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कविता
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/* अन्य कवी */
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text/x-wiki
{{बदल}}
'''कविता''' हा साहित्यातील एक महत्त्वाचा प्रकार आहे. कविता (मुख्यतः) [[छंद|छंदोबद्ध]] व रसबद्ध असतात. कवितेतून जीवन कळते, समजते व उमगते. कविता, ओव्या, अभंग किंवा श्लोक हे साहित्याचे माध्यम आहे. त्यामध्ये मनाच्या भावना, वस्तुस्थिती किंवा मनःस्थिती व्यक्त करता येते. भारतात कवितांचा इतिहास आणि कवितांचे तत्त्वज्ञान फार जुने आहे. कविता शब्दांनी खूप समृद्ध असतात.
{{विस्तार}}
==कवितांचे प्रकार==
===लेखन पद्धतीनुसार===
* [[अंगाई]]
* [[अभंग]]
* [[आर्या (वृत्त)]]
* [[ओवी]]
* [[खंडकाव्य]]
* [[गझल]]
* [[चारोळी]]
* [[दशपदी]]
* [[पोवाडा]]
* [[महाकाव्य]]
* [[मुक्तछंद]]
* [[श्लोक]]
* [[सुनीत]]
* [[हायकू]]
===आशयानुसार===
* [[चित्रपटगीत]]
* [[संगीत नाटक]]
* [[विनोदी कविता]]
* [[भलरी]] (शेतकरी गीत)
* [[बालकविता]]
* [[भक्तीगीत]]
* [[भावगीते]]
== मराठी कवी ==
=== संतकवी ===
* [[एकनाथ]]
* [[कान्होपात्रा]]
* [[चोखामेळा]]
* [[जनाबाई]]
* [[संत तुकाराम]]
* [[नरहरी सोनार]]
* [[नामदेव]]
* [[महिपती]]
* [[मुक्ताबाई]]
* [[समर्थ रामदास स्वामी]]
* [[सावता माळी]]
* [[ज्ञानेश्वर]]
=== पंडित कवी ===
* [[अमृतराय]]
* [[आनंदतनय]]
* [[देवनाथ महाराज]]
* [[मुक्तेश्वर]]
* [[मोरोपंत]]
* [[रघुनाथ पंडित]]
* [[वामन पंडित]]
* [[श्रीधरस्वामी नाझरेकर]]
=== तंतकवी / [[शाहीर]] ===
* [[अनंत भवानीबावा घोलप]]
* [[शाहीर प्रभाकर]]
* [[राम जगन्नाथ जोशी]]
* [[सगनभाऊ]]
* [[होनाजी बाळा]]
* [[बशीर मोमीन कवठेकर]]
=== अन्य कवी ===
* [[अनंत काणेकर]]
* [[अ.स. शेट्ये]]
* [[आत्माराम रावजी देशपांडे]] (अनिल)
* [[अनिल बाबुराव गव्हाणे]] (बापू, शेती-मातीचे कवी)
* [[अरुण काळे]]
* [[अरुण कोलटकर]]
* [[अरुण म्हात्रे]]
* [[अरुणा ढेरे]]
* [[अशोक परांजपे]]
* [[चिंतामणी त्र्यंबक खानोलकर]] (आरती प्रभू)
* [[इंदिरा संत]]
* [[वि.वा. शिरवाडकर]] (कुसुमाग्रज)
* [[केशव नारायण काळे]]
* [[प्रल्हाद केशव अत्रे]] (केशवकुमार)
* [[कृष्णाजी केशव दामले]] (केशवसुत)
* [[वि.स. खांडेकर]]
* [[प्रभा गणोरकर]]
* [[गणेश हरि पाटील]]
* [[शंकर केशव कानेटकर]] (गिरीश)
* [[गुरू ठाकूर]]
* [[राम गणेश गडकरी]] (गोविंदाग्रज)
* [[माणिक सीताराम गोडघाटे]] (ग्रेस)
* [[चंद्रशेखर गोखले]]
* [[नामदेव ढसाळ]]
* [[नारायण वामन टिळक]]
* [[लक्ष्मीबाई टिळक]]
* [[ग.ल. ठोकळ]]
* [[दशरथ यादव]]
* [[नीरजा (कवयित्री)]]
* [[प्रज्ञा दया पवार]]
* [[फ.मुं. शिंदे]]
* [[बहिणाबाई चौधरी]]
* [[बाळकृष्ण भगवंत बोरकर]]
* [[त्र्यंबक बापूजी ठोंबरे]] (बालकवी)
* [[नारायण मुरलीधर गुप्ते]] (बी)
* [[भवानीशंकर पंडित]]
* [[भास्कर रामचंद्र तांबे]]
* [[मंगेश पाडगांवकर]]
* [[बाळ सीताराम मर्ढेकर]]
* [[गजानन त्र्यंबक माडखोलकर]]
* [[गजानन दिगंबर माडगूळकर]]
* [[माधव जुलियन]]
* [[यशवंत मनोहर]]
* [[लक्ष्मीकांत तांबोळी]]
* [[वा.गो. मायदेव]]
* [[यशवंत दिनकर पेंढरकर]]
* [[रजनी परुळेकर]]
* [[वसंत बापट]]
* [[वामन रामराव कांत]]
* [[विठ्ठल दत्तात्रेय घाटे]]
* [[गोविंद विनायक करंदीकर]]
* [[विनायक जनार्दन करंदीकर]]
* [[विनायक महादेव कुलकर्णी]]
* [[शांता शेळके]]
* [[संदीप खरे]]
* [[विनायक दामोदर सावरकर]]
* [[सुधीर मोघे]]
* [[सुरेश भट]]
* [[नारायण सुर्वे]]
* [[श्रीकृष्ण राऊत]]
* [[विठ्ठल वाघ]]
* [[नारायण कुलकर्णी कवठेकर]]
* [[अशोक बागवे]]
* [[प्रवीण अनंत दवणे]]
* [[नामदेव धोंडो महानोर]]
* [[प्रकाश होळकर]]
* [[अनंत राऊत]]
* [[शेख शफी बोल्डेकर]]
[[वर्ग:कविता]]
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2026-09-16T04:26:18Z
संतोष गोरे
135680
[[Special:Contributions/~2026-49032-45|~2026-49032-45]] ([[User talk:~2026-49032-45|चर्चा]]) यांनी केलेले बदल [[User:~2026-37273-78|~2026-37273-78]] यांच्या आवृत्तीकडे पूर्वपदास नेले.
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wikitext
text/x-wiki
{{बदल}}
'''कविता''' हा साहित्यातील एक महत्त्वाचा प्रकार आहे. कविता (मुख्यतः) [[छंद|छंदोबद्ध]] व रसबद्ध असतात. कवितेतून जीवन कळते, समजते व उमगते. कविता, ओव्या, अभंग किंवा श्लोक हे साहित्याचे माध्यम आहे. त्यामध्ये मनाच्या भावना, वस्तुस्थिती किंवा मनःस्थिती व्यक्त करता येते. भारतात कवितांचा इतिहास आणि कवितांचे तत्त्वज्ञान फार जुने आहे. कविता शब्दांनी खूप समृद्ध असतात.
{{विस्तार}}
==कवितांचे प्रकार==
===लेखन पद्धतीनुसार===
* [[अंगाई]]
* [[अभंग]]
* [[आर्या (वृत्त)]]
* [[ओवी]]
* [[खंडकाव्य]]
* [[गझल]]
* [[चारोळी]]
* [[दशपदी]]
* [[पोवाडा]]
* [[महाकाव्य]]
* [[मुक्तछंद]]
* [[श्लोक]]
* [[सुनीत]]
* [[हायकू]]
===आशयानुसार===
* [[चित्रपटगीत]]
* [[संगीत नाटक]]
* [[विनोदी कविता]]
* [[भलरी]] (शेतकरी गीत)
* [[बालकविता]]
* [[भक्तीगीत]]
* [[भावगीते]]
== मराठी कवी ==
=== संतकवी ===
* [[एकनाथ]]
* [[कान्होपात्रा]]
* [[चोखामेळा]]
* [[जनाबाई]]
* [[संत तुकाराम]]
* [[नरहरी सोनार]]
* [[नामदेव]]
* [[महिपती]]
* [[मुक्ताबाई]]
* [[समर्थ रामदास स्वामी]]
* [[सावता माळी]]
* [[ज्ञानेश्वर]]
=== पंडित कवी ===
* [[अमृतराय]]
* [[आनंदतनय]]
* [[देवनाथ महाराज]]
* [[मुक्तेश्वर]]
* [[मोरोपंत]]
* [[रघुनाथ पंडित]]
* [[वामन पंडित]]
* [[श्रीधरस्वामी नाझरेकर]]
=== तंतकवी / [[शाहीर]] ===
* [[अनंत भवानीबावा घोलप]]
* [[शाहीर प्रभाकर]]
* [[राम जगन्नाथ जोशी]]
* [[सगनभाऊ]]
* [[होनाजी बाळा]]
* [[बशीर मोमीन कवठेकर]]
=== अन्य कवी ===
* [[अनंत काणेकर]]
* [[अ.स. शेट्ये]]
* [[आत्माराम रावजी देशपांडे]] (अनिल)
* [[अनिल बाबुराव गव्हाणे]] (बापू, शेती-मातीचे कवी)
* [[अरुण काळे]]
* [[अरुण कोलटकर]]
* [[अरुण म्हात्रे]]
* [[अरुणा ढेरे]]
* [[अशोक परांजपे]]
* [[चिंतामणी त्र्यंबक खानोलकर]] (आरती प्रभू)
* [[इंदिरा संत]]
* [[वि.वा. शिरवाडकर]] (कुसुमाग्रज)
* [[केशव नारायण काळे]]
* [[प्रल्हाद केशव अत्रे]] (केशवकुमार)
* [[कृष्णाजी केशव दामले]] (केशवसुत)
* [[वि.स. खांडेकर]]
* [[प्रभा गणोरकर]]
* [[गणेश हरि पाटील]]
* [[शंकर केशव कानेटकर]] (गिरीश)
* [[गुरू ठाकूर]]
* [[राम गणेश गडकरी]] (गोविंदाग्रज)
* [[माणिक सीताराम गोडघाटे]] (ग्रेस)
* [[चंद्रशेखर गोखले]]
* [[नामदेव ढसाळ]]
* [[नारायण वामन टिळक]]
* [[लक्ष्मीबाई टिळक]]
* [[ग.ल. ठोकळ]]
* [[दशरथ यादव]]
* [[नीरजा (कवयित्री)]]
* [[प्रज्ञा दया पवार]]
* [[फ.मुं. शिंदे]]
* [[बहिणाबाई चौधरी]]
* [[बाळकृष्ण भगवंत बोरकर]]
* [[त्र्यंबक बापूजी ठोंबरे]] (बालकवी)
* [[नारायण मुरलीधर गुप्ते]] (बी)
* [[भवानीशंकर पंडित]]
* [[भास्कर रामचंद्र तांबे]]
* [[मंगेश पाडगांवकर]]
* [[बाळ सीताराम मर्ढेकर]]
* [[गजानन त्र्यंबक माडखोलकर]]
* [[गजानन दिगंबर माडगूळकर]]
* [[माधव जुलियन]]
* [[यशवंत मनोहर]]
* [[लक्ष्मीकांत तांबोळी]]
* [[वा.गो. मायदेव]]
* [[यशवंत दिनकर पेंढरकर]]
* [[रजनी परुळेकर]]
* [[वसंत बापट]]
* [[वामन रामराव कांत]]
* [[विठ्ठल दत्तात्रेय घाटे]]
* [[गोविंद विनायक करंदीकर]]
* [[विनायक जनार्दन करंदीकर]]
* [[विनायक महादेव कुलकर्णी]]
* [[शांता शेळके]]
* [[संदीप खरे]]
* [[विनायक दामोदर सावरकर]]
* [[सुधीर मोघे]]
* [[सुरेश भट]]
* [[नारायण सुर्वे]]
* [[श्रीकृष्ण राऊत]]
* [[विठ्ठल वाघ]]
* [[नारायण कुलकर्णी कवठेकर]]
* [[अशोक बागवे]]
* [[प्रवीण अनंत दवणे]]
* [[नामदेव धोंडो महानोर]]
* [[प्रकाश होळकर]]
* [[अनंत राऊत]]
[[वर्ग:कविता]]
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टोपणनावानुसार मराठी साहित्यिकांची यादी
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संतोष गोरे
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text/x-wiki
{{बदल}}
साहित्य निर्माण करणाऱ्या व्यक्तीने स्वतःचे मूळ संपूर्ण नाव न वापरता वेगळ्याच नावाने साहित्य निर्मितीत वापरलेल्या नावाला टोपण नाव म्हणतात. मराठीले अनेक लेखक टोपणनावाने लेखन करीत आलेले आहेत, काहीजण अजूनही करतात. अशा टोपणनावाने लिखाण करणाऱ्या लेखकांची ही अपूर्ण यादी :-
* [[अरुण टिकेकर]] : (टिचकीबहाद्दर); (दस्तुरखुद्द)
*[[अनिल बाबुराव गव्हाणे]] : (बापू)
* [[अशोक जैन]] : (कलंदर)
* अशोक रानडे (दक्षकर्ण)
* [[आत्माराम नीलकंठ साधले]] : [[आनंद साधले]], [[दमयंती सरपटवार]]
* आत्माराम शेट्ये : (शेषन कार्तिक)
* [[आनंद बालाजी देशपांडे]] (आकाशानंद)
* [[आनंद साधले]] : (दमयंती सरपटवार)
* आनंदीबाई कर्वे : (बाया कर्वे)
* कृष्ण गंगाधर दीक्षित : (संजीव)
* कृष्णाजी अनंत एकबोटे (सहकरी कृष्ण)
* कृष्णाजी लक्ष्मण सोमण : (किरात; काळदंड; सारथी) (काव्यलेखनासाठी किरात आणि भ्रमर)
* [[कृ.श्री. अर्जुनवाडकर]] (पंतोजी)
* केशव नारायण देव : (पतितपावनदास)
* गंगाधर कुलकर्णी (रसगंगाधर)
* गणेश दामोदर सावरकर : (बाबाराव सावरकर) (दुर्गातनय)
* गणेश वामन गोगटे : (लीला)
* गणेश विठ्ठल कुलकर्णी (कुंभोजकर) : (व्यतिपात)
* ग.दि. माडगुळकर (गदिमा)
* [[गोपाळ गोविंद मुजुमदार]] : (साधुदास)
* गोपाळ नरहर नातू : लोककवी (मनमोहन); मीनाक्षी दादरकर
* [[गोपाळ हरी देशमुख]] : ([[लोकहितवादी]]; एक ब्राह्मण)
* चंद्रकांत सखाराम चव्हाण : ([[बाबूराव अर्नाळकर]])
* चं.वि.बावडेकर : (आलमगीर)
* चिंतामण रामचंद्र टिकेकर - [[अरुण टिकेकर]] यांचे वडील : (दूत)
* चिं.त्र्य.खानोलकर - आरती प्रभु
* [[जयवंत दळवी]] : (ठणठणपाळ)
* [[तुकारामतात्या पडवळ]] : (एक हिंदू)
* [[तुळसी परब]] : ओज पर्व
* दगडू मारुती पवार : कथालेखक (जागल्या)
* [[दत्ता टोळ]] : (अमरेंद्र दत्त)
* दत्तात्रेय रामचंद्र कुलकर्णी : (श्रीपंत महाराज बाळेकुंद्रीकर)
* दामोदर माधव कुळकर्णी : (माधवसुत)
* डॉ. दामोदर विष्णू नेने : ([[दादूमिया]])
* दासोपंत दिगंबर देशपांडे : (दासोपंत)
* दिनकर शंकरराव जवळकर : (आग्यावेताळ)
* देवदत्त टिळक : (लक्ष्मीनंदन)
* द्वारकानाथ माधव पितळे : ([[नाथमाधव]])
* द्वारकाबाई हिवरगांवकर/[[मनोरमा श्रीधर रानडे]] : ([[गोपिकातनया]])
* धनंजय चिंचोलीकर : ([[बब्रूवान रुद्रकंठावार]])
* [[न.र. फाटक]] : (अंतर्भेदी), (करिष्मा), (फरिश्ता) आणि (सत्यान्वेषी)
* [[नरसिंह चिंतामण केळकर]] : (अनामिक; आत्मानंद)
* नागावकर : (गंधर्व)
* नागेश गणेश नवरे : (नागेश)
* नारायण गजानन आठवले : (राजा ठकार)
* नागोराव गोविंद साठे : (ब्रह्मानंदाश्रम स्वामी)
* नारायण जोशी : (साखरेबुवा; नानामहाराज साखरे)
* नारायण दामोदर सावरकर : (जातिहृदय)
* [[नारायण विनायक कुलकर्णी]] : गोविंदसुत (की विनायकसुत?)
* नरेंद्र नाईक (शांताग्रज)
* [[परशराम गोविंद चिंचाळकर]] : गोविंदसुत
* [[प.स. देसाई]] (सौ.जानकीबाई देसाई) : (सदाराम)
* पांडुरंग ज्ञानेश्वर कुळकर्णी : (पांडुरंग शर्मा)
* पुरुषोत्तम धाक्रस (फडकरी)
* प्रल्हाद केशव अत्रे (केशवकुमार)
* प्र.न. जोशी : (पुष्पदंत)
* प्रभाकर जनार्दन दातार : शाहीर प्रभाकर
* प्रभाकर नारायण पाध्ये : (भाऊ पाध्ये)
* प्रवीण टोकेकर : (ब्रिटिश नंदी)
* [[फोंडूशास्त्री करंडे]] : द्विरेफ
* बळवंत जनार्दन करंदीकर : (रमाकांत)
* बा.सी. मर्ढेकर : (मकरंद)
* [[बाळकृष्ण अनंत भिडे]] : (बी)
* बाळूताई खरे/[[मालती बेडेकर]] : ([[विभावरी शिरूरकर]])
* ब्रह्माजीपंत ब्रह्मानंद नाझरीकर : (श्रीधर)
* भा.रा. भागवत : (संप्रस्त)
* महादेव मल्हार जोशी : (स्वामी सच्चिदानंद)
* [[मा.गो. वैद्य]] : (नीरद)
* महादेव आसाराम घाटेवाळ : (माधव परदेशी)
* [[माधव मोडक|माधव दादाजी मोडक]] : (बंधु माधव)
* मालतीबाई बेडेकर/बाळूताई खरे : ([[विभावरी शिरूरकर]])
* [[मीनप्पा व्यंकटेश केलवाड]] : गोविंदशर्मा
* मुक्ताबाई दीक्षित : (कृष्णाबाई)
* मुक्ता विठ्ठल कुलकर्णी : (मुक्ताबाई)
* मृत्युंजय श्रीकृष्ण रिसबूड : ([[सुमेध वडावाला]])
* मृदुला तांबे : (सृष्टिलावण्या)
* मेहबूब पठाण : (अमर शेख)
* मो.ग. रांगणेकर : (धुंडिराज)
* [[र.गो. सरदेसाई]] : (र.गो.स., हरिविवेक)
* रघुनाथ चंदावरकर : (रघुनाथ पंडित)
* [[रघुवीर जगन्नाथ सामंत]] (कुमार रघुवीर)
* रामकृष्ण माधव चोणकर : (हरी माधव समर्थ)
* [[राम गणेश गडकरी]] : (बाळकराम)
* रामचंद्र जोशी : (साखरेबाबा)
* [[रामचंद्र विनायक कुलकर्णी]] : (आनंदघनराम)
* रामचंद्र विनायक टिकेकर - [[अरुण टिकेकर]] यांचे आजोबा : (धनुर्धारी)
* रामजी गणोजी चौगुले : (रामजी गणोजी)
* रा.श्री. जोग : (निशिगंध)
* लक्ष्मीकांत तांबोळी : (लता जिंतूरकर)
* लक्ष्मीकांत शांताराम कुडाळकर (लक्ष्मीकांत-प्यारेलालमधील पहिला) : (के.लक्ष्मीकांत, लक्ष्मीकांत)
* लीला भागवत : (भानुदास रोहेकर)
* [[वा.रा.कांत]] : (कांत)
* [[विठ्ठल वामन हडप]] : (केयूरक)
* [[वि.ग. कानिटकर|विनायक गजानन कानिटकर]] : (रा. म. शास्त्री, ग्यानबा)
* [[विनायक नरहरी भावे]] : ([[विनोबा]])
* वि.ल. बर्वे : (आनंद)
* वि.शा. काळे : (बाबुलनाथ)
* विश्वनाथ वामन बापट : (वसंत बापट
* विष्णू भिकाजी गोखले : (विष्णूबाबा ब्रह्मचारी)
* विष्णू वामन शिरवाडकर (कुसुमाग्रज )
* विष्णूशास्त्री चिपळूणकर : (गोल्या घुबड)
* [[विठ्ठल हरी कुलकर्णी|वि.ह. कुलकर्णी]] (चंद्रहास, रत्नपारखी, शरदचंद्र, सुहास)
* वीरसेन आनंद कदम : (बाबा कदम)
* [[शंकर दाजीशास्त्री पदे]] : पिनाकी, भ्रमर, शंकर
* शिवराम महादेव गोऱ्हे : (चंद्रशेखर; चंद्रिका)
* [[श्रीधर व्यंकटेश केतकर]] : गोविंदपौत्र
* श्रीपाद रामचंद्र टिकेकर - [[अरुण टिकेकर]] यांचे काका : मुसाफिर
* स.अ. शुक्ल : (कुमुद)
* संजीवनी मराठे (जीवन
* संगीता उत्तम धायगुडे (हुमान कार)
* [[सतीश जकातदार]] : (अमोघ श्रीवास्तव; सलील आदर्श)
* सुनंदा बलराम कुलकर्णी : (सानिया)
* सुलोचना देशमुख : (एस्; एन्)
* सेतुमाधव पगडी : (कृष्णकुमार)
* पी. विठ्ठल
* ज्ञानेश्वर नाडकर्णी : (तुकाराम शेंदाणे)
* (?) अप्पा बळवंत
* (?) (वामनसुता)
* (?) (देशभगिनी)
* (?) (लक्ष्मीतनया)
==कवी==
मराठी भाषेत जेव्हा काव्यरचनेला सुरुवात झाली तेव्हापासून कवी बहुधा आपले पहिले नाव कविनाम म्हणून वापरत असत. ज्ञानेश्वर, तुकाराम, नामदेव, मोरोपंत, सगनभाऊ ही या कवींची प्रथम नावे होती. प्रथम नाव, मधले नाव आणि नंतर आडनाव लिहायची पद्धत नंतरच्या काळात सुरू झाली. आधुनिक काळातदेखील इंदिरा, कवी गोविंद, दत्त, नीरजा, पद्मा, मनमोहन, माधव, मीरा, यशोधरा, विनायक, संजीवनी या कवी-कवयित्रींनी स्वतःच्याच पहिल्या नावाने काव्यलेखन केले. अनेक कवींनी आपल्या सग्यासंबंधींच्या नावाला अग्रज, अनुज, कुमार, जूलियन, तनय, सुत, इत्यादी प्रत्यय लावून आपापली टोपणनावे सिद्ध केली. इतरांनी या पद्धतींशी फारकत घेऊन अत्यंत स्वतंत्र टोपणनावे घेतली आणि आपले काव्यलेखन केले.
इ.स. १९६०पासून टोपणनावाखाली कविता करण्याची पद्धत मराठीतून बहुधा हद्दपार झाली आहे. (अपवाद - [[सौमित्र]])
काही मराठी आणि अन्य कवी/लेखकांच्या टोपणनावांची ही यादी :
{|Align="Center" Border="1" Width="75%"
|- Align="Center" Style="background: #D0D0D0"
| '''टोपण नाव''' || '''खरे नाव'''
|- Align="Center"
| [[अकिंचन]] || [[वासू. ग. मेहेंदळे]]
|- Align="Center"
| [[अनंततनय]] || [[दत्तात्रेय अनंत आपटे]]
|- Align="Center"
| [[अनंतफंदी]] || [[अनंत भवानीबावा घोलप]]
|- Align="Center"
| [[अनंतसुत विठ्ठल]], [[कावडीबाबा]] || [[विठ्ठल अनंत पिंपळगावकर]]
|- Align="Center"
|[[आनंद साधले]] || [[आत्माराम नीलकंठ साधले]]; [[दमयंती सरपटवार]]
|- Align="Center"
|[[अनिल]] || [[आत्माराम रावजी देशपांडे]]
|- Align="Center"
|[[अनिल भारती]] || [[शान्ताराम पाटील]] (या कातरवेळी, तो सलीम राजपुत्र)
|- Align="Center"
| [[अशोक (कवी)]] || [[नारायण रामचंद्र मोरे]]
|- Align="Center"
| [[अज्ञातवासी]] || [[दिनकर गंगाधर केळकर]]
|- Align="Center"
| [[आधुनिक]] || [[नीळकंठ बळवंत ऊर्फ बापूसाहेब भवाळकर]]
|- Align="Center"
| [[आनंद]] || [[विनायक लक्ष्मण बरवे]]
|- Align="Center"
| [[आनंदतनय]] || [[गोपाळ आनंदराव देशपांडे]]
|- Align="Center"
|[[आरती प्रभू]] || [[चिंतामण त्र्यंबक खानोलकर]]
|- Align="Center"
| [[इंदिरा]] || [[इंदिरा संत]]
|- Align="Center"
| [[इंदुकांत]] || [[दिनकर नानाजी शिंदे]]
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| [[उदासी/हरिहरमहाराज ]] || [[नीलकंठ रामकृष्ण पाळंदे]]
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| [[उद्धवचिद्धन/उद्धवचैतन्य/उधोबाबा/]] || [[उद्धव xxxx कोकिळ]]
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| [[एकनाथ]], [[एकाजनार्दन]] || [[एकनाथ|एकनाथ सूर्यनारायण पैठणकर]]
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| [[विनायक जनार्दन करंदीकर|एक मित्र]], [[विनायक जनार्दन करंदीकर|विनायक]] || [[विनायक जनार्दन करंदीकर]]
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| [[कलापी]], [[त्र्यंबक बापूजी ठोंबरे|बालकवी]] || [[त्र्यंबक बापूजी ठोंबरे]]
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| [[कबीर]] || [[]]
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| [[कवीश्वरबास]] || [[भानूभट/भास्करभट्ट xxxx बोरीकर]]
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| [[कावडीबाबा/अनंतसुत विठ्ठल]] || [[विठ्ठल अनंत पिंपळगावकर]]
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| [[कांत]] || [[वा.रा. कांत]]
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| काव्यविहारी || धोंडो वासुदेव गद्रे
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| [[काव्यशेखर]] || [[भास्कर काशीनाथ चांदूरकर]]
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| [[किरात/भ्रमर]] || [[कृष्णाजी लक्ष्मण सोमण]]
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| [[कवी कुंजविहारी]] || [[हरिहर गुरुनाथ सलगरकर]]
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| कुमुदबांधव || [[स.अ. शुक्ल]]
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| [[कुसुमाग्रज]] || [[विष्णू वामन शिरवाडकर]]
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| [[कृष्णकेशव]] || [[अनुपलब्ध]]
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| [[कृष्णाग्रज]] || [[अनुपलब्ध]]
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| [[केशवकुमार]] || [[प्रल्हाद केशव अत्रे]]
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| [[केशवसुत]] || [[कृष्णाजी केशव दामले]]
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| [[केशवसुत]] || [[नारायण केशव बेहेरे]]
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| [[के.स.रि.]] || [[केशव सदाशिव रिसबूड]]
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| [[कोणीतरी]] || [[नरहर शंकर रहाळकर]]
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| [[गिरीश]] || [[शंकर केशव कानेटकर]]
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| [[गोपिकातनया]] || [[कु.द्वारका हिवरगावकर(सौ.मनोरमा श्रीधर रानडे)]]
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| [[गोपीनाथ]] || [[गोपीनाथ तळवलकर]]
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| [[गोमा गणेश]] || [[गणेश कृष्ण फाटक]]
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| [[गोविंद]] || [[गोविंद दत्तात्रय दरेकर]]
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| [[गोविंदपौत्र]] || [[श्रीधर व्यंकटेश केतकर]]
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| [[गोविंदप्रभु]] || [[गुंडम अनंतनायक राऊळ]]
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| [[गोविंदाग्रज]] || [[राम गणेश गडकरी]]
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| ग्यानबा, रा. म.शास्त्री || [[वि.ग. कानिटकर]]
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| [[ग्रेस]] || [[माणिक गोडघाटे]]
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| [[चक्रधर]] || [[श्रीचांगदेव राऊळ]]
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| [[चंद्रशेखर]] || [[चंद्रशेखर शिवराम गोऱ्हे]]
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| [[चेतोहर]] || [[परशुराम नारायण पाटणकर]]
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| [[जगन्नाथ]] || [[जगन्नाथ धोंडू भांगले]]
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| [[जगन्मित्र]] || [[रेव्हरंड नारायण वामन टिळक]]
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| [[जननीजनकज]] || [[पु.पां गोखले]]
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| [[वासुदेव गणेश टेंबे|टेंबे स्वामी/वासुदेवानंद सरस्वती]] || [[वासुदेव गणेश टेंबे]]
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| [[ढोलीबुवा/महीपतिनाथ]] || [[सखाराम केरसुणे]]
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| [[तुकाराम]]/तुका || [[तुकाराम बोल्होबा/बाळकोबा मोरे/अंबिले/आंबले]]
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| [[तुलसीदास]] || [[]]
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| [[दत्त]] || [[दत्तात्रय कोंडो घाटे]]
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| [[दमयंती सरपटवार]] || [[आनंद साधले]], [[आत्माराम नीलकंठ साधले]
|- Align="Center"
| [[दया पवार]] || [[दगडू पवार]]
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| [[दामोदर]] || [[वीरेश्वर सदाशिव ऊर्फ तात्या छत्रे]]
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| [[दा.ग.पा.]] || [[दामोदर गणेश पाध्ये]]
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| [[दासोपंत]]/ दिगंबरानुचर || [[दासो दिगंबर देशपांडे]]
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| [[दित्जू]]/माधव जूलियन || [[माधव त्र्यंबक पटवर्धन]]
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| [[नामदेव]] || [[नामदेव दामाशेटी शिंपी]]
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| [[नारायणसुत]] || [[श्रीपाद नारायण मुजुमदार]]
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| [[निरंजन]] || [[वसंत सदाशिव बल्लाळ]]
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| [[निशिगंध]] || [[रा.श्री. जोग]]
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| [[निळोबा]] || [[निळा मुकुंद पिंपळनेरकर]]
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| [[नीरजा]] || [[नीरजा साठे]]
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| [[नृसिंहसरस्वती]] || [[नरहरी माधव काळे]]
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| [[पठ्ठे बापूराव]] || [[श्रीधर कृष्ण कुलकर्णी(रेठरेकर)]]
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| [[पद्मविहारी]] || [[रघुनाथ गणेश जोशी]]
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| [[पद्मा]] || [[पद्मा गोळे]]
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| [[पी.सावळाराम]] || [[निवृत्तिनाथ रावजी पाटील]]
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| [[पुरु.शिव. रेगे]] || [[पु.शि. रेगे]]
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| [[पूर्णदास]] || [[बाबा उपसकर-राजाध्यक्ष]]
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| [[प्रभाकर दातार|प्रभाकर]] || [[शाहीर प्रभाकर जनार्दम दातार]]
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| [[भगवान रघुनाथ कुळकर्णी|फुलारी]]/[[भगवान रघुनाथ कुळकर्णी|बी रघुनाथ]]|| [[भगवान रघुनाथ कुळकर्णी]]
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| [[बहिणाबाई]] || [[बहिणाबाई नथूजी चौधरी]]
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| [[(संत) बहिणाबाई]] || [[कु.बहिणा आऊदेव कुळकर्णी (सौ.बहिणा रत्नाकर पाठक)]]
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| [[बापरखुमादेवीवर/बापविठ्ठलसुत]] || [[ज्ञानदेव विठ्ठलपंत कुळकर्णी]]
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| [[बाबा आमटे]] || [[मुरलीधर देवीदास आमटे]]
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| [[बाबुलनाथ]] || [[विनायक श्यामराव काळे]]
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| [[बालकवी]]/कलापि || [[त्र्यंबक बापूजी ठोंबरे]]
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| [[बाळा]] || [[बाळा कारंजकर]]
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| [[बाळकृष्ण अनंत भिडे| बी]] ; B || [[बाळकृष्ण अनंत भिडे]]
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| [[नारायण मुरलीधर गुप्ते| बी]]; BEE || [[नारायण मुरलीधर गुप्ते]]
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| [[भगवान रघुनाथ कुळकर्णी|बी रघुनाथ]]/[[भगवान रघुनाथ कुळकर्णी|फुलारी]] || [[भगवान रघुनाथ कुळकर्णी]]
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| [[बोधलेबुवा]] || [[माणकोजी भानजी जगताप]]
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| [[भगवानकवि]] || [[भवान रत्नाकर कऱ्हाडकर]]
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| [[भानजी]] || [[भास्कर त्रिंबक देशपांडे]]
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| [[भानुदास/मामळूभट]] || [[भानुदास पैठणकर(एकनाथांचे पणजोबा)]]
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| [[भावगुप्तपद्म]] || [[पांडुरंग गोविंदशास्त्री पारखी]]
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| [[भावशर्मा]] || [[के.(केशव) नारायण काळे]]
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| [[भालेंदु]] || [[भालचंद्र/गुलाबराव सीताराम सुकथनकर]]
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| [[भ्रमर]]/किरात || [[कृष्णाजी लक्ष्मण सोमण]]
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| [[मंदार]] || [[रेंदाळकर|एकनाथ पांडुरंग रेंदाळकर]]
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| [[मध्वमुनीश्वर]] || [[त्रिंबक नारायणाचार्य]] ( आडनाव अनुपलब्ध)
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| [[मनमोहन]] || [[गोपाळ नरहर ऊर्फ मनमोहन नातू]]
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| [[मनोहरबंधू]] || [[भास्कर कृष्ण उजगरे]]
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| [[महिपती]] || [[महिपती दादोपंत कांबळे-ताहराबादकर]]
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| [[महीपतिनाथ]]/ढोलीबुवा || [[सखाराम केरसुणे]]
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| [[माणिक/माणिकप्रभू/माणिकबाबा]] || [[माणिक मनोहर नाईक, हरकुडे]]
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| [[माधव]] || [[माधव केशव काटदरे]]
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| [[माधव जूलियन]], दित्जू/मा.जू./एम्.जूलियन || [[माधव त्र्यंबक पटवर्धन]]
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| [[माधव मिलिंद]] || कॅ. [[मा.कृ. शिंदे]]
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| [[माधवसुत]] || [[दामोदर माधव कुळकर्णी]]
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| [[माधवानुज]] || [[काशीनाथ हरी मोडक]]
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| मार्क ट्वेन || सॅम्युएल लॅंगहाॅर्न क्लेमन्स
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| [[मीरा]] || [[मीरा तारळेकर]]
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| [[मीराबाई]] || [[]]
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| [[मुकुंदराज]] || [[?]]
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| [[मुकुंदराय]] || [[मुकुंद गणेश मिरजकर]]
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| [[मुक्ताबाई]]/मुक्ताई || [[मुक्ता विठ्ठलपंत कुळकर्णी]]
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| [[मुक्तिबोध]] || [[शरच्चंद्र माधब मुक्तिबोध]]
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| [[मुक्तेश्वर]] || [[मुक्तेश्वर चिंतामणी मुद्गल]]
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| [[मोरोपंत]] || [[मोरेश्वर रामचंद्र पराडकर]]
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| [[यशवंत]] || [[यशवंत दिनकर पेंढरकर]]
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| [[यशोधरा]] || [[यशोधरा साठे]]
|- Align="Center"
| [[योगेश]] || [[भालजी पेंढारकर]]
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| [[रंगनाथस्वामी(निगडीकर)]] || [[रंगनाथ बोपाजी घोडके]]
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| [[रघुनाथ पंडित]] || [[रघुनाथपंडित चंदावरकर/तंजावरकर; रघुनाथ गणेश नवहस्त/नवाथे]]
|- Align="Center"
| [[रमेशबाळ]] || [[बाळ सीताराम मर्ढेकर]]
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| [[राजहंस]] || [[यादव शंकर वावीकर]]
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| [[रा. देव]] || [[]]
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| [[राधारमण]] || [[कृष्णाजी पांडुरंग लिमये]]
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| [[रामजोशी/कविराय]] || [[राम जनार्दन जोशी]]
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| [[रामदास]] || [[नारायण सूर्याजी ठोसर]]
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| रा. म. शास्त्री, ग्यानबा || [[वि.ग. कानिटकर]]
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| [[वसंत]] || [[वासुदेव बळवंत पटवर्धन]]
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|[[डॉ. वसंत अवसरे]] || [[शांता शेळके (श्री अवसरे मुळात शान्ताबाईंचे स्नेही होते.) ]]
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| [[वसंतविहार]] || [[शंकर दत्तात्रय जोशी]]
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| [[वा.दा.ओ.]] || [[वामन दाजी ओक]]
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| [[वामन पंडित]] || [[वामन तानाजी शेषे / वा शेष]]
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| [[विठाबाई]] || [[विठा रामप्पा नायक]]
|- Align="Center"
| [[विठा रेणुकानंदन]] || [[विठ्ठल मनोहर बडवे-कुलकर्णी]]
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| [[विठ्ठल केरीकर]] || [[विठ्ठल नरसिंह साखळकर]]
|- Align="Center"
| [[विठ्ठलदास]] || [[विठ्ठल अनंत क्षीरसागर्/बीडकर]]
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| [[विंदा करंदीकर]] || [[गोविंद विनायक करंदीकर]]
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| [[विनायक/एक मित्र]] || [[विनायक जनार्दन करंदीकर]]
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| [[विष्णूदास]] || [[कृष्णराव रावजी धांदरफळे]]
|- Align="Center"
| [[विसोबा खेचर]] || [[विसोबा चाटे]]
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| [[विहंगम]] || [[बाळकृष्ण लक्ष्मण अंतरकर]]
|- Align="Center"
| [[वैशाख]] || [[त्र्यं.वि. देशमुख]]
|- Align="Center"
| [[शारदाश्रमवासी]] || [[पुरुषोत्तम गोपाळ काणेकर]]
|- Align="Center"
| [[शुभानंत]] || [[]]
|- Align="Center"
| [[श्रीकांत]] || [[]]
|- Align="Center"
| [[श्रीकृष्ण]] || [[श्री.नी. चाफेकर|श्रीकृष्ण नीळकंठ चापेकर]]
|- Align="Center"
| [[श्रीधर]] || [[श्रीधर ब्रह्मानंद नाझरेकर/खडके/देशपांडे]]
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| [[श्रीराम]] || [[श्रीनिवास रामचंद्र बोबडे]]
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| [[संजीव]] || [[कृष्ण गंगाधर दीक्षित]]
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| [[संजीवनी]] || [[संजीवनी मराठे]]
|- Align="Center"
| [[सदानंदस्वामी]] || [[सदानंद चिंतामणी उपासनी]]
|- Align="Center"
| [[सरस्वतीकंठाभरण]] || [[दिनकर नानाजी शिंदे]]
|- Align="Center"
| [[साधुदास]] || [[गोपाळ गोविंद मुजुमदार/पाटणकर]]
|- Align="Center"
| [[सानिया]] || सुनंदा बलराम कुलकर्णी
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| [[साने गुरुजी]] || [[पांडुरंग सदाशिव साने]]
|- Align="Center"
| [[सामराज]] || [[शामभट लक्ष्मण आर्वीकर(राजोपध्ये)]]
|- Align="Center"
| [[सांवतामाळी]] || [[सांवता परसूबा माळी]]
|- Align="Center"
| [[सुधांशु]] || [[हणमंत नरहर जोशी]]
|- Align="Center"
| [[सुमंत]] || [[अप्पाराव धुंडिराज मुरतुले]]
|- Align="Center"
| [[सुहृद्चंपा]] || [[पुरुषोत्तम शिवराम रेगे]]
|- Align="Center"
| [[सौमित्र]] || [[किशोर कदम]]
|- Align="Center"
| [[स्वरूपानंद]] || [[रामचंद्र विष्णू गोडबोले]]
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| [[हरिबुवा]] || [[हरिबुवा शिंपी(हरीबोवा केरेश्वर भोंडवे)]]
|- Align="Center"
| [[हरिहरमहाराज/उदासी]] || [[नीलकंठ रामकृष्ण पाळंदे]]
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| [[प्रीत]] || [[स्वप्नील चाफेकर]]
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| [[मानसी सरोज]] || [[नम्रता माळी पाटील]]
|- Align="Center"
| [[होनाजी]] || [[होनाजी सयाजी शेलारखाने]]
|- Align="Center"
| [[ज्ञानेश्वर/ज्ञानदेव/बापरखमादेवीवर/बापविठ्ठलसुत]] || [[ज्ञानदेव विठ्ठलपंत कुळकर्णी]
|- align="Center"
|राघुवीरदास
|बाळकृष्ण भाऊ जोशी
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|}
==हे सुद्धा पहा==
* [[टोपणनावानुसार मराठी लेखक]]
[[वर्ग:मराठी साहित्यिक|*]]
[[वर्ग:मराठी कवी|*]]
[[वर्ग:याद्या]]
hzbbmejtkwu36wxgrzoh45yl34e4i7c
ऊर्मिला
0
2732
2709868
2455412
2026-09-16T04:17:43Z
InternetArchiveBot
130355
Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5
2709868
wikitext
text/x-wiki
{{माहितीचौकट व्यक्ती|नाव=उर्मिला|चित्र=Ramayana - Marriage of Rama Bharata Lakshmana and Shatrughna.jpg|चित्र_शीर्षक=उर्मिला आणि तिच्या तीन बहिणींचे लग्न|जन्मनाव=उर्मिला|निवासस्थान=[[अयोध्या]]|ख्याती=* श्रेष्ठ पतिव्रता
* समर्पित बहीण|आई=सुनयना|वडील=[[जनक]]|नातेवाईक=* [[राम]] (दीर आणि मेव्हणा)
* [[सीता]] (बहीण)|जोडीदार=[[लक्ष्मण]]|अपत्ये=* अंगद
* चन्द्रकेतु|relations=* [[सीता]] (दत्तक बहीण)
* [[मांडवी]] आणि [[श्रुतकीर्ती]] (बहिणी)}}
'''उर्मिला''' हे [[रामायण|रामायणातील]] एक पात्र आहे. ती [[सीता|सीतेची]] धाकटी बहीण आणि [[लक्ष्मण|लक्ष्मणाची]] पत्नी होती. लक्ष्मणाचे जसे त्याचा भाऊ [[राम|रामावर]] प्रचंड प्रेम होते, तसेच उर्मिला सीतेला समर्पित होती. हिंदू पुराणातील महान स्रियांमध्ये तिची गणना होते आणि सर्वश्रेष्ठ पतिव्रतांमध्येही तिचा समावेश होतो.
लक्ष्मणाने चौदा वर्षांचा [[वनवास]] न झोपता व्यतित केला. पण ते ऊर्मिलामुळे शक्य झाले. कारण ती रात्री स्वतःसाठी व दिवसा लक्ष्मणासाठी झोप घ्यायची. अशाप्रकारे चौदा वर्षे तिने झोपून व्यतित केली. उर्मिला या अतुलनीय त्यागासाठी प्रसिद्ध आहे.<ref name=":0" />
जेव्हा लक्ष्मण तिला वनवासाला जाण्याचा निर्णय कळवायला आला तेव्हा तिने मुद्दाम राणीचा पोशाख घातला. हे पाहून लक्ष्मण तिच्यावर भडकला आणि तिची तुलना कैकेयीशी केली. पतीचे लक्ष तिच्यापासून विचलित करण्यासाठी तिने हे मुद्दाम केले जेणेकरून तो तिची बहीण आणि भावाची काळजी घेऊ शकेल. हे सगळे समजल्यावर सीता म्हणाली की, उर्मिलाच्या त्यागाची बरोबरी १०० सीताही करू शकणार नाहीत.<ref name=":0" /><ref name=":1" />
== जीवन आणि कथा ==
उर्मिला ही मिथिलाचा राजा जनक आणि राणी सुनयना यांची मुलगी आणि सीतेची धाकटी बहीण आहे. तिचा विवाह अयोध्येचा राजा दशरथाचा तिसरा मुलगा लक्ष्मण याच्याशी झाला होता. त्यांना अंगद आणि चंद्रकेतू असे दोन पुत्र झाले. लक्ष्मणाचे जसे त्याचा भाऊ [[राम|रामावर]] प्रचंड प्रेम होते, तसेच उर्मिला सीतेला समर्पित होती
उर्मिला ही देवी नागलक्ष्मीचा पुनर्जन्म आहे. काही लोककथांनुसार तिला सोमदा नावाची मुलगी होती असे सांगितले जाते.
लक्ष्मण जेव्हा राम आणि सीतेसह वनवासाला गेला तेव्हा उर्मिला त्याच्याबरोबर येण्यास तयार होती परंतु त्याने संकोच केला आणि आपल्या वृद्ध आईवडिलांची काळजी घेण्यासाठी तिला अयोध्येत थांबायला सांगितले. एका पौराणिक कथेनुसार उर्मिला १४ वर्षे सतत झोपते. असे मानले जाते की १४ वर्षांच्या वनवासात लक्ष्मण आपल्या भावाच्या आणि मेहुणीच्या रक्षणासाठी कधीही झोपला नाही. वनवासाच्या पहिल्या रात्री, जेव्हा राम आणि सीता झोपले होते, तेव्हा निद्रा देवी लक्ष्मणाला प्रकट झाली आणि त्याने तिला असा आशीर्वाद मागितला की जेणेकरून त्याला कधीही झोप येऊ नये. देवी निद्राने त्याला विचारले की त्याच्या ऐवजी दुसरे कोणी झोपू शकेल का? लक्ष्मणाने म्हणाला की त्याची पत्नी उर्मिला झोपू शकते. हे ऐकल्यानंतर देवी निद्राने उर्मिलाला याबद्दल विचारले आणि उर्मिलाने आनंदाने ते स्वीकारले. उर्मिला या अतुलनीय बलिदानासाठी उल्लेखनीय आहे ज्याला ''उर्मिला निद्रा'' म्हणतात.<ref name=":0">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.newindianexpress.com/cities/bengaluru/2014/mar/28/Urmila-The-Sleeping-Princess-591789.html|title=Urmila, The Sleeping Princess|website=The New Indian Express|access-date=2022-01-22}}</ref><ref name=":1">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.jagranjosh.com/general-knowledge/ramayana-check-lesser-known-facts-1585545052-1|title=जागरणजोष|url-status=dead|access-date=2022-01-22|archive-date=2020-03-31|archive-url=https://web.archive.org/web/20200331165816/https://www.jagranjosh.com/general-knowledge/ramayana-check-lesser-known-facts-1585545052-1}}</ref>
एका पौराणिक कथेनुसार, असे म्हणले जाते की जेव्हा लक्ष्मण उर्मिलाकडे आपला निर्णय कळवायला आला तेव्हा तिने राणीचा पोशाख घातला होता. हे पाहून लक्ष्मण तिच्यावर रागावला आणि तिची तुलना कैकेयीशी केली. आपल्या पतीचे लक्ष तिच्यापासून विचलित करण्यासाठी तिने हे मुद्दाम केले जेणेकरून तो तिची बहीण आणि भावाची काळजी घेऊ शकेल. जेव्हा सीतेला हे कळले तेव्हा ती म्हणाली की उर्मिलाच्या त्यागाची बरोबरी १०० सीताही करू शकत नाहीत.
उर्मिलाचा मृत्यू हा मांडवी आणि श्रुतकीर्तीसह सीतेचा मृत्यू आणि त्यांच्या सासूच्या मृत्यूदरम्यान झाला असे म्हणले जाते.
== मंदिर ==
[[राजस्थान|राजस्थानच्या]] [[भरतपूर]] जिल्ह्यात लक्ष्मण आणि उर्मिलाला समर्पित एक मंदिर आहे. हे मंदिर १८७० मध्ये भरतपूरचे तत्कालीन शासक बलवंत सिंग यांनी बांधले होते आणि भरतपूर राज्याच्या राजघराण्याने ते एक राजेशाही मंदिर मानले जाते.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://devasthan.rajasthan.gov.in/images/Bharatpur/laxmanji.htm|title=Temple Profile|website=devasthan.rajasthan.gov.in|access-date=2022-01-22}}</ref>
== संदर्भ व नोंदी ==
{{संदर्भयादी}}
{{रामायण}}
[[वर्ग:इक्ष्वाकु कुळ]]
[[वर्ग:रामायणातील व्यक्तिरेखा]]
[[वर्ग:हिंदू पुराणातील पतिव्रता]]
fcn7hpl3353mprw3681w02v50oqr2om
देवनागरी
0
4747
2709727
2694656
2026-09-15T12:25:39Z
Maheshbeauty
186554
2709727
wikitext
text/x-wiki
'''देवनागरी लिपी''' ही बऱ्याच [[भारत|भारतीय]] [[भाषा|भाषांची]] प्रमुख [[लेखन पद्धती]] आहे. [[मराठी]], [[भोजपुरी]], [[कोकणी]], [[संस्कृत]], [[पाली भाषा|पाली]], [[सिंधी]], [[काश्मिरी]], [[नेपाळी]], [[बोडो भाषा|बोडो]], अंगिका, [[मैथिली]], [[रोमानी]], [[हिंदी]], [[बंजारा भाषा]] इत्यादी भाषा देवनागरीत लिहिल्या जातात.
* देवनागरी लिपी एकंदरीत देशातल्या व देशाबाहेरच्या एकूण १९४ भाषांसाठी वापरली जाते.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|दुवा=https://www.evivek.com/Encyc/2018/11/17/devnagari-lipi-09.html|title=भाषावाहिनी देवनागरी|संकेतस्थळ=www.evivek.com|भाषा=mr|ॲक्सेसदिनांक=2019-10-12}}</ref> देवनागरी लिपीचा उल्लेख [[गणेशविद्या]] या नावानेदेखील केला जातो.
[[चित्र:Devnagari used in Melbourne Australia.jpg|thumb| देवनागरी लिपीचा जाहिरातीत वापर - [[मेलबर्न]] [[ऑस्ट्रेलिया]] येथे]] [[चित्र:MarathiShilalekhYear1109Found AtParalMaharashtraIndia.jpg|इवलेसे|'''परळ, [[मुंबई]] येथे जुन्या लिपीत आढळलेला शिलालेख. हा इ.स. ११०९ मध्ये कोरला गेला आहे.''']]
== देवनागरीची ओळख ==
[[मराठी]], [[संस्कृत]], [[हिंदी]], [[कोंकणी]], [[गुजराती]], [[काश्मिरी]], [[सिंधी]], [[नेपाळी]] आणि [[रोमानी]] यासारख्या व इतर काही भारतीय मुळं असलेल्या भाषांची प्रथम लिपी ही देवनागरी आहे. देवनागरी लिपी ही अबुगिडा लेखनपद्धतीमध्ये मोडते. जगातल्या बहुसंख्य लिपींप्रमणे देवनागरीदेखील डावीकडून उजवीकडे लिहिली जाते. देवनागरी लिपीचा विकसनकाल हा बराच मोठा असून ह्या लिपीचा ख्रिस्तपूर्व ५०० मध्ये असलेल्या ब्राह्मी लिपीपासून आताची देवनागरी लिपीचा विकास झालेला आहे. साधारणत: इसवी सनाच्या बाराव्या शतकात स्थिरावलेल्या लेखनपद्धतीस देवनागरी असे नांव उपयोजिण्यास आरंभ झाला असावा. प्रत्येक शब्दावर एक रेषा ओढली जाते. तिला शिरोरेषा म्हणतात. तिच्यामुळे लेखन नीटनेटके व सुंदर दिसते. ही एक ध्वन्यात्मक लिपी आहे व त्यामुळे इतर लिप्यांपेक्षा ([[रोमन]], [[अरबी]], [[चिनी]] इत्यादी) अधिक वैज्ञानिक आहे. मराठी देवनागरी लिपीला बालबोध लिपी म्हणतात. (बाळबोध नसलेली दुसरी मराठी लिपी म्हणजे मोडी लिपी.)
[[चित्र:MarathiHandwritingByKaviDasopantYear1530.jpg|इवलेसे|मराठी लेखक व कवी [[दासोपंत]] यांचे सुमारे १५व्या शतकातील लिहिलेले मराठी.]]
:जगातील विविध भाषांतील बहुतांश शब्द किंवा ध्वनी देवनागरी लिपीमध्ये जवळजवळ जसेच्या तसे लिहिता येऊ शकतात आणि रोमन किंवा इतर लिप्यांपेक्षा देवनागरीत सहज लिहिलेल्या शब्दांचा तुलनात्मकदृष्ट्या हुबेहूब उच्चार करता येतो.
या लिपीत एकूण ५२ अक्षरे आहेत, ज्यात १६ [[स्वर]] आणि ३६ [[व्यंजन|व्यंजने]] आहेत. अक्षरांचा क्रमसुद्धा वैज्ञानिक आहे. स्वर-व्यंजन, कोमल-कठोर, अल्पप्राण-महाप्राण, अनुनासिक-अन्तस्थ-उष्म इत्यादी वर्गीकरणही वैज्ञानिक आहे. [[भारत]] तसेच [[आशिया]] मधील अनेक लिप्यांचे ([[उर्दू]] सोडून) संकेत देवनागरीपेक्षा वेगळे आहेत. पण उच्चारण व वर्ण-क्रम इत्यादी देवनागरीसारखेच आहेत. त्यामुळे लिप्यंतरण करणे सोपे जाते. देवनागरी लेखनाच्या दृष्टीने सरळ, सुंदर आणि वाचनाच्या दृष्टीने सुपाठ्य आहे.
[[File:PublicTransportinMumbaiTicketUsingDevnagari.jpg|thumb|[[मुंबई|मुंबईतील]] [[बृहन्मुंबई विद्युतपुरवठा आणि परिवहन उपक्रम|बेस्ट]] बसच्या तिकीटावरील देवनागरीचा वापर]]
[[चित्र:Marathi HandwritingRamdasSwamiYear1600.jpg|इवलेसे|[[रामदास स्वामी]] यांचे इ.स १६०० शतकातले देवनागरी हस्ताक्षर.]]
== देव-नागरी: नावाचा अर्थ ==
<center>देवलोक आणि नागरलोक यासंबंधी विविध प्रकारच्या लेखनासाठी उपयोजिली जाणारी लिपी, ती देवनागरी लिपी होय.</center>
== भाषा आणि लिपी ==
आपले विचार शब्दांच्या किंवा कोणत्याही माध्यमातुन व्यक्त करण्याचे कार्य भाषा करते. तत्त्वतः कुठलीही भाषा कोणत्याही लिपीत लिहिता येते. प्रत्यक्षात हे बरेचसे जमले तरी पूर्णपणे शक्य होत नाही. भाषेची लिपी त्या त्या भाषेतून उच्चारलेल्या शब्दांच्या लिखाणासाठी असते. एखाद्या भाषेत जर विशिष्ट उच्चार नसतील तर तिच्या लिपीतही ते दाखवणाऱ्या अक्षरखुणा नसतात. इंग्रजीत ख, च, छ, ठ, फ, घ, ढ, भ, ष, ळ हे उच्चार नाहीत. तमिळमध्ये ख, ग, घ, छ, ज, झ, ठ, ड, ढ, थ, द, ध, फ, ब, भ, श, स, ह ही अक्षरे लिहिता येत नाहीत, पण यांच्यापैकी काही उच्चार आहेत. त्यामुळे लिप्यंतरावर मर्यादा पडतात.
*उदाहरणार्थ: मराठीतला "पाटील" हा शब्द रोमन लिपीत Patil असा लिहिला जातो. त्याचा उच्चार पतिल/पतिळ/पॅतिल/पॅतिळ/पातिल/पातिळ/पाटिळ असा काहीही वेगवेगळ्या ध्वनीने होऊ शकतो. देवनागरी लिपीत जगातल्या बहुसंख्य भाषांचे बहुतेक उच्चार जवळजवळ अचूक लिहिण्याची क्षमता असल्याने, तुलनात्मक दृष्ट्या या दृष्टिकोणातून देवनागरी ही एक उत्कृष्ट लिपी समजली जाते.
:मराठीमध्ये वापरला जाणारा संगणक हा शब्द देवनागरी लिपीत 'संगणक' असा तर रोमन लिपीत 'sanganaka' असा लिहितात. तसेच त्याला इंग्रजी भाषेतला शब्द computer हा देवनागरीतून कम्प्यूटर किंवा कॉम्प्यूटर असा लिहिला आणि यशस्वीरीत्या वाचलाही जाऊ शकतो.
== देवनागरी लिपी: वैशिष्ट्ये आणि इतिहास ==
* नेहमी देवनागरी डावीकडून उजवीकडे वाचता येते तसेच लिहीता येते.
* बहुतेक ध्वनींकरिता एक स्वतंत्र वर्ण/ अक्षरचिन्ह /जोडाक्षर वापरले जाते.
* ध्वनी
{{ब्राह्मी}}
== मराठी-देवनागरीतले स्वर ==
<center>
अ आ इ ई उ ऊ ऋ ॠ ऌ ॡ ए ऐ ओ औ अं अः ॲ ॲा
</center>
== देवनागरीतील स्वरांश-चिन्हे ==
<center>
ा ि ी ु ू ृ ॄ ॢ ॣ े ै ो ौ ं ः ॅ ॉ ॅं ् र्
</center>
== व्यंजने: देवनागरी ==
<center>
* '''क ख ग घ ङ'''
* '''च छ ज झ ञ'''
* '''ट ठ ड ढ ण'''
* '''त थ द ध न'''
* '''प फ ब भ म'''
* '''य र ल व श'''
* '''ष स ह त्र ज्ञ क्ष ळ'''
</center>
== अंक: देवनागरी ==
<center>
० १ २ ३ ४ ५ ६ ७ ८ ९
</center>
:मूळ लेख : [[युनिकोड]]
{{Unicode chart Devanagari}}
== संगणक-मराठी संबंधाविषयी ==
* संगणकाचा वापर इंग्लिश भाषेतून किंवा अधिक अचूक सांगावयाचे झाल्यास रोमन लिपीतून सुरू झाला आणि नंतर जगभर पसरला. आजमितीला तरी जगाची ज्ञानभाषा आणि संपर्कभाषा म्हणून इंग्रजी भाषेला महत्त्वाचे स्थान आहे. त्यामुळे अनेक महत्त्वाच्या तंत्रज्ञानांचा शोध आणि प्रगती इंग्लिश भाषेतून झाली. यात संगणकाचा देखील समावेश होतो. संगणकाशी निगडित प्रगती झपाट्याने होण्यामागचे एक महत्त्वाचे पण अप्रत्यक्ष कारण रोमन लिपी हे देखील आहे. ही बाब संगणक अभियंत्याना सहज समजेल. यासंबधीची अधिक माहिती [[संगणक टंक]] हा लेख देईल. या बाबीचा अप्रत्यक्ष फायदा जर्मनी, स्पेन, रशिया वगैरे देशांना (किंवा त्यांच्या भाषांना वा लिप्यांना) झाला.
* [[रोमन लिपी]] ही वर्णलिपी आहे. त्यामध्ये शब्द लिहिताना एकासमोर एक वर्ण लिहितात. वेलांटी, काना, मात्रा, उकार, अनुस्वार, जोडशब्द वगैरे गुंतागुंतीच्या रचना तेथे अपवादानेच आढळतात. मुळाक्षरांना [[लिपीचिन्ह|लिपीचिन्हे]] जोडून असलेल्या लिपिवर्गामध्ये देवनागरी, [[उर्दू]], [[अरबी]], [[मोडी]], [[ब्राह्मी]], इत्यादी तर नसलेल्या लिपिवर्गामध्ये [[इंग्लिश भाषा]], [[लॅटिन]], [[जपानी]],[[चिनी]], [[रशियन]], [[जर्मन]], इ. लिपी येतात. <!-- पहिल्या वर्गाला [[:en:Basilic|बॅसिलिक(Basilic)]] तर दुसऱ्या वर्गाला [[:en:Syllabic|सिलॅबिक(Syllabic)]] असे म्हणतात. --> यातील प्रत्येक गोष्टीची व्यापक माहिती [[भाषाशास्त्र]] व [[लिपीशास्त्र]] या लेखांमध्ये मिळू शकेल. 'Complex Text Layout' किंवा 'क्लिष्ट पाठ्य मांडणी' या तांत्रिक संज्ञेप्रमाणे चिनी लिपिकुटुंबातील (ज्यामध्ये [[चिनी लिपी|चिनी]], [[जपानी लिपी|जपानी]], [[कोरिअन लिपी|कोरिअन]] येतात), देवनागरी लिपिकुटुंबातील ([[देवनागरी लिपी|देवनागरी]], [[गुरुमुखी लिपी|गुरुमुखी]], [[गुजराती लिपी|गुजराती]], [[बंगाली लिपी|बंगाली]]) आणि द्रविड कुटुंबातील (जसे [[तेलुगू लिपी|तेलुगू]], [[कन्नड लिपी|कन्नड]], [[तमिळ लिपी|तमिळ]], [[मल्याळम लिपी|मल्याळम]]) लिपी येतात. इंग्रजी लिपीसाठी अमेरिकेच्या राष्ट्रीय मानक संस्थेने पुढाकार घेऊन American Standards Code for Information Interchange ([[:en:ASCII|ASCII]]) या संकेतांकांची योजना केली ज्यामध्ये इंग्रजी लिपीतील पहिली व दुसरी बाराखडी, अंक आणि काही नेहमीच्या वापरातील चिन्हे (उदा. @, #, $,&, वगैरे) येतात.
* [[युनिकोड]]चा वापर करून संगणकावर मराठी वापरता येते.
* [[संगणक आणि मराठी]] या लेखात संगणकावरील मराठीचा इतिहास तसेच भविष्य याची माहिती मिळू शकेल.
* [[महाजाल आणि मराठी]] या लेखात महाजालावरील मराठीचा इतिहास तसेच भविष्य याची माहिती मिळू शकेल.
==हार्दिक देवनागरी युनिकोड कसे वापरावे?==
Windows 10 या ऑपरेटिंग सिस्टिममध्ये सर्व भारतीय भाषांसाठी पहिल्यापासून कळफलक उपलब्ध असतो. त्याचा वापर कसा करायचा याबद्दलची माहिती पुढीलप्रमाणे.<br />
१. सर्वप्रथम संगणकावर Control Panel मध्ये जाऊन Region यावर टिकटिकवतात.<br />
२. Regionची एक चौकट उघडेल. त्या चौकटीतील Fromat या मथळ्याखालील Language Preferences या दुव्यावर टिकटिकवतात.<br />
३. Language Preferencesच्या चौकटीमध्ये Preferred Languageच्या अंर्तगत असणाऱ्या Add a preferred languageच्या अधिक{{key press| + }} या चिन्हावर टिचकी मारतात.<br />
४. नवीन उघडलेल्या चौकटीतील शोधा या चौकटीत हवी असणारी देवनागरी भाषा (उदा. संस्कृत,मराठी, कोकणी, हिंदी) शोधतात व त्यावर टिकटिकवून Next या बटनावर टिकटिकवतात.<br />
५. त्यानंतर शोधलेली भाषा Install या बटनावर टिकटिकवून आपल्या संगणकावर उतरावून घेता येते.<br />
६. संगणकावर {{key press|Alt|Shift}} कळ दाबून हवी असलेली भाषा निवडता येते, किंवा संगणकाच्या स्क्रीनवर उजव्या बाजूस खाली किंवा वर असणाऱ्या भाषेच्या चिन्हावर टिकटिकवून हवी असलेली भाषा निवडता येते.<br />
== देवनागरी: अनुदेशन(सॉफ्टवेअर) ==
* [[बॉस ऑपरेटिंग सिस्टिम]] आणि [[आग ऑपरेटिंग सिस्टिम]] या भारतीय [[संचालन प्रणाली]] मराठी भाषेतून आहेत.
* '[[#थंडरबर्ड|थंडरबर्ड]]' हे ईमेल सॉफ्टवेर मराठीतून ईमेल पाठवण्यासाठी तसेच आलेले मराठी ईमेल वाचण्यासाठी उपयुक्त आहे. हे सॉफ्टवेर [http://www.mozilla.org/ मोझीला.ऑर्ग] ह्या संकेतस्थळावरून डाउनलोड करता येईल.
* [[#वॉशिंग्टन विद्यापीठ|वॉशिंग्टन विद्यापीठाकडून]] मिळालेल्या देवनागरीसाठी कळफलकाच्या (कीबोर्ड) जुळणीचे (मॅपिंग) सॉफ्टवेर उपलब्ध आहे. या जुळणीचा वापर करून युनिकोडमध्ये शब्दरचना करू शकणाऱ्या वर्डपॅडवर लिहिलेला मजकूर विकिपीडियामध्ये कॉपी - पेस्ट करता येतो.
* अक्षरमाला सॉफ्टवेर [[#अक्षरमाला|अक्षरमाला]] वापरून विकिपीडियाची पाने बदलता येतात, नाहीतर [[#आय् ट्रान्स्|आय् ट्रान्स्]] या सॉफ्टवेरचाही वापर करता येऊ शकतो.
* याशिवाय [[#युडिट एडिटर|युडिट एडिटर]]ही वापरता येऊ शकतो.
* [[बरहा]] येथे उपलब्ध असलेल्या देवनागरी सॉफ्टवेरचाही वापर करता येतो. (बरहा फुकट नाही!)
* देवनागरी लिपीत लिहिण्यासाठी [[#तख़्ती|तख़्ती]] या सॉफ्टवेरचाही वापर करता येतो.
==पुस्तके==
* देवनागरी लिपी: चिन्हाची शास्त्रीय ओळख आणि आरेखन भाषा
लेखक- मुकुंद गोखले.
* भारतीय लिप्यांचे मौलिक एकरूप (मोडक आवृत्ती), महाराष्ट्र राज्य साहित्य संस्कृती मंडळ, लेखक:- गणपतीशास्त्री हेब्बार.
== हे सुद्धा पहा ==
* [[आग ऑपरेटिंग सिस्टिम]]
* [[संगणक टंक]] आणि [[टंक]]
* [[:en:Wikipedia:Enabling_complex_text_support_for_Indic_scripts#Unicode_Fonts|भारतीय भाषांतील संगणक टंक कसे वापरावेत]]
* [[देवनागरी लिपी]], [[मराठी]]
* [[युनिकोड]], [[कॅरॅक्टर एनकोडिंग]], [[:en:Computer_font|संगणक टंक विकिपीडिया इंग्रजी आवृत्ती]]
* [[संचालन प्रणाली]], [[मायक्रोसॉफ्ट विंडोज]], [[ग्नू लिनक्स]]
* [[महाजाल|इंटरनेट]], [[ईमेल]], [[मुक्त सॉफ्टवेर]], [[मुक्त तंत्रांश]]
* [[युनिकोड|युनिकोडविषयीचा लेख]] ([[:en:Unicode|इंग्रजी आवृत्ती]])
* देवनागरीवरील लेख ([[:en:Devanagari|इंग्रजी आवृत्ती]])
* [[देवनागरी]] [[सुलेखन]] कित्ता (लेखक [[अच्युत पालव]], प्रकाशक ऊर्जा)
== बाह्य दुवे ==
* [http://www.nitinsawant.net/index.php/marathi-software/ नीतिन सावंत यांनी बनवलेले मराठी की-बोर्ड(कळपट) सॉफ्टवेर] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20101027051831/http://www.nitinsawant.net/index.php/marathi-software/ |date=2010-10-27 }}
* <div id="अक्षरमाला">[http://www.aksharamala.com/download/free/ अक्षरमाला] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20050513231007/http://www.aksharamala.com/download/free/ |date=2005-05-13 }}(विनामूल्य उतरवून/डाउनलोड करा)</div>
* <div id=आय् ट्रान्स्">[http://www.aczone.com/itrans/ आय् ट्रान्स्] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20040202125527/http://www.aczone.com/itrans/ |date=2004-02-02 }}
* <div id="छहारी">[http://www.chhahari.com/unicode/ छहारी/नेपाळी/देवनागरी टंकलेखक]{{मृत दुवा|date=August 2024 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</div>
* <div id="युडिट">[http://www.yudit.org/ युडिट]</div>
* <div id="बरहा">[http://www.baraha.com/ बरहा] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20180913074130/http://www.baraha.com/ |date=2018-09-13 }}</div>
* <div id="स्कीम">[http://www.scim-im.org/ स्किम] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110319034930/http://www.scim-im.org/ |date=2011-03-19 }}</div>
* <div id="थंडरबर्ड">[http://www.mozilla.org/products/thunderbird/ थंडरबर्ड]</div>
* <div id="वॉशिंग्टन विद्यापीठ">[http://depts.washington.edu/ebmp/software.html वॉशिंग्टन विद्यापीठ : कळपाटाच्या जुळणीचे सॉफ्टवेर]</div>
* <div id="तख़्ती">{{Webarchiv | url=http://www.geocities.com/hanu_man_ji/ | wayback=20020813195109 | text=तख़्ती}}</div>
[[वर्ग:लिप्या]]
[[वर्ग:भाषा]]
[[वर्ग:देवनागरी]]
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चंदेल जिल्हा
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Dharmadhyaksha
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{{माहिती संचिका}}
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wikitext
text/x-wiki
{{माहिती संचिका}}
''हा लेख चंदेल जिल्ह्याविषयी आहे. [[चंदेल, मणिपुर|चंदेल]] शहराविषयीचा लेख [[चंदेल, मणिपुर|येथे]] आहे.''
'''चंदेल जिल्हा''' भारतातील [[मणिपुर]] राज्यातील एक जिल्हा आहे.
याचे प्रशासकीय केंद्र [[चंदेल, मणिपुर|चंदेल]] येथे आहे.
==चतुःसीमा==
==तालुके==
{{मणिपुर - जिल्हे}}
[[वर्ग:चंदेल जिल्हा| ]]
[[वर्ग:मणिपूरमधील जिल्हे]]
mo542ij29alyadqjh8os795kog22cp1
क्रिकेट विश्वचषक
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text/x-wiki
{{Infobox cricket tournament main
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* [[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, १९८३|१९८३]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]]
* [[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]]
* ''२०२७''
* ''२०३१''
}}
{{आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्पर्धा साइडबार}}
'''क्रिकेट विश्वचषक''', अधिकृतपणे '''आयसीसी पुरुष क्रिकेट विश्वचषक''' म्हणून ओळखला जातो,<ref>{{cite web |title=ICC Men's Cricket World Cup 2019 shatters audience records|url=https://www.icc-cricket.com/media-releases/1277987 |publisher=[[International Cricket Council|ICC]] |access-date=12 April 2021 }}</ref> ही एकदिवसीय आंतरराष्ट्रीय (वनडे) क्रिकेटची आंतरराष्ट्रीय चॅम्पियनशिप आहे. आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आयसीसी) या खेळाच्या प्रशासकीय मंडळाद्वारे हा कार्यक्रम दर चार वर्षांनी आयोजित केला जातो, ज्यामध्ये प्राथमिक पात्रता फेरी अंतिम स्पर्धेपर्यंत जाते. ही स्पर्धा जगातील सर्वाधिक पाहिल्या गेलेल्या क्रीडा स्पर्धांपैकी एक आहे आणि आयसीसी द्वारे "आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कॅलेंडरचा प्रमुख कार्यक्रम" म्हणून गणली जाते.<ref>[http://www.cricketworldcup.com/about ICC Cricket World Cup: About]
{{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130601200603/http://www.cricketworldcup.com/about |date=1 June 2013 }} – International Cricket Council. Retrieved 30 June 2013.</ref> हे क्रिकेट खेळाचे सर्वोच्च चॅम्पियनशिप मानले जाते.
पहिला विश्वचषक जून १९७५ मध्ये इंग्लंडमध्ये आयोजित करण्यात आला होता, पहिला एकदिवसीय क्रिकेट सामना फक्त चार वर्षांपूर्वी खेळला गेला होता. तथापि, पहिल्या पुरुषांच्या स्पर्धेच्या दोन वर्षे आधी एक वेगळा महिला क्रिकेट विश्वचषक आयोजित करण्यात आला होता आणि ऑस्ट्रेलिया, इंग्लंड आणि दक्षिण आफ्रिका यांच्यात कसोटी सामन्यांची त्रिकोणी स्पर्धा खेळली जात असताना १९१२ च्या सुरुवातीला अनेक आंतरराष्ट्रीय संघांचा समावेश असलेली स्पर्धा आयोजित करण्यात आली होती. पहिले तीन विश्वचषक इंग्लंडमध्ये झाले. १९८७ च्या स्पर्धेपासून, एका अनौपचारिक रोटेशन प्रणाली अंतर्गत देशांदरम्यान होस्टिंग सामायिक केले गेले आहे, चौदा आयसीसी सदस्यांनी स्पर्धेत किमान एक सामना आयोजित केला आहे.
स्पर्धेच्या टप्प्यासाठी कोणते संघ पात्र ठरतात हे निर्धारित करण्यासाठी सध्याच्या फॉरमॅटमध्ये पात्रता टप्प्याचा समावेश आहे, जो मागील तीन वर्षांमध्ये होतो. स्पर्धेच्या टप्प्यात, आपोआप पात्र ठरलेल्या यजमान राष्ट्रासह १० संघ, यजमान राष्ट्रामधील ठिकाणांवर जवळपास एक महिन्याच्या कालावधीत विजेतेपदासाठी स्पर्धा करतात. २०२७ च्या आवृत्तीमध्ये, विस्तारित १४-संघ अंतिम स्पर्धा सामावून घेण्यासाठी स्वरूप बदलले जाईल.<ref>{{cite web|url=https://www.espncricinfo.com/story/_/id/27384084/how-teams-secure-qualification-rank-no-1-32 |title=The road to World Cup 2023: how teams can secure qualification, from rank No. 1 to 32 |work=ESPN Cricinfo |access-date=14 August 2019}}</ref>
एकूण वीस संघांनी स्पर्धेच्या १३ आवृत्त्यांमध्ये भाग घेतला आहे, ज्यामध्ये अलीकडील २०२३ स्पर्धेत दहा संघ सहभागी झाले आहेत. ऑस्ट्रेलियाने सहा वेळा, भारत आणि वेस्ट इंडीजने प्रत्येकी दोनदा, तर पाकिस्तान, श्रीलंका आणि इंग्लंडने प्रत्येकी एकदा ही स्पर्धा जिंकली आहे. पूर्ण-सदस्य नसलेल्या संघाची सर्वोत्तम कामगिरी केन्याने २००३ स्पर्धेच्या उपांत्य फेरीत प्रवेश केला.
२०२३ साली भारतात झालेल्या विश्वचषक स्पर्धेत ऑस्ट्रेलिया हा सध्याचा चॅम्पियन आहे. त्यानंतरचा २०२७ विश्वचषक दक्षिण आफ्रिका, झिम्बाब्वे आणि नामिबिया येथे संयुक्तपणे होणार आहे.
==इतिहास==
{| class="wikitable floatright" style="text-align:center; font-size:85%"
|+ क्रिकेट विश्वचषक
|-
! वर्ष !!style="width:200px"| चॅम्पियन्स
|-
| [[१९७५ क्रिकेट विश्वचषक|१९७५]]
|style="text-align:left"| {{cr|WIN}}
|-
| [[१९७९ क्रिकेट विश्वचषक|१९७९]]
|style="text-align:left"| {{cr|WIN}} {{small|(२)}}
|-
| [[१९८३ क्रिकेट विश्वचषक|१९८३]]
|style="text-align:left"| {{cr|IND}}
|-
| [[१९८७ क्रिकेट विश्वचषक|१९८७]]
|style="text-align:left"| {{cr|AUS}}
|-
| [[१९९२ क्रिकेट विश्वचषक|१९९२]]
|style="text-align:left"| {{cr|PAK}}
|-
| [[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]
|style="text-align:left"| {{cr|SL}}
|-
| [[१९९९ क्रिकेट विश्वचषक|१९९९]]
|style="text-align:left"| {{cr|AUS}} {{small|(२)}}
|-
| [[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]]
|style="text-align:left"| {{cr|AUS}} {{small|(३)}}
|-
| [[२००७ क्रिकेट विश्वचषक|२००७]]
|style="text-align:left"| {{cr|AUS}} {{small|(४)}}
|-
| [[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]]
|style="text-align:left"| {{cr|IND}} {{small|(२)}}
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| [[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]]
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| [[२०१९ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९]]
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|[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]]
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{{main|क्रिकेट विश्वचषकाचा इतिहास}}
२४ आणि २५ सप्टेंबर १८४४ रोजी कॅनडा आणि युनायटेड स्टेट्स यांच्यात पहिला आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सामना खेळला गेला.<ref>{{cite news |url=http://www.espncricinfo.com/magazine/content/story/141170.html |title=The oldest international contest of them all |author=Martin Williamson |publisher=ESPN |access-date=5 July 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130605032043/http://www.espncricinfo.com/magazine/content/story/141170.html |archive-date=5 June 2013 |url-status=live}}</ref> तथापि, पहिला श्रेय दिलेला कसोटी सामना 1877 मध्ये ऑस्ट्रेलिया आणि इंग्लंड यांच्यात खेळला गेला आणि त्यानंतरच्या वर्षांत दोन्ही संघ नियमितपणे अशेज साठी स्पर्धा करत आहे. दक्षिण आफ्रिकेला १८८९ मध्ये कसोटी दर्जा देण्यात आला.<ref>{{cite web|url=http://content-uk.cricinfo.com/australia/content/match/62396.html|publisher=ESPNcricinfo|date=15 March 1877|title=1st Test Scorecard|access-date=28 January 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20090212191405/http://content-uk.cricinfo.com/australia/content/match/62396.html|archive-date=12 February 2009|url-status=live}}</ref> प्रतिनिधी क्रिकेट संघ एकमेकांच्या दौऱ्यासाठी निवडले गेले, परिणामी द्विपक्षीय स्पर्धा झाली. १९०० पॅरिस गेम्समध्ये ऑलिम्पिक खेळ म्हणून क्रिकेटचाही समावेश करण्यात आला होता, जिथे ग्रेट ब्रिटनने फ्रान्सला हरवून सुवर्णपदक जिंकले होते.<ref>{{cite web|url=http://www.espncricinfo.com/columns/engine/match/320838.html|publisher=ESPNcricinfo|date=19 August 1900|title=Olympic Games, 1900, Final|access-date=9 September 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20141226014434/http://www.espncricinfo.com/columns/engine/match/320838.html|archive-date=26 December 2014|url-status=live}}</ref> उन्हाळी ऑलिंपिकमध्ये क्रिकेटचा हा एकमेव देखावा होता.<ref>{{cite web|last=Purohit|first=Abhishek|title=Will Cricket Bat Again at the Olympics? Know Process for Inclusion at LA28|publisher=International Olympic Committee|date=10 August 2021|url=https://olympics.com/en/featured-news/cricket-olympics-los-angeles-2028-games-icc|access-date=5 December 2021}}</ref>
आंतरराष्ट्रीय स्तरावरील पहिली बहुपक्षीय स्पर्धा ही १९१२ त्रिकोणी स्पर्धा होती, ही कसोटी क्रिकेट स्पर्धा इंग्लंडमध्ये त्यावेळच्या तीन कसोटी खेळणाऱ्या राष्ट्रांमध्ये खेळली गेली: इंग्लंड, ऑस्ट्रेलिया आणि दक्षिण आफ्रिका. इव्हेंट यशस्वी झाला नाही: उन्हाळा अपवादात्मकपणे ओला होता, ओलसर खेळपट्ट्यांवर खेळणे कठीण होते आणि "क्रिकेटच्या वाढी" मुळे प्रेक्षकांची उपस्थिती कमी होती.<ref>{{cite web |url=http://content-aus.cricinfo.com/australia/content/story/207248.html|publisher=ESPNcricinfo|title=The original damp squib|date=23 April 2005|access-date=29 August 2006 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071016161938/http://content-aus.cricinfo.com/australia/content/story/207248.html |archive-date=16 October 2007}}</ref> तेव्हापासून, आंतरराष्ट्रीय कसोटी क्रिकेट सामान्यत: द्विपक्षीय मालिका म्हणून आयोजित केले गेले: १९९९ मध्ये त्रिकोणी आशियाई कसोटी चॅम्पियनशिप होईपर्यंत बहुपक्षीय कसोटी स्पर्धा पुन्हा आयोजित करण्यात आली नाही.<ref>{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/magazine/content/story/483619.html|publisher=ESPNcricinfo|title=The run-out that sparked a riot|date=30 October 2010|access-date=18 February 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141022194822/http://www.espncricinfo.com/magazine/content/story/483619.html |archive-date=22 October 2014}}</ref>
१९२८ मध्ये वेस्ट इंडीज,<ref>{{Cite web |title=England vs West Indies Scorecard 1928 {{!}} Cricket Scorecard |url=https://www.espncricinfo.com/series/west-indies-tour-of-england-1928-61871/england-vs-west-indies-1st-test-62559/full-scorecard |access-date=2023-07-05 |website=ESPNcricinfo |language=en}}</ref> १९३० मध्ये न्यू झीलंड,<ref>{{Cite web |title=New Zealand vs England Scorecard 1929/30 {{!}} Cricket Scorecard |url=https://www.espncricinfo.com/series/england-tour-of-new-zealand-1929-30-61781/new-zealand-vs-england-1st-test-62572/full-scorecard |access-date=2023-07-05 |website=ESPNcricinfo |language=en}}</ref> १९३२ मध्ये भारत<ref>{{Cite web |title=England vs India Scorecard 1932 {{!}} Cricket Scorecard |url=https://www.espncricinfo.com/series/india-tour-of-england-1932-62281/england-vs-india-only-test-62605/full-scorecard |access-date=2023-07-05 |website=ESPNcricinfo |language=en}}</ref> आणि १९५२ मध्ये पाकिस्तान<ref>{{Cite web |title=Pakistan vs India Scorecard 1952/53 {{!}} Cricket Scorecard |url=https://www.espncricinfo.com/series/pakistan-tour-of-india-1952-53-61529/india-vs-pakistan-4th-test-62744/full-scorecard |access-date=2023-07-05 |website=ESPNcricinfo |language=en}}</ref> यांच्या समावेशासह कसोटी क्रिकेट खेळणाऱ्या राष्ट्रांची संख्या हळूहळू वाढत गेली. तथापि, आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तीन, चार किंवा पाच दिवसांचे द्विपक्षीय कसोटी सामने म्हणून खेळले जात राहिले.
१९६० च्या दशकाच्या सुरुवातीस, इंग्लिश काउंटी क्रिकेट संघांनी क्रिकेटची एक लहान आवृत्ती खेळण्यास सुरुवात केली जी फक्त एक दिवस टिकली. १९६२ मध्ये मिडलँड्स नॉक-आउट कप म्हणून ओळखल्या जाणाऱ्या चार-सांघिक नॉकआऊट स्पर्धेने सुरुवात करून<ref>{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/magazine/content/story/510124.html|publisher=ESPNcricinfo|title=The low-key birth of one-day cricket|date=9 April 2011|access-date=15 July 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130919032251/http://www.espncricinfo.com/magazine/content/story/510124.html |archive-date=19 September 2013}}</ref> आणि १९६३ मधील उद्घाटन जिलेट चषक सुरू ठेवत, इंग्लंडमध्ये एकदिवसीय क्रिकेटची लोकप्रियता वाढली. १९६९ मध्ये राष्ट्रीय संडे लीगची स्थापना झाली. पहिला एक-दिवसीय आंतरराष्ट्रीय सामना १९७१ मध्ये मेलबर्न येथे इंग्लंड आणि ऑस्ट्रेलिया यांच्यातील पावसामुळे रद्द झालेल्या कसोटी सामन्याच्या पाचव्या दिवशी खेळला गेला, उपलब्ध वेळ भरून काढण्यासाठी आणि निराश झालेल्या प्रेक्षकांची भरपाई म्हणून. हा चाळीस षटकांचा खेळ होता ज्यात प्रति षटक आठ चेंडू होते.<ref>{{cite web |url=http://newicc.cricket.org/icc/odi/what_is_one-day_cricket.html |publisher=newicc.cricket.org |title=What is One-Day International cricket? |access-date=10 September 2006 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20061119054342/http://newicc.cricket.org/icc/odi/what_is_one-day_cricket.html |archive-date=19 November 2006 |आर्काईव्ह दिनांक=2006-11-19 |आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20061119054342/http://newicc.cricket.org/icc/odi/what_is_one-day_cricket.html }}</ref> इंग्लंड आणि जगाच्या इतर भागांतील देशांतर्गत एकदिवसीय स्पर्धांचे यश आणि लोकप्रियता, तसेच सुरुवातीच्या एकदिवसीय आंतरराष्ट्रीय स्पर्धांमुळे आयसीसीने क्रिकेटचे आयोजन करण्याचा विचार करण्यास प्रवृत्त केले. <ref name="WCHistory">{{cite web|url=http://content-aus.cricinfo.com/wc2007/content/story/264535.html|publisher=ESPNcricinfo|title=The World Cup – A brief history|access-date=7 December 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20080328095116/http://content-aus.cricinfo.com/wc2007/content/story/264535.html|archive-date=28 March 2008|url-status=live}}</ref>
===प्रुडेंशियल विश्वचषक (१९७५–१९८३)===
{{main|१९७५ क्रिकेट विश्वचषक|१९७९ क्रिकेट विश्वचषक|१९८३ क्रिकेट विश्वचषक}}
[[File:Prudential Cup.jpg|thumb|upright=0.9|प्रुडेंशियल कप ट्रॉफी]]
उद्घाटन क्रिकेट विश्वचषक १९७५ मध्ये इंग्लंडने आयोजित केला होता, त्या वेळी एवढा मोठा कार्यक्रम आयोजित करण्यासाठी संसाधने पुढे टाकण्यास सक्षम असलेले एकमेव राष्ट्र. पहिल्या तीन स्पर्धा इंग्लंडमध्ये आयोजित करण्यात आल्या होत्या आणि प्रायोजक प्रुडेंशियल पीएलसी नंतर अधिकृतपणे प्रुडेंशियल कप म्हणून ओळखल्या जातात. सामन्यांमध्ये प्रति संघ ६० (६ चेंडू १ षटक) षटके होती, पारंपारिक स्वरूपात दिवसा खेळले गेले, खेळाडूंनी क्रिकेटचे पांढरे कपडे घातले आणि लाल क्रिकेट चेंडू वापरला.<ref>Browning (1999), pp. 5–9</ref>
पहिल्या स्पर्धेत आठ संघ सहभागी झाले होते: ऑस्ट्रेलिया, इंग्लंड, भारत, न्यू झीलंड, पाकिस्तान आणि वेस्ट इंडीज (त्यावेळी सहा कसोटी राष्ट्रे), श्रीलंका आणि पूर्व आफ्रिकेतील संमिश्र संघ.<ref name=cricket>Browning (1999), pp. 26–31</ref> एक उल्लेखनीय वगळण्यात आलेला संघ दक्षिण आफ्रिका होता, ज्यांना वर्णभेदामुळे आंतरराष्ट्रीय क्रिकेटमधून बंदी घालण्यात आली होती. ही स्पर्धा वेस्ट इंडीजने जिंकली होती, ज्याने लॉर्ड्सवरील अंतिम सामन्यात ऑस्ट्रेलियाचा १७ धावांनी पराभव केला होता.<ref name=cricket/> १९७५ च्या विश्वचषक फायनलमध्ये एकदिवसीय सामन्यात हिट विकेट घेणारा वेस्ट इंडीजचा रॉय फ्रेडरिक्स हा पहिला फलंदाज होता.<ref>{{Cite web|url=https://www.cricbuzz.com/cricket-news/69522/icc-cricket-world-cups-fascinating-facts-part-1|title=50 fascinating facts about World Cups – Part 1|website=Cricbuzz|date=22 January 2015 |language=en|access-date=21 February 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190221174220/https://www.cricbuzz.com/cricket-news/69522/icc-cricket-world-cups-fascinating-facts-part-1|archive-date=21 February 2019|url-status=live}}</ref>
१९७९ च्या विश्वचषकामध्ये श्रीलंका आणि कॅनडा पात्रता मिळवून विश्वचषकासाठी कसोटी न खेळणारे संघ निवडण्यासाठी आयसीसी ट्रॉफी स्पर्धा सुरू करण्यात आली.<ref name="ICCTROPHY">{{cite web|url=http://www.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/ICCT2005/ARTICLES/history.html|publisher=ESPNcricinfo|title=ICC Trophy – A brief history|access-date=29 August 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20061126054556/http://www.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/ICCT2005/ARTICLES/history.html|archive-date=26 November 2006|url-status=live}}</ref> <ref name=history>Browning (1999), pp. 32–35</ref> वेस्ट इंडीजने फायनलमध्ये यजमान इंग्लंडचा ९२ धावांनी पराभव करत सलग दुसरी विश्वचषक स्पर्धा जिंकली. विश्वचषकानंतर झालेल्या बैठकीत, आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषदेने ही स्पर्धा चतुर्मासिक स्पर्धा बनविण्यास सहमती दर्शविली.<ref name=history/>
१९८३ च्या स्पर्धेचे आयोजन इंग्लंडने सलग तिसऱ्यांदा केले होते. या टप्प्यापर्यंत, श्रीलंका कसोटी खेळणारा राष्ट्र बनला होता आणि झिम्बाब्वे आयसीसी ट्रॉफीद्वारे पात्र ठरला होता. स्टंपपासून दूर असलेल्या ३० यार्ड (२७ मी) क्षेत्ररक्षण मंडळाची ओळख करून देण्यात आली. त्यामध्ये नेहमी चार फील्ड्समन असणे आवश्यक होते.<ref>Browning (1999), pp. 61–62</ref> बाद फेरीत जाण्यापूर्वी संघ दोनदा एकमेकांसमोर आले. फायनलमध्ये वेस्ट इंडीजचा ४३ धावांनी पराभव करून भारताने चॅम्पियनचा मुकुट पटकावला.<ref name="WCHistory"/><ref>Browning (1999), pp. 105–110</ref>
=== वेगवेगळे विजेते (१९८७–१९९६) ===
{{main|१९८७ क्रिकेट विश्वचषक|१९९२ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६ क्रिकेट विश्वचषक}}
भारत आणि पाकिस्तानने १९८७ च्या स्पर्धेचे संयुक्तपणे यजमानपद भूषवले होते, ही स्पर्धा प्रथमच इंग्लंडबाहेर आयोजित करण्यात आली होती. इंग्लंडच्या उन्हाळ्याच्या तुलनेत भारतीय उपखंडात दिवसाच्या प्रकाशाचे तास कमी असल्यामुळे हे खेळ सध्याच्या मानकानुसार प्रति डाव ६० ते ५० षटके कमी करण्यात आले. ऑस्ट्रेलियाने अंतिम फेरीत इंग्लंडचा ७ धावांनी पराभव करून चॅम्पियनशिप जिंकली, इंग्लंड आणि न्यू झीलंड यांच्यातील २०१९ च्या विश्वचषकाच्या अंतिम फेरीतील सर्वात जवळच्या फरकाने.
ऑस्ट्रेलिया आणि न्यू झीलंडमध्ये झालेल्या १९९२ विश्वचषकाने खेळात अनेक बदल केले, जसे की रंगीत कपडे, पांढरे चेंडू, दिवस/रात्रीचे सामने आणि क्षेत्ररक्षण प्रतिबंध नियमांमध्ये बदल. वर्णद्वेषाच्या राजवटीच्या पतनानंतर आणि आंतरराष्ट्रीय क्रीडा बहिष्काराच्या समाप्तीनंतर दक्षिण आफ्रिकेच्या क्रिकेट संघाने प्रथमच या स्पर्धेत भाग घेतला. पाकिस्तानने स्पर्धेतील निराशाजनक सुरुवात करून अखेरीस अंतिम फेरीत इंग्लंडचा २२ धावांनी पराभव केला आणि विजेता म्हणून उदयास आला.
१९९६ चे चॅम्पियनशिप भारतीय उपखंडात दुसऱ्यांदा आयोजित करण्यात आले होते, त्यात काही गट टप्प्यातील सामन्यांसाठी श्रीलंकेचा यजमान म्हणून समावेश करण्यात आला होता. उपांत्य फेरीत, २५२ धावांचा पाठलाग करताना यजमानांनी १२० धावा करताना आठ विकेट गमावल्यानंतर, ईडन गार्डन्सवर भारतावर दणदणीत विजयाच्या दिशेने वाटचाल करणाऱ्या श्रीलंकेला डीफॉल्टनुसार विजय मिळाला. लाहोर येथे झालेल्या अंतिम सामन्यात श्रीलंकेने ऑस्ट्रेलियाचा सात गडी राखून पराभव करून पहिले विजेतेपद पटकावले.
===ऑस्ट्रेलियाची हॅट्ट्रिक (१९९९–२००७)===
{{main|१९९९ क्रिकेट विश्वचषक|२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००७ क्रिकेट विश्वचषक}}
१९९९ मध्ये, या स्पर्धेचे आयोजन इंग्लंडने केले होते, काही सामने स्कॉटलंड, आयर्लंड, वेल्स आणि नेदरलँडमध्येही आयोजित केले गेले होते.<ref>Browning (1999), p. 274</ref><ref>{{cite book |url=https://books.google.com/books?id=iZq8BAAAQBAJ&q=1999+cricket+world+cup+host&pg=PA7 |title=Cricket World Cup: A Summary of the Tournaments Since 1975 |author=French Toast |publisher=Smashwords |year=2014 |isbn=9781311429230 |format=e-book |access-date=11 December 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190626181716/https://books.google.com/books?id=iZq8BAAAQBAJ&pg=PA7&dq=1999+cricket+world+cup+host&hl=en&sa=X&ei=d2qJVJyDMYuzUembgYgJ&ved=0CEYQ6AEwBA#v=onepage&q=1999%20cricket%20world%20cup%20host&f=false |archive-date=26 June 2019 |url-status=live }}</ref> विश्वचषक स्पर्धेत बारा संघ सहभागी झाले होते. दक्षिण आफ्रिकेविरुद्धच्या सुपर सिक्स सामन्यात सामन्याच्या अंतिम षटकात ऑस्ट्रेलियाने आपले लक्ष्य गाठल्यानंतर उपांत्य फेरीसाठी पात्र ठरले.<ref>Browning (1999), pp. 229–231</ref> त्यानंतर त्यांनी दक्षिण आफ्रिकेविरुद्धच्या उपांत्य फेरीतील सामना बरोबरीत सोडवून अंतिम फेरीत प्रवेश केला जेथे दक्षिण आफ्रिकेचे फलंदाज लान्स क्लुसनर आणि ॲलन डोनाल्ड यांच्यातील मिश्रणाने डोनाल्डला त्याची बॅट सोडली आणि मध्य-पिचमध्ये धावबाद होण्यासाठी अडकले. अंतिम सामन्यात ऑस्ट्रेलियाने पाकिस्तानला १३२ धावांवर संपुष्टात आणले आणि त्यानंतर २० षटकांत आणि आठ गडी राखून लक्ष्य गाठले.<ref>Browning (1999), pp. 232–238</ref>
[[File:Australian World Cup treble.jpg|thumb|upright=0.9|१०,००० हून अधिक चाहत्यांच्या जमावाने पहिल्या विश्वचषकाची हॅट्ट्रिक पूर्ण केल्याबद्दल ऑस्ट्रेलियन संघाचे स्वागत केले – मार्टिन प्लेस, सिडनी.]]
दक्षिण आफ्रिका, झिम्बाब्वे आणि केन्या यांनी २००३ च्या विश्वचषकाचे यजमानपद भूषवले होते. स्पर्धेत सहभागी होणाऱ्या संघांची संख्या बारा वरून चौदा झाली. श्रीलंका आणि झिम्बाब्वे यांच्यावर केन्याचे विजय – आणि न्यू झीलंड संघाने सुरक्षेच्या कारणास्तव केन्यामध्ये खेळण्यास नकार दिला – यामुळे केन्याला उपांत्य फेरीत पोहोचता आले, हा असोसिएट संघाचा सर्वोत्तम परिणाम आहे.<ref>{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/wctimeline/content/current/story/795703.html|publisher=ESPNcricinfo|title=Washouts, walkovers, and black armband protests|access-date=30 August 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150830100350/http://www.espncricinfo.com/wctimeline/content/current/story/795703.html |archive-date=30 August 2015}}</ref> अंतिम सामन्यात, ऑस्ट्रेलियाने दोन गडी गमावून ३५९ धावा केल्या, जे फायनलमधील आतापर्यंतचे सर्वात मोठे धावसंख्या आहे आणि भारताचा १२५ धावांनी पराभव केला.<ref name="AUS2003">{{cite news |url=http://news.bbc.co.uk/sport3/cwc2003/hi/newsid_2870000/newsid_2875100/2875135.stm |publisher=BBC Sport |title=Ruthless Aussies lift World Cup |date=23 March 2003 |access-date=29 January 2007 |location=London |archive-url=https://web.archive.org/web/20150328120655/http://news.bbc.co.uk/sport3/cwc2003/hi/newsid_2870000/newsid_2875100/2875135.stm |archive-date=28 March 2015 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |title=Full tournament schedule |url=http://news.bbc.co.uk/sport3/cwc2003/hi/fixturesresults/default.stm |publisher=BBC Sport |date=23 March 2003 |access-date=22 February 2007 |location=London |archive-url=https://web.archive.org/web/20070218103234/http://news.bbc.co.uk/sport3/cwc2003/hi/fixturesresults/default.stm |archive-date=18 February 2007 |url-status=live }}</ref>
२००७ मध्ये, स्पर्धेचे आयोजन वेस्ट इंडीजने केले होते आणि सोळा संघांपर्यंत विस्तारित केले होते.<ref>{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/wchistory/content/story/314997.html|publisher=ESPNcricinfo|title=Australia triumph in a tournament to forget|access-date=15 July 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120206124910/http://www.espncricinfo.com/wchistory/content/story/314997.html |archive-date=6 February 2012}}</ref> ग्रुप स्टेजमध्ये वर्ल्ड कपमध्ये पदार्पण करणाऱ्या आयर्लंडकडून पाकिस्तानचा पराभव झाल्यानंतर, पाकिस्तानी प्रशिक्षक बॉब वुलमर त्यांच्या हॉटेलच्या खोलीत मृतावस्थेत आढळले.<ref>{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/wc2007/content/story/285953.html|publisher=ESPNcricinfo|title=Bob Woolmer's death stuns cricket world|access-date=4 December 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121025092541/http://www.espncricinfo.com/wc2007/content/story/285953.html |archive-date=25 October 2012}}</ref> जमैका पोलिसांनी सुरुवातीला वूल्मरच्या मृत्यूचा खून तपास सुरू केला होता पण नंतर त्याचा मृत्यू हृदयविकाराने झाल्याची पुष्टी केली.<ref>{{cite web|url=http://content-usa.cricinfo.com/woolmer/content/story/286045.html|publisher=Cricinfo|title=Bob Woolmer investigation round-up|access-date=6 May 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20070516215421/http://content-usa.cricinfo.com/woolmer/content/story/286045.html|archive-date=16 May 2007|url-status=live}}</ref> ऑस्ट्रेलियाने फायनलमध्ये श्रीलंकेचा डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धतीने ५३ धावांनी पराभव केला, आणि विश्वचषकातील त्यांची अपराजित धाव २९ सामन्यांपर्यंत वाढवली आणि विजय मिळवला.<ref>{{cite web|url=http://content-usa.cricinfo.com/ci/content/story/292773.html|publisher=Cricinfo|title=Australia v Sri Lanka, World Cup final, Barbados|date=28 April 2007|access-date=6 May 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20080324035211/http://content-usa.cricinfo.com/ci/content/story/292773.html|archive-date=24 March 2008|url-status=live}}</ref>
=== यजमानांचा विजय (२०११-२०१९) ===
{{main|२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९ क्रिकेट विश्वचषक}}
२०११ च्या विश्वचषकाचे यजमानपद भारत, श्रीलंका आणि बांगलादेश यांनी मिळून दिले होते. २००९ मध्ये श्रीलंकन क्रिकेट संघावर झालेल्या दहशतवादी हल्ल्यानंतर पाकिस्तानचे यजमान हक्क काढून घेण्यात आले होते, मूळतः पाकिस्तानसाठी नियोजित खेळांचे इतर यजमान देशांना पुनर्वितरण करण्यात आले होते.<ref>{{cite news |url=http://news.bbc.co.uk/sport1/hi/cricket/other_international/pakistan/8004684.stm |title=No World Cup matches in Pakistan |publisher=BBC Sport |access-date=15 July 2014 |date=18 April 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090418013231/http://news.bbc.co.uk/sport1/hi/cricket/other_international/pakistan/8004684.stm |archive-date=18 April 2009 |url-status=live}}</ref> विश्वचषकात सहभागी होणाऱ्या संघांची संख्या चौदा करण्यात आली.<ref name="2011WC">{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/ci-icc/content/story/659953.html|publisher=ESPNcricinfo|title=India end a 28-year-long wait|access-date=29 October 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130825010536/http://www.espncricinfo.com/ci-icc/content/story/659953.html |archive-date=25 August 2013}}</ref> ऑस्ट्रेलियाचा २३ मे १९९९ पासून सुरू झालेल्या ३५ विश्वचषक सामन्यांच्या अपराजित मालिकेचा शेवट १९ मार्च २०११ रोजी पाकिस्तानविरुद्धचा अंतिम गट स्टेज सामन्याने केला.<ref>{{cite web|url=http://edition.cnn.com/2011/SPORT/03/19/cricket.australia.pakistan.bangladesh/|title=Pakistan top group after ending Australia's unbeaten World Cup streak|publisher=CNN|date=20 March 2011|access-date=13 February 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150213185518/http://edition.cnn.com/2011/SPORT/03/19/cricket.australia.pakistan.bangladesh/|archive-date=13 February 2015|url-status=live}}</ref> मुंबईतील वानखेडे स्टेडियमवर झालेल्या अंतिम सामन्यात भारताने श्रीलंकेचा ६ गडी राखून पराभव करून त्यांचे दुसरे विश्वचषक जिंकले आणि घरच्या मैदानावर विश्वचषक जिंकणारा भारत पहिला देश बनला.<ref name="2011WC"/> विश्वचषकाच्या फायनलमध्ये दोन आशियाई देश आमनेसामने येण्याची ही पहिलीच वेळ होती.<ref>{{cite web|title=ICC Cricket World Cup|publisher=ESPN|url=https://www.espn.com/extra/cricket/topics/_/page/icc-cricket-world-cup|access-date=2 January 2022}}</ref>
ऑस्ट्रेलिया आणि न्यू झीलंड यांनी संयुक्तपणे २०१५ च्या विश्वचषकाचे यजमानपद भूषवले होते. सहभागींची संख्या चौदा राहिली. स्पर्धेत एकूण तीन विजयांसह आयर्लंड सर्वात यशस्वी सहयोगी राष्ट्र ठरला. न्यू झीलंडने रोमहर्षक पहिल्या उपांत्य फेरीत दक्षिण आफ्रिकेचा पराभव करून त्यांच्या पहिल्या विश्वचषकाच्या अंतिम फेरीत प्रवेश केला. मेलबर्न येथे झालेल्या अंतिम सामन्यात ऑस्ट्रेलियाने न्यू झीलंडचा सात गडी राखून पराभव करत पाचव्यांदा विश्वचषक जिंकला.<ref name="AUS2015">{{cite news |url=https://www.bbc.co.uk/sport/0/cricket/32105654 |title=Cricket World Cup 2015: Australia crush New Zealand in final |publisher=BBC Sport |access-date=29 March 2015 |date=29 March 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150329232637/http://www.bbc.co.uk/sport/0/cricket/32105654 |archive-date=29 March 2015 |url-status=live }}</ref>
[[File:Englandvictorylap.png|thumb|right|इंग्लंडने १४ जुलै २०१९ रोजी त्यांच्या विजयानंतर लॉर्ड्सच्या आसपास आदरांजली वाहिली.]]
२०१९ च्या विश्वचषकाचे आयोजन इंग्लंड आणि वेल्स यांनी केले होते. सहभागींची संख्या १० पर्यंत कमी करण्यात आली. पावसामुळे राखीव दिवशी ढकलण्यात आलेल्या पहिल्या उपांत्य फेरीत न्यू झीलंडने भारताचा पराभव केला.<ref>{{cite news |url=https://timesofindia.indiatimes.com/sports/cricket/icc-world-cup/india-vs-new-zealand-live-score-world-cup-2019-semi-final/articleshow/70139254.cms|title=India vs New Zealand Highlights, World Cup 2019 semi-final: Match defers to reserve day|work=द टाइम्स ऑफ इंडिया|date=9 July 2019|access-date=15 July 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190711180216/https://timesofindia.indiatimes.com/sports/cricket/icc-world-cup/india-vs-new-zealand-live-score-world-cup-2019-semi-final/articleshow/70139254.cms|archive-date=11 July 2019|url-status=live}}</ref> दुसऱ्या उपांत्य फेरीत इंग्लंडने गतविजेत्या ऑस्ट्रेलियाचा पराभव केला. याआधी कोणत्याही अंतिम फेरीतील संघाने विश्वचषक जिंकला नव्हता. फायनलमध्ये, ५० षटकांनंतर स्कोअर २४१ वर टाय झाला आणि सामना सुपर ओव्हरमध्ये गेला, त्यानंतर स्कोअर पुन्हा १५ वर टाय झाला. विश्वचषक इंग्लंडने जिंकला होता, ज्यांच्या चौकारांची संख्या न्यू झीलंडपेक्षा जास्त होती.<ref>{{Cite web |url=https://www.espncricinfo.com/series/8039/report/1144530/england-vs-new-zealand-final-icc-cricket-world-cup-2019/ |title=Epic final tied, Super Over tied,England win World Cup on boundary count |date=14 July 2019 |access-date=15 July 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190715032534/https://www.espncricinfo.com/series/8039/report/1144530/england-vs-new-zealand-final-icc-cricket-world-cup-2019/ |archive-date=15 July 2019 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news|url=https://www.bbc.co.uk/sport/cricket/48985109|title=England win Cricket World Cup: A golden hour ends in a champagne super over|date=14 July 2019|last=Fordyce|first=Tom|publisher=BBC Sport|access-date=15 July 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190714235602/https://www.bbc.co.uk/sport/cricket/48985109|archive-date=14 July 2019|url-status=live}}</ref>
==स्वरूप==
===पात्रता===
{{main|क्रिकेट विश्वचषक पात्रता प्रक्रिया}}
१९७५ मधील पहिल्या विश्वचषकापासून ते २०१९ च्या विश्वचषकापर्यंत, भाग घेणारे बहुसंख्य संघ आपोआप पात्र ठरले. २०१५ विश्वचषकापर्यंत हे मुख्यतः आयसीसी चे पूर्ण सदस्यत्व असल्यामुळे होते आणि २०१९ विश्वचषकासाठी हे मुख्यतः आयसीसी एकदिवसीय चॅम्पियनशिपमधील क्रमवारीत स्थान मिळवून होते.<ref>{{cite news|title=Cricket World Cup 2019 to stay at only 10 teams|publisher=BBC Sport |url=https://www.bbc.com/sport/cricket/33296828|access-date=22 August 2022}}</ref>
१९७९ मधील दुसऱ्या विश्वचषकापासून ते २०१९ च्या विश्वचषकापर्यंत, आपोआप पात्र ठरलेल्या संघांमध्ये पात्रता प्रक्रियेद्वारे विश्वचषकासाठी पात्र ठरलेल्या इतर काही संख्येने सामील झाले. पहिली पात्रता स्पर्धा म्हणजे आयसीसी ट्रॉफी;<ref>{{Cite web|url=https://static.espncricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/ICCT2005/ARTICLES/history.html|title=Cricinfo - 2005 ICC Trophy in Ireland|website=static.espncricinfo.com|accessdate=6 April 2023}}</ref> नंतर प्री-क्वालिफायिंग टूर्नामेंट्ससह प्रक्रिया विस्तारते. २०११ विश्वचषकासाठी, आयसीसी वर्ल्ड क्रिकेट लीगने भूतकाळातील पूर्व-पात्रता प्रक्रियेची जागा घेतली; आणि "आयसीसी ट्रॉफी" चे नाव बदलून "आयसीसी पुरुष क्रिकेट विश्वचषक पात्रता" असे करण्यात आले.<ref>{{cite web |url=http://www.icc-cricket.com/icc/development/wcl/ |publisher=ICC |title=World Cricket League |access-date=28 January 2007 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20070119011351/http://www.icc-cricket.com/icc/development/wcl/ |archive-date=19 January 2007 |आर्काईव्ह दिनांक=2007-01-19 |आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20070119011351/http://www.icc-cricket.com/icc/development/wcl/ }}</ref> वर्ल्ड क्रिकेट लीग ही आयसीसीच्या सहयोगी आणि संलग्न सदस्यांना पात्र होण्यासाठी अधिक संधी देण्यासाठी प्रदान केलेली पात्रता प्रणाली होती. पात्र ठरलेल्या संघांची संख्या वर्षभर वेगवेगळी असते.<ref>{{Cite web|url=https://static1.squarespace.com/static/533e6b7de4b0d84a3bd7c4be/t/5c3a7f7288251b8b3c637260/1547337591744/Cricket.pdf|title=International Cricket Council February 2019|website=static1.squarespace.com}}</ref>
२०२३ च्या विश्वचषकापासून, फक्त यजमान देश आपोआप पात्र होतील. सर्व देश पात्रता निश्चित करण्यासाठी लीगच्या मालिकेत सहभागी होतील, ज्यामध्ये स्वयंचलित प्रमोशन आणि रेलेगेशन एका विश्वचषकाच्या चक्रातून दुसऱ्या टप्प्यापर्यंत विभागणी केली जाईल.<ref>{{cite web|url=https://www.espncricinfo.com/story/_/id/27384084/how-teams-secure-qualification-rank-no-1-32 |title=The road to World Cup 2023: how teams can secure qualification, from rank No. 1 to 32 |work=ESPN Cricinfo |access-date=22 August 2022}}</ref>
===स्पर्धा===
[[File:Autographed bats of ODI World Cup winning teams at Blades of Glory Cricket Museum, Pune.jpg|thumb|भारताच्या [[पुणे]] येथील ब्लेड्स ऑफ ग्लोरी क्रिकेट संग्रहालयात ठेवलेल्या, स्पर्धेच्या प्रत्येक आवृत्तीतील विजेत्या संघांच्या स्वाक्षऱ्या.]]
क्रिकेट विश्वचषकाच्या इतिहासात स्पर्धेचे स्वरूप मोठ्या प्रमाणात बदलले आहे. पहिल्या चारही स्पर्धांमध्ये प्रत्येकी चार संघांचे दोन गट अशा एकूण आठ संघांनी सहभाग घेतला होता.<ref>{{cite web|url=http://icc.cricket.org/icc/events/summaries/icc_world_cup_1975.html|publisher=icc.cricket.org|title=1st tournament|access-date=१९ फेब्रुवारी २००७|archive-url=https://web.archive.org/web/20071217093647/http://icc.cricket.org/icc/events/summaries/icc_world_cup_1975.html|archive-date=१७ डिसेंबर २००७}}</ref> स्पर्धा दोन टप्प्यांत खेळवली जात होती, गट फेरी आणि [[बाद-फेरी स्पर्धा|बाद फेरी]]. प्रत्येक गटातील चारही संघ [[साखळी सामने|साखळी पद्धतीने]] एकमेकांविरुद्ध खेळत आणि प्रत्येक गटातील अव्वल दोन संघ उपांत्य फेरीत प्रवेश करत. उपांत्य फेरीतील विजेते संघ अंतिम सामन्यात एकमेकांविरुद्ध खेळत. वर्णभेदविरोधी बहिष्कार संपल्यानंतर दक्षिण आफ्रिकेने १९९२ मधील पाचव्या स्पर्धेत पुनरागमन केले. त्या स्पर्धेत नऊ संघांनी गट फेरीत एकमेकांविरुद्ध प्रत्येकी एक सामना खेळला आणि अव्वल चार संघ उपांत्य फेरीत पोहोचले.<ref>{{cite web|url=http://icc.cricket.org/icc/events/summaries/icc_world_cup_199192.html|publisher=icc.cricket.org|title=92 tournament|access-date=१९ फेब्रुवारी २००७|archive-url=https://web.archive.org/web/20071217093653/http://icc.cricket.org/icc/events/summaries/icc_world_cup_199192.html|archive-date=१७ डिसेंबर २००७}}</ref> १९९६ मध्ये स्पर्धेचा आणखी विस्तार करून प्रत्येकी सहा संघांचे दोन गट करण्यात आले.<ref>{{cite web|url=http://icc.cricket.org/icc/events/summaries/icc_world_cup_199596.html|publisher=icc.cricket.org|title=96 tournament|access-date=१९ फेब्रुवारी २००७|archive-url=https://web.archive.org/web/20071217093658/http://icc.cricket.org/icc/events/summaries/icc_world_cup_199596.html|archive-date=१७ डिसेंबर २००७}}</ref> प्रत्येक गटातील अव्वल चार संघ उपांत्यपूर्व फेरीत पोहोचले आणि त्यानंतर उपांत्य फेरी खेळवण्यात आली.<ref>{{Cite web|title=Wills World Cup, 1996 schedule, live scores and results|url=https://www.cricbuzz.com/cricket-series/653/wills-world-cup-1996|access-date=५ जुलै २०२३|website=Cricbuzz|language=en}}</ref>
[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]] आणि [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]] विश्वचषकांसाठी वेगळे स्वरूप वापरण्यात आले. संघांची दोन गटांमध्ये विभागणी करण्यात आली आणि प्रत्येक गटातील अव्वल तीन संघ ''सुपर ६'' फेरीत पोहोचले.<ref name="super6">{{cite web|url=http://www.cricinfo.com/link_to_database/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC99/WC99_TABLE.html|publisher=[[क्रिकइन्फो]]|title=Super 6|access-date=१९ फेब्रुवारी २००७|archive-url=https://web.archive.org/web/20070222100838/http://www.cricinfo.com/link_to_database/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC99/WC99_TABLE.html|archive-date=२२ फेब्रुवारी २००७|url-status=live}}</ref> ''सुपर ६'' मधील संघांनी दुसऱ्या गटातून पात्र ठरलेल्या तीन संघांविरुद्ध सामने खेळले. पुढील फेरीत प्रवेश करताना, आपल्या गटातून सोबत पुढील फेरीसाठी पात्र ठरलेल्या संघांविरुद्धच्या आधीच्या सामन्यांत मिळवलेले गुण संघांना पुढे नेण्याची परवानगी होती. त्यामुळे गट फेरीत चांगली कामगिरी करण्यासाठी संघांना अतिरिक्त प्रोत्साहन मिळत असे.<ref name="super6"/> ''सुपर ६'' फेरीतील अव्वल चार संघ उपांत्य फेरीत पोहोचत आणि त्यातील विजेते अंतिम सामना खेळत.<ref>{{Cite web|title=ICC World Cup, 1999 schedule, live scores and results|url=https://www.cricbuzz.com/cricket-series/718/icc-world-cup-1999|access-date=५ जुलै २०२३|website=Cricbuzz|language=en}}</ref><ref>{{Cite web|title=Cricket World Cup History 2003: Winners, Runners-up, Stats of World Cup 2003|url=https://sports.ndtv.com/world-cup-2019/history/2003-cricket-world-cup|access-date=५ जुलै २०२३|website=NDTVSports.com|language=en|archive-date=2023-07-05|archive-url=https://web.archive.org/web/20230705061919/https://sports.ndtv.com/world-cup-2019/history/2003-cricket-world-cup|url-status=dead}}</ref>
[[File:ICC CWC 2007 team captains.jpg|thumb|upright=0.9|२००७ क्रिकेट विश्वचषकातील संघांचे कर्णधार.]]
[[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७ विश्वचषकात]] १६ संघांची प्रत्येकी चार संघांच्या चार गटांत विभागणी करण्यात आली होती.<ref>{{cite web|url=http://www.cricketworldcup.com/TeamGroupings.html|publisher=cricket world cup|title=World Cup groups|access-date=२८ जानेवारी २००७|archive-url=https://web.archive.org/web/20070126002928/http://www.cricketworldcup.com/TeamGroupings.html|archive-date=२६ जानेवारी २००७|url-status=dead}}</ref> प्रत्येक गटात संघ एकमेकांविरुद्ध साखळी पद्धतीने खेळले. विजयासाठी संघांना गुण आणि बरोबरीसाठी अर्धा गुण मिळत असे. प्रत्येक गटातील अव्वल दोन संघ ''सुपर ८'' फेरीत प्रवेश करत. ''सुपर ८'' मधील संघांनी इतर गटांतून पात्र ठरलेल्या सहा संघांविरुद्ध सामने खेळले. गट फेरीप्रमाणेच गुण देण्यात येत होते; मात्र आपल्या मूळ गटातून ''सुपर ८'' साठी पात्र ठरलेल्या दुसऱ्या संघाविरुद्ध आधीच्या सामन्यात मिळवलेले गुण पुढे नेण्यात येत होते.<ref>{{cite web|url=http://www.cricketworldcup.com/pdfs/event-overview.pdf|publisher=cricketworldcup.com|title=About the Event|access-date=२ सप्टेंबर २००६|page=1|archive-url=https://web.archive.org/web/20060905225042/http://www.cricketworldcup.com/pdfs/event-overview.pdf|archive-date=५ सप्टेंबर २००६|url-status=dead}}</ref> ''सुपर ८'' फेरीतील अव्वल चार संघ उपांत्य फेरीत पोहोचले आणि उपांत्य फेरीतील विजेत्यांनी अंतिम सामना खेळला.<ref>{{Cite web|title=ICC World Cup, 2007 schedule, live scores and results|url=https://www.cricbuzz.com/cricket-series/905/icc-world-cup-2007|access-date=५ जुलै २०२३|website=Cricbuzz|language=en}}</ref>
[[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]] आणि [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]]<ref>{{cite web|url=http://www.cricknews.net|publisher=cricknews.net|title=2015 Cricket World Cup|access-date=३ फेब्रुवारी २०१५|archive-url=https://web.archive.org/web/20150203120741/http://www.cricknews.net/|archive-date=३ फेब्रुवारी २०१५|url-status=dead}}</ref> विश्वचषकांच्या गट फेरीत प्रत्येकी सात संघांचे दोन गट होते. प्रत्येक गटातील अव्वल चार संघ उपांत्यपूर्व फेरीत, त्यानंतर उपांत्य फेरीत आणि अखेरीस अंतिम सामन्यात प्रवेश करत.<ref>{{cite news|first=K.R.|last=Nayar|title=International Cricket Council approves 14-team cup|url=http://gulfnews.com/sport/cricket/international-cricket-council-approves-14-team-cup-1.829620|work=Gulf News|date=२९ जून २०११|access-date=२ फेब्रुवारी २०१५|archive-url=https://web.archive.org/web/20110701153544/http://gulfnews.com/sport/cricket/international-cricket-council-approves-14-team-cup-1.829620|archive-date=१ जुलै २०११|url-status=live}}</ref>
स्पर्धेच्या [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]] आणि [[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३]] आवृत्त्यांमध्ये सहभागी संघांची संख्या दहापर्यंत कमी करण्यात आली. सर्व दहा संघ एका साखळी गटात खेळले आणि अव्वल चार संघ उपांत्य फेरीत पोहोचले.<ref>{{cite web|last=Smale|first=Simon|title=The Cricket World Cup 2019 has shrunk to exclude the minnows, but why? And how come it's still so long?|publisher=Australian Broadcasting Corporation|date=४ जून २०१९|url=https://www.abc.net.au/news/2019-06-05/cricket-world-cup-minnows-where-have-they-gone/11176128|access-date=१८ ऑक्टोबर २०२०}}</ref>
२०२७ आणि २०३१ विश्वचषकांमध्ये संघांची संख्या वाढवून १४ करण्यात येईल;<ref>{{cite web|url=https://sixsports.in/icc-announces-world-cup-schedule-14-teams-in-2027-and-2031/|title=ICC announces World Cup schedule; 14 teams in 2027 And 2031|website=Six Sports|date=२ जून २०२१|access-date=२ जून २०२१|archive-date=१ एप्रिल २०२२|archive-url=https://web.archive.org/web/20220401040539/https://sixsports.in/icc-announces-world-cup-schedule-14-teams-in-2027-and-2031/|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite web|url=https://cricinfo.pro/cricket-world-cup-2023-date-teams-stadiums-tickets/|title=Mark your calendars for the Cricket World Cup 2023 as the tournament is set to begin on October 5, 2023. The matches will continue until November 19, 2023|website=Cricinfo|date=७ सप्टेंबर २०२३|access-date=११ सप्टेंबर २०२३}}</ref> २०२७ मध्ये पहिल्या साखळी टप्प्यात प्रत्येकी सहा संघांचे दोन गट असतील. १४ संघांच्या स्पर्धेतील सर्वात खालच्या मानांकनाचे तीन पात्र संघ बारावा आणि अंतिम संघ निश्चित करण्यासाठी तीन सामन्यांची ''सुपर सिरीज'' फेरी खेळतील. प्रत्येक गटातील अव्वल तीन संघ आणि दोन्ही गटांतील चौथ्या स्थानावरील संघांपैकी सर्वोत्तम कामगिरी करणारा एक संघ ''सुपर ७'' फेरीत प्रवेश करेल. ''सुपर ७'' फेरीतील अव्वल चार संघ बाद फेरीत प्रवेश करतील. आयसीसीने म्हटले की, या बदलांचा उद्देश स्पर्धेतील चुरस वाढवणे आणि त्याच वेळी स्पर्धेचा कालावधी कमी करणे हा होता.<ref>{{cite news|title=ICC revamp formats for marquee men’s events|url=https://www.icc-cricket.com/news/icc-revamp-formats-for-marquee-men-s-events|work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद]]|date=१५ जुलै २०२६|access-date=१५ जुलै २०२६}}</ref><ref>{{Cite web|date=१५ जुलै २०२६|title=ICC adds Super Series and Super 7 twist to 2027 ODI World Cup|url=https://www.cricinfo.com/story/icc-adds-super-series-and-super-7-twist-to-2027-odi-world-cup-1545709|access-date=१५ जुलै २०२६|website=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref>
{| class="wikitable"
! colspan="8" |स्पर्धेच्या स्वरूपांचा सारांश
|-
!आवृत्ती
!वर्ष
!यजमान
!संघ
!सामने
!प्राथमिक टप्पा
!द्वितीय टप्पा
!अंतिम टप्पा
|-
| style="text-align:center" |१
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]]
| rowspan="2" |{{flag|इंग्लंड}}
| rowspan=4 style="text-align:center" |८
| rowspan=2 style="text-align:center" |१५
| rowspan=2 style="text-align:center" |४ संघांचे २ गट: १२ सामने
| rowspan="6" |नाही
| rowspan="4" style="text-align:center" |४ संघांची बाद फेरी (गटविजेते आणि उपविजेते): ३ सामने
|-
| style="text-align:center" |२
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]]
|-
| style="text-align:center" |३
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, १९८३|१९८३]]
|{{flag|इंग्लंड}}<br />{{flag|वेल्स}}
| rowspan="2" style="text-align:center" |२७
| rowspan=2 style="text-align:center" |४ संघांचे २ गट: २४ सामने
|-
| style="text-align:center" |४
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]]
|{{flag|भारत}}<br/>{{flag|पाकिस्तान}}
|-
| style="text-align:center" |५
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]]
|{{flag|ऑस्ट्रेलिया}}<br/>{{flag|न्यूझीलंड}}
| style="text-align:center" |९
| style="text-align:center" |३९
| style="text-align:center" |९ संघांचा साखळी टप्पा: ३६ सामने
| style="text-align:center" |४ संघांची बाद फेरी (साखळी टप्प्यातील अव्वल ४): ३ सामने
|-
| style="text-align:center" |६
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]]
|{{flag|भारत}}<br/>{{flag|पाकिस्तान}}<br/>{{flag|श्रीलंका}}
| rowspan=2 style="text-align:center" |१२
| style="text-align:center" |३७
| style="text-align:center" |६ संघांचे २ गट: ३० सामने
| style="text-align:center" |८ संघांची बाद फेरी (प्रत्येक गटातील अव्वल ४): ७ सामने
|-
| style="text-align:center" |७
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]]
|{{flag|इंग्लंड}}<br/>{{flag|वेल्स}}<br/>{{flag|स्कॉटलंड}}<br/>{{flag|आयर्लंड}}<br/>{{flag|नेदरलँड्स}}
| style="text-align:center" |४२
| style="text-align:center" |६ संघांचे २ गट: ३० सामने
| rowspan="2" |सुपर सिक्स (प्रत्येक गटातील अव्वल ३): ९ सामने
| rowspan="2" style="text-align:center" |४ संघांची बाद फेरी (सुपर सिक्समधील अव्वल ४): ३ सामने
|-
| style="text-align:center" |८
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]]
|{{flag|दक्षिण आफ्रिका}}<br/>{{flag|झिम्बाब्वे}}<br/>{{flag|केन्या}}
| style="text-align:center" |१४
| style="text-align:center" |५४
| style="text-align:center" |७ संघांचे २ गट: ४२ सामने
|-
| style="text-align:center" |९
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]]
|{{flag|वेस्ट इंडीज|cricket}}
| style="text-align:center" |१६
| style="text-align:center" |५१
| style="text-align:center" |४ संघांचे ४ गट: २४ सामने
|सुपर एट (प्रत्येक गटातील अव्वल २): २४ सामने
| style="text-align:center" |४ संघांची बाद फेरी (सुपर एटमधील अव्वल ४): ३ सामने
|-
| style="text-align:center" |१०
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]]
|{{flag|भारत}}<br/>{{flag|श्रीलंका}}<br/>{{flag|बांगलादेश}}
| rowspan=2 style="text-align:center" |१४
| rowspan=2 style="text-align:center" |४९
| rowspan=2 style="text-align:center" |७ संघांचे २ गट: ४२ सामने
| rowspan="4" |नाही
| rowspan="2" style="text-align:center" |८ संघांची बाद फेरी (प्रत्येक गटातील अव्वल ४): ७ सामने
|-
| style="text-align:center" |११
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]]
|{{flag|ऑस्ट्रेलिया}}<br/>{{flag|न्यूझीलंड}}
|-
| style="text-align:center" |१२
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]]
|{{flag|इंग्लंड}}<br/>{{flag|वेल्स}}
| rowspan=2 style="text-align:center" |१०
| rowspan=2 style="text-align:center" |४८
| rowspan=2 style="text-align:center" |१० संघांचा साखळी टप्पा: ४५ सामने
| rowspan=2 style="text-align:center" |४ संघांची बाद फेरी (साखळी टप्प्यातील अव्वल ४): ३ सामने
|-
| style="text-align:center" |१३
| style="text-align:center" |[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]]
|{{flag|भारत}}
|-
| style="text-align:center" |१४
| style="text-align:center" |[[२०२७ क्रिकेट विश्वचषक|''२०२७'']]
|{{flag|दक्षिण आफ्रिका}}<br/>{{flag|झिम्बाब्वे}}<br/>{{flag|नामिबिया}}
| rowspan="2" style="text-align:center" |''१४''
| rowspan="1" style="text-align:center" |''५७''
| rowspan="1" style="text-align:center" |''सुपर सिरीज (३ संघांचा एक गट): ३ सामने''<br/><br/>''गट टप्पा (६ संघांचे २ गट): ३० सामने''
| rowspan="1" |''सुपर सेवन (प्रत्येक गटातील अव्वल ३ + चौथ्या स्थानावरील सर्वोत्तम संघ): २१ सामने''
| rowspan="1" style="text-align:center" |''४ संघांची बाद फेरी (सुपर सेवनमधील अव्वल ४): ३ सामने''
|-
| style="text-align:center" |१५
| style="text-align:center" |''२०३१''
|{{flag|भारत}}<br/>{{flag|बांगलादेश}}
|
|
|
|
|}
==ट्रॉफी==
{{main|क्रिकेट विश्वचषक ट्रॉफी}}
आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक ट्रॉफी विश्वचषक विजेत्यांना सादर केली जाते. सध्याची ट्रॉफी १९९९ च्या चॅम्पियनशिपसाठी तयार करण्यात आली होती आणि स्पर्धेच्या इतिहासातील हे पहिले कायमस्वरूपी पारितोषिक होते. याआधी प्रत्येक विश्वचषकासाठी वेगवेगळ्या ट्रॉफी बनवण्यात आल्या होत्या.<ref>{{cite web|url=http://www.cricket-worldcup2015.net/2015/02/trophy-is-first-permanent-prize-in-cricket-world-cup.html|publisher=cricket-worldcup2015.net|title=Trophy is first permanent prize in Cricket World Cup|access-date=9 November 2007|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20150203150018/http://www.cricket-worldcup2015.net/2015/02/trophy-is-first-permanent-prize-in-cricket-world-cup.html|archive-date=3 February 2015|आर्काईव्ह दिनांक=2015-09-07|आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20150907181704/http://www.cricket-worldcup2015.net/2015/02/trophy-is-first-permanent-prize-in-cricket-world-cup.html}}</ref>{{Clarify|reason=is this right? were there different Prudential Cups, or was the same Cup used three times?|date=March 2023}} दोन महिन्यांच्या कालावधीत गॅरार्ड आणि कंपनीच्या कारागिरांच्या टीमने लंडनमध्ये ट्रॉफीची रचना आणि निर्मिती केली होती.<ref name=guardian_2015 /><ref>{{Cite web |title=Trophies {{!}} Famous Trophies |url=https://garrard.com/en/trophies/famous-trophies/ |access-date=2022-08-01 |website=Garrard |language=en-GB}}</ref>
सध्याची ट्रॉफी चांदी आणि गिल्टपासून बनविली गेली आहे आणि तीन चांदीच्या स्तंभांनी एक सोनेरी ग्लोब आहे. स्टंप आणि बेल्सच्या आकाराचे स्तंभ, क्रिकेटच्या तीन मूलभूत पैलूंचे प्रतिनिधित्व करतात: फलंदाजी, गोलंदाजी आणि क्षेत्ररक्षण, तर ग्लोब हे क्रिकेट बॉलचे वैशिष्ट्य आहे.<ref>{{cite web|url=http://www.webindia123.com/Sports/cricket/iccworldcup/history.htm|publisher=webindia123.com|title=Cricket World Cup- Past Glimpses|access-date=31 October 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20080323235801/http://www.webindia123.com/Sports/cricket/iccworldcup/history.htm|archive-date=23 March 2008|url-status=live}}</ref> पृथ्वीच्या अक्षीय झुकावचे प्रतीक म्हणून शिवण झुकलेली आहे. हे ६० सेंटीमीटर (२.० फूट) उंच आहे आणि त्याचे वजन अंदाजे ११ किलोग्रॅम (२४ पौंड) आहे. मागील विजेत्यांची नावे ट्रॉफीच्या पायावर कोरलेली आहेत, एकूण वीस शिलालेखांसाठी जागा आहे. आयसीसी मूळ ट्रॉफी ठेवते. केवळ शिलालेखांमध्ये भिन्न असलेली प्रतिकृती विजेत्या संघाला कायमस्वरूपी दिली जाते.<ref>{{cite web|url=http://www.icc-cricket.com/cricket-world-cup/about|publisher=[[International Cricket Council]]|title=About the Tournament|access-date=4 December 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140625075114/http://www.icc-cricket.com/cricket-world-cup/about |archive-date=25 June 2014}}</ref>
==मीडिया कव्हरेज==
ही स्पर्धा जगातील सर्वाधिक पाहिल्या गेलेल्या क्रीडा स्पर्धांपैकी एक आहे<ref>{{cite web|url=http://www.totalsportek.com/news/cricket-world-cup-third-most-watched-sports-event/|title=Cricket World Cup 2015 3rd Most Watched Sports Event In The World|publisher=Total Sportek|date=11 January 2015|access-date=17 March 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150325171256/http://www.totalsportek.com/news/cricket-world-cup-third-most-watched-sports-event/|archive-date=25 March 2015|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web |last=Baker |first=Alison |date=2022-07-25 |title=The Most Watched Sporting Events in The World |url=https://www.roadtrips.com/blog/the-most-watched-sporting-events-in-the-world/ |access-date=2023-07-05 |website=Roadtrips |language=en-US}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.roadtrips.com/blog/the-most-watched-sporting-events-in-the-world/|title=The Most Watched Sporting Events in The World|last=Baker|first=Alison|date=25 July 2022|access-date=15 October 2022|website=www.roadtrips.com}}</ref> आणि एकदिवसीय आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट अधिक प्रस्थापित झाल्यामुळे लागोपाठच्या स्पर्धांमुळे प्रसारमाध्यमांचे लक्ष वाढत आहे. २०११ क्रिकेट विश्वचषक २०० हून अधिक देशांमध्ये २.२ अब्जाहून अधिक प्रेक्षकांसाठी प्रसारित करण्यात आला.<ref name=guardian_2015>{{cite news|url=https://www.theguardian.com/sport/blog/2015/feb/12/cricket-world-cup-icc-50-overs|title=More money, more viewers and fewer runs in prospect for intriguing World Cup|newspaper=The Guardian|date=12 February 2015|access-date=17 March 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150304022954/http://www.theguardian.com/sport/blog/2015/feb/12/cricket-world-cup-icc-50-overs|archive-date=4 March 2015|url-status=live}}</ref><ref name="CWC">{{cite web|url=http://www.cricketworldcup.com/icc-marketing.html|publisher=cricketworldcup.com|title=World Cup Overview|access-date=29 January 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20070124001408/http://www.cricketworldcup.com/icc-marketing.html|archive-date=24 January 2007|url-status=dead|आर्काईव्ह दिनांक=2007-01-24|आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20070124001408/http://www.cricketworldcup.com/icc-marketing.html}}</ref> मुख्यतः २०११ आणि २०१५ विश्वचषकासाठी दूरचित्रवाणी अधिकार अमेरिकी १.१ अब्ज डॉलर पेक्षा जास्त विकले गेले<ref>{{cite web|url=http://content-usa.cricinfo.com/ci/content/current/story/271994.html|publisher=[[ईएसपीएन क्रिकइन्फो]]|author=Cricinfo staff|title=ICC rights for to ESPN-star|access-date=30 January 2007|date=9 December 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20090201130926/http://content-usa.cricinfo.com/ci/content/current/story/271994.html|archive-date=1 February 2009|url-status=live}}</ref> आणि प्रायोजकत्व अधिकार आणखी अमेरिकी ५०० दशलक्ष डॉलर मध्ये विकले गेले.<ref>{{cite web|url=http://content-usa.cricinfo.com/ci/content/story/276853.html|publisher=[[ईएसपीएन क्रिकइन्फो]]|author=Cricinfo staff|title=ICC set to cash in on sponsorship rights|access-date=30 January 2007|date=18 January 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20090201130947/http://content-usa.cricinfo.com/ci/content/story/276853.html|archive-date=1 February 2009|url-status=live}}</ref> आयसीसी ने २०१९ विश्वचषकासाठी एकूण १.६ अब्ज दर्शक तसेच स्पर्धेच्या डिजिटल व्हिडिओला ४.६ अब्ज व्ह्यूजचा दावा केला आहे.<ref name="2019 ICC viewership">{{Cite web|title=ICC Men's Cricket World Cup gives GDP 350 million boost to UK economy|url=https://www.icc-cricket.com/media-releases/1634008|access-date=2021-04-08|website=www.icc-cricket.com|language=en}}</ref> स्पर्धेतील सर्वात जास्त पाहिलेला सामना भारत आणि पाकिस्तान यांच्यातील गट गेम होता, जो ३०० दशलक्षाहून अधिक लोकांनी थेट पाहिला होता.<ref>{{cite web|url=https://www.icc-cricket.com/media-releases/1346930|title=2019 Men's Cricket World Cup most watched ever|date=16 September 2019|access-date=15 October 2022|website=www.icc-cricket.com}}</ref>
==प्रेक्षकांची उपस्थिती==
{| class="wikitable sortable" style="text-align:left"
|-
! वर्ष !! यजमान !! एकूण उपस्थिती !! संदर्भ
|-
| [[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]] || दक्षिण आफ्रिका, झिम्बाब्वे, केन्या || ६,२६,८४५ || <ref>{{cite web |url=http://www.icc-cricket.com/icc/news/quarterly/quarterly_3.pdf |publisher=ICC |title=Cricket World Cup 2003 |page=12 |access-date=29 January 2007 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20060321201920/http://www.icc-cricket.com/icc/news/quarterly/quarterly_3.pdf |archive-date=21 March 2006 |आर्काईव्ह दिनांक=2006-03-21 |आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20060321201920/http://www.icc-cricket.com/icc/news/quarterly/quarterly_3.pdf }}</ref>
|-
| [[२००७ क्रिकेट विश्वचषक|२००७]] || वेस्ट इंडीज || ६,७२,००० || <ref>{{cite web |url=http://content-usa.cricinfo.com/westindies/content/current/story/301516.html |title=World Cup profits boost debt-ridden Windies board |publisher=Content-usa.cricinfo.com |access-date=24 June 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080324094443/http://content-usa.cricinfo.com/westindies/content/current/story/301516.html |archive-date=24 March 2008 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|publisher=cricketworld.com|title=ICC CWC 2007 Match Attendance Soars Past 400,000|access-date=25 April 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20070928071404/http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|archive-date=28 September 2007|आर्काईव्ह दिनांक=2007-09-28|आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20070928071404/http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|url-status=dead}}</ref>
|-
| [[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]] || भारत, श्रीलंका, बांगलादेश || १२,२९,८२६ || <ref>{{cite web |url=http://content-usa.cricinfo.com/westindies/content/current/story/301516.html |title=World Cup profits boost debt-ridden Windies board |publisher=Content-usa.cricinfo.com |access-date=24 June 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080324094443/http://content-usa.cricinfo.com/westindies/content/current/story/301516.html |archive-date=24 March 2008 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|publisher=cricketworld.com|title=ICC CWC 2007 Match Attendance Soars Past 400,000|access-date=25 April 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20070928071404/http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|archive-date=28 September 2007|आर्काईव्ह दिनांक=2007-09-28|आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20070928071404/http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|url-status=dead}}</ref>
|-
| [[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]] || ऑस्ट्रेलिया, न्यू झीलंड || ११,०६,४२० || <ref>{{cite web |url=http://content-usa.cricinfo.com/westindies/content/current/story/301516.html |title=World Cup profits boost debt-ridden Windies board |publisher=Content-usa.cricinfo.com |access-date=24 June 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080324094443/http://content-usa.cricinfo.com/westindies/content/current/story/301516.html |archive-date=24 March 2008 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|publisher=cricketworld.com|title=ICC CWC 2007 Match Attendance Soars Past 400,000|access-date=25 April 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20070928071404/http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|archive-date=28 September 2007|आर्काईव्ह दिनांक=2007-09-28|आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20070928071404/http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|url-status=dead}}</ref>
|-
| [[२०१९ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९]] || इंग्लंड आणि वेल्स || ७,५२,००० || <ref>{{cite web |title=2019 Cricket World Cup delivers UK£350m boost for UK economy |first=Sam |last=Carp |url=https://www.sportspromedia.com/news/2019-cricket-world-cup-uk-economy-impact-england-wales/?zephr_sso_ott=mabKiL |date=4 March 2020 |access-date=18 May 2023 |publisher=SportsPro Daily}}</ref>
|-
| [[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]] || भारत || १२,५०,३०७ ||<ref>{{cite web |title=Record-Breaking 1.25 million spectators turn out for ICC Men's Cricket World Cup 2023|url=https://www.icc-cricket.com/media-releases/3790838 |date=21 November 2023 |access-date=21 November 2023 |publisher=cricketworldcup.com}}</ref>
|}
==यजमानांची निवड==
{{main|क्रिकेट विश्वचषकाचे यजमान}}
आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषदेची कार्यकारी समिती क्रिकेट विश्वचषक आयोजित करण्यासाठी उत्सुक असलेल्या राष्ट्रांनी केलेल्या बोलींची तपासणी केल्यानंतर स्पर्धेच्या यजमानांसाठी मतदान करते.<ref>{{cite web|url=http://content-usa.cricinfo.com/ci/content/story/245789.html|publisher=[[ईएसपीएन क्रिकइन्फो]]|title=Asia to host 2011 World Cup|date=30 April 2006|access-date=9 February 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20120928205442/http://content-usa.cricinfo.com/ci/content/story/245789.html|archive-date=28 September 2012|url-status=live}}</ref>
{{location map+|Earth
| float = center
| width = 900
|caption=क्रिकेट विश्वचषकाचे यजमान देश
|places=
{{Location map~|Earth|position=bottom|lat=51.300000|long=00.07000|label='''[[१९७५ क्रिकेट विश्वचषक|१९७५]]''',<br />'''[[१९७९ क्रिकेट विश्वचषक|१९७९]]''','''[[१९८३ क्रिकेट विश्वचषक|१९८३]]''',<br />'''[[१९९९ क्रिकेट विश्वचषक|१९९९]]''','''[[२०१९ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९]]'''}}
{{Location map~|Earth|position=bottom|lat=28.363600|long=77.13480|label='''[[१९८७ क्रिकेट विश्वचषक|१९८७]]''',<br />'''[[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]''','''[[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]]''',<br />'''[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]]''','''२०३१'''}}
{{Location map~|Earth|position=left|lat=33.360000|long=73.02000|label='''[[१९८७ क्रिकेट विश्वचषक|१९८७]]''','''[[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]'''}}
{{Location map~|Earth|position=right|lat=23.455000|long=90.23200|label='''[[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]]''','''२०३१'''}}
{{Location map~|Earth|position=bottom|lat=06.540400|long=79.50340|label='''[[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]''','''[[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]]'''}}
{{Location map~|Earth|position=left|lat=17.581700|long=-76.47350|label='''[[२००७ क्रिकेट विश्वचषक|२००७]]'''}}
{{Location map~|Earth|position=bottom|lat=-18.261700|long=130.50280|label='''[[१९९२ क्रिकेट विश्वचषक|१९९२]]''','''[[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]]'''}}
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{{Location map~|Earth|position=bottom|lat=-26.121600|long=28.02440|label='''[[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]]''','''[[२०२७ क्रिकेट विश्वचषक|२०२७]]'''}}
{{Location map~|Earth|position=top|lat=-17.494500|long=31.03080|label='''[[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]]''','''[[२०२७ क्रिकेट विश्वचषक|२०२७]]'''}}
{{Location map~|Earth|position=left|lat=-22.340000|long=17.05000|label='''[[२०२७ क्रिकेट विश्वचषक|२०२७]]'''}}
}}
[[File:Civic Centre-2003 CWC.jpg|thumb|दक्षिण आफ्रिकेतील २००३ क्रिकेट विश्वचषकाच्या निमित्ताने नागरी केंद्र उजळले]]
इंग्लंडने पहिल्या तीन स्पर्धांचे आयोजन केले होते. आयसीसीने ठरवले की इंग्लंडने पहिली स्पर्धा आयोजित करावी कारण ते उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित करण्यासाठी आवश्यक संसाधने समर्पित करण्यास तयार होते.<ref name="ENGHOST">{{cite web|url=http://www.cricworld.com/news/wchistory03feb.htm|publisher=cricworld.com|title=The History of World Cup's|access-date=19 September 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20070313181419/http://www.cricworld.com/news/wchistory03feb.htm|archive-date=13 March 2007|url-status=dead|आर्काईव्ह दिनांक=2007-03-13|आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20070313181419/http://www.cricworld.com/news/wchistory03feb.htm}}</ref> भारताने तिसऱ्या क्रिकेट विश्वचषकाचे यजमानपद स्वेच्छेने स्वीकारले, परंतु बहुतेक आयसीसी सदस्यांनी इंग्लंडला प्राधान्य दिले कारण जूनमध्ये इंग्लंडमध्ये दिवसाचा जास्त काळ म्हणजे एक सामना एका दिवसात पूर्ण होऊ शकतो.<ref>{{cite web|url=http://www1.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC_HISTORY/WC79_HISTORY.html|publisher=[[ईएसपीएन क्रिकइन्फो]]|title=The 1979 World Cup in England – West Indies retain their title|access-date=19 September 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20060523160232/http://www.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC_HISTORY/WC79_HISTORY.html|archive-date=23 May 2006|url-status=live}}</ref> १९८७ क्रिकेट विश्वचषक भारत आणि पाकिस्तानमध्ये आयोजित करण्यात आला होता, जो पहिल्यांदा इंग्लंडबाहेर आयोजित करण्यात आला होता.<ref>{{cite web|url=http://static.espncricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC_HISTORY/WC87_HISTORY.html|publisher=[[ईएसपीएन क्रिकइन्फो]]|title=The 1987 World Cup in India and Pakistan – Australia win tight tournament|access-date=15 July 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140716040704/http://static.espncricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC_HISTORY/WC87_HISTORY.html|archive-date=16 July 2014|url-status=live}}</ref>
१९८७, १९९६ आणि २०११ मध्ये दक्षिण आशिया, १९९२ आणि २०१५ मध्ये ऑस्ट्रेलिया (ऑस्ट्रेलिया आणि न्यू झीलंडमध्ये), २००३ मध्ये दक्षिण आफ्रिका आणि २००७ मध्ये वेस्ट इंडीज यासारख्या भौगोलिक प्रदेशातील अनेक स्पर्धा संयुक्तपणे आयोजित केल्या गेल्या आहेत.
नोव्हेंबर २०२१ मध्ये, आयसीसी ने २०२४ ते २०३१ सायकल दरम्यान खेळल्या जाणाऱ्या आयसीसी इव्हेंटसाठी यजमानांची नावे प्रकाशित केली. टी-२० विश्वचषक आणि चॅम्पियन्स ट्रॉफीसह ५० षटकांच्या विश्वचषकासाठी यजमानांची निवड स्पर्धात्मक बोली प्रक्रियेद्वारे करण्यात आली.<ref>{{cite news |title=India to host three ICC events in 2024-31 cycle |url=https://www.cricbuzz.com/cricket-news/119866/india-to-get-three-icc-events-in-next-cycle |access-date=16 November 2021 |work=Cricbuzz |language=en}}</ref><ref>{{cite news |title=USA to stage T20 World Cup: 2024-2031 ICC Men's tournament hosts confirmed |url=https://www.icc-cricket.com/news/2354682 |access-date=16 November 2021 |work=www.icc-cricket.com |language=en}}</ref>
==निकाल==
{{Main|क्रिकेट विश्वचषक अंतिम सामन्यांची यादी}}
{| class="wikitable sortable" style="font-size:90%; text-align:center; width:100%;"
|-
! rowspan="2" style="width:2%;|{{abbr|आवृ.|आवृत्ती}}
! rowspan="2" style="width:4%;|वर्ष
! rowspan="2" style="width:14%;|यजमान
! rowspan="2" style="width:15%;|अंतिम सामन्याचे मैदान
! colspan=3|अंतिम सामना
! rowspan=2|{{abbr|संघांची<br />संख्या|संघांची संख्या}}
|-
! style="width:15%; |विजेते
! style="width:30%; |निकाल
! style="width:15%; |उपविजेते
|-
!१
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]]
| style="text-align:left" |{{Flag|इंग्लंड}}
|[[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]
|'''{{cr|WIN}}'''<br><small>२९१/८ (६० षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५ - अंतिम सामना|वेस्ट इंडीज १७ धावांनी विजयी]]'''<br>[http://aus.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC75/WI_AUS_WC75_ODI-FINAL_21JUN1975.html (धावफलक)]
|{{cr|AUS}}<br><small>२७४ सर्वबाद (५८.४ षटके)</small>
| rowspan="4" |८
|-
!२
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]]
| style="text-align:left" |{{Flag|इंग्लंड}}
|[[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]
|'''{{cr|WIN}}'''<br><small>२८६/९ (६० षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''वेस्ट इंडीज ९२ धावांनी विजयी'''<br>[http://aus.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC79/WI_ENG_WC79_ODI-FINAL_23JUN1979.html (धावफलक)]
|{{cr|ENG}}<br><small>१९४ सर्वबाद (५१ षटके)</small>
|-
!३
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९८३|१९८३]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|इंग्लंड}} |{{flag|वेल्स}}}}
|[[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]
|'''{{cr|IND}}'''<br><small>१८३ सर्वबाद (५४.४ षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''भारत ४३ धावांनी विजयी'''<br>[http://aus.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC83/IND_WI_WC83_ODI-FINAL_25JUN1983.html (धावफलक)]
|{{cr|WIN}}<br><small>१४० सर्वबाद (५२ षटके)</small>
|-
!४
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|भारत}} |{{flag|पाकिस्तान}} }}
|[[इडन गार्डन्स]], [[कोलकाता]]
|'''{{cr|AUS}}'''<br><small>२५३/५ (५० षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''ऑस्ट्रेलिया ७ धावांनी विजयी'''<br>[http://aus.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC87/AUS_ENG_WC87_ODI-FINAL_08NOV1987.html (धावफलक)]
|{{cr|ENG}}<br><small>२४६/८ (५० षटके)</small>
|-
!५
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|ऑस्ट्रेलिया}}|{{flag|न्यूझीलंड}} }}
|[[मेलबर्न क्रिकेट मैदान]], [[मेलबर्न]]
|'''{{cr|PAK}}'''<br><small>२४९/६ (५० षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''पाकिस्तान २२ धावांनी विजयी'''<br>[http://aus.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC92/PAK_ENG_WC92_ODI-FINAL_25MAR1992.html (धावफलक)]
|{{cr|ENG}}<br><small>२२७ सर्वबाद (४९.२ षटके)</small>
|९
|-
!६
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|भारत}}|{{flag|पाकिस्तान}}|{{flag|श्रीलंका}}}}
|[[गद्दाफी स्टेडियम]], [[लाहोर]]
|'''{{cr|SRI}}'''<br><small>२४५/३ (४६.२ षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''श्रीलंका ७ गडी राखून विजयी'''<br>[http://aus.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC96/WC96-MATCHES/AUS_SL_WC96_ODI-FINAL_17MAR1996.html (धावफलक)]
|{{cr|AUS}}<br><small>२४१/७ (५० षटके)</small>
| rowspan="2" |१२
|-
!७
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|इंग्लंड}}{{efn|इंग्लंड हा एकमेव अधिकृत यजमान होता, परंतु वेल्स, स्कॉटलंड, आयर्लंड प्रजासत्ताक आणि नेदरलँड्स येथेही सामने खेळवण्यात आले.}}|{{flag|वेल्स}} |{{flag|स्कॉटलंड}} |{{flag|आयर्लंड}} |{{flag|नेदरलँड्स}} }}
|[[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]
|'''{{cr|AUS}}'''<br><small>१३३/२ (२०.१ षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''ऑस्ट्रेलिया ८ गडी राखून विजयी'''<br>[http://aus.cricinfo.com/link_to_database/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC99/SCORECARDS/FINALS/AUS_PAK_WC99_ODI-FINAL_20JUN1999.html (धावफलक)]
|{{cr|PAK}}<br><small>१३२ सर्वबाद (३९ षटके)</small>
|-
!८
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|दक्षिण आफ्रिका}}{{efn|[[दक्षिण आफ्रिका]] हा एकमेव अधिकृत मुख्य यजमान होता, परंतु झिम्बाब्वे आणि केन्या येथेही सामने खेळवण्यात आले.}}|{{flag|झिम्बाब्वे}} |{{flag|केन्या}} }}
|[[वॉन्डरर्स स्टेडियम (जोहान्सबर्ग)|वॉन्डरर्स स्टेडियम]], [[जोहान्सबर्ग]]
|'''{{cr|AUS}}'''<br><small>३५९/२ (५० षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''ऑस्ट्रेलिया १२५ धावांनी विजयी'''<br>[http://aus.cricinfo.com/link_to_database/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC2003/SCORECARDS/FINALS/AUS_IND_WC2003_ODI-FINAL_23MAR2003.html (धावफलक)]
|{{cr|IND}}<br><small>२३४ सर्वबाद (३९.२ षटके)</small>
|१४
|-
!९
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]]
| style="text-align:left" |{{Flag|वेस्ट इंडीज}}{{efn|[[क्रिकेट वेस्ट इंडीज|वेस्ट इंडीज क्रिकेट फेडरेशन]]च्या आठ सदस्य देशांनी सामने आयोजित केले - अँटिगा आणि बारबुडा, बार्बाडोस, ग्रेनाडा, गयाना, जमैका, सेंट किट्स आणि नेव्हिस, सेंट लुसिया आणि त्रिनिदाद आणि टोबॅगो.}}
|[[केन्सिंग्टन ओव्हल]], [[ब्रिजटाउन]]
|'''{{cr|AUS}}'''<br><small>२८१/४ (३८ षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''ऑस्ट्रेलिया ५३ धावांनी विजयी (डी/एल)'''<br>[http://content-aus.cricinfo.com/wc2007/engine/current/match/247507.html (धावफलक)]
|{{cr|SRI}}<br><small>२१५/८ (३६ षटके)</small>
|१६
|-
!१०
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|भारत}} |{{flag|श्रीलंका}} |{{flag|बांगलादेश}} }}
|[[वानखेडे स्टेडियम]], [[मुंबई]]
|'''{{cr|IND}}'''<br><small>२७७/४ (४८.२ षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''भारत ६ गडी राखून विजयी'''<br>[http://www.espncricinfo.com/icc_cricket_worldcup2011/engine/current/match/433606.html (धावफलक)]
|{{cr|SRI}}<br><small>२७४/६ (५० षटके)</small>
| rowspan="2" |१४
|-
!११
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|ऑस्ट्रेलिया}} |{{flag|न्यूझीलंड}} }}
|[[मेलबर्न क्रिकेट मैदान]], [[मेलबर्न]]
|'''{{cr|AUS}}'''<br><small>१८६/३ (३३.१ षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''ऑस्ट्रेलिया ७ गडी राखून विजयी'''<br>[http://www.espncricinfo.com/icc-cricket-world-cup-2015/engine/match/656495.html (धावफलक)]
|{{cr|NZ}}<br><small>१८३ सर्वबाद (४५ षटके)</small>
|-
!१२
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|इंग्लंड}} |{{flag|वेल्स}} }}
|[[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]
|'''{{cr|ENG}}'''<br><small>२४१ सर्वबाद (५० षटके)</small><br><small>१५/० ([[सुपर ओव्हर]])</small><br><small>२४ चौकार, २ षटकार</small>
| style="text-align:center" |'''सामना बरोबरीत <br> (सीमारेषीय फटक्यांच्या मोजणीवर इंग्लंड विजयी)'''<br>[http://www.espncricinfo.com/icc-cricket-world-cup-2015/engine/match/1144530.html (धावफलक)]
|{{cr|NZ}}<br><small>२४१/८ (५० षटके)</small><br><small>१५/१ ([[सुपर ओव्हर]])</small><br><small>१४ चौकार, ३ षटकार</small>
| rowspan="2" |१०
|-
!१३
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३]]
| style="text-align:left" |{{Flag|भारत}}
|[[नरेंद्र मोदी स्टेडियम]], [[अहमदाबाद]]
|'''{{cr|AUS}}'''<br><small>२४१/४ (४३ षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''[[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३ - अंतिम सामना|ऑस्ट्रेलिया ६ गडी राखून विजयी]]'''<br>[https://www.espncricinfo.com/series/icc-cricket-world-cup-2023-24-1367856/india-vs-australia-final-1384439/full-scorecard (धावफलक)]
|{{cr|IND}}<br><small>२४० सर्वबाद (५० षटके)</small>
|-
!१४
|२०२७
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|दक्षिण आफ्रिका}} |{{flag|झिम्बाब्वे}} |{{flag|नामिबिया}} }}
|ठरायचे आहे
|
|
|
| rowspan="2" |१४
|-
!१५
|२०३१
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|भारत}} |{{flag|बांगलादेश}} }}
|ठरायचे आहे
|
|
|
|}
;नोंदी
{{Notelist}}
क्रिकेट विश्वचषकातील देशांची सर्वोत्तम कामगिरी दर्शविणारा नकाशा (१९७५-२०२३).
[[File:Cricket_World_Cup_Countries'_best_results.svg|thumb|upright=3|center|देशांची सर्वोत्तम कामगिरी दर्शविणारा नकाशा.]]
===विजेतेपदांचा सारांश===
{| class="wikitable sortable"
|-
! संघ
!style="width:40%;| विजेतेपदे
!style="width:40%;| उपविजेतेपदे
|-
|style="background:gold"|{{cr|AUS}}
|style="background:gold"|'''६''' ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]], [[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]])
|style="background:#C0C0C0"|२ ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]])
|-
|style="background:gold"|{{cr|IND}}
|style="background:gold"|'''२''' ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९८३|१९८३]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]])
|style="background:#C0C0C0" |२ ([[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]], [[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]])
|-
|style="background:gold"|{{cr|WIN}}
|style="background:gold"|'''२''' ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]])
|style="background:#C0C0C0"|१ ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९८३|१९८३]])
|-
|style="background:gold"|{{cr|ENG}}
|style="background:gold"|'''१''' ([[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]])
|style="background:#C0C0C0"|३ ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]])
|-
|style="background:gold"|{{cr|SL}}
|style="background:gold"|'''१''' ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]])
|style="background:#C0C0C0"|२ ([[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]])
|-
|style="background:gold"|{{cr|PAK}}
|style="background:gold"|'''१''' ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]])
|style="background:#C0C0C0"|१ ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]])
|-
|style="background:#C0C0C0"|{{cr|NZ}}
|{{N/a}}
|style="background:#C0C0C0"|२ ([[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]])
|}
==स्पर्धेचा सारांश==
वीस देश कमीत कमी एकदा क्रिकेट विश्वचषकासाठी पात्र ठरले आहेत. सहा संघांनी प्रत्येक स्पर्धेत भाग घेतला असून त्यांपैकी पाच संघांनी विजेतेपद पटकावले आहे.<ref name="WCHistory"/> [[वेस्ट इंडीज क्रिकेट संघ|वेस्ट इंडीजने]] पहिल्या दोन स्पर्धा जिंकल्या, [[ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट संघ|ऑस्ट्रेलियाने]] सहा वेळा, [[भारतीय क्रिकेट संघ|भारताने]] दोन वेळा, तर [[पाकिस्तान क्रिकेट संघ|पाकिस्तान]], [[श्रीलंका क्रिकेट संघ|श्रीलंका]] आणि [[इंग्लंड क्रिकेट संघ|इंग्लंड]] यांनी प्रत्येकी एकदा विजेतेपद पटकावले आहे. वेस्ट इंडीज ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]] आणि [[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]]) आणि ऑस्ट्रेलिया ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]] आणि [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]]) हे सलग विजेतेपदे पटकावणारे एकमेव संघ आहेत.<ref name="WCHistory"/> ऑस्ट्रेलियाने तेरा अंतिम सामन्यांपैकी आठ अंतिम सामने ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]] आणि [[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]]) खेळले आहेत. [[न्यूझीलंड क्रिकेट संघ|न्यूझीलंडने]] अद्याप विश्वचषक जिंकलेला नाही, मात्र तो दोनदा उपविजेता ठरला आहे ([[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]] आणि [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]]). कसोटी न खेळणाऱ्या देशाची सर्वोत्तम कामगिरी [[केन्या क्रिकेट संघ|केन्याने]] [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]] स्पर्धेत उपांत्य फेरी गाठणे ही आहे; तर विश्वचषक पदार्पणात कसोटी न खेळणाऱ्या संघाची सर्वोत्तम कामगिरी [[आयर्लंड क्रिकेट संघ|आयर्लंडने]] [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]] मध्ये सुपर ८ (दुसरी फेरी) गाठणे ही आहे.<ref name="WCHistory"/>
[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६ विश्वचषकाचा]] सहयजमान असलेला श्रीलंका हा स्पर्धा जिंकणारा पहिला यजमान संघ ठरला, मात्र अंतिम सामना पाकिस्तानमध्ये झाला होता.<ref name="WCHistory"/> भारताने २०११ मध्ये यजमान म्हणून विजेतेपद पटकावले आणि स्वतःच्या देशात खेळवलेला अंतिम सामना जिंकणारा तो पहिला संघ ठरला.<ref>{{cite news|url=https://news.bbc.co.uk/sport2/hi/cricket/9444277.stm|title=India power past Sri Lanka to Cricket World Cup triumph|publisher=BBC Sport|date=२ एप्रिल २०११|access-date=१७ मार्च २०१५|archive-url=https://web.archive.org/web/20110403035451/http://news.bbc.co.uk/sport1/hi/cricket/9444277.stm|archive-date=३ एप्रिल २०११|url-status=live}}</ref> ऑस्ट्रेलिया आणि इंग्लंडने अनुक्रमे २०१५ आणि २०१९ मध्ये ही कामगिरी केली.<ref name="AUS2015"/> याशिवाय १९७९ मध्ये इंग्लंड आणि २०२३ मध्ये भारत यांनी स्वतःच्या देशात आयोजित स्पर्धेत अंतिम फेरी गाठली. स्पर्धेचे सहयजमान असताना आपली सर्वोत्तम विश्वचषक कामगिरी करणाऱ्या किंवा तिची बरोबरी करणाऱ्या इतर देशांमध्ये २०११ आणि २०१५ मध्ये अनुक्रमे अंतिम फेरी गाठणारे श्रीलंका आणि न्यूझीलंड, २००३ मध्ये सुपर सिक्स फेरी गाठणारा झिम्बाब्वे आणि २००३ मध्ये उपांत्य फेरी गाठणारा केन्या यांचा समावेश होतो.<ref name="WCHistory"/> १९८७ मध्ये सहयजमान भारत आणि पाकिस्तान या दोन्ही संघांनी उपांत्य फेरी गाठली, मात्र त्यांना अनुक्रमे इंग्लंड आणि ऑस्ट्रेलियाकडून पराभव पत्करावा लागला.<ref name="WCHistory"/> १९९२ मध्ये ऑस्ट्रेलिया, १९९९ मध्ये इंग्लंड, २००३ मध्ये दक्षिण आफ्रिका आणि २०११ मध्ये बांगलादेश हे यजमान संघ पहिल्याच फेरीत बाद झाले.<ref>{{Cite web |last=Sportstar |first=Team |date=२०१९-०५-२४ |title=World Cup, 11 editions: How host countries fared |url=https://sportstar.thehindu.com/cricket/icc-cricket-world-cup/cricket-world-cup-host-countries-england-wales-lords-india/article27228795.ece |access-date=२०२२-०८-२२ |website=sportstar.thehindu.com |language=en}}</ref>
===संघांची कामगिरी===
प्रत्येक विश्वचषकातील संघांच्या कामगिरीचा आढावा खाली दिला आहे. प्रत्येक स्पर्धेसाठी अंतिम स्पर्धेत सहभागी झालेल्या संघांची संख्या कंसात दिली आहे.
{| class="wikitable" style="text-align: center;"
|-
!rowspan="2" {{diagonal split header 2|<br/>संघ|संघांची संख्या/<br>हंगाम<br>यजमान}}
!{{small|(८)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]]
!{{small|(८)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]]
!{{small|(८)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, १९८३|१९८३]]
!{{small|(८)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]]
!{{small|(९)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]]
!{{small|(१२)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]]
!{{small|(१२)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]]
!{{small|(१४)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]]
!{{small|(१६)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]]
!{{small|(१४)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]]
!{{small|(१४)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]]
!{{small|(१०)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]]
!{{small|(१०)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३]]
!{{small|(१४)}}<br/>२०२७
! rowspan="2" |{{tooltip|सहभाग|सहभागांची संख्या}}
|-
!{{flagicon|England}}
!{{flagicon|England}}
!{{flagicon|England}}<br/>{{flagicon|Wales}}
!{{flagicon|India}}<br/>{{flagicon|Pakistan}}
!{{flagicon|Australia}}<br/>{{flagicon|New Zealand}}
!{{flagicon|India}}<br/>{{flagicon|Pakistan}}<br/>{{flagicon|Sri Lanka}}
!{{nobr|{{flagicon|England}} {{flagicon|Wales}}}}<br/>{{nobr|{{flagicon|Scotland}} {{flagicon|Ireland}}}}<br/>{{flagicon|Netherlands}}
!{{flagicon|South Africa}}<br/>{{flagicon|Zimbabwe}}<br/>{{flagicon|Kenya}}
!{{flagicon|West Indies}}
!{{flagicon|India}}<br/>{{flagicon|Sri Lanka}}<br/>{{flagicon|Bangladesh}}
!{{flagicon|Australia}}<br/>{{flagicon|New Zealand}}
!{{flagicon|England}}<br/>{{flagicon|Wales}}
!{{flagicon|India}}
!{{flagicon|South Africa}}<br/>{{flagicon|Namibia}}<br/>{{flagicon|Zimbabwe}}
|-
|style="text-align:left"|{{cr|AFG|२०१३}}|| || || || || || || || || || ||गट फेरी||१०वे||६वे|| ठरायचे आहे
| ३
|-
|style="text-align:left"|{{cr|AUS}}||style="background: silver"|'''उपविजेता'''||गट फेरी||गट फेरी||style="background: gold"|'''विजेता'''||style="border: 3px solid red" | ५वे||style="background: silver"|'''उपविजेता'''|| style="background: gold" |'''विजेता'''||style="background: gold"|'''विजेता'''|| style="background: gold" |'''विजेता'''||style="background:#ffebcd;"|'''उपांत्यपूर्व फेरी'''||style="border: 3px solid red; background: gold"|'''विजेता'''||style="background-color: #cc9966"|'''उपांत्य फेरी'''|| style="background: gold" |'''विजेता'''|| ठरायचे आहे
| १३
|-
|style="text-align:left"|{{cr|BAN}}|| || || || || || ||गट फेरी||गट फेरी|| ७वे ||style="border: 3px solid red" |गट फेरी||style="background:#ffebcd;"|'''उपांत्यपूर्व फेरी'''||८वे||| ८वे|| ठरायचे आहे
| ७
|-
|style="text-align:left"|{{cr|BER}}|| || || || || || || || ||गट फेरी|| || |||| ||
| १
|-
|style="text-align:left"|{{cr|CAN}}|| ||गट फेरी|| || || || || ||गट फेरी||गट फेरी||गट फेरी|||||| || ठरायचे आहे
| ४
|-
| style="text-align:left" |{{cr|ENG}}|| style="border: 3px solid red; background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="border: 3px solid red; background: silver" |'''उपविजेता'''|| style="border: 3px solid red; background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background: silver" |'''उपविजेता'''|| style="background: silver" |'''उपविजेता'''|| style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''||style="border: 3px solid red" | गट फेरी|| गट फेरी || ५वे || style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''||गट फेरी|| style="border: 3px solid red; background: gold" |'''विजेता''' || ७वे || ठरायचे आहे
| १३
|-
| style="text-align:left" |{{cr|IND}}||गट फेरी||गट फेरी|| style="background: gold" |'''विजेता'''|| style="border: 3px solid red; background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''||७वे|| style="border: 3px solid red; background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| ६वे|| style="background:silver" |'''उपविजेता'''||गट फेरी|| style="border: 3px solid red; background: gold" |'''विजेता'''|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="border: 3px solid red;background: silver"|'''उपविजेता''' || ठरायचे आहे
| १३
|-
| style="text-align:left" |{{cr|IRE}}|| || || || || || || || || ८वे ||गट फेरी||गट फेरी|| || || ठरायचे आहे
| ३
|-
| style="text-align:left" |{{cr|KEN}}|| || || || || ||गट फेरी||गट फेरी|| style="border: 3px solid red; background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''||गट फेरी||गट फेरी|| || || || ठरायचे आहे
| ५
|-
| style="text-align:left" |{{cr|NAM}}|| || || || || || || ||गट फेरी|| || || || || || ठरायचे आहे
| १
|-
| style="text-align:left" |{{cr|NED}}|| || || || || ||गट फेरी|| ||गट फेरी||गट फेरी||गट फेरी|| || || १०वे || ठरायचे आहे
| ५
|-
| style="text-align:left" |{{cr|NZ}}|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''||गट फेरी||गट फेरी|| style="border: 3px solid red; background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| ५वे || style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="border: 3px solid red; background: silver" |'''उपविजेता'''|| style="background: silver" |'''उपविजेता'''|| style="background-color: #cc9966"|'''उपांत्य फेरी''' || ठरायचे आहे
| १३
|-
| style="text-align:left" |{{cr|PAK}}||गट फेरी|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="border: 3px solid red; background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background: gold" |'''विजेता'''|| style="border: 3px solid red; background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''|| style="background: silver" |'''उपविजेता'''||गट फेरी||गट फेरी|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''||५वे||५वे || ठरायचे आहे
| १३
|-
| style="text-align:left" |{{cr|SCO}}|| || || || || || ||गट फेरी|| ||गट फेरी|| ||गट फेरी|| || || ठरायचे आहे
| ३
|-
| style="text-align:left" |{{cr|SA}}{{efn|name=SAfr}}|| || || || || style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''||style="border: 3px solid red;" |गट फेरी|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''||७वे|| style="background-color: #cc9966"|'''उपांत्य फेरी''' || style="border: 3px solid red" | पात्र
| ९
|-
| style="text-align:left" |{{cr|SRI}}||गट फेरी||गट फेरी||गट फेरी||गट फेरी||८वे|| style="border: 3px solid red; background: gold" |'''विजेता'''||गट फेरी|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background: silver" |'''उपविजेता'''|| style="border: 3px solid red; background: silver" |'''उपविजेता'''|| style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''||६वे|| ९वे || ठरायचे आहे
| १३
|-
| style="text-align:left" | {{nobr|{{cr|UAE}}}}|| || || || || ||गट फेरी|| || || || ||गट फेरी|| || || ठरायचे आहे
| २
|-
| style="text-align:left" |{{cr|WIN}}|| style="background: gold" |'''विजेता'''|| style="background: gold" |'''विजेता'''|| style="background: silver" |'''उपविजेता'''||गट फेरी||६वे|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''||गट फेरी||गट फेरी||style="border: 3px solid red;" |६वे || style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''|| style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''|||९वे|| || ठरायचे आहे
| १२
|-
| style="text-align:left" |{{cr|ZIM}}|| || ||गट फेरी||गट फेरी||९वे||गट फेरी|| ५वे || style="border: 3px solid red;" |६वे ||गट फेरी||गट फेरी||गट फेरी|| || || style="border: 3px solid red" | पात्र
| ९
|-
! colspan="16" |निष्क्रिय संघ
|-
|style="text-align:left"| {{flag|पूर्व आफ्रिका}}{{efn|name=EAfr}}|||गट फेरी|| || || ||colspan=10 {{n/a}}
| १
|}
'''संकेत'''
*{{bg|gold|विजेता}} - विजेता
*{{bg|silver|उपविजेता}} - उपविजेता
*{{bg|#cc9966|उपांत्य फेरी}} - उपांत्य फेरी
*{{bg|#BBF3BB|सुपर सिक्स}} - सुपर सिक्स (१९९९-२००३)
*{{bg|#ffebcd|उपांत्यपूर्व फेरी}} - उपांत्यपूर्व फेरी (१९९६, २०११-२०१५)
*{{bg|#ffebcd|सुपर एट}} - सुपर एट (२००७)
*गट फेरी - गट फेरी / पहिली फेरी
*पात्र - पात्र, अजूनही स्पर्धेत
*{{border|width=3px|color=red| }} - यजमान
===पदार्पण करणारे संघ===
{| class="wikitable" style="text-align: left;"
|-
!वर्ष
!संघ
!एकूण
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]]
|{{cr|AUS}}, {{flag|पूर्व आफ्रिका}},{{efn|name=EAfr}} {{cr|ENG}}, {{cr|IND}}, {{cr|NZ}}, {{cr|PAK}}, {{cr|WIN}}, {{cr|SL}}
|८
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]]
|{{cr|CAN}}
|१
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९८३|१९८३]]
|{{cr|ZIM}}
|१
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]]
|''कोणीही नाही''
|०
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]]
|{{cr|SA|}}{{efn|name=SAfr}}
|१
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]]
|{{cr|KEN}}, {{cr|NED}}, {{cr|UAE}}
|३
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]]
|{{cr|BAN}}, {{cr|SCO}}
|२
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]]
|{{cr|NAM}}
|१
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]]
|{{cr|BER}}, {{cr|IRE}}
|२
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]]
|''कोणीही नाही''
|०
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]]
|{{cr|AFG|२०१३}}
|१
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]]
|''कोणीही नाही''
|०
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३]]
|''कोणीही नाही''
|०
|}
===आढावा===
[[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३ स्पर्धेच्या]] समाप्तीपर्यंतच्या मागील विश्वचषकांमधील संघांच्या कामगिरीचा आढावा खालील तक्त्यात दिला आहे. संघांची मांडणी प्रथम सर्वोत्तम कामगिरीनुसार, त्यानंतर सहभागांची संख्या, विजयाची टक्केवारी, एकूण विजय, एकूण सामने आणि शेवटी वर्णक्रमानुसार करण्यात आली आहे:
{| class="wikitable sortable" style="text-align: center;"
|-
! rowspan="2"style="width:150px;"|संघ
! colspan=7 | आकडेवारी
! rowspan="2" class="unsortable" | सर्वोत्तम कामगिरी
|-
!width=30|सहभाग
!width=30|{{abbr|सामने|खेळलेले सामने}}
!width=30|विजय
!width=30|पराभव
!width=30|बरोबरी
!width=30|निकाल नाही
!width=30|विजय %*
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Australia}}
|१३||१०५||७८||२५||१||१||७५.४८||style="background:gold;" | विजेता {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|India}}
|१३||९५||६३||३०||१||१||६७.५५||style="background:gold;" | विजेता {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९८३|१९८३]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|West Indies}}
|१२||८०||४३||३५||०||२||५५.१२||style="background:gold;" | विजेता {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|England}}
|१३||९३||५२||३९||१||१||५७.१४||style="background:gold;" | विजेता {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Pakistan}}
|१३||८८||४९||३७||०||२||५६.९७||style="background:gold;" | विजेता {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Sri Lanka}}
|१३||८९||४०||४६||१||२||४६.५५||style="background:gold;" | विजेता {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|New Zealand}}
|१३||९९||५९||३८||१||१||६०.७१||style="background-color: silver" | उपविजेता {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|South Africa}}
|९||७४||४५||२६||२||१||६३.०१||style="background-color: #cc9966" | उपांत्य फेरी {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Kenya}}
|५||२९||६||२२||०||०||२१.४२||style="background-color: #cc9966"| उपांत्य फेरी {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Zimbabwe}}
|९||५७||११||४२||१||३||२१.२९||{{sort|5.4|सुपर ६}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Bangladesh}}
|७||४९||१६||३२||०||१||३३.३३||{{sort|7.4|सुपर ८}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]])}} आणि {{sort|7.4|उपांत्यपूर्व फेरी}} <small>([[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]])</small>
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Ireland}}
|३||२१||७||१३||१||०||३५.७१||{{sort|7.5|सुपर ८}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Netherlands}}
|५||२९||४||२५||०||०||१३.७९||{{sort|9.2|गट फेरी}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Canada}}
|४||१८||२||१६||०||०||११.११||{{sort|9.2|गट फेरी}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]])}}
|-
| style="text-align:left;" |{{nowrap|{{Cr|AFG|२०१३}}}}
|३||२४||५||१९||०||०||२०.८३||{{sort|9.5|गट फेरी}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Scotland}}
|३||१४||०||१४||०||०||०.००||{{sort|9.3|गट फेरी}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{nowrap|{{Cr|UAE}}}}
|२||११||१||१०||०||०||९.०९||{{sort|9.4|गट फेरी}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Namibia}}
|१||६||०||६||०||०||०.००||{{sort|9.5|गट फेरी}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Bermuda}}
|१||३||०||३||०||०||०.००||{{sort|9.5|गट फेरी}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]])}}
|-
! colspan="11" |निष्क्रिय संघ
|-
|style="text-align:left;"|{{flag|पूर्व आफ्रिका}}{{efn|name=EAfr}}
|१||३||०||३||०||०||०.००||{{sort|9.5|गट फेरी}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]])}}
|-
!colspan=11|{{smalldiv|1={{Updated|१९ नोव्हेंबर २०२३}}<br/>स्रोत: [http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/team/results_summary.html?id=12;type=trophy क्रिकइन्फो]}}
|}
''नोंद:''
* {{small|विजयाच्या टक्केवारीत अनिर्णित सामने वगळले आहेत आणि बरोबरीचा सामना अर्धा विजय म्हणून गणला आहे.}}
* {{small|संघांची क्रमवारी प्रथम सर्वोत्तम कामगिरीनुसार, त्यानंतर विजयाच्या टक्केवारीनुसार आणि ती समान असल्यास वर्णक्रमानुसार लावली आहे.}}
{{notelist|refs=
{{efn|name=EAfr|१९८९ मध्ये संघ विसर्जित करण्यात आला.}}
{{efn|name=SAfr|१९९२ विश्वचषकापूर्वी [[वर्णभेद|वर्णभेदामुळे]] दक्षिण आफ्रिकेवर बंदी होती.}}
}}
==इतर परिणाम==
{{col-begin}}
{{col-break}}
===यजमान संघांचे निकाल===
{| class="wikitable"
|-
! वर्ष
! यजमान संघ
! समाप्त केले
|-
| [[१९७५ क्रिकेट विश्वचषक|१९७५]]
| {{cr|England}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| [[१९७९ क्रिकेट विश्वचषक|१९७९]]
| {{cr|England}}
| bgcolor=Silver| '''उपविजेते'''
|-
| [[१९८३ क्रिकेट विश्वचषक|१९८३]]
| {{cr|England}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| rowspan=2|[[१९८७ क्रिकेट विश्वचषक|१९८७]]
| {{cr|India}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| {{cr|Pakistan}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| rowspan=2|[[१९९२ क्रिकेट विश्वचषक|१९९२]]
| {{cr|Australia}}
| राउंड रॉबिन
|-
| {{cr|New Zealand}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| rowspan=3|[[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]
| {{cr|India}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| {{cr|Pakistan}}
| bgcolor=#FFEBCD| उपांत्यपूर्व फेरीत
|-
| {{cr|Sri Lanka}}
| bgcolor=Gold| '''चॅम्पियन्स'''
|-
| rowspan=4|[[१९९९ क्रिकेट विश्वचषक|१९९९]]
| {{cr|England}}
| ग्रुप स्टेज
|-
| {{cr|Scotland}}
| ग्रुप स्टेज
|-
| {{cr|Netherlands}}
| ''खेळला नाही''
|-
| {{cr|Ireland}}
| ''खेळला नाही''
|-
| rowspan=3|[[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]]
| {{crw|South Africa}}
| ग्रुप स्टेज
|-
| {{cr|Zimbabwe}}
| bgcolor=#BBF3BB| सुपर ६
|-
| {{cr|Kenya}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| [[२००७ क्रिकेट विश्वचषक|२००७]]
| {{cr|West Indies}}
| bgcolor=#FFEBCD| सुपर ८
|-
| rowspan=3|[[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]]
| {{cr|India}}
| bgcolor=Gold| '''चॅम्पियन्स'''
|-
| {{cr|Sri Lanka}}
| bgcolor=Silver| '''उपविजेते'''
|-
| {{cr|Bangladesh}}
| ग्रुप स्टेज
|-
| rowspan=2|[[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]]
| {{cr|Australia}}
| bgcolor=Gold| '''चॅम्पियन्स'''
|-
| {{cr|New Zealand}}
| bgcolor=Silver| '''उपविजेते'''
|-
| [[२०१९ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९]]
| {{cr|England}}
| bgcolor=Gold| '''चॅम्पियन्स'''
|-
| [[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]]
| {{cr|India}}
| bgcolor=Silver| '''उपविजेते'''
|-
| rowspan=3|[[२०२७ क्रिकेट विश्वचषक|२०२७]]
| {{cr|South Africa}}
|
|-
| {{cr|Zimbabwe}}
|
|-
| {{cr|Namibia}}
|
|-
| rowspan=3|[[२०३१ क्रिकेट विश्वचषक|२०३१]]
| {{cr|India}}
|
|-
| {{cr|Bangladesh}}
|
|-
|}
{{col-break}}
===गतविजेत्याचे निकाल===
{| class="wikitable"
|-
! वर्ष
! गतविजेते
! समाप्त केले
|-
| [[१९७९ क्रिकेट विश्वचषक|१९७९]]
| {{cr|West Indies}}
| bgcolor=Gold| '''चॅम्पियन्स'''
|-
| [[१९८३ क्रिकेट विश्वचषक|१९८३]]
| {{cr|West Indies}}
| bgcolor=Silver| '''उपविजेते'''
|-
| [[१९८७ क्रिकेट विश्वचषक|१९८७]]
| {{cr|India}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| [[१९९२ क्रिकेट विश्वचषक|१९९२]]
| {{cr|Australia}}
| राउंड रॉबिन
|-
| [[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]
| {{cr|Pakistan}}
| bgcolor=#FFEBCD| उपांत्यपूर्व फेरीत
|-
| [[१९९९ क्रिकेट विश्वचषक|१९९९]]
| {{cr|Sri Lanka}}
| ग्रुप स्टेज
|-
| [[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]]
| {{cr|Australia}}
| bgcolor=Gold| '''चॅम्पियन्स'''
|-
| [[२००७ क्रिकेट विश्वचषक|२००७]]
| {{cr|Australia}}
| bgcolor=Gold| '''चॅम्पियन्स'''
|-
| [[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]]
| {{cr|Australia}}
| bgcolor=#FFEBCD| उपांत्यपूर्व फेरीत
|-
| [[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]]
| {{cr|India}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| [[२०१९ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९]]
| {{cr|Australia}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| [[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]]
| {{cr|England}}
| राउंड रॉबिन
|-
| [[२०२७ क्रिकेट विश्वचषक|२०२७]]
| {{cr|Australia}}
|
|-
|}
{{col-end}}
==स्पर्धेचे रेकॉर्ड==
{{main|क्रिकेट विश्वचषकातील विक्रमांची यादी}}
[[File:Sachin Tendulkar at MRF Promotion Event.jpg|right|thumbnail|विश्वचषकाच्या इतिहासात सर्वाधिक धावा करणारा [[सचिन तेंडुलकर]]]]
[[File:Glenn McGrath in Circular Quay, Sydney, Australia, 2018-02-03.jpg|thumbnail| विश्वचषकाच्या इतिहासातील आघाडीचा विकेट घेणारा गोलंदाज]]
{| class="wikitable"
|-
! colspan="3" | विश्वचषकातील विक्रम<ref>All records are based on statistics at [[ईएसपीएन क्रिकइन्फो]].com's list of [http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/index.html?id=12;type=trophy World Cup records] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20070103091603/http://www.cricinfo.com/db/STATS/WC/ |date=3 January 2007 }}</ref>
|-
! colspan="3" | फलंदाजी
|-
|सर्वाधिक धावा
|{{flagicon|India}} [[सचिन तेंडुलकर]]
|२,२७८ ([[१९९२ क्रिकेट विश्वचषक|१९९२]]–[[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]])
|-
|[[फलंदाजीची सरासरी (क्रिकेट)|सर्वोच्च सरासरी]] (किमान १० डाव) <ref>{{cite web|url=http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/batting/highest_career_batting_average.html?id=12;type=trophy|title=Best Average in Cricket World Cup|publisher=ESPN Cricinfo|access-date=14 July 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190626190708/http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/batting/highest_career_batting_average.html?id=12;type=trophy|archive-date=26 June 2019|url-status=live}}</ref>
|{{flagicon|South Africa}} [[लान्स क्लुसनर]]
|१२४.०० ([[१९९९ क्रिकेट विश्वचषक|१९९९]]–[[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]])
|-
|सर्वोच्च [[स्ट्राइक रेट|फलंदाजी स्ट्राइक रेट]] (किमान ५०० चेंडूंचा सामना केला)
|{{flagicon|Australia}} [[ग्लेन मॅक्सवेल]]
|१६०.३२ ([[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]]–[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]])
|-
|सर्वोच्च स्कोअर
| {{flagicon|New Zealand}} [[मार्टिन गप्टिल]] वि {{Flag|वेस्ट इंडीज}}
|२३७[[नाबाद|*]] ([[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]])
|-
|सर्वोच्च [[भागीदारी (क्रिकेट)|भागीदारी]]
| {{flagicon|West Indies}} [[ख्रिस गेल]] आणि [[मार्लन सॅम्युअल्स]] <br> (दुसऱ्या गड्यासाठी) वि {{cr|Zimbabwe}}
|३७२ ([[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]])
|-
|एकाच विश्वचषकात सर्वाधिक धावा
|{{flagicon|India}} [[विराट कोहली]]
|७६५ ([[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]])
|-
|सर्वाधिक शतक
|{{flagicon|India}} [[रोहित शर्मा]]
|७ ([[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]]-[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]])
|-
|एकाच विश्वचषकात सर्वाधिक शतके
|{{flagicon|IND}} [[रोहित शर्मा]]
|५ ([[२०१९ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९]])
|-
! colspan="3" | गोलंदाजी
|-
|सर्वाधिक बळी
|{{flagicon|Australia}} [[ग्लेन मॅकग्रा]]
|७१ ([[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]–[[२००७ क्रिकेट विश्वचषक|२००७]])
|-
|[[गोलंदाजीची सरासरी|सर्वात कमी सरासरी]] (किमान ४०० चेंडू टाकले)
|{{flagicon|India}} [[मोहम्मद शमी]]
|१३.५२ ([[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]]–[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]])
|-
|सर्वोत्तम [[स्ट्राइक रेट]] (किमान २० बळी)
|{{flagicon|India}} [[मोहम्मद शमी]]
|१५.८१ ([[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]]–[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]])
|-
|सर्वोत्तम [[इकॉनॉमी रेट]] (किमान १००० चेंडू टाकले)
|{{flagicon|West Indies}} [[अँडी रॉबर्ट्स]]
|३.२४ ([[१९७५ क्रिकेट विश्वचषक|१९७५]]–[[१९८३ क्रिकेट विश्वचषक|१९८३]])
|-
|सर्वोत्तम गोलंदाजी आकडेवारी
|{{flagicon|Australia}} [[ग्लेन मॅकग्रा]] वि {{cr|Namibia}}
|७/१५ ([[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]])
|-
|स्पर्धेत सर्वाधिक बळी
|{{flagicon|Australia}} [[मिचेल स्टार्क]]
|२७ ([[२०१९ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९]])
|-
! colspan="3" | क्षेत्ररक्षण
|-
|सर्वाधिक बाद ([[यष्टिरक्षक]])
|{{flagicon|Sri Lanka}} [[कुमार संगकारा]]
|५४ ([[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]]–[[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]])
|-
|सर्वाधिक झेल ([[क्षेत्ररक्षण (क्रिकेट)|क्षेत्ररक्षक]])
|{{flagicon|Australia}} [[रिकी पाँटिंग]]
|२८ ([[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]–[[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]])
|-
! colspan="3" | संघ
|-
|सर्वोच्च स्कोअर
|{{cr|South Africa}} वि {{cr|Sri Lanka}}
|४२८/५ ([[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]])
|-
|सर्वात कमी स्कोअर
|{{cr|Canada}} वि {{cr|Sri Lanka}}
|३६ ([[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]])
|-
|सर्वोच्च विजय %
|{{flagicon|Australia}} ऑस्ट्रेलिया
|७५.४८% (१०५ खेळले, ७८ जिंकले)<ref>{{cite web |title=World Cup Cricket Team Records & Stats |url=http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/team/results_summary.html?id=12;type=trophy |website=ESPNCricinfo |access-date=22 June 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110227115818/http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/team/results_summary.html?id=12%3Btype%3Dtrophy |archive-date=27 February 2011 |url-status=live }}</ref>
|-
|सर्वाधिक सलग विजय
|{{flagicon|Australia}} ऑस्ट्रेलिया
|२७ (२० जून १९९९ – १९ मार्च २०११, एक [[निकाल (क्रिकेट)#परिणाम नाही|निकाल नाही]] वगळला)<ref>{{cite web|url=http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/stats/index.html?class=2;filter=advanced;orderby=start;size=100;spanmax2=20+mar+2011;spanmin2=23+May+1999;spanval2=span;team=2;template=results;trophy=12;type=team;view=results|title=Statistics / Statsguru / One-Day Internationals / Team records|publisher=Cricinfo|access-date=30 March 2015|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20150911093616/http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/stats/index.html?class=2%3Bfilter%3Dadvanced%3Borderby%3Dstart%3Bsize%3D100%3Bspanmax2%3D20+mar+2011%3Bspanmin2%3D23+May+1999%3Bspanval2%3Dspan%3Bteam%3D2%3Btemplate%3Dresults%3Btrophy%3D12%3Btype%3Dteam%3Bview%3Dresults|archive-date=11 September 2015}}</ref>
|-
|सलग सर्वाधिक स्पर्धा जिंकतो
|{{flagicon|Australia}} ऑस्ट्रेलिया
|३ ([[१९९९ क्रिकेट विश्वचषक|१९९९]]–[[२००७ क्रिकेट विश्वचषक|२००७]])
|}
===स्पर्धेद्वारे===
{{main|क्रिकेट विश्वचषक पुरस्कार}}
{| class="wikitable"
|-
! वर्ष !! विजयी कर्णधार !! अंतिम सामन्यातील सर्वोत्तम खेळाडू !! स्पर्धेतील सर्वोत्तम खेळाडू !! सर्वाधिक धावा !! सर्वाधिक बळी
|-
| [[१९७५ क्रिकेट विश्वचषक|१९७५]] || {{flagicon|WIN}} [[क्लाइव्ह लॉईड]] || {{flagicon|WIN}} [[क्लाइव्ह लॉईड]]<ref name=potm_75-19>{{Cite web |title=ODI World Cup Finals: Full list of Player of the Match award winners from 1975 to 2019|url=https://sportstar.thehindu.com/cricket/icc-cricket-world-cup/odi-world-cup-final-man-of-the-match-list-award-winners-performances-records-stats-india-vs-australia-2023/article67550186.ece/|access-date=19 November 2023 |website=Sportstar|date=19 November 2023 }}</ref> || पुरस्कार मिळालेला नाही|| {{flagicon|NZ}} [[ग्लेन टर्नर]] (३३३) || {{flagicon|AUS}} [[गॅरी गिलमोर]] (११)
|-
|[[१९७९ क्रिकेट विश्वचषक|१९७९]] || {{flagicon|WIN}} [[क्लाइव्ह लॉईड]] || {{flagicon|WIN}} [[विव्ह रिचर्ड्स]]<ref name=potm_75-19/> || पुरस्कार मिळालेला नाही|| {{flagicon|WIN}} [[गॉर्डन ग्रीनिज]] (२५३) || {{flagicon|ENG}} [[माइक हेंड्रिक्स]] (१०)
|-
| [[१९८३ क्रिकेट विश्वचषक|१९८३]] ||{{flagicon|IND}} [[कपिल देव]] || {{flagicon|IND}} [[मोहिंदर अमरनाथ]]<ref name=potm_75-19/> || पुरस्कार मिळालेला नाही || {{flagicon|ENG}} [[डेव्हिड गोवर]] (३८४) || {{flagicon|IND}} [[रॉजर बिन्नी]] (१८)
|-
| [[१९८७ क्रिकेट विश्वचषक|१९८७]] ||{{flagicon|AUS}} [[ॲलन बॉर्डर]]|| {{flagicon|AUS}} [[डेव्हिड बून]]<ref name=potm_75-19/> || पुरस्कार मिळालेला नाही ||{{flagicon|ENG}} [[ग्रॅहम गूच]] (४७१) || {{flagicon|AUS}} [[क्रेग मॅकडरमॉट]] (१८)
|-
| [[१९९२ क्रिकेट विश्वचषक|१९९२]] ||{{flagicon|PAK}} [[इम्रान खान]] || {{flagicon|PAK}} [[वसीम अक्रम]]<ref name=potm_75-19/> ||{{flagicon|NZ}} [[मार्टिन क्रो]]<ref name=potm_75-19/> || {{flagicon|NZ}} [[मार्टिन क्रो]] (४५६) || {{flagicon|PAK}} [[वसीम अक्रम]] (१८)
|-
| [[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]||{{flagicon|SL}} [[अर्जुन रणतुंगा]] || {{flagicon|SL}} [[अरविंदा डी सिल्वा]]<ref name=potm_75-19/> || {{flagicon|SL}} [[सनथ जयसूर्या]]<ref name=potm_75-19/> || {{flagicon|IND}} [[सचिन तेंडुलकर]] (५२३) ||{{flagicon|IND}} [[अनिल कुंबळे]] (१५)
|-
| [[१९९९ क्रिकेट विश्वचषक|१९९९]] ||{{flagicon|AUS}} [[स्टीव्ह वॉ]] || {{flagicon|AUS}} [[शेन वॉर्न]]<ref name=potm99>{{Cite web |title=Australia vs Pakistan, ICC World Cup 1999 |url=https://www.espncricinfo.com/series/icc-world-cup-1999-61046/australia-vs-pakistan-final-65234/full-scorecard |access-date=19 November 2023 |website=ESPNcricinfo}}</ref>||{{flagicon|SA}} [[लान्स क्लुसनर]]<ref name=potm99/> || {{flagicon|IND}} [[राहुल द्रविड]] (४६१) ||{{flagicon|NZ}} [[जिऑफ ॲलॉट]] / <br/> {{flagicon|AUS}} [[शेन वॉर्न]] (२०)
|-
|[[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]] || {{flagicon|AUS}} [[रिकी पाँटिंग]] || {{flagicon|AUS}} [[रिकी पाँटिंग]]<ref name=potm03>{{Cite web |date=23 March 2003 |title=Australia vs India, ICC World Cup 2003 Final |url=https://www.espncricinfo.com/series/icc-world-cup-2002-03-61124/australia-vs-india-final-65286/full-scorecard |access-date=19 November 2023 |website=ESPNcricinfo}}</ref>|| {{flagicon|IND}} [[सचिन तेंडुलकर]]<ref name=potm03/> || {{flagicon|IND}} [[सचिन तेंडुलकर]] (६७३) || {{flagicon|SL}} [[चमिंडा वास]] (२३)
|-
|[[२००७ क्रिकेट विश्वचषक|२००७]] || {{flagicon|AUS}} [[रिकी पाँटिंग]] || {{flagicon|AUS}} [[ॲडम गिलख्रिस्ट]]<ref>{{Cite web |date=18 November 2018 |title=This day, that year: Adam Gilchrist scores 149 to gift Australia World Cup |url=https://www.hindustantimes.com/cricket/this-day-that-year-adam-gilchrist-scores-149-to-gift-australia-world-cup/story-k3ebcJURetMZw8I7ztP4CK.html |access-date=19 November 2023 |website=Hindustan Times}}</ref>|| {{flagicon|AUS}} [[ग्लेन मॅकग्रा]]<ref>{{Cite web |date=29 April 2007 |title=McGrath bows out winning Player of the Tournament award |url=https://www.espncricinfo.com/story/mcgrath-bows-out-winning-player-of-the-tournament-award-292785 |access-date=19 November 2023 |website=ESPNcricinfo}}</ref>|| {{flagicon|AUS}} [[मॅथ्यू हेडन]] (६५९) || {{flagicon|AUS}} [[ग्लेन मॅकग्रा]] (२६)
|-
|[[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]] || {{flagicon|IND}} [[महेंद्रसिंग धोनी]] || {{flagicon|IND}} [[महेंद्रसिंग धोनी]]<ref name="hindustantimes.com">{{Cite web |date=11 November 2011 |title=Yuvraj Player of the Tournament; Dhoni Man of the Match of WC final |url=https://www.hindustantimes.com/cricket/yuvraj-player-of-the-tournament-dhoni-man-of-the-match-of-wc-final/story-8ll0UfgXUaIUtVeIrJMOIM.html |access-date=19 November 2023 |website=Hindustan Times}}</ref>|| {{flagicon|IND}} [[युवराज सिंग]]<ref name="hindustantimes.com"/>|| {{flagicon|SL}} [[तिलकरत्ने दिलशान]] (५००) || {{flagicon|PAK}} [[शाहिद आफ्रिदी]] / <br/> {{flagicon|IND}} [[झहीर खान]] (२१)
|-
|[[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]] || {{flagicon|AUS}} [[मायकेल क्लार्क (क्रिकेटर)|मायकेल क्लार्क]] ||{{flagicon|AUS}} [[जेम्स फॉकनर]]<ref>{{Cite web |date=29 March 2015 |title=James Faulkner Emerges From the Shadows of Two Mitchells in World Cup Final |url=https://sports.ndtv.com/icc-cricket-world-cup-2015/james-faulkner-emerges-from-the-shadows-of-two-mitchells-in-world-cup-final-1502822 |access-date=19 November 2023 |website=NDTV }}{{मृत दुवा|date=July 2025 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref>||{{flagicon|AUS}} [[मिचेल स्टार्क]]<ref>{{Cite web |date=29 March 2015 |title=Mitchell Starc named as player of ICC World Cup 2015 |url=https://www.indiatoday.in/sports/world-cup-2015/story/mitchell-starc-world-cup-2015-australia-new-zealand-246307-2015-03-29 |access-date=19 November 2023 |website=India Today}}</ref>||{{flagicon|NZ}} [[मार्टिन गप्टिल]] (५४७) || {{flagicon|AUS}} [[मिचेल स्टार्क]] / <br/>{{flagicon|NZ}} [[ट्रेंट बोल्ट]] (२२)
|-
|[[२०१९ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९]] || {{flagicon|ENG}} [[इऑन मॉर्गन]] ||{{flagicon|ENG}} [[बेन स्टोक्स]]<ref name=potm19>{{Cite web |date=15 July 2019 |title=World Cup 2019 Awards Winners: Man of the Tournament and Man of the Match |url=https://indianexpress.com/article/sports/cricket-world-cup/cricket-world-cup-2019-awards-winners-list-man-of-the-tournament-and-man-of-the-match-5829154/ |access-date=19 November 2023 |website=Indian Express}}</ref>|| {{flagicon|NZ}} [[केन विल्यमसन]]<ref name=potm19/>|| {{flagicon|IND}} [[रोहित शर्मा]] (६४८) || {{flagicon|AUS}} [[मिचेल स्टार्क]] (२७)
|-
|[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]] || {{flagicon|AUS}} [[पॅट कमिन्स]] || {{flagicon|AUS}} [[ट्रॅव्हिस हेड]]<ref>{{Cite web |date=19 November 2023 |title=Travis Head delivers World Cup final masterclass in POTM display |url=https://www.cricketworldcup.com/news/3789833 |access-date=19 November 2023 |website=cricketworldcup.com }}{{मृत दुवा|date=September 2025 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref>|| {{flagicon|IND}} [[विराट कोहली]]<ref>{{Cite web |date=19 November 2023 |title=India star named Player of the Tournament at ICC Men's Cricket World Cup |url=https://www.icc-cricket.com/news/3789837 |access-date=19 November 2023 |website=ICC}}</ref>||{{flagicon|IND}} [[विराट कोहली]] (७६५) || {{flagicon|IND}} [[मोहम्मद शमी]] (२४)
|-
|}
==हे देखील पहा==
*[[आयसीसी अंडर-१९ क्रिकेट विश्वचषक]]
*[[आयसीसी टी-२० विश्वचषक]]
*[[आयसीसी चॅम्पियन्स ट्रॉफी]]
*[[आयसीसी वर्ल्ड टेस्ट चॅम्पियनशिप]]
*[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक]]
*[[महिला क्रिकेट विश्वचषक]]
*[[आशिया कप]]
*[[विश्व चषक]]
*[[विश्वचषकांची यादी]]
==संदर्भ==
{{संदर्भयादी}}
===स्रोत===
* {{cite book
| last=Browning
| first=Mark
| title=A complete history of World Cup Cricket
| url=https://archive.org/details/completehistoryo0000brow
| publisher=[[Simon & Schuster]]
| year=1999
| isbn=0-7318-0833-9 }}
== बाह्य दुवे ==
*{{official website|https://www.cricketworldcup.com/}} आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक
*{{official website|https://www.icc-cricket.com/}} आयसीसी
{{Navboxes|list=
{{क्रिकेट विश्वचषक माहिती}}
{{आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक विजेते}}
{{आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक विजेता कर्णधार}}
{{आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक फायनलमधील सामनावीर}}
{{आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक स्पर्धेतील सर्वोत्तम खेळाडू}}
{{आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट}}
{{मुख्य विश्वचषक}}
{{मुख्य जागतिक स्पर्धा}}
}}
{{Authority control}}
[[वर्ग:क्रिकेट|विश्वचषक]]
[[वर्ग:क्रिकेट विश्वचषक]]
[[वर्ग:एकदिवसीय क्रिकेट]]
[[वर्ग:आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संघटन]]
[[वर्ग:विश्वचषक]]
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2709852
2709851
2026-09-16T03:43:58Z
KiranBOT II
140753
शुद्धलेखन — ([[सदस्य:KiranBOT II/typos#नियम_८.१|शुद्धलेखनाचा नियम ८.१]]); शुद्धलेखन — शहराचे अचूक नाव ([[सदस्य:KiranBOT II/typos#शहराचे अचूक नाव|अधिक माहिती]])
2709852
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox cricket tournament main
| name = आयसीसी पुरुष क्रिकेट विश्वचषक
| image =
| image_size = 200px
| administrator = [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद]]
| cricket format = [[एक दिवसीय आंतरराष्ट्रीय]]
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}}{{Season sidebar
| image =
| caption = आयसीसी पुरुष क्रिकेट विश्वचषक ट्रॉफी
| title = आवृत्त्या
| list =
* [[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, १९८३|१९८३]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]]
* [[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]]
* ''२०२७''
* ''२०३१''
}}
{{आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्पर्धा साइडबार}}
'''क्रिकेट विश्वचषक''', अधिकृतपणे '''आयसीसी पुरुष क्रिकेट विश्वचषक''' म्हणून ओळखला जातो,<ref>{{cite web |title=ICC Men's Cricket World Cup 2019 shatters audience records|url=https://www.icc-cricket.com/media-releases/1277987 |publisher=[[International Cricket Council|ICC]] |access-date=12 April 2021 }}</ref> ही एकदिवसीय आंतरराष्ट्रीय (वनडे) क्रिकेटची आंतरराष्ट्रीय चॅम्पियनशिप आहे. आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आयसीसी) या खेळाच्या प्रशासकीय मंडळाद्वारे हा कार्यक्रम दर चार वर्षांनी आयोजित केला जातो, ज्यामध्ये प्राथमिक पात्रता फेरी अंतिम स्पर्धेपर्यंत जाते. ही स्पर्धा जगातील सर्वाधिक पाहिल्या गेलेल्या क्रीडा स्पर्धांपैकी एक आहे आणि आयसीसी द्वारे "आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कॅलेंडरचा प्रमुख कार्यक्रम" म्हणून गणली जाते.<ref>[http://www.cricketworldcup.com/about ICC Cricket World Cup: About]
{{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130601200603/http://www.cricketworldcup.com/about |date=1 June 2013 }} – International Cricket Council. Retrieved 30 June 2013.</ref> हे क्रिकेट खेळाचे सर्वोच्च चॅम्पियनशिप मानले जाते.
पहिला विश्वचषक जून १९७५ मध्ये इंग्लंडमध्ये आयोजित करण्यात आला होता, पहिला एकदिवसीय क्रिकेट सामना फक्त चार वर्षांपूर्वी खेळला गेला होता. तथापि, पहिल्या पुरुषांच्या स्पर्धेच्या दोन वर्षे आधी एक वेगळा महिला क्रिकेट विश्वचषक आयोजित करण्यात आला होता आणि ऑस्ट्रेलिया, इंग्लंड आणि दक्षिण आफ्रिका यांच्यात कसोटी सामन्यांची त्रिकोणी स्पर्धा खेळली जात असताना १९१२ च्या सुरुवातीला अनेक आंतरराष्ट्रीय संघांचा समावेश असलेली स्पर्धा आयोजित करण्यात आली होती. पहिले तीन विश्वचषक इंग्लंडमध्ये झाले. १९८७ च्या स्पर्धेपासून, एका अनौपचारिक रोटेशन प्रणाली अंतर्गत देशांदरम्यान होस्टिंग सामायिक केले गेले आहे, चौदा आयसीसी सदस्यांनी स्पर्धेत किमान एक सामना आयोजित केला आहे.
स्पर्धेच्या टप्प्यासाठी कोणते संघ पात्र ठरतात हे निर्धारित करण्यासाठी सध्याच्या फॉरमॅटमध्ये पात्रता टप्प्याचा समावेश आहे, जो मागील तीन वर्षांमध्ये होतो. स्पर्धेच्या टप्प्यात, आपोआप पात्र ठरलेल्या यजमान राष्ट्रासह १० संघ, यजमान राष्ट्रामधील ठिकाणांवर जवळपास एक महिन्याच्या कालावधीत विजेतेपदासाठी स्पर्धा करतात. २०२७ च्या आवृत्तीमध्ये, विस्तारित १४-संघ अंतिम स्पर्धा सामावून घेण्यासाठी स्वरूप बदलले जाईल.<ref>{{cite web|url=https://www.espncricinfo.com/story/_/id/27384084/how-teams-secure-qualification-rank-no-1-32 |title=The road to World Cup 2023: how teams can secure qualification, from rank No. 1 to 32 |work=ESPN Cricinfo |access-date=14 August 2019}}</ref>
एकूण वीस संघांनी स्पर्धेच्या १३ आवृत्त्यांमध्ये भाग घेतला आहे, ज्यामध्ये अलीकडील २०२३ स्पर्धेत दहा संघ सहभागी झाले आहेत. ऑस्ट्रेलियाने सहा वेळा, भारत आणि वेस्ट इंडीजने प्रत्येकी दोनदा, तर पाकिस्तान, श्रीलंका आणि इंग्लंडने प्रत्येकी एकदा ही स्पर्धा जिंकली आहे. पूर्ण-सदस्य नसलेल्या संघाची सर्वोत्तम कामगिरी केन्याने २००३ स्पर्धेच्या उपांत्य फेरीत प्रवेश केला.
२०२३ साली भारतात झालेल्या विश्वचषक स्पर्धेत ऑस्ट्रेलिया हा सध्याचा चॅम्पियन आहे. त्यानंतरचा २०२७ विश्वचषक दक्षिण आफ्रिका, झिम्बाब्वे आणि नामिबिया येथे संयुक्तपणे होणार आहे.
==इतिहास==
{| class="wikitable floatright" style="text-align:center; font-size:85%"
|+ क्रिकेट विश्वचषक
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! वर्ष !!style="width:200px"| चॅम्पियन्स
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| [[१९७५ क्रिकेट विश्वचषक|१९७५]]
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| [[१९७९ क्रिकेट विश्वचषक|१९७९]]
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| [[१९८३ क्रिकेट विश्वचषक|१९८३]]
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| [[१९८७ क्रिकेट विश्वचषक|१९८७]]
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| [[१९९२ क्रिकेट विश्वचषक|१९९२]]
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| [[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]
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| [[१९९९ क्रिकेट विश्वचषक|१९९९]]
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| [[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]]
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| [[२००७ क्रिकेट विश्वचषक|२००७]]
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| [[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]]
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| [[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]]
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| [[२०१९ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९]]
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|[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]]
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{{main|क्रिकेट विश्वचषकाचा इतिहास}}
२४ आणि २५ सप्टेंबर १८४४ रोजी कॅनडा आणि युनायटेड स्टेट्स यांच्यात पहिला आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सामना खेळला गेला.<ref>{{cite news |url=http://www.espncricinfo.com/magazine/content/story/141170.html |title=The oldest international contest of them all |author=Martin Williamson |publisher=ESPN |access-date=5 July 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130605032043/http://www.espncricinfo.com/magazine/content/story/141170.html |archive-date=5 June 2013 |url-status=live}}</ref> तथापि, पहिला श्रेय दिलेला कसोटी सामना 1877 मध्ये ऑस्ट्रेलिया आणि इंग्लंड यांच्यात खेळला गेला आणि त्यानंतरच्या वर्षांत दोन्ही संघ नियमितपणे अशेज साठी स्पर्धा करत आहे. दक्षिण आफ्रिकेला १८८९ मध्ये कसोटी दर्जा देण्यात आला.<ref>{{cite web|url=http://content-uk.cricinfo.com/australia/content/match/62396.html|publisher=ESPNcricinfo|date=15 March 1877|title=1st Test Scorecard|access-date=28 January 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20090212191405/http://content-uk.cricinfo.com/australia/content/match/62396.html|archive-date=12 February 2009|url-status=live}}</ref> प्रतिनिधी क्रिकेट संघ एकमेकांच्या दौऱ्यासाठी निवडले गेले, परिणामी द्विपक्षीय स्पर्धा झाली. १९०० पॅरिस गेम्समध्ये ऑलिम्पिक खेळ म्हणून क्रिकेटचाही समावेश करण्यात आला होता, जिथे ग्रेट ब्रिटनने फ्रान्सला हरवून सुवर्णपदक जिंकले होते.<ref>{{cite web|url=http://www.espncricinfo.com/columns/engine/match/320838.html|publisher=ESPNcricinfo|date=19 August 1900|title=Olympic Games, 1900, Final|access-date=9 September 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20141226014434/http://www.espncricinfo.com/columns/engine/match/320838.html|archive-date=26 December 2014|url-status=live}}</ref> उन्हाळी ऑलिंपिकमध्ये क्रिकेटचा हा एकमेव देखावा होता.<ref>{{cite web|last=Purohit|first=Abhishek|title=Will Cricket Bat Again at the Olympics? Know Process for Inclusion at LA28|publisher=International Olympic Committee|date=10 August 2021|url=https://olympics.com/en/featured-news/cricket-olympics-los-angeles-2028-games-icc|access-date=5 December 2021}}</ref>
आंतरराष्ट्रीय स्तरावरील पहिली बहुपक्षीय स्पर्धा ही १९१२ त्रिकोणी स्पर्धा होती, ही कसोटी क्रिकेट स्पर्धा इंग्लंडमध्ये त्यावेळच्या तीन कसोटी खेळणाऱ्या राष्ट्रांमध्ये खेळली गेली: इंग्लंड, ऑस्ट्रेलिया आणि दक्षिण आफ्रिका. इव्हेंट यशस्वी झाला नाही: उन्हाळा अपवादात्मकपणे ओला होता, ओलसर खेळपट्ट्यांवर खेळणे कठीण होते आणि "क्रिकेटच्या वाढी" मुळे प्रेक्षकांची उपस्थिती कमी होती.<ref>{{cite web |url=http://content-aus.cricinfo.com/australia/content/story/207248.html|publisher=ESPNcricinfo|title=The original damp squib|date=23 April 2005|access-date=29 August 2006 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071016161938/http://content-aus.cricinfo.com/australia/content/story/207248.html |archive-date=16 October 2007}}</ref> तेव्हापासून, आंतरराष्ट्रीय कसोटी क्रिकेट सामान्यत: द्विपक्षीय मालिका म्हणून आयोजित केले गेले: १९९९ मध्ये त्रिकोणी आशियाई कसोटी चॅम्पियनशिप होईपर्यंत बहुपक्षीय कसोटी स्पर्धा पुन्हा आयोजित करण्यात आली नाही.<ref>{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/magazine/content/story/483619.html|publisher=ESPNcricinfo|title=The run-out that sparked a riot|date=30 October 2010|access-date=18 February 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141022194822/http://www.espncricinfo.com/magazine/content/story/483619.html |archive-date=22 October 2014}}</ref>
१९२८ मध्ये वेस्ट इंडीज,<ref>{{Cite web |title=England vs West Indies Scorecard 1928 {{!}} Cricket Scorecard |url=https://www.espncricinfo.com/series/west-indies-tour-of-england-1928-61871/england-vs-west-indies-1st-test-62559/full-scorecard |access-date=2023-07-05 |website=ESPNcricinfo |language=en}}</ref> १९३० मध्ये न्यू झीलंड,<ref>{{Cite web |title=New Zealand vs England Scorecard 1929/30 {{!}} Cricket Scorecard |url=https://www.espncricinfo.com/series/england-tour-of-new-zealand-1929-30-61781/new-zealand-vs-england-1st-test-62572/full-scorecard |access-date=2023-07-05 |website=ESPNcricinfo |language=en}}</ref> १९३२ मध्ये भारत<ref>{{Cite web |title=England vs India Scorecard 1932 {{!}} Cricket Scorecard |url=https://www.espncricinfo.com/series/india-tour-of-england-1932-62281/england-vs-india-only-test-62605/full-scorecard |access-date=2023-07-05 |website=ESPNcricinfo |language=en}}</ref> आणि १९५२ मध्ये पाकिस्तान<ref>{{Cite web |title=Pakistan vs India Scorecard 1952/53 {{!}} Cricket Scorecard |url=https://www.espncricinfo.com/series/pakistan-tour-of-india-1952-53-61529/india-vs-pakistan-4th-test-62744/full-scorecard |access-date=2023-07-05 |website=ESPNcricinfo |language=en}}</ref> यांच्या समावेशासह कसोटी क्रिकेट खेळणाऱ्या राष्ट्रांची संख्या हळूहळू वाढत गेली. तथापि, आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तीन, चार किंवा पाच दिवसांचे द्विपक्षीय कसोटी सामने म्हणून खेळले जात राहिले.
१९६० च्या दशकाच्या सुरुवातीस, इंग्लिश काउंटी क्रिकेट संघांनी क्रिकेटची एक लहान आवृत्ती खेळण्यास सुरुवात केली जी फक्त एक दिवस टिकली. १९६२ मध्ये मिडलँड्स नॉक-आउट कप म्हणून ओळखल्या जाणाऱ्या चार-सांघिक नॉकआऊट स्पर्धेने सुरुवात करून<ref>{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/magazine/content/story/510124.html|publisher=ESPNcricinfo|title=The low-key birth of one-day cricket|date=9 April 2011|access-date=15 July 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130919032251/http://www.espncricinfo.com/magazine/content/story/510124.html |archive-date=19 September 2013}}</ref> आणि १९६३ मधील उद्घाटन जिलेट चषक सुरू ठेवत, इंग्लंडमध्ये एकदिवसीय क्रिकेटची लोकप्रियता वाढली. १९६९ मध्ये राष्ट्रीय संडे लीगची स्थापना झाली. पहिला एक-दिवसीय आंतरराष्ट्रीय सामना १९७१ मध्ये मेलबर्न येथे इंग्लंड आणि ऑस्ट्रेलिया यांच्यातील पावसामुळे रद्द झालेल्या कसोटी सामन्याच्या पाचव्या दिवशी खेळला गेला, उपलब्ध वेळ भरून काढण्यासाठी आणि निराश झालेल्या प्रेक्षकांची भरपाई म्हणून. हा चाळीस षटकांचा खेळ होता ज्यात प्रति षटक आठ चेंडू होते.<ref>{{cite web |url=http://newicc.cricket.org/icc/odi/what_is_one-day_cricket.html |publisher=newicc.cricket.org |title=What is One-Day International cricket? |access-date=10 September 2006 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20061119054342/http://newicc.cricket.org/icc/odi/what_is_one-day_cricket.html |archive-date=19 November 2006 |आर्काईव्ह दिनांक=2006-11-19 |आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20061119054342/http://newicc.cricket.org/icc/odi/what_is_one-day_cricket.html }}</ref> इंग्लंड आणि जगाच्या इतर भागांतील देशांतर्गत एकदिवसीय स्पर्धांचे यश आणि लोकप्रियता, तसेच सुरुवातीच्या एकदिवसीय आंतरराष्ट्रीय स्पर्धांमुळे आयसीसीने क्रिकेटचे आयोजन करण्याचा विचार करण्यास प्रवृत्त केले. <ref name="WCHistory">{{cite web|url=http://content-aus.cricinfo.com/wc2007/content/story/264535.html|publisher=ESPNcricinfo|title=The World Cup – A brief history|access-date=7 December 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20080328095116/http://content-aus.cricinfo.com/wc2007/content/story/264535.html|archive-date=28 March 2008|url-status=live}}</ref>
===प्रुडेंशियल विश्वचषक (१९७५–१९८३)===
{{main|१९७५ क्रिकेट विश्वचषक|१९७९ क्रिकेट विश्वचषक|१९८३ क्रिकेट विश्वचषक}}
[[File:Prudential Cup.jpg|thumb|upright=0.9|प्रुडेंशियल कप ट्रॉफी]]
उद्घाटन क्रिकेट विश्वचषक १९७५ मध्ये इंग्लंडने आयोजित केला होता, त्या वेळी एवढा मोठा कार्यक्रम आयोजित करण्यासाठी संसाधने पुढे टाकण्यास सक्षम असलेले एकमेव राष्ट्र. पहिल्या तीन स्पर्धा इंग्लंडमध्ये आयोजित करण्यात आल्या होत्या आणि प्रायोजक प्रुडेंशियल पीएलसी नंतर अधिकृतपणे प्रुडेंशियल कप म्हणून ओळखल्या जातात. सामन्यांमध्ये प्रति संघ ६० (६ चेंडू १ षटक) षटके होती, पारंपारिक स्वरूपात दिवसा खेळले गेले, खेळाडूंनी क्रिकेटचे पांढरे कपडे घातले आणि लाल क्रिकेट चेंडू वापरला.<ref>Browning (1999), pp. 5–9</ref>
पहिल्या स्पर्धेत आठ संघ सहभागी झाले होते: ऑस्ट्रेलिया, इंग्लंड, भारत, न्यू झीलंड, पाकिस्तान आणि वेस्ट इंडीज (त्यावेळी सहा कसोटी राष्ट्रे), श्रीलंका आणि पूर्व आफ्रिकेतील संमिश्र संघ.<ref name=cricket>Browning (1999), pp. 26–31</ref> एक उल्लेखनीय वगळण्यात आलेला संघ दक्षिण आफ्रिका होता, ज्यांना वर्णभेदामुळे आंतरराष्ट्रीय क्रिकेटमधून बंदी घालण्यात आली होती. ही स्पर्धा वेस्ट इंडीजने जिंकली होती, ज्याने लॉर्ड्सवरील अंतिम सामन्यात ऑस्ट्रेलियाचा १७ धावांनी पराभव केला होता.<ref name=cricket/> १९७५ च्या विश्वचषक फायनलमध्ये एकदिवसीय सामन्यात हिट विकेट घेणारा वेस्ट इंडीजचा रॉय फ्रेडरिक्स हा पहिला फलंदाज होता.<ref>{{Cite web|url=https://www.cricbuzz.com/cricket-news/69522/icc-cricket-world-cups-fascinating-facts-part-1|title=50 fascinating facts about World Cups – Part 1|website=Cricbuzz|date=22 January 2015 |language=en|access-date=21 February 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190221174220/https://www.cricbuzz.com/cricket-news/69522/icc-cricket-world-cups-fascinating-facts-part-1|archive-date=21 February 2019|url-status=live}}</ref>
१९७९ च्या विश्वचषकामध्ये श्रीलंका आणि कॅनडा पात्रता मिळवून विश्वचषकासाठी कसोटी न खेळणारे संघ निवडण्यासाठी आयसीसी ट्रॉफी स्पर्धा सुरू करण्यात आली.<ref name="ICCTROPHY">{{cite web|url=http://www.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/ICCT2005/ARTICLES/history.html|publisher=ESPNcricinfo|title=ICC Trophy – A brief history|access-date=29 August 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20061126054556/http://www.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/ICCT2005/ARTICLES/history.html|archive-date=26 November 2006|url-status=live}}</ref> <ref name=history>Browning (1999), pp. 32–35</ref> वेस्ट इंडीजने फायनलमध्ये यजमान इंग्लंडचा ९२ धावांनी पराभव करत सलग दुसरी विश्वचषक स्पर्धा जिंकली. विश्वचषकानंतर झालेल्या बैठकीत, आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषदेने ही स्पर्धा चतुर्मासिक स्पर्धा बनविण्यास सहमती दर्शविली.<ref name=history/>
१९८३ च्या स्पर्धेचे आयोजन इंग्लंडने सलग तिसऱ्यांदा केले होते. या टप्प्यापर्यंत, श्रीलंका कसोटी खेळणारा राष्ट्र बनला होता आणि झिम्बाब्वे आयसीसी ट्रॉफीद्वारे पात्र ठरला होता. स्टंपपासून दूर असलेल्या ३० यार्ड (२७ मी) क्षेत्ररक्षण मंडळाची ओळख करून देण्यात आली. त्यामध्ये नेहमी चार फील्ड्समन असणे आवश्यक होते.<ref>Browning (1999), pp. 61–62</ref> बाद फेरीत जाण्यापूर्वी संघ दोनदा एकमेकांसमोर आले. फायनलमध्ये वेस्ट इंडीजचा ४३ धावांनी पराभव करून भारताने चॅम्पियनचा मुकुट पटकावला.<ref name="WCHistory"/><ref>Browning (1999), pp. 105–110</ref>
=== वेगवेगळे विजेते (१९८७–१९९६) ===
{{main|१९८७ क्रिकेट विश्वचषक|१९९२ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६ क्रिकेट विश्वचषक}}
भारत आणि पाकिस्तानने १९८७ च्या स्पर्धेचे संयुक्तपणे यजमानपद भूषवले होते, ही स्पर्धा प्रथमच इंग्लंडबाहेर आयोजित करण्यात आली होती. इंग्लंडच्या उन्हाळ्याच्या तुलनेत भारतीय उपखंडात दिवसाच्या प्रकाशाचे तास कमी असल्यामुळे हे खेळ सध्याच्या मानकानुसार प्रति डाव ६० ते ५० षटके कमी करण्यात आले. ऑस्ट्रेलियाने अंतिम फेरीत इंग्लंडचा ७ धावांनी पराभव करून चॅम्पियनशिप जिंकली, इंग्लंड आणि न्यू झीलंड यांच्यातील २०१९ च्या विश्वचषकाच्या अंतिम फेरीतील सर्वात जवळच्या फरकाने.
ऑस्ट्रेलिया आणि न्यू झीलंडमध्ये झालेल्या १९९२ विश्वचषकाने खेळात अनेक बदल केले, जसे की रंगीत कपडे, पांढरे चेंडू, दिवस/रात्रीचे सामने आणि क्षेत्ररक्षण प्रतिबंध नियमांमध्ये बदल. वर्णद्वेषाच्या राजवटीच्या पतनानंतर आणि आंतरराष्ट्रीय क्रीडा बहिष्काराच्या समाप्तीनंतर दक्षिण आफ्रिकेच्या क्रिकेट संघाने प्रथमच या स्पर्धेत भाग घेतला. पाकिस्तानने स्पर्धेतील निराशाजनक सुरुवात करून अखेरीस अंतिम फेरीत इंग्लंडचा २२ धावांनी पराभव केला आणि विजेता म्हणून उदयास आला.
१९९६ चे चॅम्पियनशिप भारतीय उपखंडात दुसऱ्यांदा आयोजित करण्यात आले होते, त्यात काही गट टप्प्यातील सामन्यांसाठी श्रीलंकेचा यजमान म्हणून समावेश करण्यात आला होता. उपांत्य फेरीत, २५२ धावांचा पाठलाग करताना यजमानांनी १२० धावा करताना आठ विकेट गमावल्यानंतर, ईडन गार्डन्सवर भारतावर दणदणीत विजयाच्या दिशेने वाटचाल करणाऱ्या श्रीलंकेला डीफॉल्टनुसार विजय मिळाला. लाहोर येथे झालेल्या अंतिम सामन्यात श्रीलंकेने ऑस्ट्रेलियाचा सात गडी राखून पराभव करून पहिले विजेतेपद पटकावले.
===ऑस्ट्रेलियाची हॅट्ट्रिक (१९९९–२००७)===
{{main|१९९९ क्रिकेट विश्वचषक|२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००७ क्रिकेट विश्वचषक}}
१९९९ मध्ये, या स्पर्धेचे आयोजन इंग्लंडने केले होते, काही सामने स्कॉटलंड, आयर्लंड, वेल्स आणि नेदरलँडमध्येही आयोजित केले गेले होते.<ref>Browning (1999), p. 274</ref><ref>{{cite book |url=https://books.google.com/books?id=iZq8BAAAQBAJ&q=1999+cricket+world+cup+host&pg=PA7 |title=Cricket World Cup: A Summary of the Tournaments Since 1975 |author=French Toast |publisher=Smashwords |year=2014 |isbn=9781311429230 |format=e-book |access-date=11 December 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190626181716/https://books.google.com/books?id=iZq8BAAAQBAJ&pg=PA7&dq=1999+cricket+world+cup+host&hl=en&sa=X&ei=d2qJVJyDMYuzUembgYgJ&ved=0CEYQ6AEwBA#v=onepage&q=1999%20cricket%20world%20cup%20host&f=false |archive-date=26 June 2019 |url-status=live }}</ref> विश्वचषक स्पर्धेत बारा संघ सहभागी झाले होते. दक्षिण आफ्रिकेविरुद्धच्या सुपर सिक्स सामन्यात सामन्याच्या अंतिम षटकात ऑस्ट्रेलियाने आपले लक्ष्य गाठल्यानंतर उपांत्य फेरीसाठी पात्र ठरले.<ref>Browning (1999), pp. 229–231</ref> त्यानंतर त्यांनी दक्षिण आफ्रिकेविरुद्धच्या उपांत्य फेरीतील सामना बरोबरीत सोडवून अंतिम फेरीत प्रवेश केला जेथे दक्षिण आफ्रिकेचे फलंदाज लान्स क्लुसनर आणि ॲलन डोनाल्ड यांच्यातील मिश्रणाने डोनाल्डला त्याची बॅट सोडली आणि मध्य-पिचमध्ये धावबाद होण्यासाठी अडकले. अंतिम सामन्यात ऑस्ट्रेलियाने पाकिस्तानला १३२ धावांवर संपुष्टात आणले आणि त्यानंतर २० षटकांत आणि आठ गडी राखून लक्ष्य गाठले.<ref>Browning (1999), pp. 232–238</ref>
[[File:Australian World Cup treble.jpg|thumb|upright=0.9|१०,००० हून अधिक चाहत्यांच्या जमावाने पहिल्या विश्वचषकाची हॅट्ट्रिक पूर्ण केल्याबद्दल ऑस्ट्रेलियन संघाचे स्वागत केले – मार्टिन प्लेस, सिडनी.]]
दक्षिण आफ्रिका, झिम्बाब्वे आणि केन्या यांनी २००३ च्या विश्वचषकाचे यजमानपद भूषवले होते. स्पर्धेत सहभागी होणाऱ्या संघांची संख्या बारा वरून चौदा झाली. श्रीलंका आणि झिम्बाब्वे यांच्यावर केन्याचे विजय – आणि न्यू झीलंड संघाने सुरक्षेच्या कारणास्तव केन्यामध्ये खेळण्यास नकार दिला – यामुळे केन्याला उपांत्य फेरीत पोहोचता आले, हा असोसिएट संघाचा सर्वोत्तम परिणाम आहे.<ref>{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/wctimeline/content/current/story/795703.html|publisher=ESPNcricinfo|title=Washouts, walkovers, and black armband protests|access-date=30 August 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150830100350/http://www.espncricinfo.com/wctimeline/content/current/story/795703.html |archive-date=30 August 2015}}</ref> अंतिम सामन्यात, ऑस्ट्रेलियाने दोन गडी गमावून ३५९ धावा केल्या, जे फायनलमधील आतापर्यंतचे सर्वात मोठे धावसंख्या आहे आणि भारताचा १२५ धावांनी पराभव केला.<ref name="AUS2003">{{cite news |url=http://news.bbc.co.uk/sport3/cwc2003/hi/newsid_2870000/newsid_2875100/2875135.stm |publisher=BBC Sport |title=Ruthless Aussies lift World Cup |date=23 March 2003 |access-date=29 January 2007 |location=London |archive-url=https://web.archive.org/web/20150328120655/http://news.bbc.co.uk/sport3/cwc2003/hi/newsid_2870000/newsid_2875100/2875135.stm |archive-date=28 March 2015 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |title=Full tournament schedule |url=http://news.bbc.co.uk/sport3/cwc2003/hi/fixturesresults/default.stm |publisher=BBC Sport |date=23 March 2003 |access-date=22 February 2007 |location=London |archive-url=https://web.archive.org/web/20070218103234/http://news.bbc.co.uk/sport3/cwc2003/hi/fixturesresults/default.stm |archive-date=18 February 2007 |url-status=live }}</ref>
२००७ मध्ये, स्पर्धेचे आयोजन वेस्ट इंडीजने केले होते आणि सोळा संघांपर्यंत विस्तारित केले होते.<ref>{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/wchistory/content/story/314997.html|publisher=ESPNcricinfo|title=Australia triumph in a tournament to forget|access-date=15 July 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120206124910/http://www.espncricinfo.com/wchistory/content/story/314997.html |archive-date=6 February 2012}}</ref> ग्रुप स्टेजमध्ये वर्ल्ड कपमध्ये पदार्पण करणाऱ्या आयर्लंडकडून पाकिस्तानचा पराभव झाल्यानंतर, पाकिस्तानी प्रशिक्षक बॉब वुलमर त्यांच्या हॉटेलच्या खोलीत मृतावस्थेत आढळले.<ref>{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/wc2007/content/story/285953.html|publisher=ESPNcricinfo|title=Bob Woolmer's death stuns cricket world|access-date=4 December 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121025092541/http://www.espncricinfo.com/wc2007/content/story/285953.html |archive-date=25 October 2012}}</ref> जमैका पोलिसांनी सुरुवातीला वूल्मरच्या मृत्यूचा खून तपास सुरू केला होता पण नंतर त्याचा मृत्यू हृदयविकाराने झाल्याची पुष्टी केली.<ref>{{cite web|url=http://content-usa.cricinfo.com/woolmer/content/story/286045.html|publisher=Cricinfo|title=Bob Woolmer investigation round-up|access-date=6 May 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20070516215421/http://content-usa.cricinfo.com/woolmer/content/story/286045.html|archive-date=16 May 2007|url-status=live}}</ref> ऑस्ट्रेलियाने फायनलमध्ये श्रीलंकेचा डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धतीने ५३ धावांनी पराभव केला, आणि विश्वचषकातील त्यांची अपराजित धाव २९ सामन्यांपर्यंत वाढवली आणि विजय मिळवला.<ref>{{cite web|url=http://content-usa.cricinfo.com/ci/content/story/292773.html|publisher=Cricinfo|title=Australia v Sri Lanka, World Cup final, Barbados|date=28 April 2007|access-date=6 May 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20080324035211/http://content-usa.cricinfo.com/ci/content/story/292773.html|archive-date=24 March 2008|url-status=live}}</ref>
=== यजमानांचा विजय (२०११-२०१९) ===
{{main|२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९ क्रिकेट विश्वचषक}}
२०११ च्या विश्वचषकाचे यजमानपद भारत, श्रीलंका आणि बांगलादेश यांनी मिळून दिले होते. २००९ मध्ये श्रीलंकन क्रिकेट संघावर झालेल्या दहशतवादी हल्ल्यानंतर पाकिस्तानचे यजमान हक्क काढून घेण्यात आले होते, मूळतः पाकिस्तानसाठी नियोजित खेळांचे इतर यजमान देशांना पुनर्वितरण करण्यात आले होते.<ref>{{cite news |url=http://news.bbc.co.uk/sport1/hi/cricket/other_international/pakistan/8004684.stm |title=No World Cup matches in Pakistan |publisher=BBC Sport |access-date=15 July 2014 |date=18 April 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090418013231/http://news.bbc.co.uk/sport1/hi/cricket/other_international/pakistan/8004684.stm |archive-date=18 April 2009 |url-status=live}}</ref> विश्वचषकात सहभागी होणाऱ्या संघांची संख्या चौदा करण्यात आली.<ref name="2011WC">{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/ci-icc/content/story/659953.html|publisher=ESPNcricinfo|title=India end a 28-year-long wait|access-date=29 October 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130825010536/http://www.espncricinfo.com/ci-icc/content/story/659953.html |archive-date=25 August 2013}}</ref> ऑस्ट्रेलियाचा २३ मे १९९९ पासून सुरू झालेल्या ३५ विश्वचषक सामन्यांच्या अपराजित मालिकेचा शेवट १९ मार्च २०११ रोजी पाकिस्तानविरुद्धचा अंतिम गट स्टेज सामन्याने केला.<ref>{{cite web|url=http://edition.cnn.com/2011/SPORT/03/19/cricket.australia.pakistan.bangladesh/|title=Pakistan top group after ending Australia's unbeaten World Cup streak|publisher=CNN|date=20 March 2011|access-date=13 February 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150213185518/http://edition.cnn.com/2011/SPORT/03/19/cricket.australia.pakistan.bangladesh/|archive-date=13 February 2015|url-status=live}}</ref> मुंबईतील वानखेडे स्टेडियमवर झालेल्या अंतिम सामन्यात भारताने श्रीलंकेचा ६ गडी राखून पराभव करून त्यांचे दुसरे विश्वचषक जिंकले आणि घरच्या मैदानावर विश्वचषक जिंकणारा भारत पहिला देश बनला.<ref name="2011WC"/> विश्वचषकाच्या फायनलमध्ये दोन आशियाई देश आमनेसामने येण्याची ही पहिलीच वेळ होती.<ref>{{cite web|title=ICC Cricket World Cup|publisher=ESPN|url=https://www.espn.com/extra/cricket/topics/_/page/icc-cricket-world-cup|access-date=2 January 2022}}</ref>
ऑस्ट्रेलिया आणि न्यू झीलंड यांनी संयुक्तपणे २०१५ च्या विश्वचषकाचे यजमानपद भूषवले होते. सहभागींची संख्या चौदा राहिली. स्पर्धेत एकूण तीन विजयांसह आयर्लंड सर्वात यशस्वी सहयोगी राष्ट्र ठरला. न्यू झीलंडने रोमहर्षक पहिल्या उपांत्य फेरीत दक्षिण आफ्रिकेचा पराभव करून त्यांच्या पहिल्या विश्वचषकाच्या अंतिम फेरीत प्रवेश केला. मेलबर्न येथे झालेल्या अंतिम सामन्यात ऑस्ट्रेलियाने न्यू झीलंडचा सात गडी राखून पराभव करत पाचव्यांदा विश्वचषक जिंकला.<ref name="AUS2015">{{cite news |url=https://www.bbc.co.uk/sport/0/cricket/32105654 |title=Cricket World Cup 2015: Australia crush New Zealand in final |publisher=BBC Sport |access-date=29 March 2015 |date=29 March 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150329232637/http://www.bbc.co.uk/sport/0/cricket/32105654 |archive-date=29 March 2015 |url-status=live }}</ref>
[[File:Englandvictorylap.png|thumb|right|इंग्लंडने १४ जुलै २०१९ रोजी त्यांच्या विजयानंतर लॉर्ड्सच्या आसपास आदरांजली वाहिली.]]
२०१९ च्या विश्वचषकाचे आयोजन इंग्लंड आणि वेल्स यांनी केले होते. सहभागींची संख्या १० पर्यंत कमी करण्यात आली. पावसामुळे राखीव दिवशी ढकलण्यात आलेल्या पहिल्या उपांत्य फेरीत न्यू झीलंडने भारताचा पराभव केला.<ref>{{cite news |url=https://timesofindia.indiatimes.com/sports/cricket/icc-world-cup/india-vs-new-zealand-live-score-world-cup-2019-semi-final/articleshow/70139254.cms|title=India vs New Zealand Highlights, World Cup 2019 semi-final: Match defers to reserve day|work=द टाइम्स ऑफ इंडिया|date=9 July 2019|access-date=15 July 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190711180216/https://timesofindia.indiatimes.com/sports/cricket/icc-world-cup/india-vs-new-zealand-live-score-world-cup-2019-semi-final/articleshow/70139254.cms|archive-date=11 July 2019|url-status=live}}</ref> दुसऱ्या उपांत्य फेरीत इंग्लंडने गतविजेत्या ऑस्ट्रेलियाचा पराभव केला. याआधी कोणत्याही अंतिम फेरीतील संघाने विश्वचषक जिंकला नव्हता. फायनलमध्ये, ५० षटकांनंतर स्कोअर २४१ वर टाय झाला आणि सामना सुपर ओव्हरमध्ये गेला, त्यानंतर स्कोअर पुन्हा १५ वर टाय झाला. विश्वचषक इंग्लंडने जिंकला होता, ज्यांच्या चौकारांची संख्या न्यू झीलंडपेक्षा जास्त होती.<ref>{{Cite web |url=https://www.espncricinfo.com/series/8039/report/1144530/england-vs-new-zealand-final-icc-cricket-world-cup-2019/ |title=Epic final tied, Super Over tied,England win World Cup on boundary count |date=14 July 2019 |access-date=15 July 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190715032534/https://www.espncricinfo.com/series/8039/report/1144530/england-vs-new-zealand-final-icc-cricket-world-cup-2019/ |archive-date=15 July 2019 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news|url=https://www.bbc.co.uk/sport/cricket/48985109|title=England win Cricket World Cup: A golden hour ends in a champagne super over|date=14 July 2019|last=Fordyce|first=Tom|publisher=BBC Sport|access-date=15 July 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190714235602/https://www.bbc.co.uk/sport/cricket/48985109|archive-date=14 July 2019|url-status=live}}</ref>
==स्वरूप==
===पात्रता===
{{main|क्रिकेट विश्वचषक पात्रता प्रक्रिया}}
१९७५ मधील पहिल्या विश्वचषकापासून ते २०१९ च्या विश्वचषकापर्यंत, भाग घेणारे बहुसंख्य संघ आपोआप पात्र ठरले. २०१५ विश्वचषकापर्यंत हे मुख्यतः आयसीसी चे पूर्ण सदस्यत्व असल्यामुळे होते आणि २०१९ विश्वचषकासाठी हे मुख्यतः आयसीसी एकदिवसीय चॅम्पियनशिपमधील क्रमवारीत स्थान मिळवून होते.<ref>{{cite news|title=Cricket World Cup 2019 to stay at only 10 teams|publisher=BBC Sport |url=https://www.bbc.com/sport/cricket/33296828|access-date=22 August 2022}}</ref>
१९७९ मधील दुसऱ्या विश्वचषकापासून ते २०१९ च्या विश्वचषकापर्यंत, आपोआप पात्र ठरलेल्या संघांमध्ये पात्रता प्रक्रियेद्वारे विश्वचषकासाठी पात्र ठरलेल्या इतर काही संख्येने सामील झाले. पहिली पात्रता स्पर्धा म्हणजे आयसीसी ट्रॉफी;<ref>{{Cite web|url=https://static.espncricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/ICCT2005/ARTICLES/history.html|title=Cricinfo - 2005 ICC Trophy in Ireland|website=static.espncricinfo.com|accessdate=6 April 2023}}</ref> नंतर प्री-क्वालिफायिंग टूर्नामेंट्ससह प्रक्रिया विस्तारते. २०११ विश्वचषकासाठी, आयसीसी वर्ल्ड क्रिकेट लीगने भूतकाळातील पूर्व-पात्रता प्रक्रियेची जागा घेतली; आणि "आयसीसी ट्रॉफी" चे नाव बदलून "आयसीसी पुरुष क्रिकेट विश्वचषक पात्रता" असे करण्यात आले.<ref>{{cite web |url=http://www.icc-cricket.com/icc/development/wcl/ |publisher=ICC |title=World Cricket League |access-date=28 January 2007 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20070119011351/http://www.icc-cricket.com/icc/development/wcl/ |archive-date=19 January 2007 |आर्काईव्ह दिनांक=2007-01-19 |आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20070119011351/http://www.icc-cricket.com/icc/development/wcl/ }}</ref> वर्ल्ड क्रिकेट लीग ही आयसीसीच्या सहयोगी आणि संलग्न सदस्यांना पात्र होण्यासाठी अधिक संधी देण्यासाठी प्रदान केलेली पात्रता प्रणाली होती. पात्र ठरलेल्या संघांची संख्या वर्षभर वेगवेगळी असते.<ref>{{Cite web|url=https://static1.squarespace.com/static/533e6b7de4b0d84a3bd7c4be/t/5c3a7f7288251b8b3c637260/1547337591744/Cricket.pdf|title=International Cricket Council February 2019|website=static1.squarespace.com}}</ref>
२०२३ च्या विश्वचषकापासून, फक्त यजमान देश आपोआप पात्र होतील. सर्व देश पात्रता निश्चित करण्यासाठी लीगच्या मालिकेत सहभागी होतील, ज्यामध्ये स्वयंचलित प्रमोशन आणि रेलेगेशन एका विश्वचषकाच्या चक्रातून दुसऱ्या टप्प्यापर्यंत विभागणी केली जाईल.<ref>{{cite web|url=https://www.espncricinfo.com/story/_/id/27384084/how-teams-secure-qualification-rank-no-1-32 |title=The road to World Cup 2023: how teams can secure qualification, from rank No. 1 to 32 |work=ESPN Cricinfo |access-date=22 August 2022}}</ref>
===स्पर्धा===
[[File:Autographed bats of ODI World Cup winning teams at Blades of Glory Cricket Museum, Pune.jpg|thumb|भारताच्या [[पुणे]] येथील ब्लेड्स ऑफ ग्लोरी क्रिकेट संग्रहालयात ठेवलेल्या, स्पर्धेच्या प्रत्येक आवृत्तीतील विजेत्या संघांच्या स्वाक्षऱ्या.]]
क्रिकेट विश्वचषकाच्या इतिहासात स्पर्धेचे स्वरूप मोठ्या प्रमाणात बदलले आहे. पहिल्या चारही स्पर्धांमध्ये प्रत्येकी चार संघांचे दोन गट अशा एकूण आठ संघांनी सहभाग घेतला होता.<ref>{{cite web|url=http://icc.cricket.org/icc/events/summaries/icc_world_cup_1975.html|publisher=icc.cricket.org|title=1st tournament|access-date=१९ फेब्रुवारी २००७|archive-url=https://web.archive.org/web/20071217093647/http://icc.cricket.org/icc/events/summaries/icc_world_cup_1975.html|archive-date=१७ डिसेंबर २००७}}</ref> स्पर्धा दोन टप्प्यांत खेळवली जात होती, गट फेरी आणि [[बाद-फेरी स्पर्धा|बाद फेरी]]. प्रत्येक गटातील चारही संघ [[साखळी सामने|साखळी पद्धतीने]] एकमेकांविरुद्ध खेळत आणि प्रत्येक गटातील अव्वल दोन संघ उपांत्य फेरीत प्रवेश करत. उपांत्य फेरीतील विजेते संघ अंतिम सामन्यात एकमेकांविरुद्ध खेळत. वर्णभेदविरोधी बहिष्कार संपल्यानंतर दक्षिण आफ्रिकेने १९९२ मधील पाचव्या स्पर्धेत पुनरागमन केले. त्या स्पर्धेत नऊ संघांनी गट फेरीत एकमेकांविरुद्ध प्रत्येकी एक सामना खेळला आणि अव्वल चार संघ उपांत्य फेरीत पोहोचले.<ref>{{cite web|url=http://icc.cricket.org/icc/events/summaries/icc_world_cup_199192.html|publisher=icc.cricket.org|title=92 tournament|access-date=१९ फेब्रुवारी २००७|archive-url=https://web.archive.org/web/20071217093653/http://icc.cricket.org/icc/events/summaries/icc_world_cup_199192.html|archive-date=१७ डिसेंबर २००७}}</ref> १९९६ मध्ये स्पर्धेचा आणखी विस्तार करून प्रत्येकी सहा संघांचे दोन गट करण्यात आले.<ref>{{cite web|url=http://icc.cricket.org/icc/events/summaries/icc_world_cup_199596.html|publisher=icc.cricket.org|title=96 tournament|access-date=१९ फेब्रुवारी २००७|archive-url=https://web.archive.org/web/20071217093658/http://icc.cricket.org/icc/events/summaries/icc_world_cup_199596.html|archive-date=१७ डिसेंबर २००७}}</ref> प्रत्येक गटातील अव्वल चार संघ उपांत्यपूर्व फेरीत पोहोचले आणि त्यानंतर उपांत्य फेरी खेळवण्यात आली.<ref>{{Cite web|title=Wills World Cup, 1996 schedule, live scores and results|url=https://www.cricbuzz.com/cricket-series/653/wills-world-cup-1996|access-date=५ जुलै २०२३|website=Cricbuzz|language=en}}</ref>
[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]] आणि [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]] विश्वचषकांसाठी वेगळे स्वरूप वापरण्यात आले. संघांची दोन गटांमध्ये विभागणी करण्यात आली आणि प्रत्येक गटातील अव्वल तीन संघ ''सुपर ६'' फेरीत पोहोचले.<ref name="super6">{{cite web|url=http://www.cricinfo.com/link_to_database/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC99/WC99_TABLE.html|publisher=[[क्रिकइन्फो]]|title=Super 6|access-date=१९ फेब्रुवारी २००७|archive-url=https://web.archive.org/web/20070222100838/http://www.cricinfo.com/link_to_database/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC99/WC99_TABLE.html|archive-date=२२ फेब्रुवारी २००७|url-status=live}}</ref> ''सुपर ६'' मधील संघांनी दुसऱ्या गटातून पात्र ठरलेल्या तीन संघांविरुद्ध सामने खेळले. पुढील फेरीत प्रवेश करताना, आपल्या गटातून सोबत पुढील फेरीसाठी पात्र ठरलेल्या संघांविरुद्धच्या आधीच्या सामन्यांत मिळवलेले गुण संघांना पुढे नेण्याची परवानगी होती. त्यामुळे गट फेरीत चांगली कामगिरी करण्यासाठी संघांना अतिरिक्त प्रोत्साहन मिळत असे.<ref name="super6"/> ''सुपर ६'' फेरीतील अव्वल चार संघ उपांत्य फेरीत पोहोचत आणि त्यातील विजेते अंतिम सामना खेळत.<ref>{{Cite web|title=ICC World Cup, 1999 schedule, live scores and results|url=https://www.cricbuzz.com/cricket-series/718/icc-world-cup-1999|access-date=५ जुलै २०२३|website=Cricbuzz|language=en}}</ref><ref>{{Cite web|title=Cricket World Cup History 2003: Winners, Runners-up, Stats of World Cup 2003|url=https://sports.ndtv.com/world-cup-2019/history/2003-cricket-world-cup|access-date=५ जुलै २०२३|website=NDTVSports.com|language=en|archive-date=2023-07-05|archive-url=https://web.archive.org/web/20230705061919/https://sports.ndtv.com/world-cup-2019/history/2003-cricket-world-cup|url-status=dead}}</ref>
[[File:ICC CWC 2007 team captains.jpg|thumb|upright=0.9|२००७ क्रिकेट विश्वचषकातील संघांचे कर्णधार.]]
[[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७ विश्वचषकात]] १६ संघांची प्रत्येकी चार संघांच्या चार गटांत विभागणी करण्यात आली होती.<ref>{{cite web|url=http://www.cricketworldcup.com/TeamGroupings.html|publisher=cricket world cup|title=World Cup groups|access-date=२८ जानेवारी २००७|archive-url=https://web.archive.org/web/20070126002928/http://www.cricketworldcup.com/TeamGroupings.html|archive-date=२६ जानेवारी २००७|url-status=dead}}</ref> प्रत्येक गटात संघ एकमेकांविरुद्ध साखळी पद्धतीने खेळले. विजयासाठी संघांना गुण आणि बरोबरीसाठी अर्धा गुण मिळत असे. प्रत्येक गटातील अव्वल दोन संघ ''सुपर ८'' फेरीत प्रवेश करत. ''सुपर ८'' मधील संघांनी इतर गटांतून पात्र ठरलेल्या सहा संघांविरुद्ध सामने खेळले. गट फेरीप्रमाणेच गुण देण्यात येत होते; मात्र आपल्या मूळ गटातून ''सुपर ८'' साठी पात्र ठरलेल्या दुसऱ्या संघाविरुद्ध आधीच्या सामन्यात मिळवलेले गुण पुढे नेण्यात येत होते.<ref>{{cite web|url=http://www.cricketworldcup.com/pdfs/event-overview.pdf|publisher=cricketworldcup.com|title=About the Event|access-date=२ सप्टेंबर २००६|page=1|archive-url=https://web.archive.org/web/20060905225042/http://www.cricketworldcup.com/pdfs/event-overview.pdf|archive-date=५ सप्टेंबर २००६|url-status=dead}}</ref> ''सुपर ८'' फेरीतील अव्वल चार संघ उपांत्य फेरीत पोहोचले आणि उपांत्य फेरीतील विजेत्यांनी अंतिम सामना खेळला.<ref>{{Cite web|title=ICC World Cup, 2007 schedule, live scores and results|url=https://www.cricbuzz.com/cricket-series/905/icc-world-cup-2007|access-date=५ जुलै २०२३|website=Cricbuzz|language=en}}</ref>
[[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]] आणि [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]]<ref>{{cite web|url=http://www.cricknews.net|publisher=cricknews.net|title=2015 Cricket World Cup|access-date=३ फेब्रुवारी २०१५|archive-url=https://web.archive.org/web/20150203120741/http://www.cricknews.net/|archive-date=३ फेब्रुवारी २०१५|url-status=dead}}</ref> विश्वचषकांच्या गट फेरीत प्रत्येकी सात संघांचे दोन गट होते. प्रत्येक गटातील अव्वल चार संघ उपांत्यपूर्व फेरीत, त्यानंतर उपांत्य फेरीत आणि अखेरीस अंतिम सामन्यात प्रवेश करत.<ref>{{cite news|first=K.R.|last=Nayar|title=International Cricket Council approves 14-team cup|url=http://gulfnews.com/sport/cricket/international-cricket-council-approves-14-team-cup-1.829620|work=Gulf News|date=२९ जून २०११|access-date=२ फेब्रुवारी २०१५|archive-url=https://web.archive.org/web/20110701153544/http://gulfnews.com/sport/cricket/international-cricket-council-approves-14-team-cup-1.829620|archive-date=१ जुलै २०११|url-status=live}}</ref>
स्पर्धेच्या [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]] आणि [[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३]] आवृत्त्यांमध्ये सहभागी संघांची संख्या दहापर्यंत कमी करण्यात आली. सर्व दहा संघ एका साखळी गटात खेळले आणि अव्वल चार संघ उपांत्य फेरीत पोहोचले.<ref>{{cite web|last=Smale|first=Simon|title=The Cricket World Cup 2019 has shrunk to exclude the minnows, but why? And how come it's still so long?|publisher=Australian Broadcasting Corporation|date=४ जून २०१९|url=https://www.abc.net.au/news/2019-06-05/cricket-world-cup-minnows-where-have-they-gone/11176128|access-date=१८ ऑक्टोबर २०२०}}</ref>
२०२७ आणि २०३१ विश्वचषकांमध्ये संघांची संख्या वाढवून १४ करण्यात येईल;<ref>{{cite web|url=https://sixsports.in/icc-announces-world-cup-schedule-14-teams-in-2027-and-2031/|title=ICC announces World Cup schedule; 14 teams in 2027 And 2031|website=Six Sports|date=२ जून २०२१|access-date=२ जून २०२१|archive-date=१ एप्रिल २०२२|archive-url=https://web.archive.org/web/20220401040539/https://sixsports.in/icc-announces-world-cup-schedule-14-teams-in-2027-and-2031/|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite web|url=https://cricinfo.pro/cricket-world-cup-2023-date-teams-stadiums-tickets/|title=Mark your calendars for the Cricket World Cup 2023 as the tournament is set to begin on October 5, 2023. The matches will continue until November 19, 2023|website=Cricinfo|date=७ सप्टेंबर २०२३|access-date=११ सप्टेंबर २०२३}}</ref> २०२७ मध्ये पहिल्या साखळी टप्प्यात प्रत्येकी सहा संघांचे दोन गट असतील. १४ संघांच्या स्पर्धेतील सर्वात खालच्या मानांकनाचे तीन पात्र संघ बारावा आणि अंतिम संघ निश्चित करण्यासाठी तीन सामन्यांची ''सुपर सिरीज'' फेरी खेळतील. प्रत्येक गटातील अव्वल तीन संघ आणि दोन्ही गटांतील चौथ्या स्थानावरील संघांपैकी सर्वोत्तम कामगिरी करणारा एक संघ ''सुपर ७'' फेरीत प्रवेश करेल. ''सुपर ७'' फेरीतील अव्वल चार संघ बाद फेरीत प्रवेश करतील. आयसीसीने म्हटले की, या बदलांचा उद्देश स्पर्धेतील चुरस वाढवणे आणि त्याच वेळी स्पर्धेचा कालावधी कमी करणे हा होता.<ref>{{cite news|title=ICC revamp formats for marquee men’s events|url=https://www.icc-cricket.com/news/icc-revamp-formats-for-marquee-men-s-events|work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद]]|date=१५ जुलै २०२६|access-date=१५ जुलै २०२६}}</ref><ref>{{Cite web|date=१५ जुलै २०२६|title=ICC adds Super Series and Super 7 twist to 2027 ODI World Cup|url=https://www.cricinfo.com/story/icc-adds-super-series-and-super-7-twist-to-2027-odi-world-cup-1545709|access-date=१५ जुलै २०२६|website=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref>
{| class="wikitable"
! colspan="8" |स्पर्धेच्या स्वरूपांचा सारांश
|-
!आवृत्ती
!वर्ष
!यजमान
!संघ
!सामने
!प्राथमिक टप्पा
!द्वितीय टप्पा
!अंतिम टप्पा
|-
| style="text-align:center" |१
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]]
| rowspan="2" |{{flag|इंग्लंड}}
| rowspan=4 style="text-align:center" |८
| rowspan=2 style="text-align:center" |१५
| rowspan=2 style="text-align:center" |४ संघांचे २ गट: १२ सामने
| rowspan="6" |नाही
| rowspan="4" style="text-align:center" |४ संघांची बाद फेरी (गटविजेते आणि उपविजेते): ३ सामने
|-
| style="text-align:center" |२
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]]
|-
| style="text-align:center" |३
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, १९८३|१९८३]]
|{{flag|इंग्लंड}}<br />{{flag|वेल्स}}
| rowspan="2" style="text-align:center" |२७
| rowspan=2 style="text-align:center" |४ संघांचे २ गट: २४ सामने
|-
| style="text-align:center" |४
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]]
|{{flag|भारत}}<br/>{{flag|पाकिस्तान}}
|-
| style="text-align:center" |५
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]]
|{{flag|ऑस्ट्रेलिया}}<br/>{{flag|न्यूझीलंड}}
| style="text-align:center" |९
| style="text-align:center" |३९
| style="text-align:center" |९ संघांचा साखळी टप्पा: ३६ सामने
| style="text-align:center" |४ संघांची बाद फेरी (साखळी टप्प्यातील अव्वल ४): ३ सामने
|-
| style="text-align:center" |६
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]]
|{{flag|भारत}}<br/>{{flag|पाकिस्तान}}<br/>{{flag|श्रीलंका}}
| rowspan=2 style="text-align:center" |१२
| style="text-align:center" |३७
| style="text-align:center" |६ संघांचे २ गट: ३० सामने
| style="text-align:center" |८ संघांची बाद फेरी (प्रत्येक गटातील अव्वल ४): ७ सामने
|-
| style="text-align:center" |७
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]]
|{{flag|इंग्लंड}}<br/>{{flag|वेल्स}}<br/>{{flag|स्कॉटलंड}}<br/>{{flag|आयर्लंड}}<br/>{{flag|नेदरलँड्स}}
| style="text-align:center" |४२
| style="text-align:center" |६ संघांचे २ गट: ३० सामने
| rowspan="2" |सुपर सिक्स (प्रत्येक गटातील अव्वल ३): ९ सामने
| rowspan="2" style="text-align:center" |४ संघांची बाद फेरी (सुपर सिक्समधील अव्वल ४): ३ सामने
|-
| style="text-align:center" |८
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]]
|{{flag|दक्षिण आफ्रिका}}<br/>{{flag|झिम्बाब्वे}}<br/>{{flag|केन्या}}
| style="text-align:center" |१४
| style="text-align:center" |५४
| style="text-align:center" |७ संघांचे २ गट: ४२ सामने
|-
| style="text-align:center" |९
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]]
|{{flag|वेस्ट इंडीज|cricket}}
| style="text-align:center" |१६
| style="text-align:center" |५१
| style="text-align:center" |४ संघांचे ४ गट: २४ सामने
|सुपर एट (प्रत्येक गटातील अव्वल २): २४ सामने
| style="text-align:center" |४ संघांची बाद फेरी (सुपर एटमधील अव्वल ४): ३ सामने
|-
| style="text-align:center" |१०
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]]
|{{flag|भारत}}<br/>{{flag|श्रीलंका}}<br/>{{flag|बांगलादेश}}
| rowspan=2 style="text-align:center" |१४
| rowspan=2 style="text-align:center" |४९
| rowspan=2 style="text-align:center" |७ संघांचे २ गट: ४२ सामने
| rowspan="4" |नाही
| rowspan="2" style="text-align:center" |८ संघांची बाद फेरी (प्रत्येक गटातील अव्वल ४): ७ सामने
|-
| style="text-align:center" |११
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]]
|{{flag|ऑस्ट्रेलिया}}<br/>{{flag|न्यूझीलंड}}
|-
| style="text-align:center" |१२
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]]
|{{flag|इंग्लंड}}<br/>{{flag|वेल्स}}
| rowspan=2 style="text-align:center" |१०
| rowspan=2 style="text-align:center" |४८
| rowspan=2 style="text-align:center" |१० संघांचा साखळी टप्पा: ४५ सामने
| rowspan=2 style="text-align:center" |४ संघांची बाद फेरी (साखळी टप्प्यातील अव्वल ४): ३ सामने
|-
| style="text-align:center" |१३
| style="text-align:center" |[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]]
|{{flag|भारत}}
|-
| style="text-align:center" |१४
| style="text-align:center" |[[२०२७ क्रिकेट विश्वचषक|''२०२७'']]
|{{flag|दक्षिण आफ्रिका}}<br/>{{flag|झिम्बाब्वे}}<br/>{{flag|नामिबिया}}
| rowspan="2" style="text-align:center" |''१४''
| rowspan="1" style="text-align:center" |''५७''
| rowspan="1" style="text-align:center" |''सुपर सिरीज (३ संघांचा एक गट): ३ सामने''<br/><br/>''गट टप्पा (६ संघांचे २ गट): ३० सामने''
| rowspan="1" |''सुपर सेवन (प्रत्येक गटातील अव्वल ३ + चौथ्या स्थानावरील सर्वोत्तम संघ): २१ सामने''
| rowspan="1" style="text-align:center" |''४ संघांची बाद फेरी (सुपर सेवनमधील अव्वल ४): ३ सामने''
|-
| style="text-align:center" |१५
| style="text-align:center" |''२०३१''
|{{flag|भारत}}<br/>{{flag|बांगलादेश}}
|
|
|
|
|}
==ट्रॉफी==
{{main|क्रिकेट विश्वचषक ट्रॉफी}}
आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक ट्रॉफी विश्वचषक विजेत्यांना सादर केली जाते. सध्याची ट्रॉफी १९९९ च्या चॅम्पियनशिपसाठी तयार करण्यात आली होती आणि स्पर्धेच्या इतिहासातील हे पहिले कायमस्वरूपी पारितोषिक होते. याआधी प्रत्येक विश्वचषकासाठी वेगवेगळ्या ट्रॉफी बनवण्यात आल्या होत्या.<ref>{{cite web|url=http://www.cricket-worldcup2015.net/2015/02/trophy-is-first-permanent-prize-in-cricket-world-cup.html|publisher=cricket-worldcup2015.net|title=Trophy is first permanent prize in Cricket World Cup|access-date=9 November 2007|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20150203150018/http://www.cricket-worldcup2015.net/2015/02/trophy-is-first-permanent-prize-in-cricket-world-cup.html|archive-date=3 February 2015|आर्काईव्ह दिनांक=2015-09-07|आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20150907181704/http://www.cricket-worldcup2015.net/2015/02/trophy-is-first-permanent-prize-in-cricket-world-cup.html}}</ref>{{Clarify|reason=is this right? were there different Prudential Cups, or was the same Cup used three times?|date=March 2023}} दोन महिन्यांच्या कालावधीत गॅरार्ड आणि कंपनीच्या कारागिरांच्या टीमने लंडनमध्ये ट्रॉफीची रचना आणि निर्मिती केली होती.<ref name=guardian_2015 /><ref>{{Cite web |title=Trophies {{!}} Famous Trophies |url=https://garrard.com/en/trophies/famous-trophies/ |access-date=2022-08-01 |website=Garrard |language=en-GB}}</ref>
सध्याची ट्रॉफी चांदी आणि गिल्टपासून बनविली गेली आहे आणि तीन चांदीच्या स्तंभांनी एक सोनेरी ग्लोब आहे. स्टंप आणि बेल्सच्या आकाराचे स्तंभ, क्रिकेटच्या तीन मूलभूत पैलूंचे प्रतिनिधित्व करतात: फलंदाजी, गोलंदाजी आणि क्षेत्ररक्षण, तर ग्लोब हे क्रिकेट बॉलचे वैशिष्ट्य आहे.<ref>{{cite web|url=http://www.webindia123.com/Sports/cricket/iccworldcup/history.htm|publisher=webindia123.com|title=Cricket World Cup- Past Glimpses|access-date=31 October 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20080323235801/http://www.webindia123.com/Sports/cricket/iccworldcup/history.htm|archive-date=23 March 2008|url-status=live}}</ref> पृथ्वीच्या अक्षीय झुकावचे प्रतीक म्हणून शिवण झुकलेली आहे. हे ६० सेंटीमीटर (२.० फूट) उंच आहे आणि त्याचे वजन अंदाजे ११ किलोग्रॅम (२४ पौंड) आहे. मागील विजेत्यांची नावे ट्रॉफीच्या पायावर कोरलेली आहेत, एकूण वीस शिलालेखांसाठी जागा आहे. आयसीसी मूळ ट्रॉफी ठेवते. केवळ शिलालेखांमध्ये भिन्न असलेली प्रतिकृती विजेत्या संघाला कायमस्वरूपी दिली जाते.<ref>{{cite web|url=http://www.icc-cricket.com/cricket-world-cup/about|publisher=[[International Cricket Council]]|title=About the Tournament|access-date=4 December 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140625075114/http://www.icc-cricket.com/cricket-world-cup/about |archive-date=25 June 2014}}</ref>
==मीडिया कव्हरेज==
ही स्पर्धा जगातील सर्वाधिक पाहिल्या गेलेल्या क्रीडा स्पर्धांपैकी एक आहे<ref>{{cite web|url=http://www.totalsportek.com/news/cricket-world-cup-third-most-watched-sports-event/|title=Cricket World Cup 2015 3rd Most Watched Sports Event In The World|publisher=Total Sportek|date=11 January 2015|access-date=17 March 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150325171256/http://www.totalsportek.com/news/cricket-world-cup-third-most-watched-sports-event/|archive-date=25 March 2015|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web |last=Baker |first=Alison |date=2022-07-25 |title=The Most Watched Sporting Events in The World |url=https://www.roadtrips.com/blog/the-most-watched-sporting-events-in-the-world/ |access-date=2023-07-05 |website=Roadtrips |language=en-US}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.roadtrips.com/blog/the-most-watched-sporting-events-in-the-world/|title=The Most Watched Sporting Events in The World|last=Baker|first=Alison|date=25 July 2022|access-date=15 October 2022|website=www.roadtrips.com}}</ref> आणि एकदिवसीय आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट अधिक प्रस्थापित झाल्यामुळे लागोपाठच्या स्पर्धांमुळे प्रसारमाध्यमांचे लक्ष वाढत आहे. २०११ क्रिकेट विश्वचषक २०० हून अधिक देशांमध्ये २.२ अब्जाहून अधिक प्रेक्षकांसाठी प्रसारित करण्यात आला.<ref name=guardian_2015>{{cite news|url=https://www.theguardian.com/sport/blog/2015/feb/12/cricket-world-cup-icc-50-overs|title=More money, more viewers and fewer runs in prospect for intriguing World Cup|newspaper=The Guardian|date=12 February 2015|access-date=17 March 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150304022954/http://www.theguardian.com/sport/blog/2015/feb/12/cricket-world-cup-icc-50-overs|archive-date=4 March 2015|url-status=live}}</ref><ref name="CWC">{{cite web|url=http://www.cricketworldcup.com/icc-marketing.html|publisher=cricketworldcup.com|title=World Cup Overview|access-date=29 January 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20070124001408/http://www.cricketworldcup.com/icc-marketing.html|archive-date=24 January 2007|url-status=dead|आर्काईव्ह दिनांक=2007-01-24|आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20070124001408/http://www.cricketworldcup.com/icc-marketing.html}}</ref> मुख्यतः २०११ आणि २०१५ विश्वचषकासाठी दूरचित्रवाणी अधिकार अमेरिकी १.१ अब्ज डॉलर पेक्षा जास्त विकले गेले<ref>{{cite web|url=http://content-usa.cricinfo.com/ci/content/current/story/271994.html|publisher=[[ईएसपीएन क्रिकइन्फो]]|author=Cricinfo staff|title=ICC rights for to ESPN-star|access-date=30 January 2007|date=9 December 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20090201130926/http://content-usa.cricinfo.com/ci/content/current/story/271994.html|archive-date=1 February 2009|url-status=live}}</ref> आणि प्रायोजकत्व अधिकार आणखी अमेरिकी ५०० दशलक्ष डॉलर मध्ये विकले गेले.<ref>{{cite web|url=http://content-usa.cricinfo.com/ci/content/story/276853.html|publisher=[[ईएसपीएन क्रिकइन्फो]]|author=Cricinfo staff|title=ICC set to cash in on sponsorship rights|access-date=30 January 2007|date=18 January 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20090201130947/http://content-usa.cricinfo.com/ci/content/story/276853.html|archive-date=1 February 2009|url-status=live}}</ref> आयसीसी ने २०१९ विश्वचषकासाठी एकूण १.६ अब्ज दर्शक तसेच स्पर्धेच्या डिजिटल व्हिडिओला ४.६ अब्ज व्ह्यूजचा दावा केला आहे.<ref name="2019 ICC viewership">{{Cite web|title=ICC Men's Cricket World Cup gives GDP 350 million boost to UK economy|url=https://www.icc-cricket.com/media-releases/1634008|access-date=2021-04-08|website=www.icc-cricket.com|language=en}}</ref> स्पर्धेतील सर्वात जास्त पाहिलेला सामना भारत आणि पाकिस्तान यांच्यातील गट गेम होता, जो ३०० दशलक्षाहून अधिक लोकांनी थेट पाहिला होता.<ref>{{cite web|url=https://www.icc-cricket.com/media-releases/1346930|title=2019 Men's Cricket World Cup most watched ever|date=16 September 2019|access-date=15 October 2022|website=www.icc-cricket.com}}</ref>
==प्रेक्षकांची उपस्थिती==
{| class="wikitable sortable" style="text-align:left"
|-
! वर्ष !! यजमान !! एकूण उपस्थिती !! संदर्भ
|-
| [[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]] || दक्षिण आफ्रिका, झिम्बाब्वे, केन्या || ६,२६,८४५ || <ref>{{cite web |url=http://www.icc-cricket.com/icc/news/quarterly/quarterly_3.pdf |publisher=ICC |title=Cricket World Cup 2003 |page=12 |access-date=29 January 2007 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20060321201920/http://www.icc-cricket.com/icc/news/quarterly/quarterly_3.pdf |archive-date=21 March 2006 |आर्काईव्ह दिनांक=2006-03-21 |आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20060321201920/http://www.icc-cricket.com/icc/news/quarterly/quarterly_3.pdf }}</ref>
|-
| [[२००७ क्रिकेट विश्वचषक|२००७]] || वेस्ट इंडीज || ६,७२,००० || <ref>{{cite web |url=http://content-usa.cricinfo.com/westindies/content/current/story/301516.html |title=World Cup profits boost debt-ridden Windies board |publisher=Content-usa.cricinfo.com |access-date=24 June 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080324094443/http://content-usa.cricinfo.com/westindies/content/current/story/301516.html |archive-date=24 March 2008 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|publisher=cricketworld.com|title=ICC CWC 2007 Match Attendance Soars Past 400,000|access-date=25 April 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20070928071404/http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|archive-date=28 September 2007|आर्काईव्ह दिनांक=2007-09-28|आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20070928071404/http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|url-status=dead}}</ref>
|-
| [[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]] || भारत, श्रीलंका, बांगलादेश || १२,२९,८२६ || <ref>{{cite web |url=http://content-usa.cricinfo.com/westindies/content/current/story/301516.html |title=World Cup profits boost debt-ridden Windies board |publisher=Content-usa.cricinfo.com |access-date=24 June 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080324094443/http://content-usa.cricinfo.com/westindies/content/current/story/301516.html |archive-date=24 March 2008 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|publisher=cricketworld.com|title=ICC CWC 2007 Match Attendance Soars Past 400,000|access-date=25 April 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20070928071404/http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|archive-date=28 September 2007|आर्काईव्ह दिनांक=2007-09-28|आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20070928071404/http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|url-status=dead}}</ref>
|-
| [[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]] || ऑस्ट्रेलिया, न्यू झीलंड || ११,०६,४२० || <ref>{{cite web |url=http://content-usa.cricinfo.com/westindies/content/current/story/301516.html |title=World Cup profits boost debt-ridden Windies board |publisher=Content-usa.cricinfo.com |access-date=24 June 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080324094443/http://content-usa.cricinfo.com/westindies/content/current/story/301516.html |archive-date=24 March 2008 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|publisher=cricketworld.com|title=ICC CWC 2007 Match Attendance Soars Past 400,000|access-date=25 April 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20070928071404/http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|archive-date=28 September 2007|आर्काईव्ह दिनांक=2007-09-28|आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20070928071404/http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|url-status=dead}}</ref>
|-
| [[२०१९ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९]] || इंग्लंड आणि वेल्स || ७,५२,००० || <ref>{{cite web |title=2019 Cricket World Cup delivers UK£350m boost for UK economy |first=Sam |last=Carp |url=https://www.sportspromedia.com/news/2019-cricket-world-cup-uk-economy-impact-england-wales/?zephr_sso_ott=mabKiL |date=4 March 2020 |access-date=18 May 2023 |publisher=SportsPro Daily}}</ref>
|-
| [[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]] || भारत || १२,५०,३०७ ||<ref>{{cite web |title=Record-Breaking 1.25 million spectators turn out for ICC Men's Cricket World Cup 2023|url=https://www.icc-cricket.com/media-releases/3790838 |date=21 November 2023 |access-date=21 November 2023 |publisher=cricketworldcup.com}}</ref>
|}
==यजमानांची निवड==
{{main|क्रिकेट विश्वचषकाचे यजमान}}
आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषदेची कार्यकारी समिती क्रिकेट विश्वचषक आयोजित करण्यासाठी उत्सुक असलेल्या राष्ट्रांनी केलेल्या बोलींची तपासणी केल्यानंतर स्पर्धेच्या यजमानांसाठी मतदान करते.<ref>{{cite web|url=http://content-usa.cricinfo.com/ci/content/story/245789.html|publisher=[[ईएसपीएन क्रिकइन्फो]]|title=Asia to host 2011 World Cup|date=30 April 2006|access-date=9 February 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20120928205442/http://content-usa.cricinfo.com/ci/content/story/245789.html|archive-date=28 September 2012|url-status=live}}</ref>
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|caption=क्रिकेट विश्वचषकाचे यजमान देश
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{{Location map~|Earth|position=bottom|lat=51.300000|long=00.07000|label='''[[१९७५ क्रिकेट विश्वचषक|१९७५]]''',<br />'''[[१९७९ क्रिकेट विश्वचषक|१९७९]]''','''[[१९८३ क्रिकेट विश्वचषक|१९८३]]''',<br />'''[[१९९९ क्रिकेट विश्वचषक|१९९९]]''','''[[२०१९ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९]]'''}}
{{Location map~|Earth|position=bottom|lat=28.363600|long=77.13480|label='''[[१९८७ क्रिकेट विश्वचषक|१९८७]]''',<br />'''[[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]''','''[[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]]''',<br />'''[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]]''','''२०३१'''}}
{{Location map~|Earth|position=left|lat=33.360000|long=73.02000|label='''[[१९८७ क्रिकेट विश्वचषक|१९८७]]''','''[[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]'''}}
{{Location map~|Earth|position=right|lat=23.455000|long=90.23200|label='''[[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]]''','''२०३१'''}}
{{Location map~|Earth|position=bottom|lat=06.540400|long=79.50340|label='''[[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]''','''[[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]]'''}}
{{Location map~|Earth|position=left|lat=17.581700|long=-76.47350|label='''[[२००७ क्रिकेट विश्वचषक|२००७]]'''}}
{{Location map~|Earth|position=bottom|lat=-18.261700|long=130.50280|label='''[[१९९२ क्रिकेट विश्वचषक|१९९२]]''','''[[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]]'''}}
{{Location map~|Earth|position=left|lat=-43.314800|long=172.37130|label='''[[१९९२ क्रिकेट विश्वचषक|१९९२]]''','''[[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]]'''}}
{{Location map~|Earth|position=right|lat=01.16000|long=36.48|label='''[[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]]'''}}
{{Location map~|Earth|position=bottom|lat=-26.121600|long=28.02440|label='''[[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]]''','''[[२०२७ क्रिकेट विश्वचषक|२०२७]]'''}}
{{Location map~|Earth|position=top|lat=-17.494500|long=31.03080|label='''[[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]]''','''[[२०२७ क्रिकेट विश्वचषक|२०२७]]'''}}
{{Location map~|Earth|position=left|lat=-22.340000|long=17.05000|label='''[[२०२७ क्रिकेट विश्वचषक|२०२७]]'''}}
}}
[[File:Civic Centre-2003 CWC.jpg|thumb|दक्षिण आफ्रिकेतील २००३ क्रिकेट विश्वचषकाच्या निमित्ताने नागरी केंद्र उजळले]]
इंग्लंडने पहिल्या तीन स्पर्धांचे आयोजन केले होते. आयसीसीने ठरवले की इंग्लंडने पहिली स्पर्धा आयोजित करावी कारण ते उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित करण्यासाठी आवश्यक संसाधने समर्पित करण्यास तयार होते.<ref name="ENGHOST">{{cite web|url=http://www.cricworld.com/news/wchistory03feb.htm|publisher=cricworld.com|title=The History of World Cup's|access-date=19 September 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20070313181419/http://www.cricworld.com/news/wchistory03feb.htm|archive-date=13 March 2007|url-status=dead|आर्काईव्ह दिनांक=2007-03-13|आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20070313181419/http://www.cricworld.com/news/wchistory03feb.htm}}</ref> भारताने तिसऱ्या क्रिकेट विश्वचषकाचे यजमानपद स्वेच्छेने स्वीकारले, परंतु बहुतेक आयसीसी सदस्यांनी इंग्लंडला प्राधान्य दिले कारण जूनमध्ये इंग्लंडमध्ये दिवसाचा जास्त काळ म्हणजे एक सामना एका दिवसात पूर्ण होऊ शकतो.<ref>{{cite web|url=http://www1.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC_HISTORY/WC79_HISTORY.html|publisher=[[ईएसपीएन क्रिकइन्फो]]|title=The 1979 World Cup in England – West Indies retain their title|access-date=19 September 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20060523160232/http://www.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC_HISTORY/WC79_HISTORY.html|archive-date=23 May 2006|url-status=live}}</ref> १९८७ क्रिकेट विश्वचषक भारत आणि पाकिस्तानमध्ये आयोजित करण्यात आला होता, जो पहिल्यांदा इंग्लंडबाहेर आयोजित करण्यात आला होता.<ref>{{cite web|url=http://static.espncricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC_HISTORY/WC87_HISTORY.html|publisher=[[ईएसपीएन क्रिकइन्फो]]|title=The 1987 World Cup in India and Pakistan – Australia win tight tournament|access-date=15 July 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140716040704/http://static.espncricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC_HISTORY/WC87_HISTORY.html|archive-date=16 July 2014|url-status=live}}</ref>
१९८७, १९९६ आणि २०११ मध्ये दक्षिण आशिया, १९९२ आणि २०१५ मध्ये ऑस्ट्रेलिया (ऑस्ट्रेलिया आणि न्यू झीलंडमध्ये), २००३ मध्ये दक्षिण आफ्रिका आणि २००७ मध्ये वेस्ट इंडीज यासारख्या भौगोलिक प्रदेशातील अनेक स्पर्धा संयुक्तपणे आयोजित केल्या गेल्या आहेत.
नोव्हेंबर २०२१ मध्ये, आयसीसी ने २०२४ ते २०३१ सायकल दरम्यान खेळल्या जाणाऱ्या आयसीसी इव्हेंटसाठी यजमानांची नावे प्रकाशित केली. टी-२० विश्वचषक आणि चॅम्पियन्स ट्रॉफीसह ५० षटकांच्या विश्वचषकासाठी यजमानांची निवड स्पर्धात्मक बोली प्रक्रियेद्वारे करण्यात आली.<ref>{{cite news |title=India to host three ICC events in 2024-31 cycle |url=https://www.cricbuzz.com/cricket-news/119866/india-to-get-three-icc-events-in-next-cycle |access-date=16 November 2021 |work=Cricbuzz |language=en}}</ref><ref>{{cite news |title=USA to stage T20 World Cup: 2024-2031 ICC Men's tournament hosts confirmed |url=https://www.icc-cricket.com/news/2354682 |access-date=16 November 2021 |work=www.icc-cricket.com |language=en}}</ref>
==निकाल==
{{Main|क्रिकेट विश्वचषक अंतिम सामन्यांची यादी}}
{| class="wikitable sortable" style="font-size:90%; text-align:center; width:100%;"
|-
! rowspan="2" style="width:2%;|{{abbr|आवृ.|आवृत्ती}}
! rowspan="2" style="width:4%;|वर्ष
! rowspan="2" style="width:14%;|यजमान
! rowspan="2" style="width:15%;|अंतिम सामन्याचे मैदान
! colspan=3|अंतिम सामना
! rowspan=2|{{abbr|संघांची<br />संख्या|संघांची संख्या}}
|-
! style="width:15%; |विजेते
! style="width:30%; |निकाल
! style="width:15%; |उपविजेते
|-
!१
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]]
| style="text-align:left" |{{Flag|इंग्लंड}}
|[[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]
|'''{{cr|WIN}}'''<br><small>२९१/८ (६० षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५ - अंतिम सामना|वेस्ट इंडीज १७ धावांनी विजयी]]'''<br>[http://aus.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC75/WI_AUS_WC75_ODI-FINAL_21JUN1975.html (धावफलक)]
|{{cr|AUS}}<br><small>२७४ सर्वबाद (५८.४ षटके)</small>
| rowspan="4" |८
|-
!२
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]]
| style="text-align:left" |{{Flag|इंग्लंड}}
|[[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]
|'''{{cr|WIN}}'''<br><small>२८६/९ (६० षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''वेस्ट इंडीज ९२ धावांनी विजयी'''<br>[http://aus.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC79/WI_ENG_WC79_ODI-FINAL_23JUN1979.html (धावफलक)]
|{{cr|ENG}}<br><small>१९४ सर्वबाद (५१ षटके)</small>
|-
!३
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९८३|१९८३]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|इंग्लंड}} |{{flag|वेल्स}}}}
|[[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]
|'''{{cr|IND}}'''<br><small>१८३ सर्वबाद (५४.४ षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''भारत ४३ धावांनी विजयी'''<br>[http://aus.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC83/IND_WI_WC83_ODI-FINAL_25JUN1983.html (धावफलक)]
|{{cr|WIN}}<br><small>१४० सर्वबाद (५२ षटके)</small>
|-
!४
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|भारत}} |{{flag|पाकिस्तान}} }}
|[[इडन गार्डन्स]], [[कोलकाता]]
|'''{{cr|AUS}}'''<br><small>२५३/५ (५० षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''ऑस्ट्रेलिया ७ धावांनी विजयी'''<br>[http://aus.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC87/AUS_ENG_WC87_ODI-FINAL_08NOV1987.html (धावफलक)]
|{{cr|ENG}}<br><small>२४६/८ (५० षटके)</small>
|-
!५
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|ऑस्ट्रेलिया}}|{{flag|न्यूझीलंड}} }}
|[[मेलबर्न क्रिकेट मैदान]], [[मेलबर्न]]
|'''{{cr|PAK}}'''<br><small>२४९/६ (५० षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''पाकिस्तान २२ धावांनी विजयी'''<br>[http://aus.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC92/PAK_ENG_WC92_ODI-FINAL_25MAR1992.html (धावफलक)]
|{{cr|ENG}}<br><small>२२७ सर्वबाद (४९.२ षटके)</small>
|९
|-
!६
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|भारत}}|{{flag|पाकिस्तान}}|{{flag|श्रीलंका}}}}
|[[गद्दाफी स्टेडियम]], [[लाहोर]]
|'''{{cr|SRI}}'''<br><small>२४५/३ (४६.२ षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''श्रीलंका ७ गडी राखून विजयी'''<br>[http://aus.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC96/WC96-MATCHES/AUS_SL_WC96_ODI-FINAL_17MAR1996.html (धावफलक)]
|{{cr|AUS}}<br><small>२४१/७ (५० षटके)</small>
| rowspan="2" |१२
|-
!७
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|इंग्लंड}}{{efn|इंग्लंड हा एकमेव अधिकृत यजमान होता, परंतु वेल्स, स्कॉटलंड, आयर्लंड प्रजासत्ताक आणि नेदरलँड्स येथेही सामने खेळवण्यात आले.}}|{{flag|वेल्स}} |{{flag|स्कॉटलंड}} |{{flag|आयर्लंड}} |{{flag|नेदरलँड्स}} }}
|[[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]
|'''{{cr|AUS}}'''<br><small>१३३/२ (२०.१ षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''ऑस्ट्रेलिया ८ गडी राखून विजयी'''<br>[http://aus.cricinfo.com/link_to_database/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC99/SCORECARDS/FINALS/AUS_PAK_WC99_ODI-FINAL_20JUN1999.html (धावफलक)]
|{{cr|PAK}}<br><small>१३२ सर्वबाद (३९ षटके)</small>
|-
!८
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|दक्षिण आफ्रिका}}{{efn|[[दक्षिण आफ्रिका]] हा एकमेव अधिकृत मुख्य यजमान होता, परंतु झिम्बाब्वे आणि केन्या येथेही सामने खेळवण्यात आले.}}|{{flag|झिम्बाब्वे}} |{{flag|केन्या}} }}
|[[वॉन्डरर्स स्टेडियम (जोहान्सबर्ग)|वॉन्डरर्स स्टेडियम]], [[जोहान्सबर्ग]]
|'''{{cr|AUS}}'''<br><small>३५९/२ (५० षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''ऑस्ट्रेलिया १२५ धावांनी विजयी'''<br>[http://aus.cricinfo.com/link_to_database/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC2003/SCORECARDS/FINALS/AUS_IND_WC2003_ODI-FINAL_23MAR2003.html (धावफलक)]
|{{cr|IND}}<br><small>२३४ सर्वबाद (३९.२ षटके)</small>
|१४
|-
!९
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]]
| style="text-align:left" |{{Flag|वेस्ट इंडीज}}{{efn|[[क्रिकेट वेस्ट इंडीज|वेस्ट इंडीज क्रिकेट फेडरेशन]]च्या आठ सदस्य देशांनी सामने आयोजित केले - अँटिगा आणि बारबुडा, बार्बाडोस, ग्रेनाडा, गयाना, जमैका, सेंट किट्स आणि नेव्हिस, सेंट लुसिया आणि त्रिनिदाद आणि टोबॅगो.}}
|[[केन्सिंग्टन ओव्हल]], [[ब्रिजटाउन]]
|'''{{cr|AUS}}'''<br><small>२८१/४ (३८ षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''ऑस्ट्रेलिया ५३ धावांनी विजयी (डी/एल)'''<br>[http://content-aus.cricinfo.com/wc2007/engine/current/match/247507.html (धावफलक)]
|{{cr|SRI}}<br><small>२१५/८ (३६ षटके)</small>
|१६
|-
!१०
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|भारत}} |{{flag|श्रीलंका}} |{{flag|बांगलादेश}} }}
|[[वानखेडे स्टेडियम]], [[मुंबई]]
|'''{{cr|IND}}'''<br><small>२७७/४ (४८.२ षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''भारत ६ गडी राखून विजयी'''<br>[http://www.espncricinfo.com/icc_cricket_worldcup2011/engine/current/match/433606.html (धावफलक)]
|{{cr|SRI}}<br><small>२७४/६ (५० षटके)</small>
| rowspan="2" |१४
|-
!११
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|ऑस्ट्रेलिया}} |{{flag|न्यूझीलंड}} }}
|[[मेलबर्न क्रिकेट मैदान]], [[मेलबर्न]]
|'''{{cr|AUS}}'''<br><small>१८६/३ (३३.१ षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''ऑस्ट्रेलिया ७ गडी राखून विजयी'''<br>[http://www.espncricinfo.com/icc-cricket-world-cup-2015/engine/match/656495.html (धावफलक)]
|{{cr|NZ}}<br><small>१८३ सर्वबाद (४५ षटके)</small>
|-
!१२
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|इंग्लंड}} |{{flag|वेल्स}} }}
|[[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]
|'''{{cr|ENG}}'''<br><small>२४१ सर्वबाद (५० षटके)</small><br><small>१५/० ([[सुपर ओव्हर]])</small><br><small>२४ चौकार, २ षटकार</small>
| style="text-align:center" |'''सामना बरोबरीत <br> (सीमारेषीय फटक्यांच्या मोजणीवर इंग्लंड विजयी)'''<br>[http://www.espncricinfo.com/icc-cricket-world-cup-2015/engine/match/1144530.html (धावफलक)]
|{{cr|NZ}}<br><small>२४१/८ (५० षटके)</small><br><small>१५/१ ([[सुपर ओव्हर]])</small><br><small>१४ चौकार, ३ षटकार</small>
| rowspan="2" |१०
|-
!१३
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३]]
| style="text-align:left" |{{Flag|भारत}}
|[[नरेंद्र मोदी स्टेडियम]], [[अहमदाबाद]]
|'''{{cr|AUS}}'''<br><small>२४१/४ (४३ षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''[[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३ - अंतिम सामना|ऑस्ट्रेलिया ६ गडी राखून विजयी]]'''<br>[https://www.espncricinfo.com/series/icc-cricket-world-cup-2023-24-1367856/india-vs-australia-final-1384439/full-scorecard (धावफलक)]
|{{cr|IND}}<br><small>२४० सर्वबाद (५० षटके)</small>
|-
!१४
|२०२७
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|दक्षिण आफ्रिका}} |{{flag|झिम्बाब्वे}} |{{flag|नामिबिया}} }}
|ठरायचे आहे
|
|
|
| rowspan="2" |१४
|-
!१५
|२०३१
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|भारत}} |{{flag|बांगलादेश}} }}
|ठरायचे आहे
|
|
|
|}
;नोंदी
{{Notelist}}
क्रिकेट विश्वचषकातील देशांची सर्वोत्तम कामगिरी दर्शविणारा नकाशा (१९७५-२०२३).
[[File:Cricket_World_Cup_Countries'_best_results.svg|thumb|upright=3|center|देशांची सर्वोत्तम कामगिरी दर्शविणारा नकाशा.]]
===विजेतेपदांचा सारांश===
{| class="wikitable sortable"
|-
! संघ
!style="width:40%;| विजेतेपदे
!style="width:40%;| उपविजेतेपदे
|-
|style="background:gold"|{{cr|AUS}}
|style="background:gold"|'''६''' ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]], [[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]])
|style="background:#C0C0C0"|२ ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]])
|-
|style="background:gold"|{{cr|IND}}
|style="background:gold"|'''२''' ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९८३|१९८३]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]])
|style="background:#C0C0C0" |२ ([[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]], [[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]])
|-
|style="background:gold"|{{cr|WIN}}
|style="background:gold"|'''२''' ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]])
|style="background:#C0C0C0"|१ ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९८३|१९८३]])
|-
|style="background:gold"|{{cr|ENG}}
|style="background:gold"|'''१''' ([[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]])
|style="background:#C0C0C0"|३ ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]])
|-
|style="background:gold"|{{cr|SL}}
|style="background:gold"|'''१''' ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]])
|style="background:#C0C0C0"|२ ([[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]])
|-
|style="background:gold"|{{cr|PAK}}
|style="background:gold"|'''१''' ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]])
|style="background:#C0C0C0"|१ ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]])
|-
|style="background:#C0C0C0"|{{cr|NZ}}
|{{N/a}}
|style="background:#C0C0C0"|२ ([[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]])
|}
==स्पर्धेचा सारांश==
वीस देश कमीत कमी एकदा क्रिकेट विश्वचषकासाठी पात्र ठरले आहेत. सहा संघांनी प्रत्येक स्पर्धेत भाग घेतला असून त्यांपैकी पाच संघांनी विजेतेपद पटकावले आहे.<ref name="WCHistory"/> [[वेस्ट इंडीज क्रिकेट संघ|वेस्ट इंडीजने]] पहिल्या दोन स्पर्धा जिंकल्या, [[ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट संघ|ऑस्ट्रेलियाने]] सहा वेळा, [[भारतीय क्रिकेट संघ|भारताने]] दोन वेळा, तर [[पाकिस्तान क्रिकेट संघ|पाकिस्तान]], [[श्रीलंका क्रिकेट संघ|श्रीलंका]] आणि [[इंग्लंड क्रिकेट संघ|इंग्लंड]] यांनी प्रत्येकी एकदा विजेतेपद पटकावले आहे. वेस्ट इंडीज ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]] आणि [[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]]) आणि ऑस्ट्रेलिया ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]] आणि [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]]) हे सलग विजेतेपदे पटकावणारे एकमेव संघ आहेत.<ref name="WCHistory"/> ऑस्ट्रेलियाने तेरा अंतिम सामन्यांपैकी आठ अंतिम सामने ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]] आणि [[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]]) खेळले आहेत. [[न्यू झीलंड क्रिकेट संघ|न्यू झीलंडने]] अद्याप विश्वचषक जिंकलेला नाही, मात्र तो दोनदा उपविजेता ठरला आहे ([[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]] आणि [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]]). कसोटी न खेळणाऱ्या देशाची सर्वोत्तम कामगिरी [[केन्या क्रिकेट संघ|केन्याने]] [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]] स्पर्धेत उपांत्य फेरी गाठणे ही आहे; तर विश्वचषक पदार्पणात कसोटी न खेळणाऱ्या संघाची सर्वोत्तम कामगिरी [[आयर्लंड क्रिकेट संघ|आयर्लंडने]] [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]] मध्ये सुपर ८ (दुसरी फेरी) गाठणे ही आहे.<ref name="WCHistory"/>
[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६ विश्वचषकाचा]] सहयजमान असलेला श्रीलंका हा स्पर्धा जिंकणारा पहिला यजमान संघ ठरला, मात्र अंतिम सामना पाकिस्तानमध्ये झाला होता.<ref name="WCHistory"/> भारताने २०११ मध्ये यजमान म्हणून विजेतेपद पटकावले आणि स्वतःच्या देशात खेळवलेला अंतिम सामना जिंकणारा तो पहिला संघ ठरला.<ref>{{cite news|url=https://news.bbc.co.uk/sport2/hi/cricket/9444277.stm|title=India power past Sri Lanka to Cricket World Cup triumph|publisher=BBC Sport|date=२ एप्रिल २०११|access-date=१७ मार्च २०१५|archive-url=https://web.archive.org/web/20110403035451/http://news.bbc.co.uk/sport1/hi/cricket/9444277.stm|archive-date=३ एप्रिल २०११|url-status=live}}</ref> ऑस्ट्रेलिया आणि इंग्लंडने अनुक्रमे २०१५ आणि २०१९ मध्ये ही कामगिरी केली.<ref name="AUS2015"/> याशिवाय १९७९ मध्ये इंग्लंड आणि २०२३ मध्ये भारत यांनी स्वतःच्या देशात आयोजित स्पर्धेत अंतिम फेरी गाठली. स्पर्धेचे सहयजमान असताना आपली सर्वोत्तम विश्वचषक कामगिरी करणाऱ्या किंवा तिची बरोबरी करणाऱ्या इतर देशांमध्ये २०११ आणि २०१५ मध्ये अनुक्रमे अंतिम फेरी गाठणारे श्रीलंका आणि न्यू झीलंड, २००३ मध्ये सुपर सिक्स फेरी गाठणारा झिम्बाब्वे आणि २००३ मध्ये उपांत्य फेरी गाठणारा केन्या यांचा समावेश होतो.<ref name="WCHistory"/> १९८७ मध्ये सहयजमान भारत आणि पाकिस्तान या दोन्ही संघांनी उपांत्य फेरी गाठली, मात्र त्यांना अनुक्रमे इंग्लंड आणि ऑस्ट्रेलियाकडून पराभव पत्करावा लागला.<ref name="WCHistory"/> १९९२ मध्ये ऑस्ट्रेलिया, १९९९ मध्ये इंग्लंड, २००३ मध्ये दक्षिण आफ्रिका आणि २०११ मध्ये बांगलादेश हे यजमान संघ पहिल्याच फेरीत बाद झाले.<ref>{{Cite web |last=Sportstar |first=Team |date=२०१९-०५-२४ |title=World Cup, 11 editions: How host countries fared |url=https://sportstar.thehindu.com/cricket/icc-cricket-world-cup/cricket-world-cup-host-countries-england-wales-lords-india/article27228795.ece |access-date=२०२२-०८-२२ |website=sportstar.thehindu.com |language=en}}</ref>
===संघांची कामगिरी===
प्रत्येक विश्वचषकातील संघांच्या कामगिरीचा आढावा खाली दिला आहे. प्रत्येक स्पर्धेसाठी अंतिम स्पर्धेत सहभागी झालेल्या संघांची संख्या कंसात दिली आहे.
{| class="wikitable" style="text-align: center;"
|-
!rowspan="2" {{diagonal split header 2|<br/>संघ|संघांची संख्या/<br>हंगाम<br>यजमान}}
!{{small|(८)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]]
!{{small|(८)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]]
!{{small|(८)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, १९८३|१९८३]]
!{{small|(८)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]]
!{{small|(९)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]]
!{{small|(१२)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]]
!{{small|(१२)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]]
!{{small|(१४)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]]
!{{small|(१६)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]]
!{{small|(१४)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]]
!{{small|(१४)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]]
!{{small|(१०)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]]
!{{small|(१०)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३]]
!{{small|(१४)}}<br/>२०२७
! rowspan="2" |{{tooltip|सहभाग|सहभागांची संख्या}}
|-
!{{flagicon|England}}
!{{flagicon|England}}
!{{flagicon|England}}<br/>{{flagicon|Wales}}
!{{flagicon|India}}<br/>{{flagicon|Pakistan}}
!{{flagicon|Australia}}<br/>{{flagicon|New Zealand}}
!{{flagicon|India}}<br/>{{flagicon|Pakistan}}<br/>{{flagicon|Sri Lanka}}
!{{nobr|{{flagicon|England}} {{flagicon|Wales}}}}<br/>{{nobr|{{flagicon|Scotland}} {{flagicon|Ireland}}}}<br/>{{flagicon|Netherlands}}
!{{flagicon|South Africa}}<br/>{{flagicon|Zimbabwe}}<br/>{{flagicon|Kenya}}
!{{flagicon|West Indies}}
!{{flagicon|India}}<br/>{{flagicon|Sri Lanka}}<br/>{{flagicon|Bangladesh}}
!{{flagicon|Australia}}<br/>{{flagicon|New Zealand}}
!{{flagicon|England}}<br/>{{flagicon|Wales}}
!{{flagicon|India}}
!{{flagicon|South Africa}}<br/>{{flagicon|Namibia}}<br/>{{flagicon|Zimbabwe}}
|-
|style="text-align:left"|{{cr|AFG|२०१३}}|| || || || || || || || || || ||गट फेरी||१०वे||६वे|| ठरायचे आहे
| ३
|-
|style="text-align:left"|{{cr|AUS}}||style="background: silver"|'''उपविजेता'''||गट फेरी||गट फेरी||style="background: gold"|'''विजेता'''||style="border: 3px solid red" | ५वे||style="background: silver"|'''उपविजेता'''|| style="background: gold" |'''विजेता'''||style="background: gold"|'''विजेता'''|| style="background: gold" |'''विजेता'''||style="background:#ffebcd;"|'''उपांत्यपूर्व फेरी'''||style="border: 3px solid red; background: gold"|'''विजेता'''||style="background-color: #cc9966"|'''उपांत्य फेरी'''|| style="background: gold" |'''विजेता'''|| ठरायचे आहे
| १३
|-
|style="text-align:left"|{{cr|BAN}}|| || || || || || ||गट फेरी||गट फेरी|| ७वे ||style="border: 3px solid red" |गट फेरी||style="background:#ffebcd;"|'''उपांत्यपूर्व फेरी'''||८वे||| ८वे|| ठरायचे आहे
| ७
|-
|style="text-align:left"|{{cr|BER}}|| || || || || || || || ||गट फेरी|| || |||| ||
| १
|-
|style="text-align:left"|{{cr|CAN}}|| ||गट फेरी|| || || || || ||गट फेरी||गट फेरी||गट फेरी|||||| || ठरायचे आहे
| ४
|-
| style="text-align:left" |{{cr|ENG}}|| style="border: 3px solid red; background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="border: 3px solid red; background: silver" |'''उपविजेता'''|| style="border: 3px solid red; background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background: silver" |'''उपविजेता'''|| style="background: silver" |'''उपविजेता'''|| style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''||style="border: 3px solid red" | गट फेरी|| गट फेरी || ५वे || style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''||गट फेरी|| style="border: 3px solid red; background: gold" |'''विजेता''' || ७वे || ठरायचे आहे
| १३
|-
| style="text-align:left" |{{cr|IND}}||गट फेरी||गट फेरी|| style="background: gold" |'''विजेता'''|| style="border: 3px solid red; background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''||७वे|| style="border: 3px solid red; background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| ६वे|| style="background:silver" |'''उपविजेता'''||गट फेरी|| style="border: 3px solid red; background: gold" |'''विजेता'''|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="border: 3px solid red;background: silver"|'''उपविजेता''' || ठरायचे आहे
| १३
|-
| style="text-align:left" |{{cr|IRE}}|| || || || || || || || || ८वे ||गट फेरी||गट फेरी|| || || ठरायचे आहे
| ३
|-
| style="text-align:left" |{{cr|KEN}}|| || || || || ||गट फेरी||गट फेरी|| style="border: 3px solid red; background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''||गट फेरी||गट फेरी|| || || || ठरायचे आहे
| ५
|-
| style="text-align:left" |{{cr|NAM}}|| || || || || || || ||गट फेरी|| || || || || || ठरायचे आहे
| १
|-
| style="text-align:left" |{{cr|NED}}|| || || || || ||गट फेरी|| ||गट फेरी||गट फेरी||गट फेरी|| || || १०वे || ठरायचे आहे
| ५
|-
| style="text-align:left" |{{cr|NZ}}|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''||गट फेरी||गट फेरी|| style="border: 3px solid red; background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| ५वे || style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="border: 3px solid red; background: silver" |'''उपविजेता'''|| style="background: silver" |'''उपविजेता'''|| style="background-color: #cc9966"|'''उपांत्य फेरी''' || ठरायचे आहे
| १३
|-
| style="text-align:left" |{{cr|PAK}}||गट फेरी|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="border: 3px solid red; background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background: gold" |'''विजेता'''|| style="border: 3px solid red; background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''|| style="background: silver" |'''उपविजेता'''||गट फेरी||गट फेरी|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''||५वे||५वे || ठरायचे आहे
| १३
|-
| style="text-align:left" |{{cr|SCO}}|| || || || || || ||गट फेरी|| ||गट फेरी|| ||गट फेरी|| || || ठरायचे आहे
| ३
|-
| style="text-align:left" |{{cr|SA}}{{efn|name=SAfr}}|| || || || || style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''||style="border: 3px solid red;" |गट फेरी|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''||७वे|| style="background-color: #cc9966"|'''उपांत्य फेरी''' || style="border: 3px solid red" | पात्र
| ९
|-
| style="text-align:left" |{{cr|SRI}}||गट फेरी||गट फेरी||गट फेरी||गट फेरी||८वे|| style="border: 3px solid red; background: gold" |'''विजेता'''||गट फेरी|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background: silver" |'''उपविजेता'''|| style="border: 3px solid red; background: silver" |'''उपविजेता'''|| style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''||६वे|| ९वे || ठरायचे आहे
| १३
|-
| style="text-align:left" | {{nobr|{{cr|UAE}}}}|| || || || || ||गट फेरी|| || || || ||गट फेरी|| || || ठरायचे आहे
| २
|-
| style="text-align:left" |{{cr|WIN}}|| style="background: gold" |'''विजेता'''|| style="background: gold" |'''विजेता'''|| style="background: silver" |'''उपविजेता'''||गट फेरी||६वे|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''||गट फेरी||गट फेरी||style="border: 3px solid red;" |६वे || style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''|| style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''|||९वे|| || ठरायचे आहे
| १२
|-
| style="text-align:left" |{{cr|ZIM}}|| || ||गट फेरी||गट फेरी||९वे||गट फेरी|| ५वे || style="border: 3px solid red;" |६वे ||गट फेरी||गट फेरी||गट फेरी|| || || style="border: 3px solid red" | पात्र
| ९
|-
! colspan="16" |निष्क्रिय संघ
|-
|style="text-align:left"| {{flag|पूर्व आफ्रिका}}{{efn|name=EAfr}}|||गट फेरी|| || || ||colspan=10 {{n/a}}
| १
|}
'''संकेत'''
*{{bg|gold|विजेता}} - विजेता
*{{bg|silver|उपविजेता}} - उपविजेता
*{{bg|#cc9966|उपांत्य फेरी}} - उपांत्य फेरी
*{{bg|#BBF3BB|सुपर सिक्स}} - सुपर सिक्स (१९९९-२००३)
*{{bg|#ffebcd|उपांत्यपूर्व फेरी}} - उपांत्यपूर्व फेरी (१९९६, २०११-२०१५)
*{{bg|#ffebcd|सुपर एट}} - सुपर एट (२००७)
*गट फेरी - गट फेरी / पहिली फेरी
*पात्र - पात्र, अजूनही स्पर्धेत
*{{border|width=3px|color=red| }} - यजमान
===पदार्पण करणारे संघ===
{| class="wikitable" style="text-align: left;"
|-
!वर्ष
!संघ
!एकूण
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]]
|{{cr|AUS}}, {{flag|पूर्व आफ्रिका}},{{efn|name=EAfr}} {{cr|ENG}}, {{cr|IND}}, {{cr|NZ}}, {{cr|PAK}}, {{cr|WIN}}, {{cr|SL}}
|८
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]]
|{{cr|CAN}}
|१
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९८३|१९८३]]
|{{cr|ZIM}}
|१
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]]
|''कोणीही नाही''
|०
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]]
|{{cr|SA|}}{{efn|name=SAfr}}
|१
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]]
|{{cr|KEN}}, {{cr|NED}}, {{cr|UAE}}
|३
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]]
|{{cr|BAN}}, {{cr|SCO}}
|२
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]]
|{{cr|NAM}}
|१
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]]
|{{cr|BER}}, {{cr|IRE}}
|२
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]]
|''कोणीही नाही''
|०
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]]
|{{cr|AFG|२०१३}}
|१
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]]
|''कोणीही नाही''
|०
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३]]
|''कोणीही नाही''
|०
|}
===आढावा===
[[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३ स्पर्धेच्या]] समाप्तीपर्यंतच्या मागील विश्वचषकांमधील संघांच्या कामगिरीचा आढावा खालील तक्त्यात दिला आहे. संघांची मांडणी प्रथम सर्वोत्तम कामगिरीनुसार, त्यानंतर सहभागांची संख्या, विजयाची टक्केवारी, एकूण विजय, एकूण सामने आणि शेवटी वर्णक्रमानुसार करण्यात आली आहे:
{| class="wikitable sortable" style="text-align: center;"
|-
! rowspan="2"style="width:150px;"|संघ
! colspan=7 | आकडेवारी
! rowspan="2" class="unsortable" | सर्वोत्तम कामगिरी
|-
!width=30|सहभाग
!width=30|{{abbr|सामने|खेळलेले सामने}}
!width=30|विजय
!width=30|पराभव
!width=30|बरोबरी
!width=30|निकाल नाही
!width=30|विजय %*
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Australia}}
|१३||१०५||७८||२५||१||१||७५.४८||style="background:gold;" | विजेता {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|India}}
|१३||९५||६३||३०||१||१||६७.५५||style="background:gold;" | विजेता {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९८३|१९८३]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|West Indies}}
|१२||८०||४३||३५||०||२||५५.१२||style="background:gold;" | विजेता {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|England}}
|१३||९३||५२||३९||१||१||५७.१४||style="background:gold;" | विजेता {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Pakistan}}
|१३||८८||४९||३७||०||२||५६.९७||style="background:gold;" | विजेता {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Sri Lanka}}
|१३||८९||४०||४६||१||२||४६.५५||style="background:gold;" | विजेता {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|New Zealand}}
|१३||९९||५९||३८||१||१||६०.७१||style="background-color: silver" | उपविजेता {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|South Africa}}
|९||७४||४५||२६||२||१||६३.०१||style="background-color: #cc9966" | उपांत्य फेरी {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Kenya}}
|५||२९||६||२२||०||०||२१.४२||style="background-color: #cc9966"| उपांत्य फेरी {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Zimbabwe}}
|९||५७||११||४२||१||३||२१.२९||{{sort|5.4|सुपर ६}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Bangladesh}}
|७||४९||१६||३२||०||१||३३.३३||{{sort|7.4|सुपर ८}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]])}} आणि {{sort|7.4|उपांत्यपूर्व फेरी}} <small>([[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]])</small>
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Ireland}}
|३||२१||७||१३||१||०||३५.७१||{{sort|7.5|सुपर ८}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Netherlands}}
|५||२९||४||२५||०||०||१३.७९||{{sort|9.2|गट फेरी}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Canada}}
|४||१८||२||१६||०||०||११.११||{{sort|9.2|गट फेरी}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]])}}
|-
| style="text-align:left;" |{{nowrap|{{Cr|AFG|२०१३}}}}
|३||२४||५||१९||०||०||२०.८३||{{sort|9.5|गट फेरी}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Scotland}}
|३||१४||०||१४||०||०||०.००||{{sort|9.3|गट फेरी}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{nowrap|{{Cr|UAE}}}}
|२||११||१||१०||०||०||९.०९||{{sort|9.4|गट फेरी}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Namibia}}
|१||६||०||६||०||०||०.००||{{sort|9.5|गट फेरी}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Bermuda}}
|१||३||०||३||०||०||०.००||{{sort|9.5|गट फेरी}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]])}}
|-
! colspan="11" |निष्क्रिय संघ
|-
|style="text-align:left;"|{{flag|पूर्व आफ्रिका}}{{efn|name=EAfr}}
|१||३||०||३||०||०||०.००||{{sort|9.5|गट फेरी}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]])}}
|-
!colspan=11|{{smalldiv|1={{Updated|१९ नोव्हेंबर २०२३}}<br/>स्रोत: [http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/team/results_summary.html?id=12;type=trophy क्रिकइन्फो]}}
|}
''नोंद:''
* {{small|विजयाच्या टक्केवारीत अनिर्णित सामने वगळले आहेत आणि बरोबरीचा सामना अर्धा विजय म्हणून गणला आहे.}}
* {{small|संघांची क्रमवारी प्रथम सर्वोत्तम कामगिरीनुसार, त्यानंतर विजयाच्या टक्केवारीनुसार आणि ती समान असल्यास वर्णक्रमानुसार लावली आहे.}}
{{notelist|refs=
{{efn|name=EAfr|१९८९ मध्ये संघ विसर्जित करण्यात आला.}}
{{efn|name=SAfr|१९९२ विश्वचषकापूर्वी [[वर्णभेद|वर्णभेदामुळे]] दक्षिण आफ्रिकेवर बंदी होती.}}
}}
==इतर परिणाम==
{{col-begin}}
{{col-break}}
===यजमान संघांचे निकाल===
{| class="wikitable"
|-
! वर्ष
! यजमान संघ
! समाप्त केले
|-
| [[१९७५ क्रिकेट विश्वचषक|१९७५]]
| {{cr|England}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| [[१९७९ क्रिकेट विश्वचषक|१९७९]]
| {{cr|England}}
| bgcolor=Silver| '''उपविजेते'''
|-
| [[१९८३ क्रिकेट विश्वचषक|१९८३]]
| {{cr|England}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| rowspan=2|[[१९८७ क्रिकेट विश्वचषक|१९८७]]
| {{cr|India}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| {{cr|Pakistan}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| rowspan=2|[[१९९२ क्रिकेट विश्वचषक|१९९२]]
| {{cr|Australia}}
| राउंड रॉबिन
|-
| {{cr|New Zealand}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| rowspan=3|[[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]
| {{cr|India}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| {{cr|Pakistan}}
| bgcolor=#FFEBCD| उपांत्यपूर्व फेरीत
|-
| {{cr|Sri Lanka}}
| bgcolor=Gold| '''चॅम्पियन्स'''
|-
| rowspan=4|[[१९९९ क्रिकेट विश्वचषक|१९९९]]
| {{cr|England}}
| ग्रुप स्टेज
|-
| {{cr|Scotland}}
| ग्रुप स्टेज
|-
| {{cr|Netherlands}}
| ''खेळला नाही''
|-
| {{cr|Ireland}}
| ''खेळला नाही''
|-
| rowspan=3|[[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]]
| {{crw|South Africa}}
| ग्रुप स्टेज
|-
| {{cr|Zimbabwe}}
| bgcolor=#BBF3BB| सुपर ६
|-
| {{cr|Kenya}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| [[२००७ क्रिकेट विश्वचषक|२००७]]
| {{cr|West Indies}}
| bgcolor=#FFEBCD| सुपर ८
|-
| rowspan=3|[[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]]
| {{cr|India}}
| bgcolor=Gold| '''चॅम्पियन्स'''
|-
| {{cr|Sri Lanka}}
| bgcolor=Silver| '''उपविजेते'''
|-
| {{cr|Bangladesh}}
| ग्रुप स्टेज
|-
| rowspan=2|[[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]]
| {{cr|Australia}}
| bgcolor=Gold| '''चॅम्पियन्स'''
|-
| {{cr|New Zealand}}
| bgcolor=Silver| '''उपविजेते'''
|-
| [[२०१९ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९]]
| {{cr|England}}
| bgcolor=Gold| '''चॅम्पियन्स'''
|-
| [[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]]
| {{cr|India}}
| bgcolor=Silver| '''उपविजेते'''
|-
| rowspan=3|[[२०२७ क्रिकेट विश्वचषक|२०२७]]
| {{cr|South Africa}}
|
|-
| {{cr|Zimbabwe}}
|
|-
| {{cr|Namibia}}
|
|-
| rowspan=3|[[२०३१ क्रिकेट विश्वचषक|२०३१]]
| {{cr|India}}
|
|-
| {{cr|Bangladesh}}
|
|-
|}
{{col-break}}
===गतविजेत्याचे निकाल===
{| class="wikitable"
|-
! वर्ष
! गतविजेते
! समाप्त केले
|-
| [[१९७९ क्रिकेट विश्वचषक|१९७९]]
| {{cr|West Indies}}
| bgcolor=Gold| '''चॅम्पियन्स'''
|-
| [[१९८३ क्रिकेट विश्वचषक|१९८३]]
| {{cr|West Indies}}
| bgcolor=Silver| '''उपविजेते'''
|-
| [[१९८७ क्रिकेट विश्वचषक|१९८७]]
| {{cr|India}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| [[१९९२ क्रिकेट विश्वचषक|१९९२]]
| {{cr|Australia}}
| राउंड रॉबिन
|-
| [[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]
| {{cr|Pakistan}}
| bgcolor=#FFEBCD| उपांत्यपूर्व फेरीत
|-
| [[१९९९ क्रिकेट विश्वचषक|१९९९]]
| {{cr|Sri Lanka}}
| ग्रुप स्टेज
|-
| [[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]]
| {{cr|Australia}}
| bgcolor=Gold| '''चॅम्पियन्स'''
|-
| [[२००७ क्रिकेट विश्वचषक|२००७]]
| {{cr|Australia}}
| bgcolor=Gold| '''चॅम्पियन्स'''
|-
| [[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]]
| {{cr|Australia}}
| bgcolor=#FFEBCD| उपांत्यपूर्व फेरीत
|-
| [[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]]
| {{cr|India}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| [[२०१९ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९]]
| {{cr|Australia}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| [[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]]
| {{cr|England}}
| राउंड रॉबिन
|-
| [[२०२७ क्रिकेट विश्वचषक|२०२७]]
| {{cr|Australia}}
|
|-
|}
{{col-end}}
==स्पर्धेचे रेकॉर्ड==
{{main|क्रिकेट विश्वचषकातील विक्रमांची यादी}}
[[File:Sachin Tendulkar at MRF Promotion Event.jpg|right|thumbnail|विश्वचषकाच्या इतिहासात सर्वाधिक धावा करणारा [[सचिन तेंडुलकर]]]]
[[File:Glenn McGrath in Circular Quay, Sydney, Australia, 2018-02-03.jpg|thumbnail| विश्वचषकाच्या इतिहासातील आघाडीचा विकेट घेणारा गोलंदाज]]
{| class="wikitable"
|-
! colspan="3" | विश्वचषकातील विक्रम<ref>All records are based on statistics at [[ईएसपीएन क्रिकइन्फो]].com's list of [http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/index.html?id=12;type=trophy World Cup records] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20070103091603/http://www.cricinfo.com/db/STATS/WC/ |date=3 January 2007 }}</ref>
|-
! colspan="3" | फलंदाजी
|-
|सर्वाधिक धावा
|{{flagicon|India}} [[सचिन तेंडुलकर]]
|२,२७८ ([[१९९२ क्रिकेट विश्वचषक|१९९२]]–[[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]])
|-
|[[फलंदाजीची सरासरी (क्रिकेट)|सर्वोच्च सरासरी]] (किमान १० डाव) <ref>{{cite web|url=http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/batting/highest_career_batting_average.html?id=12;type=trophy|title=Best Average in Cricket World Cup|publisher=ESPN Cricinfo|access-date=14 July 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190626190708/http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/batting/highest_career_batting_average.html?id=12;type=trophy|archive-date=26 June 2019|url-status=live}}</ref>
|{{flagicon|South Africa}} [[लान्स क्लुसनर]]
|१२४.०० ([[१९९९ क्रिकेट विश्वचषक|१९९९]]–[[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]])
|-
|सर्वोच्च [[स्ट्राइक रेट|फलंदाजी स्ट्राइक रेट]] (किमान ५०० चेंडूंचा सामना केला)
|{{flagicon|Australia}} [[ग्लेन मॅक्सवेल]]
|१६०.३२ ([[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]]–[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]])
|-
|सर्वोच्च स्कोअर
| {{flagicon|New Zealand}} [[मार्टिन गप्टिल]] वि {{Flag|वेस्ट इंडीज}}
|२३७[[नाबाद|*]] ([[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]])
|-
|सर्वोच्च [[भागीदारी (क्रिकेट)|भागीदारी]]
| {{flagicon|West Indies}} [[ख्रिस गेल]] आणि [[मार्लन सॅम्युअल्स]] <br> (दुसऱ्या गड्यासाठी) वि {{cr|Zimbabwe}}
|३७२ ([[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]])
|-
|एकाच विश्वचषकात सर्वाधिक धावा
|{{flagicon|India}} [[विराट कोहली]]
|७६५ ([[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]])
|-
|सर्वाधिक शतक
|{{flagicon|India}} [[रोहित शर्मा]]
|७ ([[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]]-[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]])
|-
|एकाच विश्वचषकात सर्वाधिक शतके
|{{flagicon|IND}} [[रोहित शर्मा]]
|५ ([[२०१९ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९]])
|-
! colspan="3" | गोलंदाजी
|-
|सर्वाधिक बळी
|{{flagicon|Australia}} [[ग्लेन मॅकग्रा]]
|७१ ([[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]–[[२००७ क्रिकेट विश्वचषक|२००७]])
|-
|[[गोलंदाजीची सरासरी|सर्वात कमी सरासरी]] (किमान ४०० चेंडू टाकले)
|{{flagicon|India}} [[मोहम्मद शमी]]
|१३.५२ ([[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]]–[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]])
|-
|सर्वोत्तम [[स्ट्राइक रेट]] (किमान २० बळी)
|{{flagicon|India}} [[मोहम्मद शमी]]
|१५.८१ ([[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]]–[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]])
|-
|सर्वोत्तम [[इकॉनॉमी रेट]] (किमान १००० चेंडू टाकले)
|{{flagicon|West Indies}} [[अँडी रॉबर्ट्स]]
|३.२४ ([[१९७५ क्रिकेट विश्वचषक|१९७५]]–[[१९८३ क्रिकेट विश्वचषक|१९८३]])
|-
|सर्वोत्तम गोलंदाजी आकडेवारी
|{{flagicon|Australia}} [[ग्लेन मॅकग्रा]] वि {{cr|Namibia}}
|७/१५ ([[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]])
|-
|स्पर्धेत सर्वाधिक बळी
|{{flagicon|Australia}} [[मिचेल स्टार्क]]
|२७ ([[२०१९ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९]])
|-
! colspan="3" | क्षेत्ररक्षण
|-
|सर्वाधिक बाद ([[यष्टिरक्षक]])
|{{flagicon|Sri Lanka}} [[कुमार संगकारा]]
|५४ ([[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]]–[[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]])
|-
|सर्वाधिक झेल ([[क्षेत्ररक्षण (क्रिकेट)|क्षेत्ररक्षक]])
|{{flagicon|Australia}} [[रिकी पाँटिंग]]
|२८ ([[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]–[[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]])
|-
! colspan="3" | संघ
|-
|सर्वोच्च स्कोअर
|{{cr|South Africa}} वि {{cr|Sri Lanka}}
|४२८/५ ([[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]])
|-
|सर्वात कमी स्कोअर
|{{cr|Canada}} वि {{cr|Sri Lanka}}
|३६ ([[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]])
|-
|सर्वोच्च विजय %
|{{flagicon|Australia}} ऑस्ट्रेलिया
|७५.४८% (१०५ खेळले, ७८ जिंकले)<ref>{{cite web |title=World Cup Cricket Team Records & Stats |url=http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/team/results_summary.html?id=12;type=trophy |website=ESPNCricinfo |access-date=22 June 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110227115818/http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/team/results_summary.html?id=12%3Btype%3Dtrophy |archive-date=27 February 2011 |url-status=live }}</ref>
|-
|सर्वाधिक सलग विजय
|{{flagicon|Australia}} ऑस्ट्रेलिया
|२७ (२० जून १९९९ – १९ मार्च २०११, एक [[निकाल (क्रिकेट)#परिणाम नाही|निकाल नाही]] वगळला)<ref>{{cite web|url=http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/stats/index.html?class=2;filter=advanced;orderby=start;size=100;spanmax2=20+mar+2011;spanmin2=23+May+1999;spanval2=span;team=2;template=results;trophy=12;type=team;view=results|title=Statistics / Statsguru / One-Day Internationals / Team records|publisher=Cricinfo|access-date=30 March 2015|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20150911093616/http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/stats/index.html?class=2%3Bfilter%3Dadvanced%3Borderby%3Dstart%3Bsize%3D100%3Bspanmax2%3D20+mar+2011%3Bspanmin2%3D23+May+1999%3Bspanval2%3Dspan%3Bteam%3D2%3Btemplate%3Dresults%3Btrophy%3D12%3Btype%3Dteam%3Bview%3Dresults|archive-date=11 September 2015}}</ref>
|-
|सलग सर्वाधिक स्पर्धा जिंकतो
|{{flagicon|Australia}} ऑस्ट्रेलिया
|३ ([[१९९९ क्रिकेट विश्वचषक|१९९९]]–[[२००७ क्रिकेट विश्वचषक|२००७]])
|}
===स्पर्धेद्वारे===
{{main|क्रिकेट विश्वचषक पुरस्कार}}
{| class="wikitable"
|-
! वर्ष !! विजयी कर्णधार !! अंतिम सामन्यातील सर्वोत्तम खेळाडू !! स्पर्धेतील सर्वोत्तम खेळाडू !! सर्वाधिक धावा !! सर्वाधिक बळी
|-
| [[१९७५ क्रिकेट विश्वचषक|१९७५]] || {{flagicon|WIN}} [[क्लाइव्ह लॉईड]] || {{flagicon|WIN}} [[क्लाइव्ह लॉईड]]<ref name=potm_75-19>{{Cite web |title=ODI World Cup Finals: Full list of Player of the Match award winners from 1975 to 2019|url=https://sportstar.thehindu.com/cricket/icc-cricket-world-cup/odi-world-cup-final-man-of-the-match-list-award-winners-performances-records-stats-india-vs-australia-2023/article67550186.ece/|access-date=19 November 2023 |website=Sportstar|date=19 November 2023 }}</ref> || पुरस्कार मिळालेला नाही|| {{flagicon|NZ}} [[ग्लेन टर्नर]] (३३३) || {{flagicon|AUS}} [[गॅरी गिलमोर]] (११)
|-
|[[१९७९ क्रिकेट विश्वचषक|१९७९]] || {{flagicon|WIN}} [[क्लाइव्ह लॉईड]] || {{flagicon|WIN}} [[विव्ह रिचर्ड्स]]<ref name=potm_75-19/> || पुरस्कार मिळालेला नाही|| {{flagicon|WIN}} [[गॉर्डन ग्रीनिज]] (२५३) || {{flagicon|ENG}} [[माइक हेंड्रिक्स]] (१०)
|-
| [[१९८३ क्रिकेट विश्वचषक|१९८३]] ||{{flagicon|IND}} [[कपिल देव]] || {{flagicon|IND}} [[मोहिंदर अमरनाथ]]<ref name=potm_75-19/> || पुरस्कार मिळालेला नाही || {{flagicon|ENG}} [[डेव्हिड गोवर]] (३८४) || {{flagicon|IND}} [[रॉजर बिन्नी]] (१८)
|-
| [[१९८७ क्रिकेट विश्वचषक|१९८७]] ||{{flagicon|AUS}} [[ॲलन बॉर्डर]]|| {{flagicon|AUS}} [[डेव्हिड बून]]<ref name=potm_75-19/> || पुरस्कार मिळालेला नाही ||{{flagicon|ENG}} [[ग्रॅहम गूच]] (४७१) || {{flagicon|AUS}} [[क्रेग मॅकडरमॉट]] (१८)
|-
| [[१९९२ क्रिकेट विश्वचषक|१९९२]] ||{{flagicon|PAK}} [[इम्रान खान]] || {{flagicon|PAK}} [[वसीम अक्रम]]<ref name=potm_75-19/> ||{{flagicon|NZ}} [[मार्टिन क्रो]]<ref name=potm_75-19/> || {{flagicon|NZ}} [[मार्टिन क्रो]] (४५६) || {{flagicon|PAK}} [[वसीम अक्रम]] (१८)
|-
| [[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]||{{flagicon|SL}} [[अर्जुन रणतुंगा]] || {{flagicon|SL}} [[अरविंदा डी सिल्वा]]<ref name=potm_75-19/> || {{flagicon|SL}} [[सनथ जयसूर्या]]<ref name=potm_75-19/> || {{flagicon|IND}} [[सचिन तेंडुलकर]] (५२३) ||{{flagicon|IND}} [[अनिल कुंबळे]] (१५)
|-
| [[१९९९ क्रिकेट विश्वचषक|१९९९]] ||{{flagicon|AUS}} [[स्टीव्ह वॉ]] || {{flagicon|AUS}} [[शेन वॉर्न]]<ref name=potm99>{{Cite web |title=Australia vs Pakistan, ICC World Cup 1999 |url=https://www.espncricinfo.com/series/icc-world-cup-1999-61046/australia-vs-pakistan-final-65234/full-scorecard |access-date=19 November 2023 |website=ESPNcricinfo}}</ref>||{{flagicon|SA}} [[लान्स क्लुसनर]]<ref name=potm99/> || {{flagicon|IND}} [[राहुल द्रविड]] (४६१) ||{{flagicon|NZ}} [[जिऑफ ॲलॉट]] / <br/> {{flagicon|AUS}} [[शेन वॉर्न]] (२०)
|-
|[[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]] || {{flagicon|AUS}} [[रिकी पाँटिंग]] || {{flagicon|AUS}} [[रिकी पाँटिंग]]<ref name=potm03>{{Cite web |date=23 March 2003 |title=Australia vs India, ICC World Cup 2003 Final |url=https://www.espncricinfo.com/series/icc-world-cup-2002-03-61124/australia-vs-india-final-65286/full-scorecard |access-date=19 November 2023 |website=ESPNcricinfo}}</ref>|| {{flagicon|IND}} [[सचिन तेंडुलकर]]<ref name=potm03/> || {{flagicon|IND}} [[सचिन तेंडुलकर]] (६७३) || {{flagicon|SL}} [[चमिंडा वास]] (२३)
|-
|[[२००७ क्रिकेट विश्वचषक|२००७]] || {{flagicon|AUS}} [[रिकी पाँटिंग]] || {{flagicon|AUS}} [[ॲडम गिलख्रिस्ट]]<ref>{{Cite web |date=18 November 2018 |title=This day, that year: Adam Gilchrist scores 149 to gift Australia World Cup |url=https://www.hindustantimes.com/cricket/this-day-that-year-adam-gilchrist-scores-149-to-gift-australia-world-cup/story-k3ebcJURetMZw8I7ztP4CK.html |access-date=19 November 2023 |website=Hindustan Times}}</ref>|| {{flagicon|AUS}} [[ग्लेन मॅकग्रा]]<ref>{{Cite web |date=29 April 2007 |title=McGrath bows out winning Player of the Tournament award |url=https://www.espncricinfo.com/story/mcgrath-bows-out-winning-player-of-the-tournament-award-292785 |access-date=19 November 2023 |website=ESPNcricinfo}}</ref>|| {{flagicon|AUS}} [[मॅथ्यू हेडन]] (६५९) || {{flagicon|AUS}} [[ग्लेन मॅकग्रा]] (२६)
|-
|[[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]] || {{flagicon|IND}} [[महेंद्रसिंग धोनी]] || {{flagicon|IND}} [[महेंद्रसिंग धोनी]]<ref name="hindustantimes.com">{{Cite web |date=11 November 2011 |title=Yuvraj Player of the Tournament; Dhoni Man of the Match of WC final |url=https://www.hindustantimes.com/cricket/yuvraj-player-of-the-tournament-dhoni-man-of-the-match-of-wc-final/story-8ll0UfgXUaIUtVeIrJMOIM.html |access-date=19 November 2023 |website=Hindustan Times}}</ref>|| {{flagicon|IND}} [[युवराज सिंग]]<ref name="hindustantimes.com"/>|| {{flagicon|SL}} [[तिलकरत्ने दिलशान]] (५००) || {{flagicon|PAK}} [[शाहिद आफ्रिदी]] / <br/> {{flagicon|IND}} [[झहीर खान]] (२१)
|-
|[[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]] || {{flagicon|AUS}} [[मायकेल क्लार्क (क्रिकेटर)|मायकेल क्लार्क]] ||{{flagicon|AUS}} [[जेम्स फॉकनर]]<ref>{{Cite web |date=29 March 2015 |title=James Faulkner Emerges From the Shadows of Two Mitchells in World Cup Final |url=https://sports.ndtv.com/icc-cricket-world-cup-2015/james-faulkner-emerges-from-the-shadows-of-two-mitchells-in-world-cup-final-1502822 |access-date=19 November 2023 |website=NDTV }}{{मृत दुवा|date=July 2025 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref>||{{flagicon|AUS}} [[मिचेल स्टार्क]]<ref>{{Cite web |date=29 March 2015 |title=Mitchell Starc named as player of ICC World Cup 2015 |url=https://www.indiatoday.in/sports/world-cup-2015/story/mitchell-starc-world-cup-2015-australia-new-zealand-246307-2015-03-29 |access-date=19 November 2023 |website=India Today}}</ref>||{{flagicon|NZ}} [[मार्टिन गप्टिल]] (५४७) || {{flagicon|AUS}} [[मिचेल स्टार्क]] / <br/>{{flagicon|NZ}} [[ट्रेंट बोल्ट]] (२२)
|-
|[[२०१९ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९]] || {{flagicon|ENG}} [[इऑन मॉर्गन]] ||{{flagicon|ENG}} [[बेन स्टोक्स]]<ref name=potm19>{{Cite web |date=15 July 2019 |title=World Cup 2019 Awards Winners: Man of the Tournament and Man of the Match |url=https://indianexpress.com/article/sports/cricket-world-cup/cricket-world-cup-2019-awards-winners-list-man-of-the-tournament-and-man-of-the-match-5829154/ |access-date=19 November 2023 |website=Indian Express}}</ref>|| {{flagicon|NZ}} [[केन विल्यमसन]]<ref name=potm19/>|| {{flagicon|IND}} [[रोहित शर्मा]] (६४८) || {{flagicon|AUS}} [[मिचेल स्टार्क]] (२७)
|-
|[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]] || {{flagicon|AUS}} [[पॅट कमिन्स]] || {{flagicon|AUS}} [[ट्रॅव्हिस हेड]]<ref>{{Cite web |date=19 November 2023 |title=Travis Head delivers World Cup final masterclass in POTM display |url=https://www.cricketworldcup.com/news/3789833 |access-date=19 November 2023 |website=cricketworldcup.com }}{{मृत दुवा|date=September 2025 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref>|| {{flagicon|IND}} [[विराट कोहली]]<ref>{{Cite web |date=19 November 2023 |title=India star named Player of the Tournament at ICC Men's Cricket World Cup |url=https://www.icc-cricket.com/news/3789837 |access-date=19 November 2023 |website=ICC}}</ref>||{{flagicon|IND}} [[विराट कोहली]] (७६५) || {{flagicon|IND}} [[मोहम्मद शमी]] (२४)
|-
|}
==हे देखील पहा==
*[[आयसीसी अंडर-१९ क्रिकेट विश्वचषक]]
*[[आयसीसी टी-२० विश्वचषक]]
*[[आयसीसी चॅम्पियन्स ट्रॉफी]]
*[[आयसीसी वर्ल्ड टेस्ट चॅम्पियनशिप]]
*[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक]]
*[[महिला क्रिकेट विश्वचषक]]
*[[आशिया कप]]
*[[विश्व चषक]]
*[[विश्वचषकांची यादी]]
==संदर्भ==
{{संदर्भयादी}}
===स्रोत===
* {{cite book
| last=Browning
| first=Mark
| title=A complete history of World Cup Cricket
| url=https://archive.org/details/completehistoryo0000brow
| publisher=[[Simon & Schuster]]
| year=1999
| isbn=0-7318-0833-9 }}
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*{{official website|https://www.cricketworldcup.com/}} आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक
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| caption = आयसीसी पुरुष क्रिकेट विश्वचषक ट्रॉफी
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* [[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, १९८३|१९८३]]
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* [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]]
* [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]]
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* [[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]]
* ''२०२७''
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{{आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्पर्धा साइडबार}}
'''क्रिकेट विश्वचषक''', अधिकृतपणे '''आयसीसी पुरुष क्रिकेट विश्वचषक''' म्हणून ओळखला जातो,<ref>{{cite web |title=ICC Men's Cricket World Cup 2019 shatters audience records|url=https://www.icc-cricket.com/media-releases/1277987 |publisher=[[International Cricket Council|ICC]] |access-date=12 April 2021 }}</ref> ही एकदिवसीय आंतरराष्ट्रीय (वनडे) क्रिकेटची आंतरराष्ट्रीय चॅम्पियनशिप आहे. आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आयसीसी) या खेळाच्या प्रशासकीय मंडळाद्वारे हा कार्यक्रम दर चार वर्षांनी आयोजित केला जातो, ज्यामध्ये प्राथमिक पात्रता फेरी अंतिम स्पर्धेपर्यंत जाते. ही स्पर्धा जगातील सर्वाधिक पाहिल्या गेलेल्या क्रीडा स्पर्धांपैकी एक आहे आणि आयसीसी द्वारे "आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कॅलेंडरचा प्रमुख कार्यक्रम" म्हणून गणली जाते.<ref>[http://www.cricketworldcup.com/about ICC Cricket World Cup: About]
{{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130601200603/http://www.cricketworldcup.com/about |date=1 June 2013 }} – International Cricket Council. Retrieved 30 June 2013.</ref> हे क्रिकेट खेळाचे सर्वोच्च चॅम्पियनशिप मानले जाते.
पहिला विश्वचषक जून १९७५ मध्ये इंग्लंडमध्ये आयोजित करण्यात आला होता, पहिला एकदिवसीय क्रिकेट सामना फक्त चार वर्षांपूर्वी खेळला गेला होता. तथापि, पहिल्या पुरुषांच्या स्पर्धेच्या दोन वर्षे आधी एक वेगळा महिला क्रिकेट विश्वचषक आयोजित करण्यात आला होता आणि ऑस्ट्रेलिया, इंग्लंड आणि दक्षिण आफ्रिका यांच्यात कसोटी सामन्यांची त्रिकोणी स्पर्धा खेळली जात असताना १९१२ च्या सुरुवातीला अनेक आंतरराष्ट्रीय संघांचा समावेश असलेली स्पर्धा आयोजित करण्यात आली होती. पहिले तीन विश्वचषक इंग्लंडमध्ये झाले. १९८७ च्या स्पर्धेपासून, एका अनौपचारिक रोटेशन प्रणाली अंतर्गत देशांदरम्यान होस्टिंग सामायिक केले गेले आहे, चौदा आयसीसी सदस्यांनी स्पर्धेत किमान एक सामना आयोजित केला आहे.
स्पर्धेच्या टप्प्यासाठी कोणते संघ पात्र ठरतात हे निर्धारित करण्यासाठी सध्याच्या फॉरमॅटमध्ये पात्रता टप्प्याचा समावेश आहे, जो मागील तीन वर्षांमध्ये होतो. स्पर्धेच्या टप्प्यात, आपोआप पात्र ठरलेल्या यजमान राष्ट्रासह १० संघ, यजमान राष्ट्रामधील ठिकाणांवर जवळपास एक महिन्याच्या कालावधीत विजेतेपदासाठी स्पर्धा करतात. २०२७ च्या आवृत्तीमध्ये, विस्तारित १४-संघ अंतिम स्पर्धा सामावून घेण्यासाठी स्वरूप बदलले जाईल.<ref>{{cite web|url=https://www.espncricinfo.com/story/_/id/27384084/how-teams-secure-qualification-rank-no-1-32 |title=The road to World Cup 2023: how teams can secure qualification, from rank No. 1 to 32 |work=ESPN Cricinfo |access-date=14 August 2019}}</ref>
एकूण वीस संघांनी स्पर्धेच्या १३ आवृत्त्यांमध्ये भाग घेतला आहे, ज्यामध्ये अलीकडील २०२३ स्पर्धेत दहा संघ सहभागी झाले आहेत. ऑस्ट्रेलियाने सहा वेळा, भारत आणि वेस्ट इंडीजने प्रत्येकी दोनदा, तर पाकिस्तान, श्रीलंका आणि इंग्लंडने प्रत्येकी एकदा ही स्पर्धा जिंकली आहे. पूर्ण-सदस्य नसलेल्या संघाची सर्वोत्तम कामगिरी केन्याने २००३ स्पर्धेच्या उपांत्य फेरीत प्रवेश केला.
२०२३ साली भारतात झालेल्या विश्वचषक स्पर्धेत ऑस्ट्रेलिया हा सध्याचा चॅम्पियन आहे. त्यानंतरचा २०२७ विश्वचषक दक्षिण आफ्रिका, झिम्बाब्वे आणि नामिबिया येथे संयुक्तपणे होणार आहे.
==इतिहास==
{| class="wikitable floatright" style="text-align:center; font-size:85%"
|+ क्रिकेट विश्वचषक
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! वर्ष !!style="width:200px"| चॅम्पियन्स
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| [[१९७५ क्रिकेट विश्वचषक|१९७५]]
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| [[१९७९ क्रिकेट विश्वचषक|१९७९]]
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| [[१९८३ क्रिकेट विश्वचषक|१९८३]]
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| [[१९८७ क्रिकेट विश्वचषक|१९८७]]
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| [[१९९२ क्रिकेट विश्वचषक|१९९२]]
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| [[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]
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| [[१९९९ क्रिकेट विश्वचषक|१९९९]]
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| [[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]]
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| [[२००७ क्रिकेट विश्वचषक|२००७]]
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| [[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]]
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| [[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]]
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| [[२०१९ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९]]
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|[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]]
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{{main|क्रिकेट विश्वचषकाचा इतिहास}}
२४ आणि २५ सप्टेंबर १८४४ रोजी कॅनडा आणि युनायटेड स्टेट्स यांच्यात पहिला आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सामना खेळला गेला.<ref>{{cite news |url=http://www.espncricinfo.com/magazine/content/story/141170.html |title=The oldest international contest of them all |author=Martin Williamson |publisher=ESPN |access-date=5 July 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130605032043/http://www.espncricinfo.com/magazine/content/story/141170.html |archive-date=5 June 2013 |url-status=live}}</ref> तथापि, पहिला श्रेय दिलेला कसोटी सामना 1877 मध्ये ऑस्ट्रेलिया आणि इंग्लंड यांच्यात खेळला गेला आणि त्यानंतरच्या वर्षांत दोन्ही संघ नियमितपणे अशेज साठी स्पर्धा करत आहे. दक्षिण आफ्रिकेला १८८९ मध्ये कसोटी दर्जा देण्यात आला.<ref>{{cite web|url=http://content-uk.cricinfo.com/australia/content/match/62396.html|publisher=ESPNcricinfo|date=15 March 1877|title=1st Test Scorecard|access-date=28 January 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20090212191405/http://content-uk.cricinfo.com/australia/content/match/62396.html|archive-date=12 February 2009|url-status=live}}</ref> प्रतिनिधी क्रिकेट संघ एकमेकांच्या दौऱ्यासाठी निवडले गेले, परिणामी द्विपक्षीय स्पर्धा झाली. १९०० पॅरिस गेम्समध्ये ऑलिम्पिक खेळ म्हणून क्रिकेटचाही समावेश करण्यात आला होता, जिथे ग्रेट ब्रिटनने फ्रान्सला हरवून सुवर्णपदक जिंकले होते.<ref>{{cite web|url=http://www.espncricinfo.com/columns/engine/match/320838.html|publisher=ESPNcricinfo|date=19 August 1900|title=Olympic Games, 1900, Final|access-date=9 September 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20141226014434/http://www.espncricinfo.com/columns/engine/match/320838.html|archive-date=26 December 2014|url-status=live}}</ref> उन्हाळी ऑलिंपिकमध्ये क्रिकेटचा हा एकमेव देखावा होता.<ref>{{cite web|last=Purohit|first=Abhishek|title=Will Cricket Bat Again at the Olympics? Know Process for Inclusion at LA28|publisher=International Olympic Committee|date=10 August 2021|url=https://olympics.com/en/featured-news/cricket-olympics-los-angeles-2028-games-icc|access-date=5 December 2021}}</ref>
आंतरराष्ट्रीय स्तरावरील पहिली बहुपक्षीय स्पर्धा ही १९१२ त्रिकोणी स्पर्धा होती, ही कसोटी क्रिकेट स्पर्धा इंग्लंडमध्ये त्यावेळच्या तीन कसोटी खेळणाऱ्या राष्ट्रांमध्ये खेळली गेली: इंग्लंड, ऑस्ट्रेलिया आणि दक्षिण आफ्रिका. इव्हेंट यशस्वी झाला नाही: उन्हाळा अपवादात्मकपणे ओला होता, ओलसर खेळपट्ट्यांवर खेळणे कठीण होते आणि "क्रिकेटच्या वाढी" मुळे प्रेक्षकांची उपस्थिती कमी होती.<ref>{{cite web |url=http://content-aus.cricinfo.com/australia/content/story/207248.html|publisher=ESPNcricinfo|title=The original damp squib|date=23 April 2005|access-date=29 August 2006 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071016161938/http://content-aus.cricinfo.com/australia/content/story/207248.html |archive-date=16 October 2007}}</ref> तेव्हापासून, आंतरराष्ट्रीय कसोटी क्रिकेट सामान्यत: द्विपक्षीय मालिका म्हणून आयोजित केले गेले: १९९९ मध्ये त्रिकोणी आशियाई कसोटी चॅम्पियनशिप होईपर्यंत बहुपक्षीय कसोटी स्पर्धा पुन्हा आयोजित करण्यात आली नाही.<ref>{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/magazine/content/story/483619.html|publisher=ESPNcricinfo|title=The run-out that sparked a riot|date=30 October 2010|access-date=18 February 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141022194822/http://www.espncricinfo.com/magazine/content/story/483619.html |archive-date=22 October 2014}}</ref>
१९२८ मध्ये वेस्ट इंडीज,<ref>{{Cite web |title=England vs West Indies Scorecard 1928 {{!}} Cricket Scorecard |url=https://www.espncricinfo.com/series/west-indies-tour-of-england-1928-61871/england-vs-west-indies-1st-test-62559/full-scorecard |access-date=2023-07-05 |website=ESPNcricinfo |language=en}}</ref> १९३० मध्ये न्यू झीलंड,<ref>{{Cite web |title=New Zealand vs England Scorecard 1929/30 {{!}} Cricket Scorecard |url=https://www.espncricinfo.com/series/england-tour-of-new-zealand-1929-30-61781/new-zealand-vs-england-1st-test-62572/full-scorecard |access-date=2023-07-05 |website=ESPNcricinfo |language=en}}</ref> १९३२ मध्ये भारत<ref>{{Cite web |title=England vs India Scorecard 1932 {{!}} Cricket Scorecard |url=https://www.espncricinfo.com/series/india-tour-of-england-1932-62281/england-vs-india-only-test-62605/full-scorecard |access-date=2023-07-05 |website=ESPNcricinfo |language=en}}</ref> आणि १९५२ मध्ये पाकिस्तान<ref>{{Cite web |title=Pakistan vs India Scorecard 1952/53 {{!}} Cricket Scorecard |url=https://www.espncricinfo.com/series/pakistan-tour-of-india-1952-53-61529/india-vs-pakistan-4th-test-62744/full-scorecard |access-date=2023-07-05 |website=ESPNcricinfo |language=en}}</ref> यांच्या समावेशासह कसोटी क्रिकेट खेळणाऱ्या राष्ट्रांची संख्या हळूहळू वाढत गेली. तथापि, आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तीन, चार किंवा पाच दिवसांचे द्विपक्षीय कसोटी सामने म्हणून खेळले जात राहिले.
१९६० च्या दशकाच्या सुरुवातीस, इंग्लिश काउंटी क्रिकेट संघांनी क्रिकेटची एक लहान आवृत्ती खेळण्यास सुरुवात केली जी फक्त एक दिवस टिकली. १९६२ मध्ये मिडलँड्स नॉक-आउट कप म्हणून ओळखल्या जाणाऱ्या चार-सांघिक नॉकआऊट स्पर्धेने सुरुवात करून<ref>{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/magazine/content/story/510124.html|publisher=ESPNcricinfo|title=The low-key birth of one-day cricket|date=9 April 2011|access-date=15 July 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130919032251/http://www.espncricinfo.com/magazine/content/story/510124.html |archive-date=19 September 2013}}</ref> आणि १९६३ मधील उद्घाटन जिलेट चषक सुरू ठेवत, इंग्लंडमध्ये एकदिवसीय क्रिकेटची लोकप्रियता वाढली. १९६९ मध्ये राष्ट्रीय संडे लीगची स्थापना झाली. पहिला एक-दिवसीय आंतरराष्ट्रीय सामना १९७१ मध्ये मेलबर्न येथे इंग्लंड आणि ऑस्ट्रेलिया यांच्यातील पावसामुळे रद्द झालेल्या कसोटी सामन्याच्या पाचव्या दिवशी खेळला गेला, उपलब्ध वेळ भरून काढण्यासाठी आणि निराश झालेल्या प्रेक्षकांची भरपाई म्हणून. हा चाळीस षटकांचा खेळ होता ज्यात प्रति षटक आठ चेंडू होते.<ref>{{cite web |url=http://newicc.cricket.org/icc/odi/what_is_one-day_cricket.html |publisher=newicc.cricket.org |title=What is One-Day International cricket? |access-date=10 September 2006 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20061119054342/http://newicc.cricket.org/icc/odi/what_is_one-day_cricket.html |archive-date=19 November 2006 |आर्काईव्ह दिनांक=2006-11-19 |आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20061119054342/http://newicc.cricket.org/icc/odi/what_is_one-day_cricket.html }}</ref> इंग्लंड आणि जगाच्या इतर भागांतील देशांतर्गत एकदिवसीय स्पर्धांचे यश आणि लोकप्रियता, तसेच सुरुवातीच्या एकदिवसीय आंतरराष्ट्रीय स्पर्धांमुळे आयसीसीने क्रिकेटचे आयोजन करण्याचा विचार करण्यास प्रवृत्त केले. <ref name="WCHistory">{{cite web|url=http://content-aus.cricinfo.com/wc2007/content/story/264535.html|publisher=ESPNcricinfo|title=The World Cup – A brief history|access-date=7 December 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20080328095116/http://content-aus.cricinfo.com/wc2007/content/story/264535.html|archive-date=28 March 2008|url-status=live}}</ref>
===प्रुडेंशियल विश्वचषक (१९७५–१९८३)===
{{main|१९७५ क्रिकेट विश्वचषक|१९७९ क्रिकेट विश्वचषक|१९८३ क्रिकेट विश्वचषक}}
[[File:Prudential Cup.jpg|thumb|upright=0.9|प्रुडेंशियल कप ट्रॉफी]]
उद्घाटन क्रिकेट विश्वचषक १९७५ मध्ये इंग्लंडने आयोजित केला होता, त्या वेळी एवढा मोठा कार्यक्रम आयोजित करण्यासाठी संसाधने पुढे टाकण्यास सक्षम असलेले एकमेव राष्ट्र. पहिल्या तीन स्पर्धा इंग्लंडमध्ये आयोजित करण्यात आल्या होत्या आणि प्रायोजक प्रुडेंशियल पीएलसी नंतर अधिकृतपणे प्रुडेंशियल कप म्हणून ओळखल्या जातात. सामन्यांमध्ये प्रति संघ ६० (६ चेंडू १ षटक) षटके होती, पारंपारिक स्वरूपात दिवसा खेळले गेले, खेळाडूंनी क्रिकेटचे पांढरे कपडे घातले आणि लाल क्रिकेट चेंडू वापरला.<ref>Browning (1999), pp. 5–9</ref>
पहिल्या स्पर्धेत आठ संघ सहभागी झाले होते: ऑस्ट्रेलिया, इंग्लंड, भारत, न्यू झीलंड, पाकिस्तान आणि वेस्ट इंडीज (त्यावेळी सहा कसोटी राष्ट्रे), श्रीलंका आणि पूर्व आफ्रिकेतील संमिश्र संघ.<ref name=cricket>Browning (1999), pp. 26–31</ref> एक उल्लेखनीय वगळण्यात आलेला संघ दक्षिण आफ्रिका होता, ज्यांना वर्णभेदामुळे आंतरराष्ट्रीय क्रिकेटमधून बंदी घालण्यात आली होती. ही स्पर्धा वेस्ट इंडीजने जिंकली होती, ज्याने लॉर्ड्सवरील अंतिम सामन्यात ऑस्ट्रेलियाचा १७ धावांनी पराभव केला होता.<ref name=cricket/> १९७५ च्या विश्वचषक फायनलमध्ये एकदिवसीय सामन्यात हिट विकेट घेणारा वेस्ट इंडीजचा रॉय फ्रेडरिक्स हा पहिला फलंदाज होता.<ref>{{Cite web|url=https://www.cricbuzz.com/cricket-news/69522/icc-cricket-world-cups-fascinating-facts-part-1|title=50 fascinating facts about World Cups – Part 1|website=Cricbuzz|date=22 January 2015 |language=en|access-date=21 February 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190221174220/https://www.cricbuzz.com/cricket-news/69522/icc-cricket-world-cups-fascinating-facts-part-1|archive-date=21 February 2019|url-status=live}}</ref>
१९७९ च्या विश्वचषकामध्ये श्रीलंका आणि कॅनडा पात्रता मिळवून विश्वचषकासाठी कसोटी न खेळणारे संघ निवडण्यासाठी आयसीसी ट्रॉफी स्पर्धा सुरू करण्यात आली.<ref name="ICCTROPHY">{{cite web|url=http://www.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/ICCT2005/ARTICLES/history.html|publisher=ESPNcricinfo|title=ICC Trophy – A brief history|access-date=29 August 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20061126054556/http://www.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/ICCT2005/ARTICLES/history.html|archive-date=26 November 2006|url-status=live}}</ref> <ref name=history>Browning (1999), pp. 32–35</ref> वेस्ट इंडीजने फायनलमध्ये यजमान इंग्लंडचा ९२ धावांनी पराभव करत सलग दुसरी विश्वचषक स्पर्धा जिंकली. विश्वचषकानंतर झालेल्या बैठकीत, आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषदेने ही स्पर्धा चतुर्मासिक स्पर्धा बनविण्यास सहमती दर्शविली.<ref name=history/>
१९८३ च्या स्पर्धेचे आयोजन इंग्लंडने सलग तिसऱ्यांदा केले होते. या टप्प्यापर्यंत, श्रीलंका कसोटी खेळणारा राष्ट्र बनला होता आणि झिम्बाब्वे आयसीसी ट्रॉफीद्वारे पात्र ठरला होता. स्टंपपासून दूर असलेल्या ३० यार्ड (२७ मी) क्षेत्ररक्षण मंडळाची ओळख करून देण्यात आली. त्यामध्ये नेहमी चार फील्ड्समन असणे आवश्यक होते.<ref>Browning (1999), pp. 61–62</ref> बाद फेरीत जाण्यापूर्वी संघ दोनदा एकमेकांसमोर आले. फायनलमध्ये वेस्ट इंडीजचा ४३ धावांनी पराभव करून भारताने चॅम्पियनचा मुकुट पटकावला.<ref name="WCHistory"/><ref>Browning (1999), pp. 105–110</ref>
=== वेगवेगळे विजेते (१९८७–१९९६) ===
{{main|१९८७ क्रिकेट विश्वचषक|१९९२ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६ क्रिकेट विश्वचषक}}
भारत आणि पाकिस्तानने १९८७ च्या स्पर्धेचे संयुक्तपणे यजमानपद भूषवले होते, ही स्पर्धा प्रथमच इंग्लंडबाहेर आयोजित करण्यात आली होती. इंग्लंडच्या उन्हाळ्याच्या तुलनेत भारतीय उपखंडात दिवसाच्या प्रकाशाचे तास कमी असल्यामुळे हे खेळ सध्याच्या मानकानुसार प्रति डाव ६० ते ५० षटके कमी करण्यात आले. ऑस्ट्रेलियाने अंतिम फेरीत इंग्लंडचा ७ धावांनी पराभव करून चॅम्पियनशिप जिंकली, इंग्लंड आणि न्यू झीलंड यांच्यातील २०१९ च्या विश्वचषकाच्या अंतिम फेरीतील सर्वात जवळच्या फरकाने.
ऑस्ट्रेलिया आणि न्यू झीलंडमध्ये झालेल्या १९९२ विश्वचषकाने खेळात अनेक बदल केले, जसे की रंगीत कपडे, पांढरे चेंडू, दिवस/रात्रीचे सामने आणि क्षेत्ररक्षण प्रतिबंध नियमांमध्ये बदल. वर्णद्वेषाच्या राजवटीच्या पतनानंतर आणि आंतरराष्ट्रीय क्रीडा बहिष्काराच्या समाप्तीनंतर दक्षिण आफ्रिकेच्या क्रिकेट संघाने प्रथमच या स्पर्धेत भाग घेतला. पाकिस्तानने स्पर्धेतील निराशाजनक सुरुवात करून अखेरीस अंतिम फेरीत इंग्लंडचा २२ धावांनी पराभव केला आणि विजेता म्हणून उदयास आला.
१९९६ चे चॅम्पियनशिप भारतीय उपखंडात दुसऱ्यांदा आयोजित करण्यात आले होते, त्यात काही गट टप्प्यातील सामन्यांसाठी श्रीलंकेचा यजमान म्हणून समावेश करण्यात आला होता. उपांत्य फेरीत, २५२ धावांचा पाठलाग करताना यजमानांनी १२० धावा करताना आठ विकेट गमावल्यानंतर, ईडन गार्डन्सवर भारतावर दणदणीत विजयाच्या दिशेने वाटचाल करणाऱ्या श्रीलंकेला डीफॉल्टनुसार विजय मिळाला. लाहोर येथे झालेल्या अंतिम सामन्यात श्रीलंकेने ऑस्ट्रेलियाचा सात गडी राखून पराभव करून पहिले विजेतेपद पटकावले.
===ऑस्ट्रेलियाची हॅट्ट्रिक (१९९९–२००७)===
{{main|१९९९ क्रिकेट विश्वचषक|२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००७ क्रिकेट विश्वचषक}}
१९९९ मध्ये, या स्पर्धेचे आयोजन इंग्लंडने केले होते, काही सामने स्कॉटलंड, आयर्लंड, वेल्स आणि नेदरलँडमध्येही आयोजित केले गेले होते.<ref>Browning (1999), p. 274</ref><ref>{{cite book |url=https://books.google.com/books?id=iZq8BAAAQBAJ&q=1999+cricket+world+cup+host&pg=PA7 |title=Cricket World Cup: A Summary of the Tournaments Since 1975 |author=French Toast |publisher=Smashwords |year=2014 |isbn=9781311429230 |format=e-book |access-date=11 December 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190626181716/https://books.google.com/books?id=iZq8BAAAQBAJ&pg=PA7&dq=1999+cricket+world+cup+host&hl=en&sa=X&ei=d2qJVJyDMYuzUembgYgJ&ved=0CEYQ6AEwBA#v=onepage&q=1999%20cricket%20world%20cup%20host&f=false |archive-date=26 June 2019 |url-status=live }}</ref> विश्वचषक स्पर्धेत बारा संघ सहभागी झाले होते. दक्षिण आफ्रिकेविरुद्धच्या सुपर सिक्स सामन्यात सामन्याच्या अंतिम षटकात ऑस्ट्रेलियाने आपले लक्ष्य गाठल्यानंतर उपांत्य फेरीसाठी पात्र ठरले.<ref>Browning (1999), pp. 229–231</ref> त्यानंतर त्यांनी दक्षिण आफ्रिकेविरुद्धच्या उपांत्य फेरीतील सामना बरोबरीत सोडवून अंतिम फेरीत प्रवेश केला जेथे दक्षिण आफ्रिकेचे फलंदाज लान्स क्लुसनर आणि ॲलन डोनाल्ड यांच्यातील मिश्रणाने डोनाल्डला त्याची बॅट सोडली आणि मध्य-पिचमध्ये धावबाद होण्यासाठी अडकले. अंतिम सामन्यात ऑस्ट्रेलियाने पाकिस्तानला १३२ धावांवर संपुष्टात आणले आणि त्यानंतर २० षटकांत आणि आठ गडी राखून लक्ष्य गाठले.<ref>Browning (1999), pp. 232–238</ref>
[[File:Australian World Cup treble.jpg|thumb|upright=0.9|१०,००० हून अधिक चाहत्यांच्या जमावाने पहिल्या विश्वचषकाची हॅट्ट्रिक पूर्ण केल्याबद्दल ऑस्ट्रेलियन संघाचे स्वागत केले – मार्टिन प्लेस, सिडनी.]]
दक्षिण आफ्रिका, झिम्बाब्वे आणि केन्या यांनी २००३ च्या विश्वचषकाचे यजमानपद भूषवले होते. स्पर्धेत सहभागी होणाऱ्या संघांची संख्या बारा वरून चौदा झाली. श्रीलंका आणि झिम्बाब्वे यांच्यावर केन्याचे विजय – आणि न्यू झीलंड संघाने सुरक्षेच्या कारणास्तव केन्यामध्ये खेळण्यास नकार दिला – यामुळे केन्याला उपांत्य फेरीत पोहोचता आले, हा असोसिएट संघाचा सर्वोत्तम परिणाम आहे.<ref>{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/wctimeline/content/current/story/795703.html|publisher=ESPNcricinfo|title=Washouts, walkovers, and black armband protests|access-date=30 August 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150830100350/http://www.espncricinfo.com/wctimeline/content/current/story/795703.html |archive-date=30 August 2015}}</ref> अंतिम सामन्यात, ऑस्ट्रेलियाने दोन गडी गमावून ३५९ धावा केल्या, जे फायनलमधील आतापर्यंतचे सर्वात मोठे धावसंख्या आहे आणि भारताचा १२५ धावांनी पराभव केला.<ref name="AUS2003">{{cite news |url=http://news.bbc.co.uk/sport3/cwc2003/hi/newsid_2870000/newsid_2875100/2875135.stm |publisher=BBC Sport |title=Ruthless Aussies lift World Cup |date=23 March 2003 |access-date=29 January 2007 |location=London |archive-url=https://web.archive.org/web/20150328120655/http://news.bbc.co.uk/sport3/cwc2003/hi/newsid_2870000/newsid_2875100/2875135.stm |archive-date=28 March 2015 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |title=Full tournament schedule |url=http://news.bbc.co.uk/sport3/cwc2003/hi/fixturesresults/default.stm |publisher=BBC Sport |date=23 March 2003 |access-date=22 February 2007 |location=London |archive-url=https://web.archive.org/web/20070218103234/http://news.bbc.co.uk/sport3/cwc2003/hi/fixturesresults/default.stm |archive-date=18 February 2007 |url-status=live }}</ref>
२००७ मध्ये, स्पर्धेचे आयोजन वेस्ट इंडीजने केले होते आणि सोळा संघांपर्यंत विस्तारित केले होते.<ref>{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/wchistory/content/story/314997.html|publisher=ESPNcricinfo|title=Australia triumph in a tournament to forget|access-date=15 July 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120206124910/http://www.espncricinfo.com/wchistory/content/story/314997.html |archive-date=6 February 2012}}</ref> ग्रुप स्टेजमध्ये वर्ल्ड कपमध्ये पदार्पण करणाऱ्या आयर्लंडकडून पाकिस्तानचा पराभव झाल्यानंतर, पाकिस्तानी प्रशिक्षक बॉब वुलमर त्यांच्या हॉटेलच्या खोलीत मृतावस्थेत आढळले.<ref>{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/wc2007/content/story/285953.html|publisher=ESPNcricinfo|title=Bob Woolmer's death stuns cricket world|access-date=4 December 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121025092541/http://www.espncricinfo.com/wc2007/content/story/285953.html |archive-date=25 October 2012}}</ref> जमैका पोलिसांनी सुरुवातीला वूल्मरच्या मृत्यूचा खून तपास सुरू केला होता पण नंतर त्याचा मृत्यू हृदयविकाराने झाल्याची पुष्टी केली.<ref>{{cite web|url=http://content-usa.cricinfo.com/woolmer/content/story/286045.html|publisher=Cricinfo|title=Bob Woolmer investigation round-up|access-date=6 May 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20070516215421/http://content-usa.cricinfo.com/woolmer/content/story/286045.html|archive-date=16 May 2007|url-status=live}}</ref> ऑस्ट्रेलियाने फायनलमध्ये श्रीलंकेचा डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धतीने ५३ धावांनी पराभव केला, आणि विश्वचषकातील त्यांची अपराजित धाव २९ सामन्यांपर्यंत वाढवली आणि विजय मिळवला.<ref>{{cite web|url=http://content-usa.cricinfo.com/ci/content/story/292773.html|publisher=Cricinfo|title=Australia v Sri Lanka, World Cup final, Barbados|date=28 April 2007|access-date=6 May 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20080324035211/http://content-usa.cricinfo.com/ci/content/story/292773.html|archive-date=24 March 2008|url-status=live}}</ref>
=== यजमानांचा विजय (२०११-२०१९) ===
{{main|२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९ क्रिकेट विश्वचषक}}
२०११ च्या विश्वचषकाचे यजमानपद भारत, श्रीलंका आणि बांगलादेश यांनी मिळून दिले होते. २००९ मध्ये श्रीलंकन क्रिकेट संघावर झालेल्या दहशतवादी हल्ल्यानंतर पाकिस्तानचे यजमान हक्क काढून घेण्यात आले होते, मूळतः पाकिस्तानसाठी नियोजित खेळांचे इतर यजमान देशांना पुनर्वितरण करण्यात आले होते.<ref>{{cite news |url=http://news.bbc.co.uk/sport1/hi/cricket/other_international/pakistan/8004684.stm |title=No World Cup matches in Pakistan |publisher=BBC Sport |access-date=15 July 2014 |date=18 April 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090418013231/http://news.bbc.co.uk/sport1/hi/cricket/other_international/pakistan/8004684.stm |archive-date=18 April 2009 |url-status=live}}</ref> विश्वचषकात सहभागी होणाऱ्या संघांची संख्या चौदा करण्यात आली.<ref name="2011WC">{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/ci-icc/content/story/659953.html|publisher=ESPNcricinfo|title=India end a 28-year-long wait|access-date=29 October 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130825010536/http://www.espncricinfo.com/ci-icc/content/story/659953.html |archive-date=25 August 2013}}</ref> ऑस्ट्रेलियाचा २३ मे १९९९ पासून सुरू झालेल्या ३५ विश्वचषक सामन्यांच्या अपराजित मालिकेचा शेवट १९ मार्च २०११ रोजी पाकिस्तानविरुद्धचा अंतिम गट स्टेज सामन्याने केला.<ref>{{cite web|url=http://edition.cnn.com/2011/SPORT/03/19/cricket.australia.pakistan.bangladesh/|title=Pakistan top group after ending Australia's unbeaten World Cup streak|publisher=CNN|date=20 March 2011|access-date=13 February 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150213185518/http://edition.cnn.com/2011/SPORT/03/19/cricket.australia.pakistan.bangladesh/|archive-date=13 February 2015|url-status=live}}</ref> मुंबईतील वानखेडे स्टेडियमवर झालेल्या अंतिम सामन्यात भारताने श्रीलंकेचा ६ गडी राखून पराभव करून त्यांचे दुसरे विश्वचषक जिंकले आणि घरच्या मैदानावर विश्वचषक जिंकणारा भारत पहिला देश बनला.<ref name="2011WC"/> विश्वचषकाच्या फायनलमध्ये दोन आशियाई देश आमनेसामने येण्याची ही पहिलीच वेळ होती.<ref>{{cite web|title=ICC Cricket World Cup|publisher=ESPN|url=https://www.espn.com/extra/cricket/topics/_/page/icc-cricket-world-cup|access-date=2 January 2022}}</ref>
ऑस्ट्रेलिया आणि न्यू झीलंड यांनी संयुक्तपणे २०१५ च्या विश्वचषकाचे यजमानपद भूषवले होते. सहभागींची संख्या चौदा राहिली. स्पर्धेत एकूण तीन विजयांसह आयर्लंड सर्वात यशस्वी सहयोगी राष्ट्र ठरला. न्यू झीलंडने रोमहर्षक पहिल्या उपांत्य फेरीत दक्षिण आफ्रिकेचा पराभव करून त्यांच्या पहिल्या विश्वचषकाच्या अंतिम फेरीत प्रवेश केला. मेलबर्न येथे झालेल्या अंतिम सामन्यात ऑस्ट्रेलियाने न्यू झीलंडचा सात गडी राखून पराभव करत पाचव्यांदा विश्वचषक जिंकला.<ref name="AUS2015">{{cite news |url=https://www.bbc.co.uk/sport/0/cricket/32105654 |title=Cricket World Cup 2015: Australia crush New Zealand in final |publisher=BBC Sport |access-date=29 March 2015 |date=29 March 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150329232637/http://www.bbc.co.uk/sport/0/cricket/32105654 |archive-date=29 March 2015 |url-status=live }}</ref>
[[File:Englandvictorylap.png|thumb|right|इंग्लंडने १४ जुलै २०१९ रोजी त्यांच्या विजयानंतर लॉर्ड्सच्या आसपास आदरांजली वाहिली.]]
२०१९ च्या विश्वचषकाचे आयोजन इंग्लंड आणि वेल्स यांनी केले होते. सहभागींची संख्या १० पर्यंत कमी करण्यात आली. पावसामुळे राखीव दिवशी ढकलण्यात आलेल्या पहिल्या उपांत्य फेरीत न्यू झीलंडने भारताचा पराभव केला.<ref>{{cite news |url=https://timesofindia.indiatimes.com/sports/cricket/icc-world-cup/india-vs-new-zealand-live-score-world-cup-2019-semi-final/articleshow/70139254.cms|title=India vs New Zealand Highlights, World Cup 2019 semi-final: Match defers to reserve day|work=द टाइम्स ऑफ इंडिया|date=9 July 2019|access-date=15 July 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190711180216/https://timesofindia.indiatimes.com/sports/cricket/icc-world-cup/india-vs-new-zealand-live-score-world-cup-2019-semi-final/articleshow/70139254.cms|archive-date=11 July 2019|url-status=live}}</ref> दुसऱ्या उपांत्य फेरीत इंग्लंडने गतविजेत्या ऑस्ट्रेलियाचा पराभव केला. याआधी कोणत्याही अंतिम फेरीतील संघाने विश्वचषक जिंकला नव्हता. फायनलमध्ये, ५० षटकांनंतर स्कोअर २४१ वर टाय झाला आणि सामना सुपर ओव्हरमध्ये गेला, त्यानंतर स्कोअर पुन्हा १५ वर टाय झाला. विश्वचषक इंग्लंडने जिंकला होता, ज्यांच्या चौकारांची संख्या न्यू झीलंडपेक्षा जास्त होती.<ref>{{Cite web |url=https://www.espncricinfo.com/series/8039/report/1144530/england-vs-new-zealand-final-icc-cricket-world-cup-2019/ |title=Epic final tied, Super Over tied,England win World Cup on boundary count |date=14 July 2019 |access-date=15 July 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190715032534/https://www.espncricinfo.com/series/8039/report/1144530/england-vs-new-zealand-final-icc-cricket-world-cup-2019/ |archive-date=15 July 2019 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news|url=https://www.bbc.co.uk/sport/cricket/48985109|title=England win Cricket World Cup: A golden hour ends in a champagne super over|date=14 July 2019|last=Fordyce|first=Tom|publisher=BBC Sport|access-date=15 July 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190714235602/https://www.bbc.co.uk/sport/cricket/48985109|archive-date=14 July 2019|url-status=live}}</ref>
==स्वरूप==
===पात्रता===
{{main|क्रिकेट विश्वचषक पात्रता प्रक्रिया}}
१९७५ मधील पहिल्या विश्वचषकापासून ते २०१९ च्या विश्वचषकापर्यंत, भाग घेणारे बहुसंख्य संघ आपोआप पात्र ठरले. २०१५ विश्वचषकापर्यंत हे मुख्यतः आयसीसी चे पूर्ण सदस्यत्व असल्यामुळे होते आणि २०१९ विश्वचषकासाठी हे मुख्यतः आयसीसी एकदिवसीय चॅम्पियनशिपमधील क्रमवारीत स्थान मिळवून होते.<ref>{{cite news|title=Cricket World Cup 2019 to stay at only 10 teams|publisher=BBC Sport |url=https://www.bbc.com/sport/cricket/33296828|access-date=22 August 2022}}</ref>
१९७९ मधील दुसऱ्या विश्वचषकापासून ते २०१९ च्या विश्वचषकापर्यंत, आपोआप पात्र ठरलेल्या संघांमध्ये पात्रता प्रक्रियेद्वारे विश्वचषकासाठी पात्र ठरलेल्या इतर काही संख्येने सामील झाले. पहिली पात्रता स्पर्धा म्हणजे आयसीसी ट्रॉफी;<ref>{{Cite web|url=https://static.espncricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/ICCT2005/ARTICLES/history.html|title=Cricinfo - 2005 ICC Trophy in Ireland|website=static.espncricinfo.com|accessdate=6 April 2023}}</ref> नंतर प्री-क्वालिफायिंग टूर्नामेंट्ससह प्रक्रिया विस्तारते. २०११ विश्वचषकासाठी, आयसीसी वर्ल्ड क्रिकेट लीगने भूतकाळातील पूर्व-पात्रता प्रक्रियेची जागा घेतली; आणि "आयसीसी ट्रॉफी" चे नाव बदलून "आयसीसी पुरुष क्रिकेट विश्वचषक पात्रता" असे करण्यात आले.<ref>{{cite web |url=http://www.icc-cricket.com/icc/development/wcl/ |publisher=ICC |title=World Cricket League |access-date=28 January 2007 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20070119011351/http://www.icc-cricket.com/icc/development/wcl/ |archive-date=19 January 2007 |आर्काईव्ह दिनांक=2007-01-19 |आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20070119011351/http://www.icc-cricket.com/icc/development/wcl/ }}</ref> वर्ल्ड क्रिकेट लीग ही आयसीसीच्या सहयोगी आणि संलग्न सदस्यांना पात्र होण्यासाठी अधिक संधी देण्यासाठी प्रदान केलेली पात्रता प्रणाली होती. पात्र ठरलेल्या संघांची संख्या वर्षभर वेगवेगळी असते.<ref>{{Cite web|url=https://static1.squarespace.com/static/533e6b7de4b0d84a3bd7c4be/t/5c3a7f7288251b8b3c637260/1547337591744/Cricket.pdf|title=International Cricket Council February 2019|website=static1.squarespace.com}}</ref>
२०२३ च्या विश्वचषकापासून, फक्त यजमान देश आपोआप पात्र होतील. सर्व देश पात्रता निश्चित करण्यासाठी लीगच्या मालिकेत सहभागी होतील, ज्यामध्ये स्वयंचलित प्रमोशन आणि रेलेगेशन एका विश्वचषकाच्या चक्रातून दुसऱ्या टप्प्यापर्यंत विभागणी केली जाईल.<ref>{{cite web|url=https://www.espncricinfo.com/story/_/id/27384084/how-teams-secure-qualification-rank-no-1-32 |title=The road to World Cup 2023: how teams can secure qualification, from rank No. 1 to 32 |work=ESPN Cricinfo |access-date=22 August 2022}}</ref>
===स्पर्धा===
[[File:Autographed bats of ODI World Cup winning teams at Blades of Glory Cricket Museum, Pune.jpg|thumb|भारताच्या [[पुणे]] येथील ब्लेड्स ऑफ ग्लोरी क्रिकेट संग्रहालयात ठेवलेल्या, स्पर्धेच्या प्रत्येक आवृत्तीतील विजेत्या संघांच्या स्वाक्षऱ्या.]]
क्रिकेट विश्वचषकाच्या इतिहासात स्पर्धेचे स्वरूप मोठ्या प्रमाणात बदलले आहे. पहिल्या चारही स्पर्धांमध्ये प्रत्येकी चार संघांचे दोन गट अशा एकूण आठ संघांनी सहभाग घेतला होता.<ref>{{cite web|url=http://icc.cricket.org/icc/events/summaries/icc_world_cup_1975.html|publisher=icc.cricket.org|title=1st tournament|access-date=१९ फेब्रुवारी २००७|archive-url=https://web.archive.org/web/20071217093647/http://icc.cricket.org/icc/events/summaries/icc_world_cup_1975.html|archive-date=१७ डिसेंबर २००७}}</ref> स्पर्धा दोन टप्प्यांत खेळवली जात होती, गट फेरी आणि [[बाद-फेरी स्पर्धा|बाद फेरी]]. प्रत्येक गटातील चारही संघ [[साखळी सामने|साखळी पद्धतीने]] एकमेकांविरुद्ध खेळत आणि प्रत्येक गटातील अव्वल दोन संघ उपांत्य फेरीत प्रवेश करत. उपांत्य फेरीतील विजेते संघ अंतिम सामन्यात एकमेकांविरुद्ध खेळत. वर्णभेदविरोधी बहिष्कार संपल्यानंतर दक्षिण आफ्रिकेने १९९२ मधील पाचव्या स्पर्धेत पुनरागमन केले. त्या स्पर्धेत नऊ संघांनी गट फेरीत एकमेकांविरुद्ध प्रत्येकी एक सामना खेळला आणि अव्वल चार संघ उपांत्य फेरीत पोहोचले.<ref>{{cite web|url=http://icc.cricket.org/icc/events/summaries/icc_world_cup_199192.html|publisher=icc.cricket.org|title=92 tournament|access-date=१९ फेब्रुवारी २००७|archive-url=https://web.archive.org/web/20071217093653/http://icc.cricket.org/icc/events/summaries/icc_world_cup_199192.html|archive-date=१७ डिसेंबर २००७}}</ref> १९९६ मध्ये स्पर्धेचा आणखी विस्तार करून प्रत्येकी सहा संघांचे दोन गट करण्यात आले.<ref>{{cite web|url=http://icc.cricket.org/icc/events/summaries/icc_world_cup_199596.html|publisher=icc.cricket.org|title=96 tournament|access-date=१९ फेब्रुवारी २००७|archive-url=https://web.archive.org/web/20071217093658/http://icc.cricket.org/icc/events/summaries/icc_world_cup_199596.html|archive-date=१७ डिसेंबर २००७}}</ref> प्रत्येक गटातील अव्वल चार संघ उपांत्यपूर्व फेरीत पोहोचले आणि त्यानंतर उपांत्य फेरी खेळवण्यात आली.<ref>{{Cite web|title=Wills World Cup, 1996 schedule, live scores and results|url=https://www.cricbuzz.com/cricket-series/653/wills-world-cup-1996|access-date=५ जुलै २०२३|website=Cricbuzz|language=en}}</ref>
[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]] आणि [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]] विश्वचषकांसाठी वेगळे स्वरूप वापरण्यात आले. संघांची दोन गटांमध्ये विभागणी करण्यात आली आणि प्रत्येक गटातील अव्वल तीन संघ ''सुपर ६'' फेरीत पोहोचले.<ref name="super6">{{cite web|url=http://www.cricinfo.com/link_to_database/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC99/WC99_TABLE.html|publisher=[[क्रिकइन्फो]]|title=Super 6|access-date=१९ फेब्रुवारी २००७|archive-url=https://web.archive.org/web/20070222100838/http://www.cricinfo.com/link_to_database/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC99/WC99_TABLE.html|archive-date=२२ फेब्रुवारी २००७|url-status=live}}</ref> ''सुपर ६'' मधील संघांनी दुसऱ्या गटातून पात्र ठरलेल्या तीन संघांविरुद्ध सामने खेळले. पुढील फेरीत प्रवेश करताना, आपल्या गटातून सोबत पुढील फेरीसाठी पात्र ठरलेल्या संघांविरुद्धच्या आधीच्या सामन्यांत मिळवलेले गुण संघांना पुढे नेण्याची परवानगी होती. त्यामुळे गट फेरीत चांगली कामगिरी करण्यासाठी संघांना अतिरिक्त प्रोत्साहन मिळत असे.<ref name="super6"/> ''सुपर ६'' फेरीतील अव्वल चार संघ उपांत्य फेरीत पोहोचत आणि त्यातील विजेते अंतिम सामना खेळत.<ref>{{Cite web|title=ICC World Cup, 1999 schedule, live scores and results|url=https://www.cricbuzz.com/cricket-series/718/icc-world-cup-1999|access-date=५ जुलै २०२३|website=Cricbuzz|language=en}}</ref><ref>{{Cite web|title=Cricket World Cup History 2003: Winners, Runners-up, Stats of World Cup 2003|url=https://sports.ndtv.com/world-cup-2019/history/2003-cricket-world-cup|access-date=५ जुलै २०२३|website=NDTVSports.com|language=en|archive-date=2023-07-05|archive-url=https://web.archive.org/web/20230705061919/https://sports.ndtv.com/world-cup-2019/history/2003-cricket-world-cup|url-status=dead}}</ref>
[[File:ICC CWC 2007 team captains.jpg|thumb|upright=0.9|२००७ क्रिकेट विश्वचषकातील संघांचे कर्णधार.]]
[[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७ विश्वचषकात]] १६ संघांची प्रत्येकी चार संघांच्या चार गटांत विभागणी करण्यात आली होती.<ref>{{cite web|url=http://www.cricketworldcup.com/TeamGroupings.html|publisher=cricket world cup|title=World Cup groups|access-date=२८ जानेवारी २००७|archive-url=https://web.archive.org/web/20070126002928/http://www.cricketworldcup.com/TeamGroupings.html|archive-date=२६ जानेवारी २००७|url-status=dead}}</ref> प्रत्येक गटात संघ एकमेकांविरुद्ध साखळी पद्धतीने खेळले. विजयासाठी संघांना गुण आणि बरोबरीसाठी अर्धा गुण मिळत असे. प्रत्येक गटातील अव्वल दोन संघ ''सुपर ८'' फेरीत प्रवेश करत. ''सुपर ८'' मधील संघांनी इतर गटांतून पात्र ठरलेल्या सहा संघांविरुद्ध सामने खेळले. गट फेरीप्रमाणेच गुण देण्यात येत होते; मात्र आपल्या मूळ गटातून ''सुपर ८'' साठी पात्र ठरलेल्या दुसऱ्या संघाविरुद्ध आधीच्या सामन्यात मिळवलेले गुण पुढे नेण्यात येत होते.<ref>{{cite web|url=http://www.cricketworldcup.com/pdfs/event-overview.pdf|publisher=cricketworldcup.com|title=About the Event|access-date=२ सप्टेंबर २००६|page=1|archive-url=https://web.archive.org/web/20060905225042/http://www.cricketworldcup.com/pdfs/event-overview.pdf|archive-date=५ सप्टेंबर २००६|url-status=dead}}</ref> ''सुपर ८'' फेरीतील अव्वल चार संघ उपांत्य फेरीत पोहोचले आणि उपांत्य फेरीतील विजेत्यांनी अंतिम सामना खेळला.<ref>{{Cite web|title=ICC World Cup, 2007 schedule, live scores and results|url=https://www.cricbuzz.com/cricket-series/905/icc-world-cup-2007|access-date=५ जुलै २०२३|website=Cricbuzz|language=en}}</ref>
[[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]] आणि [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]]<ref>{{cite web|url=http://www.cricknews.net|publisher=cricknews.net|title=2015 Cricket World Cup|access-date=३ फेब्रुवारी २०१५|archive-url=https://web.archive.org/web/20150203120741/http://www.cricknews.net/|archive-date=३ फेब्रुवारी २०१५|url-status=dead}}</ref> विश्वचषकांच्या गट फेरीत प्रत्येकी सात संघांचे दोन गट होते. प्रत्येक गटातील अव्वल चार संघ उपांत्यपूर्व फेरीत, त्यानंतर उपांत्य फेरीत आणि अखेरीस अंतिम सामन्यात प्रवेश करत.<ref>{{cite news|first=K.R.|last=Nayar|title=International Cricket Council approves 14-team cup|url=http://gulfnews.com/sport/cricket/international-cricket-council-approves-14-team-cup-1.829620|work=Gulf News|date=२९ जून २०११|access-date=२ फेब्रुवारी २०१५|archive-url=https://web.archive.org/web/20110701153544/http://gulfnews.com/sport/cricket/international-cricket-council-approves-14-team-cup-1.829620|archive-date=१ जुलै २०११|url-status=live}}</ref>
स्पर्धेच्या [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]] आणि [[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३]] आवृत्त्यांमध्ये सहभागी संघांची संख्या दहापर्यंत कमी करण्यात आली. सर्व दहा संघ एका साखळी गटात खेळले आणि अव्वल चार संघ उपांत्य फेरीत पोहोचले.<ref>{{cite web|last=Smale|first=Simon|title=The Cricket World Cup 2019 has shrunk to exclude the minnows, but why? And how come it's still so long?|publisher=Australian Broadcasting Corporation|date=४ जून २०१९|url=https://www.abc.net.au/news/2019-06-05/cricket-world-cup-minnows-where-have-they-gone/11176128|access-date=१८ ऑक्टोबर २०२०}}</ref>
२०२७ आणि २०३१ विश्वचषकांमध्ये संघांची संख्या वाढवून १४ करण्यात येईल;<ref>{{cite web|url=https://sixsports.in/icc-announces-world-cup-schedule-14-teams-in-2027-and-2031/|title=ICC announces World Cup schedule; 14 teams in 2027 And 2031|website=Six Sports|date=२ जून २०२१|access-date=२ जून २०२१|archive-date=१ एप्रिल २०२२|archive-url=https://web.archive.org/web/20220401040539/https://sixsports.in/icc-announces-world-cup-schedule-14-teams-in-2027-and-2031/|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite web|url=https://cricinfo.pro/cricket-world-cup-2023-date-teams-stadiums-tickets/|title=Mark your calendars for the Cricket World Cup 2023 as the tournament is set to begin on October 5, 2023. The matches will continue until November 19, 2023|website=Cricinfo|date=७ सप्टेंबर २०२३|access-date=११ सप्टेंबर २०२३}}</ref> २०२७ मध्ये पहिल्या साखळी टप्प्यात प्रत्येकी सहा संघांचे दोन गट असतील. १४ संघांच्या स्पर्धेतील सर्वात खालच्या मानांकनाचे तीन पात्र संघ बारावा आणि अंतिम संघ निश्चित करण्यासाठी तीन सामन्यांची ''सुपर सिरीज'' फेरी खेळतील. प्रत्येक गटातील अव्वल तीन संघ आणि दोन्ही गटांतील चौथ्या स्थानावरील संघांपैकी सर्वोत्तम कामगिरी करणारा एक संघ ''सुपर ७'' फेरीत प्रवेश करेल. ''सुपर ७'' फेरीतील अव्वल चार संघ बाद फेरीत प्रवेश करतील. आयसीसीने म्हटले की, या बदलांचा उद्देश स्पर्धेतील चुरस वाढवणे आणि त्याच वेळी स्पर्धेचा कालावधी कमी करणे हा होता.<ref>{{cite news|title=ICC revamp formats for marquee men’s events|url=https://www.icc-cricket.com/news/icc-revamp-formats-for-marquee-men-s-events|work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद]]|date=१५ जुलै २०२६|access-date=१५ जुलै २०२६}}</ref><ref>{{Cite web|date=१५ जुलै २०२६|title=ICC adds Super Series and Super 7 twist to 2027 ODI World Cup|url=https://www.cricinfo.com/story/icc-adds-super-series-and-super-7-twist-to-2027-odi-world-cup-1545709|access-date=१५ जुलै २०२६|website=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref>
{| class="wikitable"
! colspan="8" |स्पर्धेच्या स्वरूपांचा सारांश
|-
!आवृत्ती
!वर्ष
!यजमान
!संघ
!सामने
!प्राथमिक टप्पा
!द्वितीय टप्पा
!अंतिम टप्पा
|-
| style="text-align:center" |१
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]]
| rowspan="2" |{{flag|इंग्लंड}}
| rowspan=4 style="text-align:center" |८
| rowspan=2 style="text-align:center" |१५
| rowspan=2 style="text-align:center" |४ संघांचे २ गट: १२ सामने
| rowspan="6" |नाही
| rowspan="4" style="text-align:center" |४ संघांची बाद फेरी (गटविजेते आणि उपविजेते): ३ सामने
|-
| style="text-align:center" |२
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]]
|-
| style="text-align:center" |३
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, १९८३|१९८३]]
|{{flag|इंग्लंड}}<br />{{flag|वेल्स}}
| rowspan="2" style="text-align:center" |२७
| rowspan=2 style="text-align:center" |४ संघांचे २ गट: २४ सामने
|-
| style="text-align:center" |४
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]]
|{{flag|भारत}}<br/>{{flag|पाकिस्तान}}
|-
| style="text-align:center" |५
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]]
|{{flag|ऑस्ट्रेलिया}}<br/>{{flag|न्यूझीलंड}}
| style="text-align:center" |९
| style="text-align:center" |३९
| style="text-align:center" |९ संघांचा साखळी टप्पा: ३६ सामने
| style="text-align:center" |४ संघांची बाद फेरी (साखळी टप्प्यातील अव्वल ४): ३ सामने
|-
| style="text-align:center" |६
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]]
|{{flag|भारत}}<br/>{{flag|पाकिस्तान}}<br/>{{flag|श्रीलंका}}
| rowspan=2 style="text-align:center" |१२
| style="text-align:center" |३७
| style="text-align:center" |६ संघांचे २ गट: ३० सामने
| style="text-align:center" |८ संघांची बाद फेरी (प्रत्येक गटातील अव्वल ४): ७ सामने
|-
| style="text-align:center" |७
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]]
|{{flag|इंग्लंड}}<br/>{{flag|वेल्स}}<br/>{{flag|स्कॉटलंड}}<br/>{{flag|आयर्लंड}}<br/>{{flag|नेदरलँड्स}}
| style="text-align:center" |४२
| style="text-align:center" |६ संघांचे २ गट: ३० सामने
| rowspan="2" |सुपर सिक्स (प्रत्येक गटातील अव्वल ३): ९ सामने
| rowspan="2" style="text-align:center" |४ संघांची बाद फेरी (सुपर सिक्समधील अव्वल ४): ३ सामने
|-
| style="text-align:center" |८
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]]
|{{flag|दक्षिण आफ्रिका}}<br/>{{flag|झिम्बाब्वे}}<br/>{{flag|केन्या}}
| style="text-align:center" |१४
| style="text-align:center" |५४
| style="text-align:center" |७ संघांचे २ गट: ४२ सामने
|-
| style="text-align:center" |९
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]]
|{{flag|वेस्ट इंडीज|cricket}}
| style="text-align:center" |१६
| style="text-align:center" |५१
| style="text-align:center" |४ संघांचे ४ गट: २४ सामने
|सुपर एट (प्रत्येक गटातील अव्वल २): २४ सामने
| style="text-align:center" |४ संघांची बाद फेरी (सुपर एटमधील अव्वल ४): ३ सामने
|-
| style="text-align:center" |१०
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]]
|{{flag|भारत}}<br/>{{flag|श्रीलंका}}<br/>{{flag|बांगलादेश}}
| rowspan=2 style="text-align:center" |१४
| rowspan=2 style="text-align:center" |४९
| rowspan=2 style="text-align:center" |७ संघांचे २ गट: ४२ सामने
| rowspan="4" |नाही
| rowspan="2" style="text-align:center" |८ संघांची बाद फेरी (प्रत्येक गटातील अव्वल ४): ७ सामने
|-
| style="text-align:center" |११
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]]
|{{flag|ऑस्ट्रेलिया}}<br/>{{flag|न्यूझीलंड}}
|-
| style="text-align:center" |१२
| style="text-align:center" |[[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]]
|{{flag|इंग्लंड}}<br/>{{flag|वेल्स}}
| rowspan=2 style="text-align:center" |१०
| rowspan=2 style="text-align:center" |४८
| rowspan=2 style="text-align:center" |१० संघांचा साखळी टप्पा: ४५ सामने
| rowspan=2 style="text-align:center" |४ संघांची बाद फेरी (साखळी टप्प्यातील अव्वल ४): ३ सामने
|-
| style="text-align:center" |१३
| style="text-align:center" |[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]]
|{{flag|भारत}}
|-
| style="text-align:center" |१४
| style="text-align:center" |[[२०२७ क्रिकेट विश्वचषक|''२०२७'']]
|{{flag|दक्षिण आफ्रिका}}<br/>{{flag|झिम्बाब्वे}}<br/>{{flag|नामिबिया}}
| rowspan="2" style="text-align:center" |''१४''
| rowspan="1" style="text-align:center" |''५७''
| rowspan="1" style="text-align:center" |''सुपर सिरीज (३ संघांचा एक गट): ३ सामने''<br/><br/>''गट टप्पा (६ संघांचे २ गट): ३० सामने''
| rowspan="1" |''सुपर सेवन (प्रत्येक गटातील अव्वल ३ + चौथ्या स्थानावरील सर्वोत्तम संघ): २१ सामने''
| rowspan="1" style="text-align:center" |''४ संघांची बाद फेरी (सुपर सेवनमधील अव्वल ४): ३ सामने''
|-
| style="text-align:center" |१५
| style="text-align:center" |''२०३१''
|{{flag|भारत}}<br/>{{flag|बांगलादेश}}
|
|
|
|
|}
==ट्रॉफी==
{{main|क्रिकेट विश्वचषक ट्रॉफी}}
आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक ट्रॉफी विश्वचषक विजेत्यांना सादर केली जाते. सध्याची ट्रॉफी १९९९ च्या चॅम्पियनशिपसाठी तयार करण्यात आली होती आणि स्पर्धेच्या इतिहासातील हे पहिले कायमस्वरूपी पारितोषिक होते. याआधी प्रत्येक विश्वचषकासाठी वेगवेगळ्या ट्रॉफी बनवण्यात आल्या होत्या.<ref>{{cite web|url=http://www.cricket-worldcup2015.net/2015/02/trophy-is-first-permanent-prize-in-cricket-world-cup.html|publisher=cricket-worldcup2015.net|title=Trophy is first permanent prize in Cricket World Cup|access-date=9 November 2007|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20150203150018/http://www.cricket-worldcup2015.net/2015/02/trophy-is-first-permanent-prize-in-cricket-world-cup.html|archive-date=3 February 2015|आर्काईव्ह दिनांक=2015-09-07|आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20150907181704/http://www.cricket-worldcup2015.net/2015/02/trophy-is-first-permanent-prize-in-cricket-world-cup.html}}</ref>{{Clarify|reason=is this right? were there different Prudential Cups, or was the same Cup used three times?|date=March 2023}} दोन महिन्यांच्या कालावधीत गॅरार्ड आणि कंपनीच्या कारागिरांच्या टीमने लंडनमध्ये ट्रॉफीची रचना आणि निर्मिती केली होती.<ref name=guardian_2015 /><ref>{{Cite web |title=Trophies {{!}} Famous Trophies |url=https://garrard.com/en/trophies/famous-trophies/ |access-date=2022-08-01 |website=Garrard |language=en-GB}}</ref>
सध्याची ट्रॉफी चांदी आणि गिल्टपासून बनविली गेली आहे आणि तीन चांदीच्या स्तंभांनी एक सोनेरी ग्लोब आहे. स्टंप आणि बेल्सच्या आकाराचे स्तंभ, क्रिकेटच्या तीन मूलभूत पैलूंचे प्रतिनिधित्व करतात: फलंदाजी, गोलंदाजी आणि क्षेत्ररक्षण, तर ग्लोब हे क्रिकेट बॉलचे वैशिष्ट्य आहे.<ref>{{cite web|url=http://www.webindia123.com/Sports/cricket/iccworldcup/history.htm|publisher=webindia123.com|title=Cricket World Cup- Past Glimpses|access-date=31 October 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20080323235801/http://www.webindia123.com/Sports/cricket/iccworldcup/history.htm|archive-date=23 March 2008|url-status=live}}</ref> पृथ्वीच्या अक्षीय झुकावचे प्रतीक म्हणून शिवण झुकलेली आहे. हे ६० सेंटीमीटर (२.० फूट) उंच आहे आणि त्याचे वजन अंदाजे ११ किलोग्रॅम (२४ पौंड) आहे. मागील विजेत्यांची नावे ट्रॉफीच्या पायावर कोरलेली आहेत, एकूण वीस शिलालेखांसाठी जागा आहे. आयसीसी मूळ ट्रॉफी ठेवते. केवळ शिलालेखांमध्ये भिन्न असलेली प्रतिकृती विजेत्या संघाला कायमस्वरूपी दिली जाते.<ref>{{cite web|url=http://www.icc-cricket.com/cricket-world-cup/about|publisher=[[International Cricket Council]]|title=About the Tournament|access-date=4 December 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140625075114/http://www.icc-cricket.com/cricket-world-cup/about |archive-date=25 June 2014}}</ref>
==मीडिया कव्हरेज==
ही स्पर्धा जगातील सर्वाधिक पाहिल्या गेलेल्या क्रीडा स्पर्धांपैकी एक आहे<ref>{{cite web|url=http://www.totalsportek.com/news/cricket-world-cup-third-most-watched-sports-event/|title=Cricket World Cup 2015 3rd Most Watched Sports Event In The World|publisher=Total Sportek|date=11 January 2015|access-date=17 March 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150325171256/http://www.totalsportek.com/news/cricket-world-cup-third-most-watched-sports-event/|archive-date=25 March 2015|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web |last=Baker |first=Alison |date=2022-07-25 |title=The Most Watched Sporting Events in The World |url=https://www.roadtrips.com/blog/the-most-watched-sporting-events-in-the-world/ |access-date=2023-07-05 |website=Roadtrips |language=en-US}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.roadtrips.com/blog/the-most-watched-sporting-events-in-the-world/|title=The Most Watched Sporting Events in The World|last=Baker|first=Alison|date=25 July 2022|access-date=15 October 2022|website=www.roadtrips.com}}</ref> आणि एकदिवसीय आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट अधिक प्रस्थापित झाल्यामुळे लागोपाठच्या स्पर्धांमुळे प्रसारमाध्यमांचे लक्ष वाढत आहे. २०११ क्रिकेट विश्वचषक २०० हून अधिक देशांमध्ये २.२ अब्जाहून अधिक प्रेक्षकांसाठी प्रसारित करण्यात आला.<ref name=guardian_2015>{{cite news|url=https://www.theguardian.com/sport/blog/2015/feb/12/cricket-world-cup-icc-50-overs|title=More money, more viewers and fewer runs in prospect for intriguing World Cup|newspaper=The Guardian|date=12 February 2015|access-date=17 March 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150304022954/http://www.theguardian.com/sport/blog/2015/feb/12/cricket-world-cup-icc-50-overs|archive-date=4 March 2015|url-status=live}}</ref><ref name="CWC">{{cite web|url=http://www.cricketworldcup.com/icc-marketing.html|publisher=cricketworldcup.com|title=World Cup Overview|access-date=29 January 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20070124001408/http://www.cricketworldcup.com/icc-marketing.html|archive-date=24 January 2007|url-status=dead|आर्काईव्ह दिनांक=2007-01-24|आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20070124001408/http://www.cricketworldcup.com/icc-marketing.html}}</ref> मुख्यतः २०११ आणि २०१५ विश्वचषकासाठी दूरचित्रवाणी अधिकार अमेरिकी १.१ अब्ज डॉलर पेक्षा जास्त विकले गेले<ref>{{cite web|url=http://content-usa.cricinfo.com/ci/content/current/story/271994.html|publisher=[[ईएसपीएन क्रिकइन्फो]]|author=Cricinfo staff|title=ICC rights for to ESPN-star|access-date=30 January 2007|date=9 December 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20090201130926/http://content-usa.cricinfo.com/ci/content/current/story/271994.html|archive-date=1 February 2009|url-status=live}}</ref> आणि प्रायोजकत्व अधिकार आणखी अमेरिकी ५०० दशलक्ष डॉलर मध्ये विकले गेले.<ref>{{cite web|url=http://content-usa.cricinfo.com/ci/content/story/276853.html|publisher=[[ईएसपीएन क्रिकइन्फो]]|author=Cricinfo staff|title=ICC set to cash in on sponsorship rights|access-date=30 January 2007|date=18 January 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20090201130947/http://content-usa.cricinfo.com/ci/content/story/276853.html|archive-date=1 February 2009|url-status=live}}</ref> आयसीसी ने २०१९ विश्वचषकासाठी एकूण १.६ अब्ज दर्शक तसेच स्पर्धेच्या डिजिटल व्हिडिओला ४.६ अब्ज व्ह्यूजचा दावा केला आहे.<ref name="2019 ICC viewership">{{Cite web|title=ICC Men's Cricket World Cup gives GDP 350 million boost to UK economy|url=https://www.icc-cricket.com/media-releases/1634008|access-date=2021-04-08|website=www.icc-cricket.com|language=en}}</ref> स्पर्धेतील सर्वात जास्त पाहिलेला सामना भारत आणि पाकिस्तान यांच्यातील गट गेम होता, जो ३०० दशलक्षाहून अधिक लोकांनी थेट पाहिला होता.<ref>{{cite web|url=https://www.icc-cricket.com/media-releases/1346930|title=2019 Men's Cricket World Cup most watched ever|date=16 September 2019|access-date=15 October 2022|website=www.icc-cricket.com}}</ref>
==प्रेक्षकांची उपस्थिती==
{| class="wikitable sortable" style="text-align:left"
|-
! वर्ष !! यजमान !! एकूण उपस्थिती !! संदर्भ
|-
| [[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]] || दक्षिण आफ्रिका, झिम्बाब्वे, केन्या || ६,२६,८४५ || <ref>{{cite web |url=http://www.icc-cricket.com/icc/news/quarterly/quarterly_3.pdf |publisher=ICC |title=Cricket World Cup 2003 |page=12 |access-date=29 January 2007 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20060321201920/http://www.icc-cricket.com/icc/news/quarterly/quarterly_3.pdf |archive-date=21 March 2006 |आर्काईव्ह दिनांक=2006-03-21 |आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20060321201920/http://www.icc-cricket.com/icc/news/quarterly/quarterly_3.pdf }}</ref>
|-
| [[२००७ क्रिकेट विश्वचषक|२००७]] || वेस्ट इंडीज || ६,७२,००० || <ref>{{cite web |url=http://content-usa.cricinfo.com/westindies/content/current/story/301516.html |title=World Cup profits boost debt-ridden Windies board |publisher=Content-usa.cricinfo.com |access-date=24 June 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080324094443/http://content-usa.cricinfo.com/westindies/content/current/story/301516.html |archive-date=24 March 2008 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|publisher=cricketworld.com|title=ICC CWC 2007 Match Attendance Soars Past 400,000|access-date=25 April 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20070928071404/http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|archive-date=28 September 2007|आर्काईव्ह दिनांक=2007-09-28|आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20070928071404/http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|url-status=dead}}</ref>
|-
| [[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]] || भारत, श्रीलंका, बांगलादेश || १२,२९,८२६ || <ref>{{cite web |url=http://content-usa.cricinfo.com/westindies/content/current/story/301516.html |title=World Cup profits boost debt-ridden Windies board |publisher=Content-usa.cricinfo.com |access-date=24 June 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080324094443/http://content-usa.cricinfo.com/westindies/content/current/story/301516.html |archive-date=24 March 2008 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|publisher=cricketworld.com|title=ICC CWC 2007 Match Attendance Soars Past 400,000|access-date=25 April 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20070928071404/http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|archive-date=28 September 2007|आर्काईव्ह दिनांक=2007-09-28|आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20070928071404/http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|url-status=dead}}</ref>
|-
| [[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]] || ऑस्ट्रेलिया, न्यू झीलंड || ११,०६,४२० || <ref>{{cite web |url=http://content-usa.cricinfo.com/westindies/content/current/story/301516.html |title=World Cup profits boost debt-ridden Windies board |publisher=Content-usa.cricinfo.com |access-date=24 June 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080324094443/http://content-usa.cricinfo.com/westindies/content/current/story/301516.html |archive-date=24 March 2008 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|publisher=cricketworld.com|title=ICC CWC 2007 Match Attendance Soars Past 400,000|access-date=25 April 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20070928071404/http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|archive-date=28 September 2007|आर्काईव्ह दिनांक=2007-09-28|आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20070928071404/http://www.cricketworld.com/world_cup_2007/article/?aid=11055|url-status=dead}}</ref>
|-
| [[२०१९ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९]] || इंग्लंड आणि वेल्स || ७,५२,००० || <ref>{{cite web |title=2019 Cricket World Cup delivers UK£350m boost for UK economy |first=Sam |last=Carp |url=https://www.sportspromedia.com/news/2019-cricket-world-cup-uk-economy-impact-england-wales/?zephr_sso_ott=mabKiL |date=4 March 2020 |access-date=18 May 2023 |publisher=SportsPro Daily}}</ref>
|-
| [[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]] || भारत || १२,५०,३०७ ||<ref>{{cite web |title=Record-Breaking 1.25 million spectators turn out for ICC Men's Cricket World Cup 2023|url=https://www.icc-cricket.com/media-releases/3790838 |date=21 November 2023 |access-date=21 November 2023 |publisher=cricketworldcup.com}}</ref>
|}
==यजमानांची निवड==
{{main|क्रिकेट विश्वचषकाचे यजमान}}
आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषदेची कार्यकारी समिती क्रिकेट विश्वचषक आयोजित करण्यासाठी उत्सुक असलेल्या राष्ट्रांनी केलेल्या बोलींची तपासणी केल्यानंतर स्पर्धेच्या यजमानांसाठी मतदान करते.<ref>{{cite web|url=http://content-usa.cricinfo.com/ci/content/story/245789.html|publisher=[[ईएसपीएन क्रिकइन्फो]]|title=Asia to host 2011 World Cup|date=30 April 2006|access-date=9 February 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20120928205442/http://content-usa.cricinfo.com/ci/content/story/245789.html|archive-date=28 September 2012|url-status=live}}</ref>
{{location map+|Earth
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|caption=क्रिकेट विश्वचषकाचे यजमान देश
|places=
{{Location map~|Earth|position=bottom|lat=51.300000|long=00.07000|label='''[[१९७५ क्रिकेट विश्वचषक|१९७५]]''',<br />'''[[१९७९ क्रिकेट विश्वचषक|१९७९]]''','''[[१९८३ क्रिकेट विश्वचषक|१९८३]]''',<br />'''[[१९९९ क्रिकेट विश्वचषक|१९९९]]''','''[[२०१९ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९]]'''}}
{{Location map~|Earth|position=bottom|lat=28.363600|long=77.13480|label='''[[१९८७ क्रिकेट विश्वचषक|१९८७]]''',<br />'''[[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]''','''[[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]]''',<br />'''[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]]''','''२०३१'''}}
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}}
[[File:Civic Centre-2003 CWC.jpg|thumb|दक्षिण आफ्रिकेतील २००३ क्रिकेट विश्वचषकाच्या निमित्ताने नागरी केंद्र उजळले]]
इंग्लंडने पहिल्या तीन स्पर्धांचे आयोजन केले होते. आयसीसीने ठरवले की इंग्लंडने पहिली स्पर्धा आयोजित करावी कारण ते उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित करण्यासाठी आवश्यक संसाधने समर्पित करण्यास तयार होते.<ref name="ENGHOST">{{cite web|url=http://www.cricworld.com/news/wchistory03feb.htm|publisher=cricworld.com|title=The History of World Cup's|access-date=19 September 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20070313181419/http://www.cricworld.com/news/wchistory03feb.htm|archive-date=13 March 2007|url-status=dead|आर्काईव्ह दिनांक=2007-03-13|आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20070313181419/http://www.cricworld.com/news/wchistory03feb.htm}}</ref> भारताने तिसऱ्या क्रिकेट विश्वचषकाचे यजमानपद स्वेच्छेने स्वीकारले, परंतु बहुतेक आयसीसी सदस्यांनी इंग्लंडला प्राधान्य दिले कारण जूनमध्ये इंग्लंडमध्ये दिवसाचा जास्त काळ म्हणजे एक सामना एका दिवसात पूर्ण होऊ शकतो.<ref>{{cite web|url=http://www1.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC_HISTORY/WC79_HISTORY.html|publisher=[[ईएसपीएन क्रिकइन्फो]]|title=The 1979 World Cup in England – West Indies retain their title|access-date=19 September 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20060523160232/http://www.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC_HISTORY/WC79_HISTORY.html|archive-date=23 May 2006|url-status=live}}</ref> १९८७ क्रिकेट विश्वचषक भारत आणि पाकिस्तानमध्ये आयोजित करण्यात आला होता, जो पहिल्यांदा इंग्लंडबाहेर आयोजित करण्यात आला होता.<ref>{{cite web|url=http://static.espncricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC_HISTORY/WC87_HISTORY.html|publisher=[[ईएसपीएन क्रिकइन्फो]]|title=The 1987 World Cup in India and Pakistan – Australia win tight tournament|access-date=15 July 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140716040704/http://static.espncricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC_HISTORY/WC87_HISTORY.html|archive-date=16 July 2014|url-status=live}}</ref>
१९८७, १९९६ आणि २०११ मध्ये दक्षिण आशिया, १९९२ आणि २०१५ मध्ये ऑस्ट्रेलिया (ऑस्ट्रेलिया आणि न्यू झीलंडमध्ये), २००३ मध्ये दक्षिण आफ्रिका आणि २००७ मध्ये वेस्ट इंडीज यासारख्या भौगोलिक प्रदेशातील अनेक स्पर्धा संयुक्तपणे आयोजित केल्या गेल्या आहेत.
नोव्हेंबर २०२१ मध्ये, आयसीसी ने २०२४ ते २०३१ सायकल दरम्यान खेळल्या जाणाऱ्या आयसीसी इव्हेंटसाठी यजमानांची नावे प्रकाशित केली. टी-२० विश्वचषक आणि चॅम्पियन्स ट्रॉफीसह ५० षटकांच्या विश्वचषकासाठी यजमानांची निवड स्पर्धात्मक बोली प्रक्रियेद्वारे करण्यात आली.<ref>{{cite news |title=India to host three ICC events in 2024-31 cycle |url=https://www.cricbuzz.com/cricket-news/119866/india-to-get-three-icc-events-in-next-cycle |access-date=16 November 2021 |work=Cricbuzz |language=en}}</ref><ref>{{cite news |title=USA to stage T20 World Cup: 2024-2031 ICC Men's tournament hosts confirmed |url=https://www.icc-cricket.com/news/2354682 |access-date=16 November 2021 |work=www.icc-cricket.com |language=en}}</ref>
==निकाल==
{{Main|क्रिकेट विश्वचषक अंतिम सामन्यांची यादी}}
{| class="wikitable sortable" style="font-size:90%; text-align:center; width:100%;"
|-
! rowspan="2" style="width:2%;|{{abbr|आवृ.|आवृत्ती}}
! rowspan="2" style="width:4%;|वर्ष
! rowspan="2" style="width:14%;|यजमान
! rowspan="2" style="width:15%;|अंतिम सामन्याचे मैदान
! colspan=3|अंतिम सामना
! rowspan=2|{{abbr|संघांची<br />संख्या|संघांची संख्या}}
|-
! style="width:15%; |विजेते
! style="width:30%; |निकाल
! style="width:15%; |उपविजेते
|-
!१
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]]
| style="text-align:left" |{{Flag|इंग्लंड}}
|[[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]
|'''{{cr|WIN}}'''<br><small>२९१/८ (६० षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५ - अंतिम सामना|वेस्ट इंडीज १७ धावांनी विजयी]]'''<br>[http://aus.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC75/WI_AUS_WC75_ODI-FINAL_21JUN1975.html (धावफलक)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090405150750/http://aus.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC75/WI_AUS_WC75_ODI-FINAL_21JUN1975.html |date=2009-04-05 }}
|{{cr|AUS}}<br><small>२७४ सर्वबाद (५८.४ षटके)</small>
| rowspan="4" |८
|-
!२
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]]
| style="text-align:left" |{{Flag|इंग्लंड}}
|[[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]
|'''{{cr|WIN}}'''<br><small>२८६/९ (६० षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''वेस्ट इंडीज ९२ धावांनी विजयी'''<br>[http://aus.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC79/WI_ENG_WC79_ODI-FINAL_23JUN1979.html (धावफलक)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090425135637/http://aus.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC79/WI_ENG_WC79_ODI-FINAL_23JUN1979.html |date=2009-04-25 }}
|{{cr|ENG}}<br><small>१९४ सर्वबाद (५१ षटके)</small>
|-
!३
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९८३|१९८३]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|इंग्लंड}} |{{flag|वेल्स}}}}
|[[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]
|'''{{cr|IND}}'''<br><small>१८३ सर्वबाद (५४.४ षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''भारत ४३ धावांनी विजयी'''<br>[http://aus.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC83/IND_WI_WC83_ODI-FINAL_25JUN1983.html (धावफलक)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090318144610/http://aus.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC83/IND_WI_WC83_ODI-FINAL_25JUN1983.html |date=2009-03-18 }}
|{{cr|WIN}}<br><small>१४० सर्वबाद (५२ षटके)</small>
|-
!४
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|भारत}} |{{flag|पाकिस्तान}} }}
|[[इडन गार्डन्स]], [[कोलकाता]]
|'''{{cr|AUS}}'''<br><small>२५३/५ (५० षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''ऑस्ट्रेलिया ७ धावांनी विजयी'''<br>[http://aus.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC87/AUS_ENG_WC87_ODI-FINAL_08NOV1987.html (धावफलक)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090207130805/http://aus.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC87/AUS_ENG_WC87_ODI-FINAL_08NOV1987.html |date=2009-02-07 }}
|{{cr|ENG}}<br><small>२४६/८ (५० षटके)</small>
|-
!५
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|ऑस्ट्रेलिया}}|{{flag|न्यूझीलंड}} }}
|[[मेलबर्न क्रिकेट मैदान]], [[मेलबर्न]]
|'''{{cr|PAK}}'''<br><small>२४९/६ (५० षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''पाकिस्तान २२ धावांनी विजयी'''<br>[http://aus.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC92/PAK_ENG_WC92_ODI-FINAL_25MAR1992.html (धावफलक)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090422131058/http://aus.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC92/PAK_ENG_WC92_ODI-FINAL_25MAR1992.html |date=2009-04-22 }}
|{{cr|ENG}}<br><small>२२७ सर्वबाद (४९.२ षटके)</small>
|९
|-
!६
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|भारत}}|{{flag|पाकिस्तान}}|{{flag|श्रीलंका}}}}
|[[गद्दाफी स्टेडियम]], [[लाहोर]]
|'''{{cr|SRI}}'''<br><small>२४५/३ (४६.२ षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''श्रीलंका ७ गडी राखून विजयी'''<br>[http://aus.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC96/WC96-MATCHES/AUS_SL_WC96_ODI-FINAL_17MAR1996.html (धावफलक)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090429035255/http://aus.cricinfo.com/db/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC96/WC96-MATCHES/AUS_SL_WC96_ODI-FINAL_17MAR1996.html |date=2009-04-29 }}
|{{cr|AUS}}<br><small>२४१/७ (५० षटके)</small>
| rowspan="2" |१२
|-
!७
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|इंग्लंड}}{{efn|इंग्लंड हा एकमेव अधिकृत यजमान होता, परंतु वेल्स, स्कॉटलंड, आयर्लंड प्रजासत्ताक आणि नेदरलँड्स येथेही सामने खेळवण्यात आले.}}|{{flag|वेल्स}} |{{flag|स्कॉटलंड}} |{{flag|आयर्लंड}} |{{flag|नेदरलँड्स}} }}
|[[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]
|'''{{cr|AUS}}'''<br><small>१३३/२ (२०.१ षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''ऑस्ट्रेलिया ८ गडी राखून विजयी'''<br>[http://aus.cricinfo.com/link_to_database/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC99/SCORECARDS/FINALS/AUS_PAK_WC99_ODI-FINAL_20JUN1999.html (धावफलक)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20080328014247/http://aus.cricinfo.com/link_to_database/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC99/SCORECARDS/FINALS/AUS_PAK_WC99_ODI-FINAL_20JUN1999.html |date=2008-03-28 }}
|{{cr|PAK}}<br><small>१३२ सर्वबाद (३९ षटके)</small>
|-
!८
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|दक्षिण आफ्रिका}}{{efn|[[दक्षिण आफ्रिका]] हा एकमेव अधिकृत मुख्य यजमान होता, परंतु झिम्बाब्वे आणि केन्या येथेही सामने खेळवण्यात आले.}}|{{flag|झिम्बाब्वे}} |{{flag|केन्या}} }}
|[[वॉन्डरर्स स्टेडियम (जोहान्सबर्ग)|वॉन्डरर्स स्टेडियम]], [[जोहान्सबर्ग]]
|'''{{cr|AUS}}'''<br><small>३५९/२ (५० षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''ऑस्ट्रेलिया १२५ धावांनी विजयी'''<br>[http://aus.cricinfo.com/link_to_database/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC2003/SCORECARDS/FINALS/AUS_IND_WC2003_ODI-FINAL_23MAR2003.html (धावफलक)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20080616013248/http://aus.cricinfo.com/link_to_database/ARCHIVE/WORLD_CUPS/WC2003/SCORECARDS/FINALS/AUS_IND_WC2003_ODI-FINAL_23MAR2003.html |date=2008-06-16 }}
|{{cr|IND}}<br><small>२३४ सर्वबाद (३९.२ षटके)</small>
|१४
|-
!९
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]]
| style="text-align:left" |{{Flag|वेस्ट इंडीज}}{{efn|[[क्रिकेट वेस्ट इंडीज|वेस्ट इंडीज क्रिकेट फेडरेशन]]च्या आठ सदस्य देशांनी सामने आयोजित केले - अँटिगा आणि बारबुडा, बार्बाडोस, ग्रेनाडा, गयाना, जमैका, सेंट किट्स आणि नेव्हिस, सेंट लुसिया आणि त्रिनिदाद आणि टोबॅगो.}}
|[[केन्सिंग्टन ओव्हल]], [[ब्रिजटाउन]]
|'''{{cr|AUS}}'''<br><small>२८१/४ (३८ षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''ऑस्ट्रेलिया ५३ धावांनी विजयी (डी/एल)'''<br>[http://content-aus.cricinfo.com/wc2007/engine/current/match/247507.html (धावफलक)]
|{{cr|SRI}}<br><small>२१५/८ (३६ षटके)</small>
|१६
|-
!१०
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|भारत}} |{{flag|श्रीलंका}} |{{flag|बांगलादेश}} }}
|[[वानखेडे स्टेडियम]], [[मुंबई]]
|'''{{cr|IND}}'''<br><small>२७७/४ (४८.२ षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''भारत ६ गडी राखून विजयी'''<br>[http://www.espncricinfo.com/icc_cricket_worldcup2011/engine/current/match/433606.html (धावफलक)]
|{{cr|SRI}}<br><small>२७४/६ (५० षटके)</small>
| rowspan="2" |१४
|-
!११
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|ऑस्ट्रेलिया}} |{{flag|न्यूझीलंड}} }}
|[[मेलबर्न क्रिकेट मैदान]], [[मेलबर्न]]
|'''{{cr|AUS}}'''<br><small>१८६/३ (३३.१ षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''ऑस्ट्रेलिया ७ गडी राखून विजयी'''<br>[http://www.espncricinfo.com/icc-cricket-world-cup-2015/engine/match/656495.html (धावफलक)]
|{{cr|NZ}}<br><small>१८३ सर्वबाद (४५ षटके)</small>
|-
!१२
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]]
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|इंग्लंड}} |{{flag|वेल्स}} }}
|[[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]
|'''{{cr|ENG}}'''<br><small>२४१ सर्वबाद (५० षटके)</small><br><small>१५/० ([[सुपर ओव्हर]])</small><br><small>२४ चौकार, २ षटकार</small>
| style="text-align:center" |'''सामना बरोबरीत <br> (सीमारेषीय फटक्यांच्या मोजणीवर इंग्लंड विजयी)'''<br>[http://www.espncricinfo.com/icc-cricket-world-cup-2015/engine/match/1144530.html (धावफलक)]
|{{cr|NZ}}<br><small>२४१/८ (५० षटके)</small><br><small>१५/१ ([[सुपर ओव्हर]])</small><br><small>१४ चौकार, ३ षटकार</small>
| rowspan="2" |१०
|-
!१३
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३]]
| style="text-align:left" |{{Flag|भारत}}
|[[नरेंद्र मोदी स्टेडियम]], [[अहमदाबाद]]
|'''{{cr|AUS}}'''<br><small>२४१/४ (४३ षटके)</small>
| style="text-align:center" |'''[[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३ - अंतिम सामना|ऑस्ट्रेलिया ६ गडी राखून विजयी]]'''<br>[https://www.espncricinfo.com/series/icc-cricket-world-cup-2023-24-1367856/india-vs-australia-final-1384439/full-scorecard (धावफलक)]
|{{cr|IND}}<br><small>२४० सर्वबाद (५० षटके)</small>
|-
!१४
|२०२७
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|दक्षिण आफ्रिका}} |{{flag|झिम्बाब्वे}} |{{flag|नामिबिया}} }}
|ठरायचे आहे
|
|
|
| rowspan="2" |१४
|-
!१५
|२०३१
| style="text-align:left" |{{ubl|{{flag|भारत}} |{{flag|बांगलादेश}} }}
|ठरायचे आहे
|
|
|
|}
;नोंदी
{{Notelist}}
क्रिकेट विश्वचषकातील देशांची सर्वोत्तम कामगिरी दर्शविणारा नकाशा (१९७५-२०२३).
[[File:Cricket_World_Cup_Countries'_best_results.svg|thumb|upright=3|center|देशांची सर्वोत्तम कामगिरी दर्शविणारा नकाशा.]]
===विजेतेपदांचा सारांश===
{| class="wikitable sortable"
|-
! संघ
!style="width:40%;| विजेतेपदे
!style="width:40%;| उपविजेतेपदे
|-
|style="background:gold"|{{cr|AUS}}
|style="background:gold"|'''६''' ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]], [[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]])
|style="background:#C0C0C0"|२ ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]])
|-
|style="background:gold"|{{cr|IND}}
|style="background:gold"|'''२''' ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९८३|१९८३]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]])
|style="background:#C0C0C0" |२ ([[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]], [[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]])
|-
|style="background:gold"|{{cr|WIN}}
|style="background:gold"|'''२''' ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]])
|style="background:#C0C0C0"|१ ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९८३|१९८३]])
|-
|style="background:gold"|{{cr|ENG}}
|style="background:gold"|'''१''' ([[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]])
|style="background:#C0C0C0"|३ ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]])
|-
|style="background:gold"|{{cr|SL}}
|style="background:gold"|'''१''' ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]])
|style="background:#C0C0C0"|२ ([[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]])
|-
|style="background:gold"|{{cr|PAK}}
|style="background:gold"|'''१''' ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]])
|style="background:#C0C0C0"|१ ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]])
|-
|style="background:#C0C0C0"|{{cr|NZ}}
|{{N/a}}
|style="background:#C0C0C0"|२ ([[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]])
|}
==स्पर्धेचा सारांश==
वीस देश कमीत कमी एकदा क्रिकेट विश्वचषकासाठी पात्र ठरले आहेत. सहा संघांनी प्रत्येक स्पर्धेत भाग घेतला असून त्यांपैकी पाच संघांनी विजेतेपद पटकावले आहे.<ref name="WCHistory"/> [[वेस्ट इंडीज क्रिकेट संघ|वेस्ट इंडीजने]] पहिल्या दोन स्पर्धा जिंकल्या, [[ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट संघ|ऑस्ट्रेलियाने]] सहा वेळा, [[भारतीय क्रिकेट संघ|भारताने]] दोन वेळा, तर [[पाकिस्तान क्रिकेट संघ|पाकिस्तान]], [[श्रीलंका क्रिकेट संघ|श्रीलंका]] आणि [[इंग्लंड क्रिकेट संघ|इंग्लंड]] यांनी प्रत्येकी एकदा विजेतेपद पटकावले आहे. वेस्ट इंडीज ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]] आणि [[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]]) आणि ऑस्ट्रेलिया ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]] आणि [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]]) हे सलग विजेतेपदे पटकावणारे एकमेव संघ आहेत.<ref name="WCHistory"/> ऑस्ट्रेलियाने तेरा अंतिम सामन्यांपैकी आठ अंतिम सामने ([[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]] आणि [[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]]) खेळले आहेत. [[न्यू झीलंड क्रिकेट संघ|न्यू झीलंडने]] अद्याप विश्वचषक जिंकलेला नाही, मात्र तो दोनदा उपविजेता ठरला आहे ([[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]] आणि [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]]). कसोटी न खेळणाऱ्या देशाची सर्वोत्तम कामगिरी [[केन्या क्रिकेट संघ|केन्याने]] [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]] स्पर्धेत उपांत्य फेरी गाठणे ही आहे; तर विश्वचषक पदार्पणात कसोटी न खेळणाऱ्या संघाची सर्वोत्तम कामगिरी [[आयर्लंड क्रिकेट संघ|आयर्लंडने]] [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]] मध्ये सुपर ८ (दुसरी फेरी) गाठणे ही आहे.<ref name="WCHistory"/>
[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६ विश्वचषकाचा]] सहयजमान असलेला श्रीलंका हा स्पर्धा जिंकणारा पहिला यजमान संघ ठरला, मात्र अंतिम सामना पाकिस्तानमध्ये झाला होता.<ref name="WCHistory"/> भारताने २०११ मध्ये यजमान म्हणून विजेतेपद पटकावले आणि स्वतःच्या देशात खेळवलेला अंतिम सामना जिंकणारा तो पहिला संघ ठरला.<ref>{{cite news|url=https://news.bbc.co.uk/sport2/hi/cricket/9444277.stm|title=India power past Sri Lanka to Cricket World Cup triumph|publisher=BBC Sport|date=२ एप्रिल २०११|access-date=१७ मार्च २०१५|archive-url=https://web.archive.org/web/20110403035451/http://news.bbc.co.uk/sport1/hi/cricket/9444277.stm|archive-date=३ एप्रिल २०११|url-status=live}}</ref> ऑस्ट्रेलिया आणि इंग्लंडने अनुक्रमे २०१५ आणि २०१९ मध्ये ही कामगिरी केली.<ref name="AUS2015"/> याशिवाय १९७९ मध्ये इंग्लंड आणि २०२३ मध्ये भारत यांनी स्वतःच्या देशात आयोजित स्पर्धेत अंतिम फेरी गाठली. स्पर्धेचे सहयजमान असताना आपली सर्वोत्तम विश्वचषक कामगिरी करणाऱ्या किंवा तिची बरोबरी करणाऱ्या इतर देशांमध्ये २०११ आणि २०१५ मध्ये अनुक्रमे अंतिम फेरी गाठणारे श्रीलंका आणि न्यू झीलंड, २००३ मध्ये सुपर सिक्स फेरी गाठणारा झिम्बाब्वे आणि २००३ मध्ये उपांत्य फेरी गाठणारा केन्या यांचा समावेश होतो.<ref name="WCHistory"/> १९८७ मध्ये सहयजमान भारत आणि पाकिस्तान या दोन्ही संघांनी उपांत्य फेरी गाठली, मात्र त्यांना अनुक्रमे इंग्लंड आणि ऑस्ट्रेलियाकडून पराभव पत्करावा लागला.<ref name="WCHistory"/> १९९२ मध्ये ऑस्ट्रेलिया, १९९९ मध्ये इंग्लंड, २००३ मध्ये दक्षिण आफ्रिका आणि २०११ मध्ये बांगलादेश हे यजमान संघ पहिल्याच फेरीत बाद झाले.<ref>{{Cite web |last=Sportstar |first=Team |date=२०१९-०५-२४ |title=World Cup, 11 editions: How host countries fared |url=https://sportstar.thehindu.com/cricket/icc-cricket-world-cup/cricket-world-cup-host-countries-england-wales-lords-india/article27228795.ece |access-date=२०२२-०८-२२ |website=sportstar.thehindu.com |language=en}}</ref>
===संघांची कामगिरी===
प्रत्येक विश्वचषकातील संघांच्या कामगिरीचा आढावा खाली दिला आहे. प्रत्येक स्पर्धेसाठी अंतिम स्पर्धेत सहभागी झालेल्या संघांची संख्या कंसात दिली आहे.
{| class="wikitable" style="text-align: center;"
|-
!rowspan="2" {{diagonal split header 2|<br/>संघ|संघांची संख्या/<br>हंगाम<br>यजमान}}
!{{small|(८)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]]
!{{small|(८)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]]
!{{small|(८)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, १९८३|१९८३]]
!{{small|(८)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]]
!{{small|(९)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]]
!{{small|(१२)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]]
!{{small|(१२)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]]
!{{small|(१४)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]]
!{{small|(१६)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]]
!{{small|(१४)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]]
!{{small|(१४)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]]
!{{small|(१०)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]]
!{{small|(१०)}}<br/>[[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३]]
!{{small|(१४)}}<br/>२०२७
! rowspan="2" |{{tooltip|सहभाग|सहभागांची संख्या}}
|-
!{{flagicon|England}}
!{{flagicon|England}}
!{{flagicon|England}}<br/>{{flagicon|Wales}}
!{{flagicon|India}}<br/>{{flagicon|Pakistan}}
!{{flagicon|Australia}}<br/>{{flagicon|New Zealand}}
!{{flagicon|India}}<br/>{{flagicon|Pakistan}}<br/>{{flagicon|Sri Lanka}}
!{{nobr|{{flagicon|England}} {{flagicon|Wales}}}}<br/>{{nobr|{{flagicon|Scotland}} {{flagicon|Ireland}}}}<br/>{{flagicon|Netherlands}}
!{{flagicon|South Africa}}<br/>{{flagicon|Zimbabwe}}<br/>{{flagicon|Kenya}}
!{{flagicon|West Indies}}
!{{flagicon|India}}<br/>{{flagicon|Sri Lanka}}<br/>{{flagicon|Bangladesh}}
!{{flagicon|Australia}}<br/>{{flagicon|New Zealand}}
!{{flagicon|England}}<br/>{{flagicon|Wales}}
!{{flagicon|India}}
!{{flagicon|South Africa}}<br/>{{flagicon|Namibia}}<br/>{{flagicon|Zimbabwe}}
|-
|style="text-align:left"|{{cr|AFG|२०१३}}|| || || || || || || || || || ||गट फेरी||१०वे||६वे|| ठरायचे आहे
| ३
|-
|style="text-align:left"|{{cr|AUS}}||style="background: silver"|'''उपविजेता'''||गट फेरी||गट फेरी||style="background: gold"|'''विजेता'''||style="border: 3px solid red" | ५वे||style="background: silver"|'''उपविजेता'''|| style="background: gold" |'''विजेता'''||style="background: gold"|'''विजेता'''|| style="background: gold" |'''विजेता'''||style="background:#ffebcd;"|'''उपांत्यपूर्व फेरी'''||style="border: 3px solid red; background: gold"|'''विजेता'''||style="background-color: #cc9966"|'''उपांत्य फेरी'''|| style="background: gold" |'''विजेता'''|| ठरायचे आहे
| १३
|-
|style="text-align:left"|{{cr|BAN}}|| || || || || || ||गट फेरी||गट फेरी|| ७वे ||style="border: 3px solid red" |गट फेरी||style="background:#ffebcd;"|'''उपांत्यपूर्व फेरी'''||८वे||| ८वे|| ठरायचे आहे
| ७
|-
|style="text-align:left"|{{cr|BER}}|| || || || || || || || ||गट फेरी|| || |||| ||
| १
|-
|style="text-align:left"|{{cr|CAN}}|| ||गट फेरी|| || || || || ||गट फेरी||गट फेरी||गट फेरी|||||| || ठरायचे आहे
| ४
|-
| style="text-align:left" |{{cr|ENG}}|| style="border: 3px solid red; background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="border: 3px solid red; background: silver" |'''उपविजेता'''|| style="border: 3px solid red; background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background: silver" |'''उपविजेता'''|| style="background: silver" |'''उपविजेता'''|| style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''||style="border: 3px solid red" | गट फेरी|| गट फेरी || ५वे || style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''||गट फेरी|| style="border: 3px solid red; background: gold" |'''विजेता''' || ७वे || ठरायचे आहे
| १३
|-
| style="text-align:left" |{{cr|IND}}||गट फेरी||गट फेरी|| style="background: gold" |'''विजेता'''|| style="border: 3px solid red; background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''||७वे|| style="border: 3px solid red; background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| ६वे|| style="background:silver" |'''उपविजेता'''||गट फेरी|| style="border: 3px solid red; background: gold" |'''विजेता'''|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="border: 3px solid red;background: silver"|'''उपविजेता''' || ठरायचे आहे
| १३
|-
| style="text-align:left" |{{cr|IRE}}|| || || || || || || || || ८वे ||गट फेरी||गट फेरी|| || || ठरायचे आहे
| ३
|-
| style="text-align:left" |{{cr|KEN}}|| || || || || ||गट फेरी||गट फेरी|| style="border: 3px solid red; background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''||गट फेरी||गट फेरी|| || || || ठरायचे आहे
| ५
|-
| style="text-align:left" |{{cr|NAM}}|| || || || || || || ||गट फेरी|| || || || || || ठरायचे आहे
| १
|-
| style="text-align:left" |{{cr|NED}}|| || || || || ||गट फेरी|| ||गट फेरी||गट फेरी||गट फेरी|| || || १०वे || ठरायचे आहे
| ५
|-
| style="text-align:left" |{{cr|NZ}}|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''||गट फेरी||गट फेरी|| style="border: 3px solid red; background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| ५वे || style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="border: 3px solid red; background: silver" |'''उपविजेता'''|| style="background: silver" |'''उपविजेता'''|| style="background-color: #cc9966"|'''उपांत्य फेरी''' || ठरायचे आहे
| १३
|-
| style="text-align:left" |{{cr|PAK}}||गट फेरी|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="border: 3px solid red; background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background: gold" |'''विजेता'''|| style="border: 3px solid red; background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''|| style="background: silver" |'''उपविजेता'''||गट फेरी||गट फेरी|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''||५वे||५वे || ठरायचे आहे
| १३
|-
| style="text-align:left" |{{cr|SCO}}|| || || || || || ||गट फेरी|| ||गट फेरी|| ||गट फेरी|| || || ठरायचे आहे
| ३
|-
| style="text-align:left" |{{cr|SA}}{{efn|name=SAfr}}|| || || || || style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''||style="border: 3px solid red;" |गट फेरी|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''||७वे|| style="background-color: #cc9966"|'''उपांत्य फेरी''' || style="border: 3px solid red" | पात्र
| ९
|-
| style="text-align:left" |{{cr|SRI}}||गट फेरी||गट फेरी||गट फेरी||गट फेरी||८वे|| style="border: 3px solid red; background: gold" |'''विजेता'''||गट फेरी|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''|| style="background: silver" |'''उपविजेता'''|| style="border: 3px solid red; background: silver" |'''उपविजेता'''|| style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''||६वे|| ९वे || ठरायचे आहे
| १३
|-
| style="text-align:left" | {{nobr|{{cr|UAE}}}}|| || || || || ||गट फेरी|| || || || ||गट फेरी|| || || ठरायचे आहे
| २
|-
| style="text-align:left" |{{cr|WIN}}|| style="background: gold" |'''विजेता'''|| style="background: gold" |'''विजेता'''|| style="background: silver" |'''उपविजेता'''||गट फेरी||६वे|| style="background-color: #cc9966" |'''उपांत्य फेरी'''||गट फेरी||गट फेरी||style="border: 3px solid red;" |६वे || style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''|| style="background:#ffebcd;" |'''उपांत्यपूर्व फेरी'''|||९वे|| || ठरायचे आहे
| १२
|-
| style="text-align:left" |{{cr|ZIM}}|| || ||गट फेरी||गट फेरी||९वे||गट फेरी|| ५वे || style="border: 3px solid red;" |६वे ||गट फेरी||गट फेरी||गट फेरी|| || || style="border: 3px solid red" | पात्र
| ९
|-
! colspan="16" |निष्क्रिय संघ
|-
|style="text-align:left"| {{flag|पूर्व आफ्रिका}}{{efn|name=EAfr}}|||गट फेरी|| || || ||colspan=10 {{n/a}}
| १
|}
'''संकेत'''
*{{bg|gold|विजेता}} - विजेता
*{{bg|silver|उपविजेता}} - उपविजेता
*{{bg|#cc9966|उपांत्य फेरी}} - उपांत्य फेरी
*{{bg|#BBF3BB|सुपर सिक्स}} - सुपर सिक्स (१९९९-२००३)
*{{bg|#ffebcd|उपांत्यपूर्व फेरी}} - उपांत्यपूर्व फेरी (१९९६, २०११-२०१५)
*{{bg|#ffebcd|सुपर एट}} - सुपर एट (२००७)
*गट फेरी - गट फेरी / पहिली फेरी
*पात्र - पात्र, अजूनही स्पर्धेत
*{{border|width=3px|color=red| }} - यजमान
===पदार्पण करणारे संघ===
{| class="wikitable" style="text-align: left;"
|-
!वर्ष
!संघ
!एकूण
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]]
|{{cr|AUS}}, {{flag|पूर्व आफ्रिका}},{{efn|name=EAfr}} {{cr|ENG}}, {{cr|IND}}, {{cr|NZ}}, {{cr|PAK}}, {{cr|WIN}}, {{cr|SL}}
|८
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]]
|{{cr|CAN}}
|१
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९८३|१९८३]]
|{{cr|ZIM}}
|१
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]]
|''कोणीही नाही''
|०
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]]
|{{cr|SA|}}{{efn|name=SAfr}}
|१
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]]
|{{cr|KEN}}, {{cr|NED}}, {{cr|UAE}}
|३
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]]
|{{cr|BAN}}, {{cr|SCO}}
|२
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]]
|{{cr|NAM}}
|१
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]]
|{{cr|BER}}, {{cr|IRE}}
|२
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]]
|''कोणीही नाही''
|०
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]]
|{{cr|AFG|२०१३}}
|१
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]]
|''कोणीही नाही''
|०
|-
|[[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३]]
|''कोणीही नाही''
|०
|}
===आढावा===
[[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३ स्पर्धेच्या]] समाप्तीपर्यंतच्या मागील विश्वचषकांमधील संघांच्या कामगिरीचा आढावा खालील तक्त्यात दिला आहे. संघांची मांडणी प्रथम सर्वोत्तम कामगिरीनुसार, त्यानंतर सहभागांची संख्या, विजयाची टक्केवारी, एकूण विजय, एकूण सामने आणि शेवटी वर्णक्रमानुसार करण्यात आली आहे:
{| class="wikitable sortable" style="text-align: center;"
|-
! rowspan="2"style="width:150px;"|संघ
! colspan=7 | आकडेवारी
! rowspan="2" class="unsortable" | सर्वोत्तम कामगिरी
|-
!width=30|सहभाग
!width=30|{{abbr|सामने|खेळलेले सामने}}
!width=30|विजय
!width=30|पराभव
!width=30|बरोबरी
!width=30|निकाल नाही
!width=30|विजय %*
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Australia}}
|१३||१०५||७८||२५||१||१||७५.४८||style="background:gold;" | विजेता {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९८७|१९८७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|India}}
|१३||९५||६३||३०||१||१||६७.५५||style="background:gold;" | विजेता {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९८३|१९८३]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|West Indies}}
|१२||८०||४३||३५||०||२||५५.१२||style="background:gold;" | विजेता {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|England}}
|१३||९३||५२||३९||१||१||५७.१४||style="background:gold;" | विजेता {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Pakistan}}
|१३||८८||४९||३७||०||२||५६.९७||style="background:gold;" | विजेता {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Sri Lanka}}
|१३||८९||४०||४६||१||२||४६.५५||style="background:gold;" | विजेता {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|New Zealand}}
|१३||९९||५९||३८||१||१||६०.७१||style="background-color: silver" | उपविजेता {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|South Africa}}
|९||७४||४५||२६||२||१||६३.०१||style="background-color: #cc9966" | उपांत्य फेरी {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९२|१९९२]], [[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Kenya}}
|५||२९||६||२२||०||०||२१.४२||style="background-color: #cc9966"| उपांत्य फेरी {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Zimbabwe}}
|९||५७||११||४२||१||३||२१.२९||{{sort|5.4|सुपर ६}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Bangladesh}}
|७||४९||१६||३२||०||१||३३.३३||{{sort|7.4|सुपर ८}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]])}} आणि {{sort|7.4|उपांत्यपूर्व फेरी}} <small>([[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]])</small>
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Ireland}}
|३||२१||७||१३||१||०||३५.७१||{{sort|7.5|सुपर ८}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Netherlands}}
|५||२९||४||२५||०||०||१३.७९||{{sort|9.2|गट फेरी}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Canada}}
|४||१८||२||१६||०||०||११.११||{{sort|9.2|गट फेरी}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९७९|१९७९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०११|२०११]])}}
|-
| style="text-align:left;" |{{nowrap|{{Cr|AFG|२०१३}}}}
|३||२४||५||१९||०||०||२०.८३||{{sort|9.5|गट फेरी}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१९|२०१९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०२३|२०२३]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Scotland}}
|३||१४||०||१४||०||०||०.००||{{sort|9.3|गट फेरी}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९९|१९९९]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{nowrap|{{Cr|UAE}}}}
|२||११||१||१०||०||०||९.०९||{{sort|9.4|गट फेरी}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९९६|१९९६]], [[क्रिकेट विश्वचषक, २०१५|२०१५]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Namibia}}
|१||६||०||६||०||०||०.००||{{sort|9.5|गट फेरी}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, २००३|२००३]])}}
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Bermuda}}
|१||३||०||३||०||०||०.००||{{sort|9.5|गट फेरी}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, २००७|२००७]])}}
|-
! colspan="11" |निष्क्रिय संघ
|-
|style="text-align:left;"|{{flag|पूर्व आफ्रिका}}{{efn|name=EAfr}}
|१||३||०||३||०||०||०.००||{{sort|9.5|गट फेरी}} {{small|([[क्रिकेट विश्वचषक, १९७५|१९७५]])}}
|-
!colspan=11|{{smalldiv|1={{Updated|१९ नोव्हेंबर २०२३}}<br/>स्रोत: [http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/team/results_summary.html?id=12;type=trophy क्रिकइन्फो]}}
|}
''नोंद:''
* {{small|विजयाच्या टक्केवारीत अनिर्णित सामने वगळले आहेत आणि बरोबरीचा सामना अर्धा विजय म्हणून गणला आहे.}}
* {{small|संघांची क्रमवारी प्रथम सर्वोत्तम कामगिरीनुसार, त्यानंतर विजयाच्या टक्केवारीनुसार आणि ती समान असल्यास वर्णक्रमानुसार लावली आहे.}}
{{notelist|refs=
{{efn|name=EAfr|१९८९ मध्ये संघ विसर्जित करण्यात आला.}}
{{efn|name=SAfr|१९९२ विश्वचषकापूर्वी [[वर्णभेद|वर्णभेदामुळे]] दक्षिण आफ्रिकेवर बंदी होती.}}
}}
==इतर परिणाम==
{{col-begin}}
{{col-break}}
===यजमान संघांचे निकाल===
{| class="wikitable"
|-
! वर्ष
! यजमान संघ
! समाप्त केले
|-
| [[१९७५ क्रिकेट विश्वचषक|१९७५]]
| {{cr|England}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| [[१९७९ क्रिकेट विश्वचषक|१९७९]]
| {{cr|England}}
| bgcolor=Silver| '''उपविजेते'''
|-
| [[१९८३ क्रिकेट विश्वचषक|१९८३]]
| {{cr|England}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| rowspan=2|[[१९८७ क्रिकेट विश्वचषक|१९८७]]
| {{cr|India}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| {{cr|Pakistan}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| rowspan=2|[[१९९२ क्रिकेट विश्वचषक|१९९२]]
| {{cr|Australia}}
| राउंड रॉबिन
|-
| {{cr|New Zealand}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| rowspan=3|[[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]
| {{cr|India}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| {{cr|Pakistan}}
| bgcolor=#FFEBCD| उपांत्यपूर्व फेरीत
|-
| {{cr|Sri Lanka}}
| bgcolor=Gold| '''चॅम्पियन्स'''
|-
| rowspan=4|[[१९९९ क्रिकेट विश्वचषक|१९९९]]
| {{cr|England}}
| ग्रुप स्टेज
|-
| {{cr|Scotland}}
| ग्रुप स्टेज
|-
| {{cr|Netherlands}}
| ''खेळला नाही''
|-
| {{cr|Ireland}}
| ''खेळला नाही''
|-
| rowspan=3|[[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]]
| {{crw|South Africa}}
| ग्रुप स्टेज
|-
| {{cr|Zimbabwe}}
| bgcolor=#BBF3BB| सुपर ६
|-
| {{cr|Kenya}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| [[२००७ क्रिकेट विश्वचषक|२००७]]
| {{cr|West Indies}}
| bgcolor=#FFEBCD| सुपर ८
|-
| rowspan=3|[[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]]
| {{cr|India}}
| bgcolor=Gold| '''चॅम्पियन्स'''
|-
| {{cr|Sri Lanka}}
| bgcolor=Silver| '''उपविजेते'''
|-
| {{cr|Bangladesh}}
| ग्रुप स्टेज
|-
| rowspan=2|[[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]]
| {{cr|Australia}}
| bgcolor=Gold| '''चॅम्पियन्स'''
|-
| {{cr|New Zealand}}
| bgcolor=Silver| '''उपविजेते'''
|-
| [[२०१९ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९]]
| {{cr|England}}
| bgcolor=Gold| '''चॅम्पियन्स'''
|-
| [[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]]
| {{cr|India}}
| bgcolor=Silver| '''उपविजेते'''
|-
| rowspan=3|[[२०२७ क्रिकेट विश्वचषक|२०२७]]
| {{cr|South Africa}}
|
|-
| {{cr|Zimbabwe}}
|
|-
| {{cr|Namibia}}
|
|-
| rowspan=3|[[२०३१ क्रिकेट विश्वचषक|२०३१]]
| {{cr|India}}
|
|-
| {{cr|Bangladesh}}
|
|-
|}
{{col-break}}
===गतविजेत्याचे निकाल===
{| class="wikitable"
|-
! वर्ष
! गतविजेते
! समाप्त केले
|-
| [[१९७९ क्रिकेट विश्वचषक|१९७९]]
| {{cr|West Indies}}
| bgcolor=Gold| '''चॅम्पियन्स'''
|-
| [[१९८३ क्रिकेट विश्वचषक|१९८३]]
| {{cr|West Indies}}
| bgcolor=Silver| '''उपविजेते'''
|-
| [[१९८७ क्रिकेट विश्वचषक|१९८७]]
| {{cr|India}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| [[१९९२ क्रिकेट विश्वचषक|१९९२]]
| {{cr|Australia}}
| राउंड रॉबिन
|-
| [[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]
| {{cr|Pakistan}}
| bgcolor=#FFEBCD| उपांत्यपूर्व फेरीत
|-
| [[१९९९ क्रिकेट विश्वचषक|१९९९]]
| {{cr|Sri Lanka}}
| ग्रुप स्टेज
|-
| [[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]]
| {{cr|Australia}}
| bgcolor=Gold| '''चॅम्पियन्स'''
|-
| [[२००७ क्रिकेट विश्वचषक|२००७]]
| {{cr|Australia}}
| bgcolor=Gold| '''चॅम्पियन्स'''
|-
| [[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]]
| {{cr|Australia}}
| bgcolor=#FFEBCD| उपांत्यपूर्व फेरीत
|-
| [[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]]
| {{cr|India}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| [[२०१९ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९]]
| {{cr|Australia}}
| bgcolor=#CC9966| '''उपांत्य फेरीत'''
|-
| [[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]]
| {{cr|England}}
| राउंड रॉबिन
|-
| [[२०२७ क्रिकेट विश्वचषक|२०२७]]
| {{cr|Australia}}
|
|-
|}
{{col-end}}
==स्पर्धेचे रेकॉर्ड==
{{main|क्रिकेट विश्वचषकातील विक्रमांची यादी}}
[[File:Sachin Tendulkar at MRF Promotion Event.jpg|right|thumbnail|विश्वचषकाच्या इतिहासात सर्वाधिक धावा करणारा [[सचिन तेंडुलकर]]]]
[[File:Glenn McGrath in Circular Quay, Sydney, Australia, 2018-02-03.jpg|thumbnail| विश्वचषकाच्या इतिहासातील आघाडीचा विकेट घेणारा गोलंदाज]]
{| class="wikitable"
|-
! colspan="3" | विश्वचषकातील विक्रम<ref>All records are based on statistics at [[ईएसपीएन क्रिकइन्फो]].com's list of [http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/index.html?id=12;type=trophy World Cup records] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20070103091603/http://www.cricinfo.com/db/STATS/WC/ |date=3 January 2007 }}</ref>
|-
! colspan="3" | फलंदाजी
|-
|सर्वाधिक धावा
|{{flagicon|India}} [[सचिन तेंडुलकर]]
|२,२७८ ([[१९९२ क्रिकेट विश्वचषक|१९९२]]–[[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]])
|-
|[[फलंदाजीची सरासरी (क्रिकेट)|सर्वोच्च सरासरी]] (किमान १० डाव) <ref>{{cite web|url=http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/batting/highest_career_batting_average.html?id=12;type=trophy|title=Best Average in Cricket World Cup|publisher=ESPN Cricinfo|access-date=14 July 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190626190708/http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/batting/highest_career_batting_average.html?id=12;type=trophy|archive-date=26 June 2019|url-status=live}}</ref>
|{{flagicon|South Africa}} [[लान्स क्लुसनर]]
|१२४.०० ([[१९९९ क्रिकेट विश्वचषक|१९९९]]–[[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]])
|-
|सर्वोच्च [[स्ट्राइक रेट|फलंदाजी स्ट्राइक रेट]] (किमान ५०० चेंडूंचा सामना केला)
|{{flagicon|Australia}} [[ग्लेन मॅक्सवेल]]
|१६०.३२ ([[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]]–[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]])
|-
|सर्वोच्च स्कोअर
| {{flagicon|New Zealand}} [[मार्टिन गप्टिल]] वि {{Flag|वेस्ट इंडीज}}
|२३७[[नाबाद|*]] ([[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]])
|-
|सर्वोच्च [[भागीदारी (क्रिकेट)|भागीदारी]]
| {{flagicon|West Indies}} [[ख्रिस गेल]] आणि [[मार्लन सॅम्युअल्स]] <br> (दुसऱ्या गड्यासाठी) वि {{cr|Zimbabwe}}
|३७२ ([[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]])
|-
|एकाच विश्वचषकात सर्वाधिक धावा
|{{flagicon|India}} [[विराट कोहली]]
|७६५ ([[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]])
|-
|सर्वाधिक शतक
|{{flagicon|India}} [[रोहित शर्मा]]
|७ ([[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]]-[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]])
|-
|एकाच विश्वचषकात सर्वाधिक शतके
|{{flagicon|IND}} [[रोहित शर्मा]]
|५ ([[२०१९ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९]])
|-
! colspan="3" | गोलंदाजी
|-
|सर्वाधिक बळी
|{{flagicon|Australia}} [[ग्लेन मॅकग्रा]]
|७१ ([[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]–[[२००७ क्रिकेट विश्वचषक|२००७]])
|-
|[[गोलंदाजीची सरासरी|सर्वात कमी सरासरी]] (किमान ४०० चेंडू टाकले)
|{{flagicon|India}} [[मोहम्मद शमी]]
|१३.५२ ([[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]]–[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]])
|-
|सर्वोत्तम [[स्ट्राइक रेट]] (किमान २० बळी)
|{{flagicon|India}} [[मोहम्मद शमी]]
|१५.८१ ([[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]]–[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]])
|-
|सर्वोत्तम [[इकॉनॉमी रेट]] (किमान १००० चेंडू टाकले)
|{{flagicon|West Indies}} [[अँडी रॉबर्ट्स]]
|३.२४ ([[१९७५ क्रिकेट विश्वचषक|१९७५]]–[[१९८३ क्रिकेट विश्वचषक|१९८३]])
|-
|सर्वोत्तम गोलंदाजी आकडेवारी
|{{flagicon|Australia}} [[ग्लेन मॅकग्रा]] वि {{cr|Namibia}}
|७/१५ ([[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]])
|-
|स्पर्धेत सर्वाधिक बळी
|{{flagicon|Australia}} [[मिचेल स्टार्क]]
|२७ ([[२०१९ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९]])
|-
! colspan="3" | क्षेत्ररक्षण
|-
|सर्वाधिक बाद ([[यष्टिरक्षक]])
|{{flagicon|Sri Lanka}} [[कुमार संगकारा]]
|५४ ([[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]]–[[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]])
|-
|सर्वाधिक झेल ([[क्षेत्ररक्षण (क्रिकेट)|क्षेत्ररक्षक]])
|{{flagicon|Australia}} [[रिकी पाँटिंग]]
|२८ ([[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]–[[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]])
|-
! colspan="3" | संघ
|-
|सर्वोच्च स्कोअर
|{{cr|South Africa}} वि {{cr|Sri Lanka}}
|४२८/५ ([[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]])
|-
|सर्वात कमी स्कोअर
|{{cr|Canada}} वि {{cr|Sri Lanka}}
|३६ ([[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]])
|-
|सर्वोच्च विजय %
|{{flagicon|Australia}} ऑस्ट्रेलिया
|७५.४८% (१०५ खेळले, ७८ जिंकले)<ref>{{cite web |title=World Cup Cricket Team Records & Stats |url=http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/team/results_summary.html?id=12;type=trophy |website=ESPNCricinfo |access-date=22 June 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110227115818/http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/team/results_summary.html?id=12%3Btype%3Dtrophy |archive-date=27 February 2011 |url-status=live }}</ref>
|-
|सर्वाधिक सलग विजय
|{{flagicon|Australia}} ऑस्ट्रेलिया
|२७ (२० जून १९९९ – १९ मार्च २०११, एक [[निकाल (क्रिकेट)#परिणाम नाही|निकाल नाही]] वगळला)<ref>{{cite web|url=http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/stats/index.html?class=2;filter=advanced;orderby=start;size=100;spanmax2=20+mar+2011;spanmin2=23+May+1999;spanval2=span;team=2;template=results;trophy=12;type=team;view=results|title=Statistics / Statsguru / One-Day Internationals / Team records|publisher=Cricinfo|access-date=30 March 2015|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20150911093616/http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/stats/index.html?class=2%3Bfilter%3Dadvanced%3Borderby%3Dstart%3Bsize%3D100%3Bspanmax2%3D20+mar+2011%3Bspanmin2%3D23+May+1999%3Bspanval2%3Dspan%3Bteam%3D2%3Btemplate%3Dresults%3Btrophy%3D12%3Btype%3Dteam%3Bview%3Dresults|archive-date=11 September 2015}}</ref>
|-
|सलग सर्वाधिक स्पर्धा जिंकतो
|{{flagicon|Australia}} ऑस्ट्रेलिया
|३ ([[१९९९ क्रिकेट विश्वचषक|१९९९]]–[[२००७ क्रिकेट विश्वचषक|२००७]])
|}
===स्पर्धेद्वारे===
{{main|क्रिकेट विश्वचषक पुरस्कार}}
{| class="wikitable"
|-
! वर्ष !! विजयी कर्णधार !! अंतिम सामन्यातील सर्वोत्तम खेळाडू !! स्पर्धेतील सर्वोत्तम खेळाडू !! सर्वाधिक धावा !! सर्वाधिक बळी
|-
| [[१९७५ क्रिकेट विश्वचषक|१९७५]] || {{flagicon|WIN}} [[क्लाइव्ह लॉईड]] || {{flagicon|WIN}} [[क्लाइव्ह लॉईड]]<ref name=potm_75-19>{{Cite web |title=ODI World Cup Finals: Full list of Player of the Match award winners from 1975 to 2019|url=https://sportstar.thehindu.com/cricket/icc-cricket-world-cup/odi-world-cup-final-man-of-the-match-list-award-winners-performances-records-stats-india-vs-australia-2023/article67550186.ece/|access-date=19 November 2023 |website=Sportstar|date=19 November 2023 }}</ref> || पुरस्कार मिळालेला नाही|| {{flagicon|NZ}} [[ग्लेन टर्नर]] (३३३) || {{flagicon|AUS}} [[गॅरी गिलमोर]] (११)
|-
|[[१९७९ क्रिकेट विश्वचषक|१९७९]] || {{flagicon|WIN}} [[क्लाइव्ह लॉईड]] || {{flagicon|WIN}} [[विव्ह रिचर्ड्स]]<ref name=potm_75-19/> || पुरस्कार मिळालेला नाही|| {{flagicon|WIN}} [[गॉर्डन ग्रीनिज]] (२५३) || {{flagicon|ENG}} [[माइक हेंड्रिक्स]] (१०)
|-
| [[१९८३ क्रिकेट विश्वचषक|१९८३]] ||{{flagicon|IND}} [[कपिल देव]] || {{flagicon|IND}} [[मोहिंदर अमरनाथ]]<ref name=potm_75-19/> || पुरस्कार मिळालेला नाही || {{flagicon|ENG}} [[डेव्हिड गोवर]] (३८४) || {{flagicon|IND}} [[रॉजर बिन्नी]] (१८)
|-
| [[१९८७ क्रिकेट विश्वचषक|१९८७]] ||{{flagicon|AUS}} [[ॲलन बॉर्डर]]|| {{flagicon|AUS}} [[डेव्हिड बून]]<ref name=potm_75-19/> || पुरस्कार मिळालेला नाही ||{{flagicon|ENG}} [[ग्रॅहम गूच]] (४७१) || {{flagicon|AUS}} [[क्रेग मॅकडरमॉट]] (१८)
|-
| [[१९९२ क्रिकेट विश्वचषक|१९९२]] ||{{flagicon|PAK}} [[इम्रान खान]] || {{flagicon|PAK}} [[वसीम अक्रम]]<ref name=potm_75-19/> ||{{flagicon|NZ}} [[मार्टिन क्रो]]<ref name=potm_75-19/> || {{flagicon|NZ}} [[मार्टिन क्रो]] (४५६) || {{flagicon|PAK}} [[वसीम अक्रम]] (१८)
|-
| [[१९९६ क्रिकेट विश्वचषक|१९९६]]||{{flagicon|SL}} [[अर्जुन रणतुंगा]] || {{flagicon|SL}} [[अरविंदा डी सिल्वा]]<ref name=potm_75-19/> || {{flagicon|SL}} [[सनथ जयसूर्या]]<ref name=potm_75-19/> || {{flagicon|IND}} [[सचिन तेंडुलकर]] (५२३) ||{{flagicon|IND}} [[अनिल कुंबळे]] (१५)
|-
| [[१९९९ क्रिकेट विश्वचषक|१९९९]] ||{{flagicon|AUS}} [[स्टीव्ह वॉ]] || {{flagicon|AUS}} [[शेन वॉर्न]]<ref name=potm99>{{Cite web |title=Australia vs Pakistan, ICC World Cup 1999 |url=https://www.espncricinfo.com/series/icc-world-cup-1999-61046/australia-vs-pakistan-final-65234/full-scorecard |access-date=19 November 2023 |website=ESPNcricinfo}}</ref>||{{flagicon|SA}} [[लान्स क्लुसनर]]<ref name=potm99/> || {{flagicon|IND}} [[राहुल द्रविड]] (४६१) ||{{flagicon|NZ}} [[जिऑफ ॲलॉट]] / <br/> {{flagicon|AUS}} [[शेन वॉर्न]] (२०)
|-
|[[२००३ क्रिकेट विश्वचषक|२००३]] || {{flagicon|AUS}} [[रिकी पाँटिंग]] || {{flagicon|AUS}} [[रिकी पाँटिंग]]<ref name=potm03>{{Cite web |date=23 March 2003 |title=Australia vs India, ICC World Cup 2003 Final |url=https://www.espncricinfo.com/series/icc-world-cup-2002-03-61124/australia-vs-india-final-65286/full-scorecard |access-date=19 November 2023 |website=ESPNcricinfo}}</ref>|| {{flagicon|IND}} [[सचिन तेंडुलकर]]<ref name=potm03/> || {{flagicon|IND}} [[सचिन तेंडुलकर]] (६७३) || {{flagicon|SL}} [[चमिंडा वास]] (२३)
|-
|[[२००७ क्रिकेट विश्वचषक|२००७]] || {{flagicon|AUS}} [[रिकी पाँटिंग]] || {{flagicon|AUS}} [[ॲडम गिलख्रिस्ट]]<ref>{{Cite web |date=18 November 2018 |title=This day, that year: Adam Gilchrist scores 149 to gift Australia World Cup |url=https://www.hindustantimes.com/cricket/this-day-that-year-adam-gilchrist-scores-149-to-gift-australia-world-cup/story-k3ebcJURetMZw8I7ztP4CK.html |access-date=19 November 2023 |website=Hindustan Times}}</ref>|| {{flagicon|AUS}} [[ग्लेन मॅकग्रा]]<ref>{{Cite web |date=29 April 2007 |title=McGrath bows out winning Player of the Tournament award |url=https://www.espncricinfo.com/story/mcgrath-bows-out-winning-player-of-the-tournament-award-292785 |access-date=19 November 2023 |website=ESPNcricinfo}}</ref>|| {{flagicon|AUS}} [[मॅथ्यू हेडन]] (६५९) || {{flagicon|AUS}} [[ग्लेन मॅकग्रा]] (२६)
|-
|[[२०११ क्रिकेट विश्वचषक|२०११]] || {{flagicon|IND}} [[महेंद्रसिंग धोनी]] || {{flagicon|IND}} [[महेंद्रसिंग धोनी]]<ref name="hindustantimes.com">{{Cite web |date=11 November 2011 |title=Yuvraj Player of the Tournament; Dhoni Man of the Match of WC final |url=https://www.hindustantimes.com/cricket/yuvraj-player-of-the-tournament-dhoni-man-of-the-match-of-wc-final/story-8ll0UfgXUaIUtVeIrJMOIM.html |access-date=19 November 2023 |website=Hindustan Times}}</ref>|| {{flagicon|IND}} [[युवराज सिंग]]<ref name="hindustantimes.com"/>|| {{flagicon|SL}} [[तिलकरत्ने दिलशान]] (५००) || {{flagicon|PAK}} [[शाहिद आफ्रिदी]] / <br/> {{flagicon|IND}} [[झहीर खान]] (२१)
|-
|[[२०१५ क्रिकेट विश्वचषक|२०१५]] || {{flagicon|AUS}} [[मायकेल क्लार्क (क्रिकेटर)|मायकेल क्लार्क]] ||{{flagicon|AUS}} [[जेम्स फॉकनर]]<ref>{{Cite web |date=29 March 2015 |title=James Faulkner Emerges From the Shadows of Two Mitchells in World Cup Final |url=https://sports.ndtv.com/icc-cricket-world-cup-2015/james-faulkner-emerges-from-the-shadows-of-two-mitchells-in-world-cup-final-1502822 |access-date=19 November 2023 |website=NDTV }}{{मृत दुवा|date=July 2025 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref>||{{flagicon|AUS}} [[मिचेल स्टार्क]]<ref>{{Cite web |date=29 March 2015 |title=Mitchell Starc named as player of ICC World Cup 2015 |url=https://www.indiatoday.in/sports/world-cup-2015/story/mitchell-starc-world-cup-2015-australia-new-zealand-246307-2015-03-29 |access-date=19 November 2023 |website=India Today}}</ref>||{{flagicon|NZ}} [[मार्टिन गप्टिल]] (५४७) || {{flagicon|AUS}} [[मिचेल स्टार्क]] / <br/>{{flagicon|NZ}} [[ट्रेंट बोल्ट]] (२२)
|-
|[[२०१९ क्रिकेट विश्वचषक|२०१९]] || {{flagicon|ENG}} [[इऑन मॉर्गन]] ||{{flagicon|ENG}} [[बेन स्टोक्स]]<ref name=potm19>{{Cite web |date=15 July 2019 |title=World Cup 2019 Awards Winners: Man of the Tournament and Man of the Match |url=https://indianexpress.com/article/sports/cricket-world-cup/cricket-world-cup-2019-awards-winners-list-man-of-the-tournament-and-man-of-the-match-5829154/ |access-date=19 November 2023 |website=Indian Express}}</ref>|| {{flagicon|NZ}} [[केन विल्यमसन]]<ref name=potm19/>|| {{flagicon|IND}} [[रोहित शर्मा]] (६४८) || {{flagicon|AUS}} [[मिचेल स्टार्क]] (२७)
|-
|[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक|२०२३]] || {{flagicon|AUS}} [[पॅट कमिन्स]] || {{flagicon|AUS}} [[ट्रॅव्हिस हेड]]<ref>{{Cite web |date=19 November 2023 |title=Travis Head delivers World Cup final masterclass in POTM display |url=https://www.cricketworldcup.com/news/3789833 |access-date=19 November 2023 |website=cricketworldcup.com }}{{मृत दुवा|date=September 2025 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref>|| {{flagicon|IND}} [[विराट कोहली]]<ref>{{Cite web |date=19 November 2023 |title=India star named Player of the Tournament at ICC Men's Cricket World Cup |url=https://www.icc-cricket.com/news/3789837 |access-date=19 November 2023 |website=ICC}}</ref>||{{flagicon|IND}} [[विराट कोहली]] (७६५) || {{flagicon|IND}} [[मोहम्मद शमी]] (२४)
|-
|}
==हे देखील पहा==
*[[आयसीसी अंडर-१९ क्रिकेट विश्वचषक]]
*[[आयसीसी टी-२० विश्वचषक]]
*[[आयसीसी चॅम्पियन्स ट्रॉफी]]
*[[आयसीसी वर्ल्ड टेस्ट चॅम्पियनशिप]]
*[[२०२३ क्रिकेट विश्वचषक]]
*[[महिला क्रिकेट विश्वचषक]]
*[[आशिया कप]]
*[[विश्व चषक]]
*[[विश्वचषकांची यादी]]
==संदर्भ==
{{संदर्भयादी}}
===स्रोत===
* {{cite book
| last=Browning
| first=Mark
| title=A complete history of World Cup Cricket
| url=https://archive.org/details/completehistoryo0000brow
| publisher=[[Simon & Schuster]]
| year=1999
| isbn=0-7318-0833-9 }}
== बाह्य दुवे ==
*{{official website|https://www.cricketworldcup.com/}} आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक
*{{official website|https://www.icc-cricket.com/}} आयसीसी
{{Navboxes|list=
{{क्रिकेट विश्वचषक माहिती}}
{{आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक विजेते}}
{{आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक विजेता कर्णधार}}
{{आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक फायनलमधील सामनावीर}}
{{आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक स्पर्धेतील सर्वोत्तम खेळाडू}}
{{आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट}}
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}}
{{Authority control}}
[[वर्ग:क्रिकेट|विश्वचषक]]
[[वर्ग:क्रिकेट विश्वचषक]]
[[वर्ग:एकदिवसीय क्रिकेट]]
[[वर्ग:आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संघटन]]
[[वर्ग:विश्वचषक]]
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दुर्गा
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text/x-wiki
[[चित्र:VenusClub,Khidderpore.JPG|thumb|right|[[कोलकाता]] येथील दुर्गापुजेचे एक दृश्य]]
'''दुर्गा''' (संस्कृत: दुर्गा, IAST: Durgā) ही [[हिंदू धर्म|हिंदू धर्मातील]] एक प्रमुख देवी आहे. शाक्त परंपरेत तिला [[महादेवी]]चे एक प्रमुख रूप मानले जाते. दुर्गेचा संबंध शक्ती, संरक्षण आणि युद्धाशी जोडला जातो.
{{विस्तार}}
[[शाक्त | शाक्त संप्रदाय]] मुख्य देवता आहे ज्याची तुलना सर्वोच्च [[ब्राह्मण]] शी केली जाते. दुर्गाचे वर्णन मूळ शक्ती, प्रबळ स्वभाव, सद्गुण योगमय, बुद्धीची आई आणि विकारांपासून मुक्त असे केले आहे. ती अंधकार आणि अज्ञानाच्या राक्षसांपासून संरक्षक आणि उपकारकर्ता आहे. असे मानले जाते की ती शांती, समृद्धी आणेल आणि [[धर्म]] वर हल्ला करणाऱ्या आसुरी शक्तींचा नाश करेल. <ref> पॉल रीड-बोवेन 2012, पृ. 212-213. </ref>
[[सिंह]] वर स्वार होऊन [[देवी]] म्हणून दुर्गेचे प्रतिनिधित्व केले जाते. दुर्गा देवीला आठ हात आहेत, त्या सर्वांमध्ये काहीना काही शस्त्र आहे. त्याने [[महिषासुर]] नावाच्या राक्षसाचा वध केला. महिषासुर (= महिषा + असुर = म्हैस सारखा असुर) करतो. हिंदू ग्रंथांमध्ये तिचे [[शिव]]ची पत्नी दुर्गा म्हणून वर्णन केले आहे. ज्या ज्योतिर्लिंगांमध्ये देवी दुर्गाची स्थापना केली जाते त्यांना सिद्धपीठ म्हणतात. तेथे केलेले सर्व ठराव पूर्ण झाले आहेत. दुर्गाम नावाच्या एका महान राक्षसाचा वध केल्यामुळे आईचे नाव दुर्गा देवी पडले. आईने शताक्षीचे रूप धारण केले आणि त्यानंतर शकंभारी देवी, ज्याला शाकंभरी देवी म्हणून ओळखले जाऊ लागले, त्यांनी दुर्गामासूरचा वध केला. ज्यामुळे ती संपूर्ण विश्वात दुर्गा देवीच्या नावाने प्रसिद्ध झाली. आईच्या देशात अनेक मंदिरे आहेत, कुठे महिषासुरमर्दिनी शक्तीपीठ तर कुठे कामाख्या देवी. ही देवी कोलकातामध्ये महाकाली म्हणून ओळखली जाते आणि सहारनपूरच्या प्राचीन शक्तीपीठात [[शाकंभरी]]च्या रूपात त्याची पूजा केली जाते.
हिंदूंच्या शक्ती पंथात भगवती दुर्गा ही जगाची सर्वोच्च आणि सर्वोच्च देवता मानली जाते (शाक्त संप्रदाय [[ईश्वर]] यांना देवी मानतो). [[वेद | वेद]] दुर्गाचा विस्तृत उल्लेख आहे, परंतु [[उपनिषद]] "उमा हैमावती" (हिमालयची मुलगी उमा) यांचे वर्णन करते. [[पुराण]] दुर्गाला आदिशक्ती मानले जाते. दुर्गा हे प्रत्यक्षात [[शिव]]ची पत्नी [[आदिशक्ती]]चे रूप आहे, की शिवाच्या पराशक्तीचे वर्णन मूळ स्वभाव, सद्गुणी माया, बुद्धीची आणि विकारविरहित आई म्हणून केले गेले आहे. एकटे (केंद्रीत) झाल्यानंतरही, ती माया शक्ती योगायोगाने अनेक बनते. त्या आदिशक्ती देवीने सावित्री (ब्रह्माची पहिली पत्नी), लक्ष्मी आणि प्रामुख्याने पार्वती (सती) म्हणून जन्म घेतला आणि ब्रह्मा, विष्णू आणि महेश यांच्याशी लग्न केले. तीन रूपे असूनही दुर्गा (आदिशक्ती) एक आहे.
देवी दुर्गाची स्वतः अनेक रूपे आहेत (सावित्री, लक्ष्मी आणि पार्वती सोडून). तिचे मुख्य रूप "गौरी" आहे ज्याचा अर्थ शांत, सुंदर आणि गोरा आहे. त्याचे सर्वात भयानक रूप "" काली "" आहे, म्हणजे काळे रूप. [[भारत]] आणि [[नेपाळ]]च्या अनेक मंदिरांमध्ये आणि मंदिरांमध्ये दुर्गाची विविध स्वरूपात पूजा केली जाते. देवी दुर्गा सिंहावर स्वार आहे.
मार्कंडेय पुराणात, ब्रह्देवने मानवजातीचे रक्षण करण्यासाठी मनुष्य, देवी कवच आणि देवी सूक्त यांचे एक परम रहस्य, सर्वात उपयुक्त आणि कल्याण वर्णन केले आहे आणि असे म्हणले आहे की जो व्यक्ती हे उपाय करेल, तो या जगात सुख उपभोगेल. शेवटचा काळ. बैकुंठाला जाईल. ब्रह्देव म्हणाले की जो व्यक्ती दुर्गा सप्तशतीचे पठण करेल त्याला आनंद मिळेल. भागवत पुराणानुसार, आई जगदंबाने सर्वोत्तम पुरुषांचे रक्षण करण्यासाठी अवतार घेतला आहे. तर श्रीमद देवी भागवत यांच्या मते, वेद आणि पुराणांचे रक्षण करण्यासाठी आणि दुष्टांचा नाश करण्यासाठी आई जगदंबाने अवतार घेतला आहे. त्याचप्रमाणे, igग्वेदानुसार, आई दुर्गा ही आदिम शक्ती आहे, तिच्याकडून संपूर्ण जग चालवले जाते आणि तिच्याशिवाय दुसरा अविनाशी नाही.
==दुर्गेची रूपे==
दुर्गेची नऊ रूपे आहेत. यांना शक्तिरूपे म्हणतात:
* [[शैलपुत्री]] - [[हिमालय|हिमालयाच्या]] तपश्चर्येने प्रसन्न होऊन देवीने कन्यारूपाने पृथ्वीवर जन्म घेतला, म्हणून ती [[हिमालय|हिमालयपुत्री]]. म्हणून पुराणात तिचा उल्लेख शैलपुत्री असा होतो. आपल्या पित्याच्या इच्छेप्रमाणे तिने विष्णूशी लग्न करता [[शिव|शंकराला]] वरले. म्हणून शैलपुत्री दुर्गा ही दृढनिश्चयाची आणि कठोर तपाची शिकवण देते.. नवरात्राच्या पहिल्या दिवशी हिचे पूजन करतात.
* [[ब्रम्हचारिणी]] - म्हणजे ब्रह्मपद प्रदान करणारी. उजव्या हातात [[जपमाळ]] व डाव्या हातात [[कमंडलू]] असे तेजोमय स्वरूप. पूजनाने सिद्धी व विजय प्राप्त होतात असा समज आहे. नवरात्राच्या दुसऱ्या दिवशी या रूपाची पूजा करतात.
* [[चंद्रघंटा]] - कल्याण करणारे व शांतिदायक दशभुजा स्वरूप. शिरोभागी घंटेच्या आकाराचा अर्धचंद्र आहे. सर्व हातांत अस्त्रे आहेत. पूजनाने सर्व कष्टांर्ना मुक्ती मिळते असे म्हणतात. नवरात्राच्या तिसऱ्या दिवशी हिचे पूजन करतात.
* [[कुष्मांडा]] - अष्टभुजा स्वरूपातले रूप. पूजनाने रोग नष्ट होतात असा समज आहे. कुष्मांड म्हणजे कोहळा. हिला कोहळ्याचा बळी दिला जातो. वाहन सिंह आहे. नवरात्राच्या चवथ्या दिवशी हिची पूजा होते.
* [[स्कंदमाता]] - [[कार्तिकेय|स्कंदाची]] माता म्हणून असलेले चार भुजांचे स्वरूप. कमळासनावर विराजमान आहे. या देवीचा वर्ण पूर्ण शुभ्र आहे. नवरात्राच्या पाचव्या दिवशी हिचे पूजन करतात.
* [[कात्यायनी]] - 'कत' नावाच्या ऋषीच्या कुलात, 'कात्यक' गोत्रात उत्पन्न झालेली अशी ती कात्यायनी. नवरात्राच्या सहाव्या दिवशी देवीच्या या रूपाची पूजा करतात.
* [[कालरात्री]] - काळे शरीर असलेली व तीन डोळे असलेली, केशसंभार विखुरलेला, वाहन [[गाढव|गर्दभ]]. खड्ग धारण केलेली, भयानक असे रूप. नवरात्राच्या सातव्या दिवशी हिचे पूजन करतात.
* [[महागौरी]] - गोरा वर्ण, आभूषणे व वस्त्र पांढऱ्या रंगाची. चार हात असलेली व वृषभ हे वाहन असलेली. नवरात्राच्या आठव्या दिवशी हिचे पूजन करतात.
* [[सिद्धिदात्री]] - सर्व सिद्धी देणारी.हिच्या उपासनेने [[अष्टसिद्धी|आठ सिद्धी]] प्राप्त होतात व पारलौकिक कामना पूर्ण होतात, अशी समजूत आहे..नवरात्राच्या नवव्या दिवशी हिचे पूजन करतात.
देवीच्या या नऊ रूपांचे वर्णन ’देवीकवच’ नावाच्या स्तोत्रात आले आहे.
==हे सुद्धा पहा==
* [[नवदुर्गा]]
* [[दुर्गापूजा]]
* [[हुदुर दुर्गा]]
{{हिंदू देवता आणि ग्रंथ}}
[[वर्ग:हिंदू दैवते]]
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संतोष गोरे
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}}
'''एदुआर्द बॅलादुर''' ([[फ्रेंच भाषा|फ्रेंच]]: Édouard Balladur; [[२ मे]], [[इ.स. १९२९|१९२९]] - [[३१ ऑगस्ट]], [[इ.स. २०२६|२०२६]]) हा [[फ्रान्स]] देशाचा भूतपूर्व पंतप्रधान आहे. तो मार्च १९९३ ते मे १९९५ दरम्यान ह्या पदावर होता.
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संतोष गोरे
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'''एदुआर्द बॅलादुर''' ([[फ्रेंच भाषा|फ्रेंच]]: Édouard Balladur; [[२ मे]], [[इ.स. १९२९|१९२९]] - [[३१ ऑगस्ट]], [[इ.स. २०२६|२०२६]]) हा [[फ्रान्स]] देशाचा भूतपूर्व पंतप्रधान आहे. तो मार्च १९९३ ते मे १९९५ दरम्यान ह्या पदावर होता.
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'''एदुआर्द बॅलादुर''' ([[फ्रेंच भाषा|फ्रेंच]]: Édouard Balladur; [[२ मे]], [[इ.स. १९२९|१९२९]] - [[३१ ऑगस्ट]], [[इ.स. २०२६|२०२६]]) हा [[फ्रान्स]] देशाचा भूतपूर्व पंतप्रधान आहे. तो मार्च १९९३ ते मे १९९५ दरम्यान ह्या पदावर होता.
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{{माहितीचौकट पदाधिकारी
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}}
'''एदुआर्द बॅलादुर''' ([[फ्रेंच भाषा|फ्रेंच]]: Édouard Balladur; [[२ मे]], [[इ.स. १९२९|१९२९]] - [[३१ ऑगस्ट]], [[इ.स. २०२६|२०२६]]) हा [[फ्रान्स]] देशाचा भूतपूर्व पंतप्रधान आहे. तो मार्च १९९३ ते मे १९९५ दरम्यान ह्या पदावर होता.
{{DEFAULTSORT:बॅलादुर, एदुआर्द}}
[[वर्ग:फ्रान्सचे पंतप्रधान]]
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{{मुखपृष्ठ सदर टीप
|तारीख = १८ मार्च
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}}
{{Infobox cricket tournament main
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| caption = '''टी२० विश्वचषक'''
| administrator = [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]]
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{{Season sidebar
| image = [[File:ICC_Men's_T20_World_Cup_Trophy_at_COA_-_BugWarp_(20)_(cropped).jpg|250px]]
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* [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७]]
* [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००९|२००९]]
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* [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१२|२०१२]]
* [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१४|२०१४]]
* [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१६|२०१६]]
* [[२०२१ ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२१]]
* [[२०२२ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२२]]
* [[२०२४ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२४]]
* [[२०२६ आयसीसी पुरुष ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२६]]
* [[२०२८ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२८]]
* [[२०३० आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०३०]]
}}
'''[[आयसीसी]] पुरुष टी२० विश्वचषक''' (पूर्वी '''आयसीसी विश्व ट्वेन्टी२०''' म्हणून ओळखली जात असे)<ref>{{cite web |title=विश्व टी२०चे टी२० विश्वचषक असे नामकरण |url=https://www.icc-cricket.com/media-releases/917529 |publisher=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती |आयसीसी]] | language=en|access-date=२० एप्रिल २०२२ |date=२३ नोव्हेंबर २०१८|archive-url=https://web.archive.org/web/20181123200931/https://www.icc-cricket.com/media-releases/917529 |archive-date=२३ नोव्हेंबर २०१८ |url-status=live}}</ref> ही [[आंतरराष्ट्रीय टी२० | ट्वेंटी२० क्रिकेट]]ची आंतरराष्ट्रीय स्पर्धा आहे. क्रिकेटची प्रशासकीय संस्था, [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]] (आयसीसी) द्वारे आयोजित करण्यात आलेल्या या स्पर्धेत सध्या १६ संघांचा समावेश आहे, ज्यामध्ये दिलेल्या अंतिम मुदतीनुसार क्रमवारीतील अव्वल १० संघ आणि [[आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक पात्रता|टी२० विश्वचषक पात्रता]] स्पर्धेद्वारे निवडलेल्या सहा संघांचा समावेश आहे.
सदर स्पर्धा साधारणतः दर दोन वर्षांनी आयोजित केली जाते. तथापि, स्पर्धेची २०२० आवृत्ती [[२०२१ ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक | २०२० मध्ये ऑस्ट्रेलियामध्ये होणार होती, परंतु कोविड-१९ मुळे, स्पर्धा २०२१ पर्यंत पुढे ढकलण्यात आली]] आणि यजमानपद भारताकडे सोपविण्यात आले. [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१६|२०१६]] नंतर तब्बल पाच वर्षांनी २०२१ मध्ये स्पर्धा आयोजित करण्यात आली. तथापि, [[कोव्हिड-१९ महामारीचा क्रिकेटवर झालेला परिणाम|भारतातील कोविड-१९ महामारी]]मुळे, सामने [[संयुक्त अरब अमिराती]] (युएई) आणि [[ओमान]] येथे हलविण्यात आले.<ref>{{Cite web|date=17 August 2021|title=टी२० विश्वचषक: २४ ऑक्टोबर रोजी दुबईमध्ये भारत विरुद्ध पाकिस्तान सामनारंगणार |url=https://www.thelivemirror.com/t20-world-cup-india-vs-pakistan-october-24/ | language=en|access-date=२० एप्रिल २०२२|website=द लाईव्ह मिरर| | language=en-US}}</ref> मे २०१६ मध्ये, आयसीसीने २०१८ मध्ये एक स्पर्धा आयोजित करण्याची कल्पना पुढे आणली, ज्यामध्ये दक्षिण आफ्रिका संभाव्य यजमान असणार होता.<ref name="2018SA">{{Cite web|url=http://www.espncricinfo.com/ci-icc/content/story/1019437.html |title=२०१८ मध्ये टी-२० वर्ल्डकप पुनरागमन होण्याची आयसीसीला आशा | language=en|access-date=२० एप्रिल २०२२|work=इएसपीएन क्रिकइन्फो}}</ref> परंतु [[२०१७ आयसीसी चॅम्पियन्स ट्रॉफी]]च्या समारोपाच्या वेळी, आयसीसीने २०१८ आवृत्तीची कल्पना वगळली.<ref>{{cite web|title=चॅम्पियन्स ट्रॉफी २०२१ मध्ये होणार, २०१८ मध्ये टी२० विश्वचषक स्पर्धा नाही|work=हिंदुस्थान टाइम्स|author1=मुकेश भट्ट|url=http://www.hindustantimes.com/cricket/no-icc-world-t20-in-2018-india-to-host-next-champions-trophy-in-2021/story-myhab0aP2U4ZM4n0pyVuZM.html|date=१८ जून २०१७| language=en|access-date=२० एप्रिल २०२२}}</ref>
२०२६ पर्यंत, दहा स्पर्धा खेळल्या गेल्या आहेत, त्यात एकूण २४ संघांनी भाग घेतला आहे आणि आतापर्यंत सहा राष्ट्रीय संघांनी टी२० विश्वचषक जिंकला आहे. [[भारत राष्ट्रीय क्रिकेट संघ|भारताने]] सर्वाधिक तीन विजय मिळवले आहेत ([[२००७ आयसीसी विश्व ट्वेंटी२०|२००७]], [[२०२४ आयसीसी पुरुष ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२४]], [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]). [[वेस्ट इंडीज क्रिकेट संघ|वेस्ट इंडिज]] ([[२०१२ आयसीसी विश्व ट्वेंटी२०|२०१२]], [[२०१६ आयसीसी विश्व ट्वेंटी२०|२०१६]]) आणि [[इंग्लंड क्रिकेट संघ|इंग्लंड]] ([[२०१० आयसीसी विश्व ट्वेंटी२०|२०१०]], [[२०२२ आयसीसी पुरुष ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२२]]) यांनी दोनदा जिंकले आहेत आणि [[पाकिस्तान राष्ट्रीय क्रिकेट संघ|पाकिस्तान]] ([[२००९ आयसीसी विश्व ट्वेंटी२०|२००९]]), [[श्रीलंका राष्ट्रीय क्रिकेट संघ|श्रीलंका]] ([[२०१४ आयसीसी विश्व ट्वेंटी२०|२०१४]]) आणि [[ऑस्ट्रेलिया राष्ट्रीय क्रिकेट संघ|ऑस्ट्रेलिया]] ([[२०२१ आयसीसी पुरुष ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२१]]) यांनी प्रत्येकी एक विजेतेपद पटकावले आहे. एकूण १५ देशांनी या स्पर्धेचे आयोजन केले आहे (वेस्ट इंडिजच्या ६ बेट राष्ट्रांसह). पटकावले होते.
==इतिहास==
===पार्श्वभूमी===
२००२ मध्ये जेव्हा [[बेन्सन आणि हेजेस चषक]] संपला तेव्हा [[इंग्लंड आणि वेल्स क्रिकेट बोर्ड|ईसीबी]]ला तिची जागा भरण्यासाठी आणखी एक एकदिवसीय स्पर्धा आवश्यक होती. कमी होत चाललेली गर्दी आणि कमी होणारे प्रायोजकत्व याला प्रतिसाद म्हणून क्रिकेट अधिकारी युवा पिढीमध्ये खेळाची लोकप्रियता वाढवण्याचा विचार करत होते. खेळाच्या दीर्घ आवृत्त्यांमुळे बंद झालेल्या हजारो चाहत्यांना वेगवान, रोमांचक क्रिकेट पोहोचवण्याचा हेतू होता. ईसीबीचे मार्केटिंग मॅनेजर स्टुअर्ट रॉबर्टसन यांनी २००१ मध्ये काउंटी अध्यक्षांना प्रति डाव २० षटकांचा प्रस्ताव दिला आणि त्यांनी नवीन स्वरूप स्वीकारण्याच्या बाजूने ११-७ मते दिली.<ref>{{cite web|url=http://news.bbc.co.uk/sport1/hi/cricket/6985087.stm |title=ट्वेंटी२०ची मुळे | work=बीबीसी स्पोर्ट| language=en|access-date=२० एप्रिल २०२२}}</ref>
;देशांतर्गत स्पर्धा
[[Image:2007t20.jpg|thumb|280px|बांगलादेश वि दक्षिण आफ्रिका २००७ सत्रामध्ये]]
१३ जून २००३ रोजी प्रथम अधिकृत ट्वेंटी२० सामने इंग्लिश काउंटींदरम्यान [[ट्वेंटी२० ब्लास्ट]] स्पर्धेमध्ये खेळले गेले.<ref>{{cite web|url=https://www.espncricinfo.com/story/somerset-lose-to-warwickshire-but-twenty20-cup-is-a-great-success-at-taunton-129596 |title= सॉमरसेट वॉरविकशायरकडून हरले पण ट्वेन्टी२० चषक टॉंटन येथे मोठे यश आहे | work=इएसपीएन क्रिकइन्फो | language=en|access-date=२० एप्रिल २०२२}}</ref> इंग्लंडमधील ट्वेंटी-२०चा पहिला हंगाम बऱ्यापैकी यशस्वी ठरला, ज्यामध्ये [[सरे काउंटी क्रिकेट क्लब|सरे लायन्स]]ने [[वॉरविकशायर काउंटी क्रिकेट क्लब|वॉर्विकशायर बेअर्स]]चा ९ गडी राखून पराभव करून विजेतेपदावर नाव कोरले.<ref>{{cite web|url=https://www.espncricinfo.com/series/twenty20-cup-2003-124121/surrey-vs-warwickshire-final-304785/full-scorecard |title= सरे वि वॉरविकशायर अंतिम सामना धावफलक | work=इएसपीएन क्रिकइन्फो | language=en|access-date=२० एप्रिल २०२२}}</ref> मिडलसेक्स आणि सरे यांच्यात १५ जुलै २००४ रोजी लॉर्ड्स मैदानावरील पहिल्या ट्वेंटी२० सामन्यात २७,५०९ लोकांची गर्दी झाली होती, ही १९५३ नंतरच्या वन-डे फायनल व्यतिरिक्त कोणत्याही काऊंटी क्रिकेट सामन्यासाठी सर्वात मोठी उपस्थिती होती.<ref>{{cite news |url=https://www.theguardian.com/sport/2009/may/25/usman-afzaal-surrey-middlesex-twenty20 |title=उस्मान अफझलने सरेला विजयी सुरुवात करून दिली परंतु अनुपस्थित चाहत्यांची चिंता वाढली|first=पॉल |last=विवर |newspaper=द गार्डियन |date=२५ मे २००९| language=en|access-date=२० एप्रिल २०२२}}</ref>
लवकरच इतर क्रिकेट मंडळांनी ट्वेंटी२० सामने स्वीकारल्यानंतर, अनपेक्षित गर्दीची उपस्थिती, पाकिस्तानची [[फैसल बँक टी२० चषक]] आणि कॅरेबियनमधील [[स्टॅनफोर्ड २०/२०]] स्पर्धा यांसारख्या नवीन देशांतर्गत स्पर्धा आणि फॉरमॅटमधील आर्थिक प्रोत्साहन यामुळे फॉरमॅटची लोकप्रियता वाढली.{{citation needed|date=November 2021}}
वेस्ट इंडीजच्या प्रादेशिक संघांनी [[स्टॅनफोर्ड २०/२०]] स्पर्धेत भाग घेतला. या कार्यक्रमाला दोषी फसवणूक करणारा [[ॲलन स्टॅनफोर्ड]]ने आर्थिक पाठबळ दिले होते, ज्याने त्याच्या मोठ्या पॉन्झी योजनेचे फळ म्हणून किमान US$२८,०००,००० निधी दिला होता.{{citation needed|date=November 2021}} ही स्पर्धा वार्षिक स्वरूपाची असेल असा मानस होता.{{citation needed|date=November 2021}} उद्घाटनाच्या सामन्यात [[गयाना क्रिकेट|गयाना]]ने [[त्रिनिदाद आणि टोबॅगो राष्ट्रीय क्रिकेट संघ|त्रिनिदाद आणि टोबॅगो]]चा ५ गडी राखून पराभव करून US$१,०००,०० रक्कम बक्षीस म्हणून मिळविली.<ref>{{cite web|url=http://www.cricinfo.com/stanford/content/story/256391.html|title=स्टॅनफोर्ड २०/२० स्पर्धेचे विजेतेपद गयानाकडे|publisher=इएसपीएन क्रिकइन्फो|date=१४ ऑगस्ट २००६}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.jamaicaobserver.com/sports/html/20060208T230000-0500_98302_OBS_DATES_FOR_STANFORD_TWENTY___ANNOUNCED.asp|title=स्टॅनफोर्ड ट्वेन्टी२० स्पर्धेच्या तारखा जाहीर|work=द जमैका ऑबझर्व्हर|date=९ फेब्रुवारी २००६|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20081205185816/http://www.jamaicaobserver.com/sports/html/20060208T230000-0500_98302_OBS_DATES_FOR_STANFORD_TWENTY___ANNOUNCED.asp|archive-date=५ डिसेंबर २००८}}</ref> एक स्पिन-ऑफ स्पर्धा, [[स्टॅनफोर्ड सुपर सिरीज]], ऑक्टोबर २००८ मध्ये [[मिडलसेक्स काउंटी क्रिकेट क्लब|मिडलसेक्स]] आणि [[त्रिनिदाद आणि टोबॅगो राष्ट्रीय क्रिकेट संघ|त्रिनिदाद आणि टोबॅगो]], इंग्लिश आणि कॅरिबियन ट्वेंटी-२० स्पर्धांचे संबंधित विजेते आणि वेस्ट इंडीजच्या देशांतर्गत खेळाडूंमधून स्टॅनफोर्ड सुपरस्टार्स संघ तयार करण्यात आलेला संघ; यांच्या दरम्यान खेळविण्यात आली त्रिनिदाद आणि टोबॅगोने स्पर्धा जिंकून US$२८०,०० बक्षीस रक्कम मिळवली.<ref>{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/stanfordtwenty20/content/story/372261.html|title=स्टॅनफोर्डसाठी मिडलसेक्सचे नेतृत्व उदलकडे |publisher=इएसपीएन क्रिकइन्फो |date=३ ऑक्टोबर २००८ | language=en|access-date=२० एप्रिल २०२२}}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/stanfordtwenty20/content/story/375624.html |title=रामदिनच्या नेतृत्वाखाली त्रिनिदाद आणि टोबॅगोने मोठ्या पैशाच्या वैभवाकडे|first=अँड्रू|last=मॅकग्लॅशन |publisher=इएसपीएन क्रिकइन्फो |date=२७ ऑक्टोबर २००८| language=en|access-date=२० एप्रिल २०२२}}</ref> १ नोव्हेंबर रोजी, स्टॅनफोर्ड सुपरस्टार्सने इंग्लंडशी सामना खेळला ज्यामध्ये अनेक वर्षांनंतर पाच सामन्यांपैकी पाहिला सामना असण्याची अपेक्षा होती आणि विजेत्याला प्रत्येक सामन्यात US$२०,०००,००० चे बक्षीस मिळाले.<ref>{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/stanfordtwenty20/content/story/376602.html |title=गेल लीड्स सुपरस्टार्स टू मिलियन्स |publisher=इएसपीएन क्रिकइन्फो |first=अँड्रू|last=मॅकग्लॅशन |date=१ नोव्हेंबर २००८| language=en|access-date=२० एप्रिल २०२२}}</ref><ref>{{cite news |url=http://news.bbc.co.uk/1/hi/7895505.stm |title=यूएस टायकूनवर $८ अब्जपेक्षा जास्त फसवणुकीचा आरोप|work=बीबीसी न्यूझ |date=१७ फेब्रुवारी २००९ | language=en|access-date=२० एप्रिल २०२२}}</ref>
;आंतरराष्ट्रीय ट्वेंटी२०
{{Main|आंतरराष्ट्रीय टी२०}}
१७ फेब्रुवारी २००५ रोजी [[ऑकलंड]]मधील [[ईडन पार्क]] येथे खेळल्या गेलेल्या पुरुषांच्या संपूर्ण आंतरराष्ट्रीय ट्वेंटी२० सामन्यात [[ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट संघ |ऑस्ट्रेलिया]]ने [[न्यू झीलंड क्रिकेट संघ|न्यू झीलंड]]चा पराभव केला. हा खेळ हलक्या-फुलक्या पद्धतीने खेळला गेला – दोन्ही बाजू १९८० च्या दशकात परिधान केलेल्या किटमध्ये दिसल्या, न्यू झीलंड संघाने परिधान केलेल्या किट ह्या [[बेज ब्रिगेड]]ची थेट प्रत होती. बेज ब्रिगेडच्या विनंतीनुसार, काही खेळाडूंनी १९८० च्या दशकात लोकप्रिय असलेल्या मिशा/दाढी आणि केसांच्या शैली देखील ठेवल्या होत्या. ऑस्ट्रेलियाने सर्वसमावेशकपणे खेळ जिंकला, आणि जसजसा परिणाम न्यू झीलंडच्या डावाच्या अखेरीस स्पष्ट झाला, खेळाडू आणि पंचांनी गोष्टी कमी गांभीर्याने घेतल्या - ग्लेन मॅकग्राने १९८१च्या दोन्ही बाजूंमधील एकदिवसीय सामन्यातील [[ट्रेव्हर चॅपल]]च्या अंडरआर्म घटनेची गंमतीने पुनरावृत्ती केली आणि पंच [[बिली बाउडेन]] यांनी त्याला प्रत्युत्तरात गंमतीने लाल कार्ड दाखवले (क्रिकेटमध्ये लाल कार्डे सामान्यतः वापरली जात नाहीत).
===उद्घाटन स्पर्धा===
[[File:T20 final 2009.jpg|thumb|[[लॉर्ड्स]]वर २००९च्या अंतिम सामन्यामध्ये [[शाहिद आफ्रिदी]]ला गोलंदाजी करताना [[लसिथ मलिंगा]].]]
दर दोन वर्षांनी आयसीसी विश्वचषक ट्वेंटी-२० स्पर्धा आयोजित करण्याचे प्रथम ठरवण्यात आले होते, जर त्या वर्षी [[क्रिकेट विश्वचषक]] स्पर्धा नियोजित असेल तर ट्वेंटी-२० विश्वचषक स्पर्धा एक वर्ष आधी आयोजित केली जाईल. पहिली स्पर्धा [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७ मध्ये दक्षिण आफ्रिकेत]] झाली जिथे [[भारत क्रिकेट संघ|भारताने]] [[पाकिस्तान क्रिकेट संघ|पाकिस्तानचा]] अंतिम फेरीत पराभव केला.<ref>{{cite web|url=https://www.espncricinfo.com/series/8604/report/287879/india-vs-pakistan-final-icc-world-twenty20-2007-08|title=इंडिया होल्ड देअर नर्व्ह टू विन थ्रिलर|first=दिलीप|last=प्रेमचंद्रन|date=२४ सप्टेंबर २००७| language=en|access-date=२२ एप्रिल २०२२|publisher=इएसपीएन क्रिकइन्फो|}}</ref> [[केन्या क्रिकेट संघ| केन्या]] आणि [[स्कॉटलंड क्रिकेट संघ|स्कॉटलंड]] यांना [[२००७ विश्व साखळी क्रिकेट स्पर्धा विभाग १]] द्वारे पात्रता मिळवावी लागली जी [[नैरोबी]] येथे ५० षटकांची स्पर्धा होती.<ref>{{cite web|url=http://www.espncricinfo.com/worldcricketleague/content/story/278951.html|title=केन्या क्रश कॅनडा टू बूक फायनल प्लेस|location=नैरोबी|date=५ फेब्रुवारी २००७| language=en|access-date=२२ एप्रिल २०२२|publisher=इएसपीएन क्रिकइन्फो}}</ref> डिसेंबर २००७ मध्ये संघांची चांगली तयारी करण्यासाठी २० षटकांच्या फॉरमॅटसह पात्रता स्पर्धा आयोजित करण्याचा निर्णय घेण्यात आला. ज्यामध्ये सहा संघ सहभागी झाले, त्यातील दोन [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००९|२००९ विश्व ट्वेंटी२०]] साठी पात्र ठरले आणि प्रत्येकाला $२५०,००० बक्षीस रक्कम मिळाली.<ref>{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/ci-icc/content/story/325356.html |title=आयसीसी वर्ल्ड ट्वेन्टी-२० पात्रता स्पर्धा आयर्लंडमध्ये होणार|publisher=इएसपीएन क्रिकइन्फो |date=१३ डिसेंबर २००७| language=en|access-date=२२ एप्रिल २०२२}}</ref> [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००९|दुसरी स्पर्धा]] [[पाकिस्तान क्रिकेट संघ |पाकिस्तानने]] २१ जून २००९ रोजी [[इंग्लंड]]मध्ये [[श्रीलंका क्रिकेट संघ |श्रीलंकेचा]] ८ गडी राखून पराभव केला होता. [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१०|२०१० आयसीसी विश्व ट्वेंटी२०]] स्पर्धा मे २०१०मध्ये [[वेस्ट इंडीज]]मध्ये आयोजित करण्यात आली होती, जिथे [[इंग्लंड क्रिकेट संघ |इंग्लंडने]] [[ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट संघ |ऑस्ट्रेलियाचा]] ७ गडी राखून पराभव केला होता. [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१२|२०१२ आयसीसी विश्व ट्वेंटी२०]] स्पर्धेच्या अंतिम सामन्यात [[वेस्ट इंडीज क्रिकेट संघ |वेस्ट इंडीजने]] [[श्रीलंका क्रिकेट संघ|श्रीलंकेचा]] पराभव करून विजेतेपद मिळवले. आयसीसी विश्व ट्वेंटी-२० च्या अंतिम फेरीत प्रथमच यजमान राष्ट्र सहभागी झाले होते. [[आयर्लंड क्रिकेट संघ| आयर्लंड]] आणि [[अफगाणिस्तान क्रिकेट संघ|अफगाणिस्तानसह]] [[आयसीसी विश्व ट्वेंटी२० पात्रता, २०१२]] स्पर्धेमध्ये १२ स्पर्धक सहभागी होते. ही स्पर्धा आशियाई देशातील पहिला टी२० विश्वचषक स्पर्धा होती.
===१६ संघाच्या स्पर्धेमध्ये विस्तार===
[[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१२|२०१२]]च्या आवृत्तीचा विस्तार १६ संघ स्वरूपात केला जाणार होता परंतु तो पुन्हा १२ वर करण्यात आला.<ref>{{cite web|title=आयसीसीची कसोटी चॅम्पियनशिपसाठी सहमती|url=http://www.espncricinfo.com/ci/content/current/story/481373.html|publisher=इएसपीएन क्रिकइन्फो | language=en|access-date=२२ एप्रिल २०२२}}</ref> [[बांगलादेश]]मध्ये आयोजित [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१४|२०१४]]च्या स्पर्धेत दहा [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती सदस्य देश#पूर्ण सदस्य|पूर्ण सदस्य]] आणि [[२०१३ आयसीसी विश्व ट्वेंटी२० पात्रता|२०१३]]च्या आयसीसी विश्व ट्वेंटी२० पात्रता फेरीत पात्र ठरलेल्या सर्व सहा [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती सदस्य देश#सहयोगी सदस्य|सहयोगी सदस्यांसह]] १६ संघांना प्रथमच सहभागी करून घेण्यात आले होते. तथापि ८ ऑक्टोबर २०१२ रोजी [[आयसीसी पुरुष आंतरराष्ट्रीय टी२० संघ क्रमवारी]]तील अव्वल आठ पूर्ण सदस्य संघांना [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१४#सुपर १० फेरी | सुपर १०]] टप्प्यात स्थान देण्यात आले. उर्वरित आठ संघ [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१४#गट फेरी | गट फेरीमध्ये]] सहभागी झाले होते, ज्यामधून दोन संघ सुपर १० टप्प्यात गेले.<ref name=ICC>{{cite web|url=http://www.icc-cricket.com/news/2013/media-releases/75604/west-indies-to-start-world-t20-title-defence-against-india|title=वेस्ट इंडीज टू स्टार्ट वर्ल्ड टी२० टायटल डिफेन्स अगेन्स्ट इंडिया|date=२७ ऑक्टोबर २०१३|publisher=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती|आयसीसी]] | language=en|access-date=२२ एप्रिल २०२२|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20131029185415/http://www.icc-cricket.com/news/2013/media-releases/75604/west-indies-to-start-world-t20-title-defence-against-india|archive-date=२९ ऑक्टोबर २०१३}}</ref><ref>{{cite news|url=http://www.thedailystar.net/beta2/news/bcb-promises-stellar-t20-wc/|title=बीसीबी प्रॉमिसेस स्टेलार टी२० वर्ल्ड कप |date=७ एप्रिल २०१३|newspaper=द डेली स्टार, बांगलादेश | language=en|access-date=२२ एप्रिल २०२२}}</ref> या स्पर्धेत तीन नवीन संघांनी (नेपाळ, हाँगकाँग आणि यूएई) पदार्पण केले.
;कोविड-१९
जुलै २०२० मध्ये, ICC ने जाहीर केले की २०२० आणि २०२१ या दोन्ही आवृत्त्या महामारीमुळे प्रत्येकी एक वर्षाने पुढे ढकलण्यात आल्या आहेत.<ref>{{cite web|url=https://www.icc-cricket.com/media-releases/1733391 |title=आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक २०२० पुढे ढकलली|work=आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती | language=en|access-date=२२ एप्रिल २०२२}}</ref> त्यामुळे, २०२० स्पर्धा (मूळत: ऑस्ट्रेलियाद्वारे आयोजित केली जाणार होती) [[२०२१ ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|नोव्हेंबर २०२१]] मध्ये हलविण्यात आली आणि २०२१ स्पर्धा (मूळतः भारतात आयोजित केली जाणारी) [[२०२२ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|ऑक्टोबर २०२२]] मध्ये हलवली गेली.<ref>{{cite web|url=https://www.icc-cricket.com/media-releases/1733341 |title=पुरुष टी२० विश्वचषक पुढे ढकलण्याबाबत वारंवार विचारले जाणारे प्रश्न|work=आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती | language=en|access-date=२२ एप्रिल २०२२}}</ref> २०२१ मध्ये भारत आणि २०२२ मध्ये ऑस्ट्रेलियाने यजमानपद भूषवले होते, उलट क्रमाने असले तरी ऑस्ट्रेलिया आणि भारताने स्पर्धेचे यजमानपद राखले.<ref>{{Cite web|date=10 August 2020|title=पुरुष टी२० विश्वचषक २०२१ भारतात, २०२२ ऑस्ट्रेलियात; महिला क्रिकेट विश्वचषक पुढे ढकलला | url=https://www.icc-cricket.com/news/1749997}}</ref> <ref name=sixsports.in /> २०२१ची स्पर्धा १७ ऑक्टोबर ते १४ नोव्हेंबर २०२१ या कालावधीत ओमान आणि संयुक्त अरब अमिरातीमध्ये खेळल्या गेलेल्या सामन्यांसह पार पडली.<ref>{{Cite web|title=आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक २०२१ चे सामने जाहीर|url=https://www.icc-cricket.com/news/2210270 | language=en|access-date=२२ एप्रिल २०२२|work=आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती}}</ref>
===२० संघाच्या स्पर्धेमध्ये विस्तार===
जून २०२१ मध्ये, आयसीसीने घोषित केले की २०२४, २०२६, २०२८ आणि २०३० मधील टी२० विश्वचषक स्पर्धा २० संघांचा समावेश करण्यासाठी विस्तारित केल्या जातील.<ref name=sixsports.in>{{Cite web|title=आयसीसीतर्फे वर्ल्डकप स्पर्धा जाहीर; २०२७ आणि २०३१ मध्ये १४ संघ|url=https://sixsports.in/icc-announces-world-cup-schedule-14-teams-in-2027-and-2031/|language=en|access-date=२२ एप्रिल २०२२|website=सिक्स स्पोर्ट्स|archive-date=2022-04-01|archive-url=https://web.archive.org/web/20220401040539/https://sixsports.in/icc-announces-world-cup-schedule-14-teams-in-2027-and-2031/|url-status=dead}}</ref> संघांची ४ गटात (प्रति गट ५ संघ) विभागणी केली जाईल, प्रत्येक गटातील दोन अव्वल संघ सुपर आठमध्ये जातील.<ref>{{Cite web|title=आयसीसीतर्फे पुरुषांच्या जागतिक स्पर्धांचा विस्तार: एकदिवसीय विश्वचषक स्पर्धेत १४ संघ, टी२० विश्वचषक स्पर्धेत २० संघ | url=https://www.espncricinfo.com/story/icc-expands-men-s-world-events-odi-world-cup-to-14-teams-t20-world-cup-to-20-teams-1264847 | language=en|access-date=२२ एप्रिल २०२२|website=इएसपीएन क्रिकइन्फो| language=en}}</ref> त्यांची प्रत्येकी चारच्या दोन गटात विभागणी केली जाईल, प्रत्येक गटातील दोन अव्वल संघ उपांत्य फेरीत प्रवेश करतील.
२०२४ टी२० विश्वचषक वेस्ट इंडीज आणि युनायटेड स्टेट्समध्ये आयोजित केला जाईल. यूएसने पहिल्यांदाच विश्वचषक स्पर्धेचे आयोजन केले आहे, ज्यामध्ये देशभरातील अनेक स्टेडियम एकतर नव्याने बांधले जातील किंवा क्रिकेटसाठी पुन्हा तयार केले जातील. २०२४ ची स्पर्धा भारत आणि श्रीलंका यांच्या संयुक्त विद्यमाने आयोजित केली जाईल, २०२८ मध्ये ऑस्ट्रेलिया आणि न्यू झीलंडमध्ये तसेच २०३० ची स्पर्धा इंग्लंड, वेल्स, स्कॉटलंड आणि आयर्लंडमध्ये होईल.<ref>{{Cite web|title=यूएसए मध्ये टी२० विश्वचषक: २०२४-२०३१ आयसीसी पुरुष स्पर्धांचे यजमान जाहीर|url=https://www.icc-cricket.com/news/2354682 | language=en|access-date=२२ एप्रिल २०२२|website=www.icc-cricket.com| | language=en}}</ref>
==स्वरूप==
===यजमान===
आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संघटनेची कार्यकारी समिती ही स्पर्धा आयोजित करण्यात स्वारस्य दर्शविलेल्या राष्ट्रांकडून बोली तपासल्यानंतर स्पर्धेच्या यजमानांसाठी मतदान करते. २००७ मध्ये [[दक्षिण आफ्रिका|दक्षिण आफ्रिके]]नंतर, [[इंग्लंड]], [[वेस्ट इंडीज]] आणि [[श्रीलंका]] यांनी अनुक्रमे २००९, २०१० आणि २०१२ मध्ये स्पर्धेचे आयोजन केले होते. २०१४ मध्ये बांगलादेशने स्पर्धेचे आयोजन केले होते.<ref>{{cite web |url=http://www.cricinfo.com/ci-icc/content/current/story/465631.html| title =२०१४ च्या ट्वेन्टी२० विश्वचषक स्पर्धेचे यजमानपद बांगलादेशकडे|work=क्रिकइन्फो|access-date=२२ एप्रिल २०२२|}}</ref> २०१६ मध्ये भारताने स्पर्धेचे यजमानपद भूषवले. पाच वर्षांच्या कालावधीनंतर, भारताने २०२१ आवृत्तीचे यजमानपदही जिंकले, परंतु कोविड-१९ महामारीमुळे हे सामने ओमान आणि युएई मध्ये खेळवले गेले. २०२२ च्या आवृत्तीचे आयोजन ऑस्ट्रेलियाकडून केले जाईल, ज्यांनी मागील वर्षी ही स्पर्धा जिंकली होती.
डिसेंबर २०१५ मध्ये, आयसीसीचे जागतिक विकास प्रमुख, टिम अँडरसन यांनी भविष्यातील स्पर्धा युनायटेड स्टेट्सद्वारे आयोजित करण्याची सूचना केली. त्यांचा असा विश्वास होता की या कार्यक्रमाचे आयोजन केल्याने देशातील खेळाच्या वाढीला चालना मिळू शकते, जिथे हा खेळ तुलनेने अस्पष्ट आहे आणि [[बेसबॉल]] सारख्या इतर खेळांच्या स्पर्धेला सामोरे जावे लागते.<ref name="ndtv-t20usa2">{{cite web|title=आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समितीकडून युनायटेड स्टेट्सच्या भूमीवर टी-२० विश्व क्रिकेटचे लक्ष्य: अहवाल | url=http://sports.ndtv.com/cricket/news/252894-international-cricket-council-targets-world-twenty20-on-united-states-soil-report|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20160107125712/http://sports.ndtv.com/cricket/news/252894-international-cricket-council-targets-world-twenty20-on-united-states-soil-report|archive-date=७ जानेवारी २०१६ | language=en|access-date=१४ जानेवारी २०१६|website=एनडीटीव्ही स्पोर्ट्स}}</ref>
२०२० मध्ये, [[अमेरिकेची संयुक्त संस्थाने|यूएसए]] आणि वेस्ट इंडीजने २०२३ नंतर टी२० विश्वचषक सह-यजमानपदासाठी स्वारस्य व्यक्त केले,<ref>{{Cite news|title=यूएसए लूक्स टू १९९४ फॉर टी२० वर्ल्ड कप बीड | language=en-GB|work=बीबीसी स्पोर्ट्स |url=https://www.bbc.co.uk/sport/cricket/52885902 | access-date=२२ एप्रिल २०२२}}</ref> [[मलेशिया]] आणखी एक संभाव्य दावेदार होता.<ref>{{Cite web|last=लव्हलेट|first=ट्रिस्टन|title=मलेशिया २०२३-३१ सायकलमध्ये टी२० क्रिकेट विश्वचषकाचे आयोजन करत आहे | url=https://www.forbes.com/sites/tristanlavalette/2020/06/26/malaysia-eyes-hosting-a-t20-cricket-world-cup-in-the-2023-31-cycle/ | language=en|access-date=२२ एप्रिल २०२२|website=फोर्ब्स}}</ref> नोव्हेंबर २०२१मध्ये, आयसीसीने २०२४ ते २०३० या कालावधीत पुढील चार पुरुष टी२० विश्वचषक स्पर्धेसाठी यजमानांची पुष्टी केली.<ref>{{cite web|title=यूएसए टी२० विश्वचषक आयोजित करणार: २०२४-२०३१ आयसीसी पुरुष स्पर्धेच्या यजमानांची पुष्टी|url=https://www.icc-cricket.com/news/2354682 | language=en|access-date=२२ एप्रिल २०२२|work=आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती}}</ref> [[अमेरिकेची संयुक्त संस्थाने|यूएसए]] आणि [[वेस्ट इंडीज]]कडे २०२४ आवृत्तीचे सह-यजमानपद, २०२६ आवृत्तीचे सह-यजमानपद [[भारत]] आणि [[श्रीलंका]], २०२८ आवृत्तीचे सह-यजमानपद [[ऑस्ट्रेलिया]] आणि [[न्यू झीलंड]] आणि २०३० आवृत्तीचे सह-यजमान [[इंग्लंड]], [[वेल्स]], [[स्कॉटलंड]] आणि [[आयर्लंड]] करणार आहेत.
{| class="wikitable sortable plainrowheaders"
|+ आयसीसी क्षेत्रानुसार यजमानांचा सारांश (२००७–२०३०)
! scope="col" | क्षेत्र
! scope="col" | वर्ष
! scope="col" | नियामक मंडळ
! scope="col" | यजमान
|-
! scope="row" | आफ्रिका
| [[२००७ आयसीसी विश्व ट्वेंटी२०|२००७]] || [[क्रिकेट दक्षिण आफ्रिका]] || दक्षिण आफ्रिका
|-
! scope="rowgroup" rowspan="2" | अमेरिका
| [[२०१० आयसीसी विश्व ट्वेंटी२०|२०१०]] || [[क्रिकेट वेस्ट इंडीज]] || वेस्ट इंडीज
|-
| [[२०२४ पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२४]] || [[क्रिकेट वेस्ट इंडीज]]
[[यूएसए क्रिकेट]]
|| वेस्ट इंडीज
अमेरिका
|-
! scope="rowgroup" rowspan="5" | आशिया
| [[२०१२ आयसीसी विश्व ट्वेंटी२०|२०१२]] || [[श्रीलंका क्रिकेट]] || श्रीलंका
|-
| [[२०१४ आयसीसी विश्व ट्वेंटी२०|२०१४]] || [[बांगलादेश क्रिकेट बोर्ड]] || बांगलादेश
|-
| [[२०१६ आयसीसी विश्व ट्वेंटी२०|२०१६]] || rowspan="2" | [[भारतीय क्रिकेट नियामक मंडळ]] || भारत
|-
| [[२०२१ पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२१]] || संयुक्त अरब अमिराती
ओमान
|-
| [[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]] || [[भारतीय क्रिकेट नियामक मंडळ]]
[[श्रीलंका क्रिकेट]]
|| भारत
श्रीलंका
|-
! scope="rowgroup" rowspan="2" | पूर्व आशिया-पॅसिफिक
| [[२०२२ पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२२]] || [[क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया]] || ऑस्ट्रेलिया
|-
| [[२०२८ पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२८]] || [[क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया]]
[[न्यूझीलंड क्रिकेट]]
|| ऑस्ट्रेलिया
न्यूझीलंड
|-
! scope="rowgroup" rowspan="2" | युरोप
| [[२००९ आयसीसी विश्व ट्वेंटी२०|२००९]] || [[इंग्लंड आणि वेल्स क्रिकेट बोर्ड]] || इंग्लंड
|-
| [[२०३० पुरुष टी२० विश्वचषक|२०३०]] || [[इंग्लंड आणि वेल्स क्रिकेट बोर्ड]]
[[क्रिकेट आयर्लंड]]
[[क्रिकेट स्कॉटलंड]]
|| इंग्लंड
वेल्स
आयर्लंड
स्कॉटलंड
|}
===पात्रता===
{{See also|आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक पात्रता}}
[[आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक पात्रता|टी२० विश्वचषक पात्रता]] म्हणून ओळखल्या जाणार्या पात्रता स्पर्धेद्वारे इतर आयसीसी सदस्यांनी भरलेल्या उर्वरित जागांसह, सर्व आयसीसी संपूर्ण सदस्य स्पर्धेसाठी आपोआप पात्र ठरतात. आयसीसी सहयोगी आणि संलग्न सदस्यांसाठी ५० षटकांची लीग - पहिल्या [[विश्व साखळी क्रिकेट स्पर्धा|विश्व साखळी क्रिकेट स्पर्धेच्या]] निकालातून [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७च्या पहिल्या वर्ल्ड ट्वेंटी२०]] साठी पात्रता ठरवली गेली. [[२००७ विश्व साखळी क्रिकेट स्पर्धा विभाग १]] स्पर्धेचे दोन अंतिम स्पर्धक, [[केन्या क्रिकेट संघ | केन्या]] आणि [[स्कॉटलंड क्रिकेट संघ|स्कॉटलंड]], वर्षाच्या उत्तरार्धात विश्व ट्वेंटी२० साठी पात्र ठरले. [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००९|२००९ विश्व ट्वेंटी२०]] साठी एक वेगळी पात्रता स्पर्धा लागू करण्यात आली होती आणि तेव्हापासून ती कायम ठेवण्यात आली आहे. तथापि, विश्व ट्वेंटी२० पात्रता फेरीतून पात्र ठरलेल्या संघांची संख्या दोन ([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१०|२०१०]] आणि [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१२|२०१२]] मध्ये) ते सहा ([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१४|२०१४]] आणि [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१६|२०१६]] मध्ये) पर्यंत बदलली आहे.
===अंतिम स्पर्धा===
प्रत्येक गट टप्प्यात (प्राथमिक फेरी आणि सुपर १२ फेरी दोन्ही), संघांना खालील निकषांच्या आधारे एकमेकांविरुद्ध क्रमवारी दिली जाते:<ref>[http://worldtwenty20.yahoo.com/abouttwenty20/icc_world_twenty20_playing_conditions_final.pdf अंतिम विश्व ट्वेंटी20 खेळण्याच्या अटी] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20080911035806/http://worldtwenty20.yahoo.com/abouttwenty20/icc_world_twenty20_playing_conditions_final.pdf |date=११ सप्टेंबर २००८}}, आयसीसी विश्व ट्वेन्टी२०</ref>
# सर्वाधिक गुणसंख्या
# समान असल्यास, सर्वाधिक विजय
# तरीही समान असल्यास, उत्कृष्ट [[निव्वळ धावगती]]
# तरीही समान असल्यास, कमीत कमी [[स्ट्राईक रेट#गोलंदाजी स्ट्राईक रेट|गोलंदाजी स्ट्राईक रेट]]
# तरीही समान असल्यास, एकमेकांविरुद्धच्या सामन्याचा निकाल.
बरोबरी झाल्यास (म्हणजेच, दोन्ही संघांनी आपापल्या डावाच्या शेवटी समान धावा केल्यास), [[सुपर ओव्हर]] विजेता ठरवते. सुपर ओव्हरमध्ये पुन्हा टाय झाल्यास, त्यानंतर जोपर्यंत विजेता संघ ठरत नाही तोपर्यंत सुपर ओव्हर खेळवली जाते. तत्पूर्वी, ज्या संघाने त्यांच्या डावात सर्वाधिक चौकार मारले होते तोच विजेता ठरवला जातो.<ref>{{Cite web |url=https://www.espncricinfo.com/story/_/id/27844486/no-more-boundary-countback-icc-changes-super-regulations |title=Archived copy |work=इएसपीएन क्रिकइन्फो | language=en|access-date=२२ एप्रिल २०२२}}</ref> २००७च्या स्पर्धेदरम्यान, [[बोल-आउट]]चा वापर बरोबरी झालेल्या सामन्यातील पराभवाचा निर्णय घेण्यासाठी केला गेला.<ref>[http://worldtwenty20.yahoo.com/abouttwenty20/playing-conditions.html प्लेइंग कंडिशन्स] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20080720113337/http://worldtwenty20.yahoo.com/abouttwenty20/playing-conditions.html |date=२० जुलै २०१८}}, आयसीसी वर्ल्ड ट्वेन्टी२०</ref>
==स्पर्धेचे निकाल==
{| class="wikitable" style="font-size:90%; width: 100%; text-align: center;"
|-
!rowspan=2 width=5%|वर्ष
!rowspan=2 width=15%|यजमान देश
!rowspan=2 width=15%|अंतिम सामन्याचे मैदान
!colspan=3|अंतिम सामना
!rowspan=2 width=6%|संघ
|-
!width=18%|विजेता
!width=18%|निकाल
!width=18%|उपविजेता
|-
|२००७<br>''[[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|तपशील]]''
|{{flagicon|RSA}}<br>दक्षिण आफ्रिका
|[[वॉन्डरर्स स्टेडियम, जोहान्सबर्ग|वॉन्डरर्स स्टेडियम]], [[जोहान्सबर्ग]]<br>दक्षिण आफ्रिका
|{{cr|India}}<br /><small>१५७/५ (२० षटके)</small>
|'''भारत ५ धावांनी विजयी'''<br>[http://www.cricinfo.com/twenty20wc/engine/match/287879.html धावफलक]
|{{cr|Pakistan}}<br /><small>१५२ सर्वबाद (१९.३ षटके)</small>
|१२
|-
|२००९<br>''[[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००९|तपशील]]''
|{{flagicon|ENG}}<br>इंग्लंड
|[[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]<br>इंग्लंड
|{{cr|Pakistan}}<br /><small>१३९/२ (१८.४ षटके)</small>
|'''पाकिस्तान ८ गडी राखुन विजयी'''<br>[http://www.cricinfo.com/wt202009/engine/current/match/356017.html धावफलक]
|{{cr|Sri Lanka}}<br /><small>१३८/६ (२० षटके)</small>
|१२
|-
|२०१०<br>''[[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१०|तपशील]]''
|{{flagicon|Barbados}}{{flagicon|Guyana}}{{flagicon|Saint Lucia}}{{flagicon|Trinidad and Tobago}}<br>बार्बाडोस, गयाना, सेंट लुसिया, त्रिनिदाद आणि टोबॅगो
|[[केन्सिंग्टन ओव्हल]], [[ब्रिजटाउन]]<br>बार्बाडोस
|{{cr|England}}<br /><small>१४८/३ (१७ षटके)</small>
|'''इंग्लंड ७ गडी राखुन विजयी'''<br>[http://www.cricinfo.com/world-twenty20-2010/engine/current/match/412703.html धावफलक]
|{{cr|Australia}}<br /><small>१४७/६ (२० षटके)</small>
|१२
|-
|२०१२<br>''[[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१२|तपशील]]''
|{{flagicon|SRI}}<br>श्रीलंका
|[[रणसिंगे प्रेमदासा मैदान]], [[कोलंबो]]<br>श्रीलंका
|{{cr|WIN}}<br /><small>१३७/६ (२० षटके)</small>
|'''वेस्ट इंडीज ३६ धावांनी विजयी'''<br>[http://www.espncricinfo.com/icc-world-twenty20-2012/engine/current/match/533298.html धावफलक]
|{{cr|SRI}}<br /><small>१०१ सर्वबाद (१८.४ षटके)</small>
|१२
|-
|२०१४<br>''[[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१४|तपशील]]''
|{{flagicon|BAN}}<br>बांगलादेश
|[[शेर-ए-बांगला क्रिकेट मैदान]], [[ढाका]]<br>बांगलादेश
|{{cr|SRI}}<br /><small>१३४/४ (१७.५ षटके)</small>
|'''श्रीलंका ६ गडी राखून विजयी'''<br>[http://www.espncricinfo.com/icc-world-twenty20-2014/engine/match/682965.html धावफलक]
|{{cr|IND}}<br /><small>१३०/४ (२० षटके)</small>
|१६
|-
|२०१६<br>''[[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१६|तपशील]]''
|{{flagicon|IND}}<br>भारत
|[[ईडन गार्डन्स]], [[कोलकाता]]<br>भारत
|{{cr|WIN}}<br /><small>१६१/६ (१९.४ षटके)</small>
|'''वेस्ट इंडीज ४ गडी राखून विजयी'''<br>[http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/951373.html धावफलक]
|{{cr|ENG}}<br /><small>१५५/९ (२० षटके)</small>
|१६
|-
|२०२१<br>''[[२०२१ ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|तपशील]]''
|{{flagicon|UAE}}{{flagicon|OMA}}<br />[[संयुक्त अरब अमिराती]], [[ओमान]]
|[[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]<br />संयुक्त अरब अमिराती
|{{cr|AUS}}<br /><small>१७३/२ (१८.५ षटके)</small>
|'''ऑस्ट्रेलिया ८ गडी राखून विजयी'''<br>[http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1273756.html धावफलक]
|{{cr|NZ}}<br /><small>१७२/४ (२० षटके)</small>
|१६
|-
|२०२२<br>''[[२०२२ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|तपशील]]''
|{{flagicon|AUS}}<br>ऑस्ट्रेलिया
|[[मेलबर्न क्रिकेट मैदान]], [[मेलबर्न]]<br>ऑस्ट्रेलिया
|{{cr|ENG}}<br /><small>१३८/५ (१९ षटके)</small>
|'''इंग्लंड ५ गडी राखून विजयी'''<br>[http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1298179.html धावफलक]
|{{cr|PAK}}<br /><small>१३७/८ (२० षटके)</small>
|१६
|-
|२०२४<br>''[[२०२४ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|तपशील]]''
|{{flagicon|Barbados}}{{flagicon|Saint Lucia}}{{flagicon|Saint Vincent and the Grenadines}}{{flagicon|Trinidad and Tobago}}{{flagicon|USA}}<br />बार्बाडोस, सेंट लुसिया, सेंट व्हिन्सेंट आणि द ग्रेनेडाईन्स, त्रिनिदाद आणि टोबॅगो, अमेरिकेची संयुक्त संस्थाने
|[[केन्सिंग्टन ओव्हल]], [[ब्रिजटाउन]]<br>बार्बाडोस
|{{cr|India}}<br /><small>१७६/७ (२० षटके)</small>
|'''भारत ७ धावांनी विजयी'''<br>[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1415755.html धावफलक]
|{{cr|SA}}<br /><small>१६९/८ (२० षटके)</small>
|२०
|-
|२०२६<br>''[[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|तपशील]]''
|{{flagicon|IND}}{{flagicon|SL}}<br>भारत, श्रीलंका
|[[नरेंद्र मोदी स्टेडियम]], [[अहमदाबाद]]<br>भारत
|{{cr|India}}<br /><small>२५५/५ (२० षटके)</small>
|'''भारत ९६ धावांनी विजयी'''<br>[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1512773.html धावफलक]
|{{cr|NZ}}<br /><small>१५९ (१९ षटके)</small>
|२०
|-
|२०२८<br>''[[२०२८ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|तपशील]]''
|{{flagicon|AUS}}{{flagicon|NZL}}<br>ऑस्ट्रेलिया, न्यू झीलंड
|[[मेलबर्न क्रिकेट मैदान]], [[मेलबर्न]]<br>ऑस्ट्रेलिया
|TBD
|TBD
|TBD
|२०
|-
|२०३०<br>''[[२०३० आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|तपशील]]''
|{{flagicon|ENG}}{{flagicon|Wales}}{{flagicon|IRE|cricket}}{{flagicon|SCO}}<br>इंग्लंड, वेल्स, आयर्लंड, स्कॉटलंड
|[[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]<br>इंग्लंड
|TBD
|TBD
|TBD
|२०
|}
==संघाची कामगिरी==
[[२०२४ आय.सी.सी. पुरुष ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२४ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक]] स्पर्धेपर्यंत. ''संघांची क्रमवारी सर्वोत्कृष्ट निकालानुसार, नंतर विजयाची टक्केवारी, नंतर एकूण विजय, नंतर एकूण सामने, नंतर वर्णक्रमानुसार'':
{| class="wikitable sortable mw-collapsible" style="text-align: center;"
|-
!rowspan="2" style="width:150px;"|संघ
!colspan=3|सहभाग
!rowspan="2" style="width:300px;"|सर्वोत्कृष्ट निकाल
!colspan="6"|आकडेवारी<ref name="resultsummary">{{cite web| url=http://stats.espncricinfo.com/world-t20/engine/records/team/results_summary.html?id=89;type=trophy | title=नोंदी / आयसीसी विश्व टी२० / परिणाम सारांश| publisher=इएसपीएन क्रिकइन्फो | access-date= २२ एप्रिल २०२२}}</ref>
|-
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|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|India}}
| १० || [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७]] || [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]|| bgcolor="gold" | {{sort|1.2|'''विजेतेपद'''}} ([[२००७ आय.सी.सी. विश्व ट्वेंटी२०|२००७]], [[२०२४ आय.सी.सी. पुरुष ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२४]], [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]])
|| ६१ || ४३ || २४ || १(१) || १ ||७३.३३
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|England}}
| १० || [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७]] || [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]|| bgcolor="gold" | {{sort|1.2|'''विजेतेपद'''}} ([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१०|२०१०]], [[२०२२ आय.सी.सी. पुरुष ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२२]]) || ६० || ३४ || २४ || ० || २ || ५८.६२
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|West Indies}}
| १० || [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७]] || [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]|| bgcolor="gold" | {{sort|1.1|'''विजेतेपद'''}} ([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१२|२०१२]], [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१६|२०१६]]) || ५३ || २९ || २२ || १(१) || १ || ५७.६९
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Australia}}
| १० || [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७]] || [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]|| bgcolor="gold" | {{sort|1.2|'''विजेतेपद'''}} ([[२०२१ ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२१]]) ||५१||३२||१९|| ० || ० || ६२.७४
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Pakistan}}
| १० || [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७]] || [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]|| bgcolor="gold" | {{sort|1.2|'''विजेतेपद'''}} ([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००९|२००९]])
|| ५८|| ३४|| २१|| २(०) || १ || ५९.६४
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Sri Lanka}}
| १० || [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७]] || [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]|| bgcolor="gold" | {{sort|1.2|'''विजेतेपद'''}} ([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१४|२०१४]])
|| ६१|| ३५|| २५|| १(१) || ० || ५९.०१
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|South Africa}}
| १० || [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७]] || [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]|| bgcolor="silver" | {{sort|2.1|'''उपविजेतेपद'''}} ([[२०२१ ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२४]]) ||५७||३८||१७|| ० || १ || ६९.६४
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|New Zealand}}
| १० || [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७]] || [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]|| bgcolor="silver" | {{sort|2.1|'''उपविजेतेपद'''}} ([[२०२१ ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२१]], [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]) ||५५||३०|| २२|| २(०) || १ || ५५.५५
|-
| style="text-align:left;" |{{Cr|Afghanistan|२०१३}}
| ८ || [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१०|२०१०]]|| [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]|| style="background:#cc9966;" |{{sort|3.2|'''उपांत्यफेरी'''}} ([[२०२१ ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२४]]) ||३४|| १४ ||१९ || १(०) || ० ||४१.१७
|-
| style="text-align:left;" |{{Cr|Bangladesh}}
| ९ || [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७]]|| [[२०२४ आय.सी.सी. पुरुष ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२४]]|| {{sort|4.1|सुपर ८}} ([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७]], [[२०२१ ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२४]]) ||४५|| १२ ||३२|| ० || १ || २७.२७
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Ireland}}
| ९ || [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००९|२००९]] || [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]|| {{sort|4.2|सुपर ८}} ([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००९|२००९]]) || ३१ || ८ || २० || ० || ३ || २८.५७
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|USA}} ||२ ||[[२०२४ आय.सी.सी. पुरुष ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२४]] ||[[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]||{{sort|4.2|सुपर ८}} ([[२०२४ आय.सी.सी. पुरुष ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२४]])||१०||३||६||१(१)||०||४०.००
|-
| style="text-align:left;" |{{Cr|Netherlands}}
| ७ || [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००९|२००९]]|| [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]|| {{sort|4.2|सुपर १०}} ([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१४|२०१४]]) || ३१|| ११ || १९ || ० || १ || ३६.६६
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Zimbabwe}}
| ६ || [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७]] || [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]|| {{sort|5.4|सुपर ८}} ([[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]) || २६|| ११ || १४ || ० || १ || ४४.००
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Scotland}}
| ५ || [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७]] || [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]|| {{sort|5.2|सुपर १२}} ([[२०२१ ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२१]]) || २६ || ८ || १६ || ० || २ || ३३.३३
|-
| style="text-align:left;" |{{Cr|Namibia|2021}}
| ४ || [[२०२१ ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२१]] || [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]|| {{sort|4.4|सुपर १२}} ([[२०२१ ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२१]]) ||१९ || ४ ||१४|| १(१) || ० || २६.३१
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Oman}}
| ४ || [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१६|२०१६]] || [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]|| {{sort|5.4|पहिली फेरी}} ([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१६|२०१६]], [[२०२१ ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२१]], [[२०२१ ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२४]], [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]) || १४ ||२ || १० || १(०) || १ || १५.३८
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Nepal}}
| ३ || [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१४|२०१४]] || [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]|| {{sort|5.4|पहिली फेरी}} ([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१४|२०१४]], [[२०२१ ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२४]], [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]) || १० || ३ || ७ || ० || ० || ३०.००
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Hong Kong}}
| २ || [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१४|२०१४]] || [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१६|२०१६]] || {{sort|5.3|पहिली फेरी}} ([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१४|२०१४]], [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१६|२०१६]]) || ६ || १ || ५ || ० || ० || १६.६६
|-
| style="text-align:left;" |{{Cr|United Arab Emirates}}
| २ || [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१४|२०१४]] || [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]|| {{sort|5.4|पहिली फेरी}} ([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१४|२०१४]], [[२०२२ आय.सी.सी. पुरुष ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२२]], [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]) || १० || २ || ८ || ० || ० || २०.००
|-
| style="text-align:left;" |{{Cr|Papua New Guinea}}
| २ || [[२०२१ ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२१]]|| [[२०२४ आय.सी.सी. पुरुष ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२४]]|| {{sort|5.4|पहिली फेरी }} ([[२०२१ ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२१]], [[२०२१ ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२४]]) || ७ || ० || ७ || ० || ० || ०.००
|-
|style="text-align:left;" |{{Cr|CAN}}
|२||[[२०२४ आय.सी.सी. पुरुष ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२४]]||[[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]||{{sort|5.4|पहिली फेरी }} ([[२०२४ आय.सी.सी. पुरुष ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२४]], [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]])|| ७ || १ || ६ || ० || ० || १४.२८
|-
|style="text-align:left;" |{{Cr|UGA}}
|१||[[२०२४ आय.सी.सी. पुरुष ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२४]] || [[२०२४ आय.सी.सी. पुरुष ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२४]] || {{sort|5.4|पहिली फेरी }} ([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२०२४]])|| ४ || १ || ३ || ० || ० || २५.००
|-
|style="text-align:left;"|{{Cr|Kenya}}
| १ || [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७]] || [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७]] || {{sort|5.4|पहिली फेरी }} ([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७]]) || २ || ० || २ || ० || ० || ०.००
|-
|{{Cr|Italy}}
|१
|[[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]
|[[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]
|{{sort|5.4|पहिली फेरी }} ([[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]])
|४
|१
|३
|०
|०
|२५.००
|-
! colspan="11" |{{smalldiv|1={{Updated|८ मार्च २०२६}}<br/> स्रोत:[http://stats.espncricinfo.com/world-t20/engine/records/team/results_summary.html?id=89;type=trophy ईएसपीएन क्रिकइन्फो]}}
|}
''नोंदी:''
* कंसातील संख्या बरोबरी झालेल्या सामन्यांमध्ये [[सुपर ओव्हर]] आणि [[बोल-आउट]]च्या विजयांची संख्या दर्शवते, तथापि निकालाची पर्वा न करता हा अर्धा विजय मानला जातो. विजयाच्या टक्केवारीत कोणतेही परिणाम वगळले जातात आणि बरोबरी (टायब्रेकरची पर्वा न करता) अर्धा विजय म्हणून गणली जाते.
==स्पर्धेनुसार संघ निकाल==
;सूची
* {{bg|gold| '''वि''' }} — विजेते
* {{bg|silver| '''उवि''' }} — उपविजेते
* {{bg|#cc9966| '''उफे'''}} — उपांत्यफेरी
* {{bg|#BBF3BB|फे२}} — २री फेरी (सुपर ८, सुपर १० आणि सुपर १२)
* फे१ — १ली फेरी (गट फेरी)
* पा — पात्र
* × — पात्र परंतु माघार घेतली
* ×× — पात्रतेसाठी अपात्र (निलंबित)
{| class="wikitable" style="text-align: center; font-size:90%"
|-
!संघ
!{{flagicon|RSA}}<br/>[[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७]]<br/> <small>(१२)</small>
!{{flagicon|ENG}}<br/>[[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००९|२००९]]<br/> <small>(१२)</small>
!{{flagicon|WIN}}<br/>[[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१०|२०१०]]<br/> <small>(१२)</small>
!{{flagicon|SRI}}<br/>[[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१२|२०१२]]<br/> <small>(१२)</small>
!{{flagicon|BAN}}<br/>[[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१४|२०१४]]<br/> <small>(१६)</small>
!{{flagicon|IND}}<br/>[[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१६|२०१६]]<br/> <small>(१६)</small>
!{{flagicon|UAE}}<br/>{{flagicon|OMA}}<br/>[[२०२१ ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२१]]<br/> <small>(१६)</small>
!{{flagicon|AUS}}<br/>[[२०२२ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२२]]<br/> <small>(१६)</small>
!{{flagicon|WIN}}<br/>{{flagicon|USA}}<br/>[[२०२४ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२४]]<br/> <small>(२०)</small>
!{{flagicon|IND}}<br/>{{flagicon|SRI}}<br/>[[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]<br/> <small>(२०)</small>
!{{flagicon|AUS}}<br/>{{flagicon|NZ}}<br/>[[२०२८ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२८]]<br/> <small>(२०)</small>
!{{flagicon|ENG}}<br/>{{flagicon|Ireland|cricket}}<br/>{{flagicon|SCO}}<br/>{{flagicon|Wales}}<br/>[[२०३० आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०३०]]<br/> <small>(२०)</small>
!सहभाग
|-
| id=AFG"" align=left| {{cr|AFG|२०१३}}
|—||—|| फे१ || फे१ || फे१ || style="background:#BBF3BB"| फे२ || style="background:#BBF3BB"| फे२ || style="background:#BBF3BB"| फे२ || style="background:#cc9966" | '''उफे'''|| फे१ || ||
! ८
|-
| id=AUS"" align=left| {{cr|AUS}}
|bgcolor="#cc9966"| '''उफे''' || फे१ ||bgcolor=silver|'''उवि'''||bgcolor="#cc9966"| '''उफे''' || style="background:#BBF3BB"| फे२ || style="background:#BBF3BB"| फे२ || bgcolor=gold|'''वि'''|| style="border: 3px solid red; background:#BBF3BB"| फे२ || style="background:#BBF3BB"| फे२ || फे१ || style="border: 3px solid red"| पा ||
! १०
|-
| align=left| {{cr|Italy}}
| — || —|| — || — || —|| — || — || — || — || फे१ || ||
! १
|-
| align=left| {{cr|BAN}}
| फे२ || फे१ || फे१ || फे१ || style="border: 3px solid red; background:#BBF3BB"| फे२ || style="background:#BBF3BB"| फे२ || style="background:#BBF3BB"| फे२ || style="background:#BBF3BB"| फे२ || style="background:#BBF3BB"| फे२ || × || ||
! ९
|-
| align=left| {{cr|CAN}}
| — || —|| — || — || —|| — || — || — || फे१ || फे१ || ||
! २
|-
| align=left| {{cr|ENG}}
| style="background:#BBF3BB" | फे२ || style="border: 3px solid red; background:#BBF3BB"| फे२ ||bgcolor=gold|'''वि'''|| style="background:#BBF3BB"| फे२ || style="background:#BBF3BB"| फे२ || bgcolor=silver|'''उवि'''||bgcolor="#cc9966"| '''उफे''' || bgcolor=gold|'''वि''' || style="background:#cc9966" | '''उफे'''|| bgcolor="#cc9966"| '''उफे''' || || style="border: 3px solid red"| पा
! १०
|-
| align=left| {{cr|HK}}
|—||—||—||—|| फे१ || फे१ ||—|| — || — || — || ||
! २
|-
| align=left| {{cr|IND}}
|bgcolor=gold|'''वि'''|| style="background:#BBF3BB"| फे२ || style="background:#BBF3BB"| फे२ || style="background:#BBF3BB"| फे२ ||bgcolor=silver|'''उवि'''||style="border: 3px solid red; background:#cc9966"| '''उफे''' || style="border: 3px solid red; background:#BBF3BB"| फे२ || bgcolor="#cc9966"| '''उफे''' || style="background:gold" | '''वि'''|| style="border: 3px solid red; background:gold" | '''वि''' || ||
! १०
|-
| align=left| {{cr|IRE}}
|—|| style="background:#BBF3BB"| फे२ || फे१ || फे१ || फे१ || फे१ || फे१ || style="background:#BBF3BB"| फे२ || फे१ || फे१ || || style="border: 3px solid red"| पा
! ९
|-
| align=left| {{cr|KEN}}
| फे१ ||—||—||—||—||—||—||—|| — || — || ||
! १
|-
| align=left| {{cr|NAM}}
|—||—||—||—||—||—|| style="background:#BBF3BB"| फे२ || फे१ || फे१ || फे१ || ||
! ४
|-
| align=left| {{cr|NEP}}
|—||—||—||—|| फे१ ||—||—||—|| फे१ || फे१ || ||
! ३
|-
| align=left| {{cr|NED}}
|—|| फे१ ||—||—|| style="background:#BBF3BB"| फे२ || फे१ || फे१ || style="background:#BBF3BB"| फे२ || फे१ || फे१ || ||
! ७
|-
| align=left| {{cr|NZ}}
|bgcolor="#cc9966"| '''उफे''' || style="background:#BBF3BB"| फे२ || style="background:#BBF3BB"| फे२ || style="background:#BBF3BB"| फे२ || style="background:#BBF3BB"| फे२ ||bgcolor="#cc9966"| '''उफे''' || bgcolor=silver|'''उवि'''|| bgcolor="#cc9966"| '''उफे''' || फे१ || bgcolor=silver|'''उवि'''|| style="border: 3px solid red" | पा ||
! १०
|-
| align=left| {{cr|OMA}}
|—||—||—||—||—|| फे१ || फे१ ||—|| फे१ || फे१ || ||
! ४
|-
| align=left| {{cr|PAK}}
|bgcolor=silver|'''उवि'''||bgcolor=gold|'''वि'''|| bgcolor="#cc9966"| '''उफे''' ||bgcolor="#cc9966"| '''उफे''' || style="background:#BBF3BB"| फे२ || style="background:#BBF3BB"| फे२ || bgcolor="#cc9966"| '''उफे''' || bgcolor=silver|'''उवि''' || फे१ || style="background:#BBF3BB"| फे२ || ||
! १०
|-
| align=left| {{cr|PNG}}
|—||—||—||—||—||—|| फे१ || — || फे१ || — || ||
! २
|-
| align=left| {{cr|SCO}}
| फे१ || फे१ ||—||—||—|| फे१ || style="background:#BBF3BB"| फे२ || फे१ || फे१ || फे१ || || style="border: 3px solid red"|पा
! ७
|-
| align=left| {{cr|SA}}
| style="border: 3px solid red; background:#BBF3BB" |फे२ ||bgcolor="#cc9966"| '''उफे''' || style="background:#BBF3BB"| फे२ || style="background:#BBF3BB"| फे२ ||bgcolor="#cc9966"| '''उफे''' || style="background:#BBF3BB"| फे२ || style="background:#BBF3BB"| फे२ || style="background:#BBF3BB"| फे२ || style="background:silver" | '''उवि'''|| bgcolor="#cc9966"| '''उफे''' || ||
! १०
|-
| align=left| {{cr|SL}}
| bgcolor="#cc9966"| फे२ ||bgcolor=silver|'''उवि'''||bgcolor="#cc9966"| '''उफे''' ||bgcolor=silver style|'''उवि'''||bgcolor=gold|'''वि'''|| style="background:#BBF3BB"| फे२ || style="background:#BBF3BB"| फे२ || style="background:#BBF3BB"| फे२ || फे१ || style="border: 3px solid red; background:#BBF3BB"| फे२ || ||
! १०
|-
| align=left| {{cr|UAE}}
|—||—||—||—|| फे१ ||—||—|| फे१ || — || फे१ || ||
! ३
|-
| align=left| {{cr|UGA}}
|—||—||—||—|| — ||—||—|| — || फे१ || — || ||
! १
|-
| align=left| {{cr|USA}}
|—||—||—||—||—||—|| — || — || style="border: 3px solid red; background:#BBF3BB"| फे२ || फे१ || ||
! २
|-
| align=left| {{cr|WIN}}
| फे१ ||bgcolor="#cc9966"| '''उफे''' || style="border: 3px solid red; background:#BBF3BB"| फे२ ||bgcolor=gold|'''वि'''|| bgcolor="#cc9966"| '''उफे''' ||bgcolor=gold|'''वि'''|| style="background:#BBF3BB"| फे२ || फे१ || style="border: 3px solid red; background:#BBF3BB"| फे२ || style="background:#BBF3BB"| फे२ || ||
! १०
|-
| align=left| {{cr|ZIM}}
| फे१ || × || फे१ || फे१ || फे१ || फे१ || ×× || style="background:#BBF3BB"| फे२ || — || style="background:#BBF3BB"| फे२ || ||
! ७
|}
==संघांचे पदार्पण==
पदार्पण करणारा संघ, प्रतिवर्ष वर्णक्रमानुसार.
{| class="wikitable" width=55% sortable" style="text-align:"
|-
! वर्ष
! पदार्पण करणारा संघ
! एकूण
|-
| [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७]]
| {{cr|AUS}}, {{cr|BAN}}, {{cr|ENG}}, {{cr|IND}}, {{cr|KEN}}, {{cr|NZ}}, {{cr|PAK}}, {{cr|SCO}}, {{cr|SA}}, {{cr|SL}}, {{cr|WIN}} आणि {{cr|ZIM}}
| style="text-align:center;" |१२
|-
| [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००९|२००९]]
| {{cr|IRE}} आणि {{cr|NED}}
| style="text-align:center;" |२
|-
| [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१०|२०१०]]
| {{cr|AFG|२०१३}}
| style="text-align:center;" |१
|-
| [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१२|२०१२]]
| कोणताही नाही
| style="text-align:center;" |०
|-
| [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१४|२०१४]]
| {{cr|HK}}, {{cr|NEP}} आणि {{cr|UAE}}
| style="text-align:center;" |३
|-
| [[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१६|२०१६]]
| {{cr|OMA}}
| style="text-align:center;" |१
|-
| [[२०२१ ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२१]]
| {{cr|NAM}} आणि {{cr|PNG}}
| style="text-align:center;" |२
|-
| [[२०२२ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२२]]
| कोणताही
| style="text-align:center;" |०
|-
| [[२०२४ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२४]]
| {{cr|CAN}}, {{cr|USA}} आणि {{cr|UGA}}
| style="text-align:center;" |३
|-
| [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]]
| {{cr|ITA}}
| style="text-align:center;" | १
|-
| [[२०२८ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२८]]
| TBD
| style="text-align:center;" |TBD
|-
| [[२०३० आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०३०]]
| TBD
| style="text-align:center;" |TBD
|-
! एकूण
!
! २५
|}
==स्पर्धा विक्रम==
{{Main|आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक विक्रमांची यादी}}{{updated|९ मार्च २०२६}}
{| class="wikitable"
|-
! colspan="4" | टी२० विश्वचषक विक्रम
|-
! colspan="4" | फलंदाजी
|-
|सर्वाधिक धावा
| rowspan="2" |{{cricon|IND}} [[विराट कोहली]]
|१,२९२ <small>([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१२|२०१२]]–[[२०२४ आय.सी.सी. पुरुष ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२४]])</small>
|<ref>{{cite web|url=https://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/batting/most_runs_career.html?id=89;type=trophy|title=टी२० विश्वचषक विक्रम - सर्वाधिक धावा|publisher=क्रिकइन्फो|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20211029165134/https://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/batting/most_runs_career.html?id=89;type=trophy|archive-date=२९ ऑक्टोबर २०२१|access-date=२९ ऑक्टोबर २०२१}}</ref>
|-
|[[फलंदाजी सरासरी (क्रिकेट)|सर्वाधिक सरासरी]] <small>(किमान २० डाव)</small>
|५८.७२ <small>([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१२|२०१२]]–[[२०२४ आय.सी.सी. पुरुष ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२४]])</small>
|<ref>{{cite web|url=https://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/batting/highest_career_batting_average.html?id=89;type=trophy|title=टी२० विश्वचषक विक्रम - सर्वाधिक सरासरी|publisher=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref>
|-
|सामन्यात सर्वाधिक धावा
| {{cricon|New Zealand}} [[ब्रॅन्डन मॅककुलम]] v {{cr|BAN}}
|१२३ <small>([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१२|२०१२]])</small>
|<ref>{{cite web|url=https://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/batting/most_runs_innings.html?id=89;type=trophy|title=टी२० विश्वचषक विक्रम - सामन्यात सर्वाधिक धावा|publisher=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref>
|-
|सर्वोत्कृष्ट स्ट्राईक रेट <small>(किमान ५०० चेंडू)</small>
|{{Cricon|ENG|name=इंग्लंड}} [[जोस बटलर]]
|१४४.१६ <small>([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१२|२०१२]]–[[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]])</small>
|<ref name="espncricinfo_highest_career_batting_strike-rate_892">{{cite web|url=https://www.espncricinfo.com/records/trophy/batting-highest-career-strike-rate/icc-men-s-t20-world-cup-89|title=टी२० विश्वचषक विक्रम - सर्वोत्कृष्ट स्ट्राईक रेट|publisher=क्रिकइन्फो|url-status=live|access-date=११ जुलै २०२४}}</ref>
|-
|सर्वाधिक ५०+ धावा
|{{cricon|India|name=भारत}} [[विराट कोहली]]
|१५ <small>([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१२|२०१२]]–[[२०२४ आय.सी.सी. पुरुष ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२४]])</small>
|<ref name="espncricinfo_most-fifties-career_89">{{cite web|url=https://www.espncricinfo.com/records/trophy/batting-most-fifties-career/icc-men-s-t20-world-cup-89|title=टी२० विश्वचषक विक्रम - सर्वाधिक ५०+|publisher=क्रिकइन्फो|url-status=live|access-date=११ जुलै २०२४}}</ref>
|-
| rowspan="2" |सर्वाधिक शतके
|{{cricon|Pakistan}} [[साहिबजादा फरहान]]
|२ <small>([[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]])</small>
| rowspan="2" |<ref>{{cite web|url=https://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/batting/list_hundreds.html?id=89;type=trophy|title=टी२० विश्वचषक विक्रम - सर्वाधिक शतके|publisher=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref>
|-
| rowspan="2" |{{cricon|West Indies}} [[ख्रिस गेल]]
|२ <small>([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७]]–[[२०२१ ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२१]])</small>
|-
|सर्वाधिक षटकार
|६३ <small>([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७]]–[[२०२१ ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२१]])</small>
|<ref name="espncricinfo_most-sixes-career_89">{{cite web|url=https://www.espncricinfo.com/records/trophy/batting-most-sixes-career/icc-men-s-t20-world-cup-89|title=टी२० विश्वचषक विक्रम - सर्वाधिक षटकार|publisher=क्रिकइन्फो|url-status=live|access-date=११ जुलै २०२४}}</ref>
|-
|सर्वोत्कृष्ट [[भागीदारी (क्रिकेट)|भागीदारी]]
| {{cricon|Pakistan}} [[साहिबजादा फरहान]] आणि [[फखर झमान]]<br> वि {{cr|SRI}}
|१७६ <small>([[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]])</small>
|<ref>{{cite web|url=https://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/fow/highest_partnerships_for_any_wicket.html?id=89;type=trophy|title=टी२० विश्वचषक विक्रम - सर्वोत्कृष्ट भागीदारी|publisher=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref>
|-
|स्पर्धेत सर्वाधिक धावा
|{{cricon|Pakistan}} [[साहिबजादा फरहान]]
|३८३ <small>([[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]])</small>
|<ref>{{cite web|url=https://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/batting/most_runs_series.html?id=89;type=trophy|title=टी२० विश्वचषक विक्रम - स्पर्धेत सर्वाधिक धावा|publisher=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref>
|-
! colspan="4" | गोलंदाजी
|-
|सर्वाधिक बळी
|{{cricon|BAN}} [[शाकिब अल हसन]]
|५० <small>([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७]]–[[२०२४ आय.सी.सी. पुरुष ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२४]])</small>
|<ref>{{cite web|url=https://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/bowling/most_wickets_career.html?id=89;type=trophy|title=टी२० विश्वचषक विक्रम - सर्वाधिक बळी|publisher=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref>
|-
|सर्वोत्कृष्ट [[गोलंदाजी सरासरी]] <small>(किमान ४०० चेंडू)</small>
|{{cricon|दक्षिण आफ्रिका}} [[ॲनरिक नॉर्त्ये]]
|१२.६० <small>([[२०२१ ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२१]]–[[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]])</small>
|<ref>{{cite web|url=https://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/bowling/best_career_bowling_average.html?id=89;type=trophy|title=टी२० विश्वचषक विक्रम - सर्वोत्कृष्ट गोलंदाजी सरासरी|publisher=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref>
|-
|सर्वोत्कृष्ट [[स्ट्राइक रेट]] <small>(किमान ४०० चेंडू)</small>
|{{cricon|SRI}} [[वनिंदु हसरंगा]]
|११.७२ <small>([[२०२२ आय.सी.सी. पुरुष ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२२]]–[[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१६|२०२४]])</small>
|<ref>{{cite web|url=https://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/bowling/best_career_strike_rate.html?id=89;type=trophy|title=टी२० विश्वचषक विक्रम – सर्वोत्कृष्ट स्ट्राइक रेट|publisher=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref>
|-
|सर्वोत्कृष्ट [[इकॉनॉमी रेट]] <small>(किमान ४०० चेंडू)</small>
|{{cricon|भारत}} [[जसप्रीत बुमराह]]
|५.६६ <small>([[२०१६ आय.सी.सी. विश्व ट्वेंटी२०|२०१६]]–[[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]])</small>
|<ref>{{cite web|url=https://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/bowling/best_career_economy_rate.html?id=89;type=trophy|title=टी२० विश्वचषक विक्रम - सर्वोत्कृष्ट इकॉनॉमी रेट|publisher=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref>
|-
|सर्वोत्तम गोलंदाजी
|{{cricon|SRI}} [[अजंता मेंडिस]] वि {{cr|ZIM}}
|६/८ <small>([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१२|२०१२]])</small>
|<ref>{{cite web|url=https://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/bowling/best_figures_innings.html?id=89;type=trophy|title=टी२० विश्वचषक विक्रम - सर्वोत्तम गोलंदाजी | publisher=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref>
|-
|स्पर्धेत सर्वाधिक बळी
|{{cricon|अफगाणिस्तान|variant=२०१३}} [[फझलहक फारूखी]] आणि {{cricon|भारत}} [[अर्शदीप सिंग]]
|१७ <small>([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१६|२०२४]])</small>
|<ref>{{cite web|url=https://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/bowling/most_wickets_series.html?id=89;type=trophy|title=टी२० विश्वचषक विक्रम - स्पर्धेत सर्वाधिक बळी|publisher=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref>
|-
! colspan="4" | क्षेत्ररक्षण
|-
|सर्वाधिक गडी बाद <small>([[यष्टीरक्षक]])</small>
|{{cricon|SA}} [[क्विंटन डी कॉक]]
|३९ <small>([[२०१४ आयसीसी विश्व ट्वेंटी२०|२०१४]]–[[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]])</small>
|<ref>{{cite web|url=https://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/keeping/most_dismissals_career.html?id=89;type=trophy|title=टी२० विश्वचषक विक्रम - सर्वाधिक गडी बाद|publisher=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref>
|-
|सर्वाधिक झेल <small>([[क्षेत्ररक्षण]])</small>
|{{cricon|Australia}} [[डेव्हिड वॉर्नर]]
|२५ <small>([[२००९ आयसीसी विश्व ट्वेंटी२०|२००९]]–[[२०२४ आयसीसी पुरुष ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२४]])</small>
|<ref>{{cite web|url=https://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/fielding/most_catches_career.html?id=89;type=trophy|title=टी२० विश्वचषक विक्रम - सर्वाधिक झेल | publisher=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref>
|-
! colspan="4" | संघ
|-
|सर्वाधिक सांघिक धावसंख्या
|{{cr|SRI}} (वि {{cr|KEN}})
|२६०/६ <small>([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७]])</small>
|<ref>{{cite web|url=https://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/team/highest_innings_totals.html?id=89;type=trophy|title=टी२० विश्वचषक विक्रम - सर्वाधिक धावसंख्या |publisher=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref>
|-
| rowspan="2" |सर्वात कमी धावसंख्या
|{{cr|NED}} (वि {{cr|SRI}})
|३९ <small>([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१४|२०१४]])</small>
| rowspan="2" |<ref>{{cite web|url=https://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/team/lowest_innings_totals.html?id=89;type=trophy|title=टी२० विश्वचषक विक्रम - सर्वात कमी धावसंख्या | publisher=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref>
|-
|{{cr|UGA}} (वि {{cr|WIN }})
|३९ <small>([[२०२४ आय.सी.सी. पुरुष ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२४]])</small>
|-
|सर्वाधिक विजय % <small>(किमान १० सामने)</small>
|{{cr|IND }}
|७३.३३% <small>(सामने ६१, विजय ४३)</small> <small>([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७]]–[[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]])</small>
|<ref>{{cite web|url=https://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/team/results_summary.html?id=89;type=trophy|title=टी२० विश्वचषक विक्रम - सर्वाधिक विजय टक्केवारी|publisher=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref>
|-
|सर्वात मोठा विजय <small>(धावांनुसार)</small>
|{{cr|SRI}} (वि {{cr|KEN}})
|१७२ <small>([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २००७|२००७]])</small>
|<ref>{{cite web|url=https://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/team/largest_margins.html?id=89;type=trophy|title=टी२० विश्वचषक विक्रम - सर्वात मोठा विजय|publisher=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref>
|-
|एका सामन्यात सर्वाधिक एकूण धावा
|{{cr|IND}} v {{cr|ENG}}
|४९९/१४ <small>([[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|२०२६]])</small>
|<ref>{{cite web|url=https://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/team/highest_match_aggregates.html?id=89;type=trophy|title=टी२० विश्वचषक विक्रम - एका सामन्यात सर्वाधिक एकूण धावा|publisher=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref>
|-
|एका सामन्यात सर्वात कमी एकूण धावा
|{{cr|NED}} v {{cr|SRI}}
|७९-११ <small>([[२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा, २०१४|२०१४]])</small>
|<ref>{{cite web|url=https://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/team/lowest_match_aggregates.html?id=89;type=trophy|title=टी२० विश्वचषक विक्रम - एका सामन्यात सर्वात कमी एकूण धावा|publisher=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref>
|-
|सर्वाधिक सलग विजय
|{{cr|IND }} आणि {{Cr|SA}}
|८ - दोन्ही [[२०२४ आय.सी.सी. पुरुष ट्वेंटी२० क्रिकेट विश्वचषक|२०२४]] मध्ये
|
|}
==संदर्भयादी==
{{संदर्भयादी}}
==बाह्य दुवे==
*[http://cricket.yahoo.com/ आयसीसी संकेतस्थळ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110222213420/http://cricket.yahoo.com/ |date=2011-02-22 }}
*[http://www.cricinfo.com/wt202010/content/series/412671.html ICC World Twenty20 2010] from [[ईएसपीएन क्रिकइन्फो]]
*[http://www.cricket-wc.com ICC World Twenty20] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110129171406/http://cricket-wc.com/ |date=2011-01-29 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110129171406/http://cricket-wc.com/ |date=2011-01-29 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110129171406/http://cricket-wc.com/ |date=2011-01-29 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110129171406/http://cricket-wc.com/ |date=2011-01-29 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110129171406/http://cricket-wc.com/ |date=2011-01-29 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110129171406/http://cricket-wc.com/ |date=2011-01-29 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110129171406/http://cricket-wc.com/ |date=2011-01-29 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110129171406/http://cricket-wc.com/ |date=2011-01-29 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110129171406/http://cricket-wc.com/ |date=2011-01-29 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110129171406/http://cricket-wc.com/ |date=2011-01-29 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110129171406/http://cricket-wc.com/ |date=2011-01-29 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110129171406/http://cricket-wc.com/ |date=2011-01-29 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110129171406/http://cricket-wc.com/ |date=2011-01-29 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110129171406/http://cricket-wc.com/ |date=2011-01-29 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110129171406/http://cricket-wc.com/ |date=2011-01-29 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110129171406/http://cricket-wc.com/ |date=2011-01-29 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110129171406/http://cricket-wc.com/ |date=2011-01-29 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110129171406/http://cricket-wc.com/ |date=2011-01-29 }} 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*[http://t20worldcupcricket.com T20 World Cup Website]
{{२०-२० विश्व अजिंक्यपद स्पर्धा}}
{{fb start}}
{{आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संघटन स्पर्धा}}
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[[वर्ग:२०-२० क्रिकेट]]
[[वर्ग:आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संघटन]]
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शिवराज्य पक्ष
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संतोष गोरे
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text/x-wiki
'''शिवराज्य पक्ष''' हा [[महाराष्ट्र|महाराष्ट्रातील]] राजकीय पक्ष आहे.
ब्रिगेडियर सुधीर सावंत हे शिवराज्य पक्षाचे राष्ट्रीय अध्यक्ष आहेत. हा पक्ष भारतीय राज्य घटनेचे पूर्णपणे तंतोतंत पालन करण्यासाठी स्थापन झाला आहे, असे सांगितले जाते. [[अखिल भारतीय फाॅर्वर्ड ब्लॉक]], [[वेल्फेअर पार्टी ऑफ इंडिया]] व शिवराज्य पक्ष यांच्या परिवर्तन आघाडीचे ''' २०१४ च्या लोकसभा निवडणुकीसाठीचे उमेदवार. ''' (यांपैकी एकही उमेदवार निवडून आला नाही.)
{| class="wikitable"
|-
! अ. नं. !! मतदार संघाचे नाव !! उमेदवार
|-
| १ || [[रावेर]] || आमले ज्ञानेश्वर विठ्ठल
|-
| २ || [[अमरावती]] || धनगाव नारायण गबाजी
|-
| ३ || [[रामटेक]] || भालेकर संदेश भीमराव
|-
| ४ || [[नागपूर]] || धोटे जांबुवंतराव बापूराव
|-
| ५ || [[हिंगोली]] || शेख सुलतान शेख
|-
| ६ || [[यवतमाळ]] || धोटे जांबुवंतराव बापूराव
|-
| ७ || [[नाशिक]] || आव्हाड महेश झुंजारराव
|-
| ८ || [[उत्तर]] [[मुंबई]] || थोरात सुनील उत्तमराव
|-
| ९ || [[उत्तर]] [[पूर्व]] [[मुंबई]] || पठाण साबीर मेहंदी
|-
| १० || [[उत्तर]] [[मध्य]] [[मुंबई]] || बिर्जे हेमंत अनंत
|-
| ११ || [[शिरूर]] || कुसेकर विकास सुदाम
|-
| १२ || [[अहमदनगर]] || बबन गंगाधर कोळसे-पाटील
|-
| १३ || [[बीड]] || शिनगारे गोविंद भारत
|}
<references group="http://www.maharashtraspeaks.com/Candidates.aspx {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140430050630/http://www.maharashtraspeaks.com/Candidates.aspx |date=2014-04-30 }}" />
महाराष्ट्रात शिवराज्य पक्ष विधानसभा २०१४ च्या सुद्धा निवडणुका लढवीत आहे. यावेळी १३ पक्ष व समविचारी संघटनांच्या आघाडीने बनविलेल्या "संविधान मोर्चा" या नावाने शिवराज्य पक्ष विधानसभा २०१४ च्या निवडणूक मैदानात आहे.
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
१. http://www.mantralaylive.com/%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%86%E0%A4%98%E0%A4%BE%E0%A4%A1%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BE-%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A4%BE/(महाआघाडी{{मृत दुवा|date=August 2025 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }} बनविण्याचा शेकापचा प्रयत्न
२. http://shivrajyaparty.org {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20161006212556/http://shivrajyaparty.org/ |date=2016-10-06 }}
३. http://divyamarathi.bhaskar.com/news/MAH-MUM-maharashtra-election-politics-news-in-divya-marathi-4741062-NOR.html
{{विस्तार}}
{{भारतीय राजकीय पक्ष}}
[[वर्ग:भारतातील राजकीय पक्ष]]
[[वर्ग:महाराष्ट्रातील राजकीय पक्ष]]
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कवी
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संतोष गोरे
135680
[[Special:Contributions/~2026-49032-45|~2026-49032-45]] ([[User talk:~2026-49032-45|चर्चा]]) यांनी केलेले बदल [[User:संतोष गोरे|संतोष गोरे]] यांच्या आवृत्तीकडे पूर्वपदास नेले.
2632122
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text/x-wiki
'''कवी''' ही अशी व्यक्ती आहे जी [[कविता]] अभ्यासते आणि निर्माण करते. कवी स्वतःचे असे वर्णन करू शकतात. कवी हा निर्माता ([[विचार|विचारक]], [[गीतकार]], [[लेखक]]) असू शकतो जो कविता (मौखिक किंवा [[साहित्य|लिखित]]) तयार करतो किंवा ते प्रेक्षकांसमोर त्यांची कला सादर करू शकतात. कविता करणाऱ्या स्त्रीस '''कवयित्री''' असे म्हणतात.
