विकिस्रोतः sawikisource https://sa.wikisource.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0%E0%A4%AE%E0%A5%8D MediaWiki 1.47.0-wmf.17 first-letter माध्यमम् विशेषः सम्भाषणम् सदस्यः सदस्यसम्भाषणम् विकिस्रोतः विकिस्रोतःसम्भाषणम् सञ्चिका सञ्चिकासम्भाषणम् मीडियाविकि मीडियाविकिसम्भाषणम् फलकम् फलकसम्भाषणम् साहाय्यम् साहाय्यसम्भाषणम् वर्गः वर्गसम्भाषणम् प्रवेशद्वारम् प्रवेशद्वारसम्भाषणम् लेखकः लेखकसम्भाषणम् पृष्ठम् पृष्ठसम्भाषणम् अनुक्रमणिका अनुक्रमणिकासम्भाषणम् श्रव्यम् श्रव्यसम्भाषणम् TimedText TimedText talk पटलम् पटलसम्भाषणम् Event Event talk उपनिषदः 0 31 418102 368174 2026-08-26T11:22:25Z ~2026-39930-13 10591 418102 wikitext text/x-wiki ca65vm37w8tl1m5775kz6jvyfhnoqg3 सदस्यः:V(g) 2 25211 418099 418082 2026-08-25T23:05:51Z EmausBot 3495 स्थानांतरित लक्ष्य [[सदस्यः:G(x)-former]] पृष्ठ पर टूटी हुई रीडायरेक्ट को ठीक करना। 418099 wikitext text/x-wiki 9vhg30k1e6nvvz0wv8aqv2lym7zg53g पृष्ठम्:मनुस्मृतिः (मन्वर्थमुक्तावलीसंवलिता).pdf/३९७ 104 104842 418092 267876 2026-08-25T12:09:10Z Geeta g hegde 6704 418092 proofread-page text/x-wiki gczwkxd5q9lci0xckzykw66ltdn037t 418093 418092 2026-08-25T12:10:30Z Geeta g hegde 6704 418093 proofread-page text/x-wiki ihhgym5u83ag59s4dxs8pzsxfhegfac पृष्ठम्:रसरत्नसमुच्चयः.pdf/५५९ 104 165541 418094 2026-08-25T12:46:21Z Bnarayanan V 10460 /* अपरिष्कृतम् */ भाषाटीकोपेतः । (५३७) अयं पंचाननो नामदेवराजेन कीर्तितः । श्रेष्ठः सर्वरसेंद्रेषु महारससमो गुणैः ॥६४॥ पथ्यासुरणशुंठीभिः सघृताभिर्निषेवितः । सर्वान्पाण्डुगद... नवीन पृष्ठं निर्मीत अस्ती 418094 proofread-page text/x-wiki okcqqszrgdlzcuiukwtuzpqh5yscz61 पृष्ठम्:रसरत्नसमुच्चयः.pdf/५६० 104 165542 418095 2026-08-25T12:46:57Z Bnarayanan V 10460 /* अपरिष्कृतम् */ ( ५३८ ) रसरत्नसमुच्चयः । घोटकर वाराहपुट देवे । इस प्रकार बारंबार कज्जली मिलाकर और नींबू के रस में घोटकर १० बार वाराहपुट देवे । फिर १ भाग पारद और ४भाग हरतालकी कज्जली... नवीन पृष्ठं निर्मीत अस्ती 418095 proofread-page text/x-wiki ennpqhcbr2m1jikzy89mmic85mtxjsb पृष्ठम्:रसरत्नसमुच्चयः.pdf/५६३ 104 165543 418096 2026-08-25T12:49:20Z Bnarayanan V 10460 /* अपरिष्कृतम् */ भाषाटीकोपेतः । (५४१) खरल करके चूल्हे पर चढाकर पौन घंटे तक मन्द मन्द अग्निके द्वारा पकावे । जब रस बिल्कुल शुष्क होजाय तब नीचे उतारकर बारीक खरल कर लेवे इस रसको नित्य... नवीन पृष्ठं निर्मीत अस्ती 418096 proofread-page text/x-wiki em4kahp3rdfwjwsl286170lx23wag9m पृष्ठम्:रसरत्नसमुच्चयः.pdf/५६१ 104 165544 418097 2026-08-25T12:50:02Z Bnarayanan V 10460 /* अपरिष्कृतम् */ भावाटीकोपेतः । (५३९) पलमात्रां मनोह्नां च पलमभ्रक भस्मकम् ॥ सुखस्पर्शस्य कर्षे च निक्षिप्य परिमर्द्य च ॥ ६९ ॥ मृषामध्ये विनिक्षिप्य पिनद्धांतर्मुखी ततः । पत्र... नवीन पृष्ठं निर्मीत अस्ती 418097 proofread-page text/x-wiki 1jr23keq14csmk603clgrpgtpcqc6uc पृष्ठम्:रसरत्नसमुच्चयः.pdf/५६२ 104 165545 418098 2026-08-25T12:50:52Z Bnarayanan V 10460 /* अपरिष्कृतम् */ ( ५४० ) रसरत्नसमुच्चयः । होनेपर मूषार्मेसे रसको निकालकर बारीक चूर्ण करलेवे फिर इस इसमें गन्धक, हरताल और मैनसिलका चार २ तोले चूर्ण मिलाकर खरल करके वाराहपुट देवे । इ... नवीन पृष्ठं निर्मीत अस्ती 418098 proofread-page text/x-wiki rnao7cps0vu2vlnv8im6znpb47pl2ru बाष्कलमन्त्रोपनिषत् 0 165546 418100 2026-08-26T11:18:05Z ~2026-39930-13 10591 बाष्कलमन्त्रोपनिषत्सृष्टा 418100 wikitext text/x-wiki sjx9jzv9mgjekru1h6z4yd2xahp8t6c 418101 418100 2026-08-26T11:20:51Z ~2026-39930-13 10591 वर्गाः 418101 wikitext text/x-wiki 36zplzxll1221gkemfrk0jua7v2ry6u