विकिस्रोतः sawikisource https://sa.wikisource.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0%E0%A4%AE%E0%A5%8D MediaWiki 1.47.0-wmf.8 first-letter माध्यमम् विशेषः सम्भाषणम् सदस्यः सदस्यसम्भाषणम् विकिस्रोतः विकिस्रोतःसम्भाषणम् सञ्चिका सञ्चिकासम्भाषणम् मीडियाविकि मीडियाविकिसम्भाषणम् फलकम् फलकसम्भाषणम् साहाय्यम् साहाय्यसम्भाषणम् वर्गः वर्गसम्भाषणम् प्रवेशद्वारम् प्रवेशद्वारसम्भाषणम् लेखकः लेखकसम्भाषणम् पृष्ठम् पृष्ठसम्भाषणम् अनुक्रमणिका अनुक्रमणिकासम्भाषणम् श्रव्यम् श्रव्यसम्भाषणम् TimedText TimedText talk पटलम् पटलसम्भाषणम् Event Event talk तैत्तिरीयोपनिषदत्/ब्रह्मानन्दवल्ली 0 14076 417713 404068 2026-06-25T02:36:18Z ~2026-26708-86 10448 417713 wikitext text/x-wiki aeiq5rmqun1op000mn6j2ol7nsv01ro अवधूतोपनिषत् (सव्याख्या) 0 164861 417714 416842 2026-06-25T11:58:08Z Shubha 190 417714 wikitext text/x-wiki 54g5wz187n7qyjwkk8qlkjecba1psba पृष्ठम्:रसरत्नसमुच्चयः.pdf/५४१ 104 165483 417693 2026-06-24T12:34:17Z Bnarayanan V 10460 /* अपरिष्कृतम् */ भाषाटीकोपेतः । सेव्यमानं निइत्येतदम्लपित्त सुदारुणम् । (५१९) कासं क्षयं तथा शोषमशीसि ग्रहणीं तथा ॥ २१५ ॥ कामलां पाण्डुरोगं च कुष्ठान्येकादशैव च रक्तपित्तं सख... नवीन पृष्ठं निर्मीत अस्ती 417693 proofread-page text/x-wiki 4vquf1pbu9tvomciz58qrok2b4vvqko पृष्ठम्:रसरत्नसमुच्चयः.pdf/५४२ 104 165484 417694 2026-06-24T12:34:31Z Bnarayanan V 10460 /* अपरिष्कृतम् */ ( ५२० ) रसरत्नसमुच्चयः । संग्रहणी, कामला, पाण्डुरोग, ११ प्रकारके कुष्ठ, रक्तपित्त, खालित्य, शूल, उदररोग, वातरोग, प्रतिश्याय, विद्रधि, विषमज्वर आदि समस्त व्याधियोंको... नवीन पृष्ठं निर्मीत अस्ती 417694 proofread-page text/x-wiki 449s3xcrhda8i8vkxhii9wk7625x1zr पृष्ठम्:रसरत्नसमुच्चयः.pdf/५४३ 104 165485 417695 2026-06-24T12:34:45Z Bnarayanan V 10460 /* अपरिष्कृतम् */ भाषाटीकोपेतः । (५२१) तिक्तभूयिष्ठमाहारं पानं चापि प्रकल्पयेत् । अम्लपित्ते च वमनं पटोलारिष्टवारिभिः ॥ विरेचनं त्रिवृच्चूर्ण मधुधात्रीफलैर्भवेत् ॥ २२१ ॥ अम्... नवीन पृष्ठं निर्मीत अस्ती 417695 proofread-page text/x-wiki amlukrf32slevsewxrd5utdtj8od4h3 पृष्ठम्:रसरत्नसमुच्चयः.pdf/५४४ 104 165486 417696 2026-06-24T12:35:00Z Bnarayanan V 10460 /* अपरिष्कृतम् */ ( ५२२ ) रसरत्नसमुच्चयः । समान भाग लेकर एकत्र खरल करले । फिर मुलैठी, दाख, गिलोय, जलकुम्भी, अडूसा और क्षीरविदारीकन्द इन औषधियों के रसमें उस चूर्णको क्रमसे एक २ दिन तक घ... नवीन पृष्ठं निर्मीत अस्ती 417696 proofread-page text/x-wiki qegq0g0oksvbvwh90zps2u3qo3tz3io पृष्ठम्:रसरत्नसमुच्चयः.pdf/५४५ 104 165487 417697 2026-06-24T12:35:13Z Bnarayanan V 10460 /* अपरिष्कृतम् */ भाषाटीकोपेतः । एकोनविंशोऽध्यायः । उदाररोग ( ५२३/ उदरं सजलं यस्य सदोषं वलिवर्जितम् । श्वयथुः पादयोः शोफः स्याज्जलोदरलक्षणम् ॥ १ ॥ उदरं वातसंपूर्ण सव्यथं च कृशां... नवीन पृष्ठं निर्मीत अस्ती 417697 proofread-page text/x-wiki 9dyfsbr9kppv37ryoo3jojoyl9b61rw पृष्ठम्:रसरत्नसमुच्चयः.pdf/५४६ 104 165488 417698 2026-06-24T12:35:29Z Bnarayanan V 10460 /* अपरिष्कृतम् */ ( ५२४ ) रसरत्नसमुच्चयः । विनोदविद्याधर रस | रसेंद्रबलिटंकणैः सजयपालबीजैः समैः । रसः समृदितो भवेत्खलु विनोद विद्याधरः ||४|| पयोगुडयुतो हरेत्सकलरेचनीयामयाञ् ज्वर... नवीन पृष्ठं निर्मीत अस्ती 417698 proofread-page text/x-wiki mmgjo44s27a5chhmr5u2mic64d8n1ll पृष्ठम्:रसरत्नसमुच्चयः.pdf/५४७ 104 165489 417699 2026-06-24T12:35:51Z Bnarayanan V 10460 /* अपरिष्कृतम् */ भाषाटीकोपेतः । ( ५२५) छल्के रहित । और शोधित जमालगोटे ८ तोले, सोंठ ३ तोले, शुद्ध गन्धक २ तोले, मिरच २ तोले, सुहागा १ तोला और शुद्ध पारा १ तोला लेकर सब औषधियोंको एकत्र चू... नवीन पृष्ठं निर्मीत अस्ती 417699 proofread-page text/x-wiki m17ad6w12ecftdlln78rbdzoqw4ztfg पृष्ठम्:रसरत्नसमुच्चयः.pdf/५४८ 104 165490 417700 2026-06-24T12:36:12Z Bnarayanan V 10460 /* अपरिष्कृतम् */ ( ५२६ ) रसरत्नसमुच्चयः । आदौ सर्वोदराणां च देयमुक्त विरेचनम् । गोमूत्रैर्वाऽथ गोक्षीरे योज्यमेरण्डतैलकम् ॥ १४ ॥ कर्षमात्रं प्रयत्नेन शुद्धे देयो रसः पुनः ॥ १५... नवीन पृष्ठं निर्मीत अस्ती 417700 proofread-page text/x-wiki jiz32jt66cwl07ucb8o4y7z7hg3vyrd पृष्ठम्:रसरत्नसमुच्चयः.pdf/५४९ 104 165491 417701 2026-06-24T12:36:24Z Bnarayanan V 10460 /* अपरिष्कृतम् */ भाषाटीकोपेतः । (५२७) चाहिये कोठेके शुद्ध होजानेपर फिर इस रसको सेवन करावे ॥ ८-१५ ॥ त्रैलोक्यसुन्दर रस | शुद्धं सृतं तथा गंधं मृताभ्रं सैंधवं विषम् । कृष्णजीरं विडं... नवीन पृष्ठं निर्मीत अस्ती 417701 proofread-page text/x-wiki 5oka8hova262ugq5627h00uoagpd2xn पृष्ठम्:रसरत्नसमुच्चयः.pdf/५५० 104 165492 417702 2026-06-24T12:36:43Z Bnarayanan V 10460 /* अपरिष्कृतम् */ ( ५२८ ) रसरत्नसमुच्चयः । प्रकारसे घृतको सिद्ध करे । इस वृतको एक २ तोला परिमाण लेकर अनुपान रूपसे सेवन करे और स्निग्ध तथा उष्ण पदार्थों का आहार करे ॥ १६-२० ॥ महावरिस | च... नवीन पृष्ठं निर्मीत अस्ती 417702 proofread-page text/x-wiki nvpt3wbcy7wwl9js65mzqv3uj4vv6w7 पृष्ठम्:रसरत्नसमुच्चयः.pdf/५५१ 104 165493 417703 2026-06-24T12:37:24Z Bnarayanan V 10460 /* अपरिष्कृतम् */ भाषाटीकोपेतः । ( ५२९ ) नाभीके नीचे के भागमें आपरेशन करवाकर जल निकलवावे | इस प्रकार उपचार करनेसे अल्पकालमें ही जलोदर रोग दूर होजाता है। इस रसको सेवन करनेके पश्चात्... नवीन पृष्ठं निर्मीत अस्ती 417703 proofread-page text/x-wiki 82ep8xwkwundvpx7qwxbvbs2npoq1kd सनत्कुमारतन्त्रम् 0 165494 417704 2026-06-24T13:34:42Z Shubha 190 <poem>{{header | title = सनत्कुमारतन्त्रम् | author = | translator = | section = | previous = | next = | year = | notes = }} #################################################### MUKTABODHA INDOLOGICAL RESEARCH INSTITUTE Use of this material (e-texts) is covered by Creative Commons license BY-NC 4.0 Catalog number: M00530 Uniform title: sanatk... नवीन पृष्ठं निर्मीत अस्ती 417704 wikitext text/x-wiki 0vm3gd1q24rwwb129uw6xi2cw72kphn 417705 417704 2026-06-24T13:35:16Z Shubha 190 417705 wikitext text/x-wiki mlcm3f5c4jnkcmjivo6r08ax1wrkj6j पृष्ठम्:रसरत्नसमुच्चयः.pdf/५५२ 104 165495 417706 2026-06-24T13:45:28Z Bnarayanan V 10460 /* अपरिष्कृतम् */ ( ५३० ) रसरत्नसमुच्चयः । जंबीररस संयुक्तं दिन घर्मे निधापयेत् । ततः शुल्वे द्रवीभूते रसकर्ष नियोजयेत् ॥ ३१ ॥ तत्सिद्धमुदरे योज्यं शोफे चैव भगंदरे । नाम्मा तूदरम... नवीन पृष्ठं निर्मीत अस्ती 417706 proofread-page text/x-wiki qb81b3bhlh8m82cjcawa9nxvqpi4gm5 पृष्ठम्:रसरत्नसमुच्चयः.pdf/५५३ 104 165496 417707 2026-06-24T13:45:40Z Bnarayanan V 10460 /* अपरिष्कृतम् */ भाषाटीकोपेतः । ( ५३१) शुद्ध वत्सनाभ, सर्पाविष, लौंग, पीपल, कूड, ताडके फल, त्रिफला, समुद्रफेन, ढकपन्ना, लताकस्तूरी, कन्चाबेल, गिलोय, पाँचों नमक, जुही, चमेली. मोगरा, मौलसि... नवीन पृष्ठं निर्मीत अस्ती 417707 proofread-page text/x-wiki ihleq3xvo348456i2wy0tvhydcng1ma पृष्ठम्:रसरत्नसमुच्चयः.pdf/५५४ 104 165497 417708 2026-06-24T13:45:54Z Bnarayanan V 10460 /* अपरिष्कृतम् */ ( ५३२ ) रसरत्नसमुच्चयः । समुद्र नमक, सैंधानमक. कचियानमक, जवाखार, कालानमक, सुहागा और सज्जी इन सबको समान भागलेकर बारीक चूर्ण कर लेवे। फिर उस चूर्णको आकके दूधमें और थूह... नवीन पृष्ठं निर्मीत अस्ती 417708 proofread-page text/x-wiki 90mawypage66ig4atsel42niuxwflmy पृष्ठम्:रसरत्नसमुच्चयः.pdf/५५५ 104 165498 417709 2026-06-24T13:46:05Z Bnarayanan V 10460 /* अपरिष्कृतम् */ भाषाटीकोपेतः । (५३३) चूर्णको थूहर के दूधमें एक दिनतक खरल करके चार २ मासेकी गोलियाँ बनालेवे । इन गोलियोंको भैसके दूध के साथ सेवन करनेसे जलोदररोग अवश्य दूर होता ॥ ४२... नवीन पृष्ठं निर्मीत अस्ती 417709 proofread-page text/x-wiki o9ytvuvfx4gb49ndkopb0b9r4izgk9k पृष्ठम्:रसरत्नसमुच्चयः.pdf/५५६ 104 165499 417710 2026-06-24T13:46:18Z Bnarayanan V 10460 /* अपरिष्कृतम् */ ( ५३४ ) रसरत्नसमुच्चयः । रूपसे भक्षण करे और औषधिके जीर्ण होजानेपर तॠके साथ भातका भोजन करे । यह हंसमण्डूर अल्पकालमेंही पाण्डुरोग, हलीमक, ऊरुस्तम्भ, कामला और अर्श इन... नवीन पृष्ठं निर्मीत अस्ती 417710 proofread-page text/x-wiki gzg4wvuuq3sijh9388uklbo3ph37zr8 पृष्ठम्:रसरत्नसमुच्चयः.pdf/५५७ 104 165500 417711 2026-06-24T13:46:40Z Bnarayanan V 10460 /* अपरिष्कृतम् */ भापाटीकोपेतः । ( ५३५) काल विध्वंसनो नाम रसः पाण्ड्वामयापहः । अभयाऽथ गवां मूत्रैः पिट्वा चानुप्रदापयेत् ॥९६ ॥ शुद्ध पारा, सुवर्णभस्म, रौप्यभस्म और ताम्रस्म इन चा... नवीन पृष्ठं निर्मीत अस्ती 417711 proofread-page text/x-wiki pz2padzjg32o2xh543w4s2iivbo8ssb पृष्ठम्:रसरत्नसमुच्चयः.pdf/५५८ 104 165501 417712 2026-06-24T13:46:56Z Bnarayanan V 10460 /* अपरिष्कृतम् */ ( ५३६) रसरत्नसमुच्चयः । इसमें दो बार दिनमें घोटकर रात्रिमें दो बार पुट देवे इसी प्रकार अन्य औषधियोंमें पुटदेवें । इसके अनन्तर उस रसमें १० दशभाग शुद्ध वत्सनाभ मिल... नवीन पृष्ठं निर्मीत अस्ती 417712 proofread-page text/x-wiki kwwshyydrzexfcawi30763u3idoflxm