कवी प्रागैतिहासिक काळापासून अस्तित्वात आहेत, जवळजवळ सर्व भाषांमध्ये, आणि त्यांनी विविध संस्कृती आणि कालखंडात मोठ्या प्रमाणात कामे तयार केली आहेत.<ref name="Orban">{{cite book |last=Orban |first=Clara Elizabeth |title=The Culture of Fragments: Word and Images in Futurism and Surrealism |publisher=Rodopi |year=1997 |page=3 |url=https://books.google.com/books?id=KbCVyt6MWg0C |isbn=90-420-0111-9}}</ref>
== यादी ==
काही प्रसिद्ध कवी आणि कवयित्री
#|बालकवी (त्र्यंबक बापुजी ठोंबरे)
#|कुसुमाग्रज (विष्णू वामन शिरवाडकर)
#|केशवसुत (कृष्णाजी केशव दामले)
#|केशवकुमार (प्रल्हाद केशव अत्रे)
#|शांता शेळके
#|बहिणाबाई चौधरी
#|[[अनिल बाबुराव गव्हाणे]]
#|विजया वाड
#|भा.रा. तांबे
#|मंगेश पाडगावकर
#|प्रवीण दवणे
#|ग.दि. माडगुळकर
#|कवी अनिल [आत्माराम रावजी देशपांडे)
#|कवी बी (नारायण मुरलीधर गुप्ते)
#|गोविंदाग्रज (राम गणेश गडकरी)
#|ग.ह. पाटील
#|विठ्ठल वाघ
#|बा.भ बोरकर |ना.धों. महानोर
#|कवी यशवंत (यशवंत दिनकर पेंढरकर)(बडोद्याचे राजकवी)
#|साने गुरुजी
#|दुर्गा भागवत
#|[[शिरीष गोपाळ देशपांडे]]
#|माधव जुलिअन
#|दिलीप चित्रे
#|[[ग.ल. ठोकळ]]
#|गो.ना. माडगावकर
#|सुरेश भट
#|श्री. बा. रानडे
#|गोपीनाथ
#|ना.गं. लिमये
#|केशव मेश्राम
#|बा.सी. मर्ढेकर
#|शं.चिं. श्रीखंडे
#|वि.म. कुलकर्णी
#|ना.वा. टिळक
#|शंकर वैद्य
#|इंदिरा संत
#|अरुणा ढेरे
#|कवी ग्रेस (माणिक गोडघाटे)
#|वा.रा. कांत
#|अनंत काणेकर
#|आरती प्रभू (चिं त्र्य खानोलकर)
#|पद्मा
#|कवी सुधांशु
#|विंदा करंदीकर
#|पु.शि. रेगे
#|सदानंद रेगे
#|अनंत फंदी
#|सोपानदेव चौधरी
#|वसंत आबाजी डहाके
#|दि.पु. चित्रे
#|गो.नी. दांडेकर
#|वसंत बापट
#|संगीता बर्वे
#|[[शिरीष पै]]
#|वि.भि. कोलते
#|फ.मुं शिंदे
#|अज्ञातवासी (दिनकर गंगाधर केळकर)
#|मधुकर केचे
#।दशरथ यादव
#|किरण शिवहर डोंगरदिवे
#|[[किशोर कवठे]]
==इतर कवी==
#डॉ.[[मिर्झा रफी अहमद बेग]]<ref>महाराष्ट्र टाईम्स, शनिवार,२९ नोव्हेंबर २०२५</ref>
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:साहित्यिक]]
[[वर्ग:कवी|*]]
hl7t4su7ak6wn4s8eg3ct02sb5cppkz
पक्षी
0
48035
2709822
2709369
2026-09-15T22:47:01Z
नरेश सावे
88037
/* विदेशी पक्षी */
2709822
wikitext
text/x-wiki
[[चित्र:Crested Sperpent Eagle 1.jpg|thumb|right|200 px|सर्प गरुड]]
[[चित्र:उडणारा पक्षी.JPG|200px|thumb| उडणारा पक्षी]]
'''पक्षी''' हे उंच उडणारे दोन पायांवर चालणारे पिसे असलेले गरम रक्ताचे पृष्ठवंशीय जीव आहेत. जीवशास्त्रानुसार पक्ष्यांची व्याख्या फेदर्ड बायपेड अशी होते. याचा अर्थ पिसे असलेले दोन पायांचे [[प्राणी]]. पक्ष्यांचे सर्वांत ठळक वैशिष्ट्य म्हणजे त्यांची उडण्याची क्षमता. ही क्षमता पक्ष्यांना इतर पृष्ठवंशीय प्राण्यांपेक्षा वेगळे ठरवते. [[पेंग्विन]] व [[शहामृग]] असे फारच थोडके पक्षी वगळता इतर सर्व पक्ष्यांना उडता येते. त्यांचे दुसरे वैशिष्ट्य म्हणजे त्यांची पिसे. सर्व पक्ष्यांना पिसे, चोच व चार कप्याचे हृदय असते. हृदयाच्या चार कप्यांमुळे पक्षी उष्ण रक्ताचे आहेत. पिसांच्या व चोचीच्या रचनेमुळे [[पक्षी]] वजनाने अतिशय हलके असतात. पिसांच्या व चोचीच्या रचनेमुळे पक्षी वजनाने अतिशय हलके असतात. पिसे त्यांचे थंडीपासून संरक्षण करतात व सर्वांत महत्त्वाचे म्हणजे उडण्याची शक्ती देतात.
== उत्पत्ती ==
पक्ष्यांची उत्पत्ती प्राचीनकालीन [[डायनासॉर]]पासून झाल्याचे मानण्यात येते. सुरुवातीला ही कल्पना पटणे थोडेसे कठीण होते. कारण डायनासॉर थंड रक्ताचे सरपटणारे प्राणी, तर पक्षी उष्णरक्तीय उडणारे प्राणी. मात्र, उत्खननात सापडलेल्या पुराव्यांमुळे. ही कल्पना सत्य असल्याचे दिसून आले. गेल्या शतकात जर्मनीतील एका खाणीत [[आर्कीऑपटरिक्स|आर्चिओप्टेरिक्स]] या पक्ष्याचा [[सांगाडा]] मिळाला. या सांगाड्याला पंखांची रचना होती व पंखामध्ये पक्ष्यांमध्ये न आढळणाऱ्या नख्या होत्या. सांगाड्यात सरपटणाऱ्या प्राण्यांना असतात तशा जबड्याऐवजी आजच्या पक्ष्यात आढळणारी [[चोच]] होती. शिवाय पक्ष्यांमध्ये नसलेली लांब शेपटी होती. अशा प्रकारे या उत्क्रांतीमधील महत्त्वाच्या दुवा असलेल्या त्या सांगाड्याने सिद्ध केले की पक्षी हे सरपटणाऱ्या प्राण्यांपासून बनले असले पाहिजेत. आजच्या पक्ष्यांच्या [[कवटी]]ची रचना व [[रक्त]]ातील [[लालपेशी]] ह्या सरपटणाऱ्य प्राण्यांशी साधर्म्य सांगणाऱ्या आहेत. तसेच पक्ष्यांच्या पावलांवरील खवले व नख्यांची रचना, नखे दुमडायची पद्धत ह्या गोष्टीही सरपटणाऱ्या प्राण्यांशी जवळचे नाते सांगतात. पक्षीही सरपटणाऱ्या प्राण्यांप्रमाणे [[अंडी]] घालतात. अंड्याचे कवच व आतील रचना या गोष्टीही मिळत्याजुळत्या आहेत. ज्याप्रमाणे काही सरपटणारे प्राणी नियमितपणे आपल्या कातडीची [[कात]] टाकतात तसेच काही पक्षी अजूनही आपली [[पिसे]] झडून पाडतात व नवीन पिसे धारण करतात. जीवशास्त्रज्ञांच्या म्हणण्याप्रमाणे पक्ष्यांची पिसे ही जनावरांच्या [[खवले|खवल्यांचे]] बदललेले रूप आहे.
== शरीर रचना ==
[[चित्र:Birdmorphology.svg|thumb|right|300 px|१ चोच, २ डोके, ३ पापणी, ४ बुब्बुळ, ५ Mantle, Lesser [[covert (feather)|coverts]], ७ Scapulars, ८Median coverts, ९ Tertials, १० Rump, ११ Primaries, १२ बूड, १३ जांघ, १४ Tibio-tarsal articulation, १५ Tarsus, १६ पाय, १७ नडगी, १८ पोट, १९ Flanks, २० छाती, २१ गळा, २२ Wattle]] पक्ष्यांचे शरीराचे तापमान ३८° ते ४४° इतके असते व ते साधारणपणे सस्तन प्राण्यांपेक्षा थोडेच जास्तच असते. त्यांची पिसे ही उत्तम उष्णतारोधकाचे काम करतात, त्यामुळे त्यांना शरीराचे तापमान कायम ठेवणे सोपे जाते. पिसांचा उपयोग थंड प्रदेशात अतिशय चांगला होतो व जर खाणेपिणे व्यवस्थित मिळाल्यास बाहेरील तापमान कमी असतानाही अतिशय निवांतपणे कडक थंडीतही जीवन व्यतीत करतात. परंतु याच उष्णतारोधक पिसांचा त्यांना उष्ण वातावरणात तोटा होण्याची शक्यता असते. पक्ष्यांची हालचाल इतर कोणत्याही प्राण्यांपेक्षा जास्त असते त्यामुळे त्यांच्या शरीरात मोठ्या प्रमाणावर उष्णतादेखील निर्माण होते. सस्तन प्राण्यांमध्ये घाम आणणाऱ्या स्वेद ग्रंथी असतात. त्या तापमान नियंत्रणाचे काम करतात. पक्ष्यांना अश्या स्वेद ग्रंथी नसतात. यामुळे उष्ण तापमानात हालचालीमुळे त्यांना ताप येऊन मृत्यू ओढावण्याची शक्यता झाली असती. परंतु, निसर्गाने त्यांना फुफ्फुसांमध्ये हवेचे फुगे दिले आहेत. त्यांमुळे पक्ष्यांचे जादा उष्णता निर्मूलनाचे काम पटकन होते.
पक्ष्यांची पिसे विविधरंगी असतात. पक्ष्याला शरीराच्या विविध भागांवर अनेक रंगाची पिसे असतात. हे रंग एका जातीच्या पक्ष्याला दुसऱ्या जातीच्या पक्ष्याहून वेगळे करतात. नर-मादीचे रंगही वेगळे असतात. सामान्यतः पक्ष्यांमध्ये नर अधिक सुंदर असतो.
कुठल्याही पक्ष्याला तीन प्रकारची पिसे असतात.
# बाह्य पिसे- ही पिसे सर्वांत बाहेरची असतात.यांना कॉंटूर पिसे अथवा पेने असे म्हणतात. याच पिसांचे रंग एका जातीच्या पक्ष्याला दुसऱ्या जातीपासून वेगळे ठरवतात. यांत साधारणपणे शेपटीची पिसे, उड्डाणांची पिसे व इतर बाह्य पिसे यांचा समावेश होतो.
# अंतर्बाह्य पिसे- या पिसांना प्ल्युमुले असे म्हणतात. ही पिसे लवचीक असतात व बाह्य पिसांखाली दडलेली असतात.
# अंतर्गत पिसे- ही पिसे सर्वांत आतमध्ये असतात व केसांच्या लवीप्रमाणे दिसतात. जोपर्यंत वरची पिसे आहेत तोवर ही पिसे दिसत नाहीत. ही पिसे उड्डाणात भाग घेत नाहीत.
# पक्षांना हृदयाचे केवळ ३ भाग असतात.
== पंखांची रचना व उडणे ==
वेगवेगळे खाद्य मिळविण्यासाठीच्या उडतानाच्या हालचालींना अनुरूप अशी पक्षांच्या पंखांची रचना असते.
# एकाच ठिकाणी पंख न हालविता तरंगणे
# जलद झेप
# पंखाची थोडी उघडझाप करून हवेत तरंगणे
# हवेत तरंगताना मधेच पंखांची जलद फडफड
# पंखांची जलद फडफड करून जलद उड्डाण
# भरारी मारत असतांना मधेच पंख मिटणे
# कमी उंचीवर असताना पंखांची अतिजलद फडफड
# सरळ उड्डाण व जलद फडफड
== चोच ==
पक्ष्यांच्या चोचींचे उपयोगानुसार विविध प्रकार -
१) मासे पकडण्यासाठी दातऱ्या असलेली.
२) दलदल किंवा चिखलातून अन्न गाळून घेण्यासाठी.
३) पाणी/चिखलातील अन्न शोधण्यासाठी.
४) लाकूड तासण्यासाठी.
५) फुलातील मध खाण्यासाठी .
६) बिया/कठीण कवचाची फळे फोडून खाण्यासाठी.
७) मास चिरण्यासाठी व फाडून खाण्यासाठी.
८) कापण्यासाठी.
९) संवरक्षणासाठी
== विविध जाती व कुळे ==
जगात पक्ष्यांच्या साधारणपणे एकूण ८,६०० जाती आहेत. उपजाती व स्थानिक बदल लक्षात घेतल्यास हा आकडा ३०,००० च्यावर जाईल. त्यापैकी सुमारे २६५ जाती नामशेष झाल्या असाव्यात.अजूनही काही प्रमाणात पक्षांच्या प्रजाती शोधण्याचे काम चालू आहे .
== वर्तन ==
बहुतांशी पक्षी हे दिनचर आहेत. फारच थोडे पक्षी हे निशाचर असतात. [[घुबड]]ांमधील बहुतांशी जाती निशाचर आहेत. तसेच [[रात्रबगळा]], [[टिटवी]] हे काही पक्षी निशाचर आहेत.
=== खाद्य ===
[[चित्र:BirdBeaksA.svg|thumb|right|Feeding adaptations in beaks]]
पक्ष्यांमध्ये खाण्यापिण्याच्या बाबतीत प्रचंड विविधता आढळून येते. फुलांतील मकरंद, फळे, लहान रोपे,छोटे प्राणी, साप, व विविध प्रकारचे किडे पक्षी खातात. काही शिकारी पक्षी वगळता किडे हे बहुतांशी पक्ष्यांचे आवडते अन्न आहे, किंबहुना किड्यांची संख्या नियंत्रणात ठेवण्यासाठीच पक्ष्यांचा जन्म झाला आहे असे मानण्यात येते. पक्ष्यांना दात नसल्याने ते चोचीने खाद्य प्रथम जितके लहान आकारात तोडता येईल तितके तोडतात व लगेच गिळतात. चर्वणाची पुढील प्रक्रिया पोटात पार पडते. शेवाळे हे महत्त्वाचे अन्न आहे.
== स्थलांतर ==
ठरल्या वेळी एका मुलखातून दुसऱ्या मुलुखात स्थलांतर करायचे व नंतर नियमितपणे परतायचे हे पक्ष्यांच्या स्थलांतराचे खास लक्षण आहे. उडण्याच्या वरदानामुळे पक्षी इतर प्राण्यांपेक्षा जास्त लांबवर स्थलांतर करतात. पक्ष्यांचे स्थलांतरास अनेक कारणे असतात त्यातील कारणे खालीलप्रमाणे :-
# अन्नाची उपलब्धता -
# हवामान- थंड हवामान सोसण्याची क्षमता- पक्ष्यांची थंडी सोसण्याची क्षमता चांगली असते तरी युरोप, सायबेरियातील पक्षी येथील अतिकडक हिवाळा आवाक्याबाहेरचा असतो. म्हणून या भागातील पक्षी दक्षिणेकडील उबदार प्रदेशात म्हणजे, उत्तर अफ्रिका, मध्यपूर्व इराण, भारतीय उपखंडात व आग्नेय अशियात स्थलांतर करतात. युरोप व सायबेरियातील उन्हाळ्यामध्ये या भागात खाद्य मोठ्या प्रमाणात उपलब्ध होते व पक्षी पुन्हा सायबेरिया व युरोपात स्थलांतर करतात.
# जनुकीय सवयी- लक्षावधी वर्षांची स्थलांतराची सवय यामुळे बहुतांशी स्थलांतरित पक्ष्यांच्या जातींमध्ये जन्मतः स्थलांतराचे ज्ञान असते. - उदा; पेरू व चिली देशातील काही पक्षी, जनुकीय सवयींमुळे अन्न उपलब्ध नसलेल्या भागातही स्थलांतर करतात.
# सुरक्षितता - शिकाऱ्यांपासून सुरक्षितता
# पिल्लांच्या प्रशिक्षणासाठी
# उदाहरणार्थ: कोकिळा ही उत्तर प्रदेशातून मार्चच्या पहिल्या आठवड्यात महाराष्ट्रात येते व ऑगस्टमध्ये दक्षिण भारताकडे स्थलांतर करते.
== पक्षांची घरटी ==
पक्ष्यांमुळे पर्यावरणाचा समतोल राखला जातो, बीजप्रसार होतो, निसर्गाची सुंदरता वाढते. सकाळी सकाळी पक्ष्यांचे सुमधुर आवाजाने माणूस ताजेतवाना होतो.
== शेतकऱ्यांचे मित्र ==
साप, बेडूक, फुलपाखरे, मधमाश्या कोंबड्या, शेळ्या असे अनेक प्राणी शेतकऱ्याचे मित्र असतात. सर्व पक्षी शेतातील धान्य खाऊन फस्त करतात अशी एक गैरसमजूत आहे. काही पक्षी शेतातील धान्य खात नसून पिकाची काढणी झाल्यावर शेतात पडलेले दाणे टिपतात. निसर्गातील कीड नियंत्रण आणि सरपटणाऱ्या प्राण्यांचे संतुलन राखण्याचे काम पक्षी करतात.
पिकांचे नुकसान करतात म्हणून अमेरिकेतील लोकांनी [[कॅरोलविना पॅराकीट]] या पोपटाच्या सुंदर प्रजातीचा वंशच संपवून टाकला. माओच्या आदेशानंतर चिनी नागरिकांनी लाखो चिमण्यांची कत्तल केली, त्याचा परिणाम शेतीवर झाल्याने चीनला उपासमारीचा सामना करावा लागला. पीक उत्पादनच न झाल्याने लाखो लोक मृत्युमुखी पडले. शेवटी चीन सरकारला रशियातून चिमण्या आयात कराव्या. सायंकाळच्या वेळी शेतामध्ये पक्ष्याचे थवे बघायला मिळतात. ते बघून मन प्रसन्न होते.
== पुस्तक ==
शेतकऱ्यांच्या 'मित्रां'वर डॉ. राजू कसंबे यांनी 'शेतातील पक्षी' नावाचे पुस्तक लिहिले आहे.
== भारतीय पक्षी ==
पक्ष्यांच्या ८५०० पैकी भारतात एकूण १२०० जातीचे पक्षी आढळतात. स्थानिक जातींप्रमाणेच स्थलांतरित जातींचीही संख्या पुष्कळ आहे. [[कावळा]], [[कबूतर]] व [[चिमणी]] हे भारतात सर्वाधिक प्रमाणात आढळणारे पक्षी आहेत. भारतात आढळणाऱ्या पक्ष्यांची माहिती देणारी अनेक पुस्तके मराठी-इंग्रजीत आहेत. त्यांपैकी काही ही :-
* निसर्गाचे मित्र (दैनिक सकाळमध्ये आठवड्यातून एकदा असे सतत तीन वर्षे प्रकाशित झालेल्या लेखांचा संग्रह; लेखक मिलिंद गुप्ते)
* महाराष्ट्रातील १०० सामान्य पक्षी (मोफत ई-पुस्तक)(लेखक - डॉ. राजू कसंबे)
* पक्षीजगत (लेखक - सचिन मेन)
* पक्षिकोश (लेखक - मारुती चितमपल्ली)
* पक्षीही सुस्वरें (लेखक - डॉ. सतीश पांडे)
* पक्षांचे स्थलांतर लेखक - डॉ. सतीश पांडे)
* पक्षी - आपले सख्खे शेजारी - किरण पुरंदरे
* पक्षी - पाणथळीतले – किरण पुरंदरे
* शेतातील पक्षी (मोफत ई-पुस्तक)(डॉ. राजू कसंबे)
* A Pictorial guide to the Birds of the Indian Subcontinent ( इंग्रजी; लेखक - डॉ. सलीम अली आणि एस. डिलॉन रिप्ले)
* Birds of Maharashtra (इंग्रजी; लेखक - डॉ. सतीश पांडे, प्रमोद देशपांडे आणि निरंजन संत)
* Birds of Lonavala Khandala (इंग्रजी; लेखक - डॉ. सतीश पांडे)
* Birds of Southern India (Helm Field Guides) (इंग्रजी; लेखक - रिचर्ड ग्रिमेट आणि टिम इन्स्किप)
* Birds of Sri Lanka (Helm Field Guides) (इंग्रजी; लेखक - दीपल वराकगोडा, कॅरोल इन्स्किप, टिम इन्स्किप आणि एकजण)
==विदेशी पक्षी==
अ.अमेरिकेतील पक्षी.
क.दक्षिण डाकोटा राज्य.<ref>Backyard Birds of South Dakota - South Dakota, Wildlife Division, Department of Game, Fish and Parks.Authors: Eileen Dowd Stukel,Silka L.F.Kempema,Chad Tussing.2009 edition</ref>
#[[गुंजन पक्षी]].[[(Hummingbird)]].
#[[कबुतरे व पारवे]] ([[Doves]] and [[Pigeons]]).
#[[सुतारपक्षी]] ([[Woodpeckers]]).
#[[भिंगरी पक्षी आणि राजापक्षी|स्वॅलोज आणि किंगबर्ड्स]]([[Swallows and Kingbirds]]).
#[[पाकोळ्या आणि ससाणे ]] ([[Swifts]] and [[Nighthawks]]).
#[[नीळकंठ आणि कावळा]] ([[Jays and Crows]]).
#[[चिकाडी,भिंतसर्पी,वृक्षसर्पी, आणि रानचिमणी पक्षी]] ([[Chickadees, Nuthatches, Creepers and Wrens]]).
#[[मुकुटपक्षी, हरितपक्षी, आणि वटवट्या पक्षी]] ([[Kinglets, Vireos and Warblers]]).
== पक्षी निरीक्षण ==
पक्षीनिरीक्षण हा अतिशय आनंददायक [[छंद]] आहे. त्याची सुरुवात करतानाच्या काही मूलभूत गोष्टींचा येथे ऊहापोह केलेला आहे.
'''पक्षी निरीक्षण कोठे करावे'''
पक्षीनिरीक्षणासाठी जंगलात जावे लागते असे नाही. आपल्या घराजवळशहरी बगिच्यात, रहदारीच्या रस्त्यावर सुद्धा पक्षी असतात. अर्थात प्रत्येक ठिकाणी त्यांची विविधता कमी अधिक प्रमाणात असते. त्यामळे आपणास जमेल तसे पक्षीनिरीक्षणास सुरुवात करता येते.खूप दूरच्या ठिकाणी जाणे शक्य नसल्यास आपल्या परिसरातील मोजक्या पक्ष्यांची वर्तणूक अधिक सखोल निरीक्षणे नोंदवून ठेवावीत. त्यामुळे आपल्याला पक्ष्यांच्या जीवनात डोकावून बघता येईल. कुठल्याही गावाच्या, खेड्याच्या बाहेर असलेले माळरानझुडूपी [[जंगल]], [[नदी]] [[नाले]] कितीतरी प्रजातीच्या पक्ष्यांचा [[अधिवास]] असते. अशा ठिकाणी पक्षीनिरीक्षणाला गेल्यास वेळ सत्कारणी लागतो.
'''पक्षी निरीक्षणाला कधी जावे'''
बहुतेक प्रजातीचे पक्षी (दिवाचार) सकाळी व सायंकाळी जास्त क्रियाशील असतात. त्यामुळे सकाळी व सायंकाळी पक्षी निरीक्षणाला गेल्यास जास्त गतिविधि बघायला मिळते. पक्ष्यांचे गायन, उदा. [[दयाळ]] (Oriental Magpie Robin ), [[नाचण]] (Fantail), [[भूकस्तूर]] (Grounthrush), [[शामा]] (Shama), [[कोकीळ]] ऐकायचे असतील तर मात्र सूर्योदयापूर्वी इच्छित स्थळी पोचले पाहिजे. काही पक्षी मात्र सायंकाळी व रात्री कार्यशील (निशाचर) असतात, उदा. [[घुबड]], [[पिंगळारातवा]], [[करवानक]] (Stone-Curlew or Thick-knee). हे पक्षी बघायचे असतील, त्यांचे आवाज ऐकायचे असतील मात्र सायंकाळी अथवा रात्री बाहेर पडायला हवे. हिवाळ्यात आपल्या देशात अनेक प्रजातीचे पक्षी [[स्थलांतर]] करून येतात. पावसाळ्यात व उन्हाळ्यात अनेक स्थानिक पक्षी पिलांना जन्म देतात. त्यामुळे तिन्ही ऋतू पक्षी निरीक्षण करायला चांगले असतात.
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
{{Commons category}}
== बाह्य दुवे ==
* [https://www.natureweb.net/taxa/birds/marathibirdnames पक्ष्यांची मराठी नावे (१)]
* [http://www.flickr.com/groups/marathi/discuss/72157612766100485/ Bird Names (English-Marathi)]
[[वर्ग:पक्षी|*]]
{{विस्तार}}
h8dw6elnna3bfskb95ih3cvlmhlogxu
2709825
2709822
2026-09-15T23:08:54Z
नरेश सावे
88037
/* विदेशी पक्षी */
2709825
wikitext
text/x-wiki
[[चित्र:Crested Sperpent Eagle 1.jpg|thumb|right|200 px|सर्प गरुड]]
[[चित्र:उडणारा पक्षी.JPG|200px|thumb| उडणारा पक्षी]]
'''पक्षी''' हे उंच उडणारे दोन पायांवर चालणारे पिसे असलेले गरम रक्ताचे पृष्ठवंशीय जीव आहेत. जीवशास्त्रानुसार पक्ष्यांची व्याख्या फेदर्ड बायपेड अशी होते. याचा अर्थ पिसे असलेले दोन पायांचे [[प्राणी]]. पक्ष्यांचे सर्वांत ठळक वैशिष्ट्य म्हणजे त्यांची उडण्याची क्षमता. ही क्षमता पक्ष्यांना इतर पृष्ठवंशीय प्राण्यांपेक्षा वेगळे ठरवते. [[पेंग्विन]] व [[शहामृग]] असे फारच थोडके पक्षी वगळता इतर सर्व पक्ष्यांना उडता येते. त्यांचे दुसरे वैशिष्ट्य म्हणजे त्यांची पिसे. सर्व पक्ष्यांना पिसे, चोच व चार कप्याचे हृदय असते. हृदयाच्या चार कप्यांमुळे पक्षी उष्ण रक्ताचे आहेत. पिसांच्या व चोचीच्या रचनेमुळे [[पक्षी]] वजनाने अतिशय हलके असतात. पिसांच्या व चोचीच्या रचनेमुळे पक्षी वजनाने अतिशय हलके असतात. पिसे त्यांचे थंडीपासून संरक्षण करतात व सर्वांत महत्त्वाचे म्हणजे उडण्याची शक्ती देतात.
== उत्पत्ती ==
पक्ष्यांची उत्पत्ती प्राचीनकालीन [[डायनासॉर]]पासून झाल्याचे मानण्यात येते. सुरुवातीला ही कल्पना पटणे थोडेसे कठीण होते. कारण डायनासॉर थंड रक्ताचे सरपटणारे प्राणी, तर पक्षी उष्णरक्तीय उडणारे प्राणी. मात्र, उत्खननात सापडलेल्या पुराव्यांमुळे. ही कल्पना सत्य असल्याचे दिसून आले. गेल्या शतकात जर्मनीतील एका खाणीत [[आर्कीऑपटरिक्स|आर्चिओप्टेरिक्स]] या पक्ष्याचा [[सांगाडा]] मिळाला. या सांगाड्याला पंखांची रचना होती व पंखामध्ये पक्ष्यांमध्ये न आढळणाऱ्या नख्या होत्या. सांगाड्यात सरपटणाऱ्या प्राण्यांना असतात तशा जबड्याऐवजी आजच्या पक्ष्यात आढळणारी [[चोच]] होती. शिवाय पक्ष्यांमध्ये नसलेली लांब शेपटी होती. अशा प्रकारे या उत्क्रांतीमधील महत्त्वाच्या दुवा असलेल्या त्या सांगाड्याने सिद्ध केले की पक्षी हे सरपटणाऱ्या प्राण्यांपासून बनले असले पाहिजेत. आजच्या पक्ष्यांच्या [[कवटी]]ची रचना व [[रक्त]]ातील [[लालपेशी]] ह्या सरपटणाऱ्य प्राण्यांशी साधर्म्य सांगणाऱ्या आहेत. तसेच पक्ष्यांच्या पावलांवरील खवले व नख्यांची रचना, नखे दुमडायची पद्धत ह्या गोष्टीही सरपटणाऱ्या प्राण्यांशी जवळचे नाते सांगतात. पक्षीही सरपटणाऱ्या प्राण्यांप्रमाणे [[अंडी]] घालतात. अंड्याचे कवच व आतील रचना या गोष्टीही मिळत्याजुळत्या आहेत. ज्याप्रमाणे काही सरपटणारे प्राणी नियमितपणे आपल्या कातडीची [[कात]] टाकतात तसेच काही पक्षी अजूनही आपली [[पिसे]] झडून पाडतात व नवीन पिसे धारण करतात. जीवशास्त्रज्ञांच्या म्हणण्याप्रमाणे पक्ष्यांची पिसे ही जनावरांच्या [[खवले|खवल्यांचे]] बदललेले रूप आहे.
== शरीर रचना ==
[[चित्र:Birdmorphology.svg|thumb|right|300 px|१ चोच, २ डोके, ३ पापणी, ४ बुब्बुळ, ५ Mantle, Lesser [[covert (feather)|coverts]], ७ Scapulars, ८Median coverts, ९ Tertials, १० Rump, ११ Primaries, १२ बूड, १३ जांघ, १४ Tibio-tarsal articulation, १५ Tarsus, १६ पाय, १७ नडगी, १८ पोट, १९ Flanks, २० छाती, २१ गळा, २२ Wattle]] पक्ष्यांचे शरीराचे तापमान ३८° ते ४४° इतके असते व ते साधारणपणे सस्तन प्राण्यांपेक्षा थोडेच जास्तच असते. त्यांची पिसे ही उत्तम उष्णतारोधकाचे काम करतात, त्यामुळे त्यांना शरीराचे तापमान कायम ठेवणे सोपे जाते. पिसांचा उपयोग थंड प्रदेशात अतिशय चांगला होतो व जर खाणेपिणे व्यवस्थित मिळाल्यास बाहेरील तापमान कमी असतानाही अतिशय निवांतपणे कडक थंडीतही जीवन व्यतीत करतात. परंतु याच उष्णतारोधक पिसांचा त्यांना उष्ण वातावरणात तोटा होण्याची शक्यता असते. पक्ष्यांची हालचाल इतर कोणत्याही प्राण्यांपेक्षा जास्त असते त्यामुळे त्यांच्या शरीरात मोठ्या प्रमाणावर उष्णतादेखील निर्माण होते. सस्तन प्राण्यांमध्ये घाम आणणाऱ्या स्वेद ग्रंथी असतात. त्या तापमान नियंत्रणाचे काम करतात. पक्ष्यांना अश्या स्वेद ग्रंथी नसतात. यामुळे उष्ण तापमानात हालचालीमुळे त्यांना ताप येऊन मृत्यू ओढावण्याची शक्यता झाली असती. परंतु, निसर्गाने त्यांना फुफ्फुसांमध्ये हवेचे फुगे दिले आहेत. त्यांमुळे पक्ष्यांचे जादा उष्णता निर्मूलनाचे काम पटकन होते.
पक्ष्यांची पिसे विविधरंगी असतात. पक्ष्याला शरीराच्या विविध भागांवर अनेक रंगाची पिसे असतात. हे रंग एका जातीच्या पक्ष्याला दुसऱ्या जातीच्या पक्ष्याहून वेगळे करतात. नर-मादीचे रंगही वेगळे असतात. सामान्यतः पक्ष्यांमध्ये नर अधिक सुंदर असतो.
कुठल्याही पक्ष्याला तीन प्रकारची पिसे असतात.
# बाह्य पिसे- ही पिसे सर्वांत बाहेरची असतात.यांना कॉंटूर पिसे अथवा पेने असे म्हणतात. याच पिसांचे रंग एका जातीच्या पक्ष्याला दुसऱ्या जातीपासून वेगळे ठरवतात. यांत साधारणपणे शेपटीची पिसे, उड्डाणांची पिसे व इतर बाह्य पिसे यांचा समावेश होतो.
# अंतर्बाह्य पिसे- या पिसांना प्ल्युमुले असे म्हणतात. ही पिसे लवचीक असतात व बाह्य पिसांखाली दडलेली असतात.
# अंतर्गत पिसे- ही पिसे सर्वांत आतमध्ये असतात व केसांच्या लवीप्रमाणे दिसतात. जोपर्यंत वरची पिसे आहेत तोवर ही पिसे दिसत नाहीत. ही पिसे उड्डाणात भाग घेत नाहीत.
# पक्षांना हृदयाचे केवळ ३ भाग असतात.
== पंखांची रचना व उडणे ==
वेगवेगळे खाद्य मिळविण्यासाठीच्या उडतानाच्या हालचालींना अनुरूप अशी पक्षांच्या पंखांची रचना असते.
# एकाच ठिकाणी पंख न हालविता तरंगणे
# जलद झेप
# पंखाची थोडी उघडझाप करून हवेत तरंगणे
# हवेत तरंगताना मधेच पंखांची जलद फडफड
# पंखांची जलद फडफड करून जलद उड्डाण
# भरारी मारत असतांना मधेच पंख मिटणे
# कमी उंचीवर असताना पंखांची अतिजलद फडफड
# सरळ उड्डाण व जलद फडफड
== चोच ==
पक्ष्यांच्या चोचींचे उपयोगानुसार विविध प्रकार -
१) मासे पकडण्यासाठी दातऱ्या असलेली.
२) दलदल किंवा चिखलातून अन्न गाळून घेण्यासाठी.
३) पाणी/चिखलातील अन्न शोधण्यासाठी.
४) लाकूड तासण्यासाठी.
५) फुलातील मध खाण्यासाठी .
६) बिया/कठीण कवचाची फळे फोडून खाण्यासाठी.
७) मास चिरण्यासाठी व फाडून खाण्यासाठी.
८) कापण्यासाठी.
९) संवरक्षणासाठी
== विविध जाती व कुळे ==
जगात पक्ष्यांच्या साधारणपणे एकूण ८,६०० जाती आहेत. उपजाती व स्थानिक बदल लक्षात घेतल्यास हा आकडा ३०,००० च्यावर जाईल. त्यापैकी सुमारे २६५ जाती नामशेष झाल्या असाव्यात.अजूनही काही प्रमाणात पक्षांच्या प्रजाती शोधण्याचे काम चालू आहे .
== वर्तन ==
बहुतांशी पक्षी हे दिनचर आहेत. फारच थोडे पक्षी हे निशाचर असतात. [[घुबड]]ांमधील बहुतांशी जाती निशाचर आहेत. तसेच [[रात्रबगळा]], [[टिटवी]] हे काही पक्षी निशाचर आहेत.
=== खाद्य ===
[[चित्र:BirdBeaksA.svg|thumb|right|Feeding adaptations in beaks]]
पक्ष्यांमध्ये खाण्यापिण्याच्या बाबतीत प्रचंड विविधता आढळून येते. फुलांतील मकरंद, फळे, लहान रोपे,छोटे प्राणी, साप, व विविध प्रकारचे किडे पक्षी खातात. काही शिकारी पक्षी वगळता किडे हे बहुतांशी पक्ष्यांचे आवडते अन्न आहे, किंबहुना किड्यांची संख्या नियंत्रणात ठेवण्यासाठीच पक्ष्यांचा जन्म झाला आहे असे मानण्यात येते. पक्ष्यांना दात नसल्याने ते चोचीने खाद्य प्रथम जितके लहान आकारात तोडता येईल तितके तोडतात व लगेच गिळतात. चर्वणाची पुढील प्रक्रिया पोटात पार पडते. शेवाळे हे महत्त्वाचे अन्न आहे.
== स्थलांतर ==
ठरल्या वेळी एका मुलखातून दुसऱ्या मुलुखात स्थलांतर करायचे व नंतर नियमितपणे परतायचे हे पक्ष्यांच्या स्थलांतराचे खास लक्षण आहे. उडण्याच्या वरदानामुळे पक्षी इतर प्राण्यांपेक्षा जास्त लांबवर स्थलांतर करतात. पक्ष्यांचे स्थलांतरास अनेक कारणे असतात त्यातील कारणे खालीलप्रमाणे :-
# अन्नाची उपलब्धता -
# हवामान- थंड हवामान सोसण्याची क्षमता- पक्ष्यांची थंडी सोसण्याची क्षमता चांगली असते तरी युरोप, सायबेरियातील पक्षी येथील अतिकडक हिवाळा आवाक्याबाहेरचा असतो. म्हणून या भागातील पक्षी दक्षिणेकडील उबदार प्रदेशात म्हणजे, उत्तर अफ्रिका, मध्यपूर्व इराण, भारतीय उपखंडात व आग्नेय अशियात स्थलांतर करतात. युरोप व सायबेरियातील उन्हाळ्यामध्ये या भागात खाद्य मोठ्या प्रमाणात उपलब्ध होते व पक्षी पुन्हा सायबेरिया व युरोपात स्थलांतर करतात.
# जनुकीय सवयी- लक्षावधी वर्षांची स्थलांतराची सवय यामुळे बहुतांशी स्थलांतरित पक्ष्यांच्या जातींमध्ये जन्मतः स्थलांतराचे ज्ञान असते. - उदा; पेरू व चिली देशातील काही पक्षी, जनुकीय सवयींमुळे अन्न उपलब्ध नसलेल्या भागातही स्थलांतर करतात.
# सुरक्षितता - शिकाऱ्यांपासून सुरक्षितता
# पिल्लांच्या प्रशिक्षणासाठी
# उदाहरणार्थ: कोकिळा ही उत्तर प्रदेशातून मार्चच्या पहिल्या आठवड्यात महाराष्ट्रात येते व ऑगस्टमध्ये दक्षिण भारताकडे स्थलांतर करते.
== पक्षांची घरटी ==
पक्ष्यांमुळे पर्यावरणाचा समतोल राखला जातो, बीजप्रसार होतो, निसर्गाची सुंदरता वाढते. सकाळी सकाळी पक्ष्यांचे सुमधुर आवाजाने माणूस ताजेतवाना होतो.
== शेतकऱ्यांचे मित्र ==
साप, बेडूक, फुलपाखरे, मधमाश्या कोंबड्या, शेळ्या असे अनेक प्राणी शेतकऱ्याचे मित्र असतात. सर्व पक्षी शेतातील धान्य खाऊन फस्त करतात अशी एक गैरसमजूत आहे. काही पक्षी शेतातील धान्य खात नसून पिकाची काढणी झाल्यावर शेतात पडलेले दाणे टिपतात. निसर्गातील कीड नियंत्रण आणि सरपटणाऱ्या प्राण्यांचे संतुलन राखण्याचे काम पक्षी करतात.
पिकांचे नुकसान करतात म्हणून अमेरिकेतील लोकांनी [[कॅरोलविना पॅराकीट]] या पोपटाच्या सुंदर प्रजातीचा वंशच संपवून टाकला. माओच्या आदेशानंतर चिनी नागरिकांनी लाखो चिमण्यांची कत्तल केली, त्याचा परिणाम शेतीवर झाल्याने चीनला उपासमारीचा सामना करावा लागला. पीक उत्पादनच न झाल्याने लाखो लोक मृत्युमुखी पडले. शेवटी चीन सरकारला रशियातून चिमण्या आयात कराव्या. सायंकाळच्या वेळी शेतामध्ये पक्ष्याचे थवे बघायला मिळतात. ते बघून मन प्रसन्न होते.
== पुस्तक ==
शेतकऱ्यांच्या 'मित्रां'वर डॉ. राजू कसंबे यांनी 'शेतातील पक्षी' नावाचे पुस्तक लिहिले आहे.
== भारतीय पक्षी ==
पक्ष्यांच्या ८५०० पैकी भारतात एकूण १२०० जातीचे पक्षी आढळतात. स्थानिक जातींप्रमाणेच स्थलांतरित जातींचीही संख्या पुष्कळ आहे. [[कावळा]], [[कबूतर]] व [[चिमणी]] हे भारतात सर्वाधिक प्रमाणात आढळणारे पक्षी आहेत. भारतात आढळणाऱ्या पक्ष्यांची माहिती देणारी अनेक पुस्तके मराठी-इंग्रजीत आहेत. त्यांपैकी काही ही :-
* निसर्गाचे मित्र (दैनिक सकाळमध्ये आठवड्यातून एकदा असे सतत तीन वर्षे प्रकाशित झालेल्या लेखांचा संग्रह; लेखक मिलिंद गुप्ते)
* महाराष्ट्रातील १०० सामान्य पक्षी (मोफत ई-पुस्तक)(लेखक - डॉ. राजू कसंबे)
* पक्षीजगत (लेखक - सचिन मेन)
* पक्षिकोश (लेखक - मारुती चितमपल्ली)
* पक्षीही सुस्वरें (लेखक - डॉ. सतीश पांडे)
* पक्षांचे स्थलांतर लेखक - डॉ. सतीश पांडे)
* पक्षी - आपले सख्खे शेजारी - किरण पुरंदरे
* पक्षी - पाणथळीतले – किरण पुरंदरे
* शेतातील पक्षी (मोफत ई-पुस्तक)(डॉ. राजू कसंबे)
* A Pictorial guide to the Birds of the Indian Subcontinent ( इंग्रजी; लेखक - डॉ. सलीम अली आणि एस. डिलॉन रिप्ले)
* Birds of Maharashtra (इंग्रजी; लेखक - डॉ. सतीश पांडे, प्रमोद देशपांडे आणि निरंजन संत)
* Birds of Lonavala Khandala (इंग्रजी; लेखक - डॉ. सतीश पांडे)
* Birds of Southern India (Helm Field Guides) (इंग्रजी; लेखक - रिचर्ड ग्रिमेट आणि टिम इन्स्किप)
* Birds of Sri Lanka (Helm Field Guides) (इंग्रजी; लेखक - दीपल वराकगोडा, कॅरोल इन्स्किप, टिम इन्स्किप आणि एकजण)
==विदेशी पक्षी==
अ.अमेरिकेतील पक्षी.
क.दक्षिण डाकोटा राज्य.<ref>Backyard Birds of South Dakota - South Dakota, Wildlife Division, Department of Game, Fish and Parks.Authors: Eileen Dowd Stukel,Silka L.F.Kempema,Chad Tussing.2009 edition</ref>
#[[गुंजन पक्षी]].[[(Hummingbird)]].
#[[कबुतरे व पारवे]] ([[Doves]] and [[Pigeons]]).
#[[सुतारपक्षी]] ([[Woodpeckers]]).
#[[भिंगरी पक्षी आणि राजापक्षी|स्वॅलोज आणि किंगबर्ड्स]]([[Swallows and Kingbirds]]).
#[[पाकोळ्या आणि ससाणे ]] ([[Swifts]] and [[Nighthawks]]).
#[[नीळकंठ आणि कावळा]] ([[Jays and Crows]]).
#[[चिकाडी,भिंतसर्पी,वृक्षसर्पी, आणि रानचिमणी पक्षी]] ([[Chickadees, Nuthatches, Creepers and Wrens]]).
#[[मुकुटपक्षी, हरितपक्षी, आणि वटवट्या पक्षी]] ([[Kinglets, Vireos and Warblers]]).
#[[थ्रशेस्,मिमिक्स्,आणि वक्सविंगस् ]]([[Thrushes, Mimics, and Waxwings]]).
#[[ओरियलस्,ब्लॅकबर्डस्,आणि स्टारलिंगस्]] ([[Orioles, Blackbirds, and Starlings]]).
#[[कार्डिनलस् आणि इतर ग्रॉसबिकस्]] ([[Cardinals and other Grosbeaks]]).
#[[स्परोज्,फिंचेस्,आणि क्रॉसबिलस्]] ([[Sparrows, Finches, and Crossbills]]).
#[[डायुर्नल बर्डस् ऑफ प्रे आणि स्राईकस्]] ([[Diurnal Birds of Prey and Shrikes]]).
#[[आऊलस्]] ([[Owls]]).
#[[कीलडीर]] ([[Killdeer]]).
#[[फेझंट]] ([[Pheasant]].
#[[आणखी काही पक्षी]] ([[Few More Birds]]).
== पक्षी निरीक्षण ==
पक्षीनिरीक्षण हा अतिशय आनंददायक [[छंद]] आहे. त्याची सुरुवात करतानाच्या काही मूलभूत गोष्टींचा येथे ऊहापोह केलेला आहे.
'''पक्षी निरीक्षण कोठे करावे'''
पक्षीनिरीक्षणासाठी जंगलात जावे लागते असे नाही. आपल्या घराजवळशहरी बगिच्यात, रहदारीच्या रस्त्यावर सुद्धा पक्षी असतात. अर्थात प्रत्येक ठिकाणी त्यांची विविधता कमी अधिक प्रमाणात असते. त्यामळे आपणास जमेल तसे पक्षीनिरीक्षणास सुरुवात करता येते.खूप दूरच्या ठिकाणी जाणे शक्य नसल्यास आपल्या परिसरातील मोजक्या पक्ष्यांची वर्तणूक अधिक सखोल निरीक्षणे नोंदवून ठेवावीत. त्यामुळे आपल्याला पक्ष्यांच्या जीवनात डोकावून बघता येईल. कुठल्याही गावाच्या, खेड्याच्या बाहेर असलेले माळरानझुडूपी [[जंगल]], [[नदी]] [[नाले]] कितीतरी प्रजातीच्या पक्ष्यांचा [[अधिवास]] असते. अशा ठिकाणी पक्षीनिरीक्षणाला गेल्यास वेळ सत्कारणी लागतो.
'''पक्षी निरीक्षणाला कधी जावे'''
बहुतेक प्रजातीचे पक्षी (दिवाचार) सकाळी व सायंकाळी जास्त क्रियाशील असतात. त्यामुळे सकाळी व सायंकाळी पक्षी निरीक्षणाला गेल्यास जास्त गतिविधि बघायला मिळते. पक्ष्यांचे गायन, उदा. [[दयाळ]] (Oriental Magpie Robin ), [[नाचण]] (Fantail), [[भूकस्तूर]] (Grounthrush), [[शामा]] (Shama), [[कोकीळ]] ऐकायचे असतील तर मात्र सूर्योदयापूर्वी इच्छित स्थळी पोचले पाहिजे. काही पक्षी मात्र सायंकाळी व रात्री कार्यशील (निशाचर) असतात, उदा. [[घुबड]], [[पिंगळारातवा]], [[करवानक]] (Stone-Curlew or Thick-knee). हे पक्षी बघायचे असतील, त्यांचे आवाज ऐकायचे असतील मात्र सायंकाळी अथवा रात्री बाहेर पडायला हवे. हिवाळ्यात आपल्या देशात अनेक प्रजातीचे पक्षी [[स्थलांतर]] करून येतात. पावसाळ्यात व उन्हाळ्यात अनेक स्थानिक पक्षी पिलांना जन्म देतात. त्यामुळे तिन्ही ऋतू पक्षी निरीक्षण करायला चांगले असतात.
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
{{Commons category}}
== बाह्य दुवे ==
* [https://www.natureweb.net/taxa/birds/marathibirdnames पक्ष्यांची मराठी नावे (१)]
* [http://www.flickr.com/groups/marathi/discuss/72157612766100485/ Bird Names (English-Marathi)]
[[वर्ग:पक्षी|*]]
{{विस्तार}}
2khp7g43u0d6oh3v4ey6lbiwh1cqi5e
वडिवेलू
0
74923
2709811
2300663
2026-09-15T22:17:30Z
अभय नातू
206
पुनर्लेखन
2709811
wikitext
text/x-wiki
{{माहितीचौकट अभिनेता
| नाव = वडिवेलू
| चित्र = Vadivelu at Trailer & HD Songs Launch of Kaththi Sandai .jpg
| चित्र_रुंदी = 200px
| चित्र_शीर्षक = २०१६ मधील एका कार्यक्रमात वडिवेलू
| जन्मनाव = कुमारवेल
| जन्म = १० ऑक्टोबर १९६०
| जन्मस्थान = [[मदुरै]], [[तमिळनाडू]], [[भारत]]
| राष्ट्रीयत्व = भारतीय
| व्यवसाय = [[अभिनेता]], [[हास्यकलाकार]], [[पार्श्वगायक]]
| कार्यकाळ = १९८८ - वर्तमान
| टोपणनाव = वैगैपुयल (वैगैचे वादळ)
| पुरस्कार = [[तमिळनाडू राज्य चित्रपट पुरस्कार]] (सर्वोत्कृष्ट हास्यकलाकार), [[फिल्मफेअर पुरस्कार दक्षिण]]
}}
'''वडिवेलू''' ([[१० ऑक्टोबर]], [[इ.स. १९६०|१९६०]]; [[मदुरै]], [[तमिळनाडू]] - ) हा एक प्रसिद्ध भारतीय [[अभिनेता]], [[हास्यकलाकार]] आणि [[पार्श्वगायक]] आहे.<ref>{{cite web |url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/vadivelus-triumphant-return-to-cinema/article37954931.ece |title=Vadivelu's triumphant return to cinema |website=The Hindu |access-date=14 September 2026}}</ref> त्याने प्रामुख्याने तमिळ चित्रपटसृष्टीत ([[कॉलीवूड]]) काम केले आहे. आपल्या विशिष्ट अभिनयशैली, संवादफेक आणि चेहऱ्यावरील हावभावामुळे हा तमिळ सिनेमात हास्यकलाकार लोकप्रिय आहे.<ref>{{cite web |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/tamil/movies/news/king-of-comedy-vadivelu-turns-60/articleshow/78036214.cms |title=King of Comedy Vadivelu turns 60 |website=The Times of India |access-date=14 September 2026}}</ref> त्याचे चाहते त्याला ''वैगैपुयल'' (''वैगै नदीचे वादळ'') म्हणतात.
त्याने ''इमसै अरसन २३म पुलिकेसी'' (२००६) या चित्रपटात मुख्य दुहेरी भूमिका केली होती.<ref>{{cite web |url=https://www.behindwoods.com/tamil-movie-reviews/reviews-1/imsai-arasan-23am-pulikesi.html |title=Imsai Arasan 23am Pulikesi Movie Review |website=Behindwoods |access-date=14 September 2026}}</ref> आपल्या तीन दशकांच्या प्रदीर्घ कारकिर्दीत त्याने पाच वेळा सर्वोत्कृष्ट हास्यकलाकाराचा [[तमिळनाडू राज्य चित्रपट पुरस्कार]] आणि [[फिल्मफेर पुरस्कार दक्षिण|फिल्मफेर पुरस्कार]] जिंकले आहेत.
== कारकीर्द ==
=== प्रमुख चित्रपट ===
{| class="wikitable sortable"
|-
! वर्ष !! चित्रपट !! भूमिका !! नोंदी
|-
| १९९० || [[एन रासाविन मनसिले]] || || पदार्पण चित्रपट
|-
| १९९१ || [[चिन्ना गौंडर]] || ||
|-
| rowspan="2" | १९९२ || [[सिंगारवेलन]] || वट्टा करवाडू ||
|-
| [[थेवर मगन]] || इसेकी ||
|-
| rowspan="3" | १९९३ || [[अरनमनै किळी]] || ||
|-
| [[काथिरुक्क नेरमिल्लै]] || ||
|-
| [[कोविल काळै]] || वडिवेलू ||
|-
| rowspan="2" | १९९४ || [[काधलन]] || कालियापेरुमल ||
|-
| [[पोंगालो पोंगल]] || ||
|-
| rowspan="5" | १९९५ || [[चंद्रलेखा (१९९५ चित्रपट)|चंद्रलेखा]] || ||
|-
| [[आसई]] || ||
|-
| [[तिरुुपती इळुमलै व्यंकटेशा]] || ||
|-
| [[रासय्या]] || ||
|-
| [[मुथू (चित्रपट)|मुथू]] || वलयपती ||
|-
| rowspan="3" | १९९६ || [[काधल देसम]] || ||
|-
| [[छैला]] || ||
|-
| [[मिस्टर रोमिओ]] || वव्वाल ||
|-
| rowspan="5" | १९९७ || [[लव्ह बर्ड्स (चित्रपट)|लव्ह बर्ड्स]] || ||
|-
| [[पोरक्कालम]] || ||
|-
| [[भारती कन्नम्मा]] || ईनामुथू ||
|-
| [[रासी]] || ||
|-
| [[रट्चगन]] || ||
|-
| rowspan="2" | १९९८ || [[इनियवले]] || ||
|-
| [[वेलै]] || ||
|-
| rowspan="8" | १९९९ || [[राजस्थान (चित्रपट)|राजस्थान]] || ||
|-
| [[थोदरुम]] || शिपाई मणी ||
|-
| [[पूवेल्लाम केट्टुप्पार]] || ||
|-
| [[संगमम]] || ||
|-
| [[आनंद पूंगात्रे]] || ||
|-
| [[निलावे मुगम काट्टू]] || ||
|-
| [[मोनिशा एन मोनालेसा]] || ||
|-
| [[मुधल्वन]] || पालेवेशम ||
|-
| rowspan="2" | २००० || [[मगलिरक्काग]] || ||
|-
| [[वेत्री कोडी कट्टू]] || सुदालै || 'विजेता', [[तमिळनाडू राज्य चित्रपट पुरस्कार]] (सर्वोत्कृष्ट हास्यकलाकार)
|-
| rowspan="13" | २००१ || [[फ्रेंड्स (२००१ चित्रपट)|फ्रेंड्स]] || नेसमणी ||
|-
| [[असाथल]] || वेणुगोपाल ||
|-
| [[मिडल क्लास माधवन]] || कुलंधैवेलू ||
|-
| [[इंगलुक्कुम कालम वरुम]] || ||
|-
| [[निनाइक्कात नालिल्लै]] || आणा ऊणा टाउनमणी ||
|-
| [[मनधै तिरुडिवित्तै]] || स्टीव्ह वॉ ||
|-
| [[मानस्थान]] || पच्चैकिळी ||
|-
| [[मायी]] || मोक्कैसामी ||
|-
| [[मायन]] || ||
|-
| [[सोन्नल थान काधला]] || ||
|-
| [[राजाकाळी अम्मन]] || ||
|-
| [[लुटी]] || वेलप्पा ||
|-
| [[थवासी]] || || 'विजेता', [[तमिळनाडू राज्य चित्रपट पुरस्कार]] (सर्वोत्कृष्ट हास्यकलाकार)
|-
| rowspan="14" | २००२ || [[एन मना वानिल]] || ||
|-
| [[अळगी]] || ||
|-
| [[कामरासू]] || ||
|-
| [[कारमेगम]] || ||
|-
| [[राजा (२००२ चित्रपट)|राजा]] || ||
|-
| [[तमिळ (चित्रपट)|तमिळ]] || मूर्ती ||
|-
| [[श्री राजराजेश्वरी]] || ||
|-
| [[पुधुमै पिथन]] || सुपर सुरुळी ||
|-
| [[अरासू]] || पिच्चुमणी ||
|-
| [[नम्मा वीट्टू कल्याणम]] || ||
|-
| [[सुंदरा ट्रॅव्हल्स]] || अळगा ||
|-
| [[ओट्रन]] || माडासामी ||
|-
| [[श्री (चित्रपट)|श्री]] || ||
|-
| [[भगवती (चित्रपट)|भगवती]] || व्हायब्रेशन / वडिवेलू ||
|-
| rowspan="11" | २००३ || [[दिवान (चित्रपट)|दिवान]] || ||
|-
| [[ईरानिलम]] || ||
|-
| [[वसीगरा]] || कट्टाबोम्मन ||
|-
| [[पुन्नगै पूवे]] || ||
|-
| [[आळुक्कोरु आसै]] || पलानी ||
|-
| [[विन्नर (चित्रपट)|विन्नर]] || कैपुल्ला ||
|-
| [[काधल किरुकन]] || कल्याणसुंदरम ||
|-
| [[गंभीरम]] || ऊमथुरै पी.सी. ||
|-
| [[काधल डॉट कॉम]] || ||
|-
| [[कोविल (चित्रपट)|कोविल]] || बुलेट पांडी ||
|-
| [[नाग लोक]] || ||
|-
| rowspan="9" | २००४ || [[इंगल अण्णा]] || मयिलू ||
|-
| [[अरुल]] || थंगम ||
|-
| [[आई (२००४ चित्रपट)|आई]] || पलानी ||
|-
| [[जननम्]] || ||
|-
| [[वॉचमन वडिवेलू]] || ||
|-
| [[जोरे]] || तिरुपती ||
|-
| [[गिरी (चित्रपट)|गिरी]] || वीरभागू ||
|-
| [[जय सूर्या]] || ||
|-
| [[मदुरै (२००४ चित्रपट)|मदुरै]] || पांडू ||
|-
| rowspan="22" | २००५ || [[मळै]] || ||
|-
| [[कुस्ती (चित्रपट)|कुस्ती]] || वेलू ||
|-
| [[फेब्रुवारी १४ (चित्रपट)|फेब्रुवारी १४]] || ||
|-
| [[दास]] || ||
|-
| [[पंबरकन्नाले]] || कदलामुथू ||
|-
| [[एबीसीडी (चित्रपट)|एबीसीडी]] || ||
|-
| [[कुंदक्का मंडक्का]] || चेल्लप्पा ||
|-
| [[कर्क कसदर]] || ओंडीपुली ||
|-
| [[कात्रुल्ल वरै]] || वॉचमन ||
|-
| [[अय्या]] || कारसिंगम ||
|-
| [[चंद्रमुखी (चित्रपट)|चंद्रमुखी]] || मुरुगेसन || 'विजेता', [[फिल्मफेअर पुरस्कार दक्षिण|फिल्मफेअर सर्वोत्कृष्ट हास्यकलाकार पुरस्कार (तमिळ)]]
|-
| [[सचेन]] || अय्यासामी ||
|-
| [[मजा (चित्रपट)|मजा]] || पुलिपांडी ||
|-
| [[आनै]] || ||
|-
| [[चाणक्य (चित्रपट)|चाणक्य]] || सुब्रमणी ||
|-
| [[वेत्रीवेल शक्तिवेल]] || धंडपाणी ||
|-
| [[६'२]] || मिस्टर व्हाईट ||
|-
| [[आयुधम]] || ||
|-
| [[इंग्लिशकारन]] || 'थीप्पोरी' तिरुमुगम ||
|-
| [[मन्निन मैंधन]] || ||
|-
| [[आरू]] || सुंडी मोधरम (सुमो) ||
|-
| [[लंडन (२००५ चित्रपट)|लंडन]] || वेदिमुथू ||
|-
| rowspan="12" | २००६ || [[इमसै अरसन २३म पुलिकेसी]] || पुलिकेसी / उग्रपुत्रन || 'विजेता', [[फिल्मफेअर पुरस्कार दक्षिण|फिल्मफेअर सर्वोत्कृष्ट हास्यकलाकार पुरस्कार (तमिळ)]]<br />'विजेता', [[तमिळनाडू राज्य चित्रपट पुरस्कार]]
|-
| [[नेंजिल जिल जिल]] || ||
|-
| [[थलैमगन]] || एरीमलै ||
|-
| [[थिमिरू]] || वल्लारन ||
|-
| [[कोवै ब्रदर्स]] || एकादशी ||
|-
| [[थंबी]] || ||
|-
| [[सिल्लुनु ओरु काधल]] || वेल्लासामी ||
|-
| [[एम मगन]] || करुपट्टी ||
|-
| [[थलै नगरम]] || नाई सेकर ||
|-
| [[पसाकिळिगल]] || सहाय्यक भूमिका ||
|-
| [[रेंडू]] || किरीकालम ||
|-
| [[वाथियार]] || अय्यनार ||
|-
| rowspan="13" | २००७ || [[आर्या (२००७ चित्रपट)|आर्या]] || 'स्नेक' बाबू ||
|-
| [[मां मदुरै]] || थंगवेलू ||
|-
| [[वेल (चित्रपट)|वेल]] || कुलंधैसामी ||
|-
| [[व्यापारी (चित्रपट)|व्यापारी]] || 'दिजिल' पांडी ||
|-
| [[थोट्टाल पू मलरुम]] || कबालीसुरन (कबाली खान) ||
|-
| [[मणिकंदा]] || मधयानै ||
|-
| [[मुरुगा]] || 'कूरिअर' गोपू ||
|-
| [[करुप्पसामी कुथागैथारर]] || 'पडीथुरै' पांडी ||
|-
| [[थवम]] || ||
|-
| [[चीना थाना ००१]] || चीनिस्वामी ||
|-
| [[पिरागु]] || ||
|-
| [[मरुधमलै]] || 'एन्काउंटर' एकांबरम ||
|-
| [[पोक्किरी]] || बॉडी सोडा ||
|-
| rowspan="9" | २००८ || [[थलै नगरम]] || नाई सेकर ||
|-
| [[कन्नुम कन्नुम]] || ||
|-
| [[इंदिरलोकथिल ना अळगप्पन]] || इंद्रन / यमधर्मराज / अळगप्पन || मुख्य भूमिका
|-
| [[मुनियांडी विलांगियाल मून्रामंडू]] || सोरीमुथू अय्यनार ||
|-
| [[थीकुच्ची]] || कुरवन ||
|-
| [[काथावरायन]] || 'कंडुवेट्टी' करुप्पु || 'विजेता', [[तमिळनाडू राज्य चित्रपट पुरस्कार]] (सर्वोत्कृष्ट हास्यकलाकार)
|-
| [[कुसेलन्]] || 'सलून' षण्मुगम ||
|-
| [[सेवल]] || 'थपाल' थंगवेलू ||
|-
| [[इल्लाम अवन सेयल]] || वंडू मुरुगन ||
|-
| rowspan="7"| २००९ || [[विल्लू]] || माडास्वामी ||
|-
| [[वेडिगुंडू मुरुगेसन]] || 'अलर्ट' अरुमुगम ||
|-
| [[अळगर मलै]] || काथामुथू ||
|-
| [[कंथस्वामी]] || थेन्नाप्पन ||
|-
| [[पेरानामै]] || सूसाई ||
|-
| [[आधवन]] || बॅनर्जी || नामांकित, [[विजय पुरस्कार]] (सर्वोत्कृष्ट हास्यकलाकार)
|-
| [[जगन्मोहिनी]] || जगन्मोहना ||
|-
| rowspan="4" | २०१० || [[कचेरी आरंभा]] || बॉस ||
|-
| [[सुरा (चित्रपट)|सुरा]] || छत्री (अंब्रेला) ||
|-
| [[थिल्लालांगडी]] || ||
|-
| [[पोन्नर शंकर (चित्रपट)|पोन्नर शंकर]] || ||
|}
=== इतर चित्रपट ===
{| class="wikitable sortable"
|-
! वर्ष !! चित्रपट !! भूमिका !! नोंदी
|-
| १९९० || [[इरावरसन]] || ||
|-
| १९९१ || [[वरवू एत्तना सेलवू पत्तना]] || ||
|-
| १९९३ || [[नान पेत्रा मगने]] || ||
|-
| १९९३ || [[किळक्कू चीमैयिले]] || ||
|-
| १९९३ || [[गोकुलम]] || ||
|-
| १९९३ || [[पॉन्नुमणी]] || ||
|-
| १९९३ || [[राजाविन पार्वैयिले]] || अरिवळगन ||
|-
| १९९३ || [[नीलाकुयिल]] || ||
|-
| १९९३ || [[किल्लाडी माप्पिल्ळै]] || ||
|-
| १९९३ || [[चेल्लाकन्नू]] || ||
|-
| १९९४ || [[राजकुमारन]] || ||
|-
| १९९४ || [[अधर्मम]] || ||
|-
| १९९४ || [[मरवन]] || ||
|-
| १९९४ || [[अत्ता मग रतिनमे]] || ||
|-
| १९९४ || [[पांडियानिन राज्यथिल]] || ||
|-
| १९९४ || [[इळैग्नार अनी]] || ||
|-
| १९९४ || [[मणिरत्नम]] || ||
|-
| १९९४ || [[पवित्रा]] || ||
|-
| १९९४ || [[सेवत्था पोन्नू]] || ||
|-
| १९९४ || [[सिंधुनदी पू]] || ||
|-
| १९९५ || [[वल्ली]] || ||
|-
| १९९५ || [[एन पोंडाट्टी नल्लवा]] || ||
|-
| १९९५ || [[नंदवन थेरु]] || ||
|-
| १९९५ || [[चेरन चोळन पांडियन]] || ||
|-
| १९९५ || [[किळक्कू मलै]] || ||
|-
| १९९५ || [[चिन्नामणी]] || ||
|-
| १९९५ || [[उधवुम करंगल]] || ||
|-
| १९९५ || [[मुथुकाळै]] || ||
|-
| १९९५ || [[पसुमपोन]] || ||
|-
| १९९६ || [[मायनॉर माप्पिल्ळै]] || 'कुप्पैथोट्टी' गोविंदसामी ||
|-
| १९९६ || [[आनअळगन]] || मरुधमलै ||
|-
| १९९६ || [[सुभाष]] || ||
|-
| १९९६ || [[कालम मारी पोच्चू]] || ||
|-
| १९९६ || [[नेसम पुधुसू]] || वेलू ||
|-
| १९९६ || [[शक्ती (तमिळ चित्रपट)|शक्ती]] || ||
|-
| १९९६ || [[सुंदरपुरुषन]] || ||
|-
| १९९६ || [[तायकुलमे तायकुलमे]] || तमिळपिथन ||
|-
| १९९६ || [[प्रियम्]] || ||
|-
| १९९६ || [[नम्मा ऊरु रासा]] || ||
|-
| १९९६ || [[माणिक्कम]] || ||
|-
| १९९६ || [[वसंत वासल]] || ||
|-
| १९९६ || [[पेरिय मनुष्यन]] || ||
|-
| १९९७ || [[पासमुल्ला पांडियारे]] || ||
|-
| १९९७ || [[रत्ना]] || ||
|-
| १९९७ || [[पांचालंकुरिची]] || ||
|-
| १९९७ || [[मनाविक्कू मरियाधै]] || ||
|-
| १९९७ || [[काधली]] || ||
|-
| १९९७ || [[थडयम]] || ||
|-
| १९९७ || [[विवसायी मगन]] || ||
|-
| १९९७ || [[माय इंडिया]] || ||
|-
| १९९७ || [[माप्पिल्ळै गौंडर]] || ||
|-
| १९९७ || [[पोन्नू विलैयिर भूमि]] || ||
|-
| १९९७ || [[इल्लामे एन पोंडाट्टीथान]] || ||
|-
| १९९७ || [[गंगा गौरी]] || ||
|-
| १९९७ || [[अडिमाई संगिली]] || ||
|-
| १९९७ || [[अद्रसक्का अद्रसक्का]] || ||
|-
| १९९८ || [[कन्नात्ताल]] || सूना पाना ||
|-
| १९९८ || [[काधला काधला]] || सिंगारम ||
|-
| १९९८ || [[जॉली]] || ||
|-
| १९९८ || [[पूंथोट्टम]] || ||
|-
| १९९८ || [[पोन्मानै थेडी]] || ||
|-
| १९९९ || [[विराळुक्केत्ता वीककम]] || कबाली ||
|-
| १९९९ || [[हाऊसफुल्ल (१९९९ चित्रपट)|हाऊसफुल्ल]] || ||
|-
| १९९९ || [[एन श्वासा कात्रे]] || ||
|-
| १९९९ || [[नी एनथन वानम]] || ||
|-
| १९९९ || [[माया (१९९९ चित्रपट)|माया]] || ||
|-
| २००० || [[कंध कादंब कथिर वेला]] || वडिवेलन ||
|-
| २००० || [[वण्णतमिळ पाट्टू]] || ||
|-
| २००० || [[इराणियन]] || ||
|-
| २००० || [[उन्नरुगे नानिरुंथाल]] || ||
|-
| २००० || [[काक्कै सिरगिनिले]] || ||
|-
| २००० || [[वल्लरासू]] || || पाहुणा कलाकार (गाण्यात)
|-
| २००० || [[चिन्ना चिन्ना कण्णिले]] || ||
|-
| २००० || [[कूडी वाळंथाल कोडी नन्माई]] || बॉक्सर कृष्णन ||
|-
| २००० || [[पाट्टाळी]] || ||
|-
| २००१ || [[स्टाईल (२००१ चित्रपट)|स्टाईल]] || ||
|-
| २००१ || [[शकलका बेबी]] || ||
|-
| २००१ || [[एन पुरुषन कुलंधै माथिरि]] || ||
|-
| २००१ || [[मनू नीथी]] || सवला ||
|-
| २००१ || [[श्री बन्नारी अम्मन]] || ||
|-
| २००१ || [[वडुगपट्टी माप्पिल्ळै]] || ||
|-
| २००१ || [[नागेश्वरी]] || ||
|-
| २००१ || [[मित्ता मिरासू]] || ||
|-
| २००१ || [[कण्णुक्कू कण्णागा]] || ||
|-
| २००२ || [[इळसू पुधुसू रवुसू]] || ||
|-
| २००२ || [[नैना]] || आवुडैयप्पन ||
|-
| २००२ || [[लव्ह मॅरेज (२००२ चित्रपट)|लव्ह मॅरेज]] || ||
|-
| २००२ || [[सुपर आंटी]] || ||
|-
| २००३ || [[थट्टी तावुधू मनसू]] || वैगैवेल (इन्स्पेक्टर) ||
|-
| २००३ || [[इनिदू इनिदू काधल इनिदू]] || ||
|-
| २००३ || [[अनबू (२००३ चित्रपट)|अनबू]] || ||
|-
| २००३ || [[गौंडर वीट्टू माप्पिल्ळै]] || ||
|-
| २००४ || [[काधले जयम]] || मच्चक्काळै ||
|-
| २००४ || [[नी मट्टुम]] || ||
|-
| २००५ || [[अंध नाल न्याबगम]] || ||
|-
| २००६ || [[देसीया परवै]] || ||
|-
| २००७ || [[की.मू.]] || ||
|}
== संदर्भ आणि नोंदी ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:तमिळ चित्रपट अभिनेते]]
[[वर्ग:भारतीय हास्यकलाकार]]
[[वर्ग:जिंवत व्यक्ती]]
[[वर्ग:मदुरैचे व्यक्ती]]
1fov3lzqfw71dwpq8vmce160v8n3yfo
2709812
2709811
2026-09-15T22:18:13Z
अभय नातू
206
/* प्रमुख चित्रपट */
2709812
wikitext
text/x-wiki
{{माहितीचौकट अभिनेता
| नाव = वडिवेलू
| चित्र = Vadivelu at Trailer & HD Songs Launch of Kaththi Sandai .jpg
| चित्र_रुंदी = 200px
| चित्र_शीर्षक = २०१६ मधील एका कार्यक्रमात वडिवेलू
| जन्मनाव = कुमारवेल
| जन्म = १० ऑक्टोबर १९६०
| जन्मस्थान = [[मदुरै]], [[तमिळनाडू]], [[भारत]]
| राष्ट्रीयत्व = भारतीय
| व्यवसाय = [[अभिनेता]], [[हास्यकलाकार]], [[पार्श्वगायक]]
| कार्यकाळ = १९८८ - वर्तमान
| टोपणनाव = वैगैपुयल (वैगैचे वादळ)
| पुरस्कार = [[तमिळनाडू राज्य चित्रपट पुरस्कार]] (सर्वोत्कृष्ट हास्यकलाकार), [[फिल्मफेअर पुरस्कार दक्षिण]]
}}
'''वडिवेलू''' ([[१० ऑक्टोबर]], [[इ.स. १९६०|१९६०]]; [[मदुरै]], [[तमिळनाडू]] - ) हा एक प्रसिद्ध भारतीय [[अभिनेता]], [[हास्यकलाकार]] आणि [[पार्श्वगायक]] आहे.<ref>{{cite web |url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/vadivelus-triumphant-return-to-cinema/article37954931.ece |title=Vadivelu's triumphant return to cinema |website=The Hindu |access-date=14 September 2026}}</ref> त्याने प्रामुख्याने तमिळ चित्रपटसृष्टीत ([[कॉलीवूड]]) काम केले आहे. आपल्या विशिष्ट अभिनयशैली, संवादफेक आणि चेहऱ्यावरील हावभावामुळे हा तमिळ सिनेमात हास्यकलाकार लोकप्रिय आहे.<ref>{{cite web |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/tamil/movies/news/king-of-comedy-vadivelu-turns-60/articleshow/78036214.cms |title=King of Comedy Vadivelu turns 60 |website=The Times of India |access-date=14 September 2026}}</ref> त्याचे चाहते त्याला ''वैगैपुयल'' (''वैगै नदीचे वादळ'') म्हणतात.
त्याने ''इमसै अरसन २३म पुलिकेसी'' (२००६) या चित्रपटात मुख्य दुहेरी भूमिका केली होती.<ref>{{cite web |url=https://www.behindwoods.com/tamil-movie-reviews/reviews-1/imsai-arasan-23am-pulikesi.html |title=Imsai Arasan 23am Pulikesi Movie Review |website=Behindwoods |access-date=14 September 2026}}</ref> आपल्या तीन दशकांच्या प्रदीर्घ कारकिर्दीत त्याने पाच वेळा सर्वोत्कृष्ट हास्यकलाकाराचा [[तमिळनाडू राज्य चित्रपट पुरस्कार]] आणि [[फिल्मफेर पुरस्कार दक्षिण|फिल्मफेर पुरस्कार]] जिंकले आहेत.
== कारकीर्द ==
=== प्रमुख चित्रपट ===
{| class="wikitable sortable"
|-
! वर्ष !! चित्रपट !! भूमिका !! नोंदी
|-
| १९९० || [[एन रासाविन मनसिले]] || || पदार्पण चित्रपट
|-
| १९९१ || [[चिन्ना गौंडर]] || ||
|-
| rowspan="2" | १९९२ || [[सिंगारवेलन]] || वट्टा करवाडू ||
|-
| [[थेवर मगन]] || इसेकी ||
|-
| rowspan="3" | १९९३ || [[अरनमनै किळी]] || ||
|-
| [[काथिरुक्क नेरमिल्लै]] || ||
|-
| [[कोविल काळै]] || वडिवेलू ||
|-
| rowspan="2" | १९९४ || [[काधलन]] || कालियापेरुमल ||
|-
| [[पोंगालो पोंगल]] || ||
|-
| rowspan="5" | १९९५ || [[चंद्रलेखा (१९९५ चित्रपट)|चंद्रलेखा]] || ||
|-
| [[आसई (तमिळ चित्रपट)|आसई]] || ||
|-
| [[तिरुुपती इळुमलै व्यंकटेशा]] || ||
|-
| [[रासय्या]] || ||
|-
| [[मुथू (चित्रपट)|मुथू]] || वलयपती ||
|-
| rowspan="3" | १९९६ || [[काधल देसम]] || ||
|-
| [[छैला]] || ||
|-
| [[मिस्टर रोमिओ]] || वव्वाल ||
|-
| rowspan="5" | १९९७ || [[लव्ह बर्ड्स (चित्रपट)|लव्ह बर्ड्स]] || ||
|-
| [[पोरक्कालम]] || ||
|-
| [[भारती कन्नम्मा]] || ईनामुथू ||
|-
| [[रासी]] || ||
|-
| [[रट्चगन]] || ||
|-
| rowspan="2" | १९९८ || [[इनियवले]] || ||
|-
| [[वेलै]] || ||
|-
| rowspan="8" | १९९९ || [[राजस्थान (चित्रपट)|राजस्थान]] || ||
|-
| [[थोदरुम]] || शिपाई मणी ||
|-
| [[पूवेल्लाम केट्टुप्पार]] || ||
|-
| [[संगमम]] || ||
|-
| [[आनंद पूंगात्रे]] || ||
|-
| [[निलावे मुगम काट्टू]] || ||
|-
| [[मोनिशा एन मोनालेसा]] || ||
|-
| [[मुधल्वन]] || पालेवेशम ||
|-
| rowspan="2" | २००० || [[मगलिरक्काग]] || ||
|-
| [[वेत्री कोडी कट्टू]] || सुदालै || 'विजेता', [[तमिळनाडू राज्य चित्रपट पुरस्कार]] (सर्वोत्कृष्ट हास्यकलाकार)
|-
| rowspan="13" | २००१ || [[फ्रेंड्स (२००१ चित्रपट)|फ्रेंड्स]] || नेसमणी ||
|-
| [[असाथल]] || वेणुगोपाल ||
|-
| [[मिडल क्लास माधवन]] || कुलंधैवेलू ||
|-
| [[इंगलुक्कुम कालम वरुम]] || ||
|-
| [[निनाइक्कात नालिल्लै]] || आणा ऊणा टाउनमणी ||
|-
| [[मनधै तिरुडिवित्तै]] || स्टीव्ह वॉ ||
|-
| [[मानस्थान]] || पच्चैकिळी ||
|-
| [[मायी]] || मोक्कैसामी ||
|-
| [[मायन]] || ||
|-
| [[सोन्नल थान काधला]] || ||
|-
| [[राजाकाळी अम्मन]] || ||
|-
| [[लुटी]] || वेलप्पा ||
|-
| [[थवासी]] || || 'विजेता', [[तमिळनाडू राज्य चित्रपट पुरस्कार]] (सर्वोत्कृष्ट हास्यकलाकार)
|-
| rowspan="14" | २००२ || [[एन मना वानिल]] || ||
|-
| [[अळगी]] || ||
|-
| [[कामरासू]] || ||
|-
| [[कारमेगम]] || ||
|-
| [[राजा (२००२ चित्रपट)|राजा]] || ||
|-
| [[तमिळ (चित्रपट)|तमिळ]] || मूर्ती ||
|-
| [[श्री राजराजेश्वरी]] || ||
|-
| [[पुधुमै पिथन]] || सुपर सुरुळी ||
|-
| [[अरासू]] || पिच्चुमणी ||
|-
| [[नम्मा वीट्टू कल्याणम]] || ||
|-
| [[सुंदरा ट्रॅव्हल्स]] || अळगा ||
|-
| [[ओट्रन]] || माडासामी ||
|-
| [[श्री (चित्रपट)|श्री]] || ||
|-
| [[भगवती (चित्रपट)|भगवती]] || व्हायब्रेशन / वडिवेलू ||
|-
| rowspan="11" | २००३ || [[दिवान (चित्रपट)|दिवान]] || ||
|-
| [[ईरानिलम]] || ||
|-
| [[वसीगरा]] || कट्टाबोम्मन ||
|-
| [[पुन्नगै पूवे]] || ||
|-
| [[आळुक्कोरु आसै]] || पलानी ||
|-
| [[विन्नर (चित्रपट)|विन्नर]] || कैपुल्ला ||
|-
| [[काधल किरुकन]] || कल्याणसुंदरम ||
|-
| [[गंभीरम]] || ऊमथुरै पी.सी. ||
|-
| [[काधल डॉट कॉम]] || ||
|-
| [[कोविल (चित्रपट)|कोविल]] || बुलेट पांडी ||
|-
| [[नाग लोक]] || ||
|-
| rowspan="9" | २००४ || [[इंगल अण्णा]] || मयिलू ||
|-
| [[अरुल]] || थंगम ||
|-
| [[आई (२००४ चित्रपट)|आई]] || पलानी ||
|-
| [[जननम्]] || ||
|-
| [[वॉचमन वडिवेलू]] || ||
|-
| [[जोरे]] || तिरुपती ||
|-
| [[गिरी (चित्रपट)|गिरी]] || वीरभागू ||
|-
| [[जय सूर्या]] || ||
|-
| [[मदुरै (२००४ चित्रपट)|मदुरै]] || पांडू ||
|-
| rowspan="22" | २००५ || [[मळै]] || ||
|-
| [[कुस्ती (चित्रपट)|कुस्ती]] || वेलू ||
|-
| [[फेब्रुवारी १४ (चित्रपट)|फेब्रुवारी १४]] || ||
|-
| [[दास]] || ||
|-
| [[पंबरकन्नाले]] || कदलामुथू ||
|-
| [[एबीसीडी (चित्रपट)|एबीसीडी]] || ||
|-
| [[कुंदक्का मंडक्का]] || चेल्लप्पा ||
|-
| [[कर्क कसदर]] || ओंडीपुली ||
|-
| [[कात्रुल्ल वरै]] || वॉचमन ||
|-
| [[अय्या]] || कारसिंगम ||
|-
| [[चंद्रमुखी (चित्रपट)|चंद्रमुखी]] || मुरुगेसन || 'विजेता', [[फिल्मफेअर पुरस्कार दक्षिण|फिल्मफेअर सर्वोत्कृष्ट हास्यकलाकार पुरस्कार (तमिळ)]]
|-
| [[सचेन]] || अय्यासामी ||
|-
| [[मजा (चित्रपट)|मजा]] || पुलिपांडी ||
|-
| [[आनै]] || ||
|-
| [[चाणक्य (चित्रपट)|चाणक्य]] || सुब्रमणी ||
|-
| [[वेत्रीवेल शक्तिवेल]] || धंडपाणी ||
|-
| [[६'२]] || मिस्टर व्हाईट ||
|-
| [[आयुधम]] || ||
|-
| [[इंग्लिशकारन]] || 'थीप्पोरी' तिरुमुगम ||
|-
| [[मन्निन मैंधन]] || ||
|-
| [[आरू]] || सुंडी मोधरम (सुमो) ||
|-
| [[लंडन (२००५ चित्रपट)|लंडन]] || वेदिमुथू ||
|-
| rowspan="12" | २००६ || [[इमसै अरसन २३म पुलिकेसी]] || पुलिकेसी / उग्रपुत्रन || 'विजेता', [[फिल्मफेअर पुरस्कार दक्षिण|फिल्मफेअर सर्वोत्कृष्ट हास्यकलाकार पुरस्कार (तमिळ)]]<br />'विजेता', [[तमिळनाडू राज्य चित्रपट पुरस्कार]]
|-
| [[नेंजिल जिल जिल]] || ||
|-
| [[थलैमगन]] || एरीमलै ||
|-
| [[थिमिरू]] || वल्लारन ||
|-
| [[कोवै ब्रदर्स]] || एकादशी ||
|-
| [[थंबी]] || ||
|-
| [[सिल्लुनु ओरु काधल]] || वेल्लासामी ||
|-
| [[एम मगन]] || करुपट्टी ||
|-
| [[थलै नगरम]] || नाई सेकर ||
|-
| [[पसाकिळिगल]] || सहाय्यक भूमिका ||
|-
| [[रेंडू]] || किरीकालम ||
|-
| [[वाथियार]] || अय्यनार ||
|-
| rowspan="13" | २००७ || [[आर्या (२००७ चित्रपट)|आर्या]] || 'स्नेक' बाबू ||
|-
| [[मां मदुरै]] || थंगवेलू ||
|-
| [[वेल (चित्रपट)|वेल]] || कुलंधैसामी ||
|-
| [[व्यापारी (चित्रपट)|व्यापारी]] || 'दिजिल' पांडी ||
|-
| [[थोट्टाल पू मलरुम]] || कबालीसुरन (कबाली खान) ||
|-
| [[मणिकंदा]] || मधयानै ||
|-
| [[मुरुगा]] || 'कूरिअर' गोपू ||
|-
| [[करुप्पसामी कुथागैथारर]] || 'पडीथुरै' पांडी ||
|-
| [[थवम]] || ||
|-
| [[चीना थाना ००१]] || चीनिस्वामी ||
|-
| [[पिरागु]] || ||
|-
| [[मरुधमलै]] || 'एन्काउंटर' एकांबरम ||
|-
| [[पोक्किरी]] || बॉडी सोडा ||
|-
| rowspan="9" | २००८ || [[थलै नगरम]] || नाई सेकर ||
|-
| [[कन्नुम कन्नुम]] || ||
|-
| [[इंदिरलोकथिल ना अळगप्पन]] || इंद्रन / यमधर्मराज / अळगप्पन || मुख्य भूमिका
|-
| [[मुनियांडी विलांगियाल मून्रामंडू]] || सोरीमुथू अय्यनार ||
|-
| [[थीकुच्ची]] || कुरवन ||
|-
| [[काथावरायन]] || 'कंडुवेट्टी' करुप्पु || 'विजेता', [[तमिळनाडू राज्य चित्रपट पुरस्कार]] (सर्वोत्कृष्ट हास्यकलाकार)
|-
| [[कुसेलन्]] || 'सलून' षण्मुगम ||
|-
| [[सेवल]] || 'थपाल' थंगवेलू ||
|-
| [[इल्लाम अवन सेयल]] || वंडू मुरुगन ||
|-
| rowspan="7"| २००९ || [[विल्लू]] || माडास्वामी ||
|-
| [[वेडिगुंडू मुरुगेसन]] || 'अलर्ट' अरुमुगम ||
|-
| [[अळगर मलै]] || काथामुथू ||
|-
| [[कंथस्वामी]] || थेन्नाप्पन ||
|-
| [[पेरानामै]] || सूसाई ||
|-
| [[आधवन]] || बॅनर्जी || नामांकित, [[विजय पुरस्कार]] (सर्वोत्कृष्ट हास्यकलाकार)
|-
| [[जगन्मोहिनी]] || जगन्मोहना ||
|-
| rowspan="4" | २०१० || [[कचेरी आरंभा]] || बॉस ||
|-
| [[सुरा (चित्रपट)|सुरा]] || छत्री (अंब्रेला) ||
|-
| [[थिल्लालांगडी]] || ||
|-
| [[पोन्नर शंकर (चित्रपट)|पोन्नर शंकर]] || ||
|}
=== इतर चित्रपट ===
{| class="wikitable sortable"
|-
! वर्ष !! चित्रपट !! भूमिका !! नोंदी
|-
| १९९० || [[इरावरसन]] || ||
|-
| १९९१ || [[वरवू एत्तना सेलवू पत्तना]] || ||
|-
| १९९३ || [[नान पेत्रा मगने]] || ||
|-
| १९९३ || [[किळक्कू चीमैयिले]] || ||
|-
| १९९३ || [[गोकुलम]] || ||
|-
| १९९३ || [[पॉन्नुमणी]] || ||
|-
| १९९३ || [[राजाविन पार्वैयिले]] || अरिवळगन ||
|-
| १९९३ || [[नीलाकुयिल]] || ||
|-
| १९९३ || [[किल्लाडी माप्पिल्ळै]] || ||
|-
| १९९३ || [[चेल्लाकन्नू]] || ||
|-
| १९९४ || [[राजकुमारन]] || ||
|-
| १९९४ || [[अधर्मम]] || ||
|-
| १९९४ || [[मरवन]] || ||
|-
| १९९४ || [[अत्ता मग रतिनमे]] || ||
|-
| १९९४ || [[पांडियानिन राज्यथिल]] || ||
|-
| १९९४ || [[इळैग्नार अनी]] || ||
|-
| १९९४ || [[मणिरत्नम]] || ||
|-
| १९९४ || [[पवित्रा]] || ||
|-
| १९९४ || [[सेवत्था पोन्नू]] || ||
|-
| १९९४ || [[सिंधुनदी पू]] || ||
|-
| १९९५ || [[वल्ली]] || ||
|-
| १९९५ || [[एन पोंडाट्टी नल्लवा]] || ||
|-
| १९९५ || [[नंदवन थेरु]] || ||
|-
| १९९५ || [[चेरन चोळन पांडियन]] || ||
|-
| १९९५ || [[किळक्कू मलै]] || ||
|-
| १९९५ || [[चिन्नामणी]] || ||
|-
| १९९५ || [[उधवुम करंगल]] || ||
|-
| १९९५ || [[मुथुकाळै]] || ||
|-
| १९९५ || [[पसुमपोन]] || ||
|-
| १९९६ || [[मायनॉर माप्पिल्ळै]] || 'कुप्पैथोट्टी' गोविंदसामी ||
|-
| १९९६ || [[आनअळगन]] || मरुधमलै ||
|-
| १९९६ || [[सुभाष]] || ||
|-
| १९९६ || [[कालम मारी पोच्चू]] || ||
|-
| १९९६ || [[नेसम पुधुसू]] || वेलू ||
|-
| १९९६ || [[शक्ती (तमिळ चित्रपट)|शक्ती]] || ||
|-
| १९९६ || [[सुंदरपुरुषन]] || ||
|-
| १९९६ || [[तायकुलमे तायकुलमे]] || तमिळपिथन ||
|-
| १९९६ || [[प्रियम्]] || ||
|-
| १९९६ || [[नम्मा ऊरु रासा]] || ||
|-
| १९९६ || [[माणिक्कम]] || ||
|-
| १९९६ || [[वसंत वासल]] || ||
|-
| १९९६ || [[पेरिय मनुष्यन]] || ||
|-
| १९९७ || [[पासमुल्ला पांडियारे]] || ||
|-
| १९९७ || [[रत्ना]] || ||
|-
| १९९७ || [[पांचालंकुरिची]] || ||
|-
| १९९७ || [[मनाविक्कू मरियाधै]] || ||
|-
| १९९७ || [[काधली]] || ||
|-
| १९९७ || [[थडयम]] || ||
|-
| १९९७ || [[विवसायी मगन]] || ||
|-
| १९९७ || [[माय इंडिया]] || ||
|-
| १९९७ || [[माप्पिल्ळै गौंडर]] || ||
|-
| १९९७ || [[पोन्नू विलैयिर भूमि]] || ||
|-
| १९९७ || [[इल्लामे एन पोंडाट्टीथान]] || ||
|-
| १९९७ || [[गंगा गौरी]] || ||
|-
| १९९७ || [[अडिमाई संगिली]] || ||
|-
| १९९७ || [[अद्रसक्का अद्रसक्का]] || ||
|-
| १९९८ || [[कन्नात्ताल]] || सूना पाना ||
|-
| १९९८ || [[काधला काधला]] || सिंगारम ||
|-
| १९९८ || [[जॉली]] || ||
|-
| १९९८ || [[पूंथोट्टम]] || ||
|-
| १९९८ || [[पोन्मानै थेडी]] || ||
|-
| १९९९ || [[विराळुक्केत्ता वीककम]] || कबाली ||
|-
| १९९९ || [[हाऊसफुल्ल (१९९९ चित्रपट)|हाऊसफुल्ल]] || ||
|-
| १९९९ || [[एन श्वासा कात्रे]] || ||
|-
| १९९९ || [[नी एनथन वानम]] || ||
|-
| १९९९ || [[माया (१९९९ चित्रपट)|माया]] || ||
|-
| २००० || [[कंध कादंब कथिर वेला]] || वडिवेलन ||
|-
| २००० || [[वण्णतमिळ पाट्टू]] || ||
|-
| २००० || [[इराणियन]] || ||
|-
| २००० || [[उन्नरुगे नानिरुंथाल]] || ||
|-
| २००० || [[काक्कै सिरगिनिले]] || ||
|-
| २००० || [[वल्लरासू]] || || पाहुणा कलाकार (गाण्यात)
|-
| २००० || [[चिन्ना चिन्ना कण्णिले]] || ||
|-
| २००० || [[कूडी वाळंथाल कोडी नन्माई]] || बॉक्सर कृष्णन ||
|-
| २००० || [[पाट्टाळी]] || ||
|-
| २००१ || [[स्टाईल (२००१ चित्रपट)|स्टाईल]] || ||
|-
| २००१ || [[शकलका बेबी]] || ||
|-
| २००१ || [[एन पुरुषन कुलंधै माथिरि]] || ||
|-
| २००१ || [[मनू नीथी]] || सवला ||
|-
| २००१ || [[श्री बन्नारी अम्मन]] || ||
|-
| २००१ || [[वडुगपट्टी माप्पिल्ळै]] || ||
|-
| २००१ || [[नागेश्वरी]] || ||
|-
| २००१ || [[मित्ता मिरासू]] || ||
|-
| २००१ || [[कण्णुक्कू कण्णागा]] || ||
|-
| २००२ || [[इळसू पुधुसू रवुसू]] || ||
|-
| २००२ || [[नैना]] || आवुडैयप्पन ||
|-
| २००२ || [[लव्ह मॅरेज (२००२ चित्रपट)|लव्ह मॅरेज]] || ||
|-
| २००२ || [[सुपर आंटी]] || ||
|-
| २००३ || [[थट्टी तावुधू मनसू]] || वैगैवेल (इन्स्पेक्टर) ||
|-
| २००३ || [[इनिदू इनिदू काधल इनिदू]] || ||
|-
| २००३ || [[अनबू (२००३ चित्रपट)|अनबू]] || ||
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| २००३ || [[गौंडर वीट्टू माप्पिल्ळै]] || ||
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| २००४ || [[काधले जयम]] || मच्चक्काळै ||
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| २००४ || [[नी मट्टुम]] || ||
|-
| २००५ || [[अंध नाल न्याबगम]] || ||
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| २००६ || [[देसीया परवै]] || ||
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| २००७ || [[की.मू.]] || ||
|}
== संदर्भ आणि नोंदी ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:तमिळ चित्रपट अभिनेते]]
[[वर्ग:भारतीय हास्यकलाकार]]
[[वर्ग:जिंवत व्यक्ती]]
[[वर्ग:मदुरैचे व्यक्ती]]
fs6anv8mpi3mubdxch96ds81k57ugg2
कासव
0
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2697511
2026-09-15T22:23:01Z
अभय नातू
206
/* चित्रदालन */
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wikitext
text/x-wiki
{{विकिडेटा माहितीचौकट}}
{{बदल}}
'''कासव''' हा एक [[उभयचर प्राणी]] आहे. कासवांचे आयुष्य १५० वर्षांपेक्षा जास्त असते. कासव हा जैवसाखळीतील महत्त्वाचा घटक आहे. कासवाच्या शरीराचे शीर्ष, मान, धड आणि शेपूट असे चार प्रमुख भाग असतात.
==कासवांचे प्रकार==
=== जमिनीवरील कासव ===
हे पोट आणि पाठ या दोन्ही बाजूंनी टणक असते. त्यामध्ये 1 टन वजन सहन करण्याची क्षमता असते याच्या बोटांमध्ये पडदे नसतात.
=== गोड्या पाण्यातील कासव ===
ही कासवे विहिरीत आणि नद्यांत राहतात. दीर्घायुषी असल्याने यांचा आकार खूप मोठा होऊ शकतो. इंग्रजीत यांना Sweet Water Turtle म्हणतात. ही कासवे जमिनीवरही राहू शकतात.
=== समुद्री कासव ===
समुद्रात राहणाऱ्या कासवांना समुद्री अथवा सागरी कासव असे म्हणतात. ही कासवे समुद्रतळ स्वच्छ राखून समुद्री पर्यावरणाचा समतोल राखतात. या कासवांच्या सात प्रमुख प्रजाती आजवर आढळल्या आहेत. यांतील पाच प्रकारची कासवे भारतीय उपखंडात आढळून येतात. पैकी चार जाती [[भारत|भारताच्या]] [[समुद्र किनारा|समुद्री किनाऱ्यावर]] आढळून येतात.
* '''ऑलिव्ह रिडले कासव''' - हे प्रसिद्ध आहे. कासवाचा तपकिरी रंग आणि एकत्रितपणे एकाच काळात अंडी घालण्याच्या पद्धतीमुळे यांना हे नाव मिळाले आहे. अंडी घालण्याच्या कार्यक्रमात मोठ्या संख्येने मादी कासवे एकत्रित येतात. भारतात [[ओरिसा]]च्या [[गोहिरमाथा]] समुद्र-किनाऱ्यावर ही कासवे मोठ्या प्रमाणात आढळतात. ही कासवे भारताच्या इतर किनाऱ्यांवरही आढळतात. पूर्वी या कासवांची अंडी शोधून खाऊन टाकली जात असत. परंतु त्यांची संख्या अत्यंत घटल्याने यावर बंदी आणण्यात आली. तसेच मोठ्या प्रमाणात जनजागृतीही करण्यात आली. [[कोकण]] किनाऱ्यावरही ही कासवे आढळून येतात.
* '''हिरवे कासव''' (ग्रीन टर्टल) - या कासवाचे पोट गुळगुळीत असते तर पाठ अतिशय टणक असते. पोटाचा रंग पिवळट पांढरा असतो. या कासवांच्या शरीराच्या मानाने डोक्याचा आकार छोटा असतो. भारताच्या पश्चिम आणि पूर्व किनाऱ्यावर यांचा आढळ आहे.
* '''चोच कासव''' - (हॉक्स बिल टर्टल) या कासवांच्या तोंडाचा आकार चोचीसारखा असतो. त्यामुळे त्यांना चोच कासव म्हणतात. ही छोट्या आकाराची कासवांची जात आहे. आपली घरटी ही कासवे एकान्त असलेल्या ठिकाणी बांधणे पसंत करतात. [[स्पंज]], [[माखले]], [[झिंगे]] हे त्यांचे खाद्य असते. भारतात यांचा आढळ [[अंदमान आणि निकोबार]], [[निकोबार]] आणि [[लक्षद्वीप]] बेटांवर आहे.
* '''चामडी पाठीचे कासव''' - (लेदर बॅक टर्टल) - समुद्री कासवांमधील यांचा आकार सर्वांत मोठा असतो. यांची जास्तीतजास्त लांबी १७० सें.मी. आढळली आहे व वजन ५०० किलोग्रॅम. या कासवाची [[पाठ]] एका पातळ मऊ आवरणाने आच्छादलेली असते. यांचा जबडा नाजूक कात्रीसारखा असतो. [[जेली फिश]] हे यांचे आवडते खाद्य आहे. भारतात यांचा आढळ [[अंदमान आणि निकोबार]] आणि [[लक्षदीप]] बेटांवर आहे.
तेल गळतीसारखे अपघात, यांत्रिक मासेमारीच्या जाळ्यात अडकून मृत्यू, मानवाकडून किनारी भागांचा विध्वंस, कासवांच्या पाठींचा दागिन्यांसाठी वापर, अशा अनेक कारणामुळे समुद्री कासवांची संख्या कमी होते आहे. कासवांच्या सातही प्रमुख प्रजाती सध्या नष्ट होण्याच्या मार्गावर आहेत. म्हणूनच त्या प्राणिसंवर्धन अणि संरक्षण कायद्याच्या परिघात येतात. '''समुद्री कासवांना पकडणे बेकायदेशीर आहे.'''
==== संवर्धन ====
* फेब्रुवारी व मार्च महिन्यात रत्नागिरी येथे ‘समुद्री कासव महोत्सव’ साजरा केला जातो. यावेळी कासवांची माहिती आणि ऑलिव्ह रिडले कासवाच्या पिलांच्या जन्माचा व त्यांचा समुद्राकडे जाण्याचा सोहळा पाहण्याची संधी असते.
* सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातील वायंगणी येथे ऑलिव्ह रिडले सागरी कासवांचे प्रजनन व संवर्धन केंद्र आहे.
* [[आंतरराष्ट्रीय समुद्री कासव सोसायटी]]
== भारतीय सांस्कृतिक महत्त्व ==
भारतीय संस्कृतीत कासवाला आध्यात्मिकदृष्ट्या विशेष स्थान आहे. हजारो वर्ष उत्क्रांत होत गेलेले कासव हे मानवी आवडीचा व कुतूहलाचा विषय आहे. कासवाचा प्रतीकात्मक उपयोग आपल्याला साहित्य, चित्रकला, जातककथा यामध्ये कुशलतेने केलेला दिसतो. भारतात मंदिरामध्ये देवतेपुढे असलेले कासव हेही असेच महत्त्वाचे मानले जाते.
हिंदू आख्यायिकांनुसार [[कूर्म अवतार]] हा विष्णूचा कासवरूपातील दुसरा अवतार समजला जातो. याला 'कच्छप अवतार' देखील म्हणतात. क्षीरसागर समुद्राच्या वेळी विष्णूने [[कूर्म अवतार|कूर्म अवतारात]] मंदार पर्वताला आधार दिला. अशाप्रकारे वासुकी नावाच्या सर्पाच्या मदतीने देवांनी आणि असुरांनी समुद्रमंथन करून चौदा रत्ने मिळवली.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|दुवा=https://bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%95%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE_%E0%A4%85%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B0|title=कूर्म अवतार - भारतकोश, ज्ञान का हिंदी महासागर|संकेतस्थळ=bharatdiscovery.org|ॲक्सेसदिनांक=2019-09-05}}</ref> कासव हे लक्ष्मीचे प्रतीक आहे. भारतात मंदिरामध्ये देवतेपुढे असलेले कासव महत्त्वाचे मानले जाते. त्याचा संकेत आहे की कासव जसे बाह्य गोष्टींपासून स्वतःचे रक्षण करण्यासाठी आपले पाय, शेपूट. मान कवचामध्ये ओढून घेते, तसे देवतेचे दर्शन घेताना काम, क्रोध, मद, मोह, मत्सर,लोभ या मानवी दुर्गुणांना आत खेचून घेऊन मगच देवतेचे दर्शन घ्यावे.
==कासवांवरील पुस्तके==
* कासवांचे बेट : गालोपगोस बेटांची अद्भुत सफर (डाॅ. संदीप श्रोत्री)
== संदर्भ यादी ==
<references />
== चित्रदालन ==
<gallery>
File:Snapping turtle 3 md.jpg|उत्तर [[न्यू यॉर्क (राज्य)|न्यू यॉर्क राज्या]]तील [[सेंट लॉरेन्स नदी]]जवळ टिपलेले [[कॉममन स्नॅपिंग टर्टल|कॉममन स्नॅपिंग टर्टल]]चे (''Chelydra serpentina'') जवळून घेतलेले समोरचे दृश्य
File:Random Turtle.jpg|पाणकासव
चित्र:Florida Box Turtle Digon3 re-edited.jpg|कासव
File:Chelonia mydas is going for the air.jpg|[[कोना भाग, हवाई|कोना]], [[हवाई]] येथील ''Chelonia mydas'' ([[हिरवे समुद्री कासव]])
File:Defensive turtle.jpg|फक्त नासिका व डोळे पाण्याच्या पृष्ठभागावर काढलेले पाणकासव
File:Turtle1.jpg|शर्म-अल-शेख प्राणीसंग्रहालयातील आफ्रिकन कासव
File:Turtle3m.JPG|[[चेक प्रजासत्ताक|चेक प्रजासत्ताकातील]] प्राणीसंग्रहालयातील कासव
File:Turtle-back-galawebdesign.jpg|स्नॅपिंग टर्टलची शेपटी. ब्ल्यू हिल्स रिझर्व्हेशन, मॅसेच्युसेट्स.
File:Turtle in Indonesia.ogv|समुद्री पाणकासव पोहताना.
File:Haeckel Chelonia.jpg|[[अर्न्स्ट हेकेल]] यांच्या ''[[कुन्स्टफोर्मेन डॅर नातूर]]'' (१९०४) या पुस्तकातील "Chelonia" ([[कासव|Testudines]])
</gallery>
== बाह्य दुवे ==
* [http://ibnlokmat.tv/showvideo.php?id=37501 प्रवास दोन निसर्गप्रेमींचा - भाऊ काटदरे आणि बी.एस. कुलकर्णी] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110812064630/http://ibnlokmat.tv/showvideo.php?id=37501 |date=2011-08-12 }}
[[वर्ग:प्राणी]]
[[वर्ग:जलचर प्राणी]]
[[वर्ग:स्थलचर प्राणी]]
[[वर्ग:सरीसृप]]
[[वर्ग:सरपटणारे प्राणी]]
[[वर्ग:कासव]]
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उत्तर सुलावेसी
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2026-09-16T03:52:47Z
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wikitext
text/x-wiki
{{माहितीचौकट राजकीय विभाग
| नाव = उत्तर सुलावेसी
| स्थानिकनाव = Sulawesi Utara
| प्रकार = [[इंडोनेशियाचे प्रांत|इंडोनेशियाचा प्रांत]]
| ध्वज =
| चिन्ह = North Sulawesi coa.png
| नकाशा = IndonesiaNorthSulawesi.png
| देश = इंडोनेशिया
| राजधानी = [[मनादो]]
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| लोकसंख्या = २१,५४,२३४
| घनता =
| वेबसाईट = [http://www.sulut.go.id www.sulut.go.id]
}}
'''उत्तर सुलावेसी''' ([[भासा इंडोनेशिया]]: Sulawesi Utara) हा [[इंडोनेशिया]] देशाचा [[सुलावेसी]] बेटावरील एक प्रांत आहे.
== बाह्य दुवे ==
* [http://www.sulut.go.id/ अधिकृत संकेतस्थळ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20070428030345/http://www.sulut.go.id/ |date=2007-04-28 }} {{id icon}}
* [http://www.north-sulawesi.org/ पर्यटन विभाग] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110130144207/http://www.north-sulawesi.org/ |date=2011-01-30 }}
* {{wikivoyage|North Sulawesi|उत्तर सुलावेसी}}
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{{इंडोनेशियाचे प्रांत व प्रदेश}}
[[वर्ग:इंडोनेशियाचे प्रांत|सुलावेसी, उत्तर]]
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फिल्मफेर सर्वोत्तम पुरुष पदार्पण पुरस्कार
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2026-09-15T22:26:10Z
अभय नातू
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/* विजेते व नामांकन */
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text/x-wiki
{{विकिडेटा माहितीचौकट}}
'''फिल्मफेर सर्वोत्तम पुरुष पदार्पण पुरस्कार''' दरवर्षी [[फिल्मफेअर]] नियतकालिकातर्फे [[बॉलिवूड]]मध्ये सर्वोत्तम पदार्पण करणाऱ्या [[अभिनेता|अभिनेत्याला]] दिला जातो. हा [[फिल्मफेअर पुरस्कार]]ांमधील एक [[पुरस्कार]] आहे. १९८९ साली ह पुरस्कार देण्यास सुरुवात झाली.
==विजेते व नामांकन==
{| class="wikitable sortable"
|-
! वर्ष !! विजेत्याचे चित्र !! अभिनेता !! चित्रपट
|-
| rowspan=2| १९८९ || rowspan=2| [[चित्र:AamirKhan.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[आमिर खान]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[कयामत से कयामत तक]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| १९९० || rowspan=2| [[File:Salman Khan at 10 Ka Dum.jpg |80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[सलमान खान]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[मैने प्यार किया]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| १९९१ || colspan="3" style="background:#FFAA00; text-align:center;" | ''''' पुरस्कार नाही '''''
|-
| rowspan=2| १९९२ || rowspan=2| [[File:Ajay-Devgan-LondonDreams01 (cropped).jpg |80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[अजय देवगण]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[फूल ऑर कांटे]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| १९९३ || rowspan=2| [[File:Shah_Rukh_Khan_graces_the_launch_of_the_new_Santro.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[शाहरूख खान]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[दीवाना (१९९२ चित्रपट)|दीवाना]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| १९९४ || rowspan=2|
! style="background:#FAEB86;" | [[सैफ अली खान]] || style="background:#FAEB86;" | ''आशिक आवारा''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| १९९५ || colspan="3" style="background:#FFAA00; text-align:center;" | ''''' पुरस्कार नाही '''''
|-
| rowspan=2| १९९६ || rowspan=2| [[File:Lord_Bobby_2024.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[बॉबी देओल]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[बरसात (१९९५ चित्रपट)|बरसात]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| १९९७ || rowspan=2| [[File:Chandrachur_Singh.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[चंद्रचुड सिंग]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[माचिस]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| १९९८ || rowspan=2| [[File:Akshaye_Khanna_still2.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[अक्षय खन्ना]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[हिमालय पुत्र]]''
|-
| आरिफ झकेरिया || ''दरमियान''
|-
| rowspan=2| १९९९ || rowspan=2| [[File:Fardeen_Khan_at_the_screening_of_Tadap.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[फरदीन खान]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[प्रेम अगन]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| २००० || rowspan=2| [[File:RahulKhanna.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[राहुल खन्ना]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[१९४७: अर्थ]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| २००१ || rowspan=2| [[File:Hrithik_at_Rado_launch.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[हृतिक रोशन]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[कहो ना... प्यार है]]''
|-
| [[अभिषेक बच्चन]] || ''[[रेफ्युजी]]''
|-
| rowspan=2| २००२ || rowspan=2| [[File:Tusshar.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[तुषार कपूर]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[मुझे कुछ कहना है]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| २००३ || rowspan=2| [[File:Vivek_Filmfare-Awards-Marathi-2016-5.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[विवेक ओबेरॉय]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[कंपनी (२००२ चित्रपट)|कंपनी]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| २००४ || rowspan=2| [[File:Shahid,_Alia,_and_Katrina_at_IIFA_2017_(cropped).jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[शाहिद कपूर]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[इश्क विश्क]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| २००५ || colspan="3" style="background:#FFAA00; text-align:center;" | ''''' पुरस्कार नाही '''''
|-
| rowspan=2| २००६ || rowspan=2| [[File:Shiney_Ahuja.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[शायनी आहुजा]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[हजारों ख्वाइशें ऐसी]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| २००७ || colspan="3" style="background:#FFAA00; text-align:center;" | ''''' पुरस्कार नाही '''''
|-
| rowspan=6| २००८ || rowspan=6| [[File:Ranbir_Kapoor_promoting_Brahmastra.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[रणबीर कपूर]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[सांवरिया]]''
|-
| [[दर्शील सफारी]] || ''[[तारे जमीन पर]]''
|-
| [[हिमेश रेशमिया]] || ''[[आप का सुरुर]]''
|-
| [[मुज्जमिल इब्राहिम]] || ''[[धोखा]]''
|-
| [[नील नितीन मुकेश]] || ''[[जॉनी गद्दार]]''
|-
| [[रुस्लान मुमताज]] || ''[[एमपी३: मेरा पहला पहला प्यार]]''
|-
| rowspan=7| २००९ || rowspan=7| [[File:Farhan32.gif|80px]] <br> [[File:Imran_Khan_The_Front_Row.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[फरहान अख्तर]] व [[इमरान खान (अभिनेता)|इमरान खान]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[रॉक ऑन]]'' आणि ''[[जाने तू... या जाने ना]]''
|-
| [[अनुराग सिन्हा]] || ''[[ब्लॅक अँड व्हाइट]]''
|-
| [[हरमन बावेजा]] || ''[[लव्ह स्टोरी २०५०]]''
|-
| [[निखिल द्विवेदी]] || ''[[माय नेम इज अँथनी गोन्साल्विस]]''
|-
| [[प्रतीक बब्बर]] || ''[[जाने तू... या जाने ना]]''
|-
| [[राजीव खंडेलवाल]] || ''[[आमिर]]''
|-
| [[सिकंदर खेर]] || ''[[वुडस्टॉक व्हिला]]''
|-
| २०१० || colspan="3" style="background:#FFAA00; text-align:center;" | ''''' पुरस्कार नाही '''''
|-
| rowspan=2| २०११ || rowspan=2| [[File:Ranveer_Singh_in_2023_(1)_(cropped).jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[रणवीर सिंग]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[बँड बाजा बारात]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=5| २०१२ || rowspan=5| [[File:Vidhyut_%26_Arhaan_at_the_launch_of_%27Big_RTL_Thrill%27_channel.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[विद्युत जामवाल]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[फोर्स]]''
|-
| [[गुलशन देवय्या]] || ''[[दम मारो दम]], [[शैतान]], [[दॅट गर्ल इन येल्लो बुटास]]''
|-
| [[पार्थो गुप्ते]] || ''[[स्टॅन्ले का डब्बा]]''
|-
| [[राणा दग्गुबती]] || ''[[दम मारो दम]]''
|-
| [[शिव पंडित]] || ''[[शैतान]]''
|-
| rowspan=4| २०१३ || rowspan=4| [[File:Ayushmann_Khurrana_promotos_%27Anek%27_in_Delhi_(1)_(cropped).jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[आयुष्मान खुराणा]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[विकी डोनर]]''
|-
| [[अर्जुन कपूर]] || ''[[इशकजादे]]''
|-
| [[सिद्धार्थ मल्होत्रा]] || ''[[स्टुडंट ऑफ द इयर]]''
|-
| [[वरुण धवन]] || ''[[स्टुडंट ऑफ द इयर]]''
|-
| rowspan=2| २०१४ || rowspan=2| [[File:Dhanush 62nd Britannia Filmfare South Awards (cropped).jpg |80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[धनुष (अभिनेता)|धनुष]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[रांझणा]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| २०१५ || rowspan=2| [[File:Fawad Khan promotes 'Khoobsurat' on Red FM 93.5.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[फवाद खान]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[खूबसूरत]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| २०१६ || rowspan=2| [[File:Sooraj_Pancholi_graces_Vogue_Beauty_Awards_2017.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[सुरज पांचोली]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[हिरो]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| २०१७ || rowspan=2| [[File:Diljit_Dosanjh_grace_the_media_meet_of_Phillauri_4_(cropped).jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[दिलजीत दोसांझ]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[उडता पंजाब]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| २०१८ || colspan="3" style="background:#FFAA00; text-align:center;" | ''''' पुरस्कार नाही '''''
|-
| rowspan=2| २०१९ || rowspan=2| [[File:Ishaan_Khatter_snapped_promoting_his_film_Pippa.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[ईशान खट्टर]] || style="background:#FAEB86;" | ''बियॉन्ड द क्लाउड्स'' आणि ''धडक''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=6| २०२० || rowspan=6| [[File:Abhimanyu-Dassani-graces-the-Dadasaheb-Phalke-International-Film-Festival-Awards-2022-(cropped).jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[अभिमन्यू दासानी]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[मर्द को दर्द नहीं होता]]''
|-
| [[मीझान जाफरी]] || ''[[ मलाल]]''
|-
| [[सिद्धांत चतुर्वेदी]] || ''[[गली बॉय]]''
|-
| [[वर्धन पुरी]] || ''[[ये साली आशिकी]]''
|-
| [[विशाल जेठवा]] || ''[[मर्दानी २]]''
|-
| [[झहीर इक्बाल]] || ''[[नोटबुक]]''
|-
| २०२१ || colspan="3" style="background:#FFAA00; text-align:center;" | ''''' पुरस्कार नाही '''''
|-
| rowspan=2| २०२२ || rowspan=2| -
! style="background:#FAEB86;" | [[एहान भट]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[९९ सॉग्स]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=4| २०२३ || rowspan=4| -
! style="background:#FAEB86;" | [[अंकुश गेडाम]] || style="background:#FAEB86;" | ''झुंड''
|-
|-
| [[अभय मिश्र]] || ''[[डॉक्टर जी]]''
|-
| [[पालिन कबाक]] || ''[[भेडिया]]''
|-
| [[शंतनू माहेश्वरी]] || ''[[गंगुबाई काठियावाडी]]''
|-
| rowspan=2| २०२४ || rowspan=2| -
! style="background:#FAEB86;" | [[आदित्य रावल]] || style="background:#FAEB86;" | ''फराज''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
|}
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
{{फिल्मफेअर पुरस्कार}}
[[वर्ग:फिल्मफेर पुरस्कार|पुरुष पदार्पण]]
[[वर्ग:अभिनेत्यांसाठी पुरस्कार]]
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2026-09-15T22:28:21Z
अभय नातू
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/* विजेते व नामांकन */
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wikitext
text/x-wiki
{{विकिडेटा माहितीचौकट}}
'''फिल्मफेर सर्वोत्तम पुरुष पदार्पण पुरस्कार''' दरवर्षी [[फिल्मफेअर]] नियतकालिकातर्फे [[बॉलिवूड]]मध्ये सर्वोत्तम पदार्पण करणाऱ्या [[अभिनेता|अभिनेत्याला]] दिला जातो. हा [[फिल्मफेअर पुरस्कार]]ांमधील एक [[पुरस्कार]] आहे. १९८९ साली ह पुरस्कार देण्यास सुरुवात झाली.
==विजेते व नामांकन==
{| class="wikitable sortable"
|-
! वर्ष !! विजेत्याचे चित्र !! अभिनेता !! चित्रपट
|-
| rowspan=2| १९८९ || rowspan=2| [[चित्र:AamirKhan.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[आमिर खान]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[कयामत से कयामत तक]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| १९९० || rowspan=2| [[File:Salman Khan at 10 Ka Dum.jpg |80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[सलमान खान]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[मैने प्यार किया]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| १९९१ || colspan="3" style="background:#FFAA00; text-align:center;" | ''''' पुरस्कार नाही '''''
|-
| rowspan=2| १९९२ || rowspan=2| [[File:Ajay-Devgan-LondonDreams01 (cropped).jpg |80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[अजय देवगण]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[फूल ऑर कांटे]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| १९९३ || rowspan=2| [[File:Shah_Rukh_Khan_graces_the_launch_of_the_new_Santro.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[शाहरूख खान]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[दीवाना (१९९२ चित्रपट)|दीवाना]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| १९९४ || rowspan=2|
! style="background:#FAEB86;" | [[सैफ अली खान]] || style="background:#FAEB86;" | ''आशिक आवारा''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| १९९५ || colspan="3" style="background:#FFAA00; text-align:center;" | ''''' पुरस्कार नाही '''''
|-
| rowspan=2| १९९६ || rowspan=2| [[File:Lord_Bobby_2024.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[बॉबी देओल]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[बरसात (१९९५ चित्रपट)|बरसात]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| १९९७ || rowspan=2| [[File:Chandrachur_Singh.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[चंद्रचुड सिंग]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[माचिस]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| १९९८ || rowspan=2| [[File:Akshaye_Khanna_still2.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[अक्षय खन्ना]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[हिमालय पुत्र]]''
|-
| आरिफ झकेरिया || ''दरमियान''
|-
| rowspan=2| १९९९ || rowspan=2| [[File:Fardeen_Khan_at_the_screening_of_Tadap.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[फरदीन खान]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[प्रेम अगन]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| २००० || rowspan=2| [[File:RahulKhanna.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[राहुल खन्ना]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[१९४७: अर्थ]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
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| rowspan=2| २००१ || rowspan=2| [[File:Hrithik_at_Rado_launch.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[हृतिक रोशन]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[कहो ना... प्यार है]]''
|-
| [[अभिषेक बच्चन]] || ''[[रेफ्युजी]]''
|-
| rowspan=2| २००२ || rowspan=2| [[File:Tusshar.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[तुषार कपूर]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[मुझे कुछ कहना है]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| २००३ || rowspan=2| [[File:Vivek_Filmfare-Awards-Marathi-2016-5.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[विवेक ओबेरॉय]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[कंपनी (२००२ चित्रपट)|कंपनी]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| २००४ || rowspan=2| [[File:Shahid,_Alia,_and_Katrina_at_IIFA_2017_(cropped).jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[शाहिद कपूर]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[इश्क विश्क]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| २००५ || colspan="3" style="background:#FFAA00; text-align:center;" | ''''' पुरस्कार नाही '''''
|-
| rowspan=2| २००६ || rowspan=2| [[File:Shiney_Ahuja.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[शायनी आहुजा]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[हजारों ख्वाइशें ऐसी]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| २००७ || colspan="3" style="background:#FFAA00; text-align:center;" | ''''' पुरस्कार नाही '''''
|-
| rowspan=6| २००८ || rowspan=6| [[File:Ranbir_Kapoor_promoting_Brahmastra.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[रणबीर कपूर]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[सांवरिया]]''
|-
| [[दर्शील सफारी]] || ''[[तारे जमीन पर]]''
|-
| [[हिमेश रेशमिया]] || ''[[आप का सुरुर]]''
|-
| [[मुज्जमिल इब्राहिम]] || ''[[धोखा]]''
|-
| [[नील नितीन मुकेश]] || ''[[जॉनी गद्दार]]''
|-
| [[रुस्लान मुमताज]] || ''[[एमपी३: मेरा पहला पहला प्यार]]''
|-
| rowspan=7| २००९ || rowspan=7| [[File:Farhan32.gif|80px]] <br> [[File:Imran_Khan_The_Front_Row.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[फरहान अख्तर]] व [[इमरान खान (अभिनेता)|इमरान खान]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[रॉक ऑन]]'' आणि ''[[जाने तू... या जाने ना]]''
|-
| [[अनुराग सिन्हा]] || ''[[ब्लॅक अँड व्हाइट]]''
|-
| [[हरमन बावेजा]] || ''[[लव्ह स्टोरी २०५०]]''
|-
| [[निखिल द्विवेदी]] || ''[[माय नेम इज अँथनी गोन्साल्विस]]''
|-
| [[प्रतीक बब्बर]] || ''[[जाने तू... या जाने ना]]''
|-
| [[राजीव खंडेलवाल]] || ''[[आमिर (चित्रपट)|आमिर]]''
|-
| [[सिकंदर खेर]] || ''[[वुडस्टॉक व्हिला]]''
|-
| २०१० || colspan="3" style="background:#FFAA00; text-align:center;" | ''''' पुरस्कार नाही '''''
|-
| rowspan=2| २०११ || rowspan=2| [[File:Ranveer_Singh_in_2023_(1)_(cropped).jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[रणवीर सिंग]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[बँड बाजा बारात]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=5| २०१२ || rowspan=5| [[File:Vidhyut_%26_Arhaan_at_the_launch_of_%27Big_RTL_Thrill%27_channel.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[विद्युत जामवाल]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[फोर्स]]''
|-
| [[गुलशन देवय्या]] || ''[[दम मारो दम]], [[शैतान]], [[दॅट गर्ल इन येल्लो बुटास]]''
|-
| [[पार्थो गुप्ते]] || ''[[स्टॅन्ले का डब्बा]]''
|-
| [[राणा दग्गुबती]] || ''[[दम मारो दम]]''
|-
| [[शिव पंडित]] || ''[[शैतान]]''
|-
| rowspan=4| २०१३ || rowspan=4| [[File:Ayushmann_Khurrana_promotos_%27Anek%27_in_Delhi_(1)_(cropped).jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[आयुष्मान खुराणा]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[विकी डोनर]]''
|-
| [[अर्जुन कपूर]] || ''[[इशकजादे]]''
|-
| [[सिद्धार्थ मल्होत्रा]] || ''[[स्टुडंट ऑफ द इयर]]''
|-
| [[वरुण धवन]] || ''[[स्टुडंट ऑफ द इयर]]''
|-
| rowspan=2| २०१४ || rowspan=2| [[File:Dhanush 62nd Britannia Filmfare South Awards (cropped).jpg |80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[धनुष (अभिनेता)|धनुष]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[रांझणा]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| २०१५ || rowspan=2| [[File:Fawad Khan promotes 'Khoobsurat' on Red FM 93.5.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[फवाद खान]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[खूबसूरत]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| २०१६ || rowspan=2| [[File:Sooraj_Pancholi_graces_Vogue_Beauty_Awards_2017.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[सुरज पांचोली]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[हिरो]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| २०१७ || rowspan=2| [[File:Diljit_Dosanjh_grace_the_media_meet_of_Phillauri_4_(cropped).jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[दिलजीत दोसांझ]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[उडता पंजाब]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| २०१८ || colspan="3" style="background:#FFAA00; text-align:center;" | ''''' पुरस्कार नाही '''''
|-
| rowspan=2| २०१९ || rowspan=2| [[File:Ishaan_Khatter_snapped_promoting_his_film_Pippa.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[ईशान खट्टर]] || style="background:#FAEB86;" | ''बियॉन्ड द क्लाउड्स'' आणि ''धडक''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=6| २०२० || rowspan=6| [[File:Abhimanyu-Dassani-graces-the-Dadasaheb-Phalke-International-Film-Festival-Awards-2022-(cropped).jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[अभिमन्यू दासानी]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[मर्द को दर्द नहीं होता]]''
|-
| [[मीझान जाफरी]] || ''[[ मलाल]]''
|-
| [[सिद्धांत चतुर्वेदी]] || ''[[गली बॉय]]''
|-
| [[वर्धन पुरी]] || ''[[ये साली आशिकी]]''
|-
| [[विशाल जेठवा]] || ''[[मर्दानी २]]''
|-
| [[झहीर इक्बाल]] || ''[[नोटबुक]]''
|-
| २०२१ || colspan="3" style="background:#FFAA00; text-align:center;" | ''''' पुरस्कार नाही '''''
|-
| rowspan=2| २०२२ || rowspan=2| -
! style="background:#FAEB86;" | [[एहान भट]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[९९ सॉग्स]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=4| २०२३ || rowspan=4| -
! style="background:#FAEB86;" | [[अंकुश गेडाम]] || style="background:#FAEB86;" | ''झुंड''
|-
|-
| [[अभय मिश्र]] || ''[[डॉक्टर जी]]''
|-
| [[पालिन कबाक]] || ''[[भेडिया]]''
|-
| [[शंतनू माहेश्वरी]] || ''[[गंगुबाई काठियावाडी]]''
|-
| rowspan=2| २०२४ || rowspan=2| -
! style="background:#FAEB86;" | [[आदित्य रावल]] || style="background:#FAEB86;" | ''फराज''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
|}
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
{{फिल्मफेअर पुरस्कार}}
[[वर्ग:फिल्मफेर पुरस्कार|पुरुष पदार्पण]]
[[वर्ग:अभिनेत्यांसाठी पुरस्कार]]
g7nftqph4wtu6171k4fbpqgjrn772as
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2026-09-15T22:29:25Z
अभय नातू
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/* विजेते व नामांकन */
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text/x-wiki
{{विकिडेटा माहितीचौकट}}
'''फिल्मफेर सर्वोत्तम पुरुष पदार्पण पुरस्कार''' दरवर्षी [[फिल्मफेअर]] नियतकालिकातर्फे [[बॉलिवूड]]मध्ये सर्वोत्तम पदार्पण करणाऱ्या [[अभिनेता|अभिनेत्याला]] दिला जातो. हा [[फिल्मफेअर पुरस्कार]]ांमधील एक [[पुरस्कार]] आहे. १९८९ साली ह पुरस्कार देण्यास सुरुवात झाली.
==विजेते व नामांकन==
{| class="wikitable sortable"
|-
! वर्ष !! विजेत्याचे चित्र !! अभिनेता !! चित्रपट
|-
| rowspan=2| १९८९ || rowspan=2| [[चित्र:AamirKhan.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[आमिर खान]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[कयामत से कयामत तक]]''
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| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| १९९० || rowspan=2| [[File:Salman Khan at 10 Ka Dum.jpg |80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[सलमान खान]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[मैने प्यार किया]]''
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| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
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| १९९१ || colspan="3" style="background:#FFAA00; text-align:center;" | ''''' पुरस्कार नाही '''''
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| rowspan=2| १९९२ || rowspan=2| [[File:Ajay-Devgan-LondonDreams01 (cropped).jpg |80px]]
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| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
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| rowspan=2| १९९३ || rowspan=2| [[File:Shah_Rukh_Khan_graces_the_launch_of_the_new_Santro.jpg|80px]]
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| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
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| rowspan=2| १९९४ || rowspan=2|
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| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
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| १९९५ || colspan="3" style="background:#FFAA00; text-align:center;" | ''''' पुरस्कार नाही '''''
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| rowspan=2| १९९६ || rowspan=2| [[File:Lord_Bobby_2024.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[बॉबी देओल]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[बरसात (१९९५ चित्रपट)|बरसात]]''
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| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
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| rowspan=2| १९९७ || rowspan=2| [[File:Chandrachur_Singh.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[चंद्रचुड सिंग]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[माचिस]]''
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| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
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| rowspan=2| १९९८ || rowspan=2| [[File:Akshaye_Khanna_still2.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[अक्षय खन्ना]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[हिमालय पुत्र]]''
|-
| आरिफ झकेरिया || ''दरमियान''
|-
| rowspan=2| १९९९ || rowspan=2| [[File:Fardeen_Khan_at_the_screening_of_Tadap.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[फरदीन खान]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[प्रेम अगन]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
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| rowspan=2| २००० || rowspan=2| [[File:RahulKhanna.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[राहुल खन्ना]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[१९४७: अर्थ]]''
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| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
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| rowspan=2| २००१ || rowspan=2| [[File:Hrithik_at_Rado_launch.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[हृतिक रोशन]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[कहो ना... प्यार है]]''
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| [[अभिषेक बच्चन]] || ''[[रेफ्युजी]]''
|-
| rowspan=2| २००२ || rowspan=2| [[File:Tusshar.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[तुषार कपूर]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[मुझे कुछ कहना है]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| २००३ || rowspan=2| [[File:Vivek_Filmfare-Awards-Marathi-2016-5.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[विवेक ओबेरॉय]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[कंपनी (२००२ चित्रपट)|कंपनी]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| २००४ || rowspan=2| [[File:Shahid,_Alia,_and_Katrina_at_IIFA_2017_(cropped).jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[शाहिद कपूर]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[इश्क विश्क]]''
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| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| २००५ || colspan="3" style="background:#FFAA00; text-align:center;" | ''''' पुरस्कार नाही '''''
|-
| rowspan=2| २००६ || rowspan=2| [[File:Shiney_Ahuja.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[शायनी आहुजा]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[हजारों ख्वाइशें ऐसी]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| २००७ || colspan="3" style="background:#FFAA00; text-align:center;" | ''''' पुरस्कार नाही '''''
|-
| rowspan=6| २००८ || rowspan=6| [[File:Ranbir_Kapoor_promoting_Brahmastra.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[रणबीर कपूर]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[सांवरिया]]''
|-
| [[दर्शील सफारी]] || ''[[तारे जमीन पर]]''
|-
| [[हिमेश रेशमिया]] || ''[[आप का सुरुर]]''
|-
| [[मुज्जमिल इब्राहिम]] || ''[[धोखा]]''
|-
| [[नील नितीन मुकेश]] || ''[[जॉनी गद्दार]]''
|-
| [[रुस्लान मुमताज]] || ''[[एमपी३: मेरा पहला पहला प्यार]]''
|-
| rowspan=7| २००९ || rowspan=7| [[File:Farhan32.gif|80px]] <br> [[File:Imran_Khan_The_Front_Row.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[फरहान अख्तर]] व [[इमरान खान (अभिनेता)|इमरान खान]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[रॉक ऑन]]'' आणि ''[[जाने तू... या जाने ना]]''
|-
| [[अनुराग सिन्हा]] || ''[[ब्लॅक अँड व्हाइट]]''
|-
| [[हरमन बावेजा]] || ''[[लव्ह स्टोरी २०५०]]''
|-
| [[निखिल द्विवेदी]] || ''[[माय नेम इज अँथनी गोन्साल्विस]]''
|-
| [[प्रतीक बब्बर]] || ''[[जाने तू... या जाने ना]]''
|-
| [[राजीव खंडेलवाल]] || ''[[आमिर (चित्रपट)|आमिर]]''
|-
| [[सिकंदर खेर]] || ''[[वुडस्टॉक व्हिला]]''
|-
| २०१० || colspan="3" style="background:#FFAA00; text-align:center;" | ''''' पुरस्कार नाही '''''
|-
| rowspan=2| २०११ || rowspan=2| [[File:Ranveer_Singh_in_2023_(1)_(cropped).jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[रणवीर सिंग]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[बँड बाजा बारात]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=5| २०१२ || rowspan=5| [[File:Vidhyut_%26_Arhaan_at_the_launch_of_%27Big_RTL_Thrill%27_channel.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[विद्युत जामवाल]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[फोर्स]]''
|-
| [[गुलशन देवय्या]] || ''[[दम मारो दम]], [[शैतान]], [[दॅट गर्ल इन येल्लो बुटास]]''
|-
| [[पार्थो गुप्ते]] || ''[[स्टॅन्ले का डब्बा]]''
|-
| [[राणा दग्गुबती]] || ''[[दम मारो दम]]''
|-
| [[शिव पंडित]] || ''[[शैतान]]''
|-
| rowspan=4| २०१३ || rowspan=4| [[File:Ayushmann_Khurrana_promotos_%27Anek%27_in_Delhi_(1)_(cropped).jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[आयुष्मान खुराणा]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[विकी डोनर]]''
|-
| [[अर्जुन कपूर]] || ''[[इशकजादे]]''
|-
| [[सिद्धार्थ मल्होत्रा]] || ''[[स्टुडंट ऑफ द इयर]]''
|-
| [[वरुण धवन]] || ''[[स्टुडंट ऑफ द इयर]]''
|-
| rowspan=2| २०१४ || rowspan=2| [[File:Dhanush 62nd Britannia Filmfare South Awards (cropped).jpg |80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[धनुष (अभिनेता)|धनुष]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[रांझणा]]''
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| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| २०१५ || rowspan=2| [[File:Fawad Khan promotes 'Khoobsurat' on Red FM 93.5.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[फवाद खान]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[खूबसूरत]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=2| २०१६ || rowspan=2| [[File:Sooraj_Pancholi_graces_Vogue_Beauty_Awards_2017.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[सुरज पांचोली]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[हीरो (२०१५ चित्रपट)|हिरो]]''
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| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
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| rowspan=2| २०१७ || rowspan=2| [[File:Diljit_Dosanjh_grace_the_media_meet_of_Phillauri_4_(cropped).jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[दिलजीत दोसांझ]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[उडता पंजाब]]''
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| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| २०१८ || colspan="3" style="background:#FFAA00; text-align:center;" | ''''' पुरस्कार नाही '''''
|-
| rowspan=2| २०१९ || rowspan=2| [[File:Ishaan_Khatter_snapped_promoting_his_film_Pippa.jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[ईशान खट्टर]] || style="background:#FAEB86;" | ''बियॉन्ड द क्लाउड्स'' आणि ''धडक''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=6| २०२० || rowspan=6| [[File:Abhimanyu-Dassani-graces-the-Dadasaheb-Phalke-International-Film-Festival-Awards-2022-(cropped).jpg|80px]]
! style="background:#FAEB86;" | [[अभिमन्यू दासानी]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[मर्द को दर्द नहीं होता]]''
|-
| [[मीझान जाफरी]] || ''[[ मलाल]]''
|-
| [[सिद्धांत चतुर्वेदी]] || ''[[गली बॉय]]''
|-
| [[वर्धन पुरी]] || ''[[ये साली आशिकी]]''
|-
| [[विशाल जेठवा]] || ''[[मर्दानी २]]''
|-
| [[झहीर इक्बाल]] || ''[[नोटबुक]]''
|-
| २०२१ || colspan="3" style="background:#FFAA00; text-align:center;" | ''''' पुरस्कार नाही '''''
|-
| rowspan=2| २०२२ || rowspan=2| -
! style="background:#FAEB86;" | [[एहान भट]] || style="background:#FAEB86;" | ''[[९९ सॉग्स]]''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
| rowspan=4| २०२३ || rowspan=4| -
! style="background:#FAEB86;" | [[अंकुश गेडाम]] || style="background:#FAEB86;" | ''झुंड''
|-
|-
| [[अभय मिश्र]] || ''[[डॉक्टर जी]]''
|-
| [[पालिन कबाक]] || ''[[भेडिया]]''
|-
| [[शंतनू माहेश्वरी]] || ''[[गंगुबाई काठियावाडी]]''
|-
| rowspan=2| २०२४ || rowspan=2| -
! style="background:#FAEB86;" | [[आदित्य रावल]] || style="background:#FAEB86;" | ''फराज''
|-
| colspan=2| ''अन्य नामांकन नाही''
|-
|}
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
{{फिल्मफेअर पुरस्कार}}
[[वर्ग:फिल्मफेर पुरस्कार|पुरुष पदार्पण]]
[[वर्ग:अभिनेत्यांसाठी पुरस्कार]]
117bsw0nvdb7b4fgu5hvtqf06b7aiap
सिवास प्रांत
0
143533
2709749
1189247
2026-09-15T14:30:14Z
अभय नातू
206
नवीन वर्ग घातला - [[WP:HC|हॉटकॅट]] वापरले
2709749
wikitext
text/x-wiki
{{माहितीचौकट राजकीय विभाग
| नाव = सिवास प्रांत
| स्थानिकनाव =Sivas ili
| प्रकार = [[तुर्कस्तानचे प्रांत|तुर्कस्तानचा प्रांत]]
| ध्वज =
| चिन्ह =
| नकाशा = Sivas in Turkey.svg
| देश = तुर्कस्तान
| राजधानी = [[सिवास]]
| क्षेत्रफळ = २८,४८८
| लोकसंख्या = ६,२३,५३५
| घनता = २२.४
| वेबसाईट = [http://www.sivas.gov.tr/ sivas.gov.tr]
}}
[[चित्र:Sivas districts.png|300 px|इवलेसे|सिवास प्रांतामधील जिल्ह्यांचा विस्तृत नकाशा (तुर्की भाषा)]]
'''सिवास''' ([[तुर्की भाषा|तुर्की]]: Sivas ili) हा [[तुर्कस्तान]] देशामधील एक [[तुर्कस्तानचे प्रांत|प्रांत]] आहे. तुर्कस्तानच्या मध्य भागात वसलेल्या ह्या प्रांताची लोकसंख्या सुमारे ६.२ लाख आहे. [[सिवास]] ह्याच नावाचे शहर ह्या प्रांताची राजधानी आहे.
==बाह्य दुवे==
{{कॉमन्स वर्ग|Sivas Province|{{लेखनाव}}}}
*[http://www.sivas.gov.tr/ अधिकृत संकेतस्थळ]
{{तुर्कस्तानचे प्रांत}}
[[वर्ग:तुर्कस्तानचे प्रांत]]
[[वर्ग:सिवास प्रांत|*]]
gfglbr35dnlksf6uj7ub1wlzx0cqtzg
एर युरोपा
0
166536
2709874
2682067
2026-09-16T04:51:27Z
InternetArchiveBot
130355
Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5
2709874
wikitext
text/x-wiki
{{माहितीचौकट विमान सेवा
| नाव = एर युरोपा
| चित्र = Air_Europa_Logo.png
| चित्र_आकारमान = 200 px
| IATA = UX
| ICAO = AEA
| callsign = EUROPA
| स्थापना = १९८६
| सुरुवात =
| बंद =
| विमानतळ = [[अदोल्फो सुआरेझ माद्रिद–बाराहास विमानतळ]] ([[माद्रिद]])
| मुख्य_शहरे = [[बार्सिलोना–एल प्रात विमानतळ]] ([[बार्सिलोना]])<br />[[तेनेरीफ]]
| फ्रिकवंट_फ्लायर =
| एलायंस = [[स्कायटीम]]
| उपकंपन्या =
| विमान संख्या = ४७
| मुख्य कंपनी =
| ब्रीदवाक्य = ''Your travel companion''
| मुख्यालय = [[मायोर्का]], [[बालेआरिक द्वीपसमूह]]
| मुख्य व्यक्ती =
| संकेतस्थळ = [http://www.aireuropa.com/ www.aireuropa.com]
}}
[[चित्र:Boeing 737-883, Air Europa JP6608033.jpg|250 px|इवलेसे|[[लियोनार्दो दा विन्ची-फ्युमिचिनो विमानतळ|रोम विमानतळ]]ावरील एर युरोपाचे [[बोइंग ७३७]] विमान]]
'''एर युरोपा''' ({{lang-es|Air Europa Líneas Aéreas, S.A.U.}}) ही [[स्पेन]] देशामधील [[आयबेरिया (विमान कंपनी)|आयबेरिया]] व व्ह्युएलिंग खालोखाल तिसऱ्या क्रमांकाची मोठी [[विमान वाहतूक कंपनी]] आहे. [[भूमध्य समुद्र]]ामधील [[मायोर्का]] बेटावर मुख्यालय असलेली एर युरोपा प्रामुख्याने [[युरोप]], [[उत्तर अमेरिका]], [[दक्षिण अमेरिका]], [[कॅरिबियन]] व [[कॅनरी द्वीपसमूह]] येथे प्रवासी विमानसेवा पुरवते.
२००७ सालापासून एर युरोपा [[स्कायटीम]] समूहाचा सदस्य आहे.
== विमान ताफा ==
[[File:Boeing 787-8 ‘EC-MIG’ Air Europa (27188864746).jpg|thumb|200px|एर युरोपाचे [[बोईंग ७८७|बोईंग ७८७-८]]]]
[[File:Air Europa B737-800 (EC-JHK) @ ZRH, May 2011.jpg|thumb|200px|[[स्कायटीम]] विशेष रंगसंगतीतील एर युरोपाचे [[बोईंग ७३७ नेक्स्ट जनरेशन|बोईंग ७३७-८००]]]]
[[File:Air_Europe_Embraer_195_EC-LCQ.jpg|thumb|200px|विमान कंपनीच्या जुन्या रंगसंगीतील एर युरोपाचे [[एम्ब्राएर ई१९५]]]]
[[File:Airbus A330-343 ‘EC-MHL’ Air Europa (27223009785).jpg|thumb|200px|एर युरोपाचे एक निवृत्त झालेले [[एरबस ए३३०-३००]]]]
=== सध्याचा विमान ताफा ===
नोव्हेंबर २०२५ च्या सुमारासची एर युरोपाची विमाने:<ref>{{cite magazine |title=Global Airline Guide 2025 - Air Europa |magazine=Airliner World |date=सप्टेंबर २०२५ |page=७५}}</ref><ref name="Spain's Air Europa to add five B787-9s, ten B737 MAX">{{cite web |title=Spain's Air Europa to add five B787-9s, ten B737 MAX |url=https://www.ch-aviation.com/portal/news/118966-spains-air-europa-to-add-five-b787-9s-ten-b737-max |publisher=ch-aviation GmbH |date=१ सप्टेंबर २०२२ |archive-url=https://web.archive.org/web/20230730133955/https://www.ch-aviation.com/portal/news/118966-spains-air-europa-to-add-five-b787-9s-ten-b737-max |archive-date=३० जुलै २०२३ |access-date=२ सप्टेंबर २०२२ |url-status=live }}</ref><ref name=":0">{{Cite web |title=Commercial |url=https://www.boeing.com/commercial#orders-deliveries |access-date=२०२५-१२-१० |website=www.boeing.com |language=en-US}}</ref>
{| class="wikitable" style="margin:1em auto; text-align:center;"
|+ एर युरोपा विमान ताफा
|- style="background:#00b2e3; color:white;"
!rowspan="2"|विमान
!rowspan="2"|सेवेत
!rowspan="2"|आदेश
!colspan="3"|प्रवासी<ref>{{Cite web |title=Seats {{!}} Air Europa Spain |url=https://www.aireuropa.com/us/en/aea/aexperience/services/seats.html |archive-url=https://web.archive.org/web/20250131094746/https://www.aireuropa.com/us/en/aea/aexperience/services/seats.html |archive-date=३१ जानेवारी २०२५ |access-date=२०२५-१०-०९ |website=us |language=en |url-status=live }}</ref>
!rowspan="2"|नोंदी
|- style="background:#00b2e3; color:white;"
!<abbr title="Clase Business">जे</abbr>
!<abbr title="Clase Turista">वाय</abbr>
!एकूण
|-
|[[एरबस ए३५०|एरबस ए३५०-९००]]
|—
|४०
| colspan="3" |अद्याप जाहीर व्हायचे आहे
|<ref>{{Cite web |last=Varley |first=Len |date=२०२६-०१-२२ |title=Air Europa Formalises Order with Airbus for up to 40 A350-900s |url=https://aviationsourcenews.com/air-europa-formalises-order-with-airbus-for-up-to-40-a350-900s/ |access-date=२०२६-०१-२४ |website=AviationSource News |language=en-US |archive-date=2026-07-25 |archive-url=https://web.archive.org/web/20260725103104/https://aviationsourcenews.com/air-europa-formalises-order-with-airbus-for-up-to-40-a350-900s/ |url-status=dead }}</ref>
|-
|[[बोईंग ७३७-८००]]
|१४
|—
|—
|१८६
|१८६
|
|-
|[[बोईंग ७३७ मॅक्स ८]]
|४
|१६
|—
|१८९
|१८९
|मे २०२५ पासून वितरण सुरू.<ref>{{Cite web |title=Spain's Air Europa takes delivery of first B737-8|url=https://www.ch-aviation.com/news/154090-spains-air-europa-takes-delivery-of-first-b737-8|date=२६ मे २०२५|website=ch-aviation |language=en}}</ref>
|-
|[[बोईंग ७८७-८]]
|११
|—
|२२
|२७४
|२९६
|
|-
|[[बोईंग ७८७-९]]
|१८
|—
|३२
|३०७
|३३९<ref>{{Cite news|url=http://www.routesonline.com/news/38/airlineroute/275280/air-europa-schedules-787-9-argentina-service-in-march-2018/|title=Air Europa schedules 787-9 Argentina service in March 2018|date=२०१७|work=Routesonline|access-date=२०१७-१०-१८|language=en-GB}}</ref>
|
|-
!एकूण
!४७
!५६
!colspan="4" class=''unsortable''|
|}
=== निवृत्त विमाने ===
एर युरोपाने यापूर्वी खालील विमाने चालवली होती:
{| class="wikitable" style="margin:1em auto; text-align:center;"
|+ एर युरोपा निवृत्त विमान ताफा
|- style="background:#00b2e3; color:white;"
!विमान
!सुरुवात
!निवृत्त
!नोंदी
|-
|[[एरबस ए३३०-२००]]<ref name="Spain's Air Europa to add five B787-9s, ten B737 MAX" />
|२००६
|२०२१
|
|-
|[[एरबस ए३३०-३००]]<ref name="Spain's Air Europa to add five B787-9s, ten B737 MAX" />
|२०१३
|२०२१
|
|-
|[[एरबस ए३४०-२००]]
|२००५
|२००६
|
|-
|[[एटीआर ४२-३००]]
|१९९६
|१९९७
|
|-
|[[बोईंग ७३७-३००]]
|१९८६
|२००३
|
|-
|[[बोईंग ७३७-४००]]
|१९९४
|२००५
|
|-
|[[बोईंग ७३७-६००]]
|२००३
|२००४
|
|-
|[[बोईंग ७५७-२००]]
|१९८७
|१९९८
|
|-
|[[बोईंग ७६७-२००]]
|१९९६
|२००१
|
|-
|[[बोईंग ७६७-३००ईआर]]
|२०००
|२०१२
|
|-
|[[ब्रिटिश एरोस्पेस एटीपी]]
|१९९६
|२००१
|
|-
|[[एम्ब्राएर ईआरजे १४५|एम्ब्राएर ईआरजे-१४५]]
|२०१२
|२०१७
|
|-
|[[एम्ब्राएर ई१९५]]
|२००८
|२०१७
|[[एर युरोपा एक्सप्रेस]] या उपकंपनीकडे हस्तांतरित.
|}
== अपघातांच्या घटना ==
[[File:Air Europa, EC-MTI, Boeing 787-9 Dreamliner.jpg|thumb|ईसी-एमटीआय (EC-MTI), हे विमान उड्डाण ०४५ च्या घटनेत समाविष्ट होते, नोव्हेंबर २०२२ मधील छायाचित्र]]
* १ जुलै २०२४ रोजी एर [[युरोपा फ्लाइट ०४५]] हे ईसी-एमटीआय (EC-MTI) नोंदणी असलेल्या [[बोईंग ७८७-९|बोईंग ७८७-९ ड्रीमलायनर]] प्रकारचे विमान <ref name="ASN045"/> [[स्पेन]]मधील [[माद्रिद-बाराहास विमानतळ|माद्रिद]] येथून [[उरुग्वे]]मधील [[कारास्को आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|माँटेव्हिडिओ]] कडे जाणारे नियोजित उड्डाण होते. [[अटलांटिक महासागर|अटलांटिक महासागरावरून]] प्रवास करत असताना यूटीसी वेळेनुसार पहाटे ०४:५० वाजता ३६,००० फूट उंचीवर विमानाला [[वातावरणातील खळबळ|तीव्र हवेच्या लाटांचा]] सामना करावा लागला. या घटनेनंतर विमान ब्राझीलमधील [[नाताल, रिओ ग्रांदे दो नॉर्ते|नाताल]] येथील [[ग्रेटर नाताल आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|ग्रेटर नाताल आंतरराष्ट्रीय विमानतळाकडे]] वळवण्यात आले, जिथे पहाटे ०५:३२ वाजता विमानाचे [[तात्काळ लँडिंग|सुरक्षित लँडिंग]] झाले. विमानातील ३३६ लोकांपैकी ४० जण जखमी झाले, ज्यांना रुग्णालयात दाखल करावे लागले. तसेच, विमानाचे अंतर्गत भाग मोठ्या प्रमाणावर खराब झाले होते ज्यासाठी दुरुस्तीची आवश्यकता होती. जखमींपैकी तीन प्रवासी आणि एका कर्मचाऱ्याला गंभीर दुखापत झाली होती.<ref name="ASN045">{{Cite web |last=Ranter |first=Harro |title=Accident Boeing 787-9 Dreamliner EC-MTI, Monday 1 July 2024 |url=https://asn.flightsafety.org/wikibase/390624 |access-date=२०२४-१२-२५ |website=asn.flightsafety.org}}</ref><ref>{{Citation |title=Accident: Europa B789 over Atlantic on Jul 1st 2024, severe turbulence injures 30 |author=Hradecky, S. |website=[[The Aviation Herald]] |year=२०२४ |url=https://avherald.com/h?article=51a96a28 |access-date=३० सप्टेंबर २०२४}}</ref><ref>{{cite web |title=40 people injured after Air Europa flight experiences heavy turbulence, diverted to Brazil |url=https://abcnews.go.com/International/air-europa-flight-turbulence/story?id=111595157 |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20240703110116/https://abcnews.go.com/International/air-europa-flight-turbulence/story?id=111595157 |archive-date=३ जुलै २०२४ |access-date=३ जुलै २०२४ |website=[[ABC News (United States)|ABC News]]}}</ref>
==बाह्य दुवे==
* [http://www.aireuropa.com/ अधिकृत संकेतस्थळ]
{{कॉमन्स|Air Europa|एर युरोपा}}
== संदर्भ आणि नोंदी ==
{{संदर्भयादी}}
{{स्कायटीम}}
[[वर्ग:स्पेनमधील विमानवाहतूक कंपन्या]]
[[वर्ग:स्कायटीम]]
8pko3wugl9rq61rntyeffukz0o4szdw
चंद्रकांत भोंजाळ
0
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2709725
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2026-09-15T12:21:04Z
Maheshbeauty
186554
2709725
wikitext
text/x-wiki
'''चद्रकांत भोंजाळ''' (जन्म: ११ जानेवारी १९५४) हे एक मराठी लेखक आणि अनुवादक आहेत. त्यांनी अनेक हिंदी-इंग्रजी पुस्तकांचे मराठी अनुवाद केले आहेत. त्यांनी प्रामुख्याने उर्दू, हिंदी लेखक सआदत अली मंटो यांच्या साहित्याचा अनुवाद केला आहे.
==पुस्तके==
{{col-begin}}
{{col-3}}
* दि अॅक्ट ऑफ लाइफ (अनुवादित आत्मकथन; मूळ लेखक - [[अमरीश पुरी]], ज्योती सभरवाल)
* अथांग रहस्य : जीवन तुमच्याकडून काय अपेक्षा करतं? (आध्यात्मिक, अनुवादित; मूळ लेखक - एनमैरी पोस्टमा)
* अमृतानुभव (तीन लघु कादंबऱ्या)
* आकाशवाणी आणि दूरदर्शन (बालसाहित्य)
* आख्यान (सदर लेखन संग्रह)
* आग अजून बाकी आहे (अनुवादित; मूळ लेखिका - चित्रा मुद्गल)
* उत्तरायण (कथासंग्रह, अनुवादित; मूळ लेखक - [[दामोदर खडसे]])
* उंदीर आणि मणूस
* एक होती राधा (अनुवादित; मूळ लेखक - सआदत हसन मंटो)
* कफन (अनुवादित)
* काही जनातलं काही मनातलं (लेखसंग्रह)
* कोलाहल (कादंबरी, अनुवादित; मूळ लेखक - [[दामोदर खडसे]])
{{col-3}}
* खंडित सूर्य (कादंबरी, अनुवादित; मूळ लेखक - [[दामोदर खडसे]])
* गप्पा सिनेमाच्या (अनुवादित; मूळ लेखक - [[जावेद अख्तर]], नसरीन मुन्नी कबीर)
* चालत दुरूनी आलों मागें (व्यक्तिचित्रण, अनुवादित; मूळ लेखक - राजेंद्र यादव)
* तप्त प्रवाह (अनुवादित कथासंग्रह; मूळ लेखक - भारत सासणे)
* तिसरा श्वास (अनुवादित; मूळ लेखक - कामतानाथ)
* त्यांचं आपलं सेम नसतं (अनुवादित; मूळ लेखिका - पुष्पा भारती)
* त्रिशंकू (कथासंग्रह, अनुवादित; मूळ लेखिका - [[मन्नू भंडारी]])
* दि ॲक्ट ऑफ लाईफ (अनुवादित; मूळ लेखक - अमरीश पुरी व ज्योती सभरवाल)
* धूळपेरणी (सदर लेखन संग्रह)
* नमन (लेखसंग्रह)
* नरक मसीहा (कादंबरी, अनुवादित; मूळ लेखक - भगवानदास मोरवाल)
* निलू, नीलिमा, निलोफर
{{col-3}}
* बिछड़े सभी बारी बारी (अनुवादित; मूळ लेखक - बिमल मित्र)
* ब्रेकिंग न्यूझ (संपादित - अजीत अंजुम, राजेंद्र यादव, रविंद्र त्रिपाठी)
* भय इथले संपत नाही : फाळणी एक दुःस्वप्न (कथासंग्रह, अनुवादित)
* मंटो हाजीर हो (अनुवादित; मूळ लेखक - सआदत हसन मंटो)
* मैथिलीची गोष्ट (कथासंग्रह, अनुवादित; मूळ लेखिका - सुधा अरोडा)
* लाल श्याम शहा : एका आदिवासीची जीवनकथा (कादंबरी, अनुवादित; मूळ लेखक - सुदीप ठाकूर)
* लोकशाहीची ऐशी तैशी (कादंबरी, अनुवादित; मूळ लेखक - विभूती नारायण राय)
* वासकसज्जा
* श्वास घेणारं आकाश
* सत्य (कथासंग्रह, अनुवादित; मूळ लेखिका - [[मन्नू भंडारी]])
* साक्षीदार (कादंबरी, अनुवादित; मूळ लेखक - जितेंद्र भाटिया)
* सौदामिनी (कादंबरी, अनुवादित; मूळ लेखिका - [[मन्नू भंडारी]])
{{col-end}}
{{DEFAULTSORT:भोंजाळ, चंद्रकांत}}
[[वर्ग:मराठी लेखक]]
[[वर्ग:मराठी अनुवादक]]
[[वर्ग:इ.स. १९५४ मधील जन्म]]
[[वर्ग:पुरुष चरित्रलेख]]
[[वर्ग:भाषांतरकार]]
mr9paebbyr6v0xhfh5qejmtpdc886s9
क्वीन आलिया आंतरराष्ट्रीय विमानतळ
0
192473
2709903
2415647
2026-09-16T10:14:09Z
InternetArchiveBot
130355
Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5
2709903
wikitext
text/x-wiki
{{माहितीचौकट विमानतळ
| name = क्वीन आलिया आंतरराष्ट्रीय विमानतळ
| nativename = مطار الملكة علياء الدولي
| nativename-a =
| nativename-r =
| image = Queen_Alia_International_Airport_-_New_Terminal_-_2013.JPG
| image-width =
| caption =
| IATA = AMM
| ICAO = OJAI
<center>{{Location map|जॉर्डन|width=250|float=center
|caption=|mark=Airplane_silhouette.svg|marksize=10
|label=AMM|position=bottom
|lat_deg=31|lat_min=43|lat_sec=21|lat_dir=N
|lon_deg=35|lon_min=59|lon_sec=36|lon_dir=E
}}<small>जॉर्डनमधील स्थान</small></center>
| type = जाहीर
| owner =
| operator = नागरी उड्डाण प्राधिकरण
| city-served = [[अम्मान]] महानगर क्षेत्र
| location = [[अम्मान]], [[जॉर्डन]]
| hub = [[मिडल ईस्ट एरलाइन्स]]<br />पेट्रा एरलाइन्स<br />रॉयल विंग्ज
| elevation-f = २,३९५
| elevation-m = ७३०
| coordinates =
| metric-rwy = y
| r1-number = 08R/26L
| r1-length-m = 3,600
| r1-length-f = 12,467
| r1-surface = कॉंक्रीट
| r2-number = 16/34
| r2-length-m = 3,600
| r2-length-f = 12,008
| r2-surface = कॉंक्रीट
| stat-year = २०१४
| stat1-header = उड्डाणे
| stat1-data = 67,959
| stat2-header = एकूण प्रवासी
| stat2-data = 70,89,000
| footnotes =
}}
'''क्वीन आलिया आंतरराष्ट्रीय विमानतळ''' ([[अरबी भाषा|अरबी]]: مطار الملكة علياء الدولي) {{विमानतळ संकेत|AMM|OJAI}} हा [[जॉर्डन]] देशामधील सर्वात मोठा [[विमानतळ]] आहे. हा विमानतळ राजधानी [[अम्मान]]च्या ३० किमी दक्षिणेस स्थित तो १९८३ पासून कार्यरत आहे. [[जॉर्डनचा राजा हुसेन]] ह्याची तिसरी पत्नी आलिया हिचे नाव ह्या विमानतळाला दिले गेले. [[रॉयल जॉर्डेनियन]] ह्या जॉर्डनच्या राष्ट्रीय [[विमान वाहतूक कंपनी]]चा मुख्य तळ येथेच स्थित आहे.
==विमानकंपन्या व गंतव्यस्थाने==
{{Airport-dest-list
|[[एजियन एरलाइन्स]]| [[अथेन्स आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|अथेन्स]]<ref name=amadeus>{{संकेतस्थळ स्रोत|title=Timetables|दुवा=https://www.amadeus.net/tools/timetables|accessdate=21 April 2014}}</ref>
<!-- -->
|[[एर आल्जेरी]] | [[अल्जीयर्स]]
<!-- -->
|[[एर अरेबिया]] | [[शारजा आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|शारजा]]
<!-- -->
|एर अरेबिया इजिप्त | [[अलेक्झांड्रिया]]
<!-- -->
|एर अरेबिया जॉर्डन | [[किंग फहाद आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|दम्मम]],<ref>http://airlineroute.net/2015/08/19/9p-dmm-sep15/</ref> [[एर्बिल]], [[किंग अब्दुलअझीझ आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|जेद्दाह]], [[कुवेत आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|कुवेत]], [[किंग खालिद आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|रियाध]],<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|दुवा=http://airlineroute.net/2016/04/07/9p-ruh-apr16/|title=http://airlineroute.net/2016/04/07/9p-ruh-apr16/|publisher=airlineroute|accessdate=7 April 2016}}</ref> [[शर्म अल-शेख]]<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|दुवा=http://airlineroute.net/2015/05/01/9p-may15/|title=एर Arabia Jordan Begins Operation from late-May 2015|publisher=|accessdate=4 June 2015}}</ref>
<!-- -->
|एर कैरो | [[अलेक्झांड्रिया]], [[सोहाग]]
<!-- -->
|[[एर फ्रान्स]] | [[चार्ल्स दे गॉल विमानतळ|पॅरिस]]
<!-- -->
|[[अलिटालिया]] | [[लियोनार्दो दा विन्ची-फ्युमिचिनो विमानतळ|रोम]]
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|[[आर्किया इस्रायल एरलाइन्स]] | [[बेन गुरियन विमानतळ|तेल अवीव]]
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|[[ऑस्ट्रियन एरलाइन्स]] | [[व्हियेना आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|व्हियेना]]<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत |url=http://www.starallianceemployees.com/no_cache/news/latest-news/news-details/article/tyrolean-to-merge-with-austrian-airlines-next-spring.html?tx_ttnews%5BbackPid%5D=28 |title=Tyrolean एरवेझ to merge with Austrian Airlines |access-date=2016-07-07 |archive-date=2015-02-06 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150206144334/http://www.starallianceemployees.com/no_cache/news/latest-news/news-details/article/tyrolean-to-merge-with-austrian-airlines-next-spring.html?tx_ttnews%5BbackPid%5D=28 |url-status=dead |आर्काईव्ह दिनांक=2015-02-06 |आर्काईव्ह दुवा=https://web.archive.org/web/20150206144334/http://www.starallianceemployees.com/no_cache/news/latest-news/news-details/article/tyrolean-to-merge-with-austrian-airlines-next-spring.html?tx_ttnews%5BbackPid%5D=28 }}</ref>
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|[[ब्रिटिश एरवेझ]] | [[लंडन हीथ्रो विमानतळ|लंडन-हीथ्रो]]
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|[[इजिप्तएर]] | [[कैरो आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|कैरो]]
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|[[एमिरेट्स]] | [[दुबई आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|दुबई]]
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|[[एतिहाद एरवेझ]] | [[अबु धाबी आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|अबु धाबी]]
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|[[फ्लायदुबई]] | [[दुबई]],<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत |दुवा=http://www.flyदुबई.com/en/news/article/flyदुबई-to-add-new-operations-from-dwc/ |title=flyदुबई to add new operations from DWC |date=4 August 2015 |website=[[flyदुबई]] |access-date=4 August 2015 }}{{मृत दुवा|date=November 2022 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref> [[दुबई आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|दुबई-International]]
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|[[फ्लायनास]] | [[किंग अब्दुलअझीझ आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|जेद्दाह]], [[किंग खालिद आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|रियाध]]
<!-- -->
|[[गल्फ एर]] | [[बहरैन आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|बहरैन]]
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|[[इराकी एरवेझ]] | [[बगदाद आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|बगदाद]], [[बसरा]], [[एर्बिल]], [[सुलेमानिया]]
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|[[जझीरा एरवेझ]] | [[कुवेत आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|कुवेत]]
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|[[जॉर्डन एव्हियेशन]] | [[बहरैन आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|बहरैन]]
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|[[कुवेत एरवेझ]] | [[कुवेत आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|कुवेत]]
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|[[लुफ्तान्सा]] | [[फ्रांकफुर्ट विमानतळ|फ्रांकफुर्ट]]
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|[[मिडल ईस्ट एरलाइन्स]] | [[बैरूत आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|बैरूत]]
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|[[ओमान एर]] | [[मस्कत आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|मस्कत]]
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|[[पेगासस एरलाइन्स]] | [[अंकारा]]<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|दुवा=http://airlineroute.net/2016/02/23/pc-esbamm-s16/|title=Pegasus Adds Ankara – Amman Service from late-March 2016|publisher=airlineroute|accessdate=23 February 2016}}</ref>
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|[[कतार एरवेझ]] | [[हमाद आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|दोहा]]
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|रॉयल फाल्कन | [[कैरो आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|कैरो]], [[एर्बिल]], [[नजफ]]
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|{{nowrap|[[रॉयल जॉर्डेनियन]]}} | [[अबु धाबी आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|अबु धाबी]], [[अल्जीयर्स]], [[श्चिफोल विमानतळ|ॲम्स्टरडॅम]], [[अंकारा]], [[अकाबा]], [[अथेन्स आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|अथेन्स]], [[बगदाद आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|बगदाद]], [[सुवर्णभूमी विमानतळ|बँकॉक]], [[बार्सिलोना–एल प्रात विमानतळ|बार्सिलोना]], [[बसरा]], [[बैरूत आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|बैरूत]], [[बर्लिन टेगल विमानतळ|बर्लिन]], [[कैरो आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|कैरो]], [[ओ'हेर आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|शिकागो]], [[किंग फहाद आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|दम्मम]], [[डेट्रॉईट मेट्रोपॉलिटन वेन काउंटी विमानतळ|डेट्रॉईट]], [[हमाद आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|दोहा]], [[दुबई आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|दुबई]], [[एर्बिल]], [[फ्रांकफुर्ट विमानतळ|फ्रांकफुर्ट]], [[जिनिव्हा आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|जिनिव्हा]], [[क्वांगचौ बैयून आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|क्वांगचौ]], [[हॉंग कॉंग आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|हॉंगकॉंग]], [[इस्तंबूल अतातुर्क विमानतळ|इस्तंबूल]], [[सोकर्णो-हत्ता आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|जाकार्ता]], [[किंग अब्दुलअझीझ आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|जेद्दाह]], [[खार्टूम]], [[क्वालालंपूर आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|क्वालालंपूर]], [[कुवेत आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|कुवेत]], [[लार्नाका]], [[हीथ्रो विमानतळ|लंडन]], [[माद्रिद बराहास आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|माद्रिद]], [[मदीना]], [[मॉंत्रियाल–पियेर एलियट त्रूदो आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|मॉंत्रियाल]], [[दोमोदेदोवो आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|मॉस्को-दोमोदेदोवो]], [[म्युनिक विमानतळ|म्युनिक]], [[नजफ]],<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|दुवा=http://airlineroute.net/2015/06/08/rj-njf-jun15/|title=Royal Jordan Adds Najaf Service from mid-June 2015|publisher=Airlineroute.net|date=8 June 2015|accessdate=8 June 2015}}</ref> [[जॉन एफ. केनेडी आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|न्यू यॉर्क]], [[चार्ल्स दि गॉल विमानतळ|पॅरिस]], [[किंग खालिद आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|रियाध]], [[लियोनार्दो दा विन्ची-फ्युमिचिनो विमानतळ|रोम]], [[शर्म अल-शेख]], [[सुलेमानिया]], [[ताबुक]],<ref>http://airlineroute.net/2015/07/07/rj-tuu-jul15/</ref> [[बेन गुरियन आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|तेल अवीव]], [[ट्युनिस]], [[व्हियेना आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|व्हियेना]], [[झ्युरिक विमानतळ|झ्युरिक]]
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|[[सौदिया]] | [[जेद्दाह]], [[रियाध]]
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|[[तारोम]] | [[हेन्री कोआंडा आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|बुखारेस्ट]]
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|[[तुर्की एरलाइन्स]] | [[इस्तंबूल अतातुर्क विमानतळ|इस्तंबूल]]
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|[[यू.एम. एरलाइन्स]] | [[बोरिस्पिल आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|क्यीव]]<br>'''मोसमी:''' [[खार्कीव्ह]]
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|{{nowrap|[[युक्रेन आंतरराष्ट्रीय एरलाइन्स]]}} | [[बोरिस्पिल आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|क्यीव]]
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|[[येमेनिया]] | [[एडन]], [[सना]]
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|[[झाग्रोसजेट]] | [[एर्बिल]]
}}
==बाह्य दुवे==
*[http://www.qaiairport.com/en/ अधिकृत संकेतस्थळ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160630144351/http://www.qaiairport.com/en |date=2016-06-30 }}
{{Commons category|Queen Alia International Airport|{{लेखनाव}}}}
== संदर्भ आणि नोंदी ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:अम्मान|वि]]
[[वर्ग:जॉर्डनमधील विमानतळ]]
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केतकी मोडक
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wikitext
text/x-wiki
{{माहितीचौकट व्यक्ती
| चौकट_रुंदी =
| नाव = केतकी मोडक
| चित्र =
| चित्र_आकारमान =
| चित्रशीर्षक =
| चित्रशीर्षक_पर्याय =
| जन्मनाव =
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| मृत्यू_दिनांक =
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| कलेवर_सापडलेले_स्थान =
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| चिरविश्रांतिस्थान_अक्षांश_रेखांश =
| निवासस्थान = [[पुणे]]
| राष्ट्रीयत्व = भारतीय
| टोपणनावे =
| वांशिकत्व =
| नागरिकत्व =
| शिक्षण = एम.ए. (मराठी), एम.एड., पीएच.डी.
| प्रशिक्षणसंस्था =
| पेशा = प्राध्यापिका, लेखिका, भाषांतरकार
| कारकीर्द_काळ =
| मालक =
| प्रसिद्ध_कामे =
| मूळ_गाव =
| पगार =
| निव्वळ_मालमत्ता =
| उंची =
| वजन =
| ख्याती =
| पदवी_हुद्दा =
| कार्यकाळ =
| पूर्ववर्ती =
| परवर्ती =
| राजकीय_पक्ष =
| विरोधक =
| संचालकमंडळ =
| धर्म =
| अनुयायी = श्रीअरविंद आणि श्रीमाताजी यांच्या अनुयायी
| जोडीदार =
| अपत्ये =
| वडील =
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| नातेवाईक =
| पुरस्कार =
| स्वाक्षरी =
| स्वाक्षरीशीर्षक_पर्याय =
| संकेतस्थळ =
| तळटिपा =
| संकीर्ण =
}}
'''डॉ. केतकी मोडक''' (जन्म: १९६८) या मराठीतील लेखिका, भाषांतरकार आहेत, संतसाहित्याच्या अभ्यासक आहेत. आणि मराठी भाषेच्या प्राध्यापिका होत्या. इतिहासलेखन केले आहे.
==शिक्षण==
मोडक यांनी एम.ए (मराठी), एम.एड, पीएच.डी. या पदव्या मिळवल्या आहेत. त्यांनी पीएच.डी.च्या प्रबंधासाठी 'मराठी संत साहित्यातील नाथप्रतिपादित सोऽहम् साधना' या विषयावर संशोधन केले. हे संशोधन करतानाच त्यांनी संत [[मुक्ताबाई]] यांच्या वाङ्मयावरही संशोधन करून ग्रंथलेखन केले.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत |दुवा=http://shodhganga.inflibnet.ac.in/handle/10603/153816 |title=Shodhganga@INFLIBNET: Marathi santsahityatil nathpratipadit soham sadhna_ek abhyas |भाषा=मराठी}}</ref>
==कारकीर्द==
* मोडक या सेवानिवृत्तीपूर्वी (२०२३) [[पुणे|पुण्यातील]] [[म.ए.सो. गरवारे कॉलेज ऑफ कॉमर्स|महाराष्ट्र एज्युकेशन सोसायटीच्या गरवारे कॉलेज ऑफ कॉमर्स]] येथे मराठी भाषेचे अध्यापन करत असत. तसेच नोव्हेंबर २००९ ते मे २०२२ या कालावधीत त्या उपप्राचार्य पदावर कार्यरत होत्या. त्या '[[महाराष्ट्र एज्युकेशन सोसायटी]]'च्या आजीव सदस्य मंडळाच्या आणि नियामक मंडळाच्या सदस्य होत्या.
* Principles of Integral Education and its possible implementation in existing educational system या विषयावर त्यांनी [[विद्यापीठ अनुदान मंडळ|विद्यापीठ अनुदान मंडळा]]<nowiki/>कडून मिळालेल्या अनुदानातून लघुसंशोधन प्रकल्प सादर केला आहे.
* [[श्रीअरविंद सोसायटी]], [[पुडुचेरी]] येथून प्रकाशित होणाऱ्या [[अभीप्सा (मासिक)|अभीप्सा]] (अर्थ = Aspiration towards Divine) या मासिकाच्या जानेवारी २०१८ पासून त्या संपादिका आहेत. या मासिकामध्ये [[अरविंद घोष|श्रीअरविंद]] व [[मीरा अल्फासा|श्रीमाताजी]] यांच्या इंग्रजी साहित्याचा अनुवाद प्रकाशित केला जातो.
* श्रीअरविंद व श्रीमाताजी यांच्या साहित्याला वाहिलेल्या [https://auromarathi.org/ auromarathi.org] या संकेतस्थळाच्या आणि [https://www.youtube.com/@auromarathi682 ऑरोमराठी] या युट्यूब चॅनेलच्या त्या व्यवस्थापक म्हणून कार्यरत आहेत.
==पुस्तके==
* इ.स. २००५ साली प्रथम प्रकाशित '[[कडकडोनि वीज निमाली ठायींचे ठायीं (संत मुक्ताबाई: व्यक्ती आणि वाङ्मय)]]' या संशोधन ग्रंथात [[संत मुक्ताबाई|संत मुक्ताबाईंच्या]] जीवनचरित्र, कार्यकर्तृत्व, त्यांचे वाङ्मय, आणि इतर समकालीन व उत्तर कालीन मराठी संतांवरील प्रभाव यांचा शोध घेतला आहे.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत |दुवा=https://archive.org/details/KadkadoniVijNimaleeThayeecheThayee |title=Kadkadoni Vij Nimalee Thayeeche Thayee | संकेतस्थळ=archive.org |अॅक्सेसदिनांक=४ नोव्हेंबर २०२१}}</ref> संत मुक्ताबाईंना नेमके कोणते गोरोबा भेटले आणि गोरोबांना भेटलेल्या मुक्ताबाई आणि [[ज्ञानेश्वर]] भगिनी संत मुक्ताबाई या व्यक्ती दोन की एकच या विषयाचाही या ग्रंथाच्या माध्यमातून शोध घेतला गेला आहे. संत मुक्ताबाईंच्या समग्र अभंगांचा अर्थ प्रथमच या ग्रंथाच्या माध्यमातून उपलब्ध करून दिला गेला आहे.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=http://www.bookganga.com/Preview/BookPreview.aspx?BookId=5182967898442406387&PreviewType=books|title=Kadakadoni Veej Nimali Thayinche Thayi|website=www.bookganga.com|access-date=2018-04-25}}</ref>
* '[[उपयोजित मराठी (डॉ.गं.ना.जोगळेकर कृतज्ञताग्रंथ)]]', सहसंपादक आणि सहलेखिका, ऑगस्ट २०१२, [[पद्मगंधा प्रकाशन]] <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=http://www.bookganga.com/Preview/BookPreview.aspx?BookId=4946361744590071250&PreviewType=books|title=Upyojit Marathi|website=www.bookganga.com|access-date=2018-04-25}}</ref>
* '[[ध्यासपंथे चालता (इतिहास-ग्रंथ)|ध्यासपंथे चालता]]' ([[महाराष्ट्र एज्युकेशन सोसायटी]]<nowiki/>चा १६० वर्षांचा इतिहास), फेब्रुवारी २०२२
* [[पूर्णयोग|पूर्णयोगां]]<nowiki/>तर्गत ध्यान: (श्रीअरविंद आणि श्रीमाताज<nowiki/>ी यांच्या विचारांचे संकलन) - किंडल आवृत्ती, ऑगस्ट २०२६, ASIN ''': ''' B0HDSXRYGC
* महायोगी श्रीअरविंद विरचित [[सावित्री: एक आख्यायिका आणि एक प्रतीक|सावित्री महाकाव्य]] - अ<nowiki/>ल्प परिचय - किंडल आवृत्ती, ऑगस्ट २०२६, ASIN ''': ''' B0HFN91KQD
* [[सोऽहम् (साधना)|सोऽहम साधना]] - (स्वरूप आणि महती) - किंडल आवृत्ती<nowiki/>, सप्टेंबर २०२६, ASIN ''':''' B0HJCMDXS6
== पुरस्कार व गौरव ==
* 'कडकडोनि वीज निमाली ठायींचे ठायीं (संत मुक्ताबाई: व्यक्ती आणि वाङ्मय)' या ग्रंथाला [[महाराष्ट्र साहित्य परिषद]], [[महाराष्ट्र तत्त्वज्ञान परिषद]], [[पुणे नगर वाचन मंदिर]], [[इतिहास संशोधन मंडळ, संगमनेर]] आणि [[ज्ञान प्रबोधिनी प्रशाला|ज्ञानप्रबोधिनी (निगडी)]] या संस्थांचे पुरस्कार प्राप्त झाले आहेत.
* 'उपयोजित मराठी (डॉ.गं.ना.जोगळेकर कृतज्ञताग्रंथ)' - [[सावित्रीबाई फुले पुणे विद्यापीठ|सावित्रीबाई फुले पुणे विद्यापीठाने]] या ग्रंथास संदर्भ ग्रंथ म्हणून मान्यता दिलेली आहे.<ref>सावित्रीबाई फुले पुणे विद्यापीठ अभ्यासक्रम २०१९</ref>
* '[[ध्यासपंथे चालता (इतिहास-ग्रंथ)|ध्यासपंथे चालता]]' - या [https://www.youtube.com/watch?v=B6Fx3jPwoH4 इतिहास-ग्रंथांचे प्रकाशन] फेब्रुवारी २०२२ मध्ये भारताचे उपराष्ट्रपती मा.श्री. [[व्यंकय्या नायडू]] यांच्या हस्ते दिल्ली येथे करण्यात आले.
{{श्रीअरविंद व श्रीमाताजी यांचे कार्य}}
==संदर्भ==
{{संदर्भयादी}}
{{DEFAULTSORT:मोडक, केतकी}}
[[वर्ग:मराठी लेखिका]]
[[वर्ग:स्त्री चरित्रलेख]]
[[वर्ग:मराठी संपादक]]
[[वर्ग:इ.स. १९६८ मधील जन्म]]
[[वर्ग:अरविंद घोष यांचे साहित्य]]
[[वर्ग:संत साहित्य]]
[[वर्ग:मराठी इतिहासकार]]
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गांधीतीर्थ
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2709905
wikitext
text/x-wiki
'''गांधीतीर्थ''' हे [[जळगाव]] शहरातले एक निसर्गरम्य ठिकाण आहे.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.mkgandhi.org/gandhiyatra/gandhi-teerth-jalgaon.html|title=Gandhi Teerth, Jalgaon {{!}} Gandhi Tourist Places|website=www.mkgandhi.org|language=en|access-date=2021-10-02}}{{मृत दुवा|date=September 2026 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref>
==परिसर==
या ठिकाणी एका टेकडीवजा भागांत विविध प्रकारच्या झाडांनी, वेलींनी बहरलेला परिसर आहे. आंबा, [[गुलमोहर]], [[कडुनिंब]], विविध रंगांच्या [[बोगनवेल|बोगनवेली]] व आणखी बऱ्याच प्रकारचे वृक्ष या ठिकाणी डोलताना दिसतात. गांधीतीर्थाच्या टेकडीवर [[भवरलाल जैन|भंवरलाल जैन]] यांनी सुरू केलेला आंतरराष्ट्रीय उद्योग समूह आहे. या समूहातर्फे फळांवर प्रक्रिया करणे, कांदा निर्जलीकरण, टिश्यू्कल्चरने केळीच्या झाडांची रोपे तयार करणे, शेतकऱ्यांना शेतीविषयक मार्गदर्शन करणे, शेतीची अवजारे बनविणे, बायोगॅस निर्मिती, ठिबक सिंचन, झाडांसाठी खत बनविणे अशी विविध प्रकारची कामे चालतात.
==स्वरूप==
चित्रपट, चित्रे व पुतळे यांच्या माध्यमांतून महात्मा गांधींचे जीवन दर्शविणारे अद्ययावत वातानुकूलित संग्रहालय आहे.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.esakal.com/uttar-maharashtra/jalgaon-jain-gandhitirth-penting-canda-242555|title=esakal {{!}} जळगावचे "गांधीतीर्थ' व्हाया मुंबई पोहोचले कॅनडा! |website=www.esakal.com|access-date=2021-10-02}}</ref> गांधी संदर्भांतील आणि त्यांना आवडणाऱ्या विषयांतील अनेक ग्रंथ येथे आहेत. येथे अभ्यासकांसाठी आरामदायी खोल्या आणि अभ्यासिका सुद्धा आहेत.
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:जळगाव]]
[[वर्ग:महात्मा गांधी यांच्या नावे असलेल्या गोष्टी]]
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कोर्नेलिया सोराबजी
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Depot, KG
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/* संदर्भ */
2709728
wikitext
text/x-wiki
{{विकिकरण}}
'''कोर्नेलिया सोराबजी''' ([[१५ नोव्हेंबर]], [[इ.स. १८६६|१८६६]]:[[देवळाली]], [[नाशिक जिल्हा]], [[महाराष्ट्र]] - [[६ जुलै]], [[इ.स. १९५४|१९५४]]) ह्या [[भारत|भारतातील]] पहिल्या महिला वकील होत्या. त्या [[मुंबई विद्यापीठ|मुंबई विद्यापीठातील]] प्रथम महिला पदवीधर व [[ऑक्सफर्ड विद्यापीठ|ऑक्सफर्ड विद्यापीठात]] कायदा शिकविणाऱ्या पहिल्या महिला होत्या.
{{बदल}}
==आयुष्य आणि शिक्षण==
देवळालीमध्ये पारशी कुटुंबात जन्मलेल्या, एक ब्रिटिश दांपत्याने दत्तक व उठावलेल्या रेव्हरंड सॉर्बजी करसेजी आणि त्याची पत्नी फ्रान्सिना फोर्ड यांच्या नऊ मुलांपैकी एक होती. तिचे वडील एक धर्मप्रचारक होते आणि सोराबजींनी दावा केला की बॉम्बे विद्यापीठाने महिलांना त्यांच्या पदवी कार्यक्रमात प्रवेश देण्यास ते प्रमुख व्यक्ति होते. [5] तिच्या आईने पुना (आता पुणे) मध्ये अनेक मुलींच्या शाळा स्थापन करण्यास मदत केली. [6] तिच्या प्रभावशाली सामाजिक स्थितीचा भाग म्हणून, ती वारसा आणि मालमत्ता अधिकारांशी संबंधित असलेल्या प्रकरणांमध्ये स्थानिक महिलांनी सहसा सल्ला घेतला होता. सोराबजी यांच्या नंतरच्या शैक्षणिक आणि कारकीर्द निर्णयांतील अनेकांनी तिच्या आईवर खूप प्रभाव पडला.
कॉर्नेलिया सॉर्बजीची पाच हयात आणि एक भाऊ आणि आणखी दोन भाऊ होते ज्यांचे बालपणाने निधन झाले. [7] सुरुवातीला त्यांनी बालगाल आणि नंतर पुणे येथे त्यांचे बालपण ठेवले. तिने घरी आणि मिशन शाळांमध्ये दोन्ही शिक्षण प्राप्त.
तिने डेक्कन कॉलेजमध्ये प्रवेश घेतला आणि आपल्या शेवटच्या अंकाच्या परीक्षेत प्रेसिडेन्सीमध्ये अव्वल स्थान मिळविण्याचा दावा केला, ज्यामुळे तो इंग्लंडमध्ये आणखी अभ्यास करण्यासाठी तिला एक सरकारी शिष्यवृत्ती मिळेल. सोराबजी यांच्या म्हणण्यानुसार, त्यांना शिष्यवृत्ती नाकारण्यात आली आणि त्याऐवजी गुजरातमधील एका पुरूष महाविद्यालयात इंग्रजी प्राध्यापक म्हणून तात्पुरती स्थिती होती. [8] बॉम्बे युनिव्हर्सिटीची पहिली महिला पदवीधर झाल्यानंतर, सोराबजींनी 1888 मध्ये राष्ट्रीय शिक्षण संस्थेला तिच्या शिक्षणाची पूर्णता करण्यासाठी पत्रिकेत लिहिले. फ्लॉरेन्स नाइटिंगेल, सर विल्यम वेडेरबर्न आणि इतरांप्रमाणे मरीया हॉबहाउस (ज्याचे पती आर्थर भारत परिषदेचे सदस्य होते) आणि ॲडलेड मॅनिंग यांनी या मोहिमेत भाग घेतला होता. 18 9 8 मध्ये सोराबजी इंग्लंडला आले आणि मॅनिंग व हॉबहाउसमध्ये राहिले. [9] 18 9 2 मध्ये, ऑक्सफोर्ड येथील सोर्मरील महाविद्यालयात बॅचलर ऑफ सिव्हिल लॉज परीक्षा घेण्यासाठी मोठ्या प्रमाणावर आपल्या वडिलांच्या याचिकेवर काँग्रेसच्या डिक्रीद्वारे विशेष परवानगी देण्यात आली होती. [4]
==कायदेशीर कारकीर्द==
लिंकलेन्स इन येथे कॉर्नेलिया सोराबजीचा दिवा, २०१२ ग्रेशम स्पेशल लेक्चरमध्ये घेतला
१८९४ साली भारतात परतल्यावर, पद्पननाशन्सच्या वतीने स्त्रिया आणि परदेशातील स्त्रियांना बाहेरच्या पुरुष जगाशी संवाद साधण्यास मनाई करण्यात आली. बऱ्याच बाबतीत, या महिलांकडे सिंहाचा जास्तीत जास्त मालकी हक्क होता परंतु त्यांना संरक्षण देण्यासाठी आवश्यक कायदेशीर तज्ञांचाही उपयोग झाला नाही. काठीयावाड आणि इंदोर शस्त्रांच्या ब्रिटिश कारभारापूर्वी पुरदनाशिनच्या वतीने सोरबजींना विशेष परवानगी देण्यात आली होती, परंतु ती एक महिला या नात्याने न्यायालयात बचाव करण्यास असमर्थ ठरली. भारतीय कायद्यात ते व्यावसायिक स्थितीत नव्हते. या परिस्थितीचा दुरुपयोग करण्याच्या आशेने सोराबजींनी 18 9 7 मध्ये बॉम्बे युनिव्हर्सिटीचे एलएलबी परीक्षा आणि 18 9 6 मध्ये अलाहाबाद उच्च न्यायालयात परीक्षकांची परीक्षा घेतली. तरीही, साराबजींना बॅरिस्टर म्हणून ओळखले जाणार नाही. 1 9 23 मध्ये बदलला. [3]
१९०२ च्या प्रांतीय न्यायालयांमध्ये महिला व अल्पवयीन यांचे प्रतिनिधित्व करण्यासाठी स्त्री कायदेविषयक सल्लागार देण्याकरिता सोराबजीने 1 9 02 पासून भारतीय ऑफीसला सुरुवात करण्यास सुरुवात केली. 1 9 04 मध्ये बंगाल न्यायालयाच्या लेडी असिस्टंटची नेमणूक करण्यात आली आणि 1 9 07 पर्यंत अशा प्रतिनिधित्वाची गरज असल्याने सोराबजी बंगाल, बिहार, ओरिसा आणि आसाममध्ये कार्यरत होते. येत्या 20 वर्षांच्या कार्यकाळात, सोराबजी 600हून अधिक महिला आणि अनाथ मुलांना वैधानिक युद्ध लढायला मदत करीत असल्याचा अंदाज लावला आहे, काहीवेळा कोणतेही शुल्क न घेता त्या नंतर बऱ्याच वेळा या टिव्हीईट्स आणि तिच्या दोन आत्मचरित्रातील त्यांच्या कामांत असे लिहिले होते. 1 9 24 मध्ये, भारतातील महिलांसाठी कायदेशीर व्यवसाय उघडण्यात आला आणि सॉर्बजींनी कोलकातामध्ये अभ्यास करण्यास सुरुवात केली. तथापि, पुरूष पूर्वाग्रह आणि भेदभावामुळे त्यांना न्यायालयात सादर करण्याऐवजी त्यांची बाजू मांडण्याऐवजी, मते तयार करण्यास प्रतिबंध करण्यात आला.
१९२९ साली सॉबरजी उच्च न्यायालयात निवृत्त झाले आणि लंडनमध्ये स्थायिक झाले. 6 जुलै 1 9 54 रोजी लंडन येथील मनोर हाऊस येथील ग्रीन लेन्सवरील नॉर्थम्बरलॅंड हाऊसवर त्यांचे लंडन येथील निवासस्थानी निधन झाले.
==सामाजिक आणि सुधारणा कार्य==
शतकाच्या सुरुवातीला सोराबजी सामाजिक सुधारांमधे सक्रीयपणे सहभागी झाले. ती भारतातील महिलांसाठी राष्ट्रीय परिषदेची बंगाल शाखेत, फेडरेशन ऑफ युनिव्हर्सिटी वुमन आणि बंगाल लीग ऑफ सोशल सर्व्हिस फॉर विमेनशी संलग्न होती. 1 9 0 9 मध्ये भारतीय समाजाची सेवा मिळाल्याबद्दल तिला कैसर-ई-हिंद गोल्ड मेडल बहाल करण्यात आला. जरी एक इंग्लिश धर्मप्रेमी असला, तरीही सोराबजीला "भारतीय समाजातील ब्रिटिश कायदेविषयक कायद्याची हद्दपार करणे" इतर पाश्चात्य मूल्यांचे रोपण करणे. "[11] तिच्या कारकिर्दीच्या सुरुवातीस, स्वराज्याच्या क्षमतेवर स्त्रियांच्या अधिकारांशी संबंधित सॉरीबीजीने भारतीय स्वातंत्र्य मोहिमेला पाठिंबा दिला होता. तिने पारंपारिक भारतीय जीवन व संस्कृतीला मोठ्या प्रमाणात पाठिंबा दर्शवला असला तरीही बालविवाह आणि विधवांच्या स्थितीवर हिंदू कायदे सुधारण्यासाठी चळवळीला चालना देण्यासाठी सॉर्बजींनी खूप प्रयत्न केले. अनेकदा सहकारी सुधारक आणि मित्र पंडित रमाबाई यांच्यासोबत काम केले. तरीसुद्धा, तिचा असा विश्वास होता की सामाजिक बदलांमागील खऱ्या अर्थाने शिक्षण हे शिक्षण होते आणि अशिक्षित बहुतेक अशिक्षित महिलांना त्यात प्रवेश मिळू शकला नाही तोपर्यंत, मताधिकार आंदोलन एक अपयशी ठरेल.
१९२० च्या अखेरीस, तथापि, सॉर्बजींनी कट्टर राष्ट्रविरोधी वृत्ती अंगीकारली होती; राष्ट्रवाद हिंदू 'रुढीवादी'च्या विश्वासांच्या, चालीरीती आणि परंपरेचे उल्लंघन करीत आहे असा विश्वास करीत आहे. [12] १९२७ पर्यंत ते साम्राज्य आणि हिंदू ऑर्थोडॉक्सच्या अधिकारांचे संरक्षण करण्यासाठी सहकार्य करण्यास सक्रियपणे सहभागी झाले होते. केतिरिन मेयो यांच्या 'मदर इंडिया' (१९२७) पुस्तकात त्यांनी भारतीय स्वाभिमानावर आक्षेप घेतलेला आक्षेप पाहिला आणि महात्मा गांधी यांच्या सविनय अवज्ञाची मोहीम फेटाळून लावली. तिने राजकीय आणि राजकीय मतांचा प्रचार करण्यासाठी भारत आणि अमेरिकेचा दौरा केला ज्यामुळे त्यांना सामाजिक सुधारणांचा पुढाकार घेण्याची गरज पडेल. एक अशा अयशस्वी प्रकल्प म्हणजे लीग फॉर शिशु कल्याण, प्रसूती आणि जिल्हा नर्सिंग.
==ग्रंथसूची==
सामाजिक सुधारक आणि कायदेशीर कार्यकर्ते म्हणून काम केल्याबरोबरच सोराबजी यांनी अनेक पुस्तके, लघुकथा व लेख लिहिले.
1 9 01: पुर्दा (लन्दन: फ्रेमेंटल एंड कंपनी) पलीकडे प्रेम आणि जीवन [जैनानातील जीवनसंबंधांविषयीची लघुकथा, तसेच वसाहतवादी राजवटी अंतर्गत भारतातील जीवनाचे इतर पैलू]
1 9 04: सूर्य-बाळांचा: भारतातील बाल-जीवन अभ्यास (लंडन: जॉन मरे)
1 9 08: ट्विलीड्स दरम्यान: स्वतःच्या एकाद्वारे भारतीय महिलांचा अभ्यास करणे (ऑनलाइन) (लंडन: हार्पर) [कोर्ट ऑफ वार्डसाठी काम करताना तिच्या अनेक कायदेशीर प्रकरणाचा तपशील]
1 9 16: पुरुष, स्त्रिया आणि बर्ड-पीपल (बॉम्बे: ब्लॅकी) यांच्यातील भारतीय वंशाचे ग्रेट वायन्स (प्रख्यात आणि लोककथा)
1 9 17: पुर्दूदनशिन (बॉम्बे: ब्लॅकी) (पुरुदातील स्त्रियांवर)
1 9 24: म्हणून: सोराबजी खरशेदेजी लंगराना आणि त्याची पत्नी फ्रान्सिना (लंडन: ऑक्सफर्ड युनिव्हर्सिटी प्रेस, हंफ्री मिलफोर्ड, 1 9 24) [तिच्या आईवडिलांचे जीवनसत्त्वाचे एक संस्मरण] एक छाप.
1 9 30: सोने मोहोर: वेळ लक्षात ठेवा (लंडन: अलेक्झांडर मोरिंग) (एक नाटक)
1 9 32: सूसी सोराबजी, क्रिश्चियन-पार्से एज्युकेशनल ऑफ वेस्टर्न इंडिया: ए मेमोइर (लंडन: ऑक्सफोर्ड युनिव्हर्सिटी प्रेस) (तिच्या शिक्षणाची बहीण, सुसी सोराबजी यांचे चरित्र)
सोलाबजींनी 'इंडिया कॉलिंग: द मेमरी ऑफ कॉर्नेलिया सोराबजी' (लंडन: निस्बेट अँड कं. 1 9 34) आणि इंडिया रिकॉलर्ड (लंडन: निस्बेट अँड कं. 1 9 36) या दोन आत्मचरित्रात्मक लेख लिहिले. तिने मान्य केले आहे की तिने क्वीन मॅरीज बुक ऑफ इंडिया (1 9 43) मध्ये योगदान दिले आहे, ज्याने टी. एस इलियट आणि डोरोथी एल.
सोबोरजी यांनी अनेक वृत्तपत्रांमध्ये सहकार्य केले ज्यामध्ये एशियाटिक रिव्यू, टाईम्स लिटररी सप्लीमेंट, अटलांटिक मंथली, कलकत्ता रिव्ह्यू, द इंग्लिशमन, मॅक्मिलन मॅगझीन, द स्टेट्समॅन आणि द टाईम्स यांचा समावेश आहे. [13]
==आणखी वाचन==
ब्लॅने, व्हर्जिनिया, इत्यादी. द रायमिक कम्पेनियन टू विथ इंग्लिश: मिडल एजस टू द वुन्स एजन्सी टू द फिलिप (न्यू हेवन: येल युनिव्हर्सिटी प्रेस, 1 99 0)
बर्टन, एंटोनेट, द हार्ट ऑफ द एम्पायर: इंडियन्स अँड द कॉलोनियल एन्काउंटर इन लेट-व्हिक्टोरियन ब्रिटन (बर्कले: युनिव्हर्सिटी ऑफ कॅलिफोर्निया प्रेस, 1 99 8)
मॅथ्यू, एच.सी.जी. आणि ब्रायन हॅरिसन, इ., ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ऑफ नॅशनल बायॉफी (ऑक्सफर्ड: ऑक्सफोर्ड युनिव्हर्सिटी प्रेस, 2004)
मोस्मन, मरीय जेन, फर्स्ट वुमन ॲरॉर्निअर्स: अ कॉम्परेक्टिव्ह स्टडी ऑफ जेंडर, लॉ अँड लीगल प्रोफेशन्स (टोरंटो: हार्ट पब्लिशिंग, 2007)
रॅपापोर्ट, हेलेन, एनसायक्लोपीडिया ऑफ वुमन सोशल रिफॉर्मर्स (सांता बारबरा: एबीसी सीएलओ, 2001)
सोराबजी, रिचर्ड, ओपनिंग दर्स: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ कॉर्नेलिया सोराबजी (2010)
सोरन्जी, कॉर्नेलिया, भारत कॉलिंग: मेमोरिज ऑफ कॉर्नेलिया सॉरबजी (लंडन: निस्बेट अँड कं., 1 9 34)
जिल्बोर्ग, कॅरोलीन, इ.स. विमेन फर्स्टस् (न्यू यॉर्कः गॅले, 1 99 7)
इनस, सी. एल. 'अ हिस्ट्री ऑफ ब्लॅक अँड एशियन रायटर्स इन ब्रिटन' (केंब्रिज: केंब्रिज विद्यापीठ प्रेस, 2008). कॉर्नेलिया आणि ॲलिस पेनेल सोबजी यांच्याविषयीचे एक अध्याय आहे.
== संदर्भ ==
{{संंदर्भनोंदी}}
{{Authority control}}
{{DEFAULTSORT:सोराबजी, कोर्नेलिया}}
[[वर्ग:भारतीय वकील]]
[[वर्ग:पारशी व्यक्ती]]
[[वर्ग:इ.स. १८६६ मधील जन्म]]
[[वर्ग:इ.स. १९५४ मधील मृत्यू]]
[[वर्ग:स्त्री चरित्रलेख]]
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बालकविता
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'''बालकविता''' या लहान मुलांसाठी लिहिलेल्या कविता होत. अशा कविता परंपरागत चालत आलेल्या असतात किंवा एखाद्या आधुनिक कवीने लिहिलेल्या असतात.
उदाहरण,
मुंगी उडाली आकाशीं।<br>
तिणें गिळीलें सूर्याशीं ॥१॥
थोर नवलाव जांला।<br>
वांझे पुत्र प्रसवला ॥२॥
विंचु पाताळाशी जाय।<br>
शेष माथां वंदी पाय ॥३॥
माशी व्याली घार झाली।<br>
देखोनी मुक्ताई हांसली ॥४॥
==बालकविता लिहिणारे आधुनिक कवी==
* [[रेव्हरंड टिळक]]
* [[लक्ष्मीबाई टिळक]]
*वि. म. कुलकर्णी
*[शेख शफी बोल्डेकर ]
==पुस्तक==
जुन्या बालकवितांपासून नव्या बालकवितांपर्यंतच्या समग्र कवितांचा आढावा डॉ. शोभा इंगवले यांनी ’आधुनिक मराठी बालकविता’ या दोन खंडी पुस्तकातून घेतला आहे. या पुस्तकात बालकवितांची वैशिष्ट्ये, प्रयोजन, कल्पनारम्यता अशा गोष्टींवर लेखिकेने भाष्य केले आहे. पुस्तकात वेगवेगळ्या विषयांवरील कवितांचे वर्गीकरणही केले आहे.{{संदर्भ}}
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'''बालकविता''' या लहान मुलांसाठी लिहिलेल्या कविता होत. अशा कविता परंपरागत चालत आलेल्या असतात किंवा एखाद्या आधुनिक कवीने लिहिलेल्या असतात.
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*वि. म. कुलकर्णी
*[शेख शफी बोल्डेकर ]
==पुस्तक==
जुन्या बालकवितांपासून नव्या बालकवितांपर्यंतच्या समग्र कवितांचा आढावा डॉ. शोभा इंगवले यांनी ’आधुनिक मराठी बालकविता’ या दोन खंडी पुस्तकातून घेतला आहे. या पुस्तकात बालकवितांची वैशिष्ट्ये, प्रयोजन, कल्पनारम्यता अशा गोष्टींवर लेखिकेने भाष्य केले आहे. पुस्तकात वेगवेगळ्या विषयांवरील कवितांचे वर्गीकरणही केले आहे.{{संदर्भ}} बालकवी शेख शफी बोल्डेकर लिखीत "डिझेलगाडी" हा बालकाव्यसंग्रह प्रसिद्ध आहे.
[[वर्ग:कविता]]
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'''बालकविता''' या लहान मुलांसाठी लिहिलेल्या कविता होत. अशा कविता परंपरागत चालत आलेल्या असतात किंवा एखाद्या आधुनिक कवीने लिहिलेल्या असतात.
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मुंगी उडाली आकाशीं।<br>
तिणें गिळीलें सूर्याशीं ॥१॥
थोर नवलाव जांला।<br>
वांझे पुत्र प्रसवला ॥२॥
विंचु पाताळाशी जाय।<br>
शेष माथां वंदी पाय ॥३॥
माशी व्याली घार झाली।<br>
देखोनी मुक्ताई हांसली ॥४॥
==बालकविता लिहिणारे आधुनिक कवी==
* [[रेव्हरंड टिळक]]
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*वि. म. कुलकर्णी
==पुस्तक==
जुन्या बालकवितांपासून नव्या बालकवितांपर्यंतच्या समग्र कवितांचा आढावा डॉ. शोभा इंगवले यांनी ’आधुनिक मराठी बालकविता’ या दोन खंडी पुस्तकातून घेतला आहे. या पुस्तकात बालकवितांची वैशिष्ट्ये, प्रयोजन, कल्पनारम्यता अशा गोष्टींवर लेखिकेने भाष्य केले आहे. पुस्तकात वेगवेगळ्या विषयांवरील कवितांचे वर्गीकरणही केले आहे.{{संदर्भ}}
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अविनाश बिनीवाले
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'''डॉ. अविनाश बिनीवाले''' ([[जन्म]] १२ मार्च १९४३) हे भाषाभ्यासक आणि बहुभाषाविद् लेखक आहेत. त्यांनी भाषा, भाषाव्यवहार इत्यादी विषयांवर [[मराठी भाषा|मराठीतून]] लेखन केले आहे. मराठी-डॉइच् (जर्मन) शब्दकोशनिर्मितीच्या त्यांच्या कामाचा गौरव म्हणून त्यांना मुंबई विद्यापीठाने डी. लिट् पदवीने सन्मानित केले आहे.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://mumbaimirror.indiatimes.com/mumbai/other/mumbai-university-to-confer-d-litt-on-avinash-biniwale-who-created-german-marathi-dictionary/articleshow/72228771.cms|title=Mumbai University to confer D Litt on Avinash Biniwale who created German-Marathi dictionary|website=Mumbai Mirror|language=en|access-date=2020-12-30|archive-date=2020-09-30|archive-url=https://web.archive.org/web/20200930005340/https://mumbaimirror.indiatimes.com/mumbai/other/mumbai-university-to-confer-d-litt-on-avinash-biniwale-who-created-german-marathi-dictionary/articleshow/72228771.cms|url-status=dead}}</ref>
==शिक्षण==
डॉ. अविनाश बिनीवाले यांनी [[पुणे]] येथील [[फर्ग्युसन महाविद्यालय]] येथून [[जर्मन]] व [[संस्कृत]] ह्या विषयांत बी.ए. ही पदवी प्राप्त केली. त्यानंतर त्यांनी मुंबई विद्यापीठाच्या परदेशी-भाषा-विभागातून जर्मन आणि भाषाविज्ञान ह्या विषयांत एम.ए.पदवी प्राप्त केली. याखेरीज त्यांनी [[हैदराबाद]] येथील सेंट्रल इन्स्टिट्यूट ऑफ इंग्लिश अँड फॉरेन लॅंग्वेजेस येथून '''परदेशी भाषा म्हणून जर्मनचे अध्यापन''' या विषयातली पदविका प्राप्त केली आहे. "मराठी-डॉइच् शब्दकोश" ह्या शब्दकोशाच्या निर्मितीसाठी मार्च २०१९ मध्ये मुंबई विद्यापीठाची डी. लिट् (D. Litt.) ही सर्वोच्च पदवी डॉ. अविनाश बिनीवाले यांनी मिळवली.{{संदर्भ}} ह्या पहिल्याच कोशाचे काम सुमारे ४० वर्षे चालू होते.
==अध्यापनाचा अनुभव==
१९६३ सालापासून जर्मन भाषा आणि साहित्य या विषयाचे अध्यापन केले. डॉ. अविनाश बिनीवाले यांनी मुंबईच्या एल्फिन्स्टन महाविद्यालयात जर्मन भाषेचे अध्यापन केले आणि ह्याच महाविद्यालयातून जर्मन-विभागाचे विभागप्रमुख म्हणून ते सेवानिवृत्त झाले.{{संदर्भ}}
पदवी स्तरापर्यंतच्या विद्यार्थ्यांना [[भूगोल]] या विषयाचे अध्यापन त्यांनी केले. उद्योगक्षेत्रात भाषांतरकार/दुभाषी म्हणून त्यांनी दोन वर्षे काम केले. १९६७ मध्ये महाराष्ट्र शिक्षणसेवेत राजपत्रित अधिकारी म्हणून त्यांची निवड झाली. कोल्हापूरच्या [[शिवाजी विद्यापीठ|शिवाजी विद्यापीठाच्या]] रशियन भाषा पदविका अभ्यासक्रमाचे ७ वर्षे त्यांनी अध्यापन केले.{{संदर्भ}}
मुंबई विद्यापीठाद्वारे अमराठी भाषिकांना मराठी शिकवण्यासाठी चालवण्यात येणाऱ्या अभ्यासक्रमात त्यांनी मराठीचे अध्यापन केले. परदेशातील विशेषतः फ्रेंच तसेच जर्मन विद्यार्थी/अभ्यासक ह्यांना हिंदी शिकवण्याचे काम ते करतात.{{संदर्भ}}
सन १९८० आणि १९८९ मध्ये जर्मनीतील ग्यॉटिङनच्या ग्योटऽ इन्स्टिटूट्मध्ये अभ्यागत प्राध्यापक म्हणून त्यांनी काम केले.{{संदर्भ}}
==भाषा अभ्यास==
मराठीच्या जोडीने संस्कृत, हिन्दी, [[गुजराती भाषा|गुजराती]], [[बंगाली भाषा|बंगाली]], [[सिंधी भाषा|सिन्धी]], [[आसामी भाषा|असमीया]] ह्या भारतीय भाषा डॉ. बिनीवाले यांना अवगत आहेत. याजोडीने जर्मन, फ्रेंच, रशियन, इंग्रजी या भाषांचा त्यांचा अभ्यास आहे.<ref name=":0">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://maharashtratimes.com/editorial/manasa/avinash-biniwale/articleshow/63050877.cms|title=अविनाश बिनीवाले|website=Maharashtra Times|language=mr|access-date=2020-12-31}}</ref>
==भाषाविषयक पुस्तके<ref name=":0" />==
{| class="wikitable sortable"
|+
!अ.क्र.
!ग्रंथनाव
!प्रकाशक
!स्थळ
!प्रकाशनवर्ष
!
|-
|१.
|भाषा - आपली सर्वांचीच
|राज्य मराठी विकास संस्था
|मुंबई
|२०००
|
|-
|२.
|भाषाकारण
|मुद्रा प्रकाशन
|विरार
|२००२
|
|-
|३.
|बोलु कवतिकें
|राजहंस प्रकाशन
|पुणे
|२००५
|
|-
|४.
|माय मरो पण ...
|राजहंस प्रकाशन
|पुणे
|२००५
|
|-
|५.
|शब्दगन्ध
|गौतमी प्रकाशन
|नाशिक
|२००७
|
|-
|६.
|भाषा घडतांना
|गौतमी प्रकाशन
|नाशिक
|२००७
|
|-
|७.
|भाकरीची भाषा
|डायमण्ड पब्लिकेशन
|पुणे
|२००९
|
|-
|८.
|परिसस्पर्श
|डायमण्ड पब्लिकेशन
|पुणे
|२००९
|
|-
|९.
|आवडतं व्याकरण
|अक्षरदालन प्रकाशन
|कोल्हापूर
|२०१५
|
|-
|१०.
|ओऽडर् ते राइन्
|अक्षरदालन प्रकाशन
|कोल्हापूर
|२०१५
|
|-
|११.
|भाषा - आपली सर्वांचीच
|राज्य मराठी विकास संस्था
|मुंबई
|२०२०
|
|-
|२०.
|भाषासौष्ठव
|महाराष्ट्र भारतीय शिक्षण मंडळ
|मुंबई
|२०२४
|भाषासौष्ठव या पुस्तकातील लेखांचे अभिवाचन यू-ट्यूबवर क्रमशः उपलब्ध होत आहे. ते ऐकण्यासाठी पुढील दुवा वापरा -
https://www.youtube.com/channel/UCGYCnFI83njRAlWEoMdfR3w
|-
|२१
|वतन (कथासंग्रह)
|प्रोफिशन्ट पब्लिशिंग हाऊस
|पुणे
|२०२४
|
|}
==भाषा शिक्षणासाठी लिहिलेली पुस्तके{{संदर्भ}}==
{| class="wikitable sortable"
|+
!अ.क्र.
!ग्रन्थनाम
!प्रकाशक
!स्थळ
!प्रकाशनवर्ष
|-
|१.
|जर्मन भाषा परिचय
|फडके प्रकाशन
|कोल्हापूर
|१९८३
|-
|२.
|जर्मन शिकू या
|स्नेहल प्रकाशन
|पुणे
|१९९५
|-
|३.
|जर्मन शिका
|अनमोल प्रकाशन
|पुणे
|प्रथमावृत्ति जुलै २०००,
द्वितीयावृत्ति डिसेंबर २०००,
तृतीयावृत्ति २००१,
सुधारित चतुर्थावृत्ति २००३
|-
|४.
|जर्मन शिका
|नितीन प्रकाशन
|पुणे
|पञ्चमावृत्ति २००६,
षष्ठावृत्ति २००९
|-
|५.
|झटपट जर्मन
|नितीन प्रकाशन
|पुणे
|२००४
|-
|६.
|जर्मनचा श्रीगणेशा
|गौतमी प्रकाशन
|नाशिक
|२००४
|-
|७.
|जर्मनचा श्रीगणेशा
|विराज प्रकाशन
|मुंबई
|२००४
|-
|८.
|जर्मन शिका (सुधारित)
|नितीन प्रकाशन
|पुणे
|२००९
|-
|९.
|जर्मन संभाषण
|वसुधा प्रकाशन
|नाशिक
|२०१३
|-
|१०.
|Model Handbook to Lernziel Deutsch
|(Oxford University Press)
|नवी दिल्ली
|२०००
|-
|११.
|जर्मन सीखिए (हिन्दी)
|अनमोल प्रकाशन
|पुणे
|२००२
|-
|१२.
|जर्मन शीखो (गुजराती)
|प्रवीण प्रकाशन
|राजकोट
|२००३
|-
|१३.
|German - Let’s learn it!
|व्हिजन पब्लिकेशन
|पुणे
|२००६
|-
|१४.
|ABC of German
|कारकीर्द पब्लिकेशन
|नाशिक
|२००७
|-
|१५.
|जर्मन भाषा का श्रीगणेश (हिन्दी)
|नितीन प्रकाशन
|पुणे
|२००८
|-
|१६.
|जर्मन भाषा (असमीया)
|असम बुक हाइव्
|गुवाहाटी
|२०१४
|-
|१७.
|फ्रेंच भाषेचा श्रीगणेशा
|मुद्रा प्रकाशन
|विरार
|२००५
|-
|१८.
|ABC of French
|कारकीर्द पब्लिकेशन
|नाशिक
|२००७
|-
|१९.
|फ्रांसिसी भाषा का श्रीगणेश (हिन्दी)
|नितीन प्रकाशन
|पुणे
|२००८
|-
|२०.
|फ्रेंच सम्भाषण
|वसुधा प्रकाशन
|नाशिक
|२०१४
|}
==कोशसाहित्य{{संदर्भ}}==
{| class="wikitable sortable"
|+
!अ.क्र.
!ग्रन्थनाम
!प्रकाशक
!स्थळ
!प्रकाशनवर्ष
|-
|१.
|मराठी-जर्मन व्यवहारोपयोगी शब्दकोश
|नितीन प्रकाशन
|पुणे
|१९९८
|-
|२.
|सुलभ हिन्दी-मराठी कोश
|के. भि. ढवळे प्रकाशन
|मुंबई
|२००१
|-
|३.
|डॉइच्-मराठी-इंग्लिश शब्दकोश
|व्हिजन प्रकाशन
|पुणे
|२००६
|-
|४.
|मराठी-जर्मन व्यवहारोपयोगी शब्दकोश
(सुधारित व विस्तारित आवृत्ती)
|नितीन प्रकाशन
|पुणे
|२००६
|-
|५.
|मराठी-डॉइच् शब्दकोश
|साहित्य संस्कृति मण्डळ
|मुंबई
|२०१२
|-
|६.
|जर्मन-मराठी भाषांतर शब्दकोश
|वसुधा प्रकाशन
|नाशिक
|२०१४
|-
|७.
|जर्मन-मराठी/सिन्धी शब्दकोश
|सिन्धु प्रकाशन
|पुणे
|२०१४
|}
==भाषांतरे{{संदर्भ}}==
{| class="wikitable sortable"
|+
!अ.क्र.
!ग्रन्थनाम
!प्रकाशक
!स्थळ
!प्रकाशनवर्ष
|-
|१.
|माता धीराई (बर्टोल्ट् ब्रेश्ट् ह्यांच्या नाटकाचा मूळ जर्मनमधून मराठी<ref name=":1">बर्टोल्ट ब्रेख्त यांच्या 'मदर करेज' या जर्मन नाटकाचा [[:en:Mother Courage and Her Children|अनुवाद]]</ref> अनुवाद)
|कॉन्टिनेन्टल प्रकाशन
|पुणे
|१९८३
|-
|२.
|प्रोफेसर माम्लोक् (फ्रीडरिश् वोल्फ् ह्यांच्या नाटकाचा मूळ जर्मनमधून मराठी अनुवाद)
|साहित्य संस्कृति मण्डळ
|मुंबई
|१९८६
|-
|३.
|काकांचे स्वप्न (दस्तयेवस्कि ह्यांच्या कादंबरीचा<ref name=":2">[https://openlibrary.org/books/OL23405091M/Uncle's_dream अंकल्स ड्रीम ह्या कादंबरीची ओपन लायब्ररीतील नोंद]</ref> मूळ रशियनमधून मराठी अनुवाद)
|कॉन्टिनेन्टल प्रकाशन
|पुणे
|१९८७
|-
|४.
|विश्वसाहित्यात बेर्टोल्ट् ब्रेश्ट्
|शब्दवेल प्रकाशन
|कोल्हापूर
|१९९९
|-
|५.
|मुक्काम पोस्ट देवाचे गोठणे (मराठीतून हिन्दी अनुवाद)
|राज्य मराठी विकास संस्था
|मुंबई
|२००१
|-
|६.
|पूर्वांचल - आह्वान तथा आवाहन (मराठीतून हिन्दी अनुवाद)
|लोकहित प्रकाशन
|लखनौ
|२००४
|-
|७.
|नर्मदे हर! हर नर्मदे! (मूळ मराठी भाषेत असलेल्या सुहास भास्कर लिमये ह्यांच्या पुस्तकाचा हिन्दी अनुवाद)
|गोण्डी पब्लिक ट्रस्ट प्रकाशन
|मण्डला (मध्यप्रदेश)
|२०११
|-
|८.
|यज्ञरहस्य (मराठीतून हिन्दी अनुवाद)
|यज्ञेश्वर प्रकाशन
|बदलापूर
|२०११
|-
|९.
|(अ)घोरकष्टोद्धरणस्तोत्र (मराठीतून हिन्दी अनुवाद)
|यज्ञेश्वर प्रकाशन
|बदलापूर
|२०११
|-
|१०.
|काकांचे स्वप्न (दस्तयेवस्कि ह्यांच्या कादंबरीचा<ref name=":2" /> मूळ रशियनमधून मराठी अनुवाद, सुधारित आवृत्ति)
|कॉन्टिनेन्टल प्रकाशन
|पुणे
|२०१३
|-
|११.
|मेनोपोज़ (मराठीतून हिन्दी अनुवाद)
|ज्ञाननयन प्रकाशन
|पुणे
|२०१३
|-
|१२.
|माता धीराई (बर्टोल्ट् ब्रेश्ट् ह्यांच्या नाटकाचा मूळ जर्मनमधून मराठी<ref name=":1" /> अनुवाद, सुधारित आवृत्ति)
|कॉन्टिनेन्टल प्रकाशन
|पुणे
|२०१५
|-
|१३.
|अनेक जीबन (प्रा. देवीप्रसन्न पटनायक यांच्या उडिया भाषेतील आत्मचरित्रपर लेखनाचा मराठी अनुवाद)
|साधना साप्ताहिक
|पुणे
|२०१३
|-
|१४.
|कारारबाईंची शस्त्रं (फ्रीडरिश् वोल्फ् ह्यांच्या नाटकाचा मूळ जर्मनमधून मराठी अनुवाद)
|पण्डित पब्लिकेशन
|कणकवली
|२०२०
|}
==ललित साहित्य (कादंबरी){{संदर्भ}}==
{| class="wikitable sortable"
|+
!अ.क्र.
!ग्रन्थनाम
!प्रकाशक
!स्थळ
!प्रकाशनवर्ष
|-
|१.
|जय कैलास! जय मानस!
|वेद प्रकाशन
|पुणे
|१९८६
|-
|२.
|कैलास मानस
|कॉन्टिनेन्टल प्रकाशन
|पुणे
|२०१२
|-
|३.
|जय कैलाश (हिन्दी उपन्यास)
|जागृति साहित्य प्रकाशन
|पटना
|२०१२
|-
|४.
|कैलास मानस (सुधारित आवृत्ति)
|कॉन्टिनेन्टल प्रकाशन
|पुणे
|२०१६
|-
|५.
|Jai Kailas (Translated into English by Shailesh Kakan)
|हेड्विग मीडिया हाऊस
|मुंबई
|२०२४
|-
|६.
|बोमदिला (मराठी कादम्बरी, सङ्क्षिप्त)
|कॉन्टिनेन्टल प्रकाशन
|पुणे
|१९९५
|-
|७.
|बोमदिला (हिन्दी उपन्यास, सङ्क्षिप्त)
|श्रीविद्या प्रकाशन
|दिल्ली
|१९९६
|-
|८.
|बोमदिला (सङ्क्षिप्त, मराठीतून कन्नड अनुवाद, अनुवादक -रश्मी शिरहट्टी)
|अवनि प्रकाशन
|धारवाड
|२००७
|-
|९.
|बोमदिला (सम्पूर्ण, हिन्दीतून असमीया अनुवाद, अनुवादक - पुष्पधर शर्मा)
|प्रोक्रिएट प्रकाशन
|उदालगुरि (असम)
|२०१०
|-
|१०.
|बोमदिला (हिन्दीतून संस्कृत अनुवाद, अनुवादक - दत्तभूषण पोलकम)
|संस्कृतभारती प्रकाशन
|नवी दिल्ली
|२०११
|-
|११.
|बोमदिला (हिन्दी उपन्यास)
|जागृति साहित्य प्रकाशन
|पटना
|२०११
|-
|१२.
|बोमदिला १९६२ (हिन्दीतून गुजराती अनुवाद, अनुवादक - प्रतिभा दवे)
|अरुणोदय प्रकाशन
|अहमदाबाद
|२०१३
|-
|१३.
|बोमदिला (हिन्दीतून बोडो अनुवाद, अनुवादक - दिनेश सिंग ब्रह्म)
|थुनलाइ प्रकाशन
|बरमा (असम)
|२०२२
|-
|१४.
|Bomdila (इंग्रजी)
|सिन्धु प्रकाशन
|पुणे
|२०२३
|-
|१५.
|बोमदिला १९६२ (हिन्दी उपन्यास, सम्पूर्ण)
|पुस्तकनामा
|गाज़ियाबाद
|२०२४
|-
|१६.
|बोमदिला (मराठी कादम्बरी, सम्पूर्ण)
|हेड्विग मीडिया हाऊस
|मुंबई
|२०२४
|-
|१७.
|Bomdila. A novel on the Indo-China war of 1962 (इंग्रजी, दुसरी सुधारित आवृत्ति)
|हेड्विग मीडिया हाऊस
|मुंबई
|२०२४
|-
|१८.
|बोमदिला १९६२ (हिन्दीतून सिन्धी अनुवाद, अनुवादक - जीवत घनश्यामदास केसवाणी)
|जीवत घनश्यामदास केसवाणी
|पुणे
|२०२४
|}
===बोमदिला===
{{बदल}}
१९६२ च्या भारत-चीन युद्धाच्या काळात नेफा भागातल्या सेला-बोमदिला खिण्डीत आपल्या सेनेचा दारुण पराभव झाला होता. त्या वेळच्या प्रत्यक्ष युद्धावरची जागतिक साहित्यातली ही एकमेव कादम्बरी आहे. बुमला-सेला-बोमदिला ते थेट तेज़पुरपर्यन्तचे युद्ध, त्यात भारतीय सैन्याची वाताहात, स्थानिकांचे दुहेरी वर्तन, चिनी नि भारतीय गुप्तहेर अशा अनेक घटनांनी भरलेल्या युद्धाचे प्रत्ययकारी वर्णन म्हणजे "बोमदिला" कादम्बरी. शेकडो सेनाधिकाऱ्यांनी वाखाणलेली, डॉ. इन्दिरा गोस्वामी, डॉ. भैरप्पा, डॉ. शान्तिनाथ देसाई इत्यादी साहित्यिकांनी गौरवलेली ही कादम्बरी कोणत्याही सरकारी/निमसरकारी/बिनसरकारी संस्थेच्या कसल्याही मदतीशिवाय आत्तापर्यन्त हिन्दी, मराठी, कन्नड, असमीया, संस्कृत, गुजराती, बोडो एवढ्या भाषांमध्ये प्रकाशित झाली आहे.{{संदर्भ}} डॉ. बिनीवाल्यांनी ही कादम्बरी मुळात हिन्दीत लिहिली आहे.
==प्रवासवर्णन/संस्कृति{{संदर्भ}}==
{| class="wikitable sortable"
|+
!अ.क्र.
!ग्रंथनाम
!प्रकाशक
!स्थळ
!प्रकाशनवर्ष
|-
|१.
|गरुडांच्या देशात
|माधुरी प्रकाशन
|पुणे
|१९८८
|-
|२.
|संस्कृति - जर्मन भाषिकांची
|डायमण्ड पब्लिकेशन
|पुणे
|२००६
|-
|३.
|पूर्वांचल
|कॉन्टिनेन्टल प्रकाशन
|पुणे
|२००८
|-
|४.
|जर्मन भाषेतील साहित्य
|गायत्री प्रकाशन
|पुणे
|२००९
|-
|५.
|न्याहारी
|अक्षरदालन प्रकाशन
|कोल्हापुर
|२०१२
|-
|६.
|गरुडगळ नाडिनल्लि (गरुडांच्या देशात ह्या पुस्तकाचा कन्नड अनुवाद, अनुवादक - विरूपाक्ष कुलकर्णी)
|ऱ्यॉन्टगन प्रकाशन
|पुणे
|२०२३
|-
|७.
|ईरान पारश्यांचे तीर्थक्षेत्र
|सिन्धु प्रकाशन
|पुणे
|प्रथमावृत्ति जानेवरी २०२३,
द्वितीयावृत्ति एप्रिल २०२३
|-
|८.
|ईरान पारसियों का तीर्थक्षेत्र (मराठीतून हिन्दी अनुवाद, अनुवादिक - ज्योति झा)
|पुस्तकनामा
|गाज़ियाबाद
|२०२४
|}
==वैचारिक पुस्तके{{संदर्भ}}==
{| class="wikitable sortable"
|+
!अ.क्र.
!ग्रन्थनाम
!प्रकाशक
!स्थळ
!प्रकाशनवर्ष
|-
|१.
|आतंकवाद में झुलसता पूर्वांचल
|सुनिल प्रकाशन
|मुंबई
|१९९९
|-
|२.
|जननायक (अटलजींचे चित्रमय हिन्दी चरित्र)
|वेद प्रकाशन
|पुणे
|२००२
|-
|३.
|आजचा अरुणाचल प्रदेश<ref>[http://www.bookganga.com/eBooks/Books/details/4878197422537251012?BookName=Aajacha-Arunachal-Pradesh हिमानी चौकर या लेखिका आहेत. अविनाश बिनीवाले साहाय्यक आहेत]</ref>
|अक्षरदालन प्रकाशन
|कोल्हापुर
|२०१६
|}
==पुरस्कार{{संदर्भ}}==
१. 'भाषा - आपली सर्वांचीच' ह्या पुस्तकासाठी कोकण मराठी साहित्य परिषदेचा पुरस्कार (२००१)
२. 'जय कैलाश' ह्या कादम्बरीसाठी हिन्दी साहित्य अकादमीचा पुरस्कार (२०१४)
३. महाराष्ट्र राज्य सरकारतर्फे 'डॉ. अशोक केळकर भाषा अभ्यासक पुरस्कार' (२७.२.२०१८)<ref>[https://www.maharashtra.gov.in/Site/Upload/Government%20Resolutions/Marathi/201802031549325833.pdf मराठी भाषा विभाग, महाराष्ट्र शासन]</ref>
==संदर्भ==
{{संदर्भयादी}}
==संदर्भसूची==
* {{स्रोत बातमी
| दुवा = https://mumbaimirror.indiatimes.com/mumbai/other/fastag-everything-you-need-to-know-about-new-electronic-toll-collection-payment-and-the-december-1-deadline/articleshow/72228478.cms
| title = Mumbai University to confer D Litt on Avinash Biniwale who created German-Marathi dictionary
| भाषा = इंग्लिश
| लेखक =
| लेखकदुवा =
| आडनाव = गायकवाड
| पहिलेनाव = राही
| सहलेखक =
| date = २५ नोव्हेंबर २०१९
| फॉरमॅट =
| आर्काइव्हदुवा = https://web.archive.org/web/20250221184632/https://mumbaimirror.indiatimes.com/mumbai/other/fastag-everything-you-need-to-know-about-new-electronic-toll-collection-payment-and-the-december-1-deadline/articleshow/72228478.cms
| आर्काइव्हदिनांक = 2025-02-21
| कृती =
| पृष्ठे =
| publisher = मुंबई मिरर
| अॅक्सेसदिनांक =
| अवतरण =
| आयडी =
| तिरपे =
| url-status = dead
}}
* {{स्रोत बातमी
| दुवा = https://marathi.indiatimes.com/editorial/manasa/avinash-biniwale/articleshow/63050877.cms
| title = अविनाश बिनीवाले
| भाषा = मराठी
| लेखक = महाराष्ट्र टाइम्स.कॉम
| लेखकदुवा =
| आडनाव =
| पहिलेनाव =
| सहलेखक =
| date = २४ फेब्रुवारी २०१८
| फॉरमॅट =
| आर्काइव्हदुवा = https://web.archive.org/web/20250221184625/https://marathi.indiatimes.com/editorial/manasa/avinash-biniwale/articleshow/63050877.cms
| आर्काइव्हदिनांक = 2025-02-21
| कृती =
| पृष्ठे =
| publisher = महाराष्ट्र टाइम्स
| अॅक्सेसदिनांक =
| अवतरण =
| आयडी =
| तिरपे =
| url-status = dead
}}
* {{स्रोत बातमी
| दुवा = https://www.esakal.com/mumbai/mumbai-universitys-convocation-ceremony-tuesday-238091
| title = मुंबई विद्यापीठाचा मंगळवारी दीक्षांत समारंभ
| भाषा = मराठी
| लेखक = सकाळ वृत्तसेवा
| लेखकदुवा =
| आडनाव =
| पहिलेनाव =
| सहलेखक =
| date = २४ नोव्हेंबर २०१९
| फॉरमॅट =
| आर्काइव्हदुवा =
| आर्काइव्हदिनांक =
| कृती =
| पृष्ठे =
| publisher = सकाळ
| अॅक्सेसदिनांक =
| अवतरण =
| आयडी =
| तिरपे =
}}
*{{संकेतस्थळ स्रोत
|दुवा= https://marathi.gov.in/GR/201802031549325833.pdf
|title= मराठी भाषा संवर्धन पुरस्कार सन २०१७ जाहीर करण्याबाबत
|अनुवादीत शीर्षक=
|आडनाव=
|पहिले नाव=
|लेखक= मराठी भाषा विभाग
|लेखकदुवा=
|आडनाव2=
|पहिले नाव2=
|लेखक2=
|लेखकदुवा2=
|दिनांक= २२ फेब्रुवारी २०१८
|महिना=
|वर्ष=
|आडनाव संपादक=
|पहिले नाव संपादक=
|संपादक=
|संपादकदुवा=
|आडनाव संपादक2=
|पहिले नाव संपादक2=
|संपादकदुवा2=
|इतर संपादक=
|संकेतस्थळ=
|मालिका=
|प्रकाशक= मराठी भाषा विभाग
|ठिकाण=
|पान=
|पाने=
|वेळ=
|भाषा=
|प्रकार=
|डी.ओ.आई.=
|आय.एस.बी.एन=
|आई.एस.एस.एन.=
|ओ.सी.एल.सी.=
|पी.एम.आई.डी=
|विदा संकेतस्थळ दुवा=
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}}{{मृत दुवा|date=March 2025 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}
{{DEFAULTSORT:बिनीवाले, अविनाश}}
[[वर्ग:मराठी लेखक]]
[[वर्ग:पुरुष चरित्रलेख]]
[[वर्ग:इ.स. १९४३ मधील जन्म]]
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आदिती पोहनकर
0
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2709838
wikitext
text/x-wiki
{{माहितीचौकट अभिनेता
| पार्श्वभूमी_रंग =
| नाव = आदिती पोहनकर
| चित्र = Aditi_Pohankar_graces_the_launch_of_Doycare_5.jpg
| चित्र_रुंदी =
| चित्र_शीर्षक =
| पूर्ण_नाव =
| जन्म_दिनांक = {{जन्म दिनांक आणि वय|1994|12|31}}३१ डिसेंबर १९९४
| जन्म_स्थान =
| मृत्यू_दिनांक =
| मृत्यू_स्थान =
| इतर_नावे =
| कार्यक्षेत्र =
| राष्ट्रीयत्व = भारतीय
| भाषा = मराठी
| शिक्षण =
| प्रशिक्षण_संस्था =
| कारकीर्द_काळ =
| प्रमुख_नाटके =
| प्रमुख_चित्रपट = लई भारी
| प्रमुख_दूरचित्रवाणी_कार्यक्रम =
| पुरस्कार =
| वडील_नाव = सुधीर पोहनकर
| आई_नाव = शोभा पोहनकर
| पती_नाव =
| पत्नी_नाव =
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| अपत्ये =
| स्वाक्षरी =
| स्वाक्षरीशीर्षक_पर्याय =
| ट्विटर =
| संकेतस्थळ =
| धर्म = हिंदू
| तळटिपा =
}}
'''आदिती पोहनकर'''<ref>{{स्रोत बातमी|दुवा=https://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-kerala/straddling-stage-screen-and-stadium/article4040260.ece|title=Straddling stage, screen and stadium|last=Santhosh|first=K.|date=2012-10-28|work=द हिंदू|access-date=2020-04-12|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref><ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|दुवा=https://urbanasian.com/whats-happenin/2015/10/when-aaditi-pohankar-went-fishing-with-the-king-sushant-singh-rajput/|title=When Aaditi Pohankar went fishing with the King - Sushant Singh Rajput!|दिनांक=2015-10-06|संकेतस्थळ=Urban Asian|भाषा=en-US|ॲक्सेसदिनांक=2020-04-12|archive-date=2020-03-23|archive-url=https://web.archive.org/web/20200323115914/https://urbanasian.com/whats-happenin/2015/10/when-aaditi-pohankar-went-fishing-with-the-king-sushant-singh-rajput/|url-status=dead}}</ref> (जन्म:[[३१ डिसेंबर]], [[इ.स. १९९४|१९९४]]) ही एक भारतीय अभिनेत्री आहे. तिने मराठी, हिंदी आणि तमिळ चित्रपटांमध्ये काम केले आहे. लव्ह सेक्स और धोखा (२०१०) या चित्रपटाद्वारे तिने चित्रपटसृष्टीत पदार्पण केले. मराठी सुपरस्टार रितेश देशमुखसोबत 'लई भारी' या चित्रपटातील तिच्या अभिनयाचे मोठ्या प्रमाणात कौतुक झाले.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|दुवा=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/malayalam/movies/news/Aaditi-to-debut-in-Mollywood/articleshow/16653417.cms|title=Aaditi to debut in Mollywood - टाइम्स ऑफ इंडिया|संकेतस्थळ=द टाइम्स ऑफ इंडिया|भाषा=en|ॲक्सेसदिनांक=2020-04-12}}</ref>
== वैयक्तिक जीवन ==
आदिती पोहनकर सुधीर आणि शोभा पोहनकर यांची मुलगी आहे. तिचे वडील माजी मॅरेथॉन धावपटू होते, तर आई माजी राष्ट्रीय स्तरावरील हॉकीपटू होती. तिची आजी सुशीला “ताई” पोहनकर किराना घराण्याची शास्त्रीय गायिका होती. तिचे काका अजय पोहनकर शास्त्रीय गायक आहेत. अभिजित पोहनकर तिचा चुलतभाऊ आहे.
== कारकीर्द ==
आदित्य तिच्या सुरुवातीच्या जीवनात नाट्य अभिनेत्री होती .आदितीची ओळख (२०१०) मध्ये सत्यदेव दुबेशी झाली, ज्यांनी अभिनेता मकरंद देशपांडे यांना मुंबईतील रंगमंचावर नाटकातील कलाकार म्हणून तिच्या कारकीर्दची सल्लामसलत करण्यास सांगितले. ती एकाच वेळी चित्रपटांमधील भूमिकेसाठी प्रयत्न करीत होती आणि ‘लव्ह सेक्स और धोखा’ (२०१०) या हिंदी नृत्य या चित्रपटात एका छोट्या भूमिकेतून चित्रपटसृष्टीत पदार्पण केले. अदितीने रेखा सरायच्या छोट्या बजेट मराठी चित्रपटावर काम केले, कुणाथी कुणीतरी (२०११), ज्यात तिने अशोक सराफ, स्मिता जयकर आणि पूनम ढिल्लन या कलाकारांसोबत काम केले.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|दुवा=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/riteish-deshmukh-would-be-a-fantastic-father-aaditi-pohankar/|title=Riteish Deshmukh would be a fantastic father: Aaditi Pohankar|दिनांक=2014-11-27|संकेतस्थळ=द इंडियन एक्सप्रेस|भाषा=en-US|ॲक्सेसदिनांक=2020-04-12}}</ref>
२०१२ मध्ये, आदितीने एम. एस. अनिल दिग्दर्शित मल्याळम चित्रपटात दिसण्यासाठी साइन इन केले आणि प्रकल्प थांबण्यापूर्वी, भाषा शिकण्यासाठी केरळमध्ये थोड्या वेळासाठी गेले होते.
दिग्दर्शक निशिकांत कामत यांनी जेव्हा मुंबईत मकरंदचा टाईम बॉय नाटक पाहिला तेव्हा आदितीला त्याची ओळख होती. कामतने अदितीला आपल्या 'लाइ भारी' <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|दुवा=https://www.rediff.com/movies/review/review-lai-bhaari-is-awesome/20140711.htm|title=Review: Lai Bhaari is awesome|संकेतस्थळ=Rediff|भाषा=en|ॲक्सेसदिनांक=2020-04-12}}</ref>(२०१४) या मराठी चित्रपटातील भूमिकेसाठी दोन दिवसांच्या स्क्रीन चाचण्या करायला लावले. तिच्या स्वभावामुळे प्रभावित झाल्याने कामतने तिला मराठी सुपरस्टार रितेश देशमुख यांच्याकडे ओतले. अदितीने असा खुलासा केला की शूटिंगच्या वेळी कामतने तिला अभिनेत्री म्हणून तिला पाहिजे असलेल्या गोष्टी करण्याची व तिच्या भूमिकेत जाण्यासाठी स्वातंत्र्य दिलं आणि स्वतःला "एक वाईट व्यक्ती" म्हणून रूपांतर केलं. 'लाइ भारी' या चित्रपटाच्या यशानंतर आदिती चर्चेत आली. हा चित्रपट रिलीज झाल्यावर आतापर्यंतचा सर्वात फायदेशीर मराठी चित्रपट ठरला<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|दुवा=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/tamil/movies/news/Anandhi-walks-out-now-Aaditi-in-Atharvaas-film/articleshow/54938584.cms|title=Anandhi walks out; now, Aaditi in Atharvaa's film - टाइम्स ऑफ इंडिया|संकेतस्थळ=द टाइम्स ऑफ इंडिया|भाषा=en|ॲक्सेसदिनांक=2020-04-12}}</ref>
== इतर कामे ==
चित्रपट आणि नाट्यक्षेत्रात काम करण्याव्यतिरिक्त, अदितीने गोव्यातील आंतरराष्ट्रीय चित्रपट महोत्सवाच्या रेड कार्पेटवर मॉडेल म्हणून २०१४ मध्ये काम केले आहे. कॅडबरी फोरम, गोदरेज एईआर, एअरटेल यासह ती ३हून अधिक ब्रँड जाहिराती आणि जाहिरातींमध्ये दिसली आहे. , लेनकार्ट आणि सॅमसंग, ज्यात तिचे दिग्दर्शन शुजात सरदार यांनी केले होते. अदिती सेलिब्रिटी क्रिकेट लीगच्या फ्रेंचायझी हीरो मराठीचीही समर्थक आहे आणि त्यांनी संघ सामन्यांमध्ये भाग घेतला.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|दुवा=https://www.newindianexpress.com/entertainment/tamil/2016/dec/19/aaditi-pohankar-in-selva-santhanam-untitled-flick-1550941.html|title=Aaditi Pohankar in Selva-Santhanam untitled flick|संकेतस्थळ=The New Indian Express|ॲक्सेसदिनांक=2020-04-12}}</ref>
== फिल्मोग्राफी ==
प्रेम सेक्स और धोखा
कुणासठी कुणीतरी
लाई भारी
मिथुन गणेशाणु सुरूली रजनम
मन्नावन वन्थनाडी
ती
== बाह्य दुवे ==
[[imdbname:4556443|आयएमडीबी वर अदिती पोहनकर]]
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:मराठी चित्रपट अभिनेत्री]]
[[वर्ग:स्त्री चरित्रलेख]]
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शिराळे (वैभववाडी)
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==हवामान==
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१.https://villageinfo.in/
२.https://www.census2011.co.in/
३.http://tourism.gov.in/
४.https://www.incredibleindia.org/
५.https://www.india.gov.in/topics/travel-tourism
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शिराळे वैभववाडी
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शिराळे वैभववाडी
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|कोरे_शीर्षक_१ =[[बोलीभाषा]]
|कोरे_उत्तर_१ =
| तळटिपा =}}<nowiki>नाव = शिराळे | राज्य = महाराष्ट्र | जिल्हा = सिंधुदुर्ग | तालुका = वैभववाडी | ग्रामपंचायत = सडुरे-शिराळे | जनगणना कोड = 566382 | पिनकोड = 416810 | अक्षांश = 16.463042 | रेखांश = 73.862576 | लोकसंख्या = सुमारे 280 | कुटुंबे = सुमारे 75 }}</nowiki>
'''शिराळे''' हे [[महाराष्ट्र]] राज्यातील [[सिंधुदुर्ग जिल्हा|सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातील]] [[वैभववाडी तालुका|वैभववाडी तालुक्यातील]] एक डोंगराळ व निसर्गरम्य गाव आहे. हे गाव तालुक्याच्या पूर्वेकडील भागात असून [[कोल्हापूर जिल्हा|कोल्हापूर जिल्ह्याच्या]] सीमावर्ती डोंगराळ परिसराच्या जवळ आहे. गावाचा परिसर सह्याद्रीच्या डोंगररांगा, घनदाट वनक्षेत्र, नैसर्गिक जलस्रोत आणि पावसाळ्यातील धबधब्यांसाठी ओळखला जातो.
== भौगोलिक स्थान ==
शिराळे गाव वैभववाडी तालुक्याच्या पूर्वेकडील भागात वसलेले आहे. गावाच्या परिसरात डोंगर, दऱ्या, जंगल आणि नैसर्गिक जलस्रोत आढळतात. गावाच्या स्थानाचे GPS निर्देशांक स्थानिक नोंदीनुसार '''16.463042° उत्तर अक्षांश आणि 73.862576° पूर्व रेखांश''' असे आहेत.
सन 2011 च्या भारताच्या जनगणनेनुसार शिराळे गावाचा जनगणना कोड '''566382''' असून गावाचे क्षेत्रफळ सुमारे '''1,189.7 हेक्टर''' होते.<ref name="Census2011">{{Cite web|url=https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/830/download/36188/DH_2011_2733_PART_A_DCHB_SINDHUDURG.pdf|title=District Census Handbook, Sindhudurg|publisher=Office of the Registrar General & Census Commissioner, India|access-date=2026-09-15}}</ref>
== लोकसंख्या ==
2011 च्या भारताच्या जनगणनेनुसार शिराळे गावाची लोकसंख्या '''229''' असून एकूण '''72 कुटुंबे''' होती.<ref name="Census2011" />
स्थानिक माहितीनुसार 2026 मध्ये गावाची लोकसंख्या सुमारे '''280''' असून सुमारे '''75 घरे''' आहेत. हा 2026 चा आकडा स्थानिक माहितीनुसार दिलेला असून अधिकृत जनगणना आकडा नाही. अधिकृत जनगणना आकडे उपलब्ध झाल्यानंतर या विभागात त्यानुसार सुधारणा करता येईल.
== इतिहास ==
स्थानिक परंपरेनुसार शिराळे गावाची वस्ती अनेक पिढ्यांपासून येथे आहे. स्थानिक माहितीनुसार गावातील जुन्या कुटुंबांना पूर्वी '''मिराशी''' म्हणून संबोधले जात असे. पुढील काळात '''मराठे''' आणि त्यानंतर '''पाटील''' अशी संबोधने प्रचलित झाली.
स्थानिक परंपरेनुसार गावातील पाटील कुटुंबांचा [[गांगेश्वर मंदिर|गांगेश्वर मंदिराशी]] धार्मिक संबंध होता. गावाच्या नावाच्या उत्पत्तीबाबत स्थानिक पातळीवर विविध समजुती आढळतात. त्यापैकी एक स्थानिक समजूत अशी आहे की गावातील लोकांची विशिष्ट राहणीमानाची पद्धत किंवा स्वभाव यावरून गावाला 'शिराळे' हे नाव प्राप्त झाले असावे. या नावाच्या उत्पत्तीची अधिकृत ऐतिहासिक नोंद उपलब्ध नसल्याने ही माहिती स्थानिक परंपरा म्हणून पाहिली जाते.
== समाजजीवन ==
शिराळे गावातील प्रमुख सामाजिक घटकांमध्ये मराठा आणि धनगर समाजाचा समावेश होतो. गावातील धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमांमध्ये विविध समाजघटकांचा सहभाग असतो.
गावातील सण, उत्सव, धार्मिक कार्यक्रम, भजन, सामुदायिक भोजन आणि पारंपरिक प्रथा यांमुळे गावातील सामुदायिक जीवनाला महत्त्व प्राप्त झाले आहे.
== गांगेश्वर मंदिर ==
गावाचे प्रमुख धार्मिक स्थळ '''गांगेश्वर मंदिर''' आहे. स्थानिक श्रद्धेनुसार हे मंदिर प्राचीन असून येथील गांगेश्वर देवस्थान स्वयंभू मानले जाते. स्थानिक माहितीनुसार मंदिराचा कालांतराने दोन-तीन वेळा जीर्णोद्धार करण्यात आला आहे.
गांगेश्वर मंदिर हे गावातील धार्मिक तसेच सामाजिक उपक्रमांचे एक प्रमुख केंद्र आहे. येथे विविध धार्मिक कार्यक्रम, पूजा, भजन आणि सामुदायिक भोजनाचे आयोजन केले जाते.
== मंदिर परिसरातील शांततेची परंपरा ==
गांगेश्वर मंदिर परिसरात मोठ्या आवाजातील ध्वनिक्षेपक किंवा वाद्यांचा वापर टाळण्याची स्थानिक परंपरा आहे. धार्मिक विधीच्या वेळी आवश्यकतेनुसार मर्यादित ध्वनिक्षेपकाचा वापर केला जातो.
स्थानिक परंपरेनुसार पूर्वी गावातील विवाहसोहळे गावाच्या हद्दीबाहेर करण्याची पद्धत होती. पुढील काळात स्थानिकांच्या मागणीनंतर विवाहसोहळे गावातच करण्याची पद्धत रूढ झाली.
== शुकमुनींची गुहा ==
गावाच्या डोंगराळ परिसरात '''शुकमुनींची गुहा''' किंवा '''सुखमुनी मठ''' म्हणून ओळखले जाणारे धार्मिक स्थळ आहे. या स्थळाशी संबंधित स्थानिक परंपरा आणि धार्मिक श्रद्धा गावाच्या सांस्कृतिक जीवनाचा भाग आहेत.
स्थानिक माहितीनुसार शुकमुनींच्या गुहेमुळे परिसरातील नदीला '''शुकनदी''' हे नाव पडले असल्याचे सांगितले जाते. पावसाळ्यात या परिसरातील जलप्रवाह वाढतो.
== नैसर्गिक जलस्रोत ==
शिराळे गावात बारमाही पाणी उपलब्ध करून देणारा नैसर्गिक झरा आहे. स्थानिक माहितीनुसार या झऱ्याचे पाणी पाइपद्वारे गुरुत्वाकर्षणाच्या साहाय्याने गावात आणले जाते. या पाणीपुरवठ्यासाठी मोटार किंवा विद्युत यंत्रणेचा वापर करण्याची आवश्यकता नसल्याचे स्थानिकांकडून सांगितले जाते.
== जैवविविधता ==
शिराळे परिसर हा डोंगराळ व वनक्षेत्राने व्यापलेला असल्यामुळे येथे विविध प्रकारची वनस्पती व वन्यजीव आढळतात. गावाचा परिसर राधानगरी वन्यजीव अभयारण्याच्या पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्राच्या परिसराशी संबंधित आहे. राधानगरी पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्राच्या अधिसूचनेत शिराळे गावाचा समावेश करण्यात आलेला आहे.<ref name="ESZ">{{Cite web|url=https://moef.gov.in/uploads/2020/10/radhanagari.pdf|title=Radhanagari Wildlife Sanctuary – Eco-sensitive Zone Notification|publisher=Ministry of Environment, Forest and Climate Change, Government of India|access-date=2026-09-15}}</ref>
स्थानिक माहितीनुसार परिसरात गवा, सांबर यांसारखे वन्यप्राणी तसेच विविध प्रकारचे पक्षी आढळतात. जंगलामध्ये कणकेचे कोंब, तोंडाची भाजी, टाकळ्याची भाजी यांसारख्या स्थानिक रानभाज्यांचा वापर पारंपरिक आहारात केला जातो.
परिसरात शिकेकाई, जिरंग, विकारीची साल, रक्तबावळी, कापरभेंडी, घनशीचे पाळ यांसारख्या स्थानिक वनस्पती आढळतात. या वनस्पतींचा पारंपरिक वापर स्थानिक ज्ञानाचा भाग आहे.
== पर्यटन ==
शिराळे गावाला निसर्ग आणि धार्मिक पर्यटनाची क्षमता आहे. गावाच्या परिसरातील डोंगर, धबधबे, गुहा, मंदिरे आणि नैसर्गिक जलस्रोत पर्यटकांना आकर्षित करतात.
स्थानिक पर्यटन फलकानुसार गावाच्या परिसरातील काही प्रमुख पर्यटनस्थळे पुढीलप्रमाणे आहेत.
=== बारमाही पर्यटनस्थळे ===
# शिडिमाचा उमाळा – 4.2 किमी
# पाट्याचा डोंक – 4.1 किमी
# सुरव नदी उगमस्थान – 4.1 किमी
# गवळणीचा कडा – 3.8 किमी
# वणव्याचा डोंक – 3.7 किमी
# सुखमुनी मठ – 3 किमी
# मलका देवी – 2.5 किमी
# पावणाई मंदिर – 0.1 किमी
# घोरप्याचा माळ – 0.5 किमी
# गांगेश्वर मंदिर – 0 किमी
=== पावसाळी पर्यटनस्थळे ===
पावसाळ्यात गावाच्या परिसरातील अनेक धबधबे सक्रिय होतात. स्थानिक पर्यटन फलकावर पुढील धबधब्यांची नोंद आहे.
# शिडिमाचा धबधबा – 4.2 किमी
# खुर्जी धबधबा – 3.9 किमी
# राशीचा धबधबा – 0.3 किमी
# रुसड्याचा धबधबा – 2.5 किमी
# सुतार मांगर धबधबा – 0.2 किमी
# पेंडकुळी धबधबा – 1.5 किमी
# वजर धबधबा – 0.5 किमी
# खडकी धबधबा – 0.5 किमी
# गांगो धबधबा – 0.5 किमी
वरील अंतर स्थानिक पर्यटन फलकावर नमूद केलेल्या अंतरानुसार आहेत.
== गावपळवण ==
शिराळे गावातील वैशिष्ट्यपूर्ण पारंपरिक प्रथांपैकी '''गावपळवण''' ही एक प्रथा आहे. ही प्रथा साधारणपणे [[मकरसंक्रांत|मकरसंक्रांतीच्या]] आसपास आयोजित केली जाते.
स्थानिक माहितीनुसार पूर्वी गावपळवणाचा कालावधी सुमारे तीन आठवडे किंवा त्याहून अधिक असायचा. सध्या हा कालावधी सुमारे सात दिवसांचा आहे. या काळात गावातील लोक गावाच्या हद्दीबाहेरील ठिकाणी एकत्र राहतात. ही प्रथा सामुदायिक एकोपा आणि परंपरेशी संबंधित मानली जाते.
गावपळवणानंतर '''घोरिप''' हा धार्मिक कार्यक्रम आयोजित केला जातो. या कार्यक्रमात स्थानिक लोक आपल्या श्रद्धेनुसार नवस किंवा इच्छा व्यक्त करतात. कार्यक्रमानंतर मोठ्या प्रमाणावर महाप्रसादाचे आयोजन केले जाते. स्थानिक माहितीनुसार या महाप्रसादास सुमारे 250 ते 300 लोक उपस्थित राहतात.
== पालेभावय ==
शिराळे गावात शेतीची कामे सुरू करण्यापूर्वी '''पालेभावय''' ही सामुदायिक परंपरा पाळली जाते. या प्रसंगी गावातील लोक जंगलातून उपलब्ध होणाऱ्या विविध रानभाज्या गोळा करतात. या भाज्या एकत्रितपणे शिजवून गांगेश्वर मंदिरात सामुदायिक भोजनाचे आयोजन केले जाते.
रानभाज्यांसोबत भाताचा महाप्रसाद केला जातो. गावातील नागरिक तसेच आलेल्या पाहुण्यांना प्रसाद दिल्यानंतर शेतीच्या कामांना सुरुवात करण्याची परंपरा आहे.
== वारी सोमवार ==
गांगेश्वर देवस्थानाशी संबंधित स्थानिक परंपरेनुसार सोमवारचा दिवस धार्मिक कार्यासाठी राखून ठेवण्याची पद्धत आहे. स्थानिक माहितीनुसार या दिवशी नियमित मजुरी किंवा श्रमाचे काम न करण्याची प्रथा काही कुटुंबांमध्ये पाळली जाते.
== सण आणि उत्सव ==
शिराळे गावात विविध धार्मिक व सांस्कृतिक सण साजरे केले जातात. त्यामध्ये पुढील उत्सवांचा समावेश होतो:
* गांगेश्वर देवस्थानाची वार्षिक पूजा
* घोरिप कार्यक्रम
* शिमगा
* पालेभावय
* सत्यनारायण पूजा
* दहीहंडी
* गणेशोत्सव
* नवरात्रोत्सव
* वारकरी भजन
* संगीत भजन
=== नवरात्रोत्सव ===
नवरात्रोत्सवाच्या काळात गावातील सार्वजनिक सभागृह किंवा शाळेच्या परिसरात देवीची स्थापना करून नऊ दिवस पूजा-अर्चा केली जाते.
=== धनगर समाजाचे गजा नृत्य ===
शिराळे गावातील धनगर समाजाच्या सांस्कृतिक परंपरांमध्ये '''गजा नृत्य''' या पारंपरिक नृत्यप्रकाराचा समावेश होतो. दसऱ्याच्या सणाच्या निमित्ताने विशेष पोशाख परिधान करून पारंपरिक गीते व नृत्य सादर केले जाते.
== शिक्षण ==
गावात '''जिल्हा परिषद प्राथमिक शाळा विद्यामंदिर शिराळे''' ही प्राथमिक शाळा आहे. शाळेत प्राथमिक स्तरावरील विद्यार्थ्यांना शिक्षण दिले जाते.
== अर्थव्यवस्था ==
शिराळे गावातील अर्थव्यवस्थेत शेती, पशुपालन, मजुरी आणि वनक्षेत्राशी संबंधित पारंपरिक उपजीविका यांचा समावेश होतो. डोंगराळ भौगोलिक परिस्थितीमुळे येथील शेतीचे स्वरूप परिसरातील इतर गावांपेक्षा काही प्रमाणात वेगळे आहे.
== सांस्कृतिक जीवन ==
शिराळे गावाचे सांस्कृतिक जीवन धार्मिक श्रद्धा, सामुदायिक परंपरा, भजन, लोककला, सण-उत्सव आणि सामुदायिक भोजन यांभोवती केंद्रित आहे. गावातील विविध समाजघटक धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमांमध्ये सहभागी होतात.
गावपळवण, पालेभावय, गांगेश्वर देवस्थानाशी संबंधित परंपरा आणि धनगर समाजाचे गजा नृत्य या स्थानिक सांस्कृतिक वैशिष्ट्यांमुळे शिराळे गावाला स्वतंत्र सांस्कृतिक ओळख प्राप्त झाली आहे.
== पर्यटन विकासाची क्षमता ==
शिराळे गावाच्या परिसरात नैसर्गिक आणि धार्मिक पर्यटनासाठी विविध ठिकाणे उपलब्ध आहेत. डोंगर, जंगल, धबधबे, नैसर्गिक झरे, गुहा आणि मंदिरे यांमुळे पावसाळ्यात विशेषतः पर्यटकांना आकर्षित करण्याची क्षमता या परिसरात आहे.
पर्यटनाचा विकास करताना स्थानिक पर्यावरण, वन्यजीव, जलस्रोत आणि गावाच्या पारंपरिक संस्कृतीचे संवर्धन करणे महत्त्वाचे ठरते.
== शिराळेची वैशिष्ट्ये ==
शिराळे गावाची प्रमुख वैशिष्ट्ये पुढीलप्रमाणे सांगता येतात:
* वैभववाडी तालुक्याच्या पूर्वेकडील डोंगराळ भागातील स्थान.
* सह्याद्रीच्या परिसरातील निसर्गरम्य वातावरण.
* गांगेश्वर हे प्रमुख धार्मिक स्थळ.
* शुकमुनींची गुहा व संबंधित धार्मिक परंपरा.
* नैसर्गिक झऱ्याद्वारे गुरुत्वाकर्षणाच्या साहाय्याने होणारा पारंपरिक पाणीपुरवठा.
* गावपळवण ही वैशिष्ट्यपूर्ण सामुदायिक परंपरा.
* पालेभावय ही शेतीपूर्व सामुदायिक परंपरा.
* धनगर समाजाचे गजा नृत्य.
* पावसाळ्यात सक्रिय होणारे अनेक धबधबे.
* जंगलातील स्थानिक रानभाज्या व वनस्पतींचे पारंपरिक ज्ञान.
* धार्मिक आणि सांस्कृतिक कार्यक्रमांमध्ये सामुदायिक सहभाग.
== संदर्भ ==
<references responsive="1"></references>
== बाह्य दुवे ==
* भारताची जनगणना – अधिकृत संकेतस्थळ
* भारत सरकार, पर्यावरण, वन आणि हवामान बदल मंत्रालय
[[विशेष:वर्ग|वर्ग]]:
* [[:वर्ग:सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातील गावे|सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातील गावे]]
* [[:वर्ग:वैभववाडी तालुक्यातील गावे|वैभववाडी तालुक्यातील गावे]]
* [[:वर्ग:सिंधुदुर्ग जिल्हा|सिंधुदुर्ग जिल्हा]]
* [[:वर्ग:महाराष्ट्रातील गावे|महाराष्ट्रातील गावे]]
१.https://villageinfo.in/
२.https://www.census2011.co.in/
३.http://tourism.gov.in/
४.https://www.incredibleindia.org/
५.https://www.india.gov.in/topics/travel-tourism
६.https://www.mapsofindia.com/
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'''शिराळे''' हे [[महाराष्ट्र]] राज्यातील [[सिंधुदुर्ग जिल्हा|सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातील]] [[वैभववाडी तालुका|वैभववाडी तालुक्यातील]] एक डोंगराळ व निसर्गरम्य गाव आहे. हे गाव तालुक्याच्या पूर्वेकडील भागात असून [[कोल्हापूर जिल्हा|कोल्हापूर जिल्ह्याच्या]] सीमावर्ती डोंगराळ परिसराच्या जवळ आहे. गावाचा परिसर सह्याद्रीच्या डोंगररांगा, घनदाट वनक्षेत्र, नैसर्गिक जलस्रोत आणि पावसाळ्यातील धबधब्यांसाठी ओळखला जातो.
== भौगोलिक स्थान ==
शिराळे गाव वैभववाडी तालुक्याच्या पूर्वेकडील भागात वसलेले आहे. गावाच्या परिसरात डोंगर, दऱ्या, जंगल आणि नैसर्गिक जलस्रोत आढळतात. गावाच्या स्थानाचे GPS निर्देशांक स्थानिक नोंदीनुसार '''16.463042° उत्तर अक्षांश आणि 73.862576° पूर्व रेखांश''' असे आहेत.
सन 2011 च्या भारताच्या जनगणनेनुसार शिराळे गावाचा जनगणना कोड '''566382''' असून गावाचे क्षेत्रफळ सुमारे '''1,189.7 हेक्टर''' होते.<ref name="Census2011">{{Cite web|url=https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/830/download/36188/DH_2011_2733_PART_A_DCHB_SINDHUDURG.pdf|title=District Census Handbook, Sindhudurg|publisher=Office of the Registrar General & Census Commissioner, India|access-date=2026-09-15}}</ref>
== लोकसंख्या ==
2011 च्या भारताच्या जनगणनेनुसार शिराळे गावाची लोकसंख्या '''229''' असून एकूण '''72 कुटुंबे''' होती.<ref name="Census2011" />
स्थानिक माहितीनुसार 2026 मध्ये गावाची लोकसंख्या सुमारे '''280''' असून सुमारे '''75 घरे''' आहेत. हा 2026 चा आकडा स्थानिक माहितीनुसार दिलेला असून अधिकृत जनगणना आकडा नाही. अधिकृत जनगणना आकडे उपलब्ध झाल्यानंतर या विभागात त्यानुसार सुधारणा करता येईल.
== इतिहास ==
स्थानिक परंपरेनुसार शिराळे गावाची वस्ती अनेक पिढ्यांपासून येथे आहे. स्थानिक माहितीनुसार गावातील जुन्या कुटुंबांना पूर्वी '''मिराशी''' म्हणून संबोधले जात असे. पुढील काळात '''मराठे''' आणि त्यानंतर '''पाटील''' अशी संबोधने प्रचलित झाली.
स्थानिक परंपरेनुसार गावातील पाटील कुटुंबांचा [[गांगेश्वर मंदिर|गांगेश्वर मंदिराशी]] धार्मिक संबंध होता. गावाच्या नावाच्या उत्पत्तीबाबत स्थानिक पातळीवर विविध समजुती आढळतात. त्यापैकी एक स्थानिक समजूत अशी आहे की गावातील लोकांची विशिष्ट राहणीमानाची पद्धत किंवा स्वभाव यावरून गावाला 'शिराळे' हे नाव प्राप्त झाले असावे. या नावाच्या उत्पत्तीची अधिकृत ऐतिहासिक नोंद उपलब्ध नसल्याने ही माहिती स्थानिक परंपरा म्हणून पाहिली जाते.
== समाजजीवन ==
शिराळे गावातील प्रमुख सामाजिक घटकांमध्ये मराठा आणि धनगर समाजाचा समावेश होतो. गावातील धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमांमध्ये विविध समाजघटकांचा सहभाग असतो.
गावातील सण, उत्सव, धार्मिक कार्यक्रम, भजन, सामुदायिक भोजन आणि पारंपरिक प्रथा यांमुळे गावातील सामुदायिक जीवनाला महत्त्व प्राप्त झाले आहे.
== गांगेश्वर मंदिर ==
गावाचे प्रमुख धार्मिक स्थळ '''गांगेश्वर मंदिर''' आहे. स्थानिक श्रद्धेनुसार हे मंदिर प्राचीन असून येथील गांगेश्वर देवस्थान स्वयंभू मानले जाते. स्थानिक माहितीनुसार मंदिराचा कालांतराने दोन-तीन वेळा जीर्णोद्धार करण्यात आला आहे.
गांगेश्वर मंदिर हे गावातील धार्मिक तसेच सामाजिक उपक्रमांचे एक प्रमुख केंद्र आहे. येथे विविध धार्मिक कार्यक्रम, पूजा, भजन आणि सामुदायिक भोजनाचे आयोजन केले जाते.
== मंदिर परिसरातील शांततेची परंपरा ==
गांगेश्वर मंदिर परिसरात मोठ्या आवाजातील ध्वनिक्षेपक किंवा वाद्यांचा वापर टाळण्याची स्थानिक परंपरा आहे. धार्मिक विधीच्या वेळी आवश्यकतेनुसार मर्यादित ध्वनिक्षेपकाचा वापर केला जातो.
स्थानिक परंपरेनुसार पूर्वी गावातील विवाहसोहळे गावाच्या हद्दीबाहेर करण्याची पद्धत होती. पुढील काळात स्थानिकांच्या मागणीनंतर विवाहसोहळे गावातच करण्याची पद्धत रूढ झाली.
== शुकमुनींची गुहा ==
गावाच्या डोंगराळ परिसरात '''शुकमुनींची गुहा''' किंवा '''सुखमुनी मठ''' म्हणून ओळखले जाणारे धार्मिक स्थळ आहे. या स्थळाशी संबंधित स्थानिक परंपरा आणि धार्मिक श्रद्धा गावाच्या सांस्कृतिक जीवनाचा भाग आहेत.
स्थानिक माहितीनुसार शुकमुनींच्या गुहेमुळे परिसरातील नदीला '''शुकनदी''' हे नाव पडले असल्याचे सांगितले जाते. पावसाळ्यात या परिसरातील जलप्रवाह वाढतो.
== नैसर्गिक जलस्रोत ==
शिराळे गावात बारमाही पाणी उपलब्ध करून देणारा नैसर्गिक झरा आहे. स्थानिक माहितीनुसार या झऱ्याचे पाणी पाइपद्वारे गुरुत्वाकर्षणाच्या साहाय्याने गावात आणले जाते. या पाणीपुरवठ्यासाठी मोटार किंवा विद्युत यंत्रणेचा वापर करण्याची आवश्यकता नसल्याचे स्थानिकांकडून सांगितले जाते.
== जैवविविधता ==
शिराळे परिसर हा डोंगराळ व वनक्षेत्राने व्यापलेला असल्यामुळे येथे विविध प्रकारची वनस्पती व वन्यजीव आढळतात. गावाचा परिसर राधानगरी वन्यजीव अभयारण्याच्या पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्राच्या परिसराशी संबंधित आहे. राधानगरी पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्राच्या अधिसूचनेत शिराळे गावाचा समावेश करण्यात आलेला आहे.<ref name="ESZ">{{Cite web|url=https://moef.gov.in/uploads/2020/10/radhanagari.pdf|title=Radhanagari Wildlife Sanctuary – Eco-sensitive Zone Notification|publisher=Ministry of Environment, Forest and Climate Change, Government of India|access-date=2026-09-15}}</ref>
स्थानिक माहितीनुसार परिसरात गवा, सांबर यांसारखे वन्यप्राणी तसेच विविध प्रकारचे पक्षी आढळतात. जंगलामध्ये कणकेचे कोंब, तोंडाची भाजी, टाकळ्याची भाजी यांसारख्या स्थानिक रानभाज्यांचा वापर पारंपरिक आहारात केला जातो.
परिसरात शिकेकाई, जिरंग, विकारीची साल, रक्तबावळी, कापरभेंडी, घनशीचे पाळ यांसारख्या स्थानिक वनस्पती आढळतात. या वनस्पतींचा पारंपरिक वापर स्थानिक ज्ञानाचा भाग आहे.
== पर्यटन ==
शिराळे गावाला निसर्ग आणि धार्मिक पर्यटनाची क्षमता आहे. गावाच्या परिसरातील डोंगर, धबधबे, गुहा, मंदिरे आणि नैसर्गिक जलस्रोत पर्यटकांना आकर्षित करतात.
स्थानिक पर्यटन फलकानुसार गावाच्या परिसरातील काही प्रमुख पर्यटनस्थळे पुढीलप्रमाणे आहेत.
=== बारमाही पर्यटनस्थळे ===
# शिडिमाचा उमाळा – 4.2 किमी
# पाट्याचा डोंक – 4.1 किमी
# सुरव नदी उगमस्थान – 4.1 किमी
# गवळणीचा कडा – 3.8 किमी
# वणव्याचा डोंक – 3.7 किमी
# सुखमुनी मठ – 3 किमी
# मलका देवी – 2.5 किमी
# पावणाई मंदिर – 0.1 किमी
# घोरप्याचा माळ – 0.5 किमी
# गांगेश्वर मंदिर – 0 किमी
=== पावसाळी पर्यटनस्थळे ===
पावसाळ्यात गावाच्या परिसरातील अनेक धबधबे सक्रिय होतात. स्थानिक पर्यटन फलकावर पुढील धबधब्यांची नोंद आहे.
# शिडिमाचा धबधबा – 4.2 किमी
# खुर्जी धबधबा – 3.9 किमी
# राशीचा धबधबा – 0.3 किमी
# रुसड्याचा धबधबा – 2.5 किमी
# सुतार मांगर धबधबा – 0.2 किमी
# पेंडकुळी धबधबा – 1.5 किमी
# वजर धबधबा – 0.5 किमी
# खडकी धबधबा – 0.5 किमी
# गांगो धबधबा – 0.5 किमी
वरील अंतर स्थानिक पर्यटन फलकावर नमूद केलेल्या अंतरानुसार आहेत.
== गावपळवण ==
शिराळे गावातील वैशिष्ट्यपूर्ण पारंपरिक प्रथांपैकी '''गावपळवण''' ही एक प्रथा आहे. ही प्रथा साधारणपणे [[मकरसंक्रांत|मकरसंक्रांतीच्या]] आसपास आयोजित केली जाते.
स्थानिक माहितीनुसार पूर्वी गावपळवणाचा कालावधी सुमारे तीन आठवडे किंवा त्याहून अधिक असायचा. सध्या हा कालावधी सुमारे सात दिवसांचा आहे. या काळात गावातील लोक गावाच्या हद्दीबाहेरील ठिकाणी एकत्र राहतात. ही प्रथा सामुदायिक एकोपा आणि परंपरेशी संबंधित मानली जाते.
गावपळवणानंतर '''घोरिप''' हा धार्मिक कार्यक्रम आयोजित केला जातो. या कार्यक्रमात स्थानिक लोक आपल्या श्रद्धेनुसार नवस किंवा इच्छा व्यक्त करतात. कार्यक्रमानंतर मोठ्या प्रमाणावर महाप्रसादाचे आयोजन केले जाते. स्थानिक माहितीनुसार या महाप्रसादास सुमारे 250 ते 300 लोक उपस्थित राहतात.
== पालेभावय ==
शिराळे गावात शेतीची कामे सुरू करण्यापूर्वी '''पालेभावय''' ही सामुदायिक परंपरा पाळली जाते. या प्रसंगी गावातील लोक जंगलातून उपलब्ध होणाऱ्या विविध रानभाज्या गोळा करतात. या भाज्या एकत्रितपणे शिजवून गांगेश्वर मंदिरात सामुदायिक भोजनाचे आयोजन केले जाते.
रानभाज्यांसोबत भाताचा महाप्रसाद केला जातो. गावातील नागरिक तसेच आलेल्या पाहुण्यांना प्रसाद दिल्यानंतर शेतीच्या कामांना सुरुवात करण्याची परंपरा आहे.
== वारी सोमवार ==
गांगेश्वर देवस्थानाशी संबंधित स्थानिक परंपरेनुसार सोमवारचा दिवस धार्मिक कार्यासाठी राखून ठेवण्याची पद्धत आहे. स्थानिक माहितीनुसार या दिवशी नियमित मजुरी किंवा श्रमाचे काम न करण्याची प्रथा काही कुटुंबांमध्ये पाळली जाते.
== सण आणि उत्सव ==
शिराळे गावात विविध धार्मिक व सांस्कृतिक सण साजरे केले जातात. त्यामध्ये पुढील उत्सवांचा समावेश होतो:
* गांगेश्वर देवस्थानाची वार्षिक पूजा
* घोरिप कार्यक्रम
* शिमगा
* पालेभावय
* सत्यनारायण पूजा
* दहीहंडी
* गणेशोत्सव
* नवरात्रोत्सव
* वारकरी भजन
* संगीत भजन
=== नवरात्रोत्सव ===
नवरात्रोत्सवाच्या काळात गावातील सार्वजनिक सभागृह किंवा शाळेच्या परिसरात देवीची स्थापना करून नऊ दिवस पूजा-अर्चा केली जाते.
=== धनगर समाजाचे गजा नृत्य ===
शिराळे गावातील धनगर समाजाच्या सांस्कृतिक परंपरांमध्ये '''गजा नृत्य''' या पारंपरिक नृत्यप्रकाराचा समावेश होतो. दसऱ्याच्या सणाच्या निमित्ताने विशेष पोशाख परिधान करून पारंपरिक गीते व नृत्य सादर केले जाते.
== शिक्षण ==
गावात '''जिल्हा परिषद प्राथमिक शाळा विद्यामंदिर शिराळे''' ही प्राथमिक शाळा आहे. शाळेत प्राथमिक स्तरावरील विद्यार्थ्यांना शिक्षण दिले जाते.
== अर्थव्यवस्था ==
शिराळे गावातील अर्थव्यवस्थेत शेती, पशुपालन, मजुरी आणि वनक्षेत्राशी संबंधित पारंपरिक उपजीविका यांचा समावेश होतो. डोंगराळ भौगोलिक परिस्थितीमुळे येथील शेतीचे स्वरूप परिसरातील इतर गावांपेक्षा काही प्रमाणात वेगळे आहे.
== सांस्कृतिक जीवन ==
शिराळे गावाचे सांस्कृतिक जीवन धार्मिक श्रद्धा, सामुदायिक परंपरा, भजन, लोककला, सण-उत्सव आणि सामुदायिक भोजन यांभोवती केंद्रित आहे. गावातील विविध समाजघटक धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमांमध्ये सहभागी होतात.
गावपळवण, पालेभावय, गांगेश्वर देवस्थानाशी संबंधित परंपरा आणि धनगर समाजाचे गजा नृत्य या स्थानिक सांस्कृतिक वैशिष्ट्यांमुळे शिराळे गावाला स्वतंत्र सांस्कृतिक ओळख प्राप्त झाली आहे.
== पर्यटन विकासाची क्षमता ==
शिराळे गावाच्या परिसरात नैसर्गिक आणि धार्मिक पर्यटनासाठी विविध ठिकाणे उपलब्ध आहेत. डोंगर, जंगल, धबधबे, नैसर्गिक झरे, गुहा आणि मंदिरे यांमुळे पावसाळ्यात विशेषतः पर्यटकांना आकर्षित करण्याची क्षमता या परिसरात आहे.
पर्यटनाचा विकास करताना स्थानिक पर्यावरण, वन्यजीव, जलस्रोत आणि गावाच्या पारंपरिक संस्कृतीचे संवर्धन करणे महत्त्वाचे ठरते.
== शिराळेची वैशिष्ट्ये ==
शिराळे गावाची प्रमुख वैशिष्ट्ये पुढीलप्रमाणे सांगता येतात:
* वैभववाडी तालुक्याच्या पूर्वेकडील डोंगराळ भागातील स्थान.
* सह्याद्रीच्या परिसरातील निसर्गरम्य वातावरण.
* गांगेश्वर हे प्रमुख धार्मिक स्थळ.
* शुकमुनींची गुहा व संबंधित धार्मिक परंपरा.
* नैसर्गिक झऱ्याद्वारे गुरुत्वाकर्षणाच्या साहाय्याने होणारा पारंपरिक पाणीपुरवठा.
* गावपळवण ही वैशिष्ट्यपूर्ण सामुदायिक परंपरा.
* पालेभावय ही शेतीपूर्व सामुदायिक परंपरा.
* धनगर समाजाचे गजा नृत्य.
* पावसाळ्यात सक्रिय होणारे अनेक धबधबे.
* जंगलातील स्थानिक रानभाज्या व वनस्पतींचे पारंपरिक ज्ञान.
* धार्मिक आणि सांस्कृतिक कार्यक्रमांमध्ये सामुदायिक सहभाग.
== संदर्भ ==
<references responsive="1"></references>
== बाह्य दुवे ==
* भारताची जनगणना – अधिकृत संकेतस्थळ
* भारत सरकार, पर्यावरण, वन आणि हवामान बदल मंत्रालय
[[विशेष:वर्ग|वर्ग]]:
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१.https://villageinfo.in/
२.https://www.census2011.co.in/
३.http://tourism.gov.in/
४.https://www.incredibleindia.org/
५.https://www.india.gov.in/topics/travel-tourism
६.https://www.mapsofindia.com/
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'''शिराळे''' हे [[महाराष्ट्र]] राज्यातील [[सिंधुदुर्ग जिल्हा|सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातील]] [[वैभववाडी तालुका|वैभववाडी तालुक्यातील]] एक डोंगराळ व निसर्गरम्य गाव आहे. हे गाव तालुक्याच्या पूर्वेकडील भागात असून [[कोल्हापूर जिल्हा|कोल्हापूर जिल्ह्याच्या]] सीमावर्ती डोंगराळ परिसराच्या जवळ आहे. गावाचा परिसर सह्याद्रीच्या डोंगररांगा, घनदाट वनक्षेत्र, नैसर्गिक जलस्रोत आणि पावसाळ्यातील धबधब्यांसाठी ओळखला जातो.
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शिराळे गाव वैभववाडी तालुक्याच्या पूर्वेकडील भागात वसलेले आहे. गावाच्या परिसरात डोंगर, दऱ्या, जंगल आणि नैसर्गिक जलस्रोत आढळतात. गावाच्या स्थानाचे GPS निर्देशांक स्थानिक नोंदीनुसार '''16.463042° उत्तर अक्षांश आणि 73.862576° पूर्व रेखांश''' असे आहेत.
सन 2011 च्या भारताच्या जनगणनेनुसार शिराळे गावाचा जनगणना कोड '''566382''' असून गावाचे क्षेत्रफळ सुमारे '''1,189.7 हेक्टर''' होते.<ref name="Census2011">{{Cite web|url=https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/830/download/36188/DH_2011_2733_PART_A_DCHB_SINDHUDURG.pdf|title=District Census Handbook, Sindhudurg|publisher=Office of the Registrar General & Census Commissioner, India|access-date=2026-09-15}}</ref>
== लोकसंख्या ==
2011 च्या भारताच्या जनगणनेनुसार शिराळे गावाची लोकसंख्या '''229''' असून एकूण '''72 कुटुंबे''' होती.<ref name="Census2011" />
स्थानिक माहितीनुसार 2026 मध्ये गावाची लोकसंख्या सुमारे '''280''' असून सुमारे '''75 घरे''' आहेत. हा 2026 चा आकडा स्थानिक माहितीनुसार दिलेला असून अधिकृत जनगणना आकडा नाही. अधिकृत जनगणना आकडे उपलब्ध झाल्यानंतर या विभागात त्यानुसार सुधारणा करता येईल.
== इतिहास ==
स्थानिक परंपरेनुसार शिराळे गावाची वस्ती अनेक पिढ्यांपासून येथे आहे. स्थानिक माहितीनुसार गावातील जुन्या कुटुंबांना पूर्वी '''मिराशी''' म्हणून संबोधले जात असे. पुढील काळात '''मराठे''' आणि त्यानंतर '''पाटील''' अशी संबोधने प्रचलित झाली.
स्थानिक परंपरेनुसार गावातील पाटील कुटुंबांचा [[गांगेश्वर मंदिर|गांगेश्वर मंदिराशी]] धार्मिक संबंध होता. गावाच्या नावाच्या उत्पत्तीबाबत स्थानिक पातळीवर विविध समजुती आढळतात. त्यापैकी एक स्थानिक समजूत अशी आहे की गावातील लोकांची विशिष्ट राहणीमानाची पद्धत किंवा स्वभाव यावरून गावाला 'शिराळे' हे नाव प्राप्त झाले असावे. या नावाच्या उत्पत्तीची अधिकृत ऐतिहासिक नोंद उपलब्ध नसल्याने ही माहिती स्थानिक परंपरा म्हणून पाहिली जाते.
== समाजजीवन ==
शिराळे गावातील प्रमुख सामाजिक घटकांमध्ये मराठा आणि धनगर समाजाचा समावेश होतो. गावातील धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमांमध्ये विविध समाजघटकांचा सहभाग असतो.
गावातील सण, उत्सव, धार्मिक कार्यक्रम, भजन, सामुदायिक भोजन आणि पारंपरिक प्रथा यांमुळे गावातील सामुदायिक जीवनाला महत्त्व प्राप्त झाले आहे.
== गांगेश्वर मंदिर ==
गावाचे प्रमुख धार्मिक स्थळ '''गांगेश्वर मंदिर''' आहे. स्थानिक श्रद्धेनुसार हे मंदिर प्राचीन असून येथील गांगेश्वर देवस्थान स्वयंभू मानले जाते. स्थानिक माहितीनुसार मंदिराचा कालांतराने दोन-तीन वेळा जीर्णोद्धार करण्यात आला आहे.
गांगेश्वर मंदिर हे गावातील धार्मिक तसेच सामाजिक उपक्रमांचे एक प्रमुख केंद्र आहे. येथे विविध धार्मिक कार्यक्रम, पूजा, भजन आणि सामुदायिक भोजनाचे आयोजन केले जाते.
== मंदिर परिसरातील शांततेची परंपरा ==
गांगेश्वर मंदिर परिसरात मोठ्या आवाजातील ध्वनिक्षेपक किंवा वाद्यांचा वापर टाळण्याची स्थानिक परंपरा आहे. धार्मिक विधीच्या वेळी आवश्यकतेनुसार मर्यादित ध्वनिक्षेपकाचा वापर केला जातो.
स्थानिक परंपरेनुसार पूर्वी गावातील विवाहसोहळे गावाच्या हद्दीबाहेर करण्याची पद्धत होती. पुढील काळात स्थानिकांच्या मागणीनंतर विवाहसोहळे गावातच करण्याची पद्धत रूढ झाली.
== शुकमुनींची गुहा ==
गावाच्या डोंगराळ परिसरात '''शुकमुनींची गुहा''' किंवा '''सुखमुनी मठ''' म्हणून ओळखले जाणारे धार्मिक स्थळ आहे. या स्थळाशी संबंधित स्थानिक परंपरा आणि धार्मिक श्रद्धा गावाच्या सांस्कृतिक जीवनाचा भाग आहेत.
स्थानिक माहितीनुसार शुकमुनींच्या गुहेमुळे परिसरातील नदीला '''शुकनदी''' हे नाव पडले असल्याचे सांगितले जाते. पावसाळ्यात या परिसरातील जलप्रवाह वाढतो.
== नैसर्गिक जलस्रोत ==
शिराळे गावात बारमाही पाणी उपलब्ध करून देणारा नैसर्गिक झरा आहे. स्थानिक माहितीनुसार या झऱ्याचे पाणी पाइपद्वारे गुरुत्वाकर्षणाच्या साहाय्याने गावात आणले जाते. या पाणीपुरवठ्यासाठी मोटार किंवा विद्युत यंत्रणेचा वापर करण्याची आवश्यकता नसल्याचे स्थानिकांकडून सांगितले जाते.
== जैवविविधता ==
शिराळे परिसर हा डोंगराळ व वनक्षेत्राने व्यापलेला असल्यामुळे येथे विविध प्रकारची वनस्पती व वन्यजीव आढळतात. गावाचा परिसर राधानगरी वन्यजीव अभयारण्याच्या पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्राच्या परिसराशी संबंधित आहे. राधानगरी पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्राच्या अधिसूचनेत शिराळे गावाचा समावेश करण्यात आलेला आहे.<ref name="ESZ">{{Cite web|url=https://moef.gov.in/uploads/2020/10/radhanagari.pdf|title=Radhanagari Wildlife Sanctuary – Eco-sensitive Zone Notification|publisher=Ministry of Environment, Forest and Climate Change, Government of India|access-date=2026-09-15}}</ref>
स्थानिक माहितीनुसार परिसरात गवा, सांबर यांसारखे वन्यप्राणी तसेच विविध प्रकारचे पक्षी आढळतात. जंगलामध्ये कणकेचे कोंब, तोंडाची भाजी, टाकळ्याची भाजी यांसारख्या स्थानिक रानभाज्यांचा वापर पारंपरिक आहारात केला जातो.
परिसरात शिकेकाई, जिरंग, विकारीची साल, रक्तबावळी, कापरभेंडी, घनशीचे पाळ यांसारख्या स्थानिक वनस्पती आढळतात. या वनस्पतींचा पारंपरिक वापर स्थानिक ज्ञानाचा भाग आहे.
== पर्यटन ==
शिराळे गावाला निसर्ग आणि धार्मिक पर्यटनाची क्षमता आहे. गावाच्या परिसरातील डोंगर, धबधबे, गुहा, मंदिरे आणि नैसर्गिक जलस्रोत पर्यटकांना आकर्षित करतात.
स्थानिक पर्यटन फलकानुसार गावाच्या परिसरातील काही प्रमुख पर्यटनस्थळे पुढीलप्रमाणे आहेत.
=== बारमाही पर्यटनस्थळे ===
# शिडिमाचा उमाळा – 4.2 किमी
# पाट्याचा डोंक – 4.1 किमी
# सुरव नदी उगमस्थान – 4.1 किमी
# गवळणीचा कडा – 3.8 किमी
# वणव्याचा डोंक – 3.7 किमी
# सुखमुनी मठ – 3 किमी
# मलका देवी – 2.5 किमी
# पावणाई मंदिर – 0.1 किमी
# घोरप्याचा माळ – 0.5 किमी
# गांगेश्वर मंदिर – 0 किमी
=== पावसाळी पर्यटनस्थळे ===
पावसाळ्यात गावाच्या परिसरातील अनेक धबधबे सक्रिय होतात. स्थानिक पर्यटन फलकावर पुढील धबधब्यांची नोंद आहे.
# शिडिमाचा धबधबा – 4.2 किमी
# खुर्जी धबधबा – 3.9 किमी
# राशीचा धबधबा – 0.3 किमी
# रुसड्याचा धबधबा – 2.5 किमी
# सुतार मांगर धबधबा – 0.2 किमी
# पेंडकुळी धबधबा – 1.5 किमी
# वजर धबधबा – 0.5 किमी
# खडकी धबधबा – 0.5 किमी
# गांगो धबधबा – 0.5 किमी
वरील अंतर स्थानिक पर्यटन फलकावर नमूद केलेल्या अंतरानुसार आहेत.
== गावपळवण ==
शिराळे गावातील वैशिष्ट्यपूर्ण पारंपरिक प्रथांपैकी '''गावपळवण''' ही एक प्रथा आहे. ही प्रथा साधारणपणे [[मकरसंक्रांत|मकरसंक्रांतीच्या]] आसपास आयोजित केली जाते.
स्थानिक माहितीनुसार पूर्वी गावपळवणाचा कालावधी सुमारे तीन आठवडे किंवा त्याहून अधिक असायचा. सध्या हा कालावधी सुमारे सात दिवसांचा आहे. या काळात गावातील लोक गावाच्या हद्दीबाहेरील ठिकाणी एकत्र राहतात. ही प्रथा सामुदायिक एकोपा आणि परंपरेशी संबंधित मानली जाते.
गावपळवणानंतर '''घोरिप''' हा धार्मिक कार्यक्रम आयोजित केला जातो. या कार्यक्रमात स्थानिक लोक आपल्या श्रद्धेनुसार नवस किंवा इच्छा व्यक्त करतात. कार्यक्रमानंतर मोठ्या प्रमाणावर महाप्रसादाचे आयोजन केले जाते. स्थानिक माहितीनुसार या महाप्रसादास सुमारे 250 ते 300 लोक उपस्थित राहतात.
== पालेभावय ==
शिराळे गावात शेतीची कामे सुरू करण्यापूर्वी '''पालेभावय''' ही सामुदायिक परंपरा पाळली जाते. या प्रसंगी गावातील लोक जंगलातून उपलब्ध होणाऱ्या विविध रानभाज्या गोळा करतात. या भाज्या एकत्रितपणे शिजवून गांगेश्वर मंदिरात सामुदायिक भोजनाचे आयोजन केले जाते.
रानभाज्यांसोबत भाताचा महाप्रसाद केला जातो. गावातील नागरिक तसेच आलेल्या पाहुण्यांना प्रसाद दिल्यानंतर शेतीच्या कामांना सुरुवात करण्याची परंपरा आहे.
== वारी सोमवार ==
गांगेश्वर देवस्थानाशी संबंधित स्थानिक परंपरेनुसार सोमवारचा दिवस धार्मिक कार्यासाठी राखून ठेवण्याची पद्धत आहे. स्थानिक माहितीनुसार या दिवशी नियमित मजुरी किंवा श्रमाचे काम न करण्याची प्रथा काही कुटुंबांमध्ये पाळली जाते.
== सण आणि उत्सव ==
शिराळे गावात विविध धार्मिक व सांस्कृतिक सण साजरे केले जातात. त्यामध्ये पुढील उत्सवांचा समावेश होतो:
* गांगेश्वर देवस्थानाची वार्षिक पूजा
* घोरिप कार्यक्रम
* शिमगा
* पालेभावय
* सत्यनारायण पूजा
* दहीहंडी
* गणेशोत्सव
* नवरात्रोत्सव
* वारकरी भजन
* संगीत भजन
=== नवरात्रोत्सव ===
नवरात्रोत्सवाच्या काळात गावातील सार्वजनिक सभागृह किंवा शाळेच्या परिसरात देवीची स्थापना करून नऊ दिवस पूजा-अर्चा केली जाते.
=== धनगर समाजाचे गजा नृत्य ===
शिराळे गावातील धनगर समाजाच्या सांस्कृतिक परंपरांमध्ये '''गजा नृत्य''' या पारंपरिक नृत्यप्रकाराचा समावेश होतो. दसऱ्याच्या सणाच्या निमित्ताने विशेष पोशाख परिधान करून पारंपरिक गीते व नृत्य सादर केले जाते.
== शिक्षण ==
गावात '''जिल्हा परिषद प्राथमिक शाळा विद्यामंदिर शिराळे''' ही प्राथमिक शाळा आहे. शाळेत प्राथमिक स्तरावरील विद्यार्थ्यांना शिक्षण दिले जाते.
== अर्थव्यवस्था ==
शिराळे गावातील अर्थव्यवस्थेत शेती, पशुपालन, मजुरी आणि वनक्षेत्राशी संबंधित पारंपरिक उपजीविका यांचा समावेश होतो. डोंगराळ भौगोलिक परिस्थितीमुळे येथील शेतीचे स्वरूप परिसरातील इतर गावांपेक्षा काही प्रमाणात वेगळे आहे.
== सांस्कृतिक जीवन ==
शिराळे गावाचे सांस्कृतिक जीवन धार्मिक श्रद्धा, सामुदायिक परंपरा, भजन, लोककला, सण-उत्सव आणि सामुदायिक भोजन यांभोवती केंद्रित आहे. गावातील विविध समाजघटक धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमांमध्ये सहभागी होतात.
गावपळवण, पालेभावय, गांगेश्वर देवस्थानाशी संबंधित परंपरा आणि धनगर समाजाचे गजा नृत्य या स्थानिक सांस्कृतिक वैशिष्ट्यांमुळे शिराळे गावाला स्वतंत्र सांस्कृतिक ओळख प्राप्त झाली आहे.
== पर्यटन विकासाची क्षमता ==
शिराळे गावाच्या परिसरात नैसर्गिक आणि धार्मिक पर्यटनासाठी विविध ठिकाणे उपलब्ध आहेत. डोंगर, जंगल, धबधबे, नैसर्गिक झरे, गुहा आणि मंदिरे यांमुळे पावसाळ्यात विशेषतः पर्यटकांना आकर्षित करण्याची क्षमता या परिसरात आहे.
पर्यटनाचा विकास करताना स्थानिक पर्यावरण, वन्यजीव, जलस्रोत आणि गावाच्या पारंपरिक संस्कृतीचे संवर्धन करणे महत्त्वाचे ठरते.
== शिराळेची वैशिष्ट्ये ==
शिराळे गावाची प्रमुख वैशिष्ट्ये पुढीलप्रमाणे सांगता येतात:
* वैभववाडी तालुक्याच्या पूर्वेकडील डोंगराळ भागातील स्थान.
* सह्याद्रीच्या परिसरातील निसर्गरम्य वातावरण.
* गांगेश्वर हे प्रमुख धार्मिक स्थळ.
* शुकमुनींची गुहा व संबंधित धार्मिक परंपरा.
* नैसर्गिक झऱ्याद्वारे गुरुत्वाकर्षणाच्या साहाय्याने होणारा पारंपरिक पाणीपुरवठा.
* गावपळवण ही वैशिष्ट्यपूर्ण सामुदायिक परंपरा.
* पालेभावय ही शेतीपूर्व सामुदायिक परंपरा.
* धनगर समाजाचे गजा नृत्य.
* पावसाळ्यात सक्रिय होणारे अनेक धबधबे.
* जंगलातील स्थानिक रानभाज्या व वनस्पतींचे पारंपरिक ज्ञान.
* धार्मिक आणि सांस्कृतिक कार्यक्रमांमध्ये सामुदायिक सहभाग.
== संदर्भ ==
<references responsive="1"></references>
== बाह्य दुवे ==
* भारताची जनगणना – अधिकृत संकेतस्थळ
* भारत सरकार, पर्यावरण, वन आणि हवामान बदल मंत्रालय
१.https://villageinfo.in/
२.https://www.census2011.co.in/
३.http://tourism.gov.in/
४.https://www.incredibleindia.org/
५.https://www.india.gov.in/topics/travel-tourism
६.https://www.mapsofindia.com/
[[वर्ग:वैभववाडी तालुक्यातील गावे]]
[[वर्ग:सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातील गावे]]
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== मालिका{{संदर्भ हवा}} ==
* टशन-ए-इश्क
* कैसे ये यारियां
* ये वादा रहा
* नामकरण
* लाल इश्क
* इश्कबाज
* एक भ्रम: सर्वगुणसंपन्न
* फिअर फॅक्टर: खतरों के खिलाडी ९
== वेब सिरीज ==
* नेव्हर कीस युअर बेस्ट फ्रेंड
* पॉयझन २
* क्रॅश
== अल्बम ==
* यारा २
* यारियां
* तन्हाई
== चित्रदालन ==
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[[File:Thunder,_Esselworld.jpg|thumb|एस्सेल वर्ल्ड]]
[[Category:Wikipedia infobox amusement park articles without coordinates]]
'''एस्सेल वर्ल्ड''' हे [[मुंबई|मुंबईतील]] धारावी बेटावरील [[गोराई]] येथे असलेले एक मनोरंजन उद्यान आहे. <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.mumbai.org.uk/amusement-parks/essel-world.html|title=Essel World Mumbai|website=www.mumbai.org.uk|access-date=2022-03-07|archive-date=2022-03-31|archive-url=https://web.archive.org/web/20220331062630/https://www.mumbai.org.uk/amusement-parks/essel-world.html|url-status=dead}}</ref> हे वॉटर किंगडमसह ६५ एकर क्षेत्र व्यापते आणि १९८९ मध्ये लोकांसाठी खुले करण्यात आले. <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.hindustantimes.com/business/riding-on-amusement/story-wn39HWVXzH04VqwJjCmIUL.html|title=Riding on amusement|date=August 12, 2012|website=Hindustan Times}}</ref> <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://mumbaimirror.indiatimes.com/mumbai/other/reconsider-decision-to-shut-esselworld-says-government/articleshow/15802941.cms|title=Reconsider decision to shut Esselworld, says government|website=Mumbai Mirror|access-date=2022-03-07|archive-date=2022-03-07|archive-url=https://web.archive.org/web/20220307031722/https://mumbaimirror.indiatimes.com/mumbai/other/reconsider-decision-to-shut-esselworld-says-government/articleshow/15802941.cms|url-status=dead}}</ref> एडलैब्स इमेजिका सोबत, एस्सेल वर्ल्ड हे भारतातील सर्वात मोठ्या मनोरंजन उद्यानांपैकी एक आहे.
एस्सेल वर्ल्ड अनेक वादांमध्ये अडकले आहे. ७०० एकरासाठी मूळ भूसंपादन वादात सापडले होते आणि ते बेकायदेशीर असल्याचा दावा करण्यात आला होता. <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://mumbaimirror.indiatimes.com/mumbai/other/hc-pulls-up-rane-over-land-for-esselworld/articleshow/15940923.cms|title=HC pulls up Rane over land for Esselworld|website=Mumbai Mirror|access-date=2022-03-07|archive-date=2022-03-07|archive-url=https://web.archive.org/web/20220307031725/https://mumbaimirror.indiatimes.com/mumbai/other/hc-pulls-up-rane-over-land-for-esselworld/articleshow/15940923.cms|url-status=dead}}</ref> याव्यतिरिक्त, खारफुटीचा बेकायदेशीरपणे नाश करणे आणि किनारी क्षेत्राच्या नियमांचे उल्लंघन केल्याचा आरोप आहे. <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://indianexpress.com/article/cities/mumbai/mpcb-washes-its-hands-of-mangrove-destruction-by-esselworld/|title=MPCB washes its hands of ‘mangrove destruction’ by Esselworld|date=July 17, 2014}}</ref>
== आकर्षण ==
{{बदल}}
एस्सेल वर्ल्ड विविध प्रकारचे स्विंग ऑफर करते जे प्रत्येक वयोगटातील व्यक्तींसाठी योग्य आहेत. चौदा फॅमिली स्विंग्स, अकरा एड्रेनालाईन-पंपिंग थ्रिल राइड्स आणि पंधरा मुलांचे स्विंग्स वैशिष्ट्यीकृत.
रोलरकोस्टर आणि राइड्स सारख्या थीम पार्कच्या पारंपारिक वैशिष्ट्यांव्यतिरिक्त, एस्सेल वर्ल्डमध्ये ३,४०० स्क्वेअर फूट पसरलेली मुंबईची पहिली आइस स्केटिंग रिंक देखील आहे. येथील रिंकचे तापमान ४ डिग्री सेल्सियस स्थिर ठेवणे हे या उद्यानाचे वैशिष्ट्य आहे.
येथे डान्स फ्लोरची उपस्थिती हे या उद्यानाचे अतिरिक्त वैशिष्ट्य आहे, ज्यामुळे लोकांना येथे पार्ट्या आयोजित करणे आवडते. रंगीबेरंगी दिवे, उच्च शक्तीचा ऑडिओ आणि काचेचा डान्स फ्लोर हे एक विलक्षण आकर्षण बनवते. याला आंतरराष्ट्रीय मान्यता देण्यासाठी, डान्स हॉलमध्ये [[बॉलीवूड]] तसेच पाश्चिमात्य संगीताचे मिश्रण केले जाते.
याव्यतिरिक्त, थीम पार्कमध्ये "रिकीची रॉकेटिंग गल्ली" म्हणून ओळखले जाणारे 6-लेन वेव्हिंग क्षेत्र समाविष्ट आहे. बावलिंग परिसरात आर्केड आणि रेस्टॉरंट देखील समाविष्ट आहे, रेस्टॉरंटचे नाव "तंदूर वन" आहे जे अतिशय चवदार शाकाहारी भारतीय जेवण देते. एस्सेलवर्ल्डमधील इतर पाककृती पर्यायांमध्ये साऊथ ट्रीटचा समावेश आहे - पारंपारिक दक्षिण भारतीय खाद्यपदार्थ, डोमिनोज पिझ्झा, तैपन चायनीज रेस्टॉरंट, ओह! मुंबई - स्थानिक पाककृतींचे गंतव्यस्थान, हॅप्पी सिंग दा ढाबा - मदर डेअरीच्या पंजाबी स्वादिष्ट पदार्थ, गॉरमेट्स आणि मिष्टान्नांनी परिपूर्ण आहे.
पार्कमध्ये विविध ठिकाणी Fab-5 पसरलेले आहेत, जे लोकांना Esselworld आणि Water Kingdomचे Mascots म्हणून ओळखले जातात. Fab-5च्या संपूर्ण गटाने एक दुकान देखील उघडले आहे जे अभ्यागतांना आणि ग्राहकांना कमी किमतीत स्मृतीचिन्ह खरेदी करण्याचा पर्याय प्रदान करते.
2010 मध्ये, एस्सेलवर्ल्डने मॉन्स्टर इन द मिस्ट नावाची हॉरर राइड सुरू केली, ज्याचे उद्घाटन लोकप्रिय होस्ट, अभिनेता आणि रिअॅलिटी टीव्ही मालिका "रोडीज" रणविजय आणि एस्सेल वर्ल्डचे मुख्य कार्यकारी अधिकारी शिरीष देशपांडे यांच्या हस्ते झाले. भारतातील सर्वात धोकादायक राईड म्हणून त्याची जाहिरात करण्यात आली.
ही राइड प्रामुख्याने ६,००० स्क्वेअर फूटची इनडोअर गडद राइड आहे, ज्यामध्ये ट्रॅक आणि कार सिस्टीम आहे. ही ४ मिनिटांची राइड आहे ज्यामध्ये ती धुके आणि धुक्याने भरलेल्या गडद गुहेतून बाहेर पडते. यात अनेक रहस्ये आणि रोमांचक ट्विस्ट देखील येतात. या राइडमध्ये अत्याधुनिक अॅनिमेट्रॉनिक्स आणि अत्याधुनिक ऑडिओद्वारे समर्थित २०हून अधिक दृश्यांचा समावेश आहे.
== संदर्भ ==
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[[वर्ग:Pages with unreviewed translations]]
[[वर्ग:मुंबई]]
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भारतातील सर्वाधिक कमाई करणाऱ्या चित्रपटांची यादी
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{{गल्लत|सर्वाधिक कमाई करणाऱ्या भारतीय चित्रपटांची यादी}}
[[भारतीय रुपया|भारतीय रुपयांमध्ये]] एकूण कमाईसह, '''भारतातील सर्वाधिक कमाई करणाऱ्या चित्रपटांची यादी''' खालीलप्रमाणे आहे. हे आकडेवारीचे अधिकृत ट्रॅकिंग नाही, कारण डेटा प्रकाशित करणाऱ्या विश्वसनीय स्त्रोतांवर त्यांचे अंदाज वाढवण्यासाठी वारंवार दबाव आणला जातो. <ref name="NoBO">{{स्रोत बातमी|last=Priya Gupta|url=http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2013-11-23/news-interviews/44388852_1_weekend-numbers-box-office-numbers-small-films|title=Box Office column discontinued|date=23 Nov 2013|work=[[द टाइम्स ऑफ इंडिया]]|access-date=30 December 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20131126160700/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2013-11-23/news-interviews/44388852_1_weekend-numbers-box-office-numbers-small-films|archive-date=26 November 2013|url-status=dead}}</ref> २१ व्या शतकात बॉक्स ऑफिस कलेक्शनमध्ये सातत्याने वाढ होत आहे, ज्याची मुख्य कारणे तिकिटांच्या किमतीत वाढ आणि चित्रपटगृहांची संख्या आणि चित्रपटाच्या प्रिंट्समध्ये वाढ आहे. <ref name="ETAug">{{स्रोत बातमी|last=Binoy Prabhakar|url=http://articles.economictimes.indiatimes.com/2012-08-26/news/33386102_1_box-office-movie-rotten-tomatoes|title=Business of Rs 100-cr films: Who gets what and why|date=26 Aug 2012|work=[[इंडिया टाइम्स]] The Economic Times|access-date=30 December 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20140111054228/http://articles.economictimes.indiatimes.com/2012-08-26/news/33386102_1_box-office-movie-rotten-tomatoes|archive-date=11 January 2014|url-status=live|df=dmy-all}}</ref> देशांतर्गत बॉक्स ऑफिसवर सर्वाधिक कमाई करणारे बहुतेक चित्रपट हे [[भारतीय चलचित्रपट|भारतीय चित्रपट]] आहेत, विशेषतः [[बॉलीवूड]], [[हिंदी भाषा|हिंदी भाषेतील]] चित्रपट उद्योग, त्यानंतर [[तेलुगू सिनेमा|तेलुगू]] (टॉलीवूड) आणि [[तमिळ सिनेमा|तमिळ]] (कॉलीवूड). जगभरात सर्वाधिक कमाई करणाऱ्या भारतीय चित्रपटांच्या यादीसाठी, सर्वाधिक कमाई करणाऱ्या भारतीय चित्रपटांची ''यादी'' पहा.
== आढावा ==
[[भारत|भारतातील]] सर्वाधिक कमाई करणारा चित्रपट म्हणजे ''बाहुबली 2: द कन्क्लूजन'' (२०१७), एकूण देशांतर्गत (US$ २१८ दशलक्ष). <ref name="bb2">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.boxofficeindia.com/all_format_worldwide_gross.php|title=Top Grossers All Formats Worldwide Gross|website=[[बॉक्स ऑफिस इंडिया]]|access-date=5 May 2019}}</ref> या चित्रपटाने अनेक देशांतर्गत विक्रम मोडले, <ref>{{स्रोत बातमी|url=http://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/box-office-records-shattered-by-baahubali-2-the-conclusion/photostory/58527467.cms|title=Baahubali 2:The Conclusion's all box office collection records: Box-office records shattered by 'Padmaavat'|work=[[द टाइम्स ऑफ इंडिया]]|access-date=1 October 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20171009022441/https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/box-office-records-shattered-by-baahubali-2-the-conclusion/photostory/58527467.cms|archive-date=9 October 2017|url-status=live|df=dmy-all}}</ref> त्याच्या सुरुवातीच्या वीकेंडमध्ये {{INR}} ४१५ [[कोटी|कोटींची]] कमाई केली. <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=http://indianexpress.com/article/entertainment/baahubali-2-box-office-collection-day-3-ss-rajamouli-film-prabhas-4634664/|title=Baahubali 2 box office collection day 3: With Rs 540 crore worldwide collection, the age of SS Rajamouli is here|date=1 May 2017|website=द इंडियन एक्सप्रेस|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20170430185633/http://indianexpress.com/article/entertainment/baahubali-2-box-office-collection-day-3-ss-rajamouli-film-prabhas-4634664/|archive-date=30 April 2017|access-date=1 May 2017}}</ref> ''[[दंगल (२०१६ चित्रपट)|दंगल]]'' (२०१६), जो जगभरात सर्वाधिक कमाई करणारा भारतीय चित्रपट आहे, <ref name="forbes-dangal">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.forbes.com/sites/anuraghunathan/2017/06/27/bollywood-star-aamir-khans-dangal-is-highest-grossing-indian-movie-spurred-by-china-collection/|title=Bollywood Star Aamir Khan's Dangal Is Highest Grossing Indian Movie – Spurred By China Collection|last=Raghunathan|first=Anu|website=Forbes.com|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20171001170033/https://www.forbes.com/sites/anuraghunathan/2017/06/27/bollywood-star-aamir-khans-dangal-is-highest-grossing-indian-movie-spurred-by-china-collection/|archive-date=1 October 2017|access-date=1 October 2017}}</ref> देशांतर्गत कमाईसह, पूर्वीचा सर्वाधिक कमाई करणारा देशांतर्गत चित्रपट होता. <ref name="Dangal">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/box-office-special-features/box-office-worldwide-collections-day-wise-breakup-dangal/|title=Box Office: Worldwide Collections and Day wise breakup of Dangal|date=24 December 2016|website=[[बॉलिवूड हंगामा]]|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20180715181326/https://www.bollywoodhungama.com/amp/news/box-office-special-features/box-office-worldwide-collections-day-wise-breakup-dangal/|archive-date=15 July 2018|access-date=15 July 2018}}</ref>
चलनवाढीसाठी समायोजित केल्यावर, भारतातील सर्वाधिक कमाई करणारा चित्रपट ''[[मुघल-ए-आझम (चित्रपट)|मुघल-ए-आझम]]'' (१९६०) आहे, ज्याचे समायोजित घरगुती ढोबळ अंदाजे {{INR}} २,००० च्या समतुल्य आहे. त्यानंतर ''[[मदर इंडिया]]'' (1957), ''[[शोले (चित्रपट)|शोले]]'' (१९७५), ''बाहुबली 2: द कन्क्लूजन'' आणि त्यानंतर ''[[हम आपके हैं कौन..!|हम आपके है कौन. .!]]'' (1994), <ref name="hindi" /> प्रत्येकी पेक्षा जास्त समायोजित घरगुती एकूण. फूटफॉल्सच्या बाबतीत, भारतात ''बाहुबली 2: द कन्क्लूजन'', <ref>{{स्रोत बातमी|url=http://www.hindustantimes.com/regional-movies/baahubali-2-is-the-first-indian-film-with-over-10-crore-footfalls/story-EdFN8PUyaTeaWW5I8PuwiJ.html|title=Baahubali 2 is the first Indian film with over 10 crore footfalls|date=10 July 2017|work=[[हिंदुस्तान टाइम्स]]|access-date=31 October 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20171107012539/http://www.hindustantimes.com/regional-movies/baahubali-2-is-the-first-indian-film-with-over-10-crore-footfalls/story-EdFN8PUyaTeaWW5I8PuwiJ.html|archive-date=7 November 2017|url-status=live|df=dmy-all}}</ref> ''मदर इंडिया'', ''मुघल-ए-आझम'', आणि ''शोले'' हे 100 दशलक्ष (10 कोटी) तिकिटांची विक्री झाल्याचा अंदाज आहे.
रतीय बाजारपेठेवर देशांतर्गत भारतीय चित्रपटांचे वर्चस्व आहे, ज्याने २०१५ मध्ये देशाच्या बॉक्स ऑफिस कमाईच्या ८५% कमाई केली; युनायटेड स्टेट्स नंतर मोठ्या चित्रपट बाजारासाठी हा सर्वोच्च आहे, जेथे देशांतर्गत हॉलीवूड चित्रपट त्याच्या बॉक्स ऑफिस कमाईच्या ८८.८% प्रतिनिधित्व करतात. <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=http://stats.uis.unesco.org/unesco/TableViewer/tableView.aspx?ReportId=5538|title=Percentage of GBO of all films feature exhibited that are national|publisher=UNESCO Institute for Statistics|access-date=1 November 2013|archive-date=2018-12-24|archive-url=https://web.archive.org/web/20181224225511/http://data.uis.unesco.org/?ReportId=5538|url-status=dead}}</ref> भारतीय चित्रपट देशांतर्गत भारतीय बॉक्स ऑफिसवर अव्वल स्थानावर असताना, हॉलीवूड चित्रपटांची बाजारपेठ हळूहळू वाढत आहे; <ref name="hollywood">{{स्रोत बातमी|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/entertainment-others/fan-the-jungle-book-airlift-hollywood-films-giving-bollywood-a-run-for-its-money-2836988/|title=Hollywood films giving Bollywood a run for its money?|date=6 June 2016|work=[[द इंडियन एक्सप्रेस]]}}</ref> परदेशी चित्रपटांचा बाजार हिस्सा २०१४ मधील ८% वरून २०१५ मध्ये १५% पर्यंत वाढला, <ref name="Richeri">{{जर्नल स्रोत|last=Richeri|first=Giuseppe|date=December 2016|title=Global film market, regional problems|journal=Global Media and China|volume=1|issue=4|pages=312–330|doi=10.1177/2059436416681576|doi-access=free}}</ref> हॉलिवूड चित्रपटांनी २०१६ मध्ये भारतीय बाजारपेठेतील १०% प्रतिनिधित्व केले <ref>{{स्रोत बातमी|url=https://www.hollywoodreporter.com/news/hollywood-film-revenue-india-rises-10-percent-boosted-by-dubbed-versions-987585|title=Hollywood Film Revenue in India Rises 10 Percent, Boosted by Dubbed Versions|date=March 21, 2017|work=[[The Hollywood Reporter]]|access-date=7 March 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180307155541/https://www.hollywoodreporter.com/news/hollywood-film-revenue-india-rises-10-percent-boosted-by-dubbed-versions-987585|archive-date=7 March 2018|url-status=live|df=dmy-all}}</ref> आणि २०१७ मध्ये १३%. <ref>{{स्रोत बातमी|url=https://www.moneycontrol.com/news/trends/entertainment/indian-film-industry-grew-at-27-in-2017-ficci-2520513.html|title=Indian film industry grew at 27% in 2017: FICCI|date=5 March 2018|work=[[Moneycontrol]]|access-date=3 May 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180503112153/https://www.moneycontrol.com/news/trends/entertainment/indian-film-industry-grew-at-27-in-2017-ficci-2520513.html|archive-date=3 May 2018|url-status=live|df=dmy-all}}</ref> भारतातील काही सुरुवातीच्या परदेशी ब्लॉकबस्टर्समध्ये ग्रेगरी पेक आणि ओमर शरीफ अभिनीत <ref name="Bhaumik 2014">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=http://indianquarterly.com/old-is-not-just-gold-its-mackennas-gold/|title=Old is Not Just Gold, It's Mackenna's Gold|last=Bhaumik|first=Kaushik|website=The Indian Quarterly – A Literary & Cultural Magazine|access-date=2022-03-19|archive-date=2020-06-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20200616121918/http://indianquarterly.com/old-is-not-just-gold-its-mackennas-gold/|url-status=dead}}</ref> ''गोल्ड'' (1969) आणि ब्रूस लीचे हाँगकाँगचे मार्शल आर्ट चित्रपट ''एन्टर द ड्रॅगन'' (1975 मध्ये) आणि ''वे ऑफ द ड्रॅगन'' (1979 मध्ये) यांचा समावेश होता. . <ref name="indiatoday79">{{स्रोत बातमी|last=[[Khalid Mohammed]]|url=https://www.indiatoday.in/magazine/society-the-arts/films/story/19790915-bruce-lee-storms-bombay-once-again-with-return-of-the-dragon-822544-2014-02-21|title=Bruce Lee storms Bombay once again with Return Of The Dragon|date=September 15, 1979|work=[[इंडिया टुडे (नियतकालिक)|इंडिया टुडे]]|access-date=January 20, 2015}}</ref> नेट व्यवसायाच्या बाबतीत, हॉलिवूडची निर्मिती ''Avengers: Endgame'' (2019), हा भारतातील सर्वाधिक कमाई करणारा परदेशी चित्रपट आहे, <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/avengers-endgame-english/box-office|title=Avengers Endgame Box Office|website=[[बॉलिवूड हंगामा]]}}</ref>च्या कलेक्शनसह भारतातील चौथा सर्वाधिक कमाई करणारा चित्रपट आहे आणि 6वा सर्वाधिक कमाई करणारा चित्रपट आहे. एकूण संकलनासह
== देशांतर्गत एकूण आकडे ==
=== नाममात्र स्थूल ===
{| class="wikitable sortable plainrowheaders" style="margin:auto; margin:auto;"
! scope="col" |पदवी स्थान
! scope="col" |चित्रपट
! scope="col" |एकूण स्थूल
!Primary language(s)
! scope="col" |वर्ष
! class="unsortable" |Source(s)
|-
|1
|''Baahubali 2: The Conclusion''
|१,८१० कोटी
|{{ubl|[[Telugu language|Telugu]]|[[Tamil language|Tamil]]}}
|2017
|<ref name="bb2"/>
|-
|2
|''2.0''
|६००-८००
कोटी
|Tamil
|2018
|<ref name="2.0-bo">{{स्रोत बातमी|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/tamil/2-0-box-office-collection-700-crore-5499097/|title=Rajinikanth starrer 2.0 crosses Rs 700 crore mark|date=19 December 2018|work=[[द इंडियन एक्सप्रेस]]}}</ref>
|-
|3
|''[[दंगल (२०१६ चित्रपट)|Dangal]]''
|२,२१० कोटी
|[[हिंदी भाषा|Hindi]]
|2016
|<ref name="Dangal"/>
|-
|4
|''[[बाहुबली: द बिगिनिंग (चित्रपट)|Baahubali: The Beginning]]''
|६०० कोटी
|{{ubl|Telugu|Tamil}}
|2015
|<ref name="baahubali">{{स्रोत बातमी|url=https://www.ibtimes.co.in/kabali-box-office-collection-rajinikanth-starrer-fails-beat-5-records-baahubali-bahubali-689445|title='Kabali' box office collection: Rajinikanth starrer fails to beat 5 records of 'Baahubali' (Bahubali)|date=9 August 2017|work=IBTimes|access-date=9 July 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180625075640/https://www.ibtimes.co.in/kabali-box-office-collection-rajinikanth-starrer-fails-beat-5-records-baahubali-bahubali-689445|archive-date=25 June 2018|url-status=live|df=dmy-all}}</ref>
|-
|5
|''[[पी.के. (चित्रपट)|PK]]''
|
|Hindi
|2014
|<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/pk/box-office/|title=PK Box Office}}</ref>
|-
|6
|''Avengers: Endgame''
|
|English
|2019
|<ref name="Endgame">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.boxofficemojo.com/release/rl3704456961/weekend/|title=Avengers: Endgame|website=Box Office Mojo|access-date=2020-01-10}}</ref>
|-
|7
|''[[बजरंगी भाईजान|Bajrangi Bhaijaan]]''
|
|Hindi
|2015
|<ref name="bajrangi">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=http://www.bollywoodhungama.com/movie/bajrangi-bhaijaan/box-office/|title=Bajrangi Bhaijaan Box Office Collection|website=[[बॉलिवूड हंगामा]]|access-date=14 January 2019}}</ref>
|-
|8
|''Tiger Zinda Hai''
|{{INR}}434.82{{Spaces}}crore
|Hindi
|2017
|<ref name="TZH">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=http://www.bollywoodhungama.com/news/box-office-special-features/box-office-worldwide-collections-day-wise-breakup-tiger-zinda-hai/|title=Box Office: Worldwide collections and day wise breakup of Tiger Zinda Hai|date=23 December 2017|website=[[बॉलिवूड हंगामा]]|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20181009052637/http://www.bollywoodhungama.com/news/box-office-special-features/box-office-worldwide-collections-day-wise-breakup-tiger-zinda-hai/|archive-date=9 October 2018|access-date=15 February 2018}}</ref><ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=http://www.boxofficemojo.com/movies/?page=intl&id=tigerzindahai.htm|title=Tiger Zinda Hai (2017)|website=[[Box Office Mojo]]|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20180304135723/http://www.boxofficemojo.com/movies/?page=intl&id=tigerzindahai.htm|archive-date=4 March 2018|access-date=1 March 2018}}</ref>
|-
|9
|''[[संजू|Sanju]]''
|
|Hindi
|2018
|<ref name="sanju">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.boxofficeindia.com/movie.php?movieid=2482|title=PK - Movie|website=[[बॉक्स ऑफिस इंडिया]]|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20180930055751/https://boxofficeindia.com/movie.php?movieid=2482|archive-date=30 September 2018|access-date=4 November 2018}}</ref>
|-
|10
|''Sultan''
|{{INR}}421.25{{Spaces}}crore
|Hindi
|2016
|<ref name="Sultan">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=http://www.bollywoodhungama.com/news/box-office-special-features/box-office-worldwide-collections-day-wise-breakup-sultan|title=Special Features: Box Office: Worldwide Collections and Day wise breakup of Sultan - Box Office|date=2016-07-07|website=[[बॉलिवूड हंगामा]]|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20181009052637/http://www.bollywoodhungama.com/news/box-office-special-features/box-office-worldwide-collections-day-wise-breakup-sultan|archive-date=9 October 2018|access-date=2 September 2016}}</ref>
|-
|11
|''[[पद्मावत|Padmaavat]]''
|{{INR}}387.31{{Spaces}}crore
|Hindi
|2018
|<ref name=":0">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=http://www.bollywoodhungama.com/news/box-office-special-features/box-office-worldwide-collections-day-wise-break-padmaavat/|title=Box Office: Worldwide collections and day wise break up of Padmaavat|date=2018-01-26|website=[[बॉलिवूड हंगामा]]|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20181009052637/http://www.bollywoodhungama.com/news/box-office-special-features/box-office-worldwide-collections-day-wise-break-padmaavat/|archive-date=9 October 2018|access-date=8 October 2018}}</ref>
|-
|12
|''War''
|{{INR}}378.18{{Spaces}}crore
|Hindi
|2019
|<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/war/box-office/|title=Kabali Box Office Collection till Now|website=[[बॉलिवूड हंगामा]]|access-date=23 October 2016}}</ref>
|-
|13
|''Dhoom 3''
|
|Hindi
|2013
|<ref name="Dhoom3">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/dhoom-3/box-office/|title=Dhoom 3 Box Office Collection|website=[[बॉलिवूड हंगामा]]|language=en|access-date=21 June 2020}}</ref>
|-
|14
|''Saaho''
|{{INR}}350.83{{Spaces}}crore
|{{ubl|Hindi|Tamil|Telugu}}
|2019
|<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.boxofficeindia.com/all_format_worldwide_gross.php|title=Top Grossers All Formats Worldwide Gross|website=Box Office India}}</ref>
|-
|15
|''Krrish 3''
|{{INR}}340.17{{Spaces}}crore
|Hindi
|2013
|<ref name="krrish">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/krrish-3/box-office/|title=Krrish 3 Box Office Collection|website=[[बॉलिवूड हंगामा]]|language=en|access-date=21 June 2020}}</ref>
|-
|16
|''Kabir Singh''
|{{INR}}331.24{{Spaces}}crore
|Hindi
|2019
|<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/kabir-singh/box-office/|title=Kabir Singh Box Office Collection till Now|website=[[बॉलिवूड हंगामा]]|access-date=5 July 2019}}</ref>
|-
|17
| style="background:#b6fcb6;" |''[[पुष्पा: द राइझ (तेलुगू चित्रपट)|Pushpa: The Rise]]'' *
|{{INR}}324.50{{Spaces}}crore
|Telugu
|2021
|<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.pinkvilla.com/entertainment/box-office/top-grossers-indian-box-office-2021-pushpa-tops-300-crores-spiderman-sooryavanshi-runner-ups-1012617|title=Top Grossers at Indian Box Office in 2021 - Pushpa tops with 300 crores, Spiderman & Sooryavanshi runner-ups|date=2022-02-02|website=PINKVILLA|language=en|access-date=2022-02-02}}</ref>
|-
|18
|''Kick''
|{{INR}}322.01{{Spaces}}crore
|Hindi
|2014
|<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/kick/box-office/|title=Kick Box Office Collection}}</ref>
|-
|19
|''[[तान्हाजी (चित्रपट)|Tanhaji]]''
|{{INR}}318.76{{Spaces}}crore
|Hindi
|2020
|<ref name="Tanaji domestic gross collection">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/taanaji-the-unsung-warrior/box-office/|title=Tanhaji Box Office}}</ref>
|-
|21
|''[[चेन्नई एक्सप्रेस|Chennai Express]]''
|{{INR}}315.46{{Spaces}}crore
|Hindi
|2013
|<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/chennai-express/box-office/|title=Chennai express box office collection}}</ref>
|-
|20
|''Simmba''
|{{INR}}308.09{{Spaces}}crore
|Hindi
|2018
|<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/simmba/box-office/|title=Simmba Box Office Collection|website=[[बॉलिवूड हंगामा]]|access-date=20 February 2019}}</ref>
|-
|22
|''Avengers: Infinity War''
|{{INR}}294.07{{Spaces}}crore
|English
|2018
|{{Efn|According to Box Office Mojo, ''Avengers: Infinity War'' grossed $43,594,456 in India during 2018.<ref>{{cite web|url=http://www.boxofficemojo.com/movies/?page=intl&id=marvel0518.htm|title=Avengers: Infinity War (2018)|website=Box Office Mojo|access-date=7 July 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180710053253/http://www.boxofficemojo.com/movies/?page=intl&id=marvel0518.htm|archive-date=10 July 2018|url-status=live|df=dmy-all}}</ref> According to the 2018 exchange rate at the time of release,<ref>{{cite web|url=http://fxtop.com/en/historical-exchange-rates.php?A=1&C1=USD&C2=INR&YA=1&DD1=27&MM1=04&YYYY1=2018&B=1&P=&I=1&DD2=27&MM2=05&YYYY2=2018&btnOK=Go%21|title=Historical exchange rates from 1950 with graph and charts}}</ref> this is equivalent to {{INR}}294.07 crore.}}
|-
|23
|''[[प्रेम रतन धन पायो|Prem Ratan Dhan Payo]]''
|{{INR}}291.89{{Spaces}}crore
|Hindi
|2015
|<ref name="prem">{{स्रोत बातमी|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/prem-ratan-dhan-payo/box-office/|title=Prem Ratan Dhan Payo Box Office}}</ref>
|-
|24
|''Uri: The Surgical Strike''
|{{INR}}289.68{{Spaces}}crore
|Hindi
|2019
|<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/uri/box-office/#bh-movie-box-office|title=URI Box Office Collection till Now|website=[[बॉलिवूड हंगामा]]|access-date=8 April 2019}}</ref>
|-
|25
|''[[हॅपी न्यू इयर|Happy New Year]]''
|{{INR}}281.94{{Spaces}}crore
|Hindi
|2014
|<ref name="happy new year movie">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/happy-new-year/box-office/|title=Happy New Year Box Office|website=[[बॉलिवूड हंगामा]]}}</ref>
|-
|26
|''[[३ इडियट्स|3 Idiots]]''
|{{INR}}281.88{{Spaces}}crore
|Hindi
|2009
|<ref name="boi">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/3-idiots/box-office/|title=3 Idiots collection|website=[[बॉलिवूड हंगामा]]}}</ref>
|-
|27
|''[[एक था टायगर|Ek Tha Tiger]]''
|{{INR}}276.08{{Spaces}}crore
|Hindi
|2012
|<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/ek-tha-tiger/box-office/|title=Ek Tha Tiger Box Office|website=[[बॉलिवूड हंगामा]]}}</ref>
|-
|28
| style="background:#b6fcb6;" |''Spider-Man: No Way Home'' *
|{{INR}}263.8{{Spaces}}crore
|English
|2021
|{{Efn|According to Box Office Mojo, ''Spider-Man: No Way Home'' grossed $35,300,000 in India during 2021–22.<ref>{{Cite web|title=Spider-Man: No Way Home|url=https://www.boxofficemojo.com/release/rl740590337/weekend/?ref_=bo_rl_tab#tabs|access-date=2022-01-11|website=Box Office Mojo|language=en}}</ref> According to exhange rate at the time of release, this is equivalent to {{INR}}263.8 crore.<ref>{{cite web|url=https://www.ofx.com/en-gb/forex-news/historical-exchange-rates/yearly-average-rates/|title=Yearly Average Rates (74.75 INR per USD)|publisher=[[OFX (company)|OFX]]|year=2021|access-date=11 January 2021|df=dmy-all}}</ref>}}
|-
|29
|''Golmaal Again''
|{{INR}}263.17{{Spaces}}crore
|Hindi
|2017
|<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/golmaal-again/box-office/|title=Golmaal Again Movie domestic gross collection|website=[[बॉलिवूड हंगामा]]}}</ref>
|-
|30
|''The Jungle Book''
|{{INR}}258.79{{Spaces}}crore
|English
|2016
|{{Efn}}
|-
|31
|''[[बाजीराव मस्तानी|Bajirao Mastani]]''
|{{INR}}255.83{{Spaces}}crore
|Hindi
|2015
|<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/bajirao-mastani/box-office/|title=Bajirao Mastani Box Office|website=[[बॉलिवूड हंगामा]]}}</ref>
|-
|32
|''Bang Bang!''
|{{INR}}251.43{{Spaces}}crore
|Hindi
|2014
|<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/bang-bang/box-office/|title=Bang Bang Box Office|website=[[बॉलिवूड हंगामा]]}}</ref>
|-
|33
|''Bharat''
|{{INR}}251.27{{Spaces}}crore
|Hindi
|2019
|<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/bharat/box-office/|title=Bharat Box Office|website=[[बॉलिवूड हंगामा]]}}</ref>
|-
|34
|''Mission Mangal''
|{{INR}}238.80{{Spaces}}crore
|Hindi
|2019
|<ref name="Mission Mangal domestic">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/2019/|title=Mission Mangal Box Office}}</ref>
|-
|35
|''[[ये जवानी है दीवानी|Yeh Jawaani Hai Deewani]]''
|{{INR}}236.7{{Spaces}}crore
|Hindi
|2013
|<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://boxofficeindia.com/movie.php?movieid=1280|title=Yeh Jawaani Hai Deewani}}</ref>
|-
|36
|''[[सूर्यवंशी (हिंदी चित्रपट)|Sooryavanshi]]''
|{{INR}}233.33{{Spaces}}crore
|Hindi
|2021
|<ref name="sooryavanshidomestic">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/sooryavanshi/box-office/}}</ref>
|-
|37
|''Housefull 4''
|{{INR}}231.65{{Spaces}}crore
|Hindi
|2019
|<ref name="housefull4domestic">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/housefull-4/box-office|title=Housefull 4 Box Office|website=[[बॉलिवूड हंगामा]]}}</ref>
|-
|38
|''K.G.F<nowiki><span typeof="mw:DisplaySpace" id="mwAmM">&</nowiki>nbsp;<nowiki></span></nowiki>: Chapter 1''
|
{{INR}}228{{Spaces}}crore
|Kannada
|2018
|<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.ibtimes.co.in/kgf-2-will-be-bigger-hit-baahubali-franchise-812582|title='KGF 2 will be a bigger hit than Baahubali franchise'|last=Gaikwad|first=Pramod|date=2020-01-31|website=www.ibtimes.co.in|language=en|access-date=2021-03-31}}</ref>
|-
|39
|''[[एंदिरन|Enthiran]]''
|
|Tamil
|2010
|<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=http://www.boxofficeindia.com/report-details.php?articleid=2877|title=Why Business Of Dubbed Tamil Telugu Not Included|date=25 April 2017|website=Box Office India|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20160727095155/http://www.boxofficeindia.com/report-details.php?articleid=2189|archive-date=27 July 2016|access-date=1 December 2017}}</ref><ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.ofx.com/en-gb/forex-news/historical-exchange-rates/yearly-average-rates/|title=Yearly Average Rates (46 INR per USD)|year=2010|publisher=[[OFX (company)|OFX]]|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20170713183556/https://www.ofx.com/en-gb/forex-news/historical-exchange-rates/yearly-average-rates/|archive-date=13 July 2017|access-date=1 October 2017}}</ref>
|-
|40
|''Master''
|
|Tamil
|2021
|<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.india.com/entertainment/master-completes-50-stupendous-days-at-box-office-thalapathy-vijay-roars-in-tamil-nadu-figures-inside-4463824/|title=Master Completes 50 Stupendous Days at Box Office, Thalapathy Vijay Roars in Tamil Nadu - Figures Inside|last=Kumar|first=Vineeta|date=2021-03-03|website=[[India.com]]|access-date=2021-03-31}}</ref>
|-
|41
|''[[बागी २|Baaghi 2]]''
|{{INR}}210.74{{Spaces}}crore
|Hindi
|2018
|<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=http://www.bollywoodhungama.com/news/box-office-special-features/box-office-worldwide-collections-day-wise-break-baaghi-2/|title=Box Office: Worldwide collections and day wise break up of Baaghi 2|date=3 May 2018|website=[[बॉलिवूड हंगामा]]|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20180401003909/http://www.bollywoodhungama.com/news/box-office-special-features/box-office-worldwide-collections-day-wise-break-baaghi-2/|archive-date=1 April 2018|access-date=26 April 2018}}</ref>
|-
|42
|''Bigil''
|
|Tamil
|2019
|<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.businesstoday.in/trending/box-office/story/bigil-box-office-collection-day-26-vijay-film-earns-rs-300-crore-globally-becomes-his-highest-grosser-in-uk-238643-2019-11-20|title=Bigil box office collection Day 26: Vijay's film earns Rs 300 crore globally; becomes his highest grosser in UK|website=Business Today}}</ref>
|-
|43
|''[[दिलवाले (२०१५ चित्रपट)|Dilwale]]''
|{{INR}}206.56{{Spaces}}crore
|Hindi
|2015
|<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/dilwale-2/box-office/|title=Dilwale Box Office|website=[[बॉलिवूड हंगामा]]}}</ref>
|-
|44
|''Ala Vaikunthapurramuloo''
|
|Telugu
|2020
|<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://boxofficeindia.com/report-details.php?articleid=5908|title=Ala Vaikunthapurramuloo Creates History in South - Box Office India|website=boxofficeindia.com|access-date=2020-06-07}}</ref><ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.zoomtventertainment.com/telugu-cinema/box-office/article/allu-arjuns-ala-vaikunthapurramuloo-creates-history-becomes-first-telugu-film-to-hit-rs-200-crore-without-hindi-release/552065|title=Ala Vaikunthapurramuloo creates history; becomes first Telugu film to hit Rs 200 crore without Hindi release|website=www.zoomtventertainment.com|language=en|access-date=2020-06-07}}</ref>
|-
|45
|''Sarileru Neekevvaru''
|
|Telugu
|2020
|{{संदर्भ हवा}}
|-
|46
|''Sye Raa Narasimha Reddy''
|
|Telugu
|2019
|<ref>{{स्रोत बातमी|last=Laghate|first=Gaurav|url=https://economictimes.indiatimes.com/industry/media/entertainment/indian-box-office-crosses-rs-10000-crore-mark-in-2019/articleshow/74139131.cms|title=Indian box office crosses Rs 10,000 crore mark in 2019|work=The Economic Times|access-date=21 May 2020}}</ref>
|-
|47
|''Thugs of Hindostan''
|
|Hindi
|2018
|<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=http://www.bollywoodhungama.com/movie/thugs-of-hindostan/box-office/|title=Thugs Of Hindostan Box Office Collection till Now|website=[[बॉलिवूड हंगामा]]|access-date=27 December 2018}}</ref>
|-
|48
|''[[दबंग|Dabangg]]''
|{{INR}}193.57{{Spaces}}crore
|Hindi
|2010
|<ref name="boi" /><ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.ofx.com/en-gb/forex-news/historical-exchange-rates/yearly-average-rates/|title=Yearly Average Rates (45.65775 INR per USD)|year=2010|website=[[OFX (company)|OFX]]|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20170713183556/https://www.ofx.com/en-gb/forex-news/historical-exchange-rates/yearly-average-rates/|archive-date=13 July 2017|access-date=1 October 2017}}</ref>
|-
|49
|''Singham Returns''
|{{INR}}191.48{{Spaces}}crore
|Hindi
|2014
|<ref name="boi" />
|-
|50
|''The Lion King''
|
|English
|2019
|<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.boxofficemojo.com/release/rl3442433/weekend/|title=The Lion King|website=Box Office Mojo|access-date=2020-01-10}}</ref>
|}
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:भारतीय चित्रपट]]
[[वर्ग:Webarchive template wayback links]]
[[वर्ग:Pages with unreviewed translations]]
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ए.आर. लक्ष्मणन
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2026-09-16T04:20:09Z
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2709869
wikitext
text/x-wiki
{{विकिडेटा माहितीचौकट}}
'''अरुणाचलम आर. लक्ष्मणन''' (२२ मार्च १९४२ - २७ ऑगस्ट २०२०) हे [[भारताचे सर्वोच्च न्यायालय|भारताच्या सर्वोच्च न्यायालयाचे]] न्यायाधीश होते. <ref>{{स्रोत बातमी|url=http://www.hinduonnet.com/2003/11/30/stories/2003113003850400.htm|title=Suppressing women will affect progress: judge|date=2003-11-29|work=[[द हिंदू]]|access-date=2008-03-24|archive-url=https://archive.today/20130125062611/http://www.hinduonnet.com/2003/11/30/stories/2003113003850400.htm|archive-date=2013-01-25|url-status=usurped}}</ref> <ref>{{स्रोत बातमी|last=Venkatesan|first=J.|url=http://www.hindu.com/2004/08/11/stories/2004081108880400.htm|title=Debts Recovery Tribunal gets ISO-9001 certification|date=2004-08-10|work=[[द हिंदू]]|access-date=2008-03-24|archive-url=https://web.archive.org/web/20080226063052/http://www.hindu.com/2004/08/11/stories/2004081108880400.htm|archive-date=26 February 2008|url-status=dead}}</ref>
त्यांनी [[चेन्नई]] येथे शिक्षण घेतले. २००२ मध्ये सर्वोच्च न्यायालयात पदोन्नती होण्यापूर्वी त्यांनी [[मद्रास उच्च न्यायालय]] आणि [[केरळ उच्च न्यायालय|केरळ उच्च न्यायालयात]] न्यायाधीश म्हणून काम केले. त्यांची २०० मध्ये [[राजस्थान उच्च न्यायालय]] आणि २००१ मध्ये <a href="./हैदराबाद_उच्च_न्यायालय" rel="mw:WikiLink">हैदराबाद उच्च न्यायालय</a> मुख्य न्यायाधीश म्हणून नियुक्ती करण्यात आली होती. २००७ मध्ये ते निवृत्त झाले. <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=http://www.supremecourtofindia.nic.in/judges/bio/arl.htm|title=Hon'ble Dr. Justice AR. Lakshmanan|publisher=[[Supreme Court of India]]|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20080220181513/http://www.supremecourtofindia.nic.in/judges/bio/arl.htm|archive-date=20 February 2008|access-date=2008-03-24}}</ref>
२००६-०९ दरम्यान त्यांनी [[भारतीय कायदा आयोग|भारतीय कायदा आयोगाचे]] अध्यक्ष म्हणून काम केले.
ऑगस्ट २०२०मध्ये त्याचा [[कोरोनाव्हायरस रोग २०१९|कोविड-१९]] मुळे मृत्यू झाला. दोन दिवसांपुर्वी त्याच्या पत्नीचा पण मृत्यू झाला होता. <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://mumbaimirror.indiatimes.com/news/india/former-supreme-court-judge-ar-lakshmanan-passes-away/articleshow/77786695.cms|title=Former Supreme Court judge AR Lakshmanan passes away|access-date=2023-04-18|archive-date=2023-04-18|archive-url=https://web.archive.org/web/20230418123352/https://mumbaimirror.indiatimes.com/news/india/former-supreme-court-judge-ar-lakshmanan-passes-away/articleshow/77786695.cms|url-status=dead}}</ref>
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:२१व्या शतकातील भारतीय न्यायाधीश]]
[[वर्ग:भारतीय न्यायाधीश]]
[[वर्ग:इ.स. २०२० मधील मृत्यू]]
[[वर्ग:इ.स. १९४२ मधील जन्म]]
[[वर्ग:कोविड-१९ महामारीमुळे मृत्यू]]
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पाय्यूट काउंटी (युटा)
0
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2026-09-15T16:40:32Z
अभय नातू
206
अभय नातू ने लेख [[प्यूट काउंटी (युटा)]] वरुन [[पाय्यूट काउंटी (युटा)]] ला हलविला: शुद्धलेखन
2501485
wikitext
text/x-wiki
'''प्यूट काउंटी''' ही [[अमेरिकेची संयुक्त संस्थाने|अमेरिकेच्या]] [[युटा]] राज्यातील [[युटामधील काउंट्या|२९ पैकी एक काउंटी]] आहे. याचे प्रशासकीय केन्द्र [[जंक्शन (युटा)|जंक्शन]] येथे आहे.<ref>{{cite web|url=http://www.naco.org/Counties/Pages/FindACounty.aspx|access-date=June 7, 2011|title=Find a County|publisher=National Association of Counties}}</ref>
२०२० च्या जनगणनेनुसार येथील लोकसंख्या १,४३८ इतकी होती.<ref>{{cite web|title=Piute County, Utah|url=https://data.census.gov/profile/Piute_County,_Utah?g=050XX00US49031|publisher=[[युनायटेड स्टेट्स सेन्सस ब्युरो]]|access-date=July 1, 2023}}</ref>
प्यूट काउंटीची रचना १६ जानेवारी, १८६५ रोजी झाली. या काउंटीला येथील मूळ रहिवासी [[दक्षिणी प्यूट जमात|दक्षिणी प्यूट जमातीचे]] नाव दिलेले आहे.
== हे सुद्धा पहा ==
* [[अमेरिकेच्या काउंट्यांची यादी]]
== संदर्भ आणि नोंदी ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:प्यूट काउंटी (युटा)|*]]
[[वर्ग:युटामधील काउंटी]]
[[वर्ग:इ.स. १८६५ मधील निर्मिती]]
es6wyti2n1d7uvim6cgr49zxmei2fe0
भारतीय संविधानाची आठवी अनुसूची
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2026-09-16T06:57:11Z
Dharmadhyaksha
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2709881
wikitext
text/x-wiki
{{भारताचे संविधान}}
'''[[भारताचे संविधान|भारतीय संविधानाच्या]] आठव्या अनुसूचीमध्ये''' [[भारतामधील भाषा|भारतीय प्रजासत्ताकच्या अधिकृत भाषांची]] यादी आहे.
ज्या वेळी राज्यघटना लागू करण्यात आली होती, त्या वेळी या यादीत समावेशाचा अर्थ असा होता की ह्या भाषेला राजभाषा आयोगात प्रतिनिधित्व मिळण्याचा अधिकार मिळेल. <ref>Constitution of India, Article [http://www.constitution.org/cons/india/p17344.html 344(1)].</ref><ref>Constitution of India, Article [http://www.constitution.org/cons/india/p17351.html 351].</ref> त्यानंतर मात्र या यादीला आणखी महत्त्व प्राप्त झाले आहे. भारत सरकारवर आता या भाषांच्या विकासासाठी उपाययोजना करणे बंधनकारक आहे.<ref>Official Languages Resolution, 1968, [http://www.rajbhasha.gov.in/dolresolutioneng.htm para. 2]. {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20100318123802/http://www.rajbhasha.gov.in/dolresolutioneng.htm}}</ref> याव्यतिरिक्त, सार्वजनिक सेवेसाठी आयोजित केलेल्या परीक्षेला बसलेल्या उमेदवारांना परीक्षेत उत्तर देण्यासाठी यापैकी कोणतीही भाषा माध्यम म्हणून वापरण्याचा अधिकार आहे. <ref>Official Languages Resolution, 1968, [http://www.rajbhasha.gov.in/dolresolutioneng.htm para. 4]. {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20100318123802/http://www.rajbhasha.gov.in/dolresolutioneng.htm}}</ref> ह्या भाषांमधील कलाकृतींसाठी भारत सरकार अनेक पुरस्कार पण देते; जसे की [[साहित्य अकादमी पुरस्कार]], [[राष्ट्रीय चित्रपट पुरस्कार]]. सरकारव्यतिरीक्त पण अनेक संस्था ह्या भाषांच्या विकासाचे कार्य करतात जसे की [[ज्ञानपीठ पुरस्कार]].
== समाविष्ट भाषा ==
[[भारताचे संविधान|भारतीय राज्यघटनेच्या]] अनुच्छेद ३४४(१) आणि ३५१ नुसार, आठव्या अनुसूचीमध्ये खालील २२ [[भाषा|भाषांचा]] समावेश आहे: <ref name="Josh-2019">{{स्रोत पुस्तक|url=https://books.google.com/books?id=jEuCDwAAQBAJ&pg=PA97|title=Current Affairs January 2019 eBook: by Jagran Josh|last=Josh|first=Jagran|date=4 January 2019|publisher=Jagran Josh|pages=97–|quote=The Eighth Schedule of the Indian Constitution lists 22 official languages of the Republic of India. The languages include Hindi, Assamese, Bengali, Bodo, Dogri, Gujarati, Kannada, Kashmiri, Konkani, Maithili, Malayalam, Manipuri, Marathi, Nepali, Odia, Punjabi, Sanskrit, Santali, Sindhi, Tamil, Telugu, and Urdu.}}</ref> <ref name="Arihant-2022">{{स्रोत पुस्तक|url=https://books.google.com/books?id=C0FpEAAAQBAJ&pg=PA320|title=LLB Bachelor of Laws 12 Solved Papers (2021-2010) For 2022 Exams|last=Arihant Experts|date=5 March 2022|publisher=Arihant Publications India limited|isbn=9789326191210|pages=320–|quote=49 (b) The Eighth Schedule of the Indian Constitution lists 22 official languages of the Republic of India. Part XVII of the Indian Constitution deals with the official languages in Articles 343 to 351. The 22 official languages are: Assamese, Bengali, Gujarati, Hindi, Kannada, Kashmiri, Konkani, Malayalam, Manipuri, Marathi, Nepali, Oriya, Punjabi, Sanskrit, Sindhi, Tamil, Telugu, Urdu, Bodo, Santali, Maithili, and Dogri.}}</ref>
#[[आसामी भाषा|आसामी]]
#[[बंगाली भाषा|बंगाली]]
#[[बोडो भाषा|बोडो]]
#[[डोग्री भाषा|डोग्री]]
#[[गुजराती भाषा|गुजराती]]
#[[हिंदी भाषा|हिंदी]]
#[[कन्नड भाषा|कन्नड]]
#[[काश्मिरी भाषा|काश्मिरी]]
#[[कोकणी भाषा|कोकणी]]
#[[मैथिली भाषा|मैथिली]]
#[[मलयाळम भाषा|मलयाळम]]
#[[मणिपुरी भाषा|मणिपुरी]]
#[[मराठी भाषा|मराठी]]
#[[नेपाळी भाषा|नेपाळी]]
#[[उडिया भाषा|उडिया]]
#[[पंजाबी भाषा|पंजाबी]]
#[[संस्कृत भाषा|संस्कृत]]
#[[सिंधी भाषा|सिंधी]]
#[[संथाळी भाषा|संथाळी]]
#[[तेलुगू भाषा|तेलुगू]]
#[[तमिळ भाषा|तमिळ]]
#[[उर्दू भाषा|उर्दू]]
=== इतिहास ===
* १९५०: प्रारंभी संविधानात १४ भाषा समाविष्ट होत्या: आसामी, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड, काश्मिरी, मल्याळम, मराठी, ओरिया, पंजाबी, संस्कृत, तमिळ, तेलगू आणि उर्दू.<ref name="sch">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=http://mha.nic.in/hindi/sites/upload_files/mhahindi/files/pdf/Eighth_Schedule.pdf|title=Archived copy|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20160305010536/http://mha.nic.in/hindi/sites/upload_files/mhahindi/files/pdf/Eighth_Schedule.pdf|archive-date=5 March 2016|access-date=4 October 2016}}</ref>
* १९६७: २१व्या घटनादुरुस्ती कायद्याद्वारे [[सिंधी भाषा]] जोडण्यात आली.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=http://indiacode.nic.in/coiweb/amend/amend21.htm|title=The Constitution (Twenty-first Amendment) Act, 1967|archive-url=https://web.archive.org/web/20120130174023/http://indiacode.nic.in/coiweb/amend/amend21.htm|archive-date=30 January 2012|access-date=5 December 2013}}</ref>
* १९९२: [[कोकणी भाषा|कोकणी]], [[मणिपुरी भाषा|मणिपुरी]] (मीतेई) आणि [[नेपाळी भाषा|नेपाळी]] ७१ व्या घटनादुरुस्ती कायद्याद्वारे जोडण्यात आल्या.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.india.gov.in/my-government/constitution-india/amendments/constitution-india-seventy-first-amendment-act-1992|title=The Constitution (Seventy-first Amendment) Act, 1992{{!}} National Portal of India|website=www.india.gov.in|access-date=2023-03-19}}</ref>
* २००३: ९२ व्या घटनादुरुस्ती कायद्याद्वारे [[बोडो भाषा|बोडो]], [[डोग्री भाषा|डोग्री]], [[मैथिली भाषा|मैथिली]] आणि [[संथाळी भाषा|संथाळी]] जोडले गेले.<ref name="sch" />
* २०११: ९६ व्या घटनादुरुस्ती कायद्याद्वारे ओरियाचे नाव [[उडिया भाषा|उडिया]] करण्यात आले.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://indianexpress.com/article/india/regional/orissa-becomes-odisha-oriya-is-odia/|title=Orissa becomes 'Odisha', Oriya is 'Odia'|date=2011-09-06|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2023-05-02}}</ref>
== विस्ताराची मागणी ==
सध्या, [[गृह मंत्रालय (भारत)|गृह मंत्रालयानुसार]], <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=http://mha.nic.in/hindi/sites/upload_files/mhahindi/files/pdf/Eighth_Schedule.pdf|title=Archived copy|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20160305010536/http://mha.nic.in/hindi/sites/upload_files/mhahindi/files/pdf/Eighth_Schedule.pdf|archive-date=5 March 2016|access-date=4 October 2016}}</ref> <ref>{{स्रोत बातमी|url=https://www.aninews.in/news/national/general-news/no-fixed-criteria-for-language-to-be-considered-for-inclusion-in-eighth-schedule-minister20210811232806/|title=Demands to include Awadhi as Scheduled Language|accessdate=2023-09-15|archive-date=2022-10-19|archive-url=https://web.archive.org/web/20221019110823/https://www.aninews.in/news/national/general-news/no-fixed-criteria-for-language-to-be-considered-for-inclusion-in-eighth-schedule-minister20210811232806/|url-status=dead}}</ref> राज्यघटनेच्या आठव्या अनुसूचीमध्ये आणखी ३९ भाषांचा समावेश करण्याची मागणी आहे. हे आहेत:
{{Div col|colwidth=25em}}
#[[अंगिका भाषा|अंगिका]]
#[[अवधी भाषा|अवधी]]
#[[बंजारा भाषा|बंजारा]]
#[[बज्जिका भाषा|बज्जिका]]
#[[भोजपुरी भाषा|भोजपुरी]]
#[[लडाखी भाषा|लडाखी]]
#[[सिक्कीमी भाषा|सिक्कीमी]]
#[[बुंदेली भाषा|बुंदेली]]
#[[छत्तीसगढी भाषा|छत्तीसगढी]]
#[[धाटकी भाषा|धाटकी]]
#[[इंग्लिश भाषा|इंग्लिश]]
#[[गढवाली भाषा|गढवाली]]
#[[गोंडी भाषा|गोंडी]]
#[[गुजरी भाषा|गुजरी]]
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#[[कामतापुरी भाषा|कामतापुरी (रंगपुरी)]]
#[[कार्बी भाषा|कार्बी]]
#[[खासी भाषा|खासी]]
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#[[कुडुख भाषा|कुडुख ]]
#[[लेप्चा भाषा|लेप्चा ]]
#[[लिंबू भाषा|लिंबू]]
#[[मिझो भाषा|मिझो]]
#[[मगही भाषा|मगही]]
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#[[निकोबारी भाषा|निकोबारी]]
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#[[पाली भाषा|पाली]]
#[[राजस्थानी भाषा|राजस्थानी]]
#[[संबलपुरी भाषा|संबलपुरी]]
#[[प्राकृत]]
#[[सराइकी भाषा|सराइकी]]
#[[टेनीडी भाषा|टेनीडी]]
#[[तुळू भाषा|तुळू]]
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== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
{{भारतातील अधिकृत भाषा}}
[[वर्ग:भारतामधील भाषा]]
[[वर्ग:भारताचे संविधान]]
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'''आदित्य रावल''' (जन्म २८ सप्टेंबर १९९३) हा एक भारतीय अभिनेता आणि लेखक आहे जो [[बॉलीवूड|हिंदी]] चित्रपटांमध्ये काम करतो. अभिनेते [[परेश रावळ|परेश रावल]] आणि [[स्वरूप संपत]] यांच्या पोटी जन्मलेल्या त्यांनी लेखक म्हणून कारकिर्दीला सुरुवात केली. रावलने ''बमफाड'' (२०२०) मधून चित्रपटात पदार्पण केले आणि त्यानंतर ''फराज'' (२०२२) मध्ये काम केले, ज्याने त्याला [[फिल्मफेर सर्वोत्तम पुरुष पदार्पण पुरस्कार|सर्वोत्कृष्ट पुरुष पदार्पणासाठी फिल्मफेर पुरस्कार]] मिळविला.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/amp/news/features/aditya-rawal-opens-working-hansal-mehta-faraaz-calls-enlightening-experience/|title=Aditya Rawal opens up on working with Hansal Mehta in Faraaz; calls it “enlightening experience”|website=Bollywood Hungama|access-date=28 February 2023}}</ref><ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.indiatvnews.com/entertainment/news/filmfare-awards-2024-live-updates-watch-live-streaming-of-grand-ceremony-winner-best-actor-actress-with-latest-news-2024-01-28-914101|title=Filmfare Awards 2024 Live: Alizeh Agnihotri, Aditya Rawal bag Filmfare Awards for Best Debuts|website=India TV|access-date=29 January 2024}}</ref>
रावल यांनी त्यांच्या कामाची सुरुवात ''फेरारी की सवारी'' या चित्रपटातून बालकलाकार म्हणून केली होती. त्यानंतर त्याने वडिलांच्या ''[[ओएमजी – ओह माय गॉड!]]'' (२०१२) मध्ये सहाय्यक काम केले. त्यानंतर रावल यांनी लेखक म्हणून काम केले आणि २०१९ मध्ये [[आशुतोष गोवारीकर]] यांच्या ''[[पानिपत (चित्रपट)|पानिपतसाठी]]'' आणि २०२२ मध्ये ''डिअर फादर'' या चित्रपटासाठी लिखाण केले.<ref name="PRSSAR">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://mumbaimirror.indiatimes.com/others/sunday-read/playing-the-rawal-model/amp_articleshow/75780318.cms|title=Playing The Rawal Model: Paresh, Swaroop and Aditya|last=Kunal Guha|website=Mumbai Mirror|access-date=12 November 2020|archive-date=2023-05-07|archive-url=https://web.archive.org/web/20230507124240/https://mumbaimirror.indiatimes.com/others/sunday-read/playing-the-rawal-model/amp_articleshow/75780318.cms|url-status=dead}}</ref>
== पुरस्कार ==
{| class="wikitable"
!वर्ष
! पुरस्कार
! श्रेणी
! काम
! परिणाम
! संदर्भ
|-
| rowspan="2" | २०२४
| rowspan="2" | [[फिल्मफेर पुरस्कार]]
| [[फिल्मफेर सर्वोत्तम सहाय्यक अभिनेता पुरस्कार|सर्वोत्कृष्ट सहाय्यक अभिनेता]]
| rowspan="2" | ''फराज''
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| rowspan="2" | <ref>{{स्रोत बातमी|url=https://www.filmfare.com/news/bollywood/nominations-for-the-69th-hyundai-filmfare-awards-2024-with-gujarat-tourism-full-list-out-63822.html|title=Nominations for the 69th Hyundai Filmfare Awards 2024 with Gujarat Tourism: Full list out|date=15 January 2024|work=[[Filmfare]]|access-date=15 January 2024}}</ref> <ref>{{स्रोत बातमी|url=https://www.filmfare.com/awards/filmfare-awards-2024/winners|title=Winners of the 69th Filmfare Awards 2024|date=28 January 2024|work=Filmfare|access-date=29 January 2024}}</ref>
|-
| [[फिल्मफेर सर्वोत्तम पुरुष पदार्पण पुरस्कार|सर्वोत्तम पुरुष पदार्पण]]
| {{Won}}
|-
|}
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:फिल्मफेर पुरस्कार विजेते]]
[[वर्ग:मुंबई विद्यापीठाचे माजी विद्यार्थी]]
[[वर्ग:पुरुष चरित्रलेख]]
[[वर्ग:इ.स. १९९३ मधील जन्म]]
[[वर्ग:हिंदी चित्रपट अभिनेते]]
[[वर्ग:हिंदी दूरचित्रवाहिनी अभिनेते]]
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{{विकिडेटा माहितीचौकट}}
'''आदित्य रावल''' (जन्म २८ सप्टेंबर १९९३) हा एक भारतीय अभिनेता आणि लेखक आहे जो [[बॉलीवूड|हिंदी]] चित्रपटांमध्ये काम करतो. अभिनेते [[परेश रावळ|परेश रावल]] आणि [[स्वरूप संपत]] यांच्या पोटी जन्मलेल्या त्यांनी लेखक म्हणून कारकिर्दीला सुरुवात केली. रावलने ''बमफाड'' (२०२०) मधून चित्रपटात पदार्पण केले आणि त्यानंतर ''फराज'' (२०२२) मध्ये काम केले, ज्याने त्याला [[फिल्मफेर सर्वोत्तम पुरुष पदार्पण पुरस्कार|सर्वोत्कृष्ट पुरुष पदार्पणासाठी फिल्मफेर पुरस्कार]] मिळविला.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/features/aditya-rawal-opens-working-hansal-mehta-faraaz-calls-enlightening-experience/|title=Aditya Rawal opens up on working with Hansal Mehta in Faraaz; calls it “enlightening experience”|website=Bollywood Hungama|access-date=28 February 2023}}</ref><ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.indiatvnews.com/entertainment/news/filmfare-awards-2024-live-updates-watch-live-streaming-of-grand-ceremony-winner-best-actor-actress-with-latest-news-2024-01-28-914101|title=Filmfare Awards 2024 Live: Alizeh Agnihotri, Aditya Rawal bag Filmfare Awards for Best Debuts|website=India TV|access-date=29 January 2024}}</ref>
रावल यांनी त्यांच्या कामाची सुरुवात ''फेरारी की सवारी'' या चित्रपटातून बालकलाकार म्हणून केली होती. त्यानंतर त्याने वडिलांच्या ''[[ओएमजी – ओह माय गॉड!]]'' (२०१२) मध्ये सहाय्यक काम केले. त्यानंतर रावल यांनी लेखक म्हणून काम केले आणि २०१९ मध्ये [[आशुतोष गोवारीकर]] यांच्या ''[[पानिपत (चित्रपट)|पानिपतसाठी]]'' आणि २०२२ मध्ये ''डिअर फादर'' या चित्रपटासाठी लिखाण केले.<ref name="PRSSAR">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://mumbaimirror.indiatimes.com/others/sunday-read/playing-the-rawal-model/articleshow/75780318.cms|title=Playing The Rawal Model: Paresh, Swaroop and Aditya|last=Kunal Guha|website=Mumbai Mirror|access-date=12 November 2020|archive-date=2023-05-07|archive-url=https://web.archive.org/web/20230507124240/https://mumbaimirror.indiatimes.com/others/sunday-read/playing-the-rawal-model/amp_articleshow/75780318.cms|url-status=dead}}</ref>
== पुरस्कार ==
{| class="wikitable"
!वर्ष
! पुरस्कार
! श्रेणी
! काम
! परिणाम
! संदर्भ
|-
| rowspan="2" | २०२४
| rowspan="2" | [[फिल्मफेर पुरस्कार]]
| [[फिल्मफेर सर्वोत्तम सहाय्यक अभिनेता पुरस्कार|सर्वोत्कृष्ट सहाय्यक अभिनेता]]
| rowspan="2" | ''फराज''
| {{Nom}}
| rowspan="2" | <ref>{{स्रोत बातमी|url=https://www.filmfare.com/news/bollywood/nominations-for-the-69th-hyundai-filmfare-awards-2024-with-gujarat-tourism-full-list-out-63822.html|title=Nominations for the 69th Hyundai Filmfare Awards 2024 with Gujarat Tourism: Full list out|date=15 January 2024|work=[[Filmfare]]|access-date=15 January 2024}}</ref> <ref>{{स्रोत बातमी|url=https://www.filmfare.com/awards/filmfare-awards-2024/winners|title=Winners of the 69th Filmfare Awards 2024|date=28 January 2024|work=Filmfare|access-date=29 January 2024}}</ref>
|-
| [[फिल्मफेर सर्वोत्तम पुरुष पदार्पण पुरस्कार|सर्वोत्तम पुरुष पदार्पण]]
| {{Won}}
|-
|}
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:फिल्मफेर पुरस्कार विजेते]]
[[वर्ग:मुंबई विद्यापीठाचे माजी विद्यार्थी]]
[[वर्ग:पुरुष चरित्रलेख]]
[[वर्ग:इ.स. १९९३ मधील जन्म]]
[[वर्ग:हिंदी चित्रपट अभिनेते]]
[[वर्ग:हिंदी दूरचित्रवाहिनी अभिनेते]]
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अंगद हसीजा
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{{विकिडेटा माहितीचौकट}}
'''अंगद हसीजा''' (जन्म: ३१ मे १९८४) हा एक भारतीय टेलिव्हिजन अभिनेता आहे. ''सपना बाबुल का...बिदाई'' (२००७) मधील आलेखची भूमिका साकारण्यासाठी तो ओळखला जातो. [[झी पंजाबी]] वरील २०२० मधील ''तेरा रंग चड्यामध्ये'' जिमी ढिल्लन "जेडी" ची भूमिका त्याने साकारली.<ref>{{cite web|url=https://www.indiatoday.in/television/celebrity/story/exclusive-sara-khan-angad-hasija-say-their-names-unnecessarily-dragged-into-bollywood-drug-probe-1725425-2020-09-25|title=Sara Khan and Angad Hasija say their names unnecessarily dragged in to Bollywood drug probe|work=www.indatoday.in|accessdate=25 September 2020}}</ref>
तो अलीकडेच [[झी फाईव्ह|झी५]] वरील ''इश्क आज कल'' या वेब सिरीजमध्ये दिसला होता.<ref>{{cite web|url=https://mumbaimirror.indiatimes.com/entertainment/tv/I-became-an-actor-because-of-my-mother-Angad-Hasija/articleshow/16126040.cms|title=I became an actor because of my mother: Angad Hasija|last=|first=|date=|website=Mumbai Mirror|access-date=|archive-date=2023-08-29|archive-url=https://web.archive.org/web/20230829074853/https://mumbaimirror.indiatimes.com/entertainment/tv/i-became-an-actor-because-of-my-mother-angad-hasija/articleshow/16126040.cms|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite web|url=https://mumbaimirror.indiatimes.com/entertainment/tv/I-became-an-actor-because-of-my-mother-Angad-Hasija/articleshow/16126040.cms|title=I became an actor because of my mother: Angad Hasija|last=|first=|date=|website=Mumbai Mirror|access-date=|archive-date=2023-08-29|archive-url=https://web.archive.org/web/20230829074853/https://mumbaimirror.indiatimes.com/entertainment/tv/i-became-an-actor-because-of-my-mother-angad-hasija/articleshow/16126040.cms|url-status=dead}}</ref>
२४ सप्टेंबर २०२० रोजी, अंगद हसीजा आणि टीव्ही अभिनेत्री सारा खान यांना भारतीय [[अंमली पदार्थ नियंत्रण विभाग|नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्युरो]] (NCB) ने ड्रग्ज चौकशीच्या संदर्भात समन्स बजावल्याचे वृत्त आले.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.indiatoday.in/television/celebrity/story/exclusive-sara-khan-angad-hasija-say-their-names-unnecessarily-dragged-into-bollywood-drug-probe-1725425-2020-09-25|title=Sara Khan and Angad Hasija say their names unnecessarily dragged in to Bollywood drug probe|website=www.indatoday.in|access-date=25 September 2020}}</ref>
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
{{DEFAULTSORT:हसीजा, अंगद}}
[[वर्ग:हिंदी दूरचित्रवाहिनी अभिनेते]]
[[वर्ग:इ.स. १९८४ मधील जन्म]]
[[वर्ग:पुरुष चरित्रलेख]]
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अग्निपथ
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{{विकिडेटा माहितीचौकट}}
'''''अग्निपथ''''' हा १९९० चा भारतीय [[हिंदी भाषा|हिंदी]] भाषेतील अॅक्शन क्राइम चित्रपट आहे जो मुकुल एस. आनंद दिग्दर्शित आहे, संतोष सरोज आणि [[कादर खान]] यांनी लिहिलेला आहे आणि [[धर्मा प्रॉडक्शन्स|धर्मा प्रॉडक्शनच्या]] बॅनरखाली [[यश जोहर]] यांनी निर्मित केला आहे. या चित्रपटात [[अमिताभ बच्चन]] हे विजय दीनानाथ चौहानची भूमिका साकारतात, जो आपल्या वडिलांच्या चुकीच्या मृत्यूचा आणि कुटुंबावर झालेल्या अन्यायाचा बदला घेण्यासाठी मुंबईच्या गुन्हेजगतातमध्ये प्रवेश करतो. सहाय्यक कलाकारांमध्ये [[मिथुन चक्रवर्ती]], [[रोहिणी हट्टंगडी]], [[डॅनी डेन्झोंग्पा|डॅनी डेन्झोंगपा]] आणि [[आलोक नाथ]] यांचा समावेश आहे.
या चित्रपटाचे शीर्षक अमिताभ बच्चन यांचे वडील [[हरिवंशराय बच्चन|हरिवंश राय बच्चन]] यांनी लिहिलेल्या त्याच नावाच्या हिंदी कवितेवरून घेतले आहे. चित्रपटादरम्यान ही कविता वाचली जाते आणि ती वारंवार येणारी चित्रपटात येते. ही कथा काही प्रमाणात खऱ्या आयुष्यातील गुंड वरदराजन मुदलियार आणि [[मनोहर अर्जुन सुर्वे|मन्या सुर्वे]] वरून प्रेरित असल्याचे सांगितले जाते.<ref name="auto">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=http://www.रीडिफ.कॉम/movies/dec/27sat.htm|title=Rediff On The Net, Movies: Satya is the latest movie to depict predator as prey|website=www.रीडिफ.कॉम}}{{मृत दुवा|date=July 2025 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/bollywood/on-the-vijay-path-again/story-uQMDy4D8dYk7tq6EwjhU9H.html#:~:text=But%20what%20made%20the%20Indian,character%20of%20Vijay%20Dinanth%20Chauhan.|title=On the Vijay path again!|date=29 May 2011}}</ref>
१९९० मध्ये थिएटरमध्ये प्रदर्शित झालेल्या ''अग्निपथला'' सुरुवातीला संमिश्र प्रतिसाद मिळाला आणि वर्षातील चौथ्या क्रमांकाचा सर्वाधिक कमाई करणारा हिंदी चित्रपट असूनही बॉक्स ऑफिसवर तो कमी कामगिरी करू शकला.<ref name="auto1">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/film-of-the-month-agneepath-amitabh-bachchan-6270570/|title=Film of the Month: Amitabh's Agneepath is more than mere Scarface, maloom?|date=16 February 2020}}</ref> तथापि, कालांतराने या चित्रपटाला कल्ट दर्जा मिळाला आणि त्यानंतर त्याचे शैलीबद्ध दिग्दर्शन, तीव्र अभिनय आणि सामाजिक-राजकीय विषयासाठी पुनर्मूल्यांकन केले गेले.<ref>{{Cite web|url=https://mumbaimirror.indiatimes.com/entertainment/bollywood/one-don-many-interpretations/articleshow/16122655.cms|title=One don, many interpretations|access-date=2025-07-11|archive-date=2024-11-27|archive-url=https://web.archive.org/web/20241127070503/https://mumbaimirror.indiatimes.com/entertainment/bollywood/one-don-many-interpretations/articleshow/16122655.cms|url-status=dead}}</ref> ३८ व्या राष्ट्रीय चित्रपट पुरस्कारांमध्ये बच्चन यांना [[राष्ट्रीय चित्रपट पुरस्कार, सर्वोत्कृष्ट अभिनेता|सर्वोत्कृष्ट अभिनेत्याचा पुरस्कार]] मिळाला व हा त्या श्रेणीतील त्यांचा पहिला पुरस्कार होता. ३६ व्या फिल्मफेर पुरस्कारांमध्ये, चक्रवर्ती आणि हट्टंगडी यांना अनुक्रमे [[फिल्मफेर सर्वोत्तम सहाय्यक अभिनेता पुरस्कार|सर्वोत्कृष्ट सहाय्यक अभिनेता]] आणि [[फिल्मफेर सर्वोत्तम सहाय्यक अभिनेत्री पुरस्कार|सर्वोत्कृष्ट सहाय्यक अभिनेत्रीचा]] पुरस्कार मिळाला.
२०१२ मध्ये, करण मल्होत्राने याच शीर्षकाखाली हा चित्रपट रिमेक केला आणि मुकुल एस. आनंद यांच्या भूमिकेला श्रद्धांजली म्हणून हिरू यश जोहर आणि यांचा मुलगा [[करण जोहर]] यांनी त्याची निर्मिती केली.
== गीत ==
{{Track listing
|extra_column=गायक|all_music=[[लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल]]
|title1=किसको था पता |extra1=[[एस.पी. बालसुब्रमण्यम]], [[अलका याज्ञिक]]
|title2=आय एम क्रिश्नन अय्यर एम.ए |extra2=एस.पी. बालसुब्रमण्यम
|title3=अलीबाबा मिल गये चालिस चोरोंसे |extra3=[[रुना लैला]], [[आदेश श्रीवास्तव]]<ref>{{Cite web|url=https://www.lyricsmotion.com/song/lyrics/ali-baba-mil-gaye-chalis-choron-se|title=Ali Baba Mil Gaye Chalis Choron Se Lyrics|work=LyricsMotion|access-date=31 May 2020|archive-date=2022-11-22|archive-url=https://web.archive.org/web/20221122131600/https://www.lyricsmotion.com/song/lyrics/ali-baba-mil-gaye-chalis-choron-se|url-status=dead}}</ref>
|title4=गणपती अपने गांव चले |extra4=[[सुदेश भोसले]], [[कविता कृष्णमूर्ती]], [[अनुपमा देशपांडे]]
}}
== पुरस्कार ==
{| class="wikitable sortable"
! scope="col" |पुरस्कार
! scope="col" | समारंभाची तारीख
! scope="col" | श्रेणी
! scope="col" | प्राप्तकर्ते
! scope="col" | निकाल
|-
| rowspan="5" scope="row" | [[फिल्मफेर पुरस्कार]]
| rowspan="5" | १९९१
| [[फिल्मफेर सर्वोत्तम चित्रपट पुरस्कार|सर्वोत्कृष्ट चित्रपट]]
| ''अग्निपथ''
|{{Nom}}
|-
| [[फिल्मफेर सर्वोत्तम दिग्दर्शक पुरस्कार|सर्वोत्कृष्ट दिग्दर्शक]]
| मुकुल एस. आनंद
|{{Nom}}
|-
| [[फिल्मफेर सर्वोत्तम अभिनेता पुरस्कार|सर्वोत्कृष्ट अभिनेता]]
| [[अमिताभ बच्चन]]
|{{Nom}}
|-
| [[फिल्मफेर सर्वोत्तम सहाय्यक अभिनेता पुरस्कार|सर्वोत्कृष्ट सहाय्यक अभिनेता]]
| [[मिथुन चक्रवर्ती]]
|{{Won}}
|-
| [[फिल्मफेर सर्वोत्तम सहाय्यक अभिनेत्री पुरस्कार|सर्वोत्कृष्ट सहाय्यक अभिनेत्री]]
| [[रोहिणी हट्टंगडी]]
|{{Won}}
|-
| [[राष्ट्रीय चित्रपट पुरस्कार]]
| ७ एप्रिल १९९१
| [[राष्ट्रीय चित्रपट पुरस्कार, सर्वोत्कृष्ट अभिनेता|प्रमुख भूमिकेतील सर्वोत्कृष्ट अभिनेता]]
| अमिताभ बच्चन
|{{Won}}
|-
|}
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:भारतीय ॲक्शन ड्रामा चित्रपट]]
[[वर्ग:इ.स. १९९० मधील हिंदी चित्रपट]]
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काशवी गौतम
0
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2642153
2026-09-16T07:19:36Z
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text/x-wiki
{{विकिडेटा माहितीचौकट}}
'''काशवी सुदेश गौतम''' ([[१८ एप्रिल]], [[इ.स. २००३|२००३]]:[[चंडीगढ]], [[भारत]] - ) ही {{Crw|IND}}कडून आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेळलेली [[क्रिकेट]] खेळाडू आहे. ती [[महिला प्रीमियर लीग|महिला प्रीमियर लीगमध्ये]] [[गुजरात जायंट्स (मप्रीली)|गुजरात जायंट्सकडून]] आणि देशांतर्गत क्रिकेटमध्ये [[चंडीगढ महिला क्रिकेट संघ|चंडीगढकडून]] खेळते.
== देशांतर्गत कारकीर्द ==
डिसेंबर २०२३ मध्ये झालेल्या दुसऱ्या [[२०२४ महिला प्रीमियर लीग|महिला प्रीमयर लीग]] लिलावात गौतमला [[गुजरात जायंट्स (मप्रीली)|गुजरात जायंट्स]]<nowiki/>ने ₹२ कोटींना खरेदी केले. परंतु नंतर दुखापतीमुळे तिला २०२४ च्या हंगामाच्या स्पर्धेतून बाहेर ठेवण्या आले. दुखापतीतून सावरल्यानंतर, ती [[२०२५ महिला प्रीमियर लीग|२०२५ स्पर्धा]] खेळू शकली.
गौतम [[चंडीगढ महिला क्रिकेट संघ|चंदीगड महिला क्रिकेट संघासाठी]] देशांतर्गत क्रिकेट खेळते. २४ नोव्हेंबर २०२३ रोजी महिला आंतर-झोनल ट्वेंटी२० स्पर्धा २०२३/२४ मध्ये नॉर्थ ईस्ट झोन विरुद्ध नॉर्थ झोनसाठी तिने पहिले [[पंचबळी|पाच बळी]] घेतले आणि [[इंग्लंड महिला क्रिकेट संघाचा भारत दौरा, २०२३-२४|इंग्लंडविरुद्धच्या मालिकेसाठी]] इंडिया अ संघात स्थान मिळवले.
== आंतरराष्ट्रीय कारकीर्द ==
एप्रिल २०२५ मध्ये तिला श्रीलंका आणि दक्षिण आफ्रिकेविरुद्धच्या [[२०२५ श्रीलंका महिला तिरंगी मालिका|एकदिवसीय तिरंगी मालिकेसाठी]] भारताच्या राष्ट्रीय संघात स्थान देण्यात आले. २७ एप्रिल २०२५ तिने रोजी श्रीलंकेविरुद्ध एकदिवसीय सामन्यात पदार्पण केले. <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.espncricinfo.com/story/kashvee-gautam-kanika-ahuja-ruled-out-of-wpl-with-injuries-1421799|title=Kashvee Gautam, Kanika Ahuja ruled out of WPL with injuries|website=ESPNcricinfo|access-date=9 April 2025}}</ref> ६ मे २०२५ रोजी, दुखापतीमुळे तिला स्पर्धेतून बाहेर पडावे लागले. <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://sportstar.thehindu.com/cricket/womens-cricket/wpl-2025-kashvee-gautam-back-from-injury-hopes-to-shine-for-gujarat-giants-in-womens-premier-league/article69258474.ece|title=WPL 2025 - How Kashvee Gautam returned to Women's Premier League from injury|date=2025-02-24|website=Sportstar|language=en|access-date=2025-04-08}}</ref><ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.wplt20.com/players/kashvee-gautam-wpl-profile-75656|title=Kashvee Gautam|website=WPL|access-date=19 May 2025|archive-date=2026-02-08|archive-url=https://web.archive.org/web/20260208023442/https://www.wplt20.com/players/kashvee-gautam-wpl-profile-75656|url-status=dead}}</ref>
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
{{DEFAULTSORT:गौतम, काशवी}}
[[वर्ग:भारताच्या महिला क्रिकेट खेळाडू]]
[[वर्ग:इ.स. २००३ मधील जन्म]]
[[वर्ग:स्त्री चरित्रलेख]]
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आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६
0
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2026-09-16T07:11:46Z
Nitin.kunjir
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/* पुरुषांचे कार्यक्रम */
2709885
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text/x-wiki
{{short description|International cricket season}}
{{Use dmy dates|date=January 2025}}{{आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट वर्षे|२०२५-२६|२०२६-२७}}
'''२०२६ आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट हंगाम''' एप्रिल २०२६ ते सप्टेंबर २०२६ पर्यंत असेल.<ref>{{Cite web|url=https://www.cricschedule.com/ftp.php|title=Future Tour Programs (FTP) Schedule of ICC|website=CricSchedule|access-date=2024-03-16}}</ref> या कालावधीमध्ये पुरुषांचे [[कसोटी सामना|कसोटी]], [[एकदिवसीय क्रिकेट|एकदिवसीय]] आणि [[टी२०]] सामने (पूर्ण सदस्य संघांमधील), [[महिला कसोटी क्रिकेट|महिला कसोटी]], [[महिला एक दिवसीय आंतरराष्ट्रीय|महिला एकदिवसीय]] आणि [[महिला ट्वेंटी-२० आंतरराष्ट्रीय|महिला]] [[महिला ट्वेंटी-२० आंतरराष्ट्रीय|टी२०]] सामने तसेच काही इतर महत्त्वाच्या मालिका समाविष्ट असतील.<ref>{{cite web|url=https://resources.pulse.icc-cricket.com/ICC/document/2022/08/17/9ecd5af8-4657-475f-ae1e-733b04f69750/Men-s-FTP-upto-2027.pdf|title=Men's Future Tours Programme 2023 to 2027|work=International Cricket Council|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20221226133751/https://resources.pulse.icc-cricket.com/ICC/document/2022/08/17/9ecd5af8-4657-475f-ae1e-733b04f69750/Men-s-FTP-upto-2027.pdf|archive-date=26 December 2022|accessdate=14 March 2023}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.icc-cricket.com/media-releases/2747093|title=Men's FTP for 2023-2027 announced|work=International Cricket Council|accessdate=14 March 2023}}</ref> [[२०२६ महिला टी२० विश्वचषक]] जून आणि जुलै २०२६ दरम्यान इंग्लंडमध्ये आयोजित करण्याचे नियोजित आहे.<ref>{{cite web|url=https://www.skysports.com/cricket/news/12123/12659535/england-to-host-2026-womens-t20-cricket-world-cup|title=England to host 2026 T20 Women's World Cup|work=[[Sky Sports]]|access-date=26 July 2022}}</ref> येथे दाखवलेल्या सामन्यांव्यतिरिक्त, या कालावधीत सहयोगी राष्ट्रांशी संबंधित इतर अनेक टी२०आय मालिका खेळवल्या जातील.
== मोसम आढावा ==
=== पुरुषांचे कार्यक्रम ===
{| class="wikitable" style="text-align:center; white-space:nowrap"
! colspan="6" |'''आंतरराष्ट्रीय दौरे'''
|-
! rowspan="2" |'''आरंभ दिनांक'''
! rowspan="2" |यजमान संघ
! rowspan="2" |पाहुणा संघ
! colspan="3" |निकाल [सामने]
|-
! width="80" |[[कसोटी सामना|कसोटी]]
! width="80" |[[आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय क्रिकेट|आं.ए.दि.]]
! width="80" |[[आंतरराष्ट्रीय टी२०|आं.टी२०]]
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#न्यू झीलंडचा बांगलादेश दौरा|{{date|17 April 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{cr|BAN}}
| style="text-align:left" |{{cr|NZ}}
| {{n/a}} || २–१ [३] || १–१ [३]
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#पाकिस्तानचा बांगलादेश दौरा|{{date|8 May 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{cr|BAN}}
| style="text-align:left" |{{cr|PAK}}
| २–० [२] || {{n/a}} || {{n/a}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#न्यू झीलंडचा आयर्लंड दौरा|{{date|27 May 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{cr|IRE}}
| style="text-align:left" |{{cr|NZ}}
| ०–१ [१] || {{n/a}} || {{n/a}}
|-
|style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#ऑस्ट्रेलियाचा पाकिस्तान दौरा|{{date|30 May 2026}}]]
|style="text-align:left" |{{cr|PAK}}
|style="text-align:left" |{{cr|AUS}}
|{{n/a}}
|२–१ [३]
|{{n/a}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#श्रीलंकेचा वेस्ट इंडीज दौरा|{{date|3 June 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{cr|WIN}}
| style="text-align:left" |{{cr|SL}}
| १–० [२] || ०–१ [३] || २–१ [३]
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#न्यू झीलंडचा इंग्लंड दौरा|{{date|4 June 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{cr|ENG}}
| style="text-align:left" |{{cr|NZ}}
|१–२ [३] || {{n/a}} || {{n/a}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#अफगाणिस्तानचा भारत दौरा|{{date|6 June 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{cr|IND}}
| style="text-align:left" |{{cr|AFG|२०१३}}
| १–० [१] || ३–० [३] || {{n/a}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#ऑस्ट्रेलियाचा बांगलादेश दौरा|{{date|9 June 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{cr|BAN}}
| style="text-align:left" |{{cr|AUS}}
| {{n/a}} || २–१ [३] || ०–३ [३]
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#भारताचा आयर्लंड दौरा|२६ जून २०२६]]
| style="text-align:left" |{{cr|IRE}}
| style="text-align:left" |{{cr|IND}}
| {{n/a}}|| {{n/a}} || २–० [२]
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#बांगलादेशचा झिम्बाब्वे दौरा|{{date|28 June 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{cr|ZIM}}
| style="text-align:left" |{{cr|BAN}}
|१–० [२] || २–१ [५]
|[३]
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#भारताचा इंग्लंड दौरा|{{date|1 July 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{cr|ENG}}
| style="text-align:left" |{{cr|IND}}
| {{n/a}} || २–१ [३] || ४–० [५]
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#न्यू झीलंडचा वेस्ट इंडीज दौरा|{{date|11 July 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{cr|WIN}}
| style="text-align:left" |{{cr|NZ}}
| {{n/a}} || २–३ [५] || {{n/a}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#भारताचा झिम्बाब्वे दौरा|{{date|23 July 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{cr|ZIM}}
| style="text-align:left" |{{cr|IND}}
| {{n/a}} || {{n/a}} || ०–३ [३]
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#पाकिस्तानचा वेस्ट इंडीज दौरा|{{date|25 July 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{cr|WIN}}
| style="text-align:left" |{{cr|PAK}}
| १–१ [२]|| {{n/a}} || {{n/a}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#अफगाणिस्तानचा आयर्लंड दौरा|{{date|5 August 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{cr|IRE}}
| style="text-align:left" |{{cr|AFG|२०१३}}
| {{n/a}} || ०–४ [५] || {{n/a}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#बांगलदेशचा ऑस्ट्रेलिया दौरा |{{date|13 August 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{cr|AUS}}
| style="text-align:left" |{{cr|BAN}}
| १–१ [२] || {{n/a}} || {{n/a}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#भारताचा श्रीलंका दौरा|{{date|15 August 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{cr|SRI}}
| style="text-align:left" |{{cr|IND}}
|०–१ [२] || {{n/a}} || {{n/a}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#पाकिस्तानचा इंग्लंड दौरा|{{date|19 August 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{cr|ENG}}
| style="text-align:left" |{{cr|PAK}}
|३–० [३] || {{n/a}} || {{n/a}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#दक्षिण आफ्रिकेचा नामिबिया दौरा|{{date|9 September 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{cr|NAM}}
| style="text-align:left" |{{cr|SA}}
| {{n/a}} || ०–३ [३] || {{n/a}}
|-
| style="text-align:left" | [[#भारत वि अफगाणिस्तान भारतामध्ये|१३ सप्टेंबर २०२६]]
| style="text-align:left" | {{flagicon|IND}} {{cr|AFG|२०१३}}
| style="text-align:left" | {{cr|IND}}
| {{n/a}} || {{n/a}} || [३]
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#श्रीलंकेचा इंग्लंड दौरा|{{date|15 September 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{cr|ENG}}
| style="text-align:left" |{{cr|SL}}
| {{n/a}} || [३] || [३]
|-
| style="text-align:left" |[[#ऑस्ट्रेलियाचा झिम्बाब्वे दौरा|{{date|15 September 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{cr|ZIM}}
| style="text-align:left" |{{cr|AUS}}
| {{n/a}} || [3] || {{n/a}}
|-
| style="text-align:left" |[[#भारताचा जपान दौरा|{{date|22 September 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{cr|JPN}}
| style="text-align:left" |{{cr|IND}}
| {{n/a}} || {{n/a}} || [1]
|-
! colspan="6" style="text-align :center" |'''आंतरराष्ट्रीय स्पर्धा'''
|-
!'''आरंभ दिनांक'''
! colspan="4" |'''स्पर्धा'''
!'''विजेते'''
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#२०२६ नामिबिया तिरंगी मालिका (१६वी फेरी)|{{date|2 April 2026}}]]
| colspan="4" style="text-align:left" |{{flagicon|NAM}} [[२०२६ नामिबिया तिरंगी मालिका|२०२६ नामिबिया तिरंगी मालिका (१६वी फेरी)]]
|{{n/a}}
|-
|style="text-align:left" | [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#२०२६ नेपाळ तिरंगी मालिका (१७वी फेरी)|२५ एप्रिल २०२६]]
| colspan="4" style="text-align: left;" |{{ध्वजचिन्ह|NEP}} [[२०२६ नेपाळ तिरंगी मालिका|२०२६ नेपाळ तिरंगी मालिका (१७वी फेरी)]]
| {{n/a}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#२०२६ नेपाळ तिरंगी मालिका (१८वी फेरी)|१२ मे २०२६]]
| colspan="4" style="text-align:left" |{{flagicon|USA}} [[२०२६ नेपाळ तिरंगी मालिका (मे)|२०२६ नेपाळ तिरंगी मालिका (१८वी फेरी)]]
| {{n/a}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#२०२६ कॅनडा तिरंगी मालिका (१९वी फेरी)|६ जून २०२६]]
| colspan="4" style="text-align:left" |{{flagicon|USA}} [[२०२६ कॅनडा तिरंगी मालिका|२०२६ कॅनडा तिरंगी मालिका (१९वी फेरी)]]
| {{n/a}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#२०२६ नेदरलँड्स तिरंगी मालिका (२०वी फेरी)|{{date|21 July 2026}}]]
| colspan="4" style="text-align:left" |{{flagicon|NED}} [[२०२६ नेदरलँड्स तिरंगी मालिका|२०२६ नेदरलँड्स तिरंगी मालिका (२०वी फेरी)]]
| {{n/a}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#२०२६ स्कॉटलंड तिरंगी मालिका (२१वी फेरी)|{{date|3 August 2026}}]]
| colspan="4" style="text-align:left" |{{flagicon|NED}} [[२०२६ स्कॉटलंड तिरंगी मालिका|२०२६ स्कॉटलंड तिरंगी मालिका (२१वी फेरी)]]
| {{n/a}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#२०२६ क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग ब (टांझानिया)|{{date|8 August 2026}}]]
| colspan="4" style="text-align:left" |{{flagicon|TAN}} [[२०२६ क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग ब (टांझानिया)|२०२६ क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग बी]]
| {{n/a}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#२०२६ नामिबिया आं.टी२० तिरंगी मालिका|{{date|28 August 2026}}]]
| colspan="4" style="text-align:left" |{{flagicon|NAM}} [[२०२६ नामिबिया आं.टी२० तिरंगी मालिका]]
| style="text-align:left" | {{Cr|SA}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#२०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक|{{date|30 August 2026}}]]
| colspan="4" style="text-align:left" |{{flagicon|NAM}} [[२०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक]]
| style="text-align:left" | {{Cr|NEP}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#२०२६ आशियाई खेळ|{{date|24 September 2026}}]]
| colspan="4" style="text-align:left" |{{flagicon|JPN}} [[२०२६ आशियाई खेळांमध्ये क्रिकेट – पुरुष स्पर्धा|२०२६ आशियाई खेळ - पुरुष स्पर्धा]]
| style="text-align:left" |
|}
=== महिलांचे कार्यक्रम ===
{| class="wikitable" style="text-align:center; white-space:nowrap"
! colspan="6" |'''महिलांचे आंतरराष्ट्रीय दौरे'''
|-
! rowspan="2" |आरंभ दिनांक
! rowspan="2" |यजमान संघ
! rowspan="2" |पाहुणा संघ
! colspan="3" |'''निकाल [सामने]'''
|-
! width="80" |[[महिला कसोटी क्रिकेट|म. कसोटी]]
! width="80" |[[महिला एक दिवसीय आंतरराष्ट्रीय|म.आं.ए.दि.]]
! width="80" |[[महिला ट्वेंटी-२० आंतरराष्ट्रीय|म.आं.टी२०]]
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#भारतीय महिलांचा दक्षिण आफ्रिका दौरा|{{date|17 April 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{crw|SA}}
| style="text-align:left" |{{crw|IND}}
| {{n/a}} || {{n/a}} || ४–१ [५]
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#श्रीलंका महिलांचा बांगलादेश दौरा|{{date|20 April 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{crw|BAN}}
| style="text-align:left" |{{crw|SRI}}
| {{n/a}} || १–२ [३] || ०–३ [३]
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#झिम्बाब्वे महिलांचा पाकिस्तान दौरा |{{date|3 May 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{crw|PAK}}
| style="text-align:left" |{{crw|ZIM}}
| {{n/a}} || ३–० [३] || ३–० [३]
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#न्यू झीलंड महिलांचा इंग्लंड दौरा|{{date|10 May 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{crw|ENG}}
| style="text-align:left" |{{crw|NZ}}
| {{n/a}} || १-१ [३] || २–१ [३]
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#भारतीय महिलांचा इंग्लंड दौरा|{{date|28 May 2026}}]]
| style="text-align:left" |{{crw|ENG}}
| style="text-align:left" |{{crw|IND}}
| ०–१ [१] || {{n/a}} || २–१ [३]
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#वेस्ट इंडीज महिलांचा आयर्लंड दौरा|१० जुलै २०२६]]
| style="text-align:left" |{{crw|IRE}}
| style="text-align:left" |{{crw|WIN}}
| {{n/a}} || ०–३ [३] || {{n/a}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#पाकिस्तान महिलांचा श्रीलंका दौरा|२३ जुलै २०२६]]
| style="text-align:left" |{{crw|SRI}}
| style="text-align:left" |{{crw|PAK}}
| {{n/a}} || २–१ [३] || २–१ [३]
|-
| style="text-align:left" | [[#थायलंड महिलांचा पापुआ न्यू गिनी दौरा|१० ऑगस्ट २०२६]]
| style="text-align:left" | {{crw|PNG}}
| style="text-align:left" | {{crw|THA}}
| {{n/a}} || ०–३ [३] || १–१ [२]
|-
| style="text-align:left" | [[#नेदरलँड्स महिलांचा स्कॉटलंड दौरा|२८ ऑगस्ट २०२६]]
| style="text-align:left" | {{crw|SCO}}
| style="text-align:left" | {{crw|NED}}
| {{n/a}} || १–१ [३] || {{n/a}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#आयर्लंड महिलांचा इंग्लंड दौरा|१ सप्टेंबर २०२६]]
| style="text-align:left" |{{crw|ENG}}
| style="text-align:left" |{{crw|IRE}}
| {{n/a}} || ३–० [३] || {{n/a}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#दक्षिण आफ्रिका महिलांचा झिम्बाब्वे दौरा|११ सप्टेंबर २०२६]]
| style="text-align:left" |{{crw|ZIM}}
| style="text-align:left" |{{crw|RSA}}
| {{n/a}} || {{n/a}} || [५]
|-
! colspan="6" style="text-align :center" |'''आंतरराष्ट्रीय स्पर्धा'''
|-
!'''आरंभ दिनांक'''
! colspan="4" |'''स्पर्धा'''
!'''विजेते'''
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#२०२६ स्कॉटलंड महिला तिरंगी मालिका|२८ मे २०२६]]
| colspan="4" style="text-align:left" |{{flagicon|SCO}} [[२०२६ स्कॉटलंड महिला तिरंगी मालिका]]
| style="text-align:left" |{{Crw|SCO}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#२०२६ आयर्लंड महिला तिरंगी मालिका|२८ मे २०२६]]
| colspan="4" style="text-align:left" |{{flagicon|IRE|cricket}} [[२०२६ आयर्लंड महिला तिरंगी मालिका]]
| style="text-align:left" |{{Crw|WIN}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#२०२६ महिला टी२० क्रिकेट विश्वचषक|१२ जून २०२६]]
| colspan="4" style="text-align:left" |{{flagicon|ENG}} [[२०२६ महिला टी२० क्रिकेट विश्वचषक]]
| style="text-align:left" |{{Crw|AUS}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#२०२६ महिला टी२० आशिया चषक |२८ ऑगस्ट २०२६]]
| colspan="4" style="text-align:left" |{{flagicon|UAE}} [[२०२६ महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक]]
| style="text-align:left" |{{Crw|IND}}
|-
| style="text-align:left" |[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६#२०२६ आशियाई खेळ|१७ सप्टेंबर २०२६]]
| colspan="4" style="text-align:left" |{{flagicon|JPN}} [[२०२६ आशियाई खेळांमध्ये क्रिकेट – महिला स्पर्धा|२०२६ आशियाई खेळ - महिला स्पर्धा]]
| style="text-align:left" |
|}
== एप्रिल ==
=== २०२६ नामिबिया तिरंगी मालिका (१६वी फेरी)===
{{main|२०२६ नामिबिया तिरंगी मालिका}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="6" |[[२०२४-२०२६ आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक लीग २]] - आं.ए.दि. तिरंगी मालिका
|-
!क्र.
!दिनांक
!संघ १
!संघ २
!ठिकाण
!निकाल
|-
|[http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1529139.html आं.ए.दि. ४९४६]
|२ एप्रिल
|{{cr|OMA}}
|{{cr|SCO}}
|[[वॉन्डरर्स क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]]
|सामना रद्द
|-
|[http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1529140.html आं.ए.दि. ४९४७]
|४ एप्रिल
|{{cr|NAM}}
|{{cr|OMA}}
|[[वॉन्डरर्स क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]]
|{{cr|OMA}} ३ गडी राखून
|-
|[http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1529141.html आं.ए.दि. ४९४८]
|६ एप्रिल
|{{cr|NAM}}
|{{cr|SCO}}
|[[वॉन्डरर्स क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]]
|अनिर्णित
|-
|[http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1529142.html आं.ए.दि. ४९४९]
|८ एप्रिल
|{{cr|OMA}}
|{{cr|SCO}}
|[[वॉन्डरर्स क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]]
|{{cr|OMA}} १२ धावांनी
|-
|[http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1529143.html आं.ए.दि. ४९५०]
|१० एप्रिल
|{{cr|NAM}}
|{{cr|OMA}}
|[[वॉन्डरर्स क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]]
|{{cr|NAM}} १ गडी राखून
|-
|[http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1529144.html आं.ए.दि. ४९५१]
|१२ एप्रिल
|{{cr|NAM}}
|{{cr|SCO}}
|[[वॉन्डरर्स क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]]
|{{cr|SCO}} ७ गडी राखून
|}
=== न्यू झीलंडचा बांगलादेश दौरा ===
{{Main|न्यूझीलंड क्रिकेट संघाचा बांगलादेश दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4" |आं.ए.दि. मालिका
|-
!क्र.
!दिनांक
!ठिकाण
!निकाल
|-
|[http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1528272.html १ला आं.ए.दि.]
|१७ एप्रिल
|[[शेर-इ-बांग्ला राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[मीरपूर]]
|{{cr|NZ}} २६ धावांनी
|-
|[http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1528273.html २रा आं.ए.दि.]
|२० एप्रिल
|[[शेर-इ-बांग्ला राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[मीरपूर]]
|{{cr|BAN}} ६ गडी राखून
|-
|[http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1528274.html ३रा आं.ए.दि.]
|२३ एप्रिल
|[[बीर श्रेष्ठो फ्लाइट लेफ्टनंट मतीउर रहमान क्रिकेट स्टेडियम]], [[चट्टग्राम]]
|{{cr|BAN}} ५५ धावांनी
|-
! colspan="4" |आं.टी२० मालिका
|-
!क्र.
!दिनांक
!ठिकाण
!निकाल
|-
|[http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1528275.html १ला आं.टी२०]
|२७ एप्रिल
|[[बीर श्रेष्ठो फ्लाइट लेफ्टनंट मतीउर रहमान क्रिकेट स्टेडियम]], [[चट्टग्राम]]
|{{cr|BAN}} ६ गडी राखून
|-
|[http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1528276.html २रा आं.टी२०]
|२९ एप्रिल
|[[बीर श्रेष्ठो फ्लाइट लेफ्टनंट मतीउर रहमान क्रिकेट स्टेडियम]], [[चट्टग्राम]]
|सामना रद्द
|-
|[http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1528276.html ३रा आं.टी२०]
|२ मे
|[[शेर-इ-बांग्ला राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[मीरपूर]]
|{{cr|NZ}} ६ गडी राखून ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस]])
|}
=== भारतीय महिलांचा दक्षिण आफ्रिका दौरा ===
{{main|भारतीय महिला क्रिकेट संघाचा दक्षिण आफ्रिका दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4" |म.आं.टी२० मालिका
|-
!क्र.
!दिनांक
!ठिकाण
!निकाल
|-
|[http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1527253.html १ला म.आं.टी२०]
|१७ एप्रिल
|[[किंग्जमेड क्रिकेट मैदान]], [[डर्बन]]
|{{Crw|SA}} ६ गडी राखून
|-
|[http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1527254.html २रा म.आं.टी२०]
|१९ एप्रिल
|[[किंग्जमेड क्रिकेट मैदान]], [[डर्बन]]
|{{Crw|SA}} ८ गडी राखून
|-
|[http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1527255.html ३रा म.आं.टी२०]
|२२ एप्रिल
|[[वॉन्डरर्स स्टेडियम]], [[जोहान्सबर्ग]]
|{{Crw|SA}} ९ गडी राखून
|-
|[http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1527256.html ४था म.आं.टी२०]
|२५ एप्रिल
|[[वॉन्डरर्स स्टेडियम]], [[जोहान्सबर्ग]]
|{{Crw|IND}} १४ धावांनी
|-
|[http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1527257.html ५वा म.आं.टी२०]
|२७ एप्रिल
|[[विलोमूर पार्क]], [[बेनोनी (ग्वाटेंग)|बेनोनी]]
|{{Crw|SA}} २३ धावांनी
|}
=== श्रीलंका महिलांचा बांगलादेश दौरा ===
{{main|श्रीलंका महिला क्रिकेट संघाचा बांगलादेश दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4" |{{nowrap|[[२०२५–२०२९ आयसीसी महिला अजिंक्यपद]] — म.आं.ए.दि. मालिका}}
|-
!क्र.
!दिनांक
!ठिकाण
!निकाल
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1528279.html १ला म.आं.ए.दि.]
|२० एप्रिल
|[[शहीद कमरुझ्झमान स्टेडियम]], [[राजशाही]]
|{{Crw|BAN}} ३ गडी राखून
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496580.html २रा म.आं.ए.दि.]
|२२ एप्रिल
|[[शहीद कमरुझ्झमान स्टेडियम]], [[राजशाही]]
|{{Crw|SL}} ४ गडी राखून
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496581.html ३रा म.आं.ए.दि.]
|२५ एप्रिल
|[[शहीद कमरुझ्झमान स्टेडियम]], [[राजशाही]]
|{{Crw|SL}} ७ गडी राखून
|-
! colspan="4" |WT20I series
|-
!क्र.
!दिनांक
!ठिकाण
!निकाल
|-
|[http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496582.html १ला म.आं.टी२०]
|२८ एप्रिल
|[[सिलहट आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[सिलहट]]
|{{Crw|SL}} २५ धावांनी
|-
|[http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496583.html २रा म.आं.टी२०]
|३० एप्रिल
|[[सिलहट आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[सिलहट]]
|{{Crw|SL}} २१ धावांनी
|-
|[http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496584.html ३रा म.आं.टी२०]
|२ मे
|[[सिलहट आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[सिलहट]]
|{{Crw|SL}} ३ धावांनी
|}
=== २०२६ नेपाळ तिरंगी मालिका (१७वी फेरी) ===
{{main|२०२६ नेपाळ तिरंगी मालिका}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="6" | [[२०२४-२०२६ क्रिकेट विश्वचषक लीग २]] – तिरंगी मालिका
|-
! क्र.
! दिनांक
! संघ १
! संघ २
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1531696.html आं.ए.दि. ४९५४]|| २५ एप्रिल || {{cr|NEP}} || {{cr|UAE}}|| [[त्रिभुवन विद्यापीठ आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[कीर्तिपूर]] || {{cr|NEP}} ३७ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1531698.html आं.ए.दि. ४९५५]|| २७ एप्रिल || {{cr|OMA}} || {{cr|UAE}} || [[त्रिभुवन विद्यापीठ आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[कीर्तिपूर]] || {{cr|UAE}} २५ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1531699.html आं.ए.दि. ४९५६]|| २९ एप्रिल || {{cr|NEP}} || {{cr|OMA}} || [[त्रिभुवन विद्यापीठ आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[कीर्तिपूर]]|| {{cr|OMA}} १०२ धावांनी ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस]])
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1531700.html आं.ए.दि. ४९५७]|| १ मे || {{cr|NEP}} || {{cr|UAE}} || [[त्रिभुवन विद्यापीठ आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[कीर्तिपूर]]|| {{cr|NEP}} ६ धावांनी ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस]])
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1531701.html आं.ए.दि. ४९५८]|| ३ मे || {{cr|OMA}} || {{cr|UAE}} || [[त्रिभुवन विद्यापीठ आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[कीर्तिपूर]] || {{cr|UAE}} ५४ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1531702.html आं.ए.दि. ४९५९]|| ५ मे || {{cr|NEP}} || {{cr|OMA}} || [[त्रिभुवन विद्यापीठ आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[कीर्तिपूर]]|| {{cr|NEP}} ८१ धावांनी
|}
== मे==
=== झिम्बाब्वे महिलांचा पाकिस्तान दौरा ===
{{Main|झिम्बाब्वे महिला क्रिकेट संघाचा पाकिस्तान दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4" |{{nowrap|[[२०२५–२०२९ आयसीसी महिला अजिंक्यपद]] — म.आं.ए.दि. मालिका}}
|-
!क्र.
!दिनांक
!ठिकाण
!निकाल
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1534071.html म.आं.ए.दि. १५४५]
|४ मे
|[[राष्ट्रीय स्टेडियम (कराची)|राष्ट्रीय स्टेडियम]], [[कराची]]
|{{Crw|PAK}} १६८ धावांनी
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1534072.html म.आं.ए.दि. १५४६]
|६ मे
|[[राष्ट्रीय स्टेडियम (कराची)|राष्ट्रीय स्टेडियम]], [[कराची]]
|{{Crw|PAK}} २०६ धावांनी
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1534073.html म.आं.ए.दि. १५४७]
|९ मे
|[[राष्ट्रीय स्टेडियम (कराची)|राष्ट्रीय स्टेडियम]], [[कराची]]
|{{Crw|PAK}} ९ गडी राखून
|-
! colspan="4" |म.आं.टी२०. मालिका
|-
!क्र.
!दिनांक
!ठिकाण
!निकाल
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1534074.html म.आं.टी२० २७६६]
|१२ मे
|[[राष्ट्रीय स्टेडियम (कराची)|राष्ट्रीय स्टेडियम]], [[कराची]]
|{{Crw|PAK}} १५३ धावांनी
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1534075.html म.आं.टी२० २७६७]
|१४ मे
|[[राष्ट्रीय स्टेडियम (कराची)|राष्ट्रीय स्टेडियम]], [[कराची]]
|{{Crw|PAK}} ६७ धावांनी
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1534076.html म.आं.टी२० २७६९]
|१५ मे
|[[राष्ट्रीय स्टेडियम (कराची)|राष्ट्रीय स्टेडियम]], [[कराची]]
|{{Crw|PAK}} १३३ धावांनी
|}
===पाकिस्तानचा बांगलादेश दौरा===
{{main|पाकिस्तान क्रिकेट संघाचा बांगलादेश दौरा, २०२५–२६}}
{|class="wikitable"
|+
! colspan="4" | {{nowrap|[[ २०२५-२०२७ आयसीसी विश्व कसोटी अजिंक्यपद]] – कसोटी मालिका}}
|-
!क्र.
!दिनांक
!ठिकाण
!निकाल
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1532486.html कसोटी २६१७] || ८–१२ मे || [[शेर-ए-बांगला राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[ढाका]] || {{cr|BAN}} १०४ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1532487.html कसोटी २६१८] || १६–२० मे|| [[सिलहट आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[सिलहट]] || {{cr|BAN}} ७८ धावांनी
|}
=== न्यू झीलंड महिलांचा इंग्लंड दौरा===
{{Main|न्यू झीलंड महिला क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4" |{{nowrap|[[२०२५–२०२९ आयसीसी महिला अजिंक्यपद]] — म.आं.ए.दि. मालिका}}
|-
!क्र.
!दिनांक
!ठिकाण
!निकाल
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496542.html म.आं.ए.दि. १५४८]
|१० मे
|[[रिव्हरसाइड मैदान]], [[चेस्टर-ली-स्ट्रीट]]
|{{Cr|ENG}} १ गडी राखून
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496543.html म.आं.ए.दि. १५४९]
|१३ मे
|[[काउंटी क्रिकेट मैदान (नॉरदॅम्प्टन)|काउंटी मैदान]], [[नॉरदॅम्प्टन]]
|अनिर्णित
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496544.html म.आं.ए.दि. १५५०]
|१६ मे
|[[सोफिया गार्डन्स]], [[कार्डिफ]]
|{{Cr|NZL}} १७ धावांनी ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस]])
|-
! colspan="4" |म.आं.टी२० मालिका
|-
!क्र.
!दिनांक
!ठिकाण
!निकाल
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496545.html म.आं.टी२० २७७२]
|२० मे
|[[काउंटी क्रिकेट मैदान (डर्बी)|काउंटी मैदान ]], [[डर्बी]]
|{{Cr|ENG}} ७ गडी राखून
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496546.html म.आं.टी२० २७७४]
|२३ मे
|[[सेंट लॉरेन्स मैदान]], [[कँटरबरी]]
|{{Cr|NZL}} १४ धावांनी
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496547.html म.आं.टी२० २७७५]
|२५ मे
|[[काउंटी क्रिकेट मैदान (होव)|काउंटी मैदान]], [[होव्ह]]
|{{Cr|ENG}} ७ गडी राखून
|}
=== २०२६ नेपाळ तिरंगी मालिका (१८वी फेरी) ===
{{main|२०२६ नेपाळ तिरंगी मालिका (मे)}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="6" | [[२०२४-२०२६ क्रिकेट विश्वचषक लीग २]] – तिरंगी मालिका
|-
! क्र.
! दिनांक
! संघ १
! संघ २
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1531702.html आं.ए.दि. ४९६०]|| १२ मे || {{cr|NEP}} || {{cr|SCO}}|| [[त्रिभुवन विद्यापीठ आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[कीर्तिपूर]] || {{cr|SCO}} २ धावांनी ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस]])
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1531703.html आं.ए.दि. ४९६१]|| १४ मे || {{cr|SCO}} || {{cr|USA}} || [[त्रिभुवन विद्यापीठ आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[कीर्तिपूर]] || {{cr|SCO}} २ धावांनी ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस]])
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1531704.html आं.ए.दि. ४९६२]|| १६ मे || {{cr|NEP}} || {{cr|USA}} || [[त्रिभुवन विद्यापीठ आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[कीर्तिपूर]]|| {{cr|NEP}} ९ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1531705.html आं.ए.दि. ४९६३]|| १८ मे || {{cr|NEP}} || {{cr|SCO}} || [[त्रिभुवन विद्यापीठ आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[कीर्तिपूर]]|| {{cr|NEP}} ६ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1531706.html आं.ए.दि. ४९६४]|| २० मे || {{cr|SCO}} || {{cr|USA}} || [[त्रिभुवन विद्यापीठ आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[कीर्तिपूर]] || {{cr|USA}} ६ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1531707.html आं.ए.दि. ४९६५]|| २२ मे || {{cr|NEP}} || {{cr|USA}} || [[त्रिभुवन विद्यापीठ आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[कीर्तिपूर]]|| {{cr|NEP}} १२२ धावांनी
|}
===न्यू झीलंडचा आयर्लंड दौरा ===
{{Main|न्यू झीलंड क्रिकेट संघाचा आयर्लंड दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4" |कसोटी मालिका
|-
!क्र.
!दिनांक
!ठिकाण
!निकाल
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1528547.html कसोटी २६१९]
|२७-३० मे
|[[स्टॉर्मोंट (क्रिकेट मैदान)|स्टॉर्मोंट क्रिकेट मैदान]], [[बेलफास्ट]]
|{{Cr|NZ}} १ डाव आणि ७९ धावांनी
|-
|}
=== २०२६ स्कॉटलंड महिला तिरंगी मालिका===
{{main|२०२६ स्कॉटलंड महिला तिरंगी मालिका}}
{{#section:२०२६ स्कॉटलंड महिला तिरंगी मालिका|pointtable}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="6" | साखळी सामने
|-
! क्र.
! दिनांक
! संघ १
! संघ २
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1535591.html म.आं.टी२० २७८२]|| २८ मे || {{crw|SCO}} || {{crw|NED}}|| [[द ग्रेंज क्लब]], [[एडिनबरा]] || {{crw|SCO}} ९ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1535592.html म.आं.टी२० २७९१]|| ३० मे || {{crw|SCO}} || {{crw|BAN}} || [[द ग्रेंज क्लब]], [[एडिनबरा]] || {{crw|SCO}} ८ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1535593.html म.आं.टी२० २७९६]|| ३१ मे || {{crw|BAN}} || {{crw|NED}}|| [[द ग्रेंज क्लब]], [[एडिनबरा]]|| {{crw|NED}} ८ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1535594.html म.आं.टी२० २७९९]|| २ जून || {{crw|SCO}} || {{crw|BAN}} || [[द ग्रेंज क्लब]], [[एडिनबरा]]|| {{crw|BAN}} ३४ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1535595.html म.आं.टी२० २८०९]|| ३ जून || {{crw|SCO}} || {{crw|NED}} || [[द ग्रेंज क्लब]], [[एडिनबरा]] || {{crw|SCO}} २४ धावांनी ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस]])
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1535596.html म.आं.टी२० २८१९]|| ४ जून || {{crw|BAN}} || {{crw|NED}} || [[द ग्रेंज क्लब]], [[एडिनबरा]]|| {{crw|BAN}} १३ धावांनी
|}
===२०२६ आयर्लंड महिला तिरंगी मालिका===
{{Main|२०२६ आयर्लंड महिला तिरंगी मालिका}}
{{#section:२०२६ आयर्लंड महिला तिरंगी मालिका|pointtable}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="6" | साखळी सामने
|-
! क्र.
! दिनांक
! संघ १
! संघ २
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1528538.html म.आं.टी२० २७८३] || २८ मे || {{crw|IRE}} || {{crw|WIN}} || [[कॅसल ॲव्हेन्यू]], [[क्लोंटार्फ (डब्लिन)|क्लोंटार्फ]] || {{crw|WIN}} ८ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1528539.html म.आं.टी२० २७८६] || २९ मे || {{crw|PAK}} || {{crw|WIN}} || [[कॅसल ॲव्हेन्यू]], [[क्लोंटार्फ (डब्लिन)|क्लोंटार्फ]]|| {{crw|WIN}} २५ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1528540.html म.आं.टी२० २७९७] || ३१ मे || {{crw|IRE}} || {{crw|PAK}} || [[कॅसल ॲव्हेन्यू]], [[क्लोंटार्फ (डब्लिन)|क्लोंटार्फ]] || {{crw|IRE}} ७ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1528541.html म.आं.टी२० २७९८] || १ जून || {{crw|IRE}} || {{crw|WIN}} || [[कॅसल ॲव्हेन्यू]], [[क्लोंटार्फ (डब्लिन)|क्लोंटार्फ]] || {{crw|IRE}} १ धावेने ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस]])
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1528542.html म.आं.टी२० २८१०] || ३ जून || {{crw|PAK}} || {{crw|WIN}} || [[कॅसल ॲव्हेन्यू]], [[क्लोंटार्फ (डब्लिन)|क्लोंटार्फ]] || अनिर्णित
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1528543.html म.आं.टी२० २८१९अ] || ४ जून|| {{crw|IRE}} || {{crw|PAK}} || [[कॅसल ॲव्हेन्यू]], [[क्लोंटार्फ (डब्लिन)|क्लोंटार्फ]] || सामना रद्द
|}
=== भारतीय महिलांचा इंग्लंड दौरा===
{{main|भारतीय महिला क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4" |म.आं.टी२० मालिका
|-
!क्र.
!दिनांक
!ठिकाण
!निकाल
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496548.html म.आं.टी२० २७८४]
|२८ मे
|[[काउंटी क्रिकेट मैदान (चेम्सफोर्ड)|काउंटी मैदान]], [[चेम्सफोर्ड]]
|{{crw|IND}} ३८ धावांनी
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496549.html म.आं.टी२० २७९२]
|३० मे
|[[ब्रिस्टल काउंटी मैदान|काउंटी मैदान]], [[ब्रिस्टल]]
|{{crw|ENG}} २६ धावांनी
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496550.html म.आं.टी२० २८००]
|२ जून
|[[काउंटी मैदान (टाँटन)|काउंटी मैदान]], [[टाँटन]]
|{{crw|ENG}} ६ गडी राखून
|-
! colspan="4" |महिला कसोटी
|-
!क्र.
!दिनांक
!ठिकाण
!निकाल
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496551.html म.कसोटी १५३]
|१०–१३ जुलै
|[[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]
|{{crw|IND}} २७० धावांनी
|}
=== ऑस्ट्रेलियाचा पाकिस्तान दौरा===
{{main|ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट संघाचा पाकिस्तान दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4" |आं.ए.दि. मालिका
|-
!क्र.
!दिनांक
!ठिकाण
!निकाल
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1535645.html आं.ए.दि. ४९६६]
|३० मे
|[[रावळपिंडी क्रिकेट स्टेडियम]], [[रावळपिंडी]]
|{{cr|PAK}} ५ गडी राखून
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1535646.html आं.ए.दि. ४९६७]
|२ जून
|[[गद्दाफी स्टेडियम]], [[लाहोर]]
|{{cr|AUS}} ४१ धावांनी
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1535647.html आं.ए.दि. ४९६९]
|४ जून
|[[गद्दाफी स्टेडियम]], [[लाहोर]]
|{{cr|PAK}} ४ गडी राखून
|}
==जून==
===श्रीलंकेचा वेस्ट इंडीज दौरा===
{{main|श्रीलंका क्रिकेट संघाचा वेस्ट इंडीज दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4"| आं.ए.दि. मालिका
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538304.html आं.ए.दि. ४९६८] || ३ जून || [[सबाइना पार्क (जमैका)|सबाइना पार्क]], [[किंग्स्टन]]|| {{cr|SL}} ४१ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538305.html आं.ए.दि. ४९७१] || ६ जून || [[सबाइना पार्क (जमैका)|सबाइना पार्क]], [[किंग्स्टन]]|| अनिर्णित
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538306.html आं.ए.दि. ४९७२अ] || ८ जून || [[सबाइना पार्क (जमैका)|सबाइना पार्क]], [[किंग्स्टन]]|| सामना रद्द
|-
! colspan="4"| आं.टी२० मालिका
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538307.html आं.टी२० ३९४७] || ११ जून || [[सबाइना पार्क (जमैका)|सबाइना पार्क]], [[किंग्स्टन]]|| {{cr|WIN}} ७ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538308.html आं.टी२० ३९५२] || १३ जून || [[सबाइना पार्क (जमैका)|सबाइना पार्क]], [[किंग्स्टन]]|| {{cr|SL}} ३७ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538309.html आं.टी२० ३९५५] || १४ जून || [[सबाइना पार्क (जमैका)|सबाइना पार्क]], [[किंग्स्टन]]|| {{cr|WIN}} ५ गडी राखून
|-
! colspan="4" | {{nowrap|[[२०२५-२०२७ आयसीसी विश्व कसोटी अजिंक्यपद स्पर्धा]] – कसोटी मालिका}}
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538311.html कसोटी २६२४] || २५–२९ जून || [[सर व्हिव्हियन रिचर्ड्स स्टेडियम]], [[नॉर्थ साउंड]]|| {{cr|WIN}} १ डाव आणि २१७ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538312.html कसोटी २६२६] || ३–७ जुलै || [[सर व्हिव्हियन रिचर्ड्स स्टेडियम]], [[नॉर्थ साउंड]]|| सामना अनिर्णित
|}
===न्यू झीलंडचा इंग्लंड दौरा===
{{Main|न्यू झीलंड क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4" | {{nowrap|[[२०२५-२०२७ आयसीसी विश्व कसोटी अजिंक्यपद स्पर्धा]] – कसोटी मालिका}}
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496571.html कसोटी २६२०] || ४–८ जून || [[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]|| {{cr|ENG}} ११५ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496572.html कसोटी २६२२] || १७–२१ जून || [[द ओव्हल]], [[लंडन]]|| {{cr|NZ}} २५३ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496573.html कसोटी २६२३] || २५–२९ जून || [[ट्रेंट ब्रिज मैदान]], [[नॉटिंगहॅम]]|| {{cr|NZ}} १६० धावांनी
|}
===अफगाणिस्तानचा भारत दौरा===
{{main|अफगाणिस्तान क्रिकेट संघाचा भारत दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4"| एकमेव कसोटी
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1527150.html कसोटी २६२१] || ६–१० जून || [[महाराजा यादवेंद्र सिंग आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], नवीन चंदिगढ || {{cr|IND}} १ डाव आणि ३०० धावांनी
|-
! colspan="4"| आं.ए.दि. मालिका
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1527151.html आं.ए.दि. ४९७७] || १३ जून || [[हिमाचल प्रदेश क्रिकेट असोसिएशन स्टेडियम]], [[धर्मशाळा (हिमाचल प्रदेश)|धर्मशाळा]]|| {{cr|IND}} ७ गडी राखून
|-
| [http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1527152.html आं.ए.दि. ४९८०] || १७ जून || [[इकाना क्रिकेट स्टेडियम]], [[लखनौ]]|| {{cr|IND}} १७० धावांनी
|-
| [http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1527153.html आं.ए.दि. ४९८१] || २० जून || [[एम.ए. चिदंबरम स्टेडियम]], [[चेन्नई]]|| {{cr|IND}} ९ गडी राखून
|}
===२०२६ कॅनडा तिरंगी मालिका (१९वी फेरी)===
{{main|२०२६ कॅनडा तिरंगी मालिका}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="6" | [[२०२४-२०२६ क्रिकेट विश्वचषक लीग २]] '''– तिरंगी मालिका'''
|-
! क्र.
! दिनांक
! संघ १
! संघ २
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538425.html आं.ए.दि. ४९७०] || ६ जून || {{cr|CAN}} || {{cr|USA}} || [[मेपल लीफ क्रिकेट क्लब]], [[किंग सिटी (ऑन्टारियो)|किंग सिटी]]|| {{cr|USA}} ८ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538426.html आं.ए.दि. ४९७२] || ८ जून || {{cr|NED}} || {{cr|USA}} || [[मेपल लीफ क्रिकेट क्लब]], [[किंग सिटी (ऑन्टारियो)|किंग सिटी]]|| {{cr|NED}} २१ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538427.html आं.ए.दि. ४९७४] || १० जून || {{cr|CAN}} || {{cr|NED}} || [[मेपल लीफ क्रिकेट क्लब]], [[किंग सिटी (ऑन्टारियो)|किंग सिटी]]|| {{cr|CAN}} २ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538428.html आं.ए.दि. ४९७६] || १२ जून || {{cr|CAN}} || {{cr|USA}} || [[मेपल लीफ क्रिकेट क्लब]], [[किंग सिटी (ऑन्टारियो)|किंग सिटी]]|| {{cr|USA}} ५ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538429.html आं.ए.दि. ४९७८अ] || १४ जून || {{cr|NED}} || {{cr|USA}} || [[मेपल लीफ क्रिकेट क्लब]], [[किंग सिटी (ऑन्टारियो)|किंग सिटी]]|| सामना रद्द
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538430.html आं.ए.दि. ४९७९] || १६ जून || {{cr|CAN}} || {{cr|NED}} || [[मेपल लीफ क्रिकेट क्लब]], [[किंग सिटी (ऑन्टारियो)|किंग सिटी]]|| अनिर्णित
|}
===ऑस्ट्रेलियाचा बांगलादेश दौरा===
{{Main|ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट संघाचा बांगलादेश दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4"| आं.ए.दि. मालिका
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1532480.html आं.ए.दि. ४९७३] || ९ जून || [[शेर-इ-बांग्ला राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[ढाका]]|| {{cr|BAN}} ८६ धावांनी ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस]])
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1532481.html आं.ए.दि. ४९७५] || ११ जून || [[शेर-इ-बांग्ला राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[ढाका]]|| {{cr|BAN}} ५ गडी राखून ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस]])
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1532482.html आं.ए.दि. ४९७८] || १४ जून || [[शेर-इ-बांग्ला राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[ढाका]]|| {{cr|AUS}} १ गडी राखून
|-
! colspan="4"| आं.टी२० मालिका
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1532483.html आं.टी२० ३९५६] || १७ जून || [[बीर श्रेष्ठो फ्लाइट लेफ्टनंट मतीउर रहमान क्रिकेट स्टेडियम]], [[चट्टग्राम]] || {{cr|AUS}} ४ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1532484.html आं.टी२० ३९६०] || १९ जून || [[बीर श्रेष्ठो फ्लाइट लेफ्टनंट मतीउर रहमान क्रिकेट स्टेडियम]], [[चट्टग्राम]] || {{cr|AUS}} ७ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1532485.html आं.टी२० ३९७२] || २१ जून || [[बीर श्रेष्ठो फ्लाइट लेफ्टनंट मतीउर रहमान क्रिकेट स्टेडियम]], [[चट्टग्राम]] || {{cr|AUS}} ७ गडी राखून
|}
===२०२६ महिला टी२० विश्वचषक===
{{main|२०२६ महिला टी२० विश्वचषक}}
{{col-begin|width=}}
{{col-2}}
{{#section:२०२६ महिला टी२० विश्वचषक|GroupA}}
{{col-2}}
{{#section:२०२६ महिला टी२० विश्वचषक|GroupB}}
{{col-end}}
{| class="wikitable"
! colspan="6" |साखळी सामने
|-
! क्र.
! दिनांक
! संघ १
! संघ २
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490677.html म.आं.टी२० २८४७] || १२ जून || {{crw|ENG}} || {{crw|SL}} || [[एजबॅस्टन क्रिकेट मैदान|एजबॅस्टन]], [[बर्मिंगहॅम]] || {{crw|ENG}} ८७ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490678.html म.आं.टी२० २८५०] || १३ जून || {{crw|IRE}} || {{crw|SCO}} || [[ओल्ड ट्रॅफर्ड क्रिकेट मैदान|ओल्ड ट्रॅफर्ड ]], [[मँचेस्टर]] || {{crw|SCO}} ४० धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490679.html म.आं.टी२० २८५१] || १३ जून || {{crw|AUS}} || {{crw|SA}} || [[ओल्ड ट्रॅफर्ड क्रिकेट मैदान|ओल्ड ट्रॅफर्ड ]], [[मँचेस्टर]] || {{crw|AUS}} ६५ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490680.html म.आं.टी२० २८५२] || १३ जून || {{crw|NZ}} || {{crw|WIN}} || [[रोझ बोल (क्रिकेट मैदान)|रोझ बोल]], [[साउथहँप्टन]] || {{crw|WIN}} ७ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490681.html म.आं.टी२० २८५४] || १४ जून || {{crw|BAN}} || {{crw|NED}} || [[एजबॅस्टन क्रिकेट मैदान|एजबॅस्टन]], [[बर्मिंगहॅम]] || {{crw|BAN}} ६ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490682.html म.आं.टी२० २८५७] || १४ जून || {{crw|IND}} || {{crw|PAK}} || [[एजबॅस्टन क्रिकेट मैदान|एजबॅस्टन]], [[बर्मिंगहॅम]] || {{crw|IND}} ६४ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490683.html म.आं.टी२० २८६१] || १६ जून || {{crw|NZ}} || {{crw|SL}} || [[रोझ बोल (क्रिकेट मैदान)|रोझ बोल]], [[साउथहँप्टन]] || {{crw|SL}} ५ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490684.html म.आं.टी२० २८६२] || १६ जून || {{crw|ENG}} || {{crw|IRE}} || [[रोझ बोल (क्रिकेट मैदान)|रोझ बोल]], [[साउथहँप्टन]] || {{crw|ENG}} ४ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490685.html म.आं.टी२० २८६३] || १७ जून || {{crw|AUS}} || {{crw|BAN}} || [[हेडिंग्ले स्टेडियम]], [[लीड्स]] || {{crw|AUS}} ९ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490686.html म.आं.टी२० २८६५] || १७ जून || {{crw|IND}} || {{crw|NED}} || [[हेडिंग्ले स्टेडियम]], [[लीड्स]] || {{crw|IND}} ९५ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490687.html म.आं.टी२० २८६६] || १७ जून || {{crw|PAK}} || {{crw|SA}} || [[एजबॅस्टन क्रिकेट मैदान|एजबॅस्टन]], [[बर्मिंगहॅम]] || {{crw|SA}} २ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490688.html म.आं.टी२० २८७०] || १८ जून || {{crw|SCO}} || {{crw|WIN}} || [[हेडिंग्ले स्टेडियम]], [[लीड्स]] || {{crw|WIN}} ७ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490689.html म.आं.टी२० २८७४] || १९ जून || {{crw|IRE}} || {{crw|NZ}} || [[रोझ बोल (क्रिकेट मैदान)|रोझ बोल]], [[साउथहँप्टन]] || {{crw|NZ}} ४ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490690.html म.आं.टी२० २८७७] || २० जून || {{crw|AUS}} || {{crw|NED}} || [[रोझ बोल (क्रिकेट मैदान)|रोझ बोल]], [[साउथहँप्टन]] || {{crw|AUS}} ९८ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490691.html म.आं.टी२० २८७८] || २० जून || {{crw|BAN}} || {{crw|PAK}} || [[रोझ बोल (क्रिकेट मैदान)|रोझ बोल]], [[साउथहँप्टन]] || {{crw|BAN}} २३ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490692.html म.आं.टी२० २८७९] || २० जून || {{crw|ENG}} || {{crw|SCO}} || [[हेडिंग्ले स्टेडियम]], [[लीड्स]] || {{crw|ENG}} ३८ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490693.html म.आं.टी२० २८८०]|| २१ जून || {{crw|SL}} || {{crw|WIN}} || [[ब्रिस्टल काउंटी मैदान|काउंटी मैदान]], [[ब्रिस्टल]] || {{crw|WIN}} ५ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490694.html म.आं.टी२० २८८१] || २१ जून || {{crw|IND}} || {{crw|SA}} || [[ओल्ड ट्रॅफर्ड क्रिकेट मैदान|ओल्ड ट्रॅफर्ड ]], [[मँचेस्टर]] || {{crw|SA}} ६ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490695.html म.आं.टी२० २८८२] || २५ जून || {{crw|NZ}} || {{crw|SCO}} || [[ब्रिस्टल काउंटी मैदान|काउंटी मैदान]], [[ब्रिस्टल]] || {{crw|NZ}} ६ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490696.html म.आं.टी२० २८८३] || २३ जून || {{crw|IRE}} || {{crw|SL}} || [[ब्रिस्टल काउंटी मैदान|काउंटी मैदान]], [[ब्रिस्टल]] || {{crw|SL}} ९ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490697.html म.आं.टी२० २८८४] || २३ जून || {{crw|AUS}} || {{crw|PAK}} || [[हेडिंग्ले स्टेडियम]], [[लीड्स]] || {{crw|AUS}} ११३ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490698.html म.आं.टी२० २८८५] || २४ जून || {{crw|ENG}} || {{crw|WIN}} || [[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]|| {{crw|ENG}} ३९ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490699.html म.आं.टी२० २८८६] || २५ जून || {{crw|BAN}} || {{crw|IND}} || [[ओल्ड ट्रॅफर्ड क्रिकेट मैदान|ओल्ड ट्रॅफर्ड ]], [[मँचेस्टर]] || {{crw|IND}} ५ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490700.html म.आं.टी२० २८८७] || २५ जून || {{crw|NED}} || {{crw|SA}} || [[ब्रिस्टल काउंटी मैदान|काउंटी मैदान]], [[ब्रिस्टल]] || {{crw|SA}} ८८ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490701.html म.आं.टी२० २८९१] || २६ जून || {{crw|SCO}} || {{crw|SL}} || [[ओल्ड ट्रॅफर्ड क्रिकेट मैदान|ओल्ड ट्रॅफर्ड ]], [[मँचेस्टर]] || {{crw|SL}} ३ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490702.html म.आं.टी२० २८९५] || २७ जून || {{crw|NED}} || {{crw|PAK}} || [[ब्रिस्टल काउंटी मैदान|काउंटी मैदान]], [[ब्रिस्टल]] || {{crw|PAK}} ३७ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490703.html म.आं.टी२० २८९९] || २७ जून || {{crw|IRE}} || {{crw|WIN}} || [[ब्रिस्टल काउंटी मैदान|काउंटी मैदान]], [[ब्रिस्टल]] || {{crw|IRE}} ६ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490704.html म.आं.टी२० २९००] || २७ जून || {{crw|ENG}} || {{crw|NZ}} || [[द ओव्हल]], [[लंडन]] || {{crw|ENG}} ९ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490705.html म.आं.टी२० २९०४] || २८ जून ||{{crw|BAN}} || {{crw|SA}} || [[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]|| {{crw|SA}} ४ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490706.html म.आं.टी२० २९०७] || २८ जून || {{crw|AUS}} || {{crw|IND}} || [[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]|| {{crw|AUS}} ६ गडी राखून
|-
! colspan="6" |उपांत्य सामने
|-
! क्र.
! दिनांक
! संघ १
! संघ २
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490707.html म.आं.टी२० २९०८] || ३० जून || {{crw|AUS}} || {{crw|WIN}} || [[द ओव्हल]], [[लंडन]]|| {{crw|AUS}} ८ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490708.html म.आं.टी२० २९०९] || २ जुलै || {{crw|ENG}} || {{crw|SA}} || [[द ओव्हल]], [[लंडन]]|| {{crw|ENG}} ४० धावांनी
|-
! colspan="6" |अंतिम सामना
|-
! क्र.
! दिनांक
! संघ १
! संघ २
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1490709.html म.आं.टी२० २९१०] || ५ जुलै || {{crw|ENG}} || {{crw|AUS}} || [[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]|| {{crw|AUS}} ७ गडी राखून
|}
===भारताचा आयर्लंड दौरा===
{{Main|भारतीय क्रिकेट संघाचा आयर्लंड दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4" | आं.टी२० मालिका
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1528548.html आं.टी२० ३९९३] || २६ जून || [[स्टॉर्मोंट (क्रिकेट मैदान)|स्टॉर्मोंट क्रिकेट मैदान]], [[बेलफास्ट]]|| {{cr|IRE}} ३४ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1528549.html आं.टी२० ४००४] || २८ जून || [[स्टॉर्मोंट (क्रिकेट मैदान)|स्टॉर्मोंट क्रिकेट मैदान]], [[बेलफास्ट]]|| {{cr|IRE}} १ धावेने
|}
=== बांगलादेशचा झिम्बाब्वे दौरा===
{{Main|बांगलादेश क्रिकेट संघाचा झिम्बाब्वे दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4" | {{nowrap| कसोटी सामना}}
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538297.html कसोटी २६२५] || २८ जून–२ जुलै || [[हरारे स्पोर्ट्स क्लब]], [[हरारे]]|| {{cr|ZIM}} १ डाव आणि ८५ धावांनी
|-
! colspan="4"| आं.ए.दि. मालिका
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538298.html आं.ए.दि. ४९८२] || ६ जुलै || [[हरारे स्पोर्ट्स क्लब]], [[हरारे]]|| {{cr|ZIM}} २५ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538299.html आं.ए.दि. ४९८३] || ९ जुलै || [[हरारे स्पोर्ट्स क्लब]], [[हरारे]]|| {{cr|ZIM}} १३ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538300.html आं.ए.दि. ४९८४] || ११ जुलै || [[हरारे स्पोर्ट्स क्लब]], [[हरारे]]|| {{cr|BAN}} ७ गडी राखून
|-
! colspan="4"| आं.टी२० मालिका
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538301.html आं.टी२० ४०३६] || १५ जुलै || [[क्वीन्स स्पोर्ट्स क्लब]], [[बुलावायो]]|| {{cr|ZIM}} ३२ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538302.html आं.टी२० ४०३७] || १७ जुलै || [[क्वीन्स स्पोर्ट्स क्लब]], [[बुलावायो]]|| {{cr|BAN}} ३४ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538303.html आं.टी२० ४०३८] || १९ जुलै || [[क्वीन्स स्पोर्ट्स क्लब]], [[बुलावायो]]|| {{cr|BAN}} ४ गडी राखून
|}
== जुलै ==
===भारताचा इंग्लंड दौरा===
{{Main|भारतीय क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4" |आं.टी२० मालिका
|-
!क्र.
!दिनांक
!ठिकाण
!निकाल
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496574.html आं.टी२० ४००७]
|१ जुलै
|[[रिव्हरसाइड मैदान]], [[चेस्टर-ली-स्ट्रीट]]
|सामना अनिर्णित
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496575.html आं.टी२० ४०१२]
|४ जुलै
|[[ओल्ड ट्रॅफर्ड क्रिकेट मैदान]], [[मँचेस्टर]]
|{{cr|ENG}} ४ गडी राखून
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496576.html आं.टी२० ४०१३]
|७ जुलै
|[[ट्रेंट ब्रिज मैदान]], [[नॉटिंगहॅम]]
|{{cr|ENG}} १२५ धावांनी
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496577.html आं.टी२० ४०२०]
|९ जुलै
|[[ब्रिस्टल काउंटी मैदान|काउंटी मैदान]], [[ब्रिस्टल]]
|{{cr|ENG}} ९ गडी राखून
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496578.html आं.टी२० ४०२५]
|११ जुलै
|[[रोझ बोल (क्रिकेट मैदान)| रोझ बोल]], [[साउथहँप्टन]]
|{{cr|ENG}} ५६ धावांनी
|-
! colspan="4" |आं.ए.दि. मालिका
|-
!क्र.
!दिनांक
!ठिकाण
!निकाल
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496579.html १ला आं.ए.दि.]
|१४ जुलै
|[[एजबॅस्टन क्रिकेट मैदान| एजबॅस्टन]], [[बर्मिंगहॅम]]
|{{cr|IND}} ६ गडी राखून
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496580.html २रा आं.ए.दि.]
|१६ जुलै
|[[सोफिया गार्डन्स]], [[कार्डिफ]]
|{{cr|ENG}} ४ गडी राखून
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496581.html ३रा आं.ए.दि.]
|१९ जुलै
|[[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]
|{{cr|ENG}} २७ धावांनी
|}
=== वेस्ट इंडीज महिलांचा आयर्लंड दौरा===
{{Main|वेस्ट इंडीज महिला क्रिकेट संघाचा आयर्लंड दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4" |{{nowrap|[[२०२५–२०२९ आयसीसी महिला अजिंक्यपद]] — म.आं.ए.दि. मालिका}}
|-
!क्र.
!दिनांक
!ठिकाण
!निकाल
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1528544.html म.आं.ए.दि. १५५१]
|१० जुलै
|[[ब्रेडी क्रिकेट क्लब मैदान]], [[ब्रिडी]]
|{{Crw|WIN}} ९ गडी राखून
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1528545.html म.आं.ए.दि. १५५२]
|१२ जुलै
|[[ब्रेडी क्रिकेट क्लब मैदान]], [[ब्रिडी]]
|{{Crw|WIN}} ६ गडी राखून
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1528546.html म.आं.ए.दि. १५५३]
|१५ जुलै
|[[ब्रेडी क्रिकेट क्लब मैदान]], [[ब्रिडी]]
|{{Crw|WIN}} ६४ धावांनी
|}
===न्यू झीलंडचा वेस्ट इंडीज दौरा===
{{main|न्यू झीलंड क्रिकेट संघाचा वेस्ट इंडीज दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4"| आं.ए.दि. मालिका
|-
!क्र.
!दिनांक
!ठिकाण
!निकाल
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1538624.html आं.ए.दि. ४९८५] || ११ जुलै || [[प्रोव्हिडन्स स्टेडियम]], [[प्रोव्हिडन्स, गयाना|प्रोव्हिडन्स]] || {{cr|WIN}} ७ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1538625.html आं.ए.दि. ४९८६] || १३ जुलै|| [[प्रोव्हिडन्स स्टेडियम]], [[प्रोव्हिडन्स, गयाना|प्रोव्हिडन्स]] || {{cr|NZ}} ५ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1538626.html आं.ए.दि. ४९८९] || १६ जुलै|| [[प्रोव्हिडन्स स्टेडियम]], [[प्रोव्हिडन्स, गयाना|प्रोव्हिडन्स]] || {{cr|NZ}} ६ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1538627.html आं.ए.दि. ४९९१] || १९ जुलै|| [[केन्सिंग्टन ओव्हल]], [[ब्रिजटाउन]] || {{cr|NZ}} १ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1538628.html आं.ए.दि. ४९९३] || २१ जुलै|| [[केन्सिंग्टन ओव्हल]], [[ब्रिजटाउन]] || {{cr|WIN}} २ गडी राखून
|}
===२०२६ नेदरलँड्स तिरंगी मालिका (२०वी फेरी)===
{{main|२०२६ नेदरलँड्स तिरंगी मालिका}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="6" | [[२०२४-२०२६ क्रिकेट विश्वचषक लीग २]] '''– तिरंगी मालिका'''
|-
! क्र.
! दिनांक
! संघ १
! संघ २
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538425.html आं.ए.दि. ४९९२] || २१ जुलै || {{cr|NAM}} || {{cr|NEP}} || [[स्पोर्टपार्क मार्शलचलकरवीर्ड]], [[उट्रेख्त (शहर)|उट्रेख्त]]|| {{cr|NAM}} ८ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538426.html आं.ए.दि. ४९९४] || २३ जुलै|| {{cr|NED}} || {{cr|NEP}} || [[स्पोर्टपार्क मार्शलचलकरवीर्ड]], [[उट्रेख्त (शहर)|उट्रेख्त]]|| {{cr|NED}} ६ गडी राखून
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538427.html आं.ए.दि. ४९९५] || २५ जुलै || {{cr|NED}}|| {{cr|NAM}} || [[स्पोर्टपार्क मार्शलचलकरवीर्ड]], [[उट्रेख्त (शहर)|उट्रेख्त]]|| {{cr|NED}} ५८ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538428.html आं.ए.दि. ४९९६] || २७ जुलै || {{cr|NAM}} || {{cr|NEP}} || [[स्पोर्टपार्क मार्शलचलकरवीर्ड]], [[उट्रेख्त (शहर)|उट्रेख्त]]|| {{cr|NAM}} ३ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538429.html आं.ए.दि. ४९९७] || २९ जुलै || {{cr|NED}} || {{cr|NEP}} || [[स्पोर्टपार्क मार्शलचलकरवीर्ड]], [[उट्रेख्त (शहर)|उट्रेख्त]]|| {{cr|NED}} ५७ धावांनी
|-
| [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538430.html आं.ए.दि. ४९९८] || ३१ जुलै || {{cr|NED}} || {{cr|NAM}} || [[स्पोर्टपार्क मार्शलचलकरवीर्ड]], [[उट्रेख्त (शहर)|उट्रेख्त]]|| {{cr|NAM}} ६ गडी राखून
|}
===पाकिस्तान महिलांचा श्रीलंका दौरा===
{{Main|पाकिस्तान महिला क्रिकेट संघाचा श्रीलंका दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4" |{{nowrap|[[२०२५–२०२९ आयसीसी महिला अजिंक्यपद]] — म.आं.ए.दि. मालिका}}
|-
!क्र.
!दिनांक
!ठिकाण
!निकाल
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1540540.html म.आं.ए.दि. १५५४]
|२३ जुलै
|[[महिंद राजपक्ष आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[हंबन्टोटा]]
|{{Crw|PAK}} ५ गडी राखून
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1540541.html म.आं.ए.दि. १५५५]
|२५ जुलै
|[[महिंद राजपक्ष आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[हंबन्टोटा]]
|{{Crw|SRI}} ८ गडी राखून
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1540542.html म.आं.ए.दि. १५५६]
|२८ जुलै
|[[महिंद राजपक्ष आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[हंबन्टोटा]]
|{{Crw|SRI}} ८ गडी राखून
|-
! colspan="4" |{{nowrap| म.आं.टी२० मालिका}}
|-
!क्र.
!दिनांक
!ठिकाण
!निकाल
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1540543.html म.आं.टी२० २९४३]
|३१ जुलै
|[[रणगीरी डंबुला आंतरराष्ट्रीय स्टेडियम]], [[डंबुला]]
|{{Crw|SRI}} ६ गडी राखून
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1540544.html म.आं.टी२० २९४८]
|२ ऑगस्ट
|[[रणगीरी डंबुला आंतरराष्ट्रीय स्टेडियम]], [[डंबुला]]
|{{Crw|SRI}} ६ गडी राखून
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1540545.html म.आं.टी२० २९५१]
|४ ऑगस्ट
|[[रणगीरी डंबुला आंतरराष्ट्रीय स्टेडियम]], [[डंबुला]]
|{{Crw|PAK}} ४ गडी राखून
|}
===भारताचा झिम्बाब्वे दौरा===
{{Main|भारतीय क्रिकेट संघाचा झिम्बाब्वे दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4" |{{nowrap|आं.टी२० मालिका}}
|-
!क्र.
!दिनांक
!ठिकाण
!निकाल
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1530060.html आं.टी२० ४०३९]
|२३ जुलै
|[[हरारे स्पोर्ट्स क्लब]], [[हरारे]]
|{{Cr|IND}} ७ गडी राखून
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1530061.html आं.टी२० ४०४१]
|२५ जुलै
|[[हरारे स्पोर्ट्स क्लब]], [[हरारे]]
|{{Cr|IND}} ९० धावांनी
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1530062.html आं.टी२० ४०४४]
|२६ जुलै
|[[हरारे स्पोर्ट्स क्लब]], [[हरारे]]
|{{Cr|IND}} ३५ धावांनी
|}
===पाकिस्तानचा वेस्ट इंडीज दौरा===
{{Main|पाकिस्तान क्रिकेट संघाचा वेस्ट इंडीज दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4" |{{nowrap|[[२०२५-२०२७ आयसीसी विश्व कसोटी अजिंक्यपद स्पर्धा]] – कसोटी मालिका}}
|-
!क्र.
!दिनांक
!ठिकाण
!निकाल
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538630.html कसोटी २६२७]
|२५–२९ जुलै
|[[ब्रायन लारा क्रिकेट अकादमी]], [[त्रिनिदाद आणि टोबॅगो]]
|{{Cr|WIN}} ९० धावांनी
|-
|[https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1538631.html कसोटी २६२८]
|२–६ ऑगस्ट
|[[क्वीन्स पार्क ओव्हल]], [[त्रिनिदाद आणि टोबॅगो]]
|{{Cr|PAK}} ८ गडी राखून
|}
==ऑगस्ट==
===२०२६ स्कॉटलंड तिरंगी मालिका (२१वी फेरी)===
{{main|२०२६ स्कॉटलंड तिरंगी मालिका}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="6" | [[२०२४-२०२६ आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक लीग २]] – तिरंगी मालिका
|-
! क्र.
! दिनांक
! संघ १
! संघ २
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1545998.html आं.ए.दि. ४९९८अ] || ३ ऑगस्ट || {{cr|SCO}} || {{cr|UAE}} || [[फोर्टहिल मैदान]], [[डंडी]]|| सामना रद्द
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1545999.html आं.ए.दि. ४९९८क] || ५ ऑगस्ट || {{cr|CAN}} || {{cr|UAE}} || [[फोर्टहिल मैदान]], [[डंडी]]|| सामना रद्द
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1546000.html आं.ए.दि. ५०००] || ७ ऑगस्ट || {{cr|SCO}} || {{cr|CAN}} || [[फोर्टहिल मैदान]], [[डंडी]]|| {{cr|SCO}} ९ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1546001.html आं.ए.दि. ५००१] || ९ ऑगस्ट || {{cr|SCO}} || {{cr|UAE}} || [[फोर्टहिल मैदान]], [[डंडी]]|| {{cr|SCO}} १ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1546002.html आं.ए.दि. ५००३] || ११ ऑगस्ट || {{cr|CAN}} || {{cr|UAE}} || [[फोर्टहिल मैदान]], [[डंडी]]|| {{cr|UAE}} ९७ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1546003.html आं.ए.दि. ५००५] || १३ ऑगस्ट || {{cr|SCO}} || {{cr|CAN}} || [[फोर्टहिल मैदान]], [[डंडी]]|| {{cr|SCO}} १७० धावांनी
|}
===अफगाणिस्तानचा आयर्लंड दौरा===
{{Main| अफगाणिस्तान क्रिकेट संघाचा आयर्लंड दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
|-
! colspan="4" | आं.ए.दि. मालिका
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1528550.html आं.ए.दि. ४९९८ब] || ५ ऑगस्ट || [[ब्रेडी क्रिकेट क्लब मैदान]], [[मॅघेरामेसन]] || सामना रद्द
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1528551.html आं.ए.दि. ४९९९] || ७ ऑगस्ट || [[ब्रेडी क्रिकेट क्लब मैदान]], [[मॅघेरामेसन]] || {{cr|AFG|२०१३}} ९२ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1528552.html आं.ए.दि. ५००२] || १० ऑगस्ट || [[स्टॉर्मोंट क्रिकेट मैदान]], [[बेलफास्ट]] || {{cr|AFG|२०१३}} ३ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1528553.html आं.ए.दि. ५००४] || १२ ऑगस्ट || [[स्टॉर्मोंट क्रिकेट मैदान]], [[बेलफास्ट]] || {{cr|AFG|२०१३}} ४२ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1528554.html आं.ए.दि. ५००६] || १५ ऑगस्ट || [[स्टॉर्मोंट क्रिकेट मैदान]], [[बेलफास्ट]] ||{{cr|AFG|२०१३}} ६ गडी राखून
|}
===२०२६ क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग ब (टांझानिया)===
{{main|२०२६ क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग ब (टांझानिया)}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="7" |[[२०२४-२०२६ आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग]] – लिस्ट अ मालिका
|-
! क्र.
! दिनांक
! संघ १
! संघ २
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1546340.html १ला सामना] || ८ ऑगस्ट || {{cr|TAN}} || {{cr|UGA}} || [[दार एस सलाम विद्यापीठ|दार एस सलाम विद्यापीठ मैदान १]], [[दार एस सलाम]] || {{cr|UGA}} ९० धावांनी([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत | डीएलएस]])
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1546341.html २रा सामना] || ९ ऑगस्ट || {{cr|BHR}} || {{cr|ITA}} || [[दार एस सलाम विद्यापीठ|दार एस सलाम विद्यापीठ मैदान १]], [[दार एस सलाम]] || {{cr|ITA}} ६८ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1546342.html ३रा सामना] || ९ ऑगस्ट || {{cr|HK}} || {{cr|SIN}} || [[दार एस सलाम विद्यापीठ|दार एस सलाम विद्यापीठ मैदान २]], [[दार एस सलाम]] || {{cr|HK}} १६३ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1546343.html ४था सामना] || ११ ऑगस्ट || {{cr|TAN}} || {{cr|HK}} || [[दार एस सलाम विद्यापीठ|दार एस सलाम विद्यापीठ मैदान १]], [[दार एस सलाम]] || {{cr|HK}} ६ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1546344.html ५वा सामना] || ११ ऑगस्ट || {{cr|ITA}} || {{cr|UGA}} || [[दार एस सलाम विद्यापीठ|दार एस सलाम विद्यापीठ मैदान २]], [[दार एस सलाम]] || {{cr|ITA}} ११३ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1546345.html ६वा सामना] || १२ ऑगस्ट || {{cr|BHR}} || {{cr|SIN}} || [[दार एस सलाम विद्यापीठ|दार एस सलाम विद्यापीठ मैदान १]], [[दार एस सलाम]] || {{cr|BHR}} ७ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1546346.html ७वा सामना] || १२ ऑगस्ट || {{cr|HK}} || {{cr|UGA}} || [[दार एस सलाम विद्यापीठ|दार एस सलाम विद्यापीठ मैदान २]], [[दार एस सलाम]] || {{cr|HK}} ५१ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1546347.html ८वा सामना] || १४ ऑगस्ट || {{cr|BHR}} || {{cr|HK}} || [[दार एस सलाम विद्यापीठ|दार एस सलाम विद्यापीठ मैदान १]], [[दार एस सलाम]] || {{cr|HK}} ३८ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1546348.html ९वा सामना] || १४ ऑगस्ट || {{cr|ITA}} || {{cr|SIN}} || [[दार एस सलाम विद्यापीठ|दार एस सलाम विद्यापीठ मैदान २]], [[दार एस सलाम]] || {{cr|ITA}} ७ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1546349.html १०वा सामना] || १५ ऑगस्ट || {{cr|SIN}} || {{cr|UGA}} || [[दार एस सलाम विद्यापीठ|दार एस सलाम विद्यापीठ मैदान १]], [[दार एस सलाम]] || {{cr|UGA}} ८ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1546350.html ११वा सामना] || १५ ऑगस्ट || {{cr|TAN}} || {{cr|BHR}} || [[दार एस सलाम विद्यापीठ|दार एस सलाम विद्यापीठ मैदान २]], [[दार एस सलाम]] || {{cr|TAN}} ५ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1546351.html १२वा सामना] || १७ ऑगस्ट || {{cr|HK}} || {{cr|ITA}} || [[दार एस सलाम विद्यापीठ|दार एस सलाम विद्यापीठ मैदान १]], [[दार एस सलाम]] || {{cr|ITA}} ६ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1546352.html १३वा सामना] || १७ ऑगस्ट || {{cr|TAN}} || {{cr|SIN}} || [[दार एस सलाम विद्यापीठ|दार एस सलाम विद्यापीठ मैदान २]], [[दार एस सलाम]] || {{cr|TAN}} ९ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1546353.html १४वा सामना] || १८ ऑगस्ट || {{cr|TAN}} || {{cr|ITA}} || [[दार एस सलाम विद्यापीठ|दार एस सलाम विद्यापीठ मैदान १]], [[दार एस सलाम]] || {{cr|ITA}} ८ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1546354.html १५वा सामना] || १८ ऑगस्ट || {{cr|BHR}} || {{cr|UGA}} || [[दार एस सलाम विद्यापीठ|दार एस सलाम विद्यापीठ मैदान २]], [[दार एस सलाम]] || {{cr|BHR}} ४ गडी राखून
|}
===थायलंड महिलांचा पापुआ न्यू गिनी दौरा===
{{main| थायलंड महिला क्रिकेट संघाचा पापुआ न्यू गिनी दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
! colspan="4" |म.आं.टी२० मालिका
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549208.html म.आं.टी२० २९५२] || १० ऑगस्ट || [[अमिनी पार्क]], [[पोर्ट मॉरेस्बी]] || {{crw|PNG}} ५ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549209.html म.आं.टी२० २९५३] || ११ ऑगस्ट || [[अमिनी पार्क]], [[पोर्ट मॉरेस्बी]] || {{crw|THA}} ६ गडी राखून
|-
! colspan="4" | म.आं.ए.दि. मालिका
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549210.html म.आं.ए.दि. १५५७] || १३ ऑगस्ट || [[अमिनी पार्क]], [[पोर्ट मॉरेस्बी]] || {{crw|THA}} १२१ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549211.html म.आं.ए.दि. १५५८] || १५ ऑगस्ट || [[अमिनी पार्क]], [[पोर्ट मॉरेस्बी]] || {{crw|THA}} ४० धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549212.html म.आं.ए.दि. १५५९] || १७ ऑगस्ट || [[अमिनी पार्क]], [[पोर्ट मॉरेस्बी]] || {{crw|THA}} ५ गडी राखून
|}
=== बांगलादेशचा ऑस्ट्रेलिया दौरा===
{{Main| बांगलादेश क्रिकेट संघाचा ऑस्ट्रेलिया दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|-
! colspan="4"| {{nowrap|[[२०२५-२०२७ आयसीसी विश्व कसोटी अजिंक्यपद स्पर्धा]] – कसोटी मालिका}}
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [http://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1527273.html कसोटी २६२९] || १३–१७ ऑगस्ट || [[मारारा ओव्हल]], [[डार्विन (ऑस्ट्रेलिया)|डार्विन]] || {{cr|BAN}} ९ गडी राखून
|-
| [http://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1527274.html कसोटी २६३२] || २२–२६ ऑगस्ट|| [[ग्रेट बॅरियर रीफ अरेना]], [[मॅके (क्वीन्सलंड)|मॅके]] ||{{cr|AUS}} १ डाव आणि ५१ धावांनी
|}
=== भारताचा श्रीलंका दौरा===
{{main| भारतीय क्रिकेट संघाचा श्रीलंका दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|-
! colspan="4"| {{nowrap|[[२०२५-२०२७ आयसीसी विश्व कसोटी अजिंक्यपद स्पर्धा]] – कसोटी मालिका}}
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [http://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1544001.html कसोटी २६३०] || १५–१९ ऑगस्ट || [[गाली आंतरराष्ट्रीय स्टेडियम]], [[गाली (श्रीलंका)|गाली]] || {{cr|IND}} १६५ धावांनी
|-
| [http://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1544002.html कसोटी २६३३] || २३–२७ ऑगस्ट || [[सिंहलीझ क्रीडा क्लब क्रिकेट मैदान]], [[कोलंबो]] ||अनिर्णित
|}
=== पाकिस्तानचा इंग्लंड दौरा ===
{{Main| पाकिस्तान क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4" | {{nowrap|[[२०२५-२०२७ आयसीसी विश्व कसोटी अजिंक्यपद स्पर्धा]] – कसोटी मालिका}}
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1496582.html कसोटी २६३१] || १९–२३ ऑगस्ट || [[हेडिंग्ले स्टेडियम]], [[लीड्स ]] ||{{cr|ENG}} १ डाव आणि १०३ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1496583.html कसोटी २६३४] || २७–३१ ऑगस्ट|| [[लॉर्ड्स]], [[लंडन ]] ||{{cr|ENG}} १९४ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1496584.html कसोटी २६३५] || ९–१३ सप्टेंबर || [[एजबॅस्टन क्रिकेट मैदान]], [[बर्मिंगहॅम]] ||{{cr|ENG}} ८ गडी राखून
|}
===नेदरलँड्स महिलांचा स्कॉटलंड दौरा===
{{main| नेदरलँड्स महिला क्रिकेट संघाचा स्कॉटलंड दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
! colspan="4" | म.आं.ए.दि. मालिका
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549972.html म.आं.ए.दि. १५६०] || २८ ऑगस्ट || [[टिटवूड]], [[ग्लासगो]] || {{Crw|NED}} ५८ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549973.html म.आं.ए.दि. १५६१]|| ३० ऑगस्ट || [[न्यू विल्यमफील्ड]], [[स्टर्लिंग]] || {{Crw|SCO}} ९ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549974.html म.आं.ए.दि. १५६२]|| १ सप्टेंबर || [[न्यू विल्यमफील्ड]], [[स्टर्लिंग]] || सामना रद्द
|}
===२०२६ नामिबिया आं.टी२० तिरंगी मालिका===
{{main|२०२६ नामिबिया आं.टी२० तिरंगी मालिका}}
{{#section: २०२६ नामिबिया आं.टी२० तिरंगी मालिका|PTS}}
{| class="wikitable"
! colspan="6" |साखळी सामने
|-
! क्र.
! दिनांक
! संघ १
! संघ २
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549524.html आं.टी२० ४०९७] || २८ ऑगस्ट || {{cr|NAM}} || {{cr|SA}} || [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]] || {{cr|NAM}} १८ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549525.html आं.टी२० ४०९८] || २९ ऑगस्ट || {{cr|SA}} || {{cr|ZIM}} || [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]] || {{cr|SA}} ७ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549526.html आं.टी२० ४०९९] || ३१ ऑगस्ट || {{cr|NAM}} || {{cr|ZIM}} || [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]] || {{cr|ZIM}} ५ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549527.html आं.टी२० ४१००] || १ सप्टेंबर || {{cr|SA}} || {{cr|ZIM}} || [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]] || {{cr|SA}} ४५ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549528.html आं.टी२० ४१०१] || ३ सप्टेंबर || {{cr|NAM}} || {{cr|ZIM}} || [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]] || {{cr|ZIM}} ५ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549529.html आं.टी२० ४१०२] || ४ सप्टेंबर || {{cr|NAM}} || {{cr|SA}} || [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]] || {{cr|SA}} ११ धावांनी
|-
! colspan="6" |अंतिम सामना
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549530.html आं.टी२० ४१०३] || ६ सप्टेंबर || {{cr|SA}}|| {{cr|ZIM}}|| [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]] || {{cr|SA}} ४८ धावांनी
|}
=== २०२६ महिला टी२० आशिया चषक ===
{{main|२०२६ महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक }}
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{{col-2}}
{{#section:२०२६ महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक|Group A}}
{{col-2}}
{{#section:२०२६ महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक|Group B}}
{{col-end}}
{| class="wikitable"
! colspan="6" |गट फेरी
|-
! क्र.
! दिनांक
! संघ १
! संघ २
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548891.html म.आं.टी२० २९७६] || २८ ऑगस्ट || {{crw|HK}} || {{crw|THA}} || [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]] || {{crw|THA}} ६ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548892.html म.आं.टी२० २९८२] || २९ ऑगस्ट || {{crw|UAE}} || {{crw|SL}} || [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]] ||{{crw|SL}} ९ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548893.html म.आं.टी२० २९८६] || ३० ऑगस्ट || {{crw|IND}} || {{crw|THA}} || [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]] || {{crw|IND}} ९४ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548894.html म.आं.टी२० २९८७] || ३१ ऑगस्ट || {{crw|BAN}} || {{crw|INA}} || [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]] || {{crw|BAN}} ७१ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548895.html म.आं.टी२० २९८८] || १ सप्टेंबर || {{crw|PAK}} || {{crw|THA}} || [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]] || {{crw|PAK}} ३५ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548896.html म.आं.टी२० २९८९] || २ सप्टेंबर || {{crw|INA}} || {{crw|SL}} || [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]] || {{crw|SL}} ७५ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548897.html म.आं.टी२० २९९०] || ३ सप्टेंबर || {{crw|HK}} || {{crw|IND}} || [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]] || {{crw|IND}} १३७ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548898.html म.आं.टी२० २९९६] || ४ सप्टेंबर || {{crw|UAE}} || {{crw|INA}} || [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]] || {{crw|UAE}} ६ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548899.html म.आं.टी२० ३००२] || ५ सप्टेंबर || {{crw|IND}} || {{crw|PAK}} || [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]] || {{crw|IND}} ७ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548900.html म.आं.टी२० ३००७] || ६ सप्टेंबर || {{crw|BAN}} || {{crw|SL}} || [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]] || {{crw|SL}} ४ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548901.html म.आं.टी२० ३००८] || ७ सप्टेंबर || {{crw|HK}} || {{crw|PAK}} || [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]] || {{crw|PAK}} ७२ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548902.html म.आं.टी२० ३००९] || ८ सप्टेंबर || {{crw|UAE}} || {{crw|BAN}} || [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]] || {{crw|BAN}} ३४ धावांनी
|-
! colspan="6" |उपांत्य सामने
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548903.html म.आं.टी२० ३०१०] || १० सप्टेंबर || {{crw|IND}}|| {{crw|BAN}} || [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]] || {{crw|IND}} ४० धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548904.html म.आं.टी२० ३०१२] || ११ सप्टेंबर || {{crw|SL}}|| {{crw|PAK}}|| [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]] || {{crw|SL}} ४ गडी राखून
|-
! colspan="6" |अंतिम सामना
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548905.html म.आं.टी२० ३०१४] || १३ सप्टेंबर || TBD || TBD || [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]] || {{crw|IND}} ७२ धावांनी
|}
===२०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक ===
{{main|२०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक }}
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{{col-2}}
{{#section: २०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक|Group A}}
{{col-2}}
{{#section:२०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक|Group B}}
{{col-end}}
{| class="wikitable"
! colspan="6" |गट फेरी
|-
! क्र.
! दिनांक
! संघ १
! संघ २
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549946.html १ला सामना] || ३० ऑगस्ट || {{cr|OMA}} || {{cr|SIN}} || [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]] || {{cr|OMA}} १३१ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549947.html २रा सामना] || ३० ऑगस्ट || {{cr|HK}} || {{cr|SAU}} || [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]] || {{cr|HK}} १६ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549948.html ३रा सामना] || ३१ ऑगस्ट || {{cr|QAT}} || {{cr|UAE}} || [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]] || {{cr|UAE}} ९२ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549949.html ४था सामना] || ३१ ऑगस्ट || {{cr|BHR}} || {{cr|NEP}} || [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]] || {{cr|NEP}} ७ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549950.html ५वा सामना] || १ सप्टेंबर || {{cr|MAS}} || {{cr|SAU}} || [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]] || {{cr|MAS}} ९३ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549951.html ६वा सामना] || १ सप्टेंबर || {{cr|KUW}} || {{cr|SIN}} || [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]] || {{cr|KUW}} १६० धावांनी ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस]])
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549952.html ७वा सामना] || २ सप्टेंबर || {{cr|BHR}} || {{cr|HK}} || [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]] || {{cr|BHR}} ३२ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549953.html ८वा सामना] || २ सप्टेंबर || {{cr|OMA}} || {{cr|QAT}} || [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]] || {{cr|OMA}} ५ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549954.html ९वा सामना] || ३ सप्टेंबर || {{cr|KUW}} || {{cr|UAE}} || [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]] || {{cr|UAE}} ६६ धावांनी ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस]])
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549955.html १०वा सामना] || ३ सप्टेंबर || {{cr|MAS}} || {{cr|NEP}} || [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]] || {{cr|NEP}} ६ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549956.html ११वा सामना] || ४ सप्टेंबर || {{cr|SIN}} || {{cr|QAT}} || [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]] || {{cr|QAT}} ८ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549957.html १२वा सामना] || ४ सप्टेंबर || {{cr|BHR}} || {{cr|SAU}} || [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]] || {{cr|SAU}} १७ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549958.html १३वा सामना] || ५ सप्टेंबर || {{cr|KUW}} || {{cr|OMA}} || [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]] || {{cr|KUW}} ४ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549959.html १४वा सामना] || ५ सप्टेंबर || {{cr|MAS}} || {{cr|HK}} || [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]] || बरोबरी ({{cr|HK}} सुपर ओव्हर मध्ये)
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549960.html १५वा सामना] || ६ सप्टेंबर || {{cr|NEP}} || {{cr|SAU}} || [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]] || {{cr|NEP}} ५ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549961.html १६वा सामना] || ६ सप्टेंबर || {{cr|SIN}} || {{cr|UAE}} || [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]] || {{cr|UAE}} ७ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549962.html १७वा सामना] || ७ सप्टेंबर || {{cr|MAS}} || {{cr|BHR}} || [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]] || {{cr|MAS}} १२६ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549963.html १८वा सामना] || ७ सप्टेंबर || {{cr|KUW}} || {{cr|QAT}} || [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]] || {{cr|QAT}} ४ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549964.html १९वा सामना] || ८ सप्टेंबर || {{cr|HK}} || {{cr|NEP}} || [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]] || {{cr|HK}} १५ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549965.html आं. ए. दि. ५००७] || ८ सप्टेंबर || {{cr|OMA}} || {{cr|UAE}} || [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]] || {{cr|UAE}} ४९ धावांनी
|-
! colspan="6"|उपांत्य सामने
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549966.html २१वा सामना] || १० सप्टेंबर || {{cr|NEP}}|| {{cr|OMA}}|| [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]] || {{cr|NEP}} ८७ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549967.html २२वा सामना] || १० सप्टेंबर || {{cr|UAE}}|| {{cr|HK}}|| [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]] || {{cr|UAE}} ७ गडी राखून
|-
! colspan="6"|३ऱ्या स्थानासाठी सामना
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549968.html २३वा सामना] || १२ सप्टेंबर || {{cr|HK}}|| {{cr|OMA}}|| [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]] || {{cr|HK}} ९ गडी राखून
|-
! colspan="6"|अंतिम सामना
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549969.html २४वा सामना] || १२ सप्टेंबर || {{cr|NEP}}|| {{cr|UAE}}|| [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]] || {{cr|NEP}} ४४ धावांनी
|}
== सप्टेंबर ==
=== आयर्लंड महिलांचा इंग्लंड दौरा===
{{Main|आयर्लंड महिला क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4" | {{nowrap|[[२०२५–२०२९ आयसीसी महिला अजिंक्यपद]] — म.आं.ए.दि. मालिका}}
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1496552.html १ला म.आं.ए.दि.] || १ सप्टेंबर || [[ग्रेस रोड]], [[लेस्टर]] ||{{crw|ENG}} ६ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1496553.html २रा म.आं.ए.दि.] || ३ सप्टेंबर || [[काउंटी क्रिकेट मैदान (डर्बी)|काउंटी मैदान]], [[डर्बी]] ||{{crw|ENG}} ६ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1496554.html ३रा म.आं.ए.दि.] || ६ सप्टेंबर || [[न्यू रोड]], [[वूस्टरशायर]] ||{{crw|ENG}} ११४ धावांनी
|}
=== दक्षिण आफ्रिकेचा नामिबिया दौरा ===
{{Main|दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचा नामिबिया दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
|-
! colspan="4" | आं.ए.दि. मालिका
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549531.html आं.ए.दि. ५००८] || ९ सप्टेंबर || [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]] || {{Cr|SA}} ९९ धावांनी ([[डीएलएस पद्धत|डीएलएस]])
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549532.html आं.ए.दि. ५००९] || ११ सप्टेंबर || [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]] || {{Cr|SA}} १५७ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549533.html आं.ए.दि. ५०१०] || १३ सप्टेंबर || [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]] || {{Cr|SA}} ९ गडी राखून
|}
=== दक्षिण आफ्रिका महिलांचा झिम्बाब्वे दौरा ===
{{Main|दक्षिण आफ्रिका महिला क्रिकेट संघाचा झिम्बाब्वे दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4" | म.आं.टी२० मालिका
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1543887.html म.आं.टी२० ३०११] || ११ सप्टेंबर || [[क्वीन्स स्पोर्ट्स क्लब]], [[बुलावायो]] ||{{Crw|SA}} ६ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1543888.html म.आं.टी२० ३०१३] || १३ सप्टेंबर || [[क्वीन्स स्पोर्ट्स क्लब]], [[बुलावायो]] ||{{Crw|SA}} ६४ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1543889.html म.आं.टी२० ३०१५] || १५ सप्टेंबर || [[क्वीन्स स्पोर्ट्स क्लब]], [[बुलावायो]] ||{{Crw|SA}} ८० धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1543890.html ४था म.आं.टी२०] || १७ सप्टेंबर || [[क्वीन्स स्पोर्ट्स क्लब]], [[बुलावायो]] ||
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1543891.html ५वा म.आं.टी२०] || १९ सप्टेंबर || [[क्वीन्स स्पोर्ट्स क्लब]], [[बुलावायो]] ||
|}
===भारत वि अफगाणिस्तान भारतामध्ये===
{{main|अफगाणिस्तान विरुद्ध भारतीय क्रिकेट संघ भारतामध्ये, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4"| आं.टी२० मालिका
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549586.html आं.टी२० ४१०४] || १३ सप्टेंबर || [[अरुण जेटली स्टेडियम]], [[नवी दिल्ली]]||{{Cr|IND}} ७ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549587.html आं.टी२० ४१०५] || १५ सप्टेंबर || [[अरुण जेटली स्टेडियम]], [[नवी दिल्ली]]||{{Cr|IND}} ७ गडी राखून
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549588.html 3rd T20I] || १७ सप्टेंबर || [[अरुण जेटली स्टेडियम]], [[नवी दिल्ली]]||
|}
=== श्रीलंकेचा इंग्लंड दौरा ===
{{Main|श्रीलंका क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4" | आं.टी२० मालिका
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1496585.html आं.टी२० ४१०६] || १५ सप्टेंबर || [[रोझ बोल (क्रिकेट मैदान)|रोझ बोल]], [[साउथहँप्टन]]||{{Cr|ENG}} ११९ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1496586.html २रा आं.टी.२०] || १७ सप्टेंबर || [[सोफिया गार्डन्स (क्रिकेट मैदान)|सोफिया गार्डन्स]], [[कार्डिफ]]||
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1496587.html ३रा आं.टी.२०] || १९ सप्टेंबर || [[ओल्ड ट्रॅफर्ड क्रिकेट मैदान]], [[मँचेस्टर]]||
|-
! colspan="4" | आं.ए.दि. मालिका
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1496588.html १ला आं.ए.दि.] || २२ सप्टेंबर || [[रिव्हरसाइड मैदान]], [[चेस्टर-ली-स्ट्रीट]]||
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1496589.html २रा आं.ए.दि.] || २४ सप्टेंबर || [[हेडिंग्ले स्टेडियम]], [[लीड्स]]||
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1496590.html ३रा आं.ए.दि.] || २७ सप्टेंबर || [[द ओव्हल]], [[लंडन]]||
|}
===ऑस्ट्रेलियाचा झिम्बाब्वे दौरा===
{{main|ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट संघाचा झिम्बाब्वे दौरा, २०२६}}
{| class="wikitable"
|+
! colspan="4"| आं.ए.दि. मालिका
|-
! क्र.
! दिनांक
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1530203.html आं.ए.दि. ५०११] || १५ सप्टेंबर || [[हरारे स्पोर्ट्स क्लब]], [[हरारे]] || {{Cr|AUS}} ५९ धावांनी
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1530204.html २रा आं.ए.दि.] || १८ सप्टेंबर || [[हरारे स्पोर्ट्स क्लब]], [[हरारे]] ||
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1530205.html ३रा आं.ए.दि.] || २० सप्टेंबर || [[हरारे स्पोर्ट्स क्लब]], [[हरारे]] ||
|}
===२०२६ आशियाई खेळ===
{{main|२०२२ आशियाई खेळांमध्ये क्रिकेट}}
====महिला स्पर्धा====
{{main|२०२२ आशियाई खेळांमध्ये क्रिकेट – महिला स्पर्धा}}
{| class="wikitable"
! colspan="6" |उपांत्य फेरी
|-
! क्र.
! दिनांक
! संघ १
! संघ २
! ठिकाण
! निकाल
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1550474.html १ला म.आं.टी२०] || १७ सप्टेंबर || {{crw|JPN}} || {{crw|IND}} || [[कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क]], [[निशिन]] ||
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1550475.html २रा म.आं.टी२०] || १७ सप्टेंबर || {{crw|BAN}} || {{crw|CHN}} || [[कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क]], [[निशिन]] ||
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1550476.html ३रा म.आं.टी२०] || १८ सप्टेंबर || {{crw|MAS}} || {{crw|SL}} || [[कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क]], [[निशिन]] ||
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1550477.html ४था म.आं.टी२०] || १८ सप्टेंबर || {{crw|PAK}} || {{crw|THA}} || [[कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क]], [[निशिन]] ||
|-
! colspan="6" |उपांत्य सामने
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1550478.html ५वा म.आं.टी२०] || २० सप्टेंबर || TBD || TBD || [[कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क]], [[निशिन]] ||
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1550479.html ६वा म.आं.टी२०] || २० सप्टेंबर || TBD || TBD || [[कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क]], [[निशिन]] ||
|-
! colspan="6" |३ऱ्या स्थानासाठी सामना
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1550480.html ७वा म.आं.टी२०] || २२ सप्टेंबर || TBD || TBD || [[कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क]], [[निशिन]] ||
|-
! colspan="6" |अंतिम सामना
|-
| [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1550481.html ८वा म.आं.टी२०] || २२ सप्टेंबर || TBD || TBD || [[कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क]], [[निशिन]] ||
|}
====पुरुष स्पर्धा====
{{main|२०२२ आशियाई खेळांमध्ये क्रिकेट – पुरुष स्पर्धा}}
{{#section:२०२२ आशियाई खेळांमध्ये क्रिकेट – महिला स्पर्धा|Group A}}
{{#section:२०२२ आशियाई खेळांमध्ये क्रिकेट – महिला स्पर्धा|Group B}}
{| class="wikitable"
! colspan="6" |गट फेरी
|-
! क्र.
! दिनांक
! संघ १
! संघ २
! ठिकाण
! निकाल
|-
| १ला आं.टी२० || २४ सप्टेंबर || {{cr|JPN}} || {{cr|AFG|२०१३}} || [[कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क]], [[निशिन]] ||
|-
| २रा आं.टी२० || २४ सप्टेंबर || {{cr|HKG}} || {{cr|MYS}} || [[कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क]], [[निशिन]] ||
|-
| ३रा आं.टी२० || २५ सप्टेंबर || {{cr|HKG}} || {{cr|OMN}} || [[कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क]], [[निशिन]] ||
|-
| ४था आं.टी२० || २५ सप्टेंबर || {{cr|AFG|२०१३}} || {{cr|NEP}} || [[कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क]], [[निशिन]] ||
|-
| ५वा आं.टी२० || २६ सप्टेंबर || {{cr|JPN}} || {{cr|NEP}} || [[कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क]], [[निशिन]] ||
|-
| ६वा आं.टी२० || २६ सप्टेंबर || {{cr|MYS}} || {{cr|OMN}} || [[कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क]], [[निशिन]] ||
|-
! colspan="6" |उपांत्य पूर्व सामने
|-
| ७वा आं.टी२० || २८ सप्टेंबर || {{cr|PAK}} || TBD (RU-B) || [[कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क]], [[निशिन]] ||
|-
| ८वा आं.टी२० || २८ सप्टेंबर || {{cr|IND}} || TBD (RU-A) || [[कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क]], [[निशिन]] ||
|-
| ९वा आं.टी२० || २९ सप्टेंबर || {{cr|SL}} || TBD (WN-A) || [[कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क]], [[निशिन]] ||
|-
| १०वा आं.टी२० || २९ सप्टेंबर || {{cr|BAN}} || TBD (WN-B) || [[कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क]], [[निशिन]] ||
|-
! colspan="6" |उपांत्य सामने
|-
| ११वा आं.टी२० || १ ऑक्टोबर || TBD || TBD || [[कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क]], [[निशिन]] ||
|-
| १२वा आं.टी२० || १ ऑक्टोबर || TBD || TBD || [[कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क]], [[निशिन]] ||
|-
! colspan="6" |३ऱ्या स्थानासाठी सामना
|-
| १३वा आं.टी२० || ३ ऑक्टोबर || TBD || TBD || [[कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क]], [[निशिन]] ||
|-
! colspan="6" |अंतिम सामना
|-
| १४वा आं.टी२० || 3 ऑक्टोबर || TBD || TBD || [[कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क]], [[निशिन]] ||
|}
== संदर्भयादी ==
{{reflist}}
{{आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६}}
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कॉनर एस्टरहुइझेन
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2026-09-16T11:11:25Z
Nitin.kunjir
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{{बदल}}
'''कॉनर एस्टरहुइझेन''' (जन्म ३१ मे २००१) हा एक दक्षिण आफ्रिकी आंतरराष्ट्रीय क्रिकेटपटू असून, तो उजव्या हाताने फलंदाजी करतो. देशांतर्गत क्रिकेटमध्ये तो '[[इंपीरियल लायन्स|लायन्स]]' (Lions) संघाकडून खेळतो.
त्याने १५ मार्च २०२६ रोजी न्यूझीलंडविरुद्धच्या सामन्यातून [[आंतरराष्ट्रीय टी२०]] तर ११ सप्टेंबर २०२६ रोजी [[दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचा नामिबिया दौरा, २०२६|नामिबियाविरुद्ध मालिकेतून]] [[आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय]] पदार्पण केले दक्षिण आफ्रिकेसाठी पदार्पण केले.
==संदर्भयादी==
{{संदर्भयादी}}
==बाह्यदुवे==
{{cricinfo|id=1070997}}
[[वर्ग:दक्षिण आफ्रिकेचे क्रिकेट खेळाडू]]
[[वर्ग:दक्षिण आफ्रिकेचे टी२० क्रिकेट खेळाडू]]
[[वर्ग:इ.स. २००१ मधील जन्म]]
[[वर्ग:पुरुष चरित्रलेख]]
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KiranBOT II
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शुद्धलेखन — शहराचे अचूक नाव ([[सदस्य:KiranBOT II/typos#शहराचे अचूक नाव|अधिक माहिती]])
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{{बदल}}
'''कॉनर एस्टरहुइझेन''' (जन्म ३१ मे २००१) हा एक दक्षिण आफ्रिकी आंतरराष्ट्रीय क्रिकेटपटू असून, तो उजव्या हाताने फलंदाजी करतो. देशांतर्गत क्रिकेटमध्ये तो '[[इंपीरियल लायन्स|लायन्स]]' (Lions) संघाकडून खेळतो.
त्याने १५ मार्च २०२६ रोजी न्यू झीलंडविरुद्धच्या सामन्यातून [[आंतरराष्ट्रीय टी२०]] तर ११ सप्टेंबर २०२६ रोजी [[दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचा नामिबिया दौरा, २०२६|नामिबियाविरुद्ध मालिकेतून]] [[आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय]] पदार्पण केले दक्षिण आफ्रिकेसाठी पदार्पण केले.
==संदर्भयादी==
{{संदर्भयादी}}
==बाह्यदुवे==
{{cricinfo|id=1070997}}
[[वर्ग:दक्षिण आफ्रिकेचे क्रिकेट खेळाडू]]
[[वर्ग:दक्षिण आफ्रिकेचे टी२० क्रिकेट खेळाडू]]
[[वर्ग:इ.स. २००१ मधील जन्म]]
[[वर्ग:पुरुष चरित्रलेख]]
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Nitin.kunjir
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नवीन वर्ग घातला - [[WP:HC|हॉटकॅट]] वापरले
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text/x-wiki
{{बदल}}
'''कॉनर एस्टरहुइझेन''' (जन्म ३१ मे २००१) हा एक दक्षिण आफ्रिकी आंतरराष्ट्रीय क्रिकेटपटू असून, तो उजव्या हाताने फलंदाजी करतो. देशांतर्गत क्रिकेटमध्ये तो '[[इंपीरियल लायन्स|लायन्स]]' (Lions) संघाकडून खेळतो.
त्याने १५ मार्च २०२६ रोजी न्यू झीलंडविरुद्धच्या सामन्यातून [[आंतरराष्ट्रीय टी२०]] तर ११ सप्टेंबर २०२६ रोजी [[दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचा नामिबिया दौरा, २०२६|नामिबियाविरुद्ध मालिकेतून]] [[आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय]] पदार्पण केले दक्षिण आफ्रिकेसाठी पदार्पण केले.
==संदर्भयादी==
{{संदर्भयादी}}
==बाह्यदुवे==
{{cricinfo|id=1070997}}
[[वर्ग:दक्षिण आफ्रिकेचे क्रिकेट खेळाडू]]
[[वर्ग:दक्षिण आफ्रिकेचे टी२० क्रिकेट खेळाडू]]
[[वर्ग:इ.स. २००१ मधील जन्म]]
[[वर्ग:पुरुष चरित्रलेख]]
[[वर्ग:दक्षिण आफ्रिकेचे एकदिवसीय क्रिकेट खेळाडू]]
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साचा:आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६
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text/x-wiki
{{Navbox
|name = आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६
|title = [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६]]
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|above = आधीचा मोसम: [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२५-२०२६]]
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* [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|पुरुष टी२० विश्वचषक]]
* [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक पूर्व आशिया-प्रशांत उप-प्रादेशिक पात्रता|पुरुष टी२० विश्वचषक पूर्व आशिया-प्रशांत उप-प्रादेशिक पात्रता]]
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* [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|पुरुष टी२० विश्वचषक]]
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* [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|पुरुष टी२० विश्वचषक]]
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* [[२०२६ आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|पुरुष टी२० विश्वचषक]]
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* [[२०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक|एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक]]
* [[२०२६ महिला टी२० विश्वचषक|महिला टी२० विश्वचषक]]
* [[बहरैन महिला क्रिकेट संघाचा ओमान दौरा (मलेशियामध्ये), २०२६|बहरैन महिलांचा ओमान दौरा (मलेशियामध्ये)]]
* [[कुवेत महिला क्रिकेट संघाचा म्यानमार दौरा (मलेशियामध्ये), २०२६|कुवेत महिलांचा म्यानमार दौरा (मलेशियामध्ये)]]
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* [[२०२६ आयसीसी महिला टी२० विश्वचषक|२०२६ महिला टी२० विश्वचषक]]
|group7 = जुलै
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* [[जर्सी महिला क्रिकेट संघाचा स्वित्झर्लंड दौरा, २०२६|जर्सी महिलांचा स्वित्झर्लंड दौरा]]
* [[स्पेन महिला क्रिकेट संघाचा स्वित्झर्लंड दौरा, २०२६|स्पेन महिला क्रिकेट संघाचा स्वित्झर्लंड दौरा]]
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* [[२०२६ महिला नॉर्डिक चषक|महिला नॉर्डिक चषक]]
* [[२०२६ नामिबिया आं.टी२० तिरंगी मालिका|नामिबिया आं.टी२० तिरंगी मालिका]]
* [[२०२६ महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक|महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक]]
* [[२०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक|एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक]]
* [[२०२६ महिला कॉन्टिनेंटल चषक|महिला कॉन्टिनेंटल चषक]]
|group9 = सप्टेंबर
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* [[संयुक्त अरब अमिराती क्रिकेट संघाचा मलेशिया दौरा, २०२६|यूएईचा मलेशिया दौरा]]
* [[२०२६ फॉलिंग विकेट्स चषक|फॉलिंग विकेट्स चषक]]
* [[२०२६ बाल्कन चषक (बेलग्रेड)|बाल्कन चषक]]
* [[आफ्रिका कॉन्टिनेंटल चषक, २०२६|आफ्रिका कॉन्टिनेंटल चषक]]
* [[मलेशिया महिला क्रिकेट संघाचा जपान दौरा, २०२६|मलेशिया महिला क्रिकेट संघाचा जपान दौरा]]
* [[संयुक्त अरब अमिराती क्रिकेट संघाचा मलेशिया दौरा, २०२६|यूएईचा मलेशिया दौरा]]
* [[हॉंगकॉंग क्रिकेट संघाचा जपान दौरा, २०२६|हॉंगकॉंगचा जपान दौरा]]
* [[भारतीय क्रिकेट संघाचा जपान दौरा, २०२६|भारताचा जपान दौरा]]
* [[२०२६ उत्तर अमेरिकन चषक|उत्तर अमेरिकन चषक]]
* [[२०२६ नायजेरिया चतुष्कोणीय मालिका|नायजेरिया चतुष्कोणीय मालिका]]
* [[२०२६ ईसीए महिला युरोपियन चषक|ईसीए महिला युरोपियन चषक]]
* [[आयर्लंड महिला क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|आयर्लंड महिलांचा इंग्लंड दौरा]]
* [[दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचा नामिबिया दौरा, २०२६|दक्षिण आफ्रिकेचा नामिबिया दौरा]]
* [[दक्षिण आफ्रिका महिला क्रिकेट संघाचा झिम्बाब्वे दौरा, २०२६|दक्षिण आफ्रिका महिलांचा झिम्बाब्वे दौरा]]
* [[भारतीय क्रिकेट संघाचा अफगाणिस्तानविरुद्ध भारतातील दौरा, २०२६|भारत-अफगाणिस्तान मालिका]]
* [[श्रीलंका क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|श्रीलंकेचा इंग्लंड दौरा]]
* [[ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट संघाचा झिम्बाब्वे दौरा, २०२६|ऑस्ट्रेलियाचा झिम्बाब्वे दौरा]]
* [[२०२६ आशियाई खेळ|आशियाई खेळ]]
|group10 = सुरू असलेल्या
|list10 =
* [[२०२५-२०२७ आयसीसी विश्व कसोटी अजिंक्यपद स्पर्धा|विश्व कसोटी अजिंक्यपद स्पर्धा]]
* [[२०२४-२०२६ आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक लीग २|क्रिकेट विश्वचषक लीग २]]
* [[२०२४-२०२६ आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग|क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग]]
* [[२०२५-२०२९ आयसीसी महिला चॅम्पियनशिप|महिला चॅम्पियनशिप]]
* [[असोसिएट आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६|असोसिएट टी२०आ क्रिकेट]]
|below = नंतरचा मोसम: [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६-२०२७]]
}}<noinclude>
{{navbox documentation}}
[[Category:International cricket by year navigational boxes]]
</noinclude>
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text/x-wiki
{{Navbox
| name = आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६
| title = [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६]]
| listclass = hlist
| state = collapsed
| above = आधीचा मोसम: [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२५-२६]]
| group1 = एप्रिल २०२६
| list1 =
[[२०२६ नामिबिया तिरंगी मालिका|नामिबिया तिरंगी मालिका]]
[[२०२६ पुरुष मध्य अमेरिकन अजिंक्यपद स्पर्धा|पुरुष मध्य अमेरिकन अजिंक्यपद स्पर्धा]]
[[ग्रीस महिला क्रिकेट संघाचा सायप्रस दौरा, २०२६|ग्रीस महिलांचा सायप्रस दौरा]]
[[२०२६ पोर्तुगाल तिरंगी मालिका|पोर्तुगाल तिरंगी मालिका]]
[[२०२६ कालाहारी महिला स्पर्धा|कालाहारी महिला स्पर्धा]]
[[स्वीडन क्रिकेट संघाचा इंडोनेशिया दौरा, २०२६|स्वीडनचा इंडोनेशिया दौरा]]
[[न्यूझीलंड क्रिकेट संघाचा बांगलादेश दौरा, २०२६|न्यूझीलंडचा बांगलादेश दौरा]]
[[भारतीय महिला क्रिकेट संघाचा दक्षिण आफ्रिका दौरा, २०२६|भारतीय महिलांचा दक्षिण आफ्रिका दौरा]]
[[२०२६ महिला चॅलेंज चषक|महिला चॅलेंज चषक]]
[[श्रीलंका महिला क्रिकेट संघाचा बांगलादेश दौरा, २०२६|श्रीलंका महिलांचा बांगलादेश दौरा]]
[[चिले महिला क्रिकेट संघाचा कोस्टा रिका दौरा, २०२६|चिली महिलांचा कोस्टा रिका दौरा]]
[[२०२६ नेपाळ तिरंगी मालिका (एप्रिल)|नेपाळ तिरंगी मालिका (एप्रिल)]]
| group2 = मे २०२६
| list2 =
[[इंडोनेशिया क्रिकेट संघाचा मलेशिया दौरा, २०२६|इंडोनेशियाचा मलेशिया दौरा]]
[[ऑस्ट्रिया क्रिकेट संघाचा जर्मनी दौरा, २०२६|ऑस्ट्रियाचा जर्मनी दौरा]]
[[आईल ऑफ मान क्रिकेट संघाचा गर्न्सी दौरा, २०२६|आईल ऑफ मानचा गर्न्सी दौरा]]
[[झिम्बाब्वे महिला क्रिकेट संघाचा पाकिस्तान दौरा, २०२६|झिम्बाब्वे महिलांचा पाकिस्तान दौरा]]
[[२०२६ हाँग काँग महिला तिरंगी मालिका|हाँग काँग महिला तिरंगी मालिका]]
[[जिब्राल्टर क्रिकेट संघाचा माल्टा दौरा, २०२६|जिब्राल्टरचा माल्टा दौरा]]
[[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक पूर्व आशिया-प्रशांत उप-प्रादेशिक पात्रता|पुरुष टी२० विश्वचषक पूर्व आशिया-प्रशांत उप-प्रादेशिक पात्रता]]
[[फिनलंड क्रिकेट संघाचा सायप्रस दौरा, २०२६|फिनलंडचा सायप्रस दौरा]]
[[बल्गेरिया क्रिकेट संघाचा रोमानिया दौरा, २०२६|बल्गेरियाचा रोमानिया दौरा]]
[[डेन्मार्क महिला क्रिकेट संघाचा ग्रीस दौरा, २०२६|डेन्मार्क महिलांचा ग्रीस दौरा]]
[[न्यू झीलंड महिला क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|न्यूझीलंड महिलांचा इंग्लंड दौरा]]
[[पाकिस्तान क्रिकेट संघाचा बांगलादेश दौरा, २०२५–२६|पाकिस्तानचा बांगलादेश दौरा]]
[[२०२६ नेपाळ तिरंगी मालिका (मे)|नेपाळ तिरंगी मालिका (मे)]]
[[२०२६ आशियाई क्रीडा स्पर्धा महिला पात्रता#इंडोनेशिया महिला संघाचा मलेशिया दौरा|इंडोनेशिया महिलांचा मलेशिया दौरा]]
[[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता अ|पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता अ]]
[[२०२६ आशियाई क्रीडा स्पर्धा महिला पात्रता#नेपाळ महिला संघाचा मलेशिया दौरा|नेपाळ महिलांचा मलेशिया दौरा]]
[[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक आफ्रिका उप-प्रादेशिक पात्रता अ|पुरुष टी२० विश्वचषक आफ्रिका उप-प्रादेशिक पात्रता अ]]
[[२०२६ आशियाई क्रीडा स्पर्धा महिला पात्रता|आशियाई क्रीडा स्पर्धा महिला पात्रता]]
[[न्यू झीलंड क्रिकेट संघाचा आयर्लंड दौरा, २०२६|न्यूझीलंडचा आयर्लंड दौरा]]
[[२०२६ स्कॉटलंड महिला तिरंगी मालिका|स्कॉटलंड महिला तिरंगी मालिका]]
[[२०२६ आयर्लंड महिला तिरंगी मालिका|आयर्लंड महिला तिरंगी मालिका]]
[[भारतीय महिला क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|भारतीय महिलांचा इंग्लंड दौरा]]
[[ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट संघाचा पाकिस्तान दौरा, २०२६|ऑस्ट्रेलियाचा पाकिस्तान दौरा]]
[[बहरैन महिला क्रिकेट संघाचा ओमान दौरा (मलेशियामध्ये), २०२६|बहरैन महिलांचा ओमान दौरा (मलेशियामध्ये)]]
[[कुवेत महिला क्रिकेट संघाचा म्यानमार दौरा (मलेशियामध्ये), २०२६|कुवेत महिलांचा म्यानमार दौरा (मलेशियामध्ये)]]
[[२०२६ आशियाई क्रीडा स्पर्धा पुरुष पात्रता|आशियाई क्रीडा स्पर्धा पुरुष पात्रता]]
| group3 = जून २०२६
| list3 =
[[२०२६ उबुंटू तिरंगी मालिका|उबुंटू तिरंगी मालिका]]
[[२०२६ एसीसी महिला प्रीमियर चषक|एसीसी महिला प्रीमियर चषक]]
[[२०२६ एसीसी पुरुष चॅलेंजर चषक|एसीसी पुरुष चॅलेंजर चषक]]
[[श्रीलंका क्रिकेट संघाचा वेस्ट इंडीज दौरा, २०२६|श्रीलंकेचा वेस्ट इंडीज दौरा]]
[[न्यू झीलंड क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|न्यूझीलंडचा इंग्लंड दौरा]]
[[अफगाणिस्तान क्रिकेट संघाचा भारत दौरा, २०२६|अफगाणिस्तानचा भारत दौरा]]
[[२०२६ कॅनडा तिरंगी मालिका|कॅनडा तिरंगी मालिका (१९वी फेरी)]]
[[ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट संघाचा बांगलादेश दौरा, २०२६|ऑस्ट्रेलियाचा बांगलादेश दौरा]]
[[२०२६ क्विबुका महिला टी२० स्पर्धा|क्विबुका महिला टी२० स्पर्धा]]
[[२०२६ व्हायकिंग चषक|व्हायकिंग चषक]]
[[२०२६ आयसीसी महिला टी२० विश्वचषक|२०२६ महिला टी२० विश्वचषक]]
[[गर्न्सी महिला क्रिकेट संघाचा जर्सी दौरा, २०२६|गर्न्सी महिलांचा जर्सी दौरा]]
[[माल्टा महिला क्रिकेट संघाचा सायप्रस दौरा, २०२६|माल्टा महिलांचा सायप्रस दौरा]]
[[जर्मनी क्रिकेट संघाचा डेन्मार्क दौरा, २०२६|जर्मनीचा डेन्मार्क दौरा]]
[[२०२६ नामिबिया टी२० तिरंगी मालिका|नामिबिया टी२० तिरंगी मालिका]]
[[२०२६ पुरुष कॉन्टिनेंटल चषक|पुरुष कॉन्टिनेंटल चषक]]
[[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक अमेरिका उप-प्रादेशिक पात्रता अ|पुरुष टी२० विश्वचषक अमेरिका उप-प्रादेशिक पात्रता अ]]
[[२०२६ आशिया-प्रशांत क्रिकेट चॅम्पियन्स ट्रॉफी|आशिया-प्रशांत क्रिकेट चॅम्पियन्स ट्रॉफी]]
मध्य युरोप चषक
** [[२०२६ पुरुष मध्य युरोप चषक|पुरुष]]
** [[२०२६ महिला मध्य युरोप चषक|महिला]]
[[सर्बिया महिला क्रिकेट संघाचा बल्गेरिया दौरा, २०२६|सर्बिया महिलांचा बल्गेरिया दौरा]]
[[भारतीय क्रिकेट संघाचा आयर्लंड दौरा, २०२६|भारताचा आयर्लंड दौरा]]
[[स्वित्झर्लंड महिला क्रिकेट संघाचा डेन्मार्क दौरा, २०२६|स्वित्झर्लंड महिलांचा डेन्मार्क दौरा]]
[[ऑस्ट्रिया क्रिकेट संघाचा हंगेरी दौरा, २०२६|ऑस्ट्रियाचा हंगेरी दौरा]]
[[बांगलादेश क्रिकेट संघाचा झिम्बाब्वे दौरा, २०२६|बांगलादेशचा झिम्बाब्वे दौरा]]
| group4 = जुलै २०२६
| list4 =
[[पोर्तुगाल क्रिकेट संघाचा स्वीडन दौरा, २०२६|पोर्तुगालचा स्वीडन दौरा]]
[[भारतीय क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|भारताचा इंग्लंड दौरा]]
[[पोर्तुगाल क्रिकेट संघाचा फिनलंड दौरा, २०२६|पोर्तुगालचा फिनलंड दौरा]]
[[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता ब|पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता ब]]
[[स्वित्झर्लंड महिला क्रिकेट संघाचा जर्मनी दौरा, २०२६|स्वित्झर्लंड महिला क्रिकेट संघाचा जर्मनी दौरा]]
[[वेस्ट इंडीज महिला क्रिकेट संघाचा आयर्लंड दौरा, २०२६|वेस्ट इंडीज महिलांचा आयर्लंड दौरा]]
[[न्यू झीलंड क्रिकेट संघाचा वेस्ट इंडीज दौरा, २०२६|न्यूझीलंडचा वेस्ट इंडीज दौरा]]
[[२०२६ कॅप्रिकॉर्न महिला चौरंगी मालिका|कॅप्रिकॉर्न महिला चौरंगी मालिका]]
[[२०२६ नेदरलँड्स तिरंगी मालिका|नेदरलँड्स तिरंगी मालिका (२०वी फेरी)]]
[[पाकिस्तान महिला क्रिकेट संघाचा श्रीलंका दौरा, २०२६|पाकिस्तान महिलांचा श्रीलंका दौरा]]
[[भारतीय क्रिकेट संघाचा झिम्बाब्वे दौरा, २०२६|भारताचा झिम्बाब्वे दौरा]]
[[२०२६ ईसीए पुरुष युरोपियन चषक|ईसीए पुरुष युरोपियन चषक]]
[[फिनलंड महिला क्रिकेट संघाचा एस्टोनिया दौरा, २०२६|फिनलंड महिलांचा एस्टोनिया दौरा]]
[[पाकिस्तान क्रिकेट संघाचा वेस्ट इंडीज दौरा, २०२६|पाकिस्तानचा वेस्ट इंडीज दौरा]]
[[२०२६ स्वित्झर्लंड महिला चौरंगी मालिका|स्वित्झर्लंड महिला चौरंगी मालिका]]
[[जर्सी महिला क्रिकेट संघाचा स्वित्झर्लंड दौरा, २०२६|जर्सी महिलांचा स्वित्झर्लंड दौरा]]
[[कॅनडा महिला क्रिकेट संघाचा आर्जेंटिना दौरा, २०२६|कॅनडा महिलांचा आर्जेंटिना दौरा]]
[[स्पेन महिला क्रिकेट संघाचा स्वित्झर्लंड दौरा, २०२६|स्पेन महिला क्रिकेट संघाचा स्वित्झर्लंड दौरा]]
[[२०२६ क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग ब (टांझानिया)#बहरीनचा केन्या दौरा|बहरीनचा केन्या दौरा]]
| group5 = ऑगस्ट २०२६
| list5 =
[[२०२६ स्कॉटलंड तिरंगी मालिका|स्कॉटलंड तिरंगी मालिका (२१वी फेरी)]]
[[अफगाणिस्तान क्रिकेट संघाचा आयर्लंड दौरा, २०२६|अफगाणिस्तानचा आयर्लंड दौरा]]
[[२०२६ पुरुष दक्षिण अमेरिकन अजिंक्यपद स्पर्धा|पुरुष दक्षिण अमेरिकन अजिंक्यपद स्पर्धा]]
[[२०२६ क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग ब (टांझानिया)|क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग ब (टांझानिया)]]
[[थायलंड महिला क्रिकेट संघाचा पापुआ न्यू गिनी दौरा, २०२६|थायलंड महिलांचा पापुआ न्यू गिनी दौरा]]
[[२०२६ मलावी तिरंगी मालिका|मलावी तिरंगी मालिका]]
[[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता क#जर्मनीचा फिनलंड दौरा|जर्मनीचा फिनलंड दौरा]]
[[बांगलादेश क्रिकेट संघाचा ऑस्ट्रेलिया दौरा, २०२६|बांगलादेशचा ऑस्ट्रेलिया दौरा]]
[[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता क|पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता क]]
[[भारतीय क्रिकेट संघाचा श्रीलंका दौरा, २०२६|भारताचा श्रीलंका दौरा]]
[[पाकिस्तान क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|पाकिस्तानचा इंग्लंड दौरा]]
[[२०२६ महिला बेल्ट अँड रोड ट्रॉफी|महिला बेल्ट अँड रोड ट्रॉफी]]
[[बेल्जियम महिला क्रिकेट संघाचा लक्झेंबर्ग दौरा, २०२६|बेल्जियम महिलांचा लक्झेंबर्ग दौरा]]
[[२०२६ महिला कॉन्टिनेंटल चषक|महिला कॉन्टिनेंटल चषक]]
[[२०२६ महिला नॉर्डिक चषक|महिला नॉर्डिक चषक]]
[[नेदरलँड्स महिला क्रिकेट संघाचा स्कॉटलंड दौरा, २०२६|नेदरलँड्स महिलांचा स्कॉटलंड दौरा]]
[[२०२६ नामिबिया टी२० तिरंगी मालिका (ऑगस्ट-सप्टेंबर)|नामिबिया आं.टी२० तिरंगी मालिका]]
[[२०२६ महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक|महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक]]
[[२०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक|एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक]]
| group6 = सप्टेंबर २०२६
| list6 =
[[आयर्लंड महिला क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|आयर्लंड महिलांचा इंग्लंड दौरा]]
[[२०२६ फॉलिंग विकेट्स चषक|फॉलिंग विकेट्स चषक]]
[[२०२६ बाल्कन चषक (बेलग्रेड)|बाल्कन चषक]]
[[२०२६ आफ्रिका कॉन्टिनेंटल चषक|आफ्रिका कॉन्टिनेंटल चषक]]
[[दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचा नामिबिया दौरा, २०२६|दक्षिण आफ्रिकेचा नामिबिया दौरा]]
[[मलेशिया महिला क्रिकेट संघाचा जपान दौरा, २०२६|मलेशिया महिलांचा जपान दौरा]]
[[दक्षिण आफ्रिका महिला क्रिकेट संघाचा झिम्बाब्वे दौरा, २०२६|दक्षिण आफ्रिका महिलांचा झिम्बाब्वे दौरा]]
[[अफगाणिस्तान विरुद्ध भारतीय क्रिकेट संघ भारतामध्ये, २०२६|भारत वि अफगाणिस्तान भारतामध्ये]]
[[२०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक#संयुक्त अरब अमिरातीचा मलेशिया दौरा|यूएईचा मलेशिया दौरा]]
[[ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट संघाचा झिम्बाब्वे दौरा, २०२६|ऑस्ट्रेलियाचा झिम्बाब्वे दौरा]]
[[श्रीलंका क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|श्रीलंकेचा इंग्लंड दौरा]]
[[हाँग काँग क्रिकेट संघाचा जपान दौरा, २०२६|हाँग काँगचा जपान दौरा]]
[[भारतीय क्रिकेट संघाचा जपान दौरा, २०२६|भारताचा जपान दौरा]]
[[२०२६ आशियाई खेळ]]
** [[२०२६ आशियाई खेळ#क्रिकेट - पुरुष स्पर्धा|पुरुष]]
** [[२०२६ आशियाई खेळ#क्रिकेट - महिला स्पर्धा|महिला]]
[[२०२६ उत्तर अमेरिकन चषक|उत्तर अमेरिकन चषक]]
[[२०२६ नायजेरिया चतुष्कोणी मालिका|नायजेरिया चतुष्कोणी मालिका]]
[[२०२६ ईसीए महिला युरोपियन चषक|ईसीए महिला युरोपियन चषक]]
| group7 = सुरू असलेले
| list7 =
[[२०२५-२०२७ आयसीसी विश्व कसोटी अजिंक्यपद स्पर्धा|विश्व कसोटी अजिंक्यपद स्पर्धा]]
[[२०२४-२०२६ आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक लीग २|क्रिकेट विश्वचषक लीग २]]
[[२०२४-२०२६ आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग|क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग]]
[[२०२५-२०२९ आयसीसी महिला चॅम्पियनशिप|महिला चॅम्पियनशिप]]
[[असोसिएट आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६|असोसिएट टी२०आ क्रिकेट]]
| below = नंतरचा मोसम: [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६-२७]]
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[[Category:International cricket by year navigational boxes]]
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{{Navbox
| name = आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६
| title = [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६]]
| listclass = hlist
| state = collapsed
| above = आधीचा मोसम: [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२५-२६]]
| group1 = एप्रिल २०२६
| list1 =
* [[२०२६ नामिबिया तिरंगी मालिका|नामिबिया तिरंगी मालिका]]
* [[२०२६ पुरुष मध्य अमेरिकन अजिंक्यपद स्पर्धा|पुरुष मध्य अमेरिकन अजिंक्यपद स्पर्धा]]
* [[ग्रीस महिला क्रिकेट संघाचा सायप्रस दौरा, २०२६|ग्रीस महिलांचा सायप्रस दौरा]]
* [[२०२६ पोर्तुगाल तिरंगी मालिका|पोर्तुगाल तिरंगी मालिका]]
* [[२०२६ कालाहारी महिला स्पर्धा|कालाहारी महिला स्पर्धा]]
* [[स्वीडन क्रिकेट संघाचा इंडोनेशिया दौरा, २०२६|स्वीडनचा इंडोनेशिया दौरा]]
* [[न्यूझीलंड क्रिकेट संघाचा बांगलादेश दौरा, २०२६|न्यूझीलंडचा बांगलादेश दौरा]]
* [[भारतीय महिला क्रिकेट संघाचा दक्षिण आफ्रिका दौरा, २०२६|भारतीय महिलांचा दक्षिण आफ्रिका दौरा]]
* [[२०२६ महिला चॅलेंज चषक|महिला चॅलेंज चषक]]
* [[श्रीलंका महिला क्रिकेट संघाचा बांगलादेश दौरा, २०२६|श्रीलंका महिलांचा बांगलादेश दौरा]]
* [[चिले महिला क्रिकेट संघाचा कोस्टा रिका दौरा, २०२६|चिली महिलांचा कोस्टा रिका दौरा]]
* [[२०२६ नेपाळ तिरंगी मालिका (एप्रिल)|नेपाळ तिरंगी मालिका (एप्रिल)]]
| group2 = मे २०२६
| list2 =
* [[इंडोनेशिया क्रिकेट संघाचा मलेशिया दौरा, २०२६|इंडोनेशियाचा मलेशिया दौरा]]
* [[ऑस्ट्रिया क्रिकेट संघाचा जर्मनी दौरा, २०२६|ऑस्ट्रियाचा जर्मनी दौरा]]
* [[आईल ऑफ मान क्रिकेट संघाचा गर्न्सी दौरा, २०२६|आईल ऑफ मानचा गर्न्सी दौरा]]
* [[झिम्बाब्वे महिला क्रिकेट संघाचा पाकिस्तान दौरा, २०२६|झिम्बाब्वे महिलांचा पाकिस्तान दौरा]]
* [[२०२६ हाँग काँग महिला तिरंगी मालिका|हाँग काँग महिला तिरंगी मालिका]]
* [[जिब्राल्टर क्रिकेट संघाचा माल्टा दौरा, २०२६|जिब्राल्टरचा माल्टा दौरा]]
* [[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक पूर्व आशिया-प्रशांत उप-प्रादेशिक पात्रता|पुरुष टी२० विश्वचषक पूर्व आशिया-प्रशांत उप-प्रादेशिक पात्रता]]
* [[फिनलंड क्रिकेट संघाचा सायप्रस दौरा, २०२६|फिनलंडचा सायप्रस दौरा]]
* [[बल्गेरिया क्रिकेट संघाचा रोमानिया दौरा, २०२६|बल्गेरियाचा रोमानिया दौरा]]
* [[डेन्मार्क महिला क्रिकेट संघाचा ग्रीस दौरा, २०२६|डेन्मार्क महिलांचा ग्रीस दौरा]]
* [[न्यू झीलंड महिला क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|न्यूझीलंड महिलांचा इंग्लंड दौरा]]
* [[पाकिस्तान क्रिकेट संघाचा बांगलादेश दौरा, २०२५–२६|पाकिस्तानचा बांगलादेश दौरा]]
* [[२०२६ नेपाळ तिरंगी मालिका (मे)|नेपाळ तिरंगी मालिका (मे)]]
* [[२०२६ आशियाई क्रीडा स्पर्धा महिला पात्रता#इंडोनेशिया महिला संघाचा मलेशिया दौरा|इंडोनेशिया महिलांचा मलेशिया दौरा]]
* [[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता अ|पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता अ]]
* [[२०२६ आशियाई क्रीडा स्पर्धा महिला पात्रता#नेपाळ महिला संघाचा मलेशिया दौरा|नेपाळ महिलांचा मलेशिया दौरा]]
* [[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक आफ्रिका उप-प्रादेशिक पात्रता अ|पुरुष टी२० विश्वचषक आफ्रिका उप-प्रादेशिक पात्रता अ]]
* [[२०२६ आशियाई क्रीडा स्पर्धा महिला पात्रता|आशियाई क्रीडा स्पर्धा महिला पात्रता]]
* [[न्यू झीलंड क्रिकेट संघाचा आयर्लंड दौरा, २०२६|न्यूझीलंडचा आयर्लंड दौरा]]
* [[२०२६ स्कॉटलंड महिला तिरंगी मालिका|स्कॉटलंड महिला तिरंगी मालिका]]
* [[२०२६ आयर्लंड महिला तिरंगी मालिका|आयर्लंड महिला तिरंगी मालिका]]
* [[भारतीय महिला क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|भारतीय महिलांचा इंग्लंड दौरा]]
* [[ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट संघाचा पाकिस्तान दौरा, २०२६|ऑस्ट्रेलियाचा पाकिस्तान दौरा]]
* [[बहरैन महिला क्रिकेट संघाचा ओमान दौरा (मलेशियामध्ये), २०२६|बहरैन महिलांचा ओमान दौरा (मलेशियामध्ये)]]
* [[कुवेत महिला क्रिकेट संघाचा म्यानमार दौरा (मलेशियामध्ये), २०२६|कुवेत महिलांचा म्यानमार दौरा (मलेशियामध्ये)]]
* [[२०२६ आशियाई क्रीडा स्पर्धा पुरुष पात्रता|आशियाई क्रीडा स्पर्धा पुरुष पात्रता]]
| group3 = जून २०२६
| list3 =
* [[२०२६ उबुंटू तिरंगी मालिका|उबुंटू तिरंगी मालिका]]
* [[२०२६ एसीसी महिला प्रीमियर चषक|एसीसी महिला प्रीमियर चषक]]
* [[२०२६ एसीसी पुरुष चॅलेंजर चषक|एसीसी पुरुष चॅलेंजर चषक]]
* [[श्रीलंका क्रिकेट संघाचा वेस्ट इंडीज दौरा, २०२६|श्रीलंकेचा वेस्ट इंडीज दौरा]]
* [[न्यू झीलंड क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|न्यूझीलंडचा इंग्लंड दौरा]]
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* [[२०२६ क्विबुका महिला टी२० स्पर्धा|क्विबुका महिला टी२० स्पर्धा]]
* [[२०२६ व्हायकिंग चषक|व्हायकिंग चषक]]
* [[२०२६ आयसीसी महिला टी२० विश्वचषक|२०२६ महिला टी२० विश्वचषक]]
* [[गर्न्सी महिला क्रिकेट संघाचा जर्सी दौरा, २०२६|गर्न्सी महिलांचा जर्सी दौरा]]
* [[माल्टा महिला क्रिकेट संघाचा सायप्रस दौरा, २०२६|माल्टा महिलांचा सायप्रस दौरा]]
* [[जर्मनी क्रिकेट संघाचा डेन्मार्क दौरा, २०२६|जर्मनीचा डेन्मार्क दौरा]]
* [[२०२६ नामिबिया टी२० तिरंगी मालिका|नामिबिया टी२० तिरंगी मालिका]]
* [[२०२६ पुरुष कॉन्टिनेंटल चषक|पुरुष कॉन्टिनेंटल चषक]]
* [[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक अमेरिका उप-प्रादेशिक पात्रता अ|पुरुष टी२० विश्वचषक अमेरिका उप-प्रादेशिक पात्रता अ]]
* [[२०२६ आशिया-प्रशांत क्रिकेट चॅम्पियन्स ट्रॉफी|आशिया-प्रशांत क्रिकेट चॅम्पियन्स ट्रॉफी]]
मध्य युरोप चषक
** [[२०२६ पुरुष मध्य युरोप चषक|पुरुष]]
** [[२०२६ महिला मध्य युरोप चषक|महिला]]
* [[सर्बिया महिला क्रिकेट संघाचा बल्गेरिया दौरा, २०२६|सर्बिया महिलांचा बल्गेरिया दौरा]]
* [[भारतीय क्रिकेट संघाचा आयर्लंड दौरा, २०२६|भारताचा आयर्लंड दौरा]]
* [[स्वित्झर्लंड महिला क्रिकेट संघाचा डेन्मार्क दौरा, २०२६|स्वित्झर्लंड महिलांचा डेन्मार्क दौरा]]
* [[ऑस्ट्रिया क्रिकेट संघाचा हंगेरी दौरा, २०२६|ऑस्ट्रियाचा हंगेरी दौरा]]
* [[बांगलादेश क्रिकेट संघाचा झिम्बाब्वे दौरा, २०२६|बांगलादेशचा झिम्बाब्वे दौरा]]
| group4 = जुलै २०२६
| list4 =
* [[पोर्तुगाल क्रिकेट संघाचा स्वीडन दौरा, २०२६|पोर्तुगालचा स्वीडन दौरा]]
* [[भारतीय क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|भारताचा इंग्लंड दौरा]]
* [[पोर्तुगाल क्रिकेट संघाचा फिनलंड दौरा, २०२६|पोर्तुगालचा फिनलंड दौरा]]
* [[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता ब|पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता ब]]
* [[स्वित्झर्लंड महिला क्रिकेट संघाचा जर्मनी दौरा, २०२६|स्वित्झर्लंड महिला क्रिकेट संघाचा जर्मनी दौरा]]
* [[वेस्ट इंडीज महिला क्रिकेट संघाचा आयर्लंड दौरा, २०२६|वेस्ट इंडीज महिलांचा आयर्लंड दौरा]]
* [[न्यू झीलंड क्रिकेट संघाचा वेस्ट इंडीज दौरा, २०२६|न्यूझीलंडचा वेस्ट इंडीज दौरा]]
* [[२०२६ कॅप्रिकॉर्न महिला चौरंगी मालिका|कॅप्रिकॉर्न महिला चौरंगी मालिका]]
* [[२०२६ नेदरलँड्स तिरंगी मालिका|नेदरलँड्स तिरंगी मालिका (२०वी फेरी)]]
* [[पाकिस्तान महिला क्रिकेट संघाचा श्रीलंका दौरा, २०२६|पाकिस्तान महिलांचा श्रीलंका दौरा]]
* [[भारतीय क्रिकेट संघाचा झिम्बाब्वे दौरा, २०२६|भारताचा झिम्बाब्वे दौरा]]
* [[२०२६ ईसीए पुरुष युरोपियन चषक|ईसीए पुरुष युरोपियन चषक]]
* [[फिनलंड महिला क्रिकेट संघाचा एस्टोनिया दौरा, २०२६|फिनलंड महिलांचा एस्टोनिया दौरा]]
* [[पाकिस्तान क्रिकेट संघाचा वेस्ट इंडीज दौरा, २०२६|पाकिस्तानचा वेस्ट इंडीज दौरा]]
* [[२०२६ स्वित्झर्लंड महिला चौरंगी मालिका|स्वित्झर्लंड महिला चौरंगी मालिका]]
* [[जर्सी महिला क्रिकेट संघाचा स्वित्झर्लंड दौरा, २०२६|जर्सी महिलांचा स्वित्झर्लंड दौरा]]
* [[कॅनडा महिला क्रिकेट संघाचा आर्जेंटिना दौरा, २०२६|कॅनडा महिलांचा आर्जेंटिना दौरा]]
* [[स्पेन महिला क्रिकेट संघाचा स्वित्झर्लंड दौरा, २०२६|स्पेन महिला क्रिकेट संघाचा स्वित्झर्लंड दौरा]]
* [[२०२६ क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग ब (टांझानिया)#बहरीनचा केन्या दौरा|बहरीनचा केन्या दौरा]]
| group5 = ऑगस्ट २०२६
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* [[२०२६ स्कॉटलंड तिरंगी मालिका|स्कॉटलंड तिरंगी मालिका (२१वी फेरी)]]
* [[अफगाणिस्तान क्रिकेट संघाचा आयर्लंड दौरा, २०२६|अफगाणिस्तानचा आयर्लंड दौरा]]
* [[२०२६ पुरुष दक्षिण अमेरिकन अजिंक्यपद स्पर्धा|पुरुष दक्षिण अमेरिकन अजिंक्यपद स्पर्धा]]
* [[२०२६ क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग ब (टांझानिया)|क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग ब (टांझानिया)]]
* [[थायलंड महिला क्रिकेट संघाचा पापुआ न्यू गिनी दौरा, २०२६|थायलंड महिलांचा पापुआ न्यू गिनी दौरा]]
* [[२०२६ मलावी तिरंगी मालिका|मलावी तिरंगी मालिका]]
* [[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता क#जर्मनीचा फिनलंड दौरा|जर्मनीचा फिनलंड दौरा]]
* [[बांगलादेश क्रिकेट संघाचा ऑस्ट्रेलिया दौरा, २०२६|बांगलादेशचा ऑस्ट्रेलिया दौरा]]
* [[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता क|पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता क]]
* [[भारतीय क्रिकेट संघाचा श्रीलंका दौरा, २०२६|भारताचा श्रीलंका दौरा]]
* [[पाकिस्तान क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|पाकिस्तानचा इंग्लंड दौरा]]
* [[२०२६ महिला बेल्ट अँड रोड ट्रॉफी|महिला बेल्ट अँड रोड ट्रॉफी]]
* [[बेल्जियम महिला क्रिकेट संघाचा लक्झेंबर्ग दौरा, २०२६|बेल्जियम महिलांचा लक्झेंबर्ग दौरा]]
* [[२०२६ महिला कॉन्टिनेंटल चषक|महिला कॉन्टिनेंटल चषक]]
* [[२०२६ महिला नॉर्डिक चषक|महिला नॉर्डिक चषक]]
* [[नेदरलँड्स महिला क्रिकेट संघाचा स्कॉटलंड दौरा, २०२६|नेदरलँड्स महिलांचा स्कॉटलंड दौरा]]
* [[२०२६ नामिबिया टी२० तिरंगी मालिका (ऑगस्ट-सप्टेंबर)|नामिबिया आं.टी२० तिरंगी मालिका]]
* [[२०२६ महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक|महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक]]
* [[२०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक|एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक]]
| group6 = सप्टेंबर २०२६
| list6 =
* [[आयर्लंड महिला क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|आयर्लंड महिलांचा इंग्लंड दौरा]]
* [[२०२६ फॉलिंग विकेट्स चषक|फॉलिंग विकेट्स चषक]]
* [[२०२६ बाल्कन चषक (बेलग्रेड)|बाल्कन चषक]]
* [[२०२६ आफ्रिका कॉन्टिनेंटल चषक|आफ्रिका कॉन्टिनेंटल चषक]]
* [[दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचा नामिबिया दौरा, २०२६|दक्षिण आफ्रिकेचा नामिबिया दौरा]]
* [[मलेशिया महिला क्रिकेट संघाचा जपान दौरा, २०२६|मलेशिया महिलांचा जपान दौरा]]
* [[दक्षिण आफ्रिका महिला क्रिकेट संघाचा झिम्बाब्वे दौरा, २०२६|दक्षिण आफ्रिका महिलांचा झिम्बाब्वे दौरा]]
* [[अफगाणिस्तान विरुद्ध भारतीय क्रिकेट संघ भारतामध्ये, २०२६|भारत वि अफगाणिस्तान भारतामध्ये]]
* [[२०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक#संयुक्त अरब अमिरातीचा मलेशिया दौरा|यूएईचा मलेशिया दौरा]]
* [[ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट संघाचा झिम्बाब्वे दौरा, २०२६|ऑस्ट्रेलियाचा झिम्बाब्वे दौरा]]
* [[श्रीलंका क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|श्रीलंकेचा इंग्लंड दौरा]]
* [[हाँग काँग क्रिकेट संघाचा जपान दौरा, २०२६|हाँग काँगचा जपान दौरा]]
* [[भारतीय क्रिकेट संघाचा जपान दौरा, २०२६|भारताचा जपान दौरा]]
* [[२०२६ आशियाई खेळ]]
** [[२०२६ आशियाई खेळ#क्रिकेट - पुरुष स्पर्धा|पुरुष]]
** [[२०२६ आशियाई खेळ#क्रिकेट - महिला स्पर्धा|महिला]]
* [[२०२६ उत्तर अमेरिकन चषक|उत्तर अमेरिकन चषक]]
* [[२०२६ नायजेरिया चतुष्कोणी मालिका|नायजेरिया चतुष्कोणी मालिका]]
* [[२०२६ ईसीए महिला युरोपियन चषक|ईसीए महिला युरोपियन चषक]]
| group7 = सुरू असलेले
| list7 =
* [[२०२५-२०२७ आयसीसी विश्व कसोटी अजिंक्यपद स्पर्धा|विश्व कसोटी अजिंक्यपद स्पर्धा]]
* [[२०२४-२०२६ आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक लीग २|क्रिकेट विश्वचषक लीग २]]
* [[२०२४-२०२६ आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग|क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग]]
* [[२०२५-२०२९ आयसीसी महिला चॅम्पियनशिप|महिला चॅम्पियनशिप]]
* [[असोसिएट आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६|असोसिएट टी२०आ क्रिकेट]]
| below = नंतरचा मोसम: [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६-२७]]
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[[Category:International cricket by year navigational boxes]]
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{{Navbox
| name = आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६
| title = [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६]]
| listclass = hlist
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| above = आधीचा मोसम: [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२५-२६]]
| group1 = एप्रिल २०२६
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* [[२०२६ नामिबिया तिरंगी मालिका|नामिबिया तिरंगी मालिका]]
* [[२०२६ पुरुष मध्य अमेरिकन अजिंक्यपद स्पर्धा|पुरुष मध्य अमेरिकन अजिंक्यपद स्पर्धा]]
* [[ग्रीस महिला क्रिकेट संघाचा सायप्रस दौरा, २०२६|ग्रीस महिलांचा सायप्रस दौरा]]
* [[२०२६ पोर्तुगाल तिरंगी मालिका|पोर्तुगाल तिरंगी मालिका]]
* [[२०२६ कालाहारी महिला स्पर्धा|कालाहारी महिला स्पर्धा]]
* [[स्वीडन क्रिकेट संघाचा इंडोनेशिया दौरा, २०२६|स्वीडनचा इंडोनेशिया दौरा]]
* [[न्यूझीलंड क्रिकेट संघाचा बांगलादेश दौरा, २०२६|न्यूझीलंडचा बांगलादेश दौरा]]
* [[भारतीय महिला क्रिकेट संघाचा दक्षिण आफ्रिका दौरा, २०२६|भारतीय महिलांचा दक्षिण आफ्रिका दौरा]]
* [[२०२६ महिला चॅलेंज चषक|महिला चॅलेंज चषक]]
* [[श्रीलंका महिला क्रिकेट संघाचा बांगलादेश दौरा, २०२६|श्रीलंका महिलांचा बांगलादेश दौरा]]
* [[चिले महिला क्रिकेट संघाचा कोस्टा रिका दौरा, २०२६|चिली महिलांचा कोस्टा रिका दौरा]]
* [[२०२६ नेपाळ तिरंगी मालिका (एप्रिल)|नेपाळ तिरंगी मालिका (एप्रिल)]]
| group2 = मे २०२६
| list2 =
* [[इंडोनेशिया क्रिकेट संघाचा मलेशिया दौरा, २०२६|इंडोनेशियाचा मलेशिया दौरा]]
* [[ऑस्ट्रिया क्रिकेट संघाचा जर्मनी दौरा, २०२६|ऑस्ट्रियाचा जर्मनी दौरा]]
* [[आईल ऑफ मान क्रिकेट संघाचा गर्न्सी दौरा, २०२६|आईल ऑफ मानचा गर्न्सी दौरा]]
* [[झिम्बाब्वे महिला क्रिकेट संघाचा पाकिस्तान दौरा, २०२६|झिम्बाब्वे महिलांचा पाकिस्तान दौरा]]
* [[२०२६ हाँग काँग महिला तिरंगी मालिका|हाँग काँग महिला तिरंगी मालिका]]
* [[जिब्राल्टर क्रिकेट संघाचा माल्टा दौरा, २०२६|जिब्राल्टरचा माल्टा दौरा]]
* [[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक पूर्व आशिया-प्रशांत उप-प्रादेशिक पात्रता|पुरुष टी२० विश्वचषक पूर्व आशिया-प्रशांत उप-प्रादेशिक पात्रता]]
* [[फिनलंड क्रिकेट संघाचा सायप्रस दौरा, २०२६|फिनलंडचा सायप्रस दौरा]]
* [[बल्गेरिया क्रिकेट संघाचा रोमानिया दौरा, २०२६|बल्गेरियाचा रोमानिया दौरा]]
* [[डेन्मार्क महिला क्रिकेट संघाचा ग्रीस दौरा, २०२६|डेन्मार्क महिलांचा ग्रीस दौरा]]
* [[न्यू झीलंड महिला क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|न्यूझीलंड महिलांचा इंग्लंड दौरा]]
* [[पाकिस्तान क्रिकेट संघाचा बांगलादेश दौरा, २०२५–२६|पाकिस्तानचा बांगलादेश दौरा]]
* [[२०२६ नेपाळ तिरंगी मालिका (मे)|नेपाळ तिरंगी मालिका (मे)]]
* [[२०२६ आशियाई क्रीडा स्पर्धा महिला पात्रता#इंडोनेशिया महिला संघाचा मलेशिया दौरा|इंडोनेशिया महिलांचा मलेशिया दौरा]]
* [[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता अ|पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता अ]]
* [[२०२६ आशियाई क्रीडा स्पर्धा महिला पात्रता#नेपाळ महिला संघाचा मलेशिया दौरा|नेपाळ महिलांचा मलेशिया दौरा]]
* [[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक आफ्रिका उप-प्रादेशिक पात्रता अ|पुरुष टी२० विश्वचषक आफ्रिका उप-प्रादेशिक पात्रता अ]]
* [[२०२६ आशियाई क्रीडा स्पर्धा महिला पात्रता|आशियाई क्रीडा स्पर्धा महिला पात्रता]]
* [[न्यू झीलंड क्रिकेट संघाचा आयर्लंड दौरा, २०२६|न्यूझीलंडचा आयर्लंड दौरा]]
* [[२०२६ स्कॉटलंड महिला तिरंगी मालिका|स्कॉटलंड महिला तिरंगी मालिका]]
* [[२०२६ आयर्लंड महिला तिरंगी मालिका|आयर्लंड महिला तिरंगी मालिका]]
* [[भारतीय महिला क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|भारतीय महिलांचा इंग्लंड दौरा]]
* [[ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट संघाचा पाकिस्तान दौरा, २०२६|ऑस्ट्रेलियाचा पाकिस्तान दौरा]]
* [[बहरैन महिला क्रिकेट संघाचा ओमान दौरा (मलेशियामध्ये), २०२६|बहरैन महिलांचा ओमान दौरा (मलेशियामध्ये)]]
* [[कुवेत महिला क्रिकेट संघाचा म्यानमार दौरा (मलेशियामध्ये), २०२६|कुवेत महिलांचा म्यानमार दौरा (मलेशियामध्ये)]]
* [[२०२६ आशियाई क्रीडा स्पर्धा पुरुष पात्रता|आशियाई क्रीडा स्पर्धा पुरुष पात्रता]]
| group3 = जून २०२६
| list3 =
* [[२०२६ उबुंटू तिरंगी मालिका|उबुंटू तिरंगी मालिका]]
* [[२०२६ एसीसी महिला प्रीमियर चषक|एसीसी महिला प्रीमियर चषक]]
* [[२०२६ एसीसी पुरुष चॅलेंजर चषक|एसीसी पुरुष चॅलेंजर चषक]]
* [[श्रीलंका क्रिकेट संघाचा वेस्ट इंडीज दौरा, २०२६|श्रीलंकेचा वेस्ट इंडीज दौरा]]
* [[न्यू झीलंड क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|न्यूझीलंडचा इंग्लंड दौरा]]
* [[अफगाणिस्तान क्रिकेट संघाचा भारत दौरा, २०२६|अफगाणिस्तानचा भारत दौरा]]
* [[२०२६ कॅनडा तिरंगी मालिका|कॅनडा तिरंगी मालिका (१९वी फेरी)]]
* [[ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट संघाचा बांगलादेश दौरा, २०२६|ऑस्ट्रेलियाचा बांगलादेश दौरा]]
* [[२०२६ क्विबुका महिला टी२० स्पर्धा|क्विबुका महिला टी२० स्पर्धा]]
* [[२०२६ व्हायकिंग चषक|व्हायकिंग चषक]]
* [[२०२६ आयसीसी महिला टी२० विश्वचषक|२०२६ महिला टी२० विश्वचषक]]
* [[गर्न्सी महिला क्रिकेट संघाचा जर्सी दौरा, २०२६|गर्न्सी महिलांचा जर्सी दौरा]]
* [[माल्टा महिला क्रिकेट संघाचा सायप्रस दौरा, २०२६|माल्टा महिलांचा सायप्रस दौरा]]
* [[जर्मनी क्रिकेट संघाचा डेन्मार्क दौरा, २०२६|जर्मनीचा डेन्मार्क दौरा]]
* [[२०२६ नामिबिया टी२० तिरंगी मालिका|नामिबिया टी२० तिरंगी मालिका]]
* [[२०२६ पुरुष कॉन्टिनेंटल चषक|पुरुष कॉन्टिनेंटल चषक]]
* [[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक अमेरिका उप-प्रादेशिक पात्रता अ|पुरुष टी२० विश्वचषक अमेरिका उप-प्रादेशिक पात्रता अ]]
* [[२०२६ आशिया-प्रशांत क्रिकेट चॅम्पियन्स ट्रॉफी|आशिया-प्रशांत क्रिकेट चॅम्पियन्स ट्रॉफी]]
मध्य युरोप चषक
** [[२०२६ पुरुष मध्य युरोप चषक|पुरुष]]
** [[२०२६ महिला मध्य युरोप चषक|महिला]]
* [[सर्बिया महिला क्रिकेट संघाचा बल्गेरिया दौरा, २०२६|सर्बिया महिलांचा बल्गेरिया दौरा]]
* [[भारतीय क्रिकेट संघाचा आयर्लंड दौरा, २०२६|भारताचा आयर्लंड दौरा]]
* [[स्वित्झर्लंड महिला क्रिकेट संघाचा डेन्मार्क दौरा, २०२६|स्वित्झर्लंड महिलांचा डेन्मार्क दौरा]]
* [[ऑस्ट्रिया क्रिकेट संघाचा हंगेरी दौरा, २०२६|ऑस्ट्रियाचा हंगेरी दौरा]]
* [[बांगलादेश क्रिकेट संघाचा झिम्बाब्वे दौरा, २०२६|बांगलादेशचा झिम्बाब्वे दौरा]]
| group4 = जुलै २०२६
| list4 =
* [[पोर्तुगाल क्रिकेट संघाचा स्वीडन दौरा, २०२६|पोर्तुगालचा स्वीडन दौरा]]
* [[भारतीय क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|भारताचा इंग्लंड दौरा]]
* [[पोर्तुगाल क्रिकेट संघाचा फिनलंड दौरा, २०२६|पोर्तुगालचा फिनलंड दौरा]]
* [[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता ब|पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता ब]]
* [[स्वित्झर्लंड महिला क्रिकेट संघाचा जर्मनी दौरा, २०२६|स्वित्झर्लंड महिला क्रिकेट संघाचा जर्मनी दौरा]]
* [[वेस्ट इंडीज महिला क्रिकेट संघाचा आयर्लंड दौरा, २०२६|वेस्ट इंडीज महिलांचा आयर्लंड दौरा]]
* [[न्यू झीलंड क्रिकेट संघाचा वेस्ट इंडीज दौरा, २०२६|न्यूझीलंडचा वेस्ट इंडीज दौरा]]
* [[२०२६ कॅप्रिकॉर्न महिला चौरंगी मालिका|कॅप्रिकॉर्न महिला चौरंगी मालिका]]
* [[२०२६ नेदरलँड्स तिरंगी मालिका|नेदरलँड्स तिरंगी मालिका (२०वी फेरी)]]
* [[पाकिस्तान महिला क्रिकेट संघाचा श्रीलंका दौरा, २०२६|पाकिस्तान महिलांचा श्रीलंका दौरा]]
* [[भारतीय क्रिकेट संघाचा झिम्बाब्वे दौरा, २०२६|भारताचा झिम्बाब्वे दौरा]]
* [[२०२६ ईसीए पुरुष युरोपियन चषक|ईसीए पुरुष युरोपियन चषक]]
* [[फिनलंड महिला क्रिकेट संघाचा एस्टोनिया दौरा, २०२६|फिनलंड महिलांचा एस्टोनिया दौरा]]
* [[पाकिस्तान क्रिकेट संघाचा वेस्ट इंडीज दौरा, २०२६|पाकिस्तानचा वेस्ट इंडीज दौरा]]
* [[२०२६ स्वित्झर्लंड महिला चौरंगी मालिका|स्वित्झर्लंड महिला चौरंगी मालिका]]
* [[जर्सी महिला क्रिकेट संघाचा स्वित्झर्लंड दौरा, २०२६|जर्सी महिलांचा स्वित्झर्लंड दौरा]]
* [[कॅनडा महिला क्रिकेट संघाचा आर्जेंटिना दौरा, २०२६|कॅनडा महिलांचा आर्जेंटिना दौरा]]
* [[स्पेन महिला क्रिकेट संघाचा स्वित्झर्लंड दौरा, २०२६|स्पेन महिला क्रिकेट संघाचा स्वित्झर्लंड दौरा]]
* [[२०२६ क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग ब (टांझानिया)#बहरीनचा केन्या दौरा|बहरीनचा केन्या दौरा]]
| group5 = ऑगस्ट २०२६
| list5 =
* [[२०२६ स्कॉटलंड तिरंगी मालिका|स्कॉटलंड तिरंगी मालिका (२१वी फेरी)]]
* [[अफगाणिस्तान क्रिकेट संघाचा आयर्लंड दौरा, २०२६|अफगाणिस्तानचा आयर्लंड दौरा]]
* [[२०२६ पुरुष दक्षिण अमेरिकन अजिंक्यपद स्पर्धा|पुरुष दक्षिण अमेरिकन अजिंक्यपद स्पर्धा]]
* [[२०२६ क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग ब (टांझानिया)|क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग ब (टांझानिया)]]
* [[थायलंड महिला क्रिकेट संघाचा पापुआ न्यू गिनी दौरा, २०२६|थायलंड महिलांचा पापुआ न्यू गिनी दौरा]]
* [[२०२६ मलावी तिरंगी मालिका|मलावी तिरंगी मालिका]]
* [[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता क#जर्मनीचा फिनलंड दौरा|जर्मनीचा फिनलंड दौरा]]
* [[बांगलादेश क्रिकेट संघाचा ऑस्ट्रेलिया दौरा, २०२६|बांगलादेशचा ऑस्ट्रेलिया दौरा]]
* [[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता क|पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता क]]
* [[भारतीय क्रिकेट संघाचा श्रीलंका दौरा, २०२६|भारताचा श्रीलंका दौरा]]
* [[पाकिस्तान क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|पाकिस्तानचा इंग्लंड दौरा]]
* [[२०२६ महिला बेल्ट अँड रोड ट्रॉफी|महिला बेल्ट अँड रोड ट्रॉफी]]
* [[बेल्जियम महिला क्रिकेट संघाचा लक्झेंबर्ग दौरा, २०२६|बेल्जियम महिलांचा लक्झेंबर्ग दौरा]]
* [[२०२६ महिला कॉन्टिनेंटल चषक|महिला कॉन्टिनेंटल चषक]]
* [[२०२६ महिला नॉर्डिक चषक|महिला नॉर्डिक चषक]]
* [[नेदरलँड्स महिला क्रिकेट संघाचा स्कॉटलंड दौरा, २०२६|नेदरलँड्स महिलांचा स्कॉटलंड दौरा]]
* [[२०२६ नामिबिया टी२० तिरंगी मालिका (ऑगस्ट-सप्टेंबर)|नामिबिया आं.टी२० तिरंगी मालिका]]
* [[२०२६ महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक|महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक]]
* [[२०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक|एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक]]
| group6 = सप्टेंबर २०२६
| list6 =
* [[आयर्लंड महिला क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|आयर्लंड महिलांचा इंग्लंड दौरा]]
* [[२०२६ फॉलिंग विकेट्स चषक|फॉलिंग विकेट्स चषक]]
* [[२०२६ बाल्कन चषक (बेलग्रेड)|बाल्कन चषक]]
* [[२०२६ आफ्रिका कॉन्टिनेंटल चषक|आफ्रिका कॉन्टिनेंटल चषक]]
* [[दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचा नामिबिया दौरा, २०२६|दक्षिण आफ्रिकेचा नामिबिया दौरा]]
* [[मलेशिया महिला क्रिकेट संघाचा जपान दौरा, २०२६|मलेशिया महिलांचा जपान दौरा]]
* [[दक्षिण आफ्रिका महिला क्रिकेट संघाचा झिम्बाब्वे दौरा, २०२६|दक्षिण आफ्रिका महिलांचा झिम्बाब्वे दौरा]]
* [[अफगाणिस्तान विरुद्ध भारतीय क्रिकेट संघ भारतामध्ये, २०२६|भारत वि अफगाणिस्तान भारतामध्ये]]
* [[२०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक#संयुक्त अरब अमिरातीचा मलेशिया दौरा|यूएईचा मलेशिया दौरा]]
* [[ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट संघाचा झिम्बाब्वे दौरा, २०२६|ऑस्ट्रेलियाचा झिम्बाब्वे दौरा]]
* [[श्रीलंका क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|श्रीलंकेचा इंग्लंड दौरा]]
* [[हाँग काँग क्रिकेट संघाचा जपान दौरा, २०२६|हाँग काँगचा जपान दौरा]]
* [[भारतीय क्रिकेट संघाचा जपान दौरा, २०२६|भारताचा जपान दौरा]]
* [[२०२६ आशियाई खेळ]]
** [[२०२६ आशियाई खेळ#क्रिकेट - पुरुष स्पर्धा|पुरुष]]
** [[२०२६ आशियाई खेळ#क्रिकेट - महिला स्पर्धा|महिला]]
* [[२०२६ उत्तर अमेरिकन चषक|उत्तर अमेरिकन चषक]]
* [[२०२६ नायजेरिया चतुष्कोणी मालिका|नायजेरिया चतुष्कोणी मालिका]]
* [[२०२६ ईसीए महिला युरोपियन चषक|ईसीए महिला युरोपियन चषक]]
| group7 = सुरू असलेले
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* [[२०२५-२०२७ आयसीसी विश्व कसोटी अजिंक्यपद स्पर्धा|विश्व कसोटी अजिंक्यपद स्पर्धा]]
* [[२०२४-२०२६ आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक लीग २|क्रिकेट विश्वचषक लीग २]]
* [[२०२४-२०२६ आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग|क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग]]
* [[२०२५-२०२९ आयसीसी महिला चॅम्पियनशिप|महिला चॅम्पियनशिप]]
* [[असोसिएट आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६|असोसिएट टी२०आ क्रिकेट]]
| below = नंतरचा मोसम: [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६-२७]]
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[[Category:International cricket by year navigational boxes]]
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| name = आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६
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* [[२०२६ नेपाळ तिरंगी मालिका (एप्रिल)|नेपाळ तिरंगी मालिका (एप्रिल)]]
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* [[इंडोनेशिया क्रिकेट संघाचा मलेशिया दौरा, २०२६|इंडोनेशियाचा मलेशिया दौरा]]
* [[ऑस्ट्रिया क्रिकेट संघाचा जर्मनी दौरा, २०२६|ऑस्ट्रियाचा जर्मनी दौरा]]
* [[आईल ऑफ मान क्रिकेट संघाचा गर्न्सी दौरा, २०२६|आईल ऑफ मानचा गर्न्सी दौरा]]
* [[झिम्बाब्वे महिला क्रिकेट संघाचा पाकिस्तान दौरा, २०२६|झिम्बाब्वे महिलांचा पाकिस्तान दौरा]]
* [[२०२६ हाँग काँग महिला तिरंगी मालिका|हाँग काँग महिला तिरंगी मालिका]]
* [[जिब्राल्टर क्रिकेट संघाचा माल्टा दौरा, २०२६|जिब्राल्टरचा माल्टा दौरा]]
* [[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक पूर्व आशिया-प्रशांत उप-प्रादेशिक पात्रता|पुरुष टी२० विश्वचषक पूर्व आशिया-प्रशांत उप-प्रादेशिक पात्रता]]
* [[फिनलंड क्रिकेट संघाचा सायप्रस दौरा, २०२६|फिनलंडचा सायप्रस दौरा]]
* [[बल्गेरिया क्रिकेट संघाचा रोमानिया दौरा, २०२६|बल्गेरियाचा रोमानिया दौरा]]
* [[डेन्मार्क महिला क्रिकेट संघाचा ग्रीस दौरा, २०२६|डेन्मार्क महिलांचा ग्रीस दौरा]]
* [[न्यू झीलंड महिला क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|न्यूझीलंड महिलांचा इंग्लंड दौरा]]
* [[पाकिस्तान क्रिकेट संघाचा बांगलादेश दौरा, २०२५–२६|पाकिस्तानचा बांगलादेश दौरा]]
* [[२०२६ नेपाळ तिरंगी मालिका (मे)|नेपाळ तिरंगी मालिका (मे)]]
* [[२०२६ आशियाई क्रीडा स्पर्धा महिला पात्रता#इंडोनेशिया महिला संघाचा मलेशिया दौरा|इंडोनेशिया महिलांचा मलेशिया दौरा]]
* [[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता अ|पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता अ]]
* [[२०२६ आशियाई क्रीडा स्पर्धा महिला पात्रता#नेपाळ महिला संघाचा मलेशिया दौरा|नेपाळ महिलांचा मलेशिया दौरा]]
* [[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक आफ्रिका उप-प्रादेशिक पात्रता अ|पुरुष टी२० विश्वचषक आफ्रिका उप-प्रादेशिक पात्रता अ]]
* [[२०२६ आशियाई क्रीडा स्पर्धा महिला पात्रता|आशियाई क्रीडा स्पर्धा महिला पात्रता]]
* [[न्यू झीलंड क्रिकेट संघाचा आयर्लंड दौरा, २०२६|न्यूझीलंडचा आयर्लंड दौरा]]
* [[२०२६ स्कॉटलंड महिला तिरंगी मालिका|स्कॉटलंड महिला तिरंगी मालिका]]
* [[२०२६ आयर्लंड महिला तिरंगी मालिका|आयर्लंड महिला तिरंगी मालिका]]
* [[भारतीय महिला क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|भारतीय महिलांचा इंग्लंड दौरा]]
* [[ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट संघाचा पाकिस्तान दौरा, २०२६|ऑस्ट्रेलियाचा पाकिस्तान दौरा]]
* [[बहरैन महिला क्रिकेट संघाचा ओमान दौरा (मलेशियामध्ये), २०२६|बहरैन महिलांचा ओमान दौरा (मलेशियामध्ये)]]
* [[कुवेत महिला क्रिकेट संघाचा म्यानमार दौरा (मलेशियामध्ये), २०२६|कुवेत महिलांचा म्यानमार दौरा (मलेशियामध्ये)]]
* [[२०२६ आशियाई क्रीडा स्पर्धा पुरुष पात्रता|आशियाई क्रीडा स्पर्धा पुरुष पात्रता]]
| group3 = जून २०२६
| list3 =
* [[२०२६ उबुंटू तिरंगी मालिका|उबुंटू तिरंगी मालिका]]
* [[२०२६ एसीसी महिला प्रीमियर चषक|एसीसी महिला प्रीमियर चषक]]
* [[२०२६ एसीसी पुरुष चॅलेंजर चषक|एसीसी पुरुष चॅलेंजर चषक]]
* [[श्रीलंका क्रिकेट संघाचा वेस्ट इंडीज दौरा, २०२६|श्रीलंकेचा वेस्ट इंडीज दौरा]]
* [[न्यू झीलंड क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|न्यूझीलंडचा इंग्लंड दौरा]]
* [[अफगाणिस्तान क्रिकेट संघाचा भारत दौरा, २०२६|अफगाणिस्तानचा भारत दौरा]]
* [[२०२६ कॅनडा तिरंगी मालिका|कॅनडा तिरंगी मालिका (१९वी फेरी)]]
* [[ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट संघाचा बांगलादेश दौरा, २०२६|ऑस्ट्रेलियाचा बांगलादेश दौरा]]
* [[२०२६ क्विबुका महिला टी२० स्पर्धा|क्विबुका महिला टी२० स्पर्धा]]
* [[२०२६ व्हायकिंग चषक|व्हायकिंग चषक]]
* [[२०२६ आयसीसी महिला टी२० विश्वचषक|२०२६ महिला टी२० विश्वचषक]]
* [[गर्न्सी महिला क्रिकेट संघाचा जर्सी दौरा, २०२६|गर्न्सी महिलांचा जर्सी दौरा]]
* [[माल्टा महिला क्रिकेट संघाचा सायप्रस दौरा, २०२६|माल्टा महिलांचा सायप्रस दौरा]]
* [[जर्मनी क्रिकेट संघाचा डेन्मार्क दौरा, २०२६|जर्मनीचा डेन्मार्क दौरा]]
* [[२०२६ नामिबिया टी२० तिरंगी मालिका|नामिबिया टी२० तिरंगी मालिका]]
* [[२०२६ पुरुष कॉन्टिनेंटल चषक|पुरुष कॉन्टिनेंटल चषक]]
* [[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक अमेरिका उप-प्रादेशिक पात्रता अ|पुरुष टी२० विश्वचषक अमेरिका उप-प्रादेशिक पात्रता अ]]
* [[२०२६ आशिया-प्रशांत क्रिकेट चॅम्पियन्स ट्रॉफी|आशिया-प्रशांत क्रिकेट चॅम्पियन्स ट्रॉफी]]
*मध्य युरोप चषक
** [[२०२६ पुरुष मध्य युरोप चषक|पुरुष]]
** [[२०२६ महिला मध्य युरोप चषक|महिला]]
* [[सर्बिया महिला क्रिकेट संघाचा बल्गेरिया दौरा, २०२६|सर्बिया महिलांचा बल्गेरिया दौरा]]
* [[भारतीय क्रिकेट संघाचा आयर्लंड दौरा, २०२६|भारताचा आयर्लंड दौरा]]
* [[स्वित्झर्लंड महिला क्रिकेट संघाचा डेन्मार्क दौरा, २०२६|स्वित्झर्लंड महिलांचा डेन्मार्क दौरा]]
* [[ऑस्ट्रिया क्रिकेट संघाचा हंगेरी दौरा, २०२६|ऑस्ट्रियाचा हंगेरी दौरा]]
* [[बांगलादेश क्रिकेट संघाचा झिम्बाब्वे दौरा, २०२६|बांगलादेशचा झिम्बाब्वे दौरा]]
| group4 = जुलै २०२६
| list4 =
* [[पोर्तुगाल क्रिकेट संघाचा स्वीडन दौरा, २०२६|पोर्तुगालचा स्वीडन दौरा]]
* [[भारतीय क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|भारताचा इंग्लंड दौरा]]
* [[पोर्तुगाल क्रिकेट संघाचा फिनलंड दौरा, २०२६|पोर्तुगालचा फिनलंड दौरा]]
* [[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता ब|पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता ब]]
* [[स्वित्झर्लंड महिला क्रिकेट संघाचा जर्मनी दौरा, २०२६|स्वित्झर्लंड महिला क्रिकेट संघाचा जर्मनी दौरा]]
* [[वेस्ट इंडीज महिला क्रिकेट संघाचा आयर्लंड दौरा, २०२६|वेस्ट इंडीज महिलांचा आयर्लंड दौरा]]
* [[न्यू झीलंड क्रिकेट संघाचा वेस्ट इंडीज दौरा, २०२६|न्यूझीलंडचा वेस्ट इंडीज दौरा]]
* [[२०२६ कॅप्रिकॉर्न महिला चौरंगी मालिका|कॅप्रिकॉर्न महिला चौरंगी मालिका]]
* [[२०२६ नेदरलँड्स तिरंगी मालिका|नेदरलँड्स तिरंगी मालिका (२०वी फेरी)]]
* [[पाकिस्तान महिला क्रिकेट संघाचा श्रीलंका दौरा, २०२६|पाकिस्तान महिलांचा श्रीलंका दौरा]]
* [[भारतीय क्रिकेट संघाचा झिम्बाब्वे दौरा, २०२६|भारताचा झिम्बाब्वे दौरा]]
* [[२०२६ ईसीए पुरुष युरोपियन चषक|ईसीए पुरुष युरोपियन चषक]]
* [[फिनलंड महिला क्रिकेट संघाचा एस्टोनिया दौरा, २०२६|फिनलंड महिलांचा एस्टोनिया दौरा]]
* [[पाकिस्तान क्रिकेट संघाचा वेस्ट इंडीज दौरा, २०२६|पाकिस्तानचा वेस्ट इंडीज दौरा]]
* [[२०२६ स्वित्झर्लंड महिला चौरंगी मालिका|स्वित्झर्लंड महिला चौरंगी मालिका]]
* [[जर्सी महिला क्रिकेट संघाचा स्वित्झर्लंड दौरा, २०२६|जर्सी महिलांचा स्वित्झर्लंड दौरा]]
* [[कॅनडा महिला क्रिकेट संघाचा आर्जेंटिना दौरा, २०२६|कॅनडा महिलांचा आर्जेंटिना दौरा]]
* [[स्पेन महिला क्रिकेट संघाचा स्वित्झर्लंड दौरा, २०२६|स्पेन महिला क्रिकेट संघाचा स्वित्झर्लंड दौरा]]
* [[२०२६ क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग ब (टांझानिया)#बहरीनचा केन्या दौरा|बहरीनचा केन्या दौरा]]
| group5 = ऑगस्ट २०२६
| list5 =
* [[२०२६ स्कॉटलंड तिरंगी मालिका|स्कॉटलंड तिरंगी मालिका (२१वी फेरी)]]
* [[अफगाणिस्तान क्रिकेट संघाचा आयर्लंड दौरा, २०२६|अफगाणिस्तानचा आयर्लंड दौरा]]
* [[२०२६ पुरुष दक्षिण अमेरिकन अजिंक्यपद स्पर्धा|पुरुष दक्षिण अमेरिकन अजिंक्यपद स्पर्धा]]
* [[२०२६ क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग ब (टांझानिया)|क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग ब (टांझानिया)]]
* [[थायलंड महिला क्रिकेट संघाचा पापुआ न्यू गिनी दौरा, २०२६|थायलंड महिलांचा पापुआ न्यू गिनी दौरा]]
* [[२०२६ मलावी तिरंगी मालिका|मलावी तिरंगी मालिका]]
* [[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता क#जर्मनीचा फिनलंड दौरा|जर्मनीचा फिनलंड दौरा]]
* [[बांगलादेश क्रिकेट संघाचा ऑस्ट्रेलिया दौरा, २०२६|बांगलादेशचा ऑस्ट्रेलिया दौरा]]
* [[२०२६ पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता क|पुरुष टी२० विश्वचषक युरोप उप-प्रादेशिक पात्रता क]]
* [[भारतीय क्रिकेट संघाचा श्रीलंका दौरा, २०२६|भारताचा श्रीलंका दौरा]]
* [[पाकिस्तान क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|पाकिस्तानचा इंग्लंड दौरा]]
* [[२०२६ महिला बेल्ट अँड रोड ट्रॉफी|महिला बेल्ट अँड रोड ट्रॉफी]]
* [[बेल्जियम महिला क्रिकेट संघाचा लक्झेंबर्ग दौरा, २०२६|बेल्जियम महिलांचा लक्झेंबर्ग दौरा]]
* [[२०२६ महिला कॉन्टिनेंटल चषक|महिला कॉन्टिनेंटल चषक]]
* [[२०२६ महिला नॉर्डिक चषक|महिला नॉर्डिक चषक]]
* [[नेदरलँड्स महिला क्रिकेट संघाचा स्कॉटलंड दौरा, २०२६|नेदरलँड्स महिलांचा स्कॉटलंड दौरा]]
* [[२०२६ नामिबिया टी२० तिरंगी मालिका (ऑगस्ट-सप्टेंबर)|नामिबिया आं.टी२० तिरंगी मालिका]]
* [[२०२६ महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक|महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक]]
* [[२०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक|एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक]]
| group6 = सप्टेंबर २०२६
| list6 =
* [[आयर्लंड महिला क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|आयर्लंड महिलांचा इंग्लंड दौरा]]
* [[२०२६ फॉलिंग विकेट्स चषक|फॉलिंग विकेट्स चषक]]
* [[२०२६ बाल्कन चषक (बेलग्रेड)|बाल्कन चषक]]
* [[२०२६ आफ्रिका कॉन्टिनेंटल चषक|आफ्रिका कॉन्टिनेंटल चषक]]
* [[दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचा नामिबिया दौरा, २०२६|दक्षिण आफ्रिकेचा नामिबिया दौरा]]
* [[मलेशिया महिला क्रिकेट संघाचा जपान दौरा, २०२६|मलेशिया महिलांचा जपान दौरा]]
* [[दक्षिण आफ्रिका महिला क्रिकेट संघाचा झिम्बाब्वे दौरा, २०२६|दक्षिण आफ्रिका महिलांचा झिम्बाब्वे दौरा]]
* [[अफगाणिस्तान विरुद्ध भारतीय क्रिकेट संघ भारतामध्ये, २०२६|भारत वि अफगाणिस्तान भारतामध्ये]]
* [[२०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक#संयुक्त अरब अमिरातीचा मलेशिया दौरा|यूएईचा मलेशिया दौरा]]
* [[ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट संघाचा झिम्बाब्वे दौरा, २०२६|ऑस्ट्रेलियाचा झिम्बाब्वे दौरा]]
* [[श्रीलंका क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६|श्रीलंकेचा इंग्लंड दौरा]]
* [[हाँग काँग क्रिकेट संघाचा जपान दौरा, २०२६|हाँग काँगचा जपान दौरा]]
* [[भारतीय क्रिकेट संघाचा जपान दौरा, २०२६|भारताचा जपान दौरा]]
* [[२०२६ आशियाई खेळ]]
** [[२०२६ आशियाई खेळ#क्रिकेट - पुरुष स्पर्धा|पुरुष]]
** [[२०२६ आशियाई खेळ#क्रिकेट - महिला स्पर्धा|महिला]]
* [[२०२६ उत्तर अमेरिकन चषक|उत्तर अमेरिकन चषक]]
* [[२०२६ नायजेरिया चतुष्कोणी मालिका|नायजेरिया चतुष्कोणी मालिका]]
* [[२०२६ ईसीए महिला युरोपियन चषक|ईसीए महिला युरोपियन चषक]]
| group7 = सुरू असलेले
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* [[२०२५-२०२७ आयसीसी विश्व कसोटी अजिंक्यपद स्पर्धा|विश्व कसोटी अजिंक्यपद स्पर्धा]]
* [[२०२४-२०२६ आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक लीग २|क्रिकेट विश्वचषक लीग २]]
* [[२०२४-२०२६ आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग|क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग]]
* [[२०२५-२०२९ आयसीसी महिला चॅम्पियनशिप|महिला चॅम्पियनशिप]]
* [[असोसिएट आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६|असोसिएट टी२०आ क्रिकेट]]
| below = नंतरचा मोसम: [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६-२७]]
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[[Category:International cricket by year navigational boxes]]
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{{Infobox philosopher|name=अलेक्सांद्र दुगिन|caption=|birth_name=|birth_date={{Birth date and age|1962|1|7|df=y}}|birth_place=[[मॉस्को]], रशियन सोव्हिएत संघीय समाजवादी प्रजासत्ताक, सोव्हिएत संघ<ref name="Исаев">{{Cite book |last=Борис Исаев |url=https://books.google.com/books?id=-xqwS5t83nYC&pg=PA329 |date=2005 |publisher=Издательский дом "Питер" |isbn=978-5469006510 |page=329 |language=ru |script-title=ru:Геополитика: Учебное пособие}}</ref>|era=[[समकालीन तत्त्वज्ञान]]|region=[[रूसी तत्त्वज्ञान]]|school_tradition=[[नव-युरेशियावाद]]
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{{cite book
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| title = Culture, politics, and nationalism in the age of globalization
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| quote = Dugin defines 'thalassocracy' as 'power exercised thanks to the sea,' opposed to 'tellurocracy' or 'power exercised thanks to the land'{{nbsp}}... The 'thalassocracy' here is the United States and its allies; the 'tellurocracy' is Eurasia.
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'''अलिक्सांद्र गेल्यिविच दुगिन''' ( [[रशियन भाषा|रूसी]] ; Александр Гельевич Дугин; जन्म ७ जानेवारी १९६२) हा एक रूसी राजकीय तत्त्वज्ञ आहेत जो रूसी [[नव-युरेशियावाद|नव-युरेशियावादाचा]] प्रमुख सिद्धांतकार आहे.
दुगिन हा लष्करी गुप्तचर कुटुंबात जन्मलेला. १९८० च्या दशकात साम्यवादविरोधी भिन्नमतवादी होता, <ref name="andrey-tolstoy">{{जर्नल स्रोत|last=Tolstoy|first=Andrey|last2=McCaffray|first2=Edmund|year=2015|title=MIND GAMES: Alexander Dugin and Russia's War of Ideas|url=https://archive.org/details/sim_world-affairs-us_march-april-2015_177_6/page/25|journal=World Affairs|volume=177|issue=6|pages=25–30|issn=0043-8200}}</ref> आणि [[अति-दक्षिणपंथी राजकारण|अति-दक्षिणपंथी]] [[पामित (रशिया)|पामित]] संघटनेत सामील झाले. [[सोव्हिएत संघाचे विघटन|सोव्हिएत संघाच्या विघटनानंतर]], त्याने १९९३ मध्ये [[इदुआर्त लिमोनफ]] यांच्यासोबत [[राष्ट्रीय बोल्शेविकवाद|राष्ट्रीय बोल्शेविकवादाचे]] समर्थन करणाऱ्या [[राष्ट्रीय बोल्शेविक पक्ष|राष्ट्रीय बोल्शेविक पक्षाची]] सह-स्थापना केली आणि १९९८ मध्ये ती सोडली. <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.rferl.org/a/1058689.html|title=Russia: National Bolsheviks, The Party Of 'Direct Action'|date=29 April 2005|publisher=[[Radio Free Europe/Radio Liberty]]}}</ref> १९९७ मध्ये, दुगिनने त्याचे सर्वात प्रसिद्ध पुस्तक, ''[[भू-राजकारणाचे पायाभूत]] ( Основы геополитики )'' प्रकाशित केले, ज्यामध्ये त्याने अमेरिकेच्या नेतृत्वाखालील कथित प्रतिस्पर्धी [[अटलांटिकवाद|अटलांटिकवादी]] साम्राज्याला आव्हान देण्यासाठी रूसला युती आणि विजयाद्वारे आपला प्रभाव पुनर्निर्माण करण्याचे आवाहन केले. <ref name="guardian-bio">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.theguardian.com/world/2022/aug/21/alexander-dugin-who-putin-ally-apparent-car-bombing-target|title=Alexander Dugin: who is Putin ally and apparent car bombing target?|date=21 August 2022|website=[[The Guardian]]}}</ref> दुगिनने २००२ मध्ये [[युरेशिया पक्ष|युरेशिया पक्षाची]] स्थापना केली आणि ''[[चौथा राजकीय सिद्धांत]]'' ''( Четвертая политическая теория )'' (२००९) यासह अनेक पुस्तकांमध्ये आपली विचारधारा विकसित केली. <ref name="guardian-bio" /> <ref name="andrey-tolstoy" /> त्याची मते अति-दक्षिणपंथी<ref name="WP-20220512">{{स्रोत बातमी|last=Burton|first=Tara Isabella|url=https://www.washingtonpost.com/outlook/2022/05/12/dugin-russia-ukraine-putin/|title=The far-right mystical writer who helped shape Putin's view of Russia – Alexander Dugin sees the Ukraine war as part of a wider, spiritual battle between traditional order and progressive chaos.|date=12 May 2022|work=[[The Washington Post]]|access-date=21 August 2022}}</ref> <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.wsj.com/world/russia/alexander-dugin-russia-putin-trump-voters-1740f271|title=Meet the Russian Dubbed 'Putin's Brain' Who Is Courting Trump Supporters|last=Osipovich|first=Alexander|date=14 April 2025|website=WSJ|language=en-US|access-date=7 June 2025}}</ref> म्हणून ओळखली गेली आहेत. त्याने [[उदारमतवादी लोकशाही]] आणि [[मार्क्सवाद]] स्पष्टपणे नाकारले आणि रशियामध्ये [[युरोपीय प्रबोधनाचा काळ|प्रबोधनकाळी]] विचारांविरुद्ध "[[पुराणमतवाद|पुराणमतवादी]] क्रांती"चे समर्थन केले. त्याने [[रेने गेनों]], [[जुलीओ एवोला]], [[कार्ल श्मिट]] आणि [[मार्टिन हायडेगर]] यांच्या लेखनाचा आधार घेतला आहे.
दुगिन हा [[गिनादी सिलिज्नेव]] आणि नंतर [[सिर्गेई नरिष्कीन]] यांचे सुरुवातीचे सल्लागार होते. <ref>{{स्रोत पुस्तक|url=https://books.google.com/books?id=lZO4CAAAQBAJ|title=Eurasian Mission: An Introduction to Neo-Eurasianism|last=Dugin|first=Alexander|date=15 December 2014|publisher=Arktos|isbn=978-1-910524-24-4|page=26|language=en}}</ref> <ref>{{स्रोत बातमी|last=Shaun Walker|url=https://www.theguardian.com/world/2014/mar/23/ukraine-crimea-what-putin-thinking-russia|title=Ukraine and Crimea: what is Putin thinking?|date=23 March 2014|work=[[The Guardian]]}}</ref> त्यांनी २००९ ते २०१४ पर्यंत [[मॉस्को स्टेट युनिव्हर्सिटी|मॉस्को राज्य विद्यापीठात]] आंतरराष्ट्रीय संबंधांच्या समाजशास्त्र विभागाचे प्रमुख म्हणून काम केले, पण [[सन्मानाची क्रांती|मैदानाचे]] समर्थन करणाऱ्या उक्रेनींच्या मृत्यूची मागणी केल्यामुळे झालेल्या विरोधानंतर त्याने आपले पद गमावले. <ref name="BBC 2014">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bbc.com/russian/russia/2014/06/140630_dugin_msu_university_dismissal|date=30 June 2014|publisher=[[BBC Russian Service]]|language=ru|script-title=ru:Дугин хочет с помощью Путина прояснить свой статус в МГУ}}</ref> <ref>{{स्रोत पुस्तक|title=War for Eternity: The Return of Traditionalism and the Rise of the Populist Right|last=Benjamin R. Teitelbaum|publisher=Allen Lane|year=2020|pages=155–156}}</ref> २०२३ पासून ते मानवताच्या रूसी राज्य विद्यापीठ येथे इवान इल्यिन राजकारणाचे उच्च विद्यालयाचा संचालक म्हणून कार्यरत आहेत. <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.rsuh.ru/education/section_228/vpsh.php|title=Учебно-научный центр "Высшая политическая школа имени Ивана Ильина"|publisher=[[Russian State University for the Humanities]]|trans-title=Educational and scientific center—Ivan Ilyin Higher School of Politics|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20240220205705/https://www.rsuh.ru/education/section_228/vpsh.php|archive-date=20 February 2024|access-date=28 June 2024}}</ref>
दुगिन हा [[व्लादिमिर पुतिन|व्लादिमिर पुतिनचा]] एक कट्टर समर्थक आहे. <ref name="guardian-bio"/> जरी त्याचे क्रेमलिनशी कोणतेही अधिकृत संबंध नसले तरी, <ref name="reuters-bio">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.reuters.com/world/europe/who-is-alexander-dugin-russian-nationalist-whose-daughter-died-car-bomb-attack-2022-08-21/|title=Factbox: Alexander Dugin advocates a vast new Russian empire|date=21 August 2022|website=[[Reuters]]}}</ref> परदेशी माध्यमांमध्ये त्याला अनेकदा "पुतिनचा मेंदू" म्हणून संबोधले जाते; <ref name="brain">Multiple sources:
</ref> तर काहींच्या मते त्याचा प्रभाव खूपच अतिरंजित केला गेला आहे. <ref name="bloomberg">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bloomberg.com/news/articles/2022-08-21/russia-probes-car-bomb-that-killed-daughter-of-putin-ideologist|title=Russia Probes Car Bomb That Killed Daughter of Putin Ideologist|date=21 August 2022|website=[[Bloomberg News]]}}</ref> <ref name="reshaping">{{स्रोत पुस्तक|title=Eurasianism and the European Far Right : Reshaping the Europe-Russia Relationship|last=Laruelle|first=Marlène|date=2015|isbn=9781498510691|location=Lanham|page=59}}</ref> <ref name="underfire">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.lemonde.fr/en/international/article/2022/08/22/putin-under-fire-from-the-ultranationalists-after-daria-dugina-s-assassination_5994386_4.html|title=Putin under fire from the ultranationalists after Daria Dugina's assassination|date=22 August 2022|website=[[Le Monde]]}}</ref> <ref name="overestimates">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://providencemag.com/2019/07/west-overestimates-aleksandr-dugins-influence-russia/|title=The West Overestimates Aleksandr Dugin's Influence in Russia|last=Barros|first=George|date=8 July 2019|website=Providence|language=en-US|access-date=20 August 2022}}</ref> दुगिनने [[२०१४ मध्ये रशियाने क्रिमियाला केलेले सामिलीकरण|२०१४ मध्ये रशियाने केलेल्या क्रिमियाच्या समिलीकरणाला]] आणि २०२२ मध्ये [[युक्रेनवर रशियाचे आक्रमण (२०२२)|युक्रेनवर केलेल्या आक्रमणाला]] उघडपणे पाठिंबा दिला होता. त्याची मुलगी, [[दार्या दुगिना|दार्या]], हिची २० ऑगस्ट २०२२ रोजी एका वाहनाच्या बॉम्बस्फोटात हत्या केली. <ref>{{स्रोत बातमी|last=Barnes|first=Julian E.|url=https://www.nytimes.com/2022/10/05/us/politics/ukraine-russia-dugina-assassination.html|title=U.S. Believes Ukrainians Were Behind an Assassination in Russia|last2=Goldman|first2=Adam|last3=Entous|first3=Adam|last4=Schwirtz|first4=Michael|date=5 October 2022|work=The New York Times|language=en-US|issn=0362-4331|access-date=18 August 2024}}</ref> हा खून युक्रेनने केला असावा असा व्यापक विश्वास आहे, <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.cnn.com/2022/10/05/politics/us-intelligence-ukraine-dugina-assassination/index.html|title=US believes elements within Ukraine's government authorized assassination near Moscow, sources say {{!}} CNN Politics|last=Bertrand|first=Natasha|last2=Lillis|first2=Katie Bo|date=5 October 2022|website=CNN|language=en|access-date=18 August 2024}}</ref> <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.politico.eu/article/fsb-russia-blame-ukraine-murder-vladimir-putin-darya-dugina/|title=Russia blames Ukraine for murder of Putin ally's daughter|date=22 August 2022|website=POLITICO|language=en-GB|access-date=18 August 2024}}</ref> जरी मारेकऱ्यांचे युक्रेनियन सरकारशी नेमके संबंध काय होते हे निश्चित झालेले नाही.
== बालपण आणि शिक्षण ==
अलिक्सांद्र गेल्यिविच दुगिनचा जन्म ७ जानेवारी १९६२ रोजी मॉस्को येथे झाला. त्याचे वडील गेली अलिक्सांद्रोविच दुगिन हे सोव्हिएत लष्करी गुप्तचर संस्था [[मुख्य गुप्तचर संचालनालय (रशिया)|ग्ला. र. उ.]] मध्ये कर्नल-जनरल आणि कायद्याचे विद्यावचस्पती होते.<ref name="Literaturnaya">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.litrossia.ru/2007/15/01412.html|publisher=Литературная Россия|language=ru|script-title=ru:Доктор Дугин|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20121022031837/https://www.litrossia.ru/2007/15/01412.html|archive-date=22 October 2012|access-date=18 March 2012}}</ref> तो तीन वर्षांचा असताना त्याच्या वडिलांनी कुटुंबाला सोडून दिले, पण त्याने कुटुंबाचे राहणीमान चांगले राहील याची काळजी घेतली आणि प्रसंगी दुगिनला अधिकाऱ्यांच्या अडचणीतून बाहेर काढले. <ref>{{स्रोत पुस्तक|url=https://books.google.com/books?id=c5TBCwAAQBAJ|title=Black Wind, White Snow: The Rise of Russia's New Nationalism|last=Clover|first=Charles|date=26 April 2016|publisher=Yale University Press|isbn=978-0-300-22394-1|pages=234–235|language=en|quote=Dugin, who left Alexander's mother when his son was three. While Dugin had very little contact with the man after that, it does appear that his father loomed large in his life. Dugin has been vague in various interviews about his father's profession. He told me and others that Geli was a general in military intelligence (the GRU). But when pressed, he admitted he didn't actually know for a fact what he did. 'At the end of his life he worked for the customs police, but where he worked before that – he did not tell me. That I do not really know.' Dugin's friends, however, are adamant that his father must have been someone of rank within the Soviet system. For starters, the family had the accoutrements of prestige – a nice dacha, relatives with nice dachas, and access to opportunities. According to Dugin's close friend and collaborator Gaidar Dzhemal, Geli Dugin had, on more than one occasion, intervened from a high-ranking position in the Soviet state to get his son out of trouble.}}</ref> १९८३ मध्ये त्याच्या मुलाच्या वागणुकीमुळे त्याची सीमाशुल्क सेवेत बदली करण्यात आली <ref>{{स्रोत पुस्तक|url=https://books.google.com/books?id=c5TBCwAAQBAJ|title=Black Wind, White Snow: The Rise of Russia's New Nationalism|last=Clover|first=Charles|date=26 April 2016|publisher=Yale University Press|isbn=978-0-300-22394-1|language=en|quote=Alexander, Geli was transferred to the customs service after his son's detention in 1983 by the KGB.}}</ref>
१९७९ मध्ये अलिक्सांद्रने [[मॉस्को विमानचालन संस्था|मॉस्को विमानचालन संस्थेत]] प्रवेश घेतला. कमी शैक्षणिक कामगिरी, भिन्नतमतवादी कारवाया किंवा दोन्ही कारणांमुळे त्याला पदवीशिवाय काढून टाकले. <ref name="Backman_2020">{{स्रोत पुस्तक|title=Contestations of Liberal Order|last=Backman|first=Jussi|date=2020|publisher=Palgrave Macmillan|isbn=978-3-030-22059-4|editor-last=Lehti|editor-first=Marko|publication-place=Cham|pages=289–314|chapter=A Russian Radical Conservative Challenge to the Liberal Global Order: Aleksandr Dugin|doi=10.1007/978-3-030-22059-4_11|oclc=1112419471|editor-last2=Pennanen|editor-first2=Henna-Riikka|editor-last3=Jouhki|editor-first3=Jukka|chapter-url=http://urn.fi/URN:NBN:fi:jyu-201908263901}}</ref> त्यानंतर त्याने रस्ते साफ करण्याचे काम सुरू केले. त्याने [[रशियन राज्य ग्रंथालय|रशियन राज्य ग्रंथालयात]] प्रवेश मिळवण्यासाठी आणि अभ्यास सुरू ठेवण्यासाठी बनावट वाचक ओळखपत्र वापरला. मात्र, इतर स्रोतांनुसार त्याने त्याऐवजी [[केजीबी|केजीबीच्या]] अभिलेखागारात काम करण्यास सुरुवात केली, जिथे त्याला फ्रीमेसनवाद, फॅसिझम आणि मूर्तिपूजेवरील प्रतिबंधित साहित्य उपलब्ध होते. <ref name="Umland">{{जर्नल स्रोत|last=Umland|first=Andreas|date=July 2010|title=Aleksandr Dugin's Transformation from a Lunatic Fringe Figure into a Mainstream Political Publicist, 1980–1998: A Case Study in the Rise of Late and Post-Soviet Russian Fascism|journal=Journal of Eurasian Studies|language=en|volume=1|issue=2|pages=144–152|doi=10.1016/j.euras.2010.04.008|issn=1879-3665|doi-access=free}}</ref>
१९८० मध्ये, दुगिन "[[माम्लीव मंडळ]]" मध्ये सामील झाला, जो [[सैतानी धर्म]], [[गूढ नाझीवाद]] आणि गुप्त विद्येच्या इतर प्रकारांमध्ये रस घेणारा एक अग्रगामी भिन्नमतवादी गट होता. <ref>{{जर्नल स्रोत|last=Laruelle|first=Marlene|date=2015|title=The Iuzhinskii Circle: Far-Right Metaphysics in the Soviet Underground and Its Legacy Today|url=https://onlinelibrary.wiley.com/doi/10.1111/russ.12048|journal=The Russian Review|language=en|volume=74|issue=4|pages=563–580|doi=10.1111/russ.12048|url-access=subscription}}</ref> माम्लीव मंडळ सैतानी धर्म, आत्म्यांशी संवाद साधण्याचे विधी, गूढविद्या, संमोहन, वीजा बोर्ड, सूफी पंथ, समाधी, इ. सर्व गूढ गोष्टींवरील भक्तीसाठी कुप्रसिद्ध झाले. <ref>{{स्रोत पुस्तक|url=https://books.google.com/books?id=QdHADwAAQBAJ|title=War for Eternity: The Return of Traditionalism and the Rise of the Populist Right|last=Teitelbaum|first=Benjamin R.|date=21 April 2020|publisher=Penguin Books Limited|isbn=978-0-14-199204-4|pages=41|language=en}}</ref> <ref>{{स्रोत पुस्तक|url=https://books.google.com/books?id=c5TBCwAAQBAJ|title=Black Wind, White Snow: The Rise of Russia's New Nationalism|last=Clover|first=Charles|date=26 April 2016|publisher=Yale University Press|isbn=978-0-300-22394-1|language=en|quote=}}</ref> गटात, तो [[नाझीवाद|नाझीवादाच्या]] स्वीकारासाठी ओळखला जात होता, ज्याचे श्रेय तो [[ॲडॉल्फ हिटलर|हिटलरबद्दलच्या]] खऱ्या सहानुभूतीऐवजी त्याच्या सोव्हिएत संगोपनाविरुद्धच्या बंडाला देतो. <ref>{{स्रोत पुस्तक|url=https://books.google.com/books?id=c5TBCwAAQBAJ|title=Black Wind, White Snow: The Rise of Russia's New Nationalism|last=Clover|first=Charles|date=26 April 2016|publisher=Yale University Press|isbn=978-0-300-22394-1|language=en|quote=Dugin is very forthright about his early Nazi antics, which he says were more about his total rebellion against a stifling Soviet upbringing than any real sympathy for Hitler. Still, virtually everyone who remembers Dugin from his early years brings it up.}}</ref> त्याने "हान्स जीवस" नावाचे एक [[गुप्त ओळख]] धारण केले, जे अलौकिक गोष्टींचा अभ्यास करणाऱ्या नाझी संशोधक [[वुल्फ्राम जीवस|वुल्फ्राम जीवसच्या]] नावावरून घेतले होते. <ref>{{स्रोत पुस्तक|url=https://books.google.com/books?id=c5TBCwAAQBAJ|title=Black Wind, White Snow: The Rise of Russia's New Nationalism|last=Clover|first=Charles|date=26 April 2016|publisher=Yale University Press|isbn=978-0-300-22394-1|language=en|quote=He adopted the nom de plume 'Hans Sievers', which added a hint of Teutonic severity to an already colourful and fairly camp militaristic–folklore style. The impression he created was, as his later collaborator Eduard Limonov described it, a 'picture of Oscar Wildean ambiguity'. Sievers was not just a stage name: it was a complete persona and alter ego. This was painstakingly composed of as many antisocial elements as its creator could find – a total and malevolent rebellion not just against the Soviet Union, but against convention and public taste as a whole: his namesake, Wolfram Sievers}}</ref>
स्वतः अभ्यास करत [[इटालियन]], [[जर्मन]], [[फ्रेंच]], [[इंग्रजी]], <ref>{{स्रोत पुस्तक|url=https://books.google.com/books?id=c5TBCwAAQBAJ|title=Black Wind, White Snow: The Rise of Russia's New Nationalism|last=Clover|first=Charles|date=26 April 2016|publisher=Yale University Press|isbn=978-0-300-22394-1|language=en|quote=In the evenings he read voraciously, learned to speak Italian, German, French and English, played the guitar and wrote songs.}}</ref> आणि [[स्पॅनिश]] बोलायला शिकला. <ref>{{Cite AV media}} </ref> तो [[रेने गेनों]] आणि [[परंपरावाद (शाश्वतवाद)|परंपरावादी पंथाकडून]] प्रभावित झाला होता. रशियन राज्य ग्रंथालयात त्याला [[जुलिओ एवोला|जुलिओ एवोलाचे]] लेखन सापडले, ज्यांचे पुस्तक ''मूर्तिपूजक साम्राज्यवाद'' याचे त्याने रशियन भाषेत अनुवाद केला. <ref name="Shenfield_2001">{{स्रोत पुस्तक|title=Russian Fascism: Traditions, Tendencies, Movements|last=Shenfield|first=Stephen D.|publisher=M.E. Sharpe|year=2001|isbn=9780765611642|page=192}}</ref> <ref>{{स्रोत पुस्तक|url=https://books.google.com/books?id=QdHADwAAQBAJ|title=War for Eternity: The Return of Traditionalism and the Rise of the Populist Right|last=Teitelbaum|first=Benjamin R.|date=21 April 2020|publisher=Penguin Books Limited|isbn=978-0-14-199204-4|pages=43|language=en}}</ref>
== कारकीर्द आणि राजकीय विचार ==
१९८० च्या दशकात, दुगिन एक भिन्नमतवादी<ref name="Clover">{{स्रोत बातमी|last=Charles Clover|url=https://www.ft.com/intl/cms/s/2/2917c3ec-edb2-11e0-a9a9-00144feab49a.html|title=Putin's grand vision and echoes of '1984'|date=5 October 2011|work=[[Financial Times]]}} In Russian: {{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://inosmi.ru/politic/20111005/175584070.html|last=Чарльз Кловер|date=6 October 2011|publisher=[[inoSMI]]|language=ru|script-title=ru:Грандиозные планы Путина и отголоски "1984"}}</ref> आणि साम्यवादविरोधी होता. <ref name="Neef">{{स्रोत बातमी|last=Christian von Neef|url=https://www.spiegel.de/spiegel/print/d-128101577.html|title=Jeder Westler ist ein Rassist|date=14 July 2014|work=[[Der Spiegel]]|language=de|issue=29}} In Russian: {{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://inosmi.ru/russia/20140716/221706180.html|last=Кристиан Нееф|date=16 July 2014|publisher=InoSMI|language=ru|script-title=ru:Дугин: На Западе все расисты}}</ref> [[१९८९ च्या क्रांत्या|साम्यवादाच्या पतनाच्या]] काही काळ आधी राजकारणात सक्रिय होण्यापूर्वी दुगिनने पत्रकार म्हणून काम केले होते. १९८८ मध्ये, तो आणि त्याचा मित्र गेदार झेमल हे [[पामित (रशिया)|पामित]] ("स्मृती") नावाच्या [[अतिराष्ट्रवादी]] आणि [[ज्यूविरोध|ज्यूविरोधी]] गटात होता. <ref name="Backman_2020"/> १९९० च्या दशकाच्या सुरुवातीला थोड्या काळासाठी तो नव्याने स्थापन झालेल्या [[रशियन संघराज्याचा साम्यवादी पक्षा|रशियन संघराज्याच्या साम्यवादी पक्षाचे]] नेते [[गिनादी झुगानफ|गिनादी झुगानफच्या]] जवळचा होता आणि कदाचित त्याची राष्ट्रवादी साम्यवादी विचारधारा तयार करण्यात त्याची भूमिका होती. <ref name="Shenfield_2001"/> <ref name="Dunlop">{{जर्नल स्रोत|last=John Dunlop|date=January 2004|title=Aleksandr Dugin's Foundations of Geopolitics|url=https://www2.gwu.edu/~ieresgwu/assets/docs/demokratizatsiya%20archive/GWASHU_DEMO_12_1/John%20Dunlop%20Aleksandr%20Dugin%27s%20Foundations%20of%20Geopolitics.pdf|journal=[[Demokratizatsiya (journal)|Demokratizatsiya]]|volume=12|issue=1|page=41|archive-url=https://web.archive.org/web/20160607175004/https://www2.gwu.edu/~ieresgwu/assets/docs/demokratizatsiya%20archive/GWASHU_DEMO_12_1/John%20Dunlop%20Aleksandr%20Dugin%27s%20Foundations%20of%20Geopolitics.pdf|archive-date=7 June 2016|access-date=14 March 2022|quote='It is especially important,' Dugin adds, 'to introduce geopolitical disorder into internal American activity, encouraging all kinds of separatism and ethnic, social and racial conflicts, actively supporting all dissident movements—extremist, racist, and sectarian groups, thus destabilizing internal political processes in the U.S.'}}</ref> १९९३ मध्ये त्यांनी [[एदुआर्द लिमोनफ|एदुआर्द लिमोनफच्यासोबत]] [[राष्ट्रीय बोल्शेविक पक्ष|राष्ट्रीय बोल्शेविक पक्षाची]] सह-स्थापना केली, ज्याचा बोल्शेविवादाचा राष्ट्रवादी अर्थ [[अर्न्स्ट नीकिश|अर्न्स्ट नीकिशच्या]] विचारांवर आधारित होता. लिमोनफच्याशी झालेल्या वादानंतर त्यांनी १९९८ मध्ये पक्ष सोडला. <ref name="Backman_2020" />
=== प्रकाशन कारकीर्द ===
दुगिनने १९९७ मध्ये ''[[भू-राजकारणाचे पायाभूत]]'' हे पुस्तक प्रकाशित केले. हे पुस्तक अनेक आवृत्त्यांमध्ये प्रकाशित झाले आहे, आणि भू-राजकारणावरील विद्यापीठाच्या अभ्यासक्रमांमध्ये वापरले जाते, <ref name="Umland"/> ज्यामध्ये रशियन लष्कराच्या जनरल अधिकारी अकादमीत असल्याचे म्हटले जाते. <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://foreignpolicy.com/2016/07/27/geopolitics-russia-mackinder-eurasia-heartland-dugin-ukraine-eurasianism-manifest-destiny-putin/|title=The Unlikely Origins of Russia's Manifest Destiny|date=27 July 2016|website=Foreign Policy|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20160727220120/https://foreignpolicy.com/2016/07/27/geopolitics-russia-mackinder-eurasia-heartland-dugin-ukraine-eurasianism-manifest-destiny-putin/|archive-date=27 July 2016|access-date=23 October 2017}}</ref> यामुळे अमेरिकेतील राज्यशास्त्रज्ञ घाबरले, <ref name="HI01">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.hoover.org/research/russias-new-and-frightening-ism|title=Russia's New—and Frightening—"Ism"|last=Dunlop|first=John B.|date=30 July 2004|website=[[Hoover Institution]]|access-date=12 October 2017}}</ref> आणि कधीकधी ते याला "रशियाचे [[मॅनिफेस्ट डेस्टिनी]]" म्हणून संबोधतात. <ref name=":0">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://foreignpolicy.com/2016/07/27/geopolitics-russia-mackinder-eurasia-heartland-dugin-ukraine-eurasianism-manifest-destiny-putin/|title=The Unlikely Origins of Russia's Manifest Destiny|date=27 July 2016|website=Foreign Policy|access-date=23 October 2017}}</ref> १९९७ मध्ये, त्याच्या "फॅसिझम – सीमाविरहित आणि लाल" या लेखात, त्याने रशियामध्ये "खऱ्या, अस्सल, मूलतः क्रांतिकारक आणि सुसंगत, फॅसिस्ट फॅसिझम"च्या विकासाला "राष्ट्रीय भांडवलशाही" प्रतिबंध करते असे वर्णन केले. त्याचा असा विश्वास आहे की, "[[नाझीवाद|राष्ट्रीय समाजवादाच्या]] वंशवादी आणि राष्ट्रवादाच्या पैलूंनी त्याच्या विचारधारेचे स्वरूप मुळीच निश्चित केले नाही. जर्मनीमधील या विचारधारेचा अतिरेक हा केवळ जर्मन लोकांचाच प्रश्न आहे... तर रशियन फॅसिझम हे नैसर्गिक राष्ट्रीय पुराणमतवाद आणि खऱ्या बदलांची तीव्र इच्छा यांचे मिश्रण आहे." <ref name="Andreas">{{स्रोत बातमी|last=Andreas Umland|url=https://www.hurriyetdailynews.com/will-united-russia-become-a-fascist-party.aspx?pageID=438&n=will-united-russia-become-a-fascist-party-2008-04-15|title=Will United Russia become a fascist party?|date=15 April 2008|work=[[Hürriyet Daily News]]|author-link=Andreas Umland}}</ref> त्याच्या मते, "[[वाफन-एसएस]] आणि खास करून या संघटनेचा वैज्ञानिक विभाग, [[आननेर्बे]] ," हे "राष्ट्रीय समाजवादी राजवटीच्या चौकटीतील एक बौद्धिक मरुद्यान" होते. <ref name="Andreas" />
दुगिनने लवकरच ''[[इलिमिंती (रशिया)|इलिमिंती]]'' नावाचे स्वतःचे नियतकालिक प्रकाशित करण्यास सुरुवात केली, ज्याची सुरुवात पहिले फ्रांसी-बेल्जियन [[जां-फ्रान्स्वा तिर्यार|जां-फ्रान्स्वा तिर्यारची]] प्रशंसा करण्यापासून झाली, जो उशिरा "युरो-सोव्हिएत साम्राज्याचा " समर्थक बनला होता, जे "[[डब्लिन|डब्लिनपासून]] [[व्लादिवोस्तॉक|व्लादिवोस्तॉकपर्यंत]] पसरेल आणि दक्षिणेकडेही विस्तार करणे आवश्यक असेल, कारण त्याला हिंदी महासागरावर एका बंदराची गरज आहे." [[रशियन साम्राज्य|झारशाही]] आणि स्टालिनवादी सोव्हिएत रशिया या दोन्हींचे सातत्याने गौरव करण्याबरोबरच, ''इलिमिंती'' [[जुलिओ एवोला|जुलिओ एवोलाबद्दलही]] आपली प्रशंसा व्यक्त केली. दुगिनने पूर्वी [[अलेक्सांद्र प्रोखानफ|अलेक्सांद्र प्रोखानफच्या]] दिग्दर्शनाखाली असलेल्या ''देन'' (दिवस) या साप्ताहिक नियतकालिकाबरोबरही काम केले. त्या नियतकालिकात त्याला बेल्जियन नाझी सहकारी लेओं देग्रेलेची त्याच्या मृत्यूपूर्वी सहा महिने आधीची शेवटची मुलाखत मिळाली.
दुगिन रोमानियन-फ्रेंच लेखक [[जां पार्वुलेस्को|जां पार्वुलेस्कोच्याकडून]] खूप प्रभावित झाले होते. त्याला उदारमतवाद आणि पाश्चात्त्य जग, खास करून अमेरिकेच्या वर्चस्व आवडत नाही. तो ठामपणे सांगतो: "आम्ही [[जोसेफ स्टॅलिन|स्टॅलिन]] आणि [[सोव्हिएत संघ|सोव्हिएत संघाच्या]] बाजूने आहोत". तो स्वतःला रूढीवादी म्हणून वर्णन करतो: "आम्हा रूढिवाद्यांना एक मजबूत, भक्कम राज्य, सुव्यवस्था आणि निरोगी कुटुंब, सकारात्मक मूल्ये, तसेच समाजात धर्म आणि चर्चचे महत्त्व अधिक दृढ करायचे आहे". तो पुढे म्हणतो: "आम्हाला देशभक्त रेडिओ, टीव्ही, देशभक्त तज्ञ, देशभक्त संस्थे हवे आहेत. आम्हाला अशी माध्यमे हवी आहेत जी राष्ट्रीय हित व्यक्त करतील".
दुगिन [[मार्टिन हायडेगर|मार्टिन हायडेगरच्या]] ''[[डासाइन]]'' (अस्तित्व) या संकल्पनेचा स्वीकारतो आणि तिचे भू-तात्विक संकल्पनेत रूपांतर करतो. <ref name="DuginDaesin">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.ereticamente.net/2018/03/ereticamente-intervista-aleksandr-dugin-a-cura-di-eduardo-zarelli.html|title=''Ereticamente'' intervista Aleksandr Dugin, a cura di Eduardo Zarelli|date=31 March 2018|website=Ereticamente.net|language=it|trans-title=''Ereticamente'' interviews Aleksandr Dugin, edited by Eduardo Zarelli|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20200803150104/https://www.ereticamente.net/2018/03/ereticamente-intervista-aleksandr-dugin-a-cura-di-eduardo-zarelli.html|archive-date=3 August 2020|access-date=27 April 2020}}</ref> दुगिनच्या मते, उदारमतवादी आणि [[भांडवलशाही|भांडवलवादी]] पाश्चात्य संस्कृतीच्या शक्ती म्हणजे [[ग्रीक संस्कृती|प्राचीन ग्रीकांनी]] ज्याला ''ὕβρις'' (उब्रिस, अहंकार) म्हटले आहे, म्हणजेच "तीतानवादाचे सारभूत स्वरूप" (आदर्शविरोधी स्वरूप), जे स्वर्गाला ("आदर्श स्वरूप—अवकाश, काळ, अस्तित्व यांच्या संदर्भात") विरोध करते. म्हणजेच, पश्चिमेचा सारांश 'स्वर्गाविरुद्ध पृथ्वीचे बंड' असे मांडल्या जाऊ शकते. दुगिन ज्याला पाश्चिमात्य जगाचा "अणूकरण करणारा" सार्वभौमवाद म्हणतात, त्याच्या विरुद्ध "साम्राज्य" या राजकीय कल्पनेत व्यक्त होणारा [[निषेधात्मक ब्रह्मविद्या|निषेधात्मक]] सार्वभौमवाद मांडतात. <ref name="DuginDaesin" /> लोकशाही, मानवाधिकार आणि व्यक्तिवाद ही मूल्ये सार्वत्रिक नसून केवळ पाश्चिमात्य आहेत, असे तो मानतो. <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.salon.com/2018/05/05/did-philosopher-alexander-dugin-aka-putins-brain-shape-the-2016-election/|title=Did philosopher Alexander Dugin, aka "Putin's brain," shape the 2016 election?|date=5 May 2018}}</ref>
==== युरेशियावाद, आणि भू-राजकारणावरील दृष्टिकोन ====
दुगिनने अमेरिकेच्या नेतृत्वाखालील पाश्चात्य जगाशी लढण्यास सक्षम असलेल्या "युरो-आशियाई साम्राज्या"च्या स्थापनेचा सिद्धांत मांडला आहे. <ref name="Anton1">{{जर्नल स्रोत|last=Shekhovtsov|first=Anton|year=2009|title=Aleksandr Dugin's Neo-Eurasianism: The New Right à la Russe|url=https://www.mod-langs.ox.ac.uk/russian/nationalism/shekhovtsov2.html|journal=Religion Compass: Political Religions|volume=3|pages=697–716|doi=10.1111/j.1749-8171.2009.00158.x|url-access=subscription|archive-url=https://web.archive.org/web/20201103021517/https://www.mod-langs.ox.ac.uk/russian/nationalism/shekhovtsov2.html|archive-date=3 November 2020|access-date=24 February 2015}}</ref> <ref name="Ingram1">{{जर्नल स्रोत|last=Ingram|first=Alan|date=November 2001|title=Alexander Dugin: geopolitics and neo-fascism in post-Soviet Russia|url=https://archive.org/details/sim_political-geography_2001-11_20_8/page/1029|journal=[[Political Geography (journal)|Political Geography]]|volume=20|issue=8|pages=1029–1051|doi=10.1016/S0962-6298(01)00043-9}}</ref> <ref>{{स्रोत पुस्तक|title=Russian Fascism: Traditions, Tendencies, Movements|last=Stephen Shenfield|publisher=[[M. E. Sharpe]]|year=2001|pages=195}}</ref> या संदर्भात, ते १९९३ ते १९९८ पर्यंत ( [[एदुआर्द लिमोनफ]] सोबत) [[अतिराष्ट्रवाद|अतिराष्ट्रवादी]] [[राष्ट्रीय बोल्शेविक पक्ष|राष्ट्रीय बोल्शेविक पक्षाचे]] संघटक आणि पहिले नेते होते आणि त्यानंतर [[राष्ट्रीय बोल्शेविक आघाडी]] आणि [[युरेशिया पक्ष|युरेशिया पक्षाचेही]] संघटक होते, जी नंतर एक गैर-सरकारी संघटना बनली. त्यामुळे दुगिनच्या युरेशियाई विचारधारेचे उद्दिष्ट सर्व रशियन-भाषिकांना एकाच देशात एकत्र करणे आहे. <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.theage.com.au/politics/federal/beware-the-rise-of-russias-new-imperialism-20080820-3yw6.html?page=-1|title=Beware the rise of Russia's new imperialism|last=Robert Horvath|date=21 August 2008|website=[[The Age]]|access-date=27 April 2020}}</ref> <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://echo.msk.ru/programs/personalno/532383-echo/|title=Вопросы к интервью – В ГОСТЯХ:Александр Дугин|date=8 August 2008|website=[[Echo of Moscow]]|language=ru|trans-title=Questions for the interview – GUEST: Alexander Dugin|access-date=27 April 2020}}</ref>
१९९० च्या दशकाच्या सुरुवातीला, [[राष्ट्रीय बोल्शेविक आघाडी|राष्ट्रीय बोल्शेविक आघाडीतील]] दुगिनच्या कामामध्ये २०व्या शतकाच्या पूर्वार्धातील राष्ट्रीय चळवळींची मुळे आणि समर्थक गूढ गटांच्या कारवायांवरील संशोधनाचा समावेश होता. [[ओर्दो तेम्प्ली ओरीएन्तीस|ओर्दो तेम्प्ली ओरीएन्तीसच्या]] फ्रान्समधील शाखेचे तत्कालीन सदस्य [[क्रिस्तियां बुशे]] <ref>The Ordo Templi Orientis Phenomenon. [https://oto.ru/cgi-bin/article.pl?eng/articles/russia/cr_rus_books.txt "Mega Therion and his books in the Russian tradition"]. {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20181224220135/https://www.oto.ru/cgi-bin/article.pl?eng%2Farticles%2Frussia%2Fcr_rus_books.txt}}. ''[[Ordo Templi Orientis]]''. Russia</ref> यांच्यासोबत भागीदारी करून आणि आशिया व युरोपमधील [[राष्ट्रवाद|राष्ट्रवादी]] आणि स्थलांतरित-एकात्मिक हित गटांवर आधारित, ते [[आंतरराष्ट्रीय संबंध|आंतरराष्ट्रीय राजकारण]] रशियाच्या [[युरेशियावाद|युरेशियाई]] भू-राजकीय संकल्पनेच्या जवळ आणण्यास हातभार लावतात.
दुगिनने जर्मन [[आननेर्बे|आननेर्बेच्या]] संस्थापकांपैकी एक, वादग्रस्त डच विचारवंत [[हर्मन विर्थ]] (१८८५-१९८१) च्या भू-राजकीय, संकेतशास्त्रीय आणि गूढ सिद्धांतांचा अभ्यास करण्यात दोन वर्षे घालवली. याचा परिणाम म्हणून ''हायपरबोरियन सिद्धांत'' (१९९३) हे पुस्तक प्रकाशित झाले, ज्यामध्ये दुगिनने त्याच्या [[युरेशियावाद|युरेशियावादाचा]] संभाव्य पाया म्हणून विर्थच्या कल्पनांना मोठ्या प्रमाणात समर्थन दिले. <ref>Aleksandr G. Dugin, ''Hyperborean Theory: The Experience of Ariosophical Research'' (''Giperboreiskaia teoriia: Opit ariosofskogo issledovaniia''), Moscow 1993; Aleksandr G. Dugin, [https://eurasianist-archive.com/2017/10/26/herman-wirth-and-the-sacred-proto-language-of-humanity-in-search-of-the-holy-grail-of-meanings-part-1/ "Herman Wirth and the Sacred Proto-Language of Humanity: In Search of the Holy Grail of Meanings"] (transl. Jafe Arnold), in: Dugin, ''Philosophy of Traditionalism'' (''[https://hadit.ru/wp-content/uploads/2018/08/filosofiya_traditcionalizma.pdf Filosofiia Traditsionalizma] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20220810030312/https://hadit.ru/wp-content/uploads/2018/08/filosofiya_traditcionalizma.pdf }}''), Moscow 2002, p. 135–167; Aleksandr G. Dugin, '[https://www.geopolitica.ru/en/article/herman-wirths-theory-civilization "Herman Wirth's Theory of Civilization"] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20200406133935/https://www.geopolitica.ru/en/article/herman-wirths-theory-civilization |date=2020-04-06 }} (transl. Jafe Arnold), in: Dugin, ''Noomakhia: Wars of the Mind'', vol. 14: ''[https://eurasianist-archive.com/2019/03/13/noomachy-geosophy-horizons-and-civilizations/ Geosophy – Horizons and Civilizations]'' (''Noomakhia: voinii uma'', vol. 14: ''[https://vk.com/doc271202244_442956464?hash=543b5afd7eceb011ca&dl=0eafc0be95f0950b38 Geosofiia: gorizonti i tsivilizatsii]''), Moscow 2017, p. 153–157.</ref> वरवर पाहता, हा "कोणत्याही भाषेतील विर्थच्या सर्वात विस्तृत सारांशांपैकी आणि विवेचनांपैकी एक" आहे. <ref>Jafe Arnold, ''[https://www.academia.edu/40386287/Mysteries_of_Eurasia_The_Esoteric_Sources_of_Alexander_Dugin_and_the_Yuzhinsky_Circle Mysteries of Eurasia: The Esoteric Sources of Alexander Dugin and the Yuzhinsky Circle]'', Research Masters Thesis, Amsterdam 2019, p. 72–73. Cf. Marlene Laruelle, ''[https://books.google.com/books?id=SjZyDwAAQBAJ&pg=PT100 Russian Nationalism: Imaginaries, Doctrines, and Political Battlefields]'', Abington, Oxfordshire / New York 2019, p. 95–133 (A Textbook Case of Doctrinal Entrepreneurship: Aleksandr Dugin) (download [https://azpdf.tips/russian-nationalism-imaginaries-doctrines-and-political-battlefields-pdf-free.html here]). Ibidem, '[https://books.google.com/books?id=W0SCDwAAQBAJ&pg=PA157 Alexander Dugin and Eurasianism]', in: Mark Sedgwick (ed.), ''Key Thinkers of the Radical Right: Behind the New Threat to Liberal Democracy'', Oxford 2019, p. 155–169, 157, 159. Jacob Christiansen Senholt, [https://books.google.com/books?id=f1t_BAAAQBAJ&pg=PA253 "Radical Politics and Political Esotericism: The Adaption of Esoteric Discourse within the Radical Right"], in: Egil Asprem, Kennet Granholm (red.), ''Contemporary Esotericism'', Abbington, Oxfordshire / New York 2013, p. 244–264, 252–254. Jafe Arnold, [https://www.academia.edu/40386449/Alexander_Dugin_and_Western_Esotericism_The_Challenge_of_the_Language_of_Tradition "Alexander Dugin and Western Esotericism: The Challenge of the Language of Tradition"], in: ''Mondi: Movimenti Simbolici e Sociali dell'Uomo'' 2 (2019), p. 33–70.</ref> मोल्दोव्हन मानववंशशास्त्रज्ञ लेओनिद मोस्योन्यिकच्या मते, विर्थच्या उघडपणे विक्षिप्त कल्पना साम्यवाद, उदारमतवाद आणि लोकशाहीच्या पतनानंतर निर्माण झालेल्या वैचारिक पोकळीत अगदी चपखल बसल्या. <ref>Highly critical of Dugin's enthousiasm for Wirth: Leonid A. Mosionjnik, ''Technology of the Historical Myth'' (''[https://books.google.com/books?id=K05TDwAAQBAJ&pg=PA96 Tekhnologiya istoricheskogo mifa]''), Saint Petersburg 2012, p. 95–102 et passim ([https://histrf.ru/biblioteka/b/tiekhnologhiia-istorichieskogho-mifa here for download]).</ref> दुगिनने विर्थच्या या दाव्यालाही प्रोत्साहन दिले की त्याने यहूदींच्या इतिहासावर आणि जुन्या करारावर एक पुस्तक लिहिले होते, तथाकथित ''[[पालेस्तिनाबुख]]'', जे चोरीला गेले नसते तर जग बदलू शकले असते. <ref>Aleksandr G. Dugin, "Herman Wirth: In Search of the Holy Grail of Meanings" (''[https://arcto.ru/article/120#14 German Virt: v poiskakh Sviatogo Graalia smislov]'') (1998), {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20220314085102/http://arcto.ru/article/120#14}}, in: Ibidem, ''Philosophy of Traditionalism'' (''[https://hadit.ru/wp-content/uploads/2018/08/filosofiya_traditcionalizma.pdf Filosofiia Traditsionalizma] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20220810030312/https://hadit.ru/wp-content/uploads/2018/08/filosofiya_traditcionalizma.pdf}}''), Moscow 2002, p. 135–167, 162. See also Dugin, '[https://eurasianist1.rssing.com/chan-64114423/all_p1.html Runology According to Herman Wirth]' (transl. Jafe Arnold), in: ''Absolute Homeland'' (''[https://arcto.ru/article/320 Absoliutnaia Rodina]''), Moscow 1999, p. 489 (Ch. 9). {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20220407184919/http://arcto.ru/article/320}}. Ibidem, '[https://eurasianist-archive.com/2017/04/13/herman-wirth-runes-great-yule-and-the-arctic-homeland/ Herman Wirth: Runes, Great Yule, and the Arctic Homeland]' (transl. Jafe Arnold), Foreword to the 2nd ed. of ''Hyperborean Theory'': ''Signs of the Great Nord'' (''[https://skifed.ru/attachments/article/266/%D0%94%D1%83%D0%B3%D0%B8%D0%BD%20%D0%90.%20-%20%D0%97%D0%BD%D0%B0%D0%BA%D0%B8%20%D0%92%D0%B5%D0%BB%D0%B8%D0%BA%D0%BE%D0%B3%D0%BE%20%D0%9D%D0%BE%D1%80%D0%B4%D0%B0%20(Ariana%20Mystica)%20-%202008.pdf Znaki Velikogo Norda: Giperboreiskaia teoriia]''), Moscow 2008, p. 3–20, 17. {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20210309034326/http://skifed.ru/attachments/article/266/%D0%94%D1%83%D0%B3%D0%B8%D0%BD%20%D0%90.%20-%20%D0%97%D0%BD%D0%B0%D0%BA%D0%B8%20%D0%92%D0%B5%D0%BB%D0%B8%D0%BA%D0%BE%D0%B3%D0%BE%20%D0%9D%D0%BE%D1%80%D0%B4%D0%B0%20(Ariana%20Mystica)%20-%202008.pdf}}.</ref>
[[दुसरे चेचेन युद्ध|दुसऱ्या चेचेन युद्धाच्या]] शेवटी, दुगिनला चेचेन बाजूने वाटाघाटी करण्यासाठी बोलावण्यात आले होते, याव्यतिरिक्त त्याने कझाकस्तानचे माजी अध्यक्ष [[नुरसुल्तान नझरबायेव]] आणि इराण आणि सीरियाच्या राजदूतांची भेट घेतली होती. <ref name="Teitelbaum 58">{{स्रोत पुस्तक|url=https://books.google.com/books?id=QdHADwAAQBAJ&q=war+for+eternity|title=War for Eternity: The Return of Traditionalism and the Rise of the Populist Right|last=Teitelbaum|first=Benjamin R.|date=21 April 2020|publisher=Penguin Books Limited|isbn=978-0-14-199204-4|pages=58|language=en}}</ref>
=== राजकीय पक्ष ===
==== राष्ट्रीय बोल्शेविक पक्ष ====
१९९२ मध्ये, एदुआर्द लिमोनफने सहा लहान गटांचे एकत्रीकरण करून राष्ट्रीय बोल्शेविक पक्षाची स्थापना केली. <ref>Lee, p. 314</ref> दुगिन हा त्याच्या सुरुवातीच्या सदस्यांपैकी एक होता आणि त्याने लिमोनफने राजकारणात येण्यासाठी राजी करण्यात महत्त्वाची भूमिका बजावली, तसेच १९९३ मध्ये पक्षाच्या स्थापनेच्या घोषणेवर सही केली <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.nazbol.ru:80/rubr28/index0/249.html|title=Нацбол.ру – Нацбол должен знать – Декларация о создании НБП|date=21 September 2008|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20080921193029/https://www.nazbol.ru/rubr28/index0/249.html|archive-date=21 September 2008|access-date=2 September 2018}}</ref> १९९२ मध्ये जेव्हा पक्षाच्या दोन सदस्यांना [[स्फोटगोलक]] बाळगल्याबद्दल अटक केली, तेव्हा हा पक्ष पहिल्यांदा चर्चेत आला. या घटनेमुळे पक्षाला पाश्चिमात्य वस्तूंविरोधात आयोजित करत असलेल्या बहिष्कार मोहिमेला प्रसिद्धी मिळाली. <ref>Lee, p. 320</ref>
राष्ट्रीय बोल्शेविक पक्षाने [[राष्ट्रीय मुक्ती आघाडी (रशिया)|राष्ट्रीय मुक्ती आघाडी]] (रशियन साम्यवाद्यांची आणि राष्ट्रवाद्यांची एक व्यापक आघाडी) सोबत हातमिळवणी केली. <ref>Lee, p. 321</ref> १९९८ मध्ये, पक्षातील इतर सदस्यांशी झालेल्या संघर्षामुळे दुगिनने राष्ट्रीय बोल्शेविक पक्ष सोडली. <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://w-o-s.ru/visual/nazboli/index.html|title=ВОС|website=w-o-s.ru|access-date=2 September 2018|archive-date=2025-11-29|archive-url=https://web.archive.org/web/20251129072104/https://w-o-s.ru/visual/nazboli/index.html|url-status=dead}}</ref> यामुळे तो पक्ष रशियाच्या राजकीय पटलावर आणखी डावीकडे झुकला आणि पक्षाच्या सदस्यांनी दुगिन व त्याच्या गटाला फॅसिस्ट म्हणून धिक्कारले. <ref name="radioliberty">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.rferl.org/a/1058689.html|title=Russia: National Bolsheviks, The Party Of 'Direct Action'|last=Yasmann|first=Victor|date=29 April 2005|website=Radio Free Europe Radio Liberty|access-date=15 November 2018|quote=For this mobilization, the NBP used a bizarre mixture of totalitarian and fascist symbols, geopolitical dogma, leftist ideas, and national-patriotic demagoguery.}}</ref>
==== युरेशिया पक्ष ====
[[चित्र:New_Horizons_International_Conference_01.jpg|इवलेसे| मे २०१८ मध्ये [[इराण|इराणमधील]] [[मशहद]] येथे झालेल्या "न्यू होरायझन" (नवा क्षितिज) या आंतरराष्ट्रीय परिषदेत दुगिन (डावीकडे).]]
नव-युरेशियावादी विचारांचा दावा करणाऱ्या युरेशिया पक्षाची स्थापना एप्रिल २००१ मध्ये झाली. दुगिन हा त्या गटाचा संस्थापक असल्याचे वृत्त होते. तो म्हणाला की, ही चळवळ रशियन राजकारणातील सांस्कृतिक विविधतेवर भर देईल, 'अमेरिकन पद्धतीच्या जागतिकीकरणाला' विरोध करेल आणि 'साम्यवाद व राष्ट्रवादाच्या पुनरागमनालाही प्रतिकार करेल.' याला ३१ मे २००१ रोजी [[रशियाचे न्याय मंत्रालय|न्याय मंत्रालयाने]] अधिकृत मान्यता दिली. <ref name="Dunlop"/> युरेशिया पक्षाचा दावा आहे की त्यांना काही लष्करी वर्तुळांमध्ये आणि रशियातील [[रशियन ऑर्थोडॉक्स चर्च|ऑर्थोडॉक्स ख्रिस्ती]] पंथाच्या नेत्यांकडून पाठिंबा आहे. [[चेचन्या|चेचेन]] समस्या सोडवण्याच्या प्रयत्नांमध्ये महत्त्वाची भूमिका बजावण्याची पक्षाला आशा आहे, ज्यामुळे युरोपीय आणि मध्य पूर्वेकडील देशांसोबत, प्रामुख्याने इराणसोबत, रशियाची सामरिक युती करण्याच्या दुगिनच्या उद्दिष्टासाठी पार्श्वभूमी तयार होईल.
=== युक्रेनबाबतचे मत आणि रशियन राजकारणातील भूमिका ===
{{Quote box|“रशियन जनतेच्या एकत्रित सहभागाशिवाय हे करणे अशक्य आहे; त्यांना त्यांच्या ऐतिहासिक ध्येयाची जाणीव करून दिल्याशिवाय, त्यांच्या अंतर्मनातील खोल प्रेरणेला जागृत केल्याशिवाय, आणि ‘बंधूंनो आणि भगिनींनो’ हे शब्द उच्चारल्याशिवाय हे शक्य नाही. उठा, रशियनांनो, जागे व्हा; तुम्हाला महान कार्ये पार पाडण्यासाठी पाचारण करण्यात आले आहे... तुमचे सर्व पूर्वज, सर्व पिढ्या या क्षणाकडे, आपल्या अस्तित्वाच्या मूलभूत शत्रूसोबतच्या या संघर्षाकडे वाटचाल करत होत्या... आम्ही पाश्चात्त्य संस्कृतीत, तिच्या उदारमतवाद-एकाधिकारशाहीच्या वर्चस्वात आणि [[युक्रेनियन नाझीवाद|बंदेरावाद्यांमध्ये]] मूर्त रूप धारण केलेल्या निरपेक्ष दुष्टतेविरुद्ध लढत आहोत. या ध्येयासाठीच आमची निर्मिती झाली आहे. सध्या याचीच गरज आहे—एक आवाहन आवश्यक आहे.”
| source = — मार्च २०२२ — युक्रेनवरील रशियन आक्रमणाच्या संदर्भात रशियन समाजाच्या पूर्ण-स्तरीय एकत्रीकरणाची मागणी करत दुगिन<ref>{{Cite web |last=Sazhneva|first=Ekaterina |date=30 March 2022 |title=Александр Дугин: "солнечный" Путин победил "лунного" |url=https://www.mk.ru/social/2022/03/30/aleksandr-dugin-solnechnyy-putin-pobedil-lunnogo.html |archive-url=https://web.archive.org/web/20220331062134/https://www.mk.ru/social/2022/03/30/aleksandr-dugin-solnechnyy-putin-pobedil-lunnogo.html |archive-date=31 March 2022 |website=[[Moskovskij Komsomolets]]}}</ref>
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| width = 25em
| quote = “रशियन जनतेच्या एकत्रित सहभागाशिवाय हे करणे अशक्य आहे; त्यांना त्यांच्या ऐतिहासिक ध्येयाची जाणीव करून दिल्याशिवाय, त्यांच्या अंतर्मनातील खोल प्रेरणेला जागृत केल्याशिवाय, आणि ‘बंधूंनो आणि भगिनींनो’ हे शब्द उच्चारल्याशिवाय हे शक्य नाही. उठा, रशियनांनो, जागे व्हा; तुम्हाला महान कार्ये पार पाडण्यासाठी पाचारण करण्यात आले आहे... तुमचे सर्व पूर्वज, सर्व पिढ्या या क्षणाकडे, आपल्या अस्तित्वाच्या मूलभूत शत्रूसोबतच्या या संघर्षाकडे वाटचाल करत होत्या... आम्ही पाश्चात्त्य संस्कृतीत, तिच्या उदारमतवाद-एकाधिकारशाहीच्या वर्चस्वात आणि [[युक्रेनियन नाझीवाद|बंदेरावाद्यांमध्ये]] मूर्त रूप धारण केलेल्या निरपेक्ष दुष्टतेविरुद्ध लढत आहोत. या ध्येयासाठीच आमची निर्मिती झाली आहे. सध्या याचीच गरज आहे—एक आवाहन आवश्यक आहे.”
}}
दुगिन [[व्लादिमिर पुतिन|व्लादिमीर पुतिन]] आणि त्यांच्या परराष्ट्र धोरणांचे समर्थन करतात, पण त्यांनी रशियन सरकारच्या आर्थिक धोरणांना विरोध केला आहे. २००७ मध्ये त्यांनी म्हटले होते: "पुतिनच्या धोरणांना आता कोणीही विरोधक नाहीत आणि जर असतील, तर ते मानसिक रुग्ण असून त्यांना वैद्यकीय तपासणीसाठी पाठवण्याची गरज आहे. पुतिन सर्वत्र आहे, पुतिन सर्वकाही आहे, पुतिन निरपेक्ष आहे आणि पुतिन अपरिहार्य आहे". ''[[कमिरसांत|कमिरसांतच्या]]'' वाचकांनी खुशामतीमध्ये याला दुसरा क्रमांक दिला. <ref>{{स्रोत बातमी|url=https://www.kommersant.ru/Tests/Test10.aspx|work=Kommersant|year=2007|language=ru|script-title=ru:Кто похвалит его лучше всех|trans-title=Who will praise him better than the rest|access-date=24 March 2016}} (Click the "Results" ("Результаты") button at the bottom of the page)</ref>
[[क्रेमलिनमध्ये]], दुगिन हा युक्रेनच्या मुद्द्यावरून नेतृत्वातील एक विभागणी असलेल्या "युद्धखोर गटा"चे प्रतिनिधित्व करतात. <ref name="Jensen">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://imrussia.org/en/analysis/world/2041-are-the-kremlin-hardliners-winning|title=Are the Kremlin Hardliners Winning?|last=Donald N. Jensen|date=1 October 2014|publisher=Institute of Modern Russia}}</ref> दुगिन २००८ पासून [[रशियाने केलेल्या क्रिमियाचे सामीलीकरण|रशियाने क्रिमियाचे विलीनीकरण करावे]] याचे समर्थन करत होते. <ref name="Newman2">{{स्रोत बातमी|last=Newman|first=Dina|url=https://www.bbc.com/news/world-europe-28229785|title=Russian nationalist thinker Dugin sees war with Ukraine|date=10 July 2014|work=[[BBC News]]|location=London|quote=A prominent Russian ultra-nationalist philosopher has told BBC News that war between Russia and Ukraine 'is inevitable' and has called on President Vladimir Putin to intervene militarily in eastern Ukraine 'to save Russia's moral authority'.|access-date=22 March 2022}} In Russian: {{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.bbc.com/ukrainian/ukraine_in_russian/2014/07/140710_ru_s_dugin_russia_ukraine|last=Дина Ньюман|date=10 July 2014|website=[[BBC Ukrainian]]|language=ru|script-title=ru:Кто придумал аннексировать украинский Крым?}}</ref> त्याने रशिया आणि युक्रेन यांच्यातील युद्ध अटळ मानले आणि पुतिन यांना [[दोनबासमधील युद्ध|दोनबासमधील युद्धात]] हस्तक्षेप करण्याचे आवाहन केले. <ref name="Newman2" /> दुगिन म्हणाले: "रशियन पुनर्जागरण फक्त [[क्यीव]] येथेच थांबू शकते." <ref name="За Ахметова">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.nakanune.ru/news/2014/5/21/22353563/|last=Александр Дугин|date=21 May 2014|publisher=Nakanune.ru|language=ru|script-title=ru:За Ахметова грудью встала российская шестая колонна}}</ref>
[[दोनबासमधील युद्ध|दोनबासमधील युद्धादरम्यान]], दुगिन रशिया समर्थक फुटीरतावादी बंडखोरांच्या नियमित संपर्कात होता. <ref name="DOUPOU">{{स्रोत बातमी|last=Ben Hoyle|url=https://www.theaustralian.com.au/news/world/putin-accused-of-betraying-and-abandoning-ukraine-separatists/story-fnb64oi6-1226976223365|title=Putin accused of betraying and abandoning Ukraine separatists|date=3 July 2014|work=[[The Australian]]}}<br /><br />{{स्रोत बातमी|url=https://www.theaustralian.com.au/news/world/rebel-leaders-in-ukraine-feel-abandoned-by-putin/story-fnb64oi6-1226976988427|title=Rebel leaders in Ukraine feel 'abandoned' by Putin|date=4 July 2014|work=[[The Australian]]}}<br /><br />{{स्रोत बातमी|last=Paul Sonne|url=https://www.wsj.com/articles/russian-nationalists-feel-let-down-by-kremlin-again-1404510139|title=Russian Nationalists Feel Let Down by Kremlin|date=4 July 2014|work=[[The Wall Street Journal]]}}</ref> त्यांनी आपली भूमिका "बिनशर्त [[दनेत्स्क जनतेचे प्रजासत्ताक|डीपीआर]] समर्थक आणि [[लुहान्स्क जनतेचे प्रजासत्ताक|एलपीआर]] समर्थक" असल्याचे सांगितले. <ref name="interpretermag">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.interpretermag.com/russia-this-week-what-will-be-twitters-fate-in-russia/|title=Russia This Week: Dugin Dismissed from Moscow State University? (23–29 June)|date=27 June 2014|website=interpretermag.com|access-date=3 March 2022}}</ref> यूट्यूबवर पोस्ट केलेल्या एका स्काईप व्हिडिओ कॉलमध्ये दुगिन दक्षिण आणि पूर्व युक्रेनमधील फुटीरतावाद्यांना सूचना देताना, तसेच [[एकातेरिना गुबारेवा]] यांना सल्ला देताना दिसला. गुबारेवाचे पती [[पाविल गुबरिफ]] यांनी स्वतःला [[दोनेत्स्क ओब्लास्त|दोनेत्स्क प्रदेशाचे]] राज्यपाल घोषित केले होते आणि त्यानंतर [[युक्रेनची सुरक्षा सेवा|युक्रेनच्या सुरक्षा सेवेने]] त्यांना अटक केली होती. <ref name="The Daily Beast">{{स्रोत बातमी|last=Shynkarenko|first=Oleg|url=https://www.thedailybeast.com/articles/2014/04/02/alexander-dugin-the-crazy-ideologue-of-the-new-russian-empire.html|title=Alexander Dugin: The Crazy Ideologue of the New Russian Empire|date=4 February 2014|work=The Daily Beast}} In Russian: {{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://theinternettimes.ru/post/dugin_geniy|last=Арсентий Тропаревский|website=The Internet Times|language=ru|script-title=ru:Дугин: Сумасшедший гений новой Российской империи}} {{मृत दुवा}} </ref>
३१ मार्च २०१४ रोजी, दुगिनने स्थापन केलेल्या रशियाच्या युरेशिया युवा संघाचे सदस्य ओलेग बातियारफ यांना अटक केली. [[युक्रेनची सुरक्षा सेवा|युक्रेनच्या सुरक्षा सेवेनुसार]], त्यांनी संसद आणि दुसरी सरकारी इमारत ताब्यात घेण्यासाठी सुमारे २०० लोकांच्या गटाला प्रशिक्षण दिले होते. <ref name="The Daily Beast" />
दुगिनने पुतिनबद्दल निराशा व्यक्त केली, कारण [[युक्रेनियन सेना|युक्रेनियन सेनेने]] जुलै २०१४ च्या सुरुवातीला केलेल्या आक्रमणांनंतर पुतिनने युक्रेनमधील रशिया-समर्थक बंडखोरांना मदत केली नाही. <ref name="DOUPOU"/> ऑगस्ट २०१४ मध्ये, दुगिनने युक्रेनियन अस्मिता नष्ट करण्याची मागणी केली. <ref name="FT150128">{{स्रोत बातमी|last=Jones|first=Sam|url=https://www.ft.com/intl/cms/s/0/a87747de-a713-11e4-b6bd-00144feab7de.html|title=Alarm bells ring over Syriza's Russian links|last2=Hope|first2=Kerin|last3=Weaver|first3=Courtney|date=28 January 2015|work=[[Financial Times]]|url-access=subscription}}</ref>
[[खार्किव मानवाधिकार संरक्षण गटाच्या]] हल्या कोयनाश म्हणाल्या की, पूर्व युक्रेनमधील घटनांवर आणि रशियाच्या क्रिमियावरील आक्रमणावर दुगिनच्या "युरेशियाई विचारसरणीचा" प्रभाव निःसंशय होता. <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://khpg.org.ua/en/index.php?id=1404029911|title=Intrigue over 'dismissal' of Putin's ideologue, Alexander Dugin|last=Halya Coynash|date=2 July 2014|publisher=[[Kharkiv Human Rights Protection Group]]|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20160308105340/http://khpg.org.ua/en/index.php?id=1404029911|archive-date=8 March 2016|access-date=3 March 2022}}</ref> वेंसां जॉवेर यांच्या मते, दुगिनची जहाल विचारसरणी रशियन अधिकाऱ्यांच्या अंतर्गत आणि परराष्ट्र धोरणाचा आधार बनली. <ref name="Jauvert">{{स्रोत बातमी|last=Vincent Jauvert|url=https://tempsreel.nouvelobs.com/ukraine-la-revolte/20140503.OBS6009/le-raspoutine-de-poutine.html|title=Le Raspoutine de Poutine|date=3 May 2014|work=[[Le Nouvel Observateur]]|language=fr}} In Russian: {{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://inosmi.ru/russia/20140512/220188170.html|last=Венсан Жовер|date=12 May 2014|publisher=[[inoSMI]]|language=ru|script-title=ru:Дугин — путинский Распутин}}</ref> "म्हणून दुगिनचे म्हणणे ऐकण्यासारखे आहे, जेणेकरून क्रेमलिन आपल्या देशाला आणि संपूर्ण युरोपला कोणत्या भवितव्याकडे नेत आहे हे समजू शकेल." <ref name="Jauvert" />
युक्रेनने जून २००६ पासून दुगिनवर पाच वर्षांची प्रवेशबंदी घातली, <ref name="СБУ">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://newvv.net/politics/ukraine/188184.html|date=20 October 2007|language=ru|script-title=ru:Служба безопасности Украины установила лиц, которые надругались над государственной символикой Украины на горе Говерла|trans-title=The Security Service of Ukraine identified persons who outraged Ukraine's state symbols on the mountain of Hoverla|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20220213201550/http://newvv.net/politics/ukraine/188184.html|archive-date=13 February 2022|access-date=3 March 2022}}</ref> आणि क्यीवने २००७ मध्ये त्याला ''[[अवांछित व्यक्ती]]'' म्हणून घोषित केले <ref name="Laruelle">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.cacianalyst.org/?q=node/4928|title=Neo-Eurasianist Alexander Dugin on the Russia–Georgia conflict|last=Marlène Laruelle|date=3 September 2008|publisher=Central Asia-Caucasus Institute Analyst}}</ref> त्याच्या युरेशयाई युवा संघावर युक्रेनमध्ये बंदी घातली. <ref name="СБУ" /> २००७ मध्ये, [[युक्रेनची सुरक्षा सेवा|युक्रेनच्या सुरक्षा सेवेने]] युरेशियाई युवा संघाच्या त्या व्यक्तींना ओळखले ज्यांनी [[:uk:вандалізм на Говерлі 2007 року|२००७ मध्ये गोवेरला येथे तोडफोड]] केली होती: ते [[गोवेरला]] पर्वतावर चढले, त्यांनी सोबत आणलेल्या साधनांनी [[युक्रेनचे राजचिन्ह|युक्रेनच्या लहान राजचिन्हाच्या]] आकारातील बांधकामाचे भाग कापल्याची नक्कल केली आणि [[युक्रेनचे संविधान|युक्रेनच्या संविधानाच्या]] स्मारक चिन्हावर युरेशियाई युवा संघाचे प्रतीक रंगवले. <ref name="СБУ" /> जून २००७ मध्ये [[सिम्फेरोपोल आंतरराष्ट्रीय विमानतळ|सिम्फेरोपोल आंतरराष्ट्रीय विमानतळावर]] पोहोचल्यावर त्याला रशियाला परत पाठवले. <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.kyivpost.com/opinion/op-ed/vitrenkos-flirtation-with-russian-neo-eurasianism-26787.html|title=Vitrenko's flirtation with Russian "Neo-Eurasianism"|last=Andreas Umland|authorlink=Andreas Umland|date=14 June 2007|website=[[Kyiv Post]]|type=op-ed}}</ref>
२००८ मध्ये रशिया आणि जॉर्जिया यांच्यात [[रशिया-जॉर्जिया युद्ध|युद्ध सुरू]] होण्यापूर्वी, दुगिनने [[दक्षिण ओसेशिया|दक्षिण ओसेशियाला]] भेट दिली आणि म्हणाला: "आमचे सैन्य जॉर्जियाची राजधानी [[त्बिलिसी]], संपूर्ण देश आणि कदाचित युक्रेन आणि क्रिमियासुद्धा ताब्यात घेईल, जे ऐतिहासिकदृष्ट्या रशियाचाच भाग आहे." <ref>{{स्रोत बातमी|url=https://www.spiegel.de/international/world/road-to-war-in-georgia-the-chronicle-of-a-caucasian-tragedy-a-574812.html|title=Road to War in Georgia: The Chronicle of a Caucasian Tragedy|date=25 August 2008|work=[[Der Spiegel]]}}</ref> त्यानंतर तो म्हणाला की रशियाने "दक्षिण ओसेशियाला मुक्त करून थांबू नये, तर त्यापुढे जावे," आणि "आपल्याला युक्रेनमध्येही असेच काहीतरी करावे लागेल." <ref name="Interview">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.echo.msk.ru/programs/personalno/532383-echo/|title=Interview|last=Alexander Dugin|date=8 August 2008|publisher=[[Echo of Moscow]]|language=ru}}</ref> २००८ मध्ये दुगिन म्हणाले होते की रशियाने युक्रेनमध्ये जॉर्जियासारखीच परिस्थिती निर्माण करावी, म्हणजेच त्यावर हल्ला करावा. <ref>{{स्रोत बातमी|last=Ірина Біла|url=https://www.radiosvoboda.org/content/article/1197679.html|date=10 September 2008|work=Радіо Свобода|publisher=[[Radio Free Europe/Radio Liberty]]|language=uk|script-title=uk:Можливість застосування Ющенком силового сценарію; махінації навколо землі. (Огляд преси)}}</ref> सप्टेंबर २००८ मध्ये, रशियन-जॉर्जियन युद्धानंतर, त्याने पुतिनबद्दलचा आपला राग लपवला नाही, ज्यांनी "दुसरा धक्का देण्याचे धाडस केले नाही" आणि "साम्राज्य पुनर्संचयित केले नाही." <ref name="Jauvert"/>
१० ऑक्टोबर २०१४ रोजी दुगिन म्हणाले, "[[युरेशियाई आर्थिक संघ|युरेशियाई संघ]] असलेल्या बृहत्तर रशियाची पुनर्स्थापना केल्यानंतरच आपण एक विश्वासार्ह जागतिक शक्ती बनू शकतो. आता या प्रक्रिया खूपच मंदावल्या आहेत. [[युरोमैदान|युक्रेनियन मैदान]] हे रशियन एकीकरणाच्या प्रगतीला पश्चिमेकडील देशांनी दिलेले प्रत्युत्तर होते." <ref name="Медведева">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://portal-kultura.ru/articles/person/64670-aleksandr-dugin-nuzhno-borotsya-s-shestoy-kolonnoy/|last=Татьяна Медведева|date=10–16 October 2014|website=Газета "Культура"|language=ru|script-title=ru:Александр Дугин: "Нужно бороться с "шестой колонной"}}</ref> त्यांनी [[युरोमैदान|युरोमैदानचे]] वर्णन अमेरिकेने केलेला सत्तापालट असे केले: "अमेरिकेला रशियाविरुद्धचे युद्ध स्वतःच्या हातांनी नव्हे, तर युक्रेनियन लोकांच्या हातांनी लढायचे आहे. युक्रेनच्या शांतताप्रिय जनतेमधील १० हजारांपर्यंतच्या बळींकडे डोळेझाक करण्याचे वचन देऊन आणि प्रत्यक्षात बळींची मागणी करून, अमेरिकेने हे युद्ध घडवून आणले. अमेरिकेने या युद्धाच्या उद्देशाने युरोमैदानादरम्यान सत्तापालट घडवून आणला. अमेरिकेने या युद्धाच्या उद्देशाने [[नव-नाझी]] रशियाद्वेष्ट्यांना सत्तेवर बसवले." <ref>{{स्रोत बातमी|last=Руслан Горевой|url=https://versia.ru/articles/2014/jun/30/na_poroge_voyny|date=30 July 2014|work=Газета "Версия"|language=ru|script-title=ru:На пороге войны|issue=24}}</ref>
==== इस्रायल आणि इस्रायल-हमास युद्धाबद्दलची मते ====
अलेक्सांद्र दुगिनने गाझामधील युद्धाला रशिया आणि पाश्चात्य देशांमधील व्यापक संघर्षाचा भाग म्हणून चित्रित केले आहे. <ref name=":1">{{Cite report|url=https://www.jstor.org/stable/resrep55420|title=Russia’s “New World Order” and the Israel-Hamas War|last=Feldman|first=Bat Chen Druyan|last2=Mil-Man|first2=Arkady|date=2023|publisher=Institute for National Security Studies}}</ref> दुगिनने दावा केला आहे की [[जेरुसलेम]] मूळचे रशियन आहे आणि रशियाने ती भूमी पुन्हा जिंकून घ्यावी असे आवाहन केले आहे, तसेच त्याने इस्रायलच्या अस्तित्वाच्या अधिकारावरही प्रश्नचिन्ह उपस्थित केले आहे. <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.jpost.com/israel-news/article-806056|title=Vladimir Putin hosts Hamas, Hezbollah representaives amid Gaza war {{!}} The Jerusalem Post|date=2024-06-15|website=The Jerusalem Post {{!}} JPost.com|language=en|access-date=2026-08-15}}</ref> दुगिन इस्रायलला पाश्चात्य शक्तींद्वारे नियंत्रित एक प्रतिनिधी सरकार मानतात, ज्याचा उपयोग अमेरिका आणि तिचे मित्र देश मुसलमानी जगावर हल्ला करण्यासाठी आणि त्यांना बदनाम करण्यासाठी करतात. या जागतिक दृष्टिकोनानुसार दुगिनचा दावा आहे की, "मुसलमानी देश हे ओळखतील की इस्रायल आणि हमास यांच्यातील संघर्ष हा नवीन जागतिक व्यवस्थेसाठीच्या लढाईचा एक भाग आहे, आणि मग त्यांना रशिया युक्रेनमध्ये लढत असलेले युद्ध अधिक चांगल्या प्रकारे समजेल." <ref name=":1" /> <ref name=":2">{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://en.majalla.com/node/303746|title=Aleksandr Dugin: My vision for the new world order and Gaza war|website=en.majalla.com|language=en|access-date=2026-08-15}}</ref>
दुगिनचा असे मानतात की [[इस्रायल-हमास युद्ध]] ही जग बहुध्रुवीय बनण्याची एक नैसर्गिक प्रक्रिया आहे, आणि रशिया-युक्रेन युद्ध व चीन-तैवान संघर्ष या इतर दोन लढाया ध्रुवीकरण निश्चित करतील. दुगिनने असा दावा केला आहे की रशिया आणि चीन हे मुसलमानी जगाचे मित्रराष्ट्र आहेत आणि जागतिक बहुध्रुवीयतेला गती देण्यासाठी प्रत्येक समाजाने एकमेकांना मदत केली पाहिजे. <ref name=":1"/> <ref name=":2"/> दुगिनने 'शरीयतने भांडवलशाहीवर मात केली पाहिजे' असे आवाहन केले आहे आणि 'जागतिकवादी अभिजन वर्गा'विरुद्धची आंतरराष्ट्रीय लढाई मुसलमान लढतील अशी आशा व्यक्त केली आहे. <ref>{{स्रोत बातमी|last=Schmitz|first=Matthew|url=https://www.washingtonpost.com/opinions/2026/05/01/rise-islamo-christian-right/|title=Opinion {{!}} Why right-wing influencers are suddenly praising Islam|date=2026-05-01|work=The Washington Post|language=en-US|issn=0190-8286|access-date=2026-08-15}}</ref> दुगिन [[२०२६ इस्रायल-अमेरिकेचा इराणवर हल्ला|२०२६ च्या इराण युद्धाला]] विरोध केली आहे आणि अमेरिकेने इराणवर केलेल्या हल्ल्यांना प्रत्युत्तर म्हणून त्याने जागतिक उठावाचे आवाहन केले आहे. <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.jns.org/opinion/alex-goldenberg/the-alliance-theyve-always-feared|title=The alliance they’ve always feared|last=Goldenberg|first=Alex|date=2026-03-02|website=Israel & Jewish News - JNS|language=en-US|access-date=2026-08-15}}</ref>
==== पुतिनवर प्रभाव ====
[[चित्र:Aleksandr_Dugin_13981126000.jpg|इवलेसे| २०२० मध्ये दुगिन]]
रशियन सरकार आणि [[व्लादिमिर पुतिन|व्लादिमीर पुतिनवर]] दुगिनचा प्रभाव वादग्रस्त आहे. <ref name="guardian-bio"/> त्यांचे क्रेमलिनशी कोणतेही अधिकृत संबंध नाहीत, <ref name="reuters-bio"/> पण माध्यमांमध्ये त्यांना अनेकदा "पुतिनचा मेंदू" आणि [[रशियाचे परराष्ट्र धोरण]] ठरवण्यासाठी जबाबदार मानले जाते. <ref name="Newman2"/> <ref>{{स्रोत बातमी|url=https://www.haaretz.com/world-news/2022-03-17/ty-article-magazine/.highlight/to-understand-putin-you-first-need-to-get-inside-aleksandr-dugins-head/00000180-5bca-dc1d-afc2-fbcf008d0000|title=To Understand Putin, You First Need to Get Inside Aleksandr Dugin's Head|work=Haaretz|language=en|access-date=13 April 2022}}</ref> <ref name="Burbank2">{{स्रोत बातमी|last=Burbank|first=Jane|url=https://www.nytimes.com/2022/03/22/opinion/russia-ukraine-putin-eurasianism.html|title=The Grand Theory Driving Putin to War|date=22 March 2022|work=[[The New York Times]]|location=New York City|quote=After unsuccessful interventions in post-Soviet party politics, Mr. Dugin focused on developing his influence where it counted – with the military and policymakers ... In Mr. Dugin's adjustment of [[Eurasianism]] to present conditions, Russia had a new opponent – no longer just Europe, but the whole of the 'Atlantic' world led by the United States. And his Eurasianism was not anti-imperial but the opposite: Russia had always been an empire, Russian people were 'imperial people', and after the crippling 1990s sellout to the 'eternal enemy', Russia could revive in the next phase of global combat and become a 'world empire'.|access-date=23 March 2022}}</ref> <ref>{{स्रोत बातमी|url=https://www.abc.net.au/news/2022-08-22/alexander-dugin-daughter-darya-dugina-vladimir-putin-ally/101356250|title=What we know about the father of Darya Dugina, who was killed in a suspected car bombing in Russia|date=22 August 2022|work=ABC News}}</ref> इतरांचे अस्से म्हणणे आहे की दुगिनचा प्रभाव मर्यादित आहे आणि त्या प्रभावाला खूपच अतिरंजित केला गेला आहे, <ref name="reshaping"/> <ref name="underfire"/> <ref name="bloomberg"/> कारण त्याच्या मतांमधील आणि रशियन परराष्ट्र धोरणातील सहसंबंधातून कार्यकारणभाव सूचित होत नाही. <ref name="overestimates"/>
=== पंचमस्तंभ ===
[[परकीय हस्तक]] म्हणून [[पंचमस्तंभ|पंचमस्तंभबद्दलची]] ठराविक भाषाशैली दुगिन अनेक प्रकाशनांमध्ये राजकीय आरोपांसाठी वापरतो. ''[[विज्ग्ल्यात (वर्तमानपत्र)|विज्ग्ल्यात (Взгляд)]]'' आणि ''[[कम्समोलस्काया प्रावदा|कम्समोलस्काया प्रावदा (Комсомольская правда)]]'' यांनी प्रकाशित केलेल्या त्यांच्या २०१४ च्या मुलाखतीत ते म्हणतात, "एक मोठा संघर्ष सुरू आहे. आणि, अर्थातच, युरोपमध्येही स्वतःचा पंचमस्तंभ आहे, स्वतःचे [[२०११-२०१३ रशियन निषेध|बोलोत्नाया चौक]]-विचारांचे लोक आहेत. आणि जर ते टीव्ही रेनवर निष्क्रिय बसून वाईट गोष्टी करत असतील, तर युरोपवर खरोखरच पंचमस्तंभाचे पूर्ण जोमात वर्चस्व आणि शासन आहे. हे तेच अमेरिकन क्षुद्र आहेत." <ref name="великая война">{{स्रोत बातमी|last=Петр Акопов|url=https://www.vz.ru/politics/2014/2/20/672632.html|date=20 February 2014|work=[[Vzglyad (newspaper)|Vzglyad]]|language=ru|script-title=ru:Это великая война континентов}}</ref> <ref name="KP">{{स्रोत बातमी|url=https://www.kp.ru/daily/26197.4/3084361/|date=20 February 2014|work=[[Komsomolskaya Pravda]]|language=ru|script-title=ru:Политолог, философ Александр Дугин: Это великая война континентов}}</ref>
== संदर्भ ==
=== संदर्भित साहित्य ===
[[वर्ग:भू-राज्यशास्त्रज्ञ]]
[[वर्ग:हयात व्यक्ती]]
[[वर्ग:इ.स. १९६२ मधील जन्म]]
qorcn3rldoh0q6h69nsujdcs6yo0jp2
धारी देवी
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Kumarsahil98
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text/x-wiki
{{माहिती संचिका}}
'''धारी देवी''' हे [[उत्तराखंड]]मधील गढवाल हिमालयीन क्षेत्रातील एक पवित्र हिंदू मंदिर आहे.<ref name="outlook-dhari">{{cite news |title=Dhari Devi Temple: The Shrine Of The Guardian Deity Of Garhwal |url=https://www.outlooktraveller.com/ |work=[[आऊटलुक]] |access-date=२१ ऑगस्ट २०२६}}</ref> [[श्रीनगर, उत्तराखंड|श्रीनगर]] आणि [[रुद्रप्रयाग]] यांच्या दरम्यान असलेल्या कल्याणसौर गावात, [[अलकनंदा नदी]]च्या मध्यभागी हे मंदिर वसलेले आहे.<ref name="outlook-dhari" />
हे मंदिर देवी कालीचे रूप असलेल्या 'माँ धारी देवी' यांना समर्पित आहे. येथे देवीच्या मूर्तीच्या वरच्या भागाची पूजा केली जाते, तर मूर्तीचा खालचा भाग सुमारे ६५.३ किमी अंतरावर असलेल्या कालीमठ मंदिरात स्थापित आहे.<ref>{{cite book |last=हंडू |first=ओ. सी. |title=टेम्पल्स ऑफ गढवाल हिमालय |publisher=इंडस पब्लिशिंग |year=२००१ |isbn=978-8173871221}}</ref>
धारी देवी मंदिर हे उत्तराखंड आणि [[चार धाम|चारधाम यात्रेकरूंचे]] रक्षक दैवत म्हणून प्रसिद्ध आहे.<ref name="outlook-dhari" /> 'दो धाम' किंवा 'चारधाम' यात्रेला जाणारे भाविक देवीचा दैवी आशीर्वाद घेण्यासाठी अनेकदा या प्रवासादरम्यान येथे भेट देतात.<ref name="outlook-dhari" />
== २०१३ ची उत्तराखंड पूर दुर्घटना ==
१६ जून २०१३ रोजी उत्तराखंडमध्ये आलेल्या विनाशकारी पुरामुळे अनेक घरे वाहून गेली आणि हजारो लोकांचा बळी गेला.<ref name="bbc-floods">{{cite news |title=Uttarakhand Floods: Hundreds Dead in Himalayan State |url=https://www.bbc.com/news |publisher=[[बीबीसी न्यूझ]] |date=१९ जून २०१३ |access-date=२१ ऑगस्ट २०२६}}</ref>
त्याच दिवशी, 'अलकनंदा हायड्रो पॉवर कंपनी लिमिटेड' (AHPCL) द्वारे उभारल्या जाणाऱ्या ३३० मेगावॅट क्षमतेच्या अलकनंदा जलविद्युत प्रकल्पाच्या (धरण) कामामुळे, 'माँ धारी देवी' यांची मूर्ती त्यांच्या मूळ स्थानावरून ६११ मीटर उंचीवरील एका काँक्रीटच्या चौथऱ्यावर हलवण्यात आली होती.<ref name="hindu-dhari">{{cite news |title=Shifted Dhari Devi idol restored at original spot |url=https://www.thehindu.com/ |work=[[द हिंदू]] |date=२९ जानेवारी २०२३ |access-date=२१ ऑगस्ट २०२६}}</ref>
मूर्तीचे स्थलांतर केल्यानंतर काही तासांतच त्या संपूर्ण भागात हवामानात प्रचंड बदल झाला आणि सलग अनेक दिवस ढगफुटीसदृश पाऊस पडला. यामुळे विनाशकारी पूर आणि दरडी कोसळण्याच्या घटना घडल्या; यात अनेक लोकांचा मृत्यू झाला, तसेच गावे, घरे आणि संपूर्ण शहरे वाहून गेली.<ref name="bbc-floods" />
स्थानिक लोकांचा असा विश्वास आहे की, देवीची मूर्ती तिच्या मूळ स्थानावरून हलवल्यामुळे देवीचा कोप झाला आणि ही घटना घडली.<ref name="hindu-dhari" /> १८८२ मध्येही अशीच एक घटना घडली होती, जेव्हा एका राजाने देवीची मूर्ती तिच्या मूळ ठिकाणाहून हलवली होती; त्यानंतर झालेल्या दरडी कोसळण्याच्या घटनेत केदारनाथ पूर्णपणे उद्ध्वस्त झाले होते.<ref>{{cite book |last=रावत |first=अजय एस. |title=गढवाल हिमालय: अ स्टडी इन मिडियाव्हल अँड मॉडर्न हिस्ट्री |publisher=इंडस पब्लिशिंग |year=२००२}}</ref>
== पौराणिक कथा ==
स्थानिक दंतकथांनुसार, माँ धारी देवी या सात भावांच्या धाकट्या बहीण होत्या. आई-वडिलांच्या निधनानंतर सर्व भावांनी आपल्या बहिणीची उत्तम काळजी घेतली आणि धारी देवींचेही त्यांच्यावर खूप प्रेम होते.
एकदा त्यांच्या घरी एक ज्योतिषी आला आणि त्याने भाकीत केले की, ही मुलगी सर्व भावांसाठी दुर्दैव घेऊन येईल. त्यानंतर घडलेल्या काही अनिष्ट घटनांमुळे त्यांचा त्या ज्योतिषाच्या बोलण्यावर विश्वास बसला. मग, सर्व भावांनी तिला मारून टाकण्याचा निर्णय घेतला. त्यांनी तिचे शरीर दोन भागांत कापले आणि नदीत फेकून दिले.
असे मानले जाते की, माँ धारी देवींच्या शरीराचा वरचा भाग वाहत 'कल्यासौर' (Kalyasaur) गावापर्यंत पोहोचला. तिथे अलकनंदा नदीत एका धोब्याला तो भाग सापडला; तेव्हा माँ धारी देवींनी त्याला तो भाग एका खडकावर ठेवण्यास सांगितले आणि पुढे तिथेच त्यांचे मंदिर उभारण्यात आले.<ref>[https://www.manchalamushafir.com/dhari-devi-temple/ धारी देवी मंदिराची कथा]</ref>
तसेच, शरीराचा खालचा अर्धा भाग वाहत 'कालीमठ' (Kalimath) गावापर्यंत पोहोचला, जिथे सध्या कालीमठ मंदिर स्थित आहे.
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:उत्तराखंडमधील हिंदू मंदिरे]]
[[वर्ग:रुद्रप्रयाग जिल्हा]]
[[वर्ग:भारतातील देवीची मंदिरे]]
[[वर्ग:देवीची शक्तिपीठे]]
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कोकणातील कुणबी
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text/x-wiki
{{Infobox ethnic group
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'''कोकणातील कुणबी''' हा महाराष्ट्राच्या कोकण प्रदेशातील ऐतिहासिकदृष्ट्या कृषी आणि ग्रामीण जीवनाशी संबंधित असलेला सामाजिक समुदाय आहे. कोकणातील कुणबींच्या इतिहासाचा संबंध रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, रायगड आणि ऐतिहासिक ठाणे जिल्ह्याच्या विविध भागांतील ग्रामीण समाजरचना, शेती, जमीनव्यवस्था आणि स्थानिक अर्थव्यवस्थेशी आढळतो. ब्रिटिशकालीन गॅझेटियर, जनगणना अहवाल तसेच नंतरच्या मानववंशशास्त्रीय आणि भाषावैज्ञानिक अभ्यासांमध्ये या समुदायाचा उल्लेख आढळतो.<ref name="Ratnagiri1880">{{cite book
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Ratnagiri and Savantvadi
|volume=10
|publisher=Government Central Press
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|year=1880
}}</ref><ref name="Kolaba1883">{{cite book
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira
|volume=11
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|year=1883
}}</ref><ref name="Enthoven1922">{{cite book
|last=Enthoven
|first=Reginald Edward
|title=The Tribes and Castes of Bombay
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|location=Bombay
|year=1922
}}</ref>
कोकणातील कुणबींच्या इतिहासाची सुरुवात एखाद्या विशिष्ट राजवंशापासून किंवा एका निश्चित कालखंडापासून झाली असे निश्चितपणे सांगता येत नाही. महाराष्ट्र आणि कोकणातील कृषीप्रधान ग्रामजीवनाची पार्श्वभूमी प्राचीन आहे; तथापि प्रागैतिहासिक किंवा प्राचीन काळातील कृषक समुदायांना आधुनिक अर्थाने थेट ''कुणबी'' म्हणणे इतिहासदृष्ट्या योग्य ठरत नाही. पुढील काळात कृषी, जमीनव्यवस्था, ग्रामसंस्था, महसूलपद्धती, स्थलांतर आणि सामाजिक ओळखीमधील बदलांच्या प्रक्रियेत कोकणातील कुणबी समाजाची विविध प्रादेशिक रूपे विकसित झाली.
१९व्या शतकातील ब्रिटिशकालीन गॅझेटियर आणि जनगणना अहवाल कोकणातील लोकसंख्या, शेती, जमीनधारणा आणि ग्रामीण समाजरचनेच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचे ऐतिहासिक स्रोत आहेत. रत्नागिरी आणि सावंतवाडी, कोलाबा आणि जंजिरा तसेच ठाणे प्रदेशांच्या गॅझेटियरमध्ये कृषक समाज, जमीनव्यवस्था, महसूल आणि ग्रामीण जीवनाचे वर्णन आढळते.<ref name="Ratnagiri1880" /><ref name="Kolaba1883" /><ref name="Thana1882">{{cite book
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Thana
|volume=13
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1882
}}</ref>
कोलाबा जिल्ह्याच्या १८८१ च्या जनगणनेनुसार जिल्ह्याची एकूण लोकसंख्या ३,८१,६४९ होती. त्याच नोंदींमध्ये जन्मस्थान, भाषा, धर्म, वय, लिंग आणि उपविभागनिहाय लोकसंख्येची माहिती देण्यात आली आहे.<ref name="Kolaba1883" />
कोकणातील कुणबी समाज एकसंध आणि अपरिवर्तनीय सामाजिक गट म्हणून राहिलेला नाही. वेगवेगळ्या प्रदेशांतील स्थानिक सामाजिक रचना, विवाहपद्धती, स्थलांतर, आर्थिक परिस्थिती, जमीनधारणा आणि प्रशासकीय वर्गीकरण यांमुळे कुणबीशी संबंधित विविध प्रादेशिक आणि सामाजिक ओळखी आढळतात. ब्रिटिशकालीन जनगणना आणि ethnographic साहित्यामध्ये ''Kunbi'', ''Kanbi'', ''Maratha Kunbi'' तसेच इतर प्रादेशिक संज्ञांचा वापर आढळतो. या संज्ञांचे अर्थ आणि प्रशासकीय वर्गीकरण काळानुसार बदलत गेले असल्यामुळे वेगवेगळ्या जनगणनांतील आकडे थेट परस्पर तुलनीय मानताना सावधगिरी आवश्यक आहे.<ref name="Enthoven1922" />
कोकणातील कुणबी समाजाच्या इतिहासात शेतीला महत्त्वाचे स्थान राहिले असले तरी समुदायाची सामाजिक आणि आर्थिक भूमिका केवळ शेतीपुरती मर्यादित राहिलेली नाही. कोलाबा गॅझेटियरमध्ये महाड आणि माणगाव परिसरातील कुणबी कापणीचा हंगाम संपल्यानंतर मुंबई आणि इतर मजूर बाजारपेठांकडे हंगामी स्वरूपात जात असल्याची नोंद आहे. त्याच नोंदीमध्ये काही कुणबी सैन्य, पोलीस आणि इतर सरकारी सेवांमध्ये प्रवेश करून घरी राहिलेल्या कुटुंबीयांना पैसे पाठवत असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Kolaba1883" />
पुढील काळात शिक्षण, सरकारी सेवा, व्यवसाय, उद्योग, सहकार आणि शहरी रोजगार यांमध्येही कोकणातील ग्रामीण समाजाचा सहभाग वाढला. या सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनाचा अभ्यास करताना कुणबी समाजाची स्वतंत्र आकडेवारी आणि संपूर्ण ग्रामीण किंवा जिल्हास्तरीय आकडेवारी यांमध्ये फरक ठेवणे आवश्यक आहे.
कोकणातील ग्रामीण लोकसंख्येतील बदल आणि रोजगारासाठी होणारे स्थलांतर हे आधुनिक काळातील महत्त्वाचे सामाजिक-आर्थिक घटक आहेत. विशेषतः रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्गसारख्या जिल्ह्यांमध्ये शिक्षण आणि रोजगारासाठी मोठ्या शहरी केंद्रांकडे होणाऱ्या स्थलांतराचा ग्रामीण समाजावर परिणाम झाला आहे. Kunkeri गावावरील १९६१–१९८७–२०१७ या कालखंडाच्या तुलनात्मक अभ्यासात दीर्घकालीन स्थलांतर, शिक्षणासाठी स्थलांतर, रोजगारातील बदल आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेतील परिवर्तन यांचे दस्तऐवजीकरण करण्यात आले आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019">{{cite journal
|last=Vartak
|first=Kalyani
|author2=Chinmay Tumbe
|author3=Amita Bhide
|title=Mass Migration from Rural India: A Restudy of Kunkeri Village in Konkan, Maharashtra, 1961–1987–2017
|journal=Journal of Interdisciplinary Economics
|volume=31
|issue=1
|year=2019
|pages=42–62
}}</ref>
आज कोकणातील कुणबींची स्वतंत्र आणि अधिकृत जिल्हानिहाय लोकसंख्या किंवा टक्केवारी उपलब्ध नाही. आधुनिक जनगणनेत सर्व जातींची स्वतंत्र आणि सातत्यपूर्ण जिल्हानिहाय लोकसंख्या प्रकाशित झालेली नसल्यामुळे उपलब्ध अनधिकृत अंदाजांना अधिकृत जनगणना आकडे म्हणून मांडता येत नाही. त्यामुळे ऐतिहासिक Censusमधील कुणबी किंवा Maratha-Kunbi वर्गीकरणाची संख्या आणि आजच्या कुणबी समाजाची लोकसंख्या यांची थेट तुलना करणे योग्य नाही.
भारत सरकारने २०२७मध्ये जनगणना घेण्याचा निर्णय घेतला असून केंद्र सरकारने २०२५मध्ये या जनगणनेत जातीनिहाय माहिती संकलित करण्याचा निर्णय जाहीर केला आहे. त्यामुळे जनगणना प्रक्रिया पूर्ण होऊन अधिकृत आकडे प्रसिद्ध झाल्यानंतर कुणबी आणि संबंधित सामाजिक वर्गांच्या लोकसंख्येबाबत अधिक व्यापक अधिकृत माहिती उपलब्ध होण्याची शक्यता आहे. मात्र सध्या २०२७ची जातीनिहाय लोकसंख्या उपलब्ध आहे असे मानता येत नाही.<ref>{{cite web
|title=Lok Sabha Unstarred Question No. 258
|publisher=Ministry of Home Affairs, Government of India
|date=2 December 2025
|url=https://www.mha.gov.in/MHA1/Par2017/pdfs/par2025-pdfs/LS02122025/258.pdf
}}</ref>
या लेखात कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास, नाव आणि संज्ञांची पार्श्वभूमी, भौगोलिक वितरण, मध्ययुगीन आणि ब्रिटिशकालीन ग्रामीण समाज, रत्नागिरी, रायगड आणि उत्तर कोकणातील सामाजिक स्थिती, तिलोरी कुणबी, कुणबी बोली, सामाजिक रचना, शेती आणि अर्थव्यवस्था, स्थलांतर, मराठा-कुणबी संबंध, लोकसंख्याशास्त्रीय बदल, आधुनिक प्रशासकीय स्थिती आणि सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन यांचा उपलब्ध विश्वसनीय ऐतिहासिक, शासकीय आणि शैक्षणिक स्रोतांच्या आधारे आढावा घेतला आहे.
== कुणबी आणि संज्ञा ==
‘कुणबी’ ही संज्ञा पश्चिम भारतातील कृषक समुदायांच्या संदर्भात ऐतिहासिकदृष्ट्या वापरली गेली आहे. महाराष्ट्र आणि कोकणाच्या विविध भागांत या समुदायाशी संबंधित ''Kunbi'', ''Kanbi'', ''Kulambi'', ''Kulwādi'' तसेच काही प्रादेशिक संदर्भांत ''Tilori Kunbi'' यांसारख्या संज्ञा वेगवेगळ्या काळातील स्रोतांमध्ये आढळतात. या संज्ञांचा वापर सर्व प्रदेशांत आणि सर्व काळात समान अर्थाने झाला असे मानता येत नाही. वसाहतकालीन ethnographic साहित्य, जनगणना आणि प्रशासकीय नोंदींमध्ये सामाजिक समूहांचे वर्गीकरण प्रदेश आणि काळानुसार बदलत गेले.<ref name="Enthoven1922" /><ref name="RussellHiralal1916">{{cite book
|last=Russell
|first=R. V.
|author2=Hiralal
|title=The Tribes and Castes of the Central Provinces of India
|volume=4
|publisher=Macmillan and Co., Limited
|location=London
|year=1916
}}</ref>
=== कुणबी आणि Kunbi ===
‘कुणबी’ हे मराठी रूप असून इंग्रजीतील ''Kunbi'' हे त्याचे प्रचलित लिप्यंतरित रूप आहे. वसाहतकालीन ethnographic साहित्यामध्ये ''Kunbi'' हा शब्द महाराष्ट्र आणि पश्चिम भारतातील विविध कृषक समुदायांच्या संदर्भात वापरला गेला आहे. Enthoven यांच्या The Tribes and Castes of Bombay मध्ये ''Kunbi'' आणि ''Kanbi'' या संज्ञांचा कृषक समुदायांच्या संदर्भात विचार करण्यात आला आहे.<ref name="Enthoven1922" />
=== Kanbi ===
‘कानबी’ किंवा ''Kanbi'' ही संज्ञा विशेषतः गुजरातमधील कृषक समुदायांच्या संदर्भात आढळते. Enthoven यांच्या लेखनात ''Kanbi'' आणि ''Kunbi'' ही रूपे परस्पर संबंधित संज्ञा म्हणून चर्चिली आहेत. Russell आणि Hiralal यांनीही ''Kanbi'' हे गुजरातमधील, तर ''Kunbi'' हे दख्खनमधील प्रचलित रूप असल्याची नोंद केली आहे.<ref name="Enthoven1922" /><ref name="RussellHiralal1916"/>
या नोंदींवरून ‘कानबी’ आणि ‘कुणबी’ ही नावे वेगवेगळ्या प्रदेशांत प्रचलित असलेली भाषिक रूपे असल्याचे दिसते; मात्र केवळ नावातील साम्याच्या आधारे या सर्व समुदायांची एकच ऐतिहासिक उत्पत्ती निश्चित करता येत नाही.
=== Kulambi आणि कुलंबी ===
''Kulambi'' हे रूप जुन्या ethnographic साहित्यात कुणबीशी संबंधित प्रादेशिक रूप म्हणून आढळते. Russell आणि Hiralal यांनी बॉम्बे प्रदेशातील विविध प्रादेशिक रूपांचा उल्लेख करताना दख्खनमध्ये ''Kunbi'' किंवा ''Kulambi'', दक्षिण कोकणात ''Kulwādi'', गुजरातमध्ये ''Kanbi'' आणि बेळगाव परिसरात ''Kulbi'' अशी रूपे नोंदवली आहेत.<ref name="RussellHiralal1916"/>
मात्र ‘कुलंबी’ हे ‘कुणबी’चेच मूळ रूप आहे किंवा दोन्ही शब्दांची निर्मिती एकाच ऐतिहासिक प्रक्रियेतून झाली आहे, असे निर्विवादपणे सिद्ध झालेले नाही. त्यामुळे ‘कुलंबी’ आणि ‘कुणबी’ यांचा संबंध मांडताना तो संभाव्य भाषिक संबंध किंवा ऐतिहासिक व्युत्पत्तीविषयक मत म्हणूनच मांडणे आवश्यक आहे.
=== Kulwadi / कुलवाडी ===
‘कुलवाडी’ किंवा ''Kulwādi'' ही संज्ञा विशेषतः दक्षिण कोकणाशी संबंधित प्रादेशिक रूप म्हणून Russell आणि Hiralal यांच्या नोंदीत आढळते. त्याच नोंदीत ''Kunbi'', ''Kulambi'', ''Kulwādi'', ''Kanbi'' आणि ''Kulbi'' ही विविध प्रादेशिक रूपे नमूद केली आहेत.<ref name="RussellHiralal1916"/>
कोकणातील सामाजिक इतिहासाच्या अभ्यासात ‘कुलवाडी’ ही संज्ञा स्थानिक संदर्भात स्वतंत्रपणे तपासणे आवश्यक आहे. ती प्रत्येक ठिकाणी आणि प्रत्येक काळात ‘कुणबी’ची तंतोतंत समानार्थी संज्ञा होती असे गृहीत धरता येत नाही.
=== Kutumbika / कुटुम्बिक ===
‘कुटुम्बिक’ किंवा ''Kutumbika'' या प्राचीन संज्ञेचा ‘कुणबी’ या आधुनिक सामाजिक नावाशी संबंध जोडणारे मत जुन्या ethnographic साहित्यात आढळते. Russell आणि Hiralal यांनी बॉम्बे प्रदेशातील ''Kunbi'' आणि ''Kulambi'' या रूपांचा उल्लेख करताना संस्कृत अभिलेखांमध्ये ''Kutumbika'' हे रूप आढळते आणि त्याचा संबंध ''kutumba'' म्हणजे कुटुंब याच्याशी जोडला जातो, अशी व्युत्पत्तीविषयक मांडणी नोंदवली आहे. त्यांच्या नोंदीनुसार अकराव्या शतकातील एका वृत्तांतात ''Kutumbiks'' या संज्ञेचा ग्रामांतील कृषकांच्या संदर्भात उल्लेख करण्यात आला होता.<ref name="RussellHiralal1916"/>
Russell आणि Hiralal यांनी ''Kutumbika''पासून कुणबी नावाची व्युत्पत्ती होऊ शकते, अशी मांडणी नोंदवली असली तरी त्यांनी इतर व्युत्पत्तीविषयक मतेही दिली आहेत. त्यामुळे ''Kutumbika'' → ''Kulambi'' → ''Kunbi'' हा क्रम निश्चित आणि निर्विवाद ऐतिहासिक व्युत्पत्ती म्हणून मांडता येत नाही.<ref name="RussellHiralal1916"/>
‘कुटुम्बिक’ आणि आधुनिक ‘कुणबी’ यांच्यातील संबंधाबाबत भाषिक आणि सामाजिक-ऐतिहासिक असे दोन स्वतंत्र प्रश्न विचारात घेणे आवश्यक आहे. भाषिकदृष्ट्या संभाव्य व्युत्पत्तीचे मत उपलब्ध आहे; मात्र प्राचीन ''Kutumbika'' आणि आधुनिक कुणबी हा एकच अखंड सामाजिक समुदाय असल्याचा निर्णायक पुरावा उपलब्ध आहे, असे मानता येत नाही.
=== Tilori / Tillori Kunbi ===
‘तिलोरी कुणबी’ किंवा ''Tilori Kunbi'' ही संज्ञा रत्नागिरी जिल्ह्याशी संबंधित ऐतिहासिक प्रशासकीय नोंदींमध्ये विशेषत्वाने आढळते. २३ एप्रिल १९४२ च्या तत्कालीन बॉम्बे सरकारच्या ठरावात ''Kunbi (except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)'' असा उल्लेख करण्यात आला होता, तर ''Kunbi Tilori in Ratnagiri district'' ही स्वतंत्र नोंद इतर मागास समुदायांच्या यादीत करण्यात आली होती. मुंबई उच्च न्यायालयाने २००२ च्या Dattatraya s/o Ramrao Thorat v. State of Maharashtra या निर्णयात १९४२ च्या ठरावासह १९५०, १९५६ आणि १९६१ च्या संबंधित शासन ठरावांमध्ये ही प्रशासकीय स्थिती कायम राहिल्याची नोंद केली आहे. १३ ऑक्टोबर १९६७ च्या महाराष्ट्र शासनाच्या ठरावात ''Kunbi caste'' ही स्वतंत्र इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत अनुक्रमांक ८३वर समाविष्ट करण्यात आल्याचेही न्यायालयाने नमूद केले आहे.<ref name="DattatrayaThorat2002">{{cite web
|title=Dattatraya S/o Ramrao Thorat v. The State of Maharashtra & Ors.
|publisher=Bombay High Court
|date=24 April 2002
|url=https://indiankanoon.org/doc/726744/
}}</ref>
तिलोरी कुणबीशी संबंधित भाषिक अभ्यासही करण्यात आला आहे. A. M. Ghatge यांनी Kunbi of Mahad या ग्रंथात महाड परिसरातील कुणबी बोलीचे भाषिक वर्णन केले आहे. हा ग्रंथ A Survey of Marathi Dialects या मालिकेतील Series III म्हणून १९६६मध्ये Bombay State Board for Literature and Cultureने प्रकाशित केला होता.<ref name="Ghatge1966">{{cite book
|last=Ghatge
|first=A. M.
|title=Kunbi of Mahad
|series=A Survey of Marathi Dialects
|volume=3
|publisher=Bombay State Board for Literature and Culture
|location=Bombay
|year=1966
}}</ref>
‘तिलोरी कुणबी’, ‘तिल्लोरी कुणबी’ आणि इतर संबंधित संज्ञांचा वापर करताना ऐतिहासिक सामाजिक ओळख, भाषिक रूप आणि आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरण यांमध्ये फरक करणे आवश्यक आहे. आधुनिक शासनाच्या वर्गीकरणात वापरली जाणारी संज्ञा आणि जुन्या ethnographic किंवा Census स्रोतांतील संज्ञा एकाच अर्थाने वापरल्या गेल्या आहेत असे गृहीत धरता येत नाही.
=== Maratha-Kunbi आणि Kunbi-Maratha ===
‘Maratha-Kunbi’ आणि ‘Kunbi-Maratha’ या संज्ञांचा वापर विविध ऐतिहासिक आणि प्रशासकीय संदर्भांत आढळतो. ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये Maratha आणि Kunbi या वर्गीकरणांमधील सीमा नेहमी स्पष्ट राहिल्या नाहीत. १९११ च्या बॉम्बे जनगणनेत ''Kunbi Maratha'' हा गट ''Kunbi''च्या वर्गात स्वतंत्रपणे दाखविण्यात आला होता. १९५१ च्या बॉम्बे जनगणना-आधारित अधिकृत अहवालात १९०१मध्ये ''Mahratha Kunbis'' यांची गणना ''Mahrathas''मध्ये, तर १९११मध्ये त्यांची गणना ''Kunbis''मध्ये करण्यात आल्याचे स्पष्टपणे नमूद केले आहे.<ref name="Census1911Bombay">{{cite book
|last=Mead
|first=P. J.
|author2=G. Laird MacGregor
|title=Census of India, 1911: Bombay
|volume=7
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1912
|chapter=Part I: Report
}}</ref><ref name="EstimatedPopulationCastesBombay">{{cite web
|title=Estimated Population by Castes, Bombay
|publisher=Census of India
|url=https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/30207/download/33388/21097_1951_EST.pdf
}}</ref>
या वर्गीकरणातील बदलामुळे वेगवेगळ्या जनगणनांतील Maratha आणि Kunbi यांच्या लोकसंख्येची थेट तुलना करताना त्या-त्या जनगणनेतील वर्गीकरणपद्धती लक्षात घेणे आवश्यक ठरते. १९२१ च्या बॉम्बे जनगणना अहवालातही Maratha म्हणून नोंदविल्या जाणाऱ्या व्यक्तींच्या संख्येची तुलना Kunbiशी करताना अशीच अडचण असल्याचे नमूद करण्यात आले होते.<ref name="Census1921Bombay">{{cite book
|title=Census of India, 1921: Bombay
|volume=9
|publisher=Times Press
|location=Bombay
|year=1922
|chapter=Part I: Report
}}</ref>
१९३१ च्या बॉम्बे जनगणना अहवालाने Maratha आणि Kunbi या संज्ञांच्या वापराबाबत स्पष्ट वर्गीकरणीय अडचण नोंदवली होती. अहवालानुसार त्या जनगणनेतील Maratha लोकसंख्येतील वाढीचा एक भाग Kunbi म्हणून नोंदवल्या जाणाऱ्या लोकसंख्येतील घटेशी संबंधित असू शकतो. अहवालात ''Maratha'' आणि ''Kunbi'' या संज्ञांच्या वापराबाबत असलेल्या गोंधळामुळे या बाबतीत समाधानकारक सांख्यिक तुलना करण्यासाठी संज्ञांची अधिक स्पष्ट व्याख्या आवश्यक असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Census1931Bombay">{{cite book
|title=Census of India, 1931: Bombay Presidency
|volume=8
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1933
|chapter=Part I: Report
}}</ref>
१९३१ च्या जनगणनेतील या वर्गीकरणीय समस्येवरून Maratha आणि Kunbi या सामाजिक संज्ञांचा वापर सर्व प्रदेशांत एकसारखा होता असे दिसत नाही. त्यामुळे या जनगणना नोंदींच्या आधारे ‘Maratha हीच Kunbi जात आहे’ किंवा ‘Kunbi हीच Maratha जात आहे’ असा सार्वत्रिक ऐतिहासिक निष्कर्ष काढता येत नाही. उपलब्ध Census नोंदी मात्र या दोन संज्ञांमध्ये काही प्रदेशांत सामाजिक आणि प्रशासकीय सीमारेषा बदलत्या स्वरूपाच्या होत्या, हे दर्शवतात.<ref name="EstimatedPopulationCastesBombay" /><ref name="Census1931Bombay" />
=== संज्ञा, सामाजिक ओळख आणि प्रशासकीय वर्गीकरण ===
कुणबीशी संबंधित संज्ञांचा इतिहास पाहताना भाषिक रूप, सामाजिक ओळख आणि सरकारी वर्गीकरण या वेगवेगळ्या बाबी स्वतंत्रपणे पाहणे आवश्यक आहे. एखाद्या काळात एखाद्या समूहासाठी वापरलेले नाव पुढील काळात त्याच अर्थाने वापरले गेले असे आवश्यक नाही. ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्येही जातीय वर्गीकरणातील बदलांमुळे लोकसंख्येच्या आकडेवारीत फरक पडल्याचे अधिकृत Census साहित्यामध्ये नोंदविले आहे.<ref name="EstimatedPopulationCastesBombay">{{cite web
|title=Estimated Population by Castes, Bombay
|publisher=Census of India
|url=https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/30207/download/33388/21097_1951_EST.pdf
}}</ref>
आधुनिक महाराष्ट्राच्या प्रशासकीय वर्गीकरणात ‘Kunbi’ ही नोंद इतर मागासवर्गीयांच्या यादीतील अनुक्रमांक ८३वर आहे. महाराष्ट्र शासनाच्या १३ मे २०२५ च्या अद्ययावत संकलित यादीत या नोंदीखाली ''Lewa Kunbi'', ''Lewa Patil'', ''Lewa Patidar'', ''Maratha Kunbi'', ''Kunbi Maratha'', ''Tilori Kunbi'', ''Tillori Kunbi'' आणि ''Ti. Kunbi'' या संज्ञांचा समावेश करण्यात आला आहे.<ref name="MaharashtraOBCList2025">{{cite web
|title=महाराष्ट्र राज्याची विमुक्त जाती, भटक्या जमाती, इतर मागासवर्ग व विशेष मागासवर्गाची इंग्रजी भाषांतरित यादी
|publisher=इतर मागास बहुजन कल्याण विभाग, महाराष्ट्र शासन
|date=13 May 2025
|url=https://gr.maharashtra.gov.in/Site/Upload/Government%20Resolutions/Marathi/20250513170904091534.pdf
}}</ref>
ही यादी प्रशासकीय आणि आरक्षणाच्या संदर्भातील वर्गीकरण आहे. तिच्यातील उपसंज्ञा आणि ऐतिहासिक Census किंवा ethnographic साहित्यामध्ये वापरलेल्या सामाजिक संज्ञा यांना परस्परांचे थेट समानार्थी मानता येत नाही. महाराष्ट्र शासनाच्या २०२५ च्या परिपत्रकातही सदर यादी ही संकलित स्वरूपाची असून संबंधित जात किंवा जमातीचा समावेश ज्या शासन निर्णय किंवा आदेशाद्वारे करण्यात आला आहे, ते मूळ शासन निर्णय किंवा आदेश ग्राह्य धरावेत, असे स्पष्ट केले आहे.<ref name="MaharashtraOBCList2025" />
=== व्युत्पत्तीबाबत निष्कर्ष ===
‘कुणबी’ या शब्दाची व्युत्पत्ती निश्चितपणे एका स्रोताने किंवा एका सिद्धांताने स्पष्ट झालेली नाही. ''Kunbi'', ''Kanbi'', ''Kulambi'' आणि ''Kulwādi'' ही विविध प्रादेशिक रूपे जुन्या ethnographic साहित्यात नोंदविण्यात आली आहेत. त्याच साहित्यात ''Kutumbika'' या प्राचीन संज्ञेशी ‘कुणबी’चा संबंध जोडणारे व्युत्पत्तीविषयक मतही आढळते.<ref name="RussellHiralal1916"/>
मात्र ''Kutumbika'' ही प्राचीन संज्ञा आणि आधुनिक ‘कुणबी’ हा सामाजिक समुदाय यांच्यात थेट, अखंड आणि निर्विवाद वंशसंबंध सिद्ध झालेला आहे, असे उपलब्ध पुराव्यांवरून म्हणता येत नाही. त्यामुळे ‘कुटुम्बिक → कुलंबी → कुणबी’ ही मांडणी या लेखात '''संभाव्य व्युत्पत्तीविषयक मत''' म्हणूनच नमूद करणे उचित आहे; '''सिद्ध ऐतिहासिक वंशावळ''' म्हणून नव्हे.<ref name="RussellHiralal1916"/>
== प्राचीन आणि पूर्व-मध्ययुगीन कोकणातील कृषक समाज ==
कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास समजून घेण्यासाठी त्यापूर्वीच्या कोकणातील मानवी वस्ती, उपजीविका, कृषी, पशुपालन, ग्रामजीवन आणि प्रारंभिक ग्रामीण अर्थव्यवस्थेची पार्श्वभूमी लक्षात घेणे आवश्यक आहे. मात्र प्रागैतिहासिक किंवा प्राचीन काळातील कृषक समुदायांना आधुनिक अर्थाने ‘कुणबी’ म्हणून ओळखणे इतिहासदृष्ट्या योग्य ठरत नाही. आधुनिक ‘कुणबी’ ही सामाजिक ओळख नंतरच्या ऐतिहासिक प्रक्रियांमध्ये विकसित झालेली आहे. त्यामुळे या विभागात प्राचीन कृषक संस्कृती आणि आधुनिक कुणबी समाज यांच्यात थेट वंशपरंपरेचा दावा केला जात नाही.
=== कोकणातील प्राचीन मानवी वस्ती ===
कोकणात प्रागैतिहासिक मानवी उपस्थितीचे पुरावे विविध स्वरूपात आढळतात. विशेषतः महाराष्ट्राच्या पश्चिम किनारपट्टीवरील लेटराइट पठारांवर आढळणाऱ्या भूरूपचित्रांचा (geoglyphs) अभ्यास कोकणातील प्रागैतिहासिक मानवी क्रियाशीलतेच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचा ठरला आहे. युनेस्कोच्या तात्पुरत्या जागतिक वारसा यादीतील नोंदीनुसार कोकणातील भूरूपचित्रांचा कालपट मेसोलिथिक काळापासून आरंभीच्या ऐतिहासिक काळापर्यंत पसरलेला आहे. या भूरूपचित्रांमध्ये प्राणी, मानवी आकृती आणि भूमितीय चिन्हांसह विविध प्रकारच्या आकृत्या आढळतात.<ref name="UNESCOGeoglyphsKonkan">{{cite web
|title=Geoglyphs of Konkan Region of India
|publisher=UNESCO World Heritage Centre
|url=https://whc.unesco.org/en/tentativelists/6605/
}}</ref>
कोकणातील भूरूपचित्रांच्या समूहामुळे या प्रदेशात दीर्घकालीन मानवी व सांस्कृतिक क्रियाशीलतेचे पुरावे उपलब्ध झाले आहेत. तथापि या पुराव्यांच्या आधारे त्या काळातील लोकसंख्येला आधुनिक काळातील कोणत्याही विशिष्ट जातीय किंवा सामाजिक समुदायाशी जोडता येत नाही. UNESCOच्या नोंदीनुसार या भूरूपचित्रांचा संबंध मेसोलिथिक ते आरंभीच्या ऐतिहासिक काळातील मानवी सांस्कृतिक प्रक्रियांशी जोडला जातो; त्यामुळे त्यांचा उपयोग प्राचीन कोकणातील मानवी उपस्थितीच्या पुराव्यांपुरताच करणे अधिक योग्य ठरते.<ref name="UNESCOGeoglyphsKonkan" />
कोकणाची भौगोलिक रचना सह्याद्रीच्या पश्चिम उतारांपासून अरबी समुद्रापर्यंत पसरलेल्या अरुंद किनारी प्रदेशाची आहे. नद्या, खाड्या, डोंगर, पठारे आणि समुद्रकिनारा यांमुळे येथील मानवी वस्ती आणि उपजीविकेचे स्वरूप प्रदेशानुसार बदलत गेले. त्यामुळे कोकणातील प्रागैतिहासिक समाजाचा अभ्यास करताना दख्खनच्या पठारी प्रदेशातील पुरातत्त्वीय संस्कृतींचे पुरावे थेट कोकणाला लागू न करता कोकणातील स्वतंत्र पुरातत्त्वीय साक्ष विचारात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="UNESCOGeoglyphsKonkan" />
=== महाराष्ट्रातील प्रारंभिक कृषी संस्कृती ===
महाराष्ट्रातील कृषी आणि स्थिर वस्तीच्या विकासाचा पुरातत्त्वीय इतिहास ताम्रपाषाणकालीन संस्कृतींच्या अभ्यासातून स्पष्ट होतो. दख्खनमधील ताम्रपाषाण संस्कृतीच्या विविध टप्प्यांमध्ये सावळदा, मालवा आणि जोर्वे संस्कृतींचा समावेश होतो. या काळातील वसाहती नदीकाठच्या उंच भागांवर वसवल्या जात असत; त्यामुळे पूर टाळण्याबरोबरच जवळच्या पूरमैदानांचा शेतीसाठी, कुरणांचा पशुपालनासाठी आणि वनक्षेत्रांचा शिकार व संकलनासाठी उपयोग करता येत असे. या समाजाची उपजीविका शेती, पशुपालन, शिकार, मासेमारी आणि वन्य संसाधनांच्या वापरावर आधारित मिश्र स्वरूपाची होती. पुढील काळात मालवा आणि आरंभीच्या जोर्वे टप्प्यात शेतीची तीव्रता वाढली आणि काही ठिकाणी दुबार पीकपद्धतीचा अवलंब झाल्याचे पुरावे मिळतात. ताम्रपाषाणकालीन लोकांनी जव, गहू, तांदूळ तसेच नाचणी, ज्वारी आणि कोदो यांसारख्या पिकांची लागवड केली होती. मातीची भांडी, दगडी व तांब्याची साधने आणि स्थिर वस्तींचे अवशेष या काळातील भौतिक संस्कृतीची वैशिष्ट्ये दर्शवतात.<ref name="RobbinsSchug">{{cite web
|last=Robbins Schug
|first=Gwen
|title=Chalcolithic Cultures of Western India
|work=Pre and protohistoric cultures of India
|publisher=INFLIBNET Centre
|url=https://ebooks.inflibnet.ac.in/icp02/chapter/159/
}}</ref><ref name="KorisettarArchaeobotany">{{cite web
|last=Korisettar
|first=Ravi
|title=Archaeobotany: Its relevance in reconstruction of agricultural history
|work=Pre and protohistoric cultures of India
|publisher=INFLIBNET Centre
|url=https://ebooks.inflibnet.ac.in/icp02/chapter/archaeobotany-its-relevance-in-reconstruction-of-agricultural-history/
}}</ref>
या काळातील समाजांची अर्थव्यवस्था केवळ शेतीवर आधारित नव्हती. उपलब्ध पुरातत्त्वीय पुराव्यांमध्ये पशुपालन, शिकार, मासेमारी आणि वनस्पतीजन्य अन्नस्रोतांचा वापर यांचाही समावेश आढळतो. त्यामुळे महाराष्ट्रातील प्रारंभिक कृषक अर्थव्यवस्थेचे स्वरूप मिश्र उपजीविकेचे होते.<ref name="KorisettarArchaeobotany" />
=== इनामगाव आणि ताम्रपाषाणकालीन कृषी जीवन ===
इनामगाव हे महाराष्ट्रातील ताम्रपाषाणकालीन कृषक वस्तीच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचे पुरातत्त्वीय स्थळ आहे. हे स्थळ पुणे जिल्ह्यातील घोड नदीच्या परिसरात आहे. उत्खननातून मालवा, आरंभीचा जोर्वे आणि उत्तर जोर्वे या सांस्कृतिक टप्प्यांतील वस्तीचे पुरावे मिळाले आहेत.<ref name="RobbinsSchug" /><ref name="DhavalikarInamgaon">{{cite web
|last=Dhavalikar
|first=M. K.
|title=Settlement Archaeology of Inamgaon
|publisher=Indira Gandhi National Centre for the Arts
|url=https://ignca.gov.in/Asi_data/63860.pdf
}}</ref>
इनामगावातील पुराव्यांमधून बार्ली, गहू, तांदूळ, नाचणी, ज्वारी, कुळीथ, वाटाणा, मसूर, मूग, उडीद आणि इतर कडधान्यांच्या लागवडीचे पुरावे मिळाले आहेत. पशुपालन आणि शिकार यांचाही अर्थव्यवस्थेत सहभाग होता. या पुराव्यांवरून ताम्रपाषाणकालीन महाराष्ट्रातील कृषी अर्थव्यवस्था विविध पिके, पशुपालन आणि इतर उपजीविकांच्या मिश्र स्वरूपाची होती असे दिसते.<ref name="RobbinsSchug" />
इनामगावच्या अभ्यासात कृषी व्यवस्थेशी संबंधित पाण्याच्या वापराचे आणि सिंचनाचे पुरावेही नोंदविले गेले आहेत. या पुराव्यांमुळे महाराष्ट्रातील काही ताम्रपाषाणकालीन कृषक समुदायांना पाणी, जमीन आणि पिकांच्या नियोजनाचा अनुभव असल्याचे दिसून येते.<ref name="RobbinsSchug" />
=== कोकण आणि जोर्वे संस्कृती ===
जोर्वे ही महाराष्ट्रातील ताम्रपाषाणकालीन पुरातत्त्वीय संस्कृती असून तिचे प्रमुख केंद्र दख्खनमधील नदीखोऱ्यांत होते. आधुनिक महाराष्ट्राच्या पश्चिम किनाऱ्याचा, विशेषतः कोकणाचा, जोर्वे संस्कृतीच्या मुख्य विस्तारात समावेश नसल्याचे पुरातत्त्वीय अभ्यासांमध्ये नमूद केले आहे.<ref name="Shinde1991">{{cite journal
|last=Shinde
|first=Vasant
|title=Craft specialization and social organization in the Chalcolithic Deccan, India
|journal=Antiquity
|volume=65
|issue=249
|year=1991
|pages=796–807
}}</ref>
म्हणून महाराष्ट्रातील जोर्वे संस्कृतीचा इतिहास आणि कोकणातील प्राचीन मानवी वस्ती यांचा अभ्यास स्वतंत्र पुरातत्त्वीय संदर्भांत करणे आवश्यक आहे. जोर्वे संस्कृतीचे कृषक जीवन महाराष्ट्रातील प्राचीन कृषी अर्थव्यवस्थेचे महत्त्वाचे उदाहरण आहे; मात्र ‘जोर्वे संस्कृती म्हणजे कोकणातील कुणबींची पूर्वज संस्कृती’ असा निष्कर्ष उपलब्ध पुराव्यांवरून काढता येत नाही.<ref name="Shinde1991" />
=== प्रारंभिक ग्रामजीवन आणि कृषी अर्थव्यवस्था ===
ताम्रपाषाणकालीन महाराष्ट्रातील पुरातत्त्वीय स्थळांवरून स्थिर किंवा अर्ध-स्थिर वस्ती, घरांची रचना, धान्यसाठवण, शेतीची साधने, पशुपालन आणि विविध प्रकारच्या हस्तकौशल्यांचे पुरावे मिळतात. या पुराव्यांमधून ग्रामीण अर्थव्यवस्थेची प्राथमिक रूपे आणि कृषी उत्पादनाशी संबंधित सामाजिक संघटनांचा विकास झाल्याचे दिसते.<ref name="RobbinsSchug"/>
मात्र अशा प्राचीन वस्तींच्या सामाजिक संरचनेला आधुनिक जातव्यवस्थेतील ‘कुणबी’ या विशिष्ट जातनावाशी थेट जोडण्यासाठी आवश्यक असलेला सलग पुरातत्त्वीय, अभिलेखीय आणि सामाजिक पुरावा उपलब्ध नाही. त्यामुळे प्राचीन कृषक समाज हा आधुनिक कुणबी समाजाचा थेट पूर्वज होता, असा निष्कर्ष या लेखात मांडलेला नाही.
=== प्राचीन कृषक समाजापासून ऐतिहासिक ग्रामीण समाजाकडे ===
कोकणातील प्रागैतिहासिक आणि आरंभीच्या ऐतिहासिक मानवी वस्तीचा पुरावा हा आधुनिक कुणबी समाजाच्या इतिहासाचा थेट पुरावा नसला, तरी तो पुढील ग्रामीण आणि कृषी समाजाच्या ऐतिहासिक पार्श्वभूमीचा महत्त्वाचा भाग आहे. कोकणाचा प्राचीन इतिहास हा किनारी वसाहती, नदीखोरे, बंदरे, व्यापारमार्ग आणि सह्याद्रीमार्गे दख्खनशी असलेल्या संपर्काशी संबंधित होता. महाराष्ट्राच्या इतिहासाच्या अधिकृत गॅझेटियरमध्ये कोकणातील प्राचीन वस्ती, व्यापारी केंद्रे आणि विविध राजकीय सत्तांच्या प्रभावाचा मागोवा आढळतो.<ref>{{cite web
|title=History of Maharashtra — Chapter I
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/History%20Part/chapter_1.pdf
}}</ref><ref name="UNESCOGeoglyphsKonkan" />
कालांतराने जमीन, शेती, ग्रामसंस्था, उत्पादन, व्यापार, महसूल आणि सामाजिक संबंध यांचे स्वरूप बदलत गेले. पश्चिम दख्खनातील मध्ययुगीन ग्रामसमाजाच्या अभ्यासातून कृषी जमीन, ग्रामस्थळ, सामाईक चराऊ जमीन आणि स्थानिक ग्रामसंस्थांची रचना यांविषयी माहिती मिळते. या ग्रामीण संस्थांचा विकास प्रदेशानुसार वेगवेगळ्या स्वरूपात झाला असून कोकणातील भौगोलिक परिस्थितीमुळे तेथील ग्रामजीवन पश्चिम दख्खनच्या अंतर्गत प्रदेशापेक्षा काही बाबतींत वेगळे होते.<ref name="Fukazawa1982">{{cite book
|last=Fukazawa
|first=H.
|chapter=The Medieval Deccan and Maharashtra
|title=The Cambridge Economic History of India
|editor1-last=Raychaudhuri
|editor1-first=Tapan
|editor2-last=Habib
|editor2-first=Irfan
|publisher=Cambridge University Press
|year=1982
|pages=249–260
}}</ref>
मध्ययुगीन काळात कोकणातील कृषी उत्पादनाबरोबरच किनारी व्यापार आणि बंदरांशी संबंधित आर्थिक व्यवहारांनाही महत्त्व होते. महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरनुसार प्राचीन आणि मध्ययुगीन काळात कोकणातील चौल, कल्याण, सोपारा आणि राजापुरी यांसारख्या बंदरांनी व्यापार आणि बाह्य संपर्कात भूमिका बजावली. कोकणातील भौगोलिक स्थानामुळे सह्याद्रीतील घाटमार्ग आणि समुद्री मार्ग यांच्या माध्यमातून अंतर्गत दख्खन आणि किनारी प्रदेश यांच्यात संपर्क निर्माण झाला.<ref>{{cite web
|title=History of Maharashtra — Chapter I
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/History%20Part/chapter_1.pdf
}}</ref>
या दीर्घकालीन प्रक्रियांमधून कोकणातील ग्रामीण समाजरचना विकसित होत गेली. तथापि या प्रक्रियेतील प्रत्येक प्राचीन किंवा मध्ययुगीन कृषक समूहाला आधुनिक ‘कुणबी’ या सामाजिक नावाने संबोधता येत नाही. आधुनिक कुणबी ओळख कधी आणि कोणत्या सामाजिक प्रक्रियांमधून अधिक स्पष्ट झाली, याचा अभ्यास करण्यासाठी पुढील मध्ययुगीन, प्रारंभिक आधुनिक आणि विशेषतः वसाहतकालीन प्रशासकीय, जनगणना आणि ethnographic स्रोत स्वतंत्रपणे तपासणे आवश्यक आहे.<ref name="Enthoven1922" />
त्यामुळे आधुनिक कुणबी समाजाचा इतिहास शोधताना प्रागैतिहासिक कृषक संस्कृती, प्राचीन वस्ती, मध्ययुगीन ग्रामीण समाज आणि वसाहतकालीन प्रशासकीय नोंदी यांना एकाच अखंड जातीय वंशावळीत जोडण्याऐवजी स्वतंत्र ऐतिहासिक टप्पे म्हणून तपासणे अधिक योग्य ठरते. उपलब्ध पुरावे प्राचीन कोकणातील मानवी व कृषी जीवनाची ऐतिहासिक पार्श्वभूमी स्पष्ट करतात; मात्र त्या आधारे आधुनिक कुणबी समाजाची थेट आणि अखंड वंशपरंपरा सिद्ध होत नाही.<ref name="UNESCOGeoglyphsKonkan" /><ref name="Fukazawa1982" />
=== प्रारंभिक ऐतिहासिक काळातील कोकण ===
इ.स.पूर्व शेवटच्या शतकांपासून इ.स.च्या आरंभीच्या शतकांपर्यंत पश्चिम दख्खन आणि कोकण यांच्यात व्यापारी, राजकीय आणि सांस्कृतिक संपर्क वाढला. या काळात पश्चिम दख्खनातील व्यापारी मार्ग, अंतर्गत बाजारपेठा आणि समुद्रकिनारी बंदरे यांचा विकास झाला. नाशिक, कार्ले आणि कान्हेरी यांसारख्या ठिकाणच्या शिलालेखांमधून त्या काळातील राजकीय सत्ताकेंद्रे, व्यापारी समुदाय, धार्मिक संस्था, दाते आणि विविध सामाजिक-आर्थिक समूहांविषयी माहिती मिळते.<ref>{{cite web
|title=Social and Religious Conditions: The Deccan under the Sātavāhanas
|publisher=Indira Gandhi National Centre for the Arts
|url=https://ignca.gov.in/Asi_data/17904.pdf
}}</ref>
सातवाहनकालीन पश्चिम दख्खनाच्या इतिहासाच्या अभ्यासासाठी नाशिक, कार्ले आणि इतर शिलालेख महत्त्वाचे आहेत. या शिलालेखांमधून कृषक, व्यापारी, कारागीर, धार्मिक दाते आणि प्रशासकीय घटक यांचा उल्लेख आढळतो. त्यामुळे प्रारंभिक ऐतिहासिक काळातील पश्चिम दख्खनातील समाज हा केवळ राजसत्ता आणि धार्मिक संस्थांपुरता मर्यादित नसून विविध आर्थिक आणि सामाजिक समूहांनी बनलेला होता.<ref name="Mirashi1981">{{cite book
|last=Mirashi
|first=Vasudev Vishnu
|title=The History and Inscriptions of the Sātavāhanas and the Western Kshatrapas
|publisher=Maharashtra State Board for Literature and Culture
|location=Bombay
|year=1981
}}</ref>
=== कुटुम्बिक, कुटुम्बिन् आणि कृषक समाज ===
सातवाहनकालीन आणि आरंभीच्या ऐतिहासिक शिलालेखांच्या अभ्यासात ''kuṭumbika'', ''kuṭumbin'', ''gṛhapati'' आणि कृषीशी संबंधित ''halāyudha'' किंवा ''hālakiya'' यांसारख्या संज्ञांचा उल्लेख आढळतो. या संज्ञांचा अर्थ आणि सामाजिक संदर्भ प्रत्येक शिलालेखाच्या संदर्भानुसार तपासणे आवश्यक आहे. उपलब्ध अभ्यासांमध्ये ''kuṭumbin'' किंवा ''gṛhapati'' यांचा संबंध गृहस्थ किंवा कुटुंबप्रमुखाशी, तर ''halāyudha''चा संबंध कृषक व्यवसायाशी जोडला आहे.<ref name="SatavahanaSocialReligious">{{cite web
|title=Social and Religious Conditions: The Deccan under the Sātavāhanas
|publisher=Indira Gandhi National Centre for the Arts
|url=https://ignca.gov.in/Asi_data/17904.pdf
}}</ref>
पश्चिम दख्खनातील नाशिक परिसराशी संबंधित शिलालेखीय पुराव्यांमध्ये ''kuṭumbika'' या संज्ञेचा वापर आढळतो. एका नोंदीत ''kuṭumbika''चा उल्लेख कृषक किंवा नांगरणी करणाऱ्या व्यक्तीच्या संदर्भात करण्यात आला आहे. या प्रकारच्या पुराव्यांवरून प्रारंभिक ऐतिहासिक काळात कुटुंब, कृषी उत्पादन, संपत्ती आणि धार्मिक दान यांच्यात परस्परसंबंध असलेले ग्रामीण गृहस्थ अस्तित्वात होते असे दिसते.<ref>{{cite web
|title=Social and Economic Conditions under the Sātavāhanas
|publisher=Indira Gandhi National Centre for the Arts
|url=https://ignca.gov.in/Asi_data/17073.pdf
}}</ref>
सातवाहनकालीन सामाजिक आणि आर्थिक इतिहासाच्या अभ्यासात ''kuṭumbin'' ही संज्ञा आधुनिक ‘कुणबी’ किंवा शेतकरी या शब्दांशी तुलना करण्यासाठी काही वेळा वापरली जाते. मात्र ही तुलना मुख्यतः सामाजिक-आर्थिक भूमिकेच्या संदर्भात आहे. ''kuṭumbin'' आणि आधुनिक ‘कुणबी’ हे एकच सामाजिक समुदाय होते, असा निष्कर्ष या तुलनेतून काढता येत नाही.<ref name="Mirashi1981"/>
=== प्रारंभिक कृषी व ग्रामजीवनाची पार्श्वभूमी ===
प्रारंभिक ऐतिहासिक काळातील कृषी अर्थव्यवस्था समजून घेण्यासाठी त्यापूर्वीच्या महाराष्ट्रातील ताम्रपाषाणकालीन वस्तींचे पुरावेही महत्त्वाचे आहेत. इनामगावसारख्या स्थळांवर घरांची रचना, धान्यसाठवण, कृषी उत्पादन, पशुपालन आणि कारागिरी यांचे पुरावे मिळाले आहेत. M. K. Dhavalikar यांच्या इनामगाववरील अभ्यासात या स्थळावरील वस्तीच्या आराखड्याच्या आधारे महाराष्ट्रातील प्रारंभिक कृषकांच्या वस्तीपद्धतीचा अभ्यास करण्यात आला आहे.<ref name="Dhavalikar1977">{{cite journal
|last=Dhavalikar
|first=M. K.
|title=Inamgaon: The Pattern of Settlement
|journal=Man and Environment
|volume=1
|year=1977
|pages=46–51
}}</ref>
इनामगावचा कालखंड सातवाहनकालापूर्वीचा असल्यामुळे तेथील पुरावे आणि सातवाहनकालीन शिलालेख एकाच ऐतिहासिक टप्प्याचे प्रतिनिधित्व करीत नाहीत. तथापि दोन्ही प्रकारचे पुरावे महाराष्ट्रातील दीर्घकालीन कृषी, वस्ती आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या विकासाचा स्वतंत्र पुरातत्त्वीय आणि अभिलेखीय संदर्भ उपलब्ध करून देतात.<ref name="Dhavalikar1977"/><ref name="SatavahanaSocialReligious"/>
सातवाहनकालीन शिलालेखांमध्ये कृषक, व्यापारी, कारागीर आणि धार्मिक दाते यांचे उल्लेख आढळतात. काही व्यक्तींनी बौद्ध धार्मिक संस्थांना गुहा, निधी किंवा इतर स्वरूपात दाने दिल्याचेही नोंदविले आहे. यावरून कृषी आणि इतर आर्थिक उपक्रमांमधून निर्माण होणाऱ्या संपत्तीचा काही भाग धार्मिक संस्थांच्या आश्रयासाठी वापरला जात असल्याचे दिसते.<ref name="SatavahanaSocialReligious"/>
=== प्राचीन कृषक समाज आणि आधुनिक कुणबी यांच्यातील संबंध ===
प्राचीन महाराष्ट्रातील कृषक संस्कृती, सातवाहनकालीन ''kuṭumbika'' किंवा ''kuṭumbin'' यांसारख्या संज्ञा आणि आधुनिक ‘कुणबी’ या सामाजिक नावामध्ये भाषिक किंवा सामाजिक साम्य असल्याचे काही जुन्या आणि आधुनिक अभ्यासांमध्ये सूचित केले गेले आहे. मात्र या साम्यांवरून प्रागैतिहासिक किंवा सातवाहनकालीन कृषक समाज हा आधुनिक कुणबी समाजाचा थेट पूर्वज होता, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="RussellHiralal1916"/>
विशेषतः इ.स.पूर्व दुसऱ्या सहस्रकातील मालवा किंवा जोर्वे संस्कृतीतील कृषकांना ‘कुणबी’ म्हणणे अनैतिहासिक ठरेल. त्याचप्रमाणे सातवाहनकालीन ''kuṭumbika'' किंवा ''kuṭumbin'' या संज्ञा आधुनिक जातीय अर्थाने ‘कुणबी’चे समानार्थी नाव होत्या, असे निश्चितपणे म्हणता येत नाही.
‘कुणबी’ ही सामाजिक ओळख पुढील ऐतिहासिक काळातील सामाजिक संघटन, प्रादेशिक ओळखी, कृषी संबंध, जमीनव्यवस्था आणि नंतरच्या प्रशासकीय व जनगणना प्रक्रियांमध्ये अधिक स्पष्टपणे दस्तऐवजीकृत होत गेली. त्यामुळे आधुनिक कुणबी समाजाचा इतिहास समजून घेण्यासाठी प्राचीन कृषक समाजानंतरच्या मध्ययुगीन, पूर्व-आधुनिक आणि वसाहतकालीन प्रक्रियांचा स्वतंत्र अभ्यास आवश्यक आहे.<ref name="Enthoven1922" />
या अर्थाने प्राचीन कृषक संस्कृतींचा इतिहास हा कोकणातील कुणबींच्या थेट जातीय उत्पत्तीचा पुरावा नसून महाराष्ट्र आणि पश्चिम दख्खनमध्ये कृषी, स्थिर वस्ती, कुटुंब, उत्पादन आणि ग्रामीण जीवन यांची विकसित झालेली दीर्घ ऐतिहासिक पार्श्वभूमी म्हणून पाहणे अधिक योग्य ठरते.
=== ऐतिहासिक आणि आधुनिक वर्गीकरणातील फरक ===
कुणबी समाजाशी संबंधित संज्ञांचे प्रशासकीय आणि जनगणनात्मक वर्गीकरण काळानुसार बदलत गेले. ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये जात, उपजात, जमात किंवा सामाजिक समूहांची नोंद करताना तत्कालीन प्रशासकीय वर्गीकरण, प्रदेश, स्थानिक सामाजिक ओळख आणि जनगणनेची पद्धत यांचा परिणाम होत असे. त्यामुळे ''Kunbi'', ''Kanbi'', ''Kulwadi'', ''Maratha-Kunbi'' किंवा ''Kunbi-Maratha'' यांसारख्या संज्ञा वेगवेगळ्या काळातील जनगणना नोंदींमध्ये समान पद्धतीने वापरल्या गेल्या नाहीत.<ref name="Census1931Bombay"/>
१९३१ च्या बॉम्बे जनगणनेतील विविध तक्त्यांमध्ये ''Kunbi, Kulwadi or Kanbi'', ''Lewa or Lewa Kunbi'' आणि ''Maratta-Kunbi'' अशा स्वतंत्र नोंदी आढळतात. त्याचबरोबर काही तक्त्यांमध्ये ''Maratta, Maratta-Kunbi, Kulwadi or Kanbi, Lewa or Rewa Kunbi of Khandesh'' असा संयुक्त वर्गही वापरण्यात आला होता. या नोंदींवरून तत्कालीन जनगणनांमध्ये संबंधित सामाजिक समूहांचे वर्गीकरण तक्त्यानुसार आणि प्रशासकीय संदर्भानुसार वेगवेगळ्या प्रकारे करण्यात आले होते, असे दिसते.<ref name="Census1931Bombay"/>
१९३१ च्या जनगणना अहवालात Maratha आणि Kunbi या संज्ञांच्या वापराशी संबंधित वर्गीकरणीय अडचणींचाही उल्लेख करण्यात आला होता. त्यामुळे वेगवेगळ्या जनगणना वर्षांतील Maratha आणि Kunbi लोकसंख्येची तुलना करताना संबंधित जनगणनेतील वर्गीकरणपद्धती आणि त्या काळातील संज्ञांचा अर्थ लक्षात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="Census1931Bombay"/>
स्वातंत्र्योत्तर काळात या वर्गीकरणाला अधिक स्पष्ट प्रशासकीय स्वरूप प्राप्त झाले. मुंबई सरकारने २३ एप्रिल १९४२ रोजी प्रसिद्ध केलेल्या वर्गीकरणात ''Kunbi (Except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)'' ही नोंद ''Intermediate Communities''च्या यादीत, तर ''Kunbi Tilori in Ratnagiri district'' ही नोंद ''Other Backward Communities''च्या यादीत स्वतंत्रपणे केली होती. मुंबई उच्च न्यायालयाने २००२ च्या निर्णयात ही स्थिती १ नोव्हेंबर १९५०, २९ ऑक्टोबर १९५६ आणि २१ नोव्हेंबर १९६१ च्या पुढील सरकारी ठरावांमध्येही कायम राहिल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="DattatrayaThorat2002"/>
महाराष्ट्र शासनाने १३ ऑक्टोबर १९६७ रोजी स्वतंत्र इतर मागासवर्गीयांची यादी प्रसिद्ध केली. मुंबई उच्च न्यायालयाच्या नोंदीनुसार या यादीत अनुक्रमांक ८३वर ''Kunbi caste''चा समावेश करण्यात आला. न्यायालयाने पुढे नमूद केले की १९६७पासून कुणबी जात महाराष्ट्राच्या इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समाविष्ट झाली.*Dattatraya S/o Ramrao Thorat v. The State of Maharashtra & Ors.*, Writ Petition No. 5345 of 2001, decided on 24 April 2002, 2002 (4) All MR 807.
या ऐतिहासिक बदलांमुळे जुन्या जनगणनेतील एखाद्या संज्ञेची संख्या आणि आजच्या प्रशासकीय वर्गातील त्याच संज्ञेची संख्या यांची थेट तुलना करता येत नाही. अशी तुलना करताना संबंधित जनगणनेतील वर्गीकरण, प्रशासकीय सीमा, संज्ञेचा त्या काळातील अर्थ आणि स्थानिक सामाजिक ओळख या सर्व बाबींचा विचार करणे आवश्यक आहे.
=== संज्ञांच्या वापराबाबत ऐतिहासिक सावधगिरी ===
कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास लिहिताना ‘कुणबी’, ‘कानबी’, ‘कुलवाडी’, ‘मराठा-कुणबी’ आणि ‘तिलोरी कुणबी’ या संज्ञांचा वापर त्यांच्या संबंधित ऐतिहासिक आणि प्रशासकीय संदर्भात करणे आवश्यक आहे. उपलब्ध जनगणना आणि प्रशासकीय नोंदींमध्ये या संज्ञांचे वर्गीकरण काळानुसार बदललेले दिसते.<ref name="Census1931Bombay"/><ref name="DattatrayaThorat2002"/>
विशेषतः तिलोरी कुणबीच्या बाबतीत हा फरक स्पष्टपणे दिसतो. १९४२ च्या मुंबई सरकारच्या वर्गीकरणात रत्नागिरी जिल्ह्यातील तिलोरी कुणबींना ''Other Backward Communities''च्या यादीत स्वतंत्र स्थान देण्यात आले होते, तर त्याच वेळी इतर कुणबींना ''Intermediate Communities''च्या वर्गात ठेवण्यात आले होते. १९५०, १९५६ आणि १९६१ च्या संबंधित सरकारी ठरावांमध्येही ही स्थिती कायम राहिल्याचे मुंबई उच्च न्यायालयाने नमूद केले आहे. १९६७मध्ये मात्र ''Kunbi caste''चा स्वतंत्र इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समावेश करण्यात आला.<ref name="DattatrayaThorat2002"/>
त्यामुळे एखाद्या व्यक्तीची किंवा समूहाची आधुनिक जातीय ओळख केवळ आडनाव, व्यवसाय, गावाचे नाव किंवा जुन्या जनगणनेतील नोंद यावरून निश्चित करता येत नाही. ऐतिहासिक जनगणना ही तत्कालीन प्रशासकीय आणि सामाजिक वर्गीकरणाची नोंद असते; ती प्रत्येक व्यक्तीच्या आधुनिक जातीय ओळखीचा अंतिम पुरावा मानता येत नाही. आधुनिक जातीय किंवा प्रशासकीय दावा तपासताना संबंधित काळातील प्राथमिक दस्तऐवज आणि लागू असलेले प्रशासकीय नियम स्वतंत्रपणे तपासणे आवश्यक आहे.
त्याचप्रमाणे ''Maratha-Kunbi'' किंवा ''Kunbi-Maratha'' या संज्ञांचा एखाद्या ऐतिहासिक स्रोतामध्ये वापर झाला म्हणून त्या संज्ञांचा प्रत्येक काळात आणि प्रत्येक प्रदेशात एकच सामाजिक अर्थ होता असे मानता येत नाही. १९३१ च्या जनगणनेत ''Kunbi, Kulwadi or Kanbi'', ''Maratta-Kunbi'' आणि ''Lewa or Lewa Kunbi'' अशा स्वतंत्र नोंदी तसेच काही ठिकाणी Maratha आणि संबंधित कृषक समूहांना एकत्रित करणारे वर्ग आढळतात.<ref name="Census1931Bombay"/>
या कारणामुळे कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास मांडताना '''भाषिक संज्ञा, सामाजिक ओळख, जनगणनात्मक वर्गीकरण आणि आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरण''' या चार बाबी स्वतंत्रपणे तपासणे आवश्यक आहे. ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये समान किंवा संबंधित संज्ञांचे वर्गीकरण काळानुसार बदललेले दिसते, तर स्वातंत्र्योत्तर काळात सरकारी वर्गीकरणातही कुणबी आणि तिलोरी कुणबी यांची प्रशासकीय स्थिती बदलली. त्यामुळे एका काळातील प्रशासकीय वर्गीकरण दुसऱ्या काळातील सामाजिक ओळखीशी तंतोतंत समान मानणे किंवा जुन्या जनगणना अथवा प्रशासकीय नोंदीवरून आधुनिक सामाजिक ओळख निश्चित करणे इतिहासदृष्ट्या अचूक ठरणार नाही.<ref name="Census1931Bombay"/><ref name="DattatrayaThorat2002"/>
== मध्ययुगीन कोकण ==
कोकणाच्या मध्ययुगीन इतिहासात विविध राजकीय सत्तांचा प्रभाव पडला. शिलाहार, यादव, दिल्ली सल्तनत, बहमनी सत्ता आणि त्यानंतरची दख्खनी सल्तनती राज्ये यांच्या काळात कोकणातील राजकीय सीमा, प्रशासकीय व्यवस्था आणि स्थानिक सत्ताकेंद्रे बदलत गेली. या राजकीय बदलांबरोबर जमीन, महसूल, ग्रामव्यवस्था आणि कृषी उत्पादनाशी संबंधित संस्थांमध्येही बदल झाले. मात्र या सर्व कालखंडातील कृषक समाजाला आधुनिक अर्थाने ‘कुणबी’ म्हणून संबोधणे इतिहासदृष्ट्या योग्य ठरत नाही. उपलब्ध मध्ययुगीन स्रोतांमध्ये ग्रामीण समाजाचे विविध प्रशासकीय, आर्थिक आणि सामाजिक संदर्भ आढळतात; ‘कुणबी’ ही आधुनिक सामाजिक ओळख पुढील ऐतिहासिक प्रक्रियांमध्ये अधिक स्पष्टपणे दस्तऐवजीकृत झाली.<ref name="HistoryKonkan">{{cite web
|title=History of the Konkan
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Gazetteer%20of%20Bombay%20Presidency/history_of_the_konkan/section_2.pdf
}}</ref><ref name="MediaevalAdministration">{{cite web
|title=Mediaeval Administration and Social Organisation
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/History%20Part/History_II/chapter_10.pdf
}}</ref>
=== शिलाहार ===
कोकणाच्या मध्ययुगीन इतिहासात शिलाहारांचे महत्त्वाचे स्थान आहे. शिलाहारांच्या तीन प्रमुख शाखांपैकी दक्षिण कोकणातील शाखेने साधारण इ.स. ७७० ते १०२० च्या दरम्यान राज्य केले. उत्तर कोकणातील शिलाहार शाखेचे राजकीय क्षेत्र ठाणे, कोलाबा आणि त्याच्या आसपासच्या प्रदेशाशी संबंधित होते. दक्षिण कोकणातील शिलाहार हे सुरुवातीला राष्ट्रकूटांचे आणि नंतर चालुक्य, कदंब व यादव यांसारख्या दख्खनी सत्तांचे मांडलिक होते.<ref name="Silaharas">{{cite web
|title=Silaharas
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/RATNAGIRI/his_silaharas.html
}}</ref>
उत्तर कोकणातील शिलाहारांच्या राजकीय क्षेत्रात आजच्या ठाणे, मुंबई, कोलाबा आणि आसपासच्या प्रदेशांचा समावेश होत होता. त्यांच्या काळात ठाणे, सोपारा, चौल, उरण आणि इतर किनारी केंद्रे व्यापार व राजकीय संपर्कासाठी महत्त्वाची होती. कोकणातील राजकीय आणि आर्थिक जीवनाचा संबंध समुद्री बंदरे तसेच सह्याद्रीमार्गे दख्खनच्या पठाराशी जोडलेल्या मार्गांशी होता.<ref name="HistoryKonkan"/>
शिलाहारकालीन ताम्रपट आणि शिलालेखांमधून जमीनदान, धार्मिक संस्था आणि स्थानिक सत्ताकेंद्रांमधील संबंधांचा अभ्यास करता येतो. या पुराव्यांमुळे कृषी उत्पादन आणि जमिनीचे उत्पन्न हे तत्कालीन सामाजिक, धार्मिक आणि राजकीय व्यवस्थेतील महत्त्वाचे आर्थिक आधार होते असे दिसते. तथापि या काळातील कृषक समाजाला आधुनिक ‘कुणबी’ या जातनावाने ओळखण्यास पुरेसा थेट पुरावा उपलब्ध नाही.<ref name="Silaharas"/>
=== यादव ===
इ.स. १२व्या आणि १३व्या शतकात देवगिरीच्या यादव सत्तेचा पश्चिम दख्खनावर प्रभाव वाढला. कोकणातील काही भागांवरही यादव सत्तेचे नियंत्रण किंवा प्रभाव होता. उत्तर कोकणात यादवांच्या प्रतिनिधींची प्रशासकीय उपस्थिती असल्याचे ताम्रपट आणि शिलालेखीय पुराव्यांतून दिसते. इ.स. १२७३ आणि १२९१ च्या नोंदींमध्ये रामचंद्र यादवाच्या अधिकाऱ्यांनी कल्याण आणि सालसेट परिसरातील गावांच्या दानाचा उल्लेख केला आहे.<ref name="HistoryKonkan"/>
यादवकालीन महाराष्ट्रातील ग्रामीण समाज आणि प्रशासकीय व्यवस्थेबाबत महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमध्ये गावाच्या पातळीवर ग्रामकूट, चौधरी किंवा चौगुला यांसारख्या पदांचा उल्लेख आहे. ग्रामसमिती आणि तिचे सदस्य महत्तर म्हणून ओळखले जात असल्याची नोंदही आढळते. या काळात गाव हे कृषी उत्पादन, स्थानिक प्रशासन आणि सामाजिक जीवनाचे महत्त्वाचे केंद्र होते.<ref name="TerritorialGroups">{{cite web
|title=Territorial Groups
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/land_and_people/L%20%26%20P%20pdf/Chapter%20VI/2%20Places%20of%20Pilgrimage.pdf
}}</ref>
या ग्रामव्यवस्थेचा उल्लेख आधुनिक कुणबी समाजाच्या थेट इतिहासासाठी पुरावा म्हणून न करता, कोकण आणि पश्चिम दख्खनातील पुढील ग्रामीण समाजरचनेची ऐतिहासिक पार्श्वभूमी म्हणून पाहणे अधिक योग्य आहे.
=== यादव सत्तेचा अंत आणि दिल्ली सल्तनतीचा प्रभाव ===
१३व्या शतकाच्या अखेरीस देवगिरीच्या यादव सत्तेवर दिल्ली सल्तनतीचा प्रभाव वाढला. इ.स. १३१७मध्ये यादव राज्य दिल्लीच्या सत्तेखाली पूर्णपणे गेले आणि दख्खनमध्ये दिल्लीच्या प्रशासकीय व लष्करी सत्तेची स्थापना झाली. महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरनुसार या काळात देवगिरी हे दिल्लीच्या दख्खन प्रांताचे महत्त्वाचे प्रशासकीय केंद्र राहिले आणि प्रदेशातील अनेक भागांवर लष्करी अधिकाऱ्यांच्या माध्यमातून सत्ता चालवली जात होती.<ref name="MediaevalAdministration"/>
या संक्रमणकाळात दक्षिण कोकणासारख्या सीमावर्ती भागांत काही स्थानिक हिंदू प्रमुखांनी आपली सत्ता टिकवून ठेवण्याचा प्रयत्न केल्याची नोंद महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमध्ये आहे. त्यामुळे दिल्लीच्या सत्तेचा प्रभाव वाढला असला तरी स्थानिक सत्ताकेंद्रे आणि ग्रामीण संस्था तत्काळ पूर्णपणे नाहीशा झाल्या असे मानता येत नाही.<ref name="MediaevalAdministration"/>
या राजकीय संक्रमणाचा परिणाम महसूल, जमीन आणि ग्रामीण समाजावर झाला. दिल्लीच्या दख्खनमधील प्रशासनात ''iqta''सारख्या महसूल व लष्करी व्यवस्थांचा वापर करण्यात आला होता. तथापि या कालखंडातील ग्रामीण कृषकांना आधुनिक ‘कुणबी’ या नावाने ओळखण्यास उपलब्ध स्रोत पुरेसा आधार देत नाहीत.<ref name="MediaevalAdministration"/>
=== बहमनी सत्ता ===
इ.स. १३४७मध्ये बहमनी सत्ता स्थापन झाल्यानंतर दख्खनमध्ये स्वतंत्र सुलतानशाही राजकीय व्यवस्था निर्माण झाली. महाराष्ट्रातील ग्रामीण समाजाच्या संदर्भात बहमनी सत्तेने पाटील आणि देशमुख यांसारख्या स्थानिक अधिकाऱ्यांचे हक्क व वतने मान्य केल्याची नोंद महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमध्ये आढळते.<ref name="TerritorialGroups"/>
बहमनी काळात गाव हे स्थानिक प्रशासन आणि कृषी उत्पादनाचे महत्त्वाचे केंद्र राहिले. पाटील आणि देशमुख यांसारख्या स्थानिक अधिकारपदांना मान्यता मिळाल्यामुळे केंद्रीय सुलतानशाही आणि स्थानिक ग्रामीण समाज यांच्यात संस्थात्मक संबंध निर्माण झाले. महसूलव्यवस्थेतील विविध प्रशासकीय विभागांसाठी तालुका, महाल, तरफ आणि परगणा यांसारख्या संज्ञांचा वापर होत असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद आहे.<ref name="TerritorialGroups"/>
बहमनी राज्याचे विघटन झाल्यानंतर दख्खनमध्ये अहमदनगरची निजामशाही, विजापूरची आदिलशाही, गोवळकोंड्याची कुतुबशाही, वऱ्हाडची इमादशाही आणि बिदरची बरीदशाही अशी स्वतंत्र सत्ताकेंद्रे निर्माण झाली. या सत्तांमुळे महाराष्ट्रातील राजकीय सीमा आणि प्रशासकीय व्यवस्था पुन्हा बदलल्या.<ref name="BahamanisDeccan">{{cite web
|title=The Bahamanis of the Deccan
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/History%20Part/History_II/chapter_2.pdf
}}</ref>
=== निजामशाही, आदिलशाही आणि कोकण ===
बहमनी सत्तेच्या विघटनानंतर कोकणातील विविध प्रदेशांवर अहमदनगरची निजामशाही आणि विजापूरची आदिलशाही यांचा वेगवेगळ्या काळात प्रभाव राहिला. किनारी प्रदेशात स्थानिक राजकीय सत्ताकेंद्रे, बंदरे आणि किल्ले यांचे महत्त्व वाढले. कोकणातील राजकीय नियंत्रण हे केवळ एका सत्तेच्या अखंड अधिपत्याखाली राहिले नाही; विविध सत्तांमध्ये प्रदेशांचे नियंत्रण बदलत गेले.<ref name="NizamshahiAhmadnagar">{{cite web
|title=The Nizamshahi of Ahmadnagar
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/History%20Part/History_II/chapter_3.pdf
}}</ref>
कोकणातील राजापुरीसारख्या केंद्रांच्या इतिहासातून या राजकीय बदलांचे उदाहरण दिसते. महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरनुसार राजापुरीचा प्रदेश पंधराव्या शतकाच्या अखेरीस निजामशाहीच्या प्रभावाखाली आला आणि १४९०मध्ये मलिक अहमदने दीर्घ वेढ्यानंतर तो ताब्यात घेतला.<ref name="Rajpuri">{{cite web
|title=Rajpuri
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/KOLABA/places_Rajpuri.html
}}</ref>
या राजकीय संक्रमणांचा ग्रामीण समाजावर परिणाम महसूल, जमीनवापर, स्थानिक अधिकारपदे आणि व्यापारमार्गांच्या बदलांच्या माध्यमातून झाला. मात्र उपलब्ध स्रोतांवरून या सर्व कालखंडातील कृषक समाजाची एकच जातीय ओळख होती असे म्हणता येत नाही.
=== मध्ययुगीन कोकणातील कृषक समाज ===
मध्ययुगीन कोकणातील कृषक समाज हा जमीन, पावसावर आधारित शेती, स्थानिक बाजारपेठा, ग्रामसंस्था आणि महसूलव्यवस्थेशी जोडलेला होता. कोकणाच्या भौगोलिक परिस्थितीमुळे भातशेती, डोंगरउतारावरील शेती आणि किनारी व्यापार यांना विशेष महत्त्व होते. पुढील शतकांमध्ये या ग्रामीण अर्थव्यवस्थेचे विविध स्वरूप विकसित झाले.<ref name="HistoryKonkan"/>
मध्ययुगीन ग्रामीण समाजाचा हा इतिहास आधुनिक कुणबी समाजाच्या निर्मितीचा थेट पुरावा म्हणून वापरता येत नाही. मात्र पुढील पूर्व-आधुनिक आणि वसाहतकालीन काळात जमीन, शेती, महसूल, ग्रामसंस्था आणि कृषक सामाजिक ओळखी यांच्या ज्या प्रक्रिया अधिक स्पष्ट झाल्या, त्यांची ऐतिहासिक पार्श्वभूमी या कालखंडात शोधता येते.
=== निजामशाही आणि कोकण ===
इ.स. १४९०मध्ये अहमदनगरच्या निजामशाहीची स्थापना झाल्यानंतर कोकणातील काही महत्त्वाची ठाणी आणि बंदरे निजामशाहीच्या राजकीय व लष्करी प्रभावाखाली आली. कोलाबा गॅझेटियरमध्ये दांडा-राजपुरीचा उल्लेख करताना, इ.स. १४९०मध्ये दीर्घ वेढ्यानंतर निजामशाहीचा संस्थापक मलिक अहमद याने राजपुरी जिंकून घेतल्याची नोंद आहे. त्यानंतर अहमदनगरची सत्ता कोकणातील या भागावर दृढ झाली आणि राजपुरी हे व्यापाराचे महत्त्वाचे केंद्र राहिले.<ref name="Rajpuri"/>
निजामशाहीच्या विस्ताराच्या काळात मलिक अहमदने कोकण आणि घाट परिसरातील अनेक किल्ले आपल्या ताब्यात घेतल्याची नोंद महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमध्ये आहे. इ.स. १४८५नंतर त्याने जुन्नर आणि दौलताबादच्या प्रदेशातून कोकणाकडे लष्करी मोहिमा केल्या आणि अनेक घाट व कोकणातील किल्ल्यांवर नियंत्रण मिळवले. इ.स. १४९०मध्ये दांडा-राजपुरी जिंकल्यानंतर उत्तर कोकणातील गुजरातच्या अखत्यारीत नसलेला काही प्रदेश अहमदनगरच्या नियंत्रणाखाली आला.<ref name="HistoryKonkanSection3">{{cite web
|title=History of the Konkan
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Gazetteer%20of%20Bombay%20Presidency/history_of_the_konkan/section_3.pdf
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निजामशाहीच्या काळात कोकणातील बंदरे, घाटमार्ग आणि किल्ले यांना राजकीय तसेच आर्थिक महत्त्व होते. राजपुरी हे पंधराव्या आणि सोळाव्या शतकात व्यापाराचे महत्त्वाचे केंद्र होते. पुढील काळातील प्रवाशांच्या आणि परकीय व्यापारविषयक नोंदींमध्येही राजपुरीचा व्यापारकेंद्र आणि बंदर म्हणून उल्लेख आढळतो.<ref name="Rajpuri"/>
या राजकीय आणि व्यापारी व्यवस्थेचा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेशी संबंध होता. कृषी उत्पादन स्थानिक बाजारपेठा आणि बंदरांशी जोडलेले होते. मात्र या काळातील कृषक समाजाला आधुनिक अर्थाने ‘कुणबी’ या एकसंध जातीय नावाने ओळखणे योग्य ठरणार नाही. आधुनिक कुणबी ओळख पुढील काळातील सामाजिक, प्रशासकीय आणि जनगणनात्मक प्रक्रियांमध्ये अधिक स्पष्टपणे नोंदली गेली.
=== आदिलशाही आणि दक्षिण कोकण ===
बहमनी सत्तेच्या विघटनानंतर विजापूरची आदिलशाही ही दख्खनमधील प्रमुख सत्तांपैकी एक झाली. कोकणातील विविध भागांवर अहमदनगरची निजामशाही आणि विजापूरची आदिलशाही यांचा वेगवेगळ्या काळात प्रभाव राहिला. कोकणाच्या राजकीय इतिहासात स्थानिक सरदार, किल्ले, बंदरे आणि किनारी सत्ताकेंद्रे यांचे महत्त्व कायम राहिले.<ref name="HistoryKonkanSection3"/>
इ.स. १४८९मध्ये युसुफ आदिल खानने विजापूरच्या आदिलशाहीची स्थापना केली. त्याच काळात अहमदनगरच्या मलिक अहमदने कोकणातील अनेक किल्ले ताब्यात घेण्यास सुरुवात केली होती. त्यामुळे पंधराव्या शतकाच्या अखेरीस कोकण आणि घाट प्रदेशात अहमदनगर व विजापूर या दख्खनी सत्तांमधील राजकीय स्पर्धेला महत्त्व प्राप्त झाले.<ref name="HistoryKonkanSection3"/>
दक्षिण कोकणातील राजकीय परिस्थिती एकसंध नव्हती. किनारी भागातील बंदरे आणि किल्ले तसेच सह्याद्रीतील घाटमार्ग यांवर नियंत्रण ठेवणे दख्खनी सत्तांसाठी लष्करी आणि आर्थिकदृष्ट्या महत्त्वाचे होते. समुद्री व्यापार आणि अंतर्गत दख्खनशी असलेले मार्ग यांमुळे कोकणातील किनारी केंद्रांना व्यापक आर्थिक महत्त्व प्राप्त झाले.<ref name="HistoryKonkanSection3"/>
=== मुघल प्रभाव ===
दख्खनमध्ये मुघल सत्तेचा विस्तार झाल्यानंतर महाराष्ट्रातील विविध प्रदेशांवर मुघलांचा राजकीय आणि महसुली प्रभाव वाढला. मात्र कोकणातील राजकीय परिस्थिती एकसंध नव्हती आणि किनारी प्रदेशातील विविध सत्ताकेंद्रे, किल्ले आणि स्थानिक प्रमुख यांचे महत्त्व कायम राहिले. दख्खनच्या राजकीय इतिहासात दिल्ली सल्तनत, बहमनी सत्ता, निजामशाही, आदिलशाही आणि पुढे मुघल सत्ता यांमधील सत्तांतरांची मालिका दिसून येते.<ref name="MediaevalAdministration"/>
मुघल काळातील प्रशासनाचा अभ्यास करताना केंद्रीय सत्ता आणि स्थानिक प्रशासन यांच्यातील संबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे. गावपातळीवरील स्थानिक अधिकारी आणि ग्रामीण संस्था अनेक ठिकाणी प्रशासनाच्या कार्यात सहभागी राहिल्या. त्यामुळे राजकीय सत्ता बदलली तरी स्थानिक ग्रामीण प्रशासनातील काही संस्था आणि सामाजिक संबंध सातत्याने कार्यरत राहू शकले.<ref name="MediaevalAdministration"/>
मुघल आणि दख्खनी सत्तांच्या काळातील महसूलव्यवस्थेचा ग्रामीण समाजावर परिणाम झाला असला तरी त्या काळातील प्रत्येक कृषक समूहाची आधुनिक जातीय ओळख निश्चित करण्यासाठी स्वतंत्र पुराव्यांची आवश्यकता आहे. त्यामुळे या कालखंडातील कृषक समाजाला सरसकट ‘कुणबी’ म्हणून ओळखणे योग्य ठरत नाही.
=== स्थानिक सत्ताकेंद्रे आणि कोकणातील राजकीय विविधता ===
कोकणाचा राजकीय इतिहास केवळ मोठ्या साम्राज्यांच्या इतिहासाने स्पष्ट होत नाही. शिलाहार, यादव आणि दख्खनी सल्तनतींच्या काळात स्थानिक सरदार, वतनदार आणि किल्लेदार यांना स्थानिक प्रशासन आणि संरक्षणव्यवस्थेत महत्त्व होते. किनारी भागातील बंदरे आणि किल्ले हे व्यापार, वाहतूक आणि लष्करी नियंत्रणासाठी महत्त्वाचे केंद्र होते.<ref name="HistoryKonkanSection3"/>
राजपुरी हे याचे महत्त्वाचे उदाहरण आहे. कोलाबा गॅझेटियरनुसार राजपुरीला कोकणाच्या इतिहासात विविध काळात महत्त्व प्राप्त झाले होते. इ.स. १४९०मध्ये निजामशाहीच्या मलिक अहमदने ते जिंकल्यानंतर ते अहमदनगरच्या सत्तेखाली आले. पुढे सोळाव्या आणि सतराव्या शतकातही ते महत्त्वाचे व्यापारकेंद्र राहिले. राजपुरीचा उल्लेख परकीय प्रवासी आणि व्यापारी स्रोतांमध्येही आढळतो.<ref name="Rajpuri"/>
महाड हे कोकणातील आणखी एक महत्त्वाचे ऐतिहासिक केंद्र होते. कोलाबा गॅझेटियरमध्ये महाडचा सावित्री नदीवरील महत्त्वाचा व्यापारी केंद्र म्हणून उल्लेख केला आहे. महाडजवळील पाले येथील बौद्ध लेणी आणि सावित्री नदीमार्गे अंतर्गत प्रदेशाशी असलेला संपर्क यांमुळे महाडला प्रादेशिक व्यापार आणि वाहतुकीच्या दृष्टीने महत्त्व प्राप्त झाले होते.<ref name="Rajpuri"/>
कोकणातील अशा स्थानिक केंद्रांमुळे कृषी उत्पादन, नदीमार्ग, बंदरे, बाजारपेठा आणि घाटमार्ग यांच्यात परस्पर संबंध निर्माण झाले. कोलाबा गॅझेटियरमध्ये महाड, राजपुरी, मुरुड, श्रीवर्धन, रेवदंडा आणि इतर बंदरांच्या व्यापारसंबंधी नोंदी आढळतात. यावरून किनारी आणि नदीमार्गावरील वाहतूक ही ग्रामीण उत्पादनाच्या देवाणघेवाणीशी जोडलेली होती असे दिसते.<ref name="CourseOfTrade">{{cite web
|title=Course of Trade
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/KOLABA/bank_trade_course.html
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=== ग्रामव्यवस्था ===
मध्ययुगीन महाराष्ट्रातील ग्रामव्यवस्था ही आर्थिक आणि प्रशासकीय जीवनाचा महत्त्वाचा आधार होती. यादवकालीन व्यवस्थेबाबत महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमध्ये ग्रामसमिती आणि तिच्या सदस्यांसाठी ‘महत्तर’ यांसारख्या संज्ञांचा उल्लेख आढळतो. स्थानिक ग्रामप्रशासनात विविध अधिकारी आणि सामाजिक घटक सहभागी होत असत.<ref name="TerritorialGroups"/>
बहमनी आणि त्यानंतरच्या दख्खनी सुलतानशाहींच्या काळात पाटील, देशमुख आणि इतर स्थानिक अधिकाऱ्यांचे हक्क आणि वतने अनेक ठिकाणी कायम राहिल्याचे महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमध्ये नमूद केले आहे. त्यामुळे केंद्रीय सुलतानशाही आणि स्थानिक ग्रामव्यवस्था यांच्यात परस्पर संबंध निर्माण झाले होते.<ref name="TerritorialGroups"/>
गावातील कृषी उत्पादन, जमीन, महसूल, स्थानिक सेवा आणि सामाजिक व्यवहार यांचे व्यवस्थापन विविध स्थानिक संस्थांमार्फत होत असे. पाटील हा गावपातळीवरील महत्त्वाचा अधिकारी होता, तर देशमुखाचा संबंध मोठ्या महसुली क्षेत्राशी आणि स्थानिक महसूलव्यवस्थेशी होता. पुढील मराठा काळात या संस्थांच्या अधिकारांमध्ये आणि कार्यपद्धतीत बदल झाले, तरी स्थानिक ग्रामीण प्रशासनाची काही मूलभूत रूपे पुढेही टिकून राहिली.<ref name="TerritorialGroups"/>
=== जमीन आणि महसूल ===
मध्ययुगीन कोकणातील राज्यव्यवस्थेचा महत्त्वाचा आर्थिक आधार जमीन महसूल होता. कृषी उत्पादनावर आधारित महसूलव्यवस्था ही राजसत्तेच्या उत्पन्नाचा प्रमुख स्रोत होती. बहमनी आणि त्यानंतरच्या दख्खनी सल्तनतींच्या काळात महसूल प्रशासनासाठी विविध प्रादेशिक विभाग आणि स्थानिक अधिकारी कार्यरत होते. महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमध्ये पाटील, देशमुख आणि इतर स्थानिक अधिकाऱ्यांच्या माध्यमातून ग्रामस्तरावरील प्रशासन आणि महसूलव्यवस्थेचे स्वरूप स्पष्ट केले आहे.<ref name="TerritorialGroups"/>
जमिनीचा वापर, लागवड आणि महसूल यांच्यातील संबंधामुळे कृषक हा राज्याच्या अर्थव्यवस्थेतील महत्त्वाचा घटक होता. स्थानिक पातळीवरील जमीनव्यवहार आणि महसूल प्रशासनात पाटील, देशमुख आणि इतर स्थानिक अधिकाऱ्यांची भूमिका होती. या संस्थांचे स्वरूप आणि अधिकार प्रदेश व काळानुसार बदलत गेले.<ref name="TerritorialGroups"/>
मध्ययुगीन सत्तांमध्ये जमीन महसूलाच्या पद्धती बदलत गेल्या तरी कृषी उत्पादनावर आधारित राज्याचे आर्थिक हित कायम राहिले. युद्धे, राजकीय संघर्ष आणि नैसर्गिक आपत्तींचा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेवर परिणाम होऊ शकत असे. महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमध्ये दख्खनमधील विविध कालखंडांतील दुष्काळांच्या संदर्भात युद्धे आणि राजकीय अस्थिरतेच्या परिणामांची नोंद आहे.<ref name="FaminesDeccan">{{cite web
|title=Famines in the Deccan
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/aurangabad/CHAP04/FAMINES.htm
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
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=== कृषक समाज ===
मध्ययुगीन कोकणातील कृषक समाज हा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेचा महत्त्वाचा आधार होता. भातशेतीसह स्थानिक परिस्थितीनुसार बागायती, पशुपालन आणि इतर ग्रामीण उपजीविका अस्तित्वात होत्या. कोकणाची भौगोलिक रचना, पर्जन्यमान, नद्या, खाड्या आणि किनारी प्रदेश यांचा कृषी पद्धतींवर प्रभाव होता.<ref name="HistoryKonkanSection3"/>
या कृषक समाजात सामाजिक आणि आर्थिक स्तरांमध्ये विविधता होती. जमीन कसणारे शेतकरी, स्थानिक हक्कांशी संबंधित व्यक्ती आणि विविध प्रकारचे ग्रामीण उत्पादक यांचा या व्यवस्थेत समावेश होता. पुढील मराठा आणि ब्रिटिशकालीन नोंदींमध्ये ‘मिरासदार’, ‘उपरी’ आणि इतर कृषक वर्गांचा उल्लेख अधिक स्पष्टपणे आढळतो; मात्र या संज्ञांचा अर्थ आणि प्रशासकीय व्याप्ती प्रदेश व कालखंडानुसार बदलत असल्यामुळे त्यांचा वापर संबंधित ऐतिहासिक संदर्भात करणे आवश्यक आहे.
मध्ययुगीन कृषक समाजाचे महत्त्व केवळ अन्नउत्पादनापुरते मर्यादित नव्हते. जमीन महसूल, स्थानिक बाजारपेठा, व्यापारमार्ग, किल्ले आणि बंदरे यांची आर्थिक रचना कृषी उत्पादनाशी संबंधित होती. त्यामुळे तत्कालीन राजसत्ता कोणतीही असो, ग्रामीण कृषक समाज हा राज्याच्या आर्थिक व्यवस्थेतील महत्त्वाचा घटक राहिला.<ref name="HistoryKonkanSection3"/>
=== मध्ययुगीन कृषक समाज आणि कुणबी ओळख ===
मध्ययुगीन कोकणातील कृषक समाजाचा इतिहास हा आधुनिक कुणबी समाजाच्या सामाजिक आणि आर्थिक पार्श्वभूमीचा अभ्यास करण्यासाठी महत्त्वाचा आहे; तथापि त्या काळातील सर्व कृषकांना आधुनिक अर्थाने ‘कुणबी’ म्हणणे योग्य ठरत नाही. शिलाहार, यादव, बहमनी, निजामशाही आणि आदिलशाही या विविध सत्तांच्या काळात कोकणातील ग्रामीण समाज जमीन, शेती, महसूल, ग्रामसंस्था आणि स्थानिक अधिकारपद्धती यांच्याशी संबंधित विविध स्वरूपांत अस्तित्वात होता. उपलब्ध ऐतिहासिक पुराव्यांवरून त्या काळातील कृषक समाजाचा अभ्यास करता येतो; मात्र या सर्व समूहांची आधुनिक ‘कुणबी’ या जातीय ओळखीशी थेट समानता सिद्ध होत नाही.<ref name="HistoryKonkanSection3"/>
वसाहतकालीन ethnographic साहित्यामध्ये ‘Kunbi’ या संज्ञेचा कृषक समुदाय आणि शेतीशी संबंधित सामाजिक ओळख या दोन्ही संदर्भांत वापर आढळतो. R. E. Enthoven यांच्या *The Tribes and Castes of Bombay* मध्ये कुणबींच्या विविध प्रादेशिक समूहांचे आणि त्यांच्या सामाजिक व आर्थिक जीवनाचे वर्णन केले आहे.<ref name="Enthoven1922" />
R. V. Russell आणि Hiralal यांनीही कुणबींच्या विविध प्रादेशिक रूपांचा आणि सामाजिक समूहांचा उल्लेख केला आहे. त्यांच्या ग्रंथात ‘Kunbi’, ‘Kulambi’, ‘Kulwadi’ आणि ‘Kanbi’ यांसारख्या संज्ञांचा उल्लेख आढळतो. मात्र या विविध नावांच्या आधारे सर्व समूहांची एकच अखंड ऐतिहासिक जातीय उत्पत्ती होती असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="RussellHiralal1916"/>
ब्रिटिशकालीन District Gazetteers आणि ethnographic साहित्याच्या वापराबाबत मुंबई उच्च न्यायालयानेही सावध भूमिका घेतली आहे. *Suhas s/o Anantrao Dashrathe and another v. State of Maharashtra and others* या प्रकरणात न्यायालयाने District Gazetteers आणि ethnographic साहित्याचा विचार केला. या साहित्याच्या आधारे Maratha हे मूळतः Kunbi आहेत, Maratha ही केवळ पदवी आहे किंवा Maratha ही Kunbiची उपजात अथवा समानार्थी संज्ञा आहे, असा निश्चित निष्कर्ष काढता येत नाही, असे न्यायालयाने नमूद केले. न्यायालयाने उपलब्ध साहित्यामध्ये ‘Kunbi’ हा शब्द काही संदर्भांत जमीन कसणाऱ्या व्यक्तीसाठी वापरला गेल्याचेही नोंदवले.<ref name="SuhasDashrathe2001">{{cite web
|title=Suhas s/o Anantrao Dashrathe and another v. State of Maharashtra, through the Secretary, Department of Urban Development and others
|url=https://indiankanoon.org/doc/1946655/
|publisher=Bombay High Court, Aurangabad Bench
|date=5 October 2001
|access-date=22 August 2026
}}</ref>
या न्यायालयीन निरीक्षणाचा अर्थ असा नाही की ‘कुणबी’ ही सामाजिक जातीय ओळख नव्हती; उलट आधुनिक काळातील प्रशासकीय वर्गीकरणात कुणबी ही स्वतंत्र जात म्हणून मान्य झालेली आहे. न्यायालयाचा मुद्दा असा होता की जुन्या Gazetteers किंवा ethnographic साहित्याच्या आधारे Maratha आणि Kunbi यांच्यातील ऐतिहासिक संबंधाबाबत सार्वत्रिक आणि निर्णायक वंशपरंपरागत निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="SuhasDashrathe2001"/>
या पार्श्वभूमीवर मध्ययुगीन कोकणातील ‘कृषक समाज’ आणि पुढील काळातील ‘कुणबी’ या सामाजिक ओळखीमध्ये ऐतिहासिक सातत्याचे काही घटक असण्याची शक्यता नाकारता येत नाही; परंतु उपलब्ध पुराव्यांच्या आधारे त्यांच्यात थेट आणि अखंड जातीय वंशपरंपरा सिद्ध करता येत नाही. प्राचीन किंवा मध्ययुगीन कृषक समाजातील प्रत्येक व्यक्ती किंवा समूहाला आधुनिक कुणबी म्हणून ओळखणे हे उपलब्ध पुराव्यांपेक्षा पुढे जाणारे अनुमान ठरेल.
कुणबी या नावाचा अधिक स्पष्ट आणि व्यापक दस्तऐवजी वापर पुढील वसाहतकालीन जनगणना, Gazetteers आणि ethnographic साहित्यामध्ये आढळतो. त्यामुळे मध्ययुगीन कोकणातील कृषक समाज हा आधुनिक कुणबी समाजाचा थेट समानार्थी नसून, पुढील काळात विकसित झालेल्या सामाजिक ओळखीचा ऐतिहासिक अभ्यास करण्यासाठी आवश्यक असलेली व्यापक ग्रामीण आणि कृषक पार्श्वभूमी म्हणून पाहणे अधिक योग्य ठरते.<ref name="Census1931Bombay"/><ref name="Enthoven1922"/>
== शिवकाल, स्वराज्य आणि मराठा सत्ता ==
सतराव्या शतकात छत्रपती शिवाजी महाराजांच्या नेतृत्वाखाली स्वराज्याची निर्मिती झाली आणि कोकणातील राजकीय, लष्करी व महसुली परिस्थितीत महत्त्वपूर्ण बदल झाले. स्वराज्याच्या विस्तारात कोकणाला भौगोलिक आणि आर्थिकदृष्ट्या महत्त्वाचे स्थान होते. सह्याद्रीतील घाटमार्ग, किनारी किल्ले, बंदरे, बाजारपेठा आणि कृषीप्रधान गावे यांमुळे कोकण हा स्वराज्याच्या संरक्षण, व्यापार आणि पुरवठा व्यवस्थेच्या दृष्टीने महत्त्वाचा प्रदेश बनला.<ref name="HistoryKonkanGazetteer1896">{{cite book
|editor=James M. Campbell
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: History of the Konkan, Dakhan and Southern Maratha Country
|volume=1
|issue=2
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1896
}}</ref>
शिवाजी महाराजांच्या काळातील ग्रामीण समाजाचा उल्लेख प्रामुख्याने ‘रयत’, ‘कृषक’, ‘शेतकरी’ आणि गावपातळीवरील विविध सामाजिक व प्रशासकीय घटकांच्या संदर्भात आढळतो. या काळातील सर्व रयत किंवा शेतकरी आधुनिक अर्थाने ‘कुणबी’ होते असे म्हणता येत नाही. त्यामुळे कोकणातील कुणबी समाजाच्या इतिहासाच्या संदर्भात शिवकालाचा विचार करताना ‘कुणबी’ आणि ‘रयत’ या संज्ञा एकमेकांच्या समानार्थी न मानता त्या-त्या ऐतिहासिक संदर्भात स्वतंत्रपणे वापरणे आवश्यक आहे.
=== शिवाजी महाराजांच्या काळातील रयत ===
शिवाजी महाराजांच्या राज्यव्यवस्थेत कृषक किंवा रयत हा राज्याच्या आर्थिक व्यवस्थेतील महत्त्वाचा घटक होता. महसूलव्यवस्थेत जमिनीची मोजणी, जमिनीची प्रत आणि उत्पादनक्षमतेचा अंदाज यांना महत्त्व देण्यात आले. उपलब्ध ऐतिहासिक वर्णनांनुसार महसूलवसुली अधिक थेट सरकारी यंत्रणेमार्फत करण्याचा प्रयत्न करण्यात आला आणि महसूल मक्तेदारीची पद्धत कमी करण्यावर भर देण्यात आला.<ref name="ShivajiRevenueArrangements">{{cite web
|title=Shivaji's Revenue Arrangements
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/Satara/english/BombayPresidancy/7%20History.pdf
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
शिवाजी महाराजांच्या महसूलव्यवस्थेचे स्वरूप त्यांच्या पूर्वसुरींच्या दख्खनी महसूलपद्धतींपासून पूर्णपणे वेगळे नव्हते. उपलब्ध ऐतिहासिक वर्णनांमध्ये दादोजी कोंडदेव यांच्या काळातील महसूलव्यवस्था आणि पूर्वीच्या दख्खनी प्रशासकीय अनुभवांचा प्रभाव दिसून येतो. जमिनीची मोजणी आणि उत्पादनाच्या आधारे महसूल निश्चित करण्याची पद्धत अधिक व्यवस्थित करण्याचा प्रयत्न करण्यात आला.<ref name="ShivajiRevenueArrangements"/>
=== कोकणातील ग्रामीण अर्थव्यवस्था ===
कोकणातील ग्रामीण अर्थव्यवस्था शेती, बागायती, पशुपालन, स्थानिक व्यापार आणि किनारी बाजारपेठांशी संबंधित होती. सह्याद्री आणि अरबी समुद्र यांच्यामधील भौगोलिक रचना, मोठ्या प्रमाणातील पर्जन्यमान, नद्या, खाड्या आणि अरुंद किनारी मैदाने यांमुळे कोकणातील कृषी पद्धतींना स्थानिक भौगोलिक परिस्थितीचा विशेष प्रभाव होता.
शिवाजी महाराजांच्या काळात कोकणातील राजकीय नियंत्रण वाढल्यानंतर ग्रामीण उत्पादनाचा संबंध किल्ले, बाजारपेठा आणि किनारी केंद्रांशी अधिक दृढ झाला. *Gazetteer of the Bombay Presidency: History of the Konkan* मध्ये शिवाजी महाराजांच्या काळातील दक्षिण कोकणाच्या संदर्भात महसूलव्यवस्था, किल्ले, गडकरी आणि स्थानिक लोकसंख्या यांचा परस्परसंबंध नोंदवला आहे.<ref name="HistoryKonkanShivaji">{{cite web
|title=History of the Konkan — Shivaji (1648 to 1680)
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Gazetteer%20of%20Bombay%20Presidency/history_of_the_konkan/section_6.pdf
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
कोकणातील कृषी उत्पादन हे स्थानिक उपजीविकेबरोबरच किल्ले, लष्करी ठाणी आणि बाजारपेठांच्या पुरवठ्याशीही संबंधित होते. किनारी आणि डोंगरी किल्ल्यांच्या जाळ्यामुळे धान्य, चारा, लाकूड, मीठ आणि इतर आवश्यक वस्तूंच्या स्थानिक पुरवठ्याला महत्त्व प्राप्त झाले. या आर्थिक संबंधांमुळे ग्रामीण उत्पादन आणि स्वराज्याच्या लष्करी व प्रशासकीय व्यवस्थेमध्ये परस्परावलंबित्व निर्माण झाले.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
=== महसूल व्यवस्था ===
शिवाजी महाराजांच्या महसूलव्यवस्थेत जमीन मोजणी आणि उत्पादनक्षमतेच्या आधारे महसूल निश्चित करण्याला महत्त्व देण्यात आले. उपलब्ध ऐतिहासिक वर्णनानुसार जमिनीचे सर्वेक्षण करून तिच्या उत्पादनाच्या आधारे शेतकरी आणि राज्य यांच्यातील महसुली हिस्सा निश्चित करण्याचा प्रयत्न करण्यात आला. एका ऐतिहासिक वर्णनात उत्पादनाच्या तीन-पंचमांश भागाचा हिस्सा शेतकऱ्याकडे आणि दोन-पंचमांश भाग राज्याकडे ठेवण्याची पद्धत नमूद केली आहे.<ref name="ShivajiRevenueArrangements"/>
मात्र शिवाजी महाराजांच्या संपूर्ण राज्यात सर्व प्रकारच्या जमिनींवर नेमका दोन-पंचमांश महसूलच आकारला जात असे, असा सार्वत्रिक निष्कर्ष काढणे योग्य ठरणार नाही. महसुली आकारणीमध्ये जमिनीचा प्रकार, पिके, स्थानिक परिस्थिती आणि पूर्वीच्या महसूलपद्धतींचा परिणाम होऊ शकत होता. त्यामुळे दोन-पंचमांश हा उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतामध्ये वर्णिलेला प्रमाणात्मक संदर्भ म्हणून पाहणे अधिक योग्य आहे.
शिवाजी महाराजांच्या नियंत्रणाखालील प्रदेशात महसूलवसुली अधिक थेट सरकारी यंत्रणेमार्फत करण्याचा प्रयत्न करण्यात आला. उपलब्ध Gazetteerच्या वर्णनानुसार महसूल मक्तेदारीची पद्धत दूर करून सरकारने नियुक्त केलेल्या अधिकाऱ्यांमार्फत महसूल गोळा केला जात असे. काही प्रशासकीय विभागांवर कारकून, तरफदार किंवा तालुकदार आणि त्यापुढे सुभेदार अशा अधिकाऱ्यांचा उल्लेख आढळतो.<ref name="ShivajiRevenueArrangements"/>
=== रयतेचे संरक्षण आणि कृषी ===
शिवाजी महाराजांच्या कोकणातील राज्यव्यवस्थेबाबत जुन्या *Gazetteer of the Bombay Presidency* मध्ये महसूलव्यवस्थेच्या सुधारणांचा उल्लेख आहे. दक्षिण कोकणाच्या संदर्भात त्यांच्या प्रशासनामुळे पूर्वीच्या व्यवस्थेपेक्षा काही सुधारणा झाल्या आणि cultivatorsच्या हिताचे संरक्षण करण्यात आले, अशी नोंद त्या स्रोतामध्ये आढळते.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
शिवाजी महाराजांच्या लष्करी शिस्तीविषयीच्या त्याच ऐतिहासिक स्रोतामध्ये कृषक, स्त्रिया आणि गाई यांना लष्करी मोहिमांमध्ये त्रास न देण्याच्या सूचनांचा उल्लेख आहे. युद्धकाळात ग्रामीण उत्पादन आणि शेतकऱ्यांचे संरक्षण हे राज्याच्या आर्थिक हिताशी संबंधित होते.<ref name="ShivajiAdministrationMilitary">{{cite web
|title=History — Shivaji's Administration and Military System
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/Satara/english/BombayPresidancy/7%20History.pdf
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
कृषी उत्पादन टिकवून ठेवणे हे राज्याच्या महसुली उत्पन्नासाठीही आवश्यक होते. त्यामुळे रयतेचे संरक्षण ही केवळ सामाजिक बाब नव्हती; ती कृषी उत्पादन आणि राज्याच्या आर्थिक स्थैर्याशीही संबंधित होती.
=== ग्रामीण मनुष्यबळ आणि लष्करी सहभाग ===
शिवाजी महाराजांच्या काळातील कोकणातील ग्रामीण समाजाचा काही भाग लष्करी व्यवस्थेशी जोडला गेला. दक्षिण कोकणाच्या संदर्भात *Gazetteer of the Bombay Presidency* मध्ये मालवण परिसरातील Hetkari किंवा स्थानिक मराठा सैनिकांचा उल्लेख आढळतो.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
याच स्रोतामध्ये कोकणातील किल्ल्यांशी संबंधित ‘गडकरी’ व्यवस्थेचा उल्लेख आहे. गडकरी हे किल्ल्यांच्या संरक्षणाशी संबंधित सेवाधारक होते आणि किल्ल्यांच्या आसपासच्या जमिनीशी त्यांचे संबंध होते. त्यामुळे ग्रामीण लोकसंख्येतील काही घटकांना शेतीबरोबर लष्करी किंवा किल्लेसेवेचे उपजीविकेचे साधन उपलब्ध झाले होते.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
या लष्करी सहभागाला आधुनिक जातीय वर्गीकरणाशी थेट जोडता येत नाही. गडकरी, Hetkari किंवा मावळातील सैनिक यांना सर्वसाधारणपणे कुणबी म्हणणे उपलब्ध पुराव्यांवरून योग्य ठरणार नाही. मात्र कोकणातील ग्रामीण लोकसंख्येतील काही घटक शेतीबरोबर लष्करी आणि किल्लेसेवेशी जोडले गेले होते, हे उपलब्ध ऐतिहासिक नोंदींवरून दिसून येते.
=== स्वराज्याच्या पुरवठा व्यवस्थेतील कोकण ===
कोकणातील किल्ले, बंदरे आणि बाजारपेठा यांचे महत्त्व केवळ लष्करी संरक्षणापुरते मर्यादित नव्हते. किनारी प्रदेशातील उत्पादन, व्यापारमार्ग आणि सह्याद्रीतील घाटमार्ग यांच्या माध्यमातून कोकणाचा संबंध स्वराज्याच्या व्यापक आर्थिक व्यवस्थेशी जोडला गेला. किल्ल्यांच्या देखभालीसाठी आवश्यक मनुष्यबळ, अन्नधान्य आणि इतर साहित्याचा स्थानिक प्रदेशाशी संबंध होता.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
या संदर्भात कृषक समाजाची भूमिका केवळ ‘शेतकरी’ म्हणून मर्यादित न ठेवता ग्रामीण उत्पादनव्यवस्थेतील घटक म्हणून पाहणे आवश्यक आहे. कृषी उत्पादन, स्थानिक बाजारपेठा, वाहतूक, किल्ले आणि लष्करी सेवा यांच्यातील संबंधांमुळे कोकणातील ग्रामीण अर्थव्यवस्था स्वराज्याच्या राजकीय व्यवस्थेशी जोडली गेली होती.
=== शिवकाल आणि आधुनिक कुणबी ओळख ===
शिवाजी महाराजांच्या काळातील ‘रयत’, ‘कृषक’ आणि ‘शेतकरी’ या संज्ञा आधुनिक ‘कुणबी’ या जातीय ओळखीच्या समानार्थी मानता येत नाहीत. शिवकालीन ग्रामीण समाज विविध सामाजिक, आर्थिक आणि प्रशासकीय घटकांनी बनलेला होता. उपलब्ध ऐतिहासिक वर्णनांमध्ये कृषक, स्थानिक अधिकारी, किल्लेसेवक आणि इतर ग्रामीण घटकांचे स्वतंत्र संदर्भ आढळतात.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/><ref name="ShivajiRevenueArrangements"/>
म्हणून शिवकालीन कृषक समाज आणि आधुनिक कोकणातील कुणबी समाज यांच्यात ऐतिहासिक सातत्याचे काही घटक असण्याची शक्यता तपासता येते; परंतु शिवाजी महाराजांच्या काळातील सर्व रयत कुणबी होती किंवा आधुनिक कुणबी समाजाची निश्चित जातीय ओळख त्याच काळात अस्तित्वात होती, असा निष्कर्ष उपलब्ध पुराव्यांवरून काढता येत नाही. कुणबी या सामाजिक समूहाचे अधिक स्पष्ट आणि व्यापक दस्तऐवजीकरण पुढील वसाहतकालीन जनगणना, District Gazetteers आणि ethnographic साहित्यामध्ये आढळते.<ref name="Census1931Bombay"/><ref name="Enthoven1922" /><ref name="RatnagiriSavantvadi1880">{{cite book
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Ratnagiri and Savantvadi
|volume=10
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1880
}}</ref>
=== स्वराज्याच्या पुरवठा व्यवस्थेत कृषक समाजाची भूमिका ===
स्वराज्याच्या लष्करी व्यवस्थेला धान्य, पशुधन, चारा, लाकूड आणि इतर जीवनावश्यक वस्तूंची आवश्यकता होती. किल्ल्यांच्या व्यवस्थापनात धान्यसाठा आणि इतर सामग्रीच्या देखरेखीशी संबंधित अधिकारी व प्रशासकीय व्यवस्था असल्याचे उपलब्ध ऐतिहासिक वर्णनांत आढळते.<ref name="ShivajiAdministrationMilitary"/>
किल्ल्यांच्या संरक्षणव्यवस्थेला आवश्यक असलेल्या अन्नधान्य आणि इतर साधनसामग्रीचा संबंध स्थानिक उत्पादन, बाजारपेठा आणि वाहतूकमार्गांशी होता. त्यामुळे कृषक समाजाचे उत्पादन स्वराज्याच्या व्यापक आर्थिक व्यवस्थेशी संबंधित होते. तथापि, उपलब्ध स्रोतांच्या आधारे कोकणातील सर्व कृषकांना स्वराज्याच्या लष्करी पुरवठा व्यवस्थेतील थेट घटक मानणे योग्य ठरणार नाही.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
कोकणातील किल्ले समुद्रकिनारी तसेच सह्याद्रीच्या डोंगररांगांमध्ये असल्यामुळे समुद्री मार्ग, घाटमार्ग आणि स्थानिक वाहतूक यांना महत्त्व होते. किल्ल्यांच्या बांधकाम, दुरुस्ती आणि देखभालीशी संबंधित कामांमध्ये स्थानिक मनुष्यबळाचा वापर झाल्याचे *Gazetteer of the Bombay Presidency* मध्ये नमूद केले आहे.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
=== कोकणातील किल्ले, बाजारपेठा आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्था ===
स्वराज्याच्या काळात कोकणातील किल्ले केवळ लष्करी केंद्रे नव्हती. त्यांच्या देखभालीसाठी प्रशासकीय कर्मचारी, किल्लेसेवक, कारागीर आणि इतर मनुष्यबळाची आवश्यकता होती. किल्ल्यांच्या व्यवस्थेशी संबंधित स्थानिक आर्थिक व्यवहार आणि मनुष्यबळाचा उल्लेख उपलब्ध ऐतिहासिक वर्णनांत आढळतो.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
कोकणातील बंदरे आणि बाजारपेठांनाही राजकीय व आर्थिक महत्त्व होते. समुद्री व्यापार, किनारी किल्ले आणि घाटमार्ग यांमुळे कोकणाचा अंतर्गत दख्खनशी संबंध कायम राहिला. या भौगोलिक आणि आर्थिक संबंधांमुळे ग्रामीण उत्पादनाचा संबंध स्थानिक तसेच प्रादेशिक बाजारपेठांशी होता.<ref name="HistoryKonkanGazetteer1896"/>
=== मराठा सत्तेच्या विस्तारानंतरचे बदल ===
शिवाजी महाराजांच्या मृत्यूनंतर मराठा सत्तेचा विस्तार पुढील काळात विविध टप्प्यांत झाला. संभाजी महाराज, राजाराम महाराज, महाराणी ताराबाई, छत्रपती शाहू महाराज आणि पुढे पेशवाईच्या काळात मराठा सत्तेचे राजकीय आणि प्रशासकीय स्वरूप बदलत गेले. कोकणात मराठा सत्तेबरोबरच आंग्रे, सिद्दी, पोर्तुगीज आणि ब्रिटिश अशा विविध सत्ताकेंद्रांशी संघर्ष व संबंधही कायम राहिले.<ref name="HistoryKonkanGazetteer1896"/>
पुढील मराठा काळात महसूल हक्कांचे वाटप, वतन, जहागीर, चौथाई, सरदेशमुखी आणि इतर महसुली दावे यांची प्रशासकीय गुंतागुंत वाढली. महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमधील ऐतिहासिक वर्णनानुसार मराठा सत्तेच्या विस्ताराच्या काळात विविध सरदारांना प्रदेश आणि त्यातून मिळणारे महसूल हक्क देण्यात आले आणि या महसुलाचा संबंध लष्करी व्यवस्थेशी होता.<ref name="MarathaAdministration">{{cite web
|title=History of Maharashtra — Maratha Administration
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/Satara/english/SDGrevised/2%20HISTORY.pdf
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
या प्रक्रियेमुळे कृषक आणि राज्य यांच्यातील महसुली संबंध अधिक गुंतागुंतीचे झाले. काही प्रदेशांत स्थानिक वतनदार, सरदार आणि महसूल मध्यस्थ यांची भूमिका महत्त्वाची राहिली. त्याच वेळी राज्याच्या प्रशासकीय आणि लष्करी व्यवस्थेसाठी आवश्यक महसूल ग्रामीण अर्थव्यवस्थेतून मिळत राहिला.<ref name="MarathaAdministration"/>
=== शिवकालीन कृषक समाज आणि कुणबी : ऐतिहासिक सावधगिरी ===
शिवाजी महाराजांच्या काळातील रयत, शेतकरी किंवा कृषक समाज आणि आधुनिक कुणबी समाज यांच्यात काही सामाजिक किंवा आर्थिक सातत्याचे घटक असण्याची शक्यता इतिहासाच्या अभ्यासातून तपासता येते; परंतु उपलब्ध पुराव्यांच्या आधारे शिवकालीन सर्व रयत ‘कुणबी’ होती असा निष्कर्ष काढता येत नाही. शिवकालीन ग्रामीण समाजाचा उल्लेख विविध सामाजिक, आर्थिक आणि प्रशासकीय संदर्भांत आढळतो.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
शिवकालीन आणि पुढील मराठा काळातील ‘रयत’, ‘मिरासदार’, ‘पाटील’, ‘देशमुख’ आणि इतर प्रशासकीय किंवा सामाजिक संज्ञांचा वापर त्यांच्या संबंधित ऐतिहासिक संदर्भात करणे आवश्यक आहे. या संज्ञांना आधुनिक जातीय वर्गीकरणाशी थेट समान मानणे योग्य नाही. आधुनिक काळातील ‘कुणबी’ या सामाजिक वर्गाचे अधिक स्पष्ट दस्तऐवजीकरण पुढील वसाहतकालीन जनगणना, District Gazetteers आणि ethnographic साहित्यामध्ये आढळते.<ref name="Census1931Bombay"/><ref name="Enthoven1922" />
म्हणून कोकणातील कुणबींच्या इतिहासाच्या दृष्टीने शिवकालाचे महत्त्व हे ‘शिवाजी महाराजांच्या सैन्यात कुणबी मोठ्या प्रमाणावर होते’ अशा अप्रमाणित दाव्यात नसून, '''कृषक रयत, जमीन, महसूल, ग्रामव्यवस्था, किल्ले, लष्करी मनुष्यबळ आणि राज्य यांच्यातील संबंधांच्या ऐतिहासिक विकासात''' आहे.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/><ref name="ShivajiRevenueArrangements"/>
शिवाजी महाराजांच्या स्वराज्यव्यवस्थेने कोकणातील ग्रामीण समाजावर परिणाम घडवून आणला आणि कृषी उत्पादन, महसूल, किल्ले, स्थानिक बाजारपेठा आणि लष्करी व्यवस्थेतील संबंधांना प्रशासकीय चौकट प्राप्त झाली. पुढील मराठा सत्ताकाळात या व्यवस्थेचे स्वरूप बदलत गेले आणि त्याचा कोकणातील जमीन, महसूल आणि ग्रामीण समाजावर दीर्घकालीन परिणाम झाला.<ref name="HistoryKonkanGazetteer1896"/><ref name="MarathaAdministration"/>
== ब्रिटिशपूर्व आणि ब्रिटिशकालीन कोकण ==
अठराव्या शतकाच्या उत्तरार्धापासून एकोणिसाव्या शतकाच्या उत्तरार्धापर्यंत कोकणातील जमीन, महसूल, कृषी आणि ग्रामीण समाजरचनेत महत्त्वपूर्ण बदल झाले. मराठा सत्तेच्या उत्तरकाळातील जमीनहक्क, मिरास, वतन, पाटील-कुलकर्णी व्यवस्था आणि खोतीसारख्या स्थानिक पद्धती ब्रिटिश सत्तेच्या स्थापनेनंतरही काही काळ अस्तित्वात राहिल्या; त्याच वेळी ब्रिटिश प्रशासनाने सर्वेक्षण, जमीनमोजणी, महसूल निश्चिती आणि नोंदवही यांच्या माध्यमातून जमीन व महसूल व्यवस्थेचे पुनर्गठन केले. रत्नागिरीमध्ये १८२७नंतर झालेल्या सर्वेक्षणांमधून जमीन, तिची प्रतवारी, धारकांचे हक्क आणि महसूल यांची अधिक पद्धतशीर नोंद करण्यात आली.<ref name="RatnagiriSurveys1827">{{cite web
|title=Land Administration — Ratnagiri: Surveys 1827–1851
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Ratnagiri%20and%20Sawantwadi/ratnagiri/land1_surveys27.html
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
या कालखंडाच्या अभ्यासासाठी १८८०चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Ratnagiri and Savantvadi'', १८८२चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Thana'' आणि १८८३चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira'' हे महत्त्वाचे वसाहतकालीन स्रोत आहेत. या गॅझेटियरमध्ये जमीन प्रशासन, महसूल, शेती, जमीनधारणा, पिके, गावव्यवस्था, लोकसंख्या आणि विविध सामाजिक समूहांविषयी माहिती दिली आहे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/><ref name="Thana1882"/><ref name="KolabaJanjira1883">{{cite book
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira
|volume=11
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1883
}}</ref>
=== ब्रिटिशपूर्व जमीनव्यवस्था ===
ब्रिटिश सत्ता येण्यापूर्वी कोकणातील जमीनव्यवस्था एकसंध स्वरूपाची नव्हती. प्रदेश, गाव, जमीनधारकांचे हक्क, स्थानिक वतन आणि महसूलपद्धती यांनुसार जमीनधारणेचे स्वरूप बदलत असे. रत्नागिरीतील ब्रिटिश सर्वेक्षणाच्या नोंदींमध्ये पूर्वीच्या जमीनमोजणी, जमीनवर्गीकरण आणि विविध प्रकारच्या हक्कांचा तपशील आढळतो.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
१८२७नंतर रत्नागिरीत करण्यात आलेल्या ब्रिटिश सर्वेक्षणांमध्ये पूर्वीच्या मराठा पद्धतीतील जमीनमोजणी आणि जमिनीच्या प्रतवारीचा अभ्यास करण्यात आला. सुरुवातीच्या सर्वेक्षणात जुन्या पद्धतीतील काही घटकांचा आधार घेण्यात आला; पुढे अधिक अचूक मोजणी, नकाशे आणि महसूल नोंदी तयार करण्यावर भर देण्यात आला.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== रयत आणि कृषक ===
कोकणातील ग्रामीण अर्थव्यवस्थेचा मुख्य आधार कृषी होता. रत्नागिरीत भातशेतीबरोबर नाचणी, वरी आणि इतर पिके घेतली जात. ब्रिटिश सर्वेक्षणाच्या काळात जमिनीचे वर्गीकरण तिच्या उपयोग, पिकांचा प्रकार आणि पाण्याच्या उपलब्धतेनुसार करण्यात आले. भातजमिनी आणि उंच किंवा पावसावर अवलंबून असलेल्या जमिनींचे विविध प्रकार नोंदवले गेले होते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
थाणे जिल्ह्यातही कृषी ही लोकसंख्येच्या मोठ्या भागाची उपजीविका होती. १८८२ च्या गॅझेटियरमध्ये जिल्ह्यातील सुमारे ६३ टक्के लोकसंख्या शेतीशी संबंधित असल्याचे नमूद केले आहे. भातजमिनींचे ''bandhni'' आणि ''malkhandi'' असे प्रकार करण्यात आले होते आणि पाण्याच्या उपलब्धतेनुसार जमिनीची उत्पादकता बदलत होती.<ref name="ThanaAgriculture">{{cite web
|title=Agriculture — Thana District
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Thana%20District/Thane-I/agriculture_soil.html
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
=== मिरास आणि वारसाहक्काची जमीन ===
ब्रिटिशपूर्व महाराष्ट्रातील ग्रामव्यवस्थेत काही कृषकांना जमिनीवर दीर्घकालीन किंवा वारसाहक्काचे हक्क प्राप्त होते. रत्नागिरीतील ब्रिटिश चौकशीच्या नोंदींमध्ये काही कृषकांना ''hereditary cultivators'' म्हणून वर्णिले आहे. त्यांच्या जमिनीवरील हक्कांचा संबंध स्थानिक जमीनव्यवस्था आणि पूर्वीपासून चालत आलेल्या कृषी हक्कांशी होता.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
रत्नागिरीतील १८२९–१८३० च्या चौकशीच्या संदर्भात खोती गावांतील वारसाहक्की कृषकांमध्ये कुणबींचा मोठा सहभाग असल्याची नोंद आढळते. या कृषकांना ''karda'' म्हणून संबोधण्यात आले असून त्यांच्या हक्कांचा संबंध लागवड, उत्पादन आणि खोतालाच देय असलेल्या रकमेशी होता.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
या नोंदी कोकणातील कुणबी समाजाच्या इतिहासाच्या दृष्टीने महत्त्वाच्या आहेत. कारण रत्नागिरीतील या ब्रिटिशकालीन चौकशीत ‘कुणबी’ ही संज्ञा प्रत्यक्ष कृषक आणि जमीनहक्कांच्या संदर्भात वापरलेली आढळते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== वतन व्यवस्था आणि ग्रामअधिकारी ===
मध्ययुगीन आणि मराठा काळापासून गावपातळीवरील प्रशासनात पाटील, कुलकर्णी आणि इतर वतनदारांना महत्त्व होते. पाटीलचा संबंध गावच्या कारभार आणि महसूलविषयक कामांशी, तर कुलकर्णीचा संबंध गावच्या लेखा व महसूल नोंदींशी होता. अनेक ठिकाणी या पदांना वंशपरंपरागत हक्कांचे स्वरूप प्राप्त झाले होते.<ref name="KolabaJanjira1883">{{cite book
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira
|volume=11
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1883
}}</ref>
ब्रिटिश सत्तेच्या स्थापनेनंतर या स्थानिक हक्कांची आणि वतनांची नोंद महसूल प्रशासनाच्या चौकटीत करण्यात आली. जमीन महसूल आणि ग्रामप्रशासन अधिक पद्धतशीर करण्यासाठी जमीनधारक, क्षेत्रफळ, सीमा आणि महसूल यांची नोंद तयार करण्यात आली.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== पाटील-कुलकर्णी व्यवस्था ===
गावातील पाटील आणि कुलकर्णी हे ग्रामीण प्रशासनातील प्रमुख अधिकारी होते. पाटीलचा संबंध गावच्या कारभार, महसूलविषयक कामे आणि स्थानिक प्रशासनाशी होता, तर कुलकर्णी गावच्या महसूल व जमीन नोंदी ठेवण्याच्या कामाशी संबंधित होता. मराठा काळातील ही व्यवस्था ब्रिटिश सत्तेच्या सुरुवातीच्या काळातही अनेक भागांत अस्तित्वात होती.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
ब्रिटिश सर्वेक्षणानंतर गावातील जमीन आणि महसूल नोंदी अधिक प्रमाणबद्ध करण्याचा प्रयत्न करण्यात आला. रत्नागिरीतील सर्वेक्षणात प्रत्येक शेताचे क्षेत्रफळ, सीमा आणि गावातील स्थान नोंदविण्यासाठी ''khatavni'' नावाची गावनिहाय नोंदवही तयार करण्यात आली. नकाशांमध्ये शेतांची आणि गावांची स्थिती दर्शविण्यात आली.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== खोती व्यवस्था ===
कोकणातील जमीनव्यवस्थेच्या इतिहासात खोती पद्धतीला विशेष महत्त्व होते. रत्नागिरी आणि कोलाबा प्रदेशातील काही गावांमध्ये खोत हा महसूल आणि जमीनव्यवस्थेतील मध्यस्थ म्हणून कार्यरत होता. खोती गावांमध्ये खोत आणि प्रत्यक्ष जमीन कसणारे कृषक यांच्यातील हक्क व देयकांचे संबंध ब्रिटिशकालीन महसूल चौकशीत नोंदवले गेले.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/><ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
रत्नागिरीतील १८२९–१८३० च्या चौकशीत खोती गावांतील कृषक हक्क आणि खोतांना देय असलेल्या रकमांचा उल्लेख आढळतो. या नोंदींमधून खोती व्यवस्था ही केवळ महसूलवसुलीची पद्धत नसून खोत, जमीन कसणारे कृषक आणि राज्य यांच्यातील हक्क व आर्थिक संबंधांची एक गुंतागुंतीची रचना होती, असे दिसते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== ब्रिटिश सर्वेक्षण आणि महसूल नोंदी ===
ब्रिटिश प्रशासनाने जमीन महसूल निश्चित करण्यासाठी प्रत्यक्ष सर्वेक्षण, मोजणी, नकाशे आणि जमीनधारकांच्या हक्कांची नोंद यांना महत्त्व दिले. रत्नागिरीतील १८२७ ते १८५१ या कालखंडातील सर्वेक्षण प्रक्रियेत जमिनीची मोजणी, प्रतवारी, धारकांचे हक्क आणि महसूल यांची नोंद करण्यात आली.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
या प्रक्रियेमुळे पूर्वीच्या स्थानिक जमीनहक्कांना प्रशासकीय नोंदींच्या चौकटीत स्थान मिळाले. जमीन, धारक, क्षेत्रफळ, सीमा आणि महसूल यांची नोंद पुढील काळातील जमीन प्रशासनासाठी महत्त्वाची ठरली. त्यामुळे ब्रिटिशकालीन सर्वेक्षण नोंदी या कोकणातील कृषक समाज, जमीनधारणा आणि कुणबी समाजाच्या सामाजिक-आर्थिक इतिहासाच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचे प्राथमिक स्रोत ठरतात.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== महसूल व्यवस्था ===
ब्रिटिश काळात जमीन महसूल हा जिल्ह्याच्या सरकारी उत्पन्नाचा प्रमुख स्रोत होता. कोलाबा जिल्ह्याच्या १८८३ च्या गॅझेटियरनुसार १८८०–८१मध्ये जिल्ह्याच्या एकूण सरकारी उत्पन्नातील सुमारे ६० टक्के उत्पन्न जमीन महसुलातून येत होते. १८५२–५३ ते १८८०–८१ या कालावधीत जमीन महसूल प्राप्तीत वाढ झाली होती. या वाढीमागे लागवडीखाली आणलेल्या अधिक क्षेत्राबरोबरच सर्वेक्षणामुळे झालेली अधिक अचूक जमीनमोजणी हे घटक असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद केले आहे.<ref name="KolabaRevenue">{{cite web
|title=Revenue and Finance — Kolaba
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Kolaba%20District/revenue.html
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
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कोलाबा जिल्ह्याच्या महसूलव्यवस्थेत जमीन महसुलाबरोबर स्थानिक निधीचीही व्यवस्था होती. शिक्षण, रस्ते, विहिरी, विश्रामगृहे आणि दवाखाने यांसारख्या स्थानिक सार्वजनिक कामांसाठी निधी उपलब्ध केला जात असे. १८६३पासून ग्रामीण शिक्षण आणि स्थानिक सार्वजनिक कामांसाठी स्थानिक निधीच्या व्यवस्थेचा विस्तार झाल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद आहे.<ref name="KolabaRevenue"/>
=== शेती आणि जमीनधारणा ===
कोकणातील शेतीवर पर्जन्यमान, जलव्यवस्था, जमिनीचा प्रकार आणि किनारी भौगोलिक परिस्थितीचा प्रभाव होता. थाणे जिल्ह्यात भातजमिनींची उत्पादकता पाण्याची उपलब्धता, पाण्याचा निचरा आणि जमिनीच्या स्वरूपाशी संबंधित होती. ''Bandhni'' आणि ''malkhandi'' या भातजमिनींच्या प्रकारांमध्ये उत्पादनातील फरक असल्याचे १८८२ च्या गॅझेटियरमध्ये नमूद केले आहे.<ref name="ThanaAgriculture"/>
थाणे जिल्ह्यातील १८७९–८० च्या महसूल सर्वेक्षणानुसार सरकारी लागवडीयोग्य क्षेत्रापैकी ९२.७ टक्के क्षेत्र प्रत्यक्ष लागवडीखाली होते. त्यामध्ये भातजमीन आणि कोरडवाहू जमीन हे प्रमुख प्रकार होते. किनारी भागात खारवट किंवा खारफुटीच्या प्रभावाखालील जमीन धरणे, बांध घालणे आणि पाण्याचा निचरा किंवा पावसाच्या पाण्याच्या साहाय्याने जमीन शेतीयोग्य करण्याचे प्रयत्न होत असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद आहे.<ref name="ThanaAgriculture"/>
खारवट जमीन शेतीयोग्य करण्यासाठी काही भागांत जमीन सुधारणा करणाऱ्या व्यक्तींना महसूल किंवा भाडे सवलती देण्यात आल्याची नोंद गॅझेटियरमध्ये आहे. सुरुवातीच्या काही वर्षांत कमी किंवा शून्य आकारणी करून जमीन सुधारण्यास प्रोत्साहन देण्यात येत असे. अशा प्रक्रियांमुळे किनारी भागातील काही खारवट जमीन कालांतराने भातशेतीसाठी वापरली जाऊ लागली.<ref name="ThanaAgriculture"/>
=== ग्रामीण अर्थव्यवस्था ===
कोकणातील ग्रामीण अर्थव्यवस्था केवळ शेतीपुरती मर्यादित नव्हती. भात, नाचणी, वरी, नारळ, सुपारी, फळबागा, पशुधन, मासेमारी, जंगलातील उत्पादन आणि स्थानिक व्यापार यांचा ग्रामीण जीवनाशी संबंध होता. बंदरे, नदीमार्ग आणि बाजारपेठांमुळे कृषी उत्पादनाचा संबंध स्थानिक तसेच किनारी व्यापाराशी जोडला गेला.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/><ref name="KolabaJanjira1883"/>
रत्नागिरी गॅझेटियरमध्ये भात, नारळ, सुपारी आणि इतर कृषी उत्पादनांचा उल्लेख असून कृषी उत्पादन, स्थानिक बाजारपेठ आणि व्यापार यांच्यातील संबंधांची माहिती दिली आहे. जिल्ह्यातील जमीन, कृषी उत्पादन आणि व्यापार यांसाठी स्वतंत्र वर्णने देण्यात आली आहेत.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
कोलाबा जिल्ह्याच्या १८८३ च्या गॅझेटियरमध्येही शेती, धान्य, तांदूळ, नारळ, सुपारी, बंदरे, नदीमार्ग आणि व्यापार यांचा परस्परसंबंध दिसून येतो. महाड, माणगाव, रोहा, पेण, अलिबाग आणि इतर केंद्रे कृषी उत्पादन, वाहतूक आणि व्यापाराच्या व्यापक जाळ्याशी संबंधित होती.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== कुणबी आणि जमीनधारणा ===
ब्रिटिशकालीन रत्नागिरीच्या जमीन प्रशासनाच्या नोंदी कोकणातील कुणबी समाजाच्या सामाजिक-आर्थिक इतिहासासाठी महत्त्वाच्या आहेत. १८२९–१८३० च्या जमीनविषयक चौकशीच्या संदर्भात ''vatandar kardas'' म्हणून नोंदवलेल्या वारसाहक्की कृषकांमध्ये कुणबींचा मोठा वाटा असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद केले आहे. हे कृषक विशिष्ट जमीनहिस्से कसत आणि त्या जमिनीच्या उत्पादनाशी संबंधित देयके खोत्यांना देत असत.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
गॅझेटियरच्या वर्णनानुसार अशा कुणबी कृषकांचे जीवन गावातील विशिष्ट जमीनहिस्स्यांशी संबंधित होते. कुटुंबे किंवा कुटुंबसमूह विशिष्ट जमीनभागाची लागवड करीत आणि लागवडीखालील तसेच पडीत जमिनीच्या व्यवस्थापनाशी त्यांचा संबंध होता.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
या नोंदींमुळे रत्नागिरीतील कुणबी कृषकांचा इतिहास केवळ व्यापक अर्थाने ‘शेतकरी समाज’ या वर्णनापुरता मर्यादित राहत नाही. उपलब्ध जमीनविषयक नोंदींमध्ये कुणबी कृषक, जमीनहिस्से, लागवड आणि खोती व्यवस्थेतील देयके यांच्यातील संबंध स्पष्टपणे दिसून येतात.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== ब्रिटिश प्रशासन आणि कृषकांवरील परिणाम ===
ब्रिटिश प्रशासनाने जमीन महसूल निश्चित करण्यासाठी जमीनसर्वेक्षण, मोजणी आणि नोंदणीवर भर दिला. रत्नागिरीतील १८२७नंतरच्या सर्वेक्षणांमध्ये जमीन, तिचे क्षेत्रफळ, प्रतवारी, लागवड आणि महसूल यांची अधिक पद्धतशीर नोंद करण्याचा प्रयत्न करण्यात आला. या प्रक्रियेमुळे गावांच्या सीमा, शेतजमिनी आणि महसूलविषयक माहिती अधिक औपचारिक सरकारी नोंदींमध्ये येऊ लागली.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
खोती हक्क आणि कृषकांचे हक्क यांच्यातील संबंधांबाबत ब्रिटिश प्रशासनाला विविध प्रश्नांना सामोरे जावे लागले. १८३० च्या दशकापासून पुढे खोत्यांचे अधिकार, कृषकांचे पारंपरिक हक्क, महसूल आकारणी आणि अनधिकृत आकारणी यांसंबंधी चौकशी व प्रशासकीय चर्चा झाल्याचे रत्नागिरीच्या जमीन प्रशासनाच्या नोंदींमधून दिसते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
या प्रक्रियेत अधिक अचूक जमीनसर्वेक्षण, जमिनीचे वर्गीकरण आणि महसूल नोंदी तयार करण्याला महत्त्व प्राप्त झाले. पारंपरिक जमीनहक्क आणि महसूलपद्धती यांचे सरकारी सर्वेक्षण व नोंदणीच्या माध्यमातून पुनर्गठन होत गेले.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== शेती, पाऊस आणि ग्रामीण संकटे ===
कोकणातील कृषी अर्थव्यवस्था मान्सूनवर मोठ्या प्रमाणात अवलंबून असल्यामुळे पर्जन्यमानातील बदलांचा पिकांच्या उत्पादनावर आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेवर परिणाम होत असे. रत्नागिरीच्या हंगाम अहवालांमध्ये विविध वर्षांतील पाऊस, भात आणि इतर पिकांची स्थिती, धान्याचे दर, पशुधनाची स्थिती आणि जमीन महसूल यांची नोंद करण्यात आली आहे.<ref name="RatnagiriSeasonReports">{{cite web
|title=Land Administration — Ratnagiri: Season Reports
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Ratnagiri%20and%20Sawantwadi/ratnagiri/land1_sec4.html
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
१८७५–७६मध्ये अतिवृष्टीमुळे भात आणि upland पिकांचे नुकसान झाल्याची, तर १८७६–७७मध्ये पावसाअभावी नाचणी, वरी, हरिक आणि भात यांसारख्या पिकांच्या उत्पादनावर परिणाम झाल्याची नोंद हंगाम अहवालांमध्ये आहे. या काळात काही भागांत मदतकार्य तसेच जमीन महसुलासंबंधी सवलती आणि थकबाकीची नोंदही आढळते.<ref name="RatnagiriSeasonReports"/>
या नोंदींवरून रत्नागिरीतील कृषक अर्थव्यवस्थेवर जमीनधारणा आणि लागवडीबरोबरच पर्जन्यमान, पीकउत्पादन, धान्याचे दर, पशुधन आणि जमीन महसूल यांचा परस्पर परिणाम होत असल्याचे दिसते. त्यामुळे जमीनधारणा असणे हे स्वतःपुरतेच ग्रामीण आर्थिक सुरक्षिततेचे निश्चित द्योतक मानता येत नाही.<ref name="RatnagiriSeasonReports"/>
=== ब्रिटिशकालीन गॅझेटियर निर्मिती ===
ब्रिटिश प्रशासनाने जिल्हानिहाय माहिती संकलित करून ''Gazetteer of the Bombay Presidency'' ही विस्तृत मालिका तयार केली. या गॅझेटियरमध्ये संबंधित जिल्ह्याची भौगोलिक रचना, इतिहास, लोकसंख्या, सामाजिक समूह, शेती, जमीन प्रशासन, महसूल, व्यापार, शिक्षण आणि इतर विषयांची माहिती एकत्रित करण्यात आली होती. त्यामुळे १९व्या शतकातील कोकणातील सामाजिक, आर्थिक आणि प्रशासकीय परिस्थितीच्या अभ्यासासाठी हे महत्त्वाचे वसाहतकालीन स्रोत ठरतात.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/><ref name="Thana1882"/></ref><ref name="KolabaJanjira1883"/>
१८८०चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Ratnagiri and Savantvadi'' हा या मालिकेतील दहावा खंड होता. त्यात जमीन प्रशासन, शेती, उत्पादन, व्यापार, इतिहास, महसूल आणि इतर विषयांची स्वतंत्र माहिती दिली आहे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
१८८२चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Thana'' हा खंड १३, भाग १ म्हणून प्रकाशित झाला. त्यात लोकसंख्या, सामाजिक समूह, शेती, जमीन आणि ग्रामीण जीवनासंबंधी माहिती आहे. त्याच वर्षी ''Thana: Places of Interest'' हा स्वतंत्र खंड १४ म्हणून प्रकाशित झाला; मात्र सामाजिक, कृषी आणि महसुली माहितीचा संदर्भ देताना मुख्यतः खंड १३चा वापर करणे अधिक योग्य आहे.<ref name="Thana1882"/><ref name="ThanaPlacesOfInterest1882">{{cite book
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Thana, Places of Interest
|volume=14
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1882
}}</ref>
१८८३चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira'' हा खंड ११ होता. त्यामध्ये लोकसंख्या, शेती, व्यापार, इतिहास, जमीन प्रशासन आणि महसूल व वित्त यांसाठी स्वतंत्र विभाग आहेत.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== जनगणना आणि सामाजिक वर्गीकरण ===
ब्रिटिशकालीन जनगणना ही कोकणातील सामाजिक समूहांच्या लोकसंख्येचा अभ्यास करण्यासाठी महत्त्वाची ऐतिहासिक साधने आहेत. १९व्या शतकाच्या उत्तरार्धातील जनगणना अहवालांमध्ये लोकसंख्या, धर्म, भाषा, जात, व्यवसाय, जन्मस्थान आणि इतर सामाजिक निकषांनुसार माहिती संकलित करण्यात आली. मात्र जातीय वर्गीकरणाची पद्धत काळानुसार बदलत गेली आणि विविध प्रदेशांतील स्थानिक सामाजिक संज्ञांना प्रशासकीय वर्गांमध्ये बसविण्याचा प्रयत्न करण्यात आला.<ref name="Census1931Bombay"/>
कुणबी समाजाच्या बाबतीत ही बाब विशेष महत्त्वाची आहे. ''Kunbi'', ''Kanbi'', ''Kulwadi'', ''Maratha-Kunbi'' आणि इतर संज्ञा वेगवेगळ्या जनगणनांमध्ये विविध पद्धतीने नोंदल्या गेल्या. त्यामुळे एका जनगणनेतील कुणबी लोकसंख्येची संख्या दुसऱ्या जनगणनेतील संख्येशी थेट तुलना करण्यापूर्वी त्या-त्या जनगणनेतील वर्गीकरणपद्धती, प्रशासकीय सीमा आणि संबंधित संज्ञेचा तत्कालीन अर्थ तपासणे आवश्यक आहे.<ref name="Census1931Bombay"/>
ब्रिटिशकालीन जनगणना ही तत्कालीन प्रशासकीय आणि लोकसंख्याशास्त्रीय वर्गीकरणाची महत्त्वाची नोंद असली तरी ती प्रत्येक व्यक्तीच्या सामाजिक ओळखीचे अपरिवर्तनीय किंवा अंतिम प्रतिबिंब मानता येत नाही. सामाजिक ओळख, स्थानिक प्रथा आणि प्रशासकीय वर्गीकरण यांच्यात संबंध असला तरी त्यांची उद्दिष्टे आणि स्वरूप वेगवेगळे होते.<ref name="Census1931Bombay"/>
=== कोकणातील कुणबी आणि ब्रिटिशकालीन नोंदी ===
ब्रिटिशकालीन नोंदींमध्ये कोकणातील कुणबी समाजाचा उल्लेख विविध सामाजिक, कृषी आणि जमीनविषयक संदर्भांत आढळतो. रत्नागिरीतील जमीन प्रशासनाच्या नोंदींमध्ये कुणबी हे वारसाहक्काने जमीन कसणाऱ्या कृषकांमध्ये मोठ्या प्रमाणावर असल्याचे नमूद केले आहे. थाणे आणि कोलाबा गॅझेटियरमध्येही कुणबींचा कृषी आणि ग्रामीण समाजाच्या संदर्भात उल्लेख आढळतो.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/><ref name="Thana1882"/><ref name="KolabaJanjira1883"/>
रत्नागिरीतील जमीन प्रशासनाच्या नोंदी विशेष महत्त्वाच्या आहेत कारण त्यामध्ये कुणबी कृषकांचा उल्लेख जमीनहिस्से, वारसाहक्की लागवड आणि खोती व्यवस्थेशी संबंधित संदर्भात करण्यात आला आहे. वारसाहक्की ''karda'' आणि कुणबी कृषक यांचा संबंध हा कोकणातील कुणबी समाजाच्या जमीनधारणेच्या इतिहासासाठी महत्त्वाचा प्राथमिक पुरावा आहे.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== ब्रिटिशकालीन परिवर्तन आणि कुणबी समाज ===
ब्रिटिश सत्तेने कोकणातील पारंपरिक जमीनव्यवस्था एकाच वेळी पूर्णपणे बदलली नाही. विद्यमान जमीनहक्क, वतन, खोती व्यवस्था आणि कृषकांच्या प्रथागत अधिकारांचा अभ्यास करून त्यांचे सर्वेक्षण, मोजणी आणि प्रशासकीय नोंदणी करण्यात आली. या प्रक्रियेमुळे काही पारंपरिक हक्क सरकारी नोंदींमध्ये अधिक स्पष्टपणे नोंदवले गेले, तर काही हक्कांचे स्वरूप नव्या प्रशासकीय आणि कायदेशीर चौकटीत निश्चित करण्यात आले.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
कुणबी समाजाच्या दृष्टीने या प्रक्रियेचा एक परिणाम असा झाला की जमीन, क्षेत्रफळ, सीमा, लागवड आणि महसूल यांच्याशी संबंधित माहिती अधिक पद्धतशीर सरकारी नोंदींमध्ये येऊ लागली. त्याच वेळी महसूल, भाडे, खोती हक्क आणि कृषकांचे पारंपरिक अधिकार यांच्यातील संबंध नव्या प्रशासकीय चौकटीत निश्चित करण्याची प्रक्रिया सुरू झाली.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
रत्नागिरीतील खोती व्यवस्थेच्या संदर्भात ब्रिटिश अधिकाऱ्यांनी खोत्यांचे हक्क, कृषकांचे हक्क आणि सरकारी महसूल यांच्याशी संबंधित प्रश्नांवर चौकशी व प्रशासकीय हस्तक्षेप केला. पुढील काळात खोती व्यवस्थेबाबत स्वतंत्र चौकशा आणि सुधारणा करण्यात आल्या.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== ब्रिटिशपूर्व ते ब्रिटिशकालीन संक्रमण ===
कोकणातील जमीनव्यवस्थेचा ब्रिटिशपूर्व ते ब्रिटिशकालीन प्रवास हा अचानक झालेला बदल नसून सातत्य आणि परिवर्तन यांचा मिश्र परिणाम होता. मराठा काळातील जमीनमोजणी, ग्रामअधिकारी, वतन, मिरास आणि खोती यांसारख्या संस्थांचे काही घटक ब्रिटिश काळाच्या सुरुवातीसही अस्तित्वात होते; मात्र ब्रिटिश प्रशासनाने त्यांचे सर्वेक्षण, जमीनमोजणी, नकाशे, लेखी नोंदी आणि महसूलव्यवस्थेच्या माध्यमातून अधिक औपचारिक पुनर्गठन करण्याचा प्रयत्न केला.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
या संक्रमणाचा परिणाम ग्रामीण समाजाच्या विविध स्तरांवर झाला. जमीनधारक, खोती, पाटील, कुलकर्णी, वारसाहक्की कृषक, भाडेकरू आणि मजूर यांच्यातील जमीन, महसूल, भाडे आणि प्रथागत हक्कांचे संबंध ब्रिटिशकालीन सर्वेक्षण, महसूल चौकशी आणि गावनिहाय नोंदवहींमध्ये अधिक स्पष्टपणे नोंदवले जाऊ लागले. रत्नागिरीतील १८२७–१८३० च्या सर्वेक्षणात शेतांचे क्षेत्रफळ, सीमा आणि गावातील स्थान ''khatavni'' या गावनिहाय नोंदवहीत नोंदविण्यात आले आणि त्यासोबत नकाशे तयार करण्यात आले. त्याच चौकशीत खोती गावांतील वारसाहक्की कृषक, ''vatandar kardas'', तसेच इतर प्रकारच्या कृषकांचे जमीनहक्क आणि खोत्यांशी असलेले संबंध तपासण्यात आले.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
एकोणिसाव्या शतकातील जिल्हा गॅझेटियर आणि त्यानंतरच्या जनगणना अहवालांमध्ये जमीन, शेती, लोकसंख्या, जात, व्यवसाय आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेविषयी मोठ्या प्रमाणावर सांख्यिकीय व वर्णनात्मक माहिती संकलित करण्यात आली. रत्नागिरी आणि सावंतवाडीचा १८८०चा गॅझेटियर, ठाण्याचा १८८२चा गॅझेटियर आणि कोलाबा व जंजिराचा १८८३चा गॅझेटियर यांमध्ये जमीन प्रशासन, शेती, महसूल, लोकसंख्या आणि सामाजिक जीवनासंबंधी स्वतंत्र विभाग आहेत.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/><ref name="Thana1882"/><ref name="KolabaJanjira1883"/>
त्यामुळे हे स्रोत कोकणातील एकोणिसाव्या शतकातील सामाजिक, कृषी आणि आर्थिक परिवर्तनाचा अभ्यास करण्यासाठी महत्त्वाचे ऐतिहासिक दस्तऐवज ठरतात.
कोकणातील कुणबी समाजासाठी या कालखंडाचे विशेष महत्त्व आहे. रत्नागिरीतील १८२९–१८३० च्या जमीनचौकशीच्या संदर्भात ''vatandar kardas'' या वारसाहक्की कृषकांमध्ये कुणबींचा मोठा वाटा असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद करण्यात आले आहे. या कृषकांकडे ठरावीक जमीनहिस्से होते; ते त्यांची लागवड आणि पडीत जमिनीचे व्यवस्थापन करीत आणि खोत्याशी संबंधित देयके देत असत.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्येही ''Kunbi'', ''Kanbi'', ''Kulwadi'', ''Maratta-Kunbi'' आणि संबंधित संज्ञांचे वर्गीकरण आढळते; मात्र ही वर्गीकरणे जनगणनेनुसार आणि प्रदेशानुसार बदलत असल्यामुळे त्यांच्या संख्यांची तुलना करताना संबंधित जनगणनेची वर्गीकरणपद्धती आणि तत्कालीन प्रशासकीय सीमा विचारात घेणे आवश्यक आहे. १९३१ च्या बॉम्बे जनगणनेत ''Kunbi, Kulwadi or Kanbi'', ''Lewa or Lewa Kunbi'' आणि ''Maratta-Kunbi'' अशा स्वतंत्र नोंदी आढळतात.<ref name="Census1931Bombay"/>
त्यामुळे आधुनिक कोकणातील कुणबी समाजाचा सामाजिक-आर्थिक इतिहास समजून घेण्यासाठी ब्रिटिशपूर्व ग्रामव्यवस्था, ब्रिटिशकालीन जमीनसर्वेक्षण, महसूल नोंदी, District Gazetteers आणि Census records यांचा परस्पर संदर्भात अभ्यास करणे आवश्यक आहे. या स्रोतांमधून कुणबींच्या कृषी व्यवसायाबरोबरच त्यांच्या जमीनहक्कांचा, खोती व्यवस्थेशी असलेल्या संबंधांचा आणि बदलत्या प्रशासकीय वर्गीकरणाचा इतिहास अधिक स्पष्टपणे समोर येतो.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/><ref name="Census1931Bombay"/>
== रत्नागिरीतील कुणबी ==
रत्नागिरी जिल्हा हा कोकणातील कुणबी समाजाच्या ऐतिहासिक अभ्यासासाठी विशेष महत्त्वाचा प्रदेश आहे. याचे एक प्रमुख कारण म्हणजे ब्रिटिशकालीन जमीन सर्वेक्षण, महसूल चौकशी, District Gazetteer आणि जनगणना अहवालांमध्ये रत्नागिरीतील कुणबींची तुलनेने सविस्तर नोंद आढळते. विशेषतः १८२७–१८३० च्या जमीन सर्वेक्षणाच्या नोंदींमध्ये वारसाहक्की कृषकांच्या संदर्भात कुणबींचा स्पष्ट उल्लेख आहे, तर १८८१ च्या जनगणनेत रत्नागिरी जिल्ह्यासाठी कुणबींची स्वतंत्र संख्या नोंदवण्यात आली आहे.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/><ref name="Baines1881">{{cite book
|last=Baines
|first=J. A.
|title=Imperial Census of 1881: Operations and Results in the Presidency of Bombay including Sind
|volume=1
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1882
}}</ref>
=== एकोणिसाव्या शतकातील रत्नागिरीची लोकसंख्या ===
एकोणिसाव्या शतकाच्या सुरुवातीला रत्नागिरी हा तुलनेने दाट लोकवस्तीचा आणि कृषीप्रधान जिल्हा होता. १८२० च्या सुमारास करण्यात आलेल्या लोकसंख्या मोजणीच्या संदर्भात रत्नागिरीची लोकसंख्या पावसाळी हंगामात ४,६२,६५१ इतकी असल्याचे १८८० च्या गॅझेटियरमध्ये नमूद करण्यात आले आहे. त्या काळात रत्नागिरी धान्य निर्यात करणारा प्रदेश असल्याचेही त्याच नोंदीत नमूद आहे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
एकोणिसाव्या शतकाच्या मध्यापासून रत्नागिरीची लोकसंख्या वाढत गेली; मात्र दुष्काळ, रोगराई, आर्थिक अडचणी आणि विशेषतः मुंबईकडे होणारे स्थलांतर यांमुळे लोकसंख्येच्या वाढीचे स्वरूप इतर जिल्ह्यांपेक्षा वेगळे राहिले. १८८१ च्या जनगणनेत रत्नागिरी जिल्ह्याची लोकसंख्या ९,९७,०९० नोंदली गेली होती. त्यापैकी ४७३,०५३ पुरुष आणि ५२४,०३७ स्त्रिया होत्या.<ref name="Baines1881"/>
१८८१ च्या रत्नागिरी जिल्ह्याच्या लोकसंख्येत शेतीचे स्थान अत्यंत महत्त्वाचे होते. त्या काळातील नोंदीनुसार शेतीवर अवलंबून असलेली लोकसंख्या ६,८९,८३७ इतकी होती. यामध्ये कृषी कामगार आणि त्यांच्यावर अवलंबून असलेल्या लोकांचा समावेश होता.<ref name="ImperialGazetteerRatnagiri">{{cite web
|title=Imperial Gazetteer of India: Ratnagiri
|url=https://library.bjp.org/jspui/bitstream/123456789/1895/1/The%20Imperial%20Gazetteer%20of%20India%20%20Vol-12%20%28Ratlam%20to%20Sirmur%29.pdf
|publisher=Imperial Gazetteer of India
}}</ref>
=== १८८१ची जनगणना आणि कुणबी ===
१८८१ च्या Bombay Presidency Censusमध्ये कृषक समूहांचे वर्गीकरण करताना ''Maratha Kunbi'' हा मोठा कृषक वर्ग म्हणून मांडण्यात आला. Censusच्या विश्लेषणात Deccan Kunbi आणि कोकणातील ''Maratha'' म्हणून नोंदविल्या जाणाऱ्या उपविभागाचा एकत्र विचार करण्यात आला होता. Census अधिकाऱ्याने या दोन्ही वर्गांमधील भेद अनेक ठिकाणी स्पष्ट नसल्याचे आणि काही प्रकरणांत तो मनमानी स्वरूपाचा असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Baines1881"/>
रत्नागिरी जिल्ह्याच्या बाबतीत १८८१ च्या Censusमध्ये **२,०५,७८४ कुणबी** आणि **२,७१,००० मराठा** अशी संख्या नोंदविण्यात आली होती. Censusच्या मूळ मजकुरात या आकडेवारीचा स्पष्ट उल्लेख आहे.<ref name="Baines1881"/>
१८८१ च्या Censusच्या वर्गीकरणातील ही अस्पष्टता रत्नागिरीतील कुणबींच्या ऐतिहासिक लोकसंख्येचा अभ्यास करताना विशेष लक्षात घ्यावी लागते. एका बाजूला Censusमध्ये ''Kunbi'' ही स्वतंत्र नोंद आहे; दुसऱ्या बाजूला त्याच अहवालात Deccan Kunbi आणि Konkanमधील Maratha यांच्या वर्गीकरणातील फरक नेहमी स्पष्ट नसल्याचे नमूद केले आहे. त्यामुळे १८८१ च्या आकडेवारीचा उपयोग त्या काळातील दस्तऐवजी लोकसंख्या-वर्गीकरणाचा पुरावा म्हणून करता येतो; मात्र त्यावरून आधुनिक काळातील कुणबी समाजाची लोकसंख्या निश्चित करता येत नाही.<ref name="Baines1881"/>
=== रत्नागिरी गॅझेटियरमधील कुणबी ===
१८८०चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Ratnagiri and Savantvadi'' हा रत्नागिरीतील कुणबी समाजाच्या इतिहासाच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचा वसाहतकालीन स्रोत आहे. या खंडात लोकसंख्या, शेती, जमीन प्रशासन, महसूल, व्यापार आणि १८२७–१८५१ च्या सर्वेक्षणाशी संबंधित स्वतंत्र माहिती दिली आहे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
गॅझेटियरच्या १८२७–१८३० च्या जमीन सर्वेक्षणासंबंधी नोंदींमध्ये रत्नागिरीतील वारसाहक्की कृषकांना ''hereditary cultivators'' आणि ''vatandar kardas'' असे संबोधले आहे. या कृषकांमध्ये कुणबींचा मोठा वाटा असल्याची स्पष्ट नोंद आहे. त्यामुळे रत्नागिरीतील कुणबींचे कृषक म्हणून असलेले स्थान हे केवळ नंतरच्या ethnographic वर्णनावर आधारित नसून ब्रिटिशकालीन जमीन चौकशीच्या नोंदींमध्येही दिसून येते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== कुणबी आणि वारसाहक्की जमीन ===
रत्नागिरीतील खोती गावांच्या संदर्भात ब्रिटिश अधिकाऱ्यांनी जमीनधारक आणि कृषक यांच्यातील संबंधांचा तपशीलवार अभ्यास केला. खोत्याच्या ताब्यातील जमिनीबरोबरच मोठ्या प्रमाणावर जमीन वारसाहक्की कृषकांच्या ताब्यात असल्याचे आढळले. या कृषकांमध्ये कुणबी मोठ्या संख्येने असल्याची नोंद करण्यात आली होती.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
या वारसाहक्की कृषकांना ''karda'' म्हणून संबोधले जात असे. ते विशिष्ट जमीनहिस्सा पिढ्यान्पिढ्या कसत आणि त्यावर लागवड करीत. काही नोंदींमध्ये अशा कृषकांच्या ताब्यातील जमीन, तिची लागवड आणि खोत्याशी असलेले आर्थिक संबंध यांचे वर्णन आढळते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
यावरून रत्नागिरीतील कुणबी समाजाची ऐतिहासिक ओळख केवळ ‘शेती करणारा समाज’ इतकी मर्यादित नव्हती. उपलब्ध जमीन प्रशासनाच्या नोंदींमध्ये काही कुणबी कृषक विशिष्ट जमीनहिस्से, वारसाहक्क आणि खोती महसूलव्यवस्थेशी संबंधित असल्याचे दिसते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== खोती व्यवस्था आणि कुणबी ===
रत्नागिरीच्या ग्रामीण समाजरचनेवर खोती व्यवस्थेचा मोठा प्रभाव होता. खोत हा गावाच्या महसूलव्यवस्थेतील मध्यस्थ किंवा हक्कधारक होता. खोती गावांमध्ये कृषकांकडून जमीन कसून घेऊन त्यांच्याकडून महसूल किंवा इतर देयकांची वसुली केली जात असे आणि खोत सरकारशी महसूलाच्या बाबतीत संबंधित असे.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
कुणबींचा या व्यवस्थेशी संबंध विविध स्वरूपाचा होता. उपलब्ध रत्नागिरीतील जमीन प्रशासनाच्या नोंदींमध्ये काही कुणबी वारसाहक्की ''karda'' कृषक म्हणून नोंदलेले आढळतात. त्यामुळे कुणबी समाजाला खोती व्यवस्थेत केवळ एकाच आर्थिक वर्गात बसविणे योग्य ठरणार नाही. जमीनहक्क, लागवडीचे स्वरूप आणि खोत्याशी असलेले आर्थिक संबंध यांनुसार कृषकांची स्थिती वेगवेगळी असू शकत होती.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== भातशेती आणि कृषीजीवन ===
रत्नागिरीतील कृषीव्यवस्थेत भातशेतीला महत्त्वाचे स्थान होते. जिल्ह्यातील पर्जन्यमान, भौगोलिक रचना, नदीखोरे आणि विविध प्रकारच्या जमिनी यांमुळे भात हे प्रमुख अन्नधान्य पीक होते. याशिवाय नाचणी, वरी, हरिक आणि इतर पिकांचीही लागवड केली जात होती.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
१८८३–८४ च्या आकडेवारीनुसार रत्नागिरी जिल्ह्यात १,०७८,८२१ एकर क्षेत्र प्रत्यक्ष लागवडीखाली होते. त्यापैकी १,०२०,५८३ एकरांवर धान्यपिके, ४१,७७३ एकरांवर कडधान्ये, २५,२२२ एकरांवर तेलबिया, ७,७२३ एकरांवर तंतुपिके आणि उर्वरित क्षेत्रावर बागायती, ऊस व इतर पिके घेतली जात होती.<ref name="ImperialGazetteerRatnagiri"/>
रत्नागिरीतील कृषीजीवन हे केवळ भातशेतीवर आधारित नव्हते. वर्खस किंवा डोंगराळ जमिनीवर नाचणी, वरी आणि हरिकसारखी पिके घेतली जात. Imperial Gazetteerनुसार १८८३–८४मध्ये वर्खस जमिनीवर हरिक, नाचणी आणि वरी यांसारख्या तुलनेने कमी पाण्यावर येणाऱ्या पिकांची लागवड मोठ्या प्रमाणावर होत होती. काही हलक्या व डोंगराळ जमिनींना सलग काही वर्षे लागवड केल्यानंतर पुन्हा काही काळ पडीत ठेवण्याची पद्धतही आढळत होती.<ref name="ImperialGazetteerRatnagiri"/>
=== रत्नागिरीतील ग्रामीण वितरण ===
१८८१मध्ये रत्नागिरी जिल्ह्यात १,२९७ गावे आणि शहरे नोंदली गेली होती. त्यापैकी १३८ वस्तींची लोकसंख्या २००पेक्षा कमी, ४५४ वस्तींची लोकसंख्या २०० ते ५००, ४३६ वस्तींची लोकसंख्या ५०० ते १,०००, तर २०५ वस्तींची लोकसंख्या १,००० ते २,००० होती. यावरून जिल्ह्याची लोकसंख्या मोठ्या शहरांपेक्षा असंख्य लहान ग्रामीण वसाहतींमध्ये मोठ्या प्रमाणावर विखुरलेली होती.<ref name="ImperialGazetteerRatnagiri"/>
मालवण, रत्नागिरी, चिपळूण, वेंगुर्ला, राजापूर आणि दापोली ही त्या काळातील प्रमुख शहरे होती. यांपैकी मालवण, रत्नागिरी, चिपळूण, वेंगुर्ला आणि राजापूर ही नगरपालिका असलेली शहरे होती.<ref name="ImperialGazetteerRatnagiri"/>
कुणबी समाजाच्या ग्रामीण वितरणाचा विचार करताना ही ग्रामरचना महत्त्वाची ठरते. रत्नागिरीतील कुणबी समाजाचा शेतीशी असलेला ऐतिहासिक संबंध लक्षात घेता त्यांची वस्ती कृषीप्रधान ग्रामीण भागांशी जोडलेली होती असे उपलब्ध जमीन प्रशासन आणि सामाजिक नोंदींवरून दिसते; मात्र प्रत्येक तालुका किंवा गावासाठी स्वतंत्र कुणबी लोकसंख्या उपलब्ध नसल्यामुळे जिल्ह्यातील कुणबींच्या सूक्ष्म भौगोलिक वितरणाचे अचूक प्रमाण निश्चित करता येत नाही.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== गावजीवन आणि सामाजिक रचना ===
रत्नागिरीतील ग्रामीण समाज हा कुटुंब, जमीन, शेती, ग्रामसंस्था, देवस्थान आणि स्थानिक परंपरांशी जोडलेला होता. कृषक कुटुंबांचे जीवन त्यांच्या जमीनहिस्स्याशी आणि शेतीच्या हंगामाशी संबंधित होते. पावसाळा, भातलागवड, कापणी, धान्यसाठा आणि बाजारपेठेतील विक्री यांमुळे ग्रामीण जीवनाचे वार्षिक चक्र निश्चित होत असे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
गॅझेटियरच्या वर्णनात रत्नागिरीतील ग्रामीण घरांची रचना, कौलारू घरे, अंगण आणि घरातील विविध भागांचा उल्लेख आढळतो. आर्थिक स्थिती आणि कुटुंबाच्या आकारमानानुसार घरांच्या स्वरूपात फरक असल्याचेही दिसते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
या सामाजिक रचनेत जात, कुटुंब, जमीनधारणा आणि व्यवसाय यांचा परस्पर संबंध होता. तथापि कुणबी समाजातील प्रत्येक कुटुंबाची आर्थिक स्थिती समान होती असे मानता येत नाही. जमीनहक्क, शेतीचे क्षेत्र, कर्ज, उत्पादन आणि बाहेरील रोजगाराच्या संधी यांनुसार आर्थिक फरक अस्तित्वात असू शकत होते.
=== कुणबी, मराठा आणि रत्नागिरीतील सामाजिक वर्गीकरण ===
रत्नागिरीतील कुणबींच्या इतिहासाचा अभ्यास करताना ''Kunbi'' आणि ''Maratha'' या संज्ञांमधील ऐतिहासिक संबंध अत्यंत सावधपणे तपासणे आवश्यक आहे. १८८१ च्या Censusमध्ये ''Maratha Kunbi'' हा व्यापक कृषक वर्ग वापरण्यात आला; त्याच वेळी रत्नागिरीसाठी ''Kunbi'' आणि ''Maratha'' यांच्या स्वतंत्र संख्याही नोंदविण्यात आल्या. Census अधिकाऱ्याने Konkanमधील Maratha आणि Deccan Kunbi यांच्या वर्गीकरणातील भेद काही ठिकाणी स्पष्ट नसल्याचे नमूद केले होते.<ref name="Baines1881"/>
त्यामुळे १८८१ च्या रत्नागिरीतील २,०५,७८४ कुणबी आणि २,७१,००० मराठा या संख्यांवरून दोन्ही समूह स्वतंत्र, पूर्णपणे वेगळे किंवा पूर्णपणे समान सामाजिक समूह होते असा निष्कर्ष काढता येत नाही. त्या आकडेवारीचे अर्थ लावताना ब्रिटिश जनगणनेची वर्गीकरणपद्धती आणि त्या काळातील स्थानिक सामाजिक ओळखी विचारात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="Baines1881"/>
=== सावंतवाडीशी संबंध ===
रत्नागिरी आणि सावंतवाडी हे दक्षिण कोकणातील परस्पर संबंधित ऐतिहासिक प्रदेश होते. १८८० च्या ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Ratnagiri and Savantvadi'' मध्ये या दोन्ही प्रदेशांचा एकाच खंडात स्वतंत्र विभागांसह अभ्यास करण्यात आला आहे. सावंतवाडी संस्थानातील वाडी, कुडाळ आणि बांदा या विभागांचा तसेच मालवण, वेंगुर्ला आणि दक्षिण कोकणातील इतर बाजारपेठांचा व्यापार आणि दळणवळणाच्या माध्यमातून परस्पर संबंध होता.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
सावंतवाडीच्या १८५१ च्या जनगणनेनुसार संस्थानाची लोकसंख्या १,५०,०६५ होती. १८७२ च्या जनगणनेत ती वाढून १,९०,८१४ झाली. १८७२ च्या वर्गीकरणानुसार ७३,६२७ व्यक्ती शेती आणि पशुधनाशी संबंधित व्यवसायात होत्या; ही संख्या एकूण लोकसंख्येच्या ३८.५८ टक्के होती.<ref name="SavantvadiPopulation">{{cite web
|title=Population — Savantvadi
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Ratnagiri%20and%20Sawantwadi/savantvadi/pop2_census.html
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
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सावंतवाडीतील कृषी आणि ग्रामीण समाजाचा अभ्यास रत्नागिरीतील कुणबी समाजाशी थेट समानता सिद्ध करण्यासाठी नव्हे, तर दक्षिण कोकणातील कृषी, बाजारपेठ आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या परस्परसंबंधांची ऐतिहासिक पार्श्वभूमी समजून घेण्यासाठी महत्त्वाचा आहे.
=== दक्षिण कोकणातील सामाजिक वैशिष्ट्ये ===
दक्षिण कोकणातील ग्रामीण समाजाची काही वैशिष्ट्ये रत्नागिरी, मालवण, कुडाळ, वेंगुर्ला आणि सावंतवाडी या प्रदेशांमध्ये आढळतात. पर्जन्याधारित शेती, डोंगराळ आणि किनारी भूप्रदेश, भातशेती, बागायती, जंगल आणि समुद्राशी संबंधित आर्थिक व्यवहार या प्रदेशाच्या ग्रामीण जीवनाचे महत्त्वाचे घटक होते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
एकोणिसाव्या शतकाच्या उत्तरार्धात रत्नागिरीतील लोकसंख्या, मर्यादित कृषी संसाधने आणि रोजगाराच्या उपलब्धतेतील असमतोल यांचा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेवर परिणाम झाला. विशेषतः मुंबईमध्ये वाढणाऱ्या मजूर मागणीमुळे रत्नागिरीतून हंगामी स्थलांतराला चालना मिळाली. १८७७–७८ च्या काळात रत्नागिरीतील गरीब कामगारांची नेहमीपेक्षा जवळजवळ दुप्पट संख्या, म्हणजे सुमारे १,५०,००० व्यक्ती, कामाच्या हंगामात मुंबईकडे गेल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद आहे. त्यापैकी अनेक जण पुढील पीकहंगामापूर्वी रत्नागिरीत परतले.<ref name="RatnagiriFamines">{{cite web
|title=Famines and Scarcity — Ratnagiri
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/RATNAGIRI/agri_famines.html
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
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रत्नागिरीतील लोकसंख्येचा मुंबईशी संबंध पुढील काळातही वाढत गेला. १८७२ च्या Censusनुसार मुंबई शहरात रत्नागिरी जिल्ह्यात जन्मलेल्या ७०,९४७ व्यक्ती होत्या; १८८१ च्या Censusमध्ये ही संख्या १,२६,१९० झाली. या वाढीचे प्रमाण जवळजवळ ७८ टक्के होते. Imperial Gazetteerने रत्नागिरीतील लोकसंख्येचा मुंबईतील रोजगार, औद्योगिक कामगारवर्ग आणि इतर सेवांशी असलेला संबंधही अधोरेखित केला आहे.<ref name="ImperialGazetteerRatnagiri"/>
=== कुणबी समाज आणि स्थलांतराची सुरुवात ===
रत्नागिरीतील मर्यादित कृषी संसाधने आणि मुंबईतील वाढती मजूर मागणी यांमुळे एकोणिसाव्या शतकात ग्रामीण भागातून मुंबईकडे हंगामी स्थलांतर वाढले. १८५० च्या दशकात रत्नागिरीतील कृषक मुंबईकडे हंगामानुसार जात असल्याच्या नोंदी आढळतात. एका सर्वेक्षण अधिकाऱ्याच्या नोंदीनुसार एका अंतर्गत तालुक्यातील प्रत्येक गावातून काही कृषक ऑक्टोबरच्या सुमारास मुंबईकडे जात आणि मान्सूनच्या सुरुवातीला शेतीच्या कामासाठी परतत असत.<ref name="ImperialGazetteerRatnagiri"/>
१८७७–७८ च्या काळातील गॅझेटियरची नोंदही या हंगामी स्थलांतराच्या स्वरूपाला पुष्टी देते. कामाच्या हंगामात मुंबईकडे गेलेले मोठ्या संख्येतील ग्रामीण कामगार पुढील पीकहंगामापूर्वी रत्नागिरीत परतत होते. त्यामुळे शेती आणि शहरी मजुरी यांच्यात परस्परपूरक संबंध निर्माण झाला होता.<ref name="RatnagiriFamines"/>
या स्थलांतरामुळे काही कुटुंबांच्या आर्थिक जीवनात ग्रामीण शेती आणि शहरी रोजगार यांचे मिश्र स्वरूप निर्माण झाले. गावातील जमीन आणि शेतीशी संबंध कायम ठेवत मुंबईत हंगामी मजुरी करणे हा काही ग्रामीण कुटुंबांसाठी उत्पन्नाचा पूरक मार्ग बनला. पुढील काळात याच प्रक्रियेतून हंगामी, परिपत्रक आणि कायमस्वरूपी स्थलांतराचे विविध नमुने विकसित झाले.
=== रत्नागिरीतील कुणबींची आर्थिक स्थिती ===
ब्रिटिशकालीन जमीन प्रशासनाच्या नोंदींवरून रत्नागिरीतील कुणबी समाजाची आर्थिक स्थिती एकसमान नव्हती. १८२७–१८३० च्या जमीन चौकशीमध्ये कुणबींचा उल्लेख वारसाहक्की कृषकांच्या संदर्भात आढळतो. या कृषकांकडे विशिष्ट जमीनहिस्से होते आणि ते त्या जमिनीची लागवड करीत होते. खोती गावांमध्ये अशा कृषकांचे खोतांशी महसूल आणि उत्पादनाशी संबंधित संबंध होते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
त्यामुळे रत्नागिरीतील कुणबी समाजाला केवळ एकसंध आर्थिक वर्ग म्हणून पाहणे योग्य ठरणार नाही. उपलब्ध नोंदींमध्ये वारसाहक्की कृषक, जमीन कसणारे इतर कृषक आणि खोती व्यवस्थेशी संबंधित विविध प्रकारचे जमीनहक्क व आर्थिक संबंध आढळतात. त्यामुळे ‘कुणबी म्हणजे सर्वच लहान शेतकरी’ किंवा ‘कुणबी म्हणजे सर्वच जमीनमालक’ अशी एकरेषीय मांडणी उपलब्ध ऐतिहासिक पुराव्यांशी सुसंगत ठरणार नाही.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
कृषी उत्पादन, जमीनधारणा आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेवर पर्जन्यमान, पिकांची स्थिती, जमिनीचा प्रकार आणि महसूलाची मागणी यांचा परिणाम होत असे. रत्नागिरीच्या हंगाम अहवालांमध्ये पाऊस, पिकांचे उत्पादन, धान्याचे दर, पशुधनाची हानी आणि जमीन महसूल यांची वर्षनिहाय नोंद आढळते. त्यामुळे कृषक कुटुंबांची आर्थिक स्थिती केवळ त्यांच्या जमीनहक्कावर अवलंबून नसून कृषी उत्पादन आणि त्या काळातील आर्थिक परिस्थितीशीही संबंधित होती.<ref name="RatnagiriSeasonReports"/>
एकोणिसाव्या शतकाच्या उत्तरार्धात मुंबईशी वाढलेल्या आर्थिक संबंधांचाही रत्नागिरीच्या ग्रामीण समाजावर परिणाम झाला. रोजगाराच्या शोधात रत्नागिरीतून मुंबईकडे हंगामी स्थलांतर होत असल्याची नोंद उपलब्ध गॅझेटियर आणि इतर वसाहतकालीन स्रोतांमध्ये आढळते. या प्रक्रियेमुळे काही ग्रामीण कुटुंबांच्या उपजीविकेत शेतीबरोबर बाहेरील मजुरी किंवा रोजगाराचा सहभाग वाढला.<ref name="ImperialGazetteerRatnagiri"/>
=== रत्नागिरीतील कुणबींच्या इतिहासाचे वैशिष्ट्य ===
रत्नागिरीतील कुणबी समाजाच्या इतिहासाचे एक महत्त्वाचे वैशिष्ट्य म्हणजे त्यांचा उल्लेख जमीन प्रशासन, कृषी आणि जनगणना या वेगवेगळ्या प्रकारच्या वसाहतकालीन नोंदींमध्ये आढळतो. १८२७–१८३० च्या जमीन चौकशीमध्ये कुणबींचा वारसाहक्की कृषकांच्या संदर्भात उल्लेख करण्यात आला; १८८० च्या ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Ratnagiri and Savantvadi'' मध्ये जमीन प्रशासन, शेती, महसूल आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेची विस्तृत माहिती नोंदविण्यात आली; तर १८८१ च्या Censusमध्ये रत्नागिरी जिल्ह्यासाठी कुणबींची स्वतंत्र संख्या नोंदविण्यात आली.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/><ref name="Baines1881"/>
या विविध स्रोतांचा एकत्रित अभ्यास केल्यास रत्नागिरीतील कुणबी समाजाचा इतिहास केवळ ‘शेतकरी जात’ या संक्षिप्त वर्णनापुरता मर्यादित राहत नाही. उपलब्ध नोंदींमध्ये कुणबी हे जमीन कसणारे कृषक, वारसाहक्की कृषक आणि खोती महसूलव्यवस्थेशी संबंधित ग्रामीण घटक म्हणून दिसतात. पुढील काळात रत्नागिरीतील ग्रामीण समाजाचा मुंबईतील रोजगाराशी वाढता संबंधही दिसून येतो.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/><ref name="ImperialGazetteerRatnagiri"/>
मात्र या ऐतिहासिक नोंदींचे अर्थ लावताना काळानुसार बदललेले सामाजिक आणि प्रशासकीय वर्गीकरण लक्षात घेणे आवश्यक आहे. ''Kunbi'', ''Maratha'', ''Maratha-Kunbi'' आणि संबंधित संज्ञांचा वापर वेगवेगळ्या जनगणना आणि प्रशासकीय नोंदींमध्ये समान पद्धतीने झालेला नाही. त्यामुळे १८८१ च्या Censusमधील कुणबींची संख्या ही त्या काळातील ब्रिटिश जनगणनात्मक वर्गीकरणाची नोंद म्हणून पाहणे आवश्यक आहे; तिची आजच्या प्रशासकीय किंवा सामाजिक वर्गीकरणाशी थेट तुलना करता येत नाही.<ref name="Baines1881"/>
== रायगड आणि ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशातील कुणबी ==
आधुनिक रायगड जिल्ह्याचा मोठा भाग ब्रिटिशकालीन ''Kolaba'' जिल्ह्याचा भाग होता. त्यामुळे रायगडातील कुणबी समाजाचा ऐतिहासिक अभ्यास करताना जुन्या प्रशासकीय नोंदींमधील ''Kolaba'' या संज्ञेचा संदर्भ लक्षात घेणे आवश्यक आहे. १८८३चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira'' हा या प्रदेशाच्या इतिहास, लोकसंख्या, शेती, जमीन प्रशासन, महसूल आणि व्यापाराच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचा वसाहतकालीन स्रोत आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
रायगडातील कुणबी समाजाचा ऐतिहासिक अभ्यास करताना कृषी, जमीनधारणा, ग्रामजीवन आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्था यांचा विचार करणे आवश्यक आहे. त्याचबरोबर महाड, माणगाव, रोहा, पेण, अलिबाग आणि इतर भागांचा व्यापार, नदीमार्ग आणि किनारी बाजारपेठांशी असलेला संबंधही या प्रदेशाच्या सामाजिक-आर्थिक इतिहासाला महत्त्वाचा संदर्भ देतो.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== ऐतिहासिक कोलाबा आणि आधुनिक रायगड ===
ब्रिटिशकालीन ''Kolaba'' जिल्ह्याच्या भौगोलिक सीमा आजच्या रायगड जिल्ह्याच्या सीमांशी तंतोतंत समान नव्हत्या. प्रशासकीय पुनर्रचना आणि जिल्ह्यांच्या सीमांतील बदलांमुळे जुन्या जनगणना, गॅझेटियर किंवा महसूल नोंदींमधील ''Kolaba'' या संज्ञेचा आधुनिक रायगडशी संबंध जोडताना संबंधित काळातील प्रशासकीय सीमा विचारात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
१८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये कोलाबा जिल्ह्याच्या लोकसंख्या, शेती, उत्पादन, जमीन प्रशासन, महसूल आणि व्यापाराचे स्वतंत्र वर्णन करण्यात आले आहे. या प्रशासकीय चौकटीत महाड आणि माणगावसारखे अंतर्गत कृषी प्रदेश तसेच अलिबाग, पेण आणि इतर किनारी भागांतील व्यापारकेंद्रांचा समावेश होता.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== कोलाबा प्रदेशातील कुणबींचे वितरण ===
१८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये कोलाबा जिल्ह्यातील सामाजिक समूहांचे वर्णन करताना कुणबींचा उल्लेख जिल्ह्याच्या विविध भागांत आढळणाऱ्या कृषक समुदायाच्या संदर्भात करण्यात आला आहे. सामाजिक वितरणाच्या वर्णनात किनारी भागातील काही गावांमध्ये भंडारी आणि कोळी यांची उपस्थिती नमूद करताना, मराठे प्रामुख्याने अंतर्गत भागात आढळत असल्याचे आणि कुणबी संपूर्ण जिल्ह्यात आढळत असल्याचे नोंदविण्यात आले आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
या नोंदीवरून एकोणिसाव्या शतकाच्या उत्तरार्धात कुणबींची उपस्थिती कोलाबा जिल्ह्याच्या विविध भागांत व्यापक होती, असे दिसते. तथापि ''संपूर्ण जिल्ह्यात आढळतात'' या गॅझेटियरमधील वर्णनाचा अर्थ प्रत्येक गावात कुणबी बहुसंख्य होते असा घेता येत नाही. तो त्यांच्या जिल्हास्तरीय भौगोलिक उपस्थितीचा वर्णनात्मक उल्लेख म्हणूनच समजणे अधिक योग्य आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== महाड ===
महाड हे ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशातील महत्त्वाचे अंतर्गत व्यापारी आणि वाहतूककेंद्र होते. सावित्री नदीमार्गे महाडचा कोकण किनारा तसेच सह्याद्रीच्या घाटमार्गांशी संपर्क होता. त्यामुळे महाड परिसरातील कृषी उत्पादनाचा स्थानिक बाजारपेठा आणि व्यापाराशी संबंध निर्माण झाला होता.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
महाड आणि माणगाव परिसरातील कृषक समाजाच्या वर्णनात १८८३ च्या ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira'' मध्ये स्थानिक भौगोलिक परिस्थिती, जमिनीची उत्पादकता आणि शेतीपद्धतींचा उल्लेख करण्यात आला आहे. काही भागांतील जमिनीची तुलनेने कमी उत्पादकता आणि कृषीवर असलेले अवलंबित्व यांचा ग्रामीण समाजाच्या आर्थिक स्थितीशी संबंध असल्याचे त्या वर्णनातून दिसते. त्याच संदर्भात कुणबींना मेहनती कृषक म्हणून वर्णन करण्यात आले असून, भातशेतीसाठी पाण्याचे प्रवाह नियंत्रित करण्याच्या आणि पाण्याचा उपयोग करण्याच्या त्यांच्या कृषी कौशल्याचा उल्लेख आढळतो.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
गॅझेटियरमधील अशा वर्णनांचा वापर करताना त्यांची वसाहतकालीन निर्मिती आणि त्या काळातील प्रशासकीय व सामाजिक दृष्टिकोन लक्षात घेणे आवश्यक आहे. त्यामुळे कुणबींच्या आर्थिक किंवा सामाजिक स्थितीबाबत गॅझेटियरमधील वर्णन हे ऐतिहासिक स्रोत म्हणून महत्त्वाचे असले तरी त्यातील मूल्यनिर्णय किंवा विशेषणे आधुनिक समाजशास्त्रीय निष्कर्ष म्हणून स्वीकारता येत नाहीत.
=== महाडमधील कुणबी बोली : A. M. Ghatge ===
महाड परिसरातील कुणबी समाजाच्या भाषिक अभ्यासासाठी अमृत माधव घाटगे यांचा ''Kunbi of Mahad'' हा महत्त्वाचा स्रोत आहे. हा ग्रंथ १९६६ मध्ये महाराष्ट्र राज्य साहित्य आणि संस्कृती मंडळाच्या ''A Survey of Marathi Dialects'' या मालिकेतील तिसरा खंड म्हणून प्रकाशित झाला.<ref name="GhatgeKunbiMahad">{{cite book
|last=Ghatge
|first=A. M.
|title=Kunbi of Mahad
|series=A Survey of Marathi Dialects
|volume=III
|publisher=State Board for Literature and Culture, Bombay
|year=1966
}}</ref>
''Kunbi of Mahad'' हा ग्रंथ महाड परिसरातील कुणबींच्या बोलीचा स्वतंत्र भाषाशास्त्रीय अभ्यास म्हणून महत्त्वाचा आहे. घाटगे यांच्या भाषिक सर्वेक्षणाच्या कार्यामध्ये महाराष्ट्र आणि महाराष्ट्राबाहेरील विविध मराठी व संबंधित भाषिक प्रकारांचा अभ्यास करण्यात आला होता. या व्यापक सर्वेक्षणाच्या पार्श्वभूमीवर महाडच्या कुणबी बोलीचा अभ्यास करण्यात आला.<ref name="SurveyDialectsMarathi">{{cite web
|title=Survey of Dialects of Marathi Language
|url=https://sdml.ac.in/previous-projects
|publisher=Deccan College / Survey of Dialects of Marathi Language
}}</ref>
या लेखात ''Kunbi of Mahad''चा उपयोग मुख्यतः महाड परिसरातील कुणबींच्या भाषिक ओळखीचा आणि बोलीवैशिष्ट्यांच्या अभ्यासासाठी केला जातो. अमृत माधव घाटगे यांच्या प्रमुख ग्रंथांमध्ये ''Kunbi of Mahad'' (१९६६) या ग्रंथाचा समावेश असून तो ''A Survey of Marathi Dialects'' या मालिकेतील खंड आहे.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/> मात्र एखाद्या विशिष्ट बोलीचे अस्तित्व हे स्वतःपुरते त्या समाजाची संपूर्ण जातीय उत्पत्ती किंवा अखंड ऐतिहासिक वंशावळ सिद्ध करणारे प्रमाण मानता येत नाही.
महाडच्या कुणबी बोलीचा अभ्यास या लेखातील भाषिक इतिहासाच्या संदर्भात पूरक पुरावा म्हणून महत्त्वाचा आहे. ध्वनीरचना, शब्दसंपत्ती, व्याकरण आणि स्थानिक भाषिक वैशिष्ट्यांचा अभ्यास केल्यामुळे महाड परिसरातील प्रादेशिक भाषिक ओळख आणि सामाजिक इतिहासाच्या काही पैलूंचा अभ्यास करता येतो. तथापि भाषिक साम्य किंवा बोलीवैशिष्ट्यांवरून एकट्या भाषाशास्त्रीय पुराव्याच्या आधारे कुणबी समाजाची जातीय उत्पत्ती निश्चित करणे योग्य ठरणार नाही.
=== माणगाव ===
माणगाव हा ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्यातील महत्त्वाचा अंतर्गत प्रदेश होता. सह्याद्रीच्या पायथ्याशी असलेली भौगोलिक स्थिती आणि नदीखोऱ्यांशी असलेला संबंध यांमुळे माणगाव परिसरातील ग्रामीण अर्थव्यवस्थेत शेतीला महत्त्वाचे स्थान होते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
महाड आणि माणगाव परिसराच्या सामाजिक-आर्थिक वर्णनात १८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये काही भागांतील जमिनीची तुलनेने कमी उत्पादकता आणि कृषी परिस्थितीचा उल्लेख करण्यात आला आहे. त्याच संदर्भात कुणबी कृषकांच्या आर्थिक स्थितीचा आणि त्यांच्या शेतीशी असलेल्या संबंधांचा उल्लेख आढळतो.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
या नोंदींवरून माणगाव परिसरातील कुणबी समाजाचा अभ्यास करताना जमीन, कृषी उत्पादन, पाण्याची उपलब्धता आणि स्थानिक भौगोलिक परिस्थिती यांचा विचार करणे आवश्यक ठरते. तथापि गॅझेटियरमधील वर्णन हे त्या काळातील प्रशासकीय निरीक्षण असल्यामुळे त्यातील सामाजिक किंवा आर्थिक मूल्यनिर्णय आधुनिक सामाजिक वर्गीकरणाप्रमाणे स्वीकारणे योग्य ठरणार नाही.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== रोहा ===
रोहा हा कुंडलिका नदीच्या खोऱ्याशी संबंधित महत्त्वाचा प्रदेश होता. नदीमार्ग आणि अंतर्गत वाहतुकीशी असलेल्या संबंधांमुळे रोहा परिसराचा कृषी उत्पादन, बाजारपेठा आणि व्यापाराशी संबंध होता. कोलाबा गॅझेटियरमध्ये रोहा आणि कुंडलिका नदीचा उल्लेख भौगोलिक, आर्थिक आणि वाहतुकीच्या संदर्भात आढळतो.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
रोहा परिसरातील ग्रामीण अर्थव्यवस्थेचा विचार करताना भातशेती, नदीखोरे आणि स्थानिक बाजारपेठा हे महत्त्वाचे घटक होते. तथापि रोहा तालुका किंवा त्यातील प्रत्येक गावासाठी स्वतंत्र कुणबी लोकसंख्येची विश्वसनीय ऐतिहासिक आकडेवारी उपलब्ध नसल्यामुळे तालुकानिहाय किंवा गावनिहाय कुणबी लोकसंख्येचे प्रमाण निश्चित करणे योग्य ठरणार नाही.
=== पेण ===
पेण हे ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्यातील महत्त्वाचे बाजारपेठीय आणि व्यापारी केंद्र होते. त्याचा किनारी भाग, अंतर्गत कोकण आणि मुंबईशी असलेला वाहतूक व व्यापारसंबंध यांमुळे पेणला प्रादेशिक अर्थव्यवस्थेत महत्त्वाचे स्थान प्राप्त झाले होते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
पेण परिसरातील ग्रामीण समाज हा विविध सामाजिक आणि व्यवसायिक समूहांनी बनलेला होता. कोलाबा गॅझेटियरमध्ये कुणबींसह विविध सामाजिक समूहांची जिल्ह्यातील उपस्थिती नोंदविण्यात आली आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
त्यामुळे पेण परिसरातील कुणबी समाजाचा इतिहास हा केवळ एका स्वतंत्र गावसमूहाच्या चौकटीत न पाहता कृषी, बाजारपेठ, वाहतूक आणि बहुजातीय ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या व्यापक संदर्भात पाहणे अधिक योग्य ठरते.
=== अलिबाग आणि किनारी कोलाबा ===
अलिबाग हे कोलाबा जिल्ह्याचे प्रशासकीय केंद्र आणि महत्त्वाचे किनारी ठिकाण होते. समुद्र, खाड्या, बंदरे आणि मुंबईशी असलेल्या जवळिकीमुळे अलिबाग परिसराची अर्थव्यवस्था अंतर्गत कोलाबाच्या कृषी अर्थव्यवस्थेपेक्षा अधिक वैविध्यपूर्ण होती<ref name="KolabaJanjira1883"/>
किनारी भागातील सामाजिक रचनेत कुणबींबरोबर कोळी, भंडारी आणि इतर समुदायांचा सहभाग होता. १८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये थळ आणि अलिबागच्या आसपासच्या गावांमध्ये भंडारी आणि कोळींचा उल्लेख आहे, तर कुणबी संपूर्ण जिल्ह्यात आढळत असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
यामुळे अलिबाग परिसरातील कुणबींचे जीवन केवळ भातशेतीपुरते मर्यादित नव्हते. किनारी बाजारपेठा, वाहतूक, मजुरी, व्यापार आणि शेती या विविध आर्थिक क्षेत्रांशी त्यांचा संबंध असू शकत होता; मात्र प्रत्येक आर्थिक क्रियेचा कुणबी समाजाशी थेट संबंध असल्याचा निष्कर्ष काढण्यासाठी स्वतंत्र पुरावा आवश्यक आहे.
=== भातशेती ===
कोलाबा प्रदेशातील कृषीव्यवस्थेत भाताला महत्त्वाचे स्थान होते. पावसाचे प्रमाण, नदीखोरे, खाचर जमीन आणि पाण्याचे व्यवस्थापन यांमुळे भातशेती हा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेचा प्रमुख भाग बनला होता.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
कुणबी कृषकांच्या संदर्भात गॅझेटियरमध्ये पाण्याचे अडथळे बांधणे, पाण्याचे प्रवाह वळवणे आणि भातखाचरांसाठी जलव्यवस्था करणे यांचे वर्णन आहे. यावरून कोलाबा प्रदेशातील कुणबींचे कृषी कौशल्य स्थानिक भूगोलाशी जुळवून घेतलेले होते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
भाताबरोबर नाचणी आणि इतर कोरडवाहू पिके घेतली जात होती. काही भागात बागायती पिके घेण्यासाठी पाणी उपलब्ध असल्यास जमीन सुधारण्याचे प्रयत्न केले जात.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== जमीनव्यवस्था ===
कोलाबा प्रदेशातील जमीनव्यवस्था ब्रिटिश काळात सर्वेक्षण, जमीनमोजणी आणि महसूल निश्चितीच्या प्रक्रियेतून अधिक औपचारिक झाली. १८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये ''Land Administration'' आणि ''British System: Surveys, Settlement, Results'' असे स्वतंत्र विभाग आहेत.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
या व्यवस्थेत जमीनधारक, कृषक, खोत आणि महसूल प्रशासन यांच्यातील संबंध प्रदेशानुसार बदलत होते. कोकणातील खोती व्यवस्था ही विशेषतः जमीन महसूल आणि गावाच्या आर्थिक रचनेशी संबंधित होती. त्यामुळे कुणबींच्या सामाजिक स्थितीचा अभ्यास करताना त्यांच्या जातीय ओळखीबरोबर जमीनधारणा आणि महसूलव्यवस्थेतील स्थान तपासणे आवश्यक आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== कुणबींची सामाजिक आणि आर्थिक स्थिती ===
१८८३ च्या ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira'' मधील वर्णनानुसार कोलाबा जिल्ह्यातील कुणबी प्रामुख्याने शेतीशी संबंधित कृषक होते. त्यांच्या उपजीविकेत बैलजोडी, गुरेढोरे, कोंबड्या आणि शेतीची विविध अवजारे यांचा उपयोग होत असल्याचे वर्णन करण्यात आले आहे. नांगर, कुळव, विळी, कोयते आणि इतर शेतीची साधने त्यांच्या कृषी जीवनाचा भाग होती.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
गॅझेटियरमध्ये काही कुणबी कुटुंबांकडे नाचणी किंवा हरिक यांसारख्या धान्यांचा काही महिन्यांसाठी साठा असल्याचे, तर काही कुटुंबांकडे पुरेसा धान्यसाठा नसल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. यावरून त्या काळातील कुणबी कुटुंबांच्या आर्थिक परिस्थितीत फरक होता, असे दिसून येते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
महाड आणि माणगाव परिसरातील काही भागांच्या संदर्भात गॅझेटियरमध्ये जमिनीची उत्पादकता आणि कृषी परिस्थितीचा उल्लेख करण्यात आला आहे. काही भागांत कृषकांची आर्थिक स्थिती प्रतिकूल असल्याचे वर्णन आहे, तर अधिक अनुकूल जमीन आणि पाण्याची उपलब्धता असलेल्या ठिकाणी कुणबी कृषकांनी बागायती पिकांचा उपयोग करून शेती अधिक उत्पादक करण्याचा प्रयत्न केल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
या नोंदींवरून कोलाबा प्रदेशातील कुणबी समाजाची आर्थिक स्थिती एकसमान नव्हती, असे दिसते. जमीन, पाणी, पिकांची उत्पादकता आणि उपलब्ध कृषी साधने यांनुसार कुटुंबांच्या आर्थिक परिस्थितीत फरक असू शकत होता.
=== कुणबींची घरे आणि गावजीवन ===
१८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये कोलाबा जिल्ह्यातील कुणबींच्या घरांच्या रचनेचेही वर्णन करण्यात आले आहे. माती किंवा खडीच्या भिंती, गवत किंवा भाताच्या पेंढ्याचे छप्पर आणि लाकडी आधार असलेली घरे आढळत असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. घरातील जागेचा उपयोग कुटुंबाचा दैनंदिन वावर, स्वयंपाक, झोपणे आणि साठवणूक यासाठी केला जात असे. घराजवळ गुरेढोरे आणि शेतीची अवजारे ठेवण्यासाठीही जागा असल्याचे वर्णन आढळते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
ही वर्णने एकोणिसाव्या शतकातील कोलाबा प्रदेशातील ग्रामीण जीवनाची ऐतिहासिक झलक देतात. तथापि गॅझेटियरमधील घरांच्या वर्णनावरून संपूर्ण कुणबी समाजाची घररचना एकसारखी होती असा निष्कर्ष काढता येत नाही. प्रदेश, आर्थिक स्थिती, जमीनधारणा आणि स्थानिक उपलब्ध साधनसामग्रीनुसार घरांच्या रचनेत फरक असण्याची शक्यता होती.
=== सामाजिक रचना आणि बहुजातीय ग्रामजीवन ===
कोलाबा प्रदेशातील गावे एकाच सामाजिक समूहाची वस्ती नसून विविध समुदायांच्या मिश्र वस्तीचे स्वरूप त्यात आढळत होते. १८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये कुणबी, मराठा, भंडारी, कोळी, मुसलमान, महार आणि इतर सामाजिक समूहांच्या उपस्थितीचे वर्णन करण्यात आले आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
या बहुजातीय ग्रामीण संरचनेत विविध समुदायांच्या आर्थिक आणि सामाजिक भूमिका वेगवेगळ्या असू शकत होत्या. कुणबींचा संबंध प्रामुख्याने कृषीशी जोडला गेला होता, तर किनारी प्रदेशातील काही समुदाय मासेमारी, नारळ उत्पादन, वाहतूक आणि इतर व्यवसायांशी संबंधित होते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
मात्र जात आणि व्यवसाय यांच्यातील संबंध प्रत्येक व्यक्तीच्या बाबतीत अपरिवर्तनीय होता असे मानता येत नाही. गॅझेटियरमधील व्यवसायविषयक वर्गीकरण हे त्या काळातील प्रशासकीय आणि सामाजिक निरीक्षणांवर आधारित होते; त्यामुळे त्यांचा उपयोग ऐतिहासिक सामाजिक रचनेचा अभ्यास करण्यासाठी संदर्भ म्हणून करणे अधिक योग्य ठरते.
=== महाड आणि कुणबी बोलीचे ऐतिहासिक महत्त्व ===
महाड परिसरातील कुणबी समाजाच्या भाषिक अभ्यासासाठी अमृत माधव घाटगे यांचा ''Kunbi of Mahad'' हा ग्रंथ विशेष महत्त्वाचा आहे. हा ग्रंथ ''A Survey of Marathi Dialects'' या भाषिक सर्वेक्षण मालिकेचा भाग असून महाड परिसरातील कुणबी बोलीचा स्वतंत्र भाषाशास्त्रीय अभ्यास त्यात करण्यात आला आहे.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/>
''Kunbi of Mahad''चा उपयोग महाड परिसरातील कुणबी समाजाच्या भाषिक वैशिष्ट्यांचा, बोलीच्या स्वरूपाचा आणि प्रादेशिक भाषिक विविधतेचा अभ्यास करण्यासाठी करता येतो. मात्र भाषिक साम्य किंवा विशिष्ट बोलीचे अस्तित्व यावरून एखाद्या समुदायाची जातीय उत्पत्ती, प्राचीन वंशावळ किंवा स्थलांतराचा निश्चित ऐतिहासिक मार्ग ठरविता येत नाही. अशा निष्कर्षांसाठी भाषिक पुराव्यांसोबत ऐतिहासिक, सामाजिक, भौगोलिक आणि दस्तऐवजी पुराव्यांचा स्वतंत्र विचार आवश्यक असतो.
महाडच्या कुणबी बोलीचा अभ्यास त्यामुळे कोकणातील कुणबी समाजाच्या इतिहासासाठी पूरक भाषिक स्रोत म्हणून महत्त्वाचा ठरतो. तो स्थानिक भाषिक विविधता आणि प्रादेशिक सामाजिक इतिहासाच्या अभ्यासाला अतिरिक्त संदर्भ उपलब्ध करून देतो.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/>
=== रायगड प्रदेशातील कुणबी आणि कोकणातील व्यापक कृषक समाज ===
ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशातील कुणबींचा इतिहास रत्नागिरीतील कुणबींच्या इतिहासाशी काही बाबतींत संबंधित आहे. दोन्ही प्रदेशांमध्ये भातशेती, पर्जन्याधारित कृषी, ग्रामीण वसाहती, जमीन व महसूलव्यवस्था आणि किनारी बाजारपेठांशी असलेले आर्थिक संबंध यांचे महत्त्व दिसून येते. तथापि ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशातील महाड-माणगावचा डोंगराळ भाग, रोहा-कुंडलिका नदीखोरे, पेण-अलिबागचा किनारी प्रदेश आणि मुंबईशी असलेली भौगोलिक जवळीक यांमुळे या प्रदेशाची स्वतंत्र सामाजिक-आर्थिक वैशिष्ट्ये होती.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
कुणबी समाजाच्या सामाजिक इतिहासाचा अभ्यास करताना या प्रदेशातील जमीनधारणा, शेतीच्या पद्धती, पाण्याचे व्यवस्थापन, कृषी साधने, ग्रामीण कुटुंबजीवन, बाजारपेठांशी असलेले संबंध आणि भाषिक वैशिष्ट्ये यांचा एकत्रित विचार करता येतो. या विविध घटकांमधून ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशातील कुणबी समाजाचे प्रादेशिक स्वरूप समजून घेण्यास मदत होते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== ऐतिहासिक नोंदींच्या मर्यादा ===
कोलाबा प्रदेशातील कुणबी समाजाच्या इतिहासाच्या अभ्यासासाठी १८८३चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira'' हा महत्त्वाचा वसाहतकालीन स्रोत आहे. त्यामध्ये लोकसंख्या, शेती, कृषक समाज, जमीन प्रशासन, महसूल आणि विविध सामाजिक समूहांविषयी तत्कालीन प्रशासकीय माहिती आणि निरीक्षणे नोंदविण्यात आली आहेत.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
तथापि हा गॅझेटियर ब्रिटिश वसाहतकालीन प्रशासकीय चौकटीत तयार झालेला स्रोत असल्यामुळे त्यातील सामाजिक आणि जातीय वर्णने तत्कालीन प्रशासकीय निरीक्षणे, वर्गीकरणे आणि त्या काळातील दृष्टिकोनांवर आधारित आहेत. त्यामुळे त्यातील समुदायांविषयीची सर्वसाधारण विशेषणे किंवा मूल्यनिर्णय आधुनिक सामाजिक वास्तवाचे अंतिम किंवा सार्वत्रिक वर्णन मानता येत नाहीत. गॅझेटियरचा उपयोग करताना त्यातील वर्णनात्मक माहिती आणि तिच्यामागील तत्कालीन वसाहतकालीन प्रशासकीय संदर्भ यांचा स्वतंत्र विचार करणे आवश्यक आहे.
त्याचप्रमाणे ''Kunbi'' या संज्ञेची एकोणिसाव्या शतकातील प्रशासकीय किंवा ethnographic व्याप्ती आणि आधुनिक महाराष्ट्रातील प्रशासकीय वर्गीकरण यांना तंतोतंत समान मानता येत नाही. ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये जातीय समूहांचे वर्गीकरण तत्कालीन प्रशासकीय पद्धतीनुसार करण्यात आले होते आणि विविध प्रदेशांमध्ये ''Kunbi'', ''Maratha'', ''Maratha-Kunbi'' किंवा संबंधित संज्ञांचा वापर वेगवेगळ्या प्रकारे आढळतो.<ref name="Baines1881"/>
१८८१ च्या Bombay Presidency Censusमध्ये ''Maratha Kunbi'' या व्यापक कृषक वर्गाचा विचार करण्यात आला होता. त्याच Censusच्या विश्लेषणात Konkanमधील ''Maratha'' आणि Deccanमधील ''Kunbi'' यांच्यातील वर्गीकरण काही बाबतींत स्पष्ट नसल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="Baines1881"/>
म्हणून जुन्या Census किंवा Gazetteerमधील जातीय संज्ञा आणि त्यांची लोकसंख्या आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरणाशी थेट तुलना करण्यापूर्वी संबंधित कालखंडातील प्रशासकीय सीमा, वर्गीकरणाची पद्धत, वापरलेल्या सामाजिक संज्ञा आणि स्थानिक सामाजिक संदर्भ यांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे.
=== रायगड आणि ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशातील कुणबी : ऐतिहासिक स्थान ===
ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशातील कुणबी समाज हा कोकणातील कृषक समाजाचा एक महत्त्वाचा घटक होता. १८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये कुणबींची जिल्ह्याच्या विविध भागांतील उपस्थिती, कृषीवरील त्यांचे अवलंबित्व, भातशेती, जमीन आणि ग्रामीण जीवन यांविषयी वर्णनात्मक नोंदी आढळतात. महाड आणि माणगावच्या काही भागांच्या संदर्भात जमिनीची गुणवत्ता आणि पाण्याची उपलब्धता यांचा कृषकांच्या आर्थिक स्थितीवर परिणाम होत असल्याचे, तसेच अनुकूल परिस्थितीत कुणबी कृषकांचे कृषी कौशल्य दिसून येत असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद केले आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
महाडच्या संदर्भात A. M. Ghatge यांचा १९६६चा ''Kunbi of Mahad'' हा भाषाशास्त्रीय स्रोत या ऐतिहासिक चित्राला वेगळा आयाम देतो. गॅझेटियरमधील सामाजिक-आर्थिक नोंदी आणि Ghatge यांच्या भाषिक अभ्यासाचा एकत्रित उपयोग केल्यास महाड आणि ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशातील कुणबी समाजाचा अभ्यास जमीन, शेती, ग्रामीण समाज आणि भाषा या परस्परसंबंधित घटकांच्या आधारे करता येतो.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/>
== ठाणे आणि उत्तर कोकणातील कुणबी ==
ऐतिहासिक ठाणे जिल्ह्याची भौगोलिक व्याप्ती आजच्या ठाणे आणि पालघर जिल्ह्यांच्या सीमांशी पूर्णपणे समान नव्हती. ब्रिटिशकालीन ''Thana'' जिल्ह्यात काळानुसार ठाणे, सालसेट, भिवंडी, कल्याण, मुरबाड, शहापूर, डहाणू, पालघर, जव्हार आणि इतर प्रदेशांचा समावेश होता. त्यामुळे उत्तर कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास मांडताना आधुनिक जिल्ह्यांच्या सीमा थेट १९व्या शतकातील प्रशासकीय नोंदींवर लावणे योग्य ठरत नाही. १८८२चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Tha'na'' हा या ऐतिहासिक प्रदेशाच्या लोकसंख्या, शेती, जमीनव्यवस्था, सामाजिक समूह, व्यापार आणि प्रशासनाच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचा वसाहतकालीन स्रोत आहे.<ref name="Thana1882"/>
=== ऐतिहासिक ठाणे जिल्हा ===
१८८२ च्या गॅझेटियरमध्ये ठाणे जिल्ह्याच्या लोकसंख्या, शेती, उत्पादन, सामाजिक समूह, धर्म, व्यापार, जमीन प्रशासन आणि महसूल यांचे स्वतंत्र विवेचन करण्यात आले आहे. या नोंदींमध्ये ''Kunbis'', ''Marathas'', ''Kolis'', ''Dhangars'', ''Kathkaris'', ''Thakurs'', ''Varlis'' आणि इतर समुदायांचा उल्लेख आढळतो. त्यामुळे ऐतिहासिक ठाणे जिल्ह्यातील ग्रामीण समाज हा एकाच कृषक समुदायापुरता मर्यादित नसून विविध सामाजिक आणि आर्थिक समूहांनी बनलेला होता.<ref name="Thana1882"/>
गॅझेटियरमध्ये ''Kunbis'' बरोबरच ''Marathas'', ''Kolis'', ''Kathkaris'', ''Dhangars'', ''Thakurs'' आणि ''Varlis'' यांचाही स्वतंत्र उल्लेख आढळतो. या नोंदींवरून ठाणे जिल्ह्यातील ग्रामीण आणि कृषी समाजरचनेत विविध सामाजिक समूहांचा सहभाग होता असे दिसून येते.<ref name="Thana1882"/>
=== उत्तर कोकणातील कृषक समाज ===
ठाणे जिल्ह्यातील कृषीव्यवस्थेवर प्रदेशाच्या भौगोलिक विविधतेचा मोठा प्रभाव होता. किनारी खारजमीन, नदीखोरे, खाचर प्रदेश तसेच सह्याद्रीच्या पायथ्याशी असलेली उंचसखल जमीन यांनुसार शेतीच्या पद्धती आणि पिकांमध्ये फरक पडत असे. १८८२ च्या गॅझेटियरनुसार जिल्ह्याच्या एकूण लोकसंख्येपैकी सुमारे ६३ टक्के लोक कृषीशी संबंधित होते. या वर्गीकरणात कृषी व्यवसाय करणाऱ्या प्रौढ पुरुषांबरोबर त्यांच्या पत्नी आणि मुलांचाही समावेश करण्यात आला होता.<ref name="ThanaAgriculture">{{cite web
|title=Agriculture — Thana District
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Thana%20District/Thane-I/agriculture_soil.html
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
ठाणे जिल्ह्यातील जमिनीचे ''shet'' आणि ''mal-varkas'' असे प्रमुख प्रकार वर्णिले आहेत. सपाट आणि भातशेतीस योग्य जमिनींना ''shet'' म्हटले जात असे, तर डोंगरमाथे आणि उतारांवरील जमिनींवर नाचणी, वरी आणि इतर पिके घेतली जात. भातजमिनींचे ''bandhni'' आणि ''malkhandi'' असे प्रकारही नोंदविण्यात आले आहेत.<ref name="ThanaAgriculture"/>
या कृषी अर्थव्यवस्थेत कुणबींचे महत्त्वाचे स्थान होते; तथापि ठाणे जिल्ह्यातील सर्व कृषकांना कुणबी म्हणून ओळखता येत नाही. गॅझेटियरमध्ये कुणबींबरोबर मराठा, कोळी, धनगर आणि इतर सामाजिक समूहांचाही स्वतंत्र उल्लेख आढळतो. त्यामुळे ''कृषक'' ही व्यापक आर्थिक-व्यावसायिक संज्ञा असून ''कुणबी'' ही विशिष्ट सामाजिक संज्ञा आहे, असे ऐतिहासिक नोंदींच्या आधारे वेगळेपणाने पाहणे आवश्यक आहे.<ref name="Thana1882"/>
=== ठाणे परिसरातील कुणबी ===
ठाणे हे ऐतिहासिकदृष्ट्या उत्तर कोकणातील महत्त्वाचे प्रशासकीय आणि व्यापारी केंद्र होते. शहराभोवतालच्या प्रदेशातील शेती, खाड्या, जलमार्ग आणि मुंबईशी असलेले संपर्क यांमुळे ग्रामीण आणि नागरी अर्थव्यवस्थांमध्ये परस्परसंबंध निर्माण झाले होते.<ref name="Thana1882"/>
ठाणे परिसरातील कृषक समाजाचा अभ्यास करताना सालसेट, भिवंडी, कल्याण आणि आसपासच्या प्रदेशांशी असलेले ऐतिहासिक प्रशासकीय व आर्थिक संबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे. १८८२ च्या ठाणे गॅझेटियरमध्ये जिल्ह्याच्या विविध भागांचे स्वतंत्र वर्णन करण्यात आले असून त्या भागांची कृषी, जमीन आणि लोकसंख्येच्या संदर्भातील वैशिष्ट्ये नोंदविण्यात आली आहेत.<ref name="Thana1882"/>
=== सालसेट ===
सालसेट (Salsette) हा उत्तर कोकणाच्या इतिहासातील महत्त्वाचा प्रदेश होता. १९व्या शतकात सालसेटचा प्रशासकीय संबंध ठाणे जिल्ह्याशी होता. १८८२ च्या गॅझेटियरमध्ये सालसेटच्या इतिहास, जमीनव्यवस्था आणि कृषीविषयक परिस्थितीचे स्वतंत्र वर्णन आढळते.<ref name="Thana1882"/>
सालसेटमध्ये किनारी खारजमिनींचे संरक्षण, बांधबंदिस्ती आणि जमीन पुनर्प्राप्तीच्या प्रक्रिया दीर्घकाळ चालू होत्या. ठाणे गॅझेटियरमध्ये मानवी प्रयत्नांद्वारे काही भागांमध्ये जमीन पुनर्प्राप्त करण्यात आल्याचे आणि या प्रक्रियांचा स्थानिक कृषीव्यवस्थेशी संबंध असल्याचे वर्णन केले आहे.<ref name="ThanaAgriculture"/>
सालसेटमधील कृषी प्रदेशांमध्ये भातशेती तसेच बागायती आणि नारळाशी संबंधित उत्पादनाचा समावेश होता. मुंबईच्या वाढत्या नागरी आणि व्यापारी केंद्राशी असलेल्या भौगोलिक जवळिकीमुळे या प्रदेशातील ग्रामीण उत्पादनाला शहरी बाजारपेठेशी जोडणारे आर्थिक संबंध विकसित झाले.<ref name="Thana1882"/>
=== वसई आणि बासेन ===
ऐतिहासिक वसईला ब्रिटिशकालीन नोंदींमध्ये ''Bassein'' असे संबोधले जाते. वसईचा प्रदेश पोर्तुगीज सत्तेच्या दीर्घकालीन प्रभावामुळे उत्तर कोकणातील इतर भागांपेक्षा ऐतिहासिक आणि सामाजिकदृष्ट्या वैशिष्ट्यपूर्ण होता. १८८२ च्या ठाणे गॅझेटियरमध्ये बासेनच्या इतिहास, जमीनव्यवस्था, कृषी आणि लोकसंख्येविषयी स्वतंत्र नोंदी आढळतात.<ref name="Thana1882"/>
वसई परिसरातील कृषीव्यवस्थेत भातशेती, बागायती आणि नारळाच्या लागवडीला महत्त्व होते. ठाणे गॅझेटियरमध्ये बासेन आणि माहिम येथील बागायती जमीन जिल्ह्यातील चांगल्या बागायती प्रदेशांपैकी असल्याचे नमूद केले आहे. या बागांना विहिरी आणि ''Persian wheels'' यांसारख्या जलसिंचन साधनांद्वारे पाणीपुरवठा केला जात असल्याची नोंद आहे.<ref name="ThanaAgriculture"/>
वसईच्या सामाजिक इतिहासात कुणबींचा उल्लेख उत्तर कोकणातील व्यापक कृषक समाजाच्या संदर्भात करता येतो. तथापि वसई परिसरातील सर्व कृषकांना कुणबी मानणे योग्य नाही. ऐतिहासिक ठाणे जिल्ह्यात कुणबींबरोबर मराठा, कोळी, धनगर, कातकरी, ठाकूर, वारली आणि इतर सामाजिक समूहांचाही उल्लेख आढळतो.<ref name="Thana1882"/>
=== भिवंडी आणि कल्याण ===
भिवंडी आणि कल्याण हे ऐतिहासिक ठाणे जिल्ह्यातील महत्त्वाचे अंतर्गत प्रदेश होते. सह्याद्रीच्या घाटमार्गांमधून दख्खनशी आणि पश्चिमेकडील किनारी प्रदेशाशी असलेल्या संपर्कामुळे या भागांना कृषीबरोबरच व्यापार आणि वाहतुकीच्या दृष्टीनेही महत्त्व प्राप्त झाले होते.<ref name="Thana1882"/>
कल्याण परिसरातील जमीन आणि महसूलव्यवस्थेच्या संदर्भात ब्रिटिश प्रशासनाने सर्वेक्षण, जमीनमोजणी आणि महसूल निश्चितीच्या पद्धती विकसित केल्या. ठाणे गॅझेटियरच्या जमीन प्रशासनासंबंधीच्या नोंदींमध्ये जिल्ह्यातील विविध भागांतील जमीन, सर्वेक्षण आणि महसूलव्यवस्थेचे वर्णन आढळते.<ref name="Thana1882"/>
कुणबी समाजाच्या इतिहासाच्या दृष्टीने भिवंडी आणि कल्याण परिसराचा विचार करताना ग्रामीण कृषी अर्थव्यवस्था, स्थानिक बाजारपेठा आणि वाहतूकमार्ग यांचा परस्परसंबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे. पुढील काळात या प्रदेशांच्या वाढत्या नागरी आणि औद्योगिक अर्थव्यवस्थेचा ग्रामीण समाजावर परिणाम झाला; मात्र त्या परिणामांचे स्वरूप स्वतंत्र कालखंडानुसार तपासणे आवश्यक आहे.
=== पालघर आणि उत्तर कोकण ===
आजचा पालघर जिल्हा हा ब्रिटिशकालीन ठाणे जिल्ह्याच्या उत्तरेकडील प्रदेशाशी मोठ्या प्रमाणात संबंधित होता. डहाणू, पालघर, जव्हार, मोखाडा आणि आसपासच्या प्रदेशांची सामाजिक व आर्थिक रचना ठाणे शहर किंवा सालसेटच्या तुलनेत वेगळी होती. या भागात आदिवासी आणि ग्रामीण कृषक समुदायांची लक्षणीय उपस्थिती होती.<ref name="Thana1882"/>
ठाणे गॅझेटियरमध्ये वारली, कातकरी, ठाकूर आणि इतर स्थानिक समुदायांचा स्वतंत्र उल्लेख आढळतो. विशेषतः डहाणू परिसरातील वारली लोकसंख्येचा उल्लेख करण्यात आला असून ठाणे जिल्ह्याच्या इतर भागांतील त्यांच्या उपस्थितीचीही नोंद आढळते.<ref name="Thana1882"/>
उत्तर कोकणातील या सामाजिक विविधतेमुळे कुणबी समाजाचा इतिहास व्यापक ग्रामीण समाजाच्या संदर्भापासून वेगळा करून पाहणे योग्य ठरत नाही. शेती, जमीन, जंगल, मजुरी आणि ऋतुनिष्ठ रोजगार यांसारख्या आर्थिक क्षेत्रांमध्ये विविध समुदायांचे परस्परसंबंध होते. त्यामुळे उत्तर कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास समजून घेताना कुणबींबरोबरच त्या प्रदेशातील इतर कृषक आणि स्थानिक समुदायांच्या ऐतिहासिक उपस्थितीचाही विचार करणे आवश्यक आहे.
=== डहाणू आणि कृषीव्यवस्था ===
डहाणू परिसरातील कृषीव्यवस्थेवर किनारी भूप्रदेश, नदीखोरे, पर्जन्यमान आणि जमिनीच्या स्वरूपाचा प्रभाव होता. किनारी भागात समुद्राच्या भूक्षयामुळे आणि भूभागातील बदलांमुळे जमीन व कृषी परिस्थितीवर परिणाम होत असल्याचे ठाणे गॅझेटियरमध्ये नमूद केले आहे.<ref name="ThanaAgriculture"/>
डहाणू, जव्हार आणि उत्तर ठाणे जिल्ह्यातील इतर भागांमध्ये भातशेतीबरोबर डोंगराळ व उंचसखल जमिनीवर विविध पिकांची लागवड केली जात होती. या प्रदेशात कुणबींबरोबर वारली, ठाकूर आणि इतर ग्रामीण व आदिवासी समुदायांचीही उपस्थिती होती. त्यामुळे उत्तर कोकणातील कृषी इतिहास हा विविध सामाजिक समूहांच्या सहभागातून विकसित झालेला इतिहास म्हणून पाहणे आवश्यक आहे.<ref name="Thana1882"/>
=== भातशेती आणि जलव्यवस्था ===
ठाणे जिल्ह्यातील कृषीव्यवस्थेत भातशेतीला महत्त्वाचे स्थान होते. १८७९–८० च्या महसूल सर्वेक्षणानुसार सरकारी लागवडीयोग्य क्षेत्रापैकी ९५७,९३४ एकर जमीन प्रत्यक्ष लागवडीखाली होती. त्यापैकी ३३३,७१७ एकर क्षेत्र भातशेतीखाली होते, म्हणजे सुमारे ३४.८ टक्के. उर्वरित क्षेत्रात प्रामुख्याने इतर पिकांची लागवड केली जात होती.<ref name="ThanaAgriculture"/>
भातशेतीसाठी पावसाळ्यात उंच भागातून वाहून येणारे पाणी लहान प्रवाह, बांध आणि स्थानिक जलव्यवस्थेद्वारे अडवून किंवा वळवून वापरण्याची पद्धत होती. काही ठिकाणी नदी आणि विहिरींच्या पाण्याचाही उपयोग केला जात असे. पनवेल, बासेन आणि माहिम येथील बागायतींमध्ये विविध प्रकारच्या जलउचल पद्धती वापरल्या जात असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद केले आहे.<ref name="ThanaAgriculture"/>
या जलव्यवस्थेमुळे ठाणे जिल्ह्यातील विविध भौगोलिक प्रदेशांमध्ये वेगवेगळ्या कृषी पद्धती विकसित झाल्या. पावसावर आधारित भातशेती, नदी व विहिरींच्या पाण्यावर आधारित बागायती आणि उंचसखल किंवा डोंगराळ भागातील इतर पिके यांमुळे उत्तर कोकणातील कृषी अर्थव्यवस्थेला प्रादेशिक विविधता प्राप्त झाली.<ref name="ThanaAgriculture"/>
=== जमीनव्यवस्था आणि महसूल ===
ब्रिटिश प्रशासनाने ठाणे जिल्ह्यात जमीन सर्वेक्षण, मोजणी आणि महसूल निश्चितीच्या पद्धती विकसित केल्या. १८८२ च्या गॅझेटियरमध्ये ''Land Administration'' या स्वतंत्र विभागात जमीनहक्क, महसूल, इनाम, वतन, सर्वेक्षण आणि विविध प्रकारच्या जमीनव्यवस्थेचे वर्णन करण्यात आले आहे.<ref name="Thana1882"/>
सालसेट, बासेन, माहिम आणि ठाणे जिल्ह्यातील इतर भागांमध्ये जमीनव्यवस्थेचा विकास स्थानिक इतिहास आणि पूर्वीच्या महसूलपद्धतींच्या पार्श्वभूमीवर झाला. ब्रिटिश प्रशासनाने जमीन सर्वेक्षण, नोंदणी आणि महसूल निश्चितीच्या माध्यमातून विद्यमान जमीनहक्क आणि महसूलव्यवस्थेला अधिक औपचारिक प्रशासकीय चौकटीत आणण्याचा प्रयत्न केला.<ref name="Thana1882"/>
कुणबी समाजाचा या जमीनव्यवस्थेशी संबंध प्रदेशानुसार बदलत होता. कुणबींचा उल्लेख कृषक समाजाच्या संदर्भात आढळत असला तरी प्रत्येक कुणबी कुटुंबाची जमीनधारणा, उत्पादनक्षमता, आर्थिक स्थिती किंवा महसूलव्यवस्थेतील स्थान समान होते असे मानता येत नाही. त्यामुळे उत्तर कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास समजून घेताना कृषी, जमीनहक्क, महसूल, स्थानिक ग्रामव्यवस्था आणि प्रादेशिक सामाजिक रचना या सर्व घटकांचा एकत्रित विचार करणे आवश्यक आहे.
=== कुणबी आणि इतर कृषक समुदाय ===
ठाणे जिल्ह्यातील ग्रामीण समाजात कुणबींबरोबर मराठा, कोळी, धनगर, कातकरी, ठाकूर आणि वारली यांसारख्या विविध सामाजिक समुदायांचा समावेश होता. या समुदायांच्या उपजीविकेचे स्वरूप प्रदेशानुसार आणि स्थानिक परिस्थितीनुसार बदलत होते. काही समुदाय शेतीशी, काही पशुपालनाशी, काही जंगलाशी, तर काही मासेमारी, मजुरी आणि इतर स्थानिक व्यवसायांशी संबंधित होते.<ref name="Thana1882"/>
जमीनधारणा, कृषी उत्पादन, स्थानिक बाजारपेठा, वाहतूक आणि ब्रिटिशकालीन महसूलव्यवस्थेतील बदलांमुळे ग्रामीण अर्थव्यवस्थेचे स्वरूप कालांतराने बदलत गेले. काही भागांत शेतीबरोबर इतर पूरक व्यवसायांचे महत्त्व वाढले, तर बाजारपेठांशी वाढलेल्या संपर्कामुळे ग्रामीण उत्पादनाच्या देवाणघेवाणीतही बदल झाले.<ref name="Thana1882"/>
या संदर्भात ''कुणबी'' आणि ''कृषक'' या संज्ञांमध्ये भेद करणे आवश्यक आहे. ''कुणबी'' ही सामाजिक समुदायाची संज्ञा होती, तर ''कृषक'' ही मुख्यतः शेतीशी संबंधित आर्थिक किंवा व्यावसायिक ओळख दर्शवणारी संज्ञा होती. त्यामुळे ठाणे जिल्ह्यातील प्रत्येक कृषक व्यक्ती कुणबी होती किंवा प्रत्येक कुणबी व्यक्ती केवळ शेतीवरच अवलंबून होती, असा निष्कर्ष उपलब्ध स्रोतांवरून काढता येत नाही.
=== मुंबईशी वाढता संबंध ===
ठाणे जिल्ह्याचा मुंबईशी भौगोलिक, आर्थिक आणि वाहतूकविषयक संबंध एकोणिसाव्या शतकात अधिक दृढ होत गेला. मुंबईच्या वाढत्या व्यापारी आणि औद्योगिक महत्त्वामुळे ठाणे जिल्ह्यातील काही ग्रामीण भागांचा कृषी उत्पादन, व्यापार आणि रोजगाराच्या दृष्टीने मुंबईशी संबंध वाढला.<ref name="Thana1882"/>
रेल्वे आणि इतर वाहतूकसुविधांच्या विकासामुळे ठाणे, कल्याण, भिवंडी आणि मुंबईदरम्यानचा संपर्क अधिक सुलभ झाला. त्याचा परिणाम कृषी उत्पादनाच्या वाहतुकीवर तसेच ग्रामीण लोकांच्या बाजारपेठांशी आणि रोजगाराच्या संधींशी असलेल्या संबंधांवर झाला. ठाणे गॅझेटियरमध्ये रेल्वे, रस्ते, व्यापार, उत्पादन आणि वाहतूक यांचे स्वतंत्र विवेचन आढळते.<ref name="Thana1882"/>
या बदलांचा परिणाम कुणबींसह ग्रामीण समाजातील विविध घटकांवर झाला असण्याची शक्यता होती. काही कुटुंबांनी शेतीबरोबर पूरक उत्पन्नासाठी इतर व्यवसाय किंवा शहरांशी संबंधित रोजगार स्वीकारला असावा. मात्र उपलब्ध एकोणिसाव्या शतकातील स्रोतांवरून कुणबी समाजाच्या बाबतीत अशा रोजगाराचे किंवा स्थलांतराचे अचूक प्रमाण निश्चित करता येत नाही.
=== स्थलांतर आणि ग्रामीण-नागरी संबंध ===
उत्तर कोकणातील ग्रामीण आणि नागरी अर्थव्यवस्थेतील संबंध मुंबईच्या वाढत्या व्यापारी, औद्योगिक आणि वाहतूकविषयक महत्त्वामुळे अधिक दृढ होत गेले. ठाणे जिल्ह्यातील विविध भागांमधून बाजारपेठा, व्यापार आणि रोजगाराच्या निमित्ताने मुंबईशी संपर्क वाढत गेला.<ref name="Thana1882"/>
सालसेट, ठाणे, कल्याण, भिवंडी आणि वसई यांसारख्या मुंबईच्या जवळच्या प्रदेशांना शहराशी तुलनेने सुलभ वाहतूकसंपर्क उपलब्ध होता. त्यामुळे या भागांतील ग्रामीण उत्पादन आणि नागरी बाजारपेठ यांच्यातील संबंध अधिक निकट झाले. दुसरीकडे पालघर, डहाणू आणि जव्हारसारख्या उत्तर भागांतील ग्रामीण अर्थव्यवस्था स्थानिक शेती, जंगलाधारित उपजीविका, हंगामी मजुरी आणि प्रादेशिक बाजारपेठांशीही संबंधित होती.<ref name="Thana1882"/>
कुणबी समाजाच्या संदर्भात या प्रक्रियेचा विचार करताना पारंपरिक कृषी जीवन आणि बदलती बाजारपेठीय अर्थव्यवस्था यांच्यातील संबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे. तथापि उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतांवरून १९व्या शतकातील ठाणे जिल्ह्यातील कुणबींच्या मुंबईकडे झालेल्या स्थलांतराचे स्वतंत्र आणि अचूक प्रमाण निश्चित करता येत नाही. त्यामुळे या प्रक्रियेचे वर्णन व्यापक ग्रामीण-नागरी परिवर्तनाच्या संदर्भात करणे अधिक योग्य ठरते.
=== ख्रिस्ती कुणबी आणि उत्तर कोकण ===
वसई आणि सालसेट परिसराच्या पोर्तुगीजकालीन इतिहासामुळे उत्तर कोकणातील सामाजिक ओळखींच्या अभ्यासात धर्म आणि जात यांचा परस्परसंबंध महत्त्वाचा ठरतो. पुढील वसाहतकालीन नोंदींमध्ये सालसेट आणि बासेन परिसरातील काही ख्रिस्ती समुदायांच्या संदर्भात त्यांच्या पूर्वीच्या सामाजिक किंवा जातीय ओळखींचे उल्लेख आढळतात. काही समूहांना ''Christian Kunbi'', ''Christian Bhandari'' आणि ''Christian Koli'' अशा संज्ञांनी संबोधल्याची नोंद आढळते.<ref>{{cite book
|title=The Imperial Gazetteer of India
|volume=8
|publisher=Clarendon Press
|location=Oxford
|year=1908
}}</ref>
या नोंदी उत्तर कोकणातील सामाजिक ओळखींच्या ऐतिहासिक गुंतागुंतीकडे निर्देश करतात. धर्मांतरानंतरही काही समुदायांच्या सामाजिक ओळखी किंवा पूर्वीच्या समुदायनावांचा उल्लेख प्रशासकीय आणि ethnographic नोंदींमध्ये होत राहिला. तथापि या उल्लेखांवरून धर्मांतरित ख्रिस्ती कुणबी आणि हिंदू कुणबी यांची सामाजिक, सांस्कृतिक किंवा प्रशासकीय ओळख सर्व काळात समान होती, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.
=== आधुनिक ठाणे आणि पालघरशी संबंध ===
आजच्या ठाणे आणि पालघर जिल्ह्यांच्या सीमा १९व्या शतकातील ब्रिटिशकालीन ठाणे जिल्ह्याच्या सीमांशी समान नाहीत. त्यामुळे ऐतिहासिक ''Thana district''मधील कुणबींच्या नोंदींची आधुनिक ठाणे किंवा पालघर जिल्ह्यांशी तुलना करताना तत्कालीन प्रशासकीय सीमा विचारात घेणे आवश्यक आहे.
ब्रिटिशकालीन ठाणे जिल्ह्याच्या प्रशासकीय चौकटीत डहाणू, वाडा, जव्हार, मोखाडा, वसई, भिवंडी, कल्याण, सालसेट, पनवेल आणि इतर प्रदेशांचा समावेश होता. पुढील प्रशासकीय पुनर्रचनेमुळे या प्रदेशांचे विविध आधुनिक जिल्हे आणि महानगर प्रदेशांमध्ये विभाजन झाले. त्यामुळे जुन्या ''Thana district''मधील लोकसंख्या किंवा सामाजिक समूहांची आकडेवारी आजच्या जिल्हानिहाय लोकसंख्येशी थेट तुलना करताना काळजी घेणे आवश्यक आहे.<ref name="Thana1882"/>
=== उत्तर कोकणातील कुणबी समाजाचे ऐतिहासिक स्थान ===
उत्तर कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास शेती, जमीन, पाणी, ग्रामजीवन आणि बदलत्या बाजारपेठीय संबंधांच्या इतिहासाशी संबंधित आहे. १८८२ च्या ठाणे गॅझेटियरमध्ये कुणबींचा उल्लेख जिल्ह्यातील इतर सामाजिक आणि कृषक समुदायांबरोबर आढळतो. त्याच गॅझेटियरमधील कृषीविषयक नोंदींमधून उत्तर कोकणातील विविध भौगोलिक प्रदेशांतील कृषी पद्धतींची माहिती मिळते.<ref name="Thana1882"/><ref name="ThanaAgriculture"/>
ठाणे, सालसेट, वसई, भिवंडी, कल्याण, पनवेल, पालघर आणि डहाणू या प्रदेशांमध्ये भौगोलिक आणि आर्थिक परिस्थितीत फरक होता. काही भागांत भातशेती आणि बागायतीला महत्त्व होते, तर डोंगराळ आणि उंचसखल प्रदेशांत इतर पिकांची लागवड केली जात होती. मुंबईच्या जवळच्या भागांत बाजारपेठ आणि वाहतूकसंबंधांचा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेवर वाढता प्रभाव पडत गेला.<ref name="ThanaAgriculture"/>
उत्तर कोकणातील कुणबी समाजाचे ऐतिहासिक स्थान समजून घेताना इतर कृषक आणि स्थानिक समुदायांशी असलेले सहअस्तित्वही महत्त्वाचे ठरते. कुणबी, मराठा, कोळी, धनगर, कातकरी, ठाकूर, वारली आणि इतर समुदायांच्या परस्परसंबंधातून या प्रदेशाची ग्रामीण सामाजिक रचना विकसित झाली होती.<ref name="Thana1882"/>
त्यामुळे उत्तर कोकणातील कुणबींचा स्वतंत्र सामाजिक इतिहास अभ्यासता येतो; परंतु तो या प्रदेशातील व्यापक ग्रामीण, कृषी आणि सामाजिक इतिहासापासून पूर्णपणे वेगळा करता येत नाही. जमीनधारणा, कृषी, ग्रामव्यवस्था, स्थानिक समुदाय, बाजारपेठा, स्थलांतर आणि बदलती प्रशासकीय व्यवस्था या सर्व घटकांच्या परस्परसंबंधातून उत्तर कोकणातील कुणबी समाजाचे ऐतिहासिक स्थान अधिक स्पष्टपणे समजते.
=== ऐतिहासिक स्रोतांच्या मर्यादा ===
१८८२चा ''Thana Gazetteer'' हा उत्तर कोकणातील कुणबी समाजाच्या इतिहासासाठी महत्त्वाचा वसाहतकालीन स्रोत आहे; मात्र तो ब्रिटिश प्रशासकीय चौकटीत तयार करण्यात आलेला दस्तऐवज आहे. त्यातील जातीय, सामाजिक आणि आर्थिक वर्णने तत्कालीन प्रशासकीय निरीक्षणे, सर्वेक्षणे आणि वर्गीकरणांवर आधारित आहेत. त्यामुळे त्यातील समुदायांविषयीची सर्वसाधारण विशेषणे किंवा मूल्यनिर्णय आधुनिक सामाजिक वास्तवाचे अंतिम वर्णन मानता येत नाहीत.<ref name="ThanaGazetteerPreface">{{cite web
|title=Preface — Thana Gazetteer
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Thana%20District/Thane-I/preface_i.html
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
त्याचप्रमाणे १९व्या शतकातील ''Kunbi'' या संज्ञेची प्रशासकीय व्याप्ती आणि आजच्या महाराष्ट्रातील प्रशासकीय जातीय वर्गीकरण यांना एकसारखे मानता येत नाही. जुन्या जनगणना, गॅझेटियर आणि प्रशासकीय नोंदींचा उपयोग करताना तत्कालीन प्रशासकीय सीमा, वर्गीकरणाची पद्धत, स्थानिक सामाजिक ओळखी आणि त्या नोंदींचा उद्देश यांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे.
उत्तर कोकणातील कुणबींच्या इतिहासाच्या अभ्यासासाठी म्हणूनच गॅझेटियरमधील नोंदींसोबत संबंधित Census records, जमीन व महसूल नोंदी, भाषिक अभ्यास, सरकारी ठराव आणि पुढील काळातील विश्वसनीय सामाजिक-ऐतिहासिक संशोधन यांचा तुलनात्मक उपयोग करणे आवश्यक ठरते.
== तिलोरी कुणबी ==
'''तिलोरी कुणबी''' (''Tilori Kunbi'' किंवा ''Kunbi Tilori'') ही संज्ञा विशेषतः रत्नागिरी जिल्ह्याच्या ऐतिहासिक प्रशासकीय संदर्भात आढळते. या संज्ञेला विसाव्या शतकाच्या मध्यातील सरकारी वर्गीकरणात स्वतंत्र प्रशासकीय स्थान मिळाले होते. मुंबई उच्च न्यायालयाने *Dattatraya S/o Ramrao Thorat v. The State of Maharashtra & Ors.* या २४ एप्रिल २००२ रोजीच्या निर्णयात १९४२ ते १९६७ या कालखंडातील संबंधित सरकारी ठरावांचा तपशील नोंदविला आहे.<ref name="Thorat2002">{{cite web
|title=Dattatraya S/o Ramrao Thorat v. The State of Maharashtra & Ors.
|website=Indian Kanoon
|date=24 April 2002
|url=https://indiankanoon.org/doc/726744/
|access-date=22 August 2026
}}</ref>
=== तिलोरी कुणबी या संज्ञेचा प्रादेशिक संदर्भ ===
तिलोरी कुणबी या संज्ञेचा प्रशासकीय संदर्भ प्रामुख्याने रत्नागिरी जिल्ह्याशी संबंधित होता. त्यामुळे तिचा इतिहास समजून घेताना त्या काळातील रत्नागिरी जिल्ह्याच्या प्रशासकीय सीमा, स्थानिक सामाजिक रचना आणि सरकारी वर्गीकरणाची पद्धत लक्षात घेणे आवश्यक आहे.
विसाव्या शतकाच्या पूर्वार्धात आणि मध्यकाळात मागासवर्गीय समुदायांच्या सरकारी वर्गीकरणासाठी विविध याद्या आणि ठराव जारी करण्यात आले. या प्रक्रियेत ''Kunbi'' आणि ''Kunbi Tilori in Ratnagiri district'' या संज्ञांना काही काळ स्वतंत्र प्रशासकीय संदर्भ प्राप्त झाला.<ref name="Thorat2002"/>
या सरकारी वर्गीकरणाचा अर्थ सामाजिक किंवा जातीय उत्पत्तीचा ऐतिहासिक पुरावा असा थेट लावता येत नाही. तो मुख्यतः त्या काळातील शासनाच्या प्रशासकीय आणि मागासवर्गीय वर्गीकरणाचा पुरावा म्हणून पाहणे अधिक योग्य आहे.
=== १९४२ चेसरकारी वर्गीकरण ===
तिलोरी कुणबीच्या प्रशासकीय इतिहासात २३ एप्रिल १९४२चा Bombay Government Resolution महत्त्वाचा आहे. मुंबई उच्च न्यायालयाने नोंदविल्यानुसार या ठरावात intermediate communities, scheduled castes, aboriginal and hill tribes आणि other backward communities यांच्या याद्या प्रसिद्ध करण्यात आल्या होत्या.
या वर्गीकरणात Schedule A मधील intermediate communitiesच्या यादीत अनुक्रमांक १२४वर ''Kunbi (Except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)'' अशी नोंद होती. त्याच वेळी ''Other Backward Communities''च्या यादीत अनुक्रमांक ७३वर ''Kunbi Tilori in Ratnagiri district'' अशी स्वतंत्र नोंद करण्यात आली होती.<ref name="Thorat2002" />
या नोंदीवरून १९४२ च्या सरकारी वर्गीकरणात रत्नागिरी जिल्ह्यातील तिलोरी कुणबींना इतर कुणबींपेक्षा वेगळ्या प्रशासकीय वर्गात ठेवण्यात आले होते, हे स्पष्ट होते. मात्र या प्रशासकीय फरकावरून तिलोरी कुणबींची स्वतंत्र प्राचीन जातीय उत्पत्ती किंवा स्वतंत्र वंशपरंपरा सिद्ध होते, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.
=== १९५०, १९५६ आणि १९६१मधील सातत्य ===
१९४२ च्या वर्गीकरणानंतरही हा प्रशासकीय फरक पुढील सरकारी ठरावांमध्ये कायम राहिला. मुंबई उच्च न्यायालयाने नमूद केल्यानुसार १ नोव्हेंबर १९५०, २९ ऑक्टोबर १९५६ आणि २१ नोव्हेंबर १९६१ रोजी प्रसिद्ध झालेल्या सरकारी ठरावांमध्ये ''''Kunbi (Except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)'''' आणि ''''Kunbi Tilori in Ratnagiri district'''' यांच्यातील फरक कायम ठेवण्यात आला होता.<ref name="Thorat2002" />
या नोंदींचे महत्त्व असे की ''''कुणबी तिलोरी'''' ही संज्ञा त्या काळातील सरकारी मागासवर्गीय वर्गीकरणात सातत्याने वापरली जात होती. त्यामुळे ती केवळ स्थानिक किंवा मौखिक सामाजिक संज्ञा नव्हती, तर किमान १९४२ ते १९६१ या काळात अधिकृत प्रशासकीय नोंदींमध्ये वापरली गेलेली संज्ञा होती.<ref name="Thorat2002" />
=== १९६७नंतरचे वर्गीकरण ===
१३ ऑक्टोबर १९६७ रोजी महाराष्ट्र शासनाने OBC ची स्वतंत्र यादी प्रसिद्ध केली. मुंबई उच्च न्यायालयाच्या नोंदीनुसार या यादीत अनुक्रमांक ८३ वर ''Kunbi caste''चा समावेश करण्यात आला.<ref name="Thorat2002" />
न्यायालयाने या सरकारी ठरावांच्या क्रमिक इतिहासाचा विचार करून नमूद केले की १९६७पर्यंत रत्नागिरी जिल्ह्यातील ''कुणबी तिलोरी'' यांना O.B.C. वर्गात ठेवण्यात आले होते, तर राज्याच्या इतर भागांतील कुणबी समुदायाला त्या काळातील स्वतंत्र प्रशासकीय वर्गीकरणात ठेवण्यात आले होते. १९६७मध्ये ''''कुणबी जात''' महाराष्ट्राच्या OBC च्या यादीत समावेश करण्यात आला.<ref name="Thorat2002" />
या प्रशासकीय बदलामुळे तिलोरी कुणबी या संज्ञेच्या इतिहासात एक महत्त्वाचा टप्पा निर्माण झाला. त्यामुळे तिलोरी कुणबींचा इतिहास मांडताना १९४२–१९६१ या काळातील स्वतंत्र सरकारी वर्गीकरण आणि १९६७ नंतरचे ''कुणबी जात''चे व्यापक राज्यस्तरीय वर्गीकरण हे दोन वेगळे प्रशासकीय टप्पे म्हणून पाहणे आवश्यक आहे.
=== मुंबई उच्च न्यायालयाचा २००२ चा निर्णय ===
तिलोरी कुणबींच्या प्रशासकीय वर्गीकरणाच्या इतिहासाच्या संदर्भात ''Dattatraya S/o Ramrao Thorat v. The State of Maharashtra & Ors.'' हा मुंबई उच्च न्यायालयाचा २४ एप्रिल २००२ रोजीचा निर्णय महत्त्वाचा आहे. या प्रकरणाची सुनावणी न्यायमूर्ती बी. एच. मार्लापल्ले आणि न्यायमूर्ती एन. एच. पाटील यांच्या खंडपीठासमोर झाली. हे प्रकरण याचिकाकर्त्याच्या कुणबी जात-दाव्याच्या पडताळणीशी संबंधित होते.<ref name="Thorat2002" />
या निर्णयात न्यायालयाने २३ एप्रिल १९४२ च्या मुंबई सरकारच्या ठरावासह १ नोव्हेंबर १९५०, २९ ऑक्टोबर १९५६ आणि २१ नोव्हेंबर १९६१ च्या पुढील सरकारी ठरावांचा विचार केला. न्यायालयाच्या नोंदीनुसार, १९४२ च्या वर्गीकरणात ''Kunbi (Except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)'' अशी नोंद ''intermediate communities''च्या यादीत होती, तर ''Kunbi Tilori in Ratnagiri district'' ही स्वतंत्र नोंद ''Other Backward Communities''च्या यादीत होती. पुढील १९५०, १९५६ आणि १९६१ च्या ठरावांमध्येही हा प्रशासकीय फरक कायम राहिला.<ref name="Thorat2002"/>
न्यायालयाने पुढे नोंदविले की १३ ऑक्टोबर १९६७ रोजी महाराष्ट्र शासनाने इतर मागासवर्गीयांची स्वतंत्र यादी प्रसिद्ध केली आणि त्यात अनुक्रमांक ८३वर ''Kunbi caste''चा समावेश करण्यात आला. न्यायालयाच्या निरीक्षणानुसार, १९६७पर्यंत रत्नागिरी जिल्ह्यातील ''Kunbi Tilori'' यांना इतर मागासवर्गीयांच्या वर्गात, तर राज्याच्या इतर भागांतील कुणबींना तत्कालीन ''intermediate community''च्या वर्गीकरणात ठेवण्यात आले होते; १९६७मध्ये ''Kunbi caste''चा संपूर्ण महाराष्ट्रासाठी इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समावेश करण्यात आला.<ref name="Thorat2002"/>
या निर्णयाचे महत्त्व तिलोरी कुणबींची प्राचीन उत्पत्ती, स्वतंत्र वंशावळ किंवा जातीय उगम सिद्ध करण्यात नसून, '''१९४२ ते १९६७ या कालखंडातील सरकारी जातीय व मागासवर्गीय वर्गीकरणाचा न्यायालयीन नोंदीद्वारे उपलब्ध असलेला ऐतिहासिक पुरावा''' म्हणून आहे.<ref name="Thorat2002"/>
=== १९६६मधील न्यायालयीन संदर्भ ===
तिलोरी कुणबींच्या प्रशासकीय वर्गीकरणाच्या संदर्भात ''Ashok Krishnarao Dhote v. Dean, Medical College, Nagpur'' हा मुंबई उच्च न्यायालयाचा १७ ऑक्टोबर १९६६ रोजीचा निर्णय महत्त्वाचा आहे. या प्रकरणात शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालयातील प्रवेशासाठी इतर मागासवर्गीयांसाठी असलेल्या आरक्षणाच्या संदर्भात महाराष्ट्र शासनाने मान्य केलेल्या जाती व समुदायांच्या यादीचा विचार करण्यात आला. निर्णयात ''Kunbi Tilori (in Ratnagiri District)'' या संज्ञेचा स्पष्ट उल्लेख करण्यात आला आहे.<ref name="Dhote1966">{{cite journal
|title=Ashok Krishnarao Dhote v. Dean, Medical College, Nagpur & Ors.
|journal=Bombay Law Reporter
|volume=69
|year=1967
|page=603
|url=https://indiankanoon.org/doc/1707367/
}}</ref>
न्यायालयाने महाराष्ट्र राज्यासाठी लागू असलेल्या ''Other Backward Classes (Caste Basis) for Maharashtra State'' या यादीचा विचार करताना अनुक्रमांक ८७वर ''Kunbi Tilori (in Ratnagiri District)'' या जातीचा समावेश असल्याची नोंद केली. त्याच परिच्छेदात न्यायालयाने या यादीत इतर कोणत्याही कुणबी जातीचा समावेश असल्याचे त्यांच्यासमोर दाखविण्यात आले नसल्याचेही नमूद केले.<ref name="Dhote1966"/>
न्यायालयाने पुढे असेही नमूद केले की, याच प्रकरणातील याचिकाकर्त्याने स्वतःला ''Kunbi'' जातीतला असल्याचे सांगितले होते; मात्र महाराष्ट्र शासनाच्या त्या वेळच्या यादीत ''Kunbi Tilori (in Ratnagiri District)'' या नोंदीशिवाय ''Kunbi'' या सामान्य संज्ञेचा इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समावेश असल्याचा अधिकृत पुरावा न्यायालयासमोर उपलब्ध नव्हता. त्यामुळे याचिकाकर्त्याला त्या वेळच्या नियमांनुसार इतर मागासवर्गीयांसाठी राखीव प्रवेशाचा हक्क नव्हता, असा न्यायालयाचा निष्कर्ष होता.<ref name="Dhote1966"/>
या निर्णयाचे तिलोरी कुणबींच्या इतिहासाच्या दृष्टीने महत्त्व असे की, '''१९६६मध्ये रत्नागिरी जिल्ह्यातील ''Kunbi Tilori'' ही संज्ञा महाराष्ट्र शासनाच्या अधिकृत इतर मागासवर्गीयांच्या जातीय यादीत स्वतंत्रपणे नोंदलेली होती''', याला न्यायालयीन निर्णयाचा थेट आधार मिळतो. तथापि, या प्रशासकीय नोंदीवरून तिलोरी कुणबींची इतर कुणबींपेक्षा स्वतंत्र प्राचीन जातीय उत्पत्ती किंवा वंशावळ सिद्ध होते, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="Dhote1966"/>
=== तिलोरी कुणबी आणि सामाजिक ओळख ===
''Tilori Kunbi'' ही संज्ञा उपलब्ध ऐतिहासिक नोंदींमध्ये विशेषतः रत्नागिरी जिल्ह्याशी संबंधित सामाजिक आणि प्रशासकीय ओळख म्हणून आढळते. १९६६ च्या मुंबई उच्च न्यायालयाच्या निर्णयात ''Kunbi Tilori (in Ratnagiri District)'' या संज्ञेची अधिकृत प्रशासकीय यादीतील नोंद स्पष्टपणे नमूद करण्यात आली आहे.<ref name="Dhote1966"/>
तिलोरी कुणबींच्या सामाजिक इतिहासाचा अभ्यास करताना ''Tilori'', ''Kunbi'', ''Kanbi'' आणि ''Maratha-Kunbi'' यांसारख्या संज्ञांचा वापर वेगवेगळ्या काळात आणि प्रदेशांत वेगवेगळ्या संदर्भात झाल्याचे लक्षात घेणे आवश्यक आहे. प्रशासकीय वर्गीकरणातील एखादी संज्ञा आणि त्या समुदायाची सामाजिक स्वयंओळख यांना एकच मानता येत नाही.
त्यामुळे तिलोरी कुणबींच्या इतिहासाचा अभ्यास करताना सरकारी वर्गीकरणाबरोबरच स्थानिक सामाजिक ओळख, विवाहपद्धती, बोली, जमीनधारणा, ग्रामव्यवस्था, व्यवसाय आणि इतर समकालीन ऐतिहासिक स्रोतांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे. उपलब्ध सरकारी नोंदी तिलोरी कुणबी ही रत्नागिरीशी संबंधित स्वतंत्र प्रशासकीय संज्ञा म्हणून वापरली गेल्याचे दाखवतात; मात्र त्या नोंदी स्वतःहून तिच्या प्राचीन जातीय उत्पत्तीचा अंतिम पुरावा ठरत नाहीत.<ref name="Dhote1966"/>
=== तिलोरी कुणबी आणि रत्नागिरी ===
रत्नागिरी जिल्ह्याशी तिलोरी कुणबी या संज्ञेचा विशेष प्रशासकीय संबंध विसाव्या शतकाच्या मध्यातील सरकारी नोंदींमध्ये स्पष्टपणे दिसून येतो. २३ एप्रिल १९४२ च्या मुंबई सरकारच्या ठरावात अनुसूची अ मधील मध्यमवर्गीय समुदायांच्या यादीत ''Kunbi (Except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)'' अशी नोंद करण्यात आली होती. त्याच ठरावातील इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत ''Kunbi Tilori in Ratnagiri district'' अशी स्वतंत्र नोंद करण्यात आली होती. हीच वर्गीकरणपद्धती १ नोव्हेंबर १९५०, २९ ऑक्टोबर १९५६ आणि २१ नोव्हेंबर १९६१ च्या पुढील सरकारी ठरावांमध्येही कायम राहिली.<ref name="Thorat2002"/>
१३ ऑक्टोबर १९६७ च्या महाराष्ट्र शासनाच्या नव्या वर्गीकरणात ''Kunbi caste'' ही संज्ञा इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत अनुक्रमांक ८३वर समाविष्ट करण्यात आली. या बदलाच्या संदर्भात मुंबई उच्च न्यायालयाने २००२ च्या निर्णयात नमूद केले की १९६७पर्यंत रत्नागिरी जिल्ह्यातील तिलोरी कुणबींना इतर मागासवर्गीय म्हणून स्वतंत्रपणे वर्गीकृत केले जात होते, तर इतर भागांतील कुणबींना मध्यमवर्गीय समुदायाच्या वर्गात ठेवले जात होते; १९६७मध्ये कुणबी जातीचा संपूर्ण महाराष्ट्रासाठी इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समावेश करण्यात आला.<ref name="Thorat2002"/>
या प्रशासकीय नोंदी तिलोरी कुणबी ही संज्ञा रत्नागिरी जिल्ह्याशी संबंधित स्वतंत्र प्रशासकीय वर्गीकरण म्हणून वापरली गेल्याचा महत्त्वपूर्ण पुरावा देतात. मात्र या नोंदींच्या आधारे तिलोरी कुणबींचे प्राचीन मूळ, एखाद्या विशिष्ट राजवंशाशी असलेले नाते किंवा इतर कुणबींपेक्षा वेगळी जैविक वंशपरंपरा निश्चित करता येत नाही. सरकारी वर्गीकरणाचा पुरावा आणि समुदायाच्या प्राचीन सामाजिक उत्पत्तीचा पुरावा यांमध्ये भेद करणे आवश्यक आहे.<ref name="Thorat2002"/>
=== तिलोरी कुणबी आणि भाषिक अभ्यास ===
तिलोरी कुणबींच्या सामाजिक इतिहासाच्या अभ्यासात दक्षिण कोकणातील बोलीभाषांचा अभ्यास हा पूरक स्रोत ठरतो. अमृत माधव घाटगे यांनी १९६३ ते १९७६ या कालखंडात ''मराठी बोलींचे सर्वेक्षण'' हा भाषिक सर्वेक्षण प्रकल्प राबविला. या प्रकल्पांतर्गत ''Kunbi of Mahad'' हा महाड परिसरातील कुणबी बोलीचा स्वतंत्र अभ्यास १९६६मध्ये प्रकाशित करण्यात आला.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/>
महाडच्या कुणबी बोलीचा हा अभ्यास तिलोरी कुणबींच्या सरकारी वर्गीकरणाचा थेट पुरावा नाही. त्याचे महत्त्व महाड परिसरातील कुणबी समाजाच्या भाषिक स्वरूपाचे स्वतंत्र दस्तऐवजीकरण झाले असल्यामध्ये आहे. त्यामुळे दक्षिण कोकणातील कुणबी समाजाच्या भाषिक विविधतेचा आणि प्रादेशिक सामाजिक इतिहासाचा अभ्यास करताना हा एक पूरक स्रोत म्हणून वापरता येतो.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/>
भाषिक साम्य आणि जातीय उत्पत्ती यांना एकच मानता येत नाही. एखाद्या समुदायाची स्वतंत्र बोली, भाषिक वैशिष्ट्ये किंवा विशिष्ट शब्दसंपत्ती यांवरून त्या समुदायाची प्राचीन वंशावळ किंवा निश्चित स्थलांतरमार्ग सिद्ध होत नाही. त्यामुळे महाडच्या कुणबी बोलीच्या अभ्यासाचा उपयोग प्रादेशिक भाषिक आणि सामाजिक इतिहास समजून घेण्यासाठी करणे अधिक योग्य ठरते.
=== आधुनिक महाराष्ट्रातील प्रशासकीय वर्गीकरण ===
आधुनिक महाराष्ट्रातील इतर मागासवर्गीयांच्या अधिकृत यादीत कुणबी या नोंदीखाली विविध संबंधित संज्ञांचा समावेश करण्यात आला आहे. महाराष्ट्र शासनाच्या १३ मे २०२५ च्या अधिकृत यादीत कुणबी या नोंदीखाली लेवा कुणबी, लेवा पाटील, लेवा पाटीदार, मराठा कुणबी, कुणबी मराठा, तिलोरी कुणबी, टिलोरी कुणबी आणि टी. कुणबी अशा संज्ञांचा उल्लेख आढळतो.<ref name="MaharashtraOBC2025">{{cite web
|title=Other Backward Classes list — Government Resolution dated 13 May 2025
|url=https://gr.maharashtra.gov.in/Site/Upload/Government%20Resolutions/Marathi/20250513170904091534.pdf
|publisher=Government of Maharashtra
|date=13 May 2025
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या आधुनिक प्रशासकीय यादीचा अर्थ या सर्व संज्ञांमागील समुदायांची ऐतिहासिक उत्पत्ती एकाच प्रक्रियेतून झाली आहे असा होत नाही. अशा शासकीय याद्या मुख्यतः प्रशासकीय, सामाजिक आणि आरक्षणविषयक वर्गीकरणासाठी तयार केल्या जातात. त्यामुळे केवळ या यादीतील एकत्रित नोंदींच्या आधारे एखाद्या समुदायाची प्राचीन उत्पत्ती, वंशावळ किंवा ऐतिहासिक सामाजिक संबंध निश्चित करता येत नाही.<ref name="MaharashtraOBC2025"/>
=== 'तिलोरी' आणि 'टिलोरी' या लेखनरूपांचा वापर ===
ऐतिहासिक आणि प्रशासकीय नोंदींमध्ये तिलोरी कुणबी या संज्ञेची इंग्रजी लेखनरूपे वेगवेगळी आढळतात. २००२ च्या मुंबई उच्च न्यायालयाच्या निर्णयात Kunbi Tilori in Ratnagiri district अशी नोंद करण्यात आली आहे. न्यायालयाने २३ एप्रिल १९४२ च्या सरकारी ठरावापासून २१ नोव्हेंबर १९६१पर्यंतच्या ठरावांमध्ये रत्नागिरी जिल्ह्यातील तिलोरी कुणबींना इतर कुणबींपेक्षा स्वतंत्र प्रशासकीय वर्गात ठेवण्यात आल्याचे नमूद केले आहे. त्यानंतर १३ ऑक्टोबर १९६७ च्या शासन ठरावात कुणबी जात संपूर्ण महाराष्ट्रासाठी इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समाविष्ट करण्यात आली.<ref name="Thorat2002"/>
आधुनिक महाराष्ट्र शासनाच्या १३ मे २०२५ च्या अधिकृत यादीत तिलोरी कुणबी आणि टिलोरी कुणबी अशी दोन्ही लेखनरूपे आढळतात. त्यामुळे जुन्या किंवा आधुनिक सरकारी दस्तऐवजांचा संदर्भ देताना त्या-त्या मूळ दस्तऐवजात वापरलेले लेखनरूप कायम ठेवणे अधिक अचूक ठरते.<ref name="MaharashtraOBC2025"/>
मराठी लेखनात मात्र एकसंधतेसाठी तिलोरी कुणबी ही संज्ञा वापरणे योग्य ठरते. एखाद्या ऐतिहासिक किंवा प्रशासकीय दस्तऐवजातील मूळ नोंद उद्धृत करताना त्यातील मूळ लेखनरूप संदर्भानुसार तसेच नमूद करता येते. अशा प्रकारे मराठीतील प्रचलित लेखन आणि प्राथमिक स्रोतांतील मूळ प्रशासकीय नोंद यांच्यात स्पष्ट फरक राखता येतो.
=== तिलोरी कुणबी : प्रशासकीय इतिहास आणि सामाजिक इतिहास यांतील फरक ===
तिलोरी कुणबींच्या इतिहासाचा अभ्यास करताना सरकारी प्रशासकीय वर्गीकरण आणि व्यापक सामाजिक इतिहास यांच्यात स्पष्ट भेद करणे आवश्यक आहे. २३ एप्रिल १९४२ च्या मुंबई सरकारच्या ठरावात ''Kunbi (Except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)'' अशी नोंद करण्यात आली होती, तर इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत ''Kunbi Tilori in Ratnagiri district'' अशी स्वतंत्र नोंद होती. हीच वर्गीकरणपद्धती १ नोव्हेंबर १९५०, २९ ऑक्टोबर १९५६ आणि २१ नोव्हेंबर १९६१ च्या पुढील सरकारी ठरावांमध्येही कायम राहिली.<ref name="Thorat2002"/>
१३ ऑक्टोबर १९६७ च्या महाराष्ट्र शासनाच्या नव्या यादीत ''Kunbi caste'' ही नोंद इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत करण्यात आली. २००२ च्या मुंबई उच्च न्यायालयाच्या निर्णयानुसार, १९६७पर्यंत रत्नागिरी जिल्ह्यातील तिलोरी कुणबींना इतर मागासवर्गीय म्हणून स्वतंत्रपणे वर्गीकृत केले जात होते, तर राज्यातील इतर भागांतील कुणबींना मध्यमवर्गीय समुदायाच्या वर्गात ठेवले जात होते. १९६७मध्ये प्रथमच कुणबी जातीचा संपूर्ण महाराष्ट्रासाठी इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समावेश करण्यात आला.<ref name="Thorat2002"/>
या घटनाक्रमावरून तिलोरी कुणबी ही विसाव्या शतकातील सरकारी प्रशासकीय वर्गीकरणात रत्नागिरी जिल्ह्याशी संबंधित स्वतंत्रपणे नोंदविलेली संज्ञा होती, हे स्पष्ट होते. मात्र केवळ या प्रशासकीय नोंदींच्या आधारे तिलोरी कुणबी हे प्राचीन काळापासून इतर कुणबींपेक्षा स्वतंत्र जात होते, किंवा तिलोरी कुणबी समाजाची एकच प्राचीन वंशपरंपरा होती, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. प्रशासकीय वर्गीकरणाचा पुरावा आणि समुदायाच्या ऐतिहासिक उत्पत्तीचा पुरावा यांना स्वतंत्रपणे तपासणे आवश्यक आहे.<ref name="Thorat2002"/>
=== ऐतिहासिक महत्त्व ===
तिलोरी कुणबींच्या इतिहासाचे महत्त्व रत्नागिरीतील प्रादेशिक सामाजिक ओळख आणि राज्याच्या बदलत्या प्रशासकीय वर्गीकरणाच्या परस्परसंबंधात आहे. १९४२मध्ये रत्नागिरी जिल्ह्यातील तिलोरी कुणबींना इतर कुणबींपासून प्रशासकीयदृष्ट्या वेगळ्या वर्गात ठेवण्यात आले. हे वर्गीकरण १९५०, १९५६ आणि १९६१ च्या सरकारी ठरावांमध्ये कायम राहिले.<ref name="Thorat2002"/>
१९६६ च्या ''Ashok Krishnarao Dhote v. Dean, Medical College, Nagpur'' या मुंबई उच्च न्यायालयाच्या निर्णयातही ''Kunbi Tilori (in Ratnagiri District)'' या संज्ञेचा इतर मागासवर्गीयांच्या यादीतील अनुक्रमांक ८७वरील नोंद म्हणून उल्लेख करण्यात आला होता. त्यामुळे १९६० च्या दशकाच्या मध्यापर्यंत ही संज्ञा प्रशासकीय नोंदींमध्ये वापरात असल्याचा न्यायालयीन पुरावा उपलब्ध आहे.<ref name="Dhote1966"/>
यानंतर १३ ऑक्टोबर १९६७ च्या शासन ठरावाद्वारे ''Kunbi caste'' ही संज्ञा संपूर्ण महाराष्ट्रासाठी इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समाविष्ट करण्यात आली. त्यामुळे तिलोरी कुणबींच्या प्रशासकीय इतिहासात १९४२ ते १९६१ या कालखंडातील स्वतंत्र वर्गीकरण, १९६० च्या दशकातील त्याची न्यायालयीन नोंद आणि १९६७नंतरचे व्यापक कुणबी वर्गीकरण हे महत्त्वाचे टप्पे ठरतात.<ref name="Thorat2002"/>
या पार्श्वभूमीवर तिलोरी कुणबींचा अभ्यास हा केवळ एका उपसंज्ञेच्या इतिहासापुरता मर्यादित राहत नाही. तो रत्नागिरीतील प्रादेशिक सामाजिक ओळख, विसाव्या शतकातील मागासवर्गीयांचे सरकारी वर्गीकरण, राज्याच्या प्रशासकीय धोरणातील बदल आणि आधुनिक महाराष्ट्रातील जातीय वर्गीकरण यांच्या परस्परसंबंधांचा अभ्यास करण्यासाठी महत्त्वाचा ठरतो.
== कुणबी बोली आणि भाषिक वैशिष्ट्ये ==
कोकणातील कुणबी समाजाच्या सामाजिक इतिहासात भाषेला महत्त्वाचे स्थान आहे. तथापि, ''कुणबी बोली'' ही संज्ञा संपूर्ण कोकणात एकाच भाषिक स्वरूपासाठी वापरली जाते असे मानणे योग्य नाही. उपलब्ध भाषावैज्ञानिक अभ्यासांमध्ये महाड परिसरातील कुणबींच्या भाषिक प्रकाराचा स्वतंत्र अभ्यास तसेच रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीचा स्वतंत्र अभ्यास आढळतो. त्यामुळे ''कुणबी बोली'' या संज्ञेचा वापर करताना तिचा प्रादेशिक आणि सामाजिक संदर्भ स्पष्ट करणे आवश्यक आहे.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/><ref name="Veer2022"/>
=== कुणबी बोलीची संकल्पना ===
''कुणबी बोली'' ही संज्ञा कुणबी समाजाशी संबंधित विविध प्रादेशिक भाषिक प्रकारांसाठी वापरली जाते. भाषाशास्त्रीय अभ्यासात एखाद्या भाषिक प्रकाराचे स्वरूप केवळ त्याच्या बोलणाऱ्या समुदायाच्या सामाजिक ओळखीवर निश्चित होत नाही; त्याचे भौगोलिक वितरण, ध्वनिवैशिष्ट्ये, शब्दसंपदा, व्याकरण, वाक्यरचना आणि शेजारील भाषिक प्रकारांशी असलेले संबंध यांचाही विचार केला जातो.
अमृत माधव घाटगे यांनी १९६३ ते १९७६ या कालखंडात ''A Survey of Dialects of Marathi'' हा भाषिक सर्वेक्षण प्रकल्प राबविला. या प्रकल्पाच्या अंतर्गत नऊ भाषिक प्रकारांचे स्वतंत्र पुस्तकात्मक अभ्यास प्रकाशित झाले. त्यामध्ये ''Kunbi of Mahad'' हा महाड परिसरातील कुणबी बोलीचा अभ्यास १९६६मध्ये प्रसिद्ध झाला. या मालिकेत दक्षिण कॅनरातील कोकणी, कुडाळी, कोचीन, काणकोणची कोकणी, ठाण्याची वारली, कासरगोडची मराठी, गोव्याची गावडी आणि डांगची भिली या भाषिक प्रकारांचेही स्वतंत्र अभ्यास प्रकाशित झाले होते.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/>
महाडच्या कुणबी बोलीचा स्वतंत्र भाषाशास्त्रीय अभ्यास झाल्यामुळे कुणबी समाजाशी संबंधित भाषिक विविधतेचा एक प्रादेशिक नमुना उपलब्ध होतो. त्याचप्रमाणे रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीवरील पुढील अभ्यासामुळे या प्रदेशातील कुणबी समाजाच्या भाषिक स्वरूपाचा स्वतंत्र विचार करता येतो.<ref name="Veer2022"/>
कोकणातील ग्रामीण समाज, स्थानिक जीवनपद्धती, सामाजिक संबंध आणि सांस्कृतिक परंपरा यांचा विचार करताना भाषिक वैशिष्ट्ये हा एक पूरक घटक ठरतो. रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील ग्रामीण जीवनाच्या ऐतिहासिक व सांस्कृतिक संदर्भासाठी उपलब्ध स्थानिक साहित्याचाही उपयोग करता येतो.
यावरून ''कुणबी बोली''चा अभ्यास हा केवळ जातीय समाजशास्त्राचा विषय नसून महाराष्ट्रातील प्रादेशिक भाषिक विविधता, ग्रामीण सामाजिक इतिहास आणि स्थानिक सांस्कृतिक ओळख यांच्या अभ्यासाचाही एक भाग आहे. मात्र एखाद्या बोलीचा एखाद्या समुदायाशी असलेला संबंध हा त्या समुदायाच्या प्राचीन जातीय उत्पत्तीचा किंवा वंशावळीचा स्वतःपुरता निर्णायक पुरावा मानता येत नाही.
=== महाड परिसरातील कुणबी बोली ===
महाड परिसरातील कुणबी बोलीचा स्वतंत्र भाषिक अभ्यास अमृत माधव घाटगे यांनी केला. ''Kunbi of Mahad'' हा त्यांच्या ''A Survey of Marathi Dialects'' या मालिकेतील तिसरा खंड असून तो १९६६मध्ये प्रकाशित झाला. मराठी बोलींच्या सर्वेक्षणाच्या उपलब्ध नोंदींमध्ये या ग्रंथाचा समावेश आहे.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/><ref>{{cite web
|title=Publications
|publisher=Maharashtra State Board for Literature and Culture
|url=https://sahitya.marathi.gov.in/wp-content/uploads/2021/07/publications2021-07.pdf
|format=PDF
|access-date=2026-09-08
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महाडचा हा भाषिक प्रकार महाड परिसरातील कुणबी समाजाशी संबंधित असल्यामुळे सामाजिक ओळख आणि भाषिक विविधता यांच्या परस्परसंबंधाच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचा ठरतो. मात्र महाडमध्ये नोंदवलेला हा भाषिक प्रकार संपूर्ण रत्नागिरी, रायगड किंवा कोकणातील सर्व कुणबी समाजाची एकसमान बोली होती, असा निष्कर्ष उपलब्ध अभ्यासावरून काढता येत नाही. प्रादेशिक भौगोलिक परिस्थिती, स्थानिक भाषिक संपर्क आणि सामाजिक इतिहास यांनुसार भाषिक वैशिष्ट्यांमध्ये फरक असू शकतो.<ref name="घोलम2025">{{cite book |last=घोलम |first=अनंत नर्मदा सखाराम |title=खडीकोळवण : सांस्कृतिक, ऐतिहासिक आणि ग्रामीण जीवन |publisher=Kindle Direct Publishing |year=2025 }}</ref>
=== तिलोरी कुणबी बोली ===
रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी समाजाच्या भाषिक स्वरूपाचा स्वतंत्र अभ्यास सीमा राजेश वीर यांनी ''कोकणातील तिलोरी कुणबी बोली'' या लेखातून केला आहे. हा लेख ''भाषा आणि जीवन'' या मराठी भाषावैज्ञानिक नियतकालिकाच्या २०२२ च्या अंकात प्रकाशित झाला असून तो खंड ४०, अंक ३मध्ये पृष्ठ ७ ते १९ या दरम्यान प्रसिद्ध झाला आहे.<ref name="Veer2022">{{cite journal
|last=वीर
|first=सीमा राजेश
|title=कोकणातील तिलोरी कुणबी बोली
|journal=भाषा आणि जीवन
|volume=40
|issue=3
|year=2022
|pages=7–19
}}</ref>
या अभ्यासामुळे तिलोरी कुणबी बोलीचा विचार केवळ सामाजिक किंवा प्रशासकीय ओळखीच्या संदर्भात न करता स्वतंत्र भाषिक अभ्यासाच्या विषयाच्या रूपातही करता येतो. तिलोरी कुणबींच्या भाषिक स्वरूपाचा अभ्यास करताना रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील स्थानिक भाषिक वातावरण, प्रमाण मराठीचा प्रभाव आणि शेजारील कोकणी भाषिक प्रकार यांचा संदर्भ लक्षात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="Veer2022"/>
=== मराठीशी संबंध ===
महाड आणि दक्षिण कोकणातील कुणबी भाषिक प्रकारांचा अभ्यास मराठी भाषेच्या व्यापक प्रादेशिक भाषिक विविधतेच्या संदर्भात करण्यात आला आहे. अमृत माधव घाटगे यांच्या मराठी बोलींच्या सर्वेक्षणात ''Kunbi of Mahad''चा स्वतंत्र भाषिक प्रकार म्हणून समावेश करण्यात आला होता.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/>
मराठी आणि कोकणी यांच्यातील भाषिक संबंधांविषयी भाषाशास्त्रीय अभ्यासात विविध मते मांडली गेली आहेत. मराठी बोलींच्या सर्वेक्षणाच्या उपलब्ध ऐतिहासिक माहितीनुसार जॉर्ज अब्राहम ग्रिअर्सन यांच्या भाषिक वर्गीकरणात कोकणीचा मराठीशी संबंध जोडला गेला होता; त्यानंतर सुमित्रा मंगेश कात्रे यांच्या ''The Formation of Konkani'' या १९६६मधील अभ्यासात कोकणीच्या स्वतंत्र भाषिक स्वरूपाचा विचार करण्यात आला. त्यामुळे कोकणातील एखाद्या कुणबी भाषिक प्रकाराला सरसकट ''मराठीची बोली'' किंवा ''कोकणीची बोली'' असे संबोधण्यापेक्षा संबंधित प्रदेशातील भाषिक वैशिष्ट्ये आणि उपलब्ध भाषाशास्त्रीय अभ्यास यांच्या आधारे त्याचे स्वरूप निश्चित करणे अधिक योग्य ठरते.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/>
कुणबी बोलींच्या अभ्यासातून कोकणातील सामाजिक आणि भाषिक विविधतेचा एक महत्त्वाचा पैलू समोर येतो. महाडची कुणबी बोली, रत्नागिरी-दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोली आणि इतर स्थानिक भाषिक प्रकार यांचा तुलनात्मक अभ्यास केल्यास प्रदेश, सामाजिक ओळख, भाषिक संपर्क आणि ग्रामीण सांस्कृतिक जीवन यांच्यातील परस्परसंबंध अधिक स्पष्टपणे समजून घेता येतात.<ref name="घोलम2025" />
=== कोकणी भाषिक प्रभाव ===
कोकण हा मराठी आणि कोकणी या दोन्ही भाषिक परंपरांच्या संपर्कातील प्रदेश आहे. त्यामुळे दक्षिण कोकणातील विविध भाषिक प्रकारांवर शेजारील कोकणी भाषिक क्षेत्राशी झालेल्या संपर्काचा परिणाम झालेला असण्याची शक्यता भाषिक अभ्यासाच्या दृष्टीने महत्त्वाची ठरते. हा परिणाम शब्दसंपदा, उच्चार, ध्वनिवैशिष्ट्ये किंवा वाक्यरचनेच्या काही घटकांमध्ये दिसू शकतो; मात्र त्याचे स्वरूप प्रदेशानुसार वेगवेगळे असू शकते.
एखाद्या विशिष्ट शब्दाचा, उच्चाराचा किंवा व्याकरणिक रचनेचा कोकणी प्रभाव म्हणून उल्लेख करण्यासाठी तुलनात्मक भाषाशास्त्रीय पुरावा आवश्यक असतो. त्यामुळे कोकणातील सर्व कुणबी बोलींवर कोकणीचा समान किंवा व्यापक प्रभाव आहे, असा निष्कर्ष प्रत्येक उपप्रदेशाच्या स्वतंत्र भाषिक अभ्यासाशिवाय काढणे योग्य ठरत नाही.
महाड, रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील कुणबी भाषिक प्रकारांमध्ये काही साम्य आढळू शकते; परंतु त्यांचे भौगोलिक वितरण, स्थानिक भाषिक संपर्क आणि ऐतिहासिक विकास समान असल्याचे गृहीत धरता येत नाही. महाडच्या कुणबी बोलीचा स्वतंत्र अभ्यास अमृत माधव घाटगे यांनी केला असून रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीचा स्वतंत्र भाषिक अभ्यासही उपलब्ध आहे.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/><ref name="Veer2022"/>
=== स्थानिक शब्दसंपदा ===
बोलीभाषेच्या अभ्यासातील महत्त्वाचा घटक म्हणजे स्थानिक शब्दसंपदा. शेती, पाऊस, भातशेती, जलव्यवस्था, घररचना, शेतीची अवजारे, समुद्र, डोंगर, वनस्पती, प्राणी आणि ग्रामजीवनाशी संबंधित शब्दांमधून एखाद्या प्रदेशातील दैनंदिन जीवन, पर्यावरण आणि सांस्कृतिक अनुभवांचे भाषिक प्रतिबिंब दिसून येऊ शकते. कोकणातील ग्रामीण जीवनाचा अभ्यास करताना स्थानिक शब्दसंपदेचा संबंध पारंपरिक शेतीपद्धती, घररचना आणि ग्रामजीवनाशी जोडून पाहता येतो.<ref name="घोलम2025" />
महाडच्या कुणबी बोलीचा स्वतंत्र भाषिक अभ्यास अमृत माधव घाटगे यांच्या सर्वेक्षणात करण्यात आला आहे. या अभ्यासामुळे महाड परिसरातील कुणबी समाजाशी संबंधित भाषिक वैशिष्ट्ये आणि स्थानिक शब्दसंपदेचा अभ्यास करण्यासाठी स्वतंत्र स्रोत उपलब्ध होतो.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/>
तिलोरी कुणबी बोलीच्या संदर्भात सीमा राजेश वीर यांच्या २०२२मधील अभ्यासामुळे रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील या भाषिक प्रकाराचा स्वतंत्र विचार करण्यास आधार मिळतो.<ref name="Veer2022"/>
स्थानिक शब्दसंपदा सामाजिक आणि सांस्कृतिक इतिहासासाठी पूरक पुरावा देऊ शकते; मात्र एखादा शब्द केवळ एखाद्या विशिष्ट समुदायापुरता मर्यादित आहे किंवा त्याचा उगम एखाद्या विशिष्ट प्राचीन भाषेतच झाला आहे, असा निष्कर्ष केवळ त्या शब्दाच्या स्थानिक वापरावरून काढता येत नाही. अशा निष्कर्षांसाठी शब्दव्युत्पत्ती, तुलनात्मक भाषाशास्त्र, ऐतिहासिक नोंदी आणि संबंधित भाषांमधील समांतर शब्दरूपांचा स्वतंत्र अभ्यास आवश्यक असतो.
=== उच्चारवैशिष्ट्ये ===
प्रादेशिक बोलींच्या अभ्यासात प्रमाण भाषेच्या तुलनेत आढळणारे ध्वनी, स्वरांचे उच्चार, व्यंजनांचे उच्चार, शब्दांतील अक्षररचना आणि बोलण्याची लय यांचा विचार केला जातो. अमृत माधव घाटगे यांच्या भाषिक सर्वेक्षणात महाड परिसरातील कुणबी बोलीचा स्वतंत्र अभ्यास करण्यात आला आहे. त्यामुळे या बोलीच्या उच्चारवैशिष्ट्यांचा अभ्यास प्रमाण मराठीच्या तुलनेत भाषाशास्त्रीय पद्धतीने करता येतो.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/>
तिलोरी कुणबी बोलीच्या संदर्भातही उच्चारवैशिष्ट्यांचा अभ्यास करताना रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील स्थानिक भाषिक वातावरण विचारात घेणे आवश्यक आहे. तिलोरी कुणबी बोलीवर उपलब्ध असलेल्या भाषाशास्त्रीय अभ्यासात या बोलीचा स्वतंत्र भाषिक प्रकार म्हणून विचार करण्यात आला आहे.<ref name="Veer2022"/>
मात्र बोलीच्या विशिष्ट उच्चारवैशिष्ट्यांचे वर्णन करताना संबंधित भाषाशास्त्रीय अभ्यासातील उदाहरणे, ध्वनिलेखन आणि लिप्यंतर यांचा आधार घेणे आवश्यक आहे. उपलब्ध प्राथमिक अभ्यासात स्पष्टपणे नोंद नसलेली उच्चाररूपे अनुमानाने मांडणे योग्य ठरत नाही. त्यामुळे कुणबी बोलीच्या उच्चारवैशिष्ट्यांचा सविस्तर अभ्यास संबंधित भाषाशास्त्रीय स्रोतांच्या आधारेच करणे आवश्यक आहे.
=== व्याकरणाची वैशिष्ट्ये ===
बोलीभाषेचे व्याकरण प्रमाण भाषेपेक्षा पूर्णपणे स्वतंत्र असणे आवश्यक नसते. क्रियापदांची रूपे, विभक्तीप्रत्यय, सर्वनामे, लिंग आणि वचन, काळ, वाक्यरचना तसेच शब्दक्रम यांसारख्या घटकांमध्ये प्रादेशिक किंवा सामाजिक फरक आढळू शकतात.
महाडच्या कुणबी बोलीच्या स्वतंत्र भाषिक वर्णनाचा उपयोग तिच्या व्याकरणात्मक वैशिष्ट्यांचा अभ्यास करण्यासाठी करता येतो. अमृत माधव घाटगे यांच्या महाडच्या कुणबी बोलीवरील अभ्यासामुळे या बोलीच्या भाषिक रचनेचा स्वतंत्र संदर्भ उपलब्ध होतो.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/>
रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीच्या संदर्भात सीमा राजेश वीर यांचा २०२२मधील अभ्यासही महत्त्वाचा पूरक स्रोत आहे. या अभ्यासाच्या आधारे तिलोरी कुणबी बोलीच्या भाषिक वैशिष्ट्यांचा स्वतंत्र विचार करता येतो.<ref name="Veer2022"/>
कुणबी बोलीचे व्याकरण प्रमाण मराठीपासून पूर्णपणे स्वतंत्र आहे किंवा ती स्वतंत्र भाषा आहे, असा निष्कर्ष केवळ तिच्या स्वतंत्र बोलीअभ्यासाच्या अस्तित्वावरून काढता येत नाही. तिच्या व्याकरणाचा विचार करताना प्रादेशिक मराठीचे स्वरूप, कोकणीशी असलेला भाषिक संपर्क आणि संबंधित प्रदेशातील इतर बोली यांचा तुलनात्मक अभ्यास करणे आवश्यक आहे.
=== शेती आणि बोलीभाषा ===
कुणबी समाजाच्या पारंपरिक कृषीजीवनाशी संबंधित शब्दसंपदा ही कोकणातील ग्रामीण भाषिक अभ्यासाचा एक महत्त्वाचा घटक ठरू शकते. भातशेती, नांगरणी, पेरणी, रोपलागवड, कापणी, धान्यसाठवण, जलव्यवस्था, पशुधन आणि शेतीची अवजारे यांसंबंधीचे स्थानिक शब्द त्या प्रदेशातील कृषीपद्धती आणि दैनंदिन जीवनाचे भाषिक प्रतिबिंब दर्शवू शकतात. कोकणातील ग्रामीण जीवनाच्या अभ्यासात शेती, घररचना, स्थानिक साधने आणि ग्रामजीवन यांचा परस्परसंबंधही दिसून येतो.<ref name="घोलम2025" />
महाडच्या कुणबी बोलीचा स्वतंत्र भाषिक अभ्यास अमृत माधव घाटगे यांनी केला असून, त्या अभ्यासामुळे कृषी आणि ग्रामीण जीवनाशी संबंधित स्थानिक शब्दसंपदेचा भाषाशास्त्रीय संदर्भात अभ्यास करता येतो.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/>
तथापि एखाद्या कृषीशब्दाची व्युत्पत्ती, त्याचे विशिष्ट भौगोलिक मूळ किंवा तो शब्द केवळ कुणबी समाजापुरताच मर्यादित असल्याचा निष्कर्ष केवळ स्थानिक वापरावरून काढता येत नाही. अशा निष्कर्षांसाठी तुलनात्मक भाषाशास्त्रीय अभ्यास, ऐतिहासिक शब्दकोश, संबंधित बोलींची उदाहरणे आणि उपलब्ध भाषिक नोंदींचा आधार आवश्यक असतो.
=== बोली आणि सामाजिक ओळख ===
भाषा ही सामाजिक आणि प्रादेशिक ओळखीचा एक घटक असू शकते. कुणबी समाजाशी संबंधित काही भाषिक प्रकारांना त्यांच्या बोलणाऱ्या समुदायाच्या सामाजिक ओळखीशी जोडून स्वतंत्रपणे अभ्यासण्यात आले आहे. महाड परिसरातील कुणबी बोलीचा अमृत माधव घाटगे यांनी केलेला अभ्यास आणि रत्नागिरी-दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीवरील सीमा राजेश वीर यांचा अभ्यास याची उदाहरणे आहेत.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/><ref name="Veer2022"/>
मात्र भाषा आणि जातीय ओळख यांच्यात सरळ किंवा एकरेषीय संबंध असतोच असे नाही. एकाच सामाजिक समुदायातील लोक वेगवेगळ्या प्रदेशांमध्ये भिन्न भाषिक प्रकार वापरू शकतात. त्याचप्रमाणे एखादा भाषिक प्रकार एकापेक्षा अधिक सामाजिक समूहांकडून वापरला जाऊ शकतो. त्यामुळे केवळ एखाद्या व्यक्तीच्या बोलीवरून तिची जातीय ओळख निश्चित करणे भाषाशास्त्रीयदृष्ट्या योग्य ठरत नाही.
कुणबी समाजाच्या सामाजिक इतिहासाचा अभ्यास करताना म्हणूनच बोलीभाषेचा विचार जमीन, शेती, स्थलांतर, ग्रामजीवन, स्थानिक सामाजिक संबंध आणि प्रादेशिक संस्कृती यांच्या व्यापक संदर्भात करणे अधिक उपयुक्त ठरते.
=== प्रमाण मराठीचा प्रभाव ===
शिक्षण, मुद्रण, प्रशासन, प्रसारमाध्यमे, शहरीकरण आणि स्थलांतर यांच्या विस्तारामुळे महाराष्ट्रातील अनेक प्रादेशिक भाषिक प्रकारांवर प्रमाण मराठीचा प्रभाव वाढला आहे. शाळा, सरकारी कार्यालये, मुद्रित माध्यमे आणि आधुनिक संप्रेषणाच्या साधनांमध्ये प्रमाण मराठीचा वापर वाढल्यामुळे काही स्थानिक बोलींचा दैनंदिन वापर विशिष्ट क्षेत्रांमध्ये कमी होण्याची शक्यता आहे.
भाषिक सर्वेक्षणांमध्ये महाराष्ट्रातील विविध भाषिक प्रकारांची नोंद करण्यात आली आहे. Survey of Dialects of Marathi Languageच्या माहितीनुसार महाराष्ट्रातील भाषिक विविधतेच्या अभ्यासात अनेक प्रादेशिक भाषिक प्रकारांचा स्वतंत्र विचार करण्यात आला आहे आणि सर्व भाषिक प्रकारांना मराठीच्या बोली म्हणून वर्गीकृत करता येत नाही, असे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/>
यामुळे कुणबी समाजाशी संबंधित भाषिक प्रकारांचा अभ्यास करताना त्यांना पूर्वनिर्धारितपणे प्रमाण मराठीच्या बोली म्हणून किंवा स्वतंत्र भाषा म्हणून वर्गीकृत करण्याऐवजी संबंधित प्रदेशातील उपलब्ध भाषाशास्त्रीय पुरावे, भाषिक रचना, भौगोलिक वितरण आणि इतर भाषांशी असलेला संपर्क यांचा विचार करणे आवश्यक ठरते.
=== आधुनिक भाषिक बदल ===
कोकणातील कुणबी समाजाशी संबंधित भाषिक प्रकारांवर आधुनिक शिक्षण, शहरीकरण, स्थलांतर, प्रसारमाध्यमे आणि प्रमाण मराठीच्या वाढत्या वापराचा परिणाम होत आहे. इंग्रजीच्या वाढत्या वापरामुळेही विशेषतः शिक्षण, रोजगार आणि शहरी व्यवहारांच्या क्षेत्रात भाषिक वापराच्या स्वरूपात बदल होत आहेत. या प्रक्रियेमुळे घरगुती आणि स्थानिक व्यवहारांमध्ये वापरल्या जाणाऱ्या काही प्रादेशिक भाषिक प्रकारांचा वापर विशिष्ट क्षेत्रांमध्ये कमी होण्याची शक्यता आहे.
रत्नागिरी जिल्ह्यातील तिलोरी बोलीच्या संदर्भात स्थानिक शब्दसंपदेचे संकलन आणि बोलीच्या सांस्कृतिक दस्तऐवजीकरणाचे प्रयत्न झाल्याचे समकालीन वृत्तांतांमध्ये नमूद करण्यात आले आहे. चिपळूण, संगमेश्वर आणि राजापूर परिसरात तिलोरी बोलीशी संबंधित शब्दसंपदेचे संकलन करण्यात आल्याचे या वृत्तांतात म्हटले आहे.<ref name="TiloriWords2019">{{cite web
|title=तिलोरी बोलीतले नऊ हजार शब्द संकलित
|url=https://www.esakal.com/amp/kokan/tilori-language-900-words-collection-174832
|publisher=ई-सकाळ
|date=6 March 2019
}}</ref>
या वृत्तांतानुसार सुमारे नऊ हजार शब्द, सुमारे साठ गाणी आणि काही म्हणी संकलित करण्यात आल्याचे नमूद आहे.<ref name="TiloriWords2019"/> या प्रकारचे स्थानिक संकलन तिलोरी बोलीच्या शब्दसंपदेचे आणि लोकसाहित्याचे दस्तऐवजीकरण करण्याच्या दृष्टीने महत्त्वाचे आहे. मात्र या संकलनातील सामग्रीचा उपयोग संपूर्ण रत्नागिरी जिल्ह्यातील किंवा संपूर्ण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीचे प्रतिनिधिक स्वरूप म्हणून करताना संबंधित भाषाशास्त्रीय अभ्यासाचा आधार घेणे आवश्यक आहे.
=== बोलीचे संवर्धन ===
बोलीभाषांच्या दस्तऐवजीकरणासाठी शब्दसंग्रह, म्हणी, लोकगीते, लोककथा, पारंपरिक संभाषणे आणि स्थानिक भाषिक नमुने यांचे संकलन महत्त्वाचे ठरते. अशा सामग्रीतून एखाद्या प्रदेशातील दैनंदिन जीवन, कृषीपद्धती, सामाजिक संबंध आणि सांस्कृतिक परंपरांचे भाषिक स्वरूप नोंदवता येते. कोकणातील ग्रामीण जीवन, शेती आणि स्थानिक सांस्कृतिक परंपरांचा अभ्यास करताना अशा भाषिक सामग्रीला पूरक ऐतिहासिक-सांस्कृतिक स्रोत म्हणूनही पाहता येते.<ref name="घोलम2025" />
तिलोरी बोलीच्या संदर्भात स्थानिक पातळीवर शब्दसंपदा, गीते आणि म्हणी यांचे संकलन झाल्याची नोंद उपलब्ध आहे.<ref name="TiloriWords2019"/>
भाषिक संवर्धनाच्या दृष्टीने अशा स्थानिक प्रयत्नांना शास्त्रीय भाषिक सर्वेक्षण, ध्वनिमुद्रण, लिप्यंतरण, शब्दकोश निर्मिती आणि डिजिटल संग्रह यांची जोड मिळाल्यास बोलीभाषेच्या पुढील अभ्यासासाठी अधिक व्यापक स्रोतसामग्री उपलब्ध होऊ शकते. विशेषतः वृद्ध पिढीकडे उपलब्ध असलेली स्थानिक शब्दसंपदा, म्हणी, लोकगीते आणि पारंपरिक भाषिक वापर यांचे दस्तऐवजीकरण केल्यास भाषिक आणि सांस्कृतिक वारशाच्या नोंदी जतन करण्यास मदत होऊ शकते.
=== कुणबी बोलींचा तुलनात्मक अभ्यास ===
महाडची कुणबी बोली आणि रत्नागिरी-दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोली यांचा उल्लेख एकाच व्यापक संदर्भात होत असला तरी हे दोन्ही भाषिक प्रकार समान आहेत असे गृहीत धरता येत नाही. अमृत माधव घाटगे यांचा अभ्यास महाड परिसरातील कुणबी बोलीवर केंद्रित आहे, तर सीमा राजेश वीर यांचा २०२२मधील अभ्यास रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीशी संबंधित आहे.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/><ref name="Veer2022"/>
या दोन्ही भाषिक प्रकारांचा तुलनात्मक अभ्यास करताना ध्वनिवैशिष्ट्ये, शब्दसंपदा, व्याकरण, वाक्यरचना, स्थानिक भाषिक संपर्क आणि भौगोलिक वितरण या घटकांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे. भौगोलिक जवळीक किंवा सामाजिक साम्य यांवरून दोन बोलींचे भाषिक स्वरूप समान असल्याचा निष्कर्ष काढता येत नाही.
महाड, रायगड, रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील कुणबी समाजाशी संबंधित भाषिक प्रकारांचा तुलनात्मक अभ्यास केल्यास त्यांच्या भाषिक साम्यांबरोबरच प्रादेशिक फरकही अधिक स्पष्ट होऊ शकतात. मात्र अशा तुलनात्मक निष्कर्षांसाठी संबंधित बोलींच्या प्रत्यक्ष भाषिक नमुन्यांचा आणि उपलब्ध भाषाशास्त्रीय अभ्यासांचा आधार आवश्यक आहे.
=== भाषिक इतिहास आणि कुणबी समाज ===
कुणबी समाजाशी संबंधित भाषिक प्रकारांचा इतिहास हा कोकणातील ग्रामीण समाजाच्या दीर्घकालीन भाषिक परिवर्तनाच्या संदर्भात पाहता येतो. कृषीप्रधान ग्रामजीवन, स्थानिक देवस्थान आणि लोकपरंपरा, बाजारपेठा, शेजारील भाषिक समुदायांशी संपर्क, स्थलांतर, शिक्षण आणि शहरीकरण या विविध प्रक्रियांचा भाषिक वापरावर परिणाम झाला असण्याची शक्यता आहे. कोकणातील ग्रामीण जीवन आणि कृषीसंस्कृतीच्या अभ्यासातून या भाषिक परिवर्तनाची सामाजिक पार्श्वभूमी समजण्यास पूरक संदर्भ मिळू शकतो.<ref name="घोलम2025" />
मात्र उपलब्ध भाषिक अभ्यासांवरून कुणबी बोलीची थेट प्राचीन किंवा मध्ययुगीन वंशावळ निश्चित करता येत नाही. त्याचप्रमाणे एखाद्या आधुनिक बोलीचे अस्तित्व हे त्या समुदायाच्या प्राचीन स्थलांतराचा थेट पुरावा मानता येत नाही. भाषिक इतिहास आणि सामाजिक इतिहास यांचा परस्पर संबंध असला तरी त्यांच्या निष्कर्षांसाठी भाषाशास्त्रीय, ऐतिहासिक आणि सामाजिक स्रोत स्वतंत्रपणे तपासणे आवश्यक आहे.
=== ऐतिहासिक आणि आधुनिक भाषिक अभ्यासांचे महत्त्व ===
महाडच्या कुणबी बोलीसाठी अमृत माधव घाटगे यांचा १९६६मधील अभ्यास हा कोकणातील कुणबी भाषिक प्रकाराच्या दस्तऐवजीकरणातील महत्त्वाचा स्रोत आहे. हा अभ्यास मराठीच्या बोलींच्या व्यापक सर्वेक्षणाच्या प्रकल्पाचा भाग होता.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/><ref name="GhatgeKunbiMahad"/>
तिलोरी कुणबी बोलीच्या संदर्भात सीमा राजेश वीर यांचा २०२२मधील अभ्यास आधुनिक काळातील महत्त्वाचा भाषाशास्त्रीय संदर्भ उपलब्ध करून देतो.<ref name="Veer2022"/>
या दोन्ही स्रोतांचा एकत्रित विचार केल्यास कोकणातील कुणबी समाजाशी संबंधित भाषिक प्रकारांचा अभ्यास वेगवेगळ्या कालखंडांच्या संदर्भात करता येतो. एकीकडे १९६० च्या दशकातील शास्त्रीय बोली-सर्वेक्षणातून महाड परिसरातील भाषिक स्वरूपाचे दस्तऐवजीकरण झाले, तर दुसरीकडे २०२० च्या दशकातील अभ्यासातून रत्नागिरी-दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीचा स्वतंत्र विचार उपलब्ध झाला आहे. या दोन्ही अभ्यासांमधील काल, प्रदेश आणि अभ्यासपद्धतीतील फरक लक्षात घेऊनच त्यांची तुलना करणे आवश्यक आहे.
=== भाषिक नोंदींच्या मर्यादा ===
कुणबी बोलीविषयी उपलब्ध भाषिक स्रोतांचा वापर करताना काही मर्यादा लक्षात घेणे आवश्यक आहे. प्रथम, महाडची कुणबी बोली आणि रत्नागिरी-दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोली या स्वतंत्र प्रादेशिक भाषिक अभ्यासांचे विषय आहेत. त्यामुळे दोन्ही भाषिक प्रकारांचे स्वरूप एकसमान आहे असे गृहीत धरता येत नाही. दुसरे, एखाद्या बोलीचा विशिष्ट सामाजिक समुदायाशी संबंध असला तरी त्या बोलीच्या आधारे त्या समुदायाची जातीय उत्पत्ती किंवा प्राचीन वंशपरंपरा निश्चित करता येत नाही. तिसरे, मराठी, कोकणी आणि त्यांच्या विविध प्रादेशिक भाषिक प्रकारांमधील संबंध ऐतिहासिक आणि भाषाशास्त्रीयदृष्ट्या गुंतागुंतीचे आहेत.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/>
त्यामुळे कुणबी बोलीची उत्पत्ती अमुक एका प्राचीन भाषेपासून झाली, सर्व कुणबी समाज एकच बोली बोलतो किंवा तिलोरी कुणबी बोली ही संपूर्ण कोकणातील एकमेव कुणबी बोली आहे, अशी निश्चित विधाने उपलब्ध भाषिक पुराव्यांच्या आधारे करता येत नाहीत. अशा निष्कर्षांसाठी विविध प्रदेशांतील भाषिक नमुने, ऐतिहासिक नोंदी आणि तुलनात्मक भाषाशास्त्रीय अभ्यास आवश्यक आहेत.
=== कोकणातील कुणबी बोलींचे भाषिक महत्त्व ===
कोकणातील कुणबी बोलींचे महत्त्व केवळ सामाजिक ओळखीच्या संदर्भापुरते मर्यादित नसून त्या प्रदेशातील भाषिक विविधतेच्या दस्तऐवजीकरणातही आहे. महाडमधील कुणबी बोलीचा १९६६मधील स्वतंत्र भाषिक अभ्यास आणि रत्नागिरी-दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीवरील २०२२मधील अभ्यास यांमुळे कुणबी समाजाशी संबंधित दोन वेगवेगळ्या प्रादेशिक भाषिक संदर्भांची नोंद उपलब्ध झाली आहे.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/><ref name="Veer2022"/>
या भाषिक अभ्यासांमधून कोकणातील ग्रामीण जीवन, कृषी संस्कृती आणि स्थानिक शब्दसंपदेच्या अभ्यासाला पूरक सामग्री मिळते. त्यामुळे कुणबी समाजाच्या इतिहासाचा अभ्यास करताना जमीन, शेती, लोकसंख्या, महसूल आणि प्रशासकीय नोंदींबरोबरच उपलब्ध भाषिक दस्तऐवजीकरणाचाही विचार करता येतो.
== सामाजिक रचना ==
कोकणातील कुणबी समाजाची सामाजिक रचना कुटुंब, कुळ, देवक, विवाहसंबंध, नातेसंबंध, ग्रामजीवन आणि स्थानिक सामाजिक संस्थांशी संबंधित होती. मात्र कोकणातील कुणबी समाज एकसंध सामाजिक घटक होता असे मानता येत नाही. रत्नागिरी, रायगड, सावंतवाडी, महाड आणि उत्तर कोकणातील कुणबी समाजांच्या सामाजिक जीवनावर स्थानिक भौगोलिक परिस्थिती, कृषीव्यवस्था, ग्रामरचना आणि प्रादेशिक परंपरांचा प्रभाव होता.
ब्रिटिशकालीन गॅझेटियरमध्ये कोकणातील विविध समुदायांच्या सामाजिक आणि ग्रामीण जीवनाचे वर्णन आढळते. रत्नागिरी आणि सावंतवाडीच्या गॅझेटियरमध्ये लोकसंख्या, ग्रामीण जीवन, शेती आणि सामाजिक समूहांची माहिती नोंदवण्यात आली आहे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
नंतरच्या मानववंशशास्त्रीय अभ्यासांमध्ये महाराष्ट्रातील विविध समुदायांच्या सामाजिक रचना, कुटुंबव्यवस्था, विवाहपद्धती, नातेसंबंध आणि सांस्कृतिक परंपरांचा स्वतंत्र अभ्यास करण्यात आला आहे.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004">{{cite book
|editor-last=Singh
|editor-first=K. S.
|title=People of India: Maharashtra
|volume=30
|publisher=Anthropological Survey of India
|location=New Delhi
|year=2004
}}</ref>
कोकणातील ग्रामीण जीवनाच्या संदर्भात कुटुंब, शेती, ग्रामसंस्था, स्थानिक परंपरा आणि सामाजिक संबंध यांचा परस्परसंबंध दिसून येतो. या ग्रामीण-सांस्कृतिक संदर्भांचा अभ्यास करण्यासाठी उपलब्ध स्थानिक इतिहास आणि ग्रामीण जीवनावरील साहित्य पूरक स्रोत म्हणून वापरता येते.<ref name="घोलम2025" />
=== कुटुंब ===
कुणबी समाजातील पारंपरिक सामाजिक जीवनात कुटुंब ही महत्त्वाची सामाजिक आणि आर्थिक संस्था होती. कृषीप्रधान अर्थव्यवस्थेमुळे कुटुंबातील विविध सदस्यांचा शेतीच्या कामांमध्ये सहभाग असे. ब्रिटिशकालीन गॅझेटियरमधील ग्रामीण जीवनाच्या वर्णनांमध्ये कृषी कामांमध्ये कुटुंबाच्या सहभागाचे उल्लेख आढळतात.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
कुटुंबाची आर्थिक रचना जमीनधारणा, कुटुंबाचा आकार, शेतीचे स्वरूप, पशुधन आणि उपलब्ध संसाधने यांशी संबंधित होती. कृषी उत्पादनाबरोबरच पशुपालन, घरगुती कामे आणि स्थानिक रोजगार यांचा कुटुंबाच्या उपजीविकेत सहभाग असू शकत होता. त्यामुळे ग्रामीण कृषी समाजात कुटुंबाची भूमिका सामाजिक संबंधांबरोबरच आर्थिक जीवनाशीही जोडलेली होती.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
नंतरच्या मानववंशशास्त्रीय अभ्यासांमध्ये महाराष्ट्रातील विविध समुदायांमध्ये संयुक्त आणि विभक्त कुटुंबांचे प्रकार नोंदवण्यात आले आहेत. त्यामुळे संपूर्ण कुणबी समाजात एकच कुटुंबपद्धती प्रचलित होती असे मानणे योग्य नाही. कुटुंबव्यवस्थेचे स्वरूप प्रदेश, आर्थिक परिस्थिती आणि स्थानिक सामाजिक परंपरांनुसार बदलत असण्याची शक्यता होती.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
=== कुळ ===
कुळ ही संकल्पना कुटुंबीय वंशपरंपरा, सामाजिक ओळख आणि विवाहसंबंधांच्या संदर्भात महत्त्वाची ठरते. महाराष्ट्रातील विविध ग्रामीण समाजांच्या सामाजिक रचनेत कुटुंबसमूह, आडनावे, वंशपरंपरा आणि विवाहनियम यांना स्थान असल्याचे मानववंशशास्त्रीय साहित्यात आढळते.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
काही कुणबी समुदायांमध्ये समान कुळ किंवा जवळच्या वंशसमूहातील विवाह टाळण्याची प्रथा आढळत असल्याचे तुलनात्मक मानववंशशास्त्रीय साहित्यात नमूद केले आहे. मात्र अशा प्रथा सर्व प्रदेशांतील कुणबी समाजाला समान प्रमाणात लागू होत्या असे गृहीत धरता येत नाही.<ref name="RussellHiralal1916"/>
कुळ, गोत्र, देवक आणि आडनाव या संज्ञा सामाजिक संदर्भानुसार वापरल्या जात असल्यामुळे त्यांचे अर्थ सर्व प्रदेशांत समान असतीलच असे नाही. विशेषतः कोकणातील कुणबी समाजाचा अभ्यास करताना स्थानिक विवाहपद्धती, कुटुंबव्यवस्था, देवकपरंपरा, आडनावे आणि प्रादेशिक सामाजिक संकेत यांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे.
कोकणातील ग्रामीण कुटुंबव्यवस्था, स्थानिक परंपरा आणि सामाजिक जीवनाचा अभ्यास करताना स्थानिक इतिहास व ग्रामीण जीवनावरील स्रोत पूरक ठरू शकतात. रत्नागिरीतील ग्रामीण जीवनाच्या संदर्भात कुटुंब, शेती, ग्रामव्यवस्था आणि स्थानिक सांस्कृतिक परंपरांचा परस्परसंबंधही अभ्यासता येतो.<ref name="घोलम2025" />
=== देवक ===
कुणबी समाजाच्या सामाजिक आणि विवाहसंस्थेच्या संदर्भात देवक ही महत्त्वाची संकल्पना मानली जाते. देवक हे वनस्पती, वृक्ष, प्राणी, वस्तू किंवा अन्य प्रतीकाशी संबंधित कुलचिन्ह अथवा संरक्षक प्रतीकाच्या स्वरूपात आढळू शकते. महाराष्ट्रातील कुणबी समाजावरील मानववंशशास्त्रीय अभ्यासांमध्ये देवक, गोत्र, कुळ आणि विवाहनियम यांचा परस्परसंबंध नोंदवण्यात आला आहे.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
काही कुणबी उपसमूहांमध्ये समान देवक असलेल्या कुटुंबांमध्ये विवाह टाळण्याची प्रथा आढळत असल्याचे महाराष्ट्रातील मानववंशशास्त्रीय आणि गॅझेटियर नोंदींवरून दिसते. मात्र अशा विवाहनियमांचे स्वरूप प्रदेश आणि उपसमूहानुसार बदलत असल्यामुळे ते संपूर्ण कुणबी समाजाला समान प्रमाणात लागू होते असे मानता येत नाही.<ref>{{cite web
|title=People of Maharashtra: Major Castes and Tribes
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/land_and_people/L%20%26%20P%20pdf/Chapter%20II/2%20Major%20Castes%20and%20Tribes.pdf
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
सावंतवाडी तालुक्यातील कुंकेरी गावाच्या संदर्भात १९६१ च्या जनगणनेअंतर्गत तयार करण्यात आलेल्या Village Survey Monographमध्ये कुणबी मराठा कुटुंबांच्या सामाजिक जीवनाचे वर्णन आढळते. या सर्वेक्षणाच्या प्रकाशनात स्थानिक सामाजिक प्रथा, कुटुंबव्यवस्था आणि सांस्कृतिक जीवनाचा स्वतंत्र विचार करण्यात आला आहे.<ref name="Kunkeri1966">{{cite report
|title=Kunkeri Village Survey Monograph
|publisher=Maharashtra Census Office
|location=Bombay
|year=1966
|series=Census of India, 1961
}}</ref>
देवकाचा संबंध केवळ धार्मिक श्रद्धेशी मर्यादित नसून विवाहसंबंध आणि सामाजिक ओळख यांच्याशीही जोडलेला असल्याचे या प्रकारच्या नोंदींमधून दिसते. तथापि देवकाची नावे, त्यांच्याशी संबंधित प्रथा आणि विवाहनियम यांमध्ये स्थानिक फरक असू शकतात.
=== विवाह ===
कुणबी समाजातील विवाह हा कुटुंब, कुळ आणि विस्तारित नातेसंबंधांना जोडणारा महत्त्वाचा सामाजिक विधी होता. विवाह ठरविताना कुटुंबीय संबंध, कुळ, आडनाव, देवक आणि संबंधित सामाजिक नियमांचा विचार केला जात असल्याचे महाराष्ट्रातील मानववंशशास्त्रीय अभ्यासांत आढळते.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील कुणबी आणि संबंधित कृषक समुदायांच्या विवाहपद्धतींच्या वर्णनांमध्ये समान कुळातील विवाह टाळणे आणि काही ठिकाणी समान आडनाव किंवा देवक असलेल्या कुटुंबांमधील विवाहास प्रतिबंध असल्याचे उल्लेख आढळतात.<ref name="Poona1885">{{cite book
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Poona
|volume=18
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1885
}}</ref>
या विवाहनियमांमधून कुणबी समाजातील जातीय किंवा सामाजिक अंतर्विवाहाबरोबरच कुळ, देवक किंवा वंशसमूहाच्या पातळीवरील बहिर्विवाहाची प्रथा अस्तित्वात असल्याचे दिसते. मात्र या नियमांचे स्वरूप प्रदेश, उपसमूह आणि स्थानिक सामाजिक परंपरेनुसार बदलत होते.
कोकणातील ग्रामीण जीवनाच्या संदर्भात विवाह हा केवळ दोन व्यक्तींमधील संबंध न राहता दोन कुटुंबे आणि त्यांच्या नातेसंबंधांना जोडणारी सामाजिक प्रक्रिया होती. रत्नागिरीतील ग्रामीण जीवन, कुटुंबव्यवस्था आणि स्थानिक सामाजिक परंपरांचा अभ्यास करताना अशा संबंधांचा विचार करणे आवश्यक ठरते.<ref name="घोलम2025" />
=== नातेसंबंध ===
कुणबी समाजाच्या पारंपरिक ग्रामीण जीवनात रक्तसंबंध, विवाहसंबंध आणि शेजारधर्म यांना महत्त्व होते. विस्तारित कुटुंब, सासर-माहेरचे संबंध आणि इतर नातेसंबंध सामाजिक समारंभ आणि जीवनचक्रातील विधींमध्ये सक्रिय असत.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
जन्म, नामकरण, विवाह आणि मृत्यू यांसारख्या जीवनचक्रातील विधींमध्ये नातेवाईक आणि समाजातील इतर व्यक्तींचा सहभाग असे. अशा विधींमुळे कुटुंबांमधील सामाजिक संबंध दृढ होण्यास मदत होत असे.
कोकणातील ग्रामीण समाजात कुटुंब, नातेसंबंध, शेती आणि ग्रामजीवन यांचा परस्पर संबंध असल्यामुळे सामाजिक जीवनाचा अभ्यास करताना या घटकांचा एकत्रित विचार करणे आवश्यक आहे.<ref name="घोलम2025" />
=== विवाहासंबंधी सामाजिक नियम ===
कुणबी समाजातील विवाहासाठी विविध सामाजिक नियम प्रचलित होते. समान कुळ किंवा देवकातील विवाह टाळणे, विशिष्ट नातेसंबंधांमध्ये विवाहास प्रतिबंध करणे आणि विवाहासाठी मान्य सामाजिक चौकट पाळणे यांचा उल्लेख महाराष्ट्रातील मानववंशशास्त्रीय अभ्यासांत आढळतो.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
विवाहनियमांमध्ये उपसमूह आणि प्रदेशानुसार फरक असल्याचेही नोंदींवरून दिसते. काही कुणबी उपसमूहांमध्ये विधवा पुनर्विवाहाला मान्यता असल्याचे, तसेच काही समूहांमध्ये विवाहविच्छेदाची प्रथा अस्तित्वात असल्याचे मानववंशशास्त्रीय साहित्यात नमूद केले आहे. मात्र या प्रथा संपूर्ण कुणबी समाजासाठी समान होत्या असे मानता येत नाही.<ref name="MajorCastesTribes">{{cite web
|title=People of Maharashtra: Major Castes and Tribes
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/land_and_people/L%20%26%20P%20pdf/Chapter%20II/2%20Major%20Castes%20and%20Tribes.pdf
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
म्हणून कुणबी समाजातील विवाहसंस्थेचा अभ्यास करताना प्रदेश, उपसमूह, आर्थिक स्थिती, स्थानिक सामाजिक परंपरा आणि कालखंड या घटकांचा विचार करणे आवश्यक आहे. ऐतिहासिक नोंदींमधील एखादी प्रथा संपूर्ण कुणबी समाजाचे सार्वत्रिक वैशिष्ट्य म्हणून मांडणे योग्य ठरणार नाही.
=== विधवा पुनर्विवाह आणि विवाहविच्छेद ===
कुणबी समाजातील काही उपसमूहांमध्ये विधवा पुनर्विवाहाला सामाजिक मान्यता असल्याचे मानववंशशास्त्रीय नोंदींमध्ये आढळते. त्याचप्रमाणे काही उपसमूहांमध्ये विवाहविच्छेदाची प्रथा अस्तित्वात असल्याचेही नोंदवण्यात आले आहे.<ref name="MajorCastesTribes"/>
या प्रथांचे स्वरूप प्रदेश, उपसमूह, सामाजिक स्थान आणि कालखंडानुसार बदलत असल्याचे उपलब्ध नोंदींवरून दिसते. त्यामुळे एखाद्या विशिष्ट कुणबी उपसमूहात आढळणारी विधवा पुनर्विवाहाची किंवा विवाहविच्छेदाची प्रथा संपूर्ण कुणबी समाजाचे सार्वत्रिक वैशिष्ट्य म्हणून मांडता येत नाही.
ऐतिहासिक विवाहसंस्थेचा अभ्यास करताना तत्कालीन सामाजिक नियम आणि आधुनिक काळातील कायदेशीर व सामाजिक व्यवस्था यांच्यात फरक करणे आवश्यक आहे. विसाव्या शतकाच्या उत्तरार्धातील किंवा आधुनिक कुणबी समाजातील विवाहपद्धती केवळ १९व्या शतकातील मानववंशशास्त्रीय वर्णनांच्या आधारे निश्चित करता येत नाहीत.
=== ग्रामजीवन ===
कोकणातील कुणबी समाजाचे पारंपरिक सामाजिक आणि आर्थिक जीवन गाव, शेती आणि स्थानिक सामाजिक संबंधांशी घट्टपणे जोडलेले होते. शेती, पाणी, देवस्थान, सण, बाजारपेठ, श्रमवाटप आणि परस्पर सहाय्य या घटकांमधून ग्रामीण समाजजीवनाची रचना विकसित होत असे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
रत्नागिरी आणि सावंतवाडीच्या गॅझेटियरमध्ये ग्रामीण लोकांचे शेतीशी असलेले संबंध, कुटुंबव्यवस्था, विवाह, सामाजिक समारंभ, धार्मिक प्रथा आणि स्थानिक व्यवसाय यांचे वर्णन आढळते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
गाव हे कृषी उत्पादनाचे केंद्र असण्याबरोबरच सामाजिक आणि धार्मिक व्यवहारांचेही केंद्र होते. ग्रामदेवता, देवस्थाने, जत्रा आणि विविध धार्मिक समारंभांमध्ये गावातील वेगवेगळे सामाजिक समूह सहभागी होत असत. त्यामुळे ग्रामजीवन हे केवळ शेतीच्या उत्पादनाशी संबंधित नसून सामाजिक आणि सांस्कृतिक संबंधांचेही महत्त्वाचे क्षेत्र होते.
कोकणातील ग्रामीण जीवनाचा अभ्यास करताना कुटुंब, शेती, स्थानिक परंपरा, धार्मिक आचार आणि ग्रामसमुदाय यांचा परस्परसंबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे. रत्नागिरीतील ग्रामीण जीवनाच्या ऐतिहासिक आणि सांस्कृतिक संदर्भासाठी स्थानिक ग्रामीण जीवनावरील अभ्यासही पूरक ठरतात.<ref name="घोलम2025" />
=== ग्रामसंस्था आणि परस्परावलंबन ===
पारंपरिक कोकणी ग्रामजीवनात कृषक आणि विविध सेवा देणाऱ्या समूहांमध्ये परस्परावलंबी संबंध अस्तित्वात होते. शेती आणि दैनंदिन ग्रामीण जीवनासाठी लोहार, सुतार, न्हावी, परीट, गुरव आणि इतर सेवा देणाऱ्या व्यक्ती किंवा समूहांची आवश्यकता असे. त्याबदल्यात त्यांना धान्य, उत्पन्नातील हिस्सा किंवा इतर पारंपरिक मोबदला मिळत असल्याचे ग्रामीण सामाजिक व्यवस्थेच्या वर्णनांमध्ये आढळते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
अशा परस्परावलंबी संबंधांचे स्वरूप गाव, प्रदेश आणि स्थानिक जमीनव्यवस्थेनुसार बदलत होते. त्यामुळे महाराष्ट्रातील सर्व गावांमध्ये एकसारखी बलुतेदारी व्यवस्था अस्तित्वात होती असे सरसकट म्हणता येत नाही. विशेषतः कोकणातील जमीनव्यवस्था, खोतपद्धती, वतनव्यवस्था आणि स्थानिक ग्रामरचना यांचा स्वतंत्र संदर्भात विचार करणे आवश्यक आहे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
कोकणातील ग्रामजीवनात अशा परस्परावलंबी संबंधांचा परिणाम कृषी उत्पादन, स्थानिक सेवा, सामाजिक समारंभ आणि दैनंदिन व्यवहारांवर होत असे. त्यामुळे कुणबी समाजाच्या सामाजिक इतिहासाचा अभ्यास करताना केवळ जमीनधारणा किंवा शेतीपुरता विचार न करता ग्रामसंस्था आणि इतर ग्रामीण समूहांशी असलेले संबंध यांचाही विचार करणे आवश्यक ठरते.
=== सामाजिक संघटना ===
पारंपरिक कुणबी समाजातील सामाजिक संबंध कुटुंब, कुळ, गाव आणि व्यापक सामाजिक समुदाय या विविध स्तरांवर विकसित झाले होते. विवाह, धार्मिक विधी, सामाजिक समारंभ आणि स्थानिक वादविवाद यांसारख्या प्रसंगी कुटुंबातील तसेच समुदायातील ज्येष्ठ व्यक्तींना भूमिका असू शकत होती. या सामाजिक संबंधांचे स्वरूप प्रदेश आणि स्थानिक परंपरेनुसार बदलत होते.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
महाराष्ट्रातील विविध समुदायांच्या मानववंशशास्त्रीय अभ्यासांमध्ये समुदायातील ज्येष्ठ व्यक्ती, कुटुंबसमूह किंवा स्थानिक सामाजिक संस्थांच्या माध्यमातून सामाजिक प्रश्न आणि वाद सोडवण्याच्या प्रथांचा उल्लेख आढळतो. तथापि प्रत्येक कुणबी गावात किंवा प्रत्येक उपसमूहात औपचारिक जातपंचायत अस्तित्वात होती, असा सार्वत्रिक निष्कर्ष काढण्यासाठी स्वतंत्र स्थानिक पुराव्याची आवश्यकता आहे.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
कोकणातील सामाजिक जीवनाचा विचार करताना ग्रामसमुदाय, कुटुंबीय संबंध, धार्मिक परंपरा आणि परस्पर सहाय्य यांचा एकत्रित विचार करणे आवश्यक आहे. रत्नागिरीतील ग्रामीण जीवनाच्या संदर्भात कुटुंब, शेती आणि स्थानिक सामाजिक-सांस्कृतिक संबंध यांचे परस्परसंबंधही महत्त्वाचे ठरतात.<ref name="घोलम2025" />
=== पारंपरिक सामाजिक भूमिका ===
कुणबी समाजाची पारंपरिक सामाजिक आणि आर्थिक भूमिका प्रामुख्याने कृषी उत्पादनाशी संबंधित होती. जमीन कसणे, पिकांची लागवड, पशुधनाचे पालन आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेतील सहभाग हे त्यांच्या जीवनाचे महत्त्वाचे घटक होते. रत्नागिरी, कोलाबा आणि ठाणे या ऐतिहासिक जिल्ह्यांच्या गॅझेटियरमध्ये कुणबींचा कृषक समुदाय म्हणून उल्लेख आढळतो.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/><ref name="KolabaJanjira1883"/><ref name="Thana1882"/>
कुणबींचे कृषीशी असलेले ऐतिहासिक संबंध महत्त्वाचे असले तरी कुणबी आणि शेतकरी या दोन संज्ञा समानार्थी मानता येत नाहीत. कृषक ही आर्थिक किंवा व्यवसायाधारित संज्ञा होती, तर कुणबी ही सामाजिक समुदायाची ओळख होती. त्यामुळे प्रत्येक कृषक कुणबी होता किंवा प्रत्येक कुणबी व्यक्ती केवळ शेतीवरच अवलंबून होती असे म्हणता येत नाही.
कालांतराने कुणबी समाजातील व्यक्तींनी शेतीबरोबरच मजुरी, व्यापार, वाहतूक, सरकारी सेवा, लष्करी सेवा आणि इतर व्यवसाय स्वीकारल्याचे महाराष्ट्रावरील मानववंशशास्त्रीय अभ्यासांत दिसून येते.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
=== स्त्रियांची सामाजिक आणि आर्थिक भूमिका ===
कृषीप्रधान कुटुंबव्यवस्थेत स्त्रियांचा सामाजिक आणि आर्थिक सहभाग महत्त्वाचा होता. ब्रिटिशकालीन गॅझेटियरमधील ग्रामीण आणि कृषक जीवनाच्या वर्णनांमध्ये स्त्रिया आणि मुले शेतीशी संबंधित विविध कामांमध्ये सहभागी होत असल्याचे उल्लेख आढळतात.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
शेतीतील कामांबरोबरच घरगुती उत्पादन, पशुधनाची देखभाल, अन्नप्रक्रिया, धान्यसाठवण आणि धार्मिक-सामाजिक विधींमध्येही स्त्रियांचा सहभाग असू शकत होता. कृषीप्रधान कुटुंबात घरगुती आणि कृषी कामांमध्ये स्पष्ट विभाजन नसल्यामुळे कुटुंबाच्या उपजीविकेत स्त्रियांचे योगदान विविध स्वरूपाचे होते.
कोकणातील ग्रामीण जीवनाच्या संदर्भात स्त्रियांची भूमिका समजून घेताना कुटुंबव्यवस्था, शेती, घरगुती अर्थव्यवस्था आणि धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा यांचा परस्परसंबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="घोलम2025" />
मात्र ब्रिटिशकालीन गॅझेटियरमधील स्त्रियांच्या भूमिकेविषयीची वर्णने तत्कालीन प्रशासकीय निरीक्षकांच्या दृष्टिकोनातून तयार झालेली असल्यामुळे त्यांना संपूर्ण कुणबी समाजातील स्त्रियांच्या जीवनाचे सार्वत्रिक किंवा अपरिवर्तनीय चित्र मानता येत नाही. प्रदेश, कुटुंबाची आर्थिक स्थिती, जमीनधारणा आणि सामाजिक परिस्थितीनुसार स्त्रियांच्या कामाच्या स्वरूपात फरक असण्याची शक्यता होती.
=== धार्मिक जीवन आणि सामाजिक रचना ===
कुणबी समाजातील पारंपरिक धार्मिक जीवनात ग्रामदेवता, स्थानिक देवता, कुटुंबीय देवता आणि हिंदू धार्मिक परंपरांना महत्त्वाचे स्थान होते. जन्म, विवाह आणि मृत्यू यांसारख्या जीवनचक्रातील विधींमध्ये धार्मिक श्रद्धा आणि सामाजिक संबंध यांचा परस्परसंबंध दिसून येतो. या प्रथा प्रदेश, उपसमूह आणि स्थानिक परंपरेनुसार बदलत असण्याची शक्यता होती.<ref name="MajorCastesTribes"/>
देवक ही संकल्पना या संदर्भात विशेष महत्त्वाची ठरते. देवकाचा संबंध धार्मिक प्रतीकात्मकतेबरोबरच विवाहनियमांशी जोडलेला असल्यामुळे धार्मिक श्रद्धा आणि सामाजिक संस्था यांचे परस्परसंबंध स्पष्ट होतात. काही कुणबी उपसमूहांमध्ये समान देवक असलेल्या कुटुंबांमधील विवाह टाळण्याची प्रथा नोंदवली गेली आहे.<ref name="MajorCastesTribes"/>
कोकणातील ग्रामीण जीवनात धार्मिक परंपरा या ग्रामसमुदायाच्या सामाजिक जीवनाशीही जोडलेल्या होत्या. ग्रामदेवता, देवस्थाने, जत्रा आणि धार्मिक समारंभ हे केवळ श्रद्धेचे विषय नसून सामाजिक सहभाग आणि सामुदायिक संबंध दृढ करणारे प्रसंगही होते. रत्नागिरीतील ग्रामीण जीवनाच्या अभ्यासात स्थानिक परंपरा, कुटुंबव्यवस्था, ग्रामजीवन आणि धार्मिक-सांस्कृतिक व्यवहार यांचा परस्परसंबंध विचारात घेता येतो.<ref name="घोलम2025" />
=== सामाजिक स्तर आणि प्रादेशिक फरक ===
कुणबी समाजाच्या अंतर्गतही आर्थिक आणि सामाजिक स्थितीत फरक होते. जमीनधारणा, जमिनीची गुणवत्ता, कुटुंबाचा आकार, कृषी उत्पादन, पशुधन, गावातील सामाजिक स्थान, कर्ज आणि उपलब्ध आर्थिक साधने यांनुसार कुटुंबांच्या परिस्थितीत भिन्नता असू शकत होती.
ब्रिटिशकालीन रत्नागिरी गॅझेटियरमध्ये ग्रामीण समाजातील विविध आर्थिक स्तर, कृषक, मजूर आणि इतर घटकांच्या परिस्थितीचे वर्णन आढळते. विवाह, सामाजिक समारंभ आणि कौटुंबिक खर्च यांमध्येही आर्थिक स्थितीनुसार फरक असल्याचे नोंदवले आहे.<ref>{{cite web
|title=Ratnagiri and Savantvadi Gazetteer — Capitals and Capitalists
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Ratnagiri%20and%20Sawantwadi/ratnagiri/capitals1_capitalists.html
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
रत्नागिरीतील कुणबी समाजाच्या संदर्भात जमीनधारणा आणि कृषीव्यवस्थेतील स्थानानुसार आर्थिक स्थितीत फरक असल्याचे जमीन प्रशासनाच्या नोंदींमधूनही दिसते. काही कृषक वारसाहक्की हक्कांशी संबंधित होते, तर इतर कृषकांचे जमीन आणि महसूलव्यवस्थेशी संबंध वेगळ्या स्वरूपाचे होते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
त्यामुळे कुणबी समाजाला आर्थिकदृष्ट्या एकसमान समुदाय मानणे ऐतिहासिकदृष्ट्या योग्य ठरणार नाही. कोकणातील वेगवेगळ्या प्रदेशांमध्ये जमीन, शेती, बाजारपेठ, रोजगार आणि स्थानिक सामाजिक रचना यांतील फरकांमुळे कुणबी कुटुंबांच्या सामाजिक आणि आर्थिक स्थितीतही भिन्नता निर्माण झाली होती.
=== सावंतवाडीतील कुणबी सामाजिक रचना ===
सावंतवाडी आणि वेंगुर्ले परिसरातील कुणबींच्या सामाजिक रचनेचा अभ्यास करण्यासाठी १९६१ च्या जनगणनेअंतर्गत करण्यात आलेले कुंकेरी गावाचे सर्वेक्षण महत्त्वाचे ठरते. या सर्वेक्षणावर आधारित Village Survey Monographमध्ये कुणबी मराठ्यांची कुटुंबव्यवस्था, धार्मिक प्रथा, देवक, स्थानिक सामाजिक संबंध आणि ग्रामजीवनाचे विविध पैलू नोंदवण्यात आले आहेत.<ref name="Kunkeri1966"/>
या सर्वेक्षणात कदंब किंवा कळंब या देवकाचा उल्लेख आढळतो. काही कुटुंबांना त्यांच्या पूर्वीच्या देवकाची माहिती किंवा स्मृती उपलब्ध नसल्याचेही नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="Kunkeri1966"/>
या नोंदीवरून सामाजिक आणि सांस्कृतिक संस्था काळानुसार बदलू शकतात, तसेच काही परंपरांची स्मृती कमी होऊ शकते, असे दिसून येते. मात्र कुंकेरी गावातील या नोंदीवरून संपूर्ण सावंतवाडी किंवा कोकणातील सर्व कुणबी कुटुंबांमध्ये समान देवकपरंपरा होती असा निष्कर्ष काढता येत नाही.
=== सामाजिक परिवर्तन ===
विसाव्या शतकात शिक्षणाचा प्रसार, शहरीकरण, स्थलांतर, सरकारी प्रशासन, बाजारपेठांचा विस्तार, सुधारलेले दळणवळण आणि आधुनिक कायदे यांमुळे कुणबी समाजाच्या पारंपरिक सामाजिक आणि आर्थिक जीवनात बदल घडत गेले. रत्नागिरी आणि सावंतवाडीच्या गॅझेटियरमध्ये शिक्षण, दळणवळण, प्रशासन, व्यापार आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेतील बदलांचे वर्णन आढळते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
या परिवर्तनाचा परिणाम विवाहसंस्था, कुटुंबव्यवस्था, व्यवसाय, शिक्षण आणि सामाजिक संघटनांवर झाला. तथापि या बदलांचा वेग आणि स्वरूप प्रदेशानुसार वेगवेगळे होते. १९६१ च्या जनगणनेअंतर्गत करण्यात आलेल्या कुंकेरी गावाच्या सर्वेक्षणात कुटुंबव्यवस्था, व्यवसाय, सामाजिक जीवन आणि सांस्कृतिक परंपरांचा स्वतंत्र अभ्यास करण्यात आला आहे.<ref name="Kunkeri1966"/>
ग्रामीण भागातून मुंबई आणि इतर शहरी केंद्रांकडे होणाऱ्या स्थलांतरामुळे काही कुटुंबांच्या उत्पन्नाच्या स्रोतांमध्येही बदल झाला. १८८३ च्या कोलाबा गॅझेटियरमध्ये महाड आणि माणगाव परिसरातील काही कुणबी भात कापणीचा हंगाम संपल्यानंतर मुंबईकडे किंवा इतर रोजगाराच्या ठिकाणी जात असल्याचे नमूद केले आहे. काही जण हंगामी रोजगार करून पावसाळ्यापूर्वी आपल्या गावाकडे परतत असत. अशा रोजगारातून मिळणाऱ्या उत्पन्नाचा उपयोग बियाणे खरेदी आणि कुटुंबाच्या इतर गरजांसाठी केला जात असल्याचेही वर्णन आढळते.<ref name="KolabaPopulationCommunities">{{cite web
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba — Population and Communities
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Kolaba%20District/population_communities.html
}}</ref>
त्याच गॅझेटियरमध्ये काही कुणबी लष्कर, पोलीस आणि इतर सरकारी सेवांमध्ये प्रवेश करीत असल्याचेही नमूद केले आहे. मुंबईत रोजगार करणारे काही कुणबी आपल्या मूळ गावातील नातेवाईकांना पैसे पाठवत आणि गावातील जमीन व शेतीशी संबंध कायम ठेवत असल्याचे वर्णन आढळते.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
या प्रक्रियेमुळे काही कुटुंबांनी शेती कायम ठेवून शहरी किंवा हंगामी रोजगार स्वीकारला, तर काही कुटुंबांचे उत्पन्न हळूहळू शेतीबाहेरील रोजगाराशी अधिक जोडले गेले. ग्रामीण शेती आणि शहरी रोजगार यांच्यातील हा संबंध पुढील काळात कोकणातील सामाजिक आणि आर्थिक परिवर्तनाचा एक महत्त्वाचा घटक ठरला.
मात्र हा बदल सर्व कुणबी कुटुंबांमध्ये समान प्रमाणात झाला असे मानता येत नाही. १८८३चा गॅझेटियर विशेषतः ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्यातील महाड आणि माणगाव परिसरातील नोंदी देतो. त्यामुळे त्या नोंदींचा उपयोग संबंधित प्रदेशातील कुणबींच्या स्थलांतर आणि रोजगारपद्धतीचा पुरावा म्हणून करणे योग्य आहे; परंतु त्यावरून संपूर्ण कोकणातील कुणबी समाजाच्या स्थलांतराचे सार्वत्रिक स्वरूप निश्चित करता येत नाही.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
कोकणातील ग्रामीण सामाजिक परिवर्तन समजून घेताना शेती, कुटुंब, स्थानिक परंपरा, स्थलांतर आणि बाहेरील रोजगार यांचा परस्परसंबंधही महत्त्वाचा ठरतो. रत्नागिरीतील ग्रामीण जीवनाच्या संदर्भातील स्थानिक ऐतिहासिक आणि सांस्कृतिक नोंदी या व्यापक परिवर्तनाला पूरक संदर्भ देतात.<ref name="घोलम2025" />
=== आधुनिक काळातील सामाजिक ओळख ===
आधुनिक काळात कुणबी समाजाची सामाजिक ओळख पारंपरिक कुळ, देवक, ग्रामजीवन आणि कृषी व्यवसायापुरती मर्यादित राहिलेली नाही. शिक्षणाचा प्रसार, शहरीकरण, विविध व्यवसायांचा स्वीकार, स्थलांतर आणि सामाजिक संस्थांमधील सहभाग यांमुळे समुदायाच्या सामाजिक आणि आर्थिक रचनेत काळानुसार बदल झाले. महाराष्ट्रातील विविध सामाजिक समूहांच्या अधिकृत अभ्यासांमध्येही पारंपरिक सामाजिक आणि आर्थिक रचनेतील या परिवर्तनाचा विचार करण्यात आला आहे.<ref name="MajorCastesTribes"/>
या परिवर्तनामुळे पारंपरिक सामाजिक संस्था पूर्णपणे नष्ट झाल्या असे मानता येत नाही. काही कुटुंबांमध्ये कुळ, देवक, ग्रामदेवता आणि पारंपरिक विवाहनियम आजही सामाजिक आणि सांस्कृतिक ओळखीचा भाग असू शकतात; मात्र त्यांचे स्वरूप प्रदेश, कुटुंब आणि पिढीनुसार बदलू शकते. सावंतवाडी–वेंगुर्ले परिसरातील कुंकेरी गावाच्या सर्वेक्षणात कुणबी मराठा समाजातील देवक आणि संबंधित सामाजिक परंपरांच्या स्थानिक नोंदी करण्यात आल्या आहेत.<ref name="Kunkeri1966"/>
आधुनिक सामाजिक ओळखीच्या निर्मितीत पारंपरिक कृषी व्यवसायाबरोबर शिक्षण, शहरी रोजगार, स्थलांतर आणि आधुनिक सामाजिक व आर्थिक संस्थांचाही प्रभाव पडला आहे. ग्रामीण जीवन आणि शहरी रोजगार यांच्यातील वाढत्या संबंधामुळे काही कुटुंबांच्या उपजीविकेच्या पद्धतींमध्येही बदल झाले. कोकणातील ग्रामीण जीवन, शेती, स्थलांतर आणि बदलत्या सामाजिक संबंधांचा अभ्यास करताना या प्रक्रियांचा परस्परसंबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="घोलम2025" />
तथापि उपलब्ध ऐतिहासिक आणि सामाजिक अभ्यासांवरून आधुनिक कुणबी समाजातील सामाजिक परिवर्तनाचे एकसमान स्वरूप निश्चित करता येत नाही. प्रदेश, आर्थिक स्थिती, कुटुंबाची पार्श्वभूमी, शिक्षण आणि स्थलांतराचा अनुभव यांनुसार सामाजिक परिवर्तनाचे स्वरूप वेगवेगळे असू शकते.
=== सामाजिक रचनेच्या अभ्यासाच्या मर्यादा ===
कुणबी समाजाच्या सामाजिक रचनेविषयी उपलब्ध गॅझेटियर, जनगणना आणि मानववंशशास्त्रीय स्रोत हे त्यांच्या-त्यांच्या काळातील निरीक्षणे आणि अभ्यासपद्धतींवर आधारित आहेत. ब्रिटिशकालीन गॅझेटियर हे प्रामुख्याने प्रशासकीय स्वरूपाचे स्रोत असून त्यामध्ये लोकसंख्या, जमीन, शेती, व्यवसाय, सामाजिक समूह आणि स्थानिक संस्थांविषयी माहिती संकलित करण्यात आली होती.<ref name="RatnagiriGeneralIntroduction">{{cite web
|title=Ratnagiri Gazetteer — General Introduction
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/RATNAGIRI/general_intro.html
}}</ref>
ब्रिटिशकालीन अधिकाऱ्यांनी केलेली जातीय आणि सामाजिक वर्णने तत्कालीन प्रशासकीय दृष्टिकोनातून तयार झाली असल्यामुळे त्यातील प्रत्येक सामाजिक प्रथा संपूर्ण कुणबी समाजाला किंवा संपूर्ण कोकण प्रदेशाला लागू होती असे मानता येत नाही. उदाहरणार्थ, १८८३ च्या कोलाबा गॅझेटियरमध्ये महाड आणि माणगाव परिसरातील काही कुणबींच्या हंगामी स्थलांतराची नोंद आढळते. ही नोंद त्या विशिष्ट प्रदेशातील सामाजिक आणि आर्थिक परिस्थितीचा पुरावा म्हणून महत्त्वाची आहे; मात्र तिच्यावरून संपूर्ण कोकणातील कुणबी समाजाच्या स्थलांतराचे सार्वत्रिक स्वरूप निश्चित करता येत नाही.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
तसेच १९व्या शतकातील कुणबी या सामाजिक किंवा प्रशासकीय संज्ञेची व्याप्ती आणि आधुनिक काळातील कुणबी सामाजिक ओळख यांच्यात थेट समानता गृहीत धरता येत नाही. ऐतिहासिक वर्गीकरणाचा अभ्यास करताना त्या काळातील प्रशासकीय सीमा, जनगणनेची पद्धत, स्थानिक सामाजिक ओळख आणि संबंधित प्रदेशात वापरल्या गेलेल्या संज्ञा यांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे.
सामाजिक रचनेचा ऐतिहासिक अभ्यास करताना गॅझेटियर, जनगणना, गाव-सर्वेक्षण मोनोग्राफ, जमीन व महसूल नोंदी, भाषिक अभ्यास आणि आधुनिक मानववंशशास्त्रीय संशोधन यांची तुलनात्मक चिकित्सा अधिक उपयुक्त ठरते. १९६१ च्या जनगणनेअंतर्गत कुंकेरी गावाचे स्वतंत्र सर्वेक्षण करण्यात आले होते. त्यामध्ये कुटुंब, व्यवसाय, आर्थिक स्थिती, सामाजिक जीवन आणि सांस्कृतिक जीवन यांची माहिती संकलित करण्यात आली होती.<ref name="Kunkeri1966"/>
या सर्व स्रोतांचा वापर करताना वर्णनात्मक माहिती, प्रशासकीय वर्गीकरण आणि त्यातून काढले जाणारे ऐतिहासिक निष्कर्ष यांच्यात स्पष्ट भेद ठेवणे आवश्यक आहे. अशा तुलनात्मक पद्धतीमुळे कुणबी समाजाच्या सामाजिक रचनेतील सातत्य आणि परिवर्तन यांचा अधिक संतुलित आणि पुराव्याधारित अभ्यास करता येतो.
=== सामाजिक रचनेचे ऐतिहासिक महत्त्व ===
कोकणातील कुणबी समाजाची पारंपरिक सामाजिक रचना कुटुंब, कुळ, देवक, विवाह आणि ग्रामजीवन या परस्परसंबंधित संस्थांशी जोडलेली होती. कृषीप्रधान अर्थव्यवस्थेमुळे कुटुंब, जमीन आणि उपजीविका यांचे परस्परसंबंध सामाजिक जीवनात महत्त्वाचे होते. रत्नागिरी आणि ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशाच्या गॅझेटियरमध्ये कुणबींच्या कृषी जीवनासोबत जमीनधारणा, रोजगार आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेशी संबंधित सामाजिक-आर्थिक परिस्थितीची नोंद आढळते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/><ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
कुळ आणि देवक यांसारख्या सामाजिक संस्थांचा अभ्यास करताना स्थानिक आणि प्रत्यक्ष क्षेत्रीय नोंदींना विशेष महत्त्व प्राप्त होते. सावंतवाडी परिसरातील कुंकेरी गावाच्या १९६१ च्या ग्रामसर्वेक्षणात कुणबी मराठा समाजाच्या सामाजिक, धार्मिक आणि सांस्कृतिक जीवनाचे स्वतंत्र दस्तऐवजीकरण करण्यात आले होते.<ref name="Kunkeri1966"/>
काळानुसार जमीनव्यवस्था, स्थलांतर, शिक्षण, शहरीकरण, रोजगाराच्या बदलत्या संधी आणि आधुनिक कायदे यांचा पारंपरिक सामाजिक संस्थांवर परिणाम झाला. महाड आणि माणगाव परिसरातील काही कुणबी कृषक भात कापणीचा हंगाम संपल्यानंतर मुंबईकडे किंवा इतर रोजगाराच्या ठिकाणी जात असल्याची १८८३ च्या कोलाबा गॅझेटियरमधील नोंद या ग्रामीण-नागरी संबंधांच्या ऐतिहासिक प्रक्रियेचे उदाहरण आहे. काही जण हंगामी रोजगारानंतर पावसाळ्यापूर्वी गावाकडे परतत असल्याचेही त्यात नमूद केले आहे.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
या प्रक्रियांमुळे कोकणातील कुणबी समाजाच्या सामाजिक जीवनात ग्रामीण शेती, हंगामी किंवा कायमस्वरूपी स्थलांतर, शहरी रोजगार आणि बदलत्या आर्थिक संबंधांचे परस्परसंघटन दिसून येते. काही कुटुंबांनी पारंपरिक शेतीशी संबंध कायम ठेवून बाहेरील रोजगार स्वीकारला, तर काहींच्या उपजीविकेचे स्वरूप कालांतराने अधिक वैविध्यपूर्ण झाले. तथापि हा बदल सर्व कुणबी कुटुंबांमध्ये किंवा सर्व कोकणी प्रदेशांत समान प्रमाणात झाला असे मानता येत नाही.
कोकणातील कुणबी समाजाच्या सामाजिक इतिहासाचा अभ्यास करताना ऐतिहासिक गॅझेटियर, जनगणना नोंदी, ग्रामसर्वेक्षण मोनोग्राफ, जमीन व महसूलविषयक अभिलेख, भाषिक अभ्यास आणि आधुनिक मानववंशशास्त्रीय संशोधन यांचा परस्परपूरक वापर आवश्यक ठरतो.<ref name="MajorCastesTribes"/>
या स्रोतांच्या तुलनात्मक अभ्यासातून कुणबी समाजातील पारंपरिक सामाजिक संस्था, कृषीआधारित जीवनपद्धती, प्रादेशिक विविधता आणि कालानुसार झालेले सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन यांचा अधिक संतुलित आणि पुराव्याधारित अभ्यास करता येतो.<ref name="घोलम2025" />
=== शेती, जमीन आणि अर्थव्यवस्था ===
कोकणातील कुणबी समाजाच्या पारंपरिक सामाजिक आणि आर्थिक जीवनात शेतीला महत्त्वाचे स्थान होते. रत्नागिरीच्या ऐतिहासिक जमीनव्यवस्थेच्या नोंदींमध्ये कुणबींचा वारसाहक्की कृषकांच्या संदर्भात उल्लेख आढळतो. काही कृषक विशिष्ट जमीनहिस्से पिढ्यान्पिढ्या कसत असल्याचे तसेच जमीनमोजणी, जमिनीचे वर्गीकरण आणि महसूलव्यवस्था यांचा कृषी उत्पादनाशी संबंध असल्याचे ब्रिटिशकालीन नोंदींमधून दिसून येते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
कोकणातील कृषीव्यवस्था भौगोलिक परिस्थितीशी जवळून संबंधित होती. डोंगराळ भूभाग, अरुंद सपाट प्रदेश, नद्या, खाड्या आणि मान्सूनच्या पावसामुळे भातशेतीला विशेष महत्त्व प्राप्त झाले. रत्नागिरीच्या जमीनव्यवस्थेच्या नोंदींमध्ये भातजमिनींचे विविध प्रकार नोंदवले असून, उंचसखल जमिनींवर वेगवेगळ्या पिकांची लागवड केली जात असल्याचे वर्णन आहे. काही भागांत खाडी किंवा किनारी प्रदेशातील पाण्याचे नियमन करून भातखाचरे आणि बागायती जमीन विकसित करण्यात आली होती.<ref name="RatnagiriLandCaptain">{{cite web
|title=Ratnagiri Gazetteer — Land Administration
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Ratnagiri%20and%20Sawantwadi/ratnagiri/land1_captain.html
}}</ref>
कृषी उत्पादनाच्या पद्धती जमिनीचा प्रकार, पाण्याची उपलब्धता आणि स्थानिक हवामान यांनुसार बदलत होत्या. रत्नागिरीच्या नंतरच्या कृषी नोंदींमध्ये भात, नाचणी, वरी, हरिक आणि इतर पिकांसाठी स्वतंत्र जमीनवापर पद्धतींचा उल्लेख आहे. काही वर्खस जमिनींमध्ये जमिनीची सुपीकता टिकवण्यासाठी विशिष्ट कालावधीसाठी जमीन पडीत ठेवण्याची पद्धतीही आढळते.<ref name="RatnagiriCropRotation">{{cite web
|title=Ratnagiri Gazetteer — Crop Rotation
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/RATNAGIRI/agri_crop.html
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=== भातशेती ===
भात हे कोकणातील प्रमुख अन्नधान्य पीक होते. रत्नागिरी जिल्ह्यात १९५५–५६मध्ये अन्नपिकांखालील क्षेत्रापैकी सुमारे ९० टक्के क्षेत्र धान्यपिकांखाली होते. या धान्यपिकांमध्ये भाताला प्रमुख स्थान होते. त्याच वर्षाच्या तालुकानिहाय आकडेवारीत रत्नागिरी जिल्ह्यातील विविध तालुक्यांमध्ये भाताबरोबर नाचणी, कोद्रा, वरी आणि इतर धान्यांचे उत्पादन नोंदवले आहे.<ref name="RatnagiriCereals">{{cite web
|title=Ratnagiri Gazetteer — Cereals
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/RATNAGIRI/agri_cereals.html
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रत्नागिरीतील भातशेतीचे स्वरूप जमिनीच्या उंची, पाण्याची उपलब्धता आणि सिंचनाच्या साधनांनुसार बदलत होते. पावसाळी हंगामातील भाताबरोबरच काही भागांत बारमाही नाले किंवा विहिरींमधून सिंचनाची सुविधा उपलब्ध असल्यास उन्हाळी हंगामातही भात घेतला जात असे. या पिकाला स्थानिक पातळीवर वायंगण भात म्हटले जात असे. सावंतवाडी, कुडाळ आणि मालवण हे वायंगण भाताच्या उत्पादनाचे महत्त्वाचे प्रदेश असल्याची नोंद गॅझेटियरमध्ये आहे.<ref name="RatnagiriCereals"/>
वायंगण भातासाठी शेतात पाणी धरून ठेवण्यासाठी बांधबंदिस्ती करणे, जमीन नांगरून चिखलयुक्त करणे आणि उपलब्ध सिंचनपाण्याचे नियोजन करणे आवश्यक असे. त्यामुळे या प्रकारच्या भातशेतीत जमिनीची रचना, पाण्याचे व्यवस्थापन आणि कृषकांचे स्थानिक ज्ञान यांना विशेष महत्त्व होते.<ref name="RatnagiriCereals"/>
ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्यातही भात हे प्रमुख पीक होते. उपलब्ध गॅझेटियर नोंदीनुसार १९५८–५९मध्ये कोलाबा जिल्ह्यात मोठ्या क्षेत्रावर भाताची लागवड करण्यात आली होती. अलिबाग, पनवेल, माणगाव, महाड, रोहा आणि कर्जत या प्रदेशांमध्ये भात उत्पादनाचे महत्त्व होते.<ref name="KolabaCereals">{{cite web
|title=Kolaba Gazetteer — Cereals
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/KOLABA/agri_cereals.html
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भातशेतीमुळे कुणबी समाजाच्या ग्रामीण जीवनावरही परिणाम झाला. पेरणी, रोपलागवड, निंदणी, कापणी, मळणी आणि धान्यसाठवण या कृषी प्रक्रियांभोवती ग्रामीण कुटुंबांचे वार्षिक कामाचे चक्र मोठ्या प्रमाणावर संघटित होत असे. कृषी उत्पादन हे केवळ अन्नाचा स्रोत नसून कुटुंबाच्या आर्थिक स्थिती, पशुधन, स्थानिक देवाणघेवाण आणि बाजारपेठेशी असलेल्या संबंधांशीही जोडलेले होते.<ref name="घोलम2025" />
तथापि कोकणातील सर्व कुणबी कुटुंबांची कृषीपद्धती किंवा आर्थिक स्थिती समान होती असे मानता येत नाही. जमीनधारणा, जमिनीचा प्रकार, सिंचनाची उपलब्धता, उत्पादनाचे प्रमाण, कुटुंबातील मनुष्यबळ आणि बाहेरील रोजगाराच्या संधी यांनुसार कृषीजीवनाचे स्वरूप बदलत होते. त्यामुळे कुणबी समाजाच्या आर्थिक इतिहासाचा अभ्यास करताना शेतीबरोबर जमीनव्यवस्था, ग्रामीण रोजगार आणि स्थलांतर या घटकांचाही विचार करणे आवश्यक आहे.
=== नाचणी आणि इतर धान्ये ===
भाताबरोबर नाचणी किंवा रागी हे कोकणातील महत्त्वाचे धान्यपीक होते. रत्नागिरीच्या कृषी नोंदींमध्ये नाचणीचा भातानंतरच्या प्रमुख धान्यपिकांमध्ये समावेश करण्यात आला आहे. १९५५–५६ च्या आकडेवारीनुसार रत्नागिरी जिल्ह्यात नाचणीची लागवड मोठ्या क्षेत्रावर केली जात होती. चिपळूण, दापोली, संगमेश्वर, राजापूर, खेड आणि गुहागर या तालुक्यांमध्ये नाचणीचे उत्पादन विशेष उल्लेखनीय असल्याची नोंद गॅझेटियरमध्ये आढळते.<ref name="RatnagiriCereals"/>
नाचणीची लागवड प्रामुख्याने डोंगराळ, उंचसखल आणि तुलनेने कमी पाण्याच्या उपलब्धतेच्या प्रदेशांशी संबंधित होती. त्यामुळे कोकणातील भातखाचरांबरोबरच वर्खस आणि डोंगराळ जमिनींच्या कृषी अर्थव्यवस्थेत नाचणीला महत्त्वाचे स्थान होते. कुणबी समाजाच्या पारंपरिक कृषीजीवनात भाताबरोबर नाचणी, वरी आणि इतर स्थानिक धान्यांचा उपयोग अन्नधान्याच्या गरजा पूर्ण करण्यासाठी केला जात असे.<ref name="घोलम2025" />
ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्यातही भाताबरोबर नाचणी, वरी आणि कोद्रा यांसारख्या धान्यांची लागवड केली जात होती. जिल्ह्याच्या कृषी नोंदींमध्ये भात आणि नाचणी या दोन्ही पिकांना महत्त्वाचे स्थान असल्याचे दिसून येते. महाड, माणगाव आणि इतर अंतर्गत प्रदेशांतील भौगोलिक परिस्थितीनुसार विविध धान्यपिकांची लागवड केली जात असल्याचे कृषीविषयक नोंदींमधून स्पष्ट होते.<ref name="KolabaCereals"/>
=== कडधान्ये ===
भातशेतीनंतर उपलब्ध होणाऱ्या जमिनीचा उपयोग काही प्रदेशांत कडधान्यांच्या लागवडीसाठी केला जात असे. ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्याच्या कृषी नोंदींमध्ये वाल, उडीद आणि हरभरा यांसारख्या कडधान्यांचा उल्लेख आढळतो. काही ठिकाणी ही पिके भातानंतरच्या हंगामात घेतली जात असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद केले आहे.<ref name="KolabaPulses">{{cite web
|title=Kolaba Gazetteer — Pulses
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/KOLABA/agri_pulses.html
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कडधान्यांच्या लागवडीमुळे भातावर मोठ्या प्रमाणावर अवलंबून असलेल्या कृषी अर्थव्यवस्थेत पिकांची विविधता निर्माण होत होती. जमिनीचा प्रकार, उपलब्ध ओलावा, हंगाम आणि स्थानिक कृषीपद्धती यांनुसार कडधान्यांची लागवड केली जात असे. काही भागांत भात कापणीनंतर त्याच जमिनीवर पुढील पीक घेतले जात असल्याचे कृषी नोंदींवरून दिसून येते.<ref name="KolabaPulses"/>
या पिकांच्या विविधतेचा संबंध ग्रामीण कुटुंबांच्या अन्नसुरक्षा आणि कृषी अर्थव्यवस्थेशीही होता. भात हे प्रमुख अन्नधान्य असले तरी नाचणी, वरी, कडधान्ये आणि इतर स्थानिक पिकांमुळे कुटुंबांच्या अन्नधान्याच्या गरजांमध्ये विविधता निर्माण होत असे. त्यामुळे कोकणातील कृषीजीवन केवळ भातशेतीपुरते मर्यादित न राहता विविध पिकांच्या हंगामी चक्रावर आधारित होते.
=== नारळ आणि सुपारी ===
कोकणातील किनारी हवामान आणि उपलब्ध पाणीस्रोतांमुळे नारळाच्या बागांना कृषी अर्थव्यवस्थेत महत्त्व प्राप्त झाले. ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्याच्या कृषी नोंदींनुसार समुद्रकिनारी आणि किनारी प्रदेशांमध्ये नारळाची लागवड मोठ्या प्रमाणावर केली जात होती. काही भागांतील बागायती अर्थव्यवस्थेत नारळाला महत्त्वाचे स्थान होते.<ref name="KolabaCroppedArea">{{cite web
|title=Kolaba Gazetteer — Cropped Area
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/KOLABA/agri_cropped_area.html
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रत्नागिरीतील नारळबागांच्या संदर्भात विहिरीच्या पाण्याचा सिंचनासाठी उपयोग केला जात असल्याची नोंद कृषीविषयक स्रोतांमध्ये आढळते. हिवाळा आणि उन्हाळ्याच्या काळात नारळाच्या झाडांना पुरेसे पाणी उपलब्ध करून देणे आवश्यक असल्याचेही या नोंदींमध्ये नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="RatnagiriOilSeeds">{{cite web
|title=Ratnagiri Gazetteer — Oil Seeds
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/RATNAGIRI/agri_oil%20seeds.html
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नारळाबरोबर सुपारी आणि इतर बागायती पिकेही किनारी कोकणातील कृषी उत्पादनाच्या विविधतेचा भाग होती. या बागायती पिकांचा उपयोग स्थानिक उपभोगाबरोबरच बाजारपेठीय देवाणघेवाणीतही होत असे. तथापि उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतांवरून ही सर्व बागायती पिके विशेषतः कुणबी समाजाच्या मालकीची होती असा सर्वसाधारण निष्कर्ष काढता येत नाही. त्यामुळे या पिकांचा विचार कोकणातील व्यापक कृषी अर्थव्यवस्थेच्या संदर्भात करणे अधिक योग्य ठरते.
=== आंबा, काजू आणि कोकम ===
आंबा, काजू आणि कोकम यांसारख्या बागायती उत्पादनांना पुढील काळात कोकणाच्या कृषी अर्थव्यवस्थेत महत्त्व प्राप्त झाले. या पिकांचा विस्तार, उत्पादनाची बाजारपेठ, प्रक्रिया आणि वाहतूक यांचा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेवर परिणाम झाला. विशेषतः कोकणातील बागायती शेतीच्या विकासाचा विचार करताना आंबा, काजू आणि कोकम यांसारख्या पिकांचा स्वतंत्रपणे अभ्यास करता येतो.
मात्र या लेखाच्या ऐतिहासिक संदर्भात आंबा, काजू किंवा कोकमाची लागवड प्राचीन काळापासून कुणबी समाजाची विशिष्ट शेती होती असा निष्कर्ष उपलब्ध पुराव्यांच्या आधारे काढता येत नाही. या पिकांना कोकणातील व्यापक बागायती, कृषीविविधता आणि बाजाराभिमुख ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या विकासाच्या संदर्भात मांडणे अधिक योग्य आहे.
कोकणातील बागायती शेतीचा सामाजिक इतिहास समजून घेताना जमीनधारणा, कुटुंबाची आर्थिक क्षमता, पाण्याची उपलब्धता, बाजारपेठेशी संपर्क आणि कृषी उत्पादनातील बदल या घटकांचा विचार करणे आवश्यक आहे. त्यामुळे बागायती पिकांचा इतिहास हा केवळ एखाद्या एका सामाजिक समुदायाचा इतिहास न राहता संपूर्ण कोकणी ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या परिवर्तनाशी संबंधित ठरतो.
=== पशुधन आणि शेती ===
पारंपरिक कोकणी शेतीमध्ये पशुधनाचा कृषी उत्पादनाशी घनिष्ठ संबंध होता. नांगरणी, वाहतूक, मळणी आणि इतर श्रमप्रधान कृषी कामांसाठी बैलांचा उपयोग केला जात असे. बैल, गायी आणि म्हशी यांसारखे पशुधन ग्रामीण कुटुंबांच्या आर्थिक जीवनाचा तसेच कृषी उत्पादनाच्या साधनांचा एक भाग होते.
कोलाबा जिल्ह्यातील कुणबी कृषकांच्या वर्णनात बैलजोडी, गाय किंवा म्हैस तसेच शेतीची विविध अवजारे यांचा उल्लेख आढळतो. यावरून पशुधन आणि शेतीची साधने ही कृषक कुटुंबाच्या उत्पादनक्षमतेशी संबंधित महत्त्वाची साधने होती असे दिसून येते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
रत्नागिरीतील ऐतिहासिक कृषी व्यवस्थेच्या वर्णनांमध्ये शेतीकामात कुटुंबातील विविध सदस्यांचा सहभाग असल्याचे आढळते. कृषीप्रधान कुटुंबव्यवस्थेत पुरुषांबरोबर स्त्रिया आणि मुलेही काही श्रमप्रधान शेतीकामांत सहभागी होत असल्याच्या नोंदी आहेत.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
पशुधनाचा उपयोग केवळ शेतीच्या प्रत्यक्ष कामांसाठी होत नव्हता. दूध, शेणखत आणि वाहतूक यांसारख्या माध्यमांतूनही त्याचा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेला उपयोग होत असे. त्यामुळे पारंपरिक कोकणी कृषीव्यवस्थेत जमीन, मनुष्यबळ, पशुधन आणि कृषी साधने हे परस्परावलंबी घटक होते.
कुणबी समाजाच्या संदर्भात पशुधनाचे महत्त्व मांडताना मात्र आर्थिक स्थितीनुसार कुटुंबांच्या पशुधनाच्या संख्येत आणि प्रकारात फरक असू शकत होता, हे लक्षात घेणे आवश्यक आहे. त्यामुळे प्रत्येक कुणबी कुटुंबाकडे समान प्रमाणात पशुधन किंवा कृषी साधने होती असे मानता येत नाही.
=== जलव्यवस्था आणि सिंचन ===
कोकणातील कृषीव्यवस्था प्रामुख्याने मान्सूनच्या पावसावर अवलंबून असली तरी भातशेतीसाठी स्थानिक जलसंधारण आणि सिंचन पद्धतींचाही उपयोग केला जात होता. रत्नागिरीच्या कृषी नोंदींमध्ये भातखाचरांमध्ये बांध घालून पाणी साठवणे, जमिनीत पाणी टिकवून ठेवणे आणि उपलब्ध पाण्याचा नियंत्रित वापर करणे यांचा उल्लेख आढळतो.<ref name="RatnagiriCereals"/>
उन्हाळी किंवा वायंगण भातासाठी विहिरी, बारमाही नाले आणि बांधबंदिस्त शेतांचा उपयोग केला जात असल्याचीही नोंद आहे. पाणी शेतात टिकवून ठेवण्यासाठी शेतांचे विभाग करून बांध तयार केले जात आणि उपलब्ध पाण्यानुसार सिंचन केले जात असे.<ref name="RatnagiriCereals"/>
या प्रकारच्या जलव्यवस्थेमुळे पावसाळ्यानंतरही काही भागांत कृषी उत्पादन सुरू ठेवणे शक्य होत असे. त्यामुळे कोकणातील शेतीमध्ये पाऊस, जमीन, जलसंधारण, बांधबंदिस्ती आणि स्थानिक सिंचनपद्धती यांचा परस्परसंबंध महत्त्वाचा होता.
ब्रिटिशकालीन कृषी प्रशासनात विहिरी, तलाव, सिंचन, जलनिचरा, जमीन सुधारणा आणि पुनर्वसन यांसाठी आर्थिक सहाय्याच्या योजना विकसित करण्यात आल्या. रत्नागिरीच्या नोंदींमध्ये जमीन सुधारणा कर्जांच्या अंतर्गत विहिरी, तलाव, सिंचन, जलनिचरा आणि जमीन सुधारणा यांसाठी कर्जाची तरतूद करण्यात आल्याचे नमूद आहे.<ref name="RatnagiriStateAidAgriculture">{{cite web
|title=Ratnagiri Gazetteer — State Aid to Agriculture
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/RATNAGIRI/finance_state_agri.html
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या जलव्यवस्थेचा कुणबी समाजाशी संबंध पाहताना एक महत्त्वाची बाब लक्षात घ्यावी लागते. कुणबी हे कोकणातील महत्त्वाचे कृषक समुदाय असले तरी जलव्यवस्था किंवा सिंचनपद्धती केवळ कुणबी समाजापुरती मर्यादित नव्हती. त्यामुळे या पद्धतींचा अभ्यास व्यापक कोकणी कृषी अर्थव्यवस्थेच्या संदर्भात करणे अधिक योग्य ठरते.
=== जमीनधारणा आणि कृषक हक्क ===
कोकणातील कुणबी समाजाचा सामाजिक आणि आर्थिक इतिहास समजून घेण्यासाठी जमीनधारणा हा महत्त्वाचा घटक आहे. रत्नागिरीच्या जमीन प्रशासनाच्या नोंदींमध्ये कुणबींची वारसाहक्की कृषकांमध्ये मोठ्या संख्येने उपस्थिती असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. काही कुणबी कुटुंबे निश्चित जमीनहिस्सा कसत असून त्या जमिनीवरील कृषी कामकाजाशी त्यांचे दीर्घकालीन संबंध असल्याचे या नोंदींवरून दिसते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
रत्नागिरीतील खोती व्यवस्थेच्या संदर्भात काही कुणबी आणि इतर कृषक कर्दे किंवा भाडेकरू म्हणून जमीन कसत असल्याच्या नोंदी आढळतात. गॅझेटियरमधील वर्णनानुसार अशा कृषकांना त्यांच्या पारंपरिक जमीनहिस्स्याशी संबंधित काही दीर्घकालीन हक्क प्राप्त होते आणि ठरावीक परिस्थिती व कायदेशीर चौकट वगळता त्यांना सहजपणे बेदखल करता येत नसे.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
याउलट धारेकरी हा राज्याकडून थेट जमीनधारणा करणारा कृषक होता. रत्नागिरीच्या गॅझेटियरमधील जमीन प्रशासनाच्या वर्णनानुसार धारेकऱ्याला आपल्या धारण केलेल्या जमिनीबाबत वारसाहक्क, हस्तांतरण आणि गहाण ठेवण्यासंबंधी काही अधिकार होते; हे अधिकार राज्याच्या महसुली मागणीच्या अधीन होते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
या जमीनव्यवस्थेमुळे कोकणातील कृषक समाजात जमीनधारणेचे विविध स्तर निर्माण झाले होते. जमीनधारक कृषक, भाडेकरू आणि इतर प्रकारचे शेती करणारे घटक यांची आर्थिक आणि सामाजिक स्थिती समान नव्हती. त्यामुळे कुणबी समाजाला केवळ एकसमान जमीनधारक किंवा समान आर्थिक स्थिती असलेला कृषक समुदाय म्हणून पाहणे ऐतिहासिकदृष्ट्या अचूक ठरणार नाही.
जमीन, पाणी आणि कृषी उत्पादन यांच्यातील संबंधामुळे जमीनधारणेचा परिणाम कुणबी कुटुंबांच्या आर्थिक स्थितीवरही होत होता. सुपीक जमीन, सिंचनाची उपलब्धता, जमीनहिस्सा, कृषी उत्पादन आणि बाजारपेठेशी संपर्क या घटकांनुसार कुटुंबांच्या आर्थिक परिस्थितीत फरक पडत असे. म्हणून कोकणातील कुणबी समाजाचा आर्थिक इतिहास समजून घेताना जमीनधारणा आणि स्थानिक जमीनव्यवस्थेचा स्वतंत्र विचार करणे आवश्यक आहे.
=== कृषी मजुरी ===
कोकणातील कृषी अर्थव्यवस्थेत स्वतःची जमीन कसणारे कृषक, भाडेकरू, कुटुंबीय श्रमिक आणि कृषी मजूर असे विविध घटक कार्यरत होते. रत्नागिरीच्या ऐतिहासिक नोंदींनुसार कृषी हंगामातील मजुरीवर ग्रामीण कामगारांच्या उत्पन्नाचा काही भाग अवलंबून असे. शेतीतील कामाचा हंगाम संपल्यानंतर वर्षातील उर्वरित काळात रोजगाराच्या शोधासाठी काही कामगारांना इतर प्रदेशांकडे जावे लागत असे.<ref name="RatnagiriCapitalLabour">{{cite web
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Ratnagiri and Savantvadi — Capital and Labour
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Ratnagiri%20and%20Sawantwadi/ratnagiri/capitals1_capitalists.html
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१८५१ च्या कृषी व जमीन प्रशासनासंबंधीच्या नोंदींमध्ये ग्रामीण लोकसंख्येतील मोठ्या घटकाला स्थानिक शेतीतून वर्षभर पुरेसे उत्पन्न मिळत नसल्यामुळे हंगामी रोजगारासाठी बाहेर जावे लागत असल्याचे नमूद आहे. या नोंदीनुसार काही मजूर नोव्हेंबरच्या सुमारास मुंबई आणि आसपासच्या प्रदेशांकडे रोजगारासाठी जात आणि पावसाळा सुरू होण्यापूर्वी आपल्या गावाकडे परतत असत.<ref name="RatnagiriLandCaptain"/>
हंगामी स्थलांतरामुळे ग्रामीण कुटुंबांच्या उत्पन्नाचे स्रोत केवळ शेतीपुरते मर्यादित राहत नसत. शेतीचा हंगाम, उपलब्ध जमीन, स्थानिक रोजगार आणि बाहेरील प्रदेशातील मजुरीच्या संधी यांचा कुटुंबांच्या आर्थिक स्थितीवर परिणाम होत असे. या प्रक्रियेचा परिणाम कुणबींसह कोकणातील इतर कृषक आणि ग्रामीण समुदायांवरही झाला. मात्र उपलब्ध ऐतिहासिक नोंदींवरून हा नमुना सर्व कुणबी कुटुंबांना समान प्रमाणात लागू होता असे म्हणता येत नाही.
=== बाजारपेठ आणि कृषी उत्पादन ===
कोकणातील कृषी अर्थव्यवस्था स्थानिक बाजारपेठांबरोबरच जिल्ह्याबाहेरील व्यापार आणि वाहतुकीशीही जोडलेली होती. रत्नागिरीच्या गॅझेटियरमधील नोंदीनुसार काही काळ जिल्ह्यातील स्थानिक कृषी उत्पादन लोकसंख्येच्या गरजा पूर्ण करण्यासाठी अपुरे पडत असल्यामुळे बाहेरील प्रदेशांतून धान्य आणावे लागत असे.<ref name="RatnagiriCapitalLabour"/>
वाहतुकीची साधने मर्यादित असलेल्या काळात ग्रामीण भागातून कृषी उत्पादन बाजारपेठांपर्यंत पोहोचवणे हे एक महत्त्वाचे आव्हान होते. १८५१ च्या नोंदींमध्ये काही भागांत कृषी उत्पादन मानवी वाहतुकीद्वारे बाजारपेठेत नेले जात असल्याचे वर्णन आढळते. त्यामुळे वाहतूकव्यवस्था आणि बाजारपेठेपर्यंत पोहोचण्याची क्षमता यांचा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेवर थेट परिणाम होत असे.<ref name="RatnagiriLandCaptain"/>
ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्यातील कृषी अर्थव्यवस्थेतही अन्नपिकांना महत्त्वाचे स्थान होते. १९५८–५९ च्या कृषी नोंदीनुसार जिल्ह्याच्या एकूण सकल पीकक्षेत्रापैकी ८० टक्क्यांहून अधिक क्षेत्र अन्नपिकांखाली होते. त्यामध्ये धान्य आणि कडधान्यांचा मोठा वाटा होता.<ref name="KolabaCroppedArea"/>
कोकणातील कुणबी समाजाच्या आर्थिक इतिहासाच्या संदर्भात बाजारपेठेचे महत्त्व केवळ कृषी उत्पादनाच्या विक्रीपुरते मर्यादित नव्हते. कृषी उत्पादन, हंगामी मजुरी, धान्याची उपलब्धता, वाहतूक आणि बाहेरील रोजगाराच्या संधी यांमधील परस्परसंबंधामुळे ग्रामीण कुटुंबांचे आर्थिक जीवन व्यापक प्रादेशिक अर्थव्यवस्थेशी जोडले गेले होते. त्यामुळे कुणबी समाजाच्या कृषी इतिहासाचा अभ्यास करताना जमीन आणि शेतीबरोबरच मजुरी, हंगामी स्थलांतर, वाहतूक आणि बाजारपेठ यांचाही विचार करणे आवश्यक ठरते.
=== कुणबी केवळ शेतकरी नव्हते ===
कुणबी समाजाची ऐतिहासिक ओळख कृषीशी निकटपणे संबंधित होती; तथापि कुणबी म्हणजे केवळ शेतकरी अशी समानता करणे ऐतिहासिक स्रोतांच्या आधारे योग्य ठरत नाही. रत्नागिरीच्या जमीनव्यवस्थेच्या नोंदींमध्ये कुणबींचा मोठ्या संख्येने कृषक म्हणून उल्लेख आढळतो. त्याच वेळी ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्याच्या १८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये महाड आणि माणगाव परिसरातील काही कुणबी हंगामी रोजगारासाठी मुंबईकडे जात असल्याचे तसेच काही कुणबी लष्कर, पोलीस आणि इतर सरकारी सेवांमध्ये कार्यरत असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/><ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
कुणबींच्या आर्थिक जीवनात स्वतःची जमीन कसणे, भाडेकरू म्हणून शेती करणे, कृषी मजुरी करणे, हंगामी रोजगारासाठी स्थलांतर करणे आणि शेतीबाहेरील व्यवसाय किंवा सेवा स्वीकारणे अशी विविध रूपे आढळत होती. रत्नागिरीच्या नोंदींमध्ये कृषक आणि कृषी मजुरांना वर्षातील काही काळ रोजगारासाठी मुंबई व इतर प्रदेशांकडे जावे लागत असल्याचे नमूद आहे. कोलाबा गॅझेटियरमध्येही महाड आणि माणगाव परिसरातील कुणबींच्या हंगामी स्थलांतराबरोबरच लष्कर, पोलीस आणि सरकारी सेवांमध्ये प्रवेशाचा उल्लेख आढळतो.<ref name="RatnagiriCapitalLabour"/><ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
या नोंदींवरून कोकणातील कुणबींची ऐतिहासिक अर्थव्यवस्था कृषीप्रधान असली तरी ती केवळ स्वतःची शेती कसण्यापुरती मर्यादित नव्हती असे दिसून येते. जमीनधारणा, भाडेकरू शेती, कृषी मजुरी, हंगामी स्थलांतर आणि विविध प्रकारचे शेतीबाहेरील रोजगार हे त्यांच्या आर्थिक जीवनाचे काही घटक होते. तथापि उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतांवरून या आर्थिक भूमिकांचे प्रमाण संपूर्ण कुणबी समाजात समान होते असा निष्कर्ष काढता येत नाही. प्रदेश, जमीनधारणा, कृषी उत्पादन, रोजगाराच्या उपलब्ध संधी आणि स्थानिक आर्थिक परिस्थितीनुसार कुणबी कुटुंबांच्या उपजीविकेच्या पद्धतींमध्ये फरक असण्याची शक्यता होती.
=== आधुनिक कृषी परिवर्तन ===
विसाव्या शतकाच्या मध्यापासून कोकणातील कृषी व्यवस्थेत सुधारित बियाणे, खते, सुधारित कृषी अवजारे, सिंचन, जमीन सुधारणा आणि सरकारी कृषी कर्ज यांचा वापर वाढत गेला. १९६१ च्या कुंकेरी ग्रामसर्वेक्षणात सुधारित बियाणे, खते, सुधारित जनावरे, कृषी अवजारे, सिंचन, कीडनियंत्रण आणि जमीन सुधारणा यांसारख्या कृषी सुविधांच्या उपलब्धतेविषयी स्वतंत्र माहिती संकलित करण्यात आली होती.<ref name="Kunkeri1966"/>
रत्नागिरीच्या कृषी नोंदींमध्ये १९५३–५६ या कालावधीत नव्याने जमीन लागवडीखाली आणणे, कृषी प्रात्यक्षिके आणि ‘तगाई’ किंवा कृषी कर्जाच्या स्वरूपातील सरकारी सहाय्य यांचा उल्लेख आढळतो.<ref name="RatnagiriCereals"/>
कृषी सुधारण्यासाठी विहिरी, तलाव, सिंचन, जलनिचरा, जमीन सुधारणा आणि पुनर्वसन यांसाठी कर्जपुरवठ्याची प्रशासकीय व्यवस्था विकसित करण्यात आली. रत्नागिरीच्या गॅझेटियरमध्ये जमीन सुधारणा कर्जे आणि कृषक कर्जे यांसारख्या योजनांचा उल्लेख असून विहिरी व सिंचनाच्या कामांसाठीही कर्ज उपलब्ध करून दिले जात असल्याचे नमूद आहे.<ref name="RatnagiriStateAidAgriculture"/>
भातशेतीतही तांत्रिक बदल झाले. रत्नागिरीच्या कृषी नोंदींमध्ये काही सुधारित भातवाणांचा उल्लेख असून त्यांच्या पक्व होण्याच्या कालावधीची माहिती देण्यात आली आहे. उन्हाळी भातासाठी बांधबंदिस्त शेत, पाण्याचे नियंत्रित व्यवस्थापन आणि सिंचनाचा वापर यांमुळे काही भागांत वर्षातून एकापेक्षा अधिक पिके घेणे शक्य झाले.<ref name="RatnagiriCereals"/>
कृषीतील या बदलांचा परिणाम केवळ उत्पादनपद्धतीवर झाला नाही, तर ग्रामीण कुटुंबांच्या आर्थिक जीवनावरही झाला. सुधारित कृषी तंत्रज्ञान, सिंचन, कर्जपुरवठा आणि बाजारपेठेशी वाढलेले संबंध यांमुळे पारंपरिक कृषी व्यवस्थेत हळूहळू परिवर्तन घडून आले. तथापि या सुविधा सर्व प्रदेशांत किंवा सर्व कृषक कुटुंबांना समान प्रमाणात उपलब्ध झाल्या असे उपलब्ध स्रोतांवरून म्हणता येत नाही.
=== शेती, जमीन आणि कुणबी समाज : ऐतिहासिक निष्कर्ष ===
उपलब्ध ऐतिहासिक पुराव्यांवरून कोकणातील कुणबी समाजाची पारंपरिक आर्थिक ओळख कृषीशी निकटपणे संबंधित होती. रत्नागिरीच्या जमीनव्यवस्थेच्या नोंदींमध्ये कुणबींचा मोठ्या संख्येने वारसाहक्की कृषक म्हणून उल्लेख आढळतो. त्याचप्रमाणे ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्याच्या गॅझेटियरमध्ये महाड–माणगाव परिसरातील कुणबींच्या शेतीशी संबंधित जीवनाबरोबरच हंगामी स्थलांतर आणि विविध प्रकारच्या रोजगारांचा उल्लेख करण्यात आला आहे.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/><ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
त्यामुळे कुणबी समाजाला केवळ ‘शेतकरी जात’ म्हणून मर्यादित करणे ऐतिहासिकदृष्ट्या अपुरे ठरते. उपलब्ध नोंदींनुसार कुणबी हा कोकणातील कृषीप्रधान ग्रामीण समाजाचा एक महत्त्वाचा घटक होता; मात्र त्याच्या आर्थिक जीवनात जमीनधारणा, भाडेकरू शेती, कृषी मजुरी, हंगामी स्थलांतर तसेच सरकारी, लष्करी आणि इतर रोजगारांचाही समावेश होता.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
या आर्थिक विविधतेचा विचार करताना प्रदेश आणि काळ यांचा संदर्भ महत्त्वाचा ठरतो. सर्व कुणबी कुटुंबांची जमीनधारणा, आर्थिक स्थिती किंवा रोजगाराची पद्धत समान होती असे उपलब्ध स्रोतांवरून म्हणता येत नाही. कृषी उत्पादन, जमिनीची उपलब्धता, स्थानिक रोजगाराच्या संधी आणि बाजारपेठेशी असलेला संपर्क यांनुसार त्यांच्या आर्थिक जीवनात भिन्नता होती.
=== स्थलांतर आणि मुंबईशी संबंध ===
कोकणातील कुणबी समाजाचा सामाजिक आणि आर्थिक इतिहास हा स्थलांतराच्या व्यापक प्रक्रियेशी संबंधित होता. विशेषतः रत्नागिरी आणि ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्यांमध्ये मर्यादित कृषी उत्पन्न, हंगामी रोजगाराची आवश्यकता आणि मुंबईतील वाढत्या रोजगाराच्या संधी यांमुळे ग्रामीण लोकसंख्येचे मुंबईशी आर्थिक संबंध विकसित झाले. रत्नागिरीच्या १८८० च्या गॅझेटियरमध्ये जिल्ह्यातील ग्रामीण लोकांच्या मुंबईकडे होणाऱ्या रोजगाराधारित स्थलांतराची नोंद आढळते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
रत्नागिरी जिल्ह्याच्या १८८० च्या गॅझेटियरनुसार मुंबईशी समुद्रमार्गे आणि जमिनीमार्गे असलेल्या संपर्कामुळे जिल्ह्यातील लोकांना मुंबईतील रोजगाराच्या संधी उपलब्ध होत होत्या. मोठ्या संख्येने लोक मुंबईकडे जाऊन विविध प्रकारचे काम करीत असल्याचे तसेच त्यांपैकी काही जण मुंबईत अंशतः स्थायिक झाल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्यातील नोंदींमध्येही महाड आणि माणगाव परिसरातील काही कुणबी भात कापणीचा हंगाम संपल्यानंतर मुंबई आणि इतर रोजगाराच्या ठिकाणी जात असल्याचे नमूद आहे. काही जण हंगामी रोजगार करून पावसाळ्यापूर्वी आपल्या गावाकडे परतत असत. अशा रोजगारातून मिळणारे उत्पन्न बियाणे खरेदी आणि कुटुंबाच्या इतर गरजांसाठी वापरले जात असल्याचेही नोंदवण्यात आले आहे.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
या स्थलांतरामुळे ग्रामीण कुटुंबांचे आर्थिक जीवन शेतीपुरते मर्यादित न राहता मुंबईसारख्या वाढत्या नागरी केंद्रांशी जोडले गेले. काही कुटुंबांनी शेतीशी संबंध कायम ठेवून हंगामी किंवा कायमस्वरूपी बाहेरील रोजगार स्वीकारला, तर काहींच्या उपजीविकेचे स्वरूप अधिकाधिक शहरी अर्थव्यवस्थेशी संबंधित झाले. तथापि उपलब्ध ऐतिहासिक नोंदींवरून या प्रक्रियेचे प्रमाण संपूर्ण कुणबी समाजात समान होते असा निष्कर्ष काढता येत नाही.
=== रत्नागिरी ते मुंबई : स्थलांतराची सुरुवात ===
मुंबईकडे होणारे कोकणी स्थलांतर हे कापड गिरण्यांच्या विस्तारापूर्वीच अस्तित्वात होते. मुंबईच्या बंदराशी, जहाजवाहतूक, बांधकाम, लष्कर, पोलीस, गोदामे आणि इतर रोजगारांशी संबंधित कामांसाठी कोकणातील ग्रामीण भागातून लोक मुंबईकडे जात असत. पुढील काळात मुंबईच्या औद्योगिक आणि विशेषतः कापड उद्योगाच्या विस्तारामुळे या स्थलांतराला अधिक व्यापक रोजगाराधार प्राप्त झाला. मुंबईच्या कामगारवर्गाच्या निर्मितीत ग्रामीण भागातील स्थलांतराचे महत्त्व आणि कामगारांचे ग्रामीण संबंध यांचा राजनारायण चांदवणकर यांनी अभ्यास केला आहे.<ref name="Chandavarkar1994">{{cite book
|last=Chandavarkar
|first=Rajnarayan
|title=The Origins of Industrial Capitalism in India: Business Strategies and the Working Classes in Bombay, 1900–1940
|publisher=Cambridge University Press
|location=Cambridge
|year=1994
}}</ref>
एकोणिसाव्या शतकाच्या उत्तरार्धात आणि विसाव्या शतकाच्या पूर्वार्धात मुंबईतील औद्योगिक वाढीसोबत कोकण आणि विशेषतः रत्नागिरी जिल्हा हा मुंबईच्या श्रमबाजाराशी संबंधित महत्त्वाचा प्रदेश बनला. या प्रक्रियेत ग्रामीण अर्थव्यवस्थेतील रोजगाराच्या मर्यादा, जमिनीवरील दबाव आणि मुंबईतील वाढत्या रोजगाराच्या संधी यांचा परस्परसंबंध होता.<ref name="RoyalCommissionLabour1931">{{cite report
|title=Report of the Royal Commission on Labour in India
|publisher=Government of India
|year=1931
|url=https://indianlabourarchives.org/bitstream/20.500.14121/168/4/Report%20of%20the%20Royal%20Commission%20on%20Labour%20in%20India.pdf
}}</ref>
रत्नागिरीच्या १८८० च्या गॅझेटियरमध्ये मुंबईशी असलेल्या रोजगारसंबंधांचा उल्लेख आढळतो. समुद्रमार्गे आणि जमिनीमार्गे असलेल्या संपर्कामुळे रत्नागिरी जिल्ह्यातील लोकांना मुंबईतील रोजगाराच्या संधी उपलब्ध होत होत्या आणि जिल्ह्यातील मोठ्या संख्येने लोक मुंबईत कामासाठी जात असल्याचे नोंदवण्यात आले आहे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
=== कुणबी आणि हंगामी स्थलांतर ===
कुणबी समाजाच्या बाबतीत हंगामी स्थलांतराचा थेट पुरावा १८८३ च्या कोलाबा गॅझेटियरमध्ये आढळतो. महाड आणि माणगाव परिसरातील कुणबी भात कापणीचा हंगाम संपल्यानंतर नोव्हेंबर किंवा डिसेंबरमध्ये मुंबई आणि इतर मजूर बाजारपेठांकडे जात असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद आहे. ते अनुकूल हवामानाच्या काळात काम करून उन्हाळ्याच्या अखेरीस गावाकडे परतत असत. या रोजगारातून मिळालेल्या पैशांचा उपयोग बियाणे खरेदी आणि पावसाळ्यात कुटुंबाच्या उदरनिर्वाहासाठी केला जात असल्याची नोंद आहे.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
या हंगामी स्थलांतरात गावातील जमीन आणि शहरातील रोजगार यांचा परस्परसंबंध कायम राहत असे. कोलाबा गॅझेटियरनुसार मुंबईकडे गेलेले काही कुणबी आपल्या मूळ गावातील नातेवाईकांकडे पैसे पाठवत असत आणि हे नातेवाईक गावातील जमीन व शेतीची देखभाल करीत असत. त्यावरून काही कुटुंबांच्या आर्थिक जीवनात ग्रामीण शेती आणि शहरी रोजगार यांचा एकत्रित सहभाग असल्याचे दिसून येते.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
अशा प्रकारच्या हंगामी स्थलांतरामुळे एकाच कुटुंबातील उपजीविकेचे स्रोत दोन भौगोलिक केंद्रांशी जोडले जाऊ शकत होते. गावातील जमीन, शेती आणि कुटुंबाची जबाबदारी कायम ठेवून कुटुंबातील काही सदस्य शहरात मजुरी किंवा इतर रोजगार करीत असत. त्यामुळे ग्रामीण कृषी अर्थव्यवस्था आणि मुंबईतील शहरी रोजगार यांच्यामध्ये आर्थिक परस्परसंबंध निर्माण झाला होता.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
या संदर्भात कोलाबा गॅझेटियरची नोंद विशेष महत्त्वाची आहे, कारण ती कुणबी समाजाच्या हंगामी स्थलांतराचे थेट समकालीन प्रशासकीय दस्तऐवजीकरण करते. मात्र ही नोंद मुख्यतः महाड आणि माणगाव परिसराशी संबंधित असल्यामुळे तिच्या आधारे संपूर्ण कोकणातील किंवा सर्व कुणबी कुटुंबांमध्ये समान स्वरूपाचे स्थलांतर होते असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
=== मुंबईच्या कापड गिरण्या आणि कोकणी स्थलांतर ===
मुंबईतील कापड गिरण्यांच्या विस्तारामुळे कोकण आणि विशेषतः रत्नागिरी जिल्ह्यातून मुंबईकडे होणाऱ्या स्थलांतराला पुढील काळात मोठी चालना मिळाली. मुंबईतील औद्योगिक विकासामुळे ग्रामीण भागातील कामगारांना गिरण्यांमध्ये तसेच शहरातील इतर उद्योगांमध्ये रोजगाराच्या संधी उपलब्ध झाल्या. मुंबईच्या कापड उद्योगातील कामगारवर्गाच्या सामाजिक आणि कौटुंबिक रचनेचा अभ्यास करताना ग्रामीण भागातून झालेल्या स्थलांतराचा महत्त्वाचा संदर्भ आढळतो.<ref name="Kumar1983">{{cite journal
|last=Kumar
|first=Radha
|title=Family and Factory: Women in the Bombay Cotton Textile Industry, 1919–1939
|journal=The Indian Economic & Social History Review
|volume=20
|issue=1
|year=1983
|pages=81–96
}}</ref>
१९०१ च्या मुंबई शहर व बेटाच्या जनगणना अहवालात मुंबईतील विविध भागांमध्ये बाहेरील प्रदेशांतून आलेल्या लोकसंख्येच्या वास्तव्याची नोंद आढळते. औद्योगिक भागांच्या विस्तारासोबत ग्रामीण महाराष्ट्रातून मुंबईत आलेल्या कामगारांची वस्तीही विकसित झाली होती.<ref name="CensusBombayCity1901">{{cite report
|title=Census of India, 1901: Bombay City and Island
|publisher=Government of India
|year=1901
|url=https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/31210/download/34391/20161_1901_TIH.pdf
}}</ref>
मुंबईच्या कापड उद्योगातील कामगारांच्या प्रादेशिक पार्श्वभूमीचा अभ्यास करताना रत्नागिरी जिल्ह्याचे महत्त्व अधोरेखित झाले आहे. रत्नागिरी हा मुंबईच्या औद्योगिक अर्थव्यवस्थेला मनुष्यबळ पुरविणाऱ्या कोकणातील महत्त्वाच्या प्रदेशांपैकी एक होता. तथापि मुंबईतील सर्व रत्नागिरीकर कामगार कुणबी होते असे मानता येत नाही. रत्नागिरी जिल्ह्यातील स्थलांतरामध्ये विविध जातीय, सामाजिक आणि धार्मिक समुदायांचा सहभाग होता. त्यामुळे रत्नागिरीकर आणि कुणबी या दोन सामाजिक किंवा लोकसंख्यात्मक संज्ञा समानार्थी मानणे ऐतिहासिकदृष्ट्या योग्य ठरणार नाही.
=== हंगामी स्थलांतरातून दीर्घकालीन स्थलांतराकडे ===
एकोणिसाव्या शतकातील कोकणी स्थलांतराचा एक महत्त्वाचा प्रकार हंगामी स्वरूपाचा होता. ग्रामीण कुटुंबातील काही सदस्य रोजगारासाठी मुंबई किंवा इतर शहरांकडे जात आणि शेतीच्या हंगामानुसार पुन्हा गावाकडे परतत. पुढील काळात औद्योगिकीकरण, शहरी रोजगाराच्या वाढत्या संधी, शिक्षण आणि वाहतूकव्यवस्थेतील सुधारणा यांमुळे स्थलांतराचे स्वरूप हळूहळू बदलत गेले.
कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या तीन कालखंडांतील अभ्यासातून कोकणातील ग्रामीण स्थलांतराच्या दीर्घकालीन प्रक्रियेचे एक स्थानिक उदाहरण उपलब्ध होते. या अभ्यासानुसार कुंकेरीमध्ये स्थलांतराची प्रक्रिया अनेक दशकांपर्यंत कायम राहिली आणि कालांतराने स्थलांतरितांची संख्या, रोजगाराचे प्रकार आणि स्थलांतराची कारणे यांमध्ये बदल झाले. १९६१मध्ये रोजगारासाठी झालेल्या स्थलांतरात मुंबई हे प्रमुख गंतव्यस्थान होते; पुढील काळात मुंबईबरोबर पुणे आणि गोवा यांसारख्या इतर ठिकाणांकडेही स्थलांतर झाले.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
या अभ्यासात १९६१मध्ये कुंकेरीतील कामासाठी बाहेर गेलेले ८३ स्थलांतरित सर्व पुरुष असून त्यांचे प्रमुख गंतव्य मुंबई असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. पुढील काळात स्थलांतराचे स्वरूप अधिक विविध झाले आणि शिक्षण तसेच रोजगारासाठी स्थलांतर करणाऱ्या स्त्रियांची संख्याही वाढली. त्यामुळे ग्रामीण स्थलांतर हे केवळ पुरुषांच्या हंगामी रोजगारापुरते मर्यादित न राहता कुटुंबाच्या विविध उपजीविकेच्या धोरणांशी संबंधित झाले.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
रत्नागिरी जिल्ह्याच्या १९६१ च्या जिल्हा जनगणना पुस्तिकेतही मुंबईशी असलेल्या स्थलांतरसंबंधांचा उल्लेख आढळतो. मुंबईतील रोजगाराच्या परिस्थितीत झालेल्या बदलांचा परिणाम रत्नागिरीसारख्या ग्रामीण जिल्ह्यांवर होत असल्याचे या ऐतिहासिक नोंदींमधून दिसून येते.<ref name="DistrictCensusRatnagiri1961">{{cite report
|title=District Census Handbook, Ratnagiri
|publisher=Director of Census Operations, Maharashtra
|year=1964
|url=https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/29646/download/32827/22003_1961_RAT.pdf
}}</ref>
कुंकेरीच्या अभ्यासातून स्थलांतरामुळे ग्रामीण आणि शहरी जीवनातील संबंध केवळ रोजगारापुरते मर्यादित राहत नसल्याचेही दिसते. स्थलांतरित कुटुंबांचे गावातील जमीनधारणेशी संबंध अनेक दशकांपर्यंत कायम राहिले आणि मुंबईतील स्थलांतरितांचे गावाशी सामाजिक संबंध टिकून राहिले. त्यामुळे कोकणातील स्थलांतराचा इतिहास हा ग्रामीण समाजाच्या विस्थापनाचा एकरेषीय इतिहास नसून गाव, जमीन, कुटुंब आणि शहर यांच्यातील दीर्घकालीन परस्परसंबंधांचा इतिहास म्हणून पाहता येतो.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
=== स्थलांतर आणि शिक्षण ===
काळानुसार कोकणातील स्थलांतराचे स्वरूप केवळ रोजगाराच्या शोधापुरते मर्यादित राहिले नाही. शिक्षण, उच्च शिक्षण, व्यावसायिक शिक्षण आणि शहरी भागातील शैक्षणिक सुविधांचा विस्तार यांमुळे ग्रामीण भागातून शहरांकडे होणाऱ्या स्थलांतराला नवे स्वरूप प्राप्त झाले.
सावंतवाडी तालुक्यातील कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या तीन कालखंडांतील अभ्यासातून ग्रामीण स्थलांतराच्या स्वरूपातील दीर्घकालीन बदल स्पष्ट होतात. या अभ्यासानुसार १९६१मध्ये कुंकेरीतील स्थलांतर मुख्यतः रोजगारासाठी होते आणि त्या काळातील स्थलांतरितांमध्ये शिक्षणासाठी स्थलांतराची नोंद नव्हती. २०१७पर्यंत परिस्थितीत बदल झाला आणि एकूण स्थलांतरितांपैकी सुमारे १८ टक्के व्यक्ती शिक्षणासाठी स्थलांतरित झाल्याचे आढळले. या काळात शिक्षण हे स्थलांतराचे एक महत्त्वाचे कारण बनले होते.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
या अभ्यासात शिक्षण आणि स्थलांतर यांच्यातील परस्परसंबंधाचाही उल्लेख करण्यात आला आहे. शिक्षणामुळे शहरी किंवा बाहेरील रोजगाराच्या संधी वाढू शकतात आणि त्याच वेळी स्थलांतरासाठी शिक्षण हे स्वतः एक साधन ठरू शकते. कुंकेरीतील स्थलांतरित कुटुंबांमध्ये साक्षरतेचे प्रमाण स्थलांतर न करणाऱ्या कुटुंबांच्या तुलनेत अधिक असल्याचेही अभ्यासात आढळले.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
स्थलांतराच्या बदलत्या स्वरूपामुळे शिक्षण, रोजगार, दैनंदिन प्रवास आणि कुटुंबातील वेगवेगळ्या सदस्यांचे विविध ठिकाणी वास्तव्य यांच्यातील संबंध अधिक गुंतागुंतीचे झाले. कुंकेरीच्या अभ्यासात २०१७पर्यंत शिक्षणासाठी होणारा प्रवास आणि स्त्रियांचा दैनंदिन प्रवासही वाढल्याचे नोंदविण्यात आले आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
कुंकेरीच्या अभ्यासातून दिसणारे हे परिवर्तन कोकणातील प्रत्येक गावासाठी किंवा प्रत्येक सामाजिक समुदायासाठी समान होते असे मानता येत नाही. मात्र ग्रामीण कोकणातील स्थलांतर रोजगारापासून शिक्षण, कौशल्यविकास आणि विविध प्रकारच्या शहरी संधींकडे कसे विस्तारत गेले, याचे कुंकेरी हे एक महत्त्वाचे स्थानिक उदाहरण आहे.
=== परदेशातील स्थलांतर ===
कोकणातील स्थलांतराचा विस्तार केवळ मुंबई आणि महाराष्ट्रातील शहरी केंद्रांपुरता मर्यादित राहिला नाही. ब्रिटिशकालीन काळात बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतून समुद्रपार प्रदेशांकडेही स्थलांतर होत असल्याच्या नोंदी आढळतात. १९११ च्या जनगणना अहवालात मॉरिशस, पूर्व आफ्रिका, स्ट्रेट्स सेटलमेंट्स, फेडरेटेड मलय स्टेट्स आणि सिलोन यांसारख्या प्रदेशांशी संबंधित स्थलांतराची नोंद करण्यात आली होती.<ref name="CensusBombayMigration1911">{{cite report
|title=Census of India, 1911: Bombay Presidency — Migration
|publisher=Government of India
|year=1911
|url=https://storage.lib.uchicago.edu/pres/2014/pres2014-0779-1911-07-01.pdf
}}</ref>
रत्नागिरी आणि सावंतवाडीच्या १८८० च्या गॅझेटियरमध्येही जिल्ह्यातील काही लोक रोजगाराच्या निमित्ताने एडन आणि मॉरिशस यांसारख्या परदेशातील प्रदेशांकडे जात असल्याच्या नोंदी आढळतात. या नोंदींमधून कोकणातील स्थलांतराचे भौगोलिक क्षेत्र मुंबईपलीकडेही विस्तारले होते, असे दिसून येते. तथापि या नोंदी विशिष्ट स्थानिक समूह किंवा व्यक्तींच्या स्थलांतराशी संबंधित असल्यामुळे त्यावरून संपूर्ण रत्नागिरी जिल्ह्याच्या किंवा कुणबी समाजाच्या परदेशातील स्थलांतराचे प्रमाण निश्चित करता येत नाही.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
आधुनिक काळात रत्नागिरी जिल्ह्यातील आंतरराष्ट्रीय स्थलांतर आणि त्यातून मिळणाऱ्या परदेशातून पाठविलेल्या रकमांचा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेवर होणारा परिणाम हा संशोधनाचा विषय बनला आहे. २०२३मध्ये प्रकाशित झालेल्या एका अभ्यासात रत्नागिरी जिल्ह्यातील ग्रामीण गावांमधून होणारे आंतरराष्ट्रीय स्थलांतर, परदेशातून येणाऱ्या रकमांचे प्रमाण आणि त्यांचा कुटुंबांच्या आर्थिक कल्याणावर होणारा परिणाम यांचा अभ्यास करण्यात आला. या अभ्यासात आंतरराष्ट्रीय स्थलांतर आणि परदेशातून येणाऱ्या रकमांचा ग्रामीण कुटुंबांच्या आर्थिक स्थितीशी संबंध असल्याचे आढळले.<ref name="ChintamaniKulkarni2023">{{cite journal
|last=Chintamani
|first=Bhupesh Gopal
|author2=Kulkarni, Lalitagauri
|title=Determinants and Effects of International Remittances: Evidence from Ratnagiri District of Rural Maharashtra
|journal=Indian Journal of Labour Economics
|volume=66
|issue=1
|year=2023
|pages=455–475
}}</ref>
या आधुनिक अभ्यासात रत्नागिरी जिल्ह्यातील ग्रामीण कुटुंबांचा विचार केला आहे; त्यात कुणबी समाजाचे स्वतंत्र जातीनिहाय आंतरराष्ट्रीय स्थलांतर हे अभ्यासाचे स्वतंत्र प्रमाण म्हणून मांडलेले नाही. त्यामुळे रत्नागिरीतील आंतरराष्ट्रीय स्थलांतराला थेट कुणबी समाजाचे स्थलांतर मानणे योग्य ठरणार नाही. कुणबी समाजाच्या परदेशातील स्थलांतराचे स्वतंत्र प्रमाण, गंतव्य प्रदेश आणि कालानुसार झालेला बदल निश्चित करण्यासाठी जातीनिहाय लोकसंख्याशास्त्रीय किंवा सामाजिक सर्वेक्षणांची आवश्यकता आहे.<ref name="ChintamaniKulkarni2023"/>
या दृष्टीने कोकणातील स्थलांतराचा इतिहास तीन परस्परसंबंधित टप्प्यांत अभ्यासता येतो—स्थानिक किंवा हंगामी रोजगारासाठी होणारे स्थलांतर, मुंबईसारख्या औद्योगिक केंद्रांकडे झालेले दीर्घकालीन स्थलांतर आणि पुढील काळातील शिक्षण, व्यावसायिक संधी व आंतरराष्ट्रीय रोजगाराशी संबंधित स्थलांतर. मात्र या सर्व प्रक्रियांमध्ये सहभागी झालेल्या लोकसंख्येला कुणबी या एकाच सामाजिक वर्गाशी जोडणे ऐतिहासिक पुराव्यांच्या दृष्टीने योग्य ठरणार नाही.
=== गाव आणि शहरातील संबंध ===
कोकणातील स्थलांतरामुळे ग्रामीण गावांमध्ये आणि मुंबईसारख्या शहरी केंद्रांमध्ये आर्थिक व सामाजिक संबंध निर्माण झाले. शहरात रोजगारासाठी गेलेल्या व्यक्तींचे त्यांच्या मूळ गावांशी जमीन, कुटुंब आणि आर्थिक व्यवहारांच्या माध्यमातून संबंध कायम राहत असत. १८८३ च्या कोलाबा गॅझेटियरमध्ये महाड आणि माणगाव परिसरातील काही कुणबी मुंबईत रोजगारासाठी गेल्यानंतर आपल्या गावातील नातेवाईकांकडे पैसे पाठवीत असल्याची आणि हे नातेवाईक गावातील शेतीची देखभाल करीत असल्याची नोंद आढळते.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
या आर्थिक संबंधांमध्ये शहरातून गावाकडे पैसे पाठविणे, शेतीसाठी बियाणे व इतर साधने खरेदी करणे, कुटुंबाच्या दैनंदिन गरजा भागविणे आणि गावातील जमीन व इतर मालमत्तेशी संबंध कायम ठेवणे यांचा समावेश होता. त्यामुळे रोजगारासाठी शहरात गेलेल्या कुटुंबातील व्यक्तीचे स्थलांतर झाले असले तरी संपूर्ण कुटुंबाची आर्थिक व्यवस्था तात्काळ शहरकेंद्रित होत असेच असे नाही.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या तीन कालखंडांतील दीर्घकालीन अभ्यासातूनही स्थलांतरित कुटुंबांचे मूळ गावाशी असलेले संबंध कायम राहिल्याचे दिसून येते. स्थलांतराचे स्वरूप आणि गंतव्ये काळानुसार बदलली असली तरी गावाशी असलेले कौटुंबिक आणि सामाजिक संबंध पूर्णपणे तुटले नाहीत. या अभ्यासातून स्थलांतर, ग्रामीण कुटुंबांची बदलती आर्थिक रचना आणि शहरांशी निर्माण झालेले संबंध यांचा परस्परसंबंध स्पष्ट होतो.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
या प्रक्रियेमुळे गाव आणि शहर यांच्यात एक प्रकारचे आर्थिक परस्परावलंबन निर्माण झाले. गावातील जमीन आणि कुटुंबीय संबंध कायम ठेवत शहरात रोजगार करणे, तर शहरातून मिळणाऱ्या उत्पन्नाचा काही भाग गावातील कुटुंबाच्या गरजांसाठी वापरणे, हा स्थलांतरित कुटुंबांच्या आर्थिक जीवनाचा एक भाग बनला. मात्र ही पद्धत सर्व कोकणी किंवा सर्व कुणबी कुटुंबांना समान प्रमाणात लागू होती असे उपलब्ध स्रोतांवरून म्हणता येत नाही.
=== स्थलांतरामुळे कोकणातील गावांवर झालेले परिणाम ===
दीर्घकालीन स्थलांतरामुळे कोकणातील काही गावांच्या लोकसंख्येच्या आणि सामाजिक रचनेत बदल झाले. विशेषतः रोजगारक्षम वयोगटातील व्यक्तींचे बाहेर स्थलांतर, कुटुंबातील सदस्यांचे वेगवेगळ्या ठिकाणी वास्तव्य आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेतील बदल यांचा गावाच्या सामाजिक आणि आर्थिक जीवनावर परिणाम झाला.
रत्नागिरी जिल्ह्याच्या १९६१ च्या जिल्हा जनगणना पुस्तिकेत जिल्ह्यातून मुंबईकडे मोठ्या प्रमाणावर स्थलांतर होत असल्याचा उल्लेख आहे. १९३० च्या आर्थिक मंदीच्या काळात मुंबईतील काही कापड गिरण्या बंद झाल्यामुळे काही कामगार रत्नागिरी जिल्ह्यात परतल्याची नोंदही आढळते. यावरून रत्नागिरीतील ग्रामीण रोजगार आणि लोकसंख्येचे स्वरूप मुंबईतील औद्योगिक रोजगाराच्या परिस्थितीशी संबंधित होते, असे दिसून येते.<ref name="DistrictCensusRatnagiri1961"/>
कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या कालखंडांतील तुलनात्मक अभ्यासातूनही पाच दशकांहून अधिक काळ स्थलांतराची प्रक्रिया सुरू राहिल्याचे दिसते. या कालावधीत स्थलांतरितांची संख्या, रोजगाराचे प्रकार, स्थलांतराची कारणे, कुटुंबातील सदस्यांच्या स्थलांतराचे स्वरूप आणि शिक्षणाशी संबंधित स्थलांतर यांमध्ये बदल झाल्याचे अभ्यासकांनी नोंदविले आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
स्थलांतराचा परिणाम केवळ गावातील लोकसंख्येतील घट किंवा वाढ यापुरता मर्यादित राहिला नाही. कुटुंबांच्या उत्पन्नाच्या स्रोतांमध्ये बदल, शेतीसाठी उपलब्ध मनुष्यबळ, घरांची देखभाल, शिक्षणाच्या संधी, स्थानिक बाजारपेठांशी असलेले संबंध आणि गावातील सामाजिक जीवन यांवरही त्याचा परिणाम होऊ शकतो. कुंकेरीच्या अभ्यासात स्थलांतरित कुटुंबांच्या बदलत्या आर्थिक धोरणांचा, व्यवसायातील विविधतेचा आणि मूळ गावाशी कायम राहिलेल्या संबंधांचा विचार करण्यात आला आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
=== रत्नागिरीचे मुंबईशी लोकसंख्याशास्त्रीय नाते ===
मुंबईच्या लोकसंख्येच्या वाढीत रत्नागिरी जिल्ह्यातून झालेल्या स्थलांतराचे महत्त्व ऐतिहासिक जनगणना नोंदींमधून दिसून येते. १९३१ च्या मुंबई शहराच्या जनगणना अहवालात मुंबईत राहणाऱ्या व्यक्तींच्या जन्मस्थळानुसार रत्नागिरी जिल्ह्याचा उल्लेख मोठ्या संख्येने आढळतो. या नोंदीत रत्नागिरी हा मुंबईच्या लोकसंख्येला मनुष्यबळ पुरविणाऱ्या महत्त्वाच्या जिल्ह्यांपैकी एक असल्याचे दिसून येते.<ref name="CensusBombayCity1931">{{cite report
|title=Census of India, 1931 — Bombay City
|publisher=Government of India
|year=1931
|url=https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/28362/download/31544/138796-1931.pdf
}}</ref>
मुंबई आणि रत्नागिरी यांच्यातील स्थलांतरसंबंध पुढील दशकांतही कायम राहिले. मुंबई मानव विकास अहवालात १९६१ ते २००१ या कालखंडातील बृहन्मुंबईतील जिल्हानिहाय आंतर-जिल्हा स्थलांतराची आकडेवारी देण्यात आली आहे. त्यानुसार रत्नागिरी हा महाराष्ट्रातील मुंबईकडे स्थलांतर करणाऱ्या लोकसंख्येच्या प्रमुख मूळ जिल्ह्यांपैकी एक होता. अहवालातील आकडेवारीनुसार रत्नागिरीतून बृहन्मुंबईत आलेल्या स्थलांतरितांची संख्या १९६१मध्ये ४,९४,४०४ होती आणि २००१मध्ये ती ६,१२,६८८ इतकी नोंदविण्यात आली आहे.<ref name="MumbaiHDR2009">{{cite report
|title=Mumbai Human Development Report 2009
|publisher=Government of Maharashtra
|year=2009
|url=https://www.mohua.gov.in/upload/uploadfiles/files/6Mumbai%20HDR%20Complete.pdf
}}</ref>
या स्थलांतरामागे रोजगाराच्या संधी, मुंबईतील औद्योगिकीकरण, कापड गिरण्या, बांधकाम, सेवा क्षेत्र आणि पुढील काळातील शिक्षण व व्यावसायिक संधी यांसारखे विविध घटक कार्यरत होते. त्यामुळे रत्नागिरी आणि मुंबई यांच्यातील संबंध केवळ स्थलांतरित मजुरांच्या हालचालीपुरते मर्यादित न राहता दीर्घकालीन सामाजिक आणि आर्थिक संबंधांमध्ये विकसित झाले.
तथापि रत्नागिरीतून मुंबईत स्थलांतरित झालेल्या सर्व व्यक्तींना कुणबी समाजाशी जोडणे योग्य नाही. रत्नागिरी जिल्ह्यातील स्थलांतरामध्ये विविध जातीय, धार्मिक आणि सामाजिक समूहांचा सहभाग होता. त्यामुळे रत्नागिरीकर ही भौगोलिक ओळख आणि कुणबी ही सामाजिक ओळख यांची सरसकट समानता करणे ऐतिहासिकदृष्ट्या अचूक ठरणार नाही.
=== स्थलांतराचे बदलते स्वरूप ===
कोकणातील स्थलांतराच्या इतिहासात कालानुसार त्याच्या स्वरूपात बदल झाले. सुरुवातीच्या काळात शेतीशी संबंधित हंगामी रोजगार आणि मुंबईतील मजुरी यांच्यात संबंध दिसून येतो. पुढे मुंबईतील औद्योगिकीकरणामुळे कापड गिरण्या, बांधकाम, बंदरे, वाहतूक आणि इतर शहरी व्यवसायांमध्ये रोजगाराच्या संधी वाढल्या. त्यानंतर शिक्षण, सरकारी सेवा, व्यावसायिक क्षेत्र, व्यवसाय आणि परदेशातील रोजगार यांमुळे स्थलांतराचे स्वरूप अधिक विविध झाले.<ref name="RoyalCommissionLabour1931"/>
कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या कालखंडांतील दीर्घकालीन अभ्यासातून स्थलांतराच्या स्वरूपातील हा बदल एका स्थानिक उदाहरणाच्या आधारे स्पष्ट होतो. १९६१मध्ये रोजगारासाठी मुंबईकडे होणारे स्थलांतर प्रमुख होते; पुढील दशकांत स्थलांतराची गंतव्ये, व्यवसायाचे प्रकार आणि स्थलांतराची कारणे अधिक विविध झाली. शिक्षणासाठी स्थलांतर, दैनंदिन प्रवास आणि कुटुंबातील विविध सदस्यांचे वेगवेगळ्या ठिकाणी वास्तव्य यांनाही पुढील काळात महत्त्व प्राप्त झाले.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
आधुनिक काळात रत्नागिरीच्या स्थलांतराच्या नकाशात मुंबईबरोबरच पुणे, महाराष्ट्रातील इतर शहरी केंद्रे आणि परदेशातील रोजगाराची ठिकाणे यांचाही समावेश झाला आहे. रत्नागिरी जिल्ह्यातील ग्रामीण कुटुंबांच्या आंतरराष्ट्रीय स्थलांतराचा अभ्यास करणाऱ्या २०२३ च्या संशोधनात परदेशात जाणाऱ्या व्यक्ती आणि त्यांच्या कुटुंबांकडून मिळणाऱ्या आर्थिक पाठवणींचा ग्रामीण कुटुंबांच्या आर्थिक स्थितीशी असलेला संबंध तपासण्यात आला आहे. अभ्यासानुसार परदेशातून येणाऱ्या आर्थिक पाठवणींचा प्राप्त कुटुंबांच्या आर्थिक कल्याणाशी सकारात्मक संबंध आढळला.<ref name="ChintamaniKulkarni2023"/>
=== कुणबी समाजाच्या संदर्भातील निष्कर्ष ===
कोकणातील कुणबी समाजाच्या स्थलांतराचा इतिहास हा केवळ शेती सोडून शहरांकडे जाण्याचा इतिहास नव्हता. १८८३ च्या कोलाबा गॅझेटियरमधील महाड आणि माणगाव परिसराच्या नोंदींमध्ये कुणबींचे शेतीशी असलेले संबंध, हंगामी स्थलांतर, मजुरी तसेच लष्कर, पोलीस आणि इतर सेवांमधील सहभाग यांचा उल्लेख आढळतो.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
रत्नागिरीच्या बाबतीत मुंबईशी असलेले स्थलांतरसंबंध अधिक व्यापक लोकसंख्याशास्त्रीय पातळीवर दिसून येतात. १९३१ च्या मुंबई शहराच्या जनगणना अहवालात मुंबईतील रहिवाशांच्या जन्मस्थळांच्या वर्गीकरणात रत्नागिरी जिल्ह्याचा मोठ्या प्रमाणावर उल्लेख आढळतो. पुढील काळातही रत्नागिरी हा मुंबईकडे स्थलांतरित होणाऱ्या लोकसंख्येचा महत्त्वाचा मूळ जिल्हा राहिला.<ref name="CensusBombayCity1931"/><ref name="MumbaiHDR2009"/>
म्हणून कोकणातील कुणबी समाजाचा आधुनिक इतिहास समजून घेताना गावातील जमीन आणि शेती, मुंबईतील रोजगार, हंगामी तसेच दीर्घकालीन स्थलांतर, शिक्षण, परदेशातील रोजगार, आर्थिक पाठवणी आणि मूळ गावाशी कायम राहिलेले कौटुंबिक संबंध या सर्व घटकांचा परस्परसंबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे. मात्र उपलब्ध जनगणना आणि स्थलांतरविषयक अभ्यास बहुधा जिल्हा, गाव किंवा व्यापक सामाजिक समूहाच्या पातळीवर करण्यात आलेले आहेत. त्यामुळे आधुनिक काळातील कुणबी समाजाच्या स्वतंत्र स्थलांतराचे अचूक जातीनिहाय प्रमाण किंवा टक्केवारी उपलब्ध अधिकृत आकडेवारीशिवाय निश्चित करता येत नाही.<ref name="घोलम2025" />
=== मराठा–कुणबी संबंध ===
कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास आणि मराठा समाजाचा इतिहास अनेक सामाजिक, आर्थिक आणि प्रादेशिक संदर्भांमध्ये परस्परांशी संबंधित दिसतो. तथापि मराठा आणि कुणबी या संज्ञांचा अर्थ सर्व काळात आणि सर्व प्रदेशांत एकसारखा राहिलेला नाही. ब्रिटिशकालीन जनगणना, गॅझेटियर आणि मानववंशशास्त्रीय लेखनात या समूहांचे वर्गीकरण स्थान, प्रशासकीय पद्धती, सामाजिक स्थान आणि स्थानिक ओळखीनुसार वेगवेगळ्या प्रकारे करण्यात आले आहे.
रेजिनाल्ड एडवर्ड एन्थोव्हन यांच्या The Tribes and Castes of Bombay या ग्रंथात मराठा आणि कुणबी यांच्यातील सामाजिक संबंध, परस्परविवाह आणि सामाजिक स्तर यांचे विविध संदर्भ नोंदवले आहेत. त्यांच्या वर्णनानुसार या दोन समूहांमधील सामाजिक सीमारेषा सर्व प्रदेशांत समान किंवा पूर्णपणे कठोर नव्हत्या.
त्यामुळे आधुनिक काळातील मराठा, कुणबी, मराठा-कुणबी किंवा कुणबी-मराठा या सामाजिक ओळखींचा अर्थ थेट प्राचीन किंवा मध्ययुगीन सामाजिक रचनेवर लावणे इतिहासदृष्ट्या सावधगिरीशिवाय योग्य ठरणार नाही. या संज्ञांचा अभ्यास करताना संबंधित काळातील प्रशासकीय नोंदी, जनगणना वर्गीकरण, स्थानिक सामाजिक व्यवहार आणि समुदायाच्या स्वयंओळखीचा स्वतंत्र विचार करणे आवश्यक आहे.<ref name="Enthoven1922" />
=== मराठा–कुणबी ही संज्ञा ===
मराठा–कुणबी ही संयुक्त संज्ञा ब्रिटिशकालीन प्रशासकीय आणि जनगणना साहित्यात विविध संदर्भांत आढळते. या संज्ञेचा वापर काही ऐतिहासिक वर्गीकरणांमध्ये मराठा आणि कुणबी यांच्यातील सामाजिक व प्रशासकीय संबंध दर्शविण्यासाठी करण्यात आला होता. तथापि अशा वर्गीकरणांचा अर्थ त्या काळातील जनगणना पद्धती आणि प्रशासकीय दृष्टिकोनाच्या संदर्भातच समजून घेणे आवश्यक आहे.
१८८१ च्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या जनगणना अहवालात विविध जातीय आणि सामाजिक समूहांचे स्वतंत्र वर्गीकरण करण्यात आले होते. त्या काळातील जनगणना वर्गीकरण हे आजच्या सामाजिक ओळखींच्या चौकटीशी तंतोतंत समान नव्हते. त्यामुळे त्या काळातील मराठा–कुणबी या वर्गीकरणावरून आधुनिक काळातील मराठा आणि कुणबी समाजांची एकसमान सामाजिक किंवा ऐतिहासिक ओळख सिद्ध होते असा निष्कर्ष काढता येत नाही.
रेजिनाल्ड एन्थोव्हन यांच्या पुढील मानववंशशास्त्रीय लेखनातही मराठा आणि कुणबी यांच्यातील सामाजिक संबंधांची चर्चा आढळते. त्यातून या दोन समूहांमध्ये काही सामाजिक साम्य, परस्पर संबंध आणि प्रदेशानुसार बदलणाऱ्या सामाजिक सीमारेषा अस्तित्वात होत्या, असे दिसते; मात्र त्यावरून सर्व मराठा आणि सर्व कुणबी यांची एकच ऐतिहासिक उत्पत्ती होती असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="Enthoven1922" />
अशा प्रकारे मराठा–कुणबी या संज्ञेचा ऐतिहासिक अभ्यास हा केवळ दोन सामाजिक समूहांच्या नावांचा अभ्यास नसून, ब्रिटिशकालीन जनगणना पद्धती, प्रशासकीय वर्गीकरण, कृषक समाजाची रचना आणि स्थानिक सामाजिक ओळखी यांच्यातील परस्परसंबंध समजून घेण्यासाठी महत्त्वाचा ठरतो.
=== १८८१ची जनगणना ===
१८८१ च्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या जनगणनेत विविध जातीय आणि सामाजिक समूहांचे प्रशासकीय वर्गीकरण करण्यात आले होते. या वर्गीकरणात मराठा आणि कुणबी या संज्ञांचा वापर कृषीप्रधान समाजाच्या संदर्भात करण्यात आला होता. मात्र १८८१ च्या जनगणनेतील वर्गीकरण हे आजच्या प्रशासकीय जातवर्गीकरणासारखे नव्हते. त्यामुळे त्या काळातील एखाद्या वर्गाची व्याप्ती आणि आधुनिक महाराष्ट्रातील त्याच नावाच्या प्रशासकीय वर्गाची व्याप्ती समान मानता येत नाही.<ref name="Baines1881"/>
ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये जात, व्यवसाय, स्थानिक सामाजिक ओळख आणि प्रशासकीय वर्गीकरण यांचा परस्परसंबंध अनेकदा दिसून येतो. त्यामुळे १८८१ च्या आकडेवारीचा उपयोग करताना त्या काळातील जनगणना पद्धती आणि वर्गीकरणाच्या निकषांचा स्वतंत्र विचार करणे आवश्यक आहे.
=== १९०१ची जनगणना ===
१९०१ च्या बॉम्बे जनगणनेत मराठा कुणबी आणि कोकणी मराठा या स्वतंत्र सांख्यिक विभागांची नोंद करण्यात आली होती. मुंबई शहराच्या जनगणना अहवालानुसार मराठा कुणबी हा शहरातील सर्वाधिक संख्येच्या प्रमुख जातीय-सामाजिक समूहांपैकी एक होता आणि त्याचे प्रमाण मुंबईच्या एकूण लोकसंख्येच्या सुमारे १५ टक्के होते.<ref name="CensusBombay1901">{{cite book
|author=India. Census Commissioner
|title=Census of India, 1901: Bombay and Bombay (Town and Island)
|volume=XI
|publisher=Office of the Superintendent of Government Printing, India
|year=1901
}}</ref>
त्याच अहवालात काही विभागांच्या लोकसंख्येच्या संदर्भात कुणबी (मराठा) या नावाची स्वतंत्र नोंद आढळते. उदाहरणार्थ, डोंगरी, पहिला नागपाडा आणि कुंभारवाडा या विभागांमध्ये कुणबी (मराठा) समूहाचे प्रमाण अनुक्रमे सुमारे ४७ टक्के, ३४ टक्के आणि २८ टक्के असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.
या नोंदींवरून १९०१ च्या जनगणनेत मराठा, कुणबी आणि मराठा कुणबी या संज्ञांचा वापर विविध प्रशासकीय आणि सांख्यिक संदर्भांत करण्यात आला होता, असे दिसते. त्यामुळे त्या काळातील सामाजिक वर्गीकरण हे मराठा आणि कुणबी यांच्यात पूर्णपणे कठोर व अपरिवर्तनीय सीमा होती, अशा साध्या स्वरूपात मांडता येत नाही. तथापि या जनगणना वर्गीकरणावरून दोन्ही समूहांची एकच सामाजिक किंवा ऐतिहासिक उत्पत्ती होती असाही निष्कर्ष काढता येत नाही.
=== १९११ची जनगणना आणि वर्गीकरणातील बदल ===
१९११ च्या बॉम्बे जनगणनेत जातीय वर्गीकरणाची पद्धत पुन्हा वेगळी दिसून येते. जनगणना अहवालात मराठा आणि कुणबी या स्वतंत्र नोंदी आढळतात. या वर्गीकरणात विविध प्रदेशांतील स्थानिक सामाजिक समूह आणि त्यांच्या उपविभागांची नोंद स्वतंत्रपणे करण्यात आली होती.<ref name="CensusBombay1911">{{cite report
|title=Census of India, 1911: Bombay
|volume=VII
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1912
}}</ref>
१९११ च्या जनगणनेतील उपलब्ध आकडेवारीत कुणबी आणि मराठा या दोन्ही समूहांची स्वतंत्र संख्या नोंदविलेली आहे. त्यामुळे १९०१ आणि १९११ च्या जनगणनांमध्ये वापरलेल्या वर्गीकरणांमध्ये फरक असल्याचे दिसते.
या उदाहरणावरून ब्रिटिशकालीन जनगणनांमधील जातीय वर्गीकरण पूर्णपणे स्थिर नव्हते, असे दिसते. एका जनगणनेत विशिष्ट नावाखाली नोंदवलेला समूह पुढील जनगणनेत वेगळ्या शीर्षकाखाली किंवा वेगळ्या वर्गीकरणात दिसू शकत होता. त्यामुळे १८८१, १९०१ आणि १९११ च्या आकडेवारीची तुलना करताना प्रत्येक जनगणनेची स्वतंत्र वर्गीकरणपद्धती, प्रशासकीय सीमा आणि नोंदणीची पद्धत लक्षात घेणे आवश्यक आहे.
=== सामाजिक गतिशीलता ===
एकोणिसाव्या आणि विसाव्या शतकाच्या प्रारंभी महाराष्ट्रातील मराठा आणि कुणबी समाजांच्या सामाजिक संबंधांमध्ये प्रदेश, जमीनधारणा, आर्थिक स्थिती आणि सामाजिक प्रतिष्ठेनुसार विविधता आढळत होती. रेजिनाल्ड एडवर्ड एन्थोव्हन यांच्या मानववंशशास्त्रीय लेखनात मराठा आणि कुणबी यांच्यातील सामाजिक संबंध, कृषी व्यवसाय आणि सामाजिक स्थान यांची चर्चा आढळते.<ref name="Enthoven1922" />
एन्थोव्हन यांच्या मांडणीत कुणबी ही संज्ञा कृषी व्यवसायाशी संबंधित असल्याचेही दिसते. पुढील अभ्यासांमध्ये त्यांच्या या मांडणीचा वापर वसाहतकालीन महाराष्ट्रातील जात आणि सामाजिक वर्गीकरणाच्या अभ्यासासाठी करण्यात आला आहे. मात्र एन्थोव्हन यांचे लेखन हे वसाहतकालीन मानववंशशास्त्रीय दृष्टिकोनातून तयार झालेले असल्यामुळे त्यातील वर्गीकरणे आधुनिक सामाजिक वास्तवाचे अंतिम वर्णन मानता येत नाहीत.
त्यामुळे मराठा किंवा कुणबी या नावावरून एखाद्या व्यक्तीचे सामाजिक स्थान, आर्थिक स्थिती किंवा सामाजिक प्रतिष्ठा संपूर्णपणे निश्चित करता येत नव्हती. जमीनधारणा, व्यवसाय, शिक्षण, सरकारी सेवा आणि स्थानिक सामाजिक प्रभाव यांसारखे इतर घटकही सामाजिक स्थानावर परिणाम करीत होते.
=== स्व-ओळख आणि सामाजिक नाव ===
जातीय आणि सामाजिक ओळख ही केवळ प्रशासकीय वर्गीकरणातून निश्चित होत नाही. एखादा समूह स्वतःला कोणत्या नावाने ओळखतो, कोणत्या सामाजिक परंपरा पाळतो आणि स्थानिक समाजात त्याची ओळख कशी प्रस्थापित होते, यालाही सामाजिक इतिहासात महत्त्व आहे. ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये समान किंवा संबंधित सामाजिक समूहांचे वर्गीकरण वेगवेगळ्या काळात वेगवेगळ्या पद्धतीने करण्यात आले होते. १९०१ च्या जनगणनेत मराठा कुणबींची नोंद मराठा वर्गाशी संबंधित पद्धतीने करण्यात आली होती, तर १९११ च्या वर्गीकरणात संबंधित समूहांची नोंद कुणबी वर्गाशी करण्यात आल्याचे पुढील अधिकृत जनगणना अहवालात स्पष्ट करण्यात आले आहे.<ref name="CensusClassification1951">{{cite report
|title=Census of India, 1951 — Classification of Castes and Tribes
|publisher=Government of India
|year=1951
|url=https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/30207/download/33388/21097_1951_EST.pdf
}}</ref>
ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये प्रशासकीय अधिकाऱ्यांनी विविध समूहांचे विशिष्ट शीर्षकांखाली वर्गीकरण केले होते. मात्र जनगणनेतील अशा वर्गीकरणाचा अर्थ त्या समूहातील प्रत्येक व्यक्तीने स्वतःची ओळख त्याच नावाने केली होती, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. १९०१ च्या मुंबई जनगणनेत मराठा कुणबी आणि कोकणी मराठा या स्वतंत्र विभागांची नोंद करण्यात आली होती; पुढील जनगणनांमध्ये संबंधित वर्गीकरणात बदल झाल्याचे दिसून येते.<ref name="CensusBombay1901">{{cite book
|author=India. Census Commissioner
|title=Census of India, 1901: Bombay and Bombay (Town and island)
|volume=XI
|publisher=Office of the Superintendent of Government Printing, India
|location=India
|year=1901
}}</ref><ref name="CensusBombay1911">{{cite report
|author=P. J. Mead and G. Laird Macgregor
|title=Census of India, 1911: Bombay
|volume=VII
|part=I
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1912
}}</ref>
मराठा आणि कुणबी यांच्यातील सामाजिक संबंधांच्या संदर्भात रेजिनाल्ड एडवर्ड एन्थोव्हन यांच्या मानववंशशास्त्रीय अभ्यासातही प्रादेशिक आणि सामाजिक विविधतेचे उल्लेख आढळतात. त्यामुळे मराठा, कुणबी, मराठा–कुणबी आणि कुणबी–मराठा या संज्ञांचा ऐतिहासिक अभ्यास करताना जनगणना वर्गीकरण, प्रशासकीय नोंद, स्थानिक सामाजिक वापर आणि स्वयंओळख यांच्यातील फरक लक्षात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="Enthoven1922" />
उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतांवरून संपूर्ण महाराष्ट्रातील सर्व व्यक्तींनी या संज्ञांचा एकाच अर्थाने आणि सर्व काळात समान पद्धतीने वापर केला होता, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.
=== विवाहसंबंध ===
मराठा आणि कुणबी समूहांमधील विवाहसंबंधांचा उल्लेख ब्रिटिशकालीन मानववंशशास्त्रीय साहित्यात आढळतो. रेजिनाल्ड एडवर्ड एन्थोव्हन यांच्या नोंदींमध्ये मराठा आणि कुणबी यांच्यातील सामाजिक संबंधांचे वर्णन करताना त्यांच्या सामाजिक सीमारेषा सर्व प्रदेशांत पूर्णपणे कठोर नसल्याचे दिसून येते. काही प्रदेशांत आणि विशिष्ट सामाजिक परिस्थितींमध्ये या समूहांमध्ये परस्पर सामाजिक संपर्क आणि विवाहसंबंध अस्तित्वात असल्याचे उल्लेख आढळतात.<ref name="Enthoven1922" />
मात्र या मानववंशशास्त्रीय नोंदी संपूर्ण महाराष्ट्रातील सर्व मराठा आणि कुणबी समूहांना समान प्रमाणात लागू होतात असे मानता येत नाही. विवाहपद्धती प्रदेश, उपसमूह, कुटुंब, सामाजिक स्थान आणि स्थानिक विवाहनियमांनुसार बदलत असू शकतात. त्यामुळे काही ऐतिहासिक विवाहसंबंधांच्या आधारे मराठा आणि कुणबी हे सर्व प्रदेशांत एकच सामाजिक समूह होते, असा निष्कर्ष काढणे योग्य ठरणार नाही.<ref name="Enthoven1922" />
=== सामाजिक प्रतिष्ठा आणि सामाजिक स्तर ===
ब्रिटिशकालीन मानववंशशास्त्रीय आणि प्रशासकीय लेखनात मराठा आणि कुणबी यांच्यातील सामाजिक प्रतिष्ठेच्या भेदांचा उल्लेख आढळतो. त्याच वेळी आर्थिक स्थिती, जमीनधारणा आणि सामाजिक प्रभाव यांमुळे काही कुणबी कुटुंबांना स्थानिक समाजात तुलनेने उच्च सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त होत असल्याचेही विविध नोंदींमधून दिसून येते.<ref name="Enthoven1922" />
१९११–१२ च्या बॉम्बे प्रशासनाच्या अहवालात मराठा आणि कुणबी यांच्यातील सामाजिक सीमारेषा सर्व परिस्थितींमध्ये अपरिवर्तनीय नसल्याचे निरीक्षण आढळते. आर्थिकदृष्ट्या सक्षम कुणबी व्यक्तींना सामाजिक प्रतिष्ठेच्या उच्च स्थानाकडे जाण्याची संधी किंवा प्रवृत्ती असल्याचा उल्लेख त्या काळातील प्रशासकीय निरीक्षणात करण्यात आला आहे.<ref name="BombayAdministration1911-12">{{cite web
|title=Report on the Administration of the Bombay Presidency for the Year 1911–1912
|publisher=Government of Bombay
|year=1912
|url=https://www.qdl.qa/en/archive/81055/vdc_100146764805.0x000068
}}</ref>
या प्रकारच्या नोंदींचा उपयोग तत्कालीन सामाजिक गतिशीलता, आर्थिक स्थिती आणि सामाजिक प्रतिष्ठा यांच्यातील संबंध समजून घेण्यासाठी करता येतो. तथापि ही निरीक्षणे ब्रिटिशकालीन प्रशासकीय आणि मानववंशशास्त्रीय दृष्टिकोनातून नोंदवलेली असल्यामुळे त्यांना आधुनिक सामाजिक वास्तवाचे अंतिम वर्णन मानता येत नाही. तसेच या नोंदींच्या आधारे आधुनिक काळातील मराठा किंवा कुणबी समाजाचे सामाजिक स्थान निश्चित करता येत नाही.
=== ब्रिटिशकालीन वर्गीकरण आणि आधुनिक ओळख ===
ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये कुणबी, मराठा, मराठा कुणबी आणि कोकणी मराठा यांसारख्या संज्ञांचा वापर वेगवेगळ्या काळात आणि विविध प्रशासकीय संदर्भांत करण्यात आला. १९०१ च्या मुंबई शहराच्या जनगणनेत मराठा कुणबी आणि कोकणी मराठा यांची स्वतंत्र विभागांमध्ये नोंद करण्यात आली होती, तर १९११ च्या जनगणनेत कुणबी मराठा ही संज्ञा कुणबी या वर्गाच्या अंतर्गत दाखविण्यात आली होती.<ref name="CensusBombay1901"/><ref name="CensusBombay1911"/>
या वर्गीकरणातील बदलांमुळे जुन्या जनगणनांमधील आकडे आधुनिक प्रशासकीय जातीय वर्गांशी थेट जोडताना विशेष सावधगिरी आवश्यक आहे. प्रशासकीय सीमा, जनगणनेची पद्धत, जातीय शीर्षके आणि स्थानिक सामाजिक ओळखी काळानुसार बदलत गेल्या असल्यामुळे १९व्या किंवा २०व्या शतकाच्या प्रारंभीची मराठा कुणबी किंवा कुणबी मराठा यांची संख्या आजच्या कुणबी किंवा मराठा लोकसंख्येचे थेट मोजमाप मानता येत नाही.<ref name="CensusClassification1951" />
=== आधुनिक प्रशासकीय संदर्भ ===
आधुनिक महाराष्ट्रातील कुणबी, मराठा कुणबी आणि कुणबी मराठा या संज्ञांचा वापर जात प्रमाणपत्रे, मागासवर्गीय वर्गीकरण आणि शासकीय नोंदी यांच्या संदर्भात केला जातो. या आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरणाचा अभ्यास करताना ऐतिहासिक जनगणना, गॅझेटियर आणि मानववंशशास्त्रीय साहित्य यांना त्यांच्या संबंधित कालखंडातील स्रोत म्हणून पाहणे आवश्यक आहे. त्यांची आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरणाशी थेट समानता गृहीत धरता येत नाही.
आधुनिक प्रशासकीय वादांमध्ये जुन्या जनगणना नोंदी, गॅझेटियर आणि मानववंशशास्त्रीय साहित्याचा संदर्भ दिला जातो. महाराष्ट्रातील मराठा आणि कुणबी वर्गीकरणासंबंधीच्या विविध प्रशासकीय व न्यायालयीन चर्चांमध्ये रेजिनाल्ड एडवर्ड एन्थोव्हन यांच्या द ट्राइब्स अँड कास्ट्स ऑफ बॉम्बे या ग्रंथातील निरीक्षणांचाही संदर्भ आढळतो.<ref name="Enthoven1922" />
तथापि ऐतिहासिक मानववंशशास्त्रीय निरीक्षणे आणि आधुनिक प्रशासकीय जात-वर्गीकरण हे दोन स्वतंत्र विषय आहेत. आधुनिक काळातील जात प्रमाणपत्र किंवा प्रशासकीय वर्गीकरण निश्चित करताना त्या वेळी लागू असलेले कायदे, शासन निर्णय, अधिकृत मागासवर्गीय याद्या, सक्षम प्राधिकरणाच्या नोंदी आणि संबंधित न्यायालयीन निर्णय यांनाच प्रशासकीयदृष्ट्या निर्णायक आधार मानणे आवश्यक आहे.
=== ऐतिहासिक निष्कर्ष आणि मर्यादा ===
उपलब्ध जनगणना आणि मानववंशशास्त्रीय स्रोतांवरून असे दिसून येते की मराठा आणि कुणबी या संज्ञांमध्ये महाराष्ट्राच्या विविध भागांत ऐतिहासिक सामाजिक संबंध होते आणि काही काळ मराठा-कुणबी किंवा कुणबी-मराठा यांसारख्या संयुक्त संज्ञांचा प्रशासकीय आणि जनगणनात्मक वापर करण्यात आला. त्याच वेळी काही जनगणनांमध्ये मराठा आणि कुणबी यांची स्वतंत्र शीर्षकांखाली नोंद करण्यात आली होती.<ref name="CensusBombay1901"/><ref name="CensusBombay1911"/>
या ऐतिहासिक नोंदींमधून सामाजिक संपर्क, विवाहसंबंध, आर्थिक स्थिती आणि सामाजिक गतिशीलतेचे काही पैलू स्पष्ट होतात; परंतु त्यावरून मराठा आणि कुणबी यांची एकच व अखंडित प्राचीन वंशावळ सिद्ध होत नाही. त्याचप्रमाणे या दोन्ही समूहांमध्ये कोणताही ऐतिहासिक सामाजिक संबंध नव्हता, असेही उपलब्ध स्रोतांच्या आधारे सर्वसाधारणपणे म्हणता येत नाही.<ref name="Enthoven1922" />
म्हणून कोकणातील कुणबी समाजाच्या इतिहासात मराठा-कुणबी संबंधांचा अभ्यास करताना तीन स्तर स्वतंत्र ठेवणे आवश्यक आहे: (१) ऐतिहासिक सामाजिक संबंध, (२) ब्रिटिशकालीन जनगणना आणि मानववंशशास्त्रीय वर्गीकरण, आणि (३) आधुनिक प्रशासकीय व कायदेशीर वर्गीकरण. या तीन स्तरांची सरमिसळ न करता त्यांचा स्वतंत्रपणे अभ्यास केल्यास या विषयाचे अधिक अचूक ऐतिहासिक चित्र समोर येते.
=== धर्म, श्रद्धा आणि लोकसंस्कृती ===
कोकणातील कुणबी समाजाच्या धार्मिक आणि सांस्कृतिक जीवनाचा अभ्यास करताना ग्रामजीवन, कुटुंब, देवक, ग्रामदेवता, स्थानिक देवता, विवाहविधी आणि कृषीचक्र यांचा परस्परसंबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे. ब्रिटिशकालीन गॅझेटियर आणि रेजिनाल्ड एडवर्ड एन्थोव्हन यांच्या मानववंशशास्त्रीय नोंदींमध्ये कुणबी आणि संबंधित कृषक समूहांच्या धार्मिक श्रद्धा, देवक, विवाहविधी, देवतांची उपासना आणि सामाजिक प्रथांचे विविध संदर्भ आढळतात.<ref name="Enthoven1922" /><ref name="RatnagiriSavantvadi1880" />
या नोंदींचा उपयोग करताना त्यातील वर्णने त्यांच्या काळातील प्रशासकीय आणि मानववंशशास्त्रीय निरीक्षणांवर आधारित आहेत, हे लक्षात घेणे आवश्यक आहे. त्यामुळे त्यातील प्रत्येक धार्मिक प्रथा संपूर्ण कोकणातील सर्व कुणबी कुटुंबांना किंवा आधुनिक काळातील संपूर्ण कुणबी समाजाला तंतोतंत लागू होते, असे मानता येत नाही.
=== ग्रामदेवता आणि स्थानिक देवता ===
कोकणातील ग्रामीण धार्मिक जीवनात ग्रामदेवता आणि स्थानिक देवतांना महत्त्वाचे स्थान होते. गावाची सामाजिक रचना आणि धार्मिक जीवन यांचा परस्पर संबंध असल्यामुळे ग्रामदेवतेचे उत्सव, पूजा आणि स्थानिक धार्मिक प्रथांमध्ये गावातील विविध सामाजिक समूहांचा सहभाग असे.<ref name="KolabaJanjira1883" />
बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या गॅझेटियरमधील ग्रामीण समाजाच्या वर्णनांमध्ये मारुती, खंडोबा, शिव आणि इतर देवतांच्या उपासनेचे उल्लेख विविध सामाजिक समूहांच्या संदर्भात आढळतात. त्यामुळे कोकणातील कुणबींच्या धार्मिक जीवनाचा अभ्यास करताना केवळ कुणबी समाजाशी संबंधित मानल्या जाणाऱ्या धार्मिक परंपरांचा विचार न करता व्यापक ग्रामीण आणि प्रादेशिक धार्मिक संस्कृतीचाही विचार करणे आवश्यक आहे.<ref name="KolabaJanjira1883" />
=== कुलदैवत आणि कुटुंबीय श्रद्धा ===
कुणबी समाजाच्या धार्मिक जीवनात कुटुंब आणि वंशपरंपरेशी संबंधित देवतांना स्थान असल्याचे मानववंशशास्त्रीय साहित्यात आढळते. घरातील धार्मिक विधी, पूर्वजांचे स्मरण, कुटुंबीय देवता आणि स्थानिक धार्मिक प्रथा या ग्रामीण कुटुंबाच्या सामाजिक जीवनाशी जोडलेल्या होत्या.<ref name="Enthoven1922" />
तथापि कुलदैवत या संज्ञेअंतर्गत सर्व कुणबी कुटुंबांची एकच देवता होती, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. कुलदैवत, ग्रामदेवता आणि स्थानिक देवतांच्या परंपरा कुटुंब, गाव आणि प्रदेशानुसार बदलत असू शकतात. त्यामुळे या धार्मिक परंपरांचा अभ्यास करताना स्थानिक आणि कुटुंबीय पुराव्यांना विशेष महत्त्व देणे आवश्यक आहे.
=== देवक ===
देवक ही विवाहसंस्था आणि कुटुंबीय धार्मिक विधींशी संबंधित महत्त्वाची सामाजिक-धार्मिक संकल्पना होती. रेजिनाल्ड एडवर्ड एन्थोव्हन यांच्या मानववंशशास्त्रीय नोंदींमध्ये विविध कृषक आणि इतर हिंदू समूहांच्या विवाहविधींमध्ये देवकाला असलेले स्थान वर्णन केले आहे. विवाहापूर्वी देवकाची स्थापना करणे, त्याची पूजा करणे आणि विवाहसमारंभात त्याला धार्मिक महत्त्व देणे अशा प्रथा विविध समुदायांच्या संदर्भात नोंदविल्या आहेत.<ref name="Enthoven1922" />
कुणबी समाजाच्या सामाजिक रचनेचा अभ्यास करताना देवकाचा संबंध केवळ धार्मिक विधींशी मर्यादित न ठेवता विवाहनियम आणि सामाजिक नातेसंबंधांच्या संदर्भातही पाहिला जातो. देवक आणि विवाहसंस्था यांच्यातील संबंधामुळे विशिष्ट कुटुंबीय किंवा सामाजिक गटांमध्ये विवाहासंबंधी काही नियम प्रचलित असल्याचे दिसते. तथापि या नियमांचे स्वरूप प्रदेश आणि सामाजिक उपगटांनुसार बदलत असल्यामुळे त्यांना संपूर्ण कोकणातील कुणबी समाजाचे सार्वत्रिक नियम मानता येत नाही.<ref name="Enthoven1922" />
=== विवाहविधी आणि धार्मिक प्रथा ===
कुणबी समाजातील विवाह ही धार्मिक विधींबरोबरच सामाजिक नातेसंबंध दृढ करणारी संस्था होती, असे ब्रिटिशकालीन मानववंशशास्त्रीय नोंदींवरून दिसते. विवाहसमारंभात देवकाची स्थापना, धार्मिक पूजा, नातेवाईकांचा सहभाग, सामुदायिक भोजन आणि विविध पारंपरिक विधी यांचा समावेश असल्याचे वर्णन आढळते.<ref name="Enthoven1922" />
विवाहासंबंधीच्या प्रथा प्रदेश, सामाजिक उपगट आणि स्थानिक परंपरांनुसार बदलत असत. त्यामुळे एखाद्या मानववंशशास्त्रीय नोंदीत वर्णन केलेली विवाहपद्धती संपूर्ण कोकणातील कुणबी समाजाची एकमेव किंवा अपरिवर्तनीय पद्धत होती, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. उपलब्ध नोंदींचे विश्लेषण करताना त्यांचा काळ, भौगोलिक संदर्भ आणि संबंधित सामाजिक समूह लक्षात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="Enthoven1922" />
=== सण आणि धार्मिक उत्सव ===
कोकणातील कुणबी समाजाचे धार्मिक जीवन व्यापक ग्रामीण मराठी आणि कोकणी सांस्कृतिक परंपरांशी संबंधित होते. स्थानिक देवतांच्या जत्रा, ग्रामदेवतांची पूजा, हिंदू धार्मिक सण आणि कुटुंबीय धार्मिक विधी हे ग्रामीण सामाजिक जीवनाचे घटक होते. बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या गॅझेटियरमध्ये विविध ग्रामीण समुदायांच्या धार्मिक आचारांमध्ये स्थानिक देवता, मंदिरे, जत्रा आणि विशिष्ट दिवसांच्या पूजेचे उल्लेख आढळतात.<ref name="KolabaJanjira1883" />
काही समुदायांच्या संदर्भात शनिवार, विशिष्ट तिथी किंवा स्थानिक देवतेच्या उत्सवाच्या दिवशी पूजा करण्याच्या प्रथा नोंदविल्या आहेत. या प्रकारच्या धार्मिक प्रथा कोकणातील व्यापक ग्रामीण धार्मिक संस्कृतीचा भाग होत्या; त्यामुळे त्यांना केवळ कुणबी समाजापुरते मर्यादित करणे योग्य ठरणार नाही.<ref name="KolabaJanjira1883" />
=== कृषीचक्र आणि धार्मिक श्रद्धा ===
कुणबी समाजाची पारंपरिक अर्थव्यवस्था शेतीशी संबंधित असल्यामुळे कृषीचक्र आणि ग्रामीण धार्मिक जीवन यांच्यात परस्परसंबंध असण्याची शक्यता होती. पाऊस, पेरणी, रोपांची लागवड, पीकवाढ आणि कापणी या कृषी टप्प्यांशी स्थानिक श्रद्धा, ग्रामदेवता आणि धार्मिक प्रथा जोडल्या जात असत. कोकणातील ग्रामीण धार्मिक जीवनाच्या वर्णनांमध्ये कृषीसमाजाच्या जीवनाशी संबंधित स्थानिक देवता, धार्मिक उत्सव आणि प्रथांचे उल्लेख आढळतात.<ref name="KolabaJanjira1883" />
मात्र उपलब्ध ब्रिटिशकालीन गॅझेटियर आणि मानववंशशास्त्रीय स्रोतांमध्ये कुणबी समाजातील सर्व कृषीविधींची एकसंध आणि सविस्तर नोंद आढळत नाही. त्यामुळे एखादा विशिष्ट कृषीविधी संपूर्ण कुणबी समाजाची सार्वत्रिक परंपरा म्हणून मांडण्याऐवजी त्याचा अभ्यास संबंधित गाव, प्रदेश आणि स्थानिक ग्रामीण कृषी संस्कृतीच्या संदर्भात करणे अधिक योग्य ठरते.
कोकणातील कृषीजीवन, ग्रामीण परंपरा आणि स्थानिक सांस्कृतिक व्यवहारांच्या संदर्भात अनंत नर्मदा सखाराम घोलम यांच्या ‘खडीकोळवण : सांस्कृतिक, ऐतिहासिक आणि ग्रामीण जीवन’ या ग्रंथातील स्थानिक संदर्भ पूरक स्रोत म्हणून उपयोगी ठरू शकतात.<ref name="घोलम2025" />
=== पूर्वज, मृत्यू आणि धार्मिक विधी ===
कुटुंब आणि पूर्वजांशी संबंधित धार्मिक विधींचा उल्लेख ब्रिटिशकालीन मानववंशशास्त्रीय साहित्यामध्ये आढळतो. विवाह, मृत्यू आणि पुनर्विवाह यांसारख्या प्रसंगी धार्मिक विधी, सामाजिक मान्यता आणि कुटुंबीय संबंध यांच्यातील परस्परसंबंध विविध सामाजिक समूहांच्या संदर्भात नोंदविण्यात आले आहेत.<ref name="Enthoven1922" />
या नोंदींवरून ग्रामीण समाजात धार्मिक विधी आणि सामाजिक मान्यता यांचा परस्परसंबंध होता असे दिसते. तथापि एन्थोव्हन यांच्या नोंदी विशिष्ट काळातील आणि विशिष्ट सामाजिक समूहांवरील मानववंशशास्त्रीय निरीक्षणांवर आधारित आहेत. त्यामुळे त्यांतील वर्णने आधुनिक काळातील संपूर्ण कुणबी समाजाच्या धार्मिक जीवनाला थेट लागू करता येत नाहीत.
=== लोककथा आणि लोकपरंपरा ===
कोकणातील लोकसंस्कृतीमध्ये देवता, स्थानिक वीरपुरुष, ग्रामपरंपरा, धार्मिक स्थळे, जत्रा, आख्यायिका आणि मौखिक परंपरांना महत्त्वाचे स्थान आहे. ब्रिटिशकालीन गॅझेटियरमध्ये कोकणातील ग्रामीण समाजाच्या धार्मिक जीवनाशी संबंधित स्थानिक देवता, धार्मिक स्थळे आणि उत्सवांचे उल्लेख आढळतात.<ref name="KolabaJanjira1883" />
तथापि उपलब्ध प्रमुख गॅझेटियर आणि एन्थोव्हन यांच्या मानववंशशास्त्रीय नोंदींमध्ये कुणबी समाजाच्या स्वतंत्र लोककथांचा किंवा स्वतंत्र कथासंग्रहाचा पुरेसा सुसंगत पुरावा उपलब्ध नसल्यामुळे विशिष्ट लोककथा कुणबी समाजाची सार्वत्रिक परंपरा म्हणून नोंदविणे योग्य ठरणार नाही.
कोकणातील लोकपरंपरांचा अभ्यास व्यापक प्रादेशिक लोकसाहित्याच्या संदर्भात करणे अधिक योग्य ठरते. एखादी लोककथा, आख्यायिका, धार्मिक परंपरा किंवा मौखिक स्मृती विशिष्ट कुणबी गाव, कुटुंब किंवा स्थानिक समुदायाशी संबंधित असल्यास तिचा स्वतंत्र स्थानिक स्रोतांच्या आधारे अभ्यास करता येतो. अशा स्थानिक सांस्कृतिक आणि ग्रामीण परंपरांच्या संदर्भात ‘खडीकोळवण : सांस्कृतिक, ऐतिहासिक आणि ग्रामीण जीवन’ हा पूरक संदर्भ म्हणून वापरता येतो; मात्र एखाद्या विशिष्ट लोककथेचा पुरावा त्या ग्रंथात प्रत्यक्ष उपलब्ध असल्यासच संबंधित विधानासाठी त्याचा संदर्भ द्यावा.<ref name="घोलम2025"/>
=== लोकगीते आणि मौखिक परंपरा ===
कृषीप्रधान ग्रामीण समाजात श्रम, सण, विवाह, धार्मिक विधी आणि ऋतूचक्र यांच्याशी संबंधित मौखिक परंपरांना महत्त्वाचे स्थान होते. कोकणातील ग्रामीण लोकजीवनाच्या वर्णनांमध्ये धार्मिक उत्सव, स्थानिक देवता, जत्रा आणि सामाजिक-सांस्कृतिक प्रथांचा उल्लेख आढळतो. या व्यापक ग्रामीण सांस्कृतिक वातावरणातून विविध प्रकारच्या मौखिक परंपरा विकसित झाल्या असण्याची शक्यता आहे.<ref name="KolabaJanjira1883" />
मात्र एखादे विशिष्ट लोकगीत हे ‘कुणबी लोकगीत’ आहे, असा निष्कर्ष काढण्यासाठी त्या गीताचा कुणबी समाजाशी स्पष्ट संबंध दर्शविणारा विश्वसनीय स्रोत आवश्यक आहे. त्यामुळे केवळ कोकणात किंवा ग्रामीण समाजात प्रचलित असल्याच्या आधारावर सामान्य लोकगीतांना कुणबी समाजाची स्वतंत्र सांस्कृतिक निर्मिती म्हणून वर्गीकृत करणे योग्य ठरणार नाही.
स्थानिक लोकगीते, म्हणी, आख्यायिका आणि मौखिक स्मृती यांचा अभ्यास करताना त्यांचे भौगोलिक क्षेत्र, संबंधित समुदाय, प्रसंग आणि मौखिक परंपरेतील वापर यांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे. अशा स्थानिक सांस्कृतिक परंपरांचे दस्तऐवजीकरण कोकणातील ग्रामीण सामाजिक इतिहासाच्या अभ्यासासाठी पूरक ठरू शकते.
=== कोकणी लोकसंस्कृतीशी संबंध ===
कोकणातील कुणबी समाजाची धार्मिक आणि सांस्कृतिक ओळख व्यापक कोकणी ग्रामीण संस्कृतीपासून पूर्णपणे वेगळी नव्हती. ग्रामदेवता, स्थानिक देवता, कृषीचक्र, जत्रा, कुटुंबीय धार्मिक प्रथा, विवाहविधी आणि स्थानिक सामाजिक संस्था यांसारख्या अनेक सांस्कृतिक बाबी कोकणातील विविध ग्रामीण समुदायांमध्ये आढळत असल्याचे गॅझेटियरमधील वर्णनांवरून दिसते.<ref name="KolabaJanjira1883" />
त्यामुळे कुणबी समाजाची लोकसंस्कृती ही पूर्णपणे बंदिस्त किंवा इतर ग्रामीण समुदायांपासून स्वतंत्र अशी सांस्कृतिक व्यवस्था होती, असे मानणे योग्य ठरणार नाही. तिचा विकास स्थानिक कृषीजीवन, ग्रामसंस्था, धार्मिक परंपरा आणि कोकणातील व्यापक सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरणाशी असलेल्या परस्परसंबंधातून झाला असण्याची शक्यता अधिक आहे.
या संदर्भात स्थानिक ग्रामीण जीवन, सांस्कृतिक परंपरा आणि सामाजिक स्मृतींचे दस्तऐवजीकरण करणारे अनंत नर्मदा सखाराम घोलम यांचे ‘खडीकोळवण : सांस्कृतिक, ऐतिहासिक आणि ग्रामीण जीवन’ हे पुस्तक पूरक स्रोत म्हणून उपयोगी ठरू शकते. तथापि त्यातील विशिष्ट माहिती ज्या स्थानिक परंपरेशी संबंधित आहे, त्याच मर्यादित संदर्भात तिचा वापर करणे अधिक योग्य ठरेल.<ref name="घोलम2025" />
=== धार्मिक जीवन आणि सामाजिक संघटना ===
धार्मिक प्रथा आणि सामाजिक संघटना यांचा परस्परसंबंध पारंपरिक ग्रामीण जीवनात महत्त्वाचा होता. विवाह, धार्मिक विधी, सामाजिक नियम आणि सामुदायिक व्यवहार यांमध्ये कुटुंब, नातेसंबंध आणि समुदायातील ज्येष्ठ व्यक्तींची भूमिका असल्याचे ब्रिटिशकालीन मानववंशशास्त्रीय नोंदींमध्ये आढळते.<ref name="Enthoven1922" />
एन्थोव्हन यांच्या नोंदींमध्ये विविध सामाजिक समूहांच्या संदर्भात जातपंचायत, सामाजिक नियम, विवाहसंस्था आणि धार्मिक प्रथांचा परस्परसंबंध वर्णन केला आहे. काही समूहांमध्ये सामाजिक नियमांचे उल्लंघन झाल्यास दंड, सामुदायिक भोजन किंवा इतर सामाजिक उपायांचा वापर केला जात असल्याचेही नमूद आहे.<ref name="Enthoven1922" />
या संस्था आधुनिक न्यायालये किंवा प्रशासकीय यंत्रणांप्रमाणे औपचारिक कायदेशीर संस्था नव्हत्या. त्या स्थानिक समुदायाच्या सामाजिक नियंत्रण, परस्पर संबंध आणि रूढींचे पालन यांसाठी कार्य करणाऱ्या पारंपरिक सामाजिक पद्धती होत्या. तथापि एन्थोव्हन यांच्या नोंदी विविध समुदायांवर आधारित असल्यामुळे त्यातील प्रत्येक प्रथा संपूर्ण कोकणातील किंवा सर्व कुणबी समूहांना समानपणे लागू होती, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="Enthoven1922" />
=== धार्मिक आणि सांस्कृतिक विविधता ===
कोकणातील कुणबी समाजाला एकसंध धार्मिक पद्धती असलेला समूह मानणे योग्य ठरणार नाही. वेगवेगळ्या गावांतील ग्रामदेवता, कुटुंबीय धार्मिक परंपरा, देवक, स्थानिक देवतांची उपासना आणि प्रादेशिक धार्मिक प्रभाव यांमुळे धार्मिक आचारांमध्ये विविधता निर्माण झाली होती. ब्रिटिशकालीन मानववंशशास्त्रीय नोंदींमध्येही विविध सामाजिक समूहांच्या धार्मिक प्रथा, देवतांची उपासना आणि स्थानिक धार्मिक परंपरांमध्ये प्रादेशिक भिन्नता असल्याचे दिसते.<ref name="Enthoven1922" />
सावंतवाडी आणि दक्षिण कोकणातील धार्मिक लोकसंख्येच्या ऐतिहासिक नोंदींमध्ये विविध हिंदू धार्मिक परंपरा तसेच स्थानिक देवता आणि आत्म्यांशी संबंधित उपासनेचे प्रकार आढळतात. १८७२ च्या सावंतवाडीच्या नोंदींमध्ये मोठ्या प्रमाणावर लोक विशिष्ट पंथाशी संबंधित नसून स्थानिक देवता आणि आत्म्यांची पूजा करीत असल्याचे स्वतंत्र वर्गीकरण करण्यात आले होते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880" />
ही नोंद कुणबी समाजाची स्वतंत्र धार्मिक आकडेवारी नाही; ती त्या काळातील सावंतवाडी संस्थानातील व्यापक धार्मिक लोकसंख्येचे वर्गीकरण आहे. त्यामुळे तिचा उपयोग कुणबी समाजाची स्वतंत्र धार्मिक स्थिती निश्चित करण्यासाठी न करता दक्षिण कोकणातील तत्कालीन व्यापक धार्मिक आणि सांस्कृतिक वातावरण समजून घेण्यासाठी करणे अधिक योग्य ठरते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880" />
=== ऐतिहासिक स्रोतांच्या मर्यादा ===
कुणबी समाजाच्या धार्मिक आणि लोकसंस्कृतीविषयी उपलब्ध प्रमुख ऐतिहासिक स्रोतांमध्ये ब्रिटिशकालीन गॅझेटियर आणि मानववंशशास्त्रीय ग्रंथांचा मोठा वाटा आहे. हे स्रोत तत्कालीन प्रशासकीय अधिकारी आणि मानववंशशास्त्रज्ञ यांच्या निरीक्षणांवर आधारित असल्यामुळे त्यांतील वर्णने त्या काळातील प्रशासकीय वर्गीकरण, सामान्यीकरणे आणि निरीक्षकांच्या दृष्टिकोनाने प्रभावित असू शकतात.<ref name="Enthoven1922" />
त्यामुळे या स्रोतांमध्ये नोंदविलेली एखादी धार्मिक प्रथा संपूर्ण कुणबी समाजाची सार्वत्रिक परंपरा होती, असे गृहीत धरता येत नाही. विशेषतः ग्रामदेवता, कुलदैवत, देवक, लोककथा, लोकगीते आणि कृषीविधी यांचा अभ्यास करताना त्यांचा प्रदेश, गाव, कुटुंब आणि सामाजिक उपगट यांनुसार बदलणारा संदर्भ विचारात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="Enthoven1922" />
=== धार्मिक आणि लोकसांस्कृतिक वारशाचे ऐतिहासिक महत्त्व ===
उपलब्ध पुराव्यांवरून कोकणातील कुणबी समाजाच्या धार्मिक जीवनात ग्रामजीवन, कुटुंबीय परंपरा, देवक, स्थानिक देवता, विवाहविधी आणि कृषीप्रधान जीवन यांचे परस्परसंबंध दिसून येतात. या धार्मिक-सांस्कृतिक संस्था केवळ धार्मिक आचरणापुरत्या मर्यादित नव्हत्या; त्या कुटुंब, विवाह, ग्रामसमुदाय आणि सामाजिक संबंधांच्या संघटनेशीही संबंधित होत्या.<ref name="Enthoven1922" />
या पार्श्वभूमीवर कोकणातील कुणबी समाजाची लोकसंस्कृती समजून घेताना ‘कुणबींची स्वतंत्र संस्कृती’ आणि ‘कोकणातील व्यापक ग्रामीण संस्कृती’ यांना परस्परविरोधी मानण्याऐवजी त्यांच्यातील परस्परसंबंध, सांस्कृतिक देवाणघेवाण आणि प्रादेशिक विविधता यांचा अभ्यास करणे अधिक योग्य ठरते. स्थानिक सांस्कृतिक परंपरा, ग्रामीण जीवन आणि सामाजिक स्मृतींच्या अभ्यासासाठी अनंत नर्मदा सखाराम घोलम यांचे ‘खडीकोळवण : सांस्कृतिक, ऐतिहासिक आणि ग्रामीण जीवन’ हे पुस्तक पूरक संदर्भ म्हणून वापरता येऊ शकते; मात्र विशिष्ट धार्मिक प्रथा किंवा लोकपरंपरेचा दावा करताना त्या पुस्तकातील संबंधित प्रत्यक्ष मजकुराशी संदर्भ जुळविणे आवश्यक आहे.<ref name="घोलम2025" />
== लोकसंख्याशास्त्र ==
कोकणातील कुणबी समाजाच्या लोकसंख्येचा ऐतिहासिक अभ्यास करताना ब्रिटिशकालीन जनगणना, जिल्हानिहाय गॅझेटियर, ग्रामसर्वेक्षण आणि नंतरच्या जनगणना-अभिलेखांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे. या स्रोतांमध्ये कुणबी आणि संबंधित कृषक समूहांचे वर्गीकरण काळानुसार बदललेले दिसते. विशेषतः कुणबी, मराठा-कुणबी आणि कुणबी-मराठा यांसारख्या संज्ञांचा वापर वेगवेगळ्या जनगणनांमध्ये समान पद्धतीने झालेला नव्हता. त्यामुळे विविध जनगणनांतील आकडे थेट एकत्र करून आधुनिक काळातील कुणबी लोकसंख्येचा अंदाज काढणे पद्धतशीरदृष्ट्या योग्य ठरत नाही.<ref name="Baines1881" /><ref name="CensusBombay1901" /><ref name="CensusBombay1911" />
=== १८८१ची जनगणना ===
१८८१ची जनगणना ही बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील कुणबी आणि संबंधित कृषक समूहांच्या लोकसंख्येचा अभ्यास करण्यासाठी महत्त्वाचा ऐतिहासिक स्रोत आहे. जनगणना अहवालात जे. ए. बेन्स यांनी ‘Maratha Kunbi’ हा व्यापक कृषक समूह मानला असून त्यात दख्खनातील कुणबी तसेच कोकणात ‘Maratha’ म्हणून नोंदविल्या जाणाऱ्या संबंधित समूहांचा समावेश केला होता. अहवालात या दोन समूहांमधील भेद अनेक ठिकाणी स्पष्ट नसून काही बाबतींत तो प्रशासकीय वर्गीकरणावर अवलंबून असल्याचेही नमूद केले आहे.<ref name="Baines1881" />
१८८१ च्या अहवालातील रत्नागिरी जिल्ह्याच्या आकडेवारीनुसार २,०५,७८४ कुणबी आणि सुमारे २,७१,००० मराठा अशी नोंद करण्यात आली होती. त्यामुळे त्या काळातील रत्नागिरी जिल्ह्यात कुणबी हा मोठ्या संख्येचा कृषक समूह होता, असे जनगणना-अभिलेखावरून दिसते.<ref name="Baines1881" />
या आकडेवारीचा अर्थ लावताना १८८१ च्या जनगणनेतील ‘Maratha Kunbi’ आणि ‘Kunbi’ या वर्गांची व्याप्ती आधुनिक महाराष्ट्रातील प्रशासकीय कुणबी वर्गाशी समान नव्हती, हे लक्षात घेणे आवश्यक आहे. त्यामुळे २,०५,७८४ हा आकडा आधुनिक रत्नागिरी जिल्ह्यातील कुणबी लोकसंख्येशी थेट तुलनेसाठी वापरणे योग्य ठरणार नाही.<ref name="Baines1881" />
=== १९०१ची जनगणना ===
१९०१ च्या जनगणनेत बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील जातीय वर्गीकरणाची पद्धत १८८१ च्या तुलनेत बदललेली दिसते. मुंबई शहराच्या जनगणना अहवालात ‘Kunbi (Maratha)’ ही संज्ञा वापरण्यात आली असून काही स्थानिक विभागांमध्ये या वर्गाचे प्रमाण लक्षणीय असल्याचे नमूद केले आहे. डोंगरी, पहिला नागपाडा आणि कुंभारवाडा या विभागांमध्ये ‘Kunbi (Maratha)’ लोकसंख्येचे प्रमाण अनुक्रमे ४७ टक्के, ३४ टक्के आणि २८ टक्के असल्याचे अहवालात नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="CensusBombay1901"/>
१९०१ च्या जनगणनेतील मुंबईच्या स्थलांतरविषयक नोंदींमध्ये रत्नागिरी हा मुंबईला स्थलांतरित लोकसंख्या पुरविणाऱ्या प्रमुख जिल्ह्यांपैकी एक असल्याचे नमूद आहे. त्या वेळी मुंबईतील एकूण स्थलांतरित लोकसंख्येपैकी सुमारे १,४६,००० व्यक्ती रत्नागिरी जिल्ह्यात जन्मलेल्या होत्या; हे प्रमाण स्थलांतरित लोकसंख्येच्या सुमारे २४.५ टक्के होते. त्यामुळे विसाव्या शतकाच्या प्रारंभी रत्नागिरी आणि मुंबई यांच्यातील लोकसंख्याशास्त्रीय संबंध लक्षणीय होते.<ref name="CensusBombay1901Presidency">{{cite report
|author=India. Census Commissioner
|title=Census of India, 1901: Bombay Presidency
|publisher=Government Central Press
|year=1902
}}</ref>
मात्र मुंबईत स्थलांतरित झालेल्या रत्नागिरीकरांना कुणबी म्हणून वर्गीकृत करता येत नाही. रत्नागिरीहून होणारे स्थलांतर विविध सामाजिक आणि धार्मिक समूहांचे होते. त्यामुळे जिल्हानिहाय स्थलांतराची आकडेवारी आणि कुणबी समाजाची जातीनिहाय लोकसंख्या यांची थेट समानता करणे ऐतिहासिकदृष्ट्या अचूक ठरणार नाही.<ref name="CensusBombay1901Presidency"/>
=== १९११ची जनगणना ===
१९११ च्या जनगणनेत कुणबी आणि मराठा या समूहांचे वर्गीकरण पुन्हा बदललेले दिसते. अधिकृत जनगणना अहवालानुसार १९०१मध्ये ‘Mahratha Kunbis’ ज्या पद्धतीने वर्गीकृत करण्यात आले होते, त्यांचे १९११मध्ये कुणबी या वर्गाशी संबंध जोडण्यात आले. १९११ च्या जनगणनेत कुणबी आणि कानबी यांच्या विविध उपगटांची नोंद करण्याचाही प्रयत्न करण्यात आला होता. त्यामुळे १९०१ आणि १९११ च्या आकडेवारीची तुलना करताना दोन्ही जनगणनांमधील वर्गीकरणपद्धतीतील फरक विचारात घेणे आवश्यक ठरते.<ref name="CensusBombay1911"/>
१९११ च्या अधिकृत जनगणनेत ‘Kunbi Maratha’ हा कुणबी या शीर्षकाखाली दाखविण्यात आला, तर दख्खनी आणि कोकणी मराठा यांना मराठा या शीर्षकाखाली वर्गीकृत करण्यात आले. यावरून ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये समान किंवा संबंधित सामाजिक समूहांचे वर्गीकरण वेगवेगळ्या जनगणनांमध्ये बदलत असल्याचे दिसून येते.<ref name="CensusBombay1911"/>
या वर्गीकरणातील बदलामुळे १९०१ आणि १९११ च्या जनगणना आकडेवारीची थेट तुलना करणे सावधगिरीने करणे आवश्यक आहे. एका जनगणनेत एखादा समूह ज्या शीर्षकाखाली नोंदविला गेला होता, त्याच समूहाला पुढील जनगणनेत वेगळ्या शीर्षकाखाली समाविष्ट केले जाऊ शकत होते. त्यामुळे ऐतिहासिक जातीय लोकसंख्येचे विश्लेषण करताना केवळ संख्यात्मक आकडे न पाहता संबंधित जनगणनेची वर्गीकरणपद्धतीही तपासणे आवश्यक आहे.<ref name="CensusBombay1911"/>
=== १९३१ची जनगणना ===
१९३१ची जनगणना ब्रिटिश भारतातील जातीय वर्गीकरणाच्या शेवटच्या व्यापक जनगणनांपैकी एक होती. बॉम्बे प्रांतातील या जनगणनेच्या विविध तक्त्यांमध्ये जात, उपजात आणि प्रादेशिक वर्गीकरण स्वतंत्र पद्धतीने हाताळण्यात आले होते. त्यामुळे या जनगणनेतील कुणबी, मराठा, मराठा-कुणबी किंवा संबंधित संज्ञांचा वापर करताना संबंधित तक्ता आणि त्यामागील वर्गीकरणपद्धती तपासणे आवश्यक आहे.<ref name="Census1931Bombay"/>
१९३१नंतर भारताच्या नियमित जनगणनांमध्ये सर्व जातींची संपूर्ण लोकसंख्या पूर्वीच्या पद्धतीने सातत्याने प्रकाशित करण्यात आली नाही. त्यामुळे १९३१नंतरच्या कालखंडासाठी कुणबी समाजाची अखिल भारतीय किंवा कोकणातील सातत्यपूर्ण जातीनिहाय जनगणना-कालमालिका तयार करणे शक्य होत नाही.
=== १९६१ चे कुंकेरी ग्रामसर्वेक्षण ===
१९६१ च्या जनगणना कार्यक्रमांतर्गत महाराष्ट्रातील निवडक गावांचे स्वतंत्र ग्रामसर्वेक्षण करण्यात आले. त्याअंतर्गत सावंतवाडी तालुक्यातील कुंकेरी गावाचे स्वतंत्र ग्रामसर्वेक्षण मोनोग्राफ प्रसिद्ध करण्यात आले. हा ग्रंथ महाराष्ट्रातील निवडक ३५ गावांच्या ग्रामसर्वेक्षण मालिकेचा भाग होता आणि त्यामध्ये संबंधित गावाच्या सामाजिक, सांस्कृतिक आणि आर्थिक जीवनाचे सविस्तर दस्तऐवजीकरण करण्यात आले होते.<ref name="Kunkeri1966"/>
कुंकेरी ग्रामसर्वेक्षणात कुटुंबरचना, व्यवसाय, जमीनधारणा, आर्थिक व्यवहार, सामाजिक जीवन आणि सांस्कृतिक जीवन यांसंबंधी माहिती संकलित करण्यात आली होती. त्यामुळे दक्षिण कोकणातील ग्रामीण समाजरचनेचा सूक्ष्म पातळीवर अभ्यास करण्यासाठी हे सर्वेक्षण महत्त्वाचे प्राथमिक स्रोत ठरते.<ref name="Kunkeri1966"/>
कुंकेरीच्या पुढील दीर्घकालीन अभ्यासांमध्ये १९६१, १९८७ आणि २०१७ या तीन कालखंडांतील लोकसंख्या, सामाजिक रचना, जमीनधारणा, व्यवसाय आणि स्थलांतर यांची तुलना करण्यात आली आहे. या अभ्यासातून दीर्घकाळ चाललेल्या स्थलांतरामुळे गावाच्या सामाजिक आणि आर्थिक जीवनात बदल झाले असले तरी काही सामाजिक आणि जमीनधारणेशी संबंधित रचनांमध्ये सातत्यही राहिल्याचे दिसून येते.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
=== २००१–२०११ : कोकणातील जिल्हानिहाय लोकसंख्या बदल ===
२००१ ते २०११ या कालावधीत कोकणातील जिल्ह्यांच्या एकूण लोकसंख्येत वेगवेगळ्या प्रकारचे बदल झाले. मात्र आधुनिक भारतीय जनगणनेमध्ये ‘कुणबी’ ही स्वतंत्र सर्वसमावेशक जातीय लोकसंख्या श्रेणी नियमितपणे प्रकाशित करण्यात आलेली नसल्यामुळे, जिल्ह्यांच्या एकूण लोकसंख्येतील वाढ किंवा घट यावरून कुणबी समाजाची स्वतंत्र लोकसंख्या किंवा तिचा वाढीचा दर निश्चित करता येत नाही.<ref name="PopulationFinder2011">{{cite web
|title=Population Finder 2011
|publisher=Office of the Registrar General and Census Commissioner, India
|url=https://censusindia.gov.in/census.website/en/data/population-finder
}}</ref>
२०११ च्या जनगणनेनुसार रत्नागिरी जिल्ह्याची लोकसंख्या १६,१५,०६९ होती. २००१मध्ये ही लोकसंख्या १६,९६,७७७ होती. त्यामुळे २००१ ते २०११ या दशकात रत्नागिरी जिल्ह्याच्या लोकसंख्येत ८१,७०८ व्यक्तींची घट झाली आणि दशकातील लोकसंख्या वाढीचा दर उणे ४.८ टक्के राहिला.<ref name="RatnagiriPopulation2001">{{cite report
|title=District Census Handbook: Ratnagiri, Census of India 2001
|publisher=Directorate of Census Operations, Maharashtra
|year=2006
}}</ref><ref name="RatnagiriPopulation2011">{{cite report
|title=Census of India 2011 — Maharashtra — District Census Handbook, Ratnagiri
|publisher=Directorate of Census Operations, Maharashtra
|year=2014
}}</ref>
सिंधुदुर्ग जिल्ह्याची २०११मधील लोकसंख्या ८,४९,६५१ होती. २००१मध्ये ती सुमारे ८,६८,८२५ होती. त्यामुळे २००१ ते २०११ या कालावधीत सिंधुदुर्ग जिल्ह्याच्या लोकसंख्येत १९,१७४ व्यक्तींची घट झाली आणि दशकातील लोकसंख्या वाढीचा दर उणे २.२ टक्के राहिला.<ref name="SindhudurgPopulation2011">{{cite report
|title=Census of India 2011 — Maharashtra — District Census Handbook, Sindhudurg
|publisher=Directorate of Census Operations, Maharashtra
|year=2014
}}</ref><ref name="SindhudurgPopulation2001">{{cite report
|title=Final population totals, Maharashtra, District Sindhudurg — 2001
|publisher=Office of the Registrar General & Census Commissioner, India
|year=2001
}}</ref>
२०११ च्या जनगणनेच्या वेळी पालघर हा स्वतंत्र जिल्हा नव्हता. पालघर जिल्ह्याची निर्मिती १ ऑगस्ट २०१४ रोजी तत्कालीन ठाणे जिल्ह्याचे विभाजन करून करण्यात आली. त्यामुळे २०११ च्या जनगणनेतील पालघरची लोकसंख्या स्वतंत्र जिल्हा म्हणून मोजलेली नव्हती. तथापि, सध्याच्या पालघर जिल्ह्याच्या भौगोलिक क्षेत्राशी संबंधित २०११ची पुनर्गणित लोकसंख्या २९,९०,११६ इतकी होती.<ref name="PalgharDistrict">{{cite web
|title=About District
|publisher=District Palghar, Government of Maharashtra
|url=https://palghar.gov.in/en/about-district/
}}</ref>
महाराष्ट्र शासनाच्या जिल्हानिहाय जनगणना आकडेवारीनुसार २०११ मध्ये पालघरची लोकसंख्या २९.९० लाख, रायगडची २६.३४ लाख, रत्नागिरीची १६.१५ लाख आणि सिंधुदुर्गची ८.५० लाख होती. या आकडेवारीचा वापर करताना संबंधित जिल्ह्यांच्या २००१ आणि २०११ च्या जनगणनेतील प्रशासकीय सीमांमधील बदलांचा विचार करणे आवश्यक आहे.<ref name="DistrictwisePopulationMaharashtra">{{cite web
|title=Districtwise Total & Tribal Population as per 1991, 2001 & 2011 Census of Maharashtra State
|publisher=Tribal Research and Training Institute, Government of Maharashtra
|url=https://trti.maharashtra.gov.in/districtwiseTotalPopulation
}}</ref>
=== आधुनिक जनगणनेमध्ये कुणबी लोकसंख्येची स्थिती ===
स्वातंत्र्योत्तर भारताच्या नियमित जनगणनांमध्ये अनुसूचित जाती आणि अनुसूचित जमाती यांची स्वतंत्र लोकसंख्या आकडेवारी प्रसिद्ध करण्यात आली आहे; मात्र सर्व जातींची स्वतंत्र आणि सर्वसमावेशक जातीनिहाय लोकसंख्या नियमित जनगणनेत प्रकाशित करण्यात आलेली नाही. २०११ च्या जनगणनेच्या प्राथमिक लोकसंख्या सारांशामध्ये लोकसंख्या, लिंग, वयोगट, अनुसूचित जाती, अनुसूचित जमाती, कामाची स्थिती आणि इतर सामाजिक-आर्थिक निर्देशकांची माहिती उपलब्ध आहे; ‘कुणबी’ या स्वतंत्र सर्वसमावेशक जातीय वर्गाची जिल्हानिहाय लोकसंख्या त्यामध्ये दिलेली नाही.<ref name="PopulationFinder2011" />
त्यामुळे २०११ च्या जनगणनेच्या आधारे रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, रायगड, पालघर किंवा ठाणे या जिल्ह्यांसाठी ‘कुणबी लोकसंख्या अमुक टक्के’ असा अधिकृत जनगणना आकडा निश्चित करता येत नाही. जिल्ह्याची एकूण लोकसंख्या आणि त्या जिल्ह्यातील कुणबी समाजाची जातीनिहाय लोकसंख्या या दोन वेगळ्या सांख्यिक संकल्पना आहेत.
२०११ च्या जनगणनेत पालघरच्या सध्याच्या भौगोलिक क्षेत्राची एकूण लोकसंख्या २९,९०,११६ इतकी होती; त्यापैकी अनुसूचित जमातींची लोकसंख्या ११,१८,००८ होती. ही आकडेवारी जिल्ह्याची एकूण लोकसंख्या किंवा अनुसूचित जमातींची लोकसंख्या दर्शवते; तिच्यावरून कुणबी समाजाची लोकसंख्या निश्चित करता येत नाही.<ref name="PalgharDistrict" />
काही सामाजिक संस्था, राजकीय व्यक्ती, संशोधक किंवा माध्यमांनी कुणबी समाजाच्या लोकसंख्येबाबत विविध अंदाज व्यक्त केलेले असू शकतात. मात्र अशा अंदाजांना अधिकृत जनगणना आकडेवारीपासून स्वतंत्र ठेवणे आवश्यक आहे. विश्वसनीय अधिकृत जातीनिहाय जनगणना उपलब्ध नसताना अशा अंदाजांना कुणबी समाजाची अधिकृत लोकसंख्या म्हणून मांडणे योग्य ठरणार नाही.
त्यामुळे कोकणातील कुणबी समाजाच्या लोकसंख्येचा ऐतिहासिक अभ्यास करताना ब्रिटिशकालीन जनगणना, जिल्हानिहाय गॅझेटियर, ग्रामसर्वेक्षणे आणि उपलब्ध आधुनिक जनगणना आकडे यांचा स्वतंत्र संदर्भात उपयोग करणे आवश्यक आहे. वेगवेगळ्या कालखंडांतील वर्गीकरणपद्धती आणि प्रशासकीय सीमा भिन्न असल्यामुळे त्यांची थेट तुलना करून आधुनिक कुणबी लोकसंख्येचा निश्चित अंदाज काढणे पद्धतशीरदृष्ट्या योग्य ठरणार नाही.
=== २०२७ ची जातीनिहाय जनगणना ===
भारत सरकारने २०२७ची जनगणना घेण्याचा निर्णय अधिकृतपणे जाहीर केला असून, ३० एप्रिल २०२५ रोजी झालेल्या मंत्रिमंडळाच्या राजकीय व्यवहार समितीच्या बैठकीत आगामी जनगणनेत जातीनिहाय गणना समाविष्ट करण्याचा निर्णय घेण्यात आला. यामुळे स्वातंत्र्यानंतर प्रथमच अनुसूचित जाती आणि अनुसूचित जमातींपलीकडे सर्व सामाजिक समूहांची जातीनिहाय गणना जनगणनेच्या मुख्य प्रक्रियेचा भाग होणार आहे.<ref name="CasteEnumeration2025">{{cite web
|title=Cabinet approves Caste enumeration in the upcoming Census
|publisher=Press Information Bureau, Government of India
|date=30 April 2025
|url=https://www.pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=2125526
}}</ref>
२०२७ च्या जनगणनेची संदर्भ तारीख सामान्य क्षेत्रांसाठी १ मार्च २०२७ निश्चित करण्यात आली आहे. लडाख तसेच जम्मू आणि काश्मीर, हिमाचल प्रदेश आणि उत्तराखंडमधील असिंक्रोनस हिमाच्छादित क्षेत्रांसाठी संदर्भ तारीख १ ऑक्टोबर २०२६ निश्चित करण्यात आली आहे. या संदर्भ तारखांबाबतची अधिसूचना १६ जून २०२५ रोजी प्रसिद्ध करण्यात आली.<ref name="Census2027ReferenceDate">{{cite web
|title=Population Census-2027 to be conducted in two phases along with enumeration of castes
|publisher=Press Information Bureau, Government of India
|date=4 June 2025
|url=https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2133845
}}</ref>
२०२७ची जनगणना दोन टप्प्यांत घेण्यात येणार आहे. पहिल्या टप्प्यात घरांची यादी आणि गृहनिर्माणविषयक माहिती संकलित केली जाईल, तर दुसऱ्या टप्प्यात व्यक्तिनिहाय लोकसंख्या गणना केली जाईल. जातीनिहाय माहिती दुसऱ्या टप्प्यात संकलित केली जाणार आहे.<ref name="Census2027TwoPhases">{{cite web
|title=Population Census-2027 to be conducted in two phases along with enumeration of castes
|publisher=Press Information Bureau, Government of India
|date=4 June 2025
|url=https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2133845
}}</ref>
२०२७ च्या जनगणनेत जातीनिहाय माहिती संकलित करण्याचा निर्णय झाल्यामुळे भविष्यात कुणबी, मराठा-कुणबी, कुणबी-मराठा आणि इतर सामाजिक समूहांच्या लोकसंख्येबाबत अधिक व्यापक अधिकृत आकडेवारी उपलब्ध होण्याची शक्यता आहे. तथापि जनगणना पूर्ण होऊन तिचे अधिकृत निकाल प्रकाशित होईपर्यंत २०२७ची जातीनिहाय लोकसंख्या उपलब्ध आहे असे मानता येणार नाही. केंद्र सरकारने २०२६मध्येही स्पष्ट केले आहे की जातीनिहाय प्रश्नांसह दुसऱ्या टप्प्याची प्रश्नावली स्वतंत्रपणे अंतिम करून अधिसूचित केली जाणार आहे.<ref name="CasteBasedCensus2026">{{cite web
|title=Caste Based Census
|publisher=Press Information Bureau, Government of India
|date=4 February 2026
|url=https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2223099
}}</ref>
=== लोकसंख्याशास्त्रीय आकडेवारीची तुलना करताना आवश्यक सावधगिरी ===
कोकणातील कुणबी समाजाच्या लोकसंख्येची दीर्घकालीन तुलना करताना ऐतिहासिक जनगणनांमधील वर्गीकरणपद्धतीचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे. ‘कुणबी’, ‘कणबी’, ‘मराठा-कुणबी’, ‘कुणबी-मराठा’, ‘कुळवाडी’ आणि त्यासारख्या संज्ञांची व्याप्ती वेगवेगळ्या काळात आणि वेगवेगळ्या प्रशासकीय प्रदेशांत बदलत गेली. त्यामुळे विविध जनगणनांतील समान किंवा समानार्थी वाटणाऱ्या संज्ञांना आजच्या प्रशासकीय जातवर्गांशी थेट समान मानता येत नाही.<ref name="Baines1881" /><ref name="CensusBombay1901Presidency" />
दुसरी महत्त्वाची बाब म्हणजे ब्रिटिशकालीन प्रशासकीय जिल्ह्यांच्या सीमा आजच्या जिल्ह्यांच्या सीमांपेक्षा वेगळ्या होत्या. रत्नागिरी, कोलाबा, सावंतवाडी आणि इतर ऐतिहासिक जिल्ह्यांच्या सीमा काळानुसार बदलल्या आहेत. त्यामुळे एखाद्या जुन्या जिल्ह्याची लोकसंख्या आजच्या त्याच नावाच्या जिल्ह्याशी थेट तुलना करताना प्रशासकीय पुनर्रचनेचा विचार करणे आवश्यक आहे.
तिसरी बाब म्हणजे जनगणना अधिकाऱ्यांनी केलेले प्रशासकीय वर्गीकरण आणि संबंधित व्यक्ती किंवा समूहांची स्थानिक सामाजिक ओळख यांच्यात फरक असण्याची शक्यता होती. त्यामुळे जनगणनेतील एखाद्या शीर्षकाखाली नोंद झालेली संपूर्ण लोकसंख्या आधुनिक काळातील त्याच नावाच्या सामाजिक समूहाशी तंतोतंत संबंधित होती असे गृहीत धरता येत नाही.
चौथी बाब म्हणजे १९३१नंतर सर्व जातींची सातत्यपूर्ण आणि तुलनात्मक जातीनिहाय लोकसंख्या नियमित जनगणनेत प्रकाशित झालेली नाही. त्यामुळे १९व्या शतकाच्या उत्तरार्धापासून आजपर्यंत कुणबी समाजाची अखंड आणि तुलनायोग्य जातीनिहाय लोकसंख्या-मालिका तयार करणे शक्य होत नाही. १९५१ च्या अधिकृत जातीनिहाय अंदाजपत्रकातही पूर्वीच्या जनगणनांमध्ये ‘महरत्ता-कुणबी’ आणि ‘कुणबी’ यांचे वर्गीकरण वेगवेगळ्या प्रकारे झाले असल्याचे दिसते.<ref name="CensusClassification1951" />
या कारणांमुळे १८८१मधील कुणबी किंवा मराठा-कुणबी संख्या, १९०१मधील मराठा-कुणबी संख्या, १९११मधील कुणबी किंवा कुणबी-मराठा वर्गीकरण आणि आधुनिक प्रशासकीय कुणबी वर्ग यांना एका सलग आणि तुलनायोग्य सांख्यिक मालिकेप्रमाणे मांडणे योग्य ठरणार नाही.
=== लोकसंख्याशास्त्रीय निष्कर्ष ===
उपलब्ध ऐतिहासिक जनगणना नोंदींवरून रत्नागिरीसह कोकणातील काही भागांमध्ये कुणबी हा १९व्या शतकातील महत्त्वाच्या कृषक समूहांपैकी एक होता असे दिसून येते. १८८१ च्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या जनगणना अहवालात रत्नागिरी जिल्ह्यासाठी २,०५,७८४ कुणबींची नोंद करण्यात आली होती. मात्र त्या काळातील ‘कुणबी’ या वर्गीकरणाची व्याप्ती आणि आजच्या प्रशासकीय कुणबी वर्गाची व्याप्ती समान नसल्यामुळे हा आकडा आधुनिक लोकसंख्येशी थेट तुलना करण्यासाठी वापरता येत नाही.<ref name="Baines1881" />
१९०१ आणि १९११ च्या जनगणनांमध्ये मराठा आणि कुणबी यांच्याशी संबंधित वर्गीकरणात झालेले बदल हे ऐतिहासिक लोकसंख्याशास्त्राचा अभ्यास करताना केवळ संख्यात्मक आकडे पाहणे पुरेसे नसल्याचे दर्शवतात. प्रत्येक जनगणनेतील जातीय शीर्षके, उपविभाग आणि वर्गीकरणाची पद्धत स्वतंत्रपणे तपासणे आवश्यक आहे.<ref name="CensusBombay1901Presidency" /><ref name="CensusBombay1911" />
१९५१ च्या अधिकृत ‘जातीनिहाय लोकसंख्येचे अंदाज’ या अहवालातही ‘महरत्ता-कुणबी’, ‘कुणबी-कुळवाडी किंवा कणबी’, ‘तिरोळे कुणबी’ आणि इतर संबंधित गट स्वतंत्रपणे दाखविण्यात आले आहेत. यावरून ऐतिहासिक सरकारी आकडेवारीतही कुणबीशी संबंधित विविध सामाजिक नावांचे स्वतंत्र वर्गीकरण केले जात असल्याचे दिसते.<ref name="CensusClassification1951" />
त्यामुळे सध्याच्या काळात कोकणातील कुणबी समाजाची स्वतंत्र अधिकृत जिल्हानिहाय टक्केवारी उपलब्ध आहे असा निष्कर्ष काढता येत नाही. रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, रायगड, ठाणे किंवा पालघर या जिल्ह्यांसाठी आधुनिक कुणबी लोकसंख्येची निश्चित टक्केवारी सांगण्यासाठी जातीनिहाय अधिकृत आकडेवारी आवश्यक आहे.
२०२७ च्या जनगणनेत जातीनिहाय गणना समाविष्ट करण्यात आल्यामुळे भविष्यात या प्रश्नासाठी अधिक व्यापक अधिकृत सांख्यिक आधार उपलब्ध होण्याची शक्यता आहे. मात्र २०२७ची जनगणना पूर्ण होऊन तिचे अधिकृत जातीनिहाय निकाल प्रकाशित होईपर्यंत कुणबी समाजाच्या आधुनिक लोकसंख्येबाबत कोणताही निश्चित राष्ट्रीय किंवा जिल्हानिहाय आकडा अधिकृत मानता येणार नाही.<ref name="CasteEnumeration2025" />
== आधुनिक प्रशासकीय आणि कायदेशीर स्थिती ==
महाराष्ट्रातील कुणबी समाजाची आधुनिक प्रशासकीय ओळख ही राज्य शासनाच्या इतर मागासवर्गीयांच्या यादी, जात प्रमाणपत्रे आणि जात वैधता पडताळणीच्या प्रक्रियेशी संबंधित आहे. ऐतिहासिक जनगणना आणि मानववंशशास्त्रीय साहित्यात ‘कुणबी’, ‘कणबी’, ‘मराठा-कुणबी’ आणि ‘कुणबी-मराठा’ यांसारख्या संज्ञांचा वेगवेगळ्या संदर्भांत वापर झालेला आढळतो. मात्र आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरण हे संबंधित काळातील अधिकृत शासन निर्णय, मागासवर्गीयांच्या याद्या, लागू कायदे आणि न्यायालयीन निर्णय यांच्या आधारे निश्चित केले जाते.<ref name="MaharashtraOBC2025" />
=== महाराष्ट्रातील इतर मागासवर्गीय वर्गीकरण ===
महाराष्ट्र शासनाच्या १३ मे २०२५ रोजीच्या अधिकृत यादीत ‘कुणबी’ ही इतर मागासवर्गीय प्रवर्गातील अनुक्रमांक ८३वरील नोंद आहे. या नोंदीखाली ‘लेवा कुणबी’, ‘लेवा पाटील’, ‘लेवा पाटीदार’, ‘मराठा कुणबी’, ‘कुणबी मराठा’, ‘तिलोरी कुणबी’, ‘तिल्लोरी कुणबी’ आणि ‘ति. कुणबी’ या उपसंज्ञांचा समावेश करण्यात आला आहे.<ref name="MaharashtraOBC2025" />
ही यादी आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरण दर्शविते. या यादीतील विविध उपसंज्ञांचा एकत्रित समावेश आहे म्हणून त्या सर्व संज्ञांची ऐतिहासिक उत्पत्ती एकच आहे किंवा त्या प्रत्येक ऐतिहासिक कालखंडात समान अर्थाने वापरल्या गेल्या होत्या, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरण आणि ऐतिहासिक सामाजिक ओळख या स्वतंत्र बाबी आहेत.
=== कुणबी आणि तिलोरी कुणबी : ऐतिहासिक प्रशासकीय पार्श्वभूमी ===
कुणबी आणि तिलोरी कुणबी यांच्या प्रशासकीय वर्गीकरणात काळानुसार बदल झाले. मुंबई उच्च न्यायालयाने *Dattatraya s/o Ramrao Thorat v. State of Maharashtra* या प्रकरणात या बदलांचा ऐतिहासिक संदर्भ नोंदविला आहे. न्यायालयाच्या नोंदीनुसार २३ एप्रिल १९४२ च्या मुंबई शासनाच्या ठरावात ‘Kunbi (except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)’ यांचा एका वर्गात, तर ‘Kunbi Tilori in Ratnagiri district’ यांचा इतर मागास समुदायांच्या यादीत स्वतंत्रपणे समावेश करण्यात आला होता. ही स्थिती १९५०, १९५६ आणि १९६१ च्या संबंधित शासन ठरावांमध्येही कायम राहिली.<ref name="Thorat2002" />
न्यायालयाने पुढे नमूद केले आहे की १३ ऑक्टोबर १९६७ च्या महाराष्ट्र शासनाच्या ठरावाद्वारे स्वतंत्र इतर मागासवर्गीय यादी प्रसिद्ध करण्यात आली आणि त्यामध्ये ‘Kunbi caste’ ही अनुक्रमांक ८३वर समाविष्ट करण्यात आली. न्यायालयाच्या निरीक्षणानुसार १९६७पासून कुणबी जात संपूर्ण महाराष्ट्रासाठी इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समाविष्ट करण्यात आली.<ref name="Thorat2002" />
या ऐतिहासिक प्रशासकीय नोंदींवरून कुणबी आणि तिलोरी कुणबी यांच्या वर्गीकरणात कालानुसार आणि प्रदेशानुसार फरक राहिला असल्याचे दिसते. त्यामुळे आजच्या प्रशासकीय यादीचा अर्थ लावताना त्या काळातील शासन ठराव आणि संबंधित न्यायालयीन नोंदींचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे.
=== जात प्रमाणपत्र आणि जात वैधता पडताळणी ===
महाराष्ट्रात एखाद्या व्यक्तीच्या जात दाव्याची प्रशासकीय मान्यता ही केवळ आडनाव, सामाजिक संबोधन किंवा ऐतिहासिक साहित्याच्या आधारे निश्चित होत नाही. संबंधित व्यक्तीच्या जात दाव्याचा विचार करताना सक्षम प्राधिकरणाकडून जात प्रमाणपत्र देण्याची प्रक्रिया आणि त्यानंतर आवश्यक असल्यास जात वैधता पडताळणीची प्रक्रिया लागू होते.
जात वैधता पडताळणीच्या प्रक्रियेत जुन्या शासकीय अभिलेख, शैक्षणिक नोंदी, महसूल अभिलेख, जन्म-मृत्यू नोंदी आणि इतर संबंधित दस्तऐवजांचा पुरावा म्हणून विचार केला जाऊ शकतो. मात्र कोणता पुरावा ग्राह्य धरायचा आणि त्याचे पुराव्यात्मक महत्त्व किती आहे, हे संबंधित कायदे, नियम, शासन निर्णय आणि न्यायालयीन निर्णयांनुसार ठरते.
त्यामुळे ऐतिहासिक गॅझेटियर, जनगणना किंवा मानववंशशास्त्रीय ग्रंथांमध्ये ‘कुणबी’ किंवा संबंधित संज्ञेचा उल्लेख आढळणे आणि एखाद्या विशिष्ट व्यक्तीला आधुनिक प्रशासकीय प्रक्रियेत कुणबी जात प्रमाणपत्र किंवा जात वैधता मिळणे या दोन स्वतंत्र बाबी आहेत.
=== ऐतिहासिक नोंदी आणि आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरण ===
ब्रिटिशकालीन जनगणना, गॅझेटियर आणि मानववंशशास्त्रीय साहित्य हे कुणबी समाजाच्या ऐतिहासिक अभ्यासासाठी महत्त्वाचे स्रोत आहेत; मात्र ते स्वतःहून आधुनिक जात प्रमाणपत्र किंवा जात वैधतेचा अंतिम प्रशासकीय आधार ठरत नाहीत. आधुनिक प्रशासकीय प्रक्रियेत संबंधित कालखंडातील अधिकृत नोंदी, शासन निर्णय, लागू कायदे, नियम आणि सक्षम प्राधिकरण किंवा न्यायालयाचे निर्णय यांना महत्त्व प्राप्त होते.<ref name="Thorat2002" />
त्यामुळे कुणबी समाजाच्या आधुनिक प्रशासकीय स्थितीचा अभ्यास करताना ऐतिहासिक सामाजिक ओळख, ब्रिटिशकालीन वर्गीकरण आणि विद्यमान शासकीय वर्गीकरण यांच्यात स्पष्ट भेद ठेवणे आवश्यक आहे. महाराष्ट्र शासनाच्या विद्यमान यादीत कुणबीचा इतर मागासवर्गीय प्रवर्गात समावेश असला तरी एखाद्या व्यक्तीचा विशिष्ट जात दावा स्वतंत्र प्रशासकीय पडताळणीच्या अधीन राहतो.<ref name="MaharashtraOBC2025" />
=== लेवा कुणबी ===
‘लेवा कुणबी’ ही संज्ञा महाराष्ट्र शासनाच्या इतर मागासवर्गीयांच्या विद्यमान अधिकृत यादीत ‘कुणबी’ या नोंदीखाली समाविष्ट आहे. या नोंदीत ‘लेवा कुणबी’, ‘लेवा पाटील’ आणि ‘लेवा पाटीदार’ या संज्ञांचा समावेश करण्यात आला आहे.<ref name="MaharashtraOBC2025" />
या प्रशासकीय वर्गीकरणावरून लेवा कुणबीचा समावेश कुणबी या इतर मागासवर्गीय नोंदीखाली असल्याचे स्पष्ट होते. मात्र या प्रशासकीय समावेशावरून लेवा कुणबीची प्रादेशिक, सामाजिक किंवा ऐतिहासिक ओळख महाराष्ट्रातील इतर सर्व कुणबी समूहांशी पूर्णपणे समान आहे, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. प्रशासकीय वर्गीकरण आणि ऐतिहासिक सामाजिक ओळख या स्वतंत्र बाबी आहेत.
=== मराठा-कुणबी आणि कुणबी-मराठा ===
‘मराठा-कुणबी’ आणि ‘कुणबी-मराठा’ या संज्ञांना आधुनिक प्रशासकीय संदर्भात विशेष महत्त्व प्राप्त झाले आहे. मुंबई उच्च न्यायालयाने *Nitin s/o Mahadeorao Choudhary v. State of Maharashtra* या ११ ऑक्टोबर २०२३ रोजीच्या निर्णयात १ जून २००४ च्या महाराष्ट्र शासनाच्या निर्णयाचा संदर्भ देताना नमूद केले आहे की इतर मागासवर्गीयांच्या यादीतील अनुक्रमांक ८३वरील ‘कुणबी’ या नोंदीत पूर्वी ‘लेवा कुणबी’, ‘लेवा पाटील’ आणि ‘लेवा पाटीदार’ यांचा समावेश होता आणि १ जून २००४ च्या शासन निर्णयाद्वारे त्यात ‘मराठा-कुणबी’ आणि ‘कुणबी-मराठा’ यांचा समावेश करण्यात आला.<ref name="NitinChoudhary2023">{{cite web
|title=Nitin s/o Mahadeorao Choudhary v. State of Maharashtra
|website=Indian Kanoon
|date=11 October 2023
|url=https://indiankanoon.org/doc/61511559/
}}</ref>
या निर्णयात न्यायालयाने असेही नमूद केले की ७ सप्टेंबर २०२३ च्या शासन निर्णयाद्वारे मराठा-कुणबी आणि कुणबी-मराठा समाजातील व्यक्तींना जात प्रमाणपत्र देताना जुन्या दस्तऐवजांतील नोंदींची तपासणी करण्याची पद्धत निश्चित करण्यासाठी समिती स्थापन करण्यात आली होती. या समितीचा उद्देश संबंधित जुन्या अभिलेखांच्या तपासणीची पद्धत निश्चित करणे हा होता.<ref name="NitinChoudhary2023" />
मात्र अनुक्रमांक ८३मध्ये मराठा-कुणबी आणि कुणबी-मराठा यांचा प्रशासकीय समावेश झाला आहे, यावरून मराठा आणि कुणबी यांची ऐतिहासिक वंशपरंपरा किंवा सामाजिक ओळख सर्व काळात एकच होती, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. हा आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरणाचा विषय आहे.
=== तिलोरी कुणबी आणि तिल्लोरी कुणबी ===
‘तिलोरी कुणबी’ आणि ‘तिल्लोरी कुणबी’ या दोन्ही संज्ञांचा महाराष्ट्र शासनाच्या विद्यमान इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत ‘कुणबी’ या अनुक्रमांक ८३ च्या नोंदीखाली समावेश आहे.<ref name="MaharashtraOBC2025" />
तिलोरी कुणबीच्या प्रशासकीय इतिहासात रत्नागिरी जिल्ह्याचा विशेष संदर्भ आढळतो. मुंबई उच्च न्यायालयाने *Dattatraya s/o Ramrao Thorat v. State of Maharashtra* या २४ एप्रिल २००२ रोजीच्या निर्णयात २३ एप्रिल १९४२ च्या मुंबई शासनाच्या ठरावाचा संदर्भ देताना ‘Kunbi (Except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)’ आणि ‘Kunbi Tilori in Ratnagiri district’ यांचे त्या काळात वेगवेगळ्या प्रशासकीय वर्गांमध्ये वर्गीकरण करण्यात आल्याचे नमूद केले आहे. ही स्थिती १९५०, १९५६ आणि १९६१ च्या संबंधित शासन ठरावांमध्येही कायम राहिल्याचे न्यायालयाने नोंदविले आहे.<ref name="Thorat2002" />
त्याच निर्णयानुसार १३ ऑक्टोबर १९६७ रोजी महाराष्ट्र शासनाने स्वतंत्र इतर मागासवर्गीयांची यादी प्रसिद्ध केली आणि त्यामध्ये ‘कुणबी जात’ अनुक्रमांक ८३वर समाविष्ट करण्यात आली. न्यायालयाने नमूद केले आहे की त्यानंतर कुणबी जात संपूर्ण महाराष्ट्रासाठी इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समाविष्ट झाली.<ref name="Thorat2002" />
=== जात प्रमाणपत्र ===
महाराष्ट्रात जात प्रमाणपत्र देण्याची आणि त्याची वैधता पडताळण्याची प्रक्रिया कायद्याने नियमन केली जाते. जात प्रमाणपत्र हे सक्षम प्राधिकाऱ्याकडून दिले जाते, तर जात वैधतेचा दावा संबंधित जात पडताळणी समितीसमोर स्वतंत्रपणे तपासला जाऊ शकतो. या दोन्ही प्रक्रिया एकमेकांशी संबंधित असल्या तरी त्यांचे स्वरूप आणि अधिकारक्षेत्र वेगवेगळे आहेत.
जात दाव्याच्या पडताळणीमध्ये संबंधित व्यक्तीने सादर केलेल्या जुन्या शासकीय आणि इतर अभिलेखांचा विचार केला जाऊ शकतो. कोणते दस्तऐवज ग्राह्य धरावेत, त्यांचे पुराव्यात्मक महत्त्व किती आहे आणि जात दावा कशा प्रकारे सिद्ध करावा, हे लागू कायदे, नियम, शासन निर्णय आणि न्यायालयीन निर्णयांनुसार ठरते.
मुंबई उच्च न्यायालयाने *Dattatraya s/o Ramrao Thorat v. State of Maharashtra* या प्रकरणात जात दाव्याच्या पडताळणीसाठी सादर केलेल्या दस्तऐवजांचे पुराव्यात्मक महत्त्व तपासले आणि जात दावा सिद्ध करण्याची जबाबदारी दावेदारावर असल्याचे स्पष्ट केले.<ref name="Thorat2002" />
मराठा-कुणबी किंवा कुणबी-मराठा असा दावा करणाऱ्या व्यक्तींच्या संदर्भातही जुन्या अभिलेखांतील जातनोंदींच्या तपासणीला महत्त्व आहे. *Nitin s/o Mahadeorao Choudhary v. State of Maharashtra* या निर्णयात मुंबई उच्च न्यायालयाने संबंधित जुन्या महसूल अभिलेख, शाळेच्या नोंदी आणि इतर दस्तऐवजांची तपासणी करण्याच्या प्रशासकीय प्रक्रियेचा संदर्भ नोंदविला आहे.<ref name="NitinChoudhary2023" />
त्यामुळे ऐतिहासिक जनगणना, गॅझेटियर किंवा मानववंशशास्त्रीय ग्रंथामध्ये ‘कुणबी’, ‘तिलोरी कुणबी’ किंवा संबंधित संज्ञेचा उल्लेख आढळणे आणि एखाद्या विशिष्ट व्यक्तीचा आधुनिक प्रशासकीय जात दावा वैध ठरणे या दोन स्वतंत्र बाबी आहेत. आधुनिक जात प्रमाणपत्र आणि जात वैधता प्रक्रियेत संबंधित व्यक्तीच्या स्वतःच्या अभिलेखीय पुराव्यांचा आणि लागू कायदेशीर निकषांचा स्वतंत्रपणे विचार केला जातो.
=== जात वैधता पडताळणी ===
महाराष्ट्रात जात प्रमाणपत्राच्या वैधतेच्या पडताळणीसाठी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर संशोधन व प्रशिक्षण संस्थेच्या माध्यमातून जात प्रमाणपत्र पडताळणी माहिती प्रणाली (CCVIS) कार्यरत आहे. या प्रणालीद्वारे जात वैधता प्रमाणपत्रासाठी ऑनलाइन अर्ज करणे, अर्जाचा मागोवा घेणे आणि वैधता प्रमाणपत्राची ऑनलाइन पडताळणी करणे यांसारख्या सुविधा उपलब्ध आहेत.<ref name="CCVIS" />
जात वैधता पडताळणीच्या प्रक्रियेत अर्जदाराने सादर केलेल्या कागदपत्रांचा विचार केला जातो. अधिकृत मार्गदर्शिकेनुसार जात प्रमाणपत्रासोबत जन्मतारखेचा दाखला, अर्जदाराचा शाळा सोडल्याचा दाखला किंवा शाळेच्या नोंदवहीचा उतारा, वडिलांचा शाळा सोडल्याचा दाखला किंवा नोंदवहीचा उतारा आणि पितृकुळातील आजोबा किंवा वडिलांच्या सख्ख्या मोठ्या भावंडांच्या शाळेच्या नोंदी यांसारखी कागदपत्रे पुराव्याच्या स्वरूपात सादर करता येतात. उपलब्ध प्राथमिक कागदपत्रे नसल्यास जन्म-मृत्यू नोंदी, महसूल अभिलेख, जुने खरेदी-विक्री दस्तऐवज किंवा इतर समर्थक कागदपत्रांचा विचार केला जाऊ शकतो.<ref name="CCVISForm18" />
त्यामुळे जात वैधता पडताळणी ही केवळ जात प्रमाणपत्राची प्रशासकीय नोंद करण्याची प्रक्रिया नसून, जात दाव्याच्या समर्थनार्थ सादर केलेल्या कागदपत्रांची छाननी करणारी प्रक्रिया आहे. अर्जासोबत अर्जदार, त्याचे पितृकडील नातेवाईक आणि पूर्वज यांच्या जात नोंदी असलेली विविध प्राथमिक व दुय्यम कागदपत्रे सादर करता येतात; संबंधित जिल्हा जात प्रमाणपत्र पडताळणी समिती या कागदपत्रांची छाननी करून जात प्रमाणपत्राच्या वैधतेबाबत निर्णय घेते.<ref name="CCVISFAQ" />
=== ऐतिहासिक कागदपत्रांचे महत्त्व ===
कुणबी किंवा मराठा-कुणबी दाव्यांच्या संदर्भात जुने महसूल अभिलेख, शैक्षणिक नोंदी, जन्म-मृत्यू नोंदी, जमीनविषयक दस्तऐवज आणि इतर शासकीय अभिलेखांना महत्त्व प्राप्त होते. महाराष्ट्रातील काही जिल्हा प्रशासनांनी मराठा-कुणबी आणि कुणबी-मराठा संदर्भातील जुन्या अभिलेखांचे संकलन करून ते सार्वजनिक केले आहे.
रायगड जिल्हा प्रशासनाच्या संकेतस्थळावर अलिबाग, उरण, कर्जत, खालापूर, तळा, पनवेल, पेण, पोलादपूर, महाड, माणगाव, मुरुड, म्हसळा, रोहा, श्रीवर्धन आणि सुधागड या तालुक्यांशी संबंधित कुणबी-मराठा दस्तऐवजांच्या स्वतंत्र याद्या उपलब्ध आहेत.<ref name="RaigadKunbiMarathaDocuments">{{cite web
|title=कुणबी-मराठा दस्तऐवज
|publisher=रायगड जिल्हा प्रशासन, महाराष्ट्र शासन
|url=https://raigad.gov.in/maratha-kunbi-documents/
}}</ref>
अशा अभिलेखांचे संकलन ऐतिहासिक नोंदींच्या उपलब्धतेचा मागोवा घेण्यासाठी उपयुक्त ठरते. मात्र एखाद्या जिल्हा किंवा तालुका प्रशासनाच्या संकेतस्थळावर विशिष्ट दस्तऐवज उपलब्ध आहे, एवढ्यावरून कोणत्याही व्यक्तीचा जात दावा वैध ठरतो असा निष्कर्ष काढता येत नाही. वैधतेचा निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकरण आणि लागू कायदेशीर प्रक्रियेनुसार घेतला जातो.
=== न्यायालयीन दृष्टिकोन ===
कुणबी जातदाव्यांशी संबंधित न्यायालयीन प्रकरणांमध्ये ऐतिहासिक शासन निर्णय, जात प्रमाणपत्र, जात पडताळणी समितीचे निष्कर्ष आणि उपलब्ध अभिलेखांचा विचार करण्यात आला आहे. *Dattatraya s/o Ramrao Thorat v. State of Maharashtra* या २४ एप्रिल २००२ रोजीच्या मुंबई उच्च न्यायालयाच्या निर्णयात कुणबी आणि तिलोरी कुणबी यांच्या ऐतिहासिक प्रशासकीय वर्गीकरणाचा संदर्भ देण्यात आला आहे. न्यायालयाने २३ एप्रिल १९४२ च्या शासन निर्णयातील वर्गीकरण तसेच त्यानंतरच्या शासन निर्णयांचा उल्लेख करून १३ ऑक्टोबर १९६७ च्या शासन निर्णयात ‘कुणबी जात’ इतर मागासवर्गीयांच्या यादीतील अनुक्रमांक ८३वर समाविष्ट झाल्याची नोंद केली आहे.<ref name="Thorat2002" />
* Nitin s/o Mahadeorao Choudhary v. State of Maharashtra* या ११ ऑक्टोबर २०२३ रोजीच्या निर्णयात मुंबई उच्च न्यायालयाने इतर मागासवर्गीयांच्या यादीतील अनुक्रमांक ८३ आणि त्यामध्ये मराठा-कुणबी व कुणबी-मराठा यांचा समावेश करण्यासंबंधीच्या १ जून २००४ च्या शासन निर्णयाची नोंद केली आहे.<ref name="NitinChoudhary2023" />
या न्यायालयीन नोंदींमधून कुणबी आणि संबंधित सामाजिक संज्ञांच्या आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरणात शासन निर्णय आणि अभिलेखीय पुराव्यांचे महत्त्व दिसून येते. तथापि प्रत्येक जातदाव्याचा निर्णय संबंधित व्यक्तीने सादर केलेल्या पुराव्यांच्या आणि लागू कायदेशीर निकषांच्या आधारे स्वतंत्रपणे केला जातो.
=== ऐतिहासिक आणि आधुनिक वर्गीकरणातील फरक ===
ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये वापरलेल्या ‘कुणबी’, ‘मराठा कुणबी’ किंवा संबंधित संज्ञा आणि आजच्या महाराष्ट्र शासनाच्या इतर मागासवर्गीयांच्या यादीतील ‘कुणबी’, ‘मराठा-कुणबी’, ‘कुणबी-मराठा’ आणि ‘तिलोरी कुणबी’ या नोंदी समान प्रशासकीय संदर्भातील नाहीत. ऐतिहासिक जनगणना ही लोकसंख्या आणि सामाजिक वर्गीकरणाचे साधन होती, तर आधुनिक शासकीय याद्या आरक्षण आणि संबंधित प्रशासकीय हक्कांच्या संदर्भातील कायदेशीर वर्गीकरणाचा भाग आहेत.
त्यामुळे एखाद्या जुन्या जनगणनेत ‘मराठा कुणबी’ अशी नोंद आढळल्यास त्या नोंदीच्या आधारे आजच्या काळातील एखाद्या व्यक्तीला आपोआप कुणबी या इतर मागासवर्गीय प्रवर्गाचे जात प्रमाणपत्र किंवा जात वैधता प्रमाणपत्र मिळते, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. त्याचप्रमाणे आधुनिक इतर मागासवर्गीयांच्या यादीतील नोंदींच्या आधारे त्या सामाजिक समूहाचा प्राचीन किंवा मध्ययुगीन इतिहास निश्चित करता येत नाही.
म्हणून कुणबी समाजाच्या इतिहासाचा अभ्यास करताना ऐतिहासिक जनगणना, गॅझेटियर आणि मानववंशशास्त्रीय साहित्य यांना त्यांच्या संबंधित ऐतिहासिक संदर्भात पाहणे, तर आधुनिक जात प्रमाणपत्र आणि जात वैधता पडताळणीसाठी लागू कायदे, नियम, शासन निर्णय, अधिकृत याद्या आणि न्यायालयीन निर्णय यांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे.
== आधुनिक कोकणातील कुणबी समाज आणि भविष्यातील आव्हाने ==
आधुनिक कोकणातील कुणबी समाजाच्या सामाजिक आणि आर्थिक स्थितीत शिक्षण, ग्रामीण-शहरी स्थलांतर, शेतीतील बदल, रोजगाराचे विविधीकरण, जमीनधारणा आणि ग्रामीण पायाभूत सुविधांमधील बदल यांचा प्रभाव दिसून येतो. मात्र या प्रक्रियांचे स्वरूप संपूर्ण कोकणातील कुणबी समाजात एकसमान होते असे उपलब्ध अभ्यासांवरून म्हणता येत नाही. स्थानिक पातळीवरील अभ्यासांमधून या बदलांचे वेगवेगळे स्वरूप स्पष्ट होते.
सावंतवाडी तालुक्यातील कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या तीन कालखंडांतील तुलनात्मक अभ्यासात दीर्घकालीन स्थलांतर, कुटुंबांच्या आर्थिक रणनीतीतील बदल, स्थलांतरितांच्या व्यवसायांचे विविधीकरण आणि शिक्षणासाठी होणाऱ्या स्थलांतराचे वाढते महत्त्व नोंदविण्यात आले आहे. या अभ्यासात १९६१ च्या तुलनेत २०१७मध्ये स्थलांतर अधिक व्यापक झाले असल्याचे तसेच रोजगारासाठीच्या स्थलांतराबरोबर शिक्षण आणि इतर कारणांसाठी स्थलांतराचे महत्त्व वाढल्याचे दिसून येते.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
कुंकेरीच्या या अभ्यासात शिक्षण आणि रोजगार यांमुळे स्थलांतराचे स्वरूप बदलल्याचे दिसते. १९६१मध्ये गावाबाहेरील स्थलांतर मुख्यतः रोजगाराशी संबंधित होते; २०१७ च्या अभ्यासात शिक्षणासाठी स्थलांतर करणाऱ्यांचे प्रमाणही लक्षणीय असल्याचे नोंदविण्यात आले. स्थलांतरितांच्या रोजगारातही बदल होऊन सरकारी सेवांबरोबर खासगी आणि अनौपचारिक क्षेत्रातील विविध व्यवसायांचा समावेश वाढल्याचे अभ्यासात नमूद आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
शेतीच्या स्वरूपातही स्थानिक पातळीवर बदल झाल्याचे कुंकेरीच्या दीर्घकालीन अभ्यासातून दिसते. १९६१मध्ये भात आणि नाचणी ही प्रमुख पिके होती; पुढील काळात काजूच्या लागवडीचा विस्तार झाला आणि २०१७पर्यंत काजू हे अनेक शेतकऱ्यांसाठी महत्त्वाचे पीक आणि उत्पन्नाचे साधन बनले होते. यावरून कोकणातील काही गावांमध्ये पारंपरिक अन्नपिकांपासून अधिक बाजाराभिमुख बागायती पिकांकडे झालेल्या बदलाचा स्थानिक नमुना दिसून येतो.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
जमीनधारणेच्या बाबतीतही स्थलांतरामुळे सर्वच पारंपरिक रचना बदलल्या असे आढळत नाही. कुंकेरीच्या अभ्यासात दीर्घकालीन मोठ्या प्रमाणातील स्थलांतर असूनही गावातील जातीय वितरण आणि जमीनमालकीच्या रचनेत काही महत्त्वपूर्ण सातत्य राहिल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. त्याच वेळी लहान जमीनधारणांचे प्रमाण वाढल्याचेही अभ्यासात दिसून येते.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
कोकणातील ग्रामीण परिवर्तनाचा अभ्यास करताना मात्र कुंकेरीसारख्या एका गावाच्या अनुभवाचे संपूर्ण कुणबी समाजावर किंवा संपूर्ण कोकणावर थेट सामान्यीकरण करणे योग्य ठरणार नाही. कुंकेरीचा अभ्यास हा विशिष्ट गावाच्या दीर्घकालीन सामाजिक, आर्थिक आणि लोकसंख्याशास्त्रीय बदलांचा अभ्यास आहे. त्यामुळे त्यातून व्यापक कोकणातील स्थलांतर, शिक्षण, जमीनधारणा किंवा कृषी परिवर्तनाच्या काही प्रक्रिया समजून घेता येतात; परंतु संपूर्ण कुणबी समाजासाठी एकसमान निष्कर्ष काढण्यासाठी अधिक व्यापक जातीनिहाय आणि प्रदेशनिहाय अभ्यास आवश्यक आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
आधुनिक कोकणातील कुणबी समाजाच्या भविष्यातील प्रश्नांचा विचार करताना शेतीची आर्थिक व्यवहार्यता, लहान होत जाणारी जमीनधारणा, कृषीबाह्य रोजगार, शिक्षणासाठी होणारे स्थलांतर, मुंबई आणि इतर शहरी केंद्रांशी असलेले संबंध तसेच ग्रामीण भागातील बदलती रोजगाररचना हे परस्परसंबंधित घटक मानावे लागतात. उपलब्ध अभ्यासांनुसार स्थलांतर हे ग्रामीण कुटुंबांसाठी केवळ लोकसंख्यात्मक बदलाचे साधन न राहता उत्पन्नाच्या विविध साधनांशी जोडलेली आर्थिक रणनीती बनले आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
कुणबी समाजाची स्वतंत्र आणि सातत्यपूर्ण आधुनिक जातीनिहाय लोकसंख्या उपलब्ध अधिकृत जनगणना आकडेवारीत प्रसिद्ध झालेली नसल्यामुळे या बदलांचे संपूर्ण कोकणातील कुणबी समाजासाठी अचूक लोकसंख्याशास्त्रीय प्रमाण निश्चित करणे शक्य नाही. त्यामुळे आधुनिक सामाजिक आणि आर्थिक स्थितीचा अभ्यास करताना जिल्हानिहाय जनगणना, ग्रामसर्वेक्षणे, दीर्घकालीन गाव-अभ्यास आणि उपलब्ध सामाजिक-आर्थिक संशोधन यांचा परस्परपूरक वापर करणे आवश्यक आहे.<ref name="DistrictCensusRatnagiri1961" /><ref name="VartakTumbeBhide2019" />
=== ग्रामीण लोकसंख्येतील घट ===
रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग जिल्ह्यांच्या २००१ आणि २०११ च्या जनगणना आकडेवारीत एकूण लोकसंख्येत घट झाल्याचे दिसून येते. रत्नागिरी जिल्ह्याची लोकसंख्या २००१मध्ये १६,९६,७७७ होती; ती २०११मध्ये १६,१५,०६९ झाली. या कालावधीत जिल्ह्याचा दशकातील लोकसंख्या बदल −४.८ टक्के होता. सिंधुदुर्ग जिल्ह्याची लोकसंख्या २००१मध्ये ८,६८,८२५ होती; ती २०११मध्ये ८,४९,६५१ झाली आणि दशकातील लोकसंख्या बदल −२.२ टक्के राहिला.<ref name="RatnagiriPopulation2011" /><ref name="SindhudurgPopulation2011" />
रत्नागिरी जिल्ह्यात ग्रामीण लोकसंख्येतील घट एकूण लोकसंख्येच्या घटेपेक्षा अधिक होती. २००१मध्ये जिल्ह्याची ग्रामीण लोकसंख्या १५,०४,५६८ होती; २०११मध्ये ती १३,५१,३४६ झाली. या कालावधीत ग्रामीण लोकसंख्येतील दशकातील बदल −१०.२ टक्के होता. त्याच वेळी शहरी लोकसंख्येत ३७.२ टक्क्यांची वाढ झाली. त्यामुळे जिल्ह्याच्या लोकसंख्याशास्त्रीय बदलात ग्रामीण भागातून शहरी भागाकडे झालेल्या लोकसंख्या संक्रमणाचा एक घटक दिसून येतो.<ref name="RatnagiriPopulation2011" />
सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातही ग्रामीण लोकसंख्येत घट झाली. २००१मध्ये जिल्ह्याची ग्रामीण लोकसंख्या ७,८६,५०६ होती; ती २०११मध्ये ७,४२,६४५ झाली. या कालावधीत ग्रामीण लोकसंख्येतील दशकातील बदल −५.६ टक्के होता, तर शहरी लोकसंख्येत ३० टक्क्यांची वाढ झाली.<ref name="SindhudurgPopulation2011" />
या आकडेवारीवरून रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग जिल्ह्यांमध्ये ग्रामीण लोकसंख्येतील घट आणि शहरी लोकसंख्येतील वाढ ही महत्त्वाची लोकसंख्याशास्त्रीय प्रक्रिया असल्याचे दिसते. मात्र या जिल्हास्तरीय बदलाला थेट कुणबी समाजाच्या लोकसंख्येतील घट म्हणून मांडता येत नाही, कारण उपलब्ध जनगणना आकडेवारी या संदर्भात कुणबी समाजाची स्वतंत्र सातत्यपूर्ण लोकसंख्या देत नाही.
=== तरुणांचे स्थलांतर ===
कोकणातील ग्रामीण लोकसंख्येतील बदल समजून घेण्यासाठी स्थलांतर हा महत्त्वाचा घटक आहे. सावंतवाडी तालुक्यातील कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या कालखंडांतील तुलनात्मक अभ्यासात दीर्घकालीन बाह्य स्थलांतरात लक्षणीय वाढ झाल्याचे आढळते. १९६१मध्ये २६ टक्के कुटुंबांनी कुटुंबातील किमान एका सदस्याच्या बाह्य स्थलांतराची नोंद केली होती; २०१७मध्ये हे प्रमाण ६० टक्क्यांपर्यंत पोहोचले. त्याच काळात बाहेर स्थलांतरित व्यक्तींचे एकूण लोकसंख्येतील प्रमाण ७ टक्क्यांवरून २५.५ टक्क्यांपर्यंत वाढले.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
१९६१ च्या कुंकेरी सर्वेक्षणात बाहेर स्थलांतरित झालेले ८३ जण सर्व पुरुष होते आणि त्यांचे स्थलांतर प्रामुख्याने रोजगारासाठी झाले होते. २०१७ च्या अभ्यासात बाहेर स्थलांतरितांमध्ये महिलांचाही समावेश वाढल्याचे आढळले. त्या वर्षी विवाहाव्यतिरिक्त कारणांनी स्थलांतरित झालेल्या महिलांमध्ये शिक्षण आणि रोजगार ही प्रमुख कारणे होती.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
या अभ्यासात स्थलांतराचे स्वरूपही बदलल्याचे दिसते. १९६१मध्ये स्थलांतर करणाऱ्या कुटुंबांमध्ये प्रामुख्याने एकच सदस्य बाहेर जात असे; २०१७मध्ये अनेक कुटुंबांतील दोन, तीन, चार किंवा त्याहून अधिक सदस्य स्थलांतरित झाले होते. त्यामुळे स्थलांतर हे काही कुटुंबांसाठी स्वतंत्र रोजगाराच्या साधनाऐवजी उत्पन्नाच्या विविध साधनांशी संबंधित व्यापक आर्थिक रणनीती बनल्याचे अभ्यासकांचे निरीक्षण आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
कुंकेरीच्या बाबतीत हा बदल स्पष्टपणे दिसत असला तरी कुंकेरी हे एक विशिष्ट गाव असल्यामुळे त्यातील स्थलांतराचे प्रमाण संपूर्ण कोकणातील किंवा संपूर्ण कुणबी समाजातील तरुणांच्या स्थलांतराचे थेट प्रतिनिधित्व करते असे मानता येत नाही. मात्र ग्रामीण कोकणातील दीर्घकालीन स्थलांतराच्या प्रक्रियेचा अभ्यास करण्यासाठी हा महत्त्वाचा स्थानिक पुरावा आहे.
=== शिक्षणासाठी शहरांकडे स्थलांतर ===
कोकणातील ग्रामीण भागातून शिक्षणासाठी बाहेर जाण्याचे महत्त्व कालांतराने वाढल्याचे कुंकेरीच्या दीर्घकालीन अभ्यासातून दिसून येते. १९६१ च्या ग्रामसर्वेक्षणात कुंकेरीतील स्थलांतर मुख्यतः रोजगाराशी संबंधित असल्याचे नोंदविले गेले होते. त्याउलट २०१७ च्या अभ्यासात बाहेर स्थलांतरित झालेल्या व्यक्तींमध्ये १८ टक्के स्थलांतर शिक्षणासाठी झाल्याचे आढळले.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
कुंकेरीमध्ये १९६१मध्ये प्राथमिक शिक्षणाची सुविधा उपलब्ध होती; पुढील दशकांत गावातील शैक्षणिक सुविधा वाढल्या. तरीही उच्च शिक्षणासाठी विद्यार्थ्यांना गावाबाहेर जावे लागत असल्याचे २०१७ च्या अभ्यासातून दिसून येते. त्यामुळे शिक्षण हे ग्रामीण भागातून बाहेर पडण्याच्या स्थलांतरातील स्वतंत्र कारण म्हणून अधिक महत्त्वाचे झाले असल्याचे या अभ्यासातून दिसते.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
शिक्षण आणि स्थलांतर यांच्यातील संबंध एकतर्फी नसल्याचेही या अभ्यासातून दिसते. उच्च शिक्षणामुळे शहरांमध्ये जाण्याच्या संधी वाढल्या, तर स्थलांतरामुळे शिक्षणाला भविष्यातील रोजगार आणि सामाजिक प्रगतीशी जोडलेले महत्त्व प्राप्त झाले. त्यामुळे कुंकेरीच्या बाबतीत शिक्षण हे स्थलांतराचे कारण तसेच स्थलांतरानंतरच्या आर्थिक संधींसाठी महत्त्वाचे साधन बनल्याचे दिसून येते.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
कुंकेरीच्या अनुभवावरून ग्रामीण कोकणातील शिक्षण आणि स्थलांतर यांच्यातील बदलता संबंध स्पष्ट होतो; मात्र या निरीक्षणाचे संपूर्ण कुणबी समाजावर किंवा संपूर्ण कोकणातील ग्रामीण तरुणांवर सार्वत्रिकीकरण करण्यासाठी अधिक व्यापक प्रदेशनिहाय आणि जातीनिहाय अभ्यास आवश्यक आहे.
=== वृद्ध होत जाणारी ग्रामीण लोकसंख्या ===
कोकणातील काही ग्रामीण भागांमध्ये तरुणांचे शिक्षण आणि रोजगारासाठी बाहेर स्थलांतर वाढल्यामुळे ग्रामीण लोकसंख्येच्या वयोरचनेत बदल होण्याची शक्यता निर्माण झाली आहे. रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग जिल्ह्यांच्या २००१–२०११ च्या जनगणना आकडेवारीत एकूण लोकसंख्येत घट झाल्याचे दिसते. त्याच काळात दोन्ही जिल्ह्यांमध्ये ग्रामीण लोकसंख्येतील घटही नोंदविण्यात आली आहे.<ref name="RatnagiriPopulation2011" /><ref name="SindhudurgPopulation2011" />
मात्र या जिल्हास्तरीय लोकसंख्याशास्त्रीय बदलांवरून कुणबी समाजातील वृद्ध लोकसंख्येचे प्रमाण निश्चित करता येत नाही. कुणबी समाजासाठी स्वतंत्र आणि सातत्यपूर्ण जिल्हानिहाय वयोरचना उपलब्ध नसल्यामुळे हा विषय व्यापक ग्रामीण कोकणातील लोकसंख्याशास्त्रीय बदलांच्या संदर्भात पाहणे अधिक योग्य ठरते.
=== शेतीवरील अवलंबित्वातील बदल ===
ग्रामीण भागातील स्थलांतर, रोजगाराचे वैविध्य आणि शिक्षणाच्या वाढत्या संधी यांचा शेतीवरील कुटुंबांच्या अवलंबित्वावर परिणाम झाल्याचे काही दीर्घकालीन ग्रामअभ्यासांत दिसून येते. कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या तीन कालखंडांच्या तुलनात्मक अभ्यासात कुटुंबांच्या उपजीविकेच्या स्वरूपात लक्षणीय बदल झाल्याचे आढळते. १९६१मध्ये ७५.९८ टक्के कुटुंबे पूर्णपणे शेतीवर अवलंबून होती; २०१७मध्ये हे प्रमाण ३९.६ टक्क्यांपर्यंत कमी झाले.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
कुंकेरीच्या अभ्यासात या बदलाच्या पार्श्वभूमीवर स्थलांतर, गैर-कृषी रोजगार, शिक्षण आणि कुटुंबांच्या बदलत्या आर्थिक रणनीतींचा विचार करण्यात आला आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
या आकडेवारीचा अर्थ कुंकेरीतील शेती पूर्णपणे लुप्त झाली असा नाही. उलट, कुटुंबांच्या उपजीविकेत शेतीबरोबरच इतर उत्पन्नस्रोतांचे महत्त्व वाढले असल्याचे या दीर्घकालीन अभ्यासातून दिसते. कुंकेरीचा अनुभव संपूर्ण कोकणातील किंवा संपूर्ण कुणबी समाजातील कृषीस्थितीचे थेट प्रतिनिधित्व करतो असे मात्र मानता येत नाही.
=== कृषी जमिनीच्या वापरातील बदल ===
ग्रामीण कुटुंबांचे स्थलांतर आणि शेतीवरील अवलंबित्वातील घट यामुळे काही गावांमध्ये कृषी जमिनीच्या वापराच्या पद्धतीत बदल होऊ शकतो. मात्र उपलब्ध कुंकेरी अभ्यासाच्या आधारे संपूर्ण कोकणातील कृषी जमीन मोठ्या प्रमाणावर पडीत पडली आहे असा सर्वसाधारण निष्कर्ष काढता येत नाही.
कोकणातील जमीनवापर हा गाव, भौगोलिक परिस्थिती, सिंचनाची उपलब्धता, पिकांचा प्रकार, बाजारपेठेशी असलेला संबंध आणि कुटुंबांच्या आर्थिक परिस्थितीनुसार बदलू शकतो. त्यामुळे ''पडीत जमीन'' हा स्वतंत्र लोकसंख्याशास्त्रीय निष्कर्ष म्हणून न मांडता कृषी परिवर्तनाच्या व्यापक प्रक्रियेतील संभाव्य घटक म्हणून पाहणे अधिक योग्य ठरते.
=== गावांची सामाजिक रचना आणि स्थलांतर ===
दीर्घकालीन स्थलांतरामुळे ग्रामीण गावांच्या सामाजिक आणि आर्थिक रचनेत बदल होऊ शकतात. कुंकेरीच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या कालखंडांतील अभ्यासात मोठ्या प्रमाणावर बाह्य स्थलांतर झाले असतानाही गावातील जातीय रचना आणि जमीनधारणेच्या काही बाबींमध्ये सातत्य राहिल्याचे आढळते.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
या अभ्यासातून असेही दिसते की स्थलांतरामुळे गावाशी असलेले संबंध पूर्णपणे तुटलेले नसतात. बाहेर स्थलांतरित झालेले कुटुंबीय आणि गावातील कुटुंब यांच्यात आर्थिक व सामाजिक संबंध कायम राहू शकतात. त्यामुळे स्थलांतराचा परिणाम केवळ गावाची लोकसंख्या कमी होण्यापुरता मर्यादित न राहता कुटुंबांची उपजीविका, जमीनधारणा, रोजगार आणि गावाशी असलेल्या संबंधांच्या स्वरूपातही दिसून येऊ शकतो.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
त्यामुळे ''कोकणातील गावे ओस पडत आहेत'' असा सार्वत्रिक निष्कर्ष काढण्याऐवजी काही ग्रामीण भागांमध्ये लोकसंख्या घट, बाह्य स्थलांतर, शेतीवरील अवलंबित्वातील बदल आणि गावाबाहेर राहणाऱ्या कुटुंबीयांशी कायम राहिलेले आर्थिक-सामाजिक संबंध या परस्परसंबंधित प्रक्रियांचा अभ्यास करणे अधिक योग्य ठरते.
=== रोजगाराच्या संधींचे आव्हान ===
ग्रामीण भागातील रोजगाररचनेत झालेला बदल हा आधुनिक कोकणासमोरील महत्त्वाचा सामाजिक आणि आर्थिक प्रश्न आहे. कुंकेरी गावाच्या दीर्घकालीन अभ्यासातून शेतीवरील अवलंबित्व कमी होत असताना गैर-कृषी उत्पन्नाच्या स्रोतांचे महत्त्व वाढल्याचे दिसून येते. या प्रक्रियेत स्थलांतर, शिक्षण आणि रोजगाराच्या बदलत्या संधी यांचा परस्परसंबंध आढळतो.<ref name="VartakMigrationEducation2020">{{cite journal
|last=Vartak
|first=Kalyani
|title=Migration and Education in Regions with a Culture of Migration: Observations from Kunkeri Village, Konkan, Maharashtra
|journal=Journal of Migration Affairs
|volume=2
|issue=2
|year=2020
|pages=83–99
}}</ref>
रत्नागिरी जिल्ह्याच्या औद्योगिक विकासासंदर्भातील महाराष्ट्र शासनाच्या माहितीत फळप्रक्रिया, मत्स्यव्यवसाय आणि इतर उद्योगांबरोबर आंबा, बहुफळ प्रक्रिया आणि मत्स्यव्यवसायाशी संबंधित औद्योगिक समूहांची क्षमता नमूद करण्यात आली आहे.<ref name="RatnagiriIndustrialEcosystem2024">{{cite web
|title=Ratnagiri District Industrial Ecosystem
|publisher=Industry Department, Government of Maharashtra
|year=2024
|url=https://industry.maharashtra.gov.in/sites/default/files/2025-09/ignite-mh-booklet_2024.pdf
}}</ref>
या पार्श्वभूमीवर कृषी उत्पादनावर आधारित प्रक्रिया उद्योग, मत्स्यव्यवसाय, पर्यटन, ग्रामीण उद्योग आणि इतर बिगर-कृषी रोजगाराच्या संधी ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या विविधीकरणाशी संबंधित ठरू शकतात. मात्र या क्षेत्रांच्या विस्ताराचा कुणबी समाजावर स्वतंत्र आणि समान परिणाम झाला आहे असा निष्कर्ष उपलब्ध स्रोतांवरून काढता येत नाही.
=== आरोग्य, वाहतूक आणि इतर पायाभूत सुविधा ===
ग्रामीण भागातील सामाजिक आणि आर्थिक परिवर्तनाचा संबंध आरोग्य, शिक्षण, वाहतूक, पिण्याचे पाणी, वीज, दळणवळण आणि बँकिंग यांसारख्या पायाभूत सुविधांच्या उपलब्धतेशीही आहे. रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग जिल्ह्यांच्या २०११ च्या जिल्हा जनगणना हस्तपुस्तिकांमध्ये गावनिहाय शैक्षणिक संस्था, वैद्यकीय सुविधा, पिण्याचे पाणी, वाहतूक, दळणवळण, वीज आणि इतर नागरी सुविधांची नोंद करण्यात आली आहे.<ref name="DistrictCensusRatnagiri2011">{{cite report
|title=Census of India 2011: District Census Handbook, Ratnagiri
|publisher=Directorate of Census Operations, Maharashtra
|year=2014
}}</ref><ref name="DistrictCensusSindhudurg2011">{{cite report
|title=Census of India 2011: District Census Handbook, Sindhudurg
|publisher=Directorate of Census Operations, Maharashtra
|year=2014
}}</ref>
या सुविधांची उपलब्धता आणि त्यातील प्रादेशिक फरक ग्रामीण लोकसंख्येच्या जीवनमान, शिक्षण, आरोग्यसेवा आणि रोजगाराच्या संधींवर परिणाम करणाऱ्या व्यापक घटकांपैकी एक आहेत. त्यामुळे कोकणातील ग्रामीण विकासाचा अभ्यास करताना केवळ रस्ते, वीज किंवा पाणीपुरवठा यांचा स्वतंत्र विचार न करता शिक्षण, आरोग्य, वाहतूक, दळणवळण, बँकिंग आणि बाजारपेठेपर्यंत पोहोच या सुविधांच्या एकत्रित उपलब्धतेचा विचार करणे आवश्यक ठरते.<ref name="DistrictCensusRatnagiri2011" /><ref name="DistrictCensusSindhudurg2011" />
=== डिजिटल दळणवळण आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्था ===
डिजिटल दळणवळणाच्या विस्तारामुळे ग्रामीण भागातील शिक्षण, शासकीय सेवा, बँकिंग, बाजारपेठ, व्यवसाय आणि माहितीच्या उपलब्धतेमध्ये बदल होऊ शकतो. इंटरनेट आणि डिजिटल साधनांचा वापर कृषी उत्पादनाच्या बाजारभावाची माहिती मिळविणे, ग्राहकांशी थेट संपर्क साधणे, वस्तू व सेवांचे विपणन करणे आणि विविध शासकीय सेवांपर्यंत पोहोचणे यांसाठी केला जाऊ शकतो. मात्र या सुविधांचा प्रभाव इंटरनेटची उपलब्धता, डिजिटल साक्षरता आणि स्थानिक पातळीवरील पायाभूत सुविधांवर अवलंबून राहतो.
महाराष्ट्र शासनाच्या ग्रामीण विकास आणि पंचायत राज विभागाच्या विविध योजनांमध्ये ग्रामीण पायाभूत सुविधा, स्वयंरोजगार, कौशल्यविकास आणि ग्रामीण आर्थिक विकासाशी संबंधित उपक्रमांचा समावेश आहे.<ref name="MaharashtraRuralDevelopmentSchemes">{{cite web
|title=योजना
|publisher=ग्रामविकास आणि पंचायत राज विभाग, महाराष्ट्र शासन
|url=https://rdd.maharashtra.gov.in/en/
}}</ref>
ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या संदर्भात डिजिटल साधनांचा वापर वाढल्यास कृषी, पर्यटन, लघुउद्योग आणि सेवा क्षेत्रांना बाजारपेठेशी जोडण्याच्या नवीन शक्यता निर्माण होऊ शकतात. मात्र कोकणातील कुणबी समाजाच्या बाबतीत डिजिटल दळणवळणामुळे झालेला स्वतंत्र सामाजिक किंवा आर्थिक परिणाम दर्शविणारी पुरेशी जातीनिहाय आकडेवारी उपलब्ध नसल्यामुळे हा विषय व्यापक ग्रामीण कोकणाच्या संदर्भात पाहणे अधिक योग्य ठरते.
=== कृषीमालाचे मूल्यवर्धन ===
कोकणातील कृषीव्यवस्थेत भात, नाचणी, कुळीथ, तूर, वाल, नारळ, सुपारी, आंबा, फणस, काजू आणि कोकम यांसारख्या विविध पिकांचे उत्पादन आढळते. महाराष्ट्र शासनाच्या भूजल सर्वेक्षण आणि विकास यंत्रणेच्या कोकणविषयक माहितीत या पिकांचा प्रादेशिक कृषी उत्पादनाच्या संदर्भात उल्लेख करण्यात आला आहे.<ref name="GSDAKonkan">{{cite web
|title=कोकण प्रदेश
|publisher=भूजल सर्वेक्षण आणि विकास यंत्रणा, महाराष्ट्र शासन
|url=https://gsda.maharashtra.gov.in/en-kokan/
}}</ref>
कृषीमालाचे मूल्यवर्धन करण्यासाठी प्रक्रिया, प्रतवारी, पॅकेजिंग, साठवण, शीतसाखळी आणि बाजारपेठेशी थेट संपर्क यांसारख्या उपायांचा उपयोग केला जाऊ शकतो. महाराष्ट्राच्या कृषी निर्यातविषयक धोरणात्मक दस्तऐवजांमध्ये कोकणातील काजू प्रक्रिया केंद्रे, फळप्रक्रिया सुविधा, शीतसाखळी, पॅकगृहे तसेच आंबा आणि काजूसारख्या उत्पादनांसाठी निर्यातक्षम पायाभूत सुविधांच्या विकासाचा उल्लेख करण्यात आला आहे.<ref name="AgriculturalExportsMaharashtra">{{cite web
|title=Enlarging Agricultural Exports
|publisher=कृषी विभाग, महाराष्ट्र शासन
|url=https://krishi.maharashtra.gov.in/Site/Upload/Pdf/Publications/AgrilExports.pdf
}}</ref>
अशा मूल्यवर्धन प्रक्रियेमुळे कृषी उत्पादनाच्या प्राथमिक विक्रीपलीकडे प्रक्रिया, पॅकेजिंग, वाहतूक, विपणन आणि विक्री या क्षेत्रांमध्ये आर्थिक उपक्रम निर्माण होऊ शकतात. मात्र त्याचा प्रत्यक्ष लाभ स्थानिक उत्पादक, शेतकरी संस्था किंवा ग्रामीण उद्योजकांना किती प्रमाणात मिळतो हे प्रदेश, उत्पादन आणि बाजारपेठेच्या परिस्थितीनुसार बदलू शकते.
=== आंबा, काजू, कोकम आणि भात प्रक्रिया उद्योग ===
कोकणातील फळे आणि इतर कृषी उत्पादनांवर आधारित प्रक्रिया उद्योगांना स्थानिक कृषी अर्थव्यवस्थेच्या विविधीकरणामध्ये महत्त्व प्राप्त झाले आहे. महाराष्ट्र शासनाच्या उद्योग संचालनालयाच्या सूक्ष्म आणि लघु उद्योग समूह विकास कार्यक्रमाच्या माहितीनुसार रत्नागिरीतील आंबा प्रक्रिया समूह आणि सिंधुदुर्गमधील काजू प्रक्रिया समूह यांचा अशा औद्योगिक समूहांमध्ये समावेश करण्यात आला आहे.<ref name="MSECDP-Ratnagiri-Sindhudurg">{{cite web
|title=Investor's Guide — Micro & Small Enterprises-Cluster Development Programme (MSE-CDP)
|publisher=Directorate of Industries, Government of Maharashtra
|url=https://di.maharashtra.gov.in/_layouts/15/doistaticsite/English/investors_guide_mse_cdp.html
}}</ref>
कृषी प्रक्रिया उद्योगांमुळे उत्पादनानंतरच्या टप्प्यांमध्ये प्रक्रिया, प्रतवारी, पॅकेजिंग, साठवण, वाहतूक आणि विपणन यांसारख्या आर्थिक क्रियांना चालना मिळू शकते. त्यामुळे अशा उद्योगांचा ग्रामीण रोजगार आणि स्थानिक उद्योजकतेशी संबंध निर्माण होऊ शकतो. शेतकरी उत्पादक संस्था, सहकारी संस्था, महिला बचतगट, लघुउद्योग आणि स्थानिक उद्योजक यांचा सहभाग या प्रक्रियेत महत्त्वाचा ठरू शकतो; मात्र या सर्व घटकांच्या प्रत्यक्ष सहभागाचे प्रमाण प्रदेशानुसार बदलते.
=== पर्यटन आणि कृषी-पर्यटन ===
कोकणातील समुद्रकिनारे, डोंगर, किल्ले, मंदिरे, पारंपरिक घरे, स्थानिक संस्कृती आणि कृषी जीवन यांमुळे ग्रामीण पर्यटनाच्या विकासाला प्रादेशिक आधार मिळतो. महाराष्ट्र शासनाच्या ग्रामविकास आणि पंचायत राज विभागाने कोकण ग्रामीण पर्यटन विकास कार्यक्रम राबविला असून त्यामध्ये ग्रामीण भागातील रोजगार व स्वयंरोजगाराच्या संधी, पर्यटनाशी संबंधित पायाभूत सुविधा आणि गावांच्या विकासाला प्रोत्साहन देण्याचा उद्देश नमूद करण्यात आला आहे.<ref name="KonkanRuralTourism">{{cite web
|title=कोकण ग्रामीण पर्यटन विकास कार्यक्रम
|publisher=ग्रामविकास आणि पंचायत राज विभाग, महाराष्ट्र शासन
|url=https://rdd.maharashtra.gov.in/scheme/%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A4%A3-%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A3-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%9F%E0%A4%A8-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE/
}}</ref>
महाराष्ट्राच्या कृषी-पर्यटन धोरणामध्ये ग्रामीण विकास, कृषीमालासाठी बाजारपेठ निर्माण करणे, कृषीशी संबंधित पूरक व्यवसायांना प्रोत्साहन देणे आणि ग्रामीण महिला व युवकांसाठी रोजगाराच्या संधी निर्माण करणे यांसारख्या उद्दिष्टांचा समावेश आहे. शेतकरी आणि कृषी सहकारी संस्थांना कृषी-पर्यटन केंद्रांच्या विकासासाठी पात्र घटक म्हणूनही नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="MaharashtraAgriTourismPolicy">{{cite web
|title=Agri Tourism Policy, 2016
|publisher=Maharashtra Institution for Transformation (MITRA), Government of Maharashtra
|url=https://mahaniti.mahamitra.org/resources/policies
}}</ref>
कृषी-पर्यटनामुळे शेती, निवास, स्थानिक अन्नपदार्थ, ग्रामीण संस्कृती आणि पर्यटनसेवा यांच्यात आर्थिक संबंध निर्माण होऊ शकतात. तथापि अशा उपक्रमांचा विकास सर्व गावांमध्ये किंवा सर्व सामाजिक समूहांमध्ये समान प्रमाणात झाला आहे असे उपलब्ध स्रोतांवरून म्हणता येत नाही. त्यामुळे कुणबी समाजाच्या संदर्भात कृषी-पर्यटनाचा अभ्यास करताना स्थानिक पातळीवरील प्रत्यक्ष पुरावे स्वतंत्रपणे तपासणे आवश्यक आहे.
=== सहकार आणि ग्रामीण उद्योजकता ===
ग्रामीण कोकणातील कृषी आणि स्थानिक अर्थव्यवस्थेच्या विकासात सहकारी संस्था, शेतकरी उत्पादक संस्था, महिला बचतगट आणि लघुउद्योग यांसारख्या सामूहिक आर्थिक संस्थांना महत्त्व प्राप्त होऊ शकते. कृषीमालाची सामूहिक खरेदी, प्रक्रिया, साठवण, प्रतवारी, पॅकेजिंग आणि विक्री यांमुळे उत्पादकांना बाजारपेठेशी अधिक थेट संबंध प्रस्थापित करण्याच्या संधी निर्माण होऊ शकतात.
रत्नागिरी जिल्ह्याच्या औद्योगिक विकासासंदर्भातील महाराष्ट्र शासनाच्या माहितीत आंबा, बहुफळ प्रक्रिया आणि मत्स्यव्यवसायाशी संबंधित औद्योगिक समूहांचा उल्लेख करण्यात आला आहे. अशा समूहाधारित विकासामुळे स्थानिक कृषी व मत्स्य उत्पादनांना प्रक्रिया, मूल्यवर्धन आणि बाजारपेठेशी जोडण्याची संधी निर्माण होऊ शकते.<ref name="RatnagiriIndustrialEcosystem2024" />
या पार्श्वभूमीवर सहकार आणि स्थानिक उद्योजकता ही ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या विविधीकरणातील संभाव्य साधने मानता येतात. मात्र अशा संस्थांचा प्रत्यक्ष विस्तार आणि त्याचा कुणबी समाजावर होणारा परिणाम हा प्रदेश, उत्पादन, स्थानिक संस्था आणि आर्थिक परिस्थितीनुसार बदलू शकतो.
=== गावाकडे आर्थिक संसाधने आणि कौशल्ये परत येण्याची शक्यता ===
कोकणातील दीर्घकालीन स्थलांतरामुळे अनेक ग्रामीण कुटुंबांचे आर्थिक संबंध गाव आणि शहर या दोन्ही ठिकाणांशी जोडले गेले आहेत. कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या कालखंडांतील अभ्यासातून स्थलांतरित व्यक्ती आणि त्यांच्या मूळ गावामधील संबंध कायम राहिल्याचे दिसून येते. स्थलांतरामुळे कुटुंबांच्या उत्पन्नाच्या स्रोतांमध्ये आणि आर्थिक रणनीतींमध्येही बदल झाले.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
ग्रामीण आणि शहरी भागांतील अशा संबंधांमुळे स्थलांतरितांकडून कुटुंबांना आर्थिक मदत मिळणे, गावातील मालमत्ता आणि शेतीशी संबंध कायम राहणे तसेच शिक्षण आणि रोजगाराच्या माध्यमातून नवीन अनुभव प्राप्त होणे यांसारख्या प्रक्रिया घडू शकतात. तथापि शिक्षण, तांत्रिक कौशल्य, व्यवस्थापनाचा अनुभव किंवा उद्योजकीय क्षमता प्रत्यक्षपणे गावातील अर्थव्यवस्थेत किती प्रमाणात परत येतात याबाबत संपूर्ण कोकणासाठी स्वतंत्र आणि पुरेशी सांख्यिक माहिती उपलब्ध नाही.
त्यामुळे स्थलांतराकडे केवळ ग्रामीण लोकसंख्येतील घट म्हणून न पाहता गाव आणि शहर यांच्यातील दीर्घकालीन आर्थिक व सामाजिक संबंधांच्या संदर्भात पाहणे अधिक व्यापक ठरते.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
=== भविष्यातील संभाव्य विकासदिशा ===
कोकणातील ग्रामीण समुदायांच्या भविष्यातील आर्थिक विकासासाठी शेती आणि शेतीबाहेरील उत्पन्नस्रोत यांचा परस्परसंबंध विचारात घेणे आवश्यक ठरते. आंबा, काजू, कोकम, भात आणि इतर कृषी उत्पादनांचे मूल्यवर्धन, कृषी प्रक्रिया उद्योग, शीतसाखळी, पॅकेजिंग, स्थानिक ब्रँड, मत्स्यव्यवसाय, ग्रामीण पर्यटन आणि कृषी-पर्यटन यांसारख्या क्षेत्रांमध्ये विकासाच्या संधी उपलब्ध होऊ शकतात.<ref name="AgriculturalExportsMaharashtra" /><ref name="MSECDP-Ratnagiri-Sindhudurg" />
महाराष्ट्र शासनाच्या कोकण ग्रामीण पर्यटन विकास कार्यक्रमामध्ये ग्रामीण भागातील रोजगार आणि स्वयंरोजगाराच्या संधी, पर्यटनविषयक पायाभूत सुविधा आणि गावांच्या विकासाला प्रोत्साहन देण्याचा उद्देश नमूद करण्यात आला आहे.<ref name="KonkanRuralTourism" />
कृषी उत्पादनाचे मूल्यवर्धन, स्थानिक प्रक्रिया उद्योग, सहकारी संस्था, ग्रामीण पर्यटन, कृषी-पर्यटन, मत्स्यव्यवसाय आणि इतर बिगर-कृषी उपक्रम यांचा विकास झाल्यास ग्रामीण अर्थव्यवस्थेचे विविधीकरण होण्याची शक्यता आहे. मात्र या संभाव्य विकासदिशांचा प्रत्यक्ष परिणाम स्थानिक पायाभूत सुविधा, बाजारपेठ, भांडवल, कौशल्ये, संस्थात्मक क्षमता आणि स्थानिक सामाजिक-आर्थिक परिस्थितीवर अवलंबून राहील.
या संदर्भात कुणबी समाजाचा आधुनिक आर्थिक इतिहास पाहताना पारंपरिक शेती, स्थलांतरातून निर्माण झालेले गाव-शहर संबंध, शिक्षणामुळे वाढलेल्या रोजगाराच्या संधी आणि बदलती ग्रामीण अर्थव्यवस्था या घटकांचा एकत्रित विचार करणे आवश्यक आहे. उपलब्ध स्रोत मात्र संपूर्ण कोकणातील कुणबी समाजासाठी या विकासदिशांचा स्वतंत्र परिणाम निश्चित करीत नाहीत.
=== भविष्यातील आव्हाने ===
आधुनिक कोकणातील ग्रामीण समाजासमोरील आव्हाने लोकसंख्याशास्त्रीय बदलांपुरती मर्यादित नाहीत. ग्रामीण भागातून शिक्षण आणि रोजगारासाठी होणारे स्थलांतर, शेतीवरील आर्थिक अवलंबित्वातील बदल, जमिनीचे तुकडीकरण, स्थानिक रोजगाराच्या मर्यादा, उच्च शिक्षणासाठी शहरी केंद्रांवरील अवलंबित्व तसेच आरोग्य, वाहतूक आणि डिजिटल दळणवळणाच्या सुविधांतील प्रादेशिक फरक हे परस्परसंबंधित घटक आहेत. कुंकेरीच्या दीर्घकालीन अभ्यासातून स्थलांतर, शिक्षण आणि रोजगाराच्या बदलत्या स्वरूपाचा ग्रामीण कुटुंबांच्या आर्थिक जीवनावर परिणाम झाल्याचे दिसून येते.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
दुसरीकडे कोकणामध्ये कृषी, बागायती, मत्स्यव्यवसाय, पर्यटन आणि स्थानिक कृषी उत्पादनांवर आधारित प्रक्रिया उद्योगांच्या विकासाच्या शक्यता आहेत. महाराष्ट्र शासनाच्या विविध कार्यक्रमांमध्ये ग्रामीण पर्यटन, कृषी-पर्यटन आणि औद्योगिक समूहांच्या विकासाला प्रोत्साहन देण्याचा उल्लेख आढळतो.<ref name="KonkanRuralTourism" /><ref name="MSECDP-Ratnagiri-Sindhudurg" />
या पार्श्वभूमीवर ग्रामीण अर्थव्यवस्थेचे विविधीकरण, स्थानिक रोजगाराच्या संधी, कृषीमालाचे मूल्यवर्धन आणि ग्रामीण पायाभूत सुविधांचा विकास हे कोकणाच्या भविष्यातील महत्त्वाचे विकासविषय ठरू शकतात. मात्र या प्रक्रियांचा कुणबी समाजावर स्वतंत्र आणि समान परिणाम होईल असे उपलब्ध स्रोतांवरून निश्चितपणे म्हणता येत नाही.
=== भविष्याचा प्रश्न : स्थलांतर थांबविणे की गावाशी नाते बदलणे? ===
कोकणातील ग्रामीण समाजाच्या भविष्यातील बदलांचा विचार करताना स्थलांतराकडे केवळ लोकसंख्या घटण्याच्या प्रक्रियेच्या रूपात पाहणे पुरेसे ठरत नाही. शिक्षण, रोजगार आणि व्यवसायासाठी स्थलांतर करणे ही ग्रामीण कुटुंबांच्या आर्थिक रणनीतींचा एक भाग असू शकते. त्यामुळे स्थलांतरित व्यक्तींचे मूळ गावाशी असलेले आर्थिक, सामाजिक आणि कौटुंबिक संबंध यांचाही विचार करणे आवश्यक ठरते.
कुंकेरीच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या कालखंडांतील तुलनात्मक अभ्यासातून मोठ्या प्रमाणावर बाह्य स्थलांतर झाले असतानाही गावातील काही सामाजिक रचना आणि जमीनधारणेच्या पद्धतींमध्ये सातत्य राहिल्याचे दिसून येते. त्याचबरोबर स्थलांतरित कुटुंबांचे गावाशी असलेले संबंध कायम राहिल्याचेही अभ्यासात नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
या दृष्टिकोनातून ग्रामीण आणि शहरी भागांतील संबंध हे परस्परविरोधी न मानता परस्परावलंबी स्वरूपाचे असू शकतात. शहरांमध्ये स्थायिक झालेल्या कुटुंबांचे गावातील जमीन, घर, कुटुंबीय आणि सामाजिक संस्थांशी संबंध कायम राहू शकतात. त्याचप्रमाणे स्थलांतरातून प्राप्त उत्पन्न, शिक्षण आणि अनुभव यांचा काही प्रमाणात ग्रामीण कुटुंबांच्या आर्थिक जीवनाशी संबंध राहू शकतो.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
त्यामुळे कोकणातील ग्रामीण समाजाच्या भविष्यातील विकासाचा विचार करताना ''गावात राहणे'' आणि ''गाव सोडणे'' या दोन परस्परविरोधी पर्यायांऐवजी ग्रामीण आणि शहरी अर्थव्यवस्थांमधील बदलते संबंध हा एक महत्त्वाचा अभ्यासविषय ठरतो. शेती, कृषी प्रक्रिया, पर्यटन, डिजिटल सेवा आणि स्थानिक उद्योजकता यांसारख्या क्षेत्रांचा विकास झाल्यास ग्रामीण भाग आणि स्थलांतरित लोकसंख्या यांच्यातील आर्थिक संबंधांना नवीन स्वरूप मिळण्याची शक्यता आहे. मात्र अशा संभाव्य परिणामांचे प्रत्यक्ष स्वरूप स्थानिक आर्थिक, सामाजिक आणि पायाभूत परिस्थितीनुसार बदलू शकते.
आधुनिक कोकणातील कुणबी समाजाचा प्रश्न हा केवळ एखाद्या जातीय समुदायाच्या लोकसंख्येपुरता मर्यादित नाही; तो कोकणातील ग्रामीण समाजाच्या व्यापक सामाजिक आणि आर्थिक परिवर्तनाशी संबंधित आहे. २००१–२०११ च्या कालावधीत रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग या दोन्ही जिल्ह्यांच्या एकूण लोकसंख्येत घट झाल्याचे जनगणना-आधारित आकडेवारीत दिसते. त्याच वेळी कुंकेरीसारख्या गावांच्या दीर्घकालीन अभ्यासातून शिक्षण, रोजगार आणि स्थलांतरामुळे ग्रामीण कुटुंबांच्या आर्थिक व सामाजिक जीवनात झालेले बदल स्पष्ट होतात.<ref name="DistrictwisePopulationMaharashtra" /><ref name="VartakTumbeBhide2019" />
या पार्श्वभूमीवर कुणबी समाजासह कोकणातील ग्रामीण समुदायांसमोरील भविष्यातील प्रश्न केवळ ग्रामीण लोकसंख्या टिकवून ठेवण्यापुरते मर्यादित न राहता शिक्षण, स्थानिक रोजगार, कृषीमालाचे मूल्यवर्धन, कृषी प्रक्रिया, सहकार, पर्यटन, डिजिटल दळणवळण आणि ग्रामीण उद्योजकता यांच्यातील परस्परसंबंधांशी जोडलेले आहेत. महाराष्ट्र शासनाच्या विविध योजनांमध्ये कृषी प्रक्रिया, औद्योगिक समूह, ग्रामीण पर्यटन आणि ग्रामीण विकासाशी संबंधित उपक्रमांना प्रोत्साहन देण्यात येत आहे.<ref name="AgriculturalExportsMaharashtra" /><ref name="MSECDP-Ratnagiri-Sindhudurg" /><ref name="KonkanRuralTourism" />
कोकणातून स्थलांतरित झालेल्या लोकांचे मूळ गावाशी आर्थिक आणि सामाजिक संबंध कायम राहू शकतात, असे कुंकेरीच्या दीर्घकालीन अभ्यासातून दिसून येते. त्यामुळे स्थलांतराकडे केवळ ग्रामीण लोकसंख्येतील घट म्हणून न पाहता गाव आणि शहर यांच्यातील बदलत्या आर्थिक व सामाजिक संबंधांच्या संदर्भात पाहणे अधिक योग्य ठरते.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
या दृष्टीने शिक्षण, रोजगार आणि स्थलांतरातून निर्माण झालेले ज्ञान, अनुभव आणि आर्थिक संसाधने ग्रामीण अर्थव्यवस्थेशी जोडण्याच्या शक्यतांचा अभ्यास भविष्यात महत्त्वाचा ठरू शकतो. मात्र अशा प्रक्रियेचा संपूर्ण कोकणातील कुणबी समाजावर प्रत्यक्ष परिणाम किती प्रमाणात होतो, याबाबत स्वतंत्र आणि जातीनिहाय पुरेसा सांख्यिक पुरावा उपलब्ध नसल्यामुळे त्याविषयी निश्चित निष्कर्ष काढणे सध्या शक्य नाही.
== चित्र दालन ==
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File:The tribes and castes of the Central Provinces of India (1916) (14577097260).jpg|ब्रिटिशकालीन काळातील कुणबी/कृषक समूहाचे ऐतिहासिक चित्रण
File:कोकणातील शेतकरी व बैलजोडी.jpg|कोकणातील पारंपरिक शेती आणि बैलजोडी
File:Konkan - Ukshi Village - Part 2 20151220 (23704381920).jpg|उक्षी गाव, रत्नागिरी जिल्हा
File:Konkan - Ukshi Village - Part 2 20151220 (24000097155).jpg|उक्षी गावातील ग्रामीण जीवन
File:गावातील बलुतेदार.jpg|गावातील पारंपरिक बलुतेदारी व्यवस्था
File:उदगीर वन व जंगल.jpg|कोकणातील नैसर्गिक परिसर आणि ग्रामीण जीवन
File:Konkan - Songiri Village - Ratnagiri District - Part 1 20151218 (23997376885).jpg|सोंगीरी गाव, रत्नागिरी जिल्हा
File:Konkan - Songiri Village - Ratnagiri District - Part 1 20151218 (23629305669).jpg|सोंगीरी गावातील ग्रामीण परिसर
File:Paddy field in Maharashtra 9.jpg|महाराष्ट्रातील भातशेती
File:A scene from Dashavatara folk theatre in Konkan region.jpg|कोकणातील दशावतार लोकनाट्य
File:Palakhinrutya - Dance of Palanquin of Village Dities - Shimagotsav in Kokan - Maharashtra.jpg|कोकणातील शिमगोत्सवातील पालखी नृत्य
File:खडीकोळवण देव गांगेश्वर ग्राम मंदीर.jpg|खडीकोळवण येथील देव गांगेश्वर ग्राममंदिर
File:MaharashtraKonkan.png|महाराष्ट्रातील कोकण प्रदेशाचा नकाशा
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== हे सुद्धा पहा ==
* [[कोकण]]
* [[रत्नागिरी जिल्हा]]
* [[सिंधुदुर्ग जिल्हा]]
* [[रायगड जिल्हा]]
* [[कुणबी]]
* [[मराठा]]
* [[महाराष्ट्रातील जातिव्यवस्था]]
== बाह्य दुवे ==
* [https://censusindia.gov.in/ भारताची जनगणना — भारताचे जनगणना आयुक्त कार्यालय]
* [https://gazetteers.maharashtra.gov.in/ महाराष्ट्र शासन — गॅझेटियर विभाग]
* [https://www.bartievalidity.maharashtra.gov.in/ डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर संशोधन व प्रशिक्षण संस्था — जात वैधता पडताळणी माहिती प्रणाली] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20260119160227/http://www.bartievalidity.maharashtra.gov.in/ |date=2026-01-19 }}
* [https://raigad.gov.in/en/maratha-kunbi-documents-2/ रायगड जिल्हा प्रशासन — कुणबी-मराठा दस्तऐवज]
* [https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/31003/download/34184/49541_1961_KUN.pdf कुंकेरी ग्रामसर्वेक्षण, १९६१]
{{कोकण लोकजीवन}}
== संदर्भ ==
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[[वर्ग:कोकण]]
[[वर्ग:महाराष्ट्र]]
[[वर्ग:समाज]]
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{{Infobox ethnic group
| group = कोकणातील कुणबी
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'''कोकणातील कुणबी''' हा महाराष्ट्राच्या कोकण प्रदेशातील ऐतिहासिकदृष्ट्या कृषी आणि ग्रामीण जीवनाशी संबंधित असलेला सामाजिक समुदाय आहे. कोकणातील कुणबींच्या इतिहासाचा संबंध रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, रायगड आणि ऐतिहासिक ठाणे जिल्ह्याच्या विविध भागांतील ग्रामीण समाजरचना, शेती, जमीनव्यवस्था आणि स्थानिक अर्थव्यवस्थेशी आढळतो. ब्रिटिशकालीन गॅझेटियर, जनगणना अहवाल तसेच नंतरच्या मानववंशशास्त्रीय आणि भाषावैज्ञानिक अभ्यासांमध्ये या समुदायाचा उल्लेख आढळतो.<ref name="Ratnagiri1880">{{cite book
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Ratnagiri and Savantvadi
|volume=10
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|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira
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|title=The Tribes and Castes of Bombay
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|year=1922
}}</ref>
कोकणातील कुणबींच्या इतिहासाची सुरुवात एखाद्या विशिष्ट राजवंशापासून किंवा एका निश्चित कालखंडापासून झाली असे निश्चितपणे सांगता येत नाही. महाराष्ट्र आणि कोकणातील कृषीप्रधान ग्रामजीवनाची पार्श्वभूमी प्राचीन आहे; तथापि प्रागैतिहासिक किंवा प्राचीन काळातील कृषक समुदायांना आधुनिक अर्थाने थेट ''कुणबी'' म्हणणे इतिहासदृष्ट्या योग्य ठरत नाही. पुढील काळात कृषी, जमीनव्यवस्था, ग्रामसंस्था, महसूलपद्धती, स्थलांतर आणि सामाजिक ओळखीमधील बदलांच्या प्रक्रियेत कोकणातील कुणबी समाजाची विविध प्रादेशिक रूपे विकसित झाली.
१९व्या शतकातील ब्रिटिशकालीन गॅझेटियर आणि जनगणना अहवाल कोकणातील लोकसंख्या, शेती, जमीनधारणा आणि ग्रामीण समाजरचनेच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचे ऐतिहासिक स्रोत आहेत. रत्नागिरी आणि सावंतवाडी, कोलाबा आणि जंजिरा तसेच ठाणे प्रदेशांच्या गॅझेटियरमध्ये कृषक समाज, जमीनव्यवस्था, महसूल आणि ग्रामीण जीवनाचे वर्णन आढळते.<ref name="Ratnagiri1880" /><ref name="Kolaba1883" /><ref name="Thana1882">{{cite book
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Thana
|volume=13
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1882
}}</ref>
कोलाबा जिल्ह्याच्या १८८१ च्या जनगणनेनुसार जिल्ह्याची एकूण लोकसंख्या ३,८१,६४९ होती. त्याच नोंदींमध्ये जन्मस्थान, भाषा, धर्म, वय, लिंग आणि उपविभागनिहाय लोकसंख्येची माहिती देण्यात आली आहे.<ref name="Kolaba1883" />
कोकणातील कुणबी समाज एकसंध आणि अपरिवर्तनीय सामाजिक गट म्हणून राहिलेला नाही. वेगवेगळ्या प्रदेशांतील स्थानिक सामाजिक रचना, विवाहपद्धती, स्थलांतर, आर्थिक परिस्थिती, जमीनधारणा आणि प्रशासकीय वर्गीकरण यांमुळे कुणबीशी संबंधित विविध प्रादेशिक आणि सामाजिक ओळखी आढळतात. ब्रिटिशकालीन जनगणना आणि ethnographic साहित्यामध्ये ''Kunbi'', ''Kanbi'', ''Maratha Kunbi'' तसेच इतर प्रादेशिक संज्ञांचा वापर आढळतो. या संज्ञांचे अर्थ आणि प्रशासकीय वर्गीकरण काळानुसार बदलत गेले असल्यामुळे वेगवेगळ्या जनगणनांतील आकडे थेट परस्पर तुलनीय मानताना सावधगिरी आवश्यक आहे.<ref name="Enthoven1922" />
कोकणातील कुणबी समाजाच्या इतिहासात शेतीला महत्त्वाचे स्थान राहिले असले तरी समुदायाची सामाजिक आणि आर्थिक भूमिका केवळ शेतीपुरती मर्यादित राहिलेली नाही. कोलाबा गॅझेटियरमध्ये महाड आणि माणगाव परिसरातील कुणबी कापणीचा हंगाम संपल्यानंतर मुंबई आणि इतर मजूर बाजारपेठांकडे हंगामी स्वरूपात जात असल्याची नोंद आहे. त्याच नोंदीमध्ये काही कुणबी सैन्य, पोलीस आणि इतर सरकारी सेवांमध्ये प्रवेश करून घरी राहिलेल्या कुटुंबीयांना पैसे पाठवत असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Kolaba1883" />
पुढील काळात शिक्षण, सरकारी सेवा, व्यवसाय, उद्योग, सहकार आणि शहरी रोजगार यांमध्येही कोकणातील ग्रामीण समाजाचा सहभाग वाढला. या सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनाचा अभ्यास करताना कुणबी समाजाची स्वतंत्र आकडेवारी आणि संपूर्ण ग्रामीण किंवा जिल्हास्तरीय आकडेवारी यांमध्ये फरक ठेवणे आवश्यक आहे.
कोकणातील ग्रामीण लोकसंख्येतील बदल आणि रोजगारासाठी होणारे स्थलांतर हे आधुनिक काळातील महत्त्वाचे सामाजिक-आर्थिक घटक आहेत. विशेषतः रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्गसारख्या जिल्ह्यांमध्ये शिक्षण आणि रोजगारासाठी मोठ्या शहरी केंद्रांकडे होणाऱ्या स्थलांतराचा ग्रामीण समाजावर परिणाम झाला आहे. Kunkeri गावावरील १९६१–१९८७–२०१७ या कालखंडाच्या तुलनात्मक अभ्यासात दीर्घकालीन स्थलांतर, शिक्षणासाठी स्थलांतर, रोजगारातील बदल आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेतील परिवर्तन यांचे दस्तऐवजीकरण करण्यात आले आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019">{{cite journal
|last=Vartak
|first=Kalyani
|author2=Chinmay Tumbe
|author3=Amita Bhide
|title=Mass Migration from Rural India: A Restudy of Kunkeri Village in Konkan, Maharashtra, 1961–1987–2017
|journal=Journal of Interdisciplinary Economics
|volume=31
|issue=1
|year=2019
|pages=42–62
}}</ref>
आज कोकणातील कुणबींची स्वतंत्र आणि अधिकृत जिल्हानिहाय लोकसंख्या किंवा टक्केवारी उपलब्ध नाही. आधुनिक जनगणनेत सर्व जातींची स्वतंत्र आणि सातत्यपूर्ण जिल्हानिहाय लोकसंख्या प्रकाशित झालेली नसल्यामुळे उपलब्ध अनधिकृत अंदाजांना अधिकृत जनगणना आकडे म्हणून मांडता येत नाही. त्यामुळे ऐतिहासिक Censusमधील कुणबी किंवा Maratha-Kunbi वर्गीकरणाची संख्या आणि आजच्या कुणबी समाजाची लोकसंख्या यांची थेट तुलना करणे योग्य नाही.
भारत सरकारने २०२७मध्ये जनगणना घेण्याचा निर्णय घेतला असून केंद्र सरकारने २०२५मध्ये या जनगणनेत जातीनिहाय माहिती संकलित करण्याचा निर्णय जाहीर केला आहे. त्यामुळे जनगणना प्रक्रिया पूर्ण होऊन अधिकृत आकडे प्रसिद्ध झाल्यानंतर कुणबी आणि संबंधित सामाजिक वर्गांच्या लोकसंख्येबाबत अधिक व्यापक अधिकृत माहिती उपलब्ध होण्याची शक्यता आहे. मात्र सध्या २०२७ची जातीनिहाय लोकसंख्या उपलब्ध आहे असे मानता येत नाही.<ref>{{cite web
|title=Lok Sabha Unstarred Question No. 258
|publisher=Ministry of Home Affairs, Government of India
|date=2 December 2025
|url=https://www.mha.gov.in/MHA1/Par2017/pdfs/par2025-pdfs/LS02122025/258.pdf
}}</ref>
या लेखात कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास, नाव आणि संज्ञांची पार्श्वभूमी, भौगोलिक वितरण, मध्ययुगीन आणि ब्रिटिशकालीन ग्रामीण समाज, रत्नागिरी, रायगड आणि उत्तर कोकणातील सामाजिक स्थिती, तिलोरी कुणबी, कुणबी बोली, सामाजिक रचना, शेती आणि अर्थव्यवस्था, स्थलांतर, मराठा-कुणबी संबंध, लोकसंख्याशास्त्रीय बदल, आधुनिक प्रशासकीय स्थिती आणि सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन यांचा उपलब्ध विश्वसनीय ऐतिहासिक, शासकीय आणि शैक्षणिक स्रोतांच्या आधारे आढावा घेतला आहे.
== कुणबी आणि संज्ञा ==
‘कुणबी’ ही संज्ञा पश्चिम भारतातील कृषक समुदायांच्या संदर्भात ऐतिहासिकदृष्ट्या वापरली गेली आहे. महाराष्ट्र आणि कोकणाच्या विविध भागांत या समुदायाशी संबंधित ''Kunbi'', ''Kanbi'', ''Kulambi'', ''Kulwādi'' तसेच काही प्रादेशिक संदर्भांत ''Tilori Kunbi'' यांसारख्या संज्ञा वेगवेगळ्या काळातील स्रोतांमध्ये आढळतात. या संज्ञांचा वापर सर्व प्रदेशांत आणि सर्व काळात समान अर्थाने झाला असे मानता येत नाही. वसाहतकालीन ethnographic साहित्य, जनगणना आणि प्रशासकीय नोंदींमध्ये सामाजिक समूहांचे वर्गीकरण प्रदेश आणि काळानुसार बदलत गेले.<ref name="Enthoven1922" /><ref name="RussellHiralal1916">{{cite book
|last=Russell
|first=R. V.
|author2=Hiralal
|title=The Tribes and Castes of the Central Provinces of India
|volume=4
|publisher=Macmillan and Co., Limited
|location=London
|year=1916
}}</ref>
=== कुणबी आणि Kunbi ===
‘कुणबी’ हे मराठी रूप असून इंग्रजीतील ''Kunbi'' हे त्याचे प्रचलित लिप्यंतरित रूप आहे. वसाहतकालीन ethnographic साहित्यामध्ये ''Kunbi'' हा शब्द महाराष्ट्र आणि पश्चिम भारतातील विविध कृषक समुदायांच्या संदर्भात वापरला गेला आहे. Enthoven यांच्या The Tribes and Castes of Bombay मध्ये ''Kunbi'' आणि ''Kanbi'' या संज्ञांचा कृषक समुदायांच्या संदर्भात विचार करण्यात आला आहे.<ref name="Enthoven1922" />
=== Kanbi ===
‘कानबी’ किंवा ''Kanbi'' ही संज्ञा विशेषतः गुजरातमधील कृषक समुदायांच्या संदर्भात आढळते. Enthoven यांच्या लेखनात ''Kanbi'' आणि ''Kunbi'' ही रूपे परस्पर संबंधित संज्ञा म्हणून चर्चिली आहेत. Russell आणि Hiralal यांनीही ''Kanbi'' हे गुजरातमधील, तर ''Kunbi'' हे दख्खनमधील प्रचलित रूप असल्याची नोंद केली आहे.<ref name="Enthoven1922" /><ref name="RussellHiralal1916"/>
या नोंदींवरून ‘कानबी’ आणि ‘कुणबी’ ही नावे वेगवेगळ्या प्रदेशांत प्रचलित असलेली भाषिक रूपे असल्याचे दिसते; मात्र केवळ नावातील साम्याच्या आधारे या सर्व समुदायांची एकच ऐतिहासिक उत्पत्ती निश्चित करता येत नाही.
=== Kulambi आणि कुलंबी ===
''Kulambi'' हे रूप जुन्या ethnographic साहित्यात कुणबीशी संबंधित प्रादेशिक रूप म्हणून आढळते. Russell आणि Hiralal यांनी बॉम्बे प्रदेशातील विविध प्रादेशिक रूपांचा उल्लेख करताना दख्खनमध्ये ''Kunbi'' किंवा ''Kulambi'', दक्षिण कोकणात ''Kulwādi'', गुजरातमध्ये ''Kanbi'' आणि बेळगाव परिसरात ''Kulbi'' अशी रूपे नोंदवली आहेत.<ref name="RussellHiralal1916"/>
मात्र ‘कुलंबी’ हे ‘कुणबी’चेच मूळ रूप आहे किंवा दोन्ही शब्दांची निर्मिती एकाच ऐतिहासिक प्रक्रियेतून झाली आहे, असे निर्विवादपणे सिद्ध झालेले नाही. त्यामुळे ‘कुलंबी’ आणि ‘कुणबी’ यांचा संबंध मांडताना तो संभाव्य भाषिक संबंध किंवा ऐतिहासिक व्युत्पत्तीविषयक मत म्हणूनच मांडणे आवश्यक आहे.
=== Kulwadi / कुलवाडी ===
‘कुलवाडी’ किंवा ''Kulwādi'' ही संज्ञा विशेषतः दक्षिण कोकणाशी संबंधित प्रादेशिक रूप म्हणून Russell आणि Hiralal यांच्या नोंदीत आढळते. त्याच नोंदीत ''Kunbi'', ''Kulambi'', ''Kulwādi'', ''Kanbi'' आणि ''Kulbi'' ही विविध प्रादेशिक रूपे नमूद केली आहेत.<ref name="RussellHiralal1916"/>
कोकणातील सामाजिक इतिहासाच्या अभ्यासात ‘कुलवाडी’ ही संज्ञा स्थानिक संदर्भात स्वतंत्रपणे तपासणे आवश्यक आहे. ती प्रत्येक ठिकाणी आणि प्रत्येक काळात ‘कुणबी’ची तंतोतंत समानार्थी संज्ञा होती असे गृहीत धरता येत नाही.
=== Kutumbika / कुटुम्बिक ===
‘कुटुम्बिक’ किंवा ''Kutumbika'' या प्राचीन संज्ञेचा ‘कुणबी’ या आधुनिक सामाजिक नावाशी संबंध जोडणारे मत जुन्या ethnographic साहित्यात आढळते. Russell आणि Hiralal यांनी बॉम्बे प्रदेशातील ''Kunbi'' आणि ''Kulambi'' या रूपांचा उल्लेख करताना संस्कृत अभिलेखांमध्ये ''Kutumbika'' हे रूप आढळते आणि त्याचा संबंध ''kutumba'' म्हणजे कुटुंब याच्याशी जोडला जातो, अशी व्युत्पत्तीविषयक मांडणी नोंदवली आहे. त्यांच्या नोंदीनुसार अकराव्या शतकातील एका वृत्तांतात ''Kutumbiks'' या संज्ञेचा ग्रामांतील कृषकांच्या संदर्भात उल्लेख करण्यात आला होता.<ref name="RussellHiralal1916"/>
Russell आणि Hiralal यांनी ''Kutumbika''पासून कुणबी नावाची व्युत्पत्ती होऊ शकते, अशी मांडणी नोंदवली असली तरी त्यांनी इतर व्युत्पत्तीविषयक मतेही दिली आहेत. त्यामुळे ''Kutumbika'' → ''Kulambi'' → ''Kunbi'' हा क्रम निश्चित आणि निर्विवाद ऐतिहासिक व्युत्पत्ती म्हणून मांडता येत नाही.<ref name="RussellHiralal1916"/>
‘कुटुम्बिक’ आणि आधुनिक ‘कुणबी’ यांच्यातील संबंधाबाबत भाषिक आणि सामाजिक-ऐतिहासिक असे दोन स्वतंत्र प्रश्न विचारात घेणे आवश्यक आहे. भाषिकदृष्ट्या संभाव्य व्युत्पत्तीचे मत उपलब्ध आहे; मात्र प्राचीन ''Kutumbika'' आणि आधुनिक कुणबी हा एकच अखंड सामाजिक समुदाय असल्याचा निर्णायक पुरावा उपलब्ध आहे, असे मानता येत नाही.
=== Tilori / Tillori Kunbi ===
‘तिलोरी कुणबी’ किंवा ''Tilori Kunbi'' ही संज्ञा रत्नागिरी जिल्ह्याशी संबंधित ऐतिहासिक प्रशासकीय नोंदींमध्ये विशेषत्वाने आढळते. २३ एप्रिल १९४२ च्या तत्कालीन बॉम्बे सरकारच्या ठरावात ''Kunbi (except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)'' असा उल्लेख करण्यात आला होता, तर ''Kunbi Tilori in Ratnagiri district'' ही स्वतंत्र नोंद इतर मागास समुदायांच्या यादीत करण्यात आली होती. मुंबई उच्च न्यायालयाने २००२ च्या Dattatraya s/o Ramrao Thorat v. State of Maharashtra या निर्णयात १९४२ च्या ठरावासह १९५०, १९५६ आणि १९६१ च्या संबंधित शासन ठरावांमध्ये ही प्रशासकीय स्थिती कायम राहिल्याची नोंद केली आहे. १३ ऑक्टोबर १९६७ च्या महाराष्ट्र शासनाच्या ठरावात ''Kunbi caste'' ही स्वतंत्र इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत अनुक्रमांक ८३वर समाविष्ट करण्यात आल्याचेही न्यायालयाने नमूद केले आहे.<ref name="DattatrayaThorat2002">{{cite web
|title=Dattatraya S/o Ramrao Thorat v. The State of Maharashtra & Ors.
|publisher=Bombay High Court
|date=24 April 2002
|url=https://indiankanoon.org/doc/726744/
}}</ref>
तिलोरी कुणबीशी संबंधित भाषिक अभ्यासही करण्यात आला आहे. A. M. Ghatge यांनी Kunbi of Mahad या ग्रंथात महाड परिसरातील कुणबी बोलीचे भाषिक वर्णन केले आहे. हा ग्रंथ A Survey of Marathi Dialects या मालिकेतील Series III म्हणून १९६६मध्ये Bombay State Board for Literature and Cultureने प्रकाशित केला होता.<ref name="Ghatge1966">{{cite book
|last=Ghatge
|first=A. M.
|title=Kunbi of Mahad
|series=A Survey of Marathi Dialects
|volume=3
|publisher=Bombay State Board for Literature and Culture
|location=Bombay
|year=1966
}}</ref>
‘तिलोरी कुणबी’, ‘तिल्लोरी कुणबी’ आणि इतर संबंधित संज्ञांचा वापर करताना ऐतिहासिक सामाजिक ओळख, भाषिक रूप आणि आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरण यांमध्ये फरक करणे आवश्यक आहे. आधुनिक शासनाच्या वर्गीकरणात वापरली जाणारी संज्ञा आणि जुन्या ethnographic किंवा Census स्रोतांतील संज्ञा एकाच अर्थाने वापरल्या गेल्या आहेत असे गृहीत धरता येत नाही.
=== Maratha-Kunbi आणि Kunbi-Maratha ===
‘Maratha-Kunbi’ आणि ‘Kunbi-Maratha’ या संज्ञांचा वापर विविध ऐतिहासिक आणि प्रशासकीय संदर्भांत आढळतो. ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये Maratha आणि Kunbi या वर्गीकरणांमधील सीमा नेहमी स्पष्ट राहिल्या नाहीत. १९११ च्या बॉम्बे जनगणनेत ''Kunbi Maratha'' हा गट ''Kunbi''च्या वर्गात स्वतंत्रपणे दाखविण्यात आला होता. १९५१ च्या बॉम्बे जनगणना-आधारित अधिकृत अहवालात १९०१मध्ये ''Mahratha Kunbis'' यांची गणना ''Mahrathas''मध्ये, तर १९११मध्ये त्यांची गणना ''Kunbis''मध्ये करण्यात आल्याचे स्पष्टपणे नमूद केले आहे.<ref name="Census1911Bombay">{{cite book
|last=Mead
|first=P. J.
|author2=G. Laird MacGregor
|title=Census of India, 1911: Bombay
|volume=7
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1912
|chapter=Part I: Report
}}</ref><ref name="EstimatedPopulationCastesBombay">{{cite web
|title=Estimated Population by Castes, Bombay
|publisher=Census of India
|url=https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/30207/download/33388/21097_1951_EST.pdf
}}</ref>
या वर्गीकरणातील बदलामुळे वेगवेगळ्या जनगणनांतील Maratha आणि Kunbi यांच्या लोकसंख्येची थेट तुलना करताना त्या-त्या जनगणनेतील वर्गीकरणपद्धती लक्षात घेणे आवश्यक ठरते. १९२१ च्या बॉम्बे जनगणना अहवालातही Maratha म्हणून नोंदविल्या जाणाऱ्या व्यक्तींच्या संख्येची तुलना Kunbiशी करताना अशीच अडचण असल्याचे नमूद करण्यात आले होते.<ref name="Census1921Bombay">{{cite book
|title=Census of India, 1921: Bombay
|volume=9
|publisher=Times Press
|location=Bombay
|year=1922
|chapter=Part I: Report
}}</ref>
१९३१ च्या बॉम्बे जनगणना अहवालाने Maratha आणि Kunbi या संज्ञांच्या वापराबाबत स्पष्ट वर्गीकरणीय अडचण नोंदवली होती. अहवालानुसार त्या जनगणनेतील Maratha लोकसंख्येतील वाढीचा एक भाग Kunbi म्हणून नोंदवल्या जाणाऱ्या लोकसंख्येतील घटेशी संबंधित असू शकतो. अहवालात ''Maratha'' आणि ''Kunbi'' या संज्ञांच्या वापराबाबत असलेल्या गोंधळामुळे या बाबतीत समाधानकारक सांख्यिक तुलना करण्यासाठी संज्ञांची अधिक स्पष्ट व्याख्या आवश्यक असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Census1931Bombay">{{cite book
|title=Census of India, 1931: Bombay Presidency
|volume=8
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1933
|chapter=Part I: Report
}}</ref>
१९३१ च्या जनगणनेतील या वर्गीकरणीय समस्येवरून Maratha आणि Kunbi या सामाजिक संज्ञांचा वापर सर्व प्रदेशांत एकसारखा होता असे दिसत नाही. त्यामुळे या जनगणना नोंदींच्या आधारे ‘Maratha हीच Kunbi जात आहे’ किंवा ‘Kunbi हीच Maratha जात आहे’ असा सार्वत्रिक ऐतिहासिक निष्कर्ष काढता येत नाही. उपलब्ध Census नोंदी मात्र या दोन संज्ञांमध्ये काही प्रदेशांत सामाजिक आणि प्रशासकीय सीमारेषा बदलत्या स्वरूपाच्या होत्या, हे दर्शवतात.<ref name="EstimatedPopulationCastesBombay" /><ref name="Census1931Bombay" />
=== संज्ञा, सामाजिक ओळख आणि प्रशासकीय वर्गीकरण ===
कुणबीशी संबंधित संज्ञांचा इतिहास पाहताना भाषिक रूप, सामाजिक ओळख आणि सरकारी वर्गीकरण या वेगवेगळ्या बाबी स्वतंत्रपणे पाहणे आवश्यक आहे. एखाद्या काळात एखाद्या समूहासाठी वापरलेले नाव पुढील काळात त्याच अर्थाने वापरले गेले असे आवश्यक नाही. ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्येही जातीय वर्गीकरणातील बदलांमुळे लोकसंख्येच्या आकडेवारीत फरक पडल्याचे अधिकृत Census साहित्यामध्ये नोंदविले आहे.<ref name="EstimatedPopulationCastesBombay">{{cite web
|title=Estimated Population by Castes, Bombay
|publisher=Census of India
|url=https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/30207/download/33388/21097_1951_EST.pdf
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आधुनिक महाराष्ट्राच्या प्रशासकीय वर्गीकरणात ‘Kunbi’ ही नोंद इतर मागासवर्गीयांच्या यादीतील अनुक्रमांक ८३वर आहे. महाराष्ट्र शासनाच्या १३ मे २०२५ च्या अद्ययावत संकलित यादीत या नोंदीखाली ''Lewa Kunbi'', ''Lewa Patil'', ''Lewa Patidar'', ''Maratha Kunbi'', ''Kunbi Maratha'', ''Tilori Kunbi'', ''Tillori Kunbi'' आणि ''Ti. Kunbi'' या संज्ञांचा समावेश करण्यात आला आहे.<ref name="MaharashtraOBCList2025">{{cite web
|title=महाराष्ट्र राज्याची विमुक्त जाती, भटक्या जमाती, इतर मागासवर्ग व विशेष मागासवर्गाची इंग्रजी भाषांतरित यादी
|publisher=इतर मागास बहुजन कल्याण विभाग, महाराष्ट्र शासन
|date=13 May 2025
|url=https://gr.maharashtra.gov.in/Site/Upload/Government%20Resolutions/Marathi/20250513170904091534.pdf
}}</ref>
ही यादी प्रशासकीय आणि आरक्षणाच्या संदर्भातील वर्गीकरण आहे. तिच्यातील उपसंज्ञा आणि ऐतिहासिक Census किंवा ethnographic साहित्यामध्ये वापरलेल्या सामाजिक संज्ञा यांना परस्परांचे थेट समानार्थी मानता येत नाही. महाराष्ट्र शासनाच्या २०२५ च्या परिपत्रकातही सदर यादी ही संकलित स्वरूपाची असून संबंधित जात किंवा जमातीचा समावेश ज्या शासन निर्णय किंवा आदेशाद्वारे करण्यात आला आहे, ते मूळ शासन निर्णय किंवा आदेश ग्राह्य धरावेत, असे स्पष्ट केले आहे.<ref name="MaharashtraOBCList2025" />
=== व्युत्पत्तीबाबत निष्कर्ष ===
‘कुणबी’ या शब्दाची व्युत्पत्ती निश्चितपणे एका स्रोताने किंवा एका सिद्धांताने स्पष्ट झालेली नाही. ''Kunbi'', ''Kanbi'', ''Kulambi'' आणि ''Kulwādi'' ही विविध प्रादेशिक रूपे जुन्या ethnographic साहित्यात नोंदविण्यात आली आहेत. त्याच साहित्यात ''Kutumbika'' या प्राचीन संज्ञेशी ‘कुणबी’चा संबंध जोडणारे व्युत्पत्तीविषयक मतही आढळते.<ref name="RussellHiralal1916"/>
मात्र ''Kutumbika'' ही प्राचीन संज्ञा आणि आधुनिक ‘कुणबी’ हा सामाजिक समुदाय यांच्यात थेट, अखंड आणि निर्विवाद वंशसंबंध सिद्ध झालेला आहे, असे उपलब्ध पुराव्यांवरून म्हणता येत नाही. त्यामुळे ‘कुटुम्बिक → कुलंबी → कुणबी’ ही मांडणी या लेखात '''संभाव्य व्युत्पत्तीविषयक मत''' म्हणूनच नमूद करणे उचित आहे; '''सिद्ध ऐतिहासिक वंशावळ''' म्हणून नव्हे.<ref name="RussellHiralal1916"/>
== प्राचीन आणि पूर्व-मध्ययुगीन कोकणातील कृषक समाज ==
कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास समजून घेण्यासाठी त्यापूर्वीच्या कोकणातील मानवी वस्ती, उपजीविका, कृषी, पशुपालन, ग्रामजीवन आणि प्रारंभिक ग्रामीण अर्थव्यवस्थेची पार्श्वभूमी लक्षात घेणे आवश्यक आहे. मात्र प्रागैतिहासिक किंवा प्राचीन काळातील कृषक समुदायांना आधुनिक अर्थाने ‘कुणबी’ म्हणून ओळखणे इतिहासदृष्ट्या योग्य ठरत नाही. आधुनिक ‘कुणबी’ ही सामाजिक ओळख नंतरच्या ऐतिहासिक प्रक्रियांमध्ये विकसित झालेली आहे. त्यामुळे या विभागात प्राचीन कृषक संस्कृती आणि आधुनिक कुणबी समाज यांच्यात थेट वंशपरंपरेचा दावा केला जात नाही.
=== कोकणातील प्राचीन मानवी वस्ती ===
कोकणात प्रागैतिहासिक मानवी उपस्थितीचे पुरावे विविध स्वरूपात आढळतात. विशेषतः महाराष्ट्राच्या पश्चिम किनारपट्टीवरील लेटराइट पठारांवर आढळणाऱ्या भूरूपचित्रांचा (geoglyphs) अभ्यास कोकणातील प्रागैतिहासिक मानवी क्रियाशीलतेच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचा ठरला आहे. युनेस्कोच्या तात्पुरत्या जागतिक वारसा यादीतील नोंदीनुसार कोकणातील भूरूपचित्रांचा कालपट मेसोलिथिक काळापासून आरंभीच्या ऐतिहासिक काळापर्यंत पसरलेला आहे. या भूरूपचित्रांमध्ये प्राणी, मानवी आकृती आणि भूमितीय चिन्हांसह विविध प्रकारच्या आकृत्या आढळतात.<ref name="UNESCOGeoglyphsKonkan">{{cite web
|title=Geoglyphs of Konkan Region of India
|publisher=UNESCO World Heritage Centre
|url=https://whc.unesco.org/en/tentativelists/6605/
}}</ref>
कोकणातील भूरूपचित्रांच्या समूहामुळे या प्रदेशात दीर्घकालीन मानवी व सांस्कृतिक क्रियाशीलतेचे पुरावे उपलब्ध झाले आहेत. तथापि या पुराव्यांच्या आधारे त्या काळातील लोकसंख्येला आधुनिक काळातील कोणत्याही विशिष्ट जातीय किंवा सामाजिक समुदायाशी जोडता येत नाही. UNESCOच्या नोंदीनुसार या भूरूपचित्रांचा संबंध मेसोलिथिक ते आरंभीच्या ऐतिहासिक काळातील मानवी सांस्कृतिक प्रक्रियांशी जोडला जातो; त्यामुळे त्यांचा उपयोग प्राचीन कोकणातील मानवी उपस्थितीच्या पुराव्यांपुरताच करणे अधिक योग्य ठरते.<ref name="UNESCOGeoglyphsKonkan" />
कोकणाची भौगोलिक रचना सह्याद्रीच्या पश्चिम उतारांपासून अरबी समुद्रापर्यंत पसरलेल्या अरुंद किनारी प्रदेशाची आहे. नद्या, खाड्या, डोंगर, पठारे आणि समुद्रकिनारा यांमुळे येथील मानवी वस्ती आणि उपजीविकेचे स्वरूप प्रदेशानुसार बदलत गेले. त्यामुळे कोकणातील प्रागैतिहासिक समाजाचा अभ्यास करताना दख्खनच्या पठारी प्रदेशातील पुरातत्त्वीय संस्कृतींचे पुरावे थेट कोकणाला लागू न करता कोकणातील स्वतंत्र पुरातत्त्वीय साक्ष विचारात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="UNESCOGeoglyphsKonkan" />
=== महाराष्ट्रातील प्रारंभिक कृषी संस्कृती ===
महाराष्ट्रातील कृषी आणि स्थिर वस्तीच्या विकासाचा पुरातत्त्वीय इतिहास ताम्रपाषाणकालीन संस्कृतींच्या अभ्यासातून स्पष्ट होतो. दख्खनमधील ताम्रपाषाण संस्कृतीच्या विविध टप्प्यांमध्ये सावळदा, मालवा आणि जोर्वे संस्कृतींचा समावेश होतो. या काळातील वसाहती नदीकाठच्या उंच भागांवर वसवल्या जात असत; त्यामुळे पूर टाळण्याबरोबरच जवळच्या पूरमैदानांचा शेतीसाठी, कुरणांचा पशुपालनासाठी आणि वनक्षेत्रांचा शिकार व संकलनासाठी उपयोग करता येत असे. या समाजाची उपजीविका शेती, पशुपालन, शिकार, मासेमारी आणि वन्य संसाधनांच्या वापरावर आधारित मिश्र स्वरूपाची होती. पुढील काळात मालवा आणि आरंभीच्या जोर्वे टप्प्यात शेतीची तीव्रता वाढली आणि काही ठिकाणी दुबार पीकपद्धतीचा अवलंब झाल्याचे पुरावे मिळतात. ताम्रपाषाणकालीन लोकांनी जव, गहू, तांदूळ तसेच नाचणी, ज्वारी आणि कोदो यांसारख्या पिकांची लागवड केली होती. मातीची भांडी, दगडी व तांब्याची साधने आणि स्थिर वस्तींचे अवशेष या काळातील भौतिक संस्कृतीची वैशिष्ट्ये दर्शवतात.<ref name="RobbinsSchug">{{cite web
|last=Robbins Schug
|first=Gwen
|title=Chalcolithic Cultures of Western India
|work=Pre and protohistoric cultures of India
|publisher=INFLIBNET Centre
|url=https://ebooks.inflibnet.ac.in/icp02/chapter/159/
}}</ref><ref name="KorisettarArchaeobotany">{{cite web
|last=Korisettar
|first=Ravi
|title=Archaeobotany: Its relevance in reconstruction of agricultural history
|work=Pre and protohistoric cultures of India
|publisher=INFLIBNET Centre
|url=https://ebooks.inflibnet.ac.in/icp02/chapter/archaeobotany-its-relevance-in-reconstruction-of-agricultural-history/
}}</ref>
या काळातील समाजांची अर्थव्यवस्था केवळ शेतीवर आधारित नव्हती. उपलब्ध पुरातत्त्वीय पुराव्यांमध्ये पशुपालन, शिकार, मासेमारी आणि वनस्पतीजन्य अन्नस्रोतांचा वापर यांचाही समावेश आढळतो. त्यामुळे महाराष्ट्रातील प्रारंभिक कृषक अर्थव्यवस्थेचे स्वरूप मिश्र उपजीविकेचे होते.<ref name="KorisettarArchaeobotany" />
=== इनामगाव आणि ताम्रपाषाणकालीन कृषी जीवन ===
इनामगाव हे महाराष्ट्रातील ताम्रपाषाणकालीन कृषक वस्तीच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचे पुरातत्त्वीय स्थळ आहे. हे स्थळ पुणे जिल्ह्यातील घोड नदीच्या परिसरात आहे. उत्खननातून मालवा, आरंभीचा जोर्वे आणि उत्तर जोर्वे या सांस्कृतिक टप्प्यांतील वस्तीचे पुरावे मिळाले आहेत.<ref name="RobbinsSchug" /><ref name="DhavalikarInamgaon">{{cite web
|last=Dhavalikar
|first=M. K.
|title=Settlement Archaeology of Inamgaon
|publisher=Indira Gandhi National Centre for the Arts
|url=https://ignca.gov.in/Asi_data/63860.pdf
}}</ref>
इनामगावातील पुराव्यांमधून बार्ली, गहू, तांदूळ, नाचणी, ज्वारी, कुळीथ, वाटाणा, मसूर, मूग, उडीद आणि इतर कडधान्यांच्या लागवडीचे पुरावे मिळाले आहेत. पशुपालन आणि शिकार यांचाही अर्थव्यवस्थेत सहभाग होता. या पुराव्यांवरून ताम्रपाषाणकालीन महाराष्ट्रातील कृषी अर्थव्यवस्था विविध पिके, पशुपालन आणि इतर उपजीविकांच्या मिश्र स्वरूपाची होती असे दिसते.<ref name="RobbinsSchug" />
इनामगावच्या अभ्यासात कृषी व्यवस्थेशी संबंधित पाण्याच्या वापराचे आणि सिंचनाचे पुरावेही नोंदविले गेले आहेत. या पुराव्यांमुळे महाराष्ट्रातील काही ताम्रपाषाणकालीन कृषक समुदायांना पाणी, जमीन आणि पिकांच्या नियोजनाचा अनुभव असल्याचे दिसून येते.<ref name="RobbinsSchug" />
=== कोकण आणि जोर्वे संस्कृती ===
जोर्वे ही महाराष्ट्रातील ताम्रपाषाणकालीन पुरातत्त्वीय संस्कृती असून तिचे प्रमुख केंद्र दख्खनमधील नदीखोऱ्यांत होते. आधुनिक महाराष्ट्राच्या पश्चिम किनाऱ्याचा, विशेषतः कोकणाचा, जोर्वे संस्कृतीच्या मुख्य विस्तारात समावेश नसल्याचे पुरातत्त्वीय अभ्यासांमध्ये नमूद केले आहे.<ref name="Shinde1991">{{cite journal
|last=Shinde
|first=Vasant
|title=Craft specialization and social organization in the Chalcolithic Deccan, India
|journal=Antiquity
|volume=65
|issue=249
|year=1991
|pages=796–807
}}</ref>
म्हणून महाराष्ट्रातील जोर्वे संस्कृतीचा इतिहास आणि कोकणातील प्राचीन मानवी वस्ती यांचा अभ्यास स्वतंत्र पुरातत्त्वीय संदर्भांत करणे आवश्यक आहे. जोर्वे संस्कृतीचे कृषक जीवन महाराष्ट्रातील प्राचीन कृषी अर्थव्यवस्थेचे महत्त्वाचे उदाहरण आहे; मात्र ‘जोर्वे संस्कृती म्हणजे कोकणातील कुणबींची पूर्वज संस्कृती’ असा निष्कर्ष उपलब्ध पुराव्यांवरून काढता येत नाही.<ref name="Shinde1991" />
=== प्रारंभिक ग्रामजीवन आणि कृषी अर्थव्यवस्था ===
ताम्रपाषाणकालीन महाराष्ट्रातील पुरातत्त्वीय स्थळांवरून स्थिर किंवा अर्ध-स्थिर वस्ती, घरांची रचना, धान्यसाठवण, शेतीची साधने, पशुपालन आणि विविध प्रकारच्या हस्तकौशल्यांचे पुरावे मिळतात. या पुराव्यांमधून ग्रामीण अर्थव्यवस्थेची प्राथमिक रूपे आणि कृषी उत्पादनाशी संबंधित सामाजिक संघटनांचा विकास झाल्याचे दिसते.<ref name="RobbinsSchug"/>
मात्र अशा प्राचीन वस्तींच्या सामाजिक संरचनेला आधुनिक जातव्यवस्थेतील ‘कुणबी’ या विशिष्ट जातनावाशी थेट जोडण्यासाठी आवश्यक असलेला सलग पुरातत्त्वीय, अभिलेखीय आणि सामाजिक पुरावा उपलब्ध नाही. त्यामुळे प्राचीन कृषक समाज हा आधुनिक कुणबी समाजाचा थेट पूर्वज होता, असा निष्कर्ष या लेखात मांडलेला नाही.
=== प्राचीन कृषक समाजापासून ऐतिहासिक ग्रामीण समाजाकडे ===
कोकणातील प्रागैतिहासिक आणि आरंभीच्या ऐतिहासिक मानवी वस्तीचा पुरावा हा आधुनिक कुणबी समाजाच्या इतिहासाचा थेट पुरावा नसला, तरी तो पुढील ग्रामीण आणि कृषी समाजाच्या ऐतिहासिक पार्श्वभूमीचा महत्त्वाचा भाग आहे. कोकणाचा प्राचीन इतिहास हा किनारी वसाहती, नदीखोरे, बंदरे, व्यापारमार्ग आणि सह्याद्रीमार्गे दख्खनशी असलेल्या संपर्काशी संबंधित होता. महाराष्ट्राच्या इतिहासाच्या अधिकृत गॅझेटियरमध्ये कोकणातील प्राचीन वस्ती, व्यापारी केंद्रे आणि विविध राजकीय सत्तांच्या प्रभावाचा मागोवा आढळतो.<ref>{{cite web
|title=History of Maharashtra — Chapter I
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/History%20Part/chapter_1.pdf
}}</ref><ref name="UNESCOGeoglyphsKonkan" />
कालांतराने जमीन, शेती, ग्रामसंस्था, उत्पादन, व्यापार, महसूल आणि सामाजिक संबंध यांचे स्वरूप बदलत गेले. पश्चिम दख्खनातील मध्ययुगीन ग्रामसमाजाच्या अभ्यासातून कृषी जमीन, ग्रामस्थळ, सामाईक चराऊ जमीन आणि स्थानिक ग्रामसंस्थांची रचना यांविषयी माहिती मिळते. या ग्रामीण संस्थांचा विकास प्रदेशानुसार वेगवेगळ्या स्वरूपात झाला असून कोकणातील भौगोलिक परिस्थितीमुळे तेथील ग्रामजीवन पश्चिम दख्खनच्या अंतर्गत प्रदेशापेक्षा काही बाबतींत वेगळे होते.<ref name="Fukazawa1982">{{cite book
|last=Fukazawa
|first=H.
|chapter=The Medieval Deccan and Maharashtra
|title=The Cambridge Economic History of India
|editor1-last=Raychaudhuri
|editor1-first=Tapan
|editor2-last=Habib
|editor2-first=Irfan
|publisher=Cambridge University Press
|year=1982
|pages=249–260
}}</ref>
मध्ययुगीन काळात कोकणातील कृषी उत्पादनाबरोबरच किनारी व्यापार आणि बंदरांशी संबंधित आर्थिक व्यवहारांनाही महत्त्व होते. महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरनुसार प्राचीन आणि मध्ययुगीन काळात कोकणातील चौल, कल्याण, सोपारा आणि राजापुरी यांसारख्या बंदरांनी व्यापार आणि बाह्य संपर्कात भूमिका बजावली. कोकणातील भौगोलिक स्थानामुळे सह्याद्रीतील घाटमार्ग आणि समुद्री मार्ग यांच्या माध्यमातून अंतर्गत दख्खन आणि किनारी प्रदेश यांच्यात संपर्क निर्माण झाला.<ref>{{cite web
|title=History of Maharashtra — Chapter I
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/History%20Part/chapter_1.pdf
}}</ref>
या दीर्घकालीन प्रक्रियांमधून कोकणातील ग्रामीण समाजरचना विकसित होत गेली. तथापि या प्रक्रियेतील प्रत्येक प्राचीन किंवा मध्ययुगीन कृषक समूहाला आधुनिक ‘कुणबी’ या सामाजिक नावाने संबोधता येत नाही. आधुनिक कुणबी ओळख कधी आणि कोणत्या सामाजिक प्रक्रियांमधून अधिक स्पष्ट झाली, याचा अभ्यास करण्यासाठी पुढील मध्ययुगीन, प्रारंभिक आधुनिक आणि विशेषतः वसाहतकालीन प्रशासकीय, जनगणना आणि ethnographic स्रोत स्वतंत्रपणे तपासणे आवश्यक आहे.<ref name="Enthoven1922" />
त्यामुळे आधुनिक कुणबी समाजाचा इतिहास शोधताना प्रागैतिहासिक कृषक संस्कृती, प्राचीन वस्ती, मध्ययुगीन ग्रामीण समाज आणि वसाहतकालीन प्रशासकीय नोंदी यांना एकाच अखंड जातीय वंशावळीत जोडण्याऐवजी स्वतंत्र ऐतिहासिक टप्पे म्हणून तपासणे अधिक योग्य ठरते. उपलब्ध पुरावे प्राचीन कोकणातील मानवी व कृषी जीवनाची ऐतिहासिक पार्श्वभूमी स्पष्ट करतात; मात्र त्या आधारे आधुनिक कुणबी समाजाची थेट आणि अखंड वंशपरंपरा सिद्ध होत नाही.<ref name="UNESCOGeoglyphsKonkan" /><ref name="Fukazawa1982" />
=== प्रारंभिक ऐतिहासिक काळातील कोकण ===
इ.स.पूर्व शेवटच्या शतकांपासून इ.स.च्या आरंभीच्या शतकांपर्यंत पश्चिम दख्खन आणि कोकण यांच्यात व्यापारी, राजकीय आणि सांस्कृतिक संपर्क वाढला. या काळात पश्चिम दख्खनातील व्यापारी मार्ग, अंतर्गत बाजारपेठा आणि समुद्रकिनारी बंदरे यांचा विकास झाला. नाशिक, कार्ले आणि कान्हेरी यांसारख्या ठिकाणच्या शिलालेखांमधून त्या काळातील राजकीय सत्ताकेंद्रे, व्यापारी समुदाय, धार्मिक संस्था, दाते आणि विविध सामाजिक-आर्थिक समूहांविषयी माहिती मिळते.<ref>{{cite web
|title=Social and Religious Conditions: The Deccan under the Sātavāhanas
|publisher=Indira Gandhi National Centre for the Arts
|url=https://ignca.gov.in/Asi_data/17904.pdf
}}</ref>
सातवाहनकालीन पश्चिम दख्खनाच्या इतिहासाच्या अभ्यासासाठी नाशिक, कार्ले आणि इतर शिलालेख महत्त्वाचे आहेत. या शिलालेखांमधून कृषक, व्यापारी, कारागीर, धार्मिक दाते आणि प्रशासकीय घटक यांचा उल्लेख आढळतो. त्यामुळे प्रारंभिक ऐतिहासिक काळातील पश्चिम दख्खनातील समाज हा केवळ राजसत्ता आणि धार्मिक संस्थांपुरता मर्यादित नसून विविध आर्थिक आणि सामाजिक समूहांनी बनलेला होता.<ref name="Mirashi1981">{{cite book
|last=Mirashi
|first=Vasudev Vishnu
|title=The History and Inscriptions of the Sātavāhanas and the Western Kshatrapas
|publisher=Maharashtra State Board for Literature and Culture
|location=Bombay
|year=1981
}}</ref>
=== कुटुम्बिक, कुटुम्बिन् आणि कृषक समाज ===
सातवाहनकालीन आणि आरंभीच्या ऐतिहासिक शिलालेखांच्या अभ्यासात ''kuṭumbika'', ''kuṭumbin'', ''gṛhapati'' आणि कृषीशी संबंधित ''halāyudha'' किंवा ''hālakiya'' यांसारख्या संज्ञांचा उल्लेख आढळतो. या संज्ञांचा अर्थ आणि सामाजिक संदर्भ प्रत्येक शिलालेखाच्या संदर्भानुसार तपासणे आवश्यक आहे. उपलब्ध अभ्यासांमध्ये ''kuṭumbin'' किंवा ''gṛhapati'' यांचा संबंध गृहस्थ किंवा कुटुंबप्रमुखाशी, तर ''halāyudha''चा संबंध कृषक व्यवसायाशी जोडला आहे.<ref name="SatavahanaSocialReligious">{{cite web
|title=Social and Religious Conditions: The Deccan under the Sātavāhanas
|publisher=Indira Gandhi National Centre for the Arts
|url=https://ignca.gov.in/Asi_data/17904.pdf
}}</ref>
पश्चिम दख्खनातील नाशिक परिसराशी संबंधित शिलालेखीय पुराव्यांमध्ये ''kuṭumbika'' या संज्ञेचा वापर आढळतो. एका नोंदीत ''kuṭumbika''चा उल्लेख कृषक किंवा नांगरणी करणाऱ्या व्यक्तीच्या संदर्भात करण्यात आला आहे. या प्रकारच्या पुराव्यांवरून प्रारंभिक ऐतिहासिक काळात कुटुंब, कृषी उत्पादन, संपत्ती आणि धार्मिक दान यांच्यात परस्परसंबंध असलेले ग्रामीण गृहस्थ अस्तित्वात होते असे दिसते.<ref>{{cite web
|title=Social and Economic Conditions under the Sātavāhanas
|publisher=Indira Gandhi National Centre for the Arts
|url=https://ignca.gov.in/Asi_data/17073.pdf
}}</ref>
सातवाहनकालीन सामाजिक आणि आर्थिक इतिहासाच्या अभ्यासात ''kuṭumbin'' ही संज्ञा आधुनिक ‘कुणबी’ किंवा शेतकरी या शब्दांशी तुलना करण्यासाठी काही वेळा वापरली जाते. मात्र ही तुलना मुख्यतः सामाजिक-आर्थिक भूमिकेच्या संदर्भात आहे. ''kuṭumbin'' आणि आधुनिक ‘कुणबी’ हे एकच सामाजिक समुदाय होते, असा निष्कर्ष या तुलनेतून काढता येत नाही.<ref name="Mirashi1981"/>
=== प्रारंभिक कृषी व ग्रामजीवनाची पार्श्वभूमी ===
प्रारंभिक ऐतिहासिक काळातील कृषी अर्थव्यवस्था समजून घेण्यासाठी त्यापूर्वीच्या महाराष्ट्रातील ताम्रपाषाणकालीन वस्तींचे पुरावेही महत्त्वाचे आहेत. इनामगावसारख्या स्थळांवर घरांची रचना, धान्यसाठवण, कृषी उत्पादन, पशुपालन आणि कारागिरी यांचे पुरावे मिळाले आहेत. M. K. Dhavalikar यांच्या इनामगाववरील अभ्यासात या स्थळावरील वस्तीच्या आराखड्याच्या आधारे महाराष्ट्रातील प्रारंभिक कृषकांच्या वस्तीपद्धतीचा अभ्यास करण्यात आला आहे.<ref name="Dhavalikar1977">{{cite journal
|last=Dhavalikar
|first=M. K.
|title=Inamgaon: The Pattern of Settlement
|journal=Man and Environment
|volume=1
|year=1977
|pages=46–51
}}</ref>
इनामगावचा कालखंड सातवाहनकालापूर्वीचा असल्यामुळे तेथील पुरावे आणि सातवाहनकालीन शिलालेख एकाच ऐतिहासिक टप्प्याचे प्रतिनिधित्व करीत नाहीत. तथापि दोन्ही प्रकारचे पुरावे महाराष्ट्रातील दीर्घकालीन कृषी, वस्ती आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या विकासाचा स्वतंत्र पुरातत्त्वीय आणि अभिलेखीय संदर्भ उपलब्ध करून देतात.<ref name="Dhavalikar1977"/><ref name="SatavahanaSocialReligious"/>
सातवाहनकालीन शिलालेखांमध्ये कृषक, व्यापारी, कारागीर आणि धार्मिक दाते यांचे उल्लेख आढळतात. काही व्यक्तींनी बौद्ध धार्मिक संस्थांना गुहा, निधी किंवा इतर स्वरूपात दाने दिल्याचेही नोंदविले आहे. यावरून कृषी आणि इतर आर्थिक उपक्रमांमधून निर्माण होणाऱ्या संपत्तीचा काही भाग धार्मिक संस्थांच्या आश्रयासाठी वापरला जात असल्याचे दिसते.<ref name="SatavahanaSocialReligious"/>
=== प्राचीन कृषक समाज आणि आधुनिक कुणबी यांच्यातील संबंध ===
प्राचीन महाराष्ट्रातील कृषक संस्कृती, सातवाहनकालीन ''kuṭumbika'' किंवा ''kuṭumbin'' यांसारख्या संज्ञा आणि आधुनिक ‘कुणबी’ या सामाजिक नावामध्ये भाषिक किंवा सामाजिक साम्य असल्याचे काही जुन्या आणि आधुनिक अभ्यासांमध्ये सूचित केले गेले आहे. मात्र या साम्यांवरून प्रागैतिहासिक किंवा सातवाहनकालीन कृषक समाज हा आधुनिक कुणबी समाजाचा थेट पूर्वज होता, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="RussellHiralal1916"/>
विशेषतः इ.स.पूर्व दुसऱ्या सहस्रकातील मालवा किंवा जोर्वे संस्कृतीतील कृषकांना ‘कुणबी’ म्हणणे अनैतिहासिक ठरेल. त्याचप्रमाणे सातवाहनकालीन ''kuṭumbika'' किंवा ''kuṭumbin'' या संज्ञा आधुनिक जातीय अर्थाने ‘कुणबी’चे समानार्थी नाव होत्या, असे निश्चितपणे म्हणता येत नाही.
‘कुणबी’ ही सामाजिक ओळख पुढील ऐतिहासिक काळातील सामाजिक संघटन, प्रादेशिक ओळखी, कृषी संबंध, जमीनव्यवस्था आणि नंतरच्या प्रशासकीय व जनगणना प्रक्रियांमध्ये अधिक स्पष्टपणे दस्तऐवजीकृत होत गेली. त्यामुळे आधुनिक कुणबी समाजाचा इतिहास समजून घेण्यासाठी प्राचीन कृषक समाजानंतरच्या मध्ययुगीन, पूर्व-आधुनिक आणि वसाहतकालीन प्रक्रियांचा स्वतंत्र अभ्यास आवश्यक आहे.<ref name="Enthoven1922" />
या अर्थाने प्राचीन कृषक संस्कृतींचा इतिहास हा कोकणातील कुणबींच्या थेट जातीय उत्पत्तीचा पुरावा नसून महाराष्ट्र आणि पश्चिम दख्खनमध्ये कृषी, स्थिर वस्ती, कुटुंब, उत्पादन आणि ग्रामीण जीवन यांची विकसित झालेली दीर्घ ऐतिहासिक पार्श्वभूमी म्हणून पाहणे अधिक योग्य ठरते.
=== ऐतिहासिक आणि आधुनिक वर्गीकरणातील फरक ===
कुणबी समाजाशी संबंधित संज्ञांचे प्रशासकीय आणि जनगणनात्मक वर्गीकरण काळानुसार बदलत गेले. ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये जात, उपजात, जमात किंवा सामाजिक समूहांची नोंद करताना तत्कालीन प्रशासकीय वर्गीकरण, प्रदेश, स्थानिक सामाजिक ओळख आणि जनगणनेची पद्धत यांचा परिणाम होत असे. त्यामुळे ''Kunbi'', ''Kanbi'', ''Kulwadi'', ''Maratha-Kunbi'' किंवा ''Kunbi-Maratha'' यांसारख्या संज्ञा वेगवेगळ्या काळातील जनगणना नोंदींमध्ये समान पद्धतीने वापरल्या गेल्या नाहीत.<ref name="Census1931Bombay"/>
१९३१ च्या बॉम्बे जनगणनेतील विविध तक्त्यांमध्ये ''Kunbi, Kulwadi or Kanbi'', ''Lewa or Lewa Kunbi'' आणि ''Maratta-Kunbi'' अशा स्वतंत्र नोंदी आढळतात. त्याचबरोबर काही तक्त्यांमध्ये ''Maratta, Maratta-Kunbi, Kulwadi or Kanbi, Lewa or Rewa Kunbi of Khandesh'' असा संयुक्त वर्गही वापरण्यात आला होता. या नोंदींवरून तत्कालीन जनगणनांमध्ये संबंधित सामाजिक समूहांचे वर्गीकरण तक्त्यानुसार आणि प्रशासकीय संदर्भानुसार वेगवेगळ्या प्रकारे करण्यात आले होते, असे दिसते.<ref name="Census1931Bombay"/>
१९३१ च्या जनगणना अहवालात Maratha आणि Kunbi या संज्ञांच्या वापराशी संबंधित वर्गीकरणीय अडचणींचाही उल्लेख करण्यात आला होता. त्यामुळे वेगवेगळ्या जनगणना वर्षांतील Maratha आणि Kunbi लोकसंख्येची तुलना करताना संबंधित जनगणनेतील वर्गीकरणपद्धती आणि त्या काळातील संज्ञांचा अर्थ लक्षात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="Census1931Bombay"/>
स्वातंत्र्योत्तर काळात या वर्गीकरणाला अधिक स्पष्ट प्रशासकीय स्वरूप प्राप्त झाले. मुंबई सरकारने २३ एप्रिल १९४२ रोजी प्रसिद्ध केलेल्या वर्गीकरणात ''Kunbi (Except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)'' ही नोंद ''Intermediate Communities''च्या यादीत, तर ''Kunbi Tilori in Ratnagiri district'' ही नोंद ''Other Backward Communities''च्या यादीत स्वतंत्रपणे केली होती. मुंबई उच्च न्यायालयाने २००२ च्या निर्णयात ही स्थिती १ नोव्हेंबर १९५०, २९ ऑक्टोबर १९५६ आणि २१ नोव्हेंबर १९६१ च्या पुढील सरकारी ठरावांमध्येही कायम राहिल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="DattatrayaThorat2002"/>
महाराष्ट्र शासनाने १३ ऑक्टोबर १९६७ रोजी स्वतंत्र इतर मागासवर्गीयांची यादी प्रसिद्ध केली. मुंबई उच्च न्यायालयाच्या नोंदीनुसार या यादीत अनुक्रमांक ८३वर ''Kunbi caste''चा समावेश करण्यात आला. न्यायालयाने पुढे नमूद केले की १९६७पासून कुणबी जात महाराष्ट्राच्या इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समाविष्ट झाली.*Dattatraya S/o Ramrao Thorat v. The State of Maharashtra & Ors.*, Writ Petition No. 5345 of 2001, decided on 24 April 2002, 2002 (4) All MR 807.
या ऐतिहासिक बदलांमुळे जुन्या जनगणनेतील एखाद्या संज्ञेची संख्या आणि आजच्या प्रशासकीय वर्गातील त्याच संज्ञेची संख्या यांची थेट तुलना करता येत नाही. अशी तुलना करताना संबंधित जनगणनेतील वर्गीकरण, प्रशासकीय सीमा, संज्ञेचा त्या काळातील अर्थ आणि स्थानिक सामाजिक ओळख या सर्व बाबींचा विचार करणे आवश्यक आहे.
=== संज्ञांच्या वापराबाबत ऐतिहासिक सावधगिरी ===
कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास लिहिताना ‘कुणबी’, ‘कानबी’, ‘कुलवाडी’, ‘मराठा-कुणबी’ आणि ‘तिलोरी कुणबी’ या संज्ञांचा वापर त्यांच्या संबंधित ऐतिहासिक आणि प्रशासकीय संदर्भात करणे आवश्यक आहे. उपलब्ध जनगणना आणि प्रशासकीय नोंदींमध्ये या संज्ञांचे वर्गीकरण काळानुसार बदललेले दिसते.<ref name="Census1931Bombay"/><ref name="DattatrayaThorat2002"/>
विशेषतः तिलोरी कुणबीच्या बाबतीत हा फरक स्पष्टपणे दिसतो. १९४२ च्या मुंबई सरकारच्या वर्गीकरणात रत्नागिरी जिल्ह्यातील तिलोरी कुणबींना ''Other Backward Communities''च्या यादीत स्वतंत्र स्थान देण्यात आले होते, तर त्याच वेळी इतर कुणबींना ''Intermediate Communities''च्या वर्गात ठेवण्यात आले होते. १९५०, १९५६ आणि १९६१ च्या संबंधित सरकारी ठरावांमध्येही ही स्थिती कायम राहिल्याचे मुंबई उच्च न्यायालयाने नमूद केले आहे. १९६७मध्ये मात्र ''Kunbi caste''चा स्वतंत्र इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समावेश करण्यात आला.<ref name="DattatrayaThorat2002"/>
त्यामुळे एखाद्या व्यक्तीची किंवा समूहाची आधुनिक जातीय ओळख केवळ आडनाव, व्यवसाय, गावाचे नाव किंवा जुन्या जनगणनेतील नोंद यावरून निश्चित करता येत नाही. ऐतिहासिक जनगणना ही तत्कालीन प्रशासकीय आणि सामाजिक वर्गीकरणाची नोंद असते; ती प्रत्येक व्यक्तीच्या आधुनिक जातीय ओळखीचा अंतिम पुरावा मानता येत नाही. आधुनिक जातीय किंवा प्रशासकीय दावा तपासताना संबंधित काळातील प्राथमिक दस्तऐवज आणि लागू असलेले प्रशासकीय नियम स्वतंत्रपणे तपासणे आवश्यक आहे.
त्याचप्रमाणे ''Maratha-Kunbi'' किंवा ''Kunbi-Maratha'' या संज्ञांचा एखाद्या ऐतिहासिक स्रोतामध्ये वापर झाला म्हणून त्या संज्ञांचा प्रत्येक काळात आणि प्रत्येक प्रदेशात एकच सामाजिक अर्थ होता असे मानता येत नाही. १९३१ च्या जनगणनेत ''Kunbi, Kulwadi or Kanbi'', ''Maratta-Kunbi'' आणि ''Lewa or Lewa Kunbi'' अशा स्वतंत्र नोंदी तसेच काही ठिकाणी Maratha आणि संबंधित कृषक समूहांना एकत्रित करणारे वर्ग आढळतात.<ref name="Census1931Bombay"/>
या कारणामुळे कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास मांडताना '''भाषिक संज्ञा, सामाजिक ओळख, जनगणनात्मक वर्गीकरण आणि आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरण''' या चार बाबी स्वतंत्रपणे तपासणे आवश्यक आहे. ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये समान किंवा संबंधित संज्ञांचे वर्गीकरण काळानुसार बदललेले दिसते, तर स्वातंत्र्योत्तर काळात सरकारी वर्गीकरणातही कुणबी आणि तिलोरी कुणबी यांची प्रशासकीय स्थिती बदलली. त्यामुळे एका काळातील प्रशासकीय वर्गीकरण दुसऱ्या काळातील सामाजिक ओळखीशी तंतोतंत समान मानणे किंवा जुन्या जनगणना अथवा प्रशासकीय नोंदीवरून आधुनिक सामाजिक ओळख निश्चित करणे इतिहासदृष्ट्या अचूक ठरणार नाही.<ref name="Census1931Bombay"/><ref name="DattatrayaThorat2002"/>
== मध्ययुगीन कोकण ==
कोकणाच्या मध्ययुगीन इतिहासात विविध राजकीय सत्तांचा प्रभाव पडला. शिलाहार, यादव, दिल्ली सल्तनत, बहमनी सत्ता आणि त्यानंतरची दख्खनी सल्तनती राज्ये यांच्या काळात कोकणातील राजकीय सीमा, प्रशासकीय व्यवस्था आणि स्थानिक सत्ताकेंद्रे बदलत गेली. या राजकीय बदलांबरोबर जमीन, महसूल, ग्रामव्यवस्था आणि कृषी उत्पादनाशी संबंधित संस्थांमध्येही बदल झाले. मात्र या सर्व कालखंडातील कृषक समाजाला आधुनिक अर्थाने ‘कुणबी’ म्हणून संबोधणे इतिहासदृष्ट्या योग्य ठरत नाही. उपलब्ध मध्ययुगीन स्रोतांमध्ये ग्रामीण समाजाचे विविध प्रशासकीय, आर्थिक आणि सामाजिक संदर्भ आढळतात; ‘कुणबी’ ही आधुनिक सामाजिक ओळख पुढील ऐतिहासिक प्रक्रियांमध्ये अधिक स्पष्टपणे दस्तऐवजीकृत झाली.<ref name="HistoryKonkan">{{cite web
|title=History of the Konkan
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Gazetteer%20of%20Bombay%20Presidency/history_of_the_konkan/section_2.pdf
}}</ref><ref name="MediaevalAdministration">{{cite web
|title=Mediaeval Administration and Social Organisation
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/History%20Part/History_II/chapter_10.pdf
}}</ref>
=== शिलाहार ===
कोकणाच्या मध्ययुगीन इतिहासात शिलाहारांचे महत्त्वाचे स्थान आहे. शिलाहारांच्या तीन प्रमुख शाखांपैकी दक्षिण कोकणातील शाखेने साधारण इ.स. ७७० ते १०२० च्या दरम्यान राज्य केले. उत्तर कोकणातील शिलाहार शाखेचे राजकीय क्षेत्र ठाणे, कोलाबा आणि त्याच्या आसपासच्या प्रदेशाशी संबंधित होते. दक्षिण कोकणातील शिलाहार हे सुरुवातीला राष्ट्रकूटांचे आणि नंतर चालुक्य, कदंब व यादव यांसारख्या दख्खनी सत्तांचे मांडलिक होते.<ref name="Silaharas">{{cite web
|title=Silaharas
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/RATNAGIRI/his_silaharas.html
}}</ref>
उत्तर कोकणातील शिलाहारांच्या राजकीय क्षेत्रात आजच्या ठाणे, मुंबई, कोलाबा आणि आसपासच्या प्रदेशांचा समावेश होत होता. त्यांच्या काळात ठाणे, सोपारा, चौल, उरण आणि इतर किनारी केंद्रे व्यापार व राजकीय संपर्कासाठी महत्त्वाची होती. कोकणातील राजकीय आणि आर्थिक जीवनाचा संबंध समुद्री बंदरे तसेच सह्याद्रीमार्गे दख्खनच्या पठाराशी जोडलेल्या मार्गांशी होता.<ref name="HistoryKonkan"/>
शिलाहारकालीन ताम्रपट आणि शिलालेखांमधून जमीनदान, धार्मिक संस्था आणि स्थानिक सत्ताकेंद्रांमधील संबंधांचा अभ्यास करता येतो. या पुराव्यांमुळे कृषी उत्पादन आणि जमिनीचे उत्पन्न हे तत्कालीन सामाजिक, धार्मिक आणि राजकीय व्यवस्थेतील महत्त्वाचे आर्थिक आधार होते असे दिसते. तथापि या काळातील कृषक समाजाला आधुनिक ‘कुणबी’ या जातनावाने ओळखण्यास पुरेसा थेट पुरावा उपलब्ध नाही.<ref name="Silaharas"/>
=== यादव ===
इ.स. १२व्या आणि १३व्या शतकात देवगिरीच्या यादव सत्तेचा पश्चिम दख्खनावर प्रभाव वाढला. कोकणातील काही भागांवरही यादव सत्तेचे नियंत्रण किंवा प्रभाव होता. उत्तर कोकणात यादवांच्या प्रतिनिधींची प्रशासकीय उपस्थिती असल्याचे ताम्रपट आणि शिलालेखीय पुराव्यांतून दिसते. इ.स. १२७३ आणि १२९१ च्या नोंदींमध्ये रामचंद्र यादवाच्या अधिकाऱ्यांनी कल्याण आणि सालसेट परिसरातील गावांच्या दानाचा उल्लेख केला आहे.<ref name="HistoryKonkan"/>
यादवकालीन महाराष्ट्रातील ग्रामीण समाज आणि प्रशासकीय व्यवस्थेबाबत महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमध्ये गावाच्या पातळीवर ग्रामकूट, चौधरी किंवा चौगुला यांसारख्या पदांचा उल्लेख आहे. ग्रामसमिती आणि तिचे सदस्य महत्तर म्हणून ओळखले जात असल्याची नोंदही आढळते. या काळात गाव हे कृषी उत्पादन, स्थानिक प्रशासन आणि सामाजिक जीवनाचे महत्त्वाचे केंद्र होते.<ref name="TerritorialGroups">{{cite web
|title=Territorial Groups
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/land_and_people/L%20%26%20P%20pdf/Chapter%20VI/2%20Places%20of%20Pilgrimage.pdf
}}</ref>
या ग्रामव्यवस्थेचा उल्लेख आधुनिक कुणबी समाजाच्या थेट इतिहासासाठी पुरावा म्हणून न करता, कोकण आणि पश्चिम दख्खनातील पुढील ग्रामीण समाजरचनेची ऐतिहासिक पार्श्वभूमी म्हणून पाहणे अधिक योग्य आहे.
=== यादव सत्तेचा अंत आणि दिल्ली सल्तनतीचा प्रभाव ===
१३व्या शतकाच्या अखेरीस देवगिरीच्या यादव सत्तेवर दिल्ली सल्तनतीचा प्रभाव वाढला. इ.स. १३१७मध्ये यादव राज्य दिल्लीच्या सत्तेखाली पूर्णपणे गेले आणि दख्खनमध्ये दिल्लीच्या प्रशासकीय व लष्करी सत्तेची स्थापना झाली. महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरनुसार या काळात देवगिरी हे दिल्लीच्या दख्खन प्रांताचे महत्त्वाचे प्रशासकीय केंद्र राहिले आणि प्रदेशातील अनेक भागांवर लष्करी अधिकाऱ्यांच्या माध्यमातून सत्ता चालवली जात होती.<ref name="MediaevalAdministration"/>
या संक्रमणकाळात दक्षिण कोकणासारख्या सीमावर्ती भागांत काही स्थानिक हिंदू प्रमुखांनी आपली सत्ता टिकवून ठेवण्याचा प्रयत्न केल्याची नोंद महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमध्ये आहे. त्यामुळे दिल्लीच्या सत्तेचा प्रभाव वाढला असला तरी स्थानिक सत्ताकेंद्रे आणि ग्रामीण संस्था तत्काळ पूर्णपणे नाहीशा झाल्या असे मानता येत नाही.<ref name="MediaevalAdministration"/>
या राजकीय संक्रमणाचा परिणाम महसूल, जमीन आणि ग्रामीण समाजावर झाला. दिल्लीच्या दख्खनमधील प्रशासनात ''iqta''सारख्या महसूल व लष्करी व्यवस्थांचा वापर करण्यात आला होता. तथापि या कालखंडातील ग्रामीण कृषकांना आधुनिक ‘कुणबी’ या नावाने ओळखण्यास उपलब्ध स्रोत पुरेसा आधार देत नाहीत.<ref name="MediaevalAdministration"/>
=== बहमनी सत्ता ===
इ.स. १३४७मध्ये बहमनी सत्ता स्थापन झाल्यानंतर दख्खनमध्ये स्वतंत्र सुलतानशाही राजकीय व्यवस्था निर्माण झाली. महाराष्ट्रातील ग्रामीण समाजाच्या संदर्भात बहमनी सत्तेने पाटील आणि देशमुख यांसारख्या स्थानिक अधिकाऱ्यांचे हक्क व वतने मान्य केल्याची नोंद महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमध्ये आढळते.<ref name="TerritorialGroups"/>
बहमनी काळात गाव हे स्थानिक प्रशासन आणि कृषी उत्पादनाचे महत्त्वाचे केंद्र राहिले. पाटील आणि देशमुख यांसारख्या स्थानिक अधिकारपदांना मान्यता मिळाल्यामुळे केंद्रीय सुलतानशाही आणि स्थानिक ग्रामीण समाज यांच्यात संस्थात्मक संबंध निर्माण झाले. महसूलव्यवस्थेतील विविध प्रशासकीय विभागांसाठी तालुका, महाल, तरफ आणि परगणा यांसारख्या संज्ञांचा वापर होत असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद आहे.<ref name="TerritorialGroups"/>
बहमनी राज्याचे विघटन झाल्यानंतर दख्खनमध्ये अहमदनगरची निजामशाही, विजापूरची आदिलशाही, गोवळकोंड्याची कुतुबशाही, वऱ्हाडची इमादशाही आणि बिदरची बरीदशाही अशी स्वतंत्र सत्ताकेंद्रे निर्माण झाली. या सत्तांमुळे महाराष्ट्रातील राजकीय सीमा आणि प्रशासकीय व्यवस्था पुन्हा बदलल्या.<ref name="BahamanisDeccan">{{cite web
|title=The Bahamanis of the Deccan
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/History%20Part/History_II/chapter_2.pdf
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=== निजामशाही, आदिलशाही आणि कोकण ===
बहमनी सत्तेच्या विघटनानंतर कोकणातील विविध प्रदेशांवर अहमदनगरची निजामशाही आणि विजापूरची आदिलशाही यांचा वेगवेगळ्या काळात प्रभाव राहिला. किनारी प्रदेशात स्थानिक राजकीय सत्ताकेंद्रे, बंदरे आणि किल्ले यांचे महत्त्व वाढले. कोकणातील राजकीय नियंत्रण हे केवळ एका सत्तेच्या अखंड अधिपत्याखाली राहिले नाही; विविध सत्तांमध्ये प्रदेशांचे नियंत्रण बदलत गेले.<ref name="NizamshahiAhmadnagar">{{cite web
|title=The Nizamshahi of Ahmadnagar
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/History%20Part/History_II/chapter_3.pdf
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कोकणातील राजापुरीसारख्या केंद्रांच्या इतिहासातून या राजकीय बदलांचे उदाहरण दिसते. महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरनुसार राजापुरीचा प्रदेश पंधराव्या शतकाच्या अखेरीस निजामशाहीच्या प्रभावाखाली आला आणि १४९०मध्ये मलिक अहमदने दीर्घ वेढ्यानंतर तो ताब्यात घेतला.<ref name="Rajpuri">{{cite web
|title=Rajpuri
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/KOLABA/places_Rajpuri.html
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या राजकीय संक्रमणांचा ग्रामीण समाजावर परिणाम महसूल, जमीनवापर, स्थानिक अधिकारपदे आणि व्यापारमार्गांच्या बदलांच्या माध्यमातून झाला. मात्र उपलब्ध स्रोतांवरून या सर्व कालखंडातील कृषक समाजाची एकच जातीय ओळख होती असे म्हणता येत नाही.
=== मध्ययुगीन कोकणातील कृषक समाज ===
मध्ययुगीन कोकणातील कृषक समाज हा जमीन, पावसावर आधारित शेती, स्थानिक बाजारपेठा, ग्रामसंस्था आणि महसूलव्यवस्थेशी जोडलेला होता. कोकणाच्या भौगोलिक परिस्थितीमुळे भातशेती, डोंगरउतारावरील शेती आणि किनारी व्यापार यांना विशेष महत्त्व होते. पुढील शतकांमध्ये या ग्रामीण अर्थव्यवस्थेचे विविध स्वरूप विकसित झाले.<ref name="HistoryKonkan"/>
मध्ययुगीन ग्रामीण समाजाचा हा इतिहास आधुनिक कुणबी समाजाच्या निर्मितीचा थेट पुरावा म्हणून वापरता येत नाही. मात्र पुढील पूर्व-आधुनिक आणि वसाहतकालीन काळात जमीन, शेती, महसूल, ग्रामसंस्था आणि कृषक सामाजिक ओळखी यांच्या ज्या प्रक्रिया अधिक स्पष्ट झाल्या, त्यांची ऐतिहासिक पार्श्वभूमी या कालखंडात शोधता येते.
=== निजामशाही आणि कोकण ===
इ.स. १४९०मध्ये अहमदनगरच्या निजामशाहीची स्थापना झाल्यानंतर कोकणातील काही महत्त्वाची ठाणी आणि बंदरे निजामशाहीच्या राजकीय व लष्करी प्रभावाखाली आली. कोलाबा गॅझेटियरमध्ये दांडा-राजपुरीचा उल्लेख करताना, इ.स. १४९०मध्ये दीर्घ वेढ्यानंतर निजामशाहीचा संस्थापक मलिक अहमद याने राजपुरी जिंकून घेतल्याची नोंद आहे. त्यानंतर अहमदनगरची सत्ता कोकणातील या भागावर दृढ झाली आणि राजपुरी हे व्यापाराचे महत्त्वाचे केंद्र राहिले.<ref name="Rajpuri"/>
निजामशाहीच्या विस्ताराच्या काळात मलिक अहमदने कोकण आणि घाट परिसरातील अनेक किल्ले आपल्या ताब्यात घेतल्याची नोंद महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमध्ये आहे. इ.स. १४८५नंतर त्याने जुन्नर आणि दौलताबादच्या प्रदेशातून कोकणाकडे लष्करी मोहिमा केल्या आणि अनेक घाट व कोकणातील किल्ल्यांवर नियंत्रण मिळवले. इ.स. १४९०मध्ये दांडा-राजपुरी जिंकल्यानंतर उत्तर कोकणातील गुजरातच्या अखत्यारीत नसलेला काही प्रदेश अहमदनगरच्या नियंत्रणाखाली आला.<ref name="HistoryKonkanSection3">{{cite web
|title=History of the Konkan
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
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}}</ref>
निजामशाहीच्या काळात कोकणातील बंदरे, घाटमार्ग आणि किल्ले यांना राजकीय तसेच आर्थिक महत्त्व होते. राजपुरी हे पंधराव्या आणि सोळाव्या शतकात व्यापाराचे महत्त्वाचे केंद्र होते. पुढील काळातील प्रवाशांच्या आणि परकीय व्यापारविषयक नोंदींमध्येही राजपुरीचा व्यापारकेंद्र आणि बंदर म्हणून उल्लेख आढळतो.<ref name="Rajpuri"/>
या राजकीय आणि व्यापारी व्यवस्थेचा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेशी संबंध होता. कृषी उत्पादन स्थानिक बाजारपेठा आणि बंदरांशी जोडलेले होते. मात्र या काळातील कृषक समाजाला आधुनिक अर्थाने ‘कुणबी’ या एकसंध जातीय नावाने ओळखणे योग्य ठरणार नाही. आधुनिक कुणबी ओळख पुढील काळातील सामाजिक, प्रशासकीय आणि जनगणनात्मक प्रक्रियांमध्ये अधिक स्पष्टपणे नोंदली गेली.
=== आदिलशाही आणि दक्षिण कोकण ===
बहमनी सत्तेच्या विघटनानंतर विजापूरची आदिलशाही ही दख्खनमधील प्रमुख सत्तांपैकी एक झाली. कोकणातील विविध भागांवर अहमदनगरची निजामशाही आणि विजापूरची आदिलशाही यांचा वेगवेगळ्या काळात प्रभाव राहिला. कोकणाच्या राजकीय इतिहासात स्थानिक सरदार, किल्ले, बंदरे आणि किनारी सत्ताकेंद्रे यांचे महत्त्व कायम राहिले.<ref name="HistoryKonkanSection3"/>
इ.स. १४८९मध्ये युसुफ आदिल खानने विजापूरच्या आदिलशाहीची स्थापना केली. त्याच काळात अहमदनगरच्या मलिक अहमदने कोकणातील अनेक किल्ले ताब्यात घेण्यास सुरुवात केली होती. त्यामुळे पंधराव्या शतकाच्या अखेरीस कोकण आणि घाट प्रदेशात अहमदनगर व विजापूर या दख्खनी सत्तांमधील राजकीय स्पर्धेला महत्त्व प्राप्त झाले.<ref name="HistoryKonkanSection3"/>
दक्षिण कोकणातील राजकीय परिस्थिती एकसंध नव्हती. किनारी भागातील बंदरे आणि किल्ले तसेच सह्याद्रीतील घाटमार्ग यांवर नियंत्रण ठेवणे दख्खनी सत्तांसाठी लष्करी आणि आर्थिकदृष्ट्या महत्त्वाचे होते. समुद्री व्यापार आणि अंतर्गत दख्खनशी असलेले मार्ग यांमुळे कोकणातील किनारी केंद्रांना व्यापक आर्थिक महत्त्व प्राप्त झाले.<ref name="HistoryKonkanSection3"/>
=== मुघल प्रभाव ===
दख्खनमध्ये मुघल सत्तेचा विस्तार झाल्यानंतर महाराष्ट्रातील विविध प्रदेशांवर मुघलांचा राजकीय आणि महसुली प्रभाव वाढला. मात्र कोकणातील राजकीय परिस्थिती एकसंध नव्हती आणि किनारी प्रदेशातील विविध सत्ताकेंद्रे, किल्ले आणि स्थानिक प्रमुख यांचे महत्त्व कायम राहिले. दख्खनच्या राजकीय इतिहासात दिल्ली सल्तनत, बहमनी सत्ता, निजामशाही, आदिलशाही आणि पुढे मुघल सत्ता यांमधील सत्तांतरांची मालिका दिसून येते.<ref name="MediaevalAdministration"/>
मुघल काळातील प्रशासनाचा अभ्यास करताना केंद्रीय सत्ता आणि स्थानिक प्रशासन यांच्यातील संबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे. गावपातळीवरील स्थानिक अधिकारी आणि ग्रामीण संस्था अनेक ठिकाणी प्रशासनाच्या कार्यात सहभागी राहिल्या. त्यामुळे राजकीय सत्ता बदलली तरी स्थानिक ग्रामीण प्रशासनातील काही संस्था आणि सामाजिक संबंध सातत्याने कार्यरत राहू शकले.<ref name="MediaevalAdministration"/>
मुघल आणि दख्खनी सत्तांच्या काळातील महसूलव्यवस्थेचा ग्रामीण समाजावर परिणाम झाला असला तरी त्या काळातील प्रत्येक कृषक समूहाची आधुनिक जातीय ओळख निश्चित करण्यासाठी स्वतंत्र पुराव्यांची आवश्यकता आहे. त्यामुळे या कालखंडातील कृषक समाजाला सरसकट ‘कुणबी’ म्हणून ओळखणे योग्य ठरत नाही.
=== स्थानिक सत्ताकेंद्रे आणि कोकणातील राजकीय विविधता ===
कोकणाचा राजकीय इतिहास केवळ मोठ्या साम्राज्यांच्या इतिहासाने स्पष्ट होत नाही. शिलाहार, यादव आणि दख्खनी सल्तनतींच्या काळात स्थानिक सरदार, वतनदार आणि किल्लेदार यांना स्थानिक प्रशासन आणि संरक्षणव्यवस्थेत महत्त्व होते. किनारी भागातील बंदरे आणि किल्ले हे व्यापार, वाहतूक आणि लष्करी नियंत्रणासाठी महत्त्वाचे केंद्र होते.<ref name="HistoryKonkanSection3"/>
राजपुरी हे याचे महत्त्वाचे उदाहरण आहे. कोलाबा गॅझेटियरनुसार राजपुरीला कोकणाच्या इतिहासात विविध काळात महत्त्व प्राप्त झाले होते. इ.स. १४९०मध्ये निजामशाहीच्या मलिक अहमदने ते जिंकल्यानंतर ते अहमदनगरच्या सत्तेखाली आले. पुढे सोळाव्या आणि सतराव्या शतकातही ते महत्त्वाचे व्यापारकेंद्र राहिले. राजपुरीचा उल्लेख परकीय प्रवासी आणि व्यापारी स्रोतांमध्येही आढळतो.<ref name="Rajpuri"/>
महाड हे कोकणातील आणखी एक महत्त्वाचे ऐतिहासिक केंद्र होते. कोलाबा गॅझेटियरमध्ये महाडचा सावित्री नदीवरील महत्त्वाचा व्यापारी केंद्र म्हणून उल्लेख केला आहे. महाडजवळील पाले येथील बौद्ध लेणी आणि सावित्री नदीमार्गे अंतर्गत प्रदेशाशी असलेला संपर्क यांमुळे महाडला प्रादेशिक व्यापार आणि वाहतुकीच्या दृष्टीने महत्त्व प्राप्त झाले होते.<ref name="Rajpuri"/>
कोकणातील अशा स्थानिक केंद्रांमुळे कृषी उत्पादन, नदीमार्ग, बंदरे, बाजारपेठा आणि घाटमार्ग यांच्यात परस्पर संबंध निर्माण झाले. कोलाबा गॅझेटियरमध्ये महाड, राजपुरी, मुरुड, श्रीवर्धन, रेवदंडा आणि इतर बंदरांच्या व्यापारसंबंधी नोंदी आढळतात. यावरून किनारी आणि नदीमार्गावरील वाहतूक ही ग्रामीण उत्पादनाच्या देवाणघेवाणीशी जोडलेली होती असे दिसते.<ref name="CourseOfTrade">{{cite web
|title=Course of Trade
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/KOLABA/bank_trade_course.html
}}</ref>
=== ग्रामव्यवस्था ===
मध्ययुगीन महाराष्ट्रातील ग्रामव्यवस्था ही आर्थिक आणि प्रशासकीय जीवनाचा महत्त्वाचा आधार होती. यादवकालीन व्यवस्थेबाबत महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमध्ये ग्रामसमिती आणि तिच्या सदस्यांसाठी ‘महत्तर’ यांसारख्या संज्ञांचा उल्लेख आढळतो. स्थानिक ग्रामप्रशासनात विविध अधिकारी आणि सामाजिक घटक सहभागी होत असत.<ref name="TerritorialGroups"/>
बहमनी आणि त्यानंतरच्या दख्खनी सुलतानशाहींच्या काळात पाटील, देशमुख आणि इतर स्थानिक अधिकाऱ्यांचे हक्क आणि वतने अनेक ठिकाणी कायम राहिल्याचे महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमध्ये नमूद केले आहे. त्यामुळे केंद्रीय सुलतानशाही आणि स्थानिक ग्रामव्यवस्था यांच्यात परस्पर संबंध निर्माण झाले होते.<ref name="TerritorialGroups"/>
गावातील कृषी उत्पादन, जमीन, महसूल, स्थानिक सेवा आणि सामाजिक व्यवहार यांचे व्यवस्थापन विविध स्थानिक संस्थांमार्फत होत असे. पाटील हा गावपातळीवरील महत्त्वाचा अधिकारी होता, तर देशमुखाचा संबंध मोठ्या महसुली क्षेत्राशी आणि स्थानिक महसूलव्यवस्थेशी होता. पुढील मराठा काळात या संस्थांच्या अधिकारांमध्ये आणि कार्यपद्धतीत बदल झाले, तरी स्थानिक ग्रामीण प्रशासनाची काही मूलभूत रूपे पुढेही टिकून राहिली.<ref name="TerritorialGroups"/>
=== जमीन आणि महसूल ===
मध्ययुगीन कोकणातील राज्यव्यवस्थेचा महत्त्वाचा आर्थिक आधार जमीन महसूल होता. कृषी उत्पादनावर आधारित महसूलव्यवस्था ही राजसत्तेच्या उत्पन्नाचा प्रमुख स्रोत होती. बहमनी आणि त्यानंतरच्या दख्खनी सल्तनतींच्या काळात महसूल प्रशासनासाठी विविध प्रादेशिक विभाग आणि स्थानिक अधिकारी कार्यरत होते. महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमध्ये पाटील, देशमुख आणि इतर स्थानिक अधिकाऱ्यांच्या माध्यमातून ग्रामस्तरावरील प्रशासन आणि महसूलव्यवस्थेचे स्वरूप स्पष्ट केले आहे.<ref name="TerritorialGroups"/>
जमिनीचा वापर, लागवड आणि महसूल यांच्यातील संबंधामुळे कृषक हा राज्याच्या अर्थव्यवस्थेतील महत्त्वाचा घटक होता. स्थानिक पातळीवरील जमीनव्यवहार आणि महसूल प्रशासनात पाटील, देशमुख आणि इतर स्थानिक अधिकाऱ्यांची भूमिका होती. या संस्थांचे स्वरूप आणि अधिकार प्रदेश व काळानुसार बदलत गेले.<ref name="TerritorialGroups"/>
मध्ययुगीन सत्तांमध्ये जमीन महसूलाच्या पद्धती बदलत गेल्या तरी कृषी उत्पादनावर आधारित राज्याचे आर्थिक हित कायम राहिले. युद्धे, राजकीय संघर्ष आणि नैसर्गिक आपत्तींचा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेवर परिणाम होऊ शकत असे. महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमध्ये दख्खनमधील विविध कालखंडांतील दुष्काळांच्या संदर्भात युद्धे आणि राजकीय अस्थिरतेच्या परिणामांची नोंद आहे.<ref name="FaminesDeccan">{{cite web
|title=Famines in the Deccan
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/aurangabad/CHAP04/FAMINES.htm
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
=== कृषक समाज ===
मध्ययुगीन कोकणातील कृषक समाज हा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेचा महत्त्वाचा आधार होता. भातशेतीसह स्थानिक परिस्थितीनुसार बागायती, पशुपालन आणि इतर ग्रामीण उपजीविका अस्तित्वात होत्या. कोकणाची भौगोलिक रचना, पर्जन्यमान, नद्या, खाड्या आणि किनारी प्रदेश यांचा कृषी पद्धतींवर प्रभाव होता.<ref name="HistoryKonkanSection3"/>
या कृषक समाजात सामाजिक आणि आर्थिक स्तरांमध्ये विविधता होती. जमीन कसणारे शेतकरी, स्थानिक हक्कांशी संबंधित व्यक्ती आणि विविध प्रकारचे ग्रामीण उत्पादक यांचा या व्यवस्थेत समावेश होता. पुढील मराठा आणि ब्रिटिशकालीन नोंदींमध्ये ‘मिरासदार’, ‘उपरी’ आणि इतर कृषक वर्गांचा उल्लेख अधिक स्पष्टपणे आढळतो; मात्र या संज्ञांचा अर्थ आणि प्रशासकीय व्याप्ती प्रदेश व कालखंडानुसार बदलत असल्यामुळे त्यांचा वापर संबंधित ऐतिहासिक संदर्भात करणे आवश्यक आहे.
मध्ययुगीन कृषक समाजाचे महत्त्व केवळ अन्नउत्पादनापुरते मर्यादित नव्हते. जमीन महसूल, स्थानिक बाजारपेठा, व्यापारमार्ग, किल्ले आणि बंदरे यांची आर्थिक रचना कृषी उत्पादनाशी संबंधित होती. त्यामुळे तत्कालीन राजसत्ता कोणतीही असो, ग्रामीण कृषक समाज हा राज्याच्या आर्थिक व्यवस्थेतील महत्त्वाचा घटक राहिला.<ref name="HistoryKonkanSection3"/>
=== मध्ययुगीन कृषक समाज आणि कुणबी ओळख ===
मध्ययुगीन कोकणातील कृषक समाजाचा इतिहास हा आधुनिक कुणबी समाजाच्या सामाजिक आणि आर्थिक पार्श्वभूमीचा अभ्यास करण्यासाठी महत्त्वाचा आहे; तथापि त्या काळातील सर्व कृषकांना आधुनिक अर्थाने ‘कुणबी’ म्हणणे योग्य ठरत नाही. शिलाहार, यादव, बहमनी, निजामशाही आणि आदिलशाही या विविध सत्तांच्या काळात कोकणातील ग्रामीण समाज जमीन, शेती, महसूल, ग्रामसंस्था आणि स्थानिक अधिकारपद्धती यांच्याशी संबंधित विविध स्वरूपांत अस्तित्वात होता. उपलब्ध ऐतिहासिक पुराव्यांवरून त्या काळातील कृषक समाजाचा अभ्यास करता येतो; मात्र या सर्व समूहांची आधुनिक ‘कुणबी’ या जातीय ओळखीशी थेट समानता सिद्ध होत नाही.<ref name="HistoryKonkanSection3"/>
वसाहतकालीन ethnographic साहित्यामध्ये ‘Kunbi’ या संज्ञेचा कृषक समुदाय आणि शेतीशी संबंधित सामाजिक ओळख या दोन्ही संदर्भांत वापर आढळतो. R. E. Enthoven यांच्या *The Tribes and Castes of Bombay* मध्ये कुणबींच्या विविध प्रादेशिक समूहांचे आणि त्यांच्या सामाजिक व आर्थिक जीवनाचे वर्णन केले आहे.<ref name="Enthoven1922" />
R. V. Russell आणि Hiralal यांनीही कुणबींच्या विविध प्रादेशिक रूपांचा आणि सामाजिक समूहांचा उल्लेख केला आहे. त्यांच्या ग्रंथात ‘Kunbi’, ‘Kulambi’, ‘Kulwadi’ आणि ‘Kanbi’ यांसारख्या संज्ञांचा उल्लेख आढळतो. मात्र या विविध नावांच्या आधारे सर्व समूहांची एकच अखंड ऐतिहासिक जातीय उत्पत्ती होती असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="RussellHiralal1916"/>
ब्रिटिशकालीन District Gazetteers आणि ethnographic साहित्याच्या वापराबाबत मुंबई उच्च न्यायालयानेही सावध भूमिका घेतली आहे. *Suhas s/o Anantrao Dashrathe and another v. State of Maharashtra and others* या प्रकरणात न्यायालयाने District Gazetteers आणि ethnographic साहित्याचा विचार केला. या साहित्याच्या आधारे Maratha हे मूळतः Kunbi आहेत, Maratha ही केवळ पदवी आहे किंवा Maratha ही Kunbiची उपजात अथवा समानार्थी संज्ञा आहे, असा निश्चित निष्कर्ष काढता येत नाही, असे न्यायालयाने नमूद केले. न्यायालयाने उपलब्ध साहित्यामध्ये ‘Kunbi’ हा शब्द काही संदर्भांत जमीन कसणाऱ्या व्यक्तीसाठी वापरला गेल्याचेही नोंदवले.<ref name="SuhasDashrathe2001">{{cite web
|title=Suhas s/o Anantrao Dashrathe and another v. State of Maharashtra, through the Secretary, Department of Urban Development and others
|url=https://indiankanoon.org/doc/1946655/
|publisher=Bombay High Court, Aurangabad Bench
|date=5 October 2001
|access-date=22 August 2026
}}</ref>
या न्यायालयीन निरीक्षणाचा अर्थ असा नाही की ‘कुणबी’ ही सामाजिक जातीय ओळख नव्हती; उलट आधुनिक काळातील प्रशासकीय वर्गीकरणात कुणबी ही स्वतंत्र जात म्हणून मान्य झालेली आहे. न्यायालयाचा मुद्दा असा होता की जुन्या Gazetteers किंवा ethnographic साहित्याच्या आधारे Maratha आणि Kunbi यांच्यातील ऐतिहासिक संबंधाबाबत सार्वत्रिक आणि निर्णायक वंशपरंपरागत निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="SuhasDashrathe2001"/>
या पार्श्वभूमीवर मध्ययुगीन कोकणातील ‘कृषक समाज’ आणि पुढील काळातील ‘कुणबी’ या सामाजिक ओळखीमध्ये ऐतिहासिक सातत्याचे काही घटक असण्याची शक्यता नाकारता येत नाही; परंतु उपलब्ध पुराव्यांच्या आधारे त्यांच्यात थेट आणि अखंड जातीय वंशपरंपरा सिद्ध करता येत नाही. प्राचीन किंवा मध्ययुगीन कृषक समाजातील प्रत्येक व्यक्ती किंवा समूहाला आधुनिक कुणबी म्हणून ओळखणे हे उपलब्ध पुराव्यांपेक्षा पुढे जाणारे अनुमान ठरेल.
कुणबी या नावाचा अधिक स्पष्ट आणि व्यापक दस्तऐवजी वापर पुढील वसाहतकालीन जनगणना, Gazetteers आणि ethnographic साहित्यामध्ये आढळतो. त्यामुळे मध्ययुगीन कोकणातील कृषक समाज हा आधुनिक कुणबी समाजाचा थेट समानार्थी नसून, पुढील काळात विकसित झालेल्या सामाजिक ओळखीचा ऐतिहासिक अभ्यास करण्यासाठी आवश्यक असलेली व्यापक ग्रामीण आणि कृषक पार्श्वभूमी म्हणून पाहणे अधिक योग्य ठरते.<ref name="Census1931Bombay"/><ref name="Enthoven1922"/>
== शिवकाल, स्वराज्य आणि मराठा सत्ता ==
सतराव्या शतकात छत्रपती शिवाजी महाराजांच्या नेतृत्वाखाली स्वराज्याची निर्मिती झाली आणि कोकणातील राजकीय, लष्करी व महसुली परिस्थितीत महत्त्वपूर्ण बदल झाले. स्वराज्याच्या विस्तारात कोकणाला भौगोलिक आणि आर्थिकदृष्ट्या महत्त्वाचे स्थान होते. सह्याद्रीतील घाटमार्ग, किनारी किल्ले, बंदरे, बाजारपेठा आणि कृषीप्रधान गावे यांमुळे कोकण हा स्वराज्याच्या संरक्षण, व्यापार आणि पुरवठा व्यवस्थेच्या दृष्टीने महत्त्वाचा प्रदेश बनला.<ref name="HistoryKonkanGazetteer1896">{{cite book
|editor=James M. Campbell
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: History of the Konkan, Dakhan and Southern Maratha Country
|volume=1
|issue=2
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1896
}}</ref>
शिवाजी महाराजांच्या काळातील ग्रामीण समाजाचा उल्लेख प्रामुख्याने ‘रयत’, ‘कृषक’, ‘शेतकरी’ आणि गावपातळीवरील विविध सामाजिक व प्रशासकीय घटकांच्या संदर्भात आढळतो. या काळातील सर्व रयत किंवा शेतकरी आधुनिक अर्थाने ‘कुणबी’ होते असे म्हणता येत नाही. त्यामुळे कोकणातील कुणबी समाजाच्या इतिहासाच्या संदर्भात शिवकालाचा विचार करताना ‘कुणबी’ आणि ‘रयत’ या संज्ञा एकमेकांच्या समानार्थी न मानता त्या-त्या ऐतिहासिक संदर्भात स्वतंत्रपणे वापरणे आवश्यक आहे.
=== शिवाजी महाराजांच्या काळातील रयत ===
शिवाजी महाराजांच्या राज्यव्यवस्थेत कृषक किंवा रयत हा राज्याच्या आर्थिक व्यवस्थेतील महत्त्वाचा घटक होता. महसूलव्यवस्थेत जमिनीची मोजणी, जमिनीची प्रत आणि उत्पादनक्षमतेचा अंदाज यांना महत्त्व देण्यात आले. उपलब्ध ऐतिहासिक वर्णनांनुसार महसूलवसुली अधिक थेट सरकारी यंत्रणेमार्फत करण्याचा प्रयत्न करण्यात आला आणि महसूल मक्तेदारीची पद्धत कमी करण्यावर भर देण्यात आला.<ref name="ShivajiRevenueArrangements">{{cite web
|title=Shivaji's Revenue Arrangements
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/Satara/english/BombayPresidancy/7%20History.pdf
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
शिवाजी महाराजांच्या महसूलव्यवस्थेचे स्वरूप त्यांच्या पूर्वसुरींच्या दख्खनी महसूलपद्धतींपासून पूर्णपणे वेगळे नव्हते. उपलब्ध ऐतिहासिक वर्णनांमध्ये दादोजी कोंडदेव यांच्या काळातील महसूलव्यवस्था आणि पूर्वीच्या दख्खनी प्रशासकीय अनुभवांचा प्रभाव दिसून येतो. जमिनीची मोजणी आणि उत्पादनाच्या आधारे महसूल निश्चित करण्याची पद्धत अधिक व्यवस्थित करण्याचा प्रयत्न करण्यात आला.<ref name="ShivajiRevenueArrangements"/>
=== कोकणातील ग्रामीण अर्थव्यवस्था ===
कोकणातील ग्रामीण अर्थव्यवस्था शेती, बागायती, पशुपालन, स्थानिक व्यापार आणि किनारी बाजारपेठांशी संबंधित होती. सह्याद्री आणि अरबी समुद्र यांच्यामधील भौगोलिक रचना, मोठ्या प्रमाणातील पर्जन्यमान, नद्या, खाड्या आणि अरुंद किनारी मैदाने यांमुळे कोकणातील कृषी पद्धतींना स्थानिक भौगोलिक परिस्थितीचा विशेष प्रभाव होता.
शिवाजी महाराजांच्या काळात कोकणातील राजकीय नियंत्रण वाढल्यानंतर ग्रामीण उत्पादनाचा संबंध किल्ले, बाजारपेठा आणि किनारी केंद्रांशी अधिक दृढ झाला. *Gazetteer of the Bombay Presidency: History of the Konkan* मध्ये शिवाजी महाराजांच्या काळातील दक्षिण कोकणाच्या संदर्भात महसूलव्यवस्था, किल्ले, गडकरी आणि स्थानिक लोकसंख्या यांचा परस्परसंबंध नोंदवला आहे.<ref name="HistoryKonkanShivaji">{{cite web
|title=History of the Konkan — Shivaji (1648 to 1680)
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Gazetteer%20of%20Bombay%20Presidency/history_of_the_konkan/section_6.pdf
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
कोकणातील कृषी उत्पादन हे स्थानिक उपजीविकेबरोबरच किल्ले, लष्करी ठाणी आणि बाजारपेठांच्या पुरवठ्याशीही संबंधित होते. किनारी आणि डोंगरी किल्ल्यांच्या जाळ्यामुळे धान्य, चारा, लाकूड, मीठ आणि इतर आवश्यक वस्तूंच्या स्थानिक पुरवठ्याला महत्त्व प्राप्त झाले. या आर्थिक संबंधांमुळे ग्रामीण उत्पादन आणि स्वराज्याच्या लष्करी व प्रशासकीय व्यवस्थेमध्ये परस्परावलंबित्व निर्माण झाले.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
=== महसूल व्यवस्था ===
शिवाजी महाराजांच्या महसूलव्यवस्थेत जमीन मोजणी आणि उत्पादनक्षमतेच्या आधारे महसूल निश्चित करण्याला महत्त्व देण्यात आले. उपलब्ध ऐतिहासिक वर्णनानुसार जमिनीचे सर्वेक्षण करून तिच्या उत्पादनाच्या आधारे शेतकरी आणि राज्य यांच्यातील महसुली हिस्सा निश्चित करण्याचा प्रयत्न करण्यात आला. एका ऐतिहासिक वर्णनात उत्पादनाच्या तीन-पंचमांश भागाचा हिस्सा शेतकऱ्याकडे आणि दोन-पंचमांश भाग राज्याकडे ठेवण्याची पद्धत नमूद केली आहे.<ref name="ShivajiRevenueArrangements"/>
मात्र शिवाजी महाराजांच्या संपूर्ण राज्यात सर्व प्रकारच्या जमिनींवर नेमका दोन-पंचमांश महसूलच आकारला जात असे, असा सार्वत्रिक निष्कर्ष काढणे योग्य ठरणार नाही. महसुली आकारणीमध्ये जमिनीचा प्रकार, पिके, स्थानिक परिस्थिती आणि पूर्वीच्या महसूलपद्धतींचा परिणाम होऊ शकत होता. त्यामुळे दोन-पंचमांश हा उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतामध्ये वर्णिलेला प्रमाणात्मक संदर्भ म्हणून पाहणे अधिक योग्य आहे.
शिवाजी महाराजांच्या नियंत्रणाखालील प्रदेशात महसूलवसुली अधिक थेट सरकारी यंत्रणेमार्फत करण्याचा प्रयत्न करण्यात आला. उपलब्ध Gazetteerच्या वर्णनानुसार महसूल मक्तेदारीची पद्धत दूर करून सरकारने नियुक्त केलेल्या अधिकाऱ्यांमार्फत महसूल गोळा केला जात असे. काही प्रशासकीय विभागांवर कारकून, तरफदार किंवा तालुकदार आणि त्यापुढे सुभेदार अशा अधिकाऱ्यांचा उल्लेख आढळतो.<ref name="ShivajiRevenueArrangements"/>
=== रयतेचे संरक्षण आणि कृषी ===
शिवाजी महाराजांच्या कोकणातील राज्यव्यवस्थेबाबत जुन्या *Gazetteer of the Bombay Presidency* मध्ये महसूलव्यवस्थेच्या सुधारणांचा उल्लेख आहे. दक्षिण कोकणाच्या संदर्भात त्यांच्या प्रशासनामुळे पूर्वीच्या व्यवस्थेपेक्षा काही सुधारणा झाल्या आणि cultivatorsच्या हिताचे संरक्षण करण्यात आले, अशी नोंद त्या स्रोतामध्ये आढळते.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
शिवाजी महाराजांच्या लष्करी शिस्तीविषयीच्या त्याच ऐतिहासिक स्रोतामध्ये कृषक, स्त्रिया आणि गाई यांना लष्करी मोहिमांमध्ये त्रास न देण्याच्या सूचनांचा उल्लेख आहे. युद्धकाळात ग्रामीण उत्पादन आणि शेतकऱ्यांचे संरक्षण हे राज्याच्या आर्थिक हिताशी संबंधित होते.<ref name="ShivajiAdministrationMilitary">{{cite web
|title=History — Shivaji's Administration and Military System
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/Satara/english/BombayPresidancy/7%20History.pdf
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
कृषी उत्पादन टिकवून ठेवणे हे राज्याच्या महसुली उत्पन्नासाठीही आवश्यक होते. त्यामुळे रयतेचे संरक्षण ही केवळ सामाजिक बाब नव्हती; ती कृषी उत्पादन आणि राज्याच्या आर्थिक स्थैर्याशीही संबंधित होती.
=== ग्रामीण मनुष्यबळ आणि लष्करी सहभाग ===
शिवाजी महाराजांच्या काळातील कोकणातील ग्रामीण समाजाचा काही भाग लष्करी व्यवस्थेशी जोडला गेला. दक्षिण कोकणाच्या संदर्भात *Gazetteer of the Bombay Presidency* मध्ये मालवण परिसरातील Hetkari किंवा स्थानिक मराठा सैनिकांचा उल्लेख आढळतो.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
याच स्रोतामध्ये कोकणातील किल्ल्यांशी संबंधित ‘गडकरी’ व्यवस्थेचा उल्लेख आहे. गडकरी हे किल्ल्यांच्या संरक्षणाशी संबंधित सेवाधारक होते आणि किल्ल्यांच्या आसपासच्या जमिनीशी त्यांचे संबंध होते. त्यामुळे ग्रामीण लोकसंख्येतील काही घटकांना शेतीबरोबर लष्करी किंवा किल्लेसेवेचे उपजीविकेचे साधन उपलब्ध झाले होते.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
या लष्करी सहभागाला आधुनिक जातीय वर्गीकरणाशी थेट जोडता येत नाही. गडकरी, Hetkari किंवा मावळातील सैनिक यांना सर्वसाधारणपणे कुणबी म्हणणे उपलब्ध पुराव्यांवरून योग्य ठरणार नाही. मात्र कोकणातील ग्रामीण लोकसंख्येतील काही घटक शेतीबरोबर लष्करी आणि किल्लेसेवेशी जोडले गेले होते, हे उपलब्ध ऐतिहासिक नोंदींवरून दिसून येते.
=== स्वराज्याच्या पुरवठा व्यवस्थेतील कोकण ===
कोकणातील किल्ले, बंदरे आणि बाजारपेठा यांचे महत्त्व केवळ लष्करी संरक्षणापुरते मर्यादित नव्हते. किनारी प्रदेशातील उत्पादन, व्यापारमार्ग आणि सह्याद्रीतील घाटमार्ग यांच्या माध्यमातून कोकणाचा संबंध स्वराज्याच्या व्यापक आर्थिक व्यवस्थेशी जोडला गेला. किल्ल्यांच्या देखभालीसाठी आवश्यक मनुष्यबळ, अन्नधान्य आणि इतर साहित्याचा स्थानिक प्रदेशाशी संबंध होता.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
या संदर्भात कृषक समाजाची भूमिका केवळ ‘शेतकरी’ म्हणून मर्यादित न ठेवता ग्रामीण उत्पादनव्यवस्थेतील घटक म्हणून पाहणे आवश्यक आहे. कृषी उत्पादन, स्थानिक बाजारपेठा, वाहतूक, किल्ले आणि लष्करी सेवा यांच्यातील संबंधांमुळे कोकणातील ग्रामीण अर्थव्यवस्था स्वराज्याच्या राजकीय व्यवस्थेशी जोडली गेली होती.
=== शिवकाल आणि आधुनिक कुणबी ओळख ===
शिवाजी महाराजांच्या काळातील ‘रयत’, ‘कृषक’ आणि ‘शेतकरी’ या संज्ञा आधुनिक ‘कुणबी’ या जातीय ओळखीच्या समानार्थी मानता येत नाहीत. शिवकालीन ग्रामीण समाज विविध सामाजिक, आर्थिक आणि प्रशासकीय घटकांनी बनलेला होता. उपलब्ध ऐतिहासिक वर्णनांमध्ये कृषक, स्थानिक अधिकारी, किल्लेसेवक आणि इतर ग्रामीण घटकांचे स्वतंत्र संदर्भ आढळतात.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/><ref name="ShivajiRevenueArrangements"/>
म्हणून शिवकालीन कृषक समाज आणि आधुनिक कोकणातील कुणबी समाज यांच्यात ऐतिहासिक सातत्याचे काही घटक असण्याची शक्यता तपासता येते; परंतु शिवाजी महाराजांच्या काळातील सर्व रयत कुणबी होती किंवा आधुनिक कुणबी समाजाची निश्चित जातीय ओळख त्याच काळात अस्तित्वात होती, असा निष्कर्ष उपलब्ध पुराव्यांवरून काढता येत नाही. कुणबी या सामाजिक समूहाचे अधिक स्पष्ट आणि व्यापक दस्तऐवजीकरण पुढील वसाहतकालीन जनगणना, District Gazetteers आणि ethnographic साहित्यामध्ये आढळते.<ref name="Census1931Bombay"/><ref name="Enthoven1922" /><ref name="RatnagiriSavantvadi1880">{{cite book
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Ratnagiri and Savantvadi
|volume=10
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1880
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=== स्वराज्याच्या पुरवठा व्यवस्थेत कृषक समाजाची भूमिका ===
स्वराज्याच्या लष्करी व्यवस्थेला धान्य, पशुधन, चारा, लाकूड आणि इतर जीवनावश्यक वस्तूंची आवश्यकता होती. किल्ल्यांच्या व्यवस्थापनात धान्यसाठा आणि इतर सामग्रीच्या देखरेखीशी संबंधित अधिकारी व प्रशासकीय व्यवस्था असल्याचे उपलब्ध ऐतिहासिक वर्णनांत आढळते.<ref name="ShivajiAdministrationMilitary"/>
किल्ल्यांच्या संरक्षणव्यवस्थेला आवश्यक असलेल्या अन्नधान्य आणि इतर साधनसामग्रीचा संबंध स्थानिक उत्पादन, बाजारपेठा आणि वाहतूकमार्गांशी होता. त्यामुळे कृषक समाजाचे उत्पादन स्वराज्याच्या व्यापक आर्थिक व्यवस्थेशी संबंधित होते. तथापि, उपलब्ध स्रोतांच्या आधारे कोकणातील सर्व कृषकांना स्वराज्याच्या लष्करी पुरवठा व्यवस्थेतील थेट घटक मानणे योग्य ठरणार नाही.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
कोकणातील किल्ले समुद्रकिनारी तसेच सह्याद्रीच्या डोंगररांगांमध्ये असल्यामुळे समुद्री मार्ग, घाटमार्ग आणि स्थानिक वाहतूक यांना महत्त्व होते. किल्ल्यांच्या बांधकाम, दुरुस्ती आणि देखभालीशी संबंधित कामांमध्ये स्थानिक मनुष्यबळाचा वापर झाल्याचे *Gazetteer of the Bombay Presidency* मध्ये नमूद केले आहे.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
=== कोकणातील किल्ले, बाजारपेठा आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्था ===
स्वराज्याच्या काळात कोकणातील किल्ले केवळ लष्करी केंद्रे नव्हती. त्यांच्या देखभालीसाठी प्रशासकीय कर्मचारी, किल्लेसेवक, कारागीर आणि इतर मनुष्यबळाची आवश्यकता होती. किल्ल्यांच्या व्यवस्थेशी संबंधित स्थानिक आर्थिक व्यवहार आणि मनुष्यबळाचा उल्लेख उपलब्ध ऐतिहासिक वर्णनांत आढळतो.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
कोकणातील बंदरे आणि बाजारपेठांनाही राजकीय व आर्थिक महत्त्व होते. समुद्री व्यापार, किनारी किल्ले आणि घाटमार्ग यांमुळे कोकणाचा अंतर्गत दख्खनशी संबंध कायम राहिला. या भौगोलिक आणि आर्थिक संबंधांमुळे ग्रामीण उत्पादनाचा संबंध स्थानिक तसेच प्रादेशिक बाजारपेठांशी होता.<ref name="HistoryKonkanGazetteer1896"/>
=== मराठा सत्तेच्या विस्तारानंतरचे बदल ===
शिवाजी महाराजांच्या मृत्यूनंतर मराठा सत्तेचा विस्तार पुढील काळात विविध टप्प्यांत झाला. संभाजी महाराज, राजाराम महाराज, महाराणी ताराबाई, छत्रपती शाहू महाराज आणि पुढे पेशवाईच्या काळात मराठा सत्तेचे राजकीय आणि प्रशासकीय स्वरूप बदलत गेले. कोकणात मराठा सत्तेबरोबरच आंग्रे, सिद्दी, पोर्तुगीज आणि ब्रिटिश अशा विविध सत्ताकेंद्रांशी संघर्ष व संबंधही कायम राहिले.<ref name="HistoryKonkanGazetteer1896"/>
पुढील मराठा काळात महसूल हक्कांचे वाटप, वतन, जहागीर, चौथाई, सरदेशमुखी आणि इतर महसुली दावे यांची प्रशासकीय गुंतागुंत वाढली. महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमधील ऐतिहासिक वर्णनानुसार मराठा सत्तेच्या विस्ताराच्या काळात विविध सरदारांना प्रदेश आणि त्यातून मिळणारे महसूल हक्क देण्यात आले आणि या महसुलाचा संबंध लष्करी व्यवस्थेशी होता.<ref name="MarathaAdministration">{{cite web
|title=History of Maharashtra — Maratha Administration
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/Satara/english/SDGrevised/2%20HISTORY.pdf
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
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या प्रक्रियेमुळे कृषक आणि राज्य यांच्यातील महसुली संबंध अधिक गुंतागुंतीचे झाले. काही प्रदेशांत स्थानिक वतनदार, सरदार आणि महसूल मध्यस्थ यांची भूमिका महत्त्वाची राहिली. त्याच वेळी राज्याच्या प्रशासकीय आणि लष्करी व्यवस्थेसाठी आवश्यक महसूल ग्रामीण अर्थव्यवस्थेतून मिळत राहिला.<ref name="MarathaAdministration"/>
=== शिवकालीन कृषक समाज आणि कुणबी : ऐतिहासिक सावधगिरी ===
शिवाजी महाराजांच्या काळातील रयत, शेतकरी किंवा कृषक समाज आणि आधुनिक कुणबी समाज यांच्यात काही सामाजिक किंवा आर्थिक सातत्याचे घटक असण्याची शक्यता इतिहासाच्या अभ्यासातून तपासता येते; परंतु उपलब्ध पुराव्यांच्या आधारे शिवकालीन सर्व रयत ‘कुणबी’ होती असा निष्कर्ष काढता येत नाही. शिवकालीन ग्रामीण समाजाचा उल्लेख विविध सामाजिक, आर्थिक आणि प्रशासकीय संदर्भांत आढळतो.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
शिवकालीन आणि पुढील मराठा काळातील ‘रयत’, ‘मिरासदार’, ‘पाटील’, ‘देशमुख’ आणि इतर प्रशासकीय किंवा सामाजिक संज्ञांचा वापर त्यांच्या संबंधित ऐतिहासिक संदर्भात करणे आवश्यक आहे. या संज्ञांना आधुनिक जातीय वर्गीकरणाशी थेट समान मानणे योग्य नाही. आधुनिक काळातील ‘कुणबी’ या सामाजिक वर्गाचे अधिक स्पष्ट दस्तऐवजीकरण पुढील वसाहतकालीन जनगणना, District Gazetteers आणि ethnographic साहित्यामध्ये आढळते.<ref name="Census1931Bombay"/><ref name="Enthoven1922" />
म्हणून कोकणातील कुणबींच्या इतिहासाच्या दृष्टीने शिवकालाचे महत्त्व हे ‘शिवाजी महाराजांच्या सैन्यात कुणबी मोठ्या प्रमाणावर होते’ अशा अप्रमाणित दाव्यात नसून, '''कृषक रयत, जमीन, महसूल, ग्रामव्यवस्था, किल्ले, लष्करी मनुष्यबळ आणि राज्य यांच्यातील संबंधांच्या ऐतिहासिक विकासात''' आहे.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/><ref name="ShivajiRevenueArrangements"/>
शिवाजी महाराजांच्या स्वराज्यव्यवस्थेने कोकणातील ग्रामीण समाजावर परिणाम घडवून आणला आणि कृषी उत्पादन, महसूल, किल्ले, स्थानिक बाजारपेठा आणि लष्करी व्यवस्थेतील संबंधांना प्रशासकीय चौकट प्राप्त झाली. पुढील मराठा सत्ताकाळात या व्यवस्थेचे स्वरूप बदलत गेले आणि त्याचा कोकणातील जमीन, महसूल आणि ग्रामीण समाजावर दीर्घकालीन परिणाम झाला.<ref name="HistoryKonkanGazetteer1896"/><ref name="MarathaAdministration"/>
== ब्रिटिशपूर्व आणि ब्रिटिशकालीन कोकण ==
अठराव्या शतकाच्या उत्तरार्धापासून एकोणिसाव्या शतकाच्या उत्तरार्धापर्यंत कोकणातील जमीन, महसूल, कृषी आणि ग्रामीण समाजरचनेत महत्त्वपूर्ण बदल झाले. मराठा सत्तेच्या उत्तरकाळातील जमीनहक्क, मिरास, वतन, पाटील-कुलकर्णी व्यवस्था आणि खोतीसारख्या स्थानिक पद्धती ब्रिटिश सत्तेच्या स्थापनेनंतरही काही काळ अस्तित्वात राहिल्या; त्याच वेळी ब्रिटिश प्रशासनाने सर्वेक्षण, जमीनमोजणी, महसूल निश्चिती आणि नोंदवही यांच्या माध्यमातून जमीन व महसूल व्यवस्थेचे पुनर्गठन केले. रत्नागिरीमध्ये १८२७नंतर झालेल्या सर्वेक्षणांमधून जमीन, तिची प्रतवारी, धारकांचे हक्क आणि महसूल यांची अधिक पद्धतशीर नोंद करण्यात आली.<ref name="RatnagiriSurveys1827">{{cite web
|title=Land Administration — Ratnagiri: Surveys 1827–1851
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Ratnagiri%20and%20Sawantwadi/ratnagiri/land1_surveys27.html
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
या कालखंडाच्या अभ्यासासाठी १८८०चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Ratnagiri and Savantvadi'', १८८२चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Thana'' आणि १८८३चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira'' हे महत्त्वाचे वसाहतकालीन स्रोत आहेत. या गॅझेटियरमध्ये जमीन प्रशासन, महसूल, शेती, जमीनधारणा, पिके, गावव्यवस्था, लोकसंख्या आणि विविध सामाजिक समूहांविषयी माहिती दिली आहे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/><ref name="Thana1882"/><ref name="KolabaJanjira1883">{{cite book
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira
|volume=11
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1883
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=== ब्रिटिशपूर्व जमीनव्यवस्था ===
ब्रिटिश सत्ता येण्यापूर्वी कोकणातील जमीनव्यवस्था एकसंध स्वरूपाची नव्हती. प्रदेश, गाव, जमीनधारकांचे हक्क, स्थानिक वतन आणि महसूलपद्धती यांनुसार जमीनधारणेचे स्वरूप बदलत असे. रत्नागिरीतील ब्रिटिश सर्वेक्षणाच्या नोंदींमध्ये पूर्वीच्या जमीनमोजणी, जमीनवर्गीकरण आणि विविध प्रकारच्या हक्कांचा तपशील आढळतो.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
१८२७नंतर रत्नागिरीत करण्यात आलेल्या ब्रिटिश सर्वेक्षणांमध्ये पूर्वीच्या मराठा पद्धतीतील जमीनमोजणी आणि जमिनीच्या प्रतवारीचा अभ्यास करण्यात आला. सुरुवातीच्या सर्वेक्षणात जुन्या पद्धतीतील काही घटकांचा आधार घेण्यात आला; पुढे अधिक अचूक मोजणी, नकाशे आणि महसूल नोंदी तयार करण्यावर भर देण्यात आला.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== रयत आणि कृषक ===
कोकणातील ग्रामीण अर्थव्यवस्थेचा मुख्य आधार कृषी होता. रत्नागिरीत भातशेतीबरोबर नाचणी, वरी आणि इतर पिके घेतली जात. ब्रिटिश सर्वेक्षणाच्या काळात जमिनीचे वर्गीकरण तिच्या उपयोग, पिकांचा प्रकार आणि पाण्याच्या उपलब्धतेनुसार करण्यात आले. भातजमिनी आणि उंच किंवा पावसावर अवलंबून असलेल्या जमिनींचे विविध प्रकार नोंदवले गेले होते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
थाणे जिल्ह्यातही कृषी ही लोकसंख्येच्या मोठ्या भागाची उपजीविका होती. १८८२ च्या गॅझेटियरमध्ये जिल्ह्यातील सुमारे ६३ टक्के लोकसंख्या शेतीशी संबंधित असल्याचे नमूद केले आहे. भातजमिनींचे ''bandhni'' आणि ''malkhandi'' असे प्रकार करण्यात आले होते आणि पाण्याच्या उपलब्धतेनुसार जमिनीची उत्पादकता बदलत होती.<ref name="ThanaAgriculture">{{cite web
|title=Agriculture — Thana District
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Thana%20District/Thane-I/agriculture_soil.html
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
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=== मिरास आणि वारसाहक्काची जमीन ===
ब्रिटिशपूर्व महाराष्ट्रातील ग्रामव्यवस्थेत काही कृषकांना जमिनीवर दीर्घकालीन किंवा वारसाहक्काचे हक्क प्राप्त होते. रत्नागिरीतील ब्रिटिश चौकशीच्या नोंदींमध्ये काही कृषकांना ''hereditary cultivators'' म्हणून वर्णिले आहे. त्यांच्या जमिनीवरील हक्कांचा संबंध स्थानिक जमीनव्यवस्था आणि पूर्वीपासून चालत आलेल्या कृषी हक्कांशी होता.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
रत्नागिरीतील १८२९–१८३० च्या चौकशीच्या संदर्भात खोती गावांतील वारसाहक्की कृषकांमध्ये कुणबींचा मोठा सहभाग असल्याची नोंद आढळते. या कृषकांना ''karda'' म्हणून संबोधण्यात आले असून त्यांच्या हक्कांचा संबंध लागवड, उत्पादन आणि खोतालाच देय असलेल्या रकमेशी होता.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
या नोंदी कोकणातील कुणबी समाजाच्या इतिहासाच्या दृष्टीने महत्त्वाच्या आहेत. कारण रत्नागिरीतील या ब्रिटिशकालीन चौकशीत ‘कुणबी’ ही संज्ञा प्रत्यक्ष कृषक आणि जमीनहक्कांच्या संदर्भात वापरलेली आढळते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== वतन व्यवस्था आणि ग्रामअधिकारी ===
मध्ययुगीन आणि मराठा काळापासून गावपातळीवरील प्रशासनात पाटील, कुलकर्णी आणि इतर वतनदारांना महत्त्व होते. पाटीलचा संबंध गावच्या कारभार आणि महसूलविषयक कामांशी, तर कुलकर्णीचा संबंध गावच्या लेखा व महसूल नोंदींशी होता. अनेक ठिकाणी या पदांना वंशपरंपरागत हक्कांचे स्वरूप प्राप्त झाले होते.<ref name="KolabaJanjira1883">{{cite book
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira
|volume=11
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1883
}}</ref>
ब्रिटिश सत्तेच्या स्थापनेनंतर या स्थानिक हक्कांची आणि वतनांची नोंद महसूल प्रशासनाच्या चौकटीत करण्यात आली. जमीन महसूल आणि ग्रामप्रशासन अधिक पद्धतशीर करण्यासाठी जमीनधारक, क्षेत्रफळ, सीमा आणि महसूल यांची नोंद तयार करण्यात आली.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== पाटील-कुलकर्णी व्यवस्था ===
गावातील पाटील आणि कुलकर्णी हे ग्रामीण प्रशासनातील प्रमुख अधिकारी होते. पाटीलचा संबंध गावच्या कारभार, महसूलविषयक कामे आणि स्थानिक प्रशासनाशी होता, तर कुलकर्णी गावच्या महसूल व जमीन नोंदी ठेवण्याच्या कामाशी संबंधित होता. मराठा काळातील ही व्यवस्था ब्रिटिश सत्तेच्या सुरुवातीच्या काळातही अनेक भागांत अस्तित्वात होती.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
ब्रिटिश सर्वेक्षणानंतर गावातील जमीन आणि महसूल नोंदी अधिक प्रमाणबद्ध करण्याचा प्रयत्न करण्यात आला. रत्नागिरीतील सर्वेक्षणात प्रत्येक शेताचे क्षेत्रफळ, सीमा आणि गावातील स्थान नोंदविण्यासाठी ''khatavni'' नावाची गावनिहाय नोंदवही तयार करण्यात आली. नकाशांमध्ये शेतांची आणि गावांची स्थिती दर्शविण्यात आली.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== खोती व्यवस्था ===
कोकणातील जमीनव्यवस्थेच्या इतिहासात खोती पद्धतीला विशेष महत्त्व होते. रत्नागिरी आणि कोलाबा प्रदेशातील काही गावांमध्ये खोत हा महसूल आणि जमीनव्यवस्थेतील मध्यस्थ म्हणून कार्यरत होता. खोती गावांमध्ये खोत आणि प्रत्यक्ष जमीन कसणारे कृषक यांच्यातील हक्क व देयकांचे संबंध ब्रिटिशकालीन महसूल चौकशीत नोंदवले गेले.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/><ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
रत्नागिरीतील १८२९–१८३० च्या चौकशीत खोती गावांतील कृषक हक्क आणि खोतांना देय असलेल्या रकमांचा उल्लेख आढळतो. या नोंदींमधून खोती व्यवस्था ही केवळ महसूलवसुलीची पद्धत नसून खोत, जमीन कसणारे कृषक आणि राज्य यांच्यातील हक्क व आर्थिक संबंधांची एक गुंतागुंतीची रचना होती, असे दिसते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== ब्रिटिश सर्वेक्षण आणि महसूल नोंदी ===
ब्रिटिश प्रशासनाने जमीन महसूल निश्चित करण्यासाठी प्रत्यक्ष सर्वेक्षण, मोजणी, नकाशे आणि जमीनधारकांच्या हक्कांची नोंद यांना महत्त्व दिले. रत्नागिरीतील १८२७ ते १८५१ या कालखंडातील सर्वेक्षण प्रक्रियेत जमिनीची मोजणी, प्रतवारी, धारकांचे हक्क आणि महसूल यांची नोंद करण्यात आली.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
या प्रक्रियेमुळे पूर्वीच्या स्थानिक जमीनहक्कांना प्रशासकीय नोंदींच्या चौकटीत स्थान मिळाले. जमीन, धारक, क्षेत्रफळ, सीमा आणि महसूल यांची नोंद पुढील काळातील जमीन प्रशासनासाठी महत्त्वाची ठरली. त्यामुळे ब्रिटिशकालीन सर्वेक्षण नोंदी या कोकणातील कृषक समाज, जमीनधारणा आणि कुणबी समाजाच्या सामाजिक-आर्थिक इतिहासाच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचे प्राथमिक स्रोत ठरतात.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== महसूल व्यवस्था ===
ब्रिटिश काळात जमीन महसूल हा जिल्ह्याच्या सरकारी उत्पन्नाचा प्रमुख स्रोत होता. कोलाबा जिल्ह्याच्या १८८३ च्या गॅझेटियरनुसार १८८०–८१मध्ये जिल्ह्याच्या एकूण सरकारी उत्पन्नातील सुमारे ६० टक्के उत्पन्न जमीन महसुलातून येत होते. १८५२–५३ ते १८८०–८१ या कालावधीत जमीन महसूल प्राप्तीत वाढ झाली होती. या वाढीमागे लागवडीखाली आणलेल्या अधिक क्षेत्राबरोबरच सर्वेक्षणामुळे झालेली अधिक अचूक जमीनमोजणी हे घटक असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद केले आहे.<ref name="KolabaRevenue">{{cite web
|title=Revenue and Finance — Kolaba
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Kolaba%20District/revenue.html
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
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कोलाबा जिल्ह्याच्या महसूलव्यवस्थेत जमीन महसुलाबरोबर स्थानिक निधीचीही व्यवस्था होती. शिक्षण, रस्ते, विहिरी, विश्रामगृहे आणि दवाखाने यांसारख्या स्थानिक सार्वजनिक कामांसाठी निधी उपलब्ध केला जात असे. १८६३पासून ग्रामीण शिक्षण आणि स्थानिक सार्वजनिक कामांसाठी स्थानिक निधीच्या व्यवस्थेचा विस्तार झाल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद आहे.<ref name="KolabaRevenue"/>
=== शेती आणि जमीनधारणा ===
कोकणातील शेतीवर पर्जन्यमान, जलव्यवस्था, जमिनीचा प्रकार आणि किनारी भौगोलिक परिस्थितीचा प्रभाव होता. थाणे जिल्ह्यात भातजमिनींची उत्पादकता पाण्याची उपलब्धता, पाण्याचा निचरा आणि जमिनीच्या स्वरूपाशी संबंधित होती. ''Bandhni'' आणि ''malkhandi'' या भातजमिनींच्या प्रकारांमध्ये उत्पादनातील फरक असल्याचे १८८२ च्या गॅझेटियरमध्ये नमूद केले आहे.<ref name="ThanaAgriculture"/>
थाणे जिल्ह्यातील १८७९–८० च्या महसूल सर्वेक्षणानुसार सरकारी लागवडीयोग्य क्षेत्रापैकी ९२.७ टक्के क्षेत्र प्रत्यक्ष लागवडीखाली होते. त्यामध्ये भातजमीन आणि कोरडवाहू जमीन हे प्रमुख प्रकार होते. किनारी भागात खारवट किंवा खारफुटीच्या प्रभावाखालील जमीन धरणे, बांध घालणे आणि पाण्याचा निचरा किंवा पावसाच्या पाण्याच्या साहाय्याने जमीन शेतीयोग्य करण्याचे प्रयत्न होत असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद आहे.<ref name="ThanaAgriculture"/>
खारवट जमीन शेतीयोग्य करण्यासाठी काही भागांत जमीन सुधारणा करणाऱ्या व्यक्तींना महसूल किंवा भाडे सवलती देण्यात आल्याची नोंद गॅझेटियरमध्ये आहे. सुरुवातीच्या काही वर्षांत कमी किंवा शून्य आकारणी करून जमीन सुधारण्यास प्रोत्साहन देण्यात येत असे. अशा प्रक्रियांमुळे किनारी भागातील काही खारवट जमीन कालांतराने भातशेतीसाठी वापरली जाऊ लागली.<ref name="ThanaAgriculture"/>
=== ग्रामीण अर्थव्यवस्था ===
कोकणातील ग्रामीण अर्थव्यवस्था केवळ शेतीपुरती मर्यादित नव्हती. भात, नाचणी, वरी, नारळ, सुपारी, फळबागा, पशुधन, मासेमारी, जंगलातील उत्पादन आणि स्थानिक व्यापार यांचा ग्रामीण जीवनाशी संबंध होता. बंदरे, नदीमार्ग आणि बाजारपेठांमुळे कृषी उत्पादनाचा संबंध स्थानिक तसेच किनारी व्यापाराशी जोडला गेला.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/><ref name="KolabaJanjira1883"/>
रत्नागिरी गॅझेटियरमध्ये भात, नारळ, सुपारी आणि इतर कृषी उत्पादनांचा उल्लेख असून कृषी उत्पादन, स्थानिक बाजारपेठ आणि व्यापार यांच्यातील संबंधांची माहिती दिली आहे. जिल्ह्यातील जमीन, कृषी उत्पादन आणि व्यापार यांसाठी स्वतंत्र वर्णने देण्यात आली आहेत.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
कोलाबा जिल्ह्याच्या १८८३ च्या गॅझेटियरमध्येही शेती, धान्य, तांदूळ, नारळ, सुपारी, बंदरे, नदीमार्ग आणि व्यापार यांचा परस्परसंबंध दिसून येतो. महाड, माणगाव, रोहा, पेण, अलिबाग आणि इतर केंद्रे कृषी उत्पादन, वाहतूक आणि व्यापाराच्या व्यापक जाळ्याशी संबंधित होती.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== कुणबी आणि जमीनधारणा ===
ब्रिटिशकालीन रत्नागिरीच्या जमीन प्रशासनाच्या नोंदी कोकणातील कुणबी समाजाच्या सामाजिक-आर्थिक इतिहासासाठी महत्त्वाच्या आहेत. १८२९–१८३० च्या जमीनविषयक चौकशीच्या संदर्भात ''vatandar kardas'' म्हणून नोंदवलेल्या वारसाहक्की कृषकांमध्ये कुणबींचा मोठा वाटा असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद केले आहे. हे कृषक विशिष्ट जमीनहिस्से कसत आणि त्या जमिनीच्या उत्पादनाशी संबंधित देयके खोत्यांना देत असत.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
गॅझेटियरच्या वर्णनानुसार अशा कुणबी कृषकांचे जीवन गावातील विशिष्ट जमीनहिस्स्यांशी संबंधित होते. कुटुंबे किंवा कुटुंबसमूह विशिष्ट जमीनभागाची लागवड करीत आणि लागवडीखालील तसेच पडीत जमिनीच्या व्यवस्थापनाशी त्यांचा संबंध होता.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
या नोंदींमुळे रत्नागिरीतील कुणबी कृषकांचा इतिहास केवळ व्यापक अर्थाने ‘शेतकरी समाज’ या वर्णनापुरता मर्यादित राहत नाही. उपलब्ध जमीनविषयक नोंदींमध्ये कुणबी कृषक, जमीनहिस्से, लागवड आणि खोती व्यवस्थेतील देयके यांच्यातील संबंध स्पष्टपणे दिसून येतात.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== ब्रिटिश प्रशासन आणि कृषकांवरील परिणाम ===
ब्रिटिश प्रशासनाने जमीन महसूल निश्चित करण्यासाठी जमीनसर्वेक्षण, मोजणी आणि नोंदणीवर भर दिला. रत्नागिरीतील १८२७नंतरच्या सर्वेक्षणांमध्ये जमीन, तिचे क्षेत्रफळ, प्रतवारी, लागवड आणि महसूल यांची अधिक पद्धतशीर नोंद करण्याचा प्रयत्न करण्यात आला. या प्रक्रियेमुळे गावांच्या सीमा, शेतजमिनी आणि महसूलविषयक माहिती अधिक औपचारिक सरकारी नोंदींमध्ये येऊ लागली.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
खोती हक्क आणि कृषकांचे हक्क यांच्यातील संबंधांबाबत ब्रिटिश प्रशासनाला विविध प्रश्नांना सामोरे जावे लागले. १८३० च्या दशकापासून पुढे खोत्यांचे अधिकार, कृषकांचे पारंपरिक हक्क, महसूल आकारणी आणि अनधिकृत आकारणी यांसंबंधी चौकशी व प्रशासकीय चर्चा झाल्याचे रत्नागिरीच्या जमीन प्रशासनाच्या नोंदींमधून दिसते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
या प्रक्रियेत अधिक अचूक जमीनसर्वेक्षण, जमिनीचे वर्गीकरण आणि महसूल नोंदी तयार करण्याला महत्त्व प्राप्त झाले. पारंपरिक जमीनहक्क आणि महसूलपद्धती यांचे सरकारी सर्वेक्षण व नोंदणीच्या माध्यमातून पुनर्गठन होत गेले.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== शेती, पाऊस आणि ग्रामीण संकटे ===
कोकणातील कृषी अर्थव्यवस्था मान्सूनवर मोठ्या प्रमाणात अवलंबून असल्यामुळे पर्जन्यमानातील बदलांचा पिकांच्या उत्पादनावर आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेवर परिणाम होत असे. रत्नागिरीच्या हंगाम अहवालांमध्ये विविध वर्षांतील पाऊस, भात आणि इतर पिकांची स्थिती, धान्याचे दर, पशुधनाची स्थिती आणि जमीन महसूल यांची नोंद करण्यात आली आहे.<ref name="RatnagiriSeasonReports">{{cite web
|title=Land Administration — Ratnagiri: Season Reports
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Ratnagiri%20and%20Sawantwadi/ratnagiri/land1_sec4.html
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
१८७५–७६मध्ये अतिवृष्टीमुळे भात आणि upland पिकांचे नुकसान झाल्याची, तर १८७६–७७मध्ये पावसाअभावी नाचणी, वरी, हरिक आणि भात यांसारख्या पिकांच्या उत्पादनावर परिणाम झाल्याची नोंद हंगाम अहवालांमध्ये आहे. या काळात काही भागांत मदतकार्य तसेच जमीन महसुलासंबंधी सवलती आणि थकबाकीची नोंदही आढळते.<ref name="RatnagiriSeasonReports"/>
या नोंदींवरून रत्नागिरीतील कृषक अर्थव्यवस्थेवर जमीनधारणा आणि लागवडीबरोबरच पर्जन्यमान, पीकउत्पादन, धान्याचे दर, पशुधन आणि जमीन महसूल यांचा परस्पर परिणाम होत असल्याचे दिसते. त्यामुळे जमीनधारणा असणे हे स्वतःपुरतेच ग्रामीण आर्थिक सुरक्षिततेचे निश्चित द्योतक मानता येत नाही.<ref name="RatnagiriSeasonReports"/>
=== ब्रिटिशकालीन गॅझेटियर निर्मिती ===
ब्रिटिश प्रशासनाने जिल्हानिहाय माहिती संकलित करून ''Gazetteer of the Bombay Presidency'' ही विस्तृत मालिका तयार केली. या गॅझेटियरमध्ये संबंधित जिल्ह्याची भौगोलिक रचना, इतिहास, लोकसंख्या, सामाजिक समूह, शेती, जमीन प्रशासन, महसूल, व्यापार, शिक्षण आणि इतर विषयांची माहिती एकत्रित करण्यात आली होती. त्यामुळे १९व्या शतकातील कोकणातील सामाजिक, आर्थिक आणि प्रशासकीय परिस्थितीच्या अभ्यासासाठी हे महत्त्वाचे वसाहतकालीन स्रोत ठरतात.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/><ref name="Thana1882"/></ref><ref name="KolabaJanjira1883"/>
१८८०चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Ratnagiri and Savantvadi'' हा या मालिकेतील दहावा खंड होता. त्यात जमीन प्रशासन, शेती, उत्पादन, व्यापार, इतिहास, महसूल आणि इतर विषयांची स्वतंत्र माहिती दिली आहे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
१८८२चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Thana'' हा खंड १३, भाग १ म्हणून प्रकाशित झाला. त्यात लोकसंख्या, सामाजिक समूह, शेती, जमीन आणि ग्रामीण जीवनासंबंधी माहिती आहे. त्याच वर्षी ''Thana: Places of Interest'' हा स्वतंत्र खंड १४ म्हणून प्रकाशित झाला; मात्र सामाजिक, कृषी आणि महसुली माहितीचा संदर्भ देताना मुख्यतः खंड १३चा वापर करणे अधिक योग्य आहे.<ref name="Thana1882"/><ref name="ThanaPlacesOfInterest1882">{{cite book
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Thana, Places of Interest
|volume=14
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1882
}}</ref>
१८८३चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira'' हा खंड ११ होता. त्यामध्ये लोकसंख्या, शेती, व्यापार, इतिहास, जमीन प्रशासन आणि महसूल व वित्त यांसाठी स्वतंत्र विभाग आहेत.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== जनगणना आणि सामाजिक वर्गीकरण ===
ब्रिटिशकालीन जनगणना ही कोकणातील सामाजिक समूहांच्या लोकसंख्येचा अभ्यास करण्यासाठी महत्त्वाची ऐतिहासिक साधने आहेत. १९व्या शतकाच्या उत्तरार्धातील जनगणना अहवालांमध्ये लोकसंख्या, धर्म, भाषा, जात, व्यवसाय, जन्मस्थान आणि इतर सामाजिक निकषांनुसार माहिती संकलित करण्यात आली. मात्र जातीय वर्गीकरणाची पद्धत काळानुसार बदलत गेली आणि विविध प्रदेशांतील स्थानिक सामाजिक संज्ञांना प्रशासकीय वर्गांमध्ये बसविण्याचा प्रयत्न करण्यात आला.<ref name="Census1931Bombay"/>
कुणबी समाजाच्या बाबतीत ही बाब विशेष महत्त्वाची आहे. ''Kunbi'', ''Kanbi'', ''Kulwadi'', ''Maratha-Kunbi'' आणि इतर संज्ञा वेगवेगळ्या जनगणनांमध्ये विविध पद्धतीने नोंदल्या गेल्या. त्यामुळे एका जनगणनेतील कुणबी लोकसंख्येची संख्या दुसऱ्या जनगणनेतील संख्येशी थेट तुलना करण्यापूर्वी त्या-त्या जनगणनेतील वर्गीकरणपद्धती, प्रशासकीय सीमा आणि संबंधित संज्ञेचा तत्कालीन अर्थ तपासणे आवश्यक आहे.<ref name="Census1931Bombay"/>
ब्रिटिशकालीन जनगणना ही तत्कालीन प्रशासकीय आणि लोकसंख्याशास्त्रीय वर्गीकरणाची महत्त्वाची नोंद असली तरी ती प्रत्येक व्यक्तीच्या सामाजिक ओळखीचे अपरिवर्तनीय किंवा अंतिम प्रतिबिंब मानता येत नाही. सामाजिक ओळख, स्थानिक प्रथा आणि प्रशासकीय वर्गीकरण यांच्यात संबंध असला तरी त्यांची उद्दिष्टे आणि स्वरूप वेगवेगळे होते.<ref name="Census1931Bombay"/>
=== कोकणातील कुणबी आणि ब्रिटिशकालीन नोंदी ===
ब्रिटिशकालीन नोंदींमध्ये कोकणातील कुणबी समाजाचा उल्लेख विविध सामाजिक, कृषी आणि जमीनविषयक संदर्भांत आढळतो. रत्नागिरीतील जमीन प्रशासनाच्या नोंदींमध्ये कुणबी हे वारसाहक्काने जमीन कसणाऱ्या कृषकांमध्ये मोठ्या प्रमाणावर असल्याचे नमूद केले आहे. थाणे आणि कोलाबा गॅझेटियरमध्येही कुणबींचा कृषी आणि ग्रामीण समाजाच्या संदर्भात उल्लेख आढळतो.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/><ref name="Thana1882"/><ref name="KolabaJanjira1883"/>
रत्नागिरीतील जमीन प्रशासनाच्या नोंदी विशेष महत्त्वाच्या आहेत कारण त्यामध्ये कुणबी कृषकांचा उल्लेख जमीनहिस्से, वारसाहक्की लागवड आणि खोती व्यवस्थेशी संबंधित संदर्भात करण्यात आला आहे. वारसाहक्की ''karda'' आणि कुणबी कृषक यांचा संबंध हा कोकणातील कुणबी समाजाच्या जमीनधारणेच्या इतिहासासाठी महत्त्वाचा प्राथमिक पुरावा आहे.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== ब्रिटिशकालीन परिवर्तन आणि कुणबी समाज ===
ब्रिटिश सत्तेने कोकणातील पारंपरिक जमीनव्यवस्था एकाच वेळी पूर्णपणे बदलली नाही. विद्यमान जमीनहक्क, वतन, खोती व्यवस्था आणि कृषकांच्या प्रथागत अधिकारांचा अभ्यास करून त्यांचे सर्वेक्षण, मोजणी आणि प्रशासकीय नोंदणी करण्यात आली. या प्रक्रियेमुळे काही पारंपरिक हक्क सरकारी नोंदींमध्ये अधिक स्पष्टपणे नोंदवले गेले, तर काही हक्कांचे स्वरूप नव्या प्रशासकीय आणि कायदेशीर चौकटीत निश्चित करण्यात आले.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
कुणबी समाजाच्या दृष्टीने या प्रक्रियेचा एक परिणाम असा झाला की जमीन, क्षेत्रफळ, सीमा, लागवड आणि महसूल यांच्याशी संबंधित माहिती अधिक पद्धतशीर सरकारी नोंदींमध्ये येऊ लागली. त्याच वेळी महसूल, भाडे, खोती हक्क आणि कृषकांचे पारंपरिक अधिकार यांच्यातील संबंध नव्या प्रशासकीय चौकटीत निश्चित करण्याची प्रक्रिया सुरू झाली.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
रत्नागिरीतील खोती व्यवस्थेच्या संदर्भात ब्रिटिश अधिकाऱ्यांनी खोत्यांचे हक्क, कृषकांचे हक्क आणि सरकारी महसूल यांच्याशी संबंधित प्रश्नांवर चौकशी व प्रशासकीय हस्तक्षेप केला. पुढील काळात खोती व्यवस्थेबाबत स्वतंत्र चौकशा आणि सुधारणा करण्यात आल्या.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== ब्रिटिशपूर्व ते ब्रिटिशकालीन संक्रमण ===
कोकणातील जमीनव्यवस्थेचा ब्रिटिशपूर्व ते ब्रिटिशकालीन प्रवास हा अचानक झालेला बदल नसून सातत्य आणि परिवर्तन यांचा मिश्र परिणाम होता. मराठा काळातील जमीनमोजणी, ग्रामअधिकारी, वतन, मिरास आणि खोती यांसारख्या संस्थांचे काही घटक ब्रिटिश काळाच्या सुरुवातीसही अस्तित्वात होते; मात्र ब्रिटिश प्रशासनाने त्यांचे सर्वेक्षण, जमीनमोजणी, नकाशे, लेखी नोंदी आणि महसूलव्यवस्थेच्या माध्यमातून अधिक औपचारिक पुनर्गठन करण्याचा प्रयत्न केला.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
या संक्रमणाचा परिणाम ग्रामीण समाजाच्या विविध स्तरांवर झाला. जमीनधारक, खोती, पाटील, कुलकर्णी, वारसाहक्की कृषक, भाडेकरू आणि मजूर यांच्यातील जमीन, महसूल, भाडे आणि प्रथागत हक्कांचे संबंध ब्रिटिशकालीन सर्वेक्षण, महसूल चौकशी आणि गावनिहाय नोंदवहींमध्ये अधिक स्पष्टपणे नोंदवले जाऊ लागले. रत्नागिरीतील १८२७–१८३० च्या सर्वेक्षणात शेतांचे क्षेत्रफळ, सीमा आणि गावातील स्थान ''khatavni'' या गावनिहाय नोंदवहीत नोंदविण्यात आले आणि त्यासोबत नकाशे तयार करण्यात आले. त्याच चौकशीत खोती गावांतील वारसाहक्की कृषक, ''vatandar kardas'', तसेच इतर प्रकारच्या कृषकांचे जमीनहक्क आणि खोत्यांशी असलेले संबंध तपासण्यात आले.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
एकोणिसाव्या शतकातील जिल्हा गॅझेटियर आणि त्यानंतरच्या जनगणना अहवालांमध्ये जमीन, शेती, लोकसंख्या, जात, व्यवसाय आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेविषयी मोठ्या प्रमाणावर सांख्यिकीय व वर्णनात्मक माहिती संकलित करण्यात आली. रत्नागिरी आणि सावंतवाडीचा १८८०चा गॅझेटियर, ठाण्याचा १८८२चा गॅझेटियर आणि कोलाबा व जंजिराचा १८८३चा गॅझेटियर यांमध्ये जमीन प्रशासन, शेती, महसूल, लोकसंख्या आणि सामाजिक जीवनासंबंधी स्वतंत्र विभाग आहेत.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/><ref name="Thana1882"/><ref name="KolabaJanjira1883"/>
त्यामुळे हे स्रोत कोकणातील एकोणिसाव्या शतकातील सामाजिक, कृषी आणि आर्थिक परिवर्तनाचा अभ्यास करण्यासाठी महत्त्वाचे ऐतिहासिक दस्तऐवज ठरतात.
कोकणातील कुणबी समाजासाठी या कालखंडाचे विशेष महत्त्व आहे. रत्नागिरीतील १८२९–१८३० च्या जमीनचौकशीच्या संदर्भात ''vatandar kardas'' या वारसाहक्की कृषकांमध्ये कुणबींचा मोठा वाटा असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद करण्यात आले आहे. या कृषकांकडे ठरावीक जमीनहिस्से होते; ते त्यांची लागवड आणि पडीत जमिनीचे व्यवस्थापन करीत आणि खोत्याशी संबंधित देयके देत असत.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्येही ''Kunbi'', ''Kanbi'', ''Kulwadi'', ''Maratta-Kunbi'' आणि संबंधित संज्ञांचे वर्गीकरण आढळते; मात्र ही वर्गीकरणे जनगणनेनुसार आणि प्रदेशानुसार बदलत असल्यामुळे त्यांच्या संख्यांची तुलना करताना संबंधित जनगणनेची वर्गीकरणपद्धती आणि तत्कालीन प्रशासकीय सीमा विचारात घेणे आवश्यक आहे. १९३१ च्या बॉम्बे जनगणनेत ''Kunbi, Kulwadi or Kanbi'', ''Lewa or Lewa Kunbi'' आणि ''Maratta-Kunbi'' अशा स्वतंत्र नोंदी आढळतात.<ref name="Census1931Bombay"/>
त्यामुळे आधुनिक कोकणातील कुणबी समाजाचा सामाजिक-आर्थिक इतिहास समजून घेण्यासाठी ब्रिटिशपूर्व ग्रामव्यवस्था, ब्रिटिशकालीन जमीनसर्वेक्षण, महसूल नोंदी, District Gazetteers आणि Census records यांचा परस्पर संदर्भात अभ्यास करणे आवश्यक आहे. या स्रोतांमधून कुणबींच्या कृषी व्यवसायाबरोबरच त्यांच्या जमीनहक्कांचा, खोती व्यवस्थेशी असलेल्या संबंधांचा आणि बदलत्या प्रशासकीय वर्गीकरणाचा इतिहास अधिक स्पष्टपणे समोर येतो.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/><ref name="Census1931Bombay"/>
== रत्नागिरीतील कुणबी ==
रत्नागिरी जिल्हा हा कोकणातील कुणबी समाजाच्या ऐतिहासिक अभ्यासासाठी विशेष महत्त्वाचा प्रदेश आहे. याचे एक प्रमुख कारण म्हणजे ब्रिटिशकालीन जमीन सर्वेक्षण, महसूल चौकशी, District Gazetteer आणि जनगणना अहवालांमध्ये रत्नागिरीतील कुणबींची तुलनेने सविस्तर नोंद आढळते. विशेषतः १८२७–१८३० च्या जमीन सर्वेक्षणाच्या नोंदींमध्ये वारसाहक्की कृषकांच्या संदर्भात कुणबींचा स्पष्ट उल्लेख आहे, तर १८८१ च्या जनगणनेत रत्नागिरी जिल्ह्यासाठी कुणबींची स्वतंत्र संख्या नोंदवण्यात आली आहे.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/><ref name="Baines1881">{{cite book
|last=Baines
|first=J. A.
|title=Imperial Census of 1881: Operations and Results in the Presidency of Bombay including Sind
|volume=1
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1882
}}</ref>
=== एकोणिसाव्या शतकातील रत्नागिरीची लोकसंख्या ===
एकोणिसाव्या शतकाच्या सुरुवातीला रत्नागिरी हा तुलनेने दाट लोकवस्तीचा आणि कृषीप्रधान जिल्हा होता. १८२० च्या सुमारास करण्यात आलेल्या लोकसंख्या मोजणीच्या संदर्भात रत्नागिरीची लोकसंख्या पावसाळी हंगामात ४,६२,६५१ इतकी असल्याचे १८८० च्या गॅझेटियरमध्ये नमूद करण्यात आले आहे. त्या काळात रत्नागिरी धान्य निर्यात करणारा प्रदेश असल्याचेही त्याच नोंदीत नमूद आहे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
एकोणिसाव्या शतकाच्या मध्यापासून रत्नागिरीची लोकसंख्या वाढत गेली; मात्र दुष्काळ, रोगराई, आर्थिक अडचणी आणि विशेषतः मुंबईकडे होणारे स्थलांतर यांमुळे लोकसंख्येच्या वाढीचे स्वरूप इतर जिल्ह्यांपेक्षा वेगळे राहिले. १८८१ च्या जनगणनेत रत्नागिरी जिल्ह्याची लोकसंख्या ९,९७,०९० नोंदली गेली होती. त्यापैकी ४७३,०५३ पुरुष आणि ५२४,०३७ स्त्रिया होत्या.<ref name="Baines1881"/>
१८८१ च्या रत्नागिरी जिल्ह्याच्या लोकसंख्येत शेतीचे स्थान अत्यंत महत्त्वाचे होते. त्या काळातील नोंदीनुसार शेतीवर अवलंबून असलेली लोकसंख्या ६,८९,८३७ इतकी होती. यामध्ये कृषी कामगार आणि त्यांच्यावर अवलंबून असलेल्या लोकांचा समावेश होता.<ref name="ImperialGazetteerRatnagiri">{{cite web
|title=Imperial Gazetteer of India: Ratnagiri
|url=https://library.bjp.org/jspui/bitstream/123456789/1895/1/The%20Imperial%20Gazetteer%20of%20India%20%20Vol-12%20%28Ratlam%20to%20Sirmur%29.pdf
|publisher=Imperial Gazetteer of India
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=== १८८१ची जनगणना आणि कुणबी ===
१८८१ च्या Bombay Presidency Censusमध्ये कृषक समूहांचे वर्गीकरण करताना ''Maratha Kunbi'' हा मोठा कृषक वर्ग म्हणून मांडण्यात आला. Censusच्या विश्लेषणात Deccan Kunbi आणि कोकणातील ''Maratha'' म्हणून नोंदविल्या जाणाऱ्या उपविभागाचा एकत्र विचार करण्यात आला होता. Census अधिकाऱ्याने या दोन्ही वर्गांमधील भेद अनेक ठिकाणी स्पष्ट नसल्याचे आणि काही प्रकरणांत तो मनमानी स्वरूपाचा असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Baines1881"/>
रत्नागिरी जिल्ह्याच्या बाबतीत १८८१ च्या Censusमध्ये **२,०५,७८४ कुणबी** आणि **२,७१,००० मराठा** अशी संख्या नोंदविण्यात आली होती. Censusच्या मूळ मजकुरात या आकडेवारीचा स्पष्ट उल्लेख आहे.<ref name="Baines1881"/>
१८८१ च्या Censusच्या वर्गीकरणातील ही अस्पष्टता रत्नागिरीतील कुणबींच्या ऐतिहासिक लोकसंख्येचा अभ्यास करताना विशेष लक्षात घ्यावी लागते. एका बाजूला Censusमध्ये ''Kunbi'' ही स्वतंत्र नोंद आहे; दुसऱ्या बाजूला त्याच अहवालात Deccan Kunbi आणि Konkanमधील Maratha यांच्या वर्गीकरणातील फरक नेहमी स्पष्ट नसल्याचे नमूद केले आहे. त्यामुळे १८८१ च्या आकडेवारीचा उपयोग त्या काळातील दस्तऐवजी लोकसंख्या-वर्गीकरणाचा पुरावा म्हणून करता येतो; मात्र त्यावरून आधुनिक काळातील कुणबी समाजाची लोकसंख्या निश्चित करता येत नाही.<ref name="Baines1881"/>
=== रत्नागिरी गॅझेटियरमधील कुणबी ===
१८८०चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Ratnagiri and Savantvadi'' हा रत्नागिरीतील कुणबी समाजाच्या इतिहासाच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचा वसाहतकालीन स्रोत आहे. या खंडात लोकसंख्या, शेती, जमीन प्रशासन, महसूल, व्यापार आणि १८२७–१८५१ च्या सर्वेक्षणाशी संबंधित स्वतंत्र माहिती दिली आहे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
गॅझेटियरच्या १८२७–१८३० च्या जमीन सर्वेक्षणासंबंधी नोंदींमध्ये रत्नागिरीतील वारसाहक्की कृषकांना ''hereditary cultivators'' आणि ''vatandar kardas'' असे संबोधले आहे. या कृषकांमध्ये कुणबींचा मोठा वाटा असल्याची स्पष्ट नोंद आहे. त्यामुळे रत्नागिरीतील कुणबींचे कृषक म्हणून असलेले स्थान हे केवळ नंतरच्या ethnographic वर्णनावर आधारित नसून ब्रिटिशकालीन जमीन चौकशीच्या नोंदींमध्येही दिसून येते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== कुणबी आणि वारसाहक्की जमीन ===
रत्नागिरीतील खोती गावांच्या संदर्भात ब्रिटिश अधिकाऱ्यांनी जमीनधारक आणि कृषक यांच्यातील संबंधांचा तपशीलवार अभ्यास केला. खोत्याच्या ताब्यातील जमिनीबरोबरच मोठ्या प्रमाणावर जमीन वारसाहक्की कृषकांच्या ताब्यात असल्याचे आढळले. या कृषकांमध्ये कुणबी मोठ्या संख्येने असल्याची नोंद करण्यात आली होती.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
या वारसाहक्की कृषकांना ''karda'' म्हणून संबोधले जात असे. ते विशिष्ट जमीनहिस्सा पिढ्यान्पिढ्या कसत आणि त्यावर लागवड करीत. काही नोंदींमध्ये अशा कृषकांच्या ताब्यातील जमीन, तिची लागवड आणि खोत्याशी असलेले आर्थिक संबंध यांचे वर्णन आढळते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
यावरून रत्नागिरीतील कुणबी समाजाची ऐतिहासिक ओळख केवळ ‘शेती करणारा समाज’ इतकी मर्यादित नव्हती. उपलब्ध जमीन प्रशासनाच्या नोंदींमध्ये काही कुणबी कृषक विशिष्ट जमीनहिस्से, वारसाहक्क आणि खोती महसूलव्यवस्थेशी संबंधित असल्याचे दिसते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== खोती व्यवस्था आणि कुणबी ===
रत्नागिरीच्या ग्रामीण समाजरचनेवर खोती व्यवस्थेचा मोठा प्रभाव होता. खोत हा गावाच्या महसूलव्यवस्थेतील मध्यस्थ किंवा हक्कधारक होता. खोती गावांमध्ये कृषकांकडून जमीन कसून घेऊन त्यांच्याकडून महसूल किंवा इतर देयकांची वसुली केली जात असे आणि खोत सरकारशी महसूलाच्या बाबतीत संबंधित असे.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
कुणबींचा या व्यवस्थेशी संबंध विविध स्वरूपाचा होता. उपलब्ध रत्नागिरीतील जमीन प्रशासनाच्या नोंदींमध्ये काही कुणबी वारसाहक्की ''karda'' कृषक म्हणून नोंदलेले आढळतात. त्यामुळे कुणबी समाजाला खोती व्यवस्थेत केवळ एकाच आर्थिक वर्गात बसविणे योग्य ठरणार नाही. जमीनहक्क, लागवडीचे स्वरूप आणि खोत्याशी असलेले आर्थिक संबंध यांनुसार कृषकांची स्थिती वेगवेगळी असू शकत होती.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== भातशेती आणि कृषीजीवन ===
रत्नागिरीतील कृषीव्यवस्थेत भातशेतीला महत्त्वाचे स्थान होते. जिल्ह्यातील पर्जन्यमान, भौगोलिक रचना, नदीखोरे आणि विविध प्रकारच्या जमिनी यांमुळे भात हे प्रमुख अन्नधान्य पीक होते. याशिवाय नाचणी, वरी, हरिक आणि इतर पिकांचीही लागवड केली जात होती.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
१८८३–८४ च्या आकडेवारीनुसार रत्नागिरी जिल्ह्यात १,०७८,८२१ एकर क्षेत्र प्रत्यक्ष लागवडीखाली होते. त्यापैकी १,०२०,५८३ एकरांवर धान्यपिके, ४१,७७३ एकरांवर कडधान्ये, २५,२२२ एकरांवर तेलबिया, ७,७२३ एकरांवर तंतुपिके आणि उर्वरित क्षेत्रावर बागायती, ऊस व इतर पिके घेतली जात होती.<ref name="ImperialGazetteerRatnagiri"/>
रत्नागिरीतील कृषीजीवन हे केवळ भातशेतीवर आधारित नव्हते. वर्खस किंवा डोंगराळ जमिनीवर नाचणी, वरी आणि हरिकसारखी पिके घेतली जात. Imperial Gazetteerनुसार १८८३–८४मध्ये वर्खस जमिनीवर हरिक, नाचणी आणि वरी यांसारख्या तुलनेने कमी पाण्यावर येणाऱ्या पिकांची लागवड मोठ्या प्रमाणावर होत होती. काही हलक्या व डोंगराळ जमिनींना सलग काही वर्षे लागवड केल्यानंतर पुन्हा काही काळ पडीत ठेवण्याची पद्धतही आढळत होती.<ref name="ImperialGazetteerRatnagiri"/>
=== रत्नागिरीतील ग्रामीण वितरण ===
१८८१मध्ये रत्नागिरी जिल्ह्यात १,२९७ गावे आणि शहरे नोंदली गेली होती. त्यापैकी १३८ वस्तींची लोकसंख्या २००पेक्षा कमी, ४५४ वस्तींची लोकसंख्या २०० ते ५००, ४३६ वस्तींची लोकसंख्या ५०० ते १,०००, तर २०५ वस्तींची लोकसंख्या १,००० ते २,००० होती. यावरून जिल्ह्याची लोकसंख्या मोठ्या शहरांपेक्षा असंख्य लहान ग्रामीण वसाहतींमध्ये मोठ्या प्रमाणावर विखुरलेली होती.<ref name="ImperialGazetteerRatnagiri"/>
मालवण, रत्नागिरी, चिपळूण, वेंगुर्ला, राजापूर आणि दापोली ही त्या काळातील प्रमुख शहरे होती. यांपैकी मालवण, रत्नागिरी, चिपळूण, वेंगुर्ला आणि राजापूर ही नगरपालिका असलेली शहरे होती.<ref name="ImperialGazetteerRatnagiri"/>
कुणबी समाजाच्या ग्रामीण वितरणाचा विचार करताना ही ग्रामरचना महत्त्वाची ठरते. रत्नागिरीतील कुणबी समाजाचा शेतीशी असलेला ऐतिहासिक संबंध लक्षात घेता त्यांची वस्ती कृषीप्रधान ग्रामीण भागांशी जोडलेली होती असे उपलब्ध जमीन प्रशासन आणि सामाजिक नोंदींवरून दिसते; मात्र प्रत्येक तालुका किंवा गावासाठी स्वतंत्र कुणबी लोकसंख्या उपलब्ध नसल्यामुळे जिल्ह्यातील कुणबींच्या सूक्ष्म भौगोलिक वितरणाचे अचूक प्रमाण निश्चित करता येत नाही.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== गावजीवन आणि सामाजिक रचना ===
रत्नागिरीतील ग्रामीण समाज हा कुटुंब, जमीन, शेती, ग्रामसंस्था, देवस्थान आणि स्थानिक परंपरांशी जोडलेला होता. कृषक कुटुंबांचे जीवन त्यांच्या जमीनहिस्स्याशी आणि शेतीच्या हंगामाशी संबंधित होते. पावसाळा, भातलागवड, कापणी, धान्यसाठा आणि बाजारपेठेतील विक्री यांमुळे ग्रामीण जीवनाचे वार्षिक चक्र निश्चित होत असे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
गॅझेटियरच्या वर्णनात रत्नागिरीतील ग्रामीण घरांची रचना, कौलारू घरे, अंगण आणि घरातील विविध भागांचा उल्लेख आढळतो. आर्थिक स्थिती आणि कुटुंबाच्या आकारमानानुसार घरांच्या स्वरूपात फरक असल्याचेही दिसते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
या सामाजिक रचनेत जात, कुटुंब, जमीनधारणा आणि व्यवसाय यांचा परस्पर संबंध होता. तथापि कुणबी समाजातील प्रत्येक कुटुंबाची आर्थिक स्थिती समान होती असे मानता येत नाही. जमीनहक्क, शेतीचे क्षेत्र, कर्ज, उत्पादन आणि बाहेरील रोजगाराच्या संधी यांनुसार आर्थिक फरक अस्तित्वात असू शकत होते.
=== कुणबी, मराठा आणि रत्नागिरीतील सामाजिक वर्गीकरण ===
रत्नागिरीतील कुणबींच्या इतिहासाचा अभ्यास करताना ''Kunbi'' आणि ''Maratha'' या संज्ञांमधील ऐतिहासिक संबंध अत्यंत सावधपणे तपासणे आवश्यक आहे. १८८१ च्या Censusमध्ये ''Maratha Kunbi'' हा व्यापक कृषक वर्ग वापरण्यात आला; त्याच वेळी रत्नागिरीसाठी ''Kunbi'' आणि ''Maratha'' यांच्या स्वतंत्र संख्याही नोंदविण्यात आल्या. Census अधिकाऱ्याने Konkanमधील Maratha आणि Deccan Kunbi यांच्या वर्गीकरणातील भेद काही ठिकाणी स्पष्ट नसल्याचे नमूद केले होते.<ref name="Baines1881"/>
त्यामुळे १८८१ च्या रत्नागिरीतील २,०५,७८४ कुणबी आणि २,७१,००० मराठा या संख्यांवरून दोन्ही समूह स्वतंत्र, पूर्णपणे वेगळे किंवा पूर्णपणे समान सामाजिक समूह होते असा निष्कर्ष काढता येत नाही. त्या आकडेवारीचे अर्थ लावताना ब्रिटिश जनगणनेची वर्गीकरणपद्धती आणि त्या काळातील स्थानिक सामाजिक ओळखी विचारात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="Baines1881"/>
=== सावंतवाडीशी संबंध ===
रत्नागिरी आणि सावंतवाडी हे दक्षिण कोकणातील परस्पर संबंधित ऐतिहासिक प्रदेश होते. १८८० च्या ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Ratnagiri and Savantvadi'' मध्ये या दोन्ही प्रदेशांचा एकाच खंडात स्वतंत्र विभागांसह अभ्यास करण्यात आला आहे. सावंतवाडी संस्थानातील वाडी, कुडाळ आणि बांदा या विभागांचा तसेच मालवण, वेंगुर्ला आणि दक्षिण कोकणातील इतर बाजारपेठांचा व्यापार आणि दळणवळणाच्या माध्यमातून परस्पर संबंध होता.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
सावंतवाडीच्या १८५१ च्या जनगणनेनुसार संस्थानाची लोकसंख्या १,५०,०६५ होती. १८७२ च्या जनगणनेत ती वाढून १,९०,८१४ झाली. १८७२ च्या वर्गीकरणानुसार ७३,६२७ व्यक्ती शेती आणि पशुधनाशी संबंधित व्यवसायात होत्या; ही संख्या एकूण लोकसंख्येच्या ३८.५८ टक्के होती.<ref name="SavantvadiPopulation">{{cite web
|title=Population — Savantvadi
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|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
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सावंतवाडीतील कृषी आणि ग्रामीण समाजाचा अभ्यास रत्नागिरीतील कुणबी समाजाशी थेट समानता सिद्ध करण्यासाठी नव्हे, तर दक्षिण कोकणातील कृषी, बाजारपेठ आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या परस्परसंबंधांची ऐतिहासिक पार्श्वभूमी समजून घेण्यासाठी महत्त्वाचा आहे.
=== दक्षिण कोकणातील सामाजिक वैशिष्ट्ये ===
दक्षिण कोकणातील ग्रामीण समाजाची काही वैशिष्ट्ये रत्नागिरी, मालवण, कुडाळ, वेंगुर्ला आणि सावंतवाडी या प्रदेशांमध्ये आढळतात. पर्जन्याधारित शेती, डोंगराळ आणि किनारी भूप्रदेश, भातशेती, बागायती, जंगल आणि समुद्राशी संबंधित आर्थिक व्यवहार या प्रदेशाच्या ग्रामीण जीवनाचे महत्त्वाचे घटक होते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
एकोणिसाव्या शतकाच्या उत्तरार्धात रत्नागिरीतील लोकसंख्या, मर्यादित कृषी संसाधने आणि रोजगाराच्या उपलब्धतेतील असमतोल यांचा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेवर परिणाम झाला. विशेषतः मुंबईमध्ये वाढणाऱ्या मजूर मागणीमुळे रत्नागिरीतून हंगामी स्थलांतराला चालना मिळाली. १८७७–७८ च्या काळात रत्नागिरीतील गरीब कामगारांची नेहमीपेक्षा जवळजवळ दुप्पट संख्या, म्हणजे सुमारे १,५०,००० व्यक्ती, कामाच्या हंगामात मुंबईकडे गेल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद आहे. त्यापैकी अनेक जण पुढील पीकहंगामापूर्वी रत्नागिरीत परतले.<ref name="RatnagiriFamines">{{cite web
|title=Famines and Scarcity — Ratnagiri
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|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
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रत्नागिरीतील लोकसंख्येचा मुंबईशी संबंध पुढील काळातही वाढत गेला. १८७२ च्या Censusनुसार मुंबई शहरात रत्नागिरी जिल्ह्यात जन्मलेल्या ७०,९४७ व्यक्ती होत्या; १८८१ च्या Censusमध्ये ही संख्या १,२६,१९० झाली. या वाढीचे प्रमाण जवळजवळ ७८ टक्के होते. Imperial Gazetteerने रत्नागिरीतील लोकसंख्येचा मुंबईतील रोजगार, औद्योगिक कामगारवर्ग आणि इतर सेवांशी असलेला संबंधही अधोरेखित केला आहे.<ref name="ImperialGazetteerRatnagiri"/>
=== कुणबी समाज आणि स्थलांतराची सुरुवात ===
रत्नागिरीतील मर्यादित कृषी संसाधने आणि मुंबईतील वाढती मजूर मागणी यांमुळे एकोणिसाव्या शतकात ग्रामीण भागातून मुंबईकडे हंगामी स्थलांतर वाढले. १८५० च्या दशकात रत्नागिरीतील कृषक मुंबईकडे हंगामानुसार जात असल्याच्या नोंदी आढळतात. एका सर्वेक्षण अधिकाऱ्याच्या नोंदीनुसार एका अंतर्गत तालुक्यातील प्रत्येक गावातून काही कृषक ऑक्टोबरच्या सुमारास मुंबईकडे जात आणि मान्सूनच्या सुरुवातीला शेतीच्या कामासाठी परतत असत.<ref name="ImperialGazetteerRatnagiri"/>
१८७७–७८ च्या काळातील गॅझेटियरची नोंदही या हंगामी स्थलांतराच्या स्वरूपाला पुष्टी देते. कामाच्या हंगामात मुंबईकडे गेलेले मोठ्या संख्येतील ग्रामीण कामगार पुढील पीकहंगामापूर्वी रत्नागिरीत परतत होते. त्यामुळे शेती आणि शहरी मजुरी यांच्यात परस्परपूरक संबंध निर्माण झाला होता.<ref name="RatnagiriFamines"/>
या स्थलांतरामुळे काही कुटुंबांच्या आर्थिक जीवनात ग्रामीण शेती आणि शहरी रोजगार यांचे मिश्र स्वरूप निर्माण झाले. गावातील जमीन आणि शेतीशी संबंध कायम ठेवत मुंबईत हंगामी मजुरी करणे हा काही ग्रामीण कुटुंबांसाठी उत्पन्नाचा पूरक मार्ग बनला. पुढील काळात याच प्रक्रियेतून हंगामी, परिपत्रक आणि कायमस्वरूपी स्थलांतराचे विविध नमुने विकसित झाले.
=== रत्नागिरीतील कुणबींची आर्थिक स्थिती ===
ब्रिटिशकालीन जमीन प्रशासनाच्या नोंदींवरून रत्नागिरीतील कुणबी समाजाची आर्थिक स्थिती एकसमान नव्हती. १८२७–१८३० च्या जमीन चौकशीमध्ये कुणबींचा उल्लेख वारसाहक्की कृषकांच्या संदर्भात आढळतो. या कृषकांकडे विशिष्ट जमीनहिस्से होते आणि ते त्या जमिनीची लागवड करीत होते. खोती गावांमध्ये अशा कृषकांचे खोतांशी महसूल आणि उत्पादनाशी संबंधित संबंध होते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
त्यामुळे रत्नागिरीतील कुणबी समाजाला केवळ एकसंध आर्थिक वर्ग म्हणून पाहणे योग्य ठरणार नाही. उपलब्ध नोंदींमध्ये वारसाहक्की कृषक, जमीन कसणारे इतर कृषक आणि खोती व्यवस्थेशी संबंधित विविध प्रकारचे जमीनहक्क व आर्थिक संबंध आढळतात. त्यामुळे ‘कुणबी म्हणजे सर्वच लहान शेतकरी’ किंवा ‘कुणबी म्हणजे सर्वच जमीनमालक’ अशी एकरेषीय मांडणी उपलब्ध ऐतिहासिक पुराव्यांशी सुसंगत ठरणार नाही.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
कृषी उत्पादन, जमीनधारणा आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेवर पर्जन्यमान, पिकांची स्थिती, जमिनीचा प्रकार आणि महसूलाची मागणी यांचा परिणाम होत असे. रत्नागिरीच्या हंगाम अहवालांमध्ये पाऊस, पिकांचे उत्पादन, धान्याचे दर, पशुधनाची हानी आणि जमीन महसूल यांची वर्षनिहाय नोंद आढळते. त्यामुळे कृषक कुटुंबांची आर्थिक स्थिती केवळ त्यांच्या जमीनहक्कावर अवलंबून नसून कृषी उत्पादन आणि त्या काळातील आर्थिक परिस्थितीशीही संबंधित होती.<ref name="RatnagiriSeasonReports"/>
एकोणिसाव्या शतकाच्या उत्तरार्धात मुंबईशी वाढलेल्या आर्थिक संबंधांचाही रत्नागिरीच्या ग्रामीण समाजावर परिणाम झाला. रोजगाराच्या शोधात रत्नागिरीतून मुंबईकडे हंगामी स्थलांतर होत असल्याची नोंद उपलब्ध गॅझेटियर आणि इतर वसाहतकालीन स्रोतांमध्ये आढळते. या प्रक्रियेमुळे काही ग्रामीण कुटुंबांच्या उपजीविकेत शेतीबरोबर बाहेरील मजुरी किंवा रोजगाराचा सहभाग वाढला.<ref name="ImperialGazetteerRatnagiri"/>
=== रत्नागिरीतील कुणबींच्या इतिहासाचे वैशिष्ट्य ===
रत्नागिरीतील कुणबी समाजाच्या इतिहासाचे एक महत्त्वाचे वैशिष्ट्य म्हणजे त्यांचा उल्लेख जमीन प्रशासन, कृषी आणि जनगणना या वेगवेगळ्या प्रकारच्या वसाहतकालीन नोंदींमध्ये आढळतो. १८२७–१८३० च्या जमीन चौकशीमध्ये कुणबींचा वारसाहक्की कृषकांच्या संदर्भात उल्लेख करण्यात आला; १८८० च्या ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Ratnagiri and Savantvadi'' मध्ये जमीन प्रशासन, शेती, महसूल आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेची विस्तृत माहिती नोंदविण्यात आली; तर १८८१ च्या Censusमध्ये रत्नागिरी जिल्ह्यासाठी कुणबींची स्वतंत्र संख्या नोंदविण्यात आली.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/><ref name="Baines1881"/>
या विविध स्रोतांचा एकत्रित अभ्यास केल्यास रत्नागिरीतील कुणबी समाजाचा इतिहास केवळ ‘शेतकरी जात’ या संक्षिप्त वर्णनापुरता मर्यादित राहत नाही. उपलब्ध नोंदींमध्ये कुणबी हे जमीन कसणारे कृषक, वारसाहक्की कृषक आणि खोती महसूलव्यवस्थेशी संबंधित ग्रामीण घटक म्हणून दिसतात. पुढील काळात रत्नागिरीतील ग्रामीण समाजाचा मुंबईतील रोजगाराशी वाढता संबंधही दिसून येतो.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/><ref name="ImperialGazetteerRatnagiri"/>
मात्र या ऐतिहासिक नोंदींचे अर्थ लावताना काळानुसार बदललेले सामाजिक आणि प्रशासकीय वर्गीकरण लक्षात घेणे आवश्यक आहे. ''Kunbi'', ''Maratha'', ''Maratha-Kunbi'' आणि संबंधित संज्ञांचा वापर वेगवेगळ्या जनगणना आणि प्रशासकीय नोंदींमध्ये समान पद्धतीने झालेला नाही. त्यामुळे १८८१ च्या Censusमधील कुणबींची संख्या ही त्या काळातील ब्रिटिश जनगणनात्मक वर्गीकरणाची नोंद म्हणून पाहणे आवश्यक आहे; तिची आजच्या प्रशासकीय किंवा सामाजिक वर्गीकरणाशी थेट तुलना करता येत नाही.<ref name="Baines1881"/>
== रायगड आणि ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशातील कुणबी ==
आधुनिक रायगड जिल्ह्याचा मोठा भाग ब्रिटिशकालीन ''Kolaba'' जिल्ह्याचा भाग होता. त्यामुळे रायगडातील कुणबी समाजाचा ऐतिहासिक अभ्यास करताना जुन्या प्रशासकीय नोंदींमधील ''Kolaba'' या संज्ञेचा संदर्भ लक्षात घेणे आवश्यक आहे. १८८३चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira'' हा या प्रदेशाच्या इतिहास, लोकसंख्या, शेती, जमीन प्रशासन, महसूल आणि व्यापाराच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचा वसाहतकालीन स्रोत आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
रायगडातील कुणबी समाजाचा ऐतिहासिक अभ्यास करताना कृषी, जमीनधारणा, ग्रामजीवन आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्था यांचा विचार करणे आवश्यक आहे. त्याचबरोबर महाड, माणगाव, रोहा, पेण, अलिबाग आणि इतर भागांचा व्यापार, नदीमार्ग आणि किनारी बाजारपेठांशी असलेला संबंधही या प्रदेशाच्या सामाजिक-आर्थिक इतिहासाला महत्त्वाचा संदर्भ देतो.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== ऐतिहासिक कोलाबा आणि आधुनिक रायगड ===
ब्रिटिशकालीन ''Kolaba'' जिल्ह्याच्या भौगोलिक सीमा आजच्या रायगड जिल्ह्याच्या सीमांशी तंतोतंत समान नव्हत्या. प्रशासकीय पुनर्रचना आणि जिल्ह्यांच्या सीमांतील बदलांमुळे जुन्या जनगणना, गॅझेटियर किंवा महसूल नोंदींमधील ''Kolaba'' या संज्ञेचा आधुनिक रायगडशी संबंध जोडताना संबंधित काळातील प्रशासकीय सीमा विचारात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
१८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये कोलाबा जिल्ह्याच्या लोकसंख्या, शेती, उत्पादन, जमीन प्रशासन, महसूल आणि व्यापाराचे स्वतंत्र वर्णन करण्यात आले आहे. या प्रशासकीय चौकटीत महाड आणि माणगावसारखे अंतर्गत कृषी प्रदेश तसेच अलिबाग, पेण आणि इतर किनारी भागांतील व्यापारकेंद्रांचा समावेश होता.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== कोलाबा प्रदेशातील कुणबींचे वितरण ===
१८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये कोलाबा जिल्ह्यातील सामाजिक समूहांचे वर्णन करताना कुणबींचा उल्लेख जिल्ह्याच्या विविध भागांत आढळणाऱ्या कृषक समुदायाच्या संदर्भात करण्यात आला आहे. सामाजिक वितरणाच्या वर्णनात किनारी भागातील काही गावांमध्ये भंडारी आणि कोळी यांची उपस्थिती नमूद करताना, मराठे प्रामुख्याने अंतर्गत भागात आढळत असल्याचे आणि कुणबी संपूर्ण जिल्ह्यात आढळत असल्याचे नोंदविण्यात आले आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
या नोंदीवरून एकोणिसाव्या शतकाच्या उत्तरार्धात कुणबींची उपस्थिती कोलाबा जिल्ह्याच्या विविध भागांत व्यापक होती, असे दिसते. तथापि ''संपूर्ण जिल्ह्यात आढळतात'' या गॅझेटियरमधील वर्णनाचा अर्थ प्रत्येक गावात कुणबी बहुसंख्य होते असा घेता येत नाही. तो त्यांच्या जिल्हास्तरीय भौगोलिक उपस्थितीचा वर्णनात्मक उल्लेख म्हणूनच समजणे अधिक योग्य आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== महाड ===
महाड हे ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशातील महत्त्वाचे अंतर्गत व्यापारी आणि वाहतूककेंद्र होते. सावित्री नदीमार्गे महाडचा कोकण किनारा तसेच सह्याद्रीच्या घाटमार्गांशी संपर्क होता. त्यामुळे महाड परिसरातील कृषी उत्पादनाचा स्थानिक बाजारपेठा आणि व्यापाराशी संबंध निर्माण झाला होता.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
महाड आणि माणगाव परिसरातील कृषक समाजाच्या वर्णनात १८८३ च्या ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira'' मध्ये स्थानिक भौगोलिक परिस्थिती, जमिनीची उत्पादकता आणि शेतीपद्धतींचा उल्लेख करण्यात आला आहे. काही भागांतील जमिनीची तुलनेने कमी उत्पादकता आणि कृषीवर असलेले अवलंबित्व यांचा ग्रामीण समाजाच्या आर्थिक स्थितीशी संबंध असल्याचे त्या वर्णनातून दिसते. त्याच संदर्भात कुणबींना मेहनती कृषक म्हणून वर्णन करण्यात आले असून, भातशेतीसाठी पाण्याचे प्रवाह नियंत्रित करण्याच्या आणि पाण्याचा उपयोग करण्याच्या त्यांच्या कृषी कौशल्याचा उल्लेख आढळतो.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
गॅझेटियरमधील अशा वर्णनांचा वापर करताना त्यांची वसाहतकालीन निर्मिती आणि त्या काळातील प्रशासकीय व सामाजिक दृष्टिकोन लक्षात घेणे आवश्यक आहे. त्यामुळे कुणबींच्या आर्थिक किंवा सामाजिक स्थितीबाबत गॅझेटियरमधील वर्णन हे ऐतिहासिक स्रोत म्हणून महत्त्वाचे असले तरी त्यातील मूल्यनिर्णय किंवा विशेषणे आधुनिक समाजशास्त्रीय निष्कर्ष म्हणून स्वीकारता येत नाहीत.
=== महाडमधील कुणबी बोली : A. M. Ghatge ===
महाड परिसरातील कुणबी समाजाच्या भाषिक अभ्यासासाठी अमृत माधव घाटगे यांचा ''Kunbi of Mahad'' हा महत्त्वाचा स्रोत आहे. हा ग्रंथ १९६६ मध्ये महाराष्ट्र राज्य साहित्य आणि संस्कृती मंडळाच्या ''A Survey of Marathi Dialects'' या मालिकेतील तिसरा खंड म्हणून प्रकाशित झाला.<ref name="GhatgeKunbiMahad">{{cite book
|last=Ghatge
|first=A. M.
|title=Kunbi of Mahad
|series=A Survey of Marathi Dialects
|volume=III
|publisher=State Board for Literature and Culture, Bombay
|year=1966
}}</ref>
''Kunbi of Mahad'' हा ग्रंथ महाड परिसरातील कुणबींच्या बोलीचा स्वतंत्र भाषाशास्त्रीय अभ्यास म्हणून महत्त्वाचा आहे. घाटगे यांच्या भाषिक सर्वेक्षणाच्या कार्यामध्ये महाराष्ट्र आणि महाराष्ट्राबाहेरील विविध मराठी व संबंधित भाषिक प्रकारांचा अभ्यास करण्यात आला होता. या व्यापक सर्वेक्षणाच्या पार्श्वभूमीवर महाडच्या कुणबी बोलीचा अभ्यास करण्यात आला.<ref name="SurveyDialectsMarathi">{{cite web
|title=Survey of Dialects of Marathi Language
|url=https://sdml.ac.in/previous-projects
|publisher=Deccan College / Survey of Dialects of Marathi Language
}}</ref>
या लेखात ''Kunbi of Mahad''चा उपयोग मुख्यतः महाड परिसरातील कुणबींच्या भाषिक ओळखीचा आणि बोलीवैशिष्ट्यांच्या अभ्यासासाठी केला जातो. अमृत माधव घाटगे यांच्या प्रमुख ग्रंथांमध्ये ''Kunbi of Mahad'' (१९६६) या ग्रंथाचा समावेश असून तो ''A Survey of Marathi Dialects'' या मालिकेतील खंड आहे.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/> मात्र एखाद्या विशिष्ट बोलीचे अस्तित्व हे स्वतःपुरते त्या समाजाची संपूर्ण जातीय उत्पत्ती किंवा अखंड ऐतिहासिक वंशावळ सिद्ध करणारे प्रमाण मानता येत नाही.
महाडच्या कुणबी बोलीचा अभ्यास या लेखातील भाषिक इतिहासाच्या संदर्भात पूरक पुरावा म्हणून महत्त्वाचा आहे. ध्वनीरचना, शब्दसंपत्ती, व्याकरण आणि स्थानिक भाषिक वैशिष्ट्यांचा अभ्यास केल्यामुळे महाड परिसरातील प्रादेशिक भाषिक ओळख आणि सामाजिक इतिहासाच्या काही पैलूंचा अभ्यास करता येतो. तथापि भाषिक साम्य किंवा बोलीवैशिष्ट्यांवरून एकट्या भाषाशास्त्रीय पुराव्याच्या आधारे कुणबी समाजाची जातीय उत्पत्ती निश्चित करणे योग्य ठरणार नाही.
=== माणगाव ===
माणगाव हा ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्यातील महत्त्वाचा अंतर्गत प्रदेश होता. सह्याद्रीच्या पायथ्याशी असलेली भौगोलिक स्थिती आणि नदीखोऱ्यांशी असलेला संबंध यांमुळे माणगाव परिसरातील ग्रामीण अर्थव्यवस्थेत शेतीला महत्त्वाचे स्थान होते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
महाड आणि माणगाव परिसराच्या सामाजिक-आर्थिक वर्णनात १८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये काही भागांतील जमिनीची तुलनेने कमी उत्पादकता आणि कृषी परिस्थितीचा उल्लेख करण्यात आला आहे. त्याच संदर्भात कुणबी कृषकांच्या आर्थिक स्थितीचा आणि त्यांच्या शेतीशी असलेल्या संबंधांचा उल्लेख आढळतो.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
या नोंदींवरून माणगाव परिसरातील कुणबी समाजाचा अभ्यास करताना जमीन, कृषी उत्पादन, पाण्याची उपलब्धता आणि स्थानिक भौगोलिक परिस्थिती यांचा विचार करणे आवश्यक ठरते. तथापि गॅझेटियरमधील वर्णन हे त्या काळातील प्रशासकीय निरीक्षण असल्यामुळे त्यातील सामाजिक किंवा आर्थिक मूल्यनिर्णय आधुनिक सामाजिक वर्गीकरणाप्रमाणे स्वीकारणे योग्य ठरणार नाही.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== रोहा ===
रोहा हा कुंडलिका नदीच्या खोऱ्याशी संबंधित महत्त्वाचा प्रदेश होता. नदीमार्ग आणि अंतर्गत वाहतुकीशी असलेल्या संबंधांमुळे रोहा परिसराचा कृषी उत्पादन, बाजारपेठा आणि व्यापाराशी संबंध होता. कोलाबा गॅझेटियरमध्ये रोहा आणि कुंडलिका नदीचा उल्लेख भौगोलिक, आर्थिक आणि वाहतुकीच्या संदर्भात आढळतो.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
रोहा परिसरातील ग्रामीण अर्थव्यवस्थेचा विचार करताना भातशेती, नदीखोरे आणि स्थानिक बाजारपेठा हे महत्त्वाचे घटक होते. तथापि रोहा तालुका किंवा त्यातील प्रत्येक गावासाठी स्वतंत्र कुणबी लोकसंख्येची विश्वसनीय ऐतिहासिक आकडेवारी उपलब्ध नसल्यामुळे तालुकानिहाय किंवा गावनिहाय कुणबी लोकसंख्येचे प्रमाण निश्चित करणे योग्य ठरणार नाही.
=== पेण ===
पेण हे ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्यातील महत्त्वाचे बाजारपेठीय आणि व्यापारी केंद्र होते. त्याचा किनारी भाग, अंतर्गत कोकण आणि मुंबईशी असलेला वाहतूक व व्यापारसंबंध यांमुळे पेणला प्रादेशिक अर्थव्यवस्थेत महत्त्वाचे स्थान प्राप्त झाले होते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
पेण परिसरातील ग्रामीण समाज हा विविध सामाजिक आणि व्यवसायिक समूहांनी बनलेला होता. कोलाबा गॅझेटियरमध्ये कुणबींसह विविध सामाजिक समूहांची जिल्ह्यातील उपस्थिती नोंदविण्यात आली आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
त्यामुळे पेण परिसरातील कुणबी समाजाचा इतिहास हा केवळ एका स्वतंत्र गावसमूहाच्या चौकटीत न पाहता कृषी, बाजारपेठ, वाहतूक आणि बहुजातीय ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या व्यापक संदर्भात पाहणे अधिक योग्य ठरते.
=== अलिबाग आणि किनारी कोलाबा ===
अलिबाग हे कोलाबा जिल्ह्याचे प्रशासकीय केंद्र आणि महत्त्वाचे किनारी ठिकाण होते. समुद्र, खाड्या, बंदरे आणि मुंबईशी असलेल्या जवळिकीमुळे अलिबाग परिसराची अर्थव्यवस्था अंतर्गत कोलाबाच्या कृषी अर्थव्यवस्थेपेक्षा अधिक वैविध्यपूर्ण होती<ref name="KolabaJanjira1883"/>
किनारी भागातील सामाजिक रचनेत कुणबींबरोबर कोळी, भंडारी आणि इतर समुदायांचा सहभाग होता. १८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये थळ आणि अलिबागच्या आसपासच्या गावांमध्ये भंडारी आणि कोळींचा उल्लेख आहे, तर कुणबी संपूर्ण जिल्ह्यात आढळत असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
यामुळे अलिबाग परिसरातील कुणबींचे जीवन केवळ भातशेतीपुरते मर्यादित नव्हते. किनारी बाजारपेठा, वाहतूक, मजुरी, व्यापार आणि शेती या विविध आर्थिक क्षेत्रांशी त्यांचा संबंध असू शकत होता; मात्र प्रत्येक आर्थिक क्रियेचा कुणबी समाजाशी थेट संबंध असल्याचा निष्कर्ष काढण्यासाठी स्वतंत्र पुरावा आवश्यक आहे.
=== भातशेती ===
कोलाबा प्रदेशातील कृषीव्यवस्थेत भाताला महत्त्वाचे स्थान होते. पावसाचे प्रमाण, नदीखोरे, खाचर जमीन आणि पाण्याचे व्यवस्थापन यांमुळे भातशेती हा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेचा प्रमुख भाग बनला होता.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
कुणबी कृषकांच्या संदर्भात गॅझेटियरमध्ये पाण्याचे अडथळे बांधणे, पाण्याचे प्रवाह वळवणे आणि भातखाचरांसाठी जलव्यवस्था करणे यांचे वर्णन आहे. यावरून कोलाबा प्रदेशातील कुणबींचे कृषी कौशल्य स्थानिक भूगोलाशी जुळवून घेतलेले होते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
भाताबरोबर नाचणी आणि इतर कोरडवाहू पिके घेतली जात होती. काही भागात बागायती पिके घेण्यासाठी पाणी उपलब्ध असल्यास जमीन सुधारण्याचे प्रयत्न केले जात.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== जमीनव्यवस्था ===
कोलाबा प्रदेशातील जमीनव्यवस्था ब्रिटिश काळात सर्वेक्षण, जमीनमोजणी आणि महसूल निश्चितीच्या प्रक्रियेतून अधिक औपचारिक झाली. १८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये ''Land Administration'' आणि ''British System: Surveys, Settlement, Results'' असे स्वतंत्र विभाग आहेत.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
या व्यवस्थेत जमीनधारक, कृषक, खोत आणि महसूल प्रशासन यांच्यातील संबंध प्रदेशानुसार बदलत होते. कोकणातील खोती व्यवस्था ही विशेषतः जमीन महसूल आणि गावाच्या आर्थिक रचनेशी संबंधित होती. त्यामुळे कुणबींच्या सामाजिक स्थितीचा अभ्यास करताना त्यांच्या जातीय ओळखीबरोबर जमीनधारणा आणि महसूलव्यवस्थेतील स्थान तपासणे आवश्यक आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== कुणबींची सामाजिक आणि आर्थिक स्थिती ===
१८८३ च्या ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira'' मधील वर्णनानुसार कोलाबा जिल्ह्यातील कुणबी प्रामुख्याने शेतीशी संबंधित कृषक होते. त्यांच्या उपजीविकेत बैलजोडी, गुरेढोरे, कोंबड्या आणि शेतीची विविध अवजारे यांचा उपयोग होत असल्याचे वर्णन करण्यात आले आहे. नांगर, कुळव, विळी, कोयते आणि इतर शेतीची साधने त्यांच्या कृषी जीवनाचा भाग होती.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
गॅझेटियरमध्ये काही कुणबी कुटुंबांकडे नाचणी किंवा हरिक यांसारख्या धान्यांचा काही महिन्यांसाठी साठा असल्याचे, तर काही कुटुंबांकडे पुरेसा धान्यसाठा नसल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. यावरून त्या काळातील कुणबी कुटुंबांच्या आर्थिक परिस्थितीत फरक होता, असे दिसून येते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
महाड आणि माणगाव परिसरातील काही भागांच्या संदर्भात गॅझेटियरमध्ये जमिनीची उत्पादकता आणि कृषी परिस्थितीचा उल्लेख करण्यात आला आहे. काही भागांत कृषकांची आर्थिक स्थिती प्रतिकूल असल्याचे वर्णन आहे, तर अधिक अनुकूल जमीन आणि पाण्याची उपलब्धता असलेल्या ठिकाणी कुणबी कृषकांनी बागायती पिकांचा उपयोग करून शेती अधिक उत्पादक करण्याचा प्रयत्न केल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
या नोंदींवरून कोलाबा प्रदेशातील कुणबी समाजाची आर्थिक स्थिती एकसमान नव्हती, असे दिसते. जमीन, पाणी, पिकांची उत्पादकता आणि उपलब्ध कृषी साधने यांनुसार कुटुंबांच्या आर्थिक परिस्थितीत फरक असू शकत होता.
=== कुणबींची घरे आणि गावजीवन ===
१८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये कोलाबा जिल्ह्यातील कुणबींच्या घरांच्या रचनेचेही वर्णन करण्यात आले आहे. माती किंवा खडीच्या भिंती, गवत किंवा भाताच्या पेंढ्याचे छप्पर आणि लाकडी आधार असलेली घरे आढळत असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. घरातील जागेचा उपयोग कुटुंबाचा दैनंदिन वावर, स्वयंपाक, झोपणे आणि साठवणूक यासाठी केला जात असे. घराजवळ गुरेढोरे आणि शेतीची अवजारे ठेवण्यासाठीही जागा असल्याचे वर्णन आढळते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
ही वर्णने एकोणिसाव्या शतकातील कोलाबा प्रदेशातील ग्रामीण जीवनाची ऐतिहासिक झलक देतात. तथापि गॅझेटियरमधील घरांच्या वर्णनावरून संपूर्ण कुणबी समाजाची घररचना एकसारखी होती असा निष्कर्ष काढता येत नाही. प्रदेश, आर्थिक स्थिती, जमीनधारणा आणि स्थानिक उपलब्ध साधनसामग्रीनुसार घरांच्या रचनेत फरक असण्याची शक्यता होती.
=== सामाजिक रचना आणि बहुजातीय ग्रामजीवन ===
कोलाबा प्रदेशातील गावे एकाच सामाजिक समूहाची वस्ती नसून विविध समुदायांच्या मिश्र वस्तीचे स्वरूप त्यात आढळत होते. १८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये कुणबी, मराठा, भंडारी, कोळी, मुसलमान, महार आणि इतर सामाजिक समूहांच्या उपस्थितीचे वर्णन करण्यात आले आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
या बहुजातीय ग्रामीण संरचनेत विविध समुदायांच्या आर्थिक आणि सामाजिक भूमिका वेगवेगळ्या असू शकत होत्या. कुणबींचा संबंध प्रामुख्याने कृषीशी जोडला गेला होता, तर किनारी प्रदेशातील काही समुदाय मासेमारी, नारळ उत्पादन, वाहतूक आणि इतर व्यवसायांशी संबंधित होते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
मात्र जात आणि व्यवसाय यांच्यातील संबंध प्रत्येक व्यक्तीच्या बाबतीत अपरिवर्तनीय होता असे मानता येत नाही. गॅझेटियरमधील व्यवसायविषयक वर्गीकरण हे त्या काळातील प्रशासकीय आणि सामाजिक निरीक्षणांवर आधारित होते; त्यामुळे त्यांचा उपयोग ऐतिहासिक सामाजिक रचनेचा अभ्यास करण्यासाठी संदर्भ म्हणून करणे अधिक योग्य ठरते.
=== महाड आणि कुणबी बोलीचे ऐतिहासिक महत्त्व ===
महाड परिसरातील कुणबी समाजाच्या भाषिक अभ्यासासाठी अमृत माधव घाटगे यांचा ''Kunbi of Mahad'' हा ग्रंथ विशेष महत्त्वाचा आहे. हा ग्रंथ ''A Survey of Marathi Dialects'' या भाषिक सर्वेक्षण मालिकेचा भाग असून महाड परिसरातील कुणबी बोलीचा स्वतंत्र भाषाशास्त्रीय अभ्यास त्यात करण्यात आला आहे.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/>
''Kunbi of Mahad''चा उपयोग महाड परिसरातील कुणबी समाजाच्या भाषिक वैशिष्ट्यांचा, बोलीच्या स्वरूपाचा आणि प्रादेशिक भाषिक विविधतेचा अभ्यास करण्यासाठी करता येतो. मात्र भाषिक साम्य किंवा विशिष्ट बोलीचे अस्तित्व यावरून एखाद्या समुदायाची जातीय उत्पत्ती, प्राचीन वंशावळ किंवा स्थलांतराचा निश्चित ऐतिहासिक मार्ग ठरविता येत नाही. अशा निष्कर्षांसाठी भाषिक पुराव्यांसोबत ऐतिहासिक, सामाजिक, भौगोलिक आणि दस्तऐवजी पुराव्यांचा स्वतंत्र विचार आवश्यक असतो.
महाडच्या कुणबी बोलीचा अभ्यास त्यामुळे कोकणातील कुणबी समाजाच्या इतिहासासाठी पूरक भाषिक स्रोत म्हणून महत्त्वाचा ठरतो. तो स्थानिक भाषिक विविधता आणि प्रादेशिक सामाजिक इतिहासाच्या अभ्यासाला अतिरिक्त संदर्भ उपलब्ध करून देतो.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/>
=== रायगड प्रदेशातील कुणबी आणि कोकणातील व्यापक कृषक समाज ===
ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशातील कुणबींचा इतिहास रत्नागिरीतील कुणबींच्या इतिहासाशी काही बाबतींत संबंधित आहे. दोन्ही प्रदेशांमध्ये भातशेती, पर्जन्याधारित कृषी, ग्रामीण वसाहती, जमीन व महसूलव्यवस्था आणि किनारी बाजारपेठांशी असलेले आर्थिक संबंध यांचे महत्त्व दिसून येते. तथापि ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशातील महाड-माणगावचा डोंगराळ भाग, रोहा-कुंडलिका नदीखोरे, पेण-अलिबागचा किनारी प्रदेश आणि मुंबईशी असलेली भौगोलिक जवळीक यांमुळे या प्रदेशाची स्वतंत्र सामाजिक-आर्थिक वैशिष्ट्ये होती.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
कुणबी समाजाच्या सामाजिक इतिहासाचा अभ्यास करताना या प्रदेशातील जमीनधारणा, शेतीच्या पद्धती, पाण्याचे व्यवस्थापन, कृषी साधने, ग्रामीण कुटुंबजीवन, बाजारपेठांशी असलेले संबंध आणि भाषिक वैशिष्ट्ये यांचा एकत्रित विचार करता येतो. या विविध घटकांमधून ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशातील कुणबी समाजाचे प्रादेशिक स्वरूप समजून घेण्यास मदत होते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== ऐतिहासिक नोंदींच्या मर्यादा ===
कोलाबा प्रदेशातील कुणबी समाजाच्या इतिहासाच्या अभ्यासासाठी १८८३चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira'' हा महत्त्वाचा वसाहतकालीन स्रोत आहे. त्यामध्ये लोकसंख्या, शेती, कृषक समाज, जमीन प्रशासन, महसूल आणि विविध सामाजिक समूहांविषयी तत्कालीन प्रशासकीय माहिती आणि निरीक्षणे नोंदविण्यात आली आहेत.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
तथापि हा गॅझेटियर ब्रिटिश वसाहतकालीन प्रशासकीय चौकटीत तयार झालेला स्रोत असल्यामुळे त्यातील सामाजिक आणि जातीय वर्णने तत्कालीन प्रशासकीय निरीक्षणे, वर्गीकरणे आणि त्या काळातील दृष्टिकोनांवर आधारित आहेत. त्यामुळे त्यातील समुदायांविषयीची सर्वसाधारण विशेषणे किंवा मूल्यनिर्णय आधुनिक सामाजिक वास्तवाचे अंतिम किंवा सार्वत्रिक वर्णन मानता येत नाहीत. गॅझेटियरचा उपयोग करताना त्यातील वर्णनात्मक माहिती आणि तिच्यामागील तत्कालीन वसाहतकालीन प्रशासकीय संदर्भ यांचा स्वतंत्र विचार करणे आवश्यक आहे.
त्याचप्रमाणे ''Kunbi'' या संज्ञेची एकोणिसाव्या शतकातील प्रशासकीय किंवा ethnographic व्याप्ती आणि आधुनिक महाराष्ट्रातील प्रशासकीय वर्गीकरण यांना तंतोतंत समान मानता येत नाही. ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये जातीय समूहांचे वर्गीकरण तत्कालीन प्रशासकीय पद्धतीनुसार करण्यात आले होते आणि विविध प्रदेशांमध्ये ''Kunbi'', ''Maratha'', ''Maratha-Kunbi'' किंवा संबंधित संज्ञांचा वापर वेगवेगळ्या प्रकारे आढळतो.<ref name="Baines1881"/>
१८८१ च्या Bombay Presidency Censusमध्ये ''Maratha Kunbi'' या व्यापक कृषक वर्गाचा विचार करण्यात आला होता. त्याच Censusच्या विश्लेषणात Konkanमधील ''Maratha'' आणि Deccanमधील ''Kunbi'' यांच्यातील वर्गीकरण काही बाबतींत स्पष्ट नसल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="Baines1881"/>
म्हणून जुन्या Census किंवा Gazetteerमधील जातीय संज्ञा आणि त्यांची लोकसंख्या आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरणाशी थेट तुलना करण्यापूर्वी संबंधित कालखंडातील प्रशासकीय सीमा, वर्गीकरणाची पद्धत, वापरलेल्या सामाजिक संज्ञा आणि स्थानिक सामाजिक संदर्भ यांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे.
=== रायगड आणि ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशातील कुणबी : ऐतिहासिक स्थान ===
ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशातील कुणबी समाज हा कोकणातील कृषक समाजाचा एक महत्त्वाचा घटक होता. १८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये कुणबींची जिल्ह्याच्या विविध भागांतील उपस्थिती, कृषीवरील त्यांचे अवलंबित्व, भातशेती, जमीन आणि ग्रामीण जीवन यांविषयी वर्णनात्मक नोंदी आढळतात. महाड आणि माणगावच्या काही भागांच्या संदर्भात जमिनीची गुणवत्ता आणि पाण्याची उपलब्धता यांचा कृषकांच्या आर्थिक स्थितीवर परिणाम होत असल्याचे, तसेच अनुकूल परिस्थितीत कुणबी कृषकांचे कृषी कौशल्य दिसून येत असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद केले आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
महाडच्या संदर्भात A. M. Ghatge यांचा १९६६चा ''Kunbi of Mahad'' हा भाषाशास्त्रीय स्रोत या ऐतिहासिक चित्राला वेगळा आयाम देतो. गॅझेटियरमधील सामाजिक-आर्थिक नोंदी आणि Ghatge यांच्या भाषिक अभ्यासाचा एकत्रित उपयोग केल्यास महाड आणि ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशातील कुणबी समाजाचा अभ्यास जमीन, शेती, ग्रामीण समाज आणि भाषा या परस्परसंबंधित घटकांच्या आधारे करता येतो.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/>
== ठाणे आणि उत्तर कोकणातील कुणबी ==
ऐतिहासिक ठाणे जिल्ह्याची भौगोलिक व्याप्ती आजच्या ठाणे आणि पालघर जिल्ह्यांच्या सीमांशी पूर्णपणे समान नव्हती. ब्रिटिशकालीन ''Thana'' जिल्ह्यात काळानुसार ठाणे, सालसेट, भिवंडी, कल्याण, मुरबाड, शहापूर, डहाणू, पालघर, जव्हार आणि इतर प्रदेशांचा समावेश होता. त्यामुळे उत्तर कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास मांडताना आधुनिक जिल्ह्यांच्या सीमा थेट १९व्या शतकातील प्रशासकीय नोंदींवर लावणे योग्य ठरत नाही. १८८२चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Tha'na'' हा या ऐतिहासिक प्रदेशाच्या लोकसंख्या, शेती, जमीनव्यवस्था, सामाजिक समूह, व्यापार आणि प्रशासनाच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचा वसाहतकालीन स्रोत आहे.<ref name="Thana1882"/>
=== ऐतिहासिक ठाणे जिल्हा ===
१८८२ च्या गॅझेटियरमध्ये ठाणे जिल्ह्याच्या लोकसंख्या, शेती, उत्पादन, सामाजिक समूह, धर्म, व्यापार, जमीन प्रशासन आणि महसूल यांचे स्वतंत्र विवेचन करण्यात आले आहे. या नोंदींमध्ये ''Kunbis'', ''Marathas'', ''Kolis'', ''Dhangars'', ''Kathkaris'', ''Thakurs'', ''Varlis'' आणि इतर समुदायांचा उल्लेख आढळतो. त्यामुळे ऐतिहासिक ठाणे जिल्ह्यातील ग्रामीण समाज हा एकाच कृषक समुदायापुरता मर्यादित नसून विविध सामाजिक आणि आर्थिक समूहांनी बनलेला होता.<ref name="Thana1882"/>
गॅझेटियरमध्ये ''Kunbis'' बरोबरच ''Marathas'', ''Kolis'', ''Kathkaris'', ''Dhangars'', ''Thakurs'' आणि ''Varlis'' यांचाही स्वतंत्र उल्लेख आढळतो. या नोंदींवरून ठाणे जिल्ह्यातील ग्रामीण आणि कृषी समाजरचनेत विविध सामाजिक समूहांचा सहभाग होता असे दिसून येते.<ref name="Thana1882"/>
=== उत्तर कोकणातील कृषक समाज ===
ठाणे जिल्ह्यातील कृषीव्यवस्थेवर प्रदेशाच्या भौगोलिक विविधतेचा मोठा प्रभाव होता. किनारी खारजमीन, नदीखोरे, खाचर प्रदेश तसेच सह्याद्रीच्या पायथ्याशी असलेली उंचसखल जमीन यांनुसार शेतीच्या पद्धती आणि पिकांमध्ये फरक पडत असे. १८८२ च्या गॅझेटियरनुसार जिल्ह्याच्या एकूण लोकसंख्येपैकी सुमारे ६३ टक्के लोक कृषीशी संबंधित होते. या वर्गीकरणात कृषी व्यवसाय करणाऱ्या प्रौढ पुरुषांबरोबर त्यांच्या पत्नी आणि मुलांचाही समावेश करण्यात आला होता.<ref name="ThanaAgriculture">{{cite web
|title=Agriculture — Thana District
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Thana%20District/Thane-I/agriculture_soil.html
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
ठाणे जिल्ह्यातील जमिनीचे ''shet'' आणि ''mal-varkas'' असे प्रमुख प्रकार वर्णिले आहेत. सपाट आणि भातशेतीस योग्य जमिनींना ''shet'' म्हटले जात असे, तर डोंगरमाथे आणि उतारांवरील जमिनींवर नाचणी, वरी आणि इतर पिके घेतली जात. भातजमिनींचे ''bandhni'' आणि ''malkhandi'' असे प्रकारही नोंदविण्यात आले आहेत.<ref name="ThanaAgriculture"/>
या कृषी अर्थव्यवस्थेत कुणबींचे महत्त्वाचे स्थान होते; तथापि ठाणे जिल्ह्यातील सर्व कृषकांना कुणबी म्हणून ओळखता येत नाही. गॅझेटियरमध्ये कुणबींबरोबर मराठा, कोळी, धनगर आणि इतर सामाजिक समूहांचाही स्वतंत्र उल्लेख आढळतो. त्यामुळे ''कृषक'' ही व्यापक आर्थिक-व्यावसायिक संज्ञा असून ''कुणबी'' ही विशिष्ट सामाजिक संज्ञा आहे, असे ऐतिहासिक नोंदींच्या आधारे वेगळेपणाने पाहणे आवश्यक आहे.<ref name="Thana1882"/>
=== ठाणे परिसरातील कुणबी ===
ठाणे हे ऐतिहासिकदृष्ट्या उत्तर कोकणातील महत्त्वाचे प्रशासकीय आणि व्यापारी केंद्र होते. शहराभोवतालच्या प्रदेशातील शेती, खाड्या, जलमार्ग आणि मुंबईशी असलेले संपर्क यांमुळे ग्रामीण आणि नागरी अर्थव्यवस्थांमध्ये परस्परसंबंध निर्माण झाले होते.<ref name="Thana1882"/>
ठाणे परिसरातील कृषक समाजाचा अभ्यास करताना सालसेट, भिवंडी, कल्याण आणि आसपासच्या प्रदेशांशी असलेले ऐतिहासिक प्रशासकीय व आर्थिक संबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे. १८८२ च्या ठाणे गॅझेटियरमध्ये जिल्ह्याच्या विविध भागांचे स्वतंत्र वर्णन करण्यात आले असून त्या भागांची कृषी, जमीन आणि लोकसंख्येच्या संदर्भातील वैशिष्ट्ये नोंदविण्यात आली आहेत.<ref name="Thana1882"/>
=== सालसेट ===
सालसेट (Salsette) हा उत्तर कोकणाच्या इतिहासातील महत्त्वाचा प्रदेश होता. १९व्या शतकात सालसेटचा प्रशासकीय संबंध ठाणे जिल्ह्याशी होता. १८८२ च्या गॅझेटियरमध्ये सालसेटच्या इतिहास, जमीनव्यवस्था आणि कृषीविषयक परिस्थितीचे स्वतंत्र वर्णन आढळते.<ref name="Thana1882"/>
सालसेटमध्ये किनारी खारजमिनींचे संरक्षण, बांधबंदिस्ती आणि जमीन पुनर्प्राप्तीच्या प्रक्रिया दीर्घकाळ चालू होत्या. ठाणे गॅझेटियरमध्ये मानवी प्रयत्नांद्वारे काही भागांमध्ये जमीन पुनर्प्राप्त करण्यात आल्याचे आणि या प्रक्रियांचा स्थानिक कृषीव्यवस्थेशी संबंध असल्याचे वर्णन केले आहे.<ref name="ThanaAgriculture"/>
सालसेटमधील कृषी प्रदेशांमध्ये भातशेती तसेच बागायती आणि नारळाशी संबंधित उत्पादनाचा समावेश होता. मुंबईच्या वाढत्या नागरी आणि व्यापारी केंद्राशी असलेल्या भौगोलिक जवळिकीमुळे या प्रदेशातील ग्रामीण उत्पादनाला शहरी बाजारपेठेशी जोडणारे आर्थिक संबंध विकसित झाले.<ref name="Thana1882"/>
=== वसई आणि बासेन ===
ऐतिहासिक वसईला ब्रिटिशकालीन नोंदींमध्ये ''Bassein'' असे संबोधले जाते. वसईचा प्रदेश पोर्तुगीज सत्तेच्या दीर्घकालीन प्रभावामुळे उत्तर कोकणातील इतर भागांपेक्षा ऐतिहासिक आणि सामाजिकदृष्ट्या वैशिष्ट्यपूर्ण होता. १८८२ च्या ठाणे गॅझेटियरमध्ये बासेनच्या इतिहास, जमीनव्यवस्था, कृषी आणि लोकसंख्येविषयी स्वतंत्र नोंदी आढळतात.<ref name="Thana1882"/>
वसई परिसरातील कृषीव्यवस्थेत भातशेती, बागायती आणि नारळाच्या लागवडीला महत्त्व होते. ठाणे गॅझेटियरमध्ये बासेन आणि माहिम येथील बागायती जमीन जिल्ह्यातील चांगल्या बागायती प्रदेशांपैकी असल्याचे नमूद केले आहे. या बागांना विहिरी आणि ''Persian wheels'' यांसारख्या जलसिंचन साधनांद्वारे पाणीपुरवठा केला जात असल्याची नोंद आहे.<ref name="ThanaAgriculture"/>
वसईच्या सामाजिक इतिहासात कुणबींचा उल्लेख उत्तर कोकणातील व्यापक कृषक समाजाच्या संदर्भात करता येतो. तथापि वसई परिसरातील सर्व कृषकांना कुणबी मानणे योग्य नाही. ऐतिहासिक ठाणे जिल्ह्यात कुणबींबरोबर मराठा, कोळी, धनगर, कातकरी, ठाकूर, वारली आणि इतर सामाजिक समूहांचाही उल्लेख आढळतो.<ref name="Thana1882"/>
=== भिवंडी आणि कल्याण ===
भिवंडी आणि कल्याण हे ऐतिहासिक ठाणे जिल्ह्यातील महत्त्वाचे अंतर्गत प्रदेश होते. सह्याद्रीच्या घाटमार्गांमधून दख्खनशी आणि पश्चिमेकडील किनारी प्रदेशाशी असलेल्या संपर्कामुळे या भागांना कृषीबरोबरच व्यापार आणि वाहतुकीच्या दृष्टीनेही महत्त्व प्राप्त झाले होते.<ref name="Thana1882"/>
कल्याण परिसरातील जमीन आणि महसूलव्यवस्थेच्या संदर्भात ब्रिटिश प्रशासनाने सर्वेक्षण, जमीनमोजणी आणि महसूल निश्चितीच्या पद्धती विकसित केल्या. ठाणे गॅझेटियरच्या जमीन प्रशासनासंबंधीच्या नोंदींमध्ये जिल्ह्यातील विविध भागांतील जमीन, सर्वेक्षण आणि महसूलव्यवस्थेचे वर्णन आढळते.<ref name="Thana1882"/>
कुणबी समाजाच्या इतिहासाच्या दृष्टीने भिवंडी आणि कल्याण परिसराचा विचार करताना ग्रामीण कृषी अर्थव्यवस्था, स्थानिक बाजारपेठा आणि वाहतूकमार्ग यांचा परस्परसंबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे. पुढील काळात या प्रदेशांच्या वाढत्या नागरी आणि औद्योगिक अर्थव्यवस्थेचा ग्रामीण समाजावर परिणाम झाला; मात्र त्या परिणामांचे स्वरूप स्वतंत्र कालखंडानुसार तपासणे आवश्यक आहे.
=== पालघर आणि उत्तर कोकण ===
आजचा पालघर जिल्हा हा ब्रिटिशकालीन ठाणे जिल्ह्याच्या उत्तरेकडील प्रदेशाशी मोठ्या प्रमाणात संबंधित होता. डहाणू, पालघर, जव्हार, मोखाडा आणि आसपासच्या प्रदेशांची सामाजिक व आर्थिक रचना ठाणे शहर किंवा सालसेटच्या तुलनेत वेगळी होती. या भागात आदिवासी आणि ग्रामीण कृषक समुदायांची लक्षणीय उपस्थिती होती.<ref name="Thana1882"/>
ठाणे गॅझेटियरमध्ये वारली, कातकरी, ठाकूर आणि इतर स्थानिक समुदायांचा स्वतंत्र उल्लेख आढळतो. विशेषतः डहाणू परिसरातील वारली लोकसंख्येचा उल्लेख करण्यात आला असून ठाणे जिल्ह्याच्या इतर भागांतील त्यांच्या उपस्थितीचीही नोंद आढळते.<ref name="Thana1882"/>
उत्तर कोकणातील या सामाजिक विविधतेमुळे कुणबी समाजाचा इतिहास व्यापक ग्रामीण समाजाच्या संदर्भापासून वेगळा करून पाहणे योग्य ठरत नाही. शेती, जमीन, जंगल, मजुरी आणि ऋतुनिष्ठ रोजगार यांसारख्या आर्थिक क्षेत्रांमध्ये विविध समुदायांचे परस्परसंबंध होते. त्यामुळे उत्तर कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास समजून घेताना कुणबींबरोबरच त्या प्रदेशातील इतर कृषक आणि स्थानिक समुदायांच्या ऐतिहासिक उपस्थितीचाही विचार करणे आवश्यक आहे.
=== डहाणू आणि कृषीव्यवस्था ===
डहाणू परिसरातील कृषीव्यवस्थेवर किनारी भूप्रदेश, नदीखोरे, पर्जन्यमान आणि जमिनीच्या स्वरूपाचा प्रभाव होता. किनारी भागात समुद्राच्या भूक्षयामुळे आणि भूभागातील बदलांमुळे जमीन व कृषी परिस्थितीवर परिणाम होत असल्याचे ठाणे गॅझेटियरमध्ये नमूद केले आहे.<ref name="ThanaAgriculture"/>
डहाणू, जव्हार आणि उत्तर ठाणे जिल्ह्यातील इतर भागांमध्ये भातशेतीबरोबर डोंगराळ व उंचसखल जमिनीवर विविध पिकांची लागवड केली जात होती. या प्रदेशात कुणबींबरोबर वारली, ठाकूर आणि इतर ग्रामीण व आदिवासी समुदायांचीही उपस्थिती होती. त्यामुळे उत्तर कोकणातील कृषी इतिहास हा विविध सामाजिक समूहांच्या सहभागातून विकसित झालेला इतिहास म्हणून पाहणे आवश्यक आहे.<ref name="Thana1882"/>
=== भातशेती आणि जलव्यवस्था ===
ठाणे जिल्ह्यातील कृषीव्यवस्थेत भातशेतीला महत्त्वाचे स्थान होते. १८७९–८० च्या महसूल सर्वेक्षणानुसार सरकारी लागवडीयोग्य क्षेत्रापैकी ९५७,९३४ एकर जमीन प्रत्यक्ष लागवडीखाली होती. त्यापैकी ३३३,७१७ एकर क्षेत्र भातशेतीखाली होते, म्हणजे सुमारे ३४.८ टक्के. उर्वरित क्षेत्रात प्रामुख्याने इतर पिकांची लागवड केली जात होती.<ref name="ThanaAgriculture"/>
भातशेतीसाठी पावसाळ्यात उंच भागातून वाहून येणारे पाणी लहान प्रवाह, बांध आणि स्थानिक जलव्यवस्थेद्वारे अडवून किंवा वळवून वापरण्याची पद्धत होती. काही ठिकाणी नदी आणि विहिरींच्या पाण्याचाही उपयोग केला जात असे. पनवेल, बासेन आणि माहिम येथील बागायतींमध्ये विविध प्रकारच्या जलउचल पद्धती वापरल्या जात असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद केले आहे.<ref name="ThanaAgriculture"/>
या जलव्यवस्थेमुळे ठाणे जिल्ह्यातील विविध भौगोलिक प्रदेशांमध्ये वेगवेगळ्या कृषी पद्धती विकसित झाल्या. पावसावर आधारित भातशेती, नदी व विहिरींच्या पाण्यावर आधारित बागायती आणि उंचसखल किंवा डोंगराळ भागातील इतर पिके यांमुळे उत्तर कोकणातील कृषी अर्थव्यवस्थेला प्रादेशिक विविधता प्राप्त झाली.<ref name="ThanaAgriculture"/>
=== जमीनव्यवस्था आणि महसूल ===
ब्रिटिश प्रशासनाने ठाणे जिल्ह्यात जमीन सर्वेक्षण, मोजणी आणि महसूल निश्चितीच्या पद्धती विकसित केल्या. १८८२ च्या गॅझेटियरमध्ये ''Land Administration'' या स्वतंत्र विभागात जमीनहक्क, महसूल, इनाम, वतन, सर्वेक्षण आणि विविध प्रकारच्या जमीनव्यवस्थेचे वर्णन करण्यात आले आहे.<ref name="Thana1882"/>
सालसेट, बासेन, माहिम आणि ठाणे जिल्ह्यातील इतर भागांमध्ये जमीनव्यवस्थेचा विकास स्थानिक इतिहास आणि पूर्वीच्या महसूलपद्धतींच्या पार्श्वभूमीवर झाला. ब्रिटिश प्रशासनाने जमीन सर्वेक्षण, नोंदणी आणि महसूल निश्चितीच्या माध्यमातून विद्यमान जमीनहक्क आणि महसूलव्यवस्थेला अधिक औपचारिक प्रशासकीय चौकटीत आणण्याचा प्रयत्न केला.<ref name="Thana1882"/>
कुणबी समाजाचा या जमीनव्यवस्थेशी संबंध प्रदेशानुसार बदलत होता. कुणबींचा उल्लेख कृषक समाजाच्या संदर्भात आढळत असला तरी प्रत्येक कुणबी कुटुंबाची जमीनधारणा, उत्पादनक्षमता, आर्थिक स्थिती किंवा महसूलव्यवस्थेतील स्थान समान होते असे मानता येत नाही. त्यामुळे उत्तर कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास समजून घेताना कृषी, जमीनहक्क, महसूल, स्थानिक ग्रामव्यवस्था आणि प्रादेशिक सामाजिक रचना या सर्व घटकांचा एकत्रित विचार करणे आवश्यक आहे.
=== कुणबी आणि इतर कृषक समुदाय ===
ठाणे जिल्ह्यातील ग्रामीण समाजात कुणबींबरोबर मराठा, कोळी, धनगर, कातकरी, ठाकूर आणि वारली यांसारख्या विविध सामाजिक समुदायांचा समावेश होता. या समुदायांच्या उपजीविकेचे स्वरूप प्रदेशानुसार आणि स्थानिक परिस्थितीनुसार बदलत होते. काही समुदाय शेतीशी, काही पशुपालनाशी, काही जंगलाशी, तर काही मासेमारी, मजुरी आणि इतर स्थानिक व्यवसायांशी संबंधित होते.<ref name="Thana1882"/>
जमीनधारणा, कृषी उत्पादन, स्थानिक बाजारपेठा, वाहतूक आणि ब्रिटिशकालीन महसूलव्यवस्थेतील बदलांमुळे ग्रामीण अर्थव्यवस्थेचे स्वरूप कालांतराने बदलत गेले. काही भागांत शेतीबरोबर इतर पूरक व्यवसायांचे महत्त्व वाढले, तर बाजारपेठांशी वाढलेल्या संपर्कामुळे ग्रामीण उत्पादनाच्या देवाणघेवाणीतही बदल झाले.<ref name="Thana1882"/>
या संदर्भात ''कुणबी'' आणि ''कृषक'' या संज्ञांमध्ये भेद करणे आवश्यक आहे. ''कुणबी'' ही सामाजिक समुदायाची संज्ञा होती, तर ''कृषक'' ही मुख्यतः शेतीशी संबंधित आर्थिक किंवा व्यावसायिक ओळख दर्शवणारी संज्ञा होती. त्यामुळे ठाणे जिल्ह्यातील प्रत्येक कृषक व्यक्ती कुणबी होती किंवा प्रत्येक कुणबी व्यक्ती केवळ शेतीवरच अवलंबून होती, असा निष्कर्ष उपलब्ध स्रोतांवरून काढता येत नाही.
=== मुंबईशी वाढता संबंध ===
ठाणे जिल्ह्याचा मुंबईशी भौगोलिक, आर्थिक आणि वाहतूकविषयक संबंध एकोणिसाव्या शतकात अधिक दृढ होत गेला. मुंबईच्या वाढत्या व्यापारी आणि औद्योगिक महत्त्वामुळे ठाणे जिल्ह्यातील काही ग्रामीण भागांचा कृषी उत्पादन, व्यापार आणि रोजगाराच्या दृष्टीने मुंबईशी संबंध वाढला.<ref name="Thana1882"/>
रेल्वे आणि इतर वाहतूकसुविधांच्या विकासामुळे ठाणे, कल्याण, भिवंडी आणि मुंबईदरम्यानचा संपर्क अधिक सुलभ झाला. त्याचा परिणाम कृषी उत्पादनाच्या वाहतुकीवर तसेच ग्रामीण लोकांच्या बाजारपेठांशी आणि रोजगाराच्या संधींशी असलेल्या संबंधांवर झाला. ठाणे गॅझेटियरमध्ये रेल्वे, रस्ते, व्यापार, उत्पादन आणि वाहतूक यांचे स्वतंत्र विवेचन आढळते.<ref name="Thana1882"/>
या बदलांचा परिणाम कुणबींसह ग्रामीण समाजातील विविध घटकांवर झाला असण्याची शक्यता होती. काही कुटुंबांनी शेतीबरोबर पूरक उत्पन्नासाठी इतर व्यवसाय किंवा शहरांशी संबंधित रोजगार स्वीकारला असावा. मात्र उपलब्ध एकोणिसाव्या शतकातील स्रोतांवरून कुणबी समाजाच्या बाबतीत अशा रोजगाराचे किंवा स्थलांतराचे अचूक प्रमाण निश्चित करता येत नाही.
=== स्थलांतर आणि ग्रामीण-नागरी संबंध ===
उत्तर कोकणातील ग्रामीण आणि नागरी अर्थव्यवस्थेतील संबंध मुंबईच्या वाढत्या व्यापारी, औद्योगिक आणि वाहतूकविषयक महत्त्वामुळे अधिक दृढ होत गेले. ठाणे जिल्ह्यातील विविध भागांमधून बाजारपेठा, व्यापार आणि रोजगाराच्या निमित्ताने मुंबईशी संपर्क वाढत गेला.<ref name="Thana1882"/>
सालसेट, ठाणे, कल्याण, भिवंडी आणि वसई यांसारख्या मुंबईच्या जवळच्या प्रदेशांना शहराशी तुलनेने सुलभ वाहतूकसंपर्क उपलब्ध होता. त्यामुळे या भागांतील ग्रामीण उत्पादन आणि नागरी बाजारपेठ यांच्यातील संबंध अधिक निकट झाले. दुसरीकडे पालघर, डहाणू आणि जव्हारसारख्या उत्तर भागांतील ग्रामीण अर्थव्यवस्था स्थानिक शेती, जंगलाधारित उपजीविका, हंगामी मजुरी आणि प्रादेशिक बाजारपेठांशीही संबंधित होती.<ref name="Thana1882"/>
कुणबी समाजाच्या संदर्भात या प्रक्रियेचा विचार करताना पारंपरिक कृषी जीवन आणि बदलती बाजारपेठीय अर्थव्यवस्था यांच्यातील संबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे. तथापि उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतांवरून १९व्या शतकातील ठाणे जिल्ह्यातील कुणबींच्या मुंबईकडे झालेल्या स्थलांतराचे स्वतंत्र आणि अचूक प्रमाण निश्चित करता येत नाही. त्यामुळे या प्रक्रियेचे वर्णन व्यापक ग्रामीण-नागरी परिवर्तनाच्या संदर्भात करणे अधिक योग्य ठरते.
=== ख्रिस्ती कुणबी आणि उत्तर कोकण ===
वसई आणि सालसेट परिसराच्या पोर्तुगीजकालीन इतिहासामुळे उत्तर कोकणातील सामाजिक ओळखींच्या अभ्यासात धर्म आणि जात यांचा परस्परसंबंध महत्त्वाचा ठरतो. पुढील वसाहतकालीन नोंदींमध्ये सालसेट आणि बासेन परिसरातील काही ख्रिस्ती समुदायांच्या संदर्भात त्यांच्या पूर्वीच्या सामाजिक किंवा जातीय ओळखींचे उल्लेख आढळतात. काही समूहांना ''Christian Kunbi'', ''Christian Bhandari'' आणि ''Christian Koli'' अशा संज्ञांनी संबोधल्याची नोंद आढळते.<ref>{{cite book
|title=The Imperial Gazetteer of India
|volume=8
|publisher=Clarendon Press
|location=Oxford
|year=1908
}}</ref>
या नोंदी उत्तर कोकणातील सामाजिक ओळखींच्या ऐतिहासिक गुंतागुंतीकडे निर्देश करतात. धर्मांतरानंतरही काही समुदायांच्या सामाजिक ओळखी किंवा पूर्वीच्या समुदायनावांचा उल्लेख प्रशासकीय आणि ethnographic नोंदींमध्ये होत राहिला. तथापि या उल्लेखांवरून धर्मांतरित ख्रिस्ती कुणबी आणि हिंदू कुणबी यांची सामाजिक, सांस्कृतिक किंवा प्रशासकीय ओळख सर्व काळात समान होती, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.
=== आधुनिक ठाणे आणि पालघरशी संबंध ===
आजच्या ठाणे आणि पालघर जिल्ह्यांच्या सीमा १९व्या शतकातील ब्रिटिशकालीन ठाणे जिल्ह्याच्या सीमांशी समान नाहीत. त्यामुळे ऐतिहासिक ''Thana district''मधील कुणबींच्या नोंदींची आधुनिक ठाणे किंवा पालघर जिल्ह्यांशी तुलना करताना तत्कालीन प्रशासकीय सीमा विचारात घेणे आवश्यक आहे.
ब्रिटिशकालीन ठाणे जिल्ह्याच्या प्रशासकीय चौकटीत डहाणू, वाडा, जव्हार, मोखाडा, वसई, भिवंडी, कल्याण, सालसेट, पनवेल आणि इतर प्रदेशांचा समावेश होता. पुढील प्रशासकीय पुनर्रचनेमुळे या प्रदेशांचे विविध आधुनिक जिल्हे आणि महानगर प्रदेशांमध्ये विभाजन झाले. त्यामुळे जुन्या ''Thana district''मधील लोकसंख्या किंवा सामाजिक समूहांची आकडेवारी आजच्या जिल्हानिहाय लोकसंख्येशी थेट तुलना करताना काळजी घेणे आवश्यक आहे.<ref name="Thana1882"/>
=== उत्तर कोकणातील कुणबी समाजाचे ऐतिहासिक स्थान ===
उत्तर कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास शेती, जमीन, पाणी, ग्रामजीवन आणि बदलत्या बाजारपेठीय संबंधांच्या इतिहासाशी संबंधित आहे. १८८२ च्या ठाणे गॅझेटियरमध्ये कुणबींचा उल्लेख जिल्ह्यातील इतर सामाजिक आणि कृषक समुदायांबरोबर आढळतो. त्याच गॅझेटियरमधील कृषीविषयक नोंदींमधून उत्तर कोकणातील विविध भौगोलिक प्रदेशांतील कृषी पद्धतींची माहिती मिळते.<ref name="Thana1882"/><ref name="ThanaAgriculture"/>
ठाणे, सालसेट, वसई, भिवंडी, कल्याण, पनवेल, पालघर आणि डहाणू या प्रदेशांमध्ये भौगोलिक आणि आर्थिक परिस्थितीत फरक होता. काही भागांत भातशेती आणि बागायतीला महत्त्व होते, तर डोंगराळ आणि उंचसखल प्रदेशांत इतर पिकांची लागवड केली जात होती. मुंबईच्या जवळच्या भागांत बाजारपेठ आणि वाहतूकसंबंधांचा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेवर वाढता प्रभाव पडत गेला.<ref name="ThanaAgriculture"/>
उत्तर कोकणातील कुणबी समाजाचे ऐतिहासिक स्थान समजून घेताना इतर कृषक आणि स्थानिक समुदायांशी असलेले सहअस्तित्वही महत्त्वाचे ठरते. कुणबी, मराठा, कोळी, धनगर, कातकरी, ठाकूर, वारली आणि इतर समुदायांच्या परस्परसंबंधातून या प्रदेशाची ग्रामीण सामाजिक रचना विकसित झाली होती.<ref name="Thana1882"/>
त्यामुळे उत्तर कोकणातील कुणबींचा स्वतंत्र सामाजिक इतिहास अभ्यासता येतो; परंतु तो या प्रदेशातील व्यापक ग्रामीण, कृषी आणि सामाजिक इतिहासापासून पूर्णपणे वेगळा करता येत नाही. जमीनधारणा, कृषी, ग्रामव्यवस्था, स्थानिक समुदाय, बाजारपेठा, स्थलांतर आणि बदलती प्रशासकीय व्यवस्था या सर्व घटकांच्या परस्परसंबंधातून उत्तर कोकणातील कुणबी समाजाचे ऐतिहासिक स्थान अधिक स्पष्टपणे समजते.
=== ऐतिहासिक स्रोतांच्या मर्यादा ===
१८८२चा ''Thana Gazetteer'' हा उत्तर कोकणातील कुणबी समाजाच्या इतिहासासाठी महत्त्वाचा वसाहतकालीन स्रोत आहे; मात्र तो ब्रिटिश प्रशासकीय चौकटीत तयार करण्यात आलेला दस्तऐवज आहे. त्यातील जातीय, सामाजिक आणि आर्थिक वर्णने तत्कालीन प्रशासकीय निरीक्षणे, सर्वेक्षणे आणि वर्गीकरणांवर आधारित आहेत. त्यामुळे त्यातील समुदायांविषयीची सर्वसाधारण विशेषणे किंवा मूल्यनिर्णय आधुनिक सामाजिक वास्तवाचे अंतिम वर्णन मानता येत नाहीत.<ref name="ThanaGazetteerPreface">{{cite web
|title=Preface — Thana Gazetteer
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Thana%20District/Thane-I/preface_i.html
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
त्याचप्रमाणे १९व्या शतकातील ''Kunbi'' या संज्ञेची प्रशासकीय व्याप्ती आणि आजच्या महाराष्ट्रातील प्रशासकीय जातीय वर्गीकरण यांना एकसारखे मानता येत नाही. जुन्या जनगणना, गॅझेटियर आणि प्रशासकीय नोंदींचा उपयोग करताना तत्कालीन प्रशासकीय सीमा, वर्गीकरणाची पद्धत, स्थानिक सामाजिक ओळखी आणि त्या नोंदींचा उद्देश यांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे.
उत्तर कोकणातील कुणबींच्या इतिहासाच्या अभ्यासासाठी म्हणूनच गॅझेटियरमधील नोंदींसोबत संबंधित Census records, जमीन व महसूल नोंदी, भाषिक अभ्यास, सरकारी ठराव आणि पुढील काळातील विश्वसनीय सामाजिक-ऐतिहासिक संशोधन यांचा तुलनात्मक उपयोग करणे आवश्यक ठरते.
== तिलोरी कुणबी ==
'''तिलोरी कुणबी''' (''Tilori Kunbi'' किंवा ''Kunbi Tilori'') ही संज्ञा विशेषतः रत्नागिरी जिल्ह्याच्या ऐतिहासिक प्रशासकीय संदर्भात आढळते. या संज्ञेला विसाव्या शतकाच्या मध्यातील सरकारी वर्गीकरणात स्वतंत्र प्रशासकीय स्थान मिळाले होते. मुंबई उच्च न्यायालयाने *Dattatraya S/o Ramrao Thorat v. The State of Maharashtra & Ors.* या २४ एप्रिल २००२ रोजीच्या निर्णयात १९४२ ते १९६७ या कालखंडातील संबंधित सरकारी ठरावांचा तपशील नोंदविला आहे.<ref name="Thorat2002">{{cite web
|title=Dattatraya S/o Ramrao Thorat v. The State of Maharashtra & Ors.
|website=Indian Kanoon
|date=24 April 2002
|url=https://indiankanoon.org/doc/726744/
|access-date=22 August 2026
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=== तिलोरी कुणबी या संज्ञेचा प्रादेशिक संदर्भ ===
तिलोरी कुणबी या संज्ञेचा प्रशासकीय संदर्भ प्रामुख्याने रत्नागिरी जिल्ह्याशी संबंधित होता. त्यामुळे तिचा इतिहास समजून घेताना त्या काळातील रत्नागिरी जिल्ह्याच्या प्रशासकीय सीमा, स्थानिक सामाजिक रचना आणि सरकारी वर्गीकरणाची पद्धत लक्षात घेणे आवश्यक आहे.
विसाव्या शतकाच्या पूर्वार्धात आणि मध्यकाळात मागासवर्गीय समुदायांच्या सरकारी वर्गीकरणासाठी विविध याद्या आणि ठराव जारी करण्यात आले. या प्रक्रियेत ''Kunbi'' आणि ''Kunbi Tilori in Ratnagiri district'' या संज्ञांना काही काळ स्वतंत्र प्रशासकीय संदर्भ प्राप्त झाला.<ref name="Thorat2002"/>
या सरकारी वर्गीकरणाचा अर्थ सामाजिक किंवा जातीय उत्पत्तीचा ऐतिहासिक पुरावा असा थेट लावता येत नाही. तो मुख्यतः त्या काळातील शासनाच्या प्रशासकीय आणि मागासवर्गीय वर्गीकरणाचा पुरावा म्हणून पाहणे अधिक योग्य आहे.
=== १९४२ चेसरकारी वर्गीकरण ===
तिलोरी कुणबीच्या प्रशासकीय इतिहासात २३ एप्रिल १९४२चा Bombay Government Resolution महत्त्वाचा आहे. मुंबई उच्च न्यायालयाने नोंदविल्यानुसार या ठरावात intermediate communities, scheduled castes, aboriginal and hill tribes आणि other backward communities यांच्या याद्या प्रसिद्ध करण्यात आल्या होत्या.
या वर्गीकरणात Schedule A मधील intermediate communitiesच्या यादीत अनुक्रमांक १२४वर ''Kunbi (Except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)'' अशी नोंद होती. त्याच वेळी ''Other Backward Communities''च्या यादीत अनुक्रमांक ७३वर ''Kunbi Tilori in Ratnagiri district'' अशी स्वतंत्र नोंद करण्यात आली होती.<ref name="Thorat2002" />
या नोंदीवरून १९४२ च्या सरकारी वर्गीकरणात रत्नागिरी जिल्ह्यातील तिलोरी कुणबींना इतर कुणबींपेक्षा वेगळ्या प्रशासकीय वर्गात ठेवण्यात आले होते, हे स्पष्ट होते. मात्र या प्रशासकीय फरकावरून तिलोरी कुणबींची स्वतंत्र प्राचीन जातीय उत्पत्ती किंवा स्वतंत्र वंशपरंपरा सिद्ध होते, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.
=== १९५०, १९५६ आणि १९६१मधील सातत्य ===
१९४२ च्या वर्गीकरणानंतरही हा प्रशासकीय फरक पुढील सरकारी ठरावांमध्ये कायम राहिला. मुंबई उच्च न्यायालयाने नमूद केल्यानुसार १ नोव्हेंबर १९५०, २९ ऑक्टोबर १९५६ आणि २१ नोव्हेंबर १९६१ रोजी प्रसिद्ध झालेल्या सरकारी ठरावांमध्ये ''''Kunbi (Except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)'''' आणि ''''Kunbi Tilori in Ratnagiri district'''' यांच्यातील फरक कायम ठेवण्यात आला होता.<ref name="Thorat2002" />
या नोंदींचे महत्त्व असे की ''''कुणबी तिलोरी'''' ही संज्ञा त्या काळातील सरकारी मागासवर्गीय वर्गीकरणात सातत्याने वापरली जात होती. त्यामुळे ती केवळ स्थानिक किंवा मौखिक सामाजिक संज्ञा नव्हती, तर किमान १९४२ ते १९६१ या काळात अधिकृत प्रशासकीय नोंदींमध्ये वापरली गेलेली संज्ञा होती.<ref name="Thorat2002" />
=== १९६७नंतरचे वर्गीकरण ===
१३ ऑक्टोबर १९६७ रोजी महाराष्ट्र शासनाने OBC ची स्वतंत्र यादी प्रसिद्ध केली. मुंबई उच्च न्यायालयाच्या नोंदीनुसार या यादीत अनुक्रमांक ८३ वर ''Kunbi caste''चा समावेश करण्यात आला.<ref name="Thorat2002" />
न्यायालयाने या सरकारी ठरावांच्या क्रमिक इतिहासाचा विचार करून नमूद केले की १९६७पर्यंत रत्नागिरी जिल्ह्यातील ''कुणबी तिलोरी'' यांना O.B.C. वर्गात ठेवण्यात आले होते, तर राज्याच्या इतर भागांतील कुणबी समुदायाला त्या काळातील स्वतंत्र प्रशासकीय वर्गीकरणात ठेवण्यात आले होते. १९६७मध्ये ''''कुणबी जात''' महाराष्ट्राच्या OBC च्या यादीत समावेश करण्यात आला.<ref name="Thorat2002" />
या प्रशासकीय बदलामुळे तिलोरी कुणबी या संज्ञेच्या इतिहासात एक महत्त्वाचा टप्पा निर्माण झाला. त्यामुळे तिलोरी कुणबींचा इतिहास मांडताना १९४२–१९६१ या काळातील स्वतंत्र सरकारी वर्गीकरण आणि १९६७ नंतरचे ''कुणबी जात''चे व्यापक राज्यस्तरीय वर्गीकरण हे दोन वेगळे प्रशासकीय टप्पे म्हणून पाहणे आवश्यक आहे.
=== मुंबई उच्च न्यायालयाचा २००२ चा निर्णय ===
तिलोरी कुणबींच्या प्रशासकीय वर्गीकरणाच्या इतिहासाच्या संदर्भात ''Dattatraya S/o Ramrao Thorat v. The State of Maharashtra & Ors.'' हा मुंबई उच्च न्यायालयाचा २४ एप्रिल २००२ रोजीचा निर्णय महत्त्वाचा आहे. या प्रकरणाची सुनावणी न्यायमूर्ती बी. एच. मार्लापल्ले आणि न्यायमूर्ती एन. एच. पाटील यांच्या खंडपीठासमोर झाली. हे प्रकरण याचिकाकर्त्याच्या कुणबी जात-दाव्याच्या पडताळणीशी संबंधित होते.<ref name="Thorat2002" />
या निर्णयात न्यायालयाने २३ एप्रिल १९४२ च्या मुंबई सरकारच्या ठरावासह १ नोव्हेंबर १९५०, २९ ऑक्टोबर १९५६ आणि २१ नोव्हेंबर १९६१ च्या पुढील सरकारी ठरावांचा विचार केला. न्यायालयाच्या नोंदीनुसार, १९४२ च्या वर्गीकरणात ''Kunbi (Except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)'' अशी नोंद ''intermediate communities''च्या यादीत होती, तर ''Kunbi Tilori in Ratnagiri district'' ही स्वतंत्र नोंद ''Other Backward Communities''च्या यादीत होती. पुढील १९५०, १९५६ आणि १९६१ च्या ठरावांमध्येही हा प्रशासकीय फरक कायम राहिला.<ref name="Thorat2002"/>
न्यायालयाने पुढे नोंदविले की १३ ऑक्टोबर १९६७ रोजी महाराष्ट्र शासनाने इतर मागासवर्गीयांची स्वतंत्र यादी प्रसिद्ध केली आणि त्यात अनुक्रमांक ८३वर ''Kunbi caste''चा समावेश करण्यात आला. न्यायालयाच्या निरीक्षणानुसार, १९६७पर्यंत रत्नागिरी जिल्ह्यातील ''Kunbi Tilori'' यांना इतर मागासवर्गीयांच्या वर्गात, तर राज्याच्या इतर भागांतील कुणबींना तत्कालीन ''intermediate community''च्या वर्गीकरणात ठेवण्यात आले होते; १९६७मध्ये ''Kunbi caste''चा संपूर्ण महाराष्ट्रासाठी इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समावेश करण्यात आला.<ref name="Thorat2002"/>
या निर्णयाचे महत्त्व तिलोरी कुणबींची प्राचीन उत्पत्ती, स्वतंत्र वंशावळ किंवा जातीय उगम सिद्ध करण्यात नसून, '''१९४२ ते १९६७ या कालखंडातील सरकारी जातीय व मागासवर्गीय वर्गीकरणाचा न्यायालयीन नोंदीद्वारे उपलब्ध असलेला ऐतिहासिक पुरावा''' म्हणून आहे.<ref name="Thorat2002"/>
=== १९६६मधील न्यायालयीन संदर्भ ===
तिलोरी कुणबींच्या प्रशासकीय वर्गीकरणाच्या संदर्भात ''Ashok Krishnarao Dhote v. Dean, Medical College, Nagpur'' हा मुंबई उच्च न्यायालयाचा १७ ऑक्टोबर १९६६ रोजीचा निर्णय महत्त्वाचा आहे. या प्रकरणात शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालयातील प्रवेशासाठी इतर मागासवर्गीयांसाठी असलेल्या आरक्षणाच्या संदर्भात महाराष्ट्र शासनाने मान्य केलेल्या जाती व समुदायांच्या यादीचा विचार करण्यात आला. निर्णयात ''Kunbi Tilori (in Ratnagiri District)'' या संज्ञेचा स्पष्ट उल्लेख करण्यात आला आहे.<ref name="Dhote1966">{{cite journal
|title=Ashok Krishnarao Dhote v. Dean, Medical College, Nagpur & Ors.
|journal=Bombay Law Reporter
|volume=69
|year=1967
|page=603
|url=https://indiankanoon.org/doc/1707367/
}}</ref>
न्यायालयाने महाराष्ट्र राज्यासाठी लागू असलेल्या ''Other Backward Classes (Caste Basis) for Maharashtra State'' या यादीचा विचार करताना अनुक्रमांक ८७वर ''Kunbi Tilori (in Ratnagiri District)'' या जातीचा समावेश असल्याची नोंद केली. त्याच परिच्छेदात न्यायालयाने या यादीत इतर कोणत्याही कुणबी जातीचा समावेश असल्याचे त्यांच्यासमोर दाखविण्यात आले नसल्याचेही नमूद केले.<ref name="Dhote1966"/>
न्यायालयाने पुढे असेही नमूद केले की, याच प्रकरणातील याचिकाकर्त्याने स्वतःला ''Kunbi'' जातीतला असल्याचे सांगितले होते; मात्र महाराष्ट्र शासनाच्या त्या वेळच्या यादीत ''Kunbi Tilori (in Ratnagiri District)'' या नोंदीशिवाय ''Kunbi'' या सामान्य संज्ञेचा इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समावेश असल्याचा अधिकृत पुरावा न्यायालयासमोर उपलब्ध नव्हता. त्यामुळे याचिकाकर्त्याला त्या वेळच्या नियमांनुसार इतर मागासवर्गीयांसाठी राखीव प्रवेशाचा हक्क नव्हता, असा न्यायालयाचा निष्कर्ष होता.<ref name="Dhote1966"/>
या निर्णयाचे तिलोरी कुणबींच्या इतिहासाच्या दृष्टीने महत्त्व असे की, '''१९६६मध्ये रत्नागिरी जिल्ह्यातील ''Kunbi Tilori'' ही संज्ञा महाराष्ट्र शासनाच्या अधिकृत इतर मागासवर्गीयांच्या जातीय यादीत स्वतंत्रपणे नोंदलेली होती''', याला न्यायालयीन निर्णयाचा थेट आधार मिळतो. तथापि, या प्रशासकीय नोंदीवरून तिलोरी कुणबींची इतर कुणबींपेक्षा स्वतंत्र प्राचीन जातीय उत्पत्ती किंवा वंशावळ सिद्ध होते, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="Dhote1966"/>
=== तिलोरी कुणबी आणि सामाजिक ओळख ===
''Tilori Kunbi'' ही संज्ञा उपलब्ध ऐतिहासिक नोंदींमध्ये विशेषतः रत्नागिरी जिल्ह्याशी संबंधित सामाजिक आणि प्रशासकीय ओळख म्हणून आढळते. १९६६ च्या मुंबई उच्च न्यायालयाच्या निर्णयात ''Kunbi Tilori (in Ratnagiri District)'' या संज्ञेची अधिकृत प्रशासकीय यादीतील नोंद स्पष्टपणे नमूद करण्यात आली आहे.<ref name="Dhote1966"/>
तिलोरी कुणबींच्या सामाजिक इतिहासाचा अभ्यास करताना ''Tilori'', ''Kunbi'', ''Kanbi'' आणि ''Maratha-Kunbi'' यांसारख्या संज्ञांचा वापर वेगवेगळ्या काळात आणि प्रदेशांत वेगवेगळ्या संदर्भात झाल्याचे लक्षात घेणे आवश्यक आहे. प्रशासकीय वर्गीकरणातील एखादी संज्ञा आणि त्या समुदायाची सामाजिक स्वयंओळख यांना एकच मानता येत नाही.
त्यामुळे तिलोरी कुणबींच्या इतिहासाचा अभ्यास करताना सरकारी वर्गीकरणाबरोबरच स्थानिक सामाजिक ओळख, विवाहपद्धती, बोली, जमीनधारणा, ग्रामव्यवस्था, व्यवसाय आणि इतर समकालीन ऐतिहासिक स्रोतांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे. उपलब्ध सरकारी नोंदी तिलोरी कुणबी ही रत्नागिरीशी संबंधित स्वतंत्र प्रशासकीय संज्ञा म्हणून वापरली गेल्याचे दाखवतात; मात्र त्या नोंदी स्वतःहून तिच्या प्राचीन जातीय उत्पत्तीचा अंतिम पुरावा ठरत नाहीत.<ref name="Dhote1966"/>
=== तिलोरी कुणबी आणि रत्नागिरी ===
रत्नागिरी जिल्ह्याशी तिलोरी कुणबी या संज्ञेचा विशेष प्रशासकीय संबंध विसाव्या शतकाच्या मध्यातील सरकारी नोंदींमध्ये स्पष्टपणे दिसून येतो. २३ एप्रिल १९४२ च्या मुंबई सरकारच्या ठरावात अनुसूची अ मधील मध्यमवर्गीय समुदायांच्या यादीत ''Kunbi (Except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)'' अशी नोंद करण्यात आली होती. त्याच ठरावातील इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत ''Kunbi Tilori in Ratnagiri district'' अशी स्वतंत्र नोंद करण्यात आली होती. हीच वर्गीकरणपद्धती १ नोव्हेंबर १९५०, २९ ऑक्टोबर १९५६ आणि २१ नोव्हेंबर १९६१ च्या पुढील सरकारी ठरावांमध्येही कायम राहिली.<ref name="Thorat2002"/>
१३ ऑक्टोबर १९६७ च्या महाराष्ट्र शासनाच्या नव्या वर्गीकरणात ''Kunbi caste'' ही संज्ञा इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत अनुक्रमांक ८३वर समाविष्ट करण्यात आली. या बदलाच्या संदर्भात मुंबई उच्च न्यायालयाने २००२ च्या निर्णयात नमूद केले की १९६७पर्यंत रत्नागिरी जिल्ह्यातील तिलोरी कुणबींना इतर मागासवर्गीय म्हणून स्वतंत्रपणे वर्गीकृत केले जात होते, तर इतर भागांतील कुणबींना मध्यमवर्गीय समुदायाच्या वर्गात ठेवले जात होते; १९६७मध्ये कुणबी जातीचा संपूर्ण महाराष्ट्रासाठी इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समावेश करण्यात आला.<ref name="Thorat2002"/>
या प्रशासकीय नोंदी तिलोरी कुणबी ही संज्ञा रत्नागिरी जिल्ह्याशी संबंधित स्वतंत्र प्रशासकीय वर्गीकरण म्हणून वापरली गेल्याचा महत्त्वपूर्ण पुरावा देतात. मात्र या नोंदींच्या आधारे तिलोरी कुणबींचे प्राचीन मूळ, एखाद्या विशिष्ट राजवंशाशी असलेले नाते किंवा इतर कुणबींपेक्षा वेगळी जैविक वंशपरंपरा निश्चित करता येत नाही. सरकारी वर्गीकरणाचा पुरावा आणि समुदायाच्या प्राचीन सामाजिक उत्पत्तीचा पुरावा यांमध्ये भेद करणे आवश्यक आहे.<ref name="Thorat2002"/>
=== तिलोरी कुणबी आणि भाषिक अभ्यास ===
तिलोरी कुणबींच्या सामाजिक इतिहासाच्या अभ्यासात दक्षिण कोकणातील बोलीभाषांचा अभ्यास हा पूरक स्रोत ठरतो. अमृत माधव घाटगे यांनी १९६३ ते १९७६ या कालखंडात ''मराठी बोलींचे सर्वेक्षण'' हा भाषिक सर्वेक्षण प्रकल्प राबविला. या प्रकल्पांतर्गत ''Kunbi of Mahad'' हा महाड परिसरातील कुणबी बोलीचा स्वतंत्र अभ्यास १९६६मध्ये प्रकाशित करण्यात आला.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/>
महाडच्या कुणबी बोलीचा हा अभ्यास तिलोरी कुणबींच्या सरकारी वर्गीकरणाचा थेट पुरावा नाही. त्याचे महत्त्व महाड परिसरातील कुणबी समाजाच्या भाषिक स्वरूपाचे स्वतंत्र दस्तऐवजीकरण झाले असल्यामध्ये आहे. त्यामुळे दक्षिण कोकणातील कुणबी समाजाच्या भाषिक विविधतेचा आणि प्रादेशिक सामाजिक इतिहासाचा अभ्यास करताना हा एक पूरक स्रोत म्हणून वापरता येतो.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/>
भाषिक साम्य आणि जातीय उत्पत्ती यांना एकच मानता येत नाही. एखाद्या समुदायाची स्वतंत्र बोली, भाषिक वैशिष्ट्ये किंवा विशिष्ट शब्दसंपत्ती यांवरून त्या समुदायाची प्राचीन वंशावळ किंवा निश्चित स्थलांतरमार्ग सिद्ध होत नाही. त्यामुळे महाडच्या कुणबी बोलीच्या अभ्यासाचा उपयोग प्रादेशिक भाषिक आणि सामाजिक इतिहास समजून घेण्यासाठी करणे अधिक योग्य ठरते.
=== आधुनिक महाराष्ट्रातील प्रशासकीय वर्गीकरण ===
आधुनिक महाराष्ट्रातील इतर मागासवर्गीयांच्या अधिकृत यादीत कुणबी या नोंदीखाली विविध संबंधित संज्ञांचा समावेश करण्यात आला आहे. महाराष्ट्र शासनाच्या १३ मे २०२५ च्या अधिकृत यादीत कुणबी या नोंदीखाली लेवा कुणबी, लेवा पाटील, लेवा पाटीदार, मराठा कुणबी, कुणबी मराठा, तिलोरी कुणबी, टिलोरी कुणबी आणि टी. कुणबी अशा संज्ञांचा उल्लेख आढळतो.<ref name="MaharashtraOBC2025">{{cite web
|title=Other Backward Classes list — Government Resolution dated 13 May 2025
|url=https://gr.maharashtra.gov.in/Site/Upload/Government%20Resolutions/Marathi/20250513170904091534.pdf
|publisher=Government of Maharashtra
|date=13 May 2025
}}</ref>
या आधुनिक प्रशासकीय यादीचा अर्थ या सर्व संज्ञांमागील समुदायांची ऐतिहासिक उत्पत्ती एकाच प्रक्रियेतून झाली आहे असा होत नाही. अशा शासकीय याद्या मुख्यतः प्रशासकीय, सामाजिक आणि आरक्षणविषयक वर्गीकरणासाठी तयार केल्या जातात. त्यामुळे केवळ या यादीतील एकत्रित नोंदींच्या आधारे एखाद्या समुदायाची प्राचीन उत्पत्ती, वंशावळ किंवा ऐतिहासिक सामाजिक संबंध निश्चित करता येत नाही.<ref name="MaharashtraOBC2025"/>
=== 'तिलोरी' आणि 'टिलोरी' या लेखनरूपांचा वापर ===
ऐतिहासिक आणि प्रशासकीय नोंदींमध्ये तिलोरी कुणबी या संज्ञेची इंग्रजी लेखनरूपे वेगवेगळी आढळतात. २००२ च्या मुंबई उच्च न्यायालयाच्या निर्णयात Kunbi Tilori in Ratnagiri district अशी नोंद करण्यात आली आहे. न्यायालयाने २३ एप्रिल १९४२ च्या सरकारी ठरावापासून २१ नोव्हेंबर १९६१पर्यंतच्या ठरावांमध्ये रत्नागिरी जिल्ह्यातील तिलोरी कुणबींना इतर कुणबींपेक्षा स्वतंत्र प्रशासकीय वर्गात ठेवण्यात आल्याचे नमूद केले आहे. त्यानंतर १३ ऑक्टोबर १९६७ च्या शासन ठरावात कुणबी जात संपूर्ण महाराष्ट्रासाठी इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समाविष्ट करण्यात आली.<ref name="Thorat2002"/>
आधुनिक महाराष्ट्र शासनाच्या १३ मे २०२५ च्या अधिकृत यादीत तिलोरी कुणबी आणि टिलोरी कुणबी अशी दोन्ही लेखनरूपे आढळतात. त्यामुळे जुन्या किंवा आधुनिक सरकारी दस्तऐवजांचा संदर्भ देताना त्या-त्या मूळ दस्तऐवजात वापरलेले लेखनरूप कायम ठेवणे अधिक अचूक ठरते.<ref name="MaharashtraOBC2025"/>
मराठी लेखनात मात्र एकसंधतेसाठी तिलोरी कुणबी ही संज्ञा वापरणे योग्य ठरते. एखाद्या ऐतिहासिक किंवा प्रशासकीय दस्तऐवजातील मूळ नोंद उद्धृत करताना त्यातील मूळ लेखनरूप संदर्भानुसार तसेच नमूद करता येते. अशा प्रकारे मराठीतील प्रचलित लेखन आणि प्राथमिक स्रोतांतील मूळ प्रशासकीय नोंद यांच्यात स्पष्ट फरक राखता येतो.
=== तिलोरी कुणबी : प्रशासकीय इतिहास आणि सामाजिक इतिहास यांतील फरक ===
तिलोरी कुणबींच्या इतिहासाचा अभ्यास करताना सरकारी प्रशासकीय वर्गीकरण आणि व्यापक सामाजिक इतिहास यांच्यात स्पष्ट भेद करणे आवश्यक आहे. २३ एप्रिल १९४२ च्या मुंबई सरकारच्या ठरावात ''Kunbi (Except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)'' अशी नोंद करण्यात आली होती, तर इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत ''Kunbi Tilori in Ratnagiri district'' अशी स्वतंत्र नोंद होती. हीच वर्गीकरणपद्धती १ नोव्हेंबर १९५०, २९ ऑक्टोबर १९५६ आणि २१ नोव्हेंबर १९६१ च्या पुढील सरकारी ठरावांमध्येही कायम राहिली.<ref name="Thorat2002"/>
१३ ऑक्टोबर १९६७ च्या महाराष्ट्र शासनाच्या नव्या यादीत ''Kunbi caste'' ही नोंद इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत करण्यात आली. २००२ च्या मुंबई उच्च न्यायालयाच्या निर्णयानुसार, १९६७पर्यंत रत्नागिरी जिल्ह्यातील तिलोरी कुणबींना इतर मागासवर्गीय म्हणून स्वतंत्रपणे वर्गीकृत केले जात होते, तर राज्यातील इतर भागांतील कुणबींना मध्यमवर्गीय समुदायाच्या वर्गात ठेवले जात होते. १९६७मध्ये प्रथमच कुणबी जातीचा संपूर्ण महाराष्ट्रासाठी इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समावेश करण्यात आला.<ref name="Thorat2002"/>
या घटनाक्रमावरून तिलोरी कुणबी ही विसाव्या शतकातील सरकारी प्रशासकीय वर्गीकरणात रत्नागिरी जिल्ह्याशी संबंधित स्वतंत्रपणे नोंदविलेली संज्ञा होती, हे स्पष्ट होते. मात्र केवळ या प्रशासकीय नोंदींच्या आधारे तिलोरी कुणबी हे प्राचीन काळापासून इतर कुणबींपेक्षा स्वतंत्र जात होते, किंवा तिलोरी कुणबी समाजाची एकच प्राचीन वंशपरंपरा होती, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. प्रशासकीय वर्गीकरणाचा पुरावा आणि समुदायाच्या ऐतिहासिक उत्पत्तीचा पुरावा यांना स्वतंत्रपणे तपासणे आवश्यक आहे.<ref name="Thorat2002"/>
=== ऐतिहासिक महत्त्व ===
तिलोरी कुणबींच्या इतिहासाचे महत्त्व रत्नागिरीतील प्रादेशिक सामाजिक ओळख आणि राज्याच्या बदलत्या प्रशासकीय वर्गीकरणाच्या परस्परसंबंधात आहे. १९४२मध्ये रत्नागिरी जिल्ह्यातील तिलोरी कुणबींना इतर कुणबींपासून प्रशासकीयदृष्ट्या वेगळ्या वर्गात ठेवण्यात आले. हे वर्गीकरण १९५०, १९५६ आणि १९६१ च्या सरकारी ठरावांमध्ये कायम राहिले.<ref name="Thorat2002"/>
१९६६ च्या ''Ashok Krishnarao Dhote v. Dean, Medical College, Nagpur'' या मुंबई उच्च न्यायालयाच्या निर्णयातही ''Kunbi Tilori (in Ratnagiri District)'' या संज्ञेचा इतर मागासवर्गीयांच्या यादीतील अनुक्रमांक ८७वरील नोंद म्हणून उल्लेख करण्यात आला होता. त्यामुळे १९६० च्या दशकाच्या मध्यापर्यंत ही संज्ञा प्रशासकीय नोंदींमध्ये वापरात असल्याचा न्यायालयीन पुरावा उपलब्ध आहे.<ref name="Dhote1966"/>
यानंतर १३ ऑक्टोबर १९६७ च्या शासन ठरावाद्वारे ''Kunbi caste'' ही संज्ञा संपूर्ण महाराष्ट्रासाठी इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समाविष्ट करण्यात आली. त्यामुळे तिलोरी कुणबींच्या प्रशासकीय इतिहासात १९४२ ते १९६१ या कालखंडातील स्वतंत्र वर्गीकरण, १९६० च्या दशकातील त्याची न्यायालयीन नोंद आणि १९६७नंतरचे व्यापक कुणबी वर्गीकरण हे महत्त्वाचे टप्पे ठरतात.<ref name="Thorat2002"/>
या पार्श्वभूमीवर तिलोरी कुणबींचा अभ्यास हा केवळ एका उपसंज्ञेच्या इतिहासापुरता मर्यादित राहत नाही. तो रत्नागिरीतील प्रादेशिक सामाजिक ओळख, विसाव्या शतकातील मागासवर्गीयांचे सरकारी वर्गीकरण, राज्याच्या प्रशासकीय धोरणातील बदल आणि आधुनिक महाराष्ट्रातील जातीय वर्गीकरण यांच्या परस्परसंबंधांचा अभ्यास करण्यासाठी महत्त्वाचा ठरतो.
== कुणबी बोली आणि भाषिक वैशिष्ट्ये ==
कोकणातील कुणबी समाजाच्या सामाजिक इतिहासात भाषेला महत्त्वाचे स्थान आहे. तथापि, ''कुणबी बोली'' ही संज्ञा संपूर्ण कोकणात एकाच भाषिक स्वरूपासाठी वापरली जाते असे मानणे योग्य नाही. उपलब्ध भाषावैज्ञानिक अभ्यासांमध्ये महाड परिसरातील कुणबींच्या भाषिक प्रकाराचा स्वतंत्र अभ्यास तसेच रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीचा स्वतंत्र अभ्यास आढळतो. त्यामुळे ''कुणबी बोली'' या संज्ञेचा वापर करताना तिचा प्रादेशिक आणि सामाजिक संदर्भ स्पष्ट करणे आवश्यक आहे.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/><ref name="Veer2022"/>
=== कुणबी बोलीची संकल्पना ===
''कुणबी बोली'' ही संज्ञा कुणबी समाजाशी संबंधित विविध प्रादेशिक भाषिक प्रकारांसाठी वापरली जाते. भाषाशास्त्रीय अभ्यासात एखाद्या भाषिक प्रकाराचे स्वरूप केवळ त्याच्या बोलणाऱ्या समुदायाच्या सामाजिक ओळखीवर निश्चित होत नाही; त्याचे भौगोलिक वितरण, ध्वनिवैशिष्ट्ये, शब्दसंपदा, व्याकरण, वाक्यरचना आणि शेजारील भाषिक प्रकारांशी असलेले संबंध यांचाही विचार केला जातो.
अमृत माधव घाटगे यांनी १९६३ ते १९७६ या कालखंडात ''A Survey of Dialects of Marathi'' हा भाषिक सर्वेक्षण प्रकल्प राबविला. या प्रकल्पाच्या अंतर्गत नऊ भाषिक प्रकारांचे स्वतंत्र पुस्तकात्मक अभ्यास प्रकाशित झाले. त्यामध्ये ''Kunbi of Mahad'' हा महाड परिसरातील कुणबी बोलीचा अभ्यास १९६६मध्ये प्रसिद्ध झाला. या मालिकेत दक्षिण कॅनरातील कोकणी, कुडाळी, कोचीन, काणकोणची कोकणी, ठाण्याची वारली, कासरगोडची मराठी, गोव्याची गावडी आणि डांगची भिली या भाषिक प्रकारांचेही स्वतंत्र अभ्यास प्रकाशित झाले होते.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/>
महाडच्या कुणबी बोलीचा स्वतंत्र भाषाशास्त्रीय अभ्यास झाल्यामुळे कुणबी समाजाशी संबंधित भाषिक विविधतेचा एक प्रादेशिक नमुना उपलब्ध होतो. त्याचप्रमाणे रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीवरील पुढील अभ्यासामुळे या प्रदेशातील कुणबी समाजाच्या भाषिक स्वरूपाचा स्वतंत्र विचार करता येतो.<ref name="Veer2022"/>
कोकणातील ग्रामीण समाज, स्थानिक जीवनपद्धती, सामाजिक संबंध आणि सांस्कृतिक परंपरा यांचा विचार करताना भाषिक वैशिष्ट्ये हा एक पूरक घटक ठरतो. रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील ग्रामीण जीवनाच्या ऐतिहासिक व सांस्कृतिक संदर्भासाठी उपलब्ध स्थानिक साहित्याचाही उपयोग करता येतो.
यावरून ''कुणबी बोली''चा अभ्यास हा केवळ जातीय समाजशास्त्राचा विषय नसून महाराष्ट्रातील प्रादेशिक भाषिक विविधता, ग्रामीण सामाजिक इतिहास आणि स्थानिक सांस्कृतिक ओळख यांच्या अभ्यासाचाही एक भाग आहे. मात्र एखाद्या बोलीचा एखाद्या समुदायाशी असलेला संबंध हा त्या समुदायाच्या प्राचीन जातीय उत्पत्तीचा किंवा वंशावळीचा स्वतःपुरता निर्णायक पुरावा मानता येत नाही.
=== महाड परिसरातील कुणबी बोली ===
महाड परिसरातील कुणबी बोलीचा स्वतंत्र भाषिक अभ्यास अमृत माधव घाटगे यांनी केला. ''Kunbi of Mahad'' हा त्यांच्या ''A Survey of Marathi Dialects'' या मालिकेतील तिसरा खंड असून तो १९६६मध्ये प्रकाशित झाला. मराठी बोलींच्या सर्वेक्षणाच्या उपलब्ध नोंदींमध्ये या ग्रंथाचा समावेश आहे.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/><ref>{{cite web
|title=Publications
|publisher=Maharashtra State Board for Literature and Culture
|url=https://sahitya.marathi.gov.in/wp-content/uploads/2021/07/publications2021-07.pdf
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|access-date=2026-09-08
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महाडचा हा भाषिक प्रकार महाड परिसरातील कुणबी समाजाशी संबंधित असल्यामुळे सामाजिक ओळख आणि भाषिक विविधता यांच्या परस्परसंबंधाच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचा ठरतो. मात्र महाडमध्ये नोंदवलेला हा भाषिक प्रकार संपूर्ण रत्नागिरी, रायगड किंवा कोकणातील सर्व कुणबी समाजाची एकसमान बोली होती, असा निष्कर्ष उपलब्ध अभ्यासावरून काढता येत नाही. प्रादेशिक भौगोलिक परिस्थिती, स्थानिक भाषिक संपर्क आणि सामाजिक इतिहास यांनुसार भाषिक वैशिष्ट्यांमध्ये फरक असू शकतो.<ref name="घोलम2025">{{cite book |last=घोलम |first=अनंत नर्मदा सखाराम |title=खडीकोळवण : सांस्कृतिक, ऐतिहासिक आणि ग्रामीण जीवन |publisher=Kindle Direct Publishing |year=2025 }}</ref>
=== तिलोरी कुणबी बोली ===
रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी समाजाच्या भाषिक स्वरूपाचा स्वतंत्र अभ्यास सीमा राजेश वीर यांनी ''कोकणातील तिलोरी कुणबी बोली'' या लेखातून केला आहे. हा लेख ''भाषा आणि जीवन'' या मराठी भाषावैज्ञानिक नियतकालिकाच्या २०२२ च्या अंकात प्रकाशित झाला असून तो खंड ४०, अंक ३मध्ये पृष्ठ ७ ते १९ या दरम्यान प्रसिद्ध झाला आहे.<ref name="Veer2022">{{cite journal
|last=वीर
|first=सीमा राजेश
|title=कोकणातील तिलोरी कुणबी बोली
|journal=भाषा आणि जीवन
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|issue=3
|year=2022
|pages=7–19
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या अभ्यासामुळे तिलोरी कुणबी बोलीचा विचार केवळ सामाजिक किंवा प्रशासकीय ओळखीच्या संदर्भात न करता स्वतंत्र भाषिक अभ्यासाच्या विषयाच्या रूपातही करता येतो. तिलोरी कुणबींच्या भाषिक स्वरूपाचा अभ्यास करताना रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील स्थानिक भाषिक वातावरण, प्रमाण मराठीचा प्रभाव आणि शेजारील कोकणी भाषिक प्रकार यांचा संदर्भ लक्षात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="Veer2022"/>
=== मराठीशी संबंध ===
महाड आणि दक्षिण कोकणातील कुणबी भाषिक प्रकारांचा अभ्यास मराठी भाषेच्या व्यापक प्रादेशिक भाषिक विविधतेच्या संदर्भात करण्यात आला आहे. अमृत माधव घाटगे यांच्या मराठी बोलींच्या सर्वेक्षणात ''Kunbi of Mahad''चा स्वतंत्र भाषिक प्रकार म्हणून समावेश करण्यात आला होता.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/>
मराठी आणि कोकणी यांच्यातील भाषिक संबंधांविषयी भाषाशास्त्रीय अभ्यासात विविध मते मांडली गेली आहेत. मराठी बोलींच्या सर्वेक्षणाच्या उपलब्ध ऐतिहासिक माहितीनुसार जॉर्ज अब्राहम ग्रिअर्सन यांच्या भाषिक वर्गीकरणात कोकणीचा मराठीशी संबंध जोडला गेला होता; त्यानंतर सुमित्रा मंगेश कात्रे यांच्या ''The Formation of Konkani'' या १९६६मधील अभ्यासात कोकणीच्या स्वतंत्र भाषिक स्वरूपाचा विचार करण्यात आला. त्यामुळे कोकणातील एखाद्या कुणबी भाषिक प्रकाराला सरसकट ''मराठीची बोली'' किंवा ''कोकणीची बोली'' असे संबोधण्यापेक्षा संबंधित प्रदेशातील भाषिक वैशिष्ट्ये आणि उपलब्ध भाषाशास्त्रीय अभ्यास यांच्या आधारे त्याचे स्वरूप निश्चित करणे अधिक योग्य ठरते.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/>
कुणबी बोलींच्या अभ्यासातून कोकणातील सामाजिक आणि भाषिक विविधतेचा एक महत्त्वाचा पैलू समोर येतो. महाडची कुणबी बोली, रत्नागिरी-दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोली आणि इतर स्थानिक भाषिक प्रकार यांचा तुलनात्मक अभ्यास केल्यास प्रदेश, सामाजिक ओळख, भाषिक संपर्क आणि ग्रामीण सांस्कृतिक जीवन यांच्यातील परस्परसंबंध अधिक स्पष्टपणे समजून घेता येतात.<ref name="घोलम2025" />
=== कोकणी भाषिक प्रभाव ===
कोकण हा मराठी आणि कोकणी या दोन्ही भाषिक परंपरांच्या संपर्कातील प्रदेश आहे. त्यामुळे दक्षिण कोकणातील विविध भाषिक प्रकारांवर शेजारील कोकणी भाषिक क्षेत्राशी झालेल्या संपर्काचा परिणाम झालेला असण्याची शक्यता भाषिक अभ्यासाच्या दृष्टीने महत्त्वाची ठरते. हा परिणाम शब्दसंपदा, उच्चार, ध्वनिवैशिष्ट्ये किंवा वाक्यरचनेच्या काही घटकांमध्ये दिसू शकतो; मात्र त्याचे स्वरूप प्रदेशानुसार वेगवेगळे असू शकते.
एखाद्या विशिष्ट शब्दाचा, उच्चाराचा किंवा व्याकरणिक रचनेचा कोकणी प्रभाव म्हणून उल्लेख करण्यासाठी तुलनात्मक भाषाशास्त्रीय पुरावा आवश्यक असतो. त्यामुळे कोकणातील सर्व कुणबी बोलींवर कोकणीचा समान किंवा व्यापक प्रभाव आहे, असा निष्कर्ष प्रत्येक उपप्रदेशाच्या स्वतंत्र भाषिक अभ्यासाशिवाय काढणे योग्य ठरत नाही.
महाड, रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील कुणबी भाषिक प्रकारांमध्ये काही साम्य आढळू शकते; परंतु त्यांचे भौगोलिक वितरण, स्थानिक भाषिक संपर्क आणि ऐतिहासिक विकास समान असल्याचे गृहीत धरता येत नाही. महाडच्या कुणबी बोलीचा स्वतंत्र अभ्यास अमृत माधव घाटगे यांनी केला असून रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीचा स्वतंत्र भाषिक अभ्यासही उपलब्ध आहे.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/><ref name="Veer2022"/>
=== स्थानिक शब्दसंपदा ===
बोलीभाषेच्या अभ्यासातील महत्त्वाचा घटक म्हणजे स्थानिक शब्दसंपदा. शेती, पाऊस, भातशेती, जलव्यवस्था, घररचना, शेतीची अवजारे, समुद्र, डोंगर, वनस्पती, प्राणी आणि ग्रामजीवनाशी संबंधित शब्दांमधून एखाद्या प्रदेशातील दैनंदिन जीवन, पर्यावरण आणि सांस्कृतिक अनुभवांचे भाषिक प्रतिबिंब दिसून येऊ शकते. कोकणातील ग्रामीण जीवनाचा अभ्यास करताना स्थानिक शब्दसंपदेचा संबंध पारंपरिक शेतीपद्धती, घररचना आणि ग्रामजीवनाशी जोडून पाहता येतो.<ref name="घोलम2025" />
महाडच्या कुणबी बोलीचा स्वतंत्र भाषिक अभ्यास अमृत माधव घाटगे यांच्या सर्वेक्षणात करण्यात आला आहे. या अभ्यासामुळे महाड परिसरातील कुणबी समाजाशी संबंधित भाषिक वैशिष्ट्ये आणि स्थानिक शब्दसंपदेचा अभ्यास करण्यासाठी स्वतंत्र स्रोत उपलब्ध होतो.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/>
तिलोरी कुणबी बोलीच्या संदर्भात सीमा राजेश वीर यांच्या २०२२मधील अभ्यासामुळे रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील या भाषिक प्रकाराचा स्वतंत्र विचार करण्यास आधार मिळतो.<ref name="Veer2022"/>
स्थानिक शब्दसंपदा सामाजिक आणि सांस्कृतिक इतिहासासाठी पूरक पुरावा देऊ शकते; मात्र एखादा शब्द केवळ एखाद्या विशिष्ट समुदायापुरता मर्यादित आहे किंवा त्याचा उगम एखाद्या विशिष्ट प्राचीन भाषेतच झाला आहे, असा निष्कर्ष केवळ त्या शब्दाच्या स्थानिक वापरावरून काढता येत नाही. अशा निष्कर्षांसाठी शब्दव्युत्पत्ती, तुलनात्मक भाषाशास्त्र, ऐतिहासिक नोंदी आणि संबंधित भाषांमधील समांतर शब्दरूपांचा स्वतंत्र अभ्यास आवश्यक असतो.
=== उच्चारवैशिष्ट्ये ===
प्रादेशिक बोलींच्या अभ्यासात प्रमाण भाषेच्या तुलनेत आढळणारे ध्वनी, स्वरांचे उच्चार, व्यंजनांचे उच्चार, शब्दांतील अक्षररचना आणि बोलण्याची लय यांचा विचार केला जातो. अमृत माधव घाटगे यांच्या भाषिक सर्वेक्षणात महाड परिसरातील कुणबी बोलीचा स्वतंत्र अभ्यास करण्यात आला आहे. त्यामुळे या बोलीच्या उच्चारवैशिष्ट्यांचा अभ्यास प्रमाण मराठीच्या तुलनेत भाषाशास्त्रीय पद्धतीने करता येतो.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/>
तिलोरी कुणबी बोलीच्या संदर्भातही उच्चारवैशिष्ट्यांचा अभ्यास करताना रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील स्थानिक भाषिक वातावरण विचारात घेणे आवश्यक आहे. तिलोरी कुणबी बोलीवर उपलब्ध असलेल्या भाषाशास्त्रीय अभ्यासात या बोलीचा स्वतंत्र भाषिक प्रकार म्हणून विचार करण्यात आला आहे.<ref name="Veer2022"/>
मात्र बोलीच्या विशिष्ट उच्चारवैशिष्ट्यांचे वर्णन करताना संबंधित भाषाशास्त्रीय अभ्यासातील उदाहरणे, ध्वनिलेखन आणि लिप्यंतर यांचा आधार घेणे आवश्यक आहे. उपलब्ध प्राथमिक अभ्यासात स्पष्टपणे नोंद नसलेली उच्चाररूपे अनुमानाने मांडणे योग्य ठरत नाही. त्यामुळे कुणबी बोलीच्या उच्चारवैशिष्ट्यांचा सविस्तर अभ्यास संबंधित भाषाशास्त्रीय स्रोतांच्या आधारेच करणे आवश्यक आहे.
=== व्याकरणाची वैशिष्ट्ये ===
बोलीभाषेचे व्याकरण प्रमाण भाषेपेक्षा पूर्णपणे स्वतंत्र असणे आवश्यक नसते. क्रियापदांची रूपे, विभक्तीप्रत्यय, सर्वनामे, लिंग आणि वचन, काळ, वाक्यरचना तसेच शब्दक्रम यांसारख्या घटकांमध्ये प्रादेशिक किंवा सामाजिक फरक आढळू शकतात.
महाडच्या कुणबी बोलीच्या स्वतंत्र भाषिक वर्णनाचा उपयोग तिच्या व्याकरणात्मक वैशिष्ट्यांचा अभ्यास करण्यासाठी करता येतो. अमृत माधव घाटगे यांच्या महाडच्या कुणबी बोलीवरील अभ्यासामुळे या बोलीच्या भाषिक रचनेचा स्वतंत्र संदर्भ उपलब्ध होतो.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/>
रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीच्या संदर्भात सीमा राजेश वीर यांचा २०२२मधील अभ्यासही महत्त्वाचा पूरक स्रोत आहे. या अभ्यासाच्या आधारे तिलोरी कुणबी बोलीच्या भाषिक वैशिष्ट्यांचा स्वतंत्र विचार करता येतो.<ref name="Veer2022"/>
कुणबी बोलीचे व्याकरण प्रमाण मराठीपासून पूर्णपणे स्वतंत्र आहे किंवा ती स्वतंत्र भाषा आहे, असा निष्कर्ष केवळ तिच्या स्वतंत्र बोलीअभ्यासाच्या अस्तित्वावरून काढता येत नाही. तिच्या व्याकरणाचा विचार करताना प्रादेशिक मराठीचे स्वरूप, कोकणीशी असलेला भाषिक संपर्क आणि संबंधित प्रदेशातील इतर बोली यांचा तुलनात्मक अभ्यास करणे आवश्यक आहे.
=== शेती आणि बोलीभाषा ===
कुणबी समाजाच्या पारंपरिक कृषीजीवनाशी संबंधित शब्दसंपदा ही कोकणातील ग्रामीण भाषिक अभ्यासाचा एक महत्त्वाचा घटक ठरू शकते. भातशेती, नांगरणी, पेरणी, रोपलागवड, कापणी, धान्यसाठवण, जलव्यवस्था, पशुधन आणि शेतीची अवजारे यांसंबंधीचे स्थानिक शब्द त्या प्रदेशातील कृषीपद्धती आणि दैनंदिन जीवनाचे भाषिक प्रतिबिंब दर्शवू शकतात. कोकणातील ग्रामीण जीवनाच्या अभ्यासात शेती, घररचना, स्थानिक साधने आणि ग्रामजीवन यांचा परस्परसंबंधही दिसून येतो.<ref name="घोलम2025" />
महाडच्या कुणबी बोलीचा स्वतंत्र भाषिक अभ्यास अमृत माधव घाटगे यांनी केला असून, त्या अभ्यासामुळे कृषी आणि ग्रामीण जीवनाशी संबंधित स्थानिक शब्दसंपदेचा भाषाशास्त्रीय संदर्भात अभ्यास करता येतो.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/>
तथापि एखाद्या कृषीशब्दाची व्युत्पत्ती, त्याचे विशिष्ट भौगोलिक मूळ किंवा तो शब्द केवळ कुणबी समाजापुरताच मर्यादित असल्याचा निष्कर्ष केवळ स्थानिक वापरावरून काढता येत नाही. अशा निष्कर्षांसाठी तुलनात्मक भाषाशास्त्रीय अभ्यास, ऐतिहासिक शब्दकोश, संबंधित बोलींची उदाहरणे आणि उपलब्ध भाषिक नोंदींचा आधार आवश्यक असतो.
=== बोली आणि सामाजिक ओळख ===
भाषा ही सामाजिक आणि प्रादेशिक ओळखीचा एक घटक असू शकते. कुणबी समाजाशी संबंधित काही भाषिक प्रकारांना त्यांच्या बोलणाऱ्या समुदायाच्या सामाजिक ओळखीशी जोडून स्वतंत्रपणे अभ्यासण्यात आले आहे. महाड परिसरातील कुणबी बोलीचा अमृत माधव घाटगे यांनी केलेला अभ्यास आणि रत्नागिरी-दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीवरील सीमा राजेश वीर यांचा अभ्यास याची उदाहरणे आहेत.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/><ref name="Veer2022"/>
मात्र भाषा आणि जातीय ओळख यांच्यात सरळ किंवा एकरेषीय संबंध असतोच असे नाही. एकाच सामाजिक समुदायातील लोक वेगवेगळ्या प्रदेशांमध्ये भिन्न भाषिक प्रकार वापरू शकतात. त्याचप्रमाणे एखादा भाषिक प्रकार एकापेक्षा अधिक सामाजिक समूहांकडून वापरला जाऊ शकतो. त्यामुळे केवळ एखाद्या व्यक्तीच्या बोलीवरून तिची जातीय ओळख निश्चित करणे भाषाशास्त्रीयदृष्ट्या योग्य ठरत नाही.
कुणबी समाजाच्या सामाजिक इतिहासाचा अभ्यास करताना म्हणूनच बोलीभाषेचा विचार जमीन, शेती, स्थलांतर, ग्रामजीवन, स्थानिक सामाजिक संबंध आणि प्रादेशिक संस्कृती यांच्या व्यापक संदर्भात करणे अधिक उपयुक्त ठरते.
=== प्रमाण मराठीचा प्रभाव ===
शिक्षण, मुद्रण, प्रशासन, प्रसारमाध्यमे, शहरीकरण आणि स्थलांतर यांच्या विस्तारामुळे महाराष्ट्रातील अनेक प्रादेशिक भाषिक प्रकारांवर प्रमाण मराठीचा प्रभाव वाढला आहे. शाळा, सरकारी कार्यालये, मुद्रित माध्यमे आणि आधुनिक संप्रेषणाच्या साधनांमध्ये प्रमाण मराठीचा वापर वाढल्यामुळे काही स्थानिक बोलींचा दैनंदिन वापर विशिष्ट क्षेत्रांमध्ये कमी होण्याची शक्यता आहे.
भाषिक सर्वेक्षणांमध्ये महाराष्ट्रातील विविध भाषिक प्रकारांची नोंद करण्यात आली आहे. Survey of Dialects of Marathi Languageच्या माहितीनुसार महाराष्ट्रातील भाषिक विविधतेच्या अभ्यासात अनेक प्रादेशिक भाषिक प्रकारांचा स्वतंत्र विचार करण्यात आला आहे आणि सर्व भाषिक प्रकारांना मराठीच्या बोली म्हणून वर्गीकृत करता येत नाही, असे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/>
यामुळे कुणबी समाजाशी संबंधित भाषिक प्रकारांचा अभ्यास करताना त्यांना पूर्वनिर्धारितपणे प्रमाण मराठीच्या बोली म्हणून किंवा स्वतंत्र भाषा म्हणून वर्गीकृत करण्याऐवजी संबंधित प्रदेशातील उपलब्ध भाषाशास्त्रीय पुरावे, भाषिक रचना, भौगोलिक वितरण आणि इतर भाषांशी असलेला संपर्क यांचा विचार करणे आवश्यक ठरते.
=== आधुनिक भाषिक बदल ===
कोकणातील कुणबी समाजाशी संबंधित भाषिक प्रकारांवर आधुनिक शिक्षण, शहरीकरण, स्थलांतर, प्रसारमाध्यमे आणि प्रमाण मराठीच्या वाढत्या वापराचा परिणाम होत आहे. इंग्रजीच्या वाढत्या वापरामुळेही विशेषतः शिक्षण, रोजगार आणि शहरी व्यवहारांच्या क्षेत्रात भाषिक वापराच्या स्वरूपात बदल होत आहेत. या प्रक्रियेमुळे घरगुती आणि स्थानिक व्यवहारांमध्ये वापरल्या जाणाऱ्या काही प्रादेशिक भाषिक प्रकारांचा वापर विशिष्ट क्षेत्रांमध्ये कमी होण्याची शक्यता आहे.
रत्नागिरी जिल्ह्यातील तिलोरी बोलीच्या संदर्भात स्थानिक शब्दसंपदेचे संकलन आणि बोलीच्या सांस्कृतिक दस्तऐवजीकरणाचे प्रयत्न झाल्याचे समकालीन वृत्तांतांमध्ये नमूद करण्यात आले आहे. चिपळूण, संगमेश्वर आणि राजापूर परिसरात तिलोरी बोलीशी संबंधित शब्दसंपदेचे संकलन करण्यात आल्याचे या वृत्तांतात म्हटले आहे.<ref name="TiloriWords2019">{{cite web
|title=तिलोरी बोलीतले नऊ हजार शब्द संकलित
|url=https://www.esakal.com/amp/kokan/tilori-language-900-words-collection-174832
|publisher=ई-सकाळ
|date=6 March 2019
}}</ref>
या वृत्तांतानुसार सुमारे नऊ हजार शब्द, सुमारे साठ गाणी आणि काही म्हणी संकलित करण्यात आल्याचे नमूद आहे.<ref name="TiloriWords2019"/> या प्रकारचे स्थानिक संकलन तिलोरी बोलीच्या शब्दसंपदेचे आणि लोकसाहित्याचे दस्तऐवजीकरण करण्याच्या दृष्टीने महत्त्वाचे आहे. मात्र या संकलनातील सामग्रीचा उपयोग संपूर्ण रत्नागिरी जिल्ह्यातील किंवा संपूर्ण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीचे प्रतिनिधिक स्वरूप म्हणून करताना संबंधित भाषाशास्त्रीय अभ्यासाचा आधार घेणे आवश्यक आहे.
=== बोलीचे संवर्धन ===
बोलीभाषांच्या दस्तऐवजीकरणासाठी शब्दसंग्रह, म्हणी, लोकगीते, लोककथा, पारंपरिक संभाषणे आणि स्थानिक भाषिक नमुने यांचे संकलन महत्त्वाचे ठरते. अशा सामग्रीतून एखाद्या प्रदेशातील दैनंदिन जीवन, कृषीपद्धती, सामाजिक संबंध आणि सांस्कृतिक परंपरांचे भाषिक स्वरूप नोंदवता येते. कोकणातील ग्रामीण जीवन, शेती आणि स्थानिक सांस्कृतिक परंपरांचा अभ्यास करताना अशा भाषिक सामग्रीला पूरक ऐतिहासिक-सांस्कृतिक स्रोत म्हणूनही पाहता येते.<ref name="घोलम2025" />
तिलोरी बोलीच्या संदर्भात स्थानिक पातळीवर शब्दसंपदा, गीते आणि म्हणी यांचे संकलन झाल्याची नोंद उपलब्ध आहे.<ref name="TiloriWords2019"/>
भाषिक संवर्धनाच्या दृष्टीने अशा स्थानिक प्रयत्नांना शास्त्रीय भाषिक सर्वेक्षण, ध्वनिमुद्रण, लिप्यंतरण, शब्दकोश निर्मिती आणि डिजिटल संग्रह यांची जोड मिळाल्यास बोलीभाषेच्या पुढील अभ्यासासाठी अधिक व्यापक स्रोतसामग्री उपलब्ध होऊ शकते. विशेषतः वृद्ध पिढीकडे उपलब्ध असलेली स्थानिक शब्दसंपदा, म्हणी, लोकगीते आणि पारंपरिक भाषिक वापर यांचे दस्तऐवजीकरण केल्यास भाषिक आणि सांस्कृतिक वारशाच्या नोंदी जतन करण्यास मदत होऊ शकते.
=== कुणबी बोलींचा तुलनात्मक अभ्यास ===
महाडची कुणबी बोली आणि रत्नागिरी-दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोली यांचा उल्लेख एकाच व्यापक संदर्भात होत असला तरी हे दोन्ही भाषिक प्रकार समान आहेत असे गृहीत धरता येत नाही. अमृत माधव घाटगे यांचा अभ्यास महाड परिसरातील कुणबी बोलीवर केंद्रित आहे, तर सीमा राजेश वीर यांचा २०२२मधील अभ्यास रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीशी संबंधित आहे.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/><ref name="Veer2022"/>
या दोन्ही भाषिक प्रकारांचा तुलनात्मक अभ्यास करताना ध्वनिवैशिष्ट्ये, शब्दसंपदा, व्याकरण, वाक्यरचना, स्थानिक भाषिक संपर्क आणि भौगोलिक वितरण या घटकांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे. भौगोलिक जवळीक किंवा सामाजिक साम्य यांवरून दोन बोलींचे भाषिक स्वरूप समान असल्याचा निष्कर्ष काढता येत नाही.
महाड, रायगड, रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील कुणबी समाजाशी संबंधित भाषिक प्रकारांचा तुलनात्मक अभ्यास केल्यास त्यांच्या भाषिक साम्यांबरोबरच प्रादेशिक फरकही अधिक स्पष्ट होऊ शकतात. मात्र अशा तुलनात्मक निष्कर्षांसाठी संबंधित बोलींच्या प्रत्यक्ष भाषिक नमुन्यांचा आणि उपलब्ध भाषाशास्त्रीय अभ्यासांचा आधार आवश्यक आहे.
=== भाषिक इतिहास आणि कुणबी समाज ===
कुणबी समाजाशी संबंधित भाषिक प्रकारांचा इतिहास हा कोकणातील ग्रामीण समाजाच्या दीर्घकालीन भाषिक परिवर्तनाच्या संदर्भात पाहता येतो. कृषीप्रधान ग्रामजीवन, स्थानिक देवस्थान आणि लोकपरंपरा, बाजारपेठा, शेजारील भाषिक समुदायांशी संपर्क, स्थलांतर, शिक्षण आणि शहरीकरण या विविध प्रक्रियांचा भाषिक वापरावर परिणाम झाला असण्याची शक्यता आहे. कोकणातील ग्रामीण जीवन आणि कृषीसंस्कृतीच्या अभ्यासातून या भाषिक परिवर्तनाची सामाजिक पार्श्वभूमी समजण्यास पूरक संदर्भ मिळू शकतो.<ref name="घोलम2025" />
मात्र उपलब्ध भाषिक अभ्यासांवरून कुणबी बोलीची थेट प्राचीन किंवा मध्ययुगीन वंशावळ निश्चित करता येत नाही. त्याचप्रमाणे एखाद्या आधुनिक बोलीचे अस्तित्व हे त्या समुदायाच्या प्राचीन स्थलांतराचा थेट पुरावा मानता येत नाही. भाषिक इतिहास आणि सामाजिक इतिहास यांचा परस्पर संबंध असला तरी त्यांच्या निष्कर्षांसाठी भाषाशास्त्रीय, ऐतिहासिक आणि सामाजिक स्रोत स्वतंत्रपणे तपासणे आवश्यक आहे.
=== ऐतिहासिक आणि आधुनिक भाषिक अभ्यासांचे महत्त्व ===
महाडच्या कुणबी बोलीसाठी अमृत माधव घाटगे यांचा १९६६मधील अभ्यास हा कोकणातील कुणबी भाषिक प्रकाराच्या दस्तऐवजीकरणातील महत्त्वाचा स्रोत आहे. हा अभ्यास मराठीच्या बोलींच्या व्यापक सर्वेक्षणाच्या प्रकल्पाचा भाग होता.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/><ref name="GhatgeKunbiMahad"/>
तिलोरी कुणबी बोलीच्या संदर्भात सीमा राजेश वीर यांचा २०२२मधील अभ्यास आधुनिक काळातील महत्त्वाचा भाषाशास्त्रीय संदर्भ उपलब्ध करून देतो.<ref name="Veer2022"/>
या दोन्ही स्रोतांचा एकत्रित विचार केल्यास कोकणातील कुणबी समाजाशी संबंधित भाषिक प्रकारांचा अभ्यास वेगवेगळ्या कालखंडांच्या संदर्भात करता येतो. एकीकडे १९६० च्या दशकातील शास्त्रीय बोली-सर्वेक्षणातून महाड परिसरातील भाषिक स्वरूपाचे दस्तऐवजीकरण झाले, तर दुसरीकडे २०२० च्या दशकातील अभ्यासातून रत्नागिरी-दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीचा स्वतंत्र विचार उपलब्ध झाला आहे. या दोन्ही अभ्यासांमधील काल, प्रदेश आणि अभ्यासपद्धतीतील फरक लक्षात घेऊनच त्यांची तुलना करणे आवश्यक आहे.
=== भाषिक नोंदींच्या मर्यादा ===
कुणबी बोलीविषयी उपलब्ध भाषिक स्रोतांचा वापर करताना काही मर्यादा लक्षात घेणे आवश्यक आहे. प्रथम, महाडची कुणबी बोली आणि रत्नागिरी-दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोली या स्वतंत्र प्रादेशिक भाषिक अभ्यासांचे विषय आहेत. त्यामुळे दोन्ही भाषिक प्रकारांचे स्वरूप एकसमान आहे असे गृहीत धरता येत नाही. दुसरे, एखाद्या बोलीचा विशिष्ट सामाजिक समुदायाशी संबंध असला तरी त्या बोलीच्या आधारे त्या समुदायाची जातीय उत्पत्ती किंवा प्राचीन वंशपरंपरा निश्चित करता येत नाही. तिसरे, मराठी, कोकणी आणि त्यांच्या विविध प्रादेशिक भाषिक प्रकारांमधील संबंध ऐतिहासिक आणि भाषाशास्त्रीयदृष्ट्या गुंतागुंतीचे आहेत.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/>
त्यामुळे कुणबी बोलीची उत्पत्ती अमुक एका प्राचीन भाषेपासून झाली, सर्व कुणबी समाज एकच बोली बोलतो किंवा तिलोरी कुणबी बोली ही संपूर्ण कोकणातील एकमेव कुणबी बोली आहे, अशी निश्चित विधाने उपलब्ध भाषिक पुराव्यांच्या आधारे करता येत नाहीत. अशा निष्कर्षांसाठी विविध प्रदेशांतील भाषिक नमुने, ऐतिहासिक नोंदी आणि तुलनात्मक भाषाशास्त्रीय अभ्यास आवश्यक आहेत.
=== कोकणातील कुणबी बोलींचे भाषिक महत्त्व ===
कोकणातील कुणबी बोलींचे महत्त्व केवळ सामाजिक ओळखीच्या संदर्भापुरते मर्यादित नसून त्या प्रदेशातील भाषिक विविधतेच्या दस्तऐवजीकरणातही आहे. महाडमधील कुणबी बोलीचा १९६६मधील स्वतंत्र भाषिक अभ्यास आणि रत्नागिरी-दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीवरील २०२२मधील अभ्यास यांमुळे कुणबी समाजाशी संबंधित दोन वेगवेगळ्या प्रादेशिक भाषिक संदर्भांची नोंद उपलब्ध झाली आहे.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/><ref name="Veer2022"/>
या भाषिक अभ्यासांमधून कोकणातील ग्रामीण जीवन, कृषी संस्कृती आणि स्थानिक शब्दसंपदेच्या अभ्यासाला पूरक सामग्री मिळते. त्यामुळे कुणबी समाजाच्या इतिहासाचा अभ्यास करताना जमीन, शेती, लोकसंख्या, महसूल आणि प्रशासकीय नोंदींबरोबरच उपलब्ध भाषिक दस्तऐवजीकरणाचाही विचार करता येतो.
== सामाजिक रचना ==
कोकणातील कुणबी समाजाची सामाजिक रचना कुटुंब, कुळ, देवक, विवाहसंबंध, नातेसंबंध, ग्रामजीवन आणि स्थानिक सामाजिक संस्थांशी संबंधित होती. मात्र कोकणातील कुणबी समाज एकसंध सामाजिक घटक होता असे मानता येत नाही. रत्नागिरी, रायगड, सावंतवाडी, महाड आणि उत्तर कोकणातील कुणबी समाजांच्या सामाजिक जीवनावर स्थानिक भौगोलिक परिस्थिती, कृषीव्यवस्था, ग्रामरचना आणि प्रादेशिक परंपरांचा प्रभाव होता.
ब्रिटिशकालीन गॅझेटियरमध्ये कोकणातील विविध समुदायांच्या सामाजिक आणि ग्रामीण जीवनाचे वर्णन आढळते. रत्नागिरी आणि सावंतवाडीच्या गॅझेटियरमध्ये लोकसंख्या, ग्रामीण जीवन, शेती आणि सामाजिक समूहांची माहिती नोंदवण्यात आली आहे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
नंतरच्या मानववंशशास्त्रीय अभ्यासांमध्ये महाराष्ट्रातील विविध समुदायांच्या सामाजिक रचना, कुटुंबव्यवस्था, विवाहपद्धती, नातेसंबंध आणि सांस्कृतिक परंपरांचा स्वतंत्र अभ्यास करण्यात आला आहे.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004">{{cite book
|editor-last=Singh
|editor-first=K. S.
|title=People of India: Maharashtra
|volume=30
|publisher=Anthropological Survey of India
|location=New Delhi
|year=2004
}}</ref>
कोकणातील ग्रामीण जीवनाच्या संदर्भात कुटुंब, शेती, ग्रामसंस्था, स्थानिक परंपरा आणि सामाजिक संबंध यांचा परस्परसंबंध दिसून येतो. या ग्रामीण-सांस्कृतिक संदर्भांचा अभ्यास करण्यासाठी उपलब्ध स्थानिक इतिहास आणि ग्रामीण जीवनावरील साहित्य पूरक स्रोत म्हणून वापरता येते.<ref name="घोलम2025" />
=== कुटुंब ===
कुणबी समाजातील पारंपरिक सामाजिक जीवनात कुटुंब ही महत्त्वाची सामाजिक आणि आर्थिक संस्था होती. कृषीप्रधान अर्थव्यवस्थेमुळे कुटुंबातील विविध सदस्यांचा शेतीच्या कामांमध्ये सहभाग असे. ब्रिटिशकालीन गॅझेटियरमधील ग्रामीण जीवनाच्या वर्णनांमध्ये कृषी कामांमध्ये कुटुंबाच्या सहभागाचे उल्लेख आढळतात.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
कुटुंबाची आर्थिक रचना जमीनधारणा, कुटुंबाचा आकार, शेतीचे स्वरूप, पशुधन आणि उपलब्ध संसाधने यांशी संबंधित होती. कृषी उत्पादनाबरोबरच पशुपालन, घरगुती कामे आणि स्थानिक रोजगार यांचा कुटुंबाच्या उपजीविकेत सहभाग असू शकत होता. त्यामुळे ग्रामीण कृषी समाजात कुटुंबाची भूमिका सामाजिक संबंधांबरोबरच आर्थिक जीवनाशीही जोडलेली होती.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
नंतरच्या मानववंशशास्त्रीय अभ्यासांमध्ये महाराष्ट्रातील विविध समुदायांमध्ये संयुक्त आणि विभक्त कुटुंबांचे प्रकार नोंदवण्यात आले आहेत. त्यामुळे संपूर्ण कुणबी समाजात एकच कुटुंबपद्धती प्रचलित होती असे मानणे योग्य नाही. कुटुंबव्यवस्थेचे स्वरूप प्रदेश, आर्थिक परिस्थिती आणि स्थानिक सामाजिक परंपरांनुसार बदलत असण्याची शक्यता होती.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
=== कुळ ===
कुळ ही संकल्पना कुटुंबीय वंशपरंपरा, सामाजिक ओळख आणि विवाहसंबंधांच्या संदर्भात महत्त्वाची ठरते. महाराष्ट्रातील विविध ग्रामीण समाजांच्या सामाजिक रचनेत कुटुंबसमूह, आडनावे, वंशपरंपरा आणि विवाहनियम यांना स्थान असल्याचे मानववंशशास्त्रीय साहित्यात आढळते.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
काही कुणबी समुदायांमध्ये समान कुळ किंवा जवळच्या वंशसमूहातील विवाह टाळण्याची प्रथा आढळत असल्याचे तुलनात्मक मानववंशशास्त्रीय साहित्यात नमूद केले आहे. मात्र अशा प्रथा सर्व प्रदेशांतील कुणबी समाजाला समान प्रमाणात लागू होत्या असे गृहीत धरता येत नाही.<ref name="RussellHiralal1916"/>
कुळ, गोत्र, देवक आणि आडनाव या संज्ञा सामाजिक संदर्भानुसार वापरल्या जात असल्यामुळे त्यांचे अर्थ सर्व प्रदेशांत समान असतीलच असे नाही. विशेषतः कोकणातील कुणबी समाजाचा अभ्यास करताना स्थानिक विवाहपद्धती, कुटुंबव्यवस्था, देवकपरंपरा, आडनावे आणि प्रादेशिक सामाजिक संकेत यांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे.
कोकणातील ग्रामीण कुटुंबव्यवस्था, स्थानिक परंपरा आणि सामाजिक जीवनाचा अभ्यास करताना स्थानिक इतिहास व ग्रामीण जीवनावरील स्रोत पूरक ठरू शकतात. रत्नागिरीतील ग्रामीण जीवनाच्या संदर्भात कुटुंब, शेती, ग्रामव्यवस्था आणि स्थानिक सांस्कृतिक परंपरांचा परस्परसंबंधही अभ्यासता येतो.<ref name="घोलम2025" />
=== देवक ===
कुणबी समाजाच्या सामाजिक आणि विवाहसंस्थेच्या संदर्भात देवक ही महत्त्वाची संकल्पना मानली जाते. देवक हे वनस्पती, वृक्ष, प्राणी, वस्तू किंवा अन्य प्रतीकाशी संबंधित कुलचिन्ह अथवा संरक्षक प्रतीकाच्या स्वरूपात आढळू शकते. महाराष्ट्रातील कुणबी समाजावरील मानववंशशास्त्रीय अभ्यासांमध्ये देवक, गोत्र, कुळ आणि विवाहनियम यांचा परस्परसंबंध नोंदवण्यात आला आहे.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
काही कुणबी उपसमूहांमध्ये समान देवक असलेल्या कुटुंबांमध्ये विवाह टाळण्याची प्रथा आढळत असल्याचे महाराष्ट्रातील मानववंशशास्त्रीय आणि गॅझेटियर नोंदींवरून दिसते. मात्र अशा विवाहनियमांचे स्वरूप प्रदेश आणि उपसमूहानुसार बदलत असल्यामुळे ते संपूर्ण कुणबी समाजाला समान प्रमाणात लागू होते असे मानता येत नाही.<ref>{{cite web
|title=People of Maharashtra: Major Castes and Tribes
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/land_and_people/L%20%26%20P%20pdf/Chapter%20II/2%20Major%20Castes%20and%20Tribes.pdf
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
सावंतवाडी तालुक्यातील कुंकेरी गावाच्या संदर्भात १९६१ च्या जनगणनेअंतर्गत तयार करण्यात आलेल्या Village Survey Monographमध्ये कुणबी मराठा कुटुंबांच्या सामाजिक जीवनाचे वर्णन आढळते. या सर्वेक्षणाच्या प्रकाशनात स्थानिक सामाजिक प्रथा, कुटुंबव्यवस्था आणि सांस्कृतिक जीवनाचा स्वतंत्र विचार करण्यात आला आहे.<ref name="Kunkeri1966">{{cite report
|title=Kunkeri Village Survey Monograph
|publisher=Maharashtra Census Office
|location=Bombay
|year=1966
|series=Census of India, 1961
}}</ref>
देवकाचा संबंध केवळ धार्मिक श्रद्धेशी मर्यादित नसून विवाहसंबंध आणि सामाजिक ओळख यांच्याशीही जोडलेला असल्याचे या प्रकारच्या नोंदींमधून दिसते. तथापि देवकाची नावे, त्यांच्याशी संबंधित प्रथा आणि विवाहनियम यांमध्ये स्थानिक फरक असू शकतात.
=== विवाह ===
कुणबी समाजातील विवाह हा कुटुंब, कुळ आणि विस्तारित नातेसंबंधांना जोडणारा महत्त्वाचा सामाजिक विधी होता. विवाह ठरविताना कुटुंबीय संबंध, कुळ, आडनाव, देवक आणि संबंधित सामाजिक नियमांचा विचार केला जात असल्याचे महाराष्ट्रातील मानववंशशास्त्रीय अभ्यासांत आढळते.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील कुणबी आणि संबंधित कृषक समुदायांच्या विवाहपद्धतींच्या वर्णनांमध्ये समान कुळातील विवाह टाळणे आणि काही ठिकाणी समान आडनाव किंवा देवक असलेल्या कुटुंबांमधील विवाहास प्रतिबंध असल्याचे उल्लेख आढळतात.<ref name="Poona1885">{{cite book
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Poona
|volume=18
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1885
}}</ref>
या विवाहनियमांमधून कुणबी समाजातील जातीय किंवा सामाजिक अंतर्विवाहाबरोबरच कुळ, देवक किंवा वंशसमूहाच्या पातळीवरील बहिर्विवाहाची प्रथा अस्तित्वात असल्याचे दिसते. मात्र या नियमांचे स्वरूप प्रदेश, उपसमूह आणि स्थानिक सामाजिक परंपरेनुसार बदलत होते.
कोकणातील ग्रामीण जीवनाच्या संदर्भात विवाह हा केवळ दोन व्यक्तींमधील संबंध न राहता दोन कुटुंबे आणि त्यांच्या नातेसंबंधांना जोडणारी सामाजिक प्रक्रिया होती. रत्नागिरीतील ग्रामीण जीवन, कुटुंबव्यवस्था आणि स्थानिक सामाजिक परंपरांचा अभ्यास करताना अशा संबंधांचा विचार करणे आवश्यक ठरते.<ref name="घोलम2025" />
=== नातेसंबंध ===
कुणबी समाजाच्या पारंपरिक ग्रामीण जीवनात रक्तसंबंध, विवाहसंबंध आणि शेजारधर्म यांना महत्त्व होते. विस्तारित कुटुंब, सासर-माहेरचे संबंध आणि इतर नातेसंबंध सामाजिक समारंभ आणि जीवनचक्रातील विधींमध्ये सक्रिय असत.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
जन्म, नामकरण, विवाह आणि मृत्यू यांसारख्या जीवनचक्रातील विधींमध्ये नातेवाईक आणि समाजातील इतर व्यक्तींचा सहभाग असे. अशा विधींमुळे कुटुंबांमधील सामाजिक संबंध दृढ होण्यास मदत होत असे.
कोकणातील ग्रामीण समाजात कुटुंब, नातेसंबंध, शेती आणि ग्रामजीवन यांचा परस्पर संबंध असल्यामुळे सामाजिक जीवनाचा अभ्यास करताना या घटकांचा एकत्रित विचार करणे आवश्यक आहे.<ref name="घोलम2025" />
=== विवाहासंबंधी सामाजिक नियम ===
कुणबी समाजातील विवाहासाठी विविध सामाजिक नियम प्रचलित होते. समान कुळ किंवा देवकातील विवाह टाळणे, विशिष्ट नातेसंबंधांमध्ये विवाहास प्रतिबंध करणे आणि विवाहासाठी मान्य सामाजिक चौकट पाळणे यांचा उल्लेख महाराष्ट्रातील मानववंशशास्त्रीय अभ्यासांत आढळतो.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
विवाहनियमांमध्ये उपसमूह आणि प्रदेशानुसार फरक असल्याचेही नोंदींवरून दिसते. काही कुणबी उपसमूहांमध्ये विधवा पुनर्विवाहाला मान्यता असल्याचे, तसेच काही समूहांमध्ये विवाहविच्छेदाची प्रथा अस्तित्वात असल्याचे मानववंशशास्त्रीय साहित्यात नमूद केले आहे. मात्र या प्रथा संपूर्ण कुणबी समाजासाठी समान होत्या असे मानता येत नाही.<ref name="MajorCastesTribes">{{cite web
|title=People of Maharashtra: Major Castes and Tribes
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/land_and_people/L%20%26%20P%20pdf/Chapter%20II/2%20Major%20Castes%20and%20Tribes.pdf
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
म्हणून कुणबी समाजातील विवाहसंस्थेचा अभ्यास करताना प्रदेश, उपसमूह, आर्थिक स्थिती, स्थानिक सामाजिक परंपरा आणि कालखंड या घटकांचा विचार करणे आवश्यक आहे. ऐतिहासिक नोंदींमधील एखादी प्रथा संपूर्ण कुणबी समाजाचे सार्वत्रिक वैशिष्ट्य म्हणून मांडणे योग्य ठरणार नाही.
=== विधवा पुनर्विवाह आणि विवाहविच्छेद ===
कुणबी समाजातील काही उपसमूहांमध्ये विधवा पुनर्विवाहाला सामाजिक मान्यता असल्याचे मानववंशशास्त्रीय नोंदींमध्ये आढळते. त्याचप्रमाणे काही उपसमूहांमध्ये विवाहविच्छेदाची प्रथा अस्तित्वात असल्याचेही नोंदवण्यात आले आहे.<ref name="MajorCastesTribes"/>
या प्रथांचे स्वरूप प्रदेश, उपसमूह, सामाजिक स्थान आणि कालखंडानुसार बदलत असल्याचे उपलब्ध नोंदींवरून दिसते. त्यामुळे एखाद्या विशिष्ट कुणबी उपसमूहात आढळणारी विधवा पुनर्विवाहाची किंवा विवाहविच्छेदाची प्रथा संपूर्ण कुणबी समाजाचे सार्वत्रिक वैशिष्ट्य म्हणून मांडता येत नाही.
ऐतिहासिक विवाहसंस्थेचा अभ्यास करताना तत्कालीन सामाजिक नियम आणि आधुनिक काळातील कायदेशीर व सामाजिक व्यवस्था यांच्यात फरक करणे आवश्यक आहे. विसाव्या शतकाच्या उत्तरार्धातील किंवा आधुनिक कुणबी समाजातील विवाहपद्धती केवळ १९व्या शतकातील मानववंशशास्त्रीय वर्णनांच्या आधारे निश्चित करता येत नाहीत.
=== ग्रामजीवन ===
कोकणातील कुणबी समाजाचे पारंपरिक सामाजिक आणि आर्थिक जीवन गाव, शेती आणि स्थानिक सामाजिक संबंधांशी घट्टपणे जोडलेले होते. शेती, पाणी, देवस्थान, सण, बाजारपेठ, श्रमवाटप आणि परस्पर सहाय्य या घटकांमधून ग्रामीण समाजजीवनाची रचना विकसित होत असे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
रत्नागिरी आणि सावंतवाडीच्या गॅझेटियरमध्ये ग्रामीण लोकांचे शेतीशी असलेले संबंध, कुटुंबव्यवस्था, विवाह, सामाजिक समारंभ, धार्मिक प्रथा आणि स्थानिक व्यवसाय यांचे वर्णन आढळते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
गाव हे कृषी उत्पादनाचे केंद्र असण्याबरोबरच सामाजिक आणि धार्मिक व्यवहारांचेही केंद्र होते. ग्रामदेवता, देवस्थाने, जत्रा आणि विविध धार्मिक समारंभांमध्ये गावातील वेगवेगळे सामाजिक समूह सहभागी होत असत. त्यामुळे ग्रामजीवन हे केवळ शेतीच्या उत्पादनाशी संबंधित नसून सामाजिक आणि सांस्कृतिक संबंधांचेही महत्त्वाचे क्षेत्र होते.
कोकणातील ग्रामीण जीवनाचा अभ्यास करताना कुटुंब, शेती, स्थानिक परंपरा, धार्मिक आचार आणि ग्रामसमुदाय यांचा परस्परसंबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे. रत्नागिरीतील ग्रामीण जीवनाच्या ऐतिहासिक आणि सांस्कृतिक संदर्भासाठी स्थानिक ग्रामीण जीवनावरील अभ्यासही पूरक ठरतात.<ref name="घोलम2025" />
=== ग्रामसंस्था आणि परस्परावलंबन ===
पारंपरिक कोकणी ग्रामजीवनात कृषक आणि विविध सेवा देणाऱ्या समूहांमध्ये परस्परावलंबी संबंध अस्तित्वात होते. शेती आणि दैनंदिन ग्रामीण जीवनासाठी लोहार, सुतार, न्हावी, परीट, गुरव आणि इतर सेवा देणाऱ्या व्यक्ती किंवा समूहांची आवश्यकता असे. त्याबदल्यात त्यांना धान्य, उत्पन्नातील हिस्सा किंवा इतर पारंपरिक मोबदला मिळत असल्याचे ग्रामीण सामाजिक व्यवस्थेच्या वर्णनांमध्ये आढळते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
अशा परस्परावलंबी संबंधांचे स्वरूप गाव, प्रदेश आणि स्थानिक जमीनव्यवस्थेनुसार बदलत होते. त्यामुळे महाराष्ट्रातील सर्व गावांमध्ये एकसारखी बलुतेदारी व्यवस्था अस्तित्वात होती असे सरसकट म्हणता येत नाही. विशेषतः कोकणातील जमीनव्यवस्था, खोतपद्धती, वतनव्यवस्था आणि स्थानिक ग्रामरचना यांचा स्वतंत्र संदर्भात विचार करणे आवश्यक आहे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
कोकणातील ग्रामजीवनात अशा परस्परावलंबी संबंधांचा परिणाम कृषी उत्पादन, स्थानिक सेवा, सामाजिक समारंभ आणि दैनंदिन व्यवहारांवर होत असे. त्यामुळे कुणबी समाजाच्या सामाजिक इतिहासाचा अभ्यास करताना केवळ जमीनधारणा किंवा शेतीपुरता विचार न करता ग्रामसंस्था आणि इतर ग्रामीण समूहांशी असलेले संबंध यांचाही विचार करणे आवश्यक ठरते.
=== सामाजिक संघटना ===
पारंपरिक कुणबी समाजातील सामाजिक संबंध कुटुंब, कुळ, गाव आणि व्यापक सामाजिक समुदाय या विविध स्तरांवर विकसित झाले होते. विवाह, धार्मिक विधी, सामाजिक समारंभ आणि स्थानिक वादविवाद यांसारख्या प्रसंगी कुटुंबातील तसेच समुदायातील ज्येष्ठ व्यक्तींना भूमिका असू शकत होती. या सामाजिक संबंधांचे स्वरूप प्रदेश आणि स्थानिक परंपरेनुसार बदलत होते.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
महाराष्ट्रातील विविध समुदायांच्या मानववंशशास्त्रीय अभ्यासांमध्ये समुदायातील ज्येष्ठ व्यक्ती, कुटुंबसमूह किंवा स्थानिक सामाजिक संस्थांच्या माध्यमातून सामाजिक प्रश्न आणि वाद सोडवण्याच्या प्रथांचा उल्लेख आढळतो. तथापि प्रत्येक कुणबी गावात किंवा प्रत्येक उपसमूहात औपचारिक जातपंचायत अस्तित्वात होती, असा सार्वत्रिक निष्कर्ष काढण्यासाठी स्वतंत्र स्थानिक पुराव्याची आवश्यकता आहे.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
कोकणातील सामाजिक जीवनाचा विचार करताना ग्रामसमुदाय, कुटुंबीय संबंध, धार्मिक परंपरा आणि परस्पर सहाय्य यांचा एकत्रित विचार करणे आवश्यक आहे. रत्नागिरीतील ग्रामीण जीवनाच्या संदर्भात कुटुंब, शेती आणि स्थानिक सामाजिक-सांस्कृतिक संबंध यांचे परस्परसंबंधही महत्त्वाचे ठरतात.<ref name="घोलम2025" />
=== पारंपरिक सामाजिक भूमिका ===
कुणबी समाजाची पारंपरिक सामाजिक आणि आर्थिक भूमिका प्रामुख्याने कृषी उत्पादनाशी संबंधित होती. जमीन कसणे, पिकांची लागवड, पशुधनाचे पालन आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेतील सहभाग हे त्यांच्या जीवनाचे महत्त्वाचे घटक होते. रत्नागिरी, कोलाबा आणि ठाणे या ऐतिहासिक जिल्ह्यांच्या गॅझेटियरमध्ये कुणबींचा कृषक समुदाय म्हणून उल्लेख आढळतो.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/><ref name="KolabaJanjira1883"/><ref name="Thana1882"/>
कुणबींचे कृषीशी असलेले ऐतिहासिक संबंध महत्त्वाचे असले तरी कुणबी आणि शेतकरी या दोन संज्ञा समानार्थी मानता येत नाहीत. कृषक ही आर्थिक किंवा व्यवसायाधारित संज्ञा होती, तर कुणबी ही सामाजिक समुदायाची ओळख होती. त्यामुळे प्रत्येक कृषक कुणबी होता किंवा प्रत्येक कुणबी व्यक्ती केवळ शेतीवरच अवलंबून होती असे म्हणता येत नाही.
कालांतराने कुणबी समाजातील व्यक्तींनी शेतीबरोबरच मजुरी, व्यापार, वाहतूक, सरकारी सेवा, लष्करी सेवा आणि इतर व्यवसाय स्वीकारल्याचे महाराष्ट्रावरील मानववंशशास्त्रीय अभ्यासांत दिसून येते.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
=== स्त्रियांची सामाजिक आणि आर्थिक भूमिका ===
कृषीप्रधान कुटुंबव्यवस्थेत स्त्रियांचा सामाजिक आणि आर्थिक सहभाग महत्त्वाचा होता. ब्रिटिशकालीन गॅझेटियरमधील ग्रामीण आणि कृषक जीवनाच्या वर्णनांमध्ये स्त्रिया आणि मुले शेतीशी संबंधित विविध कामांमध्ये सहभागी होत असल्याचे उल्लेख आढळतात.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
शेतीतील कामांबरोबरच घरगुती उत्पादन, पशुधनाची देखभाल, अन्नप्रक्रिया, धान्यसाठवण आणि धार्मिक-सामाजिक विधींमध्येही स्त्रियांचा सहभाग असू शकत होता. कृषीप्रधान कुटुंबात घरगुती आणि कृषी कामांमध्ये स्पष्ट विभाजन नसल्यामुळे कुटुंबाच्या उपजीविकेत स्त्रियांचे योगदान विविध स्वरूपाचे होते.
कोकणातील ग्रामीण जीवनाच्या संदर्भात स्त्रियांची भूमिका समजून घेताना कुटुंबव्यवस्था, शेती, घरगुती अर्थव्यवस्था आणि धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा यांचा परस्परसंबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="घोलम2025" />
मात्र ब्रिटिशकालीन गॅझेटियरमधील स्त्रियांच्या भूमिकेविषयीची वर्णने तत्कालीन प्रशासकीय निरीक्षकांच्या दृष्टिकोनातून तयार झालेली असल्यामुळे त्यांना संपूर्ण कुणबी समाजातील स्त्रियांच्या जीवनाचे सार्वत्रिक किंवा अपरिवर्तनीय चित्र मानता येत नाही. प्रदेश, कुटुंबाची आर्थिक स्थिती, जमीनधारणा आणि सामाजिक परिस्थितीनुसार स्त्रियांच्या कामाच्या स्वरूपात फरक असण्याची शक्यता होती.
=== धार्मिक जीवन आणि सामाजिक रचना ===
कुणबी समाजातील पारंपरिक धार्मिक जीवनात ग्रामदेवता, स्थानिक देवता, कुटुंबीय देवता आणि हिंदू धार्मिक परंपरांना महत्त्वाचे स्थान होते. जन्म, विवाह आणि मृत्यू यांसारख्या जीवनचक्रातील विधींमध्ये धार्मिक श्रद्धा आणि सामाजिक संबंध यांचा परस्परसंबंध दिसून येतो. या प्रथा प्रदेश, उपसमूह आणि स्थानिक परंपरेनुसार बदलत असण्याची शक्यता होती.<ref name="MajorCastesTribes"/>
देवक ही संकल्पना या संदर्भात विशेष महत्त्वाची ठरते. देवकाचा संबंध धार्मिक प्रतीकात्मकतेबरोबरच विवाहनियमांशी जोडलेला असल्यामुळे धार्मिक श्रद्धा आणि सामाजिक संस्था यांचे परस्परसंबंध स्पष्ट होतात. काही कुणबी उपसमूहांमध्ये समान देवक असलेल्या कुटुंबांमधील विवाह टाळण्याची प्रथा नोंदवली गेली आहे.<ref name="MajorCastesTribes"/>
कोकणातील ग्रामीण जीवनात धार्मिक परंपरा या ग्रामसमुदायाच्या सामाजिक जीवनाशीही जोडलेल्या होत्या. ग्रामदेवता, देवस्थाने, जत्रा आणि धार्मिक समारंभ हे केवळ श्रद्धेचे विषय नसून सामाजिक सहभाग आणि सामुदायिक संबंध दृढ करणारे प्रसंगही होते. रत्नागिरीतील ग्रामीण जीवनाच्या अभ्यासात स्थानिक परंपरा, कुटुंबव्यवस्था, ग्रामजीवन आणि धार्मिक-सांस्कृतिक व्यवहार यांचा परस्परसंबंध विचारात घेता येतो.<ref name="घोलम2025" />
=== सामाजिक स्तर आणि प्रादेशिक फरक ===
कुणबी समाजाच्या अंतर्गतही आर्थिक आणि सामाजिक स्थितीत फरक होते. जमीनधारणा, जमिनीची गुणवत्ता, कुटुंबाचा आकार, कृषी उत्पादन, पशुधन, गावातील सामाजिक स्थान, कर्ज आणि उपलब्ध आर्थिक साधने यांनुसार कुटुंबांच्या परिस्थितीत भिन्नता असू शकत होती.
ब्रिटिशकालीन रत्नागिरी गॅझेटियरमध्ये ग्रामीण समाजातील विविध आर्थिक स्तर, कृषक, मजूर आणि इतर घटकांच्या परिस्थितीचे वर्णन आढळते. विवाह, सामाजिक समारंभ आणि कौटुंबिक खर्च यांमध्येही आर्थिक स्थितीनुसार फरक असल्याचे नोंदवले आहे.<ref>{{cite web
|title=Ratnagiri and Savantvadi Gazetteer — Capitals and Capitalists
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Ratnagiri%20and%20Sawantwadi/ratnagiri/capitals1_capitalists.html
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
रत्नागिरीतील कुणबी समाजाच्या संदर्भात जमीनधारणा आणि कृषीव्यवस्थेतील स्थानानुसार आर्थिक स्थितीत फरक असल्याचे जमीन प्रशासनाच्या नोंदींमधूनही दिसते. काही कृषक वारसाहक्की हक्कांशी संबंधित होते, तर इतर कृषकांचे जमीन आणि महसूलव्यवस्थेशी संबंध वेगळ्या स्वरूपाचे होते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
त्यामुळे कुणबी समाजाला आर्थिकदृष्ट्या एकसमान समुदाय मानणे ऐतिहासिकदृष्ट्या योग्य ठरणार नाही. कोकणातील वेगवेगळ्या प्रदेशांमध्ये जमीन, शेती, बाजारपेठ, रोजगार आणि स्थानिक सामाजिक रचना यांतील फरकांमुळे कुणबी कुटुंबांच्या सामाजिक आणि आर्थिक स्थितीतही भिन्नता निर्माण झाली होती.
=== सावंतवाडीतील कुणबी सामाजिक रचना ===
सावंतवाडी आणि वेंगुर्ले परिसरातील कुणबींच्या सामाजिक रचनेचा अभ्यास करण्यासाठी १९६१ च्या जनगणनेअंतर्गत करण्यात आलेले कुंकेरी गावाचे सर्वेक्षण महत्त्वाचे ठरते. या सर्वेक्षणावर आधारित Village Survey Monographमध्ये कुणबी मराठ्यांची कुटुंबव्यवस्था, धार्मिक प्रथा, देवक, स्थानिक सामाजिक संबंध आणि ग्रामजीवनाचे विविध पैलू नोंदवण्यात आले आहेत.<ref name="Kunkeri1966"/>
या सर्वेक्षणात कदंब किंवा कळंब या देवकाचा उल्लेख आढळतो. काही कुटुंबांना त्यांच्या पूर्वीच्या देवकाची माहिती किंवा स्मृती उपलब्ध नसल्याचेही नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="Kunkeri1966"/>
या नोंदीवरून सामाजिक आणि सांस्कृतिक संस्था काळानुसार बदलू शकतात, तसेच काही परंपरांची स्मृती कमी होऊ शकते, असे दिसून येते. मात्र कुंकेरी गावातील या नोंदीवरून संपूर्ण सावंतवाडी किंवा कोकणातील सर्व कुणबी कुटुंबांमध्ये समान देवकपरंपरा होती असा निष्कर्ष काढता येत नाही.
=== सामाजिक परिवर्तन ===
विसाव्या शतकात शिक्षणाचा प्रसार, शहरीकरण, स्थलांतर, सरकारी प्रशासन, बाजारपेठांचा विस्तार, सुधारलेले दळणवळण आणि आधुनिक कायदे यांमुळे कुणबी समाजाच्या पारंपरिक सामाजिक आणि आर्थिक जीवनात बदल घडत गेले. रत्नागिरी आणि सावंतवाडीच्या गॅझेटियरमध्ये शिक्षण, दळणवळण, प्रशासन, व्यापार आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेतील बदलांचे वर्णन आढळते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
या परिवर्तनाचा परिणाम विवाहसंस्था, कुटुंबव्यवस्था, व्यवसाय, शिक्षण आणि सामाजिक संघटनांवर झाला. तथापि या बदलांचा वेग आणि स्वरूप प्रदेशानुसार वेगवेगळे होते. १९६१ च्या जनगणनेअंतर्गत करण्यात आलेल्या कुंकेरी गावाच्या सर्वेक्षणात कुटुंबव्यवस्था, व्यवसाय, सामाजिक जीवन आणि सांस्कृतिक परंपरांचा स्वतंत्र अभ्यास करण्यात आला आहे.<ref name="Kunkeri1966"/>
ग्रामीण भागातून मुंबई आणि इतर शहरी केंद्रांकडे होणाऱ्या स्थलांतरामुळे काही कुटुंबांच्या उत्पन्नाच्या स्रोतांमध्येही बदल झाला. १८८३ च्या कोलाबा गॅझेटियरमध्ये महाड आणि माणगाव परिसरातील काही कुणबी भात कापणीचा हंगाम संपल्यानंतर मुंबईकडे किंवा इतर रोजगाराच्या ठिकाणी जात असल्याचे नमूद केले आहे. काही जण हंगामी रोजगार करून पावसाळ्यापूर्वी आपल्या गावाकडे परतत असत. अशा रोजगारातून मिळणाऱ्या उत्पन्नाचा उपयोग बियाणे खरेदी आणि कुटुंबाच्या इतर गरजांसाठी केला जात असल्याचेही वर्णन आढळते.<ref name="KolabaPopulationCommunities">{{cite web
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba — Population and Communities
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Kolaba%20District/population_communities.html
}}</ref>
त्याच गॅझेटियरमध्ये काही कुणबी लष्कर, पोलीस आणि इतर सरकारी सेवांमध्ये प्रवेश करीत असल्याचेही नमूद केले आहे. मुंबईत रोजगार करणारे काही कुणबी आपल्या मूळ गावातील नातेवाईकांना पैसे पाठवत आणि गावातील जमीन व शेतीशी संबंध कायम ठेवत असल्याचे वर्णन आढळते.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
या प्रक्रियेमुळे काही कुटुंबांनी शेती कायम ठेवून शहरी किंवा हंगामी रोजगार स्वीकारला, तर काही कुटुंबांचे उत्पन्न हळूहळू शेतीबाहेरील रोजगाराशी अधिक जोडले गेले. ग्रामीण शेती आणि शहरी रोजगार यांच्यातील हा संबंध पुढील काळात कोकणातील सामाजिक आणि आर्थिक परिवर्तनाचा एक महत्त्वाचा घटक ठरला.
मात्र हा बदल सर्व कुणबी कुटुंबांमध्ये समान प्रमाणात झाला असे मानता येत नाही. १८८३चा गॅझेटियर विशेषतः ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्यातील महाड आणि माणगाव परिसरातील नोंदी देतो. त्यामुळे त्या नोंदींचा उपयोग संबंधित प्रदेशातील कुणबींच्या स्थलांतर आणि रोजगारपद्धतीचा पुरावा म्हणून करणे योग्य आहे; परंतु त्यावरून संपूर्ण कोकणातील कुणबी समाजाच्या स्थलांतराचे सार्वत्रिक स्वरूप निश्चित करता येत नाही.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
कोकणातील ग्रामीण सामाजिक परिवर्तन समजून घेताना शेती, कुटुंब, स्थानिक परंपरा, स्थलांतर आणि बाहेरील रोजगार यांचा परस्परसंबंधही महत्त्वाचा ठरतो. रत्नागिरीतील ग्रामीण जीवनाच्या संदर्भातील स्थानिक ऐतिहासिक आणि सांस्कृतिक नोंदी या व्यापक परिवर्तनाला पूरक संदर्भ देतात.<ref name="घोलम2025" />
=== आधुनिक काळातील सामाजिक ओळख ===
आधुनिक काळात कुणबी समाजाची सामाजिक ओळख पारंपरिक कुळ, देवक, ग्रामजीवन आणि कृषी व्यवसायापुरती मर्यादित राहिलेली नाही. शिक्षणाचा प्रसार, शहरीकरण, विविध व्यवसायांचा स्वीकार, स्थलांतर आणि सामाजिक संस्थांमधील सहभाग यांमुळे समुदायाच्या सामाजिक आणि आर्थिक रचनेत काळानुसार बदल झाले. महाराष्ट्रातील विविध सामाजिक समूहांच्या अधिकृत अभ्यासांमध्येही पारंपरिक सामाजिक आणि आर्थिक रचनेतील या परिवर्तनाचा विचार करण्यात आला आहे.<ref name="MajorCastesTribes"/>
या परिवर्तनामुळे पारंपरिक सामाजिक संस्था पूर्णपणे नष्ट झाल्या असे मानता येत नाही. काही कुटुंबांमध्ये कुळ, देवक, ग्रामदेवता आणि पारंपरिक विवाहनियम आजही सामाजिक आणि सांस्कृतिक ओळखीचा भाग असू शकतात; मात्र त्यांचे स्वरूप प्रदेश, कुटुंब आणि पिढीनुसार बदलू शकते. सावंतवाडी–वेंगुर्ले परिसरातील कुंकेरी गावाच्या सर्वेक्षणात कुणबी मराठा समाजातील देवक आणि संबंधित सामाजिक परंपरांच्या स्थानिक नोंदी करण्यात आल्या आहेत.<ref name="Kunkeri1966"/>
आधुनिक सामाजिक ओळखीच्या निर्मितीत पारंपरिक कृषी व्यवसायाबरोबर शिक्षण, शहरी रोजगार, स्थलांतर आणि आधुनिक सामाजिक व आर्थिक संस्थांचाही प्रभाव पडला आहे. ग्रामीण जीवन आणि शहरी रोजगार यांच्यातील वाढत्या संबंधामुळे काही कुटुंबांच्या उपजीविकेच्या पद्धतींमध्येही बदल झाले. कोकणातील ग्रामीण जीवन, शेती, स्थलांतर आणि बदलत्या सामाजिक संबंधांचा अभ्यास करताना या प्रक्रियांचा परस्परसंबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="घोलम2025" />
तथापि उपलब्ध ऐतिहासिक आणि सामाजिक अभ्यासांवरून आधुनिक कुणबी समाजातील सामाजिक परिवर्तनाचे एकसमान स्वरूप निश्चित करता येत नाही. प्रदेश, आर्थिक स्थिती, कुटुंबाची पार्श्वभूमी, शिक्षण आणि स्थलांतराचा अनुभव यांनुसार सामाजिक परिवर्तनाचे स्वरूप वेगवेगळे असू शकते.
=== सामाजिक रचनेच्या अभ्यासाच्या मर्यादा ===
कुणबी समाजाच्या सामाजिक रचनेविषयी उपलब्ध गॅझेटियर, जनगणना आणि मानववंशशास्त्रीय स्रोत हे त्यांच्या-त्यांच्या काळातील निरीक्षणे आणि अभ्यासपद्धतींवर आधारित आहेत. ब्रिटिशकालीन गॅझेटियर हे प्रामुख्याने प्रशासकीय स्वरूपाचे स्रोत असून त्यामध्ये लोकसंख्या, जमीन, शेती, व्यवसाय, सामाजिक समूह आणि स्थानिक संस्थांविषयी माहिती संकलित करण्यात आली होती.<ref name="RatnagiriGeneralIntroduction">{{cite web
|title=Ratnagiri Gazetteer — General Introduction
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/RATNAGIRI/general_intro.html
}}</ref>
ब्रिटिशकालीन अधिकाऱ्यांनी केलेली जातीय आणि सामाजिक वर्णने तत्कालीन प्रशासकीय दृष्टिकोनातून तयार झाली असल्यामुळे त्यातील प्रत्येक सामाजिक प्रथा संपूर्ण कुणबी समाजाला किंवा संपूर्ण कोकण प्रदेशाला लागू होती असे मानता येत नाही. उदाहरणार्थ, १८८३ च्या कोलाबा गॅझेटियरमध्ये महाड आणि माणगाव परिसरातील काही कुणबींच्या हंगामी स्थलांतराची नोंद आढळते. ही नोंद त्या विशिष्ट प्रदेशातील सामाजिक आणि आर्थिक परिस्थितीचा पुरावा म्हणून महत्त्वाची आहे; मात्र तिच्यावरून संपूर्ण कोकणातील कुणबी समाजाच्या स्थलांतराचे सार्वत्रिक स्वरूप निश्चित करता येत नाही.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
तसेच १९व्या शतकातील कुणबी या सामाजिक किंवा प्रशासकीय संज्ञेची व्याप्ती आणि आधुनिक काळातील कुणबी सामाजिक ओळख यांच्यात थेट समानता गृहीत धरता येत नाही. ऐतिहासिक वर्गीकरणाचा अभ्यास करताना त्या काळातील प्रशासकीय सीमा, जनगणनेची पद्धत, स्थानिक सामाजिक ओळख आणि संबंधित प्रदेशात वापरल्या गेलेल्या संज्ञा यांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे.
सामाजिक रचनेचा ऐतिहासिक अभ्यास करताना गॅझेटियर, जनगणना, गाव-सर्वेक्षण मोनोग्राफ, जमीन व महसूल नोंदी, भाषिक अभ्यास आणि आधुनिक मानववंशशास्त्रीय संशोधन यांची तुलनात्मक चिकित्सा अधिक उपयुक्त ठरते. १९६१ च्या जनगणनेअंतर्गत कुंकेरी गावाचे स्वतंत्र सर्वेक्षण करण्यात आले होते. त्यामध्ये कुटुंब, व्यवसाय, आर्थिक स्थिती, सामाजिक जीवन आणि सांस्कृतिक जीवन यांची माहिती संकलित करण्यात आली होती.<ref name="Kunkeri1966"/>
या सर्व स्रोतांचा वापर करताना वर्णनात्मक माहिती, प्रशासकीय वर्गीकरण आणि त्यातून काढले जाणारे ऐतिहासिक निष्कर्ष यांच्यात स्पष्ट भेद ठेवणे आवश्यक आहे. अशा तुलनात्मक पद्धतीमुळे कुणबी समाजाच्या सामाजिक रचनेतील सातत्य आणि परिवर्तन यांचा अधिक संतुलित आणि पुराव्याधारित अभ्यास करता येतो.
=== सामाजिक रचनेचे ऐतिहासिक महत्त्व ===
कोकणातील कुणबी समाजाची पारंपरिक सामाजिक रचना कुटुंब, कुळ, देवक, विवाह आणि ग्रामजीवन या परस्परसंबंधित संस्थांशी जोडलेली होती. कृषीप्रधान अर्थव्यवस्थेमुळे कुटुंब, जमीन आणि उपजीविका यांचे परस्परसंबंध सामाजिक जीवनात महत्त्वाचे होते. रत्नागिरी आणि ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशाच्या गॅझेटियरमध्ये कुणबींच्या कृषी जीवनासोबत जमीनधारणा, रोजगार आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेशी संबंधित सामाजिक-आर्थिक परिस्थितीची नोंद आढळते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/><ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
कुळ आणि देवक यांसारख्या सामाजिक संस्थांचा अभ्यास करताना स्थानिक आणि प्रत्यक्ष क्षेत्रीय नोंदींना विशेष महत्त्व प्राप्त होते. सावंतवाडी परिसरातील कुंकेरी गावाच्या १९६१ च्या ग्रामसर्वेक्षणात कुणबी मराठा समाजाच्या सामाजिक, धार्मिक आणि सांस्कृतिक जीवनाचे स्वतंत्र दस्तऐवजीकरण करण्यात आले होते.<ref name="Kunkeri1966"/>
काळानुसार जमीनव्यवस्था, स्थलांतर, शिक्षण, शहरीकरण, रोजगाराच्या बदलत्या संधी आणि आधुनिक कायदे यांचा पारंपरिक सामाजिक संस्थांवर परिणाम झाला. महाड आणि माणगाव परिसरातील काही कुणबी कृषक भात कापणीचा हंगाम संपल्यानंतर मुंबईकडे किंवा इतर रोजगाराच्या ठिकाणी जात असल्याची १८८३ च्या कोलाबा गॅझेटियरमधील नोंद या ग्रामीण-नागरी संबंधांच्या ऐतिहासिक प्रक्रियेचे उदाहरण आहे. काही जण हंगामी रोजगारानंतर पावसाळ्यापूर्वी गावाकडे परतत असल्याचेही त्यात नमूद केले आहे.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
या प्रक्रियांमुळे कोकणातील कुणबी समाजाच्या सामाजिक जीवनात ग्रामीण शेती, हंगामी किंवा कायमस्वरूपी स्थलांतर, शहरी रोजगार आणि बदलत्या आर्थिक संबंधांचे परस्परसंघटन दिसून येते. काही कुटुंबांनी पारंपरिक शेतीशी संबंध कायम ठेवून बाहेरील रोजगार स्वीकारला, तर काहींच्या उपजीविकेचे स्वरूप कालांतराने अधिक वैविध्यपूर्ण झाले. तथापि हा बदल सर्व कुणबी कुटुंबांमध्ये किंवा सर्व कोकणी प्रदेशांत समान प्रमाणात झाला असे मानता येत नाही.
कोकणातील कुणबी समाजाच्या सामाजिक इतिहासाचा अभ्यास करताना ऐतिहासिक गॅझेटियर, जनगणना नोंदी, ग्रामसर्वेक्षण मोनोग्राफ, जमीन व महसूलविषयक अभिलेख, भाषिक अभ्यास आणि आधुनिक मानववंशशास्त्रीय संशोधन यांचा परस्परपूरक वापर आवश्यक ठरतो.<ref name="MajorCastesTribes"/>
या स्रोतांच्या तुलनात्मक अभ्यासातून कुणबी समाजातील पारंपरिक सामाजिक संस्था, कृषीआधारित जीवनपद्धती, प्रादेशिक विविधता आणि कालानुसार झालेले सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन यांचा अधिक संतुलित आणि पुराव्याधारित अभ्यास करता येतो.<ref name="घोलम2025" />
=== शेती, जमीन आणि अर्थव्यवस्था ===
कोकणातील कुणबी समाजाच्या पारंपरिक सामाजिक आणि आर्थिक जीवनात शेतीला महत्त्वाचे स्थान होते. रत्नागिरीच्या ऐतिहासिक जमीनव्यवस्थेच्या नोंदींमध्ये कुणबींचा वारसाहक्की कृषकांच्या संदर्भात उल्लेख आढळतो. काही कृषक विशिष्ट जमीनहिस्से पिढ्यान्पिढ्या कसत असल्याचे तसेच जमीनमोजणी, जमिनीचे वर्गीकरण आणि महसूलव्यवस्था यांचा कृषी उत्पादनाशी संबंध असल्याचे ब्रिटिशकालीन नोंदींमधून दिसून येते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
कोकणातील कृषीव्यवस्था भौगोलिक परिस्थितीशी जवळून संबंधित होती. डोंगराळ भूभाग, अरुंद सपाट प्रदेश, नद्या, खाड्या आणि मान्सूनच्या पावसामुळे भातशेतीला विशेष महत्त्व प्राप्त झाले. रत्नागिरीच्या जमीनव्यवस्थेच्या नोंदींमध्ये भातजमिनींचे विविध प्रकार नोंदवले असून, उंचसखल जमिनींवर वेगवेगळ्या पिकांची लागवड केली जात असल्याचे वर्णन आहे. काही भागांत खाडी किंवा किनारी प्रदेशातील पाण्याचे नियमन करून भातखाचरे आणि बागायती जमीन विकसित करण्यात आली होती.<ref name="RatnagiriLandCaptain">{{cite web
|title=Ratnagiri Gazetteer — Land Administration
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Ratnagiri%20and%20Sawantwadi/ratnagiri/land1_captain.html
}}</ref>
कृषी उत्पादनाच्या पद्धती जमिनीचा प्रकार, पाण्याची उपलब्धता आणि स्थानिक हवामान यांनुसार बदलत होत्या. रत्नागिरीच्या नंतरच्या कृषी नोंदींमध्ये भात, नाचणी, वरी, हरिक आणि इतर पिकांसाठी स्वतंत्र जमीनवापर पद्धतींचा उल्लेख आहे. काही वर्खस जमिनींमध्ये जमिनीची सुपीकता टिकवण्यासाठी विशिष्ट कालावधीसाठी जमीन पडीत ठेवण्याची पद्धतीही आढळते.<ref name="RatnagiriCropRotation">{{cite web
|title=Ratnagiri Gazetteer — Crop Rotation
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/RATNAGIRI/agri_crop.html
}}</ref>
=== भातशेती ===
भात हे कोकणातील प्रमुख अन्नधान्य पीक होते. रत्नागिरी जिल्ह्यात १९५५–५६मध्ये अन्नपिकांखालील क्षेत्रापैकी सुमारे ९० टक्के क्षेत्र धान्यपिकांखाली होते. या धान्यपिकांमध्ये भाताला प्रमुख स्थान होते. त्याच वर्षाच्या तालुकानिहाय आकडेवारीत रत्नागिरी जिल्ह्यातील विविध तालुक्यांमध्ये भाताबरोबर नाचणी, कोद्रा, वरी आणि इतर धान्यांचे उत्पादन नोंदवले आहे.<ref name="RatnagiriCereals">{{cite web
|title=Ratnagiri Gazetteer — Cereals
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/RATNAGIRI/agri_cereals.html
}}</ref>
रत्नागिरीतील भातशेतीचे स्वरूप जमिनीच्या उंची, पाण्याची उपलब्धता आणि सिंचनाच्या साधनांनुसार बदलत होते. पावसाळी हंगामातील भाताबरोबरच काही भागांत बारमाही नाले किंवा विहिरींमधून सिंचनाची सुविधा उपलब्ध असल्यास उन्हाळी हंगामातही भात घेतला जात असे. या पिकाला स्थानिक पातळीवर वायंगण भात म्हटले जात असे. सावंतवाडी, कुडाळ आणि मालवण हे वायंगण भाताच्या उत्पादनाचे महत्त्वाचे प्रदेश असल्याची नोंद गॅझेटियरमध्ये आहे.<ref name="RatnagiriCereals"/>
वायंगण भातासाठी शेतात पाणी धरून ठेवण्यासाठी बांधबंदिस्ती करणे, जमीन नांगरून चिखलयुक्त करणे आणि उपलब्ध सिंचनपाण्याचे नियोजन करणे आवश्यक असे. त्यामुळे या प्रकारच्या भातशेतीत जमिनीची रचना, पाण्याचे व्यवस्थापन आणि कृषकांचे स्थानिक ज्ञान यांना विशेष महत्त्व होते.<ref name="RatnagiriCereals"/>
ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्यातही भात हे प्रमुख पीक होते. उपलब्ध गॅझेटियर नोंदीनुसार १९५८–५९मध्ये कोलाबा जिल्ह्यात मोठ्या क्षेत्रावर भाताची लागवड करण्यात आली होती. अलिबाग, पनवेल, माणगाव, महाड, रोहा आणि कर्जत या प्रदेशांमध्ये भात उत्पादनाचे महत्त्व होते.<ref name="KolabaCereals">{{cite web
|title=Kolaba Gazetteer — Cereals
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/KOLABA/agri_cereals.html
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भातशेतीमुळे कुणबी समाजाच्या ग्रामीण जीवनावरही परिणाम झाला. पेरणी, रोपलागवड, निंदणी, कापणी, मळणी आणि धान्यसाठवण या कृषी प्रक्रियांभोवती ग्रामीण कुटुंबांचे वार्षिक कामाचे चक्र मोठ्या प्रमाणावर संघटित होत असे. कृषी उत्पादन हे केवळ अन्नाचा स्रोत नसून कुटुंबाच्या आर्थिक स्थिती, पशुधन, स्थानिक देवाणघेवाण आणि बाजारपेठेशी असलेल्या संबंधांशीही जोडलेले होते.<ref name="घोलम2025" />
तथापि कोकणातील सर्व कुणबी कुटुंबांची कृषीपद्धती किंवा आर्थिक स्थिती समान होती असे मानता येत नाही. जमीनधारणा, जमिनीचा प्रकार, सिंचनाची उपलब्धता, उत्पादनाचे प्रमाण, कुटुंबातील मनुष्यबळ आणि बाहेरील रोजगाराच्या संधी यांनुसार कृषीजीवनाचे स्वरूप बदलत होते. त्यामुळे कुणबी समाजाच्या आर्थिक इतिहासाचा अभ्यास करताना शेतीबरोबर जमीनव्यवस्था, ग्रामीण रोजगार आणि स्थलांतर या घटकांचाही विचार करणे आवश्यक आहे.
=== नाचणी आणि इतर धान्ये ===
भाताबरोबर नाचणी किंवा रागी हे कोकणातील महत्त्वाचे धान्यपीक होते. रत्नागिरीच्या कृषी नोंदींमध्ये नाचणीचा भातानंतरच्या प्रमुख धान्यपिकांमध्ये समावेश करण्यात आला आहे. १९५५–५६ च्या आकडेवारीनुसार रत्नागिरी जिल्ह्यात नाचणीची लागवड मोठ्या क्षेत्रावर केली जात होती. चिपळूण, दापोली, संगमेश्वर, राजापूर, खेड आणि गुहागर या तालुक्यांमध्ये नाचणीचे उत्पादन विशेष उल्लेखनीय असल्याची नोंद गॅझेटियरमध्ये आढळते.<ref name="RatnagiriCereals"/>
नाचणीची लागवड प्रामुख्याने डोंगराळ, उंचसखल आणि तुलनेने कमी पाण्याच्या उपलब्धतेच्या प्रदेशांशी संबंधित होती. त्यामुळे कोकणातील भातखाचरांबरोबरच वर्खस आणि डोंगराळ जमिनींच्या कृषी अर्थव्यवस्थेत नाचणीला महत्त्वाचे स्थान होते. कुणबी समाजाच्या पारंपरिक कृषीजीवनात भाताबरोबर नाचणी, वरी आणि इतर स्थानिक धान्यांचा उपयोग अन्नधान्याच्या गरजा पूर्ण करण्यासाठी केला जात असे.<ref name="घोलम2025" />
ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्यातही भाताबरोबर नाचणी, वरी आणि कोद्रा यांसारख्या धान्यांची लागवड केली जात होती. जिल्ह्याच्या कृषी नोंदींमध्ये भात आणि नाचणी या दोन्ही पिकांना महत्त्वाचे स्थान असल्याचे दिसून येते. महाड, माणगाव आणि इतर अंतर्गत प्रदेशांतील भौगोलिक परिस्थितीनुसार विविध धान्यपिकांची लागवड केली जात असल्याचे कृषीविषयक नोंदींमधून स्पष्ट होते.<ref name="KolabaCereals"/>
=== कडधान्ये ===
भातशेतीनंतर उपलब्ध होणाऱ्या जमिनीचा उपयोग काही प्रदेशांत कडधान्यांच्या लागवडीसाठी केला जात असे. ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्याच्या कृषी नोंदींमध्ये वाल, उडीद आणि हरभरा यांसारख्या कडधान्यांचा उल्लेख आढळतो. काही ठिकाणी ही पिके भातानंतरच्या हंगामात घेतली जात असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद केले आहे.<ref name="KolabaPulses">{{cite web
|title=Kolaba Gazetteer — Pulses
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/KOLABA/agri_pulses.html
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कडधान्यांच्या लागवडीमुळे भातावर मोठ्या प्रमाणावर अवलंबून असलेल्या कृषी अर्थव्यवस्थेत पिकांची विविधता निर्माण होत होती. जमिनीचा प्रकार, उपलब्ध ओलावा, हंगाम आणि स्थानिक कृषीपद्धती यांनुसार कडधान्यांची लागवड केली जात असे. काही भागांत भात कापणीनंतर त्याच जमिनीवर पुढील पीक घेतले जात असल्याचे कृषी नोंदींवरून दिसून येते.<ref name="KolabaPulses"/>
या पिकांच्या विविधतेचा संबंध ग्रामीण कुटुंबांच्या अन्नसुरक्षा आणि कृषी अर्थव्यवस्थेशीही होता. भात हे प्रमुख अन्नधान्य असले तरी नाचणी, वरी, कडधान्ये आणि इतर स्थानिक पिकांमुळे कुटुंबांच्या अन्नधान्याच्या गरजांमध्ये विविधता निर्माण होत असे. त्यामुळे कोकणातील कृषीजीवन केवळ भातशेतीपुरते मर्यादित न राहता विविध पिकांच्या हंगामी चक्रावर आधारित होते.
=== नारळ आणि सुपारी ===
कोकणातील किनारी हवामान आणि उपलब्ध पाणीस्रोतांमुळे नारळाच्या बागांना कृषी अर्थव्यवस्थेत महत्त्व प्राप्त झाले. ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्याच्या कृषी नोंदींनुसार समुद्रकिनारी आणि किनारी प्रदेशांमध्ये नारळाची लागवड मोठ्या प्रमाणावर केली जात होती. काही भागांतील बागायती अर्थव्यवस्थेत नारळाला महत्त्वाचे स्थान होते.<ref name="KolabaCroppedArea">{{cite web
|title=Kolaba Gazetteer — Cropped Area
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/KOLABA/agri_cropped_area.html
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रत्नागिरीतील नारळबागांच्या संदर्भात विहिरीच्या पाण्याचा सिंचनासाठी उपयोग केला जात असल्याची नोंद कृषीविषयक स्रोतांमध्ये आढळते. हिवाळा आणि उन्हाळ्याच्या काळात नारळाच्या झाडांना पुरेसे पाणी उपलब्ध करून देणे आवश्यक असल्याचेही या नोंदींमध्ये नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="RatnagiriOilSeeds">{{cite web
|title=Ratnagiri Gazetteer — Oil Seeds
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/RATNAGIRI/agri_oil%20seeds.html
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नारळाबरोबर सुपारी आणि इतर बागायती पिकेही किनारी कोकणातील कृषी उत्पादनाच्या विविधतेचा भाग होती. या बागायती पिकांचा उपयोग स्थानिक उपभोगाबरोबरच बाजारपेठीय देवाणघेवाणीतही होत असे. तथापि उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतांवरून ही सर्व बागायती पिके विशेषतः कुणबी समाजाच्या मालकीची होती असा सर्वसाधारण निष्कर्ष काढता येत नाही. त्यामुळे या पिकांचा विचार कोकणातील व्यापक कृषी अर्थव्यवस्थेच्या संदर्भात करणे अधिक योग्य ठरते.
=== आंबा, काजू आणि कोकम ===
आंबा, काजू आणि कोकम यांसारख्या बागायती उत्पादनांना पुढील काळात कोकणाच्या कृषी अर्थव्यवस्थेत महत्त्व प्राप्त झाले. या पिकांचा विस्तार, उत्पादनाची बाजारपेठ, प्रक्रिया आणि वाहतूक यांचा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेवर परिणाम झाला. विशेषतः कोकणातील बागायती शेतीच्या विकासाचा विचार करताना आंबा, काजू आणि कोकम यांसारख्या पिकांचा स्वतंत्रपणे अभ्यास करता येतो.
मात्र या लेखाच्या ऐतिहासिक संदर्भात आंबा, काजू किंवा कोकमाची लागवड प्राचीन काळापासून कुणबी समाजाची विशिष्ट शेती होती असा निष्कर्ष उपलब्ध पुराव्यांच्या आधारे काढता येत नाही. या पिकांना कोकणातील व्यापक बागायती, कृषीविविधता आणि बाजाराभिमुख ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या विकासाच्या संदर्भात मांडणे अधिक योग्य आहे.
कोकणातील बागायती शेतीचा सामाजिक इतिहास समजून घेताना जमीनधारणा, कुटुंबाची आर्थिक क्षमता, पाण्याची उपलब्धता, बाजारपेठेशी संपर्क आणि कृषी उत्पादनातील बदल या घटकांचा विचार करणे आवश्यक आहे. त्यामुळे बागायती पिकांचा इतिहास हा केवळ एखाद्या एका सामाजिक समुदायाचा इतिहास न राहता संपूर्ण कोकणी ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या परिवर्तनाशी संबंधित ठरतो.
=== पशुधन आणि शेती ===
पारंपरिक कोकणी शेतीमध्ये पशुधनाचा कृषी उत्पादनाशी घनिष्ठ संबंध होता. नांगरणी, वाहतूक, मळणी आणि इतर श्रमप्रधान कृषी कामांसाठी बैलांचा उपयोग केला जात असे. बैल, गायी आणि म्हशी यांसारखे पशुधन ग्रामीण कुटुंबांच्या आर्थिक जीवनाचा तसेच कृषी उत्पादनाच्या साधनांचा एक भाग होते.
कोलाबा जिल्ह्यातील कुणबी कृषकांच्या वर्णनात बैलजोडी, गाय किंवा म्हैस तसेच शेतीची विविध अवजारे यांचा उल्लेख आढळतो. यावरून पशुधन आणि शेतीची साधने ही कृषक कुटुंबाच्या उत्पादनक्षमतेशी संबंधित महत्त्वाची साधने होती असे दिसून येते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
रत्नागिरीतील ऐतिहासिक कृषी व्यवस्थेच्या वर्णनांमध्ये शेतीकामात कुटुंबातील विविध सदस्यांचा सहभाग असल्याचे आढळते. कृषीप्रधान कुटुंबव्यवस्थेत पुरुषांबरोबर स्त्रिया आणि मुलेही काही श्रमप्रधान शेतीकामांत सहभागी होत असल्याच्या नोंदी आहेत.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
पशुधनाचा उपयोग केवळ शेतीच्या प्रत्यक्ष कामांसाठी होत नव्हता. दूध, शेणखत आणि वाहतूक यांसारख्या माध्यमांतूनही त्याचा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेला उपयोग होत असे. त्यामुळे पारंपरिक कोकणी कृषीव्यवस्थेत जमीन, मनुष्यबळ, पशुधन आणि कृषी साधने हे परस्परावलंबी घटक होते.
कुणबी समाजाच्या संदर्भात पशुधनाचे महत्त्व मांडताना मात्र आर्थिक स्थितीनुसार कुटुंबांच्या पशुधनाच्या संख्येत आणि प्रकारात फरक असू शकत होता, हे लक्षात घेणे आवश्यक आहे. त्यामुळे प्रत्येक कुणबी कुटुंबाकडे समान प्रमाणात पशुधन किंवा कृषी साधने होती असे मानता येत नाही.
=== जलव्यवस्था आणि सिंचन ===
कोकणातील कृषीव्यवस्था प्रामुख्याने मान्सूनच्या पावसावर अवलंबून असली तरी भातशेतीसाठी स्थानिक जलसंधारण आणि सिंचन पद्धतींचाही उपयोग केला जात होता. रत्नागिरीच्या कृषी नोंदींमध्ये भातखाचरांमध्ये बांध घालून पाणी साठवणे, जमिनीत पाणी टिकवून ठेवणे आणि उपलब्ध पाण्याचा नियंत्रित वापर करणे यांचा उल्लेख आढळतो.<ref name="RatnagiriCereals"/>
उन्हाळी किंवा वायंगण भातासाठी विहिरी, बारमाही नाले आणि बांधबंदिस्त शेतांचा उपयोग केला जात असल्याचीही नोंद आहे. पाणी शेतात टिकवून ठेवण्यासाठी शेतांचे विभाग करून बांध तयार केले जात आणि उपलब्ध पाण्यानुसार सिंचन केले जात असे.<ref name="RatnagiriCereals"/>
या प्रकारच्या जलव्यवस्थेमुळे पावसाळ्यानंतरही काही भागांत कृषी उत्पादन सुरू ठेवणे शक्य होत असे. त्यामुळे कोकणातील शेतीमध्ये पाऊस, जमीन, जलसंधारण, बांधबंदिस्ती आणि स्थानिक सिंचनपद्धती यांचा परस्परसंबंध महत्त्वाचा होता.
ब्रिटिशकालीन कृषी प्रशासनात विहिरी, तलाव, सिंचन, जलनिचरा, जमीन सुधारणा आणि पुनर्वसन यांसाठी आर्थिक सहाय्याच्या योजना विकसित करण्यात आल्या. रत्नागिरीच्या नोंदींमध्ये जमीन सुधारणा कर्जांच्या अंतर्गत विहिरी, तलाव, सिंचन, जलनिचरा आणि जमीन सुधारणा यांसाठी कर्जाची तरतूद करण्यात आल्याचे नमूद आहे.<ref name="RatnagiriStateAidAgriculture">{{cite web
|title=Ratnagiri Gazetteer — State Aid to Agriculture
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/RATNAGIRI/finance_state_agri.html
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या जलव्यवस्थेचा कुणबी समाजाशी संबंध पाहताना एक महत्त्वाची बाब लक्षात घ्यावी लागते. कुणबी हे कोकणातील महत्त्वाचे कृषक समुदाय असले तरी जलव्यवस्था किंवा सिंचनपद्धती केवळ कुणबी समाजापुरती मर्यादित नव्हती. त्यामुळे या पद्धतींचा अभ्यास व्यापक कोकणी कृषी अर्थव्यवस्थेच्या संदर्भात करणे अधिक योग्य ठरते.
=== जमीनधारणा आणि कृषक हक्क ===
कोकणातील कुणबी समाजाचा सामाजिक आणि आर्थिक इतिहास समजून घेण्यासाठी जमीनधारणा हा महत्त्वाचा घटक आहे. रत्नागिरीच्या जमीन प्रशासनाच्या नोंदींमध्ये कुणबींची वारसाहक्की कृषकांमध्ये मोठ्या संख्येने उपस्थिती असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. काही कुणबी कुटुंबे निश्चित जमीनहिस्सा कसत असून त्या जमिनीवरील कृषी कामकाजाशी त्यांचे दीर्घकालीन संबंध असल्याचे या नोंदींवरून दिसते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
रत्नागिरीतील खोती व्यवस्थेच्या संदर्भात काही कुणबी आणि इतर कृषक कर्दे किंवा भाडेकरू म्हणून जमीन कसत असल्याच्या नोंदी आढळतात. गॅझेटियरमधील वर्णनानुसार अशा कृषकांना त्यांच्या पारंपरिक जमीनहिस्स्याशी संबंधित काही दीर्घकालीन हक्क प्राप्त होते आणि ठरावीक परिस्थिती व कायदेशीर चौकट वगळता त्यांना सहजपणे बेदखल करता येत नसे.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
याउलट धारेकरी हा राज्याकडून थेट जमीनधारणा करणारा कृषक होता. रत्नागिरीच्या गॅझेटियरमधील जमीन प्रशासनाच्या वर्णनानुसार धारेकऱ्याला आपल्या धारण केलेल्या जमिनीबाबत वारसाहक्क, हस्तांतरण आणि गहाण ठेवण्यासंबंधी काही अधिकार होते; हे अधिकार राज्याच्या महसुली मागणीच्या अधीन होते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
या जमीनव्यवस्थेमुळे कोकणातील कृषक समाजात जमीनधारणेचे विविध स्तर निर्माण झाले होते. जमीनधारक कृषक, भाडेकरू आणि इतर प्रकारचे शेती करणारे घटक यांची आर्थिक आणि सामाजिक स्थिती समान नव्हती. त्यामुळे कुणबी समाजाला केवळ एकसमान जमीनधारक किंवा समान आर्थिक स्थिती असलेला कृषक समुदाय म्हणून पाहणे ऐतिहासिकदृष्ट्या अचूक ठरणार नाही.
जमीन, पाणी आणि कृषी उत्पादन यांच्यातील संबंधामुळे जमीनधारणेचा परिणाम कुणबी कुटुंबांच्या आर्थिक स्थितीवरही होत होता. सुपीक जमीन, सिंचनाची उपलब्धता, जमीनहिस्सा, कृषी उत्पादन आणि बाजारपेठेशी संपर्क या घटकांनुसार कुटुंबांच्या आर्थिक परिस्थितीत फरक पडत असे. म्हणून कोकणातील कुणबी समाजाचा आर्थिक इतिहास समजून घेताना जमीनधारणा आणि स्थानिक जमीनव्यवस्थेचा स्वतंत्र विचार करणे आवश्यक आहे.
=== कृषी मजुरी ===
कोकणातील कृषी अर्थव्यवस्थेत स्वतःची जमीन कसणारे कृषक, भाडेकरू, कुटुंबीय श्रमिक आणि कृषी मजूर असे विविध घटक कार्यरत होते. रत्नागिरीच्या ऐतिहासिक नोंदींनुसार कृषी हंगामातील मजुरीवर ग्रामीण कामगारांच्या उत्पन्नाचा काही भाग अवलंबून असे. शेतीतील कामाचा हंगाम संपल्यानंतर वर्षातील उर्वरित काळात रोजगाराच्या शोधासाठी काही कामगारांना इतर प्रदेशांकडे जावे लागत असे.<ref name="RatnagiriCapitalLabour">{{cite web
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Ratnagiri and Savantvadi — Capital and Labour
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Ratnagiri%20and%20Sawantwadi/ratnagiri/capitals1_capitalists.html
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१८५१ च्या कृषी व जमीन प्रशासनासंबंधीच्या नोंदींमध्ये ग्रामीण लोकसंख्येतील मोठ्या घटकाला स्थानिक शेतीतून वर्षभर पुरेसे उत्पन्न मिळत नसल्यामुळे हंगामी रोजगारासाठी बाहेर जावे लागत असल्याचे नमूद आहे. या नोंदीनुसार काही मजूर नोव्हेंबरच्या सुमारास मुंबई आणि आसपासच्या प्रदेशांकडे रोजगारासाठी जात आणि पावसाळा सुरू होण्यापूर्वी आपल्या गावाकडे परतत असत.<ref name="RatnagiriLandCaptain"/>
हंगामी स्थलांतरामुळे ग्रामीण कुटुंबांच्या उत्पन्नाचे स्रोत केवळ शेतीपुरते मर्यादित राहत नसत. शेतीचा हंगाम, उपलब्ध जमीन, स्थानिक रोजगार आणि बाहेरील प्रदेशातील मजुरीच्या संधी यांचा कुटुंबांच्या आर्थिक स्थितीवर परिणाम होत असे. या प्रक्रियेचा परिणाम कुणबींसह कोकणातील इतर कृषक आणि ग्रामीण समुदायांवरही झाला. मात्र उपलब्ध ऐतिहासिक नोंदींवरून हा नमुना सर्व कुणबी कुटुंबांना समान प्रमाणात लागू होता असे म्हणता येत नाही.
=== बाजारपेठ आणि कृषी उत्पादन ===
कोकणातील कृषी अर्थव्यवस्था स्थानिक बाजारपेठांबरोबरच जिल्ह्याबाहेरील व्यापार आणि वाहतुकीशीही जोडलेली होती. रत्नागिरीच्या गॅझेटियरमधील नोंदीनुसार काही काळ जिल्ह्यातील स्थानिक कृषी उत्पादन लोकसंख्येच्या गरजा पूर्ण करण्यासाठी अपुरे पडत असल्यामुळे बाहेरील प्रदेशांतून धान्य आणावे लागत असे.<ref name="RatnagiriCapitalLabour"/>
वाहतुकीची साधने मर्यादित असलेल्या काळात ग्रामीण भागातून कृषी उत्पादन बाजारपेठांपर्यंत पोहोचवणे हे एक महत्त्वाचे आव्हान होते. १८५१ च्या नोंदींमध्ये काही भागांत कृषी उत्पादन मानवी वाहतुकीद्वारे बाजारपेठेत नेले जात असल्याचे वर्णन आढळते. त्यामुळे वाहतूकव्यवस्था आणि बाजारपेठेपर्यंत पोहोचण्याची क्षमता यांचा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेवर थेट परिणाम होत असे.<ref name="RatnagiriLandCaptain"/>
ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्यातील कृषी अर्थव्यवस्थेतही अन्नपिकांना महत्त्वाचे स्थान होते. १९५८–५९ च्या कृषी नोंदीनुसार जिल्ह्याच्या एकूण सकल पीकक्षेत्रापैकी ८० टक्क्यांहून अधिक क्षेत्र अन्नपिकांखाली होते. त्यामध्ये धान्य आणि कडधान्यांचा मोठा वाटा होता.<ref name="KolabaCroppedArea"/>
कोकणातील कुणबी समाजाच्या आर्थिक इतिहासाच्या संदर्भात बाजारपेठेचे महत्त्व केवळ कृषी उत्पादनाच्या विक्रीपुरते मर्यादित नव्हते. कृषी उत्पादन, हंगामी मजुरी, धान्याची उपलब्धता, वाहतूक आणि बाहेरील रोजगाराच्या संधी यांमधील परस्परसंबंधामुळे ग्रामीण कुटुंबांचे आर्थिक जीवन व्यापक प्रादेशिक अर्थव्यवस्थेशी जोडले गेले होते. त्यामुळे कुणबी समाजाच्या कृषी इतिहासाचा अभ्यास करताना जमीन आणि शेतीबरोबरच मजुरी, हंगामी स्थलांतर, वाहतूक आणि बाजारपेठ यांचाही विचार करणे आवश्यक ठरते.
=== कुणबी केवळ शेतकरी नव्हते ===
कुणबी समाजाची ऐतिहासिक ओळख कृषीशी निकटपणे संबंधित होती; तथापि कुणबी म्हणजे केवळ शेतकरी अशी समानता करणे ऐतिहासिक स्रोतांच्या आधारे योग्य ठरत नाही. रत्नागिरीच्या जमीनव्यवस्थेच्या नोंदींमध्ये कुणबींचा मोठ्या संख्येने कृषक म्हणून उल्लेख आढळतो. त्याच वेळी ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्याच्या १८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये महाड आणि माणगाव परिसरातील काही कुणबी हंगामी रोजगारासाठी मुंबईकडे जात असल्याचे तसेच काही कुणबी लष्कर, पोलीस आणि इतर सरकारी सेवांमध्ये कार्यरत असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/><ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
कुणबींच्या आर्थिक जीवनात स्वतःची जमीन कसणे, भाडेकरू म्हणून शेती करणे, कृषी मजुरी करणे, हंगामी रोजगारासाठी स्थलांतर करणे आणि शेतीबाहेरील व्यवसाय किंवा सेवा स्वीकारणे अशी विविध रूपे आढळत होती. रत्नागिरीच्या नोंदींमध्ये कृषक आणि कृषी मजुरांना वर्षातील काही काळ रोजगारासाठी मुंबई व इतर प्रदेशांकडे जावे लागत असल्याचे नमूद आहे. कोलाबा गॅझेटियरमध्येही महाड आणि माणगाव परिसरातील कुणबींच्या हंगामी स्थलांतराबरोबरच लष्कर, पोलीस आणि सरकारी सेवांमध्ये प्रवेशाचा उल्लेख आढळतो.<ref name="RatnagiriCapitalLabour"/><ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
या नोंदींवरून कोकणातील कुणबींची ऐतिहासिक अर्थव्यवस्था कृषीप्रधान असली तरी ती केवळ स्वतःची शेती कसण्यापुरती मर्यादित नव्हती असे दिसून येते. जमीनधारणा, भाडेकरू शेती, कृषी मजुरी, हंगामी स्थलांतर आणि विविध प्रकारचे शेतीबाहेरील रोजगार हे त्यांच्या आर्थिक जीवनाचे काही घटक होते. तथापि उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतांवरून या आर्थिक भूमिकांचे प्रमाण संपूर्ण कुणबी समाजात समान होते असा निष्कर्ष काढता येत नाही. प्रदेश, जमीनधारणा, कृषी उत्पादन, रोजगाराच्या उपलब्ध संधी आणि स्थानिक आर्थिक परिस्थितीनुसार कुणबी कुटुंबांच्या उपजीविकेच्या पद्धतींमध्ये फरक असण्याची शक्यता होती.
=== आधुनिक कृषी परिवर्तन ===
विसाव्या शतकाच्या मध्यापासून कोकणातील कृषी व्यवस्थेत सुधारित बियाणे, खते, सुधारित कृषी अवजारे, सिंचन, जमीन सुधारणा आणि सरकारी कृषी कर्ज यांचा वापर वाढत गेला. १९६१ च्या कुंकेरी ग्रामसर्वेक्षणात सुधारित बियाणे, खते, सुधारित जनावरे, कृषी अवजारे, सिंचन, कीडनियंत्रण आणि जमीन सुधारणा यांसारख्या कृषी सुविधांच्या उपलब्धतेविषयी स्वतंत्र माहिती संकलित करण्यात आली होती.<ref name="Kunkeri1966"/>
रत्नागिरीच्या कृषी नोंदींमध्ये १९५३–५६ या कालावधीत नव्याने जमीन लागवडीखाली आणणे, कृषी प्रात्यक्षिके आणि ‘तगाई’ किंवा कृषी कर्जाच्या स्वरूपातील सरकारी सहाय्य यांचा उल्लेख आढळतो.<ref name="RatnagiriCereals"/>
कृषी सुधारण्यासाठी विहिरी, तलाव, सिंचन, जलनिचरा, जमीन सुधारणा आणि पुनर्वसन यांसाठी कर्जपुरवठ्याची प्रशासकीय व्यवस्था विकसित करण्यात आली. रत्नागिरीच्या गॅझेटियरमध्ये जमीन सुधारणा कर्जे आणि कृषक कर्जे यांसारख्या योजनांचा उल्लेख असून विहिरी व सिंचनाच्या कामांसाठीही कर्ज उपलब्ध करून दिले जात असल्याचे नमूद आहे.<ref name="RatnagiriStateAidAgriculture"/>
भातशेतीतही तांत्रिक बदल झाले. रत्नागिरीच्या कृषी नोंदींमध्ये काही सुधारित भातवाणांचा उल्लेख असून त्यांच्या पक्व होण्याच्या कालावधीची माहिती देण्यात आली आहे. उन्हाळी भातासाठी बांधबंदिस्त शेत, पाण्याचे नियंत्रित व्यवस्थापन आणि सिंचनाचा वापर यांमुळे काही भागांत वर्षातून एकापेक्षा अधिक पिके घेणे शक्य झाले.<ref name="RatnagiriCereals"/>
कृषीतील या बदलांचा परिणाम केवळ उत्पादनपद्धतीवर झाला नाही, तर ग्रामीण कुटुंबांच्या आर्थिक जीवनावरही झाला. सुधारित कृषी तंत्रज्ञान, सिंचन, कर्जपुरवठा आणि बाजारपेठेशी वाढलेले संबंध यांमुळे पारंपरिक कृषी व्यवस्थेत हळूहळू परिवर्तन घडून आले. तथापि या सुविधा सर्व प्रदेशांत किंवा सर्व कृषक कुटुंबांना समान प्रमाणात उपलब्ध झाल्या असे उपलब्ध स्रोतांवरून म्हणता येत नाही.
=== शेती, जमीन आणि कुणबी समाज : ऐतिहासिक निष्कर्ष ===
उपलब्ध ऐतिहासिक पुराव्यांवरून कोकणातील कुणबी समाजाची पारंपरिक आर्थिक ओळख कृषीशी निकटपणे संबंधित होती. रत्नागिरीच्या जमीनव्यवस्थेच्या नोंदींमध्ये कुणबींचा मोठ्या संख्येने वारसाहक्की कृषक म्हणून उल्लेख आढळतो. त्याचप्रमाणे ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्याच्या गॅझेटियरमध्ये महाड–माणगाव परिसरातील कुणबींच्या शेतीशी संबंधित जीवनाबरोबरच हंगामी स्थलांतर आणि विविध प्रकारच्या रोजगारांचा उल्लेख करण्यात आला आहे.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/><ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
त्यामुळे कुणबी समाजाला केवळ ‘शेतकरी जात’ म्हणून मर्यादित करणे ऐतिहासिकदृष्ट्या अपुरे ठरते. उपलब्ध नोंदींनुसार कुणबी हा कोकणातील कृषीप्रधान ग्रामीण समाजाचा एक महत्त्वाचा घटक होता; मात्र त्याच्या आर्थिक जीवनात जमीनधारणा, भाडेकरू शेती, कृषी मजुरी, हंगामी स्थलांतर तसेच सरकारी, लष्करी आणि इतर रोजगारांचाही समावेश होता.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
या आर्थिक विविधतेचा विचार करताना प्रदेश आणि काळ यांचा संदर्भ महत्त्वाचा ठरतो. सर्व कुणबी कुटुंबांची जमीनधारणा, आर्थिक स्थिती किंवा रोजगाराची पद्धत समान होती असे उपलब्ध स्रोतांवरून म्हणता येत नाही. कृषी उत्पादन, जमिनीची उपलब्धता, स्थानिक रोजगाराच्या संधी आणि बाजारपेठेशी असलेला संपर्क यांनुसार त्यांच्या आर्थिक जीवनात भिन्नता होती.
=== स्थलांतर आणि मुंबईशी संबंध ===
कोकणातील कुणबी समाजाचा सामाजिक आणि आर्थिक इतिहास हा स्थलांतराच्या व्यापक प्रक्रियेशी संबंधित होता. विशेषतः रत्नागिरी आणि ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्यांमध्ये मर्यादित कृषी उत्पन्न, हंगामी रोजगाराची आवश्यकता आणि मुंबईतील वाढत्या रोजगाराच्या संधी यांमुळे ग्रामीण लोकसंख्येचे मुंबईशी आर्थिक संबंध विकसित झाले. रत्नागिरीच्या १८८० च्या गॅझेटियरमध्ये जिल्ह्यातील ग्रामीण लोकांच्या मुंबईकडे होणाऱ्या रोजगाराधारित स्थलांतराची नोंद आढळते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
रत्नागिरी जिल्ह्याच्या १८८० च्या गॅझेटियरनुसार मुंबईशी समुद्रमार्गे आणि जमिनीमार्गे असलेल्या संपर्कामुळे जिल्ह्यातील लोकांना मुंबईतील रोजगाराच्या संधी उपलब्ध होत होत्या. मोठ्या संख्येने लोक मुंबईकडे जाऊन विविध प्रकारचे काम करीत असल्याचे तसेच त्यांपैकी काही जण मुंबईत अंशतः स्थायिक झाल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्यातील नोंदींमध्येही महाड आणि माणगाव परिसरातील काही कुणबी भात कापणीचा हंगाम संपल्यानंतर मुंबई आणि इतर रोजगाराच्या ठिकाणी जात असल्याचे नमूद आहे. काही जण हंगामी रोजगार करून पावसाळ्यापूर्वी आपल्या गावाकडे परतत असत. अशा रोजगारातून मिळणारे उत्पन्न बियाणे खरेदी आणि कुटुंबाच्या इतर गरजांसाठी वापरले जात असल्याचेही नोंदवण्यात आले आहे.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
या स्थलांतरामुळे ग्रामीण कुटुंबांचे आर्थिक जीवन शेतीपुरते मर्यादित न राहता मुंबईसारख्या वाढत्या नागरी केंद्रांशी जोडले गेले. काही कुटुंबांनी शेतीशी संबंध कायम ठेवून हंगामी किंवा कायमस्वरूपी बाहेरील रोजगार स्वीकारला, तर काहींच्या उपजीविकेचे स्वरूप अधिकाधिक शहरी अर्थव्यवस्थेशी संबंधित झाले. तथापि उपलब्ध ऐतिहासिक नोंदींवरून या प्रक्रियेचे प्रमाण संपूर्ण कुणबी समाजात समान होते असा निष्कर्ष काढता येत नाही.
=== रत्नागिरी ते मुंबई : स्थलांतराची सुरुवात ===
मुंबईकडे होणारे कोकणी स्थलांतर हे कापड गिरण्यांच्या विस्तारापूर्वीच अस्तित्वात होते. मुंबईच्या बंदराशी, जहाजवाहतूक, बांधकाम, लष्कर, पोलीस, गोदामे आणि इतर रोजगारांशी संबंधित कामांसाठी कोकणातील ग्रामीण भागातून लोक मुंबईकडे जात असत. पुढील काळात मुंबईच्या औद्योगिक आणि विशेषतः कापड उद्योगाच्या विस्तारामुळे या स्थलांतराला अधिक व्यापक रोजगाराधार प्राप्त झाला. मुंबईच्या कामगारवर्गाच्या निर्मितीत ग्रामीण भागातील स्थलांतराचे महत्त्व आणि कामगारांचे ग्रामीण संबंध यांचा राजनारायण चांदवणकर यांनी अभ्यास केला आहे.<ref name="Chandavarkar1994">{{cite book
|last=Chandavarkar
|first=Rajnarayan
|title=The Origins of Industrial Capitalism in India: Business Strategies and the Working Classes in Bombay, 1900–1940
|publisher=Cambridge University Press
|location=Cambridge
|year=1994
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एकोणिसाव्या शतकाच्या उत्तरार्धात आणि विसाव्या शतकाच्या पूर्वार्धात मुंबईतील औद्योगिक वाढीसोबत कोकण आणि विशेषतः रत्नागिरी जिल्हा हा मुंबईच्या श्रमबाजाराशी संबंधित महत्त्वाचा प्रदेश बनला. या प्रक्रियेत ग्रामीण अर्थव्यवस्थेतील रोजगाराच्या मर्यादा, जमिनीवरील दबाव आणि मुंबईतील वाढत्या रोजगाराच्या संधी यांचा परस्परसंबंध होता.<ref name="RoyalCommissionLabour1931">{{cite report
|title=Report of the Royal Commission on Labour in India
|publisher=Government of India
|year=1931
|url=https://indianlabourarchives.org/bitstream/20.500.14121/168/4/Report%20of%20the%20Royal%20Commission%20on%20Labour%20in%20India.pdf
}}</ref>
रत्नागिरीच्या १८८० च्या गॅझेटियरमध्ये मुंबईशी असलेल्या रोजगारसंबंधांचा उल्लेख आढळतो. समुद्रमार्गे आणि जमिनीमार्गे असलेल्या संपर्कामुळे रत्नागिरी जिल्ह्यातील लोकांना मुंबईतील रोजगाराच्या संधी उपलब्ध होत होत्या आणि जिल्ह्यातील मोठ्या संख्येने लोक मुंबईत कामासाठी जात असल्याचे नोंदवण्यात आले आहे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
=== कुणबी आणि हंगामी स्थलांतर ===
कुणबी समाजाच्या बाबतीत हंगामी स्थलांतराचा थेट पुरावा १८८३ च्या कोलाबा गॅझेटियरमध्ये आढळतो. महाड आणि माणगाव परिसरातील कुणबी भात कापणीचा हंगाम संपल्यानंतर नोव्हेंबर किंवा डिसेंबरमध्ये मुंबई आणि इतर मजूर बाजारपेठांकडे जात असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद आहे. ते अनुकूल हवामानाच्या काळात काम करून उन्हाळ्याच्या अखेरीस गावाकडे परतत असत. या रोजगारातून मिळालेल्या पैशांचा उपयोग बियाणे खरेदी आणि पावसाळ्यात कुटुंबाच्या उदरनिर्वाहासाठी केला जात असल्याची नोंद आहे.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
या हंगामी स्थलांतरात गावातील जमीन आणि शहरातील रोजगार यांचा परस्परसंबंध कायम राहत असे. कोलाबा गॅझेटियरनुसार मुंबईकडे गेलेले काही कुणबी आपल्या मूळ गावातील नातेवाईकांकडे पैसे पाठवत असत आणि हे नातेवाईक गावातील जमीन व शेतीची देखभाल करीत असत. त्यावरून काही कुटुंबांच्या आर्थिक जीवनात ग्रामीण शेती आणि शहरी रोजगार यांचा एकत्रित सहभाग असल्याचे दिसून येते.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
अशा प्रकारच्या हंगामी स्थलांतरामुळे एकाच कुटुंबातील उपजीविकेचे स्रोत दोन भौगोलिक केंद्रांशी जोडले जाऊ शकत होते. गावातील जमीन, शेती आणि कुटुंबाची जबाबदारी कायम ठेवून कुटुंबातील काही सदस्य शहरात मजुरी किंवा इतर रोजगार करीत असत. त्यामुळे ग्रामीण कृषी अर्थव्यवस्था आणि मुंबईतील शहरी रोजगार यांच्यामध्ये आर्थिक परस्परसंबंध निर्माण झाला होता.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
या संदर्भात कोलाबा गॅझेटियरची नोंद विशेष महत्त्वाची आहे, कारण ती कुणबी समाजाच्या हंगामी स्थलांतराचे थेट समकालीन प्रशासकीय दस्तऐवजीकरण करते. मात्र ही नोंद मुख्यतः महाड आणि माणगाव परिसराशी संबंधित असल्यामुळे तिच्या आधारे संपूर्ण कोकणातील किंवा सर्व कुणबी कुटुंबांमध्ये समान स्वरूपाचे स्थलांतर होते असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
=== मुंबईच्या कापड गिरण्या आणि कोकणी स्थलांतर ===
मुंबईतील कापड गिरण्यांच्या विस्तारामुळे कोकण आणि विशेषतः रत्नागिरी जिल्ह्यातून मुंबईकडे होणाऱ्या स्थलांतराला पुढील काळात मोठी चालना मिळाली. मुंबईतील औद्योगिक विकासामुळे ग्रामीण भागातील कामगारांना गिरण्यांमध्ये तसेच शहरातील इतर उद्योगांमध्ये रोजगाराच्या संधी उपलब्ध झाल्या. मुंबईच्या कापड उद्योगातील कामगारवर्गाच्या सामाजिक आणि कौटुंबिक रचनेचा अभ्यास करताना ग्रामीण भागातून झालेल्या स्थलांतराचा महत्त्वाचा संदर्भ आढळतो.<ref name="Kumar1983">{{cite journal
|last=Kumar
|first=Radha
|title=Family and Factory: Women in the Bombay Cotton Textile Industry, 1919–1939
|journal=The Indian Economic & Social History Review
|volume=20
|issue=1
|year=1983
|pages=81–96
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१९०१ च्या मुंबई शहर व बेटाच्या जनगणना अहवालात मुंबईतील विविध भागांमध्ये बाहेरील प्रदेशांतून आलेल्या लोकसंख्येच्या वास्तव्याची नोंद आढळते. औद्योगिक भागांच्या विस्तारासोबत ग्रामीण महाराष्ट्रातून मुंबईत आलेल्या कामगारांची वस्तीही विकसित झाली होती.<ref name="CensusBombayCity1901">{{cite report
|title=Census of India, 1901: Bombay City and Island
|publisher=Government of India
|year=1901
|url=https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/31210/download/34391/20161_1901_TIH.pdf
}}</ref>
मुंबईच्या कापड उद्योगातील कामगारांच्या प्रादेशिक पार्श्वभूमीचा अभ्यास करताना रत्नागिरी जिल्ह्याचे महत्त्व अधोरेखित झाले आहे. रत्नागिरी हा मुंबईच्या औद्योगिक अर्थव्यवस्थेला मनुष्यबळ पुरविणाऱ्या कोकणातील महत्त्वाच्या प्रदेशांपैकी एक होता. तथापि मुंबईतील सर्व रत्नागिरीकर कामगार कुणबी होते असे मानता येत नाही. रत्नागिरी जिल्ह्यातील स्थलांतरामध्ये विविध जातीय, सामाजिक आणि धार्मिक समुदायांचा सहभाग होता. त्यामुळे रत्नागिरीकर आणि कुणबी या दोन सामाजिक किंवा लोकसंख्यात्मक संज्ञा समानार्थी मानणे ऐतिहासिकदृष्ट्या योग्य ठरणार नाही.
=== हंगामी स्थलांतरातून दीर्घकालीन स्थलांतराकडे ===
एकोणिसाव्या शतकातील कोकणी स्थलांतराचा एक महत्त्वाचा प्रकार हंगामी स्वरूपाचा होता. ग्रामीण कुटुंबातील काही सदस्य रोजगारासाठी मुंबई किंवा इतर शहरांकडे जात आणि शेतीच्या हंगामानुसार पुन्हा गावाकडे परतत. पुढील काळात औद्योगिकीकरण, शहरी रोजगाराच्या वाढत्या संधी, शिक्षण आणि वाहतूकव्यवस्थेतील सुधारणा यांमुळे स्थलांतराचे स्वरूप हळूहळू बदलत गेले.
कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या तीन कालखंडांतील अभ्यासातून कोकणातील ग्रामीण स्थलांतराच्या दीर्घकालीन प्रक्रियेचे एक स्थानिक उदाहरण उपलब्ध होते. या अभ्यासानुसार कुंकेरीमध्ये स्थलांतराची प्रक्रिया अनेक दशकांपर्यंत कायम राहिली आणि कालांतराने स्थलांतरितांची संख्या, रोजगाराचे प्रकार आणि स्थलांतराची कारणे यांमध्ये बदल झाले. १९६१मध्ये रोजगारासाठी झालेल्या स्थलांतरात मुंबई हे प्रमुख गंतव्यस्थान होते; पुढील काळात मुंबईबरोबर पुणे आणि गोवा यांसारख्या इतर ठिकाणांकडेही स्थलांतर झाले.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
या अभ्यासात १९६१मध्ये कुंकेरीतील कामासाठी बाहेर गेलेले ८३ स्थलांतरित सर्व पुरुष असून त्यांचे प्रमुख गंतव्य मुंबई असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. पुढील काळात स्थलांतराचे स्वरूप अधिक विविध झाले आणि शिक्षण तसेच रोजगारासाठी स्थलांतर करणाऱ्या स्त्रियांची संख्याही वाढली. त्यामुळे ग्रामीण स्थलांतर हे केवळ पुरुषांच्या हंगामी रोजगारापुरते मर्यादित न राहता कुटुंबाच्या विविध उपजीविकेच्या धोरणांशी संबंधित झाले.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
रत्नागिरी जिल्ह्याच्या १९६१ च्या जिल्हा जनगणना पुस्तिकेतही मुंबईशी असलेल्या स्थलांतरसंबंधांचा उल्लेख आढळतो. मुंबईतील रोजगाराच्या परिस्थितीत झालेल्या बदलांचा परिणाम रत्नागिरीसारख्या ग्रामीण जिल्ह्यांवर होत असल्याचे या ऐतिहासिक नोंदींमधून दिसून येते.<ref name="DistrictCensusRatnagiri1961">{{cite report
|title=District Census Handbook, Ratnagiri
|publisher=Director of Census Operations, Maharashtra
|year=1964
|url=https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/29646/download/32827/22003_1961_RAT.pdf
}}</ref>
कुंकेरीच्या अभ्यासातून स्थलांतरामुळे ग्रामीण आणि शहरी जीवनातील संबंध केवळ रोजगारापुरते मर्यादित राहत नसल्याचेही दिसते. स्थलांतरित कुटुंबांचे गावातील जमीनधारणेशी संबंध अनेक दशकांपर्यंत कायम राहिले आणि मुंबईतील स्थलांतरितांचे गावाशी सामाजिक संबंध टिकून राहिले. त्यामुळे कोकणातील स्थलांतराचा इतिहास हा ग्रामीण समाजाच्या विस्थापनाचा एकरेषीय इतिहास नसून गाव, जमीन, कुटुंब आणि शहर यांच्यातील दीर्घकालीन परस्परसंबंधांचा इतिहास म्हणून पाहता येतो.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
=== स्थलांतर आणि शिक्षण ===
काळानुसार कोकणातील स्थलांतराचे स्वरूप केवळ रोजगाराच्या शोधापुरते मर्यादित राहिले नाही. शिक्षण, उच्च शिक्षण, व्यावसायिक शिक्षण आणि शहरी भागातील शैक्षणिक सुविधांचा विस्तार यांमुळे ग्रामीण भागातून शहरांकडे होणाऱ्या स्थलांतराला नवे स्वरूप प्राप्त झाले.
सावंतवाडी तालुक्यातील कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या तीन कालखंडांतील अभ्यासातून ग्रामीण स्थलांतराच्या स्वरूपातील दीर्घकालीन बदल स्पष्ट होतात. या अभ्यासानुसार १९६१मध्ये कुंकेरीतील स्थलांतर मुख्यतः रोजगारासाठी होते आणि त्या काळातील स्थलांतरितांमध्ये शिक्षणासाठी स्थलांतराची नोंद नव्हती. २०१७पर्यंत परिस्थितीत बदल झाला आणि एकूण स्थलांतरितांपैकी सुमारे १८ टक्के व्यक्ती शिक्षणासाठी स्थलांतरित झाल्याचे आढळले. या काळात शिक्षण हे स्थलांतराचे एक महत्त्वाचे कारण बनले होते.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
या अभ्यासात शिक्षण आणि स्थलांतर यांच्यातील परस्परसंबंधाचाही उल्लेख करण्यात आला आहे. शिक्षणामुळे शहरी किंवा बाहेरील रोजगाराच्या संधी वाढू शकतात आणि त्याच वेळी स्थलांतरासाठी शिक्षण हे स्वतः एक साधन ठरू शकते. कुंकेरीतील स्थलांतरित कुटुंबांमध्ये साक्षरतेचे प्रमाण स्थलांतर न करणाऱ्या कुटुंबांच्या तुलनेत अधिक असल्याचेही अभ्यासात आढळले.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
स्थलांतराच्या बदलत्या स्वरूपामुळे शिक्षण, रोजगार, दैनंदिन प्रवास आणि कुटुंबातील वेगवेगळ्या सदस्यांचे विविध ठिकाणी वास्तव्य यांच्यातील संबंध अधिक गुंतागुंतीचे झाले. कुंकेरीच्या अभ्यासात २०१७पर्यंत शिक्षणासाठी होणारा प्रवास आणि स्त्रियांचा दैनंदिन प्रवासही वाढल्याचे नोंदविण्यात आले आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
कुंकेरीच्या अभ्यासातून दिसणारे हे परिवर्तन कोकणातील प्रत्येक गावासाठी किंवा प्रत्येक सामाजिक समुदायासाठी समान होते असे मानता येत नाही. मात्र ग्रामीण कोकणातील स्थलांतर रोजगारापासून शिक्षण, कौशल्यविकास आणि विविध प्रकारच्या शहरी संधींकडे कसे विस्तारत गेले, याचे कुंकेरी हे एक महत्त्वाचे स्थानिक उदाहरण आहे.
=== परदेशातील स्थलांतर ===
कोकणातील स्थलांतराचा विस्तार केवळ मुंबई आणि महाराष्ट्रातील शहरी केंद्रांपुरता मर्यादित राहिला नाही. ब्रिटिशकालीन काळात बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतून समुद्रपार प्रदेशांकडेही स्थलांतर होत असल्याच्या नोंदी आढळतात. १९११ च्या जनगणना अहवालात मॉरिशस, पूर्व आफ्रिका, स्ट्रेट्स सेटलमेंट्स, फेडरेटेड मलय स्टेट्स आणि सिलोन यांसारख्या प्रदेशांशी संबंधित स्थलांतराची नोंद करण्यात आली होती.<ref name="CensusBombayMigration1911">{{cite report
|title=Census of India, 1911: Bombay Presidency — Migration
|publisher=Government of India
|year=1911
|url=https://storage.lib.uchicago.edu/pres/2014/pres2014-0779-1911-07-01.pdf
}}</ref>
रत्नागिरी आणि सावंतवाडीच्या १८८० च्या गॅझेटियरमध्येही जिल्ह्यातील काही लोक रोजगाराच्या निमित्ताने एडन आणि मॉरिशस यांसारख्या परदेशातील प्रदेशांकडे जात असल्याच्या नोंदी आढळतात. या नोंदींमधून कोकणातील स्थलांतराचे भौगोलिक क्षेत्र मुंबईपलीकडेही विस्तारले होते, असे दिसून येते. तथापि या नोंदी विशिष्ट स्थानिक समूह किंवा व्यक्तींच्या स्थलांतराशी संबंधित असल्यामुळे त्यावरून संपूर्ण रत्नागिरी जिल्ह्याच्या किंवा कुणबी समाजाच्या परदेशातील स्थलांतराचे प्रमाण निश्चित करता येत नाही.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
आधुनिक काळात रत्नागिरी जिल्ह्यातील आंतरराष्ट्रीय स्थलांतर आणि त्यातून मिळणाऱ्या परदेशातून पाठविलेल्या रकमांचा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेवर होणारा परिणाम हा संशोधनाचा विषय बनला आहे. २०२३मध्ये प्रकाशित झालेल्या एका अभ्यासात रत्नागिरी जिल्ह्यातील ग्रामीण गावांमधून होणारे आंतरराष्ट्रीय स्थलांतर, परदेशातून येणाऱ्या रकमांचे प्रमाण आणि त्यांचा कुटुंबांच्या आर्थिक कल्याणावर होणारा परिणाम यांचा अभ्यास करण्यात आला. या अभ्यासात आंतरराष्ट्रीय स्थलांतर आणि परदेशातून येणाऱ्या रकमांचा ग्रामीण कुटुंबांच्या आर्थिक स्थितीशी संबंध असल्याचे आढळले.<ref name="ChintamaniKulkarni2023">{{cite journal
|last=Chintamani
|first=Bhupesh Gopal
|author2=Kulkarni, Lalitagauri
|title=Determinants and Effects of International Remittances: Evidence from Ratnagiri District of Rural Maharashtra
|journal=Indian Journal of Labour Economics
|volume=66
|issue=1
|year=2023
|pages=455–475
}}</ref>
या आधुनिक अभ्यासात रत्नागिरी जिल्ह्यातील ग्रामीण कुटुंबांचा विचार केला आहे; त्यात कुणबी समाजाचे स्वतंत्र जातीनिहाय आंतरराष्ट्रीय स्थलांतर हे अभ्यासाचे स्वतंत्र प्रमाण म्हणून मांडलेले नाही. त्यामुळे रत्नागिरीतील आंतरराष्ट्रीय स्थलांतराला थेट कुणबी समाजाचे स्थलांतर मानणे योग्य ठरणार नाही. कुणबी समाजाच्या परदेशातील स्थलांतराचे स्वतंत्र प्रमाण, गंतव्य प्रदेश आणि कालानुसार झालेला बदल निश्चित करण्यासाठी जातीनिहाय लोकसंख्याशास्त्रीय किंवा सामाजिक सर्वेक्षणांची आवश्यकता आहे.<ref name="ChintamaniKulkarni2023"/>
या दृष्टीने कोकणातील स्थलांतराचा इतिहास तीन परस्परसंबंधित टप्प्यांत अभ्यासता येतो—स्थानिक किंवा हंगामी रोजगारासाठी होणारे स्थलांतर, मुंबईसारख्या औद्योगिक केंद्रांकडे झालेले दीर्घकालीन स्थलांतर आणि पुढील काळातील शिक्षण, व्यावसायिक संधी व आंतरराष्ट्रीय रोजगाराशी संबंधित स्थलांतर. मात्र या सर्व प्रक्रियांमध्ये सहभागी झालेल्या लोकसंख्येला कुणबी या एकाच सामाजिक वर्गाशी जोडणे ऐतिहासिक पुराव्यांच्या दृष्टीने योग्य ठरणार नाही.
=== गाव आणि शहरातील संबंध ===
कोकणातील स्थलांतरामुळे ग्रामीण गावांमध्ये आणि मुंबईसारख्या शहरी केंद्रांमध्ये आर्थिक व सामाजिक संबंध निर्माण झाले. शहरात रोजगारासाठी गेलेल्या व्यक्तींचे त्यांच्या मूळ गावांशी जमीन, कुटुंब आणि आर्थिक व्यवहारांच्या माध्यमातून संबंध कायम राहत असत. १८८३ च्या कोलाबा गॅझेटियरमध्ये महाड आणि माणगाव परिसरातील काही कुणबी मुंबईत रोजगारासाठी गेल्यानंतर आपल्या गावातील नातेवाईकांकडे पैसे पाठवीत असल्याची आणि हे नातेवाईक गावातील शेतीची देखभाल करीत असल्याची नोंद आढळते.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
या आर्थिक संबंधांमध्ये शहरातून गावाकडे पैसे पाठविणे, शेतीसाठी बियाणे व इतर साधने खरेदी करणे, कुटुंबाच्या दैनंदिन गरजा भागविणे आणि गावातील जमीन व इतर मालमत्तेशी संबंध कायम ठेवणे यांचा समावेश होता. त्यामुळे रोजगारासाठी शहरात गेलेल्या कुटुंबातील व्यक्तीचे स्थलांतर झाले असले तरी संपूर्ण कुटुंबाची आर्थिक व्यवस्था तात्काळ शहरकेंद्रित होत असेच असे नाही.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या तीन कालखंडांतील दीर्घकालीन अभ्यासातूनही स्थलांतरित कुटुंबांचे मूळ गावाशी असलेले संबंध कायम राहिल्याचे दिसून येते. स्थलांतराचे स्वरूप आणि गंतव्ये काळानुसार बदलली असली तरी गावाशी असलेले कौटुंबिक आणि सामाजिक संबंध पूर्णपणे तुटले नाहीत. या अभ्यासातून स्थलांतर, ग्रामीण कुटुंबांची बदलती आर्थिक रचना आणि शहरांशी निर्माण झालेले संबंध यांचा परस्परसंबंध स्पष्ट होतो.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
या प्रक्रियेमुळे गाव आणि शहर यांच्यात एक प्रकारचे आर्थिक परस्परावलंबन निर्माण झाले. गावातील जमीन आणि कुटुंबीय संबंध कायम ठेवत शहरात रोजगार करणे, तर शहरातून मिळणाऱ्या उत्पन्नाचा काही भाग गावातील कुटुंबाच्या गरजांसाठी वापरणे, हा स्थलांतरित कुटुंबांच्या आर्थिक जीवनाचा एक भाग बनला. मात्र ही पद्धत सर्व कोकणी किंवा सर्व कुणबी कुटुंबांना समान प्रमाणात लागू होती असे उपलब्ध स्रोतांवरून म्हणता येत नाही.
=== स्थलांतरामुळे कोकणातील गावांवर झालेले परिणाम ===
दीर्घकालीन स्थलांतरामुळे कोकणातील काही गावांच्या लोकसंख्येच्या आणि सामाजिक रचनेत बदल झाले. विशेषतः रोजगारक्षम वयोगटातील व्यक्तींचे बाहेर स्थलांतर, कुटुंबातील सदस्यांचे वेगवेगळ्या ठिकाणी वास्तव्य आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेतील बदल यांचा गावाच्या सामाजिक आणि आर्थिक जीवनावर परिणाम झाला.
रत्नागिरी जिल्ह्याच्या १९६१ च्या जिल्हा जनगणना पुस्तिकेत जिल्ह्यातून मुंबईकडे मोठ्या प्रमाणावर स्थलांतर होत असल्याचा उल्लेख आहे. १९३० च्या आर्थिक मंदीच्या काळात मुंबईतील काही कापड गिरण्या बंद झाल्यामुळे काही कामगार रत्नागिरी जिल्ह्यात परतल्याची नोंदही आढळते. यावरून रत्नागिरीतील ग्रामीण रोजगार आणि लोकसंख्येचे स्वरूप मुंबईतील औद्योगिक रोजगाराच्या परिस्थितीशी संबंधित होते, असे दिसून येते.<ref name="DistrictCensusRatnagiri1961"/>
कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या कालखंडांतील तुलनात्मक अभ्यासातूनही पाच दशकांहून अधिक काळ स्थलांतराची प्रक्रिया सुरू राहिल्याचे दिसते. या कालावधीत स्थलांतरितांची संख्या, रोजगाराचे प्रकार, स्थलांतराची कारणे, कुटुंबातील सदस्यांच्या स्थलांतराचे स्वरूप आणि शिक्षणाशी संबंधित स्थलांतर यांमध्ये बदल झाल्याचे अभ्यासकांनी नोंदविले आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
स्थलांतराचा परिणाम केवळ गावातील लोकसंख्येतील घट किंवा वाढ यापुरता मर्यादित राहिला नाही. कुटुंबांच्या उत्पन्नाच्या स्रोतांमध्ये बदल, शेतीसाठी उपलब्ध मनुष्यबळ, घरांची देखभाल, शिक्षणाच्या संधी, स्थानिक बाजारपेठांशी असलेले संबंध आणि गावातील सामाजिक जीवन यांवरही त्याचा परिणाम होऊ शकतो. कुंकेरीच्या अभ्यासात स्थलांतरित कुटुंबांच्या बदलत्या आर्थिक धोरणांचा, व्यवसायातील विविधतेचा आणि मूळ गावाशी कायम राहिलेल्या संबंधांचा विचार करण्यात आला आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
=== रत्नागिरीचे मुंबईशी लोकसंख्याशास्त्रीय नाते ===
मुंबईच्या लोकसंख्येच्या वाढीत रत्नागिरी जिल्ह्यातून झालेल्या स्थलांतराचे महत्त्व ऐतिहासिक जनगणना नोंदींमधून दिसून येते. १९३१ च्या मुंबई शहराच्या जनगणना अहवालात मुंबईत राहणाऱ्या व्यक्तींच्या जन्मस्थळानुसार रत्नागिरी जिल्ह्याचा उल्लेख मोठ्या संख्येने आढळतो. या नोंदीत रत्नागिरी हा मुंबईच्या लोकसंख्येला मनुष्यबळ पुरविणाऱ्या महत्त्वाच्या जिल्ह्यांपैकी एक असल्याचे दिसून येते.<ref name="CensusBombayCity1931">{{cite report
|title=Census of India, 1931 — Bombay City
|publisher=Government of India
|year=1931
|url=https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/28362/download/31544/138796-1931.pdf
}}</ref>
मुंबई आणि रत्नागिरी यांच्यातील स्थलांतरसंबंध पुढील दशकांतही कायम राहिले. मुंबई मानव विकास अहवालात १९६१ ते २००१ या कालखंडातील बृहन्मुंबईतील जिल्हानिहाय आंतर-जिल्हा स्थलांतराची आकडेवारी देण्यात आली आहे. त्यानुसार रत्नागिरी हा महाराष्ट्रातील मुंबईकडे स्थलांतर करणाऱ्या लोकसंख्येच्या प्रमुख मूळ जिल्ह्यांपैकी एक होता. अहवालातील आकडेवारीनुसार रत्नागिरीतून बृहन्मुंबईत आलेल्या स्थलांतरितांची संख्या १९६१मध्ये ४,९४,४०४ होती आणि २००१मध्ये ती ६,१२,६८८ इतकी नोंदविण्यात आली आहे.<ref name="MumbaiHDR2009">{{cite report
|title=Mumbai Human Development Report 2009
|publisher=Government of Maharashtra
|year=2009
|url=https://www.mohua.gov.in/upload/uploadfiles/files/6Mumbai%20HDR%20Complete.pdf
}}</ref>
या स्थलांतरामागे रोजगाराच्या संधी, मुंबईतील औद्योगिकीकरण, कापड गिरण्या, बांधकाम, सेवा क्षेत्र आणि पुढील काळातील शिक्षण व व्यावसायिक संधी यांसारखे विविध घटक कार्यरत होते. त्यामुळे रत्नागिरी आणि मुंबई यांच्यातील संबंध केवळ स्थलांतरित मजुरांच्या हालचालीपुरते मर्यादित न राहता दीर्घकालीन सामाजिक आणि आर्थिक संबंधांमध्ये विकसित झाले.
तथापि रत्नागिरीतून मुंबईत स्थलांतरित झालेल्या सर्व व्यक्तींना कुणबी समाजाशी जोडणे योग्य नाही. रत्नागिरी जिल्ह्यातील स्थलांतरामध्ये विविध जातीय, धार्मिक आणि सामाजिक समूहांचा सहभाग होता. त्यामुळे रत्नागिरीकर ही भौगोलिक ओळख आणि कुणबी ही सामाजिक ओळख यांची सरसकट समानता करणे ऐतिहासिकदृष्ट्या अचूक ठरणार नाही.
=== स्थलांतराचे बदलते स्वरूप ===
कोकणातील स्थलांतराच्या इतिहासात कालानुसार त्याच्या स्वरूपात बदल झाले. सुरुवातीच्या काळात शेतीशी संबंधित हंगामी रोजगार आणि मुंबईतील मजुरी यांच्यात संबंध दिसून येतो. पुढे मुंबईतील औद्योगिकीकरणामुळे कापड गिरण्या, बांधकाम, बंदरे, वाहतूक आणि इतर शहरी व्यवसायांमध्ये रोजगाराच्या संधी वाढल्या. त्यानंतर शिक्षण, सरकारी सेवा, व्यावसायिक क्षेत्र, व्यवसाय आणि परदेशातील रोजगार यांमुळे स्थलांतराचे स्वरूप अधिक विविध झाले.<ref name="RoyalCommissionLabour1931"/>
कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या कालखंडांतील दीर्घकालीन अभ्यासातून स्थलांतराच्या स्वरूपातील हा बदल एका स्थानिक उदाहरणाच्या आधारे स्पष्ट होतो. १९६१मध्ये रोजगारासाठी मुंबईकडे होणारे स्थलांतर प्रमुख होते; पुढील दशकांत स्थलांतराची गंतव्ये, व्यवसायाचे प्रकार आणि स्थलांतराची कारणे अधिक विविध झाली. शिक्षणासाठी स्थलांतर, दैनंदिन प्रवास आणि कुटुंबातील विविध सदस्यांचे वेगवेगळ्या ठिकाणी वास्तव्य यांनाही पुढील काळात महत्त्व प्राप्त झाले.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
आधुनिक काळात रत्नागिरीच्या स्थलांतराच्या नकाशात मुंबईबरोबरच पुणे, महाराष्ट्रातील इतर शहरी केंद्रे आणि परदेशातील रोजगाराची ठिकाणे यांचाही समावेश झाला आहे. रत्नागिरी जिल्ह्यातील ग्रामीण कुटुंबांच्या आंतरराष्ट्रीय स्थलांतराचा अभ्यास करणाऱ्या २०२३ च्या संशोधनात परदेशात जाणाऱ्या व्यक्ती आणि त्यांच्या कुटुंबांकडून मिळणाऱ्या आर्थिक पाठवणींचा ग्रामीण कुटुंबांच्या आर्थिक स्थितीशी असलेला संबंध तपासण्यात आला आहे. अभ्यासानुसार परदेशातून येणाऱ्या आर्थिक पाठवणींचा प्राप्त कुटुंबांच्या आर्थिक कल्याणाशी सकारात्मक संबंध आढळला.<ref name="ChintamaniKulkarni2023"/>
=== कुणबी समाजाच्या संदर्भातील निष्कर्ष ===
कोकणातील कुणबी समाजाच्या स्थलांतराचा इतिहास हा केवळ शेती सोडून शहरांकडे जाण्याचा इतिहास नव्हता. १८८३ च्या कोलाबा गॅझेटियरमधील महाड आणि माणगाव परिसराच्या नोंदींमध्ये कुणबींचे शेतीशी असलेले संबंध, हंगामी स्थलांतर, मजुरी तसेच लष्कर, पोलीस आणि इतर सेवांमधील सहभाग यांचा उल्लेख आढळतो.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
रत्नागिरीच्या बाबतीत मुंबईशी असलेले स्थलांतरसंबंध अधिक व्यापक लोकसंख्याशास्त्रीय पातळीवर दिसून येतात. १९३१ च्या मुंबई शहराच्या जनगणना अहवालात मुंबईतील रहिवाशांच्या जन्मस्थळांच्या वर्गीकरणात रत्नागिरी जिल्ह्याचा मोठ्या प्रमाणावर उल्लेख आढळतो. पुढील काळातही रत्नागिरी हा मुंबईकडे स्थलांतरित होणाऱ्या लोकसंख्येचा महत्त्वाचा मूळ जिल्हा राहिला.<ref name="CensusBombayCity1931"/><ref name="MumbaiHDR2009"/>
म्हणून कोकणातील कुणबी समाजाचा आधुनिक इतिहास समजून घेताना गावातील जमीन आणि शेती, मुंबईतील रोजगार, हंगामी तसेच दीर्घकालीन स्थलांतर, शिक्षण, परदेशातील रोजगार, आर्थिक पाठवणी आणि मूळ गावाशी कायम राहिलेले कौटुंबिक संबंध या सर्व घटकांचा परस्परसंबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे. मात्र उपलब्ध जनगणना आणि स्थलांतरविषयक अभ्यास बहुधा जिल्हा, गाव किंवा व्यापक सामाजिक समूहाच्या पातळीवर करण्यात आलेले आहेत. त्यामुळे आधुनिक काळातील कुणबी समाजाच्या स्वतंत्र स्थलांतराचे अचूक जातीनिहाय प्रमाण किंवा टक्केवारी उपलब्ध अधिकृत आकडेवारीशिवाय निश्चित करता येत नाही.<ref name="घोलम2025" />
=== मराठा–कुणबी संबंध ===
कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास आणि मराठा समाजाचा इतिहास अनेक सामाजिक, आर्थिक आणि प्रादेशिक संदर्भांमध्ये परस्परांशी संबंधित दिसतो. तथापि मराठा आणि कुणबी या संज्ञांचा अर्थ सर्व काळात आणि सर्व प्रदेशांत एकसारखा राहिलेला नाही. ब्रिटिशकालीन जनगणना, गॅझेटियर आणि मानववंशशास्त्रीय लेखनात या समूहांचे वर्गीकरण स्थान, प्रशासकीय पद्धती, सामाजिक स्थान आणि स्थानिक ओळखीनुसार वेगवेगळ्या प्रकारे करण्यात आले आहे.
रेजिनाल्ड एडवर्ड एन्थोव्हन यांच्या The Tribes and Castes of Bombay या ग्रंथात मराठा आणि कुणबी यांच्यातील सामाजिक संबंध, परस्परविवाह आणि सामाजिक स्तर यांचे विविध संदर्भ नोंदवले आहेत. त्यांच्या वर्णनानुसार या दोन समूहांमधील सामाजिक सीमारेषा सर्व प्रदेशांत समान किंवा पूर्णपणे कठोर नव्हत्या.
त्यामुळे आधुनिक काळातील मराठा, कुणबी, मराठा-कुणबी किंवा कुणबी-मराठा या सामाजिक ओळखींचा अर्थ थेट प्राचीन किंवा मध्ययुगीन सामाजिक रचनेवर लावणे इतिहासदृष्ट्या सावधगिरीशिवाय योग्य ठरणार नाही. या संज्ञांचा अभ्यास करताना संबंधित काळातील प्रशासकीय नोंदी, जनगणना वर्गीकरण, स्थानिक सामाजिक व्यवहार आणि समुदायाच्या स्वयंओळखीचा स्वतंत्र विचार करणे आवश्यक आहे.<ref name="Enthoven1922" />
=== मराठा–कुणबी ही संज्ञा ===
मराठा–कुणबी ही संयुक्त संज्ञा ब्रिटिशकालीन प्रशासकीय आणि जनगणना साहित्यात विविध संदर्भांत आढळते. या संज्ञेचा वापर काही ऐतिहासिक वर्गीकरणांमध्ये मराठा आणि कुणबी यांच्यातील सामाजिक व प्रशासकीय संबंध दर्शविण्यासाठी करण्यात आला होता. तथापि अशा वर्गीकरणांचा अर्थ त्या काळातील जनगणना पद्धती आणि प्रशासकीय दृष्टिकोनाच्या संदर्भातच समजून घेणे आवश्यक आहे.
१८८१ च्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या जनगणना अहवालात विविध जातीय आणि सामाजिक समूहांचे स्वतंत्र वर्गीकरण करण्यात आले होते. त्या काळातील जनगणना वर्गीकरण हे आजच्या सामाजिक ओळखींच्या चौकटीशी तंतोतंत समान नव्हते. त्यामुळे त्या काळातील मराठा–कुणबी या वर्गीकरणावरून आधुनिक काळातील मराठा आणि कुणबी समाजांची एकसमान सामाजिक किंवा ऐतिहासिक ओळख सिद्ध होते असा निष्कर्ष काढता येत नाही.
रेजिनाल्ड एन्थोव्हन यांच्या पुढील मानववंशशास्त्रीय लेखनातही मराठा आणि कुणबी यांच्यातील सामाजिक संबंधांची चर्चा आढळते. त्यातून या दोन समूहांमध्ये काही सामाजिक साम्य, परस्पर संबंध आणि प्रदेशानुसार बदलणाऱ्या सामाजिक सीमारेषा अस्तित्वात होत्या, असे दिसते; मात्र त्यावरून सर्व मराठा आणि सर्व कुणबी यांची एकच ऐतिहासिक उत्पत्ती होती असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="Enthoven1922" />
अशा प्रकारे मराठा–कुणबी या संज्ञेचा ऐतिहासिक अभ्यास हा केवळ दोन सामाजिक समूहांच्या नावांचा अभ्यास नसून, ब्रिटिशकालीन जनगणना पद्धती, प्रशासकीय वर्गीकरण, कृषक समाजाची रचना आणि स्थानिक सामाजिक ओळखी यांच्यातील परस्परसंबंध समजून घेण्यासाठी महत्त्वाचा ठरतो.
=== १८८१ची जनगणना ===
१८८१ च्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या जनगणनेत विविध जातीय आणि सामाजिक समूहांचे प्रशासकीय वर्गीकरण करण्यात आले होते. या वर्गीकरणात मराठा आणि कुणबी या संज्ञांचा वापर कृषीप्रधान समाजाच्या संदर्भात करण्यात आला होता. मात्र १८८१ च्या जनगणनेतील वर्गीकरण हे आजच्या प्रशासकीय जातवर्गीकरणासारखे नव्हते. त्यामुळे त्या काळातील एखाद्या वर्गाची व्याप्ती आणि आधुनिक महाराष्ट्रातील त्याच नावाच्या प्रशासकीय वर्गाची व्याप्ती समान मानता येत नाही.<ref name="Baines1881"/>
ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये जात, व्यवसाय, स्थानिक सामाजिक ओळख आणि प्रशासकीय वर्गीकरण यांचा परस्परसंबंध अनेकदा दिसून येतो. त्यामुळे १८८१ च्या आकडेवारीचा उपयोग करताना त्या काळातील जनगणना पद्धती आणि वर्गीकरणाच्या निकषांचा स्वतंत्र विचार करणे आवश्यक आहे.
=== १९०१ची जनगणना ===
१९०१ च्या बॉम्बे जनगणनेत मराठा कुणबी आणि कोकणी मराठा या स्वतंत्र सांख्यिक विभागांची नोंद करण्यात आली होती. मुंबई शहराच्या जनगणना अहवालानुसार मराठा कुणबी हा शहरातील सर्वाधिक संख्येच्या प्रमुख जातीय-सामाजिक समूहांपैकी एक होता आणि त्याचे प्रमाण मुंबईच्या एकूण लोकसंख्येच्या सुमारे १५ टक्के होते.<ref name="CensusBombay1901">{{cite book
|author=India. Census Commissioner
|title=Census of India, 1901: Bombay and Bombay (Town and Island)
|volume=XI
|publisher=Office of the Superintendent of Government Printing, India
|year=1901
}}</ref>
त्याच अहवालात काही विभागांच्या लोकसंख्येच्या संदर्भात कुणबी (मराठा) या नावाची स्वतंत्र नोंद आढळते. उदाहरणार्थ, डोंगरी, पहिला नागपाडा आणि कुंभारवाडा या विभागांमध्ये कुणबी (मराठा) समूहाचे प्रमाण अनुक्रमे सुमारे ४७ टक्के, ३४ टक्के आणि २८ टक्के असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.
या नोंदींवरून १९०१ च्या जनगणनेत मराठा, कुणबी आणि मराठा कुणबी या संज्ञांचा वापर विविध प्रशासकीय आणि सांख्यिक संदर्भांत करण्यात आला होता, असे दिसते. त्यामुळे त्या काळातील सामाजिक वर्गीकरण हे मराठा आणि कुणबी यांच्यात पूर्णपणे कठोर व अपरिवर्तनीय सीमा होती, अशा साध्या स्वरूपात मांडता येत नाही. तथापि या जनगणना वर्गीकरणावरून दोन्ही समूहांची एकच सामाजिक किंवा ऐतिहासिक उत्पत्ती होती असाही निष्कर्ष काढता येत नाही.
=== १९११ची जनगणना आणि वर्गीकरणातील बदल ===
१९११ च्या बॉम्बे जनगणनेत जातीय वर्गीकरणाची पद्धत पुन्हा वेगळी दिसून येते. जनगणना अहवालात मराठा आणि कुणबी या स्वतंत्र नोंदी आढळतात. या वर्गीकरणात विविध प्रदेशांतील स्थानिक सामाजिक समूह आणि त्यांच्या उपविभागांची नोंद स्वतंत्रपणे करण्यात आली होती.<ref name="CensusBombay1911">{{cite report
|title=Census of India, 1911: Bombay
|volume=VII
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1912
}}</ref>
१९११ च्या जनगणनेतील उपलब्ध आकडेवारीत कुणबी आणि मराठा या दोन्ही समूहांची स्वतंत्र संख्या नोंदविलेली आहे. त्यामुळे १९०१ आणि १९११ च्या जनगणनांमध्ये वापरलेल्या वर्गीकरणांमध्ये फरक असल्याचे दिसते.
या उदाहरणावरून ब्रिटिशकालीन जनगणनांमधील जातीय वर्गीकरण पूर्णपणे स्थिर नव्हते, असे दिसते. एका जनगणनेत विशिष्ट नावाखाली नोंदवलेला समूह पुढील जनगणनेत वेगळ्या शीर्षकाखाली किंवा वेगळ्या वर्गीकरणात दिसू शकत होता. त्यामुळे १८८१, १९०१ आणि १९११ च्या आकडेवारीची तुलना करताना प्रत्येक जनगणनेची स्वतंत्र वर्गीकरणपद्धती, प्रशासकीय सीमा आणि नोंदणीची पद्धत लक्षात घेणे आवश्यक आहे.
=== सामाजिक गतिशीलता ===
एकोणिसाव्या आणि विसाव्या शतकाच्या प्रारंभी महाराष्ट्रातील मराठा आणि कुणबी समाजांच्या सामाजिक संबंधांमध्ये प्रदेश, जमीनधारणा, आर्थिक स्थिती आणि सामाजिक प्रतिष्ठेनुसार विविधता आढळत होती. रेजिनाल्ड एडवर्ड एन्थोव्हन यांच्या मानववंशशास्त्रीय लेखनात मराठा आणि कुणबी यांच्यातील सामाजिक संबंध, कृषी व्यवसाय आणि सामाजिक स्थान यांची चर्चा आढळते.<ref name="Enthoven1922" />
एन्थोव्हन यांच्या मांडणीत कुणबी ही संज्ञा कृषी व्यवसायाशी संबंधित असल्याचेही दिसते. पुढील अभ्यासांमध्ये त्यांच्या या मांडणीचा वापर वसाहतकालीन महाराष्ट्रातील जात आणि सामाजिक वर्गीकरणाच्या अभ्यासासाठी करण्यात आला आहे. मात्र एन्थोव्हन यांचे लेखन हे वसाहतकालीन मानववंशशास्त्रीय दृष्टिकोनातून तयार झालेले असल्यामुळे त्यातील वर्गीकरणे आधुनिक सामाजिक वास्तवाचे अंतिम वर्णन मानता येत नाहीत.
त्यामुळे मराठा किंवा कुणबी या नावावरून एखाद्या व्यक्तीचे सामाजिक स्थान, आर्थिक स्थिती किंवा सामाजिक प्रतिष्ठा संपूर्णपणे निश्चित करता येत नव्हती. जमीनधारणा, व्यवसाय, शिक्षण, सरकारी सेवा आणि स्थानिक सामाजिक प्रभाव यांसारखे इतर घटकही सामाजिक स्थानावर परिणाम करीत होते.
=== स्व-ओळख आणि सामाजिक नाव ===
जातीय आणि सामाजिक ओळख ही केवळ प्रशासकीय वर्गीकरणातून निश्चित होत नाही. एखादा समूह स्वतःला कोणत्या नावाने ओळखतो, कोणत्या सामाजिक परंपरा पाळतो आणि स्थानिक समाजात त्याची ओळख कशी प्रस्थापित होते, यालाही सामाजिक इतिहासात महत्त्व आहे. ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये समान किंवा संबंधित सामाजिक समूहांचे वर्गीकरण वेगवेगळ्या काळात वेगवेगळ्या पद्धतीने करण्यात आले होते. १९०१ च्या जनगणनेत मराठा कुणबींची नोंद मराठा वर्गाशी संबंधित पद्धतीने करण्यात आली होती, तर १९११ च्या वर्गीकरणात संबंधित समूहांची नोंद कुणबी वर्गाशी करण्यात आल्याचे पुढील अधिकृत जनगणना अहवालात स्पष्ट करण्यात आले आहे.<ref name="CensusClassification1951">{{cite report
|title=Census of India, 1951 — Classification of Castes and Tribes
|publisher=Government of India
|year=1951
|url=https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/30207/download/33388/21097_1951_EST.pdf
}}</ref>
ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये प्रशासकीय अधिकाऱ्यांनी विविध समूहांचे विशिष्ट शीर्षकांखाली वर्गीकरण केले होते. मात्र जनगणनेतील अशा वर्गीकरणाचा अर्थ त्या समूहातील प्रत्येक व्यक्तीने स्वतःची ओळख त्याच नावाने केली होती, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. १९०१ च्या मुंबई जनगणनेत मराठा कुणबी आणि कोकणी मराठा या स्वतंत्र विभागांची नोंद करण्यात आली होती; पुढील जनगणनांमध्ये संबंधित वर्गीकरणात बदल झाल्याचे दिसून येते.<ref name="CensusBombay1901"/><ref name="CensusBombay1911"/>
मराठा आणि कुणबी यांच्यातील सामाजिक संबंधांच्या संदर्भात रेजिनाल्ड एडवर्ड एन्थोव्हन यांच्या मानववंशशास्त्रीय अभ्यासातही प्रादेशिक आणि सामाजिक विविधतेचे उल्लेख आढळतात. त्यामुळे मराठा, कुणबी, मराठा–कुणबी आणि कुणबी–मराठा या संज्ञांचा ऐतिहासिक अभ्यास करताना जनगणना वर्गीकरण, प्रशासकीय नोंद, स्थानिक सामाजिक वापर आणि स्वयंओळख यांच्यातील फरक लक्षात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="Enthoven1922" />
उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतांवरून संपूर्ण महाराष्ट्रातील सर्व व्यक्तींनी या संज्ञांचा एकाच अर्थाने आणि सर्व काळात समान पद्धतीने वापर केला होता, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.
=== विवाहसंबंध ===
मराठा आणि कुणबी समूहांमधील विवाहसंबंधांचा उल्लेख ब्रिटिशकालीन मानववंशशास्त्रीय साहित्यात आढळतो. रेजिनाल्ड एडवर्ड एन्थोव्हन यांच्या नोंदींमध्ये मराठा आणि कुणबी यांच्यातील सामाजिक संबंधांचे वर्णन करताना त्यांच्या सामाजिक सीमारेषा सर्व प्रदेशांत पूर्णपणे कठोर नसल्याचे दिसून येते. काही प्रदेशांत आणि विशिष्ट सामाजिक परिस्थितींमध्ये या समूहांमध्ये परस्पर सामाजिक संपर्क आणि विवाहसंबंध अस्तित्वात असल्याचे उल्लेख आढळतात.<ref name="Enthoven1922" />
मात्र या मानववंशशास्त्रीय नोंदी संपूर्ण महाराष्ट्रातील सर्व मराठा आणि कुणबी समूहांना समान प्रमाणात लागू होतात असे मानता येत नाही. विवाहपद्धती प्रदेश, उपसमूह, कुटुंब, सामाजिक स्थान आणि स्थानिक विवाहनियमांनुसार बदलत असू शकतात. त्यामुळे काही ऐतिहासिक विवाहसंबंधांच्या आधारे मराठा आणि कुणबी हे सर्व प्रदेशांत एकच सामाजिक समूह होते, असा निष्कर्ष काढणे योग्य ठरणार नाही.<ref name="Enthoven1922" />
=== सामाजिक प्रतिष्ठा आणि सामाजिक स्तर ===
ब्रिटिशकालीन मानववंशशास्त्रीय आणि प्रशासकीय लेखनात मराठा आणि कुणबी यांच्यातील सामाजिक प्रतिष्ठेच्या भेदांचा उल्लेख आढळतो. त्याच वेळी आर्थिक स्थिती, जमीनधारणा आणि सामाजिक प्रभाव यांमुळे काही कुणबी कुटुंबांना स्थानिक समाजात तुलनेने उच्च सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त होत असल्याचेही विविध नोंदींमधून दिसून येते.<ref name="Enthoven1922" />
१९११–१२ च्या बॉम्बे प्रशासनाच्या अहवालात मराठा आणि कुणबी यांच्यातील सामाजिक सीमारेषा सर्व परिस्थितींमध्ये अपरिवर्तनीय नसल्याचे निरीक्षण आढळते. आर्थिकदृष्ट्या सक्षम कुणबी व्यक्तींना सामाजिक प्रतिष्ठेच्या उच्च स्थानाकडे जाण्याची संधी किंवा प्रवृत्ती असल्याचा उल्लेख त्या काळातील प्रशासकीय निरीक्षणात करण्यात आला आहे.<ref name="BombayAdministration1911-12">{{cite web
|title=Report on the Administration of the Bombay Presidency for the Year 1911–1912
|publisher=Government of Bombay
|year=1912
|url=https://www.qdl.qa/en/archive/81055/vdc_100146764805.0x000068
}}</ref>
या प्रकारच्या नोंदींचा उपयोग तत्कालीन सामाजिक गतिशीलता, आर्थिक स्थिती आणि सामाजिक प्रतिष्ठा यांच्यातील संबंध समजून घेण्यासाठी करता येतो. तथापि ही निरीक्षणे ब्रिटिशकालीन प्रशासकीय आणि मानववंशशास्त्रीय दृष्टिकोनातून नोंदवलेली असल्यामुळे त्यांना आधुनिक सामाजिक वास्तवाचे अंतिम वर्णन मानता येत नाही. तसेच या नोंदींच्या आधारे आधुनिक काळातील मराठा किंवा कुणबी समाजाचे सामाजिक स्थान निश्चित करता येत नाही.
=== ब्रिटिशकालीन वर्गीकरण आणि आधुनिक ओळख ===
ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये कुणबी, मराठा, मराठा कुणबी आणि कोकणी मराठा यांसारख्या संज्ञांचा वापर वेगवेगळ्या काळात आणि विविध प्रशासकीय संदर्भांत करण्यात आला. १९०१ च्या मुंबई शहराच्या जनगणनेत मराठा कुणबी आणि कोकणी मराठा यांची स्वतंत्र विभागांमध्ये नोंद करण्यात आली होती, तर १९११ च्या जनगणनेत कुणबी मराठा ही संज्ञा कुणबी या वर्गाच्या अंतर्गत दाखविण्यात आली होती.<ref name="CensusBombay1901"/><ref name="CensusBombay1911"/>
या वर्गीकरणातील बदलांमुळे जुन्या जनगणनांमधील आकडे आधुनिक प्रशासकीय जातीय वर्गांशी थेट जोडताना विशेष सावधगिरी आवश्यक आहे. प्रशासकीय सीमा, जनगणनेची पद्धत, जातीय शीर्षके आणि स्थानिक सामाजिक ओळखी काळानुसार बदलत गेल्या असल्यामुळे १९व्या किंवा २०व्या शतकाच्या प्रारंभीची मराठा कुणबी किंवा कुणबी मराठा यांची संख्या आजच्या कुणबी किंवा मराठा लोकसंख्येचे थेट मोजमाप मानता येत नाही.<ref name="CensusClassification1951" />
=== आधुनिक प्रशासकीय संदर्भ ===
आधुनिक महाराष्ट्रातील कुणबी, मराठा कुणबी आणि कुणबी मराठा या संज्ञांचा वापर जात प्रमाणपत्रे, मागासवर्गीय वर्गीकरण आणि शासकीय नोंदी यांच्या संदर्भात केला जातो. या आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरणाचा अभ्यास करताना ऐतिहासिक जनगणना, गॅझेटियर आणि मानववंशशास्त्रीय साहित्य यांना त्यांच्या संबंधित कालखंडातील स्रोत म्हणून पाहणे आवश्यक आहे. त्यांची आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरणाशी थेट समानता गृहीत धरता येत नाही.
आधुनिक प्रशासकीय वादांमध्ये जुन्या जनगणना नोंदी, गॅझेटियर आणि मानववंशशास्त्रीय साहित्याचा संदर्भ दिला जातो. महाराष्ट्रातील मराठा आणि कुणबी वर्गीकरणासंबंधीच्या विविध प्रशासकीय व न्यायालयीन चर्चांमध्ये रेजिनाल्ड एडवर्ड एन्थोव्हन यांच्या द ट्राइब्स अँड कास्ट्स ऑफ बॉम्बे या ग्रंथातील निरीक्षणांचाही संदर्भ आढळतो.<ref name="Enthoven1922" />
तथापि ऐतिहासिक मानववंशशास्त्रीय निरीक्षणे आणि आधुनिक प्रशासकीय जात-वर्गीकरण हे दोन स्वतंत्र विषय आहेत. आधुनिक काळातील जात प्रमाणपत्र किंवा प्रशासकीय वर्गीकरण निश्चित करताना त्या वेळी लागू असलेले कायदे, शासन निर्णय, अधिकृत मागासवर्गीय याद्या, सक्षम प्राधिकरणाच्या नोंदी आणि संबंधित न्यायालयीन निर्णय यांनाच प्रशासकीयदृष्ट्या निर्णायक आधार मानणे आवश्यक आहे.
=== ऐतिहासिक निष्कर्ष आणि मर्यादा ===
उपलब्ध जनगणना आणि मानववंशशास्त्रीय स्रोतांवरून असे दिसून येते की मराठा आणि कुणबी या संज्ञांमध्ये महाराष्ट्राच्या विविध भागांत ऐतिहासिक सामाजिक संबंध होते आणि काही काळ मराठा-कुणबी किंवा कुणबी-मराठा यांसारख्या संयुक्त संज्ञांचा प्रशासकीय आणि जनगणनात्मक वापर करण्यात आला. त्याच वेळी काही जनगणनांमध्ये मराठा आणि कुणबी यांची स्वतंत्र शीर्षकांखाली नोंद करण्यात आली होती.<ref name="CensusBombay1901"/><ref name="CensusBombay1911"/>
या ऐतिहासिक नोंदींमधून सामाजिक संपर्क, विवाहसंबंध, आर्थिक स्थिती आणि सामाजिक गतिशीलतेचे काही पैलू स्पष्ट होतात; परंतु त्यावरून मराठा आणि कुणबी यांची एकच व अखंडित प्राचीन वंशावळ सिद्ध होत नाही. त्याचप्रमाणे या दोन्ही समूहांमध्ये कोणताही ऐतिहासिक सामाजिक संबंध नव्हता, असेही उपलब्ध स्रोतांच्या आधारे सर्वसाधारणपणे म्हणता येत नाही.<ref name="Enthoven1922" />
म्हणून कोकणातील कुणबी समाजाच्या इतिहासात मराठा-कुणबी संबंधांचा अभ्यास करताना तीन स्तर स्वतंत्र ठेवणे आवश्यक आहे: (१) ऐतिहासिक सामाजिक संबंध, (२) ब्रिटिशकालीन जनगणना आणि मानववंशशास्त्रीय वर्गीकरण, आणि (३) आधुनिक प्रशासकीय व कायदेशीर वर्गीकरण. या तीन स्तरांची सरमिसळ न करता त्यांचा स्वतंत्रपणे अभ्यास केल्यास या विषयाचे अधिक अचूक ऐतिहासिक चित्र समोर येते.
=== धर्म, श्रद्धा आणि लोकसंस्कृती ===
कोकणातील कुणबी समाजाच्या धार्मिक आणि सांस्कृतिक जीवनाचा अभ्यास करताना ग्रामजीवन, कुटुंब, देवक, ग्रामदेवता, स्थानिक देवता, विवाहविधी आणि कृषीचक्र यांचा परस्परसंबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे. ब्रिटिशकालीन गॅझेटियर आणि रेजिनाल्ड एडवर्ड एन्थोव्हन यांच्या मानववंशशास्त्रीय नोंदींमध्ये कुणबी आणि संबंधित कृषक समूहांच्या धार्मिक श्रद्धा, देवक, विवाहविधी, देवतांची उपासना आणि सामाजिक प्रथांचे विविध संदर्भ आढळतात.<ref name="Enthoven1922" /><ref name="RatnagiriSavantvadi1880" />
या नोंदींचा उपयोग करताना त्यातील वर्णने त्यांच्या काळातील प्रशासकीय आणि मानववंशशास्त्रीय निरीक्षणांवर आधारित आहेत, हे लक्षात घेणे आवश्यक आहे. त्यामुळे त्यातील प्रत्येक धार्मिक प्रथा संपूर्ण कोकणातील सर्व कुणबी कुटुंबांना किंवा आधुनिक काळातील संपूर्ण कुणबी समाजाला तंतोतंत लागू होते, असे मानता येत नाही.
=== ग्रामदेवता आणि स्थानिक देवता ===
कोकणातील ग्रामीण धार्मिक जीवनात ग्रामदेवता आणि स्थानिक देवतांना महत्त्वाचे स्थान होते. गावाची सामाजिक रचना आणि धार्मिक जीवन यांचा परस्पर संबंध असल्यामुळे ग्रामदेवतेचे उत्सव, पूजा आणि स्थानिक धार्मिक प्रथांमध्ये गावातील विविध सामाजिक समूहांचा सहभाग असे.<ref name="KolabaJanjira1883" />
बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या गॅझेटियरमधील ग्रामीण समाजाच्या वर्णनांमध्ये मारुती, खंडोबा, शिव आणि इतर देवतांच्या उपासनेचे उल्लेख विविध सामाजिक समूहांच्या संदर्भात आढळतात. त्यामुळे कोकणातील कुणबींच्या धार्मिक जीवनाचा अभ्यास करताना केवळ कुणबी समाजाशी संबंधित मानल्या जाणाऱ्या धार्मिक परंपरांचा विचार न करता व्यापक ग्रामीण आणि प्रादेशिक धार्मिक संस्कृतीचाही विचार करणे आवश्यक आहे.<ref name="KolabaJanjira1883" />
=== कुलदैवत आणि कुटुंबीय श्रद्धा ===
कुणबी समाजाच्या धार्मिक जीवनात कुटुंब आणि वंशपरंपरेशी संबंधित देवतांना स्थान असल्याचे मानववंशशास्त्रीय साहित्यात आढळते. घरातील धार्मिक विधी, पूर्वजांचे स्मरण, कुटुंबीय देवता आणि स्थानिक धार्मिक प्रथा या ग्रामीण कुटुंबाच्या सामाजिक जीवनाशी जोडलेल्या होत्या.<ref name="Enthoven1922" />
तथापि कुलदैवत या संज्ञेअंतर्गत सर्व कुणबी कुटुंबांची एकच देवता होती, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. कुलदैवत, ग्रामदेवता आणि स्थानिक देवतांच्या परंपरा कुटुंब, गाव आणि प्रदेशानुसार बदलत असू शकतात. त्यामुळे या धार्मिक परंपरांचा अभ्यास करताना स्थानिक आणि कुटुंबीय पुराव्यांना विशेष महत्त्व देणे आवश्यक आहे.
=== देवक ===
देवक ही विवाहसंस्था आणि कुटुंबीय धार्मिक विधींशी संबंधित महत्त्वाची सामाजिक-धार्मिक संकल्पना होती. रेजिनाल्ड एडवर्ड एन्थोव्हन यांच्या मानववंशशास्त्रीय नोंदींमध्ये विविध कृषक आणि इतर हिंदू समूहांच्या विवाहविधींमध्ये देवकाला असलेले स्थान वर्णन केले आहे. विवाहापूर्वी देवकाची स्थापना करणे, त्याची पूजा करणे आणि विवाहसमारंभात त्याला धार्मिक महत्त्व देणे अशा प्रथा विविध समुदायांच्या संदर्भात नोंदविल्या आहेत.<ref name="Enthoven1922" />
कुणबी समाजाच्या सामाजिक रचनेचा अभ्यास करताना देवकाचा संबंध केवळ धार्मिक विधींशी मर्यादित न ठेवता विवाहनियम आणि सामाजिक नातेसंबंधांच्या संदर्भातही पाहिला जातो. देवक आणि विवाहसंस्था यांच्यातील संबंधामुळे विशिष्ट कुटुंबीय किंवा सामाजिक गटांमध्ये विवाहासंबंधी काही नियम प्रचलित असल्याचे दिसते. तथापि या नियमांचे स्वरूप प्रदेश आणि सामाजिक उपगटांनुसार बदलत असल्यामुळे त्यांना संपूर्ण कोकणातील कुणबी समाजाचे सार्वत्रिक नियम मानता येत नाही.<ref name="Enthoven1922" />
=== विवाहविधी आणि धार्मिक प्रथा ===
कुणबी समाजातील विवाह ही धार्मिक विधींबरोबरच सामाजिक नातेसंबंध दृढ करणारी संस्था होती, असे ब्रिटिशकालीन मानववंशशास्त्रीय नोंदींवरून दिसते. विवाहसमारंभात देवकाची स्थापना, धार्मिक पूजा, नातेवाईकांचा सहभाग, सामुदायिक भोजन आणि विविध पारंपरिक विधी यांचा समावेश असल्याचे वर्णन आढळते.<ref name="Enthoven1922" />
विवाहासंबंधीच्या प्रथा प्रदेश, सामाजिक उपगट आणि स्थानिक परंपरांनुसार बदलत असत. त्यामुळे एखाद्या मानववंशशास्त्रीय नोंदीत वर्णन केलेली विवाहपद्धती संपूर्ण कोकणातील कुणबी समाजाची एकमेव किंवा अपरिवर्तनीय पद्धत होती, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. उपलब्ध नोंदींचे विश्लेषण करताना त्यांचा काळ, भौगोलिक संदर्भ आणि संबंधित सामाजिक समूह लक्षात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="Enthoven1922" />
=== सण आणि धार्मिक उत्सव ===
कोकणातील कुणबी समाजाचे धार्मिक जीवन व्यापक ग्रामीण मराठी आणि कोकणी सांस्कृतिक परंपरांशी संबंधित होते. स्थानिक देवतांच्या जत्रा, ग्रामदेवतांची पूजा, हिंदू धार्मिक सण आणि कुटुंबीय धार्मिक विधी हे ग्रामीण सामाजिक जीवनाचे घटक होते. बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या गॅझेटियरमध्ये विविध ग्रामीण समुदायांच्या धार्मिक आचारांमध्ये स्थानिक देवता, मंदिरे, जत्रा आणि विशिष्ट दिवसांच्या पूजेचे उल्लेख आढळतात.<ref name="KolabaJanjira1883" />
काही समुदायांच्या संदर्भात शनिवार, विशिष्ट तिथी किंवा स्थानिक देवतेच्या उत्सवाच्या दिवशी पूजा करण्याच्या प्रथा नोंदविल्या आहेत. या प्रकारच्या धार्मिक प्रथा कोकणातील व्यापक ग्रामीण धार्मिक संस्कृतीचा भाग होत्या; त्यामुळे त्यांना केवळ कुणबी समाजापुरते मर्यादित करणे योग्य ठरणार नाही.<ref name="KolabaJanjira1883" />
=== कृषीचक्र आणि धार्मिक श्रद्धा ===
कुणबी समाजाची पारंपरिक अर्थव्यवस्था शेतीशी संबंधित असल्यामुळे कृषीचक्र आणि ग्रामीण धार्मिक जीवन यांच्यात परस्परसंबंध असण्याची शक्यता होती. पाऊस, पेरणी, रोपांची लागवड, पीकवाढ आणि कापणी या कृषी टप्प्यांशी स्थानिक श्रद्धा, ग्रामदेवता आणि धार्मिक प्रथा जोडल्या जात असत. कोकणातील ग्रामीण धार्मिक जीवनाच्या वर्णनांमध्ये कृषीसमाजाच्या जीवनाशी संबंधित स्थानिक देवता, धार्मिक उत्सव आणि प्रथांचे उल्लेख आढळतात.<ref name="KolabaJanjira1883" />
मात्र उपलब्ध ब्रिटिशकालीन गॅझेटियर आणि मानववंशशास्त्रीय स्रोतांमध्ये कुणबी समाजातील सर्व कृषीविधींची एकसंध आणि सविस्तर नोंद आढळत नाही. त्यामुळे एखादा विशिष्ट कृषीविधी संपूर्ण कुणबी समाजाची सार्वत्रिक परंपरा म्हणून मांडण्याऐवजी त्याचा अभ्यास संबंधित गाव, प्रदेश आणि स्थानिक ग्रामीण कृषी संस्कृतीच्या संदर्भात करणे अधिक योग्य ठरते.
कोकणातील कृषीजीवन, ग्रामीण परंपरा आणि स्थानिक सांस्कृतिक व्यवहारांच्या संदर्भात अनंत नर्मदा सखाराम घोलम यांच्या ‘खडीकोळवण : सांस्कृतिक, ऐतिहासिक आणि ग्रामीण जीवन’ या ग्रंथातील स्थानिक संदर्भ पूरक स्रोत म्हणून उपयोगी ठरू शकतात.<ref name="घोलम2025" />
=== पूर्वज, मृत्यू आणि धार्मिक विधी ===
कुटुंब आणि पूर्वजांशी संबंधित धार्मिक विधींचा उल्लेख ब्रिटिशकालीन मानववंशशास्त्रीय साहित्यामध्ये आढळतो. विवाह, मृत्यू आणि पुनर्विवाह यांसारख्या प्रसंगी धार्मिक विधी, सामाजिक मान्यता आणि कुटुंबीय संबंध यांच्यातील परस्परसंबंध विविध सामाजिक समूहांच्या संदर्भात नोंदविण्यात आले आहेत.<ref name="Enthoven1922" />
या नोंदींवरून ग्रामीण समाजात धार्मिक विधी आणि सामाजिक मान्यता यांचा परस्परसंबंध होता असे दिसते. तथापि एन्थोव्हन यांच्या नोंदी विशिष्ट काळातील आणि विशिष्ट सामाजिक समूहांवरील मानववंशशास्त्रीय निरीक्षणांवर आधारित आहेत. त्यामुळे त्यांतील वर्णने आधुनिक काळातील संपूर्ण कुणबी समाजाच्या धार्मिक जीवनाला थेट लागू करता येत नाहीत.
=== लोककथा आणि लोकपरंपरा ===
कोकणातील लोकसंस्कृतीमध्ये देवता, स्थानिक वीरपुरुष, ग्रामपरंपरा, धार्मिक स्थळे, जत्रा, आख्यायिका आणि मौखिक परंपरांना महत्त्वाचे स्थान आहे. ब्रिटिशकालीन गॅझेटियरमध्ये कोकणातील ग्रामीण समाजाच्या धार्मिक जीवनाशी संबंधित स्थानिक देवता, धार्मिक स्थळे आणि उत्सवांचे उल्लेख आढळतात.<ref name="KolabaJanjira1883" />
तथापि उपलब्ध प्रमुख गॅझेटियर आणि एन्थोव्हन यांच्या मानववंशशास्त्रीय नोंदींमध्ये कुणबी समाजाच्या स्वतंत्र लोककथांचा किंवा स्वतंत्र कथासंग्रहाचा पुरेसा सुसंगत पुरावा उपलब्ध नसल्यामुळे विशिष्ट लोककथा कुणबी समाजाची सार्वत्रिक परंपरा म्हणून नोंदविणे योग्य ठरणार नाही.
कोकणातील लोकपरंपरांचा अभ्यास व्यापक प्रादेशिक लोकसाहित्याच्या संदर्भात करणे अधिक योग्य ठरते. एखादी लोककथा, आख्यायिका, धार्मिक परंपरा किंवा मौखिक स्मृती विशिष्ट कुणबी गाव, कुटुंब किंवा स्थानिक समुदायाशी संबंधित असल्यास तिचा स्वतंत्र स्थानिक स्रोतांच्या आधारे अभ्यास करता येतो. अशा स्थानिक सांस्कृतिक आणि ग्रामीण परंपरांच्या संदर्भात ‘खडीकोळवण : सांस्कृतिक, ऐतिहासिक आणि ग्रामीण जीवन’ हा पूरक संदर्भ म्हणून वापरता येतो; मात्र एखाद्या विशिष्ट लोककथेचा पुरावा त्या ग्रंथात प्रत्यक्ष उपलब्ध असल्यासच संबंधित विधानासाठी त्याचा संदर्भ द्यावा.<ref name="घोलम2025"/>
=== लोकगीते आणि मौखिक परंपरा ===
कृषीप्रधान ग्रामीण समाजात श्रम, सण, विवाह, धार्मिक विधी आणि ऋतूचक्र यांच्याशी संबंधित मौखिक परंपरांना महत्त्वाचे स्थान होते. कोकणातील ग्रामीण लोकजीवनाच्या वर्णनांमध्ये धार्मिक उत्सव, स्थानिक देवता, जत्रा आणि सामाजिक-सांस्कृतिक प्रथांचा उल्लेख आढळतो. या व्यापक ग्रामीण सांस्कृतिक वातावरणातून विविध प्रकारच्या मौखिक परंपरा विकसित झाल्या असण्याची शक्यता आहे.<ref name="KolabaJanjira1883" />
मात्र एखादे विशिष्ट लोकगीत हे ‘कुणबी लोकगीत’ आहे, असा निष्कर्ष काढण्यासाठी त्या गीताचा कुणबी समाजाशी स्पष्ट संबंध दर्शविणारा विश्वसनीय स्रोत आवश्यक आहे. त्यामुळे केवळ कोकणात किंवा ग्रामीण समाजात प्रचलित असल्याच्या आधारावर सामान्य लोकगीतांना कुणबी समाजाची स्वतंत्र सांस्कृतिक निर्मिती म्हणून वर्गीकृत करणे योग्य ठरणार नाही.
स्थानिक लोकगीते, म्हणी, आख्यायिका आणि मौखिक स्मृती यांचा अभ्यास करताना त्यांचे भौगोलिक क्षेत्र, संबंधित समुदाय, प्रसंग आणि मौखिक परंपरेतील वापर यांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे. अशा स्थानिक सांस्कृतिक परंपरांचे दस्तऐवजीकरण कोकणातील ग्रामीण सामाजिक इतिहासाच्या अभ्यासासाठी पूरक ठरू शकते.
=== कोकणी लोकसंस्कृतीशी संबंध ===
कोकणातील कुणबी समाजाची धार्मिक आणि सांस्कृतिक ओळख व्यापक कोकणी ग्रामीण संस्कृतीपासून पूर्णपणे वेगळी नव्हती. ग्रामदेवता, स्थानिक देवता, कृषीचक्र, जत्रा, कुटुंबीय धार्मिक प्रथा, विवाहविधी आणि स्थानिक सामाजिक संस्था यांसारख्या अनेक सांस्कृतिक बाबी कोकणातील विविध ग्रामीण समुदायांमध्ये आढळत असल्याचे गॅझेटियरमधील वर्णनांवरून दिसते.<ref name="KolabaJanjira1883" />
त्यामुळे कुणबी समाजाची लोकसंस्कृती ही पूर्णपणे बंदिस्त किंवा इतर ग्रामीण समुदायांपासून स्वतंत्र अशी सांस्कृतिक व्यवस्था होती, असे मानणे योग्य ठरणार नाही. तिचा विकास स्थानिक कृषीजीवन, ग्रामसंस्था, धार्मिक परंपरा आणि कोकणातील व्यापक सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरणाशी असलेल्या परस्परसंबंधातून झाला असण्याची शक्यता अधिक आहे.
या संदर्भात स्थानिक ग्रामीण जीवन, सांस्कृतिक परंपरा आणि सामाजिक स्मृतींचे दस्तऐवजीकरण करणारे अनंत नर्मदा सखाराम घोलम यांचे ‘खडीकोळवण : सांस्कृतिक, ऐतिहासिक आणि ग्रामीण जीवन’ हे पुस्तक पूरक स्रोत म्हणून उपयोगी ठरू शकते. तथापि त्यातील विशिष्ट माहिती ज्या स्थानिक परंपरेशी संबंधित आहे, त्याच मर्यादित संदर्भात तिचा वापर करणे अधिक योग्य ठरेल.<ref name="घोलम2025" />
=== धार्मिक जीवन आणि सामाजिक संघटना ===
धार्मिक प्रथा आणि सामाजिक संघटना यांचा परस्परसंबंध पारंपरिक ग्रामीण जीवनात महत्त्वाचा होता. विवाह, धार्मिक विधी, सामाजिक नियम आणि सामुदायिक व्यवहार यांमध्ये कुटुंब, नातेसंबंध आणि समुदायातील ज्येष्ठ व्यक्तींची भूमिका असल्याचे ब्रिटिशकालीन मानववंशशास्त्रीय नोंदींमध्ये आढळते.<ref name="Enthoven1922" />
एन्थोव्हन यांच्या नोंदींमध्ये विविध सामाजिक समूहांच्या संदर्भात जातपंचायत, सामाजिक नियम, विवाहसंस्था आणि धार्मिक प्रथांचा परस्परसंबंध वर्णन केला आहे. काही समूहांमध्ये सामाजिक नियमांचे उल्लंघन झाल्यास दंड, सामुदायिक भोजन किंवा इतर सामाजिक उपायांचा वापर केला जात असल्याचेही नमूद आहे.<ref name="Enthoven1922" />
या संस्था आधुनिक न्यायालये किंवा प्रशासकीय यंत्रणांप्रमाणे औपचारिक कायदेशीर संस्था नव्हत्या. त्या स्थानिक समुदायाच्या सामाजिक नियंत्रण, परस्पर संबंध आणि रूढींचे पालन यांसाठी कार्य करणाऱ्या पारंपरिक सामाजिक पद्धती होत्या. तथापि एन्थोव्हन यांच्या नोंदी विविध समुदायांवर आधारित असल्यामुळे त्यातील प्रत्येक प्रथा संपूर्ण कोकणातील किंवा सर्व कुणबी समूहांना समानपणे लागू होती, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="Enthoven1922" />
=== धार्मिक आणि सांस्कृतिक विविधता ===
कोकणातील कुणबी समाजाला एकसंध धार्मिक पद्धती असलेला समूह मानणे योग्य ठरणार नाही. वेगवेगळ्या गावांतील ग्रामदेवता, कुटुंबीय धार्मिक परंपरा, देवक, स्थानिक देवतांची उपासना आणि प्रादेशिक धार्मिक प्रभाव यांमुळे धार्मिक आचारांमध्ये विविधता निर्माण झाली होती. ब्रिटिशकालीन मानववंशशास्त्रीय नोंदींमध्येही विविध सामाजिक समूहांच्या धार्मिक प्रथा, देवतांची उपासना आणि स्थानिक धार्मिक परंपरांमध्ये प्रादेशिक भिन्नता असल्याचे दिसते.<ref name="Enthoven1922" />
सावंतवाडी आणि दक्षिण कोकणातील धार्मिक लोकसंख्येच्या ऐतिहासिक नोंदींमध्ये विविध हिंदू धार्मिक परंपरा तसेच स्थानिक देवता आणि आत्म्यांशी संबंधित उपासनेचे प्रकार आढळतात. १८७२ च्या सावंतवाडीच्या नोंदींमध्ये मोठ्या प्रमाणावर लोक विशिष्ट पंथाशी संबंधित नसून स्थानिक देवता आणि आत्म्यांची पूजा करीत असल्याचे स्वतंत्र वर्गीकरण करण्यात आले होते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880" />
ही नोंद कुणबी समाजाची स्वतंत्र धार्मिक आकडेवारी नाही; ती त्या काळातील सावंतवाडी संस्थानातील व्यापक धार्मिक लोकसंख्येचे वर्गीकरण आहे. त्यामुळे तिचा उपयोग कुणबी समाजाची स्वतंत्र धार्मिक स्थिती निश्चित करण्यासाठी न करता दक्षिण कोकणातील तत्कालीन व्यापक धार्मिक आणि सांस्कृतिक वातावरण समजून घेण्यासाठी करणे अधिक योग्य ठरते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880" />
=== ऐतिहासिक स्रोतांच्या मर्यादा ===
कुणबी समाजाच्या धार्मिक आणि लोकसंस्कृतीविषयी उपलब्ध प्रमुख ऐतिहासिक स्रोतांमध्ये ब्रिटिशकालीन गॅझेटियर आणि मानववंशशास्त्रीय ग्रंथांचा मोठा वाटा आहे. हे स्रोत तत्कालीन प्रशासकीय अधिकारी आणि मानववंशशास्त्रज्ञ यांच्या निरीक्षणांवर आधारित असल्यामुळे त्यांतील वर्णने त्या काळातील प्रशासकीय वर्गीकरण, सामान्यीकरणे आणि निरीक्षकांच्या दृष्टिकोनाने प्रभावित असू शकतात.<ref name="Enthoven1922" />
त्यामुळे या स्रोतांमध्ये नोंदविलेली एखादी धार्मिक प्रथा संपूर्ण कुणबी समाजाची सार्वत्रिक परंपरा होती, असे गृहीत धरता येत नाही. विशेषतः ग्रामदेवता, कुलदैवत, देवक, लोककथा, लोकगीते आणि कृषीविधी यांचा अभ्यास करताना त्यांचा प्रदेश, गाव, कुटुंब आणि सामाजिक उपगट यांनुसार बदलणारा संदर्भ विचारात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="Enthoven1922" />
=== धार्मिक आणि लोकसांस्कृतिक वारशाचे ऐतिहासिक महत्त्व ===
उपलब्ध पुराव्यांवरून कोकणातील कुणबी समाजाच्या धार्मिक जीवनात ग्रामजीवन, कुटुंबीय परंपरा, देवक, स्थानिक देवता, विवाहविधी आणि कृषीप्रधान जीवन यांचे परस्परसंबंध दिसून येतात. या धार्मिक-सांस्कृतिक संस्था केवळ धार्मिक आचरणापुरत्या मर्यादित नव्हत्या; त्या कुटुंब, विवाह, ग्रामसमुदाय आणि सामाजिक संबंधांच्या संघटनेशीही संबंधित होत्या.<ref name="Enthoven1922" />
या पार्श्वभूमीवर कोकणातील कुणबी समाजाची लोकसंस्कृती समजून घेताना ‘कुणबींची स्वतंत्र संस्कृती’ आणि ‘कोकणातील व्यापक ग्रामीण संस्कृती’ यांना परस्परविरोधी मानण्याऐवजी त्यांच्यातील परस्परसंबंध, सांस्कृतिक देवाणघेवाण आणि प्रादेशिक विविधता यांचा अभ्यास करणे अधिक योग्य ठरते. स्थानिक सांस्कृतिक परंपरा, ग्रामीण जीवन आणि सामाजिक स्मृतींच्या अभ्यासासाठी अनंत नर्मदा सखाराम घोलम यांचे ‘खडीकोळवण : सांस्कृतिक, ऐतिहासिक आणि ग्रामीण जीवन’ हे पुस्तक पूरक संदर्भ म्हणून वापरता येऊ शकते; मात्र विशिष्ट धार्मिक प्रथा किंवा लोकपरंपरेचा दावा करताना त्या पुस्तकातील संबंधित प्रत्यक्ष मजकुराशी संदर्भ जुळविणे आवश्यक आहे.<ref name="घोलम2025" />
== लोकसंख्याशास्त्र ==
कोकणातील कुणबी समाजाच्या लोकसंख्येचा ऐतिहासिक अभ्यास करताना ब्रिटिशकालीन जनगणना, जिल्हानिहाय गॅझेटियर, ग्रामसर्वेक्षण आणि नंतरच्या जनगणना-अभिलेखांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे. या स्रोतांमध्ये कुणबी आणि संबंधित कृषक समूहांचे वर्गीकरण काळानुसार बदललेले दिसते. विशेषतः कुणबी, मराठा-कुणबी आणि कुणबी-मराठा यांसारख्या संज्ञांचा वापर वेगवेगळ्या जनगणनांमध्ये समान पद्धतीने झालेला नव्हता. त्यामुळे विविध जनगणनांतील आकडे थेट एकत्र करून आधुनिक काळातील कुणबी लोकसंख्येचा अंदाज काढणे पद्धतशीरदृष्ट्या योग्य ठरत नाही.<ref name="Baines1881" /><ref name="CensusBombay1901" /><ref name="CensusBombay1911" />
=== १८८१ची जनगणना ===
१८८१ची जनगणना ही बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील कुणबी आणि संबंधित कृषक समूहांच्या लोकसंख्येचा अभ्यास करण्यासाठी महत्त्वाचा ऐतिहासिक स्रोत आहे. जनगणना अहवालात जे. ए. बेन्स यांनी ‘Maratha Kunbi’ हा व्यापक कृषक समूह मानला असून त्यात दख्खनातील कुणबी तसेच कोकणात ‘Maratha’ म्हणून नोंदविल्या जाणाऱ्या संबंधित समूहांचा समावेश केला होता. अहवालात या दोन समूहांमधील भेद अनेक ठिकाणी स्पष्ट नसून काही बाबतींत तो प्रशासकीय वर्गीकरणावर अवलंबून असल्याचेही नमूद केले आहे.<ref name="Baines1881" />
१८८१ च्या अहवालातील रत्नागिरी जिल्ह्याच्या आकडेवारीनुसार २,०५,७८४ कुणबी आणि सुमारे २,७१,००० मराठा अशी नोंद करण्यात आली होती. त्यामुळे त्या काळातील रत्नागिरी जिल्ह्यात कुणबी हा मोठ्या संख्येचा कृषक समूह होता, असे जनगणना-अभिलेखावरून दिसते.<ref name="Baines1881" />
या आकडेवारीचा अर्थ लावताना १८८१ च्या जनगणनेतील ‘Maratha Kunbi’ आणि ‘Kunbi’ या वर्गांची व्याप्ती आधुनिक महाराष्ट्रातील प्रशासकीय कुणबी वर्गाशी समान नव्हती, हे लक्षात घेणे आवश्यक आहे. त्यामुळे २,०५,७८४ हा आकडा आधुनिक रत्नागिरी जिल्ह्यातील कुणबी लोकसंख्येशी थेट तुलनेसाठी वापरणे योग्य ठरणार नाही.<ref name="Baines1881" />
=== १९०१ची जनगणना ===
१९०१ च्या जनगणनेत बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील जातीय वर्गीकरणाची पद्धत १८८१ च्या तुलनेत बदललेली दिसते. मुंबई शहराच्या जनगणना अहवालात ‘Kunbi (Maratha)’ ही संज्ञा वापरण्यात आली असून काही स्थानिक विभागांमध्ये या वर्गाचे प्रमाण लक्षणीय असल्याचे नमूद केले आहे. डोंगरी, पहिला नागपाडा आणि कुंभारवाडा या विभागांमध्ये ‘Kunbi (Maratha)’ लोकसंख्येचे प्रमाण अनुक्रमे ४७ टक्के, ३४ टक्के आणि २८ टक्के असल्याचे अहवालात नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="CensusBombay1901"/>
१९०१ च्या जनगणनेतील मुंबईच्या स्थलांतरविषयक नोंदींमध्ये रत्नागिरी हा मुंबईला स्थलांतरित लोकसंख्या पुरविणाऱ्या प्रमुख जिल्ह्यांपैकी एक असल्याचे नमूद आहे. त्या वेळी मुंबईतील एकूण स्थलांतरित लोकसंख्येपैकी सुमारे १,४६,००० व्यक्ती रत्नागिरी जिल्ह्यात जन्मलेल्या होत्या; हे प्रमाण स्थलांतरित लोकसंख्येच्या सुमारे २४.५ टक्के होते. त्यामुळे विसाव्या शतकाच्या प्रारंभी रत्नागिरी आणि मुंबई यांच्यातील लोकसंख्याशास्त्रीय संबंध लक्षणीय होते.<ref name="CensusBombay1901Presidency">{{cite report
|author=India. Census Commissioner
|title=Census of India, 1901: Bombay Presidency
|publisher=Government Central Press
|year=1902
}}</ref>
मात्र मुंबईत स्थलांतरित झालेल्या रत्नागिरीकरांना कुणबी म्हणून वर्गीकृत करता येत नाही. रत्नागिरीहून होणारे स्थलांतर विविध सामाजिक आणि धार्मिक समूहांचे होते. त्यामुळे जिल्हानिहाय स्थलांतराची आकडेवारी आणि कुणबी समाजाची जातीनिहाय लोकसंख्या यांची थेट समानता करणे ऐतिहासिकदृष्ट्या अचूक ठरणार नाही.<ref name="CensusBombay1901Presidency"/>
=== १९११ची जनगणना ===
१९११ च्या जनगणनेत कुणबी आणि मराठा या समूहांचे वर्गीकरण पुन्हा बदललेले दिसते. अधिकृत जनगणना अहवालानुसार १९०१मध्ये ‘Mahratha Kunbis’ ज्या पद्धतीने वर्गीकृत करण्यात आले होते, त्यांचे १९११मध्ये कुणबी या वर्गाशी संबंध जोडण्यात आले. १९११ च्या जनगणनेत कुणबी आणि कानबी यांच्या विविध उपगटांची नोंद करण्याचाही प्रयत्न करण्यात आला होता. त्यामुळे १९०१ आणि १९११ च्या आकडेवारीची तुलना करताना दोन्ही जनगणनांमधील वर्गीकरणपद्धतीतील फरक विचारात घेणे आवश्यक ठरते.<ref name="CensusBombay1911"/>
१९११ च्या अधिकृत जनगणनेत ‘Kunbi Maratha’ हा कुणबी या शीर्षकाखाली दाखविण्यात आला, तर दख्खनी आणि कोकणी मराठा यांना मराठा या शीर्षकाखाली वर्गीकृत करण्यात आले. यावरून ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये समान किंवा संबंधित सामाजिक समूहांचे वर्गीकरण वेगवेगळ्या जनगणनांमध्ये बदलत असल्याचे दिसून येते.<ref name="CensusBombay1911"/>
या वर्गीकरणातील बदलामुळे १९०१ आणि १९११ च्या जनगणना आकडेवारीची थेट तुलना करणे सावधगिरीने करणे आवश्यक आहे. एका जनगणनेत एखादा समूह ज्या शीर्षकाखाली नोंदविला गेला होता, त्याच समूहाला पुढील जनगणनेत वेगळ्या शीर्षकाखाली समाविष्ट केले जाऊ शकत होते. त्यामुळे ऐतिहासिक जातीय लोकसंख्येचे विश्लेषण करताना केवळ संख्यात्मक आकडे न पाहता संबंधित जनगणनेची वर्गीकरणपद्धतीही तपासणे आवश्यक आहे.<ref name="CensusBombay1911"/>
=== १९३१ची जनगणना ===
१९३१ची जनगणना ब्रिटिश भारतातील जातीय वर्गीकरणाच्या शेवटच्या व्यापक जनगणनांपैकी एक होती. बॉम्बे प्रांतातील या जनगणनेच्या विविध तक्त्यांमध्ये जात, उपजात आणि प्रादेशिक वर्गीकरण स्वतंत्र पद्धतीने हाताळण्यात आले होते. त्यामुळे या जनगणनेतील कुणबी, मराठा, मराठा-कुणबी किंवा संबंधित संज्ञांचा वापर करताना संबंधित तक्ता आणि त्यामागील वर्गीकरणपद्धती तपासणे आवश्यक आहे.<ref name="Census1931Bombay"/>
१९३१नंतर भारताच्या नियमित जनगणनांमध्ये सर्व जातींची संपूर्ण लोकसंख्या पूर्वीच्या पद्धतीने सातत्याने प्रकाशित करण्यात आली नाही. त्यामुळे १९३१नंतरच्या कालखंडासाठी कुणबी समाजाची अखिल भारतीय किंवा कोकणातील सातत्यपूर्ण जातीनिहाय जनगणना-कालमालिका तयार करणे शक्य होत नाही.
=== १९६१ चे कुंकेरी ग्रामसर्वेक्षण ===
१९६१ च्या जनगणना कार्यक्रमांतर्गत महाराष्ट्रातील निवडक गावांचे स्वतंत्र ग्रामसर्वेक्षण करण्यात आले. त्याअंतर्गत सावंतवाडी तालुक्यातील कुंकेरी गावाचे स्वतंत्र ग्रामसर्वेक्षण मोनोग्राफ प्रसिद्ध करण्यात आले. हा ग्रंथ महाराष्ट्रातील निवडक ३५ गावांच्या ग्रामसर्वेक्षण मालिकेचा भाग होता आणि त्यामध्ये संबंधित गावाच्या सामाजिक, सांस्कृतिक आणि आर्थिक जीवनाचे सविस्तर दस्तऐवजीकरण करण्यात आले होते.<ref name="Kunkeri1966"/>
कुंकेरी ग्रामसर्वेक्षणात कुटुंबरचना, व्यवसाय, जमीनधारणा, आर्थिक व्यवहार, सामाजिक जीवन आणि सांस्कृतिक जीवन यांसंबंधी माहिती संकलित करण्यात आली होती. त्यामुळे दक्षिण कोकणातील ग्रामीण समाजरचनेचा सूक्ष्म पातळीवर अभ्यास करण्यासाठी हे सर्वेक्षण महत्त्वाचे प्राथमिक स्रोत ठरते.<ref name="Kunkeri1966"/>
कुंकेरीच्या पुढील दीर्घकालीन अभ्यासांमध्ये १९६१, १९८७ आणि २०१७ या तीन कालखंडांतील लोकसंख्या, सामाजिक रचना, जमीनधारणा, व्यवसाय आणि स्थलांतर यांची तुलना करण्यात आली आहे. या अभ्यासातून दीर्घकाळ चाललेल्या स्थलांतरामुळे गावाच्या सामाजिक आणि आर्थिक जीवनात बदल झाले असले तरी काही सामाजिक आणि जमीनधारणेशी संबंधित रचनांमध्ये सातत्यही राहिल्याचे दिसून येते.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
=== २००१–२०११ : कोकणातील जिल्हानिहाय लोकसंख्या बदल ===
२००१ ते २०११ या कालावधीत कोकणातील जिल्ह्यांच्या एकूण लोकसंख्येत वेगवेगळ्या प्रकारचे बदल झाले. मात्र आधुनिक भारतीय जनगणनेमध्ये ‘कुणबी’ ही स्वतंत्र सर्वसमावेशक जातीय लोकसंख्या श्रेणी नियमितपणे प्रकाशित करण्यात आलेली नसल्यामुळे, जिल्ह्यांच्या एकूण लोकसंख्येतील वाढ किंवा घट यावरून कुणबी समाजाची स्वतंत्र लोकसंख्या किंवा तिचा वाढीचा दर निश्चित करता येत नाही.<ref name="PopulationFinder2011">{{cite web
|title=Population Finder 2011
|publisher=Office of the Registrar General and Census Commissioner, India
|url=https://censusindia.gov.in/census.website/en/data/population-finder
}}</ref>
२०११ च्या जनगणनेनुसार रत्नागिरी जिल्ह्याची लोकसंख्या १६,१५,०६९ होती. २००१मध्ये ही लोकसंख्या १६,९६,७७७ होती. त्यामुळे २००१ ते २०११ या दशकात रत्नागिरी जिल्ह्याच्या लोकसंख्येत ८१,७०८ व्यक्तींची घट झाली आणि दशकातील लोकसंख्या वाढीचा दर उणे ४.८ टक्के राहिला.<ref name="RatnagiriPopulation2001">{{cite report
|title=District Census Handbook: Ratnagiri, Census of India 2001
|publisher=Directorate of Census Operations, Maharashtra
|year=2006
}}</ref><ref name="RatnagiriPopulation2011">{{cite report
|title=Census of India 2011 — Maharashtra — District Census Handbook, Ratnagiri
|publisher=Directorate of Census Operations, Maharashtra
|year=2014
}}</ref>
सिंधुदुर्ग जिल्ह्याची २०११मधील लोकसंख्या ८,४९,६५१ होती. २००१मध्ये ती सुमारे ८,६८,८२५ होती. त्यामुळे २००१ ते २०११ या कालावधीत सिंधुदुर्ग जिल्ह्याच्या लोकसंख्येत १९,१७४ व्यक्तींची घट झाली आणि दशकातील लोकसंख्या वाढीचा दर उणे २.२ टक्के राहिला.<ref name="SindhudurgPopulation2011">{{cite report
|title=Census of India 2011 — Maharashtra — District Census Handbook, Sindhudurg
|publisher=Directorate of Census Operations, Maharashtra
|year=2014
}}</ref><ref name="SindhudurgPopulation2001">{{cite report
|title=Final population totals, Maharashtra, District Sindhudurg — 2001
|publisher=Office of the Registrar General & Census Commissioner, India
|year=2001
}}</ref>
२०११ च्या जनगणनेच्या वेळी पालघर हा स्वतंत्र जिल्हा नव्हता. पालघर जिल्ह्याची निर्मिती १ ऑगस्ट २०१४ रोजी तत्कालीन ठाणे जिल्ह्याचे विभाजन करून करण्यात आली. त्यामुळे २०११ च्या जनगणनेतील पालघरची लोकसंख्या स्वतंत्र जिल्हा म्हणून मोजलेली नव्हती. तथापि, सध्याच्या पालघर जिल्ह्याच्या भौगोलिक क्षेत्राशी संबंधित २०११ची पुनर्गणित लोकसंख्या २९,९०,११६ इतकी होती.<ref name="PalgharDistrict">{{cite web
|title=About District
|publisher=District Palghar, Government of Maharashtra
|url=https://palghar.gov.in/en/about-district/
}}</ref>
महाराष्ट्र शासनाच्या जिल्हानिहाय जनगणना आकडेवारीनुसार २०११ मध्ये पालघरची लोकसंख्या २९.९० लाख, रायगडची २६.३४ लाख, रत्नागिरीची १६.१५ लाख आणि सिंधुदुर्गची ८.५० लाख होती. या आकडेवारीचा वापर करताना संबंधित जिल्ह्यांच्या २००१ आणि २०११ च्या जनगणनेतील प्रशासकीय सीमांमधील बदलांचा विचार करणे आवश्यक आहे.<ref name="DistrictwisePopulationMaharashtra">{{cite web
|title=Districtwise Total & Tribal Population as per 1991, 2001 & 2011 Census of Maharashtra State
|publisher=Tribal Research and Training Institute, Government of Maharashtra
|url=https://trti.maharashtra.gov.in/districtwiseTotalPopulation
}}</ref>
=== आधुनिक जनगणनेमध्ये कुणबी लोकसंख्येची स्थिती ===
स्वातंत्र्योत्तर भारताच्या नियमित जनगणनांमध्ये अनुसूचित जाती आणि अनुसूचित जमाती यांची स्वतंत्र लोकसंख्या आकडेवारी प्रसिद्ध करण्यात आली आहे; मात्र सर्व जातींची स्वतंत्र आणि सर्वसमावेशक जातीनिहाय लोकसंख्या नियमित जनगणनेत प्रकाशित करण्यात आलेली नाही. २०११ च्या जनगणनेच्या प्राथमिक लोकसंख्या सारांशामध्ये लोकसंख्या, लिंग, वयोगट, अनुसूचित जाती, अनुसूचित जमाती, कामाची स्थिती आणि इतर सामाजिक-आर्थिक निर्देशकांची माहिती उपलब्ध आहे; ‘कुणबी’ या स्वतंत्र सर्वसमावेशक जातीय वर्गाची जिल्हानिहाय लोकसंख्या त्यामध्ये दिलेली नाही.<ref name="PopulationFinder2011" />
त्यामुळे २०११ च्या जनगणनेच्या आधारे रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, रायगड, पालघर किंवा ठाणे या जिल्ह्यांसाठी ‘कुणबी लोकसंख्या अमुक टक्के’ असा अधिकृत जनगणना आकडा निश्चित करता येत नाही. जिल्ह्याची एकूण लोकसंख्या आणि त्या जिल्ह्यातील कुणबी समाजाची जातीनिहाय लोकसंख्या या दोन वेगळ्या सांख्यिक संकल्पना आहेत.
२०११ च्या जनगणनेत पालघरच्या सध्याच्या भौगोलिक क्षेत्राची एकूण लोकसंख्या २९,९०,११६ इतकी होती; त्यापैकी अनुसूचित जमातींची लोकसंख्या ११,१८,००८ होती. ही आकडेवारी जिल्ह्याची एकूण लोकसंख्या किंवा अनुसूचित जमातींची लोकसंख्या दर्शवते; तिच्यावरून कुणबी समाजाची लोकसंख्या निश्चित करता येत नाही.<ref name="PalgharDistrict" />
काही सामाजिक संस्था, राजकीय व्यक्ती, संशोधक किंवा माध्यमांनी कुणबी समाजाच्या लोकसंख्येबाबत विविध अंदाज व्यक्त केलेले असू शकतात. मात्र अशा अंदाजांना अधिकृत जनगणना आकडेवारीपासून स्वतंत्र ठेवणे आवश्यक आहे. विश्वसनीय अधिकृत जातीनिहाय जनगणना उपलब्ध नसताना अशा अंदाजांना कुणबी समाजाची अधिकृत लोकसंख्या म्हणून मांडणे योग्य ठरणार नाही.
त्यामुळे कोकणातील कुणबी समाजाच्या लोकसंख्येचा ऐतिहासिक अभ्यास करताना ब्रिटिशकालीन जनगणना, जिल्हानिहाय गॅझेटियर, ग्रामसर्वेक्षणे आणि उपलब्ध आधुनिक जनगणना आकडे यांचा स्वतंत्र संदर्भात उपयोग करणे आवश्यक आहे. वेगवेगळ्या कालखंडांतील वर्गीकरणपद्धती आणि प्रशासकीय सीमा भिन्न असल्यामुळे त्यांची थेट तुलना करून आधुनिक कुणबी लोकसंख्येचा निश्चित अंदाज काढणे पद्धतशीरदृष्ट्या योग्य ठरणार नाही.
=== २०२७ ची जातीनिहाय जनगणना ===
भारत सरकारने २०२७ची जनगणना घेण्याचा निर्णय अधिकृतपणे जाहीर केला असून, ३० एप्रिल २०२५ रोजी झालेल्या मंत्रिमंडळाच्या राजकीय व्यवहार समितीच्या बैठकीत आगामी जनगणनेत जातीनिहाय गणना समाविष्ट करण्याचा निर्णय घेण्यात आला. यामुळे स्वातंत्र्यानंतर प्रथमच अनुसूचित जाती आणि अनुसूचित जमातींपलीकडे सर्व सामाजिक समूहांची जातीनिहाय गणना जनगणनेच्या मुख्य प्रक्रियेचा भाग होणार आहे.<ref name="CasteEnumeration2025">{{cite web
|title=Cabinet approves Caste enumeration in the upcoming Census
|publisher=Press Information Bureau, Government of India
|date=30 April 2025
|url=https://www.pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=2125526
}}</ref>
२०२७ च्या जनगणनेची संदर्भ तारीख सामान्य क्षेत्रांसाठी १ मार्च २०२७ निश्चित करण्यात आली आहे. लडाख तसेच जम्मू आणि काश्मीर, हिमाचल प्रदेश आणि उत्तराखंडमधील असिंक्रोनस हिमाच्छादित क्षेत्रांसाठी संदर्भ तारीख १ ऑक्टोबर २०२६ निश्चित करण्यात आली आहे. या संदर्भ तारखांबाबतची अधिसूचना १६ जून २०२५ रोजी प्रसिद्ध करण्यात आली.<ref name="Census2027ReferenceDate">{{cite web
|title=Population Census-2027 to be conducted in two phases along with enumeration of castes
|publisher=Press Information Bureau, Government of India
|date=4 June 2025
|url=https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2133845
}}</ref>
२०२७ची जनगणना दोन टप्प्यांत घेण्यात येणार आहे. पहिल्या टप्प्यात घरांची यादी आणि गृहनिर्माणविषयक माहिती संकलित केली जाईल, तर दुसऱ्या टप्प्यात व्यक्तिनिहाय लोकसंख्या गणना केली जाईल. जातीनिहाय माहिती दुसऱ्या टप्प्यात संकलित केली जाणार आहे.<ref name="Census2027TwoPhases">{{cite web
|title=Population Census-2027 to be conducted in two phases along with enumeration of castes
|publisher=Press Information Bureau, Government of India
|date=4 June 2025
|url=https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2133845
}}</ref>
२०२७ च्या जनगणनेत जातीनिहाय माहिती संकलित करण्याचा निर्णय झाल्यामुळे भविष्यात कुणबी, मराठा-कुणबी, कुणबी-मराठा आणि इतर सामाजिक समूहांच्या लोकसंख्येबाबत अधिक व्यापक अधिकृत आकडेवारी उपलब्ध होण्याची शक्यता आहे. तथापि जनगणना पूर्ण होऊन तिचे अधिकृत निकाल प्रकाशित होईपर्यंत २०२७ची जातीनिहाय लोकसंख्या उपलब्ध आहे असे मानता येणार नाही. केंद्र सरकारने २०२६मध्येही स्पष्ट केले आहे की जातीनिहाय प्रश्नांसह दुसऱ्या टप्प्याची प्रश्नावली स्वतंत्रपणे अंतिम करून अधिसूचित केली जाणार आहे.<ref name="CasteBasedCensus2026">{{cite web
|title=Caste Based Census
|publisher=Press Information Bureau, Government of India
|date=4 February 2026
|url=https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2223099
}}</ref>
=== लोकसंख्याशास्त्रीय आकडेवारीची तुलना करताना आवश्यक सावधगिरी ===
कोकणातील कुणबी समाजाच्या लोकसंख्येची दीर्घकालीन तुलना करताना ऐतिहासिक जनगणनांमधील वर्गीकरणपद्धतीचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे. ‘कुणबी’, ‘कणबी’, ‘मराठा-कुणबी’, ‘कुणबी-मराठा’, ‘कुळवाडी’ आणि त्यासारख्या संज्ञांची व्याप्ती वेगवेगळ्या काळात आणि वेगवेगळ्या प्रशासकीय प्रदेशांत बदलत गेली. त्यामुळे विविध जनगणनांतील समान किंवा समानार्थी वाटणाऱ्या संज्ञांना आजच्या प्रशासकीय जातवर्गांशी थेट समान मानता येत नाही.<ref name="Baines1881" /><ref name="CensusBombay1901Presidency" />
दुसरी महत्त्वाची बाब म्हणजे ब्रिटिशकालीन प्रशासकीय जिल्ह्यांच्या सीमा आजच्या जिल्ह्यांच्या सीमांपेक्षा वेगळ्या होत्या. रत्नागिरी, कोलाबा, सावंतवाडी आणि इतर ऐतिहासिक जिल्ह्यांच्या सीमा काळानुसार बदलल्या आहेत. त्यामुळे एखाद्या जुन्या जिल्ह्याची लोकसंख्या आजच्या त्याच नावाच्या जिल्ह्याशी थेट तुलना करताना प्रशासकीय पुनर्रचनेचा विचार करणे आवश्यक आहे.
तिसरी बाब म्हणजे जनगणना अधिकाऱ्यांनी केलेले प्रशासकीय वर्गीकरण आणि संबंधित व्यक्ती किंवा समूहांची स्थानिक सामाजिक ओळख यांच्यात फरक असण्याची शक्यता होती. त्यामुळे जनगणनेतील एखाद्या शीर्षकाखाली नोंद झालेली संपूर्ण लोकसंख्या आधुनिक काळातील त्याच नावाच्या सामाजिक समूहाशी तंतोतंत संबंधित होती असे गृहीत धरता येत नाही.
चौथी बाब म्हणजे १९३१नंतर सर्व जातींची सातत्यपूर्ण आणि तुलनात्मक जातीनिहाय लोकसंख्या नियमित जनगणनेत प्रकाशित झालेली नाही. त्यामुळे १९व्या शतकाच्या उत्तरार्धापासून आजपर्यंत कुणबी समाजाची अखंड आणि तुलनायोग्य जातीनिहाय लोकसंख्या-मालिका तयार करणे शक्य होत नाही. १९५१ च्या अधिकृत जातीनिहाय अंदाजपत्रकातही पूर्वीच्या जनगणनांमध्ये ‘महरत्ता-कुणबी’ आणि ‘कुणबी’ यांचे वर्गीकरण वेगवेगळ्या प्रकारे झाले असल्याचे दिसते.<ref name="CensusClassification1951" />
या कारणांमुळे १८८१मधील कुणबी किंवा मराठा-कुणबी संख्या, १९०१मधील मराठा-कुणबी संख्या, १९११मधील कुणबी किंवा कुणबी-मराठा वर्गीकरण आणि आधुनिक प्रशासकीय कुणबी वर्ग यांना एका सलग आणि तुलनायोग्य सांख्यिक मालिकेप्रमाणे मांडणे योग्य ठरणार नाही.
=== लोकसंख्याशास्त्रीय निष्कर्ष ===
उपलब्ध ऐतिहासिक जनगणना नोंदींवरून रत्नागिरीसह कोकणातील काही भागांमध्ये कुणबी हा १९व्या शतकातील महत्त्वाच्या कृषक समूहांपैकी एक होता असे दिसून येते. १८८१ च्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या जनगणना अहवालात रत्नागिरी जिल्ह्यासाठी २,०५,७८४ कुणबींची नोंद करण्यात आली होती. मात्र त्या काळातील ‘कुणबी’ या वर्गीकरणाची व्याप्ती आणि आजच्या प्रशासकीय कुणबी वर्गाची व्याप्ती समान नसल्यामुळे हा आकडा आधुनिक लोकसंख्येशी थेट तुलना करण्यासाठी वापरता येत नाही.<ref name="Baines1881" />
१९०१ आणि १९११ च्या जनगणनांमध्ये मराठा आणि कुणबी यांच्याशी संबंधित वर्गीकरणात झालेले बदल हे ऐतिहासिक लोकसंख्याशास्त्राचा अभ्यास करताना केवळ संख्यात्मक आकडे पाहणे पुरेसे नसल्याचे दर्शवतात. प्रत्येक जनगणनेतील जातीय शीर्षके, उपविभाग आणि वर्गीकरणाची पद्धत स्वतंत्रपणे तपासणे आवश्यक आहे.<ref name="CensusBombay1901Presidency" /><ref name="CensusBombay1911" />
१९५१ च्या अधिकृत ‘जातीनिहाय लोकसंख्येचे अंदाज’ या अहवालातही ‘महरत्ता-कुणबी’, ‘कुणबी-कुळवाडी किंवा कणबी’, ‘तिरोळे कुणबी’ आणि इतर संबंधित गट स्वतंत्रपणे दाखविण्यात आले आहेत. यावरून ऐतिहासिक सरकारी आकडेवारीतही कुणबीशी संबंधित विविध सामाजिक नावांचे स्वतंत्र वर्गीकरण केले जात असल्याचे दिसते.<ref name="CensusClassification1951" />
त्यामुळे सध्याच्या काळात कोकणातील कुणबी समाजाची स्वतंत्र अधिकृत जिल्हानिहाय टक्केवारी उपलब्ध आहे असा निष्कर्ष काढता येत नाही. रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, रायगड, ठाणे किंवा पालघर या जिल्ह्यांसाठी आधुनिक कुणबी लोकसंख्येची निश्चित टक्केवारी सांगण्यासाठी जातीनिहाय अधिकृत आकडेवारी आवश्यक आहे.
२०२७ च्या जनगणनेत जातीनिहाय गणना समाविष्ट करण्यात आल्यामुळे भविष्यात या प्रश्नासाठी अधिक व्यापक अधिकृत सांख्यिक आधार उपलब्ध होण्याची शक्यता आहे. मात्र २०२७ची जनगणना पूर्ण होऊन तिचे अधिकृत जातीनिहाय निकाल प्रकाशित होईपर्यंत कुणबी समाजाच्या आधुनिक लोकसंख्येबाबत कोणताही निश्चित राष्ट्रीय किंवा जिल्हानिहाय आकडा अधिकृत मानता येणार नाही.<ref name="CasteEnumeration2025" />
== आधुनिक प्रशासकीय आणि कायदेशीर स्थिती ==
महाराष्ट्रातील कुणबी समाजाची आधुनिक प्रशासकीय ओळख ही राज्य शासनाच्या इतर मागासवर्गीयांच्या यादी, जात प्रमाणपत्रे आणि जात वैधता पडताळणीच्या प्रक्रियेशी संबंधित आहे. ऐतिहासिक जनगणना आणि मानववंशशास्त्रीय साहित्यात ‘कुणबी’, ‘कणबी’, ‘मराठा-कुणबी’ आणि ‘कुणबी-मराठा’ यांसारख्या संज्ञांचा वेगवेगळ्या संदर्भांत वापर झालेला आढळतो. मात्र आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरण हे संबंधित काळातील अधिकृत शासन निर्णय, मागासवर्गीयांच्या याद्या, लागू कायदे आणि न्यायालयीन निर्णय यांच्या आधारे निश्चित केले जाते.<ref name="MaharashtraOBC2025" />
=== महाराष्ट्रातील इतर मागासवर्गीय वर्गीकरण ===
महाराष्ट्र शासनाच्या १३ मे २०२५ रोजीच्या अधिकृत यादीत ‘कुणबी’ ही इतर मागासवर्गीय प्रवर्गातील अनुक्रमांक ८३वरील नोंद आहे. या नोंदीखाली ‘लेवा कुणबी’, ‘लेवा पाटील’, ‘लेवा पाटीदार’, ‘मराठा कुणबी’, ‘कुणबी मराठा’, ‘तिलोरी कुणबी’, ‘तिल्लोरी कुणबी’ आणि ‘ति. कुणबी’ या उपसंज्ञांचा समावेश करण्यात आला आहे.<ref name="MaharashtraOBC2025" />
ही यादी आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरण दर्शविते. या यादीतील विविध उपसंज्ञांचा एकत्रित समावेश आहे म्हणून त्या सर्व संज्ञांची ऐतिहासिक उत्पत्ती एकच आहे किंवा त्या प्रत्येक ऐतिहासिक कालखंडात समान अर्थाने वापरल्या गेल्या होत्या, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरण आणि ऐतिहासिक सामाजिक ओळख या स्वतंत्र बाबी आहेत.
=== कुणबी आणि तिलोरी कुणबी : ऐतिहासिक प्रशासकीय पार्श्वभूमी ===
कुणबी आणि तिलोरी कुणबी यांच्या प्रशासकीय वर्गीकरणात काळानुसार बदल झाले. मुंबई उच्च न्यायालयाने *Dattatraya s/o Ramrao Thorat v. State of Maharashtra* या प्रकरणात या बदलांचा ऐतिहासिक संदर्भ नोंदविला आहे. न्यायालयाच्या नोंदीनुसार २३ एप्रिल १९४२ च्या मुंबई शासनाच्या ठरावात ‘Kunbi (except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)’ यांचा एका वर्गात, तर ‘Kunbi Tilori in Ratnagiri district’ यांचा इतर मागास समुदायांच्या यादीत स्वतंत्रपणे समावेश करण्यात आला होता. ही स्थिती १९५०, १९५६ आणि १९६१ च्या संबंधित शासन ठरावांमध्येही कायम राहिली.<ref name="Thorat2002" />
न्यायालयाने पुढे नमूद केले आहे की १३ ऑक्टोबर १९६७ च्या महाराष्ट्र शासनाच्या ठरावाद्वारे स्वतंत्र इतर मागासवर्गीय यादी प्रसिद्ध करण्यात आली आणि त्यामध्ये ‘Kunbi caste’ ही अनुक्रमांक ८३वर समाविष्ट करण्यात आली. न्यायालयाच्या निरीक्षणानुसार १९६७पासून कुणबी जात संपूर्ण महाराष्ट्रासाठी इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समाविष्ट करण्यात आली.<ref name="Thorat2002" />
या ऐतिहासिक प्रशासकीय नोंदींवरून कुणबी आणि तिलोरी कुणबी यांच्या वर्गीकरणात कालानुसार आणि प्रदेशानुसार फरक राहिला असल्याचे दिसते. त्यामुळे आजच्या प्रशासकीय यादीचा अर्थ लावताना त्या काळातील शासन ठराव आणि संबंधित न्यायालयीन नोंदींचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे.
=== जात प्रमाणपत्र आणि जात वैधता पडताळणी ===
महाराष्ट्रात एखाद्या व्यक्तीच्या जात दाव्याची प्रशासकीय मान्यता ही केवळ आडनाव, सामाजिक संबोधन किंवा ऐतिहासिक साहित्याच्या आधारे निश्चित होत नाही. संबंधित व्यक्तीच्या जात दाव्याचा विचार करताना सक्षम प्राधिकरणाकडून जात प्रमाणपत्र देण्याची प्रक्रिया आणि त्यानंतर आवश्यक असल्यास जात वैधता पडताळणीची प्रक्रिया लागू होते.
जात वैधता पडताळणीच्या प्रक्रियेत जुन्या शासकीय अभिलेख, शैक्षणिक नोंदी, महसूल अभिलेख, जन्म-मृत्यू नोंदी आणि इतर संबंधित दस्तऐवजांचा पुरावा म्हणून विचार केला जाऊ शकतो. मात्र कोणता पुरावा ग्राह्य धरायचा आणि त्याचे पुराव्यात्मक महत्त्व किती आहे, हे संबंधित कायदे, नियम, शासन निर्णय आणि न्यायालयीन निर्णयांनुसार ठरते.
त्यामुळे ऐतिहासिक गॅझेटियर, जनगणना किंवा मानववंशशास्त्रीय ग्रंथांमध्ये ‘कुणबी’ किंवा संबंधित संज्ञेचा उल्लेख आढळणे आणि एखाद्या विशिष्ट व्यक्तीला आधुनिक प्रशासकीय प्रक्रियेत कुणबी जात प्रमाणपत्र किंवा जात वैधता मिळणे या दोन स्वतंत्र बाबी आहेत.
=== ऐतिहासिक नोंदी आणि आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरण ===
ब्रिटिशकालीन जनगणना, गॅझेटियर आणि मानववंशशास्त्रीय साहित्य हे कुणबी समाजाच्या ऐतिहासिक अभ्यासासाठी महत्त्वाचे स्रोत आहेत; मात्र ते स्वतःहून आधुनिक जात प्रमाणपत्र किंवा जात वैधतेचा अंतिम प्रशासकीय आधार ठरत नाहीत. आधुनिक प्रशासकीय प्रक्रियेत संबंधित कालखंडातील अधिकृत नोंदी, शासन निर्णय, लागू कायदे, नियम आणि सक्षम प्राधिकरण किंवा न्यायालयाचे निर्णय यांना महत्त्व प्राप्त होते.<ref name="Thorat2002" />
त्यामुळे कुणबी समाजाच्या आधुनिक प्रशासकीय स्थितीचा अभ्यास करताना ऐतिहासिक सामाजिक ओळख, ब्रिटिशकालीन वर्गीकरण आणि विद्यमान शासकीय वर्गीकरण यांच्यात स्पष्ट भेद ठेवणे आवश्यक आहे. महाराष्ट्र शासनाच्या विद्यमान यादीत कुणबीचा इतर मागासवर्गीय प्रवर्गात समावेश असला तरी एखाद्या व्यक्तीचा विशिष्ट जात दावा स्वतंत्र प्रशासकीय पडताळणीच्या अधीन राहतो.<ref name="MaharashtraOBC2025" />
=== लेवा कुणबी ===
‘लेवा कुणबी’ ही संज्ञा महाराष्ट्र शासनाच्या इतर मागासवर्गीयांच्या विद्यमान अधिकृत यादीत ‘कुणबी’ या नोंदीखाली समाविष्ट आहे. या नोंदीत ‘लेवा कुणबी’, ‘लेवा पाटील’ आणि ‘लेवा पाटीदार’ या संज्ञांचा समावेश करण्यात आला आहे.<ref name="MaharashtraOBC2025" />
या प्रशासकीय वर्गीकरणावरून लेवा कुणबीचा समावेश कुणबी या इतर मागासवर्गीय नोंदीखाली असल्याचे स्पष्ट होते. मात्र या प्रशासकीय समावेशावरून लेवा कुणबीची प्रादेशिक, सामाजिक किंवा ऐतिहासिक ओळख महाराष्ट्रातील इतर सर्व कुणबी समूहांशी पूर्णपणे समान आहे, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. प्रशासकीय वर्गीकरण आणि ऐतिहासिक सामाजिक ओळख या स्वतंत्र बाबी आहेत.
=== मराठा-कुणबी आणि कुणबी-मराठा ===
‘मराठा-कुणबी’ आणि ‘कुणबी-मराठा’ या संज्ञांना आधुनिक प्रशासकीय संदर्भात विशेष महत्त्व प्राप्त झाले आहे. मुंबई उच्च न्यायालयाने *Nitin s/o Mahadeorao Choudhary v. State of Maharashtra* या ११ ऑक्टोबर २०२३ रोजीच्या निर्णयात १ जून २००४ च्या महाराष्ट्र शासनाच्या निर्णयाचा संदर्भ देताना नमूद केले आहे की इतर मागासवर्गीयांच्या यादीतील अनुक्रमांक ८३वरील ‘कुणबी’ या नोंदीत पूर्वी ‘लेवा कुणबी’, ‘लेवा पाटील’ आणि ‘लेवा पाटीदार’ यांचा समावेश होता आणि १ जून २००४ च्या शासन निर्णयाद्वारे त्यात ‘मराठा-कुणबी’ आणि ‘कुणबी-मराठा’ यांचा समावेश करण्यात आला.<ref name="NitinChoudhary2023">{{cite web
|title=Nitin s/o Mahadeorao Choudhary v. State of Maharashtra
|website=Indian Kanoon
|date=11 October 2023
|url=https://indiankanoon.org/doc/61511559/
}}</ref>
या निर्णयात न्यायालयाने असेही नमूद केले की ७ सप्टेंबर २०२३ च्या शासन निर्णयाद्वारे मराठा-कुणबी आणि कुणबी-मराठा समाजातील व्यक्तींना जात प्रमाणपत्र देताना जुन्या दस्तऐवजांतील नोंदींची तपासणी करण्याची पद्धत निश्चित करण्यासाठी समिती स्थापन करण्यात आली होती. या समितीचा उद्देश संबंधित जुन्या अभिलेखांच्या तपासणीची पद्धत निश्चित करणे हा होता.<ref name="NitinChoudhary2023" />
मात्र अनुक्रमांक ८३मध्ये मराठा-कुणबी आणि कुणबी-मराठा यांचा प्रशासकीय समावेश झाला आहे, यावरून मराठा आणि कुणबी यांची ऐतिहासिक वंशपरंपरा किंवा सामाजिक ओळख सर्व काळात एकच होती, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. हा आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरणाचा विषय आहे.
=== तिलोरी कुणबी आणि तिल्लोरी कुणबी ===
‘तिलोरी कुणबी’ आणि ‘तिल्लोरी कुणबी’ या दोन्ही संज्ञांचा महाराष्ट्र शासनाच्या विद्यमान इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत ‘कुणबी’ या अनुक्रमांक ८३ च्या नोंदीखाली समावेश आहे.<ref name="MaharashtraOBC2025" />
तिलोरी कुणबीच्या प्रशासकीय इतिहासात रत्नागिरी जिल्ह्याचा विशेष संदर्भ आढळतो. मुंबई उच्च न्यायालयाने *Dattatraya s/o Ramrao Thorat v. State of Maharashtra* या २४ एप्रिल २००२ रोजीच्या निर्णयात २३ एप्रिल १९४२ च्या मुंबई शासनाच्या ठरावाचा संदर्भ देताना ‘Kunbi (Except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)’ आणि ‘Kunbi Tilori in Ratnagiri district’ यांचे त्या काळात वेगवेगळ्या प्रशासकीय वर्गांमध्ये वर्गीकरण करण्यात आल्याचे नमूद केले आहे. ही स्थिती १९५०, १९५६ आणि १९६१ च्या संबंधित शासन ठरावांमध्येही कायम राहिल्याचे न्यायालयाने नोंदविले आहे.<ref name="Thorat2002" />
त्याच निर्णयानुसार १३ ऑक्टोबर १९६७ रोजी महाराष्ट्र शासनाने स्वतंत्र इतर मागासवर्गीयांची यादी प्रसिद्ध केली आणि त्यामध्ये ‘कुणबी जात’ अनुक्रमांक ८३वर समाविष्ट करण्यात आली. न्यायालयाने नमूद केले आहे की त्यानंतर कुणबी जात संपूर्ण महाराष्ट्रासाठी इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समाविष्ट झाली.<ref name="Thorat2002" />
=== जात प्रमाणपत्र ===
महाराष्ट्रात जात प्रमाणपत्र देण्याची आणि त्याची वैधता पडताळण्याची प्रक्रिया कायद्याने नियमन केली जाते. जात प्रमाणपत्र हे सक्षम प्राधिकाऱ्याकडून दिले जाते, तर जात वैधतेचा दावा संबंधित जात पडताळणी समितीसमोर स्वतंत्रपणे तपासला जाऊ शकतो. या दोन्ही प्रक्रिया एकमेकांशी संबंधित असल्या तरी त्यांचे स्वरूप आणि अधिकारक्षेत्र वेगवेगळे आहेत.
जात दाव्याच्या पडताळणीमध्ये संबंधित व्यक्तीने सादर केलेल्या जुन्या शासकीय आणि इतर अभिलेखांचा विचार केला जाऊ शकतो. कोणते दस्तऐवज ग्राह्य धरावेत, त्यांचे पुराव्यात्मक महत्त्व किती आहे आणि जात दावा कशा प्रकारे सिद्ध करावा, हे लागू कायदे, नियम, शासन निर्णय आणि न्यायालयीन निर्णयांनुसार ठरते.
मुंबई उच्च न्यायालयाने *Dattatraya s/o Ramrao Thorat v. State of Maharashtra* या प्रकरणात जात दाव्याच्या पडताळणीसाठी सादर केलेल्या दस्तऐवजांचे पुराव्यात्मक महत्त्व तपासले आणि जात दावा सिद्ध करण्याची जबाबदारी दावेदारावर असल्याचे स्पष्ट केले.<ref name="Thorat2002" />
मराठा-कुणबी किंवा कुणबी-मराठा असा दावा करणाऱ्या व्यक्तींच्या संदर्भातही जुन्या अभिलेखांतील जातनोंदींच्या तपासणीला महत्त्व आहे. *Nitin s/o Mahadeorao Choudhary v. State of Maharashtra* या निर्णयात मुंबई उच्च न्यायालयाने संबंधित जुन्या महसूल अभिलेख, शाळेच्या नोंदी आणि इतर दस्तऐवजांची तपासणी करण्याच्या प्रशासकीय प्रक्रियेचा संदर्भ नोंदविला आहे.<ref name="NitinChoudhary2023" />
त्यामुळे ऐतिहासिक जनगणना, गॅझेटियर किंवा मानववंशशास्त्रीय ग्रंथामध्ये ‘कुणबी’, ‘तिलोरी कुणबी’ किंवा संबंधित संज्ञेचा उल्लेख आढळणे आणि एखाद्या विशिष्ट व्यक्तीचा आधुनिक प्रशासकीय जात दावा वैध ठरणे या दोन स्वतंत्र बाबी आहेत. आधुनिक जात प्रमाणपत्र आणि जात वैधता प्रक्रियेत संबंधित व्यक्तीच्या स्वतःच्या अभिलेखीय पुराव्यांचा आणि लागू कायदेशीर निकषांचा स्वतंत्रपणे विचार केला जातो.
=== जात वैधता पडताळणी ===
महाराष्ट्रात जात प्रमाणपत्राच्या वैधतेच्या पडताळणीसाठी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर संशोधन व प्रशिक्षण संस्थेच्या माध्यमातून जात प्रमाणपत्र पडताळणी माहिती प्रणाली (CCVIS) कार्यरत आहे. या प्रणालीद्वारे जात वैधता प्रमाणपत्रासाठी ऑनलाइन अर्ज करणे, अर्जाचा मागोवा घेणे आणि वैधता प्रमाणपत्राची ऑनलाइन पडताळणी करणे यांसारख्या सुविधा उपलब्ध आहेत.<ref name="CCVIS">{{cite web
|title=जात प्रमाणपत्र पडताळणी माहिती प्रणाली
|work=Caste Certificate Verification Information System (CCVIS)
|publisher=डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर संशोधन व प्रशिक्षण संस्था, महाराष्ट्र शासन
|url=https://www.bartievalidity.maharashtra.gov.in/
}}</ref>
जात वैधता पडताळणीच्या प्रक्रियेत अर्जदाराने सादर केलेल्या कागदपत्रांचा विचार केला जातो. अधिकृत मार्गदर्शिकेनुसार जात प्रमाणपत्रासोबत जन्मतारखेचा दाखला, अर्जदाराचा शाळा सोडल्याचा दाखला किंवा शाळेच्या नोंदवहीचा उतारा, वडिलांचा शाळा सोडल्याचा दाखला किंवा नोंदवहीचा उतारा आणि पितृकुळातील आजोबा किंवा वडिलांच्या सख्ख्या मोठ्या भावंडांच्या शाळेच्या नोंदी यांसारखी कागदपत्रे पुराव्याच्या स्वरूपात सादर करता येतात. उपलब्ध प्राथमिक कागदपत्रे नसल्यास जन्म-मृत्यू नोंदी, महसूल अभिलेख, जुने खरेदी-विक्री दस्तऐवज किंवा इतर समर्थक कागदपत्रांचा विचार केला जाऊ शकतो.<ref name="CCVISForm18">{{cite web
|title=Form No. 18 — Rule 14
|publisher=डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर संशोधन व प्रशिक्षण संस्था, महाराष्ट्र शासन
|url=https://www.bartievalidity.maharashtra.gov.in/ccvis_pdf/download/service/FORM%20No%2018-%20%5Brule-14%5D.pdf
}}</ref>
त्यामुळे जात वैधता पडताळणी ही केवळ जात प्रमाणपत्राची प्रशासकीय नोंद करण्याची प्रक्रिया नसून, जात दाव्याच्या समर्थनार्थ सादर केलेल्या कागदपत्रांची छाननी करणारी प्रक्रिया आहे. अर्जासोबत अर्जदार, त्याचे पितृकडील नातेवाईक आणि पूर्वज यांच्या जात नोंदी असलेली विविध प्राथमिक व दुय्यम कागदपत्रे सादर करता येतात; संबंधित जिल्हा जात प्रमाणपत्र पडताळणी समिती या कागदपत्रांची छाननी करून जात प्रमाणपत्राच्या वैधतेबाबत निर्णय घेते.<ref name="CCVISFAQ">{{cite web
|title=Frequently Asked Questions (FAQ’s)
|work=Caste Certificate Verification Information System (CCVIS)
|publisher=Dr. Babasaheb Ambedkar Research and Training Institute, Government of Maharashtra
|url=https://www.bartievalidity.maharashtra.gov.in/ccvis_pdf/FAQ/Frequently%20Asked%20Questions.pdf
|access-date=2026-09-11
}}</ref>
=== ऐतिहासिक कागदपत्रांचे महत्त्व ===
कुणबी किंवा मराठा-कुणबी दाव्यांच्या संदर्भात जुने महसूल अभिलेख, शैक्षणिक नोंदी, जन्म-मृत्यू नोंदी, जमीनविषयक दस्तऐवज आणि इतर शासकीय अभिलेखांना महत्त्व प्राप्त होते. महाराष्ट्रातील काही जिल्हा प्रशासनांनी मराठा-कुणबी आणि कुणबी-मराठा संदर्भातील जुन्या अभिलेखांचे संकलन करून ते सार्वजनिक केले आहे.
रायगड जिल्हा प्रशासनाच्या संकेतस्थळावर अलिबाग, उरण, कर्जत, खालापूर, तळा, पनवेल, पेण, पोलादपूर, महाड, माणगाव, मुरुड, म्हसळा, रोहा, श्रीवर्धन आणि सुधागड या तालुक्यांशी संबंधित कुणबी-मराठा दस्तऐवजांच्या स्वतंत्र याद्या उपलब्ध आहेत.<ref name="RaigadKunbiMarathaDocuments">{{cite web
|title=कुणबी-मराठा दस्तऐवज
|publisher=रायगड जिल्हा प्रशासन, महाराष्ट्र शासन
|url=https://raigad.gov.in/maratha-kunbi-documents/
}}</ref>
अशा अभिलेखांचे संकलन ऐतिहासिक नोंदींच्या उपलब्धतेचा मागोवा घेण्यासाठी उपयुक्त ठरते. मात्र एखाद्या जिल्हा किंवा तालुका प्रशासनाच्या संकेतस्थळावर विशिष्ट दस्तऐवज उपलब्ध आहे, एवढ्यावरून कोणत्याही व्यक्तीचा जात दावा वैध ठरतो असा निष्कर्ष काढता येत नाही. वैधतेचा निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकरण आणि लागू कायदेशीर प्रक्रियेनुसार घेतला जातो.
=== न्यायालयीन दृष्टिकोन ===
कुणबी जातदाव्यांशी संबंधित न्यायालयीन प्रकरणांमध्ये ऐतिहासिक शासन निर्णय, जात प्रमाणपत्र, जात पडताळणी समितीचे निष्कर्ष आणि उपलब्ध अभिलेखांचा विचार करण्यात आला आहे. *Dattatraya s/o Ramrao Thorat v. State of Maharashtra* या २४ एप्रिल २००२ रोजीच्या मुंबई उच्च न्यायालयाच्या निर्णयात कुणबी आणि तिलोरी कुणबी यांच्या ऐतिहासिक प्रशासकीय वर्गीकरणाचा संदर्भ देण्यात आला आहे. न्यायालयाने २३ एप्रिल १९४२ च्या शासन निर्णयातील वर्गीकरण तसेच त्यानंतरच्या शासन निर्णयांचा उल्लेख करून १३ ऑक्टोबर १९६७ च्या शासन निर्णयात ‘कुणबी जात’ इतर मागासवर्गीयांच्या यादीतील अनुक्रमांक ८३वर समाविष्ट झाल्याची नोंद केली आहे.<ref name="Thorat2002" />
* Nitin s/o Mahadeorao Choudhary v. State of Maharashtra* या ११ ऑक्टोबर २०२३ रोजीच्या निर्णयात मुंबई उच्च न्यायालयाने इतर मागासवर्गीयांच्या यादीतील अनुक्रमांक ८३ आणि त्यामध्ये मराठा-कुणबी व कुणबी-मराठा यांचा समावेश करण्यासंबंधीच्या १ जून २००४ च्या शासन निर्णयाची नोंद केली आहे.<ref name="NitinChoudhary2023" />
या न्यायालयीन नोंदींमधून कुणबी आणि संबंधित सामाजिक संज्ञांच्या आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरणात शासन निर्णय आणि अभिलेखीय पुराव्यांचे महत्त्व दिसून येते. तथापि प्रत्येक जातदाव्याचा निर्णय संबंधित व्यक्तीने सादर केलेल्या पुराव्यांच्या आणि लागू कायदेशीर निकषांच्या आधारे स्वतंत्रपणे केला जातो.
=== ऐतिहासिक आणि आधुनिक वर्गीकरणातील फरक ===
ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये वापरलेल्या ‘कुणबी’, ‘मराठा कुणबी’ किंवा संबंधित संज्ञा आणि आजच्या महाराष्ट्र शासनाच्या इतर मागासवर्गीयांच्या यादीतील ‘कुणबी’, ‘मराठा-कुणबी’, ‘कुणबी-मराठा’ आणि ‘तिलोरी कुणबी’ या नोंदी समान प्रशासकीय संदर्भातील नाहीत. ऐतिहासिक जनगणना ही लोकसंख्या आणि सामाजिक वर्गीकरणाचे साधन होती, तर आधुनिक शासकीय याद्या आरक्षण आणि संबंधित प्रशासकीय हक्कांच्या संदर्भातील कायदेशीर वर्गीकरणाचा भाग आहेत.
त्यामुळे एखाद्या जुन्या जनगणनेत ‘मराठा कुणबी’ अशी नोंद आढळल्यास त्या नोंदीच्या आधारे आजच्या काळातील एखाद्या व्यक्तीला आपोआप कुणबी या इतर मागासवर्गीय प्रवर्गाचे जात प्रमाणपत्र किंवा जात वैधता प्रमाणपत्र मिळते, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. त्याचप्रमाणे आधुनिक इतर मागासवर्गीयांच्या यादीतील नोंदींच्या आधारे त्या सामाजिक समूहाचा प्राचीन किंवा मध्ययुगीन इतिहास निश्चित करता येत नाही.
म्हणून कुणबी समाजाच्या इतिहासाचा अभ्यास करताना ऐतिहासिक जनगणना, गॅझेटियर आणि मानववंशशास्त्रीय साहित्य यांना त्यांच्या संबंधित ऐतिहासिक संदर्भात पाहणे, तर आधुनिक जात प्रमाणपत्र आणि जात वैधता पडताळणीसाठी लागू कायदे, नियम, शासन निर्णय, अधिकृत याद्या आणि न्यायालयीन निर्णय यांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे.
== आधुनिक कोकणातील कुणबी समाज आणि भविष्यातील आव्हाने ==
आधुनिक कोकणातील कुणबी समाजाच्या सामाजिक आणि आर्थिक स्थितीत शिक्षण, ग्रामीण-शहरी स्थलांतर, शेतीतील बदल, रोजगाराचे विविधीकरण, जमीनधारणा आणि ग्रामीण पायाभूत सुविधांमधील बदल यांचा प्रभाव दिसून येतो. मात्र या प्रक्रियांचे स्वरूप संपूर्ण कोकणातील कुणबी समाजात एकसमान होते असे उपलब्ध अभ्यासांवरून म्हणता येत नाही. स्थानिक पातळीवरील अभ्यासांमधून या बदलांचे वेगवेगळे स्वरूप स्पष्ट होते.
सावंतवाडी तालुक्यातील कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या तीन कालखंडांतील तुलनात्मक अभ्यासात दीर्घकालीन स्थलांतर, कुटुंबांच्या आर्थिक रणनीतीतील बदल, स्थलांतरितांच्या व्यवसायांचे विविधीकरण आणि शिक्षणासाठी होणाऱ्या स्थलांतराचे वाढते महत्त्व नोंदविण्यात आले आहे. या अभ्यासात १९६१ च्या तुलनेत २०१७मध्ये स्थलांतर अधिक व्यापक झाले असल्याचे तसेच रोजगारासाठीच्या स्थलांतराबरोबर शिक्षण आणि इतर कारणांसाठी स्थलांतराचे महत्त्व वाढल्याचे दिसून येते.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
कुंकेरीच्या या अभ्यासात शिक्षण आणि रोजगार यांमुळे स्थलांतराचे स्वरूप बदलल्याचे दिसते. १९६१मध्ये गावाबाहेरील स्थलांतर मुख्यतः रोजगाराशी संबंधित होते; २०१७ च्या अभ्यासात शिक्षणासाठी स्थलांतर करणाऱ्यांचे प्रमाणही लक्षणीय असल्याचे नोंदविण्यात आले. स्थलांतरितांच्या रोजगारातही बदल होऊन सरकारी सेवांबरोबर खासगी आणि अनौपचारिक क्षेत्रातील विविध व्यवसायांचा समावेश वाढल्याचे अभ्यासात नमूद आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
शेतीच्या स्वरूपातही स्थानिक पातळीवर बदल झाल्याचे कुंकेरीच्या दीर्घकालीन अभ्यासातून दिसते. १९६१मध्ये भात आणि नाचणी ही प्रमुख पिके होती; पुढील काळात काजूच्या लागवडीचा विस्तार झाला आणि २०१७पर्यंत काजू हे अनेक शेतकऱ्यांसाठी महत्त्वाचे पीक आणि उत्पन्नाचे साधन बनले होते. यावरून कोकणातील काही गावांमध्ये पारंपरिक अन्नपिकांपासून अधिक बाजाराभिमुख बागायती पिकांकडे झालेल्या बदलाचा स्थानिक नमुना दिसून येतो.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
जमीनधारणेच्या बाबतीतही स्थलांतरामुळे सर्वच पारंपरिक रचना बदलल्या असे आढळत नाही. कुंकेरीच्या अभ्यासात दीर्घकालीन मोठ्या प्रमाणातील स्थलांतर असूनही गावातील जातीय वितरण आणि जमीनमालकीच्या रचनेत काही महत्त्वपूर्ण सातत्य राहिल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. त्याच वेळी लहान जमीनधारणांचे प्रमाण वाढल्याचेही अभ्यासात दिसून येते.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
कोकणातील ग्रामीण परिवर्तनाचा अभ्यास करताना मात्र कुंकेरीसारख्या एका गावाच्या अनुभवाचे संपूर्ण कुणबी समाजावर किंवा संपूर्ण कोकणावर थेट सामान्यीकरण करणे योग्य ठरणार नाही. कुंकेरीचा अभ्यास हा विशिष्ट गावाच्या दीर्घकालीन सामाजिक, आर्थिक आणि लोकसंख्याशास्त्रीय बदलांचा अभ्यास आहे. त्यामुळे त्यातून व्यापक कोकणातील स्थलांतर, शिक्षण, जमीनधारणा किंवा कृषी परिवर्तनाच्या काही प्रक्रिया समजून घेता येतात; परंतु संपूर्ण कुणबी समाजासाठी एकसमान निष्कर्ष काढण्यासाठी अधिक व्यापक जातीनिहाय आणि प्रदेशनिहाय अभ्यास आवश्यक आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
आधुनिक कोकणातील कुणबी समाजाच्या भविष्यातील प्रश्नांचा विचार करताना शेतीची आर्थिक व्यवहार्यता, लहान होत जाणारी जमीनधारणा, कृषीबाह्य रोजगार, शिक्षणासाठी होणारे स्थलांतर, मुंबई आणि इतर शहरी केंद्रांशी असलेले संबंध तसेच ग्रामीण भागातील बदलती रोजगाररचना हे परस्परसंबंधित घटक मानावे लागतात. उपलब्ध अभ्यासांनुसार स्थलांतर हे ग्रामीण कुटुंबांसाठी केवळ लोकसंख्यात्मक बदलाचे साधन न राहता उत्पन्नाच्या विविध साधनांशी जोडलेली आर्थिक रणनीती बनले आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
कुणबी समाजाची स्वतंत्र आणि सातत्यपूर्ण आधुनिक जातीनिहाय लोकसंख्या उपलब्ध अधिकृत जनगणना आकडेवारीत प्रसिद्ध झालेली नसल्यामुळे या बदलांचे संपूर्ण कोकणातील कुणबी समाजासाठी अचूक लोकसंख्याशास्त्रीय प्रमाण निश्चित करणे शक्य नाही. त्यामुळे आधुनिक सामाजिक आणि आर्थिक स्थितीचा अभ्यास करताना जिल्हानिहाय जनगणना, ग्रामसर्वेक्षणे, दीर्घकालीन गाव-अभ्यास आणि उपलब्ध सामाजिक-आर्थिक संशोधन यांचा परस्परपूरक वापर करणे आवश्यक आहे.<ref name="DistrictCensusRatnagiri1961" /><ref name="VartakTumbeBhide2019" />
=== ग्रामीण लोकसंख्येतील घट ===
रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग जिल्ह्यांच्या २००१ आणि २०११ च्या जनगणना आकडेवारीत एकूण लोकसंख्येत घट झाल्याचे दिसून येते. रत्नागिरी जिल्ह्याची लोकसंख्या २००१मध्ये १६,९६,७७७ होती; ती २०११मध्ये १६,१५,०६९ झाली. या कालावधीत जिल्ह्याचा दशकातील लोकसंख्या बदल −४.८ टक्के होता. सिंधुदुर्ग जिल्ह्याची लोकसंख्या २००१मध्ये ८,६८,८२५ होती; ती २०११मध्ये ८,४९,६५१ झाली आणि दशकातील लोकसंख्या बदल −२.२ टक्के राहिला.<ref name="RatnagiriPopulation2011" /><ref name="SindhudurgPopulation2011" />
रत्नागिरी जिल्ह्यात ग्रामीण लोकसंख्येतील घट एकूण लोकसंख्येच्या घटेपेक्षा अधिक होती. २००१मध्ये जिल्ह्याची ग्रामीण लोकसंख्या १५,०४,५६८ होती; २०११मध्ये ती १३,५१,३४६ झाली. या कालावधीत ग्रामीण लोकसंख्येतील दशकातील बदल −१०.२ टक्के होता. त्याच वेळी शहरी लोकसंख्येत ३७.२ टक्क्यांची वाढ झाली. त्यामुळे जिल्ह्याच्या लोकसंख्याशास्त्रीय बदलात ग्रामीण भागातून शहरी भागाकडे झालेल्या लोकसंख्या संक्रमणाचा एक घटक दिसून येतो.<ref name="RatnagiriPopulation2011" />
सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातही ग्रामीण लोकसंख्येत घट झाली. २००१मध्ये जिल्ह्याची ग्रामीण लोकसंख्या ७,८६,५०६ होती; ती २०११मध्ये ७,४२,६४५ झाली. या कालावधीत ग्रामीण लोकसंख्येतील दशकातील बदल −५.६ टक्के होता, तर शहरी लोकसंख्येत ३० टक्क्यांची वाढ झाली.<ref name="SindhudurgPopulation2011" />
या आकडेवारीवरून रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग जिल्ह्यांमध्ये ग्रामीण लोकसंख्येतील घट आणि शहरी लोकसंख्येतील वाढ ही महत्त्वाची लोकसंख्याशास्त्रीय प्रक्रिया असल्याचे दिसते. मात्र या जिल्हास्तरीय बदलाला थेट कुणबी समाजाच्या लोकसंख्येतील घट म्हणून मांडता येत नाही, कारण उपलब्ध जनगणना आकडेवारी या संदर्भात कुणबी समाजाची स्वतंत्र सातत्यपूर्ण लोकसंख्या देत नाही.
=== तरुणांचे स्थलांतर ===
कोकणातील ग्रामीण लोकसंख्येतील बदल समजून घेण्यासाठी स्थलांतर हा महत्त्वाचा घटक आहे. सावंतवाडी तालुक्यातील कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या कालखंडांतील तुलनात्मक अभ्यासात दीर्घकालीन बाह्य स्थलांतरात लक्षणीय वाढ झाल्याचे आढळते. १९६१मध्ये २६ टक्के कुटुंबांनी कुटुंबातील किमान एका सदस्याच्या बाह्य स्थलांतराची नोंद केली होती; २०१७मध्ये हे प्रमाण ६० टक्क्यांपर्यंत पोहोचले. त्याच काळात बाहेर स्थलांतरित व्यक्तींचे एकूण लोकसंख्येतील प्रमाण ७ टक्क्यांवरून २५.५ टक्क्यांपर्यंत वाढले.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
१९६१ च्या कुंकेरी सर्वेक्षणात बाहेर स्थलांतरित झालेले ८३ जण सर्व पुरुष होते आणि त्यांचे स्थलांतर प्रामुख्याने रोजगारासाठी झाले होते. २०१७ च्या अभ्यासात बाहेर स्थलांतरितांमध्ये महिलांचाही समावेश वाढल्याचे आढळले. त्या वर्षी विवाहाव्यतिरिक्त कारणांनी स्थलांतरित झालेल्या महिलांमध्ये शिक्षण आणि रोजगार ही प्रमुख कारणे होती.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
या अभ्यासात स्थलांतराचे स्वरूपही बदलल्याचे दिसते. १९६१मध्ये स्थलांतर करणाऱ्या कुटुंबांमध्ये प्रामुख्याने एकच सदस्य बाहेर जात असे; २०१७मध्ये अनेक कुटुंबांतील दोन, तीन, चार किंवा त्याहून अधिक सदस्य स्थलांतरित झाले होते. त्यामुळे स्थलांतर हे काही कुटुंबांसाठी स्वतंत्र रोजगाराच्या साधनाऐवजी उत्पन्नाच्या विविध साधनांशी संबंधित व्यापक आर्थिक रणनीती बनल्याचे अभ्यासकांचे निरीक्षण आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
कुंकेरीच्या बाबतीत हा बदल स्पष्टपणे दिसत असला तरी कुंकेरी हे एक विशिष्ट गाव असल्यामुळे त्यातील स्थलांतराचे प्रमाण संपूर्ण कोकणातील किंवा संपूर्ण कुणबी समाजातील तरुणांच्या स्थलांतराचे थेट प्रतिनिधित्व करते असे मानता येत नाही. मात्र ग्रामीण कोकणातील दीर्घकालीन स्थलांतराच्या प्रक्रियेचा अभ्यास करण्यासाठी हा महत्त्वाचा स्थानिक पुरावा आहे.
=== शिक्षणासाठी शहरांकडे स्थलांतर ===
कोकणातील ग्रामीण भागातून शिक्षणासाठी बाहेर जाण्याचे महत्त्व कालांतराने वाढल्याचे कुंकेरीच्या दीर्घकालीन अभ्यासातून दिसून येते. १९६१ च्या ग्रामसर्वेक्षणात कुंकेरीतील स्थलांतर मुख्यतः रोजगाराशी संबंधित असल्याचे नोंदविले गेले होते. त्याउलट २०१७ च्या अभ्यासात बाहेर स्थलांतरित झालेल्या व्यक्तींमध्ये १८ टक्के स्थलांतर शिक्षणासाठी झाल्याचे आढळले.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
कुंकेरीमध्ये १९६१मध्ये प्राथमिक शिक्षणाची सुविधा उपलब्ध होती; पुढील दशकांत गावातील शैक्षणिक सुविधा वाढल्या. तरीही उच्च शिक्षणासाठी विद्यार्थ्यांना गावाबाहेर जावे लागत असल्याचे २०१७ च्या अभ्यासातून दिसून येते. त्यामुळे शिक्षण हे ग्रामीण भागातून बाहेर पडण्याच्या स्थलांतरातील स्वतंत्र कारण म्हणून अधिक महत्त्वाचे झाले असल्याचे या अभ्यासातून दिसते.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
शिक्षण आणि स्थलांतर यांच्यातील संबंध एकतर्फी नसल्याचेही या अभ्यासातून दिसते. उच्च शिक्षणामुळे शहरांमध्ये जाण्याच्या संधी वाढल्या, तर स्थलांतरामुळे शिक्षणाला भविष्यातील रोजगार आणि सामाजिक प्रगतीशी जोडलेले महत्त्व प्राप्त झाले. त्यामुळे कुंकेरीच्या बाबतीत शिक्षण हे स्थलांतराचे कारण तसेच स्थलांतरानंतरच्या आर्थिक संधींसाठी महत्त्वाचे साधन बनल्याचे दिसून येते.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
कुंकेरीच्या अनुभवावरून ग्रामीण कोकणातील शिक्षण आणि स्थलांतर यांच्यातील बदलता संबंध स्पष्ट होतो; मात्र या निरीक्षणाचे संपूर्ण कुणबी समाजावर किंवा संपूर्ण कोकणातील ग्रामीण तरुणांवर सार्वत्रिकीकरण करण्यासाठी अधिक व्यापक प्रदेशनिहाय आणि जातीनिहाय अभ्यास आवश्यक आहे.
=== वृद्ध होत जाणारी ग्रामीण लोकसंख्या ===
कोकणातील काही ग्रामीण भागांमध्ये तरुणांचे शिक्षण आणि रोजगारासाठी बाहेर स्थलांतर वाढल्यामुळे ग्रामीण लोकसंख्येच्या वयोरचनेत बदल होण्याची शक्यता निर्माण झाली आहे. रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग जिल्ह्यांच्या २००१–२०११ च्या जनगणना आकडेवारीत एकूण लोकसंख्येत घट झाल्याचे दिसते. त्याच काळात दोन्ही जिल्ह्यांमध्ये ग्रामीण लोकसंख्येतील घटही नोंदविण्यात आली आहे.<ref name="RatnagiriPopulation2011" /><ref name="SindhudurgPopulation2011" />
मात्र या जिल्हास्तरीय लोकसंख्याशास्त्रीय बदलांवरून कुणबी समाजातील वृद्ध लोकसंख्येचे प्रमाण निश्चित करता येत नाही. कुणबी समाजासाठी स्वतंत्र आणि सातत्यपूर्ण जिल्हानिहाय वयोरचना उपलब्ध नसल्यामुळे हा विषय व्यापक ग्रामीण कोकणातील लोकसंख्याशास्त्रीय बदलांच्या संदर्भात पाहणे अधिक योग्य ठरते.
=== शेतीवरील अवलंबित्वातील बदल ===
ग्रामीण भागातील स्थलांतर, रोजगाराचे वैविध्य आणि शिक्षणाच्या वाढत्या संधी यांचा शेतीवरील कुटुंबांच्या अवलंबित्वावर परिणाम झाल्याचे काही दीर्घकालीन ग्रामअभ्यासांत दिसून येते. कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या तीन कालखंडांच्या तुलनात्मक अभ्यासात कुटुंबांच्या उपजीविकेच्या स्वरूपात लक्षणीय बदल झाल्याचे आढळते. १९६१मध्ये ७५.९८ टक्के कुटुंबे पूर्णपणे शेतीवर अवलंबून होती; २०१७मध्ये हे प्रमाण ३९.६ टक्क्यांपर्यंत कमी झाले.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
कुंकेरीच्या अभ्यासात या बदलाच्या पार्श्वभूमीवर स्थलांतर, गैर-कृषी रोजगार, शिक्षण आणि कुटुंबांच्या बदलत्या आर्थिक रणनीतींचा विचार करण्यात आला आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
या आकडेवारीचा अर्थ कुंकेरीतील शेती पूर्णपणे लुप्त झाली असा नाही. उलट, कुटुंबांच्या उपजीविकेत शेतीबरोबरच इतर उत्पन्नस्रोतांचे महत्त्व वाढले असल्याचे या दीर्घकालीन अभ्यासातून दिसते. कुंकेरीचा अनुभव संपूर्ण कोकणातील किंवा संपूर्ण कुणबी समाजातील कृषीस्थितीचे थेट प्रतिनिधित्व करतो असे मात्र मानता येत नाही.
=== कृषी जमिनीच्या वापरातील बदल ===
ग्रामीण कुटुंबांचे स्थलांतर आणि शेतीवरील अवलंबित्वातील घट यामुळे काही गावांमध्ये कृषी जमिनीच्या वापराच्या पद्धतीत बदल होऊ शकतो. मात्र उपलब्ध कुंकेरी अभ्यासाच्या आधारे संपूर्ण कोकणातील कृषी जमीन मोठ्या प्रमाणावर पडीत पडली आहे असा सर्वसाधारण निष्कर्ष काढता येत नाही.
कोकणातील जमीनवापर हा गाव, भौगोलिक परिस्थिती, सिंचनाची उपलब्धता, पिकांचा प्रकार, बाजारपेठेशी असलेला संबंध आणि कुटुंबांच्या आर्थिक परिस्थितीनुसार बदलू शकतो. त्यामुळे ''पडीत जमीन'' हा स्वतंत्र लोकसंख्याशास्त्रीय निष्कर्ष म्हणून न मांडता कृषी परिवर्तनाच्या व्यापक प्रक्रियेतील संभाव्य घटक म्हणून पाहणे अधिक योग्य ठरते.
=== गावांची सामाजिक रचना आणि स्थलांतर ===
दीर्घकालीन स्थलांतरामुळे ग्रामीण गावांच्या सामाजिक आणि आर्थिक रचनेत बदल होऊ शकतात. कुंकेरीच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या कालखंडांतील अभ्यासात मोठ्या प्रमाणावर बाह्य स्थलांतर झाले असतानाही गावातील जातीय रचना आणि जमीनधारणेच्या काही बाबींमध्ये सातत्य राहिल्याचे आढळते.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
या अभ्यासातून असेही दिसते की स्थलांतरामुळे गावाशी असलेले संबंध पूर्णपणे तुटलेले नसतात. बाहेर स्थलांतरित झालेले कुटुंबीय आणि गावातील कुटुंब यांच्यात आर्थिक व सामाजिक संबंध कायम राहू शकतात. त्यामुळे स्थलांतराचा परिणाम केवळ गावाची लोकसंख्या कमी होण्यापुरता मर्यादित न राहता कुटुंबांची उपजीविका, जमीनधारणा, रोजगार आणि गावाशी असलेल्या संबंधांच्या स्वरूपातही दिसून येऊ शकतो.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
त्यामुळे ''कोकणातील गावे ओस पडत आहेत'' असा सार्वत्रिक निष्कर्ष काढण्याऐवजी काही ग्रामीण भागांमध्ये लोकसंख्या घट, बाह्य स्थलांतर, शेतीवरील अवलंबित्वातील बदल आणि गावाबाहेर राहणाऱ्या कुटुंबीयांशी कायम राहिलेले आर्थिक-सामाजिक संबंध या परस्परसंबंधित प्रक्रियांचा अभ्यास करणे अधिक योग्य ठरते.
=== रोजगाराच्या संधींचे आव्हान ===
ग्रामीण भागातील रोजगाररचनेत झालेला बदल हा आधुनिक कोकणासमोरील महत्त्वाचा सामाजिक आणि आर्थिक प्रश्न आहे. कुंकेरी गावाच्या दीर्घकालीन अभ्यासातून शेतीवरील अवलंबित्व कमी होत असताना गैर-कृषी उत्पन्नाच्या स्रोतांचे महत्त्व वाढल्याचे दिसून येते. या प्रक्रियेत स्थलांतर, शिक्षण आणि रोजगाराच्या बदलत्या संधी यांचा परस्परसंबंध आढळतो.<ref name="VartakMigrationEducation2020">{{cite journal
|last=Vartak
|first=Kalyani
|title=Migration and Education in Regions with a Culture of Migration: Observations from Kunkeri Village, Konkan, Maharashtra
|journal=Journal of Migration Affairs
|volume=2
|issue=2
|year=2020
|pages=83–99
}}</ref>
रत्नागिरी जिल्ह्याच्या औद्योगिक विकासासंदर्भातील महाराष्ट्र शासनाच्या माहितीत फळप्रक्रिया, मत्स्यव्यवसाय आणि इतर उद्योगांबरोबर आंबा, बहुफळ प्रक्रिया आणि मत्स्यव्यवसायाशी संबंधित औद्योगिक समूहांची क्षमता नमूद करण्यात आली आहे.<ref name="RatnagiriIndustrialEcosystem2024">{{cite web
|title=Ratnagiri District Industrial Ecosystem
|publisher=Industry Department, Government of Maharashtra
|year=2024
|url=https://industry.maharashtra.gov.in/sites/default/files/2025-09/ignite-mh-booklet_2024.pdf
}}</ref>
या पार्श्वभूमीवर कृषी उत्पादनावर आधारित प्रक्रिया उद्योग, मत्स्यव्यवसाय, पर्यटन, ग्रामीण उद्योग आणि इतर बिगर-कृषी रोजगाराच्या संधी ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या विविधीकरणाशी संबंधित ठरू शकतात. मात्र या क्षेत्रांच्या विस्ताराचा कुणबी समाजावर स्वतंत्र आणि समान परिणाम झाला आहे असा निष्कर्ष उपलब्ध स्रोतांवरून काढता येत नाही.
=== आरोग्य, वाहतूक आणि इतर पायाभूत सुविधा ===
ग्रामीण भागातील सामाजिक आणि आर्थिक परिवर्तनाचा संबंध आरोग्य, शिक्षण, वाहतूक, पिण्याचे पाणी, वीज, दळणवळण आणि बँकिंग यांसारख्या पायाभूत सुविधांच्या उपलब्धतेशीही आहे. रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग जिल्ह्यांच्या २०११ च्या जिल्हा जनगणना हस्तपुस्तिकांमध्ये गावनिहाय शैक्षणिक संस्था, वैद्यकीय सुविधा, पिण्याचे पाणी, वाहतूक, दळणवळण, वीज आणि इतर नागरी सुविधांची नोंद करण्यात आली आहे.<ref name="DistrictCensusRatnagiri2011">{{cite report
|title=Census of India 2011: District Census Handbook, Ratnagiri
|publisher=Directorate of Census Operations, Maharashtra
|year=2014
}}</ref><ref name="DistrictCensusSindhudurg2011">{{cite report
|title=Census of India 2011: District Census Handbook, Sindhudurg
|publisher=Directorate of Census Operations, Maharashtra
|year=2014
}}</ref>
या सुविधांची उपलब्धता आणि त्यातील प्रादेशिक फरक ग्रामीण लोकसंख्येच्या जीवनमान, शिक्षण, आरोग्यसेवा आणि रोजगाराच्या संधींवर परिणाम करणाऱ्या व्यापक घटकांपैकी एक आहेत. त्यामुळे कोकणातील ग्रामीण विकासाचा अभ्यास करताना केवळ रस्ते, वीज किंवा पाणीपुरवठा यांचा स्वतंत्र विचार न करता शिक्षण, आरोग्य, वाहतूक, दळणवळण, बँकिंग आणि बाजारपेठेपर्यंत पोहोच या सुविधांच्या एकत्रित उपलब्धतेचा विचार करणे आवश्यक ठरते.<ref name="DistrictCensusRatnagiri2011" /><ref name="DistrictCensusSindhudurg2011" />
=== डिजिटल दळणवळण आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्था ===
डिजिटल दळणवळणाच्या विस्तारामुळे ग्रामीण भागातील शिक्षण, शासकीय सेवा, बँकिंग, बाजारपेठ, व्यवसाय आणि माहितीच्या उपलब्धतेमध्ये बदल होऊ शकतो. इंटरनेट आणि डिजिटल साधनांचा वापर कृषी उत्पादनाच्या बाजारभावाची माहिती मिळविणे, ग्राहकांशी थेट संपर्क साधणे, वस्तू व सेवांचे विपणन करणे आणि विविध शासकीय सेवांपर्यंत पोहोचणे यांसाठी केला जाऊ शकतो. मात्र या सुविधांचा प्रभाव इंटरनेटची उपलब्धता, डिजिटल साक्षरता आणि स्थानिक पातळीवरील पायाभूत सुविधांवर अवलंबून राहतो.
महाराष्ट्र शासनाच्या ग्रामीण विकास आणि पंचायत राज विभागाच्या विविध योजनांमध्ये ग्रामीण पायाभूत सुविधा, स्वयंरोजगार, कौशल्यविकास आणि ग्रामीण आर्थिक विकासाशी संबंधित उपक्रमांचा समावेश आहे.<ref name="MaharashtraRuralDevelopmentSchemes">{{cite web
|title=योजना
|publisher=ग्रामविकास आणि पंचायत राज विभाग, महाराष्ट्र शासन
|url=https://rdd.maharashtra.gov.in/en/
}}</ref>
ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या संदर्भात डिजिटल साधनांचा वापर वाढल्यास कृषी, पर्यटन, लघुउद्योग आणि सेवा क्षेत्रांना बाजारपेठेशी जोडण्याच्या नवीन शक्यता निर्माण होऊ शकतात. मात्र कोकणातील कुणबी समाजाच्या बाबतीत डिजिटल दळणवळणामुळे झालेला स्वतंत्र सामाजिक किंवा आर्थिक परिणाम दर्शविणारी पुरेशी जातीनिहाय आकडेवारी उपलब्ध नसल्यामुळे हा विषय व्यापक ग्रामीण कोकणाच्या संदर्भात पाहणे अधिक योग्य ठरते.
=== कृषीमालाचे मूल्यवर्धन ===
कोकणातील कृषीव्यवस्थेत भात, नाचणी, कुळीथ, तूर, वाल, नारळ, सुपारी, आंबा, फणस, काजू आणि कोकम यांसारख्या विविध पिकांचे उत्पादन आढळते. महाराष्ट्र शासनाच्या भूजल सर्वेक्षण आणि विकास यंत्रणेच्या कोकणविषयक माहितीत या पिकांचा प्रादेशिक कृषी उत्पादनाच्या संदर्भात उल्लेख करण्यात आला आहे.<ref name="GSDAKonkan">{{cite web
|title=कोकण प्रदेश
|publisher=भूजल सर्वेक्षण आणि विकास यंत्रणा, महाराष्ट्र शासन
|url=https://gsda.maharashtra.gov.in/en-kokan/
}}</ref>
कृषीमालाचे मूल्यवर्धन करण्यासाठी प्रक्रिया, प्रतवारी, पॅकेजिंग, साठवण, शीतसाखळी आणि बाजारपेठेशी थेट संपर्क यांसारख्या उपायांचा उपयोग केला जाऊ शकतो. महाराष्ट्राच्या कृषी निर्यातविषयक धोरणात्मक दस्तऐवजांमध्ये कोकणातील काजू प्रक्रिया केंद्रे, फळप्रक्रिया सुविधा, शीतसाखळी, पॅकगृहे तसेच आंबा आणि काजूसारख्या उत्पादनांसाठी निर्यातक्षम पायाभूत सुविधांच्या विकासाचा उल्लेख करण्यात आला आहे.<ref name="AgriculturalExportsMaharashtra">{{cite web
|title=Enlarging Agricultural Exports
|publisher=कृषी विभाग, महाराष्ट्र शासन
|url=https://krishi.maharashtra.gov.in/Site/Upload/Pdf/Publications/AgrilExports.pdf
}}</ref>
अशा मूल्यवर्धन प्रक्रियेमुळे कृषी उत्पादनाच्या प्राथमिक विक्रीपलीकडे प्रक्रिया, पॅकेजिंग, वाहतूक, विपणन आणि विक्री या क्षेत्रांमध्ये आर्थिक उपक्रम निर्माण होऊ शकतात. मात्र त्याचा प्रत्यक्ष लाभ स्थानिक उत्पादक, शेतकरी संस्था किंवा ग्रामीण उद्योजकांना किती प्रमाणात मिळतो हे प्रदेश, उत्पादन आणि बाजारपेठेच्या परिस्थितीनुसार बदलू शकते.
=== आंबा, काजू, कोकम आणि भात प्रक्रिया उद्योग ===
कोकणातील फळे आणि इतर कृषी उत्पादनांवर आधारित प्रक्रिया उद्योगांना स्थानिक कृषी अर्थव्यवस्थेच्या विविधीकरणामध्ये महत्त्व प्राप्त झाले आहे. महाराष्ट्र शासनाच्या उद्योग संचालनालयाच्या सूक्ष्म आणि लघु उद्योग समूह विकास कार्यक्रमाच्या माहितीनुसार रत्नागिरीतील आंबा प्रक्रिया समूह आणि सिंधुदुर्गमधील काजू प्रक्रिया समूह यांचा अशा औद्योगिक समूहांमध्ये समावेश करण्यात आला आहे.<ref name="MSECDP-Ratnagiri-Sindhudurg">{{cite web
|title=Investor's Guide — Micro & Small Enterprises-Cluster Development Programme (MSE-CDP)
|publisher=Directorate of Industries, Government of Maharashtra
|url=https://di.maharashtra.gov.in/_layouts/15/doistaticsite/English/investors_guide_mse_cdp.html
}}</ref>
कृषी प्रक्रिया उद्योगांमुळे उत्पादनानंतरच्या टप्प्यांमध्ये प्रक्रिया, प्रतवारी, पॅकेजिंग, साठवण, वाहतूक आणि विपणन यांसारख्या आर्थिक क्रियांना चालना मिळू शकते. त्यामुळे अशा उद्योगांचा ग्रामीण रोजगार आणि स्थानिक उद्योजकतेशी संबंध निर्माण होऊ शकतो. शेतकरी उत्पादक संस्था, सहकारी संस्था, महिला बचतगट, लघुउद्योग आणि स्थानिक उद्योजक यांचा सहभाग या प्रक्रियेत महत्त्वाचा ठरू शकतो; मात्र या सर्व घटकांच्या प्रत्यक्ष सहभागाचे प्रमाण प्रदेशानुसार बदलते.
=== पर्यटन आणि कृषी-पर्यटन ===
कोकणातील समुद्रकिनारे, डोंगर, किल्ले, मंदिरे, पारंपरिक घरे, स्थानिक संस्कृती आणि कृषी जीवन यांमुळे ग्रामीण पर्यटनाच्या विकासाला प्रादेशिक आधार मिळतो. महाराष्ट्र शासनाच्या ग्रामविकास आणि पंचायत राज विभागाने कोकण ग्रामीण पर्यटन विकास कार्यक्रम राबविला असून त्यामध्ये ग्रामीण भागातील रोजगार व स्वयंरोजगाराच्या संधी, पर्यटनाशी संबंधित पायाभूत सुविधा आणि गावांच्या विकासाला प्रोत्साहन देण्याचा उद्देश नमूद करण्यात आला आहे.<ref name="KonkanRuralTourism">{{cite web
|title=कोकण ग्रामीण पर्यटन विकास कार्यक्रम
|publisher=ग्रामविकास आणि पंचायत राज विभाग, महाराष्ट्र शासन
|url=https://rdd.maharashtra.gov.in/scheme/%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A4%A3-%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A3-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%9F%E0%A4%A8-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE/
}}</ref>
महाराष्ट्राच्या कृषी-पर्यटन धोरणामध्ये ग्रामीण विकास, कृषीमालासाठी बाजारपेठ निर्माण करणे, कृषीशी संबंधित पूरक व्यवसायांना प्रोत्साहन देणे आणि ग्रामीण महिला व युवकांसाठी रोजगाराच्या संधी निर्माण करणे यांसारख्या उद्दिष्टांचा समावेश आहे. शेतकरी आणि कृषी सहकारी संस्थांना कृषी-पर्यटन केंद्रांच्या विकासासाठी पात्र घटक म्हणूनही नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="MaharashtraAgriTourismPolicy">{{cite web
|title=Agri Tourism Policy, 2016
|publisher=Maharashtra Institution for Transformation (MITRA), Government of Maharashtra
|url=https://mahaniti.mahamitra.org/resources/policies
}}</ref>
कृषी-पर्यटनामुळे शेती, निवास, स्थानिक अन्नपदार्थ, ग्रामीण संस्कृती आणि पर्यटनसेवा यांच्यात आर्थिक संबंध निर्माण होऊ शकतात. तथापि अशा उपक्रमांचा विकास सर्व गावांमध्ये किंवा सर्व सामाजिक समूहांमध्ये समान प्रमाणात झाला आहे असे उपलब्ध स्रोतांवरून म्हणता येत नाही. त्यामुळे कुणबी समाजाच्या संदर्भात कृषी-पर्यटनाचा अभ्यास करताना स्थानिक पातळीवरील प्रत्यक्ष पुरावे स्वतंत्रपणे तपासणे आवश्यक आहे.
=== सहकार आणि ग्रामीण उद्योजकता ===
ग्रामीण कोकणातील कृषी आणि स्थानिक अर्थव्यवस्थेच्या विकासात सहकारी संस्था, शेतकरी उत्पादक संस्था, महिला बचतगट आणि लघुउद्योग यांसारख्या सामूहिक आर्थिक संस्थांना महत्त्व प्राप्त होऊ शकते. कृषीमालाची सामूहिक खरेदी, प्रक्रिया, साठवण, प्रतवारी, पॅकेजिंग आणि विक्री यांमुळे उत्पादकांना बाजारपेठेशी अधिक थेट संबंध प्रस्थापित करण्याच्या संधी निर्माण होऊ शकतात.
रत्नागिरी जिल्ह्याच्या औद्योगिक विकासासंदर्भातील महाराष्ट्र शासनाच्या माहितीत आंबा, बहुफळ प्रक्रिया आणि मत्स्यव्यवसायाशी संबंधित औद्योगिक समूहांचा उल्लेख करण्यात आला आहे. अशा समूहाधारित विकासामुळे स्थानिक कृषी व मत्स्य उत्पादनांना प्रक्रिया, मूल्यवर्धन आणि बाजारपेठेशी जोडण्याची संधी निर्माण होऊ शकते.<ref name="RatnagiriIndustrialEcosystem2024" />
या पार्श्वभूमीवर सहकार आणि स्थानिक उद्योजकता ही ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या विविधीकरणातील संभाव्य साधने मानता येतात. मात्र अशा संस्थांचा प्रत्यक्ष विस्तार आणि त्याचा कुणबी समाजावर होणारा परिणाम हा प्रदेश, उत्पादन, स्थानिक संस्था आणि आर्थिक परिस्थितीनुसार बदलू शकतो.
=== गावाकडे आर्थिक संसाधने आणि कौशल्ये परत येण्याची शक्यता ===
कोकणातील दीर्घकालीन स्थलांतरामुळे अनेक ग्रामीण कुटुंबांचे आर्थिक संबंध गाव आणि शहर या दोन्ही ठिकाणांशी जोडले गेले आहेत. कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या कालखंडांतील अभ्यासातून स्थलांतरित व्यक्ती आणि त्यांच्या मूळ गावामधील संबंध कायम राहिल्याचे दिसून येते. स्थलांतरामुळे कुटुंबांच्या उत्पन्नाच्या स्रोतांमध्ये आणि आर्थिक रणनीतींमध्येही बदल झाले.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
ग्रामीण आणि शहरी भागांतील अशा संबंधांमुळे स्थलांतरितांकडून कुटुंबांना आर्थिक मदत मिळणे, गावातील मालमत्ता आणि शेतीशी संबंध कायम राहणे तसेच शिक्षण आणि रोजगाराच्या माध्यमातून नवीन अनुभव प्राप्त होणे यांसारख्या प्रक्रिया घडू शकतात. तथापि शिक्षण, तांत्रिक कौशल्य, व्यवस्थापनाचा अनुभव किंवा उद्योजकीय क्षमता प्रत्यक्षपणे गावातील अर्थव्यवस्थेत किती प्रमाणात परत येतात याबाबत संपूर्ण कोकणासाठी स्वतंत्र आणि पुरेशी सांख्यिक माहिती उपलब्ध नाही.
त्यामुळे स्थलांतराकडे केवळ ग्रामीण लोकसंख्येतील घट म्हणून न पाहता गाव आणि शहर यांच्यातील दीर्घकालीन आर्थिक व सामाजिक संबंधांच्या संदर्भात पाहणे अधिक व्यापक ठरते.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
=== भविष्यातील संभाव्य विकासदिशा ===
कोकणातील ग्रामीण समुदायांच्या भविष्यातील आर्थिक विकासासाठी शेती आणि शेतीबाहेरील उत्पन्नस्रोत यांचा परस्परसंबंध विचारात घेणे आवश्यक ठरते. आंबा, काजू, कोकम, भात आणि इतर कृषी उत्पादनांचे मूल्यवर्धन, कृषी प्रक्रिया उद्योग, शीतसाखळी, पॅकेजिंग, स्थानिक ब्रँड, मत्स्यव्यवसाय, ग्रामीण पर्यटन आणि कृषी-पर्यटन यांसारख्या क्षेत्रांमध्ये विकासाच्या संधी उपलब्ध होऊ शकतात.<ref name="AgriculturalExportsMaharashtra" /><ref name="MSECDP-Ratnagiri-Sindhudurg" />
महाराष्ट्र शासनाच्या कोकण ग्रामीण पर्यटन विकास कार्यक्रमामध्ये ग्रामीण भागातील रोजगार आणि स्वयंरोजगाराच्या संधी, पर्यटनविषयक पायाभूत सुविधा आणि गावांच्या विकासाला प्रोत्साहन देण्याचा उद्देश नमूद करण्यात आला आहे.<ref name="KonkanRuralTourism" />
कृषी उत्पादनाचे मूल्यवर्धन, स्थानिक प्रक्रिया उद्योग, सहकारी संस्था, ग्रामीण पर्यटन, कृषी-पर्यटन, मत्स्यव्यवसाय आणि इतर बिगर-कृषी उपक्रम यांचा विकास झाल्यास ग्रामीण अर्थव्यवस्थेचे विविधीकरण होण्याची शक्यता आहे. मात्र या संभाव्य विकासदिशांचा प्रत्यक्ष परिणाम स्थानिक पायाभूत सुविधा, बाजारपेठ, भांडवल, कौशल्ये, संस्थात्मक क्षमता आणि स्थानिक सामाजिक-आर्थिक परिस्थितीवर अवलंबून राहील.
या संदर्भात कुणबी समाजाचा आधुनिक आर्थिक इतिहास पाहताना पारंपरिक शेती, स्थलांतरातून निर्माण झालेले गाव-शहर संबंध, शिक्षणामुळे वाढलेल्या रोजगाराच्या संधी आणि बदलती ग्रामीण अर्थव्यवस्था या घटकांचा एकत्रित विचार करणे आवश्यक आहे. उपलब्ध स्रोत मात्र संपूर्ण कोकणातील कुणबी समाजासाठी या विकासदिशांचा स्वतंत्र परिणाम निश्चित करीत नाहीत.
=== भविष्यातील आव्हाने ===
आधुनिक कोकणातील ग्रामीण समाजासमोरील आव्हाने लोकसंख्याशास्त्रीय बदलांपुरती मर्यादित नाहीत. ग्रामीण भागातून शिक्षण आणि रोजगारासाठी होणारे स्थलांतर, शेतीवरील आर्थिक अवलंबित्वातील बदल, जमिनीचे तुकडीकरण, स्थानिक रोजगाराच्या मर्यादा, उच्च शिक्षणासाठी शहरी केंद्रांवरील अवलंबित्व तसेच आरोग्य, वाहतूक आणि डिजिटल दळणवळणाच्या सुविधांतील प्रादेशिक फरक हे परस्परसंबंधित घटक आहेत. कुंकेरीच्या दीर्घकालीन अभ्यासातून स्थलांतर, शिक्षण आणि रोजगाराच्या बदलत्या स्वरूपाचा ग्रामीण कुटुंबांच्या आर्थिक जीवनावर परिणाम झाल्याचे दिसून येते.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
दुसरीकडे कोकणामध्ये कृषी, बागायती, मत्स्यव्यवसाय, पर्यटन आणि स्थानिक कृषी उत्पादनांवर आधारित प्रक्रिया उद्योगांच्या विकासाच्या शक्यता आहेत. महाराष्ट्र शासनाच्या विविध कार्यक्रमांमध्ये ग्रामीण पर्यटन, कृषी-पर्यटन आणि औद्योगिक समूहांच्या विकासाला प्रोत्साहन देण्याचा उल्लेख आढळतो.<ref name="KonkanRuralTourism" /><ref name="MSECDP-Ratnagiri-Sindhudurg" />
या पार्श्वभूमीवर ग्रामीण अर्थव्यवस्थेचे विविधीकरण, स्थानिक रोजगाराच्या संधी, कृषीमालाचे मूल्यवर्धन आणि ग्रामीण पायाभूत सुविधांचा विकास हे कोकणाच्या भविष्यातील महत्त्वाचे विकासविषय ठरू शकतात. मात्र या प्रक्रियांचा कुणबी समाजावर स्वतंत्र आणि समान परिणाम होईल असे उपलब्ध स्रोतांवरून निश्चितपणे म्हणता येत नाही.
=== भविष्याचा प्रश्न : स्थलांतर थांबविणे की गावाशी नाते बदलणे? ===
कोकणातील ग्रामीण समाजाच्या भविष्यातील बदलांचा विचार करताना स्थलांतराकडे केवळ लोकसंख्या घटण्याच्या प्रक्रियेच्या रूपात पाहणे पुरेसे ठरत नाही. शिक्षण, रोजगार आणि व्यवसायासाठी स्थलांतर करणे ही ग्रामीण कुटुंबांच्या आर्थिक रणनीतींचा एक भाग असू शकते. त्यामुळे स्थलांतरित व्यक्तींचे मूळ गावाशी असलेले आर्थिक, सामाजिक आणि कौटुंबिक संबंध यांचाही विचार करणे आवश्यक ठरते.
कुंकेरीच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या कालखंडांतील तुलनात्मक अभ्यासातून मोठ्या प्रमाणावर बाह्य स्थलांतर झाले असतानाही गावातील काही सामाजिक रचना आणि जमीनधारणेच्या पद्धतींमध्ये सातत्य राहिल्याचे दिसून येते. त्याचबरोबर स्थलांतरित कुटुंबांचे गावाशी असलेले संबंध कायम राहिल्याचेही अभ्यासात नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
या दृष्टिकोनातून ग्रामीण आणि शहरी भागांतील संबंध हे परस्परविरोधी न मानता परस्परावलंबी स्वरूपाचे असू शकतात. शहरांमध्ये स्थायिक झालेल्या कुटुंबांचे गावातील जमीन, घर, कुटुंबीय आणि सामाजिक संस्थांशी संबंध कायम राहू शकतात. त्याचप्रमाणे स्थलांतरातून प्राप्त उत्पन्न, शिक्षण आणि अनुभव यांचा काही प्रमाणात ग्रामीण कुटुंबांच्या आर्थिक जीवनाशी संबंध राहू शकतो.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
त्यामुळे कोकणातील ग्रामीण समाजाच्या भविष्यातील विकासाचा विचार करताना ''गावात राहणे'' आणि ''गाव सोडणे'' या दोन परस्परविरोधी पर्यायांऐवजी ग्रामीण आणि शहरी अर्थव्यवस्थांमधील बदलते संबंध हा एक महत्त्वाचा अभ्यासविषय ठरतो. शेती, कृषी प्रक्रिया, पर्यटन, डिजिटल सेवा आणि स्थानिक उद्योजकता यांसारख्या क्षेत्रांचा विकास झाल्यास ग्रामीण भाग आणि स्थलांतरित लोकसंख्या यांच्यातील आर्थिक संबंधांना नवीन स्वरूप मिळण्याची शक्यता आहे. मात्र अशा संभाव्य परिणामांचे प्रत्यक्ष स्वरूप स्थानिक आर्थिक, सामाजिक आणि पायाभूत परिस्थितीनुसार बदलू शकते.
आधुनिक कोकणातील कुणबी समाजाचा प्रश्न हा केवळ एखाद्या जातीय समुदायाच्या लोकसंख्येपुरता मर्यादित नाही; तो कोकणातील ग्रामीण समाजाच्या व्यापक सामाजिक आणि आर्थिक परिवर्तनाशी संबंधित आहे. २००१–२०११ च्या कालावधीत रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग या दोन्ही जिल्ह्यांच्या एकूण लोकसंख्येत घट झाल्याचे जनगणना-आधारित आकडेवारीत दिसते. त्याच वेळी कुंकेरीसारख्या गावांच्या दीर्घकालीन अभ्यासातून शिक्षण, रोजगार आणि स्थलांतरामुळे ग्रामीण कुटुंबांच्या आर्थिक व सामाजिक जीवनात झालेले बदल स्पष्ट होतात.<ref name="DistrictwisePopulationMaharashtra" /><ref name="VartakTumbeBhide2019" />
या पार्श्वभूमीवर कुणबी समाजासह कोकणातील ग्रामीण समुदायांसमोरील भविष्यातील प्रश्न केवळ ग्रामीण लोकसंख्या टिकवून ठेवण्यापुरते मर्यादित न राहता शिक्षण, स्थानिक रोजगार, कृषीमालाचे मूल्यवर्धन, कृषी प्रक्रिया, सहकार, पर्यटन, डिजिटल दळणवळण आणि ग्रामीण उद्योजकता यांच्यातील परस्परसंबंधांशी जोडलेले आहेत. महाराष्ट्र शासनाच्या विविध योजनांमध्ये कृषी प्रक्रिया, औद्योगिक समूह, ग्रामीण पर्यटन आणि ग्रामीण विकासाशी संबंधित उपक्रमांना प्रोत्साहन देण्यात येत आहे.<ref name="AgriculturalExportsMaharashtra" /><ref name="MSECDP-Ratnagiri-Sindhudurg" /><ref name="KonkanRuralTourism" />
कोकणातून स्थलांतरित झालेल्या लोकांचे मूळ गावाशी आर्थिक आणि सामाजिक संबंध कायम राहू शकतात, असे कुंकेरीच्या दीर्घकालीन अभ्यासातून दिसून येते. त्यामुळे स्थलांतराकडे केवळ ग्रामीण लोकसंख्येतील घट म्हणून न पाहता गाव आणि शहर यांच्यातील बदलत्या आर्थिक व सामाजिक संबंधांच्या संदर्भात पाहणे अधिक योग्य ठरते.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
या दृष्टीने शिक्षण, रोजगार आणि स्थलांतरातून निर्माण झालेले ज्ञान, अनुभव आणि आर्थिक संसाधने ग्रामीण अर्थव्यवस्थेशी जोडण्याच्या शक्यतांचा अभ्यास भविष्यात महत्त्वाचा ठरू शकतो. मात्र अशा प्रक्रियेचा संपूर्ण कोकणातील कुणबी समाजावर प्रत्यक्ष परिणाम किती प्रमाणात होतो, याबाबत स्वतंत्र आणि जातीनिहाय पुरेसा सांख्यिक पुरावा उपलब्ध नसल्यामुळे त्याविषयी निश्चित निष्कर्ष काढणे सध्या शक्य नाही.
== चित्र दालन ==
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File:The tribes and castes of the Central Provinces of India (1916) (14577097260).jpg|ब्रिटिशकालीन काळातील कुणबी/कृषक समूहाचे ऐतिहासिक चित्रण
File:कोकणातील शेतकरी व बैलजोडी.jpg|कोकणातील पारंपरिक शेती आणि बैलजोडी
File:Konkan - Ukshi Village - Part 2 20151220 (23704381920).jpg|उक्षी गाव, रत्नागिरी जिल्हा
File:Konkan - Ukshi Village - Part 2 20151220 (24000097155).jpg|उक्षी गावातील ग्रामीण जीवन
File:गावातील बलुतेदार.jpg|गावातील पारंपरिक बलुतेदारी व्यवस्था
File:उदगीर वन व जंगल.jpg|कोकणातील नैसर्गिक परिसर आणि ग्रामीण जीवन
File:Konkan - Songiri Village - Ratnagiri District - Part 1 20151218 (23997376885).jpg|सोंगीरी गाव, रत्नागिरी जिल्हा
File:Konkan - Songiri Village - Ratnagiri District - Part 1 20151218 (23629305669).jpg|सोंगीरी गावातील ग्रामीण परिसर
File:Paddy field in Maharashtra 9.jpg|महाराष्ट्रातील भातशेती
File:A scene from Dashavatara folk theatre in Konkan region.jpg|कोकणातील दशावतार लोकनाट्य
File:Palakhinrutya - Dance of Palanquin of Village Dities - Shimagotsav in Kokan - Maharashtra.jpg|कोकणातील शिमगोत्सवातील पालखी नृत्य
File:खडीकोळवण देव गांगेश्वर ग्राम मंदीर.jpg|खडीकोळवण येथील देव गांगेश्वर ग्राममंदिर
File:MaharashtraKonkan.png|महाराष्ट्रातील कोकण प्रदेशाचा नकाशा
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== हे सुद्धा पहा ==
* [[कोकण]]
* [[रत्नागिरी जिल्हा]]
* [[सिंधुदुर्ग जिल्हा]]
* [[रायगड जिल्हा]]
* [[कुणबी]]
* [[मराठा]]
* [[महाराष्ट्रातील जातिव्यवस्था]]
== बाह्य दुवे ==
* [https://censusindia.gov.in/ भारताची जनगणना — भारताचे जनगणना आयुक्त कार्यालय]
* [https://gazetteers.maharashtra.gov.in/ महाराष्ट्र शासन — गॅझेटियर विभाग]
* [https://www.bartievalidity.maharashtra.gov.in/ डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर संशोधन व प्रशिक्षण संस्था — जात वैधता पडताळणी माहिती प्रणाली] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20260119160227/http://www.bartievalidity.maharashtra.gov.in/ |date=2026-01-19 }}
* [https://raigad.gov.in/en/maratha-kunbi-documents-2/ रायगड जिल्हा प्रशासन — कुणबी-मराठा दस्तऐवज]
* [https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/31003/download/34184/49541_1961_KUN.pdf कुंकेरी ग्रामसर्वेक्षण, १९६१]
{{कोकण लोकजीवन}}
== संदर्भ ==
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[[वर्ग:कोकण]]
[[वर्ग:महाराष्ट्र]]
[[वर्ग:समाज]]
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{{Infobox ethnic group
| group = कोकणातील कुणबी
| image = [[File:The tribes and castes of the Central Provinces of India (1916) (14577097260).jpg|250px]]
| image_caption = ब्रिटिशकालीन काळातील कुणबी/कृषक समूहाचे ऐतिहासिक चित्रण
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'''कोकणातील कुणबी''' हा महाराष्ट्राच्या कोकण प्रदेशातील ऐतिहासिकदृष्ट्या कृषी आणि ग्रामीण जीवनाशी संबंधित असलेला सामाजिक समुदाय आहे. कोकणातील कुणबींच्या इतिहासाचा संबंध रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, रायगड आणि ऐतिहासिक ठाणे जिल्ह्याच्या विविध भागांतील ग्रामीण समाजरचना, शेती, जमीनव्यवस्था आणि स्थानिक अर्थव्यवस्थेशी आढळतो. ब्रिटिशकालीन गॅझेटियर, जनगणना अहवाल तसेच नंतरच्या मानववंशशास्त्रीय आणि भाषावैज्ञानिक अभ्यासांमध्ये या समुदायाचा उल्लेख आढळतो.<ref name="Ratnagiri1880">{{cite book
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Ratnagiri and Savantvadi
|volume=10
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}}</ref><ref name="Kolaba1883">{{cite book
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira
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|last=Enthoven
|first=Reginald Edward
|title=The Tribes and Castes of Bombay
|volume=2
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|year=1922
}}</ref>
कोकणातील कुणबींच्या इतिहासाची सुरुवात एखाद्या विशिष्ट राजवंशापासून किंवा एका निश्चित कालखंडापासून झाली असे निश्चितपणे सांगता येत नाही. महाराष्ट्र आणि कोकणातील कृषीप्रधान ग्रामजीवनाची पार्श्वभूमी प्राचीन आहे; तथापि प्रागैतिहासिक किंवा प्राचीन काळातील कृषक समुदायांना आधुनिक अर्थाने थेट ''कुणबी'' म्हणणे इतिहासदृष्ट्या योग्य ठरत नाही. पुढील काळात कृषी, जमीनव्यवस्था, ग्रामसंस्था, महसूलपद्धती, स्थलांतर आणि सामाजिक ओळखीमधील बदलांच्या प्रक्रियेत कोकणातील कुणबी समाजाची विविध प्रादेशिक रूपे विकसित झाली.
१९व्या शतकातील ब्रिटिशकालीन गॅझेटियर आणि जनगणना अहवाल कोकणातील लोकसंख्या, शेती, जमीनधारणा आणि ग्रामीण समाजरचनेच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचे ऐतिहासिक स्रोत आहेत. रत्नागिरी आणि सावंतवाडी, कोलाबा आणि जंजिरा तसेच ठाणे प्रदेशांच्या गॅझेटियरमध्ये कृषक समाज, जमीनव्यवस्था, महसूल आणि ग्रामीण जीवनाचे वर्णन आढळते.<ref name="Ratnagiri1880" /><ref name="Kolaba1883" /><ref name="Thana1882">{{cite book
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Thana
|volume=13
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1882
}}</ref>
कोलाबा जिल्ह्याच्या १८८१ च्या जनगणनेनुसार जिल्ह्याची एकूण लोकसंख्या ३,८१,६४९ होती. त्याच नोंदींमध्ये जन्मस्थान, भाषा, धर्म, वय, लिंग आणि उपविभागनिहाय लोकसंख्येची माहिती देण्यात आली आहे.<ref name="Kolaba1883" />
कोकणातील कुणबी समाज एकसंध आणि अपरिवर्तनीय सामाजिक गट म्हणून राहिलेला नाही. वेगवेगळ्या प्रदेशांतील स्थानिक सामाजिक रचना, विवाहपद्धती, स्थलांतर, आर्थिक परिस्थिती, जमीनधारणा आणि प्रशासकीय वर्गीकरण यांमुळे कुणबीशी संबंधित विविध प्रादेशिक आणि सामाजिक ओळखी आढळतात. ब्रिटिशकालीन जनगणना आणि ethnographic साहित्यामध्ये ''Kunbi'', ''Kanbi'', ''Maratha Kunbi'' तसेच इतर प्रादेशिक संज्ञांचा वापर आढळतो. या संज्ञांचे अर्थ आणि प्रशासकीय वर्गीकरण काळानुसार बदलत गेले असल्यामुळे वेगवेगळ्या जनगणनांतील आकडे थेट परस्पर तुलनीय मानताना सावधगिरी आवश्यक आहे.<ref name="Enthoven1922" />
कोकणातील कुणबी समाजाच्या इतिहासात शेतीला महत्त्वाचे स्थान राहिले असले तरी समुदायाची सामाजिक आणि आर्थिक भूमिका केवळ शेतीपुरती मर्यादित राहिलेली नाही. कोलाबा गॅझेटियरमध्ये महाड आणि माणगाव परिसरातील कुणबी कापणीचा हंगाम संपल्यानंतर मुंबई आणि इतर मजूर बाजारपेठांकडे हंगामी स्वरूपात जात असल्याची नोंद आहे. त्याच नोंदीमध्ये काही कुणबी सैन्य, पोलीस आणि इतर सरकारी सेवांमध्ये प्रवेश करून घरी राहिलेल्या कुटुंबीयांना पैसे पाठवत असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Kolaba1883" />
पुढील काळात शिक्षण, सरकारी सेवा, व्यवसाय, उद्योग, सहकार आणि शहरी रोजगार यांमध्येही कोकणातील ग्रामीण समाजाचा सहभाग वाढला. या सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनाचा अभ्यास करताना कुणबी समाजाची स्वतंत्र आकडेवारी आणि संपूर्ण ग्रामीण किंवा जिल्हास्तरीय आकडेवारी यांमध्ये फरक ठेवणे आवश्यक आहे.
कोकणातील ग्रामीण लोकसंख्येतील बदल आणि रोजगारासाठी होणारे स्थलांतर हे आधुनिक काळातील महत्त्वाचे सामाजिक-आर्थिक घटक आहेत. विशेषतः रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्गसारख्या जिल्ह्यांमध्ये शिक्षण आणि रोजगारासाठी मोठ्या शहरी केंद्रांकडे होणाऱ्या स्थलांतराचा ग्रामीण समाजावर परिणाम झाला आहे. Kunkeri गावावरील १९६१–१९८७–२०१७ या कालखंडाच्या तुलनात्मक अभ्यासात दीर्घकालीन स्थलांतर, शिक्षणासाठी स्थलांतर, रोजगारातील बदल आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेतील परिवर्तन यांचे दस्तऐवजीकरण करण्यात आले आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019">{{cite journal
|last=Vartak
|first=Kalyani
|author2=Chinmay Tumbe
|author3=Amita Bhide
|title=Mass Migration from Rural India: A Restudy of Kunkeri Village in Konkan, Maharashtra, 1961–1987–2017
|journal=Journal of Interdisciplinary Economics
|volume=31
|issue=1
|year=2019
|pages=42–62
}}</ref>
आज कोकणातील कुणबींची स्वतंत्र आणि अधिकृत जिल्हानिहाय लोकसंख्या किंवा टक्केवारी उपलब्ध नाही. आधुनिक जनगणनेत सर्व जातींची स्वतंत्र आणि सातत्यपूर्ण जिल्हानिहाय लोकसंख्या प्रकाशित झालेली नसल्यामुळे उपलब्ध अनधिकृत अंदाजांना अधिकृत जनगणना आकडे म्हणून मांडता येत नाही. त्यामुळे ऐतिहासिक Censusमधील कुणबी किंवा Maratha-Kunbi वर्गीकरणाची संख्या आणि आजच्या कुणबी समाजाची लोकसंख्या यांची थेट तुलना करणे योग्य नाही.
भारत सरकारने २०२७मध्ये जनगणना घेण्याचा निर्णय घेतला असून केंद्र सरकारने २०२५मध्ये या जनगणनेत जातीनिहाय माहिती संकलित करण्याचा निर्णय जाहीर केला आहे. त्यामुळे जनगणना प्रक्रिया पूर्ण होऊन अधिकृत आकडे प्रसिद्ध झाल्यानंतर कुणबी आणि संबंधित सामाजिक वर्गांच्या लोकसंख्येबाबत अधिक व्यापक अधिकृत माहिती उपलब्ध होण्याची शक्यता आहे. मात्र सध्या २०२७ची जातीनिहाय लोकसंख्या उपलब्ध आहे असे मानता येत नाही.<ref>{{cite web
|title=Lok Sabha Unstarred Question No. 258
|publisher=Ministry of Home Affairs, Government of India
|date=2 December 2025
|url=https://www.mha.gov.in/MHA1/Par2017/pdfs/par2025-pdfs/LS02122025/258.pdf
}}</ref>
या लेखात कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास, नाव आणि संज्ञांची पार्श्वभूमी, भौगोलिक वितरण, मध्ययुगीन आणि ब्रिटिशकालीन ग्रामीण समाज, रत्नागिरी, रायगड आणि उत्तर कोकणातील सामाजिक स्थिती, तिलोरी कुणबी, कुणबी बोली, सामाजिक रचना, शेती आणि अर्थव्यवस्था, स्थलांतर, मराठा-कुणबी संबंध, लोकसंख्याशास्त्रीय बदल, आधुनिक प्रशासकीय स्थिती आणि सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन यांचा उपलब्ध विश्वसनीय ऐतिहासिक, शासकीय आणि शैक्षणिक स्रोतांच्या आधारे आढावा घेतला आहे.
== कुणबी आणि संज्ञा ==
‘कुणबी’ ही संज्ञा पश्चिम भारतातील कृषक समुदायांच्या संदर्भात ऐतिहासिकदृष्ट्या वापरली गेली आहे. महाराष्ट्र आणि कोकणाच्या विविध भागांत या समुदायाशी संबंधित ''Kunbi'', ''Kanbi'', ''Kulambi'', ''Kulwādi'' तसेच काही प्रादेशिक संदर्भांत ''Tilori Kunbi'' यांसारख्या संज्ञा वेगवेगळ्या काळातील स्रोतांमध्ये आढळतात. या संज्ञांचा वापर सर्व प्रदेशांत आणि सर्व काळात समान अर्थाने झाला असे मानता येत नाही. वसाहतकालीन ethnographic साहित्य, जनगणना आणि प्रशासकीय नोंदींमध्ये सामाजिक समूहांचे वर्गीकरण प्रदेश आणि काळानुसार बदलत गेले.<ref name="Enthoven1922" /><ref name="RussellHiralal1916">{{cite book
|last=Russell
|first=R. V.
|author2=Hiralal
|title=The Tribes and Castes of the Central Provinces of India
|volume=4
|publisher=Macmillan and Co., Limited
|location=London
|year=1916
}}</ref>
=== कुणबी आणि Kunbi ===
‘कुणबी’ हे मराठी रूप असून इंग्रजीतील ''Kunbi'' हे त्याचे प्रचलित लिप्यंतरित रूप आहे. वसाहतकालीन ethnographic साहित्यामध्ये ''Kunbi'' हा शब्द महाराष्ट्र आणि पश्चिम भारतातील विविध कृषक समुदायांच्या संदर्भात वापरला गेला आहे. Enthoven यांच्या The Tribes and Castes of Bombay मध्ये ''Kunbi'' आणि ''Kanbi'' या संज्ञांचा कृषक समुदायांच्या संदर्भात विचार करण्यात आला आहे.<ref name="Enthoven1922" />
=== Kanbi ===
‘कानबी’ किंवा ''Kanbi'' ही संज्ञा विशेषतः गुजरातमधील कृषक समुदायांच्या संदर्भात आढळते. Enthoven यांच्या लेखनात ''Kanbi'' आणि ''Kunbi'' ही रूपे परस्पर संबंधित संज्ञा म्हणून चर्चिली आहेत. Russell आणि Hiralal यांनीही ''Kanbi'' हे गुजरातमधील, तर ''Kunbi'' हे दख्खनमधील प्रचलित रूप असल्याची नोंद केली आहे.<ref name="Enthoven1922" /><ref name="RussellHiralal1916"/>
या नोंदींवरून ‘कानबी’ आणि ‘कुणबी’ ही नावे वेगवेगळ्या प्रदेशांत प्रचलित असलेली भाषिक रूपे असल्याचे दिसते; मात्र केवळ नावातील साम्याच्या आधारे या सर्व समुदायांची एकच ऐतिहासिक उत्पत्ती निश्चित करता येत नाही.
=== Kulambi आणि कुलंबी ===
''Kulambi'' हे रूप जुन्या ethnographic साहित्यात कुणबीशी संबंधित प्रादेशिक रूप म्हणून आढळते. Russell आणि Hiralal यांनी बॉम्बे प्रदेशातील विविध प्रादेशिक रूपांचा उल्लेख करताना दख्खनमध्ये ''Kunbi'' किंवा ''Kulambi'', दक्षिण कोकणात ''Kulwādi'', गुजरातमध्ये ''Kanbi'' आणि बेळगाव परिसरात ''Kulbi'' अशी रूपे नोंदवली आहेत.<ref name="RussellHiralal1916"/>
मात्र ‘कुलंबी’ हे ‘कुणबी’चेच मूळ रूप आहे किंवा दोन्ही शब्दांची निर्मिती एकाच ऐतिहासिक प्रक्रियेतून झाली आहे, असे निर्विवादपणे सिद्ध झालेले नाही. त्यामुळे ‘कुलंबी’ आणि ‘कुणबी’ यांचा संबंध मांडताना तो संभाव्य भाषिक संबंध किंवा ऐतिहासिक व्युत्पत्तीविषयक मत म्हणूनच मांडणे आवश्यक आहे.
=== Kulwadi / कुलवाडी ===
‘कुलवाडी’ किंवा ''Kulwādi'' ही संज्ञा विशेषतः दक्षिण कोकणाशी संबंधित प्रादेशिक रूप म्हणून Russell आणि Hiralal यांच्या नोंदीत आढळते. त्याच नोंदीत ''Kunbi'', ''Kulambi'', ''Kulwādi'', ''Kanbi'' आणि ''Kulbi'' ही विविध प्रादेशिक रूपे नमूद केली आहेत.<ref name="RussellHiralal1916"/>
कोकणातील सामाजिक इतिहासाच्या अभ्यासात ‘कुलवाडी’ ही संज्ञा स्थानिक संदर्भात स्वतंत्रपणे तपासणे आवश्यक आहे. ती प्रत्येक ठिकाणी आणि प्रत्येक काळात ‘कुणबी’ची तंतोतंत समानार्थी संज्ञा होती असे गृहीत धरता येत नाही.
=== Kutumbika / कुटुम्बिक ===
‘कुटुम्बिक’ किंवा ''Kutumbika'' या प्राचीन संज्ञेचा ‘कुणबी’ या आधुनिक सामाजिक नावाशी संबंध जोडणारे मत जुन्या ethnographic साहित्यात आढळते. Russell आणि Hiralal यांनी बॉम्बे प्रदेशातील ''Kunbi'' आणि ''Kulambi'' या रूपांचा उल्लेख करताना संस्कृत अभिलेखांमध्ये ''Kutumbika'' हे रूप आढळते आणि त्याचा संबंध ''kutumba'' म्हणजे कुटुंब याच्याशी जोडला जातो, अशी व्युत्पत्तीविषयक मांडणी नोंदवली आहे. त्यांच्या नोंदीनुसार अकराव्या शतकातील एका वृत्तांतात ''Kutumbiks'' या संज्ञेचा ग्रामांतील कृषकांच्या संदर्भात उल्लेख करण्यात आला होता.<ref name="RussellHiralal1916"/>
Russell आणि Hiralal यांनी ''Kutumbika''पासून कुणबी नावाची व्युत्पत्ती होऊ शकते, अशी मांडणी नोंदवली असली तरी त्यांनी इतर व्युत्पत्तीविषयक मतेही दिली आहेत. त्यामुळे ''Kutumbika'' → ''Kulambi'' → ''Kunbi'' हा क्रम निश्चित आणि निर्विवाद ऐतिहासिक व्युत्पत्ती म्हणून मांडता येत नाही.<ref name="RussellHiralal1916"/>
‘कुटुम्बिक’ आणि आधुनिक ‘कुणबी’ यांच्यातील संबंधाबाबत भाषिक आणि सामाजिक-ऐतिहासिक असे दोन स्वतंत्र प्रश्न विचारात घेणे आवश्यक आहे. भाषिकदृष्ट्या संभाव्य व्युत्पत्तीचे मत उपलब्ध आहे; मात्र प्राचीन ''Kutumbika'' आणि आधुनिक कुणबी हा एकच अखंड सामाजिक समुदाय असल्याचा निर्णायक पुरावा उपलब्ध आहे, असे मानता येत नाही.
=== Tilori / Tillori Kunbi ===
‘तिलोरी कुणबी’ किंवा ''Tilori Kunbi'' ही संज्ञा रत्नागिरी जिल्ह्याशी संबंधित ऐतिहासिक प्रशासकीय नोंदींमध्ये विशेषत्वाने आढळते. २३ एप्रिल १९४२ च्या तत्कालीन बॉम्बे सरकारच्या ठरावात ''Kunbi (except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)'' असा उल्लेख करण्यात आला होता, तर ''Kunbi Tilori in Ratnagiri district'' ही स्वतंत्र नोंद इतर मागास समुदायांच्या यादीत करण्यात आली होती. मुंबई उच्च न्यायालयाने २००२ च्या Dattatraya s/o Ramrao Thorat v. State of Maharashtra या निर्णयात १९४२ च्या ठरावासह १९५०, १९५६ आणि १९६१ च्या संबंधित शासन ठरावांमध्ये ही प्रशासकीय स्थिती कायम राहिल्याची नोंद केली आहे. १३ ऑक्टोबर १९६७ च्या महाराष्ट्र शासनाच्या ठरावात ''Kunbi caste'' ही स्वतंत्र इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत अनुक्रमांक ८३वर समाविष्ट करण्यात आल्याचेही न्यायालयाने नमूद केले आहे.<ref name="DattatrayaThorat2002">{{cite web
|title=Dattatraya S/o Ramrao Thorat v. The State of Maharashtra & Ors.
|publisher=Bombay High Court
|date=24 April 2002
|url=https://indiankanoon.org/doc/726744/
}}</ref>
तिलोरी कुणबीशी संबंधित भाषिक अभ्यासही करण्यात आला आहे. A. M. Ghatge यांनी Kunbi of Mahad या ग्रंथात महाड परिसरातील कुणबी बोलीचे भाषिक वर्णन केले आहे. हा ग्रंथ A Survey of Marathi Dialects या मालिकेतील Series III म्हणून १९६६मध्ये Bombay State Board for Literature and Cultureने प्रकाशित केला होता.<ref name="Ghatge1966">{{cite book
|last=Ghatge
|first=A. M.
|title=Kunbi of Mahad
|series=A Survey of Marathi Dialects
|volume=3
|publisher=Bombay State Board for Literature and Culture
|location=Bombay
|year=1966
}}</ref>
‘तिलोरी कुणबी’, ‘तिल्लोरी कुणबी’ आणि इतर संबंधित संज्ञांचा वापर करताना ऐतिहासिक सामाजिक ओळख, भाषिक रूप आणि आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरण यांमध्ये फरक करणे आवश्यक आहे. आधुनिक शासनाच्या वर्गीकरणात वापरली जाणारी संज्ञा आणि जुन्या ethnographic किंवा Census स्रोतांतील संज्ञा एकाच अर्थाने वापरल्या गेल्या आहेत असे गृहीत धरता येत नाही.
=== Maratha-Kunbi आणि Kunbi-Maratha ===
‘Maratha-Kunbi’ आणि ‘Kunbi-Maratha’ या संज्ञांचा वापर विविध ऐतिहासिक आणि प्रशासकीय संदर्भांत आढळतो. ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये Maratha आणि Kunbi या वर्गीकरणांमधील सीमा नेहमी स्पष्ट राहिल्या नाहीत. १९११ च्या बॉम्बे जनगणनेत ''Kunbi Maratha'' हा गट ''Kunbi''च्या वर्गात स्वतंत्रपणे दाखविण्यात आला होता. १९५१ च्या बॉम्बे जनगणना-आधारित अधिकृत अहवालात १९०१मध्ये ''Mahratha Kunbis'' यांची गणना ''Mahrathas''मध्ये, तर १९११मध्ये त्यांची गणना ''Kunbis''मध्ये करण्यात आल्याचे स्पष्टपणे नमूद केले आहे.<ref name="Census1911Bombay">{{cite book
|last=Mead
|first=P. J.
|author2=G. Laird MacGregor
|title=Census of India, 1911: Bombay
|volume=7
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1912
|chapter=Part I: Report
}}</ref><ref name="EstimatedPopulationCastesBombay">{{cite web
|title=Estimated Population by Castes, Bombay
|publisher=Census of India
|url=https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/30207/download/33388/21097_1951_EST.pdf
}}</ref>
या वर्गीकरणातील बदलामुळे वेगवेगळ्या जनगणनांतील Maratha आणि Kunbi यांच्या लोकसंख्येची थेट तुलना करताना त्या-त्या जनगणनेतील वर्गीकरणपद्धती लक्षात घेणे आवश्यक ठरते. १९२१ च्या बॉम्बे जनगणना अहवालातही Maratha म्हणून नोंदविल्या जाणाऱ्या व्यक्तींच्या संख्येची तुलना Kunbiशी करताना अशीच अडचण असल्याचे नमूद करण्यात आले होते.<ref name="Census1921Bombay">{{cite book
|title=Census of India, 1921: Bombay
|volume=9
|publisher=Times Press
|location=Bombay
|year=1922
|chapter=Part I: Report
}}</ref>
१९३१ च्या बॉम्बे जनगणना अहवालाने Maratha आणि Kunbi या संज्ञांच्या वापराबाबत स्पष्ट वर्गीकरणीय अडचण नोंदवली होती. अहवालानुसार त्या जनगणनेतील Maratha लोकसंख्येतील वाढीचा एक भाग Kunbi म्हणून नोंदवल्या जाणाऱ्या लोकसंख्येतील घटेशी संबंधित असू शकतो. अहवालात ''Maratha'' आणि ''Kunbi'' या संज्ञांच्या वापराबाबत असलेल्या गोंधळामुळे या बाबतीत समाधानकारक सांख्यिक तुलना करण्यासाठी संज्ञांची अधिक स्पष्ट व्याख्या आवश्यक असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Census1931Bombay">{{cite book
|title=Census of India, 1931: Bombay Presidency
|volume=8
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1933
|chapter=Part I: Report
}}</ref>
१९३१ च्या जनगणनेतील या वर्गीकरणीय समस्येवरून Maratha आणि Kunbi या सामाजिक संज्ञांचा वापर सर्व प्रदेशांत एकसारखा होता असे दिसत नाही. त्यामुळे या जनगणना नोंदींच्या आधारे ‘Maratha हीच Kunbi जात आहे’ किंवा ‘Kunbi हीच Maratha जात आहे’ असा सार्वत्रिक ऐतिहासिक निष्कर्ष काढता येत नाही. उपलब्ध Census नोंदी मात्र या दोन संज्ञांमध्ये काही प्रदेशांत सामाजिक आणि प्रशासकीय सीमारेषा बदलत्या स्वरूपाच्या होत्या, हे दर्शवतात.<ref name="EstimatedPopulationCastesBombay" /><ref name="Census1931Bombay" />
=== संज्ञा, सामाजिक ओळख आणि प्रशासकीय वर्गीकरण ===
कुणबीशी संबंधित संज्ञांचा इतिहास पाहताना भाषिक रूप, सामाजिक ओळख आणि सरकारी वर्गीकरण या वेगवेगळ्या बाबी स्वतंत्रपणे पाहणे आवश्यक आहे. एखाद्या काळात एखाद्या समूहासाठी वापरलेले नाव पुढील काळात त्याच अर्थाने वापरले गेले असे आवश्यक नाही. ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्येही जातीय वर्गीकरणातील बदलांमुळे लोकसंख्येच्या आकडेवारीत फरक पडल्याचे अधिकृत Census साहित्यामध्ये नोंदविले आहे.<ref name="EstimatedPopulationCastesBombay"/>
आधुनिक महाराष्ट्राच्या प्रशासकीय वर्गीकरणात ‘Kunbi’ ही नोंद इतर मागासवर्गीयांच्या यादीतील अनुक्रमांक ८३वर आहे. महाराष्ट्र शासनाच्या १३ मे २०२५ च्या अद्ययावत संकलित यादीत या नोंदीखाली ''Lewa Kunbi'', ''Lewa Patil'', ''Lewa Patidar'', ''Maratha Kunbi'', ''Kunbi Maratha'', ''Tilori Kunbi'', ''Tillori Kunbi'' आणि ''Ti. Kunbi'' या संज्ञांचा समावेश करण्यात आला आहे.<ref name="MaharashtraOBCList2025">{{cite web
|title=महाराष्ट्र राज्याची विमुक्त जाती, भटक्या जमाती, इतर मागासवर्ग व विशेष मागासवर्गाची इंग्रजी भाषांतरित यादी
|publisher=इतर मागास बहुजन कल्याण विभाग, महाराष्ट्र शासन
|date=13 May 2025
|url=https://gr.maharashtra.gov.in/Site/Upload/Government%20Resolutions/Marathi/20250513170904091534.pdf
}}</ref>
ही यादी प्रशासकीय आणि आरक्षणाच्या संदर्भातील वर्गीकरण आहे. तिच्यातील उपसंज्ञा आणि ऐतिहासिक Census किंवा ethnographic साहित्यामध्ये वापरलेल्या सामाजिक संज्ञा यांना परस्परांचे थेट समानार्थी मानता येत नाही. महाराष्ट्र शासनाच्या २०२५ च्या परिपत्रकातही सदर यादी ही संकलित स्वरूपाची असून संबंधित जात किंवा जमातीचा समावेश ज्या शासन निर्णय किंवा आदेशाद्वारे करण्यात आला आहे, ते मूळ शासन निर्णय किंवा आदेश ग्राह्य धरावेत, असे स्पष्ट केले आहे.<ref name="MaharashtraOBCList2025" />
=== व्युत्पत्तीबाबत निष्कर्ष ===
‘कुणबी’ या शब्दाची व्युत्पत्ती निश्चितपणे एका स्रोताने किंवा एका सिद्धांताने स्पष्ट झालेली नाही. ''Kunbi'', ''Kanbi'', ''Kulambi'' आणि ''Kulwādi'' ही विविध प्रादेशिक रूपे जुन्या ethnographic साहित्यात नोंदविण्यात आली आहेत. त्याच साहित्यात ''Kutumbika'' या प्राचीन संज्ञेशी ‘कुणबी’चा संबंध जोडणारे व्युत्पत्तीविषयक मतही आढळते.<ref name="RussellHiralal1916"/>
मात्र ''Kutumbika'' ही प्राचीन संज्ञा आणि आधुनिक ‘कुणबी’ हा सामाजिक समुदाय यांच्यात थेट, अखंड आणि निर्विवाद वंशसंबंध सिद्ध झालेला आहे, असे उपलब्ध पुराव्यांवरून म्हणता येत नाही. त्यामुळे ‘कुटुम्बिक → कुलंबी → कुणबी’ ही मांडणी या लेखात '''संभाव्य व्युत्पत्तीविषयक मत''' म्हणूनच नमूद करणे उचित आहे; '''सिद्ध ऐतिहासिक वंशावळ''' म्हणून नव्हे.<ref name="RussellHiralal1916"/>
== प्राचीन आणि पूर्व-मध्ययुगीन कोकणातील कृषक समाज ==
कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास समजून घेण्यासाठी त्यापूर्वीच्या कोकणातील मानवी वस्ती, उपजीविका, कृषी, पशुपालन, ग्रामजीवन आणि प्रारंभिक ग्रामीण अर्थव्यवस्थेची पार्श्वभूमी लक्षात घेणे आवश्यक आहे. मात्र प्रागैतिहासिक किंवा प्राचीन काळातील कृषक समुदायांना आधुनिक अर्थाने ‘कुणबी’ म्हणून ओळखणे इतिहासदृष्ट्या योग्य ठरत नाही. आधुनिक ‘कुणबी’ ही सामाजिक ओळख नंतरच्या ऐतिहासिक प्रक्रियांमध्ये विकसित झालेली आहे. त्यामुळे या विभागात प्राचीन कृषक संस्कृती आणि आधुनिक कुणबी समाज यांच्यात थेट वंशपरंपरेचा दावा केला जात नाही.
=== कोकणातील प्राचीन मानवी वस्ती ===
कोकणात प्रागैतिहासिक मानवी उपस्थितीचे पुरावे विविध स्वरूपात आढळतात. विशेषतः महाराष्ट्राच्या पश्चिम किनारपट्टीवरील लेटराइट पठारांवर आढळणाऱ्या भूरूपचित्रांचा (geoglyphs) अभ्यास कोकणातील प्रागैतिहासिक मानवी क्रियाशीलतेच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचा ठरला आहे. युनेस्कोच्या तात्पुरत्या जागतिक वारसा यादीतील नोंदीनुसार कोकणातील भूरूपचित्रांचा कालपट मेसोलिथिक काळापासून आरंभीच्या ऐतिहासिक काळापर्यंत पसरलेला आहे. या भूरूपचित्रांमध्ये प्राणी, मानवी आकृती आणि भूमितीय चिन्हांसह विविध प्रकारच्या आकृत्या आढळतात.<ref name="UNESCOGeoglyphsKonkan">{{cite web
|title=Geoglyphs of Konkan Region of India
|publisher=UNESCO World Heritage Centre
|url=https://whc.unesco.org/en/tentativelists/6605/
}}</ref>
कोकणातील भूरूपचित्रांच्या समूहामुळे या प्रदेशात दीर्घकालीन मानवी व सांस्कृतिक क्रियाशीलतेचे पुरावे उपलब्ध झाले आहेत. तथापि या पुराव्यांच्या आधारे त्या काळातील लोकसंख्येला आधुनिक काळातील कोणत्याही विशिष्ट जातीय किंवा सामाजिक समुदायाशी जोडता येत नाही. UNESCOच्या नोंदीनुसार या भूरूपचित्रांचा संबंध मेसोलिथिक ते आरंभीच्या ऐतिहासिक काळातील मानवी सांस्कृतिक प्रक्रियांशी जोडला जातो; त्यामुळे त्यांचा उपयोग प्राचीन कोकणातील मानवी उपस्थितीच्या पुराव्यांपुरताच करणे अधिक योग्य ठरते.<ref name="UNESCOGeoglyphsKonkan" />
कोकणाची भौगोलिक रचना सह्याद्रीच्या पश्चिम उतारांपासून अरबी समुद्रापर्यंत पसरलेल्या अरुंद किनारी प्रदेशाची आहे. नद्या, खाड्या, डोंगर, पठारे आणि समुद्रकिनारा यांमुळे येथील मानवी वस्ती आणि उपजीविकेचे स्वरूप प्रदेशानुसार बदलत गेले. त्यामुळे कोकणातील प्रागैतिहासिक समाजाचा अभ्यास करताना दख्खनच्या पठारी प्रदेशातील पुरातत्त्वीय संस्कृतींचे पुरावे थेट कोकणाला लागू न करता कोकणातील स्वतंत्र पुरातत्त्वीय साक्ष विचारात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="UNESCOGeoglyphsKonkan" />
=== महाराष्ट्रातील प्रारंभिक कृषी संस्कृती ===
महाराष्ट्रातील कृषी आणि स्थिर वस्तीच्या विकासाचा पुरातत्त्वीय इतिहास ताम्रपाषाणकालीन संस्कृतींच्या अभ्यासातून स्पष्ट होतो. दख्खनमधील ताम्रपाषाण संस्कृतीच्या विविध टप्प्यांमध्ये सावळदा, मालवा आणि जोर्वे संस्कृतींचा समावेश होतो. या काळातील वसाहती नदीकाठच्या उंच भागांवर वसवल्या जात असत; त्यामुळे पूर टाळण्याबरोबरच जवळच्या पूरमैदानांचा शेतीसाठी, कुरणांचा पशुपालनासाठी आणि वनक्षेत्रांचा शिकार व संकलनासाठी उपयोग करता येत असे. या समाजाची उपजीविका शेती, पशुपालन, शिकार, मासेमारी आणि वन्य संसाधनांच्या वापरावर आधारित मिश्र स्वरूपाची होती. पुढील काळात मालवा आणि आरंभीच्या जोर्वे टप्प्यात शेतीची तीव्रता वाढली आणि काही ठिकाणी दुबार पीकपद्धतीचा अवलंब झाल्याचे पुरावे मिळतात. ताम्रपाषाणकालीन लोकांनी जव, गहू, तांदूळ तसेच नाचणी, ज्वारी आणि कोदो यांसारख्या पिकांची लागवड केली होती. मातीची भांडी, दगडी व तांब्याची साधने आणि स्थिर वस्तींचे अवशेष या काळातील भौतिक संस्कृतीची वैशिष्ट्ये दर्शवतात.<ref name="RobbinsSchug">{{cite web
|last=Robbins Schug
|first=Gwen
|title=Chalcolithic Cultures of Western India
|work=Pre and protohistoric cultures of India
|publisher=INFLIBNET Centre
|url=https://ebooks.inflibnet.ac.in/icp02/chapter/159/
}}</ref><ref name="KorisettarArchaeobotany">{{cite web
|last=Korisettar
|first=Ravi
|title=Archaeobotany: Its relevance in reconstruction of agricultural history
|work=Pre and protohistoric cultures of India
|publisher=INFLIBNET Centre
|url=https://ebooks.inflibnet.ac.in/icp02/chapter/archaeobotany-its-relevance-in-reconstruction-of-agricultural-history/
}}</ref>
या काळातील समाजांची अर्थव्यवस्था केवळ शेतीवर आधारित नव्हती. उपलब्ध पुरातत्त्वीय पुराव्यांमध्ये पशुपालन, शिकार, मासेमारी आणि वनस्पतीजन्य अन्नस्रोतांचा वापर यांचाही समावेश आढळतो. त्यामुळे महाराष्ट्रातील प्रारंभिक कृषक अर्थव्यवस्थेचे स्वरूप मिश्र उपजीविकेचे होते.<ref name="KorisettarArchaeobotany" />
=== इनामगाव आणि ताम्रपाषाणकालीन कृषी जीवन ===
इनामगाव हे महाराष्ट्रातील ताम्रपाषाणकालीन कृषक वस्तीच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचे पुरातत्त्वीय स्थळ आहे. हे स्थळ पुणे जिल्ह्यातील घोड नदीच्या परिसरात आहे. उत्खननातून मालवा, आरंभीचा जोर्वे आणि उत्तर जोर्वे या सांस्कृतिक टप्प्यांतील वस्तीचे पुरावे मिळाले आहेत.<ref name="RobbinsSchug" /><ref name="DhavalikarInamgaon">{{cite web
|last=Dhavalikar
|first=M. K.
|title=Settlement Archaeology of Inamgaon
|publisher=Indira Gandhi National Centre for the Arts
|url=https://ignca.gov.in/Asi_data/63860.pdf
}}</ref>
इनामगावातील पुराव्यांमधून बार्ली, गहू, तांदूळ, नाचणी, ज्वारी, कुळीथ, वाटाणा, मसूर, मूग, उडीद आणि इतर कडधान्यांच्या लागवडीचे पुरावे मिळाले आहेत. पशुपालन आणि शिकार यांचाही अर्थव्यवस्थेत सहभाग होता. या पुराव्यांवरून ताम्रपाषाणकालीन महाराष्ट्रातील कृषी अर्थव्यवस्था विविध पिके, पशुपालन आणि इतर उपजीविकांच्या मिश्र स्वरूपाची होती असे दिसते.<ref name="RobbinsSchug" />
इनामगावच्या अभ्यासात कृषी व्यवस्थेशी संबंधित पाण्याच्या वापराचे आणि सिंचनाचे पुरावेही नोंदविले गेले आहेत. या पुराव्यांमुळे महाराष्ट्रातील काही ताम्रपाषाणकालीन कृषक समुदायांना पाणी, जमीन आणि पिकांच्या नियोजनाचा अनुभव असल्याचे दिसून येते.<ref name="RobbinsSchug" />
=== कोकण आणि जोर्वे संस्कृती ===
जोर्वे ही महाराष्ट्रातील ताम्रपाषाणकालीन पुरातत्त्वीय संस्कृती असून तिचे प्रमुख केंद्र दख्खनमधील नदीखोऱ्यांत होते. आधुनिक महाराष्ट्राच्या पश्चिम किनाऱ्याचा, विशेषतः कोकणाचा, जोर्वे संस्कृतीच्या मुख्य विस्तारात समावेश नसल्याचे पुरातत्त्वीय अभ्यासांमध्ये नमूद केले आहे.<ref name="Shinde1991">{{cite journal
|last=Shinde
|first=Vasant
|title=Craft specialization and social organization in the Chalcolithic Deccan, India
|journal=Antiquity
|volume=65
|issue=249
|year=1991
|pages=796–807
}}</ref>
म्हणून महाराष्ट्रातील जोर्वे संस्कृतीचा इतिहास आणि कोकणातील प्राचीन मानवी वस्ती यांचा अभ्यास स्वतंत्र पुरातत्त्वीय संदर्भांत करणे आवश्यक आहे. जोर्वे संस्कृतीचे कृषक जीवन महाराष्ट्रातील प्राचीन कृषी अर्थव्यवस्थेचे महत्त्वाचे उदाहरण आहे; मात्र ‘जोर्वे संस्कृती म्हणजे कोकणातील कुणबींची पूर्वज संस्कृती’ असा निष्कर्ष उपलब्ध पुराव्यांवरून काढता येत नाही.<ref name="Shinde1991" />
=== प्रारंभिक ग्रामजीवन आणि कृषी अर्थव्यवस्था ===
ताम्रपाषाणकालीन महाराष्ट्रातील पुरातत्त्वीय स्थळांवरून स्थिर किंवा अर्ध-स्थिर वस्ती, घरांची रचना, धान्यसाठवण, शेतीची साधने, पशुपालन आणि विविध प्रकारच्या हस्तकौशल्यांचे पुरावे मिळतात. या पुराव्यांमधून ग्रामीण अर्थव्यवस्थेची प्राथमिक रूपे आणि कृषी उत्पादनाशी संबंधित सामाजिक संघटनांचा विकास झाल्याचे दिसते.<ref name="RobbinsSchug"/>
मात्र अशा प्राचीन वस्तींच्या सामाजिक संरचनेला आधुनिक जातव्यवस्थेतील ‘कुणबी’ या विशिष्ट जातनावाशी थेट जोडण्यासाठी आवश्यक असलेला सलग पुरातत्त्वीय, अभिलेखीय आणि सामाजिक पुरावा उपलब्ध नाही. त्यामुळे प्राचीन कृषक समाज हा आधुनिक कुणबी समाजाचा थेट पूर्वज होता, असा निष्कर्ष या लेखात मांडलेला नाही.
=== प्राचीन कृषक समाजापासून ऐतिहासिक ग्रामीण समाजाकडे ===
कोकणातील प्रागैतिहासिक आणि आरंभीच्या ऐतिहासिक मानवी वस्तीचा पुरावा हा आधुनिक कुणबी समाजाच्या इतिहासाचा थेट पुरावा नसला, तरी तो पुढील ग्रामीण आणि कृषी समाजाच्या ऐतिहासिक पार्श्वभूमीचा महत्त्वाचा भाग आहे. कोकणाचा प्राचीन इतिहास हा किनारी वसाहती, नदीखोरे, बंदरे, व्यापारमार्ग आणि सह्याद्रीमार्गे दख्खनशी असलेल्या संपर्काशी संबंधित होता. महाराष्ट्राच्या इतिहासाच्या अधिकृत गॅझेटियरमध्ये कोकणातील प्राचीन वस्ती, व्यापारी केंद्रे आणि विविध राजकीय सत्तांच्या प्रभावाचा मागोवा आढळतो.<ref>{{cite web
|title=History of Maharashtra — Chapter I
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/History%20Part/chapter_1.pdf
}}</ref><ref name="UNESCOGeoglyphsKonkan" />
कालांतराने जमीन, शेती, ग्रामसंस्था, उत्पादन, व्यापार, महसूल आणि सामाजिक संबंध यांचे स्वरूप बदलत गेले. पश्चिम दख्खनातील मध्ययुगीन ग्रामसमाजाच्या अभ्यासातून कृषी जमीन, ग्रामस्थळ, सामाईक चराऊ जमीन आणि स्थानिक ग्रामसंस्थांची रचना यांविषयी माहिती मिळते. या ग्रामीण संस्थांचा विकास प्रदेशानुसार वेगवेगळ्या स्वरूपात झाला असून कोकणातील भौगोलिक परिस्थितीमुळे तेथील ग्रामजीवन पश्चिम दख्खनच्या अंतर्गत प्रदेशापेक्षा काही बाबतींत वेगळे होते.<ref name="Fukazawa1982">{{cite book
|last=Fukazawa
|first=H.
|chapter=The Medieval Deccan and Maharashtra
|title=The Cambridge Economic History of India
|editor1-last=Raychaudhuri
|editor1-first=Tapan
|editor2-last=Habib
|editor2-first=Irfan
|publisher=Cambridge University Press
|year=1982
|pages=249–260
}}</ref>
मध्ययुगीन काळात कोकणातील कृषी उत्पादनाबरोबरच किनारी व्यापार आणि बंदरांशी संबंधित आर्थिक व्यवहारांनाही महत्त्व होते. महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरनुसार प्राचीन आणि मध्ययुगीन काळात कोकणातील चौल, कल्याण, सोपारा आणि राजापुरी यांसारख्या बंदरांनी व्यापार आणि बाह्य संपर्कात भूमिका बजावली. कोकणातील भौगोलिक स्थानामुळे सह्याद्रीतील घाटमार्ग आणि समुद्री मार्ग यांच्या माध्यमातून अंतर्गत दख्खन आणि किनारी प्रदेश यांच्यात संपर्क निर्माण झाला.<ref>{{cite web
|title=History of Maharashtra — Chapter I
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/History%20Part/chapter_1.pdf
}}</ref>
या दीर्घकालीन प्रक्रियांमधून कोकणातील ग्रामीण समाजरचना विकसित होत गेली. तथापि या प्रक्रियेतील प्रत्येक प्राचीन किंवा मध्ययुगीन कृषक समूहाला आधुनिक ‘कुणबी’ या सामाजिक नावाने संबोधता येत नाही. आधुनिक कुणबी ओळख कधी आणि कोणत्या सामाजिक प्रक्रियांमधून अधिक स्पष्ट झाली, याचा अभ्यास करण्यासाठी पुढील मध्ययुगीन, प्रारंभिक आधुनिक आणि विशेषतः वसाहतकालीन प्रशासकीय, जनगणना आणि ethnographic स्रोत स्वतंत्रपणे तपासणे आवश्यक आहे.<ref name="Enthoven1922" />
त्यामुळे आधुनिक कुणबी समाजाचा इतिहास शोधताना प्रागैतिहासिक कृषक संस्कृती, प्राचीन वस्ती, मध्ययुगीन ग्रामीण समाज आणि वसाहतकालीन प्रशासकीय नोंदी यांना एकाच अखंड जातीय वंशावळीत जोडण्याऐवजी स्वतंत्र ऐतिहासिक टप्पे म्हणून तपासणे अधिक योग्य ठरते. उपलब्ध पुरावे प्राचीन कोकणातील मानवी व कृषी जीवनाची ऐतिहासिक पार्श्वभूमी स्पष्ट करतात; मात्र त्या आधारे आधुनिक कुणबी समाजाची थेट आणि अखंड वंशपरंपरा सिद्ध होत नाही.<ref name="UNESCOGeoglyphsKonkan" /><ref name="Fukazawa1982" />
=== प्रारंभिक ऐतिहासिक काळातील कोकण ===
इ.स.पूर्व शेवटच्या शतकांपासून इ.स.च्या आरंभीच्या शतकांपर्यंत पश्चिम दख्खन आणि कोकण यांच्यात व्यापारी, राजकीय आणि सांस्कृतिक संपर्क वाढला. या काळात पश्चिम दख्खनातील व्यापारी मार्ग, अंतर्गत बाजारपेठा आणि समुद्रकिनारी बंदरे यांचा विकास झाला. नाशिक, कार्ले आणि कान्हेरी यांसारख्या ठिकाणच्या शिलालेखांमधून त्या काळातील राजकीय सत्ताकेंद्रे, व्यापारी समुदाय, धार्मिक संस्था, दाते आणि विविध सामाजिक-आर्थिक समूहांविषयी माहिती मिळते.<ref>{{cite web
|title=Social and Religious Conditions: The Deccan under the Sātavāhanas
|publisher=Indira Gandhi National Centre for the Arts
|url=https://ignca.gov.in/Asi_data/17904.pdf
}}</ref>
सातवाहनकालीन पश्चिम दख्खनाच्या इतिहासाच्या अभ्यासासाठी नाशिक, कार्ले आणि इतर शिलालेख महत्त्वाचे आहेत. या शिलालेखांमधून कृषक, व्यापारी, कारागीर, धार्मिक दाते आणि प्रशासकीय घटक यांचा उल्लेख आढळतो. त्यामुळे प्रारंभिक ऐतिहासिक काळातील पश्चिम दख्खनातील समाज हा केवळ राजसत्ता आणि धार्मिक संस्थांपुरता मर्यादित नसून विविध आर्थिक आणि सामाजिक समूहांनी बनलेला होता.<ref name="Mirashi1981">{{cite book
|last=Mirashi
|first=Vasudev Vishnu
|title=The History and Inscriptions of the Sātavāhanas and the Western Kshatrapas
|publisher=Maharashtra State Board for Literature and Culture
|location=Bombay
|year=1981
}}</ref>
=== कुटुम्बिक, कुटुम्बिन् आणि कृषक समाज ===
सातवाहनकालीन आणि आरंभीच्या ऐतिहासिक शिलालेखांच्या अभ्यासात ''kuṭumbika'', ''kuṭumbin'', ''gṛhapati'' आणि कृषीशी संबंधित ''halāyudha'' किंवा ''hālakiya'' यांसारख्या संज्ञांचा उल्लेख आढळतो. या संज्ञांचा अर्थ आणि सामाजिक संदर्भ प्रत्येक शिलालेखाच्या संदर्भानुसार तपासणे आवश्यक आहे. उपलब्ध अभ्यासांमध्ये ''kuṭumbin'' किंवा ''gṛhapati'' यांचा संबंध गृहस्थ किंवा कुटुंबप्रमुखाशी, तर ''halāyudha''चा संबंध कृषक व्यवसायाशी जोडला आहे.<ref name="SatavahanaSocialReligious">{{cite web
|title=Social and Religious Conditions: The Deccan under the Sātavāhanas
|publisher=Indira Gandhi National Centre for the Arts
|url=https://ignca.gov.in/Asi_data/17904.pdf
}}</ref>
पश्चिम दख्खनातील नाशिक परिसराशी संबंधित शिलालेखीय पुराव्यांमध्ये ''kuṭumbika'' या संज्ञेचा वापर आढळतो. एका नोंदीत ''kuṭumbika''चा उल्लेख कृषक किंवा नांगरणी करणाऱ्या व्यक्तीच्या संदर्भात करण्यात आला आहे. या प्रकारच्या पुराव्यांवरून प्रारंभिक ऐतिहासिक काळात कुटुंब, कृषी उत्पादन, संपत्ती आणि धार्मिक दान यांच्यात परस्परसंबंध असलेले ग्रामीण गृहस्थ अस्तित्वात होते असे दिसते.<ref>{{cite web
|title=Social and Economic Conditions under the Sātavāhanas
|publisher=Indira Gandhi National Centre for the Arts
|url=https://ignca.gov.in/Asi_data/17073.pdf
}}</ref>
सातवाहनकालीन सामाजिक आणि आर्थिक इतिहासाच्या अभ्यासात ''kuṭumbin'' ही संज्ञा आधुनिक ‘कुणबी’ किंवा शेतकरी या शब्दांशी तुलना करण्यासाठी काही वेळा वापरली जाते. मात्र ही तुलना मुख्यतः सामाजिक-आर्थिक भूमिकेच्या संदर्भात आहे. ''kuṭumbin'' आणि आधुनिक ‘कुणबी’ हे एकच सामाजिक समुदाय होते, असा निष्कर्ष या तुलनेतून काढता येत नाही.<ref name="Mirashi1981"/>
=== प्रारंभिक कृषी व ग्रामजीवनाची पार्श्वभूमी ===
प्रारंभिक ऐतिहासिक काळातील कृषी अर्थव्यवस्था समजून घेण्यासाठी त्यापूर्वीच्या महाराष्ट्रातील ताम्रपाषाणकालीन वस्तींचे पुरावेही महत्त्वाचे आहेत. इनामगावसारख्या स्थळांवर घरांची रचना, धान्यसाठवण, कृषी उत्पादन, पशुपालन आणि कारागिरी यांचे पुरावे मिळाले आहेत. M. K. Dhavalikar यांच्या इनामगाववरील अभ्यासात या स्थळावरील वस्तीच्या आराखड्याच्या आधारे महाराष्ट्रातील प्रारंभिक कृषकांच्या वस्तीपद्धतीचा अभ्यास करण्यात आला आहे.<ref name="Dhavalikar1977">{{cite journal
|last=Dhavalikar
|first=M. K.
|title=Inamgaon: The Pattern of Settlement
|journal=Man and Environment
|volume=1
|year=1977
|pages=46–51
}}</ref>
इनामगावचा कालखंड सातवाहनकालापूर्वीचा असल्यामुळे तेथील पुरावे आणि सातवाहनकालीन शिलालेख एकाच ऐतिहासिक टप्प्याचे प्रतिनिधित्व करीत नाहीत. तथापि दोन्ही प्रकारचे पुरावे महाराष्ट्रातील दीर्घकालीन कृषी, वस्ती आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या विकासाचा स्वतंत्र पुरातत्त्वीय आणि अभिलेखीय संदर्भ उपलब्ध करून देतात.<ref name="Dhavalikar1977"/><ref name="SatavahanaSocialReligious"/>
सातवाहनकालीन शिलालेखांमध्ये कृषक, व्यापारी, कारागीर आणि धार्मिक दाते यांचे उल्लेख आढळतात. काही व्यक्तींनी बौद्ध धार्मिक संस्थांना गुहा, निधी किंवा इतर स्वरूपात दाने दिल्याचेही नोंदविले आहे. यावरून कृषी आणि इतर आर्थिक उपक्रमांमधून निर्माण होणाऱ्या संपत्तीचा काही भाग धार्मिक संस्थांच्या आश्रयासाठी वापरला जात असल्याचे दिसते.<ref name="SatavahanaSocialReligious"/>
=== प्राचीन कृषक समाज आणि आधुनिक कुणबी यांच्यातील संबंध ===
प्राचीन महाराष्ट्रातील कृषक संस्कृती, सातवाहनकालीन ''kuṭumbika'' किंवा ''kuṭumbin'' यांसारख्या संज्ञा आणि आधुनिक ‘कुणबी’ या सामाजिक नावामध्ये भाषिक किंवा सामाजिक साम्य असल्याचे काही जुन्या आणि आधुनिक अभ्यासांमध्ये सूचित केले गेले आहे. मात्र या साम्यांवरून प्रागैतिहासिक किंवा सातवाहनकालीन कृषक समाज हा आधुनिक कुणबी समाजाचा थेट पूर्वज होता, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="RussellHiralal1916"/>
विशेषतः इ.स.पूर्व दुसऱ्या सहस्रकातील मालवा किंवा जोर्वे संस्कृतीतील कृषकांना ‘कुणबी’ म्हणणे अनैतिहासिक ठरेल. त्याचप्रमाणे सातवाहनकालीन ''kuṭumbika'' किंवा ''kuṭumbin'' या संज्ञा आधुनिक जातीय अर्थाने ‘कुणबी’चे समानार्थी नाव होत्या, असे निश्चितपणे म्हणता येत नाही.
‘कुणबी’ ही सामाजिक ओळख पुढील ऐतिहासिक काळातील सामाजिक संघटन, प्रादेशिक ओळखी, कृषी संबंध, जमीनव्यवस्था आणि नंतरच्या प्रशासकीय व जनगणना प्रक्रियांमध्ये अधिक स्पष्टपणे दस्तऐवजीकृत होत गेली. त्यामुळे आधुनिक कुणबी समाजाचा इतिहास समजून घेण्यासाठी प्राचीन कृषक समाजानंतरच्या मध्ययुगीन, पूर्व-आधुनिक आणि वसाहतकालीन प्रक्रियांचा स्वतंत्र अभ्यास आवश्यक आहे.<ref name="Enthoven1922" />
या अर्थाने प्राचीन कृषक संस्कृतींचा इतिहास हा कोकणातील कुणबींच्या थेट जातीय उत्पत्तीचा पुरावा नसून महाराष्ट्र आणि पश्चिम दख्खनमध्ये कृषी, स्थिर वस्ती, कुटुंब, उत्पादन आणि ग्रामीण जीवन यांची विकसित झालेली दीर्घ ऐतिहासिक पार्श्वभूमी म्हणून पाहणे अधिक योग्य ठरते.
=== ऐतिहासिक आणि आधुनिक वर्गीकरणातील फरक ===
कुणबी समाजाशी संबंधित संज्ञांचे प्रशासकीय आणि जनगणनात्मक वर्गीकरण काळानुसार बदलत गेले. ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये जात, उपजात, जमात किंवा सामाजिक समूहांची नोंद करताना तत्कालीन प्रशासकीय वर्गीकरण, प्रदेश, स्थानिक सामाजिक ओळख आणि जनगणनेची पद्धत यांचा परिणाम होत असे. त्यामुळे ''Kunbi'', ''Kanbi'', ''Kulwadi'', ''Maratha-Kunbi'' किंवा ''Kunbi-Maratha'' यांसारख्या संज्ञा वेगवेगळ्या काळातील जनगणना नोंदींमध्ये समान पद्धतीने वापरल्या गेल्या नाहीत.<ref name="Census1931Bombay"/>
१९३१ च्या बॉम्बे जनगणनेतील विविध तक्त्यांमध्ये ''Kunbi, Kulwadi or Kanbi'', ''Lewa or Lewa Kunbi'' आणि ''Maratta-Kunbi'' अशा स्वतंत्र नोंदी आढळतात. त्याचबरोबर काही तक्त्यांमध्ये ''Maratta, Maratta-Kunbi, Kulwadi or Kanbi, Lewa or Rewa Kunbi of Khandesh'' असा संयुक्त वर्गही वापरण्यात आला होता. या नोंदींवरून तत्कालीन जनगणनांमध्ये संबंधित सामाजिक समूहांचे वर्गीकरण तक्त्यानुसार आणि प्रशासकीय संदर्भानुसार वेगवेगळ्या प्रकारे करण्यात आले होते, असे दिसते.<ref name="Census1931Bombay"/>
१९३१ च्या जनगणना अहवालात Maratha आणि Kunbi या संज्ञांच्या वापराशी संबंधित वर्गीकरणीय अडचणींचाही उल्लेख करण्यात आला होता. त्यामुळे वेगवेगळ्या जनगणना वर्षांतील Maratha आणि Kunbi लोकसंख्येची तुलना करताना संबंधित जनगणनेतील वर्गीकरणपद्धती आणि त्या काळातील संज्ञांचा अर्थ लक्षात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="Census1931Bombay"/>
स्वातंत्र्योत्तर काळात या वर्गीकरणाला अधिक स्पष्ट प्रशासकीय स्वरूप प्राप्त झाले. मुंबई सरकारने २३ एप्रिल १९४२ रोजी प्रसिद्ध केलेल्या वर्गीकरणात ''Kunbi (Except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)'' ही नोंद ''Intermediate Communities''च्या यादीत, तर ''Kunbi Tilori in Ratnagiri district'' ही नोंद ''Other Backward Communities''च्या यादीत स्वतंत्रपणे केली होती. मुंबई उच्च न्यायालयाने २००२ च्या निर्णयात ही स्थिती १ नोव्हेंबर १९५०, २९ ऑक्टोबर १९५६ आणि २१ नोव्हेंबर १९६१ च्या पुढील सरकारी ठरावांमध्येही कायम राहिल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="DattatrayaThorat2002"/>
महाराष्ट्र शासनाने १३ ऑक्टोबर १९६७ रोजी स्वतंत्र इतर मागासवर्गीयांची यादी प्रसिद्ध केली. मुंबई उच्च न्यायालयाच्या नोंदीनुसार या यादीत अनुक्रमांक ८३वर ''Kunbi caste''चा समावेश करण्यात आला. न्यायालयाने पुढे नमूद केले की १९६७पासून कुणबी जात महाराष्ट्राच्या इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समाविष्ट झाली.*Dattatraya S/o Ramrao Thorat v. The State of Maharashtra & Ors.*, Writ Petition No. 5345 of 2001, decided on 24 April 2002, 2002 (4) All MR 807.
या ऐतिहासिक बदलांमुळे जुन्या जनगणनेतील एखाद्या संज्ञेची संख्या आणि आजच्या प्रशासकीय वर्गातील त्याच संज्ञेची संख्या यांची थेट तुलना करता येत नाही. अशी तुलना करताना संबंधित जनगणनेतील वर्गीकरण, प्रशासकीय सीमा, संज्ञेचा त्या काळातील अर्थ आणि स्थानिक सामाजिक ओळख या सर्व बाबींचा विचार करणे आवश्यक आहे.
=== संज्ञांच्या वापराबाबत ऐतिहासिक सावधगिरी ===
कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास लिहिताना ‘कुणबी’, ‘कानबी’, ‘कुलवाडी’, ‘मराठा-कुणबी’ आणि ‘तिलोरी कुणबी’ या संज्ञांचा वापर त्यांच्या संबंधित ऐतिहासिक आणि प्रशासकीय संदर्भात करणे आवश्यक आहे. उपलब्ध जनगणना आणि प्रशासकीय नोंदींमध्ये या संज्ञांचे वर्गीकरण काळानुसार बदललेले दिसते.<ref name="Census1931Bombay"/><ref name="DattatrayaThorat2002"/>
विशेषतः तिलोरी कुणबीच्या बाबतीत हा फरक स्पष्टपणे दिसतो. १९४२ च्या मुंबई सरकारच्या वर्गीकरणात रत्नागिरी जिल्ह्यातील तिलोरी कुणबींना ''Other Backward Communities''च्या यादीत स्वतंत्र स्थान देण्यात आले होते, तर त्याच वेळी इतर कुणबींना ''Intermediate Communities''च्या वर्गात ठेवण्यात आले होते. १९५०, १९५६ आणि १९६१ च्या संबंधित सरकारी ठरावांमध्येही ही स्थिती कायम राहिल्याचे मुंबई उच्च न्यायालयाने नमूद केले आहे. १९६७मध्ये मात्र ''Kunbi caste''चा स्वतंत्र इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समावेश करण्यात आला.<ref name="DattatrayaThorat2002"/>
त्यामुळे एखाद्या व्यक्तीची किंवा समूहाची आधुनिक जातीय ओळख केवळ आडनाव, व्यवसाय, गावाचे नाव किंवा जुन्या जनगणनेतील नोंद यावरून निश्चित करता येत नाही. ऐतिहासिक जनगणना ही तत्कालीन प्रशासकीय आणि सामाजिक वर्गीकरणाची नोंद असते; ती प्रत्येक व्यक्तीच्या आधुनिक जातीय ओळखीचा अंतिम पुरावा मानता येत नाही. आधुनिक जातीय किंवा प्रशासकीय दावा तपासताना संबंधित काळातील प्राथमिक दस्तऐवज आणि लागू असलेले प्रशासकीय नियम स्वतंत्रपणे तपासणे आवश्यक आहे.
त्याचप्रमाणे ''Maratha-Kunbi'' किंवा ''Kunbi-Maratha'' या संज्ञांचा एखाद्या ऐतिहासिक स्रोतामध्ये वापर झाला म्हणून त्या संज्ञांचा प्रत्येक काळात आणि प्रत्येक प्रदेशात एकच सामाजिक अर्थ होता असे मानता येत नाही. १९३१ च्या जनगणनेत ''Kunbi, Kulwadi or Kanbi'', ''Maratta-Kunbi'' आणि ''Lewa or Lewa Kunbi'' अशा स्वतंत्र नोंदी तसेच काही ठिकाणी Maratha आणि संबंधित कृषक समूहांना एकत्रित करणारे वर्ग आढळतात.<ref name="Census1931Bombay"/>
या कारणामुळे कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास मांडताना '''भाषिक संज्ञा, सामाजिक ओळख, जनगणनात्मक वर्गीकरण आणि आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरण''' या चार बाबी स्वतंत्रपणे तपासणे आवश्यक आहे. ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये समान किंवा संबंधित संज्ञांचे वर्गीकरण काळानुसार बदललेले दिसते, तर स्वातंत्र्योत्तर काळात सरकारी वर्गीकरणातही कुणबी आणि तिलोरी कुणबी यांची प्रशासकीय स्थिती बदलली. त्यामुळे एका काळातील प्रशासकीय वर्गीकरण दुसऱ्या काळातील सामाजिक ओळखीशी तंतोतंत समान मानणे किंवा जुन्या जनगणना अथवा प्रशासकीय नोंदीवरून आधुनिक सामाजिक ओळख निश्चित करणे इतिहासदृष्ट्या अचूक ठरणार नाही.<ref name="Census1931Bombay"/><ref name="DattatrayaThorat2002"/>
== मध्ययुगीन कोकण ==
कोकणाच्या मध्ययुगीन इतिहासात विविध राजकीय सत्तांचा प्रभाव पडला. शिलाहार, यादव, दिल्ली सल्तनत, बहमनी सत्ता आणि त्यानंतरची दख्खनी सल्तनती राज्ये यांच्या काळात कोकणातील राजकीय सीमा, प्रशासकीय व्यवस्था आणि स्थानिक सत्ताकेंद्रे बदलत गेली. या राजकीय बदलांबरोबर जमीन, महसूल, ग्रामव्यवस्था आणि कृषी उत्पादनाशी संबंधित संस्थांमध्येही बदल झाले. मात्र या सर्व कालखंडातील कृषक समाजाला आधुनिक अर्थाने ‘कुणबी’ म्हणून संबोधणे इतिहासदृष्ट्या योग्य ठरत नाही. उपलब्ध मध्ययुगीन स्रोतांमध्ये ग्रामीण समाजाचे विविध प्रशासकीय, आर्थिक आणि सामाजिक संदर्भ आढळतात; ‘कुणबी’ ही आधुनिक सामाजिक ओळख पुढील ऐतिहासिक प्रक्रियांमध्ये अधिक स्पष्टपणे दस्तऐवजीकृत झाली.<ref name="HistoryKonkan">{{cite web
|title=History of the Konkan
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Gazetteer%20of%20Bombay%20Presidency/history_of_the_konkan/section_2.pdf
}}</ref><ref name="MediaevalAdministration">{{cite web
|title=Mediaeval Administration and Social Organisation
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/History%20Part/History_II/chapter_10.pdf
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=== शिलाहार ===
कोकणाच्या मध्ययुगीन इतिहासात शिलाहारांचे महत्त्वाचे स्थान आहे. शिलाहारांच्या तीन प्रमुख शाखांपैकी दक्षिण कोकणातील शाखेने साधारण इ.स. ७७० ते १०२० च्या दरम्यान राज्य केले. उत्तर कोकणातील शिलाहार शाखेचे राजकीय क्षेत्र ठाणे, कोलाबा आणि त्याच्या आसपासच्या प्रदेशाशी संबंधित होते. दक्षिण कोकणातील शिलाहार हे सुरुवातीला राष्ट्रकूटांचे आणि नंतर चालुक्य, कदंब व यादव यांसारख्या दख्खनी सत्तांचे मांडलिक होते.<ref name="Silaharas">{{cite web
|title=Silaharas
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
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}}</ref>
उत्तर कोकणातील शिलाहारांच्या राजकीय क्षेत्रात आजच्या ठाणे, मुंबई, कोलाबा आणि आसपासच्या प्रदेशांचा समावेश होत होता. त्यांच्या काळात ठाणे, सोपारा, चौल, उरण आणि इतर किनारी केंद्रे व्यापार व राजकीय संपर्कासाठी महत्त्वाची होती. कोकणातील राजकीय आणि आर्थिक जीवनाचा संबंध समुद्री बंदरे तसेच सह्याद्रीमार्गे दख्खनच्या पठाराशी जोडलेल्या मार्गांशी होता.<ref name="HistoryKonkan"/>
शिलाहारकालीन ताम्रपट आणि शिलालेखांमधून जमीनदान, धार्मिक संस्था आणि स्थानिक सत्ताकेंद्रांमधील संबंधांचा अभ्यास करता येतो. या पुराव्यांमुळे कृषी उत्पादन आणि जमिनीचे उत्पन्न हे तत्कालीन सामाजिक, धार्मिक आणि राजकीय व्यवस्थेतील महत्त्वाचे आर्थिक आधार होते असे दिसते. तथापि या काळातील कृषक समाजाला आधुनिक ‘कुणबी’ या जातनावाने ओळखण्यास पुरेसा थेट पुरावा उपलब्ध नाही.<ref name="Silaharas"/>
=== यादव ===
इ.स. १२व्या आणि १३व्या शतकात देवगिरीच्या यादव सत्तेचा पश्चिम दख्खनावर प्रभाव वाढला. कोकणातील काही भागांवरही यादव सत्तेचे नियंत्रण किंवा प्रभाव होता. उत्तर कोकणात यादवांच्या प्रतिनिधींची प्रशासकीय उपस्थिती असल्याचे ताम्रपट आणि शिलालेखीय पुराव्यांतून दिसते. इ.स. १२७३ आणि १२९१ च्या नोंदींमध्ये रामचंद्र यादवाच्या अधिकाऱ्यांनी कल्याण आणि सालसेट परिसरातील गावांच्या दानाचा उल्लेख केला आहे.<ref name="HistoryKonkan"/>
यादवकालीन महाराष्ट्रातील ग्रामीण समाज आणि प्रशासकीय व्यवस्थेबाबत महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमध्ये गावाच्या पातळीवर ग्रामकूट, चौधरी किंवा चौगुला यांसारख्या पदांचा उल्लेख आहे. ग्रामसमिती आणि तिचे सदस्य महत्तर म्हणून ओळखले जात असल्याची नोंदही आढळते. या काळात गाव हे कृषी उत्पादन, स्थानिक प्रशासन आणि सामाजिक जीवनाचे महत्त्वाचे केंद्र होते.<ref name="TerritorialGroups">{{cite web
|title=Territorial Groups
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/land_and_people/L%20%26%20P%20pdf/Chapter%20VI/2%20Places%20of%20Pilgrimage.pdf
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या ग्रामव्यवस्थेचा उल्लेख आधुनिक कुणबी समाजाच्या थेट इतिहासासाठी पुरावा म्हणून न करता, कोकण आणि पश्चिम दख्खनातील पुढील ग्रामीण समाजरचनेची ऐतिहासिक पार्श्वभूमी म्हणून पाहणे अधिक योग्य आहे.
=== यादव सत्तेचा अंत आणि दिल्ली सल्तनतीचा प्रभाव ===
१३व्या शतकाच्या अखेरीस देवगिरीच्या यादव सत्तेवर दिल्ली सल्तनतीचा प्रभाव वाढला. इ.स. १३१७मध्ये यादव राज्य दिल्लीच्या सत्तेखाली पूर्णपणे गेले आणि दख्खनमध्ये दिल्लीच्या प्रशासकीय व लष्करी सत्तेची स्थापना झाली. महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरनुसार या काळात देवगिरी हे दिल्लीच्या दख्खन प्रांताचे महत्त्वाचे प्रशासकीय केंद्र राहिले आणि प्रदेशातील अनेक भागांवर लष्करी अधिकाऱ्यांच्या माध्यमातून सत्ता चालवली जात होती.<ref name="MediaevalAdministration"/>
या संक्रमणकाळात दक्षिण कोकणासारख्या सीमावर्ती भागांत काही स्थानिक हिंदू प्रमुखांनी आपली सत्ता टिकवून ठेवण्याचा प्रयत्न केल्याची नोंद महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमध्ये आहे. त्यामुळे दिल्लीच्या सत्तेचा प्रभाव वाढला असला तरी स्थानिक सत्ताकेंद्रे आणि ग्रामीण संस्था तत्काळ पूर्णपणे नाहीशा झाल्या असे मानता येत नाही.<ref name="MediaevalAdministration"/>
या राजकीय संक्रमणाचा परिणाम महसूल, जमीन आणि ग्रामीण समाजावर झाला. दिल्लीच्या दख्खनमधील प्रशासनात ''iqta''सारख्या महसूल व लष्करी व्यवस्थांचा वापर करण्यात आला होता. तथापि या कालखंडातील ग्रामीण कृषकांना आधुनिक ‘कुणबी’ या नावाने ओळखण्यास उपलब्ध स्रोत पुरेसा आधार देत नाहीत.<ref name="MediaevalAdministration"/>
=== बहमनी सत्ता ===
इ.स. १३४७मध्ये बहमनी सत्ता स्थापन झाल्यानंतर दख्खनमध्ये स्वतंत्र सुलतानशाही राजकीय व्यवस्था निर्माण झाली. महाराष्ट्रातील ग्रामीण समाजाच्या संदर्भात बहमनी सत्तेने पाटील आणि देशमुख यांसारख्या स्थानिक अधिकाऱ्यांचे हक्क व वतने मान्य केल्याची नोंद महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमध्ये आढळते.<ref name="TerritorialGroups"/>
बहमनी काळात गाव हे स्थानिक प्रशासन आणि कृषी उत्पादनाचे महत्त्वाचे केंद्र राहिले. पाटील आणि देशमुख यांसारख्या स्थानिक अधिकारपदांना मान्यता मिळाल्यामुळे केंद्रीय सुलतानशाही आणि स्थानिक ग्रामीण समाज यांच्यात संस्थात्मक संबंध निर्माण झाले. महसूलव्यवस्थेतील विविध प्रशासकीय विभागांसाठी तालुका, महाल, तरफ आणि परगणा यांसारख्या संज्ञांचा वापर होत असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद आहे.<ref name="TerritorialGroups"/>
बहमनी राज्याचे विघटन झाल्यानंतर दख्खनमध्ये अहमदनगरची निजामशाही, विजापूरची आदिलशाही, गोवळकोंड्याची कुतुबशाही, वऱ्हाडची इमादशाही आणि बिदरची बरीदशाही अशी स्वतंत्र सत्ताकेंद्रे निर्माण झाली. या सत्तांमुळे महाराष्ट्रातील राजकीय सीमा आणि प्रशासकीय व्यवस्था पुन्हा बदलल्या.<ref name="BahamanisDeccan">{{cite web
|title=The Bahamanis of the Deccan
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/History%20Part/History_II/chapter_2.pdf
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=== निजामशाही, आदिलशाही आणि कोकण ===
बहमनी सत्तेच्या विघटनानंतर कोकणातील विविध प्रदेशांवर अहमदनगरची निजामशाही आणि विजापूरची आदिलशाही यांचा वेगवेगळ्या काळात प्रभाव राहिला. किनारी प्रदेशात स्थानिक राजकीय सत्ताकेंद्रे, बंदरे आणि किल्ले यांचे महत्त्व वाढले. कोकणातील राजकीय नियंत्रण हे केवळ एका सत्तेच्या अखंड अधिपत्याखाली राहिले नाही; विविध सत्तांमध्ये प्रदेशांचे नियंत्रण बदलत गेले.<ref name="NizamshahiAhmadnagar">{{cite web
|title=The Nizamshahi of Ahmadnagar
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/History%20Part/History_II/chapter_3.pdf
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कोकणातील राजापुरीसारख्या केंद्रांच्या इतिहासातून या राजकीय बदलांचे उदाहरण दिसते. महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरनुसार राजापुरीचा प्रदेश पंधराव्या शतकाच्या अखेरीस निजामशाहीच्या प्रभावाखाली आला आणि १४९०मध्ये मलिक अहमदने दीर्घ वेढ्यानंतर तो ताब्यात घेतला.<ref name="Rajpuri">{{cite web
|title=Rajpuri
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/KOLABA/places_Rajpuri.html
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या राजकीय संक्रमणांचा ग्रामीण समाजावर परिणाम महसूल, जमीनवापर, स्थानिक अधिकारपदे आणि व्यापारमार्गांच्या बदलांच्या माध्यमातून झाला. मात्र उपलब्ध स्रोतांवरून या सर्व कालखंडातील कृषक समाजाची एकच जातीय ओळख होती असे म्हणता येत नाही.
=== मध्ययुगीन कोकणातील कृषक समाज ===
मध्ययुगीन कोकणातील कृषक समाज हा जमीन, पावसावर आधारित शेती, स्थानिक बाजारपेठा, ग्रामसंस्था आणि महसूलव्यवस्थेशी जोडलेला होता. कोकणाच्या भौगोलिक परिस्थितीमुळे भातशेती, डोंगरउतारावरील शेती आणि किनारी व्यापार यांना विशेष महत्त्व होते. पुढील शतकांमध्ये या ग्रामीण अर्थव्यवस्थेचे विविध स्वरूप विकसित झाले.<ref name="HistoryKonkan"/>
मध्ययुगीन ग्रामीण समाजाचा हा इतिहास आधुनिक कुणबी समाजाच्या निर्मितीचा थेट पुरावा म्हणून वापरता येत नाही. मात्र पुढील पूर्व-आधुनिक आणि वसाहतकालीन काळात जमीन, शेती, महसूल, ग्रामसंस्था आणि कृषक सामाजिक ओळखी यांच्या ज्या प्रक्रिया अधिक स्पष्ट झाल्या, त्यांची ऐतिहासिक पार्श्वभूमी या कालखंडात शोधता येते.
=== निजामशाही आणि कोकण ===
इ.स. १४९०मध्ये अहमदनगरच्या निजामशाहीची स्थापना झाल्यानंतर कोकणातील काही महत्त्वाची ठाणी आणि बंदरे निजामशाहीच्या राजकीय व लष्करी प्रभावाखाली आली. कोलाबा गॅझेटियरमध्ये दांडा-राजपुरीचा उल्लेख करताना, इ.स. १४९०मध्ये दीर्घ वेढ्यानंतर निजामशाहीचा संस्थापक मलिक अहमद याने राजपुरी जिंकून घेतल्याची नोंद आहे. त्यानंतर अहमदनगरची सत्ता कोकणातील या भागावर दृढ झाली आणि राजपुरी हे व्यापाराचे महत्त्वाचे केंद्र राहिले.<ref name="Rajpuri"/>
निजामशाहीच्या विस्ताराच्या काळात मलिक अहमदने कोकण आणि घाट परिसरातील अनेक किल्ले आपल्या ताब्यात घेतल्याची नोंद महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमध्ये आहे. इ.स. १४८५नंतर त्याने जुन्नर आणि दौलताबादच्या प्रदेशातून कोकणाकडे लष्करी मोहिमा केल्या आणि अनेक घाट व कोकणातील किल्ल्यांवर नियंत्रण मिळवले. इ.स. १४९०मध्ये दांडा-राजपुरी जिंकल्यानंतर उत्तर कोकणातील गुजरातच्या अखत्यारीत नसलेला काही प्रदेश अहमदनगरच्या नियंत्रणाखाली आला.<ref name="HistoryKonkanSection3">{{cite web
|title=History of the Konkan
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
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निजामशाहीच्या काळात कोकणातील बंदरे, घाटमार्ग आणि किल्ले यांना राजकीय तसेच आर्थिक महत्त्व होते. राजपुरी हे पंधराव्या आणि सोळाव्या शतकात व्यापाराचे महत्त्वाचे केंद्र होते. पुढील काळातील प्रवाशांच्या आणि परकीय व्यापारविषयक नोंदींमध्येही राजपुरीचा व्यापारकेंद्र आणि बंदर म्हणून उल्लेख आढळतो.<ref name="Rajpuri"/>
या राजकीय आणि व्यापारी व्यवस्थेचा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेशी संबंध होता. कृषी उत्पादन स्थानिक बाजारपेठा आणि बंदरांशी जोडलेले होते. मात्र या काळातील कृषक समाजाला आधुनिक अर्थाने ‘कुणबी’ या एकसंध जातीय नावाने ओळखणे योग्य ठरणार नाही. आधुनिक कुणबी ओळख पुढील काळातील सामाजिक, प्रशासकीय आणि जनगणनात्मक प्रक्रियांमध्ये अधिक स्पष्टपणे नोंदली गेली.
=== आदिलशाही आणि दक्षिण कोकण ===
बहमनी सत्तेच्या विघटनानंतर विजापूरची आदिलशाही ही दख्खनमधील प्रमुख सत्तांपैकी एक झाली. कोकणातील विविध भागांवर अहमदनगरची निजामशाही आणि विजापूरची आदिलशाही यांचा वेगवेगळ्या काळात प्रभाव राहिला. कोकणाच्या राजकीय इतिहासात स्थानिक सरदार, किल्ले, बंदरे आणि किनारी सत्ताकेंद्रे यांचे महत्त्व कायम राहिले.<ref name="HistoryKonkanSection3"/>
इ.स. १४८९मध्ये युसुफ आदिल खानने विजापूरच्या आदिलशाहीची स्थापना केली. त्याच काळात अहमदनगरच्या मलिक अहमदने कोकणातील अनेक किल्ले ताब्यात घेण्यास सुरुवात केली होती. त्यामुळे पंधराव्या शतकाच्या अखेरीस कोकण आणि घाट प्रदेशात अहमदनगर व विजापूर या दख्खनी सत्तांमधील राजकीय स्पर्धेला महत्त्व प्राप्त झाले.<ref name="HistoryKonkanSection3"/>
दक्षिण कोकणातील राजकीय परिस्थिती एकसंध नव्हती. किनारी भागातील बंदरे आणि किल्ले तसेच सह्याद्रीतील घाटमार्ग यांवर नियंत्रण ठेवणे दख्खनी सत्तांसाठी लष्करी आणि आर्थिकदृष्ट्या महत्त्वाचे होते. समुद्री व्यापार आणि अंतर्गत दख्खनशी असलेले मार्ग यांमुळे कोकणातील किनारी केंद्रांना व्यापक आर्थिक महत्त्व प्राप्त झाले.<ref name="HistoryKonkanSection3"/>
=== मुघल प्रभाव ===
दख्खनमध्ये मुघल सत्तेचा विस्तार झाल्यानंतर महाराष्ट्रातील विविध प्रदेशांवर मुघलांचा राजकीय आणि महसुली प्रभाव वाढला. मात्र कोकणातील राजकीय परिस्थिती एकसंध नव्हती आणि किनारी प्रदेशातील विविध सत्ताकेंद्रे, किल्ले आणि स्थानिक प्रमुख यांचे महत्त्व कायम राहिले. दख्खनच्या राजकीय इतिहासात दिल्ली सल्तनत, बहमनी सत्ता, निजामशाही, आदिलशाही आणि पुढे मुघल सत्ता यांमधील सत्तांतरांची मालिका दिसून येते.<ref name="MediaevalAdministration"/>
मुघल काळातील प्रशासनाचा अभ्यास करताना केंद्रीय सत्ता आणि स्थानिक प्रशासन यांच्यातील संबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे. गावपातळीवरील स्थानिक अधिकारी आणि ग्रामीण संस्था अनेक ठिकाणी प्रशासनाच्या कार्यात सहभागी राहिल्या. त्यामुळे राजकीय सत्ता बदलली तरी स्थानिक ग्रामीण प्रशासनातील काही संस्था आणि सामाजिक संबंध सातत्याने कार्यरत राहू शकले.<ref name="MediaevalAdministration"/>
मुघल आणि दख्खनी सत्तांच्या काळातील महसूलव्यवस्थेचा ग्रामीण समाजावर परिणाम झाला असला तरी त्या काळातील प्रत्येक कृषक समूहाची आधुनिक जातीय ओळख निश्चित करण्यासाठी स्वतंत्र पुराव्यांची आवश्यकता आहे. त्यामुळे या कालखंडातील कृषक समाजाला सरसकट ‘कुणबी’ म्हणून ओळखणे योग्य ठरत नाही.
=== स्थानिक सत्ताकेंद्रे आणि कोकणातील राजकीय विविधता ===
कोकणाचा राजकीय इतिहास केवळ मोठ्या साम्राज्यांच्या इतिहासाने स्पष्ट होत नाही. शिलाहार, यादव आणि दख्खनी सल्तनतींच्या काळात स्थानिक सरदार, वतनदार आणि किल्लेदार यांना स्थानिक प्रशासन आणि संरक्षणव्यवस्थेत महत्त्व होते. किनारी भागातील बंदरे आणि किल्ले हे व्यापार, वाहतूक आणि लष्करी नियंत्रणासाठी महत्त्वाचे केंद्र होते.<ref name="HistoryKonkanSection3"/>
राजपुरी हे याचे महत्त्वाचे उदाहरण आहे. कोलाबा गॅझेटियरनुसार राजपुरीला कोकणाच्या इतिहासात विविध काळात महत्त्व प्राप्त झाले होते. इ.स. १४९०मध्ये निजामशाहीच्या मलिक अहमदने ते जिंकल्यानंतर ते अहमदनगरच्या सत्तेखाली आले. पुढे सोळाव्या आणि सतराव्या शतकातही ते महत्त्वाचे व्यापारकेंद्र राहिले. राजपुरीचा उल्लेख परकीय प्रवासी आणि व्यापारी स्रोतांमध्येही आढळतो.<ref name="Rajpuri"/>
महाड हे कोकणातील आणखी एक महत्त्वाचे ऐतिहासिक केंद्र होते. कोलाबा गॅझेटियरमध्ये महाडचा सावित्री नदीवरील महत्त्वाचा व्यापारी केंद्र म्हणून उल्लेख केला आहे. महाडजवळील पाले येथील बौद्ध लेणी आणि सावित्री नदीमार्गे अंतर्गत प्रदेशाशी असलेला संपर्क यांमुळे महाडला प्रादेशिक व्यापार आणि वाहतुकीच्या दृष्टीने महत्त्व प्राप्त झाले होते.<ref name="Rajpuri"/>
कोकणातील अशा स्थानिक केंद्रांमुळे कृषी उत्पादन, नदीमार्ग, बंदरे, बाजारपेठा आणि घाटमार्ग यांच्यात परस्पर संबंध निर्माण झाले. कोलाबा गॅझेटियरमध्ये महाड, राजपुरी, मुरुड, श्रीवर्धन, रेवदंडा आणि इतर बंदरांच्या व्यापारसंबंधी नोंदी आढळतात. यावरून किनारी आणि नदीमार्गावरील वाहतूक ही ग्रामीण उत्पादनाच्या देवाणघेवाणीशी जोडलेली होती असे दिसते.<ref name="CourseOfTrade">{{cite web
|title=Course of Trade
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/KOLABA/bank_trade_course.html
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=== ग्रामव्यवस्था ===
मध्ययुगीन महाराष्ट्रातील ग्रामव्यवस्था ही आर्थिक आणि प्रशासकीय जीवनाचा महत्त्वाचा आधार होती. यादवकालीन व्यवस्थेबाबत महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमध्ये ग्रामसमिती आणि तिच्या सदस्यांसाठी ‘महत्तर’ यांसारख्या संज्ञांचा उल्लेख आढळतो. स्थानिक ग्रामप्रशासनात विविध अधिकारी आणि सामाजिक घटक सहभागी होत असत.<ref name="TerritorialGroups"/>
बहमनी आणि त्यानंतरच्या दख्खनी सुलतानशाहींच्या काळात पाटील, देशमुख आणि इतर स्थानिक अधिकाऱ्यांचे हक्क आणि वतने अनेक ठिकाणी कायम राहिल्याचे महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमध्ये नमूद केले आहे. त्यामुळे केंद्रीय सुलतानशाही आणि स्थानिक ग्रामव्यवस्था यांच्यात परस्पर संबंध निर्माण झाले होते.<ref name="TerritorialGroups"/>
गावातील कृषी उत्पादन, जमीन, महसूल, स्थानिक सेवा आणि सामाजिक व्यवहार यांचे व्यवस्थापन विविध स्थानिक संस्थांमार्फत होत असे. पाटील हा गावपातळीवरील महत्त्वाचा अधिकारी होता, तर देशमुखाचा संबंध मोठ्या महसुली क्षेत्राशी आणि स्थानिक महसूलव्यवस्थेशी होता. पुढील मराठा काळात या संस्थांच्या अधिकारांमध्ये आणि कार्यपद्धतीत बदल झाले, तरी स्थानिक ग्रामीण प्रशासनाची काही मूलभूत रूपे पुढेही टिकून राहिली.<ref name="TerritorialGroups"/>
=== जमीन आणि महसूल ===
मध्ययुगीन कोकणातील राज्यव्यवस्थेचा महत्त्वाचा आर्थिक आधार जमीन महसूल होता. कृषी उत्पादनावर आधारित महसूलव्यवस्था ही राजसत्तेच्या उत्पन्नाचा प्रमुख स्रोत होती. बहमनी आणि त्यानंतरच्या दख्खनी सल्तनतींच्या काळात महसूल प्रशासनासाठी विविध प्रादेशिक विभाग आणि स्थानिक अधिकारी कार्यरत होते. महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमध्ये पाटील, देशमुख आणि इतर स्थानिक अधिकाऱ्यांच्या माध्यमातून ग्रामस्तरावरील प्रशासन आणि महसूलव्यवस्थेचे स्वरूप स्पष्ट केले आहे.<ref name="TerritorialGroups"/>
जमिनीचा वापर, लागवड आणि महसूल यांच्यातील संबंधामुळे कृषक हा राज्याच्या अर्थव्यवस्थेतील महत्त्वाचा घटक होता. स्थानिक पातळीवरील जमीनव्यवहार आणि महसूल प्रशासनात पाटील, देशमुख आणि इतर स्थानिक अधिकाऱ्यांची भूमिका होती. या संस्थांचे स्वरूप आणि अधिकार प्रदेश व काळानुसार बदलत गेले.<ref name="TerritorialGroups"/>
मध्ययुगीन सत्तांमध्ये जमीन महसूलाच्या पद्धती बदलत गेल्या तरी कृषी उत्पादनावर आधारित राज्याचे आर्थिक हित कायम राहिले. युद्धे, राजकीय संघर्ष आणि नैसर्गिक आपत्तींचा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेवर परिणाम होऊ शकत असे. महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमध्ये दख्खनमधील विविध कालखंडांतील दुष्काळांच्या संदर्भात युद्धे आणि राजकीय अस्थिरतेच्या परिणामांची नोंद आहे.<ref name="FaminesDeccan">{{cite web
|title=Famines in the Deccan
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/aurangabad/CHAP04/FAMINES.htm
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
=== कृषक समाज ===
मध्ययुगीन कोकणातील कृषक समाज हा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेचा महत्त्वाचा आधार होता. भातशेतीसह स्थानिक परिस्थितीनुसार बागायती, पशुपालन आणि इतर ग्रामीण उपजीविका अस्तित्वात होत्या. कोकणाची भौगोलिक रचना, पर्जन्यमान, नद्या, खाड्या आणि किनारी प्रदेश यांचा कृषी पद्धतींवर प्रभाव होता.<ref name="HistoryKonkanSection3"/>
या कृषक समाजात सामाजिक आणि आर्थिक स्तरांमध्ये विविधता होती. जमीन कसणारे शेतकरी, स्थानिक हक्कांशी संबंधित व्यक्ती आणि विविध प्रकारचे ग्रामीण उत्पादक यांचा या व्यवस्थेत समावेश होता. पुढील मराठा आणि ब्रिटिशकालीन नोंदींमध्ये ‘मिरासदार’, ‘उपरी’ आणि इतर कृषक वर्गांचा उल्लेख अधिक स्पष्टपणे आढळतो; मात्र या संज्ञांचा अर्थ आणि प्रशासकीय व्याप्ती प्रदेश व कालखंडानुसार बदलत असल्यामुळे त्यांचा वापर संबंधित ऐतिहासिक संदर्भात करणे आवश्यक आहे.
मध्ययुगीन कृषक समाजाचे महत्त्व केवळ अन्नउत्पादनापुरते मर्यादित नव्हते. जमीन महसूल, स्थानिक बाजारपेठा, व्यापारमार्ग, किल्ले आणि बंदरे यांची आर्थिक रचना कृषी उत्पादनाशी संबंधित होती. त्यामुळे तत्कालीन राजसत्ता कोणतीही असो, ग्रामीण कृषक समाज हा राज्याच्या आर्थिक व्यवस्थेतील महत्त्वाचा घटक राहिला.<ref name="HistoryKonkanSection3"/>
=== मध्ययुगीन कृषक समाज आणि कुणबी ओळख ===
मध्ययुगीन कोकणातील कृषक समाजाचा इतिहास हा आधुनिक कुणबी समाजाच्या सामाजिक आणि आर्थिक पार्श्वभूमीचा अभ्यास करण्यासाठी महत्त्वाचा आहे; तथापि त्या काळातील सर्व कृषकांना आधुनिक अर्थाने ‘कुणबी’ म्हणणे योग्य ठरत नाही. शिलाहार, यादव, बहमनी, निजामशाही आणि आदिलशाही या विविध सत्तांच्या काळात कोकणातील ग्रामीण समाज जमीन, शेती, महसूल, ग्रामसंस्था आणि स्थानिक अधिकारपद्धती यांच्याशी संबंधित विविध स्वरूपांत अस्तित्वात होता. उपलब्ध ऐतिहासिक पुराव्यांवरून त्या काळातील कृषक समाजाचा अभ्यास करता येतो; मात्र या सर्व समूहांची आधुनिक ‘कुणबी’ या जातीय ओळखीशी थेट समानता सिद्ध होत नाही.<ref name="HistoryKonkanSection3"/>
वसाहतकालीन ethnographic साहित्यामध्ये ‘Kunbi’ या संज्ञेचा कृषक समुदाय आणि शेतीशी संबंधित सामाजिक ओळख या दोन्ही संदर्भांत वापर आढळतो. R. E. Enthoven यांच्या *The Tribes and Castes of Bombay* मध्ये कुणबींच्या विविध प्रादेशिक समूहांचे आणि त्यांच्या सामाजिक व आर्थिक जीवनाचे वर्णन केले आहे.<ref name="Enthoven1922" />
R. V. Russell आणि Hiralal यांनीही कुणबींच्या विविध प्रादेशिक रूपांचा आणि सामाजिक समूहांचा उल्लेख केला आहे. त्यांच्या ग्रंथात ‘Kunbi’, ‘Kulambi’, ‘Kulwadi’ आणि ‘Kanbi’ यांसारख्या संज्ञांचा उल्लेख आढळतो. मात्र या विविध नावांच्या आधारे सर्व समूहांची एकच अखंड ऐतिहासिक जातीय उत्पत्ती होती असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="RussellHiralal1916"/>
ब्रिटिशकालीन District Gazetteers आणि ethnographic साहित्याच्या वापराबाबत मुंबई उच्च न्यायालयानेही सावध भूमिका घेतली आहे. *Suhas s/o Anantrao Dashrathe and another v. State of Maharashtra and others* या प्रकरणात न्यायालयाने District Gazetteers आणि ethnographic साहित्याचा विचार केला. या साहित्याच्या आधारे Maratha हे मूळतः Kunbi आहेत, Maratha ही केवळ पदवी आहे किंवा Maratha ही Kunbiची उपजात अथवा समानार्थी संज्ञा आहे, असा निश्चित निष्कर्ष काढता येत नाही, असे न्यायालयाने नमूद केले. न्यायालयाने उपलब्ध साहित्यामध्ये ‘Kunbi’ हा शब्द काही संदर्भांत जमीन कसणाऱ्या व्यक्तीसाठी वापरला गेल्याचेही नोंदवले.<ref name="SuhasDashrathe2001">{{cite web
|title=Suhas s/o Anantrao Dashrathe and another v. State of Maharashtra, through the Secretary, Department of Urban Development and others
|url=https://indiankanoon.org/doc/1946655/
|publisher=Bombay High Court, Aurangabad Bench
|date=5 October 2001
|access-date=22 August 2026
}}</ref>
या न्यायालयीन निरीक्षणाचा अर्थ असा नाही की ‘कुणबी’ ही सामाजिक जातीय ओळख नव्हती; उलट आधुनिक काळातील प्रशासकीय वर्गीकरणात कुणबी ही स्वतंत्र जात म्हणून मान्य झालेली आहे. न्यायालयाचा मुद्दा असा होता की जुन्या Gazetteers किंवा ethnographic साहित्याच्या आधारे Maratha आणि Kunbi यांच्यातील ऐतिहासिक संबंधाबाबत सार्वत्रिक आणि निर्णायक वंशपरंपरागत निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="SuhasDashrathe2001"/>
या पार्श्वभूमीवर मध्ययुगीन कोकणातील ‘कृषक समाज’ आणि पुढील काळातील ‘कुणबी’ या सामाजिक ओळखीमध्ये ऐतिहासिक सातत्याचे काही घटक असण्याची शक्यता नाकारता येत नाही; परंतु उपलब्ध पुराव्यांच्या आधारे त्यांच्यात थेट आणि अखंड जातीय वंशपरंपरा सिद्ध करता येत नाही. प्राचीन किंवा मध्ययुगीन कृषक समाजातील प्रत्येक व्यक्ती किंवा समूहाला आधुनिक कुणबी म्हणून ओळखणे हे उपलब्ध पुराव्यांपेक्षा पुढे जाणारे अनुमान ठरेल.
कुणबी या नावाचा अधिक स्पष्ट आणि व्यापक दस्तऐवजी वापर पुढील वसाहतकालीन जनगणना, Gazetteers आणि ethnographic साहित्यामध्ये आढळतो. त्यामुळे मध्ययुगीन कोकणातील कृषक समाज हा आधुनिक कुणबी समाजाचा थेट समानार्थी नसून, पुढील काळात विकसित झालेल्या सामाजिक ओळखीचा ऐतिहासिक अभ्यास करण्यासाठी आवश्यक असलेली व्यापक ग्रामीण आणि कृषक पार्श्वभूमी म्हणून पाहणे अधिक योग्य ठरते.<ref name="Census1931Bombay"/><ref name="Enthoven1922"/>
== शिवकाल, स्वराज्य आणि मराठा सत्ता ==
सतराव्या शतकात छत्रपती शिवाजी महाराजांच्या नेतृत्वाखाली स्वराज्याची निर्मिती झाली आणि कोकणातील राजकीय, लष्करी व महसुली परिस्थितीत महत्त्वपूर्ण बदल झाले. स्वराज्याच्या विस्तारात कोकणाला भौगोलिक आणि आर्थिकदृष्ट्या महत्त्वाचे स्थान होते. सह्याद्रीतील घाटमार्ग, किनारी किल्ले, बंदरे, बाजारपेठा आणि कृषीप्रधान गावे यांमुळे कोकण हा स्वराज्याच्या संरक्षण, व्यापार आणि पुरवठा व्यवस्थेच्या दृष्टीने महत्त्वाचा प्रदेश बनला.<ref name="HistoryKonkanGazetteer1896">{{cite book
|editor=James M. Campbell
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: History of the Konkan, Dakhan and Southern Maratha Country
|volume=1
|issue=2
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1896
}}</ref>
शिवाजी महाराजांच्या काळातील ग्रामीण समाजाचा उल्लेख प्रामुख्याने ‘रयत’, ‘कृषक’, ‘शेतकरी’ आणि गावपातळीवरील विविध सामाजिक व प्रशासकीय घटकांच्या संदर्भात आढळतो. या काळातील सर्व रयत किंवा शेतकरी आधुनिक अर्थाने ‘कुणबी’ होते असे म्हणता येत नाही. त्यामुळे कोकणातील कुणबी समाजाच्या इतिहासाच्या संदर्भात शिवकालाचा विचार करताना ‘कुणबी’ आणि ‘रयत’ या संज्ञा एकमेकांच्या समानार्थी न मानता त्या-त्या ऐतिहासिक संदर्भात स्वतंत्रपणे वापरणे आवश्यक आहे.
=== शिवाजी महाराजांच्या काळातील रयत ===
शिवाजी महाराजांच्या राज्यव्यवस्थेत कृषक किंवा रयत हा राज्याच्या आर्थिक व्यवस्थेतील महत्त्वाचा घटक होता. महसूलव्यवस्थेत जमिनीची मोजणी, जमिनीची प्रत आणि उत्पादनक्षमतेचा अंदाज यांना महत्त्व देण्यात आले. उपलब्ध ऐतिहासिक वर्णनांनुसार महसूलवसुली अधिक थेट सरकारी यंत्रणेमार्फत करण्याचा प्रयत्न करण्यात आला आणि महसूल मक्तेदारीची पद्धत कमी करण्यावर भर देण्यात आला.<ref name="ShivajiRevenueArrangements">{{cite web
|title=Shivaji's Revenue Arrangements
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/Satara/english/BombayPresidancy/7%20History.pdf
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
शिवाजी महाराजांच्या महसूलव्यवस्थेचे स्वरूप त्यांच्या पूर्वसुरींच्या दख्खनी महसूलपद्धतींपासून पूर्णपणे वेगळे नव्हते. उपलब्ध ऐतिहासिक वर्णनांमध्ये दादोजी कोंडदेव यांच्या काळातील महसूलव्यवस्था आणि पूर्वीच्या दख्खनी प्रशासकीय अनुभवांचा प्रभाव दिसून येतो. जमिनीची मोजणी आणि उत्पादनाच्या आधारे महसूल निश्चित करण्याची पद्धत अधिक व्यवस्थित करण्याचा प्रयत्न करण्यात आला.<ref name="ShivajiRevenueArrangements"/>
=== कोकणातील ग्रामीण अर्थव्यवस्था ===
कोकणातील ग्रामीण अर्थव्यवस्था शेती, बागायती, पशुपालन, स्थानिक व्यापार आणि किनारी बाजारपेठांशी संबंधित होती. सह्याद्री आणि अरबी समुद्र यांच्यामधील भौगोलिक रचना, मोठ्या प्रमाणातील पर्जन्यमान, नद्या, खाड्या आणि अरुंद किनारी मैदाने यांमुळे कोकणातील कृषी पद्धतींना स्थानिक भौगोलिक परिस्थितीचा विशेष प्रभाव होता.
शिवाजी महाराजांच्या काळात कोकणातील राजकीय नियंत्रण वाढल्यानंतर ग्रामीण उत्पादनाचा संबंध किल्ले, बाजारपेठा आणि किनारी केंद्रांशी अधिक दृढ झाला. *Gazetteer of the Bombay Presidency: History of the Konkan* मध्ये शिवाजी महाराजांच्या काळातील दक्षिण कोकणाच्या संदर्भात महसूलव्यवस्था, किल्ले, गडकरी आणि स्थानिक लोकसंख्या यांचा परस्परसंबंध नोंदवला आहे.<ref name="HistoryKonkanShivaji">{{cite web
|title=History of the Konkan — Shivaji (1648 to 1680)
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Gazetteer%20of%20Bombay%20Presidency/history_of_the_konkan/section_6.pdf
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
कोकणातील कृषी उत्पादन हे स्थानिक उपजीविकेबरोबरच किल्ले, लष्करी ठाणी आणि बाजारपेठांच्या पुरवठ्याशीही संबंधित होते. किनारी आणि डोंगरी किल्ल्यांच्या जाळ्यामुळे धान्य, चारा, लाकूड, मीठ आणि इतर आवश्यक वस्तूंच्या स्थानिक पुरवठ्याला महत्त्व प्राप्त झाले. या आर्थिक संबंधांमुळे ग्रामीण उत्पादन आणि स्वराज्याच्या लष्करी व प्रशासकीय व्यवस्थेमध्ये परस्परावलंबित्व निर्माण झाले.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
=== महसूल व्यवस्था ===
शिवाजी महाराजांच्या महसूलव्यवस्थेत जमीन मोजणी आणि उत्पादनक्षमतेच्या आधारे महसूल निश्चित करण्याला महत्त्व देण्यात आले. उपलब्ध ऐतिहासिक वर्णनानुसार जमिनीचे सर्वेक्षण करून तिच्या उत्पादनाच्या आधारे शेतकरी आणि राज्य यांच्यातील महसुली हिस्सा निश्चित करण्याचा प्रयत्न करण्यात आला. एका ऐतिहासिक वर्णनात उत्पादनाच्या तीन-पंचमांश भागाचा हिस्सा शेतकऱ्याकडे आणि दोन-पंचमांश भाग राज्याकडे ठेवण्याची पद्धत नमूद केली आहे.<ref name="ShivajiRevenueArrangements"/>
मात्र शिवाजी महाराजांच्या संपूर्ण राज्यात सर्व प्रकारच्या जमिनींवर नेमका दोन-पंचमांश महसूलच आकारला जात असे, असा सार्वत्रिक निष्कर्ष काढणे योग्य ठरणार नाही. महसुली आकारणीमध्ये जमिनीचा प्रकार, पिके, स्थानिक परिस्थिती आणि पूर्वीच्या महसूलपद्धतींचा परिणाम होऊ शकत होता. त्यामुळे दोन-पंचमांश हा उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतामध्ये वर्णिलेला प्रमाणात्मक संदर्भ म्हणून पाहणे अधिक योग्य आहे.
शिवाजी महाराजांच्या नियंत्रणाखालील प्रदेशात महसूलवसुली अधिक थेट सरकारी यंत्रणेमार्फत करण्याचा प्रयत्न करण्यात आला. उपलब्ध Gazetteerच्या वर्णनानुसार महसूल मक्तेदारीची पद्धत दूर करून सरकारने नियुक्त केलेल्या अधिकाऱ्यांमार्फत महसूल गोळा केला जात असे. काही प्रशासकीय विभागांवर कारकून, तरफदार किंवा तालुकदार आणि त्यापुढे सुभेदार अशा अधिकाऱ्यांचा उल्लेख आढळतो.<ref name="ShivajiRevenueArrangements"/>
=== रयतेचे संरक्षण आणि कृषी ===
शिवाजी महाराजांच्या कोकणातील राज्यव्यवस्थेबाबत जुन्या *Gazetteer of the Bombay Presidency* मध्ये महसूलव्यवस्थेच्या सुधारणांचा उल्लेख आहे. दक्षिण कोकणाच्या संदर्भात त्यांच्या प्रशासनामुळे पूर्वीच्या व्यवस्थेपेक्षा काही सुधारणा झाल्या आणि cultivatorsच्या हिताचे संरक्षण करण्यात आले, अशी नोंद त्या स्रोतामध्ये आढळते.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
शिवाजी महाराजांच्या लष्करी शिस्तीविषयीच्या त्याच ऐतिहासिक स्रोतामध्ये कृषक, स्त्रिया आणि गाई यांना लष्करी मोहिमांमध्ये त्रास न देण्याच्या सूचनांचा उल्लेख आहे. युद्धकाळात ग्रामीण उत्पादन आणि शेतकऱ्यांचे संरक्षण हे राज्याच्या आर्थिक हिताशी संबंधित होते.<ref name="ShivajiAdministrationMilitary">{{cite web
|title=History — Shivaji's Administration and Military System
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/Satara/english/BombayPresidancy/7%20History.pdf
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
कृषी उत्पादन टिकवून ठेवणे हे राज्याच्या महसुली उत्पन्नासाठीही आवश्यक होते. त्यामुळे रयतेचे संरक्षण ही केवळ सामाजिक बाब नव्हती; ती कृषी उत्पादन आणि राज्याच्या आर्थिक स्थैर्याशीही संबंधित होती.
=== ग्रामीण मनुष्यबळ आणि लष्करी सहभाग ===
शिवाजी महाराजांच्या काळातील कोकणातील ग्रामीण समाजाचा काही भाग लष्करी व्यवस्थेशी जोडला गेला. दक्षिण कोकणाच्या संदर्भात *Gazetteer of the Bombay Presidency* मध्ये मालवण परिसरातील Hetkari किंवा स्थानिक मराठा सैनिकांचा उल्लेख आढळतो.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
याच स्रोतामध्ये कोकणातील किल्ल्यांशी संबंधित ‘गडकरी’ व्यवस्थेचा उल्लेख आहे. गडकरी हे किल्ल्यांच्या संरक्षणाशी संबंधित सेवाधारक होते आणि किल्ल्यांच्या आसपासच्या जमिनीशी त्यांचे संबंध होते. त्यामुळे ग्रामीण लोकसंख्येतील काही घटकांना शेतीबरोबर लष्करी किंवा किल्लेसेवेचे उपजीविकेचे साधन उपलब्ध झाले होते.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
या लष्करी सहभागाला आधुनिक जातीय वर्गीकरणाशी थेट जोडता येत नाही. गडकरी, Hetkari किंवा मावळातील सैनिक यांना सर्वसाधारणपणे कुणबी म्हणणे उपलब्ध पुराव्यांवरून योग्य ठरणार नाही. मात्र कोकणातील ग्रामीण लोकसंख्येतील काही घटक शेतीबरोबर लष्करी आणि किल्लेसेवेशी जोडले गेले होते, हे उपलब्ध ऐतिहासिक नोंदींवरून दिसून येते.
=== स्वराज्याच्या पुरवठा व्यवस्थेतील कोकण ===
कोकणातील किल्ले, बंदरे आणि बाजारपेठा यांचे महत्त्व केवळ लष्करी संरक्षणापुरते मर्यादित नव्हते. किनारी प्रदेशातील उत्पादन, व्यापारमार्ग आणि सह्याद्रीतील घाटमार्ग यांच्या माध्यमातून कोकणाचा संबंध स्वराज्याच्या व्यापक आर्थिक व्यवस्थेशी जोडला गेला. किल्ल्यांच्या देखभालीसाठी आवश्यक मनुष्यबळ, अन्नधान्य आणि इतर साहित्याचा स्थानिक प्रदेशाशी संबंध होता.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
या संदर्भात कृषक समाजाची भूमिका केवळ ‘शेतकरी’ म्हणून मर्यादित न ठेवता ग्रामीण उत्पादनव्यवस्थेतील घटक म्हणून पाहणे आवश्यक आहे. कृषी उत्पादन, स्थानिक बाजारपेठा, वाहतूक, किल्ले आणि लष्करी सेवा यांच्यातील संबंधांमुळे कोकणातील ग्रामीण अर्थव्यवस्था स्वराज्याच्या राजकीय व्यवस्थेशी जोडली गेली होती.
=== शिवकाल आणि आधुनिक कुणबी ओळख ===
शिवाजी महाराजांच्या काळातील ‘रयत’, ‘कृषक’ आणि ‘शेतकरी’ या संज्ञा आधुनिक ‘कुणबी’ या जातीय ओळखीच्या समानार्थी मानता येत नाहीत. शिवकालीन ग्रामीण समाज विविध सामाजिक, आर्थिक आणि प्रशासकीय घटकांनी बनलेला होता. उपलब्ध ऐतिहासिक वर्णनांमध्ये कृषक, स्थानिक अधिकारी, किल्लेसेवक आणि इतर ग्रामीण घटकांचे स्वतंत्र संदर्भ आढळतात.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/><ref name="ShivajiRevenueArrangements"/>
म्हणून शिवकालीन कृषक समाज आणि आधुनिक कोकणातील कुणबी समाज यांच्यात ऐतिहासिक सातत्याचे काही घटक असण्याची शक्यता तपासता येते; परंतु शिवाजी महाराजांच्या काळातील सर्व रयत कुणबी होती किंवा आधुनिक कुणबी समाजाची निश्चित जातीय ओळख त्याच काळात अस्तित्वात होती, असा निष्कर्ष उपलब्ध पुराव्यांवरून काढता येत नाही. कुणबी या सामाजिक समूहाचे अधिक स्पष्ट आणि व्यापक दस्तऐवजीकरण पुढील वसाहतकालीन जनगणना, District Gazetteers आणि ethnographic साहित्यामध्ये आढळते.<ref name="Census1931Bombay"/><ref name="Enthoven1922" /><ref name="RatnagiriSavantvadi1880">{{cite book
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Ratnagiri and Savantvadi
|volume=10
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1880
}}</ref>
=== स्वराज्याच्या पुरवठा व्यवस्थेत कृषक समाजाची भूमिका ===
स्वराज्याच्या लष्करी व्यवस्थेला धान्य, पशुधन, चारा, लाकूड आणि इतर जीवनावश्यक वस्तूंची आवश्यकता होती. किल्ल्यांच्या व्यवस्थापनात धान्यसाठा आणि इतर सामग्रीच्या देखरेखीशी संबंधित अधिकारी व प्रशासकीय व्यवस्था असल्याचे उपलब्ध ऐतिहासिक वर्णनांत आढळते.<ref name="ShivajiAdministrationMilitary"/>
किल्ल्यांच्या संरक्षणव्यवस्थेला आवश्यक असलेल्या अन्नधान्य आणि इतर साधनसामग्रीचा संबंध स्थानिक उत्पादन, बाजारपेठा आणि वाहतूकमार्गांशी होता. त्यामुळे कृषक समाजाचे उत्पादन स्वराज्याच्या व्यापक आर्थिक व्यवस्थेशी संबंधित होते. तथापि, उपलब्ध स्रोतांच्या आधारे कोकणातील सर्व कृषकांना स्वराज्याच्या लष्करी पुरवठा व्यवस्थेतील थेट घटक मानणे योग्य ठरणार नाही.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
कोकणातील किल्ले समुद्रकिनारी तसेच सह्याद्रीच्या डोंगररांगांमध्ये असल्यामुळे समुद्री मार्ग, घाटमार्ग आणि स्थानिक वाहतूक यांना महत्त्व होते. किल्ल्यांच्या बांधकाम, दुरुस्ती आणि देखभालीशी संबंधित कामांमध्ये स्थानिक मनुष्यबळाचा वापर झाल्याचे *Gazetteer of the Bombay Presidency* मध्ये नमूद केले आहे.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
=== कोकणातील किल्ले, बाजारपेठा आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्था ===
स्वराज्याच्या काळात कोकणातील किल्ले केवळ लष्करी केंद्रे नव्हती. त्यांच्या देखभालीसाठी प्रशासकीय कर्मचारी, किल्लेसेवक, कारागीर आणि इतर मनुष्यबळाची आवश्यकता होती. किल्ल्यांच्या व्यवस्थेशी संबंधित स्थानिक आर्थिक व्यवहार आणि मनुष्यबळाचा उल्लेख उपलब्ध ऐतिहासिक वर्णनांत आढळतो.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
कोकणातील बंदरे आणि बाजारपेठांनाही राजकीय व आर्थिक महत्त्व होते. समुद्री व्यापार, किनारी किल्ले आणि घाटमार्ग यांमुळे कोकणाचा अंतर्गत दख्खनशी संबंध कायम राहिला. या भौगोलिक आणि आर्थिक संबंधांमुळे ग्रामीण उत्पादनाचा संबंध स्थानिक तसेच प्रादेशिक बाजारपेठांशी होता.<ref name="HistoryKonkanGazetteer1896"/>
=== मराठा सत्तेच्या विस्तारानंतरचे बदल ===
शिवाजी महाराजांच्या मृत्यूनंतर मराठा सत्तेचा विस्तार पुढील काळात विविध टप्प्यांत झाला. संभाजी महाराज, राजाराम महाराज, महाराणी ताराबाई, छत्रपती शाहू महाराज आणि पुढे पेशवाईच्या काळात मराठा सत्तेचे राजकीय आणि प्रशासकीय स्वरूप बदलत गेले. कोकणात मराठा सत्तेबरोबरच आंग्रे, सिद्दी, पोर्तुगीज आणि ब्रिटिश अशा विविध सत्ताकेंद्रांशी संघर्ष व संबंधही कायम राहिले.<ref name="HistoryKonkanGazetteer1896"/>
पुढील मराठा काळात महसूल हक्कांचे वाटप, वतन, जहागीर, चौथाई, सरदेशमुखी आणि इतर महसुली दावे यांची प्रशासकीय गुंतागुंत वाढली. महाराष्ट्र राज्य गॅझेटियरमधील ऐतिहासिक वर्णनानुसार मराठा सत्तेच्या विस्ताराच्या काळात विविध सरदारांना प्रदेश आणि त्यातून मिळणारे महसूल हक्क देण्यात आले आणि या महसुलाचा संबंध लष्करी व्यवस्थेशी होता.<ref name="MarathaAdministration">{{cite web
|title=History of Maharashtra — Maratha Administration
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/Satara/english/SDGrevised/2%20HISTORY.pdf
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
या प्रक्रियेमुळे कृषक आणि राज्य यांच्यातील महसुली संबंध अधिक गुंतागुंतीचे झाले. काही प्रदेशांत स्थानिक वतनदार, सरदार आणि महसूल मध्यस्थ यांची भूमिका महत्त्वाची राहिली. त्याच वेळी राज्याच्या प्रशासकीय आणि लष्करी व्यवस्थेसाठी आवश्यक महसूल ग्रामीण अर्थव्यवस्थेतून मिळत राहिला.<ref name="MarathaAdministration"/>
=== शिवकालीन कृषक समाज आणि कुणबी : ऐतिहासिक सावधगिरी ===
शिवाजी महाराजांच्या काळातील रयत, शेतकरी किंवा कृषक समाज आणि आधुनिक कुणबी समाज यांच्यात काही सामाजिक किंवा आर्थिक सातत्याचे घटक असण्याची शक्यता इतिहासाच्या अभ्यासातून तपासता येते; परंतु उपलब्ध पुराव्यांच्या आधारे शिवकालीन सर्व रयत ‘कुणबी’ होती असा निष्कर्ष काढता येत नाही. शिवकालीन ग्रामीण समाजाचा उल्लेख विविध सामाजिक, आर्थिक आणि प्रशासकीय संदर्भांत आढळतो.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/>
शिवकालीन आणि पुढील मराठा काळातील ‘रयत’, ‘मिरासदार’, ‘पाटील’, ‘देशमुख’ आणि इतर प्रशासकीय किंवा सामाजिक संज्ञांचा वापर त्यांच्या संबंधित ऐतिहासिक संदर्भात करणे आवश्यक आहे. या संज्ञांना आधुनिक जातीय वर्गीकरणाशी थेट समान मानणे योग्य नाही. आधुनिक काळातील ‘कुणबी’ या सामाजिक वर्गाचे अधिक स्पष्ट दस्तऐवजीकरण पुढील वसाहतकालीन जनगणना, District Gazetteers आणि ethnographic साहित्यामध्ये आढळते.<ref name="Census1931Bombay"/><ref name="Enthoven1922" />
म्हणून कोकणातील कुणबींच्या इतिहासाच्या दृष्टीने शिवकालाचे महत्त्व हे ‘शिवाजी महाराजांच्या सैन्यात कुणबी मोठ्या प्रमाणावर होते’ अशा अप्रमाणित दाव्यात नसून, '''कृषक रयत, जमीन, महसूल, ग्रामव्यवस्था, किल्ले, लष्करी मनुष्यबळ आणि राज्य यांच्यातील संबंधांच्या ऐतिहासिक विकासात''' आहे.<ref name="HistoryKonkanShivaji"/><ref name="ShivajiRevenueArrangements"/>
शिवाजी महाराजांच्या स्वराज्यव्यवस्थेने कोकणातील ग्रामीण समाजावर परिणाम घडवून आणला आणि कृषी उत्पादन, महसूल, किल्ले, स्थानिक बाजारपेठा आणि लष्करी व्यवस्थेतील संबंधांना प्रशासकीय चौकट प्राप्त झाली. पुढील मराठा सत्ताकाळात या व्यवस्थेचे स्वरूप बदलत गेले आणि त्याचा कोकणातील जमीन, महसूल आणि ग्रामीण समाजावर दीर्घकालीन परिणाम झाला.<ref name="HistoryKonkanGazetteer1896"/><ref name="MarathaAdministration"/>
== ब्रिटिशपूर्व आणि ब्रिटिशकालीन कोकण ==
अठराव्या शतकाच्या उत्तरार्धापासून एकोणिसाव्या शतकाच्या उत्तरार्धापर्यंत कोकणातील जमीन, महसूल, कृषी आणि ग्रामीण समाजरचनेत महत्त्वपूर्ण बदल झाले. मराठा सत्तेच्या उत्तरकाळातील जमीनहक्क, मिरास, वतन, पाटील-कुलकर्णी व्यवस्था आणि खोतीसारख्या स्थानिक पद्धती ब्रिटिश सत्तेच्या स्थापनेनंतरही काही काळ अस्तित्वात राहिल्या; त्याच वेळी ब्रिटिश प्रशासनाने सर्वेक्षण, जमीनमोजणी, महसूल निश्चिती आणि नोंदवही यांच्या माध्यमातून जमीन व महसूल व्यवस्थेचे पुनर्गठन केले. रत्नागिरीमध्ये १८२७नंतर झालेल्या सर्वेक्षणांमधून जमीन, तिची प्रतवारी, धारकांचे हक्क आणि महसूल यांची अधिक पद्धतशीर नोंद करण्यात आली.<ref name="RatnagiriSurveys1827">{{cite web
|title=Land Administration — Ratnagiri: Surveys 1827–1851
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Ratnagiri%20and%20Sawantwadi/ratnagiri/land1_surveys27.html
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
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या कालखंडाच्या अभ्यासासाठी १८८०चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Ratnagiri and Savantvadi'', १८८२चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Thana'' आणि १८८३चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira'' हे महत्त्वाचे वसाहतकालीन स्रोत आहेत. या गॅझेटियरमध्ये जमीन प्रशासन, महसूल, शेती, जमीनधारणा, पिके, गावव्यवस्था, लोकसंख्या आणि विविध सामाजिक समूहांविषयी माहिती दिली आहे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/><ref name="Thana1882"/><ref name="KolabaJanjira1883">{{cite book
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira
|volume=11
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1883
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=== ब्रिटिशपूर्व जमीनव्यवस्था ===
ब्रिटिश सत्ता येण्यापूर्वी कोकणातील जमीनव्यवस्था एकसंध स्वरूपाची नव्हती. प्रदेश, गाव, जमीनधारकांचे हक्क, स्थानिक वतन आणि महसूलपद्धती यांनुसार जमीनधारणेचे स्वरूप बदलत असे. रत्नागिरीतील ब्रिटिश सर्वेक्षणाच्या नोंदींमध्ये पूर्वीच्या जमीनमोजणी, जमीनवर्गीकरण आणि विविध प्रकारच्या हक्कांचा तपशील आढळतो.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
१८२७नंतर रत्नागिरीत करण्यात आलेल्या ब्रिटिश सर्वेक्षणांमध्ये पूर्वीच्या मराठा पद्धतीतील जमीनमोजणी आणि जमिनीच्या प्रतवारीचा अभ्यास करण्यात आला. सुरुवातीच्या सर्वेक्षणात जुन्या पद्धतीतील काही घटकांचा आधार घेण्यात आला; पुढे अधिक अचूक मोजणी, नकाशे आणि महसूल नोंदी तयार करण्यावर भर देण्यात आला.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== रयत आणि कृषक ===
कोकणातील ग्रामीण अर्थव्यवस्थेचा मुख्य आधार कृषी होता. रत्नागिरीत भातशेतीबरोबर नाचणी, वरी आणि इतर पिके घेतली जात. ब्रिटिश सर्वेक्षणाच्या काळात जमिनीचे वर्गीकरण तिच्या उपयोग, पिकांचा प्रकार आणि पाण्याच्या उपलब्धतेनुसार करण्यात आले. भातजमिनी आणि उंच किंवा पावसावर अवलंबून असलेल्या जमिनींचे विविध प्रकार नोंदवले गेले होते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
थाणे जिल्ह्यातही कृषी ही लोकसंख्येच्या मोठ्या भागाची उपजीविका होती. १८८२ च्या गॅझेटियरमध्ये जिल्ह्यातील सुमारे ६३ टक्के लोकसंख्या शेतीशी संबंधित असल्याचे नमूद केले आहे. भातजमिनींचे ''bandhni'' आणि ''malkhandi'' असे प्रकार करण्यात आले होते आणि पाण्याच्या उपलब्धतेनुसार जमिनीची उत्पादकता बदलत होती.<ref name="ThanaAgriculture">{{cite web
|title=Agriculture — Thana District
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Thana%20District/Thane-I/agriculture_soil.html
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
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=== मिरास आणि वारसाहक्काची जमीन ===
ब्रिटिशपूर्व महाराष्ट्रातील ग्रामव्यवस्थेत काही कृषकांना जमिनीवर दीर्घकालीन किंवा वारसाहक्काचे हक्क प्राप्त होते. रत्नागिरीतील ब्रिटिश चौकशीच्या नोंदींमध्ये काही कृषकांना ''hereditary cultivators'' म्हणून वर्णिले आहे. त्यांच्या जमिनीवरील हक्कांचा संबंध स्थानिक जमीनव्यवस्था आणि पूर्वीपासून चालत आलेल्या कृषी हक्कांशी होता.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
रत्नागिरीतील १८२९–१८३० च्या चौकशीच्या संदर्भात खोती गावांतील वारसाहक्की कृषकांमध्ये कुणबींचा मोठा सहभाग असल्याची नोंद आढळते. या कृषकांना ''karda'' म्हणून संबोधण्यात आले असून त्यांच्या हक्कांचा संबंध लागवड, उत्पादन आणि खोतालाच देय असलेल्या रकमेशी होता.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
या नोंदी कोकणातील कुणबी समाजाच्या इतिहासाच्या दृष्टीने महत्त्वाच्या आहेत. कारण रत्नागिरीतील या ब्रिटिशकालीन चौकशीत ‘कुणबी’ ही संज्ञा प्रत्यक्ष कृषक आणि जमीनहक्कांच्या संदर्भात वापरलेली आढळते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== वतन व्यवस्था आणि ग्रामअधिकारी ===
मध्ययुगीन आणि मराठा काळापासून गावपातळीवरील प्रशासनात पाटील, कुलकर्णी आणि इतर वतनदारांना महत्त्व होते. पाटीलचा संबंध गावच्या कारभार आणि महसूलविषयक कामांशी, तर कुलकर्णीचा संबंध गावच्या लेखा व महसूल नोंदींशी होता. अनेक ठिकाणी या पदांना वंशपरंपरागत हक्कांचे स्वरूप प्राप्त झाले होते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
ब्रिटिश सत्तेच्या स्थापनेनंतर या स्थानिक हक्कांची आणि वतनांची नोंद महसूल प्रशासनाच्या चौकटीत करण्यात आली. जमीन महसूल आणि ग्रामप्रशासन अधिक पद्धतशीर करण्यासाठी जमीनधारक, क्षेत्रफळ, सीमा आणि महसूल यांची नोंद तयार करण्यात आली.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== पाटील-कुलकर्णी व्यवस्था ===
गावातील पाटील आणि कुलकर्णी हे ग्रामीण प्रशासनातील प्रमुख अधिकारी होते. पाटीलचा संबंध गावच्या कारभार, महसूलविषयक कामे आणि स्थानिक प्रशासनाशी होता, तर कुलकर्णी गावच्या महसूल व जमीन नोंदी ठेवण्याच्या कामाशी संबंधित होता. मराठा काळातील ही व्यवस्था ब्रिटिश सत्तेच्या सुरुवातीच्या काळातही अनेक भागांत अस्तित्वात होती.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
ब्रिटिश सर्वेक्षणानंतर गावातील जमीन आणि महसूल नोंदी अधिक प्रमाणबद्ध करण्याचा प्रयत्न करण्यात आला. रत्नागिरीतील सर्वेक्षणात प्रत्येक शेताचे क्षेत्रफळ, सीमा आणि गावातील स्थान नोंदविण्यासाठी ''khatavni'' नावाची गावनिहाय नोंदवही तयार करण्यात आली. नकाशांमध्ये शेतांची आणि गावांची स्थिती दर्शविण्यात आली.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== खोती व्यवस्था ===
कोकणातील जमीनव्यवस्थेच्या इतिहासात खोती पद्धतीला विशेष महत्त्व होते. रत्नागिरी आणि कोलाबा प्रदेशातील काही गावांमध्ये खोत हा महसूल आणि जमीनव्यवस्थेतील मध्यस्थ म्हणून कार्यरत होता. खोती गावांमध्ये खोत आणि प्रत्यक्ष जमीन कसणारे कृषक यांच्यातील हक्क व देयकांचे संबंध ब्रिटिशकालीन महसूल चौकशीत नोंदवले गेले.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/><ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
रत्नागिरीतील १८२९–१८३० च्या चौकशीत खोती गावांतील कृषक हक्क आणि खोतांना देय असलेल्या रकमांचा उल्लेख आढळतो. या नोंदींमधून खोती व्यवस्था ही केवळ महसूलवसुलीची पद्धत नसून खोत, जमीन कसणारे कृषक आणि राज्य यांच्यातील हक्क व आर्थिक संबंधांची एक गुंतागुंतीची रचना होती, असे दिसते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== ब्रिटिश सर्वेक्षण आणि महसूल नोंदी ===
ब्रिटिश प्रशासनाने जमीन महसूल निश्चित करण्यासाठी प्रत्यक्ष सर्वेक्षण, मोजणी, नकाशे आणि जमीनधारकांच्या हक्कांची नोंद यांना महत्त्व दिले. रत्नागिरीतील १८२७ ते १८५१ या कालखंडातील सर्वेक्षण प्रक्रियेत जमिनीची मोजणी, प्रतवारी, धारकांचे हक्क आणि महसूल यांची नोंद करण्यात आली.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
या प्रक्रियेमुळे पूर्वीच्या स्थानिक जमीनहक्कांना प्रशासकीय नोंदींच्या चौकटीत स्थान मिळाले. जमीन, धारक, क्षेत्रफळ, सीमा आणि महसूल यांची नोंद पुढील काळातील जमीन प्रशासनासाठी महत्त्वाची ठरली. त्यामुळे ब्रिटिशकालीन सर्वेक्षण नोंदी या कोकणातील कृषक समाज, जमीनधारणा आणि कुणबी समाजाच्या सामाजिक-आर्थिक इतिहासाच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचे प्राथमिक स्रोत ठरतात.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== महसूल व्यवस्था ===
ब्रिटिश काळात जमीन महसूल हा जिल्ह्याच्या सरकारी उत्पन्नाचा प्रमुख स्रोत होता. कोलाबा जिल्ह्याच्या १८८३ च्या गॅझेटियरनुसार १८८०–८१मध्ये जिल्ह्याच्या एकूण सरकारी उत्पन्नातील सुमारे ६० टक्के उत्पन्न जमीन महसुलातून येत होते. १८५२–५३ ते १८८०–८१ या कालावधीत जमीन महसूल प्राप्तीत वाढ झाली होती. या वाढीमागे लागवडीखाली आणलेल्या अधिक क्षेत्राबरोबरच सर्वेक्षणामुळे झालेली अधिक अचूक जमीनमोजणी हे घटक असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद केले आहे.<ref name="KolabaRevenue">{{cite web
|title=Revenue and Finance — Kolaba
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Kolaba%20District/revenue.html
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
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कोलाबा जिल्ह्याच्या महसूलव्यवस्थेत जमीन महसुलाबरोबर स्थानिक निधीचीही व्यवस्था होती. शिक्षण, रस्ते, विहिरी, विश्रामगृहे आणि दवाखाने यांसारख्या स्थानिक सार्वजनिक कामांसाठी निधी उपलब्ध केला जात असे. १८६३पासून ग्रामीण शिक्षण आणि स्थानिक सार्वजनिक कामांसाठी स्थानिक निधीच्या व्यवस्थेचा विस्तार झाल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद आहे.<ref name="KolabaRevenue"/>
=== शेती आणि जमीनधारणा ===
कोकणातील शेतीवर पर्जन्यमान, जलव्यवस्था, जमिनीचा प्रकार आणि किनारी भौगोलिक परिस्थितीचा प्रभाव होता. थाणे जिल्ह्यात भातजमिनींची उत्पादकता पाण्याची उपलब्धता, पाण्याचा निचरा आणि जमिनीच्या स्वरूपाशी संबंधित होती. ''Bandhni'' आणि ''malkhandi'' या भातजमिनींच्या प्रकारांमध्ये उत्पादनातील फरक असल्याचे १८८२ च्या गॅझेटियरमध्ये नमूद केले आहे.<ref name="ThanaAgriculture"/>
थाणे जिल्ह्यातील १८७९–८० च्या महसूल सर्वेक्षणानुसार सरकारी लागवडीयोग्य क्षेत्रापैकी ९२.७ टक्के क्षेत्र प्रत्यक्ष लागवडीखाली होते. त्यामध्ये भातजमीन आणि कोरडवाहू जमीन हे प्रमुख प्रकार होते. किनारी भागात खारवट किंवा खारफुटीच्या प्रभावाखालील जमीन धरणे, बांध घालणे आणि पाण्याचा निचरा किंवा पावसाच्या पाण्याच्या साहाय्याने जमीन शेतीयोग्य करण्याचे प्रयत्न होत असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद आहे.<ref name="ThanaAgriculture"/>
खारवट जमीन शेतीयोग्य करण्यासाठी काही भागांत जमीन सुधारणा करणाऱ्या व्यक्तींना महसूल किंवा भाडे सवलती देण्यात आल्याची नोंद गॅझेटियरमध्ये आहे. सुरुवातीच्या काही वर्षांत कमी किंवा शून्य आकारणी करून जमीन सुधारण्यास प्रोत्साहन देण्यात येत असे. अशा प्रक्रियांमुळे किनारी भागातील काही खारवट जमीन कालांतराने भातशेतीसाठी वापरली जाऊ लागली.<ref name="ThanaAgriculture"/>
=== ग्रामीण अर्थव्यवस्था ===
कोकणातील ग्रामीण अर्थव्यवस्था केवळ शेतीपुरती मर्यादित नव्हती. भात, नाचणी, वरी, नारळ, सुपारी, फळबागा, पशुधन, मासेमारी, जंगलातील उत्पादन आणि स्थानिक व्यापार यांचा ग्रामीण जीवनाशी संबंध होता. बंदरे, नदीमार्ग आणि बाजारपेठांमुळे कृषी उत्पादनाचा संबंध स्थानिक तसेच किनारी व्यापाराशी जोडला गेला.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/><ref name="KolabaJanjira1883"/>
रत्नागिरी गॅझेटियरमध्ये भात, नारळ, सुपारी आणि इतर कृषी उत्पादनांचा उल्लेख असून कृषी उत्पादन, स्थानिक बाजारपेठ आणि व्यापार यांच्यातील संबंधांची माहिती दिली आहे. जिल्ह्यातील जमीन, कृषी उत्पादन आणि व्यापार यांसाठी स्वतंत्र वर्णने देण्यात आली आहेत.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
कोलाबा जिल्ह्याच्या १८८३ च्या गॅझेटियरमध्येही शेती, धान्य, तांदूळ, नारळ, सुपारी, बंदरे, नदीमार्ग आणि व्यापार यांचा परस्परसंबंध दिसून येतो. महाड, माणगाव, रोहा, पेण, अलिबाग आणि इतर केंद्रे कृषी उत्पादन, वाहतूक आणि व्यापाराच्या व्यापक जाळ्याशी संबंधित होती.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== कुणबी आणि जमीनधारणा ===
ब्रिटिशकालीन रत्नागिरीच्या जमीन प्रशासनाच्या नोंदी कोकणातील कुणबी समाजाच्या सामाजिक-आर्थिक इतिहासासाठी महत्त्वाच्या आहेत. १८२९–१८३० च्या जमीनविषयक चौकशीच्या संदर्भात ''vatandar kardas'' म्हणून नोंदवलेल्या वारसाहक्की कृषकांमध्ये कुणबींचा मोठा वाटा असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद केले आहे. हे कृषक विशिष्ट जमीनहिस्से कसत आणि त्या जमिनीच्या उत्पादनाशी संबंधित देयके खोत्यांना देत असत.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
गॅझेटियरच्या वर्णनानुसार अशा कुणबी कृषकांचे जीवन गावातील विशिष्ट जमीनहिस्स्यांशी संबंधित होते. कुटुंबे किंवा कुटुंबसमूह विशिष्ट जमीनभागाची लागवड करीत आणि लागवडीखालील तसेच पडीत जमिनीच्या व्यवस्थापनाशी त्यांचा संबंध होता.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
या नोंदींमुळे रत्नागिरीतील कुणबी कृषकांचा इतिहास केवळ व्यापक अर्थाने ‘शेतकरी समाज’ या वर्णनापुरता मर्यादित राहत नाही. उपलब्ध जमीनविषयक नोंदींमध्ये कुणबी कृषक, जमीनहिस्से, लागवड आणि खोती व्यवस्थेतील देयके यांच्यातील संबंध स्पष्टपणे दिसून येतात.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== ब्रिटिश प्रशासन आणि कृषकांवरील परिणाम ===
ब्रिटिश प्रशासनाने जमीन महसूल निश्चित करण्यासाठी जमीनसर्वेक्षण, मोजणी आणि नोंदणीवर भर दिला. रत्नागिरीतील १८२७नंतरच्या सर्वेक्षणांमध्ये जमीन, तिचे क्षेत्रफळ, प्रतवारी, लागवड आणि महसूल यांची अधिक पद्धतशीर नोंद करण्याचा प्रयत्न करण्यात आला. या प्रक्रियेमुळे गावांच्या सीमा, शेतजमिनी आणि महसूलविषयक माहिती अधिक औपचारिक सरकारी नोंदींमध्ये येऊ लागली.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
खोती हक्क आणि कृषकांचे हक्क यांच्यातील संबंधांबाबत ब्रिटिश प्रशासनाला विविध प्रश्नांना सामोरे जावे लागले. १८३० च्या दशकापासून पुढे खोत्यांचे अधिकार, कृषकांचे पारंपरिक हक्क, महसूल आकारणी आणि अनधिकृत आकारणी यांसंबंधी चौकशी व प्रशासकीय चर्चा झाल्याचे रत्नागिरीच्या जमीन प्रशासनाच्या नोंदींमधून दिसते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
या प्रक्रियेत अधिक अचूक जमीनसर्वेक्षण, जमिनीचे वर्गीकरण आणि महसूल नोंदी तयार करण्याला महत्त्व प्राप्त झाले. पारंपरिक जमीनहक्क आणि महसूलपद्धती यांचे सरकारी सर्वेक्षण व नोंदणीच्या माध्यमातून पुनर्गठन होत गेले.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== शेती, पाऊस आणि ग्रामीण संकटे ===
कोकणातील कृषी अर्थव्यवस्था मान्सूनवर मोठ्या प्रमाणात अवलंबून असल्यामुळे पर्जन्यमानातील बदलांचा पिकांच्या उत्पादनावर आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेवर परिणाम होत असे. रत्नागिरीच्या हंगाम अहवालांमध्ये विविध वर्षांतील पाऊस, भात आणि इतर पिकांची स्थिती, धान्याचे दर, पशुधनाची स्थिती आणि जमीन महसूल यांची नोंद करण्यात आली आहे.<ref name="RatnagiriSeasonReports">{{cite web
|title=Land Administration — Ratnagiri: Season Reports
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Ratnagiri%20and%20Sawantwadi/ratnagiri/land1_sec4.html
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
१८७५–७६मध्ये अतिवृष्टीमुळे भात आणि upland पिकांचे नुकसान झाल्याची, तर १८७६–७७मध्ये पावसाअभावी नाचणी, वरी, हरिक आणि भात यांसारख्या पिकांच्या उत्पादनावर परिणाम झाल्याची नोंद हंगाम अहवालांमध्ये आहे. या काळात काही भागांत मदतकार्य तसेच जमीन महसुलासंबंधी सवलती आणि थकबाकीची नोंदही आढळते.<ref name="RatnagiriSeasonReports"/>
या नोंदींवरून रत्नागिरीतील कृषक अर्थव्यवस्थेवर जमीनधारणा आणि लागवडीबरोबरच पर्जन्यमान, पीकउत्पादन, धान्याचे दर, पशुधन आणि जमीन महसूल यांचा परस्पर परिणाम होत असल्याचे दिसते. त्यामुळे जमीनधारणा असणे हे स्वतःपुरतेच ग्रामीण आर्थिक सुरक्षिततेचे निश्चित द्योतक मानता येत नाही.<ref name="RatnagiriSeasonReports"/>
=== ब्रिटिशकालीन गॅझेटियर निर्मिती ===
ब्रिटिश प्रशासनाने जिल्हानिहाय माहिती संकलित करून ''Gazetteer of the Bombay Presidency'' ही विस्तृत मालिका तयार केली. या गॅझेटियरमध्ये संबंधित जिल्ह्याची भौगोलिक रचना, इतिहास, लोकसंख्या, सामाजिक समूह, शेती, जमीन प्रशासन, महसूल, व्यापार, शिक्षण आणि इतर विषयांची माहिती एकत्रित करण्यात आली होती. त्यामुळे १९व्या शतकातील कोकणातील सामाजिक, आर्थिक आणि प्रशासकीय परिस्थितीच्या अभ्यासासाठी हे महत्त्वाचे वसाहतकालीन स्रोत ठरतात.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/><ref name="Thana1882"/></ref><ref name="KolabaJanjira1883"/>
१८८०चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Ratnagiri and Savantvadi'' हा या मालिकेतील दहावा खंड होता. त्यात जमीन प्रशासन, शेती, उत्पादन, व्यापार, इतिहास, महसूल आणि इतर विषयांची स्वतंत्र माहिती दिली आहे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
१८८२चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Thana'' हा खंड १३, भाग १ म्हणून प्रकाशित झाला. त्यात लोकसंख्या, सामाजिक समूह, शेती, जमीन आणि ग्रामीण जीवनासंबंधी माहिती आहे. त्याच वर्षी ''Thana: Places of Interest'' हा स्वतंत्र खंड १४ म्हणून प्रकाशित झाला; मात्र सामाजिक, कृषी आणि महसुली माहितीचा संदर्भ देताना मुख्यतः खंड १३चा वापर करणे अधिक योग्य आहे.<ref name="Thana1882"/><ref name="ThanaPlacesOfInterest1882">{{cite book
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Thana, Places of Interest
|volume=14
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1882
}}</ref>
१८८३चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira'' हा खंड ११ होता. त्यामध्ये लोकसंख्या, शेती, व्यापार, इतिहास, जमीन प्रशासन आणि महसूल व वित्त यांसाठी स्वतंत्र विभाग आहेत.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== जनगणना आणि सामाजिक वर्गीकरण ===
ब्रिटिशकालीन जनगणना ही कोकणातील सामाजिक समूहांच्या लोकसंख्येचा अभ्यास करण्यासाठी महत्त्वाची ऐतिहासिक साधने आहेत. १९व्या शतकाच्या उत्तरार्धातील जनगणना अहवालांमध्ये लोकसंख्या, धर्म, भाषा, जात, व्यवसाय, जन्मस्थान आणि इतर सामाजिक निकषांनुसार माहिती संकलित करण्यात आली. मात्र जातीय वर्गीकरणाची पद्धत काळानुसार बदलत गेली आणि विविध प्रदेशांतील स्थानिक सामाजिक संज्ञांना प्रशासकीय वर्गांमध्ये बसविण्याचा प्रयत्न करण्यात आला.<ref name="Census1931Bombay"/>
कुणबी समाजाच्या बाबतीत ही बाब विशेष महत्त्वाची आहे. ''Kunbi'', ''Kanbi'', ''Kulwadi'', ''Maratha-Kunbi'' आणि इतर संज्ञा वेगवेगळ्या जनगणनांमध्ये विविध पद्धतीने नोंदल्या गेल्या. त्यामुळे एका जनगणनेतील कुणबी लोकसंख्येची संख्या दुसऱ्या जनगणनेतील संख्येशी थेट तुलना करण्यापूर्वी त्या-त्या जनगणनेतील वर्गीकरणपद्धती, प्रशासकीय सीमा आणि संबंधित संज्ञेचा तत्कालीन अर्थ तपासणे आवश्यक आहे.<ref name="Census1931Bombay"/>
ब्रिटिशकालीन जनगणना ही तत्कालीन प्रशासकीय आणि लोकसंख्याशास्त्रीय वर्गीकरणाची महत्त्वाची नोंद असली तरी ती प्रत्येक व्यक्तीच्या सामाजिक ओळखीचे अपरिवर्तनीय किंवा अंतिम प्रतिबिंब मानता येत नाही. सामाजिक ओळख, स्थानिक प्रथा आणि प्रशासकीय वर्गीकरण यांच्यात संबंध असला तरी त्यांची उद्दिष्टे आणि स्वरूप वेगवेगळे होते.<ref name="Census1931Bombay"/>
=== कोकणातील कुणबी आणि ब्रिटिशकालीन नोंदी ===
ब्रिटिशकालीन नोंदींमध्ये कोकणातील कुणबी समाजाचा उल्लेख विविध सामाजिक, कृषी आणि जमीनविषयक संदर्भांत आढळतो. रत्नागिरीतील जमीन प्रशासनाच्या नोंदींमध्ये कुणबी हे वारसाहक्काने जमीन कसणाऱ्या कृषकांमध्ये मोठ्या प्रमाणावर असल्याचे नमूद केले आहे. थाणे आणि कोलाबा गॅझेटियरमध्येही कुणबींचा कृषी आणि ग्रामीण समाजाच्या संदर्भात उल्लेख आढळतो.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/><ref name="Thana1882"/><ref name="KolabaJanjira1883"/>
रत्नागिरीतील जमीन प्रशासनाच्या नोंदी विशेष महत्त्वाच्या आहेत कारण त्यामध्ये कुणबी कृषकांचा उल्लेख जमीनहिस्से, वारसाहक्की लागवड आणि खोती व्यवस्थेशी संबंधित संदर्भात करण्यात आला आहे. वारसाहक्की ''karda'' आणि कुणबी कृषक यांचा संबंध हा कोकणातील कुणबी समाजाच्या जमीनधारणेच्या इतिहासासाठी महत्त्वाचा प्राथमिक पुरावा आहे.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== ब्रिटिशकालीन परिवर्तन आणि कुणबी समाज ===
ब्रिटिश सत्तेने कोकणातील पारंपरिक जमीनव्यवस्था एकाच वेळी पूर्णपणे बदलली नाही. विद्यमान जमीनहक्क, वतन, खोती व्यवस्था आणि कृषकांच्या प्रथागत अधिकारांचा अभ्यास करून त्यांचे सर्वेक्षण, मोजणी आणि प्रशासकीय नोंदणी करण्यात आली. या प्रक्रियेमुळे काही पारंपरिक हक्क सरकारी नोंदींमध्ये अधिक स्पष्टपणे नोंदवले गेले, तर काही हक्कांचे स्वरूप नव्या प्रशासकीय आणि कायदेशीर चौकटीत निश्चित करण्यात आले.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
कुणबी समाजाच्या दृष्टीने या प्रक्रियेचा एक परिणाम असा झाला की जमीन, क्षेत्रफळ, सीमा, लागवड आणि महसूल यांच्याशी संबंधित माहिती अधिक पद्धतशीर सरकारी नोंदींमध्ये येऊ लागली. त्याच वेळी महसूल, भाडे, खोती हक्क आणि कृषकांचे पारंपरिक अधिकार यांच्यातील संबंध नव्या प्रशासकीय चौकटीत निश्चित करण्याची प्रक्रिया सुरू झाली.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
रत्नागिरीतील खोती व्यवस्थेच्या संदर्भात ब्रिटिश अधिकाऱ्यांनी खोत्यांचे हक्क, कृषकांचे हक्क आणि सरकारी महसूल यांच्याशी संबंधित प्रश्नांवर चौकशी व प्रशासकीय हस्तक्षेप केला. पुढील काळात खोती व्यवस्थेबाबत स्वतंत्र चौकशा आणि सुधारणा करण्यात आल्या.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== ब्रिटिशपूर्व ते ब्रिटिशकालीन संक्रमण ===
कोकणातील जमीनव्यवस्थेचा ब्रिटिशपूर्व ते ब्रिटिशकालीन प्रवास हा अचानक झालेला बदल नसून सातत्य आणि परिवर्तन यांचा मिश्र परिणाम होता. मराठा काळातील जमीनमोजणी, ग्रामअधिकारी, वतन, मिरास आणि खोती यांसारख्या संस्थांचे काही घटक ब्रिटिश काळाच्या सुरुवातीसही अस्तित्वात होते; मात्र ब्रिटिश प्रशासनाने त्यांचे सर्वेक्षण, जमीनमोजणी, नकाशे, लेखी नोंदी आणि महसूलव्यवस्थेच्या माध्यमातून अधिक औपचारिक पुनर्गठन करण्याचा प्रयत्न केला.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
या संक्रमणाचा परिणाम ग्रामीण समाजाच्या विविध स्तरांवर झाला. जमीनधारक, खोती, पाटील, कुलकर्णी, वारसाहक्की कृषक, भाडेकरू आणि मजूर यांच्यातील जमीन, महसूल, भाडे आणि प्रथागत हक्कांचे संबंध ब्रिटिशकालीन सर्वेक्षण, महसूल चौकशी आणि गावनिहाय नोंदवहींमध्ये अधिक स्पष्टपणे नोंदवले जाऊ लागले. रत्नागिरीतील १८२७–१८३० च्या सर्वेक्षणात शेतांचे क्षेत्रफळ, सीमा आणि गावातील स्थान ''khatavni'' या गावनिहाय नोंदवहीत नोंदविण्यात आले आणि त्यासोबत नकाशे तयार करण्यात आले. त्याच चौकशीत खोती गावांतील वारसाहक्की कृषक, ''vatandar kardas'', तसेच इतर प्रकारच्या कृषकांचे जमीनहक्क आणि खोत्यांशी असलेले संबंध तपासण्यात आले.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
एकोणिसाव्या शतकातील जिल्हा गॅझेटियर आणि त्यानंतरच्या जनगणना अहवालांमध्ये जमीन, शेती, लोकसंख्या, जात, व्यवसाय आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेविषयी मोठ्या प्रमाणावर सांख्यिकीय व वर्णनात्मक माहिती संकलित करण्यात आली. रत्नागिरी आणि सावंतवाडीचा १८८०चा गॅझेटियर, ठाण्याचा १८८२चा गॅझेटियर आणि कोलाबा व जंजिराचा १८८३चा गॅझेटियर यांमध्ये जमीन प्रशासन, शेती, महसूल, लोकसंख्या आणि सामाजिक जीवनासंबंधी स्वतंत्र विभाग आहेत.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/><ref name="Thana1882"/><ref name="KolabaJanjira1883"/>
त्यामुळे हे स्रोत कोकणातील एकोणिसाव्या शतकातील सामाजिक, कृषी आणि आर्थिक परिवर्तनाचा अभ्यास करण्यासाठी महत्त्वाचे ऐतिहासिक दस्तऐवज ठरतात.
कोकणातील कुणबी समाजासाठी या कालखंडाचे विशेष महत्त्व आहे. रत्नागिरीतील १८२९–१८३० च्या जमीनचौकशीच्या संदर्भात ''vatandar kardas'' या वारसाहक्की कृषकांमध्ये कुणबींचा मोठा वाटा असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद करण्यात आले आहे. या कृषकांकडे ठरावीक जमीनहिस्से होते; ते त्यांची लागवड आणि पडीत जमिनीचे व्यवस्थापन करीत आणि खोत्याशी संबंधित देयके देत असत.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्येही ''Kunbi'', ''Kanbi'', ''Kulwadi'', ''Maratta-Kunbi'' आणि संबंधित संज्ञांचे वर्गीकरण आढळते; मात्र ही वर्गीकरणे जनगणनेनुसार आणि प्रदेशानुसार बदलत असल्यामुळे त्यांच्या संख्यांची तुलना करताना संबंधित जनगणनेची वर्गीकरणपद्धती आणि तत्कालीन प्रशासकीय सीमा विचारात घेणे आवश्यक आहे. १९३१ च्या बॉम्बे जनगणनेत ''Kunbi, Kulwadi or Kanbi'', ''Lewa or Lewa Kunbi'' आणि ''Maratta-Kunbi'' अशा स्वतंत्र नोंदी आढळतात.<ref name="Census1931Bombay"/>
त्यामुळे आधुनिक कोकणातील कुणबी समाजाचा सामाजिक-आर्थिक इतिहास समजून घेण्यासाठी ब्रिटिशपूर्व ग्रामव्यवस्था, ब्रिटिशकालीन जमीनसर्वेक्षण, महसूल नोंदी, District Gazetteers आणि Census records यांचा परस्पर संदर्भात अभ्यास करणे आवश्यक आहे. या स्रोतांमधून कुणबींच्या कृषी व्यवसायाबरोबरच त्यांच्या जमीनहक्कांचा, खोती व्यवस्थेशी असलेल्या संबंधांचा आणि बदलत्या प्रशासकीय वर्गीकरणाचा इतिहास अधिक स्पष्टपणे समोर येतो.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/><ref name="Census1931Bombay"/>
== रत्नागिरीतील कुणबी ==
रत्नागिरी जिल्हा हा कोकणातील कुणबी समाजाच्या ऐतिहासिक अभ्यासासाठी विशेष महत्त्वाचा प्रदेश आहे. याचे एक प्रमुख कारण म्हणजे ब्रिटिशकालीन जमीन सर्वेक्षण, महसूल चौकशी, District Gazetteer आणि जनगणना अहवालांमध्ये रत्नागिरीतील कुणबींची तुलनेने सविस्तर नोंद आढळते. विशेषतः १८२७–१८३० च्या जमीन सर्वेक्षणाच्या नोंदींमध्ये वारसाहक्की कृषकांच्या संदर्भात कुणबींचा स्पष्ट उल्लेख आहे, तर १८८१ च्या जनगणनेत रत्नागिरी जिल्ह्यासाठी कुणबींची स्वतंत्र संख्या नोंदवण्यात आली आहे.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/><ref name="Baines1881">{{cite book
|last=Baines
|first=J. A.
|title=Imperial Census of 1881: Operations and Results in the Presidency of Bombay including Sind
|volume=1
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1882
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=== एकोणिसाव्या शतकातील रत्नागिरीची लोकसंख्या ===
एकोणिसाव्या शतकाच्या सुरुवातीला रत्नागिरी हा तुलनेने दाट लोकवस्तीचा आणि कृषीप्रधान जिल्हा होता. १८२० च्या सुमारास करण्यात आलेल्या लोकसंख्या मोजणीच्या संदर्भात रत्नागिरीची लोकसंख्या पावसाळी हंगामात ४,६२,६५१ इतकी असल्याचे १८८० च्या गॅझेटियरमध्ये नमूद करण्यात आले आहे. त्या काळात रत्नागिरी धान्य निर्यात करणारा प्रदेश असल्याचेही त्याच नोंदीत नमूद आहे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
एकोणिसाव्या शतकाच्या मध्यापासून रत्नागिरीची लोकसंख्या वाढत गेली; मात्र दुष्काळ, रोगराई, आर्थिक अडचणी आणि विशेषतः मुंबईकडे होणारे स्थलांतर यांमुळे लोकसंख्येच्या वाढीचे स्वरूप इतर जिल्ह्यांपेक्षा वेगळे राहिले. १८८१ च्या जनगणनेत रत्नागिरी जिल्ह्याची लोकसंख्या ९,९७,०९० नोंदली गेली होती. त्यापैकी ४७३,०५३ पुरुष आणि ५२४,०३७ स्त्रिया होत्या.<ref name="Baines1881"/>
१८८१ च्या रत्नागिरी जिल्ह्याच्या लोकसंख्येत शेतीचे स्थान अत्यंत महत्त्वाचे होते. त्या काळातील नोंदीनुसार शेतीवर अवलंबून असलेली लोकसंख्या ६,८९,८३७ इतकी होती. यामध्ये कृषी कामगार आणि त्यांच्यावर अवलंबून असलेल्या लोकांचा समावेश होता.<ref name="ImperialGazetteerRatnagiri">{{cite web
|title=Imperial Gazetteer of India: Ratnagiri
|url=https://library.bjp.org/jspui/bitstream/123456789/1895/1/The%20Imperial%20Gazetteer%20of%20India%20%20Vol-12%20%28Ratlam%20to%20Sirmur%29.pdf
|publisher=Imperial Gazetteer of India
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=== १८८१ची जनगणना आणि कुणबी ===
१८८१ च्या Bombay Presidency Censusमध्ये कृषक समूहांचे वर्गीकरण करताना ''Maratha Kunbi'' हा मोठा कृषक वर्ग म्हणून मांडण्यात आला. Censusच्या विश्लेषणात Deccan Kunbi आणि कोकणातील ''Maratha'' म्हणून नोंदविल्या जाणाऱ्या उपविभागाचा एकत्र विचार करण्यात आला होता. Census अधिकाऱ्याने या दोन्ही वर्गांमधील भेद अनेक ठिकाणी स्पष्ट नसल्याचे आणि काही प्रकरणांत तो मनमानी स्वरूपाचा असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Baines1881"/>
रत्नागिरी जिल्ह्याच्या बाबतीत १८८१ च्या Censusमध्ये **२,०५,७८४ कुणबी** आणि **२,७१,००० मराठा** अशी संख्या नोंदविण्यात आली होती. Censusच्या मूळ मजकुरात या आकडेवारीचा स्पष्ट उल्लेख आहे.<ref name="Baines1881"/>
१८८१ च्या Censusच्या वर्गीकरणातील ही अस्पष्टता रत्नागिरीतील कुणबींच्या ऐतिहासिक लोकसंख्येचा अभ्यास करताना विशेष लक्षात घ्यावी लागते. एका बाजूला Censusमध्ये ''Kunbi'' ही स्वतंत्र नोंद आहे; दुसऱ्या बाजूला त्याच अहवालात Deccan Kunbi आणि Konkanमधील Maratha यांच्या वर्गीकरणातील फरक नेहमी स्पष्ट नसल्याचे नमूद केले आहे. त्यामुळे १८८१ च्या आकडेवारीचा उपयोग त्या काळातील दस्तऐवजी लोकसंख्या-वर्गीकरणाचा पुरावा म्हणून करता येतो; मात्र त्यावरून आधुनिक काळातील कुणबी समाजाची लोकसंख्या निश्चित करता येत नाही.<ref name="Baines1881"/>
=== रत्नागिरी गॅझेटियरमधील कुणबी ===
१८८०चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Ratnagiri and Savantvadi'' हा रत्नागिरीतील कुणबी समाजाच्या इतिहासाच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचा वसाहतकालीन स्रोत आहे. या खंडात लोकसंख्या, शेती, जमीन प्रशासन, महसूल, व्यापार आणि १८२७–१८५१ च्या सर्वेक्षणाशी संबंधित स्वतंत्र माहिती दिली आहे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
गॅझेटियरच्या १८२७–१८३० च्या जमीन सर्वेक्षणासंबंधी नोंदींमध्ये रत्नागिरीतील वारसाहक्की कृषकांना ''hereditary cultivators'' आणि ''vatandar kardas'' असे संबोधले आहे. या कृषकांमध्ये कुणबींचा मोठा वाटा असल्याची स्पष्ट नोंद आहे. त्यामुळे रत्नागिरीतील कुणबींचे कृषक म्हणून असलेले स्थान हे केवळ नंतरच्या ethnographic वर्णनावर आधारित नसून ब्रिटिशकालीन जमीन चौकशीच्या नोंदींमध्येही दिसून येते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== कुणबी आणि वारसाहक्की जमीन ===
रत्नागिरीतील खोती गावांच्या संदर्भात ब्रिटिश अधिकाऱ्यांनी जमीनधारक आणि कृषक यांच्यातील संबंधांचा तपशीलवार अभ्यास केला. खोत्याच्या ताब्यातील जमिनीबरोबरच मोठ्या प्रमाणावर जमीन वारसाहक्की कृषकांच्या ताब्यात असल्याचे आढळले. या कृषकांमध्ये कुणबी मोठ्या संख्येने असल्याची नोंद करण्यात आली होती.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
या वारसाहक्की कृषकांना ''karda'' म्हणून संबोधले जात असे. ते विशिष्ट जमीनहिस्सा पिढ्यान्पिढ्या कसत आणि त्यावर लागवड करीत. काही नोंदींमध्ये अशा कृषकांच्या ताब्यातील जमीन, तिची लागवड आणि खोत्याशी असलेले आर्थिक संबंध यांचे वर्णन आढळते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
यावरून रत्नागिरीतील कुणबी समाजाची ऐतिहासिक ओळख केवळ ‘शेती करणारा समाज’ इतकी मर्यादित नव्हती. उपलब्ध जमीन प्रशासनाच्या नोंदींमध्ये काही कुणबी कृषक विशिष्ट जमीनहिस्से, वारसाहक्क आणि खोती महसूलव्यवस्थेशी संबंधित असल्याचे दिसते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== खोती व्यवस्था आणि कुणबी ===
रत्नागिरीच्या ग्रामीण समाजरचनेवर खोती व्यवस्थेचा मोठा प्रभाव होता. खोत हा गावाच्या महसूलव्यवस्थेतील मध्यस्थ किंवा हक्कधारक होता. खोती गावांमध्ये कृषकांकडून जमीन कसून घेऊन त्यांच्याकडून महसूल किंवा इतर देयकांची वसुली केली जात असे आणि खोत सरकारशी महसूलाच्या बाबतीत संबंधित असे.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
कुणबींचा या व्यवस्थेशी संबंध विविध स्वरूपाचा होता. उपलब्ध रत्नागिरीतील जमीन प्रशासनाच्या नोंदींमध्ये काही कुणबी वारसाहक्की ''karda'' कृषक म्हणून नोंदलेले आढळतात. त्यामुळे कुणबी समाजाला खोती व्यवस्थेत केवळ एकाच आर्थिक वर्गात बसविणे योग्य ठरणार नाही. जमीनहक्क, लागवडीचे स्वरूप आणि खोत्याशी असलेले आर्थिक संबंध यांनुसार कृषकांची स्थिती वेगवेगळी असू शकत होती.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== भातशेती आणि कृषीजीवन ===
रत्नागिरीतील कृषीव्यवस्थेत भातशेतीला महत्त्वाचे स्थान होते. जिल्ह्यातील पर्जन्यमान, भौगोलिक रचना, नदीखोरे आणि विविध प्रकारच्या जमिनी यांमुळे भात हे प्रमुख अन्नधान्य पीक होते. याशिवाय नाचणी, वरी, हरिक आणि इतर पिकांचीही लागवड केली जात होती.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
१८८३–८४ च्या आकडेवारीनुसार रत्नागिरी जिल्ह्यात १,०७८,८२१ एकर क्षेत्र प्रत्यक्ष लागवडीखाली होते. त्यापैकी १,०२०,५८३ एकरांवर धान्यपिके, ४१,७७३ एकरांवर कडधान्ये, २५,२२२ एकरांवर तेलबिया, ७,७२३ एकरांवर तंतुपिके आणि उर्वरित क्षेत्रावर बागायती, ऊस व इतर पिके घेतली जात होती.<ref name="ImperialGazetteerRatnagiri"/>
रत्नागिरीतील कृषीजीवन हे केवळ भातशेतीवर आधारित नव्हते. वर्खस किंवा डोंगराळ जमिनीवर नाचणी, वरी आणि हरिकसारखी पिके घेतली जात. Imperial Gazetteerनुसार १८८३–८४मध्ये वर्खस जमिनीवर हरिक, नाचणी आणि वरी यांसारख्या तुलनेने कमी पाण्यावर येणाऱ्या पिकांची लागवड मोठ्या प्रमाणावर होत होती. काही हलक्या व डोंगराळ जमिनींना सलग काही वर्षे लागवड केल्यानंतर पुन्हा काही काळ पडीत ठेवण्याची पद्धतही आढळत होती.<ref name="ImperialGazetteerRatnagiri"/>
=== रत्नागिरीतील ग्रामीण वितरण ===
१८८१मध्ये रत्नागिरी जिल्ह्यात १,२९७ गावे आणि शहरे नोंदली गेली होती. त्यापैकी १३८ वस्तींची लोकसंख्या २००पेक्षा कमी, ४५४ वस्तींची लोकसंख्या २०० ते ५००, ४३६ वस्तींची लोकसंख्या ५०० ते १,०००, तर २०५ वस्तींची लोकसंख्या १,००० ते २,००० होती. यावरून जिल्ह्याची लोकसंख्या मोठ्या शहरांपेक्षा असंख्य लहान ग्रामीण वसाहतींमध्ये मोठ्या प्रमाणावर विखुरलेली होती.<ref name="ImperialGazetteerRatnagiri"/>
मालवण, रत्नागिरी, चिपळूण, वेंगुर्ला, राजापूर आणि दापोली ही त्या काळातील प्रमुख शहरे होती. यांपैकी मालवण, रत्नागिरी, चिपळूण, वेंगुर्ला आणि राजापूर ही नगरपालिका असलेली शहरे होती.<ref name="ImperialGazetteerRatnagiri"/>
कुणबी समाजाच्या ग्रामीण वितरणाचा विचार करताना ही ग्रामरचना महत्त्वाची ठरते. रत्नागिरीतील कुणबी समाजाचा शेतीशी असलेला ऐतिहासिक संबंध लक्षात घेता त्यांची वस्ती कृषीप्रधान ग्रामीण भागांशी जोडलेली होती असे उपलब्ध जमीन प्रशासन आणि सामाजिक नोंदींवरून दिसते; मात्र प्रत्येक तालुका किंवा गावासाठी स्वतंत्र कुणबी लोकसंख्या उपलब्ध नसल्यामुळे जिल्ह्यातील कुणबींच्या सूक्ष्म भौगोलिक वितरणाचे अचूक प्रमाण निश्चित करता येत नाही.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
=== गावजीवन आणि सामाजिक रचना ===
रत्नागिरीतील ग्रामीण समाज हा कुटुंब, जमीन, शेती, ग्रामसंस्था, देवस्थान आणि स्थानिक परंपरांशी जोडलेला होता. कृषक कुटुंबांचे जीवन त्यांच्या जमीनहिस्स्याशी आणि शेतीच्या हंगामाशी संबंधित होते. पावसाळा, भातलागवड, कापणी, धान्यसाठा आणि बाजारपेठेतील विक्री यांमुळे ग्रामीण जीवनाचे वार्षिक चक्र निश्चित होत असे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
गॅझेटियरच्या वर्णनात रत्नागिरीतील ग्रामीण घरांची रचना, कौलारू घरे, अंगण आणि घरातील विविध भागांचा उल्लेख आढळतो. आर्थिक स्थिती आणि कुटुंबाच्या आकारमानानुसार घरांच्या स्वरूपात फरक असल्याचेही दिसते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
या सामाजिक रचनेत जात, कुटुंब, जमीनधारणा आणि व्यवसाय यांचा परस्पर संबंध होता. तथापि कुणबी समाजातील प्रत्येक कुटुंबाची आर्थिक स्थिती समान होती असे मानता येत नाही. जमीनहक्क, शेतीचे क्षेत्र, कर्ज, उत्पादन आणि बाहेरील रोजगाराच्या संधी यांनुसार आर्थिक फरक अस्तित्वात असू शकत होते.
=== कुणबी, मराठा आणि रत्नागिरीतील सामाजिक वर्गीकरण ===
रत्नागिरीतील कुणबींच्या इतिहासाचा अभ्यास करताना ''Kunbi'' आणि ''Maratha'' या संज्ञांमधील ऐतिहासिक संबंध अत्यंत सावधपणे तपासणे आवश्यक आहे. १८८१ च्या Censusमध्ये ''Maratha Kunbi'' हा व्यापक कृषक वर्ग वापरण्यात आला; त्याच वेळी रत्नागिरीसाठी ''Kunbi'' आणि ''Maratha'' यांच्या स्वतंत्र संख्याही नोंदविण्यात आल्या. Census अधिकाऱ्याने Konkanमधील Maratha आणि Deccan Kunbi यांच्या वर्गीकरणातील भेद काही ठिकाणी स्पष्ट नसल्याचे नमूद केले होते.<ref name="Baines1881"/>
त्यामुळे १८८१ च्या रत्नागिरीतील २,०५,७८४ कुणबी आणि २,७१,००० मराठा या संख्यांवरून दोन्ही समूह स्वतंत्र, पूर्णपणे वेगळे किंवा पूर्णपणे समान सामाजिक समूह होते असा निष्कर्ष काढता येत नाही. त्या आकडेवारीचे अर्थ लावताना ब्रिटिश जनगणनेची वर्गीकरणपद्धती आणि त्या काळातील स्थानिक सामाजिक ओळखी विचारात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="Baines1881"/>
=== सावंतवाडीशी संबंध ===
रत्नागिरी आणि सावंतवाडी हे दक्षिण कोकणातील परस्पर संबंधित ऐतिहासिक प्रदेश होते. १८८० च्या ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Ratnagiri and Savantvadi'' मध्ये या दोन्ही प्रदेशांचा एकाच खंडात स्वतंत्र विभागांसह अभ्यास करण्यात आला आहे. सावंतवाडी संस्थानातील वाडी, कुडाळ आणि बांदा या विभागांचा तसेच मालवण, वेंगुर्ला आणि दक्षिण कोकणातील इतर बाजारपेठांचा व्यापार आणि दळणवळणाच्या माध्यमातून परस्पर संबंध होता.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
सावंतवाडीच्या १८५१ च्या जनगणनेनुसार संस्थानाची लोकसंख्या १,५०,०६५ होती. १८७२ च्या जनगणनेत ती वाढून १,९०,८१४ झाली. १८७२ च्या वर्गीकरणानुसार ७३,६२७ व्यक्ती शेती आणि पशुधनाशी संबंधित व्यवसायात होत्या; ही संख्या एकूण लोकसंख्येच्या ३८.५८ टक्के होती.<ref name="SavantvadiPopulation">{{cite web
|title=Population — Savantvadi
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Ratnagiri%20and%20Sawantwadi/savantvadi/pop2_census.html
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
सावंतवाडीतील कृषी आणि ग्रामीण समाजाचा अभ्यास रत्नागिरीतील कुणबी समाजाशी थेट समानता सिद्ध करण्यासाठी नव्हे, तर दक्षिण कोकणातील कृषी, बाजारपेठ आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या परस्परसंबंधांची ऐतिहासिक पार्श्वभूमी समजून घेण्यासाठी महत्त्वाचा आहे.
=== दक्षिण कोकणातील सामाजिक वैशिष्ट्ये ===
दक्षिण कोकणातील ग्रामीण समाजाची काही वैशिष्ट्ये रत्नागिरी, मालवण, कुडाळ, वेंगुर्ला आणि सावंतवाडी या प्रदेशांमध्ये आढळतात. पर्जन्याधारित शेती, डोंगराळ आणि किनारी भूप्रदेश, भातशेती, बागायती, जंगल आणि समुद्राशी संबंधित आर्थिक व्यवहार या प्रदेशाच्या ग्रामीण जीवनाचे महत्त्वाचे घटक होते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
एकोणिसाव्या शतकाच्या उत्तरार्धात रत्नागिरीतील लोकसंख्या, मर्यादित कृषी संसाधने आणि रोजगाराच्या उपलब्धतेतील असमतोल यांचा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेवर परिणाम झाला. विशेषतः मुंबईमध्ये वाढणाऱ्या मजूर मागणीमुळे रत्नागिरीतून हंगामी स्थलांतराला चालना मिळाली. १८७७–७८ च्या काळात रत्नागिरीतील गरीब कामगारांची नेहमीपेक्षा जवळजवळ दुप्पट संख्या, म्हणजे सुमारे १,५०,००० व्यक्ती, कामाच्या हंगामात मुंबईकडे गेल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद आहे. त्यापैकी अनेक जण पुढील पीकहंगामापूर्वी रत्नागिरीत परतले.<ref name="RatnagiriFamines">{{cite web
|title=Famines and Scarcity — Ratnagiri
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/RATNAGIRI/agri_famines.html
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
रत्नागिरीतील लोकसंख्येचा मुंबईशी संबंध पुढील काळातही वाढत गेला. १८७२ च्या Censusनुसार मुंबई शहरात रत्नागिरी जिल्ह्यात जन्मलेल्या ७०,९४७ व्यक्ती होत्या; १८८१ च्या Censusमध्ये ही संख्या १,२६,१९० झाली. या वाढीचे प्रमाण जवळजवळ ७८ टक्के होते. Imperial Gazetteerने रत्नागिरीतील लोकसंख्येचा मुंबईतील रोजगार, औद्योगिक कामगारवर्ग आणि इतर सेवांशी असलेला संबंधही अधोरेखित केला आहे.<ref name="ImperialGazetteerRatnagiri"/>
=== कुणबी समाज आणि स्थलांतराची सुरुवात ===
रत्नागिरीतील मर्यादित कृषी संसाधने आणि मुंबईतील वाढती मजूर मागणी यांमुळे एकोणिसाव्या शतकात ग्रामीण भागातून मुंबईकडे हंगामी स्थलांतर वाढले. १८५० च्या दशकात रत्नागिरीतील कृषक मुंबईकडे हंगामानुसार जात असल्याच्या नोंदी आढळतात. एका सर्वेक्षण अधिकाऱ्याच्या नोंदीनुसार एका अंतर्गत तालुक्यातील प्रत्येक गावातून काही कृषक ऑक्टोबरच्या सुमारास मुंबईकडे जात आणि मान्सूनच्या सुरुवातीला शेतीच्या कामासाठी परतत असत.<ref name="ImperialGazetteerRatnagiri"/>
१८७७–७८ च्या काळातील गॅझेटियरची नोंदही या हंगामी स्थलांतराच्या स्वरूपाला पुष्टी देते. कामाच्या हंगामात मुंबईकडे गेलेले मोठ्या संख्येतील ग्रामीण कामगार पुढील पीकहंगामापूर्वी रत्नागिरीत परतत होते. त्यामुळे शेती आणि शहरी मजुरी यांच्यात परस्परपूरक संबंध निर्माण झाला होता.<ref name="RatnagiriFamines"/>
या स्थलांतरामुळे काही कुटुंबांच्या आर्थिक जीवनात ग्रामीण शेती आणि शहरी रोजगार यांचे मिश्र स्वरूप निर्माण झाले. गावातील जमीन आणि शेतीशी संबंध कायम ठेवत मुंबईत हंगामी मजुरी करणे हा काही ग्रामीण कुटुंबांसाठी उत्पन्नाचा पूरक मार्ग बनला. पुढील काळात याच प्रक्रियेतून हंगामी, परिपत्रक आणि कायमस्वरूपी स्थलांतराचे विविध नमुने विकसित झाले.
=== रत्नागिरीतील कुणबींची आर्थिक स्थिती ===
ब्रिटिशकालीन जमीन प्रशासनाच्या नोंदींवरून रत्नागिरीतील कुणबी समाजाची आर्थिक स्थिती एकसमान नव्हती. १८२७–१८३० च्या जमीन चौकशीमध्ये कुणबींचा उल्लेख वारसाहक्की कृषकांच्या संदर्भात आढळतो. या कृषकांकडे विशिष्ट जमीनहिस्से होते आणि ते त्या जमिनीची लागवड करीत होते. खोती गावांमध्ये अशा कृषकांचे खोतांशी महसूल आणि उत्पादनाशी संबंधित संबंध होते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
त्यामुळे रत्नागिरीतील कुणबी समाजाला केवळ एकसंध आर्थिक वर्ग म्हणून पाहणे योग्य ठरणार नाही. उपलब्ध नोंदींमध्ये वारसाहक्की कृषक, जमीन कसणारे इतर कृषक आणि खोती व्यवस्थेशी संबंधित विविध प्रकारचे जमीनहक्क व आर्थिक संबंध आढळतात. त्यामुळे ‘कुणबी म्हणजे सर्वच लहान शेतकरी’ किंवा ‘कुणबी म्हणजे सर्वच जमीनमालक’ अशी एकरेषीय मांडणी उपलब्ध ऐतिहासिक पुराव्यांशी सुसंगत ठरणार नाही.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
कृषी उत्पादन, जमीनधारणा आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेवर पर्जन्यमान, पिकांची स्थिती, जमिनीचा प्रकार आणि महसूलाची मागणी यांचा परिणाम होत असे. रत्नागिरीच्या हंगाम अहवालांमध्ये पाऊस, पिकांचे उत्पादन, धान्याचे दर, पशुधनाची हानी आणि जमीन महसूल यांची वर्षनिहाय नोंद आढळते. त्यामुळे कृषक कुटुंबांची आर्थिक स्थिती केवळ त्यांच्या जमीनहक्कावर अवलंबून नसून कृषी उत्पादन आणि त्या काळातील आर्थिक परिस्थितीशीही संबंधित होती.<ref name="RatnagiriSeasonReports"/>
एकोणिसाव्या शतकाच्या उत्तरार्धात मुंबईशी वाढलेल्या आर्थिक संबंधांचाही रत्नागिरीच्या ग्रामीण समाजावर परिणाम झाला. रोजगाराच्या शोधात रत्नागिरीतून मुंबईकडे हंगामी स्थलांतर होत असल्याची नोंद उपलब्ध गॅझेटियर आणि इतर वसाहतकालीन स्रोतांमध्ये आढळते. या प्रक्रियेमुळे काही ग्रामीण कुटुंबांच्या उपजीविकेत शेतीबरोबर बाहेरील मजुरी किंवा रोजगाराचा सहभाग वाढला.<ref name="ImperialGazetteerRatnagiri"/>
=== रत्नागिरीतील कुणबींच्या इतिहासाचे वैशिष्ट्य ===
रत्नागिरीतील कुणबी समाजाच्या इतिहासाचे एक महत्त्वाचे वैशिष्ट्य म्हणजे त्यांचा उल्लेख जमीन प्रशासन, कृषी आणि जनगणना या वेगवेगळ्या प्रकारच्या वसाहतकालीन नोंदींमध्ये आढळतो. १८२७–१८३० च्या जमीन चौकशीमध्ये कुणबींचा वारसाहक्की कृषकांच्या संदर्भात उल्लेख करण्यात आला; १८८० च्या ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Ratnagiri and Savantvadi'' मध्ये जमीन प्रशासन, शेती, महसूल आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेची विस्तृत माहिती नोंदविण्यात आली; तर १८८१ च्या Censusमध्ये रत्नागिरी जिल्ह्यासाठी कुणबींची स्वतंत्र संख्या नोंदविण्यात आली.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/><ref name="Baines1881"/>
या विविध स्रोतांचा एकत्रित अभ्यास केल्यास रत्नागिरीतील कुणबी समाजाचा इतिहास केवळ ‘शेतकरी जात’ या संक्षिप्त वर्णनापुरता मर्यादित राहत नाही. उपलब्ध नोंदींमध्ये कुणबी हे जमीन कसणारे कृषक, वारसाहक्की कृषक आणि खोती महसूलव्यवस्थेशी संबंधित ग्रामीण घटक म्हणून दिसतात. पुढील काळात रत्नागिरीतील ग्रामीण समाजाचा मुंबईतील रोजगाराशी वाढता संबंधही दिसून येतो.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/><ref name="ImperialGazetteerRatnagiri"/>
मात्र या ऐतिहासिक नोंदींचे अर्थ लावताना काळानुसार बदललेले सामाजिक आणि प्रशासकीय वर्गीकरण लक्षात घेणे आवश्यक आहे. ''Kunbi'', ''Maratha'', ''Maratha-Kunbi'' आणि संबंधित संज्ञांचा वापर वेगवेगळ्या जनगणना आणि प्रशासकीय नोंदींमध्ये समान पद्धतीने झालेला नाही. त्यामुळे १८८१ च्या Censusमधील कुणबींची संख्या ही त्या काळातील ब्रिटिश जनगणनात्मक वर्गीकरणाची नोंद म्हणून पाहणे आवश्यक आहे; तिची आजच्या प्रशासकीय किंवा सामाजिक वर्गीकरणाशी थेट तुलना करता येत नाही.<ref name="Baines1881"/>
== रायगड आणि ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशातील कुणबी ==
आधुनिक रायगड जिल्ह्याचा मोठा भाग ब्रिटिशकालीन ''Kolaba'' जिल्ह्याचा भाग होता. त्यामुळे रायगडातील कुणबी समाजाचा ऐतिहासिक अभ्यास करताना जुन्या प्रशासकीय नोंदींमधील ''Kolaba'' या संज्ञेचा संदर्भ लक्षात घेणे आवश्यक आहे. १८८३चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira'' हा या प्रदेशाच्या इतिहास, लोकसंख्या, शेती, जमीन प्रशासन, महसूल आणि व्यापाराच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचा वसाहतकालीन स्रोत आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
रायगडातील कुणबी समाजाचा ऐतिहासिक अभ्यास करताना कृषी, जमीनधारणा, ग्रामजीवन आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्था यांचा विचार करणे आवश्यक आहे. त्याचबरोबर महाड, माणगाव, रोहा, पेण, अलिबाग आणि इतर भागांचा व्यापार, नदीमार्ग आणि किनारी बाजारपेठांशी असलेला संबंधही या प्रदेशाच्या सामाजिक-आर्थिक इतिहासाला महत्त्वाचा संदर्भ देतो.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== ऐतिहासिक कोलाबा आणि आधुनिक रायगड ===
ब्रिटिशकालीन ''Kolaba'' जिल्ह्याच्या भौगोलिक सीमा आजच्या रायगड जिल्ह्याच्या सीमांशी तंतोतंत समान नव्हत्या. प्रशासकीय पुनर्रचना आणि जिल्ह्यांच्या सीमांतील बदलांमुळे जुन्या जनगणना, गॅझेटियर किंवा महसूल नोंदींमधील ''Kolaba'' या संज्ञेचा आधुनिक रायगडशी संबंध जोडताना संबंधित काळातील प्रशासकीय सीमा विचारात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
१८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये कोलाबा जिल्ह्याच्या लोकसंख्या, शेती, उत्पादन, जमीन प्रशासन, महसूल आणि व्यापाराचे स्वतंत्र वर्णन करण्यात आले आहे. या प्रशासकीय चौकटीत महाड आणि माणगावसारखे अंतर्गत कृषी प्रदेश तसेच अलिबाग, पेण आणि इतर किनारी भागांतील व्यापारकेंद्रांचा समावेश होता.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== कोलाबा प्रदेशातील कुणबींचे वितरण ===
१८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये कोलाबा जिल्ह्यातील सामाजिक समूहांचे वर्णन करताना कुणबींचा उल्लेख जिल्ह्याच्या विविध भागांत आढळणाऱ्या कृषक समुदायाच्या संदर्भात करण्यात आला आहे. सामाजिक वितरणाच्या वर्णनात किनारी भागातील काही गावांमध्ये भंडारी आणि कोळी यांची उपस्थिती नमूद करताना, मराठे प्रामुख्याने अंतर्गत भागात आढळत असल्याचे आणि कुणबी संपूर्ण जिल्ह्यात आढळत असल्याचे नोंदविण्यात आले आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
या नोंदीवरून एकोणिसाव्या शतकाच्या उत्तरार्धात कुणबींची उपस्थिती कोलाबा जिल्ह्याच्या विविध भागांत व्यापक होती, असे दिसते. तथापि ''संपूर्ण जिल्ह्यात आढळतात'' या गॅझेटियरमधील वर्णनाचा अर्थ प्रत्येक गावात कुणबी बहुसंख्य होते असा घेता येत नाही. तो त्यांच्या जिल्हास्तरीय भौगोलिक उपस्थितीचा वर्णनात्मक उल्लेख म्हणूनच समजणे अधिक योग्य आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== महाड ===
महाड हे ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशातील महत्त्वाचे अंतर्गत व्यापारी आणि वाहतूककेंद्र होते. सावित्री नदीमार्गे महाडचा कोकण किनारा तसेच सह्याद्रीच्या घाटमार्गांशी संपर्क होता. त्यामुळे महाड परिसरातील कृषी उत्पादनाचा स्थानिक बाजारपेठा आणि व्यापाराशी संबंध निर्माण झाला होता.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
महाड आणि माणगाव परिसरातील कृषक समाजाच्या वर्णनात १८८३ च्या ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira'' मध्ये स्थानिक भौगोलिक परिस्थिती, जमिनीची उत्पादकता आणि शेतीपद्धतींचा उल्लेख करण्यात आला आहे. काही भागांतील जमिनीची तुलनेने कमी उत्पादकता आणि कृषीवर असलेले अवलंबित्व यांचा ग्रामीण समाजाच्या आर्थिक स्थितीशी संबंध असल्याचे त्या वर्णनातून दिसते. त्याच संदर्भात कुणबींना मेहनती कृषक म्हणून वर्णन करण्यात आले असून, भातशेतीसाठी पाण्याचे प्रवाह नियंत्रित करण्याच्या आणि पाण्याचा उपयोग करण्याच्या त्यांच्या कृषी कौशल्याचा उल्लेख आढळतो.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
गॅझेटियरमधील अशा वर्णनांचा वापर करताना त्यांची वसाहतकालीन निर्मिती आणि त्या काळातील प्रशासकीय व सामाजिक दृष्टिकोन लक्षात घेणे आवश्यक आहे. त्यामुळे कुणबींच्या आर्थिक किंवा सामाजिक स्थितीबाबत गॅझेटियरमधील वर्णन हे ऐतिहासिक स्रोत म्हणून महत्त्वाचे असले तरी त्यातील मूल्यनिर्णय किंवा विशेषणे आधुनिक समाजशास्त्रीय निष्कर्ष म्हणून स्वीकारता येत नाहीत.
=== महाडमधील कुणबी बोली : A. M. Ghatge ===
महाड परिसरातील कुणबी समाजाच्या भाषिक अभ्यासासाठी अमृत माधव घाटगे यांचा ''Kunbi of Mahad'' हा महत्त्वाचा स्रोत आहे. हा ग्रंथ १९६६ मध्ये महाराष्ट्र राज्य साहित्य आणि संस्कृती मंडळाच्या ''A Survey of Marathi Dialects'' या मालिकेतील तिसरा खंड म्हणून प्रकाशित झाला.<ref name="GhatgeKunbiMahad">{{cite book
|last=Ghatge
|first=A. M.
|title=Kunbi of Mahad
|series=A Survey of Marathi Dialects
|volume=III
|publisher=State Board for Literature and Culture, Bombay
|year=1966
}}</ref>
''Kunbi of Mahad'' हा ग्रंथ महाड परिसरातील कुणबींच्या बोलीचा स्वतंत्र भाषाशास्त्रीय अभ्यास म्हणून महत्त्वाचा आहे. घाटगे यांच्या भाषिक सर्वेक्षणाच्या कार्यामध्ये महाराष्ट्र आणि महाराष्ट्राबाहेरील विविध मराठी व संबंधित भाषिक प्रकारांचा अभ्यास करण्यात आला होता. या व्यापक सर्वेक्षणाच्या पार्श्वभूमीवर महाडच्या कुणबी बोलीचा अभ्यास करण्यात आला.<ref name="SurveyDialectsMarathi">{{cite web
|title=Survey of Dialects of Marathi Language
|url=https://sdml.ac.in/previous-projects
|publisher=Deccan College / Survey of Dialects of Marathi Language
}}</ref>
या लेखात ''Kunbi of Mahad''चा उपयोग मुख्यतः महाड परिसरातील कुणबींच्या भाषिक ओळखीचा आणि बोलीवैशिष्ट्यांच्या अभ्यासासाठी केला जातो. अमृत माधव घाटगे यांच्या प्रमुख ग्रंथांमध्ये ''Kunbi of Mahad'' (१९६६) या ग्रंथाचा समावेश असून तो ''A Survey of Marathi Dialects'' या मालिकेतील खंड आहे.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/> मात्र एखाद्या विशिष्ट बोलीचे अस्तित्व हे स्वतःपुरते त्या समाजाची संपूर्ण जातीय उत्पत्ती किंवा अखंड ऐतिहासिक वंशावळ सिद्ध करणारे प्रमाण मानता येत नाही.
महाडच्या कुणबी बोलीचा अभ्यास या लेखातील भाषिक इतिहासाच्या संदर्भात पूरक पुरावा म्हणून महत्त्वाचा आहे. ध्वनीरचना, शब्दसंपत्ती, व्याकरण आणि स्थानिक भाषिक वैशिष्ट्यांचा अभ्यास केल्यामुळे महाड परिसरातील प्रादेशिक भाषिक ओळख आणि सामाजिक इतिहासाच्या काही पैलूंचा अभ्यास करता येतो. तथापि भाषिक साम्य किंवा बोलीवैशिष्ट्यांवरून एकट्या भाषाशास्त्रीय पुराव्याच्या आधारे कुणबी समाजाची जातीय उत्पत्ती निश्चित करणे योग्य ठरणार नाही.
=== माणगाव ===
माणगाव हा ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्यातील महत्त्वाचा अंतर्गत प्रदेश होता. सह्याद्रीच्या पायथ्याशी असलेली भौगोलिक स्थिती आणि नदीखोऱ्यांशी असलेला संबंध यांमुळे माणगाव परिसरातील ग्रामीण अर्थव्यवस्थेत शेतीला महत्त्वाचे स्थान होते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
महाड आणि माणगाव परिसराच्या सामाजिक-आर्थिक वर्णनात १८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये काही भागांतील जमिनीची तुलनेने कमी उत्पादकता आणि कृषी परिस्थितीचा उल्लेख करण्यात आला आहे. त्याच संदर्भात कुणबी कृषकांच्या आर्थिक स्थितीचा आणि त्यांच्या शेतीशी असलेल्या संबंधांचा उल्लेख आढळतो.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
या नोंदींवरून माणगाव परिसरातील कुणबी समाजाचा अभ्यास करताना जमीन, कृषी उत्पादन, पाण्याची उपलब्धता आणि स्थानिक भौगोलिक परिस्थिती यांचा विचार करणे आवश्यक ठरते. तथापि गॅझेटियरमधील वर्णन हे त्या काळातील प्रशासकीय निरीक्षण असल्यामुळे त्यातील सामाजिक किंवा आर्थिक मूल्यनिर्णय आधुनिक सामाजिक वर्गीकरणाप्रमाणे स्वीकारणे योग्य ठरणार नाही.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== रोहा ===
रोहा हा कुंडलिका नदीच्या खोऱ्याशी संबंधित महत्त्वाचा प्रदेश होता. नदीमार्ग आणि अंतर्गत वाहतुकीशी असलेल्या संबंधांमुळे रोहा परिसराचा कृषी उत्पादन, बाजारपेठा आणि व्यापाराशी संबंध होता. कोलाबा गॅझेटियरमध्ये रोहा आणि कुंडलिका नदीचा उल्लेख भौगोलिक, आर्थिक आणि वाहतुकीच्या संदर्भात आढळतो.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
रोहा परिसरातील ग्रामीण अर्थव्यवस्थेचा विचार करताना भातशेती, नदीखोरे आणि स्थानिक बाजारपेठा हे महत्त्वाचे घटक होते. तथापि रोहा तालुका किंवा त्यातील प्रत्येक गावासाठी स्वतंत्र कुणबी लोकसंख्येची विश्वसनीय ऐतिहासिक आकडेवारी उपलब्ध नसल्यामुळे तालुकानिहाय किंवा गावनिहाय कुणबी लोकसंख्येचे प्रमाण निश्चित करणे योग्य ठरणार नाही.
=== पेण ===
पेण हे ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्यातील महत्त्वाचे बाजारपेठीय आणि व्यापारी केंद्र होते. त्याचा किनारी भाग, अंतर्गत कोकण आणि मुंबईशी असलेला वाहतूक व व्यापारसंबंध यांमुळे पेणला प्रादेशिक अर्थव्यवस्थेत महत्त्वाचे स्थान प्राप्त झाले होते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
पेण परिसरातील ग्रामीण समाज हा विविध सामाजिक आणि व्यवसायिक समूहांनी बनलेला होता. कोलाबा गॅझेटियरमध्ये कुणबींसह विविध सामाजिक समूहांची जिल्ह्यातील उपस्थिती नोंदविण्यात आली आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
त्यामुळे पेण परिसरातील कुणबी समाजाचा इतिहास हा केवळ एका स्वतंत्र गावसमूहाच्या चौकटीत न पाहता कृषी, बाजारपेठ, वाहतूक आणि बहुजातीय ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या व्यापक संदर्भात पाहणे अधिक योग्य ठरते.
=== अलिबाग आणि किनारी कोलाबा ===
अलिबाग हे कोलाबा जिल्ह्याचे प्रशासकीय केंद्र आणि महत्त्वाचे किनारी ठिकाण होते. समुद्र, खाड्या, बंदरे आणि मुंबईशी असलेल्या जवळिकीमुळे अलिबाग परिसराची अर्थव्यवस्था अंतर्गत कोलाबाच्या कृषी अर्थव्यवस्थेपेक्षा अधिक वैविध्यपूर्ण होती<ref name="KolabaJanjira1883"/>
किनारी भागातील सामाजिक रचनेत कुणबींबरोबर कोळी, भंडारी आणि इतर समुदायांचा सहभाग होता. १८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये थळ आणि अलिबागच्या आसपासच्या गावांमध्ये भंडारी आणि कोळींचा उल्लेख आहे, तर कुणबी संपूर्ण जिल्ह्यात आढळत असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
यामुळे अलिबाग परिसरातील कुणबींचे जीवन केवळ भातशेतीपुरते मर्यादित नव्हते. किनारी बाजारपेठा, वाहतूक, मजुरी, व्यापार आणि शेती या विविध आर्थिक क्षेत्रांशी त्यांचा संबंध असू शकत होता; मात्र प्रत्येक आर्थिक क्रियेचा कुणबी समाजाशी थेट संबंध असल्याचा निष्कर्ष काढण्यासाठी स्वतंत्र पुरावा आवश्यक आहे.
=== भातशेती ===
कोलाबा प्रदेशातील कृषीव्यवस्थेत भाताला महत्त्वाचे स्थान होते. पावसाचे प्रमाण, नदीखोरे, खाचर जमीन आणि पाण्याचे व्यवस्थापन यांमुळे भातशेती हा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेचा प्रमुख भाग बनला होता.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
कुणबी कृषकांच्या संदर्भात गॅझेटियरमध्ये पाण्याचे अडथळे बांधणे, पाण्याचे प्रवाह वळवणे आणि भातखाचरांसाठी जलव्यवस्था करणे यांचे वर्णन आहे. यावरून कोलाबा प्रदेशातील कुणबींचे कृषी कौशल्य स्थानिक भूगोलाशी जुळवून घेतलेले होते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
भाताबरोबर नाचणी आणि इतर कोरडवाहू पिके घेतली जात होती. काही भागात बागायती पिके घेण्यासाठी पाणी उपलब्ध असल्यास जमीन सुधारण्याचे प्रयत्न केले जात.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== जमीनव्यवस्था ===
कोलाबा प्रदेशातील जमीनव्यवस्था ब्रिटिश काळात सर्वेक्षण, जमीनमोजणी आणि महसूल निश्चितीच्या प्रक्रियेतून अधिक औपचारिक झाली. १८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये ''Land Administration'' आणि ''British System: Surveys, Settlement, Results'' असे स्वतंत्र विभाग आहेत.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
या व्यवस्थेत जमीनधारक, कृषक, खोत आणि महसूल प्रशासन यांच्यातील संबंध प्रदेशानुसार बदलत होते. कोकणातील खोती व्यवस्था ही विशेषतः जमीन महसूल आणि गावाच्या आर्थिक रचनेशी संबंधित होती. त्यामुळे कुणबींच्या सामाजिक स्थितीचा अभ्यास करताना त्यांच्या जातीय ओळखीबरोबर जमीनधारणा आणि महसूलव्यवस्थेतील स्थान तपासणे आवश्यक आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== कुणबींची सामाजिक आणि आर्थिक स्थिती ===
१८८३ च्या ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira'' मधील वर्णनानुसार कोलाबा जिल्ह्यातील कुणबी प्रामुख्याने शेतीशी संबंधित कृषक होते. त्यांच्या उपजीविकेत बैलजोडी, गुरेढोरे, कोंबड्या आणि शेतीची विविध अवजारे यांचा उपयोग होत असल्याचे वर्णन करण्यात आले आहे. नांगर, कुळव, विळी, कोयते आणि इतर शेतीची साधने त्यांच्या कृषी जीवनाचा भाग होती.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
गॅझेटियरमध्ये काही कुणबी कुटुंबांकडे नाचणी किंवा हरिक यांसारख्या धान्यांचा काही महिन्यांसाठी साठा असल्याचे, तर काही कुटुंबांकडे पुरेसा धान्यसाठा नसल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. यावरून त्या काळातील कुणबी कुटुंबांच्या आर्थिक परिस्थितीत फरक होता, असे दिसून येते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
महाड आणि माणगाव परिसरातील काही भागांच्या संदर्भात गॅझेटियरमध्ये जमिनीची उत्पादकता आणि कृषी परिस्थितीचा उल्लेख करण्यात आला आहे. काही भागांत कृषकांची आर्थिक स्थिती प्रतिकूल असल्याचे वर्णन आहे, तर अधिक अनुकूल जमीन आणि पाण्याची उपलब्धता असलेल्या ठिकाणी कुणबी कृषकांनी बागायती पिकांचा उपयोग करून शेती अधिक उत्पादक करण्याचा प्रयत्न केल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
या नोंदींवरून कोलाबा प्रदेशातील कुणबी समाजाची आर्थिक स्थिती एकसमान नव्हती, असे दिसते. जमीन, पाणी, पिकांची उत्पादकता आणि उपलब्ध कृषी साधने यांनुसार कुटुंबांच्या आर्थिक परिस्थितीत फरक असू शकत होता.
=== कुणबींची घरे आणि गावजीवन ===
१८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये कोलाबा जिल्ह्यातील कुणबींच्या घरांच्या रचनेचेही वर्णन करण्यात आले आहे. माती किंवा खडीच्या भिंती, गवत किंवा भाताच्या पेंढ्याचे छप्पर आणि लाकडी आधार असलेली घरे आढळत असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. घरातील जागेचा उपयोग कुटुंबाचा दैनंदिन वावर, स्वयंपाक, झोपणे आणि साठवणूक यासाठी केला जात असे. घराजवळ गुरेढोरे आणि शेतीची अवजारे ठेवण्यासाठीही जागा असल्याचे वर्णन आढळते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
ही वर्णने एकोणिसाव्या शतकातील कोलाबा प्रदेशातील ग्रामीण जीवनाची ऐतिहासिक झलक देतात. तथापि गॅझेटियरमधील घरांच्या वर्णनावरून संपूर्ण कुणबी समाजाची घररचना एकसारखी होती असा निष्कर्ष काढता येत नाही. प्रदेश, आर्थिक स्थिती, जमीनधारणा आणि स्थानिक उपलब्ध साधनसामग्रीनुसार घरांच्या रचनेत फरक असण्याची शक्यता होती.
=== सामाजिक रचना आणि बहुजातीय ग्रामजीवन ===
कोलाबा प्रदेशातील गावे एकाच सामाजिक समूहाची वस्ती नसून विविध समुदायांच्या मिश्र वस्तीचे स्वरूप त्यात आढळत होते. १८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये कुणबी, मराठा, भंडारी, कोळी, मुसलमान, महार आणि इतर सामाजिक समूहांच्या उपस्थितीचे वर्णन करण्यात आले आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
या बहुजातीय ग्रामीण संरचनेत विविध समुदायांच्या आर्थिक आणि सामाजिक भूमिका वेगवेगळ्या असू शकत होत्या. कुणबींचा संबंध प्रामुख्याने कृषीशी जोडला गेला होता, तर किनारी प्रदेशातील काही समुदाय मासेमारी, नारळ उत्पादन, वाहतूक आणि इतर व्यवसायांशी संबंधित होते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
मात्र जात आणि व्यवसाय यांच्यातील संबंध प्रत्येक व्यक्तीच्या बाबतीत अपरिवर्तनीय होता असे मानता येत नाही. गॅझेटियरमधील व्यवसायविषयक वर्गीकरण हे त्या काळातील प्रशासकीय आणि सामाजिक निरीक्षणांवर आधारित होते; त्यामुळे त्यांचा उपयोग ऐतिहासिक सामाजिक रचनेचा अभ्यास करण्यासाठी संदर्भ म्हणून करणे अधिक योग्य ठरते.
=== महाड आणि कुणबी बोलीचे ऐतिहासिक महत्त्व ===
महाड परिसरातील कुणबी समाजाच्या भाषिक अभ्यासासाठी अमृत माधव घाटगे यांचा ''Kunbi of Mahad'' हा ग्रंथ विशेष महत्त्वाचा आहे. हा ग्रंथ ''A Survey of Marathi Dialects'' या भाषिक सर्वेक्षण मालिकेचा भाग असून महाड परिसरातील कुणबी बोलीचा स्वतंत्र भाषाशास्त्रीय अभ्यास त्यात करण्यात आला आहे.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/>
''Kunbi of Mahad''चा उपयोग महाड परिसरातील कुणबी समाजाच्या भाषिक वैशिष्ट्यांचा, बोलीच्या स्वरूपाचा आणि प्रादेशिक भाषिक विविधतेचा अभ्यास करण्यासाठी करता येतो. मात्र भाषिक साम्य किंवा विशिष्ट बोलीचे अस्तित्व यावरून एखाद्या समुदायाची जातीय उत्पत्ती, प्राचीन वंशावळ किंवा स्थलांतराचा निश्चित ऐतिहासिक मार्ग ठरविता येत नाही. अशा निष्कर्षांसाठी भाषिक पुराव्यांसोबत ऐतिहासिक, सामाजिक, भौगोलिक आणि दस्तऐवजी पुराव्यांचा स्वतंत्र विचार आवश्यक असतो.
महाडच्या कुणबी बोलीचा अभ्यास त्यामुळे कोकणातील कुणबी समाजाच्या इतिहासासाठी पूरक भाषिक स्रोत म्हणून महत्त्वाचा ठरतो. तो स्थानिक भाषिक विविधता आणि प्रादेशिक सामाजिक इतिहासाच्या अभ्यासाला अतिरिक्त संदर्भ उपलब्ध करून देतो.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/>
=== रायगड प्रदेशातील कुणबी आणि कोकणातील व्यापक कृषक समाज ===
ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशातील कुणबींचा इतिहास रत्नागिरीतील कुणबींच्या इतिहासाशी काही बाबतींत संबंधित आहे. दोन्ही प्रदेशांमध्ये भातशेती, पर्जन्याधारित कृषी, ग्रामीण वसाहती, जमीन व महसूलव्यवस्था आणि किनारी बाजारपेठांशी असलेले आर्थिक संबंध यांचे महत्त्व दिसून येते. तथापि ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशातील महाड-माणगावचा डोंगराळ भाग, रोहा-कुंडलिका नदीखोरे, पेण-अलिबागचा किनारी प्रदेश आणि मुंबईशी असलेली भौगोलिक जवळीक यांमुळे या प्रदेशाची स्वतंत्र सामाजिक-आर्थिक वैशिष्ट्ये होती.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
कुणबी समाजाच्या सामाजिक इतिहासाचा अभ्यास करताना या प्रदेशातील जमीनधारणा, शेतीच्या पद्धती, पाण्याचे व्यवस्थापन, कृषी साधने, ग्रामीण कुटुंबजीवन, बाजारपेठांशी असलेले संबंध आणि भाषिक वैशिष्ट्ये यांचा एकत्रित विचार करता येतो. या विविध घटकांमधून ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशातील कुणबी समाजाचे प्रादेशिक स्वरूप समजून घेण्यास मदत होते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
=== ऐतिहासिक नोंदींच्या मर्यादा ===
कोलाबा प्रदेशातील कुणबी समाजाच्या इतिहासाच्या अभ्यासासाठी १८८३चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba and Janjira'' हा महत्त्वाचा वसाहतकालीन स्रोत आहे. त्यामध्ये लोकसंख्या, शेती, कृषक समाज, जमीन प्रशासन, महसूल आणि विविध सामाजिक समूहांविषयी तत्कालीन प्रशासकीय माहिती आणि निरीक्षणे नोंदविण्यात आली आहेत.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
तथापि हा गॅझेटियर ब्रिटिश वसाहतकालीन प्रशासकीय चौकटीत तयार झालेला स्रोत असल्यामुळे त्यातील सामाजिक आणि जातीय वर्णने तत्कालीन प्रशासकीय निरीक्षणे, वर्गीकरणे आणि त्या काळातील दृष्टिकोनांवर आधारित आहेत. त्यामुळे त्यातील समुदायांविषयीची सर्वसाधारण विशेषणे किंवा मूल्यनिर्णय आधुनिक सामाजिक वास्तवाचे अंतिम किंवा सार्वत्रिक वर्णन मानता येत नाहीत. गॅझेटियरचा उपयोग करताना त्यातील वर्णनात्मक माहिती आणि तिच्यामागील तत्कालीन वसाहतकालीन प्रशासकीय संदर्भ यांचा स्वतंत्र विचार करणे आवश्यक आहे.
त्याचप्रमाणे ''Kunbi'' या संज्ञेची एकोणिसाव्या शतकातील प्रशासकीय किंवा ethnographic व्याप्ती आणि आधुनिक महाराष्ट्रातील प्रशासकीय वर्गीकरण यांना तंतोतंत समान मानता येत नाही. ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये जातीय समूहांचे वर्गीकरण तत्कालीन प्रशासकीय पद्धतीनुसार करण्यात आले होते आणि विविध प्रदेशांमध्ये ''Kunbi'', ''Maratha'', ''Maratha-Kunbi'' किंवा संबंधित संज्ञांचा वापर वेगवेगळ्या प्रकारे आढळतो.<ref name="Baines1881"/>
१८८१ च्या Bombay Presidency Censusमध्ये ''Maratha Kunbi'' या व्यापक कृषक वर्गाचा विचार करण्यात आला होता. त्याच Censusच्या विश्लेषणात Konkanमधील ''Maratha'' आणि Deccanमधील ''Kunbi'' यांच्यातील वर्गीकरण काही बाबतींत स्पष्ट नसल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="Baines1881"/>
म्हणून जुन्या Census किंवा Gazetteerमधील जातीय संज्ञा आणि त्यांची लोकसंख्या आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरणाशी थेट तुलना करण्यापूर्वी संबंधित कालखंडातील प्रशासकीय सीमा, वर्गीकरणाची पद्धत, वापरलेल्या सामाजिक संज्ञा आणि स्थानिक सामाजिक संदर्भ यांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे.
=== रायगड आणि ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशातील कुणबी : ऐतिहासिक स्थान ===
ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशातील कुणबी समाज हा कोकणातील कृषक समाजाचा एक महत्त्वाचा घटक होता. १८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये कुणबींची जिल्ह्याच्या विविध भागांतील उपस्थिती, कृषीवरील त्यांचे अवलंबित्व, भातशेती, जमीन आणि ग्रामीण जीवन यांविषयी वर्णनात्मक नोंदी आढळतात. महाड आणि माणगावच्या काही भागांच्या संदर्भात जमिनीची गुणवत्ता आणि पाण्याची उपलब्धता यांचा कृषकांच्या आर्थिक स्थितीवर परिणाम होत असल्याचे, तसेच अनुकूल परिस्थितीत कुणबी कृषकांचे कृषी कौशल्य दिसून येत असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद केले आहे.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
महाडच्या संदर्भात A. M. Ghatge यांचा १९६६चा ''Kunbi of Mahad'' हा भाषाशास्त्रीय स्रोत या ऐतिहासिक चित्राला वेगळा आयाम देतो. गॅझेटियरमधील सामाजिक-आर्थिक नोंदी आणि Ghatge यांच्या भाषिक अभ्यासाचा एकत्रित उपयोग केल्यास महाड आणि ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशातील कुणबी समाजाचा अभ्यास जमीन, शेती, ग्रामीण समाज आणि भाषा या परस्परसंबंधित घटकांच्या आधारे करता येतो.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/>
== ठाणे आणि उत्तर कोकणातील कुणबी ==
ऐतिहासिक ठाणे जिल्ह्याची भौगोलिक व्याप्ती आजच्या ठाणे आणि पालघर जिल्ह्यांच्या सीमांशी पूर्णपणे समान नव्हती. ब्रिटिशकालीन ''Thana'' जिल्ह्यात काळानुसार ठाणे, सालसेट, भिवंडी, कल्याण, मुरबाड, शहापूर, डहाणू, पालघर, जव्हार आणि इतर प्रदेशांचा समावेश होता. त्यामुळे उत्तर कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास मांडताना आधुनिक जिल्ह्यांच्या सीमा थेट १९व्या शतकातील प्रशासकीय नोंदींवर लावणे योग्य ठरत नाही. १८८२चा ''Gazetteer of the Bombay Presidency: Tha'na'' हा या ऐतिहासिक प्रदेशाच्या लोकसंख्या, शेती, जमीनव्यवस्था, सामाजिक समूह, व्यापार आणि प्रशासनाच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचा वसाहतकालीन स्रोत आहे.<ref name="Thana1882"/>
=== ऐतिहासिक ठाणे जिल्हा ===
१८८२ च्या गॅझेटियरमध्ये ठाणे जिल्ह्याच्या लोकसंख्या, शेती, उत्पादन, सामाजिक समूह, धर्म, व्यापार, जमीन प्रशासन आणि महसूल यांचे स्वतंत्र विवेचन करण्यात आले आहे. या नोंदींमध्ये ''Kunbis'', ''Marathas'', ''Kolis'', ''Dhangars'', ''Kathkaris'', ''Thakurs'', ''Varlis'' आणि इतर समुदायांचा उल्लेख आढळतो. त्यामुळे ऐतिहासिक ठाणे जिल्ह्यातील ग्रामीण समाज हा एकाच कृषक समुदायापुरता मर्यादित नसून विविध सामाजिक आणि आर्थिक समूहांनी बनलेला होता.<ref name="Thana1882"/>
गॅझेटियरमध्ये ''Kunbis'' बरोबरच ''Marathas'', ''Kolis'', ''Kathkaris'', ''Dhangars'', ''Thakurs'' आणि ''Varlis'' यांचाही स्वतंत्र उल्लेख आढळतो. या नोंदींवरून ठाणे जिल्ह्यातील ग्रामीण आणि कृषी समाजरचनेत विविध सामाजिक समूहांचा सहभाग होता असे दिसून येते.<ref name="Thana1882"/>
=== उत्तर कोकणातील कृषक समाज ===
ठाणे जिल्ह्यातील कृषीव्यवस्थेवर प्रदेशाच्या भौगोलिक विविधतेचा मोठा प्रभाव होता. किनारी खारजमीन, नदीखोरे, खाचर प्रदेश तसेच सह्याद्रीच्या पायथ्याशी असलेली उंचसखल जमीन यांनुसार शेतीच्या पद्धती आणि पिकांमध्ये फरक पडत असे. १८८२ च्या गॅझेटियरनुसार जिल्ह्याच्या एकूण लोकसंख्येपैकी सुमारे ६३ टक्के लोक कृषीशी संबंधित होते. या वर्गीकरणात कृषी व्यवसाय करणाऱ्या प्रौढ पुरुषांबरोबर त्यांच्या पत्नी आणि मुलांचाही समावेश करण्यात आला होता.<ref name="ThanaAgriculture"/>
ठाणे जिल्ह्यातील जमिनीचे ''shet'' आणि ''mal-varkas'' असे प्रमुख प्रकार वर्णिले आहेत. सपाट आणि भातशेतीस योग्य जमिनींना ''shet'' म्हटले जात असे, तर डोंगरमाथे आणि उतारांवरील जमिनींवर नाचणी, वरी आणि इतर पिके घेतली जात. भातजमिनींचे ''bandhni'' आणि ''malkhandi'' असे प्रकारही नोंदविण्यात आले आहेत.<ref name="ThanaAgriculture"/>
या कृषी अर्थव्यवस्थेत कुणबींचे महत्त्वाचे स्थान होते; तथापि ठाणे जिल्ह्यातील सर्व कृषकांना कुणबी म्हणून ओळखता येत नाही. गॅझेटियरमध्ये कुणबींबरोबर मराठा, कोळी, धनगर आणि इतर सामाजिक समूहांचाही स्वतंत्र उल्लेख आढळतो. त्यामुळे ''कृषक'' ही व्यापक आर्थिक-व्यावसायिक संज्ञा असून ''कुणबी'' ही विशिष्ट सामाजिक संज्ञा आहे, असे ऐतिहासिक नोंदींच्या आधारे वेगळेपणाने पाहणे आवश्यक आहे.<ref name="Thana1882"/>
=== ठाणे परिसरातील कुणबी ===
ठाणे हे ऐतिहासिकदृष्ट्या उत्तर कोकणातील महत्त्वाचे प्रशासकीय आणि व्यापारी केंद्र होते. शहराभोवतालच्या प्रदेशातील शेती, खाड्या, जलमार्ग आणि मुंबईशी असलेले संपर्क यांमुळे ग्रामीण आणि नागरी अर्थव्यवस्थांमध्ये परस्परसंबंध निर्माण झाले होते.<ref name="Thana1882"/>
ठाणे परिसरातील कृषक समाजाचा अभ्यास करताना सालसेट, भिवंडी, कल्याण आणि आसपासच्या प्रदेशांशी असलेले ऐतिहासिक प्रशासकीय व आर्थिक संबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे. १८८२ च्या ठाणे गॅझेटियरमध्ये जिल्ह्याच्या विविध भागांचे स्वतंत्र वर्णन करण्यात आले असून त्या भागांची कृषी, जमीन आणि लोकसंख्येच्या संदर्भातील वैशिष्ट्ये नोंदविण्यात आली आहेत.<ref name="Thana1882"/>
=== सालसेट ===
सालसेट (Salsette) हा उत्तर कोकणाच्या इतिहासातील महत्त्वाचा प्रदेश होता. १९व्या शतकात सालसेटचा प्रशासकीय संबंध ठाणे जिल्ह्याशी होता. १८८२ च्या गॅझेटियरमध्ये सालसेटच्या इतिहास, जमीनव्यवस्था आणि कृषीविषयक परिस्थितीचे स्वतंत्र वर्णन आढळते.<ref name="Thana1882"/>
सालसेटमध्ये किनारी खारजमिनींचे संरक्षण, बांधबंदिस्ती आणि जमीन पुनर्प्राप्तीच्या प्रक्रिया दीर्घकाळ चालू होत्या. ठाणे गॅझेटियरमध्ये मानवी प्रयत्नांद्वारे काही भागांमध्ये जमीन पुनर्प्राप्त करण्यात आल्याचे आणि या प्रक्रियांचा स्थानिक कृषीव्यवस्थेशी संबंध असल्याचे वर्णन केले आहे.<ref name="ThanaAgriculture"/>
सालसेटमधील कृषी प्रदेशांमध्ये भातशेती तसेच बागायती आणि नारळाशी संबंधित उत्पादनाचा समावेश होता. मुंबईच्या वाढत्या नागरी आणि व्यापारी केंद्राशी असलेल्या भौगोलिक जवळिकीमुळे या प्रदेशातील ग्रामीण उत्पादनाला शहरी बाजारपेठेशी जोडणारे आर्थिक संबंध विकसित झाले.<ref name="Thana1882"/>
=== वसई आणि बासेन ===
ऐतिहासिक वसईला ब्रिटिशकालीन नोंदींमध्ये ''Bassein'' असे संबोधले जाते. वसईचा प्रदेश पोर्तुगीज सत्तेच्या दीर्घकालीन प्रभावामुळे उत्तर कोकणातील इतर भागांपेक्षा ऐतिहासिक आणि सामाजिकदृष्ट्या वैशिष्ट्यपूर्ण होता. १८८२ च्या ठाणे गॅझेटियरमध्ये बासेनच्या इतिहास, जमीनव्यवस्था, कृषी आणि लोकसंख्येविषयी स्वतंत्र नोंदी आढळतात.<ref name="Thana1882"/>
वसई परिसरातील कृषीव्यवस्थेत भातशेती, बागायती आणि नारळाच्या लागवडीला महत्त्व होते. ठाणे गॅझेटियरमध्ये बासेन आणि माहिम येथील बागायती जमीन जिल्ह्यातील चांगल्या बागायती प्रदेशांपैकी असल्याचे नमूद केले आहे. या बागांना विहिरी आणि ''Persian wheels'' यांसारख्या जलसिंचन साधनांद्वारे पाणीपुरवठा केला जात असल्याची नोंद आहे.<ref name="ThanaAgriculture"/>
वसईच्या सामाजिक इतिहासात कुणबींचा उल्लेख उत्तर कोकणातील व्यापक कृषक समाजाच्या संदर्भात करता येतो. तथापि वसई परिसरातील सर्व कृषकांना कुणबी मानणे योग्य नाही. ऐतिहासिक ठाणे जिल्ह्यात कुणबींबरोबर मराठा, कोळी, धनगर, कातकरी, ठाकूर, वारली आणि इतर सामाजिक समूहांचाही उल्लेख आढळतो.<ref name="Thana1882"/>
=== भिवंडी आणि कल्याण ===
भिवंडी आणि कल्याण हे ऐतिहासिक ठाणे जिल्ह्यातील महत्त्वाचे अंतर्गत प्रदेश होते. सह्याद्रीच्या घाटमार्गांमधून दख्खनशी आणि पश्चिमेकडील किनारी प्रदेशाशी असलेल्या संपर्कामुळे या भागांना कृषीबरोबरच व्यापार आणि वाहतुकीच्या दृष्टीनेही महत्त्व प्राप्त झाले होते.<ref name="Thana1882"/>
कल्याण परिसरातील जमीन आणि महसूलव्यवस्थेच्या संदर्भात ब्रिटिश प्रशासनाने सर्वेक्षण, जमीनमोजणी आणि महसूल निश्चितीच्या पद्धती विकसित केल्या. ठाणे गॅझेटियरच्या जमीन प्रशासनासंबंधीच्या नोंदींमध्ये जिल्ह्यातील विविध भागांतील जमीन, सर्वेक्षण आणि महसूलव्यवस्थेचे वर्णन आढळते.<ref name="Thana1882"/>
कुणबी समाजाच्या इतिहासाच्या दृष्टीने भिवंडी आणि कल्याण परिसराचा विचार करताना ग्रामीण कृषी अर्थव्यवस्था, स्थानिक बाजारपेठा आणि वाहतूकमार्ग यांचा परस्परसंबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे. पुढील काळात या प्रदेशांच्या वाढत्या नागरी आणि औद्योगिक अर्थव्यवस्थेचा ग्रामीण समाजावर परिणाम झाला; मात्र त्या परिणामांचे स्वरूप स्वतंत्र कालखंडानुसार तपासणे आवश्यक आहे.
=== पालघर आणि उत्तर कोकण ===
आजचा पालघर जिल्हा हा ब्रिटिशकालीन ठाणे जिल्ह्याच्या उत्तरेकडील प्रदेशाशी मोठ्या प्रमाणात संबंधित होता. डहाणू, पालघर, जव्हार, मोखाडा आणि आसपासच्या प्रदेशांची सामाजिक व आर्थिक रचना ठाणे शहर किंवा सालसेटच्या तुलनेत वेगळी होती. या भागात आदिवासी आणि ग्रामीण कृषक समुदायांची लक्षणीय उपस्थिती होती.<ref name="Thana1882"/>
ठाणे गॅझेटियरमध्ये वारली, कातकरी, ठाकूर आणि इतर स्थानिक समुदायांचा स्वतंत्र उल्लेख आढळतो. विशेषतः डहाणू परिसरातील वारली लोकसंख्येचा उल्लेख करण्यात आला असून ठाणे जिल्ह्याच्या इतर भागांतील त्यांच्या उपस्थितीचीही नोंद आढळते.<ref name="Thana1882"/>
उत्तर कोकणातील या सामाजिक विविधतेमुळे कुणबी समाजाचा इतिहास व्यापक ग्रामीण समाजाच्या संदर्भापासून वेगळा करून पाहणे योग्य ठरत नाही. शेती, जमीन, जंगल, मजुरी आणि ऋतुनिष्ठ रोजगार यांसारख्या आर्थिक क्षेत्रांमध्ये विविध समुदायांचे परस्परसंबंध होते. त्यामुळे उत्तर कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास समजून घेताना कुणबींबरोबरच त्या प्रदेशातील इतर कृषक आणि स्थानिक समुदायांच्या ऐतिहासिक उपस्थितीचाही विचार करणे आवश्यक आहे.
=== डहाणू आणि कृषीव्यवस्था ===
डहाणू परिसरातील कृषीव्यवस्थेवर किनारी भूप्रदेश, नदीखोरे, पर्जन्यमान आणि जमिनीच्या स्वरूपाचा प्रभाव होता. किनारी भागात समुद्राच्या भूक्षयामुळे आणि भूभागातील बदलांमुळे जमीन व कृषी परिस्थितीवर परिणाम होत असल्याचे ठाणे गॅझेटियरमध्ये नमूद केले आहे.<ref name="ThanaAgriculture"/>
डहाणू, जव्हार आणि उत्तर ठाणे जिल्ह्यातील इतर भागांमध्ये भातशेतीबरोबर डोंगराळ व उंचसखल जमिनीवर विविध पिकांची लागवड केली जात होती. या प्रदेशात कुणबींबरोबर वारली, ठाकूर आणि इतर ग्रामीण व आदिवासी समुदायांचीही उपस्थिती होती. त्यामुळे उत्तर कोकणातील कृषी इतिहास हा विविध सामाजिक समूहांच्या सहभागातून विकसित झालेला इतिहास म्हणून पाहणे आवश्यक आहे.<ref name="Thana1882"/>
=== भातशेती आणि जलव्यवस्था ===
ठाणे जिल्ह्यातील कृषीव्यवस्थेत भातशेतीला महत्त्वाचे स्थान होते. १८७९–८० च्या महसूल सर्वेक्षणानुसार सरकारी लागवडीयोग्य क्षेत्रापैकी ९५७,९३४ एकर जमीन प्रत्यक्ष लागवडीखाली होती. त्यापैकी ३३३,७१७ एकर क्षेत्र भातशेतीखाली होते, म्हणजे सुमारे ३४.८ टक्के. उर्वरित क्षेत्रात प्रामुख्याने इतर पिकांची लागवड केली जात होती.<ref name="ThanaAgriculture"/>
भातशेतीसाठी पावसाळ्यात उंच भागातून वाहून येणारे पाणी लहान प्रवाह, बांध आणि स्थानिक जलव्यवस्थेद्वारे अडवून किंवा वळवून वापरण्याची पद्धत होती. काही ठिकाणी नदी आणि विहिरींच्या पाण्याचाही उपयोग केला जात असे. पनवेल, बासेन आणि माहिम येथील बागायतींमध्ये विविध प्रकारच्या जलउचल पद्धती वापरल्या जात असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद केले आहे.<ref name="ThanaAgriculture"/>
या जलव्यवस्थेमुळे ठाणे जिल्ह्यातील विविध भौगोलिक प्रदेशांमध्ये वेगवेगळ्या कृषी पद्धती विकसित झाल्या. पावसावर आधारित भातशेती, नदी व विहिरींच्या पाण्यावर आधारित बागायती आणि उंचसखल किंवा डोंगराळ भागातील इतर पिके यांमुळे उत्तर कोकणातील कृषी अर्थव्यवस्थेला प्रादेशिक विविधता प्राप्त झाली.<ref name="ThanaAgriculture"/>
=== जमीनव्यवस्था आणि महसूल ===
ब्रिटिश प्रशासनाने ठाणे जिल्ह्यात जमीन सर्वेक्षण, मोजणी आणि महसूल निश्चितीच्या पद्धती विकसित केल्या. १८८२ च्या गॅझेटियरमध्ये ''Land Administration'' या स्वतंत्र विभागात जमीनहक्क, महसूल, इनाम, वतन, सर्वेक्षण आणि विविध प्रकारच्या जमीनव्यवस्थेचे वर्णन करण्यात आले आहे.<ref name="Thana1882"/>
सालसेट, बासेन, माहिम आणि ठाणे जिल्ह्यातील इतर भागांमध्ये जमीनव्यवस्थेचा विकास स्थानिक इतिहास आणि पूर्वीच्या महसूलपद्धतींच्या पार्श्वभूमीवर झाला. ब्रिटिश प्रशासनाने जमीन सर्वेक्षण, नोंदणी आणि महसूल निश्चितीच्या माध्यमातून विद्यमान जमीनहक्क आणि महसूलव्यवस्थेला अधिक औपचारिक प्रशासकीय चौकटीत आणण्याचा प्रयत्न केला.<ref name="Thana1882"/>
कुणबी समाजाचा या जमीनव्यवस्थेशी संबंध प्रदेशानुसार बदलत होता. कुणबींचा उल्लेख कृषक समाजाच्या संदर्भात आढळत असला तरी प्रत्येक कुणबी कुटुंबाची जमीनधारणा, उत्पादनक्षमता, आर्थिक स्थिती किंवा महसूलव्यवस्थेतील स्थान समान होते असे मानता येत नाही. त्यामुळे उत्तर कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास समजून घेताना कृषी, जमीनहक्क, महसूल, स्थानिक ग्रामव्यवस्था आणि प्रादेशिक सामाजिक रचना या सर्व घटकांचा एकत्रित विचार करणे आवश्यक आहे.
=== कुणबी आणि इतर कृषक समुदाय ===
ठाणे जिल्ह्यातील ग्रामीण समाजात कुणबींबरोबर मराठा, कोळी, धनगर, कातकरी, ठाकूर आणि वारली यांसारख्या विविध सामाजिक समुदायांचा समावेश होता. या समुदायांच्या उपजीविकेचे स्वरूप प्रदेशानुसार आणि स्थानिक परिस्थितीनुसार बदलत होते. काही समुदाय शेतीशी, काही पशुपालनाशी, काही जंगलाशी, तर काही मासेमारी, मजुरी आणि इतर स्थानिक व्यवसायांशी संबंधित होते.<ref name="Thana1882"/>
जमीनधारणा, कृषी उत्पादन, स्थानिक बाजारपेठा, वाहतूक आणि ब्रिटिशकालीन महसूलव्यवस्थेतील बदलांमुळे ग्रामीण अर्थव्यवस्थेचे स्वरूप कालांतराने बदलत गेले. काही भागांत शेतीबरोबर इतर पूरक व्यवसायांचे महत्त्व वाढले, तर बाजारपेठांशी वाढलेल्या संपर्कामुळे ग्रामीण उत्पादनाच्या देवाणघेवाणीतही बदल झाले.<ref name="Thana1882"/>
या संदर्भात ''कुणबी'' आणि ''कृषक'' या संज्ञांमध्ये भेद करणे आवश्यक आहे. ''कुणबी'' ही सामाजिक समुदायाची संज्ञा होती, तर ''कृषक'' ही मुख्यतः शेतीशी संबंधित आर्थिक किंवा व्यावसायिक ओळख दर्शवणारी संज्ञा होती. त्यामुळे ठाणे जिल्ह्यातील प्रत्येक कृषक व्यक्ती कुणबी होती किंवा प्रत्येक कुणबी व्यक्ती केवळ शेतीवरच अवलंबून होती, असा निष्कर्ष उपलब्ध स्रोतांवरून काढता येत नाही.
=== मुंबईशी वाढता संबंध ===
ठाणे जिल्ह्याचा मुंबईशी भौगोलिक, आर्थिक आणि वाहतूकविषयक संबंध एकोणिसाव्या शतकात अधिक दृढ होत गेला. मुंबईच्या वाढत्या व्यापारी आणि औद्योगिक महत्त्वामुळे ठाणे जिल्ह्यातील काही ग्रामीण भागांचा कृषी उत्पादन, व्यापार आणि रोजगाराच्या दृष्टीने मुंबईशी संबंध वाढला.<ref name="Thana1882"/>
रेल्वे आणि इतर वाहतूकसुविधांच्या विकासामुळे ठाणे, कल्याण, भिवंडी आणि मुंबईदरम्यानचा संपर्क अधिक सुलभ झाला. त्याचा परिणाम कृषी उत्पादनाच्या वाहतुकीवर तसेच ग्रामीण लोकांच्या बाजारपेठांशी आणि रोजगाराच्या संधींशी असलेल्या संबंधांवर झाला. ठाणे गॅझेटियरमध्ये रेल्वे, रस्ते, व्यापार, उत्पादन आणि वाहतूक यांचे स्वतंत्र विवेचन आढळते.<ref name="Thana1882"/>
या बदलांचा परिणाम कुणबींसह ग्रामीण समाजातील विविध घटकांवर झाला असण्याची शक्यता होती. काही कुटुंबांनी शेतीबरोबर पूरक उत्पन्नासाठी इतर व्यवसाय किंवा शहरांशी संबंधित रोजगार स्वीकारला असावा. मात्र उपलब्ध एकोणिसाव्या शतकातील स्रोतांवरून कुणबी समाजाच्या बाबतीत अशा रोजगाराचे किंवा स्थलांतराचे अचूक प्रमाण निश्चित करता येत नाही.
=== स्थलांतर आणि ग्रामीण-नागरी संबंध ===
उत्तर कोकणातील ग्रामीण आणि नागरी अर्थव्यवस्थेतील संबंध मुंबईच्या वाढत्या व्यापारी, औद्योगिक आणि वाहतूकविषयक महत्त्वामुळे अधिक दृढ होत गेले. ठाणे जिल्ह्यातील विविध भागांमधून बाजारपेठा, व्यापार आणि रोजगाराच्या निमित्ताने मुंबईशी संपर्क वाढत गेला.<ref name="Thana1882"/>
सालसेट, ठाणे, कल्याण, भिवंडी आणि वसई यांसारख्या मुंबईच्या जवळच्या प्रदेशांना शहराशी तुलनेने सुलभ वाहतूकसंपर्क उपलब्ध होता. त्यामुळे या भागांतील ग्रामीण उत्पादन आणि नागरी बाजारपेठ यांच्यातील संबंध अधिक निकट झाले. दुसरीकडे पालघर, डहाणू आणि जव्हारसारख्या उत्तर भागांतील ग्रामीण अर्थव्यवस्था स्थानिक शेती, जंगलाधारित उपजीविका, हंगामी मजुरी आणि प्रादेशिक बाजारपेठांशीही संबंधित होती.<ref name="Thana1882"/>
कुणबी समाजाच्या संदर्भात या प्रक्रियेचा विचार करताना पारंपरिक कृषी जीवन आणि बदलती बाजारपेठीय अर्थव्यवस्था यांच्यातील संबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे. तथापि उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतांवरून १९व्या शतकातील ठाणे जिल्ह्यातील कुणबींच्या मुंबईकडे झालेल्या स्थलांतराचे स्वतंत्र आणि अचूक प्रमाण निश्चित करता येत नाही. त्यामुळे या प्रक्रियेचे वर्णन व्यापक ग्रामीण-नागरी परिवर्तनाच्या संदर्भात करणे अधिक योग्य ठरते.
=== ख्रिस्ती कुणबी आणि उत्तर कोकण ===
वसई आणि सालसेट परिसराच्या पोर्तुगीजकालीन इतिहासामुळे उत्तर कोकणातील सामाजिक ओळखींच्या अभ्यासात धर्म आणि जात यांचा परस्परसंबंध महत्त्वाचा ठरतो. पुढील वसाहतकालीन नोंदींमध्ये सालसेट आणि बासेन परिसरातील काही ख्रिस्ती समुदायांच्या संदर्भात त्यांच्या पूर्वीच्या सामाजिक किंवा जातीय ओळखींचे उल्लेख आढळतात. काही समूहांना ''Christian Kunbi'', ''Christian Bhandari'' आणि ''Christian Koli'' अशा संज्ञांनी संबोधल्याची नोंद आढळते.<ref>{{cite book
|title=The Imperial Gazetteer of India
|volume=8
|publisher=Clarendon Press
|location=Oxford
|year=1908
}}</ref>
या नोंदी उत्तर कोकणातील सामाजिक ओळखींच्या ऐतिहासिक गुंतागुंतीकडे निर्देश करतात. धर्मांतरानंतरही काही समुदायांच्या सामाजिक ओळखी किंवा पूर्वीच्या समुदायनावांचा उल्लेख प्रशासकीय आणि ethnographic नोंदींमध्ये होत राहिला. तथापि या उल्लेखांवरून धर्मांतरित ख्रिस्ती कुणबी आणि हिंदू कुणबी यांची सामाजिक, सांस्कृतिक किंवा प्रशासकीय ओळख सर्व काळात समान होती, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.
=== आधुनिक ठाणे आणि पालघरशी संबंध ===
आजच्या ठाणे आणि पालघर जिल्ह्यांच्या सीमा १९व्या शतकातील ब्रिटिशकालीन ठाणे जिल्ह्याच्या सीमांशी समान नाहीत. त्यामुळे ऐतिहासिक ''Thana district''मधील कुणबींच्या नोंदींची आधुनिक ठाणे किंवा पालघर जिल्ह्यांशी तुलना करताना तत्कालीन प्रशासकीय सीमा विचारात घेणे आवश्यक आहे.
ब्रिटिशकालीन ठाणे जिल्ह्याच्या प्रशासकीय चौकटीत डहाणू, वाडा, जव्हार, मोखाडा, वसई, भिवंडी, कल्याण, सालसेट, पनवेल आणि इतर प्रदेशांचा समावेश होता. पुढील प्रशासकीय पुनर्रचनेमुळे या प्रदेशांचे विविध आधुनिक जिल्हे आणि महानगर प्रदेशांमध्ये विभाजन झाले. त्यामुळे जुन्या ''Thana district''मधील लोकसंख्या किंवा सामाजिक समूहांची आकडेवारी आजच्या जिल्हानिहाय लोकसंख्येशी थेट तुलना करताना काळजी घेणे आवश्यक आहे.<ref name="Thana1882"/>
=== उत्तर कोकणातील कुणबी समाजाचे ऐतिहासिक स्थान ===
उत्तर कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास शेती, जमीन, पाणी, ग्रामजीवन आणि बदलत्या बाजारपेठीय संबंधांच्या इतिहासाशी संबंधित आहे. १८८२ च्या ठाणे गॅझेटियरमध्ये कुणबींचा उल्लेख जिल्ह्यातील इतर सामाजिक आणि कृषक समुदायांबरोबर आढळतो. त्याच गॅझेटियरमधील कृषीविषयक नोंदींमधून उत्तर कोकणातील विविध भौगोलिक प्रदेशांतील कृषी पद्धतींची माहिती मिळते.<ref name="Thana1882"/><ref name="ThanaAgriculture"/>
ठाणे, सालसेट, वसई, भिवंडी, कल्याण, पनवेल, पालघर आणि डहाणू या प्रदेशांमध्ये भौगोलिक आणि आर्थिक परिस्थितीत फरक होता. काही भागांत भातशेती आणि बागायतीला महत्त्व होते, तर डोंगराळ आणि उंचसखल प्रदेशांत इतर पिकांची लागवड केली जात होती. मुंबईच्या जवळच्या भागांत बाजारपेठ आणि वाहतूकसंबंधांचा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेवर वाढता प्रभाव पडत गेला.<ref name="ThanaAgriculture"/>
उत्तर कोकणातील कुणबी समाजाचे ऐतिहासिक स्थान समजून घेताना इतर कृषक आणि स्थानिक समुदायांशी असलेले सहअस्तित्वही महत्त्वाचे ठरते. कुणबी, मराठा, कोळी, धनगर, कातकरी, ठाकूर, वारली आणि इतर समुदायांच्या परस्परसंबंधातून या प्रदेशाची ग्रामीण सामाजिक रचना विकसित झाली होती.<ref name="Thana1882"/>
त्यामुळे उत्तर कोकणातील कुणबींचा स्वतंत्र सामाजिक इतिहास अभ्यासता येतो; परंतु तो या प्रदेशातील व्यापक ग्रामीण, कृषी आणि सामाजिक इतिहासापासून पूर्णपणे वेगळा करता येत नाही. जमीनधारणा, कृषी, ग्रामव्यवस्था, स्थानिक समुदाय, बाजारपेठा, स्थलांतर आणि बदलती प्रशासकीय व्यवस्था या सर्व घटकांच्या परस्परसंबंधातून उत्तर कोकणातील कुणबी समाजाचे ऐतिहासिक स्थान अधिक स्पष्टपणे समजते.
=== ऐतिहासिक स्रोतांच्या मर्यादा ===
१८८२चा ''Thana Gazetteer'' हा उत्तर कोकणातील कुणबी समाजाच्या इतिहासासाठी महत्त्वाचा वसाहतकालीन स्रोत आहे; मात्र तो ब्रिटिश प्रशासकीय चौकटीत तयार करण्यात आलेला दस्तऐवज आहे. त्यातील जातीय, सामाजिक आणि आर्थिक वर्णने तत्कालीन प्रशासकीय निरीक्षणे, सर्वेक्षणे आणि वर्गीकरणांवर आधारित आहेत. त्यामुळे त्यातील समुदायांविषयीची सर्वसाधारण विशेषणे किंवा मूल्यनिर्णय आधुनिक सामाजिक वास्तवाचे अंतिम वर्णन मानता येत नाहीत.<ref name="ThanaGazetteerPreface">{{cite web
|title=Preface — Thana Gazetteer
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Thana%20District/Thane-I/preface_i.html
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
त्याचप्रमाणे १९व्या शतकातील ''Kunbi'' या संज्ञेची प्रशासकीय व्याप्ती आणि आजच्या महाराष्ट्रातील प्रशासकीय जातीय वर्गीकरण यांना एकसारखे मानता येत नाही. जुन्या जनगणना, गॅझेटियर आणि प्रशासकीय नोंदींचा उपयोग करताना तत्कालीन प्रशासकीय सीमा, वर्गीकरणाची पद्धत, स्थानिक सामाजिक ओळखी आणि त्या नोंदींचा उद्देश यांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे.
उत्तर कोकणातील कुणबींच्या इतिहासाच्या अभ्यासासाठी म्हणूनच गॅझेटियरमधील नोंदींसोबत संबंधित Census records, जमीन व महसूल नोंदी, भाषिक अभ्यास, सरकारी ठराव आणि पुढील काळातील विश्वसनीय सामाजिक-ऐतिहासिक संशोधन यांचा तुलनात्मक उपयोग करणे आवश्यक ठरते.
== तिलोरी कुणबी ==
'''तिलोरी कुणबी''' (''Tilori Kunbi'' किंवा ''Kunbi Tilori'') ही संज्ञा विशेषतः रत्नागिरी जिल्ह्याच्या ऐतिहासिक प्रशासकीय संदर्भात आढळते. या संज्ञेला विसाव्या शतकाच्या मध्यातील सरकारी वर्गीकरणात स्वतंत्र प्रशासकीय स्थान मिळाले होते. मुंबई उच्च न्यायालयाने *Dattatraya S/o Ramrao Thorat v. The State of Maharashtra & Ors.* या २४ एप्रिल २००२ रोजीच्या निर्णयात १९४२ ते १९६७ या कालखंडातील संबंधित सरकारी ठरावांचा तपशील नोंदविला आहे.<ref name="Thorat2002">{{cite web
|title=Dattatraya S/o Ramrao Thorat v. The State of Maharashtra & Ors.
|website=Indian Kanoon
|date=24 April 2002
|url=https://indiankanoon.org/doc/726744/
|access-date=22 August 2026
}}</ref>
=== तिलोरी कुणबी या संज्ञेचा प्रादेशिक संदर्भ ===
तिलोरी कुणबी या संज्ञेचा प्रशासकीय संदर्भ प्रामुख्याने रत्नागिरी जिल्ह्याशी संबंधित होता. त्यामुळे तिचा इतिहास समजून घेताना त्या काळातील रत्नागिरी जिल्ह्याच्या प्रशासकीय सीमा, स्थानिक सामाजिक रचना आणि सरकारी वर्गीकरणाची पद्धत लक्षात घेणे आवश्यक आहे.
विसाव्या शतकाच्या पूर्वार्धात आणि मध्यकाळात मागासवर्गीय समुदायांच्या सरकारी वर्गीकरणासाठी विविध याद्या आणि ठराव जारी करण्यात आले. या प्रक्रियेत ''Kunbi'' आणि ''Kunbi Tilori in Ratnagiri district'' या संज्ञांना काही काळ स्वतंत्र प्रशासकीय संदर्भ प्राप्त झाला.<ref name="Thorat2002"/>
या सरकारी वर्गीकरणाचा अर्थ सामाजिक किंवा जातीय उत्पत्तीचा ऐतिहासिक पुरावा असा थेट लावता येत नाही. तो मुख्यतः त्या काळातील शासनाच्या प्रशासकीय आणि मागासवर्गीय वर्गीकरणाचा पुरावा म्हणून पाहणे अधिक योग्य आहे.
=== १९४२ चेसरकारी वर्गीकरण ===
तिलोरी कुणबीच्या प्रशासकीय इतिहासात २३ एप्रिल १९४२चा Bombay Government Resolution महत्त्वाचा आहे. मुंबई उच्च न्यायालयाने नोंदविल्यानुसार या ठरावात intermediate communities, scheduled castes, aboriginal and hill tribes आणि other backward communities यांच्या याद्या प्रसिद्ध करण्यात आल्या होत्या.
या वर्गीकरणात Schedule A मधील intermediate communitiesच्या यादीत अनुक्रमांक १२४वर ''Kunbi (Except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)'' अशी नोंद होती. त्याच वेळी ''Other Backward Communities''च्या यादीत अनुक्रमांक ७३वर ''Kunbi Tilori in Ratnagiri district'' अशी स्वतंत्र नोंद करण्यात आली होती.<ref name="Thorat2002" />
या नोंदीवरून १९४२ च्या सरकारी वर्गीकरणात रत्नागिरी जिल्ह्यातील तिलोरी कुणबींना इतर कुणबींपेक्षा वेगळ्या प्रशासकीय वर्गात ठेवण्यात आले होते, हे स्पष्ट होते. मात्र या प्रशासकीय फरकावरून तिलोरी कुणबींची स्वतंत्र प्राचीन जातीय उत्पत्ती किंवा स्वतंत्र वंशपरंपरा सिद्ध होते, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.
=== १९५०, १९५६ आणि १९६१मधील सातत्य ===
१९४२ च्या वर्गीकरणानंतरही हा प्रशासकीय फरक पुढील सरकारी ठरावांमध्ये कायम राहिला. मुंबई उच्च न्यायालयाने नमूद केल्यानुसार १ नोव्हेंबर १९५०, २९ ऑक्टोबर १९५६ आणि २१ नोव्हेंबर १९६१ रोजी प्रसिद्ध झालेल्या सरकारी ठरावांमध्ये ''''Kunbi (Except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)'''' आणि ''''Kunbi Tilori in Ratnagiri district'''' यांच्यातील फरक कायम ठेवण्यात आला होता.<ref name="Thorat2002" />
या नोंदींचे महत्त्व असे की ''''कुणबी तिलोरी'''' ही संज्ञा त्या काळातील सरकारी मागासवर्गीय वर्गीकरणात सातत्याने वापरली जात होती. त्यामुळे ती केवळ स्थानिक किंवा मौखिक सामाजिक संज्ञा नव्हती, तर किमान १९४२ ते १९६१ या काळात अधिकृत प्रशासकीय नोंदींमध्ये वापरली गेलेली संज्ञा होती.<ref name="Thorat2002" />
=== १९६७नंतरचे वर्गीकरण ===
१३ ऑक्टोबर १९६७ रोजी महाराष्ट्र शासनाने OBC ची स्वतंत्र यादी प्रसिद्ध केली. मुंबई उच्च न्यायालयाच्या नोंदीनुसार या यादीत अनुक्रमांक ८३ वर ''Kunbi caste''चा समावेश करण्यात आला.<ref name="Thorat2002" />
न्यायालयाने या सरकारी ठरावांच्या क्रमिक इतिहासाचा विचार करून नमूद केले की १९६७पर्यंत रत्नागिरी जिल्ह्यातील ''कुणबी तिलोरी'' यांना O.B.C. वर्गात ठेवण्यात आले होते, तर राज्याच्या इतर भागांतील कुणबी समुदायाला त्या काळातील स्वतंत्र प्रशासकीय वर्गीकरणात ठेवण्यात आले होते. १९६७मध्ये ''''कुणबी जात''' महाराष्ट्राच्या OBC च्या यादीत समावेश करण्यात आला.<ref name="Thorat2002" />
या प्रशासकीय बदलामुळे तिलोरी कुणबी या संज्ञेच्या इतिहासात एक महत्त्वाचा टप्पा निर्माण झाला. त्यामुळे तिलोरी कुणबींचा इतिहास मांडताना १९४२–१९६१ या काळातील स्वतंत्र सरकारी वर्गीकरण आणि १९६७ नंतरचे ''कुणबी जात''चे व्यापक राज्यस्तरीय वर्गीकरण हे दोन वेगळे प्रशासकीय टप्पे म्हणून पाहणे आवश्यक आहे.
=== मुंबई उच्च न्यायालयाचा २००२ चा निर्णय ===
तिलोरी कुणबींच्या प्रशासकीय वर्गीकरणाच्या इतिहासाच्या संदर्भात ''Dattatraya S/o Ramrao Thorat v. The State of Maharashtra & Ors.'' हा मुंबई उच्च न्यायालयाचा २४ एप्रिल २००२ रोजीचा निर्णय महत्त्वाचा आहे. या प्रकरणाची सुनावणी न्यायमूर्ती बी. एच. मार्लापल्ले आणि न्यायमूर्ती एन. एच. पाटील यांच्या खंडपीठासमोर झाली. हे प्रकरण याचिकाकर्त्याच्या कुणबी जात-दाव्याच्या पडताळणीशी संबंधित होते.<ref name="Thorat2002" />
या निर्णयात न्यायालयाने २३ एप्रिल १९४२ च्या मुंबई सरकारच्या ठरावासह १ नोव्हेंबर १९५०, २९ ऑक्टोबर १९५६ आणि २१ नोव्हेंबर १९६१ च्या पुढील सरकारी ठरावांचा विचार केला. न्यायालयाच्या नोंदीनुसार, १९४२ च्या वर्गीकरणात ''Kunbi (Except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)'' अशी नोंद ''intermediate communities''च्या यादीत होती, तर ''Kunbi Tilori in Ratnagiri district'' ही स्वतंत्र नोंद ''Other Backward Communities''च्या यादीत होती. पुढील १९५०, १९५६ आणि १९६१ च्या ठरावांमध्येही हा प्रशासकीय फरक कायम राहिला.<ref name="Thorat2002"/>
न्यायालयाने पुढे नोंदविले की १३ ऑक्टोबर १९६७ रोजी महाराष्ट्र शासनाने इतर मागासवर्गीयांची स्वतंत्र यादी प्रसिद्ध केली आणि त्यात अनुक्रमांक ८३वर ''Kunbi caste''चा समावेश करण्यात आला. न्यायालयाच्या निरीक्षणानुसार, १९६७पर्यंत रत्नागिरी जिल्ह्यातील ''Kunbi Tilori'' यांना इतर मागासवर्गीयांच्या वर्गात, तर राज्याच्या इतर भागांतील कुणबींना तत्कालीन ''intermediate community''च्या वर्गीकरणात ठेवण्यात आले होते; १९६७मध्ये ''Kunbi caste''चा संपूर्ण महाराष्ट्रासाठी इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समावेश करण्यात आला.<ref name="Thorat2002"/>
या निर्णयाचे महत्त्व तिलोरी कुणबींची प्राचीन उत्पत्ती, स्वतंत्र वंशावळ किंवा जातीय उगम सिद्ध करण्यात नसून, '''१९४२ ते १९६७ या कालखंडातील सरकारी जातीय व मागासवर्गीय वर्गीकरणाचा न्यायालयीन नोंदीद्वारे उपलब्ध असलेला ऐतिहासिक पुरावा''' म्हणून आहे.<ref name="Thorat2002"/>
=== १९६६मधील न्यायालयीन संदर्भ ===
तिलोरी कुणबींच्या प्रशासकीय वर्गीकरणाच्या संदर्भात ''Ashok Krishnarao Dhote v. Dean, Medical College, Nagpur'' हा मुंबई उच्च न्यायालयाचा १७ ऑक्टोबर १९६६ रोजीचा निर्णय महत्त्वाचा आहे. या प्रकरणात शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालयातील प्रवेशासाठी इतर मागासवर्गीयांसाठी असलेल्या आरक्षणाच्या संदर्भात महाराष्ट्र शासनाने मान्य केलेल्या जाती व समुदायांच्या यादीचा विचार करण्यात आला. निर्णयात ''Kunbi Tilori (in Ratnagiri District)'' या संज्ञेचा स्पष्ट उल्लेख करण्यात आला आहे.<ref name="Dhote1966">{{cite journal
|title=Ashok Krishnarao Dhote v. Dean, Medical College, Nagpur & Ors.
|journal=Bombay Law Reporter
|volume=69
|year=1967
|page=603
|url=https://indiankanoon.org/doc/1707367/
}}</ref>
न्यायालयाने महाराष्ट्र राज्यासाठी लागू असलेल्या ''Other Backward Classes (Caste Basis) for Maharashtra State'' या यादीचा विचार करताना अनुक्रमांक ८७वर ''Kunbi Tilori (in Ratnagiri District)'' या जातीचा समावेश असल्याची नोंद केली. त्याच परिच्छेदात न्यायालयाने या यादीत इतर कोणत्याही कुणबी जातीचा समावेश असल्याचे त्यांच्यासमोर दाखविण्यात आले नसल्याचेही नमूद केले.<ref name="Dhote1966"/>
न्यायालयाने पुढे असेही नमूद केले की, याच प्रकरणातील याचिकाकर्त्याने स्वतःला ''Kunbi'' जातीतला असल्याचे सांगितले होते; मात्र महाराष्ट्र शासनाच्या त्या वेळच्या यादीत ''Kunbi Tilori (in Ratnagiri District)'' या नोंदीशिवाय ''Kunbi'' या सामान्य संज्ञेचा इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समावेश असल्याचा अधिकृत पुरावा न्यायालयासमोर उपलब्ध नव्हता. त्यामुळे याचिकाकर्त्याला त्या वेळच्या नियमांनुसार इतर मागासवर्गीयांसाठी राखीव प्रवेशाचा हक्क नव्हता, असा न्यायालयाचा निष्कर्ष होता.<ref name="Dhote1966"/>
या निर्णयाचे तिलोरी कुणबींच्या इतिहासाच्या दृष्टीने महत्त्व असे की, '''१९६६मध्ये रत्नागिरी जिल्ह्यातील ''Kunbi Tilori'' ही संज्ञा महाराष्ट्र शासनाच्या अधिकृत इतर मागासवर्गीयांच्या जातीय यादीत स्वतंत्रपणे नोंदलेली होती''', याला न्यायालयीन निर्णयाचा थेट आधार मिळतो. तथापि, या प्रशासकीय नोंदीवरून तिलोरी कुणबींची इतर कुणबींपेक्षा स्वतंत्र प्राचीन जातीय उत्पत्ती किंवा वंशावळ सिद्ध होते, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="Dhote1966"/>
=== तिलोरी कुणबी आणि सामाजिक ओळख ===
''Tilori Kunbi'' ही संज्ञा उपलब्ध ऐतिहासिक नोंदींमध्ये विशेषतः रत्नागिरी जिल्ह्याशी संबंधित सामाजिक आणि प्रशासकीय ओळख म्हणून आढळते. १९६६ च्या मुंबई उच्च न्यायालयाच्या निर्णयात ''Kunbi Tilori (in Ratnagiri District)'' या संज्ञेची अधिकृत प्रशासकीय यादीतील नोंद स्पष्टपणे नमूद करण्यात आली आहे.<ref name="Dhote1966"/>
तिलोरी कुणबींच्या सामाजिक इतिहासाचा अभ्यास करताना ''Tilori'', ''Kunbi'', ''Kanbi'' आणि ''Maratha-Kunbi'' यांसारख्या संज्ञांचा वापर वेगवेगळ्या काळात आणि प्रदेशांत वेगवेगळ्या संदर्भात झाल्याचे लक्षात घेणे आवश्यक आहे. प्रशासकीय वर्गीकरणातील एखादी संज्ञा आणि त्या समुदायाची सामाजिक स्वयंओळख यांना एकच मानता येत नाही.
त्यामुळे तिलोरी कुणबींच्या इतिहासाचा अभ्यास करताना सरकारी वर्गीकरणाबरोबरच स्थानिक सामाजिक ओळख, विवाहपद्धती, बोली, जमीनधारणा, ग्रामव्यवस्था, व्यवसाय आणि इतर समकालीन ऐतिहासिक स्रोतांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे. उपलब्ध सरकारी नोंदी तिलोरी कुणबी ही रत्नागिरीशी संबंधित स्वतंत्र प्रशासकीय संज्ञा म्हणून वापरली गेल्याचे दाखवतात; मात्र त्या नोंदी स्वतःहून तिच्या प्राचीन जातीय उत्पत्तीचा अंतिम पुरावा ठरत नाहीत.<ref name="Dhote1966"/>
=== तिलोरी कुणबी आणि रत्नागिरी ===
रत्नागिरी जिल्ह्याशी तिलोरी कुणबी या संज्ञेचा विशेष प्रशासकीय संबंध विसाव्या शतकाच्या मध्यातील सरकारी नोंदींमध्ये स्पष्टपणे दिसून येतो. २३ एप्रिल १९४२ च्या मुंबई सरकारच्या ठरावात अनुसूची अ मधील मध्यमवर्गीय समुदायांच्या यादीत ''Kunbi (Except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)'' अशी नोंद करण्यात आली होती. त्याच ठरावातील इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत ''Kunbi Tilori in Ratnagiri district'' अशी स्वतंत्र नोंद करण्यात आली होती. हीच वर्गीकरणपद्धती १ नोव्हेंबर १९५०, २९ ऑक्टोबर १९५६ आणि २१ नोव्हेंबर १९६१ च्या पुढील सरकारी ठरावांमध्येही कायम राहिली.<ref name="Thorat2002"/>
१३ ऑक्टोबर १९६७ च्या महाराष्ट्र शासनाच्या नव्या वर्गीकरणात ''Kunbi caste'' ही संज्ञा इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत अनुक्रमांक ८३वर समाविष्ट करण्यात आली. या बदलाच्या संदर्भात मुंबई उच्च न्यायालयाने २००२ च्या निर्णयात नमूद केले की १९६७पर्यंत रत्नागिरी जिल्ह्यातील तिलोरी कुणबींना इतर मागासवर्गीय म्हणून स्वतंत्रपणे वर्गीकृत केले जात होते, तर इतर भागांतील कुणबींना मध्यमवर्गीय समुदायाच्या वर्गात ठेवले जात होते; १९६७मध्ये कुणबी जातीचा संपूर्ण महाराष्ट्रासाठी इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समावेश करण्यात आला.<ref name="Thorat2002"/>
या प्रशासकीय नोंदी तिलोरी कुणबी ही संज्ञा रत्नागिरी जिल्ह्याशी संबंधित स्वतंत्र प्रशासकीय वर्गीकरण म्हणून वापरली गेल्याचा महत्त्वपूर्ण पुरावा देतात. मात्र या नोंदींच्या आधारे तिलोरी कुणबींचे प्राचीन मूळ, एखाद्या विशिष्ट राजवंशाशी असलेले नाते किंवा इतर कुणबींपेक्षा वेगळी जैविक वंशपरंपरा निश्चित करता येत नाही. सरकारी वर्गीकरणाचा पुरावा आणि समुदायाच्या प्राचीन सामाजिक उत्पत्तीचा पुरावा यांमध्ये भेद करणे आवश्यक आहे.<ref name="Thorat2002"/>
=== तिलोरी कुणबी आणि भाषिक अभ्यास ===
तिलोरी कुणबींच्या सामाजिक इतिहासाच्या अभ्यासात दक्षिण कोकणातील बोलीभाषांचा अभ्यास हा पूरक स्रोत ठरतो. अमृत माधव घाटगे यांनी १९६३ ते १९७६ या कालखंडात ''मराठी बोलींचे सर्वेक्षण'' हा भाषिक सर्वेक्षण प्रकल्प राबविला. या प्रकल्पांतर्गत ''Kunbi of Mahad'' हा महाड परिसरातील कुणबी बोलीचा स्वतंत्र अभ्यास १९६६मध्ये प्रकाशित करण्यात आला.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/>
महाडच्या कुणबी बोलीचा हा अभ्यास तिलोरी कुणबींच्या सरकारी वर्गीकरणाचा थेट पुरावा नाही. त्याचे महत्त्व महाड परिसरातील कुणबी समाजाच्या भाषिक स्वरूपाचे स्वतंत्र दस्तऐवजीकरण झाले असल्यामध्ये आहे. त्यामुळे दक्षिण कोकणातील कुणबी समाजाच्या भाषिक विविधतेचा आणि प्रादेशिक सामाजिक इतिहासाचा अभ्यास करताना हा एक पूरक स्रोत म्हणून वापरता येतो.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/>
भाषिक साम्य आणि जातीय उत्पत्ती यांना एकच मानता येत नाही. एखाद्या समुदायाची स्वतंत्र बोली, भाषिक वैशिष्ट्ये किंवा विशिष्ट शब्दसंपत्ती यांवरून त्या समुदायाची प्राचीन वंशावळ किंवा निश्चित स्थलांतरमार्ग सिद्ध होत नाही. त्यामुळे महाडच्या कुणबी बोलीच्या अभ्यासाचा उपयोग प्रादेशिक भाषिक आणि सामाजिक इतिहास समजून घेण्यासाठी करणे अधिक योग्य ठरते.
=== आधुनिक महाराष्ट्रातील प्रशासकीय वर्गीकरण ===
आधुनिक महाराष्ट्रातील इतर मागासवर्गीयांच्या अधिकृत यादीत कुणबी या नोंदीखाली विविध संबंधित संज्ञांचा समावेश करण्यात आला आहे. महाराष्ट्र शासनाच्या १३ मे २०२५ च्या अधिकृत यादीत कुणबी या नोंदीखाली लेवा कुणबी, लेवा पाटील, लेवा पाटीदार, मराठा कुणबी, कुणबी मराठा, तिलोरी कुणबी, टिलोरी कुणबी आणि टी. कुणबी अशा संज्ञांचा उल्लेख आढळतो.<ref name="MaharashtraOBC2025">{{cite web
|title=Other Backward Classes list — Government Resolution dated 13 May 2025
|url=https://gr.maharashtra.gov.in/Site/Upload/Government%20Resolutions/Marathi/20250513170904091534.pdf
|publisher=Government of Maharashtra
|date=13 May 2025
}}</ref>
या आधुनिक प्रशासकीय यादीचा अर्थ या सर्व संज्ञांमागील समुदायांची ऐतिहासिक उत्पत्ती एकाच प्रक्रियेतून झाली आहे असा होत नाही. अशा शासकीय याद्या मुख्यतः प्रशासकीय, सामाजिक आणि आरक्षणविषयक वर्गीकरणासाठी तयार केल्या जातात. त्यामुळे केवळ या यादीतील एकत्रित नोंदींच्या आधारे एखाद्या समुदायाची प्राचीन उत्पत्ती, वंशावळ किंवा ऐतिहासिक सामाजिक संबंध निश्चित करता येत नाही.<ref name="MaharashtraOBC2025"/>
=== 'तिलोरी' आणि 'टिलोरी' या लेखनरूपांचा वापर ===
ऐतिहासिक आणि प्रशासकीय नोंदींमध्ये तिलोरी कुणबी या संज्ञेची इंग्रजी लेखनरूपे वेगवेगळी आढळतात. २००२ च्या मुंबई उच्च न्यायालयाच्या निर्णयात Kunbi Tilori in Ratnagiri district अशी नोंद करण्यात आली आहे. न्यायालयाने २३ एप्रिल १९४२ च्या सरकारी ठरावापासून २१ नोव्हेंबर १९६१पर्यंतच्या ठरावांमध्ये रत्नागिरी जिल्ह्यातील तिलोरी कुणबींना इतर कुणबींपेक्षा स्वतंत्र प्रशासकीय वर्गात ठेवण्यात आल्याचे नमूद केले आहे. त्यानंतर १३ ऑक्टोबर १९६७ च्या शासन ठरावात कुणबी जात संपूर्ण महाराष्ट्रासाठी इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समाविष्ट करण्यात आली.<ref name="Thorat2002"/>
आधुनिक महाराष्ट्र शासनाच्या १३ मे २०२५ च्या अधिकृत यादीत तिलोरी कुणबी आणि टिलोरी कुणबी अशी दोन्ही लेखनरूपे आढळतात. त्यामुळे जुन्या किंवा आधुनिक सरकारी दस्तऐवजांचा संदर्भ देताना त्या-त्या मूळ दस्तऐवजात वापरलेले लेखनरूप कायम ठेवणे अधिक अचूक ठरते.<ref name="MaharashtraOBC2025"/>
मराठी लेखनात मात्र एकसंधतेसाठी तिलोरी कुणबी ही संज्ञा वापरणे योग्य ठरते. एखाद्या ऐतिहासिक किंवा प्रशासकीय दस्तऐवजातील मूळ नोंद उद्धृत करताना त्यातील मूळ लेखनरूप संदर्भानुसार तसेच नमूद करता येते. अशा प्रकारे मराठीतील प्रचलित लेखन आणि प्राथमिक स्रोतांतील मूळ प्रशासकीय नोंद यांच्यात स्पष्ट फरक राखता येतो.
=== तिलोरी कुणबी : प्रशासकीय इतिहास आणि सामाजिक इतिहास यांतील फरक ===
तिलोरी कुणबींच्या इतिहासाचा अभ्यास करताना सरकारी प्रशासकीय वर्गीकरण आणि व्यापक सामाजिक इतिहास यांच्यात स्पष्ट भेद करणे आवश्यक आहे. २३ एप्रिल १९४२ च्या मुंबई सरकारच्या ठरावात ''Kunbi (Except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)'' अशी नोंद करण्यात आली होती, तर इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत ''Kunbi Tilori in Ratnagiri district'' अशी स्वतंत्र नोंद होती. हीच वर्गीकरणपद्धती १ नोव्हेंबर १९५०, २९ ऑक्टोबर १९५६ आणि २१ नोव्हेंबर १९६१ च्या पुढील सरकारी ठरावांमध्येही कायम राहिली.<ref name="Thorat2002"/>
१३ ऑक्टोबर १९६७ च्या महाराष्ट्र शासनाच्या नव्या यादीत ''Kunbi caste'' ही नोंद इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत करण्यात आली. २००२ च्या मुंबई उच्च न्यायालयाच्या निर्णयानुसार, १९६७पर्यंत रत्नागिरी जिल्ह्यातील तिलोरी कुणबींना इतर मागासवर्गीय म्हणून स्वतंत्रपणे वर्गीकृत केले जात होते, तर राज्यातील इतर भागांतील कुणबींना मध्यमवर्गीय समुदायाच्या वर्गात ठेवले जात होते. १९६७मध्ये प्रथमच कुणबी जातीचा संपूर्ण महाराष्ट्रासाठी इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समावेश करण्यात आला.<ref name="Thorat2002"/>
या घटनाक्रमावरून तिलोरी कुणबी ही विसाव्या शतकातील सरकारी प्रशासकीय वर्गीकरणात रत्नागिरी जिल्ह्याशी संबंधित स्वतंत्रपणे नोंदविलेली संज्ञा होती, हे स्पष्ट होते. मात्र केवळ या प्रशासकीय नोंदींच्या आधारे तिलोरी कुणबी हे प्राचीन काळापासून इतर कुणबींपेक्षा स्वतंत्र जात होते, किंवा तिलोरी कुणबी समाजाची एकच प्राचीन वंशपरंपरा होती, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. प्रशासकीय वर्गीकरणाचा पुरावा आणि समुदायाच्या ऐतिहासिक उत्पत्तीचा पुरावा यांना स्वतंत्रपणे तपासणे आवश्यक आहे.<ref name="Thorat2002"/>
=== ऐतिहासिक महत्त्व ===
तिलोरी कुणबींच्या इतिहासाचे महत्त्व रत्नागिरीतील प्रादेशिक सामाजिक ओळख आणि राज्याच्या बदलत्या प्रशासकीय वर्गीकरणाच्या परस्परसंबंधात आहे. १९४२मध्ये रत्नागिरी जिल्ह्यातील तिलोरी कुणबींना इतर कुणबींपासून प्रशासकीयदृष्ट्या वेगळ्या वर्गात ठेवण्यात आले. हे वर्गीकरण १९५०, १९५६ आणि १९६१ च्या सरकारी ठरावांमध्ये कायम राहिले.<ref name="Thorat2002"/>
१९६६ च्या ''Ashok Krishnarao Dhote v. Dean, Medical College, Nagpur'' या मुंबई उच्च न्यायालयाच्या निर्णयातही ''Kunbi Tilori (in Ratnagiri District)'' या संज्ञेचा इतर मागासवर्गीयांच्या यादीतील अनुक्रमांक ८७वरील नोंद म्हणून उल्लेख करण्यात आला होता. त्यामुळे १९६० च्या दशकाच्या मध्यापर्यंत ही संज्ञा प्रशासकीय नोंदींमध्ये वापरात असल्याचा न्यायालयीन पुरावा उपलब्ध आहे.<ref name="Dhote1966"/>
यानंतर १३ ऑक्टोबर १९६७ च्या शासन ठरावाद्वारे ''Kunbi caste'' ही संज्ञा संपूर्ण महाराष्ट्रासाठी इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समाविष्ट करण्यात आली. त्यामुळे तिलोरी कुणबींच्या प्रशासकीय इतिहासात १९४२ ते १९६१ या कालखंडातील स्वतंत्र वर्गीकरण, १९६० च्या दशकातील त्याची न्यायालयीन नोंद आणि १९६७नंतरचे व्यापक कुणबी वर्गीकरण हे महत्त्वाचे टप्पे ठरतात.<ref name="Thorat2002"/>
या पार्श्वभूमीवर तिलोरी कुणबींचा अभ्यास हा केवळ एका उपसंज्ञेच्या इतिहासापुरता मर्यादित राहत नाही. तो रत्नागिरीतील प्रादेशिक सामाजिक ओळख, विसाव्या शतकातील मागासवर्गीयांचे सरकारी वर्गीकरण, राज्याच्या प्रशासकीय धोरणातील बदल आणि आधुनिक महाराष्ट्रातील जातीय वर्गीकरण यांच्या परस्परसंबंधांचा अभ्यास करण्यासाठी महत्त्वाचा ठरतो.
== कुणबी बोली आणि भाषिक वैशिष्ट्ये ==
कोकणातील कुणबी समाजाच्या सामाजिक इतिहासात भाषेला महत्त्वाचे स्थान आहे. तथापि, ''कुणबी बोली'' ही संज्ञा संपूर्ण कोकणात एकाच भाषिक स्वरूपासाठी वापरली जाते असे मानणे योग्य नाही. उपलब्ध भाषावैज्ञानिक अभ्यासांमध्ये महाड परिसरातील कुणबींच्या भाषिक प्रकाराचा स्वतंत्र अभ्यास तसेच रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीचा स्वतंत्र अभ्यास आढळतो. त्यामुळे ''कुणबी बोली'' या संज्ञेचा वापर करताना तिचा प्रादेशिक आणि सामाजिक संदर्भ स्पष्ट करणे आवश्यक आहे.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/><ref name="Veer2022"/>
=== कुणबी बोलीची संकल्पना ===
''कुणबी बोली'' ही संज्ञा कुणबी समाजाशी संबंधित विविध प्रादेशिक भाषिक प्रकारांसाठी वापरली जाते. भाषाशास्त्रीय अभ्यासात एखाद्या भाषिक प्रकाराचे स्वरूप केवळ त्याच्या बोलणाऱ्या समुदायाच्या सामाजिक ओळखीवर निश्चित होत नाही; त्याचे भौगोलिक वितरण, ध्वनिवैशिष्ट्ये, शब्दसंपदा, व्याकरण, वाक्यरचना आणि शेजारील भाषिक प्रकारांशी असलेले संबंध यांचाही विचार केला जातो.
अमृत माधव घाटगे यांनी १९६३ ते १९७६ या कालखंडात ''A Survey of Dialects of Marathi'' हा भाषिक सर्वेक्षण प्रकल्प राबविला. या प्रकल्पाच्या अंतर्गत नऊ भाषिक प्रकारांचे स्वतंत्र पुस्तकात्मक अभ्यास प्रकाशित झाले. त्यामध्ये ''Kunbi of Mahad'' हा महाड परिसरातील कुणबी बोलीचा अभ्यास १९६६मध्ये प्रसिद्ध झाला. या मालिकेत दक्षिण कॅनरातील कोकणी, कुडाळी, कोचीन, काणकोणची कोकणी, ठाण्याची वारली, कासरगोडची मराठी, गोव्याची गावडी आणि डांगची भिली या भाषिक प्रकारांचेही स्वतंत्र अभ्यास प्रकाशित झाले होते.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/>
महाडच्या कुणबी बोलीचा स्वतंत्र भाषाशास्त्रीय अभ्यास झाल्यामुळे कुणबी समाजाशी संबंधित भाषिक विविधतेचा एक प्रादेशिक नमुना उपलब्ध होतो. त्याचप्रमाणे रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीवरील पुढील अभ्यासामुळे या प्रदेशातील कुणबी समाजाच्या भाषिक स्वरूपाचा स्वतंत्र विचार करता येतो.<ref name="Veer2022"/>
कोकणातील ग्रामीण समाज, स्थानिक जीवनपद्धती, सामाजिक संबंध आणि सांस्कृतिक परंपरा यांचा विचार करताना भाषिक वैशिष्ट्ये हा एक पूरक घटक ठरतो. रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील ग्रामीण जीवनाच्या ऐतिहासिक व सांस्कृतिक संदर्भासाठी उपलब्ध स्थानिक साहित्याचाही उपयोग करता येतो.
यावरून ''कुणबी बोली''चा अभ्यास हा केवळ जातीय समाजशास्त्राचा विषय नसून महाराष्ट्रातील प्रादेशिक भाषिक विविधता, ग्रामीण सामाजिक इतिहास आणि स्थानिक सांस्कृतिक ओळख यांच्या अभ्यासाचाही एक भाग आहे. मात्र एखाद्या बोलीचा एखाद्या समुदायाशी असलेला संबंध हा त्या समुदायाच्या प्राचीन जातीय उत्पत्तीचा किंवा वंशावळीचा स्वतःपुरता निर्णायक पुरावा मानता येत नाही.
=== महाड परिसरातील कुणबी बोली ===
महाड परिसरातील कुणबी बोलीचा स्वतंत्र भाषिक अभ्यास अमृत माधव घाटगे यांनी केला. ''Kunbi of Mahad'' हा त्यांच्या ''A Survey of Marathi Dialects'' या मालिकेतील तिसरा खंड असून तो १९६६मध्ये प्रकाशित झाला. मराठी बोलींच्या सर्वेक्षणाच्या उपलब्ध नोंदींमध्ये या ग्रंथाचा समावेश आहे.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/><ref>{{cite web
|title=Publications
|publisher=Maharashtra State Board for Literature and Culture
|url=https://sahitya.marathi.gov.in/wp-content/uploads/2021/07/publications2021-07.pdf
|format=PDF
|access-date=2026-09-08
}}</ref>
महाडचा हा भाषिक प्रकार महाड परिसरातील कुणबी समाजाशी संबंधित असल्यामुळे सामाजिक ओळख आणि भाषिक विविधता यांच्या परस्परसंबंधाच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचा ठरतो. मात्र महाडमध्ये नोंदवलेला हा भाषिक प्रकार संपूर्ण रत्नागिरी, रायगड किंवा कोकणातील सर्व कुणबी समाजाची एकसमान बोली होती, असा निष्कर्ष उपलब्ध अभ्यासावरून काढता येत नाही. प्रादेशिक भौगोलिक परिस्थिती, स्थानिक भाषिक संपर्क आणि सामाजिक इतिहास यांनुसार भाषिक वैशिष्ट्यांमध्ये फरक असू शकतो.<ref name="घोलम2025">{{cite book |last=घोलम |first=अनंत नर्मदा सखाराम |title=खडीकोळवण : सांस्कृतिक, ऐतिहासिक आणि ग्रामीण जीवन |publisher=Kindle Direct Publishing |year=2025 }}</ref>
=== तिलोरी कुणबी बोली ===
रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी समाजाच्या भाषिक स्वरूपाचा स्वतंत्र अभ्यास सीमा राजेश वीर यांनी ''कोकणातील तिलोरी कुणबी बोली'' या लेखातून केला आहे. हा लेख ''भाषा आणि जीवन'' या मराठी भाषावैज्ञानिक नियतकालिकाच्या २०२२ च्या अंकात प्रकाशित झाला असून तो खंड ४०, अंक ३मध्ये पृष्ठ ७ ते १९ या दरम्यान प्रसिद्ध झाला आहे.<ref name="Veer2022">{{cite journal
|last=वीर
|first=सीमा राजेश
|title=कोकणातील तिलोरी कुणबी बोली
|journal=भाषा आणि जीवन
|volume=40
|issue=3
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|pages=7–19
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या अभ्यासामुळे तिलोरी कुणबी बोलीचा विचार केवळ सामाजिक किंवा प्रशासकीय ओळखीच्या संदर्भात न करता स्वतंत्र भाषिक अभ्यासाच्या विषयाच्या रूपातही करता येतो. तिलोरी कुणबींच्या भाषिक स्वरूपाचा अभ्यास करताना रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील स्थानिक भाषिक वातावरण, प्रमाण मराठीचा प्रभाव आणि शेजारील कोकणी भाषिक प्रकार यांचा संदर्भ लक्षात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="Veer2022"/>
=== मराठीशी संबंध ===
महाड आणि दक्षिण कोकणातील कुणबी भाषिक प्रकारांचा अभ्यास मराठी भाषेच्या व्यापक प्रादेशिक भाषिक विविधतेच्या संदर्भात करण्यात आला आहे. अमृत माधव घाटगे यांच्या मराठी बोलींच्या सर्वेक्षणात ''Kunbi of Mahad''चा स्वतंत्र भाषिक प्रकार म्हणून समावेश करण्यात आला होता.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/>
मराठी आणि कोकणी यांच्यातील भाषिक संबंधांविषयी भाषाशास्त्रीय अभ्यासात विविध मते मांडली गेली आहेत. मराठी बोलींच्या सर्वेक्षणाच्या उपलब्ध ऐतिहासिक माहितीनुसार जॉर्ज अब्राहम ग्रिअर्सन यांच्या भाषिक वर्गीकरणात कोकणीचा मराठीशी संबंध जोडला गेला होता; त्यानंतर सुमित्रा मंगेश कात्रे यांच्या ''The Formation of Konkani'' या १९६६मधील अभ्यासात कोकणीच्या स्वतंत्र भाषिक स्वरूपाचा विचार करण्यात आला. त्यामुळे कोकणातील एखाद्या कुणबी भाषिक प्रकाराला सरसकट ''मराठीची बोली'' किंवा ''कोकणीची बोली'' असे संबोधण्यापेक्षा संबंधित प्रदेशातील भाषिक वैशिष्ट्ये आणि उपलब्ध भाषाशास्त्रीय अभ्यास यांच्या आधारे त्याचे स्वरूप निश्चित करणे अधिक योग्य ठरते.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/>
कुणबी बोलींच्या अभ्यासातून कोकणातील सामाजिक आणि भाषिक विविधतेचा एक महत्त्वाचा पैलू समोर येतो. महाडची कुणबी बोली, रत्नागिरी-दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोली आणि इतर स्थानिक भाषिक प्रकार यांचा तुलनात्मक अभ्यास केल्यास प्रदेश, सामाजिक ओळख, भाषिक संपर्क आणि ग्रामीण सांस्कृतिक जीवन यांच्यातील परस्परसंबंध अधिक स्पष्टपणे समजून घेता येतात.<ref name="घोलम2025" />
=== कोकणी भाषिक प्रभाव ===
कोकण हा मराठी आणि कोकणी या दोन्ही भाषिक परंपरांच्या संपर्कातील प्रदेश आहे. त्यामुळे दक्षिण कोकणातील विविध भाषिक प्रकारांवर शेजारील कोकणी भाषिक क्षेत्राशी झालेल्या संपर्काचा परिणाम झालेला असण्याची शक्यता भाषिक अभ्यासाच्या दृष्टीने महत्त्वाची ठरते. हा परिणाम शब्दसंपदा, उच्चार, ध्वनिवैशिष्ट्ये किंवा वाक्यरचनेच्या काही घटकांमध्ये दिसू शकतो; मात्र त्याचे स्वरूप प्रदेशानुसार वेगवेगळे असू शकते.
एखाद्या विशिष्ट शब्दाचा, उच्चाराचा किंवा व्याकरणिक रचनेचा कोकणी प्रभाव म्हणून उल्लेख करण्यासाठी तुलनात्मक भाषाशास्त्रीय पुरावा आवश्यक असतो. त्यामुळे कोकणातील सर्व कुणबी बोलींवर कोकणीचा समान किंवा व्यापक प्रभाव आहे, असा निष्कर्ष प्रत्येक उपप्रदेशाच्या स्वतंत्र भाषिक अभ्यासाशिवाय काढणे योग्य ठरत नाही.
महाड, रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील कुणबी भाषिक प्रकारांमध्ये काही साम्य आढळू शकते; परंतु त्यांचे भौगोलिक वितरण, स्थानिक भाषिक संपर्क आणि ऐतिहासिक विकास समान असल्याचे गृहीत धरता येत नाही. महाडच्या कुणबी बोलीचा स्वतंत्र अभ्यास अमृत माधव घाटगे यांनी केला असून रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीचा स्वतंत्र भाषिक अभ्यासही उपलब्ध आहे.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/><ref name="Veer2022"/>
=== स्थानिक शब्दसंपदा ===
बोलीभाषेच्या अभ्यासातील महत्त्वाचा घटक म्हणजे स्थानिक शब्दसंपदा. शेती, पाऊस, भातशेती, जलव्यवस्था, घररचना, शेतीची अवजारे, समुद्र, डोंगर, वनस्पती, प्राणी आणि ग्रामजीवनाशी संबंधित शब्दांमधून एखाद्या प्रदेशातील दैनंदिन जीवन, पर्यावरण आणि सांस्कृतिक अनुभवांचे भाषिक प्रतिबिंब दिसून येऊ शकते. कोकणातील ग्रामीण जीवनाचा अभ्यास करताना स्थानिक शब्दसंपदेचा संबंध पारंपरिक शेतीपद्धती, घररचना आणि ग्रामजीवनाशी जोडून पाहता येतो.<ref name="घोलम2025" />
महाडच्या कुणबी बोलीचा स्वतंत्र भाषिक अभ्यास अमृत माधव घाटगे यांच्या सर्वेक्षणात करण्यात आला आहे. या अभ्यासामुळे महाड परिसरातील कुणबी समाजाशी संबंधित भाषिक वैशिष्ट्ये आणि स्थानिक शब्दसंपदेचा अभ्यास करण्यासाठी स्वतंत्र स्रोत उपलब्ध होतो.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/>
तिलोरी कुणबी बोलीच्या संदर्भात सीमा राजेश वीर यांच्या २०२२मधील अभ्यासामुळे रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील या भाषिक प्रकाराचा स्वतंत्र विचार करण्यास आधार मिळतो.<ref name="Veer2022"/>
स्थानिक शब्दसंपदा सामाजिक आणि सांस्कृतिक इतिहासासाठी पूरक पुरावा देऊ शकते; मात्र एखादा शब्द केवळ एखाद्या विशिष्ट समुदायापुरता मर्यादित आहे किंवा त्याचा उगम एखाद्या विशिष्ट प्राचीन भाषेतच झाला आहे, असा निष्कर्ष केवळ त्या शब्दाच्या स्थानिक वापरावरून काढता येत नाही. अशा निष्कर्षांसाठी शब्दव्युत्पत्ती, तुलनात्मक भाषाशास्त्र, ऐतिहासिक नोंदी आणि संबंधित भाषांमधील समांतर शब्दरूपांचा स्वतंत्र अभ्यास आवश्यक असतो.
=== उच्चारवैशिष्ट्ये ===
प्रादेशिक बोलींच्या अभ्यासात प्रमाण भाषेच्या तुलनेत आढळणारे ध्वनी, स्वरांचे उच्चार, व्यंजनांचे उच्चार, शब्दांतील अक्षररचना आणि बोलण्याची लय यांचा विचार केला जातो. अमृत माधव घाटगे यांच्या भाषिक सर्वेक्षणात महाड परिसरातील कुणबी बोलीचा स्वतंत्र अभ्यास करण्यात आला आहे. त्यामुळे या बोलीच्या उच्चारवैशिष्ट्यांचा अभ्यास प्रमाण मराठीच्या तुलनेत भाषाशास्त्रीय पद्धतीने करता येतो.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/>
तिलोरी कुणबी बोलीच्या संदर्भातही उच्चारवैशिष्ट्यांचा अभ्यास करताना रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील स्थानिक भाषिक वातावरण विचारात घेणे आवश्यक आहे. तिलोरी कुणबी बोलीवर उपलब्ध असलेल्या भाषाशास्त्रीय अभ्यासात या बोलीचा स्वतंत्र भाषिक प्रकार म्हणून विचार करण्यात आला आहे.<ref name="Veer2022"/>
मात्र बोलीच्या विशिष्ट उच्चारवैशिष्ट्यांचे वर्णन करताना संबंधित भाषाशास्त्रीय अभ्यासातील उदाहरणे, ध्वनिलेखन आणि लिप्यंतर यांचा आधार घेणे आवश्यक आहे. उपलब्ध प्राथमिक अभ्यासात स्पष्टपणे नोंद नसलेली उच्चाररूपे अनुमानाने मांडणे योग्य ठरत नाही. त्यामुळे कुणबी बोलीच्या उच्चारवैशिष्ट्यांचा सविस्तर अभ्यास संबंधित भाषाशास्त्रीय स्रोतांच्या आधारेच करणे आवश्यक आहे.
=== व्याकरणाची वैशिष्ट्ये ===
बोलीभाषेचे व्याकरण प्रमाण भाषेपेक्षा पूर्णपणे स्वतंत्र असणे आवश्यक नसते. क्रियापदांची रूपे, विभक्तीप्रत्यय, सर्वनामे, लिंग आणि वचन, काळ, वाक्यरचना तसेच शब्दक्रम यांसारख्या घटकांमध्ये प्रादेशिक किंवा सामाजिक फरक आढळू शकतात.
महाडच्या कुणबी बोलीच्या स्वतंत्र भाषिक वर्णनाचा उपयोग तिच्या व्याकरणात्मक वैशिष्ट्यांचा अभ्यास करण्यासाठी करता येतो. अमृत माधव घाटगे यांच्या महाडच्या कुणबी बोलीवरील अभ्यासामुळे या बोलीच्या भाषिक रचनेचा स्वतंत्र संदर्भ उपलब्ध होतो.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/>
रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीच्या संदर्भात सीमा राजेश वीर यांचा २०२२मधील अभ्यासही महत्त्वाचा पूरक स्रोत आहे. या अभ्यासाच्या आधारे तिलोरी कुणबी बोलीच्या भाषिक वैशिष्ट्यांचा स्वतंत्र विचार करता येतो.<ref name="Veer2022"/>
कुणबी बोलीचे व्याकरण प्रमाण मराठीपासून पूर्णपणे स्वतंत्र आहे किंवा ती स्वतंत्र भाषा आहे, असा निष्कर्ष केवळ तिच्या स्वतंत्र बोलीअभ्यासाच्या अस्तित्वावरून काढता येत नाही. तिच्या व्याकरणाचा विचार करताना प्रादेशिक मराठीचे स्वरूप, कोकणीशी असलेला भाषिक संपर्क आणि संबंधित प्रदेशातील इतर बोली यांचा तुलनात्मक अभ्यास करणे आवश्यक आहे.
=== शेती आणि बोलीभाषा ===
कुणबी समाजाच्या पारंपरिक कृषीजीवनाशी संबंधित शब्दसंपदा ही कोकणातील ग्रामीण भाषिक अभ्यासाचा एक महत्त्वाचा घटक ठरू शकते. भातशेती, नांगरणी, पेरणी, रोपलागवड, कापणी, धान्यसाठवण, जलव्यवस्था, पशुधन आणि शेतीची अवजारे यांसंबंधीचे स्थानिक शब्द त्या प्रदेशातील कृषीपद्धती आणि दैनंदिन जीवनाचे भाषिक प्रतिबिंब दर्शवू शकतात. कोकणातील ग्रामीण जीवनाच्या अभ्यासात शेती, घररचना, स्थानिक साधने आणि ग्रामजीवन यांचा परस्परसंबंधही दिसून येतो.<ref name="घोलम2025" />
महाडच्या कुणबी बोलीचा स्वतंत्र भाषिक अभ्यास अमृत माधव घाटगे यांनी केला असून, त्या अभ्यासामुळे कृषी आणि ग्रामीण जीवनाशी संबंधित स्थानिक शब्दसंपदेचा भाषाशास्त्रीय संदर्भात अभ्यास करता येतो.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/>
तथापि एखाद्या कृषीशब्दाची व्युत्पत्ती, त्याचे विशिष्ट भौगोलिक मूळ किंवा तो शब्द केवळ कुणबी समाजापुरताच मर्यादित असल्याचा निष्कर्ष केवळ स्थानिक वापरावरून काढता येत नाही. अशा निष्कर्षांसाठी तुलनात्मक भाषाशास्त्रीय अभ्यास, ऐतिहासिक शब्दकोश, संबंधित बोलींची उदाहरणे आणि उपलब्ध भाषिक नोंदींचा आधार आवश्यक असतो.
=== बोली आणि सामाजिक ओळख ===
भाषा ही सामाजिक आणि प्रादेशिक ओळखीचा एक घटक असू शकते. कुणबी समाजाशी संबंधित काही भाषिक प्रकारांना त्यांच्या बोलणाऱ्या समुदायाच्या सामाजिक ओळखीशी जोडून स्वतंत्रपणे अभ्यासण्यात आले आहे. महाड परिसरातील कुणबी बोलीचा अमृत माधव घाटगे यांनी केलेला अभ्यास आणि रत्नागिरी-दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीवरील सीमा राजेश वीर यांचा अभ्यास याची उदाहरणे आहेत.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/><ref name="Veer2022"/>
मात्र भाषा आणि जातीय ओळख यांच्यात सरळ किंवा एकरेषीय संबंध असतोच असे नाही. एकाच सामाजिक समुदायातील लोक वेगवेगळ्या प्रदेशांमध्ये भिन्न भाषिक प्रकार वापरू शकतात. त्याचप्रमाणे एखादा भाषिक प्रकार एकापेक्षा अधिक सामाजिक समूहांकडून वापरला जाऊ शकतो. त्यामुळे केवळ एखाद्या व्यक्तीच्या बोलीवरून तिची जातीय ओळख निश्चित करणे भाषाशास्त्रीयदृष्ट्या योग्य ठरत नाही.
कुणबी समाजाच्या सामाजिक इतिहासाचा अभ्यास करताना म्हणूनच बोलीभाषेचा विचार जमीन, शेती, स्थलांतर, ग्रामजीवन, स्थानिक सामाजिक संबंध आणि प्रादेशिक संस्कृती यांच्या व्यापक संदर्भात करणे अधिक उपयुक्त ठरते.
=== प्रमाण मराठीचा प्रभाव ===
शिक्षण, मुद्रण, प्रशासन, प्रसारमाध्यमे, शहरीकरण आणि स्थलांतर यांच्या विस्तारामुळे महाराष्ट्रातील अनेक प्रादेशिक भाषिक प्रकारांवर प्रमाण मराठीचा प्रभाव वाढला आहे. शाळा, सरकारी कार्यालये, मुद्रित माध्यमे आणि आधुनिक संप्रेषणाच्या साधनांमध्ये प्रमाण मराठीचा वापर वाढल्यामुळे काही स्थानिक बोलींचा दैनंदिन वापर विशिष्ट क्षेत्रांमध्ये कमी होण्याची शक्यता आहे.
भाषिक सर्वेक्षणांमध्ये महाराष्ट्रातील विविध भाषिक प्रकारांची नोंद करण्यात आली आहे. Survey of Dialects of Marathi Languageच्या माहितीनुसार महाराष्ट्रातील भाषिक विविधतेच्या अभ्यासात अनेक प्रादेशिक भाषिक प्रकारांचा स्वतंत्र विचार करण्यात आला आहे आणि सर्व भाषिक प्रकारांना मराठीच्या बोली म्हणून वर्गीकृत करता येत नाही, असे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/>
यामुळे कुणबी समाजाशी संबंधित भाषिक प्रकारांचा अभ्यास करताना त्यांना पूर्वनिर्धारितपणे प्रमाण मराठीच्या बोली म्हणून किंवा स्वतंत्र भाषा म्हणून वर्गीकृत करण्याऐवजी संबंधित प्रदेशातील उपलब्ध भाषाशास्त्रीय पुरावे, भाषिक रचना, भौगोलिक वितरण आणि इतर भाषांशी असलेला संपर्क यांचा विचार करणे आवश्यक ठरते.
=== आधुनिक भाषिक बदल ===
कोकणातील कुणबी समाजाशी संबंधित भाषिक प्रकारांवर आधुनिक शिक्षण, शहरीकरण, स्थलांतर, प्रसारमाध्यमे आणि प्रमाण मराठीच्या वाढत्या वापराचा परिणाम होत आहे. इंग्रजीच्या वाढत्या वापरामुळेही विशेषतः शिक्षण, रोजगार आणि शहरी व्यवहारांच्या क्षेत्रात भाषिक वापराच्या स्वरूपात बदल होत आहेत. या प्रक्रियेमुळे घरगुती आणि स्थानिक व्यवहारांमध्ये वापरल्या जाणाऱ्या काही प्रादेशिक भाषिक प्रकारांचा वापर विशिष्ट क्षेत्रांमध्ये कमी होण्याची शक्यता आहे.
रत्नागिरी जिल्ह्यातील तिलोरी बोलीच्या संदर्भात स्थानिक शब्दसंपदेचे संकलन आणि बोलीच्या सांस्कृतिक दस्तऐवजीकरणाचे प्रयत्न झाल्याचे समकालीन वृत्तांतांमध्ये नमूद करण्यात आले आहे. चिपळूण, संगमेश्वर आणि राजापूर परिसरात तिलोरी बोलीशी संबंधित शब्दसंपदेचे संकलन करण्यात आल्याचे या वृत्तांतात म्हटले आहे.<ref name="TiloriWords2019">{{cite web
|title=तिलोरी बोलीतले नऊ हजार शब्द संकलित
|url=https://www.esakal.com/amp/kokan/tilori-language-900-words-collection-174832
|publisher=ई-सकाळ
|date=6 March 2019
}}</ref>
या वृत्तांतानुसार सुमारे नऊ हजार शब्द, सुमारे साठ गाणी आणि काही म्हणी संकलित करण्यात आल्याचे नमूद आहे.<ref name="TiloriWords2019"/> या प्रकारचे स्थानिक संकलन तिलोरी बोलीच्या शब्दसंपदेचे आणि लोकसाहित्याचे दस्तऐवजीकरण करण्याच्या दृष्टीने महत्त्वाचे आहे. मात्र या संकलनातील सामग्रीचा उपयोग संपूर्ण रत्नागिरी जिल्ह्यातील किंवा संपूर्ण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीचे प्रतिनिधिक स्वरूप म्हणून करताना संबंधित भाषाशास्त्रीय अभ्यासाचा आधार घेणे आवश्यक आहे.
=== बोलीचे संवर्धन ===
बोलीभाषांच्या दस्तऐवजीकरणासाठी शब्दसंग्रह, म्हणी, लोकगीते, लोककथा, पारंपरिक संभाषणे आणि स्थानिक भाषिक नमुने यांचे संकलन महत्त्वाचे ठरते. अशा सामग्रीतून एखाद्या प्रदेशातील दैनंदिन जीवन, कृषीपद्धती, सामाजिक संबंध आणि सांस्कृतिक परंपरांचे भाषिक स्वरूप नोंदवता येते. कोकणातील ग्रामीण जीवन, शेती आणि स्थानिक सांस्कृतिक परंपरांचा अभ्यास करताना अशा भाषिक सामग्रीला पूरक ऐतिहासिक-सांस्कृतिक स्रोत म्हणूनही पाहता येते.<ref name="घोलम2025" />
तिलोरी बोलीच्या संदर्भात स्थानिक पातळीवर शब्दसंपदा, गीते आणि म्हणी यांचे संकलन झाल्याची नोंद उपलब्ध आहे.<ref name="TiloriWords2019"/>
भाषिक संवर्धनाच्या दृष्टीने अशा स्थानिक प्रयत्नांना शास्त्रीय भाषिक सर्वेक्षण, ध्वनिमुद्रण, लिप्यंतरण, शब्दकोश निर्मिती आणि डिजिटल संग्रह यांची जोड मिळाल्यास बोलीभाषेच्या पुढील अभ्यासासाठी अधिक व्यापक स्रोतसामग्री उपलब्ध होऊ शकते. विशेषतः वृद्ध पिढीकडे उपलब्ध असलेली स्थानिक शब्दसंपदा, म्हणी, लोकगीते आणि पारंपरिक भाषिक वापर यांचे दस्तऐवजीकरण केल्यास भाषिक आणि सांस्कृतिक वारशाच्या नोंदी जतन करण्यास मदत होऊ शकते.
=== कुणबी बोलींचा तुलनात्मक अभ्यास ===
महाडची कुणबी बोली आणि रत्नागिरी-दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोली यांचा उल्लेख एकाच व्यापक संदर्भात होत असला तरी हे दोन्ही भाषिक प्रकार समान आहेत असे गृहीत धरता येत नाही. अमृत माधव घाटगे यांचा अभ्यास महाड परिसरातील कुणबी बोलीवर केंद्रित आहे, तर सीमा राजेश वीर यांचा २०२२मधील अभ्यास रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीशी संबंधित आहे.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/><ref name="Veer2022"/>
या दोन्ही भाषिक प्रकारांचा तुलनात्मक अभ्यास करताना ध्वनिवैशिष्ट्ये, शब्दसंपदा, व्याकरण, वाक्यरचना, स्थानिक भाषिक संपर्क आणि भौगोलिक वितरण या घटकांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे. भौगोलिक जवळीक किंवा सामाजिक साम्य यांवरून दोन बोलींचे भाषिक स्वरूप समान असल्याचा निष्कर्ष काढता येत नाही.
महाड, रायगड, रत्नागिरी आणि दक्षिण कोकणातील कुणबी समाजाशी संबंधित भाषिक प्रकारांचा तुलनात्मक अभ्यास केल्यास त्यांच्या भाषिक साम्यांबरोबरच प्रादेशिक फरकही अधिक स्पष्ट होऊ शकतात. मात्र अशा तुलनात्मक निष्कर्षांसाठी संबंधित बोलींच्या प्रत्यक्ष भाषिक नमुन्यांचा आणि उपलब्ध भाषाशास्त्रीय अभ्यासांचा आधार आवश्यक आहे.
=== भाषिक इतिहास आणि कुणबी समाज ===
कुणबी समाजाशी संबंधित भाषिक प्रकारांचा इतिहास हा कोकणातील ग्रामीण समाजाच्या दीर्घकालीन भाषिक परिवर्तनाच्या संदर्भात पाहता येतो. कृषीप्रधान ग्रामजीवन, स्थानिक देवस्थान आणि लोकपरंपरा, बाजारपेठा, शेजारील भाषिक समुदायांशी संपर्क, स्थलांतर, शिक्षण आणि शहरीकरण या विविध प्रक्रियांचा भाषिक वापरावर परिणाम झाला असण्याची शक्यता आहे. कोकणातील ग्रामीण जीवन आणि कृषीसंस्कृतीच्या अभ्यासातून या भाषिक परिवर्तनाची सामाजिक पार्श्वभूमी समजण्यास पूरक संदर्भ मिळू शकतो.<ref name="घोलम2025" />
मात्र उपलब्ध भाषिक अभ्यासांवरून कुणबी बोलीची थेट प्राचीन किंवा मध्ययुगीन वंशावळ निश्चित करता येत नाही. त्याचप्रमाणे एखाद्या आधुनिक बोलीचे अस्तित्व हे त्या समुदायाच्या प्राचीन स्थलांतराचा थेट पुरावा मानता येत नाही. भाषिक इतिहास आणि सामाजिक इतिहास यांचा परस्पर संबंध असला तरी त्यांच्या निष्कर्षांसाठी भाषाशास्त्रीय, ऐतिहासिक आणि सामाजिक स्रोत स्वतंत्रपणे तपासणे आवश्यक आहे.
=== ऐतिहासिक आणि आधुनिक भाषिक अभ्यासांचे महत्त्व ===
महाडच्या कुणबी बोलीसाठी अमृत माधव घाटगे यांचा १९६६मधील अभ्यास हा कोकणातील कुणबी भाषिक प्रकाराच्या दस्तऐवजीकरणातील महत्त्वाचा स्रोत आहे. हा अभ्यास मराठीच्या बोलींच्या व्यापक सर्वेक्षणाच्या प्रकल्पाचा भाग होता.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/><ref name="GhatgeKunbiMahad"/>
तिलोरी कुणबी बोलीच्या संदर्भात सीमा राजेश वीर यांचा २०२२मधील अभ्यास आधुनिक काळातील महत्त्वाचा भाषाशास्त्रीय संदर्भ उपलब्ध करून देतो.<ref name="Veer2022"/>
या दोन्ही स्रोतांचा एकत्रित विचार केल्यास कोकणातील कुणबी समाजाशी संबंधित भाषिक प्रकारांचा अभ्यास वेगवेगळ्या कालखंडांच्या संदर्भात करता येतो. एकीकडे १९६० च्या दशकातील शास्त्रीय बोली-सर्वेक्षणातून महाड परिसरातील भाषिक स्वरूपाचे दस्तऐवजीकरण झाले, तर दुसरीकडे २०२० च्या दशकातील अभ्यासातून रत्नागिरी-दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीचा स्वतंत्र विचार उपलब्ध झाला आहे. या दोन्ही अभ्यासांमधील काल, प्रदेश आणि अभ्यासपद्धतीतील फरक लक्षात घेऊनच त्यांची तुलना करणे आवश्यक आहे.
=== भाषिक नोंदींच्या मर्यादा ===
कुणबी बोलीविषयी उपलब्ध भाषिक स्रोतांचा वापर करताना काही मर्यादा लक्षात घेणे आवश्यक आहे. प्रथम, महाडची कुणबी बोली आणि रत्नागिरी-दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोली या स्वतंत्र प्रादेशिक भाषिक अभ्यासांचे विषय आहेत. त्यामुळे दोन्ही भाषिक प्रकारांचे स्वरूप एकसमान आहे असे गृहीत धरता येत नाही. दुसरे, एखाद्या बोलीचा विशिष्ट सामाजिक समुदायाशी संबंध असला तरी त्या बोलीच्या आधारे त्या समुदायाची जातीय उत्पत्ती किंवा प्राचीन वंशपरंपरा निश्चित करता येत नाही. तिसरे, मराठी, कोकणी आणि त्यांच्या विविध प्रादेशिक भाषिक प्रकारांमधील संबंध ऐतिहासिक आणि भाषाशास्त्रीयदृष्ट्या गुंतागुंतीचे आहेत.<ref name="SurveyDialectsMarathi"/>
त्यामुळे कुणबी बोलीची उत्पत्ती अमुक एका प्राचीन भाषेपासून झाली, सर्व कुणबी समाज एकच बोली बोलतो किंवा तिलोरी कुणबी बोली ही संपूर्ण कोकणातील एकमेव कुणबी बोली आहे, अशी निश्चित विधाने उपलब्ध भाषिक पुराव्यांच्या आधारे करता येत नाहीत. अशा निष्कर्षांसाठी विविध प्रदेशांतील भाषिक नमुने, ऐतिहासिक नोंदी आणि तुलनात्मक भाषाशास्त्रीय अभ्यास आवश्यक आहेत.
=== कोकणातील कुणबी बोलींचे भाषिक महत्त्व ===
कोकणातील कुणबी बोलींचे महत्त्व केवळ सामाजिक ओळखीच्या संदर्भापुरते मर्यादित नसून त्या प्रदेशातील भाषिक विविधतेच्या दस्तऐवजीकरणातही आहे. महाडमधील कुणबी बोलीचा १९६६मधील स्वतंत्र भाषिक अभ्यास आणि रत्नागिरी-दक्षिण कोकणातील तिलोरी कुणबी बोलीवरील २०२२मधील अभ्यास यांमुळे कुणबी समाजाशी संबंधित दोन वेगवेगळ्या प्रादेशिक भाषिक संदर्भांची नोंद उपलब्ध झाली आहे.<ref name="GhatgeKunbiMahad"/><ref name="Veer2022"/>
या भाषिक अभ्यासांमधून कोकणातील ग्रामीण जीवन, कृषी संस्कृती आणि स्थानिक शब्दसंपदेच्या अभ्यासाला पूरक सामग्री मिळते. त्यामुळे कुणबी समाजाच्या इतिहासाचा अभ्यास करताना जमीन, शेती, लोकसंख्या, महसूल आणि प्रशासकीय नोंदींबरोबरच उपलब्ध भाषिक दस्तऐवजीकरणाचाही विचार करता येतो.
== सामाजिक रचना ==
कोकणातील कुणबी समाजाची सामाजिक रचना कुटुंब, कुळ, देवक, विवाहसंबंध, नातेसंबंध, ग्रामजीवन आणि स्थानिक सामाजिक संस्थांशी संबंधित होती. मात्र कोकणातील कुणबी समाज एकसंध सामाजिक घटक होता असे मानता येत नाही. रत्नागिरी, रायगड, सावंतवाडी, महाड आणि उत्तर कोकणातील कुणबी समाजांच्या सामाजिक जीवनावर स्थानिक भौगोलिक परिस्थिती, कृषीव्यवस्था, ग्रामरचना आणि प्रादेशिक परंपरांचा प्रभाव होता.
ब्रिटिशकालीन गॅझेटियरमध्ये कोकणातील विविध समुदायांच्या सामाजिक आणि ग्रामीण जीवनाचे वर्णन आढळते. रत्नागिरी आणि सावंतवाडीच्या गॅझेटियरमध्ये लोकसंख्या, ग्रामीण जीवन, शेती आणि सामाजिक समूहांची माहिती नोंदवण्यात आली आहे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
नंतरच्या मानववंशशास्त्रीय अभ्यासांमध्ये महाराष्ट्रातील विविध समुदायांच्या सामाजिक रचना, कुटुंबव्यवस्था, विवाहपद्धती, नातेसंबंध आणि सांस्कृतिक परंपरांचा स्वतंत्र अभ्यास करण्यात आला आहे.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004">{{cite book
|editor-last=Singh
|editor-first=K. S.
|title=People of India: Maharashtra
|volume=30
|publisher=Anthropological Survey of India
|location=New Delhi
|year=2004
}}</ref>
कोकणातील ग्रामीण जीवनाच्या संदर्भात कुटुंब, शेती, ग्रामसंस्था, स्थानिक परंपरा आणि सामाजिक संबंध यांचा परस्परसंबंध दिसून येतो. या ग्रामीण-सांस्कृतिक संदर्भांचा अभ्यास करण्यासाठी उपलब्ध स्थानिक इतिहास आणि ग्रामीण जीवनावरील साहित्य पूरक स्रोत म्हणून वापरता येते.<ref name="घोलम2025" />
=== कुटुंब ===
कुणबी समाजातील पारंपरिक सामाजिक जीवनात कुटुंब ही महत्त्वाची सामाजिक आणि आर्थिक संस्था होती. कृषीप्रधान अर्थव्यवस्थेमुळे कुटुंबातील विविध सदस्यांचा शेतीच्या कामांमध्ये सहभाग असे. ब्रिटिशकालीन गॅझेटियरमधील ग्रामीण जीवनाच्या वर्णनांमध्ये कृषी कामांमध्ये कुटुंबाच्या सहभागाचे उल्लेख आढळतात.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
कुटुंबाची आर्थिक रचना जमीनधारणा, कुटुंबाचा आकार, शेतीचे स्वरूप, पशुधन आणि उपलब्ध संसाधने यांशी संबंधित होती. कृषी उत्पादनाबरोबरच पशुपालन, घरगुती कामे आणि स्थानिक रोजगार यांचा कुटुंबाच्या उपजीविकेत सहभाग असू शकत होता. त्यामुळे ग्रामीण कृषी समाजात कुटुंबाची भूमिका सामाजिक संबंधांबरोबरच आर्थिक जीवनाशीही जोडलेली होती.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
नंतरच्या मानववंशशास्त्रीय अभ्यासांमध्ये महाराष्ट्रातील विविध समुदायांमध्ये संयुक्त आणि विभक्त कुटुंबांचे प्रकार नोंदवण्यात आले आहेत. त्यामुळे संपूर्ण कुणबी समाजात एकच कुटुंबपद्धती प्रचलित होती असे मानणे योग्य नाही. कुटुंबव्यवस्थेचे स्वरूप प्रदेश, आर्थिक परिस्थिती आणि स्थानिक सामाजिक परंपरांनुसार बदलत असण्याची शक्यता होती.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
=== कुळ ===
कुळ ही संकल्पना कुटुंबीय वंशपरंपरा, सामाजिक ओळख आणि विवाहसंबंधांच्या संदर्भात महत्त्वाची ठरते. महाराष्ट्रातील विविध ग्रामीण समाजांच्या सामाजिक रचनेत कुटुंबसमूह, आडनावे, वंशपरंपरा आणि विवाहनियम यांना स्थान असल्याचे मानववंशशास्त्रीय साहित्यात आढळते.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
काही कुणबी समुदायांमध्ये समान कुळ किंवा जवळच्या वंशसमूहातील विवाह टाळण्याची प्रथा आढळत असल्याचे तुलनात्मक मानववंशशास्त्रीय साहित्यात नमूद केले आहे. मात्र अशा प्रथा सर्व प्रदेशांतील कुणबी समाजाला समान प्रमाणात लागू होत्या असे गृहीत धरता येत नाही.<ref name="RussellHiralal1916"/>
कुळ, गोत्र, देवक आणि आडनाव या संज्ञा सामाजिक संदर्भानुसार वापरल्या जात असल्यामुळे त्यांचे अर्थ सर्व प्रदेशांत समान असतीलच असे नाही. विशेषतः कोकणातील कुणबी समाजाचा अभ्यास करताना स्थानिक विवाहपद्धती, कुटुंबव्यवस्था, देवकपरंपरा, आडनावे आणि प्रादेशिक सामाजिक संकेत यांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे.
कोकणातील ग्रामीण कुटुंबव्यवस्था, स्थानिक परंपरा आणि सामाजिक जीवनाचा अभ्यास करताना स्थानिक इतिहास व ग्रामीण जीवनावरील स्रोत पूरक ठरू शकतात. रत्नागिरीतील ग्रामीण जीवनाच्या संदर्भात कुटुंब, शेती, ग्रामव्यवस्था आणि स्थानिक सांस्कृतिक परंपरांचा परस्परसंबंधही अभ्यासता येतो.<ref name="घोलम2025" />
=== देवक ===
कुणबी समाजाच्या सामाजिक आणि विवाहसंस्थेच्या संदर्भात देवक ही महत्त्वाची संकल्पना मानली जाते. देवक हे वनस्पती, वृक्ष, प्राणी, वस्तू किंवा अन्य प्रतीकाशी संबंधित कुलचिन्ह अथवा संरक्षक प्रतीकाच्या स्वरूपात आढळू शकते. महाराष्ट्रातील कुणबी समाजावरील मानववंशशास्त्रीय अभ्यासांमध्ये देवक, गोत्र, कुळ आणि विवाहनियम यांचा परस्परसंबंध नोंदवण्यात आला आहे.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
काही कुणबी उपसमूहांमध्ये समान देवक असलेल्या कुटुंबांमध्ये विवाह टाळण्याची प्रथा आढळत असल्याचे महाराष्ट्रातील मानववंशशास्त्रीय आणि गॅझेटियर नोंदींवरून दिसते. मात्र अशा विवाहनियमांचे स्वरूप प्रदेश आणि उपसमूहानुसार बदलत असल्यामुळे ते संपूर्ण कुणबी समाजाला समान प्रमाणात लागू होते असे मानता येत नाही.<ref>{{cite web
|title=People of Maharashtra: Major Castes and Tribes
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/land_and_people/L%20%26%20P%20pdf/Chapter%20II/2%20Major%20Castes%20and%20Tribes.pdf
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
सावंतवाडी तालुक्यातील कुंकेरी गावाच्या संदर्भात १९६१ च्या जनगणनेअंतर्गत तयार करण्यात आलेल्या Village Survey Monographमध्ये कुणबी मराठा कुटुंबांच्या सामाजिक जीवनाचे वर्णन आढळते. या सर्वेक्षणाच्या प्रकाशनात स्थानिक सामाजिक प्रथा, कुटुंबव्यवस्था आणि सांस्कृतिक जीवनाचा स्वतंत्र विचार करण्यात आला आहे.<ref name="Kunkeri1966">{{cite report
|title=Kunkeri Village Survey Monograph
|publisher=Maharashtra Census Office
|location=Bombay
|year=1966
|series=Census of India, 1961
}}</ref>
देवकाचा संबंध केवळ धार्मिक श्रद्धेशी मर्यादित नसून विवाहसंबंध आणि सामाजिक ओळख यांच्याशीही जोडलेला असल्याचे या प्रकारच्या नोंदींमधून दिसते. तथापि देवकाची नावे, त्यांच्याशी संबंधित प्रथा आणि विवाहनियम यांमध्ये स्थानिक फरक असू शकतात.
=== विवाह ===
कुणबी समाजातील विवाह हा कुटुंब, कुळ आणि विस्तारित नातेसंबंधांना जोडणारा महत्त्वाचा सामाजिक विधी होता. विवाह ठरविताना कुटुंबीय संबंध, कुळ, आडनाव, देवक आणि संबंधित सामाजिक नियमांचा विचार केला जात असल्याचे महाराष्ट्रातील मानववंशशास्त्रीय अभ्यासांत आढळते.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील कुणबी आणि संबंधित कृषक समुदायांच्या विवाहपद्धतींच्या वर्णनांमध्ये समान कुळातील विवाह टाळणे आणि काही ठिकाणी समान आडनाव किंवा देवक असलेल्या कुटुंबांमधील विवाहास प्रतिबंध असल्याचे उल्लेख आढळतात.<ref name="Poona1885">{{cite book
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Poona
|volume=18
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1885
}}</ref>
या विवाहनियमांमधून कुणबी समाजातील जातीय किंवा सामाजिक अंतर्विवाहाबरोबरच कुळ, देवक किंवा वंशसमूहाच्या पातळीवरील बहिर्विवाहाची प्रथा अस्तित्वात असल्याचे दिसते. मात्र या नियमांचे स्वरूप प्रदेश, उपसमूह आणि स्थानिक सामाजिक परंपरेनुसार बदलत होते.
कोकणातील ग्रामीण जीवनाच्या संदर्भात विवाह हा केवळ दोन व्यक्तींमधील संबंध न राहता दोन कुटुंबे आणि त्यांच्या नातेसंबंधांना जोडणारी सामाजिक प्रक्रिया होती. रत्नागिरीतील ग्रामीण जीवन, कुटुंबव्यवस्था आणि स्थानिक सामाजिक परंपरांचा अभ्यास करताना अशा संबंधांचा विचार करणे आवश्यक ठरते.<ref name="घोलम2025" />
=== नातेसंबंध ===
कुणबी समाजाच्या पारंपरिक ग्रामीण जीवनात रक्तसंबंध, विवाहसंबंध आणि शेजारधर्म यांना महत्त्व होते. विस्तारित कुटुंब, सासर-माहेरचे संबंध आणि इतर नातेसंबंध सामाजिक समारंभ आणि जीवनचक्रातील विधींमध्ये सक्रिय असत.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
जन्म, नामकरण, विवाह आणि मृत्यू यांसारख्या जीवनचक्रातील विधींमध्ये नातेवाईक आणि समाजातील इतर व्यक्तींचा सहभाग असे. अशा विधींमुळे कुटुंबांमधील सामाजिक संबंध दृढ होण्यास मदत होत असे.
कोकणातील ग्रामीण समाजात कुटुंब, नातेसंबंध, शेती आणि ग्रामजीवन यांचा परस्पर संबंध असल्यामुळे सामाजिक जीवनाचा अभ्यास करताना या घटकांचा एकत्रित विचार करणे आवश्यक आहे.<ref name="घोलम2025" />
=== विवाहासंबंधी सामाजिक नियम ===
कुणबी समाजातील विवाहासाठी विविध सामाजिक नियम प्रचलित होते. समान कुळ किंवा देवकातील विवाह टाळणे, विशिष्ट नातेसंबंधांमध्ये विवाहास प्रतिबंध करणे आणि विवाहासाठी मान्य सामाजिक चौकट पाळणे यांचा उल्लेख महाराष्ट्रातील मानववंशशास्त्रीय अभ्यासांत आढळतो.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
विवाहनियमांमध्ये उपसमूह आणि प्रदेशानुसार फरक असल्याचेही नोंदींवरून दिसते. काही कुणबी उपसमूहांमध्ये विधवा पुनर्विवाहाला मान्यता असल्याचे, तसेच काही समूहांमध्ये विवाहविच्छेदाची प्रथा अस्तित्वात असल्याचे मानववंशशास्त्रीय साहित्यात नमूद केले आहे. मात्र या प्रथा संपूर्ण कुणबी समाजासाठी समान होत्या असे मानता येत नाही.<ref name="MajorCastesTribes">{{cite web
|title=People of Maharashtra: Major Castes and Tribes
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/land_and_people/L%20%26%20P%20pdf/Chapter%20II/2%20Major%20Castes%20and%20Tribes.pdf
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
म्हणून कुणबी समाजातील विवाहसंस्थेचा अभ्यास करताना प्रदेश, उपसमूह, आर्थिक स्थिती, स्थानिक सामाजिक परंपरा आणि कालखंड या घटकांचा विचार करणे आवश्यक आहे. ऐतिहासिक नोंदींमधील एखादी प्रथा संपूर्ण कुणबी समाजाचे सार्वत्रिक वैशिष्ट्य म्हणून मांडणे योग्य ठरणार नाही.
=== विधवा पुनर्विवाह आणि विवाहविच्छेद ===
कुणबी समाजातील काही उपसमूहांमध्ये विधवा पुनर्विवाहाला सामाजिक मान्यता असल्याचे मानववंशशास्त्रीय नोंदींमध्ये आढळते. त्याचप्रमाणे काही उपसमूहांमध्ये विवाहविच्छेदाची प्रथा अस्तित्वात असल्याचेही नोंदवण्यात आले आहे.<ref name="MajorCastesTribes"/>
या प्रथांचे स्वरूप प्रदेश, उपसमूह, सामाजिक स्थान आणि कालखंडानुसार बदलत असल्याचे उपलब्ध नोंदींवरून दिसते. त्यामुळे एखाद्या विशिष्ट कुणबी उपसमूहात आढळणारी विधवा पुनर्विवाहाची किंवा विवाहविच्छेदाची प्रथा संपूर्ण कुणबी समाजाचे सार्वत्रिक वैशिष्ट्य म्हणून मांडता येत नाही.
ऐतिहासिक विवाहसंस्थेचा अभ्यास करताना तत्कालीन सामाजिक नियम आणि आधुनिक काळातील कायदेशीर व सामाजिक व्यवस्था यांच्यात फरक करणे आवश्यक आहे. विसाव्या शतकाच्या उत्तरार्धातील किंवा आधुनिक कुणबी समाजातील विवाहपद्धती केवळ १९व्या शतकातील मानववंशशास्त्रीय वर्णनांच्या आधारे निश्चित करता येत नाहीत.
=== ग्रामजीवन ===
कोकणातील कुणबी समाजाचे पारंपरिक सामाजिक आणि आर्थिक जीवन गाव, शेती आणि स्थानिक सामाजिक संबंधांशी घट्टपणे जोडलेले होते. शेती, पाणी, देवस्थान, सण, बाजारपेठ, श्रमवाटप आणि परस्पर सहाय्य या घटकांमधून ग्रामीण समाजजीवनाची रचना विकसित होत असे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
रत्नागिरी आणि सावंतवाडीच्या गॅझेटियरमध्ये ग्रामीण लोकांचे शेतीशी असलेले संबंध, कुटुंबव्यवस्था, विवाह, सामाजिक समारंभ, धार्मिक प्रथा आणि स्थानिक व्यवसाय यांचे वर्णन आढळते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
गाव हे कृषी उत्पादनाचे केंद्र असण्याबरोबरच सामाजिक आणि धार्मिक व्यवहारांचेही केंद्र होते. ग्रामदेवता, देवस्थाने, जत्रा आणि विविध धार्मिक समारंभांमध्ये गावातील वेगवेगळे सामाजिक समूह सहभागी होत असत. त्यामुळे ग्रामजीवन हे केवळ शेतीच्या उत्पादनाशी संबंधित नसून सामाजिक आणि सांस्कृतिक संबंधांचेही महत्त्वाचे क्षेत्र होते.
कोकणातील ग्रामीण जीवनाचा अभ्यास करताना कुटुंब, शेती, स्थानिक परंपरा, धार्मिक आचार आणि ग्रामसमुदाय यांचा परस्परसंबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे. रत्नागिरीतील ग्रामीण जीवनाच्या ऐतिहासिक आणि सांस्कृतिक संदर्भासाठी स्थानिक ग्रामीण जीवनावरील अभ्यासही पूरक ठरतात.<ref name="घोलम2025" />
=== ग्रामसंस्था आणि परस्परावलंबन ===
पारंपरिक कोकणी ग्रामजीवनात कृषक आणि विविध सेवा देणाऱ्या समूहांमध्ये परस्परावलंबी संबंध अस्तित्वात होते. शेती आणि दैनंदिन ग्रामीण जीवनासाठी लोहार, सुतार, न्हावी, परीट, गुरव आणि इतर सेवा देणाऱ्या व्यक्ती किंवा समूहांची आवश्यकता असे. त्याबदल्यात त्यांना धान्य, उत्पन्नातील हिस्सा किंवा इतर पारंपरिक मोबदला मिळत असल्याचे ग्रामीण सामाजिक व्यवस्थेच्या वर्णनांमध्ये आढळते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
अशा परस्परावलंबी संबंधांचे स्वरूप गाव, प्रदेश आणि स्थानिक जमीनव्यवस्थेनुसार बदलत होते. त्यामुळे महाराष्ट्रातील सर्व गावांमध्ये एकसारखी बलुतेदारी व्यवस्था अस्तित्वात होती असे सरसकट म्हणता येत नाही. विशेषतः कोकणातील जमीनव्यवस्था, खोतपद्धती, वतनव्यवस्था आणि स्थानिक ग्रामरचना यांचा स्वतंत्र संदर्भात विचार करणे आवश्यक आहे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
कोकणातील ग्रामजीवनात अशा परस्परावलंबी संबंधांचा परिणाम कृषी उत्पादन, स्थानिक सेवा, सामाजिक समारंभ आणि दैनंदिन व्यवहारांवर होत असे. त्यामुळे कुणबी समाजाच्या सामाजिक इतिहासाचा अभ्यास करताना केवळ जमीनधारणा किंवा शेतीपुरता विचार न करता ग्रामसंस्था आणि इतर ग्रामीण समूहांशी असलेले संबंध यांचाही विचार करणे आवश्यक ठरते.
=== सामाजिक संघटना ===
पारंपरिक कुणबी समाजातील सामाजिक संबंध कुटुंब, कुळ, गाव आणि व्यापक सामाजिक समुदाय या विविध स्तरांवर विकसित झाले होते. विवाह, धार्मिक विधी, सामाजिक समारंभ आणि स्थानिक वादविवाद यांसारख्या प्रसंगी कुटुंबातील तसेच समुदायातील ज्येष्ठ व्यक्तींना भूमिका असू शकत होती. या सामाजिक संबंधांचे स्वरूप प्रदेश आणि स्थानिक परंपरेनुसार बदलत होते.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
महाराष्ट्रातील विविध समुदायांच्या मानववंशशास्त्रीय अभ्यासांमध्ये समुदायातील ज्येष्ठ व्यक्ती, कुटुंबसमूह किंवा स्थानिक सामाजिक संस्थांच्या माध्यमातून सामाजिक प्रश्न आणि वाद सोडवण्याच्या प्रथांचा उल्लेख आढळतो. तथापि प्रत्येक कुणबी गावात किंवा प्रत्येक उपसमूहात औपचारिक जातपंचायत अस्तित्वात होती, असा सार्वत्रिक निष्कर्ष काढण्यासाठी स्वतंत्र स्थानिक पुराव्याची आवश्यकता आहे.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
कोकणातील सामाजिक जीवनाचा विचार करताना ग्रामसमुदाय, कुटुंबीय संबंध, धार्मिक परंपरा आणि परस्पर सहाय्य यांचा एकत्रित विचार करणे आवश्यक आहे. रत्नागिरीतील ग्रामीण जीवनाच्या संदर्भात कुटुंब, शेती आणि स्थानिक सामाजिक-सांस्कृतिक संबंध यांचे परस्परसंबंधही महत्त्वाचे ठरतात.<ref name="घोलम2025" />
=== पारंपरिक सामाजिक भूमिका ===
कुणबी समाजाची पारंपरिक सामाजिक आणि आर्थिक भूमिका प्रामुख्याने कृषी उत्पादनाशी संबंधित होती. जमीन कसणे, पिकांची लागवड, पशुधनाचे पालन आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेतील सहभाग हे त्यांच्या जीवनाचे महत्त्वाचे घटक होते. रत्नागिरी, कोलाबा आणि ठाणे या ऐतिहासिक जिल्ह्यांच्या गॅझेटियरमध्ये कुणबींचा कृषक समुदाय म्हणून उल्लेख आढळतो.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/><ref name="KolabaJanjira1883"/><ref name="Thana1882"/>
कुणबींचे कृषीशी असलेले ऐतिहासिक संबंध महत्त्वाचे असले तरी कुणबी आणि शेतकरी या दोन संज्ञा समानार्थी मानता येत नाहीत. कृषक ही आर्थिक किंवा व्यवसायाधारित संज्ञा होती, तर कुणबी ही सामाजिक समुदायाची ओळख होती. त्यामुळे प्रत्येक कृषक कुणबी होता किंवा प्रत्येक कुणबी व्यक्ती केवळ शेतीवरच अवलंबून होती असे म्हणता येत नाही.
कालांतराने कुणबी समाजातील व्यक्तींनी शेतीबरोबरच मजुरी, व्यापार, वाहतूक, सरकारी सेवा, लष्करी सेवा आणि इतर व्यवसाय स्वीकारल्याचे महाराष्ट्रावरील मानववंशशास्त्रीय अभ्यासांत दिसून येते.<ref name="PeopleIndiaMaharashtra2004"/>
=== स्त्रियांची सामाजिक आणि आर्थिक भूमिका ===
कृषीप्रधान कुटुंबव्यवस्थेत स्त्रियांचा सामाजिक आणि आर्थिक सहभाग महत्त्वाचा होता. ब्रिटिशकालीन गॅझेटियरमधील ग्रामीण आणि कृषक जीवनाच्या वर्णनांमध्ये स्त्रिया आणि मुले शेतीशी संबंधित विविध कामांमध्ये सहभागी होत असल्याचे उल्लेख आढळतात.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
शेतीतील कामांबरोबरच घरगुती उत्पादन, पशुधनाची देखभाल, अन्नप्रक्रिया, धान्यसाठवण आणि धार्मिक-सामाजिक विधींमध्येही स्त्रियांचा सहभाग असू शकत होता. कृषीप्रधान कुटुंबात घरगुती आणि कृषी कामांमध्ये स्पष्ट विभाजन नसल्यामुळे कुटुंबाच्या उपजीविकेत स्त्रियांचे योगदान विविध स्वरूपाचे होते.
कोकणातील ग्रामीण जीवनाच्या संदर्भात स्त्रियांची भूमिका समजून घेताना कुटुंबव्यवस्था, शेती, घरगुती अर्थव्यवस्था आणि धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा यांचा परस्परसंबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="घोलम2025" />
मात्र ब्रिटिशकालीन गॅझेटियरमधील स्त्रियांच्या भूमिकेविषयीची वर्णने तत्कालीन प्रशासकीय निरीक्षकांच्या दृष्टिकोनातून तयार झालेली असल्यामुळे त्यांना संपूर्ण कुणबी समाजातील स्त्रियांच्या जीवनाचे सार्वत्रिक किंवा अपरिवर्तनीय चित्र मानता येत नाही. प्रदेश, कुटुंबाची आर्थिक स्थिती, जमीनधारणा आणि सामाजिक परिस्थितीनुसार स्त्रियांच्या कामाच्या स्वरूपात फरक असण्याची शक्यता होती.
=== धार्मिक जीवन आणि सामाजिक रचना ===
कुणबी समाजातील पारंपरिक धार्मिक जीवनात ग्रामदेवता, स्थानिक देवता, कुटुंबीय देवता आणि हिंदू धार्मिक परंपरांना महत्त्वाचे स्थान होते. जन्म, विवाह आणि मृत्यू यांसारख्या जीवनचक्रातील विधींमध्ये धार्मिक श्रद्धा आणि सामाजिक संबंध यांचा परस्परसंबंध दिसून येतो. या प्रथा प्रदेश, उपसमूह आणि स्थानिक परंपरेनुसार बदलत असण्याची शक्यता होती.<ref name="MajorCastesTribes"/>
देवक ही संकल्पना या संदर्भात विशेष महत्त्वाची ठरते. देवकाचा संबंध धार्मिक प्रतीकात्मकतेबरोबरच विवाहनियमांशी जोडलेला असल्यामुळे धार्मिक श्रद्धा आणि सामाजिक संस्था यांचे परस्परसंबंध स्पष्ट होतात. काही कुणबी उपसमूहांमध्ये समान देवक असलेल्या कुटुंबांमधील विवाह टाळण्याची प्रथा नोंदवली गेली आहे.<ref name="MajorCastesTribes"/>
कोकणातील ग्रामीण जीवनात धार्मिक परंपरा या ग्रामसमुदायाच्या सामाजिक जीवनाशीही जोडलेल्या होत्या. ग्रामदेवता, देवस्थाने, जत्रा आणि धार्मिक समारंभ हे केवळ श्रद्धेचे विषय नसून सामाजिक सहभाग आणि सामुदायिक संबंध दृढ करणारे प्रसंगही होते. रत्नागिरीतील ग्रामीण जीवनाच्या अभ्यासात स्थानिक परंपरा, कुटुंबव्यवस्था, ग्रामजीवन आणि धार्मिक-सांस्कृतिक व्यवहार यांचा परस्परसंबंध विचारात घेता येतो.<ref name="घोलम2025" />
=== सामाजिक स्तर आणि प्रादेशिक फरक ===
कुणबी समाजाच्या अंतर्गतही आर्थिक आणि सामाजिक स्थितीत फरक होते. जमीनधारणा, जमिनीची गुणवत्ता, कुटुंबाचा आकार, कृषी उत्पादन, पशुधन, गावातील सामाजिक स्थान, कर्ज आणि उपलब्ध आर्थिक साधने यांनुसार कुटुंबांच्या परिस्थितीत भिन्नता असू शकत होती.
ब्रिटिशकालीन रत्नागिरी गॅझेटियरमध्ये ग्रामीण समाजातील विविध आर्थिक स्तर, कृषक, मजूर आणि इतर घटकांच्या परिस्थितीचे वर्णन आढळते. विवाह, सामाजिक समारंभ आणि कौटुंबिक खर्च यांमध्येही आर्थिक स्थितीनुसार फरक असल्याचे नोंदवले आहे.<ref>{{cite web
|title=Ratnagiri and Savantvadi Gazetteer — Capitals and Capitalists
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Ratnagiri%20and%20Sawantwadi/ratnagiri/capitals1_capitalists.html
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
}}</ref>
रत्नागिरीतील कुणबी समाजाच्या संदर्भात जमीनधारणा आणि कृषीव्यवस्थेतील स्थानानुसार आर्थिक स्थितीत फरक असल्याचे जमीन प्रशासनाच्या नोंदींमधूनही दिसते. काही कृषक वारसाहक्की हक्कांशी संबंधित होते, तर इतर कृषकांचे जमीन आणि महसूलव्यवस्थेशी संबंध वेगळ्या स्वरूपाचे होते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
त्यामुळे कुणबी समाजाला आर्थिकदृष्ट्या एकसमान समुदाय मानणे ऐतिहासिकदृष्ट्या योग्य ठरणार नाही. कोकणातील वेगवेगळ्या प्रदेशांमध्ये जमीन, शेती, बाजारपेठ, रोजगार आणि स्थानिक सामाजिक रचना यांतील फरकांमुळे कुणबी कुटुंबांच्या सामाजिक आणि आर्थिक स्थितीतही भिन्नता निर्माण झाली होती.
=== सावंतवाडीतील कुणबी सामाजिक रचना ===
सावंतवाडी आणि वेंगुर्ले परिसरातील कुणबींच्या सामाजिक रचनेचा अभ्यास करण्यासाठी १९६१ च्या जनगणनेअंतर्गत करण्यात आलेले कुंकेरी गावाचे सर्वेक्षण महत्त्वाचे ठरते. या सर्वेक्षणावर आधारित Village Survey Monographमध्ये कुणबी मराठ्यांची कुटुंबव्यवस्था, धार्मिक प्रथा, देवक, स्थानिक सामाजिक संबंध आणि ग्रामजीवनाचे विविध पैलू नोंदवण्यात आले आहेत.<ref name="Kunkeri1966"/>
या सर्वेक्षणात कदंब किंवा कळंब या देवकाचा उल्लेख आढळतो. काही कुटुंबांना त्यांच्या पूर्वीच्या देवकाची माहिती किंवा स्मृती उपलब्ध नसल्याचेही नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="Kunkeri1966"/>
या नोंदीवरून सामाजिक आणि सांस्कृतिक संस्था काळानुसार बदलू शकतात, तसेच काही परंपरांची स्मृती कमी होऊ शकते, असे दिसून येते. मात्र कुंकेरी गावातील या नोंदीवरून संपूर्ण सावंतवाडी किंवा कोकणातील सर्व कुणबी कुटुंबांमध्ये समान देवकपरंपरा होती असा निष्कर्ष काढता येत नाही.
=== सामाजिक परिवर्तन ===
विसाव्या शतकात शिक्षणाचा प्रसार, शहरीकरण, स्थलांतर, सरकारी प्रशासन, बाजारपेठांचा विस्तार, सुधारलेले दळणवळण आणि आधुनिक कायदे यांमुळे कुणबी समाजाच्या पारंपरिक सामाजिक आणि आर्थिक जीवनात बदल घडत गेले. रत्नागिरी आणि सावंतवाडीच्या गॅझेटियरमध्ये शिक्षण, दळणवळण, प्रशासन, व्यापार आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेतील बदलांचे वर्णन आढळते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
या परिवर्तनाचा परिणाम विवाहसंस्था, कुटुंबव्यवस्था, व्यवसाय, शिक्षण आणि सामाजिक संघटनांवर झाला. तथापि या बदलांचा वेग आणि स्वरूप प्रदेशानुसार वेगवेगळे होते. १९६१ च्या जनगणनेअंतर्गत करण्यात आलेल्या कुंकेरी गावाच्या सर्वेक्षणात कुटुंबव्यवस्था, व्यवसाय, सामाजिक जीवन आणि सांस्कृतिक परंपरांचा स्वतंत्र अभ्यास करण्यात आला आहे.<ref name="Kunkeri1966"/>
ग्रामीण भागातून मुंबई आणि इतर शहरी केंद्रांकडे होणाऱ्या स्थलांतरामुळे काही कुटुंबांच्या उत्पन्नाच्या स्रोतांमध्येही बदल झाला. १८८३ च्या कोलाबा गॅझेटियरमध्ये महाड आणि माणगाव परिसरातील काही कुणबी भात कापणीचा हंगाम संपल्यानंतर मुंबईकडे किंवा इतर रोजगाराच्या ठिकाणी जात असल्याचे नमूद केले आहे. काही जण हंगामी रोजगार करून पावसाळ्यापूर्वी आपल्या गावाकडे परतत असत. अशा रोजगारातून मिळणाऱ्या उत्पन्नाचा उपयोग बियाणे खरेदी आणि कुटुंबाच्या इतर गरजांसाठी केला जात असल्याचेही वर्णन आढळते.<ref name="KolabaPopulationCommunities">{{cite web
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Kolaba — Population and Communities
|publisher=Gazetteers Department, Government of Maharashtra
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Kolaba%20District/population_communities.html
}}</ref>
त्याच गॅझेटियरमध्ये काही कुणबी लष्कर, पोलीस आणि इतर सरकारी सेवांमध्ये प्रवेश करीत असल्याचेही नमूद केले आहे. मुंबईत रोजगार करणारे काही कुणबी आपल्या मूळ गावातील नातेवाईकांना पैसे पाठवत आणि गावातील जमीन व शेतीशी संबंध कायम ठेवत असल्याचे वर्णन आढळते.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
या प्रक्रियेमुळे काही कुटुंबांनी शेती कायम ठेवून शहरी किंवा हंगामी रोजगार स्वीकारला, तर काही कुटुंबांचे उत्पन्न हळूहळू शेतीबाहेरील रोजगाराशी अधिक जोडले गेले. ग्रामीण शेती आणि शहरी रोजगार यांच्यातील हा संबंध पुढील काळात कोकणातील सामाजिक आणि आर्थिक परिवर्तनाचा एक महत्त्वाचा घटक ठरला.
मात्र हा बदल सर्व कुणबी कुटुंबांमध्ये समान प्रमाणात झाला असे मानता येत नाही. १८८३चा गॅझेटियर विशेषतः ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्यातील महाड आणि माणगाव परिसरातील नोंदी देतो. त्यामुळे त्या नोंदींचा उपयोग संबंधित प्रदेशातील कुणबींच्या स्थलांतर आणि रोजगारपद्धतीचा पुरावा म्हणून करणे योग्य आहे; परंतु त्यावरून संपूर्ण कोकणातील कुणबी समाजाच्या स्थलांतराचे सार्वत्रिक स्वरूप निश्चित करता येत नाही.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
कोकणातील ग्रामीण सामाजिक परिवर्तन समजून घेताना शेती, कुटुंब, स्थानिक परंपरा, स्थलांतर आणि बाहेरील रोजगार यांचा परस्परसंबंधही महत्त्वाचा ठरतो. रत्नागिरीतील ग्रामीण जीवनाच्या संदर्भातील स्थानिक ऐतिहासिक आणि सांस्कृतिक नोंदी या व्यापक परिवर्तनाला पूरक संदर्भ देतात.<ref name="घोलम2025" />
=== आधुनिक काळातील सामाजिक ओळख ===
आधुनिक काळात कुणबी समाजाची सामाजिक ओळख पारंपरिक कुळ, देवक, ग्रामजीवन आणि कृषी व्यवसायापुरती मर्यादित राहिलेली नाही. शिक्षणाचा प्रसार, शहरीकरण, विविध व्यवसायांचा स्वीकार, स्थलांतर आणि सामाजिक संस्थांमधील सहभाग यांमुळे समुदायाच्या सामाजिक आणि आर्थिक रचनेत काळानुसार बदल झाले. महाराष्ट्रातील विविध सामाजिक समूहांच्या अधिकृत अभ्यासांमध्येही पारंपरिक सामाजिक आणि आर्थिक रचनेतील या परिवर्तनाचा विचार करण्यात आला आहे.<ref name="MajorCastesTribes"/>
या परिवर्तनामुळे पारंपरिक सामाजिक संस्था पूर्णपणे नष्ट झाल्या असे मानता येत नाही. काही कुटुंबांमध्ये कुळ, देवक, ग्रामदेवता आणि पारंपरिक विवाहनियम आजही सामाजिक आणि सांस्कृतिक ओळखीचा भाग असू शकतात; मात्र त्यांचे स्वरूप प्रदेश, कुटुंब आणि पिढीनुसार बदलू शकते. सावंतवाडी–वेंगुर्ले परिसरातील कुंकेरी गावाच्या सर्वेक्षणात कुणबी मराठा समाजातील देवक आणि संबंधित सामाजिक परंपरांच्या स्थानिक नोंदी करण्यात आल्या आहेत.<ref name="Kunkeri1966"/>
आधुनिक सामाजिक ओळखीच्या निर्मितीत पारंपरिक कृषी व्यवसायाबरोबर शिक्षण, शहरी रोजगार, स्थलांतर आणि आधुनिक सामाजिक व आर्थिक संस्थांचाही प्रभाव पडला आहे. ग्रामीण जीवन आणि शहरी रोजगार यांच्यातील वाढत्या संबंधामुळे काही कुटुंबांच्या उपजीविकेच्या पद्धतींमध्येही बदल झाले. कोकणातील ग्रामीण जीवन, शेती, स्थलांतर आणि बदलत्या सामाजिक संबंधांचा अभ्यास करताना या प्रक्रियांचा परस्परसंबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="घोलम2025" />
तथापि उपलब्ध ऐतिहासिक आणि सामाजिक अभ्यासांवरून आधुनिक कुणबी समाजातील सामाजिक परिवर्तनाचे एकसमान स्वरूप निश्चित करता येत नाही. प्रदेश, आर्थिक स्थिती, कुटुंबाची पार्श्वभूमी, शिक्षण आणि स्थलांतराचा अनुभव यांनुसार सामाजिक परिवर्तनाचे स्वरूप वेगवेगळे असू शकते.
=== सामाजिक रचनेच्या अभ्यासाच्या मर्यादा ===
कुणबी समाजाच्या सामाजिक रचनेविषयी उपलब्ध गॅझेटियर, जनगणना आणि मानववंशशास्त्रीय स्रोत हे त्यांच्या-त्यांच्या काळातील निरीक्षणे आणि अभ्यासपद्धतींवर आधारित आहेत. ब्रिटिशकालीन गॅझेटियर हे प्रामुख्याने प्रशासकीय स्वरूपाचे स्रोत असून त्यामध्ये लोकसंख्या, जमीन, शेती, व्यवसाय, सामाजिक समूह आणि स्थानिक संस्थांविषयी माहिती संकलित करण्यात आली होती.<ref name="RatnagiriGeneralIntroduction">{{cite web
|title=Ratnagiri Gazetteer — General Introduction
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/RATNAGIRI/general_intro.html
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ब्रिटिशकालीन अधिकाऱ्यांनी केलेली जातीय आणि सामाजिक वर्णने तत्कालीन प्रशासकीय दृष्टिकोनातून तयार झाली असल्यामुळे त्यातील प्रत्येक सामाजिक प्रथा संपूर्ण कुणबी समाजाला किंवा संपूर्ण कोकण प्रदेशाला लागू होती असे मानता येत नाही. उदाहरणार्थ, १८८३ च्या कोलाबा गॅझेटियरमध्ये महाड आणि माणगाव परिसरातील काही कुणबींच्या हंगामी स्थलांतराची नोंद आढळते. ही नोंद त्या विशिष्ट प्रदेशातील सामाजिक आणि आर्थिक परिस्थितीचा पुरावा म्हणून महत्त्वाची आहे; मात्र तिच्यावरून संपूर्ण कोकणातील कुणबी समाजाच्या स्थलांतराचे सार्वत्रिक स्वरूप निश्चित करता येत नाही.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
तसेच १९व्या शतकातील कुणबी या सामाजिक किंवा प्रशासकीय संज्ञेची व्याप्ती आणि आधुनिक काळातील कुणबी सामाजिक ओळख यांच्यात थेट समानता गृहीत धरता येत नाही. ऐतिहासिक वर्गीकरणाचा अभ्यास करताना त्या काळातील प्रशासकीय सीमा, जनगणनेची पद्धत, स्थानिक सामाजिक ओळख आणि संबंधित प्रदेशात वापरल्या गेलेल्या संज्ञा यांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे.
सामाजिक रचनेचा ऐतिहासिक अभ्यास करताना गॅझेटियर, जनगणना, गाव-सर्वेक्षण मोनोग्राफ, जमीन व महसूल नोंदी, भाषिक अभ्यास आणि आधुनिक मानववंशशास्त्रीय संशोधन यांची तुलनात्मक चिकित्सा अधिक उपयुक्त ठरते. १९६१ च्या जनगणनेअंतर्गत कुंकेरी गावाचे स्वतंत्र सर्वेक्षण करण्यात आले होते. त्यामध्ये कुटुंब, व्यवसाय, आर्थिक स्थिती, सामाजिक जीवन आणि सांस्कृतिक जीवन यांची माहिती संकलित करण्यात आली होती.<ref name="Kunkeri1966"/>
या सर्व स्रोतांचा वापर करताना वर्णनात्मक माहिती, प्रशासकीय वर्गीकरण आणि त्यातून काढले जाणारे ऐतिहासिक निष्कर्ष यांच्यात स्पष्ट भेद ठेवणे आवश्यक आहे. अशा तुलनात्मक पद्धतीमुळे कुणबी समाजाच्या सामाजिक रचनेतील सातत्य आणि परिवर्तन यांचा अधिक संतुलित आणि पुराव्याधारित अभ्यास करता येतो.
=== सामाजिक रचनेचे ऐतिहासिक महत्त्व ===
कोकणातील कुणबी समाजाची पारंपरिक सामाजिक रचना कुटुंब, कुळ, देवक, विवाह आणि ग्रामजीवन या परस्परसंबंधित संस्थांशी जोडलेली होती. कृषीप्रधान अर्थव्यवस्थेमुळे कुटुंब, जमीन आणि उपजीविका यांचे परस्परसंबंध सामाजिक जीवनात महत्त्वाचे होते. रत्नागिरी आणि ऐतिहासिक कोलाबा प्रदेशाच्या गॅझेटियरमध्ये कुणबींच्या कृषी जीवनासोबत जमीनधारणा, रोजगार आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेशी संबंधित सामाजिक-आर्थिक परिस्थितीची नोंद आढळते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/><ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
कुळ आणि देवक यांसारख्या सामाजिक संस्थांचा अभ्यास करताना स्थानिक आणि प्रत्यक्ष क्षेत्रीय नोंदींना विशेष महत्त्व प्राप्त होते. सावंतवाडी परिसरातील कुंकेरी गावाच्या १९६१ च्या ग्रामसर्वेक्षणात कुणबी मराठा समाजाच्या सामाजिक, धार्मिक आणि सांस्कृतिक जीवनाचे स्वतंत्र दस्तऐवजीकरण करण्यात आले होते.<ref name="Kunkeri1966"/>
काळानुसार जमीनव्यवस्था, स्थलांतर, शिक्षण, शहरीकरण, रोजगाराच्या बदलत्या संधी आणि आधुनिक कायदे यांचा पारंपरिक सामाजिक संस्थांवर परिणाम झाला. महाड आणि माणगाव परिसरातील काही कुणबी कृषक भात कापणीचा हंगाम संपल्यानंतर मुंबईकडे किंवा इतर रोजगाराच्या ठिकाणी जात असल्याची १८८३ च्या कोलाबा गॅझेटियरमधील नोंद या ग्रामीण-नागरी संबंधांच्या ऐतिहासिक प्रक्रियेचे उदाहरण आहे. काही जण हंगामी रोजगारानंतर पावसाळ्यापूर्वी गावाकडे परतत असल्याचेही त्यात नमूद केले आहे.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
या प्रक्रियांमुळे कोकणातील कुणबी समाजाच्या सामाजिक जीवनात ग्रामीण शेती, हंगामी किंवा कायमस्वरूपी स्थलांतर, शहरी रोजगार आणि बदलत्या आर्थिक संबंधांचे परस्परसंघटन दिसून येते. काही कुटुंबांनी पारंपरिक शेतीशी संबंध कायम ठेवून बाहेरील रोजगार स्वीकारला, तर काहींच्या उपजीविकेचे स्वरूप कालांतराने अधिक वैविध्यपूर्ण झाले. तथापि हा बदल सर्व कुणबी कुटुंबांमध्ये किंवा सर्व कोकणी प्रदेशांत समान प्रमाणात झाला असे मानता येत नाही.
कोकणातील कुणबी समाजाच्या सामाजिक इतिहासाचा अभ्यास करताना ऐतिहासिक गॅझेटियर, जनगणना नोंदी, ग्रामसर्वेक्षण मोनोग्राफ, जमीन व महसूलविषयक अभिलेख, भाषिक अभ्यास आणि आधुनिक मानववंशशास्त्रीय संशोधन यांचा परस्परपूरक वापर आवश्यक ठरतो.<ref name="MajorCastesTribes"/>
या स्रोतांच्या तुलनात्मक अभ्यासातून कुणबी समाजातील पारंपरिक सामाजिक संस्था, कृषीआधारित जीवनपद्धती, प्रादेशिक विविधता आणि कालानुसार झालेले सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन यांचा अधिक संतुलित आणि पुराव्याधारित अभ्यास करता येतो.<ref name="घोलम2025" />
=== शेती, जमीन आणि अर्थव्यवस्था ===
कोकणातील कुणबी समाजाच्या पारंपरिक सामाजिक आणि आर्थिक जीवनात शेतीला महत्त्वाचे स्थान होते. रत्नागिरीच्या ऐतिहासिक जमीनव्यवस्थेच्या नोंदींमध्ये कुणबींचा वारसाहक्की कृषकांच्या संदर्भात उल्लेख आढळतो. काही कृषक विशिष्ट जमीनहिस्से पिढ्यान्पिढ्या कसत असल्याचे तसेच जमीनमोजणी, जमिनीचे वर्गीकरण आणि महसूलव्यवस्था यांचा कृषी उत्पादनाशी संबंध असल्याचे ब्रिटिशकालीन नोंदींमधून दिसून येते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
कोकणातील कृषीव्यवस्था भौगोलिक परिस्थितीशी जवळून संबंधित होती. डोंगराळ भूभाग, अरुंद सपाट प्रदेश, नद्या, खाड्या आणि मान्सूनच्या पावसामुळे भातशेतीला विशेष महत्त्व प्राप्त झाले. रत्नागिरीच्या जमीनव्यवस्थेच्या नोंदींमध्ये भातजमिनींचे विविध प्रकार नोंदवले असून, उंचसखल जमिनींवर वेगवेगळ्या पिकांची लागवड केली जात असल्याचे वर्णन आहे. काही भागांत खाडी किंवा किनारी प्रदेशातील पाण्याचे नियमन करून भातखाचरे आणि बागायती जमीन विकसित करण्यात आली होती.<ref name="RatnagiriLandCaptain">{{cite web
|title=Ratnagiri Gazetteer — Land Administration
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Ratnagiri%20and%20Sawantwadi/ratnagiri/land1_captain.html
}}</ref>
कृषी उत्पादनाच्या पद्धती जमिनीचा प्रकार, पाण्याची उपलब्धता आणि स्थानिक हवामान यांनुसार बदलत होत्या. रत्नागिरीच्या नंतरच्या कृषी नोंदींमध्ये भात, नाचणी, वरी, हरिक आणि इतर पिकांसाठी स्वतंत्र जमीनवापर पद्धतींचा उल्लेख आहे. काही वर्खस जमिनींमध्ये जमिनीची सुपीकता टिकवण्यासाठी विशिष्ट कालावधीसाठी जमीन पडीत ठेवण्याची पद्धतीही आढळते.<ref name="RatnagiriCropRotation">{{cite web
|title=Ratnagiri Gazetteer — Crop Rotation
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/RATNAGIRI/agri_crop.html
}}</ref>
=== भातशेती ===
भात हे कोकणातील प्रमुख अन्नधान्य पीक होते. रत्नागिरी जिल्ह्यात १९५५–५६मध्ये अन्नपिकांखालील क्षेत्रापैकी सुमारे ९० टक्के क्षेत्र धान्यपिकांखाली होते. या धान्यपिकांमध्ये भाताला प्रमुख स्थान होते. त्याच वर्षाच्या तालुकानिहाय आकडेवारीत रत्नागिरी जिल्ह्यातील विविध तालुक्यांमध्ये भाताबरोबर नाचणी, कोद्रा, वरी आणि इतर धान्यांचे उत्पादन नोंदवले आहे.<ref name="RatnagiriCereals">{{cite web
|title=Ratnagiri Gazetteer — Cereals
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/RATNAGIRI/agri_cereals.html
}}</ref>
रत्नागिरीतील भातशेतीचे स्वरूप जमिनीच्या उंची, पाण्याची उपलब्धता आणि सिंचनाच्या साधनांनुसार बदलत होते. पावसाळी हंगामातील भाताबरोबरच काही भागांत बारमाही नाले किंवा विहिरींमधून सिंचनाची सुविधा उपलब्ध असल्यास उन्हाळी हंगामातही भात घेतला जात असे. या पिकाला स्थानिक पातळीवर वायंगण भात म्हटले जात असे. सावंतवाडी, कुडाळ आणि मालवण हे वायंगण भाताच्या उत्पादनाचे महत्त्वाचे प्रदेश असल्याची नोंद गॅझेटियरमध्ये आहे.<ref name="RatnagiriCereals"/>
वायंगण भातासाठी शेतात पाणी धरून ठेवण्यासाठी बांधबंदिस्ती करणे, जमीन नांगरून चिखलयुक्त करणे आणि उपलब्ध सिंचनपाण्याचे नियोजन करणे आवश्यक असे. त्यामुळे या प्रकारच्या भातशेतीत जमिनीची रचना, पाण्याचे व्यवस्थापन आणि कृषकांचे स्थानिक ज्ञान यांना विशेष महत्त्व होते.<ref name="RatnagiriCereals"/>
ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्यातही भात हे प्रमुख पीक होते. उपलब्ध गॅझेटियर नोंदीनुसार १९५८–५९मध्ये कोलाबा जिल्ह्यात मोठ्या क्षेत्रावर भाताची लागवड करण्यात आली होती. अलिबाग, पनवेल, माणगाव, महाड, रोहा आणि कर्जत या प्रदेशांमध्ये भात उत्पादनाचे महत्त्व होते.<ref name="KolabaCereals">{{cite web
|title=Kolaba Gazetteer — Cereals
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/KOLABA/agri_cereals.html
}}</ref>
भातशेतीमुळे कुणबी समाजाच्या ग्रामीण जीवनावरही परिणाम झाला. पेरणी, रोपलागवड, निंदणी, कापणी, मळणी आणि धान्यसाठवण या कृषी प्रक्रियांभोवती ग्रामीण कुटुंबांचे वार्षिक कामाचे चक्र मोठ्या प्रमाणावर संघटित होत असे. कृषी उत्पादन हे केवळ अन्नाचा स्रोत नसून कुटुंबाच्या आर्थिक स्थिती, पशुधन, स्थानिक देवाणघेवाण आणि बाजारपेठेशी असलेल्या संबंधांशीही जोडलेले होते.<ref name="घोलम2025" />
तथापि कोकणातील सर्व कुणबी कुटुंबांची कृषीपद्धती किंवा आर्थिक स्थिती समान होती असे मानता येत नाही. जमीनधारणा, जमिनीचा प्रकार, सिंचनाची उपलब्धता, उत्पादनाचे प्रमाण, कुटुंबातील मनुष्यबळ आणि बाहेरील रोजगाराच्या संधी यांनुसार कृषीजीवनाचे स्वरूप बदलत होते. त्यामुळे कुणबी समाजाच्या आर्थिक इतिहासाचा अभ्यास करताना शेतीबरोबर जमीनव्यवस्था, ग्रामीण रोजगार आणि स्थलांतर या घटकांचाही विचार करणे आवश्यक आहे.
=== नाचणी आणि इतर धान्ये ===
भाताबरोबर नाचणी किंवा रागी हे कोकणातील महत्त्वाचे धान्यपीक होते. रत्नागिरीच्या कृषी नोंदींमध्ये नाचणीचा भातानंतरच्या प्रमुख धान्यपिकांमध्ये समावेश करण्यात आला आहे. १९५५–५६ च्या आकडेवारीनुसार रत्नागिरी जिल्ह्यात नाचणीची लागवड मोठ्या क्षेत्रावर केली जात होती. चिपळूण, दापोली, संगमेश्वर, राजापूर, खेड आणि गुहागर या तालुक्यांमध्ये नाचणीचे उत्पादन विशेष उल्लेखनीय असल्याची नोंद गॅझेटियरमध्ये आढळते.<ref name="RatnagiriCereals"/>
नाचणीची लागवड प्रामुख्याने डोंगराळ, उंचसखल आणि तुलनेने कमी पाण्याच्या उपलब्धतेच्या प्रदेशांशी संबंधित होती. त्यामुळे कोकणातील भातखाचरांबरोबरच वर्खस आणि डोंगराळ जमिनींच्या कृषी अर्थव्यवस्थेत नाचणीला महत्त्वाचे स्थान होते. कुणबी समाजाच्या पारंपरिक कृषीजीवनात भाताबरोबर नाचणी, वरी आणि इतर स्थानिक धान्यांचा उपयोग अन्नधान्याच्या गरजा पूर्ण करण्यासाठी केला जात असे.<ref name="घोलम2025" />
ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्यातही भाताबरोबर नाचणी, वरी आणि कोद्रा यांसारख्या धान्यांची लागवड केली जात होती. जिल्ह्याच्या कृषी नोंदींमध्ये भात आणि नाचणी या दोन्ही पिकांना महत्त्वाचे स्थान असल्याचे दिसून येते. महाड, माणगाव आणि इतर अंतर्गत प्रदेशांतील भौगोलिक परिस्थितीनुसार विविध धान्यपिकांची लागवड केली जात असल्याचे कृषीविषयक नोंदींमधून स्पष्ट होते.<ref name="KolabaCereals"/>
=== कडधान्ये ===
भातशेतीनंतर उपलब्ध होणाऱ्या जमिनीचा उपयोग काही प्रदेशांत कडधान्यांच्या लागवडीसाठी केला जात असे. ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्याच्या कृषी नोंदींमध्ये वाल, उडीद आणि हरभरा यांसारख्या कडधान्यांचा उल्लेख आढळतो. काही ठिकाणी ही पिके भातानंतरच्या हंगामात घेतली जात असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद केले आहे.<ref name="KolabaPulses">{{cite web
|title=Kolaba Gazetteer — Pulses
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/KOLABA/agri_pulses.html
}}</ref>
कडधान्यांच्या लागवडीमुळे भातावर मोठ्या प्रमाणावर अवलंबून असलेल्या कृषी अर्थव्यवस्थेत पिकांची विविधता निर्माण होत होती. जमिनीचा प्रकार, उपलब्ध ओलावा, हंगाम आणि स्थानिक कृषीपद्धती यांनुसार कडधान्यांची लागवड केली जात असे. काही भागांत भात कापणीनंतर त्याच जमिनीवर पुढील पीक घेतले जात असल्याचे कृषी नोंदींवरून दिसून येते.<ref name="KolabaPulses"/>
या पिकांच्या विविधतेचा संबंध ग्रामीण कुटुंबांच्या अन्नसुरक्षा आणि कृषी अर्थव्यवस्थेशीही होता. भात हे प्रमुख अन्नधान्य असले तरी नाचणी, वरी, कडधान्ये आणि इतर स्थानिक पिकांमुळे कुटुंबांच्या अन्नधान्याच्या गरजांमध्ये विविधता निर्माण होत असे. त्यामुळे कोकणातील कृषीजीवन केवळ भातशेतीपुरते मर्यादित न राहता विविध पिकांच्या हंगामी चक्रावर आधारित होते.
=== नारळ आणि सुपारी ===
कोकणातील किनारी हवामान आणि उपलब्ध पाणीस्रोतांमुळे नारळाच्या बागांना कृषी अर्थव्यवस्थेत महत्त्व प्राप्त झाले. ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्याच्या कृषी नोंदींनुसार समुद्रकिनारी आणि किनारी प्रदेशांमध्ये नारळाची लागवड मोठ्या प्रमाणावर केली जात होती. काही भागांतील बागायती अर्थव्यवस्थेत नारळाला महत्त्वाचे स्थान होते.<ref name="KolabaCroppedArea">{{cite web
|title=Kolaba Gazetteer — Cropped Area
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/KOLABA/agri_cropped_area.html
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रत्नागिरीतील नारळबागांच्या संदर्भात विहिरीच्या पाण्याचा सिंचनासाठी उपयोग केला जात असल्याची नोंद कृषीविषयक स्रोतांमध्ये आढळते. हिवाळा आणि उन्हाळ्याच्या काळात नारळाच्या झाडांना पुरेसे पाणी उपलब्ध करून देणे आवश्यक असल्याचेही या नोंदींमध्ये नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="RatnagiriOilSeeds">{{cite web
|title=Ratnagiri Gazetteer — Oil Seeds
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/RATNAGIRI/agri_oil%20seeds.html
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नारळाबरोबर सुपारी आणि इतर बागायती पिकेही किनारी कोकणातील कृषी उत्पादनाच्या विविधतेचा भाग होती. या बागायती पिकांचा उपयोग स्थानिक उपभोगाबरोबरच बाजारपेठीय देवाणघेवाणीतही होत असे. तथापि उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतांवरून ही सर्व बागायती पिके विशेषतः कुणबी समाजाच्या मालकीची होती असा सर्वसाधारण निष्कर्ष काढता येत नाही. त्यामुळे या पिकांचा विचार कोकणातील व्यापक कृषी अर्थव्यवस्थेच्या संदर्भात करणे अधिक योग्य ठरते.
=== आंबा, काजू आणि कोकम ===
आंबा, काजू आणि कोकम यांसारख्या बागायती उत्पादनांना पुढील काळात कोकणाच्या कृषी अर्थव्यवस्थेत महत्त्व प्राप्त झाले. या पिकांचा विस्तार, उत्पादनाची बाजारपेठ, प्रक्रिया आणि वाहतूक यांचा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेवर परिणाम झाला. विशेषतः कोकणातील बागायती शेतीच्या विकासाचा विचार करताना आंबा, काजू आणि कोकम यांसारख्या पिकांचा स्वतंत्रपणे अभ्यास करता येतो.
मात्र या लेखाच्या ऐतिहासिक संदर्भात आंबा, काजू किंवा कोकमाची लागवड प्राचीन काळापासून कुणबी समाजाची विशिष्ट शेती होती असा निष्कर्ष उपलब्ध पुराव्यांच्या आधारे काढता येत नाही. या पिकांना कोकणातील व्यापक बागायती, कृषीविविधता आणि बाजाराभिमुख ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या विकासाच्या संदर्भात मांडणे अधिक योग्य आहे.
कोकणातील बागायती शेतीचा सामाजिक इतिहास समजून घेताना जमीनधारणा, कुटुंबाची आर्थिक क्षमता, पाण्याची उपलब्धता, बाजारपेठेशी संपर्क आणि कृषी उत्पादनातील बदल या घटकांचा विचार करणे आवश्यक आहे. त्यामुळे बागायती पिकांचा इतिहास हा केवळ एखाद्या एका सामाजिक समुदायाचा इतिहास न राहता संपूर्ण कोकणी ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या परिवर्तनाशी संबंधित ठरतो.
=== पशुधन आणि शेती ===
पारंपरिक कोकणी शेतीमध्ये पशुधनाचा कृषी उत्पादनाशी घनिष्ठ संबंध होता. नांगरणी, वाहतूक, मळणी आणि इतर श्रमप्रधान कृषी कामांसाठी बैलांचा उपयोग केला जात असे. बैल, गायी आणि म्हशी यांसारखे पशुधन ग्रामीण कुटुंबांच्या आर्थिक जीवनाचा तसेच कृषी उत्पादनाच्या साधनांचा एक भाग होते.
कोलाबा जिल्ह्यातील कुणबी कृषकांच्या वर्णनात बैलजोडी, गाय किंवा म्हैस तसेच शेतीची विविध अवजारे यांचा उल्लेख आढळतो. यावरून पशुधन आणि शेतीची साधने ही कृषक कुटुंबाच्या उत्पादनक्षमतेशी संबंधित महत्त्वाची साधने होती असे दिसून येते.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
रत्नागिरीतील ऐतिहासिक कृषी व्यवस्थेच्या वर्णनांमध्ये शेतीकामात कुटुंबातील विविध सदस्यांचा सहभाग असल्याचे आढळते. कृषीप्रधान कुटुंबव्यवस्थेत पुरुषांबरोबर स्त्रिया आणि मुलेही काही श्रमप्रधान शेतीकामांत सहभागी होत असल्याच्या नोंदी आहेत.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
पशुधनाचा उपयोग केवळ शेतीच्या प्रत्यक्ष कामांसाठी होत नव्हता. दूध, शेणखत आणि वाहतूक यांसारख्या माध्यमांतूनही त्याचा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेला उपयोग होत असे. त्यामुळे पारंपरिक कोकणी कृषीव्यवस्थेत जमीन, मनुष्यबळ, पशुधन आणि कृषी साधने हे परस्परावलंबी घटक होते.
कुणबी समाजाच्या संदर्भात पशुधनाचे महत्त्व मांडताना मात्र आर्थिक स्थितीनुसार कुटुंबांच्या पशुधनाच्या संख्येत आणि प्रकारात फरक असू शकत होता, हे लक्षात घेणे आवश्यक आहे. त्यामुळे प्रत्येक कुणबी कुटुंबाकडे समान प्रमाणात पशुधन किंवा कृषी साधने होती असे मानता येत नाही.
=== जलव्यवस्था आणि सिंचन ===
कोकणातील कृषीव्यवस्था प्रामुख्याने मान्सूनच्या पावसावर अवलंबून असली तरी भातशेतीसाठी स्थानिक जलसंधारण आणि सिंचन पद्धतींचाही उपयोग केला जात होता. रत्नागिरीच्या कृषी नोंदींमध्ये भातखाचरांमध्ये बांध घालून पाणी साठवणे, जमिनीत पाणी टिकवून ठेवणे आणि उपलब्ध पाण्याचा नियंत्रित वापर करणे यांचा उल्लेख आढळतो.<ref name="RatnagiriCereals"/>
उन्हाळी किंवा वायंगण भातासाठी विहिरी, बारमाही नाले आणि बांधबंदिस्त शेतांचा उपयोग केला जात असल्याचीही नोंद आहे. पाणी शेतात टिकवून ठेवण्यासाठी शेतांचे विभाग करून बांध तयार केले जात आणि उपलब्ध पाण्यानुसार सिंचन केले जात असे.<ref name="RatnagiriCereals"/>
या प्रकारच्या जलव्यवस्थेमुळे पावसाळ्यानंतरही काही भागांत कृषी उत्पादन सुरू ठेवणे शक्य होत असे. त्यामुळे कोकणातील शेतीमध्ये पाऊस, जमीन, जलसंधारण, बांधबंदिस्ती आणि स्थानिक सिंचनपद्धती यांचा परस्परसंबंध महत्त्वाचा होता.
ब्रिटिशकालीन कृषी प्रशासनात विहिरी, तलाव, सिंचन, जलनिचरा, जमीन सुधारणा आणि पुनर्वसन यांसाठी आर्थिक सहाय्याच्या योजना विकसित करण्यात आल्या. रत्नागिरीच्या नोंदींमध्ये जमीन सुधारणा कर्जांच्या अंतर्गत विहिरी, तलाव, सिंचन, जलनिचरा आणि जमीन सुधारणा यांसाठी कर्जाची तरतूद करण्यात आल्याचे नमूद आहे.<ref name="RatnagiriStateAidAgriculture">{{cite web
|title=Ratnagiri Gazetteer — State Aid to Agriculture
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/RATNAGIRI/finance_state_agri.html
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या जलव्यवस्थेचा कुणबी समाजाशी संबंध पाहताना एक महत्त्वाची बाब लक्षात घ्यावी लागते. कुणबी हे कोकणातील महत्त्वाचे कृषक समुदाय असले तरी जलव्यवस्था किंवा सिंचनपद्धती केवळ कुणबी समाजापुरती मर्यादित नव्हती. त्यामुळे या पद्धतींचा अभ्यास व्यापक कोकणी कृषी अर्थव्यवस्थेच्या संदर्भात करणे अधिक योग्य ठरते.
=== जमीनधारणा आणि कृषक हक्क ===
कोकणातील कुणबी समाजाचा सामाजिक आणि आर्थिक इतिहास समजून घेण्यासाठी जमीनधारणा हा महत्त्वाचा घटक आहे. रत्नागिरीच्या जमीन प्रशासनाच्या नोंदींमध्ये कुणबींची वारसाहक्की कृषकांमध्ये मोठ्या संख्येने उपस्थिती असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. काही कुणबी कुटुंबे निश्चित जमीनहिस्सा कसत असून त्या जमिनीवरील कृषी कामकाजाशी त्यांचे दीर्घकालीन संबंध असल्याचे या नोंदींवरून दिसते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
रत्नागिरीतील खोती व्यवस्थेच्या संदर्भात काही कुणबी आणि इतर कृषक कर्दे किंवा भाडेकरू म्हणून जमीन कसत असल्याच्या नोंदी आढळतात. गॅझेटियरमधील वर्णनानुसार अशा कृषकांना त्यांच्या पारंपरिक जमीनहिस्स्याशी संबंधित काही दीर्घकालीन हक्क प्राप्त होते आणि ठरावीक परिस्थिती व कायदेशीर चौकट वगळता त्यांना सहजपणे बेदखल करता येत नसे.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
याउलट धारेकरी हा राज्याकडून थेट जमीनधारणा करणारा कृषक होता. रत्नागिरीच्या गॅझेटियरमधील जमीन प्रशासनाच्या वर्णनानुसार धारेकऱ्याला आपल्या धारण केलेल्या जमिनीबाबत वारसाहक्क, हस्तांतरण आणि गहाण ठेवण्यासंबंधी काही अधिकार होते; हे अधिकार राज्याच्या महसुली मागणीच्या अधीन होते.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/>
या जमीनव्यवस्थेमुळे कोकणातील कृषक समाजात जमीनधारणेचे विविध स्तर निर्माण झाले होते. जमीनधारक कृषक, भाडेकरू आणि इतर प्रकारचे शेती करणारे घटक यांची आर्थिक आणि सामाजिक स्थिती समान नव्हती. त्यामुळे कुणबी समाजाला केवळ एकसमान जमीनधारक किंवा समान आर्थिक स्थिती असलेला कृषक समुदाय म्हणून पाहणे ऐतिहासिकदृष्ट्या अचूक ठरणार नाही.
जमीन, पाणी आणि कृषी उत्पादन यांच्यातील संबंधामुळे जमीनधारणेचा परिणाम कुणबी कुटुंबांच्या आर्थिक स्थितीवरही होत होता. सुपीक जमीन, सिंचनाची उपलब्धता, जमीनहिस्सा, कृषी उत्पादन आणि बाजारपेठेशी संपर्क या घटकांनुसार कुटुंबांच्या आर्थिक परिस्थितीत फरक पडत असे. म्हणून कोकणातील कुणबी समाजाचा आर्थिक इतिहास समजून घेताना जमीनधारणा आणि स्थानिक जमीनव्यवस्थेचा स्वतंत्र विचार करणे आवश्यक आहे.
=== कृषी मजुरी ===
कोकणातील कृषी अर्थव्यवस्थेत स्वतःची जमीन कसणारे कृषक, भाडेकरू, कुटुंबीय श्रमिक आणि कृषी मजूर असे विविध घटक कार्यरत होते. रत्नागिरीच्या ऐतिहासिक नोंदींनुसार कृषी हंगामातील मजुरीवर ग्रामीण कामगारांच्या उत्पन्नाचा काही भाग अवलंबून असे. शेतीतील कामाचा हंगाम संपल्यानंतर वर्षातील उर्वरित काळात रोजगाराच्या शोधासाठी काही कामगारांना इतर प्रदेशांकडे जावे लागत असे.<ref name="RatnagiriCapitalLabour">{{cite web
|title=Gazetteer of the Bombay Presidency: Ratnagiri and Savantvadi — Capital and Labour
|publisher=Government of Maharashtra, Gazetteers Department
|url=https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Ratnagiri%20and%20Sawantwadi/ratnagiri/capitals1_capitalists.html
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१८५१ च्या कृषी व जमीन प्रशासनासंबंधीच्या नोंदींमध्ये ग्रामीण लोकसंख्येतील मोठ्या घटकाला स्थानिक शेतीतून वर्षभर पुरेसे उत्पन्न मिळत नसल्यामुळे हंगामी रोजगारासाठी बाहेर जावे लागत असल्याचे नमूद आहे. या नोंदीनुसार काही मजूर नोव्हेंबरच्या सुमारास मुंबई आणि आसपासच्या प्रदेशांकडे रोजगारासाठी जात आणि पावसाळा सुरू होण्यापूर्वी आपल्या गावाकडे परतत असत.<ref name="RatnagiriLandCaptain"/>
हंगामी स्थलांतरामुळे ग्रामीण कुटुंबांच्या उत्पन्नाचे स्रोत केवळ शेतीपुरते मर्यादित राहत नसत. शेतीचा हंगाम, उपलब्ध जमीन, स्थानिक रोजगार आणि बाहेरील प्रदेशातील मजुरीच्या संधी यांचा कुटुंबांच्या आर्थिक स्थितीवर परिणाम होत असे. या प्रक्रियेचा परिणाम कुणबींसह कोकणातील इतर कृषक आणि ग्रामीण समुदायांवरही झाला. मात्र उपलब्ध ऐतिहासिक नोंदींवरून हा नमुना सर्व कुणबी कुटुंबांना समान प्रमाणात लागू होता असे म्हणता येत नाही.
=== बाजारपेठ आणि कृषी उत्पादन ===
कोकणातील कृषी अर्थव्यवस्था स्थानिक बाजारपेठांबरोबरच जिल्ह्याबाहेरील व्यापार आणि वाहतुकीशीही जोडलेली होती. रत्नागिरीच्या गॅझेटियरमधील नोंदीनुसार काही काळ जिल्ह्यातील स्थानिक कृषी उत्पादन लोकसंख्येच्या गरजा पूर्ण करण्यासाठी अपुरे पडत असल्यामुळे बाहेरील प्रदेशांतून धान्य आणावे लागत असे.<ref name="RatnagiriCapitalLabour"/>
वाहतुकीची साधने मर्यादित असलेल्या काळात ग्रामीण भागातून कृषी उत्पादन बाजारपेठांपर्यंत पोहोचवणे हे एक महत्त्वाचे आव्हान होते. १८५१ च्या नोंदींमध्ये काही भागांत कृषी उत्पादन मानवी वाहतुकीद्वारे बाजारपेठेत नेले जात असल्याचे वर्णन आढळते. त्यामुळे वाहतूकव्यवस्था आणि बाजारपेठेपर्यंत पोहोचण्याची क्षमता यांचा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेवर थेट परिणाम होत असे.<ref name="RatnagiriLandCaptain"/>
ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्यातील कृषी अर्थव्यवस्थेतही अन्नपिकांना महत्त्वाचे स्थान होते. १९५८–५९ च्या कृषी नोंदीनुसार जिल्ह्याच्या एकूण सकल पीकक्षेत्रापैकी ८० टक्क्यांहून अधिक क्षेत्र अन्नपिकांखाली होते. त्यामध्ये धान्य आणि कडधान्यांचा मोठा वाटा होता.<ref name="KolabaCroppedArea"/>
कोकणातील कुणबी समाजाच्या आर्थिक इतिहासाच्या संदर्भात बाजारपेठेचे महत्त्व केवळ कृषी उत्पादनाच्या विक्रीपुरते मर्यादित नव्हते. कृषी उत्पादन, हंगामी मजुरी, धान्याची उपलब्धता, वाहतूक आणि बाहेरील रोजगाराच्या संधी यांमधील परस्परसंबंधामुळे ग्रामीण कुटुंबांचे आर्थिक जीवन व्यापक प्रादेशिक अर्थव्यवस्थेशी जोडले गेले होते. त्यामुळे कुणबी समाजाच्या कृषी इतिहासाचा अभ्यास करताना जमीन आणि शेतीबरोबरच मजुरी, हंगामी स्थलांतर, वाहतूक आणि बाजारपेठ यांचाही विचार करणे आवश्यक ठरते.
=== कुणबी केवळ शेतकरी नव्हते ===
कुणबी समाजाची ऐतिहासिक ओळख कृषीशी निकटपणे संबंधित होती; तथापि कुणबी म्हणजे केवळ शेतकरी अशी समानता करणे ऐतिहासिक स्रोतांच्या आधारे योग्य ठरत नाही. रत्नागिरीच्या जमीनव्यवस्थेच्या नोंदींमध्ये कुणबींचा मोठ्या संख्येने कृषक म्हणून उल्लेख आढळतो. त्याच वेळी ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्याच्या १८८३ च्या गॅझेटियरमध्ये महाड आणि माणगाव परिसरातील काही कुणबी हंगामी रोजगारासाठी मुंबईकडे जात असल्याचे तसेच काही कुणबी लष्कर, पोलीस आणि इतर सरकारी सेवांमध्ये कार्यरत असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/><ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
कुणबींच्या आर्थिक जीवनात स्वतःची जमीन कसणे, भाडेकरू म्हणून शेती करणे, कृषी मजुरी करणे, हंगामी रोजगारासाठी स्थलांतर करणे आणि शेतीबाहेरील व्यवसाय किंवा सेवा स्वीकारणे अशी विविध रूपे आढळत होती. रत्नागिरीच्या नोंदींमध्ये कृषक आणि कृषी मजुरांना वर्षातील काही काळ रोजगारासाठी मुंबई व इतर प्रदेशांकडे जावे लागत असल्याचे नमूद आहे. कोलाबा गॅझेटियरमध्येही महाड आणि माणगाव परिसरातील कुणबींच्या हंगामी स्थलांतराबरोबरच लष्कर, पोलीस आणि सरकारी सेवांमध्ये प्रवेशाचा उल्लेख आढळतो.<ref name="RatnagiriCapitalLabour"/><ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
या नोंदींवरून कोकणातील कुणबींची ऐतिहासिक अर्थव्यवस्था कृषीप्रधान असली तरी ती केवळ स्वतःची शेती कसण्यापुरती मर्यादित नव्हती असे दिसून येते. जमीनधारणा, भाडेकरू शेती, कृषी मजुरी, हंगामी स्थलांतर आणि विविध प्रकारचे शेतीबाहेरील रोजगार हे त्यांच्या आर्थिक जीवनाचे काही घटक होते. तथापि उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतांवरून या आर्थिक भूमिकांचे प्रमाण संपूर्ण कुणबी समाजात समान होते असा निष्कर्ष काढता येत नाही. प्रदेश, जमीनधारणा, कृषी उत्पादन, रोजगाराच्या उपलब्ध संधी आणि स्थानिक आर्थिक परिस्थितीनुसार कुणबी कुटुंबांच्या उपजीविकेच्या पद्धतींमध्ये फरक असण्याची शक्यता होती.
=== आधुनिक कृषी परिवर्तन ===
विसाव्या शतकाच्या मध्यापासून कोकणातील कृषी व्यवस्थेत सुधारित बियाणे, खते, सुधारित कृषी अवजारे, सिंचन, जमीन सुधारणा आणि सरकारी कृषी कर्ज यांचा वापर वाढत गेला. १९६१ च्या कुंकेरी ग्रामसर्वेक्षणात सुधारित बियाणे, खते, सुधारित जनावरे, कृषी अवजारे, सिंचन, कीडनियंत्रण आणि जमीन सुधारणा यांसारख्या कृषी सुविधांच्या उपलब्धतेविषयी स्वतंत्र माहिती संकलित करण्यात आली होती.<ref name="Kunkeri1966"/>
रत्नागिरीच्या कृषी नोंदींमध्ये १९५३–५६ या कालावधीत नव्याने जमीन लागवडीखाली आणणे, कृषी प्रात्यक्षिके आणि ‘तगाई’ किंवा कृषी कर्जाच्या स्वरूपातील सरकारी सहाय्य यांचा उल्लेख आढळतो.<ref name="RatnagiriCereals"/>
कृषी सुधारण्यासाठी विहिरी, तलाव, सिंचन, जलनिचरा, जमीन सुधारणा आणि पुनर्वसन यांसाठी कर्जपुरवठ्याची प्रशासकीय व्यवस्था विकसित करण्यात आली. रत्नागिरीच्या गॅझेटियरमध्ये जमीन सुधारणा कर्जे आणि कृषक कर्जे यांसारख्या योजनांचा उल्लेख असून विहिरी व सिंचनाच्या कामांसाठीही कर्ज उपलब्ध करून दिले जात असल्याचे नमूद आहे.<ref name="RatnagiriStateAidAgriculture"/>
भातशेतीतही तांत्रिक बदल झाले. रत्नागिरीच्या कृषी नोंदींमध्ये काही सुधारित भातवाणांचा उल्लेख असून त्यांच्या पक्व होण्याच्या कालावधीची माहिती देण्यात आली आहे. उन्हाळी भातासाठी बांधबंदिस्त शेत, पाण्याचे नियंत्रित व्यवस्थापन आणि सिंचनाचा वापर यांमुळे काही भागांत वर्षातून एकापेक्षा अधिक पिके घेणे शक्य झाले.<ref name="RatnagiriCereals"/>
कृषीतील या बदलांचा परिणाम केवळ उत्पादनपद्धतीवर झाला नाही, तर ग्रामीण कुटुंबांच्या आर्थिक जीवनावरही झाला. सुधारित कृषी तंत्रज्ञान, सिंचन, कर्जपुरवठा आणि बाजारपेठेशी वाढलेले संबंध यांमुळे पारंपरिक कृषी व्यवस्थेत हळूहळू परिवर्तन घडून आले. तथापि या सुविधा सर्व प्रदेशांत किंवा सर्व कृषक कुटुंबांना समान प्रमाणात उपलब्ध झाल्या असे उपलब्ध स्रोतांवरून म्हणता येत नाही.
=== शेती, जमीन आणि कुणबी समाज : ऐतिहासिक निष्कर्ष ===
उपलब्ध ऐतिहासिक पुराव्यांवरून कोकणातील कुणबी समाजाची पारंपरिक आर्थिक ओळख कृषीशी निकटपणे संबंधित होती. रत्नागिरीच्या जमीनव्यवस्थेच्या नोंदींमध्ये कुणबींचा मोठ्या संख्येने वारसाहक्की कृषक म्हणून उल्लेख आढळतो. त्याचप्रमाणे ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्याच्या गॅझेटियरमध्ये महाड–माणगाव परिसरातील कुणबींच्या शेतीशी संबंधित जीवनाबरोबरच हंगामी स्थलांतर आणि विविध प्रकारच्या रोजगारांचा उल्लेख करण्यात आला आहे.<ref name="RatnagiriSurveys1827"/><ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
त्यामुळे कुणबी समाजाला केवळ ‘शेतकरी जात’ म्हणून मर्यादित करणे ऐतिहासिकदृष्ट्या अपुरे ठरते. उपलब्ध नोंदींनुसार कुणबी हा कोकणातील कृषीप्रधान ग्रामीण समाजाचा एक महत्त्वाचा घटक होता; मात्र त्याच्या आर्थिक जीवनात जमीनधारणा, भाडेकरू शेती, कृषी मजुरी, हंगामी स्थलांतर तसेच सरकारी, लष्करी आणि इतर रोजगारांचाही समावेश होता.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
या आर्थिक विविधतेचा विचार करताना प्रदेश आणि काळ यांचा संदर्भ महत्त्वाचा ठरतो. सर्व कुणबी कुटुंबांची जमीनधारणा, आर्थिक स्थिती किंवा रोजगाराची पद्धत समान होती असे उपलब्ध स्रोतांवरून म्हणता येत नाही. कृषी उत्पादन, जमिनीची उपलब्धता, स्थानिक रोजगाराच्या संधी आणि बाजारपेठेशी असलेला संपर्क यांनुसार त्यांच्या आर्थिक जीवनात भिन्नता होती.
=== स्थलांतर आणि मुंबईशी संबंध ===
कोकणातील कुणबी समाजाचा सामाजिक आणि आर्थिक इतिहास हा स्थलांतराच्या व्यापक प्रक्रियेशी संबंधित होता. विशेषतः रत्नागिरी आणि ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्यांमध्ये मर्यादित कृषी उत्पन्न, हंगामी रोजगाराची आवश्यकता आणि मुंबईतील वाढत्या रोजगाराच्या संधी यांमुळे ग्रामीण लोकसंख्येचे मुंबईशी आर्थिक संबंध विकसित झाले. रत्नागिरीच्या १८८० च्या गॅझेटियरमध्ये जिल्ह्यातील ग्रामीण लोकांच्या मुंबईकडे होणाऱ्या रोजगाराधारित स्थलांतराची नोंद आढळते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
रत्नागिरी जिल्ह्याच्या १८८० च्या गॅझेटियरनुसार मुंबईशी समुद्रमार्गे आणि जमिनीमार्गे असलेल्या संपर्कामुळे जिल्ह्यातील लोकांना मुंबईतील रोजगाराच्या संधी उपलब्ध होत होत्या. मोठ्या संख्येने लोक मुंबईकडे जाऊन विविध प्रकारचे काम करीत असल्याचे तसेच त्यांपैकी काही जण मुंबईत अंशतः स्थायिक झाल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
ऐतिहासिक कोलाबा जिल्ह्यातील नोंदींमध्येही महाड आणि माणगाव परिसरातील काही कुणबी भात कापणीचा हंगाम संपल्यानंतर मुंबई आणि इतर रोजगाराच्या ठिकाणी जात असल्याचे नमूद आहे. काही जण हंगामी रोजगार करून पावसाळ्यापूर्वी आपल्या गावाकडे परतत असत. अशा रोजगारातून मिळणारे उत्पन्न बियाणे खरेदी आणि कुटुंबाच्या इतर गरजांसाठी वापरले जात असल्याचेही नोंदवण्यात आले आहे.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
या स्थलांतरामुळे ग्रामीण कुटुंबांचे आर्थिक जीवन शेतीपुरते मर्यादित न राहता मुंबईसारख्या वाढत्या नागरी केंद्रांशी जोडले गेले. काही कुटुंबांनी शेतीशी संबंध कायम ठेवून हंगामी किंवा कायमस्वरूपी बाहेरील रोजगार स्वीकारला, तर काहींच्या उपजीविकेचे स्वरूप अधिकाधिक शहरी अर्थव्यवस्थेशी संबंधित झाले. तथापि उपलब्ध ऐतिहासिक नोंदींवरून या प्रक्रियेचे प्रमाण संपूर्ण कुणबी समाजात समान होते असा निष्कर्ष काढता येत नाही.
=== रत्नागिरी ते मुंबई : स्थलांतराची सुरुवात ===
मुंबईकडे होणारे कोकणी स्थलांतर हे कापड गिरण्यांच्या विस्तारापूर्वीच अस्तित्वात होते. मुंबईच्या बंदराशी, जहाजवाहतूक, बांधकाम, लष्कर, पोलीस, गोदामे आणि इतर रोजगारांशी संबंधित कामांसाठी कोकणातील ग्रामीण भागातून लोक मुंबईकडे जात असत. पुढील काळात मुंबईच्या औद्योगिक आणि विशेषतः कापड उद्योगाच्या विस्तारामुळे या स्थलांतराला अधिक व्यापक रोजगाराधार प्राप्त झाला. मुंबईच्या कामगारवर्गाच्या निर्मितीत ग्रामीण भागातील स्थलांतराचे महत्त्व आणि कामगारांचे ग्रामीण संबंध यांचा राजनारायण चांदवणकर यांनी अभ्यास केला आहे.<ref name="Chandavarkar1994">{{cite book
|last=Chandavarkar
|first=Rajnarayan
|title=The Origins of Industrial Capitalism in India: Business Strategies and the Working Classes in Bombay, 1900–1940
|publisher=Cambridge University Press
|location=Cambridge
|year=1994
}}</ref>
एकोणिसाव्या शतकाच्या उत्तरार्धात आणि विसाव्या शतकाच्या पूर्वार्धात मुंबईतील औद्योगिक वाढीसोबत कोकण आणि विशेषतः रत्नागिरी जिल्हा हा मुंबईच्या श्रमबाजाराशी संबंधित महत्त्वाचा प्रदेश बनला. या प्रक्रियेत ग्रामीण अर्थव्यवस्थेतील रोजगाराच्या मर्यादा, जमिनीवरील दबाव आणि मुंबईतील वाढत्या रोजगाराच्या संधी यांचा परस्परसंबंध होता.<ref name="RoyalCommissionLabour1931">{{cite report
|title=Report of the Royal Commission on Labour in India
|publisher=Government of India
|year=1931
|url=https://indianlabourarchives.org/bitstream/20.500.14121/168/4/Report%20of%20the%20Royal%20Commission%20on%20Labour%20in%20India.pdf
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रत्नागिरीच्या १८८० च्या गॅझेटियरमध्ये मुंबईशी असलेल्या रोजगारसंबंधांचा उल्लेख आढळतो. समुद्रमार्गे आणि जमिनीमार्गे असलेल्या संपर्कामुळे रत्नागिरी जिल्ह्यातील लोकांना मुंबईतील रोजगाराच्या संधी उपलब्ध होत होत्या आणि जिल्ह्यातील मोठ्या संख्येने लोक मुंबईत कामासाठी जात असल्याचे नोंदवण्यात आले आहे.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
=== कुणबी आणि हंगामी स्थलांतर ===
कुणबी समाजाच्या बाबतीत हंगामी स्थलांतराचा थेट पुरावा १८८३ च्या कोलाबा गॅझेटियरमध्ये आढळतो. महाड आणि माणगाव परिसरातील कुणबी भात कापणीचा हंगाम संपल्यानंतर नोव्हेंबर किंवा डिसेंबरमध्ये मुंबई आणि इतर मजूर बाजारपेठांकडे जात असल्याचे गॅझेटियरमध्ये नमूद आहे. ते अनुकूल हवामानाच्या काळात काम करून उन्हाळ्याच्या अखेरीस गावाकडे परतत असत. या रोजगारातून मिळालेल्या पैशांचा उपयोग बियाणे खरेदी आणि पावसाळ्यात कुटुंबाच्या उदरनिर्वाहासाठी केला जात असल्याची नोंद आहे.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
या हंगामी स्थलांतरात गावातील जमीन आणि शहरातील रोजगार यांचा परस्परसंबंध कायम राहत असे. कोलाबा गॅझेटियरनुसार मुंबईकडे गेलेले काही कुणबी आपल्या मूळ गावातील नातेवाईकांकडे पैसे पाठवत असत आणि हे नातेवाईक गावातील जमीन व शेतीची देखभाल करीत असत. त्यावरून काही कुटुंबांच्या आर्थिक जीवनात ग्रामीण शेती आणि शहरी रोजगार यांचा एकत्रित सहभाग असल्याचे दिसून येते.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
अशा प्रकारच्या हंगामी स्थलांतरामुळे एकाच कुटुंबातील उपजीविकेचे स्रोत दोन भौगोलिक केंद्रांशी जोडले जाऊ शकत होते. गावातील जमीन, शेती आणि कुटुंबाची जबाबदारी कायम ठेवून कुटुंबातील काही सदस्य शहरात मजुरी किंवा इतर रोजगार करीत असत. त्यामुळे ग्रामीण कृषी अर्थव्यवस्था आणि मुंबईतील शहरी रोजगार यांच्यामध्ये आर्थिक परस्परसंबंध निर्माण झाला होता.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
या संदर्भात कोलाबा गॅझेटियरची नोंद विशेष महत्त्वाची आहे, कारण ती कुणबी समाजाच्या हंगामी स्थलांतराचे थेट समकालीन प्रशासकीय दस्तऐवजीकरण करते. मात्र ही नोंद मुख्यतः महाड आणि माणगाव परिसराशी संबंधित असल्यामुळे तिच्या आधारे संपूर्ण कोकणातील किंवा सर्व कुणबी कुटुंबांमध्ये समान स्वरूपाचे स्थलांतर होते असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
=== मुंबईच्या कापड गिरण्या आणि कोकणी स्थलांतर ===
मुंबईतील कापड गिरण्यांच्या विस्तारामुळे कोकण आणि विशेषतः रत्नागिरी जिल्ह्यातून मुंबईकडे होणाऱ्या स्थलांतराला पुढील काळात मोठी चालना मिळाली. मुंबईतील औद्योगिक विकासामुळे ग्रामीण भागातील कामगारांना गिरण्यांमध्ये तसेच शहरातील इतर उद्योगांमध्ये रोजगाराच्या संधी उपलब्ध झाल्या. मुंबईच्या कापड उद्योगातील कामगारवर्गाच्या सामाजिक आणि कौटुंबिक रचनेचा अभ्यास करताना ग्रामीण भागातून झालेल्या स्थलांतराचा महत्त्वाचा संदर्भ आढळतो.<ref name="Kumar1983">{{cite journal
|last=Kumar
|first=Radha
|title=Family and Factory: Women in the Bombay Cotton Textile Industry, 1919–1939
|journal=The Indian Economic & Social History Review
|volume=20
|issue=1
|year=1983
|pages=81–96
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१९०१ च्या मुंबई शहर व बेटाच्या जनगणना अहवालात मुंबईतील विविध भागांमध्ये बाहेरील प्रदेशांतून आलेल्या लोकसंख्येच्या वास्तव्याची नोंद आढळते. औद्योगिक भागांच्या विस्तारासोबत ग्रामीण महाराष्ट्रातून मुंबईत आलेल्या कामगारांची वस्तीही विकसित झाली होती.<ref name="CensusBombayCity1901">{{cite report
|title=Census of India, 1901: Bombay City and Island
|publisher=Government of India
|year=1901
|url=https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/31210/download/34391/20161_1901_TIH.pdf
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मुंबईच्या कापड उद्योगातील कामगारांच्या प्रादेशिक पार्श्वभूमीचा अभ्यास करताना रत्नागिरी जिल्ह्याचे महत्त्व अधोरेखित झाले आहे. रत्नागिरी हा मुंबईच्या औद्योगिक अर्थव्यवस्थेला मनुष्यबळ पुरविणाऱ्या कोकणातील महत्त्वाच्या प्रदेशांपैकी एक होता. तथापि मुंबईतील सर्व रत्नागिरीकर कामगार कुणबी होते असे मानता येत नाही. रत्नागिरी जिल्ह्यातील स्थलांतरामध्ये विविध जातीय, सामाजिक आणि धार्मिक समुदायांचा सहभाग होता. त्यामुळे रत्नागिरीकर आणि कुणबी या दोन सामाजिक किंवा लोकसंख्यात्मक संज्ञा समानार्थी मानणे ऐतिहासिकदृष्ट्या योग्य ठरणार नाही.
=== हंगामी स्थलांतरातून दीर्घकालीन स्थलांतराकडे ===
एकोणिसाव्या शतकातील कोकणी स्थलांतराचा एक महत्त्वाचा प्रकार हंगामी स्वरूपाचा होता. ग्रामीण कुटुंबातील काही सदस्य रोजगारासाठी मुंबई किंवा इतर शहरांकडे जात आणि शेतीच्या हंगामानुसार पुन्हा गावाकडे परतत. पुढील काळात औद्योगिकीकरण, शहरी रोजगाराच्या वाढत्या संधी, शिक्षण आणि वाहतूकव्यवस्थेतील सुधारणा यांमुळे स्थलांतराचे स्वरूप हळूहळू बदलत गेले.
कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या तीन कालखंडांतील अभ्यासातून कोकणातील ग्रामीण स्थलांतराच्या दीर्घकालीन प्रक्रियेचे एक स्थानिक उदाहरण उपलब्ध होते. या अभ्यासानुसार कुंकेरीमध्ये स्थलांतराची प्रक्रिया अनेक दशकांपर्यंत कायम राहिली आणि कालांतराने स्थलांतरितांची संख्या, रोजगाराचे प्रकार आणि स्थलांतराची कारणे यांमध्ये बदल झाले. १९६१मध्ये रोजगारासाठी झालेल्या स्थलांतरात मुंबई हे प्रमुख गंतव्यस्थान होते; पुढील काळात मुंबईबरोबर पुणे आणि गोवा यांसारख्या इतर ठिकाणांकडेही स्थलांतर झाले.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
या अभ्यासात १९६१मध्ये कुंकेरीतील कामासाठी बाहेर गेलेले ८३ स्थलांतरित सर्व पुरुष असून त्यांचे प्रमुख गंतव्य मुंबई असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. पुढील काळात स्थलांतराचे स्वरूप अधिक विविध झाले आणि शिक्षण तसेच रोजगारासाठी स्थलांतर करणाऱ्या स्त्रियांची संख्याही वाढली. त्यामुळे ग्रामीण स्थलांतर हे केवळ पुरुषांच्या हंगामी रोजगारापुरते मर्यादित न राहता कुटुंबाच्या विविध उपजीविकेच्या धोरणांशी संबंधित झाले.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
रत्नागिरी जिल्ह्याच्या १९६१ च्या जिल्हा जनगणना पुस्तिकेतही मुंबईशी असलेल्या स्थलांतरसंबंधांचा उल्लेख आढळतो. मुंबईतील रोजगाराच्या परिस्थितीत झालेल्या बदलांचा परिणाम रत्नागिरीसारख्या ग्रामीण जिल्ह्यांवर होत असल्याचे या ऐतिहासिक नोंदींमधून दिसून येते.<ref name="DistrictCensusRatnagiri1961">{{cite report
|title=District Census Handbook, Ratnagiri
|publisher=Director of Census Operations, Maharashtra
|year=1964
|url=https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/29646/download/32827/22003_1961_RAT.pdf
}}</ref>
कुंकेरीच्या अभ्यासातून स्थलांतरामुळे ग्रामीण आणि शहरी जीवनातील संबंध केवळ रोजगारापुरते मर्यादित राहत नसल्याचेही दिसते. स्थलांतरित कुटुंबांचे गावातील जमीनधारणेशी संबंध अनेक दशकांपर्यंत कायम राहिले आणि मुंबईतील स्थलांतरितांचे गावाशी सामाजिक संबंध टिकून राहिले. त्यामुळे कोकणातील स्थलांतराचा इतिहास हा ग्रामीण समाजाच्या विस्थापनाचा एकरेषीय इतिहास नसून गाव, जमीन, कुटुंब आणि शहर यांच्यातील दीर्घकालीन परस्परसंबंधांचा इतिहास म्हणून पाहता येतो.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
=== स्थलांतर आणि शिक्षण ===
काळानुसार कोकणातील स्थलांतराचे स्वरूप केवळ रोजगाराच्या शोधापुरते मर्यादित राहिले नाही. शिक्षण, उच्च शिक्षण, व्यावसायिक शिक्षण आणि शहरी भागातील शैक्षणिक सुविधांचा विस्तार यांमुळे ग्रामीण भागातून शहरांकडे होणाऱ्या स्थलांतराला नवे स्वरूप प्राप्त झाले.
सावंतवाडी तालुक्यातील कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या तीन कालखंडांतील अभ्यासातून ग्रामीण स्थलांतराच्या स्वरूपातील दीर्घकालीन बदल स्पष्ट होतात. या अभ्यासानुसार १९६१मध्ये कुंकेरीतील स्थलांतर मुख्यतः रोजगारासाठी होते आणि त्या काळातील स्थलांतरितांमध्ये शिक्षणासाठी स्थलांतराची नोंद नव्हती. २०१७पर्यंत परिस्थितीत बदल झाला आणि एकूण स्थलांतरितांपैकी सुमारे १८ टक्के व्यक्ती शिक्षणासाठी स्थलांतरित झाल्याचे आढळले. या काळात शिक्षण हे स्थलांतराचे एक महत्त्वाचे कारण बनले होते.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
या अभ्यासात शिक्षण आणि स्थलांतर यांच्यातील परस्परसंबंधाचाही उल्लेख करण्यात आला आहे. शिक्षणामुळे शहरी किंवा बाहेरील रोजगाराच्या संधी वाढू शकतात आणि त्याच वेळी स्थलांतरासाठी शिक्षण हे स्वतः एक साधन ठरू शकते. कुंकेरीतील स्थलांतरित कुटुंबांमध्ये साक्षरतेचे प्रमाण स्थलांतर न करणाऱ्या कुटुंबांच्या तुलनेत अधिक असल्याचेही अभ्यासात आढळले.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
स्थलांतराच्या बदलत्या स्वरूपामुळे शिक्षण, रोजगार, दैनंदिन प्रवास आणि कुटुंबातील वेगवेगळ्या सदस्यांचे विविध ठिकाणी वास्तव्य यांच्यातील संबंध अधिक गुंतागुंतीचे झाले. कुंकेरीच्या अभ्यासात २०१७पर्यंत शिक्षणासाठी होणारा प्रवास आणि स्त्रियांचा दैनंदिन प्रवासही वाढल्याचे नोंदविण्यात आले आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
कुंकेरीच्या अभ्यासातून दिसणारे हे परिवर्तन कोकणातील प्रत्येक गावासाठी किंवा प्रत्येक सामाजिक समुदायासाठी समान होते असे मानता येत नाही. मात्र ग्रामीण कोकणातील स्थलांतर रोजगारापासून शिक्षण, कौशल्यविकास आणि विविध प्रकारच्या शहरी संधींकडे कसे विस्तारत गेले, याचे कुंकेरी हे एक महत्त्वाचे स्थानिक उदाहरण आहे.
=== परदेशातील स्थलांतर ===
कोकणातील स्थलांतराचा विस्तार केवळ मुंबई आणि महाराष्ट्रातील शहरी केंद्रांपुरता मर्यादित राहिला नाही. ब्रिटिशकालीन काळात बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतून समुद्रपार प्रदेशांकडेही स्थलांतर होत असल्याच्या नोंदी आढळतात. १९११ च्या जनगणना अहवालात मॉरिशस, पूर्व आफ्रिका, स्ट्रेट्स सेटलमेंट्स, फेडरेटेड मलय स्टेट्स आणि सिलोन यांसारख्या प्रदेशांशी संबंधित स्थलांतराची नोंद करण्यात आली होती.<ref name="CensusBombayMigration1911">{{cite report
|title=Census of India, 1911: Bombay Presidency — Migration
|publisher=Government of India
|year=1911
|url=https://storage.lib.uchicago.edu/pres/2014/pres2014-0779-1911-07-01.pdf
}}</ref>
रत्नागिरी आणि सावंतवाडीच्या १८८० च्या गॅझेटियरमध्येही जिल्ह्यातील काही लोक रोजगाराच्या निमित्ताने एडन आणि मॉरिशस यांसारख्या परदेशातील प्रदेशांकडे जात असल्याच्या नोंदी आढळतात. या नोंदींमधून कोकणातील स्थलांतराचे भौगोलिक क्षेत्र मुंबईपलीकडेही विस्तारले होते, असे दिसून येते. तथापि या नोंदी विशिष्ट स्थानिक समूह किंवा व्यक्तींच्या स्थलांतराशी संबंधित असल्यामुळे त्यावरून संपूर्ण रत्नागिरी जिल्ह्याच्या किंवा कुणबी समाजाच्या परदेशातील स्थलांतराचे प्रमाण निश्चित करता येत नाही.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880"/>
आधुनिक काळात रत्नागिरी जिल्ह्यातील आंतरराष्ट्रीय स्थलांतर आणि त्यातून मिळणाऱ्या परदेशातून पाठविलेल्या रकमांचा ग्रामीण अर्थव्यवस्थेवर होणारा परिणाम हा संशोधनाचा विषय बनला आहे. २०२३मध्ये प्रकाशित झालेल्या एका अभ्यासात रत्नागिरी जिल्ह्यातील ग्रामीण गावांमधून होणारे आंतरराष्ट्रीय स्थलांतर, परदेशातून येणाऱ्या रकमांचे प्रमाण आणि त्यांचा कुटुंबांच्या आर्थिक कल्याणावर होणारा परिणाम यांचा अभ्यास करण्यात आला. या अभ्यासात आंतरराष्ट्रीय स्थलांतर आणि परदेशातून येणाऱ्या रकमांचा ग्रामीण कुटुंबांच्या आर्थिक स्थितीशी संबंध असल्याचे आढळले.<ref name="ChintamaniKulkarni2023">{{cite journal
|last=Chintamani
|first=Bhupesh Gopal
|author2=Kulkarni, Lalitagauri
|title=Determinants and Effects of International Remittances: Evidence from Ratnagiri District of Rural Maharashtra
|journal=Indian Journal of Labour Economics
|volume=66
|issue=1
|year=2023
|pages=455–475
}}</ref>
या आधुनिक अभ्यासात रत्नागिरी जिल्ह्यातील ग्रामीण कुटुंबांचा विचार केला आहे; त्यात कुणबी समाजाचे स्वतंत्र जातीनिहाय आंतरराष्ट्रीय स्थलांतर हे अभ्यासाचे स्वतंत्र प्रमाण म्हणून मांडलेले नाही. त्यामुळे रत्नागिरीतील आंतरराष्ट्रीय स्थलांतराला थेट कुणबी समाजाचे स्थलांतर मानणे योग्य ठरणार नाही. कुणबी समाजाच्या परदेशातील स्थलांतराचे स्वतंत्र प्रमाण, गंतव्य प्रदेश आणि कालानुसार झालेला बदल निश्चित करण्यासाठी जातीनिहाय लोकसंख्याशास्त्रीय किंवा सामाजिक सर्वेक्षणांची आवश्यकता आहे.<ref name="ChintamaniKulkarni2023"/>
या दृष्टीने कोकणातील स्थलांतराचा इतिहास तीन परस्परसंबंधित टप्प्यांत अभ्यासता येतो—स्थानिक किंवा हंगामी रोजगारासाठी होणारे स्थलांतर, मुंबईसारख्या औद्योगिक केंद्रांकडे झालेले दीर्घकालीन स्थलांतर आणि पुढील काळातील शिक्षण, व्यावसायिक संधी व आंतरराष्ट्रीय रोजगाराशी संबंधित स्थलांतर. मात्र या सर्व प्रक्रियांमध्ये सहभागी झालेल्या लोकसंख्येला कुणबी या एकाच सामाजिक वर्गाशी जोडणे ऐतिहासिक पुराव्यांच्या दृष्टीने योग्य ठरणार नाही.
=== गाव आणि शहरातील संबंध ===
कोकणातील स्थलांतरामुळे ग्रामीण गावांमध्ये आणि मुंबईसारख्या शहरी केंद्रांमध्ये आर्थिक व सामाजिक संबंध निर्माण झाले. शहरात रोजगारासाठी गेलेल्या व्यक्तींचे त्यांच्या मूळ गावांशी जमीन, कुटुंब आणि आर्थिक व्यवहारांच्या माध्यमातून संबंध कायम राहत असत. १८८३ च्या कोलाबा गॅझेटियरमध्ये महाड आणि माणगाव परिसरातील काही कुणबी मुंबईत रोजगारासाठी गेल्यानंतर आपल्या गावातील नातेवाईकांकडे पैसे पाठवीत असल्याची आणि हे नातेवाईक गावातील शेतीची देखभाल करीत असल्याची नोंद आढळते.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
या आर्थिक संबंधांमध्ये शहरातून गावाकडे पैसे पाठविणे, शेतीसाठी बियाणे व इतर साधने खरेदी करणे, कुटुंबाच्या दैनंदिन गरजा भागविणे आणि गावातील जमीन व इतर मालमत्तेशी संबंध कायम ठेवणे यांचा समावेश होता. त्यामुळे रोजगारासाठी शहरात गेलेल्या कुटुंबातील व्यक्तीचे स्थलांतर झाले असले तरी संपूर्ण कुटुंबाची आर्थिक व्यवस्था तात्काळ शहरकेंद्रित होत असेच असे नाही.<ref name="KolabaPopulationCommunities"/>
कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या तीन कालखंडांतील दीर्घकालीन अभ्यासातूनही स्थलांतरित कुटुंबांचे मूळ गावाशी असलेले संबंध कायम राहिल्याचे दिसून येते. स्थलांतराचे स्वरूप आणि गंतव्ये काळानुसार बदलली असली तरी गावाशी असलेले कौटुंबिक आणि सामाजिक संबंध पूर्णपणे तुटले नाहीत. या अभ्यासातून स्थलांतर, ग्रामीण कुटुंबांची बदलती आर्थिक रचना आणि शहरांशी निर्माण झालेले संबंध यांचा परस्परसंबंध स्पष्ट होतो.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
या प्रक्रियेमुळे गाव आणि शहर यांच्यात एक प्रकारचे आर्थिक परस्परावलंबन निर्माण झाले. गावातील जमीन आणि कुटुंबीय संबंध कायम ठेवत शहरात रोजगार करणे, तर शहरातून मिळणाऱ्या उत्पन्नाचा काही भाग गावातील कुटुंबाच्या गरजांसाठी वापरणे, हा स्थलांतरित कुटुंबांच्या आर्थिक जीवनाचा एक भाग बनला. मात्र ही पद्धत सर्व कोकणी किंवा सर्व कुणबी कुटुंबांना समान प्रमाणात लागू होती असे उपलब्ध स्रोतांवरून म्हणता येत नाही.
=== स्थलांतरामुळे कोकणातील गावांवर झालेले परिणाम ===
दीर्घकालीन स्थलांतरामुळे कोकणातील काही गावांच्या लोकसंख्येच्या आणि सामाजिक रचनेत बदल झाले. विशेषतः रोजगारक्षम वयोगटातील व्यक्तींचे बाहेर स्थलांतर, कुटुंबातील सदस्यांचे वेगवेगळ्या ठिकाणी वास्तव्य आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेतील बदल यांचा गावाच्या सामाजिक आणि आर्थिक जीवनावर परिणाम झाला.
रत्नागिरी जिल्ह्याच्या १९६१ च्या जिल्हा जनगणना पुस्तिकेत जिल्ह्यातून मुंबईकडे मोठ्या प्रमाणावर स्थलांतर होत असल्याचा उल्लेख आहे. १९३० च्या आर्थिक मंदीच्या काळात मुंबईतील काही कापड गिरण्या बंद झाल्यामुळे काही कामगार रत्नागिरी जिल्ह्यात परतल्याची नोंदही आढळते. यावरून रत्नागिरीतील ग्रामीण रोजगार आणि लोकसंख्येचे स्वरूप मुंबईतील औद्योगिक रोजगाराच्या परिस्थितीशी संबंधित होते, असे दिसून येते.<ref name="DistrictCensusRatnagiri1961"/>
कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या कालखंडांतील तुलनात्मक अभ्यासातूनही पाच दशकांहून अधिक काळ स्थलांतराची प्रक्रिया सुरू राहिल्याचे दिसते. या कालावधीत स्थलांतरितांची संख्या, रोजगाराचे प्रकार, स्थलांतराची कारणे, कुटुंबातील सदस्यांच्या स्थलांतराचे स्वरूप आणि शिक्षणाशी संबंधित स्थलांतर यांमध्ये बदल झाल्याचे अभ्यासकांनी नोंदविले आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
स्थलांतराचा परिणाम केवळ गावातील लोकसंख्येतील घट किंवा वाढ यापुरता मर्यादित राहिला नाही. कुटुंबांच्या उत्पन्नाच्या स्रोतांमध्ये बदल, शेतीसाठी उपलब्ध मनुष्यबळ, घरांची देखभाल, शिक्षणाच्या संधी, स्थानिक बाजारपेठांशी असलेले संबंध आणि गावातील सामाजिक जीवन यांवरही त्याचा परिणाम होऊ शकतो. कुंकेरीच्या अभ्यासात स्थलांतरित कुटुंबांच्या बदलत्या आर्थिक धोरणांचा, व्यवसायातील विविधतेचा आणि मूळ गावाशी कायम राहिलेल्या संबंधांचा विचार करण्यात आला आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
=== रत्नागिरीचे मुंबईशी लोकसंख्याशास्त्रीय नाते ===
मुंबईच्या लोकसंख्येच्या वाढीत रत्नागिरी जिल्ह्यातून झालेल्या स्थलांतराचे महत्त्व ऐतिहासिक जनगणना नोंदींमधून दिसून येते. १९३१ च्या मुंबई शहराच्या जनगणना अहवालात मुंबईत राहणाऱ्या व्यक्तींच्या जन्मस्थळानुसार रत्नागिरी जिल्ह्याचा उल्लेख मोठ्या संख्येने आढळतो. या नोंदीत रत्नागिरी हा मुंबईच्या लोकसंख्येला मनुष्यबळ पुरविणाऱ्या महत्त्वाच्या जिल्ह्यांपैकी एक असल्याचे दिसून येते.<ref name="CensusBombayCity1931">{{cite report
|title=Census of India, 1931 — Bombay City
|publisher=Government of India
|year=1931
|url=https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/28362/download/31544/138796-1931.pdf
}}</ref>
मुंबई आणि रत्नागिरी यांच्यातील स्थलांतरसंबंध पुढील दशकांतही कायम राहिले. मुंबई मानव विकास अहवालात १९६१ ते २००१ या कालखंडातील बृहन्मुंबईतील जिल्हानिहाय आंतर-जिल्हा स्थलांतराची आकडेवारी देण्यात आली आहे. त्यानुसार रत्नागिरी हा महाराष्ट्रातील मुंबईकडे स्थलांतर करणाऱ्या लोकसंख्येच्या प्रमुख मूळ जिल्ह्यांपैकी एक होता. अहवालातील आकडेवारीनुसार रत्नागिरीतून बृहन्मुंबईत आलेल्या स्थलांतरितांची संख्या १९६१मध्ये ४,९४,४०४ होती आणि २००१मध्ये ती ६,१२,६८८ इतकी नोंदविण्यात आली आहे.<ref name="MumbaiHDR2009">{{cite report
|title=Mumbai Human Development Report 2009
|publisher=Government of Maharashtra
|year=2009
|url=https://www.mohua.gov.in/upload/uploadfiles/files/6Mumbai%20HDR%20Complete.pdf
}}</ref>
या स्थलांतरामागे रोजगाराच्या संधी, मुंबईतील औद्योगिकीकरण, कापड गिरण्या, बांधकाम, सेवा क्षेत्र आणि पुढील काळातील शिक्षण व व्यावसायिक संधी यांसारखे विविध घटक कार्यरत होते. त्यामुळे रत्नागिरी आणि मुंबई यांच्यातील संबंध केवळ स्थलांतरित मजुरांच्या हालचालीपुरते मर्यादित न राहता दीर्घकालीन सामाजिक आणि आर्थिक संबंधांमध्ये विकसित झाले.
तथापि रत्नागिरीतून मुंबईत स्थलांतरित झालेल्या सर्व व्यक्तींना कुणबी समाजाशी जोडणे योग्य नाही. रत्नागिरी जिल्ह्यातील स्थलांतरामध्ये विविध जातीय, धार्मिक आणि सामाजिक समूहांचा सहभाग होता. त्यामुळे रत्नागिरीकर ही भौगोलिक ओळख आणि कुणबी ही सामाजिक ओळख यांची सरसकट समानता करणे ऐतिहासिकदृष्ट्या अचूक ठरणार नाही.
=== स्थलांतराचे बदलते स्वरूप ===
कोकणातील स्थलांतराच्या इतिहासात कालानुसार त्याच्या स्वरूपात बदल झाले. सुरुवातीच्या काळात शेतीशी संबंधित हंगामी रोजगार आणि मुंबईतील मजुरी यांच्यात संबंध दिसून येतो. पुढे मुंबईतील औद्योगिकीकरणामुळे कापड गिरण्या, बांधकाम, बंदरे, वाहतूक आणि इतर शहरी व्यवसायांमध्ये रोजगाराच्या संधी वाढल्या. त्यानंतर शिक्षण, सरकारी सेवा, व्यावसायिक क्षेत्र, व्यवसाय आणि परदेशातील रोजगार यांमुळे स्थलांतराचे स्वरूप अधिक विविध झाले.<ref name="RoyalCommissionLabour1931"/>
कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या कालखंडांतील दीर्घकालीन अभ्यासातून स्थलांतराच्या स्वरूपातील हा बदल एका स्थानिक उदाहरणाच्या आधारे स्पष्ट होतो. १९६१मध्ये रोजगारासाठी मुंबईकडे होणारे स्थलांतर प्रमुख होते; पुढील दशकांत स्थलांतराची गंतव्ये, व्यवसायाचे प्रकार आणि स्थलांतराची कारणे अधिक विविध झाली. शिक्षणासाठी स्थलांतर, दैनंदिन प्रवास आणि कुटुंबातील विविध सदस्यांचे वेगवेगळ्या ठिकाणी वास्तव्य यांनाही पुढील काळात महत्त्व प्राप्त झाले.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
आधुनिक काळात रत्नागिरीच्या स्थलांतराच्या नकाशात मुंबईबरोबरच पुणे, महाराष्ट्रातील इतर शहरी केंद्रे आणि परदेशातील रोजगाराची ठिकाणे यांचाही समावेश झाला आहे. रत्नागिरी जिल्ह्यातील ग्रामीण कुटुंबांच्या आंतरराष्ट्रीय स्थलांतराचा अभ्यास करणाऱ्या २०२३ च्या संशोधनात परदेशात जाणाऱ्या व्यक्ती आणि त्यांच्या कुटुंबांकडून मिळणाऱ्या आर्थिक पाठवणींचा ग्रामीण कुटुंबांच्या आर्थिक स्थितीशी असलेला संबंध तपासण्यात आला आहे. अभ्यासानुसार परदेशातून येणाऱ्या आर्थिक पाठवणींचा प्राप्त कुटुंबांच्या आर्थिक कल्याणाशी सकारात्मक संबंध आढळला.<ref name="ChintamaniKulkarni2023"/>
=== कुणबी समाजाच्या संदर्भातील निष्कर्ष ===
कोकणातील कुणबी समाजाच्या स्थलांतराचा इतिहास हा केवळ शेती सोडून शहरांकडे जाण्याचा इतिहास नव्हता. १८८३ च्या कोलाबा गॅझेटियरमधील महाड आणि माणगाव परिसराच्या नोंदींमध्ये कुणबींचे शेतीशी असलेले संबंध, हंगामी स्थलांतर, मजुरी तसेच लष्कर, पोलीस आणि इतर सेवांमधील सहभाग यांचा उल्लेख आढळतो.<ref name="KolabaJanjira1883"/>
रत्नागिरीच्या बाबतीत मुंबईशी असलेले स्थलांतरसंबंध अधिक व्यापक लोकसंख्याशास्त्रीय पातळीवर दिसून येतात. १९३१ च्या मुंबई शहराच्या जनगणना अहवालात मुंबईतील रहिवाशांच्या जन्मस्थळांच्या वर्गीकरणात रत्नागिरी जिल्ह्याचा मोठ्या प्रमाणावर उल्लेख आढळतो. पुढील काळातही रत्नागिरी हा मुंबईकडे स्थलांतरित होणाऱ्या लोकसंख्येचा महत्त्वाचा मूळ जिल्हा राहिला.<ref name="CensusBombayCity1931"/><ref name="MumbaiHDR2009"/>
म्हणून कोकणातील कुणबी समाजाचा आधुनिक इतिहास समजून घेताना गावातील जमीन आणि शेती, मुंबईतील रोजगार, हंगामी तसेच दीर्घकालीन स्थलांतर, शिक्षण, परदेशातील रोजगार, आर्थिक पाठवणी आणि मूळ गावाशी कायम राहिलेले कौटुंबिक संबंध या सर्व घटकांचा परस्परसंबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे. मात्र उपलब्ध जनगणना आणि स्थलांतरविषयक अभ्यास बहुधा जिल्हा, गाव किंवा व्यापक सामाजिक समूहाच्या पातळीवर करण्यात आलेले आहेत. त्यामुळे आधुनिक काळातील कुणबी समाजाच्या स्वतंत्र स्थलांतराचे अचूक जातीनिहाय प्रमाण किंवा टक्केवारी उपलब्ध अधिकृत आकडेवारीशिवाय निश्चित करता येत नाही.<ref name="घोलम2025" />
=== मराठा–कुणबी संबंध ===
कोकणातील कुणबी समाजाचा इतिहास आणि मराठा समाजाचा इतिहास अनेक सामाजिक, आर्थिक आणि प्रादेशिक संदर्भांमध्ये परस्परांशी संबंधित दिसतो. तथापि मराठा आणि कुणबी या संज्ञांचा अर्थ सर्व काळात आणि सर्व प्रदेशांत एकसारखा राहिलेला नाही. ब्रिटिशकालीन जनगणना, गॅझेटियर आणि मानववंशशास्त्रीय लेखनात या समूहांचे वर्गीकरण स्थान, प्रशासकीय पद्धती, सामाजिक स्थान आणि स्थानिक ओळखीनुसार वेगवेगळ्या प्रकारे करण्यात आले आहे.
रेजिनाल्ड एडवर्ड एन्थोव्हन यांच्या The Tribes and Castes of Bombay या ग्रंथात मराठा आणि कुणबी यांच्यातील सामाजिक संबंध, परस्परविवाह आणि सामाजिक स्तर यांचे विविध संदर्भ नोंदवले आहेत. त्यांच्या वर्णनानुसार या दोन समूहांमधील सामाजिक सीमारेषा सर्व प्रदेशांत समान किंवा पूर्णपणे कठोर नव्हत्या.
त्यामुळे आधुनिक काळातील मराठा, कुणबी, मराठा-कुणबी किंवा कुणबी-मराठा या सामाजिक ओळखींचा अर्थ थेट प्राचीन किंवा मध्ययुगीन सामाजिक रचनेवर लावणे इतिहासदृष्ट्या सावधगिरीशिवाय योग्य ठरणार नाही. या संज्ञांचा अभ्यास करताना संबंधित काळातील प्रशासकीय नोंदी, जनगणना वर्गीकरण, स्थानिक सामाजिक व्यवहार आणि समुदायाच्या स्वयंओळखीचा स्वतंत्र विचार करणे आवश्यक आहे.<ref name="Enthoven1922" />
=== मराठा–कुणबी ही संज्ञा ===
मराठा–कुणबी ही संयुक्त संज्ञा ब्रिटिशकालीन प्रशासकीय आणि जनगणना साहित्यात विविध संदर्भांत आढळते. या संज्ञेचा वापर काही ऐतिहासिक वर्गीकरणांमध्ये मराठा आणि कुणबी यांच्यातील सामाजिक व प्रशासकीय संबंध दर्शविण्यासाठी करण्यात आला होता. तथापि अशा वर्गीकरणांचा अर्थ त्या काळातील जनगणना पद्धती आणि प्रशासकीय दृष्टिकोनाच्या संदर्भातच समजून घेणे आवश्यक आहे.
१८८१ च्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या जनगणना अहवालात विविध जातीय आणि सामाजिक समूहांचे स्वतंत्र वर्गीकरण करण्यात आले होते. त्या काळातील जनगणना वर्गीकरण हे आजच्या सामाजिक ओळखींच्या चौकटीशी तंतोतंत समान नव्हते. त्यामुळे त्या काळातील मराठा–कुणबी या वर्गीकरणावरून आधुनिक काळातील मराठा आणि कुणबी समाजांची एकसमान सामाजिक किंवा ऐतिहासिक ओळख सिद्ध होते असा निष्कर्ष काढता येत नाही.
रेजिनाल्ड एन्थोव्हन यांच्या पुढील मानववंशशास्त्रीय लेखनातही मराठा आणि कुणबी यांच्यातील सामाजिक संबंधांची चर्चा आढळते. त्यातून या दोन समूहांमध्ये काही सामाजिक साम्य, परस्पर संबंध आणि प्रदेशानुसार बदलणाऱ्या सामाजिक सीमारेषा अस्तित्वात होत्या, असे दिसते; मात्र त्यावरून सर्व मराठा आणि सर्व कुणबी यांची एकच ऐतिहासिक उत्पत्ती होती असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="Enthoven1922" />
अशा प्रकारे मराठा–कुणबी या संज्ञेचा ऐतिहासिक अभ्यास हा केवळ दोन सामाजिक समूहांच्या नावांचा अभ्यास नसून, ब्रिटिशकालीन जनगणना पद्धती, प्रशासकीय वर्गीकरण, कृषक समाजाची रचना आणि स्थानिक सामाजिक ओळखी यांच्यातील परस्परसंबंध समजून घेण्यासाठी महत्त्वाचा ठरतो.
=== १८८१ची जनगणना ===
१८८१ च्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या जनगणनेत विविध जातीय आणि सामाजिक समूहांचे प्रशासकीय वर्गीकरण करण्यात आले होते. या वर्गीकरणात मराठा आणि कुणबी या संज्ञांचा वापर कृषीप्रधान समाजाच्या संदर्भात करण्यात आला होता. मात्र १८८१ च्या जनगणनेतील वर्गीकरण हे आजच्या प्रशासकीय जातवर्गीकरणासारखे नव्हते. त्यामुळे त्या काळातील एखाद्या वर्गाची व्याप्ती आणि आधुनिक महाराष्ट्रातील त्याच नावाच्या प्रशासकीय वर्गाची व्याप्ती समान मानता येत नाही.<ref name="Baines1881"/>
ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये जात, व्यवसाय, स्थानिक सामाजिक ओळख आणि प्रशासकीय वर्गीकरण यांचा परस्परसंबंध अनेकदा दिसून येतो. त्यामुळे १८८१ च्या आकडेवारीचा उपयोग करताना त्या काळातील जनगणना पद्धती आणि वर्गीकरणाच्या निकषांचा स्वतंत्र विचार करणे आवश्यक आहे.
=== १९०१ची जनगणना ===
१९०१ च्या बॉम्बे जनगणनेत मराठा कुणबी आणि कोकणी मराठा या स्वतंत्र सांख्यिक विभागांची नोंद करण्यात आली होती. मुंबई शहराच्या जनगणना अहवालानुसार मराठा कुणबी हा शहरातील सर्वाधिक संख्येच्या प्रमुख जातीय-सामाजिक समूहांपैकी एक होता आणि त्याचे प्रमाण मुंबईच्या एकूण लोकसंख्येच्या सुमारे १५ टक्के होते.<ref name="CensusBombay1901">{{cite book
|author=India. Census Commissioner
|title=Census of India, 1901: Bombay and Bombay (Town and Island)
|volume=XI
|publisher=Office of the Superintendent of Government Printing, India
|year=1901
}}</ref>
त्याच अहवालात काही विभागांच्या लोकसंख्येच्या संदर्भात कुणबी (मराठा) या नावाची स्वतंत्र नोंद आढळते. उदाहरणार्थ, डोंगरी, पहिला नागपाडा आणि कुंभारवाडा या विभागांमध्ये कुणबी (मराठा) समूहाचे प्रमाण अनुक्रमे सुमारे ४७ टक्के, ३४ टक्के आणि २८ टक्के असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.
या नोंदींवरून १९०१ च्या जनगणनेत मराठा, कुणबी आणि मराठा कुणबी या संज्ञांचा वापर विविध प्रशासकीय आणि सांख्यिक संदर्भांत करण्यात आला होता, असे दिसते. त्यामुळे त्या काळातील सामाजिक वर्गीकरण हे मराठा आणि कुणबी यांच्यात पूर्णपणे कठोर व अपरिवर्तनीय सीमा होती, अशा साध्या स्वरूपात मांडता येत नाही. तथापि या जनगणना वर्गीकरणावरून दोन्ही समूहांची एकच सामाजिक किंवा ऐतिहासिक उत्पत्ती होती असाही निष्कर्ष काढता येत नाही.
=== १९११ची जनगणना आणि वर्गीकरणातील बदल ===
१९११ च्या बॉम्बे जनगणनेत जातीय वर्गीकरणाची पद्धत पुन्हा वेगळी दिसून येते. जनगणना अहवालात मराठा आणि कुणबी या स्वतंत्र नोंदी आढळतात. या वर्गीकरणात विविध प्रदेशांतील स्थानिक सामाजिक समूह आणि त्यांच्या उपविभागांची नोंद स्वतंत्रपणे करण्यात आली होती.<ref name="CensusBombay1911">{{cite report
|title=Census of India, 1911: Bombay
|volume=VII
|publisher=Government Central Press
|location=Bombay
|year=1912
}}</ref>
१९११ च्या जनगणनेतील उपलब्ध आकडेवारीत कुणबी आणि मराठा या दोन्ही समूहांची स्वतंत्र संख्या नोंदविलेली आहे. त्यामुळे १९०१ आणि १९११ च्या जनगणनांमध्ये वापरलेल्या वर्गीकरणांमध्ये फरक असल्याचे दिसते.
या उदाहरणावरून ब्रिटिशकालीन जनगणनांमधील जातीय वर्गीकरण पूर्णपणे स्थिर नव्हते, असे दिसते. एका जनगणनेत विशिष्ट नावाखाली नोंदवलेला समूह पुढील जनगणनेत वेगळ्या शीर्षकाखाली किंवा वेगळ्या वर्गीकरणात दिसू शकत होता. त्यामुळे १८८१, १९०१ आणि १९११ च्या आकडेवारीची तुलना करताना प्रत्येक जनगणनेची स्वतंत्र वर्गीकरणपद्धती, प्रशासकीय सीमा आणि नोंदणीची पद्धत लक्षात घेणे आवश्यक आहे.
=== सामाजिक गतिशीलता ===
एकोणिसाव्या आणि विसाव्या शतकाच्या प्रारंभी महाराष्ट्रातील मराठा आणि कुणबी समाजांच्या सामाजिक संबंधांमध्ये प्रदेश, जमीनधारणा, आर्थिक स्थिती आणि सामाजिक प्रतिष्ठेनुसार विविधता आढळत होती. रेजिनाल्ड एडवर्ड एन्थोव्हन यांच्या मानववंशशास्त्रीय लेखनात मराठा आणि कुणबी यांच्यातील सामाजिक संबंध, कृषी व्यवसाय आणि सामाजिक स्थान यांची चर्चा आढळते.<ref name="Enthoven1922" />
एन्थोव्हन यांच्या मांडणीत कुणबी ही संज्ञा कृषी व्यवसायाशी संबंधित असल्याचेही दिसते. पुढील अभ्यासांमध्ये त्यांच्या या मांडणीचा वापर वसाहतकालीन महाराष्ट्रातील जात आणि सामाजिक वर्गीकरणाच्या अभ्यासासाठी करण्यात आला आहे. मात्र एन्थोव्हन यांचे लेखन हे वसाहतकालीन मानववंशशास्त्रीय दृष्टिकोनातून तयार झालेले असल्यामुळे त्यातील वर्गीकरणे आधुनिक सामाजिक वास्तवाचे अंतिम वर्णन मानता येत नाहीत.
त्यामुळे मराठा किंवा कुणबी या नावावरून एखाद्या व्यक्तीचे सामाजिक स्थान, आर्थिक स्थिती किंवा सामाजिक प्रतिष्ठा संपूर्णपणे निश्चित करता येत नव्हती. जमीनधारणा, व्यवसाय, शिक्षण, सरकारी सेवा आणि स्थानिक सामाजिक प्रभाव यांसारखे इतर घटकही सामाजिक स्थानावर परिणाम करीत होते.
=== स्व-ओळख आणि सामाजिक नाव ===
जातीय आणि सामाजिक ओळख ही केवळ प्रशासकीय वर्गीकरणातून निश्चित होत नाही. एखादा समूह स्वतःला कोणत्या नावाने ओळखतो, कोणत्या सामाजिक परंपरा पाळतो आणि स्थानिक समाजात त्याची ओळख कशी प्रस्थापित होते, यालाही सामाजिक इतिहासात महत्त्व आहे. ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये समान किंवा संबंधित सामाजिक समूहांचे वर्गीकरण वेगवेगळ्या काळात वेगवेगळ्या पद्धतीने करण्यात आले होते. १९०१ च्या जनगणनेत मराठा कुणबींची नोंद मराठा वर्गाशी संबंधित पद्धतीने करण्यात आली होती, तर १९११ च्या वर्गीकरणात संबंधित समूहांची नोंद कुणबी वर्गाशी करण्यात आल्याचे पुढील अधिकृत जनगणना अहवालात स्पष्ट करण्यात आले आहे.<ref name="CensusClassification1951">{{cite report
|title=Census of India, 1951 — Classification of Castes and Tribes
|publisher=Government of India
|year=1951
|url=https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/30207/download/33388/21097_1951_EST.pdf
}}</ref>
ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये प्रशासकीय अधिकाऱ्यांनी विविध समूहांचे विशिष्ट शीर्षकांखाली वर्गीकरण केले होते. मात्र जनगणनेतील अशा वर्गीकरणाचा अर्थ त्या समूहातील प्रत्येक व्यक्तीने स्वतःची ओळख त्याच नावाने केली होती, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. १९०१ च्या मुंबई जनगणनेत मराठा कुणबी आणि कोकणी मराठा या स्वतंत्र विभागांची नोंद करण्यात आली होती; पुढील जनगणनांमध्ये संबंधित वर्गीकरणात बदल झाल्याचे दिसून येते.<ref name="CensusBombay1901"/><ref name="CensusBombay1911"/>
मराठा आणि कुणबी यांच्यातील सामाजिक संबंधांच्या संदर्भात रेजिनाल्ड एडवर्ड एन्थोव्हन यांच्या मानववंशशास्त्रीय अभ्यासातही प्रादेशिक आणि सामाजिक विविधतेचे उल्लेख आढळतात. त्यामुळे मराठा, कुणबी, मराठा–कुणबी आणि कुणबी–मराठा या संज्ञांचा ऐतिहासिक अभ्यास करताना जनगणना वर्गीकरण, प्रशासकीय नोंद, स्थानिक सामाजिक वापर आणि स्वयंओळख यांच्यातील फरक लक्षात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="Enthoven1922" />
उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतांवरून संपूर्ण महाराष्ट्रातील सर्व व्यक्तींनी या संज्ञांचा एकाच अर्थाने आणि सर्व काळात समान पद्धतीने वापर केला होता, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.
=== विवाहसंबंध ===
मराठा आणि कुणबी समूहांमधील विवाहसंबंधांचा उल्लेख ब्रिटिशकालीन मानववंशशास्त्रीय साहित्यात आढळतो. रेजिनाल्ड एडवर्ड एन्थोव्हन यांच्या नोंदींमध्ये मराठा आणि कुणबी यांच्यातील सामाजिक संबंधांचे वर्णन करताना त्यांच्या सामाजिक सीमारेषा सर्व प्रदेशांत पूर्णपणे कठोर नसल्याचे दिसून येते. काही प्रदेशांत आणि विशिष्ट सामाजिक परिस्थितींमध्ये या समूहांमध्ये परस्पर सामाजिक संपर्क आणि विवाहसंबंध अस्तित्वात असल्याचे उल्लेख आढळतात.<ref name="Enthoven1922" />
मात्र या मानववंशशास्त्रीय नोंदी संपूर्ण महाराष्ट्रातील सर्व मराठा आणि कुणबी समूहांना समान प्रमाणात लागू होतात असे मानता येत नाही. विवाहपद्धती प्रदेश, उपसमूह, कुटुंब, सामाजिक स्थान आणि स्थानिक विवाहनियमांनुसार बदलत असू शकतात. त्यामुळे काही ऐतिहासिक विवाहसंबंधांच्या आधारे मराठा आणि कुणबी हे सर्व प्रदेशांत एकच सामाजिक समूह होते, असा निष्कर्ष काढणे योग्य ठरणार नाही.<ref name="Enthoven1922" />
=== सामाजिक प्रतिष्ठा आणि सामाजिक स्तर ===
ब्रिटिशकालीन मानववंशशास्त्रीय आणि प्रशासकीय लेखनात मराठा आणि कुणबी यांच्यातील सामाजिक प्रतिष्ठेच्या भेदांचा उल्लेख आढळतो. त्याच वेळी आर्थिक स्थिती, जमीनधारणा आणि सामाजिक प्रभाव यांमुळे काही कुणबी कुटुंबांना स्थानिक समाजात तुलनेने उच्च सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त होत असल्याचेही विविध नोंदींमधून दिसून येते.<ref name="Enthoven1922" />
१९११–१२ च्या बॉम्बे प्रशासनाच्या अहवालात मराठा आणि कुणबी यांच्यातील सामाजिक सीमारेषा सर्व परिस्थितींमध्ये अपरिवर्तनीय नसल्याचे निरीक्षण आढळते. आर्थिकदृष्ट्या सक्षम कुणबी व्यक्तींना सामाजिक प्रतिष्ठेच्या उच्च स्थानाकडे जाण्याची संधी किंवा प्रवृत्ती असल्याचा उल्लेख त्या काळातील प्रशासकीय निरीक्षणात करण्यात आला आहे.<ref name="BombayAdministration1911-12">{{cite web
|title=Report on the Administration of the Bombay Presidency for the Year 1911–1912
|publisher=Government of Bombay
|year=1912
|url=https://www.qdl.qa/en/archive/81055/vdc_100146764805.0x000068
}}</ref>
या प्रकारच्या नोंदींचा उपयोग तत्कालीन सामाजिक गतिशीलता, आर्थिक स्थिती आणि सामाजिक प्रतिष्ठा यांच्यातील संबंध समजून घेण्यासाठी करता येतो. तथापि ही निरीक्षणे ब्रिटिशकालीन प्रशासकीय आणि मानववंशशास्त्रीय दृष्टिकोनातून नोंदवलेली असल्यामुळे त्यांना आधुनिक सामाजिक वास्तवाचे अंतिम वर्णन मानता येत नाही. तसेच या नोंदींच्या आधारे आधुनिक काळातील मराठा किंवा कुणबी समाजाचे सामाजिक स्थान निश्चित करता येत नाही.
=== ब्रिटिशकालीन वर्गीकरण आणि आधुनिक ओळख ===
ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये कुणबी, मराठा, मराठा कुणबी आणि कोकणी मराठा यांसारख्या संज्ञांचा वापर वेगवेगळ्या काळात आणि विविध प्रशासकीय संदर्भांत करण्यात आला. १९०१ च्या मुंबई शहराच्या जनगणनेत मराठा कुणबी आणि कोकणी मराठा यांची स्वतंत्र विभागांमध्ये नोंद करण्यात आली होती, तर १९११ च्या जनगणनेत कुणबी मराठा ही संज्ञा कुणबी या वर्गाच्या अंतर्गत दाखविण्यात आली होती.<ref name="CensusBombay1901"/><ref name="CensusBombay1911"/>
या वर्गीकरणातील बदलांमुळे जुन्या जनगणनांमधील आकडे आधुनिक प्रशासकीय जातीय वर्गांशी थेट जोडताना विशेष सावधगिरी आवश्यक आहे. प्रशासकीय सीमा, जनगणनेची पद्धत, जातीय शीर्षके आणि स्थानिक सामाजिक ओळखी काळानुसार बदलत गेल्या असल्यामुळे १९व्या किंवा २०व्या शतकाच्या प्रारंभीची मराठा कुणबी किंवा कुणबी मराठा यांची संख्या आजच्या कुणबी किंवा मराठा लोकसंख्येचे थेट मोजमाप मानता येत नाही.<ref name="CensusClassification1951" />
=== आधुनिक प्रशासकीय संदर्भ ===
आधुनिक महाराष्ट्रातील कुणबी, मराठा कुणबी आणि कुणबी मराठा या संज्ञांचा वापर जात प्रमाणपत्रे, मागासवर्गीय वर्गीकरण आणि शासकीय नोंदी यांच्या संदर्भात केला जातो. या आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरणाचा अभ्यास करताना ऐतिहासिक जनगणना, गॅझेटियर आणि मानववंशशास्त्रीय साहित्य यांना त्यांच्या संबंधित कालखंडातील स्रोत म्हणून पाहणे आवश्यक आहे. त्यांची आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरणाशी थेट समानता गृहीत धरता येत नाही.
आधुनिक प्रशासकीय वादांमध्ये जुन्या जनगणना नोंदी, गॅझेटियर आणि मानववंशशास्त्रीय साहित्याचा संदर्भ दिला जातो. महाराष्ट्रातील मराठा आणि कुणबी वर्गीकरणासंबंधीच्या विविध प्रशासकीय व न्यायालयीन चर्चांमध्ये रेजिनाल्ड एडवर्ड एन्थोव्हन यांच्या द ट्राइब्स अँड कास्ट्स ऑफ बॉम्बे या ग्रंथातील निरीक्षणांचाही संदर्भ आढळतो.<ref name="Enthoven1922" />
तथापि ऐतिहासिक मानववंशशास्त्रीय निरीक्षणे आणि आधुनिक प्रशासकीय जात-वर्गीकरण हे दोन स्वतंत्र विषय आहेत. आधुनिक काळातील जात प्रमाणपत्र किंवा प्रशासकीय वर्गीकरण निश्चित करताना त्या वेळी लागू असलेले कायदे, शासन निर्णय, अधिकृत मागासवर्गीय याद्या, सक्षम प्राधिकरणाच्या नोंदी आणि संबंधित न्यायालयीन निर्णय यांनाच प्रशासकीयदृष्ट्या निर्णायक आधार मानणे आवश्यक आहे.
=== ऐतिहासिक निष्कर्ष आणि मर्यादा ===
उपलब्ध जनगणना आणि मानववंशशास्त्रीय स्रोतांवरून असे दिसून येते की मराठा आणि कुणबी या संज्ञांमध्ये महाराष्ट्राच्या विविध भागांत ऐतिहासिक सामाजिक संबंध होते आणि काही काळ मराठा-कुणबी किंवा कुणबी-मराठा यांसारख्या संयुक्त संज्ञांचा प्रशासकीय आणि जनगणनात्मक वापर करण्यात आला. त्याच वेळी काही जनगणनांमध्ये मराठा आणि कुणबी यांची स्वतंत्र शीर्षकांखाली नोंद करण्यात आली होती.<ref name="CensusBombay1901"/><ref name="CensusBombay1911"/>
या ऐतिहासिक नोंदींमधून सामाजिक संपर्क, विवाहसंबंध, आर्थिक स्थिती आणि सामाजिक गतिशीलतेचे काही पैलू स्पष्ट होतात; परंतु त्यावरून मराठा आणि कुणबी यांची एकच व अखंडित प्राचीन वंशावळ सिद्ध होत नाही. त्याचप्रमाणे या दोन्ही समूहांमध्ये कोणताही ऐतिहासिक सामाजिक संबंध नव्हता, असेही उपलब्ध स्रोतांच्या आधारे सर्वसाधारणपणे म्हणता येत नाही.<ref name="Enthoven1922" />
म्हणून कोकणातील कुणबी समाजाच्या इतिहासात मराठा-कुणबी संबंधांचा अभ्यास करताना तीन स्तर स्वतंत्र ठेवणे आवश्यक आहे: (१) ऐतिहासिक सामाजिक संबंध, (२) ब्रिटिशकालीन जनगणना आणि मानववंशशास्त्रीय वर्गीकरण, आणि (३) आधुनिक प्रशासकीय व कायदेशीर वर्गीकरण. या तीन स्तरांची सरमिसळ न करता त्यांचा स्वतंत्रपणे अभ्यास केल्यास या विषयाचे अधिक अचूक ऐतिहासिक चित्र समोर येते.
=== धर्म, श्रद्धा आणि लोकसंस्कृती ===
कोकणातील कुणबी समाजाच्या धार्मिक आणि सांस्कृतिक जीवनाचा अभ्यास करताना ग्रामजीवन, कुटुंब, देवक, ग्रामदेवता, स्थानिक देवता, विवाहविधी आणि कृषीचक्र यांचा परस्परसंबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे. ब्रिटिशकालीन गॅझेटियर आणि रेजिनाल्ड एडवर्ड एन्थोव्हन यांच्या मानववंशशास्त्रीय नोंदींमध्ये कुणबी आणि संबंधित कृषक समूहांच्या धार्मिक श्रद्धा, देवक, विवाहविधी, देवतांची उपासना आणि सामाजिक प्रथांचे विविध संदर्भ आढळतात.<ref name="Enthoven1922" /><ref name="RatnagiriSavantvadi1880" />
या नोंदींचा उपयोग करताना त्यातील वर्णने त्यांच्या काळातील प्रशासकीय आणि मानववंशशास्त्रीय निरीक्षणांवर आधारित आहेत, हे लक्षात घेणे आवश्यक आहे. त्यामुळे त्यातील प्रत्येक धार्मिक प्रथा संपूर्ण कोकणातील सर्व कुणबी कुटुंबांना किंवा आधुनिक काळातील संपूर्ण कुणबी समाजाला तंतोतंत लागू होते, असे मानता येत नाही.
=== ग्रामदेवता आणि स्थानिक देवता ===
कोकणातील ग्रामीण धार्मिक जीवनात ग्रामदेवता आणि स्थानिक देवतांना महत्त्वाचे स्थान होते. गावाची सामाजिक रचना आणि धार्मिक जीवन यांचा परस्पर संबंध असल्यामुळे ग्रामदेवतेचे उत्सव, पूजा आणि स्थानिक धार्मिक प्रथांमध्ये गावातील विविध सामाजिक समूहांचा सहभाग असे.<ref name="KolabaJanjira1883" />
बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या गॅझेटियरमधील ग्रामीण समाजाच्या वर्णनांमध्ये मारुती, खंडोबा, शिव आणि इतर देवतांच्या उपासनेचे उल्लेख विविध सामाजिक समूहांच्या संदर्भात आढळतात. त्यामुळे कोकणातील कुणबींच्या धार्मिक जीवनाचा अभ्यास करताना केवळ कुणबी समाजाशी संबंधित मानल्या जाणाऱ्या धार्मिक परंपरांचा विचार न करता व्यापक ग्रामीण आणि प्रादेशिक धार्मिक संस्कृतीचाही विचार करणे आवश्यक आहे.<ref name="KolabaJanjira1883" />
=== कुलदैवत आणि कुटुंबीय श्रद्धा ===
कुणबी समाजाच्या धार्मिक जीवनात कुटुंब आणि वंशपरंपरेशी संबंधित देवतांना स्थान असल्याचे मानववंशशास्त्रीय साहित्यात आढळते. घरातील धार्मिक विधी, पूर्वजांचे स्मरण, कुटुंबीय देवता आणि स्थानिक धार्मिक प्रथा या ग्रामीण कुटुंबाच्या सामाजिक जीवनाशी जोडलेल्या होत्या.<ref name="Enthoven1922" />
तथापि कुलदैवत या संज्ञेअंतर्गत सर्व कुणबी कुटुंबांची एकच देवता होती, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. कुलदैवत, ग्रामदेवता आणि स्थानिक देवतांच्या परंपरा कुटुंब, गाव आणि प्रदेशानुसार बदलत असू शकतात. त्यामुळे या धार्मिक परंपरांचा अभ्यास करताना स्थानिक आणि कुटुंबीय पुराव्यांना विशेष महत्त्व देणे आवश्यक आहे.
=== देवक ===
देवक ही विवाहसंस्था आणि कुटुंबीय धार्मिक विधींशी संबंधित महत्त्वाची सामाजिक-धार्मिक संकल्पना होती. रेजिनाल्ड एडवर्ड एन्थोव्हन यांच्या मानववंशशास्त्रीय नोंदींमध्ये विविध कृषक आणि इतर हिंदू समूहांच्या विवाहविधींमध्ये देवकाला असलेले स्थान वर्णन केले आहे. विवाहापूर्वी देवकाची स्थापना करणे, त्याची पूजा करणे आणि विवाहसमारंभात त्याला धार्मिक महत्त्व देणे अशा प्रथा विविध समुदायांच्या संदर्भात नोंदविल्या आहेत.<ref name="Enthoven1922" />
कुणबी समाजाच्या सामाजिक रचनेचा अभ्यास करताना देवकाचा संबंध केवळ धार्मिक विधींशी मर्यादित न ठेवता विवाहनियम आणि सामाजिक नातेसंबंधांच्या संदर्भातही पाहिला जातो. देवक आणि विवाहसंस्था यांच्यातील संबंधामुळे विशिष्ट कुटुंबीय किंवा सामाजिक गटांमध्ये विवाहासंबंधी काही नियम प्रचलित असल्याचे दिसते. तथापि या नियमांचे स्वरूप प्रदेश आणि सामाजिक उपगटांनुसार बदलत असल्यामुळे त्यांना संपूर्ण कोकणातील कुणबी समाजाचे सार्वत्रिक नियम मानता येत नाही.<ref name="Enthoven1922" />
=== विवाहविधी आणि धार्मिक प्रथा ===
कुणबी समाजातील विवाह ही धार्मिक विधींबरोबरच सामाजिक नातेसंबंध दृढ करणारी संस्था होती, असे ब्रिटिशकालीन मानववंशशास्त्रीय नोंदींवरून दिसते. विवाहसमारंभात देवकाची स्थापना, धार्मिक पूजा, नातेवाईकांचा सहभाग, सामुदायिक भोजन आणि विविध पारंपरिक विधी यांचा समावेश असल्याचे वर्णन आढळते.<ref name="Enthoven1922" />
विवाहासंबंधीच्या प्रथा प्रदेश, सामाजिक उपगट आणि स्थानिक परंपरांनुसार बदलत असत. त्यामुळे एखाद्या मानववंशशास्त्रीय नोंदीत वर्णन केलेली विवाहपद्धती संपूर्ण कोकणातील कुणबी समाजाची एकमेव किंवा अपरिवर्तनीय पद्धत होती, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. उपलब्ध नोंदींचे विश्लेषण करताना त्यांचा काळ, भौगोलिक संदर्भ आणि संबंधित सामाजिक समूह लक्षात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="Enthoven1922" />
=== सण आणि धार्मिक उत्सव ===
कोकणातील कुणबी समाजाचे धार्मिक जीवन व्यापक ग्रामीण मराठी आणि कोकणी सांस्कृतिक परंपरांशी संबंधित होते. स्थानिक देवतांच्या जत्रा, ग्रामदेवतांची पूजा, हिंदू धार्मिक सण आणि कुटुंबीय धार्मिक विधी हे ग्रामीण सामाजिक जीवनाचे घटक होते. बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या गॅझेटियरमध्ये विविध ग्रामीण समुदायांच्या धार्मिक आचारांमध्ये स्थानिक देवता, मंदिरे, जत्रा आणि विशिष्ट दिवसांच्या पूजेचे उल्लेख आढळतात.<ref name="KolabaJanjira1883" />
काही समुदायांच्या संदर्भात शनिवार, विशिष्ट तिथी किंवा स्थानिक देवतेच्या उत्सवाच्या दिवशी पूजा करण्याच्या प्रथा नोंदविल्या आहेत. या प्रकारच्या धार्मिक प्रथा कोकणातील व्यापक ग्रामीण धार्मिक संस्कृतीचा भाग होत्या; त्यामुळे त्यांना केवळ कुणबी समाजापुरते मर्यादित करणे योग्य ठरणार नाही.<ref name="KolabaJanjira1883" />
=== कृषीचक्र आणि धार्मिक श्रद्धा ===
कुणबी समाजाची पारंपरिक अर्थव्यवस्था शेतीशी संबंधित असल्यामुळे कृषीचक्र आणि ग्रामीण धार्मिक जीवन यांच्यात परस्परसंबंध असण्याची शक्यता होती. पाऊस, पेरणी, रोपांची लागवड, पीकवाढ आणि कापणी या कृषी टप्प्यांशी स्थानिक श्रद्धा, ग्रामदेवता आणि धार्मिक प्रथा जोडल्या जात असत. कोकणातील ग्रामीण धार्मिक जीवनाच्या वर्णनांमध्ये कृषीसमाजाच्या जीवनाशी संबंधित स्थानिक देवता, धार्मिक उत्सव आणि प्रथांचे उल्लेख आढळतात.<ref name="KolabaJanjira1883" />
मात्र उपलब्ध ब्रिटिशकालीन गॅझेटियर आणि मानववंशशास्त्रीय स्रोतांमध्ये कुणबी समाजातील सर्व कृषीविधींची एकसंध आणि सविस्तर नोंद आढळत नाही. त्यामुळे एखादा विशिष्ट कृषीविधी संपूर्ण कुणबी समाजाची सार्वत्रिक परंपरा म्हणून मांडण्याऐवजी त्याचा अभ्यास संबंधित गाव, प्रदेश आणि स्थानिक ग्रामीण कृषी संस्कृतीच्या संदर्भात करणे अधिक योग्य ठरते.
कोकणातील कृषीजीवन, ग्रामीण परंपरा आणि स्थानिक सांस्कृतिक व्यवहारांच्या संदर्भात अनंत नर्मदा सखाराम घोलम यांच्या ‘खडीकोळवण : सांस्कृतिक, ऐतिहासिक आणि ग्रामीण जीवन’ या ग्रंथातील स्थानिक संदर्भ पूरक स्रोत म्हणून उपयोगी ठरू शकतात.<ref name="घोलम2025" />
=== पूर्वज, मृत्यू आणि धार्मिक विधी ===
कुटुंब आणि पूर्वजांशी संबंधित धार्मिक विधींचा उल्लेख ब्रिटिशकालीन मानववंशशास्त्रीय साहित्यामध्ये आढळतो. विवाह, मृत्यू आणि पुनर्विवाह यांसारख्या प्रसंगी धार्मिक विधी, सामाजिक मान्यता आणि कुटुंबीय संबंध यांच्यातील परस्परसंबंध विविध सामाजिक समूहांच्या संदर्भात नोंदविण्यात आले आहेत.<ref name="Enthoven1922" />
या नोंदींवरून ग्रामीण समाजात धार्मिक विधी आणि सामाजिक मान्यता यांचा परस्परसंबंध होता असे दिसते. तथापि एन्थोव्हन यांच्या नोंदी विशिष्ट काळातील आणि विशिष्ट सामाजिक समूहांवरील मानववंशशास्त्रीय निरीक्षणांवर आधारित आहेत. त्यामुळे त्यांतील वर्णने आधुनिक काळातील संपूर्ण कुणबी समाजाच्या धार्मिक जीवनाला थेट लागू करता येत नाहीत.
=== लोककथा आणि लोकपरंपरा ===
कोकणातील लोकसंस्कृतीमध्ये देवता, स्थानिक वीरपुरुष, ग्रामपरंपरा, धार्मिक स्थळे, जत्रा, आख्यायिका आणि मौखिक परंपरांना महत्त्वाचे स्थान आहे. ब्रिटिशकालीन गॅझेटियरमध्ये कोकणातील ग्रामीण समाजाच्या धार्मिक जीवनाशी संबंधित स्थानिक देवता, धार्मिक स्थळे आणि उत्सवांचे उल्लेख आढळतात.<ref name="KolabaJanjira1883" />
तथापि उपलब्ध प्रमुख गॅझेटियर आणि एन्थोव्हन यांच्या मानववंशशास्त्रीय नोंदींमध्ये कुणबी समाजाच्या स्वतंत्र लोककथांचा किंवा स्वतंत्र कथासंग्रहाचा पुरेसा सुसंगत पुरावा उपलब्ध नसल्यामुळे विशिष्ट लोककथा कुणबी समाजाची सार्वत्रिक परंपरा म्हणून नोंदविणे योग्य ठरणार नाही.
कोकणातील लोकपरंपरांचा अभ्यास व्यापक प्रादेशिक लोकसाहित्याच्या संदर्भात करणे अधिक योग्य ठरते. एखादी लोककथा, आख्यायिका, धार्मिक परंपरा किंवा मौखिक स्मृती विशिष्ट कुणबी गाव, कुटुंब किंवा स्थानिक समुदायाशी संबंधित असल्यास तिचा स्वतंत्र स्थानिक स्रोतांच्या आधारे अभ्यास करता येतो. अशा स्थानिक सांस्कृतिक आणि ग्रामीण परंपरांच्या संदर्भात ‘खडीकोळवण : सांस्कृतिक, ऐतिहासिक आणि ग्रामीण जीवन’ हा पूरक संदर्भ म्हणून वापरता येतो; मात्र एखाद्या विशिष्ट लोककथेचा पुरावा त्या ग्रंथात प्रत्यक्ष उपलब्ध असल्यासच संबंधित विधानासाठी त्याचा संदर्भ द्यावा.<ref name="घोलम2025"/>
=== लोकगीते आणि मौखिक परंपरा ===
कृषीप्रधान ग्रामीण समाजात श्रम, सण, विवाह, धार्मिक विधी आणि ऋतूचक्र यांच्याशी संबंधित मौखिक परंपरांना महत्त्वाचे स्थान होते. कोकणातील ग्रामीण लोकजीवनाच्या वर्णनांमध्ये धार्मिक उत्सव, स्थानिक देवता, जत्रा आणि सामाजिक-सांस्कृतिक प्रथांचा उल्लेख आढळतो. या व्यापक ग्रामीण सांस्कृतिक वातावरणातून विविध प्रकारच्या मौखिक परंपरा विकसित झाल्या असण्याची शक्यता आहे.<ref name="KolabaJanjira1883" />
मात्र एखादे विशिष्ट लोकगीत हे ‘कुणबी लोकगीत’ आहे, असा निष्कर्ष काढण्यासाठी त्या गीताचा कुणबी समाजाशी स्पष्ट संबंध दर्शविणारा विश्वसनीय स्रोत आवश्यक आहे. त्यामुळे केवळ कोकणात किंवा ग्रामीण समाजात प्रचलित असल्याच्या आधारावर सामान्य लोकगीतांना कुणबी समाजाची स्वतंत्र सांस्कृतिक निर्मिती म्हणून वर्गीकृत करणे योग्य ठरणार नाही.
स्थानिक लोकगीते, म्हणी, आख्यायिका आणि मौखिक स्मृती यांचा अभ्यास करताना त्यांचे भौगोलिक क्षेत्र, संबंधित समुदाय, प्रसंग आणि मौखिक परंपरेतील वापर यांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे. अशा स्थानिक सांस्कृतिक परंपरांचे दस्तऐवजीकरण कोकणातील ग्रामीण सामाजिक इतिहासाच्या अभ्यासासाठी पूरक ठरू शकते.
=== कोकणी लोकसंस्कृतीशी संबंध ===
कोकणातील कुणबी समाजाची धार्मिक आणि सांस्कृतिक ओळख व्यापक कोकणी ग्रामीण संस्कृतीपासून पूर्णपणे वेगळी नव्हती. ग्रामदेवता, स्थानिक देवता, कृषीचक्र, जत्रा, कुटुंबीय धार्मिक प्रथा, विवाहविधी आणि स्थानिक सामाजिक संस्था यांसारख्या अनेक सांस्कृतिक बाबी कोकणातील विविध ग्रामीण समुदायांमध्ये आढळत असल्याचे गॅझेटियरमधील वर्णनांवरून दिसते.<ref name="KolabaJanjira1883" />
त्यामुळे कुणबी समाजाची लोकसंस्कृती ही पूर्णपणे बंदिस्त किंवा इतर ग्रामीण समुदायांपासून स्वतंत्र अशी सांस्कृतिक व्यवस्था होती, असे मानणे योग्य ठरणार नाही. तिचा विकास स्थानिक कृषीजीवन, ग्रामसंस्था, धार्मिक परंपरा आणि कोकणातील व्यापक सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरणाशी असलेल्या परस्परसंबंधातून झाला असण्याची शक्यता अधिक आहे.
या संदर्भात स्थानिक ग्रामीण जीवन, सांस्कृतिक परंपरा आणि सामाजिक स्मृतींचे दस्तऐवजीकरण करणारे अनंत नर्मदा सखाराम घोलम यांचे ‘खडीकोळवण : सांस्कृतिक, ऐतिहासिक आणि ग्रामीण जीवन’ हे पुस्तक पूरक स्रोत म्हणून उपयोगी ठरू शकते. तथापि त्यातील विशिष्ट माहिती ज्या स्थानिक परंपरेशी संबंधित आहे, त्याच मर्यादित संदर्भात तिचा वापर करणे अधिक योग्य ठरेल.<ref name="घोलम2025" />
=== धार्मिक जीवन आणि सामाजिक संघटना ===
धार्मिक प्रथा आणि सामाजिक संघटना यांचा परस्परसंबंध पारंपरिक ग्रामीण जीवनात महत्त्वाचा होता. विवाह, धार्मिक विधी, सामाजिक नियम आणि सामुदायिक व्यवहार यांमध्ये कुटुंब, नातेसंबंध आणि समुदायातील ज्येष्ठ व्यक्तींची भूमिका असल्याचे ब्रिटिशकालीन मानववंशशास्त्रीय नोंदींमध्ये आढळते.<ref name="Enthoven1922" />
एन्थोव्हन यांच्या नोंदींमध्ये विविध सामाजिक समूहांच्या संदर्भात जातपंचायत, सामाजिक नियम, विवाहसंस्था आणि धार्मिक प्रथांचा परस्परसंबंध वर्णन केला आहे. काही समूहांमध्ये सामाजिक नियमांचे उल्लंघन झाल्यास दंड, सामुदायिक भोजन किंवा इतर सामाजिक उपायांचा वापर केला जात असल्याचेही नमूद आहे.<ref name="Enthoven1922" />
या संस्था आधुनिक न्यायालये किंवा प्रशासकीय यंत्रणांप्रमाणे औपचारिक कायदेशीर संस्था नव्हत्या. त्या स्थानिक समुदायाच्या सामाजिक नियंत्रण, परस्पर संबंध आणि रूढींचे पालन यांसाठी कार्य करणाऱ्या पारंपरिक सामाजिक पद्धती होत्या. तथापि एन्थोव्हन यांच्या नोंदी विविध समुदायांवर आधारित असल्यामुळे त्यातील प्रत्येक प्रथा संपूर्ण कोकणातील किंवा सर्व कुणबी समूहांना समानपणे लागू होती, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="Enthoven1922" />
=== धार्मिक आणि सांस्कृतिक विविधता ===
कोकणातील कुणबी समाजाला एकसंध धार्मिक पद्धती असलेला समूह मानणे योग्य ठरणार नाही. वेगवेगळ्या गावांतील ग्रामदेवता, कुटुंबीय धार्मिक परंपरा, देवक, स्थानिक देवतांची उपासना आणि प्रादेशिक धार्मिक प्रभाव यांमुळे धार्मिक आचारांमध्ये विविधता निर्माण झाली होती. ब्रिटिशकालीन मानववंशशास्त्रीय नोंदींमध्येही विविध सामाजिक समूहांच्या धार्मिक प्रथा, देवतांची उपासना आणि स्थानिक धार्मिक परंपरांमध्ये प्रादेशिक भिन्नता असल्याचे दिसते.<ref name="Enthoven1922" />
सावंतवाडी आणि दक्षिण कोकणातील धार्मिक लोकसंख्येच्या ऐतिहासिक नोंदींमध्ये विविध हिंदू धार्मिक परंपरा तसेच स्थानिक देवता आणि आत्म्यांशी संबंधित उपासनेचे प्रकार आढळतात. १८७२ च्या सावंतवाडीच्या नोंदींमध्ये मोठ्या प्रमाणावर लोक विशिष्ट पंथाशी संबंधित नसून स्थानिक देवता आणि आत्म्यांची पूजा करीत असल्याचे स्वतंत्र वर्गीकरण करण्यात आले होते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880" />
ही नोंद कुणबी समाजाची स्वतंत्र धार्मिक आकडेवारी नाही; ती त्या काळातील सावंतवाडी संस्थानातील व्यापक धार्मिक लोकसंख्येचे वर्गीकरण आहे. त्यामुळे तिचा उपयोग कुणबी समाजाची स्वतंत्र धार्मिक स्थिती निश्चित करण्यासाठी न करता दक्षिण कोकणातील तत्कालीन व्यापक धार्मिक आणि सांस्कृतिक वातावरण समजून घेण्यासाठी करणे अधिक योग्य ठरते.<ref name="RatnagiriSavantvadi1880" />
=== ऐतिहासिक स्रोतांच्या मर्यादा ===
कुणबी समाजाच्या धार्मिक आणि लोकसंस्कृतीविषयी उपलब्ध प्रमुख ऐतिहासिक स्रोतांमध्ये ब्रिटिशकालीन गॅझेटियर आणि मानववंशशास्त्रीय ग्रंथांचा मोठा वाटा आहे. हे स्रोत तत्कालीन प्रशासकीय अधिकारी आणि मानववंशशास्त्रज्ञ यांच्या निरीक्षणांवर आधारित असल्यामुळे त्यांतील वर्णने त्या काळातील प्रशासकीय वर्गीकरण, सामान्यीकरणे आणि निरीक्षकांच्या दृष्टिकोनाने प्रभावित असू शकतात.<ref name="Enthoven1922" />
त्यामुळे या स्रोतांमध्ये नोंदविलेली एखादी धार्मिक प्रथा संपूर्ण कुणबी समाजाची सार्वत्रिक परंपरा होती, असे गृहीत धरता येत नाही. विशेषतः ग्रामदेवता, कुलदैवत, देवक, लोककथा, लोकगीते आणि कृषीविधी यांचा अभ्यास करताना त्यांचा प्रदेश, गाव, कुटुंब आणि सामाजिक उपगट यांनुसार बदलणारा संदर्भ विचारात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="Enthoven1922" />
=== धार्मिक आणि लोकसांस्कृतिक वारशाचे ऐतिहासिक महत्त्व ===
उपलब्ध पुराव्यांवरून कोकणातील कुणबी समाजाच्या धार्मिक जीवनात ग्रामजीवन, कुटुंबीय परंपरा, देवक, स्थानिक देवता, विवाहविधी आणि कृषीप्रधान जीवन यांचे परस्परसंबंध दिसून येतात. या धार्मिक-सांस्कृतिक संस्था केवळ धार्मिक आचरणापुरत्या मर्यादित नव्हत्या; त्या कुटुंब, विवाह, ग्रामसमुदाय आणि सामाजिक संबंधांच्या संघटनेशीही संबंधित होत्या.<ref name="Enthoven1922" />
या पार्श्वभूमीवर कोकणातील कुणबी समाजाची लोकसंस्कृती समजून घेताना ‘कुणबींची स्वतंत्र संस्कृती’ आणि ‘कोकणातील व्यापक ग्रामीण संस्कृती’ यांना परस्परविरोधी मानण्याऐवजी त्यांच्यातील परस्परसंबंध, सांस्कृतिक देवाणघेवाण आणि प्रादेशिक विविधता यांचा अभ्यास करणे अधिक योग्य ठरते. स्थानिक सांस्कृतिक परंपरा, ग्रामीण जीवन आणि सामाजिक स्मृतींच्या अभ्यासासाठी अनंत नर्मदा सखाराम घोलम यांचे ‘खडीकोळवण : सांस्कृतिक, ऐतिहासिक आणि ग्रामीण जीवन’ हे पुस्तक पूरक संदर्भ म्हणून वापरता येऊ शकते; मात्र विशिष्ट धार्मिक प्रथा किंवा लोकपरंपरेचा दावा करताना त्या पुस्तकातील संबंधित प्रत्यक्ष मजकुराशी संदर्भ जुळविणे आवश्यक आहे.<ref name="घोलम2025" />
== लोकसंख्याशास्त्र ==
कोकणातील कुणबी समाजाच्या लोकसंख्येचा ऐतिहासिक अभ्यास करताना ब्रिटिशकालीन जनगणना, जिल्हानिहाय गॅझेटियर, ग्रामसर्वेक्षण आणि नंतरच्या जनगणना-अभिलेखांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे. या स्रोतांमध्ये कुणबी आणि संबंधित कृषक समूहांचे वर्गीकरण काळानुसार बदललेले दिसते. विशेषतः कुणबी, मराठा-कुणबी आणि कुणबी-मराठा यांसारख्या संज्ञांचा वापर वेगवेगळ्या जनगणनांमध्ये समान पद्धतीने झालेला नव्हता. त्यामुळे विविध जनगणनांतील आकडे थेट एकत्र करून आधुनिक काळातील कुणबी लोकसंख्येचा अंदाज काढणे पद्धतशीरदृष्ट्या योग्य ठरत नाही.<ref name="Baines1881" /><ref name="CensusBombay1901" /><ref name="CensusBombay1911" />
=== १८८१ची जनगणना ===
१८८१ची जनगणना ही बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील कुणबी आणि संबंधित कृषक समूहांच्या लोकसंख्येचा अभ्यास करण्यासाठी महत्त्वाचा ऐतिहासिक स्रोत आहे. जनगणना अहवालात जे. ए. बेन्स यांनी ‘Maratha Kunbi’ हा व्यापक कृषक समूह मानला असून त्यात दख्खनातील कुणबी तसेच कोकणात ‘Maratha’ म्हणून नोंदविल्या जाणाऱ्या संबंधित समूहांचा समावेश केला होता. अहवालात या दोन समूहांमधील भेद अनेक ठिकाणी स्पष्ट नसून काही बाबतींत तो प्रशासकीय वर्गीकरणावर अवलंबून असल्याचेही नमूद केले आहे.<ref name="Baines1881" />
१८८१ च्या अहवालातील रत्नागिरी जिल्ह्याच्या आकडेवारीनुसार २,०५,७८४ कुणबी आणि सुमारे २,७१,००० मराठा अशी नोंद करण्यात आली होती. त्यामुळे त्या काळातील रत्नागिरी जिल्ह्यात कुणबी हा मोठ्या संख्येचा कृषक समूह होता, असे जनगणना-अभिलेखावरून दिसते.<ref name="Baines1881" />
या आकडेवारीचा अर्थ लावताना १८८१ च्या जनगणनेतील ‘Maratha Kunbi’ आणि ‘Kunbi’ या वर्गांची व्याप्ती आधुनिक महाराष्ट्रातील प्रशासकीय कुणबी वर्गाशी समान नव्हती, हे लक्षात घेणे आवश्यक आहे. त्यामुळे २,०५,७८४ हा आकडा आधुनिक रत्नागिरी जिल्ह्यातील कुणबी लोकसंख्येशी थेट तुलनेसाठी वापरणे योग्य ठरणार नाही.<ref name="Baines1881" />
=== १९०१ची जनगणना ===
१९०१ च्या जनगणनेत बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील जातीय वर्गीकरणाची पद्धत १८८१ च्या तुलनेत बदललेली दिसते. मुंबई शहराच्या जनगणना अहवालात ‘Kunbi (Maratha)’ ही संज्ञा वापरण्यात आली असून काही स्थानिक विभागांमध्ये या वर्गाचे प्रमाण लक्षणीय असल्याचे नमूद केले आहे. डोंगरी, पहिला नागपाडा आणि कुंभारवाडा या विभागांमध्ये ‘Kunbi (Maratha)’ लोकसंख्येचे प्रमाण अनुक्रमे ४७ टक्के, ३४ टक्के आणि २८ टक्के असल्याचे अहवालात नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="CensusBombay1901"/>
१९०१ च्या जनगणनेतील मुंबईच्या स्थलांतरविषयक नोंदींमध्ये रत्नागिरी हा मुंबईला स्थलांतरित लोकसंख्या पुरविणाऱ्या प्रमुख जिल्ह्यांपैकी एक असल्याचे नमूद आहे. त्या वेळी मुंबईतील एकूण स्थलांतरित लोकसंख्येपैकी सुमारे १,४६,००० व्यक्ती रत्नागिरी जिल्ह्यात जन्मलेल्या होत्या; हे प्रमाण स्थलांतरित लोकसंख्येच्या सुमारे २४.५ टक्के होते. त्यामुळे विसाव्या शतकाच्या प्रारंभी रत्नागिरी आणि मुंबई यांच्यातील लोकसंख्याशास्त्रीय संबंध लक्षणीय होते.<ref name="CensusBombay1901Presidency">{{cite report
|author=India. Census Commissioner
|title=Census of India, 1901: Bombay Presidency
|publisher=Government Central Press
|year=1902
}}</ref>
मात्र मुंबईत स्थलांतरित झालेल्या रत्नागिरीकरांना कुणबी म्हणून वर्गीकृत करता येत नाही. रत्नागिरीहून होणारे स्थलांतर विविध सामाजिक आणि धार्मिक समूहांचे होते. त्यामुळे जिल्हानिहाय स्थलांतराची आकडेवारी आणि कुणबी समाजाची जातीनिहाय लोकसंख्या यांची थेट समानता करणे ऐतिहासिकदृष्ट्या अचूक ठरणार नाही.<ref name="CensusBombay1901Presidency"/>
=== १९११ची जनगणना ===
१९११ च्या जनगणनेत कुणबी आणि मराठा या समूहांचे वर्गीकरण पुन्हा बदललेले दिसते. अधिकृत जनगणना अहवालानुसार १९०१मध्ये ‘Mahratha Kunbis’ ज्या पद्धतीने वर्गीकृत करण्यात आले होते, त्यांचे १९११मध्ये कुणबी या वर्गाशी संबंध जोडण्यात आले. १९११ च्या जनगणनेत कुणबी आणि कानबी यांच्या विविध उपगटांची नोंद करण्याचाही प्रयत्न करण्यात आला होता. त्यामुळे १९०१ आणि १९११ च्या आकडेवारीची तुलना करताना दोन्ही जनगणनांमधील वर्गीकरणपद्धतीतील फरक विचारात घेणे आवश्यक ठरते.<ref name="CensusBombay1911"/>
१९११ च्या अधिकृत जनगणनेत ‘Kunbi Maratha’ हा कुणबी या शीर्षकाखाली दाखविण्यात आला, तर दख्खनी आणि कोकणी मराठा यांना मराठा या शीर्षकाखाली वर्गीकृत करण्यात आले. यावरून ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये समान किंवा संबंधित सामाजिक समूहांचे वर्गीकरण वेगवेगळ्या जनगणनांमध्ये बदलत असल्याचे दिसून येते.<ref name="CensusBombay1911"/>
या वर्गीकरणातील बदलामुळे १९०१ आणि १९११ च्या जनगणना आकडेवारीची थेट तुलना करणे सावधगिरीने करणे आवश्यक आहे. एका जनगणनेत एखादा समूह ज्या शीर्षकाखाली नोंदविला गेला होता, त्याच समूहाला पुढील जनगणनेत वेगळ्या शीर्षकाखाली समाविष्ट केले जाऊ शकत होते. त्यामुळे ऐतिहासिक जातीय लोकसंख्येचे विश्लेषण करताना केवळ संख्यात्मक आकडे न पाहता संबंधित जनगणनेची वर्गीकरणपद्धतीही तपासणे आवश्यक आहे.<ref name="CensusBombay1911"/>
=== १९३१ची जनगणना ===
१९३१ची जनगणना ब्रिटिश भारतातील जातीय वर्गीकरणाच्या शेवटच्या व्यापक जनगणनांपैकी एक होती. बॉम्बे प्रांतातील या जनगणनेच्या विविध तक्त्यांमध्ये जात, उपजात आणि प्रादेशिक वर्गीकरण स्वतंत्र पद्धतीने हाताळण्यात आले होते. त्यामुळे या जनगणनेतील कुणबी, मराठा, मराठा-कुणबी किंवा संबंधित संज्ञांचा वापर करताना संबंधित तक्ता आणि त्यामागील वर्गीकरणपद्धती तपासणे आवश्यक आहे.<ref name="Census1931Bombay"/>
१९३१नंतर भारताच्या नियमित जनगणनांमध्ये सर्व जातींची संपूर्ण लोकसंख्या पूर्वीच्या पद्धतीने सातत्याने प्रकाशित करण्यात आली नाही. त्यामुळे १९३१नंतरच्या कालखंडासाठी कुणबी समाजाची अखिल भारतीय किंवा कोकणातील सातत्यपूर्ण जातीनिहाय जनगणना-कालमालिका तयार करणे शक्य होत नाही.
=== १९६१ चे कुंकेरी ग्रामसर्वेक्षण ===
१९६१ च्या जनगणना कार्यक्रमांतर्गत महाराष्ट्रातील निवडक गावांचे स्वतंत्र ग्रामसर्वेक्षण करण्यात आले. त्याअंतर्गत सावंतवाडी तालुक्यातील कुंकेरी गावाचे स्वतंत्र ग्रामसर्वेक्षण मोनोग्राफ प्रसिद्ध करण्यात आले. हा ग्रंथ महाराष्ट्रातील निवडक ३५ गावांच्या ग्रामसर्वेक्षण मालिकेचा भाग होता आणि त्यामध्ये संबंधित गावाच्या सामाजिक, सांस्कृतिक आणि आर्थिक जीवनाचे सविस्तर दस्तऐवजीकरण करण्यात आले होते.<ref name="Kunkeri1966"/>
कुंकेरी ग्रामसर्वेक्षणात कुटुंबरचना, व्यवसाय, जमीनधारणा, आर्थिक व्यवहार, सामाजिक जीवन आणि सांस्कृतिक जीवन यांसंबंधी माहिती संकलित करण्यात आली होती. त्यामुळे दक्षिण कोकणातील ग्रामीण समाजरचनेचा सूक्ष्म पातळीवर अभ्यास करण्यासाठी हे सर्वेक्षण महत्त्वाचे प्राथमिक स्रोत ठरते.<ref name="Kunkeri1966"/>
कुंकेरीच्या पुढील दीर्घकालीन अभ्यासांमध्ये १९६१, १९८७ आणि २०१७ या तीन कालखंडांतील लोकसंख्या, सामाजिक रचना, जमीनधारणा, व्यवसाय आणि स्थलांतर यांची तुलना करण्यात आली आहे. या अभ्यासातून दीर्घकाळ चाललेल्या स्थलांतरामुळे गावाच्या सामाजिक आणि आर्थिक जीवनात बदल झाले असले तरी काही सामाजिक आणि जमीनधारणेशी संबंधित रचनांमध्ये सातत्यही राहिल्याचे दिसून येते.<ref name="VartakTumbeBhide2019"/>
=== २००१–२०११ : कोकणातील जिल्हानिहाय लोकसंख्या बदल ===
२००१ ते २०११ या कालावधीत कोकणातील जिल्ह्यांच्या एकूण लोकसंख्येत वेगवेगळ्या प्रकारचे बदल झाले. मात्र आधुनिक भारतीय जनगणनेमध्ये ‘कुणबी’ ही स्वतंत्र सर्वसमावेशक जातीय लोकसंख्या श्रेणी नियमितपणे प्रकाशित करण्यात आलेली नसल्यामुळे, जिल्ह्यांच्या एकूण लोकसंख्येतील वाढ किंवा घट यावरून कुणबी समाजाची स्वतंत्र लोकसंख्या किंवा तिचा वाढीचा दर निश्चित करता येत नाही.<ref name="PopulationFinder2011">{{cite web
|title=Population Finder 2011
|publisher=Office of the Registrar General and Census Commissioner, India
|url=https://censusindia.gov.in/census.website/en/data/population-finder
}}</ref>
२०११ च्या जनगणनेनुसार रत्नागिरी जिल्ह्याची लोकसंख्या १६,१५,०६९ होती. २००१मध्ये ही लोकसंख्या १६,९६,७७७ होती. त्यामुळे २००१ ते २०११ या दशकात रत्नागिरी जिल्ह्याच्या लोकसंख्येत ८१,७०८ व्यक्तींची घट झाली आणि दशकातील लोकसंख्या वाढीचा दर उणे ४.८ टक्के राहिला.<ref name="RatnagiriPopulation2001">{{cite report
|title=District Census Handbook: Ratnagiri, Census of India 2001
|publisher=Directorate of Census Operations, Maharashtra
|year=2006
}}</ref><ref name="RatnagiriPopulation2011">{{cite report
|title=Census of India 2011 — Maharashtra — District Census Handbook, Ratnagiri
|publisher=Directorate of Census Operations, Maharashtra
|year=2014
}}</ref>
सिंधुदुर्ग जिल्ह्याची २०११मधील लोकसंख्या ८,४९,६५१ होती. २००१मध्ये ती सुमारे ८,६८,८२५ होती. त्यामुळे २००१ ते २०११ या कालावधीत सिंधुदुर्ग जिल्ह्याच्या लोकसंख्येत १९,१७४ व्यक्तींची घट झाली आणि दशकातील लोकसंख्या वाढीचा दर उणे २.२ टक्के राहिला.<ref name="SindhudurgPopulation2011">{{cite report
|title=Census of India 2011 — Maharashtra — District Census Handbook, Sindhudurg
|publisher=Directorate of Census Operations, Maharashtra
|year=2014
}}</ref><ref name="SindhudurgPopulation2001">{{cite report
|title=Final population totals, Maharashtra, District Sindhudurg — 2001
|publisher=Office of the Registrar General & Census Commissioner, India
|year=2001
}}</ref>
२०११ च्या जनगणनेच्या वेळी पालघर हा स्वतंत्र जिल्हा नव्हता. पालघर जिल्ह्याची निर्मिती १ ऑगस्ट २०१४ रोजी तत्कालीन ठाणे जिल्ह्याचे विभाजन करून करण्यात आली. त्यामुळे २०११ च्या जनगणनेतील पालघरची लोकसंख्या स्वतंत्र जिल्हा म्हणून मोजलेली नव्हती. तथापि, सध्याच्या पालघर जिल्ह्याच्या भौगोलिक क्षेत्राशी संबंधित २०११ची पुनर्गणित लोकसंख्या २९,९०,११६ इतकी होती.<ref name="PalgharDistrict">{{cite web
|title=About District
|publisher=District Palghar, Government of Maharashtra
|url=https://palghar.gov.in/en/about-district/
}}</ref>
महाराष्ट्र शासनाच्या जिल्हानिहाय जनगणना आकडेवारीनुसार २०११ मध्ये पालघरची लोकसंख्या २९.९० लाख, रायगडची २६.३४ लाख, रत्नागिरीची १६.१५ लाख आणि सिंधुदुर्गची ८.५० लाख होती. या आकडेवारीचा वापर करताना संबंधित जिल्ह्यांच्या २००१ आणि २०११ च्या जनगणनेतील प्रशासकीय सीमांमधील बदलांचा विचार करणे आवश्यक आहे.<ref name="DistrictwisePopulationMaharashtra">{{cite web
|title=Districtwise Total & Tribal Population as per 1991, 2001 & 2011 Census of Maharashtra State
|publisher=Tribal Research and Training Institute, Government of Maharashtra
|url=https://trti.maharashtra.gov.in/districtwiseTotalPopulation
|access-date=2026-08-22
|archive-date=2026-05-11
|archive-url=https://web.archive.org/web/20260511115559/https://trti.maharashtra.gov.in/districtwiseTotalPopulation
|url-status=dead
}}</ref>
=== आधुनिक जनगणनेमध्ये कुणबी लोकसंख्येची स्थिती ===
स्वातंत्र्योत्तर भारताच्या नियमित जनगणनांमध्ये अनुसूचित जाती आणि अनुसूचित जमाती यांची स्वतंत्र लोकसंख्या आकडेवारी प्रसिद्ध करण्यात आली आहे; मात्र सर्व जातींची स्वतंत्र आणि सर्वसमावेशक जातीनिहाय लोकसंख्या नियमित जनगणनेत प्रकाशित करण्यात आलेली नाही. २०११ च्या जनगणनेच्या प्राथमिक लोकसंख्या सारांशामध्ये लोकसंख्या, लिंग, वयोगट, अनुसूचित जाती, अनुसूचित जमाती, कामाची स्थिती आणि इतर सामाजिक-आर्थिक निर्देशकांची माहिती उपलब्ध आहे; ‘कुणबी’ या स्वतंत्र सर्वसमावेशक जातीय वर्गाची जिल्हानिहाय लोकसंख्या त्यामध्ये दिलेली नाही.<ref name="PopulationFinder2011" />
त्यामुळे २०११ च्या जनगणनेच्या आधारे रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, रायगड, पालघर किंवा ठाणे या जिल्ह्यांसाठी ‘कुणबी लोकसंख्या अमुक टक्के’ असा अधिकृत जनगणना आकडा निश्चित करता येत नाही. जिल्ह्याची एकूण लोकसंख्या आणि त्या जिल्ह्यातील कुणबी समाजाची जातीनिहाय लोकसंख्या या दोन वेगळ्या सांख्यिक संकल्पना आहेत.
२०११ च्या जनगणनेत पालघरच्या सध्याच्या भौगोलिक क्षेत्राची एकूण लोकसंख्या २९,९०,११६ इतकी होती; त्यापैकी अनुसूचित जमातींची लोकसंख्या ११,१८,००८ होती. ही आकडेवारी जिल्ह्याची एकूण लोकसंख्या किंवा अनुसूचित जमातींची लोकसंख्या दर्शवते; तिच्यावरून कुणबी समाजाची लोकसंख्या निश्चित करता येत नाही.<ref name="PalgharDistrict" />
काही सामाजिक संस्था, राजकीय व्यक्ती, संशोधक किंवा माध्यमांनी कुणबी समाजाच्या लोकसंख्येबाबत विविध अंदाज व्यक्त केलेले असू शकतात. मात्र अशा अंदाजांना अधिकृत जनगणना आकडेवारीपासून स्वतंत्र ठेवणे आवश्यक आहे. विश्वसनीय अधिकृत जातीनिहाय जनगणना उपलब्ध नसताना अशा अंदाजांना कुणबी समाजाची अधिकृत लोकसंख्या म्हणून मांडणे योग्य ठरणार नाही.
त्यामुळे कोकणातील कुणबी समाजाच्या लोकसंख्येचा ऐतिहासिक अभ्यास करताना ब्रिटिशकालीन जनगणना, जिल्हानिहाय गॅझेटियर, ग्रामसर्वेक्षणे आणि उपलब्ध आधुनिक जनगणना आकडे यांचा स्वतंत्र संदर्भात उपयोग करणे आवश्यक आहे. वेगवेगळ्या कालखंडांतील वर्गीकरणपद्धती आणि प्रशासकीय सीमा भिन्न असल्यामुळे त्यांची थेट तुलना करून आधुनिक कुणबी लोकसंख्येचा निश्चित अंदाज काढणे पद्धतशीरदृष्ट्या योग्य ठरणार नाही.
=== २०२७ ची जातीनिहाय जनगणना ===
भारत सरकारने २०२७ची जनगणना घेण्याचा निर्णय अधिकृतपणे जाहीर केला असून, ३० एप्रिल २०२५ रोजी झालेल्या मंत्रिमंडळाच्या राजकीय व्यवहार समितीच्या बैठकीत आगामी जनगणनेत जातीनिहाय गणना समाविष्ट करण्याचा निर्णय घेण्यात आला. यामुळे स्वातंत्र्यानंतर प्रथमच अनुसूचित जाती आणि अनुसूचित जमातींपलीकडे सर्व सामाजिक समूहांची जातीनिहाय गणना जनगणनेच्या मुख्य प्रक्रियेचा भाग होणार आहे.<ref name="CasteEnumeration2025">{{cite web
|title=Cabinet approves Caste enumeration in the upcoming Census
|publisher=Press Information Bureau, Government of India
|date=30 April 2025
|url=https://www.pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=2125526
}}</ref>
२०२७ च्या जनगणनेची संदर्भ तारीख सामान्य क्षेत्रांसाठी १ मार्च २०२७ निश्चित करण्यात आली आहे. लडाख तसेच जम्मू आणि काश्मीर, हिमाचल प्रदेश आणि उत्तराखंडमधील असिंक्रोनस हिमाच्छादित क्षेत्रांसाठी संदर्भ तारीख १ ऑक्टोबर २०२६ निश्चित करण्यात आली आहे. या संदर्भ तारखांबाबतची अधिसूचना १६ जून २०२५ रोजी प्रसिद्ध करण्यात आली.<ref name="Census2027ReferenceDate">{{cite web
|title=Population Census-2027 to be conducted in two phases along with enumeration of castes
|publisher=Press Information Bureau, Government of India
|date=4 June 2025
|url=https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2133845
}}</ref>
२०२७ची जनगणना दोन टप्प्यांत घेण्यात येणार आहे. पहिल्या टप्प्यात घरांची यादी आणि गृहनिर्माणविषयक माहिती संकलित केली जाईल, तर दुसऱ्या टप्प्यात व्यक्तिनिहाय लोकसंख्या गणना केली जाईल. जातीनिहाय माहिती दुसऱ्या टप्प्यात संकलित केली जाणार आहे.<ref name="Census2027TwoPhases">{{cite web
|title=Population Census-2027 to be conducted in two phases along with enumeration of castes
|publisher=Press Information Bureau, Government of India
|date=4 June 2025
|url=https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2133845
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२०२७ च्या जनगणनेत जातीनिहाय माहिती संकलित करण्याचा निर्णय झाल्यामुळे भविष्यात कुणबी, मराठा-कुणबी, कुणबी-मराठा आणि इतर सामाजिक समूहांच्या लोकसंख्येबाबत अधिक व्यापक अधिकृत आकडेवारी उपलब्ध होण्याची शक्यता आहे. तथापि जनगणना पूर्ण होऊन तिचे अधिकृत निकाल प्रकाशित होईपर्यंत २०२७ची जातीनिहाय लोकसंख्या उपलब्ध आहे असे मानता येणार नाही. केंद्र सरकारने २०२६मध्येही स्पष्ट केले आहे की जातीनिहाय प्रश्नांसह दुसऱ्या टप्प्याची प्रश्नावली स्वतंत्रपणे अंतिम करून अधिसूचित केली जाणार आहे.<ref name="CasteBasedCensus2026">{{cite web
|title=Caste Based Census
|publisher=Press Information Bureau, Government of India
|date=4 February 2026
|url=https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2223099
}}</ref>
=== लोकसंख्याशास्त्रीय आकडेवारीची तुलना करताना आवश्यक सावधगिरी ===
कोकणातील कुणबी समाजाच्या लोकसंख्येची दीर्घकालीन तुलना करताना ऐतिहासिक जनगणनांमधील वर्गीकरणपद्धतीचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे. ‘कुणबी’, ‘कणबी’, ‘मराठा-कुणबी’, ‘कुणबी-मराठा’, ‘कुळवाडी’ आणि त्यासारख्या संज्ञांची व्याप्ती वेगवेगळ्या काळात आणि वेगवेगळ्या प्रशासकीय प्रदेशांत बदलत गेली. त्यामुळे विविध जनगणनांतील समान किंवा समानार्थी वाटणाऱ्या संज्ञांना आजच्या प्रशासकीय जातवर्गांशी थेट समान मानता येत नाही.<ref name="Baines1881" /><ref name="CensusBombay1901Presidency" />
दुसरी महत्त्वाची बाब म्हणजे ब्रिटिशकालीन प्रशासकीय जिल्ह्यांच्या सीमा आजच्या जिल्ह्यांच्या सीमांपेक्षा वेगळ्या होत्या. रत्नागिरी, कोलाबा, सावंतवाडी आणि इतर ऐतिहासिक जिल्ह्यांच्या सीमा काळानुसार बदलल्या आहेत. त्यामुळे एखाद्या जुन्या जिल्ह्याची लोकसंख्या आजच्या त्याच नावाच्या जिल्ह्याशी थेट तुलना करताना प्रशासकीय पुनर्रचनेचा विचार करणे आवश्यक आहे.
तिसरी बाब म्हणजे जनगणना अधिकाऱ्यांनी केलेले प्रशासकीय वर्गीकरण आणि संबंधित व्यक्ती किंवा समूहांची स्थानिक सामाजिक ओळख यांच्यात फरक असण्याची शक्यता होती. त्यामुळे जनगणनेतील एखाद्या शीर्षकाखाली नोंद झालेली संपूर्ण लोकसंख्या आधुनिक काळातील त्याच नावाच्या सामाजिक समूहाशी तंतोतंत संबंधित होती असे गृहीत धरता येत नाही.
चौथी बाब म्हणजे १९३१नंतर सर्व जातींची सातत्यपूर्ण आणि तुलनात्मक जातीनिहाय लोकसंख्या नियमित जनगणनेत प्रकाशित झालेली नाही. त्यामुळे १९व्या शतकाच्या उत्तरार्धापासून आजपर्यंत कुणबी समाजाची अखंड आणि तुलनायोग्य जातीनिहाय लोकसंख्या-मालिका तयार करणे शक्य होत नाही. १९५१ च्या अधिकृत जातीनिहाय अंदाजपत्रकातही पूर्वीच्या जनगणनांमध्ये ‘महरत्ता-कुणबी’ आणि ‘कुणबी’ यांचे वर्गीकरण वेगवेगळ्या प्रकारे झाले असल्याचे दिसते.<ref name="CensusClassification1951" />
या कारणांमुळे १८८१मधील कुणबी किंवा मराठा-कुणबी संख्या, १९०१मधील मराठा-कुणबी संख्या, १९११मधील कुणबी किंवा कुणबी-मराठा वर्गीकरण आणि आधुनिक प्रशासकीय कुणबी वर्ग यांना एका सलग आणि तुलनायोग्य सांख्यिक मालिकेप्रमाणे मांडणे योग्य ठरणार नाही.
=== लोकसंख्याशास्त्रीय निष्कर्ष ===
उपलब्ध ऐतिहासिक जनगणना नोंदींवरून रत्नागिरीसह कोकणातील काही भागांमध्ये कुणबी हा १९व्या शतकातील महत्त्वाच्या कृषक समूहांपैकी एक होता असे दिसून येते. १८८१ च्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या जनगणना अहवालात रत्नागिरी जिल्ह्यासाठी २,०५,७८४ कुणबींची नोंद करण्यात आली होती. मात्र त्या काळातील ‘कुणबी’ या वर्गीकरणाची व्याप्ती आणि आजच्या प्रशासकीय कुणबी वर्गाची व्याप्ती समान नसल्यामुळे हा आकडा आधुनिक लोकसंख्येशी थेट तुलना करण्यासाठी वापरता येत नाही.<ref name="Baines1881" />
१९०१ आणि १९११ च्या जनगणनांमध्ये मराठा आणि कुणबी यांच्याशी संबंधित वर्गीकरणात झालेले बदल हे ऐतिहासिक लोकसंख्याशास्त्राचा अभ्यास करताना केवळ संख्यात्मक आकडे पाहणे पुरेसे नसल्याचे दर्शवतात. प्रत्येक जनगणनेतील जातीय शीर्षके, उपविभाग आणि वर्गीकरणाची पद्धत स्वतंत्रपणे तपासणे आवश्यक आहे.<ref name="CensusBombay1901Presidency" /><ref name="CensusBombay1911" />
१९५१ च्या अधिकृत ‘जातीनिहाय लोकसंख्येचे अंदाज’ या अहवालातही ‘महरत्ता-कुणबी’, ‘कुणबी-कुळवाडी किंवा कणबी’, ‘तिरोळे कुणबी’ आणि इतर संबंधित गट स्वतंत्रपणे दाखविण्यात आले आहेत. यावरून ऐतिहासिक सरकारी आकडेवारीतही कुणबीशी संबंधित विविध सामाजिक नावांचे स्वतंत्र वर्गीकरण केले जात असल्याचे दिसते.<ref name="CensusClassification1951" />
त्यामुळे सध्याच्या काळात कोकणातील कुणबी समाजाची स्वतंत्र अधिकृत जिल्हानिहाय टक्केवारी उपलब्ध आहे असा निष्कर्ष काढता येत नाही. रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, रायगड, ठाणे किंवा पालघर या जिल्ह्यांसाठी आधुनिक कुणबी लोकसंख्येची निश्चित टक्केवारी सांगण्यासाठी जातीनिहाय अधिकृत आकडेवारी आवश्यक आहे.
२०२७ च्या जनगणनेत जातीनिहाय गणना समाविष्ट करण्यात आल्यामुळे भविष्यात या प्रश्नासाठी अधिक व्यापक अधिकृत सांख्यिक आधार उपलब्ध होण्याची शक्यता आहे. मात्र २०२७ची जनगणना पूर्ण होऊन तिचे अधिकृत जातीनिहाय निकाल प्रकाशित होईपर्यंत कुणबी समाजाच्या आधुनिक लोकसंख्येबाबत कोणताही निश्चित राष्ट्रीय किंवा जिल्हानिहाय आकडा अधिकृत मानता येणार नाही.<ref name="CasteEnumeration2025" />
== आधुनिक प्रशासकीय आणि कायदेशीर स्थिती ==
महाराष्ट्रातील कुणबी समाजाची आधुनिक प्रशासकीय ओळख ही राज्य शासनाच्या इतर मागासवर्गीयांच्या यादी, जात प्रमाणपत्रे आणि जात वैधता पडताळणीच्या प्रक्रियेशी संबंधित आहे. ऐतिहासिक जनगणना आणि मानववंशशास्त्रीय साहित्यात ‘कुणबी’, ‘कणबी’, ‘मराठा-कुणबी’ आणि ‘कुणबी-मराठा’ यांसारख्या संज्ञांचा वेगवेगळ्या संदर्भांत वापर झालेला आढळतो. मात्र आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरण हे संबंधित काळातील अधिकृत शासन निर्णय, मागासवर्गीयांच्या याद्या, लागू कायदे आणि न्यायालयीन निर्णय यांच्या आधारे निश्चित केले जाते.<ref name="MaharashtraOBC2025" />
=== महाराष्ट्रातील इतर मागासवर्गीय वर्गीकरण ===
महाराष्ट्र शासनाच्या १३ मे २०२५ रोजीच्या अधिकृत यादीत ‘कुणबी’ ही इतर मागासवर्गीय प्रवर्गातील अनुक्रमांक ८३वरील नोंद आहे. या नोंदीखाली ‘लेवा कुणबी’, ‘लेवा पाटील’, ‘लेवा पाटीदार’, ‘मराठा कुणबी’, ‘कुणबी मराठा’, ‘तिलोरी कुणबी’, ‘तिल्लोरी कुणबी’ आणि ‘ति. कुणबी’ या उपसंज्ञांचा समावेश करण्यात आला आहे.<ref name="MaharashtraOBC2025" />
ही यादी आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरण दर्शविते. या यादीतील विविध उपसंज्ञांचा एकत्रित समावेश आहे म्हणून त्या सर्व संज्ञांची ऐतिहासिक उत्पत्ती एकच आहे किंवा त्या प्रत्येक ऐतिहासिक कालखंडात समान अर्थाने वापरल्या गेल्या होत्या, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरण आणि ऐतिहासिक सामाजिक ओळख या स्वतंत्र बाबी आहेत.
=== कुणबी आणि तिलोरी कुणबी : ऐतिहासिक प्रशासकीय पार्श्वभूमी ===
कुणबी आणि तिलोरी कुणबी यांच्या प्रशासकीय वर्गीकरणात काळानुसार बदल झाले. मुंबई उच्च न्यायालयाने *Dattatraya s/o Ramrao Thorat v. State of Maharashtra* या प्रकरणात या बदलांचा ऐतिहासिक संदर्भ नोंदविला आहे. न्यायालयाच्या नोंदीनुसार २३ एप्रिल १९४२ च्या मुंबई शासनाच्या ठरावात ‘Kunbi (except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)’ यांचा एका वर्गात, तर ‘Kunbi Tilori in Ratnagiri district’ यांचा इतर मागास समुदायांच्या यादीत स्वतंत्रपणे समावेश करण्यात आला होता. ही स्थिती १९५०, १९५६ आणि १९६१ च्या संबंधित शासन ठरावांमध्येही कायम राहिली.<ref name="Thorat2002" />
न्यायालयाने पुढे नमूद केले आहे की १३ ऑक्टोबर १९६७ च्या महाराष्ट्र शासनाच्या ठरावाद्वारे स्वतंत्र इतर मागासवर्गीय यादी प्रसिद्ध करण्यात आली आणि त्यामध्ये ‘Kunbi caste’ ही अनुक्रमांक ८३वर समाविष्ट करण्यात आली. न्यायालयाच्या निरीक्षणानुसार १९६७पासून कुणबी जात संपूर्ण महाराष्ट्रासाठी इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समाविष्ट करण्यात आली.<ref name="Thorat2002" />
या ऐतिहासिक प्रशासकीय नोंदींवरून कुणबी आणि तिलोरी कुणबी यांच्या वर्गीकरणात कालानुसार आणि प्रदेशानुसार फरक राहिला असल्याचे दिसते. त्यामुळे आजच्या प्रशासकीय यादीचा अर्थ लावताना त्या काळातील शासन ठराव आणि संबंधित न्यायालयीन नोंदींचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे.
=== जात प्रमाणपत्र आणि जात वैधता पडताळणी ===
महाराष्ट्रात एखाद्या व्यक्तीच्या जात दाव्याची प्रशासकीय मान्यता ही केवळ आडनाव, सामाजिक संबोधन किंवा ऐतिहासिक साहित्याच्या आधारे निश्चित होत नाही. संबंधित व्यक्तीच्या जात दाव्याचा विचार करताना सक्षम प्राधिकरणाकडून जात प्रमाणपत्र देण्याची प्रक्रिया आणि त्यानंतर आवश्यक असल्यास जात वैधता पडताळणीची प्रक्रिया लागू होते.
जात वैधता पडताळणीच्या प्रक्रियेत जुन्या शासकीय अभिलेख, शैक्षणिक नोंदी, महसूल अभिलेख, जन्म-मृत्यू नोंदी आणि इतर संबंधित दस्तऐवजांचा पुरावा म्हणून विचार केला जाऊ शकतो. मात्र कोणता पुरावा ग्राह्य धरायचा आणि त्याचे पुराव्यात्मक महत्त्व किती आहे, हे संबंधित कायदे, नियम, शासन निर्णय आणि न्यायालयीन निर्णयांनुसार ठरते.
त्यामुळे ऐतिहासिक गॅझेटियर, जनगणना किंवा मानववंशशास्त्रीय ग्रंथांमध्ये ‘कुणबी’ किंवा संबंधित संज्ञेचा उल्लेख आढळणे आणि एखाद्या विशिष्ट व्यक्तीला आधुनिक प्रशासकीय प्रक्रियेत कुणबी जात प्रमाणपत्र किंवा जात वैधता मिळणे या दोन स्वतंत्र बाबी आहेत.
=== ऐतिहासिक नोंदी आणि आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरण ===
ब्रिटिशकालीन जनगणना, गॅझेटियर आणि मानववंशशास्त्रीय साहित्य हे कुणबी समाजाच्या ऐतिहासिक अभ्यासासाठी महत्त्वाचे स्रोत आहेत; मात्र ते स्वतःहून आधुनिक जात प्रमाणपत्र किंवा जात वैधतेचा अंतिम प्रशासकीय आधार ठरत नाहीत. आधुनिक प्रशासकीय प्रक्रियेत संबंधित कालखंडातील अधिकृत नोंदी, शासन निर्णय, लागू कायदे, नियम आणि सक्षम प्राधिकरण किंवा न्यायालयाचे निर्णय यांना महत्त्व प्राप्त होते.<ref name="Thorat2002" />
त्यामुळे कुणबी समाजाच्या आधुनिक प्रशासकीय स्थितीचा अभ्यास करताना ऐतिहासिक सामाजिक ओळख, ब्रिटिशकालीन वर्गीकरण आणि विद्यमान शासकीय वर्गीकरण यांच्यात स्पष्ट भेद ठेवणे आवश्यक आहे. महाराष्ट्र शासनाच्या विद्यमान यादीत कुणबीचा इतर मागासवर्गीय प्रवर्गात समावेश असला तरी एखाद्या व्यक्तीचा विशिष्ट जात दावा स्वतंत्र प्रशासकीय पडताळणीच्या अधीन राहतो.<ref name="MaharashtraOBC2025" />
=== लेवा कुणबी ===
‘लेवा कुणबी’ ही संज्ञा महाराष्ट्र शासनाच्या इतर मागासवर्गीयांच्या विद्यमान अधिकृत यादीत ‘कुणबी’ या नोंदीखाली समाविष्ट आहे. या नोंदीत ‘लेवा कुणबी’, ‘लेवा पाटील’ आणि ‘लेवा पाटीदार’ या संज्ञांचा समावेश करण्यात आला आहे.<ref name="MaharashtraOBC2025" />
या प्रशासकीय वर्गीकरणावरून लेवा कुणबीचा समावेश कुणबी या इतर मागासवर्गीय नोंदीखाली असल्याचे स्पष्ट होते. मात्र या प्रशासकीय समावेशावरून लेवा कुणबीची प्रादेशिक, सामाजिक किंवा ऐतिहासिक ओळख महाराष्ट्रातील इतर सर्व कुणबी समूहांशी पूर्णपणे समान आहे, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. प्रशासकीय वर्गीकरण आणि ऐतिहासिक सामाजिक ओळख या स्वतंत्र बाबी आहेत.
=== मराठा-कुणबी आणि कुणबी-मराठा ===
‘मराठा-कुणबी’ आणि ‘कुणबी-मराठा’ या संज्ञांना आधुनिक प्रशासकीय संदर्भात विशेष महत्त्व प्राप्त झाले आहे. मुंबई उच्च न्यायालयाने *Nitin s/o Mahadeorao Choudhary v. State of Maharashtra* या ११ ऑक्टोबर २०२३ रोजीच्या निर्णयात १ जून २००४ च्या महाराष्ट्र शासनाच्या निर्णयाचा संदर्भ देताना नमूद केले आहे की इतर मागासवर्गीयांच्या यादीतील अनुक्रमांक ८३वरील ‘कुणबी’ या नोंदीत पूर्वी ‘लेवा कुणबी’, ‘लेवा पाटील’ आणि ‘लेवा पाटीदार’ यांचा समावेश होता आणि १ जून २००४ च्या शासन निर्णयाद्वारे त्यात ‘मराठा-कुणबी’ आणि ‘कुणबी-मराठा’ यांचा समावेश करण्यात आला.<ref name="NitinChoudhary2023">{{cite web
|title=Nitin s/o Mahadeorao Choudhary v. State of Maharashtra
|website=Indian Kanoon
|date=11 October 2023
|url=https://indiankanoon.org/doc/61511559/
}}</ref>
या निर्णयात न्यायालयाने असेही नमूद केले की ७ सप्टेंबर २०२३ च्या शासन निर्णयाद्वारे मराठा-कुणबी आणि कुणबी-मराठा समाजातील व्यक्तींना जात प्रमाणपत्र देताना जुन्या दस्तऐवजांतील नोंदींची तपासणी करण्याची पद्धत निश्चित करण्यासाठी समिती स्थापन करण्यात आली होती. या समितीचा उद्देश संबंधित जुन्या अभिलेखांच्या तपासणीची पद्धत निश्चित करणे हा होता.<ref name="NitinChoudhary2023" />
मात्र अनुक्रमांक ८३मध्ये मराठा-कुणबी आणि कुणबी-मराठा यांचा प्रशासकीय समावेश झाला आहे, यावरून मराठा आणि कुणबी यांची ऐतिहासिक वंशपरंपरा किंवा सामाजिक ओळख सर्व काळात एकच होती, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. हा आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरणाचा विषय आहे.
=== तिलोरी कुणबी आणि तिल्लोरी कुणबी ===
‘तिलोरी कुणबी’ आणि ‘तिल्लोरी कुणबी’ या दोन्ही संज्ञांचा महाराष्ट्र शासनाच्या विद्यमान इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत ‘कुणबी’ या अनुक्रमांक ८३ च्या नोंदीखाली समावेश आहे.<ref name="MaharashtraOBC2025" />
तिलोरी कुणबीच्या प्रशासकीय इतिहासात रत्नागिरी जिल्ह्याचा विशेष संदर्भ आढळतो. मुंबई उच्च न्यायालयाने *Dattatraya s/o Ramrao Thorat v. State of Maharashtra* या २४ एप्रिल २००२ रोजीच्या निर्णयात २३ एप्रिल १९४२ च्या मुंबई शासनाच्या ठरावाचा संदर्भ देताना ‘Kunbi (Except Tilori Kunbi in Ratnagiri district)’ आणि ‘Kunbi Tilori in Ratnagiri district’ यांचे त्या काळात वेगवेगळ्या प्रशासकीय वर्गांमध्ये वर्गीकरण करण्यात आल्याचे नमूद केले आहे. ही स्थिती १९५०, १९५६ आणि १९६१ च्या संबंधित शासन ठरावांमध्येही कायम राहिल्याचे न्यायालयाने नोंदविले आहे.<ref name="Thorat2002" />
त्याच निर्णयानुसार १३ ऑक्टोबर १९६७ रोजी महाराष्ट्र शासनाने स्वतंत्र इतर मागासवर्गीयांची यादी प्रसिद्ध केली आणि त्यामध्ये ‘कुणबी जात’ अनुक्रमांक ८३वर समाविष्ट करण्यात आली. न्यायालयाने नमूद केले आहे की त्यानंतर कुणबी जात संपूर्ण महाराष्ट्रासाठी इतर मागासवर्गीयांच्या यादीत समाविष्ट झाली.<ref name="Thorat2002" />
=== जात प्रमाणपत्र ===
महाराष्ट्रात जात प्रमाणपत्र देण्याची आणि त्याची वैधता पडताळण्याची प्रक्रिया कायद्याने नियमन केली जाते. जात प्रमाणपत्र हे सक्षम प्राधिकाऱ्याकडून दिले जाते, तर जात वैधतेचा दावा संबंधित जात पडताळणी समितीसमोर स्वतंत्रपणे तपासला जाऊ शकतो. या दोन्ही प्रक्रिया एकमेकांशी संबंधित असल्या तरी त्यांचे स्वरूप आणि अधिकारक्षेत्र वेगवेगळे आहेत.
जात दाव्याच्या पडताळणीमध्ये संबंधित व्यक्तीने सादर केलेल्या जुन्या शासकीय आणि इतर अभिलेखांचा विचार केला जाऊ शकतो. कोणते दस्तऐवज ग्राह्य धरावेत, त्यांचे पुराव्यात्मक महत्त्व किती आहे आणि जात दावा कशा प्रकारे सिद्ध करावा, हे लागू कायदे, नियम, शासन निर्णय आणि न्यायालयीन निर्णयांनुसार ठरते.
मुंबई उच्च न्यायालयाने *Dattatraya s/o Ramrao Thorat v. State of Maharashtra* या प्रकरणात जात दाव्याच्या पडताळणीसाठी सादर केलेल्या दस्तऐवजांचे पुराव्यात्मक महत्त्व तपासले आणि जात दावा सिद्ध करण्याची जबाबदारी दावेदारावर असल्याचे स्पष्ट केले.<ref name="Thorat2002" />
मराठा-कुणबी किंवा कुणबी-मराठा असा दावा करणाऱ्या व्यक्तींच्या संदर्भातही जुन्या अभिलेखांतील जातनोंदींच्या तपासणीला महत्त्व आहे. *Nitin s/o Mahadeorao Choudhary v. State of Maharashtra* या निर्णयात मुंबई उच्च न्यायालयाने संबंधित जुन्या महसूल अभिलेख, शाळेच्या नोंदी आणि इतर दस्तऐवजांची तपासणी करण्याच्या प्रशासकीय प्रक्रियेचा संदर्भ नोंदविला आहे.<ref name="NitinChoudhary2023" />
त्यामुळे ऐतिहासिक जनगणना, गॅझेटियर किंवा मानववंशशास्त्रीय ग्रंथामध्ये ‘कुणबी’, ‘तिलोरी कुणबी’ किंवा संबंधित संज्ञेचा उल्लेख आढळणे आणि एखाद्या विशिष्ट व्यक्तीचा आधुनिक प्रशासकीय जात दावा वैध ठरणे या दोन स्वतंत्र बाबी आहेत. आधुनिक जात प्रमाणपत्र आणि जात वैधता प्रक्रियेत संबंधित व्यक्तीच्या स्वतःच्या अभिलेखीय पुराव्यांचा आणि लागू कायदेशीर निकषांचा स्वतंत्रपणे विचार केला जातो.
=== जात वैधता पडताळणी ===
महाराष्ट्रात जात प्रमाणपत्राच्या वैधतेच्या पडताळणीसाठी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर संशोधन व प्रशिक्षण संस्थेच्या माध्यमातून जात प्रमाणपत्र पडताळणी माहिती प्रणाली (CCVIS) कार्यरत आहे. या प्रणालीद्वारे जात वैधता प्रमाणपत्रासाठी ऑनलाइन अर्ज करणे, अर्जाचा मागोवा घेणे आणि वैधता प्रमाणपत्राची ऑनलाइन पडताळणी करणे यांसारख्या सुविधा उपलब्ध आहेत.<ref name="CCVIS">{{cite web
|title=जात प्रमाणपत्र पडताळणी माहिती प्रणाली
|work=Caste Certificate Verification Information System (CCVIS)
|publisher=डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर संशोधन व प्रशिक्षण संस्था, महाराष्ट्र शासन
|url=https://www.bartievalidity.maharashtra.gov.in/
|access-date=2026-08-22
|archive-date=2026-01-19
|archive-url=https://web.archive.org/web/20260119160227/http://www.bartievalidity.maharashtra.gov.in/
|url-status=dead
}}</ref>
जात वैधता पडताळणीच्या प्रक्रियेत अर्जदाराने सादर केलेल्या कागदपत्रांचा विचार केला जातो. अधिकृत मार्गदर्शिकेनुसार जात प्रमाणपत्रासोबत जन्मतारखेचा दाखला, अर्जदाराचा शाळा सोडल्याचा दाखला किंवा शाळेच्या नोंदवहीचा उतारा, वडिलांचा शाळा सोडल्याचा दाखला किंवा नोंदवहीचा उतारा आणि पितृकुळातील आजोबा किंवा वडिलांच्या सख्ख्या मोठ्या भावंडांच्या शाळेच्या नोंदी यांसारखी कागदपत्रे पुराव्याच्या स्वरूपात सादर करता येतात. उपलब्ध प्राथमिक कागदपत्रे नसल्यास जन्म-मृत्यू नोंदी, महसूल अभिलेख, जुने खरेदी-विक्री दस्तऐवज किंवा इतर समर्थक कागदपत्रांचा विचार केला जाऊ शकतो.<ref name="CCVISForm18">{{cite web
|title=Form No. 18 — Rule 14
|publisher=डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर संशोधन व प्रशिक्षण संस्था, महाराष्ट्र शासन
|url=https://www.bartievalidity.maharashtra.gov.in/ccvis_pdf/download/service/FORM%20No%2018-%20%5Brule-14%5D.pdf
|access-date=2026-08-22
|archive-date=2024-05-26
|archive-url=https://web.archive.org/web/20240526163256/https://bartievalidity.maharashtra.gov.in/ccvis_pdf/download/service/FORM%20No%2018-%20%5Brule-14%5D.pdf
|url-status=dead
}}</ref>
त्यामुळे जात वैधता पडताळणी ही केवळ जात प्रमाणपत्राची प्रशासकीय नोंद करण्याची प्रक्रिया नसून, जात दाव्याच्या समर्थनार्थ सादर केलेल्या कागदपत्रांची छाननी करणारी प्रक्रिया आहे. अर्जासोबत अर्जदार, त्याचे पितृकडील नातेवाईक आणि पूर्वज यांच्या जात नोंदी असलेली विविध प्राथमिक व दुय्यम कागदपत्रे सादर करता येतात; संबंधित जिल्हा जात प्रमाणपत्र पडताळणी समिती या कागदपत्रांची छाननी करून जात प्रमाणपत्राच्या वैधतेबाबत निर्णय घेते.<ref name="CCVISFAQ">{{cite web
|title=Frequently Asked Questions (FAQ’s)
|work=Caste Certificate Verification Information System (CCVIS)
|publisher=Dr. Babasaheb Ambedkar Research and Training Institute, Government of Maharashtra
|url=https://www.bartievalidity.maharashtra.gov.in/ccvis_pdf/FAQ/Frequently%20Asked%20Questions.pdf
|access-date=2026-09-11
}}</ref>
=== ऐतिहासिक कागदपत्रांचे महत्त्व ===
कुणबी किंवा मराठा-कुणबी दाव्यांच्या संदर्भात जुने महसूल अभिलेख, शैक्षणिक नोंदी, जन्म-मृत्यू नोंदी, जमीनविषयक दस्तऐवज आणि इतर शासकीय अभिलेखांना महत्त्व प्राप्त होते. महाराष्ट्रातील काही जिल्हा प्रशासनांनी मराठा-कुणबी आणि कुणबी-मराठा संदर्भातील जुन्या अभिलेखांचे संकलन करून ते सार्वजनिक केले आहे.
रायगड जिल्हा प्रशासनाच्या संकेतस्थळावर अलिबाग, उरण, कर्जत, खालापूर, तळा, पनवेल, पेण, पोलादपूर, महाड, माणगाव, मुरुड, म्हसळा, रोहा, श्रीवर्धन आणि सुधागड या तालुक्यांशी संबंधित कुणबी-मराठा दस्तऐवजांच्या स्वतंत्र याद्या उपलब्ध आहेत.<ref name="RaigadKunbiMarathaDocuments">{{cite web
|title=कुणबी-मराठा दस्तऐवज
|publisher=रायगड जिल्हा प्रशासन, महाराष्ट्र शासन
|url=https://raigad.gov.in/maratha-kunbi-documents/
}}</ref>
अशा अभिलेखांचे संकलन ऐतिहासिक नोंदींच्या उपलब्धतेचा मागोवा घेण्यासाठी उपयुक्त ठरते. मात्र एखाद्या जिल्हा किंवा तालुका प्रशासनाच्या संकेतस्थळावर विशिष्ट दस्तऐवज उपलब्ध आहे, एवढ्यावरून कोणत्याही व्यक्तीचा जात दावा वैध ठरतो असा निष्कर्ष काढता येत नाही. वैधतेचा निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकरण आणि लागू कायदेशीर प्रक्रियेनुसार घेतला जातो.
=== न्यायालयीन दृष्टिकोन ===
कुणबी जातदाव्यांशी संबंधित न्यायालयीन प्रकरणांमध्ये ऐतिहासिक शासन निर्णय, जात प्रमाणपत्र, जात पडताळणी समितीचे निष्कर्ष आणि उपलब्ध अभिलेखांचा विचार करण्यात आला आहे. *Dattatraya s/o Ramrao Thorat v. State of Maharashtra* या २४ एप्रिल २००२ रोजीच्या मुंबई उच्च न्यायालयाच्या निर्णयात कुणबी आणि तिलोरी कुणबी यांच्या ऐतिहासिक प्रशासकीय वर्गीकरणाचा संदर्भ देण्यात आला आहे. न्यायालयाने २३ एप्रिल १९४२ च्या शासन निर्णयातील वर्गीकरण तसेच त्यानंतरच्या शासन निर्णयांचा उल्लेख करून १३ ऑक्टोबर १९६७ च्या शासन निर्णयात ‘कुणबी जात’ इतर मागासवर्गीयांच्या यादीतील अनुक्रमांक ८३वर समाविष्ट झाल्याची नोंद केली आहे.<ref name="Thorat2002" />
* Nitin s/o Mahadeorao Choudhary v. State of Maharashtra* या ११ ऑक्टोबर २०२३ रोजीच्या निर्णयात मुंबई उच्च न्यायालयाने इतर मागासवर्गीयांच्या यादीतील अनुक्रमांक ८३ आणि त्यामध्ये मराठा-कुणबी व कुणबी-मराठा यांचा समावेश करण्यासंबंधीच्या १ जून २००४ च्या शासन निर्णयाची नोंद केली आहे.<ref name="NitinChoudhary2023" />
या न्यायालयीन नोंदींमधून कुणबी आणि संबंधित सामाजिक संज्ञांच्या आधुनिक प्रशासकीय वर्गीकरणात शासन निर्णय आणि अभिलेखीय पुराव्यांचे महत्त्व दिसून येते. तथापि प्रत्येक जातदाव्याचा निर्णय संबंधित व्यक्तीने सादर केलेल्या पुराव्यांच्या आणि लागू कायदेशीर निकषांच्या आधारे स्वतंत्रपणे केला जातो.
=== ऐतिहासिक आणि आधुनिक वर्गीकरणातील फरक ===
ब्रिटिशकालीन जनगणनांमध्ये वापरलेल्या ‘कुणबी’, ‘मराठा कुणबी’ किंवा संबंधित संज्ञा आणि आजच्या महाराष्ट्र शासनाच्या इतर मागासवर्गीयांच्या यादीतील ‘कुणबी’, ‘मराठा-कुणबी’, ‘कुणबी-मराठा’ आणि ‘तिलोरी कुणबी’ या नोंदी समान प्रशासकीय संदर्भातील नाहीत. ऐतिहासिक जनगणना ही लोकसंख्या आणि सामाजिक वर्गीकरणाचे साधन होती, तर आधुनिक शासकीय याद्या आरक्षण आणि संबंधित प्रशासकीय हक्कांच्या संदर्भातील कायदेशीर वर्गीकरणाचा भाग आहेत.
त्यामुळे एखाद्या जुन्या जनगणनेत ‘मराठा कुणबी’ अशी नोंद आढळल्यास त्या नोंदीच्या आधारे आजच्या काळातील एखाद्या व्यक्तीला आपोआप कुणबी या इतर मागासवर्गीय प्रवर्गाचे जात प्रमाणपत्र किंवा जात वैधता प्रमाणपत्र मिळते, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. त्याचप्रमाणे आधुनिक इतर मागासवर्गीयांच्या यादीतील नोंदींच्या आधारे त्या सामाजिक समूहाचा प्राचीन किंवा मध्ययुगीन इतिहास निश्चित करता येत नाही.
म्हणून कुणबी समाजाच्या इतिहासाचा अभ्यास करताना ऐतिहासिक जनगणना, गॅझेटियर आणि मानववंशशास्त्रीय साहित्य यांना त्यांच्या संबंधित ऐतिहासिक संदर्भात पाहणे, तर आधुनिक जात प्रमाणपत्र आणि जात वैधता पडताळणीसाठी लागू कायदे, नियम, शासन निर्णय, अधिकृत याद्या आणि न्यायालयीन निर्णय यांचा स्वतंत्रपणे विचार करणे आवश्यक आहे.
== आधुनिक कोकणातील कुणबी समाज आणि भविष्यातील आव्हाने ==
आधुनिक कोकणातील कुणबी समाजाच्या सामाजिक आणि आर्थिक स्थितीत शिक्षण, ग्रामीण-शहरी स्थलांतर, शेतीतील बदल, रोजगाराचे विविधीकरण, जमीनधारणा आणि ग्रामीण पायाभूत सुविधांमधील बदल यांचा प्रभाव दिसून येतो. मात्र या प्रक्रियांचे स्वरूप संपूर्ण कोकणातील कुणबी समाजात एकसमान होते असे उपलब्ध अभ्यासांवरून म्हणता येत नाही. स्थानिक पातळीवरील अभ्यासांमधून या बदलांचे वेगवेगळे स्वरूप स्पष्ट होते.
सावंतवाडी तालुक्यातील कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या तीन कालखंडांतील तुलनात्मक अभ्यासात दीर्घकालीन स्थलांतर, कुटुंबांच्या आर्थिक रणनीतीतील बदल, स्थलांतरितांच्या व्यवसायांचे विविधीकरण आणि शिक्षणासाठी होणाऱ्या स्थलांतराचे वाढते महत्त्व नोंदविण्यात आले आहे. या अभ्यासात १९६१ च्या तुलनेत २०१७मध्ये स्थलांतर अधिक व्यापक झाले असल्याचे तसेच रोजगारासाठीच्या स्थलांतराबरोबर शिक्षण आणि इतर कारणांसाठी स्थलांतराचे महत्त्व वाढल्याचे दिसून येते.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
कुंकेरीच्या या अभ्यासात शिक्षण आणि रोजगार यांमुळे स्थलांतराचे स्वरूप बदलल्याचे दिसते. १९६१मध्ये गावाबाहेरील स्थलांतर मुख्यतः रोजगाराशी संबंधित होते; २०१७ च्या अभ्यासात शिक्षणासाठी स्थलांतर करणाऱ्यांचे प्रमाणही लक्षणीय असल्याचे नोंदविण्यात आले. स्थलांतरितांच्या रोजगारातही बदल होऊन सरकारी सेवांबरोबर खासगी आणि अनौपचारिक क्षेत्रातील विविध व्यवसायांचा समावेश वाढल्याचे अभ्यासात नमूद आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
शेतीच्या स्वरूपातही स्थानिक पातळीवर बदल झाल्याचे कुंकेरीच्या दीर्घकालीन अभ्यासातून दिसते. १९६१मध्ये भात आणि नाचणी ही प्रमुख पिके होती; पुढील काळात काजूच्या लागवडीचा विस्तार झाला आणि २०१७पर्यंत काजू हे अनेक शेतकऱ्यांसाठी महत्त्वाचे पीक आणि उत्पन्नाचे साधन बनले होते. यावरून कोकणातील काही गावांमध्ये पारंपरिक अन्नपिकांपासून अधिक बाजाराभिमुख बागायती पिकांकडे झालेल्या बदलाचा स्थानिक नमुना दिसून येतो.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
जमीनधारणेच्या बाबतीतही स्थलांतरामुळे सर्वच पारंपरिक रचना बदलल्या असे आढळत नाही. कुंकेरीच्या अभ्यासात दीर्घकालीन मोठ्या प्रमाणातील स्थलांतर असूनही गावातील जातीय वितरण आणि जमीनमालकीच्या रचनेत काही महत्त्वपूर्ण सातत्य राहिल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. त्याच वेळी लहान जमीनधारणांचे प्रमाण वाढल्याचेही अभ्यासात दिसून येते.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
कोकणातील ग्रामीण परिवर्तनाचा अभ्यास करताना मात्र कुंकेरीसारख्या एका गावाच्या अनुभवाचे संपूर्ण कुणबी समाजावर किंवा संपूर्ण कोकणावर थेट सामान्यीकरण करणे योग्य ठरणार नाही. कुंकेरीचा अभ्यास हा विशिष्ट गावाच्या दीर्घकालीन सामाजिक, आर्थिक आणि लोकसंख्याशास्त्रीय बदलांचा अभ्यास आहे. त्यामुळे त्यातून व्यापक कोकणातील स्थलांतर, शिक्षण, जमीनधारणा किंवा कृषी परिवर्तनाच्या काही प्रक्रिया समजून घेता येतात; परंतु संपूर्ण कुणबी समाजासाठी एकसमान निष्कर्ष काढण्यासाठी अधिक व्यापक जातीनिहाय आणि प्रदेशनिहाय अभ्यास आवश्यक आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
आधुनिक कोकणातील कुणबी समाजाच्या भविष्यातील प्रश्नांचा विचार करताना शेतीची आर्थिक व्यवहार्यता, लहान होत जाणारी जमीनधारणा, कृषीबाह्य रोजगार, शिक्षणासाठी होणारे स्थलांतर, मुंबई आणि इतर शहरी केंद्रांशी असलेले संबंध तसेच ग्रामीण भागातील बदलती रोजगाररचना हे परस्परसंबंधित घटक मानावे लागतात. उपलब्ध अभ्यासांनुसार स्थलांतर हे ग्रामीण कुटुंबांसाठी केवळ लोकसंख्यात्मक बदलाचे साधन न राहता उत्पन्नाच्या विविध साधनांशी जोडलेली आर्थिक रणनीती बनले आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
कुणबी समाजाची स्वतंत्र आणि सातत्यपूर्ण आधुनिक जातीनिहाय लोकसंख्या उपलब्ध अधिकृत जनगणना आकडेवारीत प्रसिद्ध झालेली नसल्यामुळे या बदलांचे संपूर्ण कोकणातील कुणबी समाजासाठी अचूक लोकसंख्याशास्त्रीय प्रमाण निश्चित करणे शक्य नाही. त्यामुळे आधुनिक सामाजिक आणि आर्थिक स्थितीचा अभ्यास करताना जिल्हानिहाय जनगणना, ग्रामसर्वेक्षणे, दीर्घकालीन गाव-अभ्यास आणि उपलब्ध सामाजिक-आर्थिक संशोधन यांचा परस्परपूरक वापर करणे आवश्यक आहे.<ref name="DistrictCensusRatnagiri1961" /><ref name="VartakTumbeBhide2019" />
=== ग्रामीण लोकसंख्येतील घट ===
रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग जिल्ह्यांच्या २००१ आणि २०११ च्या जनगणना आकडेवारीत एकूण लोकसंख्येत घट झाल्याचे दिसून येते. रत्नागिरी जिल्ह्याची लोकसंख्या २००१मध्ये १६,९६,७७७ होती; ती २०११मध्ये १६,१५,०६९ झाली. या कालावधीत जिल्ह्याचा दशकातील लोकसंख्या बदल −४.८ टक्के होता. सिंधुदुर्ग जिल्ह्याची लोकसंख्या २००१मध्ये ८,६८,८२५ होती; ती २०११मध्ये ८,४९,६५१ झाली आणि दशकातील लोकसंख्या बदल −२.२ टक्के राहिला.<ref name="RatnagiriPopulation2011" /><ref name="SindhudurgPopulation2011" />
रत्नागिरी जिल्ह्यात ग्रामीण लोकसंख्येतील घट एकूण लोकसंख्येच्या घटेपेक्षा अधिक होती. २००१मध्ये जिल्ह्याची ग्रामीण लोकसंख्या १५,०४,५६८ होती; २०११मध्ये ती १३,५१,३४६ झाली. या कालावधीत ग्रामीण लोकसंख्येतील दशकातील बदल −१०.२ टक्के होता. त्याच वेळी शहरी लोकसंख्येत ३७.२ टक्क्यांची वाढ झाली. त्यामुळे जिल्ह्याच्या लोकसंख्याशास्त्रीय बदलात ग्रामीण भागातून शहरी भागाकडे झालेल्या लोकसंख्या संक्रमणाचा एक घटक दिसून येतो.<ref name="RatnagiriPopulation2011" />
सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातही ग्रामीण लोकसंख्येत घट झाली. २००१मध्ये जिल्ह्याची ग्रामीण लोकसंख्या ७,८६,५०६ होती; ती २०११मध्ये ७,४२,६४५ झाली. या कालावधीत ग्रामीण लोकसंख्येतील दशकातील बदल −५.६ टक्के होता, तर शहरी लोकसंख्येत ३० टक्क्यांची वाढ झाली.<ref name="SindhudurgPopulation2011" />
या आकडेवारीवरून रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग जिल्ह्यांमध्ये ग्रामीण लोकसंख्येतील घट आणि शहरी लोकसंख्येतील वाढ ही महत्त्वाची लोकसंख्याशास्त्रीय प्रक्रिया असल्याचे दिसते. मात्र या जिल्हास्तरीय बदलाला थेट कुणबी समाजाच्या लोकसंख्येतील घट म्हणून मांडता येत नाही, कारण उपलब्ध जनगणना आकडेवारी या संदर्भात कुणबी समाजाची स्वतंत्र सातत्यपूर्ण लोकसंख्या देत नाही.
=== तरुणांचे स्थलांतर ===
कोकणातील ग्रामीण लोकसंख्येतील बदल समजून घेण्यासाठी स्थलांतर हा महत्त्वाचा घटक आहे. सावंतवाडी तालुक्यातील कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या कालखंडांतील तुलनात्मक अभ्यासात दीर्घकालीन बाह्य स्थलांतरात लक्षणीय वाढ झाल्याचे आढळते. १९६१मध्ये २६ टक्के कुटुंबांनी कुटुंबातील किमान एका सदस्याच्या बाह्य स्थलांतराची नोंद केली होती; २०१७मध्ये हे प्रमाण ६० टक्क्यांपर्यंत पोहोचले. त्याच काळात बाहेर स्थलांतरित व्यक्तींचे एकूण लोकसंख्येतील प्रमाण ७ टक्क्यांवरून २५.५ टक्क्यांपर्यंत वाढले.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
१९६१ च्या कुंकेरी सर्वेक्षणात बाहेर स्थलांतरित झालेले ८३ जण सर्व पुरुष होते आणि त्यांचे स्थलांतर प्रामुख्याने रोजगारासाठी झाले होते. २०१७ च्या अभ्यासात बाहेर स्थलांतरितांमध्ये महिलांचाही समावेश वाढल्याचे आढळले. त्या वर्षी विवाहाव्यतिरिक्त कारणांनी स्थलांतरित झालेल्या महिलांमध्ये शिक्षण आणि रोजगार ही प्रमुख कारणे होती.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
या अभ्यासात स्थलांतराचे स्वरूपही बदलल्याचे दिसते. १९६१मध्ये स्थलांतर करणाऱ्या कुटुंबांमध्ये प्रामुख्याने एकच सदस्य बाहेर जात असे; २०१७मध्ये अनेक कुटुंबांतील दोन, तीन, चार किंवा त्याहून अधिक सदस्य स्थलांतरित झाले होते. त्यामुळे स्थलांतर हे काही कुटुंबांसाठी स्वतंत्र रोजगाराच्या साधनाऐवजी उत्पन्नाच्या विविध साधनांशी संबंधित व्यापक आर्थिक रणनीती बनल्याचे अभ्यासकांचे निरीक्षण आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
कुंकेरीच्या बाबतीत हा बदल स्पष्टपणे दिसत असला तरी कुंकेरी हे एक विशिष्ट गाव असल्यामुळे त्यातील स्थलांतराचे प्रमाण संपूर्ण कोकणातील किंवा संपूर्ण कुणबी समाजातील तरुणांच्या स्थलांतराचे थेट प्रतिनिधित्व करते असे मानता येत नाही. मात्र ग्रामीण कोकणातील दीर्घकालीन स्थलांतराच्या प्रक्रियेचा अभ्यास करण्यासाठी हा महत्त्वाचा स्थानिक पुरावा आहे.
=== शिक्षणासाठी शहरांकडे स्थलांतर ===
कोकणातील ग्रामीण भागातून शिक्षणासाठी बाहेर जाण्याचे महत्त्व कालांतराने वाढल्याचे कुंकेरीच्या दीर्घकालीन अभ्यासातून दिसून येते. १९६१ च्या ग्रामसर्वेक्षणात कुंकेरीतील स्थलांतर मुख्यतः रोजगाराशी संबंधित असल्याचे नोंदविले गेले होते. त्याउलट २०१७ च्या अभ्यासात बाहेर स्थलांतरित झालेल्या व्यक्तींमध्ये १८ टक्के स्थलांतर शिक्षणासाठी झाल्याचे आढळले.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
कुंकेरीमध्ये १९६१मध्ये प्राथमिक शिक्षणाची सुविधा उपलब्ध होती; पुढील दशकांत गावातील शैक्षणिक सुविधा वाढल्या. तरीही उच्च शिक्षणासाठी विद्यार्थ्यांना गावाबाहेर जावे लागत असल्याचे २०१७ च्या अभ्यासातून दिसून येते. त्यामुळे शिक्षण हे ग्रामीण भागातून बाहेर पडण्याच्या स्थलांतरातील स्वतंत्र कारण म्हणून अधिक महत्त्वाचे झाले असल्याचे या अभ्यासातून दिसते.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
शिक्षण आणि स्थलांतर यांच्यातील संबंध एकतर्फी नसल्याचेही या अभ्यासातून दिसते. उच्च शिक्षणामुळे शहरांमध्ये जाण्याच्या संधी वाढल्या, तर स्थलांतरामुळे शिक्षणाला भविष्यातील रोजगार आणि सामाजिक प्रगतीशी जोडलेले महत्त्व प्राप्त झाले. त्यामुळे कुंकेरीच्या बाबतीत शिक्षण हे स्थलांतराचे कारण तसेच स्थलांतरानंतरच्या आर्थिक संधींसाठी महत्त्वाचे साधन बनल्याचे दिसून येते.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
कुंकेरीच्या अनुभवावरून ग्रामीण कोकणातील शिक्षण आणि स्थलांतर यांच्यातील बदलता संबंध स्पष्ट होतो; मात्र या निरीक्षणाचे संपूर्ण कुणबी समाजावर किंवा संपूर्ण कोकणातील ग्रामीण तरुणांवर सार्वत्रिकीकरण करण्यासाठी अधिक व्यापक प्रदेशनिहाय आणि जातीनिहाय अभ्यास आवश्यक आहे.
=== वृद्ध होत जाणारी ग्रामीण लोकसंख्या ===
कोकणातील काही ग्रामीण भागांमध्ये तरुणांचे शिक्षण आणि रोजगारासाठी बाहेर स्थलांतर वाढल्यामुळे ग्रामीण लोकसंख्येच्या वयोरचनेत बदल होण्याची शक्यता निर्माण झाली आहे. रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग जिल्ह्यांच्या २००१–२०११ च्या जनगणना आकडेवारीत एकूण लोकसंख्येत घट झाल्याचे दिसते. त्याच काळात दोन्ही जिल्ह्यांमध्ये ग्रामीण लोकसंख्येतील घटही नोंदविण्यात आली आहे.<ref name="RatnagiriPopulation2011" /><ref name="SindhudurgPopulation2011" />
मात्र या जिल्हास्तरीय लोकसंख्याशास्त्रीय बदलांवरून कुणबी समाजातील वृद्ध लोकसंख्येचे प्रमाण निश्चित करता येत नाही. कुणबी समाजासाठी स्वतंत्र आणि सातत्यपूर्ण जिल्हानिहाय वयोरचना उपलब्ध नसल्यामुळे हा विषय व्यापक ग्रामीण कोकणातील लोकसंख्याशास्त्रीय बदलांच्या संदर्भात पाहणे अधिक योग्य ठरते.
=== शेतीवरील अवलंबित्वातील बदल ===
ग्रामीण भागातील स्थलांतर, रोजगाराचे वैविध्य आणि शिक्षणाच्या वाढत्या संधी यांचा शेतीवरील कुटुंबांच्या अवलंबित्वावर परिणाम झाल्याचे काही दीर्घकालीन ग्रामअभ्यासांत दिसून येते. कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या तीन कालखंडांच्या तुलनात्मक अभ्यासात कुटुंबांच्या उपजीविकेच्या स्वरूपात लक्षणीय बदल झाल्याचे आढळते. १९६१मध्ये ७५.९८ टक्के कुटुंबे पूर्णपणे शेतीवर अवलंबून होती; २०१७मध्ये हे प्रमाण ३९.६ टक्क्यांपर्यंत कमी झाले.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
कुंकेरीच्या अभ्यासात या बदलाच्या पार्श्वभूमीवर स्थलांतर, गैर-कृषी रोजगार, शिक्षण आणि कुटुंबांच्या बदलत्या आर्थिक रणनीतींचा विचार करण्यात आला आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
या आकडेवारीचा अर्थ कुंकेरीतील शेती पूर्णपणे लुप्त झाली असा नाही. उलट, कुटुंबांच्या उपजीविकेत शेतीबरोबरच इतर उत्पन्नस्रोतांचे महत्त्व वाढले असल्याचे या दीर्घकालीन अभ्यासातून दिसते. कुंकेरीचा अनुभव संपूर्ण कोकणातील किंवा संपूर्ण कुणबी समाजातील कृषीस्थितीचे थेट प्रतिनिधित्व करतो असे मात्र मानता येत नाही.
=== कृषी जमिनीच्या वापरातील बदल ===
ग्रामीण कुटुंबांचे स्थलांतर आणि शेतीवरील अवलंबित्वातील घट यामुळे काही गावांमध्ये कृषी जमिनीच्या वापराच्या पद्धतीत बदल होऊ शकतो. मात्र उपलब्ध कुंकेरी अभ्यासाच्या आधारे संपूर्ण कोकणातील कृषी जमीन मोठ्या प्रमाणावर पडीत पडली आहे असा सर्वसाधारण निष्कर्ष काढता येत नाही.
कोकणातील जमीनवापर हा गाव, भौगोलिक परिस्थिती, सिंचनाची उपलब्धता, पिकांचा प्रकार, बाजारपेठेशी असलेला संबंध आणि कुटुंबांच्या आर्थिक परिस्थितीनुसार बदलू शकतो. त्यामुळे ''पडीत जमीन'' हा स्वतंत्र लोकसंख्याशास्त्रीय निष्कर्ष म्हणून न मांडता कृषी परिवर्तनाच्या व्यापक प्रक्रियेतील संभाव्य घटक म्हणून पाहणे अधिक योग्य ठरते.
=== गावांची सामाजिक रचना आणि स्थलांतर ===
दीर्घकालीन स्थलांतरामुळे ग्रामीण गावांच्या सामाजिक आणि आर्थिक रचनेत बदल होऊ शकतात. कुंकेरीच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या कालखंडांतील अभ्यासात मोठ्या प्रमाणावर बाह्य स्थलांतर झाले असतानाही गावातील जातीय रचना आणि जमीनधारणेच्या काही बाबींमध्ये सातत्य राहिल्याचे आढळते.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
या अभ्यासातून असेही दिसते की स्थलांतरामुळे गावाशी असलेले संबंध पूर्णपणे तुटलेले नसतात. बाहेर स्थलांतरित झालेले कुटुंबीय आणि गावातील कुटुंब यांच्यात आर्थिक व सामाजिक संबंध कायम राहू शकतात. त्यामुळे स्थलांतराचा परिणाम केवळ गावाची लोकसंख्या कमी होण्यापुरता मर्यादित न राहता कुटुंबांची उपजीविका, जमीनधारणा, रोजगार आणि गावाशी असलेल्या संबंधांच्या स्वरूपातही दिसून येऊ शकतो.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
त्यामुळे ''कोकणातील गावे ओस पडत आहेत'' असा सार्वत्रिक निष्कर्ष काढण्याऐवजी काही ग्रामीण भागांमध्ये लोकसंख्या घट, बाह्य स्थलांतर, शेतीवरील अवलंबित्वातील बदल आणि गावाबाहेर राहणाऱ्या कुटुंबीयांशी कायम राहिलेले आर्थिक-सामाजिक संबंध या परस्परसंबंधित प्रक्रियांचा अभ्यास करणे अधिक योग्य ठरते.
=== रोजगाराच्या संधींचे आव्हान ===
ग्रामीण भागातील रोजगाररचनेत झालेला बदल हा आधुनिक कोकणासमोरील महत्त्वाचा सामाजिक आणि आर्थिक प्रश्न आहे. कुंकेरी गावाच्या दीर्घकालीन अभ्यासातून शेतीवरील अवलंबित्व कमी होत असताना गैर-कृषी उत्पन्नाच्या स्रोतांचे महत्त्व वाढल्याचे दिसून येते. या प्रक्रियेत स्थलांतर, शिक्षण आणि रोजगाराच्या बदलत्या संधी यांचा परस्परसंबंध आढळतो.<ref name="VartakMigrationEducation2020">{{cite journal
|last=Vartak
|first=Kalyani
|title=Migration and Education in Regions with a Culture of Migration: Observations from Kunkeri Village, Konkan, Maharashtra
|journal=Journal of Migration Affairs
|volume=2
|issue=2
|year=2020
|pages=83–99
}}</ref>
रत्नागिरी जिल्ह्याच्या औद्योगिक विकासासंदर्भातील महाराष्ट्र शासनाच्या माहितीत फळप्रक्रिया, मत्स्यव्यवसाय आणि इतर उद्योगांबरोबर आंबा, बहुफळ प्रक्रिया आणि मत्स्यव्यवसायाशी संबंधित औद्योगिक समूहांची क्षमता नमूद करण्यात आली आहे.<ref name="RatnagiriIndustrialEcosystem2024">{{cite web
|title=Ratnagiri District Industrial Ecosystem
|publisher=Industry Department, Government of Maharashtra
|year=2024
|url=https://industry.maharashtra.gov.in/sites/default/files/2025-09/ignite-mh-booklet_2024.pdf
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या पार्श्वभूमीवर कृषी उत्पादनावर आधारित प्रक्रिया उद्योग, मत्स्यव्यवसाय, पर्यटन, ग्रामीण उद्योग आणि इतर बिगर-कृषी रोजगाराच्या संधी ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या विविधीकरणाशी संबंधित ठरू शकतात. मात्र या क्षेत्रांच्या विस्ताराचा कुणबी समाजावर स्वतंत्र आणि समान परिणाम झाला आहे असा निष्कर्ष उपलब्ध स्रोतांवरून काढता येत नाही.
=== आरोग्य, वाहतूक आणि इतर पायाभूत सुविधा ===
ग्रामीण भागातील सामाजिक आणि आर्थिक परिवर्तनाचा संबंध आरोग्य, शिक्षण, वाहतूक, पिण्याचे पाणी, वीज, दळणवळण आणि बँकिंग यांसारख्या पायाभूत सुविधांच्या उपलब्धतेशीही आहे. रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग जिल्ह्यांच्या २०११ च्या जिल्हा जनगणना हस्तपुस्तिकांमध्ये गावनिहाय शैक्षणिक संस्था, वैद्यकीय सुविधा, पिण्याचे पाणी, वाहतूक, दळणवळण, वीज आणि इतर नागरी सुविधांची नोंद करण्यात आली आहे.<ref name="DistrictCensusRatnagiri2011">{{cite report
|title=Census of India 2011: District Census Handbook, Ratnagiri
|publisher=Directorate of Census Operations, Maharashtra
|year=2014
}}</ref><ref name="DistrictCensusSindhudurg2011">{{cite report
|title=Census of India 2011: District Census Handbook, Sindhudurg
|publisher=Directorate of Census Operations, Maharashtra
|year=2014
}}</ref>
या सुविधांची उपलब्धता आणि त्यातील प्रादेशिक फरक ग्रामीण लोकसंख्येच्या जीवनमान, शिक्षण, आरोग्यसेवा आणि रोजगाराच्या संधींवर परिणाम करणाऱ्या व्यापक घटकांपैकी एक आहेत. त्यामुळे कोकणातील ग्रामीण विकासाचा अभ्यास करताना केवळ रस्ते, वीज किंवा पाणीपुरवठा यांचा स्वतंत्र विचार न करता शिक्षण, आरोग्य, वाहतूक, दळणवळण, बँकिंग आणि बाजारपेठेपर्यंत पोहोच या सुविधांच्या एकत्रित उपलब्धतेचा विचार करणे आवश्यक ठरते.<ref name="DistrictCensusRatnagiri2011" /><ref name="DistrictCensusSindhudurg2011" />
=== डिजिटल दळणवळण आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्था ===
डिजिटल दळणवळणाच्या विस्तारामुळे ग्रामीण भागातील शिक्षण, शासकीय सेवा, बँकिंग, बाजारपेठ, व्यवसाय आणि माहितीच्या उपलब्धतेमध्ये बदल होऊ शकतो. इंटरनेट आणि डिजिटल साधनांचा वापर कृषी उत्पादनाच्या बाजारभावाची माहिती मिळविणे, ग्राहकांशी थेट संपर्क साधणे, वस्तू व सेवांचे विपणन करणे आणि विविध शासकीय सेवांपर्यंत पोहोचणे यांसाठी केला जाऊ शकतो. मात्र या सुविधांचा प्रभाव इंटरनेटची उपलब्धता, डिजिटल साक्षरता आणि स्थानिक पातळीवरील पायाभूत सुविधांवर अवलंबून राहतो.
महाराष्ट्र शासनाच्या ग्रामीण विकास आणि पंचायत राज विभागाच्या विविध योजनांमध्ये ग्रामीण पायाभूत सुविधा, स्वयंरोजगार, कौशल्यविकास आणि ग्रामीण आर्थिक विकासाशी संबंधित उपक्रमांचा समावेश आहे.<ref name="MaharashtraRuralDevelopmentSchemes">{{cite web
|title=योजना
|publisher=ग्रामविकास आणि पंचायत राज विभाग, महाराष्ट्र शासन
|url=https://rdd.maharashtra.gov.in/en/
}}</ref>
ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या संदर्भात डिजिटल साधनांचा वापर वाढल्यास कृषी, पर्यटन, लघुउद्योग आणि सेवा क्षेत्रांना बाजारपेठेशी जोडण्याच्या नवीन शक्यता निर्माण होऊ शकतात. मात्र कोकणातील कुणबी समाजाच्या बाबतीत डिजिटल दळणवळणामुळे झालेला स्वतंत्र सामाजिक किंवा आर्थिक परिणाम दर्शविणारी पुरेशी जातीनिहाय आकडेवारी उपलब्ध नसल्यामुळे हा विषय व्यापक ग्रामीण कोकणाच्या संदर्भात पाहणे अधिक योग्य ठरते.
=== कृषीमालाचे मूल्यवर्धन ===
कोकणातील कृषीव्यवस्थेत भात, नाचणी, कुळीथ, तूर, वाल, नारळ, सुपारी, आंबा, फणस, काजू आणि कोकम यांसारख्या विविध पिकांचे उत्पादन आढळते. महाराष्ट्र शासनाच्या भूजल सर्वेक्षण आणि विकास यंत्रणेच्या कोकणविषयक माहितीत या पिकांचा प्रादेशिक कृषी उत्पादनाच्या संदर्भात उल्लेख करण्यात आला आहे.<ref name="GSDAKonkan">{{cite web
|title=कोकण प्रदेश
|publisher=भूजल सर्वेक्षण आणि विकास यंत्रणा, महाराष्ट्र शासन
|url=https://gsda.maharashtra.gov.in/en-kokan/
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कृषीमालाचे मूल्यवर्धन करण्यासाठी प्रक्रिया, प्रतवारी, पॅकेजिंग, साठवण, शीतसाखळी आणि बाजारपेठेशी थेट संपर्क यांसारख्या उपायांचा उपयोग केला जाऊ शकतो. महाराष्ट्राच्या कृषी निर्यातविषयक धोरणात्मक दस्तऐवजांमध्ये कोकणातील काजू प्रक्रिया केंद्रे, फळप्रक्रिया सुविधा, शीतसाखळी, पॅकगृहे तसेच आंबा आणि काजूसारख्या उत्पादनांसाठी निर्यातक्षम पायाभूत सुविधांच्या विकासाचा उल्लेख करण्यात आला आहे.<ref name="AgriculturalExportsMaharashtra">{{cite web
|title=Enlarging Agricultural Exports
|publisher=कृषी विभाग, महाराष्ट्र शासन
|url=https://krishi.maharashtra.gov.in/Site/Upload/Pdf/Publications/AgrilExports.pdf
}}</ref>
अशा मूल्यवर्धन प्रक्रियेमुळे कृषी उत्पादनाच्या प्राथमिक विक्रीपलीकडे प्रक्रिया, पॅकेजिंग, वाहतूक, विपणन आणि विक्री या क्षेत्रांमध्ये आर्थिक उपक्रम निर्माण होऊ शकतात. मात्र त्याचा प्रत्यक्ष लाभ स्थानिक उत्पादक, शेतकरी संस्था किंवा ग्रामीण उद्योजकांना किती प्रमाणात मिळतो हे प्रदेश, उत्पादन आणि बाजारपेठेच्या परिस्थितीनुसार बदलू शकते.
=== आंबा, काजू, कोकम आणि भात प्रक्रिया उद्योग ===
कोकणातील फळे आणि इतर कृषी उत्पादनांवर आधारित प्रक्रिया उद्योगांना स्थानिक कृषी अर्थव्यवस्थेच्या विविधीकरणामध्ये महत्त्व प्राप्त झाले आहे. महाराष्ट्र शासनाच्या उद्योग संचालनालयाच्या सूक्ष्म आणि लघु उद्योग समूह विकास कार्यक्रमाच्या माहितीनुसार रत्नागिरीतील आंबा प्रक्रिया समूह आणि सिंधुदुर्गमधील काजू प्रक्रिया समूह यांचा अशा औद्योगिक समूहांमध्ये समावेश करण्यात आला आहे.<ref name="MSECDP-Ratnagiri-Sindhudurg">{{cite web
|title=Investor's Guide — Micro & Small Enterprises-Cluster Development Programme (MSE-CDP)
|publisher=Directorate of Industries, Government of Maharashtra
|url=https://di.maharashtra.gov.in/_layouts/15/doistaticsite/English/investors_guide_mse_cdp.html
|access-date=2026-08-22
|archive-date=2025-05-02
|archive-url=https://web.archive.org/web/20250502070715/http://di.maharashtra.gov.in/_layouts/15/doistaticsite/English/investors_guide_mse_cdp.html
|url-status=dead
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कृषी प्रक्रिया उद्योगांमुळे उत्पादनानंतरच्या टप्प्यांमध्ये प्रक्रिया, प्रतवारी, पॅकेजिंग, साठवण, वाहतूक आणि विपणन यांसारख्या आर्थिक क्रियांना चालना मिळू शकते. त्यामुळे अशा उद्योगांचा ग्रामीण रोजगार आणि स्थानिक उद्योजकतेशी संबंध निर्माण होऊ शकतो. शेतकरी उत्पादक संस्था, सहकारी संस्था, महिला बचतगट, लघुउद्योग आणि स्थानिक उद्योजक यांचा सहभाग या प्रक्रियेत महत्त्वाचा ठरू शकतो; मात्र या सर्व घटकांच्या प्रत्यक्ष सहभागाचे प्रमाण प्रदेशानुसार बदलते.
=== पर्यटन आणि कृषी-पर्यटन ===
कोकणातील समुद्रकिनारे, डोंगर, किल्ले, मंदिरे, पारंपरिक घरे, स्थानिक संस्कृती आणि कृषी जीवन यांमुळे ग्रामीण पर्यटनाच्या विकासाला प्रादेशिक आधार मिळतो. महाराष्ट्र शासनाच्या ग्रामविकास आणि पंचायत राज विभागाने कोकण ग्रामीण पर्यटन विकास कार्यक्रम राबविला असून त्यामध्ये ग्रामीण भागातील रोजगार व स्वयंरोजगाराच्या संधी, पर्यटनाशी संबंधित पायाभूत सुविधा आणि गावांच्या विकासाला प्रोत्साहन देण्याचा उद्देश नमूद करण्यात आला आहे.<ref name="KonkanRuralTourism">{{cite web
|title=कोकण ग्रामीण पर्यटन विकास कार्यक्रम
|publisher=ग्रामविकास आणि पंचायत राज विभाग, महाराष्ट्र शासन
|url=https://rdd.maharashtra.gov.in/scheme/%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A4%A3-%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A3-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%9F%E0%A4%A8-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE/
}}</ref>
महाराष्ट्राच्या कृषी-पर्यटन धोरणामध्ये ग्रामीण विकास, कृषीमालासाठी बाजारपेठ निर्माण करणे, कृषीशी संबंधित पूरक व्यवसायांना प्रोत्साहन देणे आणि ग्रामीण महिला व युवकांसाठी रोजगाराच्या संधी निर्माण करणे यांसारख्या उद्दिष्टांचा समावेश आहे. शेतकरी आणि कृषी सहकारी संस्थांना कृषी-पर्यटन केंद्रांच्या विकासासाठी पात्र घटक म्हणूनही नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="MaharashtraAgriTourismPolicy">{{cite web
|title=Agri Tourism Policy, 2016
|publisher=Maharashtra Institution for Transformation (MITRA), Government of Maharashtra
|url=https://mahaniti.mahamitra.org/resources/policies
}}</ref>
कृषी-पर्यटनामुळे शेती, निवास, स्थानिक अन्नपदार्थ, ग्रामीण संस्कृती आणि पर्यटनसेवा यांच्यात आर्थिक संबंध निर्माण होऊ शकतात. तथापि अशा उपक्रमांचा विकास सर्व गावांमध्ये किंवा सर्व सामाजिक समूहांमध्ये समान प्रमाणात झाला आहे असे उपलब्ध स्रोतांवरून म्हणता येत नाही. त्यामुळे कुणबी समाजाच्या संदर्भात कृषी-पर्यटनाचा अभ्यास करताना स्थानिक पातळीवरील प्रत्यक्ष पुरावे स्वतंत्रपणे तपासणे आवश्यक आहे.
=== सहकार आणि ग्रामीण उद्योजकता ===
ग्रामीण कोकणातील कृषी आणि स्थानिक अर्थव्यवस्थेच्या विकासात सहकारी संस्था, शेतकरी उत्पादक संस्था, महिला बचतगट आणि लघुउद्योग यांसारख्या सामूहिक आर्थिक संस्थांना महत्त्व प्राप्त होऊ शकते. कृषीमालाची सामूहिक खरेदी, प्रक्रिया, साठवण, प्रतवारी, पॅकेजिंग आणि विक्री यांमुळे उत्पादकांना बाजारपेठेशी अधिक थेट संबंध प्रस्थापित करण्याच्या संधी निर्माण होऊ शकतात.
रत्नागिरी जिल्ह्याच्या औद्योगिक विकासासंदर्भातील महाराष्ट्र शासनाच्या माहितीत आंबा, बहुफळ प्रक्रिया आणि मत्स्यव्यवसायाशी संबंधित औद्योगिक समूहांचा उल्लेख करण्यात आला आहे. अशा समूहाधारित विकासामुळे स्थानिक कृषी व मत्स्य उत्पादनांना प्रक्रिया, मूल्यवर्धन आणि बाजारपेठेशी जोडण्याची संधी निर्माण होऊ शकते.<ref name="RatnagiriIndustrialEcosystem2024" />
या पार्श्वभूमीवर सहकार आणि स्थानिक उद्योजकता ही ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या विविधीकरणातील संभाव्य साधने मानता येतात. मात्र अशा संस्थांचा प्रत्यक्ष विस्तार आणि त्याचा कुणबी समाजावर होणारा परिणाम हा प्रदेश, उत्पादन, स्थानिक संस्था आणि आर्थिक परिस्थितीनुसार बदलू शकतो.
=== गावाकडे आर्थिक संसाधने आणि कौशल्ये परत येण्याची शक्यता ===
कोकणातील दीर्घकालीन स्थलांतरामुळे अनेक ग्रामीण कुटुंबांचे आर्थिक संबंध गाव आणि शहर या दोन्ही ठिकाणांशी जोडले गेले आहेत. कुंकेरी गावाच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या कालखंडांतील अभ्यासातून स्थलांतरित व्यक्ती आणि त्यांच्या मूळ गावामधील संबंध कायम राहिल्याचे दिसून येते. स्थलांतरामुळे कुटुंबांच्या उत्पन्नाच्या स्रोतांमध्ये आणि आर्थिक रणनीतींमध्येही बदल झाले.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
ग्रामीण आणि शहरी भागांतील अशा संबंधांमुळे स्थलांतरितांकडून कुटुंबांना आर्थिक मदत मिळणे, गावातील मालमत्ता आणि शेतीशी संबंध कायम राहणे तसेच शिक्षण आणि रोजगाराच्या माध्यमातून नवीन अनुभव प्राप्त होणे यांसारख्या प्रक्रिया घडू शकतात. तथापि शिक्षण, तांत्रिक कौशल्य, व्यवस्थापनाचा अनुभव किंवा उद्योजकीय क्षमता प्रत्यक्षपणे गावातील अर्थव्यवस्थेत किती प्रमाणात परत येतात याबाबत संपूर्ण कोकणासाठी स्वतंत्र आणि पुरेशी सांख्यिक माहिती उपलब्ध नाही.
त्यामुळे स्थलांतराकडे केवळ ग्रामीण लोकसंख्येतील घट म्हणून न पाहता गाव आणि शहर यांच्यातील दीर्घकालीन आर्थिक व सामाजिक संबंधांच्या संदर्भात पाहणे अधिक व्यापक ठरते.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
=== भविष्यातील संभाव्य विकासदिशा ===
कोकणातील ग्रामीण समुदायांच्या भविष्यातील आर्थिक विकासासाठी शेती आणि शेतीबाहेरील उत्पन्नस्रोत यांचा परस्परसंबंध विचारात घेणे आवश्यक ठरते. आंबा, काजू, कोकम, भात आणि इतर कृषी उत्पादनांचे मूल्यवर्धन, कृषी प्रक्रिया उद्योग, शीतसाखळी, पॅकेजिंग, स्थानिक ब्रँड, मत्स्यव्यवसाय, ग्रामीण पर्यटन आणि कृषी-पर्यटन यांसारख्या क्षेत्रांमध्ये विकासाच्या संधी उपलब्ध होऊ शकतात.<ref name="AgriculturalExportsMaharashtra" /><ref name="MSECDP-Ratnagiri-Sindhudurg" />
महाराष्ट्र शासनाच्या कोकण ग्रामीण पर्यटन विकास कार्यक्रमामध्ये ग्रामीण भागातील रोजगार आणि स्वयंरोजगाराच्या संधी, पर्यटनविषयक पायाभूत सुविधा आणि गावांच्या विकासाला प्रोत्साहन देण्याचा उद्देश नमूद करण्यात आला आहे.<ref name="KonkanRuralTourism" />
कृषी उत्पादनाचे मूल्यवर्धन, स्थानिक प्रक्रिया उद्योग, सहकारी संस्था, ग्रामीण पर्यटन, कृषी-पर्यटन, मत्स्यव्यवसाय आणि इतर बिगर-कृषी उपक्रम यांचा विकास झाल्यास ग्रामीण अर्थव्यवस्थेचे विविधीकरण होण्याची शक्यता आहे. मात्र या संभाव्य विकासदिशांचा प्रत्यक्ष परिणाम स्थानिक पायाभूत सुविधा, बाजारपेठ, भांडवल, कौशल्ये, संस्थात्मक क्षमता आणि स्थानिक सामाजिक-आर्थिक परिस्थितीवर अवलंबून राहील.
या संदर्भात कुणबी समाजाचा आधुनिक आर्थिक इतिहास पाहताना पारंपरिक शेती, स्थलांतरातून निर्माण झालेले गाव-शहर संबंध, शिक्षणामुळे वाढलेल्या रोजगाराच्या संधी आणि बदलती ग्रामीण अर्थव्यवस्था या घटकांचा एकत्रित विचार करणे आवश्यक आहे. उपलब्ध स्रोत मात्र संपूर्ण कोकणातील कुणबी समाजासाठी या विकासदिशांचा स्वतंत्र परिणाम निश्चित करीत नाहीत.
=== भविष्यातील आव्हाने ===
आधुनिक कोकणातील ग्रामीण समाजासमोरील आव्हाने लोकसंख्याशास्त्रीय बदलांपुरती मर्यादित नाहीत. ग्रामीण भागातून शिक्षण आणि रोजगारासाठी होणारे स्थलांतर, शेतीवरील आर्थिक अवलंबित्वातील बदल, जमिनीचे तुकडीकरण, स्थानिक रोजगाराच्या मर्यादा, उच्च शिक्षणासाठी शहरी केंद्रांवरील अवलंबित्व तसेच आरोग्य, वाहतूक आणि डिजिटल दळणवळणाच्या सुविधांतील प्रादेशिक फरक हे परस्परसंबंधित घटक आहेत. कुंकेरीच्या दीर्घकालीन अभ्यासातून स्थलांतर, शिक्षण आणि रोजगाराच्या बदलत्या स्वरूपाचा ग्रामीण कुटुंबांच्या आर्थिक जीवनावर परिणाम झाल्याचे दिसून येते.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
दुसरीकडे कोकणामध्ये कृषी, बागायती, मत्स्यव्यवसाय, पर्यटन आणि स्थानिक कृषी उत्पादनांवर आधारित प्रक्रिया उद्योगांच्या विकासाच्या शक्यता आहेत. महाराष्ट्र शासनाच्या विविध कार्यक्रमांमध्ये ग्रामीण पर्यटन, कृषी-पर्यटन आणि औद्योगिक समूहांच्या विकासाला प्रोत्साहन देण्याचा उल्लेख आढळतो.<ref name="KonkanRuralTourism" /><ref name="MSECDP-Ratnagiri-Sindhudurg" />
या पार्श्वभूमीवर ग्रामीण अर्थव्यवस्थेचे विविधीकरण, स्थानिक रोजगाराच्या संधी, कृषीमालाचे मूल्यवर्धन आणि ग्रामीण पायाभूत सुविधांचा विकास हे कोकणाच्या भविष्यातील महत्त्वाचे विकासविषय ठरू शकतात. मात्र या प्रक्रियांचा कुणबी समाजावर स्वतंत्र आणि समान परिणाम होईल असे उपलब्ध स्रोतांवरून निश्चितपणे म्हणता येत नाही.
=== भविष्याचा प्रश्न : स्थलांतर थांबविणे की गावाशी नाते बदलणे? ===
कोकणातील ग्रामीण समाजाच्या भविष्यातील बदलांचा विचार करताना स्थलांतराकडे केवळ लोकसंख्या घटण्याच्या प्रक्रियेच्या रूपात पाहणे पुरेसे ठरत नाही. शिक्षण, रोजगार आणि व्यवसायासाठी स्थलांतर करणे ही ग्रामीण कुटुंबांच्या आर्थिक रणनीतींचा एक भाग असू शकते. त्यामुळे स्थलांतरित व्यक्तींचे मूळ गावाशी असलेले आर्थिक, सामाजिक आणि कौटुंबिक संबंध यांचाही विचार करणे आवश्यक ठरते.
कुंकेरीच्या १९६१, १९८७ आणि २०१७ या कालखंडांतील तुलनात्मक अभ्यासातून मोठ्या प्रमाणावर बाह्य स्थलांतर झाले असतानाही गावातील काही सामाजिक रचना आणि जमीनधारणेच्या पद्धतींमध्ये सातत्य राहिल्याचे दिसून येते. त्याचबरोबर स्थलांतरित कुटुंबांचे गावाशी असलेले संबंध कायम राहिल्याचेही अभ्यासात नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
या दृष्टिकोनातून ग्रामीण आणि शहरी भागांतील संबंध हे परस्परविरोधी न मानता परस्परावलंबी स्वरूपाचे असू शकतात. शहरांमध्ये स्थायिक झालेल्या कुटुंबांचे गावातील जमीन, घर, कुटुंबीय आणि सामाजिक संस्थांशी संबंध कायम राहू शकतात. त्याचप्रमाणे स्थलांतरातून प्राप्त उत्पन्न, शिक्षण आणि अनुभव यांचा काही प्रमाणात ग्रामीण कुटुंबांच्या आर्थिक जीवनाशी संबंध राहू शकतो.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
त्यामुळे कोकणातील ग्रामीण समाजाच्या भविष्यातील विकासाचा विचार करताना ''गावात राहणे'' आणि ''गाव सोडणे'' या दोन परस्परविरोधी पर्यायांऐवजी ग्रामीण आणि शहरी अर्थव्यवस्थांमधील बदलते संबंध हा एक महत्त्वाचा अभ्यासविषय ठरतो. शेती, कृषी प्रक्रिया, पर्यटन, डिजिटल सेवा आणि स्थानिक उद्योजकता यांसारख्या क्षेत्रांचा विकास झाल्यास ग्रामीण भाग आणि स्थलांतरित लोकसंख्या यांच्यातील आर्थिक संबंधांना नवीन स्वरूप मिळण्याची शक्यता आहे. मात्र अशा संभाव्य परिणामांचे प्रत्यक्ष स्वरूप स्थानिक आर्थिक, सामाजिक आणि पायाभूत परिस्थितीनुसार बदलू शकते.
आधुनिक कोकणातील कुणबी समाजाचा प्रश्न हा केवळ एखाद्या जातीय समुदायाच्या लोकसंख्येपुरता मर्यादित नाही; तो कोकणातील ग्रामीण समाजाच्या व्यापक सामाजिक आणि आर्थिक परिवर्तनाशी संबंधित आहे. २००१–२०११ च्या कालावधीत रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग या दोन्ही जिल्ह्यांच्या एकूण लोकसंख्येत घट झाल्याचे जनगणना-आधारित आकडेवारीत दिसते. त्याच वेळी कुंकेरीसारख्या गावांच्या दीर्घकालीन अभ्यासातून शिक्षण, रोजगार आणि स्थलांतरामुळे ग्रामीण कुटुंबांच्या आर्थिक व सामाजिक जीवनात झालेले बदल स्पष्ट होतात.<ref name="DistrictwisePopulationMaharashtra" /><ref name="VartakTumbeBhide2019" />
या पार्श्वभूमीवर कुणबी समाजासह कोकणातील ग्रामीण समुदायांसमोरील भविष्यातील प्रश्न केवळ ग्रामीण लोकसंख्या टिकवून ठेवण्यापुरते मर्यादित न राहता शिक्षण, स्थानिक रोजगार, कृषीमालाचे मूल्यवर्धन, कृषी प्रक्रिया, सहकार, पर्यटन, डिजिटल दळणवळण आणि ग्रामीण उद्योजकता यांच्यातील परस्परसंबंधांशी जोडलेले आहेत. महाराष्ट्र शासनाच्या विविध योजनांमध्ये कृषी प्रक्रिया, औद्योगिक समूह, ग्रामीण पर्यटन आणि ग्रामीण विकासाशी संबंधित उपक्रमांना प्रोत्साहन देण्यात येत आहे.<ref name="AgriculturalExportsMaharashtra" /><ref name="MSECDP-Ratnagiri-Sindhudurg" /><ref name="KonkanRuralTourism" />
कोकणातून स्थलांतरित झालेल्या लोकांचे मूळ गावाशी आर्थिक आणि सामाजिक संबंध कायम राहू शकतात, असे कुंकेरीच्या दीर्घकालीन अभ्यासातून दिसून येते. त्यामुळे स्थलांतराकडे केवळ ग्रामीण लोकसंख्येतील घट म्हणून न पाहता गाव आणि शहर यांच्यातील बदलत्या आर्थिक व सामाजिक संबंधांच्या संदर्भात पाहणे अधिक योग्य ठरते.<ref name="VartakTumbeBhide2019" />
या दृष्टीने शिक्षण, रोजगार आणि स्थलांतरातून निर्माण झालेले ज्ञान, अनुभव आणि आर्थिक संसाधने ग्रामीण अर्थव्यवस्थेशी जोडण्याच्या शक्यतांचा अभ्यास भविष्यात महत्त्वाचा ठरू शकतो. मात्र अशा प्रक्रियेचा संपूर्ण कोकणातील कुणबी समाजावर प्रत्यक्ष परिणाम किती प्रमाणात होतो, याबाबत स्वतंत्र आणि जातीनिहाय पुरेसा सांख्यिक पुरावा उपलब्ध नसल्यामुळे त्याविषयी निश्चित निष्कर्ष काढणे सध्या शक्य नाही.
== चित्र दालन ==
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File:The tribes and castes of the Central Provinces of India (1916) (14577097260).jpg|ब्रिटिशकालीन काळातील कुणबी/कृषक समूहाचे ऐतिहासिक चित्रण
File:कोकणातील शेतकरी व बैलजोडी.jpg|कोकणातील पारंपरिक शेती आणि बैलजोडी
File:Konkan - Ukshi Village - Part 2 20151220 (23704381920).jpg|उक्षी गाव, रत्नागिरी जिल्हा
File:Konkan - Ukshi Village - Part 2 20151220 (24000097155).jpg|उक्षी गावातील ग्रामीण जीवन
File:गावातील बलुतेदार.jpg|गावातील पारंपरिक बलुतेदारी व्यवस्था
File:उदगीर वन व जंगल.jpg|कोकणातील नैसर्गिक परिसर आणि ग्रामीण जीवन
File:Konkan - Songiri Village - Ratnagiri District - Part 1 20151218 (23997376885).jpg|सोंगीरी गाव, रत्नागिरी जिल्हा
File:Konkan - Songiri Village - Ratnagiri District - Part 1 20151218 (23629305669).jpg|सोंगीरी गावातील ग्रामीण परिसर
File:Paddy field in Maharashtra 9.jpg|महाराष्ट्रातील भातशेती
File:A scene from Dashavatara folk theatre in Konkan region.jpg|कोकणातील दशावतार लोकनाट्य
File:Palakhinrutya - Dance of Palanquin of Village Dities - Shimagotsav in Kokan - Maharashtra.jpg|कोकणातील शिमगोत्सवातील पालखी नृत्य
File:खडीकोळवण देव गांगेश्वर ग्राम मंदीर.jpg|खडीकोळवण येथील देव गांगेश्वर ग्राममंदिर
File:MaharashtraKonkan.png|महाराष्ट्रातील कोकण प्रदेशाचा नकाशा
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== हे सुद्धा पहा ==
* [[कोकण]]
* [[रत्नागिरी जिल्हा]]
* [[सिंधुदुर्ग जिल्हा]]
* [[रायगड जिल्हा]]
* [[कुणबी]]
* [[मराठा]]
* [[महाराष्ट्रातील जातिव्यवस्था]]
== बाह्य दुवे ==
* [https://censusindia.gov.in/ भारताची जनगणना — भारताचे जनगणना आयुक्त कार्यालय]
* [https://gazetteers.maharashtra.gov.in/ महाराष्ट्र शासन — गॅझेटियर विभाग]
* [https://www.bartievalidity.maharashtra.gov.in/ डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर संशोधन व प्रशिक्षण संस्था — जात वैधता पडताळणी माहिती प्रणाली] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20260119160227/http://www.bartievalidity.maharashtra.gov.in/ |date=2026-01-19 }}
* [https://raigad.gov.in/en/maratha-kunbi-documents-2/ रायगड जिल्हा प्रशासन — कुणबी-मराठा दस्तऐवज]
* [https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/31003/download/34184/49541_1961_KUN.pdf कुंकेरी ग्रामसर्वेक्षण, १९६१]
{{कोकण लोकजीवन}}
== संदर्भ ==
{{reflist|4}}
[[वर्ग:कोकण]]
[[वर्ग:महाराष्ट्र]]
[[वर्ग:समाज]]
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सोऽहम् (साधना)
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Maheshbeauty
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'''सोऽहम् साधना''' ही नाथसंप्रदाय प्रतिपादित साधना पद्धती आहे. यालाच आजपाजप असेही म्हटले जाते. सोऽहंसाधनेमध्ये केवळ सोऽहं शब्दाचे नामस्मरण अपेक्षित नाही तर 'तो मी आहे' हा भाव मनात दृढ बाळगणे हे अधिक महत्त्वाचे असते. सोऽहम् साधना ही भावावर आधारित आणि श्वासातून उत्क्रांत होत जाणारी अशी साधना आहे. यालाच 'मनपवनमार्ग' असे दुसरे नाव आहे. ही प्रामुख्याने निर्गुण उपासना आहे.
== सोऽहम् साधना - प्रत्यक्ष ==
सोऽहम् साधनेमध्ये तीन गोष्टी करायच्या असतात.
# भ्रूमध्यात डोळे मिटून पाहतो आहोत अशी कल्पना करायची.
# आतून ऐकू येणाऱ्या सोऽहम् श्वासाकडे अनुसंधान ठेवायचे.
# श्वास वर ओढताना तसेच बाहेर सोडताना 'मी तो आहे' असा भाव ठेवायचा.
या तीन गोष्टी मिळून सोऽहम् साधना होते.<ref name=":0" />
== निर्गुण की सगुण ==
सोऽहम् साधना ही प्रामुख्याने निर्गुण साधना आहे. परंतु ती अत्यंत लवचीक अशी साधना असल्याने सगुण साधना या स्वरूपातही ती कार्यान्वित होऊ शकते. निर्गुण साधना पेलण्याइतकी जर साधकाची सुरुवातीला तयारी झालेली नसेल तर, असा साधक त्याच्यासमोर असणारे सगुण दैवत म्हणजेच मी, अशी धारणा ठेवून सोऽहंसाधनेला सुरुवात करतो. सोऽहम् साधनाच मुळात निर्गुण स्वरूपाची असल्याने असा साधक हळूहळू निर्गुणाकडेच वाटचाल करू लागतो. होता होता एक दिवस त्याला सगुणाच्या मर्यादांची आतूनच जाणीव होते. 'निर्गुण दादुला सोहंकारु' या शब्दांत योगिराज चांगदेव त्याचे वर्णन करतात. <ref name=":0" />
== सोऽहम् शब्दाचे स्वरूप ==
श्वासोच्छ्वासातून प्रतीत होणाऱ्या सोऽहम् शब्दाचे स्वरूप कसे असते ते ही समर्थांनी येथे वर्णन केले आहे. त्यालाच त्यांनी 'सहजशब्द' अशी संज्ञा दिली आहे.<blockquote>उच्चारेविण जे शब्द । ते जाणावे सहजशब्द । प्रत्यया येती परंतु नाद । काहीच नाही ।।
ते शब्द सांडून बैसला । तो मौनी म्हणावा भला । योगाभ्यासाचा गल्बला । याकारणे ।।
धरिता सो सांडिता हम् । अखंड चाले सोऽहम् सोऽहम् । याचा विचार पाहता बहु । विस्तारला ।। <ref>सार्थ दासबोध, समर्थ रामदास</ref></blockquote>
== साधनापद्धतीच्या विकसनाचे टप्पे ==
* वेद काळात सोऽहंचा उल्लेख येतो तेव्हा प्रामुख्याने त्या त्या ऋषीने आपली उच्च अनुभूती त्यातून व्यक्त केलेली आहे. 'मी तो आहे' ही साक्षात् प्रचिती त्यांनी तेथे नोंदविलेली आढळते.
* पुढे उपनिषदकाळामध्ये मात्र सोऽहम् श्वासाचे, त्यातील सः आणि अहम् या पदांचे स्पष्टीकरण आलेले आढळते.
* पुढील काळात आद्य [[शंकराचार्य|शंकराचार्यांनी]] त्याचे अधिक स्पष्टीकरण करताना सकार हे शक्तीचे तर हकार हे शिवाचे प्रतीक असल्याचे प्रतिपादन केलेले आढळते. याचाच पुनरुच्चार इतर नाथसिद्धही नंतरच्या काळात वारंवार करताना दिसतात.
* एक स्वतंत्र साधनापद्धती म्हणून सोऽहम् साधनेचा विकास करण्याचा, ती प्रचलित करण्याचा प्रयत्न प्रामुख्याने नाथसंप्रदायाने केला आहे असे अभ्यासांती आढळून येते. <ref name=":0" />
== सोऽहम् साधनेचे ऐतिहासिक महत्त्व ==
संतसाहित्यामध्ये सोऽहम् साधनेचे महत्त्व अधोरेखित करणाऱ्या तीन गोष्टी आहेत.
# संत नामदेव यांची परीक्षा या प्रसंगामध्ये संत मुक्ताबाई जेव्हा असे म्हणतात की, झालासी हरीभक्त तरी आम्हा काय l आतली ती सोय ठाउकी नाही ll<ref>सकलसंतगाथा, संपादक - डॉ. रा.चिं. ढेरे, खंड २, अभंग १०३</ref> तेव्हा 'आतली सोय' या शब्दप्रयोगातून त्यांनी सोऽहम् साधनेचा निर्देश केलेला आहे; असे अभ्यासांती लक्षात येते.
# श्रीज्ञानेश्वर महाराज यांचा उल्लेख 'प्रकट गुह्य बोले' असा केला जातो. तेव्हा हे 'गुह्य' म्हणजे सोऽहम् साधना होते, हे देखील लक्षात येते. कारण त्यांच्यापूर्वी या साधनेचा जाहीर उल्लेख केला जात नसे. एक गुरू व एक शिष्य या परंपरेने ती साधना संक्रमित केली जात असे.
# संतांनी आध्यात्मिक लोकशाहीची स्थापना केली असे म्हटले जाते. या लोकशाही व्यवस्थेसाठी समतेचा धागा होता तो म्हणजे सोऽहम्. <ref name=":0" />
== गुरुमुखातून दीक्षा ==
सोऽहंचे ज्ञान गुरुमुखातूनच घेण्याची अनिवार्यता उपनिषद्काळापासूनच सांगितली आहे. नाथसिद्धांनीही तीच परंपरा पुढे चालविली असल्याचे लक्षात येते. <ref name=":0" />
== जपसंख्या ==
आपल्याच ठिकाणी एकवीस हजार सहाशे वेळा सोऽहम् सोऽहम् असा जप सातत्याने न करताही होत असतो. म्हणूनच त्याला अजपाजप असे म्हटले जाते. तो एकेका चक्राच्या स्थानी किती किती वेळा होतो त्याचे एक कोष्टकच [[एकनाथ|संत एकनाथां]]<nowiki/>नी एका अभंगात मांडले आहे.
# मूलाधार चक्राच्या ठिकाणी - दिड घटिका, दहा पळे, दोन निमिष
# स्वाधिष्ठान चक्राच्या ठिकाणी - साडेसोळा घटिका, दहा पळे, तीन निमिष
# मणिपूर चक्राच्या ठिकाणी - साडेसोळा घटिका, दहा पळे, चार निमिष
# अनुहत चक्राच्या ठिकाणी - साडेसोळा घटिका, दहा पळे, पाच निमिष
# विशुद्ध चक्राच्या ठिकाणी - पावणेतीन घटिका, दहा पळे, एक निमिष
# अग्निचक्राच्या ठिकाणी - पावणेतीन घटिका, दीड पळ, एक निमिष
# सहस्त्रदलाच्या ठिकाणी - अडीच घटिका, आठ पळे, चौदा निमिष
अशा प्रकारे जीव त्या त्या चक्रावर तेवढा तेवढा वेळ सोऽहम् जप करत असतो. पण अज्ञानी जिवाला याची जाण नसल्याने त्याला परमेश्वर प्राप्ती होत नाही. एकवीसहजार सहाशे इतक्या वेळा जीव सोऽहंकडे अवधान ठेवू शकेल तर त्या उपायाने त्याला ईश्वरप्राप्ती घडेल, असे नाथ सांगतात. <ref name=":0" /><ref>सकलसंतगाथा, संपादक - डॉ. रा.चिं.ढेरे, खंड ३, १९८५, अभंग ३३१९</ref>
[[विसोबा खेचर]]<nowiki/>कृत 'शडूस्छळि' या ग्रंथामध्येही अजपाजपाच्या संख्येचे हे गणित मांडले आहे. एक श्वास आणि एक उच्छ्वास यांचा मिळून एक प्राण तयार होतो. एका घटिकेमध्ये साठ प्राण होतात, अशा साठ घटिकांचे अहोरात्र तयार होतात. म्हणजेच ही संख्या एकवीस हजार सहाशे इतकी तयार होते, अशी आकडेमोड येथे मांडलेली दिसते. <ref>विसोबा खेचर विरचित षट्स्थल पुस्तक, ले. डॉ. रा. चि. ढेरे</ref>
== सोऽहंभावाचे पाच गुण ==
गुरू [[गोरखनाथ|गोरक्षनाथ]] यांनी सिद्ध-सिद्धांत-पद्धती या ग्रंथामध्ये सोऽहंभावाचे पाच गुण वर्णन केले आहेत. <ref name=":0">मराठी संतसाहित्यातील नाथप्रतिपादित सोऽहम् साधना - एक अभ्यास; डॉ. केतकी मोडक यांचा प्रबंध, २०००</ref><ref>सिद्ध-सिद्धांत-पद्धती, संपादक - भट व आघारकर, जुलै १९७९, पृष्ठ क्रमांक १४</ref>
* अहंता - 'किंबहुना चराचर आपण जाहला' ही अवस्था म्हणजेच अहंता.
* अखंड ऐश्वर्य - अखंड ऐश्वर्यातून षड्गुणसंपन्नता सूचित होते.
* स्वात्मता - स्वात्मता म्हणजे मीच सर्वत्र भरून राहिलो आहे ही वृत्ती सांगितली आहे.
* विश्वानुभवसामर्थ्य - सोऽहंसिद्धाला विश्वानुभवसामर्थ्य प्राप्त होते म्हणजे काय? तर विश्वात ओतप्रोत भरून राहिलेल्या चैतन्याचा आनंद लुटण्याचे सामर्थ्य त्याच्या अंगी येते.
* सर्वज्ञत्व - सर्वज्ञता हा महत्त्वाचा गुणही त्याच्या ठिकाणी उदित होतो, असे येथे सांगितले आहे.
== सोऽहम् साधनेचे परिणाम ==
सोऽहम् साधनेचे पंचविध परिणाम [[ज्ञानेश्वर]] महाराजांनी स्वानुभवाच्या आधारे वर्णन केले आहेत.
# मनाचे मनपण नाहीसे झाले.
# मायेचे निरसन झाले.
# काळाचे भय शिल्लक उरले नाही.
# देहात असतानाच मुक्तावस्था प्राप्त झाली.
# विश्वामध्ये परब्रह्म साठविले असल्याची प्रचिती आली. <ref name=":0" />
== अधिक माहितीसाठी ==
सोऽहम् साधना - (स्वरूप आणि महती), ले. डॉ. [[केतकी मोडक]], किंडल ईबुक, प्रकाशन - ऑगस्ट २०२६, ASIN ''' : ''' B0HJCMDXS6
== संदर्भ ==
[[वर्ग:नाथ संप्रदाय]]
[[वर्ग:साधनापद्धती]]
[[वर्ग:योग]]
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'''सोऽहम् साधना''' ही नाथसंप्रदाय प्रतिपादित साधना पद्धती आहे. यालाच आजपाजप असेही म्हटले जाते. सोऽहंसाधनेमध्ये केवळ सोऽहं शब्दाचे नामस्मरण अपेक्षित नाही तर 'तो मी आहे' हा भाव मनात दृढ बाळगणे हे अधिक महत्त्वाचे असते. सोऽहम् साधना ही भावावर आधारित आणि श्वासातून उत्क्रांत होत जाणारी अशी साधना आहे. यालाच 'मनपवनमार्ग' असे दुसरे नाव आहे. ही प्रामुख्याने निर्गुण उपासना आहे.
== सोऽहम् साधना - प्रत्यक्ष ==
सोऽहम् साधनेमध्ये तीन गोष्टी करायच्या असतात.
# भ्रूमध्यात डोळे मिटून पाहतो आहोत अशी कल्पना करायची.
# आतून ऐकू येणाऱ्या सोऽहम् श्वासाकडे अनुसंधान ठेवायचे.
# श्वास वर ओढताना तसेच बाहेर सोडताना 'मी तो आहे' असा भाव ठेवायचा.
या तीन गोष्टी मिळून सोऽहम् साधना होते.<ref name=":0" />
== निर्गुण की सगुण ==
सोऽहम् साधना ही प्रामुख्याने निर्गुण साधना आहे. परंतु ती अत्यंत लवचीक अशी साधना असल्याने सगुण साधना या स्वरूपातही ती कार्यान्वित होऊ शकते. निर्गुण साधना पेलण्याइतकी जर साधकाची सुरुवातीला तयारी झालेली नसेल तर, असा साधक त्याच्यासमोर असणारे सगुण दैवत म्हणजेच मी, अशी धारणा ठेवून सोऽहंसाधनेला सुरुवात करतो. सोऽहम् साधनाच मुळात निर्गुण स्वरूपाची असल्याने असा साधक हळूहळू निर्गुणाकडेच वाटचाल करू लागतो. होता होता एक दिवस त्याला सगुणाच्या मर्यादांची आतूनच जाणीव होते. 'निर्गुण दादुला सोहंकारु' या शब्दांत योगिराज चांगदेव त्याचे वर्णन करतात. <ref name=":0" />
== सोऽहम् शब्दाचे स्वरूप ==
श्वासोच्छ्वासातून प्रतीत होणाऱ्या सोऽहम् शब्दाचे स्वरूप कसे असते ते ही समर्थांनी येथे वर्णन केले आहे. त्यालाच त्यांनी 'सहजशब्द' अशी संज्ञा दिली आहे.<blockquote>उच्चारेविण जे शब्द । ते जाणावे सहजशब्द । प्रत्यया येती परंतु नाद । काहीच नाही ।।
ते शब्द सांडून बैसला । तो मौनी म्हणावा भला । योगाभ्यासाचा गल्बला । याकारणे ।।
धरिता सो सांडिता हम् । अखंड चाले सोऽहम् सोऽहम् । याचा विचार पाहता बहु । विस्तारला ।। <ref>सार्थ दासबोध, समर्थ रामदास</ref></blockquote>
== साधनापद्धतीच्या विकसनाचे टप्पे ==
* वेद काळात सोऽहंचा उल्लेख येतो तेव्हा प्रामुख्याने त्या त्या ऋषीने आपली उच्च अनुभूती त्यातून व्यक्त केलेली आहे. 'मी तो आहे' ही साक्षात् प्रचिती त्यांनी तेथे नोंदविलेली आढळते.
* पुढे उपनिषदकाळामध्ये मात्र सोऽहम् श्वासाचे, त्यातील सः आणि अहम् या पदांचे स्पष्टीकरण आलेले आढळते.
* पुढील काळात आद्य [[शंकराचार्य|शंकराचार्यांनी]] त्याचे अधिक स्पष्टीकरण करताना सकार हे शक्तीचे तर हकार हे शिवाचे प्रतीक असल्याचे प्रतिपादन केलेले आढळते. याचाच पुनरुच्चार इतर नाथसिद्धही नंतरच्या काळात वारंवार करताना दिसतात.
* एक स्वतंत्र साधनापद्धती म्हणून सोऽहम् साधनेचा विकास करण्याचा, ती प्रचलित करण्याचा प्रयत्न प्रामुख्याने नाथसंप्रदायाने केला आहे असे अभ्यासांती आढळून येते. <ref name=":0" />
== सोऽहम् साधनेचे ऐतिहासिक महत्त्व ==
संतसाहित्यामध्ये सोऽहम् साधनेचे महत्त्व अधोरेखित करणाऱ्या तीन गोष्टी आहेत.
# संत नामदेव यांची परीक्षा या प्रसंगामध्ये संत मुक्ताबाई जेव्हा असे म्हणतात की, झालासी हरीभक्त तरी आम्हा काय l आतली ती सोय ठाउकी नाही ll<ref>सकलसंतगाथा, संपादक - डॉ. रा.चिं. ढेरे, खंड २, अभंग १०३</ref> तेव्हा 'आतली सोय' या शब्दप्रयोगातून त्यांनी सोऽहम् साधनेचा निर्देश केलेला आहे; असे अभ्यासांती लक्षात येते.
# श्रीज्ञानेश्वर महाराज यांचा उल्लेख 'प्रकट गुह्य बोले' असा केला जातो. तेव्हा हे 'गुह्य' म्हणजे सोऽहम् साधना होते, हे देखील लक्षात येते. कारण त्यांच्यापूर्वी या साधनेचा जाहीर उल्लेख केला जात नसे. एक गुरू व एक शिष्य या परंपरेने ती साधना संक्रमित केली जात असे.
# संतांनी आध्यात्मिक लोकशाहीची स्थापना केली असे म्हटले जाते. या लोकशाही व्यवस्थेसाठी समतेचा धागा होता तो म्हणजे सोऽहम्. <ref name=":0" />
== गुरुमुखातून दीक्षा ==
सोऽहंचे ज्ञान गुरुमुखातूनच घेण्याची अनिवार्यता उपनिषद्काळापासूनच सांगितली आहे. नाथसिद्धांनीही तीच परंपरा पुढे चालविली असल्याचे लक्षात येते. <ref name=":0" />
== जपसंख्या ==
आपल्याच ठिकाणी एकवीस हजार सहाशे वेळा सोऽहम् सोऽहम् असा जप सातत्याने न करताही होत असतो. म्हणूनच त्याला अजपाजप असे म्हटले जाते. तो एकेका चक्राच्या स्थानी किती किती वेळा होतो त्याचे एक कोष्टकच [[एकनाथ|संत एकनाथां]]<nowiki/>नी एका अभंगात मांडले आहे.
# मूलाधार चक्राच्या ठिकाणी - दिड घटिका, दहा पळे, दोन निमिष
# स्वाधिष्ठान चक्राच्या ठिकाणी - साडेसोळा घटिका, दहा पळे, तीन निमिष
# मणिपूर चक्राच्या ठिकाणी - साडेसोळा घटिका, दहा पळे, चार निमिष
# अनुहत चक्राच्या ठिकाणी - साडेसोळा घटिका, दहा पळे, पाच निमिष
# विशुद्ध चक्राच्या ठिकाणी - पावणेतीन घटिका, दहा पळे, एक निमिष
# अग्निचक्राच्या ठिकाणी - पावणेतीन घटिका, दीड पळ, एक निमिष
# सहस्त्रदलाच्या ठिकाणी - अडीच घटिका, आठ पळे, चौदा निमिष
अशा प्रकारे जीव त्या त्या चक्रावर तेवढा तेवढा वेळ सोऽहम् जप करत असतो. पण अज्ञानी जिवाला याची जाण नसल्याने त्याला परमेश्वर प्राप्ती होत नाही. एकवीसहजार सहाशे इतक्या वेळा जीव सोऽहंकडे अवधान ठेवू शकेल तर त्या उपायाने त्याला ईश्वरप्राप्ती घडेल, असे नाथ सांगतात. <ref name=":0" /><ref>सकलसंतगाथा, संपादक - डॉ. रा.चिं.ढेरे, खंड ३, १९८५, अभंग ३३१९</ref>
[[विसोबा खेचर]]<nowiki/>कृत 'शडूस्छळि' या ग्रंथामध्येही अजपाजपाच्या संख्येचे हे गणित मांडले आहे. एक श्वास आणि एक उच्छ्वास यांचा मिळून एक प्राण तयार होतो. एका घटिकेमध्ये साठ प्राण होतात, अशा साठ घटिकांचे अहोरात्र तयार होतात. म्हणजेच ही संख्या एकवीस हजार सहाशे इतकी तयार होते, अशी आकडेमोड येथे मांडलेली दिसते. <ref>विसोबा खेचर विरचित षट्स्थल पुस्तक, ले. डॉ. रा. चि. ढेरे</ref>
== सोऽहंभावाचे पाच गुण ==
गुरू [[गोरखनाथ|गोरक्षनाथ]] यांनी सिद्ध-सिद्धांत-पद्धती या ग्रंथामध्ये सोऽहंभावाचे पाच गुण वर्णन केले आहेत. <ref name=":0">मराठी संतसाहित्यातील नाथप्रतिपादित सोऽहम् साधना - एक अभ्यास; डॉ. केतकी मोडक यांचा प्रबंध, २०००</ref><ref>सिद्ध-सिद्धांत-पद्धती, संपादक - भट व आघारकर, जुलै १९७९, पृष्ठ क्रमांक १४</ref>
* अहंता - 'किंबहुना चराचर आपण जाहला' ही अवस्था म्हणजेच अहंता.
* अखंड ऐश्वर्य - अखंड ऐश्वर्यातून षड्गुणसंपन्नता सूचित होते.
* स्वात्मता - स्वात्मता म्हणजे मीच सर्वत्र भरून राहिलो आहे ही वृत्ती सांगितली आहे.
* विश्वानुभवसामर्थ्य - सोऽहंसिद्धाला विश्वानुभवसामर्थ्य प्राप्त होते म्हणजे काय? तर विश्वात ओतप्रोत भरून राहिलेल्या चैतन्याचा आनंद लुटण्याचे सामर्थ्य त्याच्या अंगी येते.
* सर्वज्ञत्व - सर्वज्ञता हा महत्त्वाचा गुणही त्याच्या ठिकाणी उदित होतो, असे येथे सांगितले आहे.
== सोऽहम् साधनेचे परिणाम ==
सोऽहम् साधनेचे पंचविध परिणाम [[ज्ञानेश्वर]] महाराजांनी स्वानुभवाच्या आधारे वर्णन केले आहेत.
# मनाचे मनपण नाहीसे झाले.
# मायेचे निरसन झाले.
# काळाचे भय शिल्लक उरले नाही.
# देहात असतानाच मुक्तावस्था प्राप्त झाली.
# विश्वामध्ये परब्रह्म साठविले असल्याची प्रचिती आली. <ref name=":0" />
== अधिक माहितीसाठी ==
[https://www.amazon.in/%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%BD%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A5%8D-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A7%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%AA-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%80-Marathi-ebook/dp/B0HJCMDXS6 सोऽहम् साधना - (स्वरूप आणि महती)], ले. डॉ. [[केतकी मोडक]], किंडल ईबुक, प्रकाशन - ऑगस्ट २०२६, ASIN ''' : ''' B0HJCMDXS6
== संदर्भ ==
[[वर्ग:नाथ संप्रदाय]]
[[वर्ग:साधनापद्धती]]
[[वर्ग:योग]]
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पाकिस्तान क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६
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{{Infobox cricket tour
| series_name = पाकिस्तान क्रिकेट संघाचा इंग्लंड दौरा, २०२६
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| player_of_test_series = [[ऑली रॉबिन्सन]] (इं)<br>[[मोहम्मद अब्बास]] (पा)
}}
[[पाकिस्तान क्रिकेट संघ]]ाने [[इंग्लंड क्रिकेट संघ|इंग्लंड]]विरुद्ध सामने खेळण्यासाठी ऑगस्ट आणि सप्टेंबर २०२६ दरम्यान [[इंग्लंड]]चा दौरा केला. <ref>{{cite web|url=https://www.bbc.com/sport/cricket/articles/cn4l4vjp9kgo |trans-title=२०२६ मध्ये लॉर्ड्सवर इंग्लंडच्या तीन कसोटी सामन्यांचे आयोजन होणार|title=Lord's to host three England Tests in 2026 |work=[[बीबीसी स्पोर्ट]] |access-date=३१ ऑगस्ट २०२६}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.espncricinfo.com/story/oval-to-host-england-test-in-june-for-first-time-as-2026-fixtures-are-announced-1496508 |trans-title= २०२६ च्या सामन्यांचे वेळापत्रक जाहीर; ओव्हलवर पहिल्यांदाच जूनमध्ये इंग्लंडची कसोटी होणार|title=Oval to host England Test in June for first time as 2026 fixtures are announced |work=[[ईएसपीएन क्रिकइन्फो]] |access-date=३१ ऑगस्ट २०२६}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.pcb.com.pk/press-release-detail/pakistan-to-tour-england-for-three-tests-in-2026-.html |trans-title= पाकिस्तान २०२६ मध्ये तीन कसोटी सामन्यांच्या मालिकेसाठी इंग्लंडचा दौरा करणार.|title=Pakistan to tour England for three Tests in 2026 |work=[[पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड]] |date=10 January 2014 |access-date=३१ ऑगस्ट २०२६}}</ref> या दौऱ्यात तीन [[कसोटी सामने|कसोटी]] सामन्यांचा समावेश होता.<ref>{{Cite web |date=२४ जुलै २०२५|trans-title= इंग्लंड २०२६ मध्ये न्यूझीलंड आणि पाकिस्तानविरुद्ध कसोटी मालिकांचे यजमानपद भूषवणार.|title=England to host New Zealand, Pakistan in test series in 2026 |url=https://www.reuters.com/sports/cricket/england-host-new-zealand-pakistan-test-series-2026-2025-07-24/ |access-date=३१ ऑगस्ट २०२६|website=[[रॉयटर्स]]|language=en}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.skysports.com/cricket/news/12123/13401037/england-to-host-five-countries-in-blockbuster-2026-summer-of-international-cricket |trans-title= आंतरराष्ट्रीय क्रिकेटच्या २०२६ च्या धमाकेदार उन्हाळी हंगामात इंग्लंड पाच देशांचे यजमानपद भूषवणार. |title=England to host five countries in blockbuster 2026 summer of international cricket |work=[[स्काय स्पोर्ट्स]] |access-date=३१ ऑगस्ट २०२६}}</ref><ref>{{cite web |trans-title= पुरुषांचा भविष्यकालीन दौरा कार्यक्रम |title=Men's Future Tours Program |url=https://resources.pulse.icc-cricket.com/ICC/document/2022/08/17/9ecd5af8-4657-475f-ae1e-733b04f69750/Men-s-FTP-upto-2027.pdf |access-date=३१ ऑगस्ट २०२६|work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]] |archive-date=२६ डिसेंबर २०२२|archive-url=https://web.archive.org/web/20221226133751/https://resources.pulse.icc-cricket.com/ICC/document/2022/08/17/9ecd5af8-4657-475f-ae1e-733b04f69750/Men-s-FTP-upto-2027.pdf |url-status=dead }}</ref> ही कसोटी मालिका [[२०२५-२०२७ आयसीसी विश्व कसोटी अजिंक्यपद]] स्पर्धेचा भाग होती.<ref>{{cite web|url=https://www.icc-cricket.com/news/england-unveil-blockbuster-schedule-for-summer-of-2026 |trans-title= इंग्लंडकडून २०२६ च्या उन्हाळी हंगामासाठी दमदार वेळापत्रक जाहीर.|title=England unveil blockbuster schedule for summer of 2026 |work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]] |access-date=३१ ऑगस्ट २०२६}}</ref> जुलै २०२५ मध्ये, [[इंग्लंड आणि वेल्स क्रिकेट बोर्ड]]ाने २०२६ च्या देशांतर्गत आंतरराष्ट्रीय हंगामाचा भाग म्हणून या दौऱ्याचे वेळापत्रक निश्चित केले. <ref>{{cite web|url=https://www.ecb.co.uk/news/4320034/england-cricket-fixtures-for-2026-international-summer-announced |trans-title=२०२६ च्या आंतरराष्ट्रीय उन्हाळी हंगामासाठी इंग्लंड क्रिकेटचे सामने जाहीर|title=England Cricket fixtures for 2026 international summer announced |work=[[इंग्लंड आणि वेल्स क्रिकेट बोर्ड]]|access-date=३१ ऑगस्ट २०२६}}</ref>
==संघ==
{| class="wikitable" style="text-align:left;white-space:nowrap;margin:auto"
|-
!{{cr|ENG}}<ref>{{cite web|url=https://www.ecb.co.uk/news/4554459/england-men-name-squad-for-first-two-rothesay-tests-against-pakistan |trans-title= पाकिस्तानविरुद्धच्या पहिल्या दोन 'रोथसे' (Rothesay) कसोटी सामन्यांसाठी इंग्लंडच्या पुरुष संघाची घोषणा |title=England Men name squad for first two Rothesay Tests against Pakistan |work=[[इंग्लंड आणि वेल्स क्रिकेट बोर्ड]]|access-date=३१ ऑगस्ट २०२६}}</ref>
!{{cr|PAK}}<ref>{{cite web|url=https://www.pcb.com.pk/press-release-detail/pakistan-test-squads-announced-for-west-indies-and-england-tours.html |trans-title=|title= वेस्ट इंडीज आणि इंग्लंड दौऱ्यांसाठी पाकिस्तानचे कसोटी संघ जाहीर |work=[[पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड]] |access-date=३१ ऑगस्ट २०२६}}</ref>
|-
|- style="vertical-align:top"
|
* [[ज्यो रूट]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]])
* [[हॅरी ब्रूक]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)#उपकर्णधार|उक]])
* [[एमिलियो गे]]
* [[ऑली पोप]]
* [[ऑली रॉबिन्सन]]
* [[गस ॲटकिन्सन]]
* [[जेमी स्मिथ]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[जॉर्डन कॉक्स]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[जॉश टँग]]
* [[जोफ्रा आर्चर]]
* [[डॅन लॉरेन्स]]
* [[बेन डकेट]]
* [[ब्रायडन कार्स]]
* [[मॅथ्यू फिशर]]
* [[शोएब बशीर]]
* [[सोनी बेकर]]
* [[सॅम कूक]]
|
* [[बाबर आझम]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]])
* [[अझान अवैस]]
* [[अब्दुल्ला फजल]]
* [[अब्दुल्ला शफिक]]
* [[अराफत मिन्हास]]
* <s>[[अली उस्मान]]</s>
* अवैस झफर
* <s>[[आमेर जमाल]]</s>
* <s>[[इमाम उल हक]]</s>
* [[उबेद शाह]]
* <s>[[खुर्रम शहजाद (क्रिकेट खेळाडू)|खुर्रम शहजाद]]</s>
* [[गाझी घोरी]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[मोहम्मद अब्बास]]
* [[मोहम्मद अली (क्रिकेट खेळाडू)|मोहम्मद अली]]
* <s>[[मोहम्मद अवैस]]</s>
* [[मोहम्मद इम्रान]]
* [[मोहम्मद इम्रान रंधावा]]
* <s>[[मोहम्मद रिझवान]] ([[यष्टीरक्षक|य]])</s>
* [[रझाउल्ला मशवानी]]
* [[शान मसूद]]
* <s>[[सलमान अली आगा]]</s>
* [[साजिद खान]]
* [[साद बेग]]
* [[सैम अयुब]]
* [[सौद शकील]]
|}
२४ जुलै रोजी, पाठीच्या दुखापतीमुळे [[अब्दुल्ला फजल]] मालिकेतून बाहेर पडला आणि त्याच्या जागी [[अब्दुल्ला शफिक]]ची निवड करण्यात आली.<ref>{{cite web|url=https://www.pcb.com.pk/press-release-detail/update-on-pakistan-men-s-test-squad-for-west-indies-and-england-series.html |trans-title= वेस्ट इंडीज आणि इंग्लंड मालिकांसाठी पाकिस्तानच्या पुरुष कसोटी संघाबाबत अद्ययावत माहिती |title=Update on Pakistan men's Test squad for West Indies and England series |work=[[ पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड]] |access-date=३१ ऑगस्ट २०२६}}</ref> १८ ऑगस्ट रोजी, उजव्या हाताच्या दुखापतीमुळे [[बाबर आझम]] पहिल्या कसोटी सामन्यातून बाहेर पडला.<ref name="ESPN">{{cite web|last=रसूल|first=दान्याल |url=https://www.espncricinfo.com/story/babar-azam-ruled-out-of-first-test-against-england-salman-ali-agha-to-stand-in-as-captain-1550521 |trans-title= इंग्लंडविरुद्धच्या पहिल्या कसोटीतून बाबर बाहेर; सलमान आगा करणार नेतृत्व |title=Babar ruled out of first Test against England; Salman Agha to lead |work=[[क्रिकइन्फो]] |access-date=३१ ऑगस्ट २०२६}}</ref>
२४ ऑगस्ट रोजी, दुसऱ्या कसोटीसाठीच्या संघात [[सोनी बेकर]]चा समावेश करण्यात आला; त्याने [[ब्रायडन कार्स]]ची जागा घेतली, ज्याची ईसीबी द्वारे चौकशी सुरू होती. <ref>{{cite web|url=https://www.ecb.co.uk/news/4565725/ecb-update--brydon-carse |trans-title=ईसीबी अपडेट - ब्रायडन कार्स |title=ECB Update - Brydon Carse |work=[[इंग्लंड आणि वेल्स क्रिकेट बोर्ड]] |access-date=३१ ऑगस्ट २०२६}}</ref>
३१ ऑगस्ट रोजी, पाकिस्तानने तिसऱ्या कसोटीसाठी आपल्या संघात अनेक बदल केले; यात [[मोहम्मद रिझवान]], [[इमाम उल हक]], [[सलमान अली आगा]], [[अली उस्मान]], [[आमेर जमाल]], [[मोहम्मद अवैस]] आणि [[खुर्रम शहजाद (क्रिकेट खेळाडू)|खुर्रम शहजाद]] यांच्या जागी [[सैम अयुब]], [[अब्दुल्ला फजल]], [[अराफत मिन्हास]], [[मोहम्मद इम्रान]], [[साद बेग]], [[मोहम्मद इम्रान रंधावा]] आणि [[रझाउल्ला मशवानी]] यांचा समावेश करण्यात आला.[१४]
२ सप्टेंबर रोजी, इंग्लंडने तिसऱ्या कसोटीसाठी [[सॅम कूक]]चा संघात समावेश केला.[१५]
==कसोटी मालिका==
===१ली कसोटी===
{{Two-innings cricket match
| date = १९–२३ ऑगस्ट २०२६
| team1 = {{cr-rt|PAK}}
| team2 = {{cr|ENG}}
| score-team1-inns1 = १७१ (४८.१ षटके)
| runs-team1-inns1 = [[अब्दुल्ला शफिक]] ६१ (१०४)
| wickets-team1-inns1 = [[जॉश टँग]] ५/४६ (९.१ षटके)
| score-team2-inns1 = ४०९ (८९.५ षटके)
| runs-team2-inns1 = [[हॅरी ब्रूक]] ९१ (९३)
| wickets-team2-inns1 = [[अली उस्मान]] ५/९५ (२४ षटके)
| score-team1-inns2 = १३५ (३७.३ षटके)
| runs-team1-inns2 = [[मोहम्मद रिझवान]] ४१ (३९)
| wickets-team1-inns2 = [[ऑली रॉबिन्सन]] ३/२९ (११ षटके)
| result = इंग्लंड १ डाव आणि १०३ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496582.html धावफलक]
| venue = [[हेडिंग्ले स्टेडियम]], [[लीड्स ]]
| umpires = [[क्रिस गॅफने]] (न्यू) आणि [[अलाहुद्दीन पालेकर]] (दआ)
| motm = [[ऑली रॉबिन्सन]] (Eng)
| toss = इंग्लंडने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला
| rain = पावसामुळे दुसऱ्या दिवशी केवळ ५७ षटकांचा खेळ होऊ शकला.
| notes = [[सलमान अली आगा]] याने कसोटी सामन्यात पहिल्यांदाच पाकिस्तानचे नेतृत्व केले.<ref>{{cite web |url=https://www.rediff.com/amp/cricket/report/babar-azams-absence-hits-pakistan-ahead-of-england-test-salman-gets-captaincy-call/20260818.htm |trans-title=इंग्लंडविरुद्धच्या कसोटी सामन्यापूर्वी बाबर आझमच्या अनुपस्थितीचा पाकिस्तानला फटका; सलमानकडे कर्णधारपदाची धुरा|title=Babar Azam's absence hits Pakistan ahead of England Test; Salman gets captaincy call |work=[[Rediff.com]] |date=१८ ऑगस्ट २०२६|access-date=३१ ऑगस्ट २०२६}}</ref>
* [[अली उस्मान]] (पा) कसोटी कारकिर्दीतील पहिली 'फाइव्ह-विकेट हॉल' ([[पंचबळी]]) घेतली.<ref>{{cite web |access-date=३१ ऑगस्ट २०२६|trans-title= पाच बळी मिळवूनही पाकिस्तानच्या गोलंदाजीतील त्रुटींबद्दल उस्मानची खंत |title=Usman rues Pakistan bowling lapses despite five-wicket haul |url=https://www.espncricinfo.com/story/england-vs-pakistan-1st-test-usman-rues-pakistan-bowling-lapses-despite-five-wicket-haul-1550824 |website=क्रिकइन्फो}}</ref>
* विश्व कसोटी अजिंक्यपद गुण: इंग्लंड १२, पाकिस्तान ०.
}}
===२री कसोटी===
{{Two-innings cricket match
| date = २७–३१ ऑगस्ट २०२६
| team1 = {{cr-rt|ENG}}
| team2 = {{cr|PAK}}
| score-team1-inns1 = २९० (६६.४ षटके)
| runs-team1-inns1 = [[जेमी स्मिथ]] ६१ (८०)
| wickets-team1-inns1 = [[मोहम्मद अब्बास]] ४/७३ (२० षटके)
| score-team2-inns1 = ११० (३७.२ षटके)
| runs-team2-inns1 = [[अझान अवैस]] ४६ (१०२)
| wickets-team2-inns1 = [[ऑली रॉबिन्सन]] ४/११ (१३ षटके)
| score-team1-inns2 = २०८ (५४.२ षटके)
| runs-team1-inns2 = [[डॅन लॉरेन्स]] ५४ (७०)
| wickets-team1-inns2 = [[मोहम्मद अब्बास]] ५/५७ (२२ षटके)
| score-team2-inns2 = १९४ (५०.५ षटके)
| runs-team2-inns2 = [[सौद शकील]] ९७ (१२२)
| wickets-team2-inns2 = [[ऑली रॉबिन्सन]] ४/२४ (१४ षटके)
| result = इंग्लंड १९४ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496583.html धावफलक]
| venue = [[लॉर्ड्स]], [[लंडन]]
| umpires = [[अलाहुद्दीन पालेकर]] (दआ) आणि [[पॉल रायफेल]] (ऑ)
| motm = [[ऑली रॉबिन्सन]] (इं)
| toss = पाकिस्तानने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला
| rain = पावसामुळे तिसऱ्या दिवशी केवळ २४.५ षटकांचा खेळ होऊ शकला.
| notes = विश्व कसोटी अजिंक्यपद गुण: इंग्लंड १२, पाकिस्तान ०.
}}
===३री कसोटी===
{{Two-innings cricket match
| date = ९–१३ सप्टेंबर २०२६
| team1 = {{cr-rt|PAK}}
| team2 = {{cr|ENG}}
| score-team1-inns1 = १३३ (३३.५ षटके)
| runs-team1-inns1 = [[सौद शकील]] ४३ (४७)
| wickets-team1-inns1 = [[जॉश टँग]] ४/४२ (१० षटके)
| score-team2-inns1 = ४५३ (८९ षटके)
| runs-team2-inns1 = [[हॅरी ब्रूक]] ७५ (९७)
| wickets-team2-inns1 = [[रझाउल्ला मशवानी]] ४/१४८ (२३ षटके)
| score-team1-inns2 = ४४९ (९६.४ षटके)
| runs-team1-inns2 = [[शान मसूद]] ९५ (१४८)
| wickets-team1-inns2 =गस ॲटकिन्सन ३/१०९ (२४ षटके)
| score-team2-inns2 = १३०/२ (२४.२ षटके)
| runs-team2-inns2 = [[ज्यो रूट]] ६२[[नाबाद|*]] (६९)
| wickets-team2-inns2 = [[मोहम्मद अब्बास]] २/२७ (८ षटके)
| result = इंग्लंड ८ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1496584.html धावफलक]
| venue = [[एजबॅस्टन क्रिकेट मैदान]], [[बर्मिंगहॅम]]
| umpires = [[क्रिस गॅफने]] (न्यू) आणि [[पॉल रायफेल]] (ऑ)
| motm = [[डॅन लॉरेन्स]] (इं)
| toss = इंग्लंडने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला
| rain =
| notes = [[गाझी घोरी]], [[मोहम्मद इम्रान रंधावा]] आणि [[रझाउल्ला मशवानी]] (पाकिस्तान) यांनी कसोटी पदार्पण केले.
* [[शान मसूद]] (पाकिस्तान) याने आपला ५० वा कसोटी सामना खेळला.
* [[ऑली रॉबिन्सन]] (इंग्लंड) याने कसोटी क्रिकेटमध्ये आपला १०० वा बळी घेतला.<ref>{{cite web |access-date=१० सप्टेंबर २०२६ |trans-title=इंग्लंड विरुद्ध पाकिस्तान: ऑली रॉबिन्सनने सैम अयूबला बाद करून आपला १०० वा कसोटी बळी मिळवला!|title=England vs Pakistan: Ollie Robinson dismisses Saim Ayub to get his 100th Test wicket! |url=https://www.skysports.com/cricket/video/19508/13583504/england-vs-pakistan-ollie-robinson-dismisses-saim-ayub-to-get-his-100th-test-wicket |website=स्काय स्पोर्ट्स}}</ref>
* [[ज्यो रूट]]ने (इंग्लंड) सर्वाधिक झेल घेणारा क्षेत्ररक्षक<ref>{{cite web |last=दुबे|first=नितेश|trans-title=ज्यो रूटने एजबॅस्टनवर इतिहास रचला; स्टीव्ह स्मिथला मागे टाकत कसोटी क्रिकेटमध्ये सर्वाधिक झेल घेणारा क्षेत्ररक्षक बनला.|title=Joe Root scripts history at Edgbaston, surpasses Steve Smith to become the fielder with most catches in Test Cricket |url=https://timesofindia.indiatimes.com/sports/cricket/news/joe-root-scripts-history-at-edgbaston-surpasses-steve-smith-to-become-the-fielder-with-most-catches-in-test-cricket/articleshow/134018017.cms |work=[[The Times of India]] |date=११ सप्टेंबर २०२६ |access-date=१६ सप्टेंबर २०२६}}</ref> म्हणून [[स्टीव्ह स्मिथ]]ला आणि कसोटी क्रिकेटच्या इतिहासात सर्वाधिक अर्धशतके ठोकणारा फलंदाज म्हणून [[सचिन तेंडुलकर]]ला मागे टाकले.<ref>{{cite web |trans-title=सर्वाधिक कसोटी अर्धशतकांच्या बाबतीत जो रूटने सचिन तेंडुलकरला टाकले मागे.|title=Joe Root surpasses Sachin Tendulkar for most Test fifties |url=https://aninews.in/news/sports/cricket/joe-root-surpasses-sachin-tendulkar-for-most-test-fifties20260912182317/ |work=[[Asian News International]] |date=१२ सप्टेंबर २०२६|access-date=१६ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
* विश्व कसोटी अजिंक्यपद गुण: इंग्लंड १२, पाकिस्तान -११.{{efn|name=|षटकांची गती कमी राखल्यामुळे पाकिस्तानचे एकूण ११ गुण कापण्यात आले आणि त्यांना त्यांच्या सामना शुल्काच्या ५०% दंडही ठोठावण्यात आला..<ref>{{cite web |trans-title=पाकिस्तानला 'वर्ल्ड टेस्ट चॅम्पियनशिप'अंतर्गत दुहेरी दंडात्मक कारवाईचा फटका|title=Pakistan hit with dual World Test Championship sanction |url=https://www.icc-cricket.com/news/pakistan-hit-with-duel-world-test-championship-sanction |work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]] |date=१४ सप्टेंबर २०२६|access-date=१६ सप्टेंबर २०२६}}</ref>}}
}}
== नोंदी ==
{{Notelist}}
==संदर्भयादी==
{{संदर्भयादी}}
==बाह्यदुवे==
* [https://www.espncricinfo.com/series/pakistan-tour-in-england-2026-1496563 मालिका मुख्यपान ईएसपीएन क्रिकइन्फोवर]
{{इंग्लंडचे आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट दौरे}}
{{आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६}}
{{२०२५-२०२७ आयसीसी विश्व कसोटी अजिंक्यपद स्पर्धा}}
[[वर्ग:पाकिस्तान क्रिकेट संघाचे इंग्लंड दौरे|२०२६]]
[[वर्ग:पाकिस्तान क्रिकेट संघाचे परदेशी दौरे|इंग्लंड]]
[[वर्ग:आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संघांचे इंग्लंड दौरे]]
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महाराष्ट्रातील भूमापन, महसूल सर्वेक्षण आणि भूमिअभिलेखांचा इतिहास
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2026-09-15T19:31:35Z
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wikitext
text/x-wiki
[[File:Route Map of the Bombay presidency, including Scinde, surveyed and collected by the quarter master general's department, Bombay armee... 12 march 1846... - btv1b53165305f (2 of 3).jpg|thumb|right|200px|१८४६ मधील बॉम्बे प्रेसिडेन्सीचा मार्गनकाशा]]
'''महाराष्ट्रातील आधुनिक भूमापन आणि जमीन महसूल व्यवस्थेचा विकास''' हा केवळ जमिनीचे क्षेत्रफळ निश्चित करण्याच्या प्रक्रियेपुरता मर्यादित नव्हता. भूमीचे मापन, जमिनीचे वर्गीकरण, महसूल निर्धारण, भूमिअभिलेखांची निर्मिती तसेच जमीनधारणा आणि प्रशासकीय नियंत्रणाशी संबंधित नोंदी या परस्परसंबंधित प्रक्रियांमधून या व्यवस्थेचा विकास झाला. ब्रिटिशकालीन बॉम्बे प्रेसिडेन्सीमध्ये महसूल सर्वेक्षणाला अधिक संघटित प्रशासकीय आणि तांत्रिक स्वरूप प्राप्त झाले.<ref name="Gordon1959">{{cite book
|last=Gordon
|first=R. G.
|title=The Bombay Survey and Settlement Manual: Historical
|volume=I
|edition=2
|publisher=Government Press
|location=Bombay
|year=1959
}}</ref>
R. G. Gordon यांच्या ऐतिहासिक विवेचनात बॉम्बे प्रांतातील सर्वेक्षण आणि सेटलमेंट व्यवस्थेच्या विकासाचे विविध टप्पे स्वतंत्रपणे चर्चिले आहेत. नवीन सर्वेक्षणपद्धतीचा प्रारंभ आणि प्रारंभीचा विकास तसेच संयुक्त अहवालानंतर झालेला पुढील प्रशासकीय विकास या प्रक्रियेच्या ऐतिहासिक संदर्भात मांडण्यात आला आहे.<ref name="Gordon1959"/>
या प्रक्रियेमुळे भूमापन, महसूल निर्धारण आणि जमिनीशी संबंधित प्रशासकीय अभिलेख यांच्यात अधिक सुसंगत संबंध विकसित झाला. परिणामी, सर्वेक्षण आणि सेटलमेंट व्यवस्था महाराष्ट्रातील पुढील भूमी प्रशासनाच्या विकासातील महत्त्वाचा आधार बनली.<ref name="Gordon1959"/>
=== पारंपरिक पद्धतींपासून पद्धतशीर सर्वेक्षणाकडे संक्रमण ===
महाराष्ट्रासह भारतीय उपखंडातील विविध प्रदेशांमध्ये भूमापनासाठी पूर्वी स्थानिक आणि पारंपरिक पद्धतींचा वापर होत असे. या पद्धती प्रदेश, स्थानिक प्रशासकीय प्रथा आणि कृषी परिस्थितीनुसार बदलत असत. विस्तृत प्रदेशातील जमिनीचे तुलनेने एकसमान पद्धतीने मापन करणे, सर्वेक्षणाच्या आधारे नकाशे तयार करणे आणि महसूल प्रशासनासाठी आवश्यक माहिती संकलित करणे या गरजांमुळे अधिक पद्धतशीर सर्वेक्षणपद्धती विकसित झाली.<ref name="Gordon1959"/>
औपनिवेशिक दक्षिण आशियातील महसूल सर्वेक्षणांचा अभ्यास करताना Bernardo A. Michael यांनी सर्वेक्षणांच्या माध्यमातून प्रदेश, जमीन आणि प्रशासकीय माहिती नोंदविण्याच्या प्रक्रियेचे विश्लेषण केले आहे. त्यांच्या अभ्यासात महसूल सर्वेक्षण, नकाशीकरण आणि प्रशासकीय ज्ञाननिर्मिती यांतील परस्परसंबंधाला विशेष महत्त्व देण्यात आले आहे.<ref name="Michael2007">{{cite journal
|last=Michael
|first=Bernardo A.
|title=Making Territory Visible: The Revenue Surveys of Colonial South Asia
|journal=Imago Mundi
|volume=59
|issue=1
|year=2007
|pages=78–95
}}</ref>
महसूल सर्वेक्षणाच्या प्रक्रियेमुळे जमिनीचे क्षेत्र, स्थान आणि प्रशासकीय विभाग यांविषयी अधिक व्यवस्थित नोंदी आणि नकाशीकरण शक्य झाले. त्यामुळे स्थानिक आणि पारंपरिक भूमापनपद्धतींपासून अधिक पद्धतशीर व दस्तऐवजी स्वरूपाच्या सर्वेक्षणव्यवस्थेकडे झालेला विकास महसूल प्रशासनाच्या इतिहासातील महत्त्वाचा टप्पा मानला जातो.<ref name="Michael2007"/>
=== महसूल सर्वेक्षणाचा भूमिअभिलेख आणि प्रशासकीय व्यवस्थेशी संबंध ===
महसूल सर्वेक्षणामुळे जमिनीच्या भौतिक मापनाशी संबंधित माहिती आणि प्रशासकीय अभिलेख यांच्यातील संबंध अधिक संघटित स्वरूपात विकसित झाला. सर्वेक्षणाच्या प्रक्रियेतून जमिनीचे क्षेत्रफळ, सीमा, स्थान आणि इतर संबंधित तपशील नोंदविण्यास मदत झाली; ही माहिती महसूल प्रशासन आणि भूमिअभिलेख व्यवस्थेसाठी महत्त्वाची ठरली.<ref name="Michael2007"/>
महाराष्ट्रातील भूमापन आणि भूमिअभिलेख व्यवस्थेच्या दस्तऐवजी परंपरेत सर्वेक्षण, मापन आणि जमिनीच्या वर्गीकरणाशी संबंधित नियम आणि मार्गदर्शक साहित्याला विशेष स्थान आहे. महाराष्ट्र शासनाच्या भूमी अभिलेख विभागाच्या अधिकृत संकेतस्थळावर भूमापनाशी संबंधित विविध नियमपुस्तिका आणि मार्गदर्शक ग्रंथ उपलब्ध आहेत. त्यामध्ये ''The Bombay Survey and Settlement Manual, Volume I'', ''Manual of Land Surveying'', ''Land Records Department Training Manual'' आणि इतर संबंधित प्रकाशनांचा समावेश आहे.<ref name="MahaLandRecords">{{cite web
|title=नियम पुस्तिका
|website=भूमि अभिलेख विभाग, महाराष्ट्र शासन
|publisher=Government of Maharashtra
|url=https://bhumiabhilekh.maharashtra.gov.in/ActsAndRules/Manuals
}}</ref>
बॉम्बे प्रांतातील महसूल सर्वेक्षणाच्या विकासाशी संबंधित ऐतिहासिक साहित्य आणि भूमापनासंबंधी प्रशासकीय नियमांचा एकत्रित विचार केल्यास, जमिनीचे मापन ही प्रक्रिया महसूल निर्धारण, अभिलेख निर्मिती आणि प्रशासकीय व्यवस्थेशी निकटपणे संबंधित असल्याचे दिसून येते.<ref name="Gordon1959"/><ref name="MahaLandRecords"/>
अशा प्रकारे महाराष्ट्रातील आधुनिक भूमापन व्यवस्थेचा विकास हा स्थानिक आणि पारंपरिक मापनपद्धती, अधिक पद्धतशीर महसूल सर्वेक्षण आणि त्यातून विकसित झालेल्या भूमिअभिलेखीय व प्रशासकीय व्यवस्थेच्या दीर्घ ऐतिहासिक प्रक्रियेशी संबंधित आहे.<ref name="Gordon1959"/><ref name="Michael2007"/>
== ऐतिहासिक पार्श्वभूमी ==
=== दख्खनमधील भूमी व महसूल व्यवस्थेची पार्श्वभूमी ===
ब्रिटिश महसूल सर्वेक्षणाच्या स्थापनेपूर्वी दख्खनमधील भूमी आणि महसूल व्यवस्था विविध राजकीय सत्ताकेंद्रे, स्थानिक प्रशासकीय परंपरा आणि कृषी परिस्थिती यांच्या परस्परसंबंधातून विकसित झाली होती. जमीन महसूल हा राज्याच्या उत्पन्नाचा महत्त्वाचा स्रोत असल्यामुळे जमिनीची लागवड, उत्पादन, जमीनधारणा आणि महसूल आकारणी यांच्याशी संबंधित विविध प्रशासकीय पद्धती प्रचलित होत्या. एकोणिसाव्या शतकाच्या प्रारंभी ब्रिटिशांच्या ताब्यात आलेल्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील महसूल प्रशासनाच्या अभ्यासातूनही प्रत्यक्ष प्रशासकीय व्यवहार आणि महसूलधोरण यांतील संबंधाचे महत्त्व दिसून येते.<ref name="Rabitoy1975">{{cite journal
|last=Rabitoy
|first=Neil
|title=System v. Expediency: The Reality of Land Revenue Administration in the Bombay Presidency, 1812–1820
|journal=Modern Asian Studies
|volume=9
|issue=4
|year=1975
|pages=529–546
}}</ref>
दख्खनमधील भूमी आणि महसूल व्यवस्थेचा विकास एकसंध किंवा अपरिवर्तनीय स्वरूपाचा नव्हता. विविध कालखंडांमध्ये निजामशाही, आदिलशाही, मुघल आणि मराठा सत्तांच्या विस्तारानुसार आणि प्रशासकीय गरजांनुसार भूमी व महसूल प्रशासनात बदल होत गेले. त्यामुळे ब्रिटिशकालीन महसूल सर्वेक्षणाचा ऐतिहासिक अभ्यास करताना त्यापूर्वीच्या प्रादेशिक महसूल परंपरा आणि प्रशासकीय पद्धतींची पार्श्वभूमी विचारात घेणे आवश्यक ठरते.
एकोणिसाव्या शतकातील दख्खनमधील महसूल सेटलमेंटच्या प्रक्रियेचा अभ्यास करताना A. R. Kulkarni यांचा ''Professor H. Green and the Revenue Settlement in the Deccan (1837–1857)'' हा लेख महत्त्वाचा आहे. या अभ्यासात ब्रिटिशकालीन दख्खनमधील महसूल सेटलमेंटचा प्रश्न प्रशासकीय धोरण आणि महसूल व्यवस्थापनाच्या संदर्भात चर्चिला आहे.<ref name="Kulkarni1989">{{cite journal
|last=Kulkarni
|first=A. R.
|title=Professor H. Green and the Revenue Settlement in the Deccan (1837–1857)
|journal=Proceedings of the Indian History Congress
|volume=50
|year=1989
|pages=595–606
}}</ref>
या पार्श्वभूमीवर ब्रिटिश महसूल सर्वेक्षणाचा अभ्यास पूर्वीच्या महसूल परंपरांपासून पूर्णपणे विलग अशा व्यवस्थेपुरता मर्यादित न ठेवता, स्थानिक परिस्थिती, उपलब्ध प्रशासकीय ज्ञान आणि बदलत्या वसाहतकालीन प्रशासकीय गरजांच्या संदर्भात करणे आवश्यक ठरते.<ref name="Rabitoy1975"/><ref name="Kulkarni1989"/>
=== मलिक अंबर आणि महसूल प्रशासन ===
दख्खनच्या सतराव्या शतकातील प्रशासकीय इतिहासात मलिक अंबर यांना महत्त्वाचे स्थान आहे. अहमदनगरच्या निजामशाहीतील प्रभावशाली प्रशासक म्हणून त्यांच्या कार्यकाळात राज्याच्या प्रशासन आणि महसूल व्यवस्थेशी संबंधित उपाययोजनांचा संबंध जोडला जातो. दख्खनमधील पुढील भूमी आणि महसूल प्रशासनाच्या इतिहासाचा अभ्यास करताना त्यांच्या काळातील प्रशासकीय पद्धतींचा संदर्भ ऐतिहासिक साहित्यामध्ये आढळतो.
दख्खनमधील महसूल प्रशासनाच्या ऐतिहासिक विकासात विविध सत्ताकालांतील सातत्य आणि बदल या दोन्ही प्रक्रियांचा विचार आवश्यक आहे. त्यामुळे मलिक अंबरकालीन व्यवस्था, मराठाकालीन महसूल प्रशासन आणि पुढील ब्रिटिशकालीन महसूल सर्वेक्षण या व्यवस्थांना एकाच स्वरूपाची किंवा अपरिवर्तित प्रशासकीय परंपरा मानता येत नाही.
अठराव्या शतकातील मराठा राज्याच्या संदर्भात जमीन, जमीनधारणा आणि राज्यसत्ता यांच्यातील संबंधांचा अभ्यास आंद्रे विंक यांनी केला आहे. त्यांच्या ''Land and Sovereignty in India: Agrarian Society and Politics under the Eighteenth-Century Maratha Svarajya'' या ग्रंथात जमीन आणि ग्रामीण समाजव्यवस्थेशी संबंधित प्रश्नांचा राज्यसत्ता आणि राजकीय संरचनेच्या व्यापक संदर्भात विचार करण्यात आला आहे.<ref name="Wink1986">{{cite book
|last=Wink
|first=André
|title=Land and Sovereignty in India: Agrarian Society and Politics under the Eighteenth-Century Maratha Svarajya
|publisher=Cambridge University Press
|location=Cambridge
|year=1986
|series=University of Cambridge Oriental Publications
|volume=36
}}</ref>
दख्खनमधील इंदापूरसारख्या प्रदेशांच्या ऐतिहासिक अभ्यासातून भूमी, महसूल आणि राज्यसत्ता यांच्यातील संबंध समजून घेण्यासाठी स्थानिक कृषी आणि प्रशासकीय परिस्थितीचे महत्त्व अधोरेखित होते. अठराव्या शतकातील मराठा राज्याच्या संदर्भात महसूलव्यवस्था ही केवळ कर आकारणीपुरती मर्यादित नसून जमीनधारणा, ग्रामीण समाज आणि राज्यसत्ता यांच्याशी संबंधित व्यापक प्रशासकीय प्रक्रियेचा भाग होती.<ref name="Wink1986"/>
अशा प्रकारे दख्खनमधील भूमी आणि महसूल व्यवस्थेची ऐतिहासिक पार्श्वभूमी विविध राजकीय सत्ताकेंद्रे, प्रादेशिक प्रशासकीय परंपरा आणि बदलत्या महसूल पद्धती यांच्या दीर्घकालीन विकासातून घडलेली दिसते. या पार्श्वभूमीवर एकोणिसाव्या शतकात ब्रिटिश प्रशासनाने विकसित केलेल्या महसूल सेटलमेंट आणि सर्वेक्षण पद्धतींचा विचार व्यापक ऐतिहासिक संदर्भात करता येतो.<ref name="Rabitoy1975"/><ref name="Kulkarni1989"/><ref name="Wink1986"/>
== मराठा काळातील भूमी आणि महसूल व्यवस्था ==
=== शिवकालीन प्रशासनाची पार्श्वभूमी ===
मराठा राज्याच्या उदयाच्या काळात दख्खनमधील भूमी, महसूल आणि स्थानिक प्रशासन यांचा परस्परसंबंध महत्त्वाचा होता. कृषी उत्पादन, जमिनीवरील विविध हक्क, महसूल आकारणी आणि स्थानिक प्रशासकीय घटक यांचा राज्याच्या आर्थिक आणि प्रशासकीय व्यवस्थेशी संबंध होता. मराठा सत्तेच्या विस्ताराच्या प्रक्रियेत पूर्वीच्या दख्खनी प्रशासकीय परंपरांतील काही संस्थात्मक आणि दस्तऐवजी पद्धतींचा स्वीकार व रूपांतर होत गेले.<ref name="Deshpande2021">{{cite journal
|last=Deshpande
|first=Prachi
|title=The Marathi Kaulnāmā: Property, Sovereignty and Documentation in a Persianate Form
|journal=Journal of the Economic and Social History of the Orient
|volume=64
|issue=5 & 6
|year=2021
|pages=583–614
}}</ref>
मराठा राज्याच्या प्रशासनाचा अभ्यास करताना भूमी आणि महसूल प्रश्नांचा विचार केवळ करआकारणीच्या दृष्टीने न करता, स्थानिक समाज, कृषी उत्पादन, अधिकारसंबंध आणि प्रशासकीय दस्तऐवजीकरण यांच्या व्यापक संदर्भात करता येतो. दख्खनी राज्यव्यवस्थेतील भूमीवरील हक्क आणि त्यासंबंधीचे व्यवहार विविध प्रकारच्या दस्तऐवजांमधून नोंदविले जात होते. या दस्तऐवजी परंपरेत प्रशासन आणि स्थानिक आर्थिक व्यवहार यांच्याशी संबंधित बाबींचाही समावेश होता.<ref name="Deshpande2021"/>
मराठा राज्याच्या भूमी आणि महसूल व्यवस्थेचा इतिहास पूर्वीच्या दख्खनी प्रशासकीय परंपरा आणि मराठा सत्तेच्या विस्ताराबरोबर विकसित झालेल्या संस्थात्मक पद्धती यांच्या परस्परसंबंधातून समजून घेता येतो. या संदर्भात जमीन, महसूल, स्थानिक प्रशासकीय घटक आणि लेखी नोंदी यांचा परस्परसंबंध महत्त्वाचा ठरतो.<ref name="Deshpande2021"/>
=== मराठा राज्यातील जमीन, हक्क आणि दस्तऐवजीकरण ===
मराठा राज्यातील जमीन आणि मालमत्तेशी संबंधित व्यवहारांच्या ऐतिहासिक अभ्यासासाठी प्रशासकीय आणि कायदेशीर स्वरूपाच्या दस्तऐवजांना विशेष महत्त्व आहे. प्राची देशपांडे यांच्या अभ्यासानुसार, ''कौलनामा'' हा आरंभीच्या आधुनिक काळातील मराठी प्रशासकीय दस्तऐवजीकरणातील महत्त्वाचा दस्तऐवजी प्रकार होता. अशा दस्तऐवजांद्वारे विविध हक्कांची पुष्टी, संरक्षणाची हमी तसेच भूमी आणि इतर आर्थिक हितसंबंधांशी संबंधित व्यवहारांची नोंद केली जात असे.<ref name="Deshpande2021"/>
देशपांडे यांच्या अभ्यासानुसार, कौलनाम्यांचा वापर दख्खनमधील विविध प्रशासकीय संदर्भांत होत होता. काही प्रकरणांत अशा दस्तऐवजांद्वारे लागवडीस प्रोत्साहन देणे, ओसाड किंवा कमी विकसित जमिनींच्या लागवडीसाठी सवलतीच्या अटी निश्चित करणे अथवा बाजारपेठांच्या विकासाशी संबंधित व्यवस्था करणे यांसारख्या उद्देशांची पूर्तता केली जात होती.<ref name="Deshpande2021"/>
या दस्तऐवजी परंपरेमुळे भूमी आणि मालमत्तेशी संबंधित अधिकारसंबंध हे केवळ प्रत्यक्ष ताब्यावर आधारित नसून लेखी नोंदी, आश्वासने आणि प्रशासकीय मान्यतेशीही संबंधित होते, असे दिसून येते. मराठी प्रशासकीय व्यवहारांमध्ये स्थानिक भाषिक परंपरा आणि फारसी दस्तऐवजी प्रभाव यांचा परस्परसंबंधही या स्रोतांच्या आधारे अभ्यासता येतो.<ref name="Deshpande2021"/>
अठराव्या शतकातील मराठा साम्राज्यातील राजकीय आणि व्यवहारात्मक संबंधांच्या अभ्यासात लेखी करारांना महत्त्व प्राप्त होते. Dominic Vendell यांच्या अभ्यासात १७९५ मधील एका कराराच्या संदर्भातून मराठी आणि फारसी दस्तऐवजी प्रकार, करारातील बंधनकारक सूत्रे आणि लेखनपद्धती यांचा राजकीय व इतर व्यवहारांमध्ये झालेला वापर स्पष्ट करण्यात आला आहे.<ref name="Vendell2021">{{cite journal
|last=Vendell
|first=Dominic
|title=Transacting Politics in the Maratha Empire: An Agreement between Friends, 1795
|journal=Journal of the Economic and Social History of the Orient
|volume=64
|issue=5 & 6
|year=2021
|pages=826–863
}}</ref>
या प्रकारच्या अभ्यासांमधून मराठा राज्यातील लेखी दस्तऐवजांचा उपयोग केवळ शासकीय आदेश किंवा महसूलविषयक नोंदीपुरता मर्यादित नसून राजकीय संबंध आणि विविध प्रकारच्या करारात्मक व्यवहारांमध्येही होत असल्याचे दिसून येते. त्यामुळे जमीन आणि मालमत्तेशी संबंधित अधिकारसंबंधांचा अभ्यास व्यापक दस्तऐवजी संस्कृतीच्या संदर्भात करणे उपयुक्त ठरते.<ref name="Vendell2021"/>
भूमी, महसूल आणि प्रशासनाच्या ऐतिहासिक अभ्यासात बहुभाषिक दस्तऐवजी व्यवहारांचाही संदर्भ महत्त्वाचा आहे. Samira Sheikh यांच्या अभ्यासात परगणा पातळीवरील प्रशासकीय आणि आर्थिक व्यवहारांमध्ये विविध भाषांचा वापर तसेच लेखनिक आणि स्थानिक प्रशासकीय घटकांची भूमिका यांचा अभ्यास करण्यात आला आहे.<ref name="Sheikh2021">{{cite journal
|last=Sheikh
|first=Samira
|title=Persian in the Villages, or, the Language of Jamiat Rai's Account Books
|journal=Journal of the Economic and Social History of the Orient
|volume=64
|issue=5 & 6
|year=2021
|pages=693–751
}}</ref>
या व्यापक पश्चिम भारतीय प्रशासकीय संदर्भातून जमीन, महसूल, हक्क आणि दस्तऐवजीकरण यांचा संबंध एकाच भाषिक किंवा प्रशासकीय चौकटीपुरता मर्यादित नसल्याचे दिसून येते. मराठी, फारसी आणि इतर प्रादेशिक भाषांच्या वापरातून विकसित झालेल्या दस्तऐवजी परंपरा भूमी आणि महसूल व्यवहारांच्या ऐतिहासिक अभ्यासासाठी उपयुक्त संदर्भ प्रदान करतात.<ref name="Sheikh2021"/>
अशा प्रकारे मराठा काळातील जमीन आणि मालमत्तेशी संबंधित व्यवस्थेचा अभ्यास करताना जमिनीवरील विविध हक्क, महसूल आकारणी आणि प्रशासकीय नियंत्रण यांच्याबरोबरच कौलनामे, करार आणि इतर लेखी नोंदी यांचे स्थान महत्त्वाचे ठरते. या दस्तऐवजांमधून सत्ता, सार्वभौमत्व, मालमत्ता आणि विविध आर्थिक व राजकीय व्यवहार यांतील परस्परसंबंधांचा अभ्यास करता येतो.<ref name="Deshpande2021"/><ref name="Vendell2021"/>
== इंदापूर : महसूल सर्वेक्षणाच्या इतिहासातील एक महत्त्वपूर्ण अभ्यासक्षेत्र ==
=== प्रारंभीची परिस्थिती ===
एकोणिसाव्या शतकाच्या पूर्वार्धात दख्खनमधील ब्रिटिश अधिपत्याखालील प्रदेशांमध्ये जमीन महसूल प्रशासनाच्या विविध पद्धती विकसित आणि अंमलात आणल्या जात होत्या. या काळातील महसूल प्रशासनाचा अभ्यास केवळ घोषित धोरणांच्या आधारे न करता, स्थानिक परिस्थिती, महसूल वसुलीतील अडचणी आणि प्रत्यक्ष प्रशासकीय व्यवहार यांच्या संदर्भात करणे आवश्यक ठरते.<ref name="Rabitoy1975"/>
Neil Rabitoy यांनी इ.स. १८१२ ते १८२० या कालखंडातील बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या जमीन महसूल प्रशासनाचा अभ्यास करताना औपचारिक महसूलपद्धती आणि स्थानिक परिस्थितीनुसार स्वीकारण्यात येणारे व्यवहार्य प्रशासकीय उपाय यांतील संबंध अधोरेखित केला आहे. त्यामुळे आरंभीच्या ब्रिटिश महसूल प्रशासनाच्या अभ्यासात प्रत्यक्ष प्रशासकीय कार्यपद्धतीला विशेष महत्त्व प्राप्त होते.<ref name="Rabitoy1975"/>
इंदापूरमधील आरंभीच्या वसाहतकालीन ग्रामीण समाजाच्या अभ्यासासाठी कृषक आणि प्रशासन यांच्यातील संबंध हा स्वतंत्र संशोधनाचा विषय ठरला आहे. Lynn Zastoupil यांच्या ''Peasant Desertions in Early Colonial Indapur'' या अभ्यासात आरंभीच्या वसाहतकालीन इंदापूरमधील कृषकांच्या हालचाली आणि ग्रामीण परिस्थितीशी संबंधित प्रश्नांचा विचार करण्यात आला आहे.<ref name="Zastoupil1992">{{cite journal
|last=Zastoupil
|first=Lynn
|title=Peasant Desertions in Early Colonial Indapur
|journal=Journal of Asian History
|volume=26
|issue=2
|year=1992
|pages=119–
}}</ref>
इंदापूरच्या आरंभीच्या वसाहतकालीन परिस्थितीचा विचार करताना जमीन महसूल प्रशासन, ग्रामीण समाज आणि कृषकांच्या आर्थिक परिस्थिती यांतील संबंध महत्त्वाचे ठरतात. तथापि, कृषकांच्या स्थलांतराची कारणे, महसूल भाराचा विशिष्ट परिणाम किंवा एखाद्या विशिष्ट प्रशासकीय उपायाचा परिणाम यांसारखे तपशील संबंधित प्राथमिक किंवा संशोधन स्रोतांच्या थेट आधारेच निश्चित करणे आवश्यक आहे.<ref name="Rabitoy1975"/><ref name="Zastoupil1992"/>
=== इंदापूरमधील अनुभव आणि भूमिवर्गीकरण पद्धतीचा विकास ===
बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील महसूल सर्वेक्षणाच्या इतिहासात इंदापूरचा उल्लेख महत्त्वाच्या अभ्यासक्षेत्रांपैकी एक म्हणून आढळतो. R. G. Gordon यांच्या ''The Bombay Survey and Settlement Manual: Historical'' या ग्रंथात बॉम्बे प्रांतातील सर्वेक्षण आणि सेटलमेंट व्यवस्थेच्या ऐतिहासिक विकासाचा मागोवा घेण्यात आला आहे. या ग्रंथात नवीन सर्वेक्षणपद्धतीचा प्रारंभ आणि पुढील प्रशासकीय विकास यांचा स्वतंत्रपणे विचार करण्यात आला आहे.<ref name="Gordon1959"/>
इ.स. १८७२–७३ च्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या प्रशासन अहवालात इंदापूरमध्ये Mr. Goldsmid आणि Lieutenant Wingate यांनी स्वीकारलेल्या भूमिवर्गीकरण पद्धतीचा स्पष्ट उल्लेख आढळतो. अहवालानुसार, इंदापूरमध्ये स्वीकारलेली वर्गीकरणपद्धती पुढील काळातही सुरू ठेवण्यात आली आणि अनुभवाच्या आधारे आवश्यक ते मर्यादित बदल करण्यात आले. विविध वर्गीकरण पथकांमध्ये मूल्यांकनाच्या निकषांमध्ये एकरूपता राखण्यावर विशेष भर देण्यात आला होता.<ref name="BombayReport1872-73">{{cite book
|title=General Report on the Administration of the Bombay Presidency for the Year 1872–73
|location=Bombay
|publisher=Government Central Press
|year=1874
}}</ref>
या अहवालानुसार भूमिवर्गीकरणाचे कार्य शेतानुसार केले जात होते. प्रत्येक शेताची स्वतंत्रपणे तपासणी करून वर्गीकरण करण्यात येत असे आणि प्रत्यक्ष कामाच्या अचूकतेची खात्री करण्यासाठी वरिष्ठ अधिकाऱ्यांकडून नियमित चाचण्या व तपासणी करण्यात येत होती.<ref name="BombayReport1872-73"/>
त्यामुळे इंदापूरमधील अनुभव हा बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील भूमिवर्गीकरणाच्या पद्धतीच्या इतिहासात महत्त्वाचा संदर्भ ठरतो. मूल्यांकनातील एकरूपता, शेतनिहाय तपासणी आणि वरिष्ठ स्तरावरील नियंत्रण या घटकांना या प्रक्रियेत विशेष महत्त्व देण्यात आले होते.<ref name="BombayReport1872-73"/>
Gordon यांच्या ऐतिहासिक अभ्यासातून बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील महसूल सर्वेक्षण आणि सेटलमेंट पद्धती क्रमशः विकसित होत गेल्याचे दिसून येते. नवीन पद्धतीचा प्रारंभ, तिचा विस्तार आणि पुढील प्रशासकीय बदल यांच्या व्यापक संदर्भात इंदापूरसारख्या प्रदेशांतील प्रत्यक्ष अनुभवांचे स्थान महत्त्वाचे होते.<ref name="Gordon1959"/>
अशा प्रकारे इंदापूरचा अभ्यास हा केवळ एका प्रदेशाच्या महसूल इतिहासापुरता मर्यादित राहत नाही. आरंभीच्या ब्रिटिश जमीन महसूल प्रशासनातील प्रत्यक्ष प्रशासकीय प्रश्न, ग्रामीण समाजाशी संबंधित बदल तसेच भूमिवर्गीकरण आणि सर्वेक्षण पद्धतींच्या विकासाच्या इतिहासासाठी इंदापूर महत्त्वाचा संदर्भ प्रदान करतो.<ref name="Rabitoy1975"/><ref name="Gordon1959"/><ref name="BombayReport1872-73"/>
== ब्रिटिश काळातील महसूल सर्वेक्षण ==
=== प्रारंभीचे प्रयोग आणि समस्या ===
ब्रिटिश सत्तेच्या आरंभीच्या काळात बॉम्बे प्रेसिडेन्सीमध्ये जमीन महसूल प्रशासनाची एकसंध आणि सर्वत्र समान पद्धत तत्काळ विकसित झाली नव्हती. विविध प्रदेशांतील पूर्वीच्या महसूल व्यवस्था, स्थानिक परिस्थिती आणि प्रशासकीय गरजा यांमुळे महसूल आकारणी आणि प्रशासनाच्या प्रत्यक्ष कार्यपद्धतीत फरक दिसून येत होता. इ.स. १८१२ ते १८२० या कालखंडातील बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या जमीन महसूल प्रशासनाचा अभ्यास करताना Neil Rabitoy यांनी औपचारिक महसूलपद्धती आणि प्रत्यक्ष प्रशासनातील परिस्थितीनुरूप उपाय यांतील संबंध अधोरेखित केला आहे.<ref name="Rabitoy1975"/>
Rabitoy यांच्या अभ्यासातून आरंभीच्या ब्रिटिश जमीन महसूल प्रशासनात औपचारिक महसूलपद्धती आणि प्रत्यक्ष प्रशासकीय व्यवहार यांमध्ये काही प्रसंगी फरक दिसून येत असल्याचे स्पष्ट होते. स्थानिक परिस्थिती आणि तात्कालिक प्रशासकीय गरजांनुसार व्यवहार्य उपाय स्वीकारले जात असल्याने घोषित धोरण आणि प्रत्यक्ष अंमलबजावणी यांच्यात अंतर निर्माण होऊ शकत असे.<ref name="Rabitoy1975"/>
त्यामुळे बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील जमीन महसूल प्रशासनाच्या आरंभीच्या विकासाचा विचार केवळ एखाद्या निश्चित प्रशासकीय प्रणालीच्या चौकटीत न करता, विविध प्रशासकीय प्रयोग आणि परिस्थितीनुरूप बदलांच्या प्रक्रियेच्या संदर्भात करता येतो.<ref name="Rabitoy1975"/>
ब्रिटिश काळात जमीन, कृषी उत्पादन आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेशी संबंधित आर्थिक संबंधांमध्येही महत्त्वपूर्ण बदल झाले. Vasant Kaiwar यांनी बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील वसाहतकालीन राज्य, भांडवल आणि कृषक समाज यांच्या परस्परसंबंधांचा अभ्यास करताना ग्रामीण मालमत्ता-संबंध आणि कृषक अर्थव्यवस्थेतील बदलांकडे लक्ष वेधले आहे.<ref name="Kaiwar1994">{{cite journal
|last=Kaiwar
|first=Vasant
|title=The Colonial State, Capital and the Peasantry in Bombay Presidency
|journal=Modern Asian Studies
|volume=28
|issue=4
|year=1994
|pages=793–832
}}</ref>
Kaiwar यांच्या अभ्यासाच्या संदर्भात वसाहतकालीन आर्थिक आणि प्रशासकीय धोरणांचा ग्रामीण समाजातील भूमी, उत्पादन, कर्ज आणि मालमत्तेशी संबंधित संबंधांवर परिणाम झाला. त्यामुळे महसूल प्रशासनातील बदलांचा विचार केवळ करआकारणीच्या दृष्टीने न करता, कृषक समाज आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या व्यापक संदर्भातही करता येतो.<ref name="Kaiwar1994"/>
=== इंदापूरमधील अनुभव आणि नवीन सर्वेक्षण पद्धती ===
बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील महसूल सर्वेक्षणाच्या इतिहासात इंदापूरचा अनुभव महत्त्वपूर्ण संदर्भ म्हणून आढळतो. महसूल सर्वेक्षणाच्या पद्धतीचा विकास हा जमिनीचे मापन, शेतनिहाय नोंदणी, भूमिवर्गीकरण आणि महसूल सेटलमेंट यांसारख्या परस्परसंबंधित प्रक्रियांशी संबंधित होता. R. G. Gordon यांच्या ''The Bombay Survey and Settlement Manual: Historical'' या ग्रंथात बॉम्बे प्रांतातील सर्वेक्षण आणि सेटलमेंट पद्धतीच्या ऐतिहासिक विकासाचा आढावा घेण्यात आला आहे.<ref name="Gordon1959"/>
Gordon यांच्या ऐतिहासिक विवेचनात नवीन सर्वेक्षणपद्धतीचा प्रारंभ, तिचा प्रारंभीचा विकास आणि पुढील प्रशासकीय बदलांचा स्वतंत्रपणे विचार करण्यात आला आहे. या व्यापक ऐतिहासिक संदर्भात इंदापूरसारख्या प्रदेशांतील प्रत्यक्ष अनुभवांचे स्थान महत्त्वाचे ठरते.<ref name="Gordon1959"/>
इ.स. १८७२–७३ च्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या प्रशासन अहवालात महसूल सर्वेक्षण आणि भूमिवर्गीकरणाच्या कार्यपद्धतीसंबंधी माहिती उपलब्ध आहे. अहवालात इंदापूरमध्ये Mr. Goldsmid आणि Lieutenant Wingate यांनी स्वीकारलेली भूमिवर्गीकरणाची पद्धत पुढील काळातही चालू ठेवण्यात आल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. अनुभवाच्या आधारे आवश्यक वाटलेल्या मर्यादित सुधारणा करण्यात आल्या होत्या.<ref name="BombayReport1872-73"/>
अहवालानुसार विविध वर्गीकरण पथकांमध्ये मूल्यांकनाच्या निकषांमध्ये एकरूपता राखण्यासाठी विशेष काळजी घेण्यात येत होती. वर्गीकरणाचे कार्य शेतनिहाय केले जात असून प्रत्यक्ष कामाच्या अचूकतेची खात्री करण्यासाठी वरिष्ठ अधिकाऱ्यांकडून तपासणीची व्यवस्था करण्यात आली होती.<ref name="BombayReport1872-73"/>
या नोंदींवरून महसूल सर्वेक्षणाच्या कार्यात मोजणी आणि भूमिवर्गीकरणाशी संबंधित अधिक पद्धतशीर आणि नियंत्रित कार्यपद्धती विकसित करण्यात आली होती, असे दिसून येते. इंदापूरमधील अनुभव या प्रक्रियेच्या इतिहासातील महत्त्वाचा दस्तऐवजी संदर्भ ठरतो.<ref name="BombayReport1872-73"/>
=== इ.स. १८४७ चा संयुक्त अहवाल आणि सर्वेक्षणपद्धती ===
बॉम्बे प्रांतातील महसूल सर्वेक्षणाच्या इतिहासात इ.स. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित प्रशासकीय दस्तऐवजांना विशेष स्थान आहे. महाराष्ट्र शासनाच्या भूमी अभिलेख विभागाने प्रकाशित केलेल्या ''Measurement and Classification Rules of the Deccan, Gujarat, Konkan and Kanara Surveys'' या संग्रहात बॉम्बे सरकारच्या अभिलेखांमधील इ.स. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित निवडक कागदपत्रे आणि नियम समाविष्ट करण्यात आले आहेत.<ref name="LandRecords1975">{{cite book
|author=Maharashtra (India). Land Records Department
|title=Measurement and Classification Rules of the Deccan, Gujarat, Konkan and Kanara Surveys: Selections from the Records of the Bombay Government Papers of the Joint Report of 1847
|location=Bombay
|publisher=Government Press
|year=1975
}}</ref>
या संग्रहातून भूमापन आणि भूमिवर्गीकरणाशी संबंधित प्रशासकीय नियम, संज्ञा आणि कार्यपद्धतींच्या दस्तऐवजी परंपरेचा संदर्भ उपलब्ध होतो. त्यामुळे बॉम्बे प्रांतातील सर्वेक्षण आणि वर्गीकरणाच्या ऐतिहासिक पद्धतींचा अभ्यास करण्यासाठी हे प्रकाशन महत्त्वाचे स्रोतसाहित्य ठरते.<ref name="LandRecords1975"/>
इ.स. १८७२–७३ च्या प्रशासन अहवालातील नोंदींवरून सर्वेक्षण, सेटलमेंट आणि भूमिवर्गीकरणाशी संबंधित पद्धती पुढील काळात प्रशासकीय कार्याचा भाग राहिल्याचे दिसून येते. इंदापूरमध्ये पूर्वी स्वीकारलेल्या भूमिवर्गीकरण पद्धतीच्या पुढील वापराचा उल्लेख या प्रक्रियेच्या सातत्याचा दस्तऐवजी संदर्भ प्रदान करतो.<ref name="BombayReport1872-73"/>
=== सर्वेक्षण आणि महसूल प्रशासनाचा विस्तार ===
बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील महसूल सर्वेक्षणाचा विकास हा प्रारंभीच्या महसूल प्रशासनातील विविध प्रयोगांपासून अधिक पद्धतशीर भूमापन, भूमिवर्गीकरण आणि महसूल सेटलमेंटच्या पद्धतींपर्यंत झालेल्या बदलांच्या प्रक्रियेचा भाग होता. या विकासाचा संबंध प्रशासकीय गरजा, स्थानिक परिस्थिती आणि सर्वेक्षणातून उपलब्ध होणाऱ्या जमिनीसंबंधी माहितीशी होता.<ref name="Rabitoy1975"/><ref name="Gordon1959"/>
इंदापूरमधील अनुभव, इ.स. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित दस्तऐवजी साहित्य आणि त्यानंतरच्या प्रशासन अहवालांतील नोंदी यांच्या आधारे बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील सर्वेक्षण आणि भूमिवर्गीकरणाच्या पद्धतींचा क्रमशः विकास अभ्यासता येतो.<ref name="Gordon1959"/><ref name="BombayReport1872-73"/><ref name="LandRecords1975"/>
== बॉम्बे महसूल सर्वेक्षण ==
=== सर्वेक्षणाचा प्रारंभ आणि विस्तार ===
एकोणिसाव्या शतकाच्या पूर्वार्धात ब्रिटिश प्रशासनास त्यांच्या नियंत्रणाखालील प्रदेशांच्या अंतर्गत सीमा आणि प्रशासकीय विभागांविषयी अधिक तपशीलवार माहितीची आवश्यकता भासू लागली. तपशीलवार महसूल सर्वेक्षणांच्या माध्यमातून विविध प्रशासकीय विभागांचे नकाशीकरण करण्यात आले आणि जमिनीच्या धारणांशी संबंधित अधिक टिकाऊ अभिलेख तयार करण्यात आले.<ref name="Michael2007"/>
बंगाल, बॉम्बे आणि मद्रास या प्रेसिडेन्सींमध्ये महसूल सर्वेक्षणाचे विविध प्रयत्न करण्यात आले होते; तथापि, त्यांची व्याप्ती, अचूकता आणि परिणाम सर्वत्र समान नव्हते. ब्रिटिश प्रशासनाच्या विस्ताराबरोबर अधिक तपशीलवार महसूल सर्वेक्षणांना महत्त्व प्राप्त झाले. या प्रक्रियेमुळे भूभाग, प्रशासकीय विभाग आणि जमिनीच्या धारणांशी संबंधित माहितीचे अधिक पद्धतशीर नोंदणीकरण आणि नकाशीकरण शक्य झाले.<ref name="Michael2007"/>
R. G. Gordon यांच्या ''The Bombay Survey and Settlement Manual: Historical'' या ग्रंथात बॉम्बे प्रांतातील सर्वेक्षण आणि सेटलमेंट व्यवस्थेच्या ऐतिहासिक विकासाचा मागोवा घेण्यात आला आहे. या ग्रंथात नवीन सर्वेक्षणपद्धतीचा प्रारंभ, तिचा विकास आणि इ.स. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित पुढील टप्प्यांचा ऐतिहासिक संदर्भ उपलब्ध आहे.<ref name="Gordon1959"/>
बॉम्बे महसूल सर्वेक्षणाच्या विकासात विविध प्रदेशांतील प्रत्यक्ष अनुभवांच्या आधारे कार्यपद्धतीत बदल आणि सुधारणा करण्यात आल्या. सर्वेक्षण आणि भूमिवर्गीकरणाच्या कामात अचूकता, मूल्यांकनातील एकरूपता आणि वरिष्ठ स्तरावरील तपासणी यांना महत्त्व देण्यात आले होते.<ref name="Gordon1959"/>
=== इंदापूरमधील अनुभव आणि सर्वेक्षणपद्धती ===
बॉम्बे महसूल सर्वेक्षणाच्या इतिहासात इंदापूरचा अनुभव महत्त्वपूर्ण संदर्भ म्हणून आढळतो. इंदापूरमधील सर्वेक्षण आणि महसूल सेटलमेंटच्या अनुभवाशी H. E. Goldsmid आणि Lieutenant Wingate यांची नावे ऐतिहासिक आणि प्रशासकीय स्रोतांमध्ये संबंधित आढळतात.<ref name="LandRevenuePoona">{{cite web
|title=The Land Revenue Administration of Poona
|website=Indira Gandhi National Centre for the Arts
|url=https://ignca.gov.in/Asi_data/25453.pdf
}}</ref>
इ.स. १८७२–७३ च्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या प्रशासन अहवालात इंदापूरमध्ये Mr. Goldsmid आणि Lieutenant Wingate यांनी स्वीकारलेली भूमिवर्गीकरणाची पद्धत पुढील काळातही चालू ठेवण्यात आल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. पुढील अनुभवाच्या आधारे आवश्यक वाटलेल्या मर्यादित सुधारणा करण्यात आल्या होत्या.<ref name="BombayReport1872-73"/>
अहवालानुसार विविध वर्गीकरण पथकांमध्ये मूल्यांकनाच्या निकषांची एकरूपता राखण्यासाठी विशेष काळजी घेण्यात येत होती. वरिष्ठ अधिकाऱ्यांकडून नियमित तपासणी करण्यात येत होती आणि भूमिवर्गीकरणाचे कार्य शेतनिहाय केले जात असे. या पद्धतीत प्रत्येक शेताची सूक्ष्म तपासणी करून वर्गीकरणाचे निष्कर्ष नोंदविण्यावर भर देण्यात आला होता.<ref name="BombayReport1872-73"/>
या संदर्भांवरून इंदापूरमधील अनुभव हा बॉम्बे प्रांतातील भूमिवर्गीकरण आणि महसूल सर्वेक्षणाच्या पद्धतींच्या विकासातील महत्त्वाचा ऐतिहासिक संदर्भ ठरतो.<ref name="BombayReport1872-73"/><ref name="Gordon1959"/>
=== एच. ई. गोल्डस्मिड यांचा संदर्भ ===
बॉम्बे महसूल सर्वेक्षणाच्या इतिहासात H. E. Goldsmid यांचे नाव सर्वेक्षण आणि भूमिवर्गीकरणाच्या प्रशासकीय प्रक्रियेशी संबंधित स्रोतांमध्ये आढळते. पुणे आणि सोलापूर परिसरातील महसूल सर्वेक्षणाच्या प्रारंभीच्या कामाशी त्यांचा संबंध असल्याचे ऐतिहासिक स्रोतांमध्ये नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="LandRevenuePoona"/>
इंदापूरमधील भूमिवर्गीकरणाच्या पद्धतीचा उल्लेख करताना इ.स. १८७२–७३ च्या प्रशासन अहवालात Goldsmid आणि Lieutenant Wingate या दोघांची नावे स्पष्टपणे देण्यात आली आहेत. त्या अहवालानुसार, इंदापूरमध्ये स्वीकारलेली वर्गीकरणपद्धती पुढील काळातही मर्यादित सुधारणांसह सुरू ठेवण्यात आली होती.<ref name="BombayReport1872-73"/>
त्याच पद्धतीत विविध वर्गीकरण पथकांमध्ये मूल्यांकनाच्या निकषांची एकरूपता राखण्याचा प्रयत्न करण्यात आला होता. वरिष्ठ अधिकाऱ्यांकडून नियमित तपासणी आणि शेतनिहाय सूक्ष्म वर्गीकरण ही त्या कार्यपद्धतीची वैशिष्ट्ये होती.<ref name="BombayReport1872-73"/>
उपलब्ध स्रोतांच्या आधारे Goldsmid यांचा संदर्भ मुख्यतः बॉम्बे प्रांतातील सर्वेक्षण आणि भूमिवर्गीकरणाच्या प्रशासकीय इतिहासाच्या संदर्भात देता येतो. त्यांच्या स्वतंत्र वैयक्तिक योगदानाचे अधिक विस्तृत मूल्यमापन करण्यासाठी स्वतंत्र चरित्रात्मक किंवा विशेष ऐतिहासिक स्रोतांची आवश्यकता आहे.
=== सर जॉर्ज विंगेट आणि महसूल सर्वेक्षण ===
बॉम्बे महसूल सर्वेक्षणाच्या इतिहासात Lieutenant Wingate, पुढे Sir George Wingate म्हणून ओळखले गेले, यांचे नाव सर्वेक्षण आणि महसूल सेटलमेंटच्या विकासाशी संबंधित ऐतिहासिक स्रोतांमध्ये आढळते.<ref name="LandRevenuePoona"/><ref name="Gordon1959"/>
पुणे आणि सोलापूर परिसरातील महसूल सर्वेक्षणाच्या प्रारंभीच्या कामाशी Goldsmid आणि Wingate यांचा संबंध होता. इंदापूरमधील सर्वेक्षण आणि सेटलमेंटच्या ऐतिहासिक संदर्भातही Wingate यांच्या कार्याचा उल्लेख आढळतो.<ref name="LandRevenuePoona"/>
इ.स. १८७२–७३ च्या प्रशासन अहवालात इंदापूरमधील भूमिवर्गीकरणाच्या पद्धतीचा उल्लेख करताना Goldsmid आणि Lieutenant Wingate यांची नावे देण्यात आली आहेत. त्या ठिकाणी स्वीकारलेली वर्गीकरणपद्धती पुढील काळातही अनुभवाच्या आधारे मर्यादित सुधारणांसह चालू ठेवण्यात आल्याचे अहवालात नमूद आहे.<ref name="BombayReport1872-73"/>
बॉम्बे प्रांतातील महसूल सर्वेक्षणाच्या व्यापक इतिहासात सर्वेक्षण, भूमिवर्गीकरण आणि महसूल सेटलमेंट या परस्परसंबंधित प्रक्रियांच्या संदर्भात Wingate यांच्या कार्याचा विचार करण्यात येतो. नवीन सर्वेक्षणपद्धतीचा प्रारंभ आणि पुढील विकास या ऐतिहासिक प्रक्रियेच्या संदर्भात त्यांचे नाव विशेषत्वाने आढळते.<ref name="Gordon1959"/>
=== इ.स. १८४७ चा संयुक्त अहवाल आणि नियमपद्धती ===
बॉम्बे प्रांतातील महसूल सर्वेक्षणाच्या इतिहासात इ.स. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित प्रशासकीय दस्तऐवजांना विशेष स्थान आहे. महाराष्ट्र भूमी अभिलेख विभागाने प्रकाशित केलेल्या ''Measurement and Classification Rules of the Deccan, Gujarat, Konkan and Kanara Surveys: Selections from the Records of the Bombay Government Papers of the Joint Report of 1847'' या ग्रंथात त्या अहवालाशी संबंधित निवडक प्रशासकीय कागदपत्रे आणि नियम संकलित करण्यात आले आहेत.<ref name="LandRecords1975"/>
या ग्रंथातील दस्तऐवजी साहित्यामध्ये भूमापन, शेतसीमा, सर्वेक्षण क्रमांक, मोजणी, भूमिवर्गीकरण आणि संबंधित महसूल प्रशासनाशी निगडित संज्ञा व कार्यपद्धतींचा संदर्भ उपलब्ध आहे.<ref name="LandRecords1975"/>
त्यामुळे बॉम्बे प्रांतातील महसूल सर्वेक्षण आणि भूमिवर्गीकरणाच्या ऐतिहासिक पद्धतींचा अभ्यास करताना इ.स. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित हे दस्तऐवजी साहित्य महत्त्वाचे स्रोतसाहित्य ठरते.<ref name="LandRecords1975"/>
=== सर्वेक्षणपद्धतीचा विकास ===
बॉम्बे महसूल सर्वेक्षणाचा विकास हा प्रारंभीच्या विविध महसूल सर्वेक्षणांच्या प्रयत्नांपासून अधिक पद्धतशीर भूमापन, नकाशीकरण, भूमिवर्गीकरण आणि महसूल सेटलमेंटच्या प्रक्रियांकडे झालेल्या ऐतिहासिक विकासाचा भाग होता.<ref name="Michael2007"/><ref name="Gordon1959"/>
इंदापूरमधील अनुभव, भूमिवर्गीकरणाच्या कार्यपद्धतीसंबंधी प्रशासन अहवालातील नोंदी आणि इ.स. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित नियमसाहित्य यांच्या आधारे बॉम्बे प्रांतातील सर्वेक्षणपद्धतीच्या ऐतिहासिक विकासाचा अभ्यास करता येतो.<ref name="BombayReport1872-73"/><ref name="LandRecords1975"/><ref name="Gordon1959"/>
== १८४७ चा संयुक्त अहवाल ==
१८४७ चा संयुक्त अहवाल हा बॉम्बे प्रांतातील महसूल सर्वेक्षण आणि भूमिवर्गीकरणाच्या ऐतिहासिक विकासाशी संबंधित महत्त्वाचा दस्तऐवजी संदर्भ आहे. या अहवालाशी संबंधित बॉम्बे सरकारच्या निवडक अभिलेखांवर आधारित साहित्य पुढे ''Measurement and Classification Rules of the Deccan, Gujarat, Konkan and Kanara Surveys: Selections from the Records of the Bombay Government Papers of the Joint Report of 1847'' या शीर्षकाने प्रकाशित करण्यात आले.<ref name="MeasurementClassificationRules1975">{{cite book
|author=Maharashtra (India). Land Records Department
|title=Measurement and Classification Rules of the Deccan, Gujarat, Konkan and Kanara Surveys: Selections from the Records of the Bombay Government Papers of the Joint Report of 1847
|series=No. DXXXII, New Series
|location=Bombay
|publisher=Government Press
|year=1975
}}</ref>
R. G. Gordon यांच्या ''The Bombay Survey and Settlement Manual: Historical'' या ग्रंथात बॉम्बे सर्वेक्षण आणि सेटलमेंट व्यवस्थेच्या इतिहासातील नवीन पद्धतीचा प्रारंभ आणि तिचा प्रारंभीचा विकास यानंतरचा काळ ''After the Joint Report'' या स्वतंत्र ऐतिहासिक टप्प्याच्या स्वरूपात चर्चिला आहे.<ref name="Gordon1959"/>
त्यामुळे १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित दस्तऐवजी साहित्य आणि त्यानंतरच्या सर्वेक्षण व्यवस्थेचा विकास हे बॉम्बे प्रांतातील महसूल सर्वेक्षणाच्या इतिहासाच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचे संदर्भ ठरतात.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/><ref name="Gordon1959"/>
=== संयुक्त अहवालाचा ऐतिहासिक संदर्भ ===
बॉम्बे प्रांतात महसूल सर्वेक्षणाचा विस्तार होत असताना भूमापन, जमिनीचे वर्गीकरण आणि सर्वेक्षणाशी संबंधित प्रशासकीय कार्यपद्धती विकसित होत होत्या. या प्रक्रियेशी संबंधित नियम आणि दस्तऐवजांचा ऐतिहासिक संदर्भ १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित प्रकाशित संग्रहातून उपलब्ध होतो.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
Gordon यांनी बॉम्बे प्रांतातील सर्वेक्षण आणि सेटलमेंट व्यवस्थेच्या इतिहासाचा मागोवा घेताना नवीन सर्वेक्षणपद्धतीच्या प्रारंभिक विकासानंतरच्या काळालाही स्वतंत्र स्थान दिले आहे. त्यांच्या ग्रंथाच्या रचनेत संयुक्त अहवालानंतरचा काळ सर्वेक्षण व्यवस्थेच्या पुढील ऐतिहासिक विकासाच्या संदर्भात समाविष्ट करण्यात आला आहे.<ref name="Gordon1959"/>
औपनिवेशिक दक्षिण आशियातील महसूल सर्वेक्षणांच्या व्यापक इतिहासाच्या संदर्भात Bernardo A. Michael यांनी तपशीलवार महसूल सर्वेक्षणांमुळे प्रदेशांचे नकाशीकरण आणि मालमत्तेशी संबंधित प्रशासकीय माहितीचे अधिक पद्धतशीर अभिलेखन विकसित झाल्याचे विश्लेषण केले आहे.<ref name="Michael2007"/>
हा व्यापक संदर्भ बॉम्बे प्रांतातील महसूल सर्वेक्षणाच्या ऐतिहासिक प्रक्रियेचे आकलन करण्यासाठी उपयुक्त ठरतो; तथापि, बॉम्बे प्रांतातील विशिष्ट नियम आणि कार्यपद्धतींसाठी स्वतंत्र प्रशासकीय किंवा ऐतिहासिक स्रोत आवश्यक असतात.<ref name="Michael2007"/>
=== भूमापन आणि सर्वेक्षणाशी संबंधित नियम ===
१८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित प्रकाशित दस्तऐवजी संग्रहाच्या शीर्षकावरून दख्खन, गुजरात, कोकण आणि कानारा येथील सर्वेक्षणांशी संबंधित मोजमाप आणि जमिनीच्या वर्गीकरणाच्या नियमांचा ऐतिहासिक संदर्भ उपलब्ध होतो.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
या संग्रहात सर्वेक्षणाशी संबंधित मोजमाप, सीमांकन, भूखंडांची ओळख, सर्वेक्षणीय नोंदी आणि भूमिवर्गीकरण यांसारख्या विषयांशी संबंधित प्रशासकीय संज्ञा व नियमांचा संदर्भ आढळतो.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
महसूल सर्वेक्षणाच्या व्यापक प्रक्रियेत जमिनीचे मापन, तिची ओळख आणि नोंदणी हे परस्परसंबंधित घटक होते. सर्वेक्षणाच्या माध्यमातून भूभागाशी संबंधित माहिती अधिक पद्धतशीर स्वरूपात नोंदविण्याची प्रक्रिया विकसित झाली.<ref name="Michael2007"/>
=== क्षेत्रनिश्चिती आणि भूखंडांचे मोजमाप ===
महसूल सर्वेक्षणात जमिनीच्या क्षेत्रफळाचे मापन आणि भूभागाची ओळख निश्चित करणे या प्रशासकीय प्रक्रियेला महत्त्व प्राप्त झाले. मोजमापाच्या आधारे विशिष्ट भूभागाशी संबंधित सर्वेक्षणीय माहिती नोंदविण्यात येत असे.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
बॉम्बे प्रांतातील सर्वेक्षण आणि सेटलमेंट व्यवस्थेच्या ऐतिहासिक विकासात मोजणी, भूमिवर्गीकरण आणि महसूल सेटलमेंट यांचा परस्परसंबंध दिसून येतो.<ref name="Gordon1959"/>
औपनिवेशिक महसूल सर्वेक्षणांच्या व्यापक संदर्भात मोजमाप आणि नकाशीकरणाच्या प्रक्रियेमुळे प्रशासकीय भूभागाची माहिती अधिक स्पष्ट आणि दस्तऐवजी स्वरूपात उपलब्ध होऊ लागली.<ref name="Michael2007"/>
=== सीमा आणि भूखंडांची ओळख ===
जमिनीच्या सर्वेक्षणात भूभागाच्या सीमा आणि त्याची स्वतंत्र ओळख नोंदविण्याशी संबंधित कार्यपद्धतींना महत्त्व होते. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित प्रकाशित दस्तऐवजी संग्रहात सीमा, मोजमाप आणि सर्वेक्षणीय नोंदींशी संबंधित संज्ञा व नियमांचा संदर्भ उपलब्ध आहे.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
महसूल सर्वेक्षणांच्या व्यापक अभ्यासानुसार तपशीलवार सर्वेक्षण आणि नकाशीकरणामुळे प्रदेशांची अंतर्गत विभागणी आणि मालमत्तेशी संबंधित माहिती अधिक स्पष्टपणे नोंदविण्यास मदत झाली.<ref name="Michael2007"/>
=== जमिनीचे वर्गीकरण ===
महसूल सर्वेक्षणाच्या प्रक्रियेत जमिनीचे वर्गीकरण हा महत्त्वाचा घटक होता. दख्खन, गुजरात, कोकण आणि कानारा येथील सर्वेक्षणांशी संबंधित मोजमाप आणि वर्गीकरण नियमांचा ऐतिहासिक दस्तऐवजी संदर्भ १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित प्रकाशित संग्रहात उपलब्ध आहे.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
बॉम्बे सर्वेक्षण आणि सेटलमेंट व्यवस्थेच्या इतिहासात सर्वेक्षण, जमिनीचे वर्गीकरण आणि महसूल सेटलमेंट या परस्परसंबंधित प्रक्रियांचा विचार करण्यात आला आहे.<ref name="Gordon1959"/>
=== सर्वेक्षण क्रमांक आणि सर्वेक्षणीय नोंदी ===
महसूल सर्वेक्षणाच्या प्रक्रियेत भूभागाची स्वतंत्र ओळख, त्याचे मोजमाप आणि संबंधित नोंदी यांना महत्त्व प्राप्त झाले. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित प्रकाशित दस्तऐवजी साहित्यामध्ये सर्वेक्षण क्रमांक, भूखंड, मोजमाप आणि अभिलेखनाशी संबंधित संज्ञांचा संदर्भ उपलब्ध आहे.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
औपनिवेशिक काळातील महसूल सर्वेक्षणांच्या व्यापक अभ्यासातून सर्वेक्षणीय माहिती आणि नकाशीकरणाच्या माध्यमातून मालमत्तेशी संबंधित अधिक टिकाऊ प्रशासकीय अभिलेख विकसित झाल्याचे दिसून येते.<ref name="Michael2007"/>
=== अभिलेख आणि नकाशे ===
महसूल सर्वेक्षणातून निर्माण होणाऱ्या मोजमापाच्या नोंदी, क्षेत्रीय माहिती आणि नकाशे हे प्रशासकीय अभिलेखांच्या निर्मितीशी संबंधित होते. तपशीलवार सर्वेक्षण आणि नकाशीकरणामुळे भूभाग, प्रशासकीय विभाग आणि मालमत्तेशी संबंधित माहिती अधिक पद्धतशीर स्वरूपात नोंदविणे शक्य झाले.<ref name="Michael2007"/>
१८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित प्रकाशित निवडींमधून सर्वेक्षण, मोजमाप आणि भूमिवर्गीकरणाच्या ऐतिहासिक प्रशासकीय नियमांचा दस्तऐवजी संदर्भ उपलब्ध होतो.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
=== पुढील प्रशासकीय विकास ===
बॉम्बे प्रांतातील महसूल सर्वेक्षणाच्या ऐतिहासिक विकासानंतर महाराष्ट्रातील भूमापन आणि महसूल सर्वेक्षणासाठी स्वतंत्र वैधानिक व प्रशासकीय चौकट विकसित झाली. महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता, १९६६ मध्ये महसूल सर्वेक्षण, सर्वेक्षण क्रमांक, अभिलेख आणि सीमा यांच्याशी संबंधित तरतुदी समाविष्ट करण्यात आल्या आहेत.<ref name="MLRRules1969">{{cite web
|title=The Maharashtra Land Revenue (Revenue Surveys and Sub-Divisions of Survey Number) Rules, 1969
|website=Indian Kanoon
|url=https://indiankanoon.org/doc/81736757/
}}</ref>
त्यानंतरच्या ''The Maharashtra Land Revenue (Revenue Surveys and Sub-Divisions of Survey Number) Rules, 1969'' मध्ये जमिनीचे स्वतंत्र मोजमाप, वर्गीकरण, मूल्यांकन, सर्वेक्षण क्रमांक, मोजमापाच्या नोंदी आणि गावनकाशे यांसंबंधी नियमांची तरतूद करण्यात आली आहे.<ref name="MLRC1966">{{cite web
|title=The Maharashtra Land Revenue Code, 1966
|publisher=Law and Judiciary Department, Government of Maharashtra
|url=https://lj.maharashtra.gov.in/en/document/the-maharashtra-land-revenue-code-1966-text-as-on-2nd-april-2025/
|access-date=2026-09-16
}}</ref>
या आधुनिक वैधानिक चौकटीचा उल्लेख १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी थेट कायदेशीर किंवा संस्थात्मक सातत्य सिद्ध करण्यासाठी नव्हे, तर महाराष्ट्रातील भूमापन आणि महसूल सर्वेक्षणाच्या पुढील प्रशासकीय विकासाच्या संदर्भात करता येतो.<ref name="MLRC1966"/><ref name="MLRRules1969"/>
== भूमापन आणि भूवर्गीकरणाची पद्धत ==
महसूल सर्वेक्षणामध्ये भूमापन, भूखंडांची ओळख, सीमा, क्षेत्रफळाची नोंद आणि जमिनीचे वर्गीकरण या परस्परसंबंधित प्रक्रिया होत्या. बॉम्बे प्रांतातील महसूल सर्वेक्षणाच्या विकासाबरोबर या प्रक्रियांशी संबंधित नियम आणि प्रशासकीय कार्यपद्धती विकसित होत गेल्या. इ.स. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित बॉम्बे सरकारच्या अभिलेखांमधून निवडलेल्या दस्तऐवजांच्या संग्रहात दख्खन, गुजरात, कोकण आणि कानारा येथील सर्वेक्षणांशी संबंधित मोजमाप आणि जमिनीच्या वर्गीकरणाच्या नियमांचा ऐतिहासिक संदर्भ उपलब्ध आहे.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
औपनिवेशिक दक्षिण आशियातील महसूल सर्वेक्षणांच्या व्यापक इतिहासाचा अभ्यास करताना Bernardo A. Michael यांनी तपशीलवार महसूल सर्वेक्षण, नकाशीकरण आणि प्रशासकीय ज्ञाननिर्मिती यांतील संबंधाचे विश्लेषण केले आहे. त्यांच्या अभ्यासानुसार सर्वेक्षणांच्या माध्यमातून प्रदेश, अंतर्गत विभागणी आणि मालमत्तेशी संबंधित माहिती अधिक स्पष्टपणे अभिलेखित करण्यात आली.<ref name="Michael2007"/>
=== भूखंडांची ओळख आणि सर्वेक्षणीय नोंदी ===
महसूल सर्वेक्षणाच्या प्रक्रियेत जमिनीच्या क्षेत्राची ओळख, त्याचे मोजमाप आणि संबंधित माहितीची नोंद या परस्परसंबंधित प्रक्रिया होत्या. सर्वेक्षणाशी संबंधित नियमांमध्ये भूखंड, सीमा, मोजमाप आणि सर्वेक्षणीय नोंदी यांसारख्या विषयांचा संदर्भ आढळतो.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
तपशीलवार महसूल सर्वेक्षण आणि नकाशीकरणाच्या माध्यमातून भूभागाशी संबंधित प्रशासकीय माहिती अधिक पद्धतशीर स्वरूपात उपलब्ध होऊ लागली. या प्रक्रियेमुळे भूभागाची ओळख, प्रशासकीय विभागणी आणि मालमत्तेशी संबंधित अभिलेख यांमध्ये अधिक निकटचा संबंध निर्माण झाला.<ref name="Michael2007"/>
=== मोजमाप आणि क्षेत्रफळाची नोंद ===
भूमापन हा महसूल सर्वेक्षणातील मूलभूत घटक होता. जमिनीच्या क्षेत्रफळाशी संबंधित माहिती तयार करण्यासाठी प्रत्यक्ष क्षेत्रीय मोजणी आणि संबंधित नोंदींची प्रक्रिया वापरण्यात येत असे. मोजमाप, सीमा आणि सर्वेक्षणीय नोंदी यांचा संबंध महसूल सर्वेक्षणाच्या प्रशासकीय कार्याशी जोडलेला होता.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
बॉम्बे प्रांतातील सर्वेक्षण आणि सेटलमेंट व्यवस्थेच्या ऐतिहासिक विकासात मोजणी, भूमिवर्गीकरण आणि महसूल सेटलमेंट या परस्परसंबंधित प्रक्रियांचा विकास झाला.<ref name="Gordon1959"/>
महसूल सर्वेक्षणांच्या व्यापक इतिहासात तपशीलवार मोजमाप आणि नकाशीकरणामुळे प्रदेशांशी संबंधित प्रशासकीय माहितीचे अधिक पद्धतशीर अभिलेखन शक्य झाले.<ref name="Michael2007"/>
=== सर्वेक्षणाच्या कार्यपद्धतीतील सुसंगती ===
महसूल सर्वेक्षणाचा विस्तार होत असताना विविध प्रदेशांतील सर्वेक्षण आणि वर्गीकरणाच्या कार्यपद्धतींशी संबंधित अनुभवांच्या आधारे प्रशासकीय पद्धती विकसित होत गेल्या. इ.स. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित प्रकाशित दस्तऐवजी साहित्य या ऐतिहासिक प्रक्रियेच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचा संदर्भ प्रदान करते.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
इ.स. १८७२–७३ च्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या प्रशासन अहवालात सर्वेक्षण आणि भूमिवर्गीकरणाच्या कार्यपद्धतींमध्ये अनुभवाच्या आधारे करण्यात आलेल्या बदलांचा उल्लेख आहे. अहवालात विविध वर्गीकरण पथकांमध्ये मूल्यांकनाच्या निकषांमध्ये एकरूपता राखण्यासाठी विशेष काळजी घेण्यात येत असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.
=== भूवर्गीकरण ===
भूमापनाबरोबर जमिनीचे वर्गीकरण हा महसूल सर्वेक्षणातील एक महत्त्वाचा घटक होता. जमिनीच्या मोजमापाशी आणि तिच्या विविध वैशिष्ट्यांच्या परीक्षणाशी संबंधित माहितीच्या आधारे वर्गीकरणाची प्रक्रिया विकसित करण्यात आली. इ.स. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित प्रकाशित दस्तऐवजी संग्रहात दख्खन, गुजरात, कोकण आणि कानारा येथील मोजमाप आणि जमिनीच्या वर्गीकरणाशी संबंधित नियमांचा ऐतिहासिक संदर्भ उपलब्ध आहे.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
बॉम्बे सर्वेक्षण आणि सेटलमेंट व्यवस्थेच्या इतिहासात सर्वेक्षण, जमिनीचे वर्गीकरण आणि महसूल सेटलमेंट यांचा परस्परसंबंध आढळतो.<ref name="Gordon1959"/>
=== जमिनीच्या वैशिष्ट्यांचे परीक्षण ===
जमिनीच्या वर्गीकरणाच्या प्रक्रियेत प्रत्यक्ष क्षेत्रीय परीक्षणाला महत्त्व होते. इ.स. १८७२–७३ च्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या प्रशासन अहवालात वर्गीकरणाच्या कामात प्रत्येक शेताचे स्वतंत्रपणे परीक्षण करण्यात येत असल्याचा संदर्भ आढळतो.
अहवालात इंदापूर येथे Goldsmid आणि Lieutenant Wingate यांनी स्वीकारलेली वर्गीकरणाची पद्धत पुढील काळातही अनुभवाच्या आधारे मर्यादित बदलांसह सुरू ठेवण्यात आल्याचे नमूद आहे. विविध वर्गीकरण पथकांमध्ये मूल्यांकनाच्या निकषांची एकरूपता राखण्यासाठी प्रयत्न करण्यात येत होते आणि कामाच्या तपासणीसाठी वरिष्ठ अधिकाऱ्यांची भूमिका होती.
=== भूवर्गीकरण आणि महसूल मूल्यांकन ===
जमिनीचे वर्गीकरण आणि महसूल सेटलमेंट यांचा ऐतिहासिकदृष्ट्या निकटचा संबंध होता. भूमापनातून जमिनीच्या क्षेत्रफळाशी आणि ओळखीशी संबंधित माहिती उपलब्ध होत असताना, वर्गीकरणाच्या प्रक्रियेत जमिनीच्या संबंधित वैशिष्ट्यांचा विचार करण्यात येत असे. या प्रक्रियांशी संबंधित माहिती महसूल प्रशासनाच्या पुढील कार्यासाठी उपयोगी पडत असे.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/><ref name="Gordon1959"/>
इंदापूरमधील वर्गीकरणाच्या कार्यपद्धतीचा उल्लेख इ.स. १८७२–७३ च्या प्रशासन अहवालात आढळतो. Goldsmid आणि Lieutenant Wingate यांनी स्वीकारलेली पद्धत पुढील काळात अनुभवाच्या आधारे मर्यादित बदलांसह वापरात राहिल्याचे त्या अहवालात नमूद आहे.
=== अभिलेख आणि नकाशीकरण ===
महसूल सर्वेक्षणातून मोजमाप, भूभाग आणि प्रशासकीय विभागांशी संबंधित माहितीचे अभिलेखन करण्यात येत असे. तपशीलवार सर्वेक्षण आणि नकाशीकरणामुळे प्रदेशाची अंतर्गत रचना आणि मालमत्तेशी संबंधित माहिती अधिक स्पष्टपणे नोंदविण्याची प्रक्रिया विकसित झाली.<ref name="Michael2007"/>
बॉम्बे प्रांतातील सर्वेक्षणाशी संबंधित दस्तऐवजी परंपरेत मोजमाप, भूमिवर्गीकरण आणि सर्वेक्षणीय नोंदी यांसंबंधी नियम आणि प्रशासकीय कार्यपद्धतींचा संदर्भ उपलब्ध आहे. इ.स. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित प्रकाशित संग्रह या ऐतिहासिक दस्तऐवजी परंपरेच्या अभ्यासासाठी स्रोतसाहित्य प्रदान करतो.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
अशा प्रकारे बॉम्बे प्रांतातील महसूल सर्वेक्षणाच्या प्रक्रियेत भूमापन, भूखंडांची ओळख, मोजमाप, वर्गीकरण आणि अभिलेखन हे परस्परसंबंधित घटक होते. या प्रक्रियांचा विकास महसूल प्रशासन आणि सर्वेक्षण व्यवस्थेच्या व्यापक ऐतिहासिक परिवर्तनाशी संबंधित होता.<ref name="Gordon1959"/><ref name="Michael2007"/>
== मोजमापाची एकके ==
भारतातील भूमापनाच्या ऐतिहासिक पद्धतींमध्ये स्थानिक आणि प्रादेशिक मोजमाप एककांचा वापर होत असे. या एककांचे स्वरूप सर्व प्रदेशांत एकसारखे नव्हते. स्थानिक प्रथा, प्रशासकीय परंपरा आणि महसूल व्यवस्थेनुसार मोजमापाच्या एककांमध्ये फरक आढळत असे. महसूल सर्वेक्षणाच्या अधिक पद्धतशीर विकासाबरोबर मोजणीच्या कार्यपद्धती आणि एककांमध्ये प्रशासकीय सुसंगती आणण्याचे प्रयत्न करण्यात आले.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
भारतामध्ये विविध स्थानिक मापपद्धती प्रचलित असल्यामुळे त्यांच्या प्रमाणात प्रदेशानुसार फरक होता. विसाव्या शतकाच्या प्रारंभी भारतातील वजन आणि मापपद्धतींचा विचार करताना विविध स्थानिक मापपद्धतींच्या अस्तित्वाची नोंद करण्यात आली होती.<ref name="Silberrad1922">{{cite journal
|last=Silberrad
|first=C. A.
|title=The Weights and Measures of India
|journal=Nature
|volume=110
|date=2 September 1922
|pages=325–329
|url=https://www.nature.com/articles/110325a0
|access-date=2026-09-01
}}</ref>
=== पारंपरिक आणि प्रादेशिक मोजमाप पद्धती ===
पारंपरिक भूमापन पद्धतींमध्ये स्थानिक पातळीवर रूढ असलेल्या विविध एककांचा वापर होत असे. जमिनीच्या मोजमापाशी संबंधित एककांमध्ये प्रदेशानुसार फरक असल्यामुळे समान नावाच्या एककाचे प्रमाणही सर्व भागांत एकसारखे असेलच असे नव्हते. भारतातील ऐतिहासिक वजन आणि मापपद्धतींच्या अभ्यासातून स्थानिक आणि प्रादेशिक विविधतेचे स्वरूप दिसून येते.<ref name="Silberrad1922"/>
महसूल सर्वेक्षणाच्या पद्धती विकसित होत असताना स्थानिक मोजमाप पद्धतींबरोबर अधिक प्रमाणित सर्वेक्षणीय एककांचा वापर वाढला. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित नियमांच्या संकलनात दख्खन, गुजरात, कोकण आणि कानारा येथील महसूल सर्वेक्षणासाठी वापरल्या जाणाऱ्या मोजमाप आणि भूवर्गीकरणाच्या कार्यपद्धतींचा दस्तऐवजी आधार उपलब्ध आहे.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
=== स्थानिक मोजमाप एकके आणि प्रादेशिक फरक ===
भारतातील पारंपरिक भूमापन पद्धतींमध्ये स्थानिक एककांची विविधता हा महत्त्वाचा घटक होता. वेगवेगळ्या प्रदेशांमध्ये जमीन मोजण्यासाठी भिन्न एकके वापरली जात असल्याने महसूल आणि भूमिअभिलेख व्यवस्थेत मोजमापाचे प्रमाण स्पष्टपणे निश्चित करणे आवश्यक ठरले.<ref name="Silberrad1922"/>
महाराष्ट्रातील भूमापनाच्या ऐतिहासिक संदर्भात महाराष्ट्र शासनाच्या भूमिअभिलेख विभागाने महसूली मोजणीसाठी वापरल्या गेलेल्या विविध एककांची माहिती दिली आहे. विभागाच्या माहितीनुसार, जुन्या मुंबई इलाख्यातील तसेच मराठवाडा आणि विदर्भातील महसूली मोजणीच्या पद्धतींमध्ये क्षेत्रफळ नोंदविण्यासाठी एकर आणि त्याच्या उपविभागांचा वापर करण्यात आला होता.<ref name="MaharashtraLandRecordsMeasurement">{{cite web
|title=भूमापन
|website=भूमि अभिलेख विभाग, महाराष्ट्र शासन
|publisher=Government of Maharashtra
|url=https://www.bhumiabhilekh.maharashtra.gov.in/Pages/AboutUsDetail?pageId=58
|language=mr
|access-date=2026-09-16
}}</ref>
=== मोजमापाचे प्रशासकीय मानकीकरण ===
महसूल सर्वेक्षणाच्या विस्ताराबरोबर भूमापनाची प्रक्रिया अधिक प्रमाणित करण्याची आवश्यकता निर्माण झाली. मोजणीची एकके, सर्वेक्षणाच्या कार्यपद्धती आणि क्षेत्रफळ नोंदविण्याच्या पद्धती यांमध्ये प्रशासकीय सुसंगती आणण्याच्या प्रक्रियेला महसूल सर्वेक्षणाच्या विकासात महत्त्व प्राप्त झाले.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
महाराष्ट्रातील भूमापनाच्या इतिहासाविषयी भूमिअभिलेख विभागाने दिलेल्या माहितीनुसार महसूली मोजणीमध्ये विशिष्ट लांबीच्या साखळीचा वापर करण्यात येत असे. जुन्या मुंबई इलाख्यातील तसेच मराठवाडा आणि विदर्भातील अनेक भागांत क्षेत्रफळाच्या मोजणीसाठी एकर आणि गुंठा ही एकके प्रचलित होती. पुढे दशमान पद्धतीच्या वापरामुळे शेतजमिनीचे क्षेत्र हेक्टर आणि आर या एककांमध्ये नोंदविले जाऊ लागले.<ref name="MaharashtraLandRecordsMeasurement"/>
=== गुंठा ===
गुंठा हे महाराष्ट्रातील महसूली भूमापनाच्या संदर्भात वापरले जाणारे क्षेत्रफळाचे एकक आहे. महाराष्ट्र भूमिअभिलेख विभागाच्या माहितीनुसार, जुन्या मुंबई इलाख्यातील, मराठवाड्यातील आणि विदर्भातील महसूली मोजणीमध्ये एक एकराचे ४० गुंठ्यांमध्ये विभाजन करण्यात आले असून, एक गुंठा हा एका चौरस साखळीच्या बरोबरीचा मानला जातो. त्याचे क्षेत्रफळ १,०८९ चौरस फूट आहे.<ref name="MaharashtraLandRecordsMeasurement"/>
बॉम्बे प्रांतातील मोजमाप पद्धतीशी संबंधित कायदेशीर नोंदींमध्येही गुंठ्याचा क्षेत्रफळाच्या एकक म्हणून उल्लेख आढळतो. ''The Bombay Weights and Measures Act, 1932'' मध्ये गुंठा हा १२१ चौरस यार्ड क्षेत्रफळाचा एकक म्हणून नमूद करण्यात आला होता. त्याच संदर्भात एक एकर ४,८४० चौरस यार्ड इतका असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="BombayWeightsMeasures1932">{{cite web |title=The Bombay Weights and Measures Act, 1932 |website=Indian Kanoon |url=https://indiankanoon.org/doc/140283567/ |access-date=2026-09-01}}</ref>
महसूल सर्वेक्षणाशी संबंधित ऐतिहासिक प्रकाशनांमध्येही ''gunthas'' हा शब्द क्षेत्रफळाच्या मोजणीशी संबंधित एकक म्हणून आढळतो. त्यामुळे गुंठ्याचा वापर महसूली भूमापनाच्या ऐतिहासिक पद्धतीशी संबंधित असल्याचे दिसून येते.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
तथापि, ''गुंठा'', ''gunta'' किंवा ''guntha'' या शब्दाच्या व्युत्पत्तीबाबत उपलब्ध स्रोतांच्या आधारे निश्चित निष्कर्ष काढणे शक्य नाही. स्वतंत्र आणि विश्वसनीय भाषिक किंवा ऐतिहासिक स्रोतांशिवाय या शब्दाची उत्पत्ती, त्याचा निश्चित कालखंड किंवा एखाद्या विशिष्ट मोजणीच्या उपकरणाशी त्याचा संबंध निश्चितपणे सांगता येत नाही. त्यामुळे या लेखात गुंठा या शब्दाच्या व्युत्पत्तीबाबत कोणताही निश्चित दावा करण्यात आलेला नाही.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
=== आधुनिक मोजमाप पद्धतीकडे संक्रमण ===
महाराष्ट्रातील भूमिअभिलेख व्यवस्थेत ऐतिहासिक महसूली मोजणीसाठी एकर आणि गुंठा यांसारख्या एककांचा वापर होत असताना पुढे दशमान पद्धतीच्या अंमलबजावणीमुळे क्षेत्रफळाच्या नोंदीत हेक्टर आणि आर या एककांचा वापर वाढला. भूमिअभिलेख विभागाच्या माहितीनुसार शेतजमिनीचे क्षेत्र प्रचलित पद्धतीनुसार हेक्टर आणि आरमध्ये नोंदविले जाते, तर अकृषिक जमिनीचे क्षेत्र चौरस मीटरमध्ये दर्शविले जाते.<ref name="MaharashtraLandRecordsMeasurement"/><ref name="MaharashtraLandRecordsUnit">{{cite web
|title=गाव नमुना सातवर नमूद ‘क्षेत्र, एकक व आकारणी’ म्हणजे काय?
|website=महाराष्ट्र भूमी अभिलेख विभाग
|publisher=Government of Maharashtra
|url=https://bhumiabhilekh.maharashtra.gov.in/
|language=mr
|access-date=2026-09-16
}}</ref>
अशा प्रकारे महाराष्ट्रातील भूमापनाच्या एककांचा इतिहास हा स्थानिक आणि प्रादेशिक मापपद्धतींपासून अधिक प्रमाणित महसूली सर्वेक्षणीय पद्धतीकडे, आणि पुढे दशमान पद्धतीवर आधारित आधुनिक मोजमाप व्यवस्थेकडे झालेल्या संक्रमणाशी संबंधित आहे.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/><ref name="MaharashtraLandRecordsMeasurement"/>
== नकाशे आणि भूमिअभिलेख ==
भूमापन आणि महसूल सर्वेक्षणाच्या प्रक्रियेत नकाशे, सीमा निश्चिती आणि अभिलेखीय नोंदी यांना महत्त्वाचे स्थान प्राप्त झाले. महसूल सर्वेक्षणाचा उद्देश केवळ जमिनीचे क्षेत्रफळ निश्चित करणे इतकाच मर्यादित नव्हता. भूखंडांची ओळख, त्यांचे स्थान आणि सीमा, क्षेत्रफळ, जमिनीचे वर्गीकरण आणि महसूल प्रशासनासाठी आवश्यक माहिती यांची नोंद करणे हाही या प्रक्रियेचा महत्त्वाचा भाग होता.<ref name="Michael2007"/>
१८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित निवडक नियमांच्या प्रकाशित संकलनातून दख्खन, गुजरात, कोकण आणि कानारा येथील महसूल सर्वेक्षणात मोजमाप आणि जमिनीच्या वर्गीकरणाशी संबंधित कार्यपद्धतींचा दस्तऐवजी आधार उपलब्ध होतो.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
=== गाव नकाशा ===
महसूल सर्वेक्षणाच्या प्रक्रियेत स्थानिक भूभागाचे सर्वेक्षण करून त्याचे नकाशात्मक प्रतिनिधित्व तयार करण्यात आले. अशा नकाशांमुळे भूखंडांचे स्थान, त्यांचे परस्पर संबंध आणि सीमांशी संबंधित माहिती दृश्य स्वरूपात नोंदविणे शक्य झाले. औपनिवेशिक दक्षिण आशियातील महसूल सर्वेक्षणांचा अभ्यास करताना सर्वेक्षण, नकाशांकन आणि प्रशासकीय ज्ञाननिर्मिती यांच्यातील संबंध महत्त्वाचा असल्याचे दिसून येते.<ref name="Michael2007"/>
तपशीलवार महसूल सर्वेक्षणांमुळे प्रदेश आणि त्यातील भूखंडांशी संबंधित माहिती अधिक पद्धतशीर स्वरूपात अभिलेखित करण्यात आली. नकाशे आणि संबंधित सर्वेक्षणीय नोंदी यांमधून भूभागाची प्रशासकीय ओळख अधिक स्पष्ट करण्यास मदत झाली.<ref name="Michael2007"/>
=== सीमा निश्चिती ===
भूमापन प्रक्रियेत जमिनीच्या सीमा निश्चित करणे हा महत्त्वाचा घटक होता. भूखंडांची स्वतंत्र ओळख निर्माण करणे, त्यांचे क्षेत्रफळ निश्चित करणे आणि संबंधित प्रशासकीय नोंदी तयार करणे यासाठी सीमांशी संबंधित माहिती आवश्यक होती.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
१८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित प्रकाशित नियमसंग्रहात मोजमाप आणि जमिनीच्या वर्गीकरणाशी संबंधित विविध नियम व कार्यपद्धतींचा दस्तऐवजी आधार उपलब्ध आहे. त्यामुळे महसूल सर्वेक्षणातील मोजणी, भूखंडांची ओळख आणि प्रशासकीय नोंदी यांच्यातील संबंध समजून घेण्यासाठी हा स्रोत महत्त्वाचा ठरतो.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
तथापि, प्रत्येक कालखंडात किंवा सर्व प्रदेशांत एकसारखी सर्वेक्षणपद्धती वापरली गेली होती, असा व्यापक निष्कर्ष स्वतंत्र तुलनात्मक ऐतिहासिक स्रोतांशिवाय काढता येत नाही.
=== भूमिअभिलेखांची निर्मिती ===
महसूल सर्वेक्षणाच्या प्रक्रियेत भूखंडांची ओळख, त्यांचे मोजमाप आणि नकाशात्मक नोंद यांमधून भूमिअभिलेखीय माहितीच्या निर्मितीला आधार मिळाला. सर्वेक्षणीय एकके, क्षेत्रफळाशी संबंधित नोंदी आणि नकाशे यांमुळे जमिनीच्या प्रशासकीय व्यवस्थापनासाठी अधिक संरचित माहिती उपलब्ध होऊ लागली.<ref name="Michael2007"/><ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
औपनिवेशिक दक्षिण आशियातील महसूल सर्वेक्षणांच्या अभ्यासातून सर्वेक्षण ही प्रक्रिया केवळ तांत्रिक मोजणीपुरती मर्यादित नसून भूभाग, मालमत्ता आणि प्रशासकीय माहिती यांना अधिक स्पष्ट स्वरूप देणाऱ्या प्रक्रियेशी संबंधित असल्याचे दिसून येते.<ref name="Michael2007"/>
बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील महसूल प्रशासनाच्या इतिहासाचा अभ्यास करणाऱ्या संशोधनात महसूल व्यवस्था आणि प्रत्यक्ष प्रशासकीय कार्यपद्धती यांच्यातील संबंधांवर भर देण्यात आला आहे. त्यामुळे भूमीशी संबंधित अभिलेखांची निर्मिती आणि वापर यांचा अभ्यास व्यापक महसूल प्रशासनाच्या संदर्भात करणे आवश्यक ठरते.<ref name="Rabitoy1975"/><ref name="Kaiwar1994"/>
=== नकाशे, नोंदी आणि महसूल प्रशासन ===
नकाशे, सीमा निश्चिती आणि अभिलेखीय नोंदी हे महसूल सर्वेक्षणातील परस्परपूरक घटक होते. भूमापनातून प्राप्त झालेली माहिती नकाशे आणि विविध सर्वेक्षणीय नोंदींमध्ये समाविष्ट करण्यात येत असल्याने भूखंडांशी संबंधित माहिती अधिक संघटित स्वरूपात उपलब्ध झाली.<ref name="Michael2007"/><ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
या प्रक्रियेमुळे भूभागाची ओळख, त्याचे क्षेत्रफळ, स्थान आणि प्रशासकीय नोंदी यांच्यात अधिक निकटचा संबंध निर्माण झाला. त्यामुळे नकाशे आणि भूमिअभिलेख हे केवळ सर्वेक्षणाचे तांत्रिक परिणाम न राहता महसूल प्रशासनाच्या व्यापक अभिलेखीय रचनेचा भाग बनले.<ref name="Michael2007"/><ref name="Rabitoy1975"/>
अशा प्रकारे भूमापन, नकाशांकन आणि अभिलेखन या परस्परसंबंधित प्रक्रियांमधून जमिनीशी संबंधित माहितीचे अधिक पद्धतशीर आणि प्रशासकीयदृष्ट्या उपयोगी स्वरूप विकसित झाले. बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील महसूल सर्वेक्षणाच्या व्यापक इतिहासात या प्रक्रियेला भूमी, महसूल आणि प्रशासकीय ज्ञान यांच्या संबंधातील महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त झाले.<ref name="Michael2007"/><ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
== कायदे आणि संस्थात्मक विकास ==
महाराष्ट्रातील भूमापन, महसूल सर्वेक्षण आणि भूमिअभिलेख व्यवस्थेचा विकास हा केवळ प्रशासकीय कार्यपद्धतींमधील बदलांपुरता मर्यादित राहिला नाही. कालांतराने सर्वेक्षण, जमीन महसूल, भूमीवरील हक्क आणि अभिलेख यांच्या व्यवस्थापनाशी संबंधित कार्यांना कायदेशीर आणि संस्थात्मक चौकट प्राप्त झाली. त्यामुळे महसूल प्रशासनाच्या ऐतिहासिक विकासाचा विचार करताना सर्वेक्षण पद्धती आणि तिची वैधानिक व संस्थात्मक रचना यांचा परस्परसंबंध महत्त्वाचा ठरतो.<ref name="MLRC1966"/>
=== बॉम्बे काळातील कायदेशीर चौकट ===
ब्रिटिश काळातील बॉम्बे प्रेसिडेन्सीमध्ये महसूल प्रशासन आणि जमीन महसूल व्यवस्थेचा विकास विविध कायदे, नियम, प्रशासकीय सूचना आणि सर्वेक्षणाशी संबंधित कार्यपद्धती यांच्या आधारे झाला. या व्यवस्थेच्या ऐतिहासिक विकासाचा अभ्यास करताना प्रशासकीय अहवाल, महसूल सर्वेक्षणाशी संबंधित नियमसंग्रह आणि संबंधित कायदे यांचा एकत्रित विचार आवश्यक ठरतो.
बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील महसूल सर्वेक्षणाच्या विस्ताराबरोबर सर्वेक्षण, जमिनीचे वर्गीकरण, महसूल निर्धारण आणि अभिलेखीय नोंदी यांसंबंधीच्या कार्यपद्धती अधिक संस्थात्मक स्वरूपात विकसित होत गेल्या. तथापि, विविध कालखंडांतील कायदे आणि प्रशासकीय तरतुदींचा परिणाम सर्व प्रदेशांत किंवा सर्व परिस्थितींमध्ये समान होता, असा व्यापक निष्कर्ष स्वतंत्र कायदे आणि प्रशासकीय दस्तऐवजांच्या तुलनात्मक अभ्यासाशिवाय काढता येत नाही.
=== Bombay Land Revenue Code, 1879 ===
''Bombay Land Revenue Code, 1879'' हा बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील जमीन आणि जमीन महसूल व्यवस्थेच्या कायदेशीर चौकटीच्या ऐतिहासिक विकासातील एक महत्त्वपूर्ण टप्पा होता. या संहितेमुळे महसूल प्रशासनाशी संबंधित विविध विषयांना अधिक औपचारिक वैधानिक चौकट प्राप्त झाली.
महसूल प्रशासनाच्या संदर्भात सर्वेक्षण, जमिनीशी संबंधित प्रशासकीय कार्यवाही, महसूल आकारणी आणि अभिलेखीय नोंदी या विषयांचा कायदेशीर व प्रशासकीय व्यवस्थेशी संबंध निर्माण झाला. त्यामुळे पूर्वी विकसित झालेल्या महसूल सर्वेक्षणाच्या पद्धतींचा विचार पुढील संस्थात्मक आणि वैधानिक विकासाच्या संदर्भात करणे आवश्यक ठरते.
या ऐतिहासिक कालखंडाशी संबंधित विशिष्ट कायदेशीर तरतुदी किंवा त्यांच्या परिणामांबाबतचे तपशील मूळ अधिनियम किंवा अन्य विश्वसनीय प्राथमिक स्रोतांच्या आधारे निश्चित करणे आवश्यक आहे. त्यामुळे संबंधित प्राथमिक कायदेपुस्तकाची स्वतंत्र पडताळणी झाल्यानंतरच विशिष्ट कलमांचा सविस्तर उल्लेख करणे उचित ठरते.
=== महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता, १९६६ ===
महाराष्ट्र राज्यातील जमीन आणि जमीन महसूलासंबंधी कायद्यांचे एकीकरण आणि सुधारणा करण्याच्या उद्देशाने ''महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता, १९६६'' लागू करण्यात आली. संहितेच्या दीर्घ शीर्षकानुसार तिचा उद्देश महाराष्ट्र राज्यातील जमीन आणि जमीन महसूलासंबंधी कायद्यांचे एकीकरण व सुधारणा करणे हा आहे.<ref name="MLRC1966"/>
संहितेमध्ये महसूल प्रशासन, महसूल सर्वेक्षण आणि जमिनीशी संबंधित अभिलेखीय व्यवस्थेला कायदेशीर चौकट प्रदान करण्यात आली आहे. महसूल सर्वेक्षण, जमिनीचे मोजमाप आणि वर्गीकरण तसेच सर्वेक्षणाशी संबंधित अभिलेखांच्या निर्मिती आणि व्यवस्थापनाशी संबंधित तरतुदी आधुनिक महसूल प्रशासनाचा भाग आहेत.<ref name="MLRCIndiaCode">{{cite web
|title=The Maharashtra Land Revenue Code, 1966
|website=India Code
|publisher=Government of India
|url=https://www.indiacode.nic.in/handle/123456789/15974
|access-date=2026-09-01
}}</ref>
संहितेअंतर्गत सर्वेक्षण क्रमांक आणि त्यांच्या उपविभागांशी संबंधित अभिलेखीय नोंदींचीही तरतूद करण्यात आली आहे. त्यामुळे भूमापन, सर्वेक्षणीय ओळख, जमिनीचे विभाजन आणि संबंधित अभिलेख यांना आधुनिक महसूल प्रशासनाच्या वैधानिक चौकटीत स्थान प्राप्त झाले.<ref name="MLRC1966"/>
=== भूमापन, सर्वेक्षण आणि अभिलेख ===
महाराष्ट्र जमीन महसूल संहितेअंतर्गत महसूल सर्वेक्षणाची प्रक्रिया भूमापन आणि भूमिअभिलेख व्यवस्थेशी निकटपणे संबंधित आहे. महसूल सर्वेक्षण, जमिनीचे मोजमाप आणि वर्गीकरण, सर्वेक्षण क्रमांक आणि संबंधित अभिलेख यांसाठी कायदेशीर व प्रशासकीय चौकट उपलब्ध आहे.<ref name="MLRCIndiaCode"/>
महाराष्ट्राच्या भूमिअभिलेख विभागाच्या संस्थात्मक कार्यामध्ये भूमापन, महसूल सर्वेक्षण आणि संबंधित अभिलेखीय व्यवस्थेचे महत्त्वपूर्ण स्थान आहे. विभागाच्या कार्याशी संबंधित कायदे आणि नियमांच्या चौकटीत भूमापन आणि जमिनीशी संबंधित अभिलेखांचे प्रशासन केले जाते.<ref name="MLRCIndiaCode">{{cite web
|title=The Maharashtra Land Revenue Code, 1966
|website=India Code
|publisher=Government of India
|url=https://www.indiacode.nic.in/handle/123456789/15974
|access-date=2026-09-01
}}</ref><ref name="MaharashtraLandRecordsActs">{{cite web
|title=अधिनियम
|website=भूमि अभिलेख विभाग, महाराष्ट्र शासन
|publisher=Government of Maharashtra
|url=https://bhumiabhilekh.maharashtra.gov.in/ActsAndRules/acts_list_view
|language=mr
|access-date=2026-09-01
}}</ref>
अशा प्रकारे ब्रिटिशकालीन महसूल प्रशासनातील सर्वेक्षण पद्धतींपासून पुढे कायदेशीर संहिताकरण आणि आधुनिक राज्यस्तरीय महसूल प्रशासनापर्यंत झालेला विकास हा भूमापन, महसूल सर्वेक्षण आणि भूमिअभिलेख यांच्या संस्थात्मक परिवर्तनाचा महत्त्वपूर्ण भाग ठरला.<ref name="MLRC1966"/>
== आधुनिक भूमिअभिलेख व्यवस्था ==
=== महाराष्ट्रातील भूमिअभिलेख ===
महाराष्ट्रातील आधुनिक भूमिअभिलेख व्यवस्थेची कायदेशीर चौकट प्रामुख्याने ''महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता, १९६६'' आणि त्याअंतर्गत विकसित झालेल्या महसूल सर्वेक्षण व अभिलेखीय व्यवस्थेशी संबंधित आहे.<ref name="MLRC1966"/>
महाराष्ट्र जमीन महसूल संहितेत महसूल सर्वेक्षण, सर्वेक्षण क्रमांक व त्यांचे उपविभाग तसेच जमिनीशी संबंधित महसूल अभिलेखांच्या व्यवस्थापनासाठी तरतुदी करण्यात आल्या आहेत. महसूल सर्वेक्षण, जमिनीचे मोजमाप व वर्गीकरण आणि सर्वेक्षणीय अभिलेखांच्या निर्मितीशी संबंधित प्रक्रिया आधुनिक महसूल प्रशासनाच्या कायदेशीर चौकटीचा भाग आहेत.<ref name="MLRC1966"/>
जमिनीशी संबंधित हक्कांच्या नोंदी आणि इतर महसूल अभिलेखांच्या देखभालीसंबंधीही कायदेशीर व प्रशासकीय तरतुदी अस्तित्वात आहेत. त्यामुळे भूमापन, महसूल सर्वेक्षण आणि जमिनीशी संबंधित अभिलेखीय नोंदी हे आधुनिक महसूल प्रशासनातील परस्परसंबंधित घटक आहेत.<ref name="MLRC1966"/>
महाराष्ट्राच्या भूमी अभिलेख विभागाच्या संस्थात्मक कार्यामध्ये भूमापन आणि संबंधित अभिलेखीय व्यवस्थेचे महत्त्वपूर्ण स्थान आहे. विभागाच्या कार्याशी संबंधित कायदे व नियमांच्या चौकटीत भूमापन, सर्वेक्षण आणि जमिनीशी संबंधित अभिलेखांचे प्रशासन केले जाते.<ref name="MaharashtraLandRecordsDepartment">{{cite web
|title=भूमि अभिलेख विभाग
|website=भूमि अभिलेख – महाराष्ट्र भूमी अभिलेख विभाग
|publisher=Government of Maharashtra
|url=https://bhumiabhilekh.maharashtra.gov.in/
|language=mr
|access-date=2026-09-01
}}</ref>
=== भूमिअभिलेखांचे आधुनिकीकरण ===
भूमिअभिलेखांचे आधुनिकीकरण ही केवळ कागदी अभिलेखांचे डिजिटल स्वरूपात रूपांतर करण्यापुरती मर्यादित प्रक्रिया नसून अभिलेखांची अचूकता, अद्ययावतपणा, माहितीचे व्यवस्थापन आणि विविध प्रशासकीय प्रक्रियांशी त्यांचा संबंध या व्यापक प्रश्नांशी संबंधित आहे.
आर. रामकुमार आणि पद्मिनी रमेश यांनी दक्षिण भारतातील भूमिअभिलेख आधुनिकीकरणाच्या कार्यक्रमाचा अभ्यास करताना अभिलेखांचे अद्ययावतीकरण आणि डिजिटलकरणासमोरील ऐतिहासिक, सामाजिक व प्रशासकीय गुंतागुंतींकडे लक्ष वेधले आहे.<ref name="RamakumarRamesh2023"/>
या अभ्यासात तेलंगणातील भूमिअभिलेखांचे अद्ययावतीकरण आणि डिजिटलकरणाशी संबंधित उपक्रमाचा विचार करण्यात आला आहे. त्यामुळे या अभ्यासातील निष्कर्ष महाराष्ट्रातील भूमिअभिलेख व्यवस्थेला थेट लागू केल्याचे मानता येत नाही. तथापि, भूमिअभिलेख आधुनिकीकरणाच्या प्रक्रियेत ऐतिहासिक त्रुटी, अभिलेखीय विसंगती, प्रशासकीय प्रक्रिया आणि विविध सामाजिक घटकांचा विचार आवश्यक असल्याचा व्यापक अभ्यासात्मक संदर्भ या संशोधनातून उपलब्ध होतो.<ref name="RamakumarRamesh2023"/>
भारतात भूमिअभिलेखांचे आधुनिकीकरण आणि डिजिटलकरण ही व्यापक शासकीय धोरणात्मक प्रक्रिया म्हणूनही विकसित झाली आहे. भूमिअभिलेखांचे आधुनिकीकरण, डिजिटल अभिलेखांची निर्मिती आणि विविध स्तरांवरील भूमीविषयक माहितीच्या व्यवस्थापनाशी संबंधित उपक्रम केंद्र व राज्य स्तरांवर राबविण्यात आले आहेत.<ref name="DILRMP"/>
महाराष्ट्रातील आधुनिक भूमिअभिलेख व्यवस्थेचा विचार करताना ऐतिहासिक महसूल सर्वेक्षणाची परंपरा, महाराष्ट्र जमीन महसूल संहितेची वैधानिक चौकट आणि आधुनिक अभिलेखीय व डिजिटल व्यवस्थेतील बदल यांचा परस्परसंबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="MLRC1966"/>
== परिणाम आणि ऐतिहासिक महत्त्व ==
महाराष्ट्रासह पूर्वीच्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील महसूल सर्वेक्षण आणि भूमिअभिलेख व्यवस्थेच्या विकासामुळे जमीन, महसूल आणि प्रशासकीय नियंत्रण यांच्यातील संबंध अधिक संरचित स्वरूपात विकसित झाले. या प्रक्रियेचा संबंध केवळ महसूल आकारणीशी मर्यादित नव्हता; तर जमीनमालमत्तेची संकल्पना, अभिलेखीय नोंदी, नकाशाधारित प्रशासन आणि कृषी समाजाशी राज्याचे संबंध यांच्याशीही होता.<ref name="Kaiwar1994"/><ref name="Michael2007"/>
=== महसूल प्रशासनाचे मानकीकरण ===
महसूल सर्वेक्षणाच्या प्रक्रियेमुळे जमिनीशी संबंधित प्रशासकीय माहिती अधिक पद्धतशीर स्वरूपात संकलित करण्याच्या पद्धती विकसित झाल्या. भूखंडांची ओळख, मोजमाप, वर्गीकरण आणि महसूल निर्धारणाशी संबंधित प्रक्रिया परस्पर जोडल्या गेल्याने महसूल प्रशासनाची कार्यपद्धती अधिक संरचित झाली.<ref name="Michael2007"/>
तथापि, मानकीकरणाची प्रक्रिया सर्व प्रदेशांत आणि सर्व सामाजिक गटांमध्ये समान प्रकारे कार्यरत होती, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. महसूल प्रशासनाच्या प्रत्यक्ष कार्यपद्धतीवर स्थानिक परिस्थिती, कृषी संबंध आणि प्रशासकीय धोरणांचा प्रभाव कायम राहिला.<ref name="Kaiwar1994"/>
आधुनिक भूमिअभिलेख आधुनिकीकरणाच्या अभ्यासांमधूनही औपचारिकरीत्या प्रमाणित करण्यात आलेल्या अभिलेखीय व्यवस्थेची प्रत्यक्ष अंमलबजावणी ऐतिहासिक नोंदी, प्रशासकीय प्रक्रिया आणि सामाजिक परिस्थिती यांसारख्या विविध घटकांवर अवलंबून असल्याचे दिसून येते. हा निष्कर्ष महाराष्ट्राच्या संदर्भातील थेट पुरावा म्हणून नव्हे, तर भूमिअभिलेख आधुनिकीकरणाच्या व्यापक अभ्यासात्मक संदर्भात विचारात घेतला जातो.<ref name="RamakumarRamesh2023"/>
=== भूमिअभिलेखांची निर्मिती ===
महसूल सर्वेक्षणातून भूखंडांशी संबंधित मोजमाप, क्षेत्रफळ आणि इतर प्रशासकीय माहितीची नोंद करण्यासाठी अधिक संघटित अभिलेखीय व्यवस्था विकसित झाली. सर्वेक्षण आणि अभिलेख यांतील संबंधामुळे जमीनविषयक माहितीचे प्रशासकीय व्यवस्थापन अधिक पद्धतशीर स्वरूपात करता आले.<ref name="Michael2007"/>
भूमिअभिलेख हे केवळ तांत्रिक माहितीचे संकलन न राहता प्रशासकीय प्रक्रियेचा महत्त्वपूर्ण भाग बनले. आधुनिक भूमिअभिलेख व्यवस्थेच्या अभ्यासातून अभिलेखांची निर्मिती, त्यांचे अद्ययावतीकरण आणि त्यांचा प्रशासकीय वापर या प्रक्रियांमधील ऐतिहासिक आणि संस्थात्मक गुंतागुंत अधोरेखित होते.<ref name="RamakumarRamesh2023"/>
=== नकाशाधारित प्रशासन ===
महसूल सर्वेक्षणाच्या विस्ताराबरोबर भूभागाचे नकाशात्मक प्रतिनिधित्व प्रशासनासाठी महत्त्वाचे ठरले. सर्वेक्षण आणि नकाशांकनाच्या माध्यमातून प्रदेश, गाव आणि भूखंड यांच्याशी संबंधित माहिती दृश्य आणि अभिलेखीय स्वरूपात संघटित करण्यात आली.<ref name="Michael2007"/>
या प्रक्रियेमुळे भूभागाचे प्रशासकीय आकलन अधिक मोजमापाधारित आणि नोंदाधारित स्वरूपात विकसित झाले. त्यामुळे नकाशे हे केवळ भौगोलिक प्रतिनिधित्वाचे साधन न राहता महसूल आणि प्रशासकीय व्यवस्थेशी संबंधित दस्तऐवज म्हणूनही महत्त्वाचे ठरले.<ref name="Michael2007"/>
=== जमीन आणि राज्यसत्ता यांचा संबंध ===
जमीन आणि राज्य यांच्यातील संबंध महसूल प्रशासनाच्या विकासाबरोबर बदलत गेले. वसाहतकालीन प्रशासनाच्या व्यापक संदर्भात जमीन, कृषी उत्पादन, महसूल आणि प्रशासन यांच्यातील संबंध अधिक औपचारिक कायदेशीर व प्रशासकीय चौकटीत मांडले गेले.<ref name="Whitehead2012">{{cite journal
|last=Whitehead
|first=Judith
|title=John Locke, Accumulation by Dispossession and the Governance of Colonial India
|journal=Journal of Contemporary Asia
|volume=42
|issue=1
|year=2012
|pages=1–21
}}</ref>
व्हाइटहेड यांच्या अभ्यासात वसाहतकालीन भारतातील जमीनविषयक धोरणांचा विचार व्यापक शासनविचाराच्या संदर्भात करण्यात आला आहे. त्यामुळे जमीन आणि राज्यसत्ता यांचा संबंध हा केवळ महसूल वसुलीचा प्रश्न नसून जमिनीचे प्रशासकीय वर्गीकरण, मालमत्तेसंबंधी धोरणे आणि शासनाच्या संकल्पनांशी संबंधित व्यापक ऐतिहासिक विषय म्हणूनही अभ्यासला जातो. हा संदर्भ बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या विशिष्ट परिस्थितीचा थेट पुरावा म्हणून न पाहता व्यापक वसाहतकालीन संदर्भ म्हणून विचारात घ्यावा.<ref name="Whitehead2012"/>
=== कृषकांवरील परिणाम ===
महसूल व्यवस्था आणि जमीनविषयक प्रशासकीय बदलांचा कृषक समाजाशी निकटचा संबंध होता. बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील कृषी समाजाचा अभ्यास करताना जमीन, भांडवल, कर्ज, महसूल आणि कृषकांचे आर्थिक संबंध यांमधील गुंतागुंतीकडे लक्ष वेधण्यात आले आहे.<ref name="Kaiwar1994"/>
कैवार यांच्या अभ्यासानुसार वसाहतकालीन जमीनविषयक बदलांशी मालमत्तेची रचना आणि कृषकांच्या आर्थिक संबंधांमधील परिवर्तन संबंधित होते. तथापि, या प्रक्रियांचे परिणाम सर्व कृषकांवर समान स्वरूपाचे होते, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="Kaiwar1994"/>
त्यामुळे महसूल सर्वेक्षण आणि जमीनविषयक प्रशासकीय बदलांचा विचार केवळ प्रशासकीय कार्यक्षमतेच्या दृष्टीने न करता कृषक समाज, जमीनधारणा आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्था यांच्या व्यापक संदर्भातही केला जातो.<ref name="Kaiwar1994"/>
=== वसाहतकालीन प्रशासनाचे व्यापक परिणाम ===
वसाहतकालीन महसूल सर्वेक्षणाने राज्याच्या भूभाग आणि जमिनीशी संबंधित माहितीच्या संकलन, वर्गीकरण आणि अभिलेखनाच्या प्रशासकीय प्रक्रियेला अधिक पद्धतशीर स्वरूप दिले. सर्वेक्षण, मोजमाप, वर्गीकरण, नकाशांकन आणि अभिलेखीय नोंदी या परस्परपूरक प्रक्रियांमुळे प्रशासनासाठी भूभागाशी संबंधित अधिक संरचित माहिती उपलब्ध झाली.<ref name="Michael2007"/>
त्याच वेळी, जमीनविषयक प्रशासनातील बदल हे व्यापक सामाजिक आणि आर्थिक प्रक्रियांपासून स्वतंत्र नव्हते. वसाहतकालीन जमीनधोरणांचा संबंध मालमत्ता, कृषी समाज, भांडवल आणि राज्यसत्ता यांच्यातील बदलत्या संबंधांशी जोडलेला होता.<ref name="Kaiwar1994"/><ref name="Whitehead2012"/>
भूमिअभिलेखांच्या आधुनिक आधुनिकीकरणाच्या अभ्यासातून अभिलेखीय व्यवस्थेतील तांत्रिक बदलांमुळे पूर्वीच्या ऐतिहासिक नोंदी किंवा प्रशासकीय पद्धती आपोआप निराकरण होत नाहीत, असे व्यापकपणे दिसून येते. त्यामुळे भूमिअभिलेख व्यवस्थेचा इतिहास हा केवळ सर्वेक्षण तंत्रज्ञानाचा इतिहास नसून प्रशासन, राज्यसत्ता, जमीनविषयक संबंध आणि सामाजिक व्यवहार यांच्या परस्परसंबंधांचा इतिहास म्हणूनही अभ्यासला जातो.<ref name="RamakumarRamesh2023"/>
अशा प्रकारे महाराष्ट्र आणि पूर्वीच्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील भूमापन व महसूल सर्वेक्षणाच्या विकासाचा महसूल प्रशासन, भूमिअभिलेख, नकाशाधारित माहिती आणि जमीनविषयक शासनव्यवस्थेच्या ऐतिहासिक परिवर्तनाशी निकटचा संबंध होता. या प्रक्रियेचे मूल्यमापन करताना प्रशासकीय मानकीकरणाबरोबरच त्याचे सामाजिक, आर्थिक आणि राजकीय संदर्भ विचारात घेणे आवश्यक ठरते.<ref name="Kaiwar1994"/><ref name="Michael2007"/><ref name="Whitehead2012"/>
== वारसा आणि समकालीन संदर्भ ==
=== ऐतिहासिक सर्वेक्षणाची प्रशासकीय परंपरा ===
महाराष्ट्रातील आधुनिक भूमापन आणि भूमिअभिलेख व्यवस्थेची ऐतिहासिक पार्श्वभूमी महसूल सर्वेक्षणाच्या दीर्घ प्रशासकीय परंपरेशी संबंधित आहे. वसाहतकालीन काळात विकसित झालेल्या क्षेत्रमोजणी, भूखंडनिश्चिती, सीमांकन, भूवर्गीकरण, सर्वेक्षण क्रमांक आणि नकाशाधारित नोंदी या प्रक्रियांनी भूमीच्या प्रशासकीय व्यवस्थापनासाठी आवश्यक असलेल्या अभिलेखीय चौकटीच्या विकासास हातभार लावला.<ref name="Michael2007"/>
महसूल सर्वेक्षणामुळे भूमीचे क्षेत्रफळ, सीमा आणि स्थान यांसंबंधीची माहिती अधिक पद्धतशीर रीतीने नोंदविणे शक्य झाले. सर्वेक्षणातून तयार होणाऱ्या नकाशे आणि अभिलेखांमुळे भूभागाची प्रशासकीय ओळख अधिक स्पष्ट स्वरूपात निश्चित होऊ लागली. या प्रक्रियेत भूमीची भौतिक स्थिती, प्रशासकीय नोंद आणि राज्याच्या महसूल व्यवस्थेतील तिचे स्थान यांच्यात परस्परसंबंध निर्माण झाला.<ref name="Michael2007" />
स्वातंत्र्योत्तर काळात महाराष्ट्रातील जमीन आणि जमीन महसूल विषयक कायद्यांचे एकत्रीकरण व पुनर्रचना करण्यात आली. ''महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता, १९६६'' ही राज्यातील जमीन आणि जमीन महसूल विषयक कायद्यांचे एकत्रीकरण व सुधारणा करण्यासाठीची प्रमुख वैधानिक चौकट आहे.<ref name="MLRC1966"/>
त्यामुळे पूर्वीच्या महसूल सर्वेक्षणातून विकसित झालेल्या भूमापन, सर्वेक्षण क्रमांक आणि अभिलेखीय नोंदींच्या पद्धती आधुनिक महसूल प्रशासनाच्या कायदेशीर चौकटीशी विविध स्वरूपांत संबंधित राहिल्या.<ref name="MLRC1966" />
=== आधुनिक आणि डिजिटल भूमिअभिलेख व्यवस्थेशी संबंध ===
ऐतिहासिक महसूल सर्वेक्षणातून विकसित झालेल्या भूमिअभिलेखीय परंपरेत आधुनिक काळात संगणकीकरण आणि डिजिटल व्यवस्थापनाचा समावेश झाला आहे. भारत सरकारच्या डिजिटल इंडिया भूमिअभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रमाचा उद्देश भूमिअभिलेखांचे आधुनिकीकरण, अभिलेखांचे अद्ययावतीकरण, मजकूराधारित आणि नकाशाधारित अभिलेखांचे एकत्रीकरण तसेच सर्वेक्षण आणि पुनःसर्वेक्षणाशी संबंधित प्रक्रियांचा विकास करणे हा आहे.<ref name="DILRMP">{{cite web |title=DILRMP |website=Department of Land Resources |publisher=Government of India |url=https://dolr.gov.in/en/programmes-schemes/dilrmp-2/ |access-date=2026-09-01}}</ref>
महाराष्ट्रातील भूमिअभिलेख व्यवस्थेमध्ये सर्वेक्षण क्रमांक, ७/१२ उतारे, ८-अ उतारे, फेरफार नोंदी, मालमत्ता पत्रके आणि नकाशाधारित अभिलेख यांसारख्या विविध नोंदींचा प्रशासकीय वापर केला जातो. महाराष्ट्र भूमी अभिलेख विभागाच्या डिजिटल सेवांद्वारे भूमिअभिलेख, नकाशे आणि संबंधित माहिती नागरिकांना उपलब्ध करून देण्यासाठी विविध ऑनलाइन सुविधा विकसित करण्यात आल्या आहेत.<ref name="MahaBhuServices">{{cite web |title=Services |website=भूमि अभिलेख – महाराष्ट्र भूमी अभिलेख विभाग |publisher=Government of Maharashtra |url=https://bhumiabhilekh.maharashtra.gov.in/Services |access-date=2026-09-01}}</ref>
भूमिअभिलेखांच्या आधुनिकीकरणाचा अर्थ मात्र केवळ कागदी नोंदींचे डिजिटल स्वरूपात रूपांतर इतकाच मर्यादित नाही. भूमिअभिलेखांच्या आधुनिकीकरणाशी संबंधित अभ्यासांमध्ये अभिलेखांचे अद्ययावतीकरण, पूर्वीच्या नोंदींतील त्रुटी आणि विसंगती तसेच डिजिटल व्यवस्थेच्या अंमलबजावणीशी संबंधित प्रशासकीय आणि सामाजिक घटकांचा विचार महत्त्वाचा असल्याचे दिसून येते.<ref name="RamakumarRamesh2023">{{cite journal |last=Ramakumar |first=R. |last2=Ramesh |first2=Padmini |title=Illegibly legible: Outcomes of a land records modernisation programme in South India |journal=Journal of Agrarian Change |volume=23 |issue=4 |year=2023 |pages=729–754 }}</ref>
रामकुमार आणि पद्मिनी रमेश यांच्या दक्षिण भारतातील भूमिअभिलेख आधुनिकीकरणावरील अभ्यासातून डिजिटल अभिलेखीय व्यवस्थेच्या परिणामांचा संबंध केवळ तांत्रिक बदलांशी नसून विद्यमान अभिलेखांची स्थिती, त्यांच्या ऐतिहासिक निर्मितीची प्रक्रिया आणि प्रत्यक्ष प्रशासकीय व्यवहाराशीही असल्याचे अधोरेखित होते.<ref name="RamakumarRamesh2023" /> हा अभ्यास महाराष्ट्रातील परिस्थितीवर थेट लागू करता येत नसला, तरी भूमिअभिलेखांच्या आधुनिकीकरणाचा अभ्यास करताना स्थानिक ऐतिहासिक आणि प्रशासकीय संदर्भ लक्षात घेणे आवश्यक असल्याचा व्यापक संदर्भ त्यातून उपलब्ध होतो.
अशा प्रकारे महाराष्ट्रातील समकालीन भूमिअभिलेख व्यवस्था ही पारंपरिक भूमापन, महसूल सर्वेक्षण, नकाशाधारित अभिलेख, वैधानिक संस्थात्मक चौकट आणि आधुनिक डिजिटल तंत्रज्ञान यांच्या दीर्घ ऐतिहासिक विकासाशी संबंधित आहे. डिजिटल प्रणालींमुळे भूमिअभिलेखांची उपलब्धता आणि व्यवस्थापनासाठी नवीन साधने उपलब्ध झाली असली, तरी सर्वेक्षण, सीमा, भूखंड आणि अभिलेख यांच्यातील मूलभूत संबंध महसूल सर्वेक्षणाच्या ऐतिहासिक परंपरेशी जोडलेले राहतात.<ref name="Michael2007"/><ref name="DILRMP" /><ref name="MahaBhuServices" />
== चित्रदालन ==
<gallery mode="packed" heights="180px">
File:Route Map of the Bombay presidency, including Scinde, surveyed and collected by the quarter master general's department, Bombay armee... 12 march 1846... - btv1b53165305f (2 of 3).jpg|१८४६ मधील बॉम्बे प्रेसिडेन्सीचा मार्गनकाशा
File:C.P. Joshi delivering the valedictory address, at the Follow-up Workshop on National Land Records Modernization Programme (NLRMP), in New Delhi on August 18, 2009.jpg|राष्ट्रीय भूमिअभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रमावरील कार्यशाळा, नवी दिल्ली, २००९
File:Bombay Prov 1909.jpg|बॉम्बे प्रांताचा नकाशा, १९०९
File:Nature Village, Ratnagiri, Maharashtra (kokan) 2.jpg|रत्नागिरी, महाराष्ट्रातील कोकण प्रदेशाचे दृश्य
File:ICAR NBSS & LUP, Nagpur.jpg|ICAR–NBSS & LUP, नागपूर
File:63 of 'Report on the Land Revenue Settlement of the Chanda district, Central Provinces, 1869. (With map, etc.)' (11091430044).jpg|चांदा जिल्ह्याच्या जमीन महसूल सेटलमेंटचा अहवाल, १८६९
</gallery>
== हेही पहा ==
* [[महाराष्ट्राचा इतिहास]]
* [[बॉम्बे प्रेसिडेन्सी]]
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
== बाह्यदुवे ==
* [https://www.indiacode.nic.in/handle/123456789/15974 महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता, १९६६] — इंडिया कोड
* [https://lj.maharashtra.gov.in/en/document/the-maharashtra-land-revenue-code-1966-text-as-on-2nd-april-2025/ महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता, १९६६] — विधी व न्याय विभाग, महाराष्ट्र शासन
* [https://bhumiabhilekh.maharashtra.gov.in/ महाराष्ट्र भूमी अभिलेख विभाग]
* [https://bhumiabhilekh.maharashtra.gov.in/ActsandRules/Acts/1 अधिनियम आणि नियम] — महाराष्ट्र भूमी अभिलेख विभाग
* [https://bhumiabhilekh.maharashtra.gov.in/ActsAndRules/Manuals नियमपुस्तिका आणि मार्गदर्शिका] — महाराष्ट्र भूमी अभिलेख विभाग
* [https://dolr.gov.in/en/ Department of Land Resources, Government of India]
* [https://dolr.gov.in/en/programmes-schemes/dilrmp-2/ Digital India Land Records Modernization Programme]
{{कोकण लोकजीवन}}
== वर्ग ==
[[वर्ग:महाराष्ट्राचा इतिहास]]
[[वर्ग:महाराष्ट्राचा भूगोल]]
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[[File:Route Map of the Bombay presidency, including Scinde, surveyed and collected by the quarter master general's department, Bombay armee... 12 march 1846... - btv1b53165305f (2 of 3).jpg|thumb|right|200px|१८४६ मधील बॉम्बे प्रेसिडेन्सीचा मार्गनकाशा]]
'''महाराष्ट्रातील आधुनिक भूमापन आणि जमीन महसूल व्यवस्थेचा विकास''' हा केवळ जमिनीचे क्षेत्रफळ निश्चित करण्याच्या प्रक्रियेपुरता मर्यादित नव्हता. भूमीचे मापन, जमिनीचे वर्गीकरण, महसूल निर्धारण, भूमिअभिलेखांची निर्मिती तसेच जमीनधारणा आणि प्रशासकीय नियंत्रणाशी संबंधित नोंदी या परस्परसंबंधित प्रक्रियांमधून या व्यवस्थेचा विकास झाला. ब्रिटिशकालीन बॉम्बे प्रेसिडेन्सीमध्ये महसूल सर्वेक्षणाला अधिक संघटित प्रशासकीय आणि तांत्रिक स्वरूप प्राप्त झाले.<ref name="Gordon1959">{{cite book
|last=Gordon
|first=R. G.
|title=The Bombay Survey and Settlement Manual: Historical
|volume=I
|edition=2
|publisher=Government Press
|location=Bombay
|year=1959
}}</ref>
R. G. Gordon यांच्या ऐतिहासिक विवेचनात बॉम्बे प्रांतातील सर्वेक्षण आणि सेटलमेंट व्यवस्थेच्या विकासाचे विविध टप्पे स्वतंत्रपणे चर्चिले आहेत. नवीन सर्वेक्षणपद्धतीचा प्रारंभ आणि प्रारंभीचा विकास तसेच संयुक्त अहवालानंतर झालेला पुढील प्रशासकीय विकास या प्रक्रियेच्या ऐतिहासिक संदर्भात मांडण्यात आला आहे.<ref name="Gordon1959"/>
या प्रक्रियेमुळे भूमापन, महसूल निर्धारण आणि जमिनीशी संबंधित प्रशासकीय अभिलेख यांच्यात अधिक सुसंगत संबंध विकसित झाला. परिणामी, सर्वेक्षण आणि सेटलमेंट व्यवस्था महाराष्ट्रातील पुढील भूमी प्रशासनाच्या विकासातील महत्त्वाचा आधार बनली.<ref name="Gordon1959"/>
=== पारंपरिक पद्धतींपासून पद्धतशीर सर्वेक्षणाकडे संक्रमण ===
महाराष्ट्रासह भारतीय उपखंडातील विविध प्रदेशांमध्ये भूमापनासाठी पूर्वी स्थानिक आणि पारंपरिक पद्धतींचा वापर होत असे. या पद्धती प्रदेश, स्थानिक प्रशासकीय प्रथा आणि कृषी परिस्थितीनुसार बदलत असत. विस्तृत प्रदेशातील जमिनीचे तुलनेने एकसमान पद्धतीने मापन करणे, सर्वेक्षणाच्या आधारे नकाशे तयार करणे आणि महसूल प्रशासनासाठी आवश्यक माहिती संकलित करणे या गरजांमुळे अधिक पद्धतशीर सर्वेक्षणपद्धती विकसित झाली.<ref name="Gordon1959"/>
औपनिवेशिक दक्षिण आशियातील महसूल सर्वेक्षणांचा अभ्यास करताना Bernardo A. Michael यांनी सर्वेक्षणांच्या माध्यमातून प्रदेश, जमीन आणि प्रशासकीय माहिती नोंदविण्याच्या प्रक्रियेचे विश्लेषण केले आहे. त्यांच्या अभ्यासात महसूल सर्वेक्षण, नकाशीकरण आणि प्रशासकीय ज्ञाननिर्मिती यांतील परस्परसंबंधाला विशेष महत्त्व देण्यात आले आहे.<ref name="Michael2007">{{cite journal
|last=Michael
|first=Bernardo A.
|title=Making Territory Visible: The Revenue Surveys of Colonial South Asia
|journal=Imago Mundi
|volume=59
|issue=1
|year=2007
|pages=78–95
}}</ref>
महसूल सर्वेक्षणाच्या प्रक्रियेमुळे जमिनीचे क्षेत्र, स्थान आणि प्रशासकीय विभाग यांविषयी अधिक व्यवस्थित नोंदी आणि नकाशीकरण शक्य झाले. त्यामुळे स्थानिक आणि पारंपरिक भूमापनपद्धतींपासून अधिक पद्धतशीर व दस्तऐवजी स्वरूपाच्या सर्वेक्षणव्यवस्थेकडे झालेला विकास महसूल प्रशासनाच्या इतिहासातील महत्त्वाचा टप्पा मानला जातो.<ref name="Michael2007"/>
=== महसूल सर्वेक्षणाचा भूमिअभिलेख आणि प्रशासकीय व्यवस्थेशी संबंध ===
महसूल सर्वेक्षणामुळे जमिनीच्या भौतिक मापनाशी संबंधित माहिती आणि प्रशासकीय अभिलेख यांच्यातील संबंध अधिक संघटित स्वरूपात विकसित झाला. सर्वेक्षणाच्या प्रक्रियेतून जमिनीचे क्षेत्रफळ, सीमा, स्थान आणि इतर संबंधित तपशील नोंदविण्यास मदत झाली; ही माहिती महसूल प्रशासन आणि भूमिअभिलेख व्यवस्थेसाठी महत्त्वाची ठरली.<ref name="Michael2007"/>
महाराष्ट्रातील भूमापन आणि भूमिअभिलेख व्यवस्थेच्या दस्तऐवजी परंपरेत सर्वेक्षण, मापन आणि जमिनीच्या वर्गीकरणाशी संबंधित नियम आणि मार्गदर्शक साहित्याला विशेष स्थान आहे. महाराष्ट्र शासनाच्या भूमी अभिलेख विभागाच्या अधिकृत संकेतस्थळावर भूमापनाशी संबंधित विविध नियमपुस्तिका आणि मार्गदर्शक ग्रंथ उपलब्ध आहेत. त्यामध्ये ''The Bombay Survey and Settlement Manual, Volume I'', ''Manual of Land Surveying'', ''Land Records Department Training Manual'' आणि इतर संबंधित प्रकाशनांचा समावेश आहे.<ref name="MahaLandRecords">{{cite web
|title=नियम पुस्तिका
|website=भूमि अभिलेख विभाग, महाराष्ट्र शासन
|publisher=Government of Maharashtra
|url=https://bhumiabhilekh.maharashtra.gov.in/ActsAndRules/Manuals
}}</ref>
बॉम्बे प्रांतातील महसूल सर्वेक्षणाच्या विकासाशी संबंधित ऐतिहासिक साहित्य आणि भूमापनासंबंधी प्रशासकीय नियमांचा एकत्रित विचार केल्यास, जमिनीचे मापन ही प्रक्रिया महसूल निर्धारण, अभिलेख निर्मिती आणि प्रशासकीय व्यवस्थेशी निकटपणे संबंधित असल्याचे दिसून येते.<ref name="Gordon1959"/><ref name="MahaLandRecords"/>
अशा प्रकारे महाराष्ट्रातील आधुनिक भूमापन व्यवस्थेचा विकास हा स्थानिक आणि पारंपरिक मापनपद्धती, अधिक पद्धतशीर महसूल सर्वेक्षण आणि त्यातून विकसित झालेल्या भूमिअभिलेखीय व प्रशासकीय व्यवस्थेच्या दीर्घ ऐतिहासिक प्रक्रियेशी संबंधित आहे.<ref name="Gordon1959"/><ref name="Michael2007"/>
== ऐतिहासिक पार्श्वभूमी ==
=== दख्खनमधील भूमी व महसूल व्यवस्थेची पार्श्वभूमी ===
ब्रिटिश महसूल सर्वेक्षणाच्या स्थापनेपूर्वी दख्खनमधील भूमी आणि महसूल व्यवस्था विविध राजकीय सत्ताकेंद्रे, स्थानिक प्रशासकीय परंपरा आणि कृषी परिस्थिती यांच्या परस्परसंबंधातून विकसित झाली होती. जमीन महसूल हा राज्याच्या उत्पन्नाचा महत्त्वाचा स्रोत असल्यामुळे जमिनीची लागवड, उत्पादन, जमीनधारणा आणि महसूल आकारणी यांच्याशी संबंधित विविध प्रशासकीय पद्धती प्रचलित होत्या. एकोणिसाव्या शतकाच्या प्रारंभी ब्रिटिशांच्या ताब्यात आलेल्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील महसूल प्रशासनाच्या अभ्यासातूनही प्रत्यक्ष प्रशासकीय व्यवहार आणि महसूलधोरण यांतील संबंधाचे महत्त्व दिसून येते.<ref name="Rabitoy1975">{{cite journal
|last=Rabitoy
|first=Neil
|title=System v. Expediency: The Reality of Land Revenue Administration in the Bombay Presidency, 1812–1820
|journal=Modern Asian Studies
|volume=9
|issue=4
|year=1975
|pages=529–546
}}</ref>
दख्खनमधील भूमी आणि महसूल व्यवस्थेचा विकास एकसंध किंवा अपरिवर्तनीय स्वरूपाचा नव्हता. विविध कालखंडांमध्ये निजामशाही, आदिलशाही, मुघल आणि मराठा सत्तांच्या विस्तारानुसार आणि प्रशासकीय गरजांनुसार भूमी व महसूल प्रशासनात बदल होत गेले. त्यामुळे ब्रिटिशकालीन महसूल सर्वेक्षणाचा ऐतिहासिक अभ्यास करताना त्यापूर्वीच्या प्रादेशिक महसूल परंपरा आणि प्रशासकीय पद्धतींची पार्श्वभूमी विचारात घेणे आवश्यक ठरते.
एकोणिसाव्या शतकातील दख्खनमधील महसूल सेटलमेंटच्या प्रक्रियेचा अभ्यास करताना A. R. Kulkarni यांचा ''Professor H. Green and the Revenue Settlement in the Deccan (1837–1857)'' हा लेख महत्त्वाचा आहे. या अभ्यासात ब्रिटिशकालीन दख्खनमधील महसूल सेटलमेंटचा प्रश्न प्रशासकीय धोरण आणि महसूल व्यवस्थापनाच्या संदर्भात चर्चिला आहे.<ref name="Kulkarni1989">{{cite journal
|last=Kulkarni
|first=A. R.
|title=Professor H. Green and the Revenue Settlement in the Deccan (1837–1857)
|journal=Proceedings of the Indian History Congress
|volume=50
|year=1989
|pages=595–606
}}</ref>
या पार्श्वभूमीवर ब्रिटिश महसूल सर्वेक्षणाचा अभ्यास पूर्वीच्या महसूल परंपरांपासून पूर्णपणे विलग अशा व्यवस्थेपुरता मर्यादित न ठेवता, स्थानिक परिस्थिती, उपलब्ध प्रशासकीय ज्ञान आणि बदलत्या वसाहतकालीन प्रशासकीय गरजांच्या संदर्भात करणे आवश्यक ठरते.<ref name="Rabitoy1975"/><ref name="Kulkarni1989"/>
=== मलिक अंबर आणि महसूल प्रशासन ===
दख्खनच्या सतराव्या शतकातील प्रशासकीय इतिहासात मलिक अंबर यांना महत्त्वाचे स्थान आहे. अहमदनगरच्या निजामशाहीतील प्रभावशाली प्रशासक म्हणून त्यांच्या कार्यकाळात राज्याच्या प्रशासन आणि महसूल व्यवस्थेशी संबंधित उपाययोजनांचा संबंध जोडला जातो. दख्खनमधील पुढील भूमी आणि महसूल प्रशासनाच्या इतिहासाचा अभ्यास करताना त्यांच्या काळातील प्रशासकीय पद्धतींचा संदर्भ ऐतिहासिक साहित्यामध्ये आढळतो.
दख्खनमधील महसूल प्रशासनाच्या ऐतिहासिक विकासात विविध सत्ताकालांतील सातत्य आणि बदल या दोन्ही प्रक्रियांचा विचार आवश्यक आहे. त्यामुळे मलिक अंबरकालीन व्यवस्था, मराठाकालीन महसूल प्रशासन आणि पुढील ब्रिटिशकालीन महसूल सर्वेक्षण या व्यवस्थांना एकाच स्वरूपाची किंवा अपरिवर्तित प्रशासकीय परंपरा मानता येत नाही.
अठराव्या शतकातील मराठा राज्याच्या संदर्भात जमीन, जमीनधारणा आणि राज्यसत्ता यांच्यातील संबंधांचा अभ्यास आंद्रे विंक यांनी केला आहे. त्यांच्या ''Land and Sovereignty in India: Agrarian Society and Politics under the Eighteenth-Century Maratha Svarajya'' या ग्रंथात जमीन आणि ग्रामीण समाजव्यवस्थेशी संबंधित प्रश्नांचा राज्यसत्ता आणि राजकीय संरचनेच्या व्यापक संदर्भात विचार करण्यात आला आहे.<ref name="Wink1986">{{cite book
|last=Wink
|first=André
|title=Land and Sovereignty in India: Agrarian Society and Politics under the Eighteenth-Century Maratha Svarajya
|publisher=Cambridge University Press
|location=Cambridge
|year=1986
|series=University of Cambridge Oriental Publications
|volume=36
}}</ref>
दख्खनमधील इंदापूरसारख्या प्रदेशांच्या ऐतिहासिक अभ्यासातून भूमी, महसूल आणि राज्यसत्ता यांच्यातील संबंध समजून घेण्यासाठी स्थानिक कृषी आणि प्रशासकीय परिस्थितीचे महत्त्व अधोरेखित होते. अठराव्या शतकातील मराठा राज्याच्या संदर्भात महसूलव्यवस्था ही केवळ कर आकारणीपुरती मर्यादित नसून जमीनधारणा, ग्रामीण समाज आणि राज्यसत्ता यांच्याशी संबंधित व्यापक प्रशासकीय प्रक्रियेचा भाग होती.<ref name="Wink1986"/>
अशा प्रकारे दख्खनमधील भूमी आणि महसूल व्यवस्थेची ऐतिहासिक पार्श्वभूमी विविध राजकीय सत्ताकेंद्रे, प्रादेशिक प्रशासकीय परंपरा आणि बदलत्या महसूल पद्धती यांच्या दीर्घकालीन विकासातून घडलेली दिसते. या पार्श्वभूमीवर एकोणिसाव्या शतकात ब्रिटिश प्रशासनाने विकसित केलेल्या महसूल सेटलमेंट आणि सर्वेक्षण पद्धतींचा विचार व्यापक ऐतिहासिक संदर्भात करता येतो.<ref name="Rabitoy1975"/><ref name="Kulkarni1989"/><ref name="Wink1986"/>
== मराठा काळातील भूमी आणि महसूल व्यवस्था ==
=== शिवकालीन प्रशासनाची पार्श्वभूमी ===
मराठा राज्याच्या उदयाच्या काळात दख्खनमधील भूमी, महसूल आणि स्थानिक प्रशासन यांचा परस्परसंबंध महत्त्वाचा होता. कृषी उत्पादन, जमिनीवरील विविध हक्क, महसूल आकारणी आणि स्थानिक प्रशासकीय घटक यांचा राज्याच्या आर्थिक आणि प्रशासकीय व्यवस्थेशी संबंध होता. मराठा सत्तेच्या विस्ताराच्या प्रक्रियेत पूर्वीच्या दख्खनी प्रशासकीय परंपरांतील काही संस्थात्मक आणि दस्तऐवजी पद्धतींचा स्वीकार व रूपांतर होत गेले.<ref name="Deshpande2021">{{cite journal
|last=Deshpande
|first=Prachi
|title=The Marathi Kaulnāmā: Property, Sovereignty and Documentation in a Persianate Form
|journal=Journal of the Economic and Social History of the Orient
|volume=64
|issue=5 & 6
|year=2021
|pages=583–614
}}</ref>
मराठा राज्याच्या प्रशासनाचा अभ्यास करताना भूमी आणि महसूल प्रश्नांचा विचार केवळ करआकारणीच्या दृष्टीने न करता, स्थानिक समाज, कृषी उत्पादन, अधिकारसंबंध आणि प्रशासकीय दस्तऐवजीकरण यांच्या व्यापक संदर्भात करता येतो. दख्खनी राज्यव्यवस्थेतील भूमीवरील हक्क आणि त्यासंबंधीचे व्यवहार विविध प्रकारच्या दस्तऐवजांमधून नोंदविले जात होते. या दस्तऐवजी परंपरेत प्रशासन आणि स्थानिक आर्थिक व्यवहार यांच्याशी संबंधित बाबींचाही समावेश होता.<ref name="Deshpande2021"/>
मराठा राज्याच्या भूमी आणि महसूल व्यवस्थेचा इतिहास पूर्वीच्या दख्खनी प्रशासकीय परंपरा आणि मराठा सत्तेच्या विस्ताराबरोबर विकसित झालेल्या संस्थात्मक पद्धती यांच्या परस्परसंबंधातून समजून घेता येतो. या संदर्भात जमीन, महसूल, स्थानिक प्रशासकीय घटक आणि लेखी नोंदी यांचा परस्परसंबंध महत्त्वाचा ठरतो.<ref name="Deshpande2021"/>
=== मराठा राज्यातील जमीन, हक्क आणि दस्तऐवजीकरण ===
मराठा राज्यातील जमीन आणि मालमत्तेशी संबंधित व्यवहारांच्या ऐतिहासिक अभ्यासासाठी प्रशासकीय आणि कायदेशीर स्वरूपाच्या दस्तऐवजांना विशेष महत्त्व आहे. प्राची देशपांडे यांच्या अभ्यासानुसार, ''कौलनामा'' हा आरंभीच्या आधुनिक काळातील मराठी प्रशासकीय दस्तऐवजीकरणातील महत्त्वाचा दस्तऐवजी प्रकार होता. अशा दस्तऐवजांद्वारे विविध हक्कांची पुष्टी, संरक्षणाची हमी तसेच भूमी आणि इतर आर्थिक हितसंबंधांशी संबंधित व्यवहारांची नोंद केली जात असे.<ref name="Deshpande2021"/>
देशपांडे यांच्या अभ्यासानुसार, कौलनाम्यांचा वापर दख्खनमधील विविध प्रशासकीय संदर्भांत होत होता. काही प्रकरणांत अशा दस्तऐवजांद्वारे लागवडीस प्रोत्साहन देणे, ओसाड किंवा कमी विकसित जमिनींच्या लागवडीसाठी सवलतीच्या अटी निश्चित करणे अथवा बाजारपेठांच्या विकासाशी संबंधित व्यवस्था करणे यांसारख्या उद्देशांची पूर्तता केली जात होती.<ref name="Deshpande2021"/>
या दस्तऐवजी परंपरेमुळे भूमी आणि मालमत्तेशी संबंधित अधिकारसंबंध हे केवळ प्रत्यक्ष ताब्यावर आधारित नसून लेखी नोंदी, आश्वासने आणि प्रशासकीय मान्यतेशीही संबंधित होते, असे दिसून येते. मराठी प्रशासकीय व्यवहारांमध्ये स्थानिक भाषिक परंपरा आणि फारसी दस्तऐवजी प्रभाव यांचा परस्परसंबंधही या स्रोतांच्या आधारे अभ्यासता येतो.<ref name="Deshpande2021"/>
अठराव्या शतकातील मराठा साम्राज्यातील राजकीय आणि व्यवहारात्मक संबंधांच्या अभ्यासात लेखी करारांना महत्त्व प्राप्त होते. Dominic Vendell यांच्या अभ्यासात १७९५ मधील एका कराराच्या संदर्भातून मराठी आणि फारसी दस्तऐवजी प्रकार, करारातील बंधनकारक सूत्रे आणि लेखनपद्धती यांचा राजकीय व इतर व्यवहारांमध्ये झालेला वापर स्पष्ट करण्यात आला आहे.<ref name="Vendell2021">{{cite journal
|last=Vendell
|first=Dominic
|title=Transacting Politics in the Maratha Empire: An Agreement between Friends, 1795
|journal=Journal of the Economic and Social History of the Orient
|volume=64
|issue=5 & 6
|year=2021
|pages=826–863
}}</ref>
या प्रकारच्या अभ्यासांमधून मराठा राज्यातील लेखी दस्तऐवजांचा उपयोग केवळ शासकीय आदेश किंवा महसूलविषयक नोंदीपुरता मर्यादित नसून राजकीय संबंध आणि विविध प्रकारच्या करारात्मक व्यवहारांमध्येही होत असल्याचे दिसून येते. त्यामुळे जमीन आणि मालमत्तेशी संबंधित अधिकारसंबंधांचा अभ्यास व्यापक दस्तऐवजी संस्कृतीच्या संदर्भात करणे उपयुक्त ठरते.<ref name="Vendell2021"/>
भूमी, महसूल आणि प्रशासनाच्या ऐतिहासिक अभ्यासात बहुभाषिक दस्तऐवजी व्यवहारांचाही संदर्भ महत्त्वाचा आहे. Samira Sheikh यांच्या अभ्यासात परगणा पातळीवरील प्रशासकीय आणि आर्थिक व्यवहारांमध्ये विविध भाषांचा वापर तसेच लेखनिक आणि स्थानिक प्रशासकीय घटकांची भूमिका यांचा अभ्यास करण्यात आला आहे.<ref name="Sheikh2021">{{cite journal
|last=Sheikh
|first=Samira
|title=Persian in the Villages, or, the Language of Jamiat Rai's Account Books
|journal=Journal of the Economic and Social History of the Orient
|volume=64
|issue=5 & 6
|year=2021
|pages=693–751
}}</ref>
या व्यापक पश्चिम भारतीय प्रशासकीय संदर्भातून जमीन, महसूल, हक्क आणि दस्तऐवजीकरण यांचा संबंध एकाच भाषिक किंवा प्रशासकीय चौकटीपुरता मर्यादित नसल्याचे दिसून येते. मराठी, फारसी आणि इतर प्रादेशिक भाषांच्या वापरातून विकसित झालेल्या दस्तऐवजी परंपरा भूमी आणि महसूल व्यवहारांच्या ऐतिहासिक अभ्यासासाठी उपयुक्त संदर्भ प्रदान करतात.<ref name="Sheikh2021"/>
अशा प्रकारे मराठा काळातील जमीन आणि मालमत्तेशी संबंधित व्यवस्थेचा अभ्यास करताना जमिनीवरील विविध हक्क, महसूल आकारणी आणि प्रशासकीय नियंत्रण यांच्याबरोबरच कौलनामे, करार आणि इतर लेखी नोंदी यांचे स्थान महत्त्वाचे ठरते. या दस्तऐवजांमधून सत्ता, सार्वभौमत्व, मालमत्ता आणि विविध आर्थिक व राजकीय व्यवहार यांतील परस्परसंबंधांचा अभ्यास करता येतो.<ref name="Deshpande2021"/><ref name="Vendell2021"/>
== इंदापूर : महसूल सर्वेक्षणाच्या इतिहासातील एक महत्त्वपूर्ण अभ्यासक्षेत्र ==
=== प्रारंभीची परिस्थिती ===
एकोणिसाव्या शतकाच्या पूर्वार्धात दख्खनमधील ब्रिटिश अधिपत्याखालील प्रदेशांमध्ये जमीन महसूल प्रशासनाच्या विविध पद्धती विकसित आणि अंमलात आणल्या जात होत्या. या काळातील महसूल प्रशासनाचा अभ्यास केवळ घोषित धोरणांच्या आधारे न करता, स्थानिक परिस्थिती, महसूल वसुलीतील अडचणी आणि प्रत्यक्ष प्रशासकीय व्यवहार यांच्या संदर्भात करणे आवश्यक ठरते.<ref name="Rabitoy1975"/>
Neil Rabitoy यांनी इ.स. १८१२ ते १८२० या कालखंडातील बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या जमीन महसूल प्रशासनाचा अभ्यास करताना औपचारिक महसूलपद्धती आणि स्थानिक परिस्थितीनुसार स्वीकारण्यात येणारे व्यवहार्य प्रशासकीय उपाय यांतील संबंध अधोरेखित केला आहे. त्यामुळे आरंभीच्या ब्रिटिश महसूल प्रशासनाच्या अभ्यासात प्रत्यक्ष प्रशासकीय कार्यपद्धतीला विशेष महत्त्व प्राप्त होते.<ref name="Rabitoy1975"/>
इंदापूरमधील आरंभीच्या वसाहतकालीन ग्रामीण समाजाच्या अभ्यासासाठी कृषक आणि प्रशासन यांच्यातील संबंध हा स्वतंत्र संशोधनाचा विषय ठरला आहे. Lynn Zastoupil यांच्या ''Peasant Desertions in Early Colonial Indapur'' या अभ्यासात आरंभीच्या वसाहतकालीन इंदापूरमधील कृषकांच्या हालचाली आणि ग्रामीण परिस्थितीशी संबंधित प्रश्नांचा विचार करण्यात आला आहे.<ref name="Zastoupil1992">{{cite journal
|last=Zastoupil
|first=Lynn
|title=Peasant Desertions in Early Colonial Indapur
|journal=Journal of Asian History
|volume=26
|issue=2
|year=1992
|pages=119
}}</ref>
इंदापूरच्या आरंभीच्या वसाहतकालीन परिस्थितीचा विचार करताना जमीन महसूल प्रशासन, ग्रामीण समाज आणि कृषकांच्या आर्थिक परिस्थिती यांतील संबंध महत्त्वाचे ठरतात. तथापि, कृषकांच्या स्थलांतराची कारणे, महसूल भाराचा विशिष्ट परिणाम किंवा एखाद्या विशिष्ट प्रशासकीय उपायाचा परिणाम यांसारखे तपशील संबंधित प्राथमिक किंवा संशोधन स्रोतांच्या थेट आधारेच निश्चित करणे आवश्यक आहे.<ref name="Rabitoy1975"/><ref name="Zastoupil1992"/>
=== इंदापूरमधील अनुभव आणि भूमिवर्गीकरण पद्धतीचा विकास ===
बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील महसूल सर्वेक्षणाच्या इतिहासात इंदापूरचा उल्लेख महत्त्वाच्या अभ्यासक्षेत्रांपैकी एक म्हणून आढळतो. R. G. Gordon यांच्या ''The Bombay Survey and Settlement Manual: Historical'' या ग्रंथात बॉम्बे प्रांतातील सर्वेक्षण आणि सेटलमेंट व्यवस्थेच्या ऐतिहासिक विकासाचा मागोवा घेण्यात आला आहे. या ग्रंथात नवीन सर्वेक्षणपद्धतीचा प्रारंभ आणि पुढील प्रशासकीय विकास यांचा स्वतंत्रपणे विचार करण्यात आला आहे.<ref name="Gordon1959"/>
इ.स. १८७२–७३ च्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या प्रशासन अहवालात इंदापूरमध्ये Mr. Goldsmid आणि Lieutenant Wingate यांनी स्वीकारलेल्या भूमिवर्गीकरण पद्धतीचा स्पष्ट उल्लेख आढळतो. अहवालानुसार, इंदापूरमध्ये स्वीकारलेली वर्गीकरणपद्धती पुढील काळातही सुरू ठेवण्यात आली आणि अनुभवाच्या आधारे आवश्यक ते मर्यादित बदल करण्यात आले. विविध वर्गीकरण पथकांमध्ये मूल्यांकनाच्या निकषांमध्ये एकरूपता राखण्यावर विशेष भर देण्यात आला होता.<ref name="BombayReport1872-73">{{cite book
|title=General Report on the Administration of the Bombay Presidency for the Year 1872–73
|location=Bombay
|publisher=Government Central Press
|year=1874
}}</ref>
या अहवालानुसार भूमिवर्गीकरणाचे कार्य शेतानुसार केले जात होते. प्रत्येक शेताची स्वतंत्रपणे तपासणी करून वर्गीकरण करण्यात येत असे आणि प्रत्यक्ष कामाच्या अचूकतेची खात्री करण्यासाठी वरिष्ठ अधिकाऱ्यांकडून नियमित चाचण्या व तपासणी करण्यात येत होती.<ref name="BombayReport1872-73"/>
त्यामुळे इंदापूरमधील अनुभव हा बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील भूमिवर्गीकरणाच्या पद्धतीच्या इतिहासात महत्त्वाचा संदर्भ ठरतो. मूल्यांकनातील एकरूपता, शेतनिहाय तपासणी आणि वरिष्ठ स्तरावरील नियंत्रण या घटकांना या प्रक्रियेत विशेष महत्त्व देण्यात आले होते.<ref name="BombayReport1872-73"/>
Gordon यांच्या ऐतिहासिक अभ्यासातून बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील महसूल सर्वेक्षण आणि सेटलमेंट पद्धती क्रमशः विकसित होत गेल्याचे दिसून येते. नवीन पद्धतीचा प्रारंभ, तिचा विस्तार आणि पुढील प्रशासकीय बदल यांच्या व्यापक संदर्भात इंदापूरसारख्या प्रदेशांतील प्रत्यक्ष अनुभवांचे स्थान महत्त्वाचे होते.<ref name="Gordon1959"/>
अशा प्रकारे इंदापूरचा अभ्यास हा केवळ एका प्रदेशाच्या महसूल इतिहासापुरता मर्यादित राहत नाही. आरंभीच्या ब्रिटिश जमीन महसूल प्रशासनातील प्रत्यक्ष प्रशासकीय प्रश्न, ग्रामीण समाजाशी संबंधित बदल तसेच भूमिवर्गीकरण आणि सर्वेक्षण पद्धतींच्या विकासाच्या इतिहासासाठी इंदापूर महत्त्वाचा संदर्भ प्रदान करतो.<ref name="Rabitoy1975"/><ref name="Gordon1959"/><ref name="BombayReport1872-73"/>
== ब्रिटिश काळातील महसूल सर्वेक्षण ==
=== प्रारंभीचे प्रयोग आणि समस्या ===
ब्रिटिश सत्तेच्या आरंभीच्या काळात बॉम्बे प्रेसिडेन्सीमध्ये जमीन महसूल प्रशासनाची एकसंध आणि सर्वत्र समान पद्धत तत्काळ विकसित झाली नव्हती. विविध प्रदेशांतील पूर्वीच्या महसूल व्यवस्था, स्थानिक परिस्थिती आणि प्रशासकीय गरजा यांमुळे महसूल आकारणी आणि प्रशासनाच्या प्रत्यक्ष कार्यपद्धतीत फरक दिसून येत होता. इ.स. १८१२ ते १८२० या कालखंडातील बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या जमीन महसूल प्रशासनाचा अभ्यास करताना Neil Rabitoy यांनी औपचारिक महसूलपद्धती आणि प्रत्यक्ष प्रशासनातील परिस्थितीनुरूप उपाय यांतील संबंध अधोरेखित केला आहे.<ref name="Rabitoy1975"/>
Rabitoy यांच्या अभ्यासातून आरंभीच्या ब्रिटिश जमीन महसूल प्रशासनात औपचारिक महसूलपद्धती आणि प्रत्यक्ष प्रशासकीय व्यवहार यांमध्ये काही प्रसंगी फरक दिसून येत असल्याचे स्पष्ट होते. स्थानिक परिस्थिती आणि तात्कालिक प्रशासकीय गरजांनुसार व्यवहार्य उपाय स्वीकारले जात असल्याने घोषित धोरण आणि प्रत्यक्ष अंमलबजावणी यांच्यात अंतर निर्माण होऊ शकत असे.<ref name="Rabitoy1975"/>
त्यामुळे बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील जमीन महसूल प्रशासनाच्या आरंभीच्या विकासाचा विचार केवळ एखाद्या निश्चित प्रशासकीय प्रणालीच्या चौकटीत न करता, विविध प्रशासकीय प्रयोग आणि परिस्थितीनुरूप बदलांच्या प्रक्रियेच्या संदर्भात करता येतो.<ref name="Rabitoy1975"/>
ब्रिटिश काळात जमीन, कृषी उत्पादन आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेशी संबंधित आर्थिक संबंधांमध्येही महत्त्वपूर्ण बदल झाले. Vasant Kaiwar यांनी बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील वसाहतकालीन राज्य, भांडवल आणि कृषक समाज यांच्या परस्परसंबंधांचा अभ्यास करताना ग्रामीण मालमत्ता-संबंध आणि कृषक अर्थव्यवस्थेतील बदलांकडे लक्ष वेधले आहे.<ref name="Kaiwar1994">{{cite journal
|last=Kaiwar
|first=Vasant
|title=The Colonial State, Capital and the Peasantry in Bombay Presidency
|journal=Modern Asian Studies
|volume=28
|issue=4
|year=1994
|pages=793–832
}}</ref>
Kaiwar यांच्या अभ्यासाच्या संदर्भात वसाहतकालीन आर्थिक आणि प्रशासकीय धोरणांचा ग्रामीण समाजातील भूमी, उत्पादन, कर्ज आणि मालमत्तेशी संबंधित संबंधांवर परिणाम झाला. त्यामुळे महसूल प्रशासनातील बदलांचा विचार केवळ करआकारणीच्या दृष्टीने न करता, कृषक समाज आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्थेच्या व्यापक संदर्भातही करता येतो.<ref name="Kaiwar1994"/>
=== इंदापूरमधील अनुभव आणि नवीन सर्वेक्षण पद्धती ===
बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील महसूल सर्वेक्षणाच्या इतिहासात इंदापूरचा अनुभव महत्त्वपूर्ण संदर्भ म्हणून आढळतो. महसूल सर्वेक्षणाच्या पद्धतीचा विकास हा जमिनीचे मापन, शेतनिहाय नोंदणी, भूमिवर्गीकरण आणि महसूल सेटलमेंट यांसारख्या परस्परसंबंधित प्रक्रियांशी संबंधित होता. R. G. Gordon यांच्या ''The Bombay Survey and Settlement Manual: Historical'' या ग्रंथात बॉम्बे प्रांतातील सर्वेक्षण आणि सेटलमेंट पद्धतीच्या ऐतिहासिक विकासाचा आढावा घेण्यात आला आहे.<ref name="Gordon1959"/>
Gordon यांच्या ऐतिहासिक विवेचनात नवीन सर्वेक्षणपद्धतीचा प्रारंभ, तिचा प्रारंभीचा विकास आणि पुढील प्रशासकीय बदलांचा स्वतंत्रपणे विचार करण्यात आला आहे. या व्यापक ऐतिहासिक संदर्भात इंदापूरसारख्या प्रदेशांतील प्रत्यक्ष अनुभवांचे स्थान महत्त्वाचे ठरते.<ref name="Gordon1959"/>
इ.स. १८७२–७३ च्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या प्रशासन अहवालात महसूल सर्वेक्षण आणि भूमिवर्गीकरणाच्या कार्यपद्धतीसंबंधी माहिती उपलब्ध आहे. अहवालात इंदापूरमध्ये Mr. Goldsmid आणि Lieutenant Wingate यांनी स्वीकारलेली भूमिवर्गीकरणाची पद्धत पुढील काळातही चालू ठेवण्यात आल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. अनुभवाच्या आधारे आवश्यक वाटलेल्या मर्यादित सुधारणा करण्यात आल्या होत्या.<ref name="BombayReport1872-73"/>
अहवालानुसार विविध वर्गीकरण पथकांमध्ये मूल्यांकनाच्या निकषांमध्ये एकरूपता राखण्यासाठी विशेष काळजी घेण्यात येत होती. वर्गीकरणाचे कार्य शेतनिहाय केले जात असून प्रत्यक्ष कामाच्या अचूकतेची खात्री करण्यासाठी वरिष्ठ अधिकाऱ्यांकडून तपासणीची व्यवस्था करण्यात आली होती.<ref name="BombayReport1872-73"/>
या नोंदींवरून महसूल सर्वेक्षणाच्या कार्यात मोजणी आणि भूमिवर्गीकरणाशी संबंधित अधिक पद्धतशीर आणि नियंत्रित कार्यपद्धती विकसित करण्यात आली होती, असे दिसून येते. इंदापूरमधील अनुभव या प्रक्रियेच्या इतिहासातील महत्त्वाचा दस्तऐवजी संदर्भ ठरतो.<ref name="BombayReport1872-73"/>
=== इ.स. १८४७ चा संयुक्त अहवाल आणि सर्वेक्षणपद्धती ===
बॉम्बे प्रांतातील महसूल सर्वेक्षणाच्या इतिहासात इ.स. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित प्रशासकीय दस्तऐवजांना विशेष स्थान आहे. महाराष्ट्र शासनाच्या भूमी अभिलेख विभागाने प्रकाशित केलेल्या ''Measurement and Classification Rules of the Deccan, Gujarat, Konkan and Kanara Surveys'' या संग्रहात बॉम्बे सरकारच्या अभिलेखांमधील इ.स. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित निवडक कागदपत्रे आणि नियम समाविष्ट करण्यात आले आहेत.<ref name="LandRecords1975">{{cite book
|author=Maharashtra (India). Land Records Department
|title=Measurement and Classification Rules of the Deccan, Gujarat, Konkan and Kanara Surveys: Selections from the Records of the Bombay Government Papers of the Joint Report of 1847
|location=Bombay
|publisher=Government Press
|year=1975
}}</ref>
या संग्रहातून भूमापन आणि भूमिवर्गीकरणाशी संबंधित प्रशासकीय नियम, संज्ञा आणि कार्यपद्धतींच्या दस्तऐवजी परंपरेचा संदर्भ उपलब्ध होतो. त्यामुळे बॉम्बे प्रांतातील सर्वेक्षण आणि वर्गीकरणाच्या ऐतिहासिक पद्धतींचा अभ्यास करण्यासाठी हे प्रकाशन महत्त्वाचे स्रोतसाहित्य ठरते.<ref name="LandRecords1975"/>
इ.स. १८७२–७३ च्या प्रशासन अहवालातील नोंदींवरून सर्वेक्षण, सेटलमेंट आणि भूमिवर्गीकरणाशी संबंधित पद्धती पुढील काळात प्रशासकीय कार्याचा भाग राहिल्याचे दिसून येते. इंदापूरमध्ये पूर्वी स्वीकारलेल्या भूमिवर्गीकरण पद्धतीच्या पुढील वापराचा उल्लेख या प्रक्रियेच्या सातत्याचा दस्तऐवजी संदर्भ प्रदान करतो.<ref name="BombayReport1872-73"/>
=== सर्वेक्षण आणि महसूल प्रशासनाचा विस्तार ===
बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील महसूल सर्वेक्षणाचा विकास हा प्रारंभीच्या महसूल प्रशासनातील विविध प्रयोगांपासून अधिक पद्धतशीर भूमापन, भूमिवर्गीकरण आणि महसूल सेटलमेंटच्या पद्धतींपर्यंत झालेल्या बदलांच्या प्रक्रियेचा भाग होता. या विकासाचा संबंध प्रशासकीय गरजा, स्थानिक परिस्थिती आणि सर्वेक्षणातून उपलब्ध होणाऱ्या जमिनीसंबंधी माहितीशी होता.<ref name="Rabitoy1975"/><ref name="Gordon1959"/>
इंदापूरमधील अनुभव, इ.स. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित दस्तऐवजी साहित्य आणि त्यानंतरच्या प्रशासन अहवालांतील नोंदी यांच्या आधारे बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील सर्वेक्षण आणि भूमिवर्गीकरणाच्या पद्धतींचा क्रमशः विकास अभ्यासता येतो.<ref name="Gordon1959"/><ref name="BombayReport1872-73"/><ref name="LandRecords1975"/>
== बॉम्बे महसूल सर्वेक्षण ==
=== सर्वेक्षणाचा प्रारंभ आणि विस्तार ===
एकोणिसाव्या शतकाच्या पूर्वार्धात ब्रिटिश प्रशासनास त्यांच्या नियंत्रणाखालील प्रदेशांच्या अंतर्गत सीमा आणि प्रशासकीय विभागांविषयी अधिक तपशीलवार माहितीची आवश्यकता भासू लागली. तपशीलवार महसूल सर्वेक्षणांच्या माध्यमातून विविध प्रशासकीय विभागांचे नकाशीकरण करण्यात आले आणि जमिनीच्या धारणांशी संबंधित अधिक टिकाऊ अभिलेख तयार करण्यात आले.<ref name="Michael2007"/>
बंगाल, बॉम्बे आणि मद्रास या प्रेसिडेन्सींमध्ये महसूल सर्वेक्षणाचे विविध प्रयत्न करण्यात आले होते; तथापि, त्यांची व्याप्ती, अचूकता आणि परिणाम सर्वत्र समान नव्हते. ब्रिटिश प्रशासनाच्या विस्ताराबरोबर अधिक तपशीलवार महसूल सर्वेक्षणांना महत्त्व प्राप्त झाले. या प्रक्रियेमुळे भूभाग, प्रशासकीय विभाग आणि जमिनीच्या धारणांशी संबंधित माहितीचे अधिक पद्धतशीर नोंदणीकरण आणि नकाशीकरण शक्य झाले.<ref name="Michael2007"/>
R. G. Gordon यांच्या ''The Bombay Survey and Settlement Manual: Historical'' या ग्रंथात बॉम्बे प्रांतातील सर्वेक्षण आणि सेटलमेंट व्यवस्थेच्या ऐतिहासिक विकासाचा मागोवा घेण्यात आला आहे. या ग्रंथात नवीन सर्वेक्षणपद्धतीचा प्रारंभ, तिचा विकास आणि इ.स. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित पुढील टप्प्यांचा ऐतिहासिक संदर्भ उपलब्ध आहे.<ref name="Gordon1959"/>
बॉम्बे महसूल सर्वेक्षणाच्या विकासात विविध प्रदेशांतील प्रत्यक्ष अनुभवांच्या आधारे कार्यपद्धतीत बदल आणि सुधारणा करण्यात आल्या. सर्वेक्षण आणि भूमिवर्गीकरणाच्या कामात अचूकता, मूल्यांकनातील एकरूपता आणि वरिष्ठ स्तरावरील तपासणी यांना महत्त्व देण्यात आले होते.<ref name="Gordon1959"/>
=== इंदापूरमधील अनुभव आणि सर्वेक्षणपद्धती ===
बॉम्बे महसूल सर्वेक्षणाच्या इतिहासात इंदापूरचा अनुभव महत्त्वपूर्ण संदर्भ म्हणून आढळतो. इंदापूरमधील सर्वेक्षण आणि महसूल सेटलमेंटच्या अनुभवाशी H. E. Goldsmid आणि Lieutenant Wingate यांची नावे ऐतिहासिक आणि प्रशासकीय स्रोतांमध्ये संबंधित आढळतात.<ref name="LandRevenuePoona">{{cite web
|title=The Land Revenue Administration of Poona
|website=Indira Gandhi National Centre for the Arts
|url=https://ignca.gov.in/Asi_data/25453.pdf
}}</ref>
इ.स. १८७२–७३ च्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या प्रशासन अहवालात इंदापूरमध्ये Mr. Goldsmid आणि Lieutenant Wingate यांनी स्वीकारलेली भूमिवर्गीकरणाची पद्धत पुढील काळातही चालू ठेवण्यात आल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. पुढील अनुभवाच्या आधारे आवश्यक वाटलेल्या मर्यादित सुधारणा करण्यात आल्या होत्या.<ref name="BombayReport1872-73"/>
अहवालानुसार विविध वर्गीकरण पथकांमध्ये मूल्यांकनाच्या निकषांची एकरूपता राखण्यासाठी विशेष काळजी घेण्यात येत होती. वरिष्ठ अधिकाऱ्यांकडून नियमित तपासणी करण्यात येत होती आणि भूमिवर्गीकरणाचे कार्य शेतनिहाय केले जात असे. या पद्धतीत प्रत्येक शेताची सूक्ष्म तपासणी करून वर्गीकरणाचे निष्कर्ष नोंदविण्यावर भर देण्यात आला होता.<ref name="BombayReport1872-73"/>
या संदर्भांवरून इंदापूरमधील अनुभव हा बॉम्बे प्रांतातील भूमिवर्गीकरण आणि महसूल सर्वेक्षणाच्या पद्धतींच्या विकासातील महत्त्वाचा ऐतिहासिक संदर्भ ठरतो.<ref name="BombayReport1872-73"/><ref name="Gordon1959"/>
=== एच. ई. गोल्डस्मिड यांचा संदर्भ ===
बॉम्बे महसूल सर्वेक्षणाच्या इतिहासात H. E. Goldsmid यांचे नाव सर्वेक्षण आणि भूमिवर्गीकरणाच्या प्रशासकीय प्रक्रियेशी संबंधित स्रोतांमध्ये आढळते. पुणे आणि सोलापूर परिसरातील महसूल सर्वेक्षणाच्या प्रारंभीच्या कामाशी त्यांचा संबंध असल्याचे ऐतिहासिक स्रोतांमध्ये नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="LandRevenuePoona"/>
इंदापूरमधील भूमिवर्गीकरणाच्या पद्धतीचा उल्लेख करताना इ.स. १८७२–७३ च्या प्रशासन अहवालात Goldsmid आणि Lieutenant Wingate या दोघांची नावे स्पष्टपणे देण्यात आली आहेत. त्या अहवालानुसार, इंदापूरमध्ये स्वीकारलेली वर्गीकरणपद्धती पुढील काळातही मर्यादित सुधारणांसह सुरू ठेवण्यात आली होती.<ref name="BombayReport1872-73"/>
त्याच पद्धतीत विविध वर्गीकरण पथकांमध्ये मूल्यांकनाच्या निकषांची एकरूपता राखण्याचा प्रयत्न करण्यात आला होता. वरिष्ठ अधिकाऱ्यांकडून नियमित तपासणी आणि शेतनिहाय सूक्ष्म वर्गीकरण ही त्या कार्यपद्धतीची वैशिष्ट्ये होती.<ref name="BombayReport1872-73"/>
उपलब्ध स्रोतांच्या आधारे Goldsmid यांचा संदर्भ मुख्यतः बॉम्बे प्रांतातील सर्वेक्षण आणि भूमिवर्गीकरणाच्या प्रशासकीय इतिहासाच्या संदर्भात देता येतो. त्यांच्या स्वतंत्र वैयक्तिक योगदानाचे अधिक विस्तृत मूल्यमापन करण्यासाठी स्वतंत्र चरित्रात्मक किंवा विशेष ऐतिहासिक स्रोतांची आवश्यकता आहे.
=== सर जॉर्ज विंगेट आणि महसूल सर्वेक्षण ===
बॉम्बे महसूल सर्वेक्षणाच्या इतिहासात Lieutenant Wingate, पुढे Sir George Wingate म्हणून ओळखले गेले, यांचे नाव सर्वेक्षण आणि महसूल सेटलमेंटच्या विकासाशी संबंधित ऐतिहासिक स्रोतांमध्ये आढळते.<ref name="LandRevenuePoona"/><ref name="Gordon1959"/>
पुणे आणि सोलापूर परिसरातील महसूल सर्वेक्षणाच्या प्रारंभीच्या कामाशी Goldsmid आणि Wingate यांचा संबंध होता. इंदापूरमधील सर्वेक्षण आणि सेटलमेंटच्या ऐतिहासिक संदर्भातही Wingate यांच्या कार्याचा उल्लेख आढळतो.<ref name="LandRevenuePoona"/>
इ.स. १८७२–७३ च्या प्रशासन अहवालात इंदापूरमधील भूमिवर्गीकरणाच्या पद्धतीचा उल्लेख करताना Goldsmid आणि Lieutenant Wingate यांची नावे देण्यात आली आहेत. त्या ठिकाणी स्वीकारलेली वर्गीकरणपद्धती पुढील काळातही अनुभवाच्या आधारे मर्यादित सुधारणांसह चालू ठेवण्यात आल्याचे अहवालात नमूद आहे.<ref name="BombayReport1872-73"/>
बॉम्बे प्रांतातील महसूल सर्वेक्षणाच्या व्यापक इतिहासात सर्वेक्षण, भूमिवर्गीकरण आणि महसूल सेटलमेंट या परस्परसंबंधित प्रक्रियांच्या संदर्भात Wingate यांच्या कार्याचा विचार करण्यात येतो. नवीन सर्वेक्षणपद्धतीचा प्रारंभ आणि पुढील विकास या ऐतिहासिक प्रक्रियेच्या संदर्भात त्यांचे नाव विशेषत्वाने आढळते.<ref name="Gordon1959"/>
=== इ.स. १८४७ चा संयुक्त अहवाल आणि नियमपद्धती ===
बॉम्बे प्रांतातील महसूल सर्वेक्षणाच्या इतिहासात इ.स. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित प्रशासकीय दस्तऐवजांना विशेष स्थान आहे. महाराष्ट्र भूमी अभिलेख विभागाने प्रकाशित केलेल्या ''Measurement and Classification Rules of the Deccan, Gujarat, Konkan and Kanara Surveys: Selections from the Records of the Bombay Government Papers of the Joint Report of 1847'' या ग्रंथात त्या अहवालाशी संबंधित निवडक प्रशासकीय कागदपत्रे आणि नियम संकलित करण्यात आले आहेत.<ref name="LandRecords1975"/>
या ग्रंथातील दस्तऐवजी साहित्यामध्ये भूमापन, शेतसीमा, सर्वेक्षण क्रमांक, मोजणी, भूमिवर्गीकरण आणि संबंधित महसूल प्रशासनाशी निगडित संज्ञा व कार्यपद्धतींचा संदर्भ उपलब्ध आहे.<ref name="LandRecords1975"/>
त्यामुळे बॉम्बे प्रांतातील महसूल सर्वेक्षण आणि भूमिवर्गीकरणाच्या ऐतिहासिक पद्धतींचा अभ्यास करताना इ.स. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित हे दस्तऐवजी साहित्य महत्त्वाचे स्रोतसाहित्य ठरते.<ref name="LandRecords1975"/>
=== सर्वेक्षणपद्धतीचा विकास ===
बॉम्बे महसूल सर्वेक्षणाचा विकास हा प्रारंभीच्या विविध महसूल सर्वेक्षणांच्या प्रयत्नांपासून अधिक पद्धतशीर भूमापन, नकाशीकरण, भूमिवर्गीकरण आणि महसूल सेटलमेंटच्या प्रक्रियांकडे झालेल्या ऐतिहासिक विकासाचा भाग होता.<ref name="Michael2007"/><ref name="Gordon1959"/>
इंदापूरमधील अनुभव, भूमिवर्गीकरणाच्या कार्यपद्धतीसंबंधी प्रशासन अहवालातील नोंदी आणि इ.स. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित नियमसाहित्य यांच्या आधारे बॉम्बे प्रांतातील सर्वेक्षणपद्धतीच्या ऐतिहासिक विकासाचा अभ्यास करता येतो.<ref name="BombayReport1872-73"/><ref name="LandRecords1975"/><ref name="Gordon1959"/>
== १८४७ चा संयुक्त अहवाल ==
१८४७ चा संयुक्त अहवाल हा बॉम्बे प्रांतातील महसूल सर्वेक्षण आणि भूमिवर्गीकरणाच्या ऐतिहासिक विकासाशी संबंधित महत्त्वाचा दस्तऐवजी संदर्भ आहे. या अहवालाशी संबंधित बॉम्बे सरकारच्या निवडक अभिलेखांवर आधारित साहित्य पुढे ''Measurement and Classification Rules of the Deccan, Gujarat, Konkan and Kanara Surveys: Selections from the Records of the Bombay Government Papers of the Joint Report of 1847'' या शीर्षकाने प्रकाशित करण्यात आले.<ref name="MeasurementClassificationRules1975">{{cite book
|author=Maharashtra (India). Land Records Department
|title=Measurement and Classification Rules of the Deccan, Gujarat, Konkan and Kanara Surveys: Selections from the Records of the Bombay Government Papers of the Joint Report of 1847
|series=No. DXXXII, New Series
|location=Bombay
|publisher=Government Press
|year=1975
}}</ref>
R. G. Gordon यांच्या ''The Bombay Survey and Settlement Manual: Historical'' या ग्रंथात बॉम्बे सर्वेक्षण आणि सेटलमेंट व्यवस्थेच्या इतिहासातील नवीन पद्धतीचा प्रारंभ आणि तिचा प्रारंभीचा विकास यानंतरचा काळ ''After the Joint Report'' या स्वतंत्र ऐतिहासिक टप्प्याच्या स्वरूपात चर्चिला आहे.<ref name="Gordon1959"/>
त्यामुळे १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित दस्तऐवजी साहित्य आणि त्यानंतरच्या सर्वेक्षण व्यवस्थेचा विकास हे बॉम्बे प्रांतातील महसूल सर्वेक्षणाच्या इतिहासाच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचे संदर्भ ठरतात.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/><ref name="Gordon1959"/>
=== संयुक्त अहवालाचा ऐतिहासिक संदर्भ ===
बॉम्बे प्रांतात महसूल सर्वेक्षणाचा विस्तार होत असताना भूमापन, जमिनीचे वर्गीकरण आणि सर्वेक्षणाशी संबंधित प्रशासकीय कार्यपद्धती विकसित होत होत्या. या प्रक्रियेशी संबंधित नियम आणि दस्तऐवजांचा ऐतिहासिक संदर्भ १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित प्रकाशित संग्रहातून उपलब्ध होतो.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
Gordon यांनी बॉम्बे प्रांतातील सर्वेक्षण आणि सेटलमेंट व्यवस्थेच्या इतिहासाचा मागोवा घेताना नवीन सर्वेक्षणपद्धतीच्या प्रारंभिक विकासानंतरच्या काळालाही स्वतंत्र स्थान दिले आहे. त्यांच्या ग्रंथाच्या रचनेत संयुक्त अहवालानंतरचा काळ सर्वेक्षण व्यवस्थेच्या पुढील ऐतिहासिक विकासाच्या संदर्भात समाविष्ट करण्यात आला आहे.<ref name="Gordon1959"/>
औपनिवेशिक दक्षिण आशियातील महसूल सर्वेक्षणांच्या व्यापक इतिहासाच्या संदर्भात Bernardo A. Michael यांनी तपशीलवार महसूल सर्वेक्षणांमुळे प्रदेशांचे नकाशीकरण आणि मालमत्तेशी संबंधित प्रशासकीय माहितीचे अधिक पद्धतशीर अभिलेखन विकसित झाल्याचे विश्लेषण केले आहे.<ref name="Michael2007"/>
हा व्यापक संदर्भ बॉम्बे प्रांतातील महसूल सर्वेक्षणाच्या ऐतिहासिक प्रक्रियेचे आकलन करण्यासाठी उपयुक्त ठरतो; तथापि, बॉम्बे प्रांतातील विशिष्ट नियम आणि कार्यपद्धतींसाठी स्वतंत्र प्रशासकीय किंवा ऐतिहासिक स्रोत आवश्यक असतात.<ref name="Michael2007"/>
=== भूमापन आणि सर्वेक्षणाशी संबंधित नियम ===
१८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित प्रकाशित दस्तऐवजी संग्रहाच्या शीर्षकावरून दख्खन, गुजरात, कोकण आणि कानारा येथील सर्वेक्षणांशी संबंधित मोजमाप आणि जमिनीच्या वर्गीकरणाच्या नियमांचा ऐतिहासिक संदर्भ उपलब्ध होतो.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
या संग्रहात सर्वेक्षणाशी संबंधित मोजमाप, सीमांकन, भूखंडांची ओळख, सर्वेक्षणीय नोंदी आणि भूमिवर्गीकरण यांसारख्या विषयांशी संबंधित प्रशासकीय संज्ञा व नियमांचा संदर्भ आढळतो.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
महसूल सर्वेक्षणाच्या व्यापक प्रक्रियेत जमिनीचे मापन, तिची ओळख आणि नोंदणी हे परस्परसंबंधित घटक होते. सर्वेक्षणाच्या माध्यमातून भूभागाशी संबंधित माहिती अधिक पद्धतशीर स्वरूपात नोंदविण्याची प्रक्रिया विकसित झाली.<ref name="Michael2007"/>
=== क्षेत्रनिश्चिती आणि भूखंडांचे मोजमाप ===
महसूल सर्वेक्षणात जमिनीच्या क्षेत्रफळाचे मापन आणि भूभागाची ओळख निश्चित करणे या प्रशासकीय प्रक्रियेला महत्त्व प्राप्त झाले. मोजमापाच्या आधारे विशिष्ट भूभागाशी संबंधित सर्वेक्षणीय माहिती नोंदविण्यात येत असे.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
बॉम्बे प्रांतातील सर्वेक्षण आणि सेटलमेंट व्यवस्थेच्या ऐतिहासिक विकासात मोजणी, भूमिवर्गीकरण आणि महसूल सेटलमेंट यांचा परस्परसंबंध दिसून येतो.<ref name="Gordon1959"/>
औपनिवेशिक महसूल सर्वेक्षणांच्या व्यापक संदर्भात मोजमाप आणि नकाशीकरणाच्या प्रक्रियेमुळे प्रशासकीय भूभागाची माहिती अधिक स्पष्ट आणि दस्तऐवजी स्वरूपात उपलब्ध होऊ लागली.<ref name="Michael2007"/>
=== सीमा आणि भूखंडांची ओळख ===
जमिनीच्या सर्वेक्षणात भूभागाच्या सीमा आणि त्याची स्वतंत्र ओळख नोंदविण्याशी संबंधित कार्यपद्धतींना महत्त्व होते. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित प्रकाशित दस्तऐवजी संग्रहात सीमा, मोजमाप आणि सर्वेक्षणीय नोंदींशी संबंधित संज्ञा व नियमांचा संदर्भ उपलब्ध आहे.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
महसूल सर्वेक्षणांच्या व्यापक अभ्यासानुसार तपशीलवार सर्वेक्षण आणि नकाशीकरणामुळे प्रदेशांची अंतर्गत विभागणी आणि मालमत्तेशी संबंधित माहिती अधिक स्पष्टपणे नोंदविण्यास मदत झाली.<ref name="Michael2007"/>
=== जमिनीचे वर्गीकरण ===
महसूल सर्वेक्षणाच्या प्रक्रियेत जमिनीचे वर्गीकरण हा महत्त्वाचा घटक होता. दख्खन, गुजरात, कोकण आणि कानारा येथील सर्वेक्षणांशी संबंधित मोजमाप आणि वर्गीकरण नियमांचा ऐतिहासिक दस्तऐवजी संदर्भ १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित प्रकाशित संग्रहात उपलब्ध आहे.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
बॉम्बे सर्वेक्षण आणि सेटलमेंट व्यवस्थेच्या इतिहासात सर्वेक्षण, जमिनीचे वर्गीकरण आणि महसूल सेटलमेंट या परस्परसंबंधित प्रक्रियांचा विचार करण्यात आला आहे.<ref name="Gordon1959"/>
=== सर्वेक्षण क्रमांक आणि सर्वेक्षणीय नोंदी ===
महसूल सर्वेक्षणाच्या प्रक्रियेत भूभागाची स्वतंत्र ओळख, त्याचे मोजमाप आणि संबंधित नोंदी यांना महत्त्व प्राप्त झाले. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित प्रकाशित दस्तऐवजी साहित्यामध्ये सर्वेक्षण क्रमांक, भूखंड, मोजमाप आणि अभिलेखनाशी संबंधित संज्ञांचा संदर्भ उपलब्ध आहे.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
औपनिवेशिक काळातील महसूल सर्वेक्षणांच्या व्यापक अभ्यासातून सर्वेक्षणीय माहिती आणि नकाशीकरणाच्या माध्यमातून मालमत्तेशी संबंधित अधिक टिकाऊ प्रशासकीय अभिलेख विकसित झाल्याचे दिसून येते.<ref name="Michael2007"/>
=== अभिलेख आणि नकाशे ===
महसूल सर्वेक्षणातून निर्माण होणाऱ्या मोजमापाच्या नोंदी, क्षेत्रीय माहिती आणि नकाशे हे प्रशासकीय अभिलेखांच्या निर्मितीशी संबंधित होते. तपशीलवार सर्वेक्षण आणि नकाशीकरणामुळे भूभाग, प्रशासकीय विभाग आणि मालमत्तेशी संबंधित माहिती अधिक पद्धतशीर स्वरूपात नोंदविणे शक्य झाले.<ref name="Michael2007"/>
१८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित प्रकाशित निवडींमधून सर्वेक्षण, मोजमाप आणि भूमिवर्गीकरणाच्या ऐतिहासिक प्रशासकीय नियमांचा दस्तऐवजी संदर्भ उपलब्ध होतो.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
=== पुढील प्रशासकीय विकास ===
बॉम्बे प्रांतातील महसूल सर्वेक्षणाच्या ऐतिहासिक विकासानंतर महाराष्ट्रातील भूमापन आणि महसूल सर्वेक्षणासाठी स्वतंत्र वैधानिक व प्रशासकीय चौकट विकसित झाली. महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता, १९६६ मध्ये महसूल सर्वेक्षण, सर्वेक्षण क्रमांक, अभिलेख आणि सीमा यांच्याशी संबंधित तरतुदी समाविष्ट करण्यात आल्या आहेत.<ref name="MLRRules1969">{{cite web
|title=The Maharashtra Land Revenue (Revenue Surveys and Sub-Divisions of Survey Number) Rules, 1969
|website=Indian Kanoon
|url=https://indiankanoon.org/doc/81736757/
}}</ref>
त्यानंतरच्या ''The Maharashtra Land Revenue (Revenue Surveys and Sub-Divisions of Survey Number) Rules, 1969'' मध्ये जमिनीचे स्वतंत्र मोजमाप, वर्गीकरण, मूल्यांकन, सर्वेक्षण क्रमांक, मोजमापाच्या नोंदी आणि गावनकाशे यांसंबंधी नियमांची तरतूद करण्यात आली आहे.<ref name="MLRC1966">{{cite web
|title=The Maharashtra Land Revenue Code, 1966
|publisher=Law and Judiciary Department, Government of Maharashtra
|url=https://lj.maharashtra.gov.in/en/document/the-maharashtra-land-revenue-code-1966-text-as-on-2nd-april-2025/
|access-date=2026-09-16
}}</ref>
या आधुनिक वैधानिक चौकटीचा उल्लेख १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी थेट कायदेशीर किंवा संस्थात्मक सातत्य सिद्ध करण्यासाठी नव्हे, तर महाराष्ट्रातील भूमापन आणि महसूल सर्वेक्षणाच्या पुढील प्रशासकीय विकासाच्या संदर्भात करता येतो.<ref name="MLRC1966"/><ref name="MLRRules1969"/>
== भूमापन आणि भूवर्गीकरणाची पद्धत ==
महसूल सर्वेक्षणामध्ये भूमापन, भूखंडांची ओळख, सीमा, क्षेत्रफळाची नोंद आणि जमिनीचे वर्गीकरण या परस्परसंबंधित प्रक्रिया होत्या. बॉम्बे प्रांतातील महसूल सर्वेक्षणाच्या विकासाबरोबर या प्रक्रियांशी संबंधित नियम आणि प्रशासकीय कार्यपद्धती विकसित होत गेल्या. इ.स. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित बॉम्बे सरकारच्या अभिलेखांमधून निवडलेल्या दस्तऐवजांच्या संग्रहात दख्खन, गुजरात, कोकण आणि कानारा येथील सर्वेक्षणांशी संबंधित मोजमाप आणि जमिनीच्या वर्गीकरणाच्या नियमांचा ऐतिहासिक संदर्भ उपलब्ध आहे.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
औपनिवेशिक दक्षिण आशियातील महसूल सर्वेक्षणांच्या व्यापक इतिहासाचा अभ्यास करताना Bernardo A. Michael यांनी तपशीलवार महसूल सर्वेक्षण, नकाशीकरण आणि प्रशासकीय ज्ञाननिर्मिती यांतील संबंधाचे विश्लेषण केले आहे. त्यांच्या अभ्यासानुसार सर्वेक्षणांच्या माध्यमातून प्रदेश, अंतर्गत विभागणी आणि मालमत्तेशी संबंधित माहिती अधिक स्पष्टपणे अभिलेखित करण्यात आली.<ref name="Michael2007"/>
=== भूखंडांची ओळख आणि सर्वेक्षणीय नोंदी ===
महसूल सर्वेक्षणाच्या प्रक्रियेत जमिनीच्या क्षेत्राची ओळख, त्याचे मोजमाप आणि संबंधित माहितीची नोंद या परस्परसंबंधित प्रक्रिया होत्या. सर्वेक्षणाशी संबंधित नियमांमध्ये भूखंड, सीमा, मोजमाप आणि सर्वेक्षणीय नोंदी यांसारख्या विषयांचा संदर्भ आढळतो.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
तपशीलवार महसूल सर्वेक्षण आणि नकाशीकरणाच्या माध्यमातून भूभागाशी संबंधित प्रशासकीय माहिती अधिक पद्धतशीर स्वरूपात उपलब्ध होऊ लागली. या प्रक्रियेमुळे भूभागाची ओळख, प्रशासकीय विभागणी आणि मालमत्तेशी संबंधित अभिलेख यांमध्ये अधिक निकटचा संबंध निर्माण झाला.<ref name="Michael2007"/>
=== मोजमाप आणि क्षेत्रफळाची नोंद ===
भूमापन हा महसूल सर्वेक्षणातील मूलभूत घटक होता. जमिनीच्या क्षेत्रफळाशी संबंधित माहिती तयार करण्यासाठी प्रत्यक्ष क्षेत्रीय मोजणी आणि संबंधित नोंदींची प्रक्रिया वापरण्यात येत असे. मोजमाप, सीमा आणि सर्वेक्षणीय नोंदी यांचा संबंध महसूल सर्वेक्षणाच्या प्रशासकीय कार्याशी जोडलेला होता.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
बॉम्बे प्रांतातील सर्वेक्षण आणि सेटलमेंट व्यवस्थेच्या ऐतिहासिक विकासात मोजणी, भूमिवर्गीकरण आणि महसूल सेटलमेंट या परस्परसंबंधित प्रक्रियांचा विकास झाला.<ref name="Gordon1959"/>
महसूल सर्वेक्षणांच्या व्यापक इतिहासात तपशीलवार मोजमाप आणि नकाशीकरणामुळे प्रदेशांशी संबंधित प्रशासकीय माहितीचे अधिक पद्धतशीर अभिलेखन शक्य झाले.<ref name="Michael2007"/>
=== सर्वेक्षणाच्या कार्यपद्धतीतील सुसंगती ===
महसूल सर्वेक्षणाचा विस्तार होत असताना विविध प्रदेशांतील सर्वेक्षण आणि वर्गीकरणाच्या कार्यपद्धतींशी संबंधित अनुभवांच्या आधारे प्रशासकीय पद्धती विकसित होत गेल्या. इ.स. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित प्रकाशित दस्तऐवजी साहित्य या ऐतिहासिक प्रक्रियेच्या अभ्यासासाठी महत्त्वाचा संदर्भ प्रदान करते.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
इ.स. १८७२–७३ च्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या प्रशासन अहवालात सर्वेक्षण आणि भूमिवर्गीकरणाच्या कार्यपद्धतींमध्ये अनुभवाच्या आधारे करण्यात आलेल्या बदलांचा उल्लेख आहे. अहवालात विविध वर्गीकरण पथकांमध्ये मूल्यांकनाच्या निकषांमध्ये एकरूपता राखण्यासाठी विशेष काळजी घेण्यात येत असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.
=== भूवर्गीकरण ===
भूमापनाबरोबर जमिनीचे वर्गीकरण हा महसूल सर्वेक्षणातील एक महत्त्वाचा घटक होता. जमिनीच्या मोजमापाशी आणि तिच्या विविध वैशिष्ट्यांच्या परीक्षणाशी संबंधित माहितीच्या आधारे वर्गीकरणाची प्रक्रिया विकसित करण्यात आली. इ.स. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित प्रकाशित दस्तऐवजी संग्रहात दख्खन, गुजरात, कोकण आणि कानारा येथील मोजमाप आणि जमिनीच्या वर्गीकरणाशी संबंधित नियमांचा ऐतिहासिक संदर्भ उपलब्ध आहे.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
बॉम्बे सर्वेक्षण आणि सेटलमेंट व्यवस्थेच्या इतिहासात सर्वेक्षण, जमिनीचे वर्गीकरण आणि महसूल सेटलमेंट यांचा परस्परसंबंध आढळतो.<ref name="Gordon1959"/>
=== जमिनीच्या वैशिष्ट्यांचे परीक्षण ===
जमिनीच्या वर्गीकरणाच्या प्रक्रियेत प्रत्यक्ष क्षेत्रीय परीक्षणाला महत्त्व होते. इ.स. १८७२–७३ च्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या प्रशासन अहवालात वर्गीकरणाच्या कामात प्रत्येक शेताचे स्वतंत्रपणे परीक्षण करण्यात येत असल्याचा संदर्भ आढळतो.
अहवालात इंदापूर येथे Goldsmid आणि Lieutenant Wingate यांनी स्वीकारलेली वर्गीकरणाची पद्धत पुढील काळातही अनुभवाच्या आधारे मर्यादित बदलांसह सुरू ठेवण्यात आल्याचे नमूद आहे. विविध वर्गीकरण पथकांमध्ये मूल्यांकनाच्या निकषांची एकरूपता राखण्यासाठी प्रयत्न करण्यात येत होते आणि कामाच्या तपासणीसाठी वरिष्ठ अधिकाऱ्यांची भूमिका होती.
=== भूवर्गीकरण आणि महसूल मूल्यांकन ===
जमिनीचे वर्गीकरण आणि महसूल सेटलमेंट यांचा ऐतिहासिकदृष्ट्या निकटचा संबंध होता. भूमापनातून जमिनीच्या क्षेत्रफळाशी आणि ओळखीशी संबंधित माहिती उपलब्ध होत असताना, वर्गीकरणाच्या प्रक्रियेत जमिनीच्या संबंधित वैशिष्ट्यांचा विचार करण्यात येत असे. या प्रक्रियांशी संबंधित माहिती महसूल प्रशासनाच्या पुढील कार्यासाठी उपयोगी पडत असे.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/><ref name="Gordon1959"/>
इंदापूरमधील वर्गीकरणाच्या कार्यपद्धतीचा उल्लेख इ.स. १८७२–७३ च्या प्रशासन अहवालात आढळतो. Goldsmid आणि Lieutenant Wingate यांनी स्वीकारलेली पद्धत पुढील काळात अनुभवाच्या आधारे मर्यादित बदलांसह वापरात राहिल्याचे त्या अहवालात नमूद आहे.
=== अभिलेख आणि नकाशीकरण ===
महसूल सर्वेक्षणातून मोजमाप, भूभाग आणि प्रशासकीय विभागांशी संबंधित माहितीचे अभिलेखन करण्यात येत असे. तपशीलवार सर्वेक्षण आणि नकाशीकरणामुळे प्रदेशाची अंतर्गत रचना आणि मालमत्तेशी संबंधित माहिती अधिक स्पष्टपणे नोंदविण्याची प्रक्रिया विकसित झाली.<ref name="Michael2007"/>
बॉम्बे प्रांतातील सर्वेक्षणाशी संबंधित दस्तऐवजी परंपरेत मोजमाप, भूमिवर्गीकरण आणि सर्वेक्षणीय नोंदी यांसंबंधी नियम आणि प्रशासकीय कार्यपद्धतींचा संदर्भ उपलब्ध आहे. इ.स. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित प्रकाशित संग्रह या ऐतिहासिक दस्तऐवजी परंपरेच्या अभ्यासासाठी स्रोतसाहित्य प्रदान करतो.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
अशा प्रकारे बॉम्बे प्रांतातील महसूल सर्वेक्षणाच्या प्रक्रियेत भूमापन, भूखंडांची ओळख, मोजमाप, वर्गीकरण आणि अभिलेखन हे परस्परसंबंधित घटक होते. या प्रक्रियांचा विकास महसूल प्रशासन आणि सर्वेक्षण व्यवस्थेच्या व्यापक ऐतिहासिक परिवर्तनाशी संबंधित होता.<ref name="Gordon1959"/><ref name="Michael2007"/>
== मोजमापाची एकके ==
भारतातील भूमापनाच्या ऐतिहासिक पद्धतींमध्ये स्थानिक आणि प्रादेशिक मोजमाप एककांचा वापर होत असे. या एककांचे स्वरूप सर्व प्रदेशांत एकसारखे नव्हते. स्थानिक प्रथा, प्रशासकीय परंपरा आणि महसूल व्यवस्थेनुसार मोजमापाच्या एककांमध्ये फरक आढळत असे. महसूल सर्वेक्षणाच्या अधिक पद्धतशीर विकासाबरोबर मोजणीच्या कार्यपद्धती आणि एककांमध्ये प्रशासकीय सुसंगती आणण्याचे प्रयत्न करण्यात आले.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
भारतामध्ये विविध स्थानिक मापपद्धती प्रचलित असल्यामुळे त्यांच्या प्रमाणात प्रदेशानुसार फरक होता. विसाव्या शतकाच्या प्रारंभी भारतातील वजन आणि मापपद्धतींचा विचार करताना विविध स्थानिक मापपद्धतींच्या अस्तित्वाची नोंद करण्यात आली होती.<ref name="Silberrad1922">{{cite journal
|last=Silberrad
|first=C. A.
|title=The Weights and Measures of India
|journal=Nature
|volume=110
|date=2 September 1922
|pages=325–329
|url=https://www.nature.com/articles/110325a0
|access-date=2026-09-01
}}</ref>
=== पारंपरिक आणि प्रादेशिक मोजमाप पद्धती ===
पारंपरिक भूमापन पद्धतींमध्ये स्थानिक पातळीवर रूढ असलेल्या विविध एककांचा वापर होत असे. जमिनीच्या मोजमापाशी संबंधित एककांमध्ये प्रदेशानुसार फरक असल्यामुळे समान नावाच्या एककाचे प्रमाणही सर्व भागांत एकसारखे असेलच असे नव्हते. भारतातील ऐतिहासिक वजन आणि मापपद्धतींच्या अभ्यासातून स्थानिक आणि प्रादेशिक विविधतेचे स्वरूप दिसून येते.<ref name="Silberrad1922"/>
महसूल सर्वेक्षणाच्या पद्धती विकसित होत असताना स्थानिक मोजमाप पद्धतींबरोबर अधिक प्रमाणित सर्वेक्षणीय एककांचा वापर वाढला. १८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित नियमांच्या संकलनात दख्खन, गुजरात, कोकण आणि कानारा येथील महसूल सर्वेक्षणासाठी वापरल्या जाणाऱ्या मोजमाप आणि भूवर्गीकरणाच्या कार्यपद्धतींचा दस्तऐवजी आधार उपलब्ध आहे.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
=== स्थानिक मोजमाप एकके आणि प्रादेशिक फरक ===
भारतातील पारंपरिक भूमापन पद्धतींमध्ये स्थानिक एककांची विविधता हा महत्त्वाचा घटक होता. वेगवेगळ्या प्रदेशांमध्ये जमीन मोजण्यासाठी भिन्न एकके वापरली जात असल्याने महसूल आणि भूमिअभिलेख व्यवस्थेत मोजमापाचे प्रमाण स्पष्टपणे निश्चित करणे आवश्यक ठरले.<ref name="Silberrad1922"/>
महाराष्ट्रातील भूमापनाच्या ऐतिहासिक संदर्भात महाराष्ट्र शासनाच्या भूमिअभिलेख विभागाने महसूली मोजणीसाठी वापरल्या गेलेल्या विविध एककांची माहिती दिली आहे. विभागाच्या माहितीनुसार, जुन्या मुंबई इलाख्यातील तसेच मराठवाडा आणि विदर्भातील महसूली मोजणीच्या पद्धतींमध्ये क्षेत्रफळ नोंदविण्यासाठी एकर आणि त्याच्या उपविभागांचा वापर करण्यात आला होता.<ref name="MaharashtraLandRecordsMeasurement">{{cite web
|title=भूमि अभिलेख विभाग
|website=भूमि अभिलेख – महाराष्ट्र भूमी अभिलेख विभाग
|publisher=Government of Maharashtra
|url=https://bhumiabhilekh.maharashtra.gov.in/
|language=mr
|access-date=2026-09-16
}}</ref>
=== मोजमापाचे प्रशासकीय मानकीकरण ===
महसूल सर्वेक्षणाच्या विस्ताराबरोबर भूमापनाची प्रक्रिया अधिक प्रमाणित करण्याची आवश्यकता निर्माण झाली. मोजणीची एकके, सर्वेक्षणाच्या कार्यपद्धती आणि क्षेत्रफळ नोंदविण्याच्या पद्धती यांमध्ये प्रशासकीय सुसंगती आणण्याच्या प्रक्रियेला महसूल सर्वेक्षणाच्या विकासात महत्त्व प्राप्त झाले.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
महाराष्ट्रातील भूमापनाच्या इतिहासाविषयी भूमिअभिलेख विभागाने दिलेल्या माहितीनुसार महसूली मोजणीमध्ये विशिष्ट लांबीच्या साखळीचा वापर करण्यात येत असे. जुन्या मुंबई इलाख्यातील तसेच मराठवाडा आणि विदर्भातील अनेक भागांत क्षेत्रफळाच्या मोजणीसाठी एकर आणि गुंठा ही एकके प्रचलित होती. पुढे दशमान पद्धतीच्या वापरामुळे शेतजमिनीचे क्षेत्र हेक्टर आणि आर या एककांमध्ये नोंदविले जाऊ लागले.<ref name="MaharashtraLandRecordsMeasurement"/>
=== गुंठा ===
गुंठा हे महाराष्ट्रातील महसूली भूमापनाच्या संदर्भात वापरले जाणारे क्षेत्रफळाचे एकक आहे. महाराष्ट्र भूमिअभिलेख विभागाच्या माहितीनुसार, जुन्या मुंबई इलाख्यातील, मराठवाड्यातील आणि विदर्भातील महसूली मोजणीमध्ये एक एकराचे ४० गुंठ्यांमध्ये विभाजन करण्यात आले असून, एक गुंठा हा एका चौरस साखळीच्या बरोबरीचा मानला जातो. त्याचे क्षेत्रफळ १,०८९ चौरस फूट आहे.<ref name="MaharashtraLandRecordsMeasurement"/>
बॉम्बे प्रांतातील मोजमाप पद्धतीशी संबंधित कायदेशीर नोंदींमध्येही गुंठ्याचा क्षेत्रफळाच्या एकक म्हणून उल्लेख आढळतो. ''The Bombay Weights and Measures Act, 1932'' मध्ये गुंठा हा १२१ चौरस यार्ड क्षेत्रफळाचा एकक म्हणून नमूद करण्यात आला होता. त्याच संदर्भात एक एकर ४,८४० चौरस यार्ड इतका असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="BombayWeightsMeasures1932">{{cite web |title=The Bombay Weights and Measures Act, 1932 |website=Indian Kanoon |url=https://indiankanoon.org/doc/140283567/ |access-date=2026-09-01}}</ref>
महसूल सर्वेक्षणाशी संबंधित ऐतिहासिक प्रकाशनांमध्येही ''gunthas'' हा शब्द क्षेत्रफळाच्या मोजणीशी संबंधित एकक म्हणून आढळतो. त्यामुळे गुंठ्याचा वापर महसूली भूमापनाच्या ऐतिहासिक पद्धतीशी संबंधित असल्याचे दिसून येते.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
तथापि, ''गुंठा'', ''gunta'' किंवा ''guntha'' या शब्दाच्या व्युत्पत्तीबाबत उपलब्ध स्रोतांच्या आधारे निश्चित निष्कर्ष काढणे शक्य नाही. स्वतंत्र आणि विश्वसनीय भाषिक किंवा ऐतिहासिक स्रोतांशिवाय या शब्दाची उत्पत्ती, त्याचा निश्चित कालखंड किंवा एखाद्या विशिष्ट मोजणीच्या उपकरणाशी त्याचा संबंध निश्चितपणे सांगता येत नाही. त्यामुळे या लेखात गुंठा या शब्दाच्या व्युत्पत्तीबाबत कोणताही निश्चित दावा करण्यात आलेला नाही.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
=== आधुनिक मोजमाप पद्धतीकडे संक्रमण ===
महाराष्ट्रातील भूमिअभिलेख व्यवस्थेत ऐतिहासिक महसूली मोजणीसाठी एकर आणि गुंठा यांसारख्या एककांचा वापर होत असताना पुढे दशमान पद्धतीच्या अंमलबजावणीमुळे क्षेत्रफळाच्या नोंदीत हेक्टर आणि आर या एककांचा वापर वाढला. भूमिअभिलेख विभागाच्या माहितीनुसार शेतजमिनीचे क्षेत्र प्रचलित पद्धतीनुसार हेक्टर आणि आरमध्ये नोंदविले जाते, तर अकृषिक जमिनीचे क्षेत्र चौरस मीटरमध्ये दर्शविले जाते.<ref name="MaharashtraLandRecordsMeasurement"/><ref name="MaharashtraLandRecordsUnit">{{cite web
|title=गाव नमुना सातवर नमूद ‘क्षेत्र, एकक व आकारणी’ म्हणजे काय?
|website=महाराष्ट्र भूमी अभिलेख विभाग
|publisher=Government of Maharashtra
|url=https://bhumiabhilekh.maharashtra.gov.in/
|language=mr
|access-date=2026-09-16
}}</ref>
अशा प्रकारे महाराष्ट्रातील भूमापनाच्या एककांचा इतिहास हा स्थानिक आणि प्रादेशिक मापपद्धतींपासून अधिक प्रमाणित महसूली सर्वेक्षणीय पद्धतीकडे, आणि पुढे दशमान पद्धतीवर आधारित आधुनिक मोजमाप व्यवस्थेकडे झालेल्या संक्रमणाशी संबंधित आहे.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/><ref name="MaharashtraLandRecordsMeasurement"/>
== नकाशे आणि भूमिअभिलेख ==
भूमापन आणि महसूल सर्वेक्षणाच्या प्रक्रियेत नकाशे, सीमा निश्चिती आणि अभिलेखीय नोंदी यांना महत्त्वाचे स्थान प्राप्त झाले. महसूल सर्वेक्षणाचा उद्देश केवळ जमिनीचे क्षेत्रफळ निश्चित करणे इतकाच मर्यादित नव्हता. भूखंडांची ओळख, त्यांचे स्थान आणि सीमा, क्षेत्रफळ, जमिनीचे वर्गीकरण आणि महसूल प्रशासनासाठी आवश्यक माहिती यांची नोंद करणे हाही या प्रक्रियेचा महत्त्वाचा भाग होता.<ref name="Michael2007"/>
१८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित निवडक नियमांच्या प्रकाशित संकलनातून दख्खन, गुजरात, कोकण आणि कानारा येथील महसूल सर्वेक्षणात मोजमाप आणि जमिनीच्या वर्गीकरणाशी संबंधित कार्यपद्धतींचा दस्तऐवजी आधार उपलब्ध होतो.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
=== गाव नकाशा ===
महसूल सर्वेक्षणाच्या प्रक्रियेत स्थानिक भूभागाचे सर्वेक्षण करून त्याचे नकाशात्मक प्रतिनिधित्व तयार करण्यात आले. अशा नकाशांमुळे भूखंडांचे स्थान, त्यांचे परस्पर संबंध आणि सीमांशी संबंधित माहिती दृश्य स्वरूपात नोंदविणे शक्य झाले. औपनिवेशिक दक्षिण आशियातील महसूल सर्वेक्षणांचा अभ्यास करताना सर्वेक्षण, नकाशांकन आणि प्रशासकीय ज्ञाननिर्मिती यांच्यातील संबंध महत्त्वाचा असल्याचे दिसून येते.<ref name="Michael2007"/>
तपशीलवार महसूल सर्वेक्षणांमुळे प्रदेश आणि त्यातील भूखंडांशी संबंधित माहिती अधिक पद्धतशीर स्वरूपात अभिलेखित करण्यात आली. नकाशे आणि संबंधित सर्वेक्षणीय नोंदी यांमधून भूभागाची प्रशासकीय ओळख अधिक स्पष्ट करण्यास मदत झाली.<ref name="Michael2007"/>
=== सीमा निश्चिती ===
भूमापन प्रक्रियेत जमिनीच्या सीमा निश्चित करणे हा महत्त्वाचा घटक होता. भूखंडांची स्वतंत्र ओळख निर्माण करणे, त्यांचे क्षेत्रफळ निश्चित करणे आणि संबंधित प्रशासकीय नोंदी तयार करणे यासाठी सीमांशी संबंधित माहिती आवश्यक होती.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
१८४७ च्या संयुक्त अहवालाशी संबंधित प्रकाशित नियमसंग्रहात मोजमाप आणि जमिनीच्या वर्गीकरणाशी संबंधित विविध नियम व कार्यपद्धतींचा दस्तऐवजी आधार उपलब्ध आहे. त्यामुळे महसूल सर्वेक्षणातील मोजणी, भूखंडांची ओळख आणि प्रशासकीय नोंदी यांच्यातील संबंध समजून घेण्यासाठी हा स्रोत महत्त्वाचा ठरतो.<ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
तथापि, प्रत्येक कालखंडात किंवा सर्व प्रदेशांत एकसारखी सर्वेक्षणपद्धती वापरली गेली होती, असा व्यापक निष्कर्ष स्वतंत्र तुलनात्मक ऐतिहासिक स्रोतांशिवाय काढता येत नाही.
=== भूमिअभिलेखांची निर्मिती ===
महसूल सर्वेक्षणाच्या प्रक्रियेत भूखंडांची ओळख, त्यांचे मोजमाप आणि नकाशात्मक नोंद यांमधून भूमिअभिलेखीय माहितीच्या निर्मितीला आधार मिळाला. सर्वेक्षणीय एकके, क्षेत्रफळाशी संबंधित नोंदी आणि नकाशे यांमुळे जमिनीच्या प्रशासकीय व्यवस्थापनासाठी अधिक संरचित माहिती उपलब्ध होऊ लागली.<ref name="Michael2007"/><ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
औपनिवेशिक दक्षिण आशियातील महसूल सर्वेक्षणांच्या अभ्यासातून सर्वेक्षण ही प्रक्रिया केवळ तांत्रिक मोजणीपुरती मर्यादित नसून भूभाग, मालमत्ता आणि प्रशासकीय माहिती यांना अधिक स्पष्ट स्वरूप देणाऱ्या प्रक्रियेशी संबंधित असल्याचे दिसून येते.<ref name="Michael2007"/>
बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील महसूल प्रशासनाच्या इतिहासाचा अभ्यास करणाऱ्या संशोधनात महसूल व्यवस्था आणि प्रत्यक्ष प्रशासकीय कार्यपद्धती यांच्यातील संबंधांवर भर देण्यात आला आहे. त्यामुळे भूमीशी संबंधित अभिलेखांची निर्मिती आणि वापर यांचा अभ्यास व्यापक महसूल प्रशासनाच्या संदर्भात करणे आवश्यक ठरते.<ref name="Rabitoy1975"/><ref name="Kaiwar1994"/>
=== नकाशे, नोंदी आणि महसूल प्रशासन ===
नकाशे, सीमा निश्चिती आणि अभिलेखीय नोंदी हे महसूल सर्वेक्षणातील परस्परपूरक घटक होते. भूमापनातून प्राप्त झालेली माहिती नकाशे आणि विविध सर्वेक्षणीय नोंदींमध्ये समाविष्ट करण्यात येत असल्याने भूखंडांशी संबंधित माहिती अधिक संघटित स्वरूपात उपलब्ध झाली.<ref name="Michael2007"/><ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
या प्रक्रियेमुळे भूभागाची ओळख, त्याचे क्षेत्रफळ, स्थान आणि प्रशासकीय नोंदी यांच्यात अधिक निकटचा संबंध निर्माण झाला. त्यामुळे नकाशे आणि भूमिअभिलेख हे केवळ सर्वेक्षणाचे तांत्रिक परिणाम न राहता महसूल प्रशासनाच्या व्यापक अभिलेखीय रचनेचा भाग बनले.<ref name="Michael2007"/><ref name="Rabitoy1975"/>
अशा प्रकारे भूमापन, नकाशांकन आणि अभिलेखन या परस्परसंबंधित प्रक्रियांमधून जमिनीशी संबंधित माहितीचे अधिक पद्धतशीर आणि प्रशासकीयदृष्ट्या उपयोगी स्वरूप विकसित झाले. बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील महसूल सर्वेक्षणाच्या व्यापक इतिहासात या प्रक्रियेला भूमी, महसूल आणि प्रशासकीय ज्ञान यांच्या संबंधातील महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त झाले.<ref name="Michael2007"/><ref name="MeasurementClassificationRules1975"/>
== कायदे आणि संस्थात्मक विकास ==
महाराष्ट्रातील भूमापन, महसूल सर्वेक्षण आणि भूमिअभिलेख व्यवस्थेचा विकास हा केवळ प्रशासकीय कार्यपद्धतींमधील बदलांपुरता मर्यादित राहिला नाही. कालांतराने सर्वेक्षण, जमीन महसूल, भूमीवरील हक्क आणि अभिलेख यांच्या व्यवस्थापनाशी संबंधित कार्यांना कायदेशीर आणि संस्थात्मक चौकट प्राप्त झाली. त्यामुळे महसूल प्रशासनाच्या ऐतिहासिक विकासाचा विचार करताना सर्वेक्षण पद्धती आणि तिची वैधानिक व संस्थात्मक रचना यांचा परस्परसंबंध महत्त्वाचा ठरतो.<ref name="MLRC1966"/>
=== बॉम्बे काळातील कायदेशीर चौकट ===
ब्रिटिश काळातील बॉम्बे प्रेसिडेन्सीमध्ये महसूल प्रशासन आणि जमीन महसूल व्यवस्थेचा विकास विविध कायदे, नियम, प्रशासकीय सूचना आणि सर्वेक्षणाशी संबंधित कार्यपद्धती यांच्या आधारे झाला. या व्यवस्थेच्या ऐतिहासिक विकासाचा अभ्यास करताना प्रशासकीय अहवाल, महसूल सर्वेक्षणाशी संबंधित नियमसंग्रह आणि संबंधित कायदे यांचा एकत्रित विचार आवश्यक ठरतो.
बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील महसूल सर्वेक्षणाच्या विस्ताराबरोबर सर्वेक्षण, जमिनीचे वर्गीकरण, महसूल निर्धारण आणि अभिलेखीय नोंदी यांसंबंधीच्या कार्यपद्धती अधिक संस्थात्मक स्वरूपात विकसित होत गेल्या. तथापि, विविध कालखंडांतील कायदे आणि प्रशासकीय तरतुदींचा परिणाम सर्व प्रदेशांत किंवा सर्व परिस्थितींमध्ये समान होता, असा व्यापक निष्कर्ष स्वतंत्र कायदे आणि प्रशासकीय दस्तऐवजांच्या तुलनात्मक अभ्यासाशिवाय काढता येत नाही.
=== Bombay Land Revenue Code, 1879 ===
''Bombay Land Revenue Code, 1879'' हा बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील जमीन आणि जमीन महसूल व्यवस्थेच्या कायदेशीर चौकटीच्या ऐतिहासिक विकासातील एक महत्त्वपूर्ण टप्पा होता. या संहितेमुळे महसूल प्रशासनाशी संबंधित विविध विषयांना अधिक औपचारिक वैधानिक चौकट प्राप्त झाली.
महसूल प्रशासनाच्या संदर्भात सर्वेक्षण, जमिनीशी संबंधित प्रशासकीय कार्यवाही, महसूल आकारणी आणि अभिलेखीय नोंदी या विषयांचा कायदेशीर व प्रशासकीय व्यवस्थेशी संबंध निर्माण झाला. त्यामुळे पूर्वी विकसित झालेल्या महसूल सर्वेक्षणाच्या पद्धतींचा विचार पुढील संस्थात्मक आणि वैधानिक विकासाच्या संदर्भात करणे आवश्यक ठरते.
या ऐतिहासिक कालखंडाशी संबंधित विशिष्ट कायदेशीर तरतुदी किंवा त्यांच्या परिणामांबाबतचे तपशील मूळ अधिनियम किंवा अन्य विश्वसनीय प्राथमिक स्रोतांच्या आधारे निश्चित करणे आवश्यक आहे. त्यामुळे संबंधित प्राथमिक कायदेपुस्तकाची स्वतंत्र पडताळणी झाल्यानंतरच विशिष्ट कलमांचा सविस्तर उल्लेख करणे उचित ठरते.
=== महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता, १९६६ ===
महाराष्ट्र राज्यातील जमीन आणि जमीन महसूलासंबंधी कायद्यांचे एकीकरण आणि सुधारणा करण्याच्या उद्देशाने ''महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता, १९६६'' लागू करण्यात आली. संहितेच्या दीर्घ शीर्षकानुसार तिचा उद्देश महाराष्ट्र राज्यातील जमीन आणि जमीन महसूलासंबंधी कायद्यांचे एकीकरण व सुधारणा करणे हा आहे.<ref name="MLRC1966"/>
संहितेमध्ये महसूल प्रशासन, महसूल सर्वेक्षण आणि जमिनीशी संबंधित अभिलेखीय व्यवस्थेला कायदेशीर चौकट प्रदान करण्यात आली आहे. महसूल सर्वेक्षण, जमिनीचे मोजमाप आणि वर्गीकरण तसेच सर्वेक्षणाशी संबंधित अभिलेखांच्या निर्मिती आणि व्यवस्थापनाशी संबंधित तरतुदी आधुनिक महसूल प्रशासनाचा भाग आहेत.<ref name="MLRCIndiaCode">{{cite web
|title=The Maharashtra Land Revenue Code, 1966
|website=India Code
|publisher=Government of India
|url=https://www.indiacode.nic.in/handle/123456789/15974
|access-date=2026-09-01
}}</ref>
संहितेअंतर्गत सर्वेक्षण क्रमांक आणि त्यांच्या उपविभागांशी संबंधित अभिलेखीय नोंदींचीही तरतूद करण्यात आली आहे. त्यामुळे भूमापन, सर्वेक्षणीय ओळख, जमिनीचे विभाजन आणि संबंधित अभिलेख यांना आधुनिक महसूल प्रशासनाच्या वैधानिक चौकटीत स्थान प्राप्त झाले.<ref name="MLRC1966"/>
=== भूमापन, सर्वेक्षण आणि अभिलेख ===
महाराष्ट्र जमीन महसूल संहितेअंतर्गत महसूल सर्वेक्षणाची प्रक्रिया भूमापन आणि भूमिअभिलेख व्यवस्थेशी निकटपणे संबंधित आहे. महसूल सर्वेक्षण, जमिनीचे मोजमाप आणि वर्गीकरण, सर्वेक्षण क्रमांक आणि संबंधित अभिलेख यांसाठी कायदेशीर व प्रशासकीय चौकट उपलब्ध आहे.<ref name="MLRCIndiaCode"/>
महाराष्ट्राच्या भूमिअभिलेख विभागाच्या संस्थात्मक कार्यामध्ये भूमापन, महसूल सर्वेक्षण आणि संबंधित अभिलेखीय व्यवस्थेचे महत्त्वपूर्ण स्थान आहे. विभागाच्या कार्याशी संबंधित कायदे आणि नियमांच्या चौकटीत भूमापन आणि जमिनीशी संबंधित अभिलेखांचे प्रशासन केले जाते.<ref name="MLRCIndiaCode">{{cite web
|title=The Maharashtra Land Revenue Code, 1966
|website=India Code
|publisher=Government of India
|url=https://www.indiacode.nic.in/handle/123456789/15974
|access-date=2026-09-01
}}</ref><ref name="MaharashtraLandRecordsActs">{{cite web
|title=अधिनियम
|website=भूमि अभिलेख विभाग, महाराष्ट्र शासन
|publisher=Government of Maharashtra
|url=https://bhumiabhilekh.maharashtra.gov.in/ActsAndRules/acts_list_view
|language=mr
|access-date=2026-09-01
}}</ref>
अशा प्रकारे ब्रिटिशकालीन महसूल प्रशासनातील सर्वेक्षण पद्धतींपासून पुढे कायदेशीर संहिताकरण आणि आधुनिक राज्यस्तरीय महसूल प्रशासनापर्यंत झालेला विकास हा भूमापन, महसूल सर्वेक्षण आणि भूमिअभिलेख यांच्या संस्थात्मक परिवर्तनाचा महत्त्वपूर्ण भाग ठरला.<ref name="MLRC1966"/>
== आधुनिक भूमिअभिलेख व्यवस्था ==
=== महाराष्ट्रातील भूमिअभिलेख ===
महाराष्ट्रातील आधुनिक भूमिअभिलेख व्यवस्थेची कायदेशीर चौकट प्रामुख्याने ''महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता, १९६६'' आणि त्याअंतर्गत विकसित झालेल्या महसूल सर्वेक्षण व अभिलेखीय व्यवस्थेशी संबंधित आहे.<ref name="MLRC1966"/>
महाराष्ट्र जमीन महसूल संहितेत महसूल सर्वेक्षण, सर्वेक्षण क्रमांक व त्यांचे उपविभाग तसेच जमिनीशी संबंधित महसूल अभिलेखांच्या व्यवस्थापनासाठी तरतुदी करण्यात आल्या आहेत. महसूल सर्वेक्षण, जमिनीचे मोजमाप व वर्गीकरण आणि सर्वेक्षणीय अभिलेखांच्या निर्मितीशी संबंधित प्रक्रिया आधुनिक महसूल प्रशासनाच्या कायदेशीर चौकटीचा भाग आहेत.<ref name="MLRC1966"/>
जमिनीशी संबंधित हक्कांच्या नोंदी आणि इतर महसूल अभिलेखांच्या देखभालीसंबंधीही कायदेशीर व प्रशासकीय तरतुदी अस्तित्वात आहेत. त्यामुळे भूमापन, महसूल सर्वेक्षण आणि जमिनीशी संबंधित अभिलेखीय नोंदी हे आधुनिक महसूल प्रशासनातील परस्परसंबंधित घटक आहेत.<ref name="MLRC1966"/>
महाराष्ट्राच्या भूमी अभिलेख विभागाच्या संस्थात्मक कार्यामध्ये भूमापन आणि संबंधित अभिलेखीय व्यवस्थेचे महत्त्वपूर्ण स्थान आहे. विभागाच्या कार्याशी संबंधित कायदे व नियमांच्या चौकटीत भूमापन, सर्वेक्षण आणि जमिनीशी संबंधित अभिलेखांचे प्रशासन केले जाते.<ref name="MaharashtraLandRecordsDepartment">{{cite web
|title=भूमि अभिलेख विभाग
|website=भूमि अभिलेख – महाराष्ट्र भूमी अभिलेख विभाग
|publisher=Government of Maharashtra
|url=https://bhumiabhilekh.maharashtra.gov.in/
|language=mr
|access-date=2026-09-01
}}</ref>
=== भूमिअभिलेखांचे आधुनिकीकरण ===
भूमिअभिलेखांचे आधुनिकीकरण ही केवळ कागदी अभिलेखांचे डिजिटल स्वरूपात रूपांतर करण्यापुरती मर्यादित प्रक्रिया नसून अभिलेखांची अचूकता, अद्ययावतपणा, माहितीचे व्यवस्थापन आणि विविध प्रशासकीय प्रक्रियांशी त्यांचा संबंध या व्यापक प्रश्नांशी संबंधित आहे.
आर. रामकुमार आणि पद्मिनी रमेश यांनी दक्षिण भारतातील भूमिअभिलेख आधुनिकीकरणाच्या कार्यक्रमाचा अभ्यास करताना अभिलेखांचे अद्ययावतीकरण आणि डिजिटलकरणासमोरील ऐतिहासिक, सामाजिक व प्रशासकीय गुंतागुंतींकडे लक्ष वेधले आहे.<ref name="RamakumarRamesh2023"/>
या अभ्यासात तेलंगणातील भूमिअभिलेखांचे अद्ययावतीकरण आणि डिजिटलकरणाशी संबंधित उपक्रमाचा विचार करण्यात आला आहे. त्यामुळे या अभ्यासातील निष्कर्ष महाराष्ट्रातील भूमिअभिलेख व्यवस्थेला थेट लागू केल्याचे मानता येत नाही. तथापि, भूमिअभिलेख आधुनिकीकरणाच्या प्रक्रियेत ऐतिहासिक त्रुटी, अभिलेखीय विसंगती, प्रशासकीय प्रक्रिया आणि विविध सामाजिक घटकांचा विचार आवश्यक असल्याचा व्यापक अभ्यासात्मक संदर्भ या संशोधनातून उपलब्ध होतो.<ref name="RamakumarRamesh2023"/>
भारतात भूमिअभिलेखांचे आधुनिकीकरण आणि डिजिटलकरण ही व्यापक शासकीय धोरणात्मक प्रक्रिया म्हणूनही विकसित झाली आहे. भूमिअभिलेखांचे आधुनिकीकरण, डिजिटल अभिलेखांची निर्मिती आणि विविध स्तरांवरील भूमीविषयक माहितीच्या व्यवस्थापनाशी संबंधित उपक्रम केंद्र व राज्य स्तरांवर राबविण्यात आले आहेत.<ref name="DILRMP"/>
महाराष्ट्रातील आधुनिक भूमिअभिलेख व्यवस्थेचा विचार करताना ऐतिहासिक महसूल सर्वेक्षणाची परंपरा, महाराष्ट्र जमीन महसूल संहितेची वैधानिक चौकट आणि आधुनिक अभिलेखीय व डिजिटल व्यवस्थेतील बदल यांचा परस्परसंबंध लक्षात घेणे आवश्यक आहे.<ref name="MLRC1966"/>
== परिणाम आणि ऐतिहासिक महत्त्व ==
महाराष्ट्रासह पूर्वीच्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील महसूल सर्वेक्षण आणि भूमिअभिलेख व्यवस्थेच्या विकासामुळे जमीन, महसूल आणि प्रशासकीय नियंत्रण यांच्यातील संबंध अधिक संरचित स्वरूपात विकसित झाले. या प्रक्रियेचा संबंध केवळ महसूल आकारणीशी मर्यादित नव्हता; तर जमीनमालमत्तेची संकल्पना, अभिलेखीय नोंदी, नकाशाधारित प्रशासन आणि कृषी समाजाशी राज्याचे संबंध यांच्याशीही होता.<ref name="Kaiwar1994"/><ref name="Michael2007"/>
=== महसूल प्रशासनाचे मानकीकरण ===
महसूल सर्वेक्षणाच्या प्रक्रियेमुळे जमिनीशी संबंधित प्रशासकीय माहिती अधिक पद्धतशीर स्वरूपात संकलित करण्याच्या पद्धती विकसित झाल्या. भूखंडांची ओळख, मोजमाप, वर्गीकरण आणि महसूल निर्धारणाशी संबंधित प्रक्रिया परस्पर जोडल्या गेल्याने महसूल प्रशासनाची कार्यपद्धती अधिक संरचित झाली.<ref name="Michael2007"/>
तथापि, मानकीकरणाची प्रक्रिया सर्व प्रदेशांत आणि सर्व सामाजिक गटांमध्ये समान प्रकारे कार्यरत होती, असा निष्कर्ष काढता येत नाही. महसूल प्रशासनाच्या प्रत्यक्ष कार्यपद्धतीवर स्थानिक परिस्थिती, कृषी संबंध आणि प्रशासकीय धोरणांचा प्रभाव कायम राहिला.<ref name="Kaiwar1994"/>
आधुनिक भूमिअभिलेख आधुनिकीकरणाच्या अभ्यासांमधूनही औपचारिकरीत्या प्रमाणित करण्यात आलेल्या अभिलेखीय व्यवस्थेची प्रत्यक्ष अंमलबजावणी ऐतिहासिक नोंदी, प्रशासकीय प्रक्रिया आणि सामाजिक परिस्थिती यांसारख्या विविध घटकांवर अवलंबून असल्याचे दिसून येते. हा निष्कर्ष महाराष्ट्राच्या संदर्भातील थेट पुरावा म्हणून नव्हे, तर भूमिअभिलेख आधुनिकीकरणाच्या व्यापक अभ्यासात्मक संदर्भात विचारात घेतला जातो.<ref name="RamakumarRamesh2023"/>
=== भूमिअभिलेखांची निर्मिती ===
महसूल सर्वेक्षणातून भूखंडांशी संबंधित मोजमाप, क्षेत्रफळ आणि इतर प्रशासकीय माहितीची नोंद करण्यासाठी अधिक संघटित अभिलेखीय व्यवस्था विकसित झाली. सर्वेक्षण आणि अभिलेख यांतील संबंधामुळे जमीनविषयक माहितीचे प्रशासकीय व्यवस्थापन अधिक पद्धतशीर स्वरूपात करता आले.<ref name="Michael2007"/>
भूमिअभिलेख हे केवळ तांत्रिक माहितीचे संकलन न राहता प्रशासकीय प्रक्रियेचा महत्त्वपूर्ण भाग बनले. आधुनिक भूमिअभिलेख व्यवस्थेच्या अभ्यासातून अभिलेखांची निर्मिती, त्यांचे अद्ययावतीकरण आणि त्यांचा प्रशासकीय वापर या प्रक्रियांमधील ऐतिहासिक आणि संस्थात्मक गुंतागुंत अधोरेखित होते.<ref name="RamakumarRamesh2023"/>
=== नकाशाधारित प्रशासन ===
महसूल सर्वेक्षणाच्या विस्ताराबरोबर भूभागाचे नकाशात्मक प्रतिनिधित्व प्रशासनासाठी महत्त्वाचे ठरले. सर्वेक्षण आणि नकाशांकनाच्या माध्यमातून प्रदेश, गाव आणि भूखंड यांच्याशी संबंधित माहिती दृश्य आणि अभिलेखीय स्वरूपात संघटित करण्यात आली.<ref name="Michael2007"/>
या प्रक्रियेमुळे भूभागाचे प्रशासकीय आकलन अधिक मोजमापाधारित आणि नोंदाधारित स्वरूपात विकसित झाले. त्यामुळे नकाशे हे केवळ भौगोलिक प्रतिनिधित्वाचे साधन न राहता महसूल आणि प्रशासकीय व्यवस्थेशी संबंधित दस्तऐवज म्हणूनही महत्त्वाचे ठरले.<ref name="Michael2007"/>
=== जमीन आणि राज्यसत्ता यांचा संबंध ===
जमीन आणि राज्य यांच्यातील संबंध महसूल प्रशासनाच्या विकासाबरोबर बदलत गेले. वसाहतकालीन प्रशासनाच्या व्यापक संदर्भात जमीन, कृषी उत्पादन, महसूल आणि प्रशासन यांच्यातील संबंध अधिक औपचारिक कायदेशीर व प्रशासकीय चौकटीत मांडले गेले.<ref name="Whitehead2012">{{cite journal
|last=Whitehead
|first=Judith
|title=John Locke, Accumulation by Dispossession and the Governance of Colonial India
|journal=Journal of Contemporary Asia
|volume=42
|issue=1
|year=2012
|pages=1–21
}}</ref>
व्हाइटहेड यांच्या अभ्यासात वसाहतकालीन भारतातील जमीनविषयक धोरणांचा विचार व्यापक शासनविचाराच्या संदर्भात करण्यात आला आहे. त्यामुळे जमीन आणि राज्यसत्ता यांचा संबंध हा केवळ महसूल वसुलीचा प्रश्न नसून जमिनीचे प्रशासकीय वर्गीकरण, मालमत्तेसंबंधी धोरणे आणि शासनाच्या संकल्पनांशी संबंधित व्यापक ऐतिहासिक विषय म्हणूनही अभ्यासला जातो. हा संदर्भ बॉम्बे प्रेसिडेन्सीच्या विशिष्ट परिस्थितीचा थेट पुरावा म्हणून न पाहता व्यापक वसाहतकालीन संदर्भ म्हणून विचारात घ्यावा.<ref name="Whitehead2012"/>
=== कृषकांवरील परिणाम ===
महसूल व्यवस्था आणि जमीनविषयक प्रशासकीय बदलांचा कृषक समाजाशी निकटचा संबंध होता. बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील कृषी समाजाचा अभ्यास करताना जमीन, भांडवल, कर्ज, महसूल आणि कृषकांचे आर्थिक संबंध यांमधील गुंतागुंतीकडे लक्ष वेधण्यात आले आहे.<ref name="Kaiwar1994"/>
कैवार यांच्या अभ्यासानुसार वसाहतकालीन जमीनविषयक बदलांशी मालमत्तेची रचना आणि कृषकांच्या आर्थिक संबंधांमधील परिवर्तन संबंधित होते. तथापि, या प्रक्रियांचे परिणाम सर्व कृषकांवर समान स्वरूपाचे होते, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="Kaiwar1994"/>
त्यामुळे महसूल सर्वेक्षण आणि जमीनविषयक प्रशासकीय बदलांचा विचार केवळ प्रशासकीय कार्यक्षमतेच्या दृष्टीने न करता कृषक समाज, जमीनधारणा आणि ग्रामीण अर्थव्यवस्था यांच्या व्यापक संदर्भातही केला जातो.<ref name="Kaiwar1994"/>
=== वसाहतकालीन प्रशासनाचे व्यापक परिणाम ===
वसाहतकालीन महसूल सर्वेक्षणाने राज्याच्या भूभाग आणि जमिनीशी संबंधित माहितीच्या संकलन, वर्गीकरण आणि अभिलेखनाच्या प्रशासकीय प्रक्रियेला अधिक पद्धतशीर स्वरूप दिले. सर्वेक्षण, मोजमाप, वर्गीकरण, नकाशांकन आणि अभिलेखीय नोंदी या परस्परपूरक प्रक्रियांमुळे प्रशासनासाठी भूभागाशी संबंधित अधिक संरचित माहिती उपलब्ध झाली.<ref name="Michael2007"/>
त्याच वेळी, जमीनविषयक प्रशासनातील बदल हे व्यापक सामाजिक आणि आर्थिक प्रक्रियांपासून स्वतंत्र नव्हते. वसाहतकालीन जमीनधोरणांचा संबंध मालमत्ता, कृषी समाज, भांडवल आणि राज्यसत्ता यांच्यातील बदलत्या संबंधांशी जोडलेला होता.<ref name="Kaiwar1994"/><ref name="Whitehead2012"/>
भूमिअभिलेखांच्या आधुनिक आधुनिकीकरणाच्या अभ्यासातून अभिलेखीय व्यवस्थेतील तांत्रिक बदलांमुळे पूर्वीच्या ऐतिहासिक नोंदी किंवा प्रशासकीय पद्धती आपोआप निराकरण होत नाहीत, असे व्यापकपणे दिसून येते. त्यामुळे भूमिअभिलेख व्यवस्थेचा इतिहास हा केवळ सर्वेक्षण तंत्रज्ञानाचा इतिहास नसून प्रशासन, राज्यसत्ता, जमीनविषयक संबंध आणि सामाजिक व्यवहार यांच्या परस्परसंबंधांचा इतिहास म्हणूनही अभ्यासला जातो.<ref name="RamakumarRamesh2023"/>
अशा प्रकारे महाराष्ट्र आणि पूर्वीच्या बॉम्बे प्रेसिडेन्सीतील भूमापन व महसूल सर्वेक्षणाच्या विकासाचा महसूल प्रशासन, भूमिअभिलेख, नकाशाधारित माहिती आणि जमीनविषयक शासनव्यवस्थेच्या ऐतिहासिक परिवर्तनाशी निकटचा संबंध होता. या प्रक्रियेचे मूल्यमापन करताना प्रशासकीय मानकीकरणाबरोबरच त्याचे सामाजिक, आर्थिक आणि राजकीय संदर्भ विचारात घेणे आवश्यक ठरते.<ref name="Kaiwar1994"/><ref name="Michael2007"/><ref name="Whitehead2012"/>
== वारसा आणि समकालीन संदर्भ ==
=== ऐतिहासिक सर्वेक्षणाची प्रशासकीय परंपरा ===
महाराष्ट्रातील आधुनिक भूमापन आणि भूमिअभिलेख व्यवस्थेची ऐतिहासिक पार्श्वभूमी महसूल सर्वेक्षणाच्या दीर्घ प्रशासकीय परंपरेशी संबंधित आहे. वसाहतकालीन काळात विकसित झालेल्या क्षेत्रमोजणी, भूखंडनिश्चिती, सीमांकन, भूवर्गीकरण, सर्वेक्षण क्रमांक आणि नकाशाधारित नोंदी या प्रक्रियांनी भूमीच्या प्रशासकीय व्यवस्थापनासाठी आवश्यक असलेल्या अभिलेखीय चौकटीच्या विकासास हातभार लावला.<ref name="Michael2007"/>
महसूल सर्वेक्षणामुळे भूमीचे क्षेत्रफळ, सीमा आणि स्थान यांसंबंधीची माहिती अधिक पद्धतशीर रीतीने नोंदविणे शक्य झाले. सर्वेक्षणातून तयार होणाऱ्या नकाशे आणि अभिलेखांमुळे भूभागाची प्रशासकीय ओळख अधिक स्पष्ट स्वरूपात निश्चित होऊ लागली. या प्रक्रियेत भूमीची भौतिक स्थिती, प्रशासकीय नोंद आणि राज्याच्या महसूल व्यवस्थेतील तिचे स्थान यांच्यात परस्परसंबंध निर्माण झाला.<ref name="Michael2007" />
स्वातंत्र्योत्तर काळात महाराष्ट्रातील जमीन आणि जमीन महसूल विषयक कायद्यांचे एकत्रीकरण व पुनर्रचना करण्यात आली. ''महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता, १९६६'' ही राज्यातील जमीन आणि जमीन महसूल विषयक कायद्यांचे एकत्रीकरण व सुधारणा करण्यासाठीची प्रमुख वैधानिक चौकट आहे.<ref name="MLRC1966"/>
त्यामुळे पूर्वीच्या महसूल सर्वेक्षणातून विकसित झालेल्या भूमापन, सर्वेक्षण क्रमांक आणि अभिलेखीय नोंदींच्या पद्धती आधुनिक महसूल प्रशासनाच्या कायदेशीर चौकटीशी विविध स्वरूपांत संबंधित राहिल्या.<ref name="MLRC1966" />
=== आधुनिक आणि डिजिटल भूमिअभिलेख व्यवस्थेशी संबंध ===
ऐतिहासिक महसूल सर्वेक्षणातून विकसित झालेल्या भूमिअभिलेखीय परंपरेत आधुनिक काळात संगणकीकरण आणि डिजिटल व्यवस्थापनाचा समावेश झाला आहे. भारत सरकारच्या डिजिटल इंडिया भूमिअभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रमाचा उद्देश भूमिअभिलेखांचे आधुनिकीकरण, अभिलेखांचे अद्ययावतीकरण, मजकूराधारित आणि नकाशाधारित अभिलेखांचे एकत्रीकरण तसेच सर्वेक्षण आणि पुनःसर्वेक्षणाशी संबंधित प्रक्रियांचा विकास करणे हा आहे.<ref name="DILRMP">{{cite web |title=DILRMP |website=Department of Land Resources |publisher=Government of India |url=https://dolr.gov.in/en/programmes-schemes/dilrmp-2/ |access-date=2026-09-01}}</ref>
महाराष्ट्रातील भूमिअभिलेख व्यवस्थेमध्ये सर्वेक्षण क्रमांक, ७/१२ उतारे, ८-अ उतारे, फेरफार नोंदी, मालमत्ता पत्रके आणि नकाशाधारित अभिलेख यांसारख्या विविध नोंदींचा प्रशासकीय वापर केला जातो. महाराष्ट्र भूमी अभिलेख विभागाच्या डिजिटल सेवांद्वारे भूमिअभिलेख, नकाशे आणि संबंधित माहिती नागरिकांना उपलब्ध करून देण्यासाठी विविध ऑनलाइन सुविधा विकसित करण्यात आल्या आहेत.<ref name="MahaBhuServices">{{cite web |title=Services |website=भूमि अभिलेख – महाराष्ट्र भूमी अभिलेख विभाग |publisher=Government of Maharashtra |url=https://bhumiabhilekh.maharashtra.gov.in/Services |access-date=2026-09-01}}</ref>
भूमिअभिलेखांच्या आधुनिकीकरणाचा अर्थ मात्र केवळ कागदी नोंदींचे डिजिटल स्वरूपात रूपांतर इतकाच मर्यादित नाही. भूमिअभिलेखांच्या आधुनिकीकरणाशी संबंधित अभ्यासांमध्ये अभिलेखांचे अद्ययावतीकरण, पूर्वीच्या नोंदींतील त्रुटी आणि विसंगती तसेच डिजिटल व्यवस्थेच्या अंमलबजावणीशी संबंधित प्रशासकीय आणि सामाजिक घटकांचा विचार महत्त्वाचा असल्याचे दिसून येते.<ref name="RamakumarRamesh2023">{{cite journal |last=Ramakumar |first=R. |last2=Ramesh |first2=Padmini |title=Illegibly legible: Outcomes of a land records modernisation programme in South India |journal=Journal of Agrarian Change |volume=23 |issue=4 |year=2023 |pages=729–754 }}</ref>
रामकुमार आणि पद्मिनी रमेश यांच्या दक्षिण भारतातील भूमिअभिलेख आधुनिकीकरणावरील अभ्यासातून डिजिटल अभिलेखीय व्यवस्थेच्या परिणामांचा संबंध केवळ तांत्रिक बदलांशी नसून विद्यमान अभिलेखांची स्थिती, त्यांच्या ऐतिहासिक निर्मितीची प्रक्रिया आणि प्रत्यक्ष प्रशासकीय व्यवहाराशीही असल्याचे अधोरेखित होते.<ref name="RamakumarRamesh2023" /> हा अभ्यास महाराष्ट्रातील परिस्थितीवर थेट लागू करता येत नसला, तरी भूमिअभिलेखांच्या आधुनिकीकरणाचा अभ्यास करताना स्थानिक ऐतिहासिक आणि प्रशासकीय संदर्भ लक्षात घेणे आवश्यक असल्याचा व्यापक संदर्भ त्यातून उपलब्ध होतो.
अशा प्रकारे महाराष्ट्रातील समकालीन भूमिअभिलेख व्यवस्था ही पारंपरिक भूमापन, महसूल सर्वेक्षण, नकाशाधारित अभिलेख, वैधानिक संस्थात्मक चौकट आणि आधुनिक डिजिटल तंत्रज्ञान यांच्या दीर्घ ऐतिहासिक विकासाशी संबंधित आहे. डिजिटल प्रणालींमुळे भूमिअभिलेखांची उपलब्धता आणि व्यवस्थापनासाठी नवीन साधने उपलब्ध झाली असली, तरी सर्वेक्षण, सीमा, भूखंड आणि अभिलेख यांच्यातील मूलभूत संबंध महसूल सर्वेक्षणाच्या ऐतिहासिक परंपरेशी जोडलेले राहतात.<ref name="Michael2007"/><ref name="DILRMP" /><ref name="MahaBhuServices" />
== चित्रदालन ==
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File:Route Map of the Bombay presidency, including Scinde, surveyed and collected by the quarter master general's department, Bombay armee... 12 march 1846... - btv1b53165305f (2 of 3).jpg|१८४६ मधील बॉम्बे प्रेसिडेन्सीचा मार्गनकाशा
File:C.P. Joshi delivering the valedictory address, at the Follow-up Workshop on National Land Records Modernization Programme (NLRMP), in New Delhi on August 18, 2009.jpg|राष्ट्रीय भूमिअभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रमावरील कार्यशाळा, नवी दिल्ली, २००९
File:Bombay Prov 1909.jpg|बॉम्बे प्रांताचा नकाशा, १९०९
File:Nature Village, Ratnagiri, Maharashtra (kokan) 2.jpg|रत्नागिरी, महाराष्ट्रातील कोकण प्रदेशाचे दृश्य
File:ICAR NBSS & LUP, Nagpur.jpg|ICAR–NBSS & LUP, नागपूर
File:63 of 'Report on the Land Revenue Settlement of the Chanda district, Central Provinces, 1869. (With map, etc.)' (11091430044).jpg|चांदा जिल्ह्याच्या जमीन महसूल सेटलमेंटचा अहवाल, १८६९
</gallery>
== हेही पहा ==
* [[महाराष्ट्राचा इतिहास]]
* [[बॉम्बे प्रेसिडेन्सी]]
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
== बाह्यदुवे ==
* [https://www.indiacode.nic.in/handle/123456789/15974 महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता, १९६६] — इंडिया कोड
* [https://lj.maharashtra.gov.in/en/document/the-maharashtra-land-revenue-code-1966-text-as-on-2nd-april-2025/ महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता, १९६६] — विधी व न्याय विभाग, महाराष्ट्र शासन
* [https://bhumiabhilekh.maharashtra.gov.in/ महाराष्ट्र भूमी अभिलेख विभाग]
* [https://bhumiabhilekh.maharashtra.gov.in/ActsandRules/Acts/1 अधिनियम आणि नियम] — महाराष्ट्र भूमी अभिलेख विभाग
* [https://bhumiabhilekh.maharashtra.gov.in/ActsAndRules/Manuals नियमपुस्तिका आणि मार्गदर्शिका] — महाराष्ट्र भूमी अभिलेख विभाग
* [https://dolr.gov.in/en/ Department of Land Resources, Government of India]
* [https://dolr.gov.in/en/programmes-schemes/dilrmp-2/ Digital India Land Records Modernization Programme]
{{कोकण लोकजीवन}}
== वर्ग ==
[[वर्ग:महाराष्ट्राचा इतिहास]]
[[वर्ग:महाराष्ट्राचा भूगोल]]
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२०२६ महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक
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{{Infobox cricket tournament
| name = २०२६ महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक
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| cricket format = [[महिला ट्वेंटी-२० आंतरराष्ट्रीय]]
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'''२०२६ महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक''' ही [[महिला आशिया चषक]]ाची दहावी स्पर्धा (आणि ट्वेंटी२० स्वरूपातील सहावी स्पर्धा) आहे. ही स्पर्धा २८ ऑगस्ट ते १३ सप्टेंबर २०२६ या कालावधीत [[संयुक्त अरब अमिराती]]मध्ये आयोजित केली जात असून, <ref>{{cite web |trans-title=महिला आशिया चषक २८ ऑगस्टपासून दुबईत सुरू होणार; ५ सप्टेंबरला भारत विरुद्ध पाकिस्तान सामना.|title=Women's Asia Cup starts August 28 in Dubai; India vs Pakistan on September 5 |url=https://www.cricinfo.com/story/women-s-asia-cup-starts-august-28-in-dubai-india-vs-pakistan-on-september-5-1548880 |work=[[क्रिकइन्फो]] |date=६ ऑगस्ट २०२६ |access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web|trans-title= महिला टी२० आशिया चषक २८ ऑगस्टपासून दुबईत सुरू होणार; ५ सप्टेंबरला भारत-पाकिस्तान सामना. |title=Women's T20 Asia Cup to begin on August 28 in Dubai; India-Pakistan clash on September 5 |url=https://www.aninews.in/news/sports/cricket/womens-t20-asia-cup-to-begin-on-august-28-in-dubai-india-pakistan-clash-on-september-520260806220635/ |work=एशियन न्यूज इंटरनॅशनल |date=६ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref> त्यातील सामने [[महिला आंतरराष्ट्रीय टी२०|आंतरराष्ट्रीय टी२०]] स्वरूपात खेळवले जातील. <ref>{{cite web |last= इल्सली |first=रॉबर्ट|date=१० ऑगस्ट २०२६|trans-title= दुबईमध्ये महिला आशिया चषकाचे स्वागत – सर्व तपशील |title=Dubai welcomes Women’s Asia Cup – All the details |url=https://gulfnews.com/sport/dubai-welcomes-womens-asia-cup-all-the-details-1.500636007 |work=[[गल्फ न्यूज]] |access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |trans-title= महिला टी२० आशिया चषक २०२६: ५ सप्टेंबर रोजी दुबईत भारत आणि पाकिस्तान आमनेसामने येणार |title=Women’s T20 Asia Cup 2026: India to face Pakistan on September 5 in Dubai |url=https://ddnews.gov.in/en/womens-t20-asia-cup-2026-india-to-face-pakistan-on-september-5-in-dubai/ |work=[[डीडी न्यूज]] |date=६ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref> श्रीलंका हा गतविजेता संघ होता;<ref>{{cite web |last= रामानुजम |first=श्रीनिधी|date=२८ जुलै २०२४|trans-title= अथापथ्थू आणि समरविक्रमा यांच्या दमदार कामगिरीने भारताला चकित करत श्रीलंकेने पहिले महिला आशिया चषक विजेतेपद पटकावले. |title=Athapaththu, Samarawickrama stun India as Sri Lanka win their first Women's Asia Cup title |url=https://www.cricinfo.com/series/women-s-asia-cup-2024-1426636/sri-lanka-women-vs-india-women-final-1426770/match-report |work=[[क्रिकइन्फो]] |access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |trans-title= भारतावर दणदणीत विजय मिळवत श्रीलंकेने पहिल्यांदाच जिंकला महिला आशिया चषक. |title=Sri Lanka Clinch Maiden Women's Asia Cup Title With Comprehensive Win Over India |url=https://www.icc-cricket.com/news/sri-lanka-clinch-maiden-women-s-asia-cup-title-with-comprehensive-win-over-india |work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]] |date=२८ जुलै २०२४|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref> अंतिम सामन्यात भारताने त्यांचा पराभव केला आणि टी२० प्रकारातील आपले विक्रम अधिक उंचावणारे असे चौथे व आशिया चषकातील एकूण आठवे विजेतेपद पटकावले.
==संघ आणि पात्रता==
{| class="wikitable"
! पात्रतेचे निकष
!दिनांक
!यजमान
!जागा
!पात्र संघ
|-
| rowspan="4" | [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती सदस्य देश# पूर्ण सदस्य|आयसीसी पूर्ण सदस्य]] || rowspan="4" {{n/a}} || rowspan="4" {{n/a}} || rowspan="4" style="text-align:center;" |'''४'''|| {{crw|BAN}}
|-
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|-
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| rowspan="4" style="text-align:center;" |'''४'''|| {{crw|HK}}
|-
| {{crw|IDN}}
|-
| {{crw|THA}}
|-
| {{nobr|{{crw|UAE}}}}
|-
! एकूण!! !! !! ८ !!
|}
==संघ==
{| class="wikitable" style="text-align:left;white-space:nowrap; margin:auto"
|-
! {{crw|BAN}}<ref>{{cite web |trans-title= बांगलादेशतर्फे आशिया चषक आणि आशियाई क्रीडा स्पर्धांसाठी अनुभवी संघाची घोषणा. |title=Bangladesh name experienced unit for Asia Cup and Asian Games |url=https://www.icc-cricket.com/news/bangladesh-name-experienced-unit-for-asia-cup-and-asian-games |work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]] |date=१७ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
! {{crw|HKG}}<ref>{{cite web |trans-title=हाँगकाँग, चीनचा महिला संघ आशिया कप २०२६ चे आव्हान स्वीकारण्यास सज्ज आहे. |title=Hong Kong, China women’s team is ready to take on the Asia Cup 2026 Challenge |url=https://www.crickethongkong.com/news-detail/5059/Hong-Kong,-China-women%E2%80%99s-team-is-ready-to-take-on-the-Asia-Cup-2026-Challenge |work=[[क्रिकेट हाँगकाँग, चीन]] |date=१९ ऑगस्ट २०२६ |access-date=२ सप्टेंबर २०२६ |archive-date=2026-08-23 |archive-url=https://web.archive.org/web/20260823143310/https://www.crickethongkong.com/news-detail/5059/Hong-Kong,-China-women%25E2%2580%2599s-team-is-ready-to-take-on-the-Asia-Cup-2026-Challenge |url-status=dead }}</ref>
! {{crw|IND}}<ref>{{cite web |trans-title= २०२६ च्या आशियाई क्रीडा स्पर्धेसाठी भारतीय महिला संघाची घोषणा |title=India Women's squad for the 2026 Asian Games announced |url=https://www.bcci.tv/news/article/india-women-s-squad-for-the-2026-asian-games-announced |work=[[भारतीय क्रिकेट नियामक मंडळ|बीसीसीआय]] |date=३० जून २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
! {{crw|INA}}<ref>{{cite web |trans-title= २०२६ डीपी वर्ल्ड महिला आशिया चषक स्पर्धेमध्ये इंडोनेशियाला इतिहास घडवण्याची संधी, तरुण संघ खंडीय स्तरावर आपली छाप सोडण्यास सज्ज. |title=History beckons for Indonesia at the DP World Womens Asia Cup 2026 with a youthful squad ready to make its mark on the continental stag |url=https://www.instagram.com/p/DcdirJMoaQq/ |work=[[आशिया क्रिकेट समिती]] |date=२५ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६|via=[[इन्स्टाग्राम]]}}</ref>
|-
|valign=top|
* [[निगार सुलताना]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]], [[यष्टीरक्षक|य]])
* [[नाहिदा अख्तर]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)#उपकर्णधार|उक]])
* [[जुवैरिया फिरदौस]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[दिलारा अख्तर]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[फरिहा तृष्ना]]
* [[फाहिमा खातून]]
* [[मारुफा अख्तर]]
* [[राबेया खान]]
* [[रितू मोनी]]
* [[शर्मिन अख्तर]]
* [[शर्मिन सुलताना]]
* [[शोभना मोस्तारी]]
* [[शोर्णा अख्तर]]
* [[संजिदा अक्तेर मेघला]]
* [[सुलताना खातून]]
|valign=top|
* [[कॅरी चॅन]]
* ॲलिसन सिउ
* इक्रा सहर
* जॉयलीन कौर
* [[नताशा माइल्स]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]])
* मरिना लॅम्प्लो
* मरियम बीबी ([[कर्णधार (क्रिकेट)#उपकर्णधार|उक]])
* महेकदीप कौर
* [[मारिको हिल]]
* [[यास्मिन दासवानी]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* रुचिता व्यंकटेश
* शानझीन शहजाद ([[यष्टीरक्षक|य]])
* शार्लोट चॅन
* शिंग चॅन
* हेली वोंग
|valign=top|
* [[हरमनप्रीत कौर]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]])
* [[स्मृती मंधाना]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)#उपकर्णधार|उक]])
* [[अरुंधती रेड्डी]]
* [[ऋचा घोष]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[क्रांती गौड]]
* [[गुणलन कमलिनी]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* <s>[[जेमिमा रॉड्रिग्ज]]</s>{{efn|name=Jemimah| हॅमस्ट्रिंगच्या दुखापतीमुळे भारताच्या संघात [[जेमिमा रॉड्रिग्ज]]च्या जागी [[प्रतिका रावळ ]]ची निवड करण्यात आली.<ref>{{cite web |trans-title= जेमिमा रॉड्रिज आशिया चषक आणि आशियाई क्रीडा स्पर्धेतून बाहेर |title=Jemimah Rodrigues ruled out of Asia Cup and Asian Games |url=https://www.bcci.tv/news/article/jemimah-rodrigues-ruled-out-asia-cup-and-asian-games |work=[[भारतीय क्रिकेट नियामक मंडळ|बीसीसीआय]] |date=१४ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref>}}
* [[दीप्ती शर्मा]]
* [[नंदनी शर्मा]]
* [[प्रतिका रावळ]]{{efn|name=Jemimah}}
* [[भारती फुलमाळी]]
* [[राधा यादव]]
* [[रेणुका सिंग]]
* [[शफाली वर्मा]]
* [[श्री चरणी]]
|valign=top|
* नि पुटू आयु नंदा सक्रीनी ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]], [[(यष्टीरक्षक|य)]]
* कदेक विंदा प्रस्तीनी
* किसी कसे
* दारा अगुंग लक्ष्मी
* देर्नी बांगी
* देसी वुलंदरी
* नि कडेक अरियानी
* नि कदेक फित्रिया राडा राणी
* नि मादे पुत्री सुवांदेवी
* नि लुह वेसिक रत्न देवि
* मारिया कोराझोन ([[यष्टीरक्षक|य]])
* रहमावती पंगेस्तुती
* ली किआओ
* सांग आयू मायप्रियानी
* सोफिया वेलिक
|-
! {{crw|PAK}}<ref>{{cite web |trans-title= एसीसी आशिया चषक आणि आशियाई क्रीडा स्पर्धांसाठी पाकिस्तानच्या महिला संघांची घोषणा |title=Pakistan women's squads announced for ACC Asia Cup and Asian Games |url=https://www.pcb.com.pk/press-release-detail/pakistan-women-s-squads-announced-for-acc-asia-cup-and-asian-games.html |work=[[पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड]] |date=१६ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
! {{crw|SL}}<ref>{{cite web |trans-title=महिला आशिया चषक २०२६ साठी श्रीलंकेचा संघ|title=Sri Lanka Squad for Women’s Asia Cup 2026 |url=https://srilankacricket.lk/2026/08/sri-lanka-squad-for-womens-asia-cup-2026/ |work=[[श्रीलंका क्रिकेट]] |date=१३ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
! {{crw|THA}}<ref>{{cite web |trans-title=डीपी वर्ल्ड महिला आशिया चषक २०२६ साठी थायलंडच्या संघात युवा आणि अनुभवी खेळाडूंचा उत्तम मेळ.|title=A fine blend of youth and experience headlines Thailand’s squad for the DP World Womens Asia Cup 2026 |url=https://www.facebook.com/share/p/1GoTyhYzp9/ |work=[[आशिया क्रिकेट समिती]] |date=२१ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६|via=[[फेसबुक]]}}</ref>
! {{crw|UAE}}<ref>{{cite web |trans-title=डीपी वर्ल्ड महिला आशिया चषक २०२६ - ईशा ओझा यूएईच्या १५ सदस्यांच्या संघाचे नेतृत्व करणार |title=DP World Women's Asia Cup 2026 - ईशा ओझा to lead UAE's 15-member squad |url=https://emiratescricket.com/news-detail/OMWVYmxkazn7aJ0PoX1G |work=[[अमिराती क्रिकेट बोर्ड]] |date=२१ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
|-
|valign=top|
* [[फातिमा सना]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]])
* [[आयेशा झफर]]
* [[इमान नसीर]]
* [[उम्म-ए-हानी]]
* [[एमान फातिमा]]
* [[गुल फरोझा]]
* [[तुबा हसन]]
* [[सायरा जबीन]]
* <s>[[नजीहा अल्वी]]</s>{{efn|name=Najiha| गुडघ्याच्या दुखापतीमुळे पाकिस्तानच्या संघात [[सदफ शमास]] च्या जागी [[नजीहा अल्वी]]चा समावेश करण्यात आला. <ref>{{cite web |trans-title= एसीसी महिला आशिया चषक स्पर्धेसाठी पाकिस्तान संघात दुखापतग्रस्त नजीहा अल्वीच्या जागी सदफ शमासचा समावेश|title= Sadaf Shamas replaces injured Najiha Alvi in Pakistan squad for ACC Women's Asia Cup |url=https://www.pcb.com.pk/press-release-detail/sadaf-shamas-replaces-injured-najiha-alvi-in-pakistan-squad-for-acc-women-s-asia-cup.html |work=[[पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड]] |date=२४ ऑगस्ट २०२६}}</ref>}}
* [[नश्रा संधू]]
* [[मुनीबा अली]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[मोमिना रियासत]]
* [[वहीदा अख्तर]]
* [[शवाल झुल्फिकार]]
* [[सदफ शमास]]{{efn|name=Najiha}}
* [[सादिया इक्बाल]]
|valign=top|
* [[चामरी अटापट्टू]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]])
* [[हर्षिता मादवी]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)#उपकर्णधार|उक]])
* [[इमेशा दुलानी]]
* [[कविशा दिलहारी]]
* [[काव्या कविंदी]]
* [[कौशिनी नुत्यंगना]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[चेतना विमुक्ती]]
* [[देउमी विहंगा]]
* [[निलाक्षी डि सिल्व्हा ]]
* [[मिताली आयोद्या]]
* [[विश्मी गुणरत्ने]]
* [[संजना कविंदी]]
* [[सुगंदिका कुमारी]]
* [[हसिनी परेरा]]
* चामुडी प्रबोधा
|valign=top|
* [[नरुएमोल चैवाई]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]], [[यष्टीरक्षक|य]])
* [[अपिसरा सुवांचनरोती]]
* [[ओन्निचा कांचोम्पू]]
* कोरानित सुवांचनरोती
* चयानिसा फेंगपेन
* [[चानिदा सुत्थिरुआंग]]
* थनरादा सीसावान
* [[थीपचा पुत्थावॉन्ग]]
* [[नत्ताकन चांतम]]
* [[नन्नाफत चैहान]]
* नाओमी हॅमिल्टन
* [[नान्नापत काँचारोएन्काई]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[फन्नीता माया]]
* [[सुनिदा चतुरोंगरात्तना]]
* [[सुलीपोर्न लाओमी]]
|valign=top|
* [[ईशा ओझा]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]])
* अर्चरा सुप्रिया
* [[इंदुजा नंदकुमार]]
* उत्तरा अय्यर
* जननी तिरुक्ककुमारन
* [[तीर्थ सतीश]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* मेहुल कुलकर्णी
* रिणिता रजीत
* [[लावण्या केनी]]
* [[वैष्णवी महेश]]
* शशिकला सिल्वा
* [[समायरा धरणीधरका]]
* [[सिया गोखले]]
* [[सुरक्षा कोट्टे]]
* [[हीना होतचंदानी]]
|}
==गट फेरी==
स्पर्धेचे वेळापत्रक ६ ऑगस्ट २०२६ रोजी जाहीर करण्यात आले.<ref>{{cite web |trans-title= महिला आशिया चषक २०२६ च्या वेळापत्रकात भारत-पाकिस्तान सामना मुख्य आकर्षण |title= India-Pakistan clash headlines Women's Asia Cup 2026 schedule |url=https://www.cricbuzz.com/cricket-news/139765/india-pakistan-clash-headlines-womens-asia-cup-2026-schedule |work=[[क्रिकबझ्झ]] |date=६ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |trans-title= महिला आशिया चषक २०२६ चे वेळापत्रक जाहीर: दुबईत ५ सप्टेंबरला भारत-पाकिस्तान सामना |title=Women's Asia Cup 2026 Schedule Announced: India-Pakistan Clash Set For September 5 In Dubai |url=https://www.outlookindia.com/sports/cricket/womens-asia-cup-2026-schedule-fixture-india-vs-pakistan |work= [[आउटलुक (भारतीय नियतकालिक) | आउटलुक]] |date=६ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
===गट अ===
====गुणफलक====
<section begin=Group A/>
{| class="wikitable" style="text-align:center"
! style="width:25px"| स्थान
! style="width:160px"| संघ
! style="width:30px"| {{abbr|सा|सामने}}
! style="width:30px"| {{abbr|वि|विजय}}
! style="width:30px"| {{abbr|प|पराभव}}
! style="width:30px"| {{abbr|अ|अनिर्णित}}
! style="width:30px"| गुण
! {{abbr|धावगती|निव्वळ धावगती}}
|-style="background:#cfc;"
| १ || style="text-align:left" | {{Crw|IND}} || ३ || ३ || ० || ० || '''६''' || ५.४७१
|-style="background:#cfc;"
| २ || style="text-align:left" | {{Crw|PAK}} || ३ || २ || १ || ० || '''४''' || ०.९२७
|-
| ३ || style="text-align:left" | {{Crw|THA}} || ३ || १ || २ || ० || '''२''' || −२.०५०
|-
| ४ || style="text-align:left" | {{Crw|HK}} || ३ || ० || ३ || ० || '''०''' || −३.५८३
|}
<small>स्रोत: [[क्रिकइन्फो]]<ref name="PTWATC26">{{cite web|url=https://www.cricinfo.com/series/women-s-asia-cup-2026-1548888/points-table-standings|trans-title=महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक २०२६ – गुणफलक आणि संघ क्रमवारी|title= Women's Twenty20 Asia Cup 2026 Points Table & Team Standings |access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref></small>
<section end=Group A/>
====सामने====
{{Single-innings cricket match
| date = २८ ऑगस्ट २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|THA}}
| team2 = {{crw|HKG}}
| score1 = १२०/९ (२० षटके)
| runs1 = [[नरुएमोल चैवाई]] ४३ (३१)
| wickets1 = मरिना लॅम्प्लो ४/११ (४ षटके)
| score2 = ११४/७ (२० षटके)
| runs2 = [[कॅरी चॅन]] २८ (२०)
| wickets2 = [[ओन्निचा कांचोम्पू]] ३/२७ (४ षटके)
| result = थायलंड ६ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548891.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = रबाब अहसान (युएई) आणि [[वृंदा राठी]] (भा)
| motm = [[नरुएमोल चैवाई]] (था)
| toss = हाँग काँगने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला .
| notes = नाओमी हॅमिल्टन (था) हिने आंतरराष्ट्रीय टी२० पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३० ऑगस्ट २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|IND}}
| team2 = {{crw|THA}}
| score1 = १५९/९ (२० षटके)
| runs1 = [[शफाली वर्मा]] ६४ (३६)
| wickets1 = [[सुलीपोर्न लाओमी]] ३/२६ (४ षटके)
| score2 = ६५ (१६.१ षटके)
| runs2 = [[नान्नापत काँचारोएन्काई]] ४१ (४८)
| wickets2 = [[दीप्ती शर्मा]] ३/० (१.१ षटके)
| result = भारत ९४ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548893.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[निमाली परेरा]] (श्री) आणि [[मिशू चौधरी]] (बां)
| motm = [[शफाली वर्मा]] (भा)
| toss = थायलंडने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला .
| notes = [[प्रतिका रावळ]] (भा) हिने आंतरराष्ट्रीय टी२० पदार्पण केले.
* [[दीप्ती शर्मा]] (भा) तिचा १५०वा आंतरराष्ट्रीय टी२० सामना खेळली.<ref>{{cite web |last=बिश्त|first=हर्षित|date=३० ऑगस्ट २०२६|url=https://www.news18.com/cricket/deepti-sharma-becomes-third-indian-to-play-150-wt20is-10300870.html |trans-title= दीप्ती शर्मा १५० आंतरराष्ट्रीय टी२० सामने खेळण्यासाठी हरमनप्रीत कौर आणि स्मृती मंधाना नंतर तिसरी भारतीय बनली |title= Deepti Sharma Becomes 3rd Indian After Harmanpreet Kaur And Smriti Mandhana To Play 150 WT20Is |work=[[न्यूज१८]] |access-date=३ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = १ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|PAK}}
| team2 = {{crw|THA}}
| score1 = ११९/९ (२० षटके)
| runs1 = [[मुनीबा अली]] ५४ (५२)
| wickets1 = [[सुलीपोर्न लाओमी]] ३/१४ (४ षटके)
| score2 = ८४/८ (२० षटके)
| runs2 = [[चानिदा सुत्थिरुआंग]] २५ (२४)
| wickets2 = [[सादिया इक्बाल]] ३/११ (४ षटके)
| result = पाकिस्तान ३५ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548895.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[शाथिरा जाकीर]] (बां) आणि [[निमाली परेरा]] (श्री)
| motm = [[मुनीबा अली]] (पा)
| toss = पाकिस्तानने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|IND}}
| team2 = {{crw|HKG}}
| score1 = १९३/५ (२० षटके)
| runs1 = [[स्मृती मंधाना]] १२४ (६४)
| wickets1 = मरिना लॅम्प्लो २/४६ (४ षटके)
| score2 = ५६ (१६.२ षटके)
| runs2 = [[नताशा माइल्स]] १५ (२७)
| wickets2 = [[दीप्ती शर्मा]] ३/९ (३ षटके)
| result = भारत १३७ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/series/women-s-asia-cup-2026-1548888/hong-kong-women-vs-india-women-7th-match-group-a-1548897/live-cricket-score धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [मिशू चौधरी]] (बां) आणि [[निमाली परेरा]] (श्री)
| motm = [[स्मृती मंधाना]] (भा)
| toss = हाँग काँगने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = हाँग काँग आणि भारत हे देश आंतरराष्ट्रीय टी२० सामन्यामध्ये समोरासमोर येण्याची ही पहिलीच वेळ असेल.
* ॲलिसन सिउ (हाँकाँ) हिचा हा १००वा आंतरराष्ट्रीय टी२० सामना होता.
* भारताच्या [[स्मृती मंधाना]]चे हे १८ वे आंतरराष्ट्रीय शतक होते. तिने ऑस्ट्रेलियाच्या [[मेग लॅनिंग]]ला मागे टाकून सर्वाधिक आंतरराष्ट्रीय शतकांच्या यादीत अव्वल स्थान पटकावले.<ref>{{cite web|url=https://www.loksatta.com/krida/smriti-mandhana-breaks-big-record-of-meg-lenning-of-scoring-most-centuries-in-international-cricket-amd-2000-6117020/|title=Smriti Mandhana Record: स्मृती मानधना जगात भारी! मेग लेनिंगला मागे टाकत ‘हा’ रेकॉर्ड करणारी ठरली जगातील पहिलीच फलंदाज|work=लोकसत्ता|access-date=४ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
* ह्या सामन्याच्या निकलामुळे भारत उपांत्य फेरीसाठी पात्र.<ref>{{cite web|url=https://www.cricinfo.com/series/women-s-asia-cup-2026-1548888/hong-kong-women-vs-india-women-7th-match-group-a-1548897/match-report|trans-title=मंधानाच्या विक्रमी शतकाच्या जोरावर भारताची उपांत्य फेरीत धडक|title=Mandhana's record ton powers India into semi-finals|work=क्रिकइन्फो|access-date=४ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ५ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|PAK}}
| team2 = {{crw|IND}}
| score1 = ५५ (१८.१ षटके)
| runs1 = [[शवाल झुल्फिकार]] १४ (१४)
| wickets1 = [[श्री चरणी]] ३/७ (४ षटके)
| score2 = ५७/३ (८.४ षटके)
| runs2 = [[हरमनप्रीत कौर]] १८[[नाबाद|*]] (१८)
| wickets2 = [[फातिमा सना]] ३/१७ (३ षटके)
| result = भारत ७ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548899.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[शाथिरा जाकीर]] (बां) आणि [[निमाली परेरा]] (श्री)
| motm = [[श्री चरणी]] (भा)
| toss = पाकिस्तानने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = [[रमनप्रीत कौर]] (भा) हीचा कर्णधार म्हणून हा १५०वा आंतरराष्ट्रीय टी२० सामना होता.<ref>{{cite web |url=https://www.rediff.com/amp/cricket/report/india-vs-pakistan-womens-asia-cup-historic-harmanpreet-kaur-first-cricketer-to-captain-in-150-t20is/20260905.htm |trans-title=ऐतिहासिक! १५० टी२० आंतरराष्ट्रीय सामन्यांत नेतृत्व करणारी हरमनप्रीत पहिली कर्णधार.|title=Historic! Harmanpreet first captain to lead in 150 T20Is |work=रेडीफ.कॉम |date=५ सप्टेंबर २०२६ |access-date=७ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
* ही आंतरराष्ट्रीय टी२० सामन्यामधील पाकिस्तानची सर्वात कमी धावसंख्या होती.<ref>{{cite news |trans-title=भारताविरुद्ध पाकिस्तान महिला संघाची ५५ धावांत घसरण; टी-२० आंतरराष्ट्रीय सामन्यातील सर्वात कमी धावसंख्येची नोंद.|title=Pakistan Women collapse to 55 against India, suffer lowest-ever T20I total |url=https://www.aninews.in/news/sports/cricket/pakistan-women-collapse-to-55-against-india-suffer-lowest-ever-t20i-total20260905220156/ |work=एशियन न्यूज इंटरनॅशनल |date=५ सप्टेंबर २०२६ |access-date=७ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
* [[शफाली वर्मा]] (भा) हिच्या आंतरराष्ट्रीय टी२० कारकिर्दीतील ३,००० धावा पूर्ण.<ref>{{cite web |url=https://timesofindia.indiatimes.com/sports/cricket/womens-asia-cup/news/shafali-varma-scripts-history-becomes-fastest-and-youngest-to-3000-t20i-runs-in-womens-cricket/articleshow/133809520.cms |trans-title=शफाली वर्माची ऐतिहासिक कामगिरी; महिला क्रिकेटमध्ये ३,००० आंतरराष्ट्रीय टी२० धावा पूर्ण करणारी सर्वात जलद आणि सर्वात तरुण खेळाडू ठरली.|title=Shafali Varma scripts history, becomes fastest and youngest to reach 3,000 T20I runs in women’s cricket |work=[[द टाइम्स ऑफ इंडिया]] |date=५ सप्टेंबर २०२६ |access-date=७ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ७ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|PAK}}
| team2 = {{crw|HK}}
| score1 = १४३/८ (२० षटके)
| runs1 = [[शवाल झुल्फिकार]] ४७ (३५)
| wickets1 = जॉयलीन कौर ४/१९ (४ षटके)
| score2 = ७१ (१९ षटके)
| runs2 = [[कॅरी चॅन]] ३० (४७)
| wickets2 = [[नश्रा संधू]] ६/७ (४ षटके)
| result = पाकिस्तान ७२ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548901.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = रबाब अहसान (युएई) आणि [मिशू चौधरी]] (बां)
| motm = [[नश्रा संधू]] (पा)
| toss = पाकिस्तानने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = हाँगकाँग आणि पाकिस्तान हे देश आंतरराष्ट्रीय टी२० सामन्यामध्ये समोरासमोर येण्याची ही पहिलीच वेळ असेल.
* [[नश्रा संधू]]ने (पा) आंतरराष्ट्रीय टी२० सामन्यामध्ये पहिल्यांदाच एका डावात पाच बळी घेण्याची कामगिरी केली.
}}
===गट ब===
====गुणफलक====
<section begin=Group B/>
{| class="wikitable" style="text-align:center"
! style="width:25px"| स्थान
! style="width:160px"| संघ
! style="width:30px"| {{abbr|सा|सामने}}
! style="width:30px"| {{abbr|वि|विजय}}
! style="width:30px"| {{abbr|प|पराभव}}
! style="width:30px"| {{abbr|अ|अनिर्णित}}
! style="width:30px"| गुण
! {{abbr|धावगती|निव्वळ धावगती}}
|-style="background:#cfc;"
| १ || style="text-align:left" | {{Crw|SRI}} || ३ || ३ || ० || ० || '''६''' || २.७३०
|-style="background:#cfc;"
| २ || style="text-align:left" | {{Crw|BAN}} || ३ || २ || १ || ० || '''४''' || १.६८८
|-
| ३ || style="text-align:left" | {{Crw|UAE}} '''(य)''' || ३ || १ || २ || ० || '''२''' || −१.१५८
|-
| ४ || style="text-align:left" | {{Crw|INA}} || ३ || ० || ३ || ० || '''०''' || −३.१६९
|}
<small>स्रोत: [[क्रिकइन्फो]]<ref name="PTWATC26"/></small>
<section end=Group B/>
====सामने====
{{Single-innings cricket match
| date = २९ ऑगस्ट २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|UAE}}
| team2 = {{crw|SL}}
| score1 = ७९ (१९.५ षटके)
| runs1 = [[ईशा ओझा]] १८ (२४)
| wickets1 = [[मिताली आयोद्या]] ३/१४ (३.५ षटके)
| score2 = ८०/१ (७.५ षटके)
| runs2 = [[चामरी अटापट्टू]] ४८[[नाबाद|*]] (२५)
| result = श्रीलंका ९ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548892.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[हुमैरा फराह]] (पा) आणि [[शाथिरा जाकीर]] (बां)
| motm = [[चेतना विमुक्ती]] (श्री)
| toss = श्रीलंकेने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला .
| notes = [[चेतना विमुक्ती]] (श्री) हिने आंतरराष्ट्रीय टी२० पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३१ ऑगस्ट २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|BAN}}
| team2 = {{crw|INA}}
| score1 = १२९/८ (२० षटके)
| runs1 = [[शोभना मोस्तारी]] ४० (४२)
| wickets1 = नि अरियानी ३/२८ (४ षटके)
| score2 = ५८ (१७.३ षटके)
| runs2 = मारिया कोराझोन १२ (१३)
| wickets2 = [[नाहिदा अख्तर]] ३/१५ (४ षटके)
| result = बांगलादेश ७१ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548894.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[सलीमा इम्तियाझ]] (पा) आणि [[शिवानी मिश्रा]] (क)
| motm = [[नाहिदा अख्तर]] (बां)
| toss = इंडोनेशियाने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = महिला आंतरराष्ट्रीय टी२० सामन्यामध्ये इंडोनेशिया आणि बांगलादेश आमनेसामने येण्याची ही पहिलीच वेळ होती.
* सोफिया वेलिक (इं) हिने आंतरराष्ट्रीय टी२० पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = २ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|SL}}
| team2 = {{crw|INA}}
| score1 = १२४/७ (२० षटके)
| runs1 = [[निलाक्षी डि सिल्व्हा]] ५० (३५)
| wickets1 = नि लुह देवि ३/३२ (४ षटके)
| score2 = ४९ (१८.३ षटके)
| runs2 = नि मादे पुत्री सुवांदेवी १२[[नाबाद|*]] (३२)
| wickets2 = [[चामरी अटापट्टू]] ७/५ (३.३ षटके)
| result = श्रीलंका ७५ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548896.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[शिवानी मिश्रा]] (क) आणि [[सलीमा इम्तियाझ]] (पा)
| motm = [[चामरी अटापट्टू]] (श्री)
| toss = इंडोनेशियाने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = महिला आंतरराष्ट्रीय टी२० सामन्यामध्ये इंडोनेशिया आणि श्रीलंका आमनेसामने येण्याची ही पहिलीच वेळ होती.
* [[चामरी अटापट्टू]] (श्रीलंका) हिने महिला टी२० आशिया चषकातील सर्वोत्तम गोलंदाजीची कामगिरी नोंदवली, टी२० आंतरराष्ट्रीय सामन्यांत पहिल्यांदाच एका डावात पाच बळी घेतले, तसेच महिला आंतरराष्ट्रीय टी२० सामन्यांत हॅट्ट्रिक आणि ७ बळी घेणारी पहिली श्रीलंकाई खेळाडू ठरली.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date =४ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|INA}}
| team2 = {{crw|UAE}}
| score1 = ७३ (१९.४ षटके)
| runs1 = नि पुटू आयु नंदा सक्रीनी ३९ (५२)
| wickets1 = [[सुरक्षा कोट्टे]] ३/१६ (४ षटके)
| score2 = ७५/४ (१३.१ षटके)
| runs2 = [[ईशा ओझा]] ३० (२९)
| wickets2 = सोफिया वेलिक २/२५ (३.१ षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ६ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548896.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[शिवानी मिश्रा]] (कतार) आणि [[वृंदा राठी]] (भा)
| motm = [[ईशा ओझा]]] (युएई)
| toss = संयुक्त अरब अमिरातीने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ६ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|BAN}}
| team2 = {{crw|SL}}
| score1 = ११४/८ (२० षटके)
| runs1 = [[शोभना मोस्तारी]] ३४ (४१)
| wickets1 = चामुडी प्रबोधा ३/२१ (४ षटके)
| score2 = ११५/६ (१९.२ षटके)
| runs2 = [[हर्षिता मादवी]] ४८[[नाबाद|*]] (३७)
| wickets2 = [[मारुफा अख्तर]] ३/२१ (४ षटके)
| result = श्रीलंका ४ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548900.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[हुमैरा फराह]] (पा) आणि [[वृंदा राठी]] (भा)
| motm = [[हर्षिता मादवी]] (श्री)
| toss = श्रीलंकेने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = फरजाना ईस्मिन (बां) हिने आंतरराष्ट्रीय टी२० पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ८ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|BAN}}
| team2 = {{crw|UAE}}
| score1 = १०३/७ (२० षटके)
| runs1 = [[शर्मिन अख्तर]] ३८ (३१)
| wickets1 = [[सुरक्षा कोट्टे]] ३/११ (४ षटके)
| score2 = ६९/९ (२० षटके)
| runs2 = [[हिना होतचंदानी]] १८ (१९)
| wickets2 = [[राबेया खान]] ३/१४ (४ षटके)
| result = बांगलादेश ३४ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548902.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[सलीमा इम्तियाझ]] (पा) आणि [[वृंदा राठी]] (भा)
| motm = [[नहिदा अख्तर]] (बां)
| toss = संयुक्त अरब अमिरातीने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| rain =
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}}
==बाद फेरी==
{{4TeamBracket|nowrap=y
| RD1 = [[#उपांत्य सामने|उपांत्य सामने]]
| RD2 = [[#अंतिम सामना|अंतिम सामना]]
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===उपांत्य सामने===
====उपांत्य सामना १====
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| date = १० सप्टेंबर २०२६
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====उपांत्य सामना २====
{{Single-innings cricket match
| date = 11 सप्टेंबर २०२६
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===अंतिम सामना===
{{Single-innings cricket match
| date = १३ सप्टेंबर २०२६
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| team1 = उसावि१
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| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
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== नोंदी ==
{{notelist}}
==संदर्भयादी==
{{संदर्भयादी}}
==बाह्यदुवे==
* [https://www.cricinfo.com/series/women-s-twenty20-asia-cup-2026-1548888 क्रिकइन्फोवरील स्पर्धेचे मुख्य पान]
{{महिला आशिया चषक}}
{{आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६}}
[[वर्ग:संयुक्त अरब अमिरातीमधील क्रिकेट]]
[[वर्ग:महिला क्रिकेट]]
[[वर्ग:इ.स. २०२६ मधील क्रिकेट]]
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2709888
2709886
2026-09-16T07:20:37Z
Nitin.kunjir
4684
2709888
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox cricket tournament
| name = २०२६ महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक
| fromdate = २८ ऑगस्ट
| todate = १३ सप्टेंबर २०२६
| administrator = [[आशिया क्रिकेट समिती]]
| cricket format = [[महिला ट्वेंटी-२० आंतरराष्ट्रीय]]
| tournament format = गट [[साखळी सामने]] आणि [[बाद फेरी]]
| host = {{flag|संयुक्त अरब अमिराती}}
| participants = ८
| matches = १५
| previous_year = २०२४
| previous_tournament = २०२४ महिला ट्वेंटी-२० आशिया चषक
| champions ={{Crw|IND}}
| count = ४
| runner up = {{crw|SL}}
| most runs = {{crwicon|IND}} [[शफाली वर्मा]] (२३६)
| most wickets = {{crwicon|IND}} [[दीप्ती शर्मा]] (१४)
| previous_year = २०२४
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}}
'''२०२६ महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक''' ही [[महिला आशिया चषक]]ाची दहावी (आणि ट्वेंटी२० स्वरूपातील सहावी) स्पर्धा होती. ही स्पर्धा २८ ऑगस्ट ते १३ सप्टेंबर २०२६ या कालावधीत [[संयुक्त अरब अमिराती]]मध्ये आयोजित केली गेली, <ref>{{cite web |trans-title=महिला आशिया चषक २८ ऑगस्टपासून दुबईत सुरू होणार; ५ सप्टेंबरला भारत विरुद्ध पाकिस्तान सामना.|title=Women's Asia Cup starts August 28 in Dubai; India vs Pakistan on September 5 |url=https://www.cricinfo.com/story/women-s-asia-cup-starts-august-28-in-dubai-india-vs-pakistan-on-september-5-1548880 |work=[[क्रिकइन्फो]] |date=६ ऑगस्ट २०२६ |access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web|trans-title= महिला टी२० आशिया चषक २८ ऑगस्टपासून दुबईत सुरू होणार; ५ सप्टेंबरला भारत-पाकिस्तान सामना. |title=Women's T20 Asia Cup to begin on August 28 in Dubai; India-Pakistan clash on September 5 |url=https://www.aninews.in/news/sports/cricket/womens-t20-asia-cup-to-begin-on-august-28-in-dubai-india-pakistan-clash-on-september-520260806220635/ |work=एशियन न्यूज इंटरनॅशनल |date=६ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref> त्यातील सामने [[महिला आंतरराष्ट्रीय टी२०|आंतरराष्ट्रीय टी२०]] स्वरूपात खेळवले गेले. <ref>{{cite web |last= इल्सली |first=रॉबर्ट|date=१० ऑगस्ट २०२६|trans-title= दुबईमध्ये महिला आशिया चषकाचे स्वागत – सर्व तपशील |title=Dubai welcomes Women’s Asia Cup – All the details |url=https://gulfnews.com/sport/dubai-welcomes-womens-asia-cup-all-the-details-1.500636007 |work=[[गल्फ न्यूज]] |access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |trans-title= महिला टी२० आशिया चषक २०२६: ५ सप्टेंबर रोजी दुबईत भारत आणि पाकिस्तान आमनेसामने येणार |title=Women’s T20 Asia Cup 2026: India to face Pakistan on September 5 in Dubai |url=https://ddnews.gov.in/en/womens-t20-asia-cup-2026-india-to-face-pakistan-on-september-5-in-dubai/ |work=[[डीडी न्यूज]] |date=६ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref> श्रीलंका हा गतविजेता संघ होता;<ref>{{cite web |last= रामानुजम |first=श्रीनिधी|date=२८ जुलै २०२४|trans-title= अथापथ्थू आणि समरविक्रमा यांच्या दमदार कामगिरीने भारताला चकित करत श्रीलंकेने पहिले महिला आशिया चषक विजेतेपद पटकावले. |title=Athapaththu, Samarawickrama stun India as Sri Lanka win their first Women's Asia Cup title |url=https://www.cricinfo.com/series/women-s-asia-cup-2024-1426636/sri-lanka-women-vs-india-women-final-1426770/match-report |work=[[क्रिकइन्फो]] |access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |trans-title= भारतावर दणदणीत विजय मिळवत श्रीलंकेने पहिल्यांदाच जिंकला महिला आशिया चषक. |title=Sri Lanka Clinch Maiden Women's Asia Cup Title With Comprehensive Win Over India |url=https://www.icc-cricket.com/news/sri-lanka-clinch-maiden-women-s-asia-cup-title-with-comprehensive-win-over-india |work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]] |date=२८ जुलै २०२४|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref> अंतिम सामन्यात भारताने त्यांचा पराभव केला आणि टी२० प्रकारातील आपले विक्रम अधिक उंचावणारे असे चौथे व आशिया चषकातील एकूण आठवे विजेतेपद पटकावले.
==संघ आणि पात्रता==
{| class="wikitable"
! पात्रतेचे निकष
!दिनांक
!यजमान
!जागा
!पात्र संघ
|-
| rowspan="4" | [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती सदस्य देश# पूर्ण सदस्य|आयसीसी पूर्ण सदस्य]] || rowspan="4" {{n/a}} || rowspan="4" {{n/a}} || rowspan="4" style="text-align:center;" |'''४'''|| {{crw|BAN}}
|-
| {{crw|IND}}
|-
| {{crw|PAK}}
|-
| {{crw|SL}}
|-
| rowspan="4" | [[२०२६ एसीसी महिला प्रीमियर चषक]] || rowspan="4" | १३ जून २०२६ || rowspan="4" | {{flag|मलेशिया}}
| rowspan="4" style="text-align:center;" |'''४'''|| {{crw|HK}}
|-
| {{crw|IDN}}
|-
| {{crw|THA}}
|-
| {{nobr|{{crw|UAE}}}}
|-
! एकूण!! !! !! ८ !!
|}
==संघ==
{| class="wikitable" style="text-align:left;white-space:nowrap; margin:auto"
|-
! {{crw|BAN}}<ref>{{cite web |trans-title= बांगलादेशतर्फे आशिया चषक आणि आशियाई क्रीडा स्पर्धांसाठी अनुभवी संघाची घोषणा. |title=Bangladesh name experienced unit for Asia Cup and Asian Games |url=https://www.icc-cricket.com/news/bangladesh-name-experienced-unit-for-asia-cup-and-asian-games |work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]] |date=१७ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
! {{crw|HKG}}<ref>{{cite web |trans-title=हाँगकाँग, चीनचा महिला संघ आशिया कप २०२६ चे आव्हान स्वीकारण्यास सज्ज आहे. |title=Hong Kong, China women’s team is ready to take on the Asia Cup 2026 Challenge |url=https://www.crickethongkong.com/news-detail/5059/Hong-Kong,-China-women%E2%80%99s-team-is-ready-to-take-on-the-Asia-Cup-2026-Challenge |work=[[क्रिकेट हाँगकाँग, चीन]] |date=१९ ऑगस्ट २०२६ |access-date=२ सप्टेंबर २०२६ |archive-date=2026-08-23 |archive-url=https://web.archive.org/web/20260823143310/https://www.crickethongkong.com/news-detail/5059/Hong-Kong,-China-women%25E2%2580%2599s-team-is-ready-to-take-on-the-Asia-Cup-2026-Challenge |url-status=dead }}</ref>
! {{crw|IND}}<ref>{{cite web |trans-title= २०२६ च्या आशियाई क्रीडा स्पर्धेसाठी भारतीय महिला संघाची घोषणा |title=India Women's squad for the 2026 Asian Games announced |url=https://www.bcci.tv/news/article/india-women-s-squad-for-the-2026-asian-games-announced |work=[[भारतीय क्रिकेट नियामक मंडळ|बीसीसीआय]] |date=३० जून २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
! {{crw|INA}}<ref>{{cite web |trans-title= २०२६ डीपी वर्ल्ड महिला आशिया चषक स्पर्धेमध्ये इंडोनेशियाला इतिहास घडवण्याची संधी, तरुण संघ खंडीय स्तरावर आपली छाप सोडण्यास सज्ज. |title=History beckons for Indonesia at the DP World Womens Asia Cup 2026 with a youthful squad ready to make its mark on the continental stag |url=https://www.instagram.com/p/DcdirJMoaQq/ |work=[[आशिया क्रिकेट समिती]] |date=२५ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६|via=[[इन्स्टाग्राम]]}}</ref>
|-
|valign=top|
* [[निगार सुलताना]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]], [[यष्टीरक्षक|य]])
* [[नाहिदा अख्तर]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)#उपकर्णधार|उक]])
* [[जुवैरिया फिरदौस]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[दिलारा अख्तर]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[फरिहा तृष्ना]]
* [[फाहिमा खातून]]
* [[मारुफा अख्तर]]
* [[राबेया खान]]
* [[रितू मोनी]]
* [[शर्मिन अख्तर]]
* [[शर्मिन सुलताना]]
* [[शोभना मोस्तारी]]
* [[शोर्णा अख्तर]]
* [[संजिदा अक्तेर मेघला]]
* [[सुलताना खातून]]
|valign=top|
* [[कॅरी चॅन]]
* ॲलिसन सिउ
* इक्रा सहर
* जॉयलीन कौर
* [[नताशा माइल्स]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]])
* मरिना लॅम्प्लो
* मरियम बीबी ([[कर्णधार (क्रिकेट)#उपकर्णधार|उक]])
* महेकदीप कौर
* [[मारिको हिल]]
* [[यास्मिन दासवानी]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* रुचिता व्यंकटेश
* शानझीन शहजाद ([[यष्टीरक्षक|य]])
* शार्लोट चॅन
* शिंग चॅन
* हेली वोंग
|valign=top|
* [[हरमनप्रीत कौर]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]])
* [[स्मृती मंधाना]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)#उपकर्णधार|उक]])
* [[अरुंधती रेड्डी]]
* [[ऋचा घोष]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[क्रांती गौड]]
* [[गुणलन कमलिनी]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* <s>[[जेमिमा रॉड्रिग्ज]]</s>{{efn|name=Jemimah| हॅमस्ट्रिंगच्या दुखापतीमुळे भारताच्या संघात [[जेमिमा रॉड्रिग्ज]]च्या जागी [[प्रतिका रावळ ]]ची निवड करण्यात आली.<ref>{{cite web |trans-title= जेमिमा रॉड्रिज आशिया चषक आणि आशियाई क्रीडा स्पर्धेतून बाहेर |title=Jemimah Rodrigues ruled out of Asia Cup and Asian Games |url=https://www.bcci.tv/news/article/jemimah-rodrigues-ruled-out-asia-cup-and-asian-games |work=[[भारतीय क्रिकेट नियामक मंडळ|बीसीसीआय]] |date=१४ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref>}}
* [[दीप्ती शर्मा]]
* [[नंदनी शर्मा]]
* [[प्रतिका रावळ]]{{efn|name=Jemimah}}
* [[भारती फुलमाळी]]
* [[राधा यादव]]
* [[रेणुका सिंग]]
* [[शफाली वर्मा]]
* [[श्री चरणी]]
|valign=top|
* नि पुटू आयु नंदा सक्रीनी ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]], [[(यष्टीरक्षक|य)]]
* कदेक विंदा प्रस्तीनी
* किसी कसे
* दारा अगुंग लक्ष्मी
* देर्नी बांगी
* देसी वुलंदरी
* नि कडेक अरियानी
* नि कदेक फित्रिया राडा राणी
* नि मादे पुत्री सुवांदेवी
* नि लुह वेसिक रत्न देवि
* मारिया कोराझोन ([[यष्टीरक्षक|य]])
* रहमावती पंगेस्तुती
* ली किआओ
* सांग आयू मायप्रियानी
* सोफिया वेलिक
|-
! {{crw|PAK}}<ref>{{cite web |trans-title= एसीसी आशिया चषक आणि आशियाई क्रीडा स्पर्धांसाठी पाकिस्तानच्या महिला संघांची घोषणा |title=Pakistan women's squads announced for ACC Asia Cup and Asian Games |url=https://www.pcb.com.pk/press-release-detail/pakistan-women-s-squads-announced-for-acc-asia-cup-and-asian-games.html |work=[[पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड]] |date=१६ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
! {{crw|SL}}<ref>{{cite web |trans-title=महिला आशिया चषक २०२६ साठी श्रीलंकेचा संघ|title=Sri Lanka Squad for Women’s Asia Cup 2026 |url=https://srilankacricket.lk/2026/08/sri-lanka-squad-for-womens-asia-cup-2026/ |work=[[श्रीलंका क्रिकेट]] |date=१३ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
! {{crw|THA}}<ref>{{cite web |trans-title=डीपी वर्ल्ड महिला आशिया चषक २०२६ साठी थायलंडच्या संघात युवा आणि अनुभवी खेळाडूंचा उत्तम मेळ.|title=A fine blend of youth and experience headlines Thailand’s squad for the DP World Womens Asia Cup 2026 |url=https://www.facebook.com/share/p/1GoTyhYzp9/ |work=[[आशिया क्रिकेट समिती]] |date=२१ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६|via=[[फेसबुक]]}}</ref>
! {{crw|UAE}}<ref>{{cite web |trans-title=डीपी वर्ल्ड महिला आशिया चषक २०२६ - ईशा ओझा यूएईच्या १५ सदस्यांच्या संघाचे नेतृत्व करणार |title=DP World Women's Asia Cup 2026 - ईशा ओझा to lead UAE's 15-member squad |url=https://emiratescricket.com/news-detail/OMWVYmxkazn7aJ0PoX1G |work=[[अमिराती क्रिकेट बोर्ड]] |date=२१ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
|-
|valign=top|
* [[फातिमा सना]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]])
* [[आयेशा झफर]]
* [[इमान नसीर]]
* [[उम्म-ए-हानी]]
* [[एमान फातिमा]]
* [[गुल फरोझा]]
* [[तुबा हसन]]
* [[सायरा जबीन]]
* <s>[[नजीहा अल्वी]]</s>{{efn|name=Najiha| गुडघ्याच्या दुखापतीमुळे पाकिस्तानच्या संघात [[सदफ शमास]] च्या जागी [[नजीहा अल्वी]]चा समावेश करण्यात आला. <ref>{{cite web |trans-title= एसीसी महिला आशिया चषक स्पर्धेसाठी पाकिस्तान संघात दुखापतग्रस्त नजीहा अल्वीच्या जागी सदफ शमासचा समावेश|title= Sadaf Shamas replaces injured Najiha Alvi in Pakistan squad for ACC Women's Asia Cup |url=https://www.pcb.com.pk/press-release-detail/sadaf-shamas-replaces-injured-najiha-alvi-in-pakistan-squad-for-acc-women-s-asia-cup.html |work=[[पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड]] |date=२४ ऑगस्ट २०२६}}</ref>}}
* [[नश्रा संधू]]
* [[मुनीबा अली]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[मोमिना रियासत]]
* [[वहीदा अख्तर]]
* [[शवाल झुल्फिकार]]
* [[सदफ शमास]]{{efn|name=Najiha}}
* [[सादिया इक्बाल]]
|valign=top|
* [[चामरी अटापट्टू]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]])
* [[हर्षिता मादवी]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)#उपकर्णधार|उक]])
* [[इमेशा दुलानी]]
* [[कविशा दिलहारी]]
* [[काव्या कविंदी]]
* [[कौशिनी नुत्यंगना]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[चेतना विमुक्ती]]
* [[देउमी विहंगा]]
* [[निलाक्षी डि सिल्व्हा ]]
* [[मिताली आयोद्या]]
* [[विश्मी गुणरत्ने]]
* [[संजना कविंदी]]
* [[सुगंदिका कुमारी]]
* [[हसिनी परेरा]]
* चामुडी प्रबोधा
|valign=top|
* [[नरुएमोल चैवाई]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]], [[यष्टीरक्षक|य]])
* [[अपिसरा सुवांचनरोती]]
* [[ओन्निचा कांचोम्पू]]
* कोरानित सुवांचनरोती
* चयानिसा फेंगपेन
* [[चानिदा सुत्थिरुआंग]]
* थनरादा सीसावान
* [[थीपचा पुत्थावॉन्ग]]
* [[नत्ताकन चांतम]]
* [[नन्नाफत चैहान]]
* नाओमी हॅमिल्टन
* [[नान्नापत काँचारोएन्काई]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[फन्नीता माया]]
* [[सुनिदा चतुरोंगरात्तना]]
* [[सुलीपोर्न लाओमी]]
|valign=top|
* [[ईशा ओझा]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]])
* अर्चरा सुप्रिया
* [[इंदुजा नंदकुमार]]
* उत्तरा अय्यर
* जननी तिरुक्ककुमारन
* [[तीर्थ सतीश]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* मेहुल कुलकर्णी
* रिणिता रजीत
* [[लावण्या केनी]]
* [[वैष्णवी महेश]]
* शशिकला सिल्वा
* [[समायरा धरणीधरका]]
* [[सिया गोखले]]
* [[सुरक्षा कोट्टे]]
* [[हीना होतचंदानी]]
|}
==गट फेरी==
स्पर्धेचे वेळापत्रक ६ ऑगस्ट २०२६ रोजी जाहीर करण्यात आले.<ref>{{cite web |trans-title= महिला आशिया चषक २०२६ च्या वेळापत्रकात भारत-पाकिस्तान सामना मुख्य आकर्षण |title= India-Pakistan clash headlines Women's Asia Cup 2026 schedule |url=https://www.cricbuzz.com/cricket-news/139765/india-pakistan-clash-headlines-womens-asia-cup-2026-schedule |work=[[क्रिकबझ्झ]] |date=६ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |trans-title= महिला आशिया चषक २०२६ चे वेळापत्रक जाहीर: दुबईत ५ सप्टेंबरला भारत-पाकिस्तान सामना |title=Women's Asia Cup 2026 Schedule Announced: India-Pakistan Clash Set For September 5 In Dubai |url=https://www.outlookindia.com/sports/cricket/womens-asia-cup-2026-schedule-fixture-india-vs-pakistan |work= [[आउटलुक (भारतीय नियतकालिक) | आउटलुक]] |date=६ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
===गट अ===
====गुणफलक====
<section begin=Group A/>
{| class="wikitable" style="text-align:center"
! style="width:25px"| स्थान
! style="width:160px"| संघ
! style="width:30px"| {{abbr|सा|सामने}}
! style="width:30px"| {{abbr|वि|विजय}}
! style="width:30px"| {{abbr|प|पराभव}}
! style="width:30px"| {{abbr|अ|अनिर्णित}}
! style="width:30px"| गुण
! {{abbr|धावगती|निव्वळ धावगती}}
|-style="background:#cfc;"
| १ || style="text-align:left" | {{Crw|IND}} || ३ || ३ || ० || ० || '''६''' || ५.४७१
|-style="background:#cfc;"
| २ || style="text-align:left" | {{Crw|PAK}} || ३ || २ || १ || ० || '''४''' || ०.९२७
|-
| ३ || style="text-align:left" | {{Crw|THA}} || ३ || १ || २ || ० || '''२''' || −२.०५०
|-
| ४ || style="text-align:left" | {{Crw|HK}} || ३ || ० || ३ || ० || '''०''' || −३.५८३
|}
<small>स्रोत: [[क्रिकइन्फो]]<ref name="PTWATC26">{{cite web|url=https://www.cricinfo.com/series/women-s-asia-cup-2026-1548888/points-table-standings|trans-title=महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक २०२६ – गुणफलक आणि संघ क्रमवारी|title= Women's Twenty20 Asia Cup 2026 Points Table & Team Standings |access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref></small>
<section end=Group A/>
====सामने====
{{Single-innings cricket match
| date = २८ ऑगस्ट २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|THA}}
| team2 = {{crw|HKG}}
| score1 = १२०/९ (२० षटके)
| runs1 = [[नरुएमोल चैवाई]] ४३ (३१)
| wickets1 = मरिना लॅम्प्लो ४/११ (४ षटके)
| score2 = ११४/७ (२० षटके)
| runs2 = [[कॅरी चॅन]] २८ (२०)
| wickets2 = [[ओन्निचा कांचोम्पू]] ३/२७ (४ षटके)
| result = थायलंड ६ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548891.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = रबाब अहसान (युएई) आणि [[वृंदा राठी]] (भा)
| motm = [[नरुएमोल चैवाई]] (था)
| toss = हाँग काँगने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला .
| notes = नाओमी हॅमिल्टन (था) हिने आंतरराष्ट्रीय टी२० पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३० ऑगस्ट २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|IND}}
| team2 = {{crw|THA}}
| score1 = १५९/९ (२० षटके)
| runs1 = [[शफाली वर्मा]] ६४ (३६)
| wickets1 = [[सुलीपोर्न लाओमी]] ३/२६ (४ षटके)
| score2 = ६५ (१६.१ षटके)
| runs2 = [[नान्नापत काँचारोएन्काई]] ४१ (४८)
| wickets2 = [[दीप्ती शर्मा]] ३/० (१.१ षटके)
| result = भारत ९४ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548893.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[निमाली परेरा]] (श्री) आणि [[मिशू चौधरी]] (बां)
| motm = [[शफाली वर्मा]] (भा)
| toss = थायलंडने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला .
| notes = [[प्रतिका रावळ]] (भा) हिने आंतरराष्ट्रीय टी२० पदार्पण केले.
* [[दीप्ती शर्मा]] (भा) तिचा १५०वा आंतरराष्ट्रीय टी२० सामना खेळली.<ref>{{cite web |last=बिश्त|first=हर्षित|date=३० ऑगस्ट २०२६|url=https://www.news18.com/cricket/deepti-sharma-becomes-third-indian-to-play-150-wt20is-10300870.html |trans-title= दीप्ती शर्मा १५० आंतरराष्ट्रीय टी२० सामने खेळण्यासाठी हरमनप्रीत कौर आणि स्मृती मंधाना नंतर तिसरी भारतीय बनली |title= Deepti Sharma Becomes 3rd Indian After Harmanpreet Kaur And Smriti Mandhana To Play 150 WT20Is |work=[[न्यूज१८]] |access-date=३ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = १ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|PAK}}
| team2 = {{crw|THA}}
| score1 = ११९/९ (२० षटके)
| runs1 = [[मुनीबा अली]] ५४ (५२)
| wickets1 = [[सुलीपोर्न लाओमी]] ३/१४ (४ षटके)
| score2 = ८४/८ (२० षटके)
| runs2 = [[चानिदा सुत्थिरुआंग]] २५ (२४)
| wickets2 = [[सादिया इक्बाल]] ३/११ (४ षटके)
| result = पाकिस्तान ३५ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548895.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[शाथिरा जाकीर]] (बां) आणि [[निमाली परेरा]] (श्री)
| motm = [[मुनीबा अली]] (पा)
| toss = पाकिस्तानने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|IND}}
| team2 = {{crw|HKG}}
| score1 = १९३/५ (२० षटके)
| runs1 = [[स्मृती मंधाना]] १२४ (६४)
| wickets1 = मरिना लॅम्प्लो २/४६ (४ षटके)
| score2 = ५६ (१६.२ षटके)
| runs2 = [[नताशा माइल्स]] १५ (२७)
| wickets2 = [[दीप्ती शर्मा]] ३/९ (३ षटके)
| result = भारत १३७ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/series/women-s-asia-cup-2026-1548888/hong-kong-women-vs-india-women-7th-match-group-a-1548897/live-cricket-score धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [मिशू चौधरी]] (बां) आणि [[निमाली परेरा]] (श्री)
| motm = [[स्मृती मंधाना]] (भा)
| toss = हाँग काँगने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = हाँग काँग आणि भारत हे देश आंतरराष्ट्रीय टी२० सामन्यामध्ये समोरासमोर येण्याची ही पहिलीच वेळ असेल.
* ॲलिसन सिउ (हाँकाँ) हिचा हा १००वा आंतरराष्ट्रीय टी२० सामना होता.
* भारताच्या [[स्मृती मंधाना]]चे हे १८ वे आंतरराष्ट्रीय शतक होते. तिने ऑस्ट्रेलियाच्या [[मेग लॅनिंग]]ला मागे टाकून सर्वाधिक आंतरराष्ट्रीय शतकांच्या यादीत अव्वल स्थान पटकावले.<ref>{{cite web|url=https://www.loksatta.com/krida/smriti-mandhana-breaks-big-record-of-meg-lenning-of-scoring-most-centuries-in-international-cricket-amd-2000-6117020/|title=Smriti Mandhana Record: स्मृती मानधना जगात भारी! मेग लेनिंगला मागे टाकत ‘हा’ रेकॉर्ड करणारी ठरली जगातील पहिलीच फलंदाज|work=लोकसत्ता|access-date=४ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
* ह्या सामन्याच्या निकलामुळे भारत उपांत्य फेरीसाठी पात्र.<ref>{{cite web|url=https://www.cricinfo.com/series/women-s-asia-cup-2026-1548888/hong-kong-women-vs-india-women-7th-match-group-a-1548897/match-report|trans-title=मंधानाच्या विक्रमी शतकाच्या जोरावर भारताची उपांत्य फेरीत धडक|title=Mandhana's record ton powers India into semi-finals|work=क्रिकइन्फो|access-date=४ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ५ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|PAK}}
| team2 = {{crw|IND}}
| score1 = ५५ (१८.१ षटके)
| runs1 = [[शवाल झुल्फिकार]] १४ (१४)
| wickets1 = [[श्री चरणी]] ३/७ (४ षटके)
| score2 = ५७/३ (८.४ षटके)
| runs2 = [[हरमनप्रीत कौर]] १८[[नाबाद|*]] (१८)
| wickets2 = [[फातिमा सना]] ३/१७ (३ षटके)
| result = भारत ७ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548899.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[शाथिरा जाकीर]] (बां) आणि [[निमाली परेरा]] (श्री)
| motm = [[श्री चरणी]] (भा)
| toss = पाकिस्तानने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = [[रमनप्रीत कौर]] (भा) हीचा कर्णधार म्हणून हा १५०वा आंतरराष्ट्रीय टी२० सामना होता.<ref>{{cite web |url=https://www.rediff.com/amp/cricket/report/india-vs-pakistan-womens-asia-cup-historic-harmanpreet-kaur-first-cricketer-to-captain-in-150-t20is/20260905.htm |trans-title=ऐतिहासिक! १५० टी२० आंतरराष्ट्रीय सामन्यांत नेतृत्व करणारी हरमनप्रीत पहिली कर्णधार.|title=Historic! Harmanpreet first captain to lead in 150 T20Is |work=रेडीफ.कॉम |date=५ सप्टेंबर २०२६ |access-date=७ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
* ही आंतरराष्ट्रीय टी२० सामन्यामधील पाकिस्तानची सर्वात कमी धावसंख्या होती.<ref>{{cite news |trans-title=भारताविरुद्ध पाकिस्तान महिला संघाची ५५ धावांत घसरण; टी-२० आंतरराष्ट्रीय सामन्यातील सर्वात कमी धावसंख्येची नोंद.|title=Pakistan Women collapse to 55 against India, suffer lowest-ever T20I total |url=https://www.aninews.in/news/sports/cricket/pakistan-women-collapse-to-55-against-india-suffer-lowest-ever-t20i-total20260905220156/ |work=एशियन न्यूज इंटरनॅशनल |date=५ सप्टेंबर २०२६ |access-date=७ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
* [[शफाली वर्मा]] (भा) हिच्या आंतरराष्ट्रीय टी२० कारकिर्दीतील ३,००० धावा पूर्ण.<ref>{{cite web |url=https://timesofindia.indiatimes.com/sports/cricket/womens-asia-cup/news/shafali-varma-scripts-history-becomes-fastest-and-youngest-to-3000-t20i-runs-in-womens-cricket/articleshow/133809520.cms |trans-title=शफाली वर्माची ऐतिहासिक कामगिरी; महिला क्रिकेटमध्ये ३,००० आंतरराष्ट्रीय टी२० धावा पूर्ण करणारी सर्वात जलद आणि सर्वात तरुण खेळाडू ठरली.|title=Shafali Varma scripts history, becomes fastest and youngest to reach 3,000 T20I runs in women’s cricket |work=[[द टाइम्स ऑफ इंडिया]] |date=५ सप्टेंबर २०२६ |access-date=७ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ७ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|PAK}}
| team2 = {{crw|HK}}
| score1 = १४३/८ (२० षटके)
| runs1 = [[शवाल झुल्फिकार]] ४७ (३५)
| wickets1 = जॉयलीन कौर ४/१९ (४ षटके)
| score2 = ७१ (१९ षटके)
| runs2 = [[कॅरी चॅन]] ३० (४७)
| wickets2 = [[नश्रा संधू]] ६/७ (४ षटके)
| result = पाकिस्तान ७२ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548901.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = रबाब अहसान (युएई) आणि [मिशू चौधरी]] (बां)
| motm = [[नश्रा संधू]] (पा)
| toss = पाकिस्तानने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = हाँगकाँग आणि पाकिस्तान हे देश आंतरराष्ट्रीय टी२० सामन्यामध्ये समोरासमोर येण्याची ही पहिलीच वेळ असेल.
* [[नश्रा संधू]]ने (पा) आंतरराष्ट्रीय टी२० सामन्यामध्ये पहिल्यांदाच एका डावात पाच बळी घेण्याची कामगिरी केली.
}}
===गट ब===
====गुणफलक====
<section begin=Group B/>
{| class="wikitable" style="text-align:center"
! style="width:25px"| स्थान
! style="width:160px"| संघ
! style="width:30px"| {{abbr|सा|सामने}}
! style="width:30px"| {{abbr|वि|विजय}}
! style="width:30px"| {{abbr|प|पराभव}}
! style="width:30px"| {{abbr|अ|अनिर्णित}}
! style="width:30px"| गुण
! {{abbr|धावगती|निव्वळ धावगती}}
|-style="background:#cfc;"
| १ || style="text-align:left" | {{Crw|SRI}} || ३ || ३ || ० || ० || '''६''' || २.७३०
|-style="background:#cfc;"
| २ || style="text-align:left" | {{Crw|BAN}} || ३ || २ || १ || ० || '''४''' || १.६८८
|-
| ३ || style="text-align:left" | {{Crw|UAE}} '''(य)''' || ३ || १ || २ || ० || '''२''' || −१.१५८
|-
| ४ || style="text-align:left" | {{Crw|INA}} || ३ || ० || ३ || ० || '''०''' || −३.१६९
|}
<small>स्रोत: [[क्रिकइन्फो]]<ref name="PTWATC26"/></small>
<section end=Group B/>
====सामने====
{{Single-innings cricket match
| date = २९ ऑगस्ट २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|UAE}}
| team2 = {{crw|SL}}
| score1 = ७९ (१९.५ षटके)
| runs1 = [[ईशा ओझा]] १८ (२४)
| wickets1 = [[मिताली आयोद्या]] ३/१४ (३.५ षटके)
| score2 = ८०/१ (७.५ षटके)
| runs2 = [[चामरी अटापट्टू]] ४८[[नाबाद|*]] (२५)
| result = श्रीलंका ९ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548892.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[हुमैरा फराह]] (पा) आणि [[शाथिरा जाकीर]] (बां)
| motm = [[चेतना विमुक्ती]] (श्री)
| toss = श्रीलंकेने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला .
| notes = [[चेतना विमुक्ती]] (श्री) हिने आंतरराष्ट्रीय टी२० पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३१ ऑगस्ट २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|BAN}}
| team2 = {{crw|INA}}
| score1 = १२९/८ (२० षटके)
| runs1 = [[शोभना मोस्तारी]] ४० (४२)
| wickets1 = नि अरियानी ३/२८ (४ षटके)
| score2 = ५८ (१७.३ षटके)
| runs2 = मारिया कोराझोन १२ (१३)
| wickets2 = [[नाहिदा अख्तर]] ३/१५ (४ षटके)
| result = बांगलादेश ७१ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548894.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[सलीमा इम्तियाझ]] (पा) आणि [[शिवानी मिश्रा]] (क)
| motm = [[नाहिदा अख्तर]] (बां)
| toss = इंडोनेशियाने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = महिला आंतरराष्ट्रीय टी२० सामन्यामध्ये इंडोनेशिया आणि बांगलादेश आमनेसामने येण्याची ही पहिलीच वेळ होती.
* सोफिया वेलिक (इं) हिने आंतरराष्ट्रीय टी२० पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = २ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|SL}}
| team2 = {{crw|INA}}
| score1 = १२४/७ (२० षटके)
| runs1 = [[निलाक्षी डि सिल्व्हा]] ५० (३५)
| wickets1 = नि लुह देवि ३/३२ (४ षटके)
| score2 = ४९ (१८.३ षटके)
| runs2 = नि मादे पुत्री सुवांदेवी १२[[नाबाद|*]] (३२)
| wickets2 = [[चामरी अटापट्टू]] ७/५ (३.३ षटके)
| result = श्रीलंका ७५ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548896.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[शिवानी मिश्रा]] (क) आणि [[सलीमा इम्तियाझ]] (पा)
| motm = [[चामरी अटापट्टू]] (श्री)
| toss = इंडोनेशियाने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = महिला आंतरराष्ट्रीय टी२० सामन्यामध्ये इंडोनेशिया आणि श्रीलंका आमनेसामने येण्याची ही पहिलीच वेळ होती.
* [[चामरी अटापट्टू]] (श्रीलंका) हिने महिला टी२० आशिया चषकातील सर्वोत्तम गोलंदाजीची कामगिरी नोंदवली, टी२० आंतरराष्ट्रीय सामन्यांत पहिल्यांदाच एका डावात पाच बळी घेतले, तसेच महिला आंतरराष्ट्रीय टी२० सामन्यांत हॅट्ट्रिक आणि ७ बळी घेणारी पहिली श्रीलंकाई खेळाडू ठरली.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date =४ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|INA}}
| team2 = {{crw|UAE}}
| score1 = ७३ (१९.४ षटके)
| runs1 = नि पुटू आयु नंदा सक्रीनी ३९ (५२)
| wickets1 = [[सुरक्षा कोट्टे]] ३/१६ (४ षटके)
| score2 = ७५/४ (१३.१ षटके)
| runs2 = [[ईशा ओझा]] ३० (२९)
| wickets2 = सोफिया वेलिक २/२५ (३.१ षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ६ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548896.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[शिवानी मिश्रा]] (कतार) आणि [[वृंदा राठी]] (भा)
| motm = [[ईशा ओझा]]] (युएई)
| toss = संयुक्त अरब अमिरातीने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ६ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|BAN}}
| team2 = {{crw|SL}}
| score1 = ११४/८ (२० षटके)
| runs1 = [[शोभना मोस्तारी]] ३४ (४१)
| wickets1 = चामुडी प्रबोधा ३/२१ (४ षटके)
| score2 = ११५/६ (१९.२ षटके)
| runs2 = [[हर्षिता मादवी]] ४८[[नाबाद|*]] (३७)
| wickets2 = [[मारुफा अख्तर]] ३/२१ (४ षटके)
| result = श्रीलंका ४ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548900.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[हुमैरा फराह]] (पा) आणि [[वृंदा राठी]] (भा)
| motm = [[हर्षिता मादवी]] (श्री)
| toss = श्रीलंकेने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = फरजाना ईस्मिन (बां) हिने आंतरराष्ट्रीय टी२० पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ८ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|BAN}}
| team2 = {{crw|UAE}}
| score1 = १०३/७ (२० षटके)
| runs1 = [[शर्मिन अख्तर]] ३८ (३१)
| wickets1 = [[सुरक्षा कोट्टे]] ३/११ (४ षटके)
| score2 = ६९/९ (२० षटके)
| runs2 = [[हिना होतचंदानी]] १८ (१९)
| wickets2 = [[राबेया खान]] ३/१४ (४ षटके)
| result = बांगलादेश ३४ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548902.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[सलीमा इम्तियाझ]] (पा) आणि [[वृंदा राठी]] (भा)
| motm = [[नहिदा अख्तर]] (बां)
| toss = संयुक्त अरब अमिरातीने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
==बाद फेरी==
{{4TeamBracket|nowrap=y
| RD1 = [[#उपांत्य सामने|उपांत्य सामने]]
| RD2 = [[#अंतिम सामना|अंतिम सामना]]
| seeds = yes
| RD1-seed1 = अ१
| RD1-team1 = '''{{Cr|IND}}'''
| RD1-score1 ='''१४९/६ (२० षटके)'''
| RD1-seed2 = ब२
| RD1-team2 = {{Cr|BAN}}
| RD1-score2 =१०९/७ (२० षटके)
| RD1-seed3 = ब१
| RD1-team3 = '''{{Cr|SRI}}'''
| RD1-score3 ='''१३४/६ (१८.४ षटके)'''
| RD1-seed4 = अ२
| RD1-team4 = {{Cr|PAK}}
| RD1-score4 =१३०/५ (२० षटके)
| RD2-seed1 = उसा१
| RD2-team1 ='''{{Cr|IND}}'''
| RD2-score1 ='''१८३/५ (२० षटके)'''
| RD2-seed2 = उसा२
| RD2-team2 ={{Cr|SRI}}
| RD2-score2 =१११ (२० षटके)
}}
===उपांत्य सामने===
====उपांत्य सामना १====
{{Single-innings cricket match
| date = १० सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{Cr-rt|IND}}
| team2 = {{Cr|BAN}}
| score1 =
| runs1 =
| wickets1 =
| score2 =
| runs2 =
| wickets2 =
| result =
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548903.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires =
| motm =
| toss =
| rain =
| notes =
}}
====उपांत्य सामना २====
{{Single-innings cricket match
| date = 11 सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{Cr-rt|SRI}}
| team2 = {{Cr|PAK}}
| score1 =
| runs1 =
| wickets1 =
| score2 =
| runs2 =
| wickets2 =
| result =
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548904.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires =
| motm =
| toss =
| rain =
| notes =
}}
===अंतिम सामना===
{{Single-innings cricket match
| date = १३ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = उसावि१
| team2 = उसावि२
| score1 =
| runs1 =
| wickets1 =
| score2 =
| runs2 =
| wickets2 =
| result =
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548905.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires =
| motm =
| toss =
| rain =
| notes =
}}
== नोंदी ==
{{notelist}}
==संदर्भयादी==
{{संदर्भयादी}}
==बाह्यदुवे==
* [https://www.cricinfo.com/series/women-s-twenty20-asia-cup-2026-1548888 क्रिकइन्फोवरील स्पर्धेचे मुख्य पान]
{{महिला आशिया चषक}}
{{आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६}}
[[वर्ग:संयुक्त अरब अमिरातीमधील क्रिकेट]]
[[वर्ग:महिला क्रिकेट]]
[[वर्ग:इ.स. २०२६ मधील क्रिकेट]]
ip7cm56yrg4nc8zkvg5namiso6q72dm
2709889
2709888
2026-09-16T07:54:49Z
Nitin.kunjir
4684
/* बाद फेरी */
2709889
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox cricket tournament
| name = २०२६ महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक
| fromdate = २८ ऑगस्ट
| todate = १३ सप्टेंबर २०२६
| administrator = [[आशिया क्रिकेट समिती]]
| cricket format = [[महिला ट्वेंटी-२० आंतरराष्ट्रीय]]
| tournament format = गट [[साखळी सामने]] आणि [[बाद फेरी]]
| host = {{flag|संयुक्त अरब अमिराती}}
| participants = ८
| matches = १५
| previous_year = २०२४
| previous_tournament = २०२४ महिला ट्वेंटी-२० आशिया चषक
| champions ={{Crw|IND}}
| count = ४
| runner up = {{crw|SL}}
| most runs = {{crwicon|IND}} [[शफाली वर्मा]] (२३६)
| most wickets = {{crwicon|IND}} [[दीप्ती शर्मा]] (१४)
| previous_year = २०२४
| previous_tournament = २०२४ महिला ट्वेंटी-२० आशिया चषक
| next_year = २०२८
| next_tournament = २०२८ महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक
}}
'''२०२६ महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक''' ही [[महिला आशिया चषक]]ाची दहावी (आणि ट्वेंटी२० स्वरूपातील सहावी) स्पर्धा होती. ही स्पर्धा २८ ऑगस्ट ते १३ सप्टेंबर २०२६ या कालावधीत [[संयुक्त अरब अमिराती]]मध्ये आयोजित केली गेली, <ref>{{cite web |trans-title=महिला आशिया चषक २८ ऑगस्टपासून दुबईत सुरू होणार; ५ सप्टेंबरला भारत विरुद्ध पाकिस्तान सामना.|title=Women's Asia Cup starts August 28 in Dubai; India vs Pakistan on September 5 |url=https://www.cricinfo.com/story/women-s-asia-cup-starts-august-28-in-dubai-india-vs-pakistan-on-september-5-1548880 |work=[[क्रिकइन्फो]] |date=६ ऑगस्ट २०२६ |access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web|trans-title= महिला टी२० आशिया चषक २८ ऑगस्टपासून दुबईत सुरू होणार; ५ सप्टेंबरला भारत-पाकिस्तान सामना. |title=Women's T20 Asia Cup to begin on August 28 in Dubai; India-Pakistan clash on September 5 |url=https://www.aninews.in/news/sports/cricket/womens-t20-asia-cup-to-begin-on-august-28-in-dubai-india-pakistan-clash-on-september-520260806220635/ |work=एशियन न्यूज इंटरनॅशनल |date=६ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref> त्यातील सामने [[महिला आंतरराष्ट्रीय टी२०|आंतरराष्ट्रीय टी२०]] स्वरूपात खेळवले गेले. <ref>{{cite web |last= इल्सली |first=रॉबर्ट|date=१० ऑगस्ट २०२६|trans-title= दुबईमध्ये महिला आशिया चषकाचे स्वागत – सर्व तपशील |title=Dubai welcomes Women’s Asia Cup – All the details |url=https://gulfnews.com/sport/dubai-welcomes-womens-asia-cup-all-the-details-1.500636007 |work=[[गल्फ न्यूज]] |access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |trans-title= महिला टी२० आशिया चषक २०२६: ५ सप्टेंबर रोजी दुबईत भारत आणि पाकिस्तान आमनेसामने येणार |title=Women’s T20 Asia Cup 2026: India to face Pakistan on September 5 in Dubai |url=https://ddnews.gov.in/en/womens-t20-asia-cup-2026-india-to-face-pakistan-on-september-5-in-dubai/ |work=[[डीडी न्यूज]] |date=६ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref> श्रीलंका हा गतविजेता संघ होता;<ref>{{cite web |last= रामानुजम |first=श्रीनिधी|date=२८ जुलै २०२४|trans-title= अथापथ्थू आणि समरविक्रमा यांच्या दमदार कामगिरीने भारताला चकित करत श्रीलंकेने पहिले महिला आशिया चषक विजेतेपद पटकावले. |title=Athapaththu, Samarawickrama stun India as Sri Lanka win their first Women's Asia Cup title |url=https://www.cricinfo.com/series/women-s-asia-cup-2024-1426636/sri-lanka-women-vs-india-women-final-1426770/match-report |work=[[क्रिकइन्फो]] |access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |trans-title= भारतावर दणदणीत विजय मिळवत श्रीलंकेने पहिल्यांदाच जिंकला महिला आशिया चषक. |title=Sri Lanka Clinch Maiden Women's Asia Cup Title With Comprehensive Win Over India |url=https://www.icc-cricket.com/news/sri-lanka-clinch-maiden-women-s-asia-cup-title-with-comprehensive-win-over-india |work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]] |date=२८ जुलै २०२४|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref> अंतिम सामन्यात भारताने त्यांचा पराभव केला आणि टी२० प्रकारातील आपले विक्रम अधिक उंचावणारे असे चौथे व आशिया चषकातील एकूण आठवे विजेतेपद पटकावले.
==संघ आणि पात्रता==
{| class="wikitable"
! पात्रतेचे निकष
!दिनांक
!यजमान
!जागा
!पात्र संघ
|-
| rowspan="4" | [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती सदस्य देश# पूर्ण सदस्य|आयसीसी पूर्ण सदस्य]] || rowspan="4" {{n/a}} || rowspan="4" {{n/a}} || rowspan="4" style="text-align:center;" |'''४'''|| {{crw|BAN}}
|-
| {{crw|IND}}
|-
| {{crw|PAK}}
|-
| {{crw|SL}}
|-
| rowspan="4" | [[२०२६ एसीसी महिला प्रीमियर चषक]] || rowspan="4" | १३ जून २०२६ || rowspan="4" | {{flag|मलेशिया}}
| rowspan="4" style="text-align:center;" |'''४'''|| {{crw|HK}}
|-
| {{crw|IDN}}
|-
| {{crw|THA}}
|-
| {{nobr|{{crw|UAE}}}}
|-
! एकूण!! !! !! ८ !!
|}
==संघ==
{| class="wikitable" style="text-align:left;white-space:nowrap; margin:auto"
|-
! {{crw|BAN}}<ref>{{cite web |trans-title= बांगलादेशतर्फे आशिया चषक आणि आशियाई क्रीडा स्पर्धांसाठी अनुभवी संघाची घोषणा. |title=Bangladesh name experienced unit for Asia Cup and Asian Games |url=https://www.icc-cricket.com/news/bangladesh-name-experienced-unit-for-asia-cup-and-asian-games |work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]] |date=१७ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
! {{crw|HKG}}<ref>{{cite web |trans-title=हाँगकाँग, चीनचा महिला संघ आशिया कप २०२६ चे आव्हान स्वीकारण्यास सज्ज आहे. |title=Hong Kong, China women’s team is ready to take on the Asia Cup 2026 Challenge |url=https://www.crickethongkong.com/news-detail/5059/Hong-Kong,-China-women%E2%80%99s-team-is-ready-to-take-on-the-Asia-Cup-2026-Challenge |work=[[क्रिकेट हाँगकाँग, चीन]] |date=१९ ऑगस्ट २०२६ |access-date=२ सप्टेंबर २०२६ |archive-date=2026-08-23 |archive-url=https://web.archive.org/web/20260823143310/https://www.crickethongkong.com/news-detail/5059/Hong-Kong,-China-women%25E2%2580%2599s-team-is-ready-to-take-on-the-Asia-Cup-2026-Challenge |url-status=dead }}</ref>
! {{crw|IND}}<ref>{{cite web |trans-title= २०२६ च्या आशियाई क्रीडा स्पर्धेसाठी भारतीय महिला संघाची घोषणा |title=India Women's squad for the 2026 Asian Games announced |url=https://www.bcci.tv/news/article/india-women-s-squad-for-the-2026-asian-games-announced |work=[[भारतीय क्रिकेट नियामक मंडळ|बीसीसीआय]] |date=३० जून २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
! {{crw|INA}}<ref>{{cite web |trans-title= २०२६ डीपी वर्ल्ड महिला आशिया चषक स्पर्धेमध्ये इंडोनेशियाला इतिहास घडवण्याची संधी, तरुण संघ खंडीय स्तरावर आपली छाप सोडण्यास सज्ज. |title=History beckons for Indonesia at the DP World Womens Asia Cup 2026 with a youthful squad ready to make its mark on the continental stag |url=https://www.instagram.com/p/DcdirJMoaQq/ |work=[[आशिया क्रिकेट समिती]] |date=२५ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६|via=[[इन्स्टाग्राम]]}}</ref>
|-
|valign=top|
* [[निगार सुलताना]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]], [[यष्टीरक्षक|य]])
* [[नाहिदा अख्तर]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)#उपकर्णधार|उक]])
* [[जुवैरिया फिरदौस]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[दिलारा अख्तर]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[फरिहा तृष्ना]]
* [[फाहिमा खातून]]
* [[मारुफा अख्तर]]
* [[राबेया खान]]
* [[रितू मोनी]]
* [[शर्मिन अख्तर]]
* [[शर्मिन सुलताना]]
* [[शोभना मोस्तारी]]
* [[शोर्णा अख्तर]]
* [[संजिदा अक्तेर मेघला]]
* [[सुलताना खातून]]
|valign=top|
* [[कॅरी चॅन]]
* ॲलिसन सिउ
* इक्रा सहर
* जॉयलीन कौर
* [[नताशा माइल्स]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]])
* मरिना लॅम्प्लो
* मरियम बीबी ([[कर्णधार (क्रिकेट)#उपकर्णधार|उक]])
* महेकदीप कौर
* [[मारिको हिल]]
* [[यास्मिन दासवानी]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* रुचिता व्यंकटेश
* शानझीन शहजाद ([[यष्टीरक्षक|य]])
* शार्लोट चॅन
* शिंग चॅन
* हेली वोंग
|valign=top|
* [[हरमनप्रीत कौर]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]])
* [[स्मृती मंधाना]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)#उपकर्णधार|उक]])
* [[अरुंधती रेड्डी]]
* [[ऋचा घोष]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[क्रांती गौड]]
* [[गुणलन कमलिनी]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* <s>[[जेमिमा रॉड्रिग्ज]]</s>{{efn|name=Jemimah| हॅमस्ट्रिंगच्या दुखापतीमुळे भारताच्या संघात [[जेमिमा रॉड्रिग्ज]]च्या जागी [[प्रतिका रावळ ]]ची निवड करण्यात आली.<ref>{{cite web |trans-title= जेमिमा रॉड्रिज आशिया चषक आणि आशियाई क्रीडा स्पर्धेतून बाहेर |title=Jemimah Rodrigues ruled out of Asia Cup and Asian Games |url=https://www.bcci.tv/news/article/jemimah-rodrigues-ruled-out-asia-cup-and-asian-games |work=[[भारतीय क्रिकेट नियामक मंडळ|बीसीसीआय]] |date=१४ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref>}}
* [[दीप्ती शर्मा]]
* [[नंदनी शर्मा]]
* [[प्रतिका रावळ]]{{efn|name=Jemimah}}
* [[भारती फुलमाळी]]
* [[राधा यादव]]
* [[रेणुका सिंग]]
* [[शफाली वर्मा]]
* [[श्री चरणी]]
|valign=top|
* नि पुटू आयु नंदा सक्रीनी ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]], [[(यष्टीरक्षक|य)]]
* कदेक विंदा प्रस्तीनी
* किसी कसे
* दारा अगुंग लक्ष्मी
* देर्नी बांगी
* देसी वुलंदरी
* नि कडेक अरियानी
* नि कदेक फित्रिया राडा राणी
* नि मादे पुत्री सुवांदेवी
* नि लुह वेसिक रत्न देवि
* मारिया कोराझोन ([[यष्टीरक्षक|य]])
* रहमावती पंगेस्तुती
* ली किआओ
* सांग आयू मायप्रियानी
* सोफिया वेलिक
|-
! {{crw|PAK}}<ref>{{cite web |trans-title= एसीसी आशिया चषक आणि आशियाई क्रीडा स्पर्धांसाठी पाकिस्तानच्या महिला संघांची घोषणा |title=Pakistan women's squads announced for ACC Asia Cup and Asian Games |url=https://www.pcb.com.pk/press-release-detail/pakistan-women-s-squads-announced-for-acc-asia-cup-and-asian-games.html |work=[[पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड]] |date=१६ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
! {{crw|SL}}<ref>{{cite web |trans-title=महिला आशिया चषक २०२६ साठी श्रीलंकेचा संघ|title=Sri Lanka Squad for Women’s Asia Cup 2026 |url=https://srilankacricket.lk/2026/08/sri-lanka-squad-for-womens-asia-cup-2026/ |work=[[श्रीलंका क्रिकेट]] |date=१३ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
! {{crw|THA}}<ref>{{cite web |trans-title=डीपी वर्ल्ड महिला आशिया चषक २०२६ साठी थायलंडच्या संघात युवा आणि अनुभवी खेळाडूंचा उत्तम मेळ.|title=A fine blend of youth and experience headlines Thailand’s squad for the DP World Womens Asia Cup 2026 |url=https://www.facebook.com/share/p/1GoTyhYzp9/ |work=[[आशिया क्रिकेट समिती]] |date=२१ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६|via=[[फेसबुक]]}}</ref>
! {{crw|UAE}}<ref>{{cite web |trans-title=डीपी वर्ल्ड महिला आशिया चषक २०२६ - ईशा ओझा यूएईच्या १५ सदस्यांच्या संघाचे नेतृत्व करणार |title=DP World Women's Asia Cup 2026 - ईशा ओझा to lead UAE's 15-member squad |url=https://emiratescricket.com/news-detail/OMWVYmxkazn7aJ0PoX1G |work=[[अमिराती क्रिकेट बोर्ड]] |date=२१ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
|-
|valign=top|
* [[फातिमा सना]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]])
* [[आयेशा झफर]]
* [[इमान नसीर]]
* [[उम्म-ए-हानी]]
* [[एमान फातिमा]]
* [[गुल फरोझा]]
* [[तुबा हसन]]
* [[सायरा जबीन]]
* <s>[[नजीहा अल्वी]]</s>{{efn|name=Najiha| गुडघ्याच्या दुखापतीमुळे पाकिस्तानच्या संघात [[सदफ शमास]] च्या जागी [[नजीहा अल्वी]]चा समावेश करण्यात आला. <ref>{{cite web |trans-title= एसीसी महिला आशिया चषक स्पर्धेसाठी पाकिस्तान संघात दुखापतग्रस्त नजीहा अल्वीच्या जागी सदफ शमासचा समावेश|title= Sadaf Shamas replaces injured Najiha Alvi in Pakistan squad for ACC Women's Asia Cup |url=https://www.pcb.com.pk/press-release-detail/sadaf-shamas-replaces-injured-najiha-alvi-in-pakistan-squad-for-acc-women-s-asia-cup.html |work=[[पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड]] |date=२४ ऑगस्ट २०२६}}</ref>}}
* [[नश्रा संधू]]
* [[मुनीबा अली]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[मोमिना रियासत]]
* [[वहीदा अख्तर]]
* [[शवाल झुल्फिकार]]
* [[सदफ शमास]]{{efn|name=Najiha}}
* [[सादिया इक्बाल]]
|valign=top|
* [[चामरी अटापट्टू]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]])
* [[हर्षिता मादवी]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)#उपकर्णधार|उक]])
* [[इमेशा दुलानी]]
* [[कविशा दिलहारी]]
* [[काव्या कविंदी]]
* [[कौशिनी नुत्यंगना]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[चेतना विमुक्ती]]
* [[देउमी विहंगा]]
* [[निलाक्षी डि सिल्व्हा ]]
* [[मिताली आयोद्या]]
* [[विश्मी गुणरत्ने]]
* [[संजना कविंदी]]
* [[सुगंदिका कुमारी]]
* [[हसिनी परेरा]]
* चामुडी प्रबोधा
|valign=top|
* [[नरुएमोल चैवाई]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]], [[यष्टीरक्षक|य]])
* [[अपिसरा सुवांचनरोती]]
* [[ओन्निचा कांचोम्पू]]
* कोरानित सुवांचनरोती
* चयानिसा फेंगपेन
* [[चानिदा सुत्थिरुआंग]]
* थनरादा सीसावान
* [[थीपचा पुत्थावॉन्ग]]
* [[नत्ताकन चांतम]]
* [[नन्नाफत चैहान]]
* नाओमी हॅमिल्टन
* [[नान्नापत काँचारोएन्काई]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[फन्नीता माया]]
* [[सुनिदा चतुरोंगरात्तना]]
* [[सुलीपोर्न लाओमी]]
|valign=top|
* [[ईशा ओझा]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]])
* अर्चरा सुप्रिया
* [[इंदुजा नंदकुमार]]
* उत्तरा अय्यर
* जननी तिरुक्ककुमारन
* [[तीर्थ सतीश]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* मेहुल कुलकर्णी
* रिणिता रजीत
* [[लावण्या केनी]]
* [[वैष्णवी महेश]]
* शशिकला सिल्वा
* [[समायरा धरणीधरका]]
* [[सिया गोखले]]
* [[सुरक्षा कोट्टे]]
* [[हीना होतचंदानी]]
|}
==गट फेरी==
स्पर्धेचे वेळापत्रक ६ ऑगस्ट २०२६ रोजी जाहीर करण्यात आले.<ref>{{cite web |trans-title= महिला आशिया चषक २०२६ च्या वेळापत्रकात भारत-पाकिस्तान सामना मुख्य आकर्षण |title= India-Pakistan clash headlines Women's Asia Cup 2026 schedule |url=https://www.cricbuzz.com/cricket-news/139765/india-pakistan-clash-headlines-womens-asia-cup-2026-schedule |work=[[क्रिकबझ्झ]] |date=६ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |trans-title= महिला आशिया चषक २०२६ चे वेळापत्रक जाहीर: दुबईत ५ सप्टेंबरला भारत-पाकिस्तान सामना |title=Women's Asia Cup 2026 Schedule Announced: India-Pakistan Clash Set For September 5 In Dubai |url=https://www.outlookindia.com/sports/cricket/womens-asia-cup-2026-schedule-fixture-india-vs-pakistan |work= [[आउटलुक (भारतीय नियतकालिक) | आउटलुक]] |date=६ ऑगस्ट २०२६|access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
===गट अ===
====गुणफलक====
<section begin=Group A/>
{| class="wikitable" style="text-align:center"
! style="width:25px"| स्थान
! style="width:160px"| संघ
! style="width:30px"| {{abbr|सा|सामने}}
! style="width:30px"| {{abbr|वि|विजय}}
! style="width:30px"| {{abbr|प|पराभव}}
! style="width:30px"| {{abbr|अ|अनिर्णित}}
! style="width:30px"| गुण
! {{abbr|धावगती|निव्वळ धावगती}}
|-style="background:#cfc;"
| १ || style="text-align:left" | {{Crw|IND}} || ३ || ३ || ० || ० || '''६''' || ५.४७१
|-style="background:#cfc;"
| २ || style="text-align:left" | {{Crw|PAK}} || ३ || २ || १ || ० || '''४''' || ०.९२७
|-
| ३ || style="text-align:left" | {{Crw|THA}} || ३ || १ || २ || ० || '''२''' || −२.०५०
|-
| ४ || style="text-align:left" | {{Crw|HK}} || ३ || ० || ३ || ० || '''०''' || −३.५८३
|}
<small>स्रोत: [[क्रिकइन्फो]]<ref name="PTWATC26">{{cite web|url=https://www.cricinfo.com/series/women-s-asia-cup-2026-1548888/points-table-standings|trans-title=महिला ट्वेंटी२० आशिया चषक २०२६ – गुणफलक आणि संघ क्रमवारी|title= Women's Twenty20 Asia Cup 2026 Points Table & Team Standings |access-date=२ सप्टेंबर २०२६}}</ref></small>
<section end=Group A/>
====सामने====
{{Single-innings cricket match
| date = २८ ऑगस्ट २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|THA}}
| team2 = {{crw|HKG}}
| score1 = १२०/९ (२० षटके)
| runs1 = [[नरुएमोल चैवाई]] ४३ (३१)
| wickets1 = मरिना लॅम्प्लो ४/११ (४ षटके)
| score2 = ११४/७ (२० षटके)
| runs2 = [[कॅरी चॅन]] २८ (२०)
| wickets2 = [[ओन्निचा कांचोम्पू]] ३/२७ (४ षटके)
| result = थायलंड ६ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548891.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = रबाब अहसान (युएई) आणि [[वृंदा राठी]] (भा)
| motm = [[नरुएमोल चैवाई]] (था)
| toss = हाँग काँगने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला .
| notes = नाओमी हॅमिल्टन (था) हिने आंतरराष्ट्रीय टी२० पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३० ऑगस्ट २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|IND}}
| team2 = {{crw|THA}}
| score1 = १५९/९ (२० षटके)
| runs1 = [[शफाली वर्मा]] ६४ (३६)
| wickets1 = [[सुलीपोर्न लाओमी]] ३/२६ (४ षटके)
| score2 = ६५ (१६.१ षटके)
| runs2 = [[नान्नापत काँचारोएन्काई]] ४१ (४८)
| wickets2 = [[दीप्ती शर्मा]] ३/० (१.१ षटके)
| result = भारत ९४ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548893.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[निमाली परेरा]] (श्री) आणि [[मिशू चौधरी]] (बां)
| motm = [[शफाली वर्मा]] (भा)
| toss = थायलंडने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला .
| notes = [[प्रतिका रावळ]] (भा) हिने आंतरराष्ट्रीय टी२० पदार्पण केले.
* [[दीप्ती शर्मा]] (भा) तिचा १५०वा आंतरराष्ट्रीय टी२० सामना खेळली.<ref>{{cite web |last=बिश्त|first=हर्षित|date=३० ऑगस्ट २०२६|url=https://www.news18.com/cricket/deepti-sharma-becomes-third-indian-to-play-150-wt20is-10300870.html |trans-title= दीप्ती शर्मा १५० आंतरराष्ट्रीय टी२० सामने खेळण्यासाठी हरमनप्रीत कौर आणि स्मृती मंधाना नंतर तिसरी भारतीय बनली |title= Deepti Sharma Becomes 3rd Indian After Harmanpreet Kaur And Smriti Mandhana To Play 150 WT20Is |work=[[न्यूज१८]] |access-date=३ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = १ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|PAK}}
| team2 = {{crw|THA}}
| score1 = ११९/९ (२० षटके)
| runs1 = [[मुनीबा अली]] ५४ (५२)
| wickets1 = [[सुलीपोर्न लाओमी]] ३/१४ (४ षटके)
| score2 = ८४/८ (२० षटके)
| runs2 = [[चानिदा सुत्थिरुआंग]] २५ (२४)
| wickets2 = [[सादिया इक्बाल]] ३/११ (४ षटके)
| result = पाकिस्तान ३५ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548895.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[शाथिरा जाकीर]] (बां) आणि [[निमाली परेरा]] (श्री)
| motm = [[मुनीबा अली]] (पा)
| toss = पाकिस्तानने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|IND}}
| team2 = {{crw|HKG}}
| score1 = १९३/५ (२० षटके)
| runs1 = [[स्मृती मंधाना]] १२४ (६४)
| wickets1 = मरिना लॅम्प्लो २/४६ (४ षटके)
| score2 = ५६ (१६.२ षटके)
| runs2 = [[नताशा माइल्स]] १५ (२७)
| wickets2 = [[दीप्ती शर्मा]] ३/९ (३ षटके)
| result = भारत १३७ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/series/women-s-asia-cup-2026-1548888/hong-kong-women-vs-india-women-7th-match-group-a-1548897/live-cricket-score धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [मिशू चौधरी]] (बां) आणि [[निमाली परेरा]] (श्री)
| motm = [[स्मृती मंधाना]] (भा)
| toss = हाँग काँगने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = हाँग काँग आणि भारत हे देश आंतरराष्ट्रीय टी२० सामन्यामध्ये समोरासमोर येण्याची ही पहिलीच वेळ असेल.
* ॲलिसन सिउ (हाँकाँ) हिचा हा १००वा आंतरराष्ट्रीय टी२० सामना होता.
* भारताच्या [[स्मृती मंधाना]]चे हे १८ वे आंतरराष्ट्रीय शतक होते. तिने ऑस्ट्रेलियाच्या [[मेग लॅनिंग]]ला मागे टाकून सर्वाधिक आंतरराष्ट्रीय शतकांच्या यादीत अव्वल स्थान पटकावले.<ref>{{cite web|url=https://www.loksatta.com/krida/smriti-mandhana-breaks-big-record-of-meg-lenning-of-scoring-most-centuries-in-international-cricket-amd-2000-6117020/|title=Smriti Mandhana Record: स्मृती मानधना जगात भारी! मेग लेनिंगला मागे टाकत ‘हा’ रेकॉर्ड करणारी ठरली जगातील पहिलीच फलंदाज|work=लोकसत्ता|access-date=४ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
* ह्या सामन्याच्या निकलामुळे भारत उपांत्य फेरीसाठी पात्र.<ref>{{cite web|url=https://www.cricinfo.com/series/women-s-asia-cup-2026-1548888/hong-kong-women-vs-india-women-7th-match-group-a-1548897/match-report|trans-title=मंधानाच्या विक्रमी शतकाच्या जोरावर भारताची उपांत्य फेरीत धडक|title=Mandhana's record ton powers India into semi-finals|work=क्रिकइन्फो|access-date=४ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ५ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|PAK}}
| team2 = {{crw|IND}}
| score1 = ५५ (१८.१ षटके)
| runs1 = [[शवाल झुल्फिकार]] १४ (१४)
| wickets1 = [[श्री चरणी]] ३/७ (४ षटके)
| score2 = ५७/३ (८.४ षटके)
| runs2 = [[हरमनप्रीत कौर]] १८[[नाबाद|*]] (१८)
| wickets2 = [[फातिमा सना]] ३/१७ (३ षटके)
| result = भारत ७ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548899.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[शाथिरा जाकीर]] (बां) आणि [[निमाली परेरा]] (श्री)
| motm = [[श्री चरणी]] (भा)
| toss = पाकिस्तानने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = [[रमनप्रीत कौर]] (भा) हीचा कर्णधार म्हणून हा १५०वा आंतरराष्ट्रीय टी२० सामना होता.<ref>{{cite web |url=https://www.rediff.com/amp/cricket/report/india-vs-pakistan-womens-asia-cup-historic-harmanpreet-kaur-first-cricketer-to-captain-in-150-t20is/20260905.htm |trans-title=ऐतिहासिक! १५० टी२० आंतरराष्ट्रीय सामन्यांत नेतृत्व करणारी हरमनप्रीत पहिली कर्णधार.|title=Historic! Harmanpreet first captain to lead in 150 T20Is |work=रेडीफ.कॉम |date=५ सप्टेंबर २०२६ |access-date=७ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
* ही आंतरराष्ट्रीय टी२० सामन्यामधील पाकिस्तानची सर्वात कमी धावसंख्या होती.<ref>{{cite news |trans-title=भारताविरुद्ध पाकिस्तान महिला संघाची ५५ धावांत घसरण; टी-२० आंतरराष्ट्रीय सामन्यातील सर्वात कमी धावसंख्येची नोंद.|title=Pakistan Women collapse to 55 against India, suffer lowest-ever T20I total |url=https://www.aninews.in/news/sports/cricket/pakistan-women-collapse-to-55-against-india-suffer-lowest-ever-t20i-total20260905220156/ |work=एशियन न्यूज इंटरनॅशनल |date=५ सप्टेंबर २०२६ |access-date=७ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
* [[शफाली वर्मा]] (भा) हिच्या आंतरराष्ट्रीय टी२० कारकिर्दीतील ३,००० धावा पूर्ण.<ref>{{cite web |url=https://timesofindia.indiatimes.com/sports/cricket/womens-asia-cup/news/shafali-varma-scripts-history-becomes-fastest-and-youngest-to-3000-t20i-runs-in-womens-cricket/articleshow/133809520.cms |trans-title=शफाली वर्माची ऐतिहासिक कामगिरी; महिला क्रिकेटमध्ये ३,००० आंतरराष्ट्रीय टी२० धावा पूर्ण करणारी सर्वात जलद आणि सर्वात तरुण खेळाडू ठरली.|title=Shafali Varma scripts history, becomes fastest and youngest to reach 3,000 T20I runs in women’s cricket |work=[[द टाइम्स ऑफ इंडिया]] |date=५ सप्टेंबर २०२६ |access-date=७ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ७ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|PAK}}
| team2 = {{crw|HK}}
| score1 = १४३/८ (२० षटके)
| runs1 = [[शवाल झुल्फिकार]] ४७ (३५)
| wickets1 = जॉयलीन कौर ४/१९ (४ षटके)
| score2 = ७१ (१९ षटके)
| runs2 = [[कॅरी चॅन]] ३० (४७)
| wickets2 = [[नश्रा संधू]] ६/७ (४ षटके)
| result = पाकिस्तान ७२ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548901.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = रबाब अहसान (युएई) आणि [मिशू चौधरी]] (बां)
| motm = [[नश्रा संधू]] (पा)
| toss = पाकिस्तानने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = हाँगकाँग आणि पाकिस्तान हे देश आंतरराष्ट्रीय टी२० सामन्यामध्ये समोरासमोर येण्याची ही पहिलीच वेळ असेल.
* [[नश्रा संधू]]ने (पा) आंतरराष्ट्रीय टी२० सामन्यामध्ये पहिल्यांदाच एका डावात पाच बळी घेण्याची कामगिरी केली.
}}
===गट ब===
====गुणफलक====
<section begin=Group B/>
{| class="wikitable" style="text-align:center"
! style="width:25px"| स्थान
! style="width:160px"| संघ
! style="width:30px"| {{abbr|सा|सामने}}
! style="width:30px"| {{abbr|वि|विजय}}
! style="width:30px"| {{abbr|प|पराभव}}
! style="width:30px"| {{abbr|अ|अनिर्णित}}
! style="width:30px"| गुण
! {{abbr|धावगती|निव्वळ धावगती}}
|-style="background:#cfc;"
| १ || style="text-align:left" | {{Crw|SRI}} || ३ || ३ || ० || ० || '''६''' || २.७३०
|-style="background:#cfc;"
| २ || style="text-align:left" | {{Crw|BAN}} || ३ || २ || १ || ० || '''४''' || १.६८८
|-
| ३ || style="text-align:left" | {{Crw|UAE}} '''(य)''' || ३ || १ || २ || ० || '''२''' || −१.१५८
|-
| ४ || style="text-align:left" | {{Crw|INA}} || ३ || ० || ३ || ० || '''०''' || −३.१६९
|}
<small>स्रोत: [[क्रिकइन्फो]]<ref name="PTWATC26"/></small>
<section end=Group B/>
====सामने====
{{Single-innings cricket match
| date = २९ ऑगस्ट २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|UAE}}
| team2 = {{crw|SL}}
| score1 = ७९ (१९.५ षटके)
| runs1 = [[ईशा ओझा]] १८ (२४)
| wickets1 = [[मिताली आयोद्या]] ३/१४ (३.५ षटके)
| score2 = ८०/१ (७.५ षटके)
| runs2 = [[चामरी अटापट्टू]] ४८[[नाबाद|*]] (२५)
| result = श्रीलंका ९ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548892.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[हुमैरा फराह]] (पा) आणि [[शाथिरा जाकीर]] (बां)
| motm = [[चेतना विमुक्ती]] (श्री)
| toss = श्रीलंकेने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला .
| notes = [[चेतना विमुक्ती]] (श्री) हिने आंतरराष्ट्रीय टी२० पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३१ ऑगस्ट २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|BAN}}
| team2 = {{crw|INA}}
| score1 = १२९/८ (२० षटके)
| runs1 = [[शोभना मोस्तारी]] ४० (४२)
| wickets1 = नि अरियानी ३/२८ (४ षटके)
| score2 = ५८ (१७.३ षटके)
| runs2 = मारिया कोराझोन १२ (१३)
| wickets2 = [[नाहिदा अख्तर]] ३/१५ (४ षटके)
| result = बांगलादेश ७१ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548894.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[सलीमा इम्तियाझ]] (पा) आणि [[शिवानी मिश्रा]] (क)
| motm = [[नाहिदा अख्तर]] (बां)
| toss = इंडोनेशियाने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = महिला आंतरराष्ट्रीय टी२० सामन्यामध्ये इंडोनेशिया आणि बांगलादेश आमनेसामने येण्याची ही पहिलीच वेळ होती.
* सोफिया वेलिक (इं) हिने आंतरराष्ट्रीय टी२० पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = २ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|SL}}
| team2 = {{crw|INA}}
| score1 = १२४/७ (२० षटके)
| runs1 = [[निलाक्षी डि सिल्व्हा]] ५० (३५)
| wickets1 = नि लुह देवि ३/३२ (४ षटके)
| score2 = ४९ (१८.३ षटके)
| runs2 = नि मादे पुत्री सुवांदेवी १२[[नाबाद|*]] (३२)
| wickets2 = [[चामरी अटापट्टू]] ७/५ (३.३ षटके)
| result = श्रीलंका ७५ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548896.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[शिवानी मिश्रा]] (क) आणि [[सलीमा इम्तियाझ]] (पा)
| motm = [[चामरी अटापट्टू]] (श्री)
| toss = इंडोनेशियाने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = महिला आंतरराष्ट्रीय टी२० सामन्यामध्ये इंडोनेशिया आणि श्रीलंका आमनेसामने येण्याची ही पहिलीच वेळ होती.
* [[चामरी अटापट्टू]] (श्रीलंका) हिने महिला टी२० आशिया चषकातील सर्वोत्तम गोलंदाजीची कामगिरी नोंदवली, टी२० आंतरराष्ट्रीय सामन्यांत पहिल्यांदाच एका डावात पाच बळी घेतले, तसेच महिला आंतरराष्ट्रीय टी२० सामन्यांत हॅट्ट्रिक आणि ७ बळी घेणारी पहिली श्रीलंकाई खेळाडू ठरली.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date =४ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|INA}}
| team2 = {{crw|UAE}}
| score1 = ७३ (१९.४ षटके)
| runs1 = नि पुटू आयु नंदा सक्रीनी ३९ (५२)
| wickets1 = [[सुरक्षा कोट्टे]] ३/१६ (४ षटके)
| score2 = ७५/४ (१३.१ षटके)
| runs2 = [[ईशा ओझा]] ३० (२९)
| wickets2 = सोफिया वेलिक २/२५ (३.१ षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ६ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548896.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[शिवानी मिश्रा]] (कतार) आणि [[वृंदा राठी]] (भा)
| motm = [[ईशा ओझा]]] (युएई)
| toss = संयुक्त अरब अमिरातीने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ६ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|BAN}}
| team2 = {{crw|SL}}
| score1 = ११४/८ (२० षटके)
| runs1 = [[शोभना मोस्तारी]] ३४ (४१)
| wickets1 = चामुडी प्रबोधा ३/२१ (४ षटके)
| score2 = ११५/६ (१९.२ षटके)
| runs2 = [[हर्षिता मादवी]] ४८[[नाबाद|*]] (३७)
| wickets2 = [[मारुफा अख्तर]] ३/२१ (४ षटके)
| result = श्रीलंका ४ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548900.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[हुमैरा फराह]] (पा) आणि [[वृंदा राठी]] (भा)
| motm = [[हर्षिता मादवी]] (श्री)
| toss = श्रीलंकेने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = फरजाना ईस्मिन (बां) हिने आंतरराष्ट्रीय टी२० पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ८ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|BAN}}
| team2 = {{crw|UAE}}
| score1 = १०३/७ (२० षटके)
| runs1 = [[शर्मिन अख्तर]] ३८ (३१)
| wickets1 = [[सुरक्षा कोट्टे]] ३/११ (४ षटके)
| score2 = ६९/९ (२० षटके)
| runs2 = [[हिना होतचंदानी]] १८ (१९)
| wickets2 = [[राबेया खान]] ३/१४ (४ षटके)
| result = बांगलादेश ३४ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548902.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[सलीमा इम्तियाझ]] (पा) आणि [[वृंदा राठी]] (भा)
| motm = [[नहिदा अख्तर]] (बां)
| toss = संयुक्त अरब अमिरातीने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
==बाद फेरी==
{{4TeamBracket|nowrap=y
| RD1 = [[#उपांत्य सामने|उपांत्य सामने]]
| RD2 = [[#अंतिम सामना|अंतिम सामना]]
| seeds = yes
| RD1-seed1 = अ१
| RD1-team1 = '''{{Cr|IND}}'''
| RD1-score1 ='''१४९/६ (२० षटके)'''
| RD1-seed2 = ब२
| RD1-team2 = {{Cr|BAN}}
| RD1-score2 =१०९/७ (२० षटके)
| RD1-seed3 = ब१
| RD1-team3 = '''{{Cr|SRI}}'''
| RD1-score3 ='''१३४/६ (१८.४ षटके)'''
| RD1-seed4 = अ२
| RD1-team4 = {{Cr|PAK}}
| RD1-score4 =१३०/५ (२० षटके)
| RD2-seed1 = उसा१
| RD2-team1 ='''{{Cr|IND}}'''
| RD2-score1 ='''१८३/५ (२० षटके)'''
| RD2-seed2 = उसा२
| RD2-team2 ={{Cr|SRI}}
| RD2-score2 =१११ (२० षटके)
}}
===उपांत्य सामने===
====उपांत्य सामना १====
{{Single-innings cricket match
| date = १० सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{Cr-rt|IND}}
| team2 = {{Cr|BAN}}
| score1 = १४९/६ (२० षटके)
| runs1 = [[शफाली वर्मा]] ६४ (४०)
| wickets1 = [[सुलताना खातून]] २/३० (३ षटके)
| score2 = १०९/७ (२० षटके)
| runs2 = [[शोर्णा अख्तर]] २२[[नाबाद|*]] (१८)
| wickets2 = [[दीप्ती शर्मा]] ३/२६ (४ षटके)
| result = भारत ४० धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548903.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[सलीमा इम्तियाज]] (पा) आणि [[निमाली परेरा]] (श्री)
| motm = [[शफाली वर्मा]] (भा)
| toss = बांगलादेशने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = [[मारुफा अख्तर]] (बां) हीचा हा ५०वा महिला आंतरराष्ट्रीय टी२० सामना होता.<ref>{{Cite web |date=१० सप्टेंबर २०२६|trans-title=भारत विरुद्ध बांगलादेश क्षणचित्रे, महिला आशिया चषक २०२६ उपांत्य फेरी (सामना १): भारताची सलग सहाव्यांदा अंतिम फेरीत धडक|title=India vs Bangladesh Highlights, Women's Asia Cup 2026 Semifinal 1: India advances to sixth straight final |url=https://sportstar.thehindu.com/cricket/womens-cricket/india-vs-bangladesh-live-score-highlights-womens-asia-cup-2026-semifinal-commentary-smriti/article71451773.ece |access-date=१६ सप्टेंबर २०२६|work=[[स्पोर्टस्टार]] |language=en}}</ref>
* [[श्री चरणी]] (भा) हिने महिला आंतरराष्ट्रीय टी२० कारकिर्दीतील आपला ५०वा बळी घेतला.<ref>{{cite web |url=https://timesofindia.indiatimes.com/sports/cricket/womens-asia-cup/shree-charani-creates-history-at-22-becomes-fastest-indian-to-50-t20i-wickets/articleshow/134021088.cms |trans-title=२२ व्या वर्षी श्री चरणीने इतिहास रचला; आंतरराष्ट्रीय टी२० क्रिकेटमध्ये ५० बळी घेणारी सर्वात जलद भारतीय ठरली.|title=Shree Charani creates history at 22, becomes fastest Indian to 50 T20I wickets |work=[[द टाइम्स ऑफ इंडिया]] |date=१० सप्टेंबर २०२६|access-date=१६ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
* भारत सलग सहाव्यांदा टी२० स्पर्धेच्या अंतिम सामन्यासाठी आणि एकूण सलग दहाव्यांदा आशिया चषक स्पर्धेच्या अंतिम सामन्यासाठी पात्र ठरला.<ref name="IND6">{{Cite web |date=१० सप्टेंबर २०२६|trans-title=शेफाली आणि दीप्ती यांच्या जोरावर भारताची सहाव्यांदा टी२० आशिया चषक अंतिम फेरीत धडक|title=Shafali, Deepti power India into sixth T20 Asia Cup final |url=https://www.cricinfo.com/series/women-s-asia-cup-2026-1548888/bangladesh-women-vs-india-women-1st-semi-final-1548903/match-report |access-date=१६ सप्टेंबर २०२६|publisher=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref><ref name="Hist"/>
}}
====उपांत्य सामना २====
{{Single-innings cricket match
| date = ११ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|PAK}}
| team2 = {{crw|SL}}
| score1 = १३०/५ (२० षटके)
| runs1 = [[फातिमा सना]] ४७[[नाबाद|*]] (३६)
| wickets1 = [[चामरी अटापट्टू]] २/२४ (४ षटके)
| score2 = १३४/५ (१८.४ षटके)
| runs2 = [[हर्षिता मादवी]] ३६ (३१)
| wickets2 = [[फातिमा सना]] ४/३८ (३.४ षटके)
| result = श्रीलंका ४ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548904.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[शथिरा जाकीर]] (बां) आणि [[वृंदा राठी]] (भा)
| motm = [[फातिमा सना]] (पा)
| toss = श्रीलंकेने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = श्रीलंकेने टी२० स्पर्धेच्या सलग तिसऱ्या तर एकूण सहाव्यांदा आशिया चषक अंतिम सामन्यात धडक मारली.<ref name="SL3">{{Cite web |date=११ सप्टेंबर २०२६ |trans-title=श्रीलंकेने फातिमा सनाचे आव्हान परतवून लावत आशिया चषकाच्या अंतिम फेरीत स्थान निश्चित केले.|title=Sri Lanka thwart Fatima Sana challenge to secure Asia Cup final spot |url=https://www.cricinfo.com/series/women-s-asia-cup-2026-1548888/pakistan-women-vs-sri-lanka-women-2nd-semi-final-1548904/match-report |access-date=१६ सप्टेंबर २०२६|publisher=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref><ref name="Hist"/>
}}
===अंतिम सामना===
{{Single-innings cricket match
| date = १३ सप्टेंबर २०२६
| time = १८:३०
| night = y
| team1 = {{crw-rt|IND}}
| team2 = {{crw|SL}}
| score1 = १८३/५ (२० षटके)
| runs1 = [[शफाली वर्मा]] ६८ (३९)
| wickets1 = मिताली आयोद्या १/३३ (४ षटके)
| score2 = १११ (२० षटके)
| runs2 = [[चामरी अटापट्टू]] ३६ (३२)
| wickets2 = [[श्री चरणी]] ४/२० (४ षटके)
| result = भारत ७२ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1548905.html धावफलक]
| venue = [[दुबई आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम]], [[दुबई]]
| umpires = [[सलीमा इम्तियाज]] (पा) आणि [[शथिरा जाकीर]] (बां)
| motm = [[शफाली वर्मा]] (भा)
| toss = भारताने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = भारत चार टी२० आशिया चषक आणि एकूण आठ आशिया चषक विजेतेपदे जिंकणारा पहिला संघ ठरला.<ref name="4-8">{{Cite web |last=रविंद्रनाथ|first=श्रुती|date=१३ सप्टेंबर २०२६|trans-title=शेफाली आणि मंधाना यांच्या जोरावर भारताचे आठव्यांदा आशिया चषक विजेतेपद|title=Shafali, Mandhana power India to eighth Asia Cup title |url=https://www.cricinfo.com/series/women-s-asia-cup-2026-1548888/india-women-vs-sri-lanka-women-final-1548905/match-report |access-date=१६ सप्टेंबर २०२६|publisher=[[क्रिकइन्फो]]}}</ref><ref name="Hist">{{Cite web |trans-title=शेफाली आणि मंधाना यांच्या जोरावर भारताचे आठव्यांदा आशिया चषक विजेतेपद|title=Women's Asia Cup Winners 2003/04–2026 |publisher=क्रिकेट सांख्यिकी आणि इतिहासकार संघटना|url=https://acscricket.com/?page_id=7533 |access-date=१६ सप्टेंबर २०२६ |language=en-GB}}</ref>
}}
== नोंदी ==
{{notelist}}
==संदर्भयादी==
{{संदर्भयादी}}
==बाह्यदुवे==
* [https://www.cricinfo.com/series/women-s-twenty20-asia-cup-2026-1548888 क्रिकइन्फोवरील स्पर्धेचे मुख्य पान]
{{महिला आशिया चषक}}
{{आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६}}
[[वर्ग:संयुक्त अरब अमिरातीमधील क्रिकेट]]
[[वर्ग:महिला क्रिकेट]]
[[वर्ग:इ.स. २०२६ मधील क्रिकेट]]
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२०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक
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2026-09-16T08:21:52Z
Nitin.kunjir
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2709891
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox cricket tournament
| name = २०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक
| image =
| imagesize =
| fromdate = ३० ऑगस्ट
| todate = १२ सप्टेंबर २०२६
| administrator = [[आशिया क्रिकेट समिती]]
| cricket format = [[आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय| आं.ए.दि.]]<br>[[लिस्ट अ क्रिकेट|लिस्ट अ]]<br>[[मर्यादित षटकांचे सामने|५० षटके]]
| tournament format = गट [[साखळी सामने]] आणि [[बाद फेरी]]
| host = मलेशिया
| champions = {{cr|NEP}}
| count = २
| runner up = {{cr|UAE}}
| participants = १०
| matches = २४
| player of the series = {{cricon|NEP}} [[संदीप लामिछाने]]
| most runs = {{cricon|MAS}} [[विरेनदीप सिंग]] (२७३)
| most wickets = {{cricon|NEP}} [[संदीप लामिछाने]] (१७)
| previous_year = २०२४
| previous_tournament = २०२४ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक
| next_year =
| next_tournament =
}}
'''२०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक ही''' तिसरी एसीसी प्रीमियर चषक स्पर्धा होती, जी ३० ऑगस्ट ते १२ सप्टेंबर २०२६ या कालावधीत मलेशियामध्ये आयोजित केली गेली आणि ती [[२०२७ आशिया चषक]] स्पर्धेसाठी पात्रतेचा अंतिम टप्पा होती. <ref>{{cite web |trans-title=मलेशिया क्रिकेट ऑगस्ट/सप्टेंबरमध्ये एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक २०२६ चे यजमानपद भूषवणार.|title=Malaysia Cricket to host ACC Men’s Premier Cup 2026 in August/September |url=https://czarsportzauto.com/acc-mens-premier-cup-2026/ |date=८ ऑगस्ट २०२६|access-date=४ सप्टेंबर २०२६|work=Czarsportz}}</ref><ref>{{cite web |url=https://gorkhapatraonline.com/news/217716 |work=गोरखापत्र | title=एसीसी प्रिमियर कप : नेपालको पहिलो खेल साउदीसँग |trans-title= एसीसी प्रीमियर कप: नेपाळचा पहिला सामना सौदी अरेबियाविरुद्ध |date=८ ऑगस्ट २०२६|access-date=४ सप्टेंबर २०२६|lang=ne}}</ref>
==संघ आणि पात्रता==
[[२०२४ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक]] स्पर्धेमधील अव्वल ८ संघांसोबत, [[२०२६ एसीसी पुरुष चॅलेंजर चषक]] स्पर्धेमधील अंतिम फेरीतील दोन संघ सामील झाले.<ref>{{cite web |url=https://www.cricketthailand.org/malaysia-and-singapore-promoted-to-premier-cup-as-thailand-miss-out/ |trans-title= थायलंडची संधी हुकली; मलेशिया आणि सिंगापूरची 'प्रीमियर कप'मध्ये बढती. |title=Malaysia and Singapore promoted to Premier Cup as Thailand miss out |work=[[थायलंड क्रिकेट असोसिएशन]] |date=१८ जून २०२६|access-date=४ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
{| class="wikitable"
|+
!पात्रतेचे निकष
!ठिकाण
!संघांची संख्या
!संघ
|-
|rowspan="8"| [[२०२४ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक]]<br><small>(अव्वल ८ संघ)</small>
|rowspan="8"| ओमान
|rowspan="8" style="text-align:center"| '''८'''
| {{cr|BHR}}
|-
| {{cr|HKG}}
|-
| {{cr|KUW}}
|-
| {{cr|NEP}}
|-
| {{cr|OMA}}
|-
| {{cr|QAT}}
|-
| {{cr|SAU}}
|-
| {{nobr|{{cr|UAE}}}}
|-
|rowspan="2"| {{nobr|[[२०२६ एसीसी पुरुष चॅलेंजर चषक]]}}
|rowspan="2"| सिंगापूर
|rowspan="2" style="text-align:center"| '''२'''
| {{cr|MAS}}
|-
| {{cr|SIN}}
|-
!एकूण
!
!१०
!
|}
==गट फेरी==
सहभागी दहा देशांची दोन गटांत विभागणी करण्यात आली होती आणि प्रत्येक गटातील अव्वल दोन संघ बाद फेरीसाठी पात्र ठरले. [[आशियाई क्रिकेट समिती]]ने १२ ऑगस्ट २०२६ रोजी सामन्यांचे वेळापत्रक जाहीर केले. <ref>{{cite tweet |number=2087458017998778804 |trans-title= दहा संघ. एकच ध्येय. २०२७ च्या पुरुष आशिया चषकातील स्थान. मलेशियामध्ये होणाऱ्या एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक २०२६ मध्ये चुरशीची क्रिकेट स्पर्धा पाहायला मिळणार असून, प्रत्येक सामन्याचे महत्त्व अनन्यसाधारण असेल. या स्पर्धेची सुरुवात ३० ऑगस्टपासून होणार आहे. |title=𝐓𝐞𝐧 𝐬𝐢𝐝𝐞𝐬. 𝐎𝐧𝐞 𝐠𝐨𝐚𝐥. 𝐀 𝐩𝐥𝐚𝐜𝐞 𝐚𝐭 𝐭𝐡𝐞 𝟐𝟎𝟐𝟕 𝐌𝐞𝐧’𝐬 𝐀𝐬𝐢𝐚 𝐂𝐮𝐩 The ACC Mens Premier Cup 2026 is set for some serious cricket in Malaysia with every game carrying its own weight. Action begins on the 30th August |user=ACCMedia1}}</ref>
===गट अ===
====गुणफलक====
<section begin=Group A/>
{| class="wikitable" style="text-align:center"
! style="width:25px"| स्थान
! style="width:160px"| संघ
! style="width:30px"| {{abbr|सा|सामने}}
! style="width:30px"| {{abbr|वि|विजय}}
! style="width:30px"| {{abbr|प|पराभव}}
! style="width:30px"| {{abbr|अ|अनिर्णित}}
! style="width:30px"| गुण
! {{abbr|धावगती|निव्वळ धावगती}}
|-style="background:#cfc;"
| १ || style="text-align:left" | {{Cr|NEP}} || ४ || ३ || १ || ० || '''६''' || १.५३१
|-style="background:#cfc;"
| २ || style="text-align:left" | {{Cr|HK}} || ४ || ३ || १ || ० || '''६''' || −०.००५
|-
| ३ || style="text-align:left" | {{Cr|MAS}} '''(य)'''|| ४ || २ || २ || ० || '''४''' || ०.५६८
|-
| ४ || style="text-align:left" | {{Cr|SAU}} || ४ || १ || ३ || ० || '''२''' || −०.६९६
|-
| ५|| style="text-align:left" | {{Cr|BHR}} || ४ || १ || ३ || ० || '''२''' || −१.१८८
|}
<small>स्रोत: [[क्रिकइन्फो]]<ref name="PT">{{cite web|url= https://www.espncricinfo.com/series/acc-men-s-premier-cup-2026-1549936/points-table-standings|trans-title= एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक २०२६ गुणतालिका आणि संघांची क्रमवारी|title= Women's Twenty20 Asia Cup 2026 Points Table & Team Standings |access-date=४ सप्टेंबर २०२६}}</ref></small>
<section end=Group A/>
====सामने====
{{hatnote|सर्व वेळा ह्या मलेशिया प्रमाणवेळ ([[यूटीसी+०८:००]]) आहेत}}
{{Single-innings cricket match
| date = ३० ऑगस्ट २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|HK}}
| team2 = {{cr|SAU}}
| score1 = २७३ (४८.५ षटके)
| runs1 = [[बाबर हयात]] ७३ (८९)
| wickets1 = उस्मान नजीब ३/५३ (८ षटके)
| score2 = २५७ (४९.२ षटके)
| runs2 = मनन अली ५४ (६३)
| wickets2 = [[यासिम मुर्तझा]] ३/५३ (१० षटके)
| result = हाँग काँग १६ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549947.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[विनोद बाबू]] (ओमान)
| motm = [[यासिम मुर्तझा]] (हाँकाँ)
| toss = हाँग काँगने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३१ ऑगस्ट २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|BHR}}
| team2 = {{cr|NEP}}
| score1 = ८७ (३६.२ षटके)
| runs1 = फैझ अहमद १५ (१५)
| wickets1 = [[संदीप लामिछाने]] ५/१४ (१० षटके)
| score2 = ८८/३ (२१ षटके)
| runs2 = अर्जुन कुमल ३६ (५८)
| wickets2 = [[इम्रान अन्वर]] २/२० (६ षटके)
| result = नेपाळ ७ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549949.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = आनंद नटराजन (सिं) आणि [[शिजू सॅम]] (युएई)
| motm = [[संदीप लामिछाने]] (ने)
| toss = नेपाळणे नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = मुहम्मद वसीमने (ब) लिस्ट अ पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = १ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|MAS}}
| team2 = {{cr|SAU}}
| score1 = २७०/८ (५० षटके)
| runs1 = [[मुहम्मद स्याहादत]] ८२ (९८)
| wickets1 = मुहम्मद साकीब ३/४२ (८ षटके)
| score2 = १७७ (३४ षटके)
| runs2 = उस्मान नजीब ६४[[नाबाद|*]] (२९)
| wickets2 = विजय उन्नी ५/३४ (९ षटके)
| result = मलेशिया ९३ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549950.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[विनोद बाबू]] (ओमान) आणि इम्रान मुस्तफा (कुवेत)
| motm = [[विरेनदीप सिंग]] (मलेशिया)
| toss = मलेशियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = २ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|BHR}}
| team2 = {{cr|HK}}
| score1 = २१०/८ (५० षटके)
| runs1 = जुनैद अझीझ ४७ (६०)
| wickets1 = [[यासिम मुर्तझा]] ३/३० (१० षटके)
| score2 = १७८ (४९.४ षटके)
| runs2 = [[शाहिद वासीफ]] ५३ (६४)
| wickets2 = अली दाऊद ४/२१ (१० षटके)
| result = बहरीन ३२ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549952.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[विनोद बाबू]] (ओमान) आणि आनंद नटराजन (सिं)
| motm = अली दाऊद (ब)
| toss = बहरीनने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = यासीर नजीर, मुहम्मद सलमान (ब) आणि कल्हन छल्लू (हाँकाँ) या सर्वांनी लिस्ट अ क्रिकेटमध्ये पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|MAS}}
| team2 = {{cr|NEP}}
| score1 = १०३ (३२.३ षटके)
| runs1 = [[सय्यद अझीज]] ३० (४९)
| wickets1 = [[करण के.सी.]] ४/२३ (७.३ षटके)
| score2 = १०६/४ (२१.४ षटके)
| runs2 = अर्जुन कुमल ४५[[नाबाद|*]] (६८)
| wickets2 = [[सय्यद अझीज]] १/१९ (४ षटके)
| result = नेपाळ ६ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549955.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = इम्रान मुस्तफा (कुवेत) आणि [[शिजू सॅम]] (युएई)
| motm = [[करण के.सी.]] (ने)
| toss = मलेशियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ४ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SAU}}
| team2 = {{cr|BHR}}
| score1 = २२१ (४८.४ षटके)
| runs1 = अब्दुल वाहिद ७० (९१)
| wickets1 = अली दाऊद ३/३७ (९.४ षटके)
| score2 = २०४/८ (५० षटके)
| runs2 = [[इम्रान अन्वर]] ४९ (५९)
| wickets2 = मुहम्मद सकीब १९/२ (७ षटके)
| result = सौदी अरेबिया १७ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549957.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = आनंद नटराजन (सिं) आणि दुर्गा सुबेदी (ने)
| motm = अब्दुल वाहिद (सौदी)
| toss = सौदी अरेबियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ५ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|HK}}
| team2 = {{cr|MAS}}
| score1 = २०९ (४६.३ षटके)
| runs1 = कल्हन चल्लू ६९ (७२)
| wickets1 = [[अकील वाहिद]] ४/३९ (१० षटके)
| score2 = २०९/९ (५० षटके)
| runs2 = [[विरनदीप सिंग]] ८२[[नाबाद|*]] (१०६)
| wickets2 = [[हसन खान मोहम्मद]] २/२९ (७ षटके)
| result = सामना बरोबरीत<br />(हाँग काँग [[सुपर ओव्हर]] मध्ये विजयी)
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549959.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = इम्रान मुस्तफा (कु) आणि [[विनोद बाबू]] (ओ)
| motm = [[अंशुमन रथ]] (हाँकाँ)
| toss = हाँग काँगने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = [[सुपर ओव्हर]]: हाँग काँग १४/४, मलेशिया ११/१
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ६ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SAU}}
| team2 = {{cr|NEP}}
| score1 = १९० (49.2 षटके)
| runs1 = [[अकील वाहिद]] ७७ (८९)
| wickets1 = [[संदीप लामिछाने]] ३/१९ (१० षटके)
| score2 = १९३/५ (४१ षटके)
| runs2 = [[गुलशन झा]] ४४[[नाबाद|*]] (३५)
| wickets2 = इश्तीआक अहमद २/२३ (५ षटके)
| result = नेपाळ ५ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549960.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[अकील वाहिद]] (युएई)
| motm = [[गुलशन झा]] (ने)
| toss = सौदी अरेबियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ७ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|MAS}}
| team2 = {{cr|BHR}}
| score1 = २५४/८ (५० षटके)
| runs1 = [[विरनदीप सिंग]] ९८ (११८)
| wickets1 = [[इम्रान अन्वर]] ३/५६ (९ षटके)
| score2 = १२८ (३७.५ षटके)
| runs2 = प्रशांत कुरूप ३४ (५५)
| wickets2 = [[अकील वाहिद]] ४/३२ (९.५ षटके)
| result = मलेशिया १२६ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549962.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[शिजू सॅम]] (युएई) आणि दुर्गा सुबेदी (ने)
| motm = [[विरनदीप सिंग]] (म)
| toss = मलेशियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ८ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|HK}}
| team2 = {{cr|NEP}}
| score1 = २६१/७ (५० षटके)
| runs1 = [[बाबर हयात]] ११७[[नाबाद|*]] (१२६)
| wickets1 = [[संदीप लामिछाने]] ४/४४ (१० षटके)
| score2 = २४६ (४९.१ षटके)
| runs2 = ईशान पांडे ९० (१०६)
| wickets2 = [[एजाज खान (क्रिकेट खेळाडू)|एजाज खान]] ४/५० (१० षटके)
| result = हाँग काँग १५ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549964.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[शिजू सॅम]] (युएई)
| motm = [[बाबर हयात]] (हाँकाँ)
| toss = हाँग काँगने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = शेर मल्ला (नेपाळ) याने लिस्ट अ क्रिकेटमध्ये पदार्पण केले.
}}
===गट ब===
====गुणफलक====
<section begin="Group B" />
{| class="wikitable" style="text-align:center"
! style="width:25px"| स्थान
! style="width:160px"| संघ
! style="width:30px"| {{abbr|सा|सामने}}
! style="width:30px"| {{abbr|वि|विजय}}
! style="width:30px"| {{abbr|प|पराभव}}
! style="width:30px"| {{abbr|अ|अनिर्णित}}
! style="width:30px"| गुण
! {{abbr|धावगती|निव्वळ धावगती}}
|-style="background:#cfc;"
| १ || style="text-align:left" | {{Cr|UAE}} || ४ || ४ || ० || ० || '''८''' || १.९७९
|-style="background:#cfc;"
| २ || style="text-align:left" | {{Cr|OMA}} || ४ || २ || २ || ० || '''४''' || ०.६४९
|-
| ३ || style="text-align:left" | {{Cr|QAT}} || ४ || २ || २ || ० || '''४''' || ०.२२७
|-
| ४ || style="text-align:left" | {{Cr|KUW}} || ४ || २ || २ || ० || '''४''' || ०.१५२
|-
| ५|| style="text-align:left" | {{Cr|SIN}} || ४ || ० || ४ || ० || '''०''' || −३.२४१
|}
<small>स्रोत: [[क्रिकइन्फो]]<ref name="PT">{{cite web|url= https://www.espncricinfo.com/series/acc-men-s-premier-cup-2026-1549936/points-table-standings|trans-title= एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक २०२६ गुणतालिका आणि संघांची क्रमवारी|title= Women's Twenty20 Asia Cup 2026 Points Table & Team Standings |access-date=४ सप्टेंबर २०२६}}</ref></small>
<section end="Group B" />
====सामने====
{{hatnote|सर्व वेळा ह्या मलेशिया प्रमाणवेळ ([[यूटीसी+०८:००]]) आहेत}}
{{Single-innings cricket match
| date = ३० ऑगस्ट २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|OMA}}
| team2 = {{cr|SIN}}
| score1 = ३१६/९ (५० षटके)
| runs1 = [[विनायक शुक्ला]] 88 (56)
| wickets1 = हर्ष वेंकटराम ३/६४ (१० षटके)
| score2 = १८५ (४२.३ षटके)
| runs2 = [[मनप्रीत सिंग (क्रिकेट खेळाडू)|मनप्रीत सिंग]] 49 (56)
| wickets2 = [[हसनैन शाह]] ३/२९ (७ षटके)
| result = ओमान १३१ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549946.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[विश्वनादन कालिदास]] (मलेशिया) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[विनायक शुक्ला]] (ओ)
| toss = सिंगापूरने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = युवा पांडे, दक्ष त्यागी, साई वेणुगोपाल आणि कबीर झानदानी (सिं) या सर्वांनी [[लिस्ट अ क्रिकेट]]मध्ये मध्ये पदार्पण केले
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३१ ऑगस्ट २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|UAE}}
| team2 = {{cr|QAT}}
| score1 = २६३/९ (५० षटके)
| runs1 = [[अदीब उस्मानी]] ९२ (१०६)
| wickets1 = मिर्झा मोहम्मद बेग ३/६२ (९ षटके)
| score2 = १७१ (३७.३ षटके)
| runs2 = [[इमल लियानागे]] ७० (८२)
| wickets2 = [[हैदर अली (क्रिकेट खेळाडू, जन्म १९९४)|हैदर अली]] २/२५ (८ षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ९२ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549948.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि इम्रान मुस्तफा (कुवेत)
| motm = [[अदीब उस्मानी]] (युएई)
| toss = संयुक्त अरब अमिरातीने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = शाहजेब आफ्रिदी, झुबेर अली, मिर्झा मोहम्मद बेग, झीशान हैदर आणि [[अक्षय शंकर]] (कतार) या सर्वांनी लिस्ट ए मध्ये पदार्पण केले.}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = १ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|KUW}}
| team2 = {{cr|SIN}}
| score1 = २४९/४ (४३.४ षटके)
| runs1 = [[मीत भावसार]] ८४[[नाबाद|*]] (९०)
| wickets1 = प्रणव सुदर्शन २/३२ (७ षटके)
| score2 = ९६ (२७.३ षटके)
| runs2 = गिरीन गुणे ३४[[नाबाद|*]] (५४)
| wickets2 = [[मोहम्मद अस्लम (क्रिकेट खेळाडू)|मोहम्मद अस्लम]] ४/१५ (७.३ षटके)
| result = कुवेत १६० धावांनी विजयी ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस पद्धत]])
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549951.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[मोहम्मद अस्लम (क्रिकेट खेळाडू)|मोहम्मद अस्लम]] (कु)
| toss = सिंगापूरने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| rain = पावसामुळे सिंगापूरसमोर ३६ षटकांत २५७ धावांचे सुधारित लक्ष्य ठेवण्यात आले..
| notes = उमर अब्बास, मुहम्मद आकीफ फारूक आणि अब्दुल्ला झहीर (कु) या सर्वांनी [[लिस्ट अ क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले.}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = २ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|QAT}}
| team2 = {{cr|OMA}}
| score1 = २७२/९ (५० षटके)
| runs1 = झुबेर अली ७७ (१०१)
| wickets1 = [[हसनैन शाह]] ४/५८ (१० षटके)
| score2 = २७६/५ (४०.३ षटके)
| runs2 = [[हम्माद मिर्झा]] ८४[[नाबाद|*]] (९६)
| wickets2 = मिर्झा मोहम्मद बेग २/४५ (८ षटके)
| result = ओमान ५ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549953.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि [[विश्वनादन कालिदास]] (मलेशिया)
| motm = [[हम्माद मिर्झा]] (ओ)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = ओबैद उर रहमान (कतार) याने [[लिस्ट अ क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|UAE}}
| team2 = {{cr|KUW}}
| score1 = २८६/८ (५० षटके)
| runs1 = मुहम्मद शाहदाद ९४ (११०)
| wickets1 = मुहम्मद अकीफ फारूक ३/३८ (६ षटके)
| score2 = ११०/९ (२५ षटके)
| runs2 = [[रविजा संदारुवान]] 26 (42)
| wickets2 = [[अक्षदीप नाथ]] 6/21 (5 षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ६६ धावांनी विजयी ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस पद्धत]])
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549954.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि [[विश्वनादन कालिदास]] (मलेशिया)
| motm = मुहम्मद शाहदाद (युएई)
| toss = संयुक्त अरब अमिरातीने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain = पावसामुळे कुवेतसमोर २५ षटकांत १७७ धावांचे सुधारित लक्ष्य ठेवण्यात आले.
| notes = इब्रार अहमद (यूएई) याने [[लिस्ट ए क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले.
* [[अक्षदीप नाथ]] (युएई) याने लिस्ट अ सामन्यामध्ये पहिल्यांदा [[पंचबळी|पाच बळी]] घेतले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ४ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SIN}}
| team2 = {{cr|QAT}}
| score1 = १५० (३८.२ षटके)
| runs1 = [[मनप्रीत सिंग (क्रिकेट खेळाडू)|मनप्रीत सिंग]] ९६ (११३)
| wickets1 = मुहम्मद असीम ६/१८ (९.२ षटके)
| score2 = १५३/२ (२८.१ षटके)
| runs2 = झुबेर अली ५५[[नाबाद|*]] (७९)
| wickets2 = हरमन सिंग १/७ (३ षटके)
| result = कतार ८ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549956.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[शिजू सॅम]] (युएई)
| motm = मुहम्मद असीम (क)
| toss = सिंगापूरने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = मुहम्मद असीम (क) याने लिस्ट अ सामन्यामध्ये पहिल्यांदा [[पंचबळी|पाच बळी]] घेतले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ५ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|OMA}}
| team2 = {{cr|KUW}}
| score1 = २५२/८ (५० षटके)
| runs1 = [[जितेन रामानंदी]] ५३ (५५)
| wickets1 = अब्दुल्ला झहीर ३/५४ (१० षटके)
| score2 = २५६/६ (४९.४ षटके)
| runs2 = बिलाल ताहिर १०३[[नाबाद|*]] (१०६)
| wickets2 = फैसल शाह २/३७ (८ षटके)
| result = कुवेत ४ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549958.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि [[विश्वनादन कालिदास]] (म)
| motm = बिलाल ताहिर (कु)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = बिलाल ताहिर (कु) ह्याने लिस्ट अ सामन्यामध्ये पहिले शतक झळकावले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ६ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SIN}}
| team2 = {{cr|UAE}}
| score1 = १७२ (४७.४ षटके)
| runs1 = रियान नाईक ४४ (८३)
| wickets1 = [[आयान अफजल खान]] ३/२६ (१० षटके)
| score2 = १७४/३ (२४.३ षटके)
| runs2 = [[अक्षदीप नाथ]] ५८ (६२)
| wickets2 = चंद्रमौळी २/३१ (५.३ षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ७ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549961.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires =[[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[आयान अफजल खान]] (युएई)
| toss = सिंगापूरने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = मोहसीन खान (युएई) ह्याने लिस्ट अ क्रिकेटमध्ये पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ७ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|KUW}}
| team2 = {{cr|QAT}}
| score1 = २३३ (४९.५ षटके)
| runs1 = निमिष लतीफ ४७[[नाबाद|*]] (३८)
| wickets1 = मिर्झा मोहम्मद बेग २/४६ (१० षटके)
| score2 = २३५/६ (३५.५ षटके)
| runs2 = [[इमल लियानागे]] ५८ (८१)
| wickets2 = अब्दुल्ला झहीर २/३२ (४ षटके)
| result = कतार ४ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549963.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[विनोद बाबू]] (ओ)
| motm = मोहम्मद असीम (क)
| toss = कतारने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ८ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|UAE}}
| team2 = {{cr|OMA}}
| score1 = १९२ (४८.१ षटके)
| runs1 = [[तनिश सुरी]] ४८ (५३)
| wickets1 = [[जय ओडेदरा]] ३/१७ (५.१ षटके)
| score2 = १४३ (३४.५ षटके)
| runs2 = जितेन रामानंदी ५१ (७०)
| wickets2 = [[आयान अफजल खान]] ५/३४ (८.५ षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ४९ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549965.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[दुर्गा सुबेदी]] (ने) आणि [[विश्वनादन कालिदास]] (म)
| motm = [[आयान अफजल खान]] (युएई)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = संजू सजीव (ओ) आणि इब्रार अहमद (यूएई) या दोघांनीही आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय पदार्पण केले.
}}
==बाद फेरी==
{{hatnote|सर्व वेळा ह्या मलेशिया प्रमाणवेळ ([[यूटीसी+०८:००]]) आहेत)}}
{{4TeamBracket-with 3rd
| nowrap=y
| RD1 = [[#उपांत्य सामने|उपांत्य सामने]]
| RD2 = [[#अंतिम सामना|अंतिम सामना]]
| RD3= [[#३ऱ्या स्थानासाठी सामना|३ऱ्या स्थानासाठी सामना]]
| RD1-seed1 = अ१
| RD1-team1 = '''{{Cr|NEP}}'''
| RD1-score1 = '''१४७ (४५.४ षटके)'''
| RD1-seed2 = ब२
| RD1-team2 ={{Cr|OMA}}
| RD1-score2 = ६० (२८.१ षटके)
| RD1-seed3 = ब१
| RD1-team3 = '''{{nobr|{{Cr|UAE}}}}'''
| RD1-score3 = '''७१/३ (११.१ षटके)'''
| RD1-seed4 = अ२
| RD1-team4 = {{Cr|HK}}
| RD1-score4 =७० (३०.१ षटके)
| RD2-seed1 = उसा१वि
| RD2-team1 = '''{{Cr|NEP}}'''
| RD2-score1 = '''३१३/९ (५० षटके)'''
| RD2-seed2 = उसा२वि
| RD2-team2 = {{nobr|{{Cr|UAE}}}}
| RD2-score2 = २६८ (४९.२ षटके)
| RD3-seed1= उसा१प
| RD3-team1= {{Cr|OMA}}
| RD3-score1= १४४ /(४०.१ षटके)
| RD3-seed2= उसा२प
| RD3-team2= {{Cr|HK}}
| RD3-score2= १४६/१ (१९.५ षटके)
}}
===उपांत्य सामने===
{{Single-innings cricket match
| round = '''१ला उपांत्य सामना'''
| date = १० सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| daynight =
| team1 = {{Cr-rt|NEP}}
| team2 = {{Cr|OMA}}
| score1 = १४७ (४५.४ षटके)
| runs1 = [[दीपेंद्र सिंह ऐरी]] ५१ (७६)
| wickets1 = [[जय ओडेदरा]] ३/२६ (१० षटके)
| score2 = ६० (२८.१ षटके)
| runs2 = [[जतिंदर सिंग]] २५ (४१)
| wickets2 = [[संदीप लामिछाने]] ३/९ (६ षटके)
| result = नेपाळ ८७ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549966.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[तबारक दर]] (हाँकाँ)
| motm = [[दीपेंद्र सिंह ऐरी]] (ने)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = [[शेर मल्ला]] (ने) ह्याने आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| round = '''२रा उपांत्य सामना'''
| date = १० सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| daynight =
| team1 = {{cr-rt|HK}}
| team2 = {{cr|UAE}}
| score1 = ७० (३०.१ षटके)
| runs1 = [[झिशान अली]] १७ (२८)
| wickets1 = [[हैदर अली (क्रिकेट खेळाडू, जन्म १९९४)|हैदर अली]] ६/१४ (१० षटके)
| score2 = ७१/३ (११.१ षटके)
| runs2 = [[तनिश सुरी]] २७ (२५)
| wickets2 = [[किंचित शाह]] १/४ (१.१ षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ७ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549967.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[विश्वनादन कालिदास]] (म) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[[हैदर अली (क्रिकेट खेळाडू, जन्म १९९४)|हैदर अली]] (युएई)
| toss = संयुक्त अरब अमिरातीने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
}}
===३ऱ्या स्थानासाठी सामना===
{{Single-innings cricket match
| date = १२ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| daynight =
| team1 = {{cr-rt|OMA}}
| team2 = {{cr|HK}}
| score1 = १४४ (४०.१ षटके)
| runs1 = संजू सजीव ५९ (९९)
| wickets1 = [[नसरुल्ला राणा]] ४/२६ (९ षटके)
| score2 = १४६/१ (१९.५ षटके)
| runs2 = [[अंशुमन रथ]] ६८[[नाबाद|*]] (६०)
| wickets2 = [[शकिल अहमद]] १/३३ (४ षटके)
| result = हाँग काँग ९ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549968.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[शिजू सॅम]] (युएई) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[नसरुल्ला राणा]] (हाँकाँ)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
===अंतिम सामना===
{{Single-innings cricket match
| date = १२ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| daynight =
| team1 = {{cr-rt|NEP}}
| team2 = {{cr|UAE}}
| score1 = ३१३/९ (५० षटके)
| runs1 = [[आसिफ शेख]] १०२ (१०६)
| wickets1 = ईबरार अहमद ४/६२ (८ षटके)
| score2 = २६९ (४९.१ षटके)
| runs2 = [[राहुल चोप्रा]] १००[[नाबाद|*]] (१०५)
| wickets2 = [[करण केसी]] ३/४९ (९ षटके)
| result = नेपाळ ४४ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549969.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) and [[विश्वनादन कालिदास]] (म)
| motm = [[आसिफ शेख]] (ने)
| toss = नेपाळने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = [[मुहम्मद मोहसिन]] (यूएई) याने एकदिवसीय क्रिकेट पदार्पण केले.
* [[गुलशन झा]] (ने) याने एकदिवसीय कारकिर्दीतील १,००० धावा पूर्ण केली.
}}
== नोंदी ==
{{notelist}}
== संदर्भयादी==
{{संदर्भयादी}}
==बाह्यदुवे==
* [https://www.espncricinfo.com/series/acc-men-s-premier-cup-2026-1549936 मालिका मुख्यपान क्रिकइन्फोवर]
{{आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६}}
[[वर्ग:इ.स. २०२६ मधील क्रिकेट]]
[[वर्ग:मलेशियामधील क्रिकेट]]
7klth5t5vo5cw3mjiyh5h2nyho41ev0
2709896
2709891
2026-09-16T09:44:36Z
Nitin.kunjir
4684
/* बाद फेरी */
2709896
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox cricket tournament
| name = २०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक
| image =
| imagesize =
| fromdate = ३० ऑगस्ट
| todate = १२ सप्टेंबर २०२६
| administrator = [[आशिया क्रिकेट समिती]]
| cricket format = [[आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय| आं.ए.दि.]]<br>[[लिस्ट अ क्रिकेट|लिस्ट अ]]<br>[[मर्यादित षटकांचे सामने|५० षटके]]
| tournament format = गट [[साखळी सामने]] आणि [[बाद फेरी]]
| host = मलेशिया
| champions = {{cr|NEP}}
| count = २
| runner up = {{cr|UAE}}
| participants = १०
| matches = २४
| player of the series = {{cricon|NEP}} [[संदीप लामिछाने]]
| most runs = {{cricon|MAS}} [[विरेनदीप सिंग]] (२७३)
| most wickets = {{cricon|NEP}} [[संदीप लामिछाने]] (१७)
| previous_year = २०२४
| previous_tournament = २०२४ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक
| next_year =
| next_tournament =
}}
'''२०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक ही''' तिसरी एसीसी प्रीमियर चषक स्पर्धा होती, जी ३० ऑगस्ट ते १२ सप्टेंबर २०२६ या कालावधीत मलेशियामध्ये आयोजित केली गेली आणि ती [[२०२७ आशिया चषक]] स्पर्धेसाठी पात्रतेचा अंतिम टप्पा होती. <ref>{{cite web |trans-title=मलेशिया क्रिकेट ऑगस्ट/सप्टेंबरमध्ये एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक २०२६ चे यजमानपद भूषवणार.|title=Malaysia Cricket to host ACC Men’s Premier Cup 2026 in August/September |url=https://czarsportzauto.com/acc-mens-premier-cup-2026/ |date=८ ऑगस्ट २०२६|access-date=४ सप्टेंबर २०२६|work=Czarsportz}}</ref><ref>{{cite web |url=https://gorkhapatraonline.com/news/217716 |work=गोरखापत्र | title=एसीसी प्रिमियर कप : नेपालको पहिलो खेल साउदीसँग |trans-title= एसीसी प्रीमियर कप: नेपाळचा पहिला सामना सौदी अरेबियाविरुद्ध |date=८ ऑगस्ट २०२६|access-date=४ सप्टेंबर २०२६|lang=ne}}</ref>
==संघ आणि पात्रता==
[[२०२४ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक]] स्पर्धेमधील अव्वल ८ संघांसोबत, [[२०२६ एसीसी पुरुष चॅलेंजर चषक]] स्पर्धेमधील अंतिम फेरीतील दोन संघ सामील झाले.<ref>{{cite web |url=https://www.cricketthailand.org/malaysia-and-singapore-promoted-to-premier-cup-as-thailand-miss-out/ |trans-title= थायलंडची संधी हुकली; मलेशिया आणि सिंगापूरची 'प्रीमियर कप'मध्ये बढती. |title=Malaysia and Singapore promoted to Premier Cup as Thailand miss out |work=[[थायलंड क्रिकेट असोसिएशन]] |date=१८ जून २०२६|access-date=४ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
{| class="wikitable"
|+
!पात्रतेचे निकष
!ठिकाण
!संघांची संख्या
!संघ
|-
|rowspan="8"| [[२०२४ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक]]<br><small>(अव्वल ८ संघ)</small>
|rowspan="8"| ओमान
|rowspan="8" style="text-align:center"| '''८'''
| {{cr|BHR}}
|-
| {{cr|HKG}}
|-
| {{cr|KUW}}
|-
| {{cr|NEP}}
|-
| {{cr|OMA}}
|-
| {{cr|QAT}}
|-
| {{cr|SAU}}
|-
| {{nobr|{{cr|UAE}}}}
|-
|rowspan="2"| {{nobr|[[२०२६ एसीसी पुरुष चॅलेंजर चषक]]}}
|rowspan="2"| सिंगापूर
|rowspan="2" style="text-align:center"| '''२'''
| {{cr|MAS}}
|-
| {{cr|SIN}}
|-
!एकूण
!
!१०
!
|}
==गट फेरी==
सहभागी दहा देशांची दोन गटांत विभागणी करण्यात आली होती आणि प्रत्येक गटातील अव्वल दोन संघ बाद फेरीसाठी पात्र ठरले. [[आशियाई क्रिकेट समिती]]ने १२ ऑगस्ट २०२६ रोजी सामन्यांचे वेळापत्रक जाहीर केले. <ref>{{cite tweet |number=2087458017998778804 |trans-title= दहा संघ. एकच ध्येय. २०२७ च्या पुरुष आशिया चषकातील स्थान. मलेशियामध्ये होणाऱ्या एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक २०२६ मध्ये चुरशीची क्रिकेट स्पर्धा पाहायला मिळणार असून, प्रत्येक सामन्याचे महत्त्व अनन्यसाधारण असेल. या स्पर्धेची सुरुवात ३० ऑगस्टपासून होणार आहे. |title=𝐓𝐞𝐧 𝐬𝐢𝐝𝐞𝐬. 𝐎𝐧𝐞 𝐠𝐨𝐚𝐥. 𝐀 𝐩𝐥𝐚𝐜𝐞 𝐚𝐭 𝐭𝐡𝐞 𝟐𝟎𝟐𝟕 𝐌𝐞𝐧’𝐬 𝐀𝐬𝐢𝐚 𝐂𝐮𝐩 The ACC Mens Premier Cup 2026 is set for some serious cricket in Malaysia with every game carrying its own weight. Action begins on the 30th August |user=ACCMedia1}}</ref>
===गट अ===
====गुणफलक====
<section begin=Group A/>
{| class="wikitable" style="text-align:center"
! style="width:25px"| स्थान
! style="width:160px"| संघ
! style="width:30px"| {{abbr|सा|सामने}}
! style="width:30px"| {{abbr|वि|विजय}}
! style="width:30px"| {{abbr|प|पराभव}}
! style="width:30px"| {{abbr|अ|अनिर्णित}}
! style="width:30px"| गुण
! {{abbr|धावगती|निव्वळ धावगती}}
|-style="background:#cfc;"
| १ || style="text-align:left" | {{Cr|NEP}} || ४ || ३ || १ || ० || '''६''' || १.५३१
|-style="background:#cfc;"
| २ || style="text-align:left" | {{Cr|HK}} || ४ || ३ || १ || ० || '''६''' || −०.००५
|-
| ३ || style="text-align:left" | {{Cr|MAS}} '''(य)'''|| ४ || २ || २ || ० || '''४''' || ०.५६८
|-
| ४ || style="text-align:left" | {{Cr|SAU}} || ४ || १ || ३ || ० || '''२''' || −०.६९६
|-
| ५|| style="text-align:left" | {{Cr|BHR}} || ४ || १ || ३ || ० || '''२''' || −१.१८८
|}
<small>स्रोत: [[क्रिकइन्फो]]<ref name="PT">{{cite web|url= https://www.espncricinfo.com/series/acc-men-s-premier-cup-2026-1549936/points-table-standings|trans-title= एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक २०२६ गुणतालिका आणि संघांची क्रमवारी|title= Women's Twenty20 Asia Cup 2026 Points Table & Team Standings |access-date=४ सप्टेंबर २०२६}}</ref></small>
<section end=Group A/>
====सामने====
{{hatnote|सर्व वेळा ह्या मलेशिया प्रमाणवेळ ([[यूटीसी+०८:००]]) आहेत}}
{{Single-innings cricket match
| date = ३० ऑगस्ट २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|HK}}
| team2 = {{cr|SAU}}
| score1 = २७३ (४८.५ षटके)
| runs1 = [[बाबर हयात]] ७३ (८९)
| wickets1 = उस्मान नजीब ३/५३ (८ षटके)
| score2 = २५७ (४९.२ षटके)
| runs2 = मनन अली ५४ (६३)
| wickets2 = [[यासिम मुर्तझा]] ३/५३ (१० षटके)
| result = हाँग काँग १६ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549947.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[विनोद बाबू]] (ओमान)
| motm = [[यासिम मुर्तझा]] (हाँकाँ)
| toss = हाँग काँगने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३१ ऑगस्ट २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|BHR}}
| team2 = {{cr|NEP}}
| score1 = ८७ (३६.२ षटके)
| runs1 = फैझ अहमद १५ (१५)
| wickets1 = [[संदीप लामिछाने]] ५/१४ (१० षटके)
| score2 = ८८/३ (२१ षटके)
| runs2 = अर्जुन कुमल ३६ (५८)
| wickets2 = [[इम्रान अन्वर]] २/२० (६ षटके)
| result = नेपाळ ७ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549949.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = आनंद नटराजन (सिं) आणि [[शिजू सॅम]] (युएई)
| motm = [[संदीप लामिछाने]] (ने)
| toss = नेपाळणे नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = मुहम्मद वसीमने (ब) लिस्ट अ पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = १ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|MAS}}
| team2 = {{cr|SAU}}
| score1 = २७०/८ (५० षटके)
| runs1 = [[मुहम्मद स्याहादत]] ८२ (९८)
| wickets1 = मुहम्मद साकीब ३/४२ (८ षटके)
| score2 = १७७ (३४ षटके)
| runs2 = उस्मान नजीब ६४[[नाबाद|*]] (२९)
| wickets2 = विजय उन्नी ५/३४ (९ षटके)
| result = मलेशिया ९३ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549950.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[विनोद बाबू]] (ओमान) आणि इम्रान मुस्तफा (कुवेत)
| motm = [[विरेनदीप सिंग]] (मलेशिया)
| toss = मलेशियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = २ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|BHR}}
| team2 = {{cr|HK}}
| score1 = २१०/८ (५० षटके)
| runs1 = जुनैद अझीझ ४७ (६०)
| wickets1 = [[यासिम मुर्तझा]] ३/३० (१० षटके)
| score2 = १७८ (४९.४ षटके)
| runs2 = [[शाहिद वासीफ]] ५३ (६४)
| wickets2 = अली दाऊद ४/२१ (१० षटके)
| result = बहरीन ३२ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549952.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[विनोद बाबू]] (ओमान) आणि आनंद नटराजन (सिं)
| motm = अली दाऊद (ब)
| toss = बहरीनने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = यासीर नजीर, मुहम्मद सलमान (ब) आणि कल्हन छल्लू (हाँकाँ) या सर्वांनी लिस्ट अ क्रिकेटमध्ये पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|MAS}}
| team2 = {{cr|NEP}}
| score1 = १०३ (३२.३ षटके)
| runs1 = [[सय्यद अझीज]] ३० (४९)
| wickets1 = [[करण के.सी.]] ४/२३ (७.३ षटके)
| score2 = १०६/४ (२१.४ षटके)
| runs2 = अर्जुन कुमल ४५[[नाबाद|*]] (६८)
| wickets2 = [[सय्यद अझीज]] १/१९ (४ षटके)
| result = नेपाळ ६ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549955.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = इम्रान मुस्तफा (कुवेत) आणि [[शिजू सॅम]] (युएई)
| motm = [[करण के.सी.]] (ने)
| toss = मलेशियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ४ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SAU}}
| team2 = {{cr|BHR}}
| score1 = २२१ (४८.४ षटके)
| runs1 = अब्दुल वाहिद ७० (९१)
| wickets1 = अली दाऊद ३/३७ (९.४ षटके)
| score2 = २०४/८ (५० षटके)
| runs2 = [[इम्रान अन्वर]] ४९ (५९)
| wickets2 = मुहम्मद सकीब १९/२ (७ षटके)
| result = सौदी अरेबिया १७ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549957.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = आनंद नटराजन (सिं) आणि दुर्गा सुबेदी (ने)
| motm = अब्दुल वाहिद (सौदी)
| toss = सौदी अरेबियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ५ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|HK}}
| team2 = {{cr|MAS}}
| score1 = २०९ (४६.३ षटके)
| runs1 = कल्हन चल्लू ६९ (७२)
| wickets1 = [[अकील वाहिद]] ४/३९ (१० षटके)
| score2 = २०९/९ (५० षटके)
| runs2 = [[विरनदीप सिंग]] ८२[[नाबाद|*]] (१०६)
| wickets2 = [[हसन खान मोहम्मद]] २/२९ (७ षटके)
| result = सामना बरोबरीत<br />(हाँग काँग [[सुपर ओव्हर]] मध्ये विजयी)
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549959.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = इम्रान मुस्तफा (कु) आणि [[विनोद बाबू]] (ओ)
| motm = [[अंशुमन रथ]] (हाँकाँ)
| toss = हाँग काँगने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = [[सुपर ओव्हर]]: हाँग काँग १४/४, मलेशिया ११/१
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ६ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SAU}}
| team2 = {{cr|NEP}}
| score1 = १९० (49.2 षटके)
| runs1 = [[अकील वाहिद]] ७७ (८९)
| wickets1 = [[संदीप लामिछाने]] ३/१९ (१० षटके)
| score2 = १९३/५ (४१ षटके)
| runs2 = [[गुलशन झा]] ४४[[नाबाद|*]] (३५)
| wickets2 = इश्तीआक अहमद २/२३ (५ षटके)
| result = नेपाळ ५ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549960.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[अकील वाहिद]] (युएई)
| motm = [[गुलशन झा]] (ने)
| toss = सौदी अरेबियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ७ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|MAS}}
| team2 = {{cr|BHR}}
| score1 = २५४/८ (५० षटके)
| runs1 = [[विरनदीप सिंग]] ९८ (११८)
| wickets1 = [[इम्रान अन्वर]] ३/५६ (९ षटके)
| score2 = १२८ (३७.५ षटके)
| runs2 = प्रशांत कुरूप ३४ (५५)
| wickets2 = [[अकील वाहिद]] ४/३२ (९.५ षटके)
| result = मलेशिया १२६ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549962.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[शिजू सॅम]] (युएई) आणि दुर्गा सुबेदी (ने)
| motm = [[विरनदीप सिंग]] (म)
| toss = मलेशियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ८ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|HK}}
| team2 = {{cr|NEP}}
| score1 = २६१/७ (५० षटके)
| runs1 = [[बाबर हयात]] ११७[[नाबाद|*]] (१२६)
| wickets1 = [[संदीप लामिछाने]] ४/४४ (१० षटके)
| score2 = २४६ (४९.१ षटके)
| runs2 = ईशान पांडे ९० (१०६)
| wickets2 = [[एजाज खान (क्रिकेट खेळाडू)|एजाज खान]] ४/५० (१० षटके)
| result = हाँग काँग १५ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549964.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[शिजू सॅम]] (युएई)
| motm = [[बाबर हयात]] (हाँकाँ)
| toss = हाँग काँगने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = शेर मल्ला (नेपाळ) याने लिस्ट अ क्रिकेटमध्ये पदार्पण केले.
}}
===गट ब===
====गुणफलक====
<section begin="Group B" />
{| class="wikitable" style="text-align:center"
! style="width:25px"| स्थान
! style="width:160px"| संघ
! style="width:30px"| {{abbr|सा|सामने}}
! style="width:30px"| {{abbr|वि|विजय}}
! style="width:30px"| {{abbr|प|पराभव}}
! style="width:30px"| {{abbr|अ|अनिर्णित}}
! style="width:30px"| गुण
! {{abbr|धावगती|निव्वळ धावगती}}
|-style="background:#cfc;"
| १ || style="text-align:left" | {{Cr|UAE}} || ४ || ४ || ० || ० || '''८''' || १.९७९
|-style="background:#cfc;"
| २ || style="text-align:left" | {{Cr|OMA}} || ४ || २ || २ || ० || '''४''' || ०.६४९
|-
| ३ || style="text-align:left" | {{Cr|QAT}} || ४ || २ || २ || ० || '''४''' || ०.२२७
|-
| ४ || style="text-align:left" | {{Cr|KUW}} || ४ || २ || २ || ० || '''४''' || ०.१५२
|-
| ५|| style="text-align:left" | {{Cr|SIN}} || ४ || ० || ४ || ० || '''०''' || −३.२४१
|}
<small>स्रोत: [[क्रिकइन्फो]]<ref name="PT">{{cite web|url= https://www.espncricinfo.com/series/acc-men-s-premier-cup-2026-1549936/points-table-standings|trans-title= एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक २०२६ गुणतालिका आणि संघांची क्रमवारी|title= Women's Twenty20 Asia Cup 2026 Points Table & Team Standings |access-date=४ सप्टेंबर २०२६}}</ref></small>
<section end="Group B" />
====सामने====
{{hatnote|सर्व वेळा ह्या मलेशिया प्रमाणवेळ ([[यूटीसी+०८:००]]) आहेत}}
{{Single-innings cricket match
| date = ३० ऑगस्ट २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|OMA}}
| team2 = {{cr|SIN}}
| score1 = ३१६/९ (५० षटके)
| runs1 = [[विनायक शुक्ला]] 88 (56)
| wickets1 = हर्ष वेंकटराम ३/६४ (१० षटके)
| score2 = १८५ (४२.३ षटके)
| runs2 = [[मनप्रीत सिंग (क्रिकेट खेळाडू)|मनप्रीत सिंग]] 49 (56)
| wickets2 = [[हसनैन शाह]] ३/२९ (७ षटके)
| result = ओमान १३१ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549946.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[विश्वनादन कालिदास]] (मलेशिया) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[विनायक शुक्ला]] (ओ)
| toss = सिंगापूरने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = युवा पांडे, दक्ष त्यागी, साई वेणुगोपाल आणि कबीर झानदानी (सिं) या सर्वांनी [[लिस्ट अ क्रिकेट]]मध्ये मध्ये पदार्पण केले
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३१ ऑगस्ट २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|UAE}}
| team2 = {{cr|QAT}}
| score1 = २६३/९ (५० षटके)
| runs1 = [[अदीब उस्मानी]] ९२ (१०६)
| wickets1 = मिर्झा मोहम्मद बेग ३/६२ (९ षटके)
| score2 = १७१ (३७.३ षटके)
| runs2 = [[इमल लियानागे]] ७० (८२)
| wickets2 = [[हैदर अली (क्रिकेट खेळाडू, जन्म १९९४)|हैदर अली]] २/२५ (८ षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ९२ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549948.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि इम्रान मुस्तफा (कुवेत)
| motm = [[अदीब उस्मानी]] (युएई)
| toss = संयुक्त अरब अमिरातीने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = शाहजेब आफ्रिदी, झुबेर अली, मिर्झा मोहम्मद बेग, झीशान हैदर आणि [[अक्षय शंकर]] (कतार) या सर्वांनी लिस्ट ए मध्ये पदार्पण केले.}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = १ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|KUW}}
| team2 = {{cr|SIN}}
| score1 = २४९/४ (४३.४ षटके)
| runs1 = [[मीत भावसार]] ८४[[नाबाद|*]] (९०)
| wickets1 = प्रणव सुदर्शन २/३२ (७ षटके)
| score2 = ९६ (२७.३ षटके)
| runs2 = गिरीन गुणे ३४[[नाबाद|*]] (५४)
| wickets2 = [[मोहम्मद अस्लम (क्रिकेट खेळाडू)|मोहम्मद अस्लम]] ४/१५ (७.३ षटके)
| result = कुवेत १६० धावांनी विजयी ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस पद्धत]])
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549951.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[मोहम्मद अस्लम (क्रिकेट खेळाडू)|मोहम्मद अस्लम]] (कु)
| toss = सिंगापूरने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| rain = पावसामुळे सिंगापूरसमोर ३६ षटकांत २५७ धावांचे सुधारित लक्ष्य ठेवण्यात आले..
| notes = उमर अब्बास, मुहम्मद आकीफ फारूक आणि अब्दुल्ला झहीर (कु) या सर्वांनी [[लिस्ट अ क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले.}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = २ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|QAT}}
| team2 = {{cr|OMA}}
| score1 = २७२/९ (५० षटके)
| runs1 = झुबेर अली ७७ (१०१)
| wickets1 = [[हसनैन शाह]] ४/५८ (१० षटके)
| score2 = २७६/५ (४०.३ षटके)
| runs2 = [[हम्माद मिर्झा]] ८४[[नाबाद|*]] (९६)
| wickets2 = मिर्झा मोहम्मद बेग २/४५ (८ षटके)
| result = ओमान ५ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549953.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि [[विश्वनादन कालिदास]] (मलेशिया)
| motm = [[हम्माद मिर्झा]] (ओ)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = ओबैद उर रहमान (कतार) याने [[लिस्ट अ क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|UAE}}
| team2 = {{cr|KUW}}
| score1 = २८६/८ (५० षटके)
| runs1 = मुहम्मद शाहदाद ९४ (११०)
| wickets1 = मुहम्मद अकीफ फारूक ३/३८ (६ षटके)
| score2 = ११०/९ (२५ षटके)
| runs2 = [[रविजा संदारुवान]] 26 (42)
| wickets2 = [[अक्षदीप नाथ]] 6/21 (5 षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ६६ धावांनी विजयी ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस पद्धत]])
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549954.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि [[विश्वनादन कालिदास]] (मलेशिया)
| motm = मुहम्मद शाहदाद (युएई)
| toss = संयुक्त अरब अमिरातीने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain = पावसामुळे कुवेतसमोर २५ षटकांत १७७ धावांचे सुधारित लक्ष्य ठेवण्यात आले.
| notes = इब्रार अहमद (यूएई) याने [[लिस्ट ए क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले.
* [[अक्षदीप नाथ]] (युएई) याने लिस्ट अ सामन्यामध्ये पहिल्यांदा [[पंचबळी|पाच बळी]] घेतले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ४ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SIN}}
| team2 = {{cr|QAT}}
| score1 = १५० (३८.२ षटके)
| runs1 = [[मनप्रीत सिंग (क्रिकेट खेळाडू)|मनप्रीत सिंग]] ९६ (११३)
| wickets1 = मुहम्मद असीम ६/१८ (९.२ षटके)
| score2 = १५३/२ (२८.१ षटके)
| runs2 = झुबेर अली ५५[[नाबाद|*]] (७९)
| wickets2 = हरमन सिंग १/७ (३ षटके)
| result = कतार ८ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549956.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[शिजू सॅम]] (युएई)
| motm = मुहम्मद असीम (क)
| toss = सिंगापूरने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = मुहम्मद असीम (क) याने लिस्ट अ सामन्यामध्ये पहिल्यांदा [[पंचबळी|पाच बळी]] घेतले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ५ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|OMA}}
| team2 = {{cr|KUW}}
| score1 = २५२/८ (५० षटके)
| runs1 = [[जितेन रामानंदी]] ५३ (५५)
| wickets1 = अब्दुल्ला झहीर ३/५४ (१० षटके)
| score2 = २५६/६ (४९.४ षटके)
| runs2 = बिलाल ताहिर १०३[[नाबाद|*]] (१०६)
| wickets2 = फैसल शाह २/३७ (८ षटके)
| result = कुवेत ४ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549958.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि [[विश्वनादन कालिदास]] (म)
| motm = बिलाल ताहिर (कु)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = बिलाल ताहिर (कु) ह्याने लिस्ट अ सामन्यामध्ये पहिले शतक झळकावले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ६ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SIN}}
| team2 = {{cr|UAE}}
| score1 = १७२ (४७.४ षटके)
| runs1 = रियान नाईक ४४ (८३)
| wickets1 = [[आयान अफजल खान]] ३/२६ (१० षटके)
| score2 = १७४/३ (२४.३ षटके)
| runs2 = [[अक्षदीप नाथ]] ५८ (६२)
| wickets2 = चंद्रमौळी २/३१ (५.३ षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ७ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549961.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires =[[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[आयान अफजल खान]] (युएई)
| toss = सिंगापूरने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = मोहसीन खान (युएई) ह्याने लिस्ट अ क्रिकेटमध्ये पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ७ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|KUW}}
| team2 = {{cr|QAT}}
| score1 = २३३ (४९.५ षटके)
| runs1 = निमिष लतीफ ४७[[नाबाद|*]] (३८)
| wickets1 = मिर्झा मोहम्मद बेग २/४६ (१० षटके)
| score2 = २३५/६ (३५.५ षटके)
| runs2 = [[इमल लियानागे]] ५८ (८१)
| wickets2 = अब्दुल्ला झहीर २/३२ (४ षटके)
| result = कतार ४ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549963.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[विनोद बाबू]] (ओ)
| motm = मोहम्मद असीम (क)
| toss = कतारने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ८ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|UAE}}
| team2 = {{cr|OMA}}
| score1 = १९२ (४८.१ षटके)
| runs1 = [[तनिश सुरी]] ४८ (५३)
| wickets1 = [[जय ओडेदरा]] ३/१७ (५.१ षटके)
| score2 = १४३ (३४.५ षटके)
| runs2 = जितेन रामानंदी ५१ (७०)
| wickets2 = [[आयान अफजल खान]] ५/३४ (८.५ षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ४९ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549965.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[दुर्गा सुबेदी]] (ने) आणि [[विश्वनादन कालिदास]] (म)
| motm = [[आयान अफजल खान]] (युएई)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = संजू सजीव (ओ) आणि इब्रार अहमद (यूएई) या दोघांनीही आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय पदार्पण केले.
}}
==बाद फेरी==
{{hatnote|सर्व वेळा ह्या मलेशिया प्रमाणवेळ ([[यूटीसी+०८:००]]) आहेत)}}
{{4TeamBracket-with 3rd
| nowrap=y
| RD1 = [[#उपांत्य सामने|उपांत्य सामने]]
| RD2 = [[#अंतिम सामना|अंतिम सामना]]
| RD3= [[#३ऱ्या स्थानासाठी सामना|३ऱ्या स्थानासाठी सामना]]
| RD1-seed1 = अ१
| RD1-team1 = '''{{Cr|NEP}}'''
| RD1-score1 = '''{{nobr|१४७ (४५.४ षटके)}}'''
| RD1-seed2 = ब२
| RD1-team2 ={{Cr|OMA}}
| RD1-score2 = ६० (२८.१ षटके)
| RD1-seed3 = ब१
| RD1-team3 = '''{{nobr|{{Cr|UAE}}}}'''
| RD1-score3 = '''७१/३ (११.१ षटके)'''
| RD1-seed4 = अ२
| RD1-team4 = {{Cr|HK}}
| RD1-score4 =७० (३०.१ षटके)
| RD2-seed1 = उसा१वि
| RD2-team1 = '''{{Cr|NEP}}'''
| RD2-score1 = '''३१३/९ (५० षटके)'''
| RD2-seed2 = उसा२वि
| RD2-team2 = {{nobr|{{Cr|UAE}}}}
| RD2-score2 = २६८ (४९.२ षटके)
| RD3-seed1= उसा१प
| RD3-team1= {{Cr|OMA}}
| RD3-score1= १४४ /(४०.१ षटके)
| RD3-seed2= उसा२प
| RD3-team2= {{Cr|HK}}
| RD3-score2= १४६/१ (१९.५ षटके)
}}
===उपांत्य सामने===
{{Single-innings cricket match
| round = '''१ला उपांत्य सामना'''
| date = १० सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| daynight =
| team1 = {{Cr-rt|NEP}}
| team2 = {{Cr|OMA}}
| score1 = १४७ (४५.४ षटके)
| runs1 = [[दीपेंद्र सिंह ऐरी]] ५१ (७६)
| wickets1 = [[जय ओडेदरा]] ३/२६ (१० षटके)
| score2 = ६० (२८.१ षटके)
| runs2 = [[जतिंदर सिंग]] २५ (४१)
| wickets2 = [[संदीप लामिछाने]] ३/९ (६ षटके)
| result = नेपाळ ८७ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549966.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[तबारक दर]] (हाँकाँ)
| motm = [[दीपेंद्र सिंह ऐरी]] (ने)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = [[शेर मल्ला]] (ने) ह्याने आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| round = '''२रा उपांत्य सामना'''
| date = १० सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| daynight =
| team1 = {{cr-rt|HK}}
| team2 = {{cr|UAE}}
| score1 = ७० (३०.१ षटके)
| runs1 = [[झिशान अली]] १७ (२८)
| wickets1 = [[हैदर अली (क्रिकेट खेळाडू, जन्म १९९४)|हैदर अली]] ६/१४ (१० षटके)
| score2 = ७१/३ (११.१ षटके)
| runs2 = [[तनिश सुरी]] २७ (२५)
| wickets2 = [[किंचित शाह]] १/४ (१.१ षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ७ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549967.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[विश्वनादन कालिदास]] (म) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[[हैदर अली (क्रिकेट खेळाडू, जन्म १९९४)|हैदर अली]] (युएई)
| toss = संयुक्त अरब अमिरातीने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
}}
===३ऱ्या स्थानासाठी सामना===
{{Single-innings cricket match
| date = १२ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| daynight =
| team1 = {{cr-rt|OMA}}
| team2 = {{cr|HK}}
| score1 = १४४ (४०.१ षटके)
| runs1 = संजू सजीव ५९ (९९)
| wickets1 = [[नसरुल्ला राणा]] ४/२६ (९ षटके)
| score2 = १४६/१ (१९.५ षटके)
| runs2 = [[अंशुमन रथ]] ६८[[नाबाद|*]] (६०)
| wickets2 = [[शकिल अहमद]] १/३३ (४ षटके)
| result = हाँग काँग ९ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549968.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[शिजू सॅम]] (युएई) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[नसरुल्ला राणा]] (हाँकाँ)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
===अंतिम सामना===
{{Single-innings cricket match
| date = १२ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| daynight =
| team1 = {{cr-rt|NEP}}
| team2 = {{cr|UAE}}
| score1 = ३१३/९ (५० षटके)
| runs1 = [[आसिफ शेख]] १०२ (१०६)
| wickets1 = ईबरार अहमद ४/६२ (८ षटके)
| score2 = २६९ (४९.१ षटके)
| runs2 = [[राहुल चोप्रा]] १००[[नाबाद|*]] (१०५)
| wickets2 = [[करण केसी]] ३/४९ (९ षटके)
| result = नेपाळ ४४ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549969.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) and [[विश्वनादन कालिदास]] (म)
| motm = [[आसिफ शेख]] (ने)
| toss = नेपाळने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = [[मुहम्मद मोहसिन]] (यूएई) याने एकदिवसीय क्रिकेट पदार्पण केले.
* [[गुलशन झा]] (ने) याने एकदिवसीय कारकिर्दीतील १,००० धावा पूर्ण केली.
}}
== नोंदी ==
{{notelist}}
== संदर्भयादी==
{{संदर्भयादी}}
==बाह्यदुवे==
* [https://www.espncricinfo.com/series/acc-men-s-premier-cup-2026-1549936 मालिका मुख्यपान क्रिकइन्फोवर]
{{आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६}}
[[वर्ग:इ.स. २०२६ मधील क्रिकेट]]
[[वर्ग:मलेशियामधील क्रिकेट]]
83e1ss6g1pfmfwhlf1krrpupoltft3p
2709897
2709896
2026-09-16T09:45:04Z
Nitin.kunjir
4684
/* बाद फेरी */
2709897
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox cricket tournament
| name = २०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक
| image =
| imagesize =
| fromdate = ३० ऑगस्ट
| todate = १२ सप्टेंबर २०२६
| administrator = [[आशिया क्रिकेट समिती]]
| cricket format = [[आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय| आं.ए.दि.]]<br>[[लिस्ट अ क्रिकेट|लिस्ट अ]]<br>[[मर्यादित षटकांचे सामने|५० षटके]]
| tournament format = गट [[साखळी सामने]] आणि [[बाद फेरी]]
| host = मलेशिया
| champions = {{cr|NEP}}
| count = २
| runner up = {{cr|UAE}}
| participants = १०
| matches = २४
| player of the series = {{cricon|NEP}} [[संदीप लामिछाने]]
| most runs = {{cricon|MAS}} [[विरेनदीप सिंग]] (२७३)
| most wickets = {{cricon|NEP}} [[संदीप लामिछाने]] (१७)
| previous_year = २०२४
| previous_tournament = २०२४ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक
| next_year =
| next_tournament =
}}
'''२०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक ही''' तिसरी एसीसी प्रीमियर चषक स्पर्धा होती, जी ३० ऑगस्ट ते १२ सप्टेंबर २०२६ या कालावधीत मलेशियामध्ये आयोजित केली गेली आणि ती [[२०२७ आशिया चषक]] स्पर्धेसाठी पात्रतेचा अंतिम टप्पा होती. <ref>{{cite web |trans-title=मलेशिया क्रिकेट ऑगस्ट/सप्टेंबरमध्ये एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक २०२६ चे यजमानपद भूषवणार.|title=Malaysia Cricket to host ACC Men’s Premier Cup 2026 in August/September |url=https://czarsportzauto.com/acc-mens-premier-cup-2026/ |date=८ ऑगस्ट २०२६|access-date=४ सप्टेंबर २०२६|work=Czarsportz}}</ref><ref>{{cite web |url=https://gorkhapatraonline.com/news/217716 |work=गोरखापत्र | title=एसीसी प्रिमियर कप : नेपालको पहिलो खेल साउदीसँग |trans-title= एसीसी प्रीमियर कप: नेपाळचा पहिला सामना सौदी अरेबियाविरुद्ध |date=८ ऑगस्ट २०२६|access-date=४ सप्टेंबर २०२६|lang=ne}}</ref>
==संघ आणि पात्रता==
[[२०२४ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक]] स्पर्धेमधील अव्वल ८ संघांसोबत, [[२०२६ एसीसी पुरुष चॅलेंजर चषक]] स्पर्धेमधील अंतिम फेरीतील दोन संघ सामील झाले.<ref>{{cite web |url=https://www.cricketthailand.org/malaysia-and-singapore-promoted-to-premier-cup-as-thailand-miss-out/ |trans-title= थायलंडची संधी हुकली; मलेशिया आणि सिंगापूरची 'प्रीमियर कप'मध्ये बढती. |title=Malaysia and Singapore promoted to Premier Cup as Thailand miss out |work=[[थायलंड क्रिकेट असोसिएशन]] |date=१८ जून २०२६|access-date=४ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
{| class="wikitable"
|+
!पात्रतेचे निकष
!ठिकाण
!संघांची संख्या
!संघ
|-
|rowspan="8"| [[२०२४ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक]]<br><small>(अव्वल ८ संघ)</small>
|rowspan="8"| ओमान
|rowspan="8" style="text-align:center"| '''८'''
| {{cr|BHR}}
|-
| {{cr|HKG}}
|-
| {{cr|KUW}}
|-
| {{cr|NEP}}
|-
| {{cr|OMA}}
|-
| {{cr|QAT}}
|-
| {{cr|SAU}}
|-
| {{nobr|{{cr|UAE}}}}
|-
|rowspan="2"| {{nobr|[[२०२६ एसीसी पुरुष चॅलेंजर चषक]]}}
|rowspan="2"| सिंगापूर
|rowspan="2" style="text-align:center"| '''२'''
| {{cr|MAS}}
|-
| {{cr|SIN}}
|-
!एकूण
!
!१०
!
|}
==गट फेरी==
सहभागी दहा देशांची दोन गटांत विभागणी करण्यात आली होती आणि प्रत्येक गटातील अव्वल दोन संघ बाद फेरीसाठी पात्र ठरले. [[आशियाई क्रिकेट समिती]]ने १२ ऑगस्ट २०२६ रोजी सामन्यांचे वेळापत्रक जाहीर केले. <ref>{{cite tweet |number=2087458017998778804 |trans-title= दहा संघ. एकच ध्येय. २०२७ च्या पुरुष आशिया चषकातील स्थान. मलेशियामध्ये होणाऱ्या एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक २०२६ मध्ये चुरशीची क्रिकेट स्पर्धा पाहायला मिळणार असून, प्रत्येक सामन्याचे महत्त्व अनन्यसाधारण असेल. या स्पर्धेची सुरुवात ३० ऑगस्टपासून होणार आहे. |title=𝐓𝐞𝐧 𝐬𝐢𝐝𝐞𝐬. 𝐎𝐧𝐞 𝐠𝐨𝐚𝐥. 𝐀 𝐩𝐥𝐚𝐜𝐞 𝐚𝐭 𝐭𝐡𝐞 𝟐𝟎𝟐𝟕 𝐌𝐞𝐧’𝐬 𝐀𝐬𝐢𝐚 𝐂𝐮𝐩 The ACC Mens Premier Cup 2026 is set for some serious cricket in Malaysia with every game carrying its own weight. Action begins on the 30th August |user=ACCMedia1}}</ref>
===गट अ===
====गुणफलक====
<section begin=Group A/>
{| class="wikitable" style="text-align:center"
! style="width:25px"| स्थान
! style="width:160px"| संघ
! style="width:30px"| {{abbr|सा|सामने}}
! style="width:30px"| {{abbr|वि|विजय}}
! style="width:30px"| {{abbr|प|पराभव}}
! style="width:30px"| {{abbr|अ|अनिर्णित}}
! style="width:30px"| गुण
! {{abbr|धावगती|निव्वळ धावगती}}
|-style="background:#cfc;"
| १ || style="text-align:left" | {{Cr|NEP}} || ४ || ३ || १ || ० || '''६''' || १.५३१
|-style="background:#cfc;"
| २ || style="text-align:left" | {{Cr|HK}} || ४ || ३ || १ || ० || '''६''' || −०.००५
|-
| ३ || style="text-align:left" | {{Cr|MAS}} '''(य)'''|| ४ || २ || २ || ० || '''४''' || ०.५६८
|-
| ४ || style="text-align:left" | {{Cr|SAU}} || ४ || १ || ३ || ० || '''२''' || −०.६९६
|-
| ५|| style="text-align:left" | {{Cr|BHR}} || ४ || १ || ३ || ० || '''२''' || −१.१८८
|}
<small>स्रोत: [[क्रिकइन्फो]]<ref name="PT">{{cite web|url= https://www.espncricinfo.com/series/acc-men-s-premier-cup-2026-1549936/points-table-standings|trans-title= एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक २०२६ गुणतालिका आणि संघांची क्रमवारी|title= Women's Twenty20 Asia Cup 2026 Points Table & Team Standings |access-date=४ सप्टेंबर २०२६}}</ref></small>
<section end=Group A/>
====सामने====
{{hatnote|सर्व वेळा ह्या मलेशिया प्रमाणवेळ ([[यूटीसी+०८:००]]) आहेत}}
{{Single-innings cricket match
| date = ३० ऑगस्ट २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|HK}}
| team2 = {{cr|SAU}}
| score1 = २७३ (४८.५ षटके)
| runs1 = [[बाबर हयात]] ७३ (८९)
| wickets1 = उस्मान नजीब ३/५३ (८ षटके)
| score2 = २५७ (४९.२ षटके)
| runs2 = मनन अली ५४ (६३)
| wickets2 = [[यासिम मुर्तझा]] ३/५३ (१० षटके)
| result = हाँग काँग १६ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549947.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[विनोद बाबू]] (ओमान)
| motm = [[यासिम मुर्तझा]] (हाँकाँ)
| toss = हाँग काँगने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३१ ऑगस्ट २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|BHR}}
| team2 = {{cr|NEP}}
| score1 = ८७ (३६.२ षटके)
| runs1 = फैझ अहमद १५ (१५)
| wickets1 = [[संदीप लामिछाने]] ५/१४ (१० षटके)
| score2 = ८८/३ (२१ षटके)
| runs2 = अर्जुन कुमल ३६ (५८)
| wickets2 = [[इम्रान अन्वर]] २/२० (६ षटके)
| result = नेपाळ ७ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549949.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = आनंद नटराजन (सिं) आणि [[शिजू सॅम]] (युएई)
| motm = [[संदीप लामिछाने]] (ने)
| toss = नेपाळणे नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = मुहम्मद वसीमने (ब) लिस्ट अ पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = १ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|MAS}}
| team2 = {{cr|SAU}}
| score1 = २७०/८ (५० षटके)
| runs1 = [[मुहम्मद स्याहादत]] ८२ (९८)
| wickets1 = मुहम्मद साकीब ३/४२ (८ षटके)
| score2 = १७७ (३४ षटके)
| runs2 = उस्मान नजीब ६४[[नाबाद|*]] (२९)
| wickets2 = विजय उन्नी ५/३४ (९ षटके)
| result = मलेशिया ९३ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549950.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[विनोद बाबू]] (ओमान) आणि इम्रान मुस्तफा (कुवेत)
| motm = [[विरेनदीप सिंग]] (मलेशिया)
| toss = मलेशियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = २ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|BHR}}
| team2 = {{cr|HK}}
| score1 = २१०/८ (५० षटके)
| runs1 = जुनैद अझीझ ४७ (६०)
| wickets1 = [[यासिम मुर्तझा]] ३/३० (१० षटके)
| score2 = १७८ (४९.४ षटके)
| runs2 = [[शाहिद वासीफ]] ५३ (६४)
| wickets2 = अली दाऊद ४/२१ (१० षटके)
| result = बहरीन ३२ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549952.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[विनोद बाबू]] (ओमान) आणि आनंद नटराजन (सिं)
| motm = अली दाऊद (ब)
| toss = बहरीनने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = यासीर नजीर, मुहम्मद सलमान (ब) आणि कल्हन छल्लू (हाँकाँ) या सर्वांनी लिस्ट अ क्रिकेटमध्ये पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|MAS}}
| team2 = {{cr|NEP}}
| score1 = १०३ (३२.३ षटके)
| runs1 = [[सय्यद अझीज]] ३० (४९)
| wickets1 = [[करण के.सी.]] ४/२३ (७.३ षटके)
| score2 = १०६/४ (२१.४ षटके)
| runs2 = अर्जुन कुमल ४५[[नाबाद|*]] (६८)
| wickets2 = [[सय्यद अझीज]] १/१९ (४ षटके)
| result = नेपाळ ६ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549955.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = इम्रान मुस्तफा (कुवेत) आणि [[शिजू सॅम]] (युएई)
| motm = [[करण के.सी.]] (ने)
| toss = मलेशियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ४ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SAU}}
| team2 = {{cr|BHR}}
| score1 = २२१ (४८.४ षटके)
| runs1 = अब्दुल वाहिद ७० (९१)
| wickets1 = अली दाऊद ३/३७ (९.४ षटके)
| score2 = २०४/८ (५० षटके)
| runs2 = [[इम्रान अन्वर]] ४९ (५९)
| wickets2 = मुहम्मद सकीब १९/२ (७ षटके)
| result = सौदी अरेबिया १७ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549957.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = आनंद नटराजन (सिं) आणि दुर्गा सुबेदी (ने)
| motm = अब्दुल वाहिद (सौदी)
| toss = सौदी अरेबियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ५ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|HK}}
| team2 = {{cr|MAS}}
| score1 = २०९ (४६.३ षटके)
| runs1 = कल्हन चल्लू ६९ (७२)
| wickets1 = [[अकील वाहिद]] ४/३९ (१० षटके)
| score2 = २०९/९ (५० षटके)
| runs2 = [[विरनदीप सिंग]] ८२[[नाबाद|*]] (१०६)
| wickets2 = [[हसन खान मोहम्मद]] २/२९ (७ षटके)
| result = सामना बरोबरीत<br />(हाँग काँग [[सुपर ओव्हर]] मध्ये विजयी)
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549959.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = इम्रान मुस्तफा (कु) आणि [[विनोद बाबू]] (ओ)
| motm = [[अंशुमन रथ]] (हाँकाँ)
| toss = हाँग काँगने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = [[सुपर ओव्हर]]: हाँग काँग १४/४, मलेशिया ११/१
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ६ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SAU}}
| team2 = {{cr|NEP}}
| score1 = १९० (49.2 षटके)
| runs1 = [[अकील वाहिद]] ७७ (८९)
| wickets1 = [[संदीप लामिछाने]] ३/१९ (१० षटके)
| score2 = १९३/५ (४१ षटके)
| runs2 = [[गुलशन झा]] ४४[[नाबाद|*]] (३५)
| wickets2 = इश्तीआक अहमद २/२३ (५ षटके)
| result = नेपाळ ५ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549960.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[अकील वाहिद]] (युएई)
| motm = [[गुलशन झा]] (ने)
| toss = सौदी अरेबियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ७ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|MAS}}
| team2 = {{cr|BHR}}
| score1 = २५४/८ (५० षटके)
| runs1 = [[विरनदीप सिंग]] ९८ (११८)
| wickets1 = [[इम्रान अन्वर]] ३/५६ (९ षटके)
| score2 = १२८ (३७.५ षटके)
| runs2 = प्रशांत कुरूप ३४ (५५)
| wickets2 = [[अकील वाहिद]] ४/३२ (९.५ षटके)
| result = मलेशिया १२६ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549962.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[शिजू सॅम]] (युएई) आणि दुर्गा सुबेदी (ने)
| motm = [[विरनदीप सिंग]] (म)
| toss = मलेशियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ८ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|HK}}
| team2 = {{cr|NEP}}
| score1 = २६१/७ (५० षटके)
| runs1 = [[बाबर हयात]] ११७[[नाबाद|*]] (१२६)
| wickets1 = [[संदीप लामिछाने]] ४/४४ (१० षटके)
| score2 = २४६ (४९.१ षटके)
| runs2 = ईशान पांडे ९० (१०६)
| wickets2 = [[एजाज खान (क्रिकेट खेळाडू)|एजाज खान]] ४/५० (१० षटके)
| result = हाँग काँग १५ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549964.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[शिजू सॅम]] (युएई)
| motm = [[बाबर हयात]] (हाँकाँ)
| toss = हाँग काँगने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = शेर मल्ला (नेपाळ) याने लिस्ट अ क्रिकेटमध्ये पदार्पण केले.
}}
===गट ब===
====गुणफलक====
<section begin="Group B" />
{| class="wikitable" style="text-align:center"
! style="width:25px"| स्थान
! style="width:160px"| संघ
! style="width:30px"| {{abbr|सा|सामने}}
! style="width:30px"| {{abbr|वि|विजय}}
! style="width:30px"| {{abbr|प|पराभव}}
! style="width:30px"| {{abbr|अ|अनिर्णित}}
! style="width:30px"| गुण
! {{abbr|धावगती|निव्वळ धावगती}}
|-style="background:#cfc;"
| १ || style="text-align:left" | {{Cr|UAE}} || ४ || ४ || ० || ० || '''८''' || १.९७९
|-style="background:#cfc;"
| २ || style="text-align:left" | {{Cr|OMA}} || ४ || २ || २ || ० || '''४''' || ०.६४९
|-
| ३ || style="text-align:left" | {{Cr|QAT}} || ४ || २ || २ || ० || '''४''' || ०.२२७
|-
| ४ || style="text-align:left" | {{Cr|KUW}} || ४ || २ || २ || ० || '''४''' || ०.१५२
|-
| ५|| style="text-align:left" | {{Cr|SIN}} || ४ || ० || ४ || ० || '''०''' || −३.२४१
|}
<small>स्रोत: [[क्रिकइन्फो]]<ref name="PT">{{cite web|url= https://www.espncricinfo.com/series/acc-men-s-premier-cup-2026-1549936/points-table-standings|trans-title= एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक २०२६ गुणतालिका आणि संघांची क्रमवारी|title= Women's Twenty20 Asia Cup 2026 Points Table & Team Standings |access-date=४ सप्टेंबर २०२६}}</ref></small>
<section end="Group B" />
====सामने====
{{hatnote|सर्व वेळा ह्या मलेशिया प्रमाणवेळ ([[यूटीसी+०८:००]]) आहेत}}
{{Single-innings cricket match
| date = ३० ऑगस्ट २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|OMA}}
| team2 = {{cr|SIN}}
| score1 = ३१६/९ (५० षटके)
| runs1 = [[विनायक शुक्ला]] 88 (56)
| wickets1 = हर्ष वेंकटराम ३/६४ (१० षटके)
| score2 = १८५ (४२.३ षटके)
| runs2 = [[मनप्रीत सिंग (क्रिकेट खेळाडू)|मनप्रीत सिंग]] 49 (56)
| wickets2 = [[हसनैन शाह]] ३/२९ (७ षटके)
| result = ओमान १३१ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549946.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[विश्वनादन कालिदास]] (मलेशिया) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[विनायक शुक्ला]] (ओ)
| toss = सिंगापूरने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = युवा पांडे, दक्ष त्यागी, साई वेणुगोपाल आणि कबीर झानदानी (सिं) या सर्वांनी [[लिस्ट अ क्रिकेट]]मध्ये मध्ये पदार्पण केले
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३१ ऑगस्ट २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|UAE}}
| team2 = {{cr|QAT}}
| score1 = २६३/९ (५० षटके)
| runs1 = [[अदीब उस्मानी]] ९२ (१०६)
| wickets1 = मिर्झा मोहम्मद बेग ३/६२ (९ षटके)
| score2 = १७१ (३७.३ षटके)
| runs2 = [[इमल लियानागे]] ७० (८२)
| wickets2 = [[हैदर अली (क्रिकेट खेळाडू, जन्म १९९४)|हैदर अली]] २/२५ (८ षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ९२ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549948.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि इम्रान मुस्तफा (कुवेत)
| motm = [[अदीब उस्मानी]] (युएई)
| toss = संयुक्त अरब अमिरातीने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = शाहजेब आफ्रिदी, झुबेर अली, मिर्झा मोहम्मद बेग, झीशान हैदर आणि [[अक्षय शंकर]] (कतार) या सर्वांनी लिस्ट ए मध्ये पदार्पण केले.}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = १ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|KUW}}
| team2 = {{cr|SIN}}
| score1 = २४९/४ (४३.४ षटके)
| runs1 = [[मीत भावसार]] ८४[[नाबाद|*]] (९०)
| wickets1 = प्रणव सुदर्शन २/३२ (७ षटके)
| score2 = ९६ (२७.३ षटके)
| runs2 = गिरीन गुणे ३४[[नाबाद|*]] (५४)
| wickets2 = [[मोहम्मद अस्लम (क्रिकेट खेळाडू)|मोहम्मद अस्लम]] ४/१५ (७.३ षटके)
| result = कुवेत १६० धावांनी विजयी ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस पद्धत]])
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549951.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[मोहम्मद अस्लम (क्रिकेट खेळाडू)|मोहम्मद अस्लम]] (कु)
| toss = सिंगापूरने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| rain = पावसामुळे सिंगापूरसमोर ३६ षटकांत २५७ धावांचे सुधारित लक्ष्य ठेवण्यात आले..
| notes = उमर अब्बास, मुहम्मद आकीफ फारूक आणि अब्दुल्ला झहीर (कु) या सर्वांनी [[लिस्ट अ क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले.}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = २ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|QAT}}
| team2 = {{cr|OMA}}
| score1 = २७२/९ (५० षटके)
| runs1 = झुबेर अली ७७ (१०१)
| wickets1 = [[हसनैन शाह]] ४/५८ (१० षटके)
| score2 = २७६/५ (४०.३ षटके)
| runs2 = [[हम्माद मिर्झा]] ८४[[नाबाद|*]] (९६)
| wickets2 = मिर्झा मोहम्मद बेग २/४५ (८ षटके)
| result = ओमान ५ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549953.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि [[विश्वनादन कालिदास]] (मलेशिया)
| motm = [[हम्माद मिर्झा]] (ओ)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = ओबैद उर रहमान (कतार) याने [[लिस्ट अ क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|UAE}}
| team2 = {{cr|KUW}}
| score1 = २८६/८ (५० षटके)
| runs1 = मुहम्मद शाहदाद ९४ (११०)
| wickets1 = मुहम्मद अकीफ फारूक ३/३८ (६ षटके)
| score2 = ११०/९ (२५ षटके)
| runs2 = [[रविजा संदारुवान]] 26 (42)
| wickets2 = [[अक्षदीप नाथ]] 6/21 (5 षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ६६ धावांनी विजयी ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस पद्धत]])
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549954.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि [[विश्वनादन कालिदास]] (मलेशिया)
| motm = मुहम्मद शाहदाद (युएई)
| toss = संयुक्त अरब अमिरातीने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain = पावसामुळे कुवेतसमोर २५ षटकांत १७७ धावांचे सुधारित लक्ष्य ठेवण्यात आले.
| notes = इब्रार अहमद (यूएई) याने [[लिस्ट ए क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले.
* [[अक्षदीप नाथ]] (युएई) याने लिस्ट अ सामन्यामध्ये पहिल्यांदा [[पंचबळी|पाच बळी]] घेतले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ४ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SIN}}
| team2 = {{cr|QAT}}
| score1 = १५० (३८.२ षटके)
| runs1 = [[मनप्रीत सिंग (क्रिकेट खेळाडू)|मनप्रीत सिंग]] ९६ (११३)
| wickets1 = मुहम्मद असीम ६/१८ (९.२ षटके)
| score2 = १५३/२ (२८.१ षटके)
| runs2 = झुबेर अली ५५[[नाबाद|*]] (७९)
| wickets2 = हरमन सिंग १/७ (३ षटके)
| result = कतार ८ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549956.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[शिजू सॅम]] (युएई)
| motm = मुहम्मद असीम (क)
| toss = सिंगापूरने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = मुहम्मद असीम (क) याने लिस्ट अ सामन्यामध्ये पहिल्यांदा [[पंचबळी|पाच बळी]] घेतले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ५ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|OMA}}
| team2 = {{cr|KUW}}
| score1 = २५२/८ (५० षटके)
| runs1 = [[जितेन रामानंदी]] ५३ (५५)
| wickets1 = अब्दुल्ला झहीर ३/५४ (१० षटके)
| score2 = २५६/६ (४९.४ षटके)
| runs2 = बिलाल ताहिर १०३[[नाबाद|*]] (१०६)
| wickets2 = फैसल शाह २/३७ (८ षटके)
| result = कुवेत ४ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549958.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि [[विश्वनादन कालिदास]] (म)
| motm = बिलाल ताहिर (कु)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = बिलाल ताहिर (कु) ह्याने लिस्ट अ सामन्यामध्ये पहिले शतक झळकावले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ६ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SIN}}
| team2 = {{cr|UAE}}
| score1 = १७२ (४७.४ षटके)
| runs1 = रियान नाईक ४४ (८३)
| wickets1 = [[आयान अफजल खान]] ३/२६ (१० षटके)
| score2 = १७४/३ (२४.३ षटके)
| runs2 = [[अक्षदीप नाथ]] ५८ (६२)
| wickets2 = चंद्रमौळी २/३१ (५.३ षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ७ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549961.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires =[[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[आयान अफजल खान]] (युएई)
| toss = सिंगापूरने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = मोहसीन खान (युएई) ह्याने लिस्ट अ क्रिकेटमध्ये पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ७ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|KUW}}
| team2 = {{cr|QAT}}
| score1 = २३३ (४९.५ षटके)
| runs1 = निमिष लतीफ ४७[[नाबाद|*]] (३८)
| wickets1 = मिर्झा मोहम्मद बेग २/४६ (१० षटके)
| score2 = २३५/६ (३५.५ षटके)
| runs2 = [[इमल लियानागे]] ५८ (८१)
| wickets2 = अब्दुल्ला झहीर २/३२ (४ षटके)
| result = कतार ४ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549963.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[विनोद बाबू]] (ओ)
| motm = मोहम्मद असीम (क)
| toss = कतारने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ८ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|UAE}}
| team2 = {{cr|OMA}}
| score1 = १९२ (४८.१ षटके)
| runs1 = [[तनिश सुरी]] ४८ (५३)
| wickets1 = [[जय ओडेदरा]] ३/१७ (५.१ षटके)
| score2 = १४३ (३४.५ षटके)
| runs2 = जितेन रामानंदी ५१ (७०)
| wickets2 = [[आयान अफजल खान]] ५/३४ (८.५ षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ४९ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549965.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[दुर्गा सुबेदी]] (ने) आणि [[विश्वनादन कालिदास]] (म)
| motm = [[आयान अफजल खान]] (युएई)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = संजू सजीव (ओ) आणि इब्रार अहमद (यूएई) या दोघांनीही आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय पदार्पण केले.
}}
==बाद फेरी==
{{hatnote|सर्व वेळा ह्या मलेशिया प्रमाणवेळ ([[यूटीसी+०८:००]]) आहेत)}}
{{4TeamBracket-with 3rd
| nowrap=y
| RD1 = [[#उपांत्य सामने|उपांत्य सामने]]
| RD2 = [[#अंतिम सामना|अंतिम सामना]]
| RD3= [[#३ऱ्या स्थानासाठी सामना|३ऱ्या स्थानासाठी सामना]]
| RD1-seed1 = अ१
| RD1-team1 = '''{{Cr|NEP}}'''
| RD1-score1 = '''{{nobr|१४७ (४५.४ षटके)}}'''
| RD1-seed2 = ब२
| RD1-team2 ={{Cr|OMA}}
| RD1-score2 = ६० (२८.१ षटके)
| RD1-seed3 = ब१
| RD1-team3 = '''{{nobr|{{Cr|UAE}}}}'''
| RD1-score3 = '''७१/३ (११.१ षटके)'''
| RD1-seed4 = अ२
| RD1-team4 = {{Cr|HK}}
| RD1-score4 =७० (३०.१ षटके)
| RD2-seed1 = उसा१वि
| RD2-team1 = '''{{Cr|NEP}}'''
| RD2-score1 = '''३१३/९ (५० षटके)'''
| RD2-seed2 = उसा२वि
| RD2-team2 = {{nobr|{{Cr|UAE}}}}
| RD2-score2 = {{nobr|२६८ (४९.२ षटके)}}
| RD3-seed1= उसा१प
| RD3-team1= {{Cr|OMA}}
| RD3-score1= १४४ /(४०.१ षटके)
| RD3-seed2= उसा२प
| RD3-team2= {{Cr|HK}}
| RD3-score2= १४६/१ (१९.५ षटके)
}}
===उपांत्य सामने===
{{Single-innings cricket match
| round = '''१ला उपांत्य सामना'''
| date = १० सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| daynight =
| team1 = {{Cr-rt|NEP}}
| team2 = {{Cr|OMA}}
| score1 = १४७ (४५.४ षटके)
| runs1 = [[दीपेंद्र सिंह ऐरी]] ५१ (७६)
| wickets1 = [[जय ओडेदरा]] ३/२६ (१० षटके)
| score2 = ६० (२८.१ षटके)
| runs2 = [[जतिंदर सिंग]] २५ (४१)
| wickets2 = [[संदीप लामिछाने]] ३/९ (६ षटके)
| result = नेपाळ ८७ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549966.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[तबारक दर]] (हाँकाँ)
| motm = [[दीपेंद्र सिंह ऐरी]] (ने)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = [[शेर मल्ला]] (ने) ह्याने आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| round = '''२रा उपांत्य सामना'''
| date = १० सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| daynight =
| team1 = {{cr-rt|HK}}
| team2 = {{cr|UAE}}
| score1 = ७० (३०.१ षटके)
| runs1 = [[झिशान अली]] १७ (२८)
| wickets1 = [[हैदर अली (क्रिकेट खेळाडू, जन्म १९९४)|हैदर अली]] ६/१४ (१० षटके)
| score2 = ७१/३ (११.१ षटके)
| runs2 = [[तनिश सुरी]] २७ (२५)
| wickets2 = [[किंचित शाह]] १/४ (१.१ षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ७ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549967.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[विश्वनादन कालिदास]] (म) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[[हैदर अली (क्रिकेट खेळाडू, जन्म १९९४)|हैदर अली]] (युएई)
| toss = संयुक्त अरब अमिरातीने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
}}
===३ऱ्या स्थानासाठी सामना===
{{Single-innings cricket match
| date = १२ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| daynight =
| team1 = {{cr-rt|OMA}}
| team2 = {{cr|HK}}
| score1 = १४४ (४०.१ षटके)
| runs1 = संजू सजीव ५९ (९९)
| wickets1 = [[नसरुल्ला राणा]] ४/२६ (९ षटके)
| score2 = १४६/१ (१९.५ षटके)
| runs2 = [[अंशुमन रथ]] ६८[[नाबाद|*]] (६०)
| wickets2 = [[शकिल अहमद]] १/३३ (४ षटके)
| result = हाँग काँग ९ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549968.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[शिजू सॅम]] (युएई) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[नसरुल्ला राणा]] (हाँकाँ)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
===अंतिम सामना===
{{Single-innings cricket match
| date = १२ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| daynight =
| team1 = {{cr-rt|NEP}}
| team2 = {{cr|UAE}}
| score1 = ३१३/९ (५० षटके)
| runs1 = [[आसिफ शेख]] १०२ (१०६)
| wickets1 = ईबरार अहमद ४/६२ (८ षटके)
| score2 = २६९ (४९.१ षटके)
| runs2 = [[राहुल चोप्रा]] १००[[नाबाद|*]] (१०५)
| wickets2 = [[करण केसी]] ३/४९ (९ षटके)
| result = नेपाळ ४४ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549969.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) and [[विश्वनादन कालिदास]] (म)
| motm = [[आसिफ शेख]] (ने)
| toss = नेपाळने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = [[मुहम्मद मोहसिन]] (यूएई) याने एकदिवसीय क्रिकेट पदार्पण केले.
* [[गुलशन झा]] (ने) याने एकदिवसीय कारकिर्दीतील १,००० धावा पूर्ण केली.
}}
== नोंदी ==
{{notelist}}
== संदर्भयादी==
{{संदर्भयादी}}
==बाह्यदुवे==
* [https://www.espncricinfo.com/series/acc-men-s-premier-cup-2026-1549936 मालिका मुख्यपान क्रिकइन्फोवर]
{{आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६}}
[[वर्ग:इ.स. २०२६ मधील क्रिकेट]]
[[वर्ग:मलेशियामधील क्रिकेट]]
aa2c3ozvrdqzx1t6y9d01cgct0miouk
2709898
2709897
2026-09-16T09:45:34Z
Nitin.kunjir
4684
/* बाद फेरी */
2709898
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox cricket tournament
| name = २०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक
| image =
| imagesize =
| fromdate = ३० ऑगस्ट
| todate = १२ सप्टेंबर २०२६
| administrator = [[आशिया क्रिकेट समिती]]
| cricket format = [[आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय| आं.ए.दि.]]<br>[[लिस्ट अ क्रिकेट|लिस्ट अ]]<br>[[मर्यादित षटकांचे सामने|५० षटके]]
| tournament format = गट [[साखळी सामने]] आणि [[बाद फेरी]]
| host = मलेशिया
| champions = {{cr|NEP}}
| count = २
| runner up = {{cr|UAE}}
| participants = १०
| matches = २४
| player of the series = {{cricon|NEP}} [[संदीप लामिछाने]]
| most runs = {{cricon|MAS}} [[विरेनदीप सिंग]] (२७३)
| most wickets = {{cricon|NEP}} [[संदीप लामिछाने]] (१७)
| previous_year = २०२४
| previous_tournament = २०२४ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक
| next_year =
| next_tournament =
}}
'''२०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक ही''' तिसरी एसीसी प्रीमियर चषक स्पर्धा होती, जी ३० ऑगस्ट ते १२ सप्टेंबर २०२६ या कालावधीत मलेशियामध्ये आयोजित केली गेली आणि ती [[२०२७ आशिया चषक]] स्पर्धेसाठी पात्रतेचा अंतिम टप्पा होती. <ref>{{cite web |trans-title=मलेशिया क्रिकेट ऑगस्ट/सप्टेंबरमध्ये एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक २०२६ चे यजमानपद भूषवणार.|title=Malaysia Cricket to host ACC Men’s Premier Cup 2026 in August/September |url=https://czarsportzauto.com/acc-mens-premier-cup-2026/ |date=८ ऑगस्ट २०२६|access-date=४ सप्टेंबर २०२६|work=Czarsportz}}</ref><ref>{{cite web |url=https://gorkhapatraonline.com/news/217716 |work=गोरखापत्र | title=एसीसी प्रिमियर कप : नेपालको पहिलो खेल साउदीसँग |trans-title= एसीसी प्रीमियर कप: नेपाळचा पहिला सामना सौदी अरेबियाविरुद्ध |date=८ ऑगस्ट २०२६|access-date=४ सप्टेंबर २०२६|lang=ne}}</ref>
==संघ आणि पात्रता==
[[२०२४ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक]] स्पर्धेमधील अव्वल ८ संघांसोबत, [[२०२६ एसीसी पुरुष चॅलेंजर चषक]] स्पर्धेमधील अंतिम फेरीतील दोन संघ सामील झाले.<ref>{{cite web |url=https://www.cricketthailand.org/malaysia-and-singapore-promoted-to-premier-cup-as-thailand-miss-out/ |trans-title= थायलंडची संधी हुकली; मलेशिया आणि सिंगापूरची 'प्रीमियर कप'मध्ये बढती. |title=Malaysia and Singapore promoted to Premier Cup as Thailand miss out |work=[[थायलंड क्रिकेट असोसिएशन]] |date=१८ जून २०२६|access-date=४ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
{| class="wikitable"
|+
!पात्रतेचे निकष
!ठिकाण
!संघांची संख्या
!संघ
|-
|rowspan="8"| [[२०२४ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक]]<br><small>(अव्वल ८ संघ)</small>
|rowspan="8"| ओमान
|rowspan="8" style="text-align:center"| '''८'''
| {{cr|BHR}}
|-
| {{cr|HKG}}
|-
| {{cr|KUW}}
|-
| {{cr|NEP}}
|-
| {{cr|OMA}}
|-
| {{cr|QAT}}
|-
| {{cr|SAU}}
|-
| {{nobr|{{cr|UAE}}}}
|-
|rowspan="2"| {{nobr|[[२०२६ एसीसी पुरुष चॅलेंजर चषक]]}}
|rowspan="2"| सिंगापूर
|rowspan="2" style="text-align:center"| '''२'''
| {{cr|MAS}}
|-
| {{cr|SIN}}
|-
!एकूण
!
!१०
!
|}
==गट फेरी==
सहभागी दहा देशांची दोन गटांत विभागणी करण्यात आली होती आणि प्रत्येक गटातील अव्वल दोन संघ बाद फेरीसाठी पात्र ठरले. [[आशियाई क्रिकेट समिती]]ने १२ ऑगस्ट २०२६ रोजी सामन्यांचे वेळापत्रक जाहीर केले. <ref>{{cite tweet |number=2087458017998778804 |trans-title= दहा संघ. एकच ध्येय. २०२७ च्या पुरुष आशिया चषकातील स्थान. मलेशियामध्ये होणाऱ्या एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक २०२६ मध्ये चुरशीची क्रिकेट स्पर्धा पाहायला मिळणार असून, प्रत्येक सामन्याचे महत्त्व अनन्यसाधारण असेल. या स्पर्धेची सुरुवात ३० ऑगस्टपासून होणार आहे. |title=𝐓𝐞𝐧 𝐬𝐢𝐝𝐞𝐬. 𝐎𝐧𝐞 𝐠𝐨𝐚𝐥. 𝐀 𝐩𝐥𝐚𝐜𝐞 𝐚𝐭 𝐭𝐡𝐞 𝟐𝟎𝟐𝟕 𝐌𝐞𝐧’𝐬 𝐀𝐬𝐢𝐚 𝐂𝐮𝐩 The ACC Mens Premier Cup 2026 is set for some serious cricket in Malaysia with every game carrying its own weight. Action begins on the 30th August |user=ACCMedia1}}</ref>
===गट अ===
====गुणफलक====
<section begin=Group A/>
{| class="wikitable" style="text-align:center"
! style="width:25px"| स्थान
! style="width:160px"| संघ
! style="width:30px"| {{abbr|सा|सामने}}
! style="width:30px"| {{abbr|वि|विजय}}
! style="width:30px"| {{abbr|प|पराभव}}
! style="width:30px"| {{abbr|अ|अनिर्णित}}
! style="width:30px"| गुण
! {{abbr|धावगती|निव्वळ धावगती}}
|-style="background:#cfc;"
| १ || style="text-align:left" | {{Cr|NEP}} || ४ || ३ || १ || ० || '''६''' || १.५३१
|-style="background:#cfc;"
| २ || style="text-align:left" | {{Cr|HK}} || ४ || ३ || १ || ० || '''६''' || −०.००५
|-
| ३ || style="text-align:left" | {{Cr|MAS}} '''(य)'''|| ४ || २ || २ || ० || '''४''' || ०.५६८
|-
| ४ || style="text-align:left" | {{Cr|SAU}} || ४ || १ || ३ || ० || '''२''' || −०.६९६
|-
| ५|| style="text-align:left" | {{Cr|BHR}} || ४ || १ || ३ || ० || '''२''' || −१.१८८
|}
<small>स्रोत: [[क्रिकइन्फो]]<ref name="PT">{{cite web|url= https://www.espncricinfo.com/series/acc-men-s-premier-cup-2026-1549936/points-table-standings|trans-title= एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक २०२६ गुणतालिका आणि संघांची क्रमवारी|title= Women's Twenty20 Asia Cup 2026 Points Table & Team Standings |access-date=४ सप्टेंबर २०२६}}</ref></small>
<section end=Group A/>
====सामने====
{{hatnote|सर्व वेळा ह्या मलेशिया प्रमाणवेळ ([[यूटीसी+०८:००]]) आहेत}}
{{Single-innings cricket match
| date = ३० ऑगस्ट २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|HK}}
| team2 = {{cr|SAU}}
| score1 = २७३ (४८.५ षटके)
| runs1 = [[बाबर हयात]] ७३ (८९)
| wickets1 = उस्मान नजीब ३/५३ (८ षटके)
| score2 = २५७ (४९.२ षटके)
| runs2 = मनन अली ५४ (६३)
| wickets2 = [[यासिम मुर्तझा]] ३/५३ (१० षटके)
| result = हाँग काँग १६ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549947.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[विनोद बाबू]] (ओमान)
| motm = [[यासिम मुर्तझा]] (हाँकाँ)
| toss = हाँग काँगने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३१ ऑगस्ट २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|BHR}}
| team2 = {{cr|NEP}}
| score1 = ८७ (३६.२ षटके)
| runs1 = फैझ अहमद १५ (१५)
| wickets1 = [[संदीप लामिछाने]] ५/१४ (१० षटके)
| score2 = ८८/३ (२१ षटके)
| runs2 = अर्जुन कुमल ३६ (५८)
| wickets2 = [[इम्रान अन्वर]] २/२० (६ षटके)
| result = नेपाळ ७ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549949.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = आनंद नटराजन (सिं) आणि [[शिजू सॅम]] (युएई)
| motm = [[संदीप लामिछाने]] (ने)
| toss = नेपाळणे नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = मुहम्मद वसीमने (ब) लिस्ट अ पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = १ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|MAS}}
| team2 = {{cr|SAU}}
| score1 = २७०/८ (५० षटके)
| runs1 = [[मुहम्मद स्याहादत]] ८२ (९८)
| wickets1 = मुहम्मद साकीब ३/४२ (८ षटके)
| score2 = १७७ (३४ षटके)
| runs2 = उस्मान नजीब ६४[[नाबाद|*]] (२९)
| wickets2 = विजय उन्नी ५/३४ (९ षटके)
| result = मलेशिया ९३ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549950.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[विनोद बाबू]] (ओमान) आणि इम्रान मुस्तफा (कुवेत)
| motm = [[विरेनदीप सिंग]] (मलेशिया)
| toss = मलेशियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = २ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|BHR}}
| team2 = {{cr|HK}}
| score1 = २१०/८ (५० षटके)
| runs1 = जुनैद अझीझ ४७ (६०)
| wickets1 = [[यासिम मुर्तझा]] ३/३० (१० षटके)
| score2 = १७८ (४९.४ षटके)
| runs2 = [[शाहिद वासीफ]] ५३ (६४)
| wickets2 = अली दाऊद ४/२१ (१० षटके)
| result = बहरीन ३२ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549952.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[विनोद बाबू]] (ओमान) आणि आनंद नटराजन (सिं)
| motm = अली दाऊद (ब)
| toss = बहरीनने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = यासीर नजीर, मुहम्मद सलमान (ब) आणि कल्हन छल्लू (हाँकाँ) या सर्वांनी लिस्ट अ क्रिकेटमध्ये पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|MAS}}
| team2 = {{cr|NEP}}
| score1 = १०३ (३२.३ षटके)
| runs1 = [[सय्यद अझीज]] ३० (४९)
| wickets1 = [[करण के.सी.]] ४/२३ (७.३ षटके)
| score2 = १०६/४ (२१.४ षटके)
| runs2 = अर्जुन कुमल ४५[[नाबाद|*]] (६८)
| wickets2 = [[सय्यद अझीज]] १/१९ (४ षटके)
| result = नेपाळ ६ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549955.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = इम्रान मुस्तफा (कुवेत) आणि [[शिजू सॅम]] (युएई)
| motm = [[करण के.सी.]] (ने)
| toss = मलेशियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ४ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SAU}}
| team2 = {{cr|BHR}}
| score1 = २२१ (४८.४ षटके)
| runs1 = अब्दुल वाहिद ७० (९१)
| wickets1 = अली दाऊद ३/३७ (९.४ षटके)
| score2 = २०४/८ (५० षटके)
| runs2 = [[इम्रान अन्वर]] ४९ (५९)
| wickets2 = मुहम्मद सकीब १९/२ (७ षटके)
| result = सौदी अरेबिया १७ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549957.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = आनंद नटराजन (सिं) आणि दुर्गा सुबेदी (ने)
| motm = अब्दुल वाहिद (सौदी)
| toss = सौदी अरेबियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ५ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|HK}}
| team2 = {{cr|MAS}}
| score1 = २०९ (४६.३ षटके)
| runs1 = कल्हन चल्लू ६९ (७२)
| wickets1 = [[अकील वाहिद]] ४/३९ (१० षटके)
| score2 = २०९/९ (५० षटके)
| runs2 = [[विरनदीप सिंग]] ८२[[नाबाद|*]] (१०६)
| wickets2 = [[हसन खान मोहम्मद]] २/२९ (७ षटके)
| result = सामना बरोबरीत<br />(हाँग काँग [[सुपर ओव्हर]] मध्ये विजयी)
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549959.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = इम्रान मुस्तफा (कु) आणि [[विनोद बाबू]] (ओ)
| motm = [[अंशुमन रथ]] (हाँकाँ)
| toss = हाँग काँगने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = [[सुपर ओव्हर]]: हाँग काँग १४/४, मलेशिया ११/१
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ६ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SAU}}
| team2 = {{cr|NEP}}
| score1 = १९० (49.2 षटके)
| runs1 = [[अकील वाहिद]] ७७ (८९)
| wickets1 = [[संदीप लामिछाने]] ३/१९ (१० षटके)
| score2 = १९३/५ (४१ षटके)
| runs2 = [[गुलशन झा]] ४४[[नाबाद|*]] (३५)
| wickets2 = इश्तीआक अहमद २/२३ (५ षटके)
| result = नेपाळ ५ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549960.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[अकील वाहिद]] (युएई)
| motm = [[गुलशन झा]] (ने)
| toss = सौदी अरेबियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ७ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|MAS}}
| team2 = {{cr|BHR}}
| score1 = २५४/८ (५० षटके)
| runs1 = [[विरनदीप सिंग]] ९८ (११८)
| wickets1 = [[इम्रान अन्वर]] ३/५६ (९ षटके)
| score2 = १२८ (३७.५ षटके)
| runs2 = प्रशांत कुरूप ३४ (५५)
| wickets2 = [[अकील वाहिद]] ४/३२ (९.५ षटके)
| result = मलेशिया १२६ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549962.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[शिजू सॅम]] (युएई) आणि दुर्गा सुबेदी (ने)
| motm = [[विरनदीप सिंग]] (म)
| toss = मलेशियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ८ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|HK}}
| team2 = {{cr|NEP}}
| score1 = २६१/७ (५० षटके)
| runs1 = [[बाबर हयात]] ११७[[नाबाद|*]] (१२६)
| wickets1 = [[संदीप लामिछाने]] ४/४४ (१० षटके)
| score2 = २४६ (४९.१ षटके)
| runs2 = ईशान पांडे ९० (१०६)
| wickets2 = [[एजाज खान (क्रिकेट खेळाडू)|एजाज खान]] ४/५० (१० षटके)
| result = हाँग काँग १५ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549964.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[शिजू सॅम]] (युएई)
| motm = [[बाबर हयात]] (हाँकाँ)
| toss = हाँग काँगने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = शेर मल्ला (नेपाळ) याने लिस्ट अ क्रिकेटमध्ये पदार्पण केले.
}}
===गट ब===
====गुणफलक====
<section begin="Group B" />
{| class="wikitable" style="text-align:center"
! style="width:25px"| स्थान
! style="width:160px"| संघ
! style="width:30px"| {{abbr|सा|सामने}}
! style="width:30px"| {{abbr|वि|विजय}}
! style="width:30px"| {{abbr|प|पराभव}}
! style="width:30px"| {{abbr|अ|अनिर्णित}}
! style="width:30px"| गुण
! {{abbr|धावगती|निव्वळ धावगती}}
|-style="background:#cfc;"
| १ || style="text-align:left" | {{Cr|UAE}} || ४ || ४ || ० || ० || '''८''' || १.९७९
|-style="background:#cfc;"
| २ || style="text-align:left" | {{Cr|OMA}} || ४ || २ || २ || ० || '''४''' || ०.६४९
|-
| ३ || style="text-align:left" | {{Cr|QAT}} || ४ || २ || २ || ० || '''४''' || ०.२२७
|-
| ४ || style="text-align:left" | {{Cr|KUW}} || ४ || २ || २ || ० || '''४''' || ०.१५२
|-
| ५|| style="text-align:left" | {{Cr|SIN}} || ४ || ० || ४ || ० || '''०''' || −३.२४१
|}
<small>स्रोत: [[क्रिकइन्फो]]<ref name="PT">{{cite web|url= https://www.espncricinfo.com/series/acc-men-s-premier-cup-2026-1549936/points-table-standings|trans-title= एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक २०२६ गुणतालिका आणि संघांची क्रमवारी|title= Women's Twenty20 Asia Cup 2026 Points Table & Team Standings |access-date=४ सप्टेंबर २०२६}}</ref></small>
<section end="Group B" />
====सामने====
{{hatnote|सर्व वेळा ह्या मलेशिया प्रमाणवेळ ([[यूटीसी+०८:००]]) आहेत}}
{{Single-innings cricket match
| date = ३० ऑगस्ट २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|OMA}}
| team2 = {{cr|SIN}}
| score1 = ३१६/९ (५० षटके)
| runs1 = [[विनायक शुक्ला]] 88 (56)
| wickets1 = हर्ष वेंकटराम ३/६४ (१० षटके)
| score2 = १८५ (४२.३ षटके)
| runs2 = [[मनप्रीत सिंग (क्रिकेट खेळाडू)|मनप्रीत सिंग]] 49 (56)
| wickets2 = [[हसनैन शाह]] ३/२९ (७ षटके)
| result = ओमान १३१ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549946.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[विश्वनादन कालिदास]] (मलेशिया) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[विनायक शुक्ला]] (ओ)
| toss = सिंगापूरने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = युवा पांडे, दक्ष त्यागी, साई वेणुगोपाल आणि कबीर झानदानी (सिं) या सर्वांनी [[लिस्ट अ क्रिकेट]]मध्ये मध्ये पदार्पण केले
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३१ ऑगस्ट २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|UAE}}
| team2 = {{cr|QAT}}
| score1 = २६३/९ (५० षटके)
| runs1 = [[अदीब उस्मानी]] ९२ (१०६)
| wickets1 = मिर्झा मोहम्मद बेग ३/६२ (९ षटके)
| score2 = १७१ (३७.३ षटके)
| runs2 = [[इमल लियानागे]] ७० (८२)
| wickets2 = [[हैदर अली (क्रिकेट खेळाडू, जन्म १९९४)|हैदर अली]] २/२५ (८ षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ९२ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549948.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि इम्रान मुस्तफा (कुवेत)
| motm = [[अदीब उस्मानी]] (युएई)
| toss = संयुक्त अरब अमिरातीने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = शाहजेब आफ्रिदी, झुबेर अली, मिर्झा मोहम्मद बेग, झीशान हैदर आणि [[अक्षय शंकर]] (कतार) या सर्वांनी लिस्ट ए मध्ये पदार्पण केले.}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = १ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|KUW}}
| team2 = {{cr|SIN}}
| score1 = २४९/४ (४३.४ षटके)
| runs1 = [[मीत भावसार]] ८४[[नाबाद|*]] (९०)
| wickets1 = प्रणव सुदर्शन २/३२ (७ षटके)
| score2 = ९६ (२७.३ षटके)
| runs2 = गिरीन गुणे ३४[[नाबाद|*]] (५४)
| wickets2 = [[मोहम्मद अस्लम (क्रिकेट खेळाडू)|मोहम्मद अस्लम]] ४/१५ (७.३ षटके)
| result = कुवेत १६० धावांनी विजयी ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस पद्धत]])
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549951.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[मोहम्मद अस्लम (क्रिकेट खेळाडू)|मोहम्मद अस्लम]] (कु)
| toss = सिंगापूरने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| rain = पावसामुळे सिंगापूरसमोर ३६ षटकांत २५७ धावांचे सुधारित लक्ष्य ठेवण्यात आले..
| notes = उमर अब्बास, मुहम्मद आकीफ फारूक आणि अब्दुल्ला झहीर (कु) या सर्वांनी [[लिस्ट अ क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले.}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = २ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|QAT}}
| team2 = {{cr|OMA}}
| score1 = २७२/९ (५० षटके)
| runs1 = झुबेर अली ७७ (१०१)
| wickets1 = [[हसनैन शाह]] ४/५८ (१० षटके)
| score2 = २७६/५ (४०.३ षटके)
| runs2 = [[हम्माद मिर्झा]] ८४[[नाबाद|*]] (९६)
| wickets2 = मिर्झा मोहम्मद बेग २/४५ (८ षटके)
| result = ओमान ५ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549953.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि [[विश्वनादन कालिदास]] (मलेशिया)
| motm = [[हम्माद मिर्झा]] (ओ)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = ओबैद उर रहमान (कतार) याने [[लिस्ट अ क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|UAE}}
| team2 = {{cr|KUW}}
| score1 = २८६/८ (५० षटके)
| runs1 = मुहम्मद शाहदाद ९४ (११०)
| wickets1 = मुहम्मद अकीफ फारूक ३/३८ (६ षटके)
| score2 = ११०/९ (२५ षटके)
| runs2 = [[रविजा संदारुवान]] 26 (42)
| wickets2 = [[अक्षदीप नाथ]] 6/21 (5 षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ६६ धावांनी विजयी ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस पद्धत]])
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549954.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि [[विश्वनादन कालिदास]] (मलेशिया)
| motm = मुहम्मद शाहदाद (युएई)
| toss = संयुक्त अरब अमिरातीने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain = पावसामुळे कुवेतसमोर २५ षटकांत १७७ धावांचे सुधारित लक्ष्य ठेवण्यात आले.
| notes = इब्रार अहमद (यूएई) याने [[लिस्ट ए क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले.
* [[अक्षदीप नाथ]] (युएई) याने लिस्ट अ सामन्यामध्ये पहिल्यांदा [[पंचबळी|पाच बळी]] घेतले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ४ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SIN}}
| team2 = {{cr|QAT}}
| score1 = १५० (३८.२ षटके)
| runs1 = [[मनप्रीत सिंग (क्रिकेट खेळाडू)|मनप्रीत सिंग]] ९६ (११३)
| wickets1 = मुहम्मद असीम ६/१८ (९.२ षटके)
| score2 = १५३/२ (२८.१ षटके)
| runs2 = झुबेर अली ५५[[नाबाद|*]] (७९)
| wickets2 = हरमन सिंग १/७ (३ षटके)
| result = कतार ८ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549956.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[शिजू सॅम]] (युएई)
| motm = मुहम्मद असीम (क)
| toss = सिंगापूरने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = मुहम्मद असीम (क) याने लिस्ट अ सामन्यामध्ये पहिल्यांदा [[पंचबळी|पाच बळी]] घेतले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ५ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|OMA}}
| team2 = {{cr|KUW}}
| score1 = २५२/८ (५० षटके)
| runs1 = [[जितेन रामानंदी]] ५३ (५५)
| wickets1 = अब्दुल्ला झहीर ३/५४ (१० षटके)
| score2 = २५६/६ (४९.४ षटके)
| runs2 = बिलाल ताहिर १०३[[नाबाद|*]] (१०६)
| wickets2 = फैसल शाह २/३७ (८ षटके)
| result = कुवेत ४ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549958.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि [[विश्वनादन कालिदास]] (म)
| motm = बिलाल ताहिर (कु)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = बिलाल ताहिर (कु) ह्याने लिस्ट अ सामन्यामध्ये पहिले शतक झळकावले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ६ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SIN}}
| team2 = {{cr|UAE}}
| score1 = १७२ (४७.४ षटके)
| runs1 = रियान नाईक ४४ (८३)
| wickets1 = [[आयान अफजल खान]] ३/२६ (१० षटके)
| score2 = १७४/३ (२४.३ षटके)
| runs2 = [[अक्षदीप नाथ]] ५८ (६२)
| wickets2 = चंद्रमौळी २/३१ (५.३ षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ७ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549961.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires =[[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[आयान अफजल खान]] (युएई)
| toss = सिंगापूरने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = मोहसीन खान (युएई) ह्याने लिस्ट अ क्रिकेटमध्ये पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ७ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|KUW}}
| team2 = {{cr|QAT}}
| score1 = २३३ (४९.५ षटके)
| runs1 = निमिष लतीफ ४७[[नाबाद|*]] (३८)
| wickets1 = मिर्झा मोहम्मद बेग २/४६ (१० षटके)
| score2 = २३५/६ (३५.५ षटके)
| runs2 = [[इमल लियानागे]] ५८ (८१)
| wickets2 = अब्दुल्ला झहीर २/३२ (४ षटके)
| result = कतार ४ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549963.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[विनोद बाबू]] (ओ)
| motm = मोहम्मद असीम (क)
| toss = कतारने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ८ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|UAE}}
| team2 = {{cr|OMA}}
| score1 = १९२ (४८.१ षटके)
| runs1 = [[तनिश सुरी]] ४८ (५३)
| wickets1 = [[जय ओडेदरा]] ३/१७ (५.१ षटके)
| score2 = १४३ (३४.५ षटके)
| runs2 = जितेन रामानंदी ५१ (७०)
| wickets2 = [[आयान अफजल खान]] ५/३४ (८.५ षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ४९ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549965.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[दुर्गा सुबेदी]] (ने) आणि [[विश्वनादन कालिदास]] (म)
| motm = [[आयान अफजल खान]] (युएई)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = संजू सजीव (ओ) आणि इब्रार अहमद (यूएई) या दोघांनीही आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय पदार्पण केले.
}}
==बाद फेरी==
{{hatnote|सर्व वेळा ह्या मलेशिया प्रमाणवेळ ([[यूटीसी+०८:००]]) आहेत)}}
{{4TeamBracket-with 3rd
| nowrap=y
| RD1 = [[#उपांत्य सामने|उपांत्य सामने]]
| RD2 = [[#अंतिम सामना|अंतिम सामना]]
| RD3= [[#३ऱ्या स्थानासाठी सामना|३ऱ्या स्थानासाठी सामना]]
| RD1-seed1 = अ१
| RD1-team1 = '''{{Cr|NEP}}'''
| RD1-score1 = '''{{nobr|१४७ (४५.४ षटके)}}'''
| RD1-seed2 = ब२
| RD1-team2 ={{Cr|OMA}}
| RD1-score2 = ६० (२८.१ षटके)
| RD1-seed3 = ब१
| RD1-team3 = '''{{nobr|{{Cr|UAE}}}}'''
| RD1-score3 = '''७१/३ (११.१ षटके)'''
| RD1-seed4 = अ२
| RD1-team4 = {{Cr|HK}}
| RD1-score4 =७० (३०.१ षटके)
| RD2-seed1 = उसा१वि
| RD2-team1 = '''{{Cr|NEP}}'''
| RD2-score1 = '''{{nobr|३१३/९ (५० षटके)}}'''
| RD2-seed2 = उसा२वि
| RD2-team2 = {{nobr|{{Cr|UAE}}}}
| RD2-score2 = २६८ (४९.२ षटके)
| RD3-seed1= उसा१प
| RD3-team1= {{Cr|OMA}}
| RD3-score1= १४४ /(४०.१ षटके)
| RD3-seed2= उसा२प
| RD3-team2= {{Cr|HK}}
| RD3-score2= १४६/१ (१९.५ षटके)
}}
===उपांत्य सामने===
{{Single-innings cricket match
| round = '''१ला उपांत्य सामना'''
| date = १० सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| daynight =
| team1 = {{Cr-rt|NEP}}
| team2 = {{Cr|OMA}}
| score1 = १४७ (४५.४ षटके)
| runs1 = [[दीपेंद्र सिंह ऐरी]] ५१ (७६)
| wickets1 = [[जय ओडेदरा]] ३/२६ (१० षटके)
| score2 = ६० (२८.१ षटके)
| runs2 = [[जतिंदर सिंग]] २५ (४१)
| wickets2 = [[संदीप लामिछाने]] ३/९ (६ षटके)
| result = नेपाळ ८७ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549966.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[तबारक दर]] (हाँकाँ)
| motm = [[दीपेंद्र सिंह ऐरी]] (ने)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = [[शेर मल्ला]] (ने) ह्याने आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| round = '''२रा उपांत्य सामना'''
| date = १० सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| daynight =
| team1 = {{cr-rt|HK}}
| team2 = {{cr|UAE}}
| score1 = ७० (३०.१ षटके)
| runs1 = [[झिशान अली]] १७ (२८)
| wickets1 = [[हैदर अली (क्रिकेट खेळाडू, जन्म १९९४)|हैदर अली]] ६/१४ (१० षटके)
| score2 = ७१/३ (११.१ षटके)
| runs2 = [[तनिश सुरी]] २७ (२५)
| wickets2 = [[किंचित शाह]] १/४ (१.१ षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ७ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549967.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[विश्वनादन कालिदास]] (म) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[[हैदर अली (क्रिकेट खेळाडू, जन्म १९९४)|हैदर अली]] (युएई)
| toss = संयुक्त अरब अमिरातीने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
}}
===३ऱ्या स्थानासाठी सामना===
{{Single-innings cricket match
| date = १२ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| daynight =
| team1 = {{cr-rt|OMA}}
| team2 = {{cr|HK}}
| score1 = १४४ (४०.१ षटके)
| runs1 = संजू सजीव ५९ (९९)
| wickets1 = [[नसरुल्ला राणा]] ४/२६ (९ षटके)
| score2 = १४६/१ (१९.५ षटके)
| runs2 = [[अंशुमन रथ]] ६८[[नाबाद|*]] (६०)
| wickets2 = [[शकिल अहमद]] १/३३ (४ षटके)
| result = हाँग काँग ९ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549968.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[शिजू सॅम]] (युएई) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[नसरुल्ला राणा]] (हाँकाँ)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
===अंतिम सामना===
{{Single-innings cricket match
| date = १२ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| daynight =
| team1 = {{cr-rt|NEP}}
| team2 = {{cr|UAE}}
| score1 = ३१३/९ (५० षटके)
| runs1 = [[आसिफ शेख]] १०२ (१०६)
| wickets1 = ईबरार अहमद ४/६२ (८ षटके)
| score2 = २६९ (४९.१ षटके)
| runs2 = [[राहुल चोप्रा]] १००[[नाबाद|*]] (१०५)
| wickets2 = [[करण केसी]] ३/४९ (९ षटके)
| result = नेपाळ ४४ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549969.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) and [[विश्वनादन कालिदास]] (म)
| motm = [[आसिफ शेख]] (ने)
| toss = नेपाळने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = [[मुहम्मद मोहसिन]] (यूएई) याने एकदिवसीय क्रिकेट पदार्पण केले.
* [[गुलशन झा]] (ने) याने एकदिवसीय कारकिर्दीतील १,००० धावा पूर्ण केली.
}}
== नोंदी ==
{{notelist}}
== संदर्भयादी==
{{संदर्भयादी}}
==बाह्यदुवे==
* [https://www.espncricinfo.com/series/acc-men-s-premier-cup-2026-1549936 मालिका मुख्यपान क्रिकइन्फोवर]
{{आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६}}
[[वर्ग:इ.स. २०२६ मधील क्रिकेट]]
[[वर्ग:मलेशियामधील क्रिकेट]]
gbuxib3eaxh7yvqu5e2md6gpk42qeei
2709899
2709898
2026-09-16T09:46:00Z
Nitin.kunjir
4684
/* बाद फेरी */
2709899
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox cricket tournament
| name = २०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक
| image =
| imagesize =
| fromdate = ३० ऑगस्ट
| todate = १२ सप्टेंबर २०२६
| administrator = [[आशिया क्रिकेट समिती]]
| cricket format = [[आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय| आं.ए.दि.]]<br>[[लिस्ट अ क्रिकेट|लिस्ट अ]]<br>[[मर्यादित षटकांचे सामने|५० षटके]]
| tournament format = गट [[साखळी सामने]] आणि [[बाद फेरी]]
| host = मलेशिया
| champions = {{cr|NEP}}
| count = २
| runner up = {{cr|UAE}}
| participants = १०
| matches = २४
| player of the series = {{cricon|NEP}} [[संदीप लामिछाने]]
| most runs = {{cricon|MAS}} [[विरेनदीप सिंग]] (२७३)
| most wickets = {{cricon|NEP}} [[संदीप लामिछाने]] (१७)
| previous_year = २०२४
| previous_tournament = २०२४ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक
| next_year =
| next_tournament =
}}
'''२०२६ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक ही''' तिसरी एसीसी प्रीमियर चषक स्पर्धा होती, जी ३० ऑगस्ट ते १२ सप्टेंबर २०२६ या कालावधीत मलेशियामध्ये आयोजित केली गेली आणि ती [[२०२७ आशिया चषक]] स्पर्धेसाठी पात्रतेचा अंतिम टप्पा होती. <ref>{{cite web |trans-title=मलेशिया क्रिकेट ऑगस्ट/सप्टेंबरमध्ये एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक २०२६ चे यजमानपद भूषवणार.|title=Malaysia Cricket to host ACC Men’s Premier Cup 2026 in August/September |url=https://czarsportzauto.com/acc-mens-premier-cup-2026/ |date=८ ऑगस्ट २०२६|access-date=४ सप्टेंबर २०२६|work=Czarsportz}}</ref><ref>{{cite web |url=https://gorkhapatraonline.com/news/217716 |work=गोरखापत्र | title=एसीसी प्रिमियर कप : नेपालको पहिलो खेल साउदीसँग |trans-title= एसीसी प्रीमियर कप: नेपाळचा पहिला सामना सौदी अरेबियाविरुद्ध |date=८ ऑगस्ट २०२६|access-date=४ सप्टेंबर २०२६|lang=ne}}</ref>
==संघ आणि पात्रता==
[[२०२४ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक]] स्पर्धेमधील अव्वल ८ संघांसोबत, [[२०२६ एसीसी पुरुष चॅलेंजर चषक]] स्पर्धेमधील अंतिम फेरीतील दोन संघ सामील झाले.<ref>{{cite web |url=https://www.cricketthailand.org/malaysia-and-singapore-promoted-to-premier-cup-as-thailand-miss-out/ |trans-title= थायलंडची संधी हुकली; मलेशिया आणि सिंगापूरची 'प्रीमियर कप'मध्ये बढती. |title=Malaysia and Singapore promoted to Premier Cup as Thailand miss out |work=[[थायलंड क्रिकेट असोसिएशन]] |date=१८ जून २०२६|access-date=४ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
{| class="wikitable"
|+
!पात्रतेचे निकष
!ठिकाण
!संघांची संख्या
!संघ
|-
|rowspan="8"| [[२०२४ एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक]]<br><small>(अव्वल ८ संघ)</small>
|rowspan="8"| ओमान
|rowspan="8" style="text-align:center"| '''८'''
| {{cr|BHR}}
|-
| {{cr|HKG}}
|-
| {{cr|KUW}}
|-
| {{cr|NEP}}
|-
| {{cr|OMA}}
|-
| {{cr|QAT}}
|-
| {{cr|SAU}}
|-
| {{nobr|{{cr|UAE}}}}
|-
|rowspan="2"| {{nobr|[[२०२६ एसीसी पुरुष चॅलेंजर चषक]]}}
|rowspan="2"| सिंगापूर
|rowspan="2" style="text-align:center"| '''२'''
| {{cr|MAS}}
|-
| {{cr|SIN}}
|-
!एकूण
!
!१०
!
|}
==गट फेरी==
सहभागी दहा देशांची दोन गटांत विभागणी करण्यात आली होती आणि प्रत्येक गटातील अव्वल दोन संघ बाद फेरीसाठी पात्र ठरले. [[आशियाई क्रिकेट समिती]]ने १२ ऑगस्ट २०२६ रोजी सामन्यांचे वेळापत्रक जाहीर केले. <ref>{{cite tweet |number=2087458017998778804 |trans-title= दहा संघ. एकच ध्येय. २०२७ च्या पुरुष आशिया चषकातील स्थान. मलेशियामध्ये होणाऱ्या एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक २०२६ मध्ये चुरशीची क्रिकेट स्पर्धा पाहायला मिळणार असून, प्रत्येक सामन्याचे महत्त्व अनन्यसाधारण असेल. या स्पर्धेची सुरुवात ३० ऑगस्टपासून होणार आहे. |title=𝐓𝐞𝐧 𝐬𝐢𝐝𝐞𝐬. 𝐎𝐧𝐞 𝐠𝐨𝐚𝐥. 𝐀 𝐩𝐥𝐚𝐜𝐞 𝐚𝐭 𝐭𝐡𝐞 𝟐𝟎𝟐𝟕 𝐌𝐞𝐧’𝐬 𝐀𝐬𝐢𝐚 𝐂𝐮𝐩 The ACC Mens Premier Cup 2026 is set for some serious cricket in Malaysia with every game carrying its own weight. Action begins on the 30th August |user=ACCMedia1}}</ref>
===गट अ===
====गुणफलक====
<section begin=Group A/>
{| class="wikitable" style="text-align:center"
! style="width:25px"| स्थान
! style="width:160px"| संघ
! style="width:30px"| {{abbr|सा|सामने}}
! style="width:30px"| {{abbr|वि|विजय}}
! style="width:30px"| {{abbr|प|पराभव}}
! style="width:30px"| {{abbr|अ|अनिर्णित}}
! style="width:30px"| गुण
! {{abbr|धावगती|निव्वळ धावगती}}
|-style="background:#cfc;"
| १ || style="text-align:left" | {{Cr|NEP}} || ४ || ३ || १ || ० || '''६''' || १.५३१
|-style="background:#cfc;"
| २ || style="text-align:left" | {{Cr|HK}} || ४ || ३ || १ || ० || '''६''' || −०.००५
|-
| ३ || style="text-align:left" | {{Cr|MAS}} '''(य)'''|| ४ || २ || २ || ० || '''४''' || ०.५६८
|-
| ४ || style="text-align:left" | {{Cr|SAU}} || ४ || १ || ३ || ० || '''२''' || −०.६९६
|-
| ५|| style="text-align:left" | {{Cr|BHR}} || ४ || १ || ३ || ० || '''२''' || −१.१८८
|}
<small>स्रोत: [[क्रिकइन्फो]]<ref name="PT">{{cite web|url= https://www.espncricinfo.com/series/acc-men-s-premier-cup-2026-1549936/points-table-standings|trans-title= एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक २०२६ गुणतालिका आणि संघांची क्रमवारी|title= Women's Twenty20 Asia Cup 2026 Points Table & Team Standings |access-date=४ सप्टेंबर २०२६}}</ref></small>
<section end=Group A/>
====सामने====
{{hatnote|सर्व वेळा ह्या मलेशिया प्रमाणवेळ ([[यूटीसी+०८:००]]) आहेत}}
{{Single-innings cricket match
| date = ३० ऑगस्ट २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|HK}}
| team2 = {{cr|SAU}}
| score1 = २७३ (४८.५ षटके)
| runs1 = [[बाबर हयात]] ७३ (८९)
| wickets1 = उस्मान नजीब ३/५३ (८ षटके)
| score2 = २५७ (४९.२ षटके)
| runs2 = मनन अली ५४ (६३)
| wickets2 = [[यासिम मुर्तझा]] ३/५३ (१० षटके)
| result = हाँग काँग १६ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549947.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[विनोद बाबू]] (ओमान)
| motm = [[यासिम मुर्तझा]] (हाँकाँ)
| toss = हाँग काँगने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३१ ऑगस्ट २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|BHR}}
| team2 = {{cr|NEP}}
| score1 = ८७ (३६.२ षटके)
| runs1 = फैझ अहमद १५ (१५)
| wickets1 = [[संदीप लामिछाने]] ५/१४ (१० षटके)
| score2 = ८८/३ (२१ षटके)
| runs2 = अर्जुन कुमल ३६ (५८)
| wickets2 = [[इम्रान अन्वर]] २/२० (६ षटके)
| result = नेपाळ ७ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549949.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = आनंद नटराजन (सिं) आणि [[शिजू सॅम]] (युएई)
| motm = [[संदीप लामिछाने]] (ने)
| toss = नेपाळणे नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = मुहम्मद वसीमने (ब) लिस्ट अ पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = १ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|MAS}}
| team2 = {{cr|SAU}}
| score1 = २७०/८ (५० षटके)
| runs1 = [[मुहम्मद स्याहादत]] ८२ (९८)
| wickets1 = मुहम्मद साकीब ३/४२ (८ षटके)
| score2 = १७७ (३४ षटके)
| runs2 = उस्मान नजीब ६४[[नाबाद|*]] (२९)
| wickets2 = विजय उन्नी ५/३४ (९ षटके)
| result = मलेशिया ९३ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549950.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[विनोद बाबू]] (ओमान) आणि इम्रान मुस्तफा (कुवेत)
| motm = [[विरेनदीप सिंग]] (मलेशिया)
| toss = मलेशियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = २ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|BHR}}
| team2 = {{cr|HK}}
| score1 = २१०/८ (५० षटके)
| runs1 = जुनैद अझीझ ४७ (६०)
| wickets1 = [[यासिम मुर्तझा]] ३/३० (१० षटके)
| score2 = १७८ (४९.४ षटके)
| runs2 = [[शाहिद वासीफ]] ५३ (६४)
| wickets2 = अली दाऊद ४/२१ (१० षटके)
| result = बहरीन ३२ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549952.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[विनोद बाबू]] (ओमान) आणि आनंद नटराजन (सिं)
| motm = अली दाऊद (ब)
| toss = बहरीनने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = यासीर नजीर, मुहम्मद सलमान (ब) आणि कल्हन छल्लू (हाँकाँ) या सर्वांनी लिस्ट अ क्रिकेटमध्ये पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|MAS}}
| team2 = {{cr|NEP}}
| score1 = १०३ (३२.३ षटके)
| runs1 = [[सय्यद अझीज]] ३० (४९)
| wickets1 = [[करण के.सी.]] ४/२३ (७.३ षटके)
| score2 = १०६/४ (२१.४ षटके)
| runs2 = अर्जुन कुमल ४५[[नाबाद|*]] (६८)
| wickets2 = [[सय्यद अझीज]] १/१९ (४ षटके)
| result = नेपाळ ६ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549955.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = इम्रान मुस्तफा (कुवेत) आणि [[शिजू सॅम]] (युएई)
| motm = [[करण के.सी.]] (ने)
| toss = मलेशियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ४ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SAU}}
| team2 = {{cr|BHR}}
| score1 = २२१ (४८.४ षटके)
| runs1 = अब्दुल वाहिद ७० (९१)
| wickets1 = अली दाऊद ३/३७ (९.४ षटके)
| score2 = २०४/८ (५० षटके)
| runs2 = [[इम्रान अन्वर]] ४९ (५९)
| wickets2 = मुहम्मद सकीब १९/२ (७ षटके)
| result = सौदी अरेबिया १७ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549957.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = आनंद नटराजन (सिं) आणि दुर्गा सुबेदी (ने)
| motm = अब्दुल वाहिद (सौदी)
| toss = सौदी अरेबियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ५ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|HK}}
| team2 = {{cr|MAS}}
| score1 = २०९ (४६.३ षटके)
| runs1 = कल्हन चल्लू ६९ (७२)
| wickets1 = [[अकील वाहिद]] ४/३९ (१० षटके)
| score2 = २०९/९ (५० षटके)
| runs2 = [[विरनदीप सिंग]] ८२[[नाबाद|*]] (१०६)
| wickets2 = [[हसन खान मोहम्मद]] २/२९ (७ षटके)
| result = सामना बरोबरीत<br />(हाँग काँग [[सुपर ओव्हर]] मध्ये विजयी)
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549959.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = इम्रान मुस्तफा (कु) आणि [[विनोद बाबू]] (ओ)
| motm = [[अंशुमन रथ]] (हाँकाँ)
| toss = हाँग काँगने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = [[सुपर ओव्हर]]: हाँग काँग १४/४, मलेशिया ११/१
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ६ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SAU}}
| team2 = {{cr|NEP}}
| score1 = १९० (49.2 षटके)
| runs1 = [[अकील वाहिद]] ७७ (८९)
| wickets1 = [[संदीप लामिछाने]] ३/१९ (१० षटके)
| score2 = १९३/५ (४१ षटके)
| runs2 = [[गुलशन झा]] ४४[[नाबाद|*]] (३५)
| wickets2 = इश्तीआक अहमद २/२३ (५ षटके)
| result = नेपाळ ५ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549960.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[अकील वाहिद]] (युएई)
| motm = [[गुलशन झा]] (ने)
| toss = सौदी अरेबियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ७ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|MAS}}
| team2 = {{cr|BHR}}
| score1 = २५४/८ (५० षटके)
| runs1 = [[विरनदीप सिंग]] ९८ (११८)
| wickets1 = [[इम्रान अन्वर]] ३/५६ (९ षटके)
| score2 = १२८ (३७.५ षटके)
| runs2 = प्रशांत कुरूप ३४ (५५)
| wickets2 = [[अकील वाहिद]] ४/३२ (९.५ षटके)
| result = मलेशिया १२६ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549962.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[शिजू सॅम]] (युएई) आणि दुर्गा सुबेदी (ने)
| motm = [[विरनदीप सिंग]] (म)
| toss = मलेशियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ८ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|HK}}
| team2 = {{cr|NEP}}
| score1 = २६१/७ (५० षटके)
| runs1 = [[बाबर हयात]] ११७[[नाबाद|*]] (१२६)
| wickets1 = [[संदीप लामिछाने]] ४/४४ (१० षटके)
| score2 = २४६ (४९.१ षटके)
| runs2 = ईशान पांडे ९० (१०६)
| wickets2 = [[एजाज खान (क्रिकेट खेळाडू)|एजाज खान]] ४/५० (१० षटके)
| result = हाँग काँग १५ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549964.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[शिजू सॅम]] (युएई)
| motm = [[बाबर हयात]] (हाँकाँ)
| toss = हाँग काँगने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = शेर मल्ला (नेपाळ) याने लिस्ट अ क्रिकेटमध्ये पदार्पण केले.
}}
===गट ब===
====गुणफलक====
<section begin="Group B" />
{| class="wikitable" style="text-align:center"
! style="width:25px"| स्थान
! style="width:160px"| संघ
! style="width:30px"| {{abbr|सा|सामने}}
! style="width:30px"| {{abbr|वि|विजय}}
! style="width:30px"| {{abbr|प|पराभव}}
! style="width:30px"| {{abbr|अ|अनिर्णित}}
! style="width:30px"| गुण
! {{abbr|धावगती|निव्वळ धावगती}}
|-style="background:#cfc;"
| १ || style="text-align:left" | {{Cr|UAE}} || ४ || ४ || ० || ० || '''८''' || १.९७९
|-style="background:#cfc;"
| २ || style="text-align:left" | {{Cr|OMA}} || ४ || २ || २ || ० || '''४''' || ०.६४९
|-
| ३ || style="text-align:left" | {{Cr|QAT}} || ४ || २ || २ || ० || '''४''' || ०.२२७
|-
| ४ || style="text-align:left" | {{Cr|KUW}} || ४ || २ || २ || ० || '''४''' || ०.१५२
|-
| ५|| style="text-align:left" | {{Cr|SIN}} || ४ || ० || ४ || ० || '''०''' || −३.२४१
|}
<small>स्रोत: [[क्रिकइन्फो]]<ref name="PT">{{cite web|url= https://www.espncricinfo.com/series/acc-men-s-premier-cup-2026-1549936/points-table-standings|trans-title= एसीसी पुरुष प्रीमियर चषक २०२६ गुणतालिका आणि संघांची क्रमवारी|title= Women's Twenty20 Asia Cup 2026 Points Table & Team Standings |access-date=४ सप्टेंबर २०२६}}</ref></small>
<section end="Group B" />
====सामने====
{{hatnote|सर्व वेळा ह्या मलेशिया प्रमाणवेळ ([[यूटीसी+०८:००]]) आहेत}}
{{Single-innings cricket match
| date = ३० ऑगस्ट २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|OMA}}
| team2 = {{cr|SIN}}
| score1 = ३१६/९ (५० षटके)
| runs1 = [[विनायक शुक्ला]] 88 (56)
| wickets1 = हर्ष वेंकटराम ३/६४ (१० षटके)
| score2 = १८५ (४२.३ षटके)
| runs2 = [[मनप्रीत सिंग (क्रिकेट खेळाडू)|मनप्रीत सिंग]] 49 (56)
| wickets2 = [[हसनैन शाह]] ३/२९ (७ षटके)
| result = ओमान १३१ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549946.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[विश्वनादन कालिदास]] (मलेशिया) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[विनायक शुक्ला]] (ओ)
| toss = सिंगापूरने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = युवा पांडे, दक्ष त्यागी, साई वेणुगोपाल आणि कबीर झानदानी (सिं) या सर्वांनी [[लिस्ट अ क्रिकेट]]मध्ये मध्ये पदार्पण केले
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३१ ऑगस्ट २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|UAE}}
| team2 = {{cr|QAT}}
| score1 = २६३/९ (५० षटके)
| runs1 = [[अदीब उस्मानी]] ९२ (१०६)
| wickets1 = मिर्झा मोहम्मद बेग ३/६२ (९ षटके)
| score2 = १७१ (३७.३ षटके)
| runs2 = [[इमल लियानागे]] ७० (८२)
| wickets2 = [[हैदर अली (क्रिकेट खेळाडू, जन्म १९९४)|हैदर अली]] २/२५ (८ षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ९२ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549948.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि इम्रान मुस्तफा (कुवेत)
| motm = [[अदीब उस्मानी]] (युएई)
| toss = संयुक्त अरब अमिरातीने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = शाहजेब आफ्रिदी, झुबेर अली, मिर्झा मोहम्मद बेग, झीशान हैदर आणि [[अक्षय शंकर]] (कतार) या सर्वांनी लिस्ट ए मध्ये पदार्पण केले.}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = १ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|KUW}}
| team2 = {{cr|SIN}}
| score1 = २४९/४ (४३.४ षटके)
| runs1 = [[मीत भावसार]] ८४[[नाबाद|*]] (९०)
| wickets1 = प्रणव सुदर्शन २/३२ (७ षटके)
| score2 = ९६ (२७.३ षटके)
| runs2 = गिरीन गुणे ३४[[नाबाद|*]] (५४)
| wickets2 = [[मोहम्मद अस्लम (क्रिकेट खेळाडू)|मोहम्मद अस्लम]] ४/१५ (७.३ षटके)
| result = कुवेत १६० धावांनी विजयी ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस पद्धत]])
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549951.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[मोहम्मद अस्लम (क्रिकेट खेळाडू)|मोहम्मद अस्लम]] (कु)
| toss = सिंगापूरने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| rain = पावसामुळे सिंगापूरसमोर ३६ षटकांत २५७ धावांचे सुधारित लक्ष्य ठेवण्यात आले..
| notes = उमर अब्बास, मुहम्मद आकीफ फारूक आणि अब्दुल्ला झहीर (कु) या सर्वांनी [[लिस्ट अ क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले.}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = २ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|QAT}}
| team2 = {{cr|OMA}}
| score1 = २७२/९ (५० षटके)
| runs1 = झुबेर अली ७७ (१०१)
| wickets1 = [[हसनैन शाह]] ४/५८ (१० षटके)
| score2 = २७६/५ (४०.३ षटके)
| runs2 = [[हम्माद मिर्झा]] ८४[[नाबाद|*]] (९६)
| wickets2 = मिर्झा मोहम्मद बेग २/४५ (८ षटके)
| result = ओमान ५ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549953.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि [[विश्वनादन कालिदास]] (मलेशिया)
| motm = [[हम्माद मिर्झा]] (ओ)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = ओबैद उर रहमान (कतार) याने [[लिस्ट अ क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ३ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|UAE}}
| team2 = {{cr|KUW}}
| score1 = २८६/८ (५० षटके)
| runs1 = मुहम्मद शाहदाद ९४ (११०)
| wickets1 = मुहम्मद अकीफ फारूक ३/३८ (६ षटके)
| score2 = ११०/९ (२५ षटके)
| runs2 = [[रविजा संदारुवान]] 26 (42)
| wickets2 = [[अक्षदीप नाथ]] 6/21 (5 षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ६६ धावांनी विजयी ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस पद्धत]])
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549954.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि [[विश्वनादन कालिदास]] (मलेशिया)
| motm = मुहम्मद शाहदाद (युएई)
| toss = संयुक्त अरब अमिरातीने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain = पावसामुळे कुवेतसमोर २५ षटकांत १७७ धावांचे सुधारित लक्ष्य ठेवण्यात आले.
| notes = इब्रार अहमद (यूएई) याने [[लिस्ट ए क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले.
* [[अक्षदीप नाथ]] (युएई) याने लिस्ट अ सामन्यामध्ये पहिल्यांदा [[पंचबळी|पाच बळी]] घेतले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ४ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SIN}}
| team2 = {{cr|QAT}}
| score1 = १५० (३८.२ षटके)
| runs1 = [[मनप्रीत सिंग (क्रिकेट खेळाडू)|मनप्रीत सिंग]] ९६ (११३)
| wickets1 = मुहम्मद असीम ६/१८ (९.२ षटके)
| score2 = १५३/२ (२८.१ षटके)
| runs2 = झुबेर अली ५५[[नाबाद|*]] (७९)
| wickets2 = हरमन सिंग १/७ (३ षटके)
| result = कतार ८ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549956.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[शिजू सॅम]] (युएई)
| motm = मुहम्मद असीम (क)
| toss = सिंगापूरने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = मुहम्मद असीम (क) याने लिस्ट अ सामन्यामध्ये पहिल्यांदा [[पंचबळी|पाच बळी]] घेतले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ५ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|OMA}}
| team2 = {{cr|KUW}}
| score1 = २५२/८ (५० षटके)
| runs1 = [[जितेन रामानंदी]] ५३ (५५)
| wickets1 = अब्दुल्ला झहीर ३/५४ (१० षटके)
| score2 = २५६/६ (४९.४ षटके)
| runs2 = बिलाल ताहिर १०३[[नाबाद|*]] (१०६)
| wickets2 = फैसल शाह २/३७ (८ षटके)
| result = कुवेत ४ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549958.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि [[विश्वनादन कालिदास]] (म)
| motm = बिलाल ताहिर (कु)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = बिलाल ताहिर (कु) ह्याने लिस्ट अ सामन्यामध्ये पहिले शतक झळकावले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ६ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SIN}}
| team2 = {{cr|UAE}}
| score1 = १७२ (४७.४ षटके)
| runs1 = रियान नाईक ४४ (८३)
| wickets1 = [[आयान अफजल खान]] ३/२६ (१० षटके)
| score2 = १७४/३ (२४.३ षटके)
| runs2 = [[अक्षदीप नाथ]] ५८ (६२)
| wickets2 = चंद्रमौळी २/३१ (५.३ षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ७ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549961.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires =[[तबारक दर]] (हाँकाँ) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[आयान अफजल खान]] (युएई)
| toss = सिंगापूरने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| notes = मोहसीन खान (युएई) ह्याने लिस्ट अ क्रिकेटमध्ये पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ७ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|KUW}}
| team2 = {{cr|QAT}}
| score1 = २३३ (४९.५ षटके)
| runs1 = निमिष लतीफ ४७[[नाबाद|*]] (३८)
| wickets1 = मिर्झा मोहम्मद बेग २/४६ (१० षटके)
| score2 = २३५/६ (३५.५ षटके)
| runs2 = [[इमल लियानागे]] ५८ (८१)
| wickets2 = अब्दुल्ला झहीर २/३२ (४ षटके)
| result = कतार ४ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549963.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[विनोद बाबू]] (ओ)
| motm = मोहम्मद असीम (क)
| toss = कतारने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
----
{{Single-innings cricket match
| date = ८ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|UAE}}
| team2 = {{cr|OMA}}
| score1 = १९२ (४८.१ षटके)
| runs1 = [[तनिश सुरी]] ४८ (५३)
| wickets1 = [[जय ओडेदरा]] ३/१७ (५.१ षटके)
| score2 = १४३ (३४.५ षटके)
| runs2 = जितेन रामानंदी ५१ (७०)
| wickets2 = [[आयान अफजल खान]] ५/३४ (८.५ षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ४९ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549965.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[दुर्गा सुबेदी]] (ने) आणि [[विश्वनादन कालिदास]] (म)
| motm = [[आयान अफजल खान]] (युएई)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = संजू सजीव (ओ) आणि इब्रार अहमद (यूएई) या दोघांनीही आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय पदार्पण केले.
}}
==बाद फेरी==
{{hatnote|सर्व वेळा ह्या मलेशिया प्रमाणवेळ ([[यूटीसी+०८:००]]) आहेत)}}
{{4TeamBracket-with 3rd
| nowrap=y
| RD1 = [[#उपांत्य सामने|उपांत्य सामने]]
| RD2 = [[#अंतिम सामना|अंतिम सामना]]
| RD3= [[#३ऱ्या स्थानासाठी सामना|३ऱ्या स्थानासाठी सामना]]
| RD1-seed1 = अ१
| RD1-team1 = '''{{Cr|NEP}}'''
| RD1-score1 = '''{{nobr|१४७ (४५.४ षटके)}}'''
| RD1-seed2 = ब२
| RD1-team2 ={{Cr|OMA}}
| RD1-score2 = ६० (२८.१ षटके)
| RD1-seed3 = ब१
| RD1-team3 = '''{{nobr|{{Cr|UAE}}}}'''
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| RD1-seed4 = अ२
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| RD2-seed1 = उसा१वि
| RD2-team1 = '''{{Cr|NEP}}'''
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| RD2-seed2 = उसा२वि
| RD2-team2 = {{nobr|{{Cr|UAE}}}}
| RD2-score2 = २६८ (४९.२ षटके)
| RD3-seed1= उसा१प
| RD3-team1= {{Cr|OMA}}
| RD3-score1= १४४ /(४०.१ षटके)
| RD3-seed2= उसा२प
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| RD3-score2= {{nobr|१४६/१ (१९.५ षटके)}}
}}
===उपांत्य सामने===
{{Single-innings cricket match
| round = '''१ला उपांत्य सामना'''
| date = १० सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| daynight =
| team1 = {{Cr-rt|NEP}}
| team2 = {{Cr|OMA}}
| score1 = १४७ (४५.४ षटके)
| runs1 = [[दीपेंद्र सिंह ऐरी]] ५१ (७६)
| wickets1 = [[जय ओडेदरा]] ३/२६ (१० षटके)
| score2 = ६० (२८.१ षटके)
| runs2 = [[जतिंदर सिंग]] २५ (४१)
| wickets2 = [[संदीप लामिछाने]] ३/९ (६ षटके)
| result = नेपाळ ८७ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549966.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[अकबर अली]] (युएई) आणि [[तबारक दर]] (हाँकाँ)
| motm = [[दीपेंद्र सिंह ऐरी]] (ने)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
| notes = [[शेर मल्ला]] (ने) ह्याने आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय पदार्पण केले.
}}
----
{{Single-innings cricket match
| round = '''२रा उपांत्य सामना'''
| date = १० सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| daynight =
| team1 = {{cr-rt|HK}}
| team2 = {{cr|UAE}}
| score1 = ७० (३०.१ षटके)
| runs1 = [[झिशान अली]] १७ (२८)
| wickets1 = [[हैदर अली (क्रिकेट खेळाडू, जन्म १९९४)|हैदर अली]] ६/१४ (१० षटके)
| score2 = ७१/३ (११.१ षटके)
| runs2 = [[तनिश सुरी]] २७ (२५)
| wickets2 = [[किंचित शाह]] १/४ (१.१ षटके)
| result = संयुक्त अरब अमिराती ७ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549967.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[विश्वनादन कालिदास]] (म) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[[हैदर अली (क्रिकेट खेळाडू, जन्म १९९४)|हैदर अली]] (युएई)
| toss = संयुक्त अरब अमिरातीने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षणाचा निर्णय घेतला.
}}
===३ऱ्या स्थानासाठी सामना===
{{Single-innings cricket match
| date = १२ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| daynight =
| team1 = {{cr-rt|OMA}}
| team2 = {{cr|HK}}
| score1 = १४४ (४०.१ षटके)
| runs1 = संजू सजीव ५९ (९९)
| wickets1 = [[नसरुल्ला राणा]] ४/२६ (९ षटके)
| score2 = १४६/१ (१९.५ षटके)
| runs2 = [[अंशुमन रथ]] ६८[[नाबाद|*]] (६०)
| wickets2 = [[शकिल अहमद]] १/३३ (४ षटके)
| result = हाँग काँग ९ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549968.html धावफलक]
| venue = [[मलेशिया राष्ट्रीय विद्यापीठ|युकेएम-वायएसडी क्रिकेट ओव्हल]], [[बांगी (सलांगोर)|बांगी]]
| umpires = [[शिजू सॅम]] (युएई) आणि [[दुर्गा सुबेदी]] (ने)
| motm = [[नसरुल्ला राणा]] (हाँकाँ)
| toss = ओमानने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes =
}}
===अंतिम सामना===
{{Single-innings cricket match
| date = १२ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| daynight =
| team1 = {{cr-rt|NEP}}
| team2 = {{cr|UAE}}
| score1 = ३१३/९ (५० षटके)
| runs1 = [[आसिफ शेख]] १०२ (१०६)
| wickets1 = ईबरार अहमद ४/६२ (८ षटके)
| score2 = २६९ (४९.१ षटके)
| runs2 = [[राहुल चोप्रा]] १००[[नाबाद|*]] (१०५)
| wickets2 = [[करण केसी]] ३/४९ (९ षटके)
| result = नेपाळ ४४ धावांनी विजयी
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1549969.html धावफलक]
| venue = [[बायुएमास ओव्हल]], [[क्वालालंपूर]]
| umpires = [[तबारक दर]] (हाँकाँ) and [[विश्वनादन कालिदास]] (म)
| motm = [[आसिफ शेख]] (ने)
| toss = नेपाळने नाणेफेक जिंकून फलंदाजीचा निर्णय घेतला.
| rain =
| notes = [[मुहम्मद मोहसिन]] (यूएई) याने एकदिवसीय क्रिकेट पदार्पण केले.
* [[गुलशन झा]] (ने) याने एकदिवसीय कारकिर्दीतील १,००० धावा पूर्ण केली.
}}
== नोंदी ==
{{notelist}}
== संदर्भयादी==
{{संदर्भयादी}}
==बाह्यदुवे==
* [https://www.espncricinfo.com/series/acc-men-s-premier-cup-2026-1549936 मालिका मुख्यपान क्रिकइन्फोवर]
{{आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६}}
[[वर्ग:इ.स. २०२६ मधील क्रिकेट]]
[[वर्ग:मलेशियामधील क्रिकेट]]
pmiaigftovcmyil1tqa74j9yg29vpyh
कोकणातील गौरी गणपती
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2026-09-16T08:57:39Z
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wikitext
text/x-wiki
[[File:कोकणातील गणपती आणि गौरीपूजन.jpg|thumb|कोकणातील गणपती आणि गौरीपूजन]]
'''कोकणातील गौरी–गणपती''' हा भाद्रपद महिन्यात साजरा होणारा धार्मिक तसेच सामाजिक-सांस्कृतिक उत्सव आहे. कोकणातील अनेक कुटुंबांमध्ये गणपतीची घरगुती स्थापना आणि त्यानंतर ज्येष्ठा गौरीचे आवाहन, स्थापना व पूजन करण्याची परंपरा आढळते. या उत्सवाचे स्वरूप केवळ धार्मिक विधींपुरते मर्यादित नसून कुटुंबीय, नातेवाईक आणि ग्रामस्थ यांच्या एकत्र येण्याबरोबरच भजन, फुगडी आणि इतर लोककलांच्या सादरीकरणाशीही जोडलेले आहे. सिंधुदुर्ग जिल्ह्याच्या नोंदीनुसार गौरी–गणपती हा जिल्ह्यातील प्रमुख सण असून या काळात मुंबईहून चाकरमानी मोठ्या संख्येने गावी येतात; गणेशोत्सवात भजने आणि फुगड्यांचे कार्यक्रमही होतात.<ref name="मराठीविश्वकोश-सिंधुदुर्ग-जिल्हा"/>
कोकणातील गौरी–गणपती उत्सवाचे स्वरूप गाव, समाज, कुटुंब आणि स्थानिक परंपरेनुसार बदलते. काही कुटुंबांत गणपतीची पूजा हा उत्सवाचा प्रमुख भाग असतो, तर त्याच उत्सवकाळात ज्येष्ठा गौरीचे आवाहन व पूजन केले जाते. काही ठिकाणी गौरीच्या प्रतिमा किंवा मुखवटे वापरले जातात, तर काही परंपरांमध्ये गोटे, स्थानिक वनस्पती किंवा इतर प्रतीकात्मक वस्तूंना गौरीचे रूप मानले जाते. त्यामुळे कोकणातील गौरी–गणपती उत्सवाचे एकच प्रमाणित स्वरूप नसून विविध स्थानिक आणि कौटुंबिक परंपरा त्यात आढळतात.<ref name="मराठीविश्वकोश-गौरी"/>
या उत्सवाला कोकणातील स्थलांतराच्या सामाजिक संदर्भाचीही जोड आहे. रोजगारासाठी मुंबईसह अन्य शहरांत राहणारे चाकरमानी गौरी–गणपतीच्या निमित्ताने मूळ गावी परततात. या काळात वडिलोपार्जित प्रथा आणि कौटुंबिक परंपरांचे पालन केले जाते तसेच गावांमध्ये सामाजिक आणि सांस्कृतिक उपक्रमांना चालना मिळते.<ref name="अमोलमोरे-कोकणगाज">मोरे, अमोल. “कोकण गाज - कोकणातल्या गावांची एकाकीपणाची गोष्ट!”. ''एबीपी माझा'', 17 सप्टेंबर 2024. [https://marathi.abplive.com/blog/blog-by-amol-more-on-konkan-ganeshostav-gauri-ganapti-marathi-news-1313411]</ref>
== कोकणातील गौरी–गणपती परंपरेची पार्श्वभूमी ==
=== कोकणातील गणपती उत्सवाची परंपरा ===
महाराष्ट्रात भाद्रपद शुक्ल चतुर्थीला गणेशचतुर्थी साजरी केली जाते आणि या दिवसापासून अनंत चतुर्दशीपर्यंत गणेशोत्सवाचा कालखंड मानला जातो. गणेशोत्सवाला धार्मिक स्वरूपाबरोबरच महाराष्ट्रात पुढे सार्वजनिक आणि सांस्कृतिक स्वरूपही प्राप्त झाले. महाराष्ट्र राज्याच्या गॅझेटिअरनुसार कुटुंब आणि प्रदेशानुसार गणेशोत्सवाचा कालावधी दीड दिवसांपासून दहा दिवसांपर्यंत बदलतो. घरगुती गणपतीची स्थापना करून पूजाअर्चा केली जाते आणि उत्सवाच्या समाप्तीनंतर मूर्तीचे विसर्जन केले जाते.<ref name="महाराष्ट्र-भूमीआणिलोक-धार्मिकपंथ">''Maharashtra: Land and Its People''. Gazetteers Department, Government of Maharashtra, “The Religious Sect”. [https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/land_and_people/L%20%26%20P%20pdf/Chapter%20VII/2%20The%20Religious%20Sect.pdf]</ref>
कोकणातील घरगुती गणपतीची परंपरा कुटुंब, वडिलोपार्जित घर आणि गावाशी असलेल्या संबंधांशी जोडलेली असल्याचे विविध स्थानिक नोंदींमधून दिसते. गौरी–गणपतीच्या काळात शहरांत वास्तव्यास असलेले चाकरमानी मूळ गावी परततात आणि कुटुंबातील जुन्या प्रथा व परंपरांमध्ये सहभागी होतात. त्यामुळे उत्सवाच्या काळात गावातील घरे आणि वाड्या पुन्हा गजबजून जातात.<ref name="अमोलमोरे-कोकणगाज"/>
गणपती उत्सवातील धार्मिक कार्यक्रमांबरोबरच भजन, आरती, फुगडी आणि इतर पारंपरिक कलांचे कार्यक्रमही काही भागांत आढळतात. सिंधुदुर्ग जिल्ह्याच्या नोंदीनुसार गौरी–गणपती हा प्रमुख सण असून गणेशोत्सवाच्या काळात भजने आणि फुगड्यांचे कार्यक्रम होतात.<ref name="मराठीविश्वकोश-सिंधुदुर्ग-जिल्हा"/>
=== गणपती आणि गौरी यांचा संबंध ===
महाराष्ट्रातील भाद्रपदातील गौरीपूजन गणेशोत्सवाशी संबंधित आहे. ज्येष्ठा नक्षत्रावर पूजल्या जाणाऱ्या गौरींना ‘ज्येष्ठा गौरी’ म्हटले जाते. गौरीच्या आवाहनाची, पूजनाची आणि विसर्जनाची परंपरा अनुक्रमे अनुराधा, ज्येष्ठा आणि मूळ या नक्षत्रांशी जोडलेली आहे. कोकणात तसेच महाराष्ट्रातील इतर भागांत गौरीव्रताला महत्त्व असल्याची नोंद आहे.<ref name="मराठीविश्वकोश-गौरी"/>
कोकणातील काही परंपरांमध्ये गणपतीच्या आगमनानंतर गौरीचे आगमन होते आणि त्या काही काळ गणपतीसोबत घरात पूजल्या जातात. गौरीचे स्वरूप, स्थापना, पूजाविधी, नैवेद्य आणि विसर्जन यांत गाव, कुटुंब आणि समाजानुसार भिन्नता आढळते. काही ठिकाणी धातू किंवा मातीच्या प्रतिमा वापरल्या जातात, तर काही ठिकाणी गोटे किंवा स्थानिक वनस्पती यांना गौरीचे प्रतीक मानले जाते.<ref name="मराठीविश्वकोश-गौरी" />
त्यामुळे ‘गौरी–गणपती’ ही संज्ञा कोकणातील अनेक कुटुंबांमध्ये गणपती आणि ज्येष्ठा गौरी यांच्या पूजा एकाच उत्सवकाळात केल्या जाणाऱ्या परंपरेचा निर्देश करते. या दोन्ही पूजांचे परस्परसंबंध असले तरी त्यांचे विधी आणि स्थानिक प्रथा कुटुंबाच्या कुलाचारानुसार स्वतंत्र स्वरूपातही आढळतात.<ref name="मराठीविश्वकोश-गौरी" /><ref name="मराठीविश्वकोश-सिंधुदुर्ग-जिल्हा" />
=== उत्सवाचा कालक्रम आणि स्वरूप ===
गणपती–गौरी उत्सवाचा कालक्रम कुटुंबाच्या परंपरेनुसार आणि स्थानिक प्रथेनुसार बदलतो. गणेशचतुर्थीला गणपतीची स्थापना झाल्यानंतर गणेशोत्सव सुरू होतो. त्यानंतर स्थानिक परंपरेनुसार ज्येष्ठा गौरीचे आवाहन, स्थापना आणि पूजन केले जाते. गौरीव्रताच्या परंपरेत आवाहन अनुराधा नक्षत्रावर, पूजन ज्येष्ठा नक्षत्रावर आणि विसर्जन मूळ नक्षत्रावर करण्याची पद्धत नोंदली आहे.<ref name="मराठीविश्वकोश-गौरी" />
महाराष्ट्रातील विविध भागांमध्ये गौरीपूजनाच्या पद्धती वेगवेगळ्या आहेत. कोकणातही गौरीचे स्वरूप, स्वागताची पद्धत, पूजेतील साहित्य, नैवेद्य आणि विसर्जन यांत स्थानिक भिन्नता दिसून येते. त्यामुळे संपूर्ण कोकणासाठी एकच निश्चित विधी किंवा एकसारखा कालक्रम असल्याचे मानता येत नाही. गाव, समाज आणि कुटुंब यांच्या परंपरेनुसार गौरी–गणपती उत्सवाचे स्थानिक स्वरूप बदलते.<ref name="मराठीविश्वकोश-गौरी" />
गणपती–गौरी उत्सवाच्या काळात धार्मिक विधींबरोबरच भजन, फुगडी आणि इतर लोककलांचे कार्यक्रमही काही ठिकाणी होतात. सिंधुदुर्ग जिल्ह्याच्या नोंदीनुसार गणेशोत्सवात भजने आणि फुगड्यांचे कार्यक्रम होतात.<ref name="मराठीविश्वकोश-सिंधुदुर्ग-जिल्हा" />
=== धार्मिक आणि सामाजिक संदर्भ ===
गणपती–गौरी उत्सवाचा धार्मिक आधार पूजा, आरती, नैवेद्य, आवाहन, स्थापना आणि विसर्जन या विधींमध्ये दिसून येतो. कोकणातील सामाजिक जीवनात मात्र या उत्सवाचे स्वरूप त्यापेक्षा व्यापक आहे. गणपतीच्या निमित्ताने शहरांत राहणारे कुटुंबीय मूळ गावी परततात, नातेवाईकांच्या भेटीगाठी होतात आणि उत्सवाच्या काळात गावातील सामाजिक वर्दळ वाढते.<ref name="अमोलमोरे-कोकणगाज" /><ref name="मराठीविश्वकोश-सिंधुदुर्ग-जिल्हा" />
या उत्सवाचे आणखी एक वैशिष्ट्य म्हणजे घरगुती धार्मिक विधी आणि सामुदायिक सहभाग यांचे सहअस्तित्व. गणपतीची स्थापना प्रामुख्याने घरगुती पातळीवर केली जात असली, तरी आरती, भजन, फुगडी आणि इतर कार्यक्रमांमुळे उत्सव काही ठिकाणी घराच्या चौकटीबाहेर ग्रामसमुदायापर्यंत विस्तारतो.<ref name="अमोलमोरे-कोकणगाज" /><ref name="मराठीविश्वकोश-सिंधुदुर्ग-जिल्हा" />
कोकणातील गौरी–गणपती परंपरेचे स्वरूप समजून घेताना धार्मिक विधी, कौटुंबिक सहभाग आणि स्थानिक सामाजिक-सांस्कृतिक उपक्रम हे परस्परांशी संबंधित घटक म्हणून दिसून येतात. गणपती आणि गौरी यांच्या पूजापरंपरा, कुटुंबीय व नातेवाईकांचे एकत्र येणे तसेच भजन, फुगडी आणि इतर लोककलांमधील सहभाग या विविध अंगांमधून या उत्सवाचे धार्मिक आणि सामाजिक स्वरूप स्पष्ट होते.<ref name="मराठीविश्वकोश-गणेशोत्सव">“गणेशोत्सव”. ''मराठी विश्वकोश'', महाराष्ट्र राज्य मराठी विश्वकोश निर्मिती मंडळ. [https://vishwakosh.marathi.gov.in/21292/] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20210829044744/https://vishwakosh.marathi.gov.in/21292/ |date=2021-08-29 }}</ref><ref name="मराठीविश्वकोश-सिंधुदुर्ग-जिल्हा" /><ref name="अमोलमोरे-कोकणगाज" />
== कोकणातील गणपतीची परंपरा ==
=== घरगुती गणपती ===
कोकणातील गणेशोत्सवाचे एक महत्त्वाचे वैशिष्ट्य म्हणजे घरगुती गणपतीची परंपरा. अनेक कुटुंबांमध्ये गणपतीची स्थापना वडिलोपार्जित घर आणि कौटुंबिक प्रथांशी जोडलेली असते. गणेशोत्सवाच्या काळात बाहेरगावी राहणारे कुटुंबीय मूळ गावी परततात. त्यामुळे गणपतीचा उत्सव हा घरातील धार्मिक विधींबरोबरच कुटुंबीयांच्या एकत्र येण्याचा प्रसंग ठरतो.<ref name="अमोलमोरे-कोकणगाज" />
रत्नागिरी जिल्ह्यातील ग्रामीण भागाच्या वृत्तनोंदीनुसार अनेक वाड्यांमध्ये प्रत्येक घरात गणपतीची स्थापना केली जाते. गणेशोत्सवाच्या काळात सकाळी आणि रात्री पूजा व आरत्या होतात आणि संध्याकाळच्या आरत्यांसाठी ग्रामस्थ एकमेकांच्या घरी जातात. बाहेरगावी राहणारे चाकरमानीही या कार्यक्रमांत सहभागी होतात.... प्रत्येक घरात सामूहिक आरती केली जाते.<ref name="Sakal-Ratnagiri-Aartya-2024">सकाळ वृत्तसेवा. “आरत्या, भजनांच्या मंजूळ सुरांनी जिल्हा गणेशमय”. ''सकाळ'', 9 सप्टेंबर 2024. [https://www.esakal.com/kokan/todays-latest-marathi-news-kop24c15340-txt-ratnagiri-20240909120237]</ref>
घरगुती गणपतीच्या परंपरेत कुटुंबातील सदस्यांबरोबर नातेवाईक आणि शेजाऱ्यांचाही सहभाग आढळतो. काही कुटुंबांमध्ये विशिष्ट पूजा किंवा आरतीच्या पद्धती अनेक पिढ्यांपासून जपल्या जातात. रत्नागिरी जिल्ह्यातील कोंडगाव येथील एका कुटुंबात गणपतीसमोर बसून आरती करण्याची परंपरा चार पिढ्यांपासून चालत असल्याची नोंद आहे. आरतीनंतर कुटुंबातील लहान मुलांनी श्लोक म्हणण्याची पद्धतही त्या कुटुंबात जपली जाते.<ref name="सकाळ-साखरपा-चारपिढ्यांचीआरती">“गणपतीसमोर बसून आरती करण्याची चार पिढ्यांची परंपरा”. ''सकाळ'', 12 सप्टेंबर 2024. [https://www.esakal.com/kokan/todays-latest-marathi-news-kop24c16228-txt-ratnagiri-today-20240912100254]</ref>
=== गणपतीचे आगमन आणि स्थापना ===
कोकणातील काही गावांमध्ये गणपतीचे आगमन हा उत्सवातील स्वतंत्र सोहळा असतो. गणेशमूर्ती घरात आणण्यापूर्वी घराची स्वच्छता, सजावट आणि पूजेची तयारी केली जाते. रत्नागिरी तालुक्यातील मेर्वी येथील वृत्तानुसार काही भक्तांनी गणेशचतुर्थीपूर्वीच वाजतगाजत गणेशमूर्ती घरी आणल्या आणि त्यानंतर प्राणप्रतिष्ठेचा विधी करण्यात आला.<ref name="सकाळ-मेर्वी-गणपतीआगमन-2024">सकाळ वृत्तसेवा. “हरतालिका तृतीयेला बाप्पाचे घरोघरी आगमन”. ''सकाळ'', 6 सप्टेंबर 2024. [https://www.esakal.com/kokan/todays-latest-marathi-news-kop24c14531-txt-ratnagiri-today-20240906111043]</ref>
कोकणातील पारंपरिक गणेशोत्सवाच्या वर्णनात मूर्ती घरात आणल्यानंतर प्राणप्रतिष्ठा करण्याची पद्धत नमूद केली आहे. प्रल्हाद कुडतरकर यांच्या वर्णनानुसार गणपतीचे आगमन झाल्यानंतर घरातील मंडपी किंवा मखर सजवले जाई आणि त्यानंतर प्राणप्रतिष्ठा केली जात असे. गणपतीच्या आगमनानंतर घराघरांतील भजन आणि आरतीचे क्रमही ठरवले जात.<ref name="प्रल्हादकुडतरकर-लोकसत्ता-2017">कुडतरकर, प्रल्हाद. “भजन, खटखटे लाडू आणि अमाप उत्साह..”. ''लोकसत्ता'', 26 ऑगस्ट 2017. [https://www.loksatta.com/vasturang/vastu-lekh/actor-and-writer-prahlad-kurtadkar-article-on-ganesh-festival-in-konkan-1537544/]</ref>
गणपतीच्या स्थापनेनंतर घरातील पूजाविधी सुरू होतात. काही पारंपरिक घरांमध्ये मंडपी किंवा मखरासाठी रानवेली, फुले, नारळ, सुपारी आणि इतर स्थानिक साहित्याचा वापर केला जात असल्याचे वर्णन आढळते. सजावटीचे स्वरूप मात्र स्थानिक उपलब्धता आणि कुटुंबाच्या परंपरेनुसार बदलते.<ref name="प्रल्हादकुडतरकर-लोकसत्ता-2017" />
=== गणपतीची पूजा, आरती आणि नैवेद्य ===
गणपतीची स्थापना झाल्यानंतर पूजा, आरती आणि नैवेद्य हे घरगुती गणेशोत्सवातील प्रमुख धार्मिक आचार आहेत. रत्नागिरी जिल्ह्यातील ग्रामीण भागाच्या वृत्तनोंदीनुसार गणेशोत्सवाच्या काळात सकाळी आणि रात्री पूजा व आरत्या केल्या जातात. संध्याकाळच्या आरत्यांसाठी ठरावीक वेळेनुसार ग्रामस्थ एकमेकांच्या घरी जातात.<ref name="Sakal-Ratnagiri-Aartya-2024"/>
या सामूहिक आरतीच्या पद्धतीत प्रत्येक घरातील आरतीची वेळ ठरवली जाते. टाळ, झांजा, मृदंग किंवा ढोलकी यांसारख्या वाद्यांच्या साथीने आरती केली जाते आणि आरतीनंतर प्रसादाचे वाटप केले जाते. या कार्यक्रमांत स्थानिक ग्रामस्थांबरोबर बाहेरगावाहून आलेले चाकरमानीही सहभागी होतात.<ref name="Sakal-Ratnagiri-Aartya-2024" />
२०२५ मधील रत्नागिरी जिल्ह्याच्या वृत्तानुसार काही गावांमध्ये भाविक ठरावीक क्रमाने घरोघरी जाऊन आरत्या करतात. या प्रथेमुळे गणेशोत्सवाच्या काळात गावातील परस्पर संपर्क आणि सामूहिक सहभाग वाढतो, असे त्या वृत्तात नमूद केले आहे.<ref name="Sakal-Ratnagiri-Gharoghari-Aartya-2025">सकाळ वृत्तसेवा. “घरोघरी आरत्या, भजनांच्या मंजूळ स्वर”. ''सकाळ'', 2 सप्टेंबर 2025. [https://www.esakal.com/kokan/todays-latest-marathi-news-kop25d25019-txt-ratnagiri-today-20250902100319]</ref>
नैवेद्याच्या बाबतीतही कुटुंब आणि स्थानिक परंपरेनुसार फरक आढळतो. मोदकांसह विविध घरगुती पदार्थ गणपतीला अर्पण केले जातात. कोकणातील गणेशोत्सवाच्या वर्णनात मोदक आणि इतर खाद्यपदार्थांच्या तयारीबरोबर भजनासाठी येणाऱ्या भाविकांना प्रसाद देण्याची प्रथा नमूद केली आहे.<ref name="प्रल्हादकुडतरकर-लोकसत्ता-2017" /><ref name="Sakal-Ratnagiri-Aartya-2024" />
=== गणपतीसमोरील भजन आणि धार्मिक कार्यक्रम ===
कोकणातील गणेशोत्सवात भजनाला महत्त्वाचे स्थान आहे. काही गावांमध्ये गणपतीच्या स्थापनेनंतर वाडीतील किंवा गावातील भजनी मंडळे विविध घरांमध्ये जाऊन भजन करतात. रत्नागिरी जिल्ह्यातील ग्रामीण भागाच्या वृत्तानुसार गणपतीसमोर आरती आणि भजन करून पुढील घराकडे जाण्याची पद्धत आढळते. टाळ, मृदंग, तबला, पेटी यांसारख्या वाद्यांचा वापर या कार्यक्रमांत केला जातो.<ref name="Sakal-Ratnagiri-Aartya-2024" />
सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातील कुडाळ तालुक्यातील पिंगुळी-शेटकरवाडी येथे अनेक वर्षांपासून घरोघरी जाऊन भजन-आरती करण्याची परंपरा असल्याची नोंद आहे. ठरावीक क्रमाने प्रत्येक घरात आरती केली जाते आणि ही परंपरा अनेक वर्षांपासून जपली जात असल्याचे स्थानिक वृत्तात नमूद केले आहे.<ref name="सकाळ-पिंगुळी-भजनआरती-2024">सावंत, अजय. “अनेक वर्षे जोपासताहेत भजन-आरतीची प्रथा”. ''सकाळ'', 10 सप्टेंबर 2024. [https://www.esakal.com/kokan/todays-latest-marathi-news-kop24c15613-txt-sindhudurg-today-20240910111417]</ref>
कोकणातील गणेशोत्सवाच्या अनुभवाधारित वर्णनात घराघरांतील भजन आणि आरतीचे क्रम आधीच ठरवले जात असल्याचे नमूद केले आहे. या कार्यक्रमांमध्ये पारंपरिक वाद्यांचा वापर केला जातो आणि काही ठिकाणी रात्री उशिरापर्यंत भजनाचे कार्यक्रम सुरू राहतात.<ref name="प्रल्हादकुडतरकर-लोकसत्ता-2017" />
भजन आणि आरतीच्या या परंपरांमुळे गणेशोत्सवातील धार्मिक कार्यक्रमांना सामूहिक स्वरूप प्राप्त होते. घरगुती गणपतीसमोरील पूजा, गायन आणि वादन यांमध्ये शेजारी, नातेवाईक आणि ग्रामस्थ सहभागी होतात.<ref name="Sakal-Ratnagiri-Aartya-2024" /><ref name="सकाळ-पिंगुळी-भजनआरती-2024" />
=== गणपती आणि कुटुंबीयांचे एकत्रीकरण ===
कोकणातील घरगुती गणपतीचा उत्सव कुटुंबीयांच्या एकत्र येण्याशी संबंधित आहे. वर्षातील इतर काळात शिक्षण, नोकरी किंवा व्यवसायासाठी शहरांमध्ये किंवा अन्य ठिकाणी राहणारे कुटुंबीय गणपतीच्या निमित्ताने मूळ गावी परततात. त्यामुळे वडिलोपार्जित घरात कुटुंबीय आणि नातेवाईक एकत्र येतात.<ref name="अमोलमोरे-कोकणगाज" />
गणपतीच्या तयारीत घरातील विविध सदस्य सहभागी होतात. घराची स्वच्छता, सजावट, मंडपी किंवा मखराची तयारी, नैवेद्य आणि पूजाविधी यांत कुटुंबातील सदस्यांचा सहभाग असतो. कोकणातील गणेशोत्सवाच्या वर्णनात घराची तयारी आणि गणपतीच्या आगमनासाठी कुटुंबातील सदस्य सहभागी होत असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="प्रल्हादकुडतरकर-लोकसत्ता-2017" />
काही कुटुंबांमध्ये विशिष्ट आरती, श्लोक किंवा पूजापद्धती पिढ्यान्पिढ्या चालत आलेल्या आहेत. रत्नागिरी जिल्ह्यातील कोंडगाव येथील एका कुटुंबात गणपतीसमोर बसून आरती करण्याची परंपरा चार पिढ्यांपासून सुरू असल्याची नोंद आहे. आरतीनंतर घरातील लहान मुलांनी श्लोक म्हणण्याची पद्धतही त्या कुटुंबात जपली जाते.<ref name="सकाळ-साखरपा-चारपिढ्यांचीआरती" />
अशा कौटुंबिक उदाहरणांमधून गणेशोत्सव हा धार्मिक विधींबरोबरच कुटुंबातील परंपरा आणि आचार पुढील पिढीकडे पोहोचण्याचा प्रसंग असल्याचे दिसते.<ref name="सकाळ-साखरपा-चारपिढ्यांचीआरती" /><ref name="प्रल्हादकुडतरकर-लोकसत्ता-2017" />
=== गणपती आणि चाकरमानी ===
कोकणातील गणेशोत्सवाचा सामाजिक संदर्भ चाकरमानी या संकल्पनेशी जोडलेला आहे. रोजगार, व्यवसाय किंवा शिक्षणासाठी मुंबईसह इतर शहरांत राहणारे कोकणातील लोक गणेशोत्सवाच्या काळात मूळ गावी परततात. त्यामुळे गणपतीच्या दिवसांत काही गावांमध्ये आणि वाड्यांमध्ये लोकवर्दळ वाढते. कोकणातील गौरी–गणपतीसाठी मोठ्या संख्येने चाकरमानी मूळ गावी येत असल्याची नोंद उपलब्ध आहे.<ref name="अमोलमोरे-कोकणगाज" />
गणपतीसाठी गावी परतण्याची ही प्रथा धार्मिक कारणांबरोबरच कौटुंबिक आणि सामाजिक संबंधांशीही जोडलेली आहे. वडिलोपार्जित घरातील गणपती, कुटुंबीयांच्या भेटी, गावातील आरती-भजन आणि इतर कार्यक्रम यांमध्ये सहभागी होण्यासाठी बाहेरगावी राहणारे कुटुंबीय गावी येतात. रत्नागिरी जिल्ह्यातील वृत्तानुसार चाकरमानी मोठ्या संख्येने गावी आल्याने बंद घरे पुन्हा उघडली आणि सामूहिक आरती-भजनांच्या कार्यक्रमांत त्यांचा सहभाग झाला.<ref name="Sakal-Ratnagiri-Aartya-2024" />
घरोघरी होणाऱ्या आरतीच्या कार्यक्रमांमध्ये चाकरमानी, स्थानिक ग्रामस्थ, महिला, मुले आणि ज्येष्ठ नागरिक सहभागी होत असल्याचीही नोंद आहे. त्यामुळे गणेशोत्सवाच्या काळात मूळ गावी परतलेले आणि गावात वास्तव्यास असलेले विविध कुटुंबीय धार्मिक कार्यक्रमांत एकत्र येतात.<ref name="Sakal-Ratnagiri-Gharoghari-Aartya-2025"/>
कोकणातील गणपती उत्सवात चाकरमान्यांचा सहभाग हा घरगुती धार्मिक परंपरा आणि गावातील सामाजिक जीवन यांना जोडणारा घटक म्हणून दिसून येतो. गणपतीच्या निमित्ताने मूळ गावी परतणे, कुटुंबीयांबरोबर उत्सव साजरा करणे आणि घरोघरी होणाऱ्या आरती-भजनांत सहभागी होणे या प्रथांमधून हा संबंध स्पष्ट होतो.<ref name="अमोलमोरे-कोकणगाज" /><ref name="Sakal-Ratnagiri-Aartya-2024" /><ref name="Sakal-Ratnagiri-Gharoghari-Aartya-2025" />
== ओवसा आणि स्त्रियांचे लोकजीवन ==
=== ओवशाची संकल्पना ===
कोकणातील गौरी–गणपती उत्सवाशी संबंधित स्त्रियांच्या परंपरांमध्ये '''ओवसा''' किंवा '''ववसा''' ही एक प्रथा आढळते. ‘ओवसा’ हा शब्द ‘ओवसणे’ किंवा ‘ओवाळणे’ या अर्थाने वापरला जातो. गौरीपूजनाच्या वेळी सूपात विविध वस्तू भरून गौरीसमोर त्याची ओवाळणी करण्याची पद्धत काही कोकणी भागांत आढळते. म्हापण परिसरातील नोंदीनुसार या विधीत बांबूच्या सुपांचा वापर केला जातो आणि सुवासिनी स्त्रिया गौरीसमोर ओवसा भरतात.<ref name="सकाळ-म्हापण-ओवसापूजन-2024">सकाळ वृत्तसेवा. “नववधूंनी केले गौरी गणपतींचे ‘ओवसा पूजन’”. ''सकाळ'', 11 सप्टेंबर 2024. [https://www.esakal.com/kokan/todays-latest-marathi-news-kop24c15881-txt-sindhudurg-today-20240911102439]</ref>
ओवशाची पद्धत सर्व ठिकाणी एकसारखी नाही. सुपांची संख्या, त्यात ठेवण्यात येणाऱ्या वस्तू, ओवसा करण्याची पद्धत आणि वाण देण्याची प्रथा यांत स्थानिक व कौटुंबिक फरक आढळतात. रायगड जिल्ह्यातील नोंदीनुसार काही ठिकाणी पाच किंवा दहा बांबूच्या सुपांचा वापर केला जातो.<ref name="सकाळ-रायगड-ओवसा-2024">सकाळ वृत्तसेवा. “ओवसा भरण्यासाठी नववधूंचा उत्साह”. ''सकाळ'', 11 सप्टेंबर 2024. [https://www.esakal.com/mumbai/todays-latest-marathi-news-mah24b09606-txt-raigad-20240911113011]</ref>
ओवशाच्या निमित्ताने स्त्रिया एकत्र येतात आणि गौरीपूजनाशी संबंधित धार्मिक विधींमध्ये सहभागी होतात. काही ठिकाणी ओवशानंतर वाण देण्याची पद्धत असल्यामुळे या प्रथेला कौटुंबिक आणि सामाजिक संबंधांचाही संदर्भ प्राप्त होतो.<ref name="सकाळ-म्हापण-ओवसापूजन-2024" /><ref name="सकाळ-रायगड-ओवसा-2024" />
=== सुपातील वाण आणि ओवसा ===
ओवशासाठी बांबूपासून तयार केलेल्या सुपांचा वापर काही कोकणी भागांत केला जातो. सुपात ठेवण्यात येणाऱ्या वस्तू स्थानिक परंपरेनुसार बदलतात. फळे, भाज्या, पाने, धान्य, सौभाग्यवस्तू, हळद-कुंकू आणि ओटीचे साहित्य यांचा त्यात समावेश होऊ शकतो.<ref name="सकाळ-म्हापण-ओवसापूजन-2024" /><ref name="सकाळ-रायगड-ओवसा-2024" />
म्हापण परिसरातील नोंदीनुसार ओवशाच्या सुपात काकडी, दोडका, सफेद चाफा, करंदा आणि हळद यांसारख्या वनस्पतींची पाने तसेच डाळिंब, काकडी, सफरचंद, पोहे, केळी आणि लाह्या यांसारख्या वस्तू ठेवण्याची पद्धत आहे. नववधूच्या ओवशासाठी पाच भांड्यांचा किंवा सुपांचा संच वापरला जात असल्याचीही नोंद आहे.<ref name="सकाळ-म्हापण-ओवसापूजन-2024" />
रायगड जिल्ह्यातील नोंदीनुसार काही ठिकाणी प्रत्येक सुपात पाच प्रकारच्या भाज्या, पाच प्रकारच्या वेलींची पाने, पाच प्रकारची फळे, करंडा-फणी, ओटी आणि इतर पूजासाहित्य ठेवले जाते. गौरीसमोर सुपे ठेवून त्यांची पूजा केली जाते आणि भरलेले सूप दोन्ही हातांनी धरून गौरीसमोर फिरवण्याच्या विधीला ‘ओवसणे’ म्हटले जाते.<ref name="सकाळ-रायगड-ओवसा-2024" />
रायगडमधील त्याच नोंदीनुसार भरलेले सूप ऐश्वर्य आणि मांगल्याचे प्रतीक मानले जाते. गौरीपूजनाच्या काळात बांबूच्या सुपांना मागणी असल्याची स्वतंत्र नोंदही उपलब्ध आहे. त्यामुळे ओवसा आणि बांबूच्या पारंपरिक वस्तूंच्या वापरामध्ये संबंध दिसून येतो.<ref name="सकाळ-रायगड-ओवसा-2024" /><ref name="अॅग्रोवन-बांबू-सूप-2024">“गौरी पूजनासाठी बांबूच्या सुपांना मागणी”. ''अॅग्रोवन'', 11 सप्टेंबर 2024. [https://agrowon.esakal.com/agro-special/demand-for-bamboo-sup-for-gauri-puja]</ref>
=== नववधूचा पहिला ओवसा ===
कोकणातील काही भागांत नववधूचा पहिला ओवसा हा गौरी–गणपती उत्सवातील विशेष कौटुंबिक प्रथा आहे. रायगड जिल्ह्यातील नोंदीनुसार लग्नानंतर ज्या वर्षी गौरीचे आगमन पूर्वा नक्षत्रात होते, त्या वेळी नववधूचा पहिला ओवसा करण्याची पद्धत आहे. पहिल्या वर्षी हा योग न आल्यास पुढील अशा योगाची प्रतीक्षा करावी लागते, अशीही त्या भागातील प्रथा नोंदवली आहे.<ref name="सकाळ-रायगड-ओवसा-2024" />
पहिला ओवसा हा नववधूच्या सासरी होणाऱ्या मान-सन्मानाशी जोडला जातो. रायगडमधील नोंदीनुसार नववधूला घरातील ज्येष्ठ व्यक्ती आणि नातेवाईकांचा परिचय करून देणे, तसेच तिला साडी, दागिने किंवा इतर भेटवस्तू देणे या प्रथेशी संबंधित आहे. माहेर आणि सासरच्या नातेवाईकांना सुपे देण्याची पद्धतही काही ठिकाणी आढळते.<ref name="सकाळ-रायगड-ओवसा-2024" />
संगमेश्वर परिसरातील नोंदीनुसार नववधूसाठी पाच बांबूच्या सुपांचा संच वापरला जातो. त्यामध्ये फळे, सौभाग्यवस्तू, तांदूळ आणि ओटीचे साहित्य ठेवून गौरीसमोर त्यांचे पूजन केले जाते.<ref name="सकाळ-संगमेश्वर-ओवसा-2024">सकाळ वृत्तसेवा. “गणेशोत्सवात ओवसा साजरा होणार”. ''सकाळ'', 21 ऑगस्ट 2024. [https://www.esakal.com/kokan/todays-latest-marathi-news-kop24c09228-txt-ratnagiri-20240821123957]</ref>
रायगडमधील नोंदीनुसार काही ठिकाणी नववधू प्रथम माहेरच्या गौरीला आणि त्यानंतर सासरच्या गौरीला ओवसते. त्यामुळे या प्रथेत माहेर आणि सासर या दोन्ही कुटुंबांशी संबंधित धार्मिक व सामाजिक संदर्भ दिसून येतो.<ref name="सकाळ-रायगड-ओवसा-2024" />
=== माहेर–सासर संबंध आणि वाण ===
ओवशाच्या प्रथेत माहेर आणि सासरच्या नातेसंबंधांना स्थान आहे. नववधूच्या ओवशाशी संबंधित प्रथांमध्ये माहेरच्या आणि सासरच्या नातेवाईकांना सुपे किंवा वाण देण्याची पद्धत काही ठिकाणी आढळते. त्याबदल्यात नववधूला साडी, दागिने किंवा इतर भेटवस्तू दिल्या जातात.<ref name="सकाळ-रायगड-ओवसा-2024" />
म्हापण परिसरातील नोंदीनुसार गौरी–गणपतीनंतर तुळस, ग्रामदेवता, कुलदेवता आणि स्थानदेवता यांच्यासाठीही ओवशाचे पान ठेवले जाते. त्यानंतर कुटुंबातील सदस्य आणि वाडीतील घरांना ओवशाचे पान ‘वाण’ म्हणून दिले जाते. वाण देणाऱ्या नववधूला त्याबदल्यात आशीर्वादाच्या स्वरूपात पैसे किंवा भेटवस्तू दिल्या जातात.<ref name="सकाळ-म्हापण-ओवसापूजन-2024" />
या देवाणघेवाणीमुळे ओवशाची प्रथा गौरीपूजेच्या धार्मिक विधीबरोबरच नातेवाईक, शेजारी आणि वाडीतील कुटुंबांमधील परस्पर संबंधांशी जोडलेली असल्याचे दिसते.<ref name="सकाळ-म्हापण-ओवसापूजन-2024" /><ref name="सकाळ-रायगड-ओवसा-2024" />
=== स्त्रियांचा सहभाग ===
गौरीपूजनातील अनेक विधींमध्ये स्त्रियांचा सक्रिय सहभाग असतो. गौरीला साडी आणि दागिने नेसवणे, फुलांनी सजवणे, पूजा करणे, ओवसा भरणे आणि आरती करणे यांत सुवासिनी, नववधू आणि कुटुंबातील इतर महिला सहभागी होतात. मंडणगड परिसरातील नोंदीनुसार पारंपरिक गाणी, ओवसे आणि विविध खेळ यांमध्ये महिलांचा सहभाग असतो.<ref name="सकाळ-मंडणगड-गौराई-2025">“मानवी भावनांच्या हृद्य स्पर्शाच अविष्कार ‘गौराई’”. ''सकाळ'', 31 ऑगस्ट 2025. [https://www.esakal.com/kokan/todays-latest-marathi-news-kop25d24335-txt-ratnagiri-today-20250831105610]</ref>
मळगाव येथील नोंदीनुसार गौरीपूजनाच्या वेळी महिलांनी ओवसा भरला, नववधूंना प्रथम मान दिला आणि त्यानंतर महिलांनी एकमेकींच्या गौरींचे दर्शन घेतले. महाआरती, प्रसादवाटप आणि फुगडीचे कार्यक्रमही झाले.<ref name="सकाळ-मळगाव-गौराई-2024">“गौराई सणाचा मळगावात उत्साह”. ''सकाळ'', 13 सप्टेंबर 2024. [https://www.esakal.com/amp/kokan/todays-latest-marathi-news-kop24c16561-txt-sindhudurg-today-20240913114550]</ref>
या प्रथांमध्ये कुटुंबातील ज्येष्ठ महिला आणि नववधू किंवा तरुण महिलांचा एकत्र सहभाग दिसतो. त्यामुळे गौरीपूजनाच्या धार्मिक आचारांसोबत गाणी, ओवसा, फुगडी आणि इतर स्थानिक प्रथा पुढील पिढीपर्यंत पोहोचण्याची प्रक्रिया घडते, असे उपलब्ध स्थानिक नोंदींवरून दिसते.<ref name="सकाळ-मंडणगड-गौराई-2025" /><ref name="सकाळ-मळगाव-गौराई-2024" />
=== फुगडी आणि स्त्रियांचे सामूहिक जीवन ===
गौरी–गणपतीच्या उत्सवकाळात स्त्रियांच्या सामूहिक उपक्रमांमध्ये फुगडीला स्थान आहे. मळगाव येथील नोंदीनुसार गौरीपूजनानंतर महिलांनी विविध प्रकारच्या फुगड्या सादर केल्या. त्यानंतर गौरीचे विसर्जन करण्यात आले.<ref name="सकाळ-मळगाव-गौराई-2024" />
रत्नागिरी जिल्ह्याच्या नोंदीनुसार गौरी–गणपतीच्या काळात भजन आणि फुगडीचे कार्यक्रम होतात. त्यामुळे काही भागांत फुगडी ही उत्सवाच्या धार्मिक कार्यक्रमांबरोबर चालणाऱ्या स्त्रियांच्या सामूहिक सांस्कृतिक उपक्रमांपैकी एक आहे.<ref name="Vishwakosh-Ratnagiri-District"/>
मंडणगड परिसरातील नोंदीनुसार फुगडीबरोबर पिंगा आणि कोंबडा यांसारखे पारंपरिक खेळही महिलांकडून खेळले जातात. पारंपरिक गाणी आणि विरहगीतेही या कार्यक्रमांचा भाग आहेत. काही ठिकाणी गौरीच्या निरोपाच्या वेळी स्त्रिया विरहगीते म्हणतात; या प्रथेला सासर–माहेरच्या भावबंधाचा संदर्भ दिला जातो.<ref name="सकाळ-मंडणगड-गौराई-2025" />
उपलब्ध कोकण-विशिष्ट संदर्भांमध्ये फुगडी, पिंगा, कोंबडा, पारंपरिक गाणी आणि ओवसा यांचा गौरी–गणपती उत्सवाशी संबंध स्पष्टपणे नोंदला आहे. त्याच्या तुलनेत ‘झिम्मा’चा या उत्सवाशी असलेला कोकण-विशिष्ट संबंध या उपलब्ध स्रोतांमधून पुरेसा स्पष्ट होत नाही. त्यामुळे या लेखात झिम्म्याबाबत स्वतंत्र सर्वसाधारण दावा केलेला नाही.
ओवसा, फुगडी, पारंपरिक गाणी आणि सामूहिक पूजाविधी यांच्या माध्यमातून गौरी–गणपतीच्या उत्सवकाळात स्त्रियांचा सामूहिक सहभाग दिसून येतो. या प्रथांमध्ये धार्मिक विधींबरोबर परस्पर भेटीगाठी, कौटुंबिक संबंध आणि स्थानिक सांस्कृतिक परंपरांचा सहभाग आढळतो.<ref name="सकाळ-म्हापण-ओवसापूजन-2024" /><ref name="सकाळ-मंडणगड-गौराई-2025" /><ref name="सकाळ-मळगाव-गौराई-2024" />
== गणपती–गौरी आणि लोककला ==
कोकणातील गणपती–गौरी उत्सव हा धार्मिक विधींबरोबरच लोककला, संगीत, नृत्य आणि सामुदायिक सांस्कृतिक कार्यक्रमांशी जोडलेला आहे. गणेशोत्सवाच्या काळात भजन, आरती, जाखडी, गौरी–गणपती नृत्य आणि स्थानिक गीतपरंपरांचे सादरीकरण काही गावांमध्ये केले जाते. या कलाप्रकारांमध्ये धार्मिक आशयाबरोबरच गायन, नृत्य, वादन आणि मनोरंजनाचे घटक आढळतात. कोकणातील कुणबी समाजातील गौरी व गौरी–गणपतीचा नाच ‘चेऊली नाच’ म्हणून ओळखला जातो आणि त्याला ‘जाखडी’ असेही म्हटले जाते.<ref name="मराठीविश्वकोश-नृत्यनोंद" /><ref name="महाराष्ट्र-भूमीआणिलोक-प्रयोगकलागॅझेटिअर"/>
=== गाणी आणि लोकसंगीत ===
गणपती–गौरीच्या उत्सवकाळात आरती, भजने आणि स्थानिक गीतांना महत्त्वाचे स्थान आहे. रत्नागिरी जिल्ह्यातील गणेशोत्सवाच्या वृत्तांत घराघरांत आरती आणि भजनांचे कार्यक्रम होत असल्याची नोंद आहे. काही गावांमध्ये रात्री ठरावीक क्रमाने प्रत्येक घरात जाऊन आरती व भजन केले जाते.<ref name="Sakal-Ratnagiri-Gharoghari-Aartya-2025" />
जाखडीच्या सादरीकरणात गण, गौळण आणि पद यांसारख्या गायनप्रकारांचा समावेश होतो. काही सादरीकरणांमध्ये पदांमधून कोडी किंवा उखाणे घातले जातात आणि प्रतिस्पर्धी गटाने त्यांची उत्तरे द्यायची असतात. त्यामुळे या कलाप्रकारात धार्मिक आशयाबरोबर गायन, काव्य आणि स्पर्धात्मक सादरीकरणाचे घटक आढळतात.<ref name="सकाळ-जाखडी-2024"/>
सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातील भिरवंडे येथे महिलांनी ‘गणराज आले धरतीवरती’ या गणेश–गौराई गीताचे पारंपरिक वेशभूषेत सादरीकरण केले होते. या कार्यक्रमात आरती, कळशी नृत्य, फुगडी, झिम्मा–पिंगा, सुपफुगडी, गौराईपूजन, गोल रिंगण आणि गौराई गीत अशा विविध नृत्य व गीतप्रकारांचा समावेश होता.<ref name="सकाळ-भिरवंडे-गणेशगौराईगीत-2023">“गणेश-गौराई गीताचे भिरवंडेत सादरीकरण”. ''सकाळ'', 15 सप्टेंबर 2023. [https://www.esakal.com/kokan/todays-latest-marathi-news-kop23b06889-txt-sindhudurg-20230915020922]</ref>
=== जाखडी ===
जाखडी हा कोकणातील पारंपरिक लोककलाप्रकार असून त्याचा गौरी–गणपती उत्सवाशी संबंध आढळतो. मराठी विश्वकोशानुसार कोकणातील कुणबी समाजामध्ये गौरी आणि गौरी–गणपतीचा नाच केला जातो. तो ‘चेऊली नाच’ म्हणूनही ओळखला जातो. कुलाबा जिल्ह्यातील चेऊल या गावाच्या नावावरून ‘चेऊली’ हे नाव पडले असावे, अशी नोंद आहे. या नृत्याला ‘जाखडी’ असेही नाव असून दोन गटांमध्ये गाण्यांतून उखाण्यांची स्पर्धा केली जाते.<ref name="मराठीविश्वकोश-नृत्यनोंद" />
महाराष्ट्र शासनाच्या गॅझेटिअरनुसार गौरी–गणपतीचा हा नृत्यप्रकार रायगड जिल्ह्यातील चेऊल येथे विशेषत्वाने आढळतो. तो कुणबी समाजात प्रचलित असला तरी इतर समाजांतील लोकही त्यात सहभागी होतात. त्यामुळे या नृत्याला जाखडी असेही संबोधले जाते.<ref name="महाराष्ट्र-भूमीआणिलोक-प्रयोगकलागॅझेटिअर" />
जाखडीच्या पारंपरिक सादरीकरणात नर्तक गोलाकार फेर धरून नाचतात. मध्यभागी मृदंग आणि झांजा वाजवणारे कलाकार बसतात. नर्तकांच्या पायांत चाळ असतात. दोन गटांमध्ये गाण्यांतून उखाणे किंवा कोडी घालण्याची आणि दुसऱ्या गटाने ती सोडवण्याची स्पर्धात्मक पद्धतही या नृत्यप्रकारात आढळते. गौरी विसर्जनाच्या वेळी झांज व मृदंग वाजवणारे कलाकार पुढे आणि त्यांच्या मागे नर्तक मिरवणुकीने जात असल्याचीही नोंद आहे.<ref name="मराठीविश्वकोश-नृत्यनोंद" />
रत्नागिरी जिल्ह्यातील गणेशोत्सवाच्या वृत्तांत गणेशोत्सवाच्या काळात सायंकाळी आरत्या आणि रात्री संगीत–नृत्याचे कार्यक्रम करण्याची परंपरा असल्याचे नमूद आहे. घराघरांत जाऊन सादर होणाऱ्या या संगीत–नृत्याच्या विकसित रूपाला जाखडी म्हटले जाते. त्यात गण, गौळण आणि पद यांचा समावेश होतो.<ref name="सकाळ-जाखडी-2024" />
=== शक्तीवाले आणि तुरेवाले ===
जाखडीच्या विकसित परंपरेत शक्तीवाले आणि तुरेवाले असे दोन गट आढळतात. रत्नागिरी जिल्ह्यातील नोंदीनुसार शक्ती म्हणजे पार्वतीचे रूप, तर तुरा म्हणजे शंकराचे रूप मानले जाते. शक्तीवाले आपल्या गीतांमधून पार्वतीचा महिमा मांडतात, तर तुरेवाले शंकराची थोरवी गातात.<ref name="सकाळ-जाखडी-2023">“मंडणगड- गणपती सणात कोकणात जाखडी नृत्याने रंगत”. ''सकाळ'', 22 सप्टेंबर 2023. [https://www.esakal.com/kokan/todays-latest-marathi-news-kop23b08808-txt-ratnagiri-today-20230922111119]</ref>
या परंपरेतील सादरीकरणात स्तवन, गण, गौळण आणि पद असा क्रम आढळतो. काही ठिकाणी पदांमधून कोडी किंवा उखाणे घातले जातात आणि प्रतिस्पर्धी गटाने त्यांची उत्तरे द्यायची असतात. त्यामुळे धार्मिक आशय, काव्य, गायन आणि स्पर्धात्मक सादरीकरण यांचा संगम या कलाप्रकारात दिसतो.<ref name="सकाळ-जाखडी-2024" />
गणेशोत्सवाशी या कलेचे नाते स्थानिक नोंदींमधून स्पष्ट होते. मंडणगड परिसरातील वृत्तांत गणपती उत्सवाच्या काळात जाखडी किंवा शक्ती–तुरा सादरीकरण होत असल्याचे नमूद आहे. या कलाप्रकाराच्या पारंपरिक सादरीकरणात झांज, ढोलकी आणि बासरी यांसारख्या वाद्यांचा वापर होत असून कालांतराने आधुनिक वाद्यांचाही वापर वाढल्याची नोंद आहे.<ref name="सकाळ-जाखडी-2023" /><ref name="सकाळ-जाखडी-2024" />
=== गणपती–गौरी नृत्य ===
कोकणातील गौरी–गणपती नृत्याची स्वतंत्र परंपरा विशेषतः कुणबी समाजाशी संबंधित असल्याची नोंद आढळते. मराठी विश्वकोशात या नृत्याला ‘चेऊली नाच’ असे म्हटले असून त्याला ‘जाखडी’ असेही संबोधले जाते. गौरीच्या विसर्जनाच्या वेळी झांजा आणि मृदंग वाजवणारे कलाकार मिरवणुकीच्या अग्रभागी असतात आणि त्यांच्या मागे नर्तक एकमेकांच्या गळ्यात हात घालून नाचत-गात जातात, अशी नोंद आहे.<ref name="मराठीविश्वकोश-नृत्यनोंद" />
या नृत्याचा उत्सवातील धार्मिक विधींशी संबंध दिसून येतो. विशेषतः गौरीच्या विसर्जनाच्या वेळी त्याचा मिरवणुकीत समावेश होत असल्याने नृत्य, वादन आणि धार्मिक सोहळा यांचा परस्पर संबंध स्पष्ट होतो.<ref name="मराठीविश्वकोश-नृत्यनोंद" />
रत्नागिरी जिल्ह्यातील दापोली तालुक्यातील गावतळे येथे 2024 मध्ये गणपती विसर्जनाच्या मिरवणुकीत जाखडीचे सादरीकरण झाले. या वेळी गण, गौळण आणि पद गायले गेले तसेच ढोलकी आणि झांजांच्या साथीने नृत्य सादर करण्यात आले. वृत्तानुसार या सादरीकरणात शक्ती–तुरा संघर्षापेक्षा सामुदायिक उत्साहाला महत्त्व देण्यात आले.<ref name="सकाळ-गावतळे-जाखडी-2024"/>
=== आगरी–कुणबी लोकनृत्यपरंपरा ===
कोकणातील गौरी–गणपतीशी संबंधित लोकनृत्यपरंपरेत कुणबी समाजाचा उल्लेख प्रमुखत्वाने आढळतो. महाराष्ट्र शासनाच्या गॅझेटिअरमध्ये गौरी–गणपतीचा चेऊली नाच कुणबी समाजातील नृत्य म्हणून नोंदविला असून इतर समाजांतील लोकही त्यात सहभागी होत असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="महाराष्ट्र-भूमीआणिलोक-प्रयोगकलागॅझेटिअर" />
मराठी विश्वकोशातही कोकणातील कुणबी समाजामध्ये गौरीचा आणि गौरी–गणपतीचा नाच प्रचलित असल्याचे नमूद केले आहे. या नृत्याला चेऊली नाच किंवा जाखडी अशी नावे आढळतात.<ref name="मराठीविश्वकोश-लोकनृत्य">“लोकनृत्य”. ''मराठी विश्वकोश'', महाराष्ट्र राज्य मराठी विश्वकोश निर्मिती मंडळ. [https://vishwakosh.marathi.gov.in/32119/] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20260715002629/https://vishwakosh.marathi.gov.in/32119/ |date=2026-07-15 }}</ref>
आगरी समाजाशी संबंधित गौरी–गणपती नृत्याचाही उल्लेख महाराष्ट्राच्या उपप्रादेशिक संस्कृतीविषयक गॅझेटिअरमध्ये आढळतो. त्यात आगरी आणि कुणबी समाजांच्या गौरी–गणपती नृत्यांचा कोकणातील वैशिष्ट्यपूर्ण लोकनृत्यांमध्ये समावेश केला आहे. त्यामुळे या लोकनृत्यपरंपरेचा अभ्यास करताना कुणबी समाजाबरोबर आगरी समाजाचाही संदर्भ विचारात घेता येतो.<ref name="महाराष्ट्र-उपप्रादेशिक-संस्कृती">“Distinctive Features of Sub-regional Culture of Maharashtra”. ''Maharashtra: Land and Its People''. Gazetteers Department, Government of Maharashtra. [https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/land_and_people/L%20%26%20P%20pdf/Chapter%20III/3%20Distinctive%20Features%20of%20Sub-regional%20Culture%20of%20Maharashtra.pdf]</ref>
=== भजन, जागरण आणि सांस्कृतिक कार्यक्रम ===
कोकणातील गणेशोत्सवाशी भजनपरंपरेचे संबंध आढळतात. सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातील कुडाळ तालुक्यात ग्रामीण भागातील भजनी मंडळांना प्रोत्साहन देण्यासाठी जिल्हा परिषदेच्या स्वनिधीतून भजनी साहित्याचे वाटप करण्यात आले होते. या साहित्यामध्ये मृदंग, टाळ आणि चक्की यांचा समावेश होता; त्यात काही महिला भजनी मंडळांचाही समावेश होता.<ref name="सकाळ-कुडाळ-भजनकला-2024">जगताप, धनंजय. “भजन कला कोकणच्या अस्मितेचे प्रतीक”. ''सकाळ'', 11 सप्टेंबर 2024. [https://www.esakal.com/kokan/todays-latest-marathi-news-kop24c15945-txt-sindhudurg-today-20240911105542]</ref>
गणेशोत्सवातील रात्रीच्या कार्यक्रमांमध्ये आरतीनंतर भजन, जाखडी किंवा इतर संगीत–नृत्याचे कार्यक्रम होतात. गुहागर परिसरातील वृत्तानुसार गणेशोत्सवाच्या काळात सायंकाळच्या आरत्या आणि रात्री संगीत–नाचाची परंपरा कायम असून काही ठिकाणी कलाकार घराघरांत जाऊनही सादरीकरण करतात.<ref name="सकाळ-जाखडी-2024" />
सार्वजनिक गणेशोत्सवाच्या निमित्ताने भक्तिसंगीत आणि सुगम संगीताचे कार्यक्रमही आयोजित केले जातात. रत्नागिरी जिल्ह्यातील मंडणगड येथे सार्वजनिक गणेशोत्सवानिमित्त भक्ती व सुगम संगीताची मैफल आयोजित करण्यात आली होती. या कार्यक्रमात विविध राग, गीते आणि गणेशविषयक गाण्यांचे सादरीकरण झाले.<ref name="सकाळ-मंडणगड-संगीतमैफल-2024">“मंडणगड - भक्ती सुगम संगीताची मैफिल”. ''सकाळ'', 15 सप्टेंबर 2024. [https://www.esakal.com/kokan/todays-latest-marathi-news-kop24c17181-txt-ratnagiri-20240915011200]</ref>
‘जागरण’ हा शब्द मात्र कोकणातील प्रत्येक गणपती–गौरी उत्सवासाठी सार्वत्रिक स्वरूपात वापरणे योग्य ठरणार नाही. उपलब्ध नोंदींमध्ये काही ठिकाणी रात्री संगीत, नृत्य, भजन किंवा लोककलांचे कार्यक्रम होत असल्याचे दिसते; त्यामुळे अशा स्थानिक संदर्भात रात्रौ आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमांचा उल्लेख करणे अधिक अचूक ठरते.<ref name="सकाळ-जाखडी-2024" />
=== पारंपरिक वाद्ये ===
कोकणातील गणपती–गौरीशी संबंधित लोककलांमध्ये विविध तालवाद्यांचा वापर आढळतो. जाखडीच्या पारंपरिक सादरीकरणात मृदंग आणि झांज यांचा उल्लेख मराठी विश्वकोशात आहे. नर्तकांच्या पायातील चाळांच्या तालाबरोबर मध्यभागी बसलेले मृदंग आणि झांजा वाजवणारे कलाकार नृत्याला साथ देतात.<ref name="मराठीविश्वकोश-नृत्यनोंद" />
जाखडीच्या विकसित संगीत–नाचाच्या स्वरूपात हलगी आणि डफ यांऐवजी मृदंग, पखवाज आणि ढोलकी यांचा आधार घेतला गेल्याची नोंद आहे. त्याच संदर्भात पारंपरिक कलगीतुराच्या प्रभावातून ‘शक्तीतुरा’ हे नाव प्रचलित झाल्याचेही नमूद केले आहे.<ref name="सकाळ-जाखडी-2024" />
भजनपरंपरेत मृदंग आणि टाळ यांना महत्त्व आहे. सिंधुदुर्गातील कुडाळ तालुक्यातील भजनी मंडळांना वितरित करण्यात आलेल्या साहित्यामध्ये एक मृदंग, पाच टाळ आणि एका चक्कीचा समावेश असल्याची नोंद आहे.<ref name="सकाळ-कुडाळ-भजनकला-2024" />
रत्नागिरी जिल्ह्यातील गणेशोत्सवाच्या वृत्तांतांमध्ये घराघरांत होणाऱ्या आरती आणि भजनांच्या कार्यक्रमांसाठी टाळ, मृदंग, ढोलकी, झांजा आणि पेटी यांसारख्या वाद्यांच्या साथीचा उल्लेख आढळतो.<ref name="Sakal-Ratnagiri-Gharoghari-Aartya-2025" />
या वाद्यांचा वापर जाखडी, भजन, आरती आणि इतर सांस्कृतिक सादरीकरणांना तालाची साथ देतो. त्यामुळे गणपती–गौरी उत्सवाशी संबंधित लोककलांच्या सादरीकरणात वाद्यसंगतीला महत्त्वाचे स्थान असल्याचे स्थानिक नोंदींवरून दिसून येते.<ref name="मराठीविश्वकोश-नृत्यनोंद"/><ref name="सकाळ-जाखडी-2024" /><ref name="सकाळ-कुडाळ-भजनकला-2024" />
== उत्सवकाळातील ग्रामजीवन ==
=== गणपती–गौरीचे सामूहिक आगमन ===
कोकणातील गणपती–गौरी उत्सवाचा मुख्य आधार घरगुती पूजापरंपरा असला, तरी उत्सवाच्या काळात गावातील सामाजिक आणि सांस्कृतिक हालचाली वाढतात. रत्नागिरी जिल्ह्याच्या नोंदीनुसार गौरी–गणपती हा जिल्ह्यातील प्रमुख सण असून या निमित्ताने मुंबईहून चाकरमानी आपल्या घरी येतात. गणेशोत्सवाच्या काळात भजने आणि फुगड्यांचे कार्यक्रमही होतात.<ref name="Vishwakosh-Ratnagiri-District"/>
कोकणातील पारंपरिक गणेशोत्सवाच्या एका वर्णनात गणपतीची मूर्ती घरातील कर्त्या व्यक्तीच्या डोक्यावरून आणण्याची तसेच वाडीतील गणपती एकत्र येण्याची पद्धत नमूद केली आहे. त्यानंतर घरातील पूजास्थळी गणपतीची प्रतिष्ठापना केली जाते. हा संदर्भ स्थानिक परंपरेचे उदाहरण म्हणून पाहता येतो; तो संपूर्ण कोकणातील एकसमान पद्धत मानता येत नाही.<ref name="प्रल्हादकुडतरकर-लोकसत्ता-2017"/>
=== उत्सवकाळातील गावातील वर्दळ ===
गणपती–गौरीच्या दिवसांत गावातील सामाजिक हालचाली वाढल्याचे स्थानिक वृत्तांतांत दिसते. रत्नागिरी जिल्ह्यातील काही गावांमध्ये घराघरांत गणपती असल्यामुळे सायंकाळी ठरावीक क्रमाने सामूहिक आरती करण्याची पद्धत आहे. प्रत्येक घरातील आरतीनंतर मंडळी पुढील घराकडे जातात. काही गावांमध्ये ही पद्धत अनेक वर्षांपासून चालत असल्याचे वृत्तांतात नमूद आहे. या आरत्यांसाठी आबालवृद्ध रात्री घरोघरी जातात.<ref name="Sakal-Ratnagiri-Aartya-2024" />
२०२५ मधील रत्नागिरीच्या वृत्तांतातही गणेशोत्सवाच्या काळात चाकरमान्यांच्या आगमनामुळे गावातील घरे गजबजल्याचे आणि घरोघरी आरती व भजनांचे स्वर ऐकू येत असल्याचे नमूद केले आहे. काही गावांमध्ये गणेशभक्त वाडीतील घरांमध्ये जाऊन नियमित आरत्या करतात.<ref name="Sakal-Ratnagiri-Gharoghari-Aartya-2025" />
=== शहरातून गावी येणे आणि बंद घरे उघडणे ===
कोकणातील काही कुटुंबांचे रोजगार आणि व्यवसायाच्या निमित्ताने मुंबईसह इतर शहरांशी संबंध आहेत. गणपती–गौरीच्या उत्सवासाठी या कुटुंबांतील सदस्य मूळ गावी परततात. रत्नागिरी जिल्ह्याच्या नोंदीनुसार गौरी–गणपतीच्या सणासाठी मुंबईहून चाकरमानी आपल्या घरी येतात.<ref name="Vishwakosh-Ratnagiri-District">“रत्नागिरी जिल्हा”. ''मराठी विश्वकोश'', महाराष्ट्र राज्य मराठी विश्वकोश निर्मिती मंडळ. [https://vishwakosh.marathi.gov.in/30964/]{{मृत दुवा|date=September 2026 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref>
गणेशोत्सवाच्या काळात चाकरमान्यांच्या आगमनामुळे वर्षातील काही काळ बंद असलेली घरे पुन्हा उघडली जातात. २०२४ मधील रत्नागिरीच्या वृत्तांतात चाकरमान्यांची बंद घरे उघडल्याचे तसेच ते घरोघरी होणाऱ्या आरती आणि भजनांमध्ये सहभागी होत असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Sakal-Ratnagiri-Aartya-2024" />
२०२५ मध्येही गणेशोत्सवासाठी मोठ्या संख्येने चाकरमानी कोकणात दाखल झाल्याची नोंद आहे. त्यांच्या परतीच्या प्रवासासाठी रत्नागिरी विभागाने अतिरिक्त एसटी फेऱ्यांचे नियोजन केले होते.<ref name="सकाळ-चाकरमानी-परती-2025">सकाळ वृत्तसेवा. “चाकरमान्यांच्या परतीसाठी रत्नागिरी विभाग सज्ज”. ''सकाळ'', 13 ऑगस्ट 2025. [https://www.esakal.com/kokan/todays-latest-marathi-news-kop25d19270-txt-ratnagiri-20250813012118]</ref>
=== कुटुंबीय, नातेवाईक आणि भावकीचे एकत्रीकरण ===
गणपती–गौरीच्या निमित्ताने शहरांमध्ये राहणारे कुटुंबीय मूळ गावी परतत असल्यामुळे कुटुंबातील विविध सदस्य काही काळ एकत्र येतात. रत्नागिरी जिल्ह्यातील एका सामाजिक-सांस्कृतिक वर्णनात दूरवर गेलेले चाकरमानी गणपतीसाठी घरी येतात आणि गावात किंवा आसपासच्या ठिकाणी राहणारे लोक गणपतीच्या निमित्ताने एकत्र येतात, असे नमूद केले आहे.<ref name="सकाळ-सामाजिक-अभिसरण">दामले, शिरीष. “सामाजिक अभिसरणाचा सृजनोत्सव”. ''सकाळ''. [https://www.esakal.com/kokan/ratnagiri-creation-of-social-convergence-tmb01]</ref>
घरोघरी होणाऱ्या आरत्या आणि भजनांमध्ये शेजारी, नातेवाईक तसेच गावातील इतर व्यक्ती सहभागी होतात. रत्नागिरी जिल्ह्यातील घरोघरी सामूहिक आरतीची परंपरा आणि सिंधुदुर्गातील ग्रामीण भागातील घरोघरी आरती–भजनांची नोंद या सामुदायिक सहभागाची उदाहरणे आहेत.<ref name="Sakal-Ratnagiri-Aartya-2024" /><ref name="सकाळ-सिंधुदुर्ग-गौरीआरती-2025">“चला गं सयांनो, चला बाई गौराई पुजूया”. ''सकाळ'', 1 सप्टेंबर 2025. [https://www.esakal.com/kokan/todays-latest-marathi-news-kop25d24728-txt-sindhudurg-today-20250901104522]</ref>
या नोंदींवरून गणपती–गौरी उत्सव हा धार्मिक विधींसोबत कुटुंबीय, नातेवाईक आणि स्थानिक समुदायातील प्रत्यक्ष भेटीगाठींचे एक निमित्त ठरत असल्याचे दिसते.<ref name="सकाळ-सामाजिक-अभिसरण" /><ref name="Sakal-Ratnagiri-Aartya-2024" /><ref name="सकाळ-सिंधुदुर्ग-गौरीआरती-2025" />
=== शेतीच्या कामांची पार्श्वभूमी ===
कोकणातील ग्रामजीवनाच्या पार्श्वभूमीमध्ये शेतीला महत्त्वाचे स्थान आहे. रत्नागिरी जिल्ह्यातील वलाटी प्रदेशात भात हे मुख्य पीक असून किनारपट्टीच्या खलाटी प्रदेशात नारळाची लागवड मोठ्या प्रमाणावर आढळते.<ref name="Vishwakosh-Ratnagiri-District" />
गौरी–गणपतीच्या सणाचा काळ आणि पावसाळ्यातील शेतीचे ऋतूचक्र यांचा संबंध कोकणातील काही सांस्कृतिक वर्णनांत आढळतो. ''भूमी आणि स्त्री'' या ग्रंथातील “कोकणांतील गौराई” या वर्णनात कोकणातील शेतकरी पावसाळ्यात नांगरणी, भात व नागलीची लागवड आणि पेरणीची कामे करतो आणि श्रावणापर्यंत ही कामे संपल्यानंतर गौरी–गणपतीच्या तयारीला सुरुवात होते, असे नमूद केले आहे.<ref name="भूमीआणिस्त्री-कोकणांतीलगौराई">“कोकणांतील गौराई”. ''भूमी आणि स्त्री''. विकिस्रोत. [https://mr.wikisource.org/wiki/भूमी_आणि_स्त्री/वर्षन,_भूमी_आणि_सर्जन]</ref>
या वर्णनावरून काही पारंपरिक ग्रामीण संदर्भांत उत्सवाची तयारी आणि पावसाळी शेतीचे ऋतूचक्र यांचा संबंध दिसून येतो. हा संबंध स्थानिक कृषीजीवनाच्या संदर्भात मांडणे अधिक योग्य असून संपूर्ण कोकणातील प्रत्येक कुटुंबाचा एकसमान कृषी दिनक्रम म्हणून त्याचे सामान्यीकरण करता येत नाही.<ref name="भूमीआणिस्त्री-कोकणांतीलगौराई" />
=== गावाशी आणि सामाजिक नातेसंबंधांशी पुनर्जोड ===
चाकरमानी गणपती–गौरीच्या निमित्ताने मूळ गावी परतत असल्यामुळे त्यांचा कुटुंबीय आणि स्थानिक सामाजिक जीवनाशी प्रत्यक्ष संपर्क वाढतो. रत्नागिरी जिल्ह्याच्या नोंदीनुसार गौरी–गणपतीच्या सणासाठी मुंबईहून चाकरमानी आपल्या घरी येतात.<ref name="Vishwakosh-Ratnagiri-District" />
गणपतीच्या निमित्ताने घरोघरी जाणे, आरती–भजनात सहभागी होणे आणि एकत्र येणे या प्रथा या पुनर्संपर्काला सामुदायिक स्वरूप देतात. रत्नागिरीतील एका सामाजिक वर्णनात लोक आरत्या आणि पारंपरिक भजने म्हणण्यासाठी एकमेकांच्या घरी जात असल्याचे तसेच दूरवर गेलेले चाकरमानी गणपतीसाठी घरी परतत असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="सकाळ-सामाजिक-अभिसरण" />
=== घरसजावट आणि उत्सवी वातावरण ===
गणपतीच्या आगमनापूर्वी घरांची स्वच्छता, पूजास्थळाची तयारी आणि सजावट केली जाते. कोकणातील पारंपरिक गणेशोत्सवाच्या वर्णनात स्थानिक फुले, पाने, नारळ, सुपारी, दुर्वा आणि रानवेली यांच्या साहाय्याने मंडप व परिसर सजविण्याची पद्धत नमूद केली आहे.<ref name="प्रल्हादकुडतरकर-लोकसत्ता-2017" />
गणेशोत्सवाच्या काळात गणपतीच्या मूर्ती, मखर, सजावटीचे साहित्य, फळे–फुले आणि वाद्ये यांच्या खरेदीसाठी ग्रामीण तसेच शहरी बाजारपेठांमध्ये गर्दी वाढते. २०२५ मधील रत्नागिरीच्या वृत्तांतात ग्रामीण भागातही लहान बाजार भरत असल्याचे आणि चाकरमानी तसेच स्थानिक नागरिक सजावट व पूजासाहित्याची खरेदी करत असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="सकाळ-बिगस्टोरी-2025">“बिग स्टोरी”. ''सकाळ'', 24 ऑगस्ट 2025. [https://www.esakal.com/kokan/todays-latest-marathi-news-kop25d22409-txt-ratnagiri-today-20250824112736]</ref>
गौरीच्या पूजेसाठीही घरातील पूजास्थळाची स्वतंत्र तयारी केली जाते. कोकणातील गौरीपरंपरेत गोटे, स्थानिक वनस्पती, मुखवटे किंवा इतर प्रतीकात्मक वस्तूंचा वापर प्रदेश आणि कुटुंबाच्या परंपरेनुसार बदलतो.<ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-महाराष्ट्र"/>
=== रात्रजागरण आणि सामुदायिक कार्यक्रम ===
गणपती–गौरी उत्सवातील काही सामुदायिक कार्यक्रम रात्रीच्या वेळी होतात. रत्नागिरी जिल्ह्यातील काही गावांमध्ये रात्री आबालवृद्ध घरोघरी आरतीसाठी फिरतात. टाळ, झांजा, मृदंग आणि ढोलकी यांच्या साथीने आरती केली जाते आणि घरांमध्ये प्रसादाचे वाटप केले जाते.<ref name="Sakal-Ratnagiri-Aartya-2024" />
२०२५ मधील रत्नागिरीच्या वृत्तांतातही गणेशोत्सवाच्या काळात वाडीतील गणेशभक्त सायंकाळी संगीत आरतीसाठी घराघरांत जात असल्याचे आणि काही गावांमध्ये प्रत्येक घरी नियमित पाच आरत्या म्हणण्याची प्रथा असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Sakal-Ratnagiri-Gharoghari-Aartya-2025" />
रात्रीच्या धार्मिक कार्यक्रमांबरोबरच जाखडीसारख्या लोककलांचे सादरीकरणही गणेशोत्सवाच्या काळात होते. रत्नागिरी जिल्ह्यातील जाखडीच्या कार्यक्रमांत गायन, नृत्य आणि वादन यांचा समावेश असून काही ठिकाणी घराघरांत किंवा गावातील कार्यक्रमांमध्ये त्याचे सादरीकरण केले जाते.<ref name="सकाळ-जाखडी-2024" />
सिंधुदुर्गातील ग्रामीण भागातील नोंदींमध्ये गौरीच्या दिवसांत महिलांचा घरोघरी गौरीपूजेसाठी सहभाग, माहेरवाशिणींची उपस्थिती आणि त्यासोबत आरती–भजनांचे कार्यक्रम आढळतात. या नोंदींमधून उत्सवकाळातील सामुदायिक जीवनात महिलांचा सहभाग आणि कुटुंबीयांच्या एकत्र येण्याचे स्वरूप दिसून येते.<ref name="सकाळ-सिंधुदुर्ग-गौरीआरती-2025" />
== कोकणातील गणपती–गौरी आणि निसर्ग ==
=== जलस्रोत आणि गणपती–गौरी परंपरा ===
कोकणातील काही गौरीपरंपरांमध्ये जलस्रोतांना धार्मिक विधींमध्ये स्थान आहे. किनारी महाराष्ट्रातील काही परंपरांमध्ये गौरीचे आवाहन विहीर, तलाव, नदी, तळे किंवा अन्य जलस्रोतांजवळून केले जाते. गोटे किंवा स्थानिक वनस्पती व फुलझाडे जलस्रोताजवळ नेऊन त्यांची पूजा केल्यानंतर ती घरात आणली जातात.<ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-विधी">Redij, Tanashree. “Rituals of Gaurī Vrata”. ''Sahapedia''. [https://www.sahapedia.org/rituals-of-gaur%C4%AB-vrata]</ref>
या परंपरेत जलस्रोत हा गौरीचे आवाहन करण्याच्या विधीचा एक भाग ठरतो. किनारी महाराष्ट्रातील काही पद्धतींमध्ये जलस्रोताजवळ प्रारंभीची अर्पणे केली जातात आणि त्यानंतर गोटे किंवा वनस्पती घरात आणून त्यांची पूजा केली जाते. उत्सवाच्या समाप्तीनंतर या गोट्यांचे किंवा वनस्पतींचे पुन्हा जलस्रोतामध्ये विसर्जन केले जाते.<ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-विधी" />
गौरीपूजेतील जलस्रोतांचा हा संबंध कोकणातील भौगोलिक परिस्थितीच्या संदर्भातही पाहता येतो. कोकण प्रदेशात पर्जन्यमान मोठे असून नद्या, खाड्या, ओढे आणि विविध प्रकारचे जलप्रदेश आढळतात. दक्षिण कोकणात किनारा खडकाळ असून खाड्या, लहान आखाते आणि उपसागरांची संख्या मोठी आहे.<ref name="मराठीविश्वकोश-कोकण">“कोकण”. ''मराठी विश्वकोश'', महाराष्ट्र राज्य मराठी विश्वकोश निर्मिती मंडळ. [https://vishwakosh.marathi.gov.in/21111/] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20260616023731/https://vishwakosh.marathi.gov.in/21111/ |date=2026-06-16 }}</ref>
=== गौरीपूजेतील तेरडा आणि इतर वनस्पती ===
कोकणातील गौरीपूजेत स्थानिक वनस्पतींचा वापर आढळतो. तेरडा ही कोकण आणि पश्चिम घाटात आढळणारी वर्षायू वनस्पती असून तिची फुले आणि पत्री गौरी–गणपतीच्या सणाच्या दिवशी पूजेसाठी वापरली जातात. मराठी विश्वकोशात तेरड्याचा हा धार्मिक उपयोग स्पष्टपणे नमूद केला आहे.<ref name="मराठीविश्वकोश-तेरडा">जमदाडे, ज. वि.; चौधरी, रा. मो. “तेरडा”. ''मराठी विश्वकोश'', महाराष्ट्र राज्य मराठी विश्वकोश निर्मिती मंडळ. [https://vishwakosh.marathi.gov.in/18774/]{{मृत दुवा|date=September 2026 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref>
गौरीच्या आवाहनासाठी किनारी महाराष्ट्रात स्थानिक औषधी वनस्पती आणि फुलझाडे वापरण्याच्या पद्धतीही नोंदल्या आहेत. काही ठिकाणी गोट्यांऐवजी किंवा त्यांच्यासोबत स्थानिक वनस्पती गौरीचे प्रतीक मानून त्या जलस्रोतापासून घरी आणल्या जातात.<ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-महाराष्ट्र"/>
कोकणातील वनस्पतीवैविध्याच्या संदर्भातही या परंपरेचा विचार करता येतो. कोकणात सदाहरित व पानझडी अरण्ये, विविध फळझाडे आणि औषधी वनस्पती आढळतात; किनारी भागात नारळ आणि सुपारीची लागवडही मोठ्या प्रमाणावर होते. धार्मिक विधींमध्ये स्थानिक वनस्पतींचा वापर हा या प्रदेशातील वनस्पती आणि मानवी सांस्कृतिक व्यवहार यांच्यातील संबंधाचे एक उदाहरण आहे.<ref name="मराठीविश्वकोश-कोकण" /><ref name="मराठीविश्वकोश-तेरडा" />
=== गोटे आणि जलस्रोत ===
गौरीचे प्रतीक म्हणून नदीतील किंवा जलस्रोतांमधून आणलेल्या गोट्यांचा वापर कोकणातील काही परंपरांमध्ये आढळतो. मराठी विश्वकोशातील ‘गौरी’ या नोंदीनुसार काही ठिकाणी नदीतील पाच लहान खडे आणून त्यांची गौरी म्हणून पूजा केली जाते.<ref name="मराठीविश्वकोश-गौरी">जोशी, रंगनाथशास्त्री. “गौरी”. ''मराठी विश्वकोश'', महाराष्ट्र राज्य मराठी विश्वकोश निर्मिती मंडळ. [https://vishwakosh.marathi.gov.in/22225/] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20260608111141/https://vishwakosh.marathi.gov.in/22225/ |date=2026-06-08 }}</ref>
किनारी महाराष्ट्रातील गौरीव्रताच्या नोंदींमध्ये दोन, पाच किंवा सात गोटे जलस्रोतापासून आणण्याची पद्धत वर्णिली आहे. हे गोटे प्रथम जलस्रोताजवळ पूजले जातात आणि नंतर घरात आणून गौरीचे प्रतीक म्हणून त्यांची स्थापना केली जाते. उत्सवाच्या समाप्तीनंतर त्यांचे पुन्हा पाण्यात विसर्जन केले जाते.<ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-विधी" />
या पद्धतीत नैसर्गिक गोट्यांना धार्मिक प्रतीकाचे रूप दिले जाते. त्यामुळे जलस्रोत, गोटे आणि घरातील देवस्थान यांच्यात धार्मिक-सांस्कृतिक संबंध निर्माण होतो. हा संबंध काही विशिष्ट स्थानिक परंपरांचा भाग असून तो सर्वच कुटुंबांमध्ये किंवा संपूर्ण कोकणात एकसारखा आढळतो असे म्हणता येत नाही.<ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-महाराष्ट्र" /><ref name="मराठीविश्वकोश-गौरी" />
=== समुद्रकिनारी जीवन आणि उत्सव ===
कोकणातील समुद्रकिनारी जीवनाचा काही समुदायांच्या धार्मिक आणि सांस्कृतिक आचारांवर प्रभाव दिसून येतो. विशेषतः सोनकोळी समाजाचे जीवन समुद्र आणि मासेमारीशी घनिष्ठपणे जोडलेले आहे. महाराष्ट्र शासनाच्या सांस्कृतिक संदर्भग्रंथात सोनकोळी समाजाची वस्ती कोकण किनाऱ्यावर पसरलेली असून मासेमारी हा त्यांच्या पारंपरिक व्यवसायांपैकी एक प्रमुख व्यवसाय असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="महाराष्ट्र-भूमीआणिलोक-प्रमुखजाती-जमाती">“Major Castes and Tribes”. ''Maharashtra: Land and Its People''. Gazetteers Department, Government of Maharashtra. [https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/land_and_people/L%20%26%20P%20pdf/Chapter%20II/2%20Major%20Castes%20and%20Tribes.pdf]</ref>
सोनकोळी समाजाच्या धार्मिक जीवनात समुद्रालाही महत्त्वाचे स्थान आहे. महाराष्ट्र शासनाच्या नोंदीनुसार नारळी पौर्णिमेच्या दिवशी सोनकोळी समुद्राची पूजा करून त्याला नारळ अर्पण करतात आणि त्यानंतर मासेमारीच्या हंगामाला सुरुवात करतात. त्यामुळे समुद्र, उपजीविका आणि धार्मिक आचार यांचा परस्परसंबंध या समाजाच्या जीवनात दिसतो.<ref name="महाराष्ट्र-भूमीआणिलोक-प्रमुखजाती-जमाती" />
समुद्राशी असलेले हे नाते लोककलांमध्येही प्रतिबिंबित होते. महाराष्ट्र शासनाच्या सांस्कृतिक संदर्भात कोळी नृत्यात होडी वल्हवणे, समुद्राच्या लाटांवरील हालचाल आणि मासेमारीशी संबंधित देहबोली यांचे अनुकरण केले जाते, असे नमूद आहे. हा लोकनृत्यप्रकार समुद्राधारित जीवनाचे सांस्कृतिक प्रतिबिंब म्हणून पाहता येतो; मात्र त्याचा गणपती–गौरी उत्सवाशी थेट संबंध असल्याचे या स्रोतावरून सिद्ध होत नाही.<ref name="महाराष्ट्र-भूमीआणिलोक-प्रयोगकलागॅझेटिअर"/>
=== मच्छीमार समाजातील परंपरा ===
सोनकोळी समाजात गौरी–गणपतीचा उत्सव समुद्र आणि मासेमारीच्या जीवनाशी संबंधित सांस्कृतिक घटकांसह साजरा केला जातो. प्रनिता ए. हरड आणि पी. पी. जोगळेकर यांच्या अभ्यासानुसार सोनकोळी समाजात गौरीचा उत्सव गणपतीसोबत साजरा केला जातो आणि या प्रसंगी माशांपासून तयार केलेले पदार्थ नैवेद्य म्हणून अर्पण करण्याची प्रथा आढळते. विशेषतः खेकड्यांचे पदार्थ अर्पण करण्याचा उल्लेख या अभ्यासात आहे.<ref name="Harad-Joglekar-2017">Harad, Pranita A.; Joglekar, P. P. “A Study of Fish Symbolism in the Life of the Son Koli Community of Mumbai”. ''Bulletin of the Deccan College Post-Graduate and Research Institute'', खंड 77, 2017, pp. 121–130. [https://www.jstor.org/stable/26609165]</ref>
याच अभ्यासात सोनकोळी समाजाच्या वस्ती मुंबई, ठाणे किनारा आणि रायगड परिसरासह वसई-विरारपासून रत्नागिरीपर्यंत कोकणात पसरलेल्या असल्याचे नमूद केले आहे. त्यामुळे ही प्रथा कोकणातील सर्व मच्छीमार समाजाची एकसमान परंपरा न मानता सोनकोळी समाजाच्या धार्मिक जीवनातील विशिष्ट परंपरा म्हणून मांडणे अधिक योग्य ठरते.<ref name="Harad-Joglekar-2017" />
सोनकोळी समाजाच्या धार्मिक जीवनात मासे हे केवळ अन्न किंवा आर्थिक साधन नसून सांस्कृतिक प्रतीक म्हणूनही महत्त्वाचे आहेत. अभ्यासात मासे, खेकडे, शंख आणि इतर सागरी घटकांचे प्रतिबिंब त्यांच्या अलंकारांमध्ये, घरसजावटीत, धार्मिक विधींमध्ये आणि सणांमध्ये आढळते. गौरी–गणपतीच्या संदर्भातील माशांशी संबंधित घटक या व्यापक सागरी सांस्कृतिक जीवनाच्या संदर्भात पाहता येतात.<ref name="Harad-Joglekar-2017" />
=== पर्यावरण आणि जैव-सांस्कृतिक परंपरा ===
कोकणातील गणपती–गौरी परंपरेत नैसर्गिक घटकांचा वापर विविध प्रकारे आढळतो. जलस्रोतांमधून आणलेले गोटे, स्थानिक वनस्पती, तेरड्याची फुले व पत्री, तसेच सोनकोळी समाजातील सागरी जीवनाशी संबंधित धार्मिक प्रथा यांमधून धार्मिक आचार आणि नैसर्गिक परिसर यांचा संबंध दिसतो.<ref name="मराठीविश्वकोश-तेरडा" /><ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-विधी" /><ref name="Harad-Joglekar-2017" />
या परंपरांकडे जैव-सांस्कृतिक दृष्टिकोनातून पाहिल्यास स्थानिक समाज आपल्या परिसरातील जलस्रोत, वनस्पती, गोटे आणि सागरी घटकांना धार्मिक व सांस्कृतिक अर्थ देत असल्याचे दिसते. कोकणातील नैसर्गिक परिसर आणि तेथील स्थानिक समाज यांच्या परस्परसंबंधाचा हा एक सांस्कृतिक पैलू आहे.<ref name="मराठीविश्वकोश-कोकण" /><ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-महाराष्ट्र" /><ref name="Harad-Joglekar-2017" />
धार्मिक विधींमध्ये एखाद्या नैसर्गिक घटकाचा वापर होतो म्हणून त्या परंपरेचा थेट पर्यावरणसंवर्धनाचा परिणाम होतो, असा निष्कर्ष मात्र उपलब्ध स्रोतांच्या आधारे काढता येत नाही. त्यामुळे या परंपरांचे पर्यावरणीय महत्त्व सांगताना त्यांच्या प्रत्यक्ष संवर्धनपर परिणामांपेक्षा स्थानिक पर्यावरणाशी निर्माण झालेल्या सांस्कृतिक संबंधांवर भर देणे अधिक योग्य ठरते.<ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-विधी" /><ref name="मराठीविश्वकोश-तेरडा" />
== कोकणातील विविध समाजांतील परंपरा ==
कोकणातील गणपती–गौरी उत्सवाचे स्वरूप सर्व समाजांत एकसारखे नाही. प्रदेश, समाज, गाव आणि कुटुंब यांच्या परंपरेनुसार गौरीचे स्वरूप, पूजेची पद्धत, नैवेद्य, लोककला आणि उत्सवातील सामाजिक सहभाग यांमध्ये फरक आढळतो. महाराष्ट्र शासनाच्या सांस्कृतिक संदर्भग्रंथात कोकणातील आगरी–कुणबी समाजाच्या गौरी–गणपती नृत्याचा, सोनकोळी समाजाच्या सागरी सांस्कृतिक परंपरांचा आणि उत्तर कोकणातील आदिवासी समाजांच्या स्वतंत्र लोकपरंपरांचा उल्लेख आढळतो.<ref name="महाराष्ट्र-उपप्रादेशिक-संस्कृती"/>
=== आगरी–कुणबी समाज ===
कोकणातील आगरी आणि कुणबी समाजाच्या सांस्कृतिक परंपरांमध्ये गौरी–गणपती उत्सवाशी संबंधित लोकनृत्याचा उल्लेख आढळतो. महाराष्ट्र शासनाच्या ''Maharashtra: Land and Its People'' या संदर्भग्रंथात आगरी आणि कुणबी समाजांचे गौरी–गणपती नृत्य हे कोकणातील वैशिष्ट्यपूर्ण लोकनृत्यांपैकी एक म्हणून नोंदविले आहे.<ref name="महाराष्ट्र-उपप्रादेशिक-संस्कृती" />
रायगड जिल्ह्यातील चेऊल परिसरात या नृत्याला ‘चेऊली नाच’ असे म्हटले जाते. महाराष्ट्र शासनाच्या सांस्कृतिक नोंदीनुसार ते कुणबी समाजात विशेषत्वाने आढळते आणि इतर समाजांतील लोकही त्यात सहभागी होतात. या नृत्याला ‘जाखडी’ असेही संबोधले जाते.<ref name="महाराष्ट्र-भूमीआणिलोक-प्रयोगकलागॅझेटिअर">“Performing Art”. ''Maharashtra: Land and Its People''. Gazetteers Department, Government of Maharashtra. [https://gazetteers.maharashtra.gov.in/cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/land_and_people/L%20%26%20P%20pdf/Chapter%20VIII/4%20Performing%20Art.pdf]</ref>
या परंपरेत नृत्याबरोबर गायन आणि वादन यांचा समावेश असतो. कोकणातील कुणबी समाजाच्या गौरी–गणपती नृत्याच्या वर्णनात दोन गटांमध्ये गाणी, कोडी आणि प्रश्नोत्तरांच्या माध्यमातून सादरीकरणाची पद्धत नमूद केली आहे. मृदंग आणि झांजा यांसारखी वाद्ये त्यात वापरली जातात आणि नर्तकांच्या पायांत चाळ असतात.<ref name="मराठीविश्वकोश-नृत्यनोंद"/>
या लोकनृत्याचा संबंध गौरी–गणपतीच्या उत्सवाशी जोडलेला आहे. काही ठिकाणी गौरीच्या विसर्जनाच्या वेळी वादक आणि नर्तक मिरवणुकीत सहभागी होतात.<ref name="मराठीविश्वकोश-नृत्यनोंद" />
=== सोनकोळी समाज ===
सोनकोळी समाजाचे पारंपरिक जीवन समुद्र आणि मासेमारीशी घनिष्ठपणे जोडलेले आहे. या समाजाच्या सांस्कृतिक जीवनात मासे हे केवळ अन्न किंवा उपजीविकेचे साधन नसून धार्मिक आणि सांस्कृतिक प्रतीक म्हणूनही महत्त्वाचे आहेत. प्रनिता ए. हरड आणि पी. पी. जोगळेकर यांच्या अभ्यासानुसार सोनकोळी समाजाची वस्ती मुंबई, ठाणे किनारा, रायगड आणि वसई-विरारपासून रत्नागिरीपर्यंतच्या किनारी प्रदेशात आढळते.<ref name="Harad-Joglekar-2017"/>
सोनकोळी समाजात गौरीचा उत्सव गणपतीसोबत साजरा केला जातो. या प्रसंगी देवतांना माशांपासून तयार केलेले पदार्थ अर्पण करण्याची प्रथा असल्याचे या अभ्यासात नमूद केले आहे. विशेषतः खेकड्यांचे पदार्थ गौरीला अर्पण केले जातात. ही प्रथा सोनकोळी समाजाच्या धार्मिक जीवनातील सागरी अन्नपरंपरेचा एक भाग आहे.<ref name="Harad-Joglekar-2017" />
माशांचे प्रतीकात्मक महत्त्व सोनकोळी समाजाच्या इतर सांस्कृतिक वस्तूंमध्येही दिसते. माशांच्या आकाराचे पारंपरिक दागिने तसेच घरसजावटीतील सागरी प्रतिमांचा वापर यांचा अभ्यासात उल्लेख आहे. त्यामुळे गौरी–गणपतीच्या नैवेद्यापासून वस्तुसंस्कृतीपर्यंत सागरी जीवनाचे प्रतिबिंब या समाजाच्या सांस्कृतिक परंपरांमध्ये दिसते.<ref name="Harad-Joglekar-2017" />
या प्रथा सर्व कोळी समाजाची किंवा संपूर्ण कोकणातील मच्छीमार समाजाची समान परंपरा म्हणून मांडता येत नाहीत. उपलब्ध संशोधन हे विशेषतः सोनकोळी समाजाच्या संदर्भात आहे; त्यामुळे त्याच मर्यादेत या प्रथांचा विचार करणे आवश्यक आहे.<ref name="Harad-Joglekar-2017" />
=== पालघरमधील आदिवासी समाज ===
पालघर जिल्ह्यातील काही आदिवासी समाजांमध्ये गौरीला स्थानिक नाव आणि स्थानिक नैसर्गिक घटकांशी जोडलेले स्वरूप आढळते. डहाणू, विक्रमगड, पालघर आणि वाडा परिसरातील काही आदिवासी समुदाय गौरीला ‘गावर’ किंवा ‘गावूर’ या नावाने संबोधतात. २०२४ मधील स्थानिक वृत्तांतानुसार या परंपरेत मानवनिर्मित गौरीची मूर्ती न बसवता ‘इंदावी’ वेलीची फुले, कळ्या आणि पाने यांचा वापर केला जातो.<ref name="सकाळ-पालघर-गावूर-2024"/>
गावूरच्या तयारीत घराची स्वच्छता आणि सजावटही केली जाते. संबंधित वृत्तांतानुसार महिलांकडून घर शेण-मातीने सारवणे, लाल मातीच्या रेषा काढणे आणि तांदळाच्या पिठाने हातांचे ठसे उमटवणे अशा पद्धती वापरल्या जातात. पुरुष इंदावीची फुले आणतात आणि महिलांकडून त्यांचे औक्षण केले जाते. इंदावीची फुले व पाने नव्या सुपात ठेवून ती घरात आणली जातात.<ref name="सकाळ-पालघर-गावूर-2024" />
या परंपरेत वनस्पती ही गौरीच्या प्रतीकाचा भाग बनते. त्यामुळे पालघरमधील या आदिवासी परंपरेत धार्मिक आचार, स्त्रियांचा सहभाग आणि स्थानिक वनस्पती यांचा परस्परसंबंध दिसतो. संबंधित वृत्तांतात इंदावीची वनस्पती जंगलातील बदलांमुळे दुर्मीळ होत असल्याचीही नोंद आहे.<ref name="सकाळ-पालघर-गावूर-2024" />
उपलब्ध स्रोताच्या आधारे ‘गावूर’ परंपरा ही पालघर परिसरातील काही आदिवासी समुदायांमध्ये आढळणारी स्थानिक परंपरा म्हणून मांडणे अधिक योग्य ठरते. तिचा संपूर्ण पालघर जिल्ह्यातील किंवा सर्व आदिवासी समाजांतील समान धार्मिक विधी म्हणून विस्तार करणे योग्य ठरणार नाही.<ref name="सकाळ-पालघर-गावूर-2024" />
=== इतर स्थानिक समाज आणि कौटुंबिक परंपरा ===
कोकणातील गणपती–गौरी उत्सवात समाजनिहाय फरकांबरोबरच गावागावांतील आणि कुटुंबागणिक परंपरांमध्येही विविधता आढळते. कुंकेरी गावाच्या १९६१ च्या जनगणना ग्रामसर्वेक्षणात गणपतीचा उत्सव प्रत्येक हिंदू कुटुंबात घरगुती पद्धतीने साजरा होत असल्याचे आणि त्याच काळात गौरीचीही पूजा केली जात असल्याचे नोंदले आहे. त्या गावात सार्वजनिक स्वरूपाचा सामूहिक गणपती प्रचलित नसून घरगुती उत्सवाला महत्त्व असल्याचेही या सर्वेक्षणात नमूद केले आहे.<ref name="कुंकेरी-ग्रामसर्वेक्षण-1961">Rangnekar, D. V. ''Kunkeri Village Survey Monograph, Part VI (I), Vol. X''. Census of India, 1961. [https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/31003/download/34184/49541_1961_KUN.pdf]</ref>
याच सर्वेक्षणात गणपतीच्या काळात घरांची स्वच्छता, भिंतींना रंग देणे आणि जमीन शेणाने सारवणे यांचा उल्लेख आहे. गणपतीच्या उत्सवात महिलांच्या फुगड्यांनाही स्थान असल्याचे नमूद केले आहे. यावरून एका विशिष्ट गावातील धार्मिक विधी, घरसजावट आणि स्त्रियांचा सामूहिक सहभाग यांचा परस्परसंबंध दिसून येतो.<ref name="कुंकेरी-ग्रामसर्वेक्षण-1961" />
कोकणातील इतर कुटुंबांमध्ये गौरीचे स्वरूपही वेगवेगळे असू शकते. काही ठिकाणी धातू किंवा मातीच्या प्रतिमा, काही ठिकाणी मुखवटे, तर काही किनारी भागांत गोटे किंवा स्थानिक वनस्पती यांचा वापर आढळतो. गौरीव्रताच्या प्रादेशिक अभ्यासात किनारी महाराष्ट्रात ज्येष्ठा गौरीचे प्रतीक म्हणून गोटे, स्थानिक वनस्पती, फुलझाडे किंवा मुखवटे वापरले जात असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-महाराष्ट्र">Redij, Tanashree. “Gauri Vrata in Maharashtra”. ''Sahapedia''. [https://www.sahapedia.org/gauri-vrata-maharashtra]</ref>
नैवेद्य, ओवसा, गौरीचे प्रतीक, पूजेची वेळ, विसर्जनाची पद्धत आणि उत्सवातील लोककलांचा सहभाग यांतही कुटुंबपरंपरेनुसार फरक पडतो. सिंधुदुर्गातील काही कुटुंबांच्या वर्णनात गौरीला विशिष्ट प्रकारचा मांसाहारी नैवेद्य देण्याची प्रथा नोंदली आहे; ही पद्धत तळकोकणातील काही कुटुंबांपुरती मर्यादित असल्याचेही त्याच वृत्तांतात स्पष्ट केले आहे.<ref name="महाराष्ट्रटाइम्स-सिंधुदुर्ग-गौरी-नैवेद्य-2023">“गौरी पूजनाची अनोखी प्रथा; गणपतीला शाकाहारी नैवेद्य तर गौरीला मांसाहारी नैवेद्यची प्रथा”. ''महाराष्ट्र टाइम्स'', 22 सप्टेंबर 2023. [https://maharashtratimes.com/maharashtra/sindhudurg/unique-practice-of-gauri-puja-offering-vegetarian-offerings-to-gauri/articleshow/103870326.cms]</ref>
अशा स्थानिक प्रथा लक्षात घेतल्यास कोकणातील गणपती–गौरी उत्सव एकाच रूढ पद्धतीने साजरा होत नसून विविध समाज, भौगोलिक परिसर आणि कुटुंबपरंपरांनुसार त्याची स्थानिक रूपे आढळतात. आगरी–कुणबी समाजातील गौरी–गणपती नृत्य, सोनकोळी समाजातील गौरीपूजेशी संबंधित सागरी अन्नपरंपरा, पालघरमधील काही आदिवासी समाजांतील ‘गावूर’ परंपरा आणि कुंकेरीसारख्या गावांतील स्वतंत्र कौटुंबिक उत्सवपद्धती यांमधून ही विविधता स्पष्ट होते.<ref name="महाराष्ट्र-उपप्रादेशिक-संस्कृती" /><ref name="Harad-Joglekar-2017" /><ref name="सकाळ-पालघर-गावूर-2024" /><ref name="कुंकेरी-ग्रामसर्वेक्षण-1961" />
या विविध स्थानिक रूपांमध्ये धार्मिक विधींसोबत लोककला, आहारपरंपरा, स्त्रियांचा सहभाग, स्थानिक वनस्पती, जलस्रोत आणि सामाजिक संबंध यांना वेगवेगळ्या प्रकारे स्थान मिळते. त्यामुळे कोकणातील गणपती–गौरी परंपरेचा अभ्यास करताना समाज, प्रदेश आणि कुटुंब यांच्या पातळीवरील भिन्नता लक्षात घेणे आवश्यक ठरते.<ref name="मराठीविश्वकोश-नृत्यनोंद" /><ref name="Harad-Joglekar-2017" /><ref name="सकाळ-पालघर-गावूर-2024" /><ref name="कुंकेरी-ग्रामसर्वेक्षण-1961" /><ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-महाराष्ट्र" />
== कोकणातील प्रादेशिक विविधता ==
कोकणातील गणपती–गौरी उत्सवाचे स्वरूप संपूर्ण प्रदेशात एकसारखे नाही. भौगोलिक परिसर, स्थानिक समाजरचना, कुटुंबपरंपरा आणि लोककलांच्या स्वरूपानुसार उत्सवाच्या पद्धतींमध्ये फरक आढळतो. पालघर परिसरातील काही आदिवासी समाजांची ‘गावूर’ परंपरा, रायगडातील आगरी–कुणबी समाजाशी संबंधित गौरी–गणपती नृत्य आणि रत्नागिरी व सिंधुदुर्गमधील विविध कौटुंबिक व लोककलात्मक प्रथा या प्रादेशिक विविधतेची उदाहरणे आहेत.<ref name="महाराष्ट्र-उपप्रादेशिक-संस्कृती"/><ref name="सकाळ-पालघर-गावूर-2024"/>
=== पालघर आणि उत्तर कोकण ===
पालघर परिसरातील काही आदिवासी समाजांमध्ये गौरीशी संबंधित स्थानिक परंपरा आढळतात. डहाणू, विक्रमगड, पालघर आणि वाडा परिसरातील काही आदिवासी समुदाय गौरीला ‘गावूर’ किंवा ‘गावर’ या नावाने संबोधतात. या परंपरेत इंदावी वेलीची फुले, कळ्या आणि पाने यांचा वापर करून गौरीचे प्रतीक तयार केले जाते. घराची स्वच्छता, शेण-मातीने सारवणे, तांदळाच्या पिठाने हातांचे ठसे उमटवणे आणि महिलांकडून औक्षण करणे अशा पद्धतींचाही उल्लेख आहे.<ref name="सकाळ-पालघर-गावूर-2024" />
गावूरच्या तयारीत पुरुष इंदावीची फुले आणतात आणि महिलांकडून त्यांचे औक्षण केले जाते. त्यानंतर इंदावीची फुले व पाने नव्या सुपात ठेवून ती घरात आणली जातात. त्यामुळे या स्थानिक परंपरेत धार्मिक विधी, स्त्रियांचा सहभाग आणि स्थानिक वनस्पती यांचा परस्परसंबंध दिसतो.<ref name="सकाळ-पालघर-गावूर-2024" />
‘गावूर’ परंपरेचा उल्लेख उपलब्ध स्रोतांमध्ये विशिष्ट स्थानिक आदिवासी समुदायांच्या संदर्भात आहे. त्यामुळे तिला संपूर्ण पालघर जिल्ह्यातील किंवा उत्तर कोकणातील सर्व समाजांची समान गणपती–गौरी परंपरा मानणे योग्य ठरणार नाही.<ref name="सकाळ-पालघर-गावूर-2024" />
=== रायगड ===
रायगड जिल्ह्यातील गणपती–गौरी परंपरेत आगरी–कुणबी समाजाशी संबंधित लोकनृत्याचा उल्लेख आढळतो. महाराष्ट्र शासनाच्या सांस्कृतिक संदर्भग्रंथात आगरी आणि कुणबी समाजांचे गौरी–गणपती नृत्य हे कोकणातील वैशिष्ट्यपूर्ण लोकनृत्यांपैकी एक म्हणून नोंदविले आहे.<ref name="महाराष्ट्र-उपप्रादेशिक-संस्कृती" />
रायगड जिल्ह्यातील चेऊल परिसरात गौरी–गणपतीच्या नृत्यपरंपरेला ‘चेऊली नाच’ असे म्हटले जाते. महाराष्ट्र शासनाच्या नोंदीनुसार हे नृत्य कुणबी समाजात विशेषत्वाने आढळते आणि इतर समाजांतील लोकही त्यात सहभागी होतात. या नृत्याला ‘जाखडी’ असेही संबोधले जाते.<ref name="महाराष्ट्र-भूमीआणिलोक-प्रयोगकलागॅझेटिअर"/>
रायगड आणि दक्षिण कोकणातील काही भागांत गौरीपूजेशी संबंधित ओवसा आणि सुपाच्या प्रथाही आढळतात. गौरीपूजेवरील नोंदीनुसार अलिबाग तसेच त्याच्या दक्षिणेकडील रायगड, रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग परिसरात सुपे ओवसण्याची प्रथा आढळते.<ref name="लोकसत्ता-गौरी-आवाहन-2019">“जाणून घ्या गौरी आवाहनाची परंपरा”. ''लोकसत्ता'', 2019. [https://www.loksatta.com/maharashtra/know-all-details-about-gauri-pujan-sas-89-1964766/]</ref>
रायगड जिल्ह्यातील काही गावांमध्ये गणपती उत्सवाच्या स्वतंत्र सामुदायिक पद्धतींची उदाहरणेही आढळतात. माणगाव तालुक्यातील साळे गावात ‘एक गाव, एक गणपती’ या स्वरूपाची परंपरा जपली जात असल्याचे वृत्तांतात नमूद केले आहे. हे उदाहरण विशिष्ट गावाच्या परंपरेचे असून संपूर्ण रायगड जिल्ह्याची सार्वत्रिक पद्धत म्हणून त्याचा अर्थ घेता येत नाही.<ref name="महाराष्ट्रटाइम्स-रायगड-एकगावएकगणपती">“एक गाव, एक गणपती, एक गणेशोत्सव, महाराष्ट्रातील ‘या’ गावात अनोखी परंपरा”. ''महाराष्ट्र टाइम्स''. [https://maharashtratimes.com/maharashtra/raigad/raigad-mangaon-taluka-sale-village-one-village-one-ganpati-unique-tradition/articleshow/103857578.cms]</ref>
=== रत्नागिरी ===
रत्नागिरी जिल्ह्यात गौरी–गणपती हा प्रमुख सण असून गणेशोत्सवाशी संबंधित घरगुती पूजा, आरती, भजने आणि लोककलांना स्थान आहे. जिल्ह्याच्या सांस्कृतिक संदर्भांमध्ये जाखडीसह विविध पारंपरिक कलाप्रकारांचा उल्लेख आढळतो.<ref name="Vishwakosh-Ratnagiri-District"/><ref name="पावस-लोकसंस्कृती">“ऐतिहासिक व सांस्कृतिक वारसा”. ''ग्रामपंचायत पावस, रत्नागिरी''. [https://gppawas.com/historical-and-cultural-heritage/]</ref>
रत्नागिरीतील गणपती उत्सवात जाखडी, भजन आणि आरती यांसारख्या धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमांचे आयोजन विविध स्थानिक संदर्भांत आढळते. जाखडीमध्ये गायन, नृत्य आणि वादन यांचा समावेश असून गणेशोत्सवाच्या काळात तिचे सादरीकरण केले जाते.<ref name="सकाळ-जाखडी-2024"/>
रत्नागिरीतील उत्सवपरंपरेत चाकरमान्यांच्या आगमनालाही महत्त्व आहे. गणपती–गौरीच्या निमित्ताने मुंबईहून मूळ गावी परतणारे चाकरमानी घरगुती आणि सामाजिक उत्सवात सहभागी होतात.<ref name="Vishwakosh-Ratnagiri-District" />
=== सिंधुदुर्ग आणि दक्षिण कोकण ===
सिंधुदुर्ग जिल्ह्यात गौरी–गणपती हा प्रमुख सण असून गणेशोत्सवात भजने आणि फुगड्यांचे कार्यक्रम होतात. जिल्ह्याच्या मराठी विश्वकोशातील नोंदीनुसार मुंबईहून चाकरमानी या सणासाठी जिल्ह्यात परततात.<ref name="मराठीविश्वकोश-सिंधुदुर्ग-जिल्हा">“सिंधुदुर्ग जिल्हा”. ''मराठी विश्वकोश'', महाराष्ट्र राज्य मराठी विश्वकोश निर्मिती मंडळ. [https://vishwakosh.marathi.gov.in/25774/] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20260510110431/https://vishwakosh.marathi.gov.in/25774/ |date=2026-05-10 }}</ref>
सिंधुदुर्गच्या लोकसंस्कृतीत दशावतारासह विविध स्थानिक कलापरंपरांना स्थान आहे. जिल्हा परिषद सिंधुदुर्गाच्या माहितीनुसार दशावतार ही जिल्ह्याची विशेष लोककला असून स्थानिक ग्रामदेवता, जत्रा आणि उत्सवांनाही सांस्कृतिक महत्त्व आहे.<ref name="जिप-सिंधुदुर्ग-सांस्कृतिकवारसा">“सिंधुदुर्ग जिल्ह्याचे सांस्कृतिक महत्त्व”. ''जिल्हा परिषद सिंधुदुर्ग''. [https://www.zpsindhudurg.maharashtra.gov.in/aboutsindhu.php] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20260906195657/https://www.zpsindhudurg.maharashtra.gov.in/aboutsindhu.php |date=2026-09-06 }}</ref>
सिंधुदुर्गातील गौरीपूजेत काही स्थानिक कौटुंबिक प्रथांना विशेष महत्त्व आहे. काही कुटुंबांच्या वर्णनात गौरीला माहेरवाशिणीचे रूप मानून तिचे स्वागत करण्याची पद्धत तसेच गणपतीला शाकाहारी आणि गौरीला मांसाहारी नैवेद्य देण्याची प्रथा नोंदली आहे. ही पद्धत विशिष्ट कुटुंबे किंवा परिसरांपुरती मर्यादित असल्याने ती संपूर्ण सिंधुदुर्गाची किंवा दक्षिण कोकणाची सार्वत्रिक परंपरा मानता येत नाही.<ref name="महाराष्ट्रटाइम्स-सिंधुदुर्ग-गौरी-नैवेद्य-2023"/>
रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग या दक्षिण कोकणातील जिल्ह्यांमध्ये गणपती–गौरी उत्सवाच्या समान धार्मिक चौकटीसोबत स्थानिक लोककला आणि कौटुंबिक प्रथांची वेगवेगळी रूपे आढळतात. त्यामुळे दक्षिण कोकणातील उत्सवपरंपरेचा विचार करताना जिल्हानिहाय आणि स्थानिक भिन्नता लक्षात घेणे आवश्यक ठरते.<ref name="Vishwakosh-Ratnagiri-District" /><ref name="मराठीविश्वकोश-सिंधुदुर्ग-जिल्हा" /><ref name="सकाळ-कोकणातील-लोककला-2023">पाटील, डॉ. विकास. “कोकणातील लोककला”. ''सकाळ'', 16 ऑगस्ट 2023. [https://www.esakal.com/kokan/todays-latest-marathi-news-kop23a97173-txt-ratnagiri-today-20230816105619]</ref>
=== गावागावांतील आणि कुटुंबागणिक फरक ===
कोकणातील प्रादेशिक विविधता जिल्ह्यांच्या सीमांपुरती मर्यादित नसून गावागावांत आणि कुटुंबांमध्येही उत्सवाच्या पद्धतींमध्ये फरक आढळतो. गौरीचे प्रतीक म्हणून मूर्ती, मुखवटा, गोटे किंवा वनस्पती यांपैकी काय वापरायचे, नैवेद्य कोणता असावा, ओवसा कसा भरायचा आणि विसर्जनाची पद्धत कोणती असावी, यांत स्थानिक परंपरेनुसार बदल दिसतात.<ref name="लोकसत्ता-गौरी-आवाहन-2019" /><ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-महाराष्ट्र"/>
काही गावांमध्ये घरगुती गणपतीची परंपरा प्रमुख असते, तर काही ठिकाणी सामुदायिक स्वरूपाच्या उत्सवपद्धती आढळतात. कुंकेरीच्या १९६१ च्या ग्रामसर्वेक्षणात गणपती आणि गौरीचा उत्सव घरगुती पद्धतीने साजरा होत असल्याची नोंद आहे, तर रायगडातील साळे गावात ‘एक गाव, एक गणपती’ अशी स्वतंत्र सामुदायिक परंपरा नोंदली गेली आहे. ही दोन्ही उदाहरणे स्थानिक उत्सवपद्धतींतील फरक स्पष्ट करतात.<ref name="कुंकेरी-ग्रामसर्वेक्षण-1961"/><ref name="महाराष्ट्रटाइम्स-रायगड-एकगावएकगणपती" />
कुटुंबपरंपरेनुसार गौरीच्या पूजेतील साहित्य, नैवेद्य आणि धार्मिक संकेतही बदलू शकतात. सिंधुदुर्गातील काही कुटुंबांतील विशिष्ट नैवेद्यपरंपरा आणि पालघरमधील काही आदिवासी समाजांतील वनस्पतीआधारित ‘गावूर’ परंपरा यांतून या कौटुंबिक आणि स्थानिक विविधतेची वेगवेगळी रूपे दिसतात.<ref name="महाराष्ट्रटाइम्स-सिंधुदुर्ग-गौरी-नैवेद्य-2023" /><ref name="सकाळ-पालघर-गावूर-2024" />
म्हणून कोकणातील गणपती–गौरी परंपरेचे स्वरूप मांडताना एखाद्या गावातील किंवा कुटुंबातील प्रथा संपूर्ण कोकणाची प्रथा म्हणून मांडणे टाळणे आवश्यक आहे. उपलब्ध नोंदींवरून ही परंपरा प्रादेशिक, सामाजिक आणि कौटुंबिक पातळ्यांवर विविध रूपांत आढळते.<ref name="सकाळ-कोकणातील-लोककला-2023" /><ref name="लोकसत्ता-गौरी-आवाहन-2019" /><ref name="कुंकेरी-ग्रामसर्वेक्षण-1961" />
== गणपती–गौरीचे विसर्जन ==
=== विसर्जनाची धार्मिक परंपरा ===
गणपती–गौरी उत्सवातील पूजाविधींच्या समाप्तीनंतर गणपती आणि गौरीच्या प्रतीकांचे विसर्जन केले जाते. गणपतीची मूर्ती उत्सवाच्या कालावधीनुसार नदी, तलाव, समुद्र किंवा अन्य जलस्रोताकडे नेऊन विसर्जित करण्याची पद्धत आढळते. गौरीचे विसर्जन मात्र तिच्या प्रतीकाच्या स्वरूपानुसार आणि स्थानिक पूजापद्धतीनुसार वेगवेगळ्या प्रकारे केले जाते.<ref name="महाराष्ट्रपर्यटन-गौरीआगमन">“गौरी आगमन”. ''महाराष्ट्र पर्यटन'', महाराष्ट्र शासन. [https://maharashtratourism.gov.in/mr/festivals/%E0%A4%97%E0%A5%8C%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%97%E0%A4%AE%E0%A4%A8/]</ref>
कोकणातील काही परंपरांमध्ये गौरीचे आवाहन ज्या जलस्रोताजवळ केले जाते, त्याच ठिकाणी तिचे विसर्जन करण्याची पद्धत आढळते. काही ठिकाणी गणपती आणि गौरी यांचे विसर्जन एकाच जलस्रोतावर केले जाते, तर काही ठिकाणी दोन्हींसाठी स्वतंत्र ठिकाणे वापरली जातात.<ref name="दापोली-गणेशोत्सव-गौरीपूजन-ओवसा">“कोकणातील गणेशोत्सव, गौरीपूजन आणि ओवसा”. ''दापोली तालुका''. [https://talukadapoli.com/festivals/ganeshotsav-gauri-pujan-information/]</ref>
=== गणपतीचे विसर्जन ===
गणपतीच्या विसर्जनापूर्वी घरातील पूजाविधी, आरती आणि नैवेद्य पूर्ण करून गणपतीची मूर्ती विसर्जनस्थळी नेली जाते. विसर्जनाचा दिवस गणेशोत्सवाच्या कालावधीनुसार बदलतो. महाराष्ट्रातील कुटुंबपरंपरांमध्ये गणपतीचा उत्सव दीड दिवसांपासून अनंत चतुर्दशीपर्यंत विविध कालावधींचा असू शकतो.<ref name="महाराष्ट्र-भूमीआणिलोक-धार्मिकपंथ"/>
२०२५ मधील सिंधुदुर्गातील वृत्तांतात दीड दिवसांचा गणेशोत्सव आटोपल्यानंतर चाकरमानी परतीच्या प्रवासाला लागल्याचे नमूद केले आहे. त्याआधी गणपतीचे विसर्जन झाले होते.<ref name="पुढारी-सिंधुदुर्ग-दीडदिवस-विसर्जन-2025">“दीड दिवसाचा गणेशोत्सव आटोपून चाकरमानी परतीच्या प्रवासाला!”. ''पुढारी'', 30 ऑगस्ट 2025. [https://pudhari.news/maharashtra/kokan/sindhudurg/ganesh-chaturthi-visarjan-one-and-half-day-festival-konkan-devotees-return-sp96]</ref>
गणपतीच्या विसर्जनाची मिरवणूक काही ठिकाणी गावातून जलस्रोतापर्यंत काढली जाते. दापोली तालुक्यातील गावतळे येथे गणपती विसर्जनासाठी गावातून मिरवणूक निघून निसर्गनिर्मित तळ्यापर्यंत गेल्याची नोंद आहे. या मिरवणुकीत जाखडी नृत्य, गण, गौळण आणि पद यांचे सादरीकरण झाले आणि त्यानंतर दोन वाड्यांतील गणपतींचे विसर्जन करण्यात आले.<ref name="सकाळ-गावतळे-जाखडी-2024"/>
=== गौरीचे विसर्जन ===
गौरीचे विसर्जन तिच्या पूजेसाठी वापरलेल्या प्रतीकानुसार बदलते. कोकणातील काही ठिकाणी गौरीचे प्रतीक म्हणून गोटे, स्थानिक वनस्पती किंवा मुखवटे वापरले जातात. या प्रतीकांचे पूजन केल्यानंतर स्थानिक प्रथेनुसार त्यांचे विसर्जन केले जाते.<ref name="एबीपी-गौरीआगमन-2017">“कोकणासह राज्यभरात गौरीचं जल्लोषात आगमन”. ''एबीपी माझा'', 2017. [https://marathi.abplive.com/news/maharashtra/ratnagiri-arrival-of-goddess-gauri-in-homes-today-449946]</ref><ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-विधी"/>
स्थानिक परंपरेनुसार गौरीचे विसर्जन गणपतीपेक्षा वेगळ्या पद्धतीनेही केले जाते. दापोली परिसराच्या वर्णनात पाणवठ्यावरून गौरीची प्रतीके आणण्याची आणि अनेक ठिकाणी त्याच पाणवठ्यावर गौरीचे विसर्जन करण्याची पद्धत नोंदली आहे. काही ठिकाणी गणपतीच्या विसर्जनस्थळीच गौरीचे विसर्जन केले जाते, तर काही ठिकाणी पुरुष गणपतीच्या विसर्जनासाठी नदीवर जातात आणि सुवासिनी स्त्रिया स्वतंत्रपणे पाणवठ्यावर गौरीचे विसर्जन करतात.<ref name="दापोली-गणेशोत्सव-गौरीपूजन-ओवसा" />
किनारी महाराष्ट्रातील गौरीव्रताच्या नोंदीनुसार गोटे किंवा स्थानिक वनस्पती गौरीचे प्रतीक म्हणून वापरल्या जातात आणि पूजेनंतर त्यांचे जलस्रोतामध्ये विसर्जन केले जाते. त्यामुळे गौरीच्या प्रतीकाचे स्वरूप आणि विसर्जनाची पद्धत यांचा परस्पर संबंध दिसतो.<ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-विधी" />
=== नदी, समुद्र आणि इतर जलस्रोत ===
कोकणातील गौरीपूजेच्या काही पद्धतींमध्ये नदी, विहीर, तळे किंवा गावातील पारंपरिक पाणवठा यांना महत्त्व आहे. गौरीचे आवाहन करण्यासाठी स्त्रिया पाणवठ्यावर जातात आणि तेथील धार्मिक विधी केल्यानंतर गौरीचे प्रतीक घरी आणतात.<ref name="एबीपी-गौरीआगमन-2017" />
गौरीचे विसर्जनही काही ठिकाणी त्याच जलस्रोताशी जोडलेले असते. दापोली परिसरातील वर्णनानुसार ज्या पाणवठ्यावरून गौरी आणली जाते, त्याच पाणवठ्यावर तिचे विसर्जन करण्याची पद्धत अनेक ठिकाणी आढळते. काही ठिकाणी स्थानिक उपलब्धतेनुसार नदी, विहीर किंवा तळे यांचा वापर केला जातो.<ref name="दापोली-गणेशोत्सव-गौरीपूजन-ओवसा" />
गणपतीच्या विसर्जनासाठीही स्थानिक उपलब्धतेनुसार विविध जलस्रोत वापरले जातात. गावतळे येथील नोंदीनुसार गावातील गणपतींचे विसर्जन निसर्गनिर्मित तळ्यात करण्यात आले. या उदाहरणावरून विसर्जनस्थळाची निवड स्थानिक भौगोलिक परिस्थितीशी संबंधित असल्याचे दिसते.<ref name="सकाळ-गावतळे-जाखडी-2024" />
=== सामूहिक विसर्जन आणि मिरवणूक ===
गणपतीच्या विसर्जनाला काही ठिकाणी सामूहिक स्वरूप प्राप्त होते. घरातील गणपतीची मूर्ती कुटुंबीय आणि गावातील इतर व्यक्तींच्या सहभागाने मिरवणुकीत नेली जाते. या वेळी आरती, भजन, वाद्ये आणि लोकनृत्यांचा समावेश होऊ शकतो. दापोली तालुक्यातील गावतळे येथील विसर्जन मिरवणुकीत जाखडी नृत्य, गण, गौळण आणि पद यांचे सादरीकरण झाल्याची नोंद आहे.<ref name="सकाळ-गावतळे-जाखडी-2024" />
गावतळे येथील उदाहरणात हनुमानवाडी आणि दत्तवाडी या दोन्ही वाड्यांतील गणपती मिरवणुकीनंतर एकाच निसर्गनिर्मित तळ्यात विसर्जित करण्यात आले. त्यामुळे त्या स्थानिक उदाहरणात धार्मिक विधीबरोबर वाडीस्तरीय सामुदायिक सहभागही दिसून येतो.<ref name="सकाळ-गावतळे-जाखडी-2024" />
गौरीच्या विसर्जनात काही ठिकाणी स्त्रियांचा सहभाग अधिक स्पष्टपणे दिसतो. पाणवठ्यावर गौरीचे विसर्जन करण्याच्या पद्धतीत सुवासिनी स्त्रिया स्वतंत्रपणे सहभागी होतात, अशी नोंद दापोली परिसरातील वर्णनात आहे.<ref name="दापोली-गणेशोत्सव-गौरीपूजन-ओवसा" />
=== आगमनापासून विसर्जनापर्यंतचा सामूहिक सोहळा ===
गणपती–गौरी उत्सवात आगमन, स्थापना, पूजा, आरती, नैवेद्य, लोककला आणि विसर्जन हे परस्परांशी जोडलेले विविध टप्पे आहेत. गणपतीच्या आगमनाच्या काळात चाकरमानी मूळ गावी परततात, उत्सवादरम्यान घराघरांत पूजा आणि सामूहिक कार्यक्रम होतात आणि काही ठिकाणी विसर्जनासाठी मिरवणुकीने जलस्रोताकडे जाण्याची पद्धत आढळते.<ref name="Vishwakosh-Ratnagiri-District" /><ref name="Sakal-Ratnagiri-Aartya-2024" /><ref name="सकाळ-गावतळे-जाखडी-2024" />
गौरीच्या बाबतीतही जलस्रोताशी संबंधित आवाहनापासून विसर्जनापर्यंतची प्रक्रिया काही कोकणी परंपरांमध्ये सलग दिसते. पाणवठ्यावर किंवा नदीकाठी गौरीचे आवाहन करणे, तिचे प्रतीक घरी आणणे, त्याची पूजा करणे आणि पुन्हा जलस्रोताकडे नेऊन विसर्जन करणे, या प्रक्रियेत धार्मिक विधी आणि स्थानिक जलस्रोत यांचा संबंध दिसतो.<ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-विधी" /><ref name="दापोली-गणेशोत्सव-गौरीपूजन-ओवसा" />
विसर्जन काही गावांमध्ये धार्मिक विधीबरोबरच मिरवणूक, आरती, भजन, वादन आणि लोकनृत्य यांचा समावेश असलेला सामाजिक-सांस्कृतिक प्रसंग ठरतो. तथापि, विसर्जनाची तारीख, जलस्रोत, मिरवणुकीचे स्वरूप आणि गणपती–गौरीच्या स्वतंत्र किंवा संयुक्त विसर्जनाची पद्धत गाव, समाज आणि कुटुंबपरंपरेनुसार बदलते.<ref name="पुढारी-सिंधुदुर्ग-दीडदिवस-विसर्जन-2025" /><ref name="सकाळ-गावतळे-जाखडी-2024" /><ref name="दापोली-गणेशोत्सव-गौरीपूजन-ओवसा" />
== स्थानिक कारागिरी आणि वस्तुसंस्कृती ==
कोकणातील गणपती–गौरी उत्सवात धार्मिक विधींमध्ये वापरल्या जाणाऱ्या वस्तूंना स्थानिक कारागिरी आणि ग्रामीण वस्तुसंस्कृतीची जोड आढळते. गौरीचे मुखवटे व प्रतिमा, बांबूची सुपे, ओवशासाठी वापरल्या जाणाऱ्या वस्तू तसेच गणपतीच्या सजावटीसाठी वापरले जाणारे स्थानिक साहित्य यांचा उत्सवातील विधींशी संबंध आहे. काही स्थानिक परंपरांमध्ये या वस्तूंच्या निर्मितीत पारंपरिक हस्तकौशल्य आणि परिसरात उपलब्ध साहित्याचा वापर केला जातो.<ref name="दापोली-गणेशोत्सव-गौरीपूजन-ओवसा"/>
=== गौरीचे मुखवटे आणि प्रतिमा ===
कोकणातील काही घरांमध्ये गौरीची पूजा मुखवट्यांच्या किंवा अन्य प्रतीकात्मक रूपांच्या माध्यमातून केली जाते. महाराष्ट्रातील गौरीव्रताच्या प्रादेशिक नोंदींमध्ये गोट्यांची गौर, फुलांची गौर, तेरड्याची गौर आणि मुखवट्याची गौर अशी विविध रूपे नमूद केली आहेत. मुखवट्यांची परंपरा महाराष्ट्रातील काही भागांत आढळत असून मुखवट्यांसाठी लाकूड, माती, टेराकोटा आणि धातू यांसारख्या पदार्थांचा वापर झाल्याचे नोंदविले आहे.<ref name="रेडिज-गौरी-मुखवटे-2025">Redij, Tanashree. “महाराष्ट्रातील गौरी मुखवट्यांची परंपरा”. ''Shreshtha Maharashtra'', 30 ऑगस्ट 2025. [https://shreshthmaharashtra.com/festive/tradition-of-gauri-masks-in-maharashtra/]</ref>
कोकणातील काही जुन्या घरांमध्ये लाकडी मुखवट्यांचा वापर केला जात असल्याची स्थानिक नोंद आढळते. अशा मुखवट्यांवर कोरीवकाम आणि रंगकाम केले जाते. काही ठिकाणी मुखवट्यांची दरवर्षी रंगरंगोटी करून पुनर्वापर करण्याची पद्धत असल्याचेही नमूद केले आहे.<ref name="दापोली-गणेशोत्सव-गौरीपूजन-ओवसा" />
काही परंपरांमध्ये गौरीच्या मुखवट्याला साडी, दागिने आणि इतर अलंकारांनी सजवून तिचे पूजनीय रूप तयार केले जाते. त्यामुळे गौरीची प्रतिमा ही केवळ मुखवट्यापुरती मर्यादित न राहता वस्त्र, अलंकार आणि घरातील सजावटीच्या घटकांशीही जोडली जाते.<ref name="दापोली-गणेशोत्सव-गौरीपूजन-ओवसा" /><ref name="रेडिज-गौरी-मुखवटे-2025" />
=== बांबूची सुपे आणि ओवसा ===
कोकणातील काही भागांत गौरीपूजेतील ओवसा या परंपरेत बांबूच्या सुपांना महत्त्व आहे. ओवशासाठी विविध वस्तू सुपात मांडून त्या गौरीसमोर ठेवण्याची पद्धत आढळते. नववधूच्या पहिल्या ओवशाशीही सुपांचा संबंध असल्याचे स्थानिक वृत्तांतांत नमूद केले आहे.<ref name="सकाळ-संगमेश्वर-ओवसा-2024"/>
बांबूच्या सुपांची निर्मिती हे पारंपरिक वळपकामाशी संबंधित हस्तकौशल्य आहे. संगमेश्वर तालुक्यातील शिवणे, तेरेये आणि बुरंबी या गावांमध्ये बांबूचे वळपकाम करणारे कारागीर असल्याची नोंद आहे. ओवशासाठी लागणारी सूपे तयार करण्याच्या कामाला उत्सवकाळात मागणी मिळते.<ref name="सकाळ-संगमेश्वर-ओवसा-2024" />
गौरीपूजनाच्या काळात बांबूच्या सुपांना स्थानिक बाजारपेठेत मागणी वाढते. पोलादपूर परिसरातील २०२४ च्या वृत्तांतात गौरीच्या ओवशासाठी मोठ्या प्रमाणात सुपांची विक्री झाल्याचे आणि या मागणीचा बुरूड कारागिरांच्या व्यवसायावर परिणाम झाल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="अॅग्रोवन-बांबू-सूप-2024"/>
=== स्थानिक कारागीर ===
गौरी–गणपती उत्सवाशी संबंधित वस्तू तयार करणाऱ्या कारागिरांमध्ये बांबूचे वळपकाम करणारे कारागीर, गौरीचे मुखवटे तयार करणारे कारागीर तसेच गणपतीच्या मूर्ती आणि सजावटीचे साहित्य तयार करणारे कारागीर यांचा समावेश होतो. उत्सवाच्या काळात अशा वस्तूंना मागणी निर्माण होते.<ref name="सकाळ-संगमेश्वर-ओवसा-2024" /><ref name="अॅग्रोवन-बांबू-सूप-2024" />
संगमेश्वर परिसरातील वळपकामाच्या संदर्भात स्थानिक वृत्तांतात या व्यवसायाकडे नवीन पिढीचे लक्ष कमी होत असल्याचे नमूद केले आहे. त्याच वेळी गौरीच्या ओवशासाठी सुपांना मिळणारी हंगामी मागणी या कारागिरांच्या व्यवसायाला आधार देते.<ref name="सकाळ-संगमेश्वर-ओवसा-2024" />
सिंधुदुर्गातील एका वृत्तांतात ओवसा पूजनासाठी आवश्यक वस्तूंच्या निर्मिती आणि विक्रीशी संबंधित स्थानिक कारागिरीचे वर्णन आढळते. अशा वस्तूंना उत्सवकाळात मागणी निर्माण होत असल्याने धार्मिक परंपरा आणि स्थानिक कारागिरी यांचा परस्परसंबंध दिसून येतो.<ref name="पुढारी-सिंधुदुर्ग-ओवसा-कारागीर-2025">“ग्रामीण भागात ‘ओवसा पूजन’ तयारीची लगबग”. ''पुढारी'', 2025. [https://pudhari.news/maharashtra/kokan/sindhudurg/ganesh-chaturthi-ovasa-puja-rural-traditions-maharashtra-sp96]</ref>
=== ग्रामीण हस्तकला ===
कोकणातील गणपती उत्सवाच्या काही पारंपरिक सजावटींमध्ये स्थानिक आणि नैसर्गिक साहित्याचा वापर केला जातो. माटवी किंवा मंडपी सजवताना रानफुले, वेली, नारळ, सुपारी, फळे आणि परिसरात उपलब्ध असलेल्या वनस्पतींचा वापर केल्याची नोंद आहे. काही पारंपरिक गणेशोत्सवांच्या वर्णनात मखराच्या सजावटीत अशा स्थानिक साहित्याचा उपयोग झाल्याचे आढळते.<ref name="फ्रीप्रेस-कोकणचा-गणपती">“‘कोकणचो गणपती’ पर्यटन नकाशार कधी झळकतलो?”. ''Free Press Journal Marathi''. [https://marathi.freepressjournal.in/aksharrang/konkan-ganesh-festival-cultural-tourism]</ref>
गौरीच्या प्रतिमा आणि मुखवटे तयार करण्यासाठीही विविध पदार्थांचा वापर केला जातो. महाराष्ट्रातील गौरीमुखवट्यांच्या परंपरेवरील नोंदीनुसार लाकूड, माती, टेराकोटा आणि धातू यांसारख्या पदार्थांपासून मुखवटे तयार केले जातात.<ref name="रेडिज-गौरी-मुखवटे-2025" />
बांबू, लाकूड, माती आणि स्थानिक वनस्पती यांसारख्या साहित्याचा उत्सवातील वापर धार्मिक विधी आणि घरसजावटीशी संबंधित आहे. या वापरातून स्थानिक वस्तू, हस्तकौशल्य आणि उत्सवी विधी यांच्यातील संबंध स्पष्ट होतो.<ref name="दापोली-गणेशोत्सव-गौरीपूजन-ओवसा" /><ref name="फ्रीप्रेस-कोकणचा-गणपती" />
=== परंपरा आणि बदलते बाजाररूप ===
पारंपरिक वस्तूंना उत्सवाच्या काळात मागणी मिळत असल्याचे विविध स्थानिक वृत्तांतांत दिसून येते. बांबूच्या सुपांना गौरीच्या ओवशासाठी मागणी असल्याने त्यांचे उत्पादन आणि विक्री उत्सवाच्या काळात वाढते.<ref name="अॅग्रोवन-बांबू-सूप-2024" />
संगमेश्वर परिसरातील नोंदीनुसार ओवशाच्या सुपांना मिळणारी मागणी पारंपरिक वळपकाम करणाऱ्या कारागिरांसाठी हंगामी व्यवसायाची संधी निर्माण करते. त्याच वृत्तांतात या पारंपरिक कौशल्याकडे नवीन पिढीचे आकर्षण कमी होत असल्याचेही नमूद केले आहे. त्यामुळे उत्सवामुळे वस्तूंना मागणी मिळत असली तरी कारागिरीच्या सातत्याचा प्रश्न स्वतंत्रपणे उपस्थित होतो.<ref name="सकाळ-संगमेश्वर-ओवसा-2024" />
बांबूच्या पारंपरिक सुपांसोबत आधुनिक पर्यायांचाही वापर काही ठिकाणी होत असल्याचे स्थानिक नोंदींत दिसते. त्यामुळे उत्सवातील वस्तुसंस्कृतीत पारंपरिक हस्तनिर्मित वस्तू आणि बाजारातून उपलब्ध होणारे पर्याय एकत्र आढळतात.<ref name="सकाळ-मंडणगड-गौराई-2025"/>
गणपतीच्या सजावटीच्या बाबतीतही पारंपरिक साहित्याबरोबर आधुनिक सजावट, तयार मखरे आणि प्रकाशयोजना यांचा वापर वाढल्याचे अलीकडील वृत्तांतांत दिसते. त्याच वेळी काही घरांमध्ये स्थानिक साहित्य, रानफुले आणि वेलींच्या साहाय्याने पारंपरिक सजावट करण्याची पद्धत टिकून आहे.<ref name="फ्रीप्रेस-कोकणचा-गणपती" /><ref name="सकाळ-गौरीगणपती-मॉडर्नटच-2025">परशेट्ये, सिद्धेश. “पारंपरिक गणेशोत्सवाला मॉडर्न टच”. ''सकाळ'', 16 ऑगस्ट 2025. [https://www.esakal.com/kokan/todays-latest-marathi-news-kop25d19798-txt-ratnagiri-20250816110903]</ref>
अशा प्रकारे गणपती–गौरी उत्सवाशी संबंधित वस्तुसंस्कृतीत धार्मिक गरजा, स्थानिक हस्तकौशल्य आणि बदलती बाजारपेठ यांचा संबंध दिसतो. बांबूची सूपे आणि इतर पारंपरिक वस्तूंना उत्सवकाळात मिळणारी मागणी स्थानिक कारागिरीला हंगामी आधार देते; त्याच वेळी आधुनिक पर्याय आणि बदलते ग्राहकवर्तन या वस्तूंच्या वापराचे स्वरूप बदलत आहे.<ref name="अॅग्रोवन-बांबू-सूप-2024" /><ref name="सकाळ-संगमेश्वर-ओवसा-2024" /><ref name="सकाळ-गौरीगणपती-मॉडर्नटच-2025" />
== लोकविश्वास आणि कथनपरंपरा ==
कोकणातील गणपती–गौरी परंपरेत धार्मिक विधींबरोबरच लोकविश्वास, कौटुंबिक समजुती आणि मौखिक कथनपरंपरांनाही स्थान आहे. या विश्वासांचे स्वरूप गाव, समाज, कुटुंब आणि स्थानिक धार्मिक परंपरेनुसार बदलते. गौरीव्रताशी संबंधित कथांमध्ये देवीचे स्वरूप, तिचे आगमन, पूजेच्या पद्धती आणि नैवेद्य यांविषयी विविध धार्मिक समजुती आढळतात. गणपतीशी संबंधित स्थानिक परंपरांमध्येही विशिष्ट देवस्थान, गाव किंवा कुटुंबाशी निगडित श्रद्धा आणि आख्यायिका आढळतात.<ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-परिचय">Redij, Tanashree. “Gaurī Vrata: An Introduction”. ''Sahapedia''. [https://www.sahapedia.org/gaur%C4%AB-vrata-introduction]</ref><ref name="सकाळ-कोकणातील-देवांच्या-कथा-2023">“पुरवणी लेख-कोकणातील देवांच्या कथा”. ''सकाळ'', 7 मे 2023. [https://www.esakal.com/kokan/todays-latest-marathi-news-kop23a66368-txt-ratnagiri-today-20230507041701]</ref>
=== गौरीविषयक लोकविश्वास ===
कोकणातील गौरीव्रताच्या परंपरेत ज्येष्ठा गौरीला गणपतीशी संबंधित देवी मानले जाते. किनारी महाराष्ट्रातील काही परंपरांमध्ये गौरीचे आगमन गणपतीच्या उत्सवाच्या काळात होते आणि तिला घरात आदराने आणून तिचे पूजन केले जाते. काही स्थानिक कथनांमध्ये गौरीचे माहेरवाशीण किंवा कुटुंबातील सन्माननीय पाहुणीप्रमाणे स्वागत केले जाते. त्यामुळे तिचे आगमन, भोजन आणि विसर्जन यांना कौटुंबिक संदर्भ प्राप्त होतो.<ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-परिचय" /><ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-कथनपरंपरा">Redij, Tanashree. “Narratives of Gaurī Vrata”. ''Sahapedia''. [https://www.sahapedia.org/narratives-of-gaur%C4%AB-vrata]</ref>
कोकणातील गौरीच्या प्रतीकात्मक स्वरूपातही विविधता आढळते. नदी, विहीर, तलाव किंवा अन्य जलस्रोतांमधून आणलेले गोटे, स्थानिक वनस्पती किंवा फुलझाडे यांना काही परंपरांमध्ये गौरीचे प्रतीक मानले जाते. काही ठिकाणी मुखवट्याच्या रूपात तिची स्थापना केली जाते. त्यामुळे गौरीची प्रतिमा किंवा प्रतीक स्थानिक परंपरेनुसार बदलते.<ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-विधी"/><ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-महाराष्ट्र"/>
काही किनारी परंपरांमध्ये गौरीव्रताच्या काळातील नैवेद्य आणि त्यांच्याशी संबंधित कथनांनाही महत्त्व आहे. घावनघाटले आणि खीर यांसारख्या पदार्थांचा उल्लेख गौरीव्रताच्या स्थानिक कथनपरंपरेत आढळतो. त्यामुळे नैवेद्य हा काही ठिकाणी केवळ आहाराचा भाग न राहता धार्मिक कथन आणि पूजाविधीशी जोडलेला घटक ठरतो.<ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-विधी" /><ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-कथनपरंपरा" />
=== गौरीविषयक आख्यायिका ===
गौरीव्रताशी संबंधित कथा प्रामुख्याने मौखिक स्वरूपाच्या आहेत. तानश्री रेडिज यांच्या अभ्यासानुसार अशा व्रतकथांचा विशिष्ट लेखक निश्चित करता येत नाही. त्या मौखिक परंपरेतून पुढे आल्यामुळे त्यांच्या मूळ निर्मितीचा निश्चित काल किंवा एकमेव स्रोत ठरवणे कठीण आहे. या कथांमधून व्रताशी संबंधित धार्मिक आचार, संकेत आणि श्रद्धांचे स्पष्टीकरण केले जाते.<ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-कथनपरंपरा" />
किनारी महाराष्ट्रात सांगितल्या जाणाऱ्या एका कथेत एका गरीब ब्राह्मणाच्या घरी आलेली वृद्ध स्त्री पुढे ज्येष्ठा गौरी असल्याचे उघड होते. तिच्या आगमनानंतर कुटुंबाला समृद्धी प्राप्त होते आणि ती गौरीव्रताची पद्धत सांगते. नदीकाठून गोटे आणणे, त्यांची पूजा करणे, विशिष्ट नैवेद्य अर्पण करणे आणि तिसऱ्या दिवशी त्या गोट्यांचे विसर्जन करणे अशा प्रथा या कथनाशी जोडल्या आहेत.<ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-कथनपरंपरा" />
अशा कथांचा उपयोग गौरीव्रताशी संबंधित धार्मिक आचार आणि संकेतांचे स्पष्टीकरण करण्यासाठी केला जातो. मात्र या कथांना ऐतिहासिक घटना म्हणून ग्राह्य धरण्याऐवजी मौखिक परंपरा आणि लोकश्रद्धांचा भाग म्हणून पाहणे अधिक योग्य ठरते. त्यांचे महत्त्व धार्मिक स्मृती, लोकविश्वास आणि कथनपरंपरेच्या अभ्यासाच्या संदर्भात आहे.<ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-कथनपरंपरा" />
=== गणपतीशी संबंधित स्थानिक श्रद्धा ===
गणपतीशी संबंधित श्रद्धांमध्ये विघ्नहर्ता आणि शुभारंभाशी संबंधित धार्मिक प्रतिमा व्यापकपणे आढळते. त्यासोबत कोकणातील काही गावांमध्ये किंवा देवस्थानांमध्ये विशिष्ट गणपतीशी संबंधित स्थानिक श्रद्धा आणि आख्यायिका आढळतात. काही स्थानिक वृत्तांतांमध्ये विशिष्ट गणपती देवस्थानांशी संबंधित धार्मिक महत्त्व आणि स्थानिक श्रद्धांचा उल्लेख केला आहे.<ref name="सकाळ-कोकणातील-गणपती-मंदिरे-2023">“कोकणातील गणेशमंदिरे आणि मूर्ती विविधता”. ''सकाळ'', 3 मे 2023. [https://www.esakal.com/kokan/todays-latest-marathi-news-kop23a65486-txt-ratnagiri-today-20230503095415]</ref>
रायगड जिल्ह्यातील माणगाव तालुक्यातील साळे गावात घराघरांत गणपतीची प्रतिष्ठापना न करण्याची स्वतंत्र परंपरा आढळते. गावात गणपतीची प्रतिष्ठापना केल्यास अरिष्ट येते, अशी स्थानिक धारणा या परंपरेमागे असल्याचे वृत्तांतात नमूद केले आहे. हे उदाहरण स्थानिक धार्मिक श्रद्धा आणि गावाच्या उत्सवपरंपरेतील संबंध स्पष्ट करते; मात्र या धारणेचे सामान्यीकरण संपूर्ण रायगड किंवा कोकणासाठी करता येत नाही.<ref name="सकाळ-सालेगाव-गणपती-2023">“महाराष्ट्रात असं एक गाव आहे, तिथं कुणाच्याही घरी गणपती प्रतिष्ठापना होत नाही; काय आहे कारण?”. ''सकाळ'', 22 सप्टेंबर 2023. [https://www.esakal.com/ganesh-chaturti-festival/konkan-ganeshotsav-ganpati-installation-is-not-done-in-sale-village-mangaon-of-raigad-bam92]</ref>
गणपतीच्या पूजाविधीशी संबंधित कौटुंबिक परंपराही काही घरांमध्ये पिढ्यान्पिढ्या जपल्या जातात. रत्नागिरी जिल्ह्यातील साखरपा येथील एका वृत्तांतात गणपतीसमोर आरती करण्याची चार पिढ्यांची परंपरा नोंदली आहे. अशा उदाहरणांत विशिष्ट कुटुंबाची धार्मिक पद्धत आणि तिचे पिढ्यान्पिढ्या चालत आलेले सातत्य दिसून येते.<ref name="सकाळ-साखरपा-चारपिढ्यांचीआरती"/>
=== लोककथा आणि धार्मिक कथनपरंपरा ===
कोकणातील धार्मिक कथनपरंपरेत ग्रामदैवते, कुलदैवते आणि स्थानिक देवतांशी संबंधित कथा आढळतात. या कथांमध्ये एखादी देवता एखाद्या ठिकाणी कशी प्रकट झाली, एखाद्या भक्ताला कसा दृष्टांत झाला किंवा एखाद्या धार्मिक स्थळाशी विशिष्ट श्रद्धा कशी जोडली गेली यांसारखे कथाविषय आढळतात. अशा कथांना स्थानिक धार्मिक स्मृती आणि मौखिक परंपरेचा भाग मानले जाते.<ref name="सकाळ-कोकणातील-देवांच्या-कथा-2023" />
गौरीव्रताच्या कथांमध्येही मौखिक परंपरेचे स्वरूप स्पष्टपणे दिसते. विविध कथांमध्ये गौरीचे आगमन, तिचे पूजन, नैवेद्य आणि विसर्जन यांसारख्या धार्मिक आचारांना कथात्मक संदर्भ दिला जातो. त्यामुळे व्रताच्या धार्मिक पद्धती आणि त्यामागील श्रद्धा यांचे कथनपरंपरेत जतन होते.<ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-कथनपरंपरा" />
लोककथा आणि आख्यायिकांमध्ये स्थानिक अनुभव, धार्मिक श्रद्धा आणि सांस्कृतिक स्मृती यांचे मिश्रण आढळते. त्यामुळे कोकणातील गणपती–गौरी परंपरेचा अभ्यास करताना या कथांकडे त्या समाजाच्या श्रद्धाविश्वाचा आणि सांस्कृतिक स्मृतीचा भाग म्हणून पाहणे योग्य ठरते. एखाद्या आख्यायिकेतील घटना ऐतिहासिकदृष्ट्या सिद्ध झालेली आहे असे मानण्याऐवजी ती कोणत्या समुदायात आणि कोणत्या धार्मिक प्रथेच्या संदर्भात सांगितली जाते, याचा विचार करणे आवश्यक आहे.<ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-कथनपरंपरा" /><ref name="सकाळ-कोकणातील-देवांच्या-कथा-2023" />
== आधुनिक काळातील बदल ==
कोकणातील गणपती–गौरी उत्सवाच्या पारंपरिक धार्मिक आणि कौटुंबिक स्वरूपात आधुनिक काळात काही बदल झाले आहेत. शहरीकरण, रोजगारासाठी स्थलांतर, वाहतूक व दळणवळणातील सुविधा, बदलती बाजारपेठ, आधुनिक सजावटीचे साहित्य आणि नव्या माध्यमांचा वापर यांचा उत्सवाच्या आयोजनावर परिणाम झाला आहे. त्याच वेळी गणपती–गौरीशी संबंधित अनेक कौटुंबिक विधी, ओवसा, आरती, भजन आणि स्थानिक कलाप्रकार विविध ठिकाणी सुरू आहेत. त्यामुळे उपलब्ध नोंदींवरून पारंपरिक पद्धती पूर्णपणे नाहीशा झाल्याऐवजी काही ठिकाणी पारंपरिक पद्धती आणि आधुनिक साधने यांचे सहअस्तित्व दिसून येते.<ref name="सकाळ-बिगस्टोरी-2025"/>
=== पारंपरिक उत्सवातील बदल ===
पूर्वी काही कोकणी घरांमध्ये गणपतीच्या आगमनापूर्वी घराची स्वच्छता, सारवण, रंगरंगोटी आणि स्थानिक साहित्याने सजावट करण्यावर भर असे. कालांतराने घरबांधणी आणि बांधकाम साहित्य बदलल्यामुळे या तयारीचे स्वरूपही बदलले आहे. २०२१ मधील सिंधुदुर्गातील वृत्तांतात मातीच्या जमिनी आणि भिंतींच्या पारंपरिक पद्धतींच्या जागी लाद्या, चिरेबंदी बांधकाम आणि आधुनिक रंगांचा वापर झाल्याचे नमूद केले आहे. भिंतींवर हाताने चित्रे काढण्याऐवजी डिजिटल बॅनरचा वापर होत असल्याचीही नोंद आहे.<ref name="पुढारी-कोकण-गणेशोत्सव-बदल-2021">“गणेशोत्सव : कोकणच्या ‘महाउत्सवास’ आजपासून प्रारंभ”. ''पुढारी'', 10 सप्टेंबर 2021. [https://pudhari.news/latest/%E0%A4%97%E0%A4%A3%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A4%A3%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B8-%E0%A4%86%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%AD-%E0%A4%85%E0%A4%A1%E0%A5%80%E0%A4%9A-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B9%E0%A5%82%E0%A4%A8-%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%AEानी-दाखल]</ref>
उत्सवाच्या कालावधीबाबतही कुटुंबागणिक आणि प्रदेशागणिक फरक कायम आहे. काही कुटुंबे दीड दिवसांचा गणपती करतात, तर काही ठिकाणी अधिक दिवस उत्सव साजरा केला जातो. सिंधुदुर्गातील २०२५ च्या वृत्तांतात दीड दिवसांचा गणेशोत्सव आटोपल्यानंतर चाकरमानी परतीच्या प्रवासाला लागल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="पुढारी-सिंधुदुर्ग-दीडदिवस-विसर्जन-2025"/>
=== सजावट आणि आधुनिक तंत्रज्ञान ===
गणपती–गौरीच्या सजावटीत पारंपरिक साहित्याबरोबर तयार सजावटीच्या वस्तू, विद्युत रोषणाई आणि आधुनिक दृश्यसाहित्याचा वापर काही ठिकाणी वाढला आहे. २०२५ मधील सिंधुदुर्गातील वृत्तांतात गणेशोत्सवासाठी बंद घरे उघडून त्यांची रंगरंगोटी आणि आकर्षक विद्युत रोषणाई केल्याची नोंद आहे.<ref name="पुढारी-सिंधुदुर्ग-गणेशोत्सव-2025">सावंत, अजित. “कोकणच्या महाउत्सवास आजपासून प्रारंभ; अवघा सिंधुदुर्ग भक्तिमय”. ''पुढारी'', 27 ऑगस्ट 2025. [https://pudhari.news/maharashtra/kokan/sindhudurg/ganesh-chaturthi-konkan-grand-festival-begins-sindhudurg-devotional-celebration-sp96]</ref>
गणेशोत्सवातील सजावटीच्या स्वरूपातही तंत्रज्ञानाचा वापर झाल्याचे स्थानिक नोंदींत दिसते. सिंधुदुर्गातील २०२१ च्या वृत्तांतात पूर्वी भिंतींवर हाताने धार्मिक किंवा नैसर्गिक चित्रे काढण्याऐवजी डिजिटल बॅनर वापरण्याची पद्धत वाढल्याचे नमूद केले आहे. त्याच वृत्तांतात विद्युत तोरणे आणि इतर आधुनिक सजावटीच्या वस्तूंच्या उपलब्धतेचाही उल्लेख आहे.<ref name="पुढारी-कोकण-गणेशोत्सव-बदल-2021" />
गौरीच्या सजावटीशी संबंधित वस्तूंच्या बाबतीतही बाजारपेठेतील विविधता दिसते. २०२५ मधील स्थानिक वृत्तांतात पारंपरिक साहित्याबरोबर आधुनिक साहित्य आणि तयार सजावटीच्या वस्तू उपलब्ध होत असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="सकाळ-गौरीगणपती-मॉडर्नटच-2025"/>
सामाजिक माध्यमांमुळे उत्सवाशी संबंधित माहिती, छायाचित्रे, गाणी आणि कार्यक्रमांची माहिती व्यापक पातळीवर पोहोचण्याची शक्यता वाढली आहे. २०२५ मधील वृत्तविश्लेषणात गणेशोत्सवाशी संबंधित विविध उपक्रम, सजावट आणि नव्या पिढीच्या सहभागाचा उल्लेख आढळतो. त्यामुळे स्थानिक उत्सवाच्या प्रसिद्धीसाठी डिजिटल माध्यमांचाही वापर होत असल्याचे दिसते.<ref name="सकाळ-बिगस्टोरी-2025" />
=== शहरीकरण आणि स्थलांतर ===
कोकणातील अनेक कुटुंबांतील सदस्य रोजगार आणि व्यवसायासाठी मुंबई, पुणे तसेच इतर शहरांत स्थायिक झाले आहेत. गणपती–गौरीच्या काळात त्यांपैकी अनेक जण मूळ गावी परततात. रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग जिल्ह्यांच्या नोंदींमध्ये गणपती–गौरीच्या निमित्ताने चाकरमानी मुंबईहून गावी परतत असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Vishwakosh-Ratnagiri-District" />
उत्सवाच्या काळात वर्षातील इतर वेळी बंद असलेली काही घरे पुन्हा उघडली जातात. २०२५ मधील सिंधुदुर्गातील वृत्तांतात चाकरमान्यांच्या आगमनामुळे बंद घरे उघडणे, रंगरंगोटी आणि घरांची सजावट यांचा उल्लेख आहे.<ref name="पुढारी-सिंधुदुर्ग-गणेशोत्सव-2025" />
या स्थलांतराचा वाहतूक व्यवस्थेवरही परिणाम दिसतो. २०२५ मध्ये गणेशोत्सवासाठी कोकणाकडे जाणाऱ्या रेल्वेगाड्यांच्या आगाऊ आरक्षणाला मोठी मागणी असल्याची नोंद झाली होती. गणेशोत्सवाच्या काळातील चाकरमान्यांची मोठ्या प्रमाणावरील ये-जा ही कोकणातील उत्सवाच्या सामाजिक संदर्भातील महत्त्वाची बाब ठरते.<ref name="पुढारी-गणपती-रेल्वे-आरक्षण-2025">“गणेश चतुर्थीसाठी रेल्वेचे 20 जूनपासून आगाऊ आरक्षण!”. ''पुढारी'', 23 मे 2025. [https://pudhari.news/maharashtra/kokan/sindhudurg/ganesh-chaturthi-trains-advance-booking-june-20-ab96]</ref>
=== बदलते लोककलाप्रकार ===
गणपती–गौरीच्या काळातील लोककलांमध्ये पारंपरिक प्रकारांचे अस्तित्व कायम असले तरी त्यांच्या सादरीकरणाच्या साधनांमध्ये काही बदल झाले आहेत. जाखडी, भजन, आरती आणि इतर स्थानिक कलाप्रकार विविध ठिकाणी सादर केले जातात. जाखडीच्या सादरीकरणात पारंपरिक वाद्यांबरोबर नंतर आधुनिक वाद्यांचा वापर झाल्याची नोंद आहे.<ref name="सकाळ-जाखडी-2024">पाटणकर, मयूरेश. “नृत्य, गायन, वादनाचा त्रिवेणी संगम जाखडी”. ''सकाळ'', 10 सप्टेंबर 2024. [https://www.esakal.com/kokan/todays-latest-marathi-news-kop24c15520-txt-ratnagiri-20240910092558]{{मृत दुवा|date=September 2026 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref>
नव्या पिढीचा उत्सवातील सहभागही विविध स्वरूपांत दिसून येतो. २०२५ मधील वृत्तविश्लेषणात सजावट, सांस्कृतिक कार्यक्रम आणि स्थानिक परंपरांशी संबंधित नव्या उपक्रमांचा उल्लेख आहे.<ref name="सकाळ-बिगस्टोरी-2025" />
जाखडीसारख्या लोककलांमध्ये पारंपरिक आशय टिकवून सादरीकरणाच्या साधनांमध्ये बदल होऊ शकतो. जाखडीच्या विकसित स्वरूपात पारंपरिक मृदंग, पखवाज आणि ढोलकी यांसह नंतर आधुनिक वाद्यांचा वापर झाल्याची नोंद आहे. त्यामुळे लोककलेतील बदल हा केवळ कलाप्रकाराच्या अस्तित्वाचा प्रश्न नसून त्याच्या सादरीकरणाच्या साधनांशीही संबंधित आहे.<ref name="सकाळ-जाखडी-2024" />
तथापि, आधुनिक बदलांचे स्वरूप संपूर्ण कोकणात एकसारखे आहे असे म्हणता येत नाही. उपलब्ध नोंदी विशिष्ट जिल्हे, गावे किंवा कलाप्रकारांशी संबंधित आहेत. त्यामुळे आधुनिक तंत्रज्ञान, बाजारपेठ, स्थलांतर आणि लोककलांतील बदल यांचा परिणाम स्थानिक परिस्थितीनुसार वेगवेगळा दिसतो.<ref name="मराठीविश्वकोश-नृत्यनोंद">“नृत्य नोंद पुढे चालू…”. ''मराठी विश्वकोश'', महाराष्ट्र राज्य मराठी विश्वकोश निर्मिती मंडळ. [https://vishwakosh.marathi.gov.in/19944/]{{मृत दुवा|date=September 2026 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref><ref name="सकाळ-जाखडी-2024" />
=== बदलती खाद्यपरंपरा ===
गणपती–गौरी उत्सवातील खाद्यपरंपरा स्थानिक कुटुंबपरंपरा आणि सामाजिक संदर्भांशी जोडलेली असल्यामुळे तिच्या स्वरूपात प्रदेशनिहाय आणि कुटुंबनिहाय विविधता आढळते. गौरीच्या नैवेद्यातील पदार्थ, ओवशाशी संबंधित खाद्यवस्तू आणि उत्सवातील भोजनपद्धती यांमध्ये स्थानिक फरक दिसतात. त्यामुळे संपूर्ण कोकणासाठी एकच प्रमाणित खाद्यपरंपरा असल्याचे मानता येत नाही.<ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-विधी"/>
काही ठिकाणी पारंपरिक पदार्थ आणि स्थानिक खाद्यपद्धती आजही उत्सवाचा भाग आहेत. उदाहरणार्थ, सिंधुदुर्गातील काही कुटुंबांमध्ये गौरीसाठी मांसाहारी नैवेद्य देण्याची स्वतंत्र कौटुंबिक परंपरा असल्याची नोंद आहे. त्याच परंपरेत गणपतीला शाकाहारी आणि गौरीला मांसाहारी नैवेद्य देण्याचा उल्लेख आहे. हे उदाहरण विशिष्ट कुटुंबीय किंवा स्थानिक परंपरेपुरते मर्यादित असून त्यावरून संपूर्ण कोकणातील गौरीच्या नैवेद्याचे स्वरूप ठरवता येत नाही.<ref name="महाराष्ट्रटाइम्स-सिंधुदुर्ग-गौरी-नैवेद्य-2023"/>
उत्सवाशी संबंधित खाद्यपदार्थ आणि पूजासाहित्याच्या खरेदीत स्थानिक बाजारपेठेलाही महत्त्व असते. देवगड परिसरातील २०२५ च्या वृत्तांतात गौरीच्या ओवशासाठी वापरल्या जाणाऱ्या सूप आणि रोवळी यांसारख्या वस्तूंच्या खरेदीसाठी बाजारात गर्दी होत असल्याची नोंद आहे. यावरून उत्सवाशी संबंधित पारंपरिक वस्तूंची मागणी स्थानिक बाजारव्यवस्थेशी जोडलेली असल्याचे दिसते; मात्र या नोंदीवरून खाद्यपदार्थांच्या खरेदीतील व्यापक बदल निष्पन्न होत नाहीत.<ref name="सकाळ-देवगड-सूप-रोवळी-2025">“किंमती वधारल्या तरी सूप, रोवळी खरेदीसाठी गर्दी”. ''सकाळ'', 22 ऑगस्ट 2025. [https://www.esakal.com/kokan/todays-latest-marathi-news-kop25d21866-txt-sindhudurg-today-20250822105827]</ref>
=== परंपरांचे जतन आणि नव्या पिढीचा सहभाग ===
आधुनिक बदलांनंतरही गणपती–गौरीशी संबंधित अनेक कौटुंबिक परंपरा विविध ठिकाणी पुढे चालू आहेत. ओवसा, गौरीपूजन, आरती आणि कुटुंबीयांचा सहभाग यांसारख्या प्रथा आजही आढळतात. सिंधुदुर्गातील म्हापण येथील वृत्तांतात नववधूंनी गौरी–गणपतीचे ओवसा पूजन केल्याची नोंद आहे. अशा स्थानिक उदाहरणांतून कौटुंबिक परंपरांचे सातत्य दिसून येते.<ref name="सकाळ-म्हापण-ओवसापूजन-2024"/>
नव्या पिढीचा सहभाग उत्सवाच्या धार्मिक विधींबरोबरच सजावट, सांस्कृतिक कार्यक्रम आणि स्थानिक परंपरांशी संबंधित उपक्रमांमध्येही दिसतो. २०२५ मधील वृत्तविश्लेषणात उत्सवाच्या आयोजनात नवीन पिढीच्या सहभागाचा तसेच सामाजिक माध्यमांचा आणि आधुनिक साधनांचा वापर झाल्याचा उल्लेख आहे.<ref name="सकाळ-बिगस्टोरी-2025"/>
परंपरेच्या जतनाबरोबर उत्सवाच्या आयोजनात पर्यावरणविषयक उपाययोजनांचाही समावेश होत आहे. उदाहरणार्थ, चिपळूणमध्ये २०२५ मध्ये गणेशोत्सवाच्या पार्श्वभूमीवर कृत्रिम विसर्जन तलाव आणि निर्माल्य संकलनाची व्यवस्था करण्यात आली होती. अशा उपाययोजनांमधून धार्मिक उत्सवाच्या व्यवस्थापनात पर्यावरणीय बाबींचा विचार केला जात असल्याचे दिसते.<ref name="सकाळ-चिपळूण-पर्यावरणपूरक-गणेशोत्सव-2025">“पर्यावरणपूरक गणेशोत्सवासाठी पालिकेची जागृती”. ''सकाळ'', 27 ऑगस्ट 2025. [https://www.esakal.com/kokan/todays-latest-marathi-news-kop25d23276-txt-ratnagiri-today-20250827115559]</ref>
अशा प्रकारे आधुनिक काळातील कोकणातील गणपती–गौरी परंपरेत बदल आणि सातत्य हे दोन्ही घटक दिसून येतात. आधुनिक बाजारपेठ, तंत्रज्ञान आणि स्थलांतर यांमुळे उत्सवाच्या आयोजनाच्या काही पद्धती बदलल्या असल्या तरी ओवसा, गौरीपूजन, आरती, भजन आणि स्थानिक कलांशी संबंधित परंपरा विविध ठिकाणी सुरू आहेत. उपलब्ध स्थानिक नोंदींवरून या बदलांकडे पारंपरिक आचार आणि बदलती सामाजिक, आर्थिक व तांत्रिक परिस्थिती यांच्यातील परस्परसंबंध म्हणून पाहता येते.<ref name="सकाळ-बिगस्टोरी-2025" /><ref name="सकाळ-म्हापण-ओवसापूजन-2024" /><ref name="सकाळ-चिपळूण-पर्यावरणपूरक-गणेशोत्सव-2025" />
== सांस्कृतिक महत्त्व ==
कोकणातील गणपती–गौरी उत्सवाचे महत्त्व केवळ धार्मिक पूजाविधीपुरते मर्यादित नाही. घरगुती देवपूजा, गौरीचे आगमन व पूजन, ओवसा, आरती, भजन, लोकनृत्य, कौटुंबिक भेटीगाठी आणि स्थानिक सामुदायिक कार्यक्रम यांच्या माध्यमातून हा उत्सव धार्मिक आचारांबरोबरच सामाजिक आणि सांस्कृतिक जीवनाशी जोडला जातो. प्रदेश, समाज आणि कुटुंबानुसार उत्सवाच्या पद्धती बदलत असल्यामुळे त्याला एकसारखे स्वरूप नसून विविध स्थानिक रूपे आढळतात.<ref name="महाराष्ट्र-उपप्रादेशिक-संस्कृती"/><ref name="मराठीविश्वकोश-सिंधुदुर्ग-जिल्हा"/>
=== धार्मिक आणि आध्यात्मिक महत्त्व ===
गणपती–गौरी उत्सवाचा केंद्रबिंदू गणपती आणि ज्येष्ठा गौरी यांचे पूजन हा आहे. गणपतीची स्थापना, पूजा, आरती आणि विसर्जन यांबरोबर गौरीचे आवाहन, पूजन, नैवेद्य आणि विसर्जन अशा स्वतंत्र धार्मिक प्रथा काही कोकणी कुटुंबांत पाळल्या जातात. गौरीव्रताच्या विविध पद्धतींमध्ये गोटे, स्थानिक वनस्पती, मुखवटे आणि इतर प्रतीकांचा वापर आढळतो. त्यामुळे धार्मिक विधींचे स्वरूप स्थानिक परंपरा आणि उपलब्ध वस्तूंशीही जोडलेले दिसते.<ref name="मराठीविश्वकोश-गौरी"/><ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-महाराष्ट्र"/>
गणपती आणि गौरीच्या पूजेशी संबंधित आरती, नैवेद्य, धार्मिक गीते आणि कथनपरंपरा या उत्सवाच्या धार्मिक अनुभवाचा भाग आहेत. काही कुटुंबांत विशिष्ट पूजा किंवा आरती पिढ्यान्पिढ्या चालत असल्याच्या नोंदी आढळतात. त्यामुळे उत्सव धार्मिक आचारांच्या पुनरावृत्तीबरोबरच कौटुंबिक धार्मिक स्मृतीच्या सातत्याशीही संबंधित राहतो.<ref name="सकाळ-साखरपा-चारपिढ्यांचीआरती"/>
=== कुटुंब आणि नातेसंबंध ===
कोकणातील गणपती–गौरी उत्सवाचे एक महत्त्वाचे सामाजिक वैशिष्ट्य म्हणजे कुटुंबीयांचे एकत्र येणे. रोजगारासाठी शहरांत राहणारे अनेक कोकणवासी उत्सवाच्या काळात मूळ गावी परततात. रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग जिल्ह्यांच्या संदर्भात चाकरमानी गणपती–गौरीच्या निमित्ताने गावी येत असल्याची नोंद आहे. त्यामुळे उत्सवाच्या काळात काही बंद घरे पुन्हा उघडली जातात आणि कुटुंबीयांची गावातील उपस्थिती वाढते.<ref name="Vishwakosh-Ratnagiri-District" /><ref name="पुढारी-सिंधुदुर्ग-गणेशोत्सव-2025"/>
उत्सवाच्या तयारीत घराची स्वच्छता, सजावट, पूजासाहित्याची व्यवस्था आणि नैवेद्याची तयारी यांसारख्या कामांत कुटुंबातील विविध सदस्य सहभागी होतात. काही कुटुंबांत विशिष्ट धार्मिक पद्धती अनेक पिढ्यांपासून चालत आल्याचेही आढळते. अशा परंपरांमधून उत्सव हा कौटुंबिक धार्मिक आचारांचे सातत्य राखण्याचा प्रसंग ठरतो.<ref name="सकाळ-साखरपा-चारपिढ्यांचीआरती" />
ओवसा आणि गौरीपूजेच्या निमित्ताने माहेर–सासर संबंधांनाही स्थान मिळते. काही कोकणी भागांत नववधूचा पहिला ओवसा ही महत्त्वाची कौटुंबिक प्रथा आहे. वाण देणे, गौरीपूजनात सहभागी होणे आणि स्त्रियांनी एकमेकींच्या घरी जाणे यांसारख्या प्रथा उत्सवाच्या सामाजिक व्यवहाराशी जोडलेल्या आहेत.<ref name="सकाळ-म्हापण-ओवसापूजन-2024"/>
=== स्त्रियांचे सामाजिक आणि सांस्कृतिक स्थान ===
गौरीपूजा आणि ओवसा या परंपरांमध्ये स्त्रियांचा सक्रिय सहभाग आढळतो. गौरीचे आवाहन, स्थापना, पूजन, नैवेद्य, ओवसा आणि काही ठिकाणी विसर्जन या विधींमध्ये स्त्रियांची भूमिका स्पष्टपणे नोंदली आहे. गौरीव्रताच्या काही पद्धतींमध्ये जलस्रोतावर जाऊन गौरीचे प्रतीक आणणे आणि त्याचे पूजन करणे या प्रक्रियेतही स्त्रियांचा सहभाग असतो.<ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-विधी"/>
ओवसा ही स्त्रियांच्या परस्पर सामाजिक संबंधांशी जोडलेली परंपरा आहे. नववधूचा पहिला ओवसा, वाणाची देवाणघेवाण आणि गौरीपूजेच्या निमित्ताने स्त्रियांचे एकत्र येणे यांमधून स्त्रियांच्या कौटुंबिक आणि सामाजिक सहभागाला उत्सवाच्या चौकटीत स्थान मिळते.<ref name="सकाळ-म्हापण-ओवसापूजन-2024" /><ref name="सकाळ-मंडणगड-गौराई-2025"/>
फुगडी, झिम्मा-पिंगा किंवा इतर स्त्रीप्रधान लोकप्रकार काही स्थानिक गौरी–गणपती कार्यक्रमांमध्ये सादर केले जातात. सिंधुदुर्गातील भिरवंडे येथील नोंदीनुसार महिलांनी गणेश–गौराई गीत, आरती, फुगडी आणि इतर सामूहिक सादरीकरणे केली होती. अशा कार्यक्रमांमधून धार्मिक विधींबरोबर स्त्रियांच्या सांस्कृतिक सहभागालाही व्यासपीठ मिळते.<ref name="सकाळ-भिरवंडे-गणेशगौराईगीत-2023"/>
=== ग्रामसमुदायाचे एकत्रीकरण ===
गणपती–गौरी उत्सवातील घरगुती पूजा अनेक ठिकाणी ग्रामस्तरावरील सामूहिक कार्यक्रमांशी जोडली जाते. घराघरांत आरती, भजन, जाखडी किंवा इतर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित केले जातात. रत्नागिरी जिल्ह्यातील नोंदींमध्ये गणपतीच्या काळात घराघरांत सामूहिक आरत्या आणि भजनांचे आयोजन होत असल्याचे आढळते.<ref name="Sakal-Ratnagiri-Aartya-2024" />
लोककलांच्या माध्यमातूनही ग्रामसमुदायाचा सहभाग व्यक्त होतो. जाखडीमध्ये गायन, नृत्य, वादन आणि दोन गटांमधील प्रश्नोत्तर किंवा कोडी यांचा समावेश होतो. काही ठिकाणी गणपतीच्या विसर्जनाच्या मिरवणुकीतही जाखडीचे सादरीकरण केले जाते.<ref name="सकाळ-जाखडी-2024"/><ref name="सकाळ-गावतळे-जाखडी-2024">“गावतळेत जाखडी नृत्याने गणरायांना निरोप”. ''सकाळ'', 12 सप्टेंबर 2024. [https://www.esakal.com/kokan/todays-latest-marathi-news-kop24c16291-txt-ratnagiri-20240912124226]</ref>
ग्रामसमुदायाच्या सहभागाचे स्वरूप मात्र स्थानिक परंपरेनुसार बदलते. कुंकेरीच्या ग्रामसर्वेक्षणात गणपती–गौरी उत्सव घरगुती स्वरूपाचा असल्याची नोंद आहे, तर कोकणातील काही गावांमध्ये सामुदायिक गणपतीच्या स्वतंत्र पद्धती आढळतात. त्यामुळे उत्सवाचे सामाजिक एकत्रीकरण हे सर्व गावांत समान पद्धतीने घडते असे म्हणता येत नाही.<ref name="कुंकेरी-ग्रामसर्वेक्षण-1961"/><ref name="सकाळ-उर्से-एकगावएकगणपती-2020">“‘एक गाव एक गणपती’ च्या 48 वर्ष परंपरेचं कोकणातील उर्सें गाव”. ''सकाळ'', 26 ऑगस्ट 2020. [https://www.esakal.com/kokan/kasa-villege-48-years-tradition-one-village-one-ganesh]</ref>
=== लोककला आणि सांस्कृतिक वारसा ===
गणपती–गौरी उत्सवाशी जाखडी, भजन, फुगडी आणि गणेश–गौराई गीतांसारखे विविध लोककलाप्रकार जोडलेले आहेत. महाराष्ट्र शासनाच्या सांस्कृतिक संदर्भग्रंथात कोकणातील आगरी–कुणबी समाजाच्या गौरी–गणपती नृत्याची नोंद आहे; या नृत्याला काही ठिकाणी जाखडी किंवा चेऊली नाच असेही संबोधले जाते.<ref name="महाराष्ट्र-उपप्रादेशिक-संस्कृती" /><ref name="महाराष्ट्र-भूमीआणिलोक-प्रयोगकलागॅझेटिअर"/>
भजनपरंपरेलाही कोकणातील गणेशोत्सवात स्थान आहे. रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग जिल्ह्यांच्या नोंदींमध्ये गणेशोत्सवाच्या काळात भजन आणि इतर धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम होत असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Vishwakosh-Ratnagiri-District" /><ref name="मराठीविश्वकोश-सिंधुदुर्ग-जिल्हा" />
लोककलांच्या सादरीकरणामुळे धार्मिक उत्सवाच्या काळात पारंपरिक गायन, नृत्य, वादन आणि सामूहिक सहभागाला स्थान मिळते. जाखडीच्या विकसित स्वरूपात पारंपरिक वाद्यांसोबत आधुनिक वाद्यांचा वापर झाल्याच्या नोंदी उपलब्ध आहेत. त्यामुळे उत्सवाशी जोडलेल्या लोककलांमध्ये परंपरेचे सातत्य आणि सादरीकरणातील बदल हे दोन्ही घटक दिसतात.<ref name="सकाळ-जाखडी-2024" />
=== कोकणच्या सांस्कृतिक ओळखीतील स्थान ===
गणपती–गौरी उत्सव कोकणातील धार्मिक आणि सामाजिक जीवनातील महत्त्वाच्या उत्सवपरंपरांपैकी एक आहे. रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग जिल्ह्यांच्या सांस्कृतिक नोंदींमध्ये गौरी–गणपतीला प्रमुख सण म्हणून स्थान दिले आहे. या काळात चाकरमानी मूळ गावी परतणे, घरगुती पूजा, भजन, आरती आणि लोककलांचे कार्यक्रम यांमुळे उत्सवाला व्यापक सामाजिक संदर्भ प्राप्त होतो.<ref name="Vishwakosh-Ratnagiri-District" /><ref name="मराठीविश्वकोश-सिंधुदुर्ग-जिल्हा" />
उत्सवाच्या परंपरेत स्थानिक समाजांची सांस्कृतिक वैशिष्ट्येही प्रतिबिंबित होतात. आगरी–कुणबी समाजाशी संबंधित गौरी–गणपती नृत्य, सोनकोळी समाजातील गणपती–गौरीशी संबंधित विशिष्ट धार्मिक व खाद्यपरंपरा आणि पालघर परिसरातील काही आदिवासी समुदायांची ‘गावूर’ परंपरा ही त्याची वेगवेगळी उदाहरणे आहेत.<ref name="महाराष्ट्र-उपप्रादेशिक-संस्कृती" /><ref name="Harad-Joglekar-2017"/><ref name="सकाळ-पालघर-गावूर-2024">सकाळ वृत्तसेवा. “पालघर, विक्रमगड, डहाणू, वाडा परिसरातील आदिवासी समाजाची ‘गावूर’ परंपरा”. ''सकाळ'', 9 सप्टेंबर 2024. [https://www.esakal.com/mumbai/todays-latest-marathi-news-mum24h87299-txt-palghar-today-20240909113520]</ref>
त्यामुळे कोकणातील गणपती–गौरी परंपरेचे सांस्कृतिक महत्त्व तिच्या एकरूपतेत नसून स्थानिक विविधतेतही दिसून येते. धार्मिक विधी, कौटुंबिक संबंध, स्त्रियांचा सहभाग, ग्रामस्तरीय कार्यक्रम, लोककला, स्थानिक वस्तुसंस्कृती आणि स्थलांतरित कोकणवासीयांचे मूळ गावाशी असलेले संबंध या विविध घटकांना हा उत्सव एकत्र आणतो. उपलब्ध नोंदींच्या आधारे गणपती–गौरी उत्सवाकडे कोकणातील धार्मिक परंपरा आणि सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन यांना जोडणारा बहुआयामी उत्सव म्हणून पाहता येते.<ref name="महाराष्ट्र-उपप्रादेशिक-संस्कृती" /><ref name="Vishwakosh-Ratnagiri-District" /><ref name="मराठीविश्वकोश-सिंधुदुर्ग-जिल्हा" />
=== स्त्रियांचे सामाजिक आणि सांस्कृतिक स्थान ===
गौरीपूजा आणि ओवसा या परंपरांमध्ये स्त्रियांचा सक्रिय सहभाग दिसून येतो. गौरीचे आवाहन, पूजेची तयारी, नैवेद्य, आरती, ओवसा भरणे आणि वाण देणे या विविध धार्मिक व सामाजिक कृतींमध्ये स्त्रिया सहभागी होतात. काही गौरीव्रताच्या पद्धतींमध्ये जलस्रोतावरून गौरीचे प्रतीक आणण्याच्या विधीतही स्त्रियांचा सहभाग असतो.<ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-विधी"/><ref name="एबीपी-गौरीआगमन-2017"/>
ओवसा, गणेश–गौराईची गीते, फुगडी आणि इतर सामूहिक स्त्री-उपक्रमांमधून धार्मिक विधींबरोबर स्त्रियांचा सांस्कृतिक सहभागही व्यक्त होतो. कुंकेरीच्या १९६१ च्या ग्रामसर्वेक्षणात गणपती–गौरीच्या काळात स्त्रिया फुगड्या खेळत असल्याची नोंद आहे. सिंधुदुर्गातील भिरवंडे येथील नोंदीत महिलांनी गणेश–गौराई गीत, आरती, फुगडी आणि इतर सामूहिक सादरीकरणे केल्याचे नमूद आहे.<ref name="कुंकेरी-ग्रामसर्वेक्षण-1961"/><ref name="सकाळ-भिरवंडे-गणेशगौराईगीत-2023"/>
स्त्रियांच्या सहभागातून धार्मिक विधी, कौटुंबिक प्रथा आणि स्थानिक सांस्कृतिक सादरीकरण यांना उत्सवाच्या चौकटीत स्थान मिळते. गौरीव्रताशी संबंधित मौखिक कथनपरंपराही धार्मिक आचार आणि श्रद्धांचे स्पष्टीकरण करण्याचे माध्यम आहे. त्यामुळे स्त्रियांचा सहभाग हा उत्सवाच्या धार्मिक आणि सांस्कृतिक दोन्ही अंगांशी संबंधित असल्याचे उपलब्ध नोंदींवरून दिसते.<ref name="सहपेडिया-गौरीव्रत-कथनपरंपरा"/>
=== ग्रामसमुदायाचे एकत्रीकरण ===
गणपती–गौरी उत्सवाच्या काळात काही गावांमध्ये घराघरांत आरती, भजन किंवा इतर धार्मिक कार्यक्रमांसाठी लोक एकत्र येतात. रत्नागिरीतील वृत्तनोंदींमध्ये गणपतीच्या काळात घराघरांत सामूहिक आरती आणि भजनांचे कार्यक्रम होत असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Sakal-Ratnagiri-Aartya-2024" />
काही ठिकाणी उत्सवाशी संबंधित लोककला आणि मिरवणुका सामूहिक सहभागातून पार पडतात. जाखडीच्या सादरीकरणात गायन, नृत्य आणि वादन यांचा समावेश असतो; काही ठिकाणी गणपतीच्या विसर्जनाच्या मिरवणुकीतही जाखडीचे सादरीकरण केले जाते.<ref name="मराठीविश्वकोश-नृत्यनोंद"/><ref name="सकाळ-गावतळे-जाखडी-2024"/>
उत्सवाच्या काळात शहरातून मूळ गावी परतणाऱ्या चाकरमान्यांमुळे काही गावांमध्ये लोकवर्दळ वाढते. रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग जिल्ह्यांच्या नोंदींमध्ये गणपती–गौरीच्या निमित्ताने चाकरमानी गावी परतत असल्याचे नमूद केले आहे. या काळात कुटुंबीय, नातेवाईक आणि गावातील इतर लोकांच्या भेटीगाठींचे प्रमाण वाढते, असे स्थानिक वृत्तांतांवरून दिसते.<ref name="Vishwakosh-Ratnagiri-District" /><ref name="मराठीविश्वकोश-सिंधुदुर्ग-जिल्हा"/>
ग्रामसमुदायाचा सहभाग मात्र सर्व ठिकाणी एकसारखा नसतो. काही गावांमध्ये घरगुती गणपती–गौरीची परंपरा प्रमुख आहे, तर काही ठिकाणी सामुदायिक स्वरूपाच्या उत्सवपद्धती आढळतात. त्यामुळे उत्सवामुळे होणारे सामाजिक एकत्रीकरण स्थानिक रचना आणि परंपरेनुसार बदलते.<ref name="कुंकेरी-ग्रामसर्वेक्षण-1961" /><ref name="सकाळ-उर्से-एकगावएकगणपती-2020"/>
=== लोककला आणि सांस्कृतिक वारसा ===
गणपती–गौरी उत्सव हा कोकणातील काही लोककलांच्या सादरीकरणाशी संबंधित आहे. आगरी–कुणबी समाजातील गौरी–गणपती नृत्य, ज्याला काही ठिकाणी जाखडी किंवा चेऊली नाच असेही संबोधले जाते, ही त्याची उल्लेखनीय उदाहरणे आहेत. या नृत्यपरंपरेत गायन, वादन, प्रश्नोत्तरात्मक सादरीकरण आणि नृत्य यांचा समावेश आढळतो.<ref name="महाराष्ट्र-भूमीआणिलोक-प्रयोगकलागॅझेटिअर"/><ref name="मराठीविश्वकोश-लोकनृत्य"/>
जाखडी, भजन, गणेश–गौराईची गीते आणि फुगडी यांसारख्या प्रकारांना उत्सवाच्या काळात सादरीकरणाचे व्यासपीठ मिळते. कुंकेरीच्या ग्रामसर्वेक्षणात गणपती–गौरीच्या काळातील फुगडीची नोंद आहे, तर भिरवंडे येथील वृत्तांतात महिलांनी गणेश–गौराई गीत आणि विविध फुगडीप्रकार सादर केल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="कुंकेरी-ग्रामसर्वेक्षण-1961" /><ref name="सकाळ-भिरवंडे-गणेशगौराईगीत-2023" />
लोककलांच्या बाबतीतही प्रादेशिक विविधता महत्त्वाची आहे. महाराष्ट्राच्या उपप्रादेशिक सांस्कृतिक अभ्यासात आगरी आणि कुणबी समाजांच्या गौरी–गणपती नृत्याचा कोकणातील वैशिष्ट्यपूर्ण लोकनृत्य म्हणून उल्लेख केला आहे. त्यामुळे गणपती–गौरी उत्सव हा काही स्थानिक लोककलांच्या सादरीकरणासाठी आणि त्यांच्या सांस्कृतिक सातत्यासाठी महत्त्वाचा संदर्भ ठरतो.<ref name="महाराष्ट्र-उपप्रादेशिक-संस्कृती"/>
=== कोकणच्या सांस्कृतिक ओळखीतील स्थान ===
कोकणातील गणपती–गौरी उत्सवाच्या सांस्कृतिक संदर्भात धार्मिक परंपरा, कुटुंब, स्थलांतर, लोककला आणि स्त्रियांचा सहभाग हे विविध घटक एकत्र येतात. रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग जिल्ह्यांच्या सांस्कृतिक नोंदींमध्ये गणपती–गौरी हा प्रमुख सण म्हणून नोंदला असून चाकरमानींच्या मूळ गावी परतण्याशी त्याचा संबंधही स्पष्ट केला आहे.<ref name="Vishwakosh-Ratnagiri-District" /><ref name="मराठीविश्वकोश-सिंधुदुर्ग-जिल्हा" />
या उत्सवाच्या स्थानिक रूपांमध्ये प्रादेशिक आणि समाजनिहाय विविधता दिसते. रायगडातील आगरी–कुणबी लोकनृत्य, रत्नागिरीतील जाखडी व भजनपरंपरा, सिंधुदुर्गातील विशिष्ट कौटुंबिक गौरीपरंपरा आणि पालघर परिसरातील काही आदिवासी समुदायांतील ‘गावूर’ यांसारख्या उदाहरणांतून ही विविधता स्पष्ट होते.<ref name="महाराष्ट्र-उपप्रादेशिक-संस्कृती" /><ref name="सकाळ-पालघर-गावूर-2024"/><ref name="महाराष्ट्रटाइम्स-सिंधुदुर्ग-गौरी-नैवेद्य-2023"/>
गणपती–गौरी उत्सवाच्या माध्यमातून धार्मिक परंपरा आणि स्थानिक सामाजिक जीवन यांचा परस्परसंबंध व्यक्त होतो. घरगुती पूजाविधींपासून सामुदायिक आरती, लोकनृत्य आणि विसर्जन मिरवणुकीपर्यंत विविध स्तरांवर व्यक्ती आणि समूहांचा सहभाग आढळतो. त्यामुळे उत्सव हा धार्मिक आचारांबरोबरच सामाजिक आणि लोकसांस्कृतिक सहभागाचा एक प्रसंग ठरतो.<ref name="Sakal-Ratnagiri-Aartya-2024" /><ref name="महाराष्ट्र-भूमीआणिलोक-प्रयोगकलागॅझेटिअर" />
मात्र कोकणची सांस्कृतिक ओळख केवळ गणपती–गौरी उत्सवाने निश्चित होत नाही. कोकणातील विविध समाज, त्यांच्या धार्मिक परंपरा, लोककला, समुद्राशी व शेतीशी असलेले संबंध आणि स्थानिक इतिहास यांच्या एकत्रित परिणामातून या प्रदेशाची सांस्कृतिक ओळख घडते. त्या व्यापक सांस्कृतिक पटातील गणपती–गौरी उत्सव हा एक महत्त्वाचा धार्मिक, कौटुंबिक आणि लोकसांस्कृतिक घटक आहे.<ref name="महाराष्ट्र-उपप्रादेशिक-संस्कृती" /><ref name="मराठीविश्वकोश-कोकण"/>
== चित्रदालन ==
<gallery mode="packed" heights="180">
File:कोकणातील गणपती आणि गौरीपूजन.jpg|कोकणातील गणपती आणि गौरीपूजन
File:कोकणातील गणेशोत्सव.jpg|कोकणातील गणेशोत्सव
File:देखाव्यासह गणपती आणि गौरी.jpg|देखाव्यासह गणपती आणि गौरी
File:Ganpati Festival.jpg|गणपती उत्सव
File:Ganpati Bappa 2.jpg|गणपती बाप्पाची प्रतिमा
File:Ganpati Murti at Home.jpeg|घरगुती गणपतीची मूर्ती
File:Ganapati with Mooshak.jpg|मूषकासह गणपती
File:गौरी (महालक्ष्मी ) (1).jpg|गौरी (महालक्ष्मी)
</gallery>
== हेही पहा ==
* [[गणेश चतुर्थी]]
* [[गणेशोत्सव]]
* [[गणपती]]
* [[गौरीपूजन]]
* [[ज्येष्ठा गौरी]]
* [[कोकण]]
* [[महाराष्ट्रातील लोककला]]
* [[कोकणातील टिपरी परंपरा]]
* [[शक्तीवाले व तुरेवाले (लोककला)]]
== बाह्यदुवे ==
* [https://vishwakosh.marathi.gov.in/21292/ गणेशोत्सव — मराठी विश्वकोश] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20210829044744/https://vishwakosh.marathi.gov.in/21292/ |date=2021-08-29 }}
* [https://vishwakosh.marathi.gov.in/22225/ गौरी — मराठी विश्वकोश]{{मृत दुवा|date=September 2026 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}
* [https://gazetteers.maharashtra.gov.in/ महाराष्ट्र राज्य गॅझेटिअर्स विभाग]
* [https://www.sahapedia.org/gauri-vrata-maharashtra Gauri Vrata in Maharashtra — Sahapedia]
* [https://www.sahapedia.org/gaur%C4%AB-vrata-introduction Gaurī Vrata: An Introduction — Sahapedia]
* [https://www.sahapedia.org/rituals-of-gaur%C4%AB-vrata Rituals of Gaurī Vrata — Sahapedia]
* [https://www.sahapedia.org/narratives-of-gaur%C4%AB-vrata Narratives of Gaurī Vrata — Sahapedia]
{{कोकण लोकजीवन}}
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:कोकण]]
[[वर्ग:गणेशोत्सव]]
[[वर्ग:महाराष्ट्रातील लोककला]]
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दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचा नामिबिया दौरा, २०२६
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2026-09-16T10:32:29Z
Nitin.kunjir
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/* संघ */
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox cricket tour
| series_name = दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचा नामिबिया दौरा, २०२६
| team1_image = Flag of Namibia.svg
| team1_name = नामिबिया
| team2_image = Flag of South Africa.svg
| team2_name = दक्षिण आफ्रिका
| from_date = ९
| to_date = १३ सप्टेंबर २०२६
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| team2_captain = [[ब्यॉर्न फॉर्टुइन]]
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}}
[[दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघ]] ९ ते १३ सप्टेंबर २०२६ या कालावधीत [[नामिबिया क्रिकेट संघ|नामिबिया]]विरुद्ध सामने खेळण्यासाठी [[नामिबिया]]चा दौरा करणार आहे. <ref>{{cite web |last=मुंडा|first=फिरदोस|date=७ ऑगस्ट २०२६ |trans-title= आफ्रिका टी२० चषक स्पर्धा जवळ येत असताना नामिबिया दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वेचे यजमानपद भूषवणार. |title=Namibia to host SA, Zimbabwe as Africa T20 Cup grows closer |url=https://www.cricinfo.com/story/namibia-to-host-south-africa-zimbabwe-as-africa-t20-cup-grows-closer-1548977 |work=[[क्रिकइन्फो]] |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |trans-title=दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वे नामिबियाच्या 'व्हाइट-बॉल' दौऱ्यासाठी सज्ज |title=South Africa, Zimbabwe set for white-ball tour of Namibia |url=https://www.cricbuzz.com/cricket-news/139776/south-africa-zimbabwe-set-for-white-ball-tour-of-namibia-cricbuzzcom |work=[[क्रिकबझ्झ]] |date=७ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref> या दौऱ्यात तीन [[आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय]] सामन्यांचा समावेश असेल; हे सामने [[नामिबिया राष्ट्रीय क्रिकेट संघ|नामिबिया]], [[दक्षिण आफ्रिका राष्ट्रीय क्रिकेट संघ|दक्षिण आफ्रिका]] आणि [[झिम्बाब्वे राष्ट्रीय क्रिकेट संघ|झिम्बाब्वे]]च्या पुरुष राष्ट्रीय संघांमधील [[२०२६ नामिबिया आं.टी२० तिरंगी मालिका|२०२६ नामिबिया आंतरराष्ट्रीय टी२० तिरंगी मालिके]]नंतर खेळवले जातील. <ref>{{cite web |trans-title= क्रिकेट विश्वचषक २०२७ चे यजमान ऐतिहासिक तिरंगी मालिका खेळणार |title=Cricket World Cup 2027 hosts set to play landmark tri-series |url=https://www.icc-cricket.com/news/cricket-world-cup-2027-hosts-set-to-play-landmark-tri-series |work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]] |date=७ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |last=हेस |first=स्टुअर्ट|date=४ ऑगस्ट २०२६|trans-title= ऑस्ट्रेलियाविरुद्धच्या आव्हानापूर्वी नामिबियातील तिरंगी मालिकेने 'प्रोटियाज'चा हंगाम सुरू होणार |title=Proteas to open season with Namibia tri-series before Australia challenge |url=https://www.businessday.co.za/sport/cricket/2026-08-04-proteas-to-open-season-with-namibia-tri-series-before-australia-challenge/ |work=बिझनेस डे (दक्षिण आफ्रिका) |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref> सर्व सामने [[विंडहोक]] येथील [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]] येथे खेळवले जातील.<ref>{{cite web |trans-title= ऑगस्ट २०२६ मध्ये दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वे यांच्याविरुद्ध आंतरराष्ट्रीय टी२० तिरंगी मालिका आणि एकदिवसीय मालिकेचे यजमानपद क्रिकेट नामिबिया भूषवणार आहे.|title=Cricket Namibia to host South Africa and Zimbabwe for T20I Tri-series and ODI series in August 2026 |url=https://czarsportzauto.com/namibia-vs-south-africa-vs-zimbabwe-tri-series-2026/ |date=७ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६|work=Czarsportz}}</ref><ref>{{cite web |last= शुट्झ |first= हेल्गे |date=७ ऑगस्ट २०२६ |trans-title= नामिबिया 'एफएनबी टी२० ट्राय-सीरीज'मध्ये दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वेचे यजमानपद भूषवणार |title=Namibia to host SA & Zimbabwe in FNB T20 Tri-Series |url=https://www.namibian.com.na/namibia-to-host-sa-zimbabwe-in-fnb-t20-tri-series/ |work=[[द नामिबियन]] |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref> ऑगस्ट २०२६ मध्ये, [[क्रिकेट नामिबिया]]ने या मालिकेचे वेळापत्रक निश्चित केले.<ref>{{cite web |trans-title= क्रिकेट नामिबिया 'एफएनबी टी-२० ट्राय-सीरीज'मध्ये प्रोटियाज आणि झिम्बाब्वेचे यजमानपद भूषवणार |title=Cricket Namibia to Host The Proteas and Zimbabwe in FNB T20 Tri-Series |url=https://cricketnamibia.com/cricket-namibia-to-host-the-proteas-and-zimbabwe-in-fnb-t20-tri-series/ |work=[[क्रिकेट नामिबिया]] |date=७ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |trans-title= दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वे नामिबियाच्या 'व्हाइट-बॉल' दौऱ्यासाठी सज्ज |title=South Africa, Zimbabwe set for white-ball tour of Namibia |url=https://guyanachronicle.com/2026/08/08/south-africa-zimbabwe-set-for-white-ball-tour-of-namibia/ |work=गयाना क्रोनिकल्स |date=८ ऑगस्ट २०२६|access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
==संघ==
{| class="wikitable" style="text-align:left; margin:auto"
|-
!{{cr|NAM}}<ref>{{cite web|url=https://www.cricinfo.com/series/south-africa-in-namibia-2026-1549537/namibia-squad-1553386/series-squads|title=South Africa tour of Namibia 2026 Squad – Namibia Team|date=८ सप्टेंबर २०२६|work=[[क्रिकइन्फो]]|trans-title=दक्षिण आफ्रिकेचा नामिबिया दौरा २०२६ - संघ (नामिबिया संघ)|url-status=live|access-date=१६ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
!{{cr|SA}}<ref>{{cite web |trans-title= दक्षिण आफ्रिकेचा नवीन कर्णधार नामिबिया दौऱ्यावर संघाचे नेतृत्व करण्यास सज्ज |title=New South Africa skipper set to lead side on Namibia tour |url=https://www.icc-cricket.com/news/new-south-africa-skipper-set-to-lead-side-on-namibia-tour |date=११ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६|work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]]}}</ref>
|-
|valign="top"|
* [[गेरहार्ड इरास्मुस]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]],[[यष्टीरक्षक|य]])
* अलेक्झांडर बसिंग-वोल्शेंक
* मॅक्स हिंगो
* ज्युनियर तान्यांदा
* [[जेजे स्मिट]]
* [[जॅक ब्रासेल]]
* [[झेन ग्रीन]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[बर्नार्ड शोल्ट्झ]]
* [[मायकेल व्हान लिंगेन]]
* [[मलान क्रुगर]]
* [[यान निकोल लोफ्टी-ईटन]]
* [[यान फ्रायलिंक]]
* [[यान बाल्ट]]
* [[रुबेन ट्रम्पलमान|रुबेन ट्रम्पलमन]]
* लॉरेन स्टीनकॅम्प
* वाल्डो स्मिथ
|valign="top"|
* [[ब्यॉर्न फॉर्टुइन]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]])
* [[इथन बॉश]]
* <s>[[अँडील सिमेलेन]]</s>
* [[कॉनर एस्टरह्युझेन]] [[यष्टीरक्षक|(य)]]
* [[कॉर्बिन बॉश]]
* [[क्वेना मफाका]]
* [[जेसन स्मिथ]]
* [[जॉर्डन हरमन]]
* [[टोनी डी झॉर्झी]]
* [[डेवाल्ड ब्रेव्हिस]]
* [[दुआन यान्सिन]]
* [[न्काबा पीटर]]
* [[न्कोबानी मोकोएना]]
* [[प्रीनेलन सुब्रयेन]]
* [[मॅथ्यू ब्रीट्झके]]
* [[रुबिन हरमन]]
* <s>[[लुआन-ड्रे प्रिटोरियस]]</s> [[यष्टीरक्षक|(य)]]
* <s>[[लुथो सिपामला]]</s>
|}
३० ऑगस्ट २०२६ रोजी, हॅमस्ट्रिंगच्या दुखापतीमुळे [[लुथो सिपामला]] मालिकेतून बाहेर पडला आणि दक्षिण आफ्रिकेच्या संघात त्याच्या जागी [[अँडील सिमेलेन]]ची निवड करण्यात आली.<ref>{{cite web |last=मुंडा|first=फिरदोस|date=३० ऑगस्ट २०२६ |trans-title=हॅमस्ट्रिंगच्या दुखापतीमुळे सिपामला नामिबिया तिरंगी मालिकेतून बाहेर|title=Sipamla ruled out of Namibia tri-series with hamstring injury |url=https://www.cricinfo.com/story/lutho-sipamla-ruled-out-of-namibia-tri-series-with-hamstring-injury-1552225 |work=[[क्रिकइन्फो]] |access-date=१० सप्टेंबर २०२६}}</ref> ७ सप्टेंबर २०२६ रोजी, [[अँडील सिमेलेन]] आणि [[लुआन-ड्रे प्रिटोरियस]] हे दोघेही संघातून बाहेर पडले आणि त्यांच्या जागी [[कॉर्बिन बॉश]] व [[मॅथ्यू ब्रीट्झके]] यांची निवड करण्यात आली.<ref>{{cite web|last=मुंडा|first=फिरदोस |date=७ सप्टेंबर २०२६ |trans-title=ऑस्ट्रेलियाविरुद्धच्या एकदिवसीय मालिकेसाठी दक्षिण आफ्रिकेच्या संघात मिलर, डी कॉक आणि कोएत्झी यांचा समावेश.|title=Miller, de Kock, Coetzee in South Africa squad for Australia ODIs |url=https://www.cricinfo.com/story/sa-vs-aus-david-miller-quinton-de-kock-temba-bavuma-in-sa-squad-for-australia-odis-1553166 |work=[[क्रिकइन्फो]] |access-date=१० सप्टेंबर २०२६}}</ref>
== आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय मालिका==
===१ला आं.ए.दि.===
{{Single-innings cricket match
| date = ९ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SA}}
| team2 = {{cr|NAM}}
| score1 = ३४८/६ (५० षटके)
| runs1 = [[जॉर्डन हरमन]] १५० (१२६)
| wickets1 = [[रुबेन ट्रम्पलमान]] ४/६८ (१० षटके)
| score2 = १६२/८ (३१ षटके)
| runs2 = [[मलान क्रुगर]] ३४ (६०)
| wickets2 = [[प्रीनेलन सुब्रयेन]] ४/२९ (6 षटके)
| result = दक्षिण आफ्रिका ९९ धावांनी विजयी ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस पद्धत]])
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549531.html धावफलक]
| venue = [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]]
| umpires = [[रशीद रियाझ]] (पा) आणि क्लॉस शुमाकर (ना)
| motm = [[जॉर्डन हरमन]] (द)
| toss = नामिबियाने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षण करण्याचा निर्णय घेतला.
| rain = पावसामुळे नामिबियासमोर ३१ षटकांत २६२ धावांचे सुधारित लक्ष्य ठेवण्यात आले.
| notes = [[कॉनर एस्टरह्युझेन]], [[जॉर्डन हरमन]] आणि [[दुआन यान्सिन]] (द) ह्या सर्वांनी आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय पदार्पण केले.
* जॉर्डन हर्मनने (दआ) एकदिवसीय कारकीर्दीमधील आपले पहिले शतक झळकावले. त्याची ही धावसंख्या एकदिवसीय पदार्पणातील सर्वोच्च धावसंख्येच्या विक्रमाशी बरोबरी करणारी ठरली.<ref>{{cite web |trans-title=प्रोटियाजसाठी हर्मनचे शानदार पदार्पणातील शतक; एकदिवसीय सामन्यांतील विक्रमाशी बरोबरी|title=Hermann’s glorious debut ton for Proteas equals ODI record |url=https://www.icc-cricket.com/news/hermann-s-glorious-debut-ton-for-proteas-equals-odi-record |work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]] |date=९ सप्टेंबर २०२६ |access-date=१० सप्टेंबर २०२६}}</ref>
}}
===२रा आं.ए.दि.===
{{Single-innings cricket match
| date = ११ सप्टेंबर २०२६
| time =
| team1 = {{cr-rt|NAM}}
| team2 = {{cr|SA}}
| score1 =
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| wickets1 =
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| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549532.html धावफलक]
| venue = [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]]
| umpires =
| motm =
| toss =
}}
===३रा आं.ए.दि.===
{{Single-innings cricket match
| date = १३ सप्टेंबर २०२६
| time =
| team1 = {{cr-rt|NAM}}
| team2 = {{cr|SA}}
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| runs1 =
| wickets1 =
| score2 =
| runs2 =
| wickets2 =
| result =
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549533.html धावफलक]
| venue = [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]]
| umpires =
| motm =
| toss =
}}
==संदर्भयादी==
{{संदर्भयादी}}
{{नामिबियाचे आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट दौरे}}
{{आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६}}
[[वर्ग:दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचे नामिबिया दौरे|२०२६]]
[[वर्ग:दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचे परदेशी दौरे|नामिबिया]]
[[वर्ग:आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संघांचे नामिबिया दौरे]]
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2709910
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Nitin.kunjir
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox cricket tour
| series_name = दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचा नामिबिया दौरा, २०२६
| team1_image = Flag of Namibia.svg
| team1_name = नामिबिया
| team2_image = Flag of South Africa.svg
| team2_name = दक्षिण आफ्रिका
| from_date = ९
| to_date = १३ सप्टेंबर २०२६
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| team2_captain = [[ब्यॉर्न फॉर्टुइन]]
| no_of_ODIs = 3
| team1_ODIs_won =
| team2_ODIs_won =
| team1_ODIs_most_runs =
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| team2_ODIs_most_wickets =
| player_of_ODI_series =
}}
[[दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघ]]ाने ९ ते १३ सप्टेंबर २०२६ या कालावधीत [[नामिबिया क्रिकेट संघ|नामिबिया]]विरुद्ध सामने खेळण्यासाठी [[नामिबिया]]चा दौरा केला. <ref>{{cite web |last=मुंडा|first=फिरदोस|date=७ ऑगस्ट २०२६ |trans-title= आफ्रिका टी२० चषक स्पर्धा जवळ येत असताना नामिबिया दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वेचे यजमानपद भूषवणार. |title=Namibia to host SA, Zimbabwe as Africa T20 Cup grows closer |url=https://www.cricinfo.com/story/namibia-to-host-south-africa-zimbabwe-as-africa-t20-cup-grows-closer-1548977 |work=[[क्रिकइन्फो]] |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |trans-title=दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वे नामिबियाच्या 'व्हाइट-बॉल' दौऱ्यासाठी सज्ज |title=South Africa, Zimbabwe set for white-ball tour of Namibia |url=https://www.cricbuzz.com/cricket-news/139776/south-africa-zimbabwe-set-for-white-ball-tour-of-namibia-cricbuzzcom |work=[[क्रिकबझ्झ]] |date=७ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref> या दौऱ्यात तीन [[आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय]] सामन्यांचा समावेश होता; हे सामने [[नामिबिया राष्ट्रीय क्रिकेट संघ|नामिबिया]], [[दक्षिण आफ्रिका राष्ट्रीय क्रिकेट संघ|दक्षिण आफ्रिका]] आणि [[झिम्बाब्वे राष्ट्रीय क्रिकेट संघ|झिम्बाब्वे]]च्या पुरुष राष्ट्रीय संघांमधील [[२०२६ नामिबिया आं.टी२० तिरंगी मालिका|२०२६ नामिबिया आंतरराष्ट्रीय टी२० तिरंगी मालिके]]नंतर खेळवले गेले. <ref>{{cite web |trans-title= क्रिकेट विश्वचषक २०२७ चे यजमान ऐतिहासिक तिरंगी मालिका खेळणार |title=Cricket World Cup 2027 hosts set to play landmark tri-series |url=https://www.icc-cricket.com/news/cricket-world-cup-2027-hosts-set-to-play-landmark-tri-series |work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]] |date=७ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |last=हेस |first=स्टुअर्ट|date=४ ऑगस्ट २०२६|trans-title= ऑस्ट्रेलियाविरुद्धच्या आव्हानापूर्वी नामिबियातील तिरंगी मालिकेने 'प्रोटियाज'चा हंगाम सुरू होणार |title=Proteas to open season with Namibia tri-series before Australia challenge |url=https://www.businessday.co.za/sport/cricket/2026-08-04-proteas-to-open-season-with-namibia-tri-series-before-australia-challenge/ |work=बिझनेस डे (दक्षिण आफ्रिका) |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref> सर्व सामने [[विंडहोक]] येथील [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]] येथे खेळवले गेले.<ref>{{cite web |trans-title= ऑगस्ट २०२६ मध्ये दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वे यांच्याविरुद्ध आंतरराष्ट्रीय टी२० तिरंगी मालिका आणि एकदिवसीय मालिकेचे यजमानपद क्रिकेट नामिबिया भूषवणार आहे.|title=Cricket Namibia to host South Africa and Zimbabwe for T20I Tri-series and ODI series in August 2026 |url=https://czarsportzauto.com/namibia-vs-south-africa-vs-zimbabwe-tri-series-2026/ |date=७ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६|work=Czarsportz}}</ref><ref>{{cite web |last= शुट्झ |first= हेल्गे |date=७ ऑगस्ट २०२६ |trans-title= नामिबिया 'एफएनबी टी२० ट्राय-सीरीज'मध्ये दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वेचे यजमानपद भूषवणार |title=Namibia to host SA & Zimbabwe in FNB T20 Tri-Series |url=https://www.namibian.com.na/namibia-to-host-sa-zimbabwe-in-fnb-t20-tri-series/ |work=[[द नामिबियन]] |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref> ऑगस्ट २०२६ मध्ये, [[क्रिकेट नामिबिया]]ने या मालिकेचे वेळापत्रक निश्चित केले.<ref>{{cite web |trans-title= क्रिकेट नामिबिया 'एफएनबी टी-२० ट्राय-सीरीज'मध्ये प्रोटियाज आणि झिम्बाब्वेचे यजमानपद भूषवणार |title=Cricket Namibia to Host The Proteas and Zimbabwe in FNB T20 Tri-Series |url=https://cricketnamibia.com/cricket-namibia-to-host-the-proteas-and-zimbabwe-in-fnb-t20-tri-series/ |work=[[क्रिकेट नामिबिया]] |date=७ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |trans-title= दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वे नामिबियाच्या 'व्हाइट-बॉल' दौऱ्यासाठी सज्ज |title=South Africa, Zimbabwe set for white-ball tour of Namibia |url=https://guyanachronicle.com/2026/08/08/south-africa-zimbabwe-set-for-white-ball-tour-of-namibia/ |work=गयाना क्रोनिकल्स |date=८ ऑगस्ट २०२६|access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
==संघ==
{| class="wikitable" style="text-align:left; margin:auto"
|-
!{{cr|NAM}}<ref>{{cite web|url=https://www.cricinfo.com/series/south-africa-in-namibia-2026-1549537/namibia-squad-1553386/series-squads|title=South Africa tour of Namibia 2026 Squad – Namibia Team|date=८ सप्टेंबर २०२६|work=[[क्रिकइन्फो]]|trans-title=दक्षिण आफ्रिकेचा नामिबिया दौरा २०२६ - संघ (नामिबिया संघ)|url-status=live|access-date=१६ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
!{{cr|SA}}<ref>{{cite web |trans-title= दक्षिण आफ्रिकेचा नवीन कर्णधार नामिबिया दौऱ्यावर संघाचे नेतृत्व करण्यास सज्ज |title=New South Africa skipper set to lead side on Namibia tour |url=https://www.icc-cricket.com/news/new-south-africa-skipper-set-to-lead-side-on-namibia-tour |date=११ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६|work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]]}}</ref>
|-
|valign="top"|
* [[गेरहार्ड इरास्मुस]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]],[[यष्टीरक्षक|य]])
* अलेक्झांडर बसिंग-वोल्शेंक
* मॅक्स हिंगो
* ज्युनियर तान्यांदा
* [[जेजे स्मिट]]
* [[जॅक ब्रासेल]]
* [[झेन ग्रीन]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[बर्नार्ड शोल्ट्झ]]
* [[मायकेल व्हान लिंगेन]]
* [[मलान क्रुगर]]
* [[यान निकोल लोफ्टी-ईटन]]
* [[यान फ्रायलिंक]]
* [[यान बाल्ट]]
* [[रुबेन ट्रम्पलमान|रुबेन ट्रम्पलमन]]
* लॉरेन स्टीनकॅम्प
* वाल्डो स्मिथ
|valign="top"|
* [[ब्यॉर्न फॉर्टुइन]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]])
* [[इथन बॉश]]
* <s>[[अँडील सिमेलेन]]</s>
* [[कॉनर एस्टरह्युझेन]] [[यष्टीरक्षक|(य)]]
* [[कॉर्बिन बॉश]]
* [[क्वेना मफाका]]
* [[जेसन स्मिथ]]
* [[जॉर्डन हरमन]]
* [[टोनी डी झॉर्झी]]
* [[डेवाल्ड ब्रेव्हिस]]
* [[दुआन यान्सिन]]
* [[न्काबा पीटर]]
* [[न्कोबानी मोकोएना]]
* [[प्रीनेलन सुब्रयेन]]
* [[मॅथ्यू ब्रीट्झके]]
* [[रुबिन हरमन]]
* <s>[[लुआन-ड्रे प्रिटोरियस]]</s> [[यष्टीरक्षक|(य)]]
* <s>[[लुथो सिपामला]]</s>
|}
३० ऑगस्ट २०२६ रोजी, हॅमस्ट्रिंगच्या दुखापतीमुळे [[लुथो सिपामला]] मालिकेतून बाहेर पडला आणि दक्षिण आफ्रिकेच्या संघात त्याच्या जागी [[अँडील सिमेलेन]]ची निवड करण्यात आली.<ref>{{cite web |last=मुंडा|first=फिरदोस|date=३० ऑगस्ट २०२६ |trans-title=हॅमस्ट्रिंगच्या दुखापतीमुळे सिपामला नामिबिया तिरंगी मालिकेतून बाहेर|title=Sipamla ruled out of Namibia tri-series with hamstring injury |url=https://www.cricinfo.com/story/lutho-sipamla-ruled-out-of-namibia-tri-series-with-hamstring-injury-1552225 |work=[[क्रिकइन्फो]] |access-date=१० सप्टेंबर २०२६}}</ref> ७ सप्टेंबर २०२६ रोजी, [[अँडील सिमेलेन]] आणि [[लुआन-ड्रे प्रिटोरियस]] हे दोघेही संघातून बाहेर पडले आणि त्यांच्या जागी [[कॉर्बिन बॉश]] व [[मॅथ्यू ब्रीट्झके]] यांची निवड करण्यात आली.<ref>{{cite web|last=मुंडा|first=फिरदोस |date=७ सप्टेंबर २०२६ |trans-title=ऑस्ट्रेलियाविरुद्धच्या एकदिवसीय मालिकेसाठी दक्षिण आफ्रिकेच्या संघात मिलर, डी कॉक आणि कोएत्झी यांचा समावेश.|title=Miller, de Kock, Coetzee in South Africa squad for Australia ODIs |url=https://www.cricinfo.com/story/sa-vs-aus-david-miller-quinton-de-kock-temba-bavuma-in-sa-squad-for-australia-odis-1553166 |work=[[क्रिकइन्फो]] |access-date=१० सप्टेंबर २०२६}}</ref>
== आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय मालिका==
===१ला आं.ए.दि.===
{{Single-innings cricket match
| date = ९ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SA}}
| team2 = {{cr|NAM}}
| score1 = ३४८/६ (५० षटके)
| runs1 = [[जॉर्डन हरमन]] १५० (१२६)
| wickets1 = [[रुबेन ट्रम्पलमान]] ४/६८ (१० षटके)
| score2 = १६२/८ (३१ षटके)
| runs2 = [[मलान क्रुगर]] ३४ (६०)
| wickets2 = [[प्रीनेलन सुब्रयेन]] ४/२९ (6 षटके)
| result = दक्षिण आफ्रिका ९९ धावांनी विजयी ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस पद्धत]])
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549531.html धावफलक]
| venue = [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]]
| umpires = [[रशीद रियाझ]] (पा) आणि क्लॉस शुमाकर (ना)
| motm = [[जॉर्डन हरमन]] (द)
| toss = नामिबियाने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षण करण्याचा निर्णय घेतला.
| rain = पावसामुळे नामिबियासमोर ३१ षटकांत २६२ धावांचे सुधारित लक्ष्य ठेवण्यात आले.
| notes = [[कॉनर एस्टरह्युझेन]], [[जॉर्डन हरमन]] आणि [[दुआन यान्सिन]] (द) ह्या सर्वांनी आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय पदार्पण केले.
* जॉर्डन हर्मनने (दआ) एकदिवसीय कारकीर्दीमधील आपले पहिले शतक झळकावले. त्याची ही धावसंख्या एकदिवसीय पदार्पणातील सर्वोच्च धावसंख्येच्या विक्रमाशी बरोबरी करणारी ठरली.<ref>{{cite web |trans-title=प्रोटियाजसाठी हर्मनचे शानदार पदार्पणातील शतक; एकदिवसीय सामन्यांतील विक्रमाशी बरोबरी|title=Hermann’s glorious debut ton for Proteas equals ODI record |url=https://www.icc-cricket.com/news/hermann-s-glorious-debut-ton-for-proteas-equals-odi-record |work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]] |date=९ सप्टेंबर २०२६ |access-date=१० सप्टेंबर २०२६}}</ref>
}}
===२रा आं.ए.दि.===
{{Single-innings cricket match
| date = ११ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SA}}
| team2 = {{cr|NAM}}
| score1 = ३३५/९ (५० षटके)
| runs1 = [[कॉनर एस्टरह्युझेन]] ११९ (११०)
| wickets1 = [[जॅक ब्रासेल]] ४/६४ (१० षटके)
| score2 = १७८ (४१.५ षटके)
| runs2 = [[गेरहार्ड इरास्मुस]] ६८ (८४)
| wickets2 = [[दुआन यान्सिन]] ४/३१ (९ षटके)
| result = दक्षिण आफ्रिका १५७ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549532.html धावफलक]
| venue = [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]]
| umpires = [[रशीद रियाझ]] (पा) आणि इवौद लसेन (ना)
| motm = [[कॉनर एस्टरह्युझेन]] (द)
| toss = नामिबियाने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षण करण्याचा निर्णय घेतला.
| notes = [[न्कोबानी मोकोएना]] (द) आणि [[वाल्डो स्मिथ]] (ना) ह्या दोघांनी आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय पदार्पण केले.
* [[कॉनर एस्टरह्युझेन]] (द) ह्याने आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय कारकिर्दीतील पहिले शतक झळकावले.<ref>{{cite web |trans-title=कॉनर एस्टरह्युझेनच्या पहिल्यावहिल्या एकदिवसीय शतकाच्या जोरावर दक्षिण आफ्रिकेचा मोठा विजय|title=Connor Esterhuizen's maiden ODI century powers SA to massive win |url=https://m.cricbuzz.com/cricket-news/140145/connor-esterhuizens-maiden-odi-century-powers-sa-to-massive-win |work=[[क्रिकबझ्झ]] |date=११ सप्टेंबर २०२६|access-date=१६ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
}}
===३रा आं.ए.दि.===
{{Single-innings cricket match
| date = १३ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|NAM}}
| team2 = {{cr|SA}}
| score1 = १५६ (३६.२ षटके)
| runs1 = [[झेन ग्रीन]] ३३ (४२)
| wickets1 = [[ब्यॉर्न फॉर्टुइन]] ४/३३ (१० षटके)
| score2 = १५७/१ (२१.३ षटके)
| runs2 = [[जॉर्डन हरमन]] ७७ (५९)
| wickets2 = [[वाल्डो स्मिथ]] १/२९ (३ षटके)
| result = दक्षिण आफ्रिका ९ वादी राखून विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549533.html धावफलक]
| venue = [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]]
| umpires = [[रशीद रियाझ]] (पा) आणि क्लॉस शुमाकर (ना)
| motm = [[ब्यॉर्न फॉर्टुइन]] (द)
| toss = नामिबियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजी करण्याचा निर्णय घेतला.
}}
==संदर्भयादी==
{{संदर्भयादी}}
{{नामिबियाचे आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट दौरे}}
{{आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६}}
[[वर्ग:दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचे नामिबिया दौरे|२०२६]]
[[वर्ग:दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचे परदेशी दौरे|नामिबिया]]
[[वर्ग:आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संघांचे नामिबिया दौरे]]
best6cxgsyaxy1svne4i1rwak5n8itu
2709916
2709910
2026-09-16T11:12:19Z
Nitin.kunjir
4684
/* संघ */
2709916
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox cricket tour
| series_name = दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचा नामिबिया दौरा, २०२६
| team1_image = Flag of Namibia.svg
| team1_name = नामिबिया
| team2_image = Flag of South Africa.svg
| team2_name = दक्षिण आफ्रिका
| from_date = ९
| to_date = १३ सप्टेंबर २०२६
| team1_captain =
| team2_captain = [[ब्यॉर्न फॉर्टुइन]]
| no_of_ODIs = 3
| team1_ODIs_won =
| team2_ODIs_won =
| team1_ODIs_most_runs =
| team2_ODIs_most_runs =
| team1_ODIs_most_wickets =
| team2_ODIs_most_wickets =
| player_of_ODI_series =
}}
[[दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघ]]ाने ९ ते १३ सप्टेंबर २०२६ या कालावधीत [[नामिबिया क्रिकेट संघ|नामिबिया]]विरुद्ध सामने खेळण्यासाठी [[नामिबिया]]चा दौरा केला. <ref>{{cite web |last=मुंडा|first=फिरदोस|date=७ ऑगस्ट २०२६ |trans-title= आफ्रिका टी२० चषक स्पर्धा जवळ येत असताना नामिबिया दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वेचे यजमानपद भूषवणार. |title=Namibia to host SA, Zimbabwe as Africa T20 Cup grows closer |url=https://www.cricinfo.com/story/namibia-to-host-south-africa-zimbabwe-as-africa-t20-cup-grows-closer-1548977 |work=[[क्रिकइन्फो]] |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |trans-title=दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वे नामिबियाच्या 'व्हाइट-बॉल' दौऱ्यासाठी सज्ज |title=South Africa, Zimbabwe set for white-ball tour of Namibia |url=https://www.cricbuzz.com/cricket-news/139776/south-africa-zimbabwe-set-for-white-ball-tour-of-namibia-cricbuzzcom |work=[[क्रिकबझ्झ]] |date=७ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref> या दौऱ्यात तीन [[आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय]] सामन्यांचा समावेश होता; हे सामने [[नामिबिया राष्ट्रीय क्रिकेट संघ|नामिबिया]], [[दक्षिण आफ्रिका राष्ट्रीय क्रिकेट संघ|दक्षिण आफ्रिका]] आणि [[झिम्बाब्वे राष्ट्रीय क्रिकेट संघ|झिम्बाब्वे]]च्या पुरुष राष्ट्रीय संघांमधील [[२०२६ नामिबिया आं.टी२० तिरंगी मालिका|२०२६ नामिबिया आंतरराष्ट्रीय टी२० तिरंगी मालिके]]नंतर खेळवले गेले. <ref>{{cite web |trans-title= क्रिकेट विश्वचषक २०२७ चे यजमान ऐतिहासिक तिरंगी मालिका खेळणार |title=Cricket World Cup 2027 hosts set to play landmark tri-series |url=https://www.icc-cricket.com/news/cricket-world-cup-2027-hosts-set-to-play-landmark-tri-series |work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]] |date=७ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |last=हेस |first=स्टुअर्ट|date=४ ऑगस्ट २०२६|trans-title= ऑस्ट्रेलियाविरुद्धच्या आव्हानापूर्वी नामिबियातील तिरंगी मालिकेने 'प्रोटियाज'चा हंगाम सुरू होणार |title=Proteas to open season with Namibia tri-series before Australia challenge |url=https://www.businessday.co.za/sport/cricket/2026-08-04-proteas-to-open-season-with-namibia-tri-series-before-australia-challenge/ |work=बिझनेस डे (दक्षिण आफ्रिका) |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref> सर्व सामने [[विंडहोक]] येथील [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]] येथे खेळवले गेले.<ref>{{cite web |trans-title= ऑगस्ट २०२६ मध्ये दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वे यांच्याविरुद्ध आंतरराष्ट्रीय टी२० तिरंगी मालिका आणि एकदिवसीय मालिकेचे यजमानपद क्रिकेट नामिबिया भूषवणार आहे.|title=Cricket Namibia to host South Africa and Zimbabwe for T20I Tri-series and ODI series in August 2026 |url=https://czarsportzauto.com/namibia-vs-south-africa-vs-zimbabwe-tri-series-2026/ |date=७ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६|work=Czarsportz}}</ref><ref>{{cite web |last= शुट्झ |first= हेल्गे |date=७ ऑगस्ट २०२६ |trans-title= नामिबिया 'एफएनबी टी२० ट्राय-सीरीज'मध्ये दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वेचे यजमानपद भूषवणार |title=Namibia to host SA & Zimbabwe in FNB T20 Tri-Series |url=https://www.namibian.com.na/namibia-to-host-sa-zimbabwe-in-fnb-t20-tri-series/ |work=[[द नामिबियन]] |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref> ऑगस्ट २०२६ मध्ये, [[क्रिकेट नामिबिया]]ने या मालिकेचे वेळापत्रक निश्चित केले.<ref>{{cite web |trans-title= क्रिकेट नामिबिया 'एफएनबी टी-२० ट्राय-सीरीज'मध्ये प्रोटियाज आणि झिम्बाब्वेचे यजमानपद भूषवणार |title=Cricket Namibia to Host The Proteas and Zimbabwe in FNB T20 Tri-Series |url=https://cricketnamibia.com/cricket-namibia-to-host-the-proteas-and-zimbabwe-in-fnb-t20-tri-series/ |work=[[क्रिकेट नामिबिया]] |date=७ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |trans-title= दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वे नामिबियाच्या 'व्हाइट-बॉल' दौऱ्यासाठी सज्ज |title=South Africa, Zimbabwe set for white-ball tour of Namibia |url=https://guyanachronicle.com/2026/08/08/south-africa-zimbabwe-set-for-white-ball-tour-of-namibia/ |work=गयाना क्रोनिकल्स |date=८ ऑगस्ट २०२६|access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
==संघ==
{| class="wikitable" style="text-align:left; margin:auto"
|-
!{{cr|NAM}}<ref>{{cite web|url=https://www.cricinfo.com/series/south-africa-in-namibia-2026-1549537/namibia-squad-1553386/series-squads|title=South Africa tour of Namibia 2026 Squad – Namibia Team|date=८ सप्टेंबर २०२६|work=[[क्रिकइन्फो]]|trans-title=दक्षिण आफ्रिकेचा नामिबिया दौरा २०२६ - संघ (नामिबिया संघ)|url-status=live|access-date=१६ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
!{{cr|SA}}<ref>{{cite web |trans-title= दक्षिण आफ्रिकेचा नवीन कर्णधार नामिबिया दौऱ्यावर संघाचे नेतृत्व करण्यास सज्ज |title=New South Africa skipper set to lead side on Namibia tour |url=https://www.icc-cricket.com/news/new-south-africa-skipper-set-to-lead-side-on-namibia-tour |date=११ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६|work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]]}}</ref>
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|valign="top"|
* [[गेरहार्ड इरास्मुस]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]],[[यष्टीरक्षक|य]])
* अलेक्झांडर बसिंग-वोल्शेंक
* मॅक्स हिंगो
* ज्युनियर तान्यांदा
* [[जेजे स्मिट]]
* [[जॅक ब्रासेल]]
* [[झेन ग्रीन]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[बर्नार्ड शोल्ट्झ]]
* [[मायकेल व्हान लिंगेन]]
* [[मलान क्रुगर]]
* [[यान निकोल लोफ्टी-ईटन]]
* [[यान फ्रायलिंक]]
* [[यान बाल्ट]]
* [[रुबेन ट्रम्पलमान|रुबेन ट्रम्पलमन]]
* लॉरेन स्टीनकॅम्प
* वाल्डो स्मिथ
|valign="top"|
* [[ब्यॉर्न फॉर्टुइन]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]])
* [[इथन बॉश]]
* <s>[[अँडील सिमेलेन]]</s>
* [[कॉनर एस्टरहुइझेन]] [[यष्टीरक्षक|(य)]]
* [[कॉर्बिन बॉश]]
* [[क्वेना मफाका]]
* [[जेसन स्मिथ]]
* [[जॉर्डन हरमन]]
* [[टोनी डी झॉर्झी]]
* [[डेवाल्ड ब्रेव्हिस]]
* [[दुआन यान्सिन]]
* [[न्काबा पीटर]]
* [[न्कोबानी मोकोएना]]
* [[प्रीनेलन सुब्रयेन]]
* [[मॅथ्यू ब्रीट्झके]]
* [[रुबिन हरमन]]
* <s>[[लुआन-ड्रे प्रिटोरियस]]</s> [[यष्टीरक्षक|(य)]]
* <s>[[लुथो सिपामला]]</s>
|}
३० ऑगस्ट २०२६ रोजी, हॅमस्ट्रिंगच्या दुखापतीमुळे [[लुथो सिपामला]] मालिकेतून बाहेर पडला आणि दक्षिण आफ्रिकेच्या संघात त्याच्या जागी [[अँडील सिमेलेन]]ची निवड करण्यात आली.<ref>{{cite web |last=मुंडा|first=फिरदोस|date=३० ऑगस्ट २०२६ |trans-title=हॅमस्ट्रिंगच्या दुखापतीमुळे सिपामला नामिबिया तिरंगी मालिकेतून बाहेर|title=Sipamla ruled out of Namibia tri-series with hamstring injury |url=https://www.cricinfo.com/story/lutho-sipamla-ruled-out-of-namibia-tri-series-with-hamstring-injury-1552225 |work=[[क्रिकइन्फो]] |access-date=१० सप्टेंबर २०२६}}</ref> ७ सप्टेंबर २०२६ रोजी, [[अँडील सिमेलेन]] आणि [[लुआन-ड्रे प्रिटोरियस]] हे दोघेही संघातून बाहेर पडले आणि त्यांच्या जागी [[कॉर्बिन बॉश]] व [[मॅथ्यू ब्रीट्झके]] यांची निवड करण्यात आली.<ref>{{cite web|last=मुंडा|first=फिरदोस |date=७ सप्टेंबर २०२६ |trans-title=ऑस्ट्रेलियाविरुद्धच्या एकदिवसीय मालिकेसाठी दक्षिण आफ्रिकेच्या संघात मिलर, डी कॉक आणि कोएत्झी यांचा समावेश.|title=Miller, de Kock, Coetzee in South Africa squad for Australia ODIs |url=https://www.cricinfo.com/story/sa-vs-aus-david-miller-quinton-de-kock-temba-bavuma-in-sa-squad-for-australia-odis-1553166 |work=[[क्रिकइन्फो]] |access-date=१० सप्टेंबर २०२६}}</ref>
== आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय मालिका==
===१ला आं.ए.दि.===
{{Single-innings cricket match
| date = ९ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SA}}
| team2 = {{cr|NAM}}
| score1 = ३४८/६ (५० षटके)
| runs1 = [[जॉर्डन हरमन]] १५० (१२६)
| wickets1 = [[रुबेन ट्रम्पलमान]] ४/६८ (१० षटके)
| score2 = १६२/८ (३१ षटके)
| runs2 = [[मलान क्रुगर]] ३४ (६०)
| wickets2 = [[प्रीनेलन सुब्रयेन]] ४/२९ (6 षटके)
| result = दक्षिण आफ्रिका ९९ धावांनी विजयी ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस पद्धत]])
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549531.html धावफलक]
| venue = [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]]
| umpires = [[रशीद रियाझ]] (पा) आणि क्लॉस शुमाकर (ना)
| motm = [[जॉर्डन हरमन]] (द)
| toss = नामिबियाने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षण करण्याचा निर्णय घेतला.
| rain = पावसामुळे नामिबियासमोर ३१ षटकांत २६२ धावांचे सुधारित लक्ष्य ठेवण्यात आले.
| notes = [[कॉनर एस्टरह्युझेन]], [[जॉर्डन हरमन]] आणि [[दुआन यान्सिन]] (द) ह्या सर्वांनी आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय पदार्पण केले.
* जॉर्डन हर्मनने (दआ) एकदिवसीय कारकीर्दीमधील आपले पहिले शतक झळकावले. त्याची ही धावसंख्या एकदिवसीय पदार्पणातील सर्वोच्च धावसंख्येच्या विक्रमाशी बरोबरी करणारी ठरली.<ref>{{cite web |trans-title=प्रोटियाजसाठी हर्मनचे शानदार पदार्पणातील शतक; एकदिवसीय सामन्यांतील विक्रमाशी बरोबरी|title=Hermann’s glorious debut ton for Proteas equals ODI record |url=https://www.icc-cricket.com/news/hermann-s-glorious-debut-ton-for-proteas-equals-odi-record |work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]] |date=९ सप्टेंबर २०२६ |access-date=१० सप्टेंबर २०२६}}</ref>
}}
===२रा आं.ए.दि.===
{{Single-innings cricket match
| date = ११ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SA}}
| team2 = {{cr|NAM}}
| score1 = ३३५/९ (५० षटके)
| runs1 = [[कॉनर एस्टरह्युझेन]] ११९ (११०)
| wickets1 = [[जॅक ब्रासेल]] ४/६४ (१० षटके)
| score2 = १७८ (४१.५ षटके)
| runs2 = [[गेरहार्ड इरास्मुस]] ६८ (८४)
| wickets2 = [[दुआन यान्सिन]] ४/३१ (९ षटके)
| result = दक्षिण आफ्रिका १५७ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549532.html धावफलक]
| venue = [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]]
| umpires = [[रशीद रियाझ]] (पा) आणि इवौद लसेन (ना)
| motm = [[कॉनर एस्टरह्युझेन]] (द)
| toss = नामिबियाने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षण करण्याचा निर्णय घेतला.
| notes = [[न्कोबानी मोकोएना]] (द) आणि [[वाल्डो स्मिथ]] (ना) ह्या दोघांनी आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय पदार्पण केले.
* [[कॉनर एस्टरह्युझेन]] (द) ह्याने आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय कारकिर्दीतील पहिले शतक झळकावले.<ref>{{cite web |trans-title=कॉनर एस्टरह्युझेनच्या पहिल्यावहिल्या एकदिवसीय शतकाच्या जोरावर दक्षिण आफ्रिकेचा मोठा विजय|title=Connor Esterhuizen's maiden ODI century powers SA to massive win |url=https://m.cricbuzz.com/cricket-news/140145/connor-esterhuizens-maiden-odi-century-powers-sa-to-massive-win |work=[[क्रिकबझ्झ]] |date=११ सप्टेंबर २०२६|access-date=१६ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
}}
===३रा आं.ए.दि.===
{{Single-innings cricket match
| date = १३ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|NAM}}
| team2 = {{cr|SA}}
| score1 = १५६ (३६.२ षटके)
| runs1 = [[झेन ग्रीन]] ३३ (४२)
| wickets1 = [[ब्यॉर्न फॉर्टुइन]] ४/३३ (१० षटके)
| score2 = १५७/१ (२१.३ षटके)
| runs2 = [[जॉर्डन हरमन]] ७७ (५९)
| wickets2 = [[वाल्डो स्मिथ]] १/२९ (३ षटके)
| result = दक्षिण आफ्रिका ९ वादी राखून विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549533.html धावफलक]
| venue = [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]]
| umpires = [[रशीद रियाझ]] (पा) आणि क्लॉस शुमाकर (ना)
| motm = [[ब्यॉर्न फॉर्टुइन]] (द)
| toss = नामिबियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजी करण्याचा निर्णय घेतला.
}}
==संदर्भयादी==
{{संदर्भयादी}}
{{नामिबियाचे आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट दौरे}}
{{आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६}}
[[वर्ग:दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचे नामिबिया दौरे|२०२६]]
[[वर्ग:दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचे परदेशी दौरे|नामिबिया]]
[[वर्ग:आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संघांचे नामिबिया दौरे]]
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2709916
2026-09-16T11:12:50Z
Nitin.kunjir
4684
/* आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय मालिका */
2709917
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox cricket tour
| series_name = दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचा नामिबिया दौरा, २०२६
| team1_image = Flag of Namibia.svg
| team1_name = नामिबिया
| team2_image = Flag of South Africa.svg
| team2_name = दक्षिण आफ्रिका
| from_date = ९
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}}
[[दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघ]]ाने ९ ते १३ सप्टेंबर २०२६ या कालावधीत [[नामिबिया क्रिकेट संघ|नामिबिया]]विरुद्ध सामने खेळण्यासाठी [[नामिबिया]]चा दौरा केला. <ref>{{cite web |last=मुंडा|first=फिरदोस|date=७ ऑगस्ट २०२६ |trans-title= आफ्रिका टी२० चषक स्पर्धा जवळ येत असताना नामिबिया दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वेचे यजमानपद भूषवणार. |title=Namibia to host SA, Zimbabwe as Africa T20 Cup grows closer |url=https://www.cricinfo.com/story/namibia-to-host-south-africa-zimbabwe-as-africa-t20-cup-grows-closer-1548977 |work=[[क्रिकइन्फो]] |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |trans-title=दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वे नामिबियाच्या 'व्हाइट-बॉल' दौऱ्यासाठी सज्ज |title=South Africa, Zimbabwe set for white-ball tour of Namibia |url=https://www.cricbuzz.com/cricket-news/139776/south-africa-zimbabwe-set-for-white-ball-tour-of-namibia-cricbuzzcom |work=[[क्रिकबझ्झ]] |date=७ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref> या दौऱ्यात तीन [[आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय]] सामन्यांचा समावेश होता; हे सामने [[नामिबिया राष्ट्रीय क्रिकेट संघ|नामिबिया]], [[दक्षिण आफ्रिका राष्ट्रीय क्रिकेट संघ|दक्षिण आफ्रिका]] आणि [[झिम्बाब्वे राष्ट्रीय क्रिकेट संघ|झिम्बाब्वे]]च्या पुरुष राष्ट्रीय संघांमधील [[२०२६ नामिबिया आं.टी२० तिरंगी मालिका|२०२६ नामिबिया आंतरराष्ट्रीय टी२० तिरंगी मालिके]]नंतर खेळवले गेले. <ref>{{cite web |trans-title= क्रिकेट विश्वचषक २०२७ चे यजमान ऐतिहासिक तिरंगी मालिका खेळणार |title=Cricket World Cup 2027 hosts set to play landmark tri-series |url=https://www.icc-cricket.com/news/cricket-world-cup-2027-hosts-set-to-play-landmark-tri-series |work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]] |date=७ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |last=हेस |first=स्टुअर्ट|date=४ ऑगस्ट २०२६|trans-title= ऑस्ट्रेलियाविरुद्धच्या आव्हानापूर्वी नामिबियातील तिरंगी मालिकेने 'प्रोटियाज'चा हंगाम सुरू होणार |title=Proteas to open season with Namibia tri-series before Australia challenge |url=https://www.businessday.co.za/sport/cricket/2026-08-04-proteas-to-open-season-with-namibia-tri-series-before-australia-challenge/ |work=बिझनेस डे (दक्षिण आफ्रिका) |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref> सर्व सामने [[विंडहोक]] येथील [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]] येथे खेळवले गेले.<ref>{{cite web |trans-title= ऑगस्ट २०२६ मध्ये दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वे यांच्याविरुद्ध आंतरराष्ट्रीय टी२० तिरंगी मालिका आणि एकदिवसीय मालिकेचे यजमानपद क्रिकेट नामिबिया भूषवणार आहे.|title=Cricket Namibia to host South Africa and Zimbabwe for T20I Tri-series and ODI series in August 2026 |url=https://czarsportzauto.com/namibia-vs-south-africa-vs-zimbabwe-tri-series-2026/ |date=७ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६|work=Czarsportz}}</ref><ref>{{cite web |last= शुट्झ |first= हेल्गे |date=७ ऑगस्ट २०२६ |trans-title= नामिबिया 'एफएनबी टी२० ट्राय-सीरीज'मध्ये दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वेचे यजमानपद भूषवणार |title=Namibia to host SA & Zimbabwe in FNB T20 Tri-Series |url=https://www.namibian.com.na/namibia-to-host-sa-zimbabwe-in-fnb-t20-tri-series/ |work=[[द नामिबियन]] |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref> ऑगस्ट २०२६ मध्ये, [[क्रिकेट नामिबिया]]ने या मालिकेचे वेळापत्रक निश्चित केले.<ref>{{cite web |trans-title= क्रिकेट नामिबिया 'एफएनबी टी-२० ट्राय-सीरीज'मध्ये प्रोटियाज आणि झिम्बाब्वेचे यजमानपद भूषवणार |title=Cricket Namibia to Host The Proteas and Zimbabwe in FNB T20 Tri-Series |url=https://cricketnamibia.com/cricket-namibia-to-host-the-proteas-and-zimbabwe-in-fnb-t20-tri-series/ |work=[[क्रिकेट नामिबिया]] |date=७ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |trans-title= दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वे नामिबियाच्या 'व्हाइट-बॉल' दौऱ्यासाठी सज्ज |title=South Africa, Zimbabwe set for white-ball tour of Namibia |url=https://guyanachronicle.com/2026/08/08/south-africa-zimbabwe-set-for-white-ball-tour-of-namibia/ |work=गयाना क्रोनिकल्स |date=८ ऑगस्ट २०२६|access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
==संघ==
{| class="wikitable" style="text-align:left; margin:auto"
|-
!{{cr|NAM}}<ref>{{cite web|url=https://www.cricinfo.com/series/south-africa-in-namibia-2026-1549537/namibia-squad-1553386/series-squads|title=South Africa tour of Namibia 2026 Squad – Namibia Team|date=८ सप्टेंबर २०२६|work=[[क्रिकइन्फो]]|trans-title=दक्षिण आफ्रिकेचा नामिबिया दौरा २०२६ - संघ (नामिबिया संघ)|url-status=live|access-date=१६ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
!{{cr|SA}}<ref>{{cite web |trans-title= दक्षिण आफ्रिकेचा नवीन कर्णधार नामिबिया दौऱ्यावर संघाचे नेतृत्व करण्यास सज्ज |title=New South Africa skipper set to lead side on Namibia tour |url=https://www.icc-cricket.com/news/new-south-africa-skipper-set-to-lead-side-on-namibia-tour |date=११ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६|work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]]}}</ref>
|-
|valign="top"|
* [[गेरहार्ड इरास्मुस]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]],[[यष्टीरक्षक|य]])
* अलेक्झांडर बसिंग-वोल्शेंक
* मॅक्स हिंगो
* ज्युनियर तान्यांदा
* [[जेजे स्मिट]]
* [[जॅक ब्रासेल]]
* [[झेन ग्रीन]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[बर्नार्ड शोल्ट्झ]]
* [[मायकेल व्हान लिंगेन]]
* [[मलान क्रुगर]]
* [[यान निकोल लोफ्टी-ईटन]]
* [[यान फ्रायलिंक]]
* [[यान बाल्ट]]
* [[रुबेन ट्रम्पलमान|रुबेन ट्रम्पलमन]]
* लॉरेन स्टीनकॅम्प
* वाल्डो स्मिथ
|valign="top"|
* [[ब्यॉर्न फॉर्टुइन]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]])
* [[इथन बॉश]]
* <s>[[अँडील सिमेलेन]]</s>
* [[कॉनर एस्टरहुइझेन]] [[यष्टीरक्षक|(य)]]
* [[कॉर्बिन बॉश]]
* [[क्वेना मफाका]]
* [[जेसन स्मिथ]]
* [[जॉर्डन हरमन]]
* [[टोनी डी झॉर्झी]]
* [[डेवाल्ड ब्रेव्हिस]]
* [[दुआन यान्सिन]]
* [[न्काबा पीटर]]
* [[न्कोबानी मोकोएना]]
* [[प्रीनेलन सुब्रयेन]]
* [[मॅथ्यू ब्रीट्झके]]
* [[रुबिन हरमन]]
* <s>[[लुआन-ड्रे प्रिटोरियस]]</s> [[यष्टीरक्षक|(य)]]
* <s>[[लुथो सिपामला]]</s>
|}
३० ऑगस्ट २०२६ रोजी, हॅमस्ट्रिंगच्या दुखापतीमुळे [[लुथो सिपामला]] मालिकेतून बाहेर पडला आणि दक्षिण आफ्रिकेच्या संघात त्याच्या जागी [[अँडील सिमेलेन]]ची निवड करण्यात आली.<ref>{{cite web |last=मुंडा|first=फिरदोस|date=३० ऑगस्ट २०२६ |trans-title=हॅमस्ट्रिंगच्या दुखापतीमुळे सिपामला नामिबिया तिरंगी मालिकेतून बाहेर|title=Sipamla ruled out of Namibia tri-series with hamstring injury |url=https://www.cricinfo.com/story/lutho-sipamla-ruled-out-of-namibia-tri-series-with-hamstring-injury-1552225 |work=[[क्रिकइन्फो]] |access-date=१० सप्टेंबर २०२६}}</ref> ७ सप्टेंबर २०२६ रोजी, [[अँडील सिमेलेन]] आणि [[लुआन-ड्रे प्रिटोरियस]] हे दोघेही संघातून बाहेर पडले आणि त्यांच्या जागी [[कॉर्बिन बॉश]] व [[मॅथ्यू ब्रीट्झके]] यांची निवड करण्यात आली.<ref>{{cite web|last=मुंडा|first=फिरदोस |date=७ सप्टेंबर २०२६ |trans-title=ऑस्ट्रेलियाविरुद्धच्या एकदिवसीय मालिकेसाठी दक्षिण आफ्रिकेच्या संघात मिलर, डी कॉक आणि कोएत्झी यांचा समावेश.|title=Miller, de Kock, Coetzee in South Africa squad for Australia ODIs |url=https://www.cricinfo.com/story/sa-vs-aus-david-miller-quinton-de-kock-temba-bavuma-in-sa-squad-for-australia-odis-1553166 |work=[[क्रिकइन्फो]] |access-date=१० सप्टेंबर २०२६}}</ref>
== आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय मालिका==
===१ला आं.ए.दि.===
{{Single-innings cricket match
| date = ९ सप्टेंबर २०२६
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| team1 = {{cr-rt|SA}}
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| score1 = ३४८/६ (५० षटके)
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| rain = पावसामुळे नामिबियासमोर ३१ षटकांत २६२ धावांचे सुधारित लक्ष्य ठेवण्यात आले.
| notes = [[कॉनर एस्टरहुइझेन]], [[जॉर्डन हरमन]] आणि [[दुआन यान्सिन]] (द) ह्या सर्वांनी आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय पदार्पण केले.
* जॉर्डन हर्मनने (दआ) एकदिवसीय कारकीर्दीमधील आपले पहिले शतक झळकावले. त्याची ही धावसंख्या एकदिवसीय पदार्पणातील सर्वोच्च धावसंख्येच्या विक्रमाशी बरोबरी करणारी ठरली.<ref>{{cite web |trans-title=प्रोटियाजसाठी हर्मनचे शानदार पदार्पणातील शतक; एकदिवसीय सामन्यांतील विक्रमाशी बरोबरी|title=Hermann’s glorious debut ton for Proteas equals ODI record |url=https://www.icc-cricket.com/news/hermann-s-glorious-debut-ton-for-proteas-equals-odi-record |work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]] |date=९ सप्टेंबर २०२६ |access-date=१० सप्टेंबर २०२६}}</ref>
}}
===२रा आं.ए.दि.===
{{Single-innings cricket match
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* [[कॉनर एस्टरह्युझेन]] (द) ह्याने आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय कारकिर्दीतील पहिले शतक झळकावले.<ref>{{cite web |trans-title=कॉनर एस्टरह्युझेनच्या पहिल्यावहिल्या एकदिवसीय शतकाच्या जोरावर दक्षिण आफ्रिकेचा मोठा विजय|title=Connor Esterhuizen's maiden ODI century powers SA to massive win |url=https://m.cricbuzz.com/cricket-news/140145/connor-esterhuizens-maiden-odi-century-powers-sa-to-massive-win |work=[[क्रिकबझ्झ]] |date=११ सप्टेंबर २०२६|access-date=१६ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
}}
===३रा आं.ए.दि.===
{{Single-innings cricket match
| date = १३ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|NAM}}
| team2 = {{cr|SA}}
| score1 = १५६ (३६.२ षटके)
| runs1 = [[झेन ग्रीन]] ३३ (४२)
| wickets1 = [[ब्यॉर्न फॉर्टुइन]] ४/३३ (१० षटके)
| score2 = १५७/१ (२१.३ षटके)
| runs2 = [[जॉर्डन हरमन]] ७७ (५९)
| wickets2 = [[वाल्डो स्मिथ]] १/२९ (३ षटके)
| result = दक्षिण आफ्रिका ९ वादी राखून विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549533.html धावफलक]
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}}
==संदर्भयादी==
{{संदर्भयादी}}
{{नामिबियाचे आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट दौरे}}
{{आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६}}
[[वर्ग:दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचे नामिबिया दौरे|२०२६]]
[[वर्ग:दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचे परदेशी दौरे|नामिबिया]]
[[वर्ग:आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संघांचे नामिबिया दौरे]]
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2709918
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox cricket tour
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}}
[[दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघ]]ाने ९ ते १३ सप्टेंबर २०२६ या कालावधीत [[नामिबिया क्रिकेट संघ|नामिबिया]]विरुद्ध सामने खेळण्यासाठी [[नामिबिया]]चा दौरा केला. <ref>{{cite web |last=मुंडा|first=फिरदोस|date=७ ऑगस्ट २०२६ |trans-title= आफ्रिका टी२० चषक स्पर्धा जवळ येत असताना नामिबिया दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वेचे यजमानपद भूषवणार. |title=Namibia to host SA, Zimbabwe as Africa T20 Cup grows closer |url=https://www.cricinfo.com/story/namibia-to-host-south-africa-zimbabwe-as-africa-t20-cup-grows-closer-1548977 |work=[[क्रिकइन्फो]] |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |trans-title=दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वे नामिबियाच्या 'व्हाइट-बॉल' दौऱ्यासाठी सज्ज |title=South Africa, Zimbabwe set for white-ball tour of Namibia |url=https://www.cricbuzz.com/cricket-news/139776/south-africa-zimbabwe-set-for-white-ball-tour-of-namibia-cricbuzzcom |work=[[क्रिकबझ्झ]] |date=७ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref> या दौऱ्यात तीन [[आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय]] सामन्यांचा समावेश होता; हे सामने [[नामिबिया राष्ट्रीय क्रिकेट संघ|नामिबिया]], [[दक्षिण आफ्रिका राष्ट्रीय क्रिकेट संघ|दक्षिण आफ्रिका]] आणि [[झिम्बाब्वे राष्ट्रीय क्रिकेट संघ|झिम्बाब्वे]]च्या पुरुष राष्ट्रीय संघांमधील [[२०२६ नामिबिया आं.टी२० तिरंगी मालिका|२०२६ नामिबिया आंतरराष्ट्रीय टी२० तिरंगी मालिके]]नंतर खेळवले गेले. <ref>{{cite web |trans-title= क्रिकेट विश्वचषक २०२७ चे यजमान ऐतिहासिक तिरंगी मालिका खेळणार |title=Cricket World Cup 2027 hosts set to play landmark tri-series |url=https://www.icc-cricket.com/news/cricket-world-cup-2027-hosts-set-to-play-landmark-tri-series |work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]] |date=७ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |last=हेस |first=स्टुअर्ट|date=४ ऑगस्ट २०२६|trans-title= ऑस्ट्रेलियाविरुद्धच्या आव्हानापूर्वी नामिबियातील तिरंगी मालिकेने 'प्रोटियाज'चा हंगाम सुरू होणार |title=Proteas to open season with Namibia tri-series before Australia challenge |url=https://www.businessday.co.za/sport/cricket/2026-08-04-proteas-to-open-season-with-namibia-tri-series-before-australia-challenge/ |work=बिझनेस डे (दक्षिण आफ्रिका) |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref> सर्व सामने [[विंडहोक]] येथील [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]] येथे खेळवले गेले.<ref>{{cite web |trans-title= ऑगस्ट २०२६ मध्ये दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वे यांच्याविरुद्ध आंतरराष्ट्रीय टी२० तिरंगी मालिका आणि एकदिवसीय मालिकेचे यजमानपद क्रिकेट नामिबिया भूषवणार आहे.|title=Cricket Namibia to host South Africa and Zimbabwe for T20I Tri-series and ODI series in August 2026 |url=https://czarsportzauto.com/namibia-vs-south-africa-vs-zimbabwe-tri-series-2026/ |date=७ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६|work=Czarsportz}}</ref><ref>{{cite web |last= शुट्झ |first= हेल्गे |date=७ ऑगस्ट २०२६ |trans-title= नामिबिया 'एफएनबी टी२० ट्राय-सीरीज'मध्ये दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वेचे यजमानपद भूषवणार |title=Namibia to host SA & Zimbabwe in FNB T20 Tri-Series |url=https://www.namibian.com.na/namibia-to-host-sa-zimbabwe-in-fnb-t20-tri-series/ |work=[[द नामिबियन]] |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref> ऑगस्ट २०२६ मध्ये, [[क्रिकेट नामिबिया]]ने या मालिकेचे वेळापत्रक निश्चित केले.<ref>{{cite web |trans-title= क्रिकेट नामिबिया 'एफएनबी टी-२० ट्राय-सीरीज'मध्ये प्रोटियाज आणि झिम्बाब्वेचे यजमानपद भूषवणार |title=Cricket Namibia to Host The Proteas and Zimbabwe in FNB T20 Tri-Series |url=https://cricketnamibia.com/cricket-namibia-to-host-the-proteas-and-zimbabwe-in-fnb-t20-tri-series/ |work=[[क्रिकेट नामिबिया]] |date=७ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |trans-title= दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वे नामिबियाच्या 'व्हाइट-बॉल' दौऱ्यासाठी सज्ज |title=South Africa, Zimbabwe set for white-ball tour of Namibia |url=https://guyanachronicle.com/2026/08/08/south-africa-zimbabwe-set-for-white-ball-tour-of-namibia/ |work=गयाना क्रोनिकल्स |date=८ ऑगस्ट २०२६|access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
==संघ==
{| class="wikitable" style="text-align:left; margin:auto"
|-
!{{cr|NAM}}<ref>{{cite web|url=https://www.cricinfo.com/series/south-africa-in-namibia-2026-1549537/namibia-squad-1553386/series-squads|title=South Africa tour of Namibia 2026 Squad – Namibia Team|date=८ सप्टेंबर २०२६|work=[[क्रिकइन्फो]]|trans-title=दक्षिण आफ्रिकेचा नामिबिया दौरा २०२६ - संघ (नामिबिया संघ)|url-status=live|access-date=१६ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
!{{cr|SA}}<ref>{{cite web |trans-title= दक्षिण आफ्रिकेचा नवीन कर्णधार नामिबिया दौऱ्यावर संघाचे नेतृत्व करण्यास सज्ज |title=New South Africa skipper set to lead side on Namibia tour |url=https://www.icc-cricket.com/news/new-south-africa-skipper-set-to-lead-side-on-namibia-tour |date=११ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६|work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]]}}</ref>
|-
|valign="top"|
* [[गेरहार्ड इरास्मुस]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]],[[यष्टीरक्षक|य]])
* अलेक्झांडर बसिंग-वोल्शेंक
* मॅक्स हिंगो
* ज्युनियर तान्यांदा
* [[जेजे स्मिट]]
* [[जॅक ब्रासेल]]
* [[झेन ग्रीन]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[बर्नार्ड शोल्ट्झ]]
* [[मायकेल व्हान लिंगेन]]
* [[मलान क्रुगर]]
* [[यान निकोल लोफ्टी-ईटन]]
* [[यान फ्रायलिंक]]
* [[यान बाल्ट]]
* [[रुबेन ट्रम्पलमान|रुबेन ट्रम्पलमन]]
* लॉरेन स्टीनकॅम्प
* वाल्डो स्मिथ
|valign="top"|
* [[ब्यॉर्न फॉर्टुइन]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]])
* [[इथन बॉश]]
* <s>[[अँडील सिमेलेन]]</s>
* [[कॉनर एस्टरहुइझेन]] [[यष्टीरक्षक|(य)]]
* [[कॉर्बिन बॉश]]
* [[क्वेना मफाका]]
* [[जेसन स्मिथ]]
* [[जॉर्डन हरमन]]
* [[टोनी डी झॉर्झी]]
* [[डेवाल्ड ब्रेव्हिस]]
* [[दुआन यान्सिन]]
* [[न्काबा पीटर]]
* [[न्कोबानी मोकोएना]]
* [[प्रीनेलन सुब्रयेन]]
* [[मॅथ्यू ब्रीट्झके]]
* [[रुबिन हरमन]]
* <s>[[लुआन-ड्रे प्रिटोरियस]]</s> [[यष्टीरक्षक|(य)]]
* <s>[[लुथो सिपामला]]</s>
|}
३० ऑगस्ट २०२६ रोजी, हॅमस्ट्रिंगच्या दुखापतीमुळे [[लुथो सिपामला]] मालिकेतून बाहेर पडला आणि दक्षिण आफ्रिकेच्या संघात त्याच्या जागी [[अँडील सिमेलेन]]ची निवड करण्यात आली.<ref>{{cite web |last=मुंडा|first=फिरदोस|date=३० ऑगस्ट २०२६ |trans-title=हॅमस्ट्रिंगच्या दुखापतीमुळे सिपामला नामिबिया तिरंगी मालिकेतून बाहेर|title=Sipamla ruled out of Namibia tri-series with hamstring injury |url=https://www.cricinfo.com/story/lutho-sipamla-ruled-out-of-namibia-tri-series-with-hamstring-injury-1552225 |work=[[क्रिकइन्फो]] |access-date=१० सप्टेंबर २०२६}}</ref> ७ सप्टेंबर २०२६ रोजी, [[अँडील सिमेलेन]] आणि [[लुआन-ड्रे प्रिटोरियस]] हे दोघेही संघातून बाहेर पडले आणि त्यांच्या जागी [[कॉर्बिन बॉश]] व [[मॅथ्यू ब्रीट्झके]] यांची निवड करण्यात आली.<ref>{{cite web|last=मुंडा|first=फिरदोस |date=७ सप्टेंबर २०२६ |trans-title=ऑस्ट्रेलियाविरुद्धच्या एकदिवसीय मालिकेसाठी दक्षिण आफ्रिकेच्या संघात मिलर, डी कॉक आणि कोएत्झी यांचा समावेश.|title=Miller, de Kock, Coetzee in South Africa squad for Australia ODIs |url=https://www.cricinfo.com/story/sa-vs-aus-david-miller-quinton-de-kock-temba-bavuma-in-sa-squad-for-australia-odis-1553166 |work=[[क्रिकइन्फो]] |access-date=१० सप्टेंबर २०२६}}</ref>
== आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय मालिका==
===१ला आं.ए.दि.===
{{Single-innings cricket match
| date = ९ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SA}}
| team2 = {{cr|NAM}}
| score1 = ३४८/६ (५० षटके)
| runs1 = [[जॉर्डन हरमन]] १५० (१२६)
| wickets1 = [[रुबेन ट्रम्पलमान]] ४/६८ (१० षटके)
| score2 = १६२/८ (३१ षटके)
| runs2 = [[मलान क्रुगर]] ३४ (६०)
| wickets2 = [[प्रीनेलन सुब्रयेन]] ४/२९ (6 षटके)
| result = दक्षिण आफ्रिका ९९ धावांनी विजयी ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस पद्धत]])
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549531.html धावफलक]
| venue = [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]]
| umpires = [[रशीद रियाझ]] (पा) आणि क्लॉस शुमाकर (ना)
| motm = [[जॉर्डन हरमन]] (द)
| toss = नामिबियाने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षण करण्याचा निर्णय घेतला.
| rain = पावसामुळे नामिबियासमोर ३१ षटकांत २६२ धावांचे सुधारित लक्ष्य ठेवण्यात आले.
| notes = [[कॉनर एस्टरहुइझेन]], [[जॉर्डन हरमन]] आणि [[दुआन यान्सिन]] (द) ह्या सर्वांनी आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय पदार्पण केले.
* जॉर्डन हर्मनने (दआ) एकदिवसीय कारकीर्दीमधील आपले पहिले शतक झळकावले. त्याची ही धावसंख्या एकदिवसीय पदार्पणातील सर्वोच्च धावसंख्येच्या विक्रमाशी बरोबरी करणारी ठरली.<ref>{{cite web |trans-title=प्रोटियाजसाठी हर्मनचे शानदार पदार्पणातील शतक; एकदिवसीय सामन्यांतील विक्रमाशी बरोबरी|title=Hermann’s glorious debut ton for Proteas equals ODI record |url=https://www.icc-cricket.com/news/hermann-s-glorious-debut-ton-for-proteas-equals-odi-record |work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]] |date=९ सप्टेंबर २०२६ |access-date=१० सप्टेंबर २०२६}}</ref>
}}
===२रा आं.ए.दि.===
{{Single-innings cricket match
| date = ११ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SA}}
| team2 = {{cr|NAM}}
| score1 = ३३५/९ (५० षटके)
| runs1 = [[कॉनर एस्टरहुइझेन]] ११९ (११०)
| wickets1 = [[जॅक ब्रासेल]] ४/६४ (१० षटके)
| score2 = १७८ (४१.५ षटके)
| runs2 = [[गेरहार्ड इरास्मुस]] ६८ (८४)
| wickets2 = [[दुआन यान्सिन]] ४/३१ (९ षटके)
| result = दक्षिण आफ्रिका १५७ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549532.html धावफलक]
| venue = [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]]
| umpires = [[रशीद रियाझ]] (पा) आणि इवौद लसेन (ना)
| motm = [[कॉनर एस्टरहुइझेन]] (द)
| toss = नामिबियाने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षण करण्याचा निर्णय घेतला.
| notes = [[न्कोबानी मोकोएना]] (द) आणि [[वाल्डो स्मिथ]] (ना) ह्या दोघांनी आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय पदार्पण केले.
* [[कॉनर एस्टरहुइझेन]] (द) ह्याने आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय कारकिर्दीतील पहिले शतक झळकावले.<ref>{{cite web |trans-title=कॉनर एस्टरह्युझेनच्या पहिल्यावहिल्या एकदिवसीय शतकाच्या जोरावर दक्षिण आफ्रिकेचा मोठा विजय|title=Connor Esterhuizen's maiden ODI century powers SA to massive win |url=https://m.cricbuzz.com/cricket-news/140145/connor-esterhuizens-maiden-odi-century-powers-sa-to-massive-win |work=[[क्रिकबझ्झ]] |date=११ सप्टेंबर २०२६|access-date=१६ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
}}
===३रा आं.ए.दि.===
{{Single-innings cricket match
| date = १३ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|NAM}}
| team2 = {{cr|SA}}
| score1 = १५६ (३६.२ षटके)
| runs1 = [[झेन ग्रीन]] ३३ (४२)
| wickets1 = [[ब्यॉर्न फॉर्टुइन]] ४/३३ (१० षटके)
| score2 = १५७/१ (२१.३ षटके)
| runs2 = [[जॉर्डन हरमन]] ७७ (५९)
| wickets2 = [[वाल्डो स्मिथ]] १/२९ (३ षटके)
| result = दक्षिण आफ्रिका ९ वादी राखून विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549533.html धावफलक]
| venue = [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]]
| umpires = [[रशीद रियाझ]] (पा) आणि क्लॉस शुमाकर (ना)
| motm = [[ब्यॉर्न फॉर्टुइन]] (द)
| toss = नामिबियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजी करण्याचा निर्णय घेतला.
}}
==संदर्भयादी==
{{संदर्भयादी}}
{{नामिबियाचे आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट दौरे}}
{{आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६}}
[[वर्ग:दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचे नामिबिया दौरे|२०२६]]
[[वर्ग:दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचे परदेशी दौरे|नामिबिया]]
[[वर्ग:आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संघांचे नामिबिया दौरे]]
jgziovbcr2wf5jvjay3qhvwm3bq9nf4
2709938
2709918
2026-09-16T11:26:10Z
Nitin.kunjir
4684
/* ३रा आं.ए.दि. */
2709938
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox cricket tour
| series_name = दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचा नामिबिया दौरा, २०२६
| team1_image = Flag of Namibia.svg
| team1_name = नामिबिया
| team2_image = Flag of South Africa.svg
| team2_name = दक्षिण आफ्रिका
| from_date = ९
| to_date = १३ सप्टेंबर २०२६
| team1_captain =
| team2_captain = [[ब्यॉर्न फॉर्टुइन]]
| no_of_ODIs = 3
| team1_ODIs_won =
| team2_ODIs_won =
| team1_ODIs_most_runs =
| team2_ODIs_most_runs =
| team1_ODIs_most_wickets =
| team2_ODIs_most_wickets =
| player_of_ODI_series =
}}
[[दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघ]]ाने ९ ते १३ सप्टेंबर २०२६ या कालावधीत [[नामिबिया क्रिकेट संघ|नामिबिया]]विरुद्ध सामने खेळण्यासाठी [[नामिबिया]]चा दौरा केला. <ref>{{cite web |last=मुंडा|first=फिरदोस|date=७ ऑगस्ट २०२६ |trans-title= आफ्रिका टी२० चषक स्पर्धा जवळ येत असताना नामिबिया दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वेचे यजमानपद भूषवणार. |title=Namibia to host SA, Zimbabwe as Africa T20 Cup grows closer |url=https://www.cricinfo.com/story/namibia-to-host-south-africa-zimbabwe-as-africa-t20-cup-grows-closer-1548977 |work=[[क्रिकइन्फो]] |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |trans-title=दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वे नामिबियाच्या 'व्हाइट-बॉल' दौऱ्यासाठी सज्ज |title=South Africa, Zimbabwe set for white-ball tour of Namibia |url=https://www.cricbuzz.com/cricket-news/139776/south-africa-zimbabwe-set-for-white-ball-tour-of-namibia-cricbuzzcom |work=[[क्रिकबझ्झ]] |date=७ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref> या दौऱ्यात तीन [[आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय]] सामन्यांचा समावेश होता; हे सामने [[नामिबिया राष्ट्रीय क्रिकेट संघ|नामिबिया]], [[दक्षिण आफ्रिका राष्ट्रीय क्रिकेट संघ|दक्षिण आफ्रिका]] आणि [[झिम्बाब्वे राष्ट्रीय क्रिकेट संघ|झिम्बाब्वे]]च्या पुरुष राष्ट्रीय संघांमधील [[२०२६ नामिबिया आं.टी२० तिरंगी मालिका|२०२६ नामिबिया आंतरराष्ट्रीय टी२० तिरंगी मालिके]]नंतर खेळवले गेले. <ref>{{cite web |trans-title= क्रिकेट विश्वचषक २०२७ चे यजमान ऐतिहासिक तिरंगी मालिका खेळणार |title=Cricket World Cup 2027 hosts set to play landmark tri-series |url=https://www.icc-cricket.com/news/cricket-world-cup-2027-hosts-set-to-play-landmark-tri-series |work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]] |date=७ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |last=हेस |first=स्टुअर्ट|date=४ ऑगस्ट २०२६|trans-title= ऑस्ट्रेलियाविरुद्धच्या आव्हानापूर्वी नामिबियातील तिरंगी मालिकेने 'प्रोटियाज'चा हंगाम सुरू होणार |title=Proteas to open season with Namibia tri-series before Australia challenge |url=https://www.businessday.co.za/sport/cricket/2026-08-04-proteas-to-open-season-with-namibia-tri-series-before-australia-challenge/ |work=बिझनेस डे (दक्षिण आफ्रिका) |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref> सर्व सामने [[विंडहोक]] येथील [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]] येथे खेळवले गेले.<ref>{{cite web |trans-title= ऑगस्ट २०२६ मध्ये दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वे यांच्याविरुद्ध आंतरराष्ट्रीय टी२० तिरंगी मालिका आणि एकदिवसीय मालिकेचे यजमानपद क्रिकेट नामिबिया भूषवणार आहे.|title=Cricket Namibia to host South Africa and Zimbabwe for T20I Tri-series and ODI series in August 2026 |url=https://czarsportzauto.com/namibia-vs-south-africa-vs-zimbabwe-tri-series-2026/ |date=७ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६|work=Czarsportz}}</ref><ref>{{cite web |last= शुट्झ |first= हेल्गे |date=७ ऑगस्ट २०२६ |trans-title= नामिबिया 'एफएनबी टी२० ट्राय-सीरीज'मध्ये दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वेचे यजमानपद भूषवणार |title=Namibia to host SA & Zimbabwe in FNB T20 Tri-Series |url=https://www.namibian.com.na/namibia-to-host-sa-zimbabwe-in-fnb-t20-tri-series/ |work=[[द नामिबियन]] |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref> ऑगस्ट २०२६ मध्ये, [[क्रिकेट नामिबिया]]ने या मालिकेचे वेळापत्रक निश्चित केले.<ref>{{cite web |trans-title= क्रिकेट नामिबिया 'एफएनबी टी-२० ट्राय-सीरीज'मध्ये प्रोटियाज आणि झिम्बाब्वेचे यजमानपद भूषवणार |title=Cricket Namibia to Host The Proteas and Zimbabwe in FNB T20 Tri-Series |url=https://cricketnamibia.com/cricket-namibia-to-host-the-proteas-and-zimbabwe-in-fnb-t20-tri-series/ |work=[[क्रिकेट नामिबिया]] |date=७ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref><ref>{{cite web |trans-title= दक्षिण आफ्रिका आणि झिम्बाब्वे नामिबियाच्या 'व्हाइट-बॉल' दौऱ्यासाठी सज्ज |title=South Africa, Zimbabwe set for white-ball tour of Namibia |url=https://guyanachronicle.com/2026/08/08/south-africa-zimbabwe-set-for-white-ball-tour-of-namibia/ |work=गयाना क्रोनिकल्स |date=८ ऑगस्ट २०२६|access-date=८ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
==संघ==
{| class="wikitable" style="text-align:left; margin:auto"
|-
!{{cr|NAM}}<ref>{{cite web|url=https://www.cricinfo.com/series/south-africa-in-namibia-2026-1549537/namibia-squad-1553386/series-squads|title=South Africa tour of Namibia 2026 Squad – Namibia Team|date=८ सप्टेंबर २०२६|work=[[क्रिकइन्फो]]|trans-title=दक्षिण आफ्रिकेचा नामिबिया दौरा २०२६ - संघ (नामिबिया संघ)|url-status=live|access-date=१६ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
!{{cr|SA}}<ref>{{cite web |trans-title= दक्षिण आफ्रिकेचा नवीन कर्णधार नामिबिया दौऱ्यावर संघाचे नेतृत्व करण्यास सज्ज |title=New South Africa skipper set to lead side on Namibia tour |url=https://www.icc-cricket.com/news/new-south-africa-skipper-set-to-lead-side-on-namibia-tour |date=११ ऑगस्ट २०२६ |access-date=८ सप्टेंबर २०२६|work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]]}}</ref>
|-
|valign="top"|
* [[गेरहार्ड इरास्मुस]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]],[[यष्टीरक्षक|य]])
* अलेक्झांडर बसिंग-वोल्शेंक
* मॅक्स हिंगो
* ज्युनियर तान्यांदा
* [[जेजे स्मिट]]
* [[जॅक ब्रासेल]]
* [[झेन ग्रीन]] ([[यष्टीरक्षक|य]])
* [[बर्नार्ड शोल्ट्झ]]
* [[मायकेल व्हान लिंगेन]]
* [[मलान क्रुगर]]
* [[यान निकोल लोफ्टी-ईटन]]
* [[यान फ्रायलिंक]]
* [[यान बाल्ट]]
* [[रुबेन ट्रम्पलमान|रुबेन ट्रम्पलमन]]
* लॉरेन स्टीनकॅम्प
* वाल्डो स्मिथ
|valign="top"|
* [[ब्यॉर्न फॉर्टुइन]] ([[कर्णधार (क्रिकेट)|क]])
* [[इथन बॉश]]
* <s>[[अँडील सिमेलेन]]</s>
* [[कॉनर एस्टरहुइझेन]] [[यष्टीरक्षक|(य)]]
* [[कॉर्बिन बॉश]]
* [[क्वेना मफाका]]
* [[जेसन स्मिथ]]
* [[जॉर्डन हरमन]]
* [[टोनी डी झॉर्झी]]
* [[डेवाल्ड ब्रेव्हिस]]
* [[दुआन यान्सिन]]
* [[न्काबा पीटर]]
* [[न्कोबानी मोकोएना]]
* [[प्रीनेलन सुब्रयेन]]
* [[मॅथ्यू ब्रीट्झके]]
* [[रुबिन हरमन]]
* <s>[[लुआन-ड्रे प्रिटोरियस]]</s> [[यष्टीरक्षक|(य)]]
* <s>[[लुथो सिपामला]]</s>
|}
३० ऑगस्ट २०२६ रोजी, हॅमस्ट्रिंगच्या दुखापतीमुळे [[लुथो सिपामला]] मालिकेतून बाहेर पडला आणि दक्षिण आफ्रिकेच्या संघात त्याच्या जागी [[अँडील सिमेलेन]]ची निवड करण्यात आली.<ref>{{cite web |last=मुंडा|first=फिरदोस|date=३० ऑगस्ट २०२६ |trans-title=हॅमस्ट्रिंगच्या दुखापतीमुळे सिपामला नामिबिया तिरंगी मालिकेतून बाहेर|title=Sipamla ruled out of Namibia tri-series with hamstring injury |url=https://www.cricinfo.com/story/lutho-sipamla-ruled-out-of-namibia-tri-series-with-hamstring-injury-1552225 |work=[[क्रिकइन्फो]] |access-date=१० सप्टेंबर २०२६}}</ref> ७ सप्टेंबर २०२६ रोजी, [[अँडील सिमेलेन]] आणि [[लुआन-ड्रे प्रिटोरियस]] हे दोघेही संघातून बाहेर पडले आणि त्यांच्या जागी [[कॉर्बिन बॉश]] व [[मॅथ्यू ब्रीट्झके]] यांची निवड करण्यात आली.<ref>{{cite web|last=मुंडा|first=फिरदोस |date=७ सप्टेंबर २०२६ |trans-title=ऑस्ट्रेलियाविरुद्धच्या एकदिवसीय मालिकेसाठी दक्षिण आफ्रिकेच्या संघात मिलर, डी कॉक आणि कोएत्झी यांचा समावेश.|title=Miller, de Kock, Coetzee in South Africa squad for Australia ODIs |url=https://www.cricinfo.com/story/sa-vs-aus-david-miller-quinton-de-kock-temba-bavuma-in-sa-squad-for-australia-odis-1553166 |work=[[क्रिकइन्फो]] |access-date=१० सप्टेंबर २०२६}}</ref>
== आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय मालिका==
===१ला आं.ए.दि.===
{{Single-innings cricket match
| date = ९ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SA}}
| team2 = {{cr|NAM}}
| score1 = ३४८/६ (५० षटके)
| runs1 = [[जॉर्डन हरमन]] १५० (१२६)
| wickets1 = [[रुबेन ट्रम्पलमान]] ४/६८ (१० षटके)
| score2 = १६२/८ (३१ षटके)
| runs2 = [[मलान क्रुगर]] ३४ (६०)
| wickets2 = [[प्रीनेलन सुब्रयेन]] ४/२९ (6 षटके)
| result = दक्षिण आफ्रिका ९९ धावांनी विजयी ([[डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धत|डीएलएस पद्धत]])
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549531.html धावफलक]
| venue = [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]]
| umpires = [[रशीद रियाझ]] (पा) आणि क्लॉस शुमाकर (ना)
| motm = [[जॉर्डन हरमन]] (द)
| toss = नामिबियाने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षण करण्याचा निर्णय घेतला.
| rain = पावसामुळे नामिबियासमोर ३१ षटकांत २६२ धावांचे सुधारित लक्ष्य ठेवण्यात आले.
| notes = [[कॉनर एस्टरहुइझेन]], [[जॉर्डन हरमन]] आणि [[दुआन यान्सिन]] (द) ह्या सर्वांनी आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय पदार्पण केले.
* जॉर्डन हर्मनने (दआ) एकदिवसीय कारकीर्दीमधील आपले पहिले शतक झळकावले. त्याची ही धावसंख्या एकदिवसीय पदार्पणातील सर्वोच्च धावसंख्येच्या विक्रमाशी बरोबरी करणारी ठरली.<ref>{{cite web |trans-title=प्रोटियाजसाठी हर्मनचे शानदार पदार्पणातील शतक; एकदिवसीय सामन्यांतील विक्रमाशी बरोबरी|title=Hermann’s glorious debut ton for Proteas equals ODI record |url=https://www.icc-cricket.com/news/hermann-s-glorious-debut-ton-for-proteas-equals-odi-record |work=[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती]] |date=९ सप्टेंबर २०२६ |access-date=१० सप्टेंबर २०२६}}</ref>
}}
===२रा आं.ए.दि.===
{{Single-innings cricket match
| date = ११ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|SA}}
| team2 = {{cr|NAM}}
| score1 = ३३५/९ (५० षटके)
| runs1 = [[कॉनर एस्टरहुइझेन]] ११९ (११०)
| wickets1 = [[जॅक ब्रासेल]] ४/६४ (१० षटके)
| score2 = १७८ (४१.५ षटके)
| runs2 = [[गेरहार्ड इरास्मुस]] ६८ (८४)
| wickets2 = [[दुआन यान्सिन]] ४/३१ (९ षटके)
| result = दक्षिण आफ्रिका १५७ धावांनी विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549532.html धावफलक]
| venue = [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]]
| umpires = [[रशीद रियाझ]] (पा) आणि इवौद लसेन (ना)
| motm = [[कॉनर एस्टरहुइझेन]] (द)
| toss = नामिबियाने नाणेफेक जिंकून क्षेत्ररक्षण करण्याचा निर्णय घेतला.
| notes = [[न्कोबानी मोकोएना]] (द) आणि [[वाल्डो स्मिथ]] (ना) ह्या दोघांनी आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय पदार्पण केले.
* [[कॉनर एस्टरहुइझेन]] (द) ह्याने आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय कारकिर्दीतील पहिले शतक झळकावले.<ref>{{cite web |trans-title=कॉनर एस्टरह्युझेनच्या पहिल्यावहिल्या एकदिवसीय शतकाच्या जोरावर दक्षिण आफ्रिकेचा मोठा विजय|title=Connor Esterhuizen's maiden ODI century powers SA to massive win |url=https://m.cricbuzz.com/cricket-news/140145/connor-esterhuizens-maiden-odi-century-powers-sa-to-massive-win |work=[[क्रिकबझ्झ]] |date=११ सप्टेंबर २०२६|access-date=१६ सप्टेंबर २०२६}}</ref>
}}
===३रा आं.ए.दि.===
{{Single-innings cricket match
| date = १३ सप्टेंबर २०२६
| time = ०९:३०
| team1 = {{cr-rt|NAM}}
| team2 = {{cr|SA}}
| score1 = १५६ (३६.२ षटके)
| runs1 = [[झेन ग्रीन]] ३३ (४२)
| wickets1 = [[ब्यॉर्न फॉर्टुइन]] ४/३३ (१० षटके)
| score2 = १५७/१ (२१.३ षटके)
| runs2 = [[जॉर्डन हरमन]] ७७ (५९)
| wickets2 = [[वाल्डो स्मिथ]] १/२९ (३ षटके)
| result = दक्षिण आफ्रिका ९ गडी राखून विजयी
| report = [https://www.cricinfo.com/ci/engine/match/1549533.html धावफलक]
| venue = [[नामिबिया क्रिकेट मैदान]], [[विंडहोक]]
| umpires = [[रशीद रियाझ]] (पा) आणि क्लॉस शुमाकर (ना)
| motm = [[ब्यॉर्न फॉर्टुइन]] (द)
| toss = नामिबियाने नाणेफेक जिंकून फलंदाजी करण्याचा निर्णय घेतला.
}}
==संदर्भयादी==
{{संदर्भयादी}}
{{नामिबियाचे आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट दौरे}}
{{आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, २०२६}}
[[वर्ग:दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचे नामिबिया दौरे|२०२६]]
[[वर्ग:दक्षिण आफ्रिका क्रिकेट संघाचे परदेशी दौरे|नामिबिया]]
[[वर्ग:आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संघांचे नामिबिया दौरे]]
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गारो हिल्स स्वायत्त जिल्हा परिषद
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2026-09-15T13:46:55Z
Dharmadhyaksha
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wikitext
text/x-wiki
{{माहिती संचिका}}
'''गारो हिल्स स्वायत्त जिल्हा परिषद''' ही भारतातील [[मेघालय]] राज्यातील एक [[भारताचे स्वायत्त प्रशासकीय विभाग|स्वायत्त जिल्हा परिषद]] आहे.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://www.sentinelassam.com/news/three-autonomous-district-councils-of-meghalaya-urges-the-national-commission-to-bar-government-from-meddling/|title=Three Autonomous District Councils of Meghalaya urges the National Commission to bar government from meddling - Sentinelassam|date=15 May 2019}}</ref> याचे मुख्यालय [[तुरा]] येथे असून, यात [[पूर्व गारो हिल्स जिल्हा]], [[पश्चिम गारो हिल्स जिल्हा]], [[दक्षिण गारो हिल्स जिल्हा]], [[उत्तर गारो हिल्स जिल्हा]] आणि [[नैऋत्य गारो हिल्स जिल्हा|नैऋत्य गारो हिल्स जिल्ह्याचा]] समावेश होतो. हे मेघालयातील तीन स्वायत्त जिल्हा परिषदांपैकी एक आणि [[भारताचे स्वायत्त प्रशासकीय विभाग|भारताच्या ३० स्वायत्त प्रदेशांपैकी]] एक आहे. गारो हिल्स स्वायत्त जिल्हा परिषदेचे एकूण क्षेत्रफळ १०,१०२ चौरस किलोमीटर असून २०११ च्या जनगणनेनुसार येथील लोकसंख्या १३,९४,३६२ आहे.
[[File:NE_Autonomous_divisions_of_India.svg|350x350अंश|right]]
==संदर्भ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:भारतातील स्वायत्त जिल्हा परिषद]]
[[वर्ग:मेघालयमधील राजकारण]]
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साचा:आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्पर्धा साइडबार
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text/x-wiki
{{Sidebar with collapsible lists
| name = आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्पर्धा साइडबार
| pretitle = '''या विषयावरील लेखमालेचा भाग'''
| title = {{nobr|[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट#आंतरराष्ट्रीय स्पर्धा|आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्पर्धा]]}}
| image = [[File:Cricket pictogram.svg|120px|class=skin-invert]]
| above = {{flatlist|
* [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद]]
* [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट|आढावा]]
}}
| list1title = प्रादेशिक संस्था
| list1 = {{flatlist|
* [[आफ्रिका क्रिकेट असोसिएशन|आफ्रिका]]
* [[आयसीसी अमेरिका|अमेरिका]]
* [[आशिया क्रिकेट समिती|आशिया]]
* [[आयसीसी पूर्व आशिया-प्रशांत|पूर्व आशिया-प्रशांत]]
* [[आयसीसी युरोप|युरोप]]
}}
| heading2 = <big>आयसीसी स्पर्धा</big>
| heading3 = पुरुष
| list3title = [[आयसीसी विश्व कसोटी अजिंक्यपद स्पर्धा|कसोटी अजिंक्यपद स्पर्धा]]
| list3 = {{flatlist|
* आयसीसी कसोटी अजिंक्यपद गदा
* विश्व कसोटी अजिंक्यपद स्पर्धेतील विक्रम
}}
| list4title = [[क्रिकेट विश्वचषक|एकदिवसीय विश्वचषक]]
| list4 = {{flatlist|
* क्रिकेट विश्वचषकाचा इतिहास
** [[आयसीसी विश्वचषक पात्रता सामने|पात्रता]]
** क्रिकेट विश्वचषक अंतिम सामन्यांची यादी
** क्रिकेट विश्वचषकातील संघ
** क्रिकेट विश्वचषक ट्रॉफी
* क्रिकेट विश्वचषकातील विक्रम
** क्रिकेट विश्वचषकातील शतकांची यादी
** क्रिकेट विश्वचषकातील पाच बळींच्या कामगिरींची यादी
* ''[[आयसीसी विश्व क्रिकेट लीग]]''
** विभाग
*** ''[[आयसीसी विश्व क्रिकेट लीग अजिंक्यपद स्पर्धा|अजिंक्यपद स्पर्धा]]''
*** ''[[आयसीसी विश्व क्रिकेट लीग विभाग दोन|दोन]]''
*** ''[[आयसीसी विश्व क्रिकेट लीग विभाग तीन|तीन]]''
*** ''[[आयसीसी विश्व क्रिकेट लीग विभाग चार|चार]]''
*** ''[[आयसीसी विश्व क्रिकेट लीग विभाग पाच|पाच]]''
*** ''[[आयसीसी विश्व क्रिकेट लीग विभाग सहा|सहा]]''
*** ''[[आयसीसी विश्व क्रिकेट लीग विभाग सात|सात]]''
*** ''[[आयसीसी विश्व क्रिकेट लीग विभाग आठ|आठ]]''
** पात्रता
*** ''आफ्रिका''
*** ''आयसीसी अमेरिका अजिंक्यपद स्पर्धा''
*** ''[[एसीसी ट्रॉफी|आशिया]]''
*** ''पूर्व आशिया-प्रशांत''
*** ''युरोपियन क्रिकेट अजिंक्यपद स्पर्धा''
* [[आयसीसी विश्वचषक पात्रता सामने|पात्रता]]
** क्रिकेट विश्वचषक पात्रता प्ले-ऑफ
* ''[[आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक सुपर लीग|सुपर लीग]]''
* [[आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक लीग २|लीग २]]
* [[आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग|चॅलेंज लीग]]
** [[आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग अ|अ]]
** [[आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग ब|ब]]
** आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग प्ले-ऑफ
}}
| list5title = [[आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|टी२० विश्वचषक]]
| list5 = {{flatlist|
* पुरुष टी२० विश्वचषकाचा इतिहास
** पुरुष टी२० विश्वचषक स्पर्धा
* [[आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक पात्रता|पात्रता]]
** पुरुष टी२० विश्वचषक जागतिक पात्रता
** पुरुष टी२० विश्वचषक प्रादेशिक पात्रता
* पुरुष टी२० विश्वचषकातील विक्रम
** पुरुष टी२० विश्वचषकातील शतकांची यादी
** पुरुष टी२० विश्वचषकातील पाच बळींच्या कामगिरींची यादी
** पुरुष टी२० विश्वचषकातील हॅट्रिकची यादी
}}
| list6title = [[आयसीसी चॅम्पियन्स चषक|चॅम्पियन्स चषक]]
| list6 = {{flatlist|
* विक्रम
** चॅम्पियन्स चषकातील शतकांची यादी
** चॅम्पियन्स चषकातील पाच बळींच्या कामगिरींची यादी
}}
| list7title = ''[[आयसीसी आंतरखंडीय चषक|आंतरखंडीय चषक]]''
| list7 = {{flatlist|
* [[आयसीसी आंतरखंडीय चषक#स्पर्धेचा इतिहास|इतिहास]]
* [[आयसीसी आंतरखंडीय चषक#विक्रम आणि आकडेवारी|विक्रम]]
}}
| list8title = [[१९ वर्षांखालील क्रिकेट विश्वचषक|१९ वर्षांखालील विश्वचषक]]
| list8 = {{flatlist|
* विक्रम
** १९ वर्षांखालील क्रिकेट विश्वचषकातील शतकांची यादी
* पात्रता
** आयसीसी १९ वर्षांखालील क्रिकेट विश्वचषक आफ्रिका पात्रता
** आयसीसी १९ वर्षांखालील क्रिकेट विश्वचषक अमेरिका पात्रता
** [[१९ वर्षांखालील पुरुष आशिया चषक|आशिया]]
** आयसीसी १९ वर्षांखालील क्रिकेट विश्वचषक पूर्व आशिया-प्रशांत पात्रता
** आयसीसी १९ वर्षांखालील क्रिकेट विश्वचषक युरोप पात्रता
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| heading9 = महिला
| list9title = [[महिला क्रिकेट विश्वचषक|एकदिवसीय विश्वचषक]]
| list9 = {{flatlist|
* [[महिला क्रिकेट विश्वचषक#इतिहास|इतिहास]]
* महिला क्रिकेट विश्वचषकातील विक्रम
* पात्रता
** [[महिला क्रिकेट विश्वचषक पात्रता|पात्रता]]
** [[आयसीसी महिला चॅम्पियनशिप|चॅम्पियनशिप]]
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| list10title = [[आयसीसी महिला टी२० विश्वचषक|टी२० विश्वचषक]]
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* महिला टी२० विश्वचषकाचा इतिहास
* महिला टी२० विश्वचषकातील विक्रम
* [[महिला टी२० विश्वचषक पात्रता|पात्रता]]
}}
| list11title = [[आयसीसी महिला चॅम्पियन्स चषक|चॅम्पियन्स चषक]]
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* [[आयसीसी महिला चॅम्पियन्स चषक#इतिहास|इतिहास]]
}}
| list12title = [[१९ वर्षांखालील महिला टी२० विश्वचषक|१९ वर्षांखालील विश्वचषक]]
| list12 = {{flatlist|
* पात्रता
** १९ वर्षांखालील महिला टी२० विश्वचषक आफ्रिका पात्रता
** १९ वर्षांखालील महिला टी२० विश्वचषक अमेरिका पात्रता
** १९ वर्षांखालील महिला टी२० विश्वचषक आशिया पात्रता
** १९ वर्षांखालील महिला टी२० विश्वचषक पूर्व आशिया-प्रशांत पात्रता
** १९ वर्षांखालील महिला टी२० विश्वचषक युरोप पात्रता
}}
| heading13 = <big>बहु-क्रीडा स्पर्धा</big><br/>{{icon|template}} [[साचा:क्रिकेट बहु-क्रीडा स्पर्धा|क्रिकेट बहु-क्रीडा स्पर्धा साचा]]
| content13 = {{flatlist|
* उन्हाळी ऑलिंपिकमधील क्रिकेट
** ऑलिंपिक क्रिकेट पदकविजेत्यांची यादी
* ''राष्ट्रकुल क्रीडा स्पर्धेतील क्रिकेट''
* आफ्रिकन क्रीडा स्पर्धेतील क्रिकेट
* आशियाई क्रीडा स्पर्धेतील क्रिकेट
** आशियाई क्रीडा स्पर्धेतील क्रिकेट पदकविजेत्यांची यादी
* ''पॅसिफिक क्रीडा स्पर्धेतील क्रिकेट''
* पॅन अमेरिकन क्रीडा स्पर्धेतील क्रिकेट
* दक्षिण आशियाई क्रीडा स्पर्धेतील क्रिकेट
* आग्नेय आशियाई क्रीडा स्पर्धेतील क्रिकेट
}}
| heading22 = <big>प्रादेशिक स्पर्धा</big>
| list22title = आफ्रिका
| list22 = {{flatlist|
* क्विबुका टी२० स्पर्धा
}}
| list23title = अमेरिका
| list23 = {{flatlist|
* उत्तर अमेरिकन चषक
* दक्षिण अमेरिकन क्रिकेट अजिंक्यपद स्पर्धा
}}
| list24title = आशिया
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; पुरुष
: ''आशियाई कसोटी अजिंक्यपद स्पर्धा''
: [[आशिया चषक]]
:: एसीसी प्रीमियर चषक
:: एसीसी पुरुष चॅलेंजर चषक
: आशिया चषक रायझिंग स्टार्स
: [[१९ वर्षांखालील पुरुष आशिया चषक|१९ वर्षांखालील आशिया चषक]]
:: एसीसी १९ वर्षांखालील पुरुष प्रीमियर चषक
: ''[[एसीसी ट्रॉफी]]''
: ''एसीसी ट्वेंटी२० चषक''
; महिला
: [[महिला आशिया चषक|आशिया चषक]]
:: एसीसी महिला प्रीमियर चषक
: महिला आशिया चषक रायझिंग स्टार्स
: १९ वर्षांखालील महिला टी२० आशिया चषक
:: एसीसी १९ वर्षांखालील महिला प्रीमियर चषक
}}
| list25title = पूर्व आशिया-प्रशांत
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* पूर्व आशिया टी२० चषक
}}
| list26title = युरोप
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* मध्य युरोप चषक
* ''महिला युरोपियन क्रिकेट अजिंक्यपद स्पर्धा''
}}
| list27title = इतर
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* ''वर्ल्ड सिरीज क्रिकेट''
}}
| content28 = '''टीप''': ''बंद झालेल्या स्पर्धा'' तिरप्या अक्षरांत दाखवल्या आहेत.
| below = {{flatlist|
* {{icon|category}} [[:वर्ग:आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्पर्धा|वर्ग]]
* {{icon|commons}} [[c:Category:International cricket|कॉमन्स]]
* {{icon|template}} [[साचा:आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद साइडबार|मुख्य साइडबार]]
}}
}}<noinclude>
[[वर्ग:आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्पर्धा|*]]
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{{Sidebar with collapsible lists
| name = आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्पर्धा साइडबार
| pretitle = '''या विषयावरील लेखमालेचा भाग'''
| title = {{nobr|[[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट#आंतरराष्ट्रीय स्पर्धा|आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्पर्धा]]}}
| image = [[File:Cricket pictogram.svg|120px|class=skin-invert]]
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* [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद]]
* [[आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट|आढावा]]
}}
| list1title = प्रादेशिक संस्था
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* [[आफ्रिका क्रिकेट असोसिएशन|आफ्रिका]]
* [[आयसीसी अमेरिका|अमेरिका]]
* [[आशिया क्रिकेट समिती|आशिया]]
* [[आयसीसी पूर्व आशिया-प्रशांत|पूर्व आशिया-प्रशांत]]
* [[आयसीसी युरोप|युरोप]]
}}
| heading2 = <big>आयसीसी स्पर्धा</big>
| heading3 = पुरुष
| list3title = [[आयसीसी विश्व कसोटी अजिंक्यपद स्पर्धा|कसोटी अजिंक्यपद स्पर्धा]]
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* आयसीसी कसोटी अजिंक्यपद गदा
* विश्व कसोटी अजिंक्यपद स्पर्धेतील विक्रम
}}
| list4title = [[क्रिकेट विश्वचषक|एकदिवसीय विश्वचषक]]
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* क्रिकेट विश्वचषकाचा इतिहास
** [[आयसीसी विश्वचषक पात्रता सामने|पात्रता]]
** क्रिकेट विश्वचषक अंतिम सामन्यांची यादी
** क्रिकेट विश्वचषकातील संघ
** क्रिकेट विश्वचषक ट्रॉफी
* क्रिकेट विश्वचषकातील विक्रम
** क्रिकेट विश्वचषकातील शतकांची यादी
** क्रिकेट विश्वचषकातील पाच बळींच्या कामगिरींची यादी
* ''[[आयसीसी विश्व क्रिकेट लीग]]''
** विभाग
*** ''[[आयसीसी विश्व क्रिकेट लीग अजिंक्यपद स्पर्धा|अजिंक्यपद स्पर्धा]]''
*** ''[[आयसीसी विश्व क्रिकेट लीग विभाग दोन|दोन]]''
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*** ''[[आयसीसी विश्व क्रिकेट लीग विभाग चार|चार]]''
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*** ''[[आयसीसी विश्व क्रिकेट लीग विभाग सहा|सहा]]''
*** ''[[आयसीसी विश्व क्रिकेट लीग विभाग सात|सात]]''
*** ''[[आयसीसी विश्व क्रिकेट लीग विभाग आठ|आठ]]''
** पात्रता
*** ''आफ्रिका''
*** ''आयसीसी अमेरिका अजिंक्यपद स्पर्धा''
*** ''[[एसीसी ट्रॉफी|आशिया]]''
*** ''पूर्व आशिया-प्रशांत''
*** ''युरोपियन क्रिकेट अजिंक्यपद स्पर्धा''
* [[आयसीसी विश्वचषक पात्रता सामने|पात्रता]]
** क्रिकेट विश्वचषक पात्रता प्ले-ऑफ
* ''[[आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक सुपर लीग|सुपर लीग]]''
* [[आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक लीग २|लीग २]]
* [[आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग|चॅलेंज लीग]]
** [[आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग अ|अ]]
** [[आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग ब|ब]]
** आयसीसी क्रिकेट विश्वचषक चॅलेंज लीग प्ले-ऑफ
}}
| list5title = [[आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक|टी२० विश्वचषक]]
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* पुरुष टी२० विश्वचषकाचा इतिहास
** पुरुष टी२० विश्वचषक स्पर्धा
* [[आयसीसी पुरुष टी२० विश्वचषक पात्रता|पात्रता]]
** पुरुष टी२० विश्वचषक जागतिक पात्रता
** पुरुष टी२० विश्वचषक प्रादेशिक पात्रता
* पुरुष टी२० विश्वचषकातील विक्रम
** पुरुष टी२० विश्वचषकातील शतकांची यादी
** पुरुष टी२० विश्वचषकातील पाच बळींच्या कामगिरींची यादी
** पुरुष टी२० विश्वचषकातील हॅट्रिकची यादी
}}
| list6title = [[आयसीसी चॅम्पियन्स चषक|चॅम्पियन्स चषक]]
| list6 = {{flatlist|
* विक्रम
** चॅम्पियन्स चषकातील शतकांची यादी
** चॅम्पियन्स चषकातील पाच बळींच्या कामगिरींची यादी
}}
| list7title = ''[[आयसीसी आंतरखंडीय चषक|आंतरखंडीय चषक]]''
| list7 = {{flatlist|
* [[आयसीसी आंतरखंडीय चषक#स्पर्धेचा इतिहास|इतिहास]]
* [[आयसीसी आंतरखंडीय चषक#विक्रम आणि आकडेवारी|विक्रम]]
}}
| list8title = [[१९ वर्षांखालील क्रिकेट विश्वचषक|१९ वर्षांखालील विश्वचषक]]
| list8 = {{flatlist|
* विक्रम
** १९ वर्षांखालील क्रिकेट विश्वचषकातील शतकांची यादी
* पात्रता
** आयसीसी १९ वर्षांखालील क्रिकेट विश्वचषक आफ्रिका पात्रता
** आयसीसी १९ वर्षांखालील क्रिकेट विश्वचषक अमेरिका पात्रता
** [[१९ वर्षांखालील पुरुष आशिया चषक|आशिया]]
** आयसीसी १९ वर्षांखालील क्रिकेट विश्वचषक पूर्व आशिया-प्रशांत पात्रता
** आयसीसी १९ वर्षांखालील क्रिकेट विश्वचषक युरोप पात्रता
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| heading9 = महिला
| list9title = [[महिला क्रिकेट विश्वचषक|एकदिवसीय विश्वचषक]]
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* [[महिला क्रिकेट विश्वचषक#इतिहास|इतिहास]]
* महिला क्रिकेट विश्वचषकातील विक्रम
* पात्रता
** [[महिला क्रिकेट विश्वचषक पात्रता|पात्रता]]
** [[आयसीसी महिला चॅम्पियनशिप|चॅम्पियनशिप]]
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| list10title = [[आयसीसी महिला टी२० विश्वचषक|टी२० विश्वचषक]]
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* महिला टी२० विश्वचषकाचा इतिहास
* महिला टी२० विश्वचषकातील विक्रम
* [[महिला टी२० विश्वचषक पात्रता|पात्रता]]
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| list11title = [[आयसीसी महिला चॅम्पियन्स चषक|चॅम्पियन्स चषक]]
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* [[आयसीसी महिला चॅम्पियन्स चषक#इतिहास|इतिहास]]
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| list12title = [[१९ वर्षांखालील महिला टी२० विश्वचषक|१९ वर्षांखालील विश्वचषक]]
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** १९ वर्षांखालील महिला टी२० विश्वचषक आफ्रिका पात्रता
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* दक्षिण अमेरिकन क्रिकेट अजिंक्यपद स्पर्धा
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:: एसीसी प्रीमियर चषक
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: [[१९ वर्षांखालील पुरुष आशिया चषक|१९ वर्षांखालील आशिया चषक]]
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; महिला
: [[महिला आशिया चषक|आशिया चषक]]
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* पूर्व आशिया टी२० चषक
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| content28 = '''टीप''': ''बंद झालेल्या स्पर्धा'' तिरप्या अक्षरांत दाखवल्या आहेत.
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}}<noinclude>
[[वर्ग:आंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्पर्धा|*]]
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बार्न स्वॅलो
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नरेश सावे
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{{जीवचौकट
| नाव = बार्न स्वॅलो |घरपाकोळी
| स्थिती =
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| स्थिती_प्रणाली =
| स्थिती_संदर्भ =
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| regnum = [[प्राणी]]
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| जात = [[पक्षी]]
| वर्ग =
| कुळ =Hirundo rustica
| उपकुळ =
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| आढळप्रदेश_नकाशा=
| आढळप्रदेश_नकाशा_रुंदी=
| आढळप्रदेश_नकाशा_title=
| बायनॉमियल2 =
| बायनॉमियल_अधिकारी =
}}
'''बार्न स्वॅलो''' किंवा घरपाकोळी हा अमेरिकेतील दक्षिण डाकोटा या राज्यात आढळणारा पक्षी आहे. हा पक्षी [[भिंगरी आणि राजापक्षी |स्वॅलोज आणि किंगबर्ड्स]] या वर्गात मोडतो.
==वर्णन==
ह्या पक्ष्याला लांब, पातळ आणि टोकदार पंखे असतात.हा पक्षी त्याच्या काट्यासारख्या दुभंगलेल्या शेपटीमुळे लगेच लक्षात येतो. वाढ झालेल्या पक्ष्यांची पंखे व पाठीचा भाग हा गडद निळा म्हणजे जवळजवळ जांभळा असतो.
==आढळस्थान==
हा अमेरिकेतील दक्षिण डाकोटा राज्यात आढळतो.उन्हाळ्यानंतर तो स्थलांतर करतो.
==आवाज==
या पक्ष्याचा आवाज छोटा विट् विट् असा असतो. धोका असताना हाच विट् विट् आवाज मोठा आणि जोरदार असतो.
==खाद्य==
हा पक्षी उडणारे कीटक खातो.
==घरटे==
हा पक्षी आपले घरटे इमारती किंवा इतर मानवनिर्मित बांधकामाच्या ठिकाणी उघड्या जागी बांधतो. ह्या पक्ष्यांची घरटी घरे,कोठारे आणि मानवनिर्मित इतर बांधकामांच्या छपरांच्या कडा इत्यादी ठिकाणी आढळतात. घरटी माती किंवा चिखलाने बनविलेली असतात.
==वैशिष्ट्य==
मादी पक्षी लांब शेपटी आणि गडद लाल छाती असलेले नर पक्षी निवडतात.
<ref>Backyard Birds of South Dakota - South Dakota, Wildlife Division, Department of Game, Fish and Parks.Authors: Eileen Dowd Stukel,Silka L.F.Kempema,Chad Tussing.2009 edition</ref>
[[वर्ग:पक्षी]]
[[वर्ग:विदेशी पक्षी]]
[[वर्ग:दक्षिण डाकोटा अमेरिका पक्षी]]
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{{जीवचौकट
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'''बार्न स्वॅलो''' किंवा घरपाकोळी हा अमेरिकेतील दक्षिण डाकोटा या राज्यात आढळणारा [[पक्षी]] आहे. हा पक्षी [[भिंगरी आणि राजापक्षी|स्वॅलोज आणि किंगबर्ड्स]] या वर्गात मोडतो.
==वर्णन==
ह्या पक्ष्याला लांब, पातळ आणि टोकदार पंखे असतात.हा पक्षी त्याच्या काट्यासारख्या दुभंगलेल्या शेपटीमुळे लगेच लक्षात येतो. वाढ झालेल्या पक्ष्यांची पंखे व पाठीचा भाग हा गडद निळा म्हणजे जवळजवळ जांभळा असतो.
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या पक्ष्याचा आवाज छोटा विट् विट् असा असतो. धोका असताना हाच विट् विट् आवाज मोठा आणि जोरदार असतो.
==खाद्य==
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हा पक्षी आपले घरटे इमारती किंवा इतर मानवनिर्मित बांधकामाच्या ठिकाणी उघड्या जागी बांधतो. ह्या पक्ष्यांची घरटी घरे,कोठारे आणि मानवनिर्मित इतर बांधकामांच्या छपरांच्या कडा इत्यादी ठिकाणी आढळतात. घरटी माती किंवा चिखलाने बनविलेली असतात.
==वैशिष्ट्य==
मादी पक्षी लांब शेपटी आणि गडद लाल छाती असलेले नर पक्षी निवडतात.
<ref>Backyard Birds of South Dakota - South Dakota, Wildlife Division, Department of Game, Fish and Parks.Authors: Eileen Dowd Stukel,Silka L.F.Kempema,Chad Tussing.2009 edition</ref>
[[वर्ग:पक्षी]]
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देवरी स्वायत्त परिषद
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Dharmadhyaksha
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"[[:en:Special:Redirect/revision/1349250130|Deori Autonomous Council]]" पानाचे भाषांतर करुन तयार झाले
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wikitext
text/x-wiki
'''देवरी स्वायत्त परिषद''' ही भारतातील [[आसाम]] राज्यातील [[लखीमपूर जिल्हा|लखीमपूर जिल्ह्यातील]] एक [[भारताचे स्वायत्त प्रशासकीय विभाग|स्वायत्त जिल्हा परिषद]] आहे.
त्या भागासाठी अधिक स्वायत्तता इच्छिणाऱ्या देवरी लोकांचे प्रतिनिधी आणि [[आसाम सरकार]] यांच्यात झालेल्या करारानंतर २००५ मध्ये देवरी स्वायत्त परिषदेची स्थापना झाली.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://dacassam.org.in/|title=The Official Portal of Deori Autonomous Council (DAC) Govt of Assam|website=DAC Connect|language=en|access-date=2025-11-11}}</ref> परिषदेची पहिली निवडणूक २००७ साली झाली.
पूर्वी ह्या परिषदेत २० सदस्य होते, ज्यापैकी १८ सदस्य लोकांकडून निवडले जात आणि २ सदस्य आसाम सरकारद्वारे नामनिर्देशित केले जात. निर्वाचित जागांपैकी नऊ जागा [[अनुसूचित जाती आणि अनुसूचित जमाती|अनुसूचित जमातींच्या]] सदस्यांसाठी आणि तीन महिलांसाठी राखीव होत्या.
''देवरी स्वायत्त परिषद (सुधारणा) विधेयक, २०२१'' ने जागांची संख्या २६ पर्यंत वाढवली, त्यापैकी २२ जागा थेट निवडणुकीद्वारे निवडल्या जातील आणि ४ जागा सरकारद्वारे नामनिर्देशित केल्या जातील. ह्या २२ निर्वाचित जागांपैकी, १८ जागा अनुसूचित जमातींसाठी, ३ जागा महिलांसाठी आणि १ जागा सामान्य प्रवर्गासाठी राखीव असेल.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_states/assam/2021/The_Deori_Autonomous%20_%20Council(Amendment)%20Bill,%202021_1.pdf|title=The Deori Autonomous Council (Amendment) Bill, 2021|website=PRS India}}</ref>
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:भारतातील स्वायत्त जिल्हा परिषद]]
[[वर्ग:इ.स. २००५ मधील निर्मिती]]
[[वर्ग:आसाममधील राजकारण]]
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Dharmadhyaksha
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{{माहिती संचिका}}
'''देवरी स्वायत्त परिषद''' ही भारतातील [[आसाम]] राज्यातील [[लखीमपूर जिल्हा|लखीमपूर जिल्ह्यातील]] एक [[भारताचे स्वायत्त प्रशासकीय विभाग|स्वायत्त जिल्हा परिषद]] आहे.
त्या भागासाठी अधिक स्वायत्तता इच्छिणाऱ्या देवरी लोकांचे प्रतिनिधी आणि [[आसाम सरकार]] यांच्यात झालेल्या करारानंतर २००५ मध्ये देवरी स्वायत्त परिषदेची स्थापना झाली.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://dacassam.org.in/|title=The Official Portal of Deori Autonomous Council (DAC) Govt of Assam|website=DAC Connect|language=en|access-date=2025-11-11}}</ref> परिषदेची पहिली निवडणूक २००७ साली झाली.
पूर्वी ह्या परिषदेत २० सदस्य होते, ज्यापैकी १८ सदस्य लोकांकडून निवडले जात आणि २ सदस्य आसाम सरकारद्वारे नामनिर्देशित केले जात. निर्वाचित जागांपैकी नऊ जागा [[अनुसूचित जाती आणि अनुसूचित जमाती|अनुसूचित जमातींच्या]] सदस्यांसाठी आणि तीन महिलांसाठी राखीव होत्या.
''देवरी स्वायत्त परिषद (सुधारणा) विधेयक, २०२१'' ने जागांची संख्या २६ पर्यंत वाढवली, त्यापैकी २२ जागा थेट निवडणुकीद्वारे निवडल्या जातील आणि ४ जागा सरकारद्वारे नामनिर्देशित केल्या जातील. ह्या २२ निर्वाचित जागांपैकी, १८ जागा अनुसूचित जमातींसाठी, ३ जागा महिलांसाठी आणि १ जागा सामान्य प्रवर्गासाठी राखीव असेल.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://prsindia.org/files/bills_acts/bills_states/assam/2021/The_Deori_Autonomous%20_%20Council(Amendment)%20Bill,%202021_1.pdf|title=The Deori Autonomous Council (Amendment) Bill, 2021|website=PRS India}}</ref>
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:भारतातील स्वायत्त जिल्हा परिषद]]
[[वर्ग:इ.स. २००५ मधील निर्मिती]]
[[वर्ग:आसाममधील राजकारण]]
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मोरान स्वायत्त परिषद
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Dharmadhyaksha
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text/x-wiki
'''मोरान स्वायत्त परिषद''' ही भारतीय राज्य [[आसाम|आसाममधील]] वांशिक मोरान लोकांच्या विकासासाठी आणि संरक्षणासाठी असलेली एक [[भारताचे स्वायत्त प्रशासकीय विभाग|स्वायत्त परिषद]] आहे.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://legislative.assam.gov.in/sites/default/files/swf_utility_folder/departments/legislative_medhassu_in_oid_3/menu/document/the_moran_autonomous_council_act_2020.pdf|title=The moran autonomus council act, 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20230327151400/https://legislative.assam.gov.in/sites/default/files/swf_utility_folder/departments/legislative_medhassu_in_oid_3/menu/document/the_moran_autonomous_council_act_2020.pdf|archive-date=2023-03-27}}</ref> त्याची स्थापना २०२० मध्ये आसाम सरकारने केली होती.<ref name="wire">{{स्रोत बातमी|url=https://thewire.in/government/assam-assembly-passes-bills-to-create-three-separate-autonomous-councils|title=Assam Assembly Passes Bills To Create Three Separate Autonomous Councils|date=4 September 2020|work=The wire|access-date=3 April 2020}}</ref>
मोरान लोक हे प्रामुख्याने आसामच्या [[तिनसुकिया जिल्हा|तिनसुकिया जिल्ह्यात]] राहणारे मूळनिवासी लोक आहेत.<ref>{{स्रोत बातमी|last=Arunabh Saikia|url=https://scroll.in/article/990118/assams-small-ethnic-groups-dumped-bjp-over-caa-the-party-wooed-them-back-not-just-for-elections|title=Assam's small ethnic groups dumped BJP over CAA. The party wooed them back – not just for elections|date=24 March 2020|work=Scroll|access-date=3 April 2020}}</ref> परिषदेत २५ सदस्य आहे; ज्यातील २२ हे लोकनोवडणूकीतून येणात तर ३ हे आसाम सरकान नामांकीत करणार.<ref>{{Cite news|url=https://www.sentinelassam.com/guwahati-city/formation-of-3-autonomous-councils-dispur-in-dilemma-507773|title=Formation of 3 autonomous councils: Dispur in dilemma|date=20 October 2020|newspaper=Sentinelassam|access-date=3 April 2020}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.sentinelassam.com/topheadlines/4-autonomous-councils-almost-non-functional-578605|title=4 autonomous councils almost non-functional - Sentinelassam|date=17 February 2022}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.sentinelassam.com/topheadlines/assam-government-to-form-four-interim-councils-soon|title=Assam Government To Form Four Interim Councils Soon|date=9 January 2021|newspaper=Sentinelassam|access-date=3 April 2020}}</ref>
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:भारतातील स्वायत्त जिल्हा परिषद]]
[[वर्ग:आसाममधील राजकारण]]
[[वर्ग:इ.स. २०२० मधील निर्मिती]]
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text/x-wiki
{{माहिती संचिका}}
'''मोरान स्वायत्त परिषद''' ही भारतीय राज्य [[आसाम|आसाममधील]] वांशिक मोरान लोकांच्या विकासासाठी आणि संरक्षणासाठी असलेली एक [[भारताचे स्वायत्त प्रशासकीय विभाग|स्वायत्त परिषद]] आहे.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://legislative.assam.gov.in/sites/default/files/swf_utility_folder/departments/legislative_medhassu_in_oid_3/menu/document/the_moran_autonomous_council_act_2020.pdf|title=The moran autonomus council act, 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20230327151400/https://legislative.assam.gov.in/sites/default/files/swf_utility_folder/departments/legislative_medhassu_in_oid_3/menu/document/the_moran_autonomous_council_act_2020.pdf|archive-date=2023-03-27}}</ref> त्याची स्थापना २०२० मध्ये आसाम सरकारने केली होती.<ref name="wire">{{स्रोत बातमी|url=https://thewire.in/government/assam-assembly-passes-bills-to-create-three-separate-autonomous-councils|title=Assam Assembly Passes Bills To Create Three Separate Autonomous Councils|date=4 September 2020|work=The wire|access-date=3 April 2020}}</ref>
मोरान लोक हे प्रामुख्याने आसामच्या [[तिनसुकिया जिल्हा|तिनसुकिया जिल्ह्यात]] राहणारे मूळनिवासी लोक आहेत.<ref>{{स्रोत बातमी|last=Arunabh Saikia|url=https://scroll.in/article/990118/assams-small-ethnic-groups-dumped-bjp-over-caa-the-party-wooed-them-back-not-just-for-elections|title=Assam's small ethnic groups dumped BJP over CAA. The party wooed them back – not just for elections|date=24 March 2020|work=Scroll|access-date=3 April 2020}}</ref> परिषदेत २५ सदस्य आहे; ज्यातील २२ हे लोकनोवडणूकीतून येणात तर ३ हे आसाम सरकान नामांकीत करणार.<ref>{{Cite news|url=https://www.sentinelassam.com/guwahati-city/formation-of-3-autonomous-councils-dispur-in-dilemma-507773|title=Formation of 3 autonomous councils: Dispur in dilemma|date=20 October 2020|newspaper=Sentinelassam|access-date=3 April 2020}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.sentinelassam.com/topheadlines/4-autonomous-councils-almost-non-functional-578605|title=4 autonomous councils almost non-functional - Sentinelassam|date=17 February 2022}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.sentinelassam.com/topheadlines/assam-government-to-form-four-interim-councils-soon|title=Assam Government To Form Four Interim Councils Soon|date=9 January 2021|newspaper=Sentinelassam|access-date=3 April 2020}}</ref>
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:भारतातील स्वायत्त जिल्हा परिषद]]
[[वर्ग:आसाममधील राजकारण]]
[[वर्ग:इ.स. २०२० मधील निर्मिती]]
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Dharmadhyaksha
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नवीन वर्ग घातला - [[WP:HC|हॉटकॅट]] वापरले
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text/x-wiki
{{माहिती संचिका}}
'''मोरान स्वायत्त परिषद''' ही भारतीय राज्य [[आसाम|आसाममधील]] वांशिक मोरान लोकांच्या विकासासाठी आणि संरक्षणासाठी असलेली एक [[भारताचे स्वायत्त प्रशासकीय विभाग|स्वायत्त परिषद]] आहे.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://legislative.assam.gov.in/sites/default/files/swf_utility_folder/departments/legislative_medhassu_in_oid_3/menu/document/the_moran_autonomous_council_act_2020.pdf|title=The moran autonomus council act, 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20230327151400/https://legislative.assam.gov.in/sites/default/files/swf_utility_folder/departments/legislative_medhassu_in_oid_3/menu/document/the_moran_autonomous_council_act_2020.pdf|archive-date=2023-03-27}}</ref> त्याची स्थापना २०२० मध्ये आसाम सरकारने केली होती.<ref name="wire">{{स्रोत बातमी|url=https://thewire.in/government/assam-assembly-passes-bills-to-create-three-separate-autonomous-councils|title=Assam Assembly Passes Bills To Create Three Separate Autonomous Councils|date=4 September 2020|work=The wire|access-date=3 April 2020}}</ref>
मोरान लोक हे प्रामुख्याने आसामच्या [[तिनसुकिया जिल्हा|तिनसुकिया जिल्ह्यात]] राहणारे मूळनिवासी लोक आहेत.<ref>{{स्रोत बातमी|last=Arunabh Saikia|url=https://scroll.in/article/990118/assams-small-ethnic-groups-dumped-bjp-over-caa-the-party-wooed-them-back-not-just-for-elections|title=Assam's small ethnic groups dumped BJP over CAA. The party wooed them back – not just for elections|date=24 March 2020|work=Scroll|access-date=3 April 2020}}</ref> परिषदेत २५ सदस्य आहे; ज्यातील २२ हे लोकनोवडणूकीतून येणात तर ३ हे आसाम सरकान नामांकीत करणार.<ref>{{Cite news|url=https://www.sentinelassam.com/guwahati-city/formation-of-3-autonomous-councils-dispur-in-dilemma-507773|title=Formation of 3 autonomous councils: Dispur in dilemma|date=20 October 2020|newspaper=Sentinelassam|access-date=3 April 2020}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.sentinelassam.com/topheadlines/4-autonomous-councils-almost-non-functional-578605|title=4 autonomous councils almost non-functional - Sentinelassam|date=17 February 2022}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.sentinelassam.com/topheadlines/assam-government-to-form-four-interim-councils-soon|title=Assam Government To Form Four Interim Councils Soon|date=9 January 2021|newspaper=Sentinelassam|access-date=3 April 2020}}</ref>
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:भारतातील स्वायत्त जिल्हा परिषद]]
[[वर्ग:आसाममधील राजकारण]]
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मिसिंग स्वायत्त परिषद
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'''मिसिंग स्वायत्त परिषद''' ही भारतातील [[आसाम]] राज्यातील [[धेमाजी जिल्हा|धेमाजी]], [[लखीमपूर जिल्हा|लखीमपूर]], सोनितपूर, [[सोणितपूर जिल्हा|बिस्वनाथ]], [[विश्वनाथ जिल्हा|दिब्रुगड]], [[दिब्रुगढ जिल्हा|तिनसुकिया]], [[तिनसुकिया जिल्हा|शिवसागर]], [[सिबसागर जिल्हा|जोरहाट]] आणि [[जोरहाट जिल्हा|माजुली]] येथील मिसिंग लोकांसाठी [[भारताचे स्वायत्त प्रशासकीय विभाग|स्वायत्त जिल्हा परिषद]] आहे. ह्या परिषदेचे मुख्यालय [[धेमाजी]] येथे आहे.<ref>{{स्रोत बातमी|url=https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/6-tribal-autonomous-councils-in-assam-gets-central-fund-to-build-own-offices/articleshow/21374218.cms|title=6 Tribal Autonomous Councils in Assam gets Central fund to build own offices|date=26 Jul 2013|publisher=The Economic Times|access-date=8 January 2015}}</ref><ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=http://macgov.in/pdf/List_of_C.E.C._and_P.S..pdf|title=List of the Executive Members along with their Designation and Port-folios.|website=macgov.in|publisher=Mising Autonomous Council|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20141228003617/http://macgov.in/pdf/List_of_C.E.C._and_P.S..pdf|archive-date=28 December 2014|access-date=8 January 2015}}</ref><ref>{{स्रोत बातमी|url=http://www.assamtribune.com/scripts/detailsnew.asp?id=nov2214/state052|title=First anniversary of Mising Autonomous Council|date=21 November 2014|publisher=Assam Tribune|access-date=8 January 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150108160441/http://www.assamtribune.com/scripts/detailsnew.asp?id=nov2214%2Fstate052|archive-date=8 January 2015|url-status=dead}}</ref> परिषदेची स्थापना १९९५ मध्ये आसाम सरकारने केली होती.<ref name="Sharma">{{स्रोत पुस्तक|title=Peace and Conflict Studies: Perspectives from South Asia|last=Sharma|first=Chandan Kumar|publisher=Department of Political Science, Gauhati University|year=2012|isbn=9788192401317|editor-last=Mahanta|editor-first=Nani Gopal|pages=24-26|chapter=Mapping The Trajectory of Contemporary Ethnic Identity Movement: The Case of the Misings of Assam|chapter-url=https://www.academia.edu/40787605/Mapping_the_Trajectory_of_a_Contemporary_Ethnic_Identity_Movement_The_Case_of_the_Misings_of_Assam}}</ref>
परिषद मध्ये ३६ सदस्य आहे.
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:धेमाजी जिल्हा]]
[[वर्ग:भारतातील स्वायत्त जिल्हा परिषद]]
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{{माहिती संचिका}}
'''मिसिंग स्वायत्त परिषद''' ही भारतातील [[आसाम]] राज्यातील [[धेमाजी जिल्हा|धेमाजी]], [[लखीमपूर जिल्हा|लखीमपूर]], सोनितपूर, [[सोणितपूर जिल्हा|बिस्वनाथ]], [[विश्वनाथ जिल्हा|दिब्रुगड]], [[दिब्रुगढ जिल्हा|तिनसुकिया]], [[तिनसुकिया जिल्हा|शिवसागर]], [[सिबसागर जिल्हा|जोरहाट]] आणि [[जोरहाट जिल्हा|माजुली]] येथील मिसिंग लोकांसाठी [[भारताचे स्वायत्त प्रशासकीय विभाग|स्वायत्त जिल्हा परिषद]] आहे. ह्या परिषदेचे मुख्यालय [[धेमाजी]] येथे आहे.<ref>{{स्रोत बातमी|url=https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/6-tribal-autonomous-councils-in-assam-gets-central-fund-to-build-own-offices/articleshow/21374218.cms|title=6 Tribal Autonomous Councils in Assam gets Central fund to build own offices|date=26 Jul 2013|publisher=The Economic Times|access-date=8 January 2015}}</ref><ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=http://macgov.in/pdf/List_of_C.E.C._and_P.S..pdf|title=List of the Executive Members along with their Designation and Port-folios.|website=macgov.in|publisher=Mising Autonomous Council|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20141228003617/http://macgov.in/pdf/List_of_C.E.C._and_P.S..pdf|archive-date=28 December 2014|access-date=8 January 2015}}</ref><ref>{{स्रोत बातमी|url=http://www.assamtribune.com/scripts/detailsnew.asp?id=nov2214/state052|title=First anniversary of Mising Autonomous Council|date=21 November 2014|publisher=Assam Tribune|access-date=8 January 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150108160441/http://www.assamtribune.com/scripts/detailsnew.asp?id=nov2214%2Fstate052|archive-date=8 January 2015|url-status=dead}}</ref> परिषदेची स्थापना १९९५ मध्ये आसाम सरकारने केली होती.<ref name="Sharma">{{स्रोत पुस्तक|title=Peace and Conflict Studies: Perspectives from South Asia|last=Sharma|first=Chandan Kumar|publisher=Department of Political Science, Gauhati University|year=2012|isbn=9788192401317|editor-last=Mahanta|editor-first=Nani Gopal|pages=24-26|chapter=Mapping The Trajectory of Contemporary Ethnic Identity Movement: The Case of the Misings of Assam|chapter-url=https://www.academia.edu/40787605/Mapping_the_Trajectory_of_a_Contemporary_Ethnic_Identity_Movement_The_Case_of_the_Misings_of_Assam}}</ref>
परिषद मध्ये ३६ सदस्य आहे.
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:धेमाजी जिल्हा]]
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लडाख स्वायत्त डोंगराळ विकास परिषद, कारगिल
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'''लडाख स्वायत्त डोंगराळ विकास परिषद, कारगिल''' (LAHDC कारगिल), ही [[लडाख|लडाख केंद्रशासित प्रदेशातील]] दोन [[भारताचे स्वायत्त प्रशासकीय विभाग|स्वायत्त जिल्हा परिषदांपैकी]] एक आहे. एलएएचडीसी कारगिल हे भारतातील लडाखमधील [[कारगिल जिल्हा|कारगिल जिल्ह्याचे]] प्रशासन पाहते.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://kargil.nic.in/lahdc/|title=LAHDCK – Ladakh Autonomous Hill Development Council, Kargil | District Kargil, Government of Jammu & Kashmir | India}}</ref>
परिषदमध्ये ३० सदस्य आहे; ज्यातील २६ जनमताने निवडले जातात आणि ४ हे राखीव महिला व अल्पसंख्याक लोकांसाठी आहे.<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=wZTDAAAAQBAJ&q=Contents+in+Counterinsurgency%2C+Democracy+and+the+politics+of+Identity+in+India&pg=PA215|title=The Hill Council and the Healing Touch policy|last=Bhan|first=Mona|date=11 September 2013|publisher=Routledge Contemporary South Asia Series|isbn=9781134509836|page=63}}</ref>
== संदर्भ ==
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'''लडाख स्वायत्त डोंगराळ विकास परिषद, कारगिल''' (LAHDC कारगिल), ही [[लडाख|लडाख केंद्रशासित प्रदेशातील]] दोन [[भारताचे स्वायत्त प्रशासकीय विभाग|स्वायत्त जिल्हा परिषदांपैकी]] एक आहे. एलएएचडीसी कारगिल हे भारतातील लडाखमधील [[कारगिल जिल्हा|कारगिल जिल्ह्याचे]] प्रशासन पाहते.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://kargil.nic.in/lahdc/|title=LAHDCK – Ladakh Autonomous Hill Development Council, Kargil | District Kargil, Government of Jammu & Kashmir | India}}</ref>
परिषदमध्ये ३० सदस्य आहे; ज्यातील २६ जनमताने निवडले जातात आणि ४ हे राखीव महिला व अल्पसंख्याक लोकांसाठी आहे.<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=wZTDAAAAQBAJ&q=Contents+in+Counterinsurgency%2C+Democracy+and+the+politics+of+Identity+in+India&pg=PA215|title=The Hill Council and the Healing Touch policy|last=Bhan|first=Mona|date=11 September 2013|publisher=Routledge Contemporary South Asia Series|isbn=9781134509836|page=63}}</ref>
== संदर्भ ==
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'''लडाख स्वायत्त डोंगराळ विकास परिषद, लेह''' <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://ladakh.nic.in/ladakh-autonomous-hill-development-council-leh/|title=Ladakh Autonomous Hill Development Council, Leh | the Administration of Union Territory of Ladakh | India}}</ref> (LAHDC लेह) ही [[लडाख|लडाख केंद्रशासित प्रदेशातील]] दोन [[भारताचे स्वायत्त प्रशासकीय विभाग|स्वायत्त जिल्हा परिषदांपैकी]] एक आहे. एलएएचडीसी लेह हे भारताच्या लडाखमधील [[लेह जिल्हा|लेह जिल्ह्याचे]] प्रशासन करते.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=http://leh.nic.in/lahdc.htm|title=Ladakh Autonomous hill development Council|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20071030134447/http://leh.nic.in/lahdc.htm|archive-date=2007-10-30|access-date=2007-12-06}}</ref> १९९५ मधेय् स्थापन झालेल्या परिषदमध्ये ३० जागा आहे ज्यातील २६ जनमताने तर ४ राखीव आहे.<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=wZTDAAAAQBAJ&q=Contents+in+Counterinsurgency%2C+Democracy+and+the+politics+of+Identity+in+India&pg=PA215|title=The Hill Council and the Healing Touch policy|last=Bhan|first=Mona|date=11 September 2013|publisher=Routledge Contemporary South Asia Series|isbn=9781134509836|page=63}}</ref>
== संदर्भ ==
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'''लडाख स्वायत्त डोंगराळ विकास परिषद, लेह''' <ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://ladakh.nic.in/ladakh-autonomous-hill-development-council-leh/|title=Ladakh Autonomous Hill Development Council, Leh | the Administration of Union Territory of Ladakh | India}}</ref> (LAHDC लेह) ही [[लडाख|लडाख केंद्रशासित प्रदेशातील]] दोन [[भारताचे स्वायत्त प्रशासकीय विभाग|स्वायत्त जिल्हा परिषदांपैकी]] एक आहे. एलएएचडीसी लेह हे भारताच्या लडाखमधील [[लेह जिल्हा|लेह जिल्ह्याचे]] प्रशासन करते.<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=http://leh.nic.in/lahdc.htm|title=Ladakh Autonomous hill development Council|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20071030134447/http://leh.nic.in/lahdc.htm|archive-date=2007-10-30|access-date=2007-12-06}}</ref> १९९५ मधेय् स्थापन झालेल्या परिषदमध्ये ३० जागा आहे ज्यातील २६ जनमताने तर ४ राखीव आहे.<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=wZTDAAAAQBAJ&q=Contents+in+Counterinsurgency%2C+Democracy+and+the+politics+of+Identity+in+India&pg=PA215|title=The Hill Council and the Healing Touch policy|last=Bhan|first=Mona|date=11 September 2013|publisher=Routledge Contemporary South Asia Series|isbn=9781134509836|page=63}}</ref>
== संदर्भ ==
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चर्चा:शिराळे (वैभववाडी)
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नवीन पान: | नाव = शिराळे | राज्य = महाराष्ट्र | जिल्हा = सिंधुदुर्ग | तालुका = वैभववाडी | ग्रामपंचायत = सडुरे-शिराळे | जनगणना कोड = 566382 | पिनकोड = 416810 | अक्षांश = 16.463042 | रेखांश = 73.862576 | लोकसंख्या = सुमारे 280 | कुटुं...
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wikitext
text/x-wiki
| नाव = शिराळे
| राज्य = महाराष्ट्र
| जिल्हा = सिंधुदुर्ग
| तालुका = वैभववाडी
| ग्रामपंचायत = सडुरे-शिराळे
| जनगणना कोड = 566382
| पिनकोड = 416810
| अक्षांश = 16.463042
| रेखांश = 73.862576
| लोकसंख्या = सुमारे 280
| कुटुंबे = सुमारे 75
}}
'''शिराळे''' हे [[महाराष्ट्र]] राज्यातील [[सिंधुदुर्ग जिल्हा|सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातील]] [[वैभववाडी तालुका|वैभववाडी तालुक्यातील]] एक डोंगराळ व निसर्गरम्य गाव आहे. हे गाव तालुक्याच्या पूर्वेकडील भागात असून [[कोल्हापूर जिल्हा|कोल्हापूर जिल्ह्याच्या]] सीमावर्ती डोंगराळ परिसराच्या जवळ आहे. गावाचा परिसर सह्याद्रीच्या डोंगररांगा, घनदाट वनक्षेत्र, नैसर्गिक जलस्रोत आणि पावसाळ्यातील धबधब्यांसाठी ओळखला जातो.
== भौगोलिक स्थान ==
शिराळे गाव वैभववाडी तालुक्याच्या पूर्वेकडील भागात वसलेले आहे. गावाच्या परिसरात डोंगर, दऱ्या, जंगल आणि नैसर्गिक जलस्रोत आढळतात. गावाच्या स्थानाचे GPS निर्देशांक स्थानिक नोंदीनुसार '''16.463042° उत्तर अक्षांश आणि 73.862576° पूर्व रेखांश''' असे आहेत.
सन 2011 च्या भारताच्या जनगणनेनुसार शिराळे गावाचा जनगणना कोड '''566382''' असून गावाचे क्षेत्रफळ सुमारे '''1,189.7 हेक्टर''' होते.<ref name="Census2011">{{Cite web
|url=https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/830/download/36188/DH_2011_2733_PART_A_DCHB_SINDHUDURG.pdf
|title=District Census Handbook, Sindhudurg
|publisher=Office of the Registrar General & Census Commissioner, India
|access-date=2026-09-15
}}</ref>
== लोकसंख्या ==
2011 च्या भारताच्या जनगणनेनुसार शिराळे गावाची लोकसंख्या '''229''' असून एकूण '''72 कुटुंबे''' होती.<ref name="Census2011" />
स्थानिक माहितीनुसार 2026 मध्ये गावाची लोकसंख्या सुमारे '''280''' असून सुमारे '''75 घरे''' आहेत. हा 2026 चा आकडा स्थानिक माहितीनुसार दिलेला असून अधिकृत जनगणना आकडा नाही. अधिकृत जनगणना आकडे उपलब्ध झाल्यानंतर या विभागात त्यानुसार सुधारणा करता येईल.
== इतिहास ==
स्थानिक परंपरेनुसार शिराळे गावाची वस्ती अनेक पिढ्यांपासून येथे आहे. स्थानिक माहितीनुसार गावातील जुन्या कुटुंबांना पूर्वी '''मिराशी''' म्हणून संबोधले जात असे. पुढील काळात '''मराठे''' आणि त्यानंतर '''पाटील''' अशी संबोधने प्रचलित झाली.
स्थानिक परंपरेनुसार गावातील पाटील कुटुंबांचा [[गांगेश्वर मंदिर|गांगेश्वर मंदिराशी]] धार्मिक संबंध होता. गावाच्या नावाच्या उत्पत्तीबाबत स्थानिक पातळीवर विविध समजुती आढळतात. त्यापैकी एक स्थानिक समजूत अशी आहे की गावातील लोकांची विशिष्ट राहणीमानाची पद्धत किंवा स्वभाव यावरून गावाला 'शिराळे' हे नाव प्राप्त झाले असावे. या नावाच्या उत्पत्तीची अधिकृत ऐतिहासिक नोंद उपलब्ध नसल्याने ही माहिती स्थानिक परंपरा म्हणून पाहिली जाते.
== समाजजीवन ==
शिराळे गावातील प्रमुख सामाजिक घटकांमध्ये मराठा आणि धनगर समाजाचा समावेश होतो. गावातील धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमांमध्ये विविध समाजघटकांचा सहभाग असतो.
गावातील सण, उत्सव, धार्मिक कार्यक्रम, भजन, सामुदायिक भोजन आणि पारंपरिक प्रथा यांमुळे गावातील सामुदायिक जीवनाला महत्त्व प्राप्त झाले आहे.
== गांगेश्वर मंदिर ==
गावाचे प्रमुख धार्मिक स्थळ '''गांगेश्वर मंदिर''' आहे. स्थानिक श्रद्धेनुसार हे मंदिर प्राचीन असून येथील गांगेश्वर देवस्थान स्वयंभू मानले जाते. स्थानिक माहितीनुसार मंदिराचा कालांतराने दोन-तीन वेळा जीर्णोद्धार करण्यात आला आहे.
गांगेश्वर मंदिर हे गावातील धार्मिक तसेच सामाजिक उपक्रमांचे एक प्रमुख केंद्र आहे. येथे विविध धार्मिक कार्यक्रम, पूजा, भजन आणि सामुदायिक भोजनाचे आयोजन केले जाते.
== मंदिर परिसरातील शांततेची परंपरा ==
गांगेश्वर मंदिर परिसरात मोठ्या आवाजातील ध्वनिक्षेपक किंवा वाद्यांचा वापर टाळण्याची स्थानिक परंपरा आहे. धार्मिक विधीच्या वेळी आवश्यकतेनुसार मर्यादित ध्वनिक्षेपकाचा वापर केला जातो.
स्थानिक परंपरेनुसार पूर्वी गावातील विवाहसोहळे गावाच्या हद्दीबाहेर करण्याची पद्धत होती. पुढील काळात स्थानिकांच्या मागणीनंतर विवाहसोहळे गावातच करण्याची पद्धत रूढ झाली.
== शुकमुनींची गुहा ==
गावाच्या डोंगराळ परिसरात '''शुकमुनींची गुहा''' किंवा '''सुखमुनी मठ''' म्हणून ओळखले जाणारे धार्मिक स्थळ आहे. या स्थळाशी संबंधित स्थानिक परंपरा आणि धार्मिक श्रद्धा गावाच्या सांस्कृतिक जीवनाचा भाग आहेत.
स्थानिक माहितीनुसार शुकमुनींच्या गुहेमुळे परिसरातील नदीला '''शुकनदी''' हे नाव पडले असल्याचे सांगितले जाते. पावसाळ्यात या परिसरातील जलप्रवाह वाढतो.
== नैसर्गिक जलस्रोत ==
शिराळे गावात बारमाही पाणी उपलब्ध करून देणारा नैसर्गिक झरा आहे. स्थानिक माहितीनुसार या झऱ्याचे पाणी पाइपद्वारे गुरुत्वाकर्षणाच्या साहाय्याने गावात आणले जाते. या पाणीपुरवठ्यासाठी मोटार किंवा विद्युत यंत्रणेचा वापर करण्याची आवश्यकता नसल्याचे स्थानिकांकडून सांगितले जाते.
== जैवविविधता ==
शिराळे परिसर हा डोंगराळ व वनक्षेत्राने व्यापलेला असल्यामुळे येथे विविध प्रकारची वनस्पती व वन्यजीव आढळतात. गावाचा परिसर राधानगरी वन्यजीव अभयारण्याच्या पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्राच्या परिसराशी संबंधित आहे. राधानगरी पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्राच्या अधिसूचनेत शिराळे गावाचा समावेश करण्यात आलेला आहे.<ref name="ESZ">{{Cite web
|url=https://moef.gov.in/uploads/2020/10/radhanagari.pdf
|title=Radhanagari Wildlife Sanctuary – Eco-sensitive Zone Notification
|publisher=Ministry of Environment, Forest and Climate Change, Government of India
|access-date=2026-09-15
}}</ref>
स्थानिक माहितीनुसार परिसरात गवा, सांबर यांसारखे वन्यप्राणी तसेच विविध प्रकारचे पक्षी आढळतात. जंगलामध्ये कणकेचे कोंब, तोंडाची भाजी, टाकळ्याची भाजी यांसारख्या स्थानिक रानभाज्यांचा वापर पारंपरिक आहारात केला जातो.
परिसरात शिकेकाई, जिरंग, विकारीची साल, रक्तबावळी, कापरभेंडी, घनशीचे पाळ यांसारख्या स्थानिक वनस्पती आढळतात. या वनस्पतींचा पारंपरिक वापर स्थानिक ज्ञानाचा भाग आहे.
== पर्यटन ==
शिराळे गावाला निसर्ग आणि धार्मिक पर्यटनाची क्षमता आहे. गावाच्या परिसरातील डोंगर, धबधबे, गुहा, मंदिरे आणि नैसर्गिक जलस्रोत पर्यटकांना आकर्षित करतात.
स्थानिक पर्यटन फलकानुसार गावाच्या परिसरातील काही प्रमुख पर्यटनस्थळे पुढीलप्रमाणे आहेत.
=== बारमाही पर्यटनस्थळे ===
# शिडिमाचा उमाळा – 4.2 किमी
# पाट्याचा डोंक – 4.1 किमी
# सुरव नदी उगमस्थान – 4.1 किमी
# गवळणीचा कडा – 3.8 किमी
# वणव्याचा डोंक – 3.7 किमी
# सुखमुनी मठ – 3 किमी
# मलका देवी – 2.5 किमी
# पावणाई मंदिर – 0.1 किमी
# घोरप्याचा माळ – 0.5 किमी
# गांगेश्वर मंदिर – 0 किमी
=== पावसाळी पर्यटनस्थळे ===
पावसाळ्यात गावाच्या परिसरातील अनेक धबधबे सक्रिय होतात. स्थानिक पर्यटन फलकावर पुढील धबधब्यांची नोंद आहे.
# शिडिमाचा धबधबा – 4.2 किमी
# खुर्जी धबधबा – 3.9 किमी
# राशीचा धबधबा – 0.3 किमी
# रुसड्याचा धबधबा – 2.5 किमी
# सुतार मांगर धबधबा – 0.2 किमी
# पेंडकुळी धबधबा – 1.5 किमी
# वजर धबधबा – 0.5 किमी
# खडकी धबधबा – 0.5 किमी
# गांगो धबधबा – 0.5 किमी
वरील अंतर स्थानिक पर्यटन फलकावर नमूद केलेल्या अंतरानुसार आहेत.
== गावपळवण ==
शिराळे गावातील वैशिष्ट्यपूर्ण पारंपरिक प्रथांपैकी '''गावपळवण''' ही एक प्रथा आहे. ही प्रथा साधारणपणे [[मकरसंक्रांत]]ीच्या आसपास आयोजित केली जाते.
स्थानिक माहितीनुसार पूर्वी गावपळवणाचा कालावधी सुमारे तीन आठवडे किंवा त्याहून अधिक असायचा. सध्या हा कालावधी सुमारे सात दिवसांचा आहे. या काळात गावातील लोक गावाच्या हद्दीबाहेरील ठिकाणी एकत्र राहतात. ही प्रथा सामुदायिक एकोपा आणि परंपरेशी संबंधित मानली जाते.
गावपळवणानंतर '''घोरिप''' हा धार्मिक कार्यक्रम आयोजित केला जातो. या कार्यक्रमात स्थानिक लोक आपल्या श्रद्धेनुसार नवस किंवा इच्छा व्यक्त करतात. कार्यक्रमानंतर मोठ्या प्रमाणावर महाप्रसादाचे आयोजन केले जाते. स्थानिक माहितीनुसार या महाप्रसादास सुमारे 250 ते 300 लोक उपस्थित राहतात.
== पालेभावय ==
शिराळे गावात शेतीची कामे सुरू करण्यापूर्वी '''पालेभावय''' ही सामुदायिक परंपरा पाळली जाते. या प्रसंगी गावातील लोक जंगलातून उपलब्ध होणाऱ्या विविध रानभाज्या गोळा करतात. या भाज्या एकत्रितपणे शिजवून गांगेश्वर मंदिरात सामुदायिक भोजनाचे आयोजन केले जाते.
रानभाज्यांसोबत भाताचा महाप्रसाद केला जातो. गावातील नागरिक तसेच आलेल्या पाहुण्यांना प्रसाद दिल्यानंतर शेतीच्या कामांना सुरुवात करण्याची परंपरा आहे.
== वारी सोमवार ==
गांगेश्वर देवस्थानाशी संबंधित स्थानिक परंपरेनुसार सोमवारचा दिवस धार्मिक कार्यासाठी राखून ठेवण्याची पद्धत आहे. स्थानिक माहितीनुसार या दिवशी नियमित मजुरी किंवा श्रमाचे काम न करण्याची प्रथा काही कुटुंबांमध्ये पाळली जाते.
== सण आणि उत्सव ==
शिराळे गावात विविध धार्मिक व सांस्कृतिक सण साजरे केले जातात. त्यामध्ये पुढील उत्सवांचा समावेश होतो:
* गांगेश्वर देवस्थानाची वार्षिक पूजा
* घोरिप कार्यक्रम
* शिमगा
* पालेभावय
* सत्यनारायण पूजा
* दहीहंडी
* गणेशोत्सव
* नवरात्रोत्सव
* वारकरी भजन
* संगीत भजन
=== नवरात्रोत्सव ===
नवरात्रोत्सवाच्या काळात गावातील सार्वजनिक सभागृह किंवा शाळेच्या परिसरात देवीची स्थापना करून नऊ दिवस पूजा-अर्चा केली जाते.
=== धनगर समाजाचे गजा नृत्य ===
शिराळे गावातील धनगर समाजाच्या सांस्कृतिक परंपरांमध्ये '''गजा नृत्य''' या पारंपरिक नृत्यप्रकाराचा समावेश होतो. दसऱ्याच्या सणाच्या निमित्ताने विशेष पोशाख परिधान करून पारंपरिक गीते व नृत्य सादर केले जाते.
== शिक्षण ==
गावात '''जिल्हा परिषद प्राथमिक शाळा विद्यामंदिर शिराळे''' ही प्राथमिक शाळा आहे. शाळेत प्राथमिक स्तरावरील विद्यार्थ्यांना शिक्षण दिले जाते.
== अर्थव्यवस्था ==
शिराळे गावातील अर्थव्यवस्थेत शेती, पशुपालन, मजुरी आणि वनक्षेत्राशी संबंधित पारंपरिक उपजीविका यांचा समावेश होतो. डोंगराळ भौगोलिक परिस्थितीमुळे येथील शेतीचे स्वरूप परिसरातील इतर गावांपेक्षा काही प्रमाणात वेगळे आहे.
== सांस्कृतिक जीवन ==
शिराळे गावाचे सांस्कृतिक जीवन धार्मिक श्रद्धा, सामुदायिक परंपरा, भजन, लोककला, सण-उत्सव आणि सामुदायिक भोजन यांभोवती केंद्रित आहे. गावातील विविध समाजघटक धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमांमध्ये सहभागी होतात.
गावपळवण, पालेभावय, गांगेश्वर देवस्थानाशी संबंधित परंपरा आणि धनगर समाजाचे गजा नृत्य या स्थानिक सांस्कृतिक वैशिष्ट्यांमुळे शिराळे गावाला स्वतंत्र सांस्कृतिक ओळख प्राप्त झाली आहे.
== पर्यटन विकासाची क्षमता ==
शिराळे गावाच्या परिसरात नैसर्गिक आणि धार्मिक पर्यटनासाठी विविध ठिकाणे उपलब्ध आहेत. डोंगर, जंगल, धबधबे, नैसर्गिक झरे, गुहा आणि मंदिरे यांमुळे पावसाळ्यात विशेषतः पर्यटकांना आकर्षित करण्याची क्षमता या परिसरात आहे.
पर्यटनाचा विकास करताना स्थानिक पर्यावरण, वन्यजीव, जलस्रोत आणि गावाच्या पारंपरिक संस्कृतीचे संवर्धन करणे महत्त्वाचे ठरते.
== शिराळेची वैशिष्ट्ये ==
शिराळे गावाची प्रमुख वैशिष्ट्ये पुढीलप्रमाणे सांगता येतात:
* वैभववाडी तालुक्याच्या पूर्वेकडील डोंगराळ भागातील स्थान.
* सह्याद्रीच्या परिसरातील निसर्गरम्य वातावरण.
* गांगेश्वर हे प्रमुख धार्मिक स्थळ.
* शुकमुनींची गुहा व संबंधित धार्मिक परंपरा.
* नैसर्गिक झऱ्याद्वारे गुरुत्वाकर्षणाच्या साहाय्याने होणारा पारंपरिक पाणीपुरवठा.
* गावपळवण ही वैशिष्ट्यपूर्ण सामुदायिक परंपरा.
* पालेभावय ही शेतीपूर्व सामुदायिक परंपरा.
* धनगर समाजाचे गजा नृत्य.
* पावसाळ्यात सक्रिय होणारे अनेक धबधबे.
* जंगलातील स्थानिक रानभाज्या व वनस्पतींचे पारंपरिक ज्ञान.
* धार्मिक आणि सांस्कृतिक कार्यक्रमांमध्ये सामुदायिक सहभाग.
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
== बाह्य दुवे ==
* [https://censusindia.gov.in/ भारताची जनगणना – अधिकृत संकेतस्थळ]
* [https://moef.gov.in/ भारत सरकार, पर्यावरण, वन आणि हवामान बदल मंत्रालय]
[[वर्ग:सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातील गावे]]
[[वर्ग:वैभववाडी तालुक्यातील गावे]]
[[वर्ग:सिंधुदुर्ग जिल्हा]]
[[वर्ग:महाराष्ट्रातील गावे]]
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शिराळे वैभववाडी
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सदस्य चर्चा:Mr Kanha Makasare
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साहाय्य चमू
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नविन सदस्याच्या चर्चापानावर [[Template:Welcome|स्वागत संदेश]] टाकला
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{{Template:Welcome|realName=|name=Mr Kanha Makasare}}
-- [[सदस्य:साहाय्य चमू|साहाय्य चमू]] ([[सदस्य चर्चा:साहाय्य चमू|चर्चा]]) २०:४१, १५ सप्टेंबर २०२६ (IST)
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युटामधील काउंटी
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अभय नातू
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नवीन
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[[चित्र:Map of Utah highlighting County.svg|अंगुष्ठ|३००पिक्सेल|युटामधील काउंटी दर्शवणारा नकाशा]]
[[अमेरिका|अमेरिकेच्या]] [[युटा]] राज्यात एकूण २९ [[काउंटी]] आहेत. ४ जानेवारी १८९६ रोजी युटा राज्याची निर्मिती झाली तेव्हा राज्यात १५ मूळ काउंटी अस्तित्वात होत्या.
== काउंटींची यादी ==
{| class="wikitable sortable" style="font-size: 85%; text-align: center;"
|- style="background: #e0e0e0;"
! काउंटी !! काउंटी ठिकाण !! निर्मिती दिनांक/वर्ष !! निर्मिती !! नावाचा उगम !! लोकसंख्या<br />(२०२०) !! क्षेत्रफळ (चौ. किमी)
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[बीव्हर काउंटी, युटा|बीव्हर]] || [[बीव्हर, युटा|बीव्हर]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५६ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|५ जानेवारी १८५६]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || परिसरातील मुबलक बीव्हर प्राण्यांवरून || ७,०७२ || ६,७०८
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[बॉक्स एल्डर काउंटी, युटा|बॉक्स एल्डर]] || [[ब्रिगहॅम सिटी, युटा|ब्रिगहॅम सिटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५६ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|५ जानेवारी १८५६]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || परिसरात आढळणाऱ्या बॉक्स एल्डर झाडांवरून || ५७,६६६ || १४,८२३
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[कॅश काउंटी, युटा|कॅश]] || [[लोगन, युटा|लोगन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५६ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|४ एप्रिल १८५६]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || फर व्यापाऱ्यांच्या गुप्त गुहांवरून (Caches) || १,३३,१५४ || ३,०३८
|-
| [[कार्बन काउंटी, युटा|कार्बन]] || [[प्राइस, युटा|प्राइस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|८ मार्च १८९४]] || एमरी काउंटीच्या भागातून || परिसरातील कोळशाच्या साठ्यांवरून || २०,४१२ || ३,८२९
|-
| [[डागेट काउंटी, युटा|डागेट]] || [[मिलांड, युटा|मिलांड]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१८ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|७ जानेवारी १९१८]] || युइंता काउंटीच्या भागातून || [[एलस्वर्थ डागेट]] (युटाचे पहिले सर्व्हेयर जनरल) || ९३५ || १,८०९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[डेव्हिस काउंटी, युटा|डेव्हिस]] || [[फार्मिंग्टन, युटा|फार्मिंग्टन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|५ ऑक्टोबर १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[डॅनिएल सी. डेव्हिस]] (मॉर्मन बटालियनचे कॅप्टन) || ३,६२,६७९ || ७६४
|-
| [[डुशेन काउंटी, युटा|डुशेन]] || [[डुशेन, युटा|डुशेन]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१५ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|७ जानेवारी १९१५]] || वासॅच काउंटीच्या भागातून || [[ॲटिएन डुशेन]] (फ्रेंच-इंडियन फर व्यापारी) || १९,५८० || deal_size_placeholder -> ८,४३३
|-
| [[एमरी काउंटी, युटा|एमरी]] || [[कॅसल डेल, युटा|कॅसल डेल]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१२ फेब्रुवारी १८८०]] || सॅनपीट काउंटीच्या भागातून || [[जॉर्ज डब्ल्यू. एमरी]] (युटा प्रांताचे गव्हर्नर) || ९,८२५ || ११,५५१
|-
| [[गारफील्ड काउंटी, युटा|गारफील्ड]] || [[पँग्विच, युटा|पँग्विच]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ मार्च १८८२]] || आयर्न काउंटीच्या भागातून || [[जेम्स ए. गारफील्ड]] (अमेरिकेचे २० वे राष्ट्राध्यक्ष) || ५,०८३ || १३,४०१
|-
| [[ग्रँड काउंटी, युटा|ग्रँड]] || [[मोॲब, युटा|मोॲब]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१३ मार्च १८९०]] || युइंता काउंटीच्या भागातून || [[ग्रँड नदी]] (आताची कॉलोराडो नदी) वरून || ९,६६९ || ९,६८२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[आयर्न काउंटी, युटा|आयर्न]] || [[पॅरोवान, युटा|पॅरोवान]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३१ जानेवारी १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || परिसरातील लोखंडाच्या खनिजांवरून || ५७,२८९ || ८,५४२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[जुआब काउंटी, युटा|जुआब]] || [[नेफी, युटा|नेफी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ मार्च १८५२]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || स्थानिक यूट भाषेतील 'तहानलेला देश' या शब्दावरून || ११,७८५ || ८,७८८
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[केन काउंटी, युटा|केन]] || [[कनाब, युटा|कनाब]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६४]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[थॉमस एल. केन]] (मॉर्मन स्थलांतरितांचे समर्थक अधिकारी) || ७,६६७ || १०,६४१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[मिलार्ड काउंटी, युटा|मिलार्ड]] || [[फिल्मोर, युटा|फिल्मोर]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|५ ऑक्टोबर १८५१]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मिलार्ड फिल्मोर]] (अमेरिकेचे १३ वे राष्ट्राध्यक्ष) || १२,९७५ || १७,०२२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[मोर्गन काउंटी, युटा|मोर्गन]] || [[मोर्गन, युटा|मोर्गन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१७ जानेवारी १८६२]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जेडेडिया एम. मोर्गन]] (मॉर्मन चर्चचे नेते) || १२,२९५ || १,५७५
|-
| [[पाय्यूट काउंटी, युटा|पाय्यूट]] || [[जंक्शन, युटा|जंक्शन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६५ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६५]] || बीव्हर काउंटीच्या भागातून || [[पाय्यूट]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || १,४३८ || १,९६३
|-
| [[रिच काउंटी, युटा|रिच]] || [[रँडॉल्फ, युटा|रँडॉल्फ]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६४]] || कॅश काउंटीच्या भागातून || [[चार्ल्स सी. रिच]] (मॉर्मन चर्चचे प्रेषित) || ३,६१० || २,६६४
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[साल्ट लेक काउंटी, युटा|साल्ट लेक]] || [[साल्ट लेक सिटी, युटा|साल्ट लेक सिटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३१ मार्च १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ग्रेट साल्ट लेक]] या खाऱ्या पाण्याचा तलावावरून || ११,८५,२३८ || १,८९१
|-
| [[सॅन हुआन काउंटी, युटा|सॅन हुआन]] || [[माँटिचेलो, युटा|माँटिचेलो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१७ फेब्रुवारी १८८०]] || काणे, आयर्न आणि पाय्यूट काउंटीच्या भागांतून || [[सॅन हुआन नदी (कॉलोराडो नदी)|सॅन हुआन नदीवरून]] || १४,५१८ || २०,२५४
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सॅनपीट काउंटी, युटा|सॅनपीट]] || [[मँटी, युटा|मँटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ मार्च १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सानपिच]] (स्थानिक यूट जमातीचे प्रमुख) || २८,४३७ || ४,११३
|-
| [[सेव्हियर काउंटी, युटा|सेव्हियर]] || [[रिचफील्ड, युटा|रिचफील्ड]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६५ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६५]] || सॅनपीट काउंटीच्या भागातून || [[सेव्हियर नदी]] वरून || २१,५२२ || ४,९४७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[समिट काउंटी, युटा|समिट]] || [[कोलव्हिल, युटा|कोलव्हिल]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१३ जाने १८५४]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || परिसरातील उंच पर्वताच्या शिखरांवरून (Summits) || ४२,५३१ || ४,८७४
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[टूईला काउंटी, युटा|टूईला]] || [[टूईला, युटा|टूईला]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३१ मार्च १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[टूईला]] (गॉश्यूट जमातीचे प्रमुख किंवा वनस्पतीवरून) || ७२,६९८ || १८,०००
|-
| [[युइंता काउंटी, युटा|युइंता]] || [[व्हर्नल, युटा|व्हर्नल]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१८ फेब्रुवारी १८८०]] || वासॅच काउंटीच्या भागातून || [[युइंता]] (स्थानिक यूट जमातीवरून) || ३५,६२० || ११,५९५
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[युटा काउंटी, युटा|युटा]] || [[प्रोव्हो, युटा|प्रोव्हो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३१ जानेवारी १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[यूट]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || ६,५९,३९९ || ५,१७०
|-
| [[वासॅच काउंटी, युटा|वासॅच]] || [[हेबर सिटी, युटा|हेबर सिटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१७ जानेवारी १८६२]] || युटा आणि साल्ट लेक काउंटीच्या भागांतून || [[वासॅच पर्वतमाला|वासॅच पर्वतरांगेवरून]] || ३४,७८८ || ३,०५९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[वॉशिंग्टन काउंटी, युटा|वॉशिंग्टन]] || [[सेंट जॉर्ज, युटा|सेंट जॉर्ज]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ मार्च १८५२]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जॉर्ज वॉशिंग्टन]] (अमेरिकेचे १ ले राष्ट्राध्यक्ष) || १,८०,२७९ || ६,२८५
|-
| [[वेन काउंटी, युटा|वेन]] || [[लोआ, युटा|लोआ]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१० मे १८९२]] || पाय्यूट काउंटीच्या भागातून || [[वेन रोबिन्सन]] (आमदार जोसेफ रोबिन्सन यांचा मुलगा) || २,४८६ || ६,४०५
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[वेबर काउंटी, युटा|वेबर]] || [[ऑग्डेन, युटा|ऑग्डेन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ मार्च १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[वेबर नदी]] वरून || २,६२,२२३ || १,४५१
|}
== हेसुद्धा पहा ==
* [[वायोमिंगमधील काउंटी]]
* [[कॉलोराडोमधील काउंटी]]
== संदर्भ आणि नोंदी ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:युटामधील काउंटी|*]]
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2709760
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अभय नातू
206
साचा
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wikitext
text/x-wiki
{{युटाच्या काउंट्यांचा नकाशा}}
[[अमेरिका|अमेरिकेच्या]] [[युटा]] राज्यात एकूण २९ [[काउंटी]] आहेत. ४ जानेवारी १८९६ रोजी युटा राज्याची निर्मिती झाली तेव्हा राज्यात १५ मूळ काउंटी अस्तित्वात होत्या.
== काउंटींची यादी ==
{| class="wikitable sortable" style="font-size: 85%; text-align: center;"
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! काउंटी !! काउंटी ठिकाण !! निर्मिती दिनांक/वर्ष !! निर्मिती !! नावाचा उगम !! लोकसंख्या<br />(२०२०) !! क्षेत्रफळ (चौ. किमी)
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| [[बीव्हर काउंटी, युटा|बीव्हर]] || [[बीव्हर, युटा|बीव्हर]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५६ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|५ जानेवारी १८५६]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || परिसरातील मुबलक बीव्हर प्राण्यांवरून || ७,०७२ || ६,७०८
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| [[बॉक्स एल्डर काउंटी, युटा|बॉक्स एल्डर]] || [[ब्रिगहॅम सिटी, युटा|ब्रिगहॅम सिटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५६ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|५ जानेवारी १८५६]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || परिसरात आढळणाऱ्या बॉक्स एल्डर झाडांवरून || ५७,६६६ || १४,८२३
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| [[कॅश काउंटी, युटा|कॅश]] || [[लोगन, युटा|लोगन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५६ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|४ एप्रिल १८५६]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || फर व्यापाऱ्यांच्या गुप्त गुहांवरून (Caches) || १,३३,१५४ || ३,०३८
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| [[कार्बन काउंटी, युटा|कार्बन]] || [[प्राइस, युटा|प्राइस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|८ मार्च १८९४]] || एमरी काउंटीच्या भागातून || परिसरातील कोळशाच्या साठ्यांवरून || २०,४१२ || ३,८२९
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| [[डागेट काउंटी, युटा|डागेट]] || [[मिलांड, युटा|मिलांड]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१८ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|७ जानेवारी १९१८]] || युइंता काउंटीच्या भागातून || [[एलस्वर्थ डागेट]] (युटाचे पहिले सर्व्हेयर जनरल) || ९३५ || १,८०९
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| [[डेव्हिस काउंटी, युटा|डेव्हिस]] || [[फार्मिंग्टन, युटा|फार्मिंग्टन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|५ ऑक्टोबर १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[डॅनिएल सी. डेव्हिस]] (मॉर्मन बटालियनचे कॅप्टन) || ३,६२,६७९ || ७६४
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| [[डुशेन काउंटी, युटा|डुशेन]] || [[डुशेन, युटा|डुशेन]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१५ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|७ जानेवारी १९१५]] || वासॅच काउंटीच्या भागातून || [[ॲटिएन डुशेन]] (फ्रेंच-इंडियन फर व्यापारी) || १९,५८० || deal_size_placeholder -> ८,४३३
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| [[एमरी काउंटी, युटा|एमरी]] || [[कॅसल डेल, युटा|कॅसल डेल]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१२ फेब्रुवारी १८८०]] || सॅनपीट काउंटीच्या भागातून || [[जॉर्ज डब्ल्यू. एमरी]] (युटा प्रांताचे गव्हर्नर) || ९,८२५ || ११,५५१
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| [[गारफील्ड काउंटी, युटा|गारफील्ड]] || [[पँग्विच, युटा|पँग्विच]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ मार्च १८८२]] || आयर्न काउंटीच्या भागातून || [[जेम्स ए. गारफील्ड]] (अमेरिकेचे २० वे राष्ट्राध्यक्ष) || ५,०८३ || १३,४०१
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| [[ग्रँड काउंटी, युटा|ग्रँड]] || [[मोॲब, युटा|मोॲब]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१३ मार्च १८९०]] || युइंता काउंटीच्या भागातून || [[ग्रँड नदी]] (आताची कॉलोराडो नदी) वरून || ९,६६९ || ९,६८२
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| [[आयर्न काउंटी, युटा|आयर्न]] || [[पॅरोवान, युटा|पॅरोवान]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३१ जानेवारी १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || परिसरातील लोखंडाच्या खनिजांवरून || ५७,२८९ || ८,५४२
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| [[जुआब काउंटी, युटा|जुआब]] || [[नेफी, युटा|नेफी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ मार्च १८५२]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || स्थानिक यूट भाषेतील 'तहानलेला देश' या शब्दावरून || ११,७८५ || ८,७८८
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| [[केन काउंटी, युटा|केन]] || [[कनाब, युटा|कनाब]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६४]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[थॉमस एल. केन]] (मॉर्मन स्थलांतरितांचे समर्थक अधिकारी) || ७,६६७ || १०,६४१
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| [[मिलार्ड काउंटी, युटा|मिलार्ड]] || [[फिल्मोर, युटा|फिल्मोर]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|५ ऑक्टोबर १८५१]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मिलार्ड फिल्मोर]] (अमेरिकेचे १३ वे राष्ट्राध्यक्ष) || १२,९७५ || १७,०२२
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| [[मोर्गन काउंटी, युटा|मोर्गन]] || [[मोर्गन, युटा|मोर्गन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१७ जानेवारी १८६२]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जेडेडिया एम. मोर्गन]] (मॉर्मन चर्चचे नेते) || १२,२९५ || १,५७५
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| [[पाय्यूट काउंटी, युटा|पाय्यूट]] || [[जंक्शन, युटा|जंक्शन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६५ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६५]] || बीव्हर काउंटीच्या भागातून || [[पाय्यूट]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || १,४३८ || १,९६३
|-
| [[रिच काउंटी, युटा|रिच]] || [[रँडॉल्फ, युटा|रँडॉल्फ]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६४]] || कॅश काउंटीच्या भागातून || [[चार्ल्स सी. रिच]] (मॉर्मन चर्चचे प्रेषित) || ३,६१० || २,६६४
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[साल्ट लेक काउंटी, युटा|साल्ट लेक]] || [[साल्ट लेक सिटी, युटा|साल्ट लेक सिटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३१ मार्च १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ग्रेट साल्ट लेक]] या खाऱ्या पाण्याचा तलावावरून || ११,८५,२३८ || १,८९१
|-
| [[सॅन हुआन काउंटी, युटा|सॅन हुआन]] || [[माँटिचेलो, युटा|माँटिचेलो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१७ फेब्रुवारी १८८०]] || काणे, आयर्न आणि पाय्यूट काउंटीच्या भागांतून || [[सॅन हुआन नदी (कॉलोराडो नदी)|सॅन हुआन नदीवरून]] || १४,५१८ || २०,२५४
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सॅनपीट काउंटी, युटा|सॅनपीट]] || [[मँटी, युटा|मँटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ मार्च १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सानपिच]] (स्थानिक यूट जमातीचे प्रमुख) || २८,४३७ || ४,११३
|-
| [[सेव्हियर काउंटी, युटा|सेव्हियर]] || [[रिचफील्ड, युटा|रिचफील्ड]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६५ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६५]] || सॅनपीट काउंटीच्या भागातून || [[सेव्हियर नदी]] वरून || २१,५२२ || ४,९४७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[समिट काउंटी, युटा|समिट]] || [[कोलव्हिल, युटा|कोलव्हिल]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१३ जाने १८५४]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || परिसरातील उंच पर्वताच्या शिखरांवरून (Summits) || ४२,५३१ || ४,८७४
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| [[टूईला काउंटी, युटा|टूईला]] || [[टूईला, युटा|टूईला]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३१ मार्च १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[टूईला]] (गॉश्यूट जमातीचे प्रमुख किंवा वनस्पतीवरून) || ७२,६९८ || १८,०००
|-
| [[युइंटा काउंटी, युटा|युइंटा]] || [[व्हर्नल, युटा|व्हर्नल]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१८ फेब्रुवारी १८८०]] || वासॅच काउंटीच्या भागातून || [[युइंता]] (स्थानिक यूट जमातीवरून) || ३५,६२० || ११,५९५
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[युटा काउंटी, युटा|युटा]] || [[प्रोव्हो, युटा|प्रोव्हो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३१ जानेवारी १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[यूट]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || ६,५९,३९९ || ५,१७०
|-
| [[वासॅच काउंटी, युटा|वासॅच]] || [[हेबर सिटी, युटा|हेबर सिटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१७ जानेवारी १८६२]] || युटा आणि साल्ट लेक काउंटीच्या भागांतून || [[वासॅच पर्वतमाला|वासॅच पर्वतरांगेवरून]] || ३४,७८८ || ३,०५९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[वॉशिंग्टन काउंटी, युटा|वॉशिंग्टन]] || [[सेंट जॉर्ज, युटा|सेंट जॉर्ज]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ मार्च १८५२]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जॉर्ज वॉशिंग्टन]] (अमेरिकेचे १ ले राष्ट्राध्यक्ष) || १,८०,२७९ || ६,२८५
|-
| [[वेन काउंटी, युटा|वेन]] || [[लोआ, युटा|लोआ]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१० मे १८९२]] || पाय्यूट काउंटीच्या भागातून || [[वेन रोबिन्सन]] (आमदार जोसेफ रोबिन्सन यांचा मुलगा) || २,४८६ || ६,४०५
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[वेबर काउंटी, युटा|वेबर]] || [[ऑग्डेन, युटा|ऑग्डेन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ मार्च १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[वेबर नदी]] वरून || २,६२,२२३ || १,४५१
|}
== हेसुद्धा पहा ==
* [[वायोमिंगमधील काउंटी]]
* [[कॉलोराडोमधील काउंटी]]
== संदर्भ आणि नोंदी ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:युटामधील काउंटी|*]]
7sbbpd57ebu64zjx328zgxutzmxw4co
2709761
2709760
2026-09-15T15:22:29Z
अभय नातू
206
साचा
2709761
wikitext
text/x-wiki
[[चित्र:Map of Utah highlighting County.svg|अंगुष्ठ|३००पिक्सेल|युटामधील काउंटी दर्शवणारा नकाशा]]
[[अमेरिका|अमेरिकेच्या]] [[युटा]] राज्यात एकूण २९ [[काउंटी]] आहेत. ४ जानेवारी १८९६ रोजी युटा राज्याची निर्मिती झाली तेव्हा राज्यात १५ मूळ काउंटी अस्तित्वात होत्या.
== काउंटींची यादी ==
{| class="wikitable sortable" style="font-size: 85%; text-align: center;"
|- style="background: #e0e0e0;"
! काउंटी !! काउंटी ठिकाण !! निर्मिती दिनांक/वर्ष !! निर्मिती !! नावाचा उगम !! लोकसंख्या<br />(२०२०) !! क्षेत्रफळ (चौ. किमी)
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[बीव्हर काउंटी, युटा|बीव्हर]] || [[बीव्हर, युटा|बीव्हर]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५६ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|५ जानेवारी १८५६]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || परिसरातील मुबलक बीव्हर प्राण्यांवरून || ७,०७२ || ६,७०८
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[बॉक्स एल्डर काउंटी, युटा|बॉक्स एल्डर]] || [[ब्रिगहॅम सिटी, युटा|ब्रिगहॅम सिटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५६ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|५ जानेवारी १८५६]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || परिसरात आढळणाऱ्या बॉक्स एल्डर झाडांवरून || ५७,६६६ || १४,८२३
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[कॅश काउंटी, युटा|कॅश]] || [[लोगन, युटा|लोगन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५६ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|४ एप्रिल १८५६]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || फर व्यापाऱ्यांच्या गुप्त गुहांवरून (Caches) || १,३३,१५४ || ३,०३८
|-
| [[कार्बन काउंटी, युटा|कार्बन]] || [[प्राइस, युटा|प्राइस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|८ मार्च १८९४]] || एमरी काउंटीच्या भागातून || परिसरातील कोळशाच्या साठ्यांवरून || २०,४१२ || ३,८२९
|-
| [[डागेट काउंटी, युटा|डागेट]] || [[मिलांड, युटा|मिलांड]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१८ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|७ जानेवारी १९१८]] || युइंता काउंटीच्या भागातून || [[एलस्वर्थ डागेट]] (युटाचे पहिले सर्व्हेयर जनरल) || ९३५ || १,८०९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[डेव्हिस काउंटी, युटा|डेव्हिस]] || [[फार्मिंग्टन, युटा|फार्मिंग्टन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|५ ऑक्टोबर १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[डॅनिएल सी. डेव्हिस]] (मॉर्मन बटालियनचे कॅप्टन) || ३,६२,६७९ || ७६४
|-
| [[डुशेन काउंटी, युटा|डुशेन]] || [[डुशेन, युटा|डुशेन]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१५ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|७ जानेवारी १९१५]] || वासॅच काउंटीच्या भागातून || [[ॲटिएन डुशेन]] (फ्रेंच-इंडियन फर व्यापारी) || १९,५८० || deal_size_placeholder -> ८,४३३
|-
| [[एमरी काउंटी, युटा|एमरी]] || [[कॅसल डेल, युटा|कॅसल डेल]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१२ फेब्रुवारी १८८०]] || सॅनपीट काउंटीच्या भागातून || [[जॉर्ज डब्ल्यू. एमरी]] (युटा प्रांताचे गव्हर्नर) || ९,८२५ || ११,५५१
|-
| [[गारफील्ड काउंटी, युटा|गारफील्ड]] || [[पँग्विच, युटा|पँग्विच]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ मार्च १८८२]] || आयर्न काउंटीच्या भागातून || [[जेम्स ए. गारफील्ड]] (अमेरिकेचे २० वे राष्ट्राध्यक्ष) || ५,०८३ || १३,४०१
|-
| [[ग्रँड काउंटी, युटा|ग्रँड]] || [[मोॲब, युटा|मोॲब]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१३ मार्च १८९०]] || युइंता काउंटीच्या भागातून || [[ग्रँड नदी]] (आताची कॉलोराडो नदी) वरून || ९,६६९ || ९,६८२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[आयर्न काउंटी, युटा|आयर्न]] || [[पॅरोवान, युटा|पॅरोवान]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३१ जानेवारी १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || परिसरातील लोखंडाच्या खनिजांवरून || ५७,२८९ || ८,५४२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[जुआब काउंटी, युटा|जुआब]] || [[नेफी, युटा|नेफी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ मार्च १८५२]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || स्थानिक यूट भाषेतील 'तहानलेला देश' या शब्दावरून || ११,७८५ || ८,७८८
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[केन काउंटी, युटा|केन]] || [[कनाब, युटा|कनाब]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६४]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[थॉमस एल. केन]] (मॉर्मन स्थलांतरितांचे समर्थक अधिकारी) || ७,६६७ || १०,६४१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[मिलार्ड काउंटी, युटा|मिलार्ड]] || [[फिल्मोर, युटा|फिल्मोर]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|५ ऑक्टोबर १८५१]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मिलार्ड फिल्मोर]] (अमेरिकेचे १३ वे राष्ट्राध्यक्ष) || १२,९७५ || १७,०२२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[मोर्गन काउंटी, युटा|मोर्गन]] || [[मोर्गन, युटा|मोर्गन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१७ जानेवारी १८६२]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जेडेडिया एम. मोर्गन]] (मॉर्मन चर्चचे नेते) || १२,२९५ || १,५७५
|-
| [[पाय्यूट काउंटी, युटा|पाय्यूट]] || [[जंक्शन, युटा|जंक्शन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६५ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६५]] || बीव्हर काउंटीच्या भागातून || [[पाय्यूट]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || १,४३८ || १,९६३
|-
| [[रिच काउंटी, युटा|रिच]] || [[रँडॉल्फ, युटा|रँडॉल्फ]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६४]] || कॅश काउंटीच्या भागातून || [[चार्ल्स सी. रिच]] (मॉर्मन चर्चचे प्रेषित) || ३,६१० || २,६६४
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[साल्ट लेक काउंटी, युटा|साल्ट लेक]] || [[साल्ट लेक सिटी, युटा|साल्ट लेक सिटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३१ मार्च १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ग्रेट साल्ट लेक]] या खाऱ्या पाण्याचा तलावावरून || ११,८५,२३८ || १,८९१
|-
| [[सॅन हुआन काउंटी, युटा|सॅन हुआन]] || [[माँटिचेलो, युटा|माँटिचेलो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१७ फेब्रुवारी १८८०]] || काणे, आयर्न आणि पाय्यूट काउंटीच्या भागांतून || [[सॅन हुआन नदी (कॉलोराडो नदी)|सॅन हुआन नदीवरून]] || १४,५१८ || २०,२५४
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सॅनपीट काउंटी, युटा|सॅनपीट]] || [[मँटी, युटा|मँटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ मार्च १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सानपिच]] (स्थानिक यूट जमातीचे प्रमुख) || २८,४३७ || ४,११३
|-
| [[सेव्हियर काउंटी, युटा|सेव्हियर]] || [[रिचफील्ड, युटा|रिचफील्ड]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६५ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६५]] || सॅनपीट काउंटीच्या भागातून || [[सेव्हियर नदी]] वरून || २१,५२२ || ४,९४७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[समिट काउंटी, युटा|समिट]] || [[कोलव्हिल, युटा|कोलव्हिल]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१३ जाने १८५४]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || परिसरातील उंच पर्वताच्या शिखरांवरून (Summits) || ४२,५३१ || ४,८७४
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[टूईला काउंटी, युटा|टूईला]] || [[टूईला, युटा|टूईला]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३१ मार्च १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[टूईला]] (गॉश्यूट जमातीचे प्रमुख किंवा वनस्पतीवरून) || ७२,६९८ || १८,०००
|-
| [[युइंता काउंटी, युटा|युइंता]] || [[व्हर्नल, युटा|व्हर्नल]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१८ फेब्रुवारी १८८०]] || वासॅच काउंटीच्या भागातून || [[युइंता]] (स्थानिक यूट जमातीवरून) || ३५,६२० || ११,५९५
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[युटा काउंटी, युटा|युटा]] || [[प्रोव्हो, युटा|प्रोव्हो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३१ जानेवारी १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[यूट]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || ६,५९,३९९ || ५,१७०
|-
| [[वासॅच काउंटी, युटा|वासॅच]] || [[हेबर सिटी, युटा|हेबर सिटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१७ जानेवारी १८६२]] || युटा आणि साल्ट लेक काउंटीच्या भागांतून || [[वासॅच पर्वतमाला|वासॅच पर्वतरांगेवरून]] || ३४,७८८ || ३,०५९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[वॉशिंग्टन काउंटी, युटा|वॉशिंग्टन]] || [[सेंट जॉर्ज, युटा|सेंट जॉर्ज]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ मार्च १८५२]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जॉर्ज वॉशिंग्टन]] (अमेरिकेचे १ ले राष्ट्राध्यक्ष) || १,८०,२७९ || ६,२८५
|-
| [[वेन काउंटी, युटा|वेन]] || [[लोआ, युटा|लोआ]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१० मे १८९२]] || पाय्यूट काउंटीच्या भागातून || [[वेन रोबिन्सन]] (आमदार जोसेफ रोबिन्सन यांचा मुलगा) || २,४८६ || ६,४०५
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[वेबर काउंटी, युटा|वेबर]] || [[ऑग्डेन, युटा|ऑग्डेन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ मार्च १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[वेबर नदी]] वरून || २,६२,२२३ || १,४५१
|}
== हेसुद्धा पहा ==
* [[वायोमिंगमधील काउंटी]]
* [[कॉलोराडोमधील काउंटी]]
== संदर्भ आणि नोंदी ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:युटामधील काउंटी|*]]
6iq7e01ax1mznb91900ktjvuyzl6uyp
2709762
2709761
2026-09-15T15:23:16Z
अभय नातू
206
साचा
2709762
wikitext
text/x-wiki
{{युटाच्या काउंट्यांचा नकाशा}}
[[अमेरिका|अमेरिकेच्या]] [[युटा]] राज्यात एकूण २९ [[काउंटी]] आहेत. ४ जानेवारी १८९६ रोजी युटा राज्याची निर्मिती झाली तेव्हा राज्यात १५ मूळ काउंटी अस्तित्वात होत्या.
== काउंटींची यादी ==
{| class="wikitable sortable" style="font-size: 85%; text-align: center;"
|- style="background: #e0e0e0;"
! काउंटी !! काउंटी ठिकाण !! निर्मिती दिनांक/वर्ष !! निर्मिती !! नावाचा उगम !! लोकसंख्या<br />(२०२०) !! क्षेत्रफळ (चौ. किमी)
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[बीव्हर काउंटी, युटा|बीव्हर]] || [[बीव्हर, युटा|बीव्हर]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५६ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|५ जानेवारी १८५६]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || परिसरातील मुबलक बीव्हर प्राण्यांवरून || ७,०७२ || ६,७०८
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[बॉक्स एल्डर काउंटी, युटा|बॉक्स एल्डर]] || [[ब्रिगहॅम सिटी, युटा|ब्रिगहॅम सिटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५६ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|५ जानेवारी १८५६]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || परिसरात आढळणाऱ्या बॉक्स एल्डर झाडांवरून || ५७,६६६ || १४,८२३
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[कॅश काउंटी, युटा|कॅश]] || [[लोगन, युटा|लोगन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५६ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|४ एप्रिल १८५६]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || फर व्यापाऱ्यांच्या गुप्त गुहांवरून (Caches) || १,३३,१५४ || ३,०३८
|-
| [[कार्बन काउंटी, युटा|कार्बन]] || [[प्राइस, युटा|प्राइस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|८ मार्च १८९४]] || एमरी काउंटीच्या भागातून || परिसरातील कोळशाच्या साठ्यांवरून || २०,४१२ || ३,८२९
|-
| [[डागेट काउंटी, युटा|डागेट]] || [[मिलांड, युटा|मिलांड]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१८ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|७ जानेवारी १९१८]] || युइंता काउंटीच्या भागातून || [[एलस्वर्थ डागेट]] (युटाचे पहिले सर्व्हेयर जनरल) || ९३५ || १,८०९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[डेव्हिस काउंटी, युटा|डेव्हिस]] || [[फार्मिंग्टन, युटा|फार्मिंग्टन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|५ ऑक्टोबर १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[डॅनिएल सी. डेव्हिस]] (मॉर्मन बटालियनचे कॅप्टन) || ३,६२,६७९ || ७६४
|-
| [[डुशेन काउंटी, युटा|डुशेन]] || [[डुशेन, युटा|डुशेन]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१५ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|७ जानेवारी १९१५]] || वासॅच काउंटीच्या भागातून || [[ॲटिएन डुशेन]] (फ्रेंच-इंडियन फर व्यापारी) || १९,५८० || deal_size_placeholder -> ८,४३३
|-
| [[एमरी काउंटी, युटा|एमरी]] || [[कॅसल डेल, युटा|कॅसल डेल]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१२ फेब्रुवारी १८८०]] || सॅनपीट काउंटीच्या भागातून || [[जॉर्ज डब्ल्यू. एमरी]] (युटा प्रांताचे गव्हर्नर) || ९,८२५ || ११,५५१
|-
| [[गारफील्ड काउंटी, युटा|गारफील्ड]] || [[पँग्विच, युटा|पँग्विच]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ मार्च १८८२]] || आयर्न काउंटीच्या भागातून || [[जेम्स ए. गारफील्ड]] (अमेरिकेचे २० वे राष्ट्राध्यक्ष) || ५,०८३ || १३,४०१
|-
| [[ग्रँड काउंटी, युटा|ग्रँड]] || [[मोॲब, युटा|मोॲब]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१३ मार्च १८९०]] || युइंता काउंटीच्या भागातून || [[ग्रँड नदी]] (आताची कॉलोराडो नदी) वरून || ९,६६९ || ९,६८२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[आयर्न काउंटी, युटा|आयर्न]] || [[पॅरोवान, युटा|पॅरोवान]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३१ जानेवारी १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || परिसरातील लोखंडाच्या खनिजांवरून || ५७,२८९ || ८,५४२
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| [[जुआब काउंटी, युटा|जुआब]] || [[नेफी, युटा|नेफी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ मार्च १८५२]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || स्थानिक यूट भाषेतील 'तहानलेला देश' या शब्दावरून || ११,७८५ || ८,७८८
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[केन काउंटी, युटा|केन]] || [[कनाब, युटा|कनाब]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६४]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[थॉमस एल. केन]] (मॉर्मन स्थलांतरितांचे समर्थक अधिकारी) || ७,६६७ || १०,६४१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[मिलार्ड काउंटी, युटा|मिलार्ड]] || [[फिल्मोर, युटा|फिल्मोर]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|५ ऑक्टोबर १८५१]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मिलार्ड फिल्मोर]] (अमेरिकेचे १३ वे राष्ट्राध्यक्ष) || १२,९७५ || १७,०२२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[मोर्गन काउंटी, युटा|मोर्गन]] || [[मोर्गन, युटा|मोर्गन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१७ जानेवारी १८६२]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जेडेडिया एम. मोर्गन]] (मॉर्मन चर्चचे नेते) || १२,२९५ || १,५७५
|-
| [[पाय्यूट काउंटी, युटा|पाय्यूट]] || [[जंक्शन, युटा|जंक्शन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६५ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६५]] || बीव्हर काउंटीच्या भागातून || [[पाय्यूट]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || १,४३८ || १,९६३
|-
| [[रिच काउंटी, युटा|रिच]] || [[रँडॉल्फ, युटा|रँडॉल्फ]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६४]] || कॅश काउंटीच्या भागातून || [[चार्ल्स सी. रिच]] (मॉर्मन चर्चचे प्रेषित) || ३,६१० || २,६६४
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[साल्ट लेक काउंटी, युटा|साल्ट लेक]] || [[साल्ट लेक सिटी, युटा|साल्ट लेक सिटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३१ मार्च १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ग्रेट साल्ट लेक]] या खाऱ्या पाण्याचा तलावावरून || ११,८५,२३८ || १,८९१
|-
| [[सॅन हुआन काउंटी, युटा|सॅन हुआन]] || [[माँटिचेलो, युटा|माँटिचेलो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१७ फेब्रुवारी १८८०]] || काणे, आयर्न आणि पाय्यूट काउंटीच्या भागांतून || [[सॅन हुआन नदी (कॉलोराडो नदी)|सॅन हुआन नदीवरून]] || १४,५१८ || २०,२५४
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सॅनपीट काउंटी, युटा|सॅनपीट]] || [[मँटी, युटा|मँटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ मार्च १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सानपिच]] (स्थानिक यूट जमातीचे प्रमुख) || २८,४३७ || ४,११३
|-
| [[सेव्हियर काउंटी, युटा|सेव्हियर]] || [[रिचफील्ड, युटा|रिचफील्ड]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६५ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६५]] || सॅनपीट काउंटीच्या भागातून || [[सेव्हियर नदी]] वरून || २१,५२२ || ४,९४७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[समिट काउंटी, युटा|समिट]] || [[कोलव्हिल, युटा|कोलव्हिल]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१३ जाने १८५४]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || परिसरातील उंच पर्वताच्या शिखरांवरून (Summits) || ४२,५३१ || ४,८७४
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[टूईला काउंटी, युटा|टूईला]] || [[टूईला, युटा|टूईला]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३१ मार्च १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[टूईला]] (गॉश्यूट जमातीचे प्रमुख किंवा वनस्पतीवरून) || ७२,६९८ || १८,०००
|-
| [[युइंटा काउंटी, युटा|युइंटा]] || [[व्हर्नल, युटा|व्हर्नल]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१८ फेब्रुवारी १८८०]] || वासॅच काउंटीच्या भागातून || [[युइंता]] (स्थानिक यूट जमातीवरून) || ३५,६२० || ११,५९५
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[युटा काउंटी, युटा|युटा]] || [[प्रोव्हो, युटा|प्रोव्हो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३१ जानेवारी १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[यूट]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || ६,५९,३९९ || ५,१७०
|-
| [[वासॅच काउंटी, युटा|वासॅच]] || [[हेबर सिटी, युटा|हेबर सिटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१७ जानेवारी १८६२]] || युटा आणि साल्ट लेक काउंटीच्या भागांतून || [[वासॅच पर्वतमाला|वासॅच पर्वतरांगेवरून]] || ३४,७८८ || ३,०५९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[वॉशिंग्टन काउंटी, युटा|वॉशिंग्टन]] || [[सेंट जॉर्ज, युटा|सेंट जॉर्ज]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ मार्च १८५२]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जॉर्ज वॉशिंग्टन]] (अमेरिकेचे १ ले राष्ट्राध्यक्ष) || १,८०,२७९ || ६,२८५
|-
| [[वेन काउंटी, युटा|वेन]] || [[लोआ, युटा|लोआ]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१० मे १८९२]] || पाय्यूट काउंटीच्या भागातून || [[वेन रोबिन्सन]] (आमदार जोसेफ रोबिन्सन यांचा मुलगा) || २,४८६ || ६,४०५
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[वेबर काउंटी, युटा|वेबर]] || [[ऑग्डेन, युटा|ऑग्डेन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ मार्च १८५०]] || १५ मूळ काउंटींपैकी एक || [[वेबर नदी]] वरून || २,६२,२२३ || १,४५१
|}
== हेसुद्धा पहा ==
* [[वायोमिंगमधील काउंटी]]
* [[कॉलोराडोमधील काउंटी]]
== संदर्भ आणि नोंदी ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:युटामधील काउंटी|*]]
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साल्ट लेक सिटी, युटा
0
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2709763
2026-09-15T15:24:07Z
अभय नातू
206
लेखनभेद
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text/x-wiki
#पुनर्निर्देशन [[सॉल्ट लेक सिटी]]
1e0vshr8ywug1t45lo690g5t4cth0t3
साल्ट लेक काउंटी, युटा
0
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अभय नातू
206
लेखनभेद
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text/x-wiki
#पुनर्निर्देशन [[सॉल्ट लेक काउंटी (युटा)]]
0ub9ad5ewkmejdbnmjhcr0vahortkpd
वासॅच काउंटी, युटा
0
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अभय नातू
206
लेखनभेद
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text/x-wiki
#पुनर्निर्देशन [[वासाच काउंटी (युटा)]]
f8lfelmgg4ryidy0x61a8yfv6fkls39
कॅश काउंटी, युटा
0
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अभय नातू
206
लेखनभेद
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text/x-wiki
#पुनर्निर्देशन [[केश काउंटी (युटा)]]
1yr4rdj345tcwibu3ktkmyltrh2766h
डागेट काउंटी, युटा
0
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2026-09-15T15:27:47Z
अभय नातू
206
लेखनभेद
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text/x-wiki
#पुनर्निर्देशन [[डॅगेट काउंटी (युटा)]]
cxsctjckyn54n80vrrencw17dky97kj
मोर्गन काउंटी, युटा
0
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2026-09-15T15:35:27Z
अभय नातू
206
लेखनभेद
2709768
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text/x-wiki
#पुनर्निर्देशन [[मॉर्गन काउंटी (युटा)]]
oh6tk4dt4578gt9mnprf0u4kgf7ye8s
सदस्य चर्चा:Sandeep mahipati sande
3
384007
2709769
2026-09-15T15:59:08Z
साहाय्य चमू
25365
नविन सदस्याच्या चर्चापानावर [[Template:Welcome|स्वागत संदेश]] टाकला
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text/x-wiki
{{Template:Welcome|realName=|name=Sandeep mahipati sande}}
-- [[सदस्य:साहाय्य चमू|साहाय्य चमू]] ([[सदस्य चर्चा:साहाय्य चमू|चर्चा]]) २१:२९, १५ सप्टेंबर २०२६ (IST)
rmnri74uu3u37k2y5da8nc947paek8z
प्यूट काउंटी (युटा)
0
384008
2709775
2026-09-15T16:40:33Z
अभय नातू
206
अभय नातू ने लेख [[प्यूट काउंटी (युटा)]] वरुन [[पाय्यूट काउंटी (युटा)]] ला हलविला: शुद्धलेखन
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text/x-wiki
#पुनर्निर्देशन [[पाय्यूट काउंटी (युटा)]]
dly6l6xde8n94oai1lxovajb56psqmh
पाय्यूट काउंटी, युटा
0
384009
2709776
2026-09-15T16:40:48Z
अभय नातू
206
शीर्षकलेखन संकेत
2709776
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text/x-wiki
#पुनर्निर्देशन [[पाय्यूट काउंटी (युटा)]]
dly6l6xde8n94oai1lxovajb56psqmh
सॅन हुआन काउंटी, युटा
0
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2026-09-15T17:23:49Z
अभय नातू
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लेखनभेद
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text/x-wiki
#पुनर्निर्देशन [[सान हुआन काउंटी (युटा)]]
cef2e20nfjb3x7id5abyg6jfpxzw2nn
सेव्हियर काउंटी, युटा
0
384011
2709778
2026-09-15T17:24:05Z
अभय नातू
206
लेखनभेद
2709778
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text/x-wiki
#पुनर्निर्देशन [[सेव्हियेर काउंटी (युटा)]]
cqfnlph7iszzxgj3lhwjrbo7tcpk0jq
टूईला काउंटी, युटा
0
384012
2709779
2026-09-15T17:24:47Z
अभय नातू
206
लेखनभेद
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text/x-wiki
#पुनर्निर्देशन [[टूविल काउंटी (युटा)]]
hqwhruc0yvk4si9j6lom3ttptuy6oaf
युइंता काउंटी, युटा
0
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2709780
2026-09-15T17:25:21Z
अभय नातू
206
लेखनभेद
2709780
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text/x-wiki
#पुनर्निर्देशन [[युइंटा काउंटी (युटा)]]
i377umah2oecdawqagrk3msfqcceufq
सदस्य चर्चा:Dr Borgavkar
3
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2709784
2026-09-15T17:52:16Z
साहाय्य चमू
25365
नविन सदस्याच्या चर्चापानावर [[Template:Welcome|स्वागत संदेश]] टाकला
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text/x-wiki
{{Template:Welcome|realName=|name=Dr Borgavkar}}
-- [[सदस्य:साहाय्य चमू|साहाय्य चमू]] ([[सदस्य चर्चा:साहाय्य चमू|चर्चा]]) २३:२२, १५ सप्टेंबर २०२६ (IST)
jjr8rgvg8ej4i2fm1c6pcy8cd8yxlqw
मिलार्ड फिल्मोर
0
384015
2709789
2026-09-15T19:47:12Z
अभय नातू
206
लेखनभेद
2709789
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text/x-wiki
#पुनर्निर्देशन [[मिलार्ड फिलमोर]]
5t2dr5n8ckdkgtwjs0vdqcerklto5nb
युटामधील काउंट्या
0
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2709790
2026-09-15T19:48:47Z
अभय नातू
206
लेखनभेद
2709790
wikitext
text/x-wiki
#पुनर्निर्देशन [[युटामधील काउंटी]]
2w8ovazxm61ftbrk0cc3reqwjtp4nlw
ॲरिझोनामधील काउंटी
0
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2709791
2026-09-15T20:01:14Z
अभय नातू
206
नवीन
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text/x-wiki
[[अमेरिका|अमेरिकेच्या]] [[ॲरिझोना]] राज्यात एकूण १५ [[काउंटी]] आहेत. १४ फेब्रुवारी १९१२ रोजी ॲरिझोना राज्याची निर्मिती झाली तेव्हा राज्यात १४ मूळ काउंटी अस्तित्वात होत्या.
== यादी ==
{| class="wikitable sortable" style="font-size: 85%; text-align: center;"
|- style="background: #e0e0e0;"
! काउंटी !! प्रशासकीय केन्द्र !! निर्मिती दिनांक/वर्ष !! निर्मिती !! नावाचा उगम !! लोकसंख्या<br />(२०२०) !! क्षेत्रफळ (चौ. किमी)
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[अपाचे काउंटी, ॲरिझोना|अपाचे]] || [[सेंट जॉन्स, ॲरिझोना|सेंट जॉन्स]] || [[:वर्ग:इ.स. १८७९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२४ फेब्रुवारी १८७९]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[अपाचे]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || ६६,०२१ || block_size_placeholder -> २९,०५६
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[कोचिस काउंटी, ॲरिझोना|कोचिस]] || [[बिस्बी, ॲरिझोना|बिस्बी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ फेब्रुवारी १८८१]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[कोचिस]] (अपाचे जमातीचे प्रमुख) || १,२५,४४७ || १६,१०७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[कोकोनिनो काउंटी, ॲरिझोना|कोकोनिनो]] || [[फ्लॅगस्टाफ, ॲरिझोना|फ्लॅगस्टाफ]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१९ फेब्रुवारी १८९१]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[कोकोनिनो]] (हावासुपाई आणि हवालपाई जमातींसाठी वापरले जाणारे नाव) || १,४५,१०१ || ४८,३३२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[गिला काउंटी, ॲरिझोना|गिला]] || [[ग्लोब, ॲरिझोना|ग्लोब]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|८ फेब्रुवारी १८८१]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[गिला नदी]] वरून || ५३,२७२ || १२,४२२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ग्रॅहॅम काउंटी, ॲरिझोना|ग्रॅहॅम]] || [[सॅफर्ड, ॲरिझोना|सॅफर्ड]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१० मार्च १८८१]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ग्रॅहॅम पर्वत]] वरून || ३८,५३७ || block_size_placeholder -> १२,०२०
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ग्रीनली काउंटी, ॲरिझोना|ग्रीनली]] || [[क्लिफ्टन, ॲरिझोना|क्लिफ्टन]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१० मार्च १९०९]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मेसन ग्रीनली]] (स्थानिक खाण व्यावसायिक) || ९,५६३ || block_size_placeholder -> ४,७८७
|-
| [[ला पाझ काउंटी, ॲरिझोना|ला पाझ]] || [[पारकर, ॲरिझोना|पारकर]] || [[:वर्ग:इ.स. १९८३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१ जानेवारी १९८३]] || युमा काउंटीच्या विभाजनातून || [[ला पाझ, ॲरिझोना]] या ऐतिहासिक शहरावरून || १६,५५७ || ११,६९०
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[मॅरीकोपा काउंटी, ॲरिझोना|मॅरीकोपा]] || [[फिनिक्स, ॲरिझोना|फिनिक्स]] || [[:वर्ग:इ.स. १८७१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१४ फेब्रुवारी १८७१]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मॅरीकोपा]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || ४४,२०,५६८ || २३,८९१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[मोहावे काउंटी, ॲरिझोना|मोहावे]] || [[किंगमन, ॲरिझोना|किंगमन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ नोव्हेंबर १८६४]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मोहावे]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || २,१३,२६७ || ३४,८८६
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[नाव्हाहो काउंटी, ॲरिझोना|नाव्हाहो]] || [[होलब्रुक, ॲरिझोना|होलब्रुक]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९५ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२१ मार्च १८९५]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[नाव्हाहो]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || १,०६,७१७ || २५,७७९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[पिमा काउंटी, ॲरिझोना|पिमा]] || [[टुसॉन, ॲरिझोना|टुसॉन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ नोव्हेंबर १८६४]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[पिमा]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || १०,४३,४३३ || २४,०७९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[पिनाल काउंटी, ॲरिझोना|पिनाल]] || [[फ्लोरेन्स, ॲरिझोना|फ्लोरेन्स]] || [[:वर्ग:इ.स. १८७५ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१ फेब्रुवारी १८७५]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[पिनाल पर्वत]] रांगेवरून || ४,२५,२६४ || block_size_placeholder -> १३,९१९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सांता क्रुझ काउंटी, ॲरिझोना|सांता क्रुझ]] || [[नोगालेस, ॲरिझोना|नोगालेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१५ मार्च १८९९]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सांता क्रुझ नदी (ॲरिझोना)|सांता क्रुझ नदीवरून]] || ४७,६६९ || ३,२०६
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[यावापाई काउंटी, ॲरिझोना|यावापाई]] || [[प्रेस्कॉट, ॲरिझोना|प्रेस्कॉट]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ नोव्हेंबर १८६४]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[यावापाई]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || २,३६,२०९ || block_size_placeholder -> २१,०५१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[युमा काउंटी, ॲरिझोना|युमा]] || [[युमा, ॲरिझोना|युमा]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ नोव्हेंबर १८६४]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[युमा (क्वेचान)]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || २,०३,८८१ || block_size_placeholder -> १४,२९४
|}
== हेसुद्धा पहा ==
* [[कॉलोराडोमधील काउंटी]]
* [[युटामधील काउंटी]]
== संदर्भ आणि नोंदी ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:ॲरिझोनामधील काउंटी|*]]
n84tyd5pmbppyps9gxjzf22vn2gvj2k
2709792
2709791
2026-09-15T20:02:01Z
अभय नातू
206
/* यादी */
2709792
wikitext
text/x-wiki
[[अमेरिका|अमेरिकेच्या]] [[ॲरिझोना]] राज्यात एकूण १५ [[काउंटी]] आहेत. १४ फेब्रुवारी १९१२ रोजी ॲरिझोना राज्याची निर्मिती झाली तेव्हा राज्यात १४ मूळ काउंटी अस्तित्वात होत्या.
== यादी ==
{| class="wikitable sortable" style="font-size: 85%; text-align: center;"
|- style="background: #e0e0e0;"
! काउंटी !! प्रशासकीय केन्द्र !! निर्मिती दिनांक/वर्ष !! निर्मिती !! नावाचा उगम !! लोकसंख्या<br />(२०२०) !! क्षेत्रफळ (चौ. किमी)
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[अपाचे काउंटी, ॲरिझोना|अपाचे]] || [[सेंट जॉन्स, ॲरिझोना|सेंट जॉन्स]] || [[:वर्ग:इ.स. १८७९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२४ फेब्रुवारी १८७९]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[अपाचे]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || ६६,०२१ || २९,०५६
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[कोचिस काउंटी, ॲरिझोना|कोचिस]] || [[बिस्बी, ॲरिझोना|बिस्बी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ फेब्रुवारी १८८१]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[कोचिस]] (अपाचे जमातीचे प्रमुख) || १,२५,४४७ || १६,१०७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[कोकोनिनो काउंटी, ॲरिझोना|कोकोनिनो]] || [[फ्लॅगस्टाफ, ॲरिझोना|फ्लॅगस्टाफ]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१९ फेब्रुवारी १८९१]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[कोकोनिनो]] (हावासुपाई आणि हवालपाई जमातींसाठी वापरले जाणारे नाव) || १,४५,१०१ || ४८,३३२
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| [[गिला काउंटी, ॲरिझोना|गिला]] || [[ग्लोब, ॲरिझोना|ग्लोब]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|८ फेब्रुवारी १८८१]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[गिला नदी]] वरून || ५३,२७२ || १२,४२२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ग्रॅहॅम काउंटी, ॲरिझोना|ग्रॅहॅम]] || [[सॅफर्ड, ॲरिझोना|सॅफर्ड]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१० मार्च १८८१]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ग्रॅहॅम पर्वत]] वरून || ३८,५३७ || १२,०२०
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| [[ग्रीनली काउंटी, ॲरिझोना|ग्रीनली]] || [[क्लिफ्टन, ॲरिझोना|क्लिफ्टन]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१० मार्च १९०९]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मेसन ग्रीनली]] (स्थानिक खाण व्यावसायिक) || ९,५६३ || ४,७८७
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| [[ला पाझ काउंटी, ॲरिझोना|ला पाझ]] || [[पारकर, ॲरिझोना|पारकर]] || [[:वर्ग:इ.स. १९८३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१ जानेवारी १९८३]] || युमा काउंटीच्या विभाजनातून || [[ला पाझ, ॲरिझोना]] या ऐतिहासिक शहरावरून || १६,५५७ || ११,६९०
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| [[मॅरीकोपा काउंटी, ॲरिझोना|मॅरीकोपा]] || [[फिनिक्स, ॲरिझोना|फिनिक्स]] || [[:वर्ग:इ.स. १८७१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१४ फेब्रुवारी १८७१]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मॅरीकोपा]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || ४४,२०,५६८ || २३,८९१
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| [[मोहावे काउंटी, ॲरिझोना|मोहावे]] || [[किंगमन, ॲरिझोना|किंगमन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ नोव्हेंबर १८६४]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मोहावे]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || २,१३,२६७ || ३४,८८६
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| [[नाव्हाहो काउंटी, ॲरिझोना|नाव्हाहो]] || [[होलब्रुक, ॲरिझोना|होलब्रुक]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९५ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२१ मार्च १८९५]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[नाव्हाहो]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || १,०६,७१७ || २५,७७९
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| [[पिमा काउंटी, ॲरिझोना|पिमा]] || [[टुसॉन, ॲरिझोना|टुसॉन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ नोव्हेंबर १८६४]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[पिमा]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || १०,४३,४३३ || २४,०७९
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| [[पिनाल काउंटी, ॲरिझोना|पिनाल]] || [[फ्लोरेन्स, ॲरिझोना|फ्लोरेन्स]] || [[:वर्ग:इ.स. १८७५ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१ फेब्रुवारी १८७५]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[पिनाल पर्वत]] रांगेवरून || ४,२५,२६४ || १३,९१९
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| [[सांता क्रुझ काउंटी, ॲरिझोना|सांता क्रुझ]] || [[नोगालेस, ॲरिझोना|नोगालेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१५ मार्च १८९९]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सांता क्रुझ नदी (ॲरिझोना)|सांता क्रुझ नदीवरून]] || ४७,६६९ || ३,२०६
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| [[यावापाई काउंटी, ॲरिझोना|यावापाई]] || [[प्रेस्कॉट, ॲरिझोना|प्रेस्कॉट]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ नोव्हेंबर १८६४]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[यावापाई]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || २,३६,२०९ || २१,०५१
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| [[युमा काउंटी, ॲरिझोना|युमा]] || [[युमा, ॲरिझोना|युमा]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ नोव्हेंबर १८६४]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[युमा (क्वेचान)]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || २,०३,८८१ || १४,२९४
|}
== हेसुद्धा पहा ==
* [[कॉलोराडोमधील काउंटी]]
* [[युटामधील काउंटी]]
== संदर्भ आणि नोंदी ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:ॲरिझोनामधील काउंटी|*]]
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2026-09-15T20:08:27Z
अभय नातू
206
साचा
2709797
wikitext
text/x-wiki
{{ॲरिझोनाच्या काउंट्यांचा नकाशा}}
[[अमेरिका|अमेरिकेच्या]] [[ॲरिझोना]] राज्यात एकूण १५ [[काउंटी]] आहेत. १४ फेब्रुवारी १९१२ रोजी ॲरिझोना राज्याची निर्मिती झाली तेव्हा राज्यात १४ मूळ काउंटी अस्तित्वात होत्या.
== यादी ==
{| class="wikitable sortable" style="font-size: 85%; text-align: center;"
|- style="background: #e0e0e0;"
! काउंटी !! प्रशासकीय केन्द्र !! निर्मिती दिनांक/वर्ष !! निर्मिती !! नावाचा उगम !! लोकसंख्या<br />(२०२०) !! क्षेत्रफळ (चौ. किमी)
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[अपाचे काउंटी, ॲरिझोना|अपाचे]] || [[सेंट जॉन्स, ॲरिझोना|सेंट जॉन्स]] || [[:वर्ग:इ.स. १८७९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२४ फेब्रुवारी १८७९]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[अपाचे]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || ६६,०२१ || २९,०५६
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[कोचिस काउंटी, ॲरिझोना|कोचिस]] || [[बिस्बी, ॲरिझोना|बिस्बी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ फेब्रुवारी १८८१]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[कोचिस]] (अपाचे जमातीचे प्रमुख) || १,२५,४४७ || १६,१०७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[कोकोनिनो काउंटी, ॲरिझोना|कोकोनिनो]] || [[फ्लॅगस्टाफ, ॲरिझोना|फ्लॅगस्टाफ]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१९ फेब्रुवारी १८९१]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[कोकोनिनो]] (हावासुपाई आणि हवालपाई जमातींसाठी वापरले जाणारे नाव) || १,४५,१०१ || ४८,३३२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[गिला काउंटी, ॲरिझोना|गिला]] || [[ग्लोब, ॲरिझोना|ग्लोब]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|८ फेब्रुवारी १८८१]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[गिला नदी]] वरून || ५३,२७२ || १२,४२२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ग्रॅहॅम काउंटी, ॲरिझोना|ग्रॅहॅम]] || [[सॅफर्ड, ॲरिझोना|सॅफर्ड]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१० मार्च १८८१]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ग्रॅहॅम पर्वत]] वरून || ३८,५३७ || १२,०२०
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| [[ग्रीनली काउंटी, ॲरिझोना|ग्रीनली]] || [[क्लिफ्टन, ॲरिझोना|क्लिफ्टन]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१० मार्च १९०९]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मेसन ग्रीनली]] (स्थानिक खाण व्यावसायिक) || ९,५६३ || ४,७८७
|-
| [[ला पाझ काउंटी, ॲरिझोना|ला पाझ]] || [[पारकर, ॲरिझोना|पारकर]] || [[:वर्ग:इ.स. १९८३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१ जानेवारी १९८३]] || युमा काउंटीच्या विभाजनातून || [[ला पाझ, ॲरिझोना]] या ऐतिहासिक शहरावरून || १६,५५७ || ११,६९०
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[मॅरीकोपा काउंटी, ॲरिझोना|मॅरीकोपा]] || [[फिनिक्स, ॲरिझोना|फिनिक्स]] || [[:वर्ग:इ.स. १८७१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१४ फेब्रुवारी १८७१]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मॅरीकोपा]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || ४४,२०,५६८ || २३,८९१
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| [[मोहावे काउंटी, ॲरिझोना|मोहावे]] || [[किंगमन, ॲरिझोना|किंगमन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ नोव्हेंबर १८६४]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मोहावे]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || २,१३,२६७ || ३४,८८६
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| [[नाव्हाहो काउंटी, ॲरिझोना|नाव्हाहो]] || [[होलब्रुक, ॲरिझोना|होलब्रुक]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९५ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२१ मार्च १८९५]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[नाव्हाहो]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || १,०६,७१७ || २५,७७९
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| [[पिमा काउंटी, ॲरिझोना|पिमा]] || [[टुसॉन, ॲरिझोना|टुसॉन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ नोव्हेंबर १८६४]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[पिमा]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || १०,४३,४३३ || २४,०७९
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| [[पिनाल काउंटी, ॲरिझोना|पिनाल]] || [[फ्लोरेन्स, ॲरिझोना|फ्लोरेन्स]] || [[:वर्ग:इ.स. १८७५ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१ फेब्रुवारी १८७५]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[पिनाल पर्वत]] रांगेवरून || ४,२५,२६४ || १३,९१९
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| [[सांता क्रुझ काउंटी, ॲरिझोना|सांता क्रुझ]] || [[नोगालेस, ॲरिझोना|नोगालेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१५ मार्च १८९९]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सांता क्रुझ नदी (ॲरिझोना)|सांता क्रुझ नदीवरून]] || ४७,६६९ || ३,२०६
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[यावापाई काउंटी, ॲरिझोना|यावापाई]] || [[प्रेस्कॉट, ॲरिझोना|प्रेस्कॉट]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ नोव्हेंबर १८६४]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[यावापाई]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || २,३६,२०९ || २१,०५१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[युमा काउंटी, ॲरिझोना|युमा]] || [[युमा, ॲरिझोना|युमा]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ नोव्हेंबर १८६४]] || १४ मूळ काउंटींपैकी एक || [[युमा (क्वेचान)]] नेटिव्ह अमेरिकन जमातीवरून || २,०३,८८१ || १४,२९४
|}
== हेसुद्धा पहा ==
* [[कॉलोराडोमधील काउंटी]]
* [[युटामधील काउंटी]]
== संदर्भ आणि नोंदी ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:ॲरिझोनामधील काउंटी|*]]
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मॅरीकोपा काउंटी, ॲरिझोना
0
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2026-09-15T20:02:32Z
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लेखनभेद
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wikitext
text/x-wiki
#पुनर्निर्देशन [[मॅरिकोपा काउंटी (ॲरिझोना)]]
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नाव्हाहो काउंटी, ॲरिझोना
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2026-09-15T20:02:51Z
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लेखनभेद
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wikitext
text/x-wiki
#पुनर्निर्देशन [[नवाहो काउंटी (ॲरिझोना)]]
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टुसॉन, ॲरिझोना
0
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अभय नातू
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लेखनभेद
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text/x-wiki
#पुनर्निर्देशन [[तुसॉन (अॅरिझोना)]]
o8gcp416gzu4xfz24mf8jduh18nkaud
साचा:ॲरिझोनाच्या काउंट्यांचा नकाशा
10
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2026-09-15T20:08:05Z
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नवीन
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wikitext
text/x-wiki
{{Image label begin|image=USA Arizona location map.svg|width={{{width|300}}}|float={{{float|right}}}}}
{{Image label|x=242|y=65|scale={{{width|300}}}/300|text=[[अपाचे काउंटी, ॲरिझोना|अपाचे]]}}
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[[वर्ग:ॲरिझोना साचे]]
[[वर्ग:अमेरिकेच्या राज्यांमधील काउंटीचे लेबल असलेले नकाशे]]
</noinclude>
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ॲरिझोनामधील काउंट्या
0
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2026-09-15T20:08:46Z
अभय नातू
206
लेखनभेद
2709798
wikitext
text/x-wiki
#पुनर्निर्देशन [[ॲरिझोनामधील काउंटी]]
h3t8px0s3i3txoturfcko2vh7ppf9r6
कोकणातील भात शेती कापणी
0
384023
2709801
2026-09-15T20:44:29Z
AdvAnantGholam
172574
नवीन पान: कोकणातील भात शेती ही प्रदेशाच्या कृषी आणि ग्रामीण जीवनाचा महत्त्वाचा भाग आहे. कोकणातील भातपिकाची लागवड प्रामुख्याने पावसावर अवलंबून असून, भाताची कापणी हा पिकाच्या उत्पादनचक्...
2709801
wikitext
text/x-wiki
कोकणातील भात शेती ही प्रदेशाच्या कृषी आणि ग्रामीण जीवनाचा महत्त्वाचा भाग आहे. कोकणातील भातपिकाची लागवड प्रामुख्याने पावसावर अवलंबून असून, भाताची कापणी हा पिकाच्या उत्पादनचक्रातील अत्यंत महत्त्वाचा टप्पा आहे. या प्रदेशातील भौगोलिक परिस्थिती, अतिवृष्टी, लहान व तुकड्यात विभागलेली शेती, उताराची किंवा पायरीदार जमीन आणि कापणीच्या काळातील मजुरांची उपलब्धता या घटकांचा भातकापणीच्या पद्धतीवर परिणाम होतो.<ref name="Bhanage2016">{{cite journal
|last=Bhanage
|first=G. B.
|author2=P. U. Shahare
|author3=P. S. Deshmukh
|author4=P. B. Gaikwad
|author5=V. V. Aware
|title=Mechanization in Harvesting and Post-Harvest Operation for Paddy in Konkan Region and Its Economic Feasibility
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|volume=34
|issue=2
|year=2016
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92862
}}</ref>
परंपरेने कोकणातील भाताची कापणी मानवी श्रमांवर आधारित राहिली असून विळा किंवा तत्सम साधनांनी भात कापणे, कापलेले भाताचे पुंजके एकत्र करणे, त्यानंतर मळणी व धान वेगळे करणे अशा सलग प्रक्रियेतून कापणीचे काम केले जात असे. कापणी व कापणीनंतरच्या प्रक्रियांमध्ये मोठ्या प्रमाणावर श्रम लागत असल्याने मजुरांची कमतरता आणि वाढता मजुरीखर्च हे कोकणातील भातशेतीसमोरील महत्त्वाचे प्रश्न ठरले आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील शेतीच्या विशिष्ट परिस्थितीमुळे भातकापणीच्या यांत्रिकीकरणालाही स्वतंत्र स्वरूप प्राप्त झाले आहे. लहान व विखुरलेली शेतजमीन, उताराची व पायरीदार शेती आणि मोठ्या प्रमाणातील पाऊस या मर्यादा लक्षात घेऊन भात कापणीसाठी लहान व तुलनेने हलकी यंत्रे विकसित करण्याचे प्रयत्न झाले आहेत.<ref name="Bhanage2017">{{cite journal
|last=Bhanage
|first=Girishkumar Balasaheb
|author2=P. U. Shahare
|author3=V. V. Aware
|author4=K. G. Dhande
|author5=P. S. Deshmukh
|title=Development of stripper harvester for paddy
|journal=Journal of Applied and Natural Science
|volume=9
|issue=4
|year=2017
|pages=1943–1948
|url=https://journals.ansfoundation.org/index.php/jans/article/view/1469
}}</ref>
या पार्श्वभूमीवर कोकणातील भात शेती कापणीचा अभ्यास हा केवळ भात कापण्याच्या तंत्राचा अभ्यास न राहता, पाऊस व जमीन, पिकाची पक्वता, पारंपरिक श्रमव्यवस्था, कापणीची साधने, मळणी व धान साठवण, यांत्रिकीकरण, मजूरटंचाई आणि ग्रामीण लोकजीवन यांचा परस्परसंबंध समजून घेण्याचा विषय ठरतो.
== कोकणातील भातशेतीची भौगोलिक व कृषी पार्श्वभूमी ==
कोकण हा महाराष्ट्राच्या पश्चिम किनारपट्टीवरील अरबी समुद्रालगतचा प्रदेश असून, त्याची भौगोलिक रचना डोंगराळ, खाचखळग्यांची आणि काही ठिकाणी सखल स्वरूपाची आहे. महाराष्ट्रातील कोकण विभागातील भात उत्पादनाच्या संदर्भात ठाणे, पालघर, रायगड, रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग हे प्रमुख जिल्हे विचारात घेतले जातात. या प्रदेशात उष्ण व दमट हवामान आणि मोठ्या प्रमाणातील नैऋत्य मोसमी पाऊस ही भातशेतीस अनुकूल वैशिष्ट्ये आहेत.<ref name="BiswasPhadtare1995">{{cite journal
|last=Biswas
|first=B. C.
|author2=R. D. Phadtare
|title=Cropping pattern of Konkan region on the basis of probabilistic rainfall and soil characteristics
|journal=MAUSAM
|volume=46
|issue=2
|year=1995
|pages=133–140
|url=https://mausamjournal.imd.gov.in/index.php/MAUSAM/article/view/3218
}}</ref>
कोकणातील भातशेती मोठ्या प्रमाणावर पावसावर अवलंबून आहे. अतिवृष्टी आणि सखल भौगोलिक परिस्थितीमुळे खरीप हंगामात भात हे अनेक भागांतील प्रमुख पीक ठरते. अखिल भारतीय समन्वित भात सुधारणा प्रकल्पाच्या उत्पादनाभिमुख सर्वेक्षणानुसार कोकणातील भात उत्पादक पट्ट्यात खरीप हंगामात भाताचे क्षेत्र मोठ्या प्रमाणावर असून, जास्त पावसामुळे काही भागांत खरीप हंगामात भाताव्यतिरिक्त इतर पिकांची लागवड करणे मर्यादित होते.<ref name="AICRIP2019">{{cite report
|author=All India Coordinated Rice Improvement Project
|title=Production Oriented Survey 2019
|publisher=Indian Institute of Rice Research
|url=https://icar-iirr.org/AICRIP/Final%20POS%202019-2020.pdf
}}</ref>
कोकणातील पर्जन्यमानाचा भातपिकाच्या वाढीवर आणि उत्पादनावर थेट परिणाम होतो. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील दीर्घकालीन पर्जन्यविषयक आकडेवारीच्या अभ्यासातून भातपिकाच्या वाढीच्या विविध अवस्थांमध्ये पावसाचे महत्त्व स्पष्ट झाले आहे. त्यामुळे कोकणातील भातशेतीची लागवड, वाढ आणि पक्वता यांचे वेळापत्रक स्थानिक पर्जन्यमानाशी घनिष्ठपणे संबंधित असते.<ref name="ChowdhuryDas1993">{{cite journal
|last=Chowdhury
|first=A.
|author2=H. P. Das
|title=Effect of rainfall on growth and yield of rice in Konkan coast
|journal=MAUSAM
|volume=44
|issue=2
|year=1993
|pages=143–146
|url=https://mausamjournal.imd.gov.in/index.php/MAUSAM/article/view/3811
}}</ref>
कोकणातील कृषी रचनेचे आणखी एक वैशिष्ट्य म्हणजे लहान व तुकड्यात विभागलेली शेतजमीन. अशा जमिनी, डोंगराळ किंवा उताराची भौगोलिक रचना आणि मर्यादित सिंचनसुविधा यांमुळे भातशेतीच्या उत्पादनपद्धतीवर तसेच शेतीच्या यांत्रिकीकरणावर परिणाम होतो. कोकणातील भात उत्पादक शेतकऱ्यांच्या अभ्यासात लहान व विखुरलेली जमीन, मजुरीचा वाढता खर्च आणि उत्पादन तंत्रज्ञान स्वीकारण्यातील अडचणी या महत्त्वाच्या मर्यादा असल्याचे आढळते.<ref name="HileDarekarDatrkar2015">{{cite journal
|last=Hile
|first=R. B.
|author2=A. S. Darekar
|author3=S. B. Datrkar
|title=Adoption assessment of production technology for paddy cultivation in Konkan region of Maharashtra
|journal=Indian Journal of Economics and Development
|volume=11
|issue=1
|year=2015
|pages=217–225
|url=https://indianjournals.com/article/ijed1-11-1-023
}}</ref>
या भौगोलिक आणि कृषी परिस्थितीचा परिणाम भाताच्या कापणीवरही होतो. पिकाच्या पक्वतेच्या काळात उशिरा किंवा अतिवृष्टी झाल्यास कापणीच्या कामात विलंब होऊन पिकाचे नुकसान होऊ शकते. कोकणातील भातपिकाच्या उत्पादनाभिमुख सर्वेक्षणात पक्वता आणि कापणीच्या अवस्थेत झालेल्या उशिराच्या व जोरदार पावसामुळे काही भागांत उत्पादनहानी झाल्याची नोंद आहे.<ref name="AICRIP2019"/>
== कोकणातील भातपिकाचे हंगामी चक्र ==
कोकणातील भातपीक हे प्रामुख्याने खरीप हंगामातील पीक असून त्याचे हंगामी चक्र नैऋत्य मोसमी पावसाच्या आगमनाशी आणि उपलब्ध पाण्याशी जवळून संबंधित आहे. कोकणातील भातपिकाच्या अभ्यासात पेरणीची वेळ, वाणांची निवड आणि पिकाची वाढ यांचा पर्जन्यमान व स्थानिक हवामानाशी संबंध असल्याचे दिसून येते. कोकणातील काही प्रमुख भातवाणांसाठी जूनच्या सुरुवातीच्या काळातील पेरणी अनुकूल ठरू शकते, असे स्थानिक कृषी संशोधनातून दिसून आले आहे.<ref name="Jagtap2016">{{cite journal
|last=Jagtap
|first=D. N.
|author2=V. G. Chavan
|author3=U. V. Mahadkar
|author4=S. A. Chavan
|title=Effect of Sowing Times on the Yield and Yield Attributes of Rice (Oryza sativa L.) Varieties
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|volume=34
|issue=2
|year=2016
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92857
}}</ref>
पावसाळ्याच्या प्रारंभी भातासाठी रोपवाटिका तयार करणे, बियाणे पेरणे आणि मुख्य शेताची मशागत करणे ही कामे सुरू होतात. त्यानंतर योग्य वयाची रोपे मुख्य शेतात लावली जातात. कोकणातील खरीप भाताच्या विविध वाणांवर केलेल्या प्रयोगांमध्ये पेरणीच्या वेळेचा वाढ, उत्पादन आणि आर्थिक परताव्यावर परिणाम होत असल्याचे आढळले आहे.<ref name="Jagtap2016"/>
रोपांची पुनर्लागवड झाल्यानंतर पावसाळ्यात भातपिकाची वाढ, फुटवे येणे, कणसांची निर्मिती आणि दाणे भरणे या अवस्था क्रमाने पूर्ण होतात. या काळात पर्जन्यमानातील चढ-उतार आणि पावसाचे दिवस यांचा पिकाच्या वाढीवर परिणाम होऊ शकतो. कोकण प्रदेशातील पर्जन्यमानाच्या दीर्घकालीन अभ्यासात मे ते नोव्हेंबर या कालावधीत पर्जन्य व पावसाळी दिवसांच्या स्वरूपात बदल आढळल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="KonkanRainfall2019">{{cite journal
|title=Spatio-temporal Trends of Rainfall and Rainy Days in Konkan Region of Maharashtra
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|year=2019
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92410
}}</ref>
पिकाची पक्वता जवळ आल्यानंतर भातकापणीचा टप्पा सुरू होतो. कोकणातील भातशेतीत कापणीची वेळ व पद्धत ही वाणाचा कालावधी, पेरणीची वेळ, स्थानिक हवामान आणि त्या वर्षीच्या पावसाच्या स्वरूपानुसार बदलू शकते. त्यामुळे संपूर्ण कोकणासाठी कापणीची एकच निश्चित तारीख ठरविता येत नाही. कापणी, मळणी आणि धान वाळवणे या कापणीनंतरच्या प्रक्रिया भातपिकाच्या हंगामी चक्राचा अविभाज्य भाग आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
अशा प्रकारे कोकणातील भातपिकाचे हंगामी चक्र साधारणपणे **पावसाळ्याच्या प्रारंभी रोपवाटिका व पेरणी → मुख्य शेताची मशागत व पुनर्लागवड → पावसाळ्यात पिकाची वाढ → दाणे भरणे व पक्वता → भातकापणी → मळणी, धान वेगळे करणे व वाळवणे** अशा क्रमाने पुढे जाते. या संपूर्ण चक्रावर कोकणातील पर्जन्यमान, स्थानिक जमीन, वाण आणि शेतीतील उपलब्ध श्रम यांचा प्रभाव असतो.
== भात कापणीची वेळ आणि पक्वतेची चिन्हे ==
कोकणातील भातपिकाची कापणी प्रामुख्याने खरीप हंगामाच्या अखेरीस केली जाते. कापणीची नेमकी वेळ भाताच्या वाणाचा कालावधी, लागवडीची वेळ, स्थानिक हवामान आणि त्या वर्षीच्या पावसाच्या स्वरूपानुसार बदलते. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील १९५१ ते १९८७ या कालावधीतील आकडेवारीच्या अभ्यासानुसार कोकणात भाताची लागवड साधारणपणे जूनमध्ये होते आणि पिकाचा सक्रिय वाढीचा कालावधी सुमारे ९० दिवसांचा असतो. या अभ्यासात शारीरिक पक्वता प्राप्त झाल्यानंतर काही दिवसांनी, साधारण ऑक्टोबरच्या सुरुवातीस, भाताची कापणी केली जात असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
भातपिकाची कापणी योग्य वेळी करणे महत्त्वाचे असते. पीक पूर्णपणे पक्व होण्यापूर्वी कापणी केल्यास दाणे अपक्व राहण्याची शक्यता असते, तर कापणीस अनावश्यक विलंब झाल्यास दाणे गळणे, कणसे वाकणे किंवा पिकाचे नुकसान होण्याचा धोका वाढतो. त्यामुळे शेतातील पिकाची प्रत्यक्ष पक्वता पाहून कापणीचा निर्णय घेतला जातो.<ref name="ICARHarvest2025">{{cite report
|author=Indian Council of Agricultural Research
|title=Kharif Agro-Advisories for Farmers 2025
|publisher=Indian Council of Agricultural Research
|url=https://icar.gov.in/sites/default/files/Circulars/ICAR-En-Kharif-Agro-Advisories-for-Farmers-2025.pdf
}}</ref>
भातपिकाच्या पक्वतेची प्रमुख बाह्य चिन्हे म्हणजे कणसांवरील बहुतांश दाण्यांचा हिरव्या रंगातून पिवळसर किंवा सोनेरी रंगाकडे झालेला बदल आणि दाणे कडक होणे. ICARच्या कृषी मार्गदर्शनानुसार कणसांवरील सुमारे ८०–८५ टक्के दाणे सोनेरी-पिवळे व कडक झाल्यावर भात कापणीस योग्य मानला जातो. या अवस्थेत कापणी केल्यास कापणीतील विलंबामुळे होणारे दाणे गळणे आणि पीक लोळण्याचे नुकसान कमी करण्यास मदत होते.<ref name="ICARHarvest2025"/>
कोकणातील भातशेती पूर्णपणे किंवा मोठ्या प्रमाणावर पावसाच्या लहरीवर अवलंबून असल्याने कापणीची वेळ निश्चित करताना पावसाची स्थितीही महत्त्वाची ठरते. पक्वतेच्या कालावधीत उशिरा होणारा किंवा जोरदार पाऊस कापणीला अडथळा आणू शकतो. त्यामुळे पीक कापणीस योग्य झालेले असताना उपलब्ध कोरड्या हवामानाचा कालावधी साधून कापणी करणे आवश्यक ठरते. कोकणातील पर्जन्यमान आणि भातपिकाच्या वाढीवरील अभ्यासात पावसाच्या विविध वाढीच्या अवस्थांशी भाताच्या उत्पादनाचा संबंध असल्याचे आढळले आहे.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
कापणीपूर्वी शेतातील पिकाची अवस्था, कणसांचा रंग, दाण्यांची कडकपणा आणि हवामानाचा अंदाज यांचा विचार केला जातो. अशा प्रकारे **कणसांवरील बहुतांश दाणे सोनेरी-पिवळे होणे, दाणे कडक होणे आणि पीक शारीरिक पक्वतेला पोहोचणे** ही भात कापणीची प्रमुख चिन्हे मानली जातात. कोकणाच्या परिस्थितीत या पक्वतेनंतर अनावश्यक विलंब न करता योग्य हवामानात कापणी करणे महत्त्वाचे ठरते.
== कोकणातील पारंपरिक भातकापणी ==
कोकणातील पारंपरिक भातकापणी ही प्रामुख्याने मानवी श्रमांवर आधारित प्रक्रिया होती. भाताचे पीक कापणीस योग्य झाल्यानंतर शेतकरी आणि शेतमजूर हातातील विळ्याच्या साहाय्याने भाताची रोपे कापत. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासानुसार भात उत्पादनातील कापणी आणि कापणीनंतरची कामे पारंपरिक पद्धतीने मोठ्या प्रमाणावर हाताने केली जात असून त्यासाठी मोठ्या प्रमाणात श्रमांची आवश्यकता असते.<ref name="Bhanage2016"/>
कापणी करताना शेतातील पक्व भाताची कणसे आणि पेंढा विळ्याने कापून त्याचे पुंजके किंवा भारे तयार केले जात. कापलेला भात काही काळ शेतात किंवा योग्य जागी वाळवून पुढील मळणीसाठी नेला जात असे. अशा प्रकारे कापणी, पुंजके बांधणे, वाळवणे आणि त्यानंतर मळणी करणे ही कामे परस्परांशी जोडलेली होती.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक पद्धतीत कापणीचे काम श्रमप्रधान असल्यामुळे कापणीचा कालावधी हा उपलब्ध मजुरांच्या संख्येवरही अवलंबून असे. कोकणातील भातशेतीत लहान व तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनी, भौगोलिक परिस्थिती आणि कापणीच्या काळातील मोठ्या मनुष्यबळाची गरज यांमुळे पारंपरिक कापणी पद्धतीला विशेष महत्त्व होते. अभ्यासात कोकणातील अनेक शेतकरी अल्पभूधारक असल्यामुळे कापणी, मळणी आणि धान वाऱ्यावर पाखडणे यासाठी यंत्रसामग्री स्वतः खरेदी करणे आर्थिकदृष्ट्या कठीण असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक भातकापणी ही केवळ कृषी कामाची प्रक्रिया नसून ग्रामीण श्रमव्यवस्थेचा भाग होती. कापणीच्या हंगामात कुटुंबातील सदस्य, शेतमजूर आणि स्थानिक पातळीवरील उपलब्ध मनुष्यबळ यांच्या सहभागातून कापणीची कामे पूर्ण केली जात. त्यामुळे भातकापणीच्या काळात शेतातील सामूहिक श्रमाला विशेष महत्त्व प्राप्त होत असे.
कापणीनंतर भाताच्या कणसांमधून धान वेगळे करण्यासाठी पारंपरिक मळणी केली जात असे. पारंपरिक पद्धतींमध्ये जनावरांच्या पायाने तुडवणे किंवा इतर श्रमाधारित पद्धतींचा वापर केला जात असे; नंतर धान व पेंढा वेगळे करण्यासाठी वाऱ्याच्या साहाय्याने पाखडण्याची प्रक्रिया केली जाई. या कापणीनंतरच्या पद्धतींमध्ये अधिक वेळ आणि मानवी श्रम लागत असल्याने पुढील काळात यांत्रिक मळणी व पाखडणीची साधने वापरात आली.<ref name="ICARTraditionalThreshing">{{cite journal
|title=Mechanization in Rice Cultivation
|journal=Indian Farming
|volume=71
|issue=4
|year=2021
|pages=3–6
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/IndFarm/article/download/114370/44585/298367
}}</ref>
पारंपरिक भातकापणीची ही पद्धत कोकणातील पावसावर आधारित शेती, लहान शेतजमिनी आणि ग्रामीण श्रमव्यवस्थेशी जुळलेली होती. मात्र मजुरांची उपलब्धता कमी होणे, मजुरीचा वाढता खर्च आणि वेळेत कापणी करण्याची गरज यांमुळे पुढील काळात विळ्याबरोबरच रीपर, रीपर-बाइंडर आणि इतर यांत्रिक साधनांचा वापर वाढू लागला.<ref name="Bhanage2016"/>
== कापणीसाठी वापरली जाणारी पारंपरिक साधने ==
कोकणातील पारंपरिक भातकापणीमध्ये विळा हे प्रमुख हातसाधन राहिले आहे. पक्व भातपीक कापण्यासाठी शेतकरी आणि शेतमजूर विळ्याचा वापर करत. भाताची कापणी प्रामुख्याने मनुष्यबळाद्वारे विळ्याने केली जात असल्याचे कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासात नमूद करण्यात आले आहे. कापणीच्या कामात मोठ्या प्रमाणावर मानवी श्रम लागत असल्याने विळ्याचा वापर हा पारंपरिक भातकापणी पद्धतीचा महत्त्वाचा भाग होता.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक विळ्याच्या वापरात शेतकरी भाताची काडे हाताने धरून विळ्याने कापत असे. कापणीचे काम प्रामुख्याने वाकून करावे लागत असल्यामुळे त्यात शारीरिक श्रम मोठ्या प्रमाणात होत. भातकापणीतील हा श्रमभार कमी करण्यासाठी पुढे दातेरी विळ्यांसारख्या सुधारित हातसाधनांचा विकास करण्यात आला.<ref name="AgrowonHarvestTools">{{cite web
|title=भात पीक कापणीची साधने
|website=अॅग्रोवन
|date=23 October 2024
|url=https://agrowon.esakal.com/techno-wan/tools-for-rice-crop-harvesting-article-on-agrowon
}}</ref>
कोकणातील भातशेतीच्या संदर्भात डॉ. बाळासाहेब सावंत कोकण कृषी विद्यापीठाने विकसित केलेला ‘वैभव विळा’ हा पारंपरिक विळ्याच्या कार्यपद्धतीवर आधारित सुधारित दातेरी विळा आहे. या विळ्याच्या साहाय्याने भाताची कापणी जमिनीलगत करता येते. दातेरी पाते असल्यामुळे कापणीसाठी तुलनेने कमी ताकद लागते आणि साधनाचे वजनही कमी ठेवण्यात आले आहे.<ref name="AgrowonHarvestTools"/>
कोकण विभागासाठीच्या कृषी सल्ल्यामध्ये तयार भातपिकाची कापणी सकाळच्या वेळी जमिनीलगत ‘वैभव’ विळ्याने करण्याची शिफारस करण्यात आली आहे. कापणीनंतर कापलेला भात शेतात अनावश्यक वेळ न ठेवता पुढील मळणीसाठी हलविण्याचाही सल्ला देण्यात आला आहे.<ref name="BSKKVHarvestAdvice">{{cite web
|title=Crop Advisory : कृषी सल्ला : कोकण विभाग
|website=अॅग्रोवन
|url=https://agrowon.esakal.com/agro-special/special-agricultural-advisory-for-crops-of-konkan-division
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील पारंपरिक भातकापणीची प्रमुख ओळख **हाताने वापरल्या जाणाऱ्या विळ्याशी** जोडलेली आहे. कालांतराने पारंपरिक विळ्याच्या कार्यक्षमतेत सुधारणा करण्यासाठी दातेरी विळे विकसित झाले आणि त्यानंतर रीपर, रीपर-बाइंडर यांसारख्या यांत्रिक साधनांचा वापर सुरू झाला. त्यामुळे विळ्यापासून यांत्रिक कापणीपर्यंत झालेला बदल हा कोकणातील भातकापणीच्या तंत्रज्ञानातील महत्त्वाचा टप्पा मानता येतो.<ref name="Bhanage2016"/>
== कापणीतील ग्रामीण श्रम आणि सामुदायिक सहभाग ==
कोकणातील पारंपरिक भातकापणी ही मोठ्या प्रमाणावर मानवी श्रमांवर आधारित होती. भाताची कापणी, कापलेला भात एकत्र करणे, मळणी, धान वेगळे करणे आणि वाळवणे या कापणीनंतरच्या प्रक्रियांमध्येही मनुष्यबळाची आवश्यकता असे. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासानुसार कापणी व कापणीनंतरची कामे श्रमप्रधान असल्यामुळे या प्रक्रियांचा एकूण उत्पादनखर्च आणि काम पूर्ण करण्यासाठी लागणारा वेळ यांवर मनुष्यबळाची उपलब्धता परिणाम करते.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक पद्धतीत भातकापणीचे काम कुटुंबातील सदस्य तसेच स्थानिक शेतमजुरांच्या सहभागातून केले जात असे. कापणीच्या हंगामात कमी कालावधीत मोठ्या क्षेत्रातील पीक कापून घेणे आवश्यक असल्याने उपलब्ध मनुष्यबळाचे नियोजन महत्त्वाचे ठरत असे. कोकणातील लहान आणि तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनींमध्ये यांत्रिक कापणीची साधने वापरण्यावरही भौगोलिक आणि आर्थिक मर्यादा येत असल्याने मानवी श्रमांना पारंपरिक शेतीपद्धतीत विशेष महत्त्व होते.<ref name="Bhanage2016"/>
भातकापणीशी संबंधित कामे केवळ कापणीपुरती मर्यादित नसून त्यानंतरची मळणी, धान व पेंढा वेगळे करणे आणि धान वाळवणे अशा टप्प्यांपर्यंत चालत. या सर्व कामांमध्ये अनेक व्यक्तींचा सहभाग आवश्यक असल्याने कापणीचा काळ हा ग्रामीण पातळीवरील श्रमविनिमय आणि परस्पर सहकार्याशी जोडलेला असे. तथापि, अशा पारंपरिक सामुदायिक प्रथांचे स्वरूप गावागावानुसार वेगवेगळे असल्याने त्याबाबत सर्व कोकणाला लागू होईल असा एकसमान निष्कर्ष काढता येत नाही.
कापणीच्या कामासाठी मोठ्या प्रमाणावर मजूर लागणे ही कोकणातील भातशेतीची महत्त्वाची अडचण ठरली आहे. मजुरांची कमतरता आणि वाढती मजुरी यामुळे वेळेत कापणी करणे शेतकऱ्यांसाठी अधिक खर्चिक झाले आहे. या परिस्थितीमुळे भातकापणीतील श्रमभार कमी करण्यासाठी रीपर, रीपर-बाइंडर आणि इतर कापणी यंत्रांचा वापर करण्याची आवश्यकता निर्माण झाली.<ref name="Bhanage2016"/>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीमध्ये ग्रामीण श्रम, कुटुंबीय सहभाग आणि स्थानिक पातळीवरील परस्पर सहकार्य यांना पारंपरिक काळात महत्त्वाचे स्थान होते. मात्र मजूरटंचाई, वाढता मजुरीखर्च आणि कापणी वेळेत पूर्ण करण्याची गरज यांमुळे या श्रमाधारित व्यवस्थेत बदल होत असून यांत्रिकीकरणाकडे कल वाढत आहे.
== कापणीनंतरची मळणी आणि धान वेगळे करणे ==
भाताची कापणी झाल्यानंतर कापलेले पीक मळणीसाठी नेले जाते. मळणीच्या प्रक्रियेत भाताच्या कणसांपासून धान वेगळे केले जाते. पारंपरिक पद्धतीत ही प्रक्रिया मानवी श्रमांवर आधारित होती. कापणी, मळणी आणि त्यानंतर धान व पेंढा वेगळे करण्याच्या कामांसाठी मोठ्या प्रमाणावर मनुष्यबळ लागत असल्याने कोकणातील भातशेतीतील कापणीनंतरची कामे श्रमप्रधान राहिली आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक मळणीनंतर धानामध्ये पेंढा, कणसांचे तुकडे, भुसा आणि इतर हलका कचरा मिसळलेला असतो. त्यातून स्वच्छ धान वेगळे करण्यासाठी पाखडणी केली जाते. नैसर्गिक वाऱ्याच्या साहाय्याने किंवा हाताने चालविलेल्या पाखडणीच्या साधनांनी हलका पेंढा व भुसा बाजूला केला जातो आणि तुलनेने जड धान खाली साचते. अशा प्रकारे मळणी आणि पाखडणी या एकमेकांशी संबंधित असल्या तरी धान स्वच्छ करण्याच्या स्वतंत्र प्रक्रिया आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भातशेतीच्या यांत्रिकीकरणाच्या अभ्यासात मळणीसाठी पेडलवर चालणारे थ्रेशर, वायर-लूप प्रकारचे थ्रेशर, उलट्या साखळी-पट्टीवर आधारित थ्रेशर आणि अक्षीय प्रवाहाचे थ्रेशर यांसारख्या साधनांचा अभ्यास करण्यात आला. धान वेगळे केल्यानंतर पाखडणीसाठी हाताने चालविलेले तसेच शक्तिचलित विन्नोअर वापरण्याच्या पद्धतींचाही विचार करण्यात आला.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील लहान व तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनी आणि शेतकऱ्यांची मर्यादित आर्थिक क्षमता यांमुळे मोठ्या क्षमतेची यंत्रे सर्व शेतकऱ्यांना स्वतःच्या मालकीची ठेवणे शक्य होत नाही. त्यामुळे मळणी व पाखडणीच्या यांत्रिकीकरणासाठी सामायिक वापर, यंत्रसेवा किंवा कस्टम हायरिंग यांसारख्या पद्धती उपयुक्त ठरू शकतात.<ref name="Bhanage2016"/>
मळणी आणि पाखडणीच्या कामात मजुरांची कमतरता निर्माण झाल्यास कापणीनंतरचे काम वेळेत पूर्ण होण्यास विलंब होऊ शकतो. कोकणातील अभ्यासात मजुरांची कमतरता आणि वाढता मजुरीखर्च यामुळे कापणी व मळणीच्या कामांमध्ये विलंब होत असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. त्यामुळे कापणीनंतरच्या प्रक्रियांमध्ये यांत्रिकीकरणाला महत्त्व प्राप्त झाले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
== धान वाळवणे, साठवण आणि घरगुती प्रक्रिया ==
भातकापणी आणि मळणीनंतर मिळालेले धान साठवण्यापूर्वी योग्य प्रकारे वाळवणे आवश्यक असते. कोकणातील रायगड जिल्ह्यातील १२० शेतकरी महिलांच्या अभ्यासात मळणीच्या जागेवर धान्याची योग्य प्रकारे स्वच्छता व वाळवण करणे आणि उन्हात वाळवणे या पद्धती मोठ्या प्रमाणावर वापरल्या जात असल्याचे आढळले. अभ्यासातील ९३.३३ टक्के महिलांनी धान्याचे योग्य वाळवण व स्वच्छता तसेच उन्हात वाळवणाची पद्धत अवलंबल्याचे नोंदविण्यात आले आहे.<ref name="ChavanMehtaKale2013">{{cite journal
|last=Chavan
|first=K. M.
|author2=Mehta, P. G.
|author3=Kale, R. A.
|title=Food grain storage practices followed by the farm women
|journal=International Journal of Processing and Post Harvest Technology
|volume=4
|issue=2
|year=2013
|pages=83–85
|url=https://researchjournal.co.in/online/IJPPHT/IJPPHT%204%282%29/4_83-85_A.pdf
}}</ref>
कोकणातील पारंपरिक साठवण पद्धतींमध्ये धान घरातील स्थानिक साधनसामग्रीपासून तयार केलेल्या संरचनांमध्ये ठेवले जात असे. कोकणातील धानसाठवण संरचनांच्या अभ्यासात *कणंज किंवा साठी, मुडी, कंगे, मटक्या, ताटी आणि हाडपा* यांसारख्या पारंपरिक संरचनांचा उल्लेख करण्यात आला आहे. या संरचनांमध्ये शेतकरी घरातच धान साठवत असल्याचे अभ्यासात नमूद केले आहे.<ref name="KadKhandetodNimbalkarJadhav2016">{{cite journal
|last=Kad
|first=V. P.
|author2=Khandetod, Y. P.
|author3=Nimbalkar, C. A.
|author4=Jadhav, M. S.
|title=Design and Development of Paddy Storage Structure for Konkan Region
|journal=IMPACT: International Journal of Research in Engineering & Technology
|volume=4
|issue=5
|year=2016
|pages=25–34
|url=https://www.impactjournals.us/download/archives/2-77-1462972101-3.%20IJRET%20eng-DESIGN%20AND%20DEVELOPMENT%20OF%20PADDY%20STORAGE%20STRUCTURE%20FOR%20KONKAN%20REGION.pdf
}}</ref>
पारंपरिक साठवणुकीमध्ये किडी, बुरशी आणि उंदरांमुळे धान्याचे नुकसान होण्याची शक्यता होती. रायगड जिल्ह्यातील अभ्यासात धान्य साठवताना गोणपाटाच्या पोत्यांचा वापर ८७.५० टक्के महिलांनी केला असल्याचे आढळले. तसेच साठवलेल्या धान्याला किडींपासून संरक्षण देण्यासाठी ९३.३३ टक्के महिलांनी कडुनिंबाच्या पानांचा वापर केला होता. याउलट सिलो, पूसा बिन किंवा किसान कोठी यांसारख्या सुधारित साठवण संरचनांचा वापर अभ्यासातील प्रतिसादकर्त्यांमध्ये आढळला नाही.<ref name="ChavanMehtaKale2013"/>
कोकणातील दमट हवामानामुळे धान साठवताना आर्द्रता नियंत्रणाला विशेष महत्त्व आहे. कोकणातील दमट हवामानात धानाच्या साठवणीवर केलेल्या अभ्यासात साठवण कालावधी वाढत असताना धानाच्या काही भौतिक व गुणवत्ताविषयक गुणधर्मांमध्ये बदल होत असल्याचे आढळले. साठवणीच्या कालावधीत कीड प्रादुर्भाव वाढणे आणि धानातील आर्द्रतेत बदल होणे यांसारखे परिणाम नोंदविण्यात आले आहेत.<ref name="ThakorPatilSawant2012">{{cite journal
|last=Thakor
|first=N. J.
|author2=Patil, S. C.
|author3=Sawant, A. A.
|author4=Sawant, S. D.
|title=Influence of Storage Period on Physical Properties and Quality of Paddy Stored in GIC Silo and Bag Storage under Humid Konkan Climatic Conditions
|journal=Journal of Agricultural Engineering
|volume=49
|issue=1
|year=2012
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JAE/article/view/21870
}}</ref>
धानाचे घरगुती उपयोगासाठी रूपांतर करण्याच्या प्रक्रियेत साली काढणे, तांदूळ तयार करणे आणि त्यापासून विविध पदार्थ बनवणे अशा प्रक्रिया येतात. उत्तर कोकणातील पाडळ प्रक्रिया उद्योगांवरील अभ्यासातून धान प्रक्रियेमधून तांदळाबरोबर तांदळाची कोंडा, तूस आणि तुटलेला तांदूळ यांसारखी उपउत्पादनेही मिळतात, असे दिसून येते. या प्रक्रियेमुळे कच्च्या धानाचे खाद्य तांदळात रूपांतर होते आणि त्याला अतिरिक्त मूल्य प्राप्त होते.<ref name="ChakranarayanToraneBachhaoNikam2024">{{cite journal
|last=Chakranarayan
|first=Ankita
|author2=Torane, Sanjaykumar
|author3=Bachhao, Kiran
|author4=Nikam, Yogesh
|title=Economic Analysis of Value Addition in Paddy Processing in North Konkan Region of Maharashtra, India
|journal=Acta Scientific Agriculture
|volume=8
|issue=10
|year=2024
|pages=11–16
|url=https://actascientific.com/ASAG/ASAG-08-1411.php
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीनंतरची प्रक्रिया ही **धान स्वच्छ करणे → उन्हात वाळवणे → सुरक्षित साठवण → आवश्यकतेनुसार धानाची प्रक्रिया करून तांदूळ तयार करणे** या क्रमाने पुढे जाते. पारंपरिक घरगुती साठवण पद्धतींमध्ये स्थानिक साधनसामग्रीचा वापर होत असला, तरी कोकणातील दमट हवामानामुळे धानाची योग्य वाळवण, आर्द्रता नियंत्रण आणि कीडप्रतिबंधक साठवण या बाबींना विशेष महत्त्व आहे.
== कोकणातील पाऊस, जमीन आणि कापणीची वेळ ==
कोकणातील भातशेतीवर पर्जन्यमानाचा मोठा प्रभाव असतो. हा प्रदेश उष्ण व दमट हवामानाचा असून येथे वार्षिक पर्जन्यमान साधारण २०० ते ३५० सेंमीपर्यंत आढळते. पर्जन्याचे प्रमाण, त्याचे ऋतुनिहाय वितरण आणि जमिनीची पाणीधारण क्षमता यांचा विचार करून कोकणातील पिकांची रचना निश्चित होते. त्यामुळे भातपिकाच्या वाढीपासून पक्वतेपर्यंतच्या कालावधीवरही पावसाचा प्रभाव पडतो.<ref name="BiswasPhadtare1995"/>
कोकणातील भातशेतीच्या जमिनींचे स्वरूपही कापणीच्या वेळेवर अप्रत्यक्ष परिणाम करते. प्रदेशातील जमिनींच्या पाणीधारण क्षमतेनुसार आणि पर्जन्याच्या उपलब्धतेनुसार भातासाठी योग्य पीकपद्धती बदलते. काही भागांत पावसाचे पाणी जमिनीत साठून राहिल्यामुळे पिकाच्या वाढीच्या उत्तरार्धात बाहेरील पावसाची आवश्यकता तुलनेने कमी होऊ शकते. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील भातपिकाच्या अभ्यासात वाढीच्या वेगवेगळ्या अवस्थांमध्ये पावसाचा परिणाम वेगवेगळा असल्याचे आढळले आहे.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
भातपिकाच्या सुरुवातीच्या वाढीच्या अवस्थेत पुरेसा पाऊस आवश्यक असतो. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील १९५१ ते १९८७ या कालावधीच्या अभ्यासात भाताच्या वाढीतील विविध अवस्थांमध्ये पर्जन्यमानाचा उत्पादनाशी संबंध असल्याचे आढळले. विशेषतः फुटवे येण्याच्या अवस्थेत पावसाचे महत्त्व दिसून आले, तर पुढील काही अवस्थांमध्ये जमिनीत साठलेली आर्द्रता पिकासाठी उपयुक्त ठरू शकते.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
कापणीच्या काळात मात्र पावसाचे स्वरूप वेगळ्या प्रकारे महत्त्वाचे ठरते. पीक पक्व झाल्यानंतरही पाऊस सुरू राहिल्यास शेतातील जमीन ओलसर राहते आणि कापणी, कापलेले पीक शेताबाहेर आणणे, मळणी व धान वाळवणे या कामांमध्ये अडथळे निर्माण होऊ शकतात. कोकणातील भातकापणीवरील अभ्यासात मजुरांची कमतरता आणि कापणीच्या कामातील विलंब ही समस्या नोंदविण्यात आली असून वेळेत कापणी न झाल्यास कापणीनंतरच्या कामांवरही त्याचा परिणाम होतो.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील पावसाचा कालावधी आणि त्यातील बदल यांमुळे कापणीसाठी उपलब्ध कोरड्या हवामानाच्या कालखंडाला विशेष महत्त्व प्राप्त होते. कोकण प्रदेशातील बारा ठिकाणांच्या पर्जन्यविषयक अभ्यासात वार्षिक आणि हंगामी पर्जन्यमान तसेच पावसाळी दिवसांच्या प्रवृत्तींमध्ये स्थानानुसार फरक आढळला आहे. त्यामुळे कोकणातील सर्व जिल्ह्यांसाठी कापणीची एकच निश्चित वेळ ठरविण्याऐवजी स्थानिक पर्जन्यस्थिती आणि पिकाची पक्वता यांचा एकत्रित विचार करणे आवश्यक ठरते.<ref name="Kadam2019">{{cite journal
|last=Kadam
|first=U. S.
|author2=Jedhe, S. H.
|author3=Mane, M. S.
|author4=Mahale, D. M.
|author5=Nandgude, S. B.
|title=Spatio-temporal Trends of Rainfall and Rainy Days in Konkan Region of Maharashtra
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|volume=37
|issue=1
|year=2019
|pages=25–36
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92410
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीची वेळ ही केवळ पिकाच्या पक्वतेवर अवलंबून नसून **पावसाचे आगमन व माघार, जमिनीतील ओलावा, स्थानिक जमीनप्रकार आणि कापणीच्या वेळी उपलब्ध होणारा कोरडा कालावधी** या घटकांच्या परस्परसंबंधातून ठरते. म्हणूनच पक्व भाताची कापणी योग्य हवामानाच्या कालखंडात लवकर पूर्ण करणे कोकणातील भातशेतीसाठी महत्त्वाचे ठरते.
== कोकणातील भातकापणीचे यांत्रिकीकरण ==
कोकणातील भातशेतीमध्ये कापणी आणि कापणीनंतरची कामे पारंपरिकरीत्या मोठ्या प्रमाणावर मानवी श्रमांवर अवलंबून होती. मजुरांची कमतरता, वाढता मजुरीखर्च आणि पक्व झालेल्या पिकाची वेळेत कापणी करण्याची आवश्यकता यामुळे भातकापणीच्या यांत्रिकीकरणाची गरज निर्माण झाली. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासात कापणी व मळणीच्या यांत्रिकीकरणाचा आर्थिक व्यवहार्यतेच्या दृष्टीने अभ्यास करण्यात आला आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भातकापणीसाठी स्वयंप्रचालित रीपर, रीपर-बाइंडर आणि कापणीसाठी सुधारित हातसाधने यांसारख्या पर्यायांचा अभ्यास झाला आहे. कापणीनंतरच्या प्रक्रियांसाठी पेडलवर चालणारे थ्रेशर, वायर-लूप प्रकारचे थ्रेशर, उलट्या साखळी-पट्टीवर आधारित थ्रेशर, अक्षीय प्रवाहाचे थ्रेशर तसेच हातचलित व शक्तिचलित विन्नोअर यांचा वापर विचारात घेण्यात आला आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भौगोलिक आणि आर्थिक परिस्थिती लक्षात घेऊन यंत्रांची निवड करणे महत्त्वाचे ठरते. लहान व तुकड्यात विभागलेली शेतजमीन आणि अनेक शेतकऱ्यांकडे असलेले अल्प क्षेत्र यामुळे मोठ्या यंत्रांची वैयक्तिक मालकी आर्थिकदृष्ट्या व्यवहार्य ठरत नाही. कोकणातील अभ्यासात सुमारे ०.२ हेक्टर क्षेत्र धारण करणाऱ्या बहुसंख्य शेतकऱ्यांना कापणी, मळणी आणि पाखडणीची यंत्रे स्वतः खरेदी करणे त्यांच्या आर्थिक परिस्थितीमुळे शक्य नसल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
या परिस्थितीत रीपर आणि रीपर-बाइंडर यांसारखी यंत्रे कोकणातील लहान व मध्यम शेतांसाठी तुलनेने उपयुक्त पर्याय ठरू शकतात. अभ्यासानुसार रीपर, रीपर-बाइंडर, शक्तिचलित थ्रेशर आणि विन्नोअर यांच्या विविध संयोगांमध्ये कोकणाच्या परिस्थितीत यांत्रिकीकरणाची क्षमता आढळून आली आहे. यंत्रांची कार्यक्षमता आणि प्रति हेक्टर बदलता खर्च हे त्यांच्या आर्थिक व्यवहार्यतेवर परिणाम करणारे महत्त्वाचे घटक आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भातकापणीच्या यांत्रिकीकरणात केवळ यंत्रांची उपलब्धता नव्हे, तर ती शेतकऱ्यांना परवडणाऱ्या पद्धतीने उपलब्ध करून देणे महत्त्वाचे आहे. त्यामुळे कस्टम हायरिंग सेवा आणि कृषी अवजारे बँक यांसारख्या सामायिक यंत्रवापराच्या पद्धतींचा विस्तार करण्याची शिफारस करण्यात आली आहे. अशा पद्धतींमुळे अल्पभूधारक शेतकऱ्यांना यंत्रे स्वतः खरेदी न करता आवश्यकतेनुसार त्यांचा वापर करता येतो.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील शेतकऱ्यांच्या शारीरिक श्रमभाराचाही यांत्रिकीकरणाच्या संशोधनात विचार करण्यात आला आहे. ICARच्या वार्षिक अहवालानुसार कोकणातील पुरुष कामगारांच्या शारीरिक मापदंडांचा विचार करून गवत कापणी यंत्रासोबत वापरता येणारे पॅडी हार्वेस्टर विकसित करण्यात आले. सुधारित यंत्रामुळे विद्यमान यंत्राच्या तुलनेत चालकावरील शारीरिक कामाचा भार कमी झाल्याचे परीक्षणात आढळले.<ref name="ICARAnnualReport2023">{{cite report
|author=Indian Council of Agricultural Research
|title=ICAR Annual Report 2023–24
|publisher=Indian Council of Agricultural Research
|year=2024
|url=https://icar.gov.in/sites/default/files/2025-04/ICAR%20Annual%20Report%202023-24-english.pdf
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीचे यांत्रिकीकरण हे केवळ पारंपरिक विळ्याची जागा यंत्राने घेण्यापुरते मर्यादित नसून **कापणी, बांधणी, मळणी आणि पाखडणी या संपूर्ण प्रक्रियेत श्रम व वेळ कमी करण्याचा प्रयत्न** आहे. मात्र कोकणातील लहान शेतजमिनी आणि शेतकऱ्यांची आर्थिक क्षमता लक्षात घेता मोठ्या यंत्रांच्या वैयक्तिक मालकीपेक्षा कस्टम हायरिंग व सामायिक यंत्रवापराची व्यवस्था अधिक व्यवहार्य ठरू शकते.<ref name="Bhanage2016"/>
== मजूरटंचाई, स्थलांतर आणि बदलती कापणी पद्धत ==
कोकणातील भातशेतीमध्ये कापणीच्या हंगामात उपलब्ध होणारे ग्रामीण मनुष्यबळ हा महत्त्वाचा घटक आहे. पारंपरिक भातकापणी, मळणी आणि पाखडणी या कामांसाठी मोठ्या प्रमाणावर मजुरांची आवश्यकता असल्याने मजूर उपलब्धतेतील घटकांचा थेट परिणाम कापणीच्या वेळेवर आणि उत्पादनखर्चावर होतो. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासात कृषी कामे श्रमप्रधान असून मजुरांची कमतरता निर्माण झाल्यामुळे कापणी व मळणीच्या कामात विलंब होत असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील काही ग्रामीण भागांत कृषी मजुरांचे इतर ठिकाणी रोजगारासाठी स्थलांतर होणे ही मजूर उपलब्धतेवर परिणाम करणारी बाब आहे. कोकणातील पावसावर आधारित भातशेतीवरील एका गावपातळीच्या अभ्यासात बहुतांश प्रतिसादकर्त्यांनी मजुरीचा वाढता खर्च ही अडचण असल्याचे नमूद केले असून, ग्रामीण भागातील अनेक मजूर अधिक उत्पन्नाच्या शोधात इतर ठिकाणी रोजगारासाठी स्थलांतरित होत असल्याचे नोंदविण्यात आले आहे.<ref name="TribalRiceConstraints2019">{{cite journal
|title=Constraints Faced By The Tribal Farmers In Rainfed Rice Production In Konkan Region-A Village Level Study
|journal=International Journal of Current Microbiology and Applied Sciences
|year=2019
|url=https://www.researchgate.net/publication/331587276_Constraints_Faced_By_The_Tribal_Farmers_In_Rainfed_Rice_Production_In_Konkan_Region-A_Village_Level_Study
}}</ref>
मजूरटंचाई आणि वाढता मजुरीखर्च यामुळे भातकापणीची पारंपरिक श्रमाधारित पद्धत आर्थिकदृष्ट्या अधिक खर्चिक होत गेली. कोकणातील तुकड्यात विभागलेली आणि लहान शेतजमीन लक्षात घेता मोठ्या यंत्रांचा वापर सर्वत्र शक्य नसला तरी स्वयंप्रचालित रीपर, रीपर-बाइंडर आणि मळणी यंत्रे यांसारख्या साधनांचा वापर वाढविण्याचे प्रयत्न झाले आहेत.<ref name="Shahare2012">{{cite journal
|last=Shahare
|first=P. U.
|title=Agricultural Mechanization in Konkan Region of Maharashtra
|journal=Agricultural Engineering Today
|volume=36
|issue=2
|year=2012
|pages=6–9
|url=https://indianjournals.com/article/aet-36-2-002
}}</ref>
यांत्रिकीकरणामुळे कापणीसाठी आवश्यक मानवी श्रम कमी करण्याबरोबरच कमी कालावधीत कापणी पूर्ण करण्याची शक्यता वाढते. कोकणातील भातउत्पादनावरील अलीकडील अभ्यासात पालघर आणि ठाणे जिल्ह्यांतील काही शेतकऱ्यांनी यांत्रिक कापणी यंत्रे व मळणी यंत्रे स्वीकारल्यामुळे श्रमावरील अवलंबित्व कमी झाल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Shelake2025">{{cite journal
|last=Shelake
|first=S. M.
|author2=Kshirsagar, P. J.
|author3=Torane, S. R.
|author4=Waravadekar, S. C.
|author5=More, V. G.
|title=Economic analysis for profitable paddy production in Konkan region
|journal=International Journal of Agriculture Extension and Social Development
|volume=8
|issue=10
|year=2025
|url=https://www.extensionjournal.com/archives/2025.v8.i10.I.2591
}}</ref>
मात्र कोकणातील लहान भूधारणा आणि यंत्रांच्या तुलनेने जास्त किंमतीमुळे प्रत्येक शेतकऱ्याला कापणीची यंत्रे स्वतःच्या मालकीची ठेवणे व्यवहार्य ठरत नाही. त्यामुळे कस्टम हायरिंग सेवा आणि कृषी अवजारे बँक यांसारख्या सामायिक यंत्रवापराच्या पद्धतींना महत्त्व प्राप्त झाले आहे. कोकणातील यांत्रिकीकरणाच्या अभ्यासात अशा सेवांचा विस्तार केल्यास अल्पभूधारक शेतकऱ्यांनाही यांत्रिकीकरणाचा लाभ मिळू शकतो, असे सुचविण्यात आले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
अशा प्रकारे मजूरटंचाई, ग्रामीण मनुष्यबळाचे स्थलांतर आणि वाढता मजुरीखर्च या घटकांमुळे कोकणातील भातकापणीची पारंपरिक श्रमव्यवस्था बदलत आहे. विळ्याने हाताने कापणी करण्याच्या पद्धतीबरोबरच रीपर, रीपर-बाइंडर आणि मळणी यंत्रांचा वापर वाढत असून, सामायिक यंत्रसेवा ही लहान शेतकऱ्यांसाठी महत्त्वाची पर्यायी व्यवस्था ठरत आहे.<ref name="Shahare2012"/>
== रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, रायगड, ठाणे-पालघरमधील प्रादेशिक वैशिष्ट्ये ==
कोकणातील भातशेतीची भौगोलिक व कृषी परिस्थिती जिल्ह्यानुसार काही प्रमाणात बदलते. डॉ. बाळासाहेब सावंत कोकण कृषी विद्यापीठाच्या वर्गीकरणानुसार रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग हे दक्षिण कोकण क्षेत्रात, तर रायगड, पालघर आणि ठाणे हे उत्तर कोकण क्षेत्रात येतात. या प्रदेशात किनारी, पठारी आणि डोंगराळ अशा भौगोलिक पट्ट्यांनुसार शेतीचे स्वरूप बदलते. दक्षिण कोकणात लालसर-जांभ्या प्रकारच्या आम्लधर्मी जमिनींचे प्राबल्य आहे, तर उत्तर कोकणातील काही भागांत बेसॉल्टजन्य तपकिरी ते काळ्या जमिनी आढळतात; डोंगरउतारांवर उथळ व वालुकामय तर खोऱ्यांमध्ये चिकणमातीप्रधान जमिनी आढळतात.<ref name="DBSKKVKonkanRice">{{cite web
|title=RICE PRODUCTION IN KONKAN
|publisher=Dr. Balasaheb Sawant Konkan Krishi Vidyapeeth
|url=https://archive.dbskkv.org/collection/420/document/2304
}}</ref>
रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग या दक्षिण कोकणातील जिल्ह्यांमध्ये मोठ्या प्रमाणावर पावसावर आधारित भातशेती आढळते. डोंगरउतार, खोरी आणि किनारी भाग यांनुसार शेतजमिनींचे स्वरूप बदलत असल्यामुळे भात लागवडीच्या पद्धतीतही स्थानिक फरक दिसतात. सिंधुदुर्ग जिल्ह्याची भात उत्पादकता कोकण विभागातील इतर जिल्ह्यांच्या तुलनेत अधिक असल्याची नोंद कोकणातील भात उत्पादनाच्या उपलब्ध आकडेवारीत करण्यात आली आहे.<ref name="DBSKKVKonkanRice"/>
रायगड जिल्हा भाताच्या क्षेत्रफळाच्या दृष्टीने कोकणातील महत्त्वाचा जिल्हा आहे. उपलब्ध जिल्हानिहाय आकडेवारीनुसार रायगडमध्ये भाताखालील क्षेत्र सुमारे १.२५ लाख हेक्टर आणि भात उत्पादन सुमारे ३.५१ लाख टन नोंदविण्यात आले होते. त्यामुळे कोकणातील एकूण भात उत्पादनात रायगडचा महत्त्वाचा वाटा आहे.<ref name="DBSKKVKonkanRice"/>
ठाणे आणि पालघर हे उत्तर कोकणातील जिल्हे असून येथे भातशेतीबरोबर आदिवासी व ग्रामीण भागातील पारंपरिक कृषीपद्धतींचेही महत्त्व आहे. पालघर जिल्ह्यातील वाडा आणि पालघर तालुक्यांतील भात उत्पादक गावांवर केलेल्या अभ्यासात भात हे प्रमुख खरीप पीक असल्याचे आणि शेतकरी शिफारस केलेल्या भात उत्पादन तंत्रज्ञानाचा अवलंब करीत असल्याचे आढळते.<ref name="KarangamiDhengeChavanAnarase2020">{{cite journal
|last=Karangami
|first=R. S.
|author2=Dhenge, S. A.
|author3=Chavan, P. M.
|author4=Anarase, M. S.
|title=Association of Profile Characteristics of Rice Growers and Adoption of Recommended Package of Practices
|journal=Indian Journal of Extension Education
|year=2020
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/IJEE/article/view/109198
}}</ref>
उपलब्ध जिल्हानिहाय आकडेवारीत ठाणे जिल्ह्याचे भाताखालील क्षेत्र, उत्पादन आणि उत्पादकता कोकणातील इतर प्रमुख भात उत्पादक जिल्ह्यांच्या तुलनेत कमी असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. त्याच वेळी उत्तर कोकणातील भातशेतीवर लहान भूधारणा, स्थानिक भौगोलिक परिस्थिती आणि उपलब्ध कृषी मनुष्यबळ यांचा प्रभाव पडतो.<ref name="DBSKKVKonkanRice"/>
भातकापणीच्या दृष्टीने या प्रादेशिक फरकांना विशेष महत्त्व आहे. रायगड, रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्गमध्ये मोठ्या प्रमाणातील भातक्षेत्रामुळे कापणीच्या काळात मोठ्या प्रमाणावर मनुष्यबळ आणि यंत्रसेवेची आवश्यकता निर्माण होते. उत्तर कोकणातील ठाणे व पालघरमध्ये लहान शेतजमिनी, ग्रामीण व आदिवासी भाग आणि बदलती कृषी श्रमव्यवस्था यांमुळे कापणीच्या पद्धतीत स्थानिक परिस्थितीनुसार बदल होत आहेत. त्यामुळे संपूर्ण कोकणासाठी भातकापणीची एकच पद्धत किंवा एकच कालमर्यादा लागू होत नाही; जिल्ह्याची भौगोलिक रचना, जमीन, पर्जन्यस्थिती, पीकवाण आणि शेताचा आकार यांनुसार कापणीचे स्वरूप बदलते.
अशा प्रकारे **रत्नागिरी-सिंधुदुर्गचा दक्षिण कोकण, रायगडचा मोठा भातक्षेत्र असलेला मध्य-उत्तर भाग आणि ठाणे-पालघरचा उत्तर कोकण** यांमध्ये भातशेतीच्या क्षेत्रफळ, उत्पादकता, जमीनप्रकार आणि कृषी-सामाजिक परिस्थितीत फरक आढळतो. हे प्रादेशिक वैविध्य भातकापणीच्या वेळा, श्रमाची गरज आणि यांत्रिकीकरणाच्या स्वीकारावरही परिणाम करणारे महत्त्वाचे घटक आहेत.
== भातकापणी आणि कोकणातील ग्रामीण जीवन व लोकसंस्कृती ==
कोकणातील भातकापणी ही केवळ कृषी उत्पादनाची प्रक्रिया नसून ग्रामीण जीवनातील सामाजिक आणि सांस्कृतिक व्यवहारांशीही संबंधित राहिली आहे. भाताचे पीक हे पावसाळी शेतीच्या वार्षिक चक्राचा महत्त्वाचा भाग असल्यामुळे पेरणीपासून कापणीपर्यंतच्या विविध टप्प्यांशी स्थानिक देवता, शेतजमीन, पाऊस, जनावरे आणि चांगल्या पीकउत्पादनाच्या अपेक्षा जोडलेल्या होत्या. कोकणातील लोकपरंपरांचे संकलन करणाऱ्या *Folk Lore Notes, Vol. II—Konkan* या ग्रंथात पेरणी आणि कापणीच्या काळाशी संबंधित विविध कृषीविधींची नोंद आढळते.<ref name="JacksonEnthoven1915">{{cite book
|last=Jackson
|first=A. M. T.
|author2=Enthoven, R. E.
|title=Folk Lore Notes, Vol. II—Konkan
|publisher=British India Press
|year=1915
|url=https://books.google.com/books/about/Folk_Lore_Notes.html?id=a4XlAAAAMAAJ
}}</ref>
कापणीच्या वेळी शेतात नवीन धान्याच्या राशीची पूजा करण्याची प्रथा कोकणातील अनेक भागांत नोंदविण्यात आली आहे. तसेच काही ठिकाणी शेतातील पहिल्या कापणीच्या दिवशी शिजवलेले अन्न तयार करून ते देवतेला नैवेद्य म्हणून अर्पण केले जात असे. या प्रथांमधून नवीन पीक हे केवळ आर्थिक उत्पादन नसून धार्मिक कृतज्ञता आणि सामुदायिक जीवनाचा भाग मानले जात असल्याचे दिसून येते.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
रत्नागिरी जिल्ह्यातील फोंडा येथे कापणीच्या वेळी शेताच्या कोपऱ्यात भात आणि दह्यापासून तयार केलेले 'शिवार' ठेवण्याची प्रथा नोंदविण्यात आली आहे. या विधीला 'चोरावा' असेही संबोधले जात असल्याचे त्या ऐतिहासिक नोंदीत नमूद आहे. अशा प्रथा शेत, पीक आणि स्थानिक धार्मिक विश्वास यांच्यातील संबंध दर्शवतात.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
कोकणातील काही भागांत कापणीच्या वेळी शेताच्या रक्षणाशी संबंधित स्थानिक देवतांना नारळ, कोंबड्या किंवा शेळ्या अर्पण करण्याच्या प्रथा नोंदविण्यात आल्या आहेत. रत्नागिरी जिल्ह्यातील काही गावांमध्ये तसेच मालवण परिसरात पेरणी आणि कापणीच्या काळात शेतरक्षक देवतांना अर्पणे केली जात असल्याचे ऐतिहासिक लोकसाहित्याच्या नोंदीत नमूद आहे. या प्रथा त्या काळातील ग्रामीण समाजाच्या कृषीविश्वासांचे दस्तऐवजीकरण करतात.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
कोलाबा जिल्ह्यातील दासगावच्या संदर्भात कापणीच्या वेळी शेतात नारळ ठेवून पहिल्या कापलेल्या भाऱ्याने त्याला काही वेळा झोडपण्याची प्रथा नोंदविण्यात आली आहे; त्यानंतर नियमित मळणी सुरू केली जात असे. अशा विधींमधून पहिल्या कापणीच्या उत्पादनाला प्रतीकात्मक महत्त्व दिले जात असल्याचे दिसते.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
या कृषीपरंपरांमुळे भातकापणीचा काळ हा ग्रामीण समाजाच्या सामूहिक जीवनाशी जोडलेला असे. शेतातील कामे, स्थानिक देवतांची पूजा, नवीन धान्याशी संबंधित विधी आणि कुटुंब व गावसमूहातील सहभाग यांमधून कृषी उत्पादन आणि लोकसंस्कृती यांचे परस्परसंबंध दिसून येतात. मात्र उपलब्ध लोकसाहित्यविषयक नोंदी मुख्यतः विसाव्या शतकाच्या प्रारंभीच्या काळातील असल्यामुळे त्यातील प्रत्येक प्रथा आजही कोकणातील सर्व भागांत प्रचलित आहे, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
भातकापणीशी संबंधित या ऐतिहासिक प्रथा कोकणातील ग्रामीण समाजात भाताला असलेले आर्थिक, सामाजिक आणि सांस्कृतिक महत्त्व स्पष्ट करतात. त्यामुळे भातकापणीचा अभ्यास करताना कापणीची तांत्रिक प्रक्रिया, ग्रामीण श्रमव्यवस्था आणि कापणीनंतरची कामे यांसोबतच त्याभोवती निर्माण झालेल्या लोकपरंपरांचाही विचार करणे आवश्यक ठरते.
== आधुनिक काळातील बदल, आव्हाने आणि भविष्यातील दिशा ==
कोकणातील भातकापणीच्या पद्धतीमध्ये आधुनिक काळात लक्षणीय बदल होत आहेत. पारंपरिक हाताने कापणी आणि श्रमप्रधान मळणीच्या पद्धतींबरोबर रीपर, रीपर-बाइंडर, विविध प्रकारची मळणी यंत्रे आणि पाखडणीची यंत्रे वापरण्याकडे कल वाढला आहे. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासानुसार मजुरांची कमतरता आणि वाढता मजुरीखर्च यामुळे वेळेत कापणी व मळणी करणे कठीण होत असून, यांत्रिकीकरण हा त्यावरील महत्त्वाचा पर्याय ठरतो.<ref name="Bhanage2016"/>
आधुनिक तंत्रज्ञानाचा स्वीकार मात्र संपूर्ण कोकणात एकसमान झालेला नाही. लहान आणि तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनी, चिखलयुक्त किंवा पाणथळ क्षेत्र, उताराची जमीन, यंत्रांची किंमत आणि त्यासाठी आवश्यक कुशल चालक यांसारख्या मर्यादा यांत्रिकीकरणाच्या प्रसारावर परिणाम करतात. कोकणातील बहुतांश अल्पभूधारक शेतकऱ्यांना कापणी, मळणी आणि पाखडणीची यंत्रे स्वतःच्या मालकीची ठेवणे आर्थिकदृष्ट्या कठीण असल्याचे अभ्यासातून दिसून आले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
अलीकडील अभ्यासांमध्ये कोकणातील जिल्ह्यांनुसार आधुनिक तंत्रज्ञान स्वीकारण्यात फरक दिसून येतो. पालघर आणि ठाणे जिल्ह्यांतील काही भात उत्पादकांनी यंत्राद्वारे रोपलागवड, हार्वेस्टर आणि थ्रेशर यांचा वापर केला आहे, तर रत्नागिरीतील काही शेतकरी अद्याप अधिक श्रमप्रधान पारंपरिक पद्धतींवर अवलंबून आहेत. सिंधुदुर्गमध्ये भाताच्या पुढील प्रक्रियेत दळण, उकडणे आणि पोहेनिर्मिती यांसारख्या मूल्यवर्धित पद्धतींचा वापर आढळतो.<ref name="Shelake2025"/>
भातकापणीसमोरील आणखी एक महत्त्वाचे आव्हान म्हणजे हवामानातील अनिश्चितता. कोकणातील भातशेती मोठ्या प्रमाणावर मोसमी पावसावर अवलंबून असल्यामुळे पावसाचा कालावधी, तीव्रता आणि कापणीच्या काळातील ओलावा यांचा कापणीच्या नियोजनावर परिणाम होतो. पक्व झालेल्या पिकाची कापणी वेळेत न झाल्यास पिकाचे नुकसान होण्याची शक्यता वाढते. त्यामुळे हवामानविषयक माहिती, पीकपक्वतेचे अचूक निरीक्षण आणि उपलब्ध यंत्रसामग्रीचे वेळेवर नियोजन यांना भविष्यात अधिक महत्त्व प्राप्त होईल.
यांत्रिकीकरणाचा लाभ लहान शेतकऱ्यांपर्यंत पोहोचविण्यासाठी कस्टम हायरिंग सेवा आणि कृषी अवजारे बँका महत्त्वाच्या ठरू शकतात. कोकणातील यांत्रिकीकरणाच्या अभ्यासाने अशा सेवांचा मोठ्या प्रमाणावर विस्तार करण्याची गरज व्यक्त केली आहे. यामुळे शेतकऱ्यांना महागडी यंत्रे स्वतः खरेदी न करता आवश्यक त्या काळात कापणी व मळणीची यंत्रसेवा घेता येऊ शकते.<ref name="Bhanage2016"/>
भविष्यातील दिशेच्या दृष्टीने केवळ कापणीचे यांत्रिकीकरण पुरेसे ठरणार नाही. कापणीपासून मळणी, वाळवण, साठवण, दळण आणि मूल्यवर्धनापर्यंत संपूर्ण साखळी अधिक कार्यक्षम करण्याची गरज आहे. २०२५ मधील कोकणावरील अभ्यासात यांत्रिकीकरण आणि भातप्रक्रियेमुळे मजुरीवरील अवलंबित्व कमी होऊन उत्पादनक्षमता, खर्च आणि बाजारमूल्याच्या दृष्टीने सुधारणा होऊ शकते, असे आढळले आहे.<ref name="Shelake2025"/>
कोकणासाठी भविष्यातील भातकापणीची यंत्रे विकसित करताना या प्रदेशाच्या विशिष्ट परिस्थितीचा विचार करणे आवश्यक आहे. लहान शेतजमीन, पाणथळ क्षेत्र, उतार, अरुंद बांध आणि उच्च पर्जन्यमान यांना अनुरूप हलकी, कमी खर्चाची आणि सहज वाहतूक करता येणारी यंत्रे अधिक उपयुक्त ठरू शकतात. त्याचबरोबर स्थानिक पातळीवर यंत्रचालकांचे प्रशिक्षण, दुरुस्ती व देखभाल सुविधा आणि कस्टम हायरिंगची उपलब्धता वाढविणे आवश्यक आहे.
अशा प्रकारे आधुनिक काळातील कोकणातील भातकापणी ही **पारंपरिक श्रमाधारित पद्धतीपासून योग्य ठिकाणी यांत्रिकीकरण, सामायिक यंत्रसेवा आणि मूल्यवर्धित प्रक्रियांकडे होणाऱ्या संक्रमणाच्या** टप्प्यात आहे. भविष्यातील दिशा ही केवळ अधिक यंत्रे उपलब्ध करून देण्याची नसून, कोकणातील लहान शेतकऱ्यांच्या आर्थिक क्षमतेला, स्थानिक भौगोलिक परिस्थितीला, हवामानाच्या अनिश्चिततेला आणि भाताच्या संपूर्ण मूल्यसाखळीला अनुरूप अशी शाश्वत व परवडणारी व्यवस्था निर्माण करण्याची आहे.
== हेही पहा ==
* [[कोकण]]
* [[भात]]
== बाह्य दुवे ==
* [https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/ Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research — ICAR]
* [https://www.dbskkv.org/ डॉ. बाळासाहेब सावंत कोकण कृषी विद्यापीठ]
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:कोकण]]
[[वर्ग:महाराष्ट्रातील शेती]]
[[वर्ग:भात]]
[[वर्ग:महाराष्ट्रातील कृषी]]
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शुद्धलेखन — लेखनभेद ([[सदस्य:KiranBOT II/typos#लेखनभेद|अधिक माहिती]])
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wikitext
text/x-wiki
कोकणातील भात शेती ही प्रदेशाच्या कृषी आणि ग्रामीण जीवनाचा महत्त्वाचा भाग आहे. कोकणातील भातपिकाची लागवड प्रामुख्याने पावसावर अवलंबून असून, भाताची कापणी हा पिकाच्या उत्पादनचक्रातील अत्यंत महत्त्वाचा टप्पा आहे. या प्रदेशातील भौगोलिक परिस्थिती, अतिवृष्टी, लहान व तुकड्यात विभागलेली शेती, उताराची किंवा पायरीदार जमीन आणि कापणीच्या काळातील मजुरांची उपलब्धता या घटकांचा भातकापणीच्या पद्धतीवर परिणाम होतो.<ref name="Bhanage2016">{{cite journal
|last=Bhanage
|first=G. B.
|author2=P. U. Shahare
|author3=P. S. Deshmukh
|author4=P. B. Gaikwad
|author5=V. V. Aware
|title=Mechanization in Harvesting and Post-Harvest Operation for Paddy in Konkan Region and Its Economic Feasibility
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|volume=34
|issue=2
|year=2016
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92862
}}</ref>
परंपरेने कोकणातील भाताची कापणी मानवी श्रमांवर आधारित राहिली असून विळा किंवा तत्सम साधनांनी भात कापणे, कापलेले भाताचे पुंजके एकत्र करणे, त्यानंतर मळणी व धान वेगळे करणे अशा सलग प्रक्रियेतून कापणीचे काम केले जात असे. कापणी व कापणीनंतरच्या प्रक्रियांमध्ये मोठ्या प्रमाणावर श्रम लागत असल्याने मजुरांची कमतरता आणि वाढता मजुरीखर्च हे कोकणातील भातशेतीसमोरील महत्त्वाचे प्रश्न ठरले आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील शेतीच्या विशिष्ट परिस्थितीमुळे भातकापणीच्या यांत्रिकीकरणालाही स्वतंत्र स्वरूप प्राप्त झाले आहे. लहान व विखुरलेली शेतजमीन, उताराची व पायरीदार शेती आणि मोठ्या प्रमाणातील पाऊस या मर्यादा लक्षात घेऊन भात कापणीसाठी लहान व तुलनेने हलकी यंत्रे विकसित करण्याचे प्रयत्न झाले आहेत.<ref name="Bhanage2017">{{cite journal
|last=Bhanage
|first=Girishkumar Balasaheb
|author2=P. U. Shahare
|author3=V. V. Aware
|author4=K. G. Dhande
|author5=P. S. Deshmukh
|title=Development of stripper harvester for paddy
|journal=Journal of Applied and Natural Science
|volume=9
|issue=4
|year=2017
|pages=1943–1948
|url=https://journals.ansfoundation.org/index.php/jans/article/view/1469
}}</ref>
या पार्श्वभूमीवर कोकणातील भात शेती कापणीचा अभ्यास हा केवळ भात कापण्याच्या तंत्राचा अभ्यास न राहता, पाऊस व जमीन, पिकाची पक्वता, पारंपरिक श्रमव्यवस्था, कापणीची साधने, मळणी व धान साठवण, यांत्रिकीकरण, मजूरटंचाई आणि ग्रामीण लोकजीवन यांचा परस्परसंबंध समजून घेण्याचा विषय ठरतो.
== कोकणातील भातशेतीची भौगोलिक व कृषी पार्श्वभूमी ==
कोकण हा महाराष्ट्राच्या पश्चिम किनारपट्टीवरील अरबी समुद्रालगतचा प्रदेश असून, त्याची भौगोलिक रचना डोंगराळ, खाचखळग्यांची आणि काही ठिकाणी सखल स्वरूपाची आहे. महाराष्ट्रातील कोकण विभागातील भात उत्पादनाच्या संदर्भात ठाणे, पालघर, रायगड, रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग हे प्रमुख जिल्हे विचारात घेतले जातात. या प्रदेशात उष्ण व दमट हवामान आणि मोठ्या प्रमाणातील नैऋत्य मोसमी पाऊस ही भातशेतीस अनुकूल वैशिष्ट्ये आहेत.<ref name="BiswasPhadtare1995">{{cite journal
|last=Biswas
|first=B. C.
|author2=R. D. Phadtare
|title=Cropping pattern of Konkan region on the basis of probabilistic rainfall and soil characteristics
|journal=MAUSAM
|volume=46
|issue=2
|year=1995
|pages=133–140
|url=https://mausamjournal.imd.gov.in/index.php/MAUSAM/article/view/3218
}}</ref>
कोकणातील भातशेती मोठ्या प्रमाणावर पावसावर अवलंबून आहे. अतिवृष्टी आणि सखल भौगोलिक परिस्थितीमुळे खरीप हंगामात भात हे अनेक भागांतील प्रमुख पीक ठरते. अखिल भारतीय समन्वित भात सुधारणा प्रकल्पाच्या उत्पादनाभिमुख सर्वेक्षणानुसार कोकणातील भात उत्पादक पट्ट्यात खरीप हंगामात भाताचे क्षेत्र मोठ्या प्रमाणावर असून, जास्त पावसामुळे काही भागांत खरीप हंगामात भाताव्यतिरिक्त इतर पिकांची लागवड करणे मर्यादित होते.<ref name="AICRIP2019">{{cite report
|author=All India Coordinated Rice Improvement Project
|title=Production Oriented Survey 2019
|publisher=Indian Institute of Rice Research
|url=https://icar-iirr.org/AICRIP/Final%20POS%202019-2020.pdf
}}</ref>
कोकणातील पर्जन्यमानाचा भातपिकाच्या वाढीवर आणि उत्पादनावर थेट परिणाम होतो. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील दीर्घकालीन पर्जन्यविषयक आकडेवारीच्या अभ्यासातून भातपिकाच्या वाढीच्या विविध अवस्थांमध्ये पावसाचे महत्त्व स्पष्ट झाले आहे. त्यामुळे कोकणातील भातशेतीची लागवड, वाढ आणि पक्वता यांचे वेळापत्रक स्थानिक पर्जन्यमानाशी घनिष्ठपणे संबंधित असते.<ref name="ChowdhuryDas1993">{{cite journal
|last=Chowdhury
|first=A.
|author2=H. P. Das
|title=Effect of rainfall on growth and yield of rice in Konkan coast
|journal=MAUSAM
|volume=44
|issue=2
|year=1993
|pages=143–146
|url=https://mausamjournal.imd.gov.in/index.php/MAUSAM/article/view/3811
}}</ref>
कोकणातील कृषी रचनेचे आणखी एक वैशिष्ट्य म्हणजे लहान व तुकड्यात विभागलेली शेतजमीन. अशा जमिनी, डोंगराळ किंवा उताराची भौगोलिक रचना आणि मर्यादित सिंचनसुविधा यांमुळे भातशेतीच्या उत्पादनपद्धतीवर तसेच शेतीच्या यांत्रिकीकरणावर परिणाम होतो. कोकणातील भात उत्पादक शेतकऱ्यांच्या अभ्यासात लहान व विखुरलेली जमीन, मजुरीचा वाढता खर्च आणि उत्पादन तंत्रज्ञान स्वीकारण्यातील अडचणी या महत्त्वाच्या मर्यादा असल्याचे आढळते.<ref name="HileDarekarDatrkar2015">{{cite journal
|last=Hile
|first=R. B.
|author2=A. S. Darekar
|author3=S. B. Datrkar
|title=Adoption assessment of production technology for paddy cultivation in Konkan region of Maharashtra
|journal=Indian Journal of Economics and Development
|volume=11
|issue=1
|year=2015
|pages=217–225
|url=https://indianjournals.com/article/ijed1-11-1-023
}}</ref>
या भौगोलिक आणि कृषी परिस्थितीचा परिणाम भाताच्या कापणीवरही होतो. पिकाच्या पक्वतेच्या काळात उशिरा किंवा अतिवृष्टी झाल्यास कापणीच्या कामात विलंब होऊन पिकाचे नुकसान होऊ शकते. कोकणातील भातपिकाच्या उत्पादनाभिमुख सर्वेक्षणात पक्वता आणि कापणीच्या अवस्थेत झालेल्या उशिराच्या व जोरदार पावसामुळे काही भागांत उत्पादनहानी झाल्याची नोंद आहे.<ref name="AICRIP2019"/>
== कोकणातील भातपिकाचे हंगामी चक्र ==
कोकणातील भातपीक हे प्रामुख्याने खरीप हंगामातील पीक असून त्याचे हंगामी चक्र नैऋत्य मोसमी पावसाच्या आगमनाशी आणि उपलब्ध पाण्याशी जवळून संबंधित आहे. कोकणातील भातपिकाच्या अभ्यासात पेरणीची वेळ, वाणांची निवड आणि पिकाची वाढ यांचा पर्जन्यमान व स्थानिक हवामानाशी संबंध असल्याचे दिसून येते. कोकणातील काही प्रमुख भातवाणांसाठी जूनच्या सुरुवातीच्या काळातील पेरणी अनुकूल ठरू शकते, असे स्थानिक कृषी संशोधनातून दिसून आले आहे.<ref name="Jagtap2016">{{cite journal
|last=Jagtap
|first=D. N.
|author2=V. G. Chavan
|author3=U. V. Mahadkar
|author4=S. A. Chavan
|title=Effect of Sowing Times on the Yield and Yield Attributes of Rice (Oryza sativa L.) Varieties
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|volume=34
|issue=2
|year=2016
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92857
}}</ref>
पावसाळ्याच्या प्रारंभी भातासाठी रोपवाटिका तयार करणे, बियाणे पेरणे आणि मुख्य शेताची मशागत करणे ही कामे सुरू होतात. त्यानंतर योग्य वयाची रोपे मुख्य शेतात लावली जातात. कोकणातील खरीप भाताच्या विविध वाणांवर केलेल्या प्रयोगांमध्ये पेरणीच्या वेळेचा वाढ, उत्पादन आणि आर्थिक परताव्यावर परिणाम होत असल्याचे आढळले आहे.<ref name="Jagtap2016"/>
रोपांची पुनर्लागवड झाल्यानंतर पावसाळ्यात भातपिकाची वाढ, फुटवे येणे, कणसांची निर्मिती आणि दाणे भरणे या अवस्था क्रमाने पूर्ण होतात. या काळात पर्जन्यमानातील चढ-उतार आणि पावसाचे दिवस यांचा पिकाच्या वाढीवर परिणाम होऊ शकतो. कोकण प्रदेशातील पर्जन्यमानाच्या दीर्घकालीन अभ्यासात मे ते नोव्हेंबर या कालावधीत पर्जन्य व पावसाळी दिवसांच्या स्वरूपात बदल आढळल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="KonkanRainfall2019">{{cite journal
|title=Spatio-temporal Trends of Rainfall and Rainy Days in Konkan Region of Maharashtra
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|year=2019
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92410
}}</ref>
पिकाची पक्वता जवळ आल्यानंतर भातकापणीचा टप्पा सुरू होतो. कोकणातील भातशेतीत कापणीची वेळ व पद्धत ही वाणाचा कालावधी, पेरणीची वेळ, स्थानिक हवामान आणि त्या वर्षीच्या पावसाच्या स्वरूपानुसार बदलू शकते. त्यामुळे संपूर्ण कोकणासाठी कापणीची एकच निश्चित तारीख ठरविता येत नाही. कापणी, मळणी आणि धान वाळवणे या कापणीनंतरच्या प्रक्रिया भातपिकाच्या हंगामी चक्राचा अविभाज्य भाग आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
अशा प्रकारे कोकणातील भातपिकाचे हंगामी चक्र साधारणपणे **पावसाळ्याच्या प्रारंभी रोपवाटिका व पेरणी → मुख्य शेताची मशागत व पुनर्लागवड → पावसाळ्यात पिकाची वाढ → दाणे भरणे व पक्वता → भातकापणी → मळणी, धान वेगळे करणे व वाळवणे** अशा क्रमाने पुढे जाते. या संपूर्ण चक्रावर कोकणातील पर्जन्यमान, स्थानिक जमीन, वाण आणि शेतीतील उपलब्ध श्रम यांचा प्रभाव असतो.
== भात कापणीची वेळ आणि पक्वतेची चिन्हे ==
कोकणातील भातपिकाची कापणी प्रामुख्याने खरीप हंगामाच्या अखेरीस केली जाते. कापणीची नेमकी वेळ भाताच्या वाणाचा कालावधी, लागवडीची वेळ, स्थानिक हवामान आणि त्या वर्षीच्या पावसाच्या स्वरूपानुसार बदलते. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील १९५१ ते १९८७ या कालावधीतील आकडेवारीच्या अभ्यासानुसार कोकणात भाताची लागवड साधारणपणे जूनमध्ये होते आणि पिकाचा सक्रिय वाढीचा कालावधी सुमारे ९० दिवसांचा असतो. या अभ्यासात शारीरिक पक्वता प्राप्त झाल्यानंतर काही दिवसांनी, साधारण ऑक्टोबरच्या सुरुवातीस, भाताची कापणी केली जात असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
भातपिकाची कापणी योग्य वेळी करणे महत्त्वाचे असते. पीक पूर्णपणे पक्व होण्यापूर्वी कापणी केल्यास दाणे अपक्व राहण्याची शक्यता असते, तर कापणीस अनावश्यक विलंब झाल्यास दाणे गळणे, कणसे वाकणे किंवा पिकाचे नुकसान होण्याचा धोका वाढतो. त्यामुळे शेतातील पिकाची प्रत्यक्ष पक्वता पाहून कापणीचा निर्णय घेतला जातो.<ref name="ICARHarvest2025">{{cite report
|author=Indian Council of Agricultural Research
|title=Kharif Agro-Advisories for Farmers 2025
|publisher=Indian Council of Agricultural Research
|url=https://icar.gov.in/sites/default/files/Circulars/ICAR-En-Kharif-Agro-Advisories-for-Farmers-2025.pdf
}}</ref>
भातपिकाच्या पक्वतेची प्रमुख बाह्य चिन्हे म्हणजे कणसांवरील बहुतांश दाण्यांचा हिरव्या रंगातून पिवळसर किंवा सोनेरी रंगाकडे झालेला बदल आणि दाणे कडक होणे. ICARच्या कृषी मार्गदर्शनानुसार कणसांवरील सुमारे ८०–८५ टक्के दाणे सोनेरी-पिवळे व कडक झाल्यावर भात कापणीस योग्य मानला जातो. या अवस्थेत कापणी केल्यास कापणीतील विलंबामुळे होणारे दाणे गळणे आणि पीक लोळण्याचे नुकसान कमी करण्यास मदत होते.<ref name="ICARHarvest2025"/>
कोकणातील भातशेती पूर्णपणे किंवा मोठ्या प्रमाणावर पावसाच्या लहरीवर अवलंबून असल्याने कापणीची वेळ निश्चित करताना पावसाची स्थितीही महत्त्वाची ठरते. पक्वतेच्या कालावधीत उशिरा होणारा किंवा जोरदार पाऊस कापणीला अडथळा आणू शकतो. त्यामुळे पीक कापणीस योग्य झालेले असताना उपलब्ध कोरड्या हवामानाचा कालावधी साधून कापणी करणे आवश्यक ठरते. कोकणातील पर्जन्यमान आणि भातपिकाच्या वाढीवरील अभ्यासात पावसाच्या विविध वाढीच्या अवस्थांशी भाताच्या उत्पादनाचा संबंध असल्याचे आढळले आहे.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
कापणीपूर्वी शेतातील पिकाची अवस्था, कणसांचा रंग, दाण्यांची कडकपणा आणि हवामानाचा अंदाज यांचा विचार केला जातो. अशा प्रकारे **कणसांवरील बहुतांश दाणे सोनेरी-पिवळे होणे, दाणे कडक होणे आणि पीक शारीरिक पक्वतेला पोहोचणे** ही भात कापणीची प्रमुख चिन्हे मानली जातात. कोकणाच्या परिस्थितीत या पक्वतेनंतर अनावश्यक विलंब न करता योग्य हवामानात कापणी करणे महत्त्वाचे ठरते.
== कोकणातील पारंपरिक भातकापणी ==
कोकणातील पारंपरिक भातकापणी ही प्रामुख्याने मानवी श्रमांवर आधारित प्रक्रिया होती. भाताचे पीक कापणीस योग्य झाल्यानंतर शेतकरी आणि शेतमजूर हातातील विळ्याच्या साहाय्याने भाताची रोपे कापत. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासानुसार भात उत्पादनातील कापणी आणि कापणीनंतरची कामे पारंपरिक पद्धतीने मोठ्या प्रमाणावर हाताने केली जात असून त्यासाठी मोठ्या प्रमाणात श्रमांची आवश्यकता असते.<ref name="Bhanage2016"/>
कापणी करताना शेतातील पक्व भाताची कणसे आणि पेंढा विळ्याने कापून त्याचे पुंजके किंवा भारे तयार केले जात. कापलेला भात काही काळ शेतात किंवा योग्य जागी वाळवून पुढील मळणीसाठी नेला जात असे. अशा प्रकारे कापणी, पुंजके बांधणे, वाळवणे आणि त्यानंतर मळणी करणे ही कामे परस्परांशी जोडलेली होती.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक पद्धतीत कापणीचे काम श्रमप्रधान असल्यामुळे कापणीचा कालावधी हा उपलब्ध मजुरांच्या संख्येवरही अवलंबून असे. कोकणातील भातशेतीत लहान व तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनी, भौगोलिक परिस्थिती आणि कापणीच्या काळातील मोठ्या मनुष्यबळाची गरज यांमुळे पारंपरिक कापणी पद्धतीला विशेष महत्त्व होते. अभ्यासात कोकणातील अनेक शेतकरी अल्पभूधारक असल्यामुळे कापणी, मळणी आणि धान वाऱ्यावर पाखडणे यासाठी यंत्रसामग्री स्वतः खरेदी करणे आर्थिकदृष्ट्या कठीण असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक भातकापणी ही केवळ कृषी कामाची प्रक्रिया नसून ग्रामीण श्रमव्यवस्थेचा भाग होती. कापणीच्या हंगामात कुटुंबातील सदस्य, शेतमजूर आणि स्थानिक पातळीवरील उपलब्ध मनुष्यबळ यांच्या सहभागातून कापणीची कामे पूर्ण केली जात. त्यामुळे भातकापणीच्या काळात शेतातील सामूहिक श्रमाला विशेष महत्त्व प्राप्त होत असे.
कापणीनंतर भाताच्या कणसांमधून धान वेगळे करण्यासाठी पारंपरिक मळणी केली जात असे. पारंपरिक पद्धतींमध्ये जनावरांच्या पायाने तुडवणे किंवा इतर श्रमाधारित पद्धतींचा वापर केला जात असे; नंतर धान व पेंढा वेगळे करण्यासाठी वाऱ्याच्या साहाय्याने पाखडण्याची प्रक्रिया केली जाई. या कापणीनंतरच्या पद्धतींमध्ये अधिक वेळ आणि मानवी श्रम लागत असल्याने पुढील काळात यांत्रिक मळणी व पाखडणीची साधने वापरात आली.<ref name="ICARTraditionalThreshing">{{cite journal
|title=Mechanization in Rice Cultivation
|journal=Indian Farming
|volume=71
|issue=4
|year=2021
|pages=3–6
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/IndFarm/article/download/114370/44585/298367
}}</ref>
पारंपरिक भातकापणीची ही पद्धत कोकणातील पावसावर आधारित शेती, लहान शेतजमिनी आणि ग्रामीण श्रमव्यवस्थेशी जुळलेली होती. मात्र मजुरांची उपलब्धता कमी होणे, मजुरीचा वाढता खर्च आणि वेळेत कापणी करण्याची गरज यांमुळे पुढील काळात विळ्याबरोबरच रीपर, रीपर-बाइंडर आणि इतर यांत्रिक साधनांचा वापर वाढू लागला.<ref name="Bhanage2016"/>
== कापणीसाठी वापरली जाणारी पारंपरिक साधने ==
कोकणातील पारंपरिक भातकापणीमध्ये विळा हे प्रमुख हातसाधन राहिले आहे. पक्व भातपीक कापण्यासाठी शेतकरी आणि शेतमजूर विळ्याचा वापर करत. भाताची कापणी प्रामुख्याने मनुष्यबळाद्वारे विळ्याने केली जात असल्याचे कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासात नमूद करण्यात आले आहे. कापणीच्या कामात मोठ्या प्रमाणावर मानवी श्रम लागत असल्याने विळ्याचा वापर हा पारंपरिक भातकापणी पद्धतीचा महत्त्वाचा भाग होता.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक विळ्याच्या वापरात शेतकरी भाताची काडे हाताने धरून विळ्याने कापत असे. कापणीचे काम प्रामुख्याने वाकून करावे लागत असल्यामुळे त्यात शारीरिक श्रम मोठ्या प्रमाणात होत. भातकापणीतील हा श्रमभार कमी करण्यासाठी पुढे दातेरी विळ्यांसारख्या सुधारित हातसाधनांचा विकास करण्यात आला.<ref name="AgrowonHarvestTools">{{cite web
|title=भात पीक कापणीची साधने
|website=अॅग्रोवन
|date=23 October 2024
|url=https://agrowon.esakal.com/techno-wan/tools-for-rice-crop-harvesting-article-on-agrowon
}}</ref>
कोकणातील भातशेतीच्या संदर्भात डॉ. बाळासाहेब सावंत कोकण कृषी विद्यापीठाने विकसित केलेला ‘वैभव विळा’ हा पारंपरिक विळ्याच्या कार्यपद्धतीवर आधारित सुधारित दातेरी विळा आहे. या विळ्याच्या साहाय्याने भाताची कापणी जमिनीलगत करता येते. दातेरी पाते असल्यामुळे कापणीसाठी तुलनेने कमी ताकद लागते आणि साधनाचे वजनही कमी ठेवण्यात आले आहे.<ref name="AgrowonHarvestTools"/>
कोकण विभागासाठीच्या कृषी सल्ल्यामध्ये तयार भातपिकाची कापणी सकाळच्या वेळी जमिनीलगत ‘वैभव’ विळ्याने करण्याची शिफारस करण्यात आली आहे. कापणीनंतर कापलेला भात शेतात अनावश्यक वेळ न ठेवता पुढील मळणीसाठी हलविण्याचाही सल्ला देण्यात आला आहे.<ref name="BSKKVHarvestAdvice">{{cite web
|title=Crop Advisory : कृषी सल्ला : कोकण विभाग
|website=अॅग्रोवन
|url=https://agrowon.esakal.com/agro-special/special-agricultural-advisory-for-crops-of-konkan-division
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील पारंपरिक भातकापणीची प्रमुख ओळख **हाताने वापरल्या जाणाऱ्या विळ्याशी** जोडलेली आहे. कालांतराने पारंपरिक विळ्याच्या कार्यक्षमतेत सुधारणा करण्यासाठी दातेरी विळे विकसित झाले आणि त्यानंतर रीपर, रीपर-बाइंडर यांसारख्या यांत्रिक साधनांचा वापर सुरू झाला. त्यामुळे विळ्यापासून यांत्रिक कापणीपर्यंत झालेला बदल हा कोकणातील भातकापणीच्या तंत्रज्ञानातील महत्त्वाचा टप्पा मानता येतो.<ref name="Bhanage2016"/>
== कापणीतील ग्रामीण श्रम आणि सामुदायिक सहभाग ==
कोकणातील पारंपरिक भातकापणी ही मोठ्या प्रमाणावर मानवी श्रमांवर आधारित होती. भाताची कापणी, कापलेला भात एकत्र करणे, मळणी, धान वेगळे करणे आणि वाळवणे या कापणीनंतरच्या प्रक्रियांमध्येही मनुष्यबळाची आवश्यकता असे. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासानुसार कापणी व कापणीनंतरची कामे श्रमप्रधान असल्यामुळे या प्रक्रियांचा एकूण उत्पादनखर्च आणि काम पूर्ण करण्यासाठी लागणारा वेळ यांवर मनुष्यबळाची उपलब्धता परिणाम करते.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक पद्धतीत भातकापणीचे काम कुटुंबातील सदस्य तसेच स्थानिक शेतमजुरांच्या सहभागातून केले जात असे. कापणीच्या हंगामात कमी कालावधीत मोठ्या क्षेत्रातील पीक कापून घेणे आवश्यक असल्याने उपलब्ध मनुष्यबळाचे नियोजन महत्त्वाचे ठरत असे. कोकणातील लहान आणि तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनींमध्ये यांत्रिक कापणीची साधने वापरण्यावरही भौगोलिक आणि आर्थिक मर्यादा येत असल्याने मानवी श्रमांना पारंपरिक शेतीपद्धतीत विशेष महत्त्व होते.<ref name="Bhanage2016"/>
भातकापणीशी संबंधित कामे केवळ कापणीपुरती मर्यादित नसून त्यानंतरची मळणी, धान व पेंढा वेगळे करणे आणि धान वाळवणे अशा टप्प्यांपर्यंत चालत. या सर्व कामांमध्ये अनेक व्यक्तींचा सहभाग आवश्यक असल्याने कापणीचा काळ हा ग्रामीण पातळीवरील श्रमविनिमय आणि परस्पर सहकार्याशी जोडलेला असे. तथापि, अशा पारंपरिक सामुदायिक प्रथांचे स्वरूप गावागावानुसार वेगवेगळे असल्याने त्याबाबत सर्व कोकणाला लागू होईल असा एकसमान निष्कर्ष काढता येत नाही.
कापणीच्या कामासाठी मोठ्या प्रमाणावर मजूर लागणे ही कोकणातील भातशेतीची महत्त्वाची अडचण ठरली आहे. मजुरांची कमतरता आणि वाढती मजुरी यामुळे वेळेत कापणी करणे शेतकऱ्यांसाठी अधिक खर्चिक झाले आहे. या परिस्थितीमुळे भातकापणीतील श्रमभार कमी करण्यासाठी रीपर, रीपर-बाइंडर आणि इतर कापणी यंत्रांचा वापर करण्याची आवश्यकता निर्माण झाली.<ref name="Bhanage2016"/>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीमध्ये ग्रामीण श्रम, कुटुंबीय सहभाग आणि स्थानिक पातळीवरील परस्पर सहकार्य यांना पारंपरिक काळात महत्त्वाचे स्थान होते. मात्र मजूरटंचाई, वाढता मजुरीखर्च आणि कापणी वेळेत पूर्ण करण्याची गरज यांमुळे या श्रमाधारित व्यवस्थेत बदल होत असून यांत्रिकीकरणाकडे कल वाढत आहे.
== कापणीनंतरची मळणी आणि धान वेगळे करणे ==
भाताची कापणी झाल्यानंतर कापलेले पीक मळणीसाठी नेले जाते. मळणीच्या प्रक्रियेत भाताच्या कणसांपासून धान वेगळे केले जाते. पारंपरिक पद्धतीत ही प्रक्रिया मानवी श्रमांवर आधारित होती. कापणी, मळणी आणि त्यानंतर धान व पेंढा वेगळे करण्याच्या कामांसाठी मोठ्या प्रमाणावर मनुष्यबळ लागत असल्याने कोकणातील भातशेतीतील कापणीनंतरची कामे श्रमप्रधान राहिली आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक मळणीनंतर धानामध्ये पेंढा, कणसांचे तुकडे, भुसा आणि इतर हलका कचरा मिसळलेला असतो. त्यातून स्वच्छ धान वेगळे करण्यासाठी पाखडणी केली जाते. नैसर्गिक वाऱ्याच्या साहाय्याने किंवा हाताने चालविलेल्या पाखडणीच्या साधनांनी हलका पेंढा व भुसा बाजूला केला जातो आणि तुलनेने जड धान खाली साचते. अशा प्रकारे मळणी आणि पाखडणी या एकमेकांशी संबंधित असल्या तरी धान स्वच्छ करण्याच्या स्वतंत्र प्रक्रिया आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भातशेतीच्या यांत्रिकीकरणाच्या अभ्यासात मळणीसाठी पेडलवर चालणारे थ्रेशर, वायर-लूप प्रकारचे थ्रेशर, उलट्या साखळी-पट्टीवर आधारित थ्रेशर आणि अक्षीय प्रवाहाचे थ्रेशर यांसारख्या साधनांचा अभ्यास करण्यात आला. धान वेगळे केल्यानंतर पाखडणीसाठी हाताने चालविलेले तसेच शक्तिचलित विन्नोअर वापरण्याच्या पद्धतींचाही विचार करण्यात आला.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील लहान व तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनी आणि शेतकऱ्यांची मर्यादित आर्थिक क्षमता यांमुळे मोठ्या क्षमतेची यंत्रे सर्व शेतकऱ्यांना स्वतःच्या मालकीची ठेवणे शक्य होत नाही. त्यामुळे मळणी व पाखडणीच्या यांत्रिकीकरणासाठी सामायिक वापर, यंत्रसेवा किंवा कस्टम हायरिंग यांसारख्या पद्धती उपयुक्त ठरू शकतात.<ref name="Bhanage2016"/>
मळणी आणि पाखडणीच्या कामात मजुरांची कमतरता निर्माण झाल्यास कापणीनंतरचे काम वेळेत पूर्ण होण्यास विलंब होऊ शकतो. कोकणातील अभ्यासात मजुरांची कमतरता आणि वाढता मजुरीखर्च यामुळे कापणी व मळणीच्या कामांमध्ये विलंब होत असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. त्यामुळे कापणीनंतरच्या प्रक्रियांमध्ये यांत्रिकीकरणाला महत्त्व प्राप्त झाले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
== धान वाळवणे, साठवण आणि घरगुती प्रक्रिया ==
भातकापणी आणि मळणीनंतर मिळालेले धान साठवण्यापूर्वी योग्य प्रकारे वाळवणे आवश्यक असते. कोकणातील रायगड जिल्ह्यातील १२० शेतकरी महिलांच्या अभ्यासात मळणीच्या जागेवर धान्याची योग्य प्रकारे स्वच्छता व वाळवण करणे आणि उन्हात वाळवणे या पद्धती मोठ्या प्रमाणावर वापरल्या जात असल्याचे आढळले. अभ्यासातील ९३.३३ टक्के महिलांनी धान्याचे योग्य वाळवण व स्वच्छता तसेच उन्हात वाळवणाची पद्धत अवलंबल्याचे नोंदविण्यात आले आहे.<ref name="ChavanMehtaKale2013">{{cite journal
|last=Chavan
|first=K. M.
|author2=Mehta, P. G.
|author3=Kale, R. A.
|title=Food grain storage practices followed by the farm women
|journal=International Journal of Processing and Post Harvest Technology
|volume=4
|issue=2
|year=2013
|pages=83–85
|url=https://researchjournal.co.in/online/IJPPHT/IJPPHT%204%282%29/4_83-85_A.pdf
}}</ref>
कोकणातील पारंपरिक साठवण पद्धतींमध्ये धान घरातील स्थानिक साधनसामग्रीपासून तयार केलेल्या संरचनांमध्ये ठेवले जात असे. कोकणातील धानसाठवण संरचनांच्या अभ्यासात *कणंज किंवा साठी, मुडी, कंगे, मटक्या, ताटी आणि हाडपा* यांसारख्या पारंपरिक संरचनांचा उल्लेख करण्यात आला आहे. या संरचनांमध्ये शेतकरी घरातच धान साठवत असल्याचे अभ्यासात नमूद केले आहे.<ref name="KadKhandetodNimbalkarJadhav2016">{{cite journal
|last=Kad
|first=V. P.
|author2=Khandetod, Y. P.
|author3=Nimbalkar, C. A.
|author4=Jadhav, M. S.
|title=Design and Development of Paddy Storage Structure for Konkan Region
|journal=IMPACT: International Journal of Research in Engineering & Technology
|volume=4
|issue=5
|year=2016
|pages=25–34
|url=https://www.impactjournals.us/download/archives/2-77-1462972101-3.%20IJRET%20eng-DESIGN%20AND%20DEVELOPMENT%20OF%20PADDY%20STORAGE%20STRUCTURE%20FOR%20KONKAN%20REGION.pdf
}}</ref>
पारंपरिक साठवणुकीमध्ये किडी, बुरशी आणि उंदरांमुळे धान्याचे नुकसान होण्याची शक्यता होती. रायगड जिल्ह्यातील अभ्यासात धान्य साठवताना गोणपाटाच्या पोत्यांचा वापर ८७.५० टक्के महिलांनी केला असल्याचे आढळले. तसेच साठवलेल्या धान्याला किडींपासून संरक्षण देण्यासाठी ९३.३३ टक्के महिलांनी कडुनिंबाच्या पानांचा वापर केला होता. याउलट सिलो, पूसा बिन किंवा किसान कोठी यांसारख्या सुधारित साठवण संरचनांचा वापर अभ्यासातील प्रतिसादकर्त्यांमध्ये आढळला नाही.<ref name="ChavanMehtaKale2013"/>
कोकणातील दमट हवामानामुळे धान साठवताना आर्द्रता नियंत्रणाला विशेष महत्त्व आहे. कोकणातील दमट हवामानात धानाच्या साठवणीवर केलेल्या अभ्यासात साठवण कालावधी वाढत असताना धानाच्या काही भौतिक व गुणवत्ताविषयक गुणधर्मांमध्ये बदल होत असल्याचे आढळले. साठवणीच्या कालावधीत कीड प्रादुर्भाव वाढणे आणि धानातील आर्द्रतेत बदल होणे यांसारखे परिणाम नोंदविण्यात आले आहेत.<ref name="ThakorPatilSawant2012">{{cite journal
|last=Thakor
|first=N. J.
|author2=Patil, S. C.
|author3=Sawant, A. A.
|author4=Sawant, S. D.
|title=Influence of Storage Period on Physical Properties and Quality of Paddy Stored in GIC Silo and Bag Storage under Humid Konkan Climatic Conditions
|journal=Journal of Agricultural Engineering
|volume=49
|issue=1
|year=2012
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JAE/article/view/21870
}}</ref>
धानाचे घरगुती उपयोगासाठी रूपांतर करण्याच्या प्रक्रियेत साली काढणे, तांदूळ तयार करणे आणि त्यापासून विविध पदार्थ बनवणे अशा प्रक्रिया येतात. उत्तर कोकणातील पाडळ प्रक्रिया उद्योगांवरील अभ्यासातून धान प्रक्रियेमधून तांदळाबरोबर तांदळाची कोंडा, तूस आणि तुटलेला तांदूळ यांसारखी उपउत्पादनेही मिळतात, असे दिसून येते. या प्रक्रियेमुळे कच्च्या धानाचे खाद्य तांदळात रूपांतर होते आणि त्याला अतिरिक्त मूल्य प्राप्त होते.<ref name="ChakranarayanToraneBachhaoNikam2024">{{cite journal
|last=Chakranarayan
|first=Ankita
|author2=Torane, Sanjaykumar
|author3=Bachhao, Kiran
|author4=Nikam, Yogesh
|title=Economic Analysis of Value Addition in Paddy Processing in North Konkan Region of Maharashtra, India
|journal=Acta Scientific Agriculture
|volume=8
|issue=10
|year=2024
|pages=11–16
|url=https://actascientific.com/ASAG/ASAG-08-1411.php
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीनंतरची प्रक्रिया ही **धान स्वच्छ करणे → उन्हात वाळवणे → सुरक्षित साठवण → आवश्यकतेनुसार धानाची प्रक्रिया करून तांदूळ तयार करणे** या क्रमाने पुढे जाते. पारंपरिक घरगुती साठवण पद्धतींमध्ये स्थानिक साधनसामग्रीचा वापर होत असला, तरी कोकणातील दमट हवामानामुळे धानाची योग्य वाळवण, आर्द्रता नियंत्रण आणि कीडप्रतिबंधक साठवण या बाबींना विशेष महत्त्व आहे.
== कोकणातील पाऊस, जमीन आणि कापणीची वेळ ==
कोकणातील भातशेतीवर पर्जन्यमानाचा मोठा प्रभाव असतो. हा प्रदेश उष्ण व दमट हवामानाचा असून येथे वार्षिक पर्जन्यमान साधारण २०० ते ३५० सेंमीपर्यंत आढळते. पर्जन्याचे प्रमाण, त्याचे ऋतुनिहाय वितरण आणि जमिनीची पाणीधारण क्षमता यांचा विचार करून कोकणातील पिकांची रचना निश्चित होते. त्यामुळे भातपिकाच्या वाढीपासून पक्वतेपर्यंतच्या कालावधीवरही पावसाचा प्रभाव पडतो.<ref name="BiswasPhadtare1995"/>
कोकणातील भातशेतीच्या जमिनींचे स्वरूपही कापणीच्या वेळेवर अप्रत्यक्ष परिणाम करते. प्रदेशातील जमिनींच्या पाणीधारण क्षमतेनुसार आणि पर्जन्याच्या उपलब्धतेनुसार भातासाठी योग्य पीकपद्धती बदलते. काही भागांत पावसाचे पाणी जमिनीत साठून राहिल्यामुळे पिकाच्या वाढीच्या उत्तरार्धात बाहेरील पावसाची आवश्यकता तुलनेने कमी होऊ शकते. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील भातपिकाच्या अभ्यासात वाढीच्या वेगवेगळ्या अवस्थांमध्ये पावसाचा परिणाम वेगवेगळा असल्याचे आढळले आहे.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
भातपिकाच्या सुरुवातीच्या वाढीच्या अवस्थेत पुरेसा पाऊस आवश्यक असतो. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील १९५१ ते १९८७ या कालावधीच्या अभ्यासात भाताच्या वाढीतील विविध अवस्थांमध्ये पर्जन्यमानाचा उत्पादनाशी संबंध असल्याचे आढळले. विशेषतः फुटवे येण्याच्या अवस्थेत पावसाचे महत्त्व दिसून आले, तर पुढील काही अवस्थांमध्ये जमिनीत साठलेली आर्द्रता पिकासाठी उपयुक्त ठरू शकते.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
कापणीच्या काळात मात्र पावसाचे स्वरूप वेगळ्या प्रकारे महत्त्वाचे ठरते. पीक पक्व झाल्यानंतरही पाऊस सुरू राहिल्यास शेतातील जमीन ओलसर राहते आणि कापणी, कापलेले पीक शेताबाहेर आणणे, मळणी व धान वाळवणे या कामांमध्ये अडथळे निर्माण होऊ शकतात. कोकणातील भातकापणीवरील अभ्यासात मजुरांची कमतरता आणि कापणीच्या कामातील विलंब ही समस्या नोंदविण्यात आली असून वेळेत कापणी न झाल्यास कापणीनंतरच्या कामांवरही त्याचा परिणाम होतो.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील पावसाचा कालावधी आणि त्यातील बदल यांमुळे कापणीसाठी उपलब्ध कोरड्या हवामानाच्या कालखंडाला विशेष महत्त्व प्राप्त होते. कोकण प्रदेशातील बारा ठिकाणांच्या पर्जन्यविषयक अभ्यासात वार्षिक आणि हंगामी पर्जन्यमान तसेच पावसाळी दिवसांच्या प्रवृत्तींमध्ये स्थानानुसार फरक आढळला आहे. त्यामुळे कोकणातील सर्व जिल्ह्यांसाठी कापणीची एकच निश्चित वेळ ठरविण्याऐवजी स्थानिक पर्जन्यस्थिती आणि पिकाची पक्वता यांचा एकत्रित विचार करणे आवश्यक ठरते.<ref name="Kadam2019">{{cite journal
|last=Kadam
|first=U. S.
|author2=Jedhe, S. H.
|author3=Mane, M. S.
|author4=Mahale, D. M.
|author5=Nandgude, S. B.
|title=Spatio-temporal Trends of Rainfall and Rainy Days in Konkan Region of Maharashtra
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|volume=37
|issue=1
|year=2019
|pages=25–36
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92410
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीची वेळ ही केवळ पिकाच्या पक्वतेवर अवलंबून नसून **पावसाचे आगमन व माघार, जमिनीतील ओलावा, स्थानिक जमीनप्रकार आणि कापणीच्या वेळी उपलब्ध होणारा कोरडा कालावधी** या घटकांच्या परस्परसंबंधातून ठरते. म्हणूनच पक्व भाताची कापणी योग्य हवामानाच्या कालखंडात लवकर पूर्ण करणे कोकणातील भातशेतीसाठी महत्त्वाचे ठरते.
== कोकणातील भातकापणीचे यांत्रिकीकरण ==
कोकणातील भातशेतीमध्ये कापणी आणि कापणीनंतरची कामे पारंपरिकरीत्या मोठ्या प्रमाणावर मानवी श्रमांवर अवलंबून होती. मजुरांची कमतरता, वाढता मजुरीखर्च आणि पक्व झालेल्या पिकाची वेळेत कापणी करण्याची आवश्यकता यामुळे भातकापणीच्या यांत्रिकीकरणाची गरज निर्माण झाली. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासात कापणी व मळणीच्या यांत्रिकीकरणाचा आर्थिक व्यवहार्यतेच्या दृष्टीने अभ्यास करण्यात आला आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भातकापणीसाठी स्वयंप्रचालित रीपर, रीपर-बाइंडर आणि कापणीसाठी सुधारित हातसाधने यांसारख्या पर्यायांचा अभ्यास झाला आहे. कापणीनंतरच्या प्रक्रियांसाठी पेडलवर चालणारे थ्रेशर, वायर-लूप प्रकारचे थ्रेशर, उलट्या साखळी-पट्टीवर आधारित थ्रेशर, अक्षीय प्रवाहाचे थ्रेशर तसेच हातचलित व शक्तिचलित विन्नोअर यांचा वापर विचारात घेण्यात आला आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भौगोलिक आणि आर्थिक परिस्थिती लक्षात घेऊन यंत्रांची निवड करणे महत्त्वाचे ठरते. लहान व तुकड्यात विभागलेली शेतजमीन आणि अनेक शेतकऱ्यांकडे असलेले अल्प क्षेत्र यामुळे मोठ्या यंत्रांची वैयक्तिक मालकी आर्थिकदृष्ट्या व्यवहार्य ठरत नाही. कोकणातील अभ्यासात सुमारे ०.२ हेक्टर क्षेत्र धारण करणाऱ्या बहुसंख्य शेतकऱ्यांना कापणी, मळणी आणि पाखडणीची यंत्रे स्वतः खरेदी करणे त्यांच्या आर्थिक परिस्थितीमुळे शक्य नसल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
या परिस्थितीत रीपर आणि रीपर-बाइंडर यांसारखी यंत्रे कोकणातील लहान व मध्यम शेतांसाठी तुलनेने उपयुक्त पर्याय ठरू शकतात. अभ्यासानुसार रीपर, रीपर-बाइंडर, शक्तिचलित थ्रेशर आणि विन्नोअर यांच्या विविध संयोगांमध्ये कोकणाच्या परिस्थितीत यांत्रिकीकरणाची क्षमता आढळून आली आहे. यंत्रांची कार्यक्षमता आणि प्रति हेक्टर बदलता खर्च हे त्यांच्या आर्थिक व्यवहार्यतेवर परिणाम करणारे महत्त्वाचे घटक आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भातकापणीच्या यांत्रिकीकरणात केवळ यंत्रांची उपलब्धता नव्हे, तर ती शेतकऱ्यांना परवडणाऱ्या पद्धतीने उपलब्ध करून देणे महत्त्वाचे आहे. त्यामुळे कस्टम हायरिंग सेवा आणि कृषी अवजारे बँक यांसारख्या सामायिक यंत्रवापराच्या पद्धतींचा विस्तार करण्याची शिफारस करण्यात आली आहे. अशा पद्धतींमुळे अल्पभूधारक शेतकऱ्यांना यंत्रे स्वतः खरेदी न करता आवश्यकतेनुसार त्यांचा वापर करता येतो.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील शेतकऱ्यांच्या शारीरिक श्रमभाराचाही यांत्रिकीकरणाच्या संशोधनात विचार करण्यात आला आहे. ICARच्या वार्षिक अहवालानुसार कोकणातील पुरुष कामगारांच्या शारीरिक मापदंडांचा विचार करून गवत कापणी यंत्रासोबत वापरता येणारे पॅडी हार्वेस्टर विकसित करण्यात आले. सुधारित यंत्रामुळे विद्यमान यंत्राच्या तुलनेत चालकावरील शारीरिक कामाचा भार कमी झाल्याचे परीक्षणात आढळले.<ref name="ICARAnnualReport2023">{{cite report
|author=Indian Council of Agricultural Research
|title=ICAR Annual Report 2023–24
|publisher=Indian Council of Agricultural Research
|year=2024
|url=https://icar.gov.in/sites/default/files/2025-04/ICAR%20Annual%20Report%202023-24-english.pdf
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीचे यांत्रिकीकरण हे केवळ पारंपरिक विळ्याची जागा यंत्राने घेण्यापुरते मर्यादित नसून **कापणी, बांधणी, मळणी आणि पाखडणी या संपूर्ण प्रक्रियेत श्रम व वेळ कमी करण्याचा प्रयत्न** आहे. मात्र कोकणातील लहान शेतजमिनी आणि शेतकऱ्यांची आर्थिक क्षमता लक्षात घेता मोठ्या यंत्रांच्या वैयक्तिक मालकीपेक्षा कस्टम हायरिंग व सामायिक यंत्रवापराची व्यवस्था अधिक व्यवहार्य ठरू शकते.<ref name="Bhanage2016"/>
== मजूरटंचाई, स्थलांतर आणि बदलती कापणी पद्धत ==
कोकणातील भातशेतीमध्ये कापणीच्या हंगामात उपलब्ध होणारे ग्रामीण मनुष्यबळ हा महत्त्वाचा घटक आहे. पारंपरिक भातकापणी, मळणी आणि पाखडणी या कामांसाठी मोठ्या प्रमाणावर मजुरांची आवश्यकता असल्याने मजूर उपलब्धतेतील घटकांचा थेट परिणाम कापणीच्या वेळेवर आणि उत्पादनखर्चावर होतो. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासात कृषी कामे श्रमप्रधान असून मजुरांची कमतरता निर्माण झाल्यामुळे कापणी व मळणीच्या कामात विलंब होत असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील काही ग्रामीण भागांत कृषी मजुरांचे इतर ठिकाणी रोजगारासाठी स्थलांतर होणे ही मजूर उपलब्धतेवर परिणाम करणारी बाब आहे. कोकणातील पावसावर आधारित भातशेतीवरील एका गावपातळीच्या अभ्यासात बहुतांश प्रतिसादकर्त्यांनी मजुरीचा वाढता खर्च ही अडचण असल्याचे नमूद केले असून, ग्रामीण भागातील अनेक मजूर अधिक उत्पन्नाच्या शोधात इतर ठिकाणी रोजगारासाठी स्थलांतरित होत असल्याचे नोंदविण्यात आले आहे.<ref name="TribalRiceConstraints2019">{{cite journal
|title=Constraints Faced By The Tribal Farmers In Rainfed Rice Production In Konkan Region-A Village Level Study
|journal=International Journal of Current Microbiology and Applied Sciences
|year=2019
|url=https://www.researchgate.net/publication/331587276_Constraints_Faced_By_The_Tribal_Farmers_In_Rainfed_Rice_Production_In_Konkan_Region-A_Village_Level_Study
}}</ref>
मजूरटंचाई आणि वाढता मजुरीखर्च यामुळे भातकापणीची पारंपरिक श्रमाधारित पद्धत आर्थिकदृष्ट्या अधिक खर्चिक होत गेली. कोकणातील तुकड्यात विभागलेली आणि लहान शेतजमीन लक्षात घेता मोठ्या यंत्रांचा वापर सर्वत्र शक्य नसला तरी स्वयंप्रचालित रीपर, रीपर-बाइंडर आणि मळणी यंत्रे यांसारख्या साधनांचा वापर वाढविण्याचे प्रयत्न झाले आहेत.<ref name="Shahare2012">{{cite journal
|last=Shahare
|first=P. U.
|title=Agricultural Mechanization in Konkan Region of Maharashtra
|journal=Agricultural Engineering Today
|volume=36
|issue=2
|year=2012
|pages=6–9
|url=https://indianjournals.com/article/aet-36-2-002
}}</ref>
यांत्रिकीकरणामुळे कापणीसाठी आवश्यक मानवी श्रम कमी करण्याबरोबरच कमी कालावधीत कापणी पूर्ण करण्याची शक्यता वाढते. कोकणातील भातउत्पादनावरील अलीकडील अभ्यासात पालघर आणि ठाणे जिल्ह्यांतील काही शेतकऱ्यांनी यांत्रिक कापणी यंत्रे व मळणी यंत्रे स्वीकारल्यामुळे श्रमावरील अवलंबित्व कमी झाल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Shelake2025">{{cite journal
|last=Shelake
|first=S. M.
|author2=Kshirsagar, P. J.
|author3=Torane, S. R.
|author4=Waravadekar, S. C.
|author5=More, V. G.
|title=Economic analysis for profitable paddy production in Konkan region
|journal=International Journal of Agriculture Extension and Social Development
|volume=8
|issue=10
|year=2025
|url=https://www.extensionjournal.com/archives/2025.v8.i10.I.2591
}}</ref>
मात्र कोकणातील लहान भूधारणा आणि यंत्रांच्या तुलनेने जास्त किंमतीमुळे प्रत्येक शेतकऱ्याला कापणीची यंत्रे स्वतःच्या मालकीची ठेवणे व्यवहार्य ठरत नाही. त्यामुळे कस्टम हायरिंग सेवा आणि कृषी अवजारे बँक यांसारख्या सामायिक यंत्रवापराच्या पद्धतींना महत्त्व प्राप्त झाले आहे. कोकणातील यांत्रिकीकरणाच्या अभ्यासात अशा सेवांचा विस्तार केल्यास अल्पभूधारक शेतकऱ्यांनाही यांत्रिकीकरणाचा लाभ मिळू शकतो, असे सुचविण्यात आले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
अशा प्रकारे मजूरटंचाई, ग्रामीण मनुष्यबळाचे स्थलांतर आणि वाढता मजुरीखर्च या घटकांमुळे कोकणातील भातकापणीची पारंपरिक श्रमव्यवस्था बदलत आहे. विळ्याने हाताने कापणी करण्याच्या पद्धतीबरोबरच रीपर, रीपर-बाइंडर आणि मळणी यंत्रांचा वापर वाढत असून, सामायिक यंत्रसेवा ही लहान शेतकऱ्यांसाठी महत्त्वाची पर्यायी व्यवस्था ठरत आहे.<ref name="Shahare2012"/>
== रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, रायगड, ठाणे-पालघरमधील प्रादेशिक वैशिष्ट्ये ==
कोकणातील भातशेतीची भौगोलिक व कृषी परिस्थिती जिल्ह्यानुसार काही प्रमाणात बदलते. डॉ. बाळासाहेब सावंत कोकण कृषी विद्यापीठाच्या वर्गीकरणानुसार रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग हे दक्षिण कोकण क्षेत्रात, तर रायगड, पालघर आणि ठाणे हे उत्तर कोकण क्षेत्रात येतात. या प्रदेशात किनारी, पठारी आणि डोंगराळ अशा भौगोलिक पट्ट्यांनुसार शेतीचे स्वरूप बदलते. दक्षिण कोकणात लालसर-जांभ्या प्रकारच्या आम्लधर्मी जमिनींचे प्राबल्य आहे, तर उत्तर कोकणातील काही भागांत बेसॉल्टजन्य तपकिरी ते काळ्या जमिनी आढळतात; डोंगरउतारांवर उथळ व वालुकामय तर खोऱ्यांमध्ये चिकणमातीप्रधान जमिनी आढळतात.<ref name="DBSKKVKonkanRice">{{cite web
|title=RICE PRODUCTION IN KONKAN
|publisher=Dr. Balasaheb Sawant Konkan Krishi Vidyapeeth
|url=https://archive.dbskkv.org/collection/420/document/2304
}}</ref>
रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग या दक्षिण कोकणातील जिल्ह्यांमध्ये मोठ्या प्रमाणावर पावसावर आधारित भातशेती आढळते. डोंगरउतार, खोरी आणि किनारी भाग यांनुसार शेतजमिनींचे स्वरूप बदलत असल्यामुळे भात लागवडीच्या पद्धतीतही स्थानिक फरक दिसतात. सिंधुदुर्ग जिल्ह्याची भात उत्पादकता कोकण विभागातील इतर जिल्ह्यांच्या तुलनेत अधिक असल्याची नोंद कोकणातील भात उत्पादनाच्या उपलब्ध आकडेवारीत करण्यात आली आहे.<ref name="DBSKKVKonkanRice"/>
रायगड जिल्हा भाताच्या क्षेत्रफळाच्या दृष्टीने कोकणातील महत्त्वाचा जिल्हा आहे. उपलब्ध जिल्हानिहाय आकडेवारीनुसार रायगडमध्ये भाताखालील क्षेत्र सुमारे १.२५ लाख हेक्टर आणि भात उत्पादन सुमारे ३.५१ लाख टन नोंदविण्यात आले होते. त्यामुळे कोकणातील एकूण भात उत्पादनात रायगडचा महत्त्वाचा वाटा आहे.<ref name="DBSKKVKonkanRice"/>
ठाणे आणि पालघर हे उत्तर कोकणातील जिल्हे असून येथे भातशेतीबरोबर आदिवासी व ग्रामीण भागातील पारंपरिक कृषीपद्धतींचेही महत्त्व आहे. पालघर जिल्ह्यातील वाडा आणि पालघर तालुक्यांतील भात उत्पादक गावांवर केलेल्या अभ्यासात भात हे प्रमुख खरीप पीक असल्याचे आणि शेतकरी शिफारस केलेल्या भात उत्पादन तंत्रज्ञानाचा अवलंब करीत असल्याचे आढळते.<ref name="KarangamiDhengeChavanAnarase2020">{{cite journal
|last=Karangami
|first=R. S.
|author2=Dhenge, S. A.
|author3=Chavan, P. M.
|author4=Anarase, M. S.
|title=Association of Profile Characteristics of Rice Growers and Adoption of Recommended Package of Practices
|journal=Indian Journal of Extension Education
|year=2020
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/IJEE/article/view/109198
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उपलब्ध जिल्हानिहाय आकडेवारीत ठाणे जिल्ह्याचे भाताखालील क्षेत्र, उत्पादन आणि उत्पादकता कोकणातील इतर प्रमुख भात उत्पादक जिल्ह्यांच्या तुलनेत कमी असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. त्याच वेळी उत्तर कोकणातील भातशेतीवर लहान भूधारणा, स्थानिक भौगोलिक परिस्थिती आणि उपलब्ध कृषी मनुष्यबळ यांचा प्रभाव पडतो.<ref name="DBSKKVKonkanRice"/>
भातकापणीच्या दृष्टीने या प्रादेशिक फरकांना विशेष महत्त्व आहे. रायगड, रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्गमध्ये मोठ्या प्रमाणातील भातक्षेत्रामुळे कापणीच्या काळात मोठ्या प्रमाणावर मनुष्यबळ आणि यंत्रसेवेची आवश्यकता निर्माण होते. उत्तर कोकणातील ठाणे व पालघरमध्ये लहान शेतजमिनी, ग्रामीण व आदिवासी भाग आणि बदलती कृषी श्रमव्यवस्था यांमुळे कापणीच्या पद्धतीत स्थानिक परिस्थितीनुसार बदल होत आहेत. त्यामुळे संपूर्ण कोकणासाठी भातकापणीची एकच पद्धत किंवा एकच कालमर्यादा लागू होत नाही; जिल्ह्याची भौगोलिक रचना, जमीन, पर्जन्यस्थिती, पीकवाण आणि शेताचा आकार यांनुसार कापणीचे स्वरूप बदलते.
अशा प्रकारे **रत्नागिरी-सिंधुदुर्गचा दक्षिण कोकण, रायगडचा मोठा भातक्षेत्र असलेला मध्य-उत्तर भाग आणि ठाणे-पालघरचा उत्तर कोकण** यांमध्ये भातशेतीच्या क्षेत्रफळ, उत्पादकता, जमीनप्रकार आणि कृषी-सामाजिक परिस्थितीत फरक आढळतो. हे प्रादेशिक वैविध्य भातकापणीच्या वेळा, श्रमाची गरज आणि यांत्रिकीकरणाच्या स्वीकारावरही परिणाम करणारे महत्त्वाचे घटक आहेत.
== भातकापणी आणि कोकणातील ग्रामीण जीवन व लोकसंस्कृती ==
कोकणातील भातकापणी ही केवळ कृषी उत्पादनाची प्रक्रिया नसून ग्रामीण जीवनातील सामाजिक आणि सांस्कृतिक व्यवहारांशीही संबंधित राहिली आहे. भाताचे पीक हे पावसाळी शेतीच्या वार्षिक चक्राचा महत्त्वाचा भाग असल्यामुळे पेरणीपासून कापणीपर्यंतच्या विविध टप्प्यांशी स्थानिक देवता, शेतजमीन, पाऊस, जनावरे आणि चांगल्या पीकउत्पादनाच्या अपेक्षा जोडलेल्या होत्या. कोकणातील लोकपरंपरांचे संकलन करणाऱ्या *Folk Lore Notes, Vol. II—Konkan* या ग्रंथात पेरणी आणि कापणीच्या काळाशी संबंधित विविध कृषीविधींची नोंद आढळते.<ref name="JacksonEnthoven1915">{{cite book
|last=Jackson
|first=A. M. T.
|author2=Enthoven, R. E.
|title=Folk Lore Notes, Vol. II—Konkan
|publisher=British India Press
|year=1915
|url=https://books.google.com/books/about/Folk_Lore_Notes.html?id=a4XlAAAAMAAJ
}}</ref>
कापणीच्या वेळी शेतात नवीन धान्याच्या राशीची पूजा करण्याची प्रथा कोकणातील अनेक भागांत नोंदविण्यात आली आहे. तसेच काही ठिकाणी शेतातील पहिल्या कापणीच्या दिवशी शिजवलेले अन्न तयार करून ते देवतेला नैवेद्य म्हणून अर्पण केले जात असे. या प्रथांमधून नवीन पीक हे केवळ आर्थिक उत्पादन नसून धार्मिक कृतज्ञता आणि सामुदायिक जीवनाचा भाग मानले जात असल्याचे दिसून येते.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
रत्नागिरी जिल्ह्यातील फोंडा येथे कापणीच्या वेळी शेताच्या कोपऱ्यात भात आणि दह्यापासून तयार केलेले 'शिवार' ठेवण्याची प्रथा नोंदविण्यात आली आहे. या विधीला 'चोरावा' असेही संबोधले जात असल्याचे त्या ऐतिहासिक नोंदीत नमूद आहे. अशा प्रथा शेत, पीक आणि स्थानिक धार्मिक विश्वास यांच्यातील संबंध दर्शवतात.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
कोकणातील काही भागांत कापणीच्या वेळी शेताच्या रक्षणाशी संबंधित स्थानिक देवतांना नारळ, कोंबड्या किंवा शेळ्या अर्पण करण्याच्या प्रथा नोंदविण्यात आल्या आहेत. रत्नागिरी जिल्ह्यातील काही गावांमध्ये तसेच मालवण परिसरात पेरणी आणि कापणीच्या काळात शेतरक्षक देवतांना अर्पणे केली जात असल्याचे ऐतिहासिक लोकसाहित्याच्या नोंदीत नमूद आहे. या प्रथा त्या काळातील ग्रामीण समाजाच्या कृषीविश्वासांचे दस्तऐवजीकरण करतात.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
कोलाबा जिल्ह्यातील दासगावच्या संदर्भात कापणीच्या वेळी शेतात नारळ ठेवून पहिल्या कापलेल्या भाऱ्याने त्याला काही वेळा झोडपण्याची प्रथा नोंदविण्यात आली आहे; त्यानंतर नियमित मळणी सुरू केली जात असे. अशा विधींमधून पहिल्या कापणीच्या उत्पादनाला प्रतीकात्मक महत्त्व दिले जात असल्याचे दिसते.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
या कृषीपरंपरांमुळे भातकापणीचा काळ हा ग्रामीण समाजाच्या सामूहिक जीवनाशी जोडलेला असे. शेतातील कामे, स्थानिक देवतांची पूजा, नवीन धान्याशी संबंधित विधी आणि कुटुंब व गावसमूहातील सहभाग यांमधून कृषी उत्पादन आणि लोकसंस्कृती यांचे परस्परसंबंध दिसून येतात. मात्र उपलब्ध लोकसाहित्यविषयक नोंदी मुख्यतः विसाव्या शतकाच्या प्रारंभीच्या काळातील असल्यामुळे त्यातील प्रत्येक प्रथा आजही कोकणातील सर्व भागांत प्रचलित आहे, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
भातकापणीशी संबंधित या ऐतिहासिक प्रथा कोकणातील ग्रामीण समाजात भाताला असलेले आर्थिक, सामाजिक आणि सांस्कृतिक महत्त्व स्पष्ट करतात. त्यामुळे भातकापणीचा अभ्यास करताना कापणीची तांत्रिक प्रक्रिया, ग्रामीण श्रमव्यवस्था आणि कापणीनंतरची कामे यांसोबतच त्याभोवती निर्माण झालेल्या लोकपरंपरांचाही विचार करणे आवश्यक ठरते.
== आधुनिक काळातील बदल, आव्हाने आणि भविष्यातील दिशा ==
कोकणातील भातकापणीच्या पद्धतीमध्ये आधुनिक काळात लक्षणीय बदल होत आहेत. पारंपरिक हाताने कापणी आणि श्रमप्रधान मळणीच्या पद्धतींबरोबर रीपर, रीपर-बाइंडर, विविध प्रकारची मळणी यंत्रे आणि पाखडणीची यंत्रे वापरण्याकडे कल वाढला आहे. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासानुसार मजुरांची कमतरता आणि वाढता मजुरीखर्च यामुळे वेळेत कापणी व मळणी करणे कठीण होत असून, यांत्रिकीकरण हा त्यावरील महत्त्वाचा पर्याय ठरतो.<ref name="Bhanage2016"/>
आधुनिक तंत्रज्ञानाचा स्वीकार मात्र संपूर्ण कोकणात एकसमान झालेला नाही. लहान आणि तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनी, चिखलयुक्त किंवा पाणथळ क्षेत्र, उताराची जमीन, यंत्रांची किंमत आणि त्यासाठी आवश्यक कुशल चालक यांसारख्या मर्यादा यांत्रिकीकरणाच्या प्रसारावर परिणाम करतात. कोकणातील बहुतांश अल्पभूधारक शेतकऱ्यांना कापणी, मळणी आणि पाखडणीची यंत्रे स्वतःच्या मालकीची ठेवणे आर्थिकदृष्ट्या कठीण असल्याचे अभ्यासातून दिसून आले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
अलीकडील अभ्यासांमध्ये कोकणातील जिल्ह्यांनुसार आधुनिक तंत्रज्ञान स्वीकारण्यात फरक दिसून येतो. पालघर आणि ठाणे जिल्ह्यांतील काही भात उत्पादकांनी यंत्राद्वारे रोपलागवड, हार्वेस्टर आणि थ्रेशर यांचा वापर केला आहे, तर रत्नागिरीतील काही शेतकरी अद्याप अधिक श्रमप्रधान पारंपरिक पद्धतींवर अवलंबून आहेत. सिंधुदुर्गमध्ये भाताच्या पुढील प्रक्रियेत दळण, उकडणे आणि पोहेनिर्मिती यांसारख्या मूल्यवर्धित पद्धतींचा वापर आढळतो.<ref name="Shelake2025"/>
भातकापणीसमोरील आणखी एक महत्त्वाचे आव्हान म्हणजे हवामानातील अनिश्चितता. कोकणातील भातशेती मोठ्या प्रमाणावर मोसमी पावसावर अवलंबून असल्यामुळे पावसाचा कालावधी, तीव्रता आणि कापणीच्या काळातील ओलावा यांचा कापणीच्या नियोजनावर परिणाम होतो. पक्व झालेल्या पिकाची कापणी वेळेत न झाल्यास पिकाचे नुकसान होण्याची शक्यता वाढते. त्यामुळे हवामानविषयक माहिती, पीकपक्वतेचे अचूक निरीक्षण आणि उपलब्ध यंत्रसामग्रीचे वेळेवर नियोजन यांना भविष्यात अधिक महत्त्व प्राप्त होईल.
यांत्रिकीकरणाचा लाभ लहान शेतकऱ्यांपर्यंत पोहोचविण्यासाठी कस्टम हायरिंग सेवा आणि कृषी अवजारे बँका महत्त्वाच्या ठरू शकतात. कोकणातील यांत्रिकीकरणाच्या अभ्यासाने अशा सेवांचा मोठ्या प्रमाणावर विस्तार करण्याची गरज व्यक्त केली आहे. यामुळे शेतकऱ्यांना महागडी यंत्रे स्वतः खरेदी न करता आवश्यक त्या काळात कापणी व मळणीची यंत्रसेवा घेता येऊ शकते.<ref name="Bhanage2016"/>
भविष्यातील दिशेच्या दृष्टीने केवळ कापणीचे यांत्रिकीकरण पुरेसे ठरणार नाही. कापणीपासून मळणी, वाळवण, साठवण, दळण आणि मूल्यवर्धनापर्यंत संपूर्ण साखळी अधिक कार्यक्षम करण्याची गरज आहे. २०२५ मधील कोकणावरील अभ्यासात यांत्रिकीकरण आणि भातप्रक्रियेमुळे मजुरीवरील अवलंबित्व कमी होऊन उत्पादनक्षमता, खर्च आणि बाजारमूल्याच्या दृष्टीने सुधारणा होऊ शकते, असे आढळले आहे.<ref name="Shelake2025"/>
कोकणासाठी भविष्यातील भातकापणीची यंत्रे विकसित करताना या प्रदेशाच्या विशिष्ट परिस्थितीचा विचार करणे आवश्यक आहे. लहान शेतजमीन, पाणथळ क्षेत्र, उतार, अरुंद बांध आणि उच्च पर्जन्यमान यांना अनुरूप हलकी, कमी खर्चाची आणि सहज वाहतूक करता येणारी यंत्रे अधिक उपयुक्त ठरू शकतात. त्याचबरोबर स्थानिक पातळीवर यंत्रचालकांचे प्रशिक्षण, दुरुस्ती व देखभाल सुविधा आणि कस्टम हायरिंगची उपलब्धता वाढविणे आवश्यक आहे.
अशा प्रकारे आधुनिक काळातील कोकणातील भातकापणी ही **पारंपरिक श्रमाधारित पद्धतीपासून योग्य ठिकाणी यांत्रिकीकरण, सामायिक यंत्रसेवा आणि मूल्यवर्धित प्रक्रियांकडे होणाऱ्या संक्रमणाच्या** टप्प्यात आहे. भविष्यातील दिशा ही केवळ अधिक यंत्रे उपलब्ध करून देण्याची नसून, कोकणातील लहान शेतकऱ्यांच्या आर्थिक क्षमतेला, स्थानिक भौगोलिक परिस्थितीला, हवामानाच्या अनिश्चिततेला आणि भाताच्या संपूर्ण मूल्यसाखळीला अनुरूप अशी शाश्वत व परवडणारी व्यवस्था निर्माण करण्याची आहे.
== हेही पहा ==
* [[कोकण]]
* [[भात]]
== बाह्य दुवे ==
* [https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/ Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research — ICAR]
* [https://www.dbskkv.org/ डॉ. बाळासाहेब सावंत कोकण कृषी विद्यापीठ]
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:कोकण]]
[[वर्ग:महाराष्ट्रातील शेती]]
[[वर्ग:भात]]
[[वर्ग:महाराष्ट्रातील कृषी]]
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2026-09-15T20:46:08Z
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wikitext
text/x-wiki
कोकणातील भात शेती ही प्रदेशाच्या कृषी आणि ग्रामीण जीवनाचा महत्त्वाचा भाग आहे. कोकणातील भातपिकाची लागवड प्रामुख्याने पावसावर अवलंबून असून, भाताची कापणी हा पिकाच्या उत्पादनचक्रातील अत्यंत महत्त्वाचा टप्पा आहे. या प्रदेशातील भौगोलिक परिस्थिती, अतिवृष्टी, लहान व तुकड्यात विभागलेली शेती, उताराची किंवा पायरीदार जमीन आणि कापणीच्या काळातील मजुरांची उपलब्धता या घटकांचा भातकापणीच्या पद्धतीवर परिणाम होतो.<ref name="Bhanage2016">{{cite journal
|last=Bhanage
|first=G. B.
|author2=P. U. Shahare
|author3=P. S. Deshmukh
|author4=P. B. Gaikwad
|author5=V. V. Aware
|title=Mechanization in Harvesting and Post-Harvest Operation for Paddy in Konkan Region and Its Economic Feasibility
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|volume=34
|issue=2
|year=2016
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92862
}}</ref>
परंपरेने कोकणातील भाताची कापणी मानवी श्रमांवर आधारित राहिली असून विळा किंवा तत्सम साधनांनी भात कापणे, कापलेले भाताचे पुंजके एकत्र करणे, त्यानंतर मळणी व धान वेगळे करणे अशा सलग प्रक्रियेतून कापणीचे काम केले जात असे. कापणी व कापणीनंतरच्या प्रक्रियांमध्ये मोठ्या प्रमाणावर श्रम लागत असल्याने मजुरांची कमतरता आणि वाढता मजुरीखर्च हे कोकणातील भातशेतीसमोरील महत्त्वाचे प्रश्न ठरले आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील शेतीच्या विशिष्ट परिस्थितीमुळे भातकापणीच्या यांत्रिकीकरणालाही स्वतंत्र स्वरूप प्राप्त झाले आहे. लहान व विखुरलेली शेतजमीन, उताराची व पायरीदार शेती आणि मोठ्या प्रमाणातील पाऊस या मर्यादा लक्षात घेऊन भात कापणीसाठी लहान व तुलनेने हलकी यंत्रे विकसित करण्याचे प्रयत्न झाले आहेत.<ref name="Bhanage2017">{{cite journal
|last=Bhanage
|first=Girishkumar Balasaheb
|author2=P. U. Shahare
|author3=V. V. Aware
|author4=K. G. Dhande
|author5=P. S. Deshmukh
|title=Development of stripper harvester for paddy
|journal=Journal of Applied and Natural Science
|volume=9
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|year=2017
|pages=1943–1948
|url=https://journals.ansfoundation.org/index.php/jans/article/view/1469
}}</ref>
या पार्श्वभूमीवर कोकणातील भात शेती कापणीचा अभ्यास हा केवळ भात कापण्याच्या तंत्राचा अभ्यास न राहता, पाऊस व जमीन, पिकाची पक्वता, पारंपरिक श्रमव्यवस्था, कापणीची साधने, मळणी व धान साठवण, यांत्रिकीकरण, मजूरटंचाई आणि ग्रामीण लोकजीवन यांचा परस्परसंबंध समजून घेण्याचा विषय ठरतो.
== कोकणातील भातशेतीची भौगोलिक व कृषी पार्श्वभूमी ==
कोकण हा महाराष्ट्राच्या पश्चिम किनारपट्टीवरील अरबी समुद्रालगतचा प्रदेश असून, त्याची भौगोलिक रचना डोंगराळ, खाचखळग्यांची आणि काही ठिकाणी सखल स्वरूपाची आहे. महाराष्ट्रातील कोकण विभागातील भात उत्पादनाच्या संदर्भात ठाणे, पालघर, रायगड, रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग हे प्रमुख जिल्हे विचारात घेतले जातात. या प्रदेशात उष्ण व दमट हवामान आणि मोठ्या प्रमाणातील नैऋत्य मोसमी पाऊस ही भातशेतीस अनुकूल वैशिष्ट्ये आहेत.<ref name="BiswasPhadtare1995">{{cite journal
|last=Biswas
|first=B. C.
|author2=R. D. Phadtare
|title=Cropping pattern of Konkan region on the basis of probabilistic rainfall and soil characteristics
|journal=MAUSAM
|volume=46
|issue=2
|year=1995
|pages=133–140
|url=https://mausamjournal.imd.gov.in/index.php/MAUSAM/article/view/3218
}}</ref>
कोकणातील भातशेती मोठ्या प्रमाणावर पावसावर अवलंबून आहे. अतिवृष्टी आणि सखल भौगोलिक परिस्थितीमुळे खरीप हंगामात भात हे अनेक भागांतील प्रमुख पीक ठरते. अखिल भारतीय समन्वित भात सुधारणा प्रकल्पाच्या उत्पादनाभिमुख सर्वेक्षणानुसार कोकणातील भात उत्पादक पट्ट्यात खरीप हंगामात भाताचे क्षेत्र मोठ्या प्रमाणावर असून, जास्त पावसामुळे काही भागांत खरीप हंगामात भाताव्यतिरिक्त इतर पिकांची लागवड करणे मर्यादित होते.<ref name="AICRIP2019">{{cite report
|author=All India Coordinated Rice Improvement Project
|title=Production Oriented Survey 2019
|publisher=Indian Institute of Rice Research
|url=https://icar-iirr.org/AICRIP/Final%20POS%202019-2020.pdf
}}</ref>
कोकणातील पर्जन्यमानाचा भातपिकाच्या वाढीवर आणि उत्पादनावर थेट परिणाम होतो. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील दीर्घकालीन पर्जन्यविषयक आकडेवारीच्या अभ्यासातून भातपिकाच्या वाढीच्या विविध अवस्थांमध्ये पावसाचे महत्त्व स्पष्ट झाले आहे. त्यामुळे कोकणातील भातशेतीची लागवड, वाढ आणि पक्वता यांचे वेळापत्रक स्थानिक पर्जन्यमानाशी घनिष्ठपणे संबंधित असते.<ref name="ChowdhuryDas1993">{{cite journal
|last=Chowdhury
|first=A.
|author2=H. P. Das
|title=Effect of rainfall on growth and yield of rice in Konkan coast
|journal=MAUSAM
|volume=44
|issue=2
|year=1993
|pages=143–146
|url=https://mausamjournal.imd.gov.in/index.php/MAUSAM/article/view/3811
}}</ref>
कोकणातील कृषी रचनेचे आणखी एक वैशिष्ट्य म्हणजे लहान व तुकड्यात विभागलेली शेतजमीन. अशा जमिनी, डोंगराळ किंवा उताराची भौगोलिक रचना आणि मर्यादित सिंचनसुविधा यांमुळे भातशेतीच्या उत्पादनपद्धतीवर तसेच शेतीच्या यांत्रिकीकरणावर परिणाम होतो. कोकणातील भात उत्पादक शेतकऱ्यांच्या अभ्यासात लहान व विखुरलेली जमीन, मजुरीचा वाढता खर्च आणि उत्पादन तंत्रज्ञान स्वीकारण्यातील अडचणी या महत्त्वाच्या मर्यादा असल्याचे आढळते.<ref name="HileDarekarDatrkar2015">{{cite journal
|last=Hile
|first=R. B.
|author2=A. S. Darekar
|author3=S. B. Datrkar
|title=Adoption assessment of production technology for paddy cultivation in Konkan region of Maharashtra
|journal=Indian Journal of Economics and Development
|volume=11
|issue=1
|year=2015
|pages=217–225
|url=https://indianjournals.com/article/ijed1-11-1-023
}}</ref>
या भौगोलिक आणि कृषी परिस्थितीचा परिणाम भाताच्या कापणीवरही होतो. पिकाच्या पक्वतेच्या काळात उशिरा किंवा अतिवृष्टी झाल्यास कापणीच्या कामात विलंब होऊन पिकाचे नुकसान होऊ शकते. कोकणातील भातपिकाच्या उत्पादनाभिमुख सर्वेक्षणात पक्वता आणि कापणीच्या अवस्थेत झालेल्या उशिराच्या व जोरदार पावसामुळे काही भागांत उत्पादनहानी झाल्याची नोंद आहे.<ref name="AICRIP2019"/>
== कोकणातील भातपिकाचे हंगामी चक्र ==
कोकणातील भातपीक हे प्रामुख्याने खरीप हंगामातील पीक असून त्याचे हंगामी चक्र नैऋत्य मोसमी पावसाच्या आगमनाशी आणि उपलब्ध पाण्याशी जवळून संबंधित आहे. कोकणातील भातपिकाच्या अभ्यासात पेरणीची वेळ, वाणांची निवड आणि पिकाची वाढ यांचा पर्जन्यमान व स्थानिक हवामानाशी संबंध असल्याचे दिसून येते. कोकणातील काही प्रमुख भातवाणांसाठी जूनच्या सुरुवातीच्या काळातील पेरणी अनुकूल ठरू शकते, असे स्थानिक कृषी संशोधनातून दिसून आले आहे.<ref name="Jagtap2016">{{cite journal
|last=Jagtap
|first=D. N.
|author2=V. G. Chavan
|author3=U. V. Mahadkar
|author4=S. A. Chavan
|title=Effect of Sowing Times on the Yield and Yield Attributes of Rice (Oryza sativa L.) Varieties
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|volume=34
|issue=2
|year=2016
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92857
}}</ref>
पावसाळ्याच्या प्रारंभी भातासाठी रोपवाटिका तयार करणे, बियाणे पेरणे आणि मुख्य शेताची मशागत करणे ही कामे सुरू होतात. त्यानंतर योग्य वयाची रोपे मुख्य शेतात लावली जातात. कोकणातील खरीप भाताच्या विविध वाणांवर केलेल्या प्रयोगांमध्ये पेरणीच्या वेळेचा वाढ, उत्पादन आणि आर्थिक परताव्यावर परिणाम होत असल्याचे आढळले आहे.<ref name="Jagtap2016"/>
रोपांची पुनर्लागवड झाल्यानंतर पावसाळ्यात भातपिकाची वाढ, फुटवे येणे, कणसांची निर्मिती आणि दाणे भरणे या अवस्था क्रमाने पूर्ण होतात. या काळात पर्जन्यमानातील चढ-उतार आणि पावसाचे दिवस यांचा पिकाच्या वाढीवर परिणाम होऊ शकतो. कोकण प्रदेशातील पर्जन्यमानाच्या दीर्घकालीन अभ्यासात मे ते नोव्हेंबर या कालावधीत पर्जन्य व पावसाळी दिवसांच्या स्वरूपात बदल आढळल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="KonkanRainfall2019">{{cite journal
|title=Spatio-temporal Trends of Rainfall and Rainy Days in Konkan Region of Maharashtra
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|year=2019
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92410
}}</ref>
पिकाची पक्वता जवळ आल्यानंतर भातकापणीचा टप्पा सुरू होतो. कोकणातील भातशेतीत कापणीची वेळ व पद्धत ही वाणाचा कालावधी, पेरणीची वेळ, स्थानिक हवामान आणि त्या वर्षीच्या पावसाच्या स्वरूपानुसार बदलू शकते. त्यामुळे संपूर्ण कोकणासाठी कापणीची एकच निश्चित तारीख ठरविता येत नाही. कापणी, मळणी आणि धान वाळवणे या कापणीनंतरच्या प्रक्रिया भातपिकाच्या हंगामी चक्राचा अविभाज्य भाग आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
अशा प्रकारे कोकणातील भातपिकाचे हंगामी चक्र साधारणपणे **पावसाळ्याच्या प्रारंभी रोपवाटिका व पेरणी → मुख्य शेताची मशागत व पुनर्लागवड → पावसाळ्यात पिकाची वाढ → दाणे भरणे व पक्वता → भातकापणी → मळणी, धान वेगळे करणे व वाळवणे** अशा क्रमाने पुढे जाते. या संपूर्ण चक्रावर कोकणातील पर्जन्यमान, स्थानिक जमीन, वाण आणि शेतीतील उपलब्ध श्रम यांचा प्रभाव असतो.
== भात कापणीची वेळ आणि पक्वतेची चिन्हे ==
कोकणातील भातपिकाची कापणी प्रामुख्याने खरीप हंगामाच्या अखेरीस केली जाते. कापणीची नेमकी वेळ भाताच्या वाणाचा कालावधी, लागवडीची वेळ, स्थानिक हवामान आणि त्या वर्षीच्या पावसाच्या स्वरूपानुसार बदलते. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील १९५१ ते १९८७ या कालावधीतील आकडेवारीच्या अभ्यासानुसार कोकणात भाताची लागवड साधारणपणे जूनमध्ये होते आणि पिकाचा सक्रिय वाढीचा कालावधी सुमारे ९० दिवसांचा असतो. या अभ्यासात शारीरिक पक्वता प्राप्त झाल्यानंतर काही दिवसांनी, साधारण ऑक्टोबरच्या सुरुवातीस, भाताची कापणी केली जात असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
भातपिकाची कापणी योग्य वेळी करणे महत्त्वाचे असते. पीक पूर्णपणे पक्व होण्यापूर्वी कापणी केल्यास दाणे अपक्व राहण्याची शक्यता असते, तर कापणीस अनावश्यक विलंब झाल्यास दाणे गळणे, कणसे वाकणे किंवा पिकाचे नुकसान होण्याचा धोका वाढतो. त्यामुळे शेतातील पिकाची प्रत्यक्ष पक्वता पाहून कापणीचा निर्णय घेतला जातो.<ref name="ICARHarvest2025">{{cite report
|author=Indian Council of Agricultural Research
|title=Kharif Agro-Advisories for Farmers 2025
|publisher=Indian Council of Agricultural Research
|url=https://icar.gov.in/sites/default/files/Circulars/ICAR-En-Kharif-Agro-Advisories-for-Farmers-2025.pdf
}}</ref>
भातपिकाच्या पक्वतेची प्रमुख बाह्य चिन्हे म्हणजे कणसांवरील बहुतांश दाण्यांचा हिरव्या रंगातून पिवळसर किंवा सोनेरी रंगाकडे झालेला बदल आणि दाणे कडक होणे. ICARच्या कृषी मार्गदर्शनानुसार कणसांवरील सुमारे ८०–८५ टक्के दाणे सोनेरी-पिवळे व कडक झाल्यावर भात कापणीस योग्य मानला जातो. या अवस्थेत कापणी केल्यास कापणीतील विलंबामुळे होणारे दाणे गळणे आणि पीक लोळण्याचे नुकसान कमी करण्यास मदत होते.<ref name="ICARHarvest2025"/>
कोकणातील भातशेती पूर्णपणे किंवा मोठ्या प्रमाणावर पावसाच्या लहरीवर अवलंबून असल्याने कापणीची वेळ निश्चित करताना पावसाची स्थितीही महत्त्वाची ठरते. पक्वतेच्या कालावधीत उशिरा होणारा किंवा जोरदार पाऊस कापणीला अडथळा आणू शकतो. त्यामुळे पीक कापणीस योग्य झालेले असताना उपलब्ध कोरड्या हवामानाचा कालावधी साधून कापणी करणे आवश्यक ठरते. कोकणातील पर्जन्यमान आणि भातपिकाच्या वाढीवरील अभ्यासात पावसाच्या विविध वाढीच्या अवस्थांशी भाताच्या उत्पादनाचा संबंध असल्याचे आढळले आहे.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
कापणीपूर्वी शेतातील पिकाची अवस्था, कणसांचा रंग, दाण्यांची कडकपणा आणि हवामानाचा अंदाज यांचा विचार केला जातो. अशा प्रकारे **कणसांवरील बहुतांश दाणे सोनेरी-पिवळे होणे, दाणे कडक होणे आणि पीक शारीरिक पक्वतेला पोहोचणे** ही भात कापणीची प्रमुख चिन्हे मानली जातात. कोकणाच्या परिस्थितीत या पक्वतेनंतर अनावश्यक विलंब न करता योग्य हवामानात कापणी करणे महत्त्वाचे ठरते.
== कोकणातील पारंपरिक भातकापणी ==
कोकणातील पारंपरिक भातकापणी ही प्रामुख्याने मानवी श्रमांवर आधारित प्रक्रिया होती. भाताचे पीक कापणीस योग्य झाल्यानंतर शेतकरी आणि शेतमजूर हातातील विळ्याच्या साहाय्याने भाताची रोपे कापत. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासानुसार भात उत्पादनातील कापणी आणि कापणीनंतरची कामे पारंपरिक पद्धतीने मोठ्या प्रमाणावर हाताने केली जात असून त्यासाठी मोठ्या प्रमाणात श्रमांची आवश्यकता असते.<ref name="Bhanage2016"/>
कापणी करताना शेतातील पक्व भाताची कणसे आणि पेंढा विळ्याने कापून त्याचे पुंजके किंवा भारे तयार केले जात. कापलेला भात काही काळ शेतात किंवा योग्य जागी वाळवून पुढील मळणीसाठी नेला जात असे. अशा प्रकारे कापणी, पुंजके बांधणे, वाळवणे आणि त्यानंतर मळणी करणे ही कामे परस्परांशी जोडलेली होती.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक पद्धतीत कापणीचे काम श्रमप्रधान असल्यामुळे कापणीचा कालावधी हा उपलब्ध मजुरांच्या संख्येवरही अवलंबून असे. कोकणातील भातशेतीत लहान व तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनी, भौगोलिक परिस्थिती आणि कापणीच्या काळातील मोठ्या मनुष्यबळाची गरज यांमुळे पारंपरिक कापणी पद्धतीला विशेष महत्त्व होते. अभ्यासात कोकणातील अनेक शेतकरी अल्पभूधारक असल्यामुळे कापणी, मळणी आणि धान वाऱ्यावर पाखडणे यासाठी यंत्रसामग्री स्वतः खरेदी करणे आर्थिकदृष्ट्या कठीण असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक भातकापणी ही केवळ कृषी कामाची प्रक्रिया नसून ग्रामीण श्रमव्यवस्थेचा भाग होती. कापणीच्या हंगामात कुटुंबातील सदस्य, शेतमजूर आणि स्थानिक पातळीवरील उपलब्ध मनुष्यबळ यांच्या सहभागातून कापणीची कामे पूर्ण केली जात. त्यामुळे भातकापणीच्या काळात शेतातील सामूहिक श्रमाला विशेष महत्त्व प्राप्त होत असे.
कापणीनंतर भाताच्या कणसांमधून धान वेगळे करण्यासाठी पारंपरिक मळणी केली जात असे. पारंपरिक पद्धतींमध्ये जनावरांच्या पायाने तुडवणे किंवा इतर श्रमाधारित पद्धतींचा वापर केला जात असे; नंतर धान व पेंढा वेगळे करण्यासाठी वाऱ्याच्या साहाय्याने पाखडण्याची प्रक्रिया केली जाई. या कापणीनंतरच्या पद्धतींमध्ये अधिक वेळ आणि मानवी श्रम लागत असल्याने पुढील काळात यांत्रिक मळणी व पाखडणीची साधने वापरात आली.<ref name="ICARTraditionalThreshing">{{cite journal
|title=Mechanization in Rice Cultivation
|journal=Indian Farming
|volume=71
|issue=4
|year=2021
|pages=3–6
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/IndFarm/article/download/114370/44585/298367
}}</ref>
पारंपरिक भातकापणीची ही पद्धत कोकणातील पावसावर आधारित शेती, लहान शेतजमिनी आणि ग्रामीण श्रमव्यवस्थेशी जुळलेली होती. मात्र मजुरांची उपलब्धता कमी होणे, मजुरीचा वाढता खर्च आणि वेळेत कापणी करण्याची गरज यांमुळे पुढील काळात विळ्याबरोबरच रीपर, रीपर-बाइंडर आणि इतर यांत्रिक साधनांचा वापर वाढू लागला.<ref name="Bhanage2016"/>
== कापणीसाठी वापरली जाणारी पारंपरिक साधने ==
कोकणातील पारंपरिक भातकापणीमध्ये विळा हे प्रमुख हातसाधन राहिले आहे. पक्व भातपीक कापण्यासाठी शेतकरी आणि शेतमजूर विळ्याचा वापर करत. भाताची कापणी प्रामुख्याने मनुष्यबळाद्वारे विळ्याने केली जात असल्याचे कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासात नमूद करण्यात आले आहे. कापणीच्या कामात मोठ्या प्रमाणावर मानवी श्रम लागत असल्याने विळ्याचा वापर हा पारंपरिक भातकापणी पद्धतीचा महत्त्वाचा भाग होता.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक विळ्याच्या वापरात शेतकरी भाताची काडे हाताने धरून विळ्याने कापत असे. कापणीचे काम प्रामुख्याने वाकून करावे लागत असल्यामुळे त्यात शारीरिक श्रम मोठ्या प्रमाणात होत. भातकापणीतील हा श्रमभार कमी करण्यासाठी पुढे दातेरी विळ्यांसारख्या सुधारित हातसाधनांचा विकास करण्यात आला.<ref name="AgrowonHarvestTools">{{cite web
|title=भात पीक कापणीची साधने
|website=अॅग्रोवन
|date=23 October 2024
|url=https://agrowon.esakal.com/techno-wan/tools-for-rice-crop-harvesting-article-on-agrowon
}}</ref>
कोकणातील भातशेतीच्या संदर्भात डॉ. बाळासाहेब सावंत कोकण कृषी विद्यापीठाने विकसित केलेला ‘वैभव विळा’ हा पारंपरिक विळ्याच्या कार्यपद्धतीवर आधारित सुधारित दातेरी विळा आहे. या विळ्याच्या साहाय्याने भाताची कापणी जमिनीलगत करता येते. दातेरी पाते असल्यामुळे कापणीसाठी तुलनेने कमी ताकद लागते आणि साधनाचे वजनही कमी ठेवण्यात आले आहे.<ref name="AgrowonHarvestTools"/>
कोकण विभागासाठीच्या कृषी सल्ल्यामध्ये तयार भातपिकाची कापणी सकाळच्या वेळी जमिनीलगत ‘वैभव’ विळ्याने करण्याची शिफारस करण्यात आली आहे. कापणीनंतर कापलेला भात शेतात अनावश्यक वेळ न ठेवता पुढील मळणीसाठी हलविण्याचाही सल्ला देण्यात आला आहे.<ref name="BSKKVHarvestAdvice">{{cite web
|title=Crop Advisory : कृषी सल्ला : कोकण विभाग
|website=अॅग्रोवन
|url=https://agrowon.esakal.com/agro-special/special-agricultural-advisory-for-crops-of-konkan-division
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील पारंपरिक भातकापणीची प्रमुख ओळख **हाताने वापरल्या जाणाऱ्या विळ्याशी** जोडलेली आहे. कालांतराने पारंपरिक विळ्याच्या कार्यक्षमतेत सुधारणा करण्यासाठी दातेरी विळे विकसित झाले आणि त्यानंतर रीपर, रीपर-बाइंडर यांसारख्या यांत्रिक साधनांचा वापर सुरू झाला. त्यामुळे विळ्यापासून यांत्रिक कापणीपर्यंत झालेला बदल हा कोकणातील भातकापणीच्या तंत्रज्ञानातील महत्त्वाचा टप्पा मानता येतो.<ref name="Bhanage2016"/>
== कापणीतील ग्रामीण श्रम आणि सामुदायिक सहभाग ==
कोकणातील पारंपरिक भातकापणी ही मोठ्या प्रमाणावर मानवी श्रमांवर आधारित होती. भाताची कापणी, कापलेला भात एकत्र करणे, मळणी, धान वेगळे करणे आणि वाळवणे या कापणीनंतरच्या प्रक्रियांमध्येही मनुष्यबळाची आवश्यकता असे. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासानुसार कापणी व कापणीनंतरची कामे श्रमप्रधान असल्यामुळे या प्रक्रियांचा एकूण उत्पादनखर्च आणि काम पूर्ण करण्यासाठी लागणारा वेळ यांवर मनुष्यबळाची उपलब्धता परिणाम करते.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक पद्धतीत भातकापणीचे काम कुटुंबातील सदस्य तसेच स्थानिक शेतमजुरांच्या सहभागातून केले जात असे. कापणीच्या हंगामात कमी कालावधीत मोठ्या क्षेत्रातील पीक कापून घेणे आवश्यक असल्याने उपलब्ध मनुष्यबळाचे नियोजन महत्त्वाचे ठरत असे. कोकणातील लहान आणि तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनींमध्ये यांत्रिक कापणीची साधने वापरण्यावरही भौगोलिक आणि आर्थिक मर्यादा येत असल्याने मानवी श्रमांना पारंपरिक शेतीपद्धतीत विशेष महत्त्व होते.<ref name="Bhanage2016"/>
भातकापणीशी संबंधित कामे केवळ कापणीपुरती मर्यादित नसून त्यानंतरची मळणी, धान व पेंढा वेगळे करणे आणि धान वाळवणे अशा टप्प्यांपर्यंत चालत. या सर्व कामांमध्ये अनेक व्यक्तींचा सहभाग आवश्यक असल्याने कापणीचा काळ हा ग्रामीण पातळीवरील श्रमविनिमय आणि परस्पर सहकार्याशी जोडलेला असे. तथापि, अशा पारंपरिक सामुदायिक प्रथांचे स्वरूप गावागावानुसार वेगवेगळे असल्याने त्याबाबत सर्व कोकणाला लागू होईल असा एकसमान निष्कर्ष काढता येत नाही.
कापणीच्या कामासाठी मोठ्या प्रमाणावर मजूर लागणे ही कोकणातील भातशेतीची महत्त्वाची अडचण ठरली आहे. मजुरांची कमतरता आणि वाढती मजुरी यामुळे वेळेत कापणी करणे शेतकऱ्यांसाठी अधिक खर्चिक झाले आहे. या परिस्थितीमुळे भातकापणीतील श्रमभार कमी करण्यासाठी रीपर, रीपर-बाइंडर आणि इतर कापणी यंत्रांचा वापर करण्याची आवश्यकता निर्माण झाली.<ref name="Bhanage2016"/>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीमध्ये ग्रामीण श्रम, कुटुंबीय सहभाग आणि स्थानिक पातळीवरील परस्पर सहकार्य यांना पारंपरिक काळात महत्त्वाचे स्थान होते. मात्र मजूरटंचाई, वाढता मजुरीखर्च आणि कापणी वेळेत पूर्ण करण्याची गरज यांमुळे या श्रमाधारित व्यवस्थेत बदल होत असून यांत्रिकीकरणाकडे कल वाढत आहे.
== कापणीनंतरची मळणी आणि धान वेगळे करणे ==
भाताची कापणी झाल्यानंतर कापलेले पीक मळणीसाठी नेले जाते. मळणीच्या प्रक्रियेत भाताच्या कणसांपासून धान वेगळे केले जाते. पारंपरिक पद्धतीत ही प्रक्रिया मानवी श्रमांवर आधारित होती. कापणी, मळणी आणि त्यानंतर धान व पेंढा वेगळे करण्याच्या कामांसाठी मोठ्या प्रमाणावर मनुष्यबळ लागत असल्याने कोकणातील भातशेतीतील कापणीनंतरची कामे श्रमप्रधान राहिली आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक मळणीनंतर धानामध्ये पेंढा, कणसांचे तुकडे, भुसा आणि इतर हलका कचरा मिसळलेला असतो. त्यातून स्वच्छ धान वेगळे करण्यासाठी पाखडणी केली जाते. नैसर्गिक वाऱ्याच्या साहाय्याने किंवा हाताने चालविलेल्या पाखडणीच्या साधनांनी हलका पेंढा व भुसा बाजूला केला जातो आणि तुलनेने जड धान खाली साचते. अशा प्रकारे मळणी आणि पाखडणी या एकमेकांशी संबंधित असल्या तरी धान स्वच्छ करण्याच्या स्वतंत्र प्रक्रिया आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भातशेतीच्या यांत्रिकीकरणाच्या अभ्यासात मळणीसाठी पेडलवर चालणारे थ्रेशर, वायर-लूप प्रकारचे थ्रेशर, उलट्या साखळी-पट्टीवर आधारित थ्रेशर आणि अक्षीय प्रवाहाचे थ्रेशर यांसारख्या साधनांचा अभ्यास करण्यात आला. धान वेगळे केल्यानंतर पाखडणीसाठी हाताने चालविलेले तसेच शक्तिचलित विन्नोअर वापरण्याच्या पद्धतींचाही विचार करण्यात आला.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील लहान व तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनी आणि शेतकऱ्यांची मर्यादित आर्थिक क्षमता यांमुळे मोठ्या क्षमतेची यंत्रे सर्व शेतकऱ्यांना स्वतःच्या मालकीची ठेवणे शक्य होत नाही. त्यामुळे मळणी व पाखडणीच्या यांत्रिकीकरणासाठी सामायिक वापर, यंत्रसेवा किंवा कस्टम हायरिंग यांसारख्या पद्धती उपयुक्त ठरू शकतात.<ref name="Bhanage2016"/>
मळणी आणि पाखडणीच्या कामात मजुरांची कमतरता निर्माण झाल्यास कापणीनंतरचे काम वेळेत पूर्ण होण्यास विलंब होऊ शकतो. कोकणातील अभ्यासात मजुरांची कमतरता आणि वाढता मजुरीखर्च यामुळे कापणी व मळणीच्या कामांमध्ये विलंब होत असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. त्यामुळे कापणीनंतरच्या प्रक्रियांमध्ये यांत्रिकीकरणाला महत्त्व प्राप्त झाले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
== धान वाळवणे, साठवण आणि घरगुती प्रक्रिया ==
भातकापणी आणि मळणीनंतर मिळालेले धान साठवण्यापूर्वी योग्य प्रकारे वाळवणे आवश्यक असते. कोकणातील रायगड जिल्ह्यातील १२० शेतकरी महिलांच्या अभ्यासात मळणीच्या जागेवर धान्याची योग्य प्रकारे स्वच्छता व वाळवण करणे आणि उन्हात वाळवणे या पद्धती मोठ्या प्रमाणावर वापरल्या जात असल्याचे आढळले. अभ्यासातील ९३.३३ टक्के महिलांनी धान्याचे योग्य वाळवण व स्वच्छता तसेच उन्हात वाळवणाची पद्धत अवलंबल्याचे नोंदविण्यात आले आहे.<ref name="ChavanMehtaKale2013">{{cite journal
|last=Chavan
|first=K. M.
|author2=Mehta, P. G.
|author3=Kale, R. A.
|title=Food grain storage practices followed by the farm women
|journal=International Journal of Processing and Post Harvest Technology
|volume=4
|issue=2
|year=2013
|pages=83–85
|url=https://researchjournal.co.in/online/IJPPHT/IJPPHT%204%282%29/4_83-85_A.pdf
}}</ref>
कोकणातील पारंपरिक साठवण पद्धतींमध्ये धान घरातील स्थानिक साधनसामग्रीपासून तयार केलेल्या संरचनांमध्ये ठेवले जात असे. कोकणातील धानसाठवण संरचनांच्या अभ्यासात *कणंज किंवा साठी, मुडी, कंगे, मटक्या, ताटी आणि हाडपा* यांसारख्या पारंपरिक संरचनांचा उल्लेख करण्यात आला आहे. या संरचनांमध्ये शेतकरी घरातच धान साठवत असल्याचे अभ्यासात नमूद केले आहे.<ref name="KadKhandetodNimbalkarJadhav2016">{{cite journal
|last=Kad
|first=V. P.
|author2=Khandetod, Y. P.
|author3=Nimbalkar, C. A.
|author4=Jadhav, M. S.
|title=Design and Development of Paddy Storage Structure for Konkan Region
|journal=IMPACT: International Journal of Research in Engineering & Technology
|volume=4
|issue=5
|year=2016
|pages=25–34
|url=https://www.impactjournals.us/download/archives/2-77-1462972101-3.%20IJRET%20eng-DESIGN%20AND%20DEVELOPMENT%20OF%20PADDY%20STORAGE%20STRUCTURE%20FOR%20KONKAN%20REGION.pdf
}}</ref>
पारंपरिक साठवणुकीमध्ये किडी, बुरशी आणि उंदरांमुळे धान्याचे नुकसान होण्याची शक्यता होती. रायगड जिल्ह्यातील अभ्यासात धान्य साठवताना गोणपाटाच्या पोत्यांचा वापर ८७.५० टक्के महिलांनी केला असल्याचे आढळले. तसेच साठवलेल्या धान्याला किडींपासून संरक्षण देण्यासाठी ९३.३३ टक्के महिलांनी कडुनिंबाच्या पानांचा वापर केला होता. याउलट सिलो, पूसा बिन किंवा किसान कोठी यांसारख्या सुधारित साठवण संरचनांचा वापर अभ्यासातील प्रतिसादकर्त्यांमध्ये आढळला नाही.<ref name="ChavanMehtaKale2013"/>
कोकणातील दमट हवामानामुळे धान साठवताना आर्द्रता नियंत्रणाला विशेष महत्त्व आहे. कोकणातील दमट हवामानात धानाच्या साठवणीवर केलेल्या अभ्यासात साठवण कालावधी वाढत असताना धानाच्या काही भौतिक व गुणवत्ताविषयक गुणधर्मांमध्ये बदल होत असल्याचे आढळले. साठवणीच्या कालावधीत कीड प्रादुर्भाव वाढणे आणि धानातील आर्द्रतेत बदल होणे यांसारखे परिणाम नोंदविण्यात आले आहेत.<ref name="ThakorPatilSawant2012">{{cite journal
|last=Thakor
|first=N. J.
|author2=Patil, S. C.
|author3=Sawant, A. A.
|author4=Sawant, S. D.
|title=Influence of Storage Period on Physical Properties and Quality of Paddy Stored in GIC Silo and Bag Storage under Humid Konkan Climatic Conditions
|journal=Journal of Agricultural Engineering
|volume=49
|issue=1
|year=2012
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JAE/article/view/21870
}}</ref>
धानाचे घरगुती उपयोगासाठी रूपांतर करण्याच्या प्रक्रियेत साली काढणे, तांदूळ तयार करणे आणि त्यापासून विविध पदार्थ बनवणे अशा प्रक्रिया येतात. उत्तर कोकणातील पाडळ प्रक्रिया उद्योगांवरील अभ्यासातून धान प्रक्रियेमधून तांदळाबरोबर तांदळाची कोंडा, तूस आणि तुटलेला तांदूळ यांसारखी उपउत्पादनेही मिळतात, असे दिसून येते. या प्रक्रियेमुळे कच्च्या धानाचे खाद्य तांदळात रूपांतर होते आणि त्याला अतिरिक्त मूल्य प्राप्त होते.<ref name="ChakranarayanToraneBachhaoNikam2024">{{cite journal
|last=Chakranarayan
|first=Ankita
|author2=Torane, Sanjaykumar
|author3=Bachhao, Kiran
|author4=Nikam, Yogesh
|title=Economic Analysis of Value Addition in Paddy Processing in North Konkan Region of Maharashtra, India
|journal=Acta Scientific Agriculture
|volume=8
|issue=10
|year=2024
|pages=11–16
|url=https://actascientific.com/ASAG/ASAG-08-1411.php
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीनंतरची प्रक्रिया ही **धान स्वच्छ करणे → उन्हात वाळवणे → सुरक्षित साठवण → आवश्यकतेनुसार धानाची प्रक्रिया करून तांदूळ तयार करणे** या क्रमाने पुढे जाते. पारंपरिक घरगुती साठवण पद्धतींमध्ये स्थानिक साधनसामग्रीचा वापर होत असला, तरी कोकणातील दमट हवामानामुळे धानाची योग्य वाळवण, आर्द्रता नियंत्रण आणि कीडप्रतिबंधक साठवण या बाबींना विशेष महत्त्व आहे.
== कोकणातील पाऊस, जमीन आणि कापणीची वेळ ==
कोकणातील भातशेतीवर पर्जन्यमानाचा मोठा प्रभाव असतो. हा प्रदेश उष्ण व दमट हवामानाचा असून येथे वार्षिक पर्जन्यमान साधारण २०० ते ३५० सेंमीपर्यंत आढळते. पर्जन्याचे प्रमाण, त्याचे ऋतुनिहाय वितरण आणि जमिनीची पाणीधारण क्षमता यांचा विचार करून कोकणातील पिकांची रचना निश्चित होते. त्यामुळे भातपिकाच्या वाढीपासून पक्वतेपर्यंतच्या कालावधीवरही पावसाचा प्रभाव पडतो.<ref name="BiswasPhadtare1995"/>
कोकणातील भातशेतीच्या जमिनींचे स्वरूपही कापणीच्या वेळेवर अप्रत्यक्ष परिणाम करते. प्रदेशातील जमिनींच्या पाणीधारण क्षमतेनुसार आणि पर्जन्याच्या उपलब्धतेनुसार भातासाठी योग्य पीकपद्धती बदलते. काही भागांत पावसाचे पाणी जमिनीत साठून राहिल्यामुळे पिकाच्या वाढीच्या उत्तरार्धात बाहेरील पावसाची आवश्यकता तुलनेने कमी होऊ शकते. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील भातपिकाच्या अभ्यासात वाढीच्या वेगवेगळ्या अवस्थांमध्ये पावसाचा परिणाम वेगवेगळा असल्याचे आढळले आहे.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
भातपिकाच्या सुरुवातीच्या वाढीच्या अवस्थेत पुरेसा पाऊस आवश्यक असतो. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील १९५१ ते १९८७ या कालावधीच्या अभ्यासात भाताच्या वाढीतील विविध अवस्थांमध्ये पर्जन्यमानाचा उत्पादनाशी संबंध असल्याचे आढळले. विशेषतः फुटवे येण्याच्या अवस्थेत पावसाचे महत्त्व दिसून आले, तर पुढील काही अवस्थांमध्ये जमिनीत साठलेली आर्द्रता पिकासाठी उपयुक्त ठरू शकते.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
कापणीच्या काळात मात्र पावसाचे स्वरूप वेगळ्या प्रकारे महत्त्वाचे ठरते. पीक पक्व झाल्यानंतरही पाऊस सुरू राहिल्यास शेतातील जमीन ओलसर राहते आणि कापणी, कापलेले पीक शेताबाहेर आणणे, मळणी व धान वाळवणे या कामांमध्ये अडथळे निर्माण होऊ शकतात. कोकणातील भातकापणीवरील अभ्यासात मजुरांची कमतरता आणि कापणीच्या कामातील विलंब ही समस्या नोंदविण्यात आली असून वेळेत कापणी न झाल्यास कापणीनंतरच्या कामांवरही त्याचा परिणाम होतो.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील पावसाचा कालावधी आणि त्यातील बदल यांमुळे कापणीसाठी उपलब्ध कोरड्या हवामानाच्या कालखंडाला विशेष महत्त्व प्राप्त होते. कोकण प्रदेशातील बारा ठिकाणांच्या पर्जन्यविषयक अभ्यासात वार्षिक आणि हंगामी पर्जन्यमान तसेच पावसाळी दिवसांच्या प्रवृत्तींमध्ये स्थानानुसार फरक आढळला आहे. त्यामुळे कोकणातील सर्व जिल्ह्यांसाठी कापणीची एकच निश्चित वेळ ठरविण्याऐवजी स्थानिक पर्जन्यस्थिती आणि पिकाची पक्वता यांचा एकत्रित विचार करणे आवश्यक ठरते.<ref name="Kadam2019">{{cite journal
|last=Kadam
|first=U. S.
|author2=Jedhe, S. H.
|author3=Mane, M. S.
|author4=Mahale, D. M.
|author5=Nandgude, S. B.
|title=Spatio-temporal Trends of Rainfall and Rainy Days in Konkan Region of Maharashtra
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|volume=37
|issue=1
|year=2019
|pages=25–36
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92410
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीची वेळ ही केवळ पिकाच्या पक्वतेवर अवलंबून नसून **पावसाचे आगमन व माघार, जमिनीतील ओलावा, स्थानिक जमीनप्रकार आणि कापणीच्या वेळी उपलब्ध होणारा कोरडा कालावधी** या घटकांच्या परस्परसंबंधातून ठरते. म्हणूनच पक्व भाताची कापणी योग्य हवामानाच्या कालखंडात लवकर पूर्ण करणे कोकणातील भातशेतीसाठी महत्त्वाचे ठरते.
== कोकणातील भातकापणीचे यांत्रिकीकरण ==
कोकणातील भातशेतीमध्ये कापणी आणि कापणीनंतरची कामे पारंपरिकरीत्या मोठ्या प्रमाणावर मानवी श्रमांवर अवलंबून होती. मजुरांची कमतरता, वाढता मजुरीखर्च आणि पक्व झालेल्या पिकाची वेळेत कापणी करण्याची आवश्यकता यामुळे भातकापणीच्या यांत्रिकीकरणाची गरज निर्माण झाली. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासात कापणी व मळणीच्या यांत्रिकीकरणाचा आर्थिक व्यवहार्यतेच्या दृष्टीने अभ्यास करण्यात आला आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भातकापणीसाठी स्वयंप्रचालित रीपर, रीपर-बाइंडर आणि कापणीसाठी सुधारित हातसाधने यांसारख्या पर्यायांचा अभ्यास झाला आहे. कापणीनंतरच्या प्रक्रियांसाठी पेडलवर चालणारे थ्रेशर, वायर-लूप प्रकारचे थ्रेशर, उलट्या साखळी-पट्टीवर आधारित थ्रेशर, अक्षीय प्रवाहाचे थ्रेशर तसेच हातचलित व शक्तिचलित विन्नोअर यांचा वापर विचारात घेण्यात आला आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भौगोलिक आणि आर्थिक परिस्थिती लक्षात घेऊन यंत्रांची निवड करणे महत्त्वाचे ठरते. लहान व तुकड्यात विभागलेली शेतजमीन आणि अनेक शेतकऱ्यांकडे असलेले अल्प क्षेत्र यामुळे मोठ्या यंत्रांची वैयक्तिक मालकी आर्थिकदृष्ट्या व्यवहार्य ठरत नाही. कोकणातील अभ्यासात सुमारे ०.२ हेक्टर क्षेत्र धारण करणाऱ्या बहुसंख्य शेतकऱ्यांना कापणी, मळणी आणि पाखडणीची यंत्रे स्वतः खरेदी करणे त्यांच्या आर्थिक परिस्थितीमुळे शक्य नसल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
या परिस्थितीत रीपर आणि रीपर-बाइंडर यांसारखी यंत्रे कोकणातील लहान व मध्यम शेतांसाठी तुलनेने उपयुक्त पर्याय ठरू शकतात. अभ्यासानुसार रीपर, रीपर-बाइंडर, शक्तिचलित थ्रेशर आणि विन्नोअर यांच्या विविध संयोगांमध्ये कोकणाच्या परिस्थितीत यांत्रिकीकरणाची क्षमता आढळून आली आहे. यंत्रांची कार्यक्षमता आणि प्रति हेक्टर बदलता खर्च हे त्यांच्या आर्थिक व्यवहार्यतेवर परिणाम करणारे महत्त्वाचे घटक आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भातकापणीच्या यांत्रिकीकरणात केवळ यंत्रांची उपलब्धता नव्हे, तर ती शेतकऱ्यांना परवडणाऱ्या पद्धतीने उपलब्ध करून देणे महत्त्वाचे आहे. त्यामुळे कस्टम हायरिंग सेवा आणि कृषी अवजारे बँक यांसारख्या सामायिक यंत्रवापराच्या पद्धतींचा विस्तार करण्याची शिफारस करण्यात आली आहे. अशा पद्धतींमुळे अल्पभूधारक शेतकऱ्यांना यंत्रे स्वतः खरेदी न करता आवश्यकतेनुसार त्यांचा वापर करता येतो.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील शेतकऱ्यांच्या शारीरिक श्रमभाराचाही यांत्रिकीकरणाच्या संशोधनात विचार करण्यात आला आहे. ICARच्या वार्षिक अहवालानुसार कोकणातील पुरुष कामगारांच्या शारीरिक मापदंडांचा विचार करून गवत कापणी यंत्रासोबत वापरता येणारे पॅडी हार्वेस्टर विकसित करण्यात आले. सुधारित यंत्रामुळे विद्यमान यंत्राच्या तुलनेत चालकावरील शारीरिक कामाचा भार कमी झाल्याचे परीक्षणात आढळले.<ref name="ICARAnnualReport2023">{{cite report
|author=Indian Council of Agricultural Research
|title=ICAR Annual Report 2023–24
|publisher=Indian Council of Agricultural Research
|year=2024
|url=https://icar.gov.in/sites/default/files/2025-04/ICAR%20Annual%20Report%202023-24-english.pdf
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीचे यांत्रिकीकरण हे केवळ पारंपरिक विळ्याची जागा यंत्राने घेण्यापुरते मर्यादित नसून **कापणी, बांधणी, मळणी आणि पाखडणी या संपूर्ण प्रक्रियेत श्रम व वेळ कमी करण्याचा प्रयत्न** आहे. मात्र कोकणातील लहान शेतजमिनी आणि शेतकऱ्यांची आर्थिक क्षमता लक्षात घेता मोठ्या यंत्रांच्या वैयक्तिक मालकीपेक्षा कस्टम हायरिंग व सामायिक यंत्रवापराची व्यवस्था अधिक व्यवहार्य ठरू शकते.<ref name="Bhanage2016"/>
== मजूरटंचाई, स्थलांतर आणि बदलती कापणी पद्धत ==
कोकणातील भातशेतीमध्ये कापणीच्या हंगामात उपलब्ध होणारे ग्रामीण मनुष्यबळ हा महत्त्वाचा घटक आहे. पारंपरिक भातकापणी, मळणी आणि पाखडणी या कामांसाठी मोठ्या प्रमाणावर मजुरांची आवश्यकता असल्याने मजूर उपलब्धतेतील घटकांचा थेट परिणाम कापणीच्या वेळेवर आणि उत्पादनखर्चावर होतो. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासात कृषी कामे श्रमप्रधान असून मजुरांची कमतरता निर्माण झाल्यामुळे कापणी व मळणीच्या कामात विलंब होत असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील काही ग्रामीण भागांत कृषी मजुरांचे इतर ठिकाणी रोजगारासाठी स्थलांतर होणे ही मजूर उपलब्धतेवर परिणाम करणारी बाब आहे. कोकणातील पावसावर आधारित भातशेतीवरील एका गावपातळीच्या अभ्यासात बहुतांश प्रतिसादकर्त्यांनी मजुरीचा वाढता खर्च ही अडचण असल्याचे नमूद केले असून, ग्रामीण भागातील अनेक मजूर अधिक उत्पन्नाच्या शोधात इतर ठिकाणी रोजगारासाठी स्थलांतरित होत असल्याचे नोंदविण्यात आले आहे.<ref name="TribalRiceConstraints2019">{{cite journal
|title=Constraints Faced By The Tribal Farmers In Rainfed Rice Production In Konkan Region-A Village Level Study
|journal=International Journal of Current Microbiology and Applied Sciences
|year=2019
|url=https://www.researchgate.net/publication/331587276_Constraints_Faced_By_The_Tribal_Farmers_In_Rainfed_Rice_Production_In_Konkan_Region-A_Village_Level_Study
}}</ref>
मजूरटंचाई आणि वाढता मजुरीखर्च यामुळे भातकापणीची पारंपरिक श्रमाधारित पद्धत आर्थिकदृष्ट्या अधिक खर्चिक होत गेली. कोकणातील तुकड्यात विभागलेली आणि लहान शेतजमीन लक्षात घेता मोठ्या यंत्रांचा वापर सर्वत्र शक्य नसला तरी स्वयंप्रचालित रीपर, रीपर-बाइंडर आणि मळणी यंत्रे यांसारख्या साधनांचा वापर वाढविण्याचे प्रयत्न झाले आहेत.<ref name="Shahare2012">{{cite journal
|last=Shahare
|first=P. U.
|title=Agricultural Mechanization in Konkan Region of Maharashtra
|journal=Agricultural Engineering Today
|volume=36
|issue=2
|year=2012
|pages=6–9
|url=https://indianjournals.com/article/aet-36-2-002
}}</ref>
यांत्रिकीकरणामुळे कापणीसाठी आवश्यक मानवी श्रम कमी करण्याबरोबरच कमी कालावधीत कापणी पूर्ण करण्याची शक्यता वाढते. कोकणातील भातउत्पादनावरील अलीकडील अभ्यासात पालघर आणि ठाणे जिल्ह्यांतील काही शेतकऱ्यांनी यांत्रिक कापणी यंत्रे व मळणी यंत्रे स्वीकारल्यामुळे श्रमावरील अवलंबित्व कमी झाल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Shelake2025">{{cite journal
|last=Shelake
|first=S. M.
|author2=Kshirsagar, P. J.
|author3=Torane, S. R.
|author4=Waravadekar, S. C.
|author5=More, V. G.
|title=Economic analysis for profitable paddy production in Konkan region
|journal=International Journal of Agriculture Extension and Social Development
|volume=8
|issue=10
|year=2025
|url=https://www.extensionjournal.com/archives/2025.v8.i10.I.2591
}}</ref>
मात्र कोकणातील लहान भूधारणा आणि यंत्रांच्या तुलनेने जास्त किंमतीमुळे प्रत्येक शेतकऱ्याला कापणीची यंत्रे स्वतःच्या मालकीची ठेवणे व्यवहार्य ठरत नाही. त्यामुळे कस्टम हायरिंग सेवा आणि कृषी अवजारे बँक यांसारख्या सामायिक यंत्रवापराच्या पद्धतींना महत्त्व प्राप्त झाले आहे. कोकणातील यांत्रिकीकरणाच्या अभ्यासात अशा सेवांचा विस्तार केल्यास अल्पभूधारक शेतकऱ्यांनाही यांत्रिकीकरणाचा लाभ मिळू शकतो, असे सुचविण्यात आले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
अशा प्रकारे मजूरटंचाई, ग्रामीण मनुष्यबळाचे स्थलांतर आणि वाढता मजुरीखर्च या घटकांमुळे कोकणातील भातकापणीची पारंपरिक श्रमव्यवस्था बदलत आहे. विळ्याने हाताने कापणी करण्याच्या पद्धतीबरोबरच रीपर, रीपर-बाइंडर आणि मळणी यंत्रांचा वापर वाढत असून, सामायिक यंत्रसेवा ही लहान शेतकऱ्यांसाठी महत्त्वाची पर्यायी व्यवस्था ठरत आहे.<ref name="Shahare2012"/>
== रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, रायगड, ठाणे-पालघरमधील प्रादेशिक वैशिष्ट्ये ==
कोकणातील भातशेतीची भौगोलिक व कृषी परिस्थिती जिल्ह्यानुसार काही प्रमाणात बदलते. डॉ. बाळासाहेब सावंत कोकण कृषी विद्यापीठाच्या वर्गीकरणानुसार रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग हे दक्षिण कोकण क्षेत्रात, तर रायगड, पालघर आणि ठाणे हे उत्तर कोकण क्षेत्रात येतात. या प्रदेशात किनारी, पठारी आणि डोंगराळ अशा भौगोलिक पट्ट्यांनुसार शेतीचे स्वरूप बदलते. दक्षिण कोकणात लालसर-जांभ्या प्रकारच्या आम्लधर्मी जमिनींचे प्राबल्य आहे, तर उत्तर कोकणातील काही भागांत बेसॉल्टजन्य तपकिरी ते काळ्या जमिनी आढळतात; डोंगरउतारांवर उथळ व वालुकामय तर खोऱ्यांमध्ये चिकणमातीप्रधान जमिनी आढळतात.<ref name="DBSKKVKonkanRice">{{cite web
|title=RICE PRODUCTION IN KONKAN
|publisher=Dr. Balasaheb Sawant Konkan Krishi Vidyapeeth
|url=https://archive.dbskkv.org/collection/420/document/2304
}}</ref>
रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग या दक्षिण कोकणातील जिल्ह्यांमध्ये मोठ्या प्रमाणावर पावसावर आधारित भातशेती आढळते. डोंगरउतार, खोरी आणि किनारी भाग यांनुसार शेतजमिनींचे स्वरूप बदलत असल्यामुळे भात लागवडीच्या पद्धतीतही स्थानिक फरक दिसतात. सिंधुदुर्ग जिल्ह्याची भात उत्पादकता कोकण विभागातील इतर जिल्ह्यांच्या तुलनेत अधिक असल्याची नोंद कोकणातील भात उत्पादनाच्या उपलब्ध आकडेवारीत करण्यात आली आहे.<ref name="DBSKKVKonkanRice"/>
रायगड जिल्हा भाताच्या क्षेत्रफळाच्या दृष्टीने कोकणातील महत्त्वाचा जिल्हा आहे. उपलब्ध जिल्हानिहाय आकडेवारीनुसार रायगडमध्ये भाताखालील क्षेत्र सुमारे १.२५ लाख हेक्टर आणि भात उत्पादन सुमारे ३.५१ लाख टन नोंदविण्यात आले होते. त्यामुळे कोकणातील एकूण भात उत्पादनात रायगडचा महत्त्वाचा वाटा आहे.<ref name="DBSKKVKonkanRice"/>
ठाणे आणि पालघर हे उत्तर कोकणातील जिल्हे असून येथे भातशेतीबरोबर आदिवासी व ग्रामीण भागातील पारंपरिक कृषीपद्धतींचेही महत्त्व आहे. पालघर जिल्ह्यातील वाडा आणि पालघर तालुक्यांतील भात उत्पादक गावांवर केलेल्या अभ्यासात भात हे प्रमुख खरीप पीक असल्याचे आणि शेतकरी शिफारस केलेल्या भात उत्पादन तंत्रज्ञानाचा अवलंब करीत असल्याचे आढळते.<ref name="KarangamiDhengeChavanAnarase2020">{{cite journal
|last=Karangami
|first=R. S.
|author2=Dhenge, S. A.
|author3=Chavan, P. M.
|author4=Anarase, M. S.
|title=Association of Profile Characteristics of Rice Growers and Adoption of Recommended Package of Practices
|journal=Indian Journal of Extension Education
|year=2020
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/IJEE/article/view/109198
}}</ref>
उपलब्ध जिल्हानिहाय आकडेवारीत ठाणे जिल्ह्याचे भाताखालील क्षेत्र, उत्पादन आणि उत्पादकता कोकणातील इतर प्रमुख भात उत्पादक जिल्ह्यांच्या तुलनेत कमी असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. त्याच वेळी उत्तर कोकणातील भातशेतीवर लहान भूधारणा, स्थानिक भौगोलिक परिस्थिती आणि उपलब्ध कृषी मनुष्यबळ यांचा प्रभाव पडतो.<ref name="DBSKKVKonkanRice"/>
भातकापणीच्या दृष्टीने या प्रादेशिक फरकांना विशेष महत्त्व आहे. रायगड, रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्गमध्ये मोठ्या प्रमाणातील भातक्षेत्रामुळे कापणीच्या काळात मोठ्या प्रमाणावर मनुष्यबळ आणि यंत्रसेवेची आवश्यकता निर्माण होते. उत्तर कोकणातील ठाणे व पालघरमध्ये लहान शेतजमिनी, ग्रामीण व आदिवासी भाग आणि बदलती कृषी श्रमव्यवस्था यांमुळे कापणीच्या पद्धतीत स्थानिक परिस्थितीनुसार बदल होत आहेत. त्यामुळे संपूर्ण कोकणासाठी भातकापणीची एकच पद्धत किंवा एकच कालमर्यादा लागू होत नाही; जिल्ह्याची भौगोलिक रचना, जमीन, पर्जन्यस्थिती, पीकवाण आणि शेताचा आकार यांनुसार कापणीचे स्वरूप बदलते.
अशा प्रकारे **रत्नागिरी-सिंधुदुर्गचा दक्षिण कोकण, रायगडचा मोठा भातक्षेत्र असलेला मध्य-उत्तर भाग आणि ठाणे-पालघरचा उत्तर कोकण** यांमध्ये भातशेतीच्या क्षेत्रफळ, उत्पादकता, जमीनप्रकार आणि कृषी-सामाजिक परिस्थितीत फरक आढळतो. हे प्रादेशिक वैविध्य भातकापणीच्या वेळा, श्रमाची गरज आणि यांत्रिकीकरणाच्या स्वीकारावरही परिणाम करणारे महत्त्वाचे घटक आहेत.
== भातकापणी आणि कोकणातील ग्रामीण जीवन व लोकसंस्कृती ==
कोकणातील भातकापणी ही केवळ कृषी उत्पादनाची प्रक्रिया नसून ग्रामीण जीवनातील सामाजिक आणि सांस्कृतिक व्यवहारांशीही संबंधित राहिली आहे. भाताचे पीक हे पावसाळी शेतीच्या वार्षिक चक्राचा महत्त्वाचा भाग असल्यामुळे पेरणीपासून कापणीपर्यंतच्या विविध टप्प्यांशी स्थानिक देवता, शेतजमीन, पाऊस, जनावरे आणि चांगल्या पीकउत्पादनाच्या अपेक्षा जोडलेल्या होत्या. कोकणातील लोकपरंपरांचे संकलन करणाऱ्या *Folk Lore Notes, Vol. II—Konkan* या ग्रंथात पेरणी आणि कापणीच्या काळाशी संबंधित विविध कृषीविधींची नोंद आढळते.<ref name="JacksonEnthoven1915">{{cite book
|last=Jackson
|first=A. M. T.
|author2=Enthoven, R. E.
|title=Folk Lore Notes, Vol. II—Konkan
|publisher=British India Press
|year=1915
|url=https://books.google.com/books/about/Folk_Lore_Notes.html?id=a4XlAAAAMAAJ
}}</ref>
कापणीच्या वेळी शेतात नवीन धान्याच्या राशीची पूजा करण्याची प्रथा कोकणातील अनेक भागांत नोंदविण्यात आली आहे. तसेच काही ठिकाणी शेतातील पहिल्या कापणीच्या दिवशी शिजवलेले अन्न तयार करून ते देवतेला नैवेद्य म्हणून अर्पण केले जात असे. या प्रथांमधून नवीन पीक हे केवळ आर्थिक उत्पादन नसून धार्मिक कृतज्ञता आणि सामुदायिक जीवनाचा भाग मानले जात असल्याचे दिसून येते.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
रत्नागिरी जिल्ह्यातील फोंडा येथे कापणीच्या वेळी शेताच्या कोपऱ्यात भात आणि दह्यापासून तयार केलेले 'शिवार' ठेवण्याची प्रथा नोंदविण्यात आली आहे. या विधीला 'चोरावा' असेही संबोधले जात असल्याचे त्या ऐतिहासिक नोंदीत नमूद आहे. अशा प्रथा शेत, पीक आणि स्थानिक धार्मिक विश्वास यांच्यातील संबंध दर्शवतात.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
कोकणातील काही भागांत कापणीच्या वेळी शेताच्या रक्षणाशी संबंधित स्थानिक देवतांना नारळ, कोंबड्या किंवा शेळ्या अर्पण करण्याच्या प्रथा नोंदविण्यात आल्या आहेत. रत्नागिरी जिल्ह्यातील काही गावांमध्ये तसेच मालवण परिसरात पेरणी आणि कापणीच्या काळात शेतरक्षक देवतांना अर्पणे केली जात असल्याचे ऐतिहासिक लोकसाहित्याच्या नोंदीत नमूद आहे. या प्रथा त्या काळातील ग्रामीण समाजाच्या कृषीविश्वासांचे दस्तऐवजीकरण करतात.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
कोलाबा जिल्ह्यातील दासगावच्या संदर्भात कापणीच्या वेळी शेतात नारळ ठेवून पहिल्या कापलेल्या भाऱ्याने त्याला काही वेळा झोडपण्याची प्रथा नोंदविण्यात आली आहे; त्यानंतर नियमित मळणी सुरू केली जात असे. अशा विधींमधून पहिल्या कापणीच्या उत्पादनाला प्रतीकात्मक महत्त्व दिले जात असल्याचे दिसते.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
या कृषीपरंपरांमुळे भातकापणीचा काळ हा ग्रामीण समाजाच्या सामूहिक जीवनाशी जोडलेला असे. शेतातील कामे, स्थानिक देवतांची पूजा, नवीन धान्याशी संबंधित विधी आणि कुटुंब व गावसमूहातील सहभाग यांमधून कृषी उत्पादन आणि लोकसंस्कृती यांचे परस्परसंबंध दिसून येतात. मात्र उपलब्ध लोकसाहित्यविषयक नोंदी मुख्यतः विसाव्या शतकाच्या प्रारंभीच्या काळातील असल्यामुळे त्यातील प्रत्येक प्रथा आजही कोकणातील सर्व भागांत प्रचलित आहे, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
भातकापणीशी संबंधित या ऐतिहासिक प्रथा कोकणातील ग्रामीण समाजात भाताला असलेले आर्थिक, सामाजिक आणि सांस्कृतिक महत्त्व स्पष्ट करतात. त्यामुळे भातकापणीचा अभ्यास करताना कापणीची तांत्रिक प्रक्रिया, ग्रामीण श्रमव्यवस्था आणि कापणीनंतरची कामे यांसोबतच त्याभोवती निर्माण झालेल्या लोकपरंपरांचाही विचार करणे आवश्यक ठरते.
== आधुनिक काळातील बदल, आव्हाने आणि भविष्यातील दिशा ==
कोकणातील भातकापणीच्या पद्धतीमध्ये आधुनिक काळात लक्षणीय बदल होत आहेत. पारंपरिक हाताने कापणी आणि श्रमप्रधान मळणीच्या पद्धतींबरोबर रीपर, रीपर-बाइंडर, विविध प्रकारची मळणी यंत्रे आणि पाखडणीची यंत्रे वापरण्याकडे कल वाढला आहे. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासानुसार मजुरांची कमतरता आणि वाढता मजुरीखर्च यामुळे वेळेत कापणी व मळणी करणे कठीण होत असून, यांत्रिकीकरण हा त्यावरील महत्त्वाचा पर्याय ठरतो.<ref name="Bhanage2016"/>
आधुनिक तंत्रज्ञानाचा स्वीकार मात्र संपूर्ण कोकणात एकसमान झालेला नाही. लहान आणि तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनी, चिखलयुक्त किंवा पाणथळ क्षेत्र, उताराची जमीन, यंत्रांची किंमत आणि त्यासाठी आवश्यक कुशल चालक यांसारख्या मर्यादा यांत्रिकीकरणाच्या प्रसारावर परिणाम करतात. कोकणातील बहुतांश अल्पभूधारक शेतकऱ्यांना कापणी, मळणी आणि पाखडणीची यंत्रे स्वतःच्या मालकीची ठेवणे आर्थिकदृष्ट्या कठीण असल्याचे अभ्यासातून दिसून आले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
अलीकडील अभ्यासांमध्ये कोकणातील जिल्ह्यांनुसार आधुनिक तंत्रज्ञान स्वीकारण्यात फरक दिसून येतो. पालघर आणि ठाणे जिल्ह्यांतील काही भात उत्पादकांनी यंत्राद्वारे रोपलागवड, हार्वेस्टर आणि थ्रेशर यांचा वापर केला आहे, तर रत्नागिरीतील काही शेतकरी अद्याप अधिक श्रमप्रधान पारंपरिक पद्धतींवर अवलंबून आहेत. सिंधुदुर्गमध्ये भाताच्या पुढील प्रक्रियेत दळण, उकडणे आणि पोहेनिर्मिती यांसारख्या मूल्यवर्धित पद्धतींचा वापर आढळतो.<ref name="Shelake2025"/>
भातकापणीसमोरील आणखी एक महत्त्वाचे आव्हान म्हणजे हवामानातील अनिश्चितता. कोकणातील भातशेती मोठ्या प्रमाणावर मोसमी पावसावर अवलंबून असल्यामुळे पावसाचा कालावधी, तीव्रता आणि कापणीच्या काळातील ओलावा यांचा कापणीच्या नियोजनावर परिणाम होतो. पक्व झालेल्या पिकाची कापणी वेळेत न झाल्यास पिकाचे नुकसान होण्याची शक्यता वाढते. त्यामुळे हवामानविषयक माहिती, पीकपक्वतेचे अचूक निरीक्षण आणि उपलब्ध यंत्रसामग्रीचे वेळेवर नियोजन यांना भविष्यात अधिक महत्त्व प्राप्त होईल.
यांत्रिकीकरणाचा लाभ लहान शेतकऱ्यांपर्यंत पोहोचविण्यासाठी कस्टम हायरिंग सेवा आणि कृषी अवजारे बँका महत्त्वाच्या ठरू शकतात. कोकणातील यांत्रिकीकरणाच्या अभ्यासाने अशा सेवांचा मोठ्या प्रमाणावर विस्तार करण्याची गरज व्यक्त केली आहे. यामुळे शेतकऱ्यांना महागडी यंत्रे स्वतः खरेदी न करता आवश्यक त्या काळात कापणी व मळणीची यंत्रसेवा घेता येऊ शकते.<ref name="Bhanage2016"/>
भविष्यातील दिशेच्या दृष्टीने केवळ कापणीचे यांत्रिकीकरण पुरेसे ठरणार नाही. कापणीपासून मळणी, वाळवण, साठवण, दळण आणि मूल्यवर्धनापर्यंत संपूर्ण साखळी अधिक कार्यक्षम करण्याची गरज आहे. २०२५ मधील कोकणावरील अभ्यासात यांत्रिकीकरण आणि भातप्रक्रियेमुळे मजुरीवरील अवलंबित्व कमी होऊन उत्पादनक्षमता, खर्च आणि बाजारमूल्याच्या दृष्टीने सुधारणा होऊ शकते, असे आढळले आहे.<ref name="Shelake2025"/>
कोकणासाठी भविष्यातील भातकापणीची यंत्रे विकसित करताना या प्रदेशाच्या विशिष्ट परिस्थितीचा विचार करणे आवश्यक आहे. लहान शेतजमीन, पाणथळ क्षेत्र, उतार, अरुंद बांध आणि उच्च पर्जन्यमान यांना अनुरूप हलकी, कमी खर्चाची आणि सहज वाहतूक करता येणारी यंत्रे अधिक उपयुक्त ठरू शकतात. त्याचबरोबर स्थानिक पातळीवर यंत्रचालकांचे प्रशिक्षण, दुरुस्ती व देखभाल सुविधा आणि कस्टम हायरिंगची उपलब्धता वाढविणे आवश्यक आहे.
अशा प्रकारे आधुनिक काळातील कोकणातील भातकापणी ही **पारंपरिक श्रमाधारित पद्धतीपासून योग्य ठिकाणी यांत्रिकीकरण, सामायिक यंत्रसेवा आणि मूल्यवर्धित प्रक्रियांकडे होणाऱ्या संक्रमणाच्या** टप्प्यात आहे. भविष्यातील दिशा ही केवळ अधिक यंत्रे उपलब्ध करून देण्याची नसून, कोकणातील लहान शेतकऱ्यांच्या आर्थिक क्षमतेला, स्थानिक भौगोलिक परिस्थितीला, हवामानाच्या अनिश्चिततेला आणि भाताच्या संपूर्ण मूल्यसाखळीला अनुरूप अशी शाश्वत व परवडणारी व्यवस्था निर्माण करण्याची आहे.
== हेही पहा ==
* [[कोकण]]
* [[भात]]
== बाह्य दुवे ==
* [https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/ Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research — ICAR]
* [https://www.dbskkv.org/ डॉ. बाळासाहेब सावंत कोकण कृषी विद्यापीठ]
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:कोकण]]
[[वर्ग:महाराष्ट्र]]
[[वर्ग:शेती]]
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2026-09-15T20:49:30Z
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wikitext
text/x-wiki
कोकणातील भात शेती ही प्रदेशाच्या कृषी आणि ग्रामीण जीवनाचा महत्त्वाचा भाग आहे. कोकणातील भातपिकाची लागवड प्रामुख्याने पावसावर अवलंबून असून, भाताची कापणी हा पिकाच्या उत्पादनचक्रातील अत्यंत महत्त्वाचा टप्पा आहे. या प्रदेशातील भौगोलिक परिस्थिती, अतिवृष्टी, लहान व तुकड्यात विभागलेली शेती, उताराची किंवा पायरीदार जमीन आणि कापणीच्या काळातील मजुरांची उपलब्धता या घटकांचा भातकापणीच्या पद्धतीवर परिणाम होतो.<ref name="Bhanage2016">{{cite journal
|last=Bhanage
|first=G. B.
|author2=P. U. Shahare
|author3=P. S. Deshmukh
|author4=P. B. Gaikwad
|author5=V. V. Aware
|title=Mechanization in Harvesting and Post-Harvest Operation for Paddy in Konkan Region and Its Economic Feasibility
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|volume=34
|issue=2
|year=2016
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92862
}}</ref>
परंपरेने कोकणातील भाताची कापणी मानवी श्रमांवर आधारित राहिली असून विळा किंवा तत्सम साधनांनी भात कापणे, कापलेले भाताचे पुंजके एकत्र करणे, त्यानंतर मळणी व धान वेगळे करणे अशा सलग प्रक्रियेतून कापणीचे काम केले जात असे. कापणी व कापणीनंतरच्या प्रक्रियांमध्ये मोठ्या प्रमाणावर श्रम लागत असल्याने मजुरांची कमतरता आणि वाढता मजुरीखर्च हे कोकणातील भातशेतीसमोरील महत्त्वाचे प्रश्न ठरले आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील शेतीच्या विशिष्ट परिस्थितीमुळे भातकापणीच्या यांत्रिकीकरणालाही स्वतंत्र स्वरूप प्राप्त झाले आहे. लहान व विखुरलेली शेतजमीन, उताराची व पायरीदार शेती आणि मोठ्या प्रमाणातील पाऊस या मर्यादा लक्षात घेऊन भात कापणीसाठी लहान व तुलनेने हलकी यंत्रे विकसित करण्याचे प्रयत्न झाले आहेत.<ref name="Bhanage2017">{{cite journal
|last=Bhanage
|first=Girishkumar Balasaheb
|author2=P. U. Shahare
|author3=V. V. Aware
|author4=K. G. Dhande
|author5=P. S. Deshmukh
|title=Development of stripper harvester for paddy
|journal=Journal of Applied and Natural Science
|volume=9
|issue=4
|year=2017
|pages=1943–1948
|url=https://journals.ansfoundation.org/index.php/jans/article/view/1469
}}</ref>
या पार्श्वभूमीवर कोकणातील भात शेती कापणीचा अभ्यास हा केवळ भात कापण्याच्या तंत्राचा अभ्यास न राहता, पाऊस व जमीन, पिकाची पक्वता, पारंपरिक श्रमव्यवस्था, कापणीची साधने, मळणी व धान साठवण, यांत्रिकीकरण, मजूरटंचाई आणि ग्रामीण लोकजीवन यांचा परस्परसंबंध समजून घेण्याचा विषय ठरतो.
== कोकणातील भातशेतीची भौगोलिक व कृषी पार्श्वभूमी ==
कोकण हा महाराष्ट्राच्या पश्चिम किनारपट्टीवरील अरबी समुद्रालगतचा प्रदेश असून, त्याची भौगोलिक रचना डोंगराळ, खाचखळग्यांची आणि काही ठिकाणी सखल स्वरूपाची आहे. महाराष्ट्रातील कोकण विभागातील भात उत्पादनाच्या संदर्भात ठाणे, पालघर, रायगड, रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग हे प्रमुख जिल्हे विचारात घेतले जातात. या प्रदेशात उष्ण व दमट हवामान आणि मोठ्या प्रमाणातील नैऋत्य मोसमी पाऊस ही भातशेतीस अनुकूल वैशिष्ट्ये आहेत.<ref name="BiswasPhadtare1995">{{cite journal
|last=Biswas
|first=B. C.
|author2=R. D. Phadtare
|title=Cropping pattern of Konkan region on the basis of probabilistic rainfall and soil characteristics
|journal=MAUSAM
|volume=46
|issue=2
|year=1995
|pages=133–140
|url=https://mausamjournal.imd.gov.in/index.php/MAUSAM/article/view/3218
}}</ref>
कोकणातील भातशेती मोठ्या प्रमाणावर पावसावर अवलंबून आहे. अतिवृष्टी आणि सखल भौगोलिक परिस्थितीमुळे खरीप हंगामात भात हे अनेक भागांतील प्रमुख पीक ठरते. अखिल भारतीय समन्वित भात सुधारणा प्रकल्पाच्या उत्पादनाभिमुख सर्वेक्षणानुसार कोकणातील भात उत्पादक पट्ट्यात खरीप हंगामात भाताचे क्षेत्र मोठ्या प्रमाणावर असून, जास्त पावसामुळे काही भागांत खरीप हंगामात भाताव्यतिरिक्त इतर पिकांची लागवड करणे मर्यादित होते.<ref name="AICRIP2019">{{cite report
|author=All India Coordinated Rice Improvement Project
|title=Production Oriented Survey 2019
|publisher=Indian Institute of Rice Research
|url=https://icar-iirr.org/AICRIP/Final%20POS%202019-2020.pdf
}}</ref>
कोकणातील पर्जन्यमानाचा भातपिकाच्या वाढीवर आणि उत्पादनावर थेट परिणाम होतो. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील दीर्घकालीन पर्जन्यविषयक आकडेवारीच्या अभ्यासातून भातपिकाच्या वाढीच्या विविध अवस्थांमध्ये पावसाचे महत्त्व स्पष्ट झाले आहे. त्यामुळे कोकणातील भातशेतीची लागवड, वाढ आणि पक्वता यांचे वेळापत्रक स्थानिक पर्जन्यमानाशी घनिष्ठपणे संबंधित असते.<ref name="ChowdhuryDas1993">{{cite journal
|last=Chowdhury
|first=A.
|author2=H. P. Das
|title=Effect of rainfall on growth and yield of rice in Konkan coast
|journal=MAUSAM
|volume=44
|issue=2
|year=1993
|pages=143–146
|url=https://mausamjournal.imd.gov.in/index.php/MAUSAM/article/view/3811
}}</ref>
कोकणातील कृषी रचनेचे आणखी एक वैशिष्ट्य म्हणजे लहान व तुकड्यात विभागलेली शेतजमीन. अशा जमिनी, डोंगराळ किंवा उताराची भौगोलिक रचना आणि मर्यादित सिंचनसुविधा यांमुळे भातशेतीच्या उत्पादनपद्धतीवर तसेच शेतीच्या यांत्रिकीकरणावर परिणाम होतो. कोकणातील भात उत्पादक शेतकऱ्यांच्या अभ्यासात लहान व विखुरलेली जमीन, मजुरीचा वाढता खर्च आणि उत्पादन तंत्रज्ञान स्वीकारण्यातील अडचणी या महत्त्वाच्या मर्यादा असल्याचे आढळते.<ref name="HileDarekarDatrkar2015">{{cite journal
|last=Hile
|first=R. B.
|author2=A. S. Darekar
|author3=S. B. Datrkar
|title=Adoption assessment of production technology for paddy cultivation in Konkan region of Maharashtra
|journal=Indian Journal of Economics and Development
|volume=11
|issue=1
|year=2015
|pages=217–225
|url=https://indianjournals.com/article/ijed1-11-1-023
}}</ref>
या भौगोलिक आणि कृषी परिस्थितीचा परिणाम भाताच्या कापणीवरही होतो. पिकाच्या पक्वतेच्या काळात उशिरा किंवा अतिवृष्टी झाल्यास कापणीच्या कामात विलंब होऊन पिकाचे नुकसान होऊ शकते. कोकणातील भातपिकाच्या उत्पादनाभिमुख सर्वेक्षणात पक्वता आणि कापणीच्या अवस्थेत झालेल्या उशिराच्या व जोरदार पावसामुळे काही भागांत उत्पादनहानी झाल्याची नोंद आहे.<ref name="AICRIP2019"/>
== कोकणातील भातपिकाचे हंगामी चक्र ==
कोकणातील भातपीक हे प्रामुख्याने खरीप हंगामातील पीक असून त्याचे हंगामी चक्र नैऋत्य मोसमी पावसाच्या आगमनाशी आणि उपलब्ध पाण्याशी जवळून संबंधित आहे. कोकणातील भातपिकाच्या अभ्यासात पेरणीची वेळ, वाणांची निवड आणि पिकाची वाढ यांचा पर्जन्यमान व स्थानिक हवामानाशी संबंध असल्याचे दिसून येते. कोकणातील काही प्रमुख भातवाणांसाठी जूनच्या सुरुवातीच्या काळातील पेरणी अनुकूल ठरू शकते, असे स्थानिक कृषी संशोधनातून दिसून आले आहे.<ref name="Jagtap2016">{{cite journal
|last=Jagtap
|first=D. N.
|author2=V. G. Chavan
|author3=U. V. Mahadkar
|author4=S. A. Chavan
|title=Effect of Sowing Times on the Yield and Yield Attributes of Rice (Oryza sativa L.) Varieties
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|volume=34
|issue=2
|year=2016
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92857
}}</ref>
पावसाळ्याच्या प्रारंभी भातासाठी रोपवाटिका तयार करणे, बियाणे पेरणे आणि मुख्य शेताची मशागत करणे ही कामे सुरू होतात. त्यानंतर योग्य वयाची रोपे मुख्य शेतात लावली जातात. कोकणातील खरीप भाताच्या विविध वाणांवर केलेल्या प्रयोगांमध्ये पेरणीच्या वेळेचा वाढ, उत्पादन आणि आर्थिक परताव्यावर परिणाम होत असल्याचे आढळले आहे.<ref name="Jagtap2016"/>
रोपांची पुनर्लागवड झाल्यानंतर पावसाळ्यात भातपिकाची वाढ, फुटवे येणे, कणसांची निर्मिती आणि दाणे भरणे या अवस्था क्रमाने पूर्ण होतात. या काळात पर्जन्यमानातील चढ-उतार आणि पावसाचे दिवस यांचा पिकाच्या वाढीवर परिणाम होऊ शकतो. कोकण प्रदेशातील पर्जन्यमानाच्या दीर्घकालीन अभ्यासात मे ते नोव्हेंबर या कालावधीत पर्जन्य व पावसाळी दिवसांच्या स्वरूपात बदल आढळल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="KonkanRainfall2019">{{cite journal
|title=Spatio-temporal Trends of Rainfall and Rainy Days in Konkan Region of Maharashtra
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|year=2019
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92410
}}</ref>
पिकाची पक्वता जवळ आल्यानंतर भातकापणीचा टप्पा सुरू होतो. कोकणातील भातशेतीत कापणीची वेळ व पद्धत ही वाणाचा कालावधी, पेरणीची वेळ, स्थानिक हवामान आणि त्या वर्षीच्या पावसाच्या स्वरूपानुसार बदलू शकते. त्यामुळे संपूर्ण कोकणासाठी कापणीची एकच निश्चित तारीख ठरविता येत नाही. कापणी, मळणी आणि धान वाळवणे या कापणीनंतरच्या प्रक्रिया भातपिकाच्या हंगामी चक्राचा अविभाज्य भाग आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
अशा प्रकारे कोकणातील भातपिकाचे हंगामी चक्र साधारणपणे **पावसाळ्याच्या प्रारंभी रोपवाटिका व पेरणी → मुख्य शेताची मशागत व पुनर्लागवड → पावसाळ्यात पिकाची वाढ → दाणे भरणे व पक्वता → भातकापणी → मळणी, धान वेगळे करणे व वाळवणे** अशा क्रमाने पुढे जाते. या संपूर्ण चक्रावर कोकणातील पर्जन्यमान, स्थानिक जमीन, वाण आणि शेतीतील उपलब्ध श्रम यांचा प्रभाव असतो.
== भात कापणीची वेळ आणि पक्वतेची चिन्हे ==
कोकणातील भातपिकाची कापणी प्रामुख्याने खरीप हंगामाच्या अखेरीस केली जाते. कापणीची नेमकी वेळ भाताच्या वाणाचा कालावधी, लागवडीची वेळ, स्थानिक हवामान आणि त्या वर्षीच्या पावसाच्या स्वरूपानुसार बदलते. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील १९५१ ते १९८७ या कालावधीतील आकडेवारीच्या अभ्यासानुसार कोकणात भाताची लागवड साधारणपणे जूनमध्ये होते आणि पिकाचा सक्रिय वाढीचा कालावधी सुमारे ९० दिवसांचा असतो. या अभ्यासात शारीरिक पक्वता प्राप्त झाल्यानंतर काही दिवसांनी, साधारण ऑक्टोबरच्या सुरुवातीस, भाताची कापणी केली जात असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
भातपिकाची कापणी योग्य वेळी करणे महत्त्वाचे असते. पीक पूर्णपणे पक्व होण्यापूर्वी कापणी केल्यास दाणे अपक्व राहण्याची शक्यता असते, तर कापणीस अनावश्यक विलंब झाल्यास दाणे गळणे, कणसे वाकणे किंवा पिकाचे नुकसान होण्याचा धोका वाढतो. त्यामुळे शेतातील पिकाची प्रत्यक्ष पक्वता पाहून कापणीचा निर्णय घेतला जातो.<ref name="ICARHarvest2025">{{cite report
|author=Indian Council of Agricultural Research
|title=Kharif Agro-Advisories for Farmers 2025
|publisher=Indian Council of Agricultural Research
|url=https://icar.gov.in/sites/default/files/Circulars/ICAR-En-Kharif-Agro-Advisories-for-Farmers-2025.pdf
}}</ref>
भातपिकाच्या पक्वतेची प्रमुख बाह्य चिन्हे म्हणजे कणसांवरील बहुतांश दाण्यांचा हिरव्या रंगातून पिवळसर किंवा सोनेरी रंगाकडे झालेला बदल आणि दाणे कडक होणे. ICARच्या कृषी मार्गदर्शनानुसार कणसांवरील सुमारे ८०–८५ टक्के दाणे सोनेरी-पिवळे व कडक झाल्यावर भात कापणीस योग्य मानला जातो. या अवस्थेत कापणी केल्यास कापणीतील विलंबामुळे होणारे दाणे गळणे आणि पीक लोळण्याचे नुकसान कमी करण्यास मदत होते.<ref name="ICARHarvest2025"/>
कोकणातील भातशेती पूर्णपणे किंवा मोठ्या प्रमाणावर पावसाच्या लहरीवर अवलंबून असल्याने कापणीची वेळ निश्चित करताना पावसाची स्थितीही महत्त्वाची ठरते. पक्वतेच्या कालावधीत उशिरा होणारा किंवा जोरदार पाऊस कापणीला अडथळा आणू शकतो. त्यामुळे पीक कापणीस योग्य झालेले असताना उपलब्ध कोरड्या हवामानाचा कालावधी साधून कापणी करणे आवश्यक ठरते. कोकणातील पर्जन्यमान आणि भातपिकाच्या वाढीवरील अभ्यासात पावसाच्या विविध वाढीच्या अवस्थांशी भाताच्या उत्पादनाचा संबंध असल्याचे आढळले आहे.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
कापणीपूर्वी शेतातील पिकाची अवस्था, कणसांचा रंग, दाण्यांची कडकपणा आणि हवामानाचा अंदाज यांचा विचार केला जातो. अशा प्रकारे **कणसांवरील बहुतांश दाणे सोनेरी-पिवळे होणे, दाणे कडक होणे आणि पीक शारीरिक पक्वतेला पोहोचणे** ही भात कापणीची प्रमुख चिन्हे मानली जातात. कोकणाच्या परिस्थितीत या पक्वतेनंतर अनावश्यक विलंब न करता योग्य हवामानात कापणी करणे महत्त्वाचे ठरते.
== कोकणातील पारंपरिक भातकापणी ==
कोकणातील पारंपरिक भातकापणी ही प्रामुख्याने मानवी श्रमांवर आधारित प्रक्रिया होती. भाताचे पीक कापणीस योग्य झाल्यानंतर शेतकरी आणि शेतमजूर हातातील विळ्याच्या साहाय्याने भाताची रोपे कापत. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासानुसार भात उत्पादनातील कापणी आणि कापणीनंतरची कामे पारंपरिक पद्धतीने मोठ्या प्रमाणावर हाताने केली जात असून त्यासाठी मोठ्या प्रमाणात श्रमांची आवश्यकता असते.<ref name="Bhanage2016"/>
कापणी करताना शेतातील पक्व भाताची कणसे आणि पेंढा विळ्याने कापून त्याचे पुंजके किंवा भारे तयार केले जात. कापलेला भात काही काळ शेतात किंवा योग्य जागी वाळवून पुढील मळणीसाठी नेला जात असे. अशा प्रकारे कापणी, पुंजके बांधणे, वाळवणे आणि त्यानंतर मळणी करणे ही कामे परस्परांशी जोडलेली होती.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक पद्धतीत कापणीचे काम श्रमप्रधान असल्यामुळे कापणीचा कालावधी हा उपलब्ध मजुरांच्या संख्येवरही अवलंबून असे. कोकणातील भातशेतीत लहान व तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनी, भौगोलिक परिस्थिती आणि कापणीच्या काळातील मोठ्या मनुष्यबळाची गरज यांमुळे पारंपरिक कापणी पद्धतीला विशेष महत्त्व होते. अभ्यासात कोकणातील अनेक शेतकरी अल्पभूधारक असल्यामुळे कापणी, मळणी आणि धान वाऱ्यावर पाखडणे यासाठी यंत्रसामग्री स्वतः खरेदी करणे आर्थिकदृष्ट्या कठीण असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक भातकापणी ही केवळ कृषी कामाची प्रक्रिया नसून ग्रामीण श्रमव्यवस्थेचा भाग होती. कापणीच्या हंगामात कुटुंबातील सदस्य, शेतमजूर आणि स्थानिक पातळीवरील उपलब्ध मनुष्यबळ यांच्या सहभागातून कापणीची कामे पूर्ण केली जात. त्यामुळे भातकापणीच्या काळात शेतातील सामूहिक श्रमाला विशेष महत्त्व प्राप्त होत असे.
कापणीनंतर भाताच्या कणसांमधून धान वेगळे करण्यासाठी पारंपरिक मळणी केली जात असे. पारंपरिक पद्धतींमध्ये जनावरांच्या पायाने तुडवणे किंवा इतर श्रमाधारित पद्धतींचा वापर केला जात असे; नंतर धान व पेंढा वेगळे करण्यासाठी वाऱ्याच्या साहाय्याने पाखडण्याची प्रक्रिया केली जाई. या कापणीनंतरच्या पद्धतींमध्ये अधिक वेळ आणि मानवी श्रम लागत असल्याने पुढील काळात यांत्रिक मळणी व पाखडणीची साधने वापरात आली.<ref name="ICARTraditionalThreshing">{{cite journal
|title=Mechanization in Rice Cultivation
|journal=Indian Farming
|volume=71
|issue=4
|year=2021
|pages=3–6
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/IndFarm/article/download/114370/44585/298367
}}</ref>
पारंपरिक भातकापणीची ही पद्धत कोकणातील पावसावर आधारित शेती, लहान शेतजमिनी आणि ग्रामीण श्रमव्यवस्थेशी जुळलेली होती. मात्र मजुरांची उपलब्धता कमी होणे, मजुरीचा वाढता खर्च आणि वेळेत कापणी करण्याची गरज यांमुळे पुढील काळात विळ्याबरोबरच रीपर, रीपर-बाइंडर आणि इतर यांत्रिक साधनांचा वापर वाढू लागला.<ref name="Bhanage2016"/>
== कापणीसाठी वापरली जाणारी पारंपरिक साधने ==
कोकणातील पारंपरिक भातकापणीमध्ये विळा हे प्रमुख हातसाधन राहिले आहे. पक्व भातपीक कापण्यासाठी शेतकरी आणि शेतमजूर विळ्याचा वापर करत. भाताची कापणी प्रामुख्याने मनुष्यबळाद्वारे विळ्याने केली जात असल्याचे कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासात नमूद करण्यात आले आहे. कापणीच्या कामात मोठ्या प्रमाणावर मानवी श्रम लागत असल्याने विळ्याचा वापर हा पारंपरिक भातकापणी पद्धतीचा महत्त्वाचा भाग होता.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक विळ्याच्या वापरात शेतकरी भाताची काडे हाताने धरून विळ्याने कापत असे. कापणीचे काम प्रामुख्याने वाकून करावे लागत असल्यामुळे त्यात शारीरिक श्रम मोठ्या प्रमाणात होत. भातकापणीतील हा श्रमभार कमी करण्यासाठी पुढे दातेरी विळ्यांसारख्या सुधारित हातसाधनांचा विकास करण्यात आला.<ref name="AgrowonHarvestTools">{{cite web
|title=भात पीक कापणीची साधने
|website=अॅग्रोवन
|date=23 October 2024
|url=https://agrowon.esakal.com/techno-wan/tools-for-rice-crop-harvesting-article-on-agrowon
}}</ref>
कोकणातील भातशेतीच्या संदर्भात डॉ. बाळासाहेब सावंत कोकण कृषी विद्यापीठाने विकसित केलेला ‘वैभव विळा’ हा पारंपरिक विळ्याच्या कार्यपद्धतीवर आधारित सुधारित दातेरी विळा आहे. या विळ्याच्या साहाय्याने भाताची कापणी जमिनीलगत करता येते. दातेरी पाते असल्यामुळे कापणीसाठी तुलनेने कमी ताकद लागते आणि साधनाचे वजनही कमी ठेवण्यात आले आहे.<ref name="AgrowonHarvestTools"/>
कोकण विभागासाठीच्या कृषी सल्ल्यामध्ये तयार भातपिकाची कापणी सकाळच्या वेळी जमिनीलगत ‘वैभव’ विळ्याने करण्याची शिफारस करण्यात आली आहे. कापणीनंतर कापलेला भात शेतात अनावश्यक वेळ न ठेवता पुढील मळणीसाठी हलविण्याचाही सल्ला देण्यात आला आहे.<ref name="BSKKVHarvestAdvice">{{cite web
|title=Crop Advisory : कृषी सल्ला : कोकण विभाग
|website=अॅग्रोवन
|url=https://agrowon.esakal.com/agro-special/special-agricultural-advisory-for-crops-of-konkan-division
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील पारंपरिक भातकापणीची प्रमुख ओळख **हाताने वापरल्या जाणाऱ्या विळ्याशी** जोडलेली आहे. कालांतराने पारंपरिक विळ्याच्या कार्यक्षमतेत सुधारणा करण्यासाठी दातेरी विळे विकसित झाले आणि त्यानंतर रीपर, रीपर-बाइंडर यांसारख्या यांत्रिक साधनांचा वापर सुरू झाला. त्यामुळे विळ्यापासून यांत्रिक कापणीपर्यंत झालेला बदल हा कोकणातील भातकापणीच्या तंत्रज्ञानातील महत्त्वाचा टप्पा मानता येतो.<ref name="Bhanage2016"/>
== कापणीतील ग्रामीण श्रम आणि सामुदायिक सहभाग ==
कोकणातील पारंपरिक भातकापणी ही मोठ्या प्रमाणावर मानवी श्रमांवर आधारित होती. भाताची कापणी, कापलेला भात एकत्र करणे, मळणी, धान वेगळे करणे आणि वाळवणे या कापणीनंतरच्या प्रक्रियांमध्येही मनुष्यबळाची आवश्यकता असे. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासानुसार कापणी व कापणीनंतरची कामे श्रमप्रधान असल्यामुळे या प्रक्रियांचा एकूण उत्पादनखर्च आणि काम पूर्ण करण्यासाठी लागणारा वेळ यांवर मनुष्यबळाची उपलब्धता परिणाम करते.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक पद्धतीत भातकापणीचे काम कुटुंबातील सदस्य तसेच स्थानिक शेतमजुरांच्या सहभागातून केले जात असे. कापणीच्या हंगामात कमी कालावधीत मोठ्या क्षेत्रातील पीक कापून घेणे आवश्यक असल्याने उपलब्ध मनुष्यबळाचे नियोजन महत्त्वाचे ठरत असे. कोकणातील लहान आणि तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनींमध्ये यांत्रिक कापणीची साधने वापरण्यावरही भौगोलिक आणि आर्थिक मर्यादा येत असल्याने मानवी श्रमांना पारंपरिक शेतीपद्धतीत विशेष महत्त्व होते.<ref name="Bhanage2016"/>
भातकापणीशी संबंधित कामे केवळ कापणीपुरती मर्यादित नसून त्यानंतरची मळणी, धान व पेंढा वेगळे करणे आणि धान वाळवणे अशा टप्प्यांपर्यंत चालत. या सर्व कामांमध्ये अनेक व्यक्तींचा सहभाग आवश्यक असल्याने कापणीचा काळ हा ग्रामीण पातळीवरील श्रमविनिमय आणि परस्पर सहकार्याशी जोडलेला असे. तथापि, अशा पारंपरिक सामुदायिक प्रथांचे स्वरूप गावागावानुसार वेगवेगळे असल्याने त्याबाबत सर्व कोकणाला लागू होईल असा एकसमान निष्कर्ष काढता येत नाही.
कापणीच्या कामासाठी मोठ्या प्रमाणावर मजूर लागणे ही कोकणातील भातशेतीची महत्त्वाची अडचण ठरली आहे. मजुरांची कमतरता आणि वाढती मजुरी यामुळे वेळेत कापणी करणे शेतकऱ्यांसाठी अधिक खर्चिक झाले आहे. या परिस्थितीमुळे भातकापणीतील श्रमभार कमी करण्यासाठी रीपर, रीपर-बाइंडर आणि इतर कापणी यंत्रांचा वापर करण्याची आवश्यकता निर्माण झाली.<ref name="Bhanage2016"/>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीमध्ये ग्रामीण श्रम, कुटुंबीय सहभाग आणि स्थानिक पातळीवरील परस्पर सहकार्य यांना पारंपरिक काळात महत्त्वाचे स्थान होते. मात्र मजूरटंचाई, वाढता मजुरीखर्च आणि कापणी वेळेत पूर्ण करण्याची गरज यांमुळे या श्रमाधारित व्यवस्थेत बदल होत असून यांत्रिकीकरणाकडे कल वाढत आहे.
== कापणीनंतरची मळणी आणि धान वेगळे करणे ==
भाताची कापणी झाल्यानंतर कापलेले पीक मळणीसाठी नेले जाते. मळणीच्या प्रक्रियेत भाताच्या कणसांपासून धान वेगळे केले जाते. पारंपरिक पद्धतीत ही प्रक्रिया मानवी श्रमांवर आधारित होती. कापणी, मळणी आणि त्यानंतर धान व पेंढा वेगळे करण्याच्या कामांसाठी मोठ्या प्रमाणावर मनुष्यबळ लागत असल्याने कोकणातील भातशेतीतील कापणीनंतरची कामे श्रमप्रधान राहिली आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक मळणीनंतर धानामध्ये पेंढा, कणसांचे तुकडे, भुसा आणि इतर हलका कचरा मिसळलेला असतो. त्यातून स्वच्छ धान वेगळे करण्यासाठी पाखडणी केली जाते. नैसर्गिक वाऱ्याच्या साहाय्याने किंवा हाताने चालविलेल्या पाखडणीच्या साधनांनी हलका पेंढा व भुसा बाजूला केला जातो आणि तुलनेने जड धान खाली साचते. अशा प्रकारे मळणी आणि पाखडणी या एकमेकांशी संबंधित असल्या तरी धान स्वच्छ करण्याच्या स्वतंत्र प्रक्रिया आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भातशेतीच्या यांत्रिकीकरणाच्या अभ्यासात मळणीसाठी पेडलवर चालणारे थ्रेशर, वायर-लूप प्रकारचे थ्रेशर, उलट्या साखळी-पट्टीवर आधारित थ्रेशर आणि अक्षीय प्रवाहाचे थ्रेशर यांसारख्या साधनांचा अभ्यास करण्यात आला. धान वेगळे केल्यानंतर पाखडणीसाठी हाताने चालविलेले तसेच शक्तिचलित विन्नोअर वापरण्याच्या पद्धतींचाही विचार करण्यात आला.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील लहान व तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनी आणि शेतकऱ्यांची मर्यादित आर्थिक क्षमता यांमुळे मोठ्या क्षमतेची यंत्रे सर्व शेतकऱ्यांना स्वतःच्या मालकीची ठेवणे शक्य होत नाही. त्यामुळे मळणी व पाखडणीच्या यांत्रिकीकरणासाठी सामायिक वापर, यंत्रसेवा किंवा कस्टम हायरिंग यांसारख्या पद्धती उपयुक्त ठरू शकतात.<ref name="Bhanage2016"/>
मळणी आणि पाखडणीच्या कामात मजुरांची कमतरता निर्माण झाल्यास कापणीनंतरचे काम वेळेत पूर्ण होण्यास विलंब होऊ शकतो. कोकणातील अभ्यासात मजुरांची कमतरता आणि वाढता मजुरीखर्च यामुळे कापणी व मळणीच्या कामांमध्ये विलंब होत असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. त्यामुळे कापणीनंतरच्या प्रक्रियांमध्ये यांत्रिकीकरणाला महत्त्व प्राप्त झाले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
== धान वाळवणे, साठवण आणि घरगुती प्रक्रिया ==
भातकापणी आणि मळणीनंतर मिळालेले धान साठवण्यापूर्वी योग्य प्रकारे वाळवणे आवश्यक असते. कोकणातील रायगड जिल्ह्यातील १२० शेतकरी महिलांच्या अभ्यासात मळणीच्या जागेवर धान्याची योग्य प्रकारे स्वच्छता व वाळवण करणे आणि उन्हात वाळवणे या पद्धती मोठ्या प्रमाणावर वापरल्या जात असल्याचे आढळले. अभ्यासातील ९३.३३ टक्के महिलांनी धान्याचे योग्य वाळवण व स्वच्छता तसेच उन्हात वाळवणाची पद्धत अवलंबल्याचे नोंदविण्यात आले आहे.<ref name="ChavanMehtaKale2013">{{cite journal
|last=Chavan
|first=K. M.
|author2=Mehta, P. G.
|author3=Kale, R. A.
|title=Food grain storage practices followed by the farm women
|journal=International Journal of Processing and Post Harvest Technology
|volume=4
|issue=2
|year=2013
|pages=83–85
|url=https://researchjournal.co.in/online/IJPPHT/IJPPHT%204%282%29/4_83-85_A.pdf
}}</ref>
कोकणातील पारंपरिक साठवण पद्धतींमध्ये धान घरातील स्थानिक साधनसामग्रीपासून तयार केलेल्या संरचनांमध्ये ठेवले जात असे. कोकणातील धानसाठवण संरचनांच्या अभ्यासात *कणंज किंवा साठी, मुडी, कंगे, मटक्या, ताटी आणि हाडपा* यांसारख्या पारंपरिक संरचनांचा उल्लेख करण्यात आला आहे. या संरचनांमध्ये शेतकरी घरातच धान साठवत असल्याचे अभ्यासात नमूद केले आहे.<ref name="KadKhandetodNimbalkarJadhav2016">{{cite journal
|last=Kad
|first=V. P.
|author2=Khandetod, Y. P.
|author3=Nimbalkar, C. A.
|author4=Jadhav, M. S.
|title=Design and Development of Paddy Storage Structure for Konkan Region
|journal=IMPACT: International Journal of Research in Engineering & Technology
|volume=4
|issue=5
|year=2016
|pages=25–34
|url=https://www.impactjournals.us/download/archives/2-77-1462972101-3.%20IJRET%20eng-DESIGN%20AND%20DEVELOPMENT%20OF%20PADDY%20STORAGE%20STRUCTURE%20FOR%20KONKAN%20REGION.pdf
}}</ref>
पारंपरिक साठवणुकीमध्ये किडी, बुरशी आणि उंदरांमुळे धान्याचे नुकसान होण्याची शक्यता होती. रायगड जिल्ह्यातील अभ्यासात धान्य साठवताना गोणपाटाच्या पोत्यांचा वापर ८७.५० टक्के महिलांनी केला असल्याचे आढळले. तसेच साठवलेल्या धान्याला किडींपासून संरक्षण देण्यासाठी ९३.३३ टक्के महिलांनी कडुनिंबाच्या पानांचा वापर केला होता. याउलट सिलो, पूसा बिन किंवा किसान कोठी यांसारख्या सुधारित साठवण संरचनांचा वापर अभ्यासातील प्रतिसादकर्त्यांमध्ये आढळला नाही.<ref name="ChavanMehtaKale2013"/>
कोकणातील दमट हवामानामुळे धान साठवताना आर्द्रता नियंत्रणाला विशेष महत्त्व आहे. कोकणातील दमट हवामानात धानाच्या साठवणीवर केलेल्या अभ्यासात साठवण कालावधी वाढत असताना धानाच्या काही भौतिक व गुणवत्ताविषयक गुणधर्मांमध्ये बदल होत असल्याचे आढळले. साठवणीच्या कालावधीत कीड प्रादुर्भाव वाढणे आणि धानातील आर्द्रतेत बदल होणे यांसारखे परिणाम नोंदविण्यात आले आहेत.<ref name="ThakorPatilSawant2012">{{cite journal
|last=Thakor
|first=N. J.
|author2=Patil, S. C.
|author3=Sawant, A. A.
|author4=Sawant, S. D.
|title=Influence of Storage Period on Physical Properties and Quality of Paddy Stored in GIC Silo and Bag Storage under Humid Konkan Climatic Conditions
|journal=Journal of Agricultural Engineering
|volume=49
|issue=1
|year=2012
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JAE/article/view/21870
}}</ref>
धानाचे घरगुती उपयोगासाठी रूपांतर करण्याच्या प्रक्रियेत साली काढणे, तांदूळ तयार करणे आणि त्यापासून विविध पदार्थ बनवणे अशा प्रक्रिया येतात. उत्तर कोकणातील पाडळ प्रक्रिया उद्योगांवरील अभ्यासातून धान प्रक्रियेमधून तांदळाबरोबर तांदळाची कोंडा, तूस आणि तुटलेला तांदूळ यांसारखी उपउत्पादनेही मिळतात, असे दिसून येते. या प्रक्रियेमुळे कच्च्या धानाचे खाद्य तांदळात रूपांतर होते आणि त्याला अतिरिक्त मूल्य प्राप्त होते.<ref name="ChakranarayanToraneBachhaoNikam2024">{{cite journal
|last=Chakranarayan
|first=Ankita
|author2=Torane, Sanjaykumar
|author3=Bachhao, Kiran
|author4=Nikam, Yogesh
|title=Economic Analysis of Value Addition in Paddy Processing in North Konkan Region of Maharashtra, India
|journal=Acta Scientific Agriculture
|volume=8
|issue=10
|year=2024
|pages=11–16
|url=https://actascientific.com/ASAG/ASAG-08-1411.php
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीनंतरची प्रक्रिया ही **धान स्वच्छ करणे → उन्हात वाळवणे → सुरक्षित साठवण → आवश्यकतेनुसार धानाची प्रक्रिया करून तांदूळ तयार करणे** या क्रमाने पुढे जाते. पारंपरिक घरगुती साठवण पद्धतींमध्ये स्थानिक साधनसामग्रीचा वापर होत असला, तरी कोकणातील दमट हवामानामुळे धानाची योग्य वाळवण, आर्द्रता नियंत्रण आणि कीडप्रतिबंधक साठवण या बाबींना विशेष महत्त्व आहे.
== कोकणातील पाऊस, जमीन आणि कापणीची वेळ ==
कोकणातील भातशेतीवर पर्जन्यमानाचा मोठा प्रभाव असतो. हा प्रदेश उष्ण व दमट हवामानाचा असून येथे वार्षिक पर्जन्यमान साधारण २०० ते ३५० सेंमीपर्यंत आढळते. पर्जन्याचे प्रमाण, त्याचे ऋतुनिहाय वितरण आणि जमिनीची पाणीधारण क्षमता यांचा विचार करून कोकणातील पिकांची रचना निश्चित होते. त्यामुळे भातपिकाच्या वाढीपासून पक्वतेपर्यंतच्या कालावधीवरही पावसाचा प्रभाव पडतो.<ref name="BiswasPhadtare1995"/>
कोकणातील भातशेतीच्या जमिनींचे स्वरूपही कापणीच्या वेळेवर अप्रत्यक्ष परिणाम करते. प्रदेशातील जमिनींच्या पाणीधारण क्षमतेनुसार आणि पर्जन्याच्या उपलब्धतेनुसार भातासाठी योग्य पीकपद्धती बदलते. काही भागांत पावसाचे पाणी जमिनीत साठून राहिल्यामुळे पिकाच्या वाढीच्या उत्तरार्धात बाहेरील पावसाची आवश्यकता तुलनेने कमी होऊ शकते. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील भातपिकाच्या अभ्यासात वाढीच्या वेगवेगळ्या अवस्थांमध्ये पावसाचा परिणाम वेगवेगळा असल्याचे आढळले आहे.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
भातपिकाच्या सुरुवातीच्या वाढीच्या अवस्थेत पुरेसा पाऊस आवश्यक असतो. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील १९५१ ते १९८७ या कालावधीच्या अभ्यासात भाताच्या वाढीतील विविध अवस्थांमध्ये पर्जन्यमानाचा उत्पादनाशी संबंध असल्याचे आढळले. विशेषतः फुटवे येण्याच्या अवस्थेत पावसाचे महत्त्व दिसून आले, तर पुढील काही अवस्थांमध्ये जमिनीत साठलेली आर्द्रता पिकासाठी उपयुक्त ठरू शकते.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
कापणीच्या काळात मात्र पावसाचे स्वरूप वेगळ्या प्रकारे महत्त्वाचे ठरते. पीक पक्व झाल्यानंतरही पाऊस सुरू राहिल्यास शेतातील जमीन ओलसर राहते आणि कापणी, कापलेले पीक शेताबाहेर आणणे, मळणी व धान वाळवणे या कामांमध्ये अडथळे निर्माण होऊ शकतात. कोकणातील भातकापणीवरील अभ्यासात मजुरांची कमतरता आणि कापणीच्या कामातील विलंब ही समस्या नोंदविण्यात आली असून वेळेत कापणी न झाल्यास कापणीनंतरच्या कामांवरही त्याचा परिणाम होतो.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील पावसाचा कालावधी आणि त्यातील बदल यांमुळे कापणीसाठी उपलब्ध कोरड्या हवामानाच्या कालखंडाला विशेष महत्त्व प्राप्त होते. कोकण प्रदेशातील बारा ठिकाणांच्या पर्जन्यविषयक अभ्यासात वार्षिक आणि हंगामी पर्जन्यमान तसेच पावसाळी दिवसांच्या प्रवृत्तींमध्ये स्थानानुसार फरक आढळला आहे. त्यामुळे कोकणातील सर्व जिल्ह्यांसाठी कापणीची एकच निश्चित वेळ ठरविण्याऐवजी स्थानिक पर्जन्यस्थिती आणि पिकाची पक्वता यांचा एकत्रित विचार करणे आवश्यक ठरते.<ref name="Kadam2019">{{cite journal
|last=Kadam
|first=U. S.
|author2=Jedhe, S. H.
|author3=Mane, M. S.
|author4=Mahale, D. M.
|author5=Nandgude, S. B.
|title=Spatio-temporal Trends of Rainfall and Rainy Days in Konkan Region of Maharashtra
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|volume=37
|issue=1
|year=2019
|pages=25–36
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92410
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीची वेळ ही केवळ पिकाच्या पक्वतेवर अवलंबून नसून **पावसाचे आगमन व माघार, जमिनीतील ओलावा, स्थानिक जमीनप्रकार आणि कापणीच्या वेळी उपलब्ध होणारा कोरडा कालावधी** या घटकांच्या परस्परसंबंधातून ठरते. म्हणूनच पक्व भाताची कापणी योग्य हवामानाच्या कालखंडात लवकर पूर्ण करणे कोकणातील भातशेतीसाठी महत्त्वाचे ठरते.
== कोकणातील भातकापणीचे यांत्रिकीकरण ==
कोकणातील भातशेतीमध्ये कापणी आणि कापणीनंतरची कामे पारंपरिकरीत्या मोठ्या प्रमाणावर मानवी श्रमांवर अवलंबून होती. मजुरांची कमतरता, वाढता मजुरीखर्च आणि पक्व झालेल्या पिकाची वेळेत कापणी करण्याची आवश्यकता यामुळे भातकापणीच्या यांत्रिकीकरणाची गरज निर्माण झाली. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासात कापणी व मळणीच्या यांत्रिकीकरणाचा आर्थिक व्यवहार्यतेच्या दृष्टीने अभ्यास करण्यात आला आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भातकापणीसाठी स्वयंप्रचालित रीपर, रीपर-बाइंडर आणि कापणीसाठी सुधारित हातसाधने यांसारख्या पर्यायांचा अभ्यास झाला आहे. कापणीनंतरच्या प्रक्रियांसाठी पेडलवर चालणारे थ्रेशर, वायर-लूप प्रकारचे थ्रेशर, उलट्या साखळी-पट्टीवर आधारित थ्रेशर, अक्षीय प्रवाहाचे थ्रेशर तसेच हातचलित व शक्तिचलित विन्नोअर यांचा वापर विचारात घेण्यात आला आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भौगोलिक आणि आर्थिक परिस्थिती लक्षात घेऊन यंत्रांची निवड करणे महत्त्वाचे ठरते. लहान व तुकड्यात विभागलेली शेतजमीन आणि अनेक शेतकऱ्यांकडे असलेले अल्प क्षेत्र यामुळे मोठ्या यंत्रांची वैयक्तिक मालकी आर्थिकदृष्ट्या व्यवहार्य ठरत नाही. कोकणातील अभ्यासात सुमारे ०.२ हेक्टर क्षेत्र धारण करणाऱ्या बहुसंख्य शेतकऱ्यांना कापणी, मळणी आणि पाखडणीची यंत्रे स्वतः खरेदी करणे त्यांच्या आर्थिक परिस्थितीमुळे शक्य नसल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
या परिस्थितीत रीपर आणि रीपर-बाइंडर यांसारखी यंत्रे कोकणातील लहान व मध्यम शेतांसाठी तुलनेने उपयुक्त पर्याय ठरू शकतात. अभ्यासानुसार रीपर, रीपर-बाइंडर, शक्तिचलित थ्रेशर आणि विन्नोअर यांच्या विविध संयोगांमध्ये कोकणाच्या परिस्थितीत यांत्रिकीकरणाची क्षमता आढळून आली आहे. यंत्रांची कार्यक्षमता आणि प्रति हेक्टर बदलता खर्च हे त्यांच्या आर्थिक व्यवहार्यतेवर परिणाम करणारे महत्त्वाचे घटक आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भातकापणीच्या यांत्रिकीकरणात केवळ यंत्रांची उपलब्धता नव्हे, तर ती शेतकऱ्यांना परवडणाऱ्या पद्धतीने उपलब्ध करून देणे महत्त्वाचे आहे. त्यामुळे कस्टम हायरिंग सेवा आणि कृषी अवजारे बँक यांसारख्या सामायिक यंत्रवापराच्या पद्धतींचा विस्तार करण्याची शिफारस करण्यात आली आहे. अशा पद्धतींमुळे अल्पभूधारक शेतकऱ्यांना यंत्रे स्वतः खरेदी न करता आवश्यकतेनुसार त्यांचा वापर करता येतो.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील शेतकऱ्यांच्या शारीरिक श्रमभाराचाही यांत्रिकीकरणाच्या संशोधनात विचार करण्यात आला आहे. ICARच्या वार्षिक अहवालानुसार कोकणातील पुरुष कामगारांच्या शारीरिक मापदंडांचा विचार करून गवत कापणी यंत्रासोबत वापरता येणारे पॅडी हार्वेस्टर विकसित करण्यात आले. सुधारित यंत्रामुळे विद्यमान यंत्राच्या तुलनेत चालकावरील शारीरिक कामाचा भार कमी झाल्याचे परीक्षणात आढळले.<ref name="ICARAnnualReport2023">{{cite report
|author=Indian Council of Agricultural Research
|title=ICAR Annual Report 2023–24
|publisher=Indian Council of Agricultural Research
|year=2024
|url=https://icar.gov.in/sites/default/files/2025-04/ICAR%20Annual%20Report%202023-24-english.pdf
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीचे यांत्रिकीकरण हे केवळ पारंपरिक विळ्याची जागा यंत्राने घेण्यापुरते मर्यादित नसून **कापणी, बांधणी, मळणी आणि पाखडणी या संपूर्ण प्रक्रियेत श्रम व वेळ कमी करण्याचा प्रयत्न** आहे. मात्र कोकणातील लहान शेतजमिनी आणि शेतकऱ्यांची आर्थिक क्षमता लक्षात घेता मोठ्या यंत्रांच्या वैयक्तिक मालकीपेक्षा कस्टम हायरिंग व सामायिक यंत्रवापराची व्यवस्था अधिक व्यवहार्य ठरू शकते.<ref name="Bhanage2016"/>
== मजूरटंचाई, स्थलांतर आणि बदलती कापणी पद्धत ==
कोकणातील भातशेतीमध्ये कापणीच्या हंगामात उपलब्ध होणारे ग्रामीण मनुष्यबळ हा महत्त्वाचा घटक आहे. पारंपरिक भातकापणी, मळणी आणि पाखडणी या कामांसाठी मोठ्या प्रमाणावर मजुरांची आवश्यकता असल्याने मजूर उपलब्धतेतील घटकांचा थेट परिणाम कापणीच्या वेळेवर आणि उत्पादनखर्चावर होतो. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासात कृषी कामे श्रमप्रधान असून मजुरांची कमतरता निर्माण झाल्यामुळे कापणी व मळणीच्या कामात विलंब होत असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील काही ग्रामीण भागांत कृषी मजुरांचे इतर ठिकाणी रोजगारासाठी स्थलांतर होणे ही मजूर उपलब्धतेवर परिणाम करणारी बाब आहे. कोकणातील पावसावर आधारित भातशेतीवरील एका गावपातळीच्या अभ्यासात बहुतांश प्रतिसादकर्त्यांनी मजुरीचा वाढता खर्च ही अडचण असल्याचे नमूद केले असून, ग्रामीण भागातील अनेक मजूर अधिक उत्पन्नाच्या शोधात इतर ठिकाणी रोजगारासाठी स्थलांतरित होत असल्याचे नोंदविण्यात आले आहे.<ref name="TribalRiceConstraints2019">{{cite journal
|title=Constraints Faced By The Tribal Farmers In Rainfed Rice Production In Konkan Region-A Village Level Study
|journal=International Journal of Current Microbiology and Applied Sciences
|year=2019
|url=https://www.researchgate.net/publication/331587276_Constraints_Faced_By_The_Tribal_Farmers_In_Rainfed_Rice_Production_In_Konkan_Region-A_Village_Level_Study
}}</ref>
मजूरटंचाई आणि वाढता मजुरीखर्च यामुळे भातकापणीची पारंपरिक श्रमाधारित पद्धत आर्थिकदृष्ट्या अधिक खर्चिक होत गेली. कोकणातील तुकड्यात विभागलेली आणि लहान शेतजमीन लक्षात घेता मोठ्या यंत्रांचा वापर सर्वत्र शक्य नसला तरी स्वयंप्रचालित रीपर, रीपर-बाइंडर आणि मळणी यंत्रे यांसारख्या साधनांचा वापर वाढविण्याचे प्रयत्न झाले आहेत.<ref name="Shahare2012">{{cite journal
|last=Shahare
|first=P. U.
|title=Agricultural Mechanization in Konkan Region of Maharashtra
|journal=Agricultural Engineering Today
|volume=36
|issue=2
|year=2012
|pages=6–9
|url=https://indianjournals.com/article/aet-36-2-002
}}</ref>
यांत्रिकीकरणामुळे कापणीसाठी आवश्यक मानवी श्रम कमी करण्याबरोबरच कमी कालावधीत कापणी पूर्ण करण्याची शक्यता वाढते. कोकणातील भातउत्पादनावरील अलीकडील अभ्यासात पालघर आणि ठाणे जिल्ह्यांतील काही शेतकऱ्यांनी यांत्रिक कापणी यंत्रे व मळणी यंत्रे स्वीकारल्यामुळे श्रमावरील अवलंबित्व कमी झाल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Shelake2025">{{cite journal
|last=Shelake
|first=S. M.
|author2=Kshirsagar, P. J.
|author3=Torane, S. R.
|author4=Waravadekar, S. C.
|author5=More, V. G.
|title=Economic analysis for profitable paddy production in Konkan region
|journal=International Journal of Agriculture Extension and Social Development
|volume=8
|issue=10
|year=2025
|url=https://www.extensionjournal.com/archives/2025.v8.i10.I.2591
}}</ref>
मात्र कोकणातील लहान भूधारणा आणि यंत्रांच्या तुलनेने जास्त किंमतीमुळे प्रत्येक शेतकऱ्याला कापणीची यंत्रे स्वतःच्या मालकीची ठेवणे व्यवहार्य ठरत नाही. त्यामुळे कस्टम हायरिंग सेवा आणि कृषी अवजारे बँक यांसारख्या सामायिक यंत्रवापराच्या पद्धतींना महत्त्व प्राप्त झाले आहे. कोकणातील यांत्रिकीकरणाच्या अभ्यासात अशा सेवांचा विस्तार केल्यास अल्पभूधारक शेतकऱ्यांनाही यांत्रिकीकरणाचा लाभ मिळू शकतो, असे सुचविण्यात आले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
अशा प्रकारे मजूरटंचाई, ग्रामीण मनुष्यबळाचे स्थलांतर आणि वाढता मजुरीखर्च या घटकांमुळे कोकणातील भातकापणीची पारंपरिक श्रमव्यवस्था बदलत आहे. विळ्याने हाताने कापणी करण्याच्या पद्धतीबरोबरच रीपर, रीपर-बाइंडर आणि मळणी यंत्रांचा वापर वाढत असून, सामायिक यंत्रसेवा ही लहान शेतकऱ्यांसाठी महत्त्वाची पर्यायी व्यवस्था ठरत आहे.<ref name="Shahare2012"/>
== रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, रायगड, ठाणे-पालघरमधील प्रादेशिक वैशिष्ट्ये ==
कोकणातील भातशेतीची भौगोलिक व कृषी परिस्थिती जिल्ह्यानुसार काही प्रमाणात बदलते. डॉ. बाळासाहेब सावंत कोकण कृषी विद्यापीठाच्या वर्गीकरणानुसार रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग हे दक्षिण कोकण क्षेत्रात, तर रायगड, पालघर आणि ठाणे हे उत्तर कोकण क्षेत्रात येतात. या प्रदेशात किनारी, पठारी आणि डोंगराळ अशा भौगोलिक पट्ट्यांनुसार शेतीचे स्वरूप बदलते. दक्षिण कोकणात लालसर-जांभ्या प्रकारच्या आम्लधर्मी जमिनींचे प्राबल्य आहे, तर उत्तर कोकणातील काही भागांत बेसॉल्टजन्य तपकिरी ते काळ्या जमिनी आढळतात; डोंगरउतारांवर उथळ व वालुकामय तर खोऱ्यांमध्ये चिकणमातीप्रधान जमिनी आढळतात.<ref name="DBSKKVKonkanRice">{{cite web
|title=RICE PRODUCTION IN KONKAN
|publisher=Dr. Balasaheb Sawant Konkan Krishi Vidyapeeth
|url=https://archive.dbskkv.org/collection/420/document/2304
}}</ref>
रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग या दक्षिण कोकणातील जिल्ह्यांमध्ये मोठ्या प्रमाणावर पावसावर आधारित भातशेती आढळते. डोंगरउतार, खोरी आणि किनारी भाग यांनुसार शेतजमिनींचे स्वरूप बदलत असल्यामुळे भात लागवडीच्या पद्धतीतही स्थानिक फरक दिसतात. सिंधुदुर्ग जिल्ह्याची भात उत्पादकता कोकण विभागातील इतर जिल्ह्यांच्या तुलनेत अधिक असल्याची नोंद कोकणातील भात उत्पादनाच्या उपलब्ध आकडेवारीत करण्यात आली आहे.<ref name="DBSKKVKonkanRice"/>
रायगड जिल्हा भाताच्या क्षेत्रफळाच्या दृष्टीने कोकणातील महत्त्वाचा जिल्हा आहे. उपलब्ध जिल्हानिहाय आकडेवारीनुसार रायगडमध्ये भाताखालील क्षेत्र सुमारे १.२५ लाख हेक्टर आणि भात उत्पादन सुमारे ३.५१ लाख टन नोंदविण्यात आले होते. त्यामुळे कोकणातील एकूण भात उत्पादनात रायगडचा महत्त्वाचा वाटा आहे.<ref name="DBSKKVKonkanRice"/>
ठाणे आणि पालघर हे उत्तर कोकणातील जिल्हे असून येथे भातशेतीबरोबर आदिवासी व ग्रामीण भागातील पारंपरिक कृषीपद्धतींचेही महत्त्व आहे. पालघर जिल्ह्यातील वाडा आणि पालघर तालुक्यांतील भात उत्पादक गावांवर केलेल्या अभ्यासात भात हे प्रमुख खरीप पीक असल्याचे आणि शेतकरी शिफारस केलेल्या भात उत्पादन तंत्रज्ञानाचा अवलंब करीत असल्याचे आढळते.<ref name="KarangamiDhengeChavanAnarase2020">{{cite journal
|last=Karangami
|first=R. S.
|author2=Dhenge, S. A.
|author3=Chavan, P. M.
|author4=Anarase, M. S.
|title=Association of Profile Characteristics of Rice Growers and Adoption of Recommended Package of Practices
|journal=Indian Journal of Extension Education
|year=2020
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/IJEE/article/view/109198
}}</ref>
उपलब्ध जिल्हानिहाय आकडेवारीत ठाणे जिल्ह्याचे भाताखालील क्षेत्र, उत्पादन आणि उत्पादकता कोकणातील इतर प्रमुख भात उत्पादक जिल्ह्यांच्या तुलनेत कमी असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. त्याच वेळी उत्तर कोकणातील भातशेतीवर लहान भूधारणा, स्थानिक भौगोलिक परिस्थिती आणि उपलब्ध कृषी मनुष्यबळ यांचा प्रभाव पडतो.<ref name="DBSKKVKonkanRice"/>
भातकापणीच्या दृष्टीने या प्रादेशिक फरकांना विशेष महत्त्व आहे. रायगड, रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्गमध्ये मोठ्या प्रमाणातील भातक्षेत्रामुळे कापणीच्या काळात मोठ्या प्रमाणावर मनुष्यबळ आणि यंत्रसेवेची आवश्यकता निर्माण होते. उत्तर कोकणातील ठाणे व पालघरमध्ये लहान शेतजमिनी, ग्रामीण व आदिवासी भाग आणि बदलती कृषी श्रमव्यवस्था यांमुळे कापणीच्या पद्धतीत स्थानिक परिस्थितीनुसार बदल होत आहेत. त्यामुळे संपूर्ण कोकणासाठी भातकापणीची एकच पद्धत किंवा एकच कालमर्यादा लागू होत नाही; जिल्ह्याची भौगोलिक रचना, जमीन, पर्जन्यस्थिती, पीकवाण आणि शेताचा आकार यांनुसार कापणीचे स्वरूप बदलते.
अशा प्रकारे **रत्नागिरी-सिंधुदुर्गचा दक्षिण कोकण, रायगडचा मोठा भातक्षेत्र असलेला मध्य-उत्तर भाग आणि ठाणे-पालघरचा उत्तर कोकण** यांमध्ये भातशेतीच्या क्षेत्रफळ, उत्पादकता, जमीनप्रकार आणि कृषी-सामाजिक परिस्थितीत फरक आढळतो. हे प्रादेशिक वैविध्य भातकापणीच्या वेळा, श्रमाची गरज आणि यांत्रिकीकरणाच्या स्वीकारावरही परिणाम करणारे महत्त्वाचे घटक आहेत.
== भातकापणी आणि कोकणातील ग्रामीण जीवन व लोकसंस्कृती ==
कोकणातील भातकापणी ही केवळ कृषी उत्पादनाची प्रक्रिया नसून ग्रामीण जीवनातील सामाजिक आणि सांस्कृतिक व्यवहारांशीही संबंधित राहिली आहे. भाताचे पीक हे पावसाळी शेतीच्या वार्षिक चक्राचा महत्त्वाचा भाग असल्यामुळे पेरणीपासून कापणीपर्यंतच्या विविध टप्प्यांशी स्थानिक देवता, शेतजमीन, पाऊस, जनावरे आणि चांगल्या पीकउत्पादनाच्या अपेक्षा जोडलेल्या होत्या. कोकणातील लोकपरंपरांचे संकलन करणाऱ्या *Folk Lore Notes, Vol. II—Konkan* या ग्रंथात पेरणी आणि कापणीच्या काळाशी संबंधित विविध कृषीविधींची नोंद आढळते.<ref name="JacksonEnthoven1915">{{cite book
|last=Jackson
|first=A. M. T.
|author2=Enthoven, R. E.
|title=Folk Lore Notes, Vol. II—Konkan
|publisher=British India Press
|year=1915
|url=https://books.google.com/books/about/Folk_Lore_Notes.html?id=a4XlAAAAMAAJ
}}</ref>
कापणीच्या वेळी शेतात नवीन धान्याच्या राशीची पूजा करण्याची प्रथा कोकणातील अनेक भागांत नोंदविण्यात आली आहे. तसेच काही ठिकाणी शेतातील पहिल्या कापणीच्या दिवशी शिजवलेले अन्न तयार करून ते देवतेला नैवेद्य म्हणून अर्पण केले जात असे. या प्रथांमधून नवीन पीक हे केवळ आर्थिक उत्पादन नसून धार्मिक कृतज्ञता आणि सामुदायिक जीवनाचा भाग मानले जात असल्याचे दिसून येते.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
रत्नागिरी जिल्ह्यातील फोंडा येथे कापणीच्या वेळी शेताच्या कोपऱ्यात भात आणि दह्यापासून तयार केलेले 'शिवार' ठेवण्याची प्रथा नोंदविण्यात आली आहे. या विधीला 'चोरावा' असेही संबोधले जात असल्याचे त्या ऐतिहासिक नोंदीत नमूद आहे. अशा प्रथा शेत, पीक आणि स्थानिक धार्मिक विश्वास यांच्यातील संबंध दर्शवतात.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
कोकणातील काही भागांत कापणीच्या वेळी शेताच्या रक्षणाशी संबंधित स्थानिक देवतांना नारळ, कोंबड्या किंवा शेळ्या अर्पण करण्याच्या प्रथा नोंदविण्यात आल्या आहेत. रत्नागिरी जिल्ह्यातील काही गावांमध्ये तसेच मालवण परिसरात पेरणी आणि कापणीच्या काळात शेतरक्षक देवतांना अर्पणे केली जात असल्याचे ऐतिहासिक लोकसाहित्याच्या नोंदीत नमूद आहे. या प्रथा त्या काळातील ग्रामीण समाजाच्या कृषीविश्वासांचे दस्तऐवजीकरण करतात.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
कोलाबा जिल्ह्यातील दासगावच्या संदर्भात कापणीच्या वेळी शेतात नारळ ठेवून पहिल्या कापलेल्या भाऱ्याने त्याला काही वेळा झोडपण्याची प्रथा नोंदविण्यात आली आहे; त्यानंतर नियमित मळणी सुरू केली जात असे. अशा विधींमधून पहिल्या कापणीच्या उत्पादनाला प्रतीकात्मक महत्त्व दिले जात असल्याचे दिसते.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
या कृषीपरंपरांमुळे भातकापणीचा काळ हा ग्रामीण समाजाच्या सामूहिक जीवनाशी जोडलेला असे. शेतातील कामे, स्थानिक देवतांची पूजा, नवीन धान्याशी संबंधित विधी आणि कुटुंब व गावसमूहातील सहभाग यांमधून कृषी उत्पादन आणि लोकसंस्कृती यांचे परस्परसंबंध दिसून येतात. मात्र उपलब्ध लोकसाहित्यविषयक नोंदी मुख्यतः विसाव्या शतकाच्या प्रारंभीच्या काळातील असल्यामुळे त्यातील प्रत्येक प्रथा आजही कोकणातील सर्व भागांत प्रचलित आहे, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
भातकापणीशी संबंधित या ऐतिहासिक प्रथा कोकणातील ग्रामीण समाजात भाताला असलेले आर्थिक, सामाजिक आणि सांस्कृतिक महत्त्व स्पष्ट करतात. त्यामुळे भातकापणीचा अभ्यास करताना कापणीची तांत्रिक प्रक्रिया, ग्रामीण श्रमव्यवस्था आणि कापणीनंतरची कामे यांसोबतच त्याभोवती निर्माण झालेल्या लोकपरंपरांचाही विचार करणे आवश्यक ठरते.
== आधुनिक काळातील बदल, आव्हाने आणि भविष्यातील दिशा ==
कोकणातील भातकापणीच्या पद्धतीमध्ये आधुनिक काळात लक्षणीय बदल होत आहेत. पारंपरिक हाताने कापणी आणि श्रमप्रधान मळणीच्या पद्धतींबरोबर रीपर, रीपर-बाइंडर, विविध प्रकारची मळणी यंत्रे आणि पाखडणीची यंत्रे वापरण्याकडे कल वाढला आहे. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासानुसार मजुरांची कमतरता आणि वाढता मजुरीखर्च यामुळे वेळेत कापणी व मळणी करणे कठीण होत असून, यांत्रिकीकरण हा त्यावरील महत्त्वाचा पर्याय ठरतो.<ref name="Bhanage2016"/>
आधुनिक तंत्रज्ञानाचा स्वीकार मात्र संपूर्ण कोकणात एकसमान झालेला नाही. लहान आणि तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनी, चिखलयुक्त किंवा पाणथळ क्षेत्र, उताराची जमीन, यंत्रांची किंमत आणि त्यासाठी आवश्यक कुशल चालक यांसारख्या मर्यादा यांत्रिकीकरणाच्या प्रसारावर परिणाम करतात. कोकणातील बहुतांश अल्पभूधारक शेतकऱ्यांना कापणी, मळणी आणि पाखडणीची यंत्रे स्वतःच्या मालकीची ठेवणे आर्थिकदृष्ट्या कठीण असल्याचे अभ्यासातून दिसून आले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
अलीकडील अभ्यासांमध्ये कोकणातील जिल्ह्यांनुसार आधुनिक तंत्रज्ञान स्वीकारण्यात फरक दिसून येतो. पालघर आणि ठाणे जिल्ह्यांतील काही भात उत्पादकांनी यंत्राद्वारे रोपलागवड, हार्वेस्टर आणि थ्रेशर यांचा वापर केला आहे, तर रत्नागिरीतील काही शेतकरी अद्याप अधिक श्रमप्रधान पारंपरिक पद्धतींवर अवलंबून आहेत. सिंधुदुर्गमध्ये भाताच्या पुढील प्रक्रियेत दळण, उकडणे आणि पोहेनिर्मिती यांसारख्या मूल्यवर्धित पद्धतींचा वापर आढळतो.<ref name="Shelake2025"/>
भातकापणीसमोरील आणखी एक महत्त्वाचे आव्हान म्हणजे हवामानातील अनिश्चितता. कोकणातील भातशेती मोठ्या प्रमाणावर मोसमी पावसावर अवलंबून असल्यामुळे पावसाचा कालावधी, तीव्रता आणि कापणीच्या काळातील ओलावा यांचा कापणीच्या नियोजनावर परिणाम होतो. पक्व झालेल्या पिकाची कापणी वेळेत न झाल्यास पिकाचे नुकसान होण्याची शक्यता वाढते. त्यामुळे हवामानविषयक माहिती, पीकपक्वतेचे अचूक निरीक्षण आणि उपलब्ध यंत्रसामग्रीचे वेळेवर नियोजन यांना भविष्यात अधिक महत्त्व प्राप्त होईल.
यांत्रिकीकरणाचा लाभ लहान शेतकऱ्यांपर्यंत पोहोचविण्यासाठी कस्टम हायरिंग सेवा आणि कृषी अवजारे बँका महत्त्वाच्या ठरू शकतात. कोकणातील यांत्रिकीकरणाच्या अभ्यासाने अशा सेवांचा मोठ्या प्रमाणावर विस्तार करण्याची गरज व्यक्त केली आहे. यामुळे शेतकऱ्यांना महागडी यंत्रे स्वतः खरेदी न करता आवश्यक त्या काळात कापणी व मळणीची यंत्रसेवा घेता येऊ शकते.<ref name="Bhanage2016"/>
भविष्यातील दिशेच्या दृष्टीने केवळ कापणीचे यांत्रिकीकरण पुरेसे ठरणार नाही. कापणीपासून मळणी, वाळवण, साठवण, दळण आणि मूल्यवर्धनापर्यंत संपूर्ण साखळी अधिक कार्यक्षम करण्याची गरज आहे. २०२५ मधील कोकणावरील अभ्यासात यांत्रिकीकरण आणि भातप्रक्रियेमुळे मजुरीवरील अवलंबित्व कमी होऊन उत्पादनक्षमता, खर्च आणि बाजारमूल्याच्या दृष्टीने सुधारणा होऊ शकते, असे आढळले आहे.<ref name="Shelake2025"/>
कोकणासाठी भविष्यातील भातकापणीची यंत्रे विकसित करताना या प्रदेशाच्या विशिष्ट परिस्थितीचा विचार करणे आवश्यक आहे. लहान शेतजमीन, पाणथळ क्षेत्र, उतार, अरुंद बांध आणि उच्च पर्जन्यमान यांना अनुरूप हलकी, कमी खर्चाची आणि सहज वाहतूक करता येणारी यंत्रे अधिक उपयुक्त ठरू शकतात. त्याचबरोबर स्थानिक पातळीवर यंत्रचालकांचे प्रशिक्षण, दुरुस्ती व देखभाल सुविधा आणि कस्टम हायरिंगची उपलब्धता वाढविणे आवश्यक आहे.
अशा प्रकारे आधुनिक काळातील कोकणातील भातकापणी ही **पारंपरिक श्रमाधारित पद्धतीपासून योग्य ठिकाणी यांत्रिकीकरण, सामायिक यंत्रसेवा आणि मूल्यवर्धित प्रक्रियांकडे होणाऱ्या संक्रमणाच्या** टप्प्यात आहे. भविष्यातील दिशा ही केवळ अधिक यंत्रे उपलब्ध करून देण्याची नसून, कोकणातील लहान शेतकऱ्यांच्या आर्थिक क्षमतेला, स्थानिक भौगोलिक परिस्थितीला, हवामानाच्या अनिश्चिततेला आणि भाताच्या संपूर्ण मूल्यसाखळीला अनुरूप अशी शाश्वत व परवडणारी व्यवस्था निर्माण करण्याची आहे.
== हेही पहा ==
* [[कोकण]]
* [[भात]]
== बाह्य दुवे ==
* [https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/ Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research — ICAR]
* [https://www.dbskkv.org/ डॉ. बाळासाहेब सावंत कोकण कृषी विद्यापीठ]
{{कोकण लोकजीवन}}
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:कोकण]]
[[वर्ग:महाराष्ट्र]]
[[वर्ग:शेती]]
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2709876
2709805
2026-09-16T05:29:20Z
AdvAnantGholam
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2709876
wikitext
text/x-wiki
[[File:Rice Plantation.jpg|thumb|right|250px|रत्नागिरी जिल्ह्यातील भातशेती]]
कोकणातील भात शेती ही प्रदेशाच्या कृषी आणि ग्रामीण जीवनाचा महत्त्वाचा भाग आहे. कोकणातील भातपिकाची लागवड प्रामुख्याने पावसावर अवलंबून असून, भाताची कापणी हा पिकाच्या उत्पादनचक्रातील अत्यंत महत्त्वाचा टप्पा आहे. या प्रदेशातील भौगोलिक परिस्थिती, अतिवृष्टी, लहान व तुकड्यात विभागलेली शेती, उताराची किंवा पायरीदार जमीन आणि कापणीच्या काळातील मजुरांची उपलब्धता या घटकांचा भातकापणीच्या पद्धतीवर परिणाम होतो.<ref name="Bhanage2016">{{cite journal
|last=Bhanage
|first=G. B.
|author2=P. U. Shahare
|author3=P. S. Deshmukh
|author4=P. B. Gaikwad
|author5=V. V. Aware
|title=Mechanization in Harvesting and Post-Harvest Operation for Paddy in Konkan Region and Its Economic Feasibility
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|volume=34
|issue=2
|year=2016
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92862
}}</ref>
परंपरेने कोकणातील भाताची कापणी मानवी श्रमांवर आधारित राहिली असून विळा किंवा तत्सम साधनांनी भात कापणे, कापलेले भाताचे पुंजके एकत्र करणे, त्यानंतर मळणी व धान वेगळे करणे अशा सलग प्रक्रियेतून कापणीचे काम केले जात असे. कापणी व कापणीनंतरच्या प्रक्रियांमध्ये मोठ्या प्रमाणावर श्रम लागत असल्याने मजुरांची कमतरता आणि वाढता मजुरीखर्च हे कोकणातील भातशेतीसमोरील महत्त्वाचे प्रश्न ठरले आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील शेतीच्या विशिष्ट परिस्थितीमुळे भातकापणीच्या यांत्रिकीकरणालाही स्वतंत्र स्वरूप प्राप्त झाले आहे. लहान व विखुरलेली शेतजमीन, उताराची व पायरीदार शेती आणि मोठ्या प्रमाणातील पाऊस या मर्यादा लक्षात घेऊन भात कापणीसाठी लहान व तुलनेने हलकी यंत्रे विकसित करण्याचे प्रयत्न झाले आहेत.<ref name="Bhanage2017">{{cite journal
|last=Bhanage
|first=Girishkumar Balasaheb
|author2=P. U. Shahare
|author3=V. V. Aware
|author4=K. G. Dhande
|author5=P. S. Deshmukh
|title=Development of stripper harvester for paddy
|journal=Journal of Applied and Natural Science
|volume=9
|issue=4
|year=2017
|pages=1943–1948
|url=https://journals.ansfoundation.org/index.php/jans/article/view/1469
}}</ref>
या पार्श्वभूमीवर कोकणातील भात शेती कापणीचा अभ्यास हा केवळ भात कापण्याच्या तंत्राचा अभ्यास न राहता, पाऊस व जमीन, पिकाची पक्वता, पारंपरिक श्रमव्यवस्था, कापणीची साधने, मळणी व धान साठवण, यांत्रिकीकरण, मजूरटंचाई आणि ग्रामीण लोकजीवन यांचा परस्परसंबंध समजून घेण्याचा विषय ठरतो.
== कोकणातील भातशेतीची भौगोलिक व कृषी पार्श्वभूमी ==
कोकण हा महाराष्ट्राच्या पश्चिम किनारपट्टीवरील अरबी समुद्रालगतचा प्रदेश असून, त्याची भौगोलिक रचना डोंगराळ, खाचखळग्यांची आणि काही ठिकाणी सखल स्वरूपाची आहे. महाराष्ट्रातील कोकण विभागातील भात उत्पादनाच्या संदर्भात ठाणे, पालघर, रायगड, रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग हे प्रमुख जिल्हे विचारात घेतले जातात. या प्रदेशात उष्ण व दमट हवामान आणि मोठ्या प्रमाणातील नैऋत्य मोसमी पाऊस ही भातशेतीस अनुकूल वैशिष्ट्ये आहेत.<ref name="BiswasPhadtare1995">{{cite journal
|last=Biswas
|first=B. C.
|author2=R. D. Phadtare
|title=Cropping pattern of Konkan region on the basis of probabilistic rainfall and soil characteristics
|journal=MAUSAM
|volume=46
|issue=2
|year=1995
|pages=133–140
|url=https://mausamjournal.imd.gov.in/index.php/MAUSAM/article/view/3218
}}</ref>
कोकणातील भातशेती मोठ्या प्रमाणावर पावसावर अवलंबून आहे. अतिवृष्टी आणि सखल भौगोलिक परिस्थितीमुळे खरीप हंगामात भात हे अनेक भागांतील प्रमुख पीक ठरते. अखिल भारतीय समन्वित भात सुधारणा प्रकल्पाच्या उत्पादनाभिमुख सर्वेक्षणानुसार कोकणातील भात उत्पादक पट्ट्यात खरीप हंगामात भाताचे क्षेत्र मोठ्या प्रमाणावर असून, जास्त पावसामुळे काही भागांत खरीप हंगामात भाताव्यतिरिक्त इतर पिकांची लागवड करणे मर्यादित होते.<ref name="AICRIP2019">{{cite report
|author=All India Coordinated Rice Improvement Project
|title=Production Oriented Survey 2019
|publisher=Indian Institute of Rice Research
|url=https://icar-iirr.org/AICRIP/Final%20POS%202019-2020.pdf
}}</ref>
कोकणातील पर्जन्यमानाचा भातपिकाच्या वाढीवर आणि उत्पादनावर थेट परिणाम होतो. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील दीर्घकालीन पर्जन्यविषयक आकडेवारीच्या अभ्यासातून भातपिकाच्या वाढीच्या विविध अवस्थांमध्ये पावसाचे महत्त्व स्पष्ट झाले आहे. त्यामुळे कोकणातील भातशेतीची लागवड, वाढ आणि पक्वता यांचे वेळापत्रक स्थानिक पर्जन्यमानाशी घनिष्ठपणे संबंधित असते.<ref name="ChowdhuryDas1993">{{cite journal
|last=Chowdhury
|first=A.
|author2=H. P. Das
|title=Effect of rainfall on growth and yield of rice in Konkan coast
|journal=MAUSAM
|volume=44
|issue=2
|year=1993
|pages=143–146
|url=https://mausamjournal.imd.gov.in/index.php/MAUSAM/article/view/3811
}}</ref>
कोकणातील कृषी रचनेचे आणखी एक वैशिष्ट्य म्हणजे लहान व तुकड्यात विभागलेली शेतजमीन. अशा जमिनी, डोंगराळ किंवा उताराची भौगोलिक रचना आणि मर्यादित सिंचनसुविधा यांमुळे भातशेतीच्या उत्पादनपद्धतीवर तसेच शेतीच्या यांत्रिकीकरणावर परिणाम होतो. कोकणातील भात उत्पादक शेतकऱ्यांच्या अभ्यासात लहान व विखुरलेली जमीन, मजुरीचा वाढता खर्च आणि उत्पादन तंत्रज्ञान स्वीकारण्यातील अडचणी या महत्त्वाच्या मर्यादा असल्याचे आढळते.<ref name="HileDarekarDatrkar2015">{{cite journal
|last=Hile
|first=R. B.
|author2=A. S. Darekar
|author3=S. B. Datrkar
|title=Adoption assessment of production technology for paddy cultivation in Konkan region of Maharashtra
|journal=Indian Journal of Economics and Development
|volume=11
|issue=1
|year=2015
|pages=217–225
|url=https://indianjournals.com/article/ijed1-11-1-023
}}</ref>
या भौगोलिक आणि कृषी परिस्थितीचा परिणाम भाताच्या कापणीवरही होतो. पिकाच्या पक्वतेच्या काळात उशिरा किंवा अतिवृष्टी झाल्यास कापणीच्या कामात विलंब होऊन पिकाचे नुकसान होऊ शकते. कोकणातील भातपिकाच्या उत्पादनाभिमुख सर्वेक्षणात पक्वता आणि कापणीच्या अवस्थेत झालेल्या उशिराच्या व जोरदार पावसामुळे काही भागांत उत्पादनहानी झाल्याची नोंद आहे.<ref name="AICRIP2019"/>
== कोकणातील भातपिकाचे हंगामी चक्र ==
कोकणातील भातपीक हे प्रामुख्याने खरीप हंगामातील पीक असून त्याचे हंगामी चक्र नैऋत्य मोसमी पावसाच्या आगमनाशी आणि उपलब्ध पाण्याशी जवळून संबंधित आहे. कोकणातील भातपिकाच्या अभ्यासात पेरणीची वेळ, वाणांची निवड आणि पिकाची वाढ यांचा पर्जन्यमान व स्थानिक हवामानाशी संबंध असल्याचे दिसून येते. कोकणातील काही प्रमुख भातवाणांसाठी जूनच्या सुरुवातीच्या काळातील पेरणी अनुकूल ठरू शकते, असे स्थानिक कृषी संशोधनातून दिसून आले आहे.<ref name="Jagtap2016">{{cite journal
|last=Jagtap
|first=D. N.
|author2=V. G. Chavan
|author3=U. V. Mahadkar
|author4=S. A. Chavan
|title=Effect of Sowing Times on the Yield and Yield Attributes of Rice (Oryza sativa L.) Varieties
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|volume=34
|issue=2
|year=2016
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92857
}}</ref>
पावसाळ्याच्या प्रारंभी भातासाठी रोपवाटिका तयार करणे, बियाणे पेरणे आणि मुख्य शेताची मशागत करणे ही कामे सुरू होतात. त्यानंतर योग्य वयाची रोपे मुख्य शेतात लावली जातात. कोकणातील खरीप भाताच्या विविध वाणांवर केलेल्या प्रयोगांमध्ये पेरणीच्या वेळेचा वाढ, उत्पादन आणि आर्थिक परताव्यावर परिणाम होत असल्याचे आढळले आहे.<ref name="Jagtap2016"/>
रोपांची पुनर्लागवड झाल्यानंतर पावसाळ्यात भातपिकाची वाढ, फुटवे येणे, कणसांची निर्मिती आणि दाणे भरणे या अवस्था क्रमाने पूर्ण होतात. या काळात पर्जन्यमानातील चढ-उतार आणि पावसाचे दिवस यांचा पिकाच्या वाढीवर परिणाम होऊ शकतो. कोकण प्रदेशातील पर्जन्यमानाच्या दीर्घकालीन अभ्यासात मे ते नोव्हेंबर या कालावधीत पर्जन्य व पावसाळी दिवसांच्या स्वरूपात बदल आढळल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="KonkanRainfall2019">{{cite journal
|title=Spatio-temporal Trends of Rainfall and Rainy Days in Konkan Region of Maharashtra
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|year=2019
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92410
}}</ref>
पिकाची पक्वता जवळ आल्यानंतर भातकापणीचा टप्पा सुरू होतो. कोकणातील भातशेतीत कापणीची वेळ व पद्धत ही वाणाचा कालावधी, पेरणीची वेळ, स्थानिक हवामान आणि त्या वर्षीच्या पावसाच्या स्वरूपानुसार बदलू शकते. त्यामुळे संपूर्ण कोकणासाठी कापणीची एकच निश्चित तारीख ठरविता येत नाही. कापणी, मळणी आणि धान वाळवणे या कापणीनंतरच्या प्रक्रिया भातपिकाच्या हंगामी चक्राचा अविभाज्य भाग आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
अशा प्रकारे कोकणातील भातपिकाचे हंगामी चक्र साधारणपणे **पावसाळ्याच्या प्रारंभी रोपवाटिका व पेरणी → मुख्य शेताची मशागत व पुनर्लागवड → पावसाळ्यात पिकाची वाढ → दाणे भरणे व पक्वता → भातकापणी → मळणी, धान वेगळे करणे व वाळवणे** अशा क्रमाने पुढे जाते. या संपूर्ण चक्रावर कोकणातील पर्जन्यमान, स्थानिक जमीन, वाण आणि शेतीतील उपलब्ध श्रम यांचा प्रभाव असतो.
== भात कापणीची वेळ आणि पक्वतेची चिन्हे ==
कोकणातील भातपिकाची कापणी प्रामुख्याने खरीप हंगामाच्या अखेरीस केली जाते. कापणीची नेमकी वेळ भाताच्या वाणाचा कालावधी, लागवडीची वेळ, स्थानिक हवामान आणि त्या वर्षीच्या पावसाच्या स्वरूपानुसार बदलते. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील १९५१ ते १९८७ या कालावधीतील आकडेवारीच्या अभ्यासानुसार कोकणात भाताची लागवड साधारणपणे जूनमध्ये होते आणि पिकाचा सक्रिय वाढीचा कालावधी सुमारे ९० दिवसांचा असतो. या अभ्यासात शारीरिक पक्वता प्राप्त झाल्यानंतर काही दिवसांनी, साधारण ऑक्टोबरच्या सुरुवातीस, भाताची कापणी केली जात असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
भातपिकाची कापणी योग्य वेळी करणे महत्त्वाचे असते. पीक पूर्णपणे पक्व होण्यापूर्वी कापणी केल्यास दाणे अपक्व राहण्याची शक्यता असते, तर कापणीस अनावश्यक विलंब झाल्यास दाणे गळणे, कणसे वाकणे किंवा पिकाचे नुकसान होण्याचा धोका वाढतो. त्यामुळे शेतातील पिकाची प्रत्यक्ष पक्वता पाहून कापणीचा निर्णय घेतला जातो.<ref name="ICARHarvest2025">{{cite report
|author=Indian Council of Agricultural Research
|title=Kharif Agro-Advisories for Farmers 2025
|publisher=Indian Council of Agricultural Research
|url=https://icar.gov.in/sites/default/files/Circulars/ICAR-En-Kharif-Agro-Advisories-for-Farmers-2025.pdf
}}</ref>
भातपिकाच्या पक्वतेची प्रमुख बाह्य चिन्हे म्हणजे कणसांवरील बहुतांश दाण्यांचा हिरव्या रंगातून पिवळसर किंवा सोनेरी रंगाकडे झालेला बदल आणि दाणे कडक होणे. ICARच्या कृषी मार्गदर्शनानुसार कणसांवरील सुमारे ८०–८५ टक्के दाणे सोनेरी-पिवळे व कडक झाल्यावर भात कापणीस योग्य मानला जातो. या अवस्थेत कापणी केल्यास कापणीतील विलंबामुळे होणारे दाणे गळणे आणि पीक लोळण्याचे नुकसान कमी करण्यास मदत होते.<ref name="ICARHarvest2025"/>
कोकणातील भातशेती पूर्णपणे किंवा मोठ्या प्रमाणावर पावसाच्या लहरीवर अवलंबून असल्याने कापणीची वेळ निश्चित करताना पावसाची स्थितीही महत्त्वाची ठरते. पक्वतेच्या कालावधीत उशिरा होणारा किंवा जोरदार पाऊस कापणीला अडथळा आणू शकतो. त्यामुळे पीक कापणीस योग्य झालेले असताना उपलब्ध कोरड्या हवामानाचा कालावधी साधून कापणी करणे आवश्यक ठरते. कोकणातील पर्जन्यमान आणि भातपिकाच्या वाढीवरील अभ्यासात पावसाच्या विविध वाढीच्या अवस्थांशी भाताच्या उत्पादनाचा संबंध असल्याचे आढळले आहे.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
कापणीपूर्वी शेतातील पिकाची अवस्था, कणसांचा रंग, दाण्यांची कडकपणा आणि हवामानाचा अंदाज यांचा विचार केला जातो. अशा प्रकारे **कणसांवरील बहुतांश दाणे सोनेरी-पिवळे होणे, दाणे कडक होणे आणि पीक शारीरिक पक्वतेला पोहोचणे** ही भात कापणीची प्रमुख चिन्हे मानली जातात. कोकणाच्या परिस्थितीत या पक्वतेनंतर अनावश्यक विलंब न करता योग्य हवामानात कापणी करणे महत्त्वाचे ठरते.
== कोकणातील पारंपरिक भातकापणी ==
कोकणातील पारंपरिक भातकापणी ही प्रामुख्याने मानवी श्रमांवर आधारित प्रक्रिया होती. भाताचे पीक कापणीस योग्य झाल्यानंतर शेतकरी आणि शेतमजूर हातातील विळ्याच्या साहाय्याने भाताची रोपे कापत. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासानुसार भात उत्पादनातील कापणी आणि कापणीनंतरची कामे पारंपरिक पद्धतीने मोठ्या प्रमाणावर हाताने केली जात असून त्यासाठी मोठ्या प्रमाणात श्रमांची आवश्यकता असते.<ref name="Bhanage2016"/>
कापणी करताना शेतातील पक्व भाताची कणसे आणि पेंढा विळ्याने कापून त्याचे पुंजके किंवा भारे तयार केले जात. कापलेला भात काही काळ शेतात किंवा योग्य जागी वाळवून पुढील मळणीसाठी नेला जात असे. अशा प्रकारे कापणी, पुंजके बांधणे, वाळवणे आणि त्यानंतर मळणी करणे ही कामे परस्परांशी जोडलेली होती.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक पद्धतीत कापणीचे काम श्रमप्रधान असल्यामुळे कापणीचा कालावधी हा उपलब्ध मजुरांच्या संख्येवरही अवलंबून असे. कोकणातील भातशेतीत लहान व तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनी, भौगोलिक परिस्थिती आणि कापणीच्या काळातील मोठ्या मनुष्यबळाची गरज यांमुळे पारंपरिक कापणी पद्धतीला विशेष महत्त्व होते. अभ्यासात कोकणातील अनेक शेतकरी अल्पभूधारक असल्यामुळे कापणी, मळणी आणि धान वाऱ्यावर पाखडणे यासाठी यंत्रसामग्री स्वतः खरेदी करणे आर्थिकदृष्ट्या कठीण असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक भातकापणी ही केवळ कृषी कामाची प्रक्रिया नसून ग्रामीण श्रमव्यवस्थेचा भाग होती. कापणीच्या हंगामात कुटुंबातील सदस्य, शेतमजूर आणि स्थानिक पातळीवरील उपलब्ध मनुष्यबळ यांच्या सहभागातून कापणीची कामे पूर्ण केली जात. त्यामुळे भातकापणीच्या काळात शेतातील सामूहिक श्रमाला विशेष महत्त्व प्राप्त होत असे.
कापणीनंतर भाताच्या कणसांमधून धान वेगळे करण्यासाठी पारंपरिक मळणी केली जात असे. पारंपरिक पद्धतींमध्ये जनावरांच्या पायाने तुडवणे किंवा इतर श्रमाधारित पद्धतींचा वापर केला जात असे; नंतर धान व पेंढा वेगळे करण्यासाठी वाऱ्याच्या साहाय्याने पाखडण्याची प्रक्रिया केली जाई. या कापणीनंतरच्या पद्धतींमध्ये अधिक वेळ आणि मानवी श्रम लागत असल्याने पुढील काळात यांत्रिक मळणी व पाखडणीची साधने वापरात आली.<ref name="ICARTraditionalThreshing">{{cite journal
|title=Mechanization in Rice Cultivation
|journal=Indian Farming
|volume=71
|issue=4
|year=2021
|pages=3–6
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/IndFarm/article/download/114370/44585/298367
}}</ref>
पारंपरिक भातकापणीची ही पद्धत कोकणातील पावसावर आधारित शेती, लहान शेतजमिनी आणि ग्रामीण श्रमव्यवस्थेशी जुळलेली होती. मात्र मजुरांची उपलब्धता कमी होणे, मजुरीचा वाढता खर्च आणि वेळेत कापणी करण्याची गरज यांमुळे पुढील काळात विळ्याबरोबरच रीपर, रीपर-बाइंडर आणि इतर यांत्रिक साधनांचा वापर वाढू लागला.<ref name="Bhanage2016"/>
== कापणीसाठी वापरली जाणारी पारंपरिक साधने ==
कोकणातील पारंपरिक भातकापणीमध्ये विळा हे प्रमुख हातसाधन राहिले आहे. पक्व भातपीक कापण्यासाठी शेतकरी आणि शेतमजूर विळ्याचा वापर करत. भाताची कापणी प्रामुख्याने मनुष्यबळाद्वारे विळ्याने केली जात असल्याचे कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासात नमूद करण्यात आले आहे. कापणीच्या कामात मोठ्या प्रमाणावर मानवी श्रम लागत असल्याने विळ्याचा वापर हा पारंपरिक भातकापणी पद्धतीचा महत्त्वाचा भाग होता.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक विळ्याच्या वापरात शेतकरी भाताची काडे हाताने धरून विळ्याने कापत असे. कापणीचे काम प्रामुख्याने वाकून करावे लागत असल्यामुळे त्यात शारीरिक श्रम मोठ्या प्रमाणात होत. भातकापणीतील हा श्रमभार कमी करण्यासाठी पुढे दातेरी विळ्यांसारख्या सुधारित हातसाधनांचा विकास करण्यात आला.<ref name="AgrowonHarvestTools">{{cite web
|title=भात पीक कापणीची साधने
|website=अॅग्रोवन
|date=23 October 2024
|url=https://agrowon.esakal.com/techno-wan/tools-for-rice-crop-harvesting-article-on-agrowon
}}</ref>
कोकणातील भातशेतीच्या संदर्भात डॉ. बाळासाहेब सावंत कोकण कृषी विद्यापीठाने विकसित केलेला ‘वैभव विळा’ हा पारंपरिक विळ्याच्या कार्यपद्धतीवर आधारित सुधारित दातेरी विळा आहे. या विळ्याच्या साहाय्याने भाताची कापणी जमिनीलगत करता येते. दातेरी पाते असल्यामुळे कापणीसाठी तुलनेने कमी ताकद लागते आणि साधनाचे वजनही कमी ठेवण्यात आले आहे.<ref name="AgrowonHarvestTools"/>
कोकण विभागासाठीच्या कृषी सल्ल्यामध्ये तयार भातपिकाची कापणी सकाळच्या वेळी जमिनीलगत ‘वैभव’ विळ्याने करण्याची शिफारस करण्यात आली आहे. कापणीनंतर कापलेला भात शेतात अनावश्यक वेळ न ठेवता पुढील मळणीसाठी हलविण्याचाही सल्ला देण्यात आला आहे.<ref name="BSKKVHarvestAdvice">{{cite web
|title=Crop Advisory : कृषी सल्ला : कोकण विभाग
|website=अॅग्रोवन
|url=https://agrowon.esakal.com/agro-special/special-agricultural-advisory-for-crops-of-konkan-division
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील पारंपरिक भातकापणीची प्रमुख ओळख **हाताने वापरल्या जाणाऱ्या विळ्याशी** जोडलेली आहे. कालांतराने पारंपरिक विळ्याच्या कार्यक्षमतेत सुधारणा करण्यासाठी दातेरी विळे विकसित झाले आणि त्यानंतर रीपर, रीपर-बाइंडर यांसारख्या यांत्रिक साधनांचा वापर सुरू झाला. त्यामुळे विळ्यापासून यांत्रिक कापणीपर्यंत झालेला बदल हा कोकणातील भातकापणीच्या तंत्रज्ञानातील महत्त्वाचा टप्पा मानता येतो.<ref name="Bhanage2016"/>
== कापणीतील ग्रामीण श्रम आणि सामुदायिक सहभाग ==
कोकणातील पारंपरिक भातकापणी ही मोठ्या प्रमाणावर मानवी श्रमांवर आधारित होती. भाताची कापणी, कापलेला भात एकत्र करणे, मळणी, धान वेगळे करणे आणि वाळवणे या कापणीनंतरच्या प्रक्रियांमध्येही मनुष्यबळाची आवश्यकता असे. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासानुसार कापणी व कापणीनंतरची कामे श्रमप्रधान असल्यामुळे या प्रक्रियांचा एकूण उत्पादनखर्च आणि काम पूर्ण करण्यासाठी लागणारा वेळ यांवर मनुष्यबळाची उपलब्धता परिणाम करते.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक पद्धतीत भातकापणीचे काम कुटुंबातील सदस्य तसेच स्थानिक शेतमजुरांच्या सहभागातून केले जात असे. कापणीच्या हंगामात कमी कालावधीत मोठ्या क्षेत्रातील पीक कापून घेणे आवश्यक असल्याने उपलब्ध मनुष्यबळाचे नियोजन महत्त्वाचे ठरत असे. कोकणातील लहान आणि तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनींमध्ये यांत्रिक कापणीची साधने वापरण्यावरही भौगोलिक आणि आर्थिक मर्यादा येत असल्याने मानवी श्रमांना पारंपरिक शेतीपद्धतीत विशेष महत्त्व होते.<ref name="Bhanage2016"/>
भातकापणीशी संबंधित कामे केवळ कापणीपुरती मर्यादित नसून त्यानंतरची मळणी, धान व पेंढा वेगळे करणे आणि धान वाळवणे अशा टप्प्यांपर्यंत चालत. या सर्व कामांमध्ये अनेक व्यक्तींचा सहभाग आवश्यक असल्याने कापणीचा काळ हा ग्रामीण पातळीवरील श्रमविनिमय आणि परस्पर सहकार्याशी जोडलेला असे. तथापि, अशा पारंपरिक सामुदायिक प्रथांचे स्वरूप गावागावानुसार वेगवेगळे असल्याने त्याबाबत सर्व कोकणाला लागू होईल असा एकसमान निष्कर्ष काढता येत नाही.
कापणीच्या कामासाठी मोठ्या प्रमाणावर मजूर लागणे ही कोकणातील भातशेतीची महत्त्वाची अडचण ठरली आहे. मजुरांची कमतरता आणि वाढती मजुरी यामुळे वेळेत कापणी करणे शेतकऱ्यांसाठी अधिक खर्चिक झाले आहे. या परिस्थितीमुळे भातकापणीतील श्रमभार कमी करण्यासाठी रीपर, रीपर-बाइंडर आणि इतर कापणी यंत्रांचा वापर करण्याची आवश्यकता निर्माण झाली.<ref name="Bhanage2016"/>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीमध्ये ग्रामीण श्रम, कुटुंबीय सहभाग आणि स्थानिक पातळीवरील परस्पर सहकार्य यांना पारंपरिक काळात महत्त्वाचे स्थान होते. मात्र मजूरटंचाई, वाढता मजुरीखर्च आणि कापणी वेळेत पूर्ण करण्याची गरज यांमुळे या श्रमाधारित व्यवस्थेत बदल होत असून यांत्रिकीकरणाकडे कल वाढत आहे.
== कापणीनंतरची मळणी आणि धान वेगळे करणे ==
भाताची कापणी झाल्यानंतर कापलेले पीक मळणीसाठी नेले जाते. मळणीच्या प्रक्रियेत भाताच्या कणसांपासून धान वेगळे केले जाते. पारंपरिक पद्धतीत ही प्रक्रिया मानवी श्रमांवर आधारित होती. कापणी, मळणी आणि त्यानंतर धान व पेंढा वेगळे करण्याच्या कामांसाठी मोठ्या प्रमाणावर मनुष्यबळ लागत असल्याने कोकणातील भातशेतीतील कापणीनंतरची कामे श्रमप्रधान राहिली आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक मळणीनंतर धानामध्ये पेंढा, कणसांचे तुकडे, भुसा आणि इतर हलका कचरा मिसळलेला असतो. त्यातून स्वच्छ धान वेगळे करण्यासाठी पाखडणी केली जाते. नैसर्गिक वाऱ्याच्या साहाय्याने किंवा हाताने चालविलेल्या पाखडणीच्या साधनांनी हलका पेंढा व भुसा बाजूला केला जातो आणि तुलनेने जड धान खाली साचते. अशा प्रकारे मळणी आणि पाखडणी या एकमेकांशी संबंधित असल्या तरी धान स्वच्छ करण्याच्या स्वतंत्र प्रक्रिया आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भातशेतीच्या यांत्रिकीकरणाच्या अभ्यासात मळणीसाठी पेडलवर चालणारे थ्रेशर, वायर-लूप प्रकारचे थ्रेशर, उलट्या साखळी-पट्टीवर आधारित थ्रेशर आणि अक्षीय प्रवाहाचे थ्रेशर यांसारख्या साधनांचा अभ्यास करण्यात आला. धान वेगळे केल्यानंतर पाखडणीसाठी हाताने चालविलेले तसेच शक्तिचलित विन्नोअर वापरण्याच्या पद्धतींचाही विचार करण्यात आला.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील लहान व तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनी आणि शेतकऱ्यांची मर्यादित आर्थिक क्षमता यांमुळे मोठ्या क्षमतेची यंत्रे सर्व शेतकऱ्यांना स्वतःच्या मालकीची ठेवणे शक्य होत नाही. त्यामुळे मळणी व पाखडणीच्या यांत्रिकीकरणासाठी सामायिक वापर, यंत्रसेवा किंवा कस्टम हायरिंग यांसारख्या पद्धती उपयुक्त ठरू शकतात.<ref name="Bhanage2016"/>
मळणी आणि पाखडणीच्या कामात मजुरांची कमतरता निर्माण झाल्यास कापणीनंतरचे काम वेळेत पूर्ण होण्यास विलंब होऊ शकतो. कोकणातील अभ्यासात मजुरांची कमतरता आणि वाढता मजुरीखर्च यामुळे कापणी व मळणीच्या कामांमध्ये विलंब होत असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. त्यामुळे कापणीनंतरच्या प्रक्रियांमध्ये यांत्रिकीकरणाला महत्त्व प्राप्त झाले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
== धान वाळवणे, साठवण आणि घरगुती प्रक्रिया ==
भातकापणी आणि मळणीनंतर मिळालेले धान साठवण्यापूर्वी योग्य प्रकारे वाळवणे आवश्यक असते. कोकणातील रायगड जिल्ह्यातील १२० शेतकरी महिलांच्या अभ्यासात मळणीच्या जागेवर धान्याची योग्य प्रकारे स्वच्छता व वाळवण करणे आणि उन्हात वाळवणे या पद्धती मोठ्या प्रमाणावर वापरल्या जात असल्याचे आढळले. अभ्यासातील ९३.३३ टक्के महिलांनी धान्याचे योग्य वाळवण व स्वच्छता तसेच उन्हात वाळवणाची पद्धत अवलंबल्याचे नोंदविण्यात आले आहे.<ref name="ChavanMehtaKale2013">{{cite journal
|last=Chavan
|first=K. M.
|author2=Mehta, P. G.
|author3=Kale, R. A.
|title=Food grain storage practices followed by the farm women
|journal=International Journal of Processing and Post Harvest Technology
|volume=4
|issue=2
|year=2013
|pages=83–85
|url=https://researchjournal.co.in/online/IJPPHT/IJPPHT%204%282%29/4_83-85_A.pdf
}}</ref>
कोकणातील पारंपरिक साठवण पद्धतींमध्ये धान घरातील स्थानिक साधनसामग्रीपासून तयार केलेल्या संरचनांमध्ये ठेवले जात असे. कोकणातील धानसाठवण संरचनांच्या अभ्यासात *कणंज किंवा साठी, मुडी, कंगे, मटक्या, ताटी आणि हाडपा* यांसारख्या पारंपरिक संरचनांचा उल्लेख करण्यात आला आहे. या संरचनांमध्ये शेतकरी घरातच धान साठवत असल्याचे अभ्यासात नमूद केले आहे.<ref name="KadKhandetodNimbalkarJadhav2016">{{cite journal
|last=Kad
|first=V. P.
|author2=Khandetod, Y. P.
|author3=Nimbalkar, C. A.
|author4=Jadhav, M. S.
|title=Design and Development of Paddy Storage Structure for Konkan Region
|journal=IMPACT: International Journal of Research in Engineering & Technology
|volume=4
|issue=5
|year=2016
|pages=25–34
|url=https://www.impactjournals.us/download/archives/2-77-1462972101-3.%20IJRET%20eng-DESIGN%20AND%20DEVELOPMENT%20OF%20PADDY%20STORAGE%20STRUCTURE%20FOR%20KONKAN%20REGION.pdf
}}</ref>
पारंपरिक साठवणुकीमध्ये किडी, बुरशी आणि उंदरांमुळे धान्याचे नुकसान होण्याची शक्यता होती. रायगड जिल्ह्यातील अभ्यासात धान्य साठवताना गोणपाटाच्या पोत्यांचा वापर ८७.५० टक्के महिलांनी केला असल्याचे आढळले. तसेच साठवलेल्या धान्याला किडींपासून संरक्षण देण्यासाठी ९३.३३ टक्के महिलांनी कडुनिंबाच्या पानांचा वापर केला होता. याउलट सिलो, पूसा बिन किंवा किसान कोठी यांसारख्या सुधारित साठवण संरचनांचा वापर अभ्यासातील प्रतिसादकर्त्यांमध्ये आढळला नाही.<ref name="ChavanMehtaKale2013"/>
कोकणातील दमट हवामानामुळे धान साठवताना आर्द्रता नियंत्रणाला विशेष महत्त्व आहे. कोकणातील दमट हवामानात धानाच्या साठवणीवर केलेल्या अभ्यासात साठवण कालावधी वाढत असताना धानाच्या काही भौतिक व गुणवत्ताविषयक गुणधर्मांमध्ये बदल होत असल्याचे आढळले. साठवणीच्या कालावधीत कीड प्रादुर्भाव वाढणे आणि धानातील आर्द्रतेत बदल होणे यांसारखे परिणाम नोंदविण्यात आले आहेत.<ref name="ThakorPatilSawant2012">{{cite journal
|last=Thakor
|first=N. J.
|author2=Patil, S. C.
|author3=Sawant, A. A.
|author4=Sawant, S. D.
|title=Influence of Storage Period on Physical Properties and Quality of Paddy Stored in GIC Silo and Bag Storage under Humid Konkan Climatic Conditions
|journal=Journal of Agricultural Engineering
|volume=49
|issue=1
|year=2012
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JAE/article/view/21870
}}</ref>
धानाचे घरगुती उपयोगासाठी रूपांतर करण्याच्या प्रक्रियेत साली काढणे, तांदूळ तयार करणे आणि त्यापासून विविध पदार्थ बनवणे अशा प्रक्रिया येतात. उत्तर कोकणातील पाडळ प्रक्रिया उद्योगांवरील अभ्यासातून धान प्रक्रियेमधून तांदळाबरोबर तांदळाची कोंडा, तूस आणि तुटलेला तांदूळ यांसारखी उपउत्पादनेही मिळतात, असे दिसून येते. या प्रक्रियेमुळे कच्च्या धानाचे खाद्य तांदळात रूपांतर होते आणि त्याला अतिरिक्त मूल्य प्राप्त होते.<ref name="ChakranarayanToraneBachhaoNikam2024">{{cite journal
|last=Chakranarayan
|first=Ankita
|author2=Torane, Sanjaykumar
|author3=Bachhao, Kiran
|author4=Nikam, Yogesh
|title=Economic Analysis of Value Addition in Paddy Processing in North Konkan Region of Maharashtra, India
|journal=Acta Scientific Agriculture
|volume=8
|issue=10
|year=2024
|pages=11–16
|url=https://actascientific.com/ASAG/ASAG-08-1411.php
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीनंतरची प्रक्रिया ही **धान स्वच्छ करणे → उन्हात वाळवणे → सुरक्षित साठवण → आवश्यकतेनुसार धानाची प्रक्रिया करून तांदूळ तयार करणे** या क्रमाने पुढे जाते. पारंपरिक घरगुती साठवण पद्धतींमध्ये स्थानिक साधनसामग्रीचा वापर होत असला, तरी कोकणातील दमट हवामानामुळे धानाची योग्य वाळवण, आर्द्रता नियंत्रण आणि कीडप्रतिबंधक साठवण या बाबींना विशेष महत्त्व आहे.
== कोकणातील पाऊस, जमीन आणि कापणीची वेळ ==
कोकणातील भातशेतीवर पर्जन्यमानाचा मोठा प्रभाव असतो. हा प्रदेश उष्ण व दमट हवामानाचा असून येथे वार्षिक पर्जन्यमान साधारण २०० ते ३५० सेंमीपर्यंत आढळते. पर्जन्याचे प्रमाण, त्याचे ऋतुनिहाय वितरण आणि जमिनीची पाणीधारण क्षमता यांचा विचार करून कोकणातील पिकांची रचना निश्चित होते. त्यामुळे भातपिकाच्या वाढीपासून पक्वतेपर्यंतच्या कालावधीवरही पावसाचा प्रभाव पडतो.<ref name="BiswasPhadtare1995"/>
कोकणातील भातशेतीच्या जमिनींचे स्वरूपही कापणीच्या वेळेवर अप्रत्यक्ष परिणाम करते. प्रदेशातील जमिनींच्या पाणीधारण क्षमतेनुसार आणि पर्जन्याच्या उपलब्धतेनुसार भातासाठी योग्य पीकपद्धती बदलते. काही भागांत पावसाचे पाणी जमिनीत साठून राहिल्यामुळे पिकाच्या वाढीच्या उत्तरार्धात बाहेरील पावसाची आवश्यकता तुलनेने कमी होऊ शकते. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील भातपिकाच्या अभ्यासात वाढीच्या वेगवेगळ्या अवस्थांमध्ये पावसाचा परिणाम वेगवेगळा असल्याचे आढळले आहे.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
भातपिकाच्या सुरुवातीच्या वाढीच्या अवस्थेत पुरेसा पाऊस आवश्यक असतो. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील १९५१ ते १९८७ या कालावधीच्या अभ्यासात भाताच्या वाढीतील विविध अवस्थांमध्ये पर्जन्यमानाचा उत्पादनाशी संबंध असल्याचे आढळले. विशेषतः फुटवे येण्याच्या अवस्थेत पावसाचे महत्त्व दिसून आले, तर पुढील काही अवस्थांमध्ये जमिनीत साठलेली आर्द्रता पिकासाठी उपयुक्त ठरू शकते.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
कापणीच्या काळात मात्र पावसाचे स्वरूप वेगळ्या प्रकारे महत्त्वाचे ठरते. पीक पक्व झाल्यानंतरही पाऊस सुरू राहिल्यास शेतातील जमीन ओलसर राहते आणि कापणी, कापलेले पीक शेताबाहेर आणणे, मळणी व धान वाळवणे या कामांमध्ये अडथळे निर्माण होऊ शकतात. कोकणातील भातकापणीवरील अभ्यासात मजुरांची कमतरता आणि कापणीच्या कामातील विलंब ही समस्या नोंदविण्यात आली असून वेळेत कापणी न झाल्यास कापणीनंतरच्या कामांवरही त्याचा परिणाम होतो.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील पावसाचा कालावधी आणि त्यातील बदल यांमुळे कापणीसाठी उपलब्ध कोरड्या हवामानाच्या कालखंडाला विशेष महत्त्व प्राप्त होते. कोकण प्रदेशातील बारा ठिकाणांच्या पर्जन्यविषयक अभ्यासात वार्षिक आणि हंगामी पर्जन्यमान तसेच पावसाळी दिवसांच्या प्रवृत्तींमध्ये स्थानानुसार फरक आढळला आहे. त्यामुळे कोकणातील सर्व जिल्ह्यांसाठी कापणीची एकच निश्चित वेळ ठरविण्याऐवजी स्थानिक पर्जन्यस्थिती आणि पिकाची पक्वता यांचा एकत्रित विचार करणे आवश्यक ठरते.<ref name="Kadam2019">{{cite journal
|last=Kadam
|first=U. S.
|author2=Jedhe, S. H.
|author3=Mane, M. S.
|author4=Mahale, D. M.
|author5=Nandgude, S. B.
|title=Spatio-temporal Trends of Rainfall and Rainy Days in Konkan Region of Maharashtra
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|volume=37
|issue=1
|year=2019
|pages=25–36
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92410
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीची वेळ ही केवळ पिकाच्या पक्वतेवर अवलंबून नसून **पावसाचे आगमन व माघार, जमिनीतील ओलावा, स्थानिक जमीनप्रकार आणि कापणीच्या वेळी उपलब्ध होणारा कोरडा कालावधी** या घटकांच्या परस्परसंबंधातून ठरते. म्हणूनच पक्व भाताची कापणी योग्य हवामानाच्या कालखंडात लवकर पूर्ण करणे कोकणातील भातशेतीसाठी महत्त्वाचे ठरते.
== कोकणातील भातकापणीचे यांत्रिकीकरण ==
कोकणातील भातशेतीमध्ये कापणी आणि कापणीनंतरची कामे पारंपरिकरीत्या मोठ्या प्रमाणावर मानवी श्रमांवर अवलंबून होती. मजुरांची कमतरता, वाढता मजुरीखर्च आणि पक्व झालेल्या पिकाची वेळेत कापणी करण्याची आवश्यकता यामुळे भातकापणीच्या यांत्रिकीकरणाची गरज निर्माण झाली. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासात कापणी व मळणीच्या यांत्रिकीकरणाचा आर्थिक व्यवहार्यतेच्या दृष्टीने अभ्यास करण्यात आला आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भातकापणीसाठी स्वयंप्रचालित रीपर, रीपर-बाइंडर आणि कापणीसाठी सुधारित हातसाधने यांसारख्या पर्यायांचा अभ्यास झाला आहे. कापणीनंतरच्या प्रक्रियांसाठी पेडलवर चालणारे थ्रेशर, वायर-लूप प्रकारचे थ्रेशर, उलट्या साखळी-पट्टीवर आधारित थ्रेशर, अक्षीय प्रवाहाचे थ्रेशर तसेच हातचलित व शक्तिचलित विन्नोअर यांचा वापर विचारात घेण्यात आला आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भौगोलिक आणि आर्थिक परिस्थिती लक्षात घेऊन यंत्रांची निवड करणे महत्त्वाचे ठरते. लहान व तुकड्यात विभागलेली शेतजमीन आणि अनेक शेतकऱ्यांकडे असलेले अल्प क्षेत्र यामुळे मोठ्या यंत्रांची वैयक्तिक मालकी आर्थिकदृष्ट्या व्यवहार्य ठरत नाही. कोकणातील अभ्यासात सुमारे ०.२ हेक्टर क्षेत्र धारण करणाऱ्या बहुसंख्य शेतकऱ्यांना कापणी, मळणी आणि पाखडणीची यंत्रे स्वतः खरेदी करणे त्यांच्या आर्थिक परिस्थितीमुळे शक्य नसल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
या परिस्थितीत रीपर आणि रीपर-बाइंडर यांसारखी यंत्रे कोकणातील लहान व मध्यम शेतांसाठी तुलनेने उपयुक्त पर्याय ठरू शकतात. अभ्यासानुसार रीपर, रीपर-बाइंडर, शक्तिचलित थ्रेशर आणि विन्नोअर यांच्या विविध संयोगांमध्ये कोकणाच्या परिस्थितीत यांत्रिकीकरणाची क्षमता आढळून आली आहे. यंत्रांची कार्यक्षमता आणि प्रति हेक्टर बदलता खर्च हे त्यांच्या आर्थिक व्यवहार्यतेवर परिणाम करणारे महत्त्वाचे घटक आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भातकापणीच्या यांत्रिकीकरणात केवळ यंत्रांची उपलब्धता नव्हे, तर ती शेतकऱ्यांना परवडणाऱ्या पद्धतीने उपलब्ध करून देणे महत्त्वाचे आहे. त्यामुळे कस्टम हायरिंग सेवा आणि कृषी अवजारे बँक यांसारख्या सामायिक यंत्रवापराच्या पद्धतींचा विस्तार करण्याची शिफारस करण्यात आली आहे. अशा पद्धतींमुळे अल्पभूधारक शेतकऱ्यांना यंत्रे स्वतः खरेदी न करता आवश्यकतेनुसार त्यांचा वापर करता येतो.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील शेतकऱ्यांच्या शारीरिक श्रमभाराचाही यांत्रिकीकरणाच्या संशोधनात विचार करण्यात आला आहे. ICARच्या वार्षिक अहवालानुसार कोकणातील पुरुष कामगारांच्या शारीरिक मापदंडांचा विचार करून गवत कापणी यंत्रासोबत वापरता येणारे पॅडी हार्वेस्टर विकसित करण्यात आले. सुधारित यंत्रामुळे विद्यमान यंत्राच्या तुलनेत चालकावरील शारीरिक कामाचा भार कमी झाल्याचे परीक्षणात आढळले.<ref name="ICARAnnualReport2023">{{cite report
|author=Indian Council of Agricultural Research
|title=ICAR Annual Report 2023–24
|publisher=Indian Council of Agricultural Research
|year=2024
|url=https://icar.gov.in/sites/default/files/2025-04/ICAR%20Annual%20Report%202023-24-english.pdf
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीचे यांत्रिकीकरण हे केवळ पारंपरिक विळ्याची जागा यंत्राने घेण्यापुरते मर्यादित नसून **कापणी, बांधणी, मळणी आणि पाखडणी या संपूर्ण प्रक्रियेत श्रम व वेळ कमी करण्याचा प्रयत्न** आहे. मात्र कोकणातील लहान शेतजमिनी आणि शेतकऱ्यांची आर्थिक क्षमता लक्षात घेता मोठ्या यंत्रांच्या वैयक्तिक मालकीपेक्षा कस्टम हायरिंग व सामायिक यंत्रवापराची व्यवस्था अधिक व्यवहार्य ठरू शकते.<ref name="Bhanage2016"/>
== मजूरटंचाई, स्थलांतर आणि बदलती कापणी पद्धत ==
कोकणातील भातशेतीमध्ये कापणीच्या हंगामात उपलब्ध होणारे ग्रामीण मनुष्यबळ हा महत्त्वाचा घटक आहे. पारंपरिक भातकापणी, मळणी आणि पाखडणी या कामांसाठी मोठ्या प्रमाणावर मजुरांची आवश्यकता असल्याने मजूर उपलब्धतेतील घटकांचा थेट परिणाम कापणीच्या वेळेवर आणि उत्पादनखर्चावर होतो. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासात कृषी कामे श्रमप्रधान असून मजुरांची कमतरता निर्माण झाल्यामुळे कापणी व मळणीच्या कामात विलंब होत असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील काही ग्रामीण भागांत कृषी मजुरांचे इतर ठिकाणी रोजगारासाठी स्थलांतर होणे ही मजूर उपलब्धतेवर परिणाम करणारी बाब आहे. कोकणातील पावसावर आधारित भातशेतीवरील एका गावपातळीच्या अभ्यासात बहुतांश प्रतिसादकर्त्यांनी मजुरीचा वाढता खर्च ही अडचण असल्याचे नमूद केले असून, ग्रामीण भागातील अनेक मजूर अधिक उत्पन्नाच्या शोधात इतर ठिकाणी रोजगारासाठी स्थलांतरित होत असल्याचे नोंदविण्यात आले आहे.<ref name="TribalRiceConstraints2019">{{cite journal
|title=Constraints Faced By The Tribal Farmers In Rainfed Rice Production In Konkan Region-A Village Level Study
|journal=International Journal of Current Microbiology and Applied Sciences
|year=2019
|url=https://www.researchgate.net/publication/331587276_Constraints_Faced_By_The_Tribal_Farmers_In_Rainfed_Rice_Production_In_Konkan_Region-A_Village_Level_Study
}}</ref>
मजूरटंचाई आणि वाढता मजुरीखर्च यामुळे भातकापणीची पारंपरिक श्रमाधारित पद्धत आर्थिकदृष्ट्या अधिक खर्चिक होत गेली. कोकणातील तुकड्यात विभागलेली आणि लहान शेतजमीन लक्षात घेता मोठ्या यंत्रांचा वापर सर्वत्र शक्य नसला तरी स्वयंप्रचालित रीपर, रीपर-बाइंडर आणि मळणी यंत्रे यांसारख्या साधनांचा वापर वाढविण्याचे प्रयत्न झाले आहेत.<ref name="Shahare2012">{{cite journal
|last=Shahare
|first=P. U.
|title=Agricultural Mechanization in Konkan Region of Maharashtra
|journal=Agricultural Engineering Today
|volume=36
|issue=2
|year=2012
|pages=6–9
|url=https://indianjournals.com/article/aet-36-2-002
}}</ref>
यांत्रिकीकरणामुळे कापणीसाठी आवश्यक मानवी श्रम कमी करण्याबरोबरच कमी कालावधीत कापणी पूर्ण करण्याची शक्यता वाढते. कोकणातील भातउत्पादनावरील अलीकडील अभ्यासात पालघर आणि ठाणे जिल्ह्यांतील काही शेतकऱ्यांनी यांत्रिक कापणी यंत्रे व मळणी यंत्रे स्वीकारल्यामुळे श्रमावरील अवलंबित्व कमी झाल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Shelake2025">{{cite journal
|last=Shelake
|first=S. M.
|author2=Kshirsagar, P. J.
|author3=Torane, S. R.
|author4=Waravadekar, S. C.
|author5=More, V. G.
|title=Economic analysis for profitable paddy production in Konkan region
|journal=International Journal of Agriculture Extension and Social Development
|volume=8
|issue=10
|year=2025
|url=https://www.extensionjournal.com/archives/2025.v8.i10.I.2591
}}</ref>
मात्र कोकणातील लहान भूधारणा आणि यंत्रांच्या तुलनेने जास्त किंमतीमुळे प्रत्येक शेतकऱ्याला कापणीची यंत्रे स्वतःच्या मालकीची ठेवणे व्यवहार्य ठरत नाही. त्यामुळे कस्टम हायरिंग सेवा आणि कृषी अवजारे बँक यांसारख्या सामायिक यंत्रवापराच्या पद्धतींना महत्त्व प्राप्त झाले आहे. कोकणातील यांत्रिकीकरणाच्या अभ्यासात अशा सेवांचा विस्तार केल्यास अल्पभूधारक शेतकऱ्यांनाही यांत्रिकीकरणाचा लाभ मिळू शकतो, असे सुचविण्यात आले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
अशा प्रकारे मजूरटंचाई, ग्रामीण मनुष्यबळाचे स्थलांतर आणि वाढता मजुरीखर्च या घटकांमुळे कोकणातील भातकापणीची पारंपरिक श्रमव्यवस्था बदलत आहे. विळ्याने हाताने कापणी करण्याच्या पद्धतीबरोबरच रीपर, रीपर-बाइंडर आणि मळणी यंत्रांचा वापर वाढत असून, सामायिक यंत्रसेवा ही लहान शेतकऱ्यांसाठी महत्त्वाची पर्यायी व्यवस्था ठरत आहे.<ref name="Shahare2012"/>
== रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, रायगड, ठाणे-पालघरमधील प्रादेशिक वैशिष्ट्ये ==
कोकणातील भातशेतीची भौगोलिक व कृषी परिस्थिती जिल्ह्यानुसार काही प्रमाणात बदलते. डॉ. बाळासाहेब सावंत कोकण कृषी विद्यापीठाच्या वर्गीकरणानुसार रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग हे दक्षिण कोकण क्षेत्रात, तर रायगड, पालघर आणि ठाणे हे उत्तर कोकण क्षेत्रात येतात. या प्रदेशात किनारी, पठारी आणि डोंगराळ अशा भौगोलिक पट्ट्यांनुसार शेतीचे स्वरूप बदलते. दक्षिण कोकणात लालसर-जांभ्या प्रकारच्या आम्लधर्मी जमिनींचे प्राबल्य आहे, तर उत्तर कोकणातील काही भागांत बेसॉल्टजन्य तपकिरी ते काळ्या जमिनी आढळतात; डोंगरउतारांवर उथळ व वालुकामय तर खोऱ्यांमध्ये चिकणमातीप्रधान जमिनी आढळतात.<ref name="DBSKKVKonkanRice">{{cite web
|title=RICE PRODUCTION IN KONKAN
|publisher=Dr. Balasaheb Sawant Konkan Krishi Vidyapeeth
|url=https://archive.dbskkv.org/collection/420/document/2304
}}</ref>
रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग या दक्षिण कोकणातील जिल्ह्यांमध्ये मोठ्या प्रमाणावर पावसावर आधारित भातशेती आढळते. डोंगरउतार, खोरी आणि किनारी भाग यांनुसार शेतजमिनींचे स्वरूप बदलत असल्यामुळे भात लागवडीच्या पद्धतीतही स्थानिक फरक दिसतात. सिंधुदुर्ग जिल्ह्याची भात उत्पादकता कोकण विभागातील इतर जिल्ह्यांच्या तुलनेत अधिक असल्याची नोंद कोकणातील भात उत्पादनाच्या उपलब्ध आकडेवारीत करण्यात आली आहे.<ref name="DBSKKVKonkanRice"/>
रायगड जिल्हा भाताच्या क्षेत्रफळाच्या दृष्टीने कोकणातील महत्त्वाचा जिल्हा आहे. उपलब्ध जिल्हानिहाय आकडेवारीनुसार रायगडमध्ये भाताखालील क्षेत्र सुमारे १.२५ लाख हेक्टर आणि भात उत्पादन सुमारे ३.५१ लाख टन नोंदविण्यात आले होते. त्यामुळे कोकणातील एकूण भात उत्पादनात रायगडचा महत्त्वाचा वाटा आहे.<ref name="DBSKKVKonkanRice"/>
ठाणे आणि पालघर हे उत्तर कोकणातील जिल्हे असून येथे भातशेतीबरोबर आदिवासी व ग्रामीण भागातील पारंपरिक कृषीपद्धतींचेही महत्त्व आहे. पालघर जिल्ह्यातील वाडा आणि पालघर तालुक्यांतील भात उत्पादक गावांवर केलेल्या अभ्यासात भात हे प्रमुख खरीप पीक असल्याचे आणि शेतकरी शिफारस केलेल्या भात उत्पादन तंत्रज्ञानाचा अवलंब करीत असल्याचे आढळते.<ref name="KarangamiDhengeChavanAnarase2020">{{cite journal
|last=Karangami
|first=R. S.
|author2=Dhenge, S. A.
|author3=Chavan, P. M.
|author4=Anarase, M. S.
|title=Association of Profile Characteristics of Rice Growers and Adoption of Recommended Package of Practices
|journal=Indian Journal of Extension Education
|year=2020
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/IJEE/article/view/109198
}}</ref>
उपलब्ध जिल्हानिहाय आकडेवारीत ठाणे जिल्ह्याचे भाताखालील क्षेत्र, उत्पादन आणि उत्पादकता कोकणातील इतर प्रमुख भात उत्पादक जिल्ह्यांच्या तुलनेत कमी असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. त्याच वेळी उत्तर कोकणातील भातशेतीवर लहान भूधारणा, स्थानिक भौगोलिक परिस्थिती आणि उपलब्ध कृषी मनुष्यबळ यांचा प्रभाव पडतो.<ref name="DBSKKVKonkanRice"/>
भातकापणीच्या दृष्टीने या प्रादेशिक फरकांना विशेष महत्त्व आहे. रायगड, रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्गमध्ये मोठ्या प्रमाणातील भातक्षेत्रामुळे कापणीच्या काळात मोठ्या प्रमाणावर मनुष्यबळ आणि यंत्रसेवेची आवश्यकता निर्माण होते. उत्तर कोकणातील ठाणे व पालघरमध्ये लहान शेतजमिनी, ग्रामीण व आदिवासी भाग आणि बदलती कृषी श्रमव्यवस्था यांमुळे कापणीच्या पद्धतीत स्थानिक परिस्थितीनुसार बदल होत आहेत. त्यामुळे संपूर्ण कोकणासाठी भातकापणीची एकच पद्धत किंवा एकच कालमर्यादा लागू होत नाही; जिल्ह्याची भौगोलिक रचना, जमीन, पर्जन्यस्थिती, पीकवाण आणि शेताचा आकार यांनुसार कापणीचे स्वरूप बदलते.
अशा प्रकारे **रत्नागिरी-सिंधुदुर्गचा दक्षिण कोकण, रायगडचा मोठा भातक्षेत्र असलेला मध्य-उत्तर भाग आणि ठाणे-पालघरचा उत्तर कोकण** यांमध्ये भातशेतीच्या क्षेत्रफळ, उत्पादकता, जमीनप्रकार आणि कृषी-सामाजिक परिस्थितीत फरक आढळतो. हे प्रादेशिक वैविध्य भातकापणीच्या वेळा, श्रमाची गरज आणि यांत्रिकीकरणाच्या स्वीकारावरही परिणाम करणारे महत्त्वाचे घटक आहेत.
== भातकापणी आणि कोकणातील ग्रामीण जीवन व लोकसंस्कृती ==
कोकणातील भातकापणी ही केवळ कृषी उत्पादनाची प्रक्रिया नसून ग्रामीण जीवनातील सामाजिक आणि सांस्कृतिक व्यवहारांशीही संबंधित राहिली आहे. भाताचे पीक हे पावसाळी शेतीच्या वार्षिक चक्राचा महत्त्वाचा भाग असल्यामुळे पेरणीपासून कापणीपर्यंतच्या विविध टप्प्यांशी स्थानिक देवता, शेतजमीन, पाऊस, जनावरे आणि चांगल्या पीकउत्पादनाच्या अपेक्षा जोडलेल्या होत्या. कोकणातील लोकपरंपरांचे संकलन करणाऱ्या *Folk Lore Notes, Vol. II—Konkan* या ग्रंथात पेरणी आणि कापणीच्या काळाशी संबंधित विविध कृषीविधींची नोंद आढळते.<ref name="JacksonEnthoven1915">{{cite book
|last=Jackson
|first=A. M. T.
|author2=Enthoven, R. E.
|title=Folk Lore Notes, Vol. II—Konkan
|publisher=British India Press
|year=1915
|url=https://books.google.com/books/about/Folk_Lore_Notes.html?id=a4XlAAAAMAAJ
}}</ref>
कापणीच्या वेळी शेतात नवीन धान्याच्या राशीची पूजा करण्याची प्रथा कोकणातील अनेक भागांत नोंदविण्यात आली आहे. तसेच काही ठिकाणी शेतातील पहिल्या कापणीच्या दिवशी शिजवलेले अन्न तयार करून ते देवतेला नैवेद्य म्हणून अर्पण केले जात असे. या प्रथांमधून नवीन पीक हे केवळ आर्थिक उत्पादन नसून धार्मिक कृतज्ञता आणि सामुदायिक जीवनाचा भाग मानले जात असल्याचे दिसून येते.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
रत्नागिरी जिल्ह्यातील फोंडा येथे कापणीच्या वेळी शेताच्या कोपऱ्यात भात आणि दह्यापासून तयार केलेले 'शिवार' ठेवण्याची प्रथा नोंदविण्यात आली आहे. या विधीला 'चोरावा' असेही संबोधले जात असल्याचे त्या ऐतिहासिक नोंदीत नमूद आहे. अशा प्रथा शेत, पीक आणि स्थानिक धार्मिक विश्वास यांच्यातील संबंध दर्शवतात.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
कोकणातील काही भागांत कापणीच्या वेळी शेताच्या रक्षणाशी संबंधित स्थानिक देवतांना नारळ, कोंबड्या किंवा शेळ्या अर्पण करण्याच्या प्रथा नोंदविण्यात आल्या आहेत. रत्नागिरी जिल्ह्यातील काही गावांमध्ये तसेच मालवण परिसरात पेरणी आणि कापणीच्या काळात शेतरक्षक देवतांना अर्पणे केली जात असल्याचे ऐतिहासिक लोकसाहित्याच्या नोंदीत नमूद आहे. या प्रथा त्या काळातील ग्रामीण समाजाच्या कृषीविश्वासांचे दस्तऐवजीकरण करतात.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
कोलाबा जिल्ह्यातील दासगावच्या संदर्भात कापणीच्या वेळी शेतात नारळ ठेवून पहिल्या कापलेल्या भाऱ्याने त्याला काही वेळा झोडपण्याची प्रथा नोंदविण्यात आली आहे; त्यानंतर नियमित मळणी सुरू केली जात असे. अशा विधींमधून पहिल्या कापणीच्या उत्पादनाला प्रतीकात्मक महत्त्व दिले जात असल्याचे दिसते.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
या कृषीपरंपरांमुळे भातकापणीचा काळ हा ग्रामीण समाजाच्या सामूहिक जीवनाशी जोडलेला असे. शेतातील कामे, स्थानिक देवतांची पूजा, नवीन धान्याशी संबंधित विधी आणि कुटुंब व गावसमूहातील सहभाग यांमधून कृषी उत्पादन आणि लोकसंस्कृती यांचे परस्परसंबंध दिसून येतात. मात्र उपलब्ध लोकसाहित्यविषयक नोंदी मुख्यतः विसाव्या शतकाच्या प्रारंभीच्या काळातील असल्यामुळे त्यातील प्रत्येक प्रथा आजही कोकणातील सर्व भागांत प्रचलित आहे, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
भातकापणीशी संबंधित या ऐतिहासिक प्रथा कोकणातील ग्रामीण समाजात भाताला असलेले आर्थिक, सामाजिक आणि सांस्कृतिक महत्त्व स्पष्ट करतात. त्यामुळे भातकापणीचा अभ्यास करताना कापणीची तांत्रिक प्रक्रिया, ग्रामीण श्रमव्यवस्था आणि कापणीनंतरची कामे यांसोबतच त्याभोवती निर्माण झालेल्या लोकपरंपरांचाही विचार करणे आवश्यक ठरते.
== आधुनिक काळातील बदल, आव्हाने आणि भविष्यातील दिशा ==
कोकणातील भातकापणीच्या पद्धतीमध्ये आधुनिक काळात लक्षणीय बदल होत आहेत. पारंपरिक हाताने कापणी आणि श्रमप्रधान मळणीच्या पद्धतींबरोबर रीपर, रीपर-बाइंडर, विविध प्रकारची मळणी यंत्रे आणि पाखडणीची यंत्रे वापरण्याकडे कल वाढला आहे. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासानुसार मजुरांची कमतरता आणि वाढता मजुरीखर्च यामुळे वेळेत कापणी व मळणी करणे कठीण होत असून, यांत्रिकीकरण हा त्यावरील महत्त्वाचा पर्याय ठरतो.<ref name="Bhanage2016"/>
आधुनिक तंत्रज्ञानाचा स्वीकार मात्र संपूर्ण कोकणात एकसमान झालेला नाही. लहान आणि तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनी, चिखलयुक्त किंवा पाणथळ क्षेत्र, उताराची जमीन, यंत्रांची किंमत आणि त्यासाठी आवश्यक कुशल चालक यांसारख्या मर्यादा यांत्रिकीकरणाच्या प्रसारावर परिणाम करतात. कोकणातील बहुतांश अल्पभूधारक शेतकऱ्यांना कापणी, मळणी आणि पाखडणीची यंत्रे स्वतःच्या मालकीची ठेवणे आर्थिकदृष्ट्या कठीण असल्याचे अभ्यासातून दिसून आले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
अलीकडील अभ्यासांमध्ये कोकणातील जिल्ह्यांनुसार आधुनिक तंत्रज्ञान स्वीकारण्यात फरक दिसून येतो. पालघर आणि ठाणे जिल्ह्यांतील काही भात उत्पादकांनी यंत्राद्वारे रोपलागवड, हार्वेस्टर आणि थ्रेशर यांचा वापर केला आहे, तर रत्नागिरीतील काही शेतकरी अद्याप अधिक श्रमप्रधान पारंपरिक पद्धतींवर अवलंबून आहेत. सिंधुदुर्गमध्ये भाताच्या पुढील प्रक्रियेत दळण, उकडणे आणि पोहेनिर्मिती यांसारख्या मूल्यवर्धित पद्धतींचा वापर आढळतो.<ref name="Shelake2025"/>
भातकापणीसमोरील आणखी एक महत्त्वाचे आव्हान म्हणजे हवामानातील अनिश्चितता. कोकणातील भातशेती मोठ्या प्रमाणावर मोसमी पावसावर अवलंबून असल्यामुळे पावसाचा कालावधी, तीव्रता आणि कापणीच्या काळातील ओलावा यांचा कापणीच्या नियोजनावर परिणाम होतो. पक्व झालेल्या पिकाची कापणी वेळेत न झाल्यास पिकाचे नुकसान होण्याची शक्यता वाढते. त्यामुळे हवामानविषयक माहिती, पीकपक्वतेचे अचूक निरीक्षण आणि उपलब्ध यंत्रसामग्रीचे वेळेवर नियोजन यांना भविष्यात अधिक महत्त्व प्राप्त होईल.
यांत्रिकीकरणाचा लाभ लहान शेतकऱ्यांपर्यंत पोहोचविण्यासाठी कस्टम हायरिंग सेवा आणि कृषी अवजारे बँका महत्त्वाच्या ठरू शकतात. कोकणातील यांत्रिकीकरणाच्या अभ्यासाने अशा सेवांचा मोठ्या प्रमाणावर विस्तार करण्याची गरज व्यक्त केली आहे. यामुळे शेतकऱ्यांना महागडी यंत्रे स्वतः खरेदी न करता आवश्यक त्या काळात कापणी व मळणीची यंत्रसेवा घेता येऊ शकते.<ref name="Bhanage2016"/>
भविष्यातील दिशेच्या दृष्टीने केवळ कापणीचे यांत्रिकीकरण पुरेसे ठरणार नाही. कापणीपासून मळणी, वाळवण, साठवण, दळण आणि मूल्यवर्धनापर्यंत संपूर्ण साखळी अधिक कार्यक्षम करण्याची गरज आहे. २०२५ मधील कोकणावरील अभ्यासात यांत्रिकीकरण आणि भातप्रक्रियेमुळे मजुरीवरील अवलंबित्व कमी होऊन उत्पादनक्षमता, खर्च आणि बाजारमूल्याच्या दृष्टीने सुधारणा होऊ शकते, असे आढळले आहे.<ref name="Shelake2025"/>
कोकणासाठी भविष्यातील भातकापणीची यंत्रे विकसित करताना या प्रदेशाच्या विशिष्ट परिस्थितीचा विचार करणे आवश्यक आहे. लहान शेतजमीन, पाणथळ क्षेत्र, उतार, अरुंद बांध आणि उच्च पर्जन्यमान यांना अनुरूप हलकी, कमी खर्चाची आणि सहज वाहतूक करता येणारी यंत्रे अधिक उपयुक्त ठरू शकतात. त्याचबरोबर स्थानिक पातळीवर यंत्रचालकांचे प्रशिक्षण, दुरुस्ती व देखभाल सुविधा आणि कस्टम हायरिंगची उपलब्धता वाढविणे आवश्यक आहे.
अशा प्रकारे आधुनिक काळातील कोकणातील भातकापणी ही **पारंपरिक श्रमाधारित पद्धतीपासून योग्य ठिकाणी यांत्रिकीकरण, सामायिक यंत्रसेवा आणि मूल्यवर्धित प्रक्रियांकडे होणाऱ्या संक्रमणाच्या** टप्प्यात आहे. भविष्यातील दिशा ही केवळ अधिक यंत्रे उपलब्ध करून देण्याची नसून, कोकणातील लहान शेतकऱ्यांच्या आर्थिक क्षमतेला, स्थानिक भौगोलिक परिस्थितीला, हवामानाच्या अनिश्चिततेला आणि भाताच्या संपूर्ण मूल्यसाखळीला अनुरूप अशी शाश्वत व परवडणारी व्यवस्था निर्माण करण्याची आहे.
== चित्रदालन ==
<gallery mode="packed" heights="180">
File:Rice Plantation.jpg|रत्नागिरी जिल्ह्यातील भातशेती
File:Paddy field in Maharashtra .jpg|कोकण रेल्वेमार्गावरील महाराष्ट्रातील भातशेती
File:Paddy field in Maharashtra 8.jpg|कोकण रेल्वेमार्गावरील भातशेती
File:Paddy field in Maharashtra 11.jpg|कोकण रेल्वेमार्गावरील भातशेती
File:Konkan - Songiri Village - Ratnagiri District - Part 1 20151218 (23369027944).jpg|रत्नागिरी जिल्ह्यातील सोनगिरी गाव परिसरातील भातशेती
File:Konkan - Songiri Village - Ratnagiri District - Part 1 20151218 (23889128342).jpg|रत्नागिरी जिल्ह्यातील सोनगिरी गाव परिसरातील भातशेती
File:Rice Fields near Satarda in Sindhudurg District - panoramio.jpg|सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातील सातर्डा परिसरातील भातशेती
File:Nerur - panoramio.jpg|सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातील नेरूर परिसरातील भातशेती
File:Abandoned paddy field on Low-elevation Lateritic Plateau IMG 20220817 115924 06.jpg|रत्नागिरी जिल्ह्यातील जांभ्या पठारावरील भातशेती
File:Crop Harvesting Machine 2.JPG|भातपिकाच्या कापणीतील यांत्रिकीकरण
File:Rice Harvesting.jpg|विळ्याने भाताची कापणी
File:Rice threshering.jpg|भाताची मळणी
</gallery>
== हेही पहा ==
* [[कोकण]]
* [[भात]]
== बाह्य दुवे ==
* [https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/ Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research — ICAR]
* [https://www.dbskkv.org/ डॉ. बाळासाहेब सावंत कोकण कृषी विद्यापीठ]
{{कोकण लोकजीवन}}
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:कोकण]]
[[वर्ग:महाराष्ट्र]]
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KiranBOT II
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[[File:Rice Plantation.jpg|thumb|right|250px|रत्नागिरी जिल्ह्यातील भातशेती]]
कोकणातील भात शेती ही प्रदेशाच्या कृषी आणि ग्रामीण जीवनाचा महत्त्वाचा भाग आहे. कोकणातील भातपिकाची लागवड प्रामुख्याने पावसावर अवलंबून असून, भाताची कापणी हा पिकाच्या उत्पादनचक्रातील अत्यंत महत्त्वाचा टप्पा आहे. या प्रदेशातील भौगोलिक परिस्थिती, अतिवृष्टी, लहान व तुकड्यात विभागलेली शेती, उताराची किंवा पायरीदार जमीन आणि कापणीच्या काळातील मजुरांची उपलब्धता या घटकांचा भातकापणीच्या पद्धतीवर परिणाम होतो.<ref name="Bhanage2016">{{cite journal
|last=Bhanage
|first=G. B.
|author2=P. U. Shahare
|author3=P. S. Deshmukh
|author4=P. B. Gaikwad
|author5=V. V. Aware
|title=Mechanization in Harvesting and Post-Harvest Operation for Paddy in Konkan Region and Its Economic Feasibility
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|volume=34
|issue=2
|year=2016
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92862
}}</ref>
परंपरेने कोकणातील भाताची कापणी मानवी श्रमांवर आधारित राहिली असून विळा किंवा तत्सम साधनांनी भात कापणे, कापलेले भाताचे पुंजके एकत्र करणे, त्यानंतर मळणी व धान वेगळे करणे अशा सलग प्रक्रियेतून कापणीचे काम केले जात असे. कापणी व कापणीनंतरच्या प्रक्रियांमध्ये मोठ्या प्रमाणावर श्रम लागत असल्याने मजुरांची कमतरता आणि वाढता मजुरीखर्च हे कोकणातील भातशेतीसमोरील महत्त्वाचे प्रश्न ठरले आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील शेतीच्या विशिष्ट परिस्थितीमुळे भातकापणीच्या यांत्रिकीकरणालाही स्वतंत्र स्वरूप प्राप्त झाले आहे. लहान व विखुरलेली शेतजमीन, उताराची व पायरीदार शेती आणि मोठ्या प्रमाणातील पाऊस या मर्यादा लक्षात घेऊन भात कापणीसाठी लहान व तुलनेने हलकी यंत्रे विकसित करण्याचे प्रयत्न झाले आहेत.<ref name="Bhanage2017">{{cite journal
|last=Bhanage
|first=Girishkumar Balasaheb
|author2=P. U. Shahare
|author3=V. V. Aware
|author4=K. G. Dhande
|author5=P. S. Deshmukh
|title=Development of stripper harvester for paddy
|journal=Journal of Applied and Natural Science
|volume=9
|issue=4
|year=2017
|pages=1943–1948
|url=https://journals.ansfoundation.org/index.php/jans/article/view/1469
}}</ref>
या पार्श्वभूमीवर कोकणातील भात शेती कापणीचा अभ्यास हा केवळ भात कापण्याच्या तंत्राचा अभ्यास न राहता, पाऊस व जमीन, पिकाची पक्वता, पारंपरिक श्रमव्यवस्था, कापणीची साधने, मळणी व धान साठवण, यांत्रिकीकरण, मजूरटंचाई आणि ग्रामीण लोकजीवन यांचा परस्परसंबंध समजून घेण्याचा विषय ठरतो.
== कोकणातील भातशेतीची भौगोलिक व कृषी पार्श्वभूमी ==
कोकण हा महाराष्ट्राच्या पश्चिम किनारपट्टीवरील अरबी समुद्रालगतचा प्रदेश असून, त्याची भौगोलिक रचना डोंगराळ, खाचखळग्यांची आणि काही ठिकाणी सखल स्वरूपाची आहे. महाराष्ट्रातील कोकण विभागातील भात उत्पादनाच्या संदर्भात ठाणे, पालघर, रायगड, रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग हे प्रमुख जिल्हे विचारात घेतले जातात. या प्रदेशात उष्ण व दमट हवामान आणि मोठ्या प्रमाणातील नैऋत्य मोसमी पाऊस ही भातशेतीस अनुकूल वैशिष्ट्ये आहेत.<ref name="BiswasPhadtare1995">{{cite journal
|last=Biswas
|first=B. C.
|author2=R. D. Phadtare
|title=Cropping pattern of Konkan region on the basis of probabilistic rainfall and soil characteristics
|journal=MAUSAM
|volume=46
|issue=2
|year=1995
|pages=133–140
|url=https://mausamjournal.imd.gov.in/index.php/MAUSAM/article/view/3218
}}</ref>
कोकणातील भातशेती मोठ्या प्रमाणावर पावसावर अवलंबून आहे. अतिवृष्टी आणि सखल भौगोलिक परिस्थितीमुळे खरीप हंगामात भात हे अनेक भागांतील प्रमुख पीक ठरते. अखिल भारतीय समन्वित भात सुधारणा प्रकल्पाच्या उत्पादनाभिमुख सर्वेक्षणानुसार कोकणातील भात उत्पादक पट्ट्यात खरीप हंगामात भाताचे क्षेत्र मोठ्या प्रमाणावर असून, जास्त पावसामुळे काही भागांत खरीप हंगामात भाताव्यतिरिक्त इतर पिकांची लागवड करणे मर्यादित होते.<ref name="AICRIP2019">{{cite report
|author=All India Coordinated Rice Improvement Project
|title=Production Oriented Survey 2019
|publisher=Indian Institute of Rice Research
|url=https://icar-iirr.org/AICRIP/Final%20POS%202019-2020.pdf
}}</ref>
कोकणातील पर्जन्यमानाचा भातपिकाच्या वाढीवर आणि उत्पादनावर थेट परिणाम होतो. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील दीर्घकालीन पर्जन्यविषयक आकडेवारीच्या अभ्यासातून भातपिकाच्या वाढीच्या विविध अवस्थांमध्ये पावसाचे महत्त्व स्पष्ट झाले आहे. त्यामुळे कोकणातील भातशेतीची लागवड, वाढ आणि पक्वता यांचे वेळापत्रक स्थानिक पर्जन्यमानाशी घनिष्ठपणे संबंधित असते.<ref name="ChowdhuryDas1993">{{cite journal
|last=Chowdhury
|first=A.
|author2=H. P. Das
|title=Effect of rainfall on growth and yield of rice in Konkan coast
|journal=MAUSAM
|volume=44
|issue=2
|year=1993
|pages=143–146
|url=https://mausamjournal.imd.gov.in/index.php/MAUSAM/article/view/3811
}}</ref>
कोकणातील कृषी रचनेचे आणखी एक वैशिष्ट्य म्हणजे लहान व तुकड्यात विभागलेली शेतजमीन. अशा जमिनी, डोंगराळ किंवा उताराची भौगोलिक रचना आणि मर्यादित सिंचनसुविधा यांमुळे भातशेतीच्या उत्पादनपद्धतीवर तसेच शेतीच्या यांत्रिकीकरणावर परिणाम होतो. कोकणातील भात उत्पादक शेतकऱ्यांच्या अभ्यासात लहान व विखुरलेली जमीन, मजुरीचा वाढता खर्च आणि उत्पादन तंत्रज्ञान स्वीकारण्यातील अडचणी या महत्त्वाच्या मर्यादा असल्याचे आढळते.<ref name="HileDarekarDatrkar2015">{{cite journal
|last=Hile
|first=R. B.
|author2=A. S. Darekar
|author3=S. B. Datrkar
|title=Adoption assessment of production technology for paddy cultivation in Konkan region of Maharashtra
|journal=Indian Journal of Economics and Development
|volume=11
|issue=1
|year=2015
|pages=217–225
|url=https://indianjournals.com/article/ijed1-11-1-023
}}</ref>
या भौगोलिक आणि कृषी परिस्थितीचा परिणाम भाताच्या कापणीवरही होतो. पिकाच्या पक्वतेच्या काळात उशिरा किंवा अतिवृष्टी झाल्यास कापणीच्या कामात विलंब होऊन पिकाचे नुकसान होऊ शकते. कोकणातील भातपिकाच्या उत्पादनाभिमुख सर्वेक्षणात पक्वता आणि कापणीच्या अवस्थेत झालेल्या उशिराच्या व जोरदार पावसामुळे काही भागांत उत्पादनहानी झाल्याची नोंद आहे.<ref name="AICRIP2019"/>
== कोकणातील भातपिकाचे हंगामी चक्र ==
कोकणातील भातपीक हे प्रामुख्याने खरीप हंगामातील पीक असून त्याचे हंगामी चक्र नैऋत्य मोसमी पावसाच्या आगमनाशी आणि उपलब्ध पाण्याशी जवळून संबंधित आहे. कोकणातील भातपिकाच्या अभ्यासात पेरणीची वेळ, वाणांची निवड आणि पिकाची वाढ यांचा पर्जन्यमान व स्थानिक हवामानाशी संबंध असल्याचे दिसून येते. कोकणातील काही प्रमुख भातवाणांसाठी जूनच्या सुरुवातीच्या काळातील पेरणी अनुकूल ठरू शकते, असे स्थानिक कृषी संशोधनातून दिसून आले आहे.<ref name="Jagtap2016">{{cite journal
|last=Jagtap
|first=D. N.
|author2=V. G. Chavan
|author3=U. V. Mahadkar
|author4=S. A. Chavan
|title=Effect of Sowing Times on the Yield and Yield Attributes of Rice (Oryza sativa L.) Varieties
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|volume=34
|issue=2
|year=2016
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92857
}}</ref>
पावसाळ्याच्या प्रारंभी भातासाठी रोपवाटिका तयार करणे, बियाणे पेरणे आणि मुख्य शेताची मशागत करणे ही कामे सुरू होतात. त्यानंतर योग्य वयाची रोपे मुख्य शेतात लावली जातात. कोकणातील खरीप भाताच्या विविध वाणांवर केलेल्या प्रयोगांमध्ये पेरणीच्या वेळेचा वाढ, उत्पादन आणि आर्थिक परताव्यावर परिणाम होत असल्याचे आढळले आहे.<ref name="Jagtap2016"/>
रोपांची पुनर्लागवड झाल्यानंतर पावसाळ्यात भातपिकाची वाढ, फुटवे येणे, कणसांची निर्मिती आणि दाणे भरणे या अवस्था क्रमाने पूर्ण होतात. या काळात पर्जन्यमानातील चढ-उतार आणि पावसाचे दिवस यांचा पिकाच्या वाढीवर परिणाम होऊ शकतो. कोकण प्रदेशातील पर्जन्यमानाच्या दीर्घकालीन अभ्यासात मे ते नोव्हेंबर या कालावधीत पर्जन्य व पावसाळी दिवसांच्या स्वरूपात बदल आढळल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="KonkanRainfall2019">{{cite journal
|title=Spatio-temporal Trends of Rainfall and Rainy Days in Konkan Region of Maharashtra
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|year=2019
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92410
}}</ref>
पिकाची पक्वता जवळ आल्यानंतर भातकापणीचा टप्पा सुरू होतो. कोकणातील भातशेतीत कापणीची वेळ व पद्धत ही वाणाचा कालावधी, पेरणीची वेळ, स्थानिक हवामान आणि त्या वर्षीच्या पावसाच्या स्वरूपानुसार बदलू शकते. त्यामुळे संपूर्ण कोकणासाठी कापणीची एकच निश्चित तारीख ठरविता येत नाही. कापणी, मळणी आणि धान वाळवणे या कापणीनंतरच्या प्रक्रिया भातपिकाच्या हंगामी चक्राचा अविभाज्य भाग आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
अशा प्रकारे कोकणातील भातपिकाचे हंगामी चक्र साधारणपणे **पावसाळ्याच्या प्रारंभी रोपवाटिका व पेरणी → मुख्य शेताची मशागत व पुनर्लागवड → पावसाळ्यात पिकाची वाढ → दाणे भरणे व पक्वता → भातकापणी → मळणी, धान वेगळे करणे व वाळवणे** अशा क्रमाने पुढे जाते. या संपूर्ण चक्रावर कोकणातील पर्जन्यमान, स्थानिक जमीन, वाण आणि शेतीतील उपलब्ध श्रम यांचा प्रभाव असतो.
== भात कापणीची वेळ आणि पक्वतेची चिन्हे ==
कोकणातील भातपिकाची कापणी प्रामुख्याने खरीप हंगामाच्या अखेरीस केली जाते. कापणीची नेमकी वेळ भाताच्या वाणाचा कालावधी, लागवडीची वेळ, स्थानिक हवामान आणि त्या वर्षीच्या पावसाच्या स्वरूपानुसार बदलते. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील १९५१ ते १९८७ या कालावधीतील आकडेवारीच्या अभ्यासानुसार कोकणात भाताची लागवड साधारणपणे जूनमध्ये होते आणि पिकाचा सक्रिय वाढीचा कालावधी सुमारे ९० दिवसांचा असतो. या अभ्यासात शारीरिक पक्वता प्राप्त झाल्यानंतर काही दिवसांनी, साधारण ऑक्टोबरच्या सुरुवातीस, भाताची कापणी केली जात असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
भातपिकाची कापणी योग्य वेळी करणे महत्त्वाचे असते. पीक पूर्णपणे पक्व होण्यापूर्वी कापणी केल्यास दाणे अपक्व राहण्याची शक्यता असते, तर कापणीस अनावश्यक विलंब झाल्यास दाणे गळणे, कणसे वाकणे किंवा पिकाचे नुकसान होण्याचा धोका वाढतो. त्यामुळे शेतातील पिकाची प्रत्यक्ष पक्वता पाहून कापणीचा निर्णय घेतला जातो.<ref name="ICARHarvest2025">{{cite report
|author=Indian Council of Agricultural Research
|title=Kharif Agro-Advisories for Farmers 2025
|publisher=Indian Council of Agricultural Research
|url=https://icar.gov.in/sites/default/files/Circulars/ICAR-En-Kharif-Agro-Advisories-for-Farmers-2025.pdf
}}</ref>
भातपिकाच्या पक्वतेची प्रमुख बाह्य चिन्हे म्हणजे कणसांवरील बहुतांश दाण्यांचा हिरव्या रंगातून पिवळसर किंवा सोनेरी रंगाकडे झालेला बदल आणि दाणे कडक होणे. ICARच्या कृषी मार्गदर्शनानुसार कणसांवरील सुमारे ८०–८५ टक्के दाणे सोनेरी-पिवळे व कडक झाल्यावर भात कापणीस योग्य मानला जातो. या अवस्थेत कापणी केल्यास कापणीतील विलंबामुळे होणारे दाणे गळणे आणि पीक लोळण्याचे नुकसान कमी करण्यास मदत होते.<ref name="ICARHarvest2025"/>
कोकणातील भातशेती पूर्णपणे किंवा मोठ्या प्रमाणावर पावसाच्या लहरीवर अवलंबून असल्याने कापणीची वेळ निश्चित करताना पावसाची स्थितीही महत्त्वाची ठरते. पक्वतेच्या कालावधीत उशिरा होणारा किंवा जोरदार पाऊस कापणीला अडथळा आणू शकतो. त्यामुळे पीक कापणीस योग्य झालेले असताना उपलब्ध कोरड्या हवामानाचा कालावधी साधून कापणी करणे आवश्यक ठरते. कोकणातील पर्जन्यमान आणि भातपिकाच्या वाढीवरील अभ्यासात पावसाच्या विविध वाढीच्या अवस्थांशी भाताच्या उत्पादनाचा संबंध असल्याचे आढळले आहे.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
कापणीपूर्वी शेतातील पिकाची अवस्था, कणसांचा रंग, दाण्यांची कडकपणा आणि हवामानाचा अंदाज यांचा विचार केला जातो. अशा प्रकारे **कणसांवरील बहुतांश दाणे सोनेरी-पिवळे होणे, दाणे कडक होणे आणि पीक शारीरिक पक्वतेला पोहोचणे** ही भात कापणीची प्रमुख चिन्हे मानली जातात. कोकणाच्या परिस्थितीत या पक्वतेनंतर अनावश्यक विलंब न करता योग्य हवामानात कापणी करणे महत्त्वाचे ठरते.
== कोकणातील पारंपरिक भातकापणी ==
कोकणातील पारंपरिक भातकापणी ही प्रामुख्याने मानवी श्रमांवर आधारित प्रक्रिया होती. भाताचे पीक कापणीस योग्य झाल्यानंतर शेतकरी आणि शेतमजूर हातातील विळ्याच्या साहाय्याने भाताची रोपे कापत. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासानुसार भात उत्पादनातील कापणी आणि कापणीनंतरची कामे पारंपरिक पद्धतीने मोठ्या प्रमाणावर हाताने केली जात असून त्यासाठी मोठ्या प्रमाणात श्रमांची आवश्यकता असते.<ref name="Bhanage2016"/>
कापणी करताना शेतातील पक्व भाताची कणसे आणि पेंढा विळ्याने कापून त्याचे पुंजके किंवा भारे तयार केले जात. कापलेला भात काही काळ शेतात किंवा योग्य जागी वाळवून पुढील मळणीसाठी नेला जात असे. अशा प्रकारे कापणी, पुंजके बांधणे, वाळवणे आणि त्यानंतर मळणी करणे ही कामे परस्परांशी जोडलेली होती.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक पद्धतीत कापणीचे काम श्रमप्रधान असल्यामुळे कापणीचा कालावधी हा उपलब्ध मजुरांच्या संख्येवरही अवलंबून असे. कोकणातील भातशेतीत लहान व तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनी, भौगोलिक परिस्थिती आणि कापणीच्या काळातील मोठ्या मनुष्यबळाची गरज यांमुळे पारंपरिक कापणी पद्धतीला विशेष महत्त्व होते. अभ्यासात कोकणातील अनेक शेतकरी अल्पभूधारक असल्यामुळे कापणी, मळणी आणि धान वाऱ्यावर पाखडणे यासाठी यंत्रसामग्री स्वतः खरेदी करणे आर्थिकदृष्ट्या कठीण असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक भातकापणी ही केवळ कृषी कामाची प्रक्रिया नसून ग्रामीण श्रमव्यवस्थेचा भाग होती. कापणीच्या हंगामात कुटुंबातील सदस्य, शेतमजूर आणि स्थानिक पातळीवरील उपलब्ध मनुष्यबळ यांच्या सहभागातून कापणीची कामे पूर्ण केली जात. त्यामुळे भातकापणीच्या काळात शेतातील सामूहिक श्रमाला विशेष महत्त्व प्राप्त होत असे.
कापणीनंतर भाताच्या कणसांमधून धान वेगळे करण्यासाठी पारंपरिक मळणी केली जात असे. पारंपरिक पद्धतींमध्ये जनावरांच्या पायाने तुडवणे किंवा इतर श्रमाधारित पद्धतींचा वापर केला जात असे; नंतर धान व पेंढा वेगळे करण्यासाठी वाऱ्याच्या साहाय्याने पाखडण्याची प्रक्रिया केली जाई. या कापणीनंतरच्या पद्धतींमध्ये अधिक वेळ आणि मानवी श्रम लागत असल्याने पुढील काळात यांत्रिक मळणी व पाखडणीची साधने वापरात आली.<ref name="ICARTraditionalThreshing">{{cite journal
|title=Mechanization in Rice Cultivation
|journal=Indian Farming
|volume=71
|issue=4
|year=2021
|pages=3–6
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/IndFarm/article/download/114370/44585/298367
}}</ref>
पारंपरिक भातकापणीची ही पद्धत कोकणातील पावसावर आधारित शेती, लहान शेतजमिनी आणि ग्रामीण श्रमव्यवस्थेशी जुळलेली होती. मात्र मजुरांची उपलब्धता कमी होणे, मजुरीचा वाढता खर्च आणि वेळेत कापणी करण्याची गरज यांमुळे पुढील काळात विळ्याबरोबरच रीपर, रीपर-बाइंडर आणि इतर यांत्रिक साधनांचा वापर वाढू लागला.<ref name="Bhanage2016"/>
== कापणीसाठी वापरली जाणारी पारंपरिक साधने ==
कोकणातील पारंपरिक भातकापणीमध्ये विळा हे प्रमुख हातसाधन राहिले आहे. पक्व भातपीक कापण्यासाठी शेतकरी आणि शेतमजूर विळ्याचा वापर करत. भाताची कापणी प्रामुख्याने मनुष्यबळाद्वारे विळ्याने केली जात असल्याचे कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासात नमूद करण्यात आले आहे. कापणीच्या कामात मोठ्या प्रमाणावर मानवी श्रम लागत असल्याने विळ्याचा वापर हा पारंपरिक भातकापणी पद्धतीचा महत्त्वाचा भाग होता.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक विळ्याच्या वापरात शेतकरी भाताची काडे हाताने धरून विळ्याने कापत असे. कापणीचे काम प्रामुख्याने वाकून करावे लागत असल्यामुळे त्यात शारीरिक श्रम मोठ्या प्रमाणात होत. भातकापणीतील हा श्रमभार कमी करण्यासाठी पुढे दातेरी विळ्यांसारख्या सुधारित हातसाधनांचा विकास करण्यात आला.<ref name="AgrowonHarvestTools">{{cite web
|title=भात पीक कापणीची साधने
|website=अॅग्रोवन
|date=23 October 2024
|url=https://agrowon.esakal.com/techno-wan/tools-for-rice-crop-harvesting-article-on-agrowon
}}</ref>
कोकणातील भातशेतीच्या संदर्भात डॉ. बाळासाहेब सावंत कोकण कृषी विद्यापीठाने विकसित केलेला ‘वैभव विळा’ हा पारंपरिक विळ्याच्या कार्यपद्धतीवर आधारित सुधारित दातेरी विळा आहे. या विळ्याच्या साहाय्याने भाताची कापणी जमिनीलगत करता येते. दातेरी पाते असल्यामुळे कापणीसाठी तुलनेने कमी ताकद लागते आणि साधनाचे वजनही कमी ठेवण्यात आले आहे.<ref name="AgrowonHarvestTools"/>
कोकण विभागासाठीच्या कृषी सल्ल्यामध्ये तयार भातपिकाची कापणी सकाळच्या वेळी जमिनीलगत ‘वैभव’ विळ्याने करण्याची शिफारस करण्यात आली आहे. कापणीनंतर कापलेला भात शेतात अनावश्यक वेळ न ठेवता पुढील मळणीसाठी हलविण्याचाही सल्ला देण्यात आला आहे.<ref name="BSKKVHarvestAdvice">{{cite web
|title=Crop Advisory : कृषी सल्ला : कोकण विभाग
|website=अॅग्रोवन
|url=https://agrowon.esakal.com/agro-special/special-agricultural-advisory-for-crops-of-konkan-division
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील पारंपरिक भातकापणीची प्रमुख ओळख **हाताने वापरल्या जाणाऱ्या विळ्याशी** जोडलेली आहे. कालांतराने पारंपरिक विळ्याच्या कार्यक्षमतेत सुधारणा करण्यासाठी दातेरी विळे विकसित झाले आणि त्यानंतर रीपर, रीपर-बाइंडर यांसारख्या यांत्रिक साधनांचा वापर सुरू झाला. त्यामुळे विळ्यापासून यांत्रिक कापणीपर्यंत झालेला बदल हा कोकणातील भातकापणीच्या तंत्रज्ञानातील महत्त्वाचा टप्पा मानता येतो.<ref name="Bhanage2016"/>
== कापणीतील ग्रामीण श्रम आणि सामुदायिक सहभाग ==
कोकणातील पारंपरिक भातकापणी ही मोठ्या प्रमाणावर मानवी श्रमांवर आधारित होती. भाताची कापणी, कापलेला भात एकत्र करणे, मळणी, धान वेगळे करणे आणि वाळवणे या कापणीनंतरच्या प्रक्रियांमध्येही मनुष्यबळाची आवश्यकता असे. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासानुसार कापणी व कापणीनंतरची कामे श्रमप्रधान असल्यामुळे या प्रक्रियांचा एकूण उत्पादनखर्च आणि काम पूर्ण करण्यासाठी लागणारा वेळ यांवर मनुष्यबळाची उपलब्धता परिणाम करते.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक पद्धतीत भातकापणीचे काम कुटुंबातील सदस्य तसेच स्थानिक शेतमजुरांच्या सहभागातून केले जात असे. कापणीच्या हंगामात कमी कालावधीत मोठ्या क्षेत्रातील पीक कापून घेणे आवश्यक असल्याने उपलब्ध मनुष्यबळाचे नियोजन महत्त्वाचे ठरत असे. कोकणातील लहान आणि तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनींमध्ये यांत्रिक कापणीची साधने वापरण्यावरही भौगोलिक आणि आर्थिक मर्यादा येत असल्याने मानवी श्रमांना पारंपरिक शेतीपद्धतीत विशेष महत्त्व होते.<ref name="Bhanage2016"/>
भातकापणीशी संबंधित कामे केवळ कापणीपुरती मर्यादित नसून त्यानंतरची मळणी, धान व पेंढा वेगळे करणे आणि धान वाळवणे अशा टप्प्यांपर्यंत चालत. या सर्व कामांमध्ये अनेक व्यक्तींचा सहभाग आवश्यक असल्याने कापणीचा काळ हा ग्रामीण पातळीवरील श्रमविनिमय आणि परस्पर सहकार्याशी जोडलेला असे. तथापि, अशा पारंपरिक सामुदायिक प्रथांचे स्वरूप गावागावानुसार वेगवेगळे असल्याने त्याबाबत सर्व कोकणाला लागू होईल असा एकसमान निष्कर्ष काढता येत नाही.
कापणीच्या कामासाठी मोठ्या प्रमाणावर मजूर लागणे ही कोकणातील भातशेतीची महत्त्वाची अडचण ठरली आहे. मजुरांची कमतरता आणि वाढती मजुरी यामुळे वेळेत कापणी करणे शेतकऱ्यांसाठी अधिक खर्चिक झाले आहे. या परिस्थितीमुळे भातकापणीतील श्रमभार कमी करण्यासाठी रीपर, रीपर-बाइंडर आणि इतर कापणी यंत्रांचा वापर करण्याची आवश्यकता निर्माण झाली.<ref name="Bhanage2016"/>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीमध्ये ग्रामीण श्रम, कुटुंबीय सहभाग आणि स्थानिक पातळीवरील परस्पर सहकार्य यांना पारंपरिक काळात महत्त्वाचे स्थान होते. मात्र मजूरटंचाई, वाढता मजुरीखर्च आणि कापणी वेळेत पूर्ण करण्याची गरज यांमुळे या श्रमाधारित व्यवस्थेत बदल होत असून यांत्रिकीकरणाकडे कल वाढत आहे.
== कापणीनंतरची मळणी आणि धान वेगळे करणे ==
भाताची कापणी झाल्यानंतर कापलेले पीक मळणीसाठी नेले जाते. मळणीच्या प्रक्रियेत भाताच्या कणसांपासून धान वेगळे केले जाते. पारंपरिक पद्धतीत ही प्रक्रिया मानवी श्रमांवर आधारित होती. कापणी, मळणी आणि त्यानंतर धान व पेंढा वेगळे करण्याच्या कामांसाठी मोठ्या प्रमाणावर मनुष्यबळ लागत असल्याने कोकणातील भातशेतीतील कापणीनंतरची कामे श्रमप्रधान राहिली आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक मळणीनंतर धानामध्ये पेंढा, कणसांचे तुकडे, भुसा आणि इतर हलका कचरा मिसळलेला असतो. त्यातून स्वच्छ धान वेगळे करण्यासाठी पाखडणी केली जाते. नैसर्गिक वाऱ्याच्या साहाय्याने किंवा हाताने चालविलेल्या पाखडणीच्या साधनांनी हलका पेंढा व भुसा बाजूला केला जातो आणि तुलनेने जड धान खाली साचते. अशा प्रकारे मळणी आणि पाखडणी या एकमेकांशी संबंधित असल्या तरी धान स्वच्छ करण्याच्या स्वतंत्र प्रक्रिया आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भातशेतीच्या यांत्रिकीकरणाच्या अभ्यासात मळणीसाठी पेडलवर चालणारे थ्रेशर, वायर-लूप प्रकारचे थ्रेशर, उलट्या साखळी-पट्टीवर आधारित थ्रेशर आणि अक्षीय प्रवाहाचे थ्रेशर यांसारख्या साधनांचा अभ्यास करण्यात आला. धान वेगळे केल्यानंतर पाखडणीसाठी हाताने चालविलेले तसेच शक्तिचलित विन्नोअर वापरण्याच्या पद्धतींचाही विचार करण्यात आला.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील लहान व तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनी आणि शेतकऱ्यांची मर्यादित आर्थिक क्षमता यांमुळे मोठ्या क्षमतेची यंत्रे सर्व शेतकऱ्यांना स्वतःच्या मालकीची ठेवणे शक्य होत नाही. त्यामुळे मळणी व पाखडणीच्या यांत्रिकीकरणासाठी सामायिक वापर, यंत्रसेवा किंवा कस्टम हायरिंग यांसारख्या पद्धती उपयुक्त ठरू शकतात.<ref name="Bhanage2016"/>
मळणी आणि पाखडणीच्या कामात मजुरांची कमतरता निर्माण झाल्यास कापणीनंतरचे काम वेळेत पूर्ण होण्यास विलंब होऊ शकतो. कोकणातील अभ्यासात मजुरांची कमतरता आणि वाढता मजुरीखर्च यामुळे कापणी व मळणीच्या कामांमध्ये विलंब होत असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. त्यामुळे कापणीनंतरच्या प्रक्रियांमध्ये यांत्रिकीकरणाला महत्त्व प्राप्त झाले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
== धान वाळवणे, साठवण आणि घरगुती प्रक्रिया ==
भातकापणी आणि मळणीनंतर मिळालेले धान साठवण्यापूर्वी योग्य प्रकारे वाळवणे आवश्यक असते. कोकणातील रायगड जिल्ह्यातील १२० शेतकरी महिलांच्या अभ्यासात मळणीच्या जागेवर धान्याची योग्य प्रकारे स्वच्छता व वाळवण करणे आणि उन्हात वाळवणे या पद्धती मोठ्या प्रमाणावर वापरल्या जात असल्याचे आढळले. अभ्यासातील ९३.३३ टक्के महिलांनी धान्याचे योग्य वाळवण व स्वच्छता तसेच उन्हात वाळवणाची पद्धत अवलंबल्याचे नोंदविण्यात आले आहे.<ref name="ChavanMehtaKale2013">{{cite journal
|last=Chavan
|first=K. M.
|author2=Mehta, P. G.
|author3=Kale, R. A.
|title=Food grain storage practices followed by the farm women
|journal=International Journal of Processing and Post Harvest Technology
|volume=4
|issue=2
|year=2013
|pages=83–85
|url=https://researchjournal.co.in/online/IJPPHT/IJPPHT%204%282%29/4_83-85_A.pdf
}}</ref>
कोकणातील पारंपरिक साठवण पद्धतींमध्ये धान घरातील स्थानिक साधनसामग्रीपासून तयार केलेल्या संरचनांमध्ये ठेवले जात असे. कोकणातील धानसाठवण संरचनांच्या अभ्यासात *कणंज किंवा साठी, मुडी, कंगे, मटक्या, ताटी आणि हाडपा* यांसारख्या पारंपरिक संरचनांचा उल्लेख करण्यात आला आहे. या संरचनांमध्ये शेतकरी घरातच धान साठवत असल्याचे अभ्यासात नमूद केले आहे.<ref name="KadKhandetodNimbalkarJadhav2016">{{cite journal
|last=Kad
|first=V. P.
|author2=Khandetod, Y. P.
|author3=Nimbalkar, C. A.
|author4=Jadhav, M. S.
|title=Design and Development of Paddy Storage Structure for Konkan Region
|journal=IMPACT: International Journal of Research in Engineering & Technology
|volume=4
|issue=5
|year=2016
|pages=25–34
|url=https://www.impactjournals.us/download/archives/2-77-1462972101-3.%20IJRET%20eng-DESIGN%20AND%20DEVELOPMENT%20OF%20PADDY%20STORAGE%20STRUCTURE%20FOR%20KONKAN%20REGION.pdf
}}</ref>
पारंपरिक साठवणुकीमध्ये किडी, बुरशी आणि उंदरांमुळे धान्याचे नुकसान होण्याची शक्यता होती. रायगड जिल्ह्यातील अभ्यासात धान्य साठवताना गोणपाटाच्या पोत्यांचा वापर ८७.५० टक्के महिलांनी केला असल्याचे आढळले. तसेच साठवलेल्या धान्याला किडींपासून संरक्षण देण्यासाठी ९३.३३ टक्के महिलांनी कडुनिंबाच्या पानांचा वापर केला होता. याउलट सिलो, पूसा बिन किंवा किसान कोठी यांसारख्या सुधारित साठवण संरचनांचा वापर अभ्यासातील प्रतिसादकर्त्यांमध्ये आढळला नाही.<ref name="ChavanMehtaKale2013"/>
कोकणातील दमट हवामानामुळे धान साठवताना आर्द्रता नियंत्रणाला विशेष महत्त्व आहे. कोकणातील दमट हवामानात धानाच्या साठवणीवर केलेल्या अभ्यासात साठवण कालावधी वाढत असताना धानाच्या काही भौतिक व गुणवत्ताविषयक गुणधर्मांमध्ये बदल होत असल्याचे आढळले. साठवणीच्या कालावधीत कीड प्रादुर्भाव वाढणे आणि धानातील आर्द्रतेत बदल होणे यांसारखे परिणाम नोंदविण्यात आले आहेत.<ref name="ThakorPatilSawant2012">{{cite journal
|last=Thakor
|first=N. J.
|author2=Patil, S. C.
|author3=Sawant, A. A.
|author4=Sawant, S. D.
|title=Influence of Storage Period on Physical Properties and Quality of Paddy Stored in GIC Silo and Bag Storage under Humid Konkan Climatic Conditions
|journal=Journal of Agricultural Engineering
|volume=49
|issue=1
|year=2012
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JAE/article/view/21870
}}</ref>
धानाचे घरगुती उपयोगासाठी रूपांतर करण्याच्या प्रक्रियेत साली काढणे, तांदूळ तयार करणे आणि त्यापासून विविध पदार्थ बनवणे अशा प्रक्रिया येतात. उत्तर कोकणातील पाडळ प्रक्रिया उद्योगांवरील अभ्यासातून धान प्रक्रियेमधून तांदळाबरोबर तांदळाची कोंडा, तूस आणि तुटलेला तांदूळ यांसारखी उपउत्पादनेही मिळतात, असे दिसून येते. या प्रक्रियेमुळे कच्च्या धानाचे खाद्य तांदळात रूपांतर होते आणि त्याला अतिरिक्त मूल्य प्राप्त होते.<ref name="ChakranarayanToraneBachhaoNikam2024">{{cite journal
|last=Chakranarayan
|first=Ankita
|author2=Torane, Sanjaykumar
|author3=Bachhao, Kiran
|author4=Nikam, Yogesh
|title=Economic Analysis of Value Addition in Paddy Processing in North Konkan Region of Maharashtra, India
|journal=Acta Scientific Agriculture
|volume=8
|issue=10
|year=2024
|pages=11–16
|url=https://actascientific.com/ASAG/ASAG-08-1411.php
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीनंतरची प्रक्रिया ही **धान स्वच्छ करणे → उन्हात वाळवणे → सुरक्षित साठवण → आवश्यकतेनुसार धानाची प्रक्रिया करून तांदूळ तयार करणे** या क्रमाने पुढे जाते. पारंपरिक घरगुती साठवण पद्धतींमध्ये स्थानिक साधनसामग्रीचा वापर होत असला, तरी कोकणातील दमट हवामानामुळे धानाची योग्य वाळवण, आर्द्रता नियंत्रण आणि कीडप्रतिबंधक साठवण या बाबींना विशेष महत्त्व आहे.
== कोकणातील पाऊस, जमीन आणि कापणीची वेळ ==
कोकणातील भातशेतीवर पर्जन्यमानाचा मोठा प्रभाव असतो. हा प्रदेश उष्ण व दमट हवामानाचा असून येथे वार्षिक पर्जन्यमान साधारण २०० ते ३५० सेंमीपर्यंत आढळते. पर्जन्याचे प्रमाण, त्याचे ऋतुनिहाय वितरण आणि जमिनीची पाणीधारण क्षमता यांचा विचार करून कोकणातील पिकांची रचना निश्चित होते. त्यामुळे भातपिकाच्या वाढीपासून पक्वतेपर्यंतच्या कालावधीवरही पावसाचा प्रभाव पडतो.<ref name="BiswasPhadtare1995"/>
कोकणातील भातशेतीच्या जमिनींचे स्वरूपही कापणीच्या वेळेवर अप्रत्यक्ष परिणाम करते. प्रदेशातील जमिनींच्या पाणीधारण क्षमतेनुसार आणि पर्जन्याच्या उपलब्धतेनुसार भातासाठी योग्य पीकपद्धती बदलते. काही भागांत पावसाचे पाणी जमिनीत साठून राहिल्यामुळे पिकाच्या वाढीच्या उत्तरार्धात बाहेरील पावसाची आवश्यकता तुलनेने कमी होऊ शकते. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील भातपिकाच्या अभ्यासात वाढीच्या वेगवेगळ्या अवस्थांमध्ये पावसाचा परिणाम वेगवेगळा असल्याचे आढळले आहे.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
भातपिकाच्या सुरुवातीच्या वाढीच्या अवस्थेत पुरेसा पाऊस आवश्यक असतो. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील १९५१ ते १९८७ या कालावधीच्या अभ्यासात भाताच्या वाढीतील विविध अवस्थांमध्ये पर्जन्यमानाचा उत्पादनाशी संबंध असल्याचे आढळले. विशेषतः फुटवे येण्याच्या अवस्थेत पावसाचे महत्त्व दिसून आले, तर पुढील काही अवस्थांमध्ये जमिनीत साठलेली आर्द्रता पिकासाठी उपयुक्त ठरू शकते.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
कापणीच्या काळात मात्र पावसाचे स्वरूप वेगळ्या प्रकारे महत्त्वाचे ठरते. पीक पक्व झाल्यानंतरही पाऊस सुरू राहिल्यास शेतातील जमीन ओलसर राहते आणि कापणी, कापलेले पीक शेताबाहेर आणणे, मळणी व धान वाळवणे या कामांमध्ये अडथळे निर्माण होऊ शकतात. कोकणातील भातकापणीवरील अभ्यासात मजुरांची कमतरता आणि कापणीच्या कामातील विलंब ही समस्या नोंदविण्यात आली असून वेळेत कापणी न झाल्यास कापणीनंतरच्या कामांवरही त्याचा परिणाम होतो.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील पावसाचा कालावधी आणि त्यातील बदल यांमुळे कापणीसाठी उपलब्ध कोरड्या हवामानाच्या कालखंडाला विशेष महत्त्व प्राप्त होते. कोकण प्रदेशातील बारा ठिकाणांच्या पर्जन्यविषयक अभ्यासात वार्षिक आणि हंगामी पर्जन्यमान तसेच पावसाळी दिवसांच्या प्रवृत्तींमध्ये स्थानानुसार फरक आढळला आहे. त्यामुळे कोकणातील सर्व जिल्ह्यांसाठी कापणीची एकच निश्चित वेळ ठरविण्याऐवजी स्थानिक पर्जन्यस्थिती आणि पिकाची पक्वता यांचा एकत्रित विचार करणे आवश्यक ठरते.<ref name="Kadam2019">{{cite journal
|last=Kadam
|first=U. S.
|author2=Jedhe, S. H.
|author3=Mane, M. S.
|author4=Mahale, D. M.
|author5=Nandgude, S. B.
|title=Spatio-temporal Trends of Rainfall and Rainy Days in Konkan Region of Maharashtra
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|volume=37
|issue=1
|year=2019
|pages=25–36
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92410
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीची वेळ ही केवळ पिकाच्या पक्वतेवर अवलंबून नसून **पावसाचे आगमन व माघार, जमिनीतील ओलावा, स्थानिक जमीनप्रकार आणि कापणीच्या वेळी उपलब्ध होणारा कोरडा कालावधी** या घटकांच्या परस्परसंबंधातून ठरते. म्हणूनच पक्व भाताची कापणी योग्य हवामानाच्या कालखंडात लवकर पूर्ण करणे कोकणातील भातशेतीसाठी महत्त्वाचे ठरते.
== कोकणातील भातकापणीचे यांत्रिकीकरण ==
कोकणातील भातशेतीमध्ये कापणी आणि कापणीनंतरची कामे पारंपरिकरीत्या मोठ्या प्रमाणावर मानवी श्रमांवर अवलंबून होती. मजुरांची कमतरता, वाढता मजुरीखर्च आणि पक्व झालेल्या पिकाची वेळेत कापणी करण्याची आवश्यकता यामुळे भातकापणीच्या यांत्रिकीकरणाची गरज निर्माण झाली. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासात कापणी व मळणीच्या यांत्रिकीकरणाचा आर्थिक व्यवहार्यतेच्या दृष्टीने अभ्यास करण्यात आला आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भातकापणीसाठी स्वयंप्रचालित रीपर, रीपर-बाइंडर आणि कापणीसाठी सुधारित हातसाधने यांसारख्या पर्यायांचा अभ्यास झाला आहे. कापणीनंतरच्या प्रक्रियांसाठी पेडलवर चालणारे थ्रेशर, वायर-लूप प्रकारचे थ्रेशर, उलट्या साखळी-पट्टीवर आधारित थ्रेशर, अक्षीय प्रवाहाचे थ्रेशर तसेच हातचलित व शक्तिचलित विन्नोअर यांचा वापर विचारात घेण्यात आला आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भौगोलिक आणि आर्थिक परिस्थिती लक्षात घेऊन यंत्रांची निवड करणे महत्त्वाचे ठरते. लहान व तुकड्यात विभागलेली शेतजमीन आणि अनेक शेतकऱ्यांकडे असलेले अल्प क्षेत्र यामुळे मोठ्या यंत्रांची वैयक्तिक मालकी आर्थिकदृष्ट्या व्यवहार्य ठरत नाही. कोकणातील अभ्यासात सुमारे ०.२ हेक्टर क्षेत्र धारण करणाऱ्या बहुसंख्य शेतकऱ्यांना कापणी, मळणी आणि पाखडणीची यंत्रे स्वतः खरेदी करणे त्यांच्या आर्थिक परिस्थितीमुळे शक्य नसल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
या परिस्थितीत रीपर आणि रीपर-बाइंडर यांसारखी यंत्रे कोकणातील लहान व मध्यम शेतांसाठी तुलनेने उपयुक्त पर्याय ठरू शकतात. अभ्यासानुसार रीपर, रीपर-बाइंडर, शक्तिचलित थ्रेशर आणि विन्नोअर यांच्या विविध संयोगांमध्ये कोकणाच्या परिस्थितीत यांत्रिकीकरणाची क्षमता आढळून आली आहे. यंत्रांची कार्यक्षमता आणि प्रति हेक्टर बदलता खर्च हे त्यांच्या आर्थिक व्यवहार्यतेवर परिणाम करणारे महत्त्वाचे घटक आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भातकापणीच्या यांत्रिकीकरणात केवळ यंत्रांची उपलब्धता नव्हे, तर ती शेतकऱ्यांना परवडणाऱ्या पद्धतीने उपलब्ध करून देणे महत्त्वाचे आहे. त्यामुळे कस्टम हायरिंग सेवा आणि कृषी अवजारे बँक यांसारख्या सामायिक यंत्रवापराच्या पद्धतींचा विस्तार करण्याची शिफारस करण्यात आली आहे. अशा पद्धतींमुळे अल्पभूधारक शेतकऱ्यांना यंत्रे स्वतः खरेदी न करता आवश्यकतेनुसार त्यांचा वापर करता येतो.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील शेतकऱ्यांच्या शारीरिक श्रमभाराचाही यांत्रिकीकरणाच्या संशोधनात विचार करण्यात आला आहे. ICARच्या वार्षिक अहवालानुसार कोकणातील पुरुष कामगारांच्या शारीरिक मापदंडांचा विचार करून गवत कापणी यंत्रासोबत वापरता येणारे पॅडी हार्वेस्टर विकसित करण्यात आले. सुधारित यंत्रामुळे विद्यमान यंत्राच्या तुलनेत चालकावरील शारीरिक कामाचा भार कमी झाल्याचे परीक्षणात आढळले.<ref name="ICARAnnualReport2023">{{cite report
|author=Indian Council of Agricultural Research
|title=ICAR Annual Report 2023–24
|publisher=Indian Council of Agricultural Research
|year=2024
|url=https://icar.gov.in/sites/default/files/2025-04/ICAR%20Annual%20Report%202023-24-english.pdf
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीचे यांत्रिकीकरण हे केवळ पारंपरिक विळ्याची जागा यंत्राने घेण्यापुरते मर्यादित नसून **कापणी, बांधणी, मळणी आणि पाखडणी या संपूर्ण प्रक्रियेत श्रम व वेळ कमी करण्याचा प्रयत्न** आहे. मात्र कोकणातील लहान शेतजमिनी आणि शेतकऱ्यांची आर्थिक क्षमता लक्षात घेता मोठ्या यंत्रांच्या वैयक्तिक मालकीपेक्षा कस्टम हायरिंग व सामायिक यंत्रवापराची व्यवस्था अधिक व्यवहार्य ठरू शकते.<ref name="Bhanage2016"/>
== मजूरटंचाई, स्थलांतर आणि बदलती कापणी पद्धत ==
कोकणातील भातशेतीमध्ये कापणीच्या हंगामात उपलब्ध होणारे ग्रामीण मनुष्यबळ हा महत्त्वाचा घटक आहे. पारंपरिक भातकापणी, मळणी आणि पाखडणी या कामांसाठी मोठ्या प्रमाणावर मजुरांची आवश्यकता असल्याने मजूर उपलब्धतेतील घटकांचा थेट परिणाम कापणीच्या वेळेवर आणि उत्पादनखर्चावर होतो. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासात कृषी कामे श्रमप्रधान असून मजुरांची कमतरता निर्माण झाल्यामुळे कापणी व मळणीच्या कामात विलंब होत असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील काही ग्रामीण भागांत कृषी मजुरांचे इतर ठिकाणी रोजगारासाठी स्थलांतर होणे ही मजूर उपलब्धतेवर परिणाम करणारी बाब आहे. कोकणातील पावसावर आधारित भातशेतीवरील एका गावपातळीच्या अभ्यासात बहुतांश प्रतिसादकर्त्यांनी मजुरीचा वाढता खर्च ही अडचण असल्याचे नमूद केले असून, ग्रामीण भागातील अनेक मजूर अधिक उत्पन्नाच्या शोधात इतर ठिकाणी रोजगारासाठी स्थलांतरित होत असल्याचे नोंदविण्यात आले आहे.<ref name="TribalRiceConstraints2019">{{cite journal
|title=Constraints Faced By The Tribal Farmers In Rainfed Rice Production In Konkan Region-A Village Level Study
|journal=International Journal of Current Microbiology and Applied Sciences
|year=2019
|url=https://www.researchgate.net/publication/331587276_Constraints_Faced_By_The_Tribal_Farmers_In_Rainfed_Rice_Production_In_Konkan_Region-A_Village_Level_Study
}}</ref>
मजूरटंचाई आणि वाढता मजुरीखर्च यामुळे भातकापणीची पारंपरिक श्रमाधारित पद्धत आर्थिकदृष्ट्या अधिक खर्चिक होत गेली. कोकणातील तुकड्यात विभागलेली आणि लहान शेतजमीन लक्षात घेता मोठ्या यंत्रांचा वापर सर्वत्र शक्य नसला तरी स्वयंप्रचालित रीपर, रीपर-बाइंडर आणि मळणी यंत्रे यांसारख्या साधनांचा वापर वाढविण्याचे प्रयत्न झाले आहेत.<ref name="Shahare2012">{{cite journal
|last=Shahare
|first=P. U.
|title=Agricultural Mechanization in Konkan Region of Maharashtra
|journal=Agricultural Engineering Today
|volume=36
|issue=2
|year=2012
|pages=6–9
|url=https://indianjournals.com/article/aet-36-2-002
}}</ref>
यांत्रिकीकरणामुळे कापणीसाठी आवश्यक मानवी श्रम कमी करण्याबरोबरच कमी कालावधीत कापणी पूर्ण करण्याची शक्यता वाढते. कोकणातील भातउत्पादनावरील अलीकडील अभ्यासात पालघर आणि ठाणे जिल्ह्यांतील काही शेतकऱ्यांनी यांत्रिक कापणी यंत्रे व मळणी यंत्रे स्वीकारल्यामुळे श्रमावरील अवलंबित्व कमी झाल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Shelake2025">{{cite journal
|last=Shelake
|first=S. M.
|author2=Kshirsagar, P. J.
|author3=Torane, S. R.
|author4=Waravadekar, S. C.
|author5=More, V. G.
|title=Economic analysis for profitable paddy production in Konkan region
|journal=International Journal of Agriculture Extension and Social Development
|volume=8
|issue=10
|year=2025
|url=https://www.extensionjournal.com/archives/2025.v8.i10.I.2591
}}</ref>
मात्र कोकणातील लहान भूधारणा आणि यंत्रांच्या तुलनेने जास्त किंमतीमुळे प्रत्येक शेतकऱ्याला कापणीची यंत्रे स्वतःच्या मालकीची ठेवणे व्यवहार्य ठरत नाही. त्यामुळे कस्टम हायरिंग सेवा आणि कृषी अवजारे बँक यांसारख्या सामायिक यंत्रवापराच्या पद्धतींना महत्त्व प्राप्त झाले आहे. कोकणातील यांत्रिकीकरणाच्या अभ्यासात अशा सेवांचा विस्तार केल्यास अल्पभूधारक शेतकऱ्यांनाही यांत्रिकीकरणाचा लाभ मिळू शकतो, असे सुचविण्यात आले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
अशा प्रकारे मजूरटंचाई, ग्रामीण मनुष्यबळाचे स्थलांतर आणि वाढता मजुरीखर्च या घटकांमुळे कोकणातील भातकापणीची पारंपरिक श्रमव्यवस्था बदलत आहे. विळ्याने हाताने कापणी करण्याच्या पद्धतीबरोबरच रीपर, रीपर-बाइंडर आणि मळणी यंत्रांचा वापर वाढत असून, सामायिक यंत्रसेवा ही लहान शेतकऱ्यांसाठी महत्त्वाची पर्यायी व्यवस्था ठरत आहे.<ref name="Shahare2012"/>
== रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, रायगड, ठाणे-पालघरमधील प्रादेशिक वैशिष्ट्ये ==
कोकणातील भातशेतीची भौगोलिक व कृषी परिस्थिती जिल्ह्यानुसार काही प्रमाणात बदलते. डॉ. बाळासाहेब सावंत कोकण कृषी विद्यापीठाच्या वर्गीकरणानुसार रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग हे दक्षिण कोकण क्षेत्रात, तर रायगड, पालघर आणि ठाणे हे उत्तर कोकण क्षेत्रात येतात. या प्रदेशात किनारी, पठारी आणि डोंगराळ अशा भौगोलिक पट्ट्यांनुसार शेतीचे स्वरूप बदलते. दक्षिण कोकणात लालसर-जांभ्या प्रकारच्या आम्लधर्मी जमिनींचे प्राबल्य आहे, तर उत्तर कोकणातील काही भागांत बेसॉल्टजन्य तपकिरी ते काळ्या जमिनी आढळतात; डोंगरउतारांवर उथळ व वालुकामय तर खोऱ्यांमध्ये चिकणमातीप्रधान जमिनी आढळतात.<ref name="DBSKKVKonkanRice">{{cite web
|title=RICE PRODUCTION IN KONKAN
|publisher=Dr. Balasaheb Sawant Konkan Krishi Vidyapeeth
|url=https://archive.dbskkv.org/collection/420/document/2304
}}</ref>
रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग या दक्षिण कोकणातील जिल्ह्यांमध्ये मोठ्या प्रमाणावर पावसावर आधारित भातशेती आढळते. डोंगरउतार, खोरी आणि किनारी भाग यांनुसार शेतजमिनींचे स्वरूप बदलत असल्यामुळे भात लागवडीच्या पद्धतीतही स्थानिक फरक दिसतात. सिंधुदुर्ग जिल्ह्याची भात उत्पादकता कोकण विभागातील इतर जिल्ह्यांच्या तुलनेत अधिक असल्याची नोंद कोकणातील भात उत्पादनाच्या उपलब्ध आकडेवारीत करण्यात आली आहे.<ref name="DBSKKVKonkanRice"/>
रायगड जिल्हा भाताच्या क्षेत्रफळाच्या दृष्टीने कोकणातील महत्त्वाचा जिल्हा आहे. उपलब्ध जिल्हानिहाय आकडेवारीनुसार रायगडमध्ये भाताखालील क्षेत्र सुमारे १.२५ लाख हेक्टर आणि भात उत्पादन सुमारे ३.५१ लाख टन नोंदविण्यात आले होते. त्यामुळे कोकणातील एकूण भात उत्पादनात रायगडचा महत्त्वाचा वाटा आहे.<ref name="DBSKKVKonkanRice"/>
ठाणे आणि पालघर हे उत्तर कोकणातील जिल्हे असून येथे भातशेतीबरोबर आदिवासी व ग्रामीण भागातील पारंपरिक कृषीपद्धतींचेही महत्त्व आहे. पालघर जिल्ह्यातील वाडा आणि पालघर तालुक्यांतील भात उत्पादक गावांवर केलेल्या अभ्यासात भात हे प्रमुख खरीप पीक असल्याचे आणि शेतकरी शिफारस केलेल्या भात उत्पादन तंत्रज्ञानाचा अवलंब करीत असल्याचे आढळते.<ref name="KarangamiDhengeChavanAnarase2020">{{cite journal
|last=Karangami
|first=R. S.
|author2=Dhenge, S. A.
|author3=Chavan, P. M.
|author4=Anarase, M. S.
|title=Association of Profile Characteristics of Rice Growers and Adoption of Recommended Package of Practices
|journal=Indian Journal of Extension Education
|year=2020
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/IJEE/article/view/109198
}}</ref>
उपलब्ध जिल्हानिहाय आकडेवारीत ठाणे जिल्ह्याचे भाताखालील क्षेत्र, उत्पादन आणि उत्पादकता कोकणातील इतर प्रमुख भात उत्पादक जिल्ह्यांच्या तुलनेत कमी असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. त्याच वेळी उत्तर कोकणातील भातशेतीवर लहान भूधारणा, स्थानिक भौगोलिक परिस्थिती आणि उपलब्ध कृषी मनुष्यबळ यांचा प्रभाव पडतो.<ref name="DBSKKVKonkanRice"/>
भातकापणीच्या दृष्टीने या प्रादेशिक फरकांना विशेष महत्त्व आहे. रायगड, रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्गमध्ये मोठ्या प्रमाणातील भातक्षेत्रामुळे कापणीच्या काळात मोठ्या प्रमाणावर मनुष्यबळ आणि यंत्रसेवेची आवश्यकता निर्माण होते. उत्तर कोकणातील ठाणे व पालघरमध्ये लहान शेतजमिनी, ग्रामीण व आदिवासी भाग आणि बदलती कृषी श्रमव्यवस्था यांमुळे कापणीच्या पद्धतीत स्थानिक परिस्थितीनुसार बदल होत आहेत. त्यामुळे संपूर्ण कोकणासाठी भातकापणीची एकच पद्धत किंवा एकच कालमर्यादा लागू होत नाही; जिल्ह्याची भौगोलिक रचना, जमीन, पर्जन्यस्थिती, पीकवाण आणि शेताचा आकार यांनुसार कापणीचे स्वरूप बदलते.
अशा प्रकारे **रत्नागिरी-सिंधुदुर्गचा दक्षिण कोकण, रायगडचा मोठा भातक्षेत्र असलेला मध्य-उत्तर भाग आणि ठाणे-पालघरचा उत्तर कोकण** यांमध्ये भातशेतीच्या क्षेत्रफळ, उत्पादकता, जमीनप्रकार आणि कृषी-सामाजिक परिस्थितीत फरक आढळतो. हे प्रादेशिक वैविध्य भातकापणीच्या वेळा, श्रमाची गरज आणि यांत्रिकीकरणाच्या स्वीकारावरही परिणाम करणारे महत्त्वाचे घटक आहेत.
== भातकापणी आणि कोकणातील ग्रामीण जीवन व लोकसंस्कृती ==
कोकणातील भातकापणी ही केवळ कृषी उत्पादनाची प्रक्रिया नसून ग्रामीण जीवनातील सामाजिक आणि सांस्कृतिक व्यवहारांशीही संबंधित राहिली आहे. भाताचे पीक हे पावसाळी शेतीच्या वार्षिक चक्राचा महत्त्वाचा भाग असल्यामुळे पेरणीपासून कापणीपर्यंतच्या विविध टप्प्यांशी स्थानिक देवता, शेतजमीन, पाऊस, जनावरे आणि चांगल्या पीकउत्पादनाच्या अपेक्षा जोडलेल्या होत्या. कोकणातील लोकपरंपरांचे संकलन करणाऱ्या *Folk Lore Notes, Vol. II—Konkan* या ग्रंथात पेरणी आणि कापणीच्या काळाशी संबंधित विविध कृषीविधींची नोंद आढळते.<ref name="JacksonEnthoven1915">{{cite book
|last=Jackson
|first=A. M. T.
|author2=Enthoven, R. E.
|title=Folk Lore Notes, Vol. II—Konkan
|publisher=British India Press
|year=1915
|url=https://books.google.com/books/about/Folk_Lore_Notes.html?id=a4XlAAAAMAAJ
}}</ref>
कापणीच्या वेळी शेतात नवीन धान्याच्या राशीची पूजा करण्याची प्रथा कोकणातील अनेक भागांत नोंदविण्यात आली आहे. तसेच काही ठिकाणी शेतातील पहिल्या कापणीच्या दिवशी शिजवलेले अन्न तयार करून ते देवतेला नैवेद्य म्हणून अर्पण केले जात असे. या प्रथांमधून नवीन पीक हे केवळ आर्थिक उत्पादन नसून धार्मिक कृतज्ञता आणि सामुदायिक जीवनाचा भाग मानले जात असल्याचे दिसून येते.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
रत्नागिरी जिल्ह्यातील फोंडा येथे कापणीच्या वेळी शेताच्या कोपऱ्यात भात आणि दह्यापासून तयार केलेले 'शिवार' ठेवण्याची प्रथा नोंदविण्यात आली आहे. या विधीला 'चोरावा' असेही संबोधले जात असल्याचे त्या ऐतिहासिक नोंदीत नमूद आहे. अशा प्रथा शेत, पीक आणि स्थानिक धार्मिक विश्वास यांच्यातील संबंध दर्शवतात.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
कोकणातील काही भागांत कापणीच्या वेळी शेताच्या रक्षणाशी संबंधित स्थानिक देवतांना नारळ, कोंबड्या किंवा शेळ्या अर्पण करण्याच्या प्रथा नोंदविण्यात आल्या आहेत. रत्नागिरी जिल्ह्यातील काही गावांमध्ये तसेच मालवण परिसरात पेरणी आणि कापणीच्या काळात शेतरक्षक देवतांना अर्पणे केली जात असल्याचे ऐतिहासिक लोकसाहित्याच्या नोंदीत नमूद आहे. या प्रथा त्या काळातील ग्रामीण समाजाच्या कृषीविश्वासांचे दस्तऐवजीकरण करतात.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
कोलाबा जिल्ह्यातील दासगावच्या संदर्भात कापणीच्या वेळी शेतात नारळ ठेवून पहिल्या कापलेल्या भाऱ्याने त्याला काही वेळा झोडपण्याची प्रथा नोंदविण्यात आली आहे; त्यानंतर नियमित मळणी सुरू केली जात असे. अशा विधींमधून पहिल्या कापणीच्या उत्पादनाला प्रतीकात्मक महत्त्व दिले जात असल्याचे दिसते.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
या कृषीपरंपरांमुळे भातकापणीचा काळ हा ग्रामीण समाजाच्या सामूहिक जीवनाशी जोडलेला असे. शेतातील कामे, स्थानिक देवतांची पूजा, नवीन धान्याशी संबंधित विधी आणि कुटुंब व गावसमूहातील सहभाग यांमधून कृषी उत्पादन आणि लोकसंस्कृती यांचे परस्परसंबंध दिसून येतात. मात्र उपलब्ध लोकसाहित्यविषयक नोंदी मुख्यतः विसाव्या शतकाच्या प्रारंभीच्या काळातील असल्यामुळे त्यातील प्रत्येक प्रथा आजही कोकणातील सर्व भागांत प्रचलित आहे, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
भातकापणीशी संबंधित या ऐतिहासिक प्रथा कोकणातील ग्रामीण समाजात भाताला असलेले आर्थिक, सामाजिक आणि सांस्कृतिक महत्त्व स्पष्ट करतात. त्यामुळे भातकापणीचा अभ्यास करताना कापणीची तांत्रिक प्रक्रिया, ग्रामीण श्रमव्यवस्था आणि कापणीनंतरची कामे यांसोबतच त्याभोवती निर्माण झालेल्या लोकपरंपरांचाही विचार करणे आवश्यक ठरते.
== आधुनिक काळातील बदल, आव्हाने आणि भविष्यातील दिशा ==
कोकणातील भातकापणीच्या पद्धतीमध्ये आधुनिक काळात लक्षणीय बदल होत आहेत. पारंपरिक हाताने कापणी आणि श्रमप्रधान मळणीच्या पद्धतींबरोबर रीपर, रीपर-बाइंडर, विविध प्रकारची मळणी यंत्रे आणि पाखडणीची यंत्रे वापरण्याकडे कल वाढला आहे. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासानुसार मजुरांची कमतरता आणि वाढता मजुरीखर्च यामुळे वेळेत कापणी व मळणी करणे कठीण होत असून, यांत्रिकीकरण हा त्यावरील महत्त्वाचा पर्याय ठरतो.<ref name="Bhanage2016"/>
आधुनिक तंत्रज्ञानाचा स्वीकार मात्र संपूर्ण कोकणात एकसमान झालेला नाही. लहान आणि तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनी, चिखलयुक्त किंवा पाणथळ क्षेत्र, उताराची जमीन, यंत्रांची किंमत आणि त्यासाठी आवश्यक कुशल चालक यांसारख्या मर्यादा यांत्रिकीकरणाच्या प्रसारावर परिणाम करतात. कोकणातील बहुतांश अल्पभूधारक शेतकऱ्यांना कापणी, मळणी आणि पाखडणीची यंत्रे स्वतःच्या मालकीची ठेवणे आर्थिकदृष्ट्या कठीण असल्याचे अभ्यासातून दिसून आले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
अलीकडील अभ्यासांमध्ये कोकणातील जिल्ह्यांनुसार आधुनिक तंत्रज्ञान स्वीकारण्यात फरक दिसून येतो. पालघर आणि ठाणे जिल्ह्यांतील काही भात उत्पादकांनी यंत्राद्वारे रोपलागवड, हार्वेस्टर आणि थ्रेशर यांचा वापर केला आहे, तर रत्नागिरीतील काही शेतकरी अद्याप अधिक श्रमप्रधान पारंपरिक पद्धतींवर अवलंबून आहेत. सिंधुदुर्गमध्ये भाताच्या पुढील प्रक्रियेत दळण, उकडणे आणि पोहेनिर्मिती यांसारख्या मूल्यवर्धित पद्धतींचा वापर आढळतो.<ref name="Shelake2025"/>
भातकापणीसमोरील आणखी एक महत्त्वाचे आव्हान म्हणजे हवामानातील अनिश्चितता. कोकणातील भातशेती मोठ्या प्रमाणावर मोसमी पावसावर अवलंबून असल्यामुळे पावसाचा कालावधी, तीव्रता आणि कापणीच्या काळातील ओलावा यांचा कापणीच्या नियोजनावर परिणाम होतो. पक्व झालेल्या पिकाची कापणी वेळेत न झाल्यास पिकाचे नुकसान होण्याची शक्यता वाढते. त्यामुळे हवामानविषयक माहिती, पीकपक्वतेचे अचूक निरीक्षण आणि उपलब्ध यंत्रसामग्रीचे वेळेवर नियोजन यांना भविष्यात अधिक महत्त्व प्राप्त होईल.
यांत्रिकीकरणाचा लाभ लहान शेतकऱ्यांपर्यंत पोहोचविण्यासाठी कस्टम हायरिंग सेवा आणि कृषी अवजारे बँका महत्त्वाच्या ठरू शकतात. कोकणातील यांत्रिकीकरणाच्या अभ्यासाने अशा सेवांचा मोठ्या प्रमाणावर विस्तार करण्याची गरज व्यक्त केली आहे. यामुळे शेतकऱ्यांना महागडी यंत्रे स्वतः खरेदी न करता आवश्यक त्या काळात कापणी व मळणीची यंत्रसेवा घेता येऊ शकते.<ref name="Bhanage2016"/>
भविष्यातील दिशेच्या दृष्टीने केवळ कापणीचे यांत्रिकीकरण पुरेसे ठरणार नाही. कापणीपासून मळणी, वाळवण, साठवण, दळण आणि मूल्यवर्धनापर्यंत संपूर्ण साखळी अधिक कार्यक्षम करण्याची गरज आहे. २०२५ मधील कोकणावरील अभ्यासात यांत्रिकीकरण आणि भातप्रक्रियेमुळे मजुरीवरील अवलंबित्व कमी होऊन उत्पादनक्षमता, खर्च आणि बाजारमूल्याच्या दृष्टीने सुधारणा होऊ शकते, असे आढळले आहे.<ref name="Shelake2025"/>
कोकणासाठी भविष्यातील भातकापणीची यंत्रे विकसित करताना या प्रदेशाच्या विशिष्ट परिस्थितीचा विचार करणे आवश्यक आहे. लहान शेतजमीन, पाणथळ क्षेत्र, उतार, अरुंद बांध आणि उच्च पर्जन्यमान यांना अनुरूप हलकी, कमी खर्चाची आणि सहज वाहतूक करता येणारी यंत्रे अधिक उपयुक्त ठरू शकतात. त्याचबरोबर स्थानिक पातळीवर यंत्रचालकांचे प्रशिक्षण, दुरुस्ती व देखभाल सुविधा आणि कस्टम हायरिंगची उपलब्धता वाढविणे आवश्यक आहे.
अशा प्रकारे आधुनिक काळातील कोकणातील भातकापणी ही **पारंपरिक श्रमाधारित पद्धतीपासून योग्य ठिकाणी यांत्रिकीकरण, सामायिक यंत्रसेवा आणि मूल्यवर्धित प्रक्रियांकडे होणाऱ्या संक्रमणाच्या** टप्प्यात आहे. भविष्यातील दिशा ही केवळ अधिक यंत्रे उपलब्ध करून देण्याची नसून, कोकणातील लहान शेतकऱ्यांच्या आर्थिक क्षमतेला, स्थानिक भौगोलिक परिस्थितीला, हवामानाच्या अनिश्चिततेला आणि भाताच्या संपूर्ण मूल्यसाखळीला अनुरूप अशी शाश्वत व परवडणारी व्यवस्था निर्माण करण्याची आहे.
== चित्रदालन ==
<gallery mode="packed" heights="180">
File:Rice Plantation.jpg|रत्नागिरी जिल्ह्यातील भातशेती
File:Paddy field in Maharashtra .jpg|कोकण रेल्वेमार्गावरील महाराष्ट्रातील भातशेती
File:Paddy field in Maharashtra 8.jpg|कोकण रेल्वेमार्गावरील भातशेती
File:Paddy field in Maharashtra 11.jpg|कोकण रेल्वेमार्गावरील भातशेती
File:Konkan - Songiri Village - Ratnagiri District - Part 1 20151218 (23369027944).jpg|रत्नागिरी जिल्ह्यातील सोनगिरी गाव परिसरातील भातशेती
File:Konkan - Songiri Village - Ratnagiri District - Part 1 20151218 (23889128342).jpg|रत्नागिरी जिल्ह्यातील सोनगिरी गाव परिसरातील भातशेती
File:Rice Fields near Satarda in Sindhudurg District - panoramio.jpg|सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातील सातर्डा परिसरातील भातशेती
File:Nerur - panoramio.jpg|सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातील नेरूर परिसरातील भातशेती
File:Abandoned paddy field on Low-elevation Lateritic Plateau IMG 20220817 115924 06.jpg|रत्नागिरी जिल्ह्यातील जांभ्या पठारावरील भातशेती
File:Crop Harvesting Machine 2.JPG|भातपिकाच्या कापणीतील यांत्रिकीकरण
File:Rice Harvesting.jpg|विळ्याने भाताची कापणी
File:Rice threshering.jpg|भाताची मळणी
</gallery>
== हेही पहा ==
* [[कोकण]]
* [[भात]]
== बाह्य दुवे ==
* [https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/ Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research — ICAR]
* [https://www.dbskkv.org/ डॉ. बाळासाहेब सावंत कोकण कृषी विद्यापीठ]
{{कोकण लोकजीवन}}
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:कोकण]]
[[वर्ग:महाराष्ट्र]]
[[वर्ग:शेती]]
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2026-09-16T05:30:31Z
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wikitext
text/x-wiki
[[File:Rice Plantation.jpg|thumb|right|250px|रत्नागिरी जिल्ह्यातील भातशेती]]
कोकणातील भात शेती ही प्रदेशाच्या कृषी आणि ग्रामीण जीवनाचा महत्त्वाचा भाग आहे. कोकणातील भातपिकाची लागवड प्रामुख्याने पावसावर अवलंबून असून, भाताची कापणी हा पिकाच्या उत्पादनचक्रातील अत्यंत महत्त्वाचा टप्पा आहे. या प्रदेशातील भौगोलिक परिस्थिती, अतिवृष्टी, लहान व तुकड्यात विभागलेली शेती, उताराची किंवा पायरीदार जमीन आणि कापणीच्या काळातील मजुरांची उपलब्धता या घटकांचा भातकापणीच्या पद्धतीवर परिणाम होतो.<ref name="Bhanage2016">{{cite journal
|last=Bhanage
|first=G. B.
|author2=P. U. Shahare
|author3=P. S. Deshmukh
|author4=P. B. Gaikwad
|author5=V. V. Aware
|title=Mechanization in Harvesting and Post-Harvest Operation for Paddy in Konkan Region and Its Economic Feasibility
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|volume=34
|issue=2
|year=2016
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92862
}}</ref>
परंपरेने कोकणातील भाताची कापणी मानवी श्रमांवर आधारित राहिली असून विळा किंवा तत्सम साधनांनी भात कापणे, कापलेले भाताचे पुंजके एकत्र करणे, त्यानंतर मळणी व धान वेगळे करणे अशा सलग प्रक्रियेतून कापणीचे काम केले जात असे. कापणी व कापणीनंतरच्या प्रक्रियांमध्ये मोठ्या प्रमाणावर श्रम लागत असल्याने मजुरांची कमतरता आणि वाढता मजुरीखर्च हे कोकणातील भातशेतीसमोरील महत्त्वाचे प्रश्न ठरले आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील शेतीच्या विशिष्ट परिस्थितीमुळे भातकापणीच्या यांत्रिकीकरणालाही स्वतंत्र स्वरूप प्राप्त झाले आहे. लहान व विखुरलेली शेतजमीन, उताराची व पायरीदार शेती आणि मोठ्या प्रमाणातील पाऊस या मर्यादा लक्षात घेऊन भात कापणीसाठी लहान व तुलनेने हलकी यंत्रे विकसित करण्याचे प्रयत्न झाले आहेत.<ref name="Bhanage2017">{{cite journal
|last=Bhanage
|first=Girishkumar Balasaheb
|author2=P. U. Shahare
|author3=V. V. Aware
|author4=K. G. Dhande
|author5=P. S. Deshmukh
|title=Development of stripper harvester for paddy
|journal=Journal of Applied and Natural Science
|volume=9
|issue=4
|year=2017
|pages=1943–1948
|url=https://journals.ansfoundation.org/index.php/jans/article/view/1469
}}</ref>
या पार्श्वभूमीवर कोकणातील भात शेती कापणीचा अभ्यास हा केवळ भात कापण्याच्या तंत्राचा अभ्यास न राहता, पाऊस व जमीन, पिकाची पक्वता, पारंपरिक श्रमव्यवस्था, कापणीची साधने, मळणी व धान साठवण, यांत्रिकीकरण, मजूरटंचाई आणि ग्रामीण लोकजीवन यांचा परस्परसंबंध समजून घेण्याचा विषय ठरतो.
== कोकणातील भातशेतीची भौगोलिक व कृषी पार्श्वभूमी ==
कोकण हा महाराष्ट्राच्या पश्चिम किनारपट्टीवरील अरबी समुद्रालगतचा प्रदेश असून, त्याची भौगोलिक रचना डोंगराळ, खाचखळग्यांची आणि काही ठिकाणी सखल स्वरूपाची आहे. महाराष्ट्रातील कोकण विभागातील भात उत्पादनाच्या संदर्भात ठाणे, पालघर, रायगड, रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग हे प्रमुख जिल्हे विचारात घेतले जातात. या प्रदेशात उष्ण व दमट हवामान आणि मोठ्या प्रमाणातील नैऋत्य मोसमी पाऊस ही भातशेतीस अनुकूल वैशिष्ट्ये आहेत.<ref name="BiswasPhadtare1995">{{cite journal
|last=Biswas
|first=B. C.
|author2=R. D. Phadtare
|title=Cropping pattern of Konkan region on the basis of probabilistic rainfall and soil characteristics
|journal=MAUSAM
|volume=46
|issue=2
|year=1995
|pages=133–140
|url=https://mausamjournal.imd.gov.in/index.php/MAUSAM/article/view/3218
}}</ref>
कोकणातील भातशेती मोठ्या प्रमाणावर पावसावर अवलंबून आहे. अतिवृष्टी आणि सखल भौगोलिक परिस्थितीमुळे खरीप हंगामात भात हे अनेक भागांतील प्रमुख पीक ठरते. अखिल भारतीय समन्वित भात सुधारणा प्रकल्पाच्या उत्पादनाभिमुख सर्वेक्षणानुसार कोकणातील भात उत्पादक पट्ट्यात खरीप हंगामात भाताचे क्षेत्र मोठ्या प्रमाणावर असून, जास्त पावसामुळे काही भागांत खरीप हंगामात भाताव्यतिरिक्त इतर पिकांची लागवड करणे मर्यादित होते.<ref name="AICRIP2019">{{cite report
|author=All India Coordinated Rice Improvement Project
|title=Production Oriented Survey 2019
|publisher=Indian Institute of Rice Research
|url=https://icar-iirr.org/AICRIP/Final%20POS%202019-2020.pdf
}}</ref>
कोकणातील पर्जन्यमानाचा भातपिकाच्या वाढीवर आणि उत्पादनावर थेट परिणाम होतो. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील दीर्घकालीन पर्जन्यविषयक आकडेवारीच्या अभ्यासातून भातपिकाच्या वाढीच्या विविध अवस्थांमध्ये पावसाचे महत्त्व स्पष्ट झाले आहे. त्यामुळे कोकणातील भातशेतीची लागवड, वाढ आणि पक्वता यांचे वेळापत्रक स्थानिक पर्जन्यमानाशी घनिष्ठपणे संबंधित असते.<ref name="ChowdhuryDas1993">{{cite journal
|last=Chowdhury
|first=A.
|author2=H. P. Das
|title=Effect of rainfall on growth and yield of rice in Konkan coast
|journal=MAUSAM
|volume=44
|issue=2
|year=1993
|pages=143–146
|url=https://mausamjournal.imd.gov.in/index.php/MAUSAM/article/view/3811
}}</ref>
कोकणातील कृषी रचनेचे आणखी एक वैशिष्ट्य म्हणजे लहान व तुकड्यात विभागलेली शेतजमीन. अशा जमिनी, डोंगराळ किंवा उताराची भौगोलिक रचना आणि मर्यादित सिंचनसुविधा यांमुळे भातशेतीच्या उत्पादनपद्धतीवर तसेच शेतीच्या यांत्रिकीकरणावर परिणाम होतो. कोकणातील भात उत्पादक शेतकऱ्यांच्या अभ्यासात लहान व विखुरलेली जमीन, मजुरीचा वाढता खर्च आणि उत्पादन तंत्रज्ञान स्वीकारण्यातील अडचणी या महत्त्वाच्या मर्यादा असल्याचे आढळते.<ref name="HileDarekarDatrkar2015">{{cite journal
|last=Hile
|first=R. B.
|author2=A. S. Darekar
|author3=S. B. Datrkar
|title=Adoption assessment of production technology for paddy cultivation in Konkan region of Maharashtra
|journal=Indian Journal of Economics and Development
|volume=11
|issue=1
|year=2015
|pages=217–225
|url=https://indianjournals.com/article/ijed1-11-1-023
}}</ref>
या भौगोलिक आणि कृषी परिस्थितीचा परिणाम भाताच्या कापणीवरही होतो. पिकाच्या पक्वतेच्या काळात उशिरा किंवा अतिवृष्टी झाल्यास कापणीच्या कामात विलंब होऊन पिकाचे नुकसान होऊ शकते. कोकणातील भातपिकाच्या उत्पादनाभिमुख सर्वेक्षणात पक्वता आणि कापणीच्या अवस्थेत झालेल्या उशिराच्या व जोरदार पावसामुळे काही भागांत उत्पादनहानी झाल्याची नोंद आहे.<ref name="AICRIP2019"/>
== कोकणातील भातपिकाचे हंगामी चक्र ==
कोकणातील भातपीक हे प्रामुख्याने खरीप हंगामातील पीक असून त्याचे हंगामी चक्र नैऋत्य मोसमी पावसाच्या आगमनाशी आणि उपलब्ध पाण्याशी जवळून संबंधित आहे. कोकणातील भातपिकाच्या अभ्यासात पेरणीची वेळ, वाणांची निवड आणि पिकाची वाढ यांचा पर्जन्यमान व स्थानिक हवामानाशी संबंध असल्याचे दिसून येते. कोकणातील काही प्रमुख भातवाणांसाठी जूनच्या सुरुवातीच्या काळातील पेरणी अनुकूल ठरू शकते, असे स्थानिक कृषी संशोधनातून दिसून आले आहे.<ref name="Jagtap2016">{{cite journal
|last=Jagtap
|first=D. N.
|author2=V. G. Chavan
|author3=U. V. Mahadkar
|author4=S. A. Chavan
|title=Effect of Sowing Times on the Yield and Yield Attributes of Rice (Oryza sativa L.) Varieties
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|volume=34
|issue=2
|year=2016
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92857
}}</ref>
पावसाळ्याच्या प्रारंभी भातासाठी रोपवाटिका तयार करणे, बियाणे पेरणे आणि मुख्य शेताची मशागत करणे ही कामे सुरू होतात. त्यानंतर योग्य वयाची रोपे मुख्य शेतात लावली जातात. कोकणातील खरीप भाताच्या विविध वाणांवर केलेल्या प्रयोगांमध्ये पेरणीच्या वेळेचा वाढ, उत्पादन आणि आर्थिक परताव्यावर परिणाम होत असल्याचे आढळले आहे.<ref name="Jagtap2016"/>
रोपांची पुनर्लागवड झाल्यानंतर पावसाळ्यात भातपिकाची वाढ, फुटवे येणे, कणसांची निर्मिती आणि दाणे भरणे या अवस्था क्रमाने पूर्ण होतात. या काळात पर्जन्यमानातील चढ-उतार आणि पावसाचे दिवस यांचा पिकाच्या वाढीवर परिणाम होऊ शकतो. कोकण प्रदेशातील पर्जन्यमानाच्या दीर्घकालीन अभ्यासात मे ते नोव्हेंबर या कालावधीत पर्जन्य व पावसाळी दिवसांच्या स्वरूपात बदल आढळल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="KonkanRainfall2019">{{cite journal
|title=Spatio-temporal Trends of Rainfall and Rainy Days in Konkan Region of Maharashtra
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|year=2019
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92410
}}</ref>
पिकाची पक्वता जवळ आल्यानंतर भातकापणीचा टप्पा सुरू होतो. कोकणातील भातशेतीत कापणीची वेळ व पद्धत ही वाणाचा कालावधी, पेरणीची वेळ, स्थानिक हवामान आणि त्या वर्षीच्या पावसाच्या स्वरूपानुसार बदलू शकते. त्यामुळे संपूर्ण कोकणासाठी कापणीची एकच निश्चित तारीख ठरविता येत नाही. कापणी, मळणी आणि धान वाळवणे या कापणीनंतरच्या प्रक्रिया भातपिकाच्या हंगामी चक्राचा अविभाज्य भाग आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
अशा प्रकारे कोकणातील भातपिकाचे हंगामी चक्र साधारणपणे **पावसाळ्याच्या प्रारंभी रोपवाटिका व पेरणी → मुख्य शेताची मशागत व पुनर्लागवड → पावसाळ्यात पिकाची वाढ → दाणे भरणे व पक्वता → भातकापणी → मळणी, धान वेगळे करणे व वाळवणे** अशा क्रमाने पुढे जाते. या संपूर्ण चक्रावर कोकणातील पर्जन्यमान, स्थानिक जमीन, वाण आणि शेतीतील उपलब्ध श्रम यांचा प्रभाव असतो.
== भात कापणीची वेळ आणि पक्वतेची चिन्हे ==
कोकणातील भातपिकाची कापणी प्रामुख्याने खरीप हंगामाच्या अखेरीस केली जाते. कापणीची नेमकी वेळ भाताच्या वाणाचा कालावधी, लागवडीची वेळ, स्थानिक हवामान आणि त्या वर्षीच्या पावसाच्या स्वरूपानुसार बदलते. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील १९५१ ते १९८७ या कालावधीतील आकडेवारीच्या अभ्यासानुसार कोकणात भाताची लागवड साधारणपणे जूनमध्ये होते आणि पिकाचा सक्रिय वाढीचा कालावधी सुमारे ९० दिवसांचा असतो. या अभ्यासात शारीरिक पक्वता प्राप्त झाल्यानंतर काही दिवसांनी, साधारण ऑक्टोबरच्या सुरुवातीस, भाताची कापणी केली जात असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
भातपिकाची कापणी योग्य वेळी करणे महत्त्वाचे असते. पीक पूर्णपणे पक्व होण्यापूर्वी कापणी केल्यास दाणे अपक्व राहण्याची शक्यता असते, तर कापणीस अनावश्यक विलंब झाल्यास दाणे गळणे, कणसे वाकणे किंवा पिकाचे नुकसान होण्याचा धोका वाढतो. त्यामुळे शेतातील पिकाची प्रत्यक्ष पक्वता पाहून कापणीचा निर्णय घेतला जातो.<ref name="ICARHarvest2025">{{cite report
|author=Indian Council of Agricultural Research
|title=Kharif Agro-Advisories for Farmers 2025
|publisher=Indian Council of Agricultural Research
|url=https://icar.gov.in/sites/default/files/Circulars/ICAR-En-Kharif-Agro-Advisories-for-Farmers-2025.pdf
}}</ref>
भातपिकाच्या पक्वतेची प्रमुख बाह्य चिन्हे म्हणजे कणसांवरील बहुतांश दाण्यांचा हिरव्या रंगातून पिवळसर किंवा सोनेरी रंगाकडे झालेला बदल आणि दाणे कडक होणे. ICARच्या कृषी मार्गदर्शनानुसार कणसांवरील सुमारे ८०–८५ टक्के दाणे सोनेरी-पिवळे व कडक झाल्यावर भात कापणीस योग्य मानला जातो. या अवस्थेत कापणी केल्यास कापणीतील विलंबामुळे होणारे दाणे गळणे आणि पीक लोळण्याचे नुकसान कमी करण्यास मदत होते.<ref name="ICARHarvest2025"/>
कोकणातील भातशेती पूर्णपणे किंवा मोठ्या प्रमाणावर पावसाच्या लहरीवर अवलंबून असल्याने कापणीची वेळ निश्चित करताना पावसाची स्थितीही महत्त्वाची ठरते. पक्वतेच्या कालावधीत उशिरा होणारा किंवा जोरदार पाऊस कापणीला अडथळा आणू शकतो. त्यामुळे पीक कापणीस योग्य झालेले असताना उपलब्ध कोरड्या हवामानाचा कालावधी साधून कापणी करणे आवश्यक ठरते. कोकणातील पर्जन्यमान आणि भातपिकाच्या वाढीवरील अभ्यासात पावसाच्या विविध वाढीच्या अवस्थांशी भाताच्या उत्पादनाचा संबंध असल्याचे आढळले आहे.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
कापणीपूर्वी शेतातील पिकाची अवस्था, कणसांचा रंग, दाण्यांची कडकपणा आणि हवामानाचा अंदाज यांचा विचार केला जातो. अशा प्रकारे **कणसांवरील बहुतांश दाणे सोनेरी-पिवळे होणे, दाणे कडक होणे आणि पीक शारीरिक पक्वतेला पोहोचणे** ही भात कापणीची प्रमुख चिन्हे मानली जातात. कोकणाच्या परिस्थितीत या पक्वतेनंतर अनावश्यक विलंब न करता योग्य हवामानात कापणी करणे महत्त्वाचे ठरते.
== कोकणातील पारंपरिक भातकापणी ==
कोकणातील पारंपरिक भातकापणी ही प्रामुख्याने मानवी श्रमांवर आधारित प्रक्रिया होती. भाताचे पीक कापणीस योग्य झाल्यानंतर शेतकरी आणि शेतमजूर हातातील विळ्याच्या साहाय्याने भाताची रोपे कापत. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासानुसार भात उत्पादनातील कापणी आणि कापणीनंतरची कामे पारंपरिक पद्धतीने मोठ्या प्रमाणावर हाताने केली जात असून त्यासाठी मोठ्या प्रमाणात श्रमांची आवश्यकता असते.<ref name="Bhanage2016"/>
कापणी करताना शेतातील पक्व भाताची कणसे आणि पेंढा विळ्याने कापून त्याचे पुंजके किंवा भारे तयार केले जात. कापलेला भात काही काळ शेतात किंवा योग्य जागी वाळवून पुढील मळणीसाठी नेला जात असे. अशा प्रकारे कापणी, पुंजके बांधणे, वाळवणे आणि त्यानंतर मळणी करणे ही कामे परस्परांशी जोडलेली होती.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक पद्धतीत कापणीचे काम श्रमप्रधान असल्यामुळे कापणीचा कालावधी हा उपलब्ध मजुरांच्या संख्येवरही अवलंबून असे. कोकणातील भातशेतीत लहान व तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनी, भौगोलिक परिस्थिती आणि कापणीच्या काळातील मोठ्या मनुष्यबळाची गरज यांमुळे पारंपरिक कापणी पद्धतीला विशेष महत्त्व होते. अभ्यासात कोकणातील अनेक शेतकरी अल्पभूधारक असल्यामुळे कापणी, मळणी आणि धान वाऱ्यावर पाखडणे यासाठी यंत्रसामग्री स्वतः खरेदी करणे आर्थिकदृष्ट्या कठीण असल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक भातकापणी ही केवळ कृषी कामाची प्रक्रिया नसून ग्रामीण श्रमव्यवस्थेचा भाग होती. कापणीच्या हंगामात कुटुंबातील सदस्य, शेतमजूर आणि स्थानिक पातळीवरील उपलब्ध मनुष्यबळ यांच्या सहभागातून कापणीची कामे पूर्ण केली जात. त्यामुळे भातकापणीच्या काळात शेतातील सामूहिक श्रमाला विशेष महत्त्व प्राप्त होत असे.
कापणीनंतर भाताच्या कणसांमधून धान वेगळे करण्यासाठी पारंपरिक मळणी केली जात असे. पारंपरिक पद्धतींमध्ये जनावरांच्या पायाने तुडवणे किंवा इतर श्रमाधारित पद्धतींचा वापर केला जात असे; नंतर धान व पेंढा वेगळे करण्यासाठी वाऱ्याच्या साहाय्याने पाखडण्याची प्रक्रिया केली जाई. या कापणीनंतरच्या पद्धतींमध्ये अधिक वेळ आणि मानवी श्रम लागत असल्याने पुढील काळात यांत्रिक मळणी व पाखडणीची साधने वापरात आली.<ref name="ICARTraditionalThreshing">{{cite journal
|title=Mechanization in Rice Cultivation
|journal=Indian Farming
|volume=71
|issue=4
|year=2021
|pages=3–6
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/IndFarm/article/download/114370/44585/298367
}}</ref>
पारंपरिक भातकापणीची ही पद्धत कोकणातील पावसावर आधारित शेती, लहान शेतजमिनी आणि ग्रामीण श्रमव्यवस्थेशी जुळलेली होती. मात्र मजुरांची उपलब्धता कमी होणे, मजुरीचा वाढता खर्च आणि वेळेत कापणी करण्याची गरज यांमुळे पुढील काळात विळ्याबरोबरच रीपर, रीपर-बाइंडर आणि इतर यांत्रिक साधनांचा वापर वाढू लागला.<ref name="Bhanage2016"/>
== कापणीसाठी वापरली जाणारी पारंपरिक साधने ==
कोकणातील पारंपरिक भातकापणीमध्ये विळा हे प्रमुख हातसाधन राहिले आहे. पक्व भातपीक कापण्यासाठी शेतकरी आणि शेतमजूर विळ्याचा वापर करत. भाताची कापणी प्रामुख्याने मनुष्यबळाद्वारे विळ्याने केली जात असल्याचे कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासात नमूद करण्यात आले आहे. कापणीच्या कामात मोठ्या प्रमाणावर मानवी श्रम लागत असल्याने विळ्याचा वापर हा पारंपरिक भातकापणी पद्धतीचा महत्त्वाचा भाग होता.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक विळ्याच्या वापरात शेतकरी भाताची काडे हाताने धरून विळ्याने कापत असे. कापणीचे काम प्रामुख्याने वाकून करावे लागत असल्यामुळे त्यात शारीरिक श्रम मोठ्या प्रमाणात होत. भातकापणीतील हा श्रमभार कमी करण्यासाठी पुढे दातेरी विळ्यांसारख्या सुधारित हातसाधनांचा विकास करण्यात आला.<ref name="AgrowonHarvestTools">{{cite web
|title=भात पीक कापणीची साधने
|website=अॅग्रोवन
|date=23 October 2024
|url=https://agrowon.esakal.com/techno-wan/tools-for-rice-crop-harvesting-article-on-agrowon
}}</ref>
कोकणातील भातशेतीच्या संदर्भात डॉ. बाळासाहेब सावंत कोकण कृषी विद्यापीठाने विकसित केलेला ‘वैभव विळा’ हा पारंपरिक विळ्याच्या कार्यपद्धतीवर आधारित सुधारित दातेरी विळा आहे. या विळ्याच्या साहाय्याने भाताची कापणी जमिनीलगत करता येते. दातेरी पाते असल्यामुळे कापणीसाठी तुलनेने कमी ताकद लागते आणि साधनाचे वजनही कमी ठेवण्यात आले आहे.<ref name="AgrowonHarvestTools"/>
कोकण विभागासाठीच्या कृषी सल्ल्यामध्ये तयार भातपिकाची कापणी सकाळच्या वेळी जमिनीलगत ‘वैभव’ विळ्याने करण्याची शिफारस करण्यात आली आहे. कापणीनंतर कापलेला भात शेतात अनावश्यक वेळ न ठेवता पुढील मळणीसाठी हलविण्याचाही सल्ला देण्यात आला आहे.<ref name="BSKKVHarvestAdvice">{{cite web
|title=Crop Advisory : कृषी सल्ला : कोकण विभाग
|website=अॅग्रोवन
|url=https://agrowon.esakal.com/agro-special/special-agricultural-advisory-for-crops-of-konkan-division
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील पारंपरिक भातकापणीची प्रमुख ओळख **हाताने वापरल्या जाणाऱ्या विळ्याशी** जोडलेली आहे. कालांतराने पारंपरिक विळ्याच्या कार्यक्षमतेत सुधारणा करण्यासाठी दातेरी विळे विकसित झाले आणि त्यानंतर रीपर, रीपर-बाइंडर यांसारख्या यांत्रिक साधनांचा वापर सुरू झाला. त्यामुळे विळ्यापासून यांत्रिक कापणीपर्यंत झालेला बदल हा कोकणातील भातकापणीच्या तंत्रज्ञानातील महत्त्वाचा टप्पा मानता येतो.<ref name="Bhanage2016"/>
== कापणीतील ग्रामीण श्रम आणि सामुदायिक सहभाग ==
कोकणातील पारंपरिक भातकापणी ही मोठ्या प्रमाणावर मानवी श्रमांवर आधारित होती. भाताची कापणी, कापलेला भात एकत्र करणे, मळणी, धान वेगळे करणे आणि वाळवणे या कापणीनंतरच्या प्रक्रियांमध्येही मनुष्यबळाची आवश्यकता असे. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासानुसार कापणी व कापणीनंतरची कामे श्रमप्रधान असल्यामुळे या प्रक्रियांचा एकूण उत्पादनखर्च आणि काम पूर्ण करण्यासाठी लागणारा वेळ यांवर मनुष्यबळाची उपलब्धता परिणाम करते.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक पद्धतीत भातकापणीचे काम कुटुंबातील सदस्य तसेच स्थानिक शेतमजुरांच्या सहभागातून केले जात असे. कापणीच्या हंगामात कमी कालावधीत मोठ्या क्षेत्रातील पीक कापून घेणे आवश्यक असल्याने उपलब्ध मनुष्यबळाचे नियोजन महत्त्वाचे ठरत असे. कोकणातील लहान आणि तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनींमध्ये यांत्रिक कापणीची साधने वापरण्यावरही भौगोलिक आणि आर्थिक मर्यादा येत असल्याने मानवी श्रमांना पारंपरिक शेतीपद्धतीत विशेष महत्त्व होते.<ref name="Bhanage2016"/>
भातकापणीशी संबंधित कामे केवळ कापणीपुरती मर्यादित नसून त्यानंतरची मळणी, धान व पेंढा वेगळे करणे आणि धान वाळवणे अशा टप्प्यांपर्यंत चालत. या सर्व कामांमध्ये अनेक व्यक्तींचा सहभाग आवश्यक असल्याने कापणीचा काळ हा ग्रामीण पातळीवरील श्रमविनिमय आणि परस्पर सहकार्याशी जोडलेला असे. तथापि, अशा पारंपरिक सामुदायिक प्रथांचे स्वरूप गावागावानुसार वेगवेगळे असल्याने त्याबाबत सर्व कोकणाला लागू होईल असा एकसमान निष्कर्ष काढता येत नाही.
कापणीच्या कामासाठी मोठ्या प्रमाणावर मजूर लागणे ही कोकणातील भातशेतीची महत्त्वाची अडचण ठरली आहे. मजुरांची कमतरता आणि वाढती मजुरी यामुळे वेळेत कापणी करणे शेतकऱ्यांसाठी अधिक खर्चिक झाले आहे. या परिस्थितीमुळे भातकापणीतील श्रमभार कमी करण्यासाठी रीपर, रीपर-बाइंडर आणि इतर कापणी यंत्रांचा वापर करण्याची आवश्यकता निर्माण झाली.<ref name="Bhanage2016"/>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीमध्ये ग्रामीण श्रम, कुटुंबीय सहभाग आणि स्थानिक पातळीवरील परस्पर सहकार्य यांना पारंपरिक काळात महत्त्वाचे स्थान होते. मात्र मजूरटंचाई, वाढता मजुरीखर्च आणि कापणी वेळेत पूर्ण करण्याची गरज यांमुळे या श्रमाधारित व्यवस्थेत बदल होत असून यांत्रिकीकरणाकडे कल वाढत आहे.
== कापणीनंतरची मळणी आणि धान वेगळे करणे ==
भाताची कापणी झाल्यानंतर कापलेले पीक मळणीसाठी नेले जाते. मळणीच्या प्रक्रियेत भाताच्या कणसांपासून धान वेगळे केले जाते. पारंपरिक पद्धतीत ही प्रक्रिया मानवी श्रमांवर आधारित होती. कापणी, मळणी आणि त्यानंतर धान व पेंढा वेगळे करण्याच्या कामांसाठी मोठ्या प्रमाणावर मनुष्यबळ लागत असल्याने कोकणातील भातशेतीतील कापणीनंतरची कामे श्रमप्रधान राहिली आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
पारंपरिक मळणीनंतर धानामध्ये पेंढा, कणसांचे तुकडे, भुसा आणि इतर हलका कचरा मिसळलेला असतो. त्यातून स्वच्छ धान वेगळे करण्यासाठी पाखडणी केली जाते. नैसर्गिक वाऱ्याच्या साहाय्याने किंवा हाताने चालविलेल्या पाखडणीच्या साधनांनी हलका पेंढा व भुसा बाजूला केला जातो आणि तुलनेने जड धान खाली साचते. अशा प्रकारे मळणी आणि पाखडणी या एकमेकांशी संबंधित असल्या तरी धान स्वच्छ करण्याच्या स्वतंत्र प्रक्रिया आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भातशेतीच्या यांत्रिकीकरणाच्या अभ्यासात मळणीसाठी पेडलवर चालणारे थ्रेशर, वायर-लूप प्रकारचे थ्रेशर, उलट्या साखळी-पट्टीवर आधारित थ्रेशर आणि अक्षीय प्रवाहाचे थ्रेशर यांसारख्या साधनांचा अभ्यास करण्यात आला. धान वेगळे केल्यानंतर पाखडणीसाठी हाताने चालविलेले तसेच शक्तिचलित विन्नोअर वापरण्याच्या पद्धतींचाही विचार करण्यात आला.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील लहान व तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनी आणि शेतकऱ्यांची मर्यादित आर्थिक क्षमता यांमुळे मोठ्या क्षमतेची यंत्रे सर्व शेतकऱ्यांना स्वतःच्या मालकीची ठेवणे शक्य होत नाही. त्यामुळे मळणी व पाखडणीच्या यांत्रिकीकरणासाठी सामायिक वापर, यंत्रसेवा किंवा कस्टम हायरिंग यांसारख्या पद्धती उपयुक्त ठरू शकतात.<ref name="Bhanage2016"/>
मळणी आणि पाखडणीच्या कामात मजुरांची कमतरता निर्माण झाल्यास कापणीनंतरचे काम वेळेत पूर्ण होण्यास विलंब होऊ शकतो. कोकणातील अभ्यासात मजुरांची कमतरता आणि वाढता मजुरीखर्च यामुळे कापणी व मळणीच्या कामांमध्ये विलंब होत असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. त्यामुळे कापणीनंतरच्या प्रक्रियांमध्ये यांत्रिकीकरणाला महत्त्व प्राप्त झाले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
== धान वाळवणे, साठवण आणि घरगुती प्रक्रिया ==
भातकापणी आणि मळणीनंतर मिळालेले धान साठवण्यापूर्वी योग्य प्रकारे वाळवणे आवश्यक असते. कोकणातील रायगड जिल्ह्यातील १२० शेतकरी महिलांच्या अभ्यासात मळणीच्या जागेवर धान्याची योग्य प्रकारे स्वच्छता व वाळवण करणे आणि उन्हात वाळवणे या पद्धती मोठ्या प्रमाणावर वापरल्या जात असल्याचे आढळले. अभ्यासातील ९३.३३ टक्के महिलांनी धान्याचे योग्य वाळवण व स्वच्छता तसेच उन्हात वाळवणाची पद्धत अवलंबल्याचे नोंदविण्यात आले आहे.<ref name="ChavanMehtaKale2013">{{cite journal
|last=Chavan
|first=K. M.
|author2=Mehta, P. G.
|author3=Kale, R. A.
|title=Food grain storage practices followed by the farm women
|journal=International Journal of Processing and Post Harvest Technology
|volume=4
|issue=2
|year=2013
|pages=83–85
|url=https://researchjournal.co.in/online/IJPPHT/IJPPHT%204%282%29/4_83-85_A.pdf
}}</ref>
कोकणातील पारंपरिक साठवण पद्धतींमध्ये धान घरातील स्थानिक साधनसामग्रीपासून तयार केलेल्या संरचनांमध्ये ठेवले जात असे. कोकणातील धानसाठवण संरचनांच्या अभ्यासात *कणंज किंवा साठी, मुडी, कंगे, मटक्या, ताटी आणि हाडपा* यांसारख्या पारंपरिक संरचनांचा उल्लेख करण्यात आला आहे. या संरचनांमध्ये शेतकरी घरातच धान साठवत असल्याचे अभ्यासात नमूद केले आहे.<ref name="KadKhandetodNimbalkarJadhav2016">{{cite journal
|last=Kad
|first=V. P.
|author2=Khandetod, Y. P.
|author3=Nimbalkar, C. A.
|author4=Jadhav, M. S.
|title=Design and Development of Paddy Storage Structure for Konkan Region
|journal=IMPACT: International Journal of Research in Engineering & Technology
|volume=4
|issue=5
|year=2016
|pages=25–34
|url=https://www.impactjournals.us/download/archives/2-77-1462972101-3.%20IJRET%20eng-DESIGN%20AND%20DEVELOPMENT%20OF%20PADDY%20STORAGE%20STRUCTURE%20FOR%20KONKAN%20REGION.pdf
}}</ref>
पारंपरिक साठवणुकीमध्ये किडी, बुरशी आणि उंदरांमुळे धान्याचे नुकसान होण्याची शक्यता होती. रायगड जिल्ह्यातील अभ्यासात धान्य साठवताना गोणपाटाच्या पोत्यांचा वापर ८७.५० टक्के महिलांनी केला असल्याचे आढळले. तसेच साठवलेल्या धान्याला किडींपासून संरक्षण देण्यासाठी ९३.३३ टक्के महिलांनी कडुनिंबाच्या पानांचा वापर केला होता. याउलट सिलो, पूसा बिन किंवा किसान कोठी यांसारख्या सुधारित साठवण संरचनांचा वापर अभ्यासातील प्रतिसादकर्त्यांमध्ये आढळला नाही.<ref name="ChavanMehtaKale2013"/>
कोकणातील दमट हवामानामुळे धान साठवताना आर्द्रता नियंत्रणाला विशेष महत्त्व आहे. कोकणातील दमट हवामानात धानाच्या साठवणीवर केलेल्या अभ्यासात साठवण कालावधी वाढत असताना धानाच्या काही भौतिक व गुणवत्ताविषयक गुणधर्मांमध्ये बदल होत असल्याचे आढळले. साठवणीच्या कालावधीत कीड प्रादुर्भाव वाढणे आणि धानातील आर्द्रतेत बदल होणे यांसारखे परिणाम नोंदविण्यात आले आहेत.<ref name="ThakorPatilSawant2012">{{cite journal
|last=Thakor
|first=N. J.
|author2=Patil, S. C.
|author3=Sawant, A. A.
|author4=Sawant, S. D.
|title=Influence of Storage Period on Physical Properties and Quality of Paddy Stored in GIC Silo and Bag Storage under Humid Konkan Climatic Conditions
|journal=Journal of Agricultural Engineering
|volume=49
|issue=1
|year=2012
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JAE/article/view/21870
}}</ref>
धानाचे घरगुती उपयोगासाठी रूपांतर करण्याच्या प्रक्रियेत साली काढणे, तांदूळ तयार करणे आणि त्यापासून विविध पदार्थ बनवणे अशा प्रक्रिया येतात. उत्तर कोकणातील पाडळ प्रक्रिया उद्योगांवरील अभ्यासातून धान प्रक्रियेमधून तांदळाबरोबर तांदळाची कोंडा, तूस आणि तुटलेला तांदूळ यांसारखी उपउत्पादनेही मिळतात, असे दिसून येते. या प्रक्रियेमुळे कच्च्या धानाचे खाद्य तांदळात रूपांतर होते आणि त्याला अतिरिक्त मूल्य प्राप्त होते.<ref name="ChakranarayanToraneBachhaoNikam2024">{{cite journal
|last=Chakranarayan
|first=Ankita
|author2=Torane, Sanjaykumar
|author3=Bachhao, Kiran
|author4=Nikam, Yogesh
|title=Economic Analysis of Value Addition in Paddy Processing in North Konkan Region of Maharashtra, India
|journal=Acta Scientific Agriculture
|volume=8
|issue=10
|year=2024
|pages=11–16
|url=https://actascientific.com/ASAG/ASAG-08-1411.php
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीनंतरची प्रक्रिया ही **धान स्वच्छ करणे → उन्हात वाळवणे → सुरक्षित साठवण → आवश्यकतेनुसार धानाची प्रक्रिया करून तांदूळ तयार करणे** या क्रमाने पुढे जाते. पारंपरिक घरगुती साठवण पद्धतींमध्ये स्थानिक साधनसामग्रीचा वापर होत असला, तरी कोकणातील दमट हवामानामुळे धानाची योग्य वाळवण, आर्द्रता नियंत्रण आणि कीडप्रतिबंधक साठवण या बाबींना विशेष महत्त्व आहे.
== कोकणातील पाऊस, जमीन आणि कापणीची वेळ ==
कोकणातील भातशेतीवर पर्जन्यमानाचा मोठा प्रभाव असतो. हा प्रदेश उष्ण व दमट हवामानाचा असून येथे वार्षिक पर्जन्यमान साधारण २०० ते ३५० सेंमीपर्यंत आढळते. पर्जन्याचे प्रमाण, त्याचे ऋतुनिहाय वितरण आणि जमिनीची पाणीधारण क्षमता यांचा विचार करून कोकणातील पिकांची रचना निश्चित होते. त्यामुळे भातपिकाच्या वाढीपासून पक्वतेपर्यंतच्या कालावधीवरही पावसाचा प्रभाव पडतो.<ref name="BiswasPhadtare1995"/>
कोकणातील भातशेतीच्या जमिनींचे स्वरूपही कापणीच्या वेळेवर अप्रत्यक्ष परिणाम करते. प्रदेशातील जमिनींच्या पाणीधारण क्षमतेनुसार आणि पर्जन्याच्या उपलब्धतेनुसार भातासाठी योग्य पीकपद्धती बदलते. काही भागांत पावसाचे पाणी जमिनीत साठून राहिल्यामुळे पिकाच्या वाढीच्या उत्तरार्धात बाहेरील पावसाची आवश्यकता तुलनेने कमी होऊ शकते. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील भातपिकाच्या अभ्यासात वाढीच्या वेगवेगळ्या अवस्थांमध्ये पावसाचा परिणाम वेगवेगळा असल्याचे आढळले आहे.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
भातपिकाच्या सुरुवातीच्या वाढीच्या अवस्थेत पुरेसा पाऊस आवश्यक असतो. रत्नागिरी आणि ठाणे जिल्ह्यांतील १९५१ ते १९८७ या कालावधीच्या अभ्यासात भाताच्या वाढीतील विविध अवस्थांमध्ये पर्जन्यमानाचा उत्पादनाशी संबंध असल्याचे आढळले. विशेषतः फुटवे येण्याच्या अवस्थेत पावसाचे महत्त्व दिसून आले, तर पुढील काही अवस्थांमध्ये जमिनीत साठलेली आर्द्रता पिकासाठी उपयुक्त ठरू शकते.<ref name="ChowdhuryDas1993"/>
कापणीच्या काळात मात्र पावसाचे स्वरूप वेगळ्या प्रकारे महत्त्वाचे ठरते. पीक पक्व झाल्यानंतरही पाऊस सुरू राहिल्यास शेतातील जमीन ओलसर राहते आणि कापणी, कापलेले पीक शेताबाहेर आणणे, मळणी व धान वाळवणे या कामांमध्ये अडथळे निर्माण होऊ शकतात. कोकणातील भातकापणीवरील अभ्यासात मजुरांची कमतरता आणि कापणीच्या कामातील विलंब ही समस्या नोंदविण्यात आली असून वेळेत कापणी न झाल्यास कापणीनंतरच्या कामांवरही त्याचा परिणाम होतो.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील पावसाचा कालावधी आणि त्यातील बदल यांमुळे कापणीसाठी उपलब्ध कोरड्या हवामानाच्या कालखंडाला विशेष महत्त्व प्राप्त होते. कोकण प्रदेशातील बारा ठिकाणांच्या पर्जन्यविषयक अभ्यासात वार्षिक आणि हंगामी पर्जन्यमान तसेच पावसाळी दिवसांच्या प्रवृत्तींमध्ये स्थानानुसार फरक आढळला आहे. त्यामुळे कोकणातील सर्व जिल्ह्यांसाठी कापणीची एकच निश्चित वेळ ठरविण्याऐवजी स्थानिक पर्जन्यस्थिती आणि पिकाची पक्वता यांचा एकत्रित विचार करणे आवश्यक ठरते.<ref name="Kadam2019">{{cite journal
|last=Kadam
|first=U. S.
|author2=Jedhe, S. H.
|author3=Mane, M. S.
|author4=Mahale, D. M.
|author5=Nandgude, S. B.
|title=Spatio-temporal Trends of Rainfall and Rainy Days in Konkan Region of Maharashtra
|journal=Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research
|volume=37
|issue=1
|year=2019
|pages=25–36
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/article/view/92410
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीची वेळ ही केवळ पिकाच्या पक्वतेवर अवलंबून नसून **पावसाचे आगमन व माघार, जमिनीतील ओलावा, स्थानिक जमीनप्रकार आणि कापणीच्या वेळी उपलब्ध होणारा कोरडा कालावधी** या घटकांच्या परस्परसंबंधातून ठरते. म्हणूनच पक्व भाताची कापणी योग्य हवामानाच्या कालखंडात लवकर पूर्ण करणे कोकणातील भातशेतीसाठी महत्त्वाचे ठरते.
== कोकणातील भातकापणीचे यांत्रिकीकरण ==
कोकणातील भातशेतीमध्ये कापणी आणि कापणीनंतरची कामे पारंपरिकरीत्या मोठ्या प्रमाणावर मानवी श्रमांवर अवलंबून होती. मजुरांची कमतरता, वाढता मजुरीखर्च आणि पक्व झालेल्या पिकाची वेळेत कापणी करण्याची आवश्यकता यामुळे भातकापणीच्या यांत्रिकीकरणाची गरज निर्माण झाली. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासात कापणी व मळणीच्या यांत्रिकीकरणाचा आर्थिक व्यवहार्यतेच्या दृष्टीने अभ्यास करण्यात आला आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भातकापणीसाठी स्वयंप्रचालित रीपर, रीपर-बाइंडर आणि कापणीसाठी सुधारित हातसाधने यांसारख्या पर्यायांचा अभ्यास झाला आहे. कापणीनंतरच्या प्रक्रियांसाठी पेडलवर चालणारे थ्रेशर, वायर-लूप प्रकारचे थ्रेशर, उलट्या साखळी-पट्टीवर आधारित थ्रेशर, अक्षीय प्रवाहाचे थ्रेशर तसेच हातचलित व शक्तिचलित विन्नोअर यांचा वापर विचारात घेण्यात आला आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भौगोलिक आणि आर्थिक परिस्थिती लक्षात घेऊन यंत्रांची निवड करणे महत्त्वाचे ठरते. लहान व तुकड्यात विभागलेली शेतजमीन आणि अनेक शेतकऱ्यांकडे असलेले अल्प क्षेत्र यामुळे मोठ्या यंत्रांची वैयक्तिक मालकी आर्थिकदृष्ट्या व्यवहार्य ठरत नाही. कोकणातील अभ्यासात सुमारे ०.२ हेक्टर क्षेत्र धारण करणाऱ्या बहुसंख्य शेतकऱ्यांना कापणी, मळणी आणि पाखडणीची यंत्रे स्वतः खरेदी करणे त्यांच्या आर्थिक परिस्थितीमुळे शक्य नसल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
या परिस्थितीत रीपर आणि रीपर-बाइंडर यांसारखी यंत्रे कोकणातील लहान व मध्यम शेतांसाठी तुलनेने उपयुक्त पर्याय ठरू शकतात. अभ्यासानुसार रीपर, रीपर-बाइंडर, शक्तिचलित थ्रेशर आणि विन्नोअर यांच्या विविध संयोगांमध्ये कोकणाच्या परिस्थितीत यांत्रिकीकरणाची क्षमता आढळून आली आहे. यंत्रांची कार्यक्षमता आणि प्रति हेक्टर बदलता खर्च हे त्यांच्या आर्थिक व्यवहार्यतेवर परिणाम करणारे महत्त्वाचे घटक आहेत.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील भातकापणीच्या यांत्रिकीकरणात केवळ यंत्रांची उपलब्धता नव्हे, तर ती शेतकऱ्यांना परवडणाऱ्या पद्धतीने उपलब्ध करून देणे महत्त्वाचे आहे. त्यामुळे कस्टम हायरिंग सेवा आणि कृषी अवजारे बँक यांसारख्या सामायिक यंत्रवापराच्या पद्धतींचा विस्तार करण्याची शिफारस करण्यात आली आहे. अशा पद्धतींमुळे अल्पभूधारक शेतकऱ्यांना यंत्रे स्वतः खरेदी न करता आवश्यकतेनुसार त्यांचा वापर करता येतो.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील शेतकऱ्यांच्या शारीरिक श्रमभाराचाही यांत्रिकीकरणाच्या संशोधनात विचार करण्यात आला आहे. ICARच्या वार्षिक अहवालानुसार कोकणातील पुरुष कामगारांच्या शारीरिक मापदंडांचा विचार करून गवत कापणी यंत्रासोबत वापरता येणारे पॅडी हार्वेस्टर विकसित करण्यात आले. सुधारित यंत्रामुळे विद्यमान यंत्राच्या तुलनेत चालकावरील शारीरिक कामाचा भार कमी झाल्याचे परीक्षणात आढळले.<ref name="ICARAnnualReport2023">{{cite report
|author=Indian Council of Agricultural Research
|title=ICAR Annual Report 2023–24
|publisher=Indian Council of Agricultural Research
|year=2024
|url=https://icar.gov.in/sites/default/files/2025-04/ICAR%20Annual%20Report%202023-24-english.pdf
}}</ref>
अशा प्रकारे कोकणातील भातकापणीचे यांत्रिकीकरण हे केवळ पारंपरिक विळ्याची जागा यंत्राने घेण्यापुरते मर्यादित नसून **कापणी, बांधणी, मळणी आणि पाखडणी या संपूर्ण प्रक्रियेत श्रम व वेळ कमी करण्याचा प्रयत्न** आहे. मात्र कोकणातील लहान शेतजमिनी आणि शेतकऱ्यांची आर्थिक क्षमता लक्षात घेता मोठ्या यंत्रांच्या वैयक्तिक मालकीपेक्षा कस्टम हायरिंग व सामायिक यंत्रवापराची व्यवस्था अधिक व्यवहार्य ठरू शकते.<ref name="Bhanage2016"/>
== मजूरटंचाई, स्थलांतर आणि बदलती कापणी पद्धत ==
कोकणातील भातशेतीमध्ये कापणीच्या हंगामात उपलब्ध होणारे ग्रामीण मनुष्यबळ हा महत्त्वाचा घटक आहे. पारंपरिक भातकापणी, मळणी आणि पाखडणी या कामांसाठी मोठ्या प्रमाणावर मजुरांची आवश्यकता असल्याने मजूर उपलब्धतेतील घटकांचा थेट परिणाम कापणीच्या वेळेवर आणि उत्पादनखर्चावर होतो. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासात कृषी कामे श्रमप्रधान असून मजुरांची कमतरता निर्माण झाल्यामुळे कापणी व मळणीच्या कामात विलंब होत असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
कोकणातील काही ग्रामीण भागांत कृषी मजुरांचे इतर ठिकाणी रोजगारासाठी स्थलांतर होणे ही मजूर उपलब्धतेवर परिणाम करणारी बाब आहे. कोकणातील पावसावर आधारित भातशेतीवरील एका गावपातळीच्या अभ्यासात बहुतांश प्रतिसादकर्त्यांनी मजुरीचा वाढता खर्च ही अडचण असल्याचे नमूद केले असून, ग्रामीण भागातील अनेक मजूर अधिक उत्पन्नाच्या शोधात इतर ठिकाणी रोजगारासाठी स्थलांतरित होत असल्याचे नोंदविण्यात आले आहे.<ref name="TribalRiceConstraints2019">{{cite journal
|title=Constraints Faced By The Tribal Farmers In Rainfed Rice Production In Konkan Region-A Village Level Study
|journal=International Journal of Current Microbiology and Applied Sciences
|year=2019
|url=https://www.researchgate.net/publication/331587276_Constraints_Faced_By_The_Tribal_Farmers_In_Rainfed_Rice_Production_In_Konkan_Region-A_Village_Level_Study
}}</ref>
मजूरटंचाई आणि वाढता मजुरीखर्च यामुळे भातकापणीची पारंपरिक श्रमाधारित पद्धत आर्थिकदृष्ट्या अधिक खर्चिक होत गेली. कोकणातील तुकड्यात विभागलेली आणि लहान शेतजमीन लक्षात घेता मोठ्या यंत्रांचा वापर सर्वत्र शक्य नसला तरी स्वयंप्रचालित रीपर, रीपर-बाइंडर आणि मळणी यंत्रे यांसारख्या साधनांचा वापर वाढविण्याचे प्रयत्न झाले आहेत.<ref name="Shahare2012">{{cite journal
|last=Shahare
|first=P. U.
|title=Agricultural Mechanization in Konkan Region of Maharashtra
|journal=Agricultural Engineering Today
|volume=36
|issue=2
|year=2012
|pages=6–9
|url=https://indianjournals.com/article/aet-36-2-002
}}</ref>
यांत्रिकीकरणामुळे कापणीसाठी आवश्यक मानवी श्रम कमी करण्याबरोबरच कमी कालावधीत कापणी पूर्ण करण्याची शक्यता वाढते. कोकणातील भातउत्पादनावरील अलीकडील अभ्यासात पालघर आणि ठाणे जिल्ह्यांतील काही शेतकऱ्यांनी यांत्रिक कापणी यंत्रे व मळणी यंत्रे स्वीकारल्यामुळे श्रमावरील अवलंबित्व कमी झाल्याचे नमूद केले आहे.<ref name="Shelake2025">{{cite journal
|last=Shelake
|first=S. M.
|author2=Kshirsagar, P. J.
|author3=Torane, S. R.
|author4=Waravadekar, S. C.
|author5=More, V. G.
|title=Economic analysis for profitable paddy production in Konkan region
|journal=International Journal of Agriculture Extension and Social Development
|volume=8
|issue=10
|year=2025
|url=https://www.extensionjournal.com/archives/2025.v8.i10.I.2591
}}</ref>
मात्र कोकणातील लहान भूधारणा आणि यंत्रांच्या तुलनेने जास्त किंमतीमुळे प्रत्येक शेतकऱ्याला कापणीची यंत्रे स्वतःच्या मालकीची ठेवणे व्यवहार्य ठरत नाही. त्यामुळे कस्टम हायरिंग सेवा आणि कृषी अवजारे बँक यांसारख्या सामायिक यंत्रवापराच्या पद्धतींना महत्त्व प्राप्त झाले आहे. कोकणातील यांत्रिकीकरणाच्या अभ्यासात अशा सेवांचा विस्तार केल्यास अल्पभूधारक शेतकऱ्यांनाही यांत्रिकीकरणाचा लाभ मिळू शकतो, असे सुचविण्यात आले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
अशा प्रकारे मजूरटंचाई, ग्रामीण मनुष्यबळाचे स्थलांतर आणि वाढता मजुरीखर्च या घटकांमुळे कोकणातील भातकापणीची पारंपरिक श्रमव्यवस्था बदलत आहे. विळ्याने हाताने कापणी करण्याच्या पद्धतीबरोबरच रीपर, रीपर-बाइंडर आणि मळणी यंत्रांचा वापर वाढत असून, सामायिक यंत्रसेवा ही लहान शेतकऱ्यांसाठी महत्त्वाची पर्यायी व्यवस्था ठरत आहे.<ref name="Shahare2012"/>
== रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, रायगड, ठाणे-पालघरमधील प्रादेशिक वैशिष्ट्ये ==
कोकणातील भातशेतीची भौगोलिक व कृषी परिस्थिती जिल्ह्यानुसार काही प्रमाणात बदलते. डॉ. बाळासाहेब सावंत कोकण कृषी विद्यापीठाच्या वर्गीकरणानुसार रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग हे दक्षिण कोकण क्षेत्रात, तर रायगड, पालघर आणि ठाणे हे उत्तर कोकण क्षेत्रात येतात. या प्रदेशात किनारी, पठारी आणि डोंगराळ अशा भौगोलिक पट्ट्यांनुसार शेतीचे स्वरूप बदलते. दक्षिण कोकणात लालसर-जांभ्या प्रकारच्या आम्लधर्मी जमिनींचे प्राबल्य आहे, तर उत्तर कोकणातील काही भागांत बेसॉल्टजन्य तपकिरी ते काळ्या जमिनी आढळतात; डोंगरउतारांवर उथळ व वालुकामय तर खोऱ्यांमध्ये चिकणमातीप्रधान जमिनी आढळतात.<ref name="DBSKKVKonkanRice">{{cite web
|title=RICE PRODUCTION IN KONKAN
|publisher=Dr. Balasaheb Sawant Konkan Krishi Vidyapeeth
|url=https://archive.dbskkv.org/collection/420/document/2304
}}</ref>
रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्ग या दक्षिण कोकणातील जिल्ह्यांमध्ये मोठ्या प्रमाणावर पावसावर आधारित भातशेती आढळते. डोंगरउतार, खोरी आणि किनारी भाग यांनुसार शेतजमिनींचे स्वरूप बदलत असल्यामुळे भात लागवडीच्या पद्धतीतही स्थानिक फरक दिसतात. सिंधुदुर्ग जिल्ह्याची भात उत्पादकता कोकण विभागातील इतर जिल्ह्यांच्या तुलनेत अधिक असल्याची नोंद कोकणातील भात उत्पादनाच्या उपलब्ध आकडेवारीत करण्यात आली आहे.<ref name="DBSKKVKonkanRice"/>
रायगड जिल्हा भाताच्या क्षेत्रफळाच्या दृष्टीने कोकणातील महत्त्वाचा जिल्हा आहे. उपलब्ध जिल्हानिहाय आकडेवारीनुसार रायगडमध्ये भाताखालील क्षेत्र सुमारे १.२५ लाख हेक्टर आणि भात उत्पादन सुमारे ३.५१ लाख टन नोंदविण्यात आले होते. त्यामुळे कोकणातील एकूण भात उत्पादनात रायगडचा महत्त्वाचा वाटा आहे.<ref name="DBSKKVKonkanRice"/>
ठाणे आणि पालघर हे उत्तर कोकणातील जिल्हे असून येथे भातशेतीबरोबर आदिवासी व ग्रामीण भागातील पारंपरिक कृषीपद्धतींचेही महत्त्व आहे. पालघर जिल्ह्यातील वाडा आणि पालघर तालुक्यांतील भात उत्पादक गावांवर केलेल्या अभ्यासात भात हे प्रमुख खरीप पीक असल्याचे आणि शेतकरी शिफारस केलेल्या भात उत्पादन तंत्रज्ञानाचा अवलंब करीत असल्याचे आढळते.<ref name="KarangamiDhengeChavanAnarase2020">{{cite journal
|last=Karangami
|first=R. S.
|author2=Dhenge, S. A.
|author3=Chavan, P. M.
|author4=Anarase, M. S.
|title=Association of Profile Characteristics of Rice Growers and Adoption of Recommended Package of Practices
|journal=Indian Journal of Extension Education
|year=2020
|url=https://epubs.icar.org.in/index.php/IJEE/article/view/109198
}}</ref>
उपलब्ध जिल्हानिहाय आकडेवारीत ठाणे जिल्ह्याचे भाताखालील क्षेत्र, उत्पादन आणि उत्पादकता कोकणातील इतर प्रमुख भात उत्पादक जिल्ह्यांच्या तुलनेत कमी असल्याचे नमूद करण्यात आले आहे. त्याच वेळी उत्तर कोकणातील भातशेतीवर लहान भूधारणा, स्थानिक भौगोलिक परिस्थिती आणि उपलब्ध कृषी मनुष्यबळ यांचा प्रभाव पडतो.<ref name="DBSKKVKonkanRice"/>
भातकापणीच्या दृष्टीने या प्रादेशिक फरकांना विशेष महत्त्व आहे. रायगड, रत्नागिरी आणि सिंधुदुर्गमध्ये मोठ्या प्रमाणातील भातक्षेत्रामुळे कापणीच्या काळात मोठ्या प्रमाणावर मनुष्यबळ आणि यंत्रसेवेची आवश्यकता निर्माण होते. उत्तर कोकणातील ठाणे व पालघरमध्ये लहान शेतजमिनी, ग्रामीण व आदिवासी भाग आणि बदलती कृषी श्रमव्यवस्था यांमुळे कापणीच्या पद्धतीत स्थानिक परिस्थितीनुसार बदल होत आहेत. त्यामुळे संपूर्ण कोकणासाठी भातकापणीची एकच पद्धत किंवा एकच कालमर्यादा लागू होत नाही; जिल्ह्याची भौगोलिक रचना, जमीन, पर्जन्यस्थिती, पीकवाण आणि शेताचा आकार यांनुसार कापणीचे स्वरूप बदलते.
अशा प्रकारे **रत्नागिरी-सिंधुदुर्गचा दक्षिण कोकण, रायगडचा मोठा भातक्षेत्र असलेला मध्य-उत्तर भाग आणि ठाणे-पालघरचा उत्तर कोकण** यांमध्ये भातशेतीच्या क्षेत्रफळ, उत्पादकता, जमीनप्रकार आणि कृषी-सामाजिक परिस्थितीत फरक आढळतो. हे प्रादेशिक वैविध्य भातकापणीच्या वेळा, श्रमाची गरज आणि यांत्रिकीकरणाच्या स्वीकारावरही परिणाम करणारे महत्त्वाचे घटक आहेत.
== भातकापणी आणि कोकणातील ग्रामीण जीवन व लोकसंस्कृती ==
कोकणातील भातकापणी ही केवळ कृषी उत्पादनाची प्रक्रिया नसून ग्रामीण जीवनातील सामाजिक आणि सांस्कृतिक व्यवहारांशीही संबंधित राहिली आहे. भाताचे पीक हे पावसाळी शेतीच्या वार्षिक चक्राचा महत्त्वाचा भाग असल्यामुळे पेरणीपासून कापणीपर्यंतच्या विविध टप्प्यांशी स्थानिक देवता, शेतजमीन, पाऊस, जनावरे आणि चांगल्या पीकउत्पादनाच्या अपेक्षा जोडलेल्या होत्या. कोकणातील लोकपरंपरांचे संकलन करणाऱ्या *Folk Lore Notes, Vol. II—Konkan* या ग्रंथात पेरणी आणि कापणीच्या काळाशी संबंधित विविध कृषीविधींची नोंद आढळते.<ref name="JacksonEnthoven1915">{{cite book
|last=Jackson
|first=A. M. T.
|author2=Enthoven, R. E.
|title=Folk Lore Notes, Vol. II—Konkan
|publisher=British India Press
|year=1915
|url=https://books.google.com/books/about/Folk_Lore_Notes.html?id=a4XlAAAAMAAJ
}}</ref>
कापणीच्या वेळी शेतात नवीन धान्याच्या राशीची पूजा करण्याची प्रथा कोकणातील अनेक भागांत नोंदविण्यात आली आहे. तसेच काही ठिकाणी शेतातील पहिल्या कापणीच्या दिवशी शिजवलेले अन्न तयार करून ते देवतेला नैवेद्य म्हणून अर्पण केले जात असे. या प्रथांमधून नवीन पीक हे केवळ आर्थिक उत्पादन नसून धार्मिक कृतज्ञता आणि सामुदायिक जीवनाचा भाग मानले जात असल्याचे दिसून येते.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
रत्नागिरी जिल्ह्यातील फोंडा येथे कापणीच्या वेळी शेताच्या कोपऱ्यात भात आणि दह्यापासून तयार केलेले 'शिवार' ठेवण्याची प्रथा नोंदविण्यात आली आहे. या विधीला 'चोरावा' असेही संबोधले जात असल्याचे त्या ऐतिहासिक नोंदीत नमूद आहे. अशा प्रथा शेत, पीक आणि स्थानिक धार्मिक विश्वास यांच्यातील संबंध दर्शवतात.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
कोकणातील काही भागांत कापणीच्या वेळी शेताच्या रक्षणाशी संबंधित स्थानिक देवतांना नारळ, कोंबड्या किंवा शेळ्या अर्पण करण्याच्या प्रथा नोंदविण्यात आल्या आहेत. रत्नागिरी जिल्ह्यातील काही गावांमध्ये तसेच मालवण परिसरात पेरणी आणि कापणीच्या काळात शेतरक्षक देवतांना अर्पणे केली जात असल्याचे ऐतिहासिक लोकसाहित्याच्या नोंदीत नमूद आहे. या प्रथा त्या काळातील ग्रामीण समाजाच्या कृषीविश्वासांचे दस्तऐवजीकरण करतात.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
कोलाबा जिल्ह्यातील दासगावच्या संदर्भात कापणीच्या वेळी शेतात नारळ ठेवून पहिल्या कापलेल्या भाऱ्याने त्याला काही वेळा झोडपण्याची प्रथा नोंदविण्यात आली आहे; त्यानंतर नियमित मळणी सुरू केली जात असे. अशा विधींमधून पहिल्या कापणीच्या उत्पादनाला प्रतीकात्मक महत्त्व दिले जात असल्याचे दिसते.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
या कृषीपरंपरांमुळे भातकापणीचा काळ हा ग्रामीण समाजाच्या सामूहिक जीवनाशी जोडलेला असे. शेतातील कामे, स्थानिक देवतांची पूजा, नवीन धान्याशी संबंधित विधी आणि कुटुंब व गावसमूहातील सहभाग यांमधून कृषी उत्पादन आणि लोकसंस्कृती यांचे परस्परसंबंध दिसून येतात. मात्र उपलब्ध लोकसाहित्यविषयक नोंदी मुख्यतः विसाव्या शतकाच्या प्रारंभीच्या काळातील असल्यामुळे त्यातील प्रत्येक प्रथा आजही कोकणातील सर्व भागांत प्रचलित आहे, असा निष्कर्ष काढता येत नाही.<ref name="JacksonEnthoven1915"/>
भातकापणीशी संबंधित या ऐतिहासिक प्रथा कोकणातील ग्रामीण समाजात भाताला असलेले आर्थिक, सामाजिक आणि सांस्कृतिक महत्त्व स्पष्ट करतात. त्यामुळे भातकापणीचा अभ्यास करताना कापणीची तांत्रिक प्रक्रिया, ग्रामीण श्रमव्यवस्था आणि कापणीनंतरची कामे यांसोबतच त्याभोवती निर्माण झालेल्या लोकपरंपरांचाही विचार करणे आवश्यक ठरते.
== आधुनिक काळातील बदल, आव्हाने आणि भविष्यातील दिशा ==
कोकणातील भातकापणीच्या पद्धतीमध्ये आधुनिक काळात लक्षणीय बदल होत आहेत. पारंपरिक हाताने कापणी आणि श्रमप्रधान मळणीच्या पद्धतींबरोबर रीपर, रीपर-बाइंडर, विविध प्रकारची मळणी यंत्रे आणि पाखडणीची यंत्रे वापरण्याकडे कल वाढला आहे. कोकणातील भातशेतीवरील अभ्यासानुसार मजुरांची कमतरता आणि वाढता मजुरीखर्च यामुळे वेळेत कापणी व मळणी करणे कठीण होत असून, यांत्रिकीकरण हा त्यावरील महत्त्वाचा पर्याय ठरतो.<ref name="Bhanage2016"/>
आधुनिक तंत्रज्ञानाचा स्वीकार मात्र संपूर्ण कोकणात एकसमान झालेला नाही. लहान आणि तुकड्यात विभागलेल्या शेतजमिनी, चिखलयुक्त किंवा पाणथळ क्षेत्र, उताराची जमीन, यंत्रांची किंमत आणि त्यासाठी आवश्यक कुशल चालक यांसारख्या मर्यादा यांत्रिकीकरणाच्या प्रसारावर परिणाम करतात. कोकणातील बहुतांश अल्पभूधारक शेतकऱ्यांना कापणी, मळणी आणि पाखडणीची यंत्रे स्वतःच्या मालकीची ठेवणे आर्थिकदृष्ट्या कठीण असल्याचे अभ्यासातून दिसून आले आहे.<ref name="Bhanage2016"/>
अलीकडील अभ्यासांमध्ये कोकणातील जिल्ह्यांनुसार आधुनिक तंत्रज्ञान स्वीकारण्यात फरक दिसून येतो. पालघर आणि ठाणे जिल्ह्यांतील काही भात उत्पादकांनी यंत्राद्वारे रोपलागवड, हार्वेस्टर आणि थ्रेशर यांचा वापर केला आहे, तर रत्नागिरीतील काही शेतकरी अद्याप अधिक श्रमप्रधान पारंपरिक पद्धतींवर अवलंबून आहेत. सिंधुदुर्गमध्ये भाताच्या पुढील प्रक्रियेत दळण, उकडणे आणि पोहेनिर्मिती यांसारख्या मूल्यवर्धित पद्धतींचा वापर आढळतो.<ref name="Shelake2025"/>
भातकापणीसमोरील आणखी एक महत्त्वाचे आव्हान म्हणजे हवामानातील अनिश्चितता. कोकणातील भातशेती मोठ्या प्रमाणावर मोसमी पावसावर अवलंबून असल्यामुळे पावसाचा कालावधी, तीव्रता आणि कापणीच्या काळातील ओलावा यांचा कापणीच्या नियोजनावर परिणाम होतो. पक्व झालेल्या पिकाची कापणी वेळेत न झाल्यास पिकाचे नुकसान होण्याची शक्यता वाढते. त्यामुळे हवामानविषयक माहिती, पीकपक्वतेचे अचूक निरीक्षण आणि उपलब्ध यंत्रसामग्रीचे वेळेवर नियोजन यांना भविष्यात अधिक महत्त्व प्राप्त होईल.
यांत्रिकीकरणाचा लाभ लहान शेतकऱ्यांपर्यंत पोहोचविण्यासाठी कस्टम हायरिंग सेवा आणि कृषी अवजारे बँका महत्त्वाच्या ठरू शकतात. कोकणातील यांत्रिकीकरणाच्या अभ्यासाने अशा सेवांचा मोठ्या प्रमाणावर विस्तार करण्याची गरज व्यक्त केली आहे. यामुळे शेतकऱ्यांना महागडी यंत्रे स्वतः खरेदी न करता आवश्यक त्या काळात कापणी व मळणीची यंत्रसेवा घेता येऊ शकते.<ref name="Bhanage2016"/>
भविष्यातील दिशेच्या दृष्टीने केवळ कापणीचे यांत्रिकीकरण पुरेसे ठरणार नाही. कापणीपासून मळणी, वाळवण, साठवण, दळण आणि मूल्यवर्धनापर्यंत संपूर्ण साखळी अधिक कार्यक्षम करण्याची गरज आहे. २०२५ मधील कोकणावरील अभ्यासात यांत्रिकीकरण आणि भातप्रक्रियेमुळे मजुरीवरील अवलंबित्व कमी होऊन उत्पादनक्षमता, खर्च आणि बाजारमूल्याच्या दृष्टीने सुधारणा होऊ शकते, असे आढळले आहे.<ref name="Shelake2025"/>
कोकणासाठी भविष्यातील भातकापणीची यंत्रे विकसित करताना या प्रदेशाच्या विशिष्ट परिस्थितीचा विचार करणे आवश्यक आहे. लहान शेतजमीन, पाणथळ क्षेत्र, उतार, अरुंद बांध आणि उच्च पर्जन्यमान यांना अनुरूप हलकी, कमी खर्चाची आणि सहज वाहतूक करता येणारी यंत्रे अधिक उपयुक्त ठरू शकतात. त्याचबरोबर स्थानिक पातळीवर यंत्रचालकांचे प्रशिक्षण, दुरुस्ती व देखभाल सुविधा आणि कस्टम हायरिंगची उपलब्धता वाढविणे आवश्यक आहे.
अशा प्रकारे आधुनिक काळातील कोकणातील भातकापणी ही **पारंपरिक श्रमाधारित पद्धतीपासून योग्य ठिकाणी यांत्रिकीकरण, सामायिक यंत्रसेवा आणि मूल्यवर्धित प्रक्रियांकडे होणाऱ्या संक्रमणाच्या** टप्प्यात आहे. भविष्यातील दिशा ही केवळ अधिक यंत्रे उपलब्ध करून देण्याची नसून, कोकणातील लहान शेतकऱ्यांच्या आर्थिक क्षमतेला, स्थानिक भौगोलिक परिस्थितीला, हवामानाच्या अनिश्चिततेला आणि भाताच्या संपूर्ण मूल्यसाखळीला अनुरूप अशी शाश्वत व परवडणारी व्यवस्था निर्माण करण्याची आहे.
== चित्रदालन ==
<gallery mode="packed" heights="180">
File:Rice Plantation.jpg|रत्नागिरी जिल्ह्यातील भातशेती
File:Paddy field in Maharashtra .jpg|कोकण रेल्वेमार्गावरील महाराष्ट्रातील भातशेती
File:Paddy field in Maharashtra 8.jpg|कोकण रेल्वेमार्गावरील भातशेती
File:Paddy field in Maharashtra 11.jpg|कोकण रेल्वेमार्गावरील भातशेती
File:Konkan - Songiri Village - Ratnagiri District - Part 1 20151218 (23369027944).jpg|रत्नागिरी जिल्ह्यातील सोनगिरी गाव परिसरातील भातशेती
File:Konkan - Songiri Village - Ratnagiri District - Part 1 20151218 (23889128342).jpg|रत्नागिरी जिल्ह्यातील सोनगिरी गाव परिसरातील भातशेती
File:Rice Fields near Satarda in Sindhudurg District - panoramio.jpg|सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातील सातर्डा परिसरातील भातशेती
File:Nerur - panoramio.jpg|सिंधुदुर्ग जिल्ह्यातील नेरूर परिसरातील भातशेती
File:Abandoned paddy field on Low-elevation Lateritic Plateau IMG 20220817 115924 06.jpg|रत्नागिरी जिल्ह्यातील जांभ्या पठारावरील भातशेती
File:Crop Harvesting Machine 2.JPG|भातपिकाच्या कापणीतील यांत्रिकीकरण
File:Rice Harvesting.jpg|विळ्याने भाताची कापणी
File:Rice threshering.jpg|भाताची मळणी
</gallery>
== हेही पहा ==
* [[कोकण]]
* [[भात]]
== बाह्य दुवे ==
* [https://epubs.icar.org.in/index.php/JISCAR/ Journal of the Indian Society of Coastal Agricultural Research — ICAR]
* [https://www.dbskkv.org/ डॉ. बाळासाहेब सावंत कोकण कृषी विद्यापीठ]
{{कोकण लोकजीवन}}
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:कोकण]]
[[वर्ग:महाराष्ट्र]]
[[वर्ग:शेती]]
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पर्पल मार्टिन
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नरेश सावे
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नवीन पान: {{जीवचौकट | नाव =पर्पल मार्टिन | स्थिती = | trend = | स्थिती_प्रणाली = | स्थिती_संदर्भ = | चित्र = | चित्र_रुंदी = | regnum = [[प्राणी]] | वंश = | जात = [[पक्षी]] | वर्ग = | कुळ =Progne subis | उपकुळ = | जातकुळी = | जीव = | बायनॉमि...
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{{जीवचौकट
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| आढळप्रदेश_नकाशा_title=
| बायनॉमियल2 =
| बायनॉमियल_अधिकारी =
}}
'''पर्पल मार्टिन''' हा अमेरिकेतील दक्षिण डाकोटा या राज्यात आढळणारा पक्षी आहे. हा पक्षी [[भिंगरी पक्षी आणि राजापक्षी|स्वॅलोज आणि किंगबर्ड्स]] या वर्गात मोडतो.
==वर्णन==
हा पक्षी सर्वात मोठा [[भिंगरी |स्वॅलोज]] पक्षी आहे.या पक्ष्याचा रंग एकसंध गडद निळा किंवा काळा असतो.
==आढळस्थान==
हा अमेरिकेतील दक्षिण डाकोटा राज्यात आढळतो.उन्हाळ्यानंतर तो स्थलांतर करतो.
==आवाज==
या पक्ष्याचा आवाज संगीतमय चिवचिव आणि खरखरीत किरकिर असा असतो.
==खाद्य==
हा पक्षी उडणारे कीटक खातो.
==घरटे==
हा पक्षी आपले घरटे शक्यतो पाण्याजवळ मानवी वस्तीच्या शेजारी उघड्या भागात बांधतो. शेकडो जोडीच्या समुहात हे पक्षी आपली घरटी बांधतात. हे पक्षी माणसांनी बनविलेल्या घरट्यात राहतात. या पक्ष्यांना नैसर्गिक झाडांच्या ढोलीपेक्षा कृत्रिम घरटी आवडतात.
==वैशिष्ट्य==
हे पक्षी आपले खाद्य कीटक उडत उडत खातातच आणि पाणीसुध्दा सरोवराच्या किंवा डबक्याच्या पाण्याच्या पृष्ठभागाला समांतर उडत उडत पितात.
<ref>Backyard Birds of South Dakota - South Dakota, Wildlife Division, Department of Game, Fish and Parks.Authors: Eileen Dowd Stukel,Silka L.F.Kempema,Chad Tussing.2009 edition</ref>
[[वर्ग:पक्षी]]
[[वर्ग:विदेशी पक्षी]]
[[वर्ग:दक्षिण डाकोटा अमेरिका पक्षी]]
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KiranBOT II
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शुद्धलेखन ([[सदस्य:KiranBOT II/typos#गट १|अधिक माहिती]])
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{{जीवचौकट
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| बायनॉमियल2 =
| बायनॉमियल_अधिकारी =
}}
'''पर्पल मार्टिन''' हा अमेरिकेतील दक्षिण डाकोटा या राज्यात आढळणारा पक्षी आहे. हा पक्षी [[भिंगरी पक्षी आणि राजापक्षी|स्वॅलोज आणि किंगबर्ड्स]] या वर्गात मोडतो.
==वर्णन==
हा पक्षी सर्वात मोठा [[भिंगरी |स्वॅलोज]] पक्षी आहे.या पक्ष्याचा रंग एकसंध गडद निळा किंवा काळा असतो.
==आढळस्थान==
हा अमेरिकेतील दक्षिण डाकोटा राज्यात आढळतो.उन्हाळ्यानंतर तो स्थलांतर करतो.
==आवाज==
या पक्ष्याचा आवाज संगीतमय चिवचिव आणि खरखरीत किरकिर असा असतो.
==खाद्य==
हा पक्षी उडणारे कीटक खातो.
==घरटे==
हा पक्षी आपले घरटे शक्यतो पाण्याजवळ मानवी वस्तीच्या शेजारी उघड्या भागात बांधतो. शेकडो जोडीच्या समुहात हे पक्षी आपली घरटी बांधतात. हे पक्षी माणसांनी बनविलेल्या घरट्यात राहतात. या पक्ष्यांना नैसर्गिक झाडांच्या ढोलीपेक्षा कृत्रिम घरटी आवडतात.
==वैशिष्ट्य==
हे पक्षी आपले खाद्य कीटक उडत उडत खातातच आणि पाणीसुद्धा सरोवराच्या किंवा डबक्याच्या पाण्याच्या पृष्ठभागाला समांतर उडत उडत पितात.
<ref>Backyard Birds of South Dakota - South Dakota, Wildlife Division, Department of Game, Fish and Parks.Authors: Eileen Dowd Stukel,Silka L.F.Kempema,Chad Tussing.2009 edition</ref>
[[वर्ग:पक्षी]]
[[वर्ग:विदेशी पक्षी]]
[[वर्ग:दक्षिण डाकोटा अमेरिका पक्षी]]
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ईस्टर्न किंगबर्ड
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नरेश सावे
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नवीन पान: {{जीवचौकट | नाव = ईस्टर्न किंगबर्ड |पौर्वात्य राजापक्षी | स्थिती = | trend = | स्थिती_प्रणाली = | स्थिती_संदर्भ = | चित्र = | चित्र_रुंदी = | regnum = [[प्राणी]] | वंश = | जात = [[पक्षी]] | वर्ग = | कुळ =Tyrannus tyrannus | उपकु...
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{{जीवचौकट
| नाव = ईस्टर्न किंगबर्ड |पौर्वात्य राजापक्षी
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}}
'''ईस्टर्न किंगबर्ड''' किंवा पौर्वात्य राजापक्षी हा अमेरिकेतील दक्षिण डाकोटा या राज्यात आढळणारा पक्षी आहे. हा पक्षी [[भिंगरी पक्षी आणि राजापक्षी|स्वॅलोज आणि किंगबर्ड्स]] या वर्गात मोडतो.
==वर्णन==
ह्या पक्ष्याला उठावदार गडद करड्या रंगाची पंखे असतात.पाठीचा भाग करडा असतो.पोटाचा भाग सफेद असतो.शेपटीच्या टोकाला पांढरा भाग असतो जो उडताना ठळकपणे दिसतो. पाश्चिमात्य राजापक्षी हा या पक्ष्यापेक्षा जास्त करडा आणि हिरवा असतो आणि त्याच्या पोटाचा रंग पिवळा असतो.
==आढळस्थान==
हा अमेरिकेतील दक्षिण डाकोटा राज्यात आढळतो.उन्हाळ्यानंतर तो स्थलांतर करतो.
==आवाज==
हा पक्षी उच्च स्वरातील अडखळता आवाज (टि-ट-ट-टि) आणि त्यानंतर गुणगुणणारा झीर असा आवाज (टि-ट-ट-टि-झीर) काढत गात असतो.
==खाद्य==
हा पक्षी उडणारे कीटक खातो.
==घरटे==
हा पक्षी आपले घरटे विरळ झाडे असलेल्या ठिकाणी उघड्या जागेत वारारोधक पट्ट्यात बांधतो. ह्या पक्ष्याचे घरटे उघड्या वाटीसारखे असते. ते गवत, लहान काट्या, आणि इतर वनस्पतीजन्य पदार्थ वापरून बनवले जाते. ही घरटी समांतर फांद्यावर किंवा कुंपणाच्या खांबावर बांधली जातात.त्यासाठी केस व पिसे असे मऊ पदार्थांचे अस्तर वापरले जाते.
==वैशिष्ट्य==
हे पक्षी आपल्या घरटे असलेल्या भागात अन्य पक्ष्यांना शिरकाव करू देत नाहीत.बहिरी ससाणा किंवा हॉक सारख्या मोठ्या पक्ष्यांनाही ते हाकलतात.
<ref>Backyard Birds of South Dakota - South Dakota, Wildlife Division, Department of Game, Fish and Parks.Authors: Eileen Dowd Stukel,Silka L.F.Kempema,Chad Tussing.2009 edition</ref>
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[[वर्ग:दक्षिण डाकोटा अमेरिका पक्षी]]
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नरेश सावे
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{{जीवचौकट
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}}
'''ईस्टर्न किंगबर्ड''' किंवा पौर्वात्य राजापक्षी हा अमेरिकेतील दक्षिण डाकोटा या राज्यात आढळणारा [[पक्षी]] आहे. हा पक्षी [[भिंगरी पक्षी आणि राजापक्षी|स्वॅलोज आणि किंगबर्ड्स]] या वर्गात मोडतो.
==वर्णन==
ह्या पक्ष्याला उठावदार गडद करड्या रंगाची पंखे असतात.पाठीचा भाग करडा असतो.पोटाचा भाग सफेद असतो.शेपटीच्या टोकाला पांढरा भाग असतो जो उडताना ठळकपणे दिसतो. पाश्चिमात्य राजापक्षी हा या पक्ष्यापेक्षा जास्त करडा आणि हिरवा असतो आणि त्याच्या पोटाचा रंग पिवळा असतो.
==आढळस्थान==
हा अमेरिकेतील दक्षिण डाकोटा राज्यात आढळतो.उन्हाळ्यानंतर तो स्थलांतर करतो.
==आवाज==
हा पक्षी उच्च स्वरातील अडखळता आवाज (टि-ट-ट-टि) आणि त्यानंतर गुणगुणणारा झीर असा आवाज (टि-ट-ट-टि-झीर) काढत गात असतो.
==खाद्य==
हा पक्षी उडणारे कीटक खातो.
==घरटे==
हा पक्षी आपले घरटे विरळ झाडे असलेल्या ठिकाणी उघड्या जागेत वारारोधक पट्ट्यात बांधतो. ह्या पक्ष्याचे घरटे उघड्या वाटीसारखे असते. ते गवत, लहान काट्या, आणि इतर वनस्पतीजन्य पदार्थ वापरून बनवले जाते. ही घरटी समांतर फांद्यावर किंवा कुंपणाच्या खांबावर बांधली जातात.त्यासाठी केस व पिसे असे मऊ पदार्थांचे अस्तर वापरले जाते.
==वैशिष्ट्य==
हे पक्षी आपल्या घरटे असलेल्या भागात अन्य पक्ष्यांना शिरकाव करू देत नाहीत.बहिरी ससाणा किंवा हॉक सारख्या मोठ्या पक्ष्यांनाही ते हाकलतात.
<ref>Backyard Birds of South Dakota - South Dakota, Wildlife Division, Department of Game, Fish and Parks.Authors: Eileen Dowd Stukel,Silka L.F.Kempema,Chad Tussing.2009 edition</ref>
[[वर्ग:पक्षी]]
[[वर्ग:विदेशी पक्षी]]
[[वर्ग:दक्षिण डाकोटा अमेरिका पक्षी]]
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न्यू मेक्सिकोमधील काउंटी
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अभय नातू
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नवीन
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[[चित्र:Map of New Mexico highlighting County.svg|अंगुष्ठ|३००पिक्सेल|न्यू मेक्सिकोमधील काउंटी दर्शवणारा नकाशा]]
[[अमेरिका|अमेरिकेच्या]] [[न्यू मेक्सिको]] राज्यात एकूण ३३ [[काउंटी]] आहेत. ६ जानेवारी १९१२ रोजी न्यू मेक्सिको राज्याची निर्मिती झाली तेव्हा राज्यात २६ मूळ काउंटी अस्तित्वात होत्या.
== काउंटींची यादी ==
{| class="wikitable sortable" style="font-size: 85%; text-align: center;"
|- style="background: #e0e0e0;"
! काउंटी !! काउंटी ठिकाण !! निर्मिती दिनांक/वर्ष !! निर्मिती !! नावाचा उगम !! लोकसंख्या<br />(२०२०) !! क्षेत्रफळ (चौ. किमी)
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[बर्नालियो काउंटी, न्यू मेक्सिको|बर्नालियो]] || [[अल्बुकर्की, न्यू मेक्सिको|अल्बुकर्की]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|८ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[बर्नालियो]] (स्थानिक स्पॅनिश व्यापारी कुटुंब) || ६,७६,४४९ || ३,०२०
|-
| [[कॅट्रन काउंटी, न्यू मेक्सिको|कॅट्रन]] || [[रिझर्व्ह, न्यू मेक्सिको|रिझर्व्ह]] || [[:वर्ग:इ.स. १९२१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९२१]] || सोकोरो काउंटीच्या भागातून || [[थॉमस बी. कैट्रॉन]] (न्यू मेक्सिकोचे सिनेटर) || ३,५७९ || १७,९०१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[चेव्हस काउंटी, न्यू मेक्सिको|चेव्हस]] || [[रोजवेल, न्यू मेक्सिको|रोजवेल]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १८८९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जोस फ्रान्सिस्को चेव्हस]] (सैनिकी अधिकारी आणि राजकारणी) || ६५,१५७ || block_size_placeholder -> १५,७३४
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सिबोला काउंटी, न्यू मेक्सिको|सिबोला]] || [[ग्रँट्स, न्यू मेक्सिको|ग्रँट्स]] || [[:वर्ग:इ.स. १९८१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१९ जून १९८१]] || व्हेलेन्सिया काउंटीच्या विभाजनातून || [[सिबोलाचे सात सुवर्ण शहरे]] या पौराणिक कथेवरून || २७,२१३ || block_size_placeholder -> ११,७६३
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[कोलफॅक्स काउंटी, न्यू मेक्सिको|कोलफॅक्स]] || [[रातों, न्यू मेक्सिको|रातों]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ जानेवारी १८६९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[स्कायलर कोलफॅक्स]] (अमेरिकेचे १७ वे उपराष्ट्राध्यक्ष) || १२,३८७ || ९,७३०
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[करी काउंटी, न्यू मेक्सिको|करी]] || [[क्लोव्हिस, न्यू मेक्सिको|क्लोव्हिस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९०९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जॉर्ज करी (राजकारणी)|जॉर्ज करी]] (न्यू मेक्सिको प्रांताचे गव्हर्नर) || ४८,४३० || block_size_placeholder -> ३,६४६
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[डी बाका काउंटी, न्यू मेक्सिको|डी बाका]] || [[फोर्ट समनर, न्यू मेक्सिको|फोर्ट समनर]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९१७]] || गुआडालुपे आणि चेव्हस काउंटीच्या भागांतून || [[इझेकिएल काबेझा डी बाका]] (न्यू मेक्सिकोचे २ रे गव्हर्नर) || २,२९८ || block_size_placeholder -> ६,०४५
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[दॉन्या आना काउंटी, न्यू मेक्सिको|दॉन्या आना]] || [[लास क्रुसेस, न्यू मेक्सिको|लास क्रुसेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[डोन्या आना रोबलेडो]] (१७ व्या शतकातील स्पॅनिश महिला) || २,१९,५६१ || ९,८०८
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[इडी काउंटी, न्यू मेक्सिको|इडी]] || [[कार्लसबॅड, न्यू मेक्सिको|कार्लसबॅड]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १८८९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[चार्ल्स बी. इडी]] (स्थानिक उद्योजक) || ६२,३१४ || block_size_placeholder -> १०,८३१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ग्रँट काउंटी, न्यू मेक्सिको|ग्रँट]] || [[सिल्व्हर सिटी, न्यू मेक्सिको|सिल्व्हर सिटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६८ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३० जानेवारी १८६८]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[युलिसेस एस. ग्रँट]] (अमेरिकेचे १८ वे राष्ट्राध्यक्ष) || २८,१८५ || block_size_placeholder -> १०,२७७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ग्वादालुपे काउंटी, न्यू मेक्सिको|ग्वादालुपे]] || [[सांता रोसा, न्यू मेक्सिको|सांता रोसा]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२६ फेब्रुवारी १८९१]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[आमची लेडी ऑफ गुआडालुपे]] (कॅथलिक धार्मिक प्रतीक) || ४,४५२ || ७,८५२
|-
| [[हार्डिंग काउंटी, न्यू मेक्सिको|हार्डिंग]] || [[मोसकेरो, न्यू मेक्सिको|मोसकेरो]] || [[:वर्ग:इ.स. १९२१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|४ मार्च १९२१]] || युनियन आणि क्वे काउंटीच्या भागांतून || [[वॉरेन जी. हार्डिंग]] (अमेरिकेचे २९ वे राष्ट्राध्यक्ष) || ६५७ || block_size_placeholder -> ५,५०६
|-
| [[हिदाल्गो काउंटी, न्यू मेक्सिको|हिदाल्गो]] || [[लॉर्ड्सबर्ग, न्यू मेक्सिको|लॉर्ड्सबर्ग]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९१९]] || ग्रँट काउंटीच्या भागातून || [[गुआडालुपे हिदाल्गोचा तह]] या ऐतिहासिक तहावरून || ४,१७८ || block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> ९,९६३
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[लिया काउंटी, न्यू मेक्सिको|लिया]] || [[लोविंग्टन, न्यू मेक्सिको|लोविंग्टन]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|७ मार्च १९१७]] || एडी आणि चेव्हस काउंटीच्या भागांतून || [[जोसेफ कॅलवे लिया]] (फोर्ट समनरचे संस्थापक) || ७४,४५५ || block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> ११,३८०
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[लिंकन काउंटी, न्यू मेक्सिको|लिंकन]] || [[करिझोजो, न्यू मेक्सिको|करिझोजो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ॲब्राहाम लिंकन]] (अमेरिकेचे १६ वे राष्ट्राध्यक्ष) || २०,२६९ || block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> १२,५१२
|-
| [[लॉस अलामोस काउंटी, न्यू मेक्सिको|लॉस अलामोस]] || [[लॉस अलामोस, न्यू मेक्सिको|लॉस अलामोस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९४९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९४९]] || सँडोव्हाल आणि सांता फे काउंटीच्या भागांतून || [[लॉस अलामोस]] (स्पॅनिश भाषेत 'पॉपलरची झाडे') || १९,४४४ || block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> २८२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[लूना काउंटी, न्यू मेक्सिको|लूना]] || [[डेमिंग, न्यू मेक्सिको|डेमिंग]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९०१]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सोलोमन लूना]] (स्थानिक राजकीय नेता) || २५,४२७ || block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> ७,७१९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[मॅककिन्ली काउंटी, न्यू मेक्सिको|मॅककिन्ली]] || [[गॅलप, न्यू मेक्सिको|गॅलप]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२३ फेब्रुवारी १८९९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[विल्यम मॅककिन्ली]] (अमेरिकेचे २५ वे राष्ट्राध्यक्ष) || ७२,९०२ || block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> १४,१२९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[मोरा काउंटी, न्यू मेक्सिको|मोरा]] || [[मोरा, न्यू मेक्सिको|मोरा]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१ फेब्रुवारी १८६०]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मोरा, न्यू मेक्सिको|मोरा शहर]] (स्पॅनिश भाषेत 'ब्लॅकबेरी') || ४,१८९ || block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> ५,०३२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ओटेरो काउंटी, न्यू मेक्सिको|ओटेरो]] || [[ॲलामो गॉर्डो, न्यू मेक्सिको|ॲलामो गॉर्डो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३० जानेवारी १८९९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मिगेल अंतोनियो ओटेरो]] (प्रादेशिक प्रतिनिधी) || ६७,८३९ || block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> १७,९०७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[क्वे काउंटी, न्यू मेक्सिको|क्वे]] || [[टुकुमकारी, न्यू मेक्सिको|टुकुमकारी]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मॅथ्यू एस. क्वे]] (पेनसिल्व्हेनियाचे अमेरिकन सिनेटर) || ८,९८९ || block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> ७,४६९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[रिओ अरिबा काउंटी, न्यू मेक्सिको|रिओ अरिबा]] || [[टिएरा अमारिया, न्यू मेक्सिको|टिएरा अमारिया]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[रिओ ग्रँडे]] नदीच्या वरच्या भागावरून (स्पॅनिश: 'उंच नदी') || ४०,३६३ || block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> १५,२७१
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| [[रूझवेल्ट काउंटी, न्यू मेक्सिको|रूझवेल्ट]] || [[पोर्टालेस, न्यू मेक्सिको|पोर्टालेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[थियोडोर रूझवेल्ट]] (अमेरिकेचे २६ वे राष्ट्राध्यक्ष) || १८,५०० || block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> ६,३४२
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| [[सॅन हुआन काउंटी, न्यू मेक्सिको|सॅन हुआन]] || [[ॲझटेक, न्यू मेक्सिको|ॲझटेक]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२४ फेब्रुवारी १८८७]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सॅन हुआन नदी (कॉलोराडो नदी)|सॅन हुआन नदीवरून]] || १,२१,६६१ || block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> १४,२८१
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| [[सॅन मिगेल काउंटी, न्यू मेक्सिको|सॅन मिगेल]] || [[लास व्हेगास, न्यू मेक्सिको|लास व्हेगास]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सॅन मिगेल दे बाजो एल पोवेनिर]] या कॅथलिक चर्चवरून || २७,२०१ || block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> १२,२१७
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| [[सँडोव्हाल काउंटी, न्यू मेक्सिको|सँडोव्हाल]] || [[बर्नालियो, न्यू मेक्सिको|बर्नालियो]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१० मार्च १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सँडोव्हाल]] (स्पॅनिश जमीनदार कुटुंब) || १,४८,८३४ || block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> ९,६२०
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| [[सांता फे काउंटी, न्यू मेक्सिको|सांता फे]] || [[सांता फे, न्यू मेक्सिको|सांता फे]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सांता फे, न्यू मेक्सिको|सांता फे नगर]] (स्पॅनिश: 'पवित्र श्रद्धा') || १,५४,८२३ || block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> ४,९४५
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| [[सियेरा काउंटी, न्यू मेक्सिको|सियेरा]] || [[ट्रूथ ऑर कॉन्सिक्वेन्सेस, न्यू मेक्सिको|ट्रूथ ऑर कॉन्सिक्वेन्सेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८४४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ एप्रिल १८८४]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ब्लॅक रेंज]] पर्वतरांगेवरून (स्पॅनिश: सियेरा) || ११,५७६ || block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> १०,९२७
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| [[सोकोरो काउंटी, न्यू मेक्सिको|सोकोरो]] || [[सोकोरो, न्यू मेक्सिको|सोकोरो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || स्पॅनिश शब्द 'सोकोरो' (मदत किंवा साहाय्य) वरून || १६,५९५ || block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> १५,६०७
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| [[ताओस काउंटी, न्यू मेक्सिको|ताओस]] || [[ताओस, न्यू मेक्सिको|ताओस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[टाओस पुएब्लो]] (स्थानिक नेटिव्ह अमेरिकन शहर) || ३४,४८९ || block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> ५,७०६
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[टॉरान्स काउंटी, न्यू मेक्सिको|टॉरान्स]] || [[एस्तान्सिया, न्यू मेक्सिको|एस्टान्सिया]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[फ्रांसिस जे. टॉरन्स]] (न्यू मेक्सिको सेंट्रल रेल्वेचे अध्यक्ष) || १५,०५३ || block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> ८,५३९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[युनियन काउंटी, न्यू मेक्सिको|युनियन]] || [[क्लेटन, न्यू मेक्सिको|क्लेटन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१३ फेब्रुवारी १८९३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || वेगवेगळ्या काउंटींचे भाग एकत्र (युनियन) आल्यामुळे || ४,०७९ || block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> ९,८५८
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[व्हेलेन्सिया काउंटी, न्यू मेक्सिको|व्हेलेन्सिया]] || [[लोस लुनास, न्यू मेक्सिको|लोस लुनास]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[व्हेलेन्सिया, स्पेन]] शहरावरून || ७६,२०५ || block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> block_size_placeholder -> २,७६६
|}
== हेसुद्धा पहा ==
* [[कॅन्ससमधील काउंटी]]
* [[कॉलोराडोमधील काउंटी]]
* [[ॲरिझोनामधील काउंटी]]
* [[युटामधील काउंटी]]
== संदर्भ आणि नोंदी ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:न्यू मेक्सिकोमधील काउंटी|*]]
gmnp8b1w2th35et6t8nh7r6mpazytew
2709819
2709818
2026-09-15T22:34:29Z
अभय नातू
206
2709819
wikitext
text/x-wiki
[[चित्र:Map of New Mexico highlighting County.svg|अंगुष्ठ|३००पिक्सेल|न्यू मेक्सिकोमधील काउंटी दर्शवणारा नकाशा]]
[[अमेरिका|अमेरिकेच्या]] [[न्यू मेक्सिको]] राज्यात एकूण ३३ [[काउंटी]] आहेत. ६ जानेवारी १९१२ रोजी न्यू मेक्सिको राज्याची निर्मिती झाली तेव्हा राज्यात २६ मूळ काउंटी अस्तित्वात होत्या.
== काउंटींची यादी ==
{| class="wikitable sortable" style="font-size: 85%; text-align: center;"
|- style="background: #e0e0e0;"
! काउंटी !! काउंटी ठिकाण !! निर्मिती दिनांक/वर्ष !! निर्मिती !! नावाचा उगम !! लोकसंख्या<br />(२०२०) !! क्षेत्रफळ (चौ. किमी)
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[बर्नालियो काउंटी, न्यू मेक्सिको|बर्नालियो]] || [[अल्बुकर्की, न्यू मेक्सिको|अल्बुकर्की]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|८ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[बर्नालियो]] (स्थानिक स्पॅनिश व्यापारी कुटुंब) || ६,७६,४४९ || ३,०२०
|-
| [[कॅट्रन काउंटी, न्यू मेक्सिको|कॅट्रन]] || [[रिझर्व्ह, न्यू मेक्सिको|रिझर्व्ह]] || [[:वर्ग:इ.स. १९२१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९२१]] || सोकोरो काउंटीच्या भागातून || [[थॉमस बी. कैट्रॉन]] (न्यू मेक्सिकोचे सिनेटर) || ३,५७९ || १७,९०१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[चेव्हस काउंटी, न्यू मेक्सिको|चेव्हस]] || [[रोजवेल, न्यू मेक्सिको|रोजवेल]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १८८९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जोस फ्रान्सिस्को चेव्हस]] (सैनिकी अधिकारी आणि राजकारणी) || ६५,१५७ || १५,७३४
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सिबोला काउंटी, न्यू मेक्सिको|सिबोला]] || [[ग्रँट्स, न्यू मेक्सिको|ग्रँट्स]] || [[:वर्ग:इ.स. १९८१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१९ जून १९८१]] || व्हेलेन्सिया काउंटीच्या विभाजनातून || [[सिबोलाचे सात सुवर्ण शहरे]] या पौराणिक कथेवरून || २७,२१३ || ११,७६३
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[कोलफॅक्स काउंटी, न्यू मेक्सिको|कोलफॅक्स]] || [[रातों, न्यू मेक्सिको|रातों]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ जानेवारी १८६९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[स्कायलर कोलफॅक्स]] (अमेरिकेचे १७ वे उपराष्ट्राध्यक्ष) || १२,३८७ || ९,७३०
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[करी काउंटी, न्यू मेक्सिको|करी]] || [[क्लोव्हिस, न्यू मेक्सिको|क्लोव्हिस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९०९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जॉर्ज करी (राजकारणी)|जॉर्ज करी]] (न्यू मेक्सिको प्रांताचे गव्हर्नर) || ४८,४३० || ३,६४६
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[डी बाका काउंटी, न्यू मेक्सिको|डी बाका]] || [[फोर्ट समनर, न्यू मेक्सिको|फोर्ट समनर]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९१७]] || गुआडालुपे आणि चेव्हस काउंटीच्या भागांतून || [[इझेकिएल काबेझा डी बाका]] (न्यू मेक्सिकोचे २ रे गव्हर्नर) || २,२९८ || ६,०४५
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[दॉन्या आना काउंटी, न्यू मेक्सिको|दॉन्या आना]] || [[लास क्रुसेस, न्यू मेक्सिको|लास क्रुसेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[डोन्या आना रोबलेडो]] (१७ व्या शतकातील स्पॅनिश महिला) || २,१९,५६१ || ९,८०८
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[इडी काउंटी, न्यू मेक्सिको|इडी]] || [[कार्लसबॅड, न्यू मेक्सिको|कार्लसबॅड]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १८८९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[चार्ल्स बी. इडी]] (स्थानिक उद्योजक) || ६२,३१४ || १०,८३१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ग्रँट काउंटी, न्यू मेक्सिको|ग्रँट]] || [[सिल्व्हर सिटी, न्यू मेक्सिको|सिल्व्हर सिटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६८ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३० जानेवारी १८६८]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[युलिसेस एस. ग्रँट]] (अमेरिकेचे १८ वे राष्ट्राध्यक्ष) || २८,१८५ || १०,२७७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ग्वादालुपे काउंटी, न्यू मेक्सिको|ग्वादालुपे]] || [[सांता रोसा, न्यू मेक्सिको|सांता रोसा]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२६ फेब्रुवारी १८९१]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[आमची लेडी ऑफ गुआडालुपे]] (कॅथलिक धार्मिक प्रतीक) || ४,४५२ || ७,८५२
|-
| [[हार्डिंग काउंटी, न्यू मेक्सिको|हार्डिंग]] || [[मोसकेरो, न्यू मेक्सिको|मोसकेरो]] || [[:वर्ग:इ.स. १९२१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|४ मार्च १९२१]] || युनियन आणि क्वे काउंटीच्या भागांतून || [[वॉरेन जी. हार्डिंग]] (अमेरिकेचे २९ वे राष्ट्राध्यक्ष) || ६५७ || ५,५०६
|-
| [[हिदाल्गो काउंटी, न्यू मेक्सिको|हिदाल्गो]] || [[लॉर्ड्सबर्ग, न्यू मेक्सिको|लॉर्ड्सबर्ग]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९१९]] || ग्रँट काउंटीच्या भागातून || [[गुआडालुपे हिदाल्गोचा तह]] या ऐतिहासिक तहावरून || ४,१७८ || ९,९६३
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[लिया काउंटी, न्यू मेक्सिको|लिया]] || [[लोविंग्टन, न्यू मेक्सिको|लोविंग्टन]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|७ मार्च १९१७]] || एडी आणि चेव्हस काउंटीच्या भागांतून || [[जोसेफ कॅलवे लिया]] (फोर्ट समनरचे संस्थापक) || ७४,४५५ || ११,३८०
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[लिंकन काउंटी, न्यू मेक्सिको|लिंकन]] || [[करिझोजो, न्यू मेक्सिको|करिझोजो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ॲब्राहाम लिंकन]] (अमेरिकेचे १६ वे राष्ट्राध्यक्ष) || २०,२६९ || १२,५१२
|-
| [[लॉस अलामोस काउंटी, न्यू मेक्सिको|लॉस अलामोस]] || [[लॉस अलामोस, न्यू मेक्सिको|लॉस अलामोस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९४९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९४९]] || सँडोव्हाल आणि सांता फे काउंटीच्या भागांतून || [[लॉस अलामोस]] (स्पॅनिश भाषेत 'पॉपलरची झाडे') || १९,४४४ || २८२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[लूना काउंटी, न्यू मेक्सिको|लूना]] || [[डेमिंग, न्यू मेक्सिको|डेमिंग]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९०१]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सोलोमन लूना]] (स्थानिक राजकीय नेता) || २५,४२७ || ७,७१९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[मॅककिन्ली काउंटी, न्यू मेक्सिको|मॅककिन्ली]] || [[गॅलप, न्यू मेक्सिको|गॅलप]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२३ फेब्रुवारी १८९९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[विल्यम मॅककिन्ली]] (अमेरिकेचे २५ वे राष्ट्राध्यक्ष) || ७२,९०२ || १४,१२९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[मोरा काउंटी, न्यू मेक्सिको|मोरा]] || [[मोरा, न्यू मेक्सिको|मोरा]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१ फेब्रुवारी १८६०]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मोरा, न्यू मेक्सिको|मोरा शहर]] (स्पॅनिश भाषेत 'ब्लॅकबेरी') || ४,१८९ || ५,०३२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ओटेरो काउंटी, न्यू मेक्सिको|ओटेरो]] || [[ॲलामो गॉर्डो, न्यू मेक्सिको|ॲलामो गॉर्डो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३० जानेवारी १८९९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मिगेल अंतोनियो ओटेरो]] (प्रादेशिक प्रतिनिधी) || ६७,८३९ || १७,९०७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[क्वे काउंटी, न्यू मेक्सिको|क्वे]] || [[टुकुमकारी, न्यू मेक्सिको|टुकुमकारी]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मॅथ्यू एस. क्वे]] (पेनसिल्व्हेनियाचे अमेरिकन सिनेटर) || ८,९८९ || ७,४६९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[रिओ अरिबा काउंटी, न्यू मेक्सिको|रिओ अरिबा]] || [[टिएरा अमारिया, न्यू मेक्सिको|टिएरा अमारिया]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[रिओ ग्रँडे]] नदीच्या वरच्या भागावरून (स्पॅनिश: 'उंच नदी') || ४०,३६३ || १५,२७१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[रूझवेल्ट काउंटी, न्यू मेक्सिको|रूझवेल्ट]] || [[पोर्टालेस, न्यू मेक्सिको|पोर्टालेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[थियोडोर रूझवेल्ट]] (अमेरिकेचे २६ वे राष्ट्राध्यक्ष) || १८,५०० || ६,३४२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सॅन हुआन काउंटी, न्यू मेक्सिको|सॅन हुआन]] || [[ॲझटेक, न्यू मेक्सिको|ॲझटेक]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२४ फेब्रुवारी १८८७]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सॅन हुआन नदी (कॉलोराडो नदी)|सॅन हुआन नदीवरून]] || १,२१,६६१ || १४,२८१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सॅन मिगेल काउंटी, न्यू मेक्सिको|सॅन मिगेल]] || [[लास व्हेगास, न्यू मेक्सिको|लास व्हेगास]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सॅन मिगेल दे बाजो एल पोवेनिर]] या कॅथलिक चर्चवरून || २७,२०१ || १२,२१७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सँडोव्हाल काउंटी, न्यू मेक्सिको|सँडोव्हाल]] || [[बर्नालियो, न्यू मेक्सिको|बर्नालियो]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१० मार्च १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सँडोव्हाल]] (स्पॅनिश जमीनदार कुटुंब) || १,४८,८३४ || ९,६२०
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सांता फे काउंटी, न्यू मेक्सिको|सांता फे]] || [[सांता फे, न्यू मेक्सिको|सांता फे]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सांता फे, न्यू मेक्सिको|सांता फे नगर]] (स्पॅनिश: 'पवित्र श्रद्धा') || १,५४,८२३ || ४,९४५
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सियेरा काउंटी, न्यू मेक्सिको|सियेरा]] || [[ट्रूथ ऑर कॉन्सिक्वेन्सेस, न्यू मेक्सिको|ट्रूथ ऑर कॉन्सिक्वेन्सेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८४४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ एप्रिल १८८४]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ब्लॅक रेंज]] पर्वतरांगेवरून (स्पॅनिश: सियेरा) || ११,५७६ || १०,९२७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सोकोरो काउंटी, न्यू मेक्सिको|सोकोरो]] || [[सोकोरो, न्यू मेक्सिको|सोकोरो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || स्पॅनिश शब्द 'सोकोरो' (मदत किंवा साहाय्य) वरून || १६,५९५ || १५,६०७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ताओस काउंटी, न्यू मेक्सिको|ताओस]] || [[ताओस, न्यू मेक्सिको|ताओस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[टाओस पुएब्लो]] (स्थानिक नेटिव्ह अमेरिकन शहर) || ३४,४८९ || ५,७०६
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[टॉरान्स काउंटी, न्यू मेक्सिको|टॉरान्स]] || [[एस्तान्सिया, न्यू मेक्सिको|एस्टान्सिया]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[फ्रांसिस जे. टॉरन्स]] (न्यू मेक्सिको सेंट्रल रेल्वेचे अध्यक्ष) || १५,०५३ || ८,५३९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[युनियन काउंटी, न्यू मेक्सिको|युनियन]] || [[क्लेटन, न्यू मेक्सिको|क्लेटन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१३ फेब्रुवारी १८९३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || वेगवेगळ्या काउंटींचे भाग एकत्र (युनियन) आल्यामुळे || ४,०७९ || ९,८५८
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[व्हेलेन्सिया काउंटी, न्यू मेक्सिको|व्हेलेन्सिया]] || [[लोस लुनास, न्यू मेक्सिको|लोस लुनास]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[व्हेलेन्सिया, स्पेन]] शहरावरून || ७६,२०५ || २,७६६
|}
== हेसुद्धा पहा ==
* [[कॅन्ससमधील काउंटी]]
* [[कॉलोराडोमधील काउंटी]]
* [[ॲरिझोनामधील काउंटी]]
* [[युटामधील काउंटी]]
== संदर्भ आणि नोंदी ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:न्यू मेक्सिकोमधील काउंटी|*]]
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2709826
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2026-09-16T00:05:08Z
अभय नातू
206
नवीन
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wikitext
text/x-wiki
{{न्यू मेक्सिकोमधील काउंट्यांचा नकाशा}}
[[अमेरिका|अमेरिकेच्या]] [[न्यू मेक्सिको]] राज्यात एकूण ३३ [[काउंटी]] आहेत. ६ जानेवारी १९१२ रोजी न्यू मेक्सिको राज्याची निर्मिती झाली तेव्हा राज्यात २६ मूळ काउंटी अस्तित्वात होत्या.
== काउंटींची यादी ==
{| class="wikitable sortable" style="font-size: 85%; text-align: center;"
|- style="background: #e0e0e0;"
! काउंटी !! काउंटी ठिकाण !! निर्मिती दिनांक/वर्ष !! निर्मिती !! नावाचा उगम !! लोकसंख्या<br />(२०२०) !! क्षेत्रफळ (चौ. किमी)
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[बर्नालियो काउंटी, न्यू मेक्सिको|बर्नालियो]] || [[अल्बुकर्की, न्यू मेक्सिको|अल्बुकर्की]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|८ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[बर्नालियो]] (स्थानिक स्पॅनिश व्यापारी कुटुंब) || ६,७६,४४९ || ३,०२०
|-
| [[कॅट्रन काउंटी, न्यू मेक्सिको|कॅट्रन]] || [[रिझर्व्ह, न्यू मेक्सिको|रिझर्व्ह]] || [[:वर्ग:इ.स. १९२१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९२१]] || सोकोरो काउंटीच्या भागातून || [[थॉमस बी. कैट्रॉन]] (न्यू मेक्सिकोचे सिनेटर) || ३,५७९ || १७,९०१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[चेव्हस काउंटी, न्यू मेक्सिको|चेव्हस]] || [[रोजवेल, न्यू मेक्सिको|रोजवेल]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १८८९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जोस फ्रान्सिस्को चेव्हस]] (सैनिकी अधिकारी आणि राजकारणी) || ६५,१५७ || १५,७३४
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सिबोला काउंटी, न्यू मेक्सिको|सिबोला]] || [[ग्रँट्स, न्यू मेक्सिको|ग्रँट्स]] || [[:वर्ग:इ.स. १९८१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१९ जून १९८१]] || व्हेलेन्सिया काउंटीच्या विभाजनातून || [[सिबोलाचे सात सुवर्ण शहरे]] या पौराणिक कथेवरून || २७,२१३ || ११,७६३
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[कोलफॅक्स काउंटी, न्यू मेक्सिको|कोलफॅक्स]] || [[रातों, न्यू मेक्सिको|रातों]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ जानेवारी १८६९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[स्कायलर कोलफॅक्स]] (अमेरिकेचे १७ वे उपराष्ट्राध्यक्ष) || १२,३८७ || ९,७३०
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[करी काउंटी, न्यू मेक्सिको|करी]] || [[क्लोव्हिस, न्यू मेक्सिको|क्लोव्हिस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९०९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जॉर्ज करी (राजकारणी)|जॉर्ज करी]] (न्यू मेक्सिको प्रांताचे गव्हर्नर) || ४८,४३० || ३,६४६
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[डी बाका काउंटी, न्यू मेक्सिको|डी बाका]] || [[फोर्ट समनर, न्यू मेक्सिको|फोर्ट समनर]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९१७]] || गुआडालुपे आणि चेव्हस काउंटीच्या भागांतून || [[इझेकिएल काबेझा डी बाका]] (न्यू मेक्सिकोचे २ रे गव्हर्नर) || २,२९८ || ६,०४५
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| [[दॉन्या आना काउंटी, न्यू मेक्सिको|दॉन्या आना]] || [[लास क्रुसेस, न्यू मेक्सिको|लास क्रुसेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[डोन्या आना रोबलेडो]] (१७ व्या शतकातील स्पॅनिश महिला) || २,१९,५६१ || ९,८०८
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[इडी काउंटी, न्यू मेक्सिको|इडी]] || [[कार्लसबॅड, न्यू मेक्सिको|कार्लसबॅड]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १८८९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[चार्ल्स बी. इडी]] (स्थानिक उद्योजक) || ६२,३१४ || १०,८३१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ग्रँट काउंटी, न्यू मेक्सिको|ग्रँट]] || [[सिल्व्हर सिटी, न्यू मेक्सिको|सिल्व्हर सिटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६८ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३० जानेवारी १८६८]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[युलिसेस एस. ग्रँट]] (अमेरिकेचे १८ वे राष्ट्राध्यक्ष) || २८,१८५ || १०,२७७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ग्वादालुपे काउंटी, न्यू मेक्सिको|ग्वादालुपे]] || [[सांता रोसा, न्यू मेक्सिको|सांता रोसा]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२६ फेब्रुवारी १८९१]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[आमची लेडी ऑफ गुआडालुपे]] (कॅथलिक धार्मिक प्रतीक) || ४,४५२ || ७,८५२
|-
| [[हार्डिंग काउंटी, न्यू मेक्सिको|हार्डिंग]] || [[मोसकेरो, न्यू मेक्सिको|मोसकेरो]] || [[:वर्ग:इ.स. १९२१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|४ मार्च १९२१]] || युनियन आणि क्वे काउंटीच्या भागांतून || [[वॉरेन जी. हार्डिंग]] (अमेरिकेचे २९ वे राष्ट्राध्यक्ष) || ६५७ || ५,५०६
|-
| [[हिदाल्गो काउंटी, न्यू मेक्सिको|हिदाल्गो]] || [[लॉर्ड्सबर्ग, न्यू मेक्सिको|लॉर्ड्सबर्ग]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९१९]] || ग्रँट काउंटीच्या भागातून || [[गुआडालुपे हिदाल्गोचा तह]] या ऐतिहासिक तहावरून || ४,१७८ || ९,९६३
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[लिया काउंटी, न्यू मेक्सिको|लिया]] || [[लोविंग्टन, न्यू मेक्सिको|लोविंग्टन]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|७ मार्च १९१७]] || एडी आणि चेव्हस काउंटीच्या भागांतून || [[जोसेफ कॅलवे लिया]] (फोर्ट समनरचे संस्थापक) || ७४,४५५ || ११,३८०
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[लिंकन काउंटी, न्यू मेक्सिको|लिंकन]] || [[करिझोजो, न्यू मेक्सिको|करिझोजो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ॲब्राहाम लिंकन]] (अमेरिकेचे १६ वे राष्ट्राध्यक्ष) || २०,२६९ || १२,५१२
|-
| [[लॉस अलामोस काउंटी, न्यू मेक्सिको|लॉस अलामोस]] || [[लॉस अलामोस, न्यू मेक्सिको|लॉस अलामोस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९४९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९४९]] || सँडोव्हाल आणि सांता फे काउंटीच्या भागांतून || [[लॉस अलामोस]] (स्पॅनिश भाषेत 'पॉपलरची झाडे') || १९,४४४ || २८२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[लूना काउंटी, न्यू मेक्सिको|लूना]] || [[डेमिंग, न्यू मेक्सिको|डेमिंग]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९०१]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सोलोमन लूना]] (स्थानिक राजकीय नेता) || २५,४२७ || ७,७१९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[मॅककिन्ली काउंटी, न्यू मेक्सिको|मॅककिन्ली]] || [[गॅलप, न्यू मेक्सिको|गॅलप]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२३ फेब्रुवारी १८९९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[विल्यम मॅककिन्ली]] (अमेरिकेचे २५ वे राष्ट्राध्यक्ष) || ७२,९०२ || १४,१२९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[मोरा काउंटी, न्यू मेक्सिको|मोरा]] || [[मोरा, न्यू मेक्सिको|मोरा]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१ फेब्रुवारी १८६०]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मोरा, न्यू मेक्सिको|मोरा शहर]] (स्पॅनिश भाषेत 'ब्लॅकबेरी') || ४,१८९ || ५,०३२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ओटेरो काउंटी, न्यू मेक्सिको|ओटेरो]] || [[ॲलामो गॉर्डो, न्यू मेक्सिको|ॲलामो गॉर्डो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३० जानेवारी १८९९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मिगेल अंतोनियो ओटेरो]] (प्रादेशिक प्रतिनिधी) || ६७,८३९ || १७,९०७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[क्वे काउंटी, न्यू मेक्सिको|क्वे]] || [[टुकुमकारी, न्यू मेक्सिको|टुकुमकारी]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मॅथ्यू एस. क्वे]] (पेनसिल्व्हेनियाचे अमेरिकन सिनेटर) || ८,९८९ || ७,४६९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[रिओ अरिबा काउंटी, न्यू मेक्सिको|रिओ अरिबा]] || [[टिएरा अमारिया, न्यू मेक्सिको|टिएरा अमारिया]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[रिओ ग्रँडे]] नदीच्या वरच्या भागावरून (स्पॅनिश: 'उंच नदी') || ४०,३६३ || १५,२७१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[रूझवेल्ट काउंटी, न्यू मेक्सिको|रूझवेल्ट]] || [[पोर्टालेस, न्यू मेक्सिको|पोर्टालेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[थियोडोर रूझवेल्ट]] (अमेरिकेचे २६ वे राष्ट्राध्यक्ष) || १८,५०० || ६,३४२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सॅन हुआन काउंटी, न्यू मेक्सिको|सॅन हुआन]] || [[ॲझटेक, न्यू मेक्सिको|ॲझटेक]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२४ फेब्रुवारी १८८७]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सॅन हुआन नदी (कॉलोराडो नदी)|सॅन हुआन नदीवरून]] || १,२१,६६१ || १४,२८१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सॅन मिगेल काउंटी, न्यू मेक्सिको|सॅन मिगेल]] || [[लास व्हेगास, न्यू मेक्सिको|लास व्हेगास]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सॅन मिगेल दे बाजो एल पोवेनिर]] या कॅथलिक चर्चवरून || २७,२०१ || १२,२१७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सँडोव्हाल काउंटी, न्यू मेक्सिको|सँडोव्हाल]] || [[बर्नालियो, न्यू मेक्सिको|बर्नालियो]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१० मार्च १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सँडोव्हाल]] (स्पॅनिश जमीनदार कुटुंब) || १,४८,८३४ || ९,६२०
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सांता फे काउंटी, न्यू मेक्सिको|सांता फे]] || [[सांता फे, न्यू मेक्सिको|सांता फे]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सांता फे, न्यू मेक्सिको|सांता फे नगर]] (स्पॅनिश: 'पवित्र श्रद्धा') || १,५४,८२३ || ४,९४५
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सियेरा काउंटी, न्यू मेक्सिको|सियेरा]] || [[ट्रूथ ऑर कॉन्सिक्वेन्सेस, न्यू मेक्सिको|ट्रूथ ऑर कॉन्सिक्वेन्सेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८४४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ एप्रिल १८८४]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ब्लॅक रेंज]] पर्वतरांगेवरून (स्पॅनिश: सियेरा) || ११,५७६ || १०,९२७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सोकोरो काउंटी, न्यू मेक्सिको|सोकोरो]] || [[सोकोरो, न्यू मेक्सिको|सोकोरो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || स्पॅनिश शब्द 'सोकोरो' (मदत किंवा साहाय्य) वरून || १६,५९५ || १५,६०७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ताओस काउंटी, न्यू मेक्सिको|ताओस]] || [[ताओस, न्यू मेक्सिको|ताओस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[टाओस पुएब्लो]] (स्थानिक नेटिव्ह अमेरिकन शहर) || ३४,४८९ || ५,७०६
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[टॉरान्स काउंटी, न्यू मेक्सिको|टॉरान्स]] || [[एस्तान्सिया, न्यू मेक्सिको|एस्टान्सिया]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[फ्रांसिस जे. टॉरन्स]] (न्यू मेक्सिको सेंट्रल रेल्वेचे अध्यक्ष) || १५,०५३ || ८,५३९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[युनियन काउंटी, न्यू मेक्सिको|युनियन]] || [[क्लेटन, न्यू मेक्सिको|क्लेटन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१३ फेब्रुवारी १८९३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || वेगवेगळ्या काउंटींचे भाग एकत्र (युनियन) आल्यामुळे || ४,०७९ || ९,८५८
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[व्हेलेन्सिया काउंटी, न्यू मेक्सिको|व्हेलेन्सिया]] || [[लोस लुनास, न्यू मेक्सिको|लोस लुनास]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[व्हेलेन्सिया, स्पेन]] शहरावरून || ७६,२०५ || २,७६६
|}
== हेसुद्धा पहा ==
* [[कॅन्ससमधील काउंटी]]
* [[कॉलोराडोमधील काउंटी]]
* [[ॲरिझोनामधील काउंटी]]
* [[युटामधील काउंटी]]
== संदर्भ आणि नोंदी ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:न्यू मेक्सिकोमधील काउंटी|*]]
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2026-09-16T03:27:59Z
अभय नातू
206
/* काउंटींची यादी */
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wikitext
text/x-wiki
{{न्यू मेक्सिकोमधील काउंट्यांचा नकाशा}}
[[अमेरिका|अमेरिकेच्या]] [[न्यू मेक्सिको]] राज्यात एकूण ३३ [[काउंटी]] आहेत. ६ जानेवारी १९१२ रोजी न्यू मेक्सिको राज्याची निर्मिती झाली तेव्हा राज्यात २६ मूळ काउंटी अस्तित्वात होत्या.
== काउंटींची यादी ==
{| class="wikitable sortable" style="font-size: 85%; text-align: center;"
|- style="background: #e0e0e0;"
! काउंटी !! काउंटी ठिकाण !! निर्मिती दिनांक/वर्ष !! निर्मिती !! नावाचा उगम !! लोकसंख्या<br />(२०२०) !! क्षेत्रफळ (चौ. किमी)
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[बर्नालियो काउंटी, न्यू मेक्सिको|बर्नालियो]] || [[अल्बुकर्की, न्यू मेक्सिको|अल्बुकर्की]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|८ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[बर्नालियो]] (स्थानिक स्पॅनिश व्यापारी कुटुंब) || ६,७६,४४९ || ३,०२०
|-
| [[कॅट्रन काउंटी, न्यू मेक्सिको|कॅट्रन]] || [[रिझर्व्ह, न्यू मेक्सिको|रिझर्व्ह]] || [[:वर्ग:इ.स. १९२१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९२१]] || सोकोरो काउंटीच्या भागातून || [[थॉमस बी. कैट्रॉन]] (न्यू मेक्सिकोचे सिनेटर) || ३,५७९ || १७,९०१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[चेव्हस काउंटी, न्यू मेक्सिको|चेव्हस]] || [[रॉसवेल, न्यू मेक्सिको|रॉसवेल]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १८८९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जोस फ्रान्सिस्को चेव्हस]] (सैनिकी अधिकारी आणि राजकारणी) || ६५,१५७ || १५,७३४
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| [[सिबोला काउंटी, न्यू मेक्सिको|सिबोला]] || [[ग्रँट्स, न्यू मेक्सिको|ग्रँट्स]] || [[:वर्ग:इ.स. १९८१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१९ जून १९८१]] || व्हेलेन्सिया काउंटीच्या विभाजनातून || [[सिबोलाचे सात सुवर्ण शहरे]] या पौराणिक कथेवरून || २७,२१३ || ११,७६३
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| [[कोलफॅक्स काउंटी, न्यू मेक्सिको|कोलफॅक्स]] || [[रातों, न्यू मेक्सिको|रातों]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ जानेवारी १८६९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[स्कायलर कोलफॅक्स]] (अमेरिकेचे १७ वे उपराष्ट्राध्यक्ष) || १२,३८७ || ९,७३०
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| [[करी काउंटी, न्यू मेक्सिको|करी]] || [[क्लोव्हिस, न्यू मेक्सिको|क्लोव्हिस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९०९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जॉर्ज करी (राजकारणी)|जॉर्ज करी]] (न्यू मेक्सिको प्रांताचे गव्हर्नर) || ४८,४३० || ३,६४६
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| [[डी बाका काउंटी, न्यू मेक्सिको|डी बाका]] || [[फोर्ट समनर, न्यू मेक्सिको|फोर्ट समनर]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९१७]] || गुआडालुपे आणि चेव्हस काउंटीच्या भागांतून || [[इझेकिएल काबेझा डी बाका]] (न्यू मेक्सिकोचे २ रे गव्हर्नर) || २,२९८ || ६,०४५
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| [[दॉन्या आना काउंटी, न्यू मेक्सिको|दॉन्या आना]] || [[लास क्रुसेस, न्यू मेक्सिको|लास क्रुसेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[डोन्या आना रोबलेडो]] (१७ व्या शतकातील स्पॅनिश महिला) || २,१९,५६१ || ९,८०८
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[इडी काउंटी, न्यू मेक्सिको|इडी]] || [[कार्लसबॅड, न्यू मेक्सिको|कार्लसबॅड]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १८८९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[चार्ल्स बी. इडी]] (स्थानिक उद्योजक) || ६२,३१४ || १०,८३१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ग्रँट काउंटी, न्यू मेक्सिको|ग्रँट]] || [[सिल्व्हर सिटी, न्यू मेक्सिको|सिल्व्हर सिटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६८ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३० जानेवारी १८६८]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[युलिसेस एस. ग्रँट]] (अमेरिकेचे १८ वे राष्ट्राध्यक्ष) || २८,१८५ || १०,२७७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ग्वादालुपे काउंटी, न्यू मेक्सिको|ग्वादालुपे]] || [[सांता रोसा, न्यू मेक्सिको|सांता रोसा]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२६ फेब्रुवारी १८९१]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[आमची लेडी ऑफ गुआडालुपे]] (कॅथलिक धार्मिक प्रतीक) || ४,४५२ || ७,८५२
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| [[हार्डिंग काउंटी, न्यू मेक्सिको|हार्डिंग]] || [[मोसकेरो, न्यू मेक्सिको|मोसकेरो]] || [[:वर्ग:इ.स. १९२१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|४ मार्च १९२१]] || युनियन आणि क्वे काउंटीच्या भागांतून || [[वॉरेन जी. हार्डिंग]] (अमेरिकेचे २९ वे राष्ट्राध्यक्ष) || ६५७ || ५,५०६
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| [[हिदाल्गो काउंटी, न्यू मेक्सिको|हिदाल्गो]] || [[लॉर्ड्सबर्ग, न्यू मेक्सिको|लॉर्ड्सबर्ग]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९१९]] || ग्रँट काउंटीच्या भागातून || [[गुआडालुपे हिदाल्गोचा तह]] या ऐतिहासिक तहावरून || ४,१७८ || ९,९६३
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| [[लिया काउंटी, न्यू मेक्सिको|लिया]] || [[लोविंग्टन, न्यू मेक्सिको|लोविंग्टन]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|७ मार्च १९१७]] || एडी आणि चेव्हस काउंटीच्या भागांतून || [[जोसेफ कॅलवे लिया]] (फोर्ट समनरचे संस्थापक) || ७४,४५५ || ११,३८०
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| [[लिंकन काउंटी, न्यू मेक्सिको|लिंकन]] || [[करिझोजो, न्यू मेक्सिको|करिझोजो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ॲब्राहाम लिंकन]] (अमेरिकेचे १६ वे राष्ट्राध्यक्ष) || २०,२६९ || १२,५१२
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| [[लॉस अलामोस काउंटी, न्यू मेक्सिको|लॉस अलामोस]] || [[लॉस अलामोस, न्यू मेक्सिको|लॉस अलामोस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९४९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९४९]] || सँडोव्हाल आणि सांता फे काउंटीच्या भागांतून || [[लॉस अलामोस]] (स्पॅनिश भाषेत 'पॉपलरची झाडे') || १९,४४४ || २८२
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| [[लूना काउंटी, न्यू मेक्सिको|लूना]] || [[डेमिंग, न्यू मेक्सिको|डेमिंग]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९०१]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सोलोमन लूना]] (स्थानिक राजकीय नेता) || २५,४२७ || ७,७१९
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| [[मॅककिन्ली काउंटी, न्यू मेक्सिको|मॅककिन्ली]] || [[गॅलप, न्यू मेक्सिको|गॅलप]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२३ फेब्रुवारी १८९९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[विल्यम मॅककिन्ली]] (अमेरिकेचे २५ वे राष्ट्राध्यक्ष) || ७२,९०२ || १४,१२९
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| [[मोरा काउंटी, न्यू मेक्सिको|मोरा]] || [[मोरा, न्यू मेक्सिको|मोरा]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१ फेब्रुवारी १८६०]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मोरा, न्यू मेक्सिको|मोरा शहर]] (स्पॅनिश भाषेत 'ब्लॅकबेरी') || ४,१८९ || ५,०३२
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| [[ओटेरो काउंटी, न्यू मेक्सिको|ओटेरो]] || [[ॲलामो गॉर्डो, न्यू मेक्सिको|ॲलामो गॉर्डो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३० जानेवारी १८९९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मिगेल अंतोनियो ओटेरो]] (प्रादेशिक प्रतिनिधी) || ६७,८३९ || १७,९०७
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| [[क्वे काउंटी, न्यू मेक्सिको|क्वे]] || [[टुकुमकारी, न्यू मेक्सिको|टुकुमकारी]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मॅथ्यू एस. क्वे]] (पेनसिल्व्हेनियाचे अमेरिकन सिनेटर) || ८,९८९ || ७,४६९
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| [[रिओ अरिबा काउंटी, न्यू मेक्सिको|रिओ अरिबा]] || [[टिएरा अमारिया, न्यू मेक्सिको|टिएरा अमारिया]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[रिओ ग्रँडे]] नदीच्या वरच्या भागावरून (स्पॅनिश: 'उंच नदी') || ४०,३६३ || १५,२७१
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| [[रूझवेल्ट काउंटी, न्यू मेक्सिको|रूझवेल्ट]] || [[पोर्टालेस, न्यू मेक्सिको|पोर्टालेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[थियोडोर रूझवेल्ट]] (अमेरिकेचे २६ वे राष्ट्राध्यक्ष) || १८,५०० || ६,३४२
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| [[सॅन हुआन काउंटी, न्यू मेक्सिको|सॅन हुआन]] || [[ॲझटेक, न्यू मेक्सिको|ॲझटेक]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२४ फेब्रुवारी १८८७]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सॅन हुआन नदी (कॉलोराडो नदी)|सॅन हुआन नदीवरून]] || १,२१,६६१ || १४,२८१
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| [[सॅन मिगेल काउंटी, न्यू मेक्सिको|सॅन मिगेल]] || [[लास व्हेगास, न्यू मेक्सिको|लास व्हेगास]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सॅन मिगेल दे बाजो एल पोवेनिर]] या कॅथलिक चर्चवरून || २७,२०१ || १२,२१७
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| [[सँडोव्हाल काउंटी, न्यू मेक्सिको|सँडोव्हाल]] || [[बर्नालियो, न्यू मेक्सिको|बर्नालियो]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१० मार्च १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सँडोव्हाल]] (स्पॅनिश जमीनदार कुटुंब) || १,४८,८३४ || ९,६२०
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| [[सांता फे काउंटी, न्यू मेक्सिको|सांता फे]] || [[सांता फे, न्यू मेक्सिको|सांता फे]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सांता फे, न्यू मेक्सिको|सांता फे नगर]] (स्पॅनिश: 'पवित्र श्रद्धा') || १,५४,८२३ || ४,९४५
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| [[सियेरा काउंटी, न्यू मेक्सिको|सियेरा]] || [[ट्रूथ ऑर कॉन्सिक्वेन्सेस, न्यू मेक्सिको|ट्रूथ ऑर कॉन्सिक्वेन्सेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८४४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ एप्रिल १८८४]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ब्लॅक रेंज]] पर्वतरांगेवरून (स्पॅनिश: सियेरा) || ११,५७६ || १०,९२७
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| [[सोकोरो काउंटी, न्यू मेक्सिको|सोकोरो]] || [[सोकोरो, न्यू मेक्सिको|सोकोरो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || स्पॅनिश शब्द 'सोकोरो' (मदत किंवा साहाय्य) वरून || १६,५९५ || १५,६०७
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| [[ताओस काउंटी, न्यू मेक्सिको|ताओस]] || [[ताओस, न्यू मेक्सिको|ताओस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[टाओस पुएब्लो]] (स्थानिक नेटिव्ह अमेरिकन शहर) || ३४,४८९ || ५,७०६
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| [[टॉरान्स काउंटी, न्यू मेक्सिको|टॉरान्स]] || [[एस्तान्सिया, न्यू मेक्सिको|एस्टान्सिया]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[फ्रांसिस जे. टॉरन्स]] (न्यू मेक्सिको सेंट्रल रेल्वेचे अध्यक्ष) || १५,०५३ || ८,५३९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[युनियन काउंटी, न्यू मेक्सिको|युनियन]] || [[क्लेटन, न्यू मेक्सिको|क्लेटन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१३ फेब्रुवारी १८९३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || वेगवेगळ्या काउंटींचे भाग एकत्र (युनियन) आल्यामुळे || ४,०७९ || ९,८५८
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[व्हेलेन्सिया काउंटी, न्यू मेक्सिको|व्हेलेन्सिया]] || [[लोस लुनास, न्यू मेक्सिको|लोस लुनास]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[व्हेलेन्सिया, स्पेन]] शहरावरून || ७६,२०५ || २,७६६
|}
== हेसुद्धा पहा ==
* [[कॅन्ससमधील काउंटी]]
* [[कॉलोराडोमधील काउंटी]]
* [[ॲरिझोनामधील काउंटी]]
* [[युटामधील काउंटी]]
== संदर्भ आणि नोंदी ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:न्यू मेक्सिकोमधील काउंटी|*]]
fhd48llj34dnnuxgp97bxr446z8jl7d
2709847
2709844
2026-09-16T03:37:19Z
अभय नातू
206
/* काउंटींची यादी */
2709847
wikitext
text/x-wiki
{{न्यू मेक्सिकोमधील काउंट्यांचा नकाशा}}
[[अमेरिका|अमेरिकेच्या]] [[न्यू मेक्सिको]] राज्यात एकूण ३३ [[काउंटी]] आहेत. ६ जानेवारी १९१२ रोजी न्यू मेक्सिको राज्याची निर्मिती झाली तेव्हा राज्यात २६ मूळ काउंटी अस्तित्वात होत्या.
== काउंटींची यादी ==
{| class="wikitable sortable" style="font-size: 85%; text-align: center;"
|- style="background: #e0e0e0;"
! काउंटी !! काउंटी ठिकाण !! निर्मिती दिनांक/वर्ष !! निर्मिती !! नावाचा उगम !! लोकसंख्या<br />(२०२०) !! क्षेत्रफळ (चौ. किमी)
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[बर्नालियो काउंटी, न्यू मेक्सिको|बर्नालियो]] || [[अल्बुकर्की, न्यू मेक्सिको|अल्बुकर्की]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|८ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[बर्नालियो]] (स्थानिक स्पॅनिश व्यापारी कुटुंब) || ६,७६,४४९ || ३,०२०
|-
| [[कॅट्रन काउंटी, न्यू मेक्सिको|कॅट्रन]] || [[रिझर्व्ह, न्यू मेक्सिको|रिझर्व्ह]] || [[:वर्ग:इ.स. १९२१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९२१]] || सोकोरो काउंटीच्या भागातून || [[थॉमस बी. कैट्रॉन]] (न्यू मेक्सिकोचे सिनेटर) || ३,५७९ || १७,९०१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[शावेस काउंटी, न्यू मेक्सिको|शावेस]] || [[रॉसवेल, न्यू मेक्सिको|रॉसवेल]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १८८९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जोस फ्रान्सिस्को चेव्हस]] (सैनिकी अधिकारी आणि राजकारणी) || ६५,१५७ || १५,७३४
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सिबोला काउंटी, न्यू मेक्सिको|सिबोला]] || [[ग्रँट्स, न्यू मेक्सिको|ग्रँट्स]] || [[:वर्ग:इ.स. १९८१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१९ जून १९८१]] || व्हेलेन्सिया काउंटीच्या विभाजनातून || [[सिबोलाचे सात सुवर्ण शहरे]] या पौराणिक कथेवरून || २७,२१३ || ११,७६३
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[कोलफॅक्स काउंटी, न्यू मेक्सिको|कोलफॅक्स]] || [[रातों, न्यू मेक्सिको|रातों]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ जानेवारी १८६९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[स्कायलर कोलफॅक्स]] (अमेरिकेचे १७ वे उपराष्ट्राध्यक्ष) || १२,३८७ || ९,७३०
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[करी काउंटी, न्यू मेक्सिको|करी]] || [[क्लोव्हिस, न्यू मेक्सिको|क्लोव्हिस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९०९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जॉर्ज करी (राजकारणी)|जॉर्ज करी]] (न्यू मेक्सिको प्रांताचे गव्हर्नर) || ४८,४३० || ३,६४६
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[डी बाका काउंटी, न्यू मेक्सिको|डी बाका]] || [[फोर्ट समनर, न्यू मेक्सिको|फोर्ट समनर]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९१७]] || गुआडालुपे आणि चेव्हस काउंटीच्या भागांतून || [[इझेकिएल काबेझा डी बाका]] (न्यू मेक्सिकोचे २ रे गव्हर्नर) || २,२९८ || ६,०४५
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[दॉन्या आना काउंटी, न्यू मेक्सिको|दॉन्या आना]] || [[लास क्रुसेस, न्यू मेक्सिको|लास क्रुसेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[डोन्या आना रोबलेडो]] (१७ व्या शतकातील स्पॅनिश महिला) || २,१९,५६१ || ९,८०८
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[इडी काउंटी, न्यू मेक्सिको|इडी]] || [[कार्लसबॅड, न्यू मेक्सिको|कार्लसबॅड]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १८८९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[चार्ल्स बी. इडी]] (स्थानिक उद्योजक) || ६२,३१४ || १०,८३१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ग्रँट काउंटी, न्यू मेक्सिको|ग्रँट]] || [[सिल्व्हर सिटी, न्यू मेक्सिको|सिल्व्हर सिटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६८ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३० जानेवारी १८६८]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[युलिसेस एस. ग्रँट]] (अमेरिकेचे १८ वे राष्ट्राध्यक्ष) || २८,१८५ || १०,२७७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ग्वादालुपे काउंटी, न्यू मेक्सिको|ग्वादालुपे]] || [[सांता रोसा, न्यू मेक्सिको|सांता रोसा]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२६ फेब्रुवारी १८९१]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[आमची लेडी ऑफ गुआडालुपे]] (कॅथलिक धार्मिक प्रतीक) || ४,४५२ || ७,८५२
|-
| [[हार्डिंग काउंटी, न्यू मेक्सिको|हार्डिंग]] || [[मोसकेरो, न्यू मेक्सिको|मोसकेरो]] || [[:वर्ग:इ.स. १९२१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|४ मार्च १९२१]] || युनियन आणि क्वे काउंटीच्या भागांतून || [[वॉरेन जी. हार्डिंग]] (अमेरिकेचे २९ वे राष्ट्राध्यक्ष) || ६५७ || ५,५०६
|-
| [[हिदाल्गो काउंटी, न्यू मेक्सिको|हिदाल्गो]] || [[लॉर्ड्सबर्ग, न्यू मेक्सिको|लॉर्ड्सबर्ग]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९१९]] || ग्रँट काउंटीच्या भागातून || [[गुआडालुपे हिदाल्गोचा तह]] या ऐतिहासिक तहावरून || ४,१७८ || ९,९६३
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[लिया काउंटी, न्यू मेक्सिको|लिया]] || [[लोविंग्टन, न्यू मेक्सिको|लोविंग्टन]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|७ मार्च १९१७]] || एडी आणि चेव्हस काउंटीच्या भागांतून || [[जोसेफ कॅलवे लिया]] (फोर्ट समनरचे संस्थापक) || ७४,४५५ || ११,३८०
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[लिंकन काउंटी, न्यू मेक्सिको|लिंकन]] || [[करिझोजो, न्यू मेक्सिको|करिझोजो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ॲब्राहाम लिंकन]] (अमेरिकेचे १६ वे राष्ट्राध्यक्ष) || २०,२६९ || १२,५१२
|-
| [[लॉस अलामोस काउंटी, न्यू मेक्सिको|लॉस अलामोस]] || [[लॉस अलामोस, न्यू मेक्सिको|लॉस अलामोस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९४९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९४९]] || सँडोव्हाल आणि सांता फे काउंटीच्या भागांतून || [[लॉस अलामोस]] (स्पॅनिश भाषेत 'पॉपलरची झाडे') || १९,४४४ || २८२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[लूना काउंटी, न्यू मेक्सिको|लूना]] || [[डेमिंग, न्यू मेक्सिको|डेमिंग]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९०१]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सोलोमन लूना]] (स्थानिक राजकीय नेता) || २५,४२७ || ७,७१९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[मॅककिन्ली काउंटी, न्यू मेक्सिको|मॅककिन्ली]] || [[गॅलप, न्यू मेक्सिको|गॅलप]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२३ फेब्रुवारी १८९९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[विल्यम मॅककिन्ली]] (अमेरिकेचे २५ वे राष्ट्राध्यक्ष) || ७२,९०२ || १४,१२९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[मोरा काउंटी, न्यू मेक्सिको|मोरा]] || [[मोरा, न्यू मेक्सिको|मोरा]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१ फेब्रुवारी १८६०]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मोरा, न्यू मेक्सिको|मोरा शहर]] (स्पॅनिश भाषेत 'ब्लॅकबेरी') || ४,१८९ || ५,०३२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ओटेरो काउंटी, न्यू मेक्सिको|ओटेरो]] || [[ॲलामो गॉर्डो, न्यू मेक्सिको|ॲलामो गॉर्डो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३० जानेवारी १८९९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मिगेल अंतोनियो ओटेरो]] (प्रादेशिक प्रतिनिधी) || ६७,८३९ || १७,९०७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[क्वे काउंटी, न्यू मेक्सिको|क्वे]] || [[टुकुमकारी, न्यू मेक्सिको|टुकुमकारी]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मॅथ्यू एस. क्वे]] (पेनसिल्व्हेनियाचे अमेरिकन सिनेटर) || ८,९८९ || ७,४६९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[रिओ अरिबा काउंटी, न्यू मेक्सिको|रिओ अरिबा]] || [[टिएरा अमारिया, न्यू मेक्सिको|टिएरा अमारिया]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[रिओ ग्रँडे]] नदीच्या वरच्या भागावरून (स्पॅनिश: 'उंच नदी') || ४०,३६३ || १५,२७१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[रूझवेल्ट काउंटी, न्यू मेक्सिको|रूझवेल्ट]] || [[पोर्टालेस, न्यू मेक्सिको|पोर्टालेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[थियोडोर रूझवेल्ट]] (अमेरिकेचे २६ वे राष्ट्राध्यक्ष) || १८,५०० || ६,३४२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सॅन हुआन काउंटी, न्यू मेक्सिको|सॅन हुआन]] || [[ॲझटेक, न्यू मेक्सिको|ॲझटेक]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२४ फेब्रुवारी १८८७]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सॅन हुआन नदी (कॉलोराडो नदी)|सॅन हुआन नदीवरून]] || १,२१,६६१ || १४,२८१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सॅन मिगेल काउंटी, न्यू मेक्सिको|सॅन मिगेल]] || [[लास व्हेगास, न्यू मेक्सिको|लास व्हेगास]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सॅन मिगेल दे बाजो एल पोवेनिर]] या कॅथलिक चर्चवरून || २७,२०१ || १२,२१७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सँडोव्हाल काउंटी, न्यू मेक्सिको|सँडोव्हाल]] || [[बर्नालियो, न्यू मेक्सिको|बर्नालियो]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१० मार्च १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सँडोव्हाल]] (स्पॅनिश जमीनदार कुटुंब) || १,४८,८३४ || ९,६२०
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सांता फे काउंटी, न्यू मेक्सिको|सांता फे]] || [[सांता फे, न्यू मेक्सिको|सांता फे]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सांता फे, न्यू मेक्सिको|सांता फे नगर]] (स्पॅनिश: 'पवित्र श्रद्धा') || १,५४,८२३ || ४,९४५
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सियेरा काउंटी, न्यू मेक्सिको|सियेरा]] || [[ट्रूथ ऑर कॉन्सिक्वेन्सेस, न्यू मेक्सिको|ट्रूथ ऑर कॉन्सिक्वेन्सेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८४४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ एप्रिल १८८४]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ब्लॅक रेंज]] पर्वतरांगेवरून (स्पॅनिश: सियेरा) || ११,५७६ || १०,९२७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सोकोरो काउंटी, न्यू मेक्सिको|सोकोरो]] || [[सोकोरो, न्यू मेक्सिको|सोकोरो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || स्पॅनिश शब्द 'सोकोरो' (मदत किंवा साहाय्य) वरून || १६,५९५ || १५,६०७
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| [[ताओस काउंटी, न्यू मेक्सिको|ताओस]] || [[ताओस, न्यू मेक्सिको|ताओस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[टाओस पुएब्लो]] (स्थानिक नेटिव्ह अमेरिकन शहर) || ३४,४८९ || ५,७०६
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[टॉरान्स काउंटी, न्यू मेक्सिको|टॉरान्स]] || [[एस्तान्सिया, न्यू मेक्सिको|एस्टान्सिया]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[फ्रांसिस जे. टॉरन्स]] (न्यू मेक्सिको सेंट्रल रेल्वेचे अध्यक्ष) || १५,०५३ || ८,५३९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[युनियन काउंटी, न्यू मेक्सिको|युनियन]] || [[क्लेटन, न्यू मेक्सिको|क्लेटन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१३ फेब्रुवारी १८९३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || वेगवेगळ्या काउंटींचे भाग एकत्र (युनियन) आल्यामुळे || ४,०७९ || ९,८५८
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[व्हेलेन्सिया काउंटी, न्यू मेक्सिको|व्हेलेन्सिया]] || [[लोस लुनास, न्यू मेक्सिको|लोस लुनास]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[व्हेलेन्सिया, स्पेन]] शहरावरून || ७६,२०५ || २,७६६
|}
== हेसुद्धा पहा ==
* [[कॅन्ससमधील काउंटी]]
* [[कॉलोराडोमधील काउंटी]]
* [[ॲरिझोनामधील काउंटी]]
* [[युटामधील काउंटी]]
== संदर्भ आणि नोंदी ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:न्यू मेक्सिकोमधील काउंटी|*]]
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अभय नातू
206
/* काउंटींची यादी */
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wikitext
text/x-wiki
{{न्यू मेक्सिकोमधील काउंट्यांचा नकाशा}}
[[अमेरिका|अमेरिकेच्या]] [[न्यू मेक्सिको]] राज्यात एकूण ३३ [[काउंटी]] आहेत. ६ जानेवारी १९१२ रोजी न्यू मेक्सिको राज्याची निर्मिती झाली तेव्हा राज्यात २६ मूळ काउंटी अस्तित्वात होत्या.
== काउंटींची यादी ==
{| class="wikitable sortable" style="font-size: 85%; text-align: center;"
|- style="background: #e0e0e0;"
! काउंटी !! काउंटी ठिकाण !! निर्मिती दिनांक/वर्ष !! निर्मिती !! नावाचा उगम !! लोकसंख्या<br />(२०२०) !! क्षेत्रफळ (चौ. किमी)
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[बर्नालियो काउंटी, न्यू मेक्सिको|बर्नालियो]] || [[अल्बुकर्की, न्यू मेक्सिको|अल्बुकर्की]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|८ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[बर्नालियो]] (स्थानिक स्पॅनिश व्यापारी कुटुंब) || ६,७६,४४९ || ३,०२०
|-
| [[कॅट्रन काउंटी, न्यू मेक्सिको|कॅट्रन]] || [[रिझर्व्ह, न्यू मेक्सिको|रिझर्व्ह]] || [[:वर्ग:इ.स. १९२१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९२१]] || सोकोरो काउंटीच्या भागातून || [[थॉमस बी. कैट्रॉन]] (न्यू मेक्सिकोचे सिनेटर) || ३,५७९ || १७,९०१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[शावेस काउंटी, न्यू मेक्सिको|शावेस]] || [[रॉसवेल, न्यू मेक्सिको|रॉसवेल]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १८८९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जोस फ्रान्सिस्को चेव्हस]] (सैनिकी अधिकारी आणि राजकारणी) || ६५,१५७ || १५,७३४
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सिबोला काउंटी, न्यू मेक्सिको|सिबोला]] || [[ग्रँट्स, न्यू मेक्सिको|ग्रँट्स]] || [[:वर्ग:इ.स. १९८१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१९ जून १९८१]] || व्हेलेन्सिया काउंटीच्या विभाजनातून || [[सिबोलाचे सात सुवर्ण शहरे]] या पौराणिक कथेवरून || २७,२१३ || ११,७६३
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[कोलफॅक्स काउंटी, न्यू मेक्सिको|कोलफॅक्स]] || [[रातों, न्यू मेक्सिको|रातों]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ जानेवारी १८६९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[स्कायलर कोलफॅक्स]] (अमेरिकेचे १७ वे उपराष्ट्राध्यक्ष) || १२,३८७ || ९,७३०
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[करी काउंटी, न्यू मेक्सिको|करी]] || [[क्लोव्हिस, न्यू मेक्सिको|क्लोव्हिस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९०९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जॉर्ज करी (राजकारणी)|जॉर्ज करी]] (न्यू मेक्सिको प्रांताचे गव्हर्नर) || ४८,४३० || ३,६४६
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[डी बाका काउंटी, न्यू मेक्सिको|डी बाका]] || [[फोर्ट समनर, न्यू मेक्सिको|फोर्ट समनर]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९१७]] || गुआडालुपे आणि चेव्हस काउंटीच्या भागांतून || [[इझेकिएल काबेझा डी बाका]] (न्यू मेक्सिकोचे २ रे गव्हर्नर) || २,२९८ || ६,०४५
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[दॉन्या आना काउंटी, न्यू मेक्सिको|दॉन्या आना]] || [[लास क्रुसेस, न्यू मेक्सिको|लास क्रुसेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[डोन्या आना रोबलेडो]] (१७ व्या शतकातील स्पॅनिश महिला) || २,१९,५६१ || ९,८०८
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[इडी काउंटी, न्यू मेक्सिको|इडी]] || [[कार्लसबॅड, न्यू मेक्सिको|कार्लसबॅड]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १८८९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[चार्ल्स बी. इडी]] (स्थानिक उद्योजक) || ६२,३१४ || १०,८३१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ग्रँट काउंटी, न्यू मेक्सिको|ग्रँट]] || [[सिल्व्हर सिटी, न्यू मेक्सिको|सिल्व्हर सिटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६८ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३० जानेवारी १८६८]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[युलिसेस एस. ग्रँट]] (अमेरिकेचे १८ वे राष्ट्राध्यक्ष) || २८,१८५ || १०,२७७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ग्वादालुपे काउंटी, न्यू मेक्सिको|ग्वादालुपे]] || [[सांता रोसा, न्यू मेक्सिको|सांता रोसा]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२६ फेब्रुवारी १८९१]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[अवर लेडी ऑफ ग्वादालुपे]] || ४,४५२ || ७,८५२
|-
| [[हार्डिंग काउंटी, न्यू मेक्सिको|हार्डिंग]] || [[मोसकेरो, न्यू मेक्सिको|मोसकेरो]] || [[:वर्ग:इ.स. १९२१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|४ मार्च १९२१]] || युनियन आणि क्वे काउंटीच्या भागांतून || [[वॉरेन जी. हार्डिंग]] (अमेरिकेचे २९ वे राष्ट्राध्यक्ष) || ६५७ || ५,५०६
|-
| [[हिदाल्गो काउंटी, न्यू मेक्सिको|हिदाल्गो]] || [[लॉर्ड्सबर्ग, न्यू मेक्सिको|लॉर्ड्सबर्ग]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९१९]] || ग्रँट काउंटीच्या भागातून || [[गुआडालुपे हिदाल्गोचा तह]] या ऐतिहासिक तहावरून || ४,१७८ || ९,९६३
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[लिया काउंटी, न्यू मेक्सिको|लिया]] || [[लोविंग्टन, न्यू मेक्सिको|लोविंग्टन]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|७ मार्च १९१७]] || एडी आणि चेव्हस काउंटीच्या भागांतून || [[जोसेफ कॅलवे लिया]] (फोर्ट समनरचे संस्थापक) || ७४,४५५ || ११,३८०
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[लिंकन काउंटी, न्यू मेक्सिको|लिंकन]] || [[करिझोजो, न्यू मेक्सिको|करिझोजो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ॲब्राहाम लिंकन]] (अमेरिकेचे १६ वे राष्ट्राध्यक्ष) || २०,२६९ || १२,५१२
|-
| [[लॉस अलामोस काउंटी, न्यू मेक्सिको|लॉस अलामोस]] || [[लॉस अलामोस, न्यू मेक्सिको|लॉस अलामोस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९४९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९४९]] || सँडोव्हाल आणि सांता फे काउंटीच्या भागांतून || [[लॉस अलामोस]] (स्पॅनिश भाषेत 'पॉपलरची झाडे') || १९,४४४ || २८२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[लूना काउंटी, न्यू मेक्सिको|लूना]] || [[डेमिंग, न्यू मेक्सिको|डेमिंग]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९०१]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सोलोमन लूना]] (स्थानिक राजकीय नेता) || २५,४२७ || ७,७१९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[मॅककिन्ली काउंटी, न्यू मेक्सिको|मॅककिन्ली]] || [[गॅलप, न्यू मेक्सिको|गॅलप]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२३ फेब्रुवारी १८९९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[विल्यम मॅककिन्ली]] (अमेरिकेचे २५ वे राष्ट्राध्यक्ष) || ७२,९०२ || १४,१२९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[मोरा काउंटी, न्यू मेक्सिको|मोरा]] || [[मोरा, न्यू मेक्सिको|मोरा]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१ फेब्रुवारी १८६०]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मोरा, न्यू मेक्सिको|मोरा शहर]] (स्पॅनिश भाषेत 'ब्लॅकबेरी') || ४,१८९ || ५,०३२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ओटेरो काउंटी, न्यू मेक्सिको|ओटेरो]] || [[ॲलामो गॉर्डो, न्यू मेक्सिको|ॲलामो गॉर्डो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३० जानेवारी १८९९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मिगेल अंतोनियो ओटेरो]] (प्रादेशिक प्रतिनिधी) || ६७,८३९ || १७,९०७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[क्वे काउंटी, न्यू मेक्सिको|क्वे]] || [[टुकुमकारी, न्यू मेक्सिको|टुकुमकारी]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मॅथ्यू एस. क्वे]] (पेनसिल्व्हेनियाचे अमेरिकन सिनेटर) || ८,९८९ || ७,४६९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[रिओ अरिबा काउंटी, न्यू मेक्सिको|रिओ अरिबा]] || [[टिएरा अमारिया, न्यू मेक्सिको|टिएरा अमारिया]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[रिओ ग्रँडे]] नदीच्या वरच्या भागावरून (स्पॅनिश: 'उंच नदी') || ४०,३६३ || १५,२७१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[रूझवेल्ट काउंटी, न्यू मेक्सिको|रूझवेल्ट]] || [[पोर्टालेस, न्यू मेक्सिको|पोर्टालेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[थियोडोर रूझवेल्ट]] (अमेरिकेचे २६ वे राष्ट्राध्यक्ष) || १८,५०० || ६,३४२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सॅन हुआन काउंटी, न्यू मेक्सिको|सॅन हुआन]] || [[ॲझटेक, न्यू मेक्सिको|ॲझटेक]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२४ फेब्रुवारी १८८७]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सॅन हुआन नदी (कॉलोराडो नदी)|सॅन हुआन नदीवरून]] || १,२१,६६१ || १४,२८१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सॅन मिगेल काउंटी, न्यू मेक्सिको|सॅन मिगेल]] || [[लास व्हेगास, न्यू मेक्सिको|लास व्हेगास]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सॅन मिगेल दे बाजो एल पोवेनिर]] या कॅथलिक चर्चवरून || २७,२०१ || १२,२१७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सँडोव्हाल काउंटी, न्यू मेक्सिको|सँडोव्हाल]] || [[बर्नालियो, न्यू मेक्सिको|बर्नालियो]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१० मार्च १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सँडोव्हाल]] (स्पॅनिश जमीनदार कुटुंब) || १,४८,८३४ || ९,६२०
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सांता फे काउंटी, न्यू मेक्सिको|सांता फे]] || [[सांता फे, न्यू मेक्सिको|सांता फे]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सांता फे, न्यू मेक्सिको|सांता फे नगर]] (स्पॅनिश: 'पवित्र श्रद्धा') || १,५४,८२३ || ४,९४५
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सियेरा काउंटी, न्यू मेक्सिको|सियेरा]] || [[ट्रूथ ऑर कॉन्सिक्वेन्सेस, न्यू मेक्सिको|ट्रूथ ऑर कॉन्सिक्वेन्सेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८४४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ एप्रिल १८८४]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ब्लॅक रेंज]] पर्वतरांगेवरून (स्पॅनिश: सियेरा) || ११,५७६ || १०,९२७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सोकोरो काउंटी, न्यू मेक्सिको|सोकोरो]] || [[सोकोरो, न्यू मेक्सिको|सोकोरो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || स्पॅनिश शब्द 'सोकोरो' (मदत किंवा साहाय्य) वरून || १६,५९५ || १५,६०७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ताओस काउंटी, न्यू मेक्सिको|ताओस]] || [[ताओस, न्यू मेक्सिको|ताओस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[टाओस पुएब्लो]] (स्थानिक नेटिव्ह अमेरिकन शहर) || ३४,४८९ || ५,७०६
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[टॉरान्स काउंटी, न्यू मेक्सिको|टॉरान्स]] || [[एस्तान्सिया, न्यू मेक्सिको|एस्टान्सिया]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[फ्रांसिस जे. टॉरन्स]] (न्यू मेक्सिको सेंट्रल रेल्वेचे अध्यक्ष) || १५,०५३ || ८,५३९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[युनियन काउंटी, न्यू मेक्सिको|युनियन]] || [[क्लेटन, न्यू मेक्सिको|क्लेटन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१३ फेब्रुवारी १८९३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || वेगवेगळ्या काउंटींचे भाग एकत्र (युनियन) आल्यामुळे || ४,०७९ || ९,८५८
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[व्हेलेन्सिया काउंटी, न्यू मेक्सिको|व्हेलेन्सिया]] || [[लोस लुनास, न्यू मेक्सिको|लोस लुनास]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[व्हेलेन्सिया, स्पेन]] शहरावरून || ७६,२०५ || २,७६६
|}
== हेसुद्धा पहा ==
* [[कॅन्ससमधील काउंटी]]
* [[कॉलोराडोमधील काउंटी]]
* [[ॲरिझोनामधील काउंटी]]
* [[युटामधील काउंटी]]
== संदर्भ आणि नोंदी ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:न्यू मेक्सिकोमधील काउंटी|*]]
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अभय नातू
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/* काउंटींची यादी */
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text/x-wiki
{{न्यू मेक्सिकोमधील काउंट्यांचा नकाशा}}
[[अमेरिका|अमेरिकेच्या]] [[न्यू मेक्सिको]] राज्यात एकूण ३३ [[काउंटी]] आहेत. ६ जानेवारी १९१२ रोजी न्यू मेक्सिको राज्याची निर्मिती झाली तेव्हा राज्यात २६ मूळ काउंटी अस्तित्वात होत्या.
== काउंटींची यादी ==
{| class="wikitable sortable" style="font-size: 85%; text-align: center;"
|- style="background: #e0e0e0;"
! काउंटी !! काउंटी ठिकाण !! निर्मिती दिनांक/वर्ष !! निर्मिती !! नावाचा उगम !! लोकसंख्या<br />(२०२०) !! क्षेत्रफळ (चौ. किमी)
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| [[बर्नालियो काउंटी, न्यू मेक्सिको|बर्नालियो]] || [[अल्बुकर्की, न्यू मेक्सिको|अल्बुकर्की]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|८ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[बेर्नालियो]] (स्थानिक स्पॅनिश व्यापारी कुटुंब) || ६,७६,४४९ || ३,०२०
|-
| [[कॅट्रन काउंटी, न्यू मेक्सिको|कॅट्रन]] || [[रिझर्व्ह, न्यू मेक्सिको|रिझर्व्ह]] || [[:वर्ग:इ.स. १९२१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९२१]] || सोकोरो काउंटीच्या भागातून || [[थॉमस बी. कात्रोन]] (न्यू मेक्सिकोचे सिनेटर) || ३,५७९ || १७,९०१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[शावेस काउंटी, न्यू मेक्सिको|शावेस]] || [[रॉसवेल, न्यू मेक्सिको|रॉसवेल]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १८८९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जोस फ्रांसिस्को शावेस]] (सैनिकी अधिकारी आणि राजकारणी) || ६५,१५७ || १५,७३४
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| [[सिबोला काउंटी, न्यू मेक्सिको|सिबोला]] || [[ग्रँट्स, न्यू मेक्सिको|ग्रँट्स]] || [[:वर्ग:इ.स. १९८१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१९ जून १९८१]] || व्हेलेन्सिया काउंटीच्या विभाजनातून || [[सिबोलाचे सात सुवर्ण शहरे]] या पौराणिक कथेवरून || २७,२१३ || ११,७६३
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| [[कोलफॅक्स काउंटी, न्यू मेक्सिको|कोलफॅक्स]] || [[रातों, न्यू मेक्सिको|रातों]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ जानेवारी १८६९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[स्कायलर कोलफॅक्स]] (अमेरिकेचे १७ वे उपराष्ट्राध्यक्ष) || १२,३८७ || ९,७३०
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| [[करी काउंटी, न्यू मेक्सिको|करी]] || [[क्लोव्हिस, न्यू मेक्सिको|क्लोव्हिस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९०९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जॉर्ज करी (राजकारणी)|जॉर्ज करी]] (न्यू मेक्सिको प्रांताचे गव्हर्नर) || ४८,४३० || ३,६४६
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| [[डी बाका काउंटी, न्यू मेक्सिको|डी बाका]] || [[फोर्ट समनर, न्यू मेक्सिको|फोर्ट समनर]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९१७]] || ग्वादालुपे आणि शावेस काउंटीच्या भागांतून || [[इझेकिएल काबेझा डी बाका]] (न्यू मेक्सिकोचे २ रे गव्हर्नर) || २,२९८ || ६,०४५
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| [[दॉन्या आना काउंटी, न्यू मेक्सिको|दॉन्या आना]] || [[लास क्रुसेस, न्यू मेक्सिको|लास क्रुसेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[दॉन्या आना रोब्लेदो]] (१७ व्या शतकातील स्पॅनिश महिला) || २,१९,५६१ || ९,८०८
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| [[इडी काउंटी, न्यू मेक्सिको|इडी]] || [[कार्लसबॅड, न्यू मेक्सिको|कार्लसबॅड]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १८८९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[चार्ल्स बी. इडी]] (स्थानिक उद्योजक) || ६२,३१४ || १०,८३१
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| [[ग्रँट काउंटी, न्यू मेक्सिको|ग्रँट]] || [[सिल्व्हर सिटी, न्यू मेक्सिको|सिल्व्हर सिटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६८ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३० जानेवारी १८६८]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[युलिसेस एस. ग्रँट]] (अमेरिकेचे १८ वे राष्ट्राध्यक्ष) || २८,१८५ || १०,२७७
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| [[ग्वादालुपे काउंटी, न्यू मेक्सिको|ग्वादालुपे]] || [[सांता रोसा, न्यू मेक्सिको|सांता रोसा]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२६ फेब्रुवारी १८९१]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[अवर लेडी ऑफ ग्वादालुपे]] || ४,४५२ || ७,८५२
|-
| [[हार्डिंग काउंटी, न्यू मेक्सिको|हार्डिंग]] || [[मोसकेरो, न्यू मेक्सिको|मोसकेरो]] || [[:वर्ग:इ.स. १९२१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|४ मार्च १९२१]] || युनियन आणि क्वे काउंटीच्या भागांतून || [[वॉरेन जी. हार्डिंग]] (अमेरिकेचे २९ वे राष्ट्राध्यक्ष) || ६५७ || ५,५०६
|-
| [[हिदाल्गो काउंटी, न्यू मेक्सिको|हिदाल्गो]] || [[लॉर्ड्सबर्ग, न्यू मेक्सिको|लॉर्ड्सबर्ग]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९१९]] || ग्रँट काउंटीच्या भागातून || [[ग्वादालुपे हिदाल्गोचा तह]] या ऐतिहासिक तहावरून || ४,१७८ || ९,९६३
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| [[लिया काउंटी, न्यू मेक्सिको|लिया]] || [[लोविंग्टन, न्यू मेक्सिको|लोविंग्टन]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|७ मार्च १९१७]] || एडी आणि चेव्हस काउंटीच्या भागांतून || [[जोसेफ कॅलवे लिया]] (फोर्ट समनरचे संस्थापक) || ७४,४५५ || ११,३८०
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| [[लिंकन काउंटी, न्यू मेक्सिको|लिंकन]] || [[करिझोजो, न्यू मेक्सिको|करिझोजो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[अब्राहाम लिंकन]] (अमेरिकेचे १६ वे राष्ट्राध्यक्ष) || २०,२६९ || १२,५१२
|-
| [[लॉस अलामोस काउंटी, न्यू मेक्सिको|लॉस अलामोस]] || [[लॉस अलामोस, न्यू मेक्सिको|लॉस अलामोस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९४९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९४९]] || सँडोव्हाल आणि सांता फे काउंटीच्या भागांतून || [[लॉस अलामोस]] (स्पॅनिश भाषेत 'पॉपलरची झाडे') || १९,४४४ || २८२
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| [[लूना काउंटी, न्यू मेक्सिको|लूना]] || [[डेमिंग, न्यू मेक्सिको|डेमिंग]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९०१]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सोलोमन लूना]] (स्थानिक राजकीय नेता) || २५,४२७ || ७,७१९
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| [[मॅककिन्ली काउंटी, न्यू मेक्सिको|मॅककिन्ली]] || [[गॅलप, न्यू मेक्सिको|गॅलप]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२३ फेब्रुवारी १८९९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[विल्यम मॅककिन्ली]] (अमेरिकेचे २५ वे राष्ट्राध्यक्ष) || ७२,९०२ || १४,१२९
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| [[मोरा काउंटी, न्यू मेक्सिको|मोरा]] || [[मोरा, न्यू मेक्सिको|मोरा]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१ फेब्रुवारी १८६०]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मोरा, न्यू मेक्सिको|मोरा शहर]] (स्पॅनिश भाषेत 'ब्लॅकबेरी') || ४,१८९ || ५,०३२
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| [[ओटेरो काउंटी, न्यू मेक्सिको|ओटेरो]] || [[ॲलामो गॉर्डो, न्यू मेक्सिको|ॲलामो गॉर्डो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३० जानेवारी १८९९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मिगेल अंतोनियो ओटेरो]] (प्रादेशिक प्रतिनिधी) || ६७,८३९ || १७,९०७
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| [[क्वे काउंटी, न्यू मेक्सिको|क्वे]] || [[टुकुमकारी, न्यू मेक्सिको|टुकुमकारी]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मॅथ्यू एस. क्वे]] (पेनसिल्व्हेनियाचे अमेरिकन सिनेटर) || ८,९८९ || ७,४६९
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| [[रिओ अरिबा काउंटी, न्यू मेक्सिको|रिओ अरिबा]] || [[टिएरा अमारिया, न्यू मेक्सिको|टिएरा अमारिया]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[रिओ ग्रांदे नदी]]च्या वरच्या भागावरून (स्पॅनिश: 'उंच नदी') || ४०,३६३ || १५,२७१
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| [[रूझवेल्ट काउंटी, न्यू मेक्सिको|रूझवेल्ट]] || [[पोर्टालेस, न्यू मेक्सिको|पोर्टालेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[थियोडोर रूझवेल्ट]] (अमेरिकेचे २६ वे राष्ट्राध्यक्ष) || १८,५०० || ६,३४२
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| [[सॅन हुआन काउंटी, न्यू मेक्सिको|सॅन हुआन]] || [[ॲझटेक, न्यू मेक्सिको|ॲझटेक]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२४ फेब्रुवारी १८८७]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सॅन हुआन नदी (कॉलोराडो नदी)|सॅन हुआन नदीवरून]] || १,२१,६६१ || १४,२८१
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| [[सॅन मिगेल काउंटी, न्यू मेक्सिको|सॅन मिगेल]] || [[लास व्हेगास, न्यू मेक्सिको|लास व्हेगास]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सॅन मिगेल दे बाहो एल पोवेनिर]] या कॅथलिक चर्चवरून || २७,२०१ || १२,२१७
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| [[सँडोव्हाल काउंटी, न्यू मेक्सिको|सँडोव्हाल]] || [[बर्नालियो, न्यू मेक्सिको|बर्नालियो]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१० मार्च १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सँडोव्हाल]] (स्पॅनिश जमीनदार कुटुंब) || १,४८,८३४ || ९,६२०
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सांता फे काउंटी, न्यू मेक्सिको|सांता फे]] || [[सांता फे, न्यू मेक्सिको|सांता फे]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सांता फे, न्यू मेक्सिको|सांता फे नगर]] (स्पॅनिश: 'पवित्र श्रद्धा') || १,५४,८२३ || ४,९४५
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सियेरा काउंटी, न्यू मेक्सिको|सियेरा]] || [[ट्रूथ ऑर कॉन्सिक्वेन्सेस, न्यू मेक्सिको|ट्रूथ ऑर कॉन्सिक्वेन्सेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८४४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ एप्रिल १८८४]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ब्लॅक रेंज]] पर्वतरांगेवरून (स्पॅनिश: सियेरा) || ११,५७६ || १०,९२७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सोकोरो काउंटी, न्यू मेक्सिको|सोकोरो]] || [[सोकोरो, न्यू मेक्सिको|सोकोरो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || स्पॅनिश शब्द 'सोकोरो' (मदत किंवा साहाय्य) वरून || १६,५९५ || १५,६०७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ताओस काउंटी, न्यू मेक्सिको|ताओस]] || [[ताओस, न्यू मेक्सिको|ताओस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ताओस पेब्लो]] (स्थानिक नेटिव्ह अमेरिकन शहर) || ३४,४८९ || ५,७०६
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[टॉरान्स काउंटी, न्यू मेक्सिको|टॉरान्स]] || [[एस्तान्सिया, न्यू मेक्सिको|एस्टान्सिया]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[फ्रांसिस जे. टॉरान्स]] (न्यू मेक्सिको सेंट्रल रेल्वेचे अध्यक्ष) || १५,०५३ || ८,५३९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[युनियन काउंटी, न्यू मेक्सिको|युनियन]] || [[क्लेटन, न्यू मेक्सिको|क्लेटन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१३ फेब्रुवारी १८९३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || वेगवेगळ्या काउंटींचे भाग एकत्र (युनियन) आल्यामुळे || ४,०७९ || ९,८५८
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[व्हेलेन्सिया काउंटी, न्यू मेक्सिको|व्हेलेन्सिया]] || [[लोस लुनास, न्यू मेक्सिको|लोस लुनास]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[व्हेलेन्सिया, स्पेन]] शहरावरून || ७६,२०५ || २,७६६
|}
== हेसुद्धा पहा ==
* [[कॅन्ससमधील काउंटी]]
* [[कॉलोराडोमधील काउंटी]]
* [[ॲरिझोनामधील काउंटी]]
* [[युटामधील काउंटी]]
== संदर्भ आणि नोंदी ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:न्यू मेक्सिकोमधील काउंटी|*]]
e1jvz92zaqvbjz0lbmfu255g46jp5hf
2709854
2709849
2026-09-16T03:45:40Z
अभय नातू
206
/* काउंटींची यादी */
2709854
wikitext
text/x-wiki
{{न्यू मेक्सिकोमधील काउंट्यांचा नकाशा}}
[[अमेरिका|अमेरिकेच्या]] [[न्यू मेक्सिको]] राज्यात एकूण ३३ [[काउंटी]] आहेत. ६ जानेवारी १९१२ रोजी न्यू मेक्सिको राज्याची निर्मिती झाली तेव्हा राज्यात २६ मूळ काउंटी अस्तित्वात होत्या.
== काउंटींची यादी ==
{| class="wikitable sortable" style="font-size: 85%; text-align: center;"
|- style="background: #e0e0e0;"
! काउंटी !! काउंटी ठिकाण !! निर्मिती दिनांक/वर्ष !! निर्मिती !! नावाचा उगम !! लोकसंख्या<br />(२०२०) !! क्षेत्रफळ (चौ. किमी)
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[बर्नालियो काउंटी, न्यू मेक्सिको|बर्नालियो]] || [[अल्बुकर्की, न्यू मेक्सिको|अल्बुकर्की]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|८ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[बेर्नालियो]] (स्थानिक स्पॅनिश व्यापारी कुटुंब) || ६,७६,४४९ || ३,०२०
|-
| [[कॅट्रन काउंटी, न्यू मेक्सिको|कॅट्रन]] || [[रिझर्व्ह, न्यू मेक्सिको|रिझर्व्ह]] || [[:वर्ग:इ.स. १९२१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९२१]] || सोकोरो काउंटीच्या भागातून || [[थॉमस बी. कात्रोन]] (न्यू मेक्सिकोचे सिनेटर) || ३,५७९ || १७,९०१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[शावेस काउंटी, न्यू मेक्सिको|शावेस]] || [[रॉसवेल, न्यू मेक्सिको|रॉसवेल]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १८८९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जोस फ्रांसिस्को शावेस]] (सैनिकी अधिकारी आणि राजकारणी) || ६५,१५७ || १५,७३४
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सिबोला काउंटी, न्यू मेक्सिको|सिबोला]] || [[ग्रँट्स, न्यू मेक्सिको|ग्रँट्स]] || [[:वर्ग:इ.स. १९८१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१९ जून १९८१]] || व्हेलेन्सिया काउंटीच्या विभाजनातून || [[सिबोलाचे सात सुवर्ण शहरे]] या पौराणिक कथेवरून || २७,२१३ || ११,७६३
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[कोलफॅक्स काउंटी, न्यू मेक्सिको|कोलफॅक्स]] || [[रातों, न्यू मेक्सिको|रातों]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ जानेवारी १८६९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[स्कायलर कोलफॅक्स]] (अमेरिकेचे १७ वे उपराष्ट्राध्यक्ष) || १२,३८७ || ९,७३०
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[करी काउंटी, न्यू मेक्सिको|करी]] || [[क्लोव्हिस, न्यू मेक्सिको|क्लोव्हिस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९०९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जॉर्ज करी (राजकारणी)|जॉर्ज करी]] (न्यू मेक्सिको प्रांताचे गव्हर्नर) || ४८,४३० || ३,६४६
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[डी बाका काउंटी, न्यू मेक्सिको|डी बाका]] || [[फोर्ट समनर, न्यू मेक्सिको|फोर्ट समनर]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९१७]] || ग्वादालुपे आणि शावेस काउंटीच्या भागांतून || [[इझेकिएल काबेझा डी बाका]] (न्यू मेक्सिकोचे २ रे गव्हर्नर) || २,२९८ || ६,०४५
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[दॉन्या आना काउंटी, न्यू मेक्सिको|दॉन्या आना]] || [[लास क्रुसेस, न्यू मेक्सिको|लास क्रुसेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[दॉन्या आना रोब्लेदो]] (१७ व्या शतकातील स्पॅनिश महिला) || २,१९,५६१ || ९,८०८
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[इडी काउंटी, न्यू मेक्सिको|इडी]] || [[कार्लसबॅड, न्यू मेक्सिको|कार्लसबॅड]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १८८९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[चार्ल्स बी. इडी]] (स्थानिक उद्योजक) || ६२,३१४ || १०,८३१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ग्रँट काउंटी, न्यू मेक्सिको|ग्रँट]] || [[सिल्व्हर सिटी, न्यू मेक्सिको|सिल्व्हर सिटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६८ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३० जानेवारी १८६८]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[युलिसेस एस. ग्रँट]] (अमेरिकेचे १८ वे राष्ट्राध्यक्ष) || २८,१८५ || १०,२७७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ग्वादालुपे काउंटी, न्यू मेक्सिको|ग्वादालुपे]] || [[सांता रोसा, न्यू मेक्सिको|सांता रोसा]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२६ फेब्रुवारी १८९१]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[अवर लेडी ऑफ ग्वादालुपे]] || ४,४५२ || ७,८५२
|-
| [[हार्डिंग काउंटी, न्यू मेक्सिको|हार्डिंग]] || [[मोसकेरो, न्यू मेक्सिको|मोसकेरो]] || [[:वर्ग:इ.स. १९२१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|४ मार्च १९२१]] || युनियन आणि क्वे काउंटीच्या भागांतून || [[वॉरेन जी. हार्डिंग]] (अमेरिकेचे २९ वे राष्ट्राध्यक्ष) || ६५७ || ५,५०६
|-
| [[हिदाल्गो काउंटी, न्यू मेक्सिको|हिदाल्गो]] || [[लॉर्ड्सबर्ग, न्यू मेक्सिको|लॉर्ड्सबर्ग]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९१९]] || ग्रँट काउंटीच्या भागातून || [[ग्वादालुपे हिदाल्गोचा तह]] या ऐतिहासिक तहावरून || ४,१७८ || ९,९६३
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ली काउंटी, न्यू मेक्सिको|ली]] || [[लोविंग्टन, न्यू मेक्सिको|लोविंग्टन]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|७ मार्च १९१७]] || एडी आणि चेव्हस काउंटीच्या भागांतून || [[जोसेफ कॅलवे ली]] (फोर्ट समनरचे संस्थापक) || ७४,४५५ || ११,३८०
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[लिंकन काउंटी, न्यू मेक्सिको|लिंकन]] || [[करिझोजो, न्यू मेक्सिको|करिझोजो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[अब्राहाम लिंकन]] (अमेरिकेचे १६ वे राष्ट्राध्यक्ष) || २०,२६९ || १२,५१२
|-
| [[लॉस अलामोस काउंटी, न्यू मेक्सिको|लॉस अलामोस]] || [[लॉस अलामोस, न्यू मेक्सिको|लॉस अलामोस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९४९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९४९]] || सँडोव्हाल आणि सांता फे काउंटीच्या भागांतून || [[लॉस अलामोस]] (स्पॅनिश भाषेत 'पॉपलरची झाडे') || १९,४४४ || २८२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[लूना काउंटी, न्यू मेक्सिको|लूना]] || [[डेमिंग, न्यू मेक्सिको|डेमिंग]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९०१]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सोलोमन लूना]] (स्थानिक राजकीय नेता) || २५,४२७ || ७,७१९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[मॅककिन्ली काउंटी, न्यू मेक्सिको|मॅककिन्ली]] || [[गॅलप, न्यू मेक्सिको|गॅलप]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२३ फेब्रुवारी १८९९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[विल्यम मॅककिन्ली]] (अमेरिकेचे २५ वे राष्ट्राध्यक्ष) || ७२,९०२ || १४,१२९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[मोरा काउंटी, न्यू मेक्सिको|मोरा]] || [[मोरा, न्यू मेक्सिको|मोरा]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१ फेब्रुवारी १८६०]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मोरा, न्यू मेक्सिको|मोरा शहर]] (स्पॅनिश भाषेत 'ब्लॅकबेरी') || ४,१८९ || ५,०३२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ओटेरो काउंटी, न्यू मेक्सिको|ओटेरो]] || [[ॲलामो गॉर्डो, न्यू मेक्सिको|ॲलामो गॉर्डो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३० जानेवारी १८९९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मिगेल अंतोनियो ओटेरो]] (प्रादेशिक प्रतिनिधी) || ६७,८३९ || १७,९०७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[क्वे काउंटी, न्यू मेक्सिको|क्वे]] || [[टुकुमकारी, न्यू मेक्सिको|टुकुमकारी]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मॅथ्यू एस. क्वे]] (पेनसिल्व्हेनियाचे अमेरिकन सिनेटर) || ८,९८९ || ७,४६९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[रिओ अरिबा काउंटी, न्यू मेक्सिको|रिओ अरिबा]] || [[टिएरा अमारिया, न्यू मेक्सिको|टिएरा अमारिया]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[रिओ ग्रांदे नदी]]च्या वरच्या भागावरून (स्पॅनिश: 'उंच नदी') || ४०,३६३ || १५,२७१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[रूझवेल्ट काउंटी, न्यू मेक्सिको|रूझवेल्ट]] || [[पोर्टालेस, न्यू मेक्सिको|पोर्टालेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[थियोडोर रूझवेल्ट]] (अमेरिकेचे २६ वे राष्ट्राध्यक्ष) || १८,५०० || ६,३४२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सॅन हुआन काउंटी, न्यू मेक्सिको|सॅन हुआन]] || [[ॲझटेक, न्यू मेक्सिको|ॲझटेक]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२४ फेब्रुवारी १८८७]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सॅन हुआन नदी (कॉलोराडो नदी)|सॅन हुआन नदीवरून]] || १,२१,६६१ || १४,२८१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सॅन मिगेल काउंटी, न्यू मेक्सिको|सॅन मिगेल]] || [[लास व्हेगास, न्यू मेक्सिको|लास व्हेगास]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सॅन मिगेल दे बाहो एल पोवेनिर]] या कॅथलिक चर्चवरून || २७,२०१ || १२,२१७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सँडोव्हाल काउंटी, न्यू मेक्सिको|सँडोव्हाल]] || [[बर्नालियो, न्यू मेक्सिको|बर्नालियो]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१० मार्च १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सँडोव्हाल]] (स्पॅनिश जमीनदार कुटुंब) || १,४८,८३४ || ९,६२०
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सांता फे काउंटी, न्यू मेक्सिको|सांता फे]] || [[सांता फे, न्यू मेक्सिको|सांता फे]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सांता फे, न्यू मेक्सिको|सांता फे नगर]] (स्पॅनिश: 'पवित्र श्रद्धा') || १,५४,८२३ || ४,९४५
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सियेरा काउंटी, न्यू मेक्सिको|सियेरा]] || [[ट्रूथ ऑर कॉन्सिक्वेन्सेस, न्यू मेक्सिको|ट्रूथ ऑर कॉन्सिक्वेन्सेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८४४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ एप्रिल १८८४]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ब्लॅक रेंज]] पर्वतरांगेवरून (स्पॅनिश: सियेरा) || ११,५७६ || १०,९२७
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| [[सोकोरो काउंटी, न्यू मेक्सिको|सोकोरो]] || [[सोकोरो, न्यू मेक्सिको|सोकोरो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || स्पॅनिश शब्द 'सोकोरो' (मदत किंवा साहाय्य) वरून || १६,५९५ || १५,६०७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ताओस काउंटी, न्यू मेक्सिको|ताओस]] || [[ताओस, न्यू मेक्सिको|ताओस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ताओस पेब्लो]] (स्थानिक नेटिव्ह अमेरिकन शहर) || ३४,४८९ || ५,७०६
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| [[टॉरान्स काउंटी, न्यू मेक्सिको|टॉरान्स]] || [[एस्तान्सिया, न्यू मेक्सिको|एस्टान्सिया]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[फ्रांसिस जे. टॉरान्स]] (न्यू मेक्सिको सेंट्रल रेल्वेचे अध्यक्ष) || १५,०५३ || ८,५३९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[युनियन काउंटी, न्यू मेक्सिको|युनियन]] || [[क्लेटन, न्यू मेक्सिको|क्लेटन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१३ फेब्रुवारी १८९३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || वेगवेगळ्या काउंटींचे भाग एकत्र (युनियन) आल्यामुळे || ४,०७९ || ९,८५८
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[व्हेलेन्सिया काउंटी, न्यू मेक्सिको|व्हेलेन्सिया]] || [[लोस लुनास, न्यू मेक्सिको|लोस लुनास]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[व्हेलेन्सिया, स्पेन]] शहरावरून || ७६,२०५ || २,७६६
|}
== हेसुद्धा पहा ==
* [[कॅन्ससमधील काउंटी]]
* [[कॉलोराडोमधील काउंटी]]
* [[ॲरिझोनामधील काउंटी]]
* [[युटामधील काउंटी]]
== संदर्भ आणि नोंदी ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:न्यू मेक्सिकोमधील काउंटी|*]]
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2709863
2709854
2026-09-16T03:54:12Z
अभय नातू
206
/* काउंटींची यादी */
2709863
wikitext
text/x-wiki
{{न्यू मेक्सिकोमधील काउंट्यांचा नकाशा}}
[[अमेरिका|अमेरिकेच्या]] [[न्यू मेक्सिको]] राज्यात एकूण ३३ [[काउंटी]] आहेत. ६ जानेवारी १९१२ रोजी न्यू मेक्सिको राज्याची निर्मिती झाली तेव्हा राज्यात २६ मूळ काउंटी अस्तित्वात होत्या.
== काउंटींची यादी ==
{| class="wikitable sortable" style="font-size: 85%; text-align: center;"
|- style="background: #e0e0e0;"
! काउंटी !! प्रशासकीय केन्द्र !! निर्मिती दिनांक/वर्ष !! निर्मिती !! नावाचा उगम !! लोकसंख्या<br />(२०२०) !! क्षेत्रफळ (चौ. किमी)
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[बर्नालियो काउंटी, न्यू मेक्सिको|बर्नालियो]] || [[अल्बुकर्की, न्यू मेक्सिको|अल्बुकर्की]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|८ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[बेर्नालियो]] (स्थानिक स्पॅनिश व्यापारी कुटुंब) || ६,७६,४४९ || ३,०२०
|-
| [[कॅट्रन काउंटी, न्यू मेक्सिको|कॅट्रन]] || [[रिझर्व्ह, न्यू मेक्सिको|रिझर्व्ह]] || [[:वर्ग:इ.स. १९२१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९२१]] || सोकोरो काउंटीच्या भागातून || [[थॉमस बी. कात्रोन]] (न्यू मेक्सिकोचे सिनेटर) || ३,५७९ || १७,९०१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[शावेस काउंटी, न्यू मेक्सिको|शावेस]] || [[रॉसवेल, न्यू मेक्सिको|रॉसवेल]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १८८९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जोस फ्रांसिस्को शावेस]] (सैनिकी अधिकारी आणि राजकारणी) || ६५,१५७ || १५,७३४
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सिबोला काउंटी, न्यू मेक्सिको|सिबोला]] || [[ग्रँट्स, न्यू मेक्सिको|ग्रँट्स]] || [[:वर्ग:इ.स. १९८१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१९ जून १९८१]] || व्हेलेन्सिया काउंटीच्या विभाजनातून || [[सिबोलाचे सात सुवर्ण शहरे]] या पौराणिक कथेवरून || २७,२१३ || ११,७६३
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[कोलफॅक्स काउंटी, न्यू मेक्सिको|कोलफॅक्स]] || [[रातों, न्यू मेक्सिको|रातों]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ जानेवारी १८६९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[स्कायलर कोलफॅक्स]] (अमेरिकेचे १७ वे उपराष्ट्राध्यक्ष) || १२,३८७ || ९,७३०
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[करी काउंटी, न्यू मेक्सिको|करी]] || [[क्लोव्हिस, न्यू मेक्सिको|क्लोव्हिस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९०९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[जॉर्ज करी (राजकारणी)|जॉर्ज करी]] (न्यू मेक्सिको प्रांताचे गव्हर्नर) || ४८,४३० || ३,६४६
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[डी बाका काउंटी, न्यू मेक्सिको|डी बाका]] || [[फोर्ट समनर, न्यू मेक्सिको|फोर्ट समनर]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९१७]] || ग्वादालुपे आणि शावेस काउंटीच्या भागांतून || [[इझेकिएल काबेझा डी बाका]] (न्यू मेक्सिकोचे २ रे गव्हर्नर) || २,२९८ || ६,०४५
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[दॉन्या आना काउंटी, न्यू मेक्सिको|दॉन्या आना]] || [[लास क्रुसेस, न्यू मेक्सिको|लास क्रुसेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[दॉन्या आना रोब्लेदो]] (१७ व्या शतकातील स्पॅनिश महिला) || २,१९,५६१ || ९,८०८
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[इडी काउंटी, न्यू मेक्सिको|इडी]] || [[कार्लसबॅड, न्यू मेक्सिको|कार्लसबॅड]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १८८९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[चार्ल्स बी. इडी]] (स्थानिक उद्योजक) || ६२,३१४ || १०,८३१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ग्रँट काउंटी, न्यू मेक्सिको|ग्रँट]] || [[सिल्व्हर सिटी, न्यू मेक्सिको|सिल्व्हर सिटी]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६८ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३० जानेवारी १८६८]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[युलिसेस एस. ग्रँट]] (अमेरिकेचे १८ वे राष्ट्राध्यक्ष) || २८,१८५ || १०,२७७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ग्वादालुपे काउंटी, न्यू मेक्सिको|ग्वादालुपे]] || [[सांता रोसा, न्यू मेक्सिको|सांता रोसा]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२६ फेब्रुवारी १८९१]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[अवर लेडी ऑफ ग्वादालुपे]] || ४,४५२ || ७,८५२
|-
| [[हार्डिंग काउंटी, न्यू मेक्सिको|हार्डिंग]] || [[मोसकेरो, न्यू मेक्सिको|मोसकेरो]] || [[:वर्ग:इ.स. १९२१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|४ मार्च १९२१]] || युनियन आणि क्वे काउंटीच्या भागांतून || [[वॉरेन जी. हार्डिंग]] (अमेरिकेचे २९ वे राष्ट्राध्यक्ष) || ६५७ || ५,५०६
|-
| [[हिदाल्गो काउंटी, न्यू मेक्सिको|हिदाल्गो]] || [[लॉर्ड्सबर्ग, न्यू मेक्सिको|लॉर्ड्सबर्ग]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२५ फेब्रुवारी १९१९]] || ग्रँट काउंटीच्या भागातून || [[ग्वादालुपे हिदाल्गोचा तह]] या ऐतिहासिक तहावरून || ४,१७८ || ९,९६३
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ली काउंटी, न्यू मेक्सिको|ली]] || [[लोविंग्टन, न्यू मेक्सिको|लोविंग्टन]] || [[:वर्ग:इ.स. १९१७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|७ मार्च १९१७]] || एडी आणि चेव्हस काउंटीच्या भागांतून || [[जोसेफ कॅलवे ली]] (फोर्ट समनरचे संस्थापक) || ७४,४५५ || ११,३८०
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[लिंकन काउंटी, न्यू मेक्सिको|लिंकन]] || [[करिझोजो, न्यू मेक्सिको|करिझोजो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ जानेवारी १८६९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[अब्राहाम लिंकन]] (अमेरिकेचे १६ वे राष्ट्राध्यक्ष) || २०,२६९ || १२,५१२
|-
| [[लॉस अलामोस काउंटी, न्यू मेक्सिको|लॉस अलामोस]] || [[लॉस अलामोस, न्यू मेक्सिको|लॉस अलामोस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९४९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९४९]] || सँडोव्हाल आणि सांता फे काउंटीच्या भागांतून || [[लॉस अलामोस]] (स्पॅनिश भाषेत 'पॉपलरची झाडे') || १९,४४४ || २८२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[लूना काउंटी, न्यू मेक्सिको|लूना]] || [[डेमिंग, न्यू मेक्सिको|डेमिंग]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०१ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९०१]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सोलोमन लूना]] (स्थानिक राजकीय नेता) || २५,४२७ || ७,७१९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[मॅककिन्ली काउंटी, न्यू मेक्सिको|मॅककिन्ली]] || [[गॅलप, न्यू मेक्सिको|गॅलप]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२३ फेब्रुवारी १८९९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[विल्यम मॅककिन्ली]] (अमेरिकेचे २५ वे राष्ट्राध्यक्ष) || ७२,९०२ || १४,१२९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[मोरा काउंटी, न्यू मेक्सिको|मोरा]] || [[मोरा, न्यू मेक्सिको|मोरा]] || [[:वर्ग:इ.स. १८६० मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१ फेब्रुवारी १८६०]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मोरा, न्यू मेक्सिको|मोरा शहर]] (स्पॅनिश भाषेत 'ब्लॅकबेरी') || ४,१८९ || ५,०३२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ओटेरो काउंटी, न्यू मेक्सिको|ओटेरो]] || [[ॲलामो गॉर्डो, न्यू मेक्सिको|ॲलामो गॉर्डो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९९ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३० जानेवारी १८९९]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मिगेल अंतोनियो ओटेरो]] (प्रादेशिक प्रतिनिधी) || ६७,८३९ || १७,९०७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[क्वे काउंटी, न्यू मेक्सिको|क्वे]] || [[टुकुमकारी, न्यू मेक्सिको|टुकुमकारी]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[मॅथ्यू एस. क्वे]] (पेनसिल्व्हेनियाचे अमेरिकन सिनेटर) || ८,९८९ || ७,४६९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[रिओ अरिबा काउंटी, न्यू मेक्सिको|रिओ अरिबा]] || [[टिएरा अमारिया, न्यू मेक्सिको|टिएरा अमारिया]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[रिओ ग्रांदे नदी]]च्या वरच्या भागावरून (स्पॅनिश: 'उंच नदी') || ४०,३६३ || १५,२७१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[रूझवेल्ट काउंटी, न्यू मेक्सिको|रूझवेल्ट]] || [[पोर्टालेस, न्यू मेक्सिको|पोर्टालेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२८ फेब्रुवारी १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[थियोडोर रूझवेल्ट]] (अमेरिकेचे २६ वे राष्ट्राध्यक्ष) || १८,५०० || ६,३४२
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सॅन हुआन काउंटी, न्यू मेक्सिको|सॅन हुआन]] || [[ॲझटेक, न्यू मेक्सिको|ॲझटेक]] || [[:वर्ग:इ.स. १८८७ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|२४ फेब्रुवारी १८८७]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सॅन हुआन नदी (कॉलोराडो नदी)|सॅन हुआन नदीवरून]] || १,२१,६६१ || १४,२८१
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सॅन मिगेल काउंटी, न्यू मेक्सिको|सॅन मिगेल]] || [[लास व्हेगास, न्यू मेक्सिको|लास व्हेगास]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सॅन मिगेल दे बाहो एल पोवेनिर]] या कॅथलिक चर्चवरून || २७,२०१ || १२,२१७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सँडोव्हाल काउंटी, न्यू मेक्सिको|सँडोव्हाल]] || [[बर्नालियो, न्यू मेक्सिको|बर्नालियो]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१० मार्च १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सँडोव्हाल]] (स्पॅनिश जमीनदार कुटुंब) || १,४८,८३४ || ९,६२०
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सांता फे काउंटी, न्यू मेक्सिको|सांता फे]] || [[सांता फे, न्यू मेक्सिको|सांता फे]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[सांता फे, न्यू मेक्सिको|सांता फे नगर]] (स्पॅनिश: 'पवित्र श्रद्धा') || १,५४,८२३ || ४,९४५
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[सियेरा काउंटी, न्यू मेक्सिको|सियेरा]] || [[ट्रूथ ऑर कॉन्सिक्वेन्सेस, न्यू मेक्सिको|ट्रूथ ऑर कॉन्सिक्वेन्सेस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८४४ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|३ एप्रिल १८८४]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ब्लॅक रेंज]] पर्वतरांगेवरून (स्पॅनिश: सियेरा) || ११,५७६ || १०,९२७
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| [[सोकोरो काउंटी, न्यू मेक्सिको|सोकोरो]] || [[सोकोरो, न्यू मेक्सिको|सोकोरो]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || स्पॅनिश शब्द 'सोकोरो' (मदत किंवा साहाय्य) वरून || १६,५९५ || १५,६०७
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[ताओस काउंटी, न्यू मेक्सिको|ताओस]] || [[ताओस, न्यू मेक्सिको|ताओस]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[ताओस पेब्लो]] (स्थानिक नेटिव्ह अमेरिकन शहर) || ३४,४८९ || ५,७०६
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[टॉरान्स काउंटी, न्यू मेक्सिको|टॉरान्स]] || [[एस्तान्सिया, न्यू मेक्सिको|एस्टान्सिया]] || [[:वर्ग:इ.स. १९०३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१६ मार्च १९०३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[फ्रांसिस जे. टॉरान्स]] (न्यू मेक्सिको सेंट्रल रेल्वेचे अध्यक्ष) || १५,०५३ || ८,५३९
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[युनियन काउंटी, न्यू मेक्सिको|युनियन]] || [[क्लेटन, न्यू मेक्सिको|क्लेटन]] || [[:वर्ग:इ.स. १८९३ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|१३ फेब्रुवारी १८९३]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || वेगवेगळ्या काउंटींचे भाग एकत्र (युनियन) आल्यामुळे || ४,०७९ || ९,८५८
|- style="background: #e6f2ff;"
| [[व्हेलेन्सिया काउंटी, न्यू मेक्सिको|व्हेलेन्सिया]] || [[लोस लुनास, न्यू मेक्सिको|लोस लुनास]] || [[:वर्ग:इ.स. १८५२ मध्ये निर्मित अमेरिकेच्या काउंट्या|९ जानेवारी १८५२]] || २६ मूळ काउंटींपैकी एक || [[व्हेलेन्सिया, स्पेन]] शहरावरून || ७६,२०५ || २,७६६
|}
== हेसुद्धा पहा ==
* [[कॅन्ससमधील काउंटी]]
* [[कॉलोराडोमधील काउंटी]]
* [[ॲरिझोनामधील काउंटी]]
* [[युटामधील काउंटी]]
== संदर्भ आणि नोंदी ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:न्यू मेक्सिकोमधील काउंटी|*]]
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वेस्टर्न किंगबर्ड
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नरेश सावे
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नवीन पान: {{जीवचौकट | नाव = वेस्टर्न किंगबर्ड |पाश्चिमात्य राजापक्षी | स्थिती = | trend = | स्थिती_प्रणाली = | स्थिती_संदर्भ = | चित्र = | चित्र_रुंदी = | regnum = [[प्राणी]] | वंश = | जात = [[पक्षी]] | वर्ग = | कुळ =Tyrannus verticalis |...
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{{जीवचौकट
| नाव = वेस्टर्न किंगबर्ड |पाश्चिमात्य राजापक्षी
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}}
'''वेस्टर्न किंगबर्ड''' किंवा पाश्चिमात्य राजापक्षी हा अमेरिकेतील दक्षिण डाकोटा या राज्यात आढळणारा पक्षी आहे. हा पक्षी [[भिंगरी पक्षी आणि राजापक्षी|स्वॅलोज आणि किंगबर्ड्स]] या वर्गात मोडतो.
==वर्णन==
हा पक्षी जवळजवळ ईस्टर्न किंगबर्ड एवढाच आकाराने असतो.परंतु या पक्ष्याचा रंग एकदम वेगळा असतो. या पक्ष्याचे डोके आणि मान करड्या रंगाची असते.पिवळ्या रंगाचा पोटाचा भाग असतो.ऑलिव्ह रंगाचे पंख असतात.
==आढळस्थान==
हा अमेरिकेतील दक्षिण डाकोटा राज्यात आढळतो.उन्हाळ्यानंतर तो स्थलांतर करतो.
==आवाज==
या पक्ष्याचा आवाज तीक्ष्ण किप असा असतो.
==खाद्य==
हा पक्षी जमिनीवरचे तसेच हवेत उडणारे कीटक खातो.
==घरटे==
हा पक्षी आपले घरटे इमारती किंवा इतर मानवनिर्मित बांधकामाच्या भागात उघड्या जागी विरळ झाडे,झुडुपे असलेल्या ठिकाणी बांधतो. ह्या पक्ष्यांची घरटी गवत, लहान काट्या,आणि इतर उत्तम वनस्पतिजन्य पदार्थ वापरून उघड्या वाटीसारख्या आकारात बांधले जातात.बहुतेक वेळा ही घरटी वीज व टेलिफोनचे खांब यावर मऊ पिसे आणि केस हे अस्तरासारखे वापरून तयार केली जातात.
==वैशिष्ट्य==
पठारावर झाडांच्या मोठ्या प्रमाणावर लागवडीमुळे ह्या पक्ष्यांची लोकसंख्या आणि विस्तारक्षेत्र हे पूर्व भागात जास्त प्रमाणात वाढताना दिसत आहे.
<ref>Backyard Birds of South Dakota - South Dakota, Wildlife Division, Department of Game, Fish and Parks.Authors: Eileen Dowd Stukel,Silka L.F.Kempema,Chad Tussing.2009 edition</ref>
[[वर्ग:पक्षी]]
[[वर्ग:विदेशी पक्षी]]
[[वर्ग:दक्षिण डाकोटा अमेरिका पक्षी]]
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{{जीवचौकट
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'''वेस्टर्न किंगबर्ड''' किंवा पाश्चिमात्य राजापक्षी हा अमेरिकेतील दक्षिण डाकोटा या राज्यात आढळणारा [[पक्षी]] आहे. हा पक्षी [[भिंगरी पक्षी आणि राजापक्षी|स्वॅलोज आणि किंगबर्ड्स]] या वर्गात मोडतो.
==वर्णन==
हा पक्षी जवळजवळ ईस्टर्न किंगबर्ड एवढाच आकाराने असतो.परंतु या पक्ष्याचा रंग एकदम वेगळा असतो. या पक्ष्याचे डोके आणि मान करड्या रंगाची असते.पिवळ्या रंगाचा पोटाचा भाग असतो.ऑलिव्ह रंगाचे पंख असतात.
==आढळस्थान==
हा अमेरिकेतील दक्षिण डाकोटा राज्यात आढळतो.उन्हाळ्यानंतर तो स्थलांतर करतो.
==आवाज==
या पक्ष्याचा आवाज तीक्ष्ण किप असा असतो.
==खाद्य==
हा पक्षी जमिनीवरचे तसेच हवेत उडणारे कीटक खातो.
==घरटे==
हा पक्षी आपले घरटे इमारती किंवा इतर मानवनिर्मित बांधकामाच्या भागात उघड्या जागी विरळ झाडे,झुडुपे असलेल्या ठिकाणी बांधतो. ह्या पक्ष्यांची घरटी गवत, लहान काट्या,आणि इतर उत्तम वनस्पतिजन्य पदार्थ वापरून उघड्या वाटीसारख्या आकारात बांधले जातात.बहुतेक वेळा ही घरटी वीज व टेलिफोनचे खांब यावर मऊ पिसे आणि केस हे अस्तरासारखे वापरून तयार केली जातात.
==वैशिष्ट्य==
पठारावर झाडांच्या मोठ्या प्रमाणावर लागवडीमुळे ह्या पक्ष्यांची लोकसंख्या आणि विस्तारक्षेत्र हे पूर्व भागात जास्त प्रमाणात वाढताना दिसत आहे.
<ref>Backyard Birds of South Dakota - South Dakota, Wildlife Division, Department of Game, Fish and Parks.Authors: Eileen Dowd Stukel,Silka L.F.Kempema,Chad Tussing.2009 edition</ref>
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[[वर्ग:विदेशी पक्षी]]
[[वर्ग:दक्षिण डाकोटा अमेरिका पक्षी]]
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सदस्य चर्चा:LaundryFries
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साचा:न्यू मेक्सिकोमधील काउंट्यांचा नकाशा
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चिमणी स्विफ्ट
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नरेश सावे
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| बायनॉमियल2 =
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}}
'''चिमणी स्विफ्ट''' किंवा सिगार विथ विंग्स हा अमेरिकेतील दक्षिण डाकोटा या राज्यात आढळणारा पक्षी आहे. हा पक्षी [[स्विफ्टस् आणि नाईटहॉकस्]] या वर्गात मोडतो.
==वर्णन==
हा पक्षी तपकिरी रंगाचा असतो. या पक्ष्याचे पंख लांब आणि पातळ असतात. या पक्ष्याला 'सिगार विथ विंग्स' असेही म्हणतात.
==आढळस्थान==
हा अमेरिकेतील दक्षिण डाकोटा राज्यात आढळतो. पूर्व भागात तो उन्हाळ्यानंतर स्थलांतर करतो.
==आवाज==
या पक्ष्याचा आवाज उच्च स्वरातील चिप्स असा आहे जो एका संगीतमय ट्विटरमध्ये परिवर्तित होतो.
==खाद्य==
हा पक्षी उडत असतानाच खात असतो.
==घरटे==
हा पक्षी झाडाच्या ढोलीत तसेच गुहेत घरटे करतो.हा पक्षी झाडे असलेल्या भागात उघड्या भागात आणि मानवी वसाहतीजवळ आढळून येतो.बरेच पक्षी चिमणी आणि इतर मानवनिर्मित बांधकामामध्ये घरटी बनवितात.
==वैशिष्ट्य==
घरटे बांधणे आणि विसावा घेणे याशिवाय कुठल्याही परिस्थितीत चिमणी स्विफ्ट पक्षी जमिनीवर उतरत नाही. हे पक्षी झाड किंवा चिमणीच्यावर बसण्याऐवजी त्याच्या बाजूवर लटकत असतात.हा पक्षी उडत असतानाच खातो, पितो आणि स्नानही करतो.
<ref>Backyard Birds of South Dakota - South Dakota, Wildlife Division, Department of Game, Fish and Parks.Authors: Eileen Dowd Stukel,Silka L.F.Kempema,Chad Tussing.2009 edition</ref>
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'''चिमणी स्विफ्ट''' किंवा सिगार विथ विंग्स हा अमेरिकेतील दक्षिण डाकोटा या राज्यात आढळणारा [[पक्षी]] आहे. हा पक्षी [[स्विफ्टस् आणि नाईटहॉकस्]] या वर्गात मोडतो.
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हा पक्षी तपकिरी रंगाचा असतो. या पक्ष्याचे पंख लांब आणि पातळ असतात. या पक्ष्याला 'सिगार विथ विंग्स' असेही म्हणतात.
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या पक्ष्याचा आवाज उच्च स्वरातील चिप्स असा आहे जो एका संगीतमय ट्विटरमध्ये परिवर्तित होतो.
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हा पक्षी झाडाच्या ढोलीत तसेच गुहेत घरटे करतो.हा पक्षी झाडे असलेल्या भागात उघड्या भागात आणि मानवी वसाहतीजवळ आढळून येतो.बरेच पक्षी चिमणी आणि इतर मानवनिर्मित बांधकामामध्ये घरटी बनवितात.
==वैशिष्ट्य==
घरटे बांधणे आणि विसावा घेणे याशिवाय कुठल्याही परिस्थितीत चिमणी स्विफ्ट पक्षी जमिनीवर उतरत नाही. हे पक्षी झाड किंवा चिमणीच्यावर बसण्याऐवजी त्याच्या बाजूवर लटकत असतात.हा पक्षी उडत असतानाच खातो, पितो आणि स्नानही करतो.
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कॉमन नाईटहॉक
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नरेश सावे
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'''कॉमन नाईटहॉक''' हा अमेरिकेतील दक्षिण डाकोटा या राज्यात आढळणारा पक्षी आहे. हा पक्षी [[स्विफ्टस् आणि नाईटहॉकस्]] या वर्गात मोडतो.
==वर्णन==
हा पक्षी करड्या तपकिरी रंगाची गूढ पिसे असलेला असतो. या पक्ष्याचे पंख लांब आणि टोकदार असतात. या पक्ष्याच्या मुख्य पिसांच्या खाली पांढरा पट्टा असतो जो उडताना दिसतो.नर व मादी सारखेच दिसतात.
==आढळस्थान==
हा अमेरिकेतील दक्षिण डाकोटा राज्यात आढळतो.तो हिवाळ्यात दक्षिण भागात स्थलांतर करतो.
==आवाज==
या पक्ष्याचा सामान्यतः ऐकू येणारा आवाज म्हणजे पींट किंवा बीरेंटचा आवाजासारखा असतो. नर व मादी दोघेही उडताना असा आवाज करत असतात.
==खाद्य==
हा पक्षी पहाटे आणि संध्याकाळी उडणारे कीटक खातो.
==घरटे==
हा पक्षी घरटे बांधत नाही.हा पक्षी उघड्या भागात जमिनीवर, मोकळ्या वनात,किंवा सपाट पृष्ठभागावर घरटे करतो.हा पक्षी अनेक प्रकारच्या अधिवासांमध्ये प्रजनन करतो.
==वैशिष्ट्य==
इसवी सन १८६० मध्ये ह्या पक्ष्याची सपाट छतभागांवर घरटी करण्याची नोंद करण्यात आली होती.परंतु कालांतराने छतासाठी खडी ऐवजी रबर वापरण्यात येऊ लागला तेव्हा पासून ही घरटी कमी झाली.रबर हे गरम असल्याने व अंडी घरंगळत जात असल्याने हा परिणाम दिसून आला. हल्ली पक्ष्यांच्या संवर्धनासाठी रबरावर खडीचे पट्टे तयार केले जातात जे नाईटहॉक पक्ष्याच्या घरट्यासाठी फायदेशीर ठरते आहे.
<ref>Backyard Birds of South Dakota - South Dakota, Wildlife Division, Department of Game, Fish and Parks.Authors: Eileen Dowd Stukel,Silka L.F.Kempema,Chad Tussing.2009 edition</ref>
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[[वर्ग:विदेशी पक्षी]]
[[वर्ग:दक्षिण डाकोटा अमेरिका पक्षी]]
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नरेश सावे
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{{जीवचौकट
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'''कॉमन नाईटहॉक''' हा अमेरिकेतील दक्षिण डाकोटा या राज्यात आढळणारा [[पक्षी]] आहे. हा पक्षी [[स्विफ्टस् आणि नाईटहॉकस्]] या वर्गात मोडतो.
==वर्णन==
हा पक्षी करड्या तपकिरी रंगाची गूढ पिसे असलेला असतो. या पक्ष्याचे पंख लांब आणि टोकदार असतात. या पक्ष्याच्या मुख्य पिसांच्या खाली पांढरा पट्टा असतो जो उडताना दिसतो.नर व मादी सारखेच दिसतात.
==आढळस्थान==
हा अमेरिकेतील दक्षिण डाकोटा राज्यात आढळतो.तो हिवाळ्यात दक्षिण भागात स्थलांतर करतो.
==आवाज==
या पक्ष्याचा सामान्यतः ऐकू येणारा आवाज म्हणजे पींट किंवा बीरेंटचा आवाजासारखा असतो. नर व मादी दोघेही उडताना असा आवाज करत असतात.
==खाद्य==
हा पक्षी पहाटे आणि संध्याकाळी उडणारे कीटक खातो.
==घरटे==
हा पक्षी घरटे बांधत नाही.हा पक्षी उघड्या भागात जमिनीवर, मोकळ्या वनात,किंवा सपाट पृष्ठभागावर घरटे करतो.हा पक्षी अनेक प्रकारच्या अधिवासांमध्ये प्रजनन करतो.
==वैशिष्ट्य==
इसवी सन १८६० मध्ये ह्या पक्ष्याची सपाट छतभागांवर घरटी करण्याची नोंद करण्यात आली होती.परंतु कालांतराने छतासाठी खडी ऐवजी रबर वापरण्यात येऊ लागला तेव्हा पासून ही घरटी कमी झाली.रबर हे गरम असल्याने व अंडी घरंगळत जात असल्याने हा परिणाम दिसून आला. हल्ली पक्ष्यांच्या संवर्धनासाठी रबरावर खडीचे पट्टे तयार केले जातात जे नाईटहॉक पक्ष्याच्या घरट्यासाठी फायदेशीर ठरते आहे.
<ref>Backyard Birds of South Dakota - South Dakota, Wildlife Division, Department of Game, Fish and Parks.Authors: Eileen Dowd Stukel,Silka L.F.Kempema,Chad Tussing.2009 edition</ref>
[[वर्ग:पक्षी]]
[[वर्ग:विदेशी पक्षी]]
[[वर्ग:दक्षिण डाकोटा अमेरिका पक्षी]]
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अल्बुकर्की, न्यू मेक्सिको
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#पुनर्निर्देशन [[आल्बुकर्की (न्यू मेक्सिको)]]
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बर्नालियो काउंटी, न्यू मेक्सिको
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#पुनर्निर्देशन [[बेर्नालियो काउंटी, न्यू मेक्सिको]]
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कॅट्रन काउंटी, न्यू मेक्सिको
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#पुनर्निर्देशन [[कात्रोन काउंटी, न्यू मेक्सिको]]
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#पुनर्निर्देशन [[डि बाका काउंटी, न्यू मेक्सिको]]
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#पुनर्निर्देशन [[एड्डी काउंटी, न्यू मेक्सिको]]
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लूना काउंटी, न्यू मेक्सिको
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रिओ अरिबा काउंटी, न्यू मेक्सिको
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#पुनर्निर्देशन [[रियो अर्रिबा काउंटी, न्यू मेक्सिको]]
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#पुनर्निर्देशन [[सान हुआन काउंटी, न्यू मेक्सिको]]
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#पुनर्निर्देशन [[सान मिगेल काउंटी, न्यू मेक्सिको]]
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टॉरान्स काउंटी, न्यू मेक्सिको
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#पुनर्निर्देशन [[व्हालेन्सिया काउंटी, न्यू मेक्सिको]]
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न्यू मेक्सिकोमधील काउंट्या
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#पुनर्निर्देशन [[न्यू मेक्सिकोमधील काउंटी]]
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सदर हिल्स स्वायत्त जिल्हा परिषद
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'''सदर हिल्स स्वायत्त जिल्हा परिषद''' ही भारतातील [[मणिपूर]] राज्यातील एक [[भारताचे स्वायत्त प्रशासकीय विभाग|स्वायत्त जिल्हा परिषद]] आहे. यात मणिपूरच्या [[कांगपोक्पी जिल्हा|कांगपोक्पी जिल्ह्यातील]] सैकुल उपविभाग, [[Saitu|सैतू]] उपविभाग आणि पश्चिम सदर हिल्स उपविभागाचा समावेश आहे. हे मणिपूर राज्यातील सहा स्वायत्त जिल्हा परिषदांपैकी एक आहे,<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://manipur.gov.in/autonomous-district-council/|title=Autonomous District Council – Manipur|website=manipur.gov.in|access-date=2022-05-19}}</ref> आणि [[भारताचे स्वायत्त प्रशासकीय विभाग|भारताच्या ३० स्वायत्त प्रदेशांपैकी]] एक आहे.
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:भारतातील स्वायत्त जिल्हा परिषद]]
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{{माहिती संचिका}}
'''सदर हिल्स स्वायत्त जिल्हा परिषद''' ही भारतातील [[मणिपूर]] राज्यातील एक [[भारताचे स्वायत्त प्रशासकीय विभाग|स्वायत्त जिल्हा परिषद]] आहे. यात मणिपूरच्या [[कांगपोक्पी जिल्हा|कांगपोक्पी जिल्ह्यातील]] सैकुल उपविभाग, [[Saitu|सैतू]] उपविभाग आणि पश्चिम सदर हिल्स उपविभागाचा समावेश आहे. हे मणिपूर राज्यातील सहा स्वायत्त जिल्हा परिषदांपैकी एक आहे,<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://manipur.gov.in/autonomous-district-council/|title=Autonomous District Council – Manipur|website=manipur.gov.in|access-date=2022-05-19}}</ref> आणि [[भारताचे स्वायत्त प्रशासकीय विभाग|भारताच्या ३० स्वायत्त प्रदेशांपैकी]] एक आहे.
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:भारतातील स्वायत्त जिल्हा परिषद]]
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{{माहिती संचिका}}
'''सदर हिल्स स्वायत्त जिल्हा परिषद''' ही भारतातील [[मणिपूर]] राज्यातील एक [[भारताचे स्वायत्त प्रशासकीय विभाग|स्वायत्त जिल्हा परिषद]] आहे. यात मणिपूरच्या [[कांगपोक्पी जिल्हा|कांगपोक्पी जिल्ह्यातील]] सैकुल उपविभाग, सैतू उपविभाग आणि पश्चिम सदर हिल्स उपविभागाचा समावेश आहे. हे मणिपूर राज्यातील सहा स्वायत्त जिल्हा परिषदांपैकी एक आहे,<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://manipur.gov.in/autonomous-district-council/|title=Autonomous District Council – Manipur|website=manipur.gov.in|access-date=2022-05-19}}</ref> आणि [[भारताचे स्वायत्त प्रशासकीय विभाग|भारताच्या ३० स्वायत्त प्रदेशांपैकी]] एक आहे. ह्या परिषदेची स्थापना १९७१<ref name=":0">{{Cite web |title=Autonomous District Councils Manipur in brief By Haokholal Hangshing |url=http://e-pao.net/epSubPageExtractor.asp?src=news_section.opinions.Politics_and_Governance.Autonomous_District_Councils_Manipur_in_brief_By_Haokholal_Hangshing |access-date=2022-05-19 |website=e-pao.net}}</ref> मध्ये झाली व ह्यात २४ जागा आहे.<ref>{{Cite web |title=Councillors |url=https://manipur.gov.in/wp-content/uploads/2012/10/Kangpokpi.pdf}}</ref>
== संदर्भ ==
{{संदर्भयादी}}
[[वर्ग:भारतातील स्वायत्त जिल्हा परिषद]]
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पेरूगेट चौक मित्र मंडळ ट्रस्ट,पुणे
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पेरूगेट चौक मित्र मंडळ , ट्रस्ट हे महाराष्ट्र राज्यातील पुणे शहरातील सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडळ आहे .
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पेरूगेट चौक मित्र मंडळ , ट्रस्ट हे महाराष्ट्र राज्यातील पुणे शहरातील सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडळ आहे .
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पेरूगेट चौक मित्र मंडळ , ट्रस्ट हे महाराष्ट्र राज्यातील पुणे शहरातील सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडळ आहे . हे मंडळ ५ ० वर्षांहून अधिक काळ कार्यरत आहे . लोकमान्य टिळकांच्या विचाराला अनुसरून सदर मंडळ कार्यरत आहे .
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संदर्भ
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पेरूगेट चौक मित्र मंडळ , ट्रस्ट हे महाराष्ट्र राज्यातील पुणे शहरातील सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडळ आहे . हे मंडळ ५ ० वर्षांहून अधिक काळ कार्यरत आहे . लोकमान्य टिळकांच्या विचाराला अनुसरून सदर मंडळ कार्यरत आहे .<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://news24pune.com/perugate-chowk-mitra-mandal-will-create-a-unique-jungle-journey-through-2d-animation/|title=पेरुगेट चौक मित्र मंडळ घडविणार २ डी अॅनिमेशन देख्याव्यातून नेत्रसुखद अनोखी जंगल सफर|last=News24Pune|date=2022-08-26|website=News24Pune|language=en-US|access-date=2026-09-16}}</ref>
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पेरूगेट चौक मित्र मंडळ , ट्रस्ट हे महाराष्ट्र राज्यातील पुणे शहरातील सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडळ आहे . हे मंडळ ५ ० वर्षांहून अधिक काळ कार्यरत आहे . लोकमान्य टिळकांच्या विचाराला अनुसरून सदर मंडळ कार्यरत आहे .<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://news24pune.com/perugate-chowk-mitra-mandal-will-create-a-unique-jungle-journey-through-2d-animation/|title=पेरुगेट चौक मित्र मंडळ घडविणार २ डी अॅनिमेशन देख्याव्यातून नेत्रसुखद अनोखी जंगल सफर|last=News24Pune|date=2022-08-26|website=News24Pune|language=en-US|access-date=2026-09-16}}</ref>
== संदर्भ ==
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पेरूगेट चौक मित्र मंडळ , ट्रस्ट हे महाराष्ट्र राज्यातील पुणे शहरातील सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडळ आहे . हे मंडळ ५ ० वर्षांहून अधिक काळ कार्यरत आहे . लोकमान्य टिळकांच्या विचाराला अनुसरून सदर मंडळ कार्यरत आहे .<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://news24pune.com/perugate-chowk-mitra-mandal-will-create-a-unique-jungle-journey-through-2d-animation/|title=पेरुगेट चौक मित्र मंडळ घडविणार २ डी अॅनिमेशन देख्याव्यातून नेत्रसुखद अनोखी जंगल सफर|last=News24Pune|date=2022-08-26|website=News24Pune|language=en-US|access-date=2026-09-16}}</ref>
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== संदर्भ ==
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text/x-wiki
पेरूगेट चौक मित्र मंडळ , ट्रस्ट हे महाराष्ट्र राज्यातील पुणे शहरातील सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडळ आहे . हे मंडळ ५ ० वर्षांहून अधिक काळ कार्यरत आहे . लोकमान्य टिळकांच्या विचाराला अनुसरून सदर मंडळ कार्यरत आहे .<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://news24pune.com/perugate-chowk-mitra-mandal-will-create-a-unique-jungle-journey-through-2d-animation/|title=पेरुगेट चौक मित्र मंडळ घडविणार २ डी अॅनिमेशन देख्याव्यातून नेत्रसुखद अनोखी जंगल सफर|last=News24Pune|date=2022-08-26|website=News24Pune|language=en-US|access-date=2026-09-16}}</ref>
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== संदर्भ ==
[[वर्ग:गणेशोत्सव]]
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दुवा आणि छायाचित्र
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text/x-wiki
[[File:पेरूगेट चौक मित्र मंडळ, ट्रस्ट.jpg|thumb|पेरूगेट चौक मित्र मंडळ, ट्रस्ट]]
पेरूगेट चौक मित्र मंडळ , ट्रस्ट हे [[महाराष्ट्र]] राज्यातील [[पुणे]] शहरातील सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडळ आहे . हे मंडळ ५ ० वर्षांहून अधिक काळ कार्यरत आहे . [[लोकमान्य टिळक|लोकमान्य टिळकां]]च्या विचाराला अनुसरून सदर मंडळ कार्यरत आहे .<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://news24pune.com/perugate-chowk-mitra-mandal-will-create-a-unique-jungle-journey-through-2d-animation/|title=पेरुगेट चौक मित्र मंडळ घडविणार २ डी अॅनिमेशन देख्याव्यातून नेत्रसुखद अनोखी जंगल सफर|last=News24Pune|date=2022-08-26|website=News24Pune|language=en-US|access-date=2026-09-16}}</ref>
==इसवी सन २ ० २ ६ - गणेशोत्सव==
सप्टेंबर २ ० २ ६ मध्ये साजऱ्या आहोत असलेल्या गणेशोत्सवासाठी या अमंडळाने जिवंत देखावा सादर केला आहे . थोरले बाजीराव पेशवे यांच्या पराक्रमाची कथा सांगणारा जिवंत देखावा मंडळाने सादर केला आहे . या मंडळाने विषयावर आधारित देखावा पुणे शहरातील [[गणेशोत्सव|गणेशोत्सवा]]त प्रथमच सादर केला आहे .
== संदर्भ ==
[[वर्ग:गणेशोत्सव]]
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/* इसवी सन २ ० २ ६ - गणेशोत्सव */ चित्र
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[[File:पेरूगेट चौक मित्र मंडळ, ट्रस्ट.jpg|thumb|पेरूगेट चौक मित्र मंडळ, ट्रस्ट]]
पेरूगेट चौक मित्र मंडळ , ट्रस्ट हे [[महाराष्ट्र]] राज्यातील [[पुणे]] शहरातील सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडळ आहे . हे मंडळ ५ ० वर्षांहून अधिक काळ कार्यरत आहे . [[लोकमान्य टिळक|लोकमान्य टिळकां]]च्या विचाराला अनुसरून सदर मंडळ कार्यरत आहे .<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://news24pune.com/perugate-chowk-mitra-mandal-will-create-a-unique-jungle-journey-through-2d-animation/|title=पेरुगेट चौक मित्र मंडळ घडविणार २ डी अॅनिमेशन देख्याव्यातून नेत्रसुखद अनोखी जंगल सफर|last=News24Pune|date=2022-08-26|website=News24Pune|language=en-US|access-date=2026-09-16}}</ref>
==इसवी सन २ ० २ ६ - गणेशोत्सव==
[[File:बाजीराव पेशवे यांच्या पराक्रमावर आधारित देखावा.jpg|thumb|बाजीराव पेशवे यांच्या पराक्रमावर आधारित देखावा]]
सप्टेंबर २ ० २ ६ मध्ये साजऱ्या आहोत असलेल्या गणेशोत्सवासाठी या अमंडळाने जिवंत देखावा सादर केला आहे . थोरले बाजीराव पेशवे यांच्या पराक्रमाची कथा सांगणारा जिवंत देखावा मंडळाने सादर केला आहे . या मंडळाने विषयावर आधारित देखावा पुणे शहरातील [[गणेशोत्सव|गणेशोत्सवा]]त प्रथमच सादर केला आहे .
== संदर्भ ==
[[वर्ग:गणेशोत्सव]]
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आर्या जोशी ने लेख [[पेरूगेट चौक मित्र मंडळ , ट्रस्ट]] वरुन [[पेरूगेट चौक मित्र मंडळ , ट्रस्ट,पुणे]] ला हलविला: अचूक नाव
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[[File:पेरूगेट चौक मित्र मंडळ, ट्रस्ट.jpg|thumb|पेरूगेट चौक मित्र मंडळ, ट्रस्ट]]
पेरूगेट चौक मित्र मंडळ , ट्रस्ट हे [[महाराष्ट्र]] राज्यातील [[पुणे]] शहरातील सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडळ आहे . हे मंडळ ५ ० वर्षांहून अधिक काळ कार्यरत आहे . [[लोकमान्य टिळक|लोकमान्य टिळकां]]च्या विचाराला अनुसरून सदर मंडळ कार्यरत आहे .<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://news24pune.com/perugate-chowk-mitra-mandal-will-create-a-unique-jungle-journey-through-2d-animation/|title=पेरुगेट चौक मित्र मंडळ घडविणार २ डी अॅनिमेशन देख्याव्यातून नेत्रसुखद अनोखी जंगल सफर|last=News24Pune|date=2022-08-26|website=News24Pune|language=en-US|access-date=2026-09-16}}</ref>
==इसवी सन २ ० २ ६ - गणेशोत्सव==
[[File:बाजीराव पेशवे यांच्या पराक्रमावर आधारित देखावा.jpg|thumb|बाजीराव पेशवे यांच्या पराक्रमावर आधारित देखावा]]
सप्टेंबर २ ० २ ६ मध्ये साजऱ्या आहोत असलेल्या गणेशोत्सवासाठी या अमंडळाने जिवंत देखावा सादर केला आहे . थोरले बाजीराव पेशवे यांच्या पराक्रमाची कथा सांगणारा जिवंत देखावा मंडळाने सादर केला आहे . या मंडळाने विषयावर आधारित देखावा पुणे शहरातील [[गणेशोत्सव|गणेशोत्सवा]]त प्रथमच सादर केला आहे .
== संदर्भ ==
[[वर्ग:गणेशोत्सव]]
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[[File:पेरूगेट चौक मित्र मंडळ, ट्रस्ट.jpg|thumb|पेरूगेट चौक मित्र मंडळ, ट्रस्ट]]
पेरूगेट चौक मित्र मंडळ , ट्रस्ट हे [[महाराष्ट्र]] राज्यातील [[पुणे]] शहरातील सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडळ आहे . हे मंडळ ५ ० वर्षांहून अधिक काळ कार्यरत आहे . [[लोकमान्य टिळक|लोकमान्य टिळकां]]च्या विचाराला अनुसरून सदर मंडळ कार्यरत आहे .<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://news24pune.com/perugate-chowk-mitra-mandal-will-create-a-unique-jungle-journey-through-2d-animation/|title=पेरुगेट चौक मित्र मंडळ घडविणार २ डी अॅनिमेशन देख्याव्यातून नेत्रसुखद अनोखी जंगल सफर|last=News24Pune|date=2022-08-26|website=News24Pune|language=en-US|access-date=2026-09-16}}</ref>
==इसवी सन २ ० २ ६ - गणेशोत्सव==
[[File:बाजीराव पेशवे यांच्या पराक्रमावर आधारित देखावा.jpg|thumb|बाजीराव पेशवे यांच्या पराक्रमावर आधारित देखावा]]
सप्टेंबर २ ० २ ६ मध्ये साजऱ्या आहोत असलेल्या गणेशोत्सवासाठी या अमंडळाने जिवंत देखावा सादर केला आहे . थोरले बाजीराव पेशवे यांच्या पराक्रमाची कथा सांगणारा जिवंत देखावा मंडळाने सादर केला आहे . या मंडळाने विषयावर आधारित देखावा पुणे शहरातील [[गणेशोत्सव|गणेशोत्सवा]]त प्रथमच सादर केला आहे .
== संदर्भ ==
[[वर्ग:गणेशोत्सव]]
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/* इसवी सन २ ० २ ६ - गणेशोत्सव */
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[[File:पेरूगेट चौक मित्र मंडळ, ट्रस्ट.jpg|thumb|पेरूगेट चौक मित्र मंडळ, ट्रस्ट]]
पेरूगेट चौक मित्र मंडळ , ट्रस्ट हे [[महाराष्ट्र]] राज्यातील [[पुणे]] शहरातील सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडळ आहे . हे मंडळ ५ ० वर्षांहून अधिक काळ कार्यरत आहे . [[लोकमान्य टिळक|लोकमान्य टिळकां]]च्या विचाराला अनुसरून सदर मंडळ कार्यरत आहे .<ref>{{संकेतस्थळ स्रोत|url=https://news24pune.com/perugate-chowk-mitra-mandal-will-create-a-unique-jungle-journey-through-2d-animation/|title=पेरुगेट चौक मित्र मंडळ घडविणार २ डी अॅनिमेशन देख्याव्यातून नेत्रसुखद अनोखी जंगल सफर|last=News24Pune|date=2022-08-26|website=News24Pune|language=en-US|access-date=2026-09-16}}</ref>
==इसवी सन २ ० २ ६ - गणेशोत्सव==
[[File:बाजीराव पेशवे यांच्या पराक्रमावर आधारित देखावा.jpg|thumb|बाजीराव पेशवे यांच्या पराक्रमावर आधारित देखावा]]
सप्टेंबर २ ० २ ६ मध्ये साजऱ्या आहोत असलेल्या गणेशोत्सवासाठी या मंडळाने जिवंत देखावा सादर केला आहे . थोरले बाजीराव पेशवे यांच्या पराक्रमाची कथा सांगणारा जिवंत देखावा मंडळाने सादर केला आहे . या मंडळाने या विषयावर आधारित देखावा पुणे शहरातील [[गणेशोत्सव|गणेशोत्सवा]]त प्रथमच सादर केला आहे .
== संदर्भ ==
[[वर्ग:गणेशोत्सव]]
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पेरूगेट चौक मित्र मंडळ , ट्रस्ट
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आर्या जोशी ने लेख [[पेरूगेट चौक मित्र मंडळ , ट्रस्ट]] वरुन [[पेरूगेट चौक मित्र मंडळ , ट्रस्ट,पुणे]] ला हलविला: अचूक नाव
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#पुनर्निर्देशन [[पेरूगेट चौक मित्र मंडळ , ट्रस्ट,पुणे]]
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जॉर्डन हरमन
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नवीन पान: '''जॉर्डन गॅब्रिएल हरमन''' (जन्म ४ डिसेंबर २००१) हा दक्षिण आफ्रिकेचा क्रिकेटपटू आहे. त्याने २९ ऑक्टोबर २०२१ रोजी २०२१-२२ सीएसए ४-दिवसीय मालिकेमध्ये 'टायटन्स' संघाकडून प्रथम श्रेणी क...
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'''जॉर्डन गॅब्रिएल हरमन''' (जन्म ४ डिसेंबर २००१) हा दक्षिण आफ्रिकेचा क्रिकेटपटू आहे.
त्याने २९ ऑक्टोबर २०२१ रोजी २०२१-२२ सीएसए ४-दिवसीय मालिकेमध्ये 'टायटन्स' संघाकडून [[प्रथम श्रेणी क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले. त्याने २ डिसेंबर २०२२ रोजी सीएसए प्रांतीय वन-डे चॅलेंजमध्ये 'वॉरियर्स' संघाकडून [[लिस्ट अ क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले. त्याने १८ ऑक्टोबर २०२२ रोजी २०२२ सीएसए टी-२० चॅलेंजमध्ये 'वॉरियर्स' संघाकडून टी-२० क्रिकेटमध्ये पदार्पण केले.
त्याने १५ मार्च २०२६ रोजी न्यूझीलंडविरुद्ध आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय तर ९ सप्टेंबर २०२६ रोजी नामिबियाविरुद्ध आंतरराष्ट्रीय टी२० पदार्पण केले.
==संदर्भयादी==
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==बाह्यदुवे==
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'''जॉर्डन गॅब्रिएल हरमन''' (जन्म ४ डिसेंबर २००१) हा दक्षिण आफ्रिकेचा क्रिकेटपटू आहे.
त्याने २९ ऑक्टोबर २०२१ रोजी २०२१-२२ सीएसए ४-दिवसीय मालिकेमध्ये 'टायटन्स' संघाकडून [[प्रथम श्रेणी क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले. त्याने २ डिसेंबर २०२२ रोजी सीएसए प्रांतीय वन-डे चॅलेंजमध्ये 'वॉरियर्स' संघाकडून [[लिस्ट अ क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले. त्याने १८ ऑक्टोबर २०२२ रोजी २०२२ सीएसए टी-२० चॅलेंजमध्ये 'वॉरियर्स' संघाकडून टी-२० क्रिकेटमध्ये पदार्पण केले.
त्याने १५ मार्च २०२६ रोजी न्यू झीलंडविरुद्ध आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय तर ९ सप्टेंबर २०२६ रोजी नामिबियाविरुद्ध आंतरराष्ट्रीय टी२० पदार्पण केले.
==संदर्भयादी==
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'''जॉर्डन गॅब्रिएल हरमन''' (जन्म ४ डिसेंबर २००१) हा दक्षिण आफ्रिकेचा क्रिकेटपटू आहे.
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त्याने १५ मार्च २०२६ रोजी न्यू झीलंडविरुद्ध आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय तर ९ सप्टेंबर २०२६ रोजी नामिबियाविरुद्ध आंतरराष्ट्रीय टी२० पदार्पण केले.
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'''जॉर्डन गॅब्रिएल हरमन''' (जन्म ४ डिसेंबर २००१) हा दक्षिण आफ्रिकेचा क्रिकेटपटू आहे.
त्याने २९ ऑक्टोबर २०२१ रोजी २०२१-२२ सीएसए ४-दिवसीय मालिकेमध्ये 'टायटन्स' संघाकडून [[प्रथम श्रेणी क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले. त्याने २ डिसेंबर २०२२ रोजी सीएसए प्रांतीय वन-डे चॅलेंजमध्ये 'वॉरियर्स' संघाकडून [[लिस्ट अ क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले. त्याने १८ ऑक्टोबर २०२२ रोजी २०२२ सीएसए टी-२० चॅलेंजमध्ये 'वॉरियर्स' संघाकडून टी-२० क्रिकेटमध्ये पदार्पण केले.
त्याने १५ मार्च २०२६ रोजी न्यू झीलंडविरुद्ध आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय तर ९ सप्टेंबर २०२६ रोजी नामिबियाविरुद्ध आंतरराष्ट्रीय टी२० पदार्पण केले.
==संदर्भयादी==
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'''जॉर्डन गॅब्रिएल हरमन''' (जन्म ४ डिसेंबर २००१) हा दक्षिण आफ्रिकेचा क्रिकेटपटू आहे.
त्याने २९ ऑक्टोबर २०२१ रोजी २०२१-२२ सीएसए ४-दिवसीय मालिकेमध्ये 'टायटन्स' संघाकडून [[प्रथम श्रेणी क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले. त्याने २ डिसेंबर २०२२ रोजी सीएसए प्रांतीय वन-डे चॅलेंजमध्ये 'वॉरियर्स' संघाकडून [[लिस्ट अ क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले. त्याने १८ ऑक्टोबर २०२२ रोजी २०२२ सीएसए टी-२० चॅलेंजमध्ये 'वॉरियर्स' संघाकडून टी-२० क्रिकेटमध्ये पदार्पण केले.
त्याने १५ मार्च २०२६ रोजी न्यू झीलंडविरुद्ध आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय तर ९ सप्टेंबर २०२६ रोजी नामिबियाविरुद्ध आंतरराष्ट्रीय टी२० पदार्पण केले.
==संदर्भयादी==
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'''जॉर्डन गॅब्रिएल हरमन''' (जन्म ४ डिसेंबर २००१) हा दक्षिण आफ्रिकेचा क्रिकेटपटू आहे.
त्याने २९ ऑक्टोबर २०२१ रोजी २०२१-२२ सीएसए ४-दिवसीय मालिकेमध्ये 'टायटन्स' संघाकडून [[प्रथम श्रेणी क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले. त्याने २ डिसेंबर २०२२ रोजी सीएसए प्रांतीय वन-डे चॅलेंजमध्ये 'वॉरियर्स' संघाकडून [[लिस्ट अ क्रिकेट]]मध्ये पदार्पण केले. त्याने १८ ऑक्टोबर २०२२ रोजी २०२२ सीएसए टी-२० चॅलेंजमध्ये 'वॉरियर्स' संघाकडून टी-२० क्रिकेटमध्ये पदार्पण केले.
त्याने १५ मार्च २०२६ रोजी न्यू झीलंडविरुद्ध आंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय तर ९ सप्टेंबर २०२६ रोजी नामिबियाविरुद्ध आंतरराष्ट्रीय टी२० पदार्पण केले.
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==बाह्यदुवे==
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[[वर्ग:दक्षिण आफ्रिकेचे क्रिकेट खेळाडू]]
[[वर्ग:दक्षिण आफ्रिकेचे एकदिवसीय क्रिकेट खेळाडू]]
[[वर्ग:दक्षिण आफ्रिकेचे टी२० क्रिकेट खेळाडू]]
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सदस्य चर्चा:SUMIT DATTU KHADVE
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साहाय्य चमू
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नविन सदस्याच्या चर्चापानावर [[Template:Welcome|स्वागत संदेश]] टाकला
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-- [[सदस्य:साहाय्य चमू|साहाय्य चमू]] ([[सदस्य चर्चा:साहाय्य चमू|चर्चा]]) १६:५३, १६ सप्टेंबर २०२६ (IST)
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आयसीसी महिला चॅम्पियन्स चषक
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[[आयसीसी महिला टी-२० चॅम्पियन्स चषक]] कडे पुनर्निर्देशित
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#पुनर्निर्देशन [[आयसीसी महिला टी-२० चॅम्पियन्स चषक]]
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१९ वर्षांखालील महिला टी२० विश्वचषक
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[[आयसीसी महिला १९ वर्षांखालील क्रिकेट विश्वचषक]] कडे पुनर्निर्देशित
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#पुनर्निर्देशन [[आयसीसी महिला १९ वर्षांखालील क्रिकेट विश्वचषक]]
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सदस्य चर्चा:Waghmare Amar Tanaji
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साहाय्य चमू
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नविन सदस्याच्या चर्चापानावर [[Template:Welcome|स्वागत संदेश]] टाकला
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-- [[सदस्य:साहाय्य चमू|साहाय्य चमू]] ([[सदस्य चर्चा:साहाय्य चमू|चर्चा]]) १७:२८, १६ सप्टेंबर २०२६ (IST)
